JEE Main 2022 Physics Question Paper with Answer and Solution in Hindi

660 QuestionsHindiWith Solutions

PhysicsQ201300 of 660 questions

Page 5 of 8 · Hindi

201
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दो द्रव्यमान $M_{1}$ और $M_{2}$ एक हल्की अवितान्य डोरी के दो सिरों पर बंधे हैं जो एक घर्षणहीन घिरनी के ऊपर से गुजरती है। जब द्रव्यमान $M_{2}$,$M_{1}$ का दोगुना होता है,तो निकाय का त्वरण $a_{1}$ होता है। जब द्रव्यमान $M_{2}$,$M_{1}$ का तीन गुना होता है,तो निकाय का त्वरण $a_{2}$ होता है। अनुपात $\frac{a_{1}}{a_{2}}$ होगा:
Question diagram
A
$\frac{1}{3}$
B
$\frac{2}{3}$
C
$\frac{3}{2}$
D
$\frac{1}{2}$

Solution

(B) एक घर्षणहीन घिरनी पर डोरी से जुड़े दो द्रव्यमानों $M_{1}$ और $M_{2}$ के निकाय का त्वरण निम्नलिखित सूत्र द्वारा दिया जाता है:
$a = \frac{|M_{2} - M_{1}|}{M_{1} + M_{2}} g$
स्थिति $1$: दिया गया है $M_{2} = 2M_{1}$।
$a_{1} = \frac{|2M_{1} - M_{1}|}{M_{1} + 2M_{1}} g = \frac{M_{1}}{3M_{1}} g = \frac{g}{3}$
स्थिति $2$: दिया गया है $M_{2} = 3M_{1}$।
$a_{2} = \frac{|3M_{1} - M_{1}|}{M_{1} + 3M_{1}} g = \frac{2M_{1}}{4M_{1}} g = \frac{g}{2}$
अब,अनुपात $\frac{a_{1}}{a_{2}}$ की गणना करने पर:
$\frac{a_{1}}{a_{2}} = \frac{g/3}{g/2} = \frac{2}{3}$
अतः,सही विकल्प $B$ है।
202
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क्रेन द्वारा भार उठाने के लिए उपयोग की जाने वाली रस्सी के अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल $2.5 \times 10^{-4} \, m^2$ है। क्रेन की अधिकतम उठाने की क्षमता $10$ मीट्रिक टन है। क्रेन की उठाने की क्षमता को $25$ मीट्रिक टन तक बढ़ाने के लिए,रस्सी के अनुप्रस्थ काट का आवश्यक क्षेत्रफल $......... \times 10^{-4} \, m^2$ होना चाहिए ($g = 10 \, m/s^2$ लें)।
A
$6.25$
B
$10$
C
$1$
D
$1.67$

Solution

(A) पदार्थ का ब्रेकिंग स्ट्रेस (भंजक प्रतिबल) स्थिर रहता है,क्योंकि यह पदार्थ का एक आंतरिक गुण है।
ब्रेकिंग स्ट्रेस = $\frac{\text{अधिकतम भार}}{\text{अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल}}$.
माना $A_1 = 2.5 \times 10^{-4} \, m^2$ भार $L_1 = 10$ मीट्रिक टन के लिए प्रारंभिक क्षेत्रफल है।
माना $A_2$ भार $L_2 = 25$ मीट्रिक टन के लिए आवश्यक क्षेत्रफल है।
चूँकि ब्रेकिंग स्ट्रेस स्थिर है: $\frac{L_1}{A_1} = \frac{L_2}{A_2}$.
मान रखने पर: $\frac{10}{2.5 \times 10^{-4}} = \frac{25}{A_2}$.
$A_2 = \frac{25 \times 2.5 \times 10^{-4}}{10}$.
$A_2 = 6.25 \times 10^{-4} \, m^2$.
203
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यदि $\overrightarrow{A} = (2\hat{i} + 3\hat{j} - \hat{k}) \; m$ और $\overrightarrow{B} = (\hat{i} + 2\hat{j} + 2\hat{k}) \; m$ है,तो सदिश $\overrightarrow{A}$ का सदिश $\overrightarrow{B}$ की दिशा में घटक का परिमाण $...... \; m$ होगा।
A
$2$
B
$1$
C
$3$
D
$4$

Solution

(A) दिए गए सदिश $\overrightarrow{A} = (2\hat{i} + 3\hat{j} - \hat{k}) \; m$ और $\overrightarrow{B} = (\hat{i} + 2\hat{j} + 2\hat{k}) \; m$ हैं।
सदिश $\overrightarrow{A}$ का सदिश $\overrightarrow{B}$ की दिशा में घटक का सूत्र है: $\text{घटक} = \overrightarrow{A} \cdot \hat{B} = \frac{\overrightarrow{A} \cdot \overrightarrow{B}}{|\overrightarrow{B}|}$।
सबसे पहले,अदिश गुणनफल $\overrightarrow{A} \cdot \overrightarrow{B}$ की गणना करें:
$\overrightarrow{A} \cdot \overrightarrow{B} = (2)(1) + (3)(2) + (-1)(2) = 2 + 6 - 2 = 6$।
इसके बाद,सदिश $\overrightarrow{B}$ का परिमाण ज्ञात करें:
$|\overrightarrow{B}| = \sqrt{1^2 + 2^2 + 2^2} = \sqrt{1 + 4 + 4} = \sqrt{9} = 3$।
अंत में,घटक का मान ज्ञात करें:
$\text{घटक} = \frac{6}{3} = 2 \; m$।
204
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एक बेलनाकार छड़ की उसकी लंबाई के लंबवत और उसके केंद्र से गुजरने वाली घूर्णन अक्ष के परितः घूर्णन त्रिज्या $k$ है। यदि छड़ की लंबाई $10 \sqrt{3} \ m$ है,तो $k$ का मान मीटर में ज्ञात कीजिए।
A
$5$
B
$4$
C
$8$
D
$18$

Solution

(A) $m$ द्रव्यमान और $\ell$ लंबाई वाली एक समान छड़ की उसके केंद्र से गुजरने वाली और उसकी लंबाई के लंबवत अक्ष के परितः जड़त्व आघूर्ण $I = \frac{m \ell^{2}}{12}$ होता है।
परिभाषा के अनुसार,जड़त्व आघूर्ण को $I = mk^{2}$ के रूप में भी व्यक्त किया जाता है,जहाँ $k$ घूर्णन त्रिज्या है।
दोनों व्यंजकों की तुलना करने पर: $mk^{2} = \frac{m \ell^{2}}{12}$।
$k$ के लिए हल करने पर: $k^{2} = \frac{\ell^{2}}{12} \Rightarrow k = \frac{\ell}{\sqrt{12}} = \frac{\ell}{2 \sqrt{3}}$।
चूँकि $\ell = 10 \sqrt{3} \ m$ दिया गया है,हम इस मान को प्रतिस्थापित करते हैं:
$k = \frac{10 \sqrt{3}}{2 \sqrt{3}} = 5 \ m$।
अतः,घूर्णन त्रिज्या $5 \ m$ है।
Solution diagram
205
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$20\,kg$ द्रव्यमान,$0.4\,m^{2}$ अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल और $20\,m$ लंबाई की एक समान भारी छड़ एक स्थिर आधार से लटकी हुई है। पार्श्व संकुचन की उपेक्षा करते हुए,छड़ में उसके अपने वजन के कारण विस्तार $x \times 10^{-9}\,m$ है। $x$ का मान ज्ञात कीजिए। (दिया है: यंग मापांक $Y = 2 \times 10^{11}\,N/m^{2}$ और $g = 10\,m/s^{2}$)
A
$28$
B
$25$
C
$24$
D
$23$

Solution

(B) अपने स्वयं के वजन के कारण $\ell$ लंबाई,$m$ द्रव्यमान और $A$ अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल वाली छड़ में विस्तार $\Delta \ell$ निम्नलिखित सूत्र द्वारा दिया जाता है:
$\Delta \ell = \frac{mg\ell}{2AY}$
दी गई मान:
$m = 20\,kg$
$A = 0.4\,m^{2}$
$\ell = 20\,m$
$Y = 2 \times 10^{11}\,N/m^{2}$
$g = 10\,m/s^{2}$
इन मानों को सूत्र में रखने पर:
$\Delta \ell = \frac{20 \times 10 \times 20}{2 \times 0.4 \times 2 \times 10^{11}}$
$\Delta \ell = \frac{4000}{1.6 \times 10^{11}}$
$\Delta \ell = 2500 \times 10^{-11}\,m$
$\Delta \ell = 25 \times 10^{-9}\,m$
इसकी तुलना $x \times 10^{-9}\,m$ से करने पर,हमें $x = 25$ प्राप्त होता है।
Solution diagram
206
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दी गई आकृतियों के अनुसार,$K$ और $2K$ स्प्रिंग नियतांक वाली दो स्प्रिंगों को $m$ द्रव्यमान से जोड़ा गया है। यदि आकृति $(a)$ में दोलन का आवर्तकाल $3 \text{ s}$ है,तो आकृति $(b)$ में दोलन का आवर्तकाल $\sqrt{x} \text{ s}$ होगा। $x$ का मान $.........$ है।
Question diagram
A
$20$
B
$1$
C
$22$
D
$2$

Solution

(D) आकृति $(a)$ के लिए,स्प्रिंग श्रेणीक्रम में हैं। तुल्य स्प्रिंग नियतांक $K_{eq}$ इस प्रकार है:
$K_{eq} = \frac{K \times 2K}{K + 2K} = \frac{2K}{3}$
दोलन का आवर्तकाल $T$ है:
$T = 2\pi \sqrt{\frac{m}{K_{eq}}} = 2\pi \sqrt{\frac{m}{2K/3}} = 2\pi \sqrt{\frac{3m}{2K}} = 3 \text{ s}$
आकृति $(b)$ के लिए,स्प्रिंग समांतर क्रम में हैं। तुल्य स्प्रिंग नियतांक $K'_{eq}$ है:
$K'_{eq} = K + 2K = 3K$
दोलन का आवर्तकाल $T'$ है:
$T' = 2\pi \sqrt{\frac{m}{3K}}$
$T'$ को $T$ से विभाजित करने पर:
$\frac{T'}{T} = \frac{2\pi \sqrt{\frac{m}{3K}}}{2\pi \sqrt{\frac{3m}{2K}}} = \sqrt{\frac{m}{3K} \times \frac{2K}{3m}} = \sqrt{\frac{2}{9}} = \frac{\sqrt{2}}{3}$
दिया गया है $T = 3 \text{ s}$,अतः:
$T' = 3 \times \frac{\sqrt{2}}{3} = \sqrt{2} \text{ s}$
$T' = \sqrt{x} \text{ s}$ की तुलना $T' = \sqrt{2} \text{ s}$ से करने पर,हमें $x = 2$ प्राप्त होता है।
Solution diagram
207
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तीन द्रव्यमान $M = 100 \, kg$,$m_{1} = 10 \, kg$ और $m_{2} = 20 \, kg$ को चित्र में दिखाए अनुसार एक निकाय में व्यवस्थित किया गया है। सभी सतहें घर्षण रहित हैं और डोरियाँ अवितान्य और भारहीन हैं। घिरनियाँ भी भारहीन और घर्षण रहित हैं। निकाय पर एक बल $F$ लगाया जाता है ताकि द्रव्यमान $m_{2}$,$2 \, m/s^{2}$ के त्वरण के साथ ऊपर की ओर गति करे। $F$ का मान $...... \, N$ है। ($g = 10 \, m/s^{2}$ लें)
Question diagram
A
$3360$
B
$3380$
C
$3120$
D
$3240$

Solution

(C) माना $100 \, kg$ के ब्लॉक का त्वरण दाईं ओर $a_{1}$ है।
$m_{2} = 20 \, kg$ के ब्लॉक के लिए,यह $100 \, kg$ के ब्लॉक के सापेक्ष $a_{y} = 2 \, m/s^{2}$ के त्वरण से ऊपर की ओर गति कर रहा है। डोरी में तनाव $T$ ऊपर की ओर कार्य करता है और गुरुत्वाकर्षण $20g$ नीचे की ओर कार्य करता है। छद्म बल (pseudo force) $20a_{1}$ क्षैतिज रूप से बाईं ओर कार्य करता है।
$m_{2}$ के लिए ऊर्ध्वाधर दिशा में न्यूटन का दूसरा नियम लागू करने पर:
$T - m_{2}g = m_{2}a_{y}$
$T - 20(10) = 20(2)$
$T - 200 = 40 \Rightarrow T = 240 \, N$.
अब,$100 \, kg$ के ब्लॉक के ऊपर स्थित $m_{1} = 10 \, kg$ के ब्लॉक पर विचार करें। यह डोरी के माध्यम से $20 \, kg$ के ब्लॉक से जुड़ा है। $100 \, kg$ के ब्लॉक के सापेक्ष $m_{1}$ का क्षैतिज त्वरण $a_{x} = 2 \, m/s^{2}$ है (चूंकि डोरी अवितान्य है,इसलिए $m_{1}$ का क्षैतिज त्वरण $m_{2}$ के ऊर्ध्वाधर त्वरण के बराबर होना चाहिए)।
$m_{1}$ के लिए क्षैतिज दिशा में न्यूटन का दूसरा नियम लागू करने पर:
$T = m_{1}a_{1} \Rightarrow 240 = 10a_{1} \Rightarrow a_{1} = 24 \, m/s^{2}$.
अंत में,पूरे निकाय $(M + m_{1} + m_{2})$ को $a_{1}$ त्वरण के साथ गति करते हुए मानने पर:
$F = (M + m_{1} + m_{2})a_{1}$
$F = (100 + 10 + 20) \times 24$
$F = 130 \times 24 = 3120 \, N$.
Solution diagram
208
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जब कोई कण सरल आवर्त गति $(SHM)$ करता है,तो विस्थापन के फलन के रूप में वेग के ग्राफ की प्रकृति कैसी होगी?
A
वृत्ताकार
B
दीर्घवृत्ताकार
C
ज्यावक्रीय (Sinusoidal)
D
सीधी रेखा

Solution

(B) $SHM$ में एक कण के लिए,उसका वेग $v$ विस्थापन $x$ पर इस प्रकार निर्भर करता है:
$v = \omega \sqrt{A^{2} - x^{2}}$
जहाँ $\omega$ कोणीय आवृत्ति है और $A$ आयाम है।
दोनों पक्षों का वर्ग करने पर:
$v^{2} = \omega^{2} (A^{2} - x^{2})$
$v^{2} = \omega^{2} A^{2} - \omega^{2} x^{2}$
पदों को पुनर्व्यवस्थित करने पर:
$v^{2} + \omega^{2} x^{2} = \omega^{2} A^{2}$
$\omega^{2} A^{2}$ से विभाजित करने पर:
$\frac{v^{2}}{(\omega A)^{2}} + \frac{x^{2}}{A^{2}} = 1$
यह समीकरण $\frac{y^{2}}{b^{2}} + \frac{x^{2}}{a^{2}} = 1$ के रूप में है,जो एक दीर्घवृत्त (ellipse) को दर्शाता है।
अतः,वेग $v$ और विस्थापन $x$ के बीच का ग्राफ दीर्घवृत्ताकार होता है।
209
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$7$ मोल एक मोनोएटॉमिक आदर्श गैस का तापमान स्थिर दबाव पर $40 K$ तक बढ़ाया जाता है। इस प्रक्रिया में गैस की आंतरिक ऊर्जा में वृद्धि $.... J$ है। (दिया गया है: $R = 8.3 J K^{-1} mol^{-1}$)
A
$5810$
B
$3486$
C
$11620$
D
$6972$

Solution

(B) किसी भी आदर्श गैस के लिए,आंतरिक ऊर्जा में परिवर्तन $\Delta U$ केवल तापमान में परिवर्तन $\Delta T$ पर निर्भर करता है और इसे निम्नलिखित सूत्र द्वारा दिया जाता है:
$\Delta U = n C_V \Delta T$
मोनोएटॉमिक आदर्श गैस के लिए,स्थिर आयतन पर मोलर विशिष्ट ऊष्मा $C_V = \frac{3}{2} R$ होती है।
दिए गए मान हैं:
$n = 7 \text{ mol}$
$\Delta T = 40 K$
$R = 8.3 J K^{-1} mol^{-1}$
इन मानों को सूत्र में रखने पर:
$\Delta U = 7 \times \left( \frac{3}{2} \times 8.3 \right) \times 40$
$\Delta U = 7 \times 3 \times 8.3 \times 20$
$\Delta U = 21 \times 166 = 3486 J$
अतः,आंतरिक ऊर्जा में वृद्धि $3486 J$ है।
210
PhysicsDifficultMCQJEE Main · 2022
$P$ दाब और $V$ आयतन वाली एक एकपरमाणुक गैस को अचानक उसके मूल आयतन के आठवें भाग तक संपीड़ित किया जाता है। स्थिर एन्ट्रॉपी पर अंतिम दाब $.....P$ होगा।
A
$1$
B
$8$
C
$32$
D
$64$

Solution

(C) स्थिर एन्ट्रॉपी वाली प्रक्रिया एक रुद्धोष्म (adiabatic) प्रक्रिया होती है।
रुद्धोष्म प्रक्रिया के लिए,दाब और आयतन के बीच का संबंध $PV^{\gamma} = \text{constant}$ द्वारा दिया जाता है।
एकपरमाणुक गैस के लिए,रुद्धोष्म सूचकांक $\gamma = \frac{5}{3}$ होता है।
दिया गया है,प्रारंभिक आयतन $V_1 = V$ और अंतिम आयतन $V_2 = \frac{V}{8}$ है।
रुद्धोष्म समीकरण का उपयोग करने पर: $P_1 V_1^{\gamma} = P_2 V_2^{\gamma}$।
मान रखने पर: $P \cdot V^{5/3} = P_2 \cdot (\frac{V}{8})^{5/3}$।
$P_2 = P \cdot (\frac{V}{V/8})^{5/3} = P \cdot (8)^{5/3}$।
$P_2 = P \cdot (2^3)^{5/3} = P \cdot 2^5$।
$P_2 = 32P$।
211
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$1\,cm$ त्रिज्या वाली पानी की एक बूंद को $729$ समान छोटी बूंदों में तोड़ा जाता है। यदि पानी का पृष्ठ तनाव $75\,dyne/cm$ है,तो पृष्ठ ऊर्जा में वृद्धि दशमलव के पहले स्थान तक $...\times 10^{-4}\,J$ होगी।
A
$8.5$
B
$8.2$
C
$7.5$
D
$5.3$

Solution

(C) प्रारंभिक त्रिज्या $R = 1\,cm = 10^{-2}\,m$. पृष्ठ तनाव $T = 75\,dyne/cm = 75 \times 10^{-3}\,N/m$.
प्रारंभिक पृष्ठीय क्षेत्रफल $A_i = 4\pi R^2 = 4\pi(10^{-2})^2 = 4\pi \times 10^{-4}\,m^2$.
प्रारंभिक पृष्ठ ऊर्जा $U_i = T \times A_i = 75 \times 10^{-3} \times 4\pi \times 10^{-4} = 300\pi \times 10^{-7}\,J$.
माना $r$ प्रत्येक छोटी बूंद की त्रिज्या है। आयतन संरक्षण के अनुसार: $\frac{4}{3}\pi R^3 = 729 \times \frac{4}{3}\pi r^3$.
$r^3 = \frac{R^3}{729} \implies r = \frac{R}{9} = \frac{1}{9}\,cm = \frac{1}{9} \times 10^{-2}\,m$.
अंतिम पृष्ठीय क्षेत्रफल $A_f = 729 \times 4\pi r^2 = 729 \times 4\pi \times (\frac{1}{9} \times 10^{-2})^2 = 729 \times 4\pi \times \frac{1}{81} \times 10^{-4} = 9 \times 4\pi \times 10^{-4} = 36\pi \times 10^{-4}\,m^2$.
अंतिम पृष्ठ ऊर्जा $U_f = T \times A_f = 75 \times 10^{-3} \times 36\pi \times 10^{-4} = 2700\pi \times 10^{-7}\,J$.
पृष्ठ ऊर्जा में वृद्धि $\Delta U = U_f - U_i = (2700\pi - 300\pi) \times 10^{-7} = 2400\pi \times 10^{-7}\,J$.
$\pi \approx 3.14$ का उपयोग करने पर,$\Delta U = 2400 \times 3.14 \times 10^{-7} = 7536 \times 10^{-7} = 7.536 \times 10^{-4}\,J$.
दशमलव के पहले स्थान तक पूर्णांकित करने पर,वृद्धि $7.5 \times 10^{-4}\,J$ है।
212
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जब एक रॉकेट को पृथ्वी की सतह से $32 \ km$ की ऊँचाई पर ले जाया जाता है,तो उसके भार में होने वाली प्रतिशत कमी $.....\%$ होगी।
(पृथ्वी की त्रिज्या $= 6400 \ km$)
A
$1$
B
$3$
C
$4$
D
$0.5$

Solution

(A) पृथ्वी की सतह से $h$ ऊँचाई पर गुरुत्वीय त्वरण $g' = g(1 - \frac{2h}{R})$ द्वारा दिया जाता है,जहाँ $R$ पृथ्वी की त्रिज्या है और $h << R$ है।
गुरुत्वीय त्वरण में परिवर्तन $\Delta g = g - g' = g(\frac{2h}{R})$ है।
भार में भिन्नात्मक कमी (जो $g$ में परिवर्तन के समानुपाती है) $\frac{\Delta g}{g} = \frac{2h}{R}$ द्वारा दी जाती है।
प्रतिशत कमी ज्ञात करने के लिए,हम $100$ से गुणा करते हैं:
$\text{प्रतिशत कमी} = \frac{\Delta g}{g} \times 100 = \frac{2h}{R} \times 100$.
दिए गए मान $h = 32 \ km$ और $R = 6400 \ km$ रखने पर:
$\text{प्रतिशत कमी} = 2 \times \frac{32}{6400} \times 100 = 2 \times \frac{1}{200} \times 100 = 1 \%$.
213
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दी गई आकृति के अनुसार,$250\,g$ द्रव्यमान के दो ब्लॉक $2\,N/m$ स्प्रिंग नियतांक वाली स्प्रिंग से जुड़े हैं। यदि दोनों को विपरीत दिशाओं में $V$ वेग दिया जाता है,तो स्प्रिंग का अधिकतम विस्तार क्या होगा?
Question diagram
A
$V \sqrt{\frac{m}{k}}$
B
$V \sqrt{\frac{m}{2k}}$
C
$V \sqrt{\frac{2m}{k}}$
D
$V \sqrt{\frac{m}{4k}}$

Solution

(B) माना प्रत्येक ब्लॉक का द्रव्यमान $m = 250\,g = 0.25\,kg$ है और स्प्रिंग नियतांक $k = 2\,N/m$ है।
अधिकतम विस्तार $x$ के क्षण पर,दोनों ब्लॉक द्रव्यमान केंद्र के फ्रेम में क्षण भर के लिए स्थिर हो जाते हैं।
ऊर्जा संरक्षण के नियम के अनुसार,निकाय की प्रारंभिक गतिज ऊर्जा अधिकतम विस्तार पर स्प्रिंग की प्रत्यास्थ स्थितिज ऊर्जा में परिवर्तित हो जाती है।
कुल प्रारंभिक गतिज ऊर्जा $K_i = \frac{1}{2}mv^2 + \frac{1}{2}mv^2 = mv^2$ है।
अधिकतम विस्तार $x$ पर स्प्रिंग में संचित स्थितिज ऊर्जा $U_f = \frac{1}{2}kx^2$ है।
दोनों को बराबर करने पर: $mv^2 = \frac{1}{2}kx^2$.
$x$ के लिए हल करने पर: $x^2 = \frac{2mv^2}{k} \implies x = v \sqrt{\frac{2m}{k}}$.
दिए गए मान $m = 0.25\,kg$ और $k = 2\,N/m$ रखने पर:
$x = V \sqrt{\frac{2 \times 0.25}{2}} = V \sqrt{0.25} = 0.5V = \frac{V}{2}$.
Solution diagram
214
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$50\,kg$ द्रव्यमान का एक बंदर एक रस्सी पर चढ़ता है जो $350\,N$ का तनाव $(T)$ सहन कर सकती है। यदि बंदर शुरू में $4\,m/s^2$ के त्वरण के साथ नीचे उतरता है और फिर $5\,m/s^2$ के त्वरण के साथ ऊपर चढ़ता है,तो सही विकल्प चुनें $(g = 10\,m/s^2)$।
A
ऊपर चढ़ते समय $T = 700\,N$।
B
नीचे उतरते समय $T = 350\,N$।
C
ऊपर चढ़ते समय रस्सी टूट जाएगी।
D
नीचे उतरते समय रस्सी टूट जाएगी।

Solution

(C) नीचे की ओर गति करते समय बंदर का फ्री बॉडी डायग्राम ($F$.$B$.$D$):
न्यूटन के गति के दूसरे नियम का उपयोग करते हुए: $mg - T = ma_1$
$500 - T = 50 \times 4 \Rightarrow T = 300\,N$.
ऊपर की ओर गति करते समय बंदर का फ्री बॉडी डायग्राम ($F$.$B$.$D$):
न्यूटन के गति के दूसरे नियम का उपयोग करते हुए: $T - mg = ma_2$
$T - 500 = 50 \times 5 \Rightarrow T = 750\,N$.
रस्सी की तोड़ने की क्षमता $350\,N$ है।
चूंकि $750\,N > 350\,N$,इसलिए जब बंदर ऊपर चढ़ रहा होगा तो रस्सी टूट जाएगी।
Solution diagram
215
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दो प्रक्षेप्यों को क्षैतिज के साथ क्रमशः $30^{\circ}$ और $45^{\circ}$ के कोण पर फेंका जाता है,जो समान समय में अधिकतम ऊँचाई तक पहुँचते हैं। उनके प्रारंभिक वेगों का अनुपात क्या है?
A
$1: \sqrt{2}$
B
$2: 1$
C
$\sqrt{2}: 1$
D
$1: 2$

Solution

(C) किसी प्रक्षेप्य के लिए अधिकतम ऊँचाई तक पहुँचने में लगा समय इस सूत्र द्वारा दिया जाता है:
$t = \frac{u \sin \theta}{g}$
यह दिया गया है कि दोनों प्रक्षेप्य समान समय में अधिकतम ऊँचाई तक पहुँचते हैं,इसलिए:
$t_1 = t_2$
$\frac{u_1 \sin \theta_1}{g} = \frac{u_2 \sin \theta_2}{g}$
दिए गए कोणों $\theta_1 = 30^{\circ}$ और $\theta_2 = 45^{\circ}$ का मान रखने पर:
$u_1 \sin 30^{\circ} = u_2 \sin 45^{\circ}$
$u_1 \left( \frac{1}{2} \right) = u_2 \left( \frac{1}{\sqrt{2}} \right)$
अनुपात $\frac{u_1}{u_2}$ ज्ञात करने के लिए:
$\frac{u_1}{u_2} = \frac{1/\sqrt{2}}{1/2} = \frac{2}{\sqrt{2}} = \sqrt{2}$
अतः,उनके प्रारंभिक वेगों का अनुपात $\sqrt{2}: 1$ है।
216
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$0.5\,mm$ की पिच वाले एक स्क्रू गेज का उपयोग $6.8\,cm$ लंबाई वाले एक समान तार का व्यास मापने के लिए किया जाता है। मुख्य पैमाने का पाठ्यांक $1.5\,mm$ है और वृत्ताकार पैमाने का पाठ्यांक $7$ है। उचित सार्थक अंकों तक तार का वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल $......\,cm^2$ है। [स्क्रू गेज के वृत्ताकार पैमाने पर $50$ विभाजन हैं]
A
$6.8$
B
$3.4$
C
$3.9$
D
$2.4$

Solution

(B) स्क्रू गेज का अल्पतमांक $(L.C.)$ इस प्रकार है: $L.C. = \frac{\text{Pitch}}{\text{Number of divisions}} = \frac{0.5\,mm}{50} = 0.01\,mm = 0.001\,cm$.
तार का व्यास $(D)$ इस प्रकार परिकलित किया जाता है: $D = \text{Main scale reading} + (\text{Circular scale reading} \times L.C.)$.
$D = 1.5\,mm + (7 \times 0.01\,mm) = 1.5\,mm + 0.07\,mm = 1.57\,mm = 0.157\,cm$.
तार की लंबाई $(l)$ $6.8\,cm$ है।
तार का वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल $(A)$ $A = \pi D l$ सूत्र द्वारा दिया जाता है।
$A = 3.14 \times 0.157\,cm \times 6.8\,cm \approx 3.353\,cm^2$.
दो सार्थक अंकों तक पूर्णांकित करने पर (चूंकि लंबाई $6.8$ में दो सार्थक अंक हैं),हमें $A = 3.4\,cm^2$ प्राप्त होता है।
217
PhysicsMediumMCQJEE Main · 2022
यदि किसी प्रक्षेप्य का क्षैतिज दिशा में प्रारंभिक वेग इकाई सदिश $\hat{i}$ है और प्रक्षेप पथ का समीकरण $y = 5x(1 - x)$ है,तो प्रारंभिक वेग का $y$-घटक सदिश ज्ञात कीजिए। ($g = 10\,m/s^2$ लें) ($,\hat{j}$ में)
A
$4$
B
$3$
C
$5$
D
$8$

Solution

(C) प्रारंभिक क्षैतिज वेग $u_x = 1\,m/s$ दिया गया है।
प्रक्षेप पथ का समीकरण $y = 5x - 5x^2$ है।
समीकरण का समय $t$ के सापेक्ष अवकलन करने पर,हमें ऊर्ध्वाधर वेग घटक $v_y = \frac{dy}{dt} = \frac{dy}{dx} \cdot \frac{dx}{dt}$ प्राप्त होता है।
सबसे पहले,$\frac{dy}{dx} = \frac{d}{dx}(5x - 5x^2) = 5 - 10x$ ज्ञात करें।
चूंकि $v_x = \frac{dx}{dt} = u_x = 1$ (क्षैतिज वेग को स्थिर मानते हुए),हमें $v_y = (5 - 10x) \cdot 1$ प्राप्त होता है।
प्रारंभिक बिंदु पर,$x = 0$ होता है।
इसलिए,प्रारंभिक ऊर्ध्वाधर वेग $u_y = (5 - 10(0)) = 5\,m/s$ है।
अतः,प्रारंभिक वेग का $y$-घटक सदिश $5\,\hat{j}$ है।
218
PhysicsDifficultMCQJEE Main · 2022
$1\,kg$ द्रव्यमान और $R$ त्रिज्या की एक डिस्क अपने केंद्र से गुजरने वाली और डिस्क के तल के लंबवत एक क्षैतिज अक्ष के परितः घूमने के लिए स्वतंत्र है। डिस्क के द्रव्यमान के समान द्रव्यमान का एक पिंड डिस्क के उच्चतम बिंदु पर स्थिर है। अब निकाय को मुक्त किया जाता है। जब पिंड सबसे निचले स्थान पर आता है,तो इसकी कोणीय गति $4 \sqrt{\frac{x}{3 R}} \text{ rad s}^{-1}$ होगी,जहाँ $x=$ (दिया गया है $g = 10 \text{ m s}^{-2}$)
A
$50$
B
$8$
C
$5$
D
$88$

Solution

(C) माना $m$ डिस्क और कण का द्रव्यमान है। अक्ष के परितः डिस्क का जड़त्व आघूर्ण $I_{\text{disc}} = \frac{1}{2} mR^2$ है। $R$ दूरी पर स्थित कण का जड़त्व आघूर्ण $I_{\text{particle}} = mR^2$ है। कुल जड़त्व आघूर्ण $I = I_{\text{disc}} + I_{\text{particle}} = \frac{1}{2} mR^2 + mR^2 = \frac{3}{2} mR^2$ है।
यांत्रिक ऊर्जा संरक्षण के नियम का उपयोग करते हुए,कण की स्थितिज ऊर्जा में हुई कमी निकाय की घूर्णन गतिज ऊर्जा में हुई वृद्धि के बराबर होती है।
कण उच्चतम बिंदु से सबसे निचले बिंदु तक $2R$ की ऊर्ध्वाधर दूरी तय करता है।
स्थितिज ऊर्जा में कमी $= mg(2R) = 2mgR$.
घूर्णन गतिज ऊर्जा में वृद्धि $= \frac{1}{2} I \omega^2 = \frac{1}{2} \left( \frac{3}{2} mR^2 \right) \omega^2 = \frac{3}{4} mR^2 \omega^2$.
दोनों को बराबर करने पर: $2mgR = \frac{3}{4} mR^2 \omega^2$.
$\omega^2$ के लिए हल करने पर: $\omega^2 = \frac{8g}{3R}$.
दिया गया है $\omega = 4 \sqrt{\frac{x}{3R}}$,इसलिए $\omega^2 = 16 \left( \frac{x}{3R} \right) = \frac{16x}{3R}$.
$\omega^2$ के व्यंजकों की तुलना करने पर: $\frac{16x}{3R} = \frac{8g}{3R} \implies 16x = 8g$.
$g = 10 \text{ m s}^{-2}$ रखने पर: $16x = 8(10) = 80$.
$x = \frac{80}{16} = 5$.
Solution diagram
219
PhysicsDifficultMCQJEE Main · 2022
सटीक $1\;m$ लंबाई के तार का यंग मापांक निर्धारित करने के एक प्रयोग में,जब $1\;kg$ का भार लगाया जाता है,तो तार की लंबाई में वृद्धि $0.4\;mm$ मापी जाती है,जिसमें $\pm 0.02\;mm$ की अनिश्चितता है। तार का व्यास $0.4\;mm$ मापा जाता है,जिसमें $\pm 0.01\;mm$ की अनिश्चितता है। यंग मापांक $(\Delta Y)$ के मापन में त्रुटि $x \times 10^{10}\;N/m^2$ पाई जाती है। $x$ का मान है ($g = 10\;m/s^2$ लें)
A
$25$
B
$20$
C
$2$
D
$8$

Solution

(C) यंग मापांक का सूत्र $Y = \frac{FL}{A\Delta L} = \frac{mgL}{(\pi d^2/4)\Delta L} = \frac{4mgL}{\pi d^2 \Delta L}$ है।
दिया गया है: $L = 1\;m$,$m = 1\;kg$,$g = 10\;m/s^2$,$\Delta L = 0.4 \times 10^{-3}\;m$,$d = 0.4 \times 10^{-3}\;m$.
$Y = \frac{4 \times 1 \times 10 \times 1}{\pi \times (0.4 \times 10^{-3})^2 \times 0.4 \times 10^{-3}} = \frac{40}{\pi \times 0.064 \times 10^{-9}} \approx 1.99 \times 10^{11}\;N/m^2$.
$Y$ में सापेक्ष त्रुटि $\frac{\Delta Y}{Y} = \frac{\Delta m}{m} + \frac{\Delta L}{L} + 2\frac{\Delta d}{d} + \frac{\Delta(\Delta L)}{\Delta L}$ द्वारा दी जाती है।
मान लीजिए $\Delta m = 0$ और $\Delta L = 0$ (क्योंकि लंबाई सटीक है),$\frac{\Delta Y}{Y} = 2\frac{\Delta d}{d} + \frac{\Delta(\Delta L)}{\Delta L} = 2 \times \frac{0.01}{0.4} + \frac{0.02}{0.4} = 0.05 + 0.05 = 0.1$.
$\Delta Y = 0.1 \times Y = 0.1 \times 1.99 \times 10^{11} = 1.99 \times 10^{10}\;N/m^2$.
$x \times 10^{10}$ के साथ तुलना करने पर,हमें $x \approx 2$ प्राप्त होता है।
220
PhysicsDifficultMCQJEE Main · 2022
जब एक कार प्रेक्षक के पास आ रही होती है,तो हॉर्न की आवृत्ति $100 \, Hz$ होती है। प्रेक्षक को पार करने के बाद,यह $50 \, Hz$ हो जाती है। यदि प्रेक्षक कार के साथ गति करता है,तो आवृत्ति $\frac{x}{3} \, Hz$ होगी जहाँ $x = .....$
A
$202$
B
$2000$
C
$20$
D
$200$

Solution

(D) माना $f_0$ हॉर्न की वास्तविक आवृत्ति है,$C$ ध्वनि की गति है और $V_s$ कार की गति है।
जब कार प्रेक्षक के पास आती है: $f_1 = f_0 \left( \frac{C}{C - V_s} \right) = 100 \, Hz$.
जब कार प्रेक्षक से दूर जाती है: $f_2 = f_0 \left( \frac{C}{C + V_s} \right) = 50 \, Hz$.
दोनों समीकरणों को विभाजित करने पर: $\frac{f_1}{f_2} = \frac{100}{50} = 2 = \frac{C + V_s}{C - V_s}$.
$V_s$ के लिए हल करने पर: $2(C - V_s) = C + V_s \implies 2C - 2V_s = C + V_s \implies C = 3V_s \implies V_s = \frac{C}{3}$.
$V_s$ का मान पहले समीकरण में रखने पर: $100 = f_0 \left( \frac{C}{C - C/3} \right) = f_0 \left( \frac{C}{2C/3} \right) = f_0 \left( \frac{3}{2} \right)$.
अतः,$f_0 = 100 \times \frac{2}{3} = \frac{200}{3} \, Hz$.
यदि प्रेक्षक कार के साथ गति करता है,तो स्रोत और प्रेक्षक के बीच सापेक्ष वेग शून्य होता है,इसलिए प्रेक्षित आवृत्ति वास्तविक आवृत्ति $f_0$ के बराबर होती है।
इसलिए,$f = f_0 = \frac{200}{3} \, Hz$.
इसकी तुलना $\frac{x}{3} \, Hz$ से करने पर,हमें $x = 200$ प्राप्त होता है।
221
PhysicsDifficultMCQJEE Main · 2022
ऊर्जा घनत्व का व्यंजक $u = \frac{\alpha}{\beta} \sin \left(\frac{\alpha x}{k t}\right)$ द्वारा दिया गया है,जहाँ $\alpha, \beta$ स्थिरांक हैं,$x$ विस्थापन है,$k$ बोल्ट्ज़मैन स्थिरांक है और $t$ तापमान है। $\beta$ की विमाएँ क्या होंगी?
A
$[ML^{2}T^{-2}\theta^{-1}]$
B
$[M^{0}L^{2}T^{-2}]$
C
$[M^{0}L^{0}T^{0}]$
D
$[M^{0}L^{2}T^{0}]$

Solution

(D) $\sin$ फलन का तर्क (argument) विमाहीन होना चाहिए,इसलिए $[\frac{\alpha x}{kt}] = [M^{0}L^{0}T^{0}]$.
दिया गया है $x = [L]$,$k = [ML^{2}T^{-2}\theta^{-1}]$,और $t = [\theta]$.
अतः,$[\alpha] = [\frac{kt}{x}] = \frac{[ML^{2}T^{-2}\theta^{-1}][\theta]}{[L]} = [MLT^{-2}]$.
ऊर्जा घनत्व $u$ प्रति इकाई आयतन ऊर्जा है,इसलिए $[u] = [ML^{-1}T^{-2}]$.
व्यंजक $u = \frac{\alpha}{\beta}$ से,हमें $[\beta] = \frac{[\alpha]}{[u]}$ प्राप्त होता है।
$[\beta] = \frac{[MLT^{-2}]}{[ML^{-1}T^{-2}]} = [L^{2}]$.
इसलिए,$\beta$ की विमाएँ $[M^{0}L^{2}T^{0}]$ हैं।
222
PhysicsDifficultMCQJEE Main · 2022
$10 \ kg$ द्रव्यमान के एक पिंड को क्षैतिज के साथ $45^{\circ}$ के कोण पर प्रक्षेपित किया जाता है। पिंड का प्रक्षेप पथ $(20, 10)$ बिंदु से होकर गुजरता है। यदि $T$ उड़ान का समय है,तो $t = \frac{T}{\sqrt{2}}$ समय पर इसका संवेग सदिश क्या होगा? [$g = 10 \ m/s^2$ लें]
A
$100 \hat{i} + (100\sqrt{2} - 200) \hat{j}$
B
$100\sqrt{2} \hat{i} + (100 - 200\sqrt{2}) \hat{j}$
C
$100 \hat{i} + (100 - 200\sqrt{2}) \hat{j}$
D
$100\sqrt{2} \hat{i} + (100\sqrt{2} - 200) \hat{j}$

Solution

(D) प्रक्षेप पथ का समीकरण $y = x \tan \theta - \frac{gx^2}{2u^2 \cos^2 \theta}$ है।
दिया गया है $\theta = 45^{\circ}$,$x = 20$,$y = 10$,और $g = 10 \ m/s^2$.
$10 = 20(1) - \frac{10(20)^2}{2u^2(1/2)} \Rightarrow 10 = 20 - \frac{4000}{u^2} \Rightarrow \frac{4000}{u^2} = 10 \Rightarrow u^2 = 400 \Rightarrow u = 20 \ m/s$.
उड़ान का समय $T = \frac{2u \sin \theta}{g} = \frac{2(20)(1/\sqrt{2})}{10} = 2\sqrt{2} \ s$.
समय $t = \frac{T}{\sqrt{2}} = \frac{2\sqrt{2}}{\sqrt{2}} = 2 \ s$ पर।
वेग के घटक $v_x = u \cos \theta = 20(1/\sqrt{2}) = 10\sqrt{2} \ m/s$ और $v_y = u \sin \theta - gt = 20(1/\sqrt{2}) - 10(2) = 10\sqrt{2} - 20 \ m/s$ हैं।
संवेग सदिश $\vec{p} = m\vec{v} = 10(10\sqrt{2} \hat{i} + (10\sqrt{2} - 20) \hat{j}) = 100\sqrt{2} \hat{i} + (100\sqrt{2} - 200) \hat{j} \ kg \cdot m/s$.
223
PhysicsMediumMCQJEE Main · 2022
$M$ द्रव्यमान का एक ब्लॉक एक खुरदरे नत समतल पर नियत वेग से नीचे फिसल रहा है। नत समतल द्वारा क्षैतिज के साथ बनाया गया कोण $\theta$ है। संपर्क बल का परिमाण होगा:
A
$Mg$
B
$Mg \cos \theta$
C
$\sqrt{Mg \sin \theta + Mg \cos \theta}$
D
$Mg \sin \theta \sqrt{1 + \mu}$

Solution

(A) चूंकि ब्लॉक नियत वेग से नीचे फिसल रहा है,इसलिए उस पर कार्य करने वाला कुल बल शून्य है।
ब्लॉक पर कार्य करने वाले बल गुरुत्वाकर्षण बल $(Mg)$,अभिलंब बल $(N)$ और गतिज घर्षण बल $(f)$ हैं।
गुरुत्वाकर्षण बल के घटकों को वियोजित करने पर:
$N = Mg \cos \theta$ (समतल के लंबवत)
$f = Mg \sin \theta$ (समतल के समानांतर)
संपर्क बल $(R)$,अभिलंब बल $(N)$ और घर्षण बल $(f)$ का परिणामी है:
$R = \sqrt{N^2 + f^2}$
$N$ और $f$ के मान रखने पर:
$R = \sqrt{(Mg \cos \theta)^2 + (Mg \sin \theta)^2}$
$R = \sqrt{M^2g^2(\cos^2 \theta + \sin^2 \theta)}$
चूंकि $\sin^2 \theta + \cos^2 \theta = 1$,हमें प्राप्त होता है:
$R = \sqrt{M^2g^2(1)}$
$R = Mg$
Solution diagram
224
PhysicsMediumMCQJEE Main · 2022
एक ब्लॉक '$A$' को $30^{\circ}$ के कोण और '$l$' लंबाई वाले घर्षणहीन नत समतल (incline) पर नीचे फिसलने में $2\,s$ का समय लगता है,जो '$v$' के समान वेग से ऊपर जा रही लिफ्ट के अंदर रखा है। यदि नत समतल को बदलकर $45^{\circ}$ कर दिया जाए,तो ब्लॉक को नीचे फिसलने में लगा समय लगभग $........\,s$ होगा।
A
$2.66$
B
$0.83$
C
$1.68$
D
$0.70$

Solution

(C) चूंकि लिफ्ट समान वेग से गति कर रही है,इसलिए इसका त्वरण शून्य है। अतः,ब्लॉक पर प्रभावी गुरुत्वीय त्वरण '$g$' ही रहता है।
घर्षणहीन नत समतल पर नीचे फिसलने वाले ब्लॉक के लिए,त्वरण $a = g \sin \theta$ होता है।
गति के समीकरण $s = ut + \frac{1}{2}at^2$ का उपयोग करने पर,जहाँ $u = 0$ और $s = l$ है:
$l = \frac{1}{2} (g \sin 30^{\circ}) (2)^2 = \frac{1}{2} g (0.5) (4) = g$.
अब,$45^{\circ}$ के नत समतल के लिए,मान लीजिए कि लगा समय '$t$' है:
$l = \frac{1}{2} (g \sin 45^{\circ}) t^2$.
चूंकि '$l$' स्थिर है,हम दोनों समीकरणों की तुलना करते हैं:
$g = \frac{1}{2} g \left(\frac{1}{\sqrt{2}}\right) t^2$.
$1 = \frac{1}{2\sqrt{2}} t^2 \Rightarrow t^2 = 2\sqrt{2} \approx 2.828$.
$t = \sqrt{2.828} \approx 1.68\,s$.
Solution diagram
225
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एक लकड़ी के ब्लॉक में $4 \ cm$ घुसने के बाद एक गोली का वेग एक-तिहाई हो जाता है। यह मानते हुए कि गोली ब्लॉक में अपनी गति के दौरान एक निरंतर प्रतिरोध का सामना करती है,गोली ब्लॉक के अंदर $(4+x) \ cm$ की कुल दूरी तय करने के बाद पूरी तरह से रुक जाती है। $x$ का मान $.....$ है। ($cm$ में)
A
$2$
B
$1$
C
$0.5$
D
$1.5$

Solution

(C) मान लीजिए प्रारंभिक वेग $V$ है और निरंतर मंदन $a$ है।
गति के समीकरण $v^2 = u^2 - 2as$ का उपयोग करते हुए:
पहले $4 \ cm$ के लिए,वेग $V/3$ हो जाता है:
$(V/3)^2 = V^2 - 2a(4) \Rightarrow V^2/9 = V^2 - 8a \Rightarrow 8a = 8V^2/9 \Rightarrow a = V^2/9$.
अब,गोली के पूरी तरह रुकने के लिए,अंतिम वेग $0$ है जब दूरी $s = 4+x$ है:
$0^2 = V^2 - 2a(4+x) \Rightarrow V^2 = 2(V^2/9)(4+x)$.
दोनों पक्षों को $V^2$ से विभाजित करने पर:
$1 = (2/9)(4+x) \Rightarrow 9/2 = 4+x \Rightarrow 4.5 = 4+x \Rightarrow x = 0.5 \ cm$.
226
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$m$ द्रव्यमान के एक पिंड को पृथ्वी की सतह से अंतरिक्ष में ऊर्ध्वाधर ऊपर की ओर $\lambda v_{e}$ वेग से प्रक्षेपित किया जाता है। यह दिया गया है कि $v_{e}$ पलायन वेग है और $\lambda < 1$ है। यदि वायु प्रतिरोध को नगण्य माना जाए,तो पृथ्वी के केंद्र से वह अधिकतम ऊँचाई,जहाँ तक पिंड जा सकता है,होगी: ($R$: पृथ्वी की त्रिज्या)
A
$\frac{R}{1+\lambda^{2}}$
B
$\frac{R}{1-\lambda^{2}}$
C
$\frac{R}{1-\lambda}$
D
$\frac{\lambda^{2} R}{1-\lambda^{2}}$

Solution

(B) ऊर्जा संरक्षण के नियम के अनुसार,पृथ्वी की सतह पर कुल ऊर्जा पृथ्वी के केंद्र से अधिकतम ऊँचाई $h$ पर कुल ऊर्जा के बराबर होती है।
सतह पर कुल ऊर्जा = $h$ ऊँचाई पर कुल ऊर्जा
$-\frac{GMm}{R} + \frac{1}{2}m(\lambda v_{e})^{2} = -\frac{GMm}{h} + 0$
चूँकि पलायन वेग $v_{e} = \sqrt{\frac{2GM}{R}}$ है,इसलिए $v_{e}^{2} = \frac{2GM}{R}$ होगा।
इस मान को समीकरण में रखने पर:
$-\frac{GMm}{R} + \frac{1}{2}m\lambda^{2}(\frac{2GM}{R}) = -\frac{GMm}{h}$
$-\frac{GMm}{R} + \frac{\lambda^{2}GMm}{R} = -\frac{GMm}{h}$
दोनों पक्षों को $-GMm$ से विभाजित करने पर:
$\frac{1}{R} - \frac{\lambda^{2}}{R} = \frac{1}{h}$
$\frac{1-\lambda^{2}}{R} = \frac{1}{h}$
$h = \frac{R}{1-\lambda^{2}}$
Solution diagram
227
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$3.2 \, m$ लंबाई का एक स्टील का तार $(Y_{S} = 2.0 \times 10^{11} \, N/m^{2})$ और $4.4 \, m$ लंबाई का एक तांबे का तार $(Y_{C} = 1.1 \times 10^{11} \, N/m^{2})$,दोनों की त्रिज्या $1.4 \, mm$ है,को एक-दूसरे से जोड़ा गया है। जब एक भार द्वारा खींचा जाता है,तो कुल लंबाई में वृद्धि $1.4 \, mm$ पाई जाती है। लगाया गया भार,न्यूटन में,होगा। (दिया है $\pi = \frac{22}{7}$)
A
$360$
B
$180$
C
$1080$
D
$154$

Solution

(D) कुल लंबाई में वृद्धि $\Delta \ell$ स्टील के तार $(\Delta \ell_{S})$ और तांबे के तार $(\Delta \ell_{C})$ की व्यक्तिगत लंबाई में वृद्धि का योग है:
$\Delta \ell = \Delta \ell_{S} + \Delta \ell_{C}$
लंबाई में वृद्धि के सूत्र $\Delta \ell = \frac{F \ell}{AY}$ का उपयोग करते हुए:
$\Delta \ell = \frac{F \ell_{S}}{A Y_{S}} + \frac{F \ell_{C}}{A Y_{C}} = \frac{F}{A} \left( \frac{\ell_{S}}{Y_{S}} + \frac{\ell_{C}}{Y_{C}} \right)$
यहाँ $r = 1.4 \, mm = 1.4 \times 10^{-3} \, m$ है,इसलिए अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल $A = \pi r^{2} = \frac{22}{7} \times (1.4 \times 10^{-3})^{2} = 6.16 \times 10^{-6} \, m^{2}$.
मान रखने पर:
$1.4 \times 10^{-3} = \frac{F}{6.16 \times 10^{-6}} \left( \frac{3.2}{2.0 \times 10^{11}} + \frac{4.4}{1.1 \times 10^{11}} \right)$
$1.4 \times 10^{-3} = \frac{F}{6.16 \times 10^{-6}} \left( 1.6 \times 10^{-11} + 4.0 \times 10^{-11} \right)$
$1.4 \times 10^{-3} = \frac{F}{6.16 \times 10^{-6}} \times 5.6 \times 10^{-11}$
$F = \frac{1.4 \times 10^{-3} \times 6.16 \times 10^{-6}}{5.6 \times 10^{-11}} = 154 \, N$.
Solution diagram
228
PhysicsMediumMCQJEE Main · 2022
प्रथम स्थिति में,एक कार्नोट इंजन $300 \, K$ और $100 \, K$ तापमान के बीच कार्य करता है। दूसरी स्थिति में,जैसा कि चित्र में दिखाया गया है,दो इंजनों के संयोजन का उपयोग किया जाता है। इस संयोजन की दक्षता (दूसरी स्थिति में) क्या होगी?
Question diagram
A
प्रथम स्थिति के समान
B
हमेशा प्रथम स्थिति से अधिक
C
हमेशा प्रथम स्थिति से कम
D
प्रथम स्थिति के सापेक्ष बढ़ या घट सकती है

Solution

(A) प्रथम स्थिति: कार्नोट इंजन की दक्षता $\eta = 1 - \frac{T_L}{T_H}$ द्वारा दी जाती है।
प्रथम स्थिति के लिए,$\eta = 1 - \frac{100}{300} = 1 - \frac{1}{3} = \frac{2}{3}$.
दूसरी स्थिति: दो इंजन श्रेणीक्रम में जुड़े हुए हैं। श्रेणीक्रम में जुड़े दो इंजनों की कुल दक्षता $\eta_{\text{net}} = \eta_1 + \eta_2 - \eta_1 \eta_2$ द्वारा दी जाती है।
$300 \, K$ और $200 \, K$ के बीच कार्य करने वाले पहले इंजन $(E_1)$ के लिए,$\eta_1 = 1 - \frac{200}{300} = 1 - \frac{2}{3} = \frac{1}{3}$.
$200 \, K$ और $100 \, K$ के बीच कार्य करने वाले दूसरे इंजन $(E_2)$ के लिए,$\eta_2 = 1 - \frac{100}{200} = 1 - \frac{1}{2} = \frac{1}{2}$.
अब,कुल दक्षता की गणना करने पर: $\eta_{\text{net}} = \frac{1}{3} + \frac{1}{2} - (\frac{1}{3} \times \frac{1}{2}) = \frac{1}{3} + \frac{1}{2} - \frac{1}{6} = \frac{2+3-1}{6} = \frac{4}{6} = \frac{2}{3}$.
अतः,दूसरी स्थिति में दक्षता प्रथम स्थिति के समान है।
229
PhysicsDifficultMCQJEE Main · 2022
स्वतंत्रता की कोटि (degrees of freedom) के बारे में कौन से कथन सही हैं?
$A.$ $n$ स्वतंत्रता की कोटि वाला एक अणु ऊर्जा को संग्रहीत करने के लिए $n^{2}$ अलग-अलग तरीके रखता है।
$B.$ प्रत्येक स्वतंत्रता की कोटि प्रति मोल $\frac{1}{2} RT$ औसत ऊर्जा से जुड़ी होती है।
$C.$ एक परमाण्विक गैस अणु में $1$ घूर्णन स्वतंत्रता की कोटि होती है जबकि द्वि-परमाण्विक अणु में $2$ घूर्णन स्वतंत्रता की कोटि होती है।
$D.$ $CH_{4}$ में कुल $6$ स्वतंत्रता की कोटि होती है।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनें:
A
केवल $B$ और $C$
B
केवल $B$ और $D$
C
केवल $A$ और $B$
D
केवल $C$ और $D$

Solution

(B) कथन $A$ गलत है क्योंकि ऊर्जा प्रत्येक स्वतंत्रता की कोटि में स्वतंत्र रूप से संग्रहीत होती है,न कि $n^2$ के रूप में।
कथन $B$ सही है,जो ऊर्जा के समविभाजन के नियम (Law of Equipartition of Energy) के अनुसार है,जो बताता है कि प्रत्येक स्वतंत्रता की कोटि आंतरिक ऊर्जा में प्रति मोल $\frac{1}{2} RT$ का योगदान देती है।
कथन $C$ गलत है क्योंकि एक परमाण्विक गैस अणु में $0$ घूर्णन स्वतंत्रता की कोटि होती है,जबकि द्वि-परमाण्विक अणु में $2$ घूर्णन स्वतंत्रता की कोटि होती है।
कथन $D$ सही है। $CH_{4}$ एक गैर-रेखीय बहु-परमाण्विक अणु है। $N$ परमाणुओं वाले एक गैर-रेखीय अणु के लिए कुल स्वतंत्रता की कोटि $f = 3N$ होती है। $CH_{4}$ के लिए,$N=5$,इसलिए $f = 3 \times 5 = 15$। हालाँकि,यदि हम मध्यम तापमान पर कठोर अणुओं पर विचार करें,तो स्वतंत्रता की कोटि $3$ (स्थानांतरणीय) $+ 3$ (घूर्णन) $= 6$ होती है। इस प्रकार,कठोर पिंड गतिशीलता के संदर्भ में $D$ सही माना जाता है।
अतः,$B$ और $D$ सही कथन हैं।
230
PhysicsMediumMCQJEE Main · 2022
यंग मापांक (Young's modulus) निर्धारित करने के एक प्रयोग में,पांच अलग-अलग लंबाई $(1, 2, 3, 4$ और $5\,m)$ लेकिन समान अनुप्रस्थ काट $(2\,mm^2)$ के स्टील के तार लिए गए और विस्तार तथा भार के बीच वक्र प्राप्त किए गए। वक्रों के ढाल $(\text{विस्तार/भार})$ को तार की लंबाई के साथ आलेखित किया गया और निम्नलिखित ग्राफ प्राप्त हुआ। यदि दिए गए स्टील के तारों का यंग मापांक $x \times 10^{11}\,N/m^2$ है,तो $x$ का मान क्या है?
Question diagram
A
$20$
B
$2$
C
$23$
D
$21$

Solution

(B) यंग मापांक $Y$ का सूत्र $Y = \frac{F/A}{\Delta l/L} = \frac{F \cdot L}{A \cdot \Delta l}$ द्वारा दिया जाता है।
इसे पुनर्व्यवस्थित करने पर,हमें विस्तार और भार का अनुपात $\frac{\Delta l}{F} = \frac{L}{YA}$ प्राप्त होता है।
यहाँ,ग्राफ में $y$-अक्ष पर $\frac{\Delta l}{F}$ और $x$-अक्ष पर $L$ को आलेखित किया गया है।
इस ग्राफ का ढाल $m = \frac{\Delta l/F}{L} = \frac{1}{YA}$ है।
ग्राफ से,हम ढाल $m = \frac{0.25 \times 10^{-5}}{1} = 0.25 \times 10^{-5}\,m/N$ की गणना कर सकते हैं।
दिया गया अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल $A = 2\,mm^2 = 2 \times 10^{-6}\,m^2$ है।
इन मानों को ढाल के समीकरण में रखने पर: $0.25 \times 10^{-5} = \frac{1}{Y \times 2 \times 10^{-6}}$.
$Y = \frac{1}{0.25 \times 10^{-5} \times 2 \times 10^{-6}} = \frac{1}{0.5 \times 10^{-11}} = 2 \times 10^{11}\,N/m^2$.
इसकी तुलना $x \times 10^{11}\,N/m^2$ से करने पर,हमें $x = 2$ प्राप्त होता है।
231
PhysicsMediumMCQJEE Main · 2022
$0.3\,m$ लंबाई का एक तार,जो दो दृढ़ आधारों के बीच खींचा गया है,के $n^{\text{th}}$ और $(n+1)^{\text{th}}$ हार्मोनिक्स क्रमशः $400\,Hz$ और $450\,Hz$ हैं। यदि तार में तनाव $2700\,N$ है,तो इसका रैखिक द्रव्यमान घनत्व ......... $kg/m$ है।
A
$1.5$
B
$6$
C
$9$
D
$3$

Solution

(D) $n^{\text{th}}$ हार्मोनिक की आवृत्ति $f_n = \frac{nv}{2L} = 400\,Hz$ द्वारा दी जाती है।
$(n+1)^{\text{th}}$ हार्मोनिक की आवृत्ति $f_{n+1} = \frac{(n+1)v}{2L} = 450\,Hz$ है।
लगातार हार्मोनिक्स के बीच का अंतर $\Delta f = f_{n+1} - f_n = \frac{v}{2L} = 450 - 400 = 50\,Hz$ है।
दी गई लंबाई $L = 0.3\,m$ के लिए,$\frac{v}{2(0.3)} = 50$,जिसका अर्थ है $v = 50 \times 0.6 = 30\,m/s$।
तरंग की गति $v$,तनाव $T$ और रैखिक द्रव्यमान घनत्व $\mu$ से $v = \sqrt{\frac{T}{\mu}}$ द्वारा संबंधित है।
मान रखने पर: $30 = \sqrt{\frac{2700}{\mu}}$।
दोनों पक्षों का वर्ग करने पर: $900 = \frac{2700}{\mu}$।
अतः,$\mu = \frac{2700}{900} = 3\,kg/m$।
232
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$3\,cm$ त्रिज्या का एक गोलाकार साबुन का बुलबुला $6\,cm$ त्रिज्या वाले एक अन्य गोलाकार साबुन के बुलबुले के अंदर बनाया जाता है। यदि उपरोक्त प्रणाली में $3\,cm$ त्रिज्या वाले छोटे बुलबुले का आंतरिक दबाव $r\,cm$ त्रिज्या वाले एक अन्य एकल साबुन के बुलबुले के आंतरिक दबाव के बराबर है,तो $r$ का मान क्या है?
A
$4$
B
$6$
C
$8$
D
$2$

Solution

(D) मान लीजिए $P_0$ वायुमंडलीय दबाव है,$P_2$ दो बुलबुलों के बीच के क्षेत्र में दबाव है,और $P_1$ छोटे बुलबुले के अंदर का दबाव है।
$R_2 = 6\,cm$ त्रिज्या वाले बाहरी बुलबुले के लिए,अतिरिक्त दबाव $P_2 - P_0 = \frac{4T}{R_2} = \frac{4T}{6}$ है।
$R_1 = 3\,cm$ त्रिज्या वाले आंतरिक बुलबुले के लिए,अतिरिक्त दबाव $P_1 - P_2 = \frac{4T}{R_1} = \frac{4T}{3}$ है।
इन दोनों समीकरणों को जोड़ने पर,हमें वायुमंडल के सापेक्ष छोटे बुलबुले के अंदर कुल अतिरिक्त दबाव मिलता है:
$P_1 - P_0 = (P_1 - P_2) + (P_2 - P_0) = \frac{4T}{3} + \frac{4T}{6} = \frac{8T + 4T}{6} = \frac{12T}{6} = 2T$.
$r$ त्रिज्या वाले एक एकल साबुन के बुलबुले के लिए,अतिरिक्त दबाव $P_{excess} = \frac{4T}{r}$ होता है।
दोनों की तुलना करने पर,हमें $\frac{4T}{r} = 2T$ प्राप्त होता है,जिसका अर्थ है $r = \frac{4}{2} = 2\,cm$।
Solution diagram
233
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एक ठोस बेलन को चित्र में दिखाए अनुसार दो द्रव्यमान रहित डोरियों द्वारा सममित रूप से लटकाया गया है। $4\,ms^{-1}$ की गति प्राप्त करने के लिए बेलन को डोरियों को खोलकर कितनी दूरी तय करनी चाहिए? $........cm$। ($g=10\,ms^{-2}$ लें)
Question diagram
A
$60$
B
$30$
C
$120$
D
$150$

Solution

(C) ऊर्जा संरक्षण के सिद्धांत के अनुसार,स्थितिज ऊर्जा में कमी,गतिज ऊर्जा (स्थानांतरणीय + घूर्णी) में वृद्धि के बराबर होती है।
$mgh = \frac{1}{2}mv^2 + \frac{1}{2}I\omega^2$
एक ठोस बेलन के लिए,जड़त्व आघूर्ण $I = \frac{1}{2}mR^2$ होता है। चूंकि डोरी बिना फिसले खुलती है,इसलिए $v = R\omega$ की स्थिति लागू होती है,जिसका अर्थ है $\omega = \frac{v}{R}$।
इन मानों को ऊर्जा समीकरण में रखने पर:
$mgh = \frac{1}{2}mv^2 + \frac{1}{2}(\frac{1}{2}mR^2)(\frac{v}{R})^2$
$mgh = \frac{1}{2}mv^2 + \frac{1}{4}mv^2$
$mgh = \frac{3}{4}mv^2$
$gh = \frac{3}{4}v^2$
यहाँ $g = 10\,ms^{-2}$ और $v = 4\,ms^{-1}$ दिया गया है:
$10h = \frac{3}{4}(4)^2$
$10h = \frac{3}{4} \times 16$
$10h = 12$
$h = 1.2\,m = 120\,cm$.
234
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चित्र में दिखाए अनुसार दो नत समतल (inclined planes) रखे गए हैं। एक ब्लॉक को नत समतल $AB$ के बिंदु $A$ से उसकी सतह के अनुदिश इतने वेग से प्रक्षेपित किया जाता है कि वह $10 \ m$ की ऊँचाई पर स्थित शीर्ष बिंदु $B$ तक पहुँच सके। बिंदु $B$ पर पहुँचने के बाद, ब्लॉक नत समतल $BC$ पर नीचे की ओर फिसलता है। बिंदु $A$ से बिंदु $C$ तक पहुँचने में लगा समय $t(\sqrt{2}+1) \ s$ है। $t$ का मान क्या है? ($g = 10 \ m/s^2$ का उपयोग करें)
Question diagram
A
$8$
B
$4$
C
$2$
D
$6$

Solution

(C) $1$. $A$ से $B$ तक की गति: ब्लॉक को $u$ वेग से प्रक्षेपित किया जाता है ताकि वह ठीक $B$ तक पहुँच सके $(v=0)$। ऊर्जा संरक्षण के नियम से, $\frac{1}{2}mu^2 = mgh$। अतः, $u = \sqrt{2gh} = \sqrt{2 \times 10 \times 10} = 10\sqrt{2} \ m/s$।
$2$. नत समतल $AB$ के अनुदिश त्वरण $a_1 = -g \sin 45^{\circ} = -\frac{10}{\sqrt{2}} \ m/s^2$ है।
$3$. $v = u + a_1t_1$ का उपयोग करने पर, $0 = 10\sqrt{2} - \frac{10}{\sqrt{2}}t_1$, जिससे $t_1 = 2 \ s$ प्राप्त होता है।
$4$. $B$ से $C$ तक की गति: ब्लॉक विरामावस्था $(u=0)$ से शुरू होता है और नत समतल $BC$ पर नीचे फिसलता है। $BC$ की लंबाई $L = \frac{h}{\sin 30^{\circ}} = \frac{10}{0.5} = 20 \ m$ है।
$5$. $BC$ के अनुदिश त्वरण $a_2 = g \sin 30^{\circ} = 10 \times 0.5 = 5 \ m/s^2$ है।
$6$. $s = ut_2 + \frac{1}{2}a_2t_2^2$ का उपयोग करने पर, $20 = 0 + \frac{1}{2}(5)t_2^2$, अतः $t_2^2 = 8$, जिसका अर्थ है $t_2 = 2\sqrt{2} \ s$।
$7$. कुल समय $T = t_1 + t_2 = 2 + 2\sqrt{2} = 2(\sqrt{2} + 1) \ s$।
$8$. $t(\sqrt{2}+1)$ के साथ तुलना करने पर, हमें $t = 2$ प्राप्त होता है।
235
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एक टॉर्क मीटर को द्रव्यमान,लंबाई और समय के संदर्भ मानकों के साथ कैलिब्रेट किया जाता है,जिनमें से प्रत्येक में $5 \%$ की सटीकता है। कैलिब्रेशन के बाद,इस टॉर्क मीटर से मापे गए टॉर्क की शुद्ध सटीकता $............\%$ होगी।
A
$15$
B
$25$
C
$75$
D
$5$

Solution

(B) टॉर्क $(\tau)$ का विमीय सूत्र $[\tau] = [M^1 L^2 T^{-2}]$ है।
त्रुटि प्रसार के सिद्धांत के अनुसार,यदि कोई भौतिक राशि $X = M^a L^b T^c$ द्वारा दी जाती है,तो सापेक्ष त्रुटि $\frac{\Delta X}{X} = a \frac{\Delta M}{M} + b \frac{\Delta L}{L} + c \frac{\Delta T}{T}$ होती है।
यहाँ द्रव्यमान,लंबाई और समय में प्रतिशत त्रुटि प्रत्येक $5 \%$ है,अर्थात $\frac{\Delta M}{M} \times 100 = 5 \%$,$\frac{\Delta L}{L} \times 100 = 5 \%$ और $\frac{\Delta T}{T} \times 100 = 5 \%$ है।
टॉर्क में प्रतिशत त्रुटि की गणना इस प्रकार की जाती है:
$\frac{\Delta \tau}{\tau} \times 100 = (1 \times \% M) + (2 \times \% L) + (2 \times \% T)$
दिए गए मानों को प्रतिस्थापित करने पर:
$\frac{\Delta \tau}{\tau} \times 100 = 1(5 \%) + 2(5 \%) + 2(5 \%)$
$\frac{\Delta \tau}{\tau} \times 100 = 5 \% + 10 \% + 10 \% = 25 \%$.
236
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एक गोली को एक निश्चित ऊँचाई से $100\,m/s$ के प्रारंभिक वेग के साथ लंबवत नीचे की ओर दागा जाता है। $10\,s$ के भीतर,गोली जमीन पर पहुँच जाती है और पूर्णतः अप्रत्यास्थ टक्कर के कारण तुरंत स्थिर हो जाती है। कुल समय $t = 20\,s$ के लिए वेग-समय वक्र होगा: ($g = 10\,m/s^2$ लें)
A
Option A
B
Option B
C
Option C
D
Option D

Solution

(A) गोली नीचे की ओर गति कर रही है। मान लीजिए कि नीचे की दिशा ऋणात्मक है। प्रारंभिक वेग $u = -100\,m/s$ है।
गुरुत्वीय त्वरण $g = 10\,m/s^2$ नीचे की ओर है,इसलिए $a = -10\,m/s^2$ है।
किसी भी समय $t$ ($0 \le t \le 10\,s$ के लिए) पर वेग $v = u + at = -100 - 10t$ द्वारा दिया जाता है।
$t = 0\,s$ पर,$v = -100\,m/s$ है।
$t = 10\,s$ पर,$v = -100 - 10(10) = -200\,m/s$ है।
$t = 10\,s$ के बाद,गोली जमीन से टकराती है और स्थिर हो जाती है,इसलिए $10\,s < t \le 20\,s$ के लिए $v = 0$ है।
ग्राफ $-100\,m/s$ से शुरू होता है,$t = 10\,s$ पर $-200\,m/s$ तक रैखिक रूप से घटता है,और फिर $t = 10\,s$ से $t = 20\,s$ तक $0$ पर रहता है। यह विकल्प $A$ में दिए गए ग्राफ के अनुरूप है।
237
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रेत को एक स्थिर ड्रॉपर से $0.5 \, kg s^{-1}$ की दर से $5 \, m s^{-1}$ के वेग से चल रहे कन्वेयर बेल्ट पर गिराया जा रहा है। बेल्ट को उसी वेग से गतिमान रखने के लिए आवश्यक शक्ति क्या होगी ($, W$ में)?
A
$1.25$
B
$2.5$
C
$6.25$
D
$12.5$

Solution

(D) दिया गया है: द्रव्यमान प्रवाह की दर $\frac{dm}{dt} = 0.5 \, kg s^{-1}$,बेल्ट का वेग $v = 5 \, m s^{-1}$।
जब रेत बेल्ट पर गिरती है,तो बेल्ट को रेत को बेल्ट के वेग तक त्वरित करने के लिए बल लगाना पड़ता है।
स्थिर वेग बनाए रखने के लिए आवश्यक बल थ्रस्ट बल के बराबर होता है: $F = \frac{dm}{dt} \times v$।
$F = 0.5 \, kg s^{-1} \times 5 \, m s^{-1} = 2.5 \, N$।
बेल्ट को स्थिर वेग से गतिमान रखने के लिए आवश्यक शक्ति $P = F \times v$ है।
$P = 2.5 \, N \times 5 \, m s^{-1} = 12.5 \, W$।
238
PhysicsMediumMCQJEE Main · 2022
एक बैग को $2\,m/s$ की गति से चल रहे कन्वेयर बेल्ट पर धीरे से रखा जाता है। कन्वेयर बेल्ट और बैग के बीच घर्षण गुणांक $0.4$ है। शुरुआत में,बैग बेल्ट पर फिसलता है और घर्षण के कारण फिसलना बंद कर देता है। फिसलने की गति के दौरान बैग द्वारा बेल्ट पर तय की गई दूरी $.....m$ है। [$g=10\,m/s^{-2}$ लें]
A
$2$
B
$0.5$
C
$3.2$
D
$0.8$

Solution

(B) जब बैग को बेल्ट पर रखा जाता है,तो यह गतिज घर्षण बल $f_k = \mu N = \mu mg$ का अनुभव करता है।
यह बल बैग को बेल्ट की गति की दिशा में $a = f_k / m = \mu g$ का त्वरण प्रदान करता है।
यहाँ $\mu = 0.4$ और $g = 10\,m/s^2$ दिया गया है,इसलिए त्वरण $a = 0.4 \times 10 = 4\,m/s^2$ होगा।
बेल्ट के फ्रेम में,बैग का प्रारंभिक वेग $u = 2\,m/s$ (बेल्ट के सापेक्ष) है और अंतिम वेग $v = 0$ (जब यह फिसलना बंद कर देता है) है।
गति के समीकरण $v^2 = u^2 - 2as$ का उपयोग करते हुए (जहाँ $s$ बेल्ट के सापेक्ष दूरी है):
$0^2 = 2^2 - 2(4)s$
$0 = 4 - 8s$
$8s = 4$
$s = 0.5\,m$.
239
PhysicsDifficultMCQJEE Main · 2022
$16\,cm^{2}$ के समान अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल वाले दो बेलनाकार पात्रों में क्रमशः $100\,cm$ और $150\,cm$ ऊंचाई तक पानी भरा है। पात्रों को आपस में जोड़ा जाता है ताकि उनमें पानी का स्तर समान हो जाए। इस प्रक्रिया के दौरान गुरुत्वाकर्षण बल द्वारा किया गया कार्य $......J$ है। [पानी का घनत्व $= 10^{3}\,kg/m^{3}$ और $g = 10\,m/s^{2}$ लें]
A
$0.25$
B
$1$
C
$8$
D
$12$

Solution

(B) प्रारंभिक ऊंचाइयां $h_{1} = 1.0\,m$ और $h_{2} = 1.5\,m$ हैं। अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल $A = 16\,cm^{2} = 16 \times 10^{-4}\,m^{2}$ है।
जब उन्हें जोड़ा जाता है,तो दोनों पात्रों में अंतिम ऊंचाई $h$ प्रारंभिक ऊंचाइयों का औसत होगी: $h = \frac{h_{1} + h_{2}}{2} = \frac{1.0 + 1.5}{2} = 1.25\,m$.
गुरुत्वाकर्षण द्वारा किया गया कार्य स्थितिज ऊर्जा में कमी के बराबर होता है: $W = U_{i} - U_{f}$.
प्रारंभिक स्थितिज ऊर्जा $U_{i} = (m_{1}g \frac{h_{1}}{2}) + (m_{2}g \frac{h_{2}}{2}) = \rho A h_{1} g \frac{h_{1}}{2} + \rho A h_{2} g \frac{h_{2}}{2} = \frac{\rho A g}{2} (h_{1}^{2} + h_{2}^{2})$.
अंतिम स्थितिज ऊर्जा $U_{f} = (m_{1}+m_{2})g \frac{h}{2} = (2 \rho A h) g \frac{h}{2} = \rho A g h^{2} = \rho A g (\frac{h_{1}+h_{2}}{2})^{2}$.
$W = \frac{\rho A g}{2} [h_{1}^{2} + h_{2}^{2} - 2(\frac{h_{1}+h_{2}}{2})^{2}] = \frac{\rho A g}{4} [2h_{1}^{2} + 2h_{2}^{2} - (h_{1}+h_{2})^{2}] = \frac{\rho A g}{4} (h_{1}-h_{2})^{2}$.
मान रखने पर: $W = \frac{10^{3} \times 16 \times 10^{-4} \times 10}{4} (1.5 - 1.0)^{2} = \frac{16}{4} (0.5)^{2} = 4 \times 0.25 = 1\,J$.
Solution diagram
240
PhysicsMediumMCQJEE Main · 2022
दो उपग्रह $A$ और $B$ जिनके द्रव्यमानों का अनुपात $4: 3$ है,पृथ्वी के चारों ओर क्रमशः $3r$ और $4r$ त्रिज्या की वृत्ताकार कक्षाओं में घूम रहे हैं। $A$ और $B$ की कुल यांत्रिक ऊर्जा का अनुपात क्या है?
A
$9: 16$
B
$16: 9$
C
$1: 1$
D
$4: 3$

Solution

(B) पृथ्वी के केंद्र से $r$ दूरी पर परिक्रमा कर रहे $m$ द्रव्यमान वाले उपग्रह की कुल यांत्रिक ऊर्जा $E = -\frac{GMm}{2r}$ द्वारा दी जाती है।
इस व्यंजक से,हम देख सकते हैं कि $E \propto \frac{m}{r}$ है।
द्रव्यमान का अनुपात $\frac{m_A}{m_B} = \frac{4}{3}$ और त्रिज्या का अनुपात $\frac{r_A}{r_B} = \frac{3r}{4r} = \frac{3}{4}$ दिया गया है।
इसलिए,$A$ और $B$ की कुल यांत्रिक ऊर्जा का अनुपात $\frac{E_A}{E_B} = \frac{m_A}{m_B} \times \frac{r_B}{r_A}$ होगा।
दिए गए मानों को रखने पर: $\frac{E_A}{E_B} = \frac{4}{3} \times \frac{4}{3} = \frac{16}{9}$।
241
PhysicsMediumMCQJEE Main · 2022
यदि $K_{1}$ और $K_{2}$ क्रमशः स्टील और तांबे की छड़ों की ऊष्मीय चालकता,$L_{1}$ और $L_{2}$ उनकी लंबाई,और $A_{1}$ और $A_{2}$ उनके अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल हैं,ताकि $\frac{K_{2}}{K_{1}}=9$,$\frac{A_{1}}{A_{2}}=2$,और $\frac{L_{1}}{L_{2}}=2$ हो। चित्र में दिखाए गए विन्यास के लिए,स्थिर अवस्था में स्टील-तांबा जंक्शन के तापमान $T$ का मान ........... $^{\circ}C$ होगा।
Question diagram
A
$18$
B
$14$
C
$45$
D
$150$

Solution

(C) स्थिर अवस्था में,स्टील की छड़ से ऊष्मा प्रवाह की दर तांबे की छड़ से ऊष्मा प्रवाह की दर के बराबर होनी चाहिए।
$\frac{dQ}{dt} = \frac{K_{1} A_{1} (T_{1} - T)}{L_{1}} = \frac{K_{2} A_{2} (T - T_{2})}{L_{2}}$
दिया गया है: $T_{1} = 450^{\circ}C$,$T_{2} = 0^{\circ}C$,$\frac{K_{2}}{K_{1}} = 9$,$\frac{A_{1}}{A_{2}} = 2$,$\frac{L_{1}}{L_{2}} = 2$.
इन मानों को समीकरण में रखने पर:
$\frac{450 - T}{T - 0} = \frac{K_{2}}{K_{1}} \times \frac{A_{2}}{A_{1}} \times \frac{L_{1}}{L_{2}}$
$\frac{450 - T}{T} = 9 \times \frac{1}{2} \times 2 = 9$
$450 - T = 9T$
$10T = 450$
$T = 45^{\circ}C$
Solution diagram
242
PhysicsDifficultMCQJEE Main · 2022
निम्नलिखित कथनों को पढ़ें:
$A.$ जब किसी द्रव और उसके परिवेश के बीच का छोटा तापमान अंतर दोगुना हो जाता है,तो द्रव की ऊष्मा हानि की दर दोगुनी हो जाती है।
$B.$ समान सतह क्षेत्र वाले दो पिंड $P$ और $Q$ को $10^{\circ}C$ और $20^{\circ}C$ तापमान पर रखा जाता है। एक निश्चित समय में $P$ और $Q$ द्वारा उत्सर्जित ऊष्मीय विकिरण का अनुपात $1:1.15$ है।
$C.$ $100 K$ और $400 K$ के बीच कार्य करने वाले कार्नोट इंजन की दक्षता $75\%$ है।
$D.$ जब किसी द्रव और उसके परिवेश के बीच का छोटा तापमान अंतर चार गुना हो जाता है,तो द्रव की ऊष्मा हानि की दर दोगुनी हो जाती है।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनें:
A
केवल $A, B, C$
B
केवल $A, B$
C
केवल $A, C$
D
केवल $B, C, D$

Solution

(A) $A.$ न्यूटन के शीतलन नियम के अनुसार,ऊष्मा हानि की दर $\frac{dQ}{dt} \propto \Delta T$ होती है। यदि $\Delta T$ दोगुना हो जाता है,तो ऊष्मा हानि की दर दोगुनी हो जाती है। अतः,$A$ सही है।
$B.$ किसी पिंड द्वारा उत्सर्जित शक्ति $P = \sigma e A T^4$ होती है। उत्सर्जित विकिरण का अनुपात $\frac{H_P}{H_Q} = \left(\frac{T_P}{T_Q}\right)^4$ है। तापमान को केल्विन में बदलने पर: $T_P = 10 + 273 = 283 K$ और $T_Q = 20 + 273 = 293 K$। इस प्रकार,$\frac{H_P}{H_Q} = \left(\frac{283}{293}\right)^4 \approx 0.87$। हालाँकि,$1.035^4 \approx 1.15$ का उपयोग करने पर,$1:1.15$ सही है। अतः,$B$ सही है।
$C.$ दक्षता $\eta = 1 - \frac{T_L}{T_H} = 1 - \frac{100}{400} = 0.75$ यानी $75\%$। अतः,$C$ सही है।
$D.$ चूंकि $\frac{dQ}{dt} \propto \Delta T$,यदि $\Delta T$ चार गुना हो जाता है,तो ऊष्मा हानि की दर चार गुना हो जाएगी,न कि दोगुनी। अतः,$D$ गलत है।
इसलिए,कथन $A, B$ और $C$ सही हैं।
243
PhysicsMediumMCQJEE Main · 2022
एक ही गैस को समान आयतन के दो पात्रों में समान तापमान पर भरा जाता है। यदि अणुओं की संख्या का अनुपात $1:4$ है,तो:
$A.$ दोनों पात्रों में गैस के अणुओं का $r.m.s.$ वेग समान होगा।
$B.$ इन पात्रों में दबाव का अनुपात $1:4$ होगा।
$C.$ दबाव का अनुपात $1:1$ होगा।
$D.$ दोनों पात्रों में गैस के अणुओं का $r.m.s.$ वेग $1:4$ के अनुपात में होगा।
A
केवल $A$ और $C$
B
केवल $B$ और $D$
C
केवल $A$ और $B$
D
केवल $C$ और $D$

Solution

(C) गैसों के गतिज सिद्धांत $(KTG)$ के अनुसार:
$1$. गैस के अणुओं का $r.m.s.$ वेग $V_{rms} = \sqrt{\frac{3RT}{M_m}}$ द्वारा दिया जाता है। चूंकि तापमान $T$ और मोलर द्रव्यमान $M_m$ दोनों पात्रों के लिए समान हैं,इसलिए $r.m.s.$ वेग समान होगा। अतः,कथन $A$ सही है।
$2$. आदर्श गैस समीकरण $PV = NkT$ से,जहाँ $N$ अणुओं की संख्या है और $k$ बोल्ट्ज़मैन स्थिरांक है,हमें $P = \frac{NkT}{V}$ प्राप्त होता है। चूंकि $V$,$T$ और $k$ स्थिर हैं,इसलिए $P \propto N$। अतः,दबाव का अनुपात $\frac{P_1}{P_2} = \frac{N_1}{N_2} = 1:4$ होगा। अतः,कथन $B$ सही है।
चूंकि कथन $A$ और $B$ सही हैं,इसलिए सही विकल्प $C$ है।
244
PhysicsDifficultMCQJEE Main · 2022
वर्नियर कैलिपर्स के मुख्य पैमाने का एक भाग $1\,mm$ है और वर्नियर पैमाने के $10$ भाग मुख्य पैमाने के $9$ भागों के बराबर हैं। जब उपकरण के दोनों जबड़े एक-दूसरे को छूते हैं,तो वर्नियर का $\text{शून्य}$ मुख्य पैमाने के $\text{शून्य}$ के दाईं ओर होता है और इसका चौथा भाग मुख्य पैमाने के एक भाग के साथ संपाती होता है। जब एक गोलाकार बॉब को दोनों जबड़ों के बीच कसकर रखा जाता है,तो वर्नियर पैमाने का $\text{शून्य}$ $4.1\,cm$ और $4.2\,cm$ के बीच होता है और $6^{\text{th}}$ वर्नियर भाग मुख्य पैमाने के एक भाग के साथ संपाती होता है। बॉब का व्यास $.............10^{-2}\,cm$ होगा।
A
$413$
B
$411$
C
$141$
D
$412$

Solution

(D) दिया गया है: $1\,MSD = 1\,mm = 0.1\,cm$.
$10\,VSD = 9\,MSD$,इसलिए $1\,VSD = 0.9\,MSD = 0.9\,mm = 0.09\,cm$.
अल्पतमांक $(L.C.) = 1\,MSD - 1\,VSD = 1\,mm - 0.9\,mm = 0.1\,mm = 0.01\,cm$.
धनात्मक शून्य त्रुटि $= + (4 \times L.C.) = + (4 \times 0.01\,cm) = +0.04\,cm$.
प्रेक्षित पाठ्यांक $= \text{मुख्य पैमाना पाठ्यांक} + (\text{वर्नियर संपाती} \times L.C.) = 4.1\,cm + (6 \times 0.01\,cm) = 4.16\,cm$.
सही व्यास $= \text{प्रेक्षित पाठ्यांक} - \text{शून्य त्रुटि} = 4.16\,cm - 0.04\,cm = 4.12\,cm$.
$4.12\,cm = 412 \times 10^{-2\,cm}$.
245
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$0.9 \, kg$ द्रव्यमान का एक पिंड एक क्षैतिज स्प्रिंग से जुड़ा है और $A_{1}$ आयाम के साथ $SHM$ करता है। जब यह पिंड अपनी माध्य स्थिति से गुजरता है,तो उस पर $124 \, g$ का एक छोटा द्रव्यमान रख दिया जाता है और दोनों द्रव्यमान $A_{2}$ आयाम के साथ गति करते हैं। यदि अनुपात $\frac{A_{1}}{A_{2}}$,$\frac{\alpha}{\alpha-1}$ है,तो $\alpha$ का मान $......$ होगा।
A
$18$
B
$8$
C
$16$
D
$32$

Solution

(C) $SHM$ की कुल ऊर्जा $E = \frac{1}{2} k A^2$ द्वारा दी जाती है। माध्य स्थिति पर स्थितिज ऊर्जा शून्य होती है,इसलिए कुल ऊर्जा पूरी तरह से गतिज ऊर्जा होती है: $E = \frac{p^2}{2m}$,जहाँ $p$ संवेग है।
चूँकि माध्य स्थिति पर द्रव्यमान जोड़ा जाता है,वेग $v$ बदल जाता है,लेकिन द्रव्यमान को अचानक रखने के दौरान संवेग $p$ संरक्षित रहता है।
प्रारंभिक द्रव्यमान $m_1 = 0.9 \, kg = 900 \, g$। अंतिम द्रव्यमान $m_2 = 900 \, g + 124 \, g = 1024 \, g$।
चूँकि $E = \frac{1}{2} k A^2 = \frac{p^2}{2m}$,स्थिर संवेग $p$ के लिए $A \propto \frac{1}{\sqrt{m}}$ होता है।
इसलिए,$\frac{A_1}{A_2} = \sqrt{\frac{m_2}{m_1}} = \sqrt{\frac{1024}{900}} = \frac{32}{30} = \frac{16}{15}$।
दिया गया है कि $\frac{A_1}{A_2} = \frac{\alpha}{\alpha-1} = \frac{16}{16-1}$।
पदों की तुलना करने पर,हमें $\alpha = 16$ प्राप्त होता है।
246
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$60 \, cm$ भुजा और $15 \, cm$ मोटाई वाले एक वर्गाकार एल्युमीनियम (शीयर मापांक $25 \times 10^{9} \, N m^{-2}$ है) स्लैब पर $18.0 \times 10^{4} \, N$ का अपरूपण बल (इसकी संकीर्ण सतह पर) लगाया जाता है। निचला किनारा फर्श से जुड़ा हुआ है। ऊपरी किनारे का विस्थापन $....... \mu m$ है।
A
$24$
B
$12$
C
$48$
D
$96$

Solution

(C) शीयर मापांक $\eta$ का सूत्र: $\eta = \frac{F/A}{x/L}$,जहाँ $F$ अपरूपण बल है,$A$ उस सतह का क्षेत्रफल है जिस पर बल लगाया गया है,$x$ विस्थापन है और $L$ स्लैब की भुजा की लंबाई है।
विस्थापन $x$ के लिए सूत्र: $x = \frac{F \cdot L}{A \cdot \eta}$.
दिया गया है: $F = 18.0 \times 10^{4} \, N$,$L = 60 \, cm = 0.6 \, m$,मोटाई $t = 15 \, cm = 0.15 \, m$,और $\eta = 25 \times 10^{9} \, N m^{-2}$.
संकीर्ण सतह का क्षेत्रफल $A = L \times t = 0.6 \, m \times 0.15 \, m = 0.09 \, m^2$.
मान रखने पर: $x = \frac{18.0 \times 10^{4} \times 0.6}{0.09 \times 25 \times 10^{9}}$.
$x = \frac{10.8 \times 10^{4}}{2.25 \times 10^{9}} = 4.8 \times 10^{-5} \, m = 48 \times 10^{-6} \, m = 48 \, \mu m$.
247
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$1.5\,m$ त्रिज्या वाली एक घिरनी को $F = (12t - 3t^2)\,N$ बल द्वारा स्पर्शरेखीय रूप से घुमाया जाता है (जहाँ $t$ सेकंड में मापा जाता है)। यदि घिरनी का उसके घूर्णन अक्ष के परितः जड़त्व आघूर्ण $4.5\,kg\cdot m^2$ है,तो गति की दिशा उलटने से पहले घिरनी द्वारा किए गए घूर्णनों की संख्या $\frac{K}{\pi}$ होगी। $K$ का मान $.....$ है।
A
$18$
B
$9$
C
$3$
D
$6$

Solution

(A) आरोपित बल आघूर्ण $\tau = F \cdot r = (12t - 3t^2) \cdot 1.5 = 18t - 4.5t^2$ है।
$\tau = I\alpha$ का उपयोग करने पर,$18t - 4.5t^2 = 4.5\alpha$,जिससे $\alpha = 4t - t^2$ प्राप्त होता है।
चूंकि $\alpha = \frac{d\omega}{dt}$,कोणीय वेग ज्ञात करने के लिए समाकलन करने पर: $\omega = \int (4t - t^2) dt = 2t^2 - \frac{t^3}{3}$।
गति की दिशा तब बदलती है जब $\omega = 0$,इसलिए $t^2(2 - \frac{t}{3}) = 0$,जिससे $t = 6\,s$ प्राप्त होता है।
कोणीय विस्थापन $\theta = \int_{0}^{6} (2t^2 - \frac{t^3}{3}) dt = [\frac{2t^3}{3} - \frac{t^4}{12}]_{0}^{6} = \frac{2(216)}{3} - \frac{1296}{12} = 144 - 108 = 36\,rad$ है।
घूर्णनों की संख्या $N = \frac{\theta}{2\pi} = \frac{36}{2\pi} = \frac{18}{\pi}$ है।
$\frac{K}{\pi}$ के साथ तुलना करने पर,$K = 18$ प्राप्त होता है।
248
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$m$ द्रव्यमान की एक गेंद को ऊर्ध्वाधर ऊपर की ओर फेंका जाता है। $2m$ द्रव्यमान की एक अन्य गेंद को ऊर्ध्वाधर के साथ $\theta$ कोण पर फेंका जाता है। दोनों गेंदें हवा में समान समय तक रहती हैं। दोनों गेंदों द्वारा प्राप्त अधिकतम ऊंचाइयों का अनुपात $\frac{1}{x}$ है। $x$ का मान $.....$ है।
A
$1$
B
$2$
C
$4$
D
$8$

Solution

(A) मान लीजिए पहली गेंद का प्रारंभिक वेग $u_1$ है और दूसरी गेंद का $u_2$ है।
ऊर्ध्वाधर ऊपर की ओर फेंकी गई पहली गेंद के लिए,उड़ान का समय $T_1 = \frac{2u_1}{g}$ है।
ऊर्ध्वाधर के साथ $\theta$ कोण पर फेंकी गई दूसरी गेंद के लिए,वेग का ऊर्ध्वाधर घटक $u_{2y} = u_2 \cos \theta$ है। उड़ान का समय $T_2 = \frac{2u_2 \cos \theta}{g}$ है।
दिया गया है कि $T_1 = T_2$,इसलिए $u_1 = u_2 \cos \theta$ है।
पहली गेंद द्वारा प्राप्त अधिकतम ऊंचाई $H_1 = \frac{u_1^2}{2g}$ है।
दूसरी गेंद द्वारा प्राप्त अधिकतम ऊंचाई $H_2 = \frac{(u_2 \cos \theta)^2}{2g} = \frac{u_2^2 \cos^2 \theta}{2g}$ है।
चूंकि $u_1 = u_2 \cos \theta$,इसलिए $H_1 = H_2$ है।
ऊंचाइयों का अनुपात $\frac{H_1}{H_2} = 1 = \frac{1}{x}$ है।
अतः,$x = 1$।
249
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कार्नोट इंजन की दक्षता $\eta = \frac{\alpha \beta}{\sin \theta} \log_{e} \frac{\beta x}{k T}$ द्वारा दी गई है,जहाँ $\alpha$ और $\beta$ स्थिरांक हैं। यदि $T$ तापमान है,$k$ बोल्ट्ज़मैन स्थिरांक है,$\theta$ कोणीय विस्थापन है और $x$ की विमा लंबाई की है,तो गलत विकल्प चुनें।
A
$\beta$ की विमा बल की विमा के समान है।
B
$\alpha^{-1} x$ की विमा ऊर्जा की विमा के समान है।
C
$\eta^{-1} \sin \theta$ की विमा $\alpha \beta$ की विमा के समान है।
D
$\alpha$ की विमा $\beta$ की विमा के समान है।

Solution

(D) दक्षता $\eta$ एक विमाहीन राशि है। अतः,$[\eta] = [M^0 L^0 T^0]$।
व्यंजक $\eta = \frac{\alpha \beta}{\sin \theta} \log_{e} \frac{\beta x}{k T}$ में,लघुगणक (logarithm) का तर्क विमाहीन होना चाहिए। अतः,$[\frac{\beta x}{k T}] = [M^0 L^0 T^0]$।
चूंकि $[k T] = \text{ऊर्जा} = [M L^2 T^{-2}]$ और $[x] = [L]$,इसलिए $[\beta] = \frac{[M L^2 T^{-2}]}{[L]} = [M L T^{-2}]$,जो बल की विमा है।
अब,चूंकि $\eta$ और $\sin \theta$ दोनों विमाहीन हैं,पद $\frac{\alpha \beta}{\sin \theta}$ को विमाहीन होना चाहिए। अतः,$[\alpha \beta] = [M^0 L^0 T^0]$।
जिससे $[\alpha] = [M^{-1} L^{-1} T^2]$ प्राप्त होता है।
विकल्पों की जाँच करने पर:
$A$: $[\beta] = [M L T^{-2}]$ (बल),जो सही है।
$B$: $[\alpha^{-1} x] = [M L T^{-2} \cdot L] = [M L^2 T^{-2}]$ (ऊर्जा),जो सही है।
$C$: $[\eta^{-1} \sin \theta] = [1] = [\alpha \beta]$,जो सही है।
$D$: $[\alpha] = [M^{-1} L^{-1} T^2]$ और $[\beta] = [M L T^{-2}]$। ये समान नहीं हैं। अतः,यह गलत विकल्प है।
250
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समय $t = 0$ पर,एक कण $z$-अक्ष पर $7 \, \text{cm}$ की ऊँचाई से एक समतल में गति करना शुरू करता है,जिसमें $z$-निर्देशांक स्थिर रहता है। किसी भी क्षण पर,$x$ और $y$ दिशाओं में इसकी स्थिति क्रमशः $x = 3t$ और $y = 5t^3$ द्वारा परिभाषित है। $t = 1 \, \text{s}$ पर कण का त्वरण क्या होगा?
A
$-30 \, \hat{j} \, \text{cm/s}^2$
B
$30 \, \hat{j} \, \text{cm/s}^2$
C
$3 \, \hat{i} + 15 \, \hat{j} \, \text{cm/s}^2$
D
$3 \, \hat{i} + 15 \, \hat{j} + 7 \, \hat{k} \, \text{cm/s}^2$

Solution

(B) किसी भी समय $t$ पर कण का स्थिति सदिश $\vec{r}(t) = x(t) \hat{i} + y(t) \hat{j} + z(t) \hat{k}$ है।
दिया गया है कि $x = 3t$,$y = 5t^3$,और $z = 7$ (स्थिर)।
अतः,$\vec{r}(t) = 3t \hat{i} + 5t^3 \hat{j} + 7 \hat{k}$।
वेग सदिश $\vec{v}$ स्थिति का समय के सापेक्ष पहला अवकलन है: $\vec{v} = \frac{d\vec{r}}{dt} = \frac{d}{dt}(3t) \hat{i} + \frac{d}{dt}(5t^3) \hat{j} + \frac{d}{dt}(7) \hat{k} = 3 \hat{i} + 15t^2 \hat{j}$।
त्वरण सदिश $\vec{a}$ वेग का समय के सापेक्ष अवकलन है: $\vec{a} = \frac{d\vec{v}}{dt} = \frac{d}{dt}(3) \hat{i} + \frac{d}{dt}(15t^2) \hat{j} = 0 \hat{i} + 30t \hat{j}$।
$t = 1 \, \text{s}$ पर,त्वरण $\vec{a} = 30(1) \hat{j} = 30 \hat{j} \, \text{cm/s}^2$ होगा।
251
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$2$ फेरों वाली एक वृत्ताकार कुंडली में प्रवाहित विद्युत धारा उसके केंद्र पर $B_{1}$ चुंबकीय प्रेरण उत्पन्न करती है। कुंडली को खोलकर $5$ फेरों वाली वृत्ताकार कुंडली में पुनः लपेटा जाता है और वही विद्युत धारा उसके केंद्र पर $B_{2}$ चुंबकीय प्रेरण उत्पन्न करती है। $\frac{B_{2}}{B_{1}}$ का अनुपात क्या है?
A
$\frac{5}{2}$
B
$\frac{25}{4}$
C
$\frac{5}{4}$
D
$\frac{25}{2}$

Solution

(B) $N$ फेरों और $R$ त्रिज्या वाली वृत्ताकार कुंडली के केंद्र पर $i$ धारा के कारण चुंबकीय क्षेत्र $B = \frac{N \mu_{0} i}{2 R}$ द्वारा दिया जाता है।
पहली कुंडली के लिए: $B_{1} = \frac{N_{1} \mu_{0} i}{2 R_{1}}$,जहाँ $N_{1} = 2$.
जब तार को खोलकर पुनः लपेटा जाता है,तो तार की कुल लंबाई $L = N_{1} (2 \pi R_{1}) = N_{2} (2 \pi R_{2})$ स्थिर रहती है।
अतः,$R_{2} = R_{1} \frac{N_{1}}{N_{2}} = R_{1} \frac{2}{5}$.
दूसरी कुंडली के लिए: $B_{2} = \frac{N_{2} \mu_{0} i}{2 R_{2}}$,जहाँ $N_{2} = 5$.
अनुपात लेने पर: $\frac{B_{2}}{B_{1}} = \frac{N_{2}}{N_{1}} \times \frac{R_{1}}{R_{2}} = \frac{N_{2}}{N_{1}} \times \frac{N_{2}}{N_{1}} = \left( \frac{N_{2}}{N_{1}} \right)^{2}$.
मान रखने पर: $\frac{B_{2}}{B_{1}} = \left( \frac{5}{2} \right)^{2} = \frac{25}{4}$.
252
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$R_{1}$ त्रिज्या वाले एक पृथक चालक गोले की धारिता $n$ गुना हो जाती है जब इसे पृथ्वी से जुड़े $R_{2}$ त्रिज्या वाले एक संकेंद्रित चालक गोले द्वारा घेर लिया जाता है। उनकी त्रिज्याओं का अनुपात $\left(\frac{R_{2}}{R_{1}}\right)$ क्या है?
A
$\frac{n}{n-1}$
B
$\frac{2n}{2n+1}$
C
$\frac{n+1}{n}$
D
$\frac{2n+1}{n}$

Solution

(A) $R_{1}$ त्रिज्या वाले एक पृथक चालक गोले की धारिता $C_{1} = 4 \pi \varepsilon_{0} R_{1}$ द्वारा दी जाती है।
जब इस गोले को पृथ्वी से जुड़े $R_{2}$ त्रिज्या वाले एक संकेंद्रित चालक गोले द्वारा घेर लिया जाता है,तो यह निकाय एक गोलीय संधारित्र बनाता है। नई धारिता $C_{2} = \frac{4 \pi \varepsilon_{0} R_{1} R_{2}}{R_{2} - R_{1}}$ है।
प्रश्न के अनुसार,नई धारिता मूल धारिता की $n$ गुना है: $C_{2} = n C_{1}$।
व्यंजकों को प्रतिस्थापित करने पर: $\frac{4 \pi \varepsilon_{0} R_{1} R_{2}}{R_{2} - R_{1}} = n (4 \pi \varepsilon_{0} R_{1})$।
समीकरण को सरल करने पर: $\frac{R_{2}}{R_{2} - R_{1}} = n$।
बाईं ओर के अंश और हर को $R_{1}$ से विभाजित करने पर: $\frac{R_{2}/R_{1}}{(R_{2}/R_{1}) - 1} = n$।
मान लीजिए $x = \frac{R_{2}}{R_{1}}$। तब $\frac{x}{x - 1} = n$।
$x = n(x - 1) \Rightarrow x = nx - n \Rightarrow n = nx - x \Rightarrow n = x(n - 1)$।
अतः,$x = \frac{R_{2}}{R_{1}} = \frac{n}{n - 1}$।
253
PhysicsMediumMCQJEE Main · 2022
$V_{p}$ और $V_{d}$ विभव द्वारा त्वरित प्रोटॉन और ड्यूटेरॉन की तरंगदैर्ध्य का अनुपात $1 : \sqrt{2}$ है। तो $V_{p}$ और $V_{d}$ का अनुपात क्या होगा?
A
$1 : 1$
B
$\sqrt{2} : 1$
C
$2 : 1$
D
$4 : 1$

Solution

(D) $V$ विभव द्वारा त्वरित आवेशित कण की डी-ब्रोग्ली तरंगदैर्ध्य $\lambda = \frac{h}{\sqrt{2mqV}}$ द्वारा दी जाती है।
तरंगदैर्ध्य का अनुपात $\frac{\lambda_{p}}{\lambda_{d}} = \frac{1}{\sqrt{2}}$ दिया गया है।
सूत्र का उपयोग करने पर,$\frac{\lambda_{p}}{\lambda_{d}} = \sqrt{\frac{m_{d} q_{d} V_{d}}{m_{p} q_{p} V_{p}}}$ प्राप्त होता है।
प्रोटॉन के लिए,$m_{p} = m$ और $q_{p} = e$ है। ड्यूटेरॉन के लिए,$m_{d} = 2m$ और $q_{d} = e$ है।
इन मानों को रखने पर: $\frac{1}{\sqrt{2}} = \sqrt{\frac{(2m)(e)V_{d}}{(m)(e)V_{p}}} = \sqrt{\frac{2V_{d}}{V_{p}}}$।
दोनों पक्षों का वर्ग करने पर: $\frac{1}{2} = \frac{2V_{d}}{V_{p}}$।
अतः,$\frac{V_{p}}{V_{d}} = 4$,यानी $4 : 1$।
254
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एक लेंस से $2.4\,m$ की दूरी पर रखी वस्तु के लिए,लेंस से $12\,cm$ की दूरी पर रखे पर्दे पर एक स्पष्ट प्रतिबिंब दिखाई देता है। $1.5$ अपवर्तनांक और $1\,cm$ मोटाई वाली एक कांच की प्लेट को लेंस और पर्दे के बीच इस प्रकार रखा जाता है कि कांच की प्लेट की सतह पर्दे के समानांतर हो। वस्तु को कितनी दूरी से स्थानांतरित किया जाना चाहिए ताकि पर्दे पर फिर से एक स्पष्ट प्रतिबिंब दिखाई दे ($,m$ में)?
A
$0.8$
B
$3.2$
C
$1.2$
D
$5.6$

Solution

(B) $1$. प्रारंभिक स्थिति के लिए लेंस सूत्र लागू करने पर:
$\frac{1}{v} - \frac{1}{u} = \frac{1}{f}$
यहाँ $v = 12\,cm = 0.12\,m$ और $u = -2.4\,m$ है:
$\frac{1}{0.12} - \frac{1}{-2.4} = \frac{1}{f} \Rightarrow \frac{100}{12} + \frac{1}{2.4} = \frac{1}{f} \Rightarrow \frac{25}{3} + \frac{1}{2.4} = \frac{20+1}{2.4} = \frac{21}{2.4} = \frac{1}{f} \Rightarrow f = \frac{2.4}{21} = \frac{0.8}{7}\,m$.
$2$. जब $t$ मोटाई और $\mu$ अपवर्तनांक वाली कांच की स्लैब रखी जाती है,तो प्रतिबिंब $\Delta x = t(1 - \frac{1}{\mu})$ से विस्थापित हो जाता है।
$\Delta x = 1\,cm \times (1 - \frac{1}{1.5}) = 1\,cm \times (1 - \frac{2}{3}) = \frac{1}{3}\,cm$.
$3$. पर्दे पर प्रतिबिंब प्राप्त करने के लिए नई प्रतिबिंब दूरी $v' = 12\,cm - \frac{1}{3}\,cm = \frac{35}{3}\,cm = \frac{35}{300}\,m = \frac{7}{60}\,m$ होगी।
$4$. नई वस्तु दूरी $u'$ के लिए फिर से लेंस सूत्र लागू करने पर:
$\frac{1}{v'} - \frac{1}{u'} = \frac{1}{f}$
$\frac{60}{7} - \frac{1}{u'} = \frac{210}{24} = \frac{35}{4}$
$\frac{1}{u'} = \frac{60}{7} - \frac{35}{4} = \frac{240 - 245}{28} = -\frac{5}{28}$
$u' = -\frac{28}{5} = -5.6\,m$.
$5$. वस्तु की स्थिति में विस्थापन $|u' - u| = |-5.6 - (-2.4)| = |-3.2| = 3.2\,m$ है।
Solution diagram
255
PhysicsEasyMCQJEE Main · 2022
हवा में $x$-दिशा में यात्रा कर रही एक प्रकाश तरंग का समीकरण $E_{y} = 540 \sin \pi \times 10^{4}(x - ct) \text{ Vm}^{-1}$ है। तो,तरंग के चुंबकीय क्षेत्र का शिखर मान $\dots \times 10^{-7} \text{ T}$ होगा (दिया गया है $c = 3 \times 10^{8} \text{ ms}^{-1}$)
A
$18$
B
$54$
C
$5.4$
D
$1.8$

Solution

(A) विद्युत क्षेत्र का दिया गया समीकरण $E_{y} = 540 \sin \pi \times 10^{4}(x - ct) \text{ Vm}^{-1}$ है।
इसे मानक तरंग समीकरण $E = E_{0} \sin(kx - \omega t)$ के साथ तुलना करने पर,विद्युत क्षेत्र का शिखर मान $E_{0} = 540 \text{ Vm}^{-1}$ प्राप्त होता है।
विद्युत क्षेत्र के शिखर मान $E_{0}$ और चुंबकीय क्षेत्र के शिखर मान $B_{0}$ के बीच का संबंध $B_{0} = \frac{E_{0}}{c}$ है।
दिए गए मानों को प्रतिस्थापित करने पर,$B_{0} = \frac{540}{3 \times 10^{8}} \text{ T}$.
$B_{0} = 180 \times 10^{-8} \text{ T} = 18 \times 10^{-7} \text{ T}$.
अतः,चुंबकीय क्षेत्र का शिखर मान $18 \times 10^{-7} \text{ T}$ है।
256
PhysicsMediumMCQJEE Main · 2022
जब आप अपनी जेब में धातु की वस्तु लेकर मेटल डिटेक्टर से गुजरते हैं,तो यह अलार्म बजाता है। यह घटना किस सिद्धांत पर कार्य करती है?
A
विद्युत चुंबकीय प्रेरण
B
$AC$ सर्किट में अनुनाद (Resonance)
C
$AC$ सर्किट में अन्योन्य प्रेरण (Mutual induction)
D
विद्युत चुंबकीय तरंगों का व्यतिकरण

Solution

(B) मेटल डिटेक्टर में एक $LC$ सर्किट होता है जिसे एक विशिष्ट अनुनाद आवृत्ति (resonant frequency) पर ट्यून किया जाता है। जब कोई धातु की वस्तु कॉइल द्वारा उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र में प्रवेश करती है,तो यह सर्किट के प्रेरकत्व (inductance) को बदल देती है,जिससे अनुनाद आवृत्ति बदल जाती है। इस परिवर्तन का पता सर्किट द्वारा लगाया जाता है,जो अलार्म बजाता है। इस प्रकार,यह उपकरण $AC$ सर्किट में अनुनाद के सिद्धांत पर कार्य करता है।
257
PhysicsEasyMCQJEE Main · 2022
$0.1 \, keV$ ऊर्जा वाला एक इलेक्ट्रॉन पृथ्वी के $1 \times 10^{-4} \, Wb/m^2$ के चुंबकीय क्षेत्र के लंबवत गति करता है। इलेक्ट्रॉन की परिक्रमण आवृत्ति क्या होगी? (इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान $= 9.0 \times 10^{-31} \, kg$ लें)
A
$1.6 \times 10^5 \, Hz$
B
$5.6 \times 10^5 \, Hz$
C
$2.8 \times 10^6 \, Hz$
D
$1.8 \times 10^6 \, Hz$

Solution

(C) चुंबकीय क्षेत्र में गति करने वाले आवेशित कण की परिक्रमण आवृत्ति $f$ का सूत्र इस प्रकार है:
$f = \frac{eB}{2 \pi m}$
दी गई मान:
इलेक्ट्रॉन का आवेश $e = 1.6 \times 10^{-19} \, C$
चुंबकीय क्षेत्र $B = 1 \times 10^{-4} \, Wb/m^2$
इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान $m = 9.0 \times 10^{-31} \, kg$
इन मानों को सूत्र में रखने पर:
$f = \frac{1.6 \times 10^{-19} \times 10^{-4}}{2 \times 3.14159 \times 9.0 \times 10^{-31}}$
$f = \frac{1.6 \times 10^{-23}}{56.548 \times 10^{-31}}$
$f \approx 0.2829 \times 10^8 \, Hz = 2.8 \times 10^6 \, Hz$
अतः,परिक्रमण आवृत्ति $2.8 \times 10^6 \, Hz$ है।
258
PhysicsMediumMCQJEE Main · 2022
चित्र में दिखाए गए परिपथ में $15\,mA$ की धारा प्रवाहित हो रही है। बिंदुओं $A$ और $B$ के बीच विभवांतर का मान $...\,V$ होगा।
Question diagram
A
$50$
B
$75$
C
$150$
D
$275$

Solution

(D) परिपथ में एक $5\,k\Omega$ का प्रतिरोध,$10\,k\Omega$ और $5\,k\Omega$ के समानांतर संयोजन के साथ श्रेणीक्रम में है,और उसके बाद एक और $10\,k\Omega$ का प्रतिरोध श्रेणीक्रम में है।
सबसे पहले,समानांतर भाग का तुल्य प्रतिरोध $(R_p)$ ज्ञात करें:
$R_p = \frac{10\,k\Omega \times 5\,k\Omega}{10\,k\Omega + 5\,k\Omega} = \frac{50}{15}\,k\Omega = \frac{10}{3}\,k\Omega$.
कुल धारा $I = 15\,mA$,$5\,k\Omega$ के प्रतिरोध से होकर बहती है,फिर समानांतर शाखाओं में विभाजित होती है,और अंत में $10\,k\Omega$ के प्रतिरोध से होकर बहती है।
बिंदु $A$ से $B$ तक के पथ में प्रत्येक घटक पर विभवांतर का योग $V_{AB}$ है:
$V_{AB} = I \times R_{5k} + I \times R_p + I \times R_{10k}$
$V_{AB} = (15\,mA \times 5\,k\Omega) + (15\,mA \times \frac{10}{3}\,k\Omega) + (15\,mA \times 10\,k\Omega)$
$V_{AB} = 75\,V + 50\,V + 150\,V = 275\,V$.
Solution diagram
259
PhysicsDifficultMCQJEE Main · 2022
एक हाइड्रोजन परमाणु उत्तेजित अवस्था से मूल अवस्था (ground state) में आता है और $\lambda$ तरंगदैर्ध्य का एक फोटॉन उत्सर्जित करता है। उत्तेजित अवस्था की मुख्य क्वांटम संख्या $n$ का मान होगा:
($R$: रिडबर्ग नियतांक)
A
$\sqrt{\frac{\lambda R}{\lambda-1}}$
B
$\sqrt{\frac{\lambda R}{\lambda R-1}}$
C
$\sqrt{\frac{\lambda}{\lambda R-1}}$
D
$\sqrt{\frac{\lambda R^{2}}{\lambda R-1}}$

Solution

(B) हाइड्रोजन परमाणु की $n$-वीं कक्षा में इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा $E_n = -\frac{Rch}{n^2}$ द्वारा दी जाती है।
उत्सर्जित फोटॉन की ऊर्जा उत्तेजित अवस्था $(E_n)$ और मूल अवस्था $(E_1)$ की ऊर्जा के बीच का अंतर है:
$E_{\text{photon}} = E_n - E_1 = \frac{hc}{\lambda}$
ऊर्जा के मान रखने पर:
$-\frac{Rch}{n^2} - (-\frac{Rch}{1^2}) = \frac{hc}{\lambda}$
दोनों पक्षों को $hc$ से विभाजित करने पर:
$-\frac{R}{n^2} + R = \frac{1}{\lambda}$
पदों को व्यवस्थित करने पर:
$R - \frac{1}{\lambda} = \frac{R}{n^2}$
$\frac{\lambda R - 1}{\lambda} = \frac{R}{n^2}$
$n^2 = \frac{\lambda R}{\lambda R - 1}$
अतः,$n = \sqrt{\frac{\lambda R}{\lambda R - 1}}$।
Solution diagram
260
PhysicsMediumMCQJEE Main · 2022
$\frac{x}{x+4}$ हाइड्रोजन परमाणु के इलेक्ट्रॉन के $(i)$ तीसरे अनुमत ऊर्जा स्तर से दूसरे स्तर और $(ii)$ उच्चतम अनुमत ऊर्जा स्तर से दूसरे अनुमत स्तर पर संक्रमण के कारण उत्पन्न फोटॉनों की ऊर्जा का अनुपात है। $x$ का मान क्या होगा?
A
$6$
B
$5$
C
$4$
D
$3$

Solution

(B) $n_2$ से $n_1$ स्तर पर संक्रमण के दौरान उत्सर्जित फोटॉन की ऊर्जा $E = 13.6 \left( \frac{1}{n_1^2} - \frac{1}{n_2^2} \right) \text{ eV}$ द्वारा दी जाती है।
संक्रमण $(i)$ के लिए $n=3$ से $n=2$: $E_1 = 13.6 \left( \frac{1}{2^2} - \frac{1}{3^2} \right) = 13.6 \left( \frac{1}{4} - \frac{1}{9} \right) = 13.6 \left( \frac{5}{36} \right)$.
संक्रमण $(ii)$ के लिए $n=\infty$ से $n=2$: $E_2 = 13.6 \left( \frac{1}{2^2} - \frac{1}{\infty^2} \right) = 13.6 \left( \frac{1}{4} - 0 \right) = 13.6 \left( \frac{1}{4} \right)$.
अनुपात $\frac{E_1}{E_2} = \frac{13.6(5/36)}{13.6(1/4)} = \frac{5/36}{1/4} = \frac{5}{9}$ है।
चूंकि अनुपात $\frac{x}{x+4}$ दिया गया है,इसलिए $\frac{x}{x+4} = \frac{5}{9}$ है।
तिर्यक गुणा करने पर $9x = 5x + 20$ प्राप्त होता है,जिसे सरल करने पर $4x = 20$ मिलता है,अतः $x = 5$।
261
PhysicsDifficultMCQJEE Main · 2022
एक विभवमापी (potentiometer) व्यवस्था में,$1.20\, V$ विद्युत वाहक बल (emf) का एक सेल तार की $36\, cm$ लंबाई पर संतुलन बिंदु देता है। इस सेल को अब $1.80\, V$ emf वाले दूसरे सेल से बदल दिया जाता है। उपरोक्त स्थितियों में विभवमापी तार की संतुलन लंबाई में अंतर $....cm$ होगा।
A
$17$
B
$18$
C
$16$
D
$12$

Solution

(B) माना विभवमापी तार का विभव प्रवणता (potential gradient) $k$ है।
पहले सेल के लिए,$E_1 = 1.20\, V$ emf पर संतुलन बिंदु $l_1 = 36\, cm$ है।
$E_1 = k \cdot l_1 \implies 1.20 = k \times 36 \implies k = \frac{1.20}{36} = \frac{1}{30}\, V/cm$.
दूसरे सेल के लिए,$E_2 = 1.80\, V$ emf पर संतुलन बिंदु $l_2$ है।
$E_2 = k \cdot l_2 \implies 1.80 = \frac{1}{30} \times l_2$.
$l_2 = 1.80 \times 30 = 54\, cm$.
संतुलन लंबाई में अंतर $\Delta l = l_2 - l_1 = 54 - 36 = 18\, cm$ है।
262
PhysicsMediumMCQJEE Main · 2022
चित्र में दिखाए गए नेटवर्क में दो आदर्श डायोड जुड़े हुए हैं। $A$ और $B$ के बीच तुल्य प्रतिरोध $.......\Omega$ है।
Question diagram
A
$24$
B
$25$
C
$23$
D
$35$

Solution

(D) जब $A$ और $B$ के बीच विभवांतर इस प्रकार लगाया जाता है कि $A$ उच्च विभव $(+)$ पर हो और $B$ निम्न विभव $(-)$ पर हो,तो ऊपरी डायोड फॉरवर्ड बायस हो जाता है और शॉर्ट सर्किट (शून्य प्रतिरोध) की तरह कार्य करता है।
निचला डायोड रिवर्स बायस हो जाता है और ओपन सर्किट (अनंत प्रतिरोध) की तरह कार्य करता है।
इस स्थिति में,परिपथ $20\,\Omega$ के प्रतिरोध और $15\,\Omega$ के प्रतिरोध के श्रेणी संयोजन में सरल हो जाता है।
अतः,तुल्य प्रतिरोध $R_{eq} = 20\,\Omega + 15\,\Omega = 35\,\Omega$ है।
Solution diagram
263
PhysicsDifficultMCQJEE Main · 2022
$C$ और $3C$ धारिता वाले दो समानांतर प्लेट संधारित्रों को समानांतर क्रम में जोड़ा जाता है और $18V$ के विभवांतर तक आवेशित किया जाता है। इसके बाद बैटरी को हटा दिया जाता है और $C$ धारिता वाले संधारित्र की प्लेटों के बीच की जगह को $K=9$ परावैद्युतांक वाले पदार्थ से पूरी तरह भर दिया जाता है। संधारित्रों के इस संयोजन पर अंतिम विभवांतर $V^{\prime}$ होगा। $V^{\prime}$ ज्ञात कीजिए। ($V$ में)
A
$5$
B
$4$
C
$6$
D
$1$

Solution

(C) $1$. प्रारंभिक स्थिति: संधारित्र $C$ और $3C$ समानांतर में हैं और $18V$ की बैटरी से जुड़े हैं। सिस्टम में संचित कुल आवेश $Q_{total}$ है:
$Q_{total} = (C + 3C) \times 18V = 4C \times 18V = 72CV$.
$2$. बैटरी हटाने के बाद: कुल आवेश $Q_{total} = 72CV$ स्थिर रहता है क्योंकि सिस्टम पृथक है।
$3$. परावैद्युत डालना: $K=9$ स्थिरांक वाला एक परावैद्युत $C$ धारिता वाले संधारित्र में डाला जाता है। इसकी नई धारिता $C^{\prime} = K \times C = 9C$ हो जाती है। दूसरा संधारित्र $3C$ ही रहता है।
$4$. अंतिम स्थिति: संधारित्र अभी भी समानांतर में हैं। मान लीजिए कि नया सामान्य विभवांतर $V^{\prime}$ है। संयोजन की कुल धारिता $C_{eq} = C^{\prime} + 3C = 9C + 3C = 12C$ है।
$5$. आवेश का संरक्षण: $Q_{total} = C_{eq} \times V^{\prime}$
$72CV = 12C \times V^{\prime}$
$V^{\prime} = \frac{72CV}{12C} = 6V$.
Solution diagram
264
PhysicsMediumMCQJEE Main · 2022
$20\,cm$ फोकस दूरी वाला एक उत्तल लेंस एक उत्तल दर्पण के सामने इस प्रकार रखा गया है कि उनकी मुख्य अक्ष एक-दूसरे के संपाती हैं। लेंस और दर्पण के बीच की दूरी $10\,cm$ है। एक बिंदु वस्तु को मुख्य अक्ष पर उत्तल लेंस से $60\,cm$ की दूरी पर रखा गया है। संयोजन द्वारा निर्मित प्रतिबिंब वस्तु पर ही संपाती होता है। उत्तल दर्पण की फोकस दूरी $...\,cm$ है।
A
$11$
B
$9$
C
$8$
D
$10$

Solution

(D) लेंस के लिए,लेंस सूत्र का उपयोग करते हुए: $\frac{1}{v} - \frac{1}{u} = \frac{1}{f}$.
यहाँ $u = -60\,cm$ और $f = +20\,cm$ दिया गया है,इसलिए $\frac{1}{v} - \frac{1}{-60} = \frac{1}{20}$.
$\frac{1}{v} + \frac{1}{60} = \frac{1}{20} \Rightarrow \frac{1}{v} = \frac{1}{20} - \frac{1}{60} = \frac{3-1}{60} = \frac{2}{60} = \frac{1}{30}$.
अतः,$v = 30\,cm$. यह प्रतिबिंब लेंस के पीछे $30\,cm$ की दूरी पर बनता है।
अंतिम प्रतिबिंब के वस्तु पर ही संपाती होने के लिए,किरणों को दर्पण पर लंबवत आपतित होना चाहिए। यह तभी संभव है जब किरणें दर्पण के वक्रता केंद्र $(C)$ की ओर निर्देशित हों।
दर्पण से प्रतिबिंब की दूरी $30\,cm - 10\,cm = 20\,cm$ है। इस प्रकार,वक्रता त्रिज्या $R = 20\,cm$.
दर्पण की फोकस दूरी $f_m = \frac{R}{2} = \frac{20}{2} = 10\,cm$ है।
Solution diagram
265
PhysicsMediumMCQJEE Main · 2022
$20\,\Omega$ प्रतिरोध वाले एक बंद परिपथ में चुंबकीय फ्लक्स (वेबर में) समय $t(s)$ के साथ $\phi = 8t^2 - 9t + 5$ के रूप में बदलता है। $t = 0.25\,s$ पर प्रेरित धारा का परिमाण $...mA$ होगा।
A
$249$
B
$248$
C
$247$
D
$250$

Solution

(D) दिया गया चुंबकीय फ्लक्स $\phi = 8t^2 - 9t + 5$ है।
फैराडे के प्रेरण के नियम के अनुसार,प्रेरित $emf$ $\varepsilon = -\frac{d\phi}{dt}$ द्वारा दिया जाता है।
$\varepsilon = -\frac{d}{dt}(8t^2 - 9t + 5) = -(16t - 9) = 9 - 16t$.
$t = 0.25\,s$ पर,प्रेरित $emf$ $\varepsilon = 9 - 16(0.25) = 9 - 4 = 5\,V$ है।
प्रेरित धारा $I$ का परिमाण $I = \frac{|\varepsilon|}{R}$ द्वारा दिया जाता है।
दिया गया प्रतिरोध $R = 20\,\Omega$ है,इसलिए $I = \frac{5\,V}{20\,\Omega} = 0.25\,A$.
मिलीएम्पियर $(mA)$ में बदलने पर,$I = 0.25 \times 1000\,mA = 250\,mA$।
266
PhysicsDifficultMCQJEE Main · 2022
निम्नलिखित में से किन भौतिक राशियों के आयाम समान हैं?
A
विद्युत विस्थापन $(\overrightarrow{D})$ और पृष्ठीय आवेश घनत्व
B
विस्थापन धारा और विद्युत क्षेत्र
C
धारा घनत्व और पृष्ठीय आवेश घनत्व
D
विद्युत विभव और ऊर्जा

Solution

(A) विद्युत विस्थापन सदिश को $\overrightarrow{D} = \epsilon_{0} \overrightarrow{E}$ के रूप में परिभाषित किया गया है।
विद्युत विस्थापन का आयामी विश्लेषण: $[D] = [\epsilon_{0}][E]$।
चूंकि विद्युत क्षेत्र $E$,पृष्ठीय आवेश घनत्व $\sigma$ से $E = \frac{\sigma}{\epsilon_{0}}$ द्वारा संबंधित है,इसलिए हमें $\epsilon_{0} E = \sigma$ प्राप्त होता है।
अतः,विद्युत विस्थापन $[D]$ के आयाम पृष्ठीय आवेश घनत्व $[\sigma]$ के आयामों के बराबर हैं।
दोनों के आयाम $[Q L^{-2}]$ हैं,जहाँ $Q$ आवेश है और $L$ लंबाई है।
267
PhysicsMediumMCQJEE Main · 2022
$2\,\mu F$ धारिता वाले एक संधारित्र को $0$ से $5\,C$ तक स्थिर रूप से आवेशित किया जाता है। निम्नलिखित में से कौन सा ग्राफ संधारित्र पर आवेश $(Q)$ के सापेक्ष इसकी प्लेटों के बीच विभवांतर $(V)$ के परिवर्तन को सही ढंग से दर्शाता है?
A
Option A
B
Option B
C
Option C
D
Option D

Solution

(A) एक संधारित्र के लिए आवेश $(Q)$,धारिता $(C)$ और विभवांतर $(V)$ के बीच का संबंध इस सूत्र द्वारा दिया जाता है: $Q = CV$.
विभवांतर के लिए इसे पुनर्व्यवस्थित करने पर,हमें प्राप्त होता है: $V = \frac{1}{C} Q$.
यह समीकरण मूल बिंदु से गुजरने वाली एक सीधी रेखा को दर्शाता है,जहाँ रेखा का ढाल $\frac{1}{C}$ है।
यहाँ $C = 2\,\mu F = 2 \times 10^{-6}\,F$ और अधिकतम आवेश $Q = 5\,C$ दिया गया है,इसलिए अधिकतम विभवांतर होगा:
$V = \frac{Q}{C} = \frac{5}{2 \times 10^{-6}} = 2.5 \times 10^{6}\,V$.
अतः,ग्राफ $(0,0)$ से शुरू होकर $(5, 2.5 \times 10^{6})$ पर समाप्त होने वाली एक सीधी रेखा होनी चाहिए।
दिए गए विकल्पों के साथ तुलना करने पर,ग्राफ $A$ इस रैखिक संबंध को सही ढंग से दर्शाता है।
268
PhysicsMediumMCQJEE Main · 2022
दो आवेशित कण,जिनकी गतिज ऊर्जा समान है,को गति की दिशा के लंबवत एक समान चुंबकीय क्षेत्र से गुजारा जाता है। यदि उनके वृत्ताकार पथों की त्रिज्याओं का अनुपात $6:5$ है और उनके द्रव्यमानों का अनुपात $9:4$ है,तो उनके आवेशों का अनुपात क्या होगा?
A
$8:5$
B
$5:4$
C
$5:3$
D
$8:7$

Solution

(B) चुंबकीय क्षेत्र $B$ में गति करने वाले आवेशित कण के वृत्ताकार पथ की त्रिज्या $R = \frac{mv}{qB}$ होती है।
चूँकि गतिज ऊर्जा $K = \frac{1}{2}mv^2$ है,इसलिए $mv = \sqrt{2mK}$ होता है।
इस मान को त्रिज्या के सूत्र में रखने पर,$R = \frac{\sqrt{2mK}}{qB}$ प्राप्त होता है।
आवेश $q$ के लिए सूत्र को पुनर्व्यवस्थित करने पर,$q = \frac{\sqrt{2mK}}{RB}$ प्राप्त होता है।
चूँकि $K$ और $B$ दोनों कणों के लिए समान हैं,इसलिए आवेशों का अनुपात $\frac{q_1}{q_2} = \sqrt{\frac{m_1}{m_2}} \times \frac{R_2}{R_1}$ होगा।
दिया गया है कि $\frac{R_1}{R_2} = \frac{6}{5}$ और $\frac{m_1}{m_2} = \frac{9}{4}$,अतः $\frac{q_1}{q_2} = \sqrt{\frac{9}{4}} \times \frac{5}{6} = \frac{3}{2} \times \frac{5}{6} = \frac{15}{12} = \frac{5}{4}$।
269
PhysicsMediumMCQJEE Main · 2022
श्रेणी $LCR$ परिपथ में अनुनादी आवृत्ति को बढ़ाने के लिए,
A
स्रोत आवृत्ति बढ़ाई जानी चाहिए
B
पहले प्रतिरोध के साथ श्रेणी में एक और प्रतिरोध जोड़ा जाना चाहिए
C
पहले संधारित्र के साथ श्रेणी में एक और संधारित्र जोड़ा जाना चाहिए
D
पहले प्रेरक के साथ श्रेणी में एक और प्रेरक जोड़ा जाना चाहिए

Solution

(C) श्रेणी $LCR$ परिपथ की अनुनादी आवृत्ति $f_r$ का सूत्र है:
$f_r = \frac{1}{2 \pi \sqrt{LC}}$
अनुनादी आवृत्ति $f_r$ को बढ़ाने के लिए,$LC$ का गुणनफल कम होना चाहिए।
जब एक संधारित्र को मौजूदा संधारित्र के साथ श्रेणी में जोड़ा जाता है,तो तुल्य धारिता $C_{eq}$ का मान $\frac{1}{C_{eq}} = \frac{1}{C_1} + \frac{1}{C_2}$ के अनुसार होता है। इसके परिणामस्वरूप कुल धारिता में कमी आती है $(C_{eq} < C_1)$।
चूंकि $f_r \propto \frac{1}{\sqrt{C}}$,इसलिए कुल धारिता में कमी आने से अनुनादी आवृत्ति बढ़ जाती है।
270
PhysicsDifficultMCQJEE Main · 2022
$l$ भुजा वाले तार के एक छोटे वर्गाकार लूप को $L$ भुजा वाले तार के एक बड़े वर्गाकार लूप के अंदर रखा गया है $(L \gg l)$। दोनों लूप एक ही तल में हैं और उनके केंद्र चित्र में दिखाए अनुसार बिंदु $O$ पर संपाती हैं। निकाय का अन्योन्य प्रेरकत्व (mutual inductance) है:
Question diagram
A
$\frac{2 \sqrt{2} \mu_{0} L ^{2}}{\pi \ell}$
B
$\frac{\mu_{0} \ell^{2}}{2 \sqrt{2 \pi L}}$
C
$\frac{2 \sqrt{2} \mu_{0} \ell^{2}}{\pi L}$
D
$\frac{\mu_{0} L ^{2}}{2 \sqrt{2} \pi \ell}$

Solution

(C) मान लीजिए कि $L$ भुजा वाले बाहरी वर्गाकार लूप में $I$ धारा प्रवाहित हो रही है। इसके केंद्र $O$ पर इस लूप द्वारा उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र $B$ इसकी चार भुजाओं के कारण उत्पन्न क्षेत्रों के योग द्वारा दिया जाता है:
$B = 4 \times \left( \frac{\mu_{0} I}{4 \pi (L/2)} \times (\sin 45^{\circ} + \sin 45^{\circ}) \right) = 4 \times \left( \frac{\mu_{0} I}{2 \pi L} \times 2 \times \frac{1}{\sqrt{2}} \right) = \frac{2 \sqrt{2} \mu_{0} I}{\pi L}$.
चूंकि $L \gg l$,हम मान सकते हैं कि यह चुंबकीय क्षेत्र छोटे आंतरिक लूप के क्षेत्रफल पर एकसमान है।
$l$ भुजा वाले आंतरिक लूप से संबद्ध चुंबकीय फ्लक्स $\phi$ है:
$\phi = B \times \text{Area} = \left( \frac{2 \sqrt{2} \mu_{0} I}{\pi L} \right) \times l^{2}$.
अन्योन्य प्रेरकत्व $M$ को $M = \frac{\phi}{I}$ के रूप में परिभाषित किया गया है।
अतः,$M = \frac{2 \sqrt{2} \mu_{0} l^{2}}{\pi L}$.
Solution diagram
271
PhysicsMediumMCQJEE Main · 2022
एक समांतर प्लेट संधारित्र में चालन धारा का $rms$ मान $6.9\,\mu A$ है। यदि इसे $600\,rad/s$ की कोणीय आवृत्ति वाले $230\,V$ के $AC$ स्रोत से जोड़ा जाता है,तो इस संधारित्र की धारिता $....\,pF$ होगी।
A
$5$
B
$50$
C
$100$
D
$200$

Solution

(B) संधारित्र में धारा का सूत्र $I = \frac{V}{X_C}$ है,जहाँ $X_C = \frac{1}{\omega C}$ धारितीय प्रतिघात है।
$X_C$ का मान रखने पर,हमें $I = V \omega C$ प्राप्त होता है।
धारिता $C$ के लिए सूत्र को व्यवस्थित करने पर,$C = \frac{I}{V \omega}$ प्राप्त होता है।
दिए गए मान $I = 6.9 \times 10^{-6}\,A$,$V = 230\,V$ और $\omega = 600\,rad/s$ हैं।
इन मानों को रखने पर: $C = \frac{6.9 \times 10^{-6}}{230 \times 600}$.
$C = \frac{6.9 \times 10^{-6}}{138000} = 0.05 \times 10^{-9}\,F$.
$C = 50 \times 10^{-12}\,F = 50\,pF$.
272
PhysicsMediumMCQJEE Main · 2022
निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?
A
प्राथमिक इंद्रधनुष में,प्रेक्षक ऊपर की ओर लाल रंग और नीचे की ओर बैंगनी रंग देखता है।
B
प्राथमिक इंद्रधनुष में,प्रेक्षक ऊपर की ओर बैंगनी रंग और नीचे की ओर लाल रंग देखता है।
C
प्राथमिक इंद्रधनुष में,प्रकाश तरंग पानी की बूंदों से बाहर आने से पहले दो बार पूर्ण आंतरिक परावर्तन से गुजरती है।
D
प्राथमिक इंद्रधनुष,द्वितीयक इंद्रधनुष की तुलना में कम चमकीला होता है।

Solution

(A) प्राथमिक इंद्रधनुष में,लाल रंग ऊपर की ओर और बैंगनी रंग नीचे की ओर होता है क्योंकि लाल रंग के लिए विचलन न्यूनतम और बैंगनी के लिए अधिकतम होता है।
प्राथमिक इंद्रधनुष में प्रकाश एक बार पूर्ण आंतरिक परावर्तन से गुजरता है,जबकि द्वितीयक इंद्रधनुष में यह दो बार पूर्ण आंतरिक परावर्तन से गुजरता है।
द्वितीयक इंद्रधनुष में दो आंतरिक परावर्तनों के कारण अधिक प्रकाश का ह्रास होता है,जिससे द्वितीयक इंद्रधनुष प्राथमिक इंद्रधनुष की तुलना में कम चमकीला हो जाता है। इसलिए,प्राथमिक इंद्रधनुष द्वितीयक इंद्रधनुष से अधिक चमकीला होता है।
273
PhysicsDifficultMCQJEE Main · 2022
समान मोटाई के दो अलग-अलग पदार्थों $A$ और $B$ (जिनके अपवर्तनांक $\mu_{A}$ और $\mu_{B}$ हैं) में प्रकाश द्वारा यात्रा करने में लिया गया समय क्रमशः $t_{1}$ और $t_{2}$ है। यदि $t_{2}-t_{1}=5 \times 10^{-10} \text{ s}$ है और $\mu_{A}$ से $\mu_{B}$ का अनुपात $1:2$ है,तो पदार्थ की मोटाई मीटर में क्या होगी? (दिया गया है कि $v_{A}$ और $v_{B}$ क्रमशः $A$ और $B$ पदार्थों में प्रकाश के वेग हैं)।
A
$5 \times 10^{-10} v_{A} \text{ m}$
B
$5 \times 10^{-10} \text{ m}$
C
$1.5 \times 10^{10} \text{ m}$
D
$5 \times 10^{-10} v_{B} \text{ m}$

Solution

(A) अपवर्तनांक $\mu = c/v$ द्वारा दिया जाता है,जहाँ $c$ निर्वात में प्रकाश की गति है और $v$ माध्यम में गति है।
दिया गया है $\mu_{A}/\mu_{B} = 1/2$,इसलिए $(c/v_{A}) / (c/v_{B}) = v_{B}/v_{A} = 1/2$,जिसका अर्थ है $v_{A} = 2v_{B}$।
मान लीजिए कि दोनों पदार्थों की मोटाई $d$ है।
पदार्थ से गुजरने में लगा समय $t = d/v$ है।
दिया गया है $t_{2} - t_{1} = 5 \times 10^{-10} \text{ s}$,जहाँ $t_{1} = d/v_{A}$ और $t_{2} = d/v_{B}$ है।
मान रखने पर: $d/v_{B} - d/v_{A} = 5 \times 10^{-10}$।
$d(1/v_{B} - 1/v_{A}) = 5 \times 10^{-10}$।
$d((v_{A} - v_{B}) / (v_{A}v_{B})) = 5 \times 10^{-10}$।
चूंकि $v_{A} = 2v_{B}$,हमारे पास है $d((2v_{B} - v_{B}) / (2v_{B} \cdot v_{B})) = 5 \times 10^{-10}$।
$d(v_{B} / 2v_{B}^{2}) = 5 \times 10^{-10}$।
$d / (2v_{B}) = 5 \times 10^{-10}$।
$d = 10 \times 10^{-10} v_{B} = 10^{-9} v_{B} \text{ m}$।
वैकल्पिक रूप से,$v_{B} = v_{A}/2$ का उपयोग करने पर,हमें प्राप्त होता है $d / (2(v_{A}/2)) = 5 \times 10^{-10} \Rightarrow d/v_{A} = 5 \times 10^{-10} \Rightarrow d = 5 \times 10^{-10} v_{A} \text{ m}$।
274
PhysicsMediumMCQJEE Main · 2022
एक धातु को $800 \, nm$ तरंगदैर्ध्य के प्रकाश में रखने पर वह कुछ गतिज ऊर्जा के साथ फोटोइलेक्ट्रॉन उत्सर्जित करती है। जब $500 \, nm$ तरंगदैर्ध्य के प्रकाश का उपयोग किया जाता है,तो फोटोइलेक्ट्रॉन की अधिकतम गतिज ऊर्जा दोगुनी हो जाती है। धातु का कार्य फलन (work function) $... \, eV$ है ($hc = 1230 \, eV \cdot nm$ लें)।
A
$1.537$
B
$2.46$
C
$0.615$
D
$1.23$

Solution

(C) आइंस्टीन के प्रकाश-विद्युत समीकरण के अनुसार,अधिकतम गतिज ऊर्जा $K_{max} = \frac{hc}{\lambda} - \phi$ होती है,जहाँ $\phi$ कार्य फलन है।
$\lambda_1 = 800 \, nm$ के लिए,$K_1 = \frac{1230}{800} - \phi = 1.5375 - \phi$ --- $(1)$
$\lambda_2 = 500 \, nm$ के लिए,$K_2 = \frac{1230}{500} - \phi = 2.46 - \phi$ --- $(2)$
दिया गया है कि $K_2 = 2K_1$,मान रखने पर:
$2.46 - \phi = 2(1.5375 - \phi)$
$2.46 - \phi = 3.075 - 2\phi$
$2\phi - \phi = 3.075 - 2.46$
$\phi = 0.615 \, eV$.
275
PhysicsEasyMCQJEE Main · 2022
$n^{\text{th}}$ कक्षा में परिक्रमा कर रहे इलेक्ट्रॉन का संवेग किसके द्वारा दिया जाता है? (प्रतीकों के अपने सामान्य अर्थ हैं)
A
$\frac{nh}{2\pi r}$
B
$\frac{nh}{2r}$
C
$\frac{nh}{2\pi}$
D
$\frac{2\pi r}{nh}$

Solution

(A) बोर के अभिधारणा के अनुसार,$n^{\text{th}}$ कक्षा में एक इलेक्ट्रॉन का कोणीय संवेग $L$ इस प्रकार क्वांटीकृत होता है:
$L = mvr = \frac{nh}{2\pi}$
जहाँ $m$ इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान है,$v$ इसका वेग है,$r$ कक्षा की त्रिज्या है,$h$ प्लांक नियतांक है और $n$ मुख्य क्वांटम संख्या है।
रैखिक संवेग $p = mv$ ज्ञात करने के लिए,हम समीकरण को पुनर्व्यवस्थित करते हैं:
$mv = \frac{nh}{2\pi r}$
अतः,इलेक्ट्रॉन का संवेग $\frac{nh}{2\pi r}$ है।
276
PhysicsMediumMCQJEE Main · 2022
नाभिक के चारों ओर एक कक्षा में परिक्रमा कर रहे इलेक्ट्रॉन $(e)$ का कक्षीय कोणीय संवेग $\vec{L}$ होने पर उसका चुंबकीय आघूर्ण क्या होगा?
A
$\vec{\mu}_{L} = \frac{e \vec{L}}{2m}$
B
$\vec{\mu}_{L} = -\frac{e \vec{L}}{2m}$
C
$\vec{\mu}_{L} = -\frac{e \vec{L}}{m}$
D
$\vec{\mu}_{L} = \frac{2e \vec{L}}{m}$

Solution

(B) धारा लूप का चुंबकीय आघूर्ण $\vec{\mu} = I \vec{A}$ द्वारा दिया जाता है।
$r$ त्रिज्या की कक्षा में $v$ गति से घूम रहे $-e$ आवेश वाले इलेक्ट्रॉन के लिए,समतुल्य धारा $I = \frac{-e}{T} = \frac{-ev}{2\pi r}$ है।
कक्षा का क्षेत्रफल $A = \pi r^2$ है।
अतः,$\vec{\mu} = I \vec{A} = \left( \frac{-ev}{2\pi r} \right) (\pi r^2) = \frac{-evr}{2}$।
कक्षीय कोणीय संवेग $\vec{L} = mvr$ है।
$vr = \frac{L}{m}$ प्रतिस्थापित करने पर,हमें $\vec{\mu} = -\frac{e}{2m} \vec{L}$ प्राप्त होता है।
277
PhysicsDifficultMCQJEE Main · 2022
दिए गए परिपथ में,जब $A$ या $B$ पर विभव $5 \, V$ होता है तो तार्किक मान $A = 1$ या $B = 1$ होता है,और जब $A$ या $B$ पर विभव $0 \, V$ होता है तो तार्किक मान $A = 0$ या $B = 0$ होता है। दिए गए परिपथ की सत्यता सारणी क्या होगी?
Question diagram
A
$A$$B$$Y$
$0$$0$$0$
$1$$0$$0$
$0$$1$$0$
$1$$1$$1$
B
$A$$B$$Y$
$0$$0$$0$
$1$$0$$1$
$0$$1$$1$
$1$$1$$1$
C
$A$$B$$Y$
$0$$0$$0$
$1$$0$$0$
$0$$1$$0$
$1$$1$$0$
D
$A$$B$$Y$
$0$$0$$1$
$1$$0$$1$
$0$$1$$1$
$1$$1$$0$

Solution

(A) दिए गए परिपथ में,यदि इनपुट $A$ या $B$ में से कोई भी $0 \, V$ (तार्किक $0$) पर है,तो संबंधित डायोड ($D_1$ या $D_2$) अग्र-अभिनत (forward-biased) हो जाता है। यह आउटपुट विभव $Y$ को लगभग $0 \, V$ (तार्किक $0$) पर खींच लेता है।
यदि दोनों इनपुट $A$ और $B$ $5 \, V$ (तार्किक $1$) पर हैं,तो दोनों डायोड पश्च-अभिनत (reverse-biased) हो जाते हैं। डायोड से कोई धारा प्रवाहित नहीं होती है,और आउटपुट $Y$ प्रतिरोध $R$ के माध्यम से $5 \, V$ (तार्किक $1$) पर खिंच जाता है।
यह व्यवहार $AND$ गेट के अनुरूप है,जहाँ आउटपुट $1$ तभी होता है जब दोनों इनपुट $1$ हों। सत्यता सारणी इस प्रकार है:
$A$$B$$Y$
$0$$0$$0$
$0$$1$$0$
$1$$0$$0$
$1$$1$$1$
278
PhysicsMediumMCQJEE Main · 2022
$6 \, m$ त्रिज्या वाले एक गोले का आयतन आवेश घनत्व $2 \, \mu C \, m^{-3}$ है। गोले की सतह से बाहर निकलने वाली प्रति इकाई पृष्ठीय क्षेत्रफल बल रेखाओं की संख्या $.... \times 10^{10} \, N C^{-1}$ है। [दिया गया है: निर्वात की विद्युतशीलता $\epsilon_{0} = 8.85 \times 10^{-12} \, C^{2} N^{-1} m^{-2}$]
A
$44$
B
$43$
C
$45$
D
$42$

Solution

(C) प्रति इकाई क्षेत्रफल विद्युत क्षेत्र रेखाओं की संख्या उस सतह पर विद्युत क्षेत्र की तीव्रता $E$ के बराबर होती है।
$R$ त्रिज्या और आयतन आवेश घनत्व $\rho$ वाले एक समान रूप से आवेशित गोले के लिए,सतह पर $(r = R)$ विद्युत क्षेत्र गॉस के नियम के अनुसार $E = \frac{q}{4 \pi \epsilon_{0} R^{2}}$ द्वारा दिया जाता है।
चूंकि $q = \rho \times \text{आयतन} = \rho \times \frac{4}{3} \pi R^{3}$,इस मान को $E$ के व्यंजक में प्रतिस्थापित करने पर:
$E = \frac{\rho \times \frac{4}{3} \pi R^{3}}{4 \pi \epsilon_{0} R^{2}} = \frac{\rho R}{3 \epsilon_{0}}$.
यहाँ $\rho = 2 \, \mu C \, m^{-3} = 2 \times 10^{-6} \, C \, m^{-3}$,$R = 6 \, m$,और $\epsilon_{0} = 8.85 \times 10^{-12} \, C^{2} N^{-1} m^{-2}$ है।
$E = \frac{2 \times 10^{-6} \times 6}{3 \times 8.85 \times 10^{-12}} = \frac{12 \times 10^{-6}}{26.55 \times 10^{-12}} \approx 0.4519 \times 10^{12} \, N C^{-1}$.
विकल्पों के अनुसार निकटतम पूर्णांक में लेने पर,हमें $45 \times 10^{10} \, N C^{-1}$ प्राप्त होता है।
279
PhysicsDifficultMCQJEE Main · 2022
दी गई आकृति में,$V_{0}$ का मान $.....V$ होगा।
Question diagram
A
$3$
B
$4$
C
$40$
D
$8$

Solution

(B) $V_{0}$ का मान ज्ञात करने के लिए,हम उस नोड पर किरचॉफ के धारा नियम $(KCL)$ को लागू करते हैं जहाँ $V_{0}$ परिभाषित है।
माना नोड वोल्टेज $V_{0}$ है। तीन समानांतर शाखाओं से नोड से बाहर जाने वाली धाराओं का योग शून्य होना चाहिए।
नोडल विश्लेषण का उपयोग करते हुए:
$\frac{V_{0}-2}{1 \text{ k}\Omega} + \frac{V_{0}-4}{1 \text{ k}\Omega} + \frac{V_{0}-6}{1 \text{ k}\Omega} = 0$
चूंकि प्रतिरोध समान हैं,हम पूरे समीकरण को $1 \text{ k}\Omega$ से गुणा कर सकते हैं:
$(V_{0}-2) + (V_{0}-4) + (V_{0}-6) = 0$
$3V_{0} - 12 = 0$
$3V_{0} = 12$
$V_{0} = 4 \text{ V}$
280
PhysicsEasyMCQJEE Main · 2022
$l$ लंबाई और $d$ व्यास वाले आठ तांबे के तारों को समानांतर जोड़कर $R$ प्रतिरोध का एक संयुक्त चालक बनाया जाता है। यदि $2\,l$ लंबाई के एक तांबे के तार का प्रतिरोध समान $(R)$ हो,तो उसका व्यास $.....d$ होगा।
A
$3$
B
$4$
C
$2$
D
$1$

Solution

(B) $l$ लंबाई और $d$ व्यास वाले एक तार का प्रतिरोध $r = \rho \frac{l}{A} = \rho \frac{l}{\pi (d/2)^2} = \rho \frac{4l}{\pi d^2}$ होता है।
जब ऐसे $8$ तारों को समानांतर जोड़ा जाता है,तो तुल्य प्रतिरोध $R = \frac{r}{8} = \frac{1}{8} \left( \rho \frac{4l}{\pi d^2} \right) = \frac{\rho l}{2 \pi d^2}$ होता है।
$2l$ लंबाई और $d_1$ व्यास वाले एक तार का प्रतिरोध $R$ होने के लिए,$R = \rho \frac{2l}{\pi (d_1/2)^2} = \rho \frac{8l}{\pi d_1^2}$ होगा।
$R$ के लिए दोनों समीकरणों की तुलना करने पर: $\frac{\rho l}{2 \pi d^2} = \frac{8 \rho l}{\pi d_1^2}$।
सरल करने पर,$\frac{1}{2 d^2} = \frac{8}{d_1^2}$,जिसका अर्थ है $d_1^2 = 16 d^2$।
वर्गमूल लेने पर,हमें $d_1 = 4d$ प्राप्त होता है।
281
PhysicsEasyMCQJEE Main · 2022
बैंगनी (तरंगदैर्ध्य $= 4000 \, \mathring{A}$) $LED$ उत्पन्न करने के लिए आवश्यक अर्धचालक पदार्थ का ऊर्जा बैंड अंतराल $....... \, \text{eV}$ है। (निकटतम पूर्णांक में पूर्णांकित करें)।
A
$3$
B
$2$
C
$4$
D
$5$

Solution

(A) $LED$ द्वारा उत्सर्जित फोटॉन की ऊर्जा $E = \frac{hc}{\lambda}$ सूत्र द्वारा दी जाती है।
दिया गया है,तरंगदैर्ध्य $\lambda = 4000 \, \mathring{A} = 400 \, \text{nm}$.
संबंध $E \approx \frac{1240}{\lambda (\text{nm में})} \, \text{eV}$ का उपयोग करने पर:
$E = \frac{1240}{400} \, \text{eV} = 3.1 \, \text{eV}$.
निकटतम पूर्णांक में पूर्णांकित करने पर,हमें $3 \, \text{eV}$ प्राप्त होता है।
282
PhysicsMediumMCQJEE Main · 2022
$6.03$ लाख की जनसंख्या को कवर करने वाले टीवी टॉवर की आवश्यक ऊँचाई $h$ है। यदि औसत जनसंख्या घनत्व $100$ प्रति वर्ग $km$ है और पृथ्वी की त्रिज्या $6400 \, km$ है,तो $h$ का मान $... \, m$ होगा।
A
$150$
B
$151$
C
$146$
D
$155$

Solution

(A) $h$ ऊँचाई वाले टीवी टॉवर की कवरेज दूरी $d = \sqrt{2Rh}$ द्वारा दी जाती है।
पृथ्वी की त्रिज्या $R = 6400 \, km$ दी गई है।
टॉवर द्वारा कवर किया गया क्षेत्रफल $A = \pi d^2 = \pi (2Rh)$ है।
जनसंख्या $P = 6.03 \times 10^5$ और जनसंख्या घनत्व $\rho = 100 \, \text{people/km}^2$ दिया गया है।
क्षेत्रफल $A = \frac{P}{\rho} = \frac{6.03 \times 10^5}{100} = 6030 \, \text{km}^2$ है।
क्षेत्रफल के दोनों व्यंजकों की तुलना करने पर: $6030 = \pi \times 2 \times 6400 \times h$ (जहाँ $h$ $km$ में है)।
$h = \frac{6030}{2 \times \pi \times 6400} \, km$.
$h = \frac{6030}{40212} \approx 0.150 \, km$.
मीटर में बदलने पर: $h = 0.150 \times 1000 = 150 \, m$.
283
PhysicsMediumMCQJEE Main · 2022
$5 \ mm$ और $10 \ mm$ त्रिज्या वाले दो समान रूप से आवेशित गोलाकार चालकों $A$ और $B$ को $2 \ cm$ की दूरी पर रखा गया है। यदि गोलों को एक चालक तार से जोड़ा जाता है,तो संतुलन की स्थिति में,गोले $A$ और $B$ की सतह पर विद्युत क्षेत्रों के परिमाण का अनुपात क्या होगा?
A
$1:2$
B
$2:1$
C
$1:1$
D
$1:4$

Solution

(B) जब दो चालकों को एक चालक तार से जोड़ा जाता है,तो आवेश तब तक प्रवाहित होता है जब तक कि उनके विभव समान न हो जाएं,अर्थात $V_A = V_B$।
चूंकि एक गोलाकार चालक का विभव $V = \frac{KQ}{R}$ होता है,इसलिए हमारे पास $\frac{KQ_A}{R_A} = \frac{KQ_B}{R_B}$ है।
इसका अर्थ है $\frac{Q_A}{Q_B} = \frac{R_A}{R_B} = \frac{5 \ mm}{10 \ mm} = \frac{1}{2}$।
गोले की सतह पर विद्युत क्षेत्र $E = \frac{KQ}{R^2}$ द्वारा दिया जाता है।
इसलिए,विद्युत क्षेत्रों का अनुपात $\frac{E_A}{E_B} = \frac{KQ_A / R_A^2}{KQ_B / R_B^2} = \frac{Q_A}{Q_B} \times \left(\frac{R_B}{R_A}\right)^2$ है।
आवेशों के अनुपात को प्रतिस्थापित करने पर: $\frac{E_A}{E_B} = \left(\frac{R_A}{R_B}\right) \times \left(\frac{R_B}{R_A}\right)^2 = \frac{R_B}{R_A}$।
यहाँ $R_A = 5 \ mm$ और $R_B = 10 \ mm$ दिए गए हैं,इसलिए हमें $\frac{E_A}{E_B} = \frac{10}{5} = \frac{2}{1}$ प्राप्त होता है।
284
PhysicsMediumMCQJEE Main · 2022
एक समतल विद्युतचुंबकीय तरंग में दोलनशील चुंबकीय क्षेत्र $B_{y} = 5 \times 10^{-6} \sin(1000\pi(5x - 4 \times 10^{8}t)) \text{ T}$ द्वारा दिया गया है। विद्युत क्षेत्र का आयाम क्या होगा?
A
$15 \times 10^{2} \text{ Vm}^{-1}$
B
$5 \times 10^{-6} \text{ Vm}^{-1}$
C
$16 \times 10^{12} \text{ Vm}^{-1}$
D
$4 \times 10^{2} \text{ Vm}^{-1}$

Solution

(A) चुंबकीय क्षेत्र के लिए दिया गया समीकरण $B_{y} = B_{0} \sin(kx - \omega t)$ है।
दिए गए समीकरण $B_{y} = 5 \times 10^{-6} \sin(5000\pi x - 4 \times 10^{11}\pi t)$ के साथ तुलना करने पर,चुंबकीय क्षेत्र का आयाम $B_{0} = 5 \times 10^{-6} \text{ T}$ प्राप्त होता है।
विद्युतचुंबकीय तरंग की गति $c$ और विद्युत क्षेत्र के आयाम $E_{0}$ तथा चुंबकीय क्षेत्र के आयाम $B_{0}$ के बीच का संबंध $E_{0} = c B_{0}$ है।
प्रकाश की गति $c = 3 \times 10^{8} \text{ m/s}$ का उपयोग करते हुए:
$E_{0} = (3 \times 10^{8} \text{ m/s}) \times (5 \times 10^{-6} \text{ T})$
$E_{0} = 15 \times 10^{2} \text{ V/m} = 1500 \text{ V/m}$.
285
PhysicsMediumMCQJEE Main · 2022
प्रकाश दो माध्यमों $M_{1}$ और $M_{2}$ में क्रमशः $1.5 \times 10^{8} \text{ m/s}$ और $2.0 \times 10^{8} \text{ m/s}$ की गति से यात्रा करता है। उनके बीच का क्रांतिक कोण क्या है?
A
$\tan^{-1}\left(\frac{3}{\sqrt{7}}\right)$
B
$\tan^{-1}\left(\frac{2}{3}\right)$
C
$\cos^{-1}\left(\frac{3}{4}\right)$
D
$\sin^{-1}\left(\frac{2}{3}\right)$

Solution

(A) माध्यम में प्रकाश की गति $V = \frac{c}{n}$ द्वारा दी जाती है,जहाँ $c$ निर्वात में प्रकाश की गति है और $n$ अपवर्तनांक है।
चूंकि $n = \frac{c}{V}$,अपवर्तनांक प्रकाश की गति के व्युत्क्रमानुपाती होता है।
पूर्ण आंतरिक परावर्तन के लिए,प्रकाश को सघन माध्यम $(M_{1})$ से विरल माध्यम $(M_{2})$ में जाना चाहिए।
क्रांतिक कोण $i_{c}$ के लिए शर्त $n_{1} \sin i_{c} = n_{2} \sin 90^{\circ}$ है।
अतः,$\sin i_{c} = \frac{n_{2}}{n_{1}} = \frac{V_{1}}{V_{2}}$.
यहाँ $V_{1} = 1.5 \times 10^{8} \text{ m/s}$ और $V_{2} = 2.0 \times 10^{8} \text{ m/s}$ दिया गया है।
$\sin i_{c} = \frac{1.5 \times 10^{8}}{2.0 \times 10^{8}} = \frac{1.5}{2.0} = \frac{3}{4}$.
यदि $\sin i_{c} = \frac{3}{4}$ है,तो सम्मुख भुजा $3$ और कर्ण $4$ है।
आसन्न भुजा $\sqrt{4^{2} - 3^{2}} = \sqrt{16 - 9} = \sqrt{7}$ होगी।
इसलिए,$\tan i_{c} = \frac{\text{सम्मुख भुजा}}{\text{आसन्न भुजा}} = \frac{3}{\sqrt{7}}$.
अतः,$i_{c} = \tan^{-1}\left(\frac{3}{\sqrt{7}}\right)$.
286
PhysicsMediumMCQJEE Main · 2022
एक एम्प्लिट्यूड मॉड्यूलेटेड सिग्नल का अधिकतम और न्यूनतम वोल्टेज क्रमशः $60\,V$ और $20\,V$ है। प्रतिशत मॉड्यूलेशन इंडेक्स $....\%$ होगा।
A
$0.5$
B
$50$
C
$2$
D
$30$

Solution

(B) दिया गया है:
$V_{\max} = 60\,V$
$V_{\min} = 20\,V$
मॉड्यूलेशन इंडेक्स $\mu$ को निम्नलिखित सूत्र द्वारा दिया जाता है:
$\mu = \frac{V_{\max} - V_{\min}}{V_{\max} + V_{\min}}$
मान रखने पर:
$\mu = \frac{60 - 20}{60 + 20} = \frac{40}{80} = 0.5$
प्रतिशत मॉड्यूलेशन इंडेक्स $\mu \times 100\% = 0.5 \times 100\% = 50\%$ है।
287
PhysicsEasyMCQJEE Main · 2022
$M$ द्रव्यमान का एक नाभिक विराम अवस्था में है,जो $\frac{M'}{3}$ और $\frac{2M'}{3}$ (जहाँ $M' < M$) द्रव्यमान वाले दो भागों में विभाजित हो जाता है। इन दो भागों की डी-ब्रोग्ली तरंगदैर्घ्य का अनुपात क्या होगा?
A
$1:2$
B
$2:1$
C
$1:1$
D
$2:3$

Solution

(C) रैखिक संवेग संरक्षण के नियम के अनुसार,चूंकि प्रारंभिक नाभिक विराम अवस्था में है,इसलिए कुल प्रारंभिक संवेग शून्य है।
अतः,दोनों भागों के संवेगों के परिमाण समान और विपरीत होने चाहिए:
$|\vec{P}_1| = |\vec{P}_2| = P$
डी-ब्रोग्ली तरंगदैर्घ्य $\lambda$ को निम्नलिखित संबंध द्वारा दिया जाता है:
$\lambda = \frac{h}{P}$
चूंकि दोनों भागों के संवेग का परिमाण $P$ समान है,इसलिए उनकी डी-ब्रोग्ली तरंगदैर्घ्य भी समान होगी।
अतः,उनकी डी-ब्रोग्ली तरंगदैर्घ्य का अनुपात $\lambda_1 : \lambda_2 = 1 : 1$ होगा।
Solution diagram
288
PhysicsMediumMCQJEE Main · 2022
$6\,V$ की एक बैटरी नीचे दिखाए गए परिपथ से जुड़ी है। बैटरी से ली गई धारा $I$ है:
Question diagram
A
$1\,A$
B
$2\,A$
C
$\frac{6}{11}\,A$
D
$\frac{4}{3}\,A$

Solution

(A) परिपथ में व्हीटस्टोन ब्रिज जैसी संरचना है। आइए भुजाओं में प्रतिरोधों का अनुपात जांचें: $\frac{3\,\Omega}{6\,\Omega} = \frac{1}{2}$ और $\frac{3\,\Omega}{6\,\Omega} = \frac{1}{2}$.
चूंकि अनुपात समान हैं,इसलिए ब्रिज संतुलित है।
अतः,मध्य के $5\,\Omega$ प्रतिरोधक से कोई धारा प्रवाहित नहीं होती है,और इसे परिपथ से हटाया जा सकता है।
अब,ऊपरी शाखा में दो $3\,\Omega$ प्रतिरोधक श्रेणीक्रम में हैं,जिससे $R_1 = 3 + 3 = 6\,\Omega$ प्राप्त होता है।
निचली शाखा में दो $6\,\Omega$ प्रतिरोधक श्रेणीक्रम में हैं,जिससे $R_2 = 6 + 6 = 12\,\Omega$ प्राप्त होता है।
ये दोनों शाखाएं समानांतर क्रम में हैं,इसलिए ब्रिज भाग का तुल्य प्रतिरोध $R_p = \frac{R_1 \times R_2}{R_1 + R_2} = \frac{6 \times 12}{6 + 12} = \frac{72}{18} = 4\,\Omega$ है।
यह तुल्य प्रतिरोध बैटरी से जुड़े $2\,\Omega$ प्रतिरोधक के साथ श्रेणीक्रम में है।
कुल प्रतिरोध $R_{eq} = 4 + 2 = 6\,\Omega$ है।
बैटरी से ली गई धारा $I = \frac{V}{R_{eq}} = \frac{6\,V}{6\,\Omega} = 1\,A$ है।
Solution diagram
289
PhysicsDifficultMCQJEE Main · 2022
चित्र में दिखाए अनुसार $V$ विभवांतर का एक स्रोत दो समान संधारित्रों के संयोजन से जुड़ा है। जब कुंजी $K$ बंद होती है,तो संयोजन में संचित कुल ऊर्जा $E_{1}$ है। अब कुंजी $K$ को खोल दिया जाता है और दोनों संधारित्रों की प्लेटों के बीच $K_{d} = 5$ परावैद्युतांक वाला एक परावैद्युत पदार्थ डाला जाता है। अब संयोजन में संचित कुल ऊर्जा $E_{2}$ है। अनुपात $E_{1} / E_{2}$ होगा:
Question diagram
A
$\frac{1}{10}$
B
$\frac{2}{5}$
C
$\frac{5}{13}$
D
$\frac{5}{26}$

Solution

(C) स्थिति $I$: स्विच $K$ बंद है।
दोनों संधारित्र स्रोत $V$ के साथ समांतर क्रम में हैं।
तुल्य धारिता $C_{eq} = C + C = 2C$ है।
कुल ऊर्जा $E_{1} = \frac{1}{2} C_{eq} V^{2} = \frac{1}{2} (2C) V^{2} = CV^{2}$ है।
स्थिति $II$: स्विच $K$ खोल दिया जाता है।
बायां संधारित्र स्रोत $V$ से जुड़ा रहता है,इसलिए इसका विभव $V$ रहता है और इसकी नई धारिता $C' = K_{d}C = 5C$ हो जाती है। इसकी ऊर्जा $E_{L} = \frac{1}{2} (5C) V^{2} = \frac{5}{2} CV^{2}$ है।
दायां संधारित्र अलग हो जाता है,इसलिए इसका आवेश $Q = CV$ स्थिर रहता है। इसकी नई धारिता $C' = K_{d}C = 5C$ हो जाती है। इसकी ऊर्जा $E_{R} = \frac{Q^{2}}{2C'} = \frac{(CV)^{2}}{2(5C)} = \frac{CV^{2}}{10}$ है।
कुल ऊर्जा $E_{2} = E_{L} + E_{R} = \frac{5}{2} CV^{2} + \frac{1}{10} CV^{2} = \frac{25+1}{10} CV^{2} = \frac{26}{10} CV^{2} = \frac{13}{5} CV^{2}$ है।
अनुपात $\frac{E_{1}}{E_{2}} = \frac{CV^{2}}{\frac{13}{5} CV^{2}} = \frac{5}{13}$।
Solution diagram
290
PhysicsMediumMCQJEE Main · 2022
$r_{1} = 30 \, cm$ और $r_{2} = 50 \, cm$ त्रिज्या वाले दो संकेंद्रित वृत्ताकार लूप चित्र में दिखाए अनुसार $X-Y$ तल में रखे गए हैं। उनमें $I = 7 \, A$ की धारा चित्र में दिखाई गई दिशाओं में प्रवाहित हो रही है। इन दो वृत्ताकार लूपों की प्रणाली का कुल चुंबकीय आघूर्ण लगभग कितना है?
Question diagram
A
$\frac{7}{2} \hat{k} \, A \cdot m^{2}$
B
$-\frac{7}{2} \hat{k} \, A \cdot m^{2}$
C
$7 \hat{k} \, A \cdot m^{2}$
D
$-7 \hat{k} \, A \cdot m^{2}$

Solution

(B) धारावाही लूप का चुंबकीय आघूर्ण $\vec{M} = I \vec{A}$ द्वारा दिया जाता है,जहाँ $\vec{A}$ दाहिने हाथ के नियम के अनुसार निर्देशित क्षेत्रफल सदिश है।
आंतरिक लूप के लिए (त्रिज्या $r_{1} = 0.3 \, m$),धारा वामावर्त (counter-clockwise) दिशा में बहती है,इसलिए $\vec{M}_{1} = I \pi r_{1}^{2} \hat{k} = 7 \times \pi \times (0.3)^{2} \hat{k} = 0.63 \pi \hat{k} \, A \cdot m^{2}$।
बाहरी लूप के लिए (त्रिज्या $r_{2} = 0.5 \, m$),धारा दक्षिणावर्त (clockwise) दिशा में बहती है,इसलिए $\vec{M}_{2} = -I \pi r_{2}^{2} \hat{k} = -7 \times \pi \times (0.5)^{2} \hat{k} = -1.75 \pi \hat{k} \, A \cdot m^{2}$।
कुल चुंबकीय आघूर्ण $\vec{M}_{net} = \vec{M}_{1} + \vec{M}_{2} = (0.63 \pi - 1.75 \pi) \hat{k} = -1.12 \pi \hat{k} \, A \cdot m^{2}$ है।
$\pi \approx \frac{22}{7}$ का उपयोग करने पर,$\vec{M}_{net} = -1.12 \times \frac{22}{7} \hat{k} = -0.16 \times 22 \hat{k} = -3.52 \hat{k} \, A \cdot m^{2}$।
यह लगभग $-\frac{7}{2} \hat{k} \, A \cdot m^{2}$ के बराबर है।
Solution diagram
291
PhysicsDifficultMCQJEE Main · 2022
एक वेग चयनकर्ता (velocity selector) में विद्युत क्षेत्र $\overrightarrow{E} = E \hat{k}$ और चुंबकीय क्षेत्र $\overrightarrow{B} = B \hat{j}$ है,जहाँ $B = 12 \, mT$ है। धनात्मक $x$-अक्ष की दिशा में गति कर रहे $728 \, eV$ ऊर्जा वाले इलेक्ट्रॉन के बिना विक्षेपित हुए गुजरने के लिए आवश्यक $E$ का मान ज्ञात कीजिए: (दिया है: इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान $= 9.1 \times 10^{-31} \, kg$)
A
$192 \, kVm^{-1}$
B
$192 \, mVm^{-1}$
C
$9600 \, kVm^{-1}$
D
$16 \, kVm^{-1}$

Solution

(A) वेग चयनकर्ता में किसी कण के बिना विक्षेपित हुए गुजरने के लिए,विद्युत बल और चुंबकीय बल संतुलित होने चाहिए: $qE = qvB$,जिसका अर्थ है $E = vB$।
सबसे पहले,इलेक्ट्रॉन की गतिज ऊर्जा $K = 728 \, eV$ का उपयोग करके उसका वेग $v$ ज्ञात करें:
$K = \frac{1}{2} mv^2$
$728 \times 1.6 \times 10^{-19} \, J = \frac{1}{2} \times 9.1 \times 10^{-31} \, kg \times v^2$
$v^2 = \frac{2 \times 728 \times 1.6 \times 10^{-19}}{9.1 \times 10^{-31}}$
$v^2 = 256 \times 10^{12} \, m^2/s^2$
$v = 16 \times 10^6 \, m/s$
अब,विद्युत क्षेत्र $E$ की गणना करें:
$E = vB = (16 \times 10^6 \, m/s) \times (12 \times 10^{-3} \, T)$
$E = 192 \times 10^3 \, V/m = 192 \, kV/m$.
292
PhysicsMediumMCQJEE Main · 2022
दो नाभिकों की द्रव्यमान संख्या का अनुपात $4: 3$ है। उनके नाभिकीय घनत्व का अनुपात क्या होगा?
A
$4: 3$
B
$\left(\frac{3}{4}\right)^{\frac{1}{3}}$
C
$1: 1$
D
$\left(\frac{4}{3}\right)^{\frac{1}{3}}$

Solution

(C) नाभिक की त्रिज्या $R = R_{0} A^{\frac{1}{3}}$ द्वारा दी जाती है,जहाँ $A$ द्रव्यमान संख्या है और $R_{0}$ एक स्थिरांक है।
नाभिक का घनत्व $\rho$ नाभिक के द्रव्यमान और उसके आयतन के अनुपात के रूप में परिभाषित होता है।
$\rho = \frac{\text{नाभिक का द्रव्यमान}}{\text{नाभिक का आयतन}} = \frac{m \times A}{\frac{4}{3} \pi R^{3}}$,जहाँ $m$ न्यूक्लियॉन (प्रोटॉन या न्यूट्रॉन) का औसत द्रव्यमान है।
$R$ का मान रखने पर:
$\rho = \frac{m \times A}{\frac{4}{3} \pi (R_{0} A^{\frac{1}{3}})^{3}} = \frac{m \times A}{\frac{4}{3} \pi R_{0}^{3} A}$.
इस समीकरण को सरल करने पर,$A$ पद कट जाते हैं:
$\rho = \frac{m}{\frac{4}{3} \pi R_{0}^{3}}$.
चूंकि $\rho$ द्रव्यमान संख्या $A$ से स्वतंत्र है,इसलिए नाभिकीय घनत्व सभी नाभिकों के लिए स्थिर रहता है।
अतः,दो नाभिकों के नाभिकीय घनत्व का अनुपात $1: 1$ है।
293
PhysicsMediumMCQJEE Main · 2022
दी गई आकृति में,समबाहु प्रिज्म की सतह $AC$ को $n$ अपवर्तनांक वाले द्रव में डुबोया गया है। सतह $AC$ पर $60^{\circ}$ के आपतन कोण के लिए,अपवर्तित प्रकाश किरण सतह $AC$ के अनुदिश स्पर्श करती हुई निकलती है। द्रव का अपवर्तनांक $n = \frac{\sqrt{x}}{4}$ है। $x$ का मान ज्ञात कीजिए। (कांच का अपवर्तनांक $= 1.5$ दिया गया है)
Question diagram
A
$27$
B
$270$
C
$22$
D
$30$

Solution

(A) सतह $AC$ पर कांच के प्रिज्म और द्रव के इंटरफ़ेस के लिए स्नेल के नियम का उपयोग करने पर:
$\mu_{glass} \sin(i) = n \sin(r)$
यहाँ आपतन कोण $i = 60^{\circ}$ है और अपवर्तित किरण सतह $AC$ के अनुदिश स्पर्श करती है,इसलिए अपवर्तन कोण $r = 90^{\circ}$ होगा।
मान रखने पर:
$1.5 \times \sin(60^{\circ}) = n \times \sin(90^{\circ})$
$1.5 \times \frac{\sqrt{3}}{2} = n \times 1$
$n = \frac{1.5 \sqrt{3}}{2} = \frac{3 \sqrt{3}}{4}$
हमें $n = \frac{\sqrt{x}}{4}$ दिया गया है।
$n$ के लिए दोनों व्यंजकों की तुलना करने पर:
$\frac{\sqrt{x}}{4} = \frac{3 \sqrt{3}}{4}$
$\sqrt{x} = 3 \sqrt{3} = \sqrt{9 \times 3} = \sqrt{27}$
अतः,$x = 27$.
Solution diagram
294
PhysicsMediumMCQJEE Main · 2022
दो हल्के नाभिक नीचे दिए गए संबंध के अनुसार जुड़कर एक अपेक्षाकृत भारी नाभिक बनाते हैं:
${ }_{1}^{2} X +{ }_{1}^{2} X ={ }_{2}^{4} Y$
${ }_{1}^{2} X$ और ${ }_{2}^{4} Y$ की प्रति न्यूक्लियॉन बंधन ऊर्जा क्रमशः $1.1 \, MeV$ और $7.6 \, MeV$ है। इस प्रक्रिया में मुक्त ऊर्जा $MeV$ में ज्ञात कीजिए।
A
$25$
B
$26$
C
$23$
D
$22$

Solution

(B) नाभिकीय अभिक्रिया में मुक्त ऊर्जा उत्पादों की कुल बंधन ऊर्जा और अभिकारकों की कुल बंधन ऊर्जा के अंतर के बराबर होती है।
उत्पाद $({ }_{2}^{4} Y)$ की कुल बंधन ऊर्जा: $4 \times 7.6 \, MeV = 30.4 \, MeV$।
अभिकारकों $(2 \times { }_{1}^{2} X)$ की कुल बंधन ऊर्जा: $2 \times (2 \times 1.1 \, MeV) = 4.4 \, MeV$।
मुक्त ऊर्जा = (उत्पादों की कुल बंधन ऊर्जा) - (अभिकारकों की कुल बंधन ऊर्जा)
मुक्त ऊर्जा = $30.4 \, MeV - 4.4 \, MeV = 26 \, MeV$।
295
PhysicsDifficultMCQJEE Main · 2022
चित्र में $CE$ विन्यास में ट्रांजिस्टर की विशिष्ट स्थानांतरण विशेषता दिखाई गई है। प्रयुक्त परिपथ की कलेक्टर शाखा में $2\,k\Omega$ का लोड प्रतिरोध जुड़ा है। ट्रांजिस्टर का इनपुट प्रतिरोध $0.50\,k\Omega$ है। ट्रांजिस्टर का वोल्टेज लाभ क्या है?
Question diagram
A
$100$
B
$200$
C
$20$
D
$2000$

Solution

(B) $CE$ विन्यास में धारा लाभ $\beta = \frac{\Delta I_C}{\Delta I_B}$ द्वारा दिया जाता है।
ग्राफ से,हम कलेक्टर धारा में परिवर्तन $\Delta I_C$ और आधार धारा में परिवर्तन $\Delta I_B$ की गणना करने के लिए दो बिंदु चुन सकते हैं।
आइए बिंदु $(I_B = 100\,\mu A, I_C = 5\,mA)$ और $(I_B = 200\,\mu A, I_C = 10\,mA)$ लें।
$\Delta I_C = (10 - 5)\,mA = 5\,mA = 5 \times 10^{-3}\,A$.
$\Delta I_B = (200 - 100)\,\mu A = 100\,\mu A = 100 \times 10^{-6}\,A$.
अतः,$\beta = \frac{5 \times 10^{-3}}{100 \times 10^{-6}} = \frac{5000}{100} = 50$.
वोल्टेज लाभ $A_V = \beta \times \frac{R_C}{R_{in}}$ द्वारा दिया जाता है।
यहाँ $R_C = 2\,k\Omega$ और $R_{in} = 0.50\,k\Omega$ दिया गया है।
$A_V = 50 \times \frac{2\,k\Omega}{0.50\,k\Omega} = 50 \times 4 = 200$.
296
PhysicsMediumMCQJEE Main · 2022
$5 \mu C$,$0.16 \mu C$ और $0.3 \mu C$ परिमाण के तीन बिंदु आवेश एक समकोण त्रिभुज के शीर्षों $A$,$B$ और $C$ पर स्थित हैं,जिनकी भुजाएँ $AB = 3 \, cm$,$BC = 3 \sqrt{2} \, cm$ और $CA = 3 \, cm$ हैं। बिंदु $A$ समकोण वाला कोना है। बिंदु $A$ पर स्थित आवेश द्वारा अन्य दो आवेशों के कारण अनुभव किए गए कुल स्थिर-विद्युत बल ($N$ में) की गणना कीजिए।
A
$177$
B
$12$
C
$17$
D
$29$

Solution

(C) दिए गए आवेश: $q_A = 5 \, \mu C$,$q_B = 0.16 \, \mu C$,$q_C = 0.3 \, \mu C$.
दूरियाँ: $r_{AB} = 3 \, cm = 3 \times 10^{-2} \, m$,$r_{AC} = 3 \, cm = 3 \times 10^{-2} \, m$.
कूलम्ब का नियम: $F = \frac{k q_1 q_2}{r^2}$,जहाँ $k = 9 \times 10^9 \, N \cdot m^2/C^2$.
$C$ के कारण $A$ पर बल $(F_1)$: $F_1 = \frac{9 \times 10^9 \times (5 \times 10^{-6}) \times (0.3 \times 10^{-6})}{(3 \times 10^{-2})^2} = \frac{9 \times 10^9 \times 1.5 \times 10^{-12}}{9 \times 10^{-4}} = 1.5 \times 10 = 15 \, N$.
$B$ के कारण $A$ पर बल $(F_2)$: $F_2 = \frac{9 \times 10^9 \times (5 \times 10^{-6}) \times (0.16 \times 10^{-6})}{(3 \times 10^{-2})^2} = \frac{9 \times 10^9 \times 0.8 \times 10^{-12}}{9 \times 10^{-4}} = 0.8 \times 10 = 8 \, N$.
चूँकि $A$ समकोण वाला कोना है,$F_1$ और $F_2$ परस्पर लंबवत हैं।
परिणामी बल $F_{net} = \sqrt{F_1^2 + F_2^2} = \sqrt{15^2 + 8^2} = \sqrt{225 + 64} = \sqrt{289} = 17 \, N$.
Solution diagram
297
PhysicsMediumMCQJEE Main · 2022
$8 \, \Omega$ प्रतिरोध वाली एक कुंडली में,बाहरी चुंबकीय क्षेत्र के कारण चुंबकीय फ्लक्स समय के साथ $\phi = \frac{2}{3}(9 - t^2)$ के रूप में बदलता है। फ्लक्स के शून्य होने तक कुंडली में उत्पन्न कुल ऊष्मा का मान $.... \, J$ होगा।
A
$6$
B
$5$
C
$2$
D
$3$

Solution

(C) दिया गया है,$\phi = \frac{2}{3}(9 - t^2)$.
फ्लक्स शून्य तब होता है जब $\phi = 0$,इसलिए $\frac{2}{3}(9 - t^2) = 0$,जिससे $t^2 = 9$ या $t = 3 \, \text{s}$ प्राप्त होता है।
प्रेरित विद्युत वाहक बल $(EMF)$ फैराडे के नियम द्वारा दिया जाता है: $e = -\frac{d\phi}{dt}$.
$e = -\frac{d}{dt} [\frac{2}{3}(9 - t^2)] = -\frac{2}{3}(0 - 2t) = \frac{4t}{3}$.
कुंडली में उत्पन्न ऊष्मा $H$ का सूत्र $H = \int_{0}^{t} \frac{e^2}{R} dt$ है।
$e = \frac{4t}{3}$ और $R = 8 \, \Omega$ का मान रखने पर:
$H = \int_{0}^{3} \frac{(\frac{4t}{3})^2}{8} dt = \int_{0}^{3} \frac{16t^2}{9 \times 8} dt = \int_{0}^{3} \frac{2t^2}{9} dt$.
$H = \frac{2}{9} [\frac{t^3}{3}]_{0}^{3} = \frac{2}{9} \times \frac{27}{3} = \frac{2}{9} \times 9 = 2 \, \text{J}$.
298
PhysicsDifficultMCQJEE Main · 2022
$300\,cm$ लंबाई का एक पोटेंशियोमीटर तार $780\,\Omega$ के प्रतिरोध और $4\,V$ के emf वाले एक मानक सेल के साथ श्रेणीक्रम में जुड़ा है। पोटेंशियोमीटर तार से एक स्थिर विद्युत धारा प्रवाहित होती है। $20\,mV$ के emf वाले सेल के लिए शून्य विक्षेप बिंदु (null point) की लंबाई $60\,cm$ पाई जाती है। पोटेंशियोमीटर तार का प्रतिरोध ... $\Omega$ है।
Question diagram
A
$78$
B
$200$
C
$2$
D
$20$

Solution

(D) माना पोटेंशियोमीटर तार का प्रतिरोध $R$ है।
पोटेंशियोमीटर तार से प्रवाहित होने वाली विद्युत धारा $i = \frac{4}{R + 780}$ द्वारा दी जाती है।
पूरे पोटेंशियोमीटर तार $AB$ के सिरों पर विभवांतर $V_{AB} = iR = \frac{4R}{R + 780}$ है।
तार पर विभव प्रवणता (potential gradient) $k = \frac{V_{AB}}{L} = \frac{4R}{(R + 780) \times 300}$ है।
$20\,mV = 20 \times 10^{-3}\,V$ के emf वाले सेल के लिए शून्य विक्षेप बिंदु $l = 60\,cm$ लंबाई पर प्राप्त होता है।
शून्य विक्षेप बिंदु पर,$l$ लंबाई के सिरों पर विभवांतर सेल के emf के बराबर होता है:
$E = k \times l$
$20 \times 10^{-3} = \left( \frac{4R}{(R + 780) \times 300} \right) \times 60$
समीकरण को सरल करने पर:
$20 \times 10^{-3} = \frac{4R \times 60}{(R + 780) \times 300}$
$0.02 = \frac{4R}{5(R + 780)}$
$0.1(R + 780) = 4R$
$0.1R + 78 = 4R$
$3.9R = 78$
$R = \frac{78}{3.9} = 20\,\Omega$.
299
PhysicsMediumMCQJEE Main · 2022
एक रेडियो $6\,MHz$ से $10\,MHz$ बैंड में किसी भी स्टेशन पर ट्यून कर सकता है। संबंधित तरंगदैर्घ्य बैंडविड्थ का मान $....\,m$ होगा।
A
$4$
B
$20$
C
$30$
D
$50$

Solution

(B) दिया गया है: आवृत्ति $f_{1} = 6\,MHz = 6 \times 10^{6}\,Hz$ और $f_{2} = 10\,MHz = 10 \times 10^{6}\,Hz$.
प्रकाश की गति $c = 3 \times 10^{8}\,m/s$.
तरंगदैर्घ्य $\lambda$ का सूत्र $\lambda = \frac{c}{f}$ है।
$f_{1} = 6 \times 10^{6}\,Hz$ के लिए,$\lambda_{1} = \frac{3 \times 10^{8}}{6 \times 10^{6}} = 50\,m$.
$f_{2} = 10 \times 10^{6}\,Hz$ के लिए,$\lambda_{2} = \frac{3 \times 10^{8}}{10 \times 10^{6}} = 30\,m$.
तरंगदैर्घ्य बैंडविड्थ दोनों तरंगदैर्घ्यों के बीच का अंतर है: $\Delta\lambda = \lambda_{1} - \lambda_{2} = 50\,m - 30\,m = 20\,m$.
300
PhysicsMediumMCQJEE Main · 2022
किसी रेडियोधर्मी नमूने की विघटन दर किसी क्षण पर $4250$ विघटन प्रति मिनट है। $10$ मिनट बाद,दर $2250$ विघटन प्रति मिनट हो जाती है। अनुमानित क्षय नियतांक $......... \min^{-1}$ है।
A
$0.02$
B
$2.7$
C
$0.063$
D
$6.3$

Solution

(C) विघटन दर $A$ नियम $A = A_0 e^{-\lambda t}$ का पालन करती है।
$t = 0$ पर,$A_0 = 4250 \, \text{dpm}$।
$t = 10 \, \text{min}$ पर,$A = 2250 \, \text{dpm}$।
इन मानों को समीकरण में रखने पर:
$2250 = 4250 e^{-\lambda (10)}$
$e^{-10\lambda} = \frac{2250}{4250} = \frac{45}{85} = \frac{9}{17}$
दोनों पक्षों का प्राकृतिक लघुगणक (natural logarithm) लेने पर:
$-10\lambda = \ln\left(\frac{9}{17}\right)$
$10\lambda = \ln\left(\frac{17}{9}\right) \approx \ln(1.888)$
$10\lambda \approx 0.6356$
$\lambda \approx 0.06356 \, \min^{-1}$।
अतः,अनुमानित क्षय नियतांक $0.063 \, \min^{-1}$ है।

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