MHT CET 2025 Physics Question Paper with Answer and Solution in Hindi

795 QuestionsHindiWith Solutions

PhysicsQ151250 of 795 questions

Page 4 of 9 · Hindi

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दो लड़के जमीन पर बिंदुओं $A$ और $B$ पर खड़े हैं,जहाँ दूरी $AB = x$ है। $B$ पर स्थित लड़का $AB$ के लंबवत $v_1$ वेग से दौड़ना शुरू करता है। $A$ पर स्थित लड़का उसी समय $v$ वेग से दौड़ना शुरू करता है और $t$ समय में दूसरे लड़के से मिलता है। $t$ का मान क्या है?
A
$\frac{x}{\sqrt{v^2 - v_1^2}}$
B
$\frac{x}{\sqrt{v_1^2 - v^2}}$
C
$\frac{x}{v - v_1}$
D
$\frac{x}{v + v_1}$

Solution

(A) मान लीजिए कि $A$ पर स्थित लड़का मूल बिंदु $(0, 0)$ पर है और $B$ पर स्थित लड़का $(x, 0)$ पर है।
$B$ पर स्थित लड़का $y$-अक्ष के अनुदिश $v_1$ वेग से गति करता है। $t$ समय पर उसकी स्थिति $(x, v_1 t)$ है।
$A$ पर स्थित लड़का $v$ वेग से गति करता है और $t$ समय पर $B$ वाले लड़के से मिलता है। $t$ समय पर उसकी स्थिति $(v_x t, v_y t)$ है,ताकि $\sqrt{(v_x t)^2 + (v_y t)^2} = vt$ हो।
चूंकि वे $(x, v_1 t)$ पर मिलते हैं,इसलिए $v_x t = x$ और $v_y t = v_1 t$ है।
वेग के परिमाण की शर्त का उपयोग करते हुए: $(v_x t)^2 + (v_y t)^2 = (vt)^2$।
मान रखने पर: $x^2 + (v_1 t)^2 = v^2 t^2$।
$t^2$ के लिए पुनर्व्यवस्थित करने पर: $v^2 t^2 - v_1^2 t^2 = x^2$।
$t^2 (v^2 - v_1^2) = x^2$।
$t = \frac{x}{\sqrt{v^2 - v_1^2}}$।
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दो लड़कियाँ एक मैदान के सिरों $A$ और $B$ पर खड़ी हैं जहाँ $AB = b$ है। $B$ पर खड़ी लड़की $AB$ के लंबवत दिशा में $V_1$ वेग से दौड़ना शुरू करती है। $A$ पर खड़ी लड़की उसी समय $V_2$ वेग से दौड़ना शुरू करती है और न्यूनतम समय $t$ में दूसरी लड़की से मिल जाती है। $t$ का मान क्या है?
A
$\frac{b}{\sqrt{V_1^2 + V_2^2}}$
B
$\frac{b}{V_1 + V_2}$
C
$\frac{b}{V_2 - V_1}$
D
$\frac{b}{\sqrt{V_2^2 - V_1^2}}$

Solution

(D) मान लीजिए $A$ पर लड़की की स्थिति $(0, 0)$ है और $B$ पर लड़की की स्थिति $(b, 0)$ है।
$B$ पर लड़की $V_1$ वेग $\vec{V_1} = V_1 \hat{j}$ के साथ चलती है। समय $t$ पर उसकी स्थिति $\vec{r_B}(t) = b \hat{i} + V_1 t \hat{j}$ है।
$A$ पर लड़की $V_2$ वेग के साथ चलती है। मान लीजिए $\vec{V_2} = V_2 \cos \theta \hat{i} + V_2 \sin \theta \hat{j}$ है।
समय $t$ पर उसकी स्थिति $\vec{r_A}(t) = (V_2 \cos \theta) t \hat{i} + (V_2 \sin \theta) t \hat{j}$ है।
उनके मिलने के लिए,$\vec{r_A}(t) = \vec{r_B}(t)$ होना चाहिए,इसलिए $V_2 \cos \theta t = b$ और $V_2 \sin \theta t = V_1 t$ है।
दूसरे समीकरण से,$\sin \theta = V_1 / V_2$ है। अतः,$\cos \theta = \sqrt{1 - (V_1/V_2)^2} = \frac{\sqrt{V_2^2 - V_1^2}}{V_2}$ है।
$\cos \theta$ का मान पहले समीकरण में रखने पर: $V_2 \left( \frac{\sqrt{V_2^2 - V_1^2}}{V_2} \right) t = b$ प्राप्त होता है।
अतः,$t = \frac{b}{\sqrt{V_2^2 - V_1^2}}$ है।
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$\frac{\pi}{2} \,m$ त्रिज्या के एकसमान वृत्तीय गति करते हुए एक कण द्वारा $t$ समय में $x$ चक्कर लगाए जाते हैं। इसका स्पर्शरेखीय वेग क्या है?
A
$\frac{x}{\pi t}$
B
$\frac{\pi^2}{xt}$
C
$\frac{\pi^2 x}{t}$
D
$\frac{\pi x}{t}$

Solution

(C) वृत्तीय पथ की त्रिज्या $r = \frac{\pi}{2} \,m$ है。
कण $t$ समय में $x$ चक्कर लगाता है。
$x$ चक्करों में तय की गई कुल दूरी $d = x \times (2\pi r)$ है。
$r$ का मान रखने पर: $d = x \times (2\pi \times \frac{\pi}{2}) = x \times \pi^2 = \pi^2 x \,m$。
स्पर्शरेखीय वेग $v$ को तय की गई कुल दूरी और लिए गए समय के अनुपात के रूप में परिभाषित किया जाता है:
$v = \frac{d}{t} = \frac{\pi^2 x}{t} \,m/s$。
अतः, सही विकल्प $C$ है。
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एक समान कोणीय गति से वृत्त में गति कर रहे कण के लिए,निम्नलिखित में से कौन सा कथन 'असत्य' है?
A
वेग सदिश वृत्त के स्पर्शरेखीय होता है।
B
त्वरण सदिश वृत्त के स्पर्शरेखीय होता है।
C
वेग और त्वरण सदिश एक दूसरे के लंबवत होते हैं।
D
त्वरण सदिश वृत्त के केंद्र की ओर इंगित करता है।

Solution

(B) समान वृत्तीय गति में,कण एक स्थिर कोणीय गति $\omega$ के साथ चलता है।
$1$. वेग सदिश $\vec{v}$ हमेशा किसी भी बिंदु पर वृत्तीय पथ के स्पर्शरेखीय होता है। अतः,कथन $A$ सत्य है।
$2$. चूंकि गति स्थिर है,इसलिए कोई स्पर्शरेखीय त्वरण नहीं होता है। केवल अभिकेंद्र त्वरण $\vec{a}_c$ मौजूद होता है,जो वृत्त के केंद्र की ओर निर्देशित होता है। अतः,कथन $D$ सत्य है।
$3$. चूंकि त्वरण सदिश $\vec{a}_c$ केंद्र की ओर इंगित करता है और वेग सदिश $\vec{v}$ वृत्त के स्पर्शरेखीय (त्रिज्या के लंबवत) होता है,इसलिए वेग और त्वरण सदिश हमेशा एक दूसरे के लंबवत होते हैं। अतः,कथन $C$ सत्य है।
$4$. चूंकि त्वरण सदिश केंद्र की ओर इंगित करता है,इसलिए यह वृत्त के स्पर्शरेखीय नहीं होता है। अतः,कथन $B$ असत्य है।
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एक वाहन $20 \ m$ त्रिज्या के वृत्ताकार क्षैतिज ट्रैक पर $10 \ m/s$ की स्थिर गति से चल रहा है। वाहन की छत से एक बॉब को द्रव्यमानहीन डोरी से लटकाया गया है। डोरी द्वारा ऊर्ध्वाधर के साथ बनाया गया कोण क्या होगा? (गुरुत्वीय त्वरण,$g = 10 \ m/s^2$)
A
$\tan^{-1}(0.5)$
B
$\tan^{-1}(0.6)$
C
$\tan^{-1}(0.7)$
D
$\tan^{-1}(0.8)$

Solution

(A) जब वाहन वृत्ताकार पथ पर गति करता है,तो बॉब पर बाहर की ओर छद्म बल (pseudo force) $F_p = \frac{mv^2}{r}$ और नीचे की ओर गुरुत्वाकर्षण बल $mg$ कार्य करता है।
माना $\theta$ वह कोण है जो डोरी ऊर्ध्वाधर के साथ बनाती है।
वाहन के फ्रेम में,बॉब तनाव $T$,छद्म बल और भार के प्रभाव में संतुलन में है।
घटकों को लेने पर,हमें मिलता है $T \sin \theta = \frac{mv^2}{r}$ और $T \cos \theta = mg$.
दोनों समीकरणों को विभाजित करने पर: $\tan \theta = \frac{mv^2/r}{mg} = \frac{v^2}{rg}$.
दिया गया है $v = 10 \ m/s$,$r = 20 \ m$,और $g = 10 \ m/s^2$.
$\tan \theta = \frac{10^2}{20 \times 10} = \frac{100}{200} = 0.5$.
अतः,$\theta = \tan^{-1}(0.5)$.
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एक सिरे पर बंधी $\ell$ लंबाई की एक अवितान्य डोरी के दूसरे सिरे पर $m$ द्रव्यमान लटका है। यदि डोरी स्थिर सिरे से गुजरने वाली ऊर्ध्वाधर अक्ष के चारों ओर $\frac{1}{\pi}$ चक्कर प्रति सेकंड लगाती है,तो डोरी में तनाव क्या है? [डोरी ऊर्ध्वाधर के साथ $\theta$ कोण बनाती है]
A
$4\pi^2 m\ell$
B
$2\pi^2 m\ell$
C
$4 m\ell$
D
$m\ell$

Solution

(C) $m$ द्रव्यमान $r = \ell \sin \theta$ त्रिज्या के क्षैतिज वृत्त में गति करता है।
कोणीय आवृत्ति $\omega = 2\pi f = 2\pi \times \frac{1}{\pi} = 2 \text{ rad/s}$ है।
द्रव्यमान पर कार्य करने वाले बल तनाव $T$ (डोरी के अनुदिश) और भार $mg$ (नीचे की ओर) हैं।
तनाव के घटकों को वियोजित करने पर: $T \cos \theta = mg$ और $T \sin \theta = m\omega^2 r$।
$r = \ell \sin \theta$ प्रतिस्थापित करने पर,$T \sin \theta = m\omega^2 \ell \sin \theta$ प्राप्त होता है,जो सरल होकर $T = m\omega^2 \ell$ हो जाता है।
$\omega = 2 \text{ rad/s}$ रखने पर,$T = m(2)^2 \ell = 4m\ell$ प्राप्त होता है।
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$m$ और $3m$ द्रव्यमान के दो पत्थरों को क्षैतिज वृत्तों में घुमाया जाता है,भारी पत्थर $(r/3)$ त्रिज्या में और हल्का पत्थर $r$ त्रिज्या में घूमता है। जब वे समान अभिकेंद्री बल का अनुभव करते हैं,तो हल्के पत्थर की स्पर्शरेखीय गति भारी पत्थर की गति की $n$ गुना होती है। $n$ का मान ज्ञात कीजिए:
A
$2$
B
$3$
C
$1$
D
$4$

Solution

(B) मान लीजिए हल्के पत्थर का द्रव्यमान $m_1 = m$ और उसकी त्रिज्या $r_1 = r$ है। उसकी स्पर्शरेखीय गति $v_1$ है।
मान लीजिए भारी पत्थर का द्रव्यमान $m_2 = 3m$ और उसकी त्रिज्या $r_2 = r/3$ है। उसकी स्पर्शरेखीय गति $v_2$ है।
अभिकेंद्री बल का सूत्र $F = \frac{mv^2}{r}$ है।
दिया गया है कि अभिकेंद्री बल समान हैं: $F_1 = F_2$।
$\frac{m_1 v_1^2}{r_1} = \frac{m_2 v_2^2}{r_2}$
मान रखने पर: $\frac{m v_1^2}{r} = \frac{3m v_2^2}{(r/3)}$
$\frac{m v_1^2}{r} = \frac{9m v_2^2}{r}$
$v_1^2 = 9 v_2^2$
$v_1 = 3 v_2$
चूंकि $v_1 = n v_2$,इसलिए $n = 3$ है।
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$P$ और $Q$ एक ही तल में स्थित निश्चित बिंदु हैं और द्रव्यमान $m$ को चित्र में दिखाए अनुसार डोरियों से बांधा गया है। यदि द्रव्यमान को इस तल से थोड़ा बाहर विस्थापित करके छोड़ दिया जाए,तो यह किस आवर्तकाल के साथ दोलन करेगा? (दिया है: $PQ = 2d$,$PR = QR = L$)
Question diagram
A
$2 \pi \sqrt{\frac{L}{g}}$
B
$2 \pi \sqrt{\frac{L^2}{g}}$
C
$2 \pi \sqrt{\frac{\sqrt{L^2-d^2}}{g}}$
D
$2 \pi \sqrt{\frac{\sqrt{L^2+d^2}}{g}}$

Solution

(C) मान लीजिए कि बिंदु $P$ और $Q$ $x$-अक्ष पर क्रमशः $(-d, 0, 0)$ और $(d, 0, 0)$ पर हैं। द्रव्यमान $m$ $xy$-तल में बिंदु $R$ पर $(0, -h, 0)$ पर स्थित है,जहाँ $h = \sqrt{L^2 - d^2}$ है।
जब द्रव्यमान को तल से थोड़ा बाहर ($z$-दिशा में) $z$ दूरी तक विस्थापित किया जाता है,तो $P$ और $Q$ से द्रव्यमान की नई दूरी $L' = \sqrt{h^2 + z^2 + d^2} = \sqrt{L^2 + z^2}$ हो जाती है।
प्रत्येक डोरी में तनाव $T = \frac{mg}{2 \cos \theta}$ है,जहाँ $\cos \theta = \frac{h}{L'}$.
$z$-दिशा में प्रत्यानयन बल $F = -2T \sin \phi$ है,जहाँ $\phi$ डोरी और $xy$-तल के बीच का कोण है,$\sin \phi = \frac{z}{L'}$.
अतः,$F = -2 \left( \frac{mg}{2(h/L')} \right) \left( \frac{z}{L'} \right) = -\frac{mgz}{h}$.
प्रभावी स्प्रिंग नियतांक $k = \frac{mg}{h} = \frac{mg}{\sqrt{L^2 - d^2}}$ है।
आवर्तकाल $T = 2 \pi \sqrt{\frac{m}{k}} = 2 \pi \sqrt{\frac{m}{mg/\sqrt{L^2 - d^2}}} = 2 \pi \sqrt{\frac{\sqrt{L^2 - d^2}}{g}}$ होगा।
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एक स्थिर लिफ्ट के अंदर एक सरल लोलक का आवर्तकाल $\sqrt{3} \ s$ है। जब लिफ्ट $g/3$ के त्वरण के साथ ऊपर की ओर गति करती है,तो नया आवर्तकाल क्या होगा? ($g=$ गुरुत्वीय त्वरण)
A
$1.5 \ s$
B
$2 \ s$
C
$\sqrt{3} \ s$
D
$3 \ s$

Solution

(A) सरल लोलक का आवर्तकाल $T = 2\pi \sqrt{\frac{L}{g_{eff}}}$ द्वारा दिया जाता है।
स्थिर लिफ्ट के लिए,$g_{eff} = g$,इसलिए $T_1 = 2\pi \sqrt{\frac{L}{g}} = \sqrt{3} \ s$ है।
जब लिफ्ट $a = g/3$ के त्वरण के साथ ऊपर की ओर गति करती है,तो प्रभावी त्वरण $g_{eff} = g + a = g + g/3 = 4g/3$ हो जाता है।
नया आवर्तकाल $T_2 = 2\pi \sqrt{\frac{L}{4g/3}} = 2\pi \sqrt{\frac{3L}{4g}} = \sqrt{\frac{3}{4}} \times (2\pi \sqrt{\frac{L}{g}})$ द्वारा दिया जाता है।
$T_1 = \sqrt{3} \ s$ का मान रखने पर,हमें $T_2 = \frac{\sqrt{3}}{2} \times \sqrt{3} = \frac{3}{2} = 1.5 \ s$ प्राप्त होता है।
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यदि एक स्प्रिंग से लटके हुए $m$ द्रव्यमान के दोलन का आवर्तकाल $2 \ s$ है,तो उसी स्प्रिंग के साथ $4m$ द्रव्यमान लटकाने पर उसका आवर्तकाल क्या होगा ($s$ में)?
A
$1$
B
$3$
C
$2$
D
$4$

Solution

(D) स्प्रिंग नियतांक $k$ वाली स्प्रिंग से लटके $m$ द्रव्यमान के दोलन का आवर्तकाल $T$ इस सूत्र द्वारा दिया जाता है: $T = 2\pi \sqrt{\frac{m}{k}}$.
दिया गया है कि द्रव्यमान $m$ के लिए आवर्तकाल $T_1 = 2 \ s$ है।
अतः,$2 = 2\pi \sqrt{\frac{m}{k}}$.
अब,नए द्रव्यमान $m' = 4m$ के लिए,नया आवर्तकाल $T_2$ होगा: $T_2 = 2\pi \sqrt{\frac{4m}{k}}$.
हम इसे इस प्रकार लिख सकते हैं: $T_2 = 2 \times (2\pi \sqrt{\frac{m}{k}})$.
समीकरण में $T_1$ का मान रखने पर: $T_2 = 2 \times T_1$.
चूंकि $T_1 = 2 \ s$,इसलिए $T_2 = 2 \times 2 \ s = 4 \ s$.
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एक सरल लोलक का आवर्तकाल $T_1$ है। अब निलंबन बिंदु को समीकरण $y = kt^2$ के अनुसार ऊपर की ओर ले जाया जाता है,जहाँ $k = 1 \ m/s^2$ है। यदि नया आवर्तकाल $T_2$ है,तो $\frac{T_1^2}{T_2^2}$ का मान क्या होगा? ($g = 10 \ m/s^2$ लें)
A
$\frac{2}{3}$
B
$\frac{5}{6}$
C
$\frac{6}{5}$
D
$\frac{3}{2}$

Solution

(C) सरल लोलक का आवर्तकाल $T = 2\pi \sqrt{\frac{L}{g_{eff}}}$ द्वारा दिया जाता है।
प्रारंभ में,निलंबन बिंदु स्थिर है,इसलिए $g_{eff} = g = 10 \ m/s^2$। अतः,$T_1 = 2\pi \sqrt{\frac{L}{g}}$।
जब निलंबन बिंदु $a$ त्वरण के साथ ऊपर की ओर गति करता है,तो प्रभावी त्वरण $g_{eff} = g + a$ होता है।
विस्थापन $y = kt^2$ दिया गया है,इसलिए त्वरण $a$ विस्थापन का समय के सापेक्ष द्वितीय अवकलज है: $a = \frac{d^2y}{dt^2} = \frac{d^2}{dt^2}(kt^2) = 2k$।
चूंकि $k = 1 \ m/s^2$ दिया गया है,इसलिए $a = 2(1) = 2 \ m/s^2$ प्राप्त होता है।
अतः,$g_{eff} = g + a = 10 + 2 = 12 \ m/s^2$।
नया आवर्तकाल $T_2 = 2\pi \sqrt{\frac{L}{g_{eff}}} = 2\pi \sqrt{\frac{L}{12}}$ होगा।
अब,अनुपात $\frac{T_1^2}{T_2^2} = \frac{4\pi^2 (L/g)}{4\pi^2 (L/g_{eff})} = \frac{g_{eff}}{g} = \frac{12}{10} = \frac{6}{5}$।
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सरल लोलक की लंबाई को मूल लंबाई का $3$ गुना कर दिया जाता है। यदि $T$ इसका मूल आवर्तकाल है,तो नया आवर्तकाल क्या होगा?
A
$3 T$
B
$\sqrt{3} T$
C
$\frac{T}{\sqrt{3}}$
D
$\frac{T}{3}$

Solution

(B) सरल लोलक का आवर्तकाल $T$ सूत्र द्वारा दिया जाता है: $T = 2\pi \sqrt{\frac{L}{g}}$,जहाँ $L$ लोलक की लंबाई है और $g$ गुरुत्वीय त्वरण है।
इस सूत्र से,हम देख सकते हैं कि $T \propto \sqrt{L}$ है।
माना मूल लंबाई $L_1 = L$ है और मूल आवर्तकाल $T_1 = T$ है।
नई लंबाई $L_2 = 3L$ है।
माना नया आवर्तकाल $T_2$ है।
समानुपातिकता $T \propto \sqrt{L}$ का उपयोग करते हुए,हमारे पास है: $\frac{T_2}{T_1} = \sqrt{\frac{L_2}{L_1}}$.
मान रखने पर: $\frac{T_2}{T} = \sqrt{\frac{3L}{L}} = \sqrt{3}$.
अतः,$T_2 = \sqrt{3} T$.
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'$r$' त्रिज्या की एक छोटी गोलाकार गेंद '$R$' वक्रता त्रिज्या वाली घर्षणहीन वक्र सतह पर लुढ़क रही है। इसकी गति सरल आवर्त गति है। तो इसका दोलन काल किसके समानुपाती है? ($g=$ गुरुत्वीय त्वरण)
Question diagram
A
$\sqrt{\frac{R}{g}}$
B
$\sqrt{\frac{r}{g}}$
C
$\sqrt{\frac{R-r}{g}}$
D
$\sqrt{\frac{R+r}{g}}$

Solution

(C) जब '$r$' त्रिज्या की एक छोटी गेंद '$R$' त्रिज्या की वक्र सतह पर लुढ़कती है,तो गेंद का द्रव्यमान केंद्र '$(R-r)$' त्रिज्या के वृत्ताकार पथ पर चलता है।
छोटे दोलनों के लिए,यह गति '$L_{eff} = R-r$' प्रभावी लंबाई वाले सरल लोलक के समतुल्य है।
सरल लोलक का आवर्तकाल $T = 2\pi \sqrt{\frac{L_{eff}}{g}}$ द्वारा दिया जाता है।
प्रभावी लंबाई को प्रतिस्थापित करने पर,हमें $T = 2\pi \sqrt{\frac{R-r}{g}}$ प्राप्त होता है।
अतः,दोलन का आवर्तकाल $\sqrt{\frac{R-r}{g}}$ के समानुपाती है।
164
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एक छोटा गोला $1.6 \ m$ वक्रता त्रिज्या वाले वॉच ग्लास में सरल आवर्त गति करता है। गोले के दोलन का आवर्तकाल क्या है ($\pi \ s$ में)? (गुरुत्वीय त्वरण $g = 10 \ m/s^2$)
A
$0.2$
B
$0.4$
C
$0.6$
D
$0.8$

Solution

(D) वॉच ग्लास में दोलन करने वाला एक छोटा गोला एक सरल लोलक की तरह कार्य करता है।
इस समतुल्य लोलक की प्रभावी लंबाई $L$,वॉच ग्लास की वक्रता त्रिज्या $R$ के बराबर होती है।
दिया गया है,$R = 1.6 \ m$ और $g = 10 \ m/s^2$।
सरल लोलक के आवर्तकाल $T$ का सूत्र $T = 2\pi \sqrt{\frac{L}{g}}$ है।
मान रखने पर,$T = 2\pi \sqrt{\frac{1.6}{10}}$।
$T = 2\pi \sqrt{0.16}$।
$T = 2\pi \times 0.4$।
$T = 0.8\pi \ s$।
165
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चित्र में दिखाए अनुसार,$S_1$ और $S_2$ समान स्प्रिंग हैं,जिनमें से प्रत्येक का स्प्रिंग नियतांक $K$ है। द्रव्यमान $m$ की दोलन आवृत्ति $f$ है। यदि स्प्रिंग $S_2$ को हटा दिया जाए,तो दोलन आवृत्ति क्या हो जाएगी?
Question diagram
A
$f$
B
$2f$
C
$\frac{f}{\sqrt{2}}$
D
$\sqrt{2} \cdot f$

Solution

(C) प्रारंभिक विन्यास में,द्रव्यमान $m$ दो समानांतर स्प्रिंगों से जुड़ा हुआ है। प्रभावी स्प्रिंग नियतांक $K_{eff} = K + K = 2K$ है।
दोलन की आवृत्ति $f = \frac{1}{2\pi} \sqrt{\frac{K_{eff}}{m}} = \frac{1}{2\pi} \sqrt{\frac{2K}{m}}$ द्वारा दी जाती है।
जब स्प्रिंग $S_2$ को हटा दिया जाता है,तो केवल एक स्प्रिंग शेष रहता है जिसका स्प्रिंग नियतांक $K$ है।
नया प्रभावी स्प्रिंग नियतांक $K'_{eff} = K$ है।
दोलन की नई आवृत्ति $f' = \frac{1}{2\pi} \sqrt{\frac{K}{m}}$ है।
$f'$ और $f$ की तुलना करने पर,हमें प्राप्त होता है $\frac{f'}{f} = \frac{\frac{1}{2\pi} \sqrt{\frac{K}{m}}}{\frac{1}{2\pi} \sqrt{\frac{2K}{m}}} = \frac{1}{\sqrt{2}}$।
अतः,$f' = \frac{f}{\sqrt{2}}$।
166
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एक सरल लोलक एक लिफ्ट की छत से लटका हुआ है। जब लिफ्ट स्थिर होती है,तो इसका आवर्तकाल $T$ होता है। आवर्तकाल को घटाकर $\frac{T}{2}$ करने के लिए लिफ्ट को किस त्वरण $a$ से ऊपर की ओर त्वरित किया जाना चाहिए? (गुरुत्वीय त्वरण के लिए $g$ लें।)
A
$2g$
B
$3g$
C
$4g$
D
$g$

Solution

(B) सरल लोलक का आवर्तकाल $T = 2\pi \sqrt{\frac{L}{g_{eff}}}$ द्वारा दिया जाता है।
जब लिफ्ट स्थिर होती है,तो $g_{eff} = g$,इसलिए $T = 2\pi \sqrt{\frac{L}{g}}$।
जब लिफ्ट $a$ त्वरण के साथ ऊपर की ओर त्वरित होती है,तो प्रभावी गुरुत्व $g_{eff} = g + a$ हो जाता है।
नया आवर्तकाल $T' = 2\pi \sqrt{\frac{L}{g+a}}$ है।
दिया गया है कि $T' = \frac{T}{2}$,इसलिए $\frac{T}{2} = 2\pi \sqrt{\frac{L}{g+a}}$।
$T = 2\pi \sqrt{\frac{L}{g}}$ प्रतिस्थापित करने पर,हमें $\frac{1}{2} \left( 2\pi \sqrt{\frac{L}{g}} \right) = 2\pi \sqrt{\frac{L}{g+a}}$ प्राप्त होता है।
दोनों पक्षों का वर्ग करने पर: $\frac{1}{4} \left( \frac{L}{g} \right) = \frac{L}{g+a}$।
इसे सरल करने पर $g + a = 4g$ प्राप्त होता है,जिसका अर्थ है $a = 3g$।
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$k$ नियतांक वाली दो समान स्प्रिंगों को श्रेणीक्रम में और फिर समांतर क्रम में जोड़ा जाता है। उनसे $m$ द्रव्यमान लटकाया जाता है,तो उनके ऊर्ध्वाधर दोलनों की आवृत्तियों का अनुपात क्या होगा?
Question diagram
A
$2:1$
B
$1:1$
C
$4:1$
D
$1:2$

Solution

(D) $k$ नियतांक वाली दो समान स्प्रिंगों को श्रेणीक्रम में जोड़ने पर,तुल्य स्प्रिंग नियतांक $k_s = \frac{k \cdot k}{k + k} = \frac{k}{2}$ होता है।
श्रेणीक्रम में दोलन की आवृत्ति $f_s = \frac{1}{2\pi} \sqrt{\frac{k_s}{m}} = \frac{1}{2\pi} \sqrt{\frac{k}{2m}}$ है।
$k$ नियतांक वाली दो समान स्प्रिंगों को समांतर क्रम में जोड़ने पर,तुल्य स्प्रिंग नियतांक $k_p = k + k = 2k$ होता है।
समांतर क्रम में दोलन की आवृत्ति $f_p = \frac{1}{2\pi} \sqrt{\frac{k_p}{m}} = \frac{1}{2\pi} \sqrt{\frac{2k}{m}}$ है।
उनकी आवृत्तियों का अनुपात $\frac{f_s}{f_p} = \frac{\frac{1}{2\pi} \sqrt{\frac{k}{2m}}}{\frac{1}{2\pi} \sqrt{\frac{2k}{m}}} = \sqrt{\frac{k}{2m} \cdot \frac{m}{2k}} = \sqrt{\frac{1}{4}} = \frac{1}{2}$ है।
अतः,अनुपात $1:2$ है।
168
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चित्र $(a)$,$(b)$ और $(c)$ में सभी स्प्रिंग समान हैं,जिनमें से प्रत्येक का बल नियतांक $K$ है। प्रत्येक निकाय से द्रव्यमान $m$ जुड़ा हुआ है। यदि $T_a, T_b$ और $T_c$ क्रमशः चित्र $(a)$,$(b)$ और $(c)$ में तीन निकायों के दोलनों के आवर्तकाल हैं,तो:
Question diagram
A
$T_{a}=\sqrt{2} \,T_{b}$
B
$T_{a}=\frac{T_{c}}{\sqrt{2}}$
C
$T_{b}=2 \,T_{a}$
D
$T_{b}=2 \,T_{c}$

Solution

(D) स्प्रिंग-द्रव्यमान निकाय का आवर्तकाल $T = 2\pi \sqrt{\frac{m}{K_{eq}}}$ द्वारा दिया जाता है।
चित्र $(a)$ के लिए: प्रभावी स्प्रिंग नियतांक $K_{eq,a} = K$ है। अतः,$T_a = 2\pi \sqrt{\frac{m}{K}}$.
चित्र $(b)$ के लिए: दो स्प्रिंग श्रेणीक्रम में हैं। प्रभावी स्प्रिंग नियतांक $\frac{1}{K_{eq,b}} = \frac{1}{K} + \frac{1}{K} = \frac{2}{K}$ है,इसलिए $K_{eq,b} = \frac{K}{2}$। अतः,$T_b = 2\pi \sqrt{\frac{m}{K/2}} = 2\pi \sqrt{\frac{2m}{K}} = \sqrt{2} T_a$।
चित्र $(c)$ के लिए: दो स्प्रिंग समांतर क्रम में हैं। प्रभावी स्प्रिंग नियतांक $K_{eq,c} = K + K = 2K$ है। अतः,$T_c = 2\pi \sqrt{\frac{m}{2K}} = \frac{1}{\sqrt{2}} (2\pi \sqrt{\frac{m}{K}}) = \frac{T_a}{\sqrt{2}}$।
परिणामों की तुलना करने पर: $T_b = \sqrt{2} T_a$ और $T_c = \frac{T_a}{\sqrt{2}}$।
अतः,$T_b = \sqrt{2} (\sqrt{2} T_c) = 2 T_c$। इसलिए,सही विकल्प $(d)$ है।
169
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यदि दोलन करते सरल लोलक की लंबाई को मूल लंबाई का $\frac{1}{3}$ गुना कर दिया जाए और आयाम को समान रखा जाए, तो उसकी कुल ऊर्जा में वृद्धि होगी: ($\text{गुना}$ में)
A
$3$
B
$2$
C
$9$
D
$5$

Solution

(A) सरल लोलक की कुल ऊर्जा $E$ का सूत्र $E = \frac{1}{2} m \omega^2 A^2$ है, जहाँ $m$ द्रव्यमान है, $\omega$ कोणीय आवृत्ति है और $A$ आयाम है।
चूँकि $\omega = \sqrt{\frac{g}{l}}$, ऊर्जा का व्यंजक $E = \frac{1}{2} m (\frac{g}{l}) A^2 = \frac{mgA^2}{2l}$ हो जाता है।
यह दिया गया है कि आयाम $A$ स्थिर रहता है और लंबाई $l$ बदलकर $l' = \frac{l}{3}$ हो जाती है, इसलिए नई ऊर्जा $E'$ का मान $E' = \frac{mgA^2}{2(l/3)} = 3 \times \frac{mgA^2}{2l} = 3E$ होगा।
अतः, कुल ऊर्जा मूल ऊर्जा की $3$ गुनी हो जाएगी।
170
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$S.H.M.$ कर रहे एक कण के लिए,जब माध्य स्थिति से कण का विस्थापन $\frac{\sqrt{3}}{2} A$ है,तो कुल ऊर्जा गतिज ऊर्जा की '$n$' गुना है,जहाँ $A$ $S.H.M.$ का आयाम है। '$n$' का मान है
A
$2$
B
$3$
C
$4$
D
$6$

Solution

(C) $S.H.M.$ कर रहे कण की कुल ऊर्जा $(E)$ का सूत्र $E = \frac{1}{2} k A^2$ है।
विस्थापन $x$ पर गतिज ऊर्जा $(K)$ का सूत्र $K = \frac{1}{2} k (A^2 - x^2)$ है।
दिया गया है कि विस्थापन $x = \frac{\sqrt{3}}{2} A$ है।
$x$ का मान गतिज ऊर्जा के सूत्र में रखने पर:
$K = \frac{1}{2} k (A^2 - (\frac{\sqrt{3}}{2} A)^2) = \frac{1}{2} k (A^2 - \frac{3}{4} A^2) = \frac{1}{2} k (\frac{1}{4} A^2) = \frac{1}{8} k A^2$.
प्रश्न के अनुसार,$E = n \times K$.
$E$ और $K$ के व्यंजक रखने पर:
$\frac{1}{2} k A^2 = n \times (\frac{1}{8} k A^2)$.
दोनों पक्षों को $\frac{1}{2} k A^2$ से विभाजित करने पर:
$1 = n \times \frac{1}{4}$.
अतः,$n = 4$.
171
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एक कण माध्य स्थिति से शुरू होकर रैखिक $S.H.M.$ कर रहा है। आयाम के आधे बिंदु पर कण की गतिज ऊर्जा और स्थितिज ऊर्जा का अनुपात क्या है ($: 1$ में)?
A
$2$
B
$3$
C
$4$
D
$8$

Solution

(B) कण का विस्थापन $x = A \sin(\omega t)$ द्वारा दिया जाता है।
आधे आयाम पर,विस्थापन $x = A/2$ है।
$S.H.M.$ में कण की स्थितिज ऊर्जा $(U)$ $U = \frac{1}{2} k x^2$ द्वारा दी जाती है।
$x = A/2$ प्रतिस्थापित करने पर,हमें $U = \frac{1}{2} k (A/2)^2 = \frac{1}{8} k A^2$ प्राप्त होता है।
कण की कुल ऊर्जा $(E)$ $E = \frac{1}{2} k A^2$ है।
गतिज ऊर्जा $(K)$ $K = E - U = \frac{1}{2} k A^2 - \frac{1}{8} k A^2 = \frac{3}{8} k A^2$ है।
अब,गतिज ऊर्जा और स्थितिज ऊर्जा का अनुपात $K/U = (\frac{3}{8} k A^2) / (\frac{1}{8} k A^2) = 3/1$ है।
अतः,अनुपात $3: 1$ है।
172
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एक कण $A$ आयाम के साथ $S.H.M.$ कर रहा है। जब दोलन के दौरान कण की स्थितिज ऊर्जा उसके अधिकतम मान की आधी होती है,तो संतुलन स्थिति से उसका विस्थापन कितना होगा?
A
$\pm \frac{A}{4}$
B
$\pm \frac{A}{2}$
C
$\pm \frac{A}{\sqrt{3}}$
D
$\pm \frac{A}{\sqrt{2}}$

Solution

(D) $S.H.M.$ कर रहे कण की $x$ विस्थापन पर स्थितिज ऊर्जा $(U)$ का सूत्र $U = \frac{1}{2} k x^2$ है,जहाँ $k$ बल नियतांक है।
अधिकतम स्थितिज ऊर्जा $(U_{max})$ चरम स्थितियों पर होती है जहाँ $x = \pm A$,इसलिए $U_{max} = \frac{1}{2} k A^2$ है।
प्रश्न के अनुसार,स्थितिज ऊर्जा उसके अधिकतम मान की आधी है: $U = \frac{1}{2} U_{max}$।
सूत्रों को प्रतिस्थापित करने पर: $\frac{1}{2} k x^2 = \frac{1}{2} (\frac{1}{2} k A^2)$।
समीकरण को सरल करने पर: $x^2 = \frac{1}{2} A^2$।
दोनों पक्षों का वर्गमूल लेने पर: $x = \pm \frac{A}{\sqrt{2}}$।
अतः,विस्थापन $\pm \frac{A}{\sqrt{2}}$ है।
173
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एक कण अपने माध्य स्थिति से $T$ आवर्तकाल के साथ सरल आवर्त गति करना शुरू करता है। समय $t = T/6$ पर,कण की स्थितिज ऊर्जा और गतिज ऊर्जा का अनुपात क्या होगा? $\left[\sin 30^{\circ} = \cos 60^{\circ} = 0.5, \cos 30^{\circ} = \sin 60^{\circ} = \sqrt{3}/2\right]$
A
$1: 2$
B
$1: 3$
C
$2: 1$
D
$3: 1$

Solution

(D) माध्य स्थिति से शुरू होने वाले कण का विस्थापन $x = A \sin(\omega t)$ द्वारा दिया जाता है,जहाँ $A$ आयाम है और $\omega = 2\pi/T$ कोणीय आवृत्ति है।
$t = T/6$ पर,विस्थापन $x = A \sin((2\pi/T) \cdot (T/6)) = A \sin(\pi/3) = A \sqrt{3}/2$ है।
स्थितिज ऊर्जा $U = \frac{1}{2} k x^2 = \frac{1}{2} k (A \sqrt{3}/2)^2 = \frac{3}{8} k A^2$ है।
कुल ऊर्जा $E = \frac{1}{2} k A^2$ है।
गतिज ऊर्जा $K = E - U = \frac{1}{2} k A^2 - \frac{3}{8} k A^2 = \frac{1}{8} k A^2$ है।
स्थितिज ऊर्जा और गतिज ऊर्जा का अनुपात $U/K = (3/8 k A^2) / (1/8 k A^2) = 3/1$ है।
अतः,अनुपात $3: 1$ है।
174
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दो सरल लोलक हैं,जिनमें पहले $(A)$ गोलक का द्रव्यमान $M_1$ और लंबाई $L_1$ है,और दूसरे $(B)$ का द्रव्यमान $M_2$ और लंबाई $L_2$ है। यदि $M_1 = M_2$ और $L_1 = 2 L_2$ है और उनकी कुल ऊर्जा समान है,तो निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?
A
$B$ का आयाम $A$ के आयाम से अधिक है।
B
$B$ का आयाम $A$ के आयाम से छोटा है।
C
दोनों का आयाम समान होगा।
D
$B$ का आयाम $A$ से दोगुना है।

Solution

(B) सरल आवर्त गति करने वाले सरल लोलक की कुल ऊर्जा $E = \frac{1}{2} m \omega^2 A^2$ द्वारा दी जाती है,जहाँ $m$ द्रव्यमान है,$\omega$ कोणीय आवृत्ति है और $A$ आयाम है।
सरल लोलक के लिए,कोणीय आवृत्ति $\omega = \sqrt{\frac{g}{L}}$ होती है,इसलिए $\omega^2 = \frac{g}{L}$.
इस मान को ऊर्जा समीकरण में रखने पर: $E = \frac{1}{2} m \left(\frac{g}{L}\right) A^2$.
दिया गया है कि $E_A = E_B$,$M_1 = M_2 = M$,और $L_1 = 2 L_2$:
$\frac{1}{2} M \left(\frac{g}{L_1}\right) A_A^2 = \frac{1}{2} M \left(\frac{g}{L_2}\right) A_B^2$.
सरल करने पर,हमें $\frac{A_A^2}{L_1} = \frac{A_B^2}{L_2}$ प्राप्त होता है।
$L_1 = 2 L_2$ रखने पर: $\frac{A_A^2}{2 L_2} = \frac{A_B^2}{L_2}$.
इससे $A_A^2 = 2 A_B^2$ या $A_A = \sqrt{2} A_B$ प्राप्त होता है।
अतः,$A_B = \frac{A_A}{\sqrt{2}}$,जिसका अर्थ है कि $B$ का आयाम $A$ के आयाम से छोटा है।
175
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एक स्थान पर,दोलन करते सरल लोलक की लंबाई को आयाम समान रखते हुए $\frac{1}{4}$ गुना कर दिया जाता है,तो कुल ऊर्जा होगी:
A
$2$ गुना
B
$4$ गुना
C
$8$ गुना
D
समान रहेगी

Solution

(B) सरल आवर्त गति करने वाले सरल लोलक की कुल ऊर्जा $(E)$ का सूत्र $E = \frac{1}{2} m \omega^2 A^2$ है,जहाँ $m$ द्रव्यमान है,$\omega$ कोणीय आवृत्ति है और $A$ आयाम है।
सरल लोलक के लिए,कोणीय आवृत्ति $\omega = \sqrt{\frac{g}{l}}$ होती है,जहाँ $g$ गुरुत्वीय त्वरण है और $l$ लोलक की लंबाई है।
ऊर्जा के समीकरण में $\omega^2 = \frac{g}{l}$ रखने पर,हमें $E = \frac{1}{2} m (\frac{g}{l}) A^2$ प्राप्त होता है।
चूंकि द्रव्यमान $(m)$,गुरुत्वीय त्वरण $(g)$,और आयाम $(A)$ स्थिर हैं,इसलिए कुल ऊर्जा लोलक की लंबाई के व्युत्क्रमानुपाती होती है: $E \propto \frac{1}{l}$।
यदि नई लंबाई $l' = \frac{l}{4}$ है,तो नई ऊर्जा $E'$ का मान $E' \propto \frac{1}{l/4} = 4 \times (\frac{1}{l}) = 4E$ होगा।
अतः,कुल ऊर्जा प्रारंभिक ऊर्जा की $4$ गुना हो जाएगी।
176
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एक ऊर्ध्वाधर स्प्रिंग से लटका हुआ द्रव्यमान $T = 0.1 \ s$ के आवर्तकाल के साथ $S.H.M.$ करता है। स्प्रिंग अपनी गति के उच्चतम बिंदु पर बिना खिंची हुई है। द्रव्यमान की अधिकतम चाल क्या है? (गुरुत्वीय त्वरण $g = 10 \ m/s^2$ लें)
A
$\frac{1}{2 \pi} \ m/s$
B
$\frac{1}{\pi} \ m/s$
C
$\frac{2}{\pi} \ m/s$
D
$\pi \ m/s$

Solution

(A) एक ऊर्ध्वाधर स्प्रिंग-द्रव्यमान प्रणाली में,संतुलन स्थिति वह है जहाँ स्प्रिंग $x_0 = \frac{mg}{k}$ के विस्तार तक खिंची होती है।
दोलन का आवर्तकाल $T = 2 \pi \sqrt{\frac{m}{k}}$ है,जिसका अर्थ है $\frac{k}{m} = \omega^2 = \left(\frac{2 \pi}{T}\right)^2$.
दिया गया है $T = 0.1 \ s$,इसलिए $\omega = \frac{2 \pi}{0.1} = 20 \pi \ rad/s$.
संतुलन पर विस्तार $x_0 = \frac{g}{\omega^2} = \frac{10}{(20 \pi)^2} = \frac{10}{400 \pi^2} = \frac{1}{40 \pi^2} \ m$ है।
चूंकि स्प्रिंग उच्चतम बिंदु पर बिना खिंची हुई है,इसलिए दोलन का आयाम $A$ संतुलन विस्तार $x_0$ के बराबर है,अर्थात $A = x_0 = \frac{1}{40 \pi^2} \ m$.
$S.H.M.$ में अधिकतम चाल $v_{max} = A \omega$ द्वारा दी जाती है।
मान रखने पर: $v_{max} = \left(\frac{1}{40 \pi^2}\right) \times (20 \pi) = \frac{20 \pi}{40 \pi^2} = \frac{1}{2 \pi} \ m/s$.
177
PhysicsMediumMCQMHT CET · 2025
$S.H.M.$ करने वाले एक कण के लिए विस्थापन-समय ग्राफ दिखाया गया है। उस कण के लिए, बल-समय ग्राफ को निम्नलिखित में से किसके द्वारा सही ढंग से दर्शाया गया है?
Question diagram
A
a
B
b
C
c
D
d

Solution

(A) $S.H.M.$ में, विस्थापन $y = A \sin(\omega t)$ द्वारा दिया जाता है।
कण पर कार्य करने वाला बल $F = -ky = -k A \sin(\omega t)$ है, जहाँ $k$ बल नियतांक है।
यह समीकरण दर्शाता है कि बल विस्थापन के साथ $180^{\circ}$ (या $\pi$ रेडियन) के कलांतर में है।
यदि विस्थापन ग्राफ मूल बिंदु से शुरू होने वाली एक साइन तरंग है, तो बल ग्राफ मूल बिंदु से शुरू होने वाली एक उल्टी साइन तरंग (ऋणात्मक साइन तरंग) होनी चाहिए।
इसलिए, बल-समय ग्राफ समय अक्ष के सापेक्ष विस्थापन-समय ग्राफ का दर्पण प्रतिबिंब होगा।
178
PhysicsMediumMCQMHT CET · 2025
एक कण $8 \ s$ के आवर्तकाल और $4 \sqrt{2} \ m$ के आयाम के साथ एक सीधी रेखा में सरल आवर्त गति करता है। कण माध्य स्थिति से गति शुरू करता है। इसकी गति के पहले सेकंड में तय की गई दूरी और दूसरे सेकंड में तय की गई दूरी का अनुपात क्या है? $(\sin 45^{\circ} = 1 / \sqrt{2}, \sin \frac{\pi}{2} = 1)$
A
$1: 8$
B
$1: 4$
C
$1: 2$
D
$1: (\sqrt{2} - 1)$

Solution

(D) सरल आवर्त गति में माध्य स्थिति से शुरू होने वाले कण के विस्थापन का समीकरण $x(t) = A \sin(\omega t)$ है।
दिया गया है: $T = 8 \ s$,इसलिए $\omega = \frac{2\pi}{T} = \frac{2\pi}{8} = \frac{\pi}{4} \ rad/s$. आयाम $A = 4\sqrt{2} \ m$.
अतः,$x(t) = 4\sqrt{2} \sin(\frac{\pi}{4} t)$.
पहले सेकंड ($t=0$ से $t=1$) में तय की गई दूरी: $x(1) = 4\sqrt{2} \sin(\frac{\pi}{4}) = 4\sqrt{2} \times \frac{1}{\sqrt{2}} = 4 \ m$.
दूसरे सेकंड ($t=1$ से $t=2$) में तय की गई दूरी: $x(2) = 4\sqrt{2} \sin(\frac{2\pi}{4}) = 4\sqrt{2} \sin(\frac{\pi}{2}) = 4\sqrt{2} \times 1 = 4\sqrt{2} \ m$.
दूसरे सेकंड में तय की गई दूरी $d_2 = x(2) - x(1) = 4\sqrt{2} - 4 = 4(\sqrt{2} - 1) \ m$.
पहले सेकंड और दूसरे सेकंड में तय की गई दूरी का अनुपात $\frac{d_1}{d_2} = \frac{4}{4(\sqrt{2} - 1)} = \frac{1}{\sqrt{2} - 1}$ है।
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PhysicsMediumMCQMHT CET · 2025
एक कण के $S.H.M.$ का आवर्तकाल $16 \ s$ है। $t = 2 \ s$ और $t = 4 \ s$ पर कण की स्थितियों के बीच का कलान्तर (phase difference) क्या होगा?
A
$\pi$
B
$\frac{\pi}{2}$
C
$\frac{\pi}{4}$
D
$\frac{\pi}{8}$

Solution

(C) $S.H.M.$ का आवर्तकाल $T = 16 \ s$ दिया गया है।
कोणीय आवृत्ति $\omega = \frac{2\pi}{T} = \frac{2\pi}{16} = \frac{\pi}{8} \ rad/s$ है।
किसी भी समय $t$ पर कला $\phi = \omega t$ द्वारा दी जाती है।
$t_1 = 2 \ s$ पर कला $\phi_1 = \omega t_1 = \frac{\pi}{8} \times 2 = \frac{\pi}{4}$ है।
$t_2 = 4 \ s$ पर कला $\phi_2 = \omega t_2 = \frac{\pi}{8} \times 4 = \frac{\pi}{2}$ है।
कलान्तर $\Delta\phi = \phi_2 - \phi_1 = \frac{\pi}{2} - \frac{\pi}{4} = \frac{\pi}{4}$ होगा।
180
PhysicsMediumMCQMHT CET · 2025
एक कण रैखिक $S.H.M.$ निष्पादित करता है। इसकी दो स्थितियों में वेग $V_1$ और $V_2$ हैं और त्वरण क्रमशः $a_1$ और $a_2$ हैं $(0 < a_1 < a_2)$। स्थितियों के बीच की दूरी है
A
$\frac{V_1^2-V_2^2}{a_1-a_2}$
B
$\frac{V_2^2-V_1^2}{a_1-a_2}$
C
$\frac{V_1^2-V_2^2}{a_1+a_2}$
D
$\frac{V_2^2-V_1^2}{a_1^2+a_2^2}$

Solution

(C) $S.H.M.$ में एक कण के लिए,विस्थापन $x$ पर वेग $V$ का सूत्र $V^2 = \omega^2(A^2 - x^2)$ है और त्वरण $a = -\omega^2 x$ है।
त्वरण समीकरण से,$x = -a/\omega^2$ प्राप्त होता है।
इस मान को वेग समीकरण में रखने पर: $V^2 = \omega^2 A^2 - a^2/\omega^2$।
दो स्थितियों के लिए:
$V_1^2 = \omega^2 A^2 - a_1^2/\omega^2$
$V_2^2 = \omega^2 A^2 - a_2^2/\omega^2$
दोनों को घटाने पर: $V_1^2 - V_2^2 = (a_2^2 - a_1^2)/\omega^2$।
दो स्थितियों के बीच की दूरी $d = |x_1 - x_2| = |(-a_1/\omega^2) - (-a_2/\omega^2)| = |a_2 - a_1|/\omega^2$ है।
घटाने के परिणाम से,$1/\omega^2 = (V_1^2 - V_2^2) / (a_2^2 - a_1^2)$।
इस मान को दूरी के सूत्र में रखने पर: $d = |a_2 - a_1| \cdot \frac{V_1^2 - V_2^2}{a_2^2 - a_1^2} = \frac{V_1^2 - V_2^2}{a_2 + a_1}$।
अतः,सही विकल्प $C$ है।
181
PhysicsMediumMCQMHT CET · 2025
एक स्प्रिंग से जुड़ा द्रव्यमान $S.H.M.$ करता है,जिसका विस्थापन $x = 3 \times 10^{-3} \cos(2 \pi t) \text{ m}$ है। पहली बार अधिकतम गति प्राप्त करने में लगा समय है
A
$1/12 \text{ s}$
B
$1/8 \text{ s}$
C
$1/4 \text{ s}$
D
$1/2 \text{ s}$

Solution

(C) कण का विस्थापन $x = A \cos(\omega t)$ द्वारा दिया गया है,जहाँ $A = 3 \times 10^{-3} \text{ m}$ और $\omega = 2 \pi \text{ rad/s}$ है।
कण का वेग $v$,विस्थापन का समय के सापेक्ष अवकलन है: $v = \frac{dx}{dt} = -A \omega \sin(\omega t)$.
गति $|v| = A \omega |\sin(\omega t)|$ है।
अधिकतम गति तब होती है जब $|\sin(\omega t)| = 1$ हो,जिसका अर्थ है $\omega t = \frac{\pi}{2}, \frac{3\pi}{2}, \dots$.
पहली बार के लिए,$\omega t = \frac{\pi}{2}$ लें।
$\omega = 2 \pi$ प्रतिस्थापित करने पर,हमें $2 \pi t = \frac{\pi}{2}$ प्राप्त होता है।
$t$ के लिए हल करने पर,हमें $t = 1/4 \text{ s}$ प्राप्त होता है।
182
PhysicsEasyMCQMHT CET · 2025
$300 \ rad/s$ और $3000 \ rad/s$ की कोणीय आवृत्ति वाली दो सरल आवर्त गतियों का आयाम समान है। उनके अधिकतम त्वरण का अनुपात क्या है?
A
$1: 10$
B
$1: 10^2$
C
$1: 10^3$
D
$1: 10^4$

Solution

(B) सरल आवर्त गति करने वाले कण का अधिकतम त्वरण $a_{max}$ सूत्र $a_{max} = \omega^2 A$ द्वारा दिया जाता है,जहाँ $\omega$ कोणीय आवृत्ति है और $A$ आयाम है।
यह दिया गया है कि आयाम $A_1$ और $A_2$ समान हैं $(A_1 = A_2 = A)$,इसलिए अधिकतम त्वरण का अनुपात है:
$\frac{a_{max,1}}{a_{max,2}} = \frac{\omega_1^2 A}{\omega_2^2 A} = \left( \frac{\omega_1}{\omega_2} \right)^2$
दिए गए मान $\omega_1 = 300 \ rad/s$ और $\omega_2 = 3000 \ rad/s$ रखने पर:
$\frac{a_{max,1}}{a_{max,2}} = \left( \frac{300}{3000} \right)^2 = \left( \frac{1}{10} \right)^2 = \frac{1}{100} = 1: 10^2$
अतः,सही विकल्प $B$ है।
183
PhysicsMediumMCQMHT CET · 2025
एक कण जो रैखिक $S.H.M.$ कर रहा है,उसका आवर्तकाल $8 \ s$ है। समय $t=0$ पर,यह माध्य स्थिति पर है। $1^{st}$ और $2^{nd}$ सेकंड में कण द्वारा तय की गई दूरियों का अनुपात ज्ञात कीजिए $(\cos 45^{\circ} = 1/\sqrt{2})$।
A
$1:(\sqrt{2}-1)$
B
$1:2$
C
$2:1$
D
$1:(\sqrt{2}+1)$

Solution

(A) माध्य स्थिति से शुरू होने वाले $S.H.M.$ में कण का विस्थापन $x(t) = A \sin(\omega t)$ द्वारा दिया जाता है,जहाँ $A$ आयाम है और $\omega = 2\pi/T$ है। दिया गया है $T = 8 \ s$,इसलिए $\omega = 2\pi/8 = \pi/4 \ rad/s$ है।
$t=0$ पर,$x(0) = 0$ है।
$t=1 \ s$ पर,$x(1) = A \sin(\pi/4 \times 1) = A/\sqrt{2}$ है। पहले सेकंड में तय की गई दूरी $d_1 = |x(1) - x(0)| = A/\sqrt{2}$ है।
$t=2 \ s$ पर,$x(2) = A \sin(\pi/4 \times 2) = A \sin(\pi/2) = A$ है। दूसरे सेकंड में तय की गई दूरी $d_2 = |x(2) - x(1)| = |A - A/\sqrt{2}| = A(1 - 1/\sqrt{2}) = A(\sqrt{2}-1)/\sqrt{2}$ है।
अनुपात $d_1/d_2 = (A/\sqrt{2}) / [A(\sqrt{2}-1)/\sqrt{2}] = 1/(\sqrt{2}-1)$ है।
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PhysicsMediumMCQMHT CET · 2025
एक कण माध्य स्थिति से शुरू होकर $S.H.M.$ करता है। इसका आयाम '$a$' है और इसका आवर्तकाल '$T$' है। किसी निश्चित क्षण पर,इसकी गति '$u$',अधिकतम गति $V_{\text{max}}$ की आधी है। उस क्षण पर कण का विस्थापन क्या है?
A
$\frac{2 a}{\sqrt{3}}$
B
$\frac{\sqrt{2} a}{3}$
C
$\frac{3 a}{\sqrt{2}}$
D
$\frac{\sqrt{3} a}{2}$

Solution

(D) $S.H.M.$ में '$x$' विस्थापन पर कण की गति $u = \omega \sqrt{a^2 - x^2}$ द्वारा दी जाती है।
कण की अधिकतम गति $V_{\text{max}} = a\omega$ है।
यह दिया गया है कि गति '$u$',अधिकतम गति की आधी है,इसलिए $u = \frac{V_{\text{max}}}{2} = \frac{a\omega}{2}$ है।
गति के लिए दोनों समीकरणों की तुलना करने पर: $\frac{a\omega}{2} = \omega \sqrt{a^2 - x^2}$।
दोनों पक्षों से $\omega$ को हटाने पर: $\frac{a}{2} = \sqrt{a^2 - x^2}$।
दोनों पक्षों का वर्ग करने पर: $\frac{a^2}{4} = a^2 - x^2$।
'$x^2$' के लिए व्यवस्थित करने पर: $x^2 = a^2 - \frac{a^2}{4} = \frac{3a^2}{4}$।
वर्गमूल लेने पर: $x = \frac{\sqrt{3}a}{2}$।
185
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एक अवमंदित दोलक (damped oscillator) का आयाम $2 \ s$ में अपने मूल आयाम का $\left(\frac{1}{3}\right)$ हो जाता है। यदि $6 \ s$ के बाद इसका आयाम मूल आयाम का $\left(\frac{1}{n}\right)$ गुना हो जाता है,तो $n$ का मान ज्ञात कीजिए ($n$ एक शून्येतर पूर्णांक है)।
A
$9$
B
$3$
C
$81$
D
$27$

Solution

(D) एक अवमंदित दोलक का $t$ समय पर आयाम $A(t) = A_0 e^{-bt/2m}$ द्वारा दिया जाता है।
दिया गया है कि $t = 2 \ s$ पर,$A(2) = \frac{1}{3} A_0$ है।
अतः,$\frac{1}{3} A_0 = A_0 e^{-b(2)/2m} \implies e^{-b/m} = \frac{1}{3}$ है।
हमें $t = 6 \ s$ पर आयाम ज्ञात करना है,जो $A(6) = A_0 e^{-b(6)/2m} = A_0 (e^{-b/m})^3$ है।
$e^{-b/m}$ का मान प्रतिस्थापित करने पर,हमें $A(6) = A_0 \left(\frac{1}{3}\right)^3 = A_0 \left(\frac{1}{27}\right)$ प्राप्त होता है।
इसकी तुलना $A(6) = \frac{1}{n} A_0$ से करने पर,हमें $n = 27$ प्राप्त होता है।
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एक कण $A$ आयाम के साथ $S.H.M.$ करता है और तरंग की तरंगदैर्ध्य $\lambda$ है। यदि $V$ तरंग का वेग है और $\nu$ कण का अधिकतम वेग है,तो उनके बीच का संबंध है:
A
$\nu = \frac{\lambda V}{4 \pi A}$
B
$V = \frac{\lambda \nu}{4 \pi A}$
C
$\nu = \frac{2 \pi A}{\lambda} V$
D
$V = \frac{2 \pi A}{\lambda} \nu$

Solution

(C) $y = A \sin(\omega t - kx)$ द्वारा निरूपित तरंग के लिए,तरंग का वेग $V = \frac{\omega}{k}$ होता है।
हम जानते हैं कि तरंग संख्या $k = \frac{2 \pi}{\lambda}$ होती है।
अतः,$V = \frac{\omega}{2 \pi / \lambda} = \frac{\omega \lambda}{2 \pi}$।
$S.H.M.$ में कण का अधिकतम वेग $\nu = A \omega$ द्वारा दिया जाता है।
इससे,$\omega = \frac{\nu}{A}$ प्राप्त होता है।
$V$ के व्यंजक में $\omega$ का मान रखने पर:
$V = \frac{(\nu / A) \lambda}{2 \pi} = \frac{\lambda \nu}{2 \pi A}$।
$\nu$ के लिए व्यवस्थित करने पर:
$\nu = \frac{2 \pi A}{\lambda} V$।
अतः,सही संबंध $\nu = \frac{2 \pi A}{\lambda} V$ है।
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कण की गति समीकरण $x = A \sin \omega t + B \cos \omega t$ द्वारा दी गई है। कण की गति है:
A
$(A+B)$ आयाम के साथ सरल आवर्त गति
B
$(A-B)$ आयाम के साथ सरल आवर्त गति
C
$(A^2+B^2)^{1/2}$ आयाम के साथ सरल आवर्त गति
D
सरल आवर्त गति नहीं है

Solution

(C) दिया गया गति का समीकरण: $x = A \sin \omega t + B \cos \omega t$।
इसे सरल आवर्त गति के मानक रूप $x = R \sin(\omega t + \phi)$ में व्यक्त करने के लिए,हम $\sqrt{A^2 + B^2}$ से गुणा और भाग करते हैं:
$x = \sqrt{A^2 + B^2} \left( \frac{A}{\sqrt{A^2 + B^2}} \sin \omega t + \frac{B}{\sqrt{A^2 + B^2}} \cos \omega t \right)$।
माना $\frac{A}{\sqrt{A^2 + B^2}} = \cos \phi$ और $\frac{B}{\sqrt{A^2 + B^2}} = \sin \phi$।
तब,$x = \sqrt{A^2 + B^2} (\sin \omega t \cos \phi + \cos \omega t \sin \phi)$।
त्रिकोणमितीय सर्वसमिका $\sin(a+b) = \sin a \cos b + \cos a \sin b$ का उपयोग करने पर,हमें प्राप्त होता है:
$x = \sqrt{A^2 + B^2} \sin(\omega t + \phi)$।
यह सरल आवर्त गति का मानक समीकरण है,जिसका आयाम $R = \sqrt{A^2 + B^2} = (A^2 + B^2)^{1/2}$ है।
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$0.2 \ kg$ द्रव्यमान की एक वस्तु $X$-अक्ष के अनुदिश $(\frac{25}{\pi}) \ Hz$ की आवृत्ति के साथ सरल आवर्त गति करती है। $x=0.04 \ m$ की स्थिति पर,वस्तु की गतिज ऊर्जा $1 \ J$ और स्थितिज ऊर्जा $0.6 \ J$ है। दोलन का आयाम क्या है ($m$ में)?
A
$0.06$
B
$0.6$
C
$0.08$
D
$0.8$

Solution

(C) सरल आवर्त गति में एक कण की कुल यांत्रिक ऊर्जा $E$,किसी भी स्थिति $x$ पर उसकी गतिज ऊर्जा $K$ और स्थितिज ऊर्जा $U$ का योग होती है।
$E = K + U = 1 \ J + 0.6 \ J = 1.6 \ J$.
सरल आवर्त गति में कण की स्थितिज ऊर्जा $U = \frac{1}{2} k x^2$ द्वारा दी जाती है,जहाँ $k$ बल नियतांक है।
हम जानते हैं कि $k = m \omega^2$,जहाँ $\omega = 2 \pi f$.
दिया गया है $f = \frac{25}{\pi} \ Hz$,इसलिए $\omega = 2 \pi (\frac{25}{\pi}) = 50 \ rad/s$.
अतः,$k = 0.2 \times (50)^2 = 0.2 \times 2500 = 500 \ N/m$.
वैकल्पिक रूप से,हम कुल ऊर्जा के सूत्र $E = \frac{1}{2} k A^2$ का उपयोग कर सकते हैं,जहाँ $A$ आयाम है।
$1.6 = \frac{1}{2} \times 500 \times A^2$.
$1.6 = 250 \times A^2$.
$A^2 = \frac{1.6}{250} = \frac{16}{2500} = 0.0064$.
$A = \sqrt{0.0064} = 0.08 \ m$.
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$S.H.M.$ में एक कण का विस्थापन $x = A \cos(\omega t + \pi/6)$ है। इसकी चाल किस समय पर अधिकतम होगी?
A
$\frac{\pi}{3 \omega} \text{ s}$
B
$\frac{\pi}{2 \omega} \text{ s}$
C
$\frac{\pi}{\omega} \text{ s}$
D
$\frac{\pi}{4 \omega} \text{ s}$

Solution

(A) कण का विस्थापन $x = A \cos(\omega t + \pi/6)$ है।
वेग $v$,विस्थापन का समय के सापेक्ष अवकलन है: $v = \frac{dx}{dt} = -A \omega \sin(\omega t + \pi/6)$।
चाल तब अधिकतम होती है जब वेग का परिमाण $|v|$ अधिकतम हो,जो तब होता है जब $|\sin(\omega t + \pi/6)| = 1$ हो।
यह तब होता है जब $(\omega t + \pi/6) = \pi/2$ हो।
$\omega t + \pi/6 = \pi/2$ रखने पर,हमें $\omega t = \pi/2 - \pi/6 = 3\pi/6 - \pi/6 = 2\pi/6 = \pi/3$ प्राप्त होता है।
अतः,$t = \frac{\pi}{3 \omega} \text{ s}$।
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दो कण $A$ और $B$,$T$ और $\frac{3T}{2}$ आवर्तकाल के साथ $SHM$ करते हैं। यदि वे माध्य स्थिति से शुरू करते हैं,तो जब कण $A$ दो दोलन पूरे कर लेता है,तब उनके बीच का कलांतर (phase difference) क्या होगा?
A
$\frac{\pi}{3}$
B
$\frac{\pi}{6}$
C
$\frac{4\pi}{3}$
D
$\frac{\pi}{4}$

Solution

(C) कण $A$ द्वारा दो दोलन पूरा करने में लिया गया समय $t = 2T$ है।
कण $A$ के लिए,कोणीय आवृत्ति $\omega_A = \frac{2\pi}{T}$ है।
समय $t = 2T$ पर कण $A$ की कला $\phi_A = \omega_A t = \left(\frac{2\pi}{T}\right)(2T) = 4\pi$ है।
कण $B$ के लिए,कोणीय आवृत्ति $\omega_B = \frac{2\pi}{(3T/2)} = \frac{4\pi}{3T}$ है।
समय $t = 2T$ पर कण $B$ की कला $\phi_B = \omega_B t = \left(\frac{4\pi}{3T}\right)(2T) = \frac{8\pi}{3}$ है।
उनके बीच का कलांतर $\Delta\phi = |\phi_A - \phi_B| = |4\pi - \frac{8\pi}{3}| = |\frac{12\pi - 8\pi}{3}| = \frac{4\pi}{3}$ होगा।
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एक स्प्रिंग $1 \,kg$ द्रव्यमान के साथ $S.H.M.$ करती है। स्प्रिंग का बल नियतांक $4 \,N/m$ है। यदि किसी क्षण पर इसका वेग $20 \,cm/s$ है, तो उस क्षण पर विस्थापन क्या होगा? ($S.H.M.$ का आयाम $0.4 \,m$ है)
A
$\sqrt{0.11} \,m$
B
$\sqrt{0.15} \,m$
C
$\sqrt{0.17} \,m$
D
$\sqrt{0.19} \,m$

Solution

(B) दिया गया है: द्रव्यमान $m = 1 \,kg$, बल नियतांक $k = 4 \,N/m$, वेग $v = 20 \,cm/s = 0.2 \,m/s$, आयाम $A = 0.4 \,m$.
सबसे पहले, कोणीय आवृत्ति $\omega = \sqrt{k/m} = \sqrt{4/1} = 2 \,rad/s$ की गणना करें।
$S.H.M.$ में कण का वेग $v = \omega \sqrt{A^2 - x^2}$ द्वारा दिया जाता है, जहाँ $x$ विस्थापन है।
मान रखने पर: $0.2 = 2 \sqrt{0.4^2 - x^2}$.
$2$ से विभाजित करने पर: $0.1 = \sqrt{0.16 - x^2}$.
दोनों पक्षों का वर्ग करने पर: $0.01 = 0.16 - x^2$.
$x^2$ के लिए व्यवस्थित करने पर: $x^2 = 0.16 - 0.01 = 0.15$.
अतः, विस्थापन $x = \sqrt{0.15} \,m$ है।
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एक कण चरम स्थिति से $S.H.M.$ कर रहा है। ग्राफिकल निरूपण यह दर्शाता है कि विस्थापन और त्वरण के बीच कितना कलांतर (phase difference) होता है?
A
$\pi \ rad$
B
$\frac{\pi}{2} \ rad$
C
$\frac{\pi}{4} \ rad$
D
$0 \ rad$

Solution

(A) $S.H.M.$ में,कण का विस्थापन $x(t) = A \cos(\omega t + \phi)$ द्वारा दिया जाता है।
चूंकि कण चरम स्थिति से शुरू होता है,$t = 0$ पर,$x = A$,जिसका अर्थ है $\phi = 0$। अतः,$x(t) = A \cos(\omega t)$।
त्वरण $a(t)$ विस्थापन के द्वितीय अवकलज द्वारा दिया जाता है: $a(t) = \frac{d^2x}{dt^2} = -\omega^2 A \cos(\omega t)$।
हम त्वरण को $a(t) = \omega^2 A \cos(\omega t + \pi)$ के रूप में लिख सकते हैं।
विस्थापन $(\omega t)$ और त्वरण $(\omega t + \pi)$ की कला की तुलना करने पर,कलांतर $\pi \ rad$ प्राप्त होता है।
193
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एक कण $4 \ cm$ आयाम के साथ रैखिक $S.H.M.$ निष्पादित करता है। जब यह माध्य स्थिति से $3 \ cm$ की दूरी पर होता है,तो वेग और त्वरण का परिमाण समान होता है। दोलन का आवर्तकाल क्या है?
A
$\frac{\pi}{\sqrt{7}} \ s$
B
$\frac{6 \pi}{\sqrt{7}} \ s$
C
$\frac{3 \pi}{\sqrt{7}} \ s$
D
$\frac{5 \pi}{\sqrt{7}} \ s$

Solution

(B) दिया गया है: आयाम $A = 4 \ cm$,विस्थापन $x = 3 \ cm$.
$S.H.M.$ में वेग का सूत्र $v = \omega \sqrt{A^2 - x^2}$ है।
$S.H.M.$ में त्वरण का सूत्र $a = \omega^2 x$ है।
प्रश्न के अनुसार,वेग का परिमाण और त्वरण का परिमाण समान है: $|v| = |a|$.
$\omega \sqrt{A^2 - x^2} = \omega^2 x$.
$\sqrt{A^2 - x^2} = \omega x$.
मान रखने पर: $\sqrt{4^2 - 3^2} = \omega (3)$.
$\sqrt{16 - 9} = 3 \omega$.
$\sqrt{7} = 3 \omega$.
$\omega = \frac{\sqrt{7}}{3} \ rad/s$.
आवर्तकाल $T$ का सूत्र $T = \frac{2 \pi}{\omega}$ है।
$T = \frac{2 \pi}{\frac{\sqrt{7}}{3}} = \frac{6 \pi}{\sqrt{7}} \ s$.
194
PhysicsMediumMCQMHT CET · 2025
एक सरल लोलक अपनी माध्य स्थिति $(x=0)$ से '$a$' आयाम और '$T$' आवर्तकाल के साथ सरल आवर्त गति करना शुरू करता है। $x=\frac{a}{2}$ पर लोलक के वेग का परिमाण क्या है?
A
$\frac{3 \pi^2 a}{T}$
B
$\frac{\sqrt{3} \pi a}{2 T}$
C
$\frac{\pi a}{T}$
D
$\frac{\sqrt{3} \pi a}{T}$

Solution

(D) सरल आवर्त गति $(SHM)$ में कण का विस्थापन $x = a \sin(\omega t)$ द्वारा दिया जाता है।
कण का वेग $v = \omega \sqrt{a^2 - x^2}$ सूत्र द्वारा प्राप्त होता है।
यहाँ आवर्तकाल $T$ दिया गया है,इसलिए कोणीय आवृत्ति $\omega = \frac{2\pi}{T}$ होगी।
$x = \frac{a}{2}$ पर वेग:
$v = \frac{2\pi}{T} \sqrt{a^2 - (\frac{a}{2})^2}$
$v = \frac{2\pi}{T} \sqrt{a^2 - \frac{a^2}{4}}$
$v = \frac{2\pi}{T} \sqrt{\frac{3a^2}{4}}$
$v = \frac{2\pi}{T} \cdot \frac{\sqrt{3}a}{2}$
$v = \frac{\sqrt{3} \pi a}{T}$.
195
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$200 \text{ g}$ द्रव्यमान का एक बिंदु कण $0.2 \text{ m}$ के आयाम के साथ $S.H.M.$ कर रहा है। जब कण माध्य स्थिति से गुजरता है,तो उसकी गतिज ऊर्जा $16 \times 10^{-3} \text{ J}$ होती है। इस कण की गति का समीकरण क्या है? (दोलन की प्रारंभिक कला $= 0^{\circ}$)
A
$Y = 0.2 \sin(4t)$
B
$Y = 0.2 \sin\left(\frac{t}{4}\right)$
C
$Y = 0.2 \sin\left(\frac{t}{2}\right)$
D
$Y = 0.2 \sin(2t)$

Solution

(D) दिया गया है: द्रव्यमान $m = 200 \text{ g} = 0.2 \text{ kg}$,आयाम $A = 0.2 \text{ m}$,माध्य स्थिति पर गतिज ऊर्जा $K_{max} = 16 \times 10^{-3} \text{ J}$।
माध्य स्थिति पर,वेग अधिकतम होता है,$v_{max} = A\omega$।
अधिकतम गतिज ऊर्जा का सूत्र $K_{max} = \frac{1}{2} m v_{max}^2 = \frac{1}{2} m (A\omega)^2$ है।
मान रखने पर: $16 \times 10^{-3} = \frac{1}{2} \times 0.2 \times (0.2 \times \omega)^2$।
$16 \times 10^{-3} = 0.1 \times 0.04 \times \omega^2$।
$16 \times 10^{-3} = 0.004 \times \omega^2$।
$\omega^2 = \frac{16 \times 10^{-3}}{4 \times 10^{-3}} = 4$।
$\omega = 2 \text{ rad/s}$।
$S.H.M.$ के लिए सामान्य समीकरण $Y = A \sin(\omega t + \phi)$ है।
प्रारंभिक कला $\phi = 0^{\circ}$ दी गई है,इसलिए $Y = 0.2 \sin(2t)$ प्राप्त होता है।
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एक ऊर्ध्वाधर स्प्रिंग $6 \ s$ के आवर्तकाल के साथ दोलन करती है जब इससे $m$ द्रव्यमान लटकाया जाता है। जब द्रव्यमान स्थिर होता है,तो स्प्रिंग में कितना खिंचाव (विस्थापन) होता है ($m$ में)? (गुरुत्वीय त्वरण $g = \pi^2 = 10 \ m/s^2$ लें)
A
$10$
B
$3$
C
$6$
D
$9$

Solution

(D) एक ऊर्ध्वाधर स्प्रिंग-द्रव्यमान प्रणाली का आवर्तकाल $T = 2\pi \sqrt{\frac{m}{k}}$ द्वारा दिया जाता है।
दिया गया है $T = 6 \ s$,इसलिए $6 = 2\pi \sqrt{\frac{m}{k}}$,जिसे सरल करने पर $3 = \pi \sqrt{\frac{m}{k}}$ प्राप्त होता है।
दोनों पक्षों का वर्ग करने पर,$9 = \pi^2 \frac{m}{k}$ प्राप्त होता है।
चूंकि $g = \pi^2$,हम लिख सकते हैं $9 = g \frac{m}{k}$,या $\frac{m}{k} = \frac{9}{g}$।
जब द्रव्यमान स्थिर होता है,तो स्प्रिंग में खिंचाव $x$ इस प्रकार होता है कि स्प्रिंग बल और गुरुत्वाकर्षण बल बराबर हो जाते हैं: $kx = mg$।
अतः,खिंचाव $x = \frac{mg}{k} = m \cdot \frac{g}{k}$।
$\frac{m}{k} = \frac{9}{g}$ प्रतिस्थापित करने पर,हमें $x = \frac{g}{k} \cdot m = \frac{9}{g} \cdot g = 9 \ m$ प्राप्त होता है।
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$x \ g$ द्रव्यमान को एक हल्की स्प्रिंग से लटकाया गया है। इसे नीचे की दिशा में खींचकर छोड़ा जाता है ताकि द्रव्यमान $T$ आवर्तकाल के साथ $S.H.M.$ करे। यदि द्रव्यमान को $Y \ g$ से बढ़ा दिया जाए,तो आवर्तकाल $4T/3$ हो जाता है। $Y/x$ का अनुपात क्या है?
A
$7:9$
B
$5:4$
C
$3:2$
D
$8:7$

Solution

(A) $k$ बल नियतांक वाली स्प्रिंग से जुड़े $m$ द्रव्यमान का आवर्तकाल $T = 2\pi \sqrt{m/k}$ द्वारा दिया जाता है।
प्रारंभिक द्रव्यमान $x$ के लिए,आवर्तकाल $T = 2\pi \sqrt{x/k}$ है।
जब द्रव्यमान को $Y \ g$ से बढ़ाया जाता है,तो नया द्रव्यमान $(x + Y)$ हो जाता है और नया आवर्तकाल $T' = 4T/3$ हो जाता है।
अतः,$T' = 2\pi \sqrt{(x + Y)/k} = 4T/3$.
पहले समीकरण से $T$ का मान रखने पर: $2\pi \sqrt{(x + Y)/k} = (4/3) \cdot 2\pi \sqrt{x/k}$.
दोनों पक्षों का वर्ग करने पर: $(x + Y)/k = (16/9) \cdot (x/k)$.
दोनों पक्षों से $k$ को हटाने पर: $x + Y = (16/9)x$.
$Y$ का मान ज्ञात करने के लिए पुनर्व्यवस्थित करने पर: $Y = (16/9)x - x = (7/9)x$.
इसलिए,अनुपात $Y/x = 7/9$ है।
198
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एक द्रव्यमान $m$ को नगण्य द्रव्यमान वाली स्प्रिंग से लटकाया गया है। स्प्रिंग को थोड़ा खींचकर छोड़ दिया जाता है,जिससे द्रव्यमान $T$ आवर्तकाल के साथ $S.H.M.$ करता है। यदि द्रव्यमान में $m_0$ की वृद्धि की जाती है,तो नया आवर्तकाल $\frac{5T}{4}$ हो जाता है। अनुपात $\frac{m_0}{m}$ है
A
$\frac{3}{4}$
B
$\frac{4}{3}$
C
$\frac{9}{16}$
D
$\frac{16}{9}$

Solution

(C) स्प्रिंग नियतांक $k$ वाली स्प्रिंग से जुड़े $m$ द्रव्यमान का आवर्तकाल $T = 2\pi \sqrt{\frac{m}{k}}$ द्वारा दिया जाता है।
प्रारंभिक द्रव्यमान $m$ के लिए,$T = 2\pi \sqrt{\frac{m}{k}}$.
जब द्रव्यमान में $m_0$ की वृद्धि की जाती है,तो नया द्रव्यमान $m' = m + m_0$ हो जाता है। नया आवर्तकाल $T'$ हमें $\frac{5T}{4}$ दिया गया है।
अतः,$T' = 2\pi \sqrt{\frac{m + m_0}{k}} = \frac{5}{4} T$.
$T$ का मान रखने पर: $2\pi \sqrt{\frac{m + m_0}{k}} = \frac{5}{4} \times 2\pi \sqrt{\frac{m}{k}}$.
दोनों पक्षों का वर्ग करने पर: $\frac{m + m_0}{k} = \frac{25}{16} \frac{m}{k}$.
दोनों पक्षों से $k$ को हटाने पर: $m + m_0 = \frac{25}{16} m$.
$m_0$ के लिए हल करने पर: $m_0 = \frac{25}{16} m - m = \frac{9}{16} m$.
इसलिए,अनुपात $\frac{m_0}{m} = \frac{9}{16}$ है।
199
PhysicsEasyMCQMHT CET · 2025
एक ही स्थान पर दो सरल लोलकों की आवृत्तियों का अनुपात $4: 3$ है। उनकी संबंधित लंबाइयों का अनुपात क्या है?
A
$3: 4$
B
$4: 3$
C
$9: 16$
D
$16: 9$

Solution

(C) सरल लोलक की आवृत्ति $f$ का सूत्र $f = \frac{1}{2\pi} \sqrt{\frac{g}{L}}$ है,जहाँ $g$ गुरुत्वीय त्वरण है और $L$ लोलक की लंबाई है।
चूंकि लोलक एक ही स्थान पर हैं,इसलिए $g$ स्थिर रहेगा।
अतः,$f \propto \frac{1}{\sqrt{L}}$,जिसका अर्थ है $f^2 \propto \frac{1}{L}$ या $L \propto \frac{1}{f^2}$।
आवृत्तियों का अनुपात $f_1 : f_2 = 4 : 3$ दिया गया है,इसलिए $\frac{f_1}{f_2} = \frac{4}{3}$।
उनकी लंबाइयों का अनुपात $\frac{L_1}{L_2} = \frac{f_2^2}{f_1^2} = \left( \frac{f_2}{f_1} \right)^2$ होगा।
मान रखने पर,$\frac{L_1}{L_2} = \left( \frac{3}{4} \right)^2 = \frac{9}{16}$।
अतः,उनकी लंबाइयों का अनुपात $9: 16$ है।
200
PhysicsMediumMCQMHT CET · 2025
एक वलय (ring) का उसके केंद्र से गुजरने वाली और उसके तल के लंबवत अक्ष के परितः जड़त्व आघूर्ण $I$ है। यह $\omega$ कोणीय वेग के साथ घूम रही है। एक अन्य समान वलय को धीरे से उस पर रखा जाता है ताकि उनके केंद्र संपाती हो जाएं। यदि दोनों वलय एक ही अक्ष के परितः घूम रहे हैं,तो गतिज ऊर्जा में हुई हानि है:
A
$\frac{I \omega^2}{16}$
B
$\frac{I \omega^2}{8}$
C
$\frac{I \omega^2}{4}$
D
$\frac{I \omega^2}{2}$

Solution

(C) प्रारंभिक स्थिति: जड़त्व आघूर्ण $I_1 = I$,कोणीय वेग $\omega_1 = \omega$। प्रारंभिक गतिज ऊर्जा $K_i = \frac{1}{2} I \omega^2$।
चूंकि निकाय पर कोई बाह्य बल आघूर्ण (torque) कार्य नहीं कर रहा है,इसलिए कोणीय संवेग संरक्षित रहता है: $L_i = L_f$।
$I \omega = (I + I) \omega_f \implies I \omega = 2I \omega_f \implies \omega_f = \frac{\omega}{2}$।
अंतिम गतिज ऊर्जा $K_f = \frac{1}{2} (2I) (\frac{\omega}{2})^2 = I \cdot \frac{\omega^2}{4} = \frac{I \omega^2}{4}$।
गतिज ऊर्जा में हानि $\Delta K = K_i - K_f = \frac{1}{2} I \omega^2 - \frac{1}{4} I \omega^2 = \frac{1}{4} I \omega^2$।
201
PhysicsMediumMCQMHT CET · 2025
जब $\lambda$ तरंगदैर्ध्य का प्रकाश एक फोटोसेल के उत्सर्जक पर गिरता है,तो उत्सर्जित फोटोइलेक्ट्रॉन की अधिकतम गति $V$ होती है। यदि आपतित तरंगदैर्ध्य को बदलकर $2\lambda / 3$ कर दिया जाए,तो उत्सर्जित फोटोइलेक्ट्रॉन की अधिकतम गति होगी:
A
$\sqrt{3/2} \,V$ से अधिक
B
$\sqrt{3/2} \,V$ से कम
C
$\sqrt{3/2} \,V$ के बराबर
D
$V$ के बराबर

Solution

(A) आइंस्टीन के प्रकाश-विद्युत समीकरण के अनुसार: $K_{max} = \frac{hc}{\lambda} - \phi$,जहाँ $K_{max} = \frac{1}{2}mv^2$ है।
तरंगदैर्ध्य $\lambda$ के लिए: $\frac{1}{2}mV^2 = \frac{hc}{\lambda} - \phi$ --- $(1)$
तरंगदैर्ध्य $\lambda' = \frac{2\lambda}{3}$ के लिए: $\frac{1}{2}mv'^2 = \frac{hc}{2\lambda/3} - \phi = \frac{3hc}{2\lambda} - \phi$ --- $(2)$
समीकरण $(1)$ से,$\frac{hc}{\lambda} = \frac{1}{2}mV^2 + \phi$ है।
इसे $(2)$ में प्रतिस्थापित करने पर: $\frac{1}{2}mv'^2 = \frac{3}{2}(\frac{1}{2}mV^2 + \phi) - \phi = \frac{3}{4}mV^2 + \frac{1}{2}\phi$ प्राप्त होता है।
चूँकि $\phi > 0$ है,इसलिए $\frac{1}{2}mv'^2 > \frac{3}{4}mV^2$ होगा।
अतः $v'^2 > \frac{3}{2}V^2$,जिसका अर्थ है कि $v' > \sqrt{\frac{3}{2}}V$।
202
PhysicsMediumMCQMHT CET · 2025
जब किसी धातु की सतह पर धातु के कार्य फलन (work function) की दोगुनी और तीन गुनी ऊर्जा वाले फोटॉन एक के बाद एक आपतित होते हैं,तो उत्सर्जित फोटोइलेक्ट्रॉन के अधिकतम वेग क्रमशः $V_1$ और $V_2$ हैं। अनुपात $V_1: V_2$ है
A
$1: \sqrt{2}$
B
$1: 2$
C
$\sqrt{2}: 1$
D
$\sqrt{3}: 1$

Solution

(A) आइंस्टीन के प्रकाश-विद्युत समीकरण के अनुसार,उत्सर्जित फोटोइलेक्ट्रॉन की अधिकतम गतिज ऊर्जा $K_{max} = E - \Phi$ द्वारा दी जाती है,जहाँ $E$ आपतित फोटॉन की ऊर्जा है और $\Phi$ धातु का कार्य फलन है।
स्थिति $1$: जब आपतित ऊर्जा $E_1 = 2\Phi$ हो,तो अधिकतम गतिज ऊर्जा $K_1 = 2\Phi - \Phi = \Phi$ होती है।
चूँकि $K_1 = \frac{1}{2} m V_1^2$,इसलिए $\frac{1}{2} m V_1^2 = \Phi$,जिसका अर्थ है $V_1 = \sqrt{\frac{2\Phi}{m}}$।
स्थिति $2$: जब आपतित ऊर्जा $E_2 = 3\Phi$ हो,तो अधिकतम गतिज ऊर्जा $K_2 = 3\Phi - \Phi = 2\Phi$ होती है।
चूँकि $K_2 = \frac{1}{2} m V_2^2$,इसलिए $\frac{1}{2} m V_2^2 = 2\Phi$,जिसका अर्थ है $V_2 = \sqrt{\frac{4\Phi}{m}}$।
अनुपात $V_1: V_2$ लेने पर:
$\frac{V_1}{V_2} = \frac{\sqrt{\frac{2\Phi}{m}}}{\sqrt{\frac{4\Phi}{m}}} = \sqrt{\frac{2}{4}} = \sqrt{\frac{1}{2}} = \frac{1}{\sqrt{2}}$।
अतः,अनुपात $V_1: V_2$ का मान $1: \sqrt{2}$ है।
203
PhysicsEasyMCQMHT CET · 2025
प्रकाश-विद्युत प्रभाव (photoelectric effect) प्रयोग से,सही कथन का चयन करें।
A
प्रकाश-विद्युत प्रभाव को प्रकाश के तरंग सिद्धांत का उपयोग करके समझाया जा सकता है।
B
फोटोइलेक्ट्रॉन की अधिकतम गतिज ऊर्जा आपतित प्रकाश की तीव्रता पर निर्भर करती है।
C
निरोधी विभव (stopping potential) केवल धातु के कार्य फलन (work function) पर निर्भर करता है।
D
जैसे-जैसे आपतित प्रकाश की तीव्रता बढ़ती है,संतृप्त धारा (saturation current) बढ़ती है।

Solution

(D) आइंस्टीन के प्रकाश-विद्युत समीकरण के अनुसार,$K_{max} = h\nu - \Phi_0$,जहाँ $K_{max}$ अधिकतम गतिज ऊर्जा है,$h\nu$ आपतित फोटॉन की ऊर्जा है,और $\Phi_0$ धातु का कार्य फलन है।
$1$. प्रकाश का तरंग सिद्धांत प्रकाश-विद्युत प्रभाव को समझाने में विफल रहता है क्योंकि यह इलेक्ट्रॉनों के तात्कालिक उत्सर्जन या देहली आवृत्ति (threshold frequency) के अस्तित्व को स्पष्ट नहीं कर सकता है।
$2$. $K_{max}$ आपतित प्रकाश की आवृत्ति $(
u)$ पर निर्भर करता है,न कि उसकी तीव्रता पर।
$3$. निरोधी विभव $(V_s)$ को $eV_s = K_{max} = h\nu - \Phi_0$ द्वारा दिया जाता है। अतः,यह आपतित प्रकाश की आवृत्ति और धातु के कार्य फलन दोनों पर निर्भर करता है।
$4$. संतृप्त धारा प्रति सेकंड उत्सर्जित फोटोइलेक्ट्रॉनों की संख्या के सीधे आनुपातिक होती है,जो आपतित प्रकाश की तीव्रता के सीधे आनुपातिक होती है। इसलिए,जैसे-जैसे तीव्रता बढ़ती है,संतृप्त धारा बढ़ती है।
204
PhysicsMediumMCQMHT CET · 2025
जब एक प्रकाश-संवेदी धातु की सतह को $\lambda_1$ तरंगदैर्ध्य के विकिरण से प्रकाशित किया जाता है,तो निरोधी विभव (stopping potential) $V_1$ होता है। यदि उसी सतह को $3\lambda_1$ तरंगदैर्ध्य के विकिरण से प्रकाशित किया जाता है,तो निरोधी विभव $\frac{V_1}{6}$ हो जाता है। प्रकाश-संवेदी धातु की सतह के लिए देहली तरंगदैर्ध्य (threshold wavelength) क्या है?
A
$\frac{3}{2} \lambda_1$
B
$2 \lambda_1$
C
$5 \lambda_1$
D
$6 \lambda_1$

Solution

(C) आइंस्टीन के प्रकाश-विद्युत समीकरण के अनुसार,निरोधी विभव $V_s$ इस प्रकार दिया जाता है: $eV_s = \frac{hc}{\lambda} - \Phi$,जहाँ $\Phi = \frac{hc}{\lambda_0}$ कार्य फलन है और $\lambda_0$ देहली तरंगदैर्ध्य है।
प्रथम स्थिति के लिए: $eV_1 = \frac{hc}{\lambda_1} - \frac{hc}{\lambda_0} = hc \left( \frac{1}{\lambda_1} - \frac{1}{\lambda_0} \right)$ --- $(1)$
दूसरी स्थिति के लिए: $e \left( \frac{V_1}{6} \right) = \frac{hc}{3\lambda_1} - \frac{hc}{\lambda_0} = hc \left( \frac{1}{3\lambda_1} - \frac{1}{\lambda_0} \right)$ --- $(2)$
समीकरण $(1)$ को समीकरण $(2)$ से विभाजित करने पर:
$6 = \frac{\frac{1}{\lambda_1} - \frac{1}{\lambda_0}}{\frac{1}{3\lambda_1} - \frac{1}{\lambda_0}}$
$6 \left( \frac{1}{3\lambda_1} - \frac{1}{\lambda_0} \right) = \frac{1}{\lambda_1} - \frac{1}{\lambda_0}$
$\frac{2}{\lambda_1} - \frac{6}{\lambda_0} = \frac{1}{\lambda_1} - \frac{1}{\lambda_0}$
$\frac{2}{\lambda_1} - \frac{1}{\lambda_1} = \frac{6}{\lambda_0} - \frac{1}{\lambda_0}$
$\frac{1}{\lambda_1} = \frac{5}{\lambda_0}$
$\lambda_0 = 5\lambda_1$. अतः,सही विकल्प $C$ है।
205
PhysicsMediumMCQMHT CET · 2025
एक निश्चित धातु से देहली आवृत्ति $v$ पर प्रकाश-विद्युत उत्सर्जन होता है। यदि $4v$ आवृत्ति का विकिरण धातु की प्लेट पर आपतित होता है,तो उत्सर्जित प्रकाश-इलेक्ट्रॉनों का अधिकतम वेग क्या होगा? ($m=$ प्रकाश-इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान,$h=$ प्लांक नियतांक)
A
$\sqrt{\frac{6hv}{m}}$
B
$\sqrt{\frac{3hv}{m}}$
C
$\sqrt{\frac{hv}{m}}$
D
$\sqrt{\frac{5hv}{m}}$

Solution

(A) आइंस्टीन के प्रकाश-विद्युत समीकरण के अनुसार,उत्सर्जित प्रकाश-इलेक्ट्रॉनों की अधिकतम गतिज ऊर्जा $K_{max} = E - \Phi$ द्वारा दी जाती है,जहाँ $E$ आपतित फोटॉन की ऊर्जा है और $\Phi$ धातु का कार्य फलन है।
चूंकि देहली आवृत्ति $v$ है,इसलिए कार्य फलन $\Phi = hv$ है।
$4v$ आवृत्ति वाले आपतित विकिरण की ऊर्जा $E = h(4v) = 4hv$ है।
इन मानों को समीकरण में रखने पर:
$K_{max} = 4hv - hv = 3hv$.
चूंकि $K_{max} = \frac{1}{2}mv_{max}^2$,इसलिए:
$\frac{1}{2}mv_{max}^2 = 3hv$.
$v_{max}$ के लिए हल करने पर:
$v_{max}^2 = \frac{6hv}{m}$.
$v_{max} = \sqrt{\frac{6hv}{m}}$.
206
PhysicsMediumMCQMHT CET · 2025
दो अलग-अलग प्रकाश-संवेदी पदार्थों के लिए,जिनके कार्य फलन (work function) क्रमशः $\phi$ और $2 \phi$ हैं,उन्हें इलेक्ट्रॉनों का उत्सर्जन करने के लिए पर्याप्त ऊर्जा वाले प्रकाश से प्रकाशित किया जाता है। यदि इन दो पदार्थों के लिए निरोधी विभव (stopping potential) $(V_s)$ बनाम आवृत्ति $(\nu)$ का ग्राफ खींचा जाता है,तो इन दो पदार्थों के लिए ग्राफ की ढाल (slope) का अनुपात क्या होगा?
A
$1: 1$
B
$1: 2$
C
$1: 4$
D
$4: 1$

Solution

(A) आइंस्टीन के प्रकाश-विद्युत समीकरण के अनुसार,निरोधी विभव $V_s$ को इस प्रकार दिया जाता है:
$eV_s = h\nu - \phi$
$V_s = (h/e)\nu - (\phi/e)$
इसे एक सीधी रेखा के समीकरण $y = mx + c$ के साथ तुलना करने पर,हमें ढाल $m = h/e$ प्राप्त होती है।
यहाँ,$h$ प्लांक नियतांक है और $e$ इलेक्ट्रॉन का आवेश है।
चूंकि $h$ और $e$ दोनों सार्वभौमिक नियतांक हैं,निरोधी विभव बनाम आवृत्ति के ग्राफ की ढाल पदार्थ के कार्य फलन $\phi$ से स्वतंत्र होती है।
इसलिए,दोनों पदार्थों के लिए ढाल समान है,अर्थात $h/e$।
अतः,ढाल का अनुपात $1: 1$ है।
207
PhysicsMediumMCQMHT CET · 2025
ग्राफ एक धातु की प्लेट पर आपतित विकिरण की आवृत्ति के साथ निरोधी विभव (stopping potential) के परिवर्तन को दर्शाता है। प्लांक नियतांक का मान क्या है? [$e=$ फोटोइलेक्ट्रॉन पर आवेश].
Question diagram
A
$\frac{e(V_2-V_1)}{\nu_2-\nu_1}$
B
$\frac{e(V_2-V_1)}{\nu_2+\nu_1}$
C
$\frac{e(V_1+V_2)}{\nu_2-\nu_1}$
D
$\frac{e(V_1-V_2)}{\nu_2-\nu_1}$

Solution

(A) आइंस्टीन के प्रकाश-विद्युत समीकरण के अनुसार,निरोधी विभव $V_s$ और आपतित विकिरण की आवृत्ति $\nu$ के बीच संबंध निम्न है:
$eV_s = h\nu - \phi$
जहाँ $h$ प्लांक नियतांक है,$e$ इलेक्ट्रॉन का आवेश है,और $\phi$ धातु का कार्य फलन (work function) है।
$V_s$ के लिए समीकरण को पुनर्व्यवस्थित करने पर:
$V_s = \frac{h}{e}\nu - \frac{\phi}{e}$
यह एक सीधी रेखा का समीकरण $y = mx + c$ है,जहाँ ढाल (slope) $m = \frac{h}{e}$ है।
दिए गए ग्राफ से,दो बिंदुओं $( \nu_1, V_1 )$ और $( \nu_2, V_2 )$ का उपयोग करके रेखा की ढाल की गणना की जा सकती है:
ढाल $= \frac{V_2 - V_1}{\nu_2 - \nu_1}$
ढाल के लिए दोनों समीकरणों की तुलना करने पर:
$\frac{h}{e} = \frac{V_2 - V_1}{\nu_2 - \nu_1}$
अतः,प्लांक नियतांक $h$ का मान है:
$h = \frac{e(V_2 - V_1)}{\nu_2 - \nu_1}$
208
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जब एक धातु की सतह को $\lambda_1$ और $\lambda_2$ तरंगदैर्ध्य के प्रकाश से प्रकाशित किया जाता है,तो उत्सर्जित फोटोइलेक्ट्रॉन का अधिकतम वेग क्रमशः $V$ और $2V$ होता है। धातु का कार्य फलन (work function) ज्ञात कीजिए ($h=$ प्लांक नियतांक,$c=$ प्रकाश का वेग,$\lambda_1 > \lambda_2$)।
A
$\frac{hc}{2 \lambda_1 \lambda_2}(\lambda_1 - \lambda_2)$
B
$\frac{hc}{\lambda_1 \lambda_2}(\lambda_1 - \lambda_2)$
C
$\frac{hc}{\lambda_1 \lambda_2}(\lambda_1 + \lambda_2)$
D
$\frac{hc}{3 \lambda_1 \lambda_2}(4 \lambda_2 - \lambda_1)$

Solution

(D) आइंस्टीन के प्रकाश-विद्युत समीकरण के अनुसार: $\frac{hc}{\lambda} = \Phi + K_{max}$,जहाँ $\Phi$ कार्य फलन है और $K_{max} = \frac{1}{2}mv^2$ है।
तरंगदैर्ध्य $\lambda_1$ और वेग $V$ के लिए: $\frac{hc}{\lambda_1} = \Phi + \frac{1}{2}mV^2$ --- $(1)$
तरंगदैर्ध्य $\lambda_2$ और वेग $2V$ के लिए: $\frac{hc}{\lambda_2} = \Phi + \frac{1}{2}m(2V)^2 = \Phi + 2mV^2$ --- $(2)$
समीकरण $(1)$ से,$\frac{1}{2}mV^2 = \frac{hc}{\lambda_1} - \Phi$। इसे $4$ से गुणा करने पर,$2mV^2 = \frac{4hc}{\lambda_1} - 4\Phi$ प्राप्त होता है।
इस मान को $(2)$ में रखने पर: $\frac{hc}{\lambda_2} = \Phi + \frac{4hc}{\lambda_1} - 4\Phi$।
$\frac{hc}{\lambda_2} = \frac{4hc}{\lambda_1} - 3\Phi$।
$3\Phi = \frac{4hc}{\lambda_1} - \frac{hc}{\lambda_2} = hc \left( \frac{4\lambda_2 - \lambda_1}{\lambda_1 \lambda_2} \right)$।
$\Phi = \frac{hc}{3 \lambda_1 \lambda_2} (4 \lambda_2 - \lambda_1)$।
209
PhysicsMediumMCQMHT CET · 2025
यदि एक प्रकाश-विद्युत प्रयोग में आपतित प्रकाश की आवृत्ति को दोगुना कर दिया जाए,तो निरोधी विभव (stopping potential)
A
दोगुना हो जाएगा।
B
आधा हो जाएगा।
C
दोगुने से अधिक हो जाएगा।
D
दोगुने से कम हो जाएगा।

Solution

(C) आइंस्टीन के प्रकाश-विद्युत समीकरण के अनुसार,उत्सर्जित प्रकाश-इलेक्ट्रॉनों की अधिकतम गतिज ऊर्जा $K_{max} = h\nu - \phi$ द्वारा दी जाती है,जहाँ $h$ प्लांक नियतांक है,$\nu$ आपतित प्रकाश की आवृत्ति है और $\phi$ धातु का कार्य फलन है।
चूंकि निरोधी विभव $V_s$ का अधिकतम गतिज ऊर्जा के साथ संबंध $K_{max} = eV_s$ है,इसलिए $eV_s = h\nu - \phi$ या $V_s = \frac{h\nu}{e} - \frac{\phi}{e}$ होता है।
प्रारंभ में,मान लीजिए आवृत्ति $\nu_1$ है और निरोधी विभव $V_{s1} = \frac{h\nu_1}{e} - \frac{\phi}{e}$ है।
जब आवृत्ति को दोगुना किया जाता है,$\nu_2 = 2\nu_1$,तो नया निरोधी विभव $V_{s2} = \frac{h(2\nu_1)}{e} - \frac{\phi}{e} = \frac{2h\nu_1}{e} - \frac{\phi}{e}$ होता है।
$V_{s2}$ की $V_{s1}$ के साथ तुलना करने पर,हम देखते हैं कि $V_{s2} = 2V_{s1} + \frac{\phi}{e}$।
चूंकि $\frac{\phi}{e} > 0$,इसलिए यह स्पष्ट है कि $V_{s2} > 2V_{s1}$।
अतः,निरोधी विभव दोगुने से अधिक हो जाएगा।
210
PhysicsMediumMCQMHT CET · 2025
थ्रेशोल्ड आवृत्ति से $3$ गुना आवृत्ति वाला प्रकाश एक प्रकाश-संवेदी पदार्थ पर आपतित होता है। यदि आपतित आवृत्ति को $\left(\frac{1}{4}\right)^{\text{th}}$ कर दिया जाए और तीव्रता को तीन गुना कर दिया जाए,तो प्रकाश-विद्युत धारा
A
बढ़ेगी
B
घटेगी
C
$\left(\frac{1}{3}\right)^{\text{rd}}$ हो जाएगी
D
शून्य हो जाएगी

Solution

(D) पदार्थ की थ्रेशोल्ड आवृत्ति $\nu_0$ है। प्रारंभिक आपतित आवृत्ति $\nu_1 = 3\nu_0$ है।
जब आपतित आवृत्ति को बदलकर $\nu_2 = \frac{1}{4} \nu_1 = \frac{1}{4} (3\nu_0) = 0.75 \nu_0$ कर दिया जाता है।
प्रकाश-विद्युत प्रभाव होने के लिए,आपतित आवृत्ति थ्रेशोल्ड आवृत्ति से अधिक या उसके बराबर $(\nu \ge \nu_0)$ होनी चाहिए।
चूंकि नई आवृत्ति $\nu_2 = 0.75 \nu_0$,थ्रेशोल्ड आवृत्ति $\nu_0$ से कम है,इसलिए आपतित प्रकाश की तीव्रता चाहे कितनी भी हो,कोई भी फोटोइलेक्ट्रॉन उत्सर्जित नहीं होगा।
अतः,प्रकाश-विद्युत धारा शून्य हो जाएगी।
211
PhysicsMediumMCQMHT CET · 2025
ग्राफ चार अलग-अलग विकिरणों के लिए एनोड विभव के साथ फोटोकरंट में परिवर्तन को दर्शाता है। मान लीजिए $I_a, I_b, I_c$ और $I_d$ तीव्रताएँ हैं और $f_a, f_b, f_c$ और $f_d$ क्रमशः वक्र $a, b, c$ और $d$ के लिए आवृत्तियाँ हैं,तो
Question diagram
A
$f_{b}>f_{a}, f_{b}=f_{c}, I_{c}=I_{d}$
B
$f_{b}=f_{a}, f_{b}>f_{c}, I_{c}>I_{d}$
C
$f_{b} < f_{a}, f_{b} < f_{c}, I_{c} < I_{d}$
D
$f_{b} \leqslant f_{a}, f_{b}>f_{c}, I_{c}=I_{d}$

Solution

(A) $1$. आवृत्ति $(f)$: निरोधी विभव $(V_0)$ वह विभव है जिस पर फोटोकरंट शून्य हो जाता है। यह $eV_0 = hf - \phi$ द्वारा दिया जाता है,जहाँ $\phi$ कार्य फलन है। अधिक ऋणात्मक निरोधी विभव आपतित विकिरण की उच्च आवृत्ति को इंगित करता है।
ग्राफ से,निरोधी विभव $V_{0a} = V_{0b} < V_{0c} < V_{0d}$ हैं।
इसलिए,$f_a = f_b < f_c < f_d$ है।
$2$. तीव्रता $(I)$: संतृप्ति धारा आपतित विकिरण की तीव्रता के सीधे आनुपातिक होती है। ग्राफ से,वक्र $c$ और $d$ के लिए संतृप्ति धारा समान है,जबकि $a$ और $b$ के लिए संतृप्ति धारा कम है।
अतः,$I_c = I_d$ और $I_a < I_b < I_c = I_d$ है।
दिए गए विकल्पों की तुलना करने पर,विकल्प $A$ व्युत्पन्न संबंधों के साथ सबसे अधिक सुसंगत है,विशेष रूप से $f_b = f_a$ (चूंकि $f_a = f_b$) और $I_c = I_d$।
212
PhysicsEasyMCQMHT CET · 2025
सीज़ियम $(Cs)$, पोटैशियम $(K)$ और सोडियम $(Na)$ के कार्य फलन (work functions) क्रमशः $2.14 \ eV$, $2.30 \ eV$ और $2.75 \ eV$ हैं। यदि आपतित विद्युतचुंबकीय विकिरण की ऊर्जा $2.41 \ eV$ है, तो इनमें से कौन सी प्रकाश-संवेदी (photosensitive) सतहें फोटोइलेक्ट्रॉन उत्सर्जित कर सकती हैं?
A
केवल $Na$
B
केवल $K$
C
$K$ और $Cs$ दोनों
D
$Cs$ और $Na$ दोनों

Solution

(C) प्रकाश-विद्युत उत्सर्जन केवल तभी होता है जब आपतित फोटॉन की ऊर्जा $(E)$ धातु की सतह के कार्य फलन $(\Phi_0)$ से अधिक या उसके बराबर हो।
दी गई आपतित ऊर्जा $E = 2.41 \ eV$ है।
कार्य फलन इस प्रकार हैं:
$Cs$ के लिए: $\Phi_0 = 2.14 \ eV$
$K$ के लिए: $\Phi_0 = 2.30 \ eV$
$Na$ के लिए: $\Phi_0 = 2.75 \ eV$
$E$ की $\Phi_0$ के साथ तुलना करने पर:
$Cs$ के लिए: $2.41 \ eV > 2.14 \ eV$ (उत्सर्जन होगा)
$K$ के लिए: $2.41 \ eV > 2.30 \ eV$ (उत्सर्जन होगा)
$Na$ के लिए: $2.41 \ eV < 2.75 \ eV$ (उत्सर्जन नहीं होगा)
अतः, $Cs$ और $K$ दोनों सतहें फोटोइलेक्ट्रॉन उत्सर्जित करेंगी।
213
PhysicsMediumMCQMHT CET · 2025
धातु की सतह पर आपतित फोटॉनों की ऊर्जा प्रारंभ में $4W$ और फिर $6W$ है,जहाँ $W$ उस धातु का कार्य फलन (work function) है। उत्सर्जित फोटोइलेक्ट्रॉनों के अधिकतम वेग का अनुपात ज्ञात कीजिए:
A
$\sqrt{3}: \sqrt{5}$
B
$1: 2$
C
$2: 3$
D
$\sqrt{2}: \sqrt{3}$

Solution

(A) आइंस्टीन के प्रकाश-विद्युत समीकरण के अनुसार,उत्सर्जित फोटोइलेक्ट्रॉनों की अधिकतम गतिज ऊर्जा $K_{max} = E - W$ द्वारा दी जाती है,जहाँ $E$ आपतित फोटॉन की ऊर्जा है और $W$ कार्य फलन है।
स्थिति $1$: $E_1 = 4W$.
$K_1 = 4W - W = 3W$.
चूँकि $K = \frac{1}{2}mv^2$,इसलिए $\frac{1}{2}mv_1^2 = 3W$,जिससे $v_1 = \sqrt{\frac{6W}{m}}$.
स्थिति $2$: $E_2 = 6W$.
$K_2 = 6W - W = 5W$.
इसी प्रकार,$\frac{1}{2}mv_2^2 = 5W$,जिससे $v_2 = \sqrt{\frac{10W}{m}}$.
वेगों का अनुपात $\frac{v_1}{v_2} = \frac{\sqrt{6W/m}}{\sqrt{10W/m}} = \sqrt{\frac{6}{10}} = \sqrt{\frac{3}{5}} = \sqrt{3}: \sqrt{5}$ है।
214
PhysicsMediumMCQMHT CET · 2025
एक प्रकाश-संवेदी सतह का कार्य फलन $\phi$ है। यदि $3 \phi$ ऊर्जा का एक फोटॉन इस सतह पर गिरता है, तो इलेक्ट्रॉन $4 \times 10^6 \,m/s$ के अधिकतम वेग के साथ बाहर आता है। जब फोटॉन की ऊर्जा को बढ़ाकर $7 \phi$ कर दिया जाता है, तो फोटोइलेक्ट्रॉन का अधिकतम वेग क्या होगा?
A
$4 \sqrt{2} \times 10^6 \,m/s$
B
$8 \times 10^6 \,m/s$
C
$4 \sqrt{3} \times 10^6 \,m/s$
D
$2 \sqrt{3} \times 10^6 \,m/s$

Solution

(C) आइंस्टीन के प्रकाश-विद्युत समीकरण के अनुसार, अधिकतम गतिज ऊर्जा $K_{max} = E - \phi$ होती है, जहाँ $E$ आपतित फोटॉन की ऊर्जा है और $\phi$ कार्य फलन है।
प्रथम स्थिति के लिए: $E_1 = 3\phi$. अतः, $K_{max1} = 3\phi - \phi = 2\phi$.
हम जानते हैं कि $K_{max} = \frac{1}{2}mv^2$, इसलिए $\frac{1}{2}mv_1^2 = 2\phi$ --- $(1)$.
दूसरी स्थिति के लिए: $E_2 = 7\phi$. अतः, $K_{max2} = 7\phi - \phi = 6\phi$.
इसलिए, $\frac{1}{2}mv_2^2 = 6\phi$ --- $(2)$.
समीकरण $(2)$ को समीकरण $(1)$ से विभाजित करने पर: $\frac{v_2^2}{v_1^2} = \frac{6\phi}{2\phi} = 3$.
अतः, $v_2 = v_1 \sqrt{3}$.
चूंकि $v_1 = 4 \times 10^6 \,m/s$ दिया गया है, इसलिए $v_2 = 4 \sqrt{3} \times 10^6 \,m/s$ प्राप्त होता है।
215
PhysicsEasyMCQMHT CET · 2025
जब एक चालक लूप को एक समान चुंबकीय क्षेत्र में गति कराया जाता है,तो उसमें प्रेरित कुल आवेश किस पर निर्भर करता है?
A
केवल प्रारंभिक चुंबकीय फ्लक्स पर।
B
केवल अंतिम चुंबकीय फ्लक्स पर।
C
चुंबकीय फ्लक्स में कुल परिवर्तन पर।
D
चुंबकीय फ्लक्स के परिवर्तन की दर पर।

Solution

(C) फैराडे के प्रेरण के नियम के अनुसार,प्रेरित विद्युत वाहक बल $(e)$ $e = -\frac{d\Phi}{dt}$ द्वारा दिया जाता है।
ओम के नियम के अनुसार,प्रेरित धारा $(I)$ $I = \frac{e}{R} = -\frac{1}{R} \frac{d\Phi}{dt}$ है,जहाँ $R$ लूप का प्रतिरोध है।
लूप से प्रवाहित होने वाला आवेश $(q)$ $q = \int I dt$ द्वारा प्राप्त होता है।
$I$ के लिए व्यंजक को प्रतिस्थापित करने पर,हमें प्राप्त होता है $q = \int -\frac{1}{R} \frac{d\Phi}{dt} dt = -\frac{1}{R} \int d\Phi$।
अतः,$q = -\frac{\Delta\Phi}{R}$,जहाँ $\Delta\Phi$ चुंबकीय फ्लक्स में कुल परिवर्तन है।
इस प्रकार,प्रेरित कुल आवेश चुंबकीय फ्लक्स में कुल परिवर्तन पर निर्भर करता है।
216
PhysicsEasyMCQMHT CET · 2025
किसी परिपथ का स्व-प्रेरकत्व (self-inductance) संख्यात्मक रूप से किसके बराबर होता है?
A
परिपथ से जुड़े चुंबकीय फ्लक्स को स्थापित करने में किया गया कार्य।
B
परिपथ में इकाई धारा के साथ जुड़े चुंबकीय फ्लक्स को स्थापित करने में किए गए कार्य का दोगुना।
C
परिपथ में इकाई धारा के साथ जुड़े चुंबकीय फ्लक्स को स्थापित करने में किए गए कार्य का तीन गुना।
D
परिपथ में इकाई धारा के साथ जुड़े चुंबकीय फ्लक्स को स्थापित करने में किया गया कार्य।

Solution

(B) $L$ स्व-प्रेरकत्व वाले एक प्रेरक में $I$ धारा प्रवाहित होने पर संचित ऊर्जा $U = \frac{1}{2} L I^2$ द्वारा दी जाती है।
यदि हम चुंबकीय फ्लक्स को स्थापित करने के लिए किए गए कार्य पर विचार करें,तो यह चुंबकीय क्षेत्र में संचित ऊर्जा के बराबर होता है।
इकाई धारा $(I = 1 \ A)$ के लिए,संचित ऊर्जा $U = \frac{1}{2} L (1)^2 = \frac{L}{2}$ है।
इसलिए,$L = 2U$।
इसका अर्थ है कि स्व-प्रेरकत्व $L$ संख्यात्मक रूप से परिपथ में इकाई धारा के साथ जुड़े चुंबकीय फ्लक्स को स्थापित करने में किए गए कार्य (या संचित ऊर्जा) के दोगुने के बराबर होता है।
217
PhysicsEasyMCQMHT CET · 2025
जब समान प्रेरकत्व $L$ के तीन प्रेरक (inductors) श्रेणीक्रम में जुड़े होते हैं और $I$ परिपथ से प्रवाहित होने वाली धारा है,तो परिपथ में संचित ऊर्जा है:
A
$\frac{1}{2} L I^2$
B
$\frac{3}{2} L I^2$
C
$\frac{5}{2} L I^2$
D
$\frac{7}{2} L I^2$

Solution

(B) जब प्रेरक श्रेणीक्रम में जुड़े होते हैं,तो तुल्य प्रेरकत्व $L_{eq}$ व्यक्तिगत प्रेरकत्वों के योग के बराबर होता है।
$L$ प्रेरकत्व वाले तीन प्रेरकों के श्रेणीक्रम में जुड़े होने पर,$L_{eq} = L + L + L = 3L$ होगा।
प्रेरक में संचित ऊर्जा का सूत्र $U = \frac{1}{2} L_{eq} I^2$ है।
$L_{eq}$ का मान रखने पर,हमें $U = \frac{1}{2} (3L) I^2 = \frac{3}{2} L I^2$ प्राप्त होता है।
अतः,सही विकल्प $B$ है।
218
PhysicsMediumMCQMHT CET · 2025
$L$ स्व-प्रेरकत्व वाली एक कुंडली को एक बल्ब और $a.c.$ स्रोत के साथ श्रेणीक्रम में जोड़ा गया है। बल्ब की चमक कब कम हो जाती है?
A
कुंडली में लोहे की छड़ डालने पर।
B
a.c. स्रोत की आवृत्ति कम करने पर।
C
कुंडली में फेरों की संख्या कम करने पर।
D
उसी परिपथ में $(X_C - X_L)$ प्रतिघात का संधारित्र जोड़ने पर।

Solution

(A) बल्ब की चमक परिपथ में बहने वाली धारा $I$ पर निर्भर करती है,जहाँ $I = \frac{V}{Z}$ है। $LR$ परिपथ का प्रतिबाधा $Z = \sqrt{R^2 + X_L^2}$ द्वारा दिया जाता है,जहाँ $X_L = \omega L = 2\pi f L$ है। चमक कम होने के लिए,धारा $I$ को कम होना चाहिए,जिसका अर्थ है कि प्रतिबाधा $Z$ को बढ़ना चाहिए।
$1$. जब कुंडली में लोहे की छड़ डाली जाती है,तो पारगम्यता (permeability) बढ़ने के कारण स्व-प्रेरकत्व $L$ बढ़ जाता है। परिणामस्वरूप,$X_L$ बढ़ता है,$Z$ बढ़ता है,और धारा $I$ कम हो जाती है,जिससे चमक कम हो जाती है।
$2$. यदि आवृत्ति $f$ कम की जाती है,तो $X_L$ कम होता है,$Z$ कम होता है,और धारा $I$ बढ़ती है,जिससे चमक बढ़ जाती है।
$3$. यदि फेरों की संख्या $N$ कम की जाती है,तो $L$ कम होता है (क्योंकि $L \propto N^2$),$X_L$ कम होता है,$Z$ कम होता है,और धारा $I$ बढ़ती है,जिससे चमक बढ़ जाती है।
$4$. संधारित्र जोड़ने से यदि परिपथ अनुनाद (resonance) में आता है तो धारा बढ़ती है,कम नहीं होती।
अतः,सही विकल्प $A$ है।
219
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तीन प्रेरकत्व (inductances) चित्र में दिखाए अनुसार जुड़े हुए हैं। $A$ और $B$ के बीच तुल्य प्रेरकत्व क्या है ($H$ में)?
Question diagram
A
$1.20$
B
$0.225$
C
$1.55$
D
$0.35$

Solution

(A) परिपथ में $0.7 \ H$ के दो प्रेरक समांतर क्रम में जुड़े हैं,जो फिर $0.85 \ H$ के प्रेरक के साथ श्रेणी क्रम में जुड़े हैं।
सबसे पहले,दो समांतर प्रेरकों का तुल्य प्रेरकत्व $(L_p)$ ज्ञात करें:
$\frac{1}{L_p} = \frac{1}{0.7} + \frac{1}{0.7} = \frac{2}{0.7}$
$L_p = \frac{0.7}{2} = 0.35 \ H$
अब,यह तुल्य प्रेरकत्व $0.85 \ H$ के प्रेरक के साथ श्रेणी क्रम में है।
कुल तुल्य प्रेरकत्व $(L_{eq})$ है:
$L_{eq} = L_p + 0.85 \ H$
$L_{eq} = 0.35 \ H + 0.85 \ H = 1.20 \ H$
अतः,$A$ और $B$ के बीच तुल्य प्रेरकत्व $1.20 \ H$ है।
220
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$A$ और $B$ के बीच तुल्य प्रेरकत्व (equivalent inductance) किसके बराबर है?
Question diagram
A
$\frac{4}{5} H$
B
$\frac{5}{4} H$
C
$\frac{3}{10} H$
D
$15 H$

Solution

(B) $1$. परिपथ का विश्लेषण: परिपथ श्रेणी और समांतर क्रम में जुड़े प्रेरकों (inductors) से बना है।
$2$. $2 H$ और $3 H$ के प्रेरक इनपुट नोड $A$ और केंद्रीय नोड के बीच समांतर क्रम में जुड़े हैं। तुल्य प्रेरकत्व $L_1 = \frac{2 \times 3}{2 + 3} = \frac{6}{5} H$ होगा।
$3$. $4 H$ और $6 H$ के प्रेरक केंद्रीय नोड और आउटपुट नोड $B$ के बीच समांतर क्रम में जुड़े हैं। तुल्य प्रेरकत्व $L_2 = \frac{4 \times 6}{4 + 6} = \frac{24}{10} = \frac{12}{5} H$ होगा।
$4$. ये दोनों तुल्य प्रेरक $L_1$ और $L_2$ श्रेणी क्रम में हैं।
$5$. कुल तुल्य प्रेरकत्व $L_{eq} = L_1 + L_2 = \frac{6}{5} + \frac{12}{5} = \frac{18}{5} = 3.6 H$ होगा।
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दो परिपथ $A$ और $B$ को समान $d.c.$ स्रोतों से जोड़ा गया है,जिनमें से प्रत्येक का $e.m.f.$ $10 \ V$ है। परिपथ $A$ और $B$ के स्व-प्रेरकत्व क्रमशः $L_A = 10 \ H$ और $L_B = 10 \ mH$ हैं। प्रत्येक परिपथ का कुल प्रतिरोध $40 \ \Omega$ है। धारा को स्थिर मान तक पहुँचाने के लिए परिपथ $A$ और परिपथ $B$ में खपत ऊर्जा का अनुपात क्या है?
A
$1$
B
$10$
C
$100$
D
$1000$

Solution

(D) जब धारा अपने स्थिर मान $I_0$ तक पहुँच जाती है,तो प्रेरक में संचित ऊर्जा $U = \frac{1}{2} L I_0^2$ द्वारा दी जाती है।
यहाँ,स्थिर धारा $I_0$ परिपथ के लिए ओम के नियम द्वारा निर्धारित होती है: $I_0 = \frac{V}{R}$।
चूँकि दोनों परिपथों में समान $e.m.f.$ $V = 10 \ V$ और समान प्रतिरोध $R = 40 \ \Omega$ है,इसलिए स्थिर धारा $I_0$ दोनों परिपथों के लिए समान है।
अतः,परिपथ $A$ और परिपथ $B$ में संचित ऊर्जा का अनुपात $\frac{U_A}{U_B} = \frac{\frac{1}{2} L_A I_0^2}{\frac{1}{2} L_B I_0^2} = \frac{L_A}{L_B}$ होगा।
दिया गया है कि $L_A = 10 \ H$ और $L_B = 10 \ mH = 10 \times 10^{-3} \ H = 0.01 \ H$।
इस प्रकार,अनुपात $\frac{10}{0.01} = 1000$ है।
222
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$80 \ mH$ के दो प्रेरक (inductors) समानांतर क्रम में जुड़े हैं। संयोजन से गुजरने वाली धारा $2.1 \ A$ है। प्रेरकों के इस संयोजन में संचित ऊर्जा है
A
$4.84 \times 10^{-2} \ J$
B
$7.26 \times 10^{-2} \ J$
C
$8.82 \times 10^{-2} \ J$
D
$10.85 \times 10^{-2} \ J$

Solution

(C) दिया गया है: प्रत्येक प्रेरक का प्रेरकत्व $L_1 = L_2 = 80 \ mH = 80 \times 10^{-3} \ H$ है।
चूंकि प्रेरक समानांतर क्रम में जुड़े हैं,इसलिए तुल्य प्रेरकत्व $L_{eq}$ इस प्रकार होगा: $\frac{1}{L_{eq}} = \frac{1}{L_1} + \frac{1}{L_2}$।
$L_{eq} = \frac{L_1 \times L_2}{L_1 + L_2} = \frac{80 \times 80}{80 + 80} \ mH = \frac{6400}{160} \ mH = 40 \ mH = 40 \times 10^{-3} \ H$।
संयोजन से गुजरने वाली धारा $I = 2.1 \ A$ है।
प्रेरक में संचित ऊर्जा का सूत्र $U = \frac{1}{2} L_{eq} I^2$ है।
$U = \frac{1}{2} \times (40 \times 10^{-3}) \times (2.1)^2$।
$U = 20 \times 10^{-3} \times 4.41$।
$U = 88.2 \times 10^{-3} \ J = 8.82 \times 10^{-2} \ J$।
223
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यदि $L$ प्रेरकत्व (inductance) है और $R$ प्रतिरोध (resistance) है,तो $\frac{L}{R}$ का $SI$ मात्रक क्या है?
A
सेकंड
B
वोल्ट
C
एम्पियर
D
प्रति सेकंड

Solution

(A) $L-R$ परिपथ का समय नियतांक (time constant) अनुपात $\tau = \frac{L}{R}$ द्वारा दिया जाता है।
चूंकि $\tau$ समय को दर्शाता है,इसलिए इसका $SI$ मात्रक सेकंड $(s)$ है।
विमीय विश्लेषण: प्रेरकत्व $L$ की विमा $[M L^2 T^{-2} A^{-2}]$ है और प्रतिरोध $R$ की विमा $[M L^2 T^{-3} A^{-2}]$ है।
इसलिए,$\frac{L}{R}$ की विमा $\frac{[M L^2 T^{-2} A^{-2}]}{[M L^2 T^{-3} A^{-2}]} = [T]$ होती है।
अतः,$\frac{L}{R}$ का $SI$ मात्रक सेकंड है।
224
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समय $t=0$ पर एक कुंडली से गुजरने वाला चुंबकीय फ्लक्स $4 \times 10^{-4} \ Wb$ है। यह $t$ सेकंड में अपने मूल मान के $30 \%$ तक कम हो जाता है। यदि कुंडली में प्रेरित e.m.f. $0.56 \ mV$ है,तो $t$ का मान क्या है ($s$ में)?
A
$0.5$
B
$0.4$
C
$0.8$
D
$0.7$

Solution

(A) दिया गया है:
प्रारंभिक चुंबकीय फ्लक्स,$\phi_1 = 4 \times 10^{-4} \ Wb$.
अंतिम चुंबकीय फ्लक्स,$\phi_2 = \phi_1$ का $30 \% = 0.30 \times 4 \times 10^{-4} \ Wb = 1.2 \times 10^{-4} \ Wb$.
प्रेरित e.m.f.,$|e| = 0.56 \ mV = 0.56 \times 10^{-3} \ V$.
फैराडे के विद्युत चुंबकीय प्रेरण के नियम के अनुसार,प्रेरित e.m.f. का परिमाण $|e| = |\frac{\Delta \phi}{\Delta t}|$ द्वारा दिया जाता है।
यहाँ,$\Delta \phi = |\phi_2 - \phi_1| = |1.2 \times 10^{-4} - 4 \times 10^{-4}| = 2.8 \times 10^{-4} \ Wb$.
सूत्र में मान रखने पर:
$0.56 \times 10^{-3} = \frac{2.8 \times 10^{-4}}{t}$.
$t = \frac{2.8 \times 10^{-4}}{0.56 \times 10^{-3}} = \frac{2.8}{5.6} = 0.5 \ s$.
अतः,$t$ का मान $0.5 \ s$ है।
225
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निम्नलिखित में से कौन सा नियम ऊर्जा संरक्षण के नियम का पालन करता है?
A
विद्युत में किरचॉफ का $1^{\text{st}}$ नियम।
B
प्रेरण में लेंज का नियम।
C
एम्पियर का परिपथीय नियम।
D
स्थिरवैद्युतिकी में गॉस का नियम।

Solution

(B) लेंज का नियम बताता है कि प्रेरित धारा की दिशा ऐसी होती है कि वह उस चुंबकीय फ्लक्स में परिवर्तन का विरोध करती है जिसने इसे उत्पन्न किया है।
इस विरोध का अर्थ है कि किसी चुंबक को कुंडली के पास या दूर ले जाने के लिए चुंबकीय बल के विरुद्ध कार्य करना पड़ता है।
किया गया यह यांत्रिक कार्य कुंडली में विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित हो जाता है।
इसलिए,लेंज का नियम ऊर्जा संरक्षण के नियम का सीधा परिणाम है।
226
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प्रारंभ में,एक आयताकार कुंडली जिसकी लंबाई ऊर्ध्वाधर है,एक स्थिर चुंबकीय क्षेत्र $B$ में दाईं ओर एक स्थिर वेग $v$ के साथ बाहर की ओर गति कर रही है। अब उसी कुंडली को उसी तल में उसी चुंबकीय क्षेत्र $B$ में $90^{\circ}$ घुमाया जाता है और कुंडली उसी वेग $v$ से गति कर रही है। अब प्रेरित e.m.f. का परिमाण है
A
प्रारंभिक प्रेरित e.m.f. से अधिक
B
प्रारंभिक प्रेरित e.m.f. से कम
C
प्रारंभिक प्रेरित e.m.f. के बराबर
D
कभी अधिक और कभी कम

Solution

(B) चुंबकीय क्षेत्र में गति करने वाले चालक में प्रेरित e.m.f. का सूत्र $\varepsilon = B l v \sin \theta$ है,जहाँ $l$ वेग सदिश $v$ और चुंबकीय क्षेत्र $B$ के लंबवत चालक की लंबाई है।
प्रारंभिक स्थिति में,कुंडली की लंबाई ऊर्ध्वाधर है,इसलिए $L$ लंबाई की ऊर्ध्वाधर भुजा वेग $v$ (जो क्षैतिज है) के लंबवत है। अतः,प्रेरित e.m.f. $\varepsilon_1 = B L v$ है।
कुंडली को $90^{\circ}$ घुमाने के बाद,लंबाई $L$ क्षैतिज (वेग $v$ के समानांतर) हो जाती है। जो भुजा पहले क्षैतिज थी (चौड़ाई $W$),वह अब ऊर्ध्वाधर हो जाती है। अब प्रेरित e.m.f. वेग के लंबवत भुजा द्वारा निर्धारित होता है,जो $W$ लंबाई की भुजा है। अतः,$\varepsilon_2 = B W v$ है।
चूंकि एक आयताकार कुंडली की लंबाई $L$ आमतौर पर उसकी चौड़ाई $W$ से अधिक होती है $(L > W)$,इसलिए नया प्रेरित e.m.f. $\varepsilon_2$ प्रारंभिक प्रेरित e.m.f. $\varepsilon_1$ से कम होगा।
227
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एक समान चुंबकीय क्षेत्र में घूर्णन करती कुंडली से जुड़े फ्लक्स और उसमें उत्पन्न प्रेरित e.m.f. के बीच कलांतर (phase difference) क्या है?
A
$\pi$
B
$-\frac{\pi}{6}$
C
$\frac{\pi}{3}$
D
$\frac{\pi}{2}$

Solution

(D) एक समान चुंबकीय क्षेत्र में घूर्णन करती कुंडली से जुड़ा चुंबकीय फ्लक्स $\phi = BA \cos(\omega t)$ द्वारा दिया जाता है,जहाँ $B$ चुंबकीय क्षेत्र है,$A$ कुंडली का क्षेत्रफल है,और $\omega$ कोणीय वेग है।
फैराडे के विद्युत चुंबकीय प्रेरण के नियम के अनुसार,प्रेरित e.m.f. $\epsilon = -\frac{d\phi}{dt}$ द्वारा दिया जाता है।
$\phi$ के व्यंजक को प्रतिस्थापित करने पर,हमें $\epsilon = -\frac{d}{dt} [BA \cos(\omega t)] = BA\omega \sin(\omega t)$ प्राप्त होता है।
त्रिकोणमितीय सर्वसमिका $\sin(\theta) = \cos(\theta - \frac{\pi}{2})$ का उपयोग करके,हम लिख सकते हैं $\epsilon = BA\omega \cos(\omega t - \frac{\pi}{2})$।
फ्लक्स की कला $(\omega t)$ और प्रेरित e.m.f. की कला $(\omega t - \frac{\pi}{2})$ की तुलना करने पर,कलांतर $\frac{\pi}{2}$ प्राप्त होता है।
228
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एक निश्चित प्रतिरोध वाली चालक रिंग एक धारावाही सीधे लंबे चालक की ओर गिर रही है। रिंग और चालक एक ही तल में हैं। तो
Question diagram
A
कुंडली में प्रेरित धारा शून्य है।
B
कुंडली में प्रेरित धारा वामावर्त (anticlockwise) है।
C
कुंडली में प्रेरित धारा दक्षिणावर्त (clockwise) है।
D
रिंग स्थिर हो जाएगी।

Solution

(B) $1$. एक लंबे सीधे धारावाही तार के कारण $r$ दूरी पर चुंबकीय क्षेत्र $B = \frac{\mu_0 I}{2\pi r}$ द्वारा दिया जाता है।
$2$. जैसे-जैसे रिंग तार की ओर गिरती है, दूरी $r$ कम होती जाती है, जिसका अर्थ है कि रिंग से जुड़ा चुंबकीय फ्लक्स $\phi$ बढ़ता है।
$3$. लेंज के नियम के अनुसार, रिंग में प्रेरित धारा इस चुंबकीय फ्लक्स में वृद्धि का विरोध करेगी।
$4$. तार से चुंबकीय क्षेत्र रेखाएं कागज के तल के अंदर की ओर इंगित करती हैं (दाएं हाथ के अंगूठे के नियम का उपयोग करके)। चूंकि तल के अंदर फ्लक्स बढ़ रहा है, इसलिए प्रेरित धारा को इस परिवर्तन का विरोध करने के लिए तल के बाहर की ओर चुंबकीय क्षेत्र बनाना होगा।
$5$. दाएं हाथ के नियम के अनुसार, जो धारा तल के बाहर की ओर चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करती है, उसे वामावर्त (anticlockwise) दिशा में होना चाहिए।
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$400 \ \Omega$ प्रतिरोध वाली एक कुंडली को चुंबकीय क्षेत्र में रखा गया है। यदि कुंडली से संबद्ध चुंबकीय फ्लक्स $\phi$ (Wb),समय $t$ $(s)$ के साथ $\phi = 50t^2 + 4$ के अनुसार बदलता है,तो $t = 2 \ s$ पर कुंडली में धारा का मान क्या होगा ($A$ में)?
A
$0.5$
B
$0.25$
C
$2$
D
$0.1$

Solution

(A) फैराडे के विद्युत चुंबकीय प्रेरण के नियम के अनुसार,प्रेरित विद्युत वाहक बल $(EMF)$ $\varepsilon$,चुंबकीय फ्लक्स के परिवर्तन की दर के बराबर होता है: $\varepsilon = -\frac{d\phi}{dt}$.
दिया गया है $\phi = 50t^2 + 4$,समय $t$ के सापेक्ष अवकलन करने पर:
$\frac{d\phi}{dt} = \frac{d}{dt}(50t^2 + 4) = 100t$.
अतः,प्रेरित $EMF$ का परिमाण $|\varepsilon| = 100t$ है।
समय $t = 2 \ s$ पर,प्रेरित $EMF$ $|\varepsilon| = 100(2) = 200 \ V$ होगा।
ओम के नियम के अनुसार कुंडली में धारा $I = \frac{|\varepsilon|}{R}$ है।
प्रतिरोध $R = 400 \ \Omega$ दिया गया है,इसलिए $I = \frac{200}{400} = 0.5 \ A$ होगा।
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एक तांबे की रिंग को क्षैतिज रूप से रखा गया है और एक छड़ चुंबक को रिंग की धुरी के अनुदिश रिंग के माध्यम से गिराया जाता है। रिंग से गुजरते समय गिरते हुए चुंबक का त्वरण क्या होगा?
A
गुरुत्वीय त्वरण से अधिक।
B
गुरुत्वीय त्वरण से कम।
C
रिंग के व्यास और चुंबक की लंबाई पर निर्भर करता है।
D
चुंबक की ध्रुव प्रबलता पर निर्भर करता है।

Solution

(B) लेंज़ के नियम के अनुसार,जब एक छड़ चुंबक तांबे की रिंग से होकर गिरता है,तो रिंग से गुजरने वाले चुंबकीय फ्लक्स में परिवर्तन के कारण रिंग में एक प्रेरित $EMF$ और भंवर धारा (eddy current) उत्पन्न होती है।
यह प्रेरित धारा एक ऐसा चुंबकीय क्षेत्र बनाती है जो उस चुंबकीय फ्लक्स परिवर्तन का विरोध करता है जिसने इसे उत्पन्न किया है।
जैसे ही चुंबक रिंग में प्रवेश करता है,प्रेरित चुंबकीय क्षेत्र चुंबक पर ऊपर की ओर प्रतिकर्षण बल लगाता है।
जैसे ही चुंबक रिंग से बाहर निकलता है,प्रेरित चुंबकीय क्षेत्र चुंबक पर ऊपर की ओर आकर्षण बल लगाता है।
दोनों ही स्थितियों में,प्रेरित चुंबकीय बल चुंबक की गति की विपरीत दिशा (ऊपर की ओर) में कार्य करता है,जबकि गुरुत्वाकर्षण नीचे की ओर कार्य करता है।
इसलिए,चुंबक का शुद्ध त्वरण $a = g - a_{induced}$ होता है,जो गुरुत्वीय त्वरण $(g)$ से कम है।
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चित्र में एक चुंबक का उत्तरी ध्रुव एक संधारित्र युक्त मोटे चालक लूप से दूर जाता हुआ दिखाया गया है। अतिरिक्त धनात्मक आवेश किस प्लेट पर आएगा?
Question diagram
A
प्लेट 'a'
B
प्लेट 'b'
C
दोनों प्लेट 'a' और 'b'
D
न तो प्लेट 'a' और न ही प्लेट 'b'

Solution

(A) लेंज के नियम के अनुसार,लूप में प्रेरित धारा उसके उत्पन्न होने के कारण का विरोध करेगी। यहाँ,चुंबक का उत्तरी ध्रुव लूप से दूर जा रहा है,इसलिए लूप चुंबक के सामने वाले फलक पर दक्षिणी ध्रुव बनाकर उसे आकर्षित करने का प्रयास करेगा।
इसके लिए लूप में (चुंबक की ओर से देखने पर) दक्षिणावर्त (clockwise) धारा की आवश्यकता होगी।
इस दक्षिणावर्त धारा के पथ का अनुसरण करते हुए,आवेश लूप के माध्यम से प्लेट 'b' से प्लेट 'a' की ओर प्रवाहित होता है।
परिणामस्वरूप,प्लेट 'a' पर धनात्मक आवेश और प्लेट 'b' पर ऋणात्मक आवेश जमा हो जाता है।
इसलिए,अतिरिक्त धनात्मक आवेश प्लेट 'a' पर आएगा।
232
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$n$ फेरों और $R \Omega$ प्रतिरोध वाली एक कुंडली को $R/4$ प्रतिरोध के साथ श्रेणीक्रम में जोड़ा गया है। इस संयोजन को $t$ सेकंड के समय में $\phi_1$ से $\phi_2$ चुंबकीय फ्लक्स के माध्यम से ले जाया जाता है। परिपथ में प्रेरित धारा है:
A
$\frac{4 n(\phi_1 - \phi_2)}{5 Rt}$
B
$\frac{n(\phi_1 - \phi_2)}{5 Rt}$
C
$\frac{4 n(\phi_1 - \phi_2)}{Rt}$
D
$\frac{5 n(\phi_1 - \phi_2)}{4 Rt}$

Solution

(A) फैराडे के विद्युत चुंबकीय प्रेरण के नियम के अनुसार,$n$ फेरों वाली कुंडली में प्रेरित विद्युत वाहक बल $(e)$ $e = -n \frac{d\phi}{dt}$ द्वारा दिया जाता है।
$t$ समय में फ्लक्स में $\phi_1$ से $\phi_2$ तक के परिवर्तन के लिए,औसत प्रेरित emf $|e| = n \frac{|\phi_2 - \phi_1|}{t} = \frac{n(\phi_1 - \phi_2)}{t}$ है।
परिपथ का कुल प्रतिरोध $R_{total} = R + R/4 = \frac{5R}{4}$ है।
ओम के नियम का उपयोग करते हुए,प्रेरित धारा $I = \frac{|e|}{R_{total}}$ है।
मान रखने पर,$I = \frac{n(\phi_1 - \phi_2) / t}{5R / 4} = \frac{4n(\phi_1 - \phi_2)}{5Rt}$ प्राप्त होता है।
233
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$n$ फेरों और $A$ क्षेत्रफल वाली एक कुंडली को अचानक चुंबकीय क्षेत्र से हटा दिया जाता है,और कुंडली से $q$ आवेश प्रवाहित होता है। यदि कुंडली का प्रतिरोध $R$ है,तो चुंबकीय फ्लक्स घनत्व ($Wb/m^2$ में) क्या है?
A
$\frac{q^2 R}{2 n A}$
B
$\frac{qR}{nA}$
C
$\frac{qR^2}{nA}$
D
$\frac{qR}{2 nA}$

Solution

(B) फैराडे के प्रेरण के नियम के अनुसार,प्रेरित विद्युत वाहक बल $(EMF)$ $\varepsilon = -n \frac{d\phi}{dt}$ द्वारा दिया जाता है।
ओम के नियम के अनुसार,प्रेरित धारा $I = \frac{\varepsilon}{R} = -\frac{n}{R} \frac{d\phi}{dt}$ है।
कुंडली से प्रवाहित होने वाला आवेश $q$,समय के साथ धारा का समाकलन है: $q = \int I dt = \int -\frac{n}{R} \frac{d\phi}{dt} dt = -\frac{n}{R} \int d\phi$।
चूंकि कुंडली को चुंबकीय क्षेत्र से हटा दिया जाता है,फ्लक्स में परिवर्तन $\Delta \phi = \phi_{final} - \phi_{initial} = 0 - BA = -BA$ है।
इसे आवेश के समीकरण में प्रतिस्थापित करने पर: $q = -\frac{n}{R} (-BA) = \frac{nBA}{R}$।
चुंबकीय फ्लक्स घनत्व $B$ के लिए हल करने पर,हमें $B = \frac{qR}{nA}$ प्राप्त होता है।
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$L$ मीटर भुजा वाला एक वर्ग $x-y$ तल में एक ऐसे क्षेत्र में स्थित है जहाँ चुंबकीय क्षेत्र $\vec{B} = B_0(2 \hat{i} + 3 \hat{j} + 4 \hat{k})$ है,जहाँ $B_0$ एक स्थिरांक है। वर्ग से गुजरने वाले चुंबकीय फ्लक्स का परिमाण (वेबर में) है: ($B_0 L^2$ में)
A
$4$
B
$2$
C
$3$
D
$29$

Solution

(A) किसी सतह से गुजरने वाला चुंबकीय फ्लक्स $\Phi$,चुंबकीय क्षेत्र सदिश $\vec{B}$ और क्षेत्रफल सदिश $\vec{A}$ के अदिश गुणनफल (dot product) द्वारा दिया जाता है।
दिया गया है,$\vec{B} = B_0(2 \hat{i} + 3 \hat{j} + 4 \hat{k})$।
वर्ग $x-y$ तल में स्थित है,इसलिए इसका क्षेत्रफल सदिश $\vec{A}$,$x-y$ तल के लंबवत यानी $z$-अक्ष की दिशा में होगा।
अतः,$\vec{A} = L^2 \hat{k}$।
चुंबकीय फ्लक्स $\Phi$ की गणना इस प्रकार की जाती है:
$\Phi = \vec{B} \cdot \vec{A}$
$\Phi = [B_0(2 \hat{i} + 3 \hat{j} + 4 \hat{k})] \cdot [L^2 \hat{k}]$
$\Phi = B_0 L^2 (2 \hat{i} \cdot \hat{k} + 3 \hat{j} \cdot \hat{k} + 4 \hat{k} \cdot \hat{k})$
चूंकि $\hat{i} \cdot \hat{k} = 0$,$\hat{j} \cdot \hat{k} = 0$,और $\hat{k} \cdot \hat{k} = 1$,हमें प्राप्त होता है:
$\Phi = B_0 L^2 (0 + 0 + 4(1)) = 4 B_0 L^2$।
अतः,फ्लक्स का परिमाण $4 B_0 L^2$ है।
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$n$ फेरों और $R \ \Omega$ प्रतिरोध वाली एक कुंडली को $R/2$ प्रतिरोध के साथ श्रेणीक्रम में जोड़ा गया है। इस संयोजन को $t$ सेकंड के समय के लिए चुंबकीय फ्लक्स $\Phi_1$ से $\Phi_2$ तक ले जाया जाता है। परिपथ में प्रेरित धारा है:
A
$\frac{n(\Phi_1-\Phi_2)}{3Rt}$
B
$\frac{2n(\Phi_1-\Phi_2)}{3Rt}$
C
$\frac{2n(\Phi_1-\Phi_2)}{Rt}$
D
$\frac{n(\Phi_1-\Phi_2)}{Rt}$

Solution

(B) फैराडे के विद्युत चुंबकीय प्रेरण के नियम के अनुसार,$n$ फेरों वाली कुंडली में प्रेरित विद्युत वाहक बल $(e)$ $e = -n \frac{d\Phi}{dt}$ द्वारा दिया जाता है।
समय $t$ में फ्लक्स में परिवर्तन $\Delta\Phi = \Phi_2 - \Phi_1$ के लिए,औसत प्रेरित emf $|e| = n \frac{|\Phi_2 - \Phi_1|}{t} = n \frac{|\Phi_1 - \Phi_2|}{t}$ होगा।
परिपथ का कुल प्रतिरोध $R_{total} = R + \frac{R}{2} = \frac{3R}{2}$ है।
ओम के नियम का उपयोग करते हुए,प्रेरित धारा $I = \frac{|e|}{R_{total}}$ होती है।
मान रखने पर,$I = \frac{n|\Phi_1 - \Phi_2| / t}{3R / 2} = \frac{2n|\Phi_1 - \Phi_2|}{3Rt}$ प्राप्त होता है।
अतः,सही विकल्प $B$ है।
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एक तांबे की रिंग जिसमें कट लगा है ताकि वह एक पूर्ण लूप न बनाए,उसे क्षैतिज रूप से रखा गया है और एक छड़ चुंबक को उसकी लंबाई को रिंग की धुरी के अनुदिश रखते हुए रिंग के माध्यम से गिराया जाता है जैसा कि चित्र में दिखाया गया है। गिरते हुए चुंबक का त्वरण है ($g=$ गुरुत्वीय त्वरण)
Question diagram
A
$g$
B
$g$ से कम
C
$g$ से अधिक
D
शून्य

Solution

(A) जब एक छड़ चुंबक को एक पूर्ण चालक रिंग के माध्यम से गिराया जाता है,तो चुंबकीय फ्लक्स में परिवर्तन के कारण रिंग में प्रेरित धारा प्रवाहित होती है,जो लेंज के नियम के अनुसार एक प्रतिकर्षण बल उत्पन्न करती है जो चुंबक की गति का विरोध करता है,जिसके परिणामस्वरूप त्वरण $g$ से कम होता है।
हालाँकि,इस मामले में,तांबे की रिंग में एक कट है,जिसका अर्थ है कि यह एक पूर्ण लूप नहीं बनाती है। इसलिए,रिंग के माध्यम से कोई प्रेरित धारा प्रवाहित नहीं हो सकती है।
चूंकि कोई प्रेरित धारा नहीं है,इसलिए चुंबक पर उसकी गति का विरोध करने के लिए कोई चुंबकीय बल (प्रतिकर्षण या आकर्षण) कार्य नहीं करता है।
परिणामस्वरूप,गिरते हुए चुंबक पर कार्य करने वाला एकमात्र बल गुरुत्वाकर्षण है।
इस प्रकार,गिरते हुए चुंबक का त्वरण $g$ के बराबर रहता है।
237
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एक चुंबकीय क्षेत्र $4 \times 10^{-2} \, T$, $100 \, cm^2$ क्षेत्रफल और $50$ फेरों वाली कुंडली पर लंबवत कार्य करता है। जब इसे '$t$' समय में क्षेत्र से बाहर निकाला जाता है, तो कुंडली में प्रेरित औसत e.m.f. $0.1 \, V$ होता है। '$t$' का मान ज्ञात कीजिए। ($\text{सेकंड}$ में)
A
$0.02$
B
$0.05$
C
$0.2$
D
$2$

Solution

(C) दिया गया है:
चुंबकीय क्षेत्र $B = 4 \times 10^{-2} \, T$
क्षेत्रफल $A = 100 \, cm^2 = 100 \times 10^{-4} \, m^2 = 10^{-2} \, m^2$
फेरों की संख्या $N = 50$
प्रेरित e.m.f. $\varepsilon = 0.1 \, V$
कुंडली से गुजरने वाला चुंबकीय फ्लक्स $\phi = B \cdot A \cdot \cos(0^\circ) = B \cdot A$ होता है।
प्रारंभिक फ्लक्स $\phi_i = B \cdot A = (4 \times 10^{-2} \, T) \times (10^{-2} \, m^2) = 4 \times 10^{-4} \, Wb$.
अंतिम फ्लक्स $\phi_f = 0$ (क्योंकि इसे क्षेत्र से हटा दिया जाता है)।
फैराडे के नियम के अनुसार औसत प्रेरित e.m.f. का परिमाण:
$|\varepsilon| = N \cdot \frac{|\Delta \phi|}{t} = N \cdot \frac{|\phi_f - \phi_i|}{t}$
$0.1 = 50 \times \frac{|0 - 4 \times 10^{-4}|}{t}$
$0.1 = \frac{50 \times 4 \times 10^{-4}}{t}$
$0.1 = \frac{200 \times 10^{-4}}{t} = \frac{0.02}{t}$
$t = \frac{0.02}{0.1} = 0.2 \, s$.
अतः, '$t$' का मान $0.2 \, s$ है।
238
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दो समान समाक्षीय वृत्ताकार लूप प्रत्येक '$i$' धारा ले जा रहे हैं,जो दक्षिणावर्त दिशा में प्रवाहित हो रही है। यदि लूप एक-दूसरे के करीब आ रहे हैं,तो
A
प्रत्येक लूप में धारा बढ़ जाती है।
B
प्रत्येक लूप में धारा समान रहती है।
C
प्रत्येक लूप में धारा कम हो जाती है।
D
एक लूप में धारा बढ़ जाती है और दूसरे में कम हो जाती है।

Solution

(C) लेंज के नियम के अनुसार,लूप में प्रेरित धारा उससे जुड़े चुंबकीय फ्लक्स में परिवर्तन का विरोध करती है।
जब समान दिशा में धारा ले जाने वाले दो समाक्षीय लूप एक-दूसरे के करीब आते हैं,तो दूसरे लूप के चुंबकीय क्षेत्र के कारण प्रत्येक लूप से गुजरने वाला चुंबकीय फ्लक्स बढ़ जाता है।
इस चुंबकीय फ्लक्स में वृद्धि का विरोध करने के लिए,प्रत्येक लूप में मूल धारा की विपरीत दिशा में एक प्रेरित धारा उत्पन्न होती है।
चूंकि मूल धारा दक्षिणावर्त दिशा में है,इसलिए प्रेरित धारा वामावर्त दिशा में होगी।
अतः,प्रत्येक लूप में कुल धारा कम हो जाती है।
239
PhysicsMediumMCQMHT CET · 2025
$N$ फेरों और $R$ $\Omega$ प्रतिरोध वाली एक कुंडली को $6R$ $\Omega$ प्रतिरोध वाले गैल्वेनोमीटर से जोड़ा गया है। इस कुंडली से जुड़ा चुंबकीय फ्लक्स $t$ सेकंड में $\phi_1$ वेबर से बदलकर $\phi_2$ वेबर हो जाता है। परिपथ में प्रेरित धारा है
A
$\frac{N(\phi_2-\phi_1)}{t}$
B
$\frac{N(\phi_2-\phi_1)}{7Rt}$
C
$\frac{N(\phi_2-\phi_1)}{Rt}$
D
$\frac{N(\phi_2-\phi_1)}{6Rt}$

Solution

(B) फैराडे के विद्युत चुंबकीय प्रेरण के नियम के अनुसार,$N$ फेरों वाली कुंडली में प्रेरित विद्युत वाहक बल $(e)$ $e = -N \frac{d\phi}{dt}$ द्वारा दिया जाता है।
$t$ समय में फ्लक्स के $\phi_1$ से $\phi_2$ तक परिवर्तन के लिए,औसत प्रेरित emf का परिमाण $|e| = N \frac{|\phi_2 - \phi_1|}{t}$ है।
परिपथ का कुल प्रतिरोध कुंडली और गैल्वेनोमीटर के प्रतिरोध का योग है: $R_{total} = R + 6R = 7R$.
ओम के नियम का उपयोग करते हुए,प्रेरित धारा $I = \frac{|e|}{R_{total}}$ है।
मान रखने पर,हमें $I = \frac{N|\phi_2 - \phi_1|}{7Rt}$ प्राप्त होता है।
240
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$3 \,m^2$ प्रभावी क्षेत्रफल वाली एक कुंडली को $0.05 \,Wb/m^2$ के चुंबकीय क्षेत्र के लंबवत रखा गया है। यदि क्षेत्र $10 \,s$ में अपने मूल मान के $20 \%$ तक कम हो जाता है, तो कुंडली में प्रेरित e.m.f. होगा: ($\,mV$ में)
A
$10$
B
$12$
C
$15$
D
$20$

Solution

(B) दिया गया है: क्षेत्रफल $A = 3 \,m^2$, प्रारंभिक चुंबकीय क्षेत्र $B_1 = 0.05 \,Wb/m^2$, समय $dt = 10 \,s$.
कुंडली को चुंबकीय क्षेत्र के लंबवत रखा गया है, इसलिए कोण $\theta = 0^\circ$ और $\cos \theta = 1$.
प्रारंभिक चुंबकीय फ्लक्स $\phi_1 = B_1 A = 0.05 \times 3 = 0.15 \,Wb$.
क्षेत्र अपने मूल मान के $20 \%$ तक कम हो जाता है, इसलिए $B_2 = 0.20 \times 0.05 = 0.01 \,Wb/m^2$.
अंतिम चुंबकीय फ्लक्स $\phi_2 = B_2 A = 0.01 \times 3 = 0.03 \,Wb$.
प्रेरित e.m.f. फैराडे के नियम द्वारा दिया जाता है: $|e| = |\frac{d\phi}{dt}| = |\frac{\phi_2 - \phi_1}{dt}|$.
$|e| = |\frac{0.03 - 0.15}{10}| = |\frac{-0.12}{10}| = 0.012 \,V$.
मिलीवोल्ट में बदलने पर: $0.012 \,V = 12 \,mV$.
241
PhysicsMediumMCQMHT CET · 2025
$m$ द्रव्यमान के गोलक और $L$ लंबाई के चालक तार वाला एक सरल लोलक गुरुत्वाकर्षण के अंतर्गत $\theta$ कोण पर दोलन करता है। दोलन की दिशा के लंबवत पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र का घटक $B$ है। लोलक में प्रेरित अधिकतम e.m.f. क्या है? ($g=$ गुरुत्वीय त्वरण)
A
$2 BL(\sqrt{gL})(\sin \theta / 2)$
B
$BL(\sqrt{gL})(\sin \theta / 2)$
C
$BL(\sqrt{gL})^2(\sin \theta / 2)$
D
$2 BL(\sqrt{gL})\left(\sin ^2 \theta / 2\right)$

Solution

(A) चुंबकीय क्षेत्र में $v$ वेग से गति करने वाले $L$ लंबाई के चालक में प्रेरित गतिक e.m.f. $\varepsilon = BLv$ द्वारा दिया जाता है।
लोलक के लिए,अधिकतम वेग $v_{max}$ दोलन के सबसे निचले बिंदु पर होता है।
ऊर्जा संरक्षण के नियम का उपयोग करते हुए,अधिकतम कोण $\theta$ पर स्थितिज ऊर्जा सबसे निचले बिंदु पर गतिज ऊर्जा में परिवर्तित हो जाती है: $mgL(1 - \cos \theta) = \frac{1}{2}mv_{max}^2$.
इसे सरल करने पर,$v_{max}^2 = 2gL(1 - \cos \theta)$.
त्रिकोणमितीय सर्वसमिका $1 - \cos \theta = 2 \sin^2(\theta / 2)$ का उपयोग करने पर,हमें $v_{max}^2 = 2gL(2 \sin^2(\theta / 2)) = 4gL \sin^2(\theta / 2)$ प्राप्त होता है।
वर्गमूल लेने पर,$v_{max} = 2\sqrt{gL} \sin(\theta / 2)$.
e.m.f. के सूत्र में $v_{max}$ का मान रखने पर: $\varepsilon_{max} = BL(2\sqrt{gL} \sin(\theta / 2)) = 2BL\sqrt{gL} \sin(\theta / 2)$.
अतः,सही विकल्प $A$ है।
242
PhysicsMediumMCQMHT CET · 2025
$\ell$ चौड़ाई,$m$ द्रव्यमान और $R$ प्रतिरोध वाला एक लंबा आयताकार चालक लूप आंशिक रूप से एक लंबवत चुंबकीय क्षेत्र $B$ में रखा गया है। इसे $V$ वेग के साथ नीचे की ओर धकेला जाता है ताकि यह स्वतंत्र रूप से गिरना जारी रख सके। वेग $V$ है
Question diagram
A
$\frac{mg R^2}{B \ell}$
B
$\frac{B^2 \ell^2 R}{mg}$
C
$\frac{mg R}{B^2 \ell^2}$
D
$\frac{mg \ell}{B^2 R^2}$

Solution

(C) जब लूप चुंबकीय क्षेत्र $B$ में $V$ वेग के साथ नीचे की ओर गति करता है,तो चुंबकीय क्षेत्र के भीतर $\ell$ लंबाई की क्षैतिज भुजा पर एक प्रेरित इलेक्ट्रोमोटिव बल $(EMF)$ उत्पन्न होता है।
प्रेरित $EMF$ $\varepsilon = B \ell V$ द्वारा दिया जाता है।
लूप में प्रेरित धारा $I = \frac{\varepsilon}{R} = \frac{B \ell V}{R}$ है।
लूप की क्षैतिज भुजा पर कार्य करने वाला चुंबकीय बल $F_m = I \ell B = \left( \frac{B \ell V}{R} \right) \ell B = \frac{B^2 \ell^2 V}{R}$ है।
लूप के लिए एक स्थिर वेग $V$ के साथ स्वतंत्र रूप से गिरने के लिए,नीचे की ओर कार्य करने वाले गुरुत्वाकर्षण बल को ऊपर की ओर कार्य करने वाले चुंबकीय बल द्वारा संतुलित किया जाना चाहिए:
$mg = F_m$
$mg = \frac{B^2 \ell^2 V}{R}$
$V$ के लिए हल करने पर,हमें प्राप्त होता है:
$V = \frac{mg R}{B^2 \ell^2}$.
243
PhysicsMediumMCQMHT CET · 2025
$r_1$ और $r_2$ $(r_1 > r_2)$ त्रिज्या वाले दो समतलीय संकेंद्रित धातु के छल्ले हवा में रखे गए हैं। बड़ी त्रिज्या वाली कुंडली से $I$ धारा प्रवाहित हो रही है। कुंडलियों के बीच अन्योन्य प्रेरण (mutual inductance) ($\mu_0 =$ मुक्त स्थान की पारगम्यता) क्या होगा?
A
$\frac{\mu_0 \pi r_1^2}{2 r_2}$
B
$\frac{\mu_0 \pi r_2^2}{2 r_1}$
C
$\frac{\mu_0 \pi (r_1 + r_2)^2}{2 r_1}$
D
$\frac{\mu_0 \pi (r_1 - r_2)^2}{2 r_2}$

Solution

(B) $I$ धारा वाली $r_1$ त्रिज्या की वृत्ताकार कुंडली के केंद्र पर चुंबकीय क्षेत्र $B = \frac{\mu_0 I}{2 r_1}$ द्वारा दिया जाता है।
चूंकि $r_1 > r_2$,बड़ी कुंडली द्वारा उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र छोटी कुंडली के क्षेत्रफल पर लगभग एकसमान रहता है।
$r_2$ त्रिज्या वाली छोटी कुंडली से जुड़ा चुंबकीय फ्लक्स $\phi = B \cdot A = \left( \frac{\mu_0 I}{2 r_1} \right) (\pi r_2^2)$ है।
अन्योन्य प्रेरण $M$ को संबंध $\phi = M I$ द्वारा परिभाषित किया जाता है।
अतः,$M = \frac{\phi}{I} = \frac{\mu_0 \pi r_2^2}{2 r_1}$.
244
PhysicsMediumMCQMHT CET · 2025
अन्योन्य प्रेरण का गुणांक $2 \text{ H}$ है और द्वितीयक कुंडली में प्रेरित e.m.f. $2 \text{ kV}$ है। प्राथमिक कुंडली में धारा $6 \text{ A}$ से घटकर $3 \text{ A}$ हो जाती है। धारा में परिवर्तन के लिए आवश्यक समय है:
A
$4 \times 10^{-3} \text{ s}$
B
$6 \times 10^{-3} \text{ s}$
C
$2 \times 10^{-3} \text{ s}$
D
$3 \times 10^{-3} \text{ s}$

Solution

(D) अन्योन्य प्रेरण के कारण द्वितीयक कुंडली में प्रेरित e.m.f. का सूत्र है:
$|\varepsilon| = M \cdot \left| \frac{dI}{dt} \right|$
दिया गया है:
अन्योन्य प्रेरकत्व $M = 2 \text{ H}$
प्रेरित e.m.f. $\varepsilon = 2 \text{ kV} = 2000 \text{ V}$
धारा में परिवर्तन $\Delta I = 6 \text{ A} - 3 \text{ A} = 3 \text{ A}$
सूत्र में मान रखने पर:
$2000 = 2 \cdot \left( \frac{3}{\Delta t} \right)$
$2000 = \frac{6}{\Delta t}$
$\Delta t = \frac{6}{2000} \text{ s}$
$\Delta t = 3 \times 10^{-3} \text{ s}$
अतः,आवश्यक समय $3 \times 10^{-3} \text{ s}$ है।
245
PhysicsEasyMCQMHT CET · 2025
सेल्फ-इंडक्टेंस $L$ वाले एक इंडक्टर से बहने वाली धारा लगातार एक स्थिर दर से बढ़ रही है। प्रेरित e.m.f. $(e)$ बनाम $dI/dt$ का परिवर्तन किस चित्र द्वारा ग्राफ़िक रूप से दिखाया गया है?
Question diagram
A
$A$
B
$B$
C
$C$
D
$D$

Solution

(B) एक इंडक्टर में प्रेरित e.m.f. $(e)$ का मान सूत्र $e = -L \frac{dI}{dt}$ द्वारा दिया जाता है।
यहाँ,$L$ इंडक्टर का सेल्फ-इंडक्टेंस है,जो कि एक स्थिरांक है।
ऋणात्मक चिह्न यह दर्शाता है कि प्रेरित e.m.f. धारा में परिवर्तन का विरोध करता है (लेंज का नियम)।
चूंकि $L$ स्थिर है,इसलिए $e$ और $\frac{dI}{dt}$ के बीच का संबंध $y = mx$ के रूप का एक रैखिक समीकरण है,जहाँ $m = -L$ है।
यह मूल बिंदु से गुजरने वाली एक सीधी रेखा को दर्शाता है जिसका ढलान (slope) ऋणात्मक है।
दिए गए ग्राफ़ को देखने पर,ग्राफ़ $B$ एक सीधी रेखा दिखाता है जो मूल बिंदु से शुरू होती है और जैसे-जैसे $\frac{dI}{dt}$ बढ़ता है,यह ऋणात्मक $e$ क्षेत्र में जाती है,जो $e = -L \frac{dI}{dt}$ संबंध को सही ढंग से दर्शाता है।
246
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$\ell$ लंबाई और $L$ प्रेरकत्व (inductance) वाले एक परिनालिका (solenoid) को बनाने के लिए,आवश्यक पतले तार की लंबाई क्या होगी? (परिनालिका का व्यास उसकी लंबाई की तुलना में बहुत कम है,$\mu_0=$ निर्वात की पारगम्यता)
A
$\left[\frac{4 \pi \ell L}{\mu_0}\right]^{\frac{1}{2}}$
B
$\left[\frac{2 \pi \ell}{\mu_0 L}\right]^{\frac{1}{2}}$
C
$\left[\frac{4 \pi \mu_0}{\ell L}\right]^{\frac{1}{2}}$
D
$\left[\frac{2 \pi \mu_0 L}{\ell}\right]^{\frac{1}{2}}$

Solution

(A) एक लंबी परिनालिका का प्रेरकत्व $L = \frac{\mu_0 N^2 A}{\ell}$ द्वारा दिया जाता है,जहाँ $N$ फेरों की संख्या है,$A$ अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल है और $\ell$ लंबाई है।
मान लीजिए $r$ परिनालिका की त्रिज्या है,तो $A = \pi r^2$. अतः,$L = \frac{\mu_0 N^2 \pi r^2}{\ell}$.
तार की कुल लंबाई $W$ एक फेरे की परिधि और फेरों की संख्या का गुणनफल है: $W = N(2 \pi r)$.
इससे,$N = \frac{W}{2 \pi r}$.
$N$ का मान प्रेरकत्व के सूत्र में रखने पर: $L = \frac{\mu_0 (W / 2 \pi r)^2 \pi r^2}{\ell} = \frac{\mu_0 W^2 \pi r^2}{\ell (4 \pi^2 r^2)} = \frac{\mu_0 W^2}{4 \pi \ell}$.
$W$ के लिए हल करने पर: $W^2 = \frac{4 \pi \ell L}{\mu_0}$,जिससे प्राप्त होता है $W = \left[\frac{4 \pi \ell L}{\mu_0}\right]^{\frac{1}{2}}$.
247
PhysicsMediumMCQMHT CET · 2025
दो कुंडलियाँ $P$ और $Q$ एक-दूसरे के निकट रखी गई हैं। जब कुंडली $P$ में कोई धारा प्रवाहित नहीं होती है और कुंडली $Q$ में धारा $10 \ A/s$ की दर से बढ़ती है,तो कुंडली $P$ में प्रेरित e.m.f. $15 \ mV$ होता है। जब कुंडली $Q$ में कोई धारा नहीं होती है और कुंडली $P$ से $1.8 \ A$ की धारा प्रवाहित होती है,तो कुंडली $Q$ से संबद्ध चुंबकीय फ्लक्स है ($mWb$ में)
A
$2.7$
B
$1.8$
C
$1.5$
D
$1.0$

Solution

(A) कुंडली $Q$ में बदलती धारा के कारण कुंडली $P$ में प्रेरित e.m.f. $\varepsilon_P = M \frac{dI_Q}{dt}$ द्वारा दिया जाता है,जहाँ $M$ अन्योन्य प्रेरकत्व (mutual inductance) है।
दिया गया है $\varepsilon_P = 15 \ mV = 15 \times 10^{-3} \ V$ और $\frac{dI_Q}{dt} = 10 \ A/s$.
$15 \times 10^{-3} = M \times 10 \implies M = 1.5 \times 10^{-3} \ H = 1.5 \ mH$.
जब कुंडली $P$ से धारा $I_P$ प्रवाहित होती है,तो कुंडली $Q$ से संबद्ध चुंबकीय फ्लक्स $\phi_Q = M I_P$ द्वारा दिया जाता है।
दिया गया है $I_P = 1.8 \ A$ और $M = 1.5 \ mH$.
$\phi_Q = 1.5 \ mH \times 1.8 \ A = 2.7 \ mWb$.
248
PhysicsMediumMCQMHT CET · 2025
एक कुंडली (coil) को आयताकार अनुप्रस्थ काट वाले कोर पर लपेटा गया है। यदि कोर के सभी रैखिक आयामों को $3$ के गुणक से बढ़ा दिया जाए और कुंडली की प्रति इकाई लंबाई में फेरों की संख्या समान रहे,तो स्व-प्रेरकत्व (self-inductance) किस गुणक से बढ़ जाएगा?
A
$3$
B
$9$
C
$27$
D
$81$

Solution

(C) सोलेनोइड का स्व-प्रेरकत्व $L$ सूत्र $L = \mu_0 n^2 A l$ द्वारा दिया जाता है,जहाँ $n$ प्रति इकाई लंबाई में फेरों की संख्या है,$A$ अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल है,और $l$ कुंडली की लंबाई है।
यह दिया गया है कि सभी रैखिक आयामों को $k = 3$ के गुणक से बढ़ाया जाता है:
$1$. लंबाई $l$,$l' = kl = 3l$ हो जाती है।
$2$. चूंकि अनुप्रस्थ काट आयताकार है,यदि इसकी भुजाएँ $a$ और $b$ हैं,तो क्षेत्रफल $A = ab$ है। जब आयामों को $k$ से स्केल किया जाता है,तो नया क्षेत्रफल $A' = (ka)(kb) = k^2 A = 3^2 A = 9A$ हो जाता है।
$3$. प्रति इकाई लंबाई में फेरों की संख्या $n$ स्थिर रहती है।
इन मानों को नए प्रेरकत्व $L'$ के सूत्र में रखने पर:
$L' = \mu_0 n^2 A' l' = \mu_0 n^2 (k^2 A) (kl) = k^3 (\mu_0 n^2 A l) = k^3 L$।
$k = 3$ रखने पर:
$L' = 3^3 L = 27L$।
अतः,स्व-प्रेरकत्व $27$ के गुणक से बढ़ जाता है।
249
PhysicsEasyMCQMHT CET · 2025
चार इंडक्टर्स $P, Q, R, S$ के लिए चुंबकीय फ्लक्स $(\phi)$ बनाम धारा $(I)$ का ग्राफ दिखाया गया है। स्व-प्रेरकत्व (self-inductance) का सबसे बड़ा मान किस इंडक्टर के लिए है?
Question diagram
A
$R$
B
$P$
C
$Q$
D
$S$

Solution

(B) एक इंडक्टर से जुड़ा चुंबकीय फ्लक्स $(\phi)$ संबंध $\phi = LI$ द्वारा दिया जाता है,जहाँ $L$ इंडक्टर का स्व-प्रेरकत्व है।
इस समीकरण से,स्व-प्रेरकत्व $L$ को $L = \frac{\phi}{I}$ के रूप में व्यक्त किया जा सकता है।
दिए गए ग्राफ में,$\phi$ को $y$-अक्ष पर और $I$ को $x$-अक्ष पर प्लॉट किया गया है।
इसलिए,$\phi-I$ ग्राफ का ढाल (slope) इंडक्टर के स्व-प्रेरकत्व $L$ को दर्शाता है।
ग्राफ का ढाल $\tan(\theta)$ द्वारा दिया जाता है,जहाँ $\theta$ वह कोण है जो रेखा धारा अक्ष ($I$-अक्ष) के साथ बनाती है।
जैसे-जैसे कोण $\theta$ बढ़ता है,$\tan(\theta)$ का मान बढ़ता है।
ग्राफ को देखने पर,इंडक्टर $P$ के लिए रेखा $I$-अक्ष के साथ सबसे बड़ा कोण बनाती है।
अतः,इंडक्टर $P$ का ढाल सबसे अधिक है,जिसका अर्थ है कि इसका स्व-प्रेरकत्व $L$ सबसे अधिक है।
250
PhysicsEasyMCQMHT CET · 2025
जब एक चालक कुंडली में धारा $0.5 \ s$ में एक दिशा में $5 \ A$ से विपरीत दिशा में $5 \ A$ में बदल जाती है,तो कुंडली में औसत प्रेरित e.m.f. $2 \ V$ होता है। कुंडली का स्व-प्रेरकत्व (self-inductance) है ($mH$ में)
A
$25$
B
$50$
C
$75$
D
$100$

Solution

(D) स्व-प्रेरकत्व $(L)$ के कारण कुंडली में प्रेरित e.m.f. $(e)$ का सूत्र है: $e = -L \frac{di}{dt}$.
यहाँ,धारा में परिवर्तन $\Delta i = i_f - i_i = (-5 \ A) - (5 \ A) = -10 \ A$ है।
समय अंतराल $\Delta t = 0.5 \ s$ है।
प्रेरित e.m.f. का परिमाण $|e| = 2 \ V$ है।
परिमाण सूत्र $|e| = L \left| \frac{\Delta i}{\Delta t} \right|$ का उपयोग करने पर:
$2 = L \left( \frac{10 \ A}{0.5 \ s} \right)$.
$2 = L \times 20$.
$L = \frac{2}{20} \ H = 0.1 \ H$.
मिलीहेनरी $(mH)$ में बदलने पर: $0.1 \ H = 100 \ mH$.

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