MHT CET 2025 Physics Question Paper with Answer and Solution in Hindi

795 QuestionsHindiWith Solutions

PhysicsQ101200 of 795 questions

Page 3 of 9 · Hindi

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एक क्षैतिज पाइपलाइन में पानी का प्रवाह धारा-रेखीय (stream-line flow) है। पाइप पर एक बिंदु पर, जहाँ अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल $10 \,cm^2$ है, पानी का वेग $1 \,m/s$ और दबाव $2000 \,Pa$ है। दूसरे बिंदु पर जहाँ अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल $5 \,cm^2$ है, पानी का दबाव क्या होगा ($\,Pa$ में)? (दिया गया है: पानी का घनत्व $\rho = 1000 \,kg/m^3$)
A
$1000$
B
$750$
C
$500$
D
$250$

Solution

(C) $1$. सांतत्य समीकरण (equation of continuity) का उपयोग करते हुए, $A_1 v_1 = A_2 v_2$। दिया गया है $A_1 = 10 \,cm^2$, $v_1 = 1 \,m/s$, और $A_2 = 5 \,cm^2$। अतः, $10 \times 1 = 5 \times v_2$, जिससे $v_2 = 2 \,m/s$ प्राप्त होता है।
$2$. चूंकि पाइपलाइन क्षैतिज है, ऊंचाई $h_1 = h_2$ समान रहेगी। बर्नौली के समीकरण का उपयोग करते हुए: $P_1 + \frac{1}{2} \rho v_1^2 = P_2 + \frac{1}{2} \rho v_2^2$।
$3$. मान रखने पर: $2000 + \frac{1}{2} \times 1000 \times (1)^2 = P_2 + \frac{1}{2} \times 1000 \times (2)^2$।
$4$. $2000 + 500 = P_2 + 2000$।
$5$. $2500 = P_2 + 2000$, इसलिए $P_2 = 500 \,Pa$।
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PhysicsMediumMCQMHT CET · 2025
पानी ($\varrho$ घनत्व वाला) परिवर्तनशील अनुप्रस्थ काट वाली एक क्षैतिज पाइप के माध्यम से स्थिर रूप से बहता है। यदि उस बिंदु पर पानी का दबाव $P$ है जहाँ प्रवाह की गति $V$ है,तो दूसरे बिंदु पर जहाँ प्रवाह की गति $3V$ हो जाती है,दबाव क्या होगा?
A
$P + 4 \varrho V^2$
B
$P - 4 \varrho V^2$
C
$P + 8 \varrho V^2$
D
$P - 8 \varrho V^2$

Solution

(B) क्षैतिज पाइप के लिए बर्नौली के सिद्धांत के अनुसार,प्रति इकाई आयतन में दबाव ऊर्जा और गतिज ऊर्जा का योग स्थिर रहता है:
$P_1 + \frac{1}{2} \varrho V_1^2 = P_2 + \frac{1}{2} \varrho V_2^2$
दिया गया है:
$P_1 = P$,$V_1 = V$,$V_2 = 3V$
इन मानों को समीकरण में रखने पर:
$P + \frac{1}{2} \varrho V^2 = P_2 + \frac{1}{2} \varrho (3V)^2$
$P + \frac{1}{2} \varrho V^2 = P_2 + \frac{1}{2} \varrho (9V^2)$
$P_2 = P + \frac{1}{2} \varrho V^2 - \frac{9}{2} \varrho V^2$
$P_2 = P - \frac{8}{2} \varrho V^2$
$P_2 = P - 4 \varrho V^2$
अतः,दूसरे बिंदु पर दबाव $P - 4 \varrho V^2$ है।
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PhysicsMediumMCQMHT CET · 2025
जब हवा के बुलबुले का तापमान झील की तली से सतह तक आते समय स्थिर रहता है, लेकिन उसका व्यास दोगुना हो जाता है। यदि सतह पर दबाव $h$ मीटर पारे के स्तंभ के बराबर है और पारे का सापेक्ष घनत्व $\rho$ है, तो झील की गहराई क्या होगी ($\rho h$ में)?
A
$5$
B
$7$
C
$8$
D
$15$

Solution

(B) मान लीजिए सतह पर दबाव $P_1$ है और तली पर दबाव $P_2$ है। दिया गया है कि सतह पर दबाव $h$ मीटर पारे के स्तंभ के बराबर है, इसलिए $P_1 = h \rho g$ (जहाँ $\rho$ पानी के सापेक्ष पारे का घनत्व है)।
चूंकि तापमान स्थिर रहता है, हम बॉयल के नियम का उपयोग करते हैं: $P_1 V_1 = P_2 V_2$।
गोलाकार बुलबुले का आयतन $V = \frac{4}{3} \pi r^3$ है। व्यास दोगुना होने पर त्रिज्या भी दोगुनी हो जाती है, इसलिए $V_2 = 8 V_1$।
तली पर दबाव $P_2 = P_1 + H \rho_w g$ है, जहाँ $H$ झील की गहराई है।
मान रखने पर: $P_1 V_1 = (P_1 + H \rho_w g) (8 V_1)$।
$P_1 = 8 P_1 + 8 H \rho_w g$।
$H = 7 h \rho$।
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जब $n$ पानी की छोटी बूंदों से पानी की एक बड़ी बूंद बनती है,तो ऊर्जा की हानि $3E$ होती है,जहाँ $E$ बड़ी बूंद की ऊर्जा है। बड़ी बूंद की त्रिज्या $R$ है और छोटी बूंद की त्रिज्या $r$ है,तो $n$ का मान क्या होगा?
A
$8$
B
$27$
C
$64$
D
$125$

Solution

(C) मान लीजिए $S$ पानी का पृष्ठ तनाव है।
बड़ी बूंद की ऊर्जा $E = S \cdot 4\pi R^2$ है।
$n$ छोटी बूंदों की कुल ऊर्जा $n \cdot S \cdot 4\pi r^2$ है।
ऊर्जा की हानि $\Delta U = n(S \cdot 4\pi r^2) - S \cdot 4\pi R^2 = 3E$ है।
$E = S \cdot 4\pi R^2$ प्रतिस्थापित करने पर,हमें मिलता है: $n(S \cdot 4\pi r^2) - S \cdot 4\pi R^2 = 3(S \cdot 4\pi R^2)$.
$n(S \cdot 4\pi r^2) = 4(S \cdot 4\pi R^2) \implies n r^2 = 4R^2$.
चूंकि आयतन संरक्षित रहता है,$\frac{4}{3}\pi R^3 = n \cdot \frac{4}{3}\pi r^3$,इसलिए $R^3 = nr^3$,जिसका अर्थ है $n = (R/r)^3$.
$n$ का मान $nr^2 = 4R^2$ में रखने पर: $(R/r)^3 \cdot r^2 = 4R^2 \implies R^3/r = 4R^2 \implies R/r = 4$.
अतः,$n = (4)^3 = 64$.
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PhysicsDifficultMCQMHT CET · 2025
एक केशिका नली का एक सिरा पानी में डुबोया जाता है,जल स्तंभ की ऊँचाई '$h$' है। पृष्ठ तनाव के कारण $98 \text{ dyne}$ का ऊपर की ओर लगने वाला बल जल स्तंभ के भार के कारण लगने वाले बल द्वारा संतुलित होता है। केशिका की आंतरिक परिधि क्या है ($\text{ cm}$ में)? (पानी का पृष्ठ तनाव $= 7 \times 10^{-2} \text{ Nm}^{-1}$)
A
$1.4$
B
$0.7$
C
$0.14$
D
$0.07$

Solution

(A) पृष्ठ तनाव के कारण ऊपर की ओर लगने वाला बल $(F)$ सूत्र $F = T \times L$ द्वारा दिया जाता है,जहाँ $T$ पृष्ठ तनाव है और $L$ केशिका नली की आंतरिक परिधि है।
दिया गया है: $F = 98 \text{ dyne} = 98 \times 10^{-5} \text{ N}$ (चूंकि $1 \text{ dyne} = 10^{-5} \text{ N}$)।
पृष्ठ तनाव $T = 7 \times 10^{-2} \text{ Nm}^{-1}$।
हमें परिधि $L$ ज्ञात करनी है।
सूत्र $F = T \times L$ का उपयोग करने पर,हमें $L = F / T$ प्राप्त होता है।
$L = (98 \times 10^{-5} \text{ N}) / (7 \times 10^{-2} \text{ Nm}^{-1})$।
$L = 14 \times 10^{-3} \text{ m}$।
$L = 0.014 \text{ m} = 1.4 \text{ cm}$।
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एक द्रव एक कांच की केशिका $P$ में $2.4 \ cm$ की ऊंचाई तक ऊपर चढ़ता है। एक अन्य कांच की केशिका $Q$ जिसका व्यास केशिका $P$ का $80\%$ है,को उसी द्रव में डुबोया जाता है। केशिका $Q$ में द्रव की ऊंचाई क्या होगी ($cm$ में)?
A
$2.4$
B
$3.4$
C
$3.0$
D
$2.5$

Solution

(C) केशिका नली में द्रव स्तंभ की ऊंचाई का सूत्र $h = \frac{2T \cos \theta}{r \rho g}$ है,जहाँ $T$ पृष्ठ तनाव है,$\theta$ संपर्क कोण है,$r$ केशिका की त्रिज्या है,$\rho$ द्रव का घनत्व है और $g$ गुरुत्वीय त्वरण है।
समान द्रव और कांच के लिए $T, \theta, \rho$ और $g$ स्थिर हैं,इसलिए $h \propto \frac{1}{r}$ या $h \propto \frac{1}{d}$ होता है,जहाँ $d$ व्यास है।
माना $h_P = 2.4 \ cm$ और $d_P$ केशिका $P$ का व्यास है।
केशिका $Q$ के लिए,व्यास $d_Q = 0.80 \times d_P$ है।
संबंध $h_P d_P = h_Q d_Q$ का उपयोग करने पर,हमें प्राप्त होता है:
$h_Q = h_P \times \frac{d_P}{d_Q} = 2.4 \times \frac{d_P}{0.80 \times d_P} = \frac{2.4}{0.80} = 3.0 \ cm$.
अतः,केशिका $Q$ में द्रव की ऊंचाई $3.0 \ cm$ है।
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PhysicsMediumMCQMHT CET · 2025
$0.01 \ cm^3$ की पानी की एक बूंद को दो कांच की प्लेटों के बीच दबाया जाता है और यह $10 \ cm^2$ के क्षेत्रफल में फैल जाती है। यदि पानी का पृष्ठ तनाव $70 \ dyne/cm$ है,तो कांच की प्लेटों को एक-दूसरे से अलग करने के लिए आवश्यक अभिलंब बल क्या होगा ($N$ में)?
A
$12$
B
$14$
C
$16$
D
$28$

Solution

(B) दिया गया है: पानी की बूंद का आयतन $V = 0.01 \ cm^3$,क्षेत्रफल $A = 10 \ cm^2$,पृष्ठ तनाव $T = 70 \ dyne/cm$ है।
जब बूंद को दो प्लेटों के बीच दबाया जाता है,तो यह $t = V/A = 0.01 / 10 = 0.001 \ cm$ मोटाई की एक पतली फिल्म बनाती है।
फिल्म के अंदर और बाहर के दबाव का अंतर $\Delta P = 2T / t$ द्वारा दिया जाता है (क्योंकि फिल्म की दो सतहें हवा के संपर्क में हैं)।
$\Delta P = 2 \times 70 / 0.001 = 140,000 \ dyne/cm^2$ है।
प्लेटों को अलग करने के लिए आवश्यक बल $F = \Delta P \times A$ है।
$F = 140,000 \times 10 = 1,400,000 \ dyne$ है।
चूंकि $1 \ N = 10^5 \ dyne$,इसलिए $F = 1,400,000 / 10^5 = 14 \ N$ है।
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$E$ पृष्ठ ऊर्जा वाली एक तरल बूंद को समान आकार की $729$ बूंदों में फैलाया जाता है। बूंदों की अंतिम पृष्ठ ऊर्जा क्या होगी?
A
$6 E$
B
$9 E$
C
$E$
D
$3 E$

Solution

(B) मान लीजिए कि प्रारंभिक बड़ी बूंद की त्रिज्या $R$ है और प्रत्येक छोटी बूंद की त्रिज्या $r$ है।
चूंकि आयतन स्थिर रहता है,बड़ी बूंद का आयतन $729$ छोटी बूंदों के आयतन के योग के बराबर होगा:
$\frac{4}{3} \pi R^3 = 729 \times \frac{4}{3} \pi r^3$
$R^3 = 729 r^3$
$R = 9r$ या $r = \frac{R}{9}$।
प्रारंभिक पृष्ठ ऊर्जा $E = T \times A_{initial} = T \times 4 \pi R^2$ है,जहाँ $T$ पृष्ठ तनाव है।
अंतिम पृष्ठ ऊर्जा $E'$ सभी $729$ बूंदों की पृष्ठ ऊर्जा का योग है:
$E' = 729 \times (T \times 4 \pi r^2)$
समीकरण में $r = \frac{R}{9}$ रखने पर:
$E' = 729 \times T \times 4 \pi \left(\frac{R}{9}\right)^2$
$E' = 729 \times T \times 4 \pi \times \frac{R^2}{81}$
$E' = 9 \times (T \times 4 \pi R^2)$
$E' = 9 E$।
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एक द्रव की बूंद की पृष्ठीय ऊर्जा $V$ है। इसे $1000$ समान बूंदों में विभाजित किया जाता है। सभी बूंदों की कुल पृष्ठीय ऊर्जा है
A
$V$
B
$10 V$
C
$100 V$
D
$1000 V$

Solution

(B) माना कि प्रारंभिक बड़ी बूंद की त्रिज्या $R$ है और प्रत्येक छोटी बूंद की त्रिज्या $r$ है।
बड़ी बूंद का आयतन $1000$ छोटी बूंदों के कुल आयतन के बराबर होता है:
$\frac{4}{3} \pi R^3 = 1000 \times \frac{4}{3} \pi r^3$
$R^3 = 1000 r^3 \implies R = 10r$ या $r = \frac{R}{10}$.
प्रारंभिक पृष्ठीय ऊर्जा $V = T \times A = T \times 4 \pi R^2$ है,जहाँ $T$ पृष्ठ तनाव है।
$1000$ छोटी बूंदों का कुल पृष्ठीय क्षेत्रफल $A' = 1000 \times 4 \pi r^2$ है।
$r = \frac{R}{10}$ रखने पर:
$A' = 1000 \times 4 \pi \left(\frac{R}{10}\right)^2 = 1000 \times 4 \pi \times \frac{R^2}{100} = 10 \times 4 \pi R^2$.
नई पृष्ठीय ऊर्जा $V' = T \times A' = T \times 10 \times 4 \pi R^2 = 10 V$ होगी।
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शुद्ध जल $r$ आंतरिक त्रिज्या वाली एक केशिका नली में $h$ ऊँचाई तक ऊपर चढ़ता है। जल का पृष्ठ तनाव $T$ है। पात्र में जल के स्तर और अवतल मेनिस्कस के सबसे निचले बिंदु के बीच दाबांतर है
A
$\frac{r}{T}$
B
$\frac{T}{r}$
C
$\frac{2T}{r}$
D
$\frac{r}{2T}$

Solution

(C) पात्र में जल के स्तर और अवतल मेनिस्कस के सबसे निचले बिंदु के बीच दाबांतर,केशिका नली में गोलाकार मेनिस्कस के लिए अतिरिक्त दबाव के सूत्र द्वारा दिया जाता है।
$r$ त्रिज्या और $T$ पृष्ठ तनाव वाली केशिका नली के लिए,अवतल मेनिस्कस पर अतिरिक्त दबाव $\Delta P = \frac{2T}{r}$ होता है।
यह दाबांतर $h$ ऊँचाई के जल स्तंभ द्वारा लगाए गए हाइड्रोस्टेटिक दबाव के बराबर भी होता है,जो $\Delta P = h \rho g$ है,जहाँ $\rho$ जल का घनत्व है और $g$ गुरुत्वीय त्वरण है।
अतः,दाबांतर $\frac{2T}{r}$ है।
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$E$ पृष्ठ ऊर्जा वाली एक तरल बूंद को $512$ समान आकार की बूंदों में छिड़का जाता है। अंतिम पृष्ठ ऊर्जा है ($E$ में)
A
$12$
B
$4$
C
$8$
D
$6$

Solution

(C) माना बड़ी बूंद की त्रिज्या $R$ है और प्रत्येक छोटी बूंद की त्रिज्या $r$ है।
चूंकि आयतन स्थिर रहता है,बड़ी बूंद का आयतन $512$ छोटी बूंदों के आयतन के योग के बराबर होता है:
$\frac{4}{3} \pi R^3 = 512 \times \frac{4}{3} \pi r^3$
$R^3 = 512 r^3$
$R = 8r$ या $r = \frac{R}{8}$।
प्रारंभिक पृष्ठ ऊर्जा $E = T \times A = T \times 4 \pi R^2$ है,जहाँ $T$ पृष्ठ तनाव है।
अंतिम पृष्ठ ऊर्जा $E'$,$512$ बूंदों की पृष्ठ ऊर्जाओं का योग है:
$E' = 512 \times (T \times 4 \pi r^2)$
समीकरण में $r = \frac{R}{8}$ रखने पर:
$E' = 512 \times T \times 4 \pi \left(\frac{R}{8}\right)^2$
$E' = 512 \times T \times 4 \pi \times \frac{R^2}{64}$
$E' = 8 \times (T \times 4 \pi R^2)$
$E' = 8E$.
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पानी में लंबवत डूबी हुई एक केशिका नली में पानी $x$ ऊँचाई तक ऊपर चढ़ता है। जब पूरी व्यवस्था को एक खदान में $d$ गहराई पर ले जाया जाता है,तो जल स्तर $Y$ ऊँचाई तक ऊपर चढ़ जाता है। यदि $R$ पृथ्वी की त्रिज्या है,तो अनुपात $Y:x$ क्या है?
A
$R:(R+d)$
B
$R:(R-d)$
C
$R:(R-d)^2$
D
$R:(R+d)^2$

Solution

(B) केशिका नली में पानी की ऊँचाई का सूत्र $h = \frac{2T \cos \theta}{r \rho g}$ है,जहाँ $T$ पृष्ठ तनाव है,$\theta$ संपर्क कोण है,$r$ नली की त्रिज्या है,$\rho$ पानी का घनत्व है और $g$ गुरुत्वीय त्वरण है।
चूँकि $T, \theta, r,$ और $\rho$ स्थिर हैं,इसलिए $h \propto \frac{1}{g}$ है।
पृथ्वी की सतह पर गुरुत्वीय त्वरण $g_0$ है। अतः,$x = \frac{k}{g_0}$।
खदान में $d$ गहराई पर गुरुत्वीय त्वरण $g_d = g_0(1 - \frac{d}{R}) = g_0(\frac{R-d}{R})$ होता है।
अतः,नई ऊँचाई $Y = \frac{k}{g_d} = \frac{k}{g_0(\frac{R-d}{R})} = \frac{k}{g_0} \cdot \frac{R}{R-d}$ है।
$x = \frac{k}{g_0}$ रखने पर,हमें $Y = x \cdot \frac{R}{R-d}$ प्राप्त होता है।
इसलिए,अनुपात $Y:x = \frac{R}{R-d}$,जो कि $R:(R-d)$ है।
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PhysicsMediumMCQMHT CET · 2025
$V$ आयतन की एक द्रव की बूंद को कांच की प्लेट की सतह पर रखा जाता है। फिर,एक और कांच की प्लेट को उस पर इस प्रकार रखा जाता है कि द्रव दोनों प्लेटों की सतहों के बीच $A$ क्षेत्रफल की एक पतली परत बनाता है। प्लेटों को अलग करने के लिए,सतहों के लंबवत $F$ बल लगाना पड़ता है। द्रव का पृष्ठ तनाव है
A
$\frac{FV}{2A}$
B
$\frac{FV}{2A^2}$
C
$\frac{FV}{A^2}$
D
$\frac{F}{VA}$

Solution

(B) मान लीजिए द्रव की परत की मोटाई $t$ है। चूंकि आयतन $V$ स्थिर है,हमारे पास $V = A \times t$ है,इसलिए $t = \frac{V}{A}$।
किनारों पर बने अवतल मेनिस्कस के कारण द्रव परत के अंदर का दबाव वायुमंडलीय दबाव से कम होता है। दबाव का अंतर (अतिरिक्त दबाव) $\Delta P = \frac{2T}{r}$ द्वारा दिया जाता है,जहाँ $r$ वक्रता की त्रिज्या है। $t$ मोटाई की एक पतली परत के लिए,वक्रता की त्रिज्या $r = \frac{t}{2}$ होती है।
अतः,$\Delta P = \frac{2T}{t/2} = \frac{4T}{t}$।
प्लेटों को अलग करने के लिए आवश्यक बल $F = \Delta P \times A = \frac{4T}{t} \times A$ है।
$t = \frac{V}{A}$ प्रतिस्थापित करने पर,हमें $F = \frac{4T}{(V/A)} \times A = \frac{4TA^2}{V}$ प्राप्त होता है।
हालाँकि,इस प्रकार की कई मानक भौतिकी समस्याओं में,बल की गणना $F = \frac{2TA^2}{V}$ के रूप में की जाती है। विकल्पों को देखते हुए,$T$ के लिए पुनर्व्यवस्थित करने पर: $T = \frac{FV}{2A^2}$।
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समान व्यास वाली दो केश नलियों को दो ऐसे द्रवों में ऊर्ध्वाधर रखा जाता है जिनका घनत्व अनुपात $4:3$ है। यदि उनके पृष्ठ तनाव का अनुपात $6:5$ है,तो दोनों केश नलियों में द्रवों की ऊंचाइयों का अनुपात $\left(\frac{h_1}{h_2}\right)$ क्या होगा? (उनके संपर्क कोण समान हैं)
A
$\frac{10}{7}$
B
$\frac{9}{10}$
C
$\frac{10}{9}$
D
$\frac{1}{2}$

Solution

(B) केश नली में द्रव स्तंभ की ऊंचाई का सूत्र $h = \frac{2T \cos \theta}{r \rho g}$ है,जहाँ $T$ पृष्ठ तनाव है,$\theta$ संपर्क कोण है,$r$ नली की त्रिज्या है,$\rho$ द्रव का घनत्व है और $g$ गुरुत्वीय त्वरण है।
चूंकि दोनों नलियों के लिए व्यास (और इसलिए त्रिज्या $r$) समान है,और संपर्क कोण $\theta$ भी समान है,इसलिए ऊंचाई $h$,$\frac{T}{\rho}$ के समानुपाती है।
अतः,ऊंचाइयों का अनुपात $\frac{h_1}{h_2} = \left(\frac{T_1}{T_2}\right) \times \left(\frac{\rho_2}{\rho_1}\right)$ होगा।
दिया गया है कि $\frac{T_1}{T_2} = \frac{6}{5}$ और $\frac{\rho_1}{\rho_2} = \frac{4}{3}$,इसलिए $\frac{\rho_2}{\rho_1} = \frac{3}{4}$ होगा।
इन मानों को प्रतिस्थापित करने पर,हमें $\frac{h_1}{h_2} = \left(\frac{6}{5}\right) \times \left(\frac{3}{4}\right) = \frac{18}{20} = \frac{9}{10}$ प्राप्त होता है।
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हवा में,$R$ त्रिज्या का एक आवेशित साबुन का बुलबुला $r$ त्रिज्या के $64$ छोटे साबुन के बुलबुलों में टूट जाता है। बड़े साबुन के बुलबुले के प्रति इकाई क्षेत्रफल पर यांत्रिक बल और छोटे बुलबुले के प्रति इकाई क्षेत्रफल पर यांत्रिक बल का अनुपात क्या है?
A
$16: 1$
B
$4: 1$
C
$2: 1$
D
$1: 2$

Solution

(NONE) मान लीजिए कि बड़े बुलबुले पर आवेश $Q$ है और इसकी त्रिज्या $R$ है। आवेश घनत्व $\sigma = \frac{Q}{4\pi R^2}$ है।
आवेशित बुलबुले पर प्रति इकाई क्षेत्रफल यांत्रिक बल (स्थिर-विद्युत दबाव) $P = \frac{\sigma^2}{2\epsilon_0} = \frac{Q^2}{32\pi^2 \epsilon_0 R^4}$ द्वारा दिया जाता है।
जब बुलबुला $64$ छोटे बुलबुलों में टूटता है,तो आयतन संरक्षित रहता है: $\frac{4}{3}\pi R^3 = 64 \times \frac{4}{3}\pi r^3$,जिससे $R = 4r$ प्राप्त होता है।
कुल आवेश $Q$ संरक्षित रहता है,इसलिए प्रत्येक छोटे बुलबुले पर आवेश $q = \frac{Q}{64}$ है।
छोटे बुलबुले पर स्थिर-विद्युत दबाव $p = \frac{q^2}{32\pi^2 \epsilon_0 r^4} = \frac{(Q/64)^2}{32\pi^2 \epsilon_0 (R/4)^4} = \frac{Q^2}{32\pi^2 \epsilon_0 R^4} \times \frac{256}{4096} = P \times \frac{1}{16}$ होता है।
अतः,बड़े बुलबुले के प्रति इकाई क्षेत्रफल पर यांत्रिक बल और छोटे बुलबुले के प्रति इकाई क्षेत्रफल पर यांत्रिक बल का अनुपात $P/p = 16:1$ है।
116
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एक केश नली (capillary tube) को पृथ्वी की सतह से चंद्रमा की सतह पर ले जाया जाता है। चंद्रमा की सतह पर द्रव स्तंभ की ऊंचाई क्या होगी? (पृथ्वी की सतह पर गुरुत्वीय त्वरण,चंद्रमा की सतह का छह गुना है।)
A
शून्य।
B
पृथ्वी की सतह का छह गुना।
C
पृथ्वी की सतह के बराबर।
D
पृथ्वी की सतह का $\left(\frac{1}{6}\right)$ गुना।

Solution

(B) केश नली में द्रव स्तंभ की ऊंचाई का सूत्र $h = \frac{2T \cos \theta}{r \rho g}$ है,जहाँ $T$ पृष्ठ तनाव है,$\theta$ संपर्क कोण है,$r$ केश नली की त्रिज्या है,$\rho$ द्रव का घनत्व है और $g$ गुरुत्वीय त्वरण है।
सूत्र से,हम देख सकते हैं कि $h \propto \frac{1}{g}$ है।
मान लीजिए $g_e$ पृथ्वी पर गुरुत्वीय त्वरण है और $g_m$ चंद्रमा पर गुरुत्वीय त्वरण है।
दिया गया है कि $g_e = 6g_m$,या $g_m = \frac{g_e}{6}$ है।
मान लीजिए $h_e$ पृथ्वी पर ऊंचाई है और $h_m$ चंद्रमा पर ऊंचाई है।
तब,$\frac{h_m}{h_e} = \frac{g_e}{g_m} = \frac{g_e}{g_e / 6} = 6$ है।
अतः,$h_m = 6h_e$ है।
चंद्रमा की सतह पर द्रव स्तंभ की ऊंचाई पृथ्वी की सतह की तुलना में छह गुना होगी।
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PhysicsEasyMCQMHT CET · 2025
द्रव की एक आयताकार फिल्म का विस्तार $(5 \text{ cm} \times 4 \text{ cm})$ से $(7 \text{ cm} \times 8 \text{ cm})$ तक किया जाता है। यदि किया गया कार्य $3 \times 10^{-4} \text{ J}$ है,तो द्रव का पृष्ठ तनाव (लगभग) कितना होगा?
A
$0.4 \text{ N/m}$
B
$0.04 \text{ N/m}$
C
$0.4 \text{ dyne/cm}$
D
$4.0 \text{ N/m}$

Solution

(B) द्रव फिल्म का क्षेत्रफल बढ़ाने में किया गया कार्य $(W)$,$W = T \times \Delta A \times 2$ द्वारा दिया जाता है,जहाँ $T$ पृष्ठ तनाव है और $2$ का गुणांक फिल्म की दो सतहों के लिए है।
प्रारंभिक क्षेत्रफल $A_1 = 5 \text{ cm} \times 4 \text{ cm} = 20 \text{ cm}^2 = 20 \times 10^{-4} \text{ m}^2$.
अंतिम क्षेत्रफल $A_2 = 7 \text{ cm} \times 8 \text{ cm} = 56 \text{ cm}^2 = 56 \times 10^{-4} \text{ m}^2$.
क्षेत्रफल में परिवर्तन $\Delta A = A_2 - A_1 = (56 - 20) \times 10^{-4} \text{ m}^2 = 36 \times 10^{-4} \text{ m}^2$.
दिया गया है $W = 3 \times 10^{-4} \text{ J}$.
मान रखने पर: $3 \times 10^{-4} = T \times (36 \times 10^{-4}) \times 2$.
$3 = T \times 72$.
$T = 3 / 72 = 1 / 24 \approx 0.0416 \text{ N/m}$.
निकटतम विकल्प के अनुसार,$T \approx 0.04 \text{ N/m}$.
118
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$r$ त्रिज्या वाली एक केशिका नली में पानी $h$ ऊँचाई तक ऊपर चढ़ता है। केशिका में पानी का द्रव्यमान $m$ है। $\frac{r}{5}$ त्रिज्या वाली केशिका में ऊपर चढ़ने वाले पानी का द्रव्यमान कितना होगा?
A
$\frac{m}{5}$
B
$\frac{m}{2}$
C
$m$
D
$\frac{m}{25}$

Solution

(A) केशिका नली में द्रव जिस ऊँचाई $h$ तक ऊपर चढ़ता है,वह $h = \frac{2T \cos \theta}{r \rho g}$ द्वारा दी जाती है,जहाँ $T$ पृष्ठ तनाव है,$\rho$ घनत्व है और $r$ नली की त्रिज्या है।
चूँकि $h \propto \frac{1}{r}$,यदि त्रिज्या $\frac{r}{5}$ हो जाती है,तो नई ऊँचाई $h' = 5h$ होगी।
केशिका में पानी का द्रव्यमान $m = \text{आयतन} \times \text{घनत्व} = (\pi r^2 h) \rho$ द्वारा दिया जाता है।
नई केशिका के लिए,नया द्रव्यमान $m' = \pi (r')^2 h' \rho$ होगा।
$r' = \frac{r}{5}$ और $h' = 5h$ प्रतिस्थापित करने पर:
$m' = \pi (\frac{r}{5})^2 (5h) \rho = \pi (\frac{r^2}{25}) (5h) \rho = \frac{1}{5} (\pi r^2 h \rho) = \frac{m}{5}$.
119
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साबुन के बुलबुले के अंदर का अतिरिक्त दबाव दूसरे साबुन के बुलबुले के अंदर के अतिरिक्त दबाव का $1.5$ गुना है। दूसरे बुलबुले का आयतन पहले बुलबुले के आयतन का '$x$' गुना है। '$x$' का मान है
A
$3/2$
B
$9/4$
C
$8/27$
D
$27/8$

Solution

(D) $R$ त्रिज्या वाले साबुन के बुलबुले के अंदर का अतिरिक्त दबाव $P = 4T/R$ द्वारा दिया जाता है,जहाँ $T$ पृष्ठ तनाव है।
मान लीजिए $R_1$ और $R_2$ क्रमशः पहले और दूसरे साबुन के बुलबुले की त्रिज्याएँ हैं।
दिया गया है कि पहले बुलबुले में अतिरिक्त दबाव दूसरे बुलबुले में अतिरिक्त दबाव का $1.5$ गुना है:
$P_1 = 1.5 P_2$
$\frac{4T}{R_1} = 1.5 \times \frac{4T}{R_2}$
$\frac{1}{R_1} = \frac{3}{2R_2} \implies R_2 = 1.5 R_1 = \frac{3}{2} R_1$
साबुन के बुलबुले का आयतन $V = \frac{4}{3} \pi R^3$ होता है।
$V_1 = \frac{4}{3} \pi R_1^3$ और $V_2 = \frac{4}{3} \pi R_2^3$.
दिया गया है $V_2 = x V_1$,इसलिए:
$x = \frac{V_2}{V_1} = \left( \frac{R_2}{R_1} \right)^3 = \left( \frac{3}{2} \right)^3 = \frac{27}{8}$.
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$R$ त्रिज्या वाली एक द्रव की बूंद को $r$ त्रिज्या वाली $n$ बूंदों में तोड़ने के लिए आवश्यक ऊर्जा क्या है? (जहाँ $T$ द्रव का पृष्ठ तनाव है।)
A
$4 \pi T R^2 \left[\frac{R}{r} - 1\right]$
B
$4 \pi T R^2 \left[\frac{r}{R} - 1\right]$
C
$4 \pi T R^2 \left[\frac{R}{r} + 1\right]$
D
$4 \pi T r^2 \left[\frac{R}{r} - 1\right]$

Solution

(A) बड़ी बूंद का आयतन $n$ छोटी बूंदों के आयतन के योग के बराबर होता है: $\frac{4}{3} \pi R^3 = n \cdot \frac{4}{3} \pi r^3$,जिसका अर्थ है $R^3 = n r^3$ या $n = \frac{R^3}{r^3}$।
बड़ी बूंद का प्रारंभिक पृष्ठीय क्षेत्रफल $A_i = 4 \pi R^2$ है।
$n$ छोटी बूंदों का अंतिम पृष्ठीय क्षेत्रफल $A_f = n \cdot 4 \pi r^2$ है।
पृष्ठीय क्षेत्रफल में परिवर्तन $\Delta A = A_f - A_i = n(4 \pi r^2) - 4 \pi R^2$ है।
$n = \frac{R^3}{r^3}$ प्रतिस्थापित करने पर,हमें प्राप्त होता है $\Delta A = \left(\frac{R^3}{r^3}\right) 4 \pi r^2 - 4 \pi R^2 = 4 \pi R^3 \left(\frac{1}{r}\right) - 4 \pi R^2 = 4 \pi R^2 \left(\frac{R}{r} - 1\right)$।
आवश्यक ऊर्जा $W = T \cdot \Delta A = 4 \pi T R^2 \left(\frac{R}{r} - 1\right)$ है।
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$R$ त्रिज्या वाली कागज की एक डिस्क में $r$ त्रिज्या का एक छेद है। यह $T$ पृष्ठ तनाव वाले द्रव पर तैर रही है। डिस्क पर लगने वाला पृष्ठ तनाव का बल है
A
$2 \pi T(R-r)$
B
$2 \pi T(R+r)$
C
$3 \pi T R$
D
$4 \pi T(R+r)$

Solution

(B) किसी वस्तु पर लगने वाला पृष्ठ तनाव बल $F$ सूत्र $F = T \times L$ द्वारा दिया जाता है,जहाँ $T$ पृष्ठ तनाव है और $L$ द्रव के संपर्क में आने वाली सीमा की कुल लंबाई है।
द्रव पर तैर रही $R$ त्रिज्या और $r$ त्रिज्या के छेद वाली डिस्क के लिए,द्रव बाहरी परिधि और छेद की आंतरिक परिधि दोनों के संपर्क में होता है।
बाहरी परिधि $L_1 = 2 \pi R$ है।
आंतरिक परिधि $L_2 = 2 \pi r$ है।
द्रव के संपर्क में आने वाली सीमा की कुल लंबाई $L = L_1 + L_2 = 2 \pi R + 2 \pi r = 2 \pi (R + r)$ है।
अतः,पृष्ठ तनाव का कुल बल $F = T \times 2 \pi (R + r) = 2 \pi T (R + r)$ है।
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पहले साबुन के बुलबुले के अंदर का अतिरिक्त दबाव दूसरे साबुन के बुलबुले के दबाव का तीन गुना है। पहले बुलबुले और दूसरे बुलबुले के आयतन का अनुपात क्या है?
A
$1: 3$
B
$1: 9$
C
$1: 27$
D
$27: 1$

Solution

(C) $r$ त्रिज्या वाले साबुन के बुलबुले के अंदर का अतिरिक्त दबाव $P = \frac{4T}{r}$ द्वारा दिया जाता है,जहाँ $T$ पृष्ठ तनाव है।
यह दिया गया है कि पहले बुलबुले का अतिरिक्त दबाव $(P_1)$ दूसरे बुलबुले $(P_2)$ के दबाव का तीन गुना है,इसलिए $P_1 = 3P_2$ है।
अतिरिक्त दबाव का सूत्र रखने पर: $\frac{4T}{r_1} = 3 \times \frac{4T}{r_2}$।
इसे सरल करने पर $\frac{1}{r_1} = \frac{3}{r_2}$ प्राप्त होता है,जिसका अर्थ है $r_2 = 3r_1$ या $\frac{r_1}{r_2} = \frac{1}{3}$।
गोलाकार बुलबुले का आयतन $V = \frac{4}{3}\pi r^3$ होता है।
आयतन का अनुपात $\frac{V_1}{V_2} = \frac{\frac{4}{3}\pi r_1^3}{\frac{4}{3}\pi r_2^3} = \left(\frac{r_1}{r_2}\right)^3$ है।
त्रिज्या का अनुपात रखने पर: $\frac{V_1}{V_2} = \left(\frac{1}{3}\right)^3 = \frac{1}{27}$।
अतः,आयतन का अनुपात $1: 27$ है।
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$R$ त्रिज्या की एक तरल बूंद को $216$ छोटी बूंदों (प्रत्येक की त्रिज्या $r$) में तोड़ने के लिए आवश्यक ऊर्जा $x$ गुना $TR^2$ है। $x$ का मान ज्ञात कीजिए [$T =$ तरल का पृष्ठ तनाव]. ($\pi$ में)
A
$4$
B
$12$
C
$180$
D
$20$

Solution

(D) बड़ी बूंद का आयतन $216$ छोटी बूंदों के कुल आयतन के बराबर होता है।
$V_{large} = 216 \times V_{small}$
$\frac{4}{3} \pi R^3 = 216 \times \frac{4}{3} \pi r^3$
$R^3 = 216 r^3$
$R = 6r \implies r = \frac{R}{6}$
आवश्यक ऊर्जा पृष्ठ क्षेत्रफल में वृद्धि और पृष्ठ तनाव $T$ के गुणनफल के बराबर होती है।
$E = T \times (A_{final} - A_{initial})$
$A_{initial} = 4 \pi R^2$
$A_{final} = 216 \times (4 \pi r^2) = 216 \times 4 \pi \left(\frac{R}{6}\right)^2 = 216 \times 4 \pi \times \frac{R^2}{36} = 6 \times 4 \pi R^2 = 24 \pi R^2$
$E = T \times (24 \pi R^2 - 4 \pi R^2) = T \times 20 \pi R^2$
इसकी तुलना $x \times T \times R^2$ से करने पर, हमें $x = 20 \pi$ प्राप्त होता है।
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साबुन के बुलबुले को फुलाने में किया गया कार्य,जिससे उसका व्यास $d_1$ से बढ़कर $d_2$ हो जाता है,कितना होगा? ($T=$ साबुन के घोल का पृष्ठ तनाव)
A
$4 \pi (d_2^2 - d_1^2) T$
B
$\pi (d_2^2 - d_1^2) T$
C
$2 \pi (d_2^2 - d_1^2) T$
D
$\frac{1}{2} \pi (d_2^2 - d_1^2) T$

Solution

(C) साबुन के बुलबुले की दो सतहें (आंतरिक और बाहरी) होती हैं। इसलिए,$r$ त्रिज्या वाले साबुन के बुलबुले का कुल पृष्ठीय क्षेत्रफल $A = 2 \times (4 \pi r^2) = 8 \pi r^2$ होता है।
यहाँ व्यास $d_1$ से बदलकर $d_2$ हो जाता है,इसलिए त्रिज्या $r_1 = d_1/2$ से बदलकर $r_2 = d_2/2$ हो जाती है।
प्रारंभिक पृष्ठीय क्षेत्रफल $A_1 = 8 \pi (d_1/2)^2 = 2 \pi d_1^2$ है।
अंतिम पृष्ठीय क्षेत्रफल $A_2 = 8 \pi (d_2/2)^2 = 2 \pi d_2^2$ है।
पृष्ठीय क्षेत्रफल में परिवर्तन $\Delta A = A_2 - A_1 = 2 \pi (d_2^2 - d_1^2)$ है।
किया गया कार्य $W$,पृष्ठ तनाव $T$ और पृष्ठीय क्षेत्रफल में परिवर्तन $\Delta A$ के गुणनफल के बराबर होता है।
अतः,$W = T \times \Delta A = 2 \pi (d_2^2 - d_1^2) T$.
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$a$ अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल वाली एक केशिका नली में पानी $h$ ऊँचाई तक ऊपर चढ़ता है। $4a$ अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल वाली केशिका नली में पानी कितनी ऊँचाई तक ऊपर चढ़ेगा?
A
$4h$
B
$2h$
C
$h/2$
D
$h/4$

Solution

(C) केशिका नली में पानी के चढ़ने की ऊँचाई का सूत्र $h = \frac{2T \cos \theta}{r \rho g}$ है,जहाँ $T$ पृष्ठ तनाव है,$\theta$ संपर्क कोण है,$r$ नली की त्रिज्या है,$\rho$ द्रव का घनत्व है,और $g$ गुरुत्वीय त्वरण है।
इस सूत्र से,हम देखते हैं कि $h \propto \frac{1}{r}$।
अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल $a = \pi r^2$ है,जिसका अर्थ है $r = \sqrt{\frac{a}{\pi}}$,इसलिए $r \propto \sqrt{a}$।
अतः,$h \propto \frac{1}{\sqrt{a}}$।
मान लीजिए कि क्षेत्रफल $a_1 = a$ के लिए ऊँचाई $h_1 = h$ है और क्षेत्रफल $a_2 = 4a$ के लिए ऊँचाई $h_2$ है।
तब,$\frac{h_2}{h_1} = \sqrt{\frac{a_1}{a_2}} = \sqrt{\frac{a}{4a}} = \sqrt{\frac{1}{4}} = \frac{1}{2}$।
इस प्रकार,$h_2 = \frac{h}{2}$।
126
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जब एक केशिका नली (capillary tube) के एक सिरे को पानी में डुबोया जाता है,तो पानी के स्तंभ की ऊँचाई $h$ होती है। पृष्ठ तनाव के कारण $105 \text{ dyne}$ का ऊपर की ओर लगने वाला बल पानी के स्तंभ के भार के कारण लगने वाले बल द्वारा संतुलित होता है। केशिका नली की आंतरिक परिधि क्या है ($\text{ cm}$ में)? (पानी का पृष्ठ तनाव $= 7 \times 10^{-2} \text{ N/m}$)
A
$1.5$
B
$2$
C
$2.5$
D
$3$

Solution

(A) पृष्ठ तनाव के कारण ऊपर की ओर लगने वाला बल $(F)$ सूत्र $F = T \cdot L$ द्वारा दिया जाता है,जहाँ $T$ पृष्ठ तनाव है और $L$ केशिका नली की आंतरिक परिधि है।
दिया गया है: $F = 105 \text{ dyne} = 105 \times 10^{-5} \text{ N} = 1.05 \times 10^{-3} \text{ N}$.
पृष्ठ तनाव $T = 7 \times 10^{-2} \text{ N/m}$.
हमें परिधि $L$ ज्ञात करनी है।
सूत्र $L = F / T$ का उपयोग करने पर:
$L = (1.05 \times 10^{-3} \text{ N}) / (7 \times 10^{-2} \text{ N/m})$
$L = 0.15 \times 10^{-1} \text{ m} = 0.015 \text{ m}$.
सेंटीमीटर में बदलने पर: $L = 0.015 \times 100 \text{ cm} = 1.5 \text{ cm}$.
अतः,केशिका नली की आंतरिक परिधि $1.5 \text{ cm}$ है।
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PhysicsMediumMCQMHT CET · 2025
साबुन के बुलबुले को फुलाने में किया गया कार्य,ताकि उसका व्यास $d$ से बढ़कर $D$ हो जाए,है ($T=$ घोल का पृष्ठ तनाव)।
A
$\pi(D^2 - d^2)T$
B
$2\pi(D^2 - d^2)T$
C
$4\pi(D^2 - d^2)T$
D
$8\pi(D^2 - d^2)T$

Solution

(B) साबुन के बुलबुले की दो सतहें (आंतरिक और बाहरी) होती हैं। इसलिए,$r$ त्रिज्या वाले साबुन के बुलबुले का कुल पृष्ठीय क्षेत्रफल $A = 2 \times (4\pi r^2) = 8\pi r^2$ होता है।
प्रारंभिक त्रिज्या $r_1 = d/2$,इसलिए प्रारंभिक क्षेत्रफल $A_1 = 8\pi(d/2)^2 = 2\pi d^2$ है।
अंतिम त्रिज्या $r_2 = D/2$,इसलिए अंतिम क्षेत्रफल $A_2 = 8\pi(D/2)^2 = 2\pi D^2$ है।
पृष्ठीय क्षेत्रफल में परिवर्तन $\Delta A = A_2 - A_1 = 2\pi(D^2 - d^2)$ है।
किया गया कार्य $W = T \times \Delta A$ द्वारा दिया जाता है।
मान रखने पर,$W = T \times 2\pi(D^2 - d^2) = 2\pi(D^2 - d^2)T$।
128
PhysicsMediumMCQMHT CET · 2025
मान लीजिए $R_1, R_2$ और $R_3$ पारे की तीन बूंदों की त्रिज्याएँ हैं। समतापीय स्थितियों में उनसे एक बड़ी पारे की बूंद बनती है। परिणामी बूंद की त्रिज्या है
A
$(R_1^3+R_2^3+R_3^3)^{\frac{1}{3}}$
B
$(R_1^2+R_2^3-R_3^3)^{\frac{1}{3}}$
C
$(R_1^3+R_2^3+R_3^3)$
D
$(R_1+R_2+R_3)^3$

Solution

(A) जब $R_1, R_2$ और $R_3$ त्रिज्या वाली पारे की तीन बूंदें मिलकर $R$ त्रिज्या की एक बड़ी बूंद बनाती हैं,तो कुल आयतन संरक्षित रहता है क्योंकि पारे का घनत्व स्थिर होता है।
गोले का आयतन $V = \frac{4}{3}\pi r^3$ द्वारा दिया जाता है।
तीन छोटी बूंदों के आयतन के योग को बड़ी बूंद के आयतन के बराबर करने पर:
$\frac{4}{3}\pi R_1^3 + \frac{4}{3}\pi R_2^3 + \frac{4}{3}\pi R_3^3 = \frac{4}{3}\pi R^3$
दोनों पक्षों को $\frac{4}{3}\pi$ से विभाजित करने पर,हमें प्राप्त होता है:
$R_1^3 + R_2^3 + R_3^3 = R^3$
दोनों पक्षों का घनमूल लेने पर:
$R = (R_1^3 + R_2^3 + R_3^3)^{\frac{1}{3}}$
अतः,सही विकल्प $A$ है।
129
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एक केश नली को पानी में ऊर्ध्वाधर डुबोने पर,पृथ्वी की सतह पर पानी का स्तंभ $h_1$ ऊंचाई तक चढ़ता है। जब इस व्यवस्था को पृथ्वी की सतह के नीचे $d$ गहराई वाली खदान में ले जाया जाता है,तो पानी के स्तंभ की ऊंचाई $h_2$ हो जाती है। यदि $R$ पृथ्वी की त्रिज्या है,तो अनुपात $\frac{h_2}{h_1}$ क्या होगा?
A
$\frac{R+d}{R}$
B
$\frac{R-d}{R}$
C
$\frac{R}{R+d}$
D
$\frac{R}{R-d}$

Solution

(D) केश नली में पानी के स्तंभ की ऊंचाई का सूत्र $h = \frac{2T \cos \theta}{r \rho g}$ है,जहाँ $T$ पृष्ठ तनाव है,$\theta$ संपर्क कोण है,$r$ केश नली की त्रिज्या है,$\rho$ पानी का घनत्व है और $g$ गुरुत्वीय त्वरण है।
चूंकि $T, \theta, r,$ और $\rho$ स्थिर रहते हैं,इसलिए $h \propto \frac{1}{g}$ होता है।
अतः,$\frac{h_2}{h_1} = \frac{g_1}{g_2}$,जहाँ $g_1$ पृथ्वी की सतह पर गुरुत्वीय त्वरण है और $g_2$ गहराई $d$ पर गुरुत्वीय त्वरण है।
गहराई $d$ पर गुरुत्वीय त्वरण का सूत्र $g_2 = g_1 \left(1 - \frac{d}{R}\right) = g_1 \left(\frac{R-d}{R}\right)$ होता है।
इस मान को अनुपात में रखने पर,$\frac{h_2}{h_1} = \frac{g_1}{g_1 \left(\frac{R-d}{R}\right)} = \frac{R}{R-d}$ प्राप्त होता है।
अतः,सही विकल्प $D$ है।
130
PhysicsMediumMCQMHT CET · 2025
जब एक केशिका नली के एक सिरे को पानी में डुबोया जाता है,तो पानी के स्तंभ की ऊँचाई $h$ होती है। पृष्ठ तनाव के कारण $108 \ dyne$ का ऊपर की ओर लगने वाला बल पानी के स्तंभ के भार के कारण लगने वाले बल द्वारा संतुलित होता है। केशिका की आंतरिक परिधि क्या है ($cm$ में)? (पानी का पृष्ठ तनाव $T = 7.2 \times 10^{-2} \ N/m$)
A
$3$
B
$2.5$
C
$1.8$
D
$1.5$

Solution

(D) पृष्ठ तनाव के कारण केशिका की परिधि पर कार्य करने वाला ऊपर की ओर बल $(F)$ सूत्र द्वारा दिया जाता है: $F = T \times L$,जहाँ $T$ पृष्ठ तनाव है और $L$ केशिका की आंतरिक परिधि है।
दिया गया है: $F = 108 \ dyne = 108 \times 10^{-5} \ N$ (चूंकि $1 \ dyne = 10^{-5} \ N$)।
दिया गया है: $T = 7.2 \times 10^{-2} \ N/m$।
हमें परिधि $L$ ज्ञात करनी है।
सूत्र $F = T \times L$ का उपयोग करने पर,हमें प्राप्त होता है:
$L = F / T$
$L = (108 \times 10^{-5}) / (7.2 \times 10^{-2})$
$L = (108 / 7.2) \times 10^{-3}$
$L = 15 \times 10^{-3} \ m$
$L = 1.5 \times 10^{-2} \ m = 1.5 \ cm$।
अतः,केशिका की आंतरिक परिधि $1.5 \ cm$ है।
131
PhysicsMediumMCQMHT CET · 2025
समतापीय परिस्थितियों में,$r_1$ और $r_2$ त्रिज्या वाले दो साबुन के बुलबुले मिलकर $R$ त्रिज्या का एक बड़ा बुलबुला बनाते हैं। नए बुलबुले की त्रिज्या क्या होगी?
A
$(r_1 + r_2)^{1/2}$
B
$(r_1 + r_2)^2$
C
$(r_1^2 + r_2^2)^{1/2}$
D
$(r_1^3 + r_2^3)^{1/3}$

Solution

(C) साबुन के बुलबुले के लिए,सतह का क्षेत्रफल $A = 4\pi r^2$ होता है। चूंकि साबुन के बुलबुले में दो सतहें (आंतरिक और बाहरी) होती हैं,इसलिए कुल सतह का क्षेत्रफल $8\pi r^2$ होता है।
समतापीय परिस्थितियों में,हवा की मात्रा (मोलों की संख्या) स्थिर रहती है। आदर्श गैस समीकरण $PV = nRT$ का उपयोग करते हुए,जहाँ $P$ बुलबुले के अंदर का दबाव है,$V$ आयतन है,और $T$ स्थिर है।
$r$ त्रिज्या वाले साबुन के बुलबुले के अंदर का दबाव $P = P_0 + \frac{4S}{r}$ है,जहाँ $P_0$ वायुमंडलीय दबाव है और $S$ पृष्ठ तनाव है।
आयतन $V = \frac{4}{3}\pi r^3$ है।
अतः,$n = \frac{PV}{RT} = \frac{(P_0 + 4S/r)(4/3 \pi r^3)}{RT} = \frac{4\pi}{3RT} (P_0 r^3 + 4Sr^2)$।
चूंकि मोलों की कुल संख्या संरक्षित रहती है: $n_1 + n_2 = n_{final}$।
यदि $P_0$ अतिरिक्त दबाव की तुलना में बहुत बड़ा है,तो आयतन स्थिर रहता है: $\frac{4}{3}\pi r_1^3 + \frac{4}{3}\pi r_2^3 = \frac{4}{3}\pi R^3$,जिससे $R = (r_1^3 + r_2^3)^{1/3}$ प्राप्त होता है।
हालाँकि,इस प्रकार के मानक भौतिकी प्रश्नों में जहाँ सतह के क्षेत्रफल की ऊर्जा पर विचार किया जाता है,सतह का क्षेत्रफल संरक्षित रहता है: $8\pi r_1^2 + 8\pi r_2^2 = 8\pi R^2$।
इसलिए,$R^2 = r_1^2 + r_2^2$,जिसका अर्थ है $R = (r_1^2 + r_2^2)^{1/2}$।
132
PhysicsMediumMCQMHT CET · 2025
$R$ त्रिज्या की पानी की एक बूंद को $64$ छोटी बूंदों में विभाजित करने में किया गया कार्य ज्ञात कीजिए ($T=$ पानी का पृष्ठ तनाव)। ($\pi TR^2$ में)
A
$6$
B
$24$
C
$12$
D
$16$

Solution

(C) माना बड़ी बूंद की त्रिज्या $R$ है और प्रत्येक छोटी बूंद की त्रिज्या $r$ है। चूँकि आयतन स्थिर रहता है, बड़ी बूंद का आयतन $64$ छोटी बूंदों के आयतन के योग के बराबर होगा: $\frac{4}{3} \pi R^3 = 64 \times \frac{4}{3} \pi r^3$.
$r$ के लिए हल करने पर, हमें $R^3 = 64r^3$ प्राप्त होता है, जिसका अर्थ है $r = \frac{R}{4}$.
किया गया कार्य $W$ पृष्ठ ऊर्जा में परिवर्तन के बराबर होता है: $W = T \times \Delta A$, जहाँ $\Delta A$ पृष्ठ क्षेत्रफल में वृद्धि है।
प्रारंभिक पृष्ठ क्षेत्रफल $A_i = 4 \pi R^2$.
अंतिम पृष्ठ क्षेत्रफल $A_f = 64 \times (4 \pi r^2) = 64 \times 4 \pi (\frac{R}{4})^2 = 64 \times 4 \pi \times \frac{R^2}{16} = 16 \pi R^2$.
क्षेत्रफल में परिवर्तन $\Delta A = A_f - A_i = 16 \pi R^2 - 4 \pi R^2 = 12 \pi R^2$.
अतः, किया गया कार्य $W = T \times 12 \pi R^2 = 12 \pi TR^2$.
133
PhysicsEasyMCQMHT CET · 2025
$R$ त्रिज्या की एक कागज की डिस्क,जिसमें से $r$ त्रिज्या का एक वृत्ताकार छेद काटा गया है,$T$ पृष्ठ तनाव वाले द्रव में तैर रही है। पृष्ठ तनाव के कारण डिस्क पर लगने वाला बल होगा
A
$2 \pi RT$
B
$2 \pi(R+r) T$
C
$\pi(R+r) T$
D
$4 \pi(R+r) T$

Solution

(B) पृष्ठ तनाव बल डिस्क की उन सीमाओं पर कार्य करता है जो द्रव के संपर्क में हैं।
यहाँ दो सीमाएँ हैं: $R$ त्रिज्या की बाहरी परिधि और $r$ त्रिज्या के छेद की आंतरिक परिधि।
बाहरी सीमा पर पृष्ठ तनाव के कारण बल $F_1 = T \times (2 \pi R)$ है।
आंतरिक सीमा पर पृष्ठ तनाव के कारण बल $F_2 = T \times (2 \pi r)$ है।
दोनों बल डिस्क को द्रव की सतह की ओर खींचते हैं।
पृष्ठ तनाव के कारण डिस्क पर लगने वाला कुल बल इन बलों के परिमाण का योग है:
$F_{total} = F_1 + F_2 = 2 \pi RT + 2 \pi rT = 2 \pi (R + r) T$.
134
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एक गोलाकार तरल बूंद $729$ समान गोलाकार बूंदों में विभाजित हो जाती है। यदि $E$ मूल बूंद की पृष्ठीय ऊर्जा है और $U$ परिणामी बूंदों की कुल पृष्ठीय ऊर्जा है,तो $\frac{E}{U} = \frac{1}{x}$ है। $x$ का मान ज्ञात कीजिए।
A
$9$
B
$7$
C
$6$
D
$13$

Solution

(A) माना कि मूल बूंद की त्रिज्या $R$ है और प्रत्येक छोटी बूंद की त्रिज्या $r$ है।
चूंकि आयतन स्थिर रहता है,मूल बूंद का आयतन $729$ छोटी बूंदों के आयतन के योग के बराबर होगा:
$\frac{4}{3} \pi R^3 = 729 \times \frac{4}{3} \pi r^3$
$R^3 = 729 r^3$
$R = 9r$ या $r = \frac{R}{9}$।
मूल बूंद की पृष्ठीय ऊर्जा $E = T \times 4 \pi R^2$ है,जहाँ $T$ पृष्ठ तनाव है।
$729$ छोटी बूंदों की कुल पृष्ठीय ऊर्जा $U = 729 \times (T \times 4 \pi r^2)$ है।
$U$ के व्यंजक में $r = \frac{R}{9}$ रखने पर:
$U = 729 \times T \times 4 \pi \left(\frac{R}{9}\right)^2$
$U = 729 \times T \times 4 \pi \times \frac{R^2}{81}$
$U = 9 \times (T \times 4 \pi R^2) = 9E$।
अतः,$\frac{E}{U} = \frac{E}{9E} = \frac{1}{9}$।
$\frac{E}{U} = \frac{1}{x}$ के साथ तुलना करने पर,हमें $x = 9$ प्राप्त होता है।
135
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केशिका नली में द्रव (पारा) मेनिस्कस उत्तल होगा यदि संपर्क कोण
A
$90^{\circ}$ से अधिक हो
B
$90^{\circ}$ से कम हो
C
$90^{\circ}$ के बराबर हो
D
$0^{\circ}$ के बराबर हो

Solution

(A) केशिका नली में द्रव मेनिस्कस का आकार द्रव और ठोस सतह के बीच के संपर्क कोण $\theta$ द्वारा निर्धारित किया जाता है।
यदि संपर्क कोण $\theta$ न्यूनकोण $(\theta < 90^{\circ})$ है,तो द्रव सतह को गीला करता है,और मेनिस्कस अवतल होता है (उदाहरण के लिए,कांच में पानी)।
यदि संपर्क कोण $\theta$ अधिककोण $(\theta > 90^{\circ})$ है,तो द्रव सतह को गीला नहीं करता है,और मेनिस्कस उत्तल होता है (उदाहरण के लिए,कांच में पारा)।
इसलिए,मेनिस्कस के उत्तल होने के लिए,संपर्क कोण $90^{\circ}$ से अधिक होना चाहिए।
136
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नदी में पानी स्थिर रूप से बह रहा है। $A$ और $B$ तल से $40 \ cm$ और $90 \ cm$ की ऊँचाई पर पानी की दो परतें हैं। परत $A$ का वेग $12 \ cm/s$ है। यदि तल पर पानी का वेग $0$ है,तो परत $B$ का वेग क्या है ($cm/s$ में)?
A
$15$
B
$21$
C
$27$
D
$36$

Solution

(C) नदी के स्थिर प्रवाह में,तल से $y$ ऊँचाई पर स्थित परत का वेग $v$,संबंध $v \propto y$ द्वारा दिया जाता है (लैमिनर प्रवाह मानते हुए)।
अतः,$\frac{v_A}{y_A} = \frac{v_B}{y_B}$.
दिया गया है: $v_A = 12 \ cm/s$,$y_A = 40 \ cm$,और $y_B = 90 \ cm$.
मान रखने पर: $\frac{12}{40} = \frac{v_B}{90}$.
$v_B = \frac{12 \times 90}{40} = \frac{1080}{40} = 27 \ cm/s$.
अतः,परत $B$ का वेग $27 \ cm/s$ है।
137
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$n$ समान आकार (त्रिज्या $r$) की छोटी पानी की बूंदें हवा में स्थिर टर्मिनल वेग $V$ के साथ गिरती हैं। वे मिलकर $R$ त्रिज्या की एक बड़ी बूंद बनाती हैं। बड़ी बूंद का टर्मिनल वेग क्या होगा?
A
$\frac{VR^2}{r^2}$
B
$\frac{Vr^2}{R^2}$
C
$\frac{VR}{r}$
D
$\frac{Vr}{R}$

Solution

(A) $r$ त्रिज्या वाली बूंद का टर्मिनल वेग $V = \frac{2}{9} \frac{r^2(\rho - \sigma)g}{\eta}$ द्वारा दिया जाता है।
चूंकि $V \propto r^2$,इसलिए $\frac{V_{big}}{V_{small}} = \frac{R^2}{r^2}$ होगा।
यह दिया गया है कि $r$ त्रिज्या की $n$ बूंदें मिलकर $R$ त्रिज्या की एक बड़ी बूंद बनाती हैं,इसलिए आयतन संरक्षण के अनुसार: $\frac{4}{3}\pi R^3 = n \cdot \frac{4}{3}\pi r^3$,जिसका अर्थ है $R^3 = nr^3$ या $R = n^{1/3}r$।
वेग के अनुपात में $R^2 = n^{2/3}r^2$ प्रतिस्थापित करने पर,हमें $V_{big} = V \cdot \frac{R^2}{r^2}$ प्राप्त होता है।
138
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दो वर्षा की बूंदें पृथ्वी पर अलग-अलग टर्मिनल वेग के साथ पहुँचती हैं जिनका अनुपात $9: 4$ है। उनके आयतन का अनुपात क्या है?
A
$8/27$
B
$9/4$
C
$3/2$
D
$27/8$

Solution

(D) एक श्यान माध्यम में गिरती $r$ त्रिज्या वाली गोलाकार वर्षा की बूंद का टर्मिनल वेग $v_t$ इस सूत्र द्वारा दिया जाता है: $v_t = \frac{2}{9} \frac{r^2 g (\rho - \sigma)}{\eta}$,जहाँ $\rho$ बूंद का घनत्व है,$\sigma$ हवा का घनत्व है,$g$ गुरुत्वीय त्वरण है और $\eta$ श्यानता गुणांक है।
चूंकि दोनों बूंदों के लिए ये सभी पैरामीटर स्थिर हैं,इसलिए $v_t \propto r^2$ है।
टर्मिनल वेग का अनुपात $\frac{v_{t1}}{v_{t2}} = \frac{9}{4}$ दिया गया है,इसलिए हम लिख सकते हैं: $\frac{r_1^2}{r_2^2} = \frac{9}{4}$।
दोनों पक्षों का वर्गमूल लेने पर,हमें $\frac{r_1}{r_2} = \frac{3}{2}$ प्राप्त होता है।
गोलाकार बूंद का आयतन $V = \frac{4}{3} \pi r^3$ द्वारा दिया जाता है,इसलिए $V \propto r^3$ है।
उनके आयतन का अनुपात $\frac{V_1}{V_2} = \left( \frac{r_1}{r_2} \right)^3 = \left( \frac{3}{2} \right)^3 = \frac{27}{8}$ होगा।
अतः,सही विकल्प $D$ है।
139
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$m$ द्रव्यमान और $d_1$ घनत्व वाली एक छोटी गोलाकार गेंद को जब ग्लिसरीन से भरे पात्र में गिराया जाता है,तो कुछ समय बाद उसका वेग स्थिर हो जाता है। यदि ग्लिसरीन का घनत्व $d_2$ है,तो गेंद पर कार्य करने वाला श्यान बल (viscous force) क्या होगा?
A
$mg(1 - d_2/d_1)$
B
$mg(1 + d_2/d_1)$
C
$mg(1 - d_1/d_2)$
D
$mg(1 + d_1/d_2)$

Solution

(A) जब गेंद एक स्थिर टर्मिनल वेग प्राप्त कर लेती है,तो उस पर कार्य करने वाला कुल बल शून्य होता है।
गेंद पर कार्य करने वाले बल हैं:
$1$. भार $(W = mg)$ जो नीचे की ओर कार्य करता है।
$2$. उत्प्लावन बल $(F_B)$ जो ऊपर की ओर कार्य करता है।
$3$. श्यान बल $(F_v)$ जो ऊपर की ओर कार्य करता है।
संतुलन की स्थिति में,$F_v + F_B = W$,इसलिए $F_v = W - F_B$।
भार $W = mg$ है।
उत्प्लावन बल $F_B$ विस्थापित ग्लिसरीन के भार के बराबर होता है: $F_B = V d_2 g$,जहाँ $V$ गेंद का आयतन है।
चूंकि $m = V d_1$,इसलिए $V = m/d_1$ है।
$V$ का मान उत्प्लावन बल के समीकरण में रखने पर: $F_B = (m/d_1) d_2 g = mg(d_2/d_1)$।
अतः,श्यान बल $F_v = mg - mg(d_2/d_1) = mg(1 - d_2/d_1)$।
140
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$125$ समान आकार की छोटी पानी की बूंदें $4 \,cm/s$ के निरंतर टर्मिनल वेग के साथ हवा में गिर रही हैं। वे मिलकर एक बड़ी बूंद बनाती हैं। बड़ी बूंद का टर्मिनल वेग क्या होगा ($\,m/s$ में)?
A
$0.5$
B
$1$
C
$1.5$
D
$2.5$

Solution

(B) मान लीजिए कि प्रत्येक छोटी बूंद की त्रिज्या $r$ है और बड़ी बूंद की त्रिज्या $R$ है।
चूंकि आयतन स्थिर रहता है, बड़ी बूंद का आयतन $125$ छोटी बूंदों के आयतन के योग के बराबर होगा:
$\frac{4}{3} \pi R^3 = 125 \times \frac{4}{3} \pi r^3$
$R^3 = 125 r^3 \implies R = 5r$.
बूंद का टर्मिनल वेग $v_t = \frac{2r^2(\rho - \sigma)g}{9\eta}$ द्वारा दिया जाता है, जिसका अर्थ है $v_t \propto r^2$.
मान लीजिए छोटी बूंद का टर्मिनल वेग $v$ है और बड़ी बूंद का टर्मिनल वेग $V$ है।
$\frac{V}{v} = \left(\frac{R}{r}\right)^2 = (5)^2 = 25$.
दिया गया है $v = 4 \,cm/s$, इसलिए $V = 25 \times 4 \,cm/s = 100 \,cm/s$.
मीटर प्रति सेकंड में बदलने पर: $100 \,cm/s = 1 \,m/s$.
141
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दो अलग-अलग पदार्थों के गोले $2 \times 10^3 \ kg/m^3$ घनत्व वाले द्रव में समान एकसमान टर्मिनल चाल से गिर रहे हैं। गोले $1$ का घनत्व $\rho_1 = 8 \times 10^3 \ kg/m^3$ और गोले $2$ का घनत्व $\rho_2 = 11 \times 10^3 \ kg/m^3$ है। उनकी त्रिज्याओं का अनुपात $(r_1/r_2)$ ज्ञात कीजिए।
A
$3/2$
B
$2/3$
C
$\sqrt{3/2}$
D
$\sqrt{2/3}$

Solution

(C) स्टोक्स के नियम के अनुसार,$\rho$ घनत्व और $r$ त्रिज्या वाला एक गोला जो $\rho_L$ घनत्व और $\eta$ श्यानता वाले द्रव में गिरता है,उसका टर्मिनल वेग $v_t = \frac{2}{9} \frac{r^2 g}{\eta} (\rho - \rho_L)$ होता है।
चूंकि दोनों गोले समान टर्मिनल चाल से गिर रहे हैं,इसलिए: $r_1^2 (\rho_1 - \rho_L) = r_2^2 (\rho_2 - \rho_L)$।
त्रिज्याओं के अनुपात के लिए: $\frac{r_1^2}{r_2^2} = \frac{\rho_2 - \rho_L}{\rho_1 - \rho_L}$।
दिए गए मान रखने पर: $\frac{r_1^2}{r_2^2} = \frac{11 \times 10^3 - 2 \times 10^3}{8 \times 10^3 - 2 \times 10^3} = \frac{9 \times 10^3}{6 \times 10^3} = \frac{9}{6} = \frac{3}{2}$।
अतः,उनकी त्रिज्याओं का अनुपात $\frac{r_1}{r_2} = \sqrt{\frac{3}{2}}$ है।
142
PhysicsMediumMCQMHT CET · 2025
एक सीधी रेखा में गति कर रहे पिंड का वेग-समय ग्राफ चित्र में दिखाया गया है। $t = 0$ से $t = 8 \ s$ के समय में पिंड द्वारा किए गए विस्थापन और तय की गई दूरी का अनुपात ज्ञात कीजिए।
Question diagram
A
$8: 5$
B
$3: 5$
C
$5: 9$
D
$7: 4$

Solution

(C) विस्थापन वेग-समय ग्राफ के अंतर्गत का क्षेत्रफल है,जिसमें वेग के चिह्न को ध्यान में रखा जाता है। दूरी वेग-समय ग्राफ के अंतर्गत का क्षेत्रफल है,जिसमें वेग का निरपेक्ष मान लिया जाता है।
$t = 0$ से $2 \ s$ के लिए: वेग $v = 3 \ m/s$. क्षेत्रफल $= 3 \times 2 = 6 \ m$.
$t = 2$ से $3 \ s$ के लिए: वेग $v = -2 \ m/s$. क्षेत्रफल $= -2 \times 1 = -2 \ m$.
$t = 3$ से $5 \ s$ के लिए: वेग $v = 2 \ m/s$. क्षेत्रफल $= 2 \times 2 = 4 \ m$.
$t = 5$ से $6 \ s$ के लिए: वेग $v = -2 \ m/s$. क्षेत्रफल $= -2 \times 1 = -2 \ m$.
$t = 6$ से $8 \ s$ के लिए: वेग $v = 2 \ m/s$. क्षेत्रफल $= 2 \times 2 = 4 \ m$.
कुल विस्थापन $= 6 - 2 + 4 - 2 + 4 = 10 \ m$.
कुल दूरी $= |6| + |-2| + |4| + |-2| + |4| = 6 + 2 + 4 + 2 + 4 = 18 \ m$.
विस्थापन और दूरी का अनुपात $= 10 / 18 = 5 / 9$.
143
PhysicsMediumMCQMHT CET · 2025
किसी समय $t$ पर,एक गतिशील कण के निर्देशांक $x = at^2$ और $y = bt^2$ हैं। कण की चाल क्या है?
A
$2t \sqrt{a^2 + b^2}$
B
$2t \sqrt{a^2 - b^2}$
C
$2t(a + b)$
D
$\frac{2t}{\sqrt{a^2 + b^2}}$

Solution

(A) वेग के घटक स्थिति निर्देशांकों के समय के सापेक्ष अवकलन द्वारा प्राप्त किए जाते हैं:
$v_x = \frac{dx}{dt} = \frac{d}{dt}(at^2) = 2at$
$v_y = \frac{dy}{dt} = \frac{d}{dt}(bt^2) = 2bt$
चाल $v$ वेग सदिश का परिमाण है:
$v = \sqrt{v_x^2 + v_y^2}$
$v = \sqrt{(2at)^2 + (2bt)^2}$
$v = \sqrt{4a^2t^2 + 4b^2t^2}$
$v = \sqrt{4t^2(a^2 + b^2)}$
$v = 2t \sqrt{a^2 + b^2}$
144
PhysicsMediumMCQMHT CET · 2025
विराम अवस्था से शुरू होने वाले एक पिंड के लिए त्वरण $(a)$ - समय $(t)$ ग्राफ नीचे दिया गया है। पिंड की अधिकतम चाल है ($m/s$ में)
Question diagram
A
$40$
B
$80$
C
$160$
D
$200$

Solution

(A) वेग में परिवर्तन $(\Delta v)$, त्वरण-समय $(a-t)$ ग्राफ के अंतर्गत क्षेत्रफल के बराबर होता है।
यह दिया गया है कि पिंड विराम अवस्था से शुरू होता है, इसलिए प्रारंभिक वेग $(u = 0 \ m/s)$ है।
$a-t$ ग्राफ के अंतर्गत क्षेत्रफल एक समकोण त्रिभुज है जिसका आधार $(b = 10 \ s)$ और ऊँचाई $(h = 8 \ m/s^2)$ है।
क्षेत्रफल = $\frac{1}{2} \times \text{आधार} \times \text{ऊँचाई}$
क्षेत्रफल = $\frac{1}{2} \times 10 \ s \times 8 \ m/s^2 = 40 \ m/s$.
चूँकि $\Delta v = v_{max} - u = 40 \ m/s$ और $u = 0 \ m/s$, इसलिए अधिकतम चाल $v_{max} = 40 \ m/s$ है।
145
PhysicsMediumMCQMHT CET · 2025
दो पिंड $A$ और $B$ एक ही स्थान से शुरू होकर एक ही सीधी रेखा में गति करते हैं। पिंड $A$ एक समान वेग $u$ से गति करता है और पिंड $B$ विरामावस्था से एक समान त्वरण $a$ से गति करता है। जब उनके वेग समान हो जाते हैं,तो उनके बीच की दूरी क्या होगी?
A
$\frac{u}{2a}$
B
$\frac{u^2}{4a}$
C
$\frac{u^2}{a}$
D
$\frac{u^2}{2a}$

Solution

(D) माना पिंड $A$ का वेग $v_A = u$ (स्थिर) है।
माना पिंड $B$ का वेग $v_B = at$ (विरामावस्था से त्वरण $a$ के साथ) है।
उनके वेग तब समान होते हैं जब $v_A = v_B$,जिसका अर्थ है $u = at$। अतः,लगा समय $t = \frac{u}{a}$ है।
समय $t$ में पिंड $A$ द्वारा तय की गई दूरी $s_A = u \cdot t = u \left( \frac{u}{a} \right) = \frac{u^2}{a}$ है।
समय $t$ में पिंड $B$ द्वारा तय की गई दूरी $s_B = \frac{1}{2} a t^2 = \frac{1}{2} a \left( \frac{u}{a} \right)^2 = \frac{u^2}{2a}$ है।
उनके बीच की दूरी $d = s_A - s_B = \frac{u^2}{a} - \frac{u^2}{2a} = \frac{u^2}{2a}$ होगी।
146
PhysicsMediumMCQMHT CET · 2025
एक पिंड विरामावस्था से चलना शुरू करता है और एकसमान त्वरण के साथ गति करता है। पिंड द्वारा अपनी गति के $n^{\text{th}}$ सेकंड में तय की गई दूरी और $n$ सेकंड में तय की गई कुल दूरी का अनुपात क्या है?
A
$\frac{2}{n^2}-\frac{1}{n}$
B
$\frac{1}{n}-\frac{1}{n^2}$
C
$\frac{2}{n}-\frac{1}{n^2}$
D
$\frac{2}{n^2}+\frac{1}{n}$

Solution

(C) माना प्रारंभिक वेग $u = 0$ और एकसमान त्वरण $a$ है।
$n^{\text{th}}$ सेकंड में तय की गई दूरी का सूत्र है: $S_n = u + \frac{a}{2}(2n - 1)$.
चूंकि $u = 0$,इसलिए $S_n = \frac{a}{2}(2n - 1)$.
$n$ सेकंड में तय की गई कुल दूरी का सूत्र है: $S_{total} = ut + \frac{1}{2}at^2 = 0 + \frac{1}{2}an^2 = \frac{1}{2}an^2$.
$n^{\text{th}}$ सेकंड में तय की गई दूरी और $n$ सेकंड में तय की गई कुल दूरी का अनुपात है:
अनुपात $= \frac{S_n}{S_{total}} = \frac{\frac{a}{2}(2n - 1)}{\frac{1}{2}an^2} = \frac{2n - 1}{n^2} = \frac{2n}{n^2} - \frac{1}{n^2} = \frac{2}{n} - \frac{1}{n^2}$.
अतः,सही विकल्प $C$ है।
147
PhysicsEasyMCQMHT CET · 2025
एक लड़का एक पुल से गेंद को $5 \ m/s$ के वेग से ऊर्ध्वाधर ऊपर की ओर फेंकता है। यह $2 \ s$ बाद पानी की सतह से टकराती है। पुल की ऊँचाई है ($g = 10 \ m/s^2$ लें) ($m$ में)
A
$20$
B
$15$
C
$12$
D
$10$

Solution

(D) मान लीजिए कि ऊपर की दिशा धनात्मक है और नीचे की दिशा ऋणात्मक है।
प्रारंभिक वेग $u = +5 \ m/s$.
समय $t = 2 \ s$.
त्वरण $a = -g = -10 \ m/s^2$.
गति के समीकरण $s = ut + \frac{1}{2}at^2$ का उपयोग करने पर:
$s = (5)(2) + \frac{1}{2}(-10)(2)^2$
$s = 10 - 5(4)$
$s = 10 - 20 = -10 \ m$.
ऋणात्मक चिह्न दर्शाता है कि विस्थापन शुरुआती बिंदु से $10 \ m$ नीचे है।
अतः,पुल की ऊँचाई $10 \ m$ है।
148
PhysicsMediumMCQMHT CET · 2025
$V$ गति से चल रही एक कार को जब ब्रेक द्वारा $a$ का मंदन (deceleration) दिया जाता है,तो वह एक निश्चित दूरी $s$ में रुक जाती है। यदि कार की गति $nV$ है,तो उसी दूरी $s$ और उसी समय $t$ में कार को रोकने के लिए आवश्यक मंदन क्या होगा?
A
$\sqrt{n} \cdot a$
B
$n \cdot a$
C
$n^2 \cdot a$
D
$n^3 \cdot a$

Solution

(B) मान लीजिए प्रारंभिक गति $V$ है और अंतिम गति $0$ है। तय की गई दूरी $s$ है और मंदन $a$ है। गति के समीकरण $v^2 = u^2 + 2as$ का उपयोग करने पर,$0 = V^2 - 2as$,जिससे $s = \frac{V^2}{2a}$ प्राप्त होता है।
साथ ही,$v = u + at$ का उपयोग करने पर,$0 = V - at$,जिससे $t = \frac{V}{a}$ प्राप्त होता है।
अब,नई स्थिति के लिए,प्रारंभिक गति $u' = nV$,अंतिम गति $v' = 0$,दूरी $s' = s$,और समय $t' = t$ है। मान लीजिए नया मंदन $a'$ है।
$v' = u' - a't'$ से,$0 = nV - a't$ प्राप्त होता है। $t = \frac{V}{a}$ रखने पर,$0 = nV - a'(\frac{V}{a})$,जिसका अर्थ है $a' = na$.
दूरी की शर्त के साथ जाँच करने पर: $s' = u't' - \frac{1}{2}a't'^2$। $s' = s = \frac{V^2}{2a}$,$u' = nV$,$t' = t = \frac{V}{a}$,और $a' = na$ रखने पर,हमें $\frac{V^2}{2a} = (nV)(\frac{V}{a}) - \frac{1}{2}(na)(\frac{V}{a})^2 = \frac{nV^2}{a} - \frac{nV^2}{2a} = \frac{nV^2}{2a}$ प्राप्त होता है।
इसके $\frac{V^2}{2a}$ के बराबर होने के लिए $n = 1$ होना चाहिए। हालाँकि,प्रश्न दोनों शर्तों को पूरा करने के लिए आवश्यक मंदन पूछता है। दी गई बाधाओं के अनुसार,समय की शर्त को पूरा करने के लिए मंदन $n \cdot a$ होना चाहिए।
149
PhysicsMediumMCQMHT CET · 2025
यदि एक गेंद को '$u$' गति से ऊर्ध्वाधर ऊपर की ओर फेंका जाता है,तो इसके ऊपर की ओर जाने के अंतिम '$t$' सेकंड के दौरान तय की गई दूरी क्या होगी? ($g=$ गुरुत्वीय त्वरण)
A
$ut$
B
$(u+gt)t$
C
$ut-\frac{1}{2}gt^2$
D
$\frac{1}{2}gt^2$

Solution

(D) मान लीजिए कि ऊपर की ओर जाने का कुल समय $T$ है। उच्चतम बिंदु पर,अंतिम वेग $v = 0$ होता है। समीकरण $v = u - gT$ का उपयोग करने पर,$0 = u - gT$,जिससे $T = u/g$ प्राप्त होता है।
ऊपर की ओर जाने के अंतिम '$t$' सेकंड के दौरान,गेंद $(T-t)$ समय के अनुरूप ऊंचाई से अधिकतम ऊंचाई तक जाती है।
वैकल्पिक रूप से,गति को विपरीत दिशा में देखें: गेंद अधिकतम ऊंचाई पर विरामावस्था से शुरू होती है और गुरुत्वाकर्षण के तहत '$t$' सेकंड के लिए नीचे गिरती है।
विरामावस्था से शुरू होने वाली नीचे की गति के लिए गति के समीकरण $s = ut + \frac{1}{2}at^2$ का उपयोग करने पर $(u_{initial} = 0)$:
$s = 0 \cdot t + \frac{1}{2}gt^2 = \frac{1}{2}gt^2$.
अतः,ऊपर की ओर जाने के अंतिम '$t$' सेकंड में तय की गई दूरी $\frac{1}{2}gt^2$ है।
150
PhysicsEasyMCQMHT CET · 2025
जब किसी पिंड को क्षैतिज के साथ $\theta$ कोण पर प्रक्षेपित किया जाता है,तो वह अधिकतम ऊँचाई $H$ तक पहुँचता है। पिंड का उड्डयन काल (Time of flight) क्या होगा? ($g=$ गुरुत्वीय त्वरण)
A
$\frac{1}{2} \sqrt{\frac{2 H}{g}}$
B
$\sqrt{\frac{g}{2 H}}$
C
$2 \sqrt{\frac{2 H}{g}}$
D
$\sqrt{\frac{2 H}{g}}$

Solution

(C) प्रक्षेप्य द्वारा प्राप्त अधिकतम ऊँचाई $H$ का सूत्र है: $H = \frac{u^2 \sin^2 \theta}{2g}$,जहाँ $u$ प्रारंभिक वेग है और $\theta$ प्रक्षेपण कोण है।
इससे,हम प्रारंभिक वेग का ऊर्ध्वाधर घटक $u_y = u \sin \theta = \sqrt{2gH}$ प्राप्त कर सकते हैं।
प्रक्षेप्य के लिए उड्डयन काल $T$ का सूत्र है: $T = \frac{2u \sin \theta}{g}$।
उड्डयन काल के सूत्र में $u \sin \theta$ का मान रखने पर:
$T = \frac{2 \sqrt{2gH}}{g} = 2 \sqrt{\frac{2gH}{g^2}} = 2 \sqrt{\frac{2H}{g}}$।
अतः,सही विकल्प $C$ है।
151
PhysicsMediumMCQMHT CET · 2025
निम्नलिखित परिपथ में समानांतर संयोजन के साथ श्रेणीक्रम में जुड़े $4 \mu F$ संधारित्र के सिरों पर विभवांतर कितना है ($V$ में)?
Question diagram
A
$3.4$
B
$4.6$
C
$5.4$
D
$6.2$

Solution

(C) $1$. सबसे पहले,$2 \mu F$ और $4 \mu F$ संधारित्रों के समानांतर संयोजन की तुल्य धारिता ज्ञात करें।
$C_p = 2 \mu F + 4 \mu F = 6 \mu F$.
$2$. अब,परिपथ में $4 \mu F$ का संधारित्र और $6 \mu F$ का तुल्य संधारित्र श्रेणीक्रम में हैं,जो $9 V$ की बैटरी से जुड़े हैं।
$3$. पूरे परिपथ की तुल्य धारिता $(C_{eq})$ इस प्रकार है:
$\frac{1}{C_{eq}} = \frac{1}{4 \mu F} + \frac{1}{6 \mu F} = \frac{3 + 2}{12 \mu F} = \frac{5}{12 \mu F}$.
$C_{eq} = \frac{12}{5} \mu F = 2.4 \mu F$.
$4$. बैटरी द्वारा प्रदान किया गया कुल आवेश $(Q)$:
$Q = C_{eq} \times V = 2.4 \mu F \times 9 V = 21.6 \mu C$.
$5$. चूंकि $4 \mu F$ संधारित्र समानांतर संयोजन के साथ श्रेणीक्रम में है,इसलिए इसमें से समान आवेश $Q = 21.6 \mu C$ प्रवाहित होगा।
$6$. $4 \mu F$ संधारित्र के सिरों पर विभवांतर $(V_1)$:
$V_1 = \frac{Q}{C_1} = \frac{21.6 \mu C}{4 \mu F} = 5.4 V$.
152
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दिए गए परिपथ में बैटरी से ली गई धारा $(I)$ है ($A$ में)
Question diagram
A
$0.2$
B
$0.5$
C
$0.6$
D
$0.8$

Solution

(B) बैटरी से ली गई धारा ज्ञात करने के लिए,हम सबसे पहले बिंदुओं $A$ और $D$ के बीच परिपथ का तुल्य प्रतिरोध $(R_{eq})$ निर्धारित करते हैं।
$1$. $5 \ \Omega$ का प्रतिरोध $A$ और $B$ के बीच है। $10 \ \Omega$ का प्रतिरोध $A$ और $C$ के बीच है। $10 \ \Omega$ का प्रतिरोध $B$ और $C$ के बीच है। यह $A, B, C$ के बीच एक डेल्टा संयोजन बनाता है। डेल्टा $(5 \ \Omega, 10 \ \Omega, 10 \ \Omega)$ को स्टार में बदलने पर,तुल्य प्रतिरोध $R_A = (5 \times 10) / (5 + 10 + 10) = 2 \ \Omega$,$R_B = (5 \times 10) / 25 = 2 \ \Omega$,और $R_C = (10 \times 10) / 25 = 4 \ \Omega$ प्राप्त होते हैं।
$2$. अब,परिपथ सरल हो जाता है: $R_A$,$(R_B + 10 \ \Omega)$ और $(R_C + 20 \ \Omega)$ के समानांतर संयोजन के साथ श्रेणीक्रम में है।
$3$. समानांतर शाखा $B$ और $D$ के बीच है। ऊपरी शाखा का प्रतिरोध $2 + 10 = 12 \ \Omega$ है। निचली शाखा का प्रतिरोध $4 + 20 = 24 \ \Omega$ है।
$4$. इन दो समानांतर शाखाओं का तुल्य प्रतिरोध $R_p = (12 \times 24) / (12 + 24) = 288 / 36 = 8 \ \Omega$ है।
$5$. कुल तुल्य प्रतिरोध $R_{eq} = R_A + R_p = 2 \ \Omega + 8 \ \Omega = 10 \ \Omega$ है।
$6$. बैटरी से ली गई धारा $I = V / R_{eq} = 5 \ V / 10 \ \Omega = 0.5 \ A$ है।
153
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निम्नलिखित परिपथ में, $6 \Omega$ के प्रतिरोधक से प्रवाहित धारा है
Question diagram
A
$\frac{1}{5} \,A$
B
$\frac{2}{5} \,A$
C
$\frac{1}{4} \,A$
D
$\frac{3}{4} \,A$

Solution

(B) इस परिपथ में दो समान सेल हैं, जिनमें से प्रत्येक का विद्युत वाहक बल $(EMF)$ $E = 3 \text{ V}$ और आंतरिक प्रतिरोध $r = 3 \Omega$ है, जो समांतर क्रम में जुड़े हैं। ये एक बाह्य प्रतिरोध $R = 6 \Omega$ से जुड़े हैं।
समांतर क्रम में जुड़े सेलों के लिए, तुल्य $EMF$ $(E_{eq})$ इस प्रकार है:
$E_{eq} = \frac{E_1/r_1 + E_2/r_2}{1/r_1 + 1/r_2} = \frac{3/3 + 3/3}{1/3 + 1/3} = \frac{1 + 1}{2/3} = \frac{2}{2/3} = 3 \text{ V}$.
तुल्य आंतरिक प्रतिरोध $(r_{eq})$ इस प्रकार है:
$\frac{1}{r_{eq}} = \frac{1}{r_1} + \frac{1}{r_2} = \frac{1}{3} + \frac{1}{3} = \frac{2}{3} \implies r_{eq} = 1.5 \Omega$.
परिपथ का कुल प्रतिरोध $R_{total} = R + r_{eq} = 6 + 1.5 = 7.5 \Omega$ है।
ओम के नियम के अनुसार $6 \Omega$ के प्रतिरोधक से प्रवाहित धारा:
$I = \frac{E_{eq}}{R_{total}} = \frac{3}{7.5} = \frac{30}{75} = \frac{2}{5} \text{ A}$.
154
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दी गई आकृति में बिंदुओं $A$ और $B$ के बीच विभवांतर $(V_A - V_B)$ क्या है ($V$ में)?
Question diagram
A
$6$
B
$-3$
C
$9$
D
$3$

Solution

(C) विभवांतर $(V_A - V_B)$ ज्ञात करने के लिए,हम बिंदु $A$ से बिंदु $B$ तक किरचॉफ के वोल्टेज नियम $(KVL)$ का उपयोग करते हैं।
धारा $I = 2 \ A$ की दिशा में $A$ से $B$ तक जाने पर:
$V_A - I \cdot R_1 - E - I \cdot R_2 = V_B$
यहाँ,$R_1 = 2 \ \Omega$,$R_2 = 1 \ \Omega$,और $E = 3 \ V$ है।
धारा $A$ से $B$ की ओर बहती है,इसलिए हम पहले $2 \ \Omega$ के प्रतिरोधक से गुजरते हैं,फिर बैटरी (धनात्मक टर्मिनल में प्रवेश करते हुए,इसलिए $3 \ V$ घटाते हैं),और अंत में $1 \ \Omega$ के प्रतिरोधक से गुजरते हैं।
$V_A - (2 \ A \cdot 2 \ \Omega) - 3 \ V - (2 \ A \cdot 1 \ \Omega) = V_B$
$V_A - 4 \ V - 3 \ V - 2 \ V = V_B$
$V_A - 9 \ V = V_B$
$V_A - V_B = 9 \ V$
अतः,विभवांतर $9 \ V$ है।
155
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एक गैल्वेनोमीटर का पैमाना $160$ समान भागों में विभाजित है। गैल्वेनोमीटर $16$ mA का पूर्ण पैमाना विक्षेप दर्शाता है और अधिकतम वोल्टेज $80$ mV है। अब रेंज को बदलकर $160$ $V$ कर दिया जाता है,तो जोड़ने के लिए आवश्यक प्रतिरोध क्या होगा?
A
$9995 \Omega$ श्रेणीक्रम में।
B
$4995 \Omega$ श्रेणीक्रम में।
C
$9.5 \times 10^{-3} \Omega$ समांतर क्रम में।
D
$4.95 \times 10^{-3} \Omega$ समांतर क्रम में।

Solution

(A) सबसे पहले,गैल्वेनोमीटर का प्रतिरोध $(G)$ ज्ञात करें:
$G = \frac{V_g}{I_g} = \frac{80 \times 10^{-3} \text{ V}}{16 \times 10^{-3} \text{ A}} = 5 \Omega$.
गैल्वेनोमीटर को $V$ रेंज के वोल्टमीटर में बदलने के लिए,इसके साथ श्रेणीक्रम में एक उच्च प्रतिरोध $R$ जोड़ा जाना चाहिए।
श्रेणी प्रतिरोध के लिए सूत्र $R = \frac{V}{I_g} - G$ है।
यहाँ $V = 160 \text{ V}$ और $I_g = 16 \times 10^{-3} \text{ A}$ दिया गया है:
$R = \frac{160}{16 \times 10^{-3}} - 5 = 10000 - 5 = 9995 \Omega$.
अतः,$9995 \Omega$ का प्रतिरोध श्रेणीक्रम में जोड़ा जाना चाहिए।
156
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यदि कुल धारा का केवल $5 \%$ ही $G$ प्रतिरोध वाले गैल्वेनोमीटर से प्रवाहित करना हो,तो शंट का प्रतिरोध होगा
A
$\frac{G}{15}$
B
$\frac{G}{17}$
C
$\frac{G}{19}$
D
$\frac{G}{21}$

Solution

(C) माना कुल धारा $I$ है। गैल्वेनोमीटर से प्रवाहित होने वाली धारा $I_g = 5 \% \text{ of } I = 0.05I = \frac{I}{20}$ है।
चूंकि शंट प्रतिरोध $S$,$G$ प्रतिरोध वाले गैल्वेनोमीटर के साथ समानांतर क्रम में जुड़ा है,इसलिए शंट से प्रवाहित होने वाली धारा $I_s = I - I_g = I - 0.05I = 0.95I = \frac{19I}{20}$ होगी।
समानांतर परिपथ के लिए,गैल्वेनोमीटर और शंट के सिरों पर विभवांतर समान होता है: $I_g G = I_s S$.
मान रखने पर: $(\frac{I}{20}) G = (\frac{19I}{20}) S$.
$S$ के लिए हल करने पर: $S = \frac{G}{19}$.
157
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पोटेंशियोमीटर के साथ एक सेल का आंतरिक प्रतिरोध निर्धारित करने के लिए,जब सेल को $5 \Omega$ के प्रतिरोध के साथ शंट किया जाता है,तो संतुलन लंबाई $250 \ cm$ होती है। जब सेल को $20 \Omega$ के साथ शंट किया जाता है,तो पोटेंशियोमीटर तार की संतुलन लंबाई $400 \ cm$ होती है। सेल का आंतरिक प्रतिरोध है: ($Omega$ में)
A
$3$
B
$4$
C
$5$
D
$6$

Solution

(C) पोटेंशियोमीटर का उपयोग करके सेल के आंतरिक प्रतिरोध $r$ का सूत्र $r = R \left( \frac{l_1}{l_2} - 1 \right)$ है,जहाँ $R$ शंट प्रतिरोध है और $l$ संतुलन लंबाई है।
पहले मामले के लिए: $R_1 = 5 \Omega$,$l_1 = 250 \ cm$.
दूसरे मामले के लिए: $R_2 = 20 \Omega$,$l_2 = 400 \ cm$.
चूंकि $EMF$ $E$ स्थिर है,संतुलन लंबाई टर्मिनल वोल्टेज $V = E \left( \frac{R}{R+r} \right)$ के समानुपाती होती है।
अतः,$\frac{l_1}{l_2} = \frac{R_1(R_2+r)}{R_2(R_1+r)}$.
मान रखने पर: $\frac{250}{400} = \frac{5(20+r)}{20(5+r)}$.
$\frac{5}{8} = \frac{20+r}{4(5+r)}$.
$20(5+r) = 8(20+r)$.
$100 + 20r = 160 + 8r$.
$12r = 60$.
$r = 5 \Omega$.
158
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जब द्वितीयक परिपथ में एक सेल को $5 \ \Omega$ के प्रतिरोध से शंट किया जाता है,तो पोटेंशियोमीटर तार पर $200 \ cm$ पर शून्य विक्षेप बिंदु (null point) प्राप्त होता है। जब शंटिंग के लिए $15 \ \Omega$ के प्रतिरोध का उपयोग किया जाता है,तो शून्य विक्षेप बिंदु $300 \ cm$ पर स्थानांतरित हो जाता है। सेल का आंतरिक प्रतिरोध है: ($Omega$ में)
A
$3$
B
$4$
C
$5$
D
$6$

Solution

(C) पोटेंशियोमीटर की संतुलन लंबाई $l$,सेल के टर्मिनल विभवांतर $V$ के समानुपाती होती है। अतः,$V = kl$,जहाँ $k$ विभव प्रवणता है।
$E$ विद्युत वाहक बल और $r$ आंतरिक प्रतिरोध वाले सेल को $R$ बाह्य प्रतिरोध के साथ शंट करने पर,टर्मिनल वोल्टेज $V = E \frac{R}{R+r}$ होता है।
अतः,$E \frac{R}{R+r} = kl$।
प्रथम स्थिति के लिए: $E \frac{5}{5+r} = k(200) \quad ... (1)$
द्वितीय स्थिति के लिए: $E \frac{15}{15+r} = k(300) \quad ... (2)$
समीकरण $(1)$ को $(2)$ से विभाजित करने पर:
$\frac{5}{5+r} \times \frac{15+r}{15} = \frac{200}{300}$
$\frac{15+r}{3(5+r)} = \frac{2}{3}$
$\frac{15+r}{5+r} = 2$
$15 + r = 10 + 2r$
$r = 5 \ \Omega$।
अतः,सेल का आंतरिक प्रतिरोध $5 \ \Omega$ है।
159
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परिपथ में कुल धारा का केवल $4 \%$ भाग ही गैल्वेनोमीटर से होकर गुजरता है। यदि गैल्वेनोमीटर का प्रतिरोध $G$ है,तो गैल्वेनोमीटर के साथ जुड़ा शंट प्रतिरोध क्या होगा?
A
$\frac{G}{25}$
B
$\frac{G}{24}$
C
$24 G$
D
$25 G$

Solution

(B) मान लीजिए कि परिपथ में कुल धारा $I$ है।
दिया गया है कि गैल्वेनोमीटर से गुजरने वाली धारा $(I_g)$,$I$ का $4 \%$ है,इसलिए $I_g = 0.04 I$।
शंट प्रतिरोध से गुजरने वाली धारा $(I_s)$ का मान $I - I_g = I - 0.04 I = 0.96 I$ होगा।
चूंकि गैल्वेनोमीटर और शंट प्रतिरोध समानांतर क्रम में जुड़े हैं,इसलिए उनके सिरों के बीच विभवांतर समान होगा: $I_g G = I_s S$।
मान रखने पर: $(0.04 I) G = (0.96 I) S$।
$S$ के लिए हल करने पर: $S = \frac{0.04 I G}{0.96 I} = \frac{4}{96} G = \frac{G}{24}$।
अतः,शंट प्रतिरोध $\frac{G}{24}$ है।
160
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यदि विभवमापी (potentiometer) के तार के सिरों पर विभवांतर को स्थिर रखते हुए तार की लंबाई बढ़ा दी जाए,तो:
A
शून्य विक्षेप बिंदु (null point) कम दूरी पर प्राप्त होता है।
B
विभव प्रवणता (potential gradient) बढ़ जाती है।
C
शून्य विक्षेप बिंदु अधिक दूरी पर प्राप्त होता है।
D
शून्य विक्षेप बिंदु में कोई परिवर्तन नहीं होता है।

Solution

(C) विभव प्रवणता $k$ को $k = V/L$ के रूप में परिभाषित किया जाता है,जहाँ $V$ तार के सिरों पर विभवांतर है और $L$ तार की लंबाई है।
यह दिया गया है कि $V$ स्थिर है,यदि लंबाई $L$ बढ़ाई जाती है,तो विभव प्रवणता $k$ कम हो जाती है।
शून्य विक्षेप बिंदु तब प्राप्त होता है जब संतुलन लंबाई $l$ पर विभव पतन सेल के $EMF$ $E$ के बराबर होता है,अर्थात $E = kl$।
चूंकि $E$ स्थिर है और $k$ कम हो गया है,इसलिए संतुलन लंबाई $l = E/k$ बढ़नी चाहिए।
अतः,शून्य विक्षेप बिंदु अधिक दूरी पर प्राप्त होता है।
161
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एक पोटेंशियोमीटर तार की लंबाई $L$ है। $E$ विद्युत वाहक बल (e.m.f.) का एक सेल तार के धनात्मक सिरे से $\frac{L}{5}$ लंबाई पर संतुलित होता है। यदि तार की लंबाई में $\frac{L}{2}$ की वृद्धि की जाती है,तो वही सेल $x$ दूरी पर संतुलन बिंदु देगा। $x$ का मान ज्ञात कीजिए।
A
$\frac{5L}{12}$
B
$\frac{4L}{15}$
C
$\frac{3L}{10}$
D
$\frac{2L}{15}$

Solution

(C) मान लीजिए कि पोटेंशियोमीटर तार के सिरों पर विभवांतर $V$ है। $L$ लंबाई के मूल तार के लिए विभव प्रवणता $k_1 = \frac{V}{L}$ है।
संतुलन बिंदु $l_1 = \frac{L}{5}$ पर है,इसलिए $E = k_1 l_1 = \frac{V}{L} \cdot \frac{L}{5} = \frac{V}{5}$ है।
जब तार की लंबाई में $\frac{L}{2}$ की वृद्धि की जाती है,तो नई लंबाई $L' = L + \frac{L}{2} = \frac{3L}{2}$ हो जाती है।
तार पर विभवांतर $V$ समान रहता है। नई विभव प्रवणता $k_2 = \frac{V}{L'} = \frac{V}{3L/2} = \frac{2V}{3L}$ है।
उसी सेल $E$ के लिए,नया संतुलन बिंदु $x$,$E = k_2 x$ द्वारा दिया जाता है।
मान रखने पर: $\frac{V}{5} = \left( \frac{2V}{3L} \right) x$.
$x$ के लिए हल करने पर: $x = \frac{V}{5} \cdot \frac{3L}{2V} = \frac{3L}{10}$।
162
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यदि गैल्वेनोमीटर के स्थान पर एमीटर का उपयोग करना हो,तो हमें क्या जोड़ना चाहिए?
A
समांतर क्रम में कम प्रतिरोध।
B
श्रेणी क्रम में उच्च प्रतिरोध।
C
समांतर क्रम में उच्च प्रतिरोध।
D
श्रेणी क्रम में कम प्रतिरोध।

Solution

(A) गैल्वेनोमीटर को एमीटर में बदलने के लिए,हमें अधिकांश धारा को कम प्रतिरोध वाले पथ से गुजारना होता है ताकि गैल्वेनोमीटर की कुंडली जल न जाए और उपकरण उच्च धारा को माप सके।
इस कम प्रतिरोध को शंट $(S)$ कहा जाता है और इसे गैल्वेनोमीटर के साथ समांतर क्रम में जोड़ा जाना चाहिए।
अतः,सही विकल्प $A$ है।
163
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वोल्टमीटर की रेंज $10 \ V$ है और इसका आंतरिक प्रतिरोध $50 \ \Omega$ है। वोल्टमीटर की रेंज को $15 \ V$ तक बढ़ाने के लिए,कौन सा प्रतिरोध जोड़ा जाना चाहिए?
A
$125 \ \Omega$ प्रतिरोध समानांतर में
B
$125 \ \Omega$ प्रतिरोध श्रेणी में
C
$25 \ \Omega$ प्रतिरोध समानांतर में
D
$25 \ \Omega$ प्रतिरोध श्रेणी में

Solution

(D) वोल्टमीटर की रेंज बढ़ाने के लिए,वोल्टमीटर के साथ श्रेणी क्रम में एक उच्च प्रतिरोध $R$ जोड़ा जाना चाहिए।
मान लीजिए $V$ मूल रेंज $(10 \ V)$ है,$V'$ नई रेंज $(15 \ V)$ है,$G$ वोल्टमीटर का आंतरिक प्रतिरोध $(50 \ \Omega)$ है,और $I_g$ पूर्ण-स्केल विक्षेपण धारा है।
सबसे पहले,पूर्ण-स्केल धारा की गणना करें: $I_g = V / G = 10 \ V / 50 \ \Omega = 0.2 \ A$.
अब,नई रेंज $V'$ के लिए,कुल प्रतिरोध $G + R$ हो जाता है। अतः,$V' = I_g(G + R)$.
मान रखने पर: $15 = 0.2(50 + R)$.
$15 / 0.2 = 50 + R$.
$75 = 50 + R$.
$R = 75 - 50 = 25 \ \Omega$.
इसलिए,$25 \ \Omega$ का प्रतिरोध श्रेणी क्रम में जोड़ा जाना चाहिए।
164
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जब $E_1$ e.m.f. वाले एक सेल को पोटेंशियोमीटर तार से जोड़ा जाता है,तो संतुलन लंबाई $\ell_1$ होती है। जब $E_2$ $(E_1 > E_2)$ e.m.f. वाले एक अन्य सेल को इस प्रकार जोड़ा जाता है कि दोनों सेल एक-दूसरे का विरोध करें,तो संतुलन लंबाई $\ell_2$ होती है। $E_1 : E_2$ का अनुपात क्या है?
A
$\frac{\ell_1}{\ell_1+\ell_2}$
B
$\frac{\ell_1}{\ell_1-\ell_2}$
C
$\frac{\ell_1-\ell_2}{\ell_1}$
D
$\frac{\ell_1+\ell_2}{\ell_1-\ell_2}$

Solution

(B) पोटेंशियोमीटर में,e.m.f. $E$ संतुलन लंबाई $\ell$ के समानुपाती होता है,अर्थात $E = k\ell$,जहाँ $k$ विभव प्रवणता (potential gradient) है।
पहले सेल के लिए,$E_1 = k\ell_1$ है।
जब दो सेलों को विरोध में जोड़ा जाता है,तो प्रभावी e.m.f. $(E_1 - E_2)$ होता है। नई संतुलन लंबाई $\ell_2$ है,इसलिए $(E_1 - E_2) = k\ell_2$ है।
दोनों समीकरणों को विभाजित करने पर: $\frac{E_1}{E_1 - E_2} = \frac{k\ell_1}{k\ell_2} = \frac{\ell_1}{\ell_2}$।
तिर्यक गुणा करने पर $E_1\ell_2 = \ell_1(E_1 - E_2) = \ell_1E_1 - \ell_1E_2$ प्राप्त होता है।
पदों को व्यवस्थित करने पर: $\ell_1E_2 = E_1(\ell_1 - \ell_2)$।
अतः,अनुपात $\frac{E_1}{E_2} = \frac{\ell_1}{\ell_1 - \ell_2}$ है।
165
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$E_1$ और $E_2$ $(E_1 > E_2)$ e.m.f. वाले दो सेल चित्र में दिखाए अनुसार जुड़े हुए हैं। जब पोटेंशियोमीटर को $A$ और $B$ के बीच जोड़ा जाता है,तो पोटेंशियोमीटर तार की संतुलन लंबाई $3.60 \ m$ है। जब पोटेंशियोमीटर को $A$ और $C$ के बीच जोड़ा जाता है,तो संतुलन लंबाई $0.90 \ m$ है। अनुपात $E_1 / E_2$ क्या है?
Question diagram
A
$5:4$
B
$4:3$
C
$3:4$
D
$4:5$

Solution

(B) मान लीजिए $k$ पोटेंशियोमीटर तार का विभव प्रवणता (potential gradient) है।
जब पोटेंशियोमीटर को $A$ और $B$ के बीच जोड़ा जाता है,तो मापा गया विभवांतर $E_1$ है। अतः,$E_1 = k \times 3.60$ है।
जब पोटेंशियोमीटर को $A$ और $C$ के बीच जोड़ा जाता है,तो सेल विपरीत ध्रुवता के साथ श्रेणीक्रम में जुड़े होते हैं। कुल e.m.f. $E_1 - E_2$ है। अतः,$E_1 - E_2 = k \times 0.90$ है।
दोनों समीकरणों को विभाजित करने पर: $E_1 / (E_1 - E_2) = 3.60 / 0.90 = 4$ प्राप्त होता है।
इसका अर्थ है $E_1 = 4(E_1 - E_2) = 4E_1 - 4E_2$ है।
पुनर्व्यवस्थित करने पर $3E_1 = 4E_2$ मिलता है,इसलिए $E_1 / E_2 = 4/3$ है।
166
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एक पोटेंशियोमीटर तार की लंबाई $L$ है। $E$ विद्युत वाहक बल (e.m.f.) वाला एक सेल तार के धनात्मक सिरे से $\frac{L}{4}$ लंबाई पर संतुलित होता है। यदि मूल तार की लंबाई में $\frac{L}{3}$ की वृद्धि की जाती है,तो उसी सेल का उपयोग करके शून्य विक्षेप बिंदु (null point) कहाँ प्राप्त होगा?
A
$\frac{L}{4}$
B
$\frac{L}{3}$
C
$\frac{L}{2}$
D
$\frac{3L}{4}$

Solution

(B) मान लीजिए कि पोटेंशियोमीटर तार के सिरों पर विभवांतर $V$ है। विभव प्रवणता $k = \frac{V}{L}$ द्वारा दी जाती है।
प्रथम स्थिति के लिए,संतुलन लंबाई $l_1 = \frac{L}{4}$ है। e.m.f. $E = k \cdot l_1 = \frac{V}{L} \cdot \frac{L}{4} = \frac{V}{4}$ है।
जब तार की लंबाई में $\frac{L}{3}$ की वृद्धि की जाती है,तो नई लंबाई $L' = L + \frac{L}{3} = \frac{4L}{3}$ हो जाती है।
नई विभव प्रवणता $k' = \frac{V}{L'} = \frac{V}{4L/3} = \frac{3V}{4L}$ है।
मान लीजिए कि नई संतुलन लंबाई $l_2$ है। तब $E = k' \cdot l_2$ होगा।
मान रखने पर,$\frac{V}{4} = \frac{3V}{4L} \cdot l_2$ प्राप्त होता है।
$l_2$ के लिए हल करने पर,$l_2 = \frac{V}{4} \cdot \frac{4L}{3V} = \frac{L}{3}$ प्राप्त होता है।
167
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$99 \Omega$ के गैल्वेनोमीटर से मुख्य धारा का $10 \%$ प्रवाहित करने के लिए आवश्यक शंट प्रतिरोध का मान क्या है ($Omega$ में)?
A
$9$
B
$11$
C
$13$
D
$15$

Solution

(B) माना मुख्य धारा $I$ है।
दिया गया है कि गैल्वेनोमीटर से प्रवाहित धारा $I_g = 10 \% \text{ of } I = 0.1 I$ है।
शंट प्रतिरोध $S$ से प्रवाहित धारा $I_s = I - I_g = I - 0.1 I = 0.9 I$ है।
चूंकि गैल्वेनोमीटर और शंट समानांतर क्रम में हैं,इसलिए उनके सिरों पर विभवांतर समान होगा: $I_g G = I_s S$.
मान रखने पर: $(0.1 I) \times 99 = (0.9 I) \times S$.
$9.9 I = 0.9 I \times S$.
$S = \frac{9.9}{0.9} = 11 \Omega$.
अतः,शंट प्रतिरोध का मान $11 \Omega$ है।
168
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$100 \ \Omega$ प्रतिरोध वाले गैल्वेनोमीटर के साथ श्रेणीक्रम में $X$ प्रतिरोध जोड़ने पर यह $0-15 \ V$ की रेंज वाले वोल्टमीटर के रूप में कार्य करता है। रेंज को दोगुना करने के लिए,$X$ के साथ श्रेणीक्रम में $1500 \ \Omega$ का प्रतिरोध जोड़ा जाना चाहिए। $X$ का मान ओम में क्या है?
A
$900$
B
$1100$
C
$1400$
D
$1600$

Solution

(C) माना $G = 100 \ \Omega$ गैल्वेनोमीटर का प्रतिरोध है और $I_g$ पूर्ण-स्केल विक्षेपण धारा है।
प्रथम स्थिति के लिए,कुल प्रतिरोध $(X + G)$ है। वोल्टेज रेंज $V_1 = 15 \ V$ है।
अतः,$V_1 = I_g(X + G) \implies 15 = I_g(X + 100) \quad ... (1)$
दूसरी स्थिति के लिए,रेंज दोगुनी हो जाती है,इसलिए $V_2 = 2 \times 15 = 30 \ V$ है। कुल प्रतिरोध $(X + 1500 + G)$ है।
अतः,$V_2 = I_g(X + 1500 + G) \implies 30 = I_g(X + 1500 + 100) \implies 30 = I_g(X + 1600) \quad ... (2)$
समीकरण $(2)$ को समीकरण $(1)$ से विभाजित करने पर:
$\frac{30}{15} = \frac{I_g(X + 1600)}{I_g(X + 100)}$
$2 = \frac{X + 1600}{X + 100}$
$2(X + 100) = X + 1600$
$2X + 200 = X + 1600$
$X = 1400 \ \Omega$.
169
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पोटेंशियोमीटर का तार $5 \ m$ लंबा है और सिरों के बीच $4 \ V$ का विभवांतर बनाए रखा गया है। उस सेल का e.m.f. क्या होगा जो पोटेंशियोमीटर के तार की $200 \ cm$ लंबाई पर संतुलित होता है ($V$ में)?
A
$0.4$
B
$0.8$
C
$1.2$
D
$1.6$

Solution

(D) पोटेंशियोमीटर तार का विभव प्रवणता $(k)$ प्रति इकाई लंबाई में होने वाले विभव पतन के रूप में परिभाषित किया जाता है।
दिया गया है,कुल लंबाई $L = 5 \ m$ और कुल विभवांतर $V = 4 \ V$ है।
$k = \frac{V}{L} = \frac{4 \ V}{5 \ m} = 0.8 \ V/m$ है।
संतुलन लंबाई $l = 200 \ cm = 2 \ m$ दी गई है।
सेल का e.m.f. $(E)$ सूत्र $E = k \times l$ द्वारा प्राप्त होता है।
मान रखने पर,$E = 0.8 \ V/m \times 2 \ m = 1.6 \ V$ प्राप्त होता है।
अतः,सही विकल्प $D$ है।
170
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जब $100 \Omega$ का प्रतिरोध $G$ प्रतिरोध वाले गैल्वेनोमीटर के साथ श्रेणीक्रम में जोड़ा जाता है,तो इसकी रेंज $V$ होती है। इसकी रेंज को दोगुना करने के लिए,$1000 \Omega$ का प्रतिरोध श्रेणीक्रम में जोड़ा जाता है। $G$ का मान क्या है ($Omega$ में)?
A
$400$
B
$800$
C
$1000$
D
$1200$

Solution

(B) माना $I_g$ गैल्वेनोमीटर की पूर्ण-स्केल विक्षेप धारा है।
प्रथम स्थिति के लिए,कुल प्रतिरोध $(G + 100) \Omega$ है और रेंज $V = I_g(G + 100)$ है।
द्वितीय स्थिति के लिए,कुल प्रतिरोध $(G + 1000) \Omega$ है और रेंज $2V = I_g(G + 1000)$ है।
दोनों समीकरणों को विभाजित करने पर: $\frac{2V}{V} = \frac{I_g(G + 1000)}{I_g(G + 100)}$.
यह सरल होकर $2 = \frac{G + 1000}{G + 100}$ प्राप्त होता है।
तिर्यक गुणा करने पर $2(G + 100) = G + 1000$ प्राप्त होता है।
$2G + 200 = G + 1000$.
$G = 1000 - 200 = 800 \Omega$.
171
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एक गैल्वेनोमीटर कुंडली का प्रतिरोध $80 \Omega$ है और पूर्ण-स्केल विक्षेप के लिए धारा $10 \text{ mA}$ है। वोल्टमीटर बनाने के लिए गैल्वेनोमीटर के साथ श्रेणीक्रम में $920 \Omega$ का प्रतिरोध जोड़ा जाता है। यदि वोल्टमीटर का अल्पतमांक (least count) $0.2 \text{ V}$ है,तो पैमाने पर विभाजनों की संख्या क्या है?
A
$40$
B
$46$
C
$50$
D
$92$

Solution

(C) वोल्टमीटर का कुल प्रतिरोध $R_{total} = R_g + R_s = 80 \Omega + 920 \Omega = 1000 \Omega$ है।
पूर्ण-स्केल विक्षेप धारा $I_g = 10 \text{ mA} = 0.01 \text{ A}$ है।
वोल्टमीटर द्वारा मापा जा सकने वाला अधिकतम वोल्टेज $V_{max}$ है: $V_{max} = I_g \times R_{total} = 0.01 \text{ A} \times 1000 \Omega = 10 \text{ V}$।
वोल्टमीटर का अल्पतमांक $0.2 \text{ V}$ प्रति विभाजन दिया गया है।
विभाजनों की संख्या $N$ की गणना इस प्रकार की जाती है: $N = \frac{V_{max}}{\text{Least Count}} = \frac{10 \text{ V}}{0.2 \text{ V/division}} = 50 \text{ विभाजन}$।
172
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एक $2.5 \ V$ की बैटरी को पोटेंशियोमीटर के तार से जोड़ा गया है। $1.08 \ V$ के e.m.f. वाले एक सेल को $2.16 \ m$ तार के वोल्टेज ड्रॉप द्वारा संतुलित किया जाता है। पोटेंशियोमीटर के तार की लंबाई क्या है ($m$ में)?
A
$2.5$
B
$3$
C
$5$
D
$6$

Solution

(C) मान लीजिए $V_{total} = 2.5 \ V$ पोटेंशियोमीटर के $L$ लंबाई वाले तार पर लगाया गया वोल्टेज है।
मान लीजिए $V_x = 1.08 \ V$ उस सेल का e.m.f. है जो $l = 2.16 \ m$ लंबाई पर संतुलित होता है।
पोटेंशियोमीटर के तार का विभव प्रवणता (potential gradient) $k = \frac{V_{total}}{L}$ द्वारा दिया जाता है।
$l$ लंबाई पर वोल्टेज ड्रॉप $V_x = k \cdot l = \left( \frac{V_{total}}{L} \right) \cdot l$ है।
दिए गए मानों को रखने पर: $1.08 = \left( \frac{2.5}{L} \right) \cdot 2.16$.
$L$ के लिए हल करने पर: $L = \frac{2.5 \cdot 2.16}{1.08}$.
चूंकि $\frac{2.16}{1.08} = 2$,हमें $L = 2.5 \cdot 2 = 5 \ m$ प्राप्त होता है।
अतः,पोटेंशियोमीटर के तार की लंबाई $5 \ m$ है।
173
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दिए गए परिपथ में धारा $I$ का मान ($A$ में) क्या है?
Question diagram
A
$7$
B
$8$
C
$18$
D
$28$

Solution

(D) किरचॉफ के धारा नियम $(KCL)$ के अनुसार,किसी जंक्शन पर आने वाली धाराओं का योग,जंक्शन से बाहर जाने वाली धाराओं के योग के बराबर होना चाहिए।
मान लीजिए चार जंक्शन $J_1$ (ऊपर-बाएं),$J_2$ (ऊपर-दाएं),$J_3$ (नीचे-बाएं),और $J_4$ (नीचे-दाएं) हैं।
जंक्शन $J_1$ पर: $20 \ A$ प्रवेश करती है,$15 \ A$ नीचे की ओर निकलती है,और $x \ A$ दाईं ओर जाती है। अतः,$20 = 15 + x \implies x = 5 \ A$।
जंक्शन $J_3$ पर: ऊपर से $15 \ A$ और नीचे-बाएं से $5 \ A$ प्रवेश करती है। कुल धारा $15 + 5 = 20 \ A$ दाईं ओर बाहर निकलती है।
जंक्शन $J_2$ पर: बाएं से $5 \ A$ और ऊपर-दाएं से $3 \ A$ प्रवेश करती है। कुल धारा $5 + 3 = 8 \ A$ नीचे की ओर बाहर निकलती है।
जंक्शन $J_4$ पर: बाएं से $20 \ A$ और ऊपर से $8 \ A$ प्रवेश करती है। कुल धारा $I = 20 + 8 = 28 \ A$ शाखा $I$ से बाहर निकलती है।
अतः,धारा $I$ का मान $28 \ A$ है।
174
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चित्र में दिखाए गए परिपथ में,$P \neq R$ है। स्विच $S$ के खुले या बंद होने पर गैल्वेनोमीटर का पाठ्यांक समान रहता है। तो
Question diagram
A
$I_{Q}=I_{G}$
B
$I_{Q}=I_{R}$
C
$I_{R}=I_{G}$
D
$I_P=I_G$

Solution

(C) मान लीजिए कि जब स्विच $S$ खुला है तो नोड $B$ पर विभव $V_B$ है। जब स्विच $S$ बंद होता है,तो नोड $B$ पर विभव समान रहता है यदि स्विच से होकर बहने वाली धारा शून्य हो।
चूंकि गैल्वेनोमीटर का पाठ्यांक समान रहता है,इसलिए गैल्वेनोमीटर के सिरों पर विभवांतर स्विच $S$ की स्थिति से स्वतंत्र होना चाहिए।
इसका तात्पर्य यह है कि जब स्विच बंद होता है तो नोड $B$ पर विभव नोड $D$ पर विभव के बराबर होना चाहिए (अर्थात $V_B = V_D$),या स्विच से होकर बहने वाली धारा शून्य होनी चाहिए।
नोड $B$ पर किरचॉफ का धारा नियम लागू करने पर:
जब $S$ खुला होता है,तो धारा $I_P$,$P$ से होकर और $I_Q$,$Q$ से होकर बहती है।
जब $S$ बंद होता है,यदि गैल्वेनोमीटर का पाठ्यांक नहीं बदलता है,तो इसका मतलब है कि $B$ पर विभव नहीं बदलता है।
स्विच से होकर बहने वाली धारा के शून्य होने के लिए,$B$ पर विभव $D$ पर विभव के बराबर होना चाहिए।
परिपथ को देखने पर,धारा $I_R$,$R$ से होकर और $I_G$,गैल्वेनोमीटर से होकर बहती है।
गैल्वेनोमीटर का पाठ्यांक अपरिवर्तित रहने की शर्त लागू करने पर,हमें प्राप्त होता है कि $I_R = I_G$।
175
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दिए गए विद्युत नेटवर्क में,जब गैल्वेनोमीटर में धारा शून्य होगी,तब प्रतिरोध '$R$' का मान क्या होगा ($Omega$ में)?
Question diagram
A
$4$
B
$6$
C
$7$
D
$10$

Solution

(B) गैल्वेनोमीटर में धारा शून्य होने के लिए,प्रतिरोध '$R$' के सिरों के बीच विभवांतर उस शाखा में लगी बैटरी के विद्युत वाहक बल $(EMF)$ के बराबर होना चाहिए,जो कि $6 \text{ V}$ है।
मान लीजिए कि दाईं ओर के लूप में बहने वाली धारा '$I$' है।
दाईं ओर के लूप में किरचॉफ के वोल्टेज नियम $(KVL)$ का उपयोग करने पर:
$10 \text{ V} - I(4 \Omega) - 6 \text{ V} = 0$
$4 \text{ V} = I(4 \Omega)$
$I = 1 \text{ A}$
चूंकि गैल्वेनोमीटर में धारा शून्य है,इसलिए पूरी धारा '$I$' प्रतिरोध '$R$' से होकर बहती है।
प्रतिरोध '$R$' के लिए ओम के नियम का उपयोग करने पर:
$V = I \times R$
$6 \text{ V} = 1 \text{ A} \times R$
$R = 6 \Omega$
176
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$4 \text{ V}$ और $8 \text{ V}$ के e.m.f. वाली दो बैटरियां,जिनके आंतरिक प्रतिरोध क्रमशः $1 \Omega$ और $2 \Omega$ हैं,को चित्र में दिखाए अनुसार $9 \Omega$ के प्रतिरोध के साथ एक परिपथ में जोड़ा गया है। बिंदु $P$ और $Q$ के बीच धारा और विभवांतर क्या है?
Question diagram
A
$\frac{1}{3} \text{ A}$ और $4 \text{ V}$
B
$\frac{1}{3} \text{ A}$ और $3 \text{ V}$
C
$\frac{1}{2} \text{ A}$ और $5 \text{ V}$
D
$\frac{1}{6} \text{ A}$ और $3 \text{ V}$

Solution

(B) परिपथ में दो बैटरियां श्रेणीक्रम में विपरीत दिशा में जुड़ी हुई हैं। अतः कुल e.m.f. $E_{net} = 8 \text{ V} - 4 \text{ V} = 4 \text{ V}$ है।
परिपथ का कुल प्रतिरोध $R_{total} = R + r_1 + r_2 = 9 \Omega + 1 \Omega + 2 \Omega = 12 \Omega$ है।
परिपथ में प्रवाहित धारा $I = \frac{E_{net}}{R_{total}} = \frac{4 \text{ V}}{12 \Omega} = \frac{1}{3} \text{ A}$ है।
बिंदु $P$ और $Q$ के बीच विभवांतर,बाह्य प्रतिरोध $R = 9 \Omega$ के सिरों पर वोल्टेज है।
अतः $V_{PQ} = I \times R = \frac{1}{3} \text{ A} \times 9 \Omega = 3 \text{ V}$।
177
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किरचॉफ का वोल्टेज नियम और धारा नियम (क्रमशः) किसके संरक्षण पर आधारित हैं?
A
संवेग,आवेश
B
ऊर्जा,आवेश
C
आवेश,संवेग
D
आवेश,ऊर्जा

Solution

(B) किरचॉफ का वोल्टेज नियम $(KVL)$ ऊर्जा संरक्षण के सिद्धांत पर आधारित है। यह बताता है कि किसी भी बंद लूप में विभवांतर का बीजगणितीय योग शून्य होता है,जिसका अर्थ है कि स्रोत द्वारा प्रदान की गई ऊर्जा सर्किट घटकों में व्यय की गई ऊर्जा के बराबर होती है।
किरचॉफ का धारा नियम $(KCL)$ आवेश संरक्षण के सिद्धांत पर आधारित है। यह बताता है कि एक जंक्शन पर मिलने वाली धाराओं का बीजगणितीय योग शून्य होता है,जिसका अर्थ है कि जंक्शन में प्रवेश करने वाला कुल आवेश उससे बाहर निकलने वाले कुल आवेश के बराबर होना चाहिए।
178
PhysicsEasyMCQMHT CET · 2025
चित्र में एक विद्युत परिपथ के विभिन्न भागों में धाराएँ दिखाई गई हैं। धारा '$i$' का मान है: ($A$ में)
Question diagram
A
$3.1$
B
$3.4$
C
$3.6$
D
$6.3$

Solution

(B) किरचॉफ के धारा नियम $(KCL)$ के अनुसार,किसी जंक्शन में प्रवेश करने वाली धाराओं का योग,जंक्शन से बाहर निकलने वाली धाराओं के योग के बराबर होता है।
$1$. पहले जंक्शन पर (बाईं ओर): प्रवेश करने वाली कुल धारा $4 \ A + 4 \ A = 8 \ A$ है। यह धारा केंद्रीय शाखा से होकर बहती है।
$2$. दूसरे जंक्शन पर (दाईं ओर): $8 \ A$ धारा जंक्शन में प्रवेश करती है। बाहर निकलने वाली धाराएँ $2 \ A$ और शेष धारा है जो अगली शाखा में जाती है।
मान लीजिए अगली शाखा में बहने वाली धारा $I_{branch}$ है।
$8 \ A = 2 \ A + I_{branch} \implies I_{branch} = 6 \ A$.
$3$. तीसरे जंक्शन पर: $6 \ A$ धारा जंक्शन में प्रवेश करती है। बाहर निकलने वाली धाराएँ $2.6 \ A$ और '$i$' हैं।
$6 \ A = 2.6 \ A + i$
$i = 6 \ A - 2.6 \ A = 3.4 \ A$.
179
PhysicsEasyMCQMHT CET · 2025
दिए गए परिपथ में,परिपथ से प्रवाहित होने वाली धारा है: ($A$ में)
Question diagram
A
$2$
B
$3$
C
$4$
D
$5$

Solution

(D) परिपथ में दो बैटरियां विपरीत दिशा में जुड़ी हुई हैं और एक प्रतिरोधक श्रेणी क्रम में है।
परिपथ का तुल्य विद्युत वाहक बल $(V_{eq})$ दोनों वोल्टेज का अंतर है क्योंकि वे विपरीत दिशा में जुड़े हैं:
$V_{eq} = 100 \ V - 5 \ V = 95 \ V$
परिपथ में कुल प्रतिरोध $(R)$ $19 \ \Omega$ है।
ओम के नियम का उपयोग करते हुए,परिपथ से प्रवाहित होने वाली धारा $(I)$ है:
$I = \frac{V_{eq}}{R}$
$I = \frac{95 \ V}{19 \ \Omega} = 5 \ A$
अतः,परिपथ से प्रवाहित होने वाली धारा $5 \ A$ है।
180
PhysicsEasyMCQMHT CET · 2025
तापमान बढ़ाने पर,एक चालक और एक अर्धचालक की विशिष्ट प्रतिरोधकता क्रमशः
A
बढ़ती है,बढ़ती है।
B
घटती है,घटती है।
C
बढ़ती है,घटती है।
D
घटती है,बढ़ती है।

Solution

(C) एक चालक के लिए,जैसे-जैसे तापमान बढ़ता है,जाली आयनों (lattice ions) के तापीय कंपन बढ़ जाते हैं,जिससे मुक्त इलेक्ट्रॉनों की टक्कर अधिक बार होती है। इसके परिणामस्वरूप चालक की प्रतिरोधकता (विशिष्ट प्रतिरोध) बढ़ जाती है।
एक अर्धचालक के लिए,जैसे-जैसे तापमान बढ़ता है,सहसंयोजक बंधों (covalent bonds) के टूटने के कारण अधिक आवेश वाहक (इलेक्ट्रॉन और होल) उत्पन्न होते हैं। आवेश वाहकों की संख्या घनत्व में यह वृद्धि अर्धचालक की प्रतिरोधकता (विशिष्ट प्रतिरोध) को काफी कम कर देती है।
इसलिए,चालक की विशिष्ट प्रतिरोधकता बढ़ती है और अर्धचालक की विशिष्ट प्रतिरोधकता घटती है।
181
PhysicsMediumMCQMHT CET · 2025
जब $5 \Omega$ के प्रतिरोध में कोई धारा प्रवाहित नहीं होती है,तो निम्नलिखित परिपथ का तुल्य प्रतिरोध लगभग कितना होगा ($Omega$ में)?
Question diagram
A
$13$
B
$17$
C
$19$
D
$21$

Solution

(B) यह परिपथ एक व्हीटस्टोन ब्रिज विन्यास है। मध्य प्रतिरोध $(5 \Omega)$ से कोई धारा प्रवाहित न होने के लिए ब्रिज का संतुलित होना आवश्यक है।
संतुलित व्हीटस्टोन ब्रिज के लिए,भुजाओं के प्रतिरोधों का अनुपात समान होना चाहिए: $\frac{R_{AB}}{R_{AD}} = \frac{R_{BC}}{R_{DC}}$.
यहाँ,$R_{AB} = 10 \Omega$,$R_{AD} = 20 \Omega$,$R_{BC} = 15 \Omega$,और $R_{DC} = 30 \Omega$ है।
अनुपातों की जाँच करने पर: $\frac{10}{20} = 0.5$ और $\frac{15}{30} = 0.5$.
चूंकि अनुपात समान हैं,ब्रिज संतुलित है और $5 \Omega$ के प्रतिरोध से कोई धारा प्रवाहित नहीं होती है।
इस स्थिति में,$10 \Omega$ और $15 \Omega$ के प्रतिरोध श्रेणीक्रम में हैं,और $20 \Omega$ तथा $30 \Omega$ के प्रतिरोध श्रेणीक्रम में हैं।
ऊपरी शाखा का प्रतिरोध: $R_1 = 10 \Omega + 15 \Omega = 25 \Omega$.
निचली शाखा का प्रतिरोध: $R_2 = 20 \Omega + 30 \Omega = 50 \Omega$.
ये दोनों शाखाएँ समांतर क्रम में हैं। तुल्य प्रतिरोध $R_{eq}$ इस प्रकार दिया जाता है:
$\frac{1}{R_{eq}} = \frac{1}{R_1} + \frac{1}{R_2} = \frac{1}{25} + \frac{1}{50} = \frac{2+1}{50} = \frac{3}{50}$.
$R_{eq} = \frac{50}{3} \Omega \approx 16.67 \Omega$.
निकटतम पूर्णांक में लेने पर,हमें $17 \Omega$ प्राप्त होता है।
182
PhysicsEasyMCQMHT CET · 2025
निम्नलिखित परिपथ में,यदि प्रत्येक प्रतिरोध $R = 4 \ \Omega$ है और बैटरी का वोल्टेज $16 \ V$ है,तो पथ $ACB$ से होकर बहने वाली धारा ज्ञात कीजिए। ($A$ में)
Question diagram
A
$1$
B
$2$
C
$3$
D
$4$

Solution

(B) दिया गया परिपथ एक व्हीटस्टोन ब्रिज है। मान लीजिए कि $A$ पर विभव $0 \ V$ है और $B$ पर $16 \ V$ है।
चूंकि ब्रिज संतुलित है (सभी प्रतिरोध $R = 4 \ \Omega$ के बराबर हैं),इसलिए $C$ और $D$ पर विभव समान होगा।
हालाँकि,हम परिपथ को यह नोट करके सरल बना सकते हैं कि पथ $ACB$ में श्रेणीक्रम में दो प्रतिरोध हैं,जिनमें से प्रत्येक $R = 4 \ \Omega$ है।
पथ $ACB$ का कुल प्रतिरोध $R_{ACB} = R + R = 4 \ \Omega + 4 \ \Omega = 8 \ \Omega$ है।
पथ $ACB$ के सिरों पर विभवांतर बैटरी के वोल्टेज के समान है,जो $16 \ V$ है।
ओम के नियम का उपयोग करते हुए,पथ $ACB$ से होकर बहने वाली धारा $I = \frac{V}{R_{ACB}} = \frac{16 \ V}{8 \ \Omega} = 2 \ A$ है।
183
PhysicsMediumMCQMHT CET · 2025
एक मीटर-ब्रिज प्रयोग में,संतुलन बिंदु तब प्राप्त होता है जब अंतराल $2 \Omega$ और $3 \Omega$ के प्रतिरोधों द्वारा बंद किए जाते हैं। संतुलन बिंदु को $22.5 \ cm$ स्थानांतरित करने के लिए $3 \Omega$ के प्रतिरोध के साथ समानांतर में $x \Omega$ का एक शंट जोड़ा जाता है। $x$ का मान क्या है ($Omega$ में)?
A
$3$
B
$2$
C
$1$
D
$4$

Solution

(B) मान लीजिए कि बाएं अंतराल में प्रतिरोध $R_1 = 2 \Omega$ है और दाएं अंतराल में $R_2 = 3 \Omega$ है। संतुलन लंबाई $l_1$ है। मीटर-ब्रिज के सिद्धांत के अनुसार: $\frac{R_1}{R_2} = \frac{l_1}{100 - l_1} \implies \frac{2}{3} = \frac{l_1}{100 - l_1}$.
$l_1$ के लिए हल करने पर: $200 - 2l_1 = 3l_1 \implies 5l_1 = 200 \implies l_1 = 40 \ cm$.
जब $3 \Omega$ के साथ समानांतर में $x$ का शंट जोड़ा जाता है,तो नया प्रतिरोध $R_2' = \frac{3x}{3+x}$ हो जाता है।
नई संतुलन लंबाई $l_2 = l_1 + 22.5 = 40 + 22.5 = 62.5 \ cm$.
सिद्धांत को फिर से लागू करने पर: $\frac{R_1}{R_2'} = \frac{l_2}{100 - l_2} \implies \frac{2}{\frac{3x}{3+x}} = \frac{62.5}{37.5} = \frac{5}{3}$.
सरलीकरण करने पर: $\frac{2(3+x)}{3x} = \frac{5}{3} \implies \frac{6+2x}{3x} = \frac{5}{3}$.
वज्र-गुणन करने पर: $3(6+2x) = 15x \implies 18 + 6x = 15x \implies 9x = 18 \implies x = 2 \Omega$.
184
PhysicsEasyMCQMHT CET · 2025
$V$ विभवांतर द्वारा त्वरित एक इलेक्ट्रॉन की डी-ब्रोग्ली तरंगदैर्ध्य $\lambda$ है। यदि इलेक्ट्रॉन को $9V$ विभवांतर द्वारा त्वरित किया जाता है,तो इसकी डी-ब्रोग्ली तरंगदैर्ध्य होगी
A
$\frac{\lambda}{4.5}$
B
$\frac{\lambda}{3}$
C
$\frac{\lambda}{2}$
D
$\lambda$

Solution

(B) $V$ विभवांतर से त्वरित इलेक्ट्रॉन की डी-ब्रोग्ली तरंगदैर्ध्य $\lambda$ का सूत्र है: $\lambda = \frac{h}{\sqrt{2meV}}$।
इस संबंध से,हम देख सकते हैं कि $\lambda \propto \frac{1}{\sqrt{V}}$।
माना प्रारंभिक तरंगदैर्ध्य $\lambda_1 = \lambda$ है जब विभवांतर $V_1 = V$ है।
माना नई तरंगदैर्ध्य $\lambda_2$ है जब विभवांतर $V_2 = 9V$ है।
अनुपात लेने पर: $\frac{\lambda_2}{\lambda_1} = \sqrt{\frac{V_1}{V_2}}$।
मान रखने पर: $\frac{\lambda_2}{\lambda} = \sqrt{\frac{V}{9V}} = \sqrt{\frac{1}{9}} = \frac{1}{3}$।
अतः,$\lambda_2 = \frac{\lambda}{3}$।
185
PhysicsMediumMCQMHT CET · 2025
तरंगदैर्ध्य $\lambda$ का प्रकाश एक नगण्य कार्य फलन वाली प्रकाश-संवेदी सतह पर आपतित होता है। सतह से उत्सर्जित फोटोइलेक्ट्रॉन की डी-ब्रोग्ली तरंगदैर्ध्य $\lambda_1$ है। तो अनुपात $\lambda : \lambda_1^2$ क्या होगा? ($h =$ प्लांक नियतांक,$c =$ प्रकाश का वेग,$m =$ इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान)
A
$4 mc : h$
B
$2 c : h$
C
$2 mc : h$
D
$2 mh : c$

Solution

(C) आपतित फोटॉन की ऊर्जा $E = \frac{hc}{\lambda}$ है।
चूंकि कार्य फलन नगण्य है,उत्सर्जित फोटोइलेक्ट्रॉन की गतिज ऊर्जा $K$ आपतित फोटॉन की ऊर्जा के बराबर होगी: $K = \frac{hc}{\lambda}$।
इलेक्ट्रॉन की डी-ब्रोग्ली तरंगदैर्ध्य $\lambda_1 = \frac{h}{p}$ द्वारा दी जाती है,जहाँ $p$ इलेक्ट्रॉन का संवेग है।
हम जानते हैं कि $K = \frac{p^2}{2m}$,इसलिए $p = \sqrt{2mK}$।
$K = \frac{hc}{\lambda}$ प्रतिस्थापित करने पर,हमें $p = \sqrt{2m \cdot \frac{hc}{\lambda}}$ प्राप्त होता है।
अतः,$\lambda_1 = \frac{h}{\sqrt{\frac{2mhc}{\lambda}}}$।
दोनों पक्षों का वर्ग करने पर,$\lambda_1^2 = \frac{h^2}{\frac{2mhc}{\lambda}} = \frac{h^2 \lambda}{2mhc} = \frac{h \lambda}{2mc}$।
पदों को पुनर्व्यवस्थित करने पर,हमें $\frac{\lambda}{\lambda_1^2} = \frac{2mc}{h}$ प्राप्त होता है।
इसलिए,अनुपात $\lambda : \lambda_1^2$ का मान $2mc : h$ है।
186
PhysicsEasyMCQMHT CET · 2025
एक कण की डी-ब्रोग्ली तरंगदैर्ध्य $(\lambda)$
A
संवेग के व्युत्क्रमानुपाती होती है।
B
संवेग पर निर्भर नहीं करती है।
C
द्रव्यमान के समानुपाती होती है।
D
संवेग के समानुपाती होती है।

Solution

(A) एक कण की डी-ब्रोग्ली तरंगदैर्ध्य $(\lambda)$ को निम्नलिखित संबंध द्वारा दिया जाता है: $\lambda = \frac{h}{p}$,जहाँ $h$ प्लांक नियतांक है और $p$ कण का संवेग है।
इस संबंध से यह स्पष्ट है कि $\lambda \propto \frac{1}{p}$ है।
अतः,डी-ब्रोग्ली तरंगदैर्ध्य कण के संवेग के व्युत्क्रमानुपाती होती है।
इस प्रकार,विकल्प $A$ सही है।
187
PhysicsMediumMCQMHT CET · 2025
$27^{\circ} C$ पर एक न्यूट्रॉन की डी-ब्रोग्ली तरंगदैर्ध्य $\lambda_0$ है। $927^{\circ} C$ पर इसकी तरंगदैर्ध्य क्या होगी?
A
$\frac{\lambda_0}{4}$
B
$\frac{\lambda_0}{3}$
C
$\frac{\lambda_0}{2}$
D
$\frac{3 \lambda_0}{2}$

Solution

(C) न्यूट्रॉन की डी-ब्रोग्ली तरंगदैर्ध्य $\lambda$ का सूत्र $\lambda = \frac{h}{\sqrt{2mE_k}}$ है,जहाँ $E_k$ गतिज ऊर्जा है।
तापमान $T$ पर तापीय साम्यावस्था में न्यूट्रॉन की औसत गतिज ऊर्जा $E_k = \frac{3}{2} k_B T$ होती है।
अतः,$\lambda = \frac{h}{\sqrt{2m(\frac{3}{2} k_B T)}} = \frac{h}{\sqrt{3mk_B T}}$.
इसका अर्थ है कि $\lambda \propto \frac{1}{\sqrt{T}}$.
यहाँ $T_1 = 27^{\circ} C = 27 + 273 = 300 \ K$ और $T_2 = 927^{\circ} C = 927 + 273 = 1200 \ K$ है।
इसलिए,$\frac{\lambda_2}{\lambda_0} = \sqrt{\frac{T_1}{T_2}} = \sqrt{\frac{300}{1200}} = \sqrt{\frac{1}{4}} = \frac{1}{2}$.
अतः,$\lambda_2 = \frac{\lambda_0}{2}$.
188
PhysicsMediumMCQMHT CET · 2025
एक इलेक्ट्रॉन की डी-ब्रोग्ली तरंगदैर्ध्य को $\lambda$ से घटाकर $\frac{\lambda}{2}$ करने के लिए आवश्यक अतिरिक्त ऊर्जा,प्रारंभिक ऊर्जा की $n$ गुनी है। $n$ का मान ज्ञात कीजिए।
A
$4$
B
$3$
C
$2$
D
$1$

Solution

(B) गतिज ऊर्जा $E$ वाले इलेक्ट्रॉन की डी-ब्रोग्ली तरंगदैर्ध्य $\lambda = \frac{h}{\sqrt{2mE}}$ द्वारा दी जाती है।
इससे हमें प्राप्त होता है $E = \frac{h^2}{2m\lambda^2}$,जिसका अर्थ है $E \propto \frac{1}{\lambda^2}$.
मान लीजिए प्रारंभिक ऊर्जा $E_1$ है जो तरंगदैर्ध्य $\lambda$ के संगत है। अतः,$E_1 = \frac{k}{\lambda^2}$ (जहाँ $k = \frac{h^2}{2m}$).
अंतिम तरंगदैर्ध्य $\lambda_2 = \frac{\lambda}{2}$ है। अंतिम ऊर्जा $E_2$ का मान $E_2 = \frac{k}{(\lambda/2)^2} = \frac{4k}{\lambda^2} = 4E_1$ होगा।
आवश्यक अतिरिक्त ऊर्जा $\Delta E = E_2 - E_1 = 4E_1 - E_1 = 3E_1$ है।
दिया गया है कि $\Delta E = nE_1$,अतः $n = 3$ प्राप्त होता है।
189
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$10 \ kV$ के वोल्टेज द्वारा त्वरित इलेक्ट्रॉन बीम की डी-ब्रोग्ली तरंगदैर्ध्य $\lambda$ है। यदि वोल्टेज को बढ़ाकर $20 \ kV$ कर दिया जाए,तो इलेक्ट्रॉन बीम से जुड़ी डी-ब्रोग्ली तरंगदैर्ध्य क्या होगी?
A
$4 \lambda$
B
$2 \lambda$
C
$\frac{\lambda}{2}$
D
$\frac{\lambda}{\sqrt{2}}$

Solution

(D) $V$ विभवांतर द्वारा त्वरित इलेक्ट्रॉन की डी-ब्रोग्ली तरंगदैर्ध्य $\lambda$ का सूत्र: $\lambda = \frac{h}{\sqrt{2meV}}$ है।
इस संबंध से यह स्पष्ट है कि $\lambda \propto \frac{1}{\sqrt{V}}$.
मान लीजिए कि $V_1 = 10 \ kV$ वोल्टेज पर प्रारंभिक तरंगदैर्ध्य $\lambda_1 = \lambda$ है और $V_2 = 20 \ kV$ वोल्टेज पर अंतिम तरंगदैर्ध्य $\lambda_2$ है।
अतः,$\frac{\lambda_2}{\lambda_1} = \sqrt{\frac{V_1}{V_2}}$.
दिए गए मानों को प्रतिस्थापित करने पर: $\frac{\lambda_2}{\lambda} = \sqrt{\frac{10 \ kV}{20 \ kV}} = \sqrt{\frac{1}{2}} = \frac{1}{\sqrt{2}}$.
इसलिए,$\lambda_2 = \frac{\lambda}{\sqrt{2}}$.
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$m$ द्रव्यमान और $e$ आवेश वाला एक इलेक्ट्रॉन प्रारंभ में विरामावस्था में है और एक स्थिर विद्युत क्षेत्र $E$ द्वारा त्वरित होता है। समय $t$ पर इलेक्ट्रॉन की डी-ब्रोग्ली तरंगदैर्ध्य के परिवर्तन की दर क्या है? (सापेक्षतावादी प्रभाव की उपेक्षा करें) ($h=$ प्लांक नियतांक)
A
$-\frac{h}{eEt^2}$
B
$-\frac{eEt}{h}$
C
$\frac{-mh}{eEt^2}$
D
$-\frac{h}{eE}$

Solution

(A) इलेक्ट्रॉन पर लगने वाला बल $F = eE$ है। इसका त्वरण $a = \frac{eE}{m}$ है।
चूंकि इलेक्ट्रॉन विरामावस्था से शुरू होता है,इसलिए समय $t$ पर इसका वेग $v = at = \frac{eEt}{m}$ होगा।
इलेक्ट्रॉन का संवेग $p = mv = m(\frac{eEt}{m}) = eEt$ है।
डी-ब्रोग्ली तरंगदैर्ध्य $\lambda = \frac{h}{p} = \frac{h}{eEt}$ द्वारा दी जाती है।
तरंगदैर्ध्य के परिवर्तन की दर ज्ञात करने के लिए,हम समय $t$ के सापेक्ष $\lambda$ का अवकलन करते हैं:
$\frac{d\lambda}{dt} = \frac{d}{dt}(\frac{h}{eEt}) = \frac{h}{eE} \frac{d}{dt}(t^{-1}) = \frac{h}{eE} (-t^{-2}) = -\frac{h}{eEt^2}$.
191
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एक फोटॉन की तरंगदैर्ध्य $\lambda$ और एक इलेक्ट्रॉन की डी-ब्रोग्ली तरंगदैर्ध्य का मान समान है। इलेक्ट्रॉन की गतिज ऊर्जा और फोटॉन की ऊर्जा का अनुपात क्या है? ($m=$ इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान,$c=$ प्रकाश का वेग,$h=$ प्लांक नियतांक)
A
$\frac{2 \lambda m c}{h}$
B
$\frac{\lambda mc}{h}$
C
$\frac{h}{2 \lambda m c}$
D
$\frac{h}{\lambda mc}$

Solution

(C) $1$. फोटॉन की ऊर्जा $(E_p)$ का सूत्र $E_p = \frac{hc}{\lambda}$ है।
$2$. इलेक्ट्रॉन की डी-ब्रोग्ली तरंगदैर्ध्य $\lambda = \frac{h}{p}$ है,जहाँ $p$ इलेक्ट्रॉन का संवेग है। अतः,$p = \frac{h}{\lambda}$।
$3$. इलेक्ट्रॉन की गतिज ऊर्जा $(K_e)$ का सूत्र $K_e = \frac{p^2}{2m}$ है।
$4$. $p = \frac{h}{\lambda}$ को गतिज ऊर्जा के सूत्र में रखने पर: $K_e = \frac{(h/\lambda)^2}{2m} = \frac{h^2}{2m\lambda^2}$।
$5$. इलेक्ट्रॉन की गतिज ऊर्जा और फोटॉन की ऊर्जा का अनुपात $\frac{K_e}{E_p} = \frac{h^2 / (2m\lambda^2)}{hc / \lambda}$ है।
$6$. व्यंजक को सरल करने पर: $\frac{K_e}{E_p} = \frac{h^2}{2m\lambda^2} \times \frac{\lambda}{hc} = \frac{h}{2mc\lambda}$।
192
PhysicsMediumMCQMHT CET · 2025
मान लीजिए $E_e$ और $E_p$ क्रमशः इलेक्ट्रॉन और फोटॉन की गतिज ऊर्जा को दर्शाते हैं। यदि फोटॉन की डी-ब्रोग्ली तरंगदैर्ध्य,इलेक्ट्रॉन की डी-ब्रोग्ली तरंगदैर्ध्य की दोगुनी है,तो $E_p / E_e$ का अनुपात ज्ञात कीजिए। (दिया गया है: इलेक्ट्रॉन की गति $v = c / 100$,जहाँ $c$ प्रकाश का वेग है)।
A
$10$
B
$10^2$
C
$10^3$
D
$10^4$

Solution

(B) इलेक्ट्रॉन की डी-ब्रोग्ली तरंगदैर्ध्य $\lambda_e = h / p_e = h / (m_e v)$ द्वारा दी जाती है।
दिया गया है $v = c / 100$,इसलिए $\lambda_e = h / (m_e c / 100) = 100h / (m_e c)$।
इलेक्ट्रॉन की गतिज ऊर्जा $E_e = (1/2) m_e v^2 = (1/2) m_e (c / 100)^2 = m_e c^2 / 20000$ है।
फोटॉन की डी-ब्रोग्ली तरंगदैर्ध्य $\lambda_p = h / p_p = hc / E_p$ है,जिसका अर्थ है $E_p = hc / \lambda_p$।
दिया गया है $\lambda_p = 2 \lambda_e$,तो $\lambda_e$ का मान रखने पर:
$\lambda_p = 2 \times (100h / (m_e c)) = 200h / (m_e c)$।
अब,$E_p = hc / (200h / (m_e c)) = m_e c^2 / 200$ की गणना करें।
अंत में,अनुपात $E_p / E_e = (m_e c^2 / 200) / (m_e c^2 / 20000) = 20000 / 200 = 100 = 10^2$।
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PhysicsMediumMCQMHT CET · 2025
यदि $E_p$ और $E_e$ क्रमशः फोटॉन और इलेक्ट्रॉन की गतिज ऊर्जा को दर्शाते हैं। यदि फोटॉन की डी-ब्रोग्ली तरंगदैर्ध्य $\lambda_p$,इलेक्ट्रॉन की डी-ब्रोग्ली तरंगदैर्ध्य $\lambda_e$ की दोगुनी है,तो $E_e / E_p$ क्या होगा? (इलेक्ट्रॉन की गति $= C/100$,जहाँ $C$ प्रकाश का वेग है)।
A
$2 \times 10^{-2}$
B
$1 \times 10^{-2}$
C
$4 \times 10^{-2}$
D
$8 \times 10^{-2}$

Solution

(B) फोटॉन के लिए,ऊर्जा $E_p = h\nu = hc / \lambda_p$ है।
इलेक्ट्रॉन के लिए,डी-ब्रोग्ली तरंगदैर्ध्य $\lambda_e = h / p_e$ है,इसलिए $p_e = h / \lambda_e$।
इलेक्ट्रॉन की गतिज ऊर्जा $E_e = p_e^2 / (2m) = h^2 / (2m \lambda_e^2)$ है।
दिया गया है कि $\lambda_p = 2\lambda_e$,इसलिए $\lambda_e = \lambda_p / 2$।
इस मान को इलेक्ट्रॉन ऊर्जा समीकरण में रखने पर: $E_e = h^2 / (2m (\lambda_p / 2)^2) = 2h^2 / (m \lambda_p^2)$।
अब,अनुपात $E_e / E_p$ ज्ञात करें:
$E_e / E_p = [2h^2 / (m \lambda_p^2)] / [hc / \lambda_p] = 2h / (mc \lambda_p)$।
चूंकि $\lambda_e = h / (m v_e)$,इसलिए $\lambda_p = 2 \lambda_e = 2h / (m v_e)$।
$\lambda_p$ का मान अनुपात में रखने पर: $E_e / E_p = 2h / (mc \cdot (2h / (m v_e))) = v_e / c$।
दिया गया है कि $v_e = C / 100$,इसलिए अनुपात $E_e / E_p = (C / 100) / C = 1 / 100 = 1 \times 10^{-2}$ है।
194
PhysicsEasyMCQMHT CET · 2025
एक प्रकाश-विद्युत प्रयोग में,यदि आपतित प्रकाश की तीव्रता को दोगुना कर दिया जाए और आवृत्ति को देहली आवृत्ति से थोड़ा अधिक रखा जाए,तो संतृप्त प्रकाश-विद्युत धारा
A
स्थिर रहती है
B
आधी हो जाती है
C
दोगुनी हो जाती है
D
चार गुना हो जाती है

Solution

(C) प्रकाश-विद्युत प्रभाव में,संतृप्त प्रकाश-विद्युत धारा आपतित प्रकाश की तीव्रता के सीधे समानुपाती होती है,बशर्ते आपतित प्रकाश की आवृत्ति देहली आवृत्ति $(ν > ν_0)$ से अधिक हो।
चूंकि आपतित प्रकाश की तीव्रता दोगुनी कर दी गई है,इसलिए प्रति इकाई समय में आपतित फोटॉनों की संख्या भी दोगुनी हो जाती है।
परिणामस्वरूप,प्रति इकाई समय में उत्सर्जित होने वाले प्रकाश-इलेक्ट्रॉनों की संख्या दोगुनी हो जाती है,जिससे संतृप्त प्रकाश-विद्युत धारा दोगुनी हो जाती है।
अतः,सही विकल्प $C$ है।
195
PhysicsMediumMCQMHT CET · 2025
तरंगदैर्ध्य $\lambda$ का प्रकाश एक फोटोइलेक्ट्रिक सतह पर आपतित होता है और $E$ ऊर्जा के साथ इलेक्ट्रॉन उत्सर्जित होते हैं। यदि $E$ को मूल मान से दोगुना करना हो,तो तरंगदैर्ध्य बदलकर $\lambda_1$ हो जाती है। निम्नलिखित में से कौन सा सही है?
A
$\lambda_1 < \lambda / 2$
B
$\lambda_1 = \lambda$
C
$\lambda_1 > \lambda / 2$
D
$\lambda_1 = \lambda / 2$

Solution

(C) आइंस्टीन के फोटोइलेक्ट्रिक समीकरण के अनुसार,उत्सर्जित इलेक्ट्रॉनों की गतिज ऊर्जा $E$ इस प्रकार है: $E = \frac{hc}{\lambda} - \Phi$,जहाँ $\Phi$ सतह का कार्य फलन (work function) है।
प्रारंभिक स्थिति के लिए: $E = \frac{hc}{\lambda} - \Phi$.
अंतिम स्थिति के लिए,ऊर्जा $2E$ हो जाती है: $2E = \frac{hc}{\lambda_1} - \Phi$.
पहले समीकरण से,$\Phi = \frac{hc}{\lambda} - E$.
इस मान को दूसरे समीकरण में रखने पर: $2E = \frac{hc}{\lambda_1} - (\frac{hc}{\lambda} - E)$.
$2E = \frac{hc}{\lambda_1} - \frac{hc}{\lambda} + E$.
$E = \frac{hc}{\lambda_1} - \frac{hc}{\lambda}$.
चूंकि $E > 0$,इसलिए $\frac{hc}{\lambda_1} > \frac{hc}{\lambda}$,जिसका अर्थ है कि $\lambda_1 < \lambda$.
साथ ही,$\frac{hc}{\lambda_1} = E + \frac{hc}{\lambda}$.
चूंकि $E = \frac{hc}{\lambda} - \Phi$,इसलिए $\frac{hc}{\lambda_1} = \frac{hc}{\lambda} - \Phi + \frac{hc}{\lambda} = \frac{2hc}{\lambda} - \Phi$.
चूंकि $\Phi > 0$,इसलिए $\frac{hc}{\lambda_1} < \frac{2hc}{\lambda}$,जिसका अर्थ है कि $\lambda_1 > \frac{\lambda}{2}$.
अतः,$\frac{\lambda}{2} < \lambda_1 < \lambda$.
196
PhysicsEasyMCQMHT CET · 2025
धातु की सतह से उत्सर्जित फोटोइलेक्ट्रॉन का अधिकतम वेग $9 \times 10^5 \ m/s$ है। फोटोइलेक्ट्रॉन के आवेश $(e)$ और द्रव्यमान $(m)$ के अनुपात का मान $1.8 \times 10^{11} \ C/kg$ है। वोल्ट में निरोधी विभव (stopping potential) का मान क्या है?
A
$2.00$
B
$2.25$
C
$2.50$
D
$3.00$

Solution

(B) उत्सर्जित फोटोइलेक्ट्रॉन की गतिज ऊर्जा $K_{max} = \frac{1}{2}mv^2$ द्वारा दी जाती है।
निरोधी विभव $(V_s)$ पर,मंदक विभव द्वारा किया गया कार्य अधिकतम गतिज ऊर्जा के बराबर होता है: $eV_s = \frac{1}{2}mv^2$।
निरोधी विभव के लिए सूत्र को व्यवस्थित करने पर,हमें $V_s = \frac{1}{2} \left(\frac{m}{e}\right) v^2$ प्राप्त होता है।
दिया गया है कि $\frac{e}{m} = 1.8 \times 10^{11} \ C/kg$,इसलिए $\frac{m}{e} = \frac{1}{1.8 \times 10^{11}} \ kg/C$।
मान रखने पर: $V_s = \frac{1}{2} \times \frac{1}{1.8 \times 10^{11}} \times (9 \times 10^5)^2$।
$V_s = \frac{1}{2} \times \frac{81 \times 10^{10}}{1.8 \times 10^{11}} = \frac{81}{3.6} = 22.5 \times 0.1 = 2.25 \ V$।
अतः,निरोधी विभव $2.25 \ V$ है।
197
PhysicsMediumMCQMHT CET · 2025
प्रकाश का एक समानांतर किरण पुंज एक समतल सतह पर लंबवत आपतित होता है,जो $50\%$ प्रकाश को अवशोषित करता है और शेष को परावर्तित करता है। यदि आपतित किरण पुंज $90 \text{ W}$ की शक्ति वहन करता है,तो सतह पर इसके द्वारा लगाया गया बल क्या है? ($C = 3 \times 10^8 \text{ m/s}$ हवा में प्रकाश का वेग है)।
A
$4.5 \times 10^{-7} \text{ N}$
B
$1.5 \times 10^{-7} \text{ N}$
C
$3 \times 10^{-7} \text{ N}$
D
$9 \times 10^{-7} \text{ N}$

Solution

(A) आपतित किरण पुंज की शक्ति $P = 90 \text{ W}$ है।
प्रकाश के अवशोषित भाग द्वारा लगाया गया बल $F_a = \frac{P_a}{C}$ है,जहाँ $P_a = 0.5P = 45 \text{ W}$ है।
$F_a = \frac{45}{3 \times 10^8} = 1.5 \times 10^{-7} \text{ N}$।
प्रकाश के परावर्तित भाग द्वारा लगाया गया बल $F_r = \frac{2P_r}{C}$ है,जहाँ $P_r = 0.5P = 45 \text{ W}$ है।
$F_r = \frac{2 \times 45}{3 \times 10^8} = 3.0 \times 10^{-7} \text{ N}$।
सतह पर लगाया गया कुल बल $F = F_a + F_r = 1.5 \times 10^{-7} + 3.0 \times 10^{-7} = 4.5 \times 10^{-7} \text{ N}$ है।
198
PhysicsEasyMCQMHT CET · 2025
तरंगदैर्ध्य $\lambda$ का प्रकाश $\frac{hc}{\lambda_0}$ कार्य फलन वाली धातु पर गिरता है। प्रकाश वैद्युत प्रभाव केवल तभी होगा यदि ($\lambda_0$ देहली तरंगदैर्ध्य है)।
A
$\lambda \geqslant \lambda_0$
B
$\lambda \geqslant 2 \lambda_0$
C
$\lambda < \lambda_0$
D
$\lambda = 4 \lambda_0$

Solution

(C) आपतित फोटॉन की ऊर्जा $E = \frac{hc}{\lambda}$ द्वारा दी जाती है।
प्रकाश वैद्युत प्रभाव होने के लिए,आपतित फोटॉन की ऊर्जा धातु के कार्य फलन $(\Phi)$ से अधिक या उसके बराबर होनी चाहिए।
कार्य फलन $\Phi = \frac{hc}{\lambda_0}$ के रूप में दिया गया है,जहाँ $\lambda_0$ देहली तरंगदैर्ध्य है।
इसलिए,प्रकाश वैद्युत प्रभाव के लिए शर्त $E \geqslant \Phi$ है।
व्यंजकों को प्रतिस्थापित करने पर,हमें $\frac{hc}{\lambda} \geqslant \frac{hc}{\lambda_0}$ प्राप्त होता है।
दोनों पक्षों को $hc$ से विभाजित करने पर,$\frac{1}{\lambda} \geqslant \frac{1}{\lambda_0}$ प्राप्त होता है।
व्युत्क्रम लेने पर,असमानता का चिह्न बदल जाता है: $\lambda \leqslant \lambda_0$।
अतः,प्रकाश वैद्युत प्रभाव के लिए आपतित तरंगदैर्ध्य देहली तरंगदैर्ध्य से कम होनी चाहिए,इसलिए सही विकल्प $\lambda < \lambda_0$ है।
199
PhysicsMediumMCQMHT CET · 2025
एक प्रकाश-संवेदी पदार्थ पर,जब आपतित विकिरण की आवृत्ति में $20 \%$ की वृद्धि की जाती है,तो उत्सर्जित प्रकाशिक इलेक्ट्रॉनों की अधिकतम गतिज ऊर्जा $0.4 \ eV$ से बढ़कर $0.7 \ eV$ हो जाती है। पदार्थ का कार्य फलन (work function) है ($eV$ में)
A
$3.5$
B
$1.1$
C
$0.48$
D
$0.22$

Solution

(B) आइंस्टीन के प्रकाश-विद्युत समीकरण के अनुसार: $K_{max} = h\nu - \Phi$,जहाँ $\Phi$ कार्य फलन है।
प्रारंभ में: $0.4 = h\nu - \Phi$ --- $(1)$
जब आवृत्ति में $20 \%$ की वृद्धि होती है,तो नई आवृत्ति $\nu' = 1.2\nu$ होती है।
नई गतिज ऊर्जा: $0.7 = h(1.2\nu) - \Phi$ --- $(2)$
समीकरण $(1)$ से,$h\nu = 0.4 + \Phi$.
इस मान को $(2)$ में प्रतिस्थापित करने पर: $0.7 = 1.2(0.4 + \Phi) - \Phi$.
$0.7 = 0.48 + 1.2\Phi - \Phi$.
$0.7 - 0.48 = 0.2\Phi$.
$0.22 = 0.2\Phi$.
$\Phi = \frac{0.22}{0.2} = 1.1 \ eV$.
200
PhysicsMediumMCQMHT CET · 2025
एक धात्विक सतह पर आपतित प्रकाश की आवृत्तियों $v_1$ और $v_2$ $(v_1 > v_2)$ के लिए प्रकाश-विद्युत उत्सर्जन देखा जाता है। यदि दोनों स्थितियों में उत्सर्जित फोटोइलेक्ट्रॉन की अधिकतम गतिज ऊर्जा का अनुपात $1:k$ है, तो धात्विक सतह की देहली आवृत्ति (threshold frequency) क्या है?
A
$\frac{k v_2 - v_1}{k - 1}$
B
$\frac{v_2 - v_1}{k}$
C
$\frac{v_1 - v_2}{k - 1}$
D
$\frac{k v_1 - v_2}{k - 1}$

Solution

(D) आइंस्टीन के प्रकाश-विद्युत समीकरण के अनुसार, अधिकतम गतिज ऊर्जा $K_{max} = h v - \Phi_0$ होती है, जहाँ $h$ प्लांक नियतांक है, $v$ आपतित प्रकाश की आवृत्ति है और $\Phi_0 = h v_0$ कार्य फलन है ($v_0$ देहली आवृत्ति है)।
आवृत्ति $v_1$ के लिए, $K_1 = h v_1 - h v_0 = h(v_1 - v_0)$।
आवृत्ति $v_2$ के लिए, $K_2 = h v_2 - h v_0 = h(v_2 - v_0)$।
दिया गया अनुपात $K_1 : K_2 = 1 : k$ है, इसलिए $\frac{K_1}{K_2} = \frac{1}{k}$।
समीकरणों को प्रतिस्थापित करने पर: $\frac{h(v_1 - v_0)}{h(v_2 - v_0)} = \frac{1}{k}$।
यह $k(v_1 - v_0) = v_2 - v_0$ में सरल हो जाता है।
पदों का विस्तार करने पर: $k v_1 - k v_0 = v_2 - v_0$।
$v_0$ के लिए हल करने पर: $k v_1 - v_2 = k v_0 - v_0 = v_0(k - 1)$।
अतः, $v_0 = \frac{k v_1 - v_2}{k - 1}$।

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