MHT CET 2025 Chemistry Question Paper with Answer and Solution in Hindi

843 QuestionsHindiWith Solutions

ChemistryQ1100 of 843 questions

Page 1 of 11 · Hindi

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ChemistryMCQMHT CET · 2025
एक चक्रीय प्रक्रिया में,निकाय द्वारा किया गया कार्य होता है
A
शून्य
B
निकाय को दी गई ऊष्मा के बराबर
C
निकाय को दी गई ऊष्मा से अधिक
D
निकाय को दी गई ऊष्मा से स्वतंत्र

Solution

(B) एक चक्रीय प्रक्रिया में,निकाय अपनी प्रारंभिक अवस्था में वापस आ जाता है।
चूंकि आंतरिक ऊर्जा $U$ एक अवस्था फलन है,इसलिए एक पूर्ण चक्र में आंतरिक ऊर्जा में परिवर्तन $\Delta U = 0$ होता है।
ऊष्मागतिकी के प्रथम नियम के अनुसार,$\Delta Q = \Delta U + \Delta W$ है।
$\Delta U = 0$ प्रतिस्थापित करने पर,हमें $\Delta Q = \Delta W$ प्राप्त होता है।
अतः,निकाय द्वारा किया गया कार्य निकाय को दी गई कुल ऊष्मा के बराबर होता है।
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ChemistryMCQMHT CET · 2025
ध्वनि के स्रोत को किस गति से चलना चाहिए ताकि एक स्थिर प्रेक्षक को आभासी आवृत्ति मूल आवृत्ति की आधी सुनाई दे?
A
$v/2$
B
$2v$
C
$v/4$
D
$v$

Solution

(D) जब स्रोत $v_s$ गति से दूर जा रहा हो,तो एक स्थिर प्रेक्षक द्वारा सुनी गई आभासी आवृत्ति $n'$ डॉपलर प्रभाव के सूत्र द्वारा दी जाती है:
$n' = n \left( \frac{v}{v + v_s} \right)$
यह दिया गया है कि आभासी आवृत्ति मूल आवृत्ति की आधी है,अर्थात $n' = n/2$.
इस मान को सूत्र में रखने पर:
$\frac{n}{2} = n \left( \frac{v}{v + v_s} \right)$
$\frac{1}{2} = \frac{v}{v + v_s}$
$v + v_s = 2v$
$v_s = v$
अतः,स्रोत को प्रेक्षक से ध्वनि की गति $v$ के बराबर गति से दूर जाना चाहिए।
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ChemistryMCQMHT CET · 2025
एक अर्धचालक (semiconductor) के टुकड़े को एक विद्युत परिपथ में श्रेणीक्रम में जोड़ा गया है। तापमान बढ़ाने पर,परिपथ में विद्युत धारा:
A
घटेगी
B
अपरिवर्तित रहेगी
C
बढ़ेगी
D
बहना बंद हो जाएगी

Solution

(C) अर्धचालक में,तापमान बढ़ने के साथ आवेश वाहकों (इलेक्ट्रॉनों और होल्स) की संख्या में तेजी से वृद्धि होती है।
इसके परिणामस्वरूप अर्धचालक पदार्थ का विद्युत प्रतिरोध कम हो जाता है।
ओम के नियम के अनुसार,$I = V/R$। चूंकि वोल्टेज $V$ स्थिर रहता है और अर्धचालक का प्रतिरोध $R$ घट जाता है,इसलिए परिपथ में विद्युत धारा $I$ बढ़ जाएगी।
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ChemistryMediumMCQMHT CET · 2025
निम्नलिखित में से कौन सी एक रेडॉक्स अभिक्रिया है?
A
$NaCl + KNO_3 \to NaNO_3 + KCl$
B
$CaC_2O_4 + 2HCl \to CaCl_2 + H_2C_2O_4$
C
$Mg(OH)_2 + 2NH_4Cl \to MgCl_2 + 2NH_4OH$
D
$Zn + 2AgCN \to 2Ag + Zn(CN)_2$

Solution

(D) रेडॉक्स अभिक्रिया वह है जिसमें ऑक्सीकरण और अपचयन दोनों एक साथ होते हैं,जिसमें तत्वों की ऑक्सीकरण अवस्था में परिवर्तन होता है।
अभिक्रिया $Zn + 2AgCN \to 2Ag + Zn(CN)_2$ में:
$1$. $Zn$ की ऑक्सीकरण अवस्था $0$ से बढ़कर $+2$ हो जाती है (ऑक्सीकरण)।
$2$. $Ag$ की ऑक्सीकरण अवस्था $+1$ से घटकर $0$ हो जाती है (अपचयन)।
चूंकि ऑक्सीकरण और अपचयन दोनों होते हैं,इसलिए यह एक रेडॉक्स अभिक्रिया है।
अन्य विकल्प द्वि-विस्थापन या अम्ल-क्षार अभिक्रियाओं को दर्शाते हैं जिनमें ऑक्सीकरण अवस्था में कोई परिवर्तन नहीं होता है।
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ChemistryMCQMHT CET · 2025
मान लीजिए $f(x) = \begin{cases} \frac{x^4 - 5x^2 + 4}{|(x - 1)(x - 2)|}, & x \ne 1, 2 \\ 6, & x = 1 \\ 12, & x = 2 \end{cases}$ है। तो $f(x)$ किस समुच्चय पर सतत है?
A
$R$
B
$R - \{1\}$
C
$R - \{2\}$
D
$R - \{1, 2\}$

Solution

(D) $x \ne 1, 2$ के लिए,फलन $f(x) = \frac{(x^2-1)(x^2-4)}{|(x-1)(x-2)|} = \frac{(x-1)(x+1)(x-2)(x+2)}{|(x-1)(x-2)|}$ है।
स्थिति $x=1$: $\lim_{x \to 1^+} f(x) = \lim_{x \to 1^+} \frac{(x-1)(x+1)(x-2)(x+2)}{(x-1)(x-2)} = (1+1)(1+2) = 6$.
$\lim_{x \to 1^-} f(x) = \lim_{x \to 1^-} \frac{(x-1)(x+1)(x-2)(x+2)}{-(x-1)(x-2)} = -(1+1)(1+2) = -6$.
चूंकि $\lim_{x \to 1^+} f(x) \ne \lim_{x \to 1^-} f(x)$,इसलिए $f(x)$ बिंदु $x=1$ पर असतत है।
स्थिति $x=2$: $\lim_{x \to 2^+} f(x) = \lim_{x \to 2^+} \frac{(x-1)(x+1)(x-2)(x+2)}{(x-1)(x-2)} = (2+1)(2+2) = 12$.
$\lim_{x \to 2^-} f(x) = \lim_{x \to 2^-} \frac{(x-1)(x+1)(x-2)(x+2)}{-(x-1)(x-2)} = -(2+1)(2+2) = -12$.
चूंकि $\lim_{x \to 2^+} f(x) \ne \lim_{x \to 2^-} f(x)$,इसलिए $f(x)$ बिंदु $x=2$ पर असतत है।
अतः,$f(x)$ समुच्चय $R - \{1, 2\}$ के सभी $x$ के लिए सतत है।
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पोषक माध्यम में पेश की गई $1000$ बैक्टीरिया की आबादी $p(t)$,$p(t) = 1000 + \frac{1000t}{100 + t^2}$ संबंध के अनुसार बढ़ती है। इस जीवाणु आबादी का अधिकतम आकार क्या है?
A
$1100$
B
$1250$
C
$1050$
D
$5250$

Solution

(C) दिया गया जनसंख्या फलन $p(t) = 1000 + \frac{1000t}{100 + t^2}$ है।
अधिकतम मान ज्ञात करने के लिए,हम $t$ के सापेक्ष $p(t)$ का अवकलन करते हैं:
$\frac{dp}{dt} = 0 + \frac{(100 + t^2)(1000) - (1000t)(2t)}{(100 + t^2)^2}$
$\frac{dp}{dt} = \frac{100000 + 1000t^2 - 2000t^2}{(100 + t^2)^2} = \frac{1000(100 - t^2)}{(100 + t^2)^2}$
क्रांतिक बिंदुओं के लिए,$\frac{dp}{dt} = 0$ रखें,जिससे $100 - t^2 = 0$ प्राप्त होता है,अतः $t = 10$ (क्योंकि समय $t > 0$ है)।
$t < 10$ के लिए,$\frac{dp}{dt} > 0$ और $t > 10$ के लिए,$\frac{dp}{dt} < 0$ है।
चूंकि अवकलज $t = 10$ पर धनात्मक से ऋणात्मक में बदलता है,इसलिए फलन का $t = 10$ पर स्थानीय अधिकतम मान है।
अधिकतम जनसंख्या $p(10) = 1000 + \frac{1000(10)}{100 + 10^2} = 1000 + \frac{10000}{200} = 1000 + 50 = 1050$ है।
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$x = 0$ पर ${\tan ^{ - 1}}\left( {\frac{{\sqrt {1 + {x^2}} - 1}}{x}} \right)$ का ${\tan ^{ - 1}}\left( {\frac{{2x\sqrt {1 - {x^2}} }}{{1 - 2{x^2}}}} \right)$ के सापेक्ष अवकलज ज्ञात कीजिए।
A
$\frac{1}{8}$
B
$\frac{1}{4}$
C
$\frac{1}{2}$
D
$1$

Solution

(B) माना $y = {\tan ^{ - 1}}\left( {\frac{{\sqrt {1 + {x^2}} - 1}}{x}} \right)$ और $z = {\tan ^{ - 1}}\left( {\frac{{2x\sqrt {1 - {x^2}} }}{{1 - 2{x^2}}}} \right)$ है।
$y$ के लिए,$x = \tan \theta$ रखने पर,$\theta = {\tan ^{ - 1}}x$ प्राप्त होता है।
$y = {\tan ^{ - 1}}\left( {\frac{{\sec \theta - 1}}{{\tan \theta }}} \right) = {\tan ^{ - 1}}\left( {\frac{{1 - \cos \theta }}{{\sin \theta }}} \right) = {\tan ^{ - 1}}\left( {\tan \frac{\theta }{2}} \right) = \frac{\theta }{2} = \frac{1}{2}{\tan ^{ - 1}}x$.
अतः,$\frac{{dy}}{{dx}} = \frac{1}{2(1 + {x^2})}$.
$z$ के लिए,$x = \sin \theta$ रखने पर,$\theta = {\sin ^{ - 1}}x$ प्राप्त होता है।
$z = {\tan ^{ - 1}}\left( {\frac{{2\sin \theta \cos \theta }}{{1 - 2\sin^2 \theta }}} \right) = {\tan ^{ - 1}}\left( {\frac{{\sin 2\theta }}{{\cos 2\theta }}} \right) = {\tan ^{ - 1}}(\tan 2\theta ) = 2\theta = 2{\sin ^{ - 1}}x$.
अतः,$\frac{{dz}}{{dx}} = \frac{2}{{\sqrt {1 - {x^2}} }}$.
अब,$\frac{{dy}}{{dz}} = \frac{{dy/dx}}{{dz/dx}} = \frac{1}{2(1 + {x^2})} \times \frac{{\sqrt {1 - {x^2}} }}{2} = \frac{{\sqrt {1 - {x^2}} }}{{4(1 + {x^2})}}$.
$x = 0$ पर,$\frac{{dy}}{{dz}} = \frac{{\sqrt {1 - 0} }}{{4(1 + 0)}} = \frac{1}{4}$.
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यदि $x = \sin t$ और $y = \sin pt$ है,तो $(1 - x^2) \frac{d^2y}{dx^2} - x \frac{dy}{dx} + p^2y$ का मान क्या होगा?
A
$0$
B
$1$
C
$-1$
D
$\sqrt{2}$

Solution

(A) दिया गया है $x = \sin t$ और $y = \sin pt$।
सबसे पहले,$t$ के सापेक्ष अवकलन करने पर:
$\frac{dx}{dt} = \cos t$
$\frac{dy}{dt} = p \cos pt$
श्रृंखला नियम (chain rule) का उपयोग करने पर,$\frac{dy}{dx} = \frac{dy/dt}{dx/dt} = \frac{p \cos pt}{\cos t}$।
दोनों पक्षों का वर्ग करने पर:
$(\frac{dy}{dx})^2 = \frac{p^2 \cos^2 pt}{\cos^2 t} = \frac{p^2(1 - \sin^2 pt)}{1 - \sin^2 t} = \frac{p^2(1 - y^2)}{1 - x^2}$।
अतः,$(1 - x^2) (\frac{dy}{dx})^2 = p^2(1 - y^2)$।
दोनों पक्षों का $x$ के सापेक्ष अवकलन करने पर:
$(1 - x^2) \cdot 2 \frac{dy}{dx} \cdot \frac{d^2y}{dx^2} + (\frac{dy}{dx})^2 \cdot (-2x) = p^2 \cdot (-2y) \frac{dy}{dx}$।
$2 \frac{dy}{dx}$ से भाग देने पर (मानते हुए कि $\frac{dy}{dx} \neq 0$):
$(1 - x^2) \frac{d^2y}{dx^2} - x \frac{dy}{dx} = -p^2y$।
पदों को व्यवस्थित करने पर:
$(1 - x^2) \frac{d^2y}{dx^2} - x \frac{dy}{dx} + p^2y = 0$।
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$\int_{-1}^{1} (\sqrt{1 + x + x^2} - \sqrt{1 - x + x^2}) \, dx$ का मान है
A
$0$
B
$1$
C
$-1$
D
इनमें से कोई नहीं

Solution

(A) माना $f(x) = \sqrt{1 + x + x^2} - \sqrt{1 - x + x^2}$ है।
हम $f(-x)$ का मूल्यांकन करके जांचते हैं कि फलन सम है या विषम:
$f(-x) = \sqrt{1 + (-x) + (-x)^2} - \sqrt{1 - (-x) + (-x)^2}$
$f(-x) = \sqrt{1 - x + x^2} - \sqrt{1 + x + x^2}$
$f(-x) = -(\sqrt{1 + x + x^2} - \sqrt{1 - x + x^2}) = -f(x)$।
चूंकि $f(-x) = -f(x)$,इसलिए फलन $f(x)$ एक विषम फलन है।
विषम फलन के लिए,निश्चित समाकलन के गुणधर्म के अनुसार $\int_{-a}^{a} f(x) \, dx = 0$ होता है।
अतः,$\int_{-1}^{1} (\sqrt{1 + x + x^2} - \sqrt{1 - x + x^2}) \, dx = 0$।
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$x = 0,$ $x = \pi /3$ और $x$-अक्ष के बीच वक्रों $y = \cos x$ और $y = \cos 2x$ द्वारा परिबद्ध क्षेत्रफलों का अनुपात ज्ञात कीजिए।
A
$\sqrt{2} : 1$
B
$1 : 1$
C
$1 : 2$
D
$2 : 1$

Solution

(D) माना $A_1$ वक्र $y = \cos x$,$x$-अक्ष,$x = 0$ और $x = \pi/3$ द्वारा परिबद्ध क्षेत्रफल है।
$A_1 = \int_{0}^{\pi/3} \cos x \, dx = [\sin x]_{0}^{\pi/3} = \sin(\pi/3) - \sin(0) = \frac{\sqrt{3}}{2}$.
माना $A_2$ वक्र $y = \cos 2x$,$x$-अक्ष,$x = 0$ और $x = \pi/3$ द्वारा परिबद्ध क्षेत्रफल है।
$A_2 = \int_{0}^{\pi/3} \cos 2x \, dx = [\frac{1}{2} \sin 2x]_{0}^{\pi/3} = \frac{1}{2} \sin(2\pi/3) - \frac{1}{2} \sin(0) = \frac{1}{2} \times \frac{\sqrt{3}}{2} = \frac{\sqrt{3}}{4}$.
अतः,अनुपात $A_1 : A_2 = \frac{\sqrt{3}}{2} : \frac{\sqrt{3}}{4} = 2 : 1$.
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अवकल समीकरण $\frac{d^2y}{dx^2} + 3\left[ \frac{dy}{dx} \right]^2 = x^2 \log \left[ \frac{d^2y}{dx^2} \right]$ की घात (degree) है
A
$1$
B
$2$
C
$3$
D
इनमें से कोई नहीं

Solution

(D) दिया गया अवकल समीकरण $\frac{d^2y}{dx^2} + 3\left[ \frac{dy}{dx} \right]^2 = x^2 \log \left[ \frac{d^2y}{dx^2} \right]$ है।
अवकल समीकरण की घात को परिभाषित करने के लिए,इसे अपने अवकलजों के संदर्भ में एक बहुपद समीकरण होना चाहिए।
इस समीकरण में,पद $\log \left[ \frac{d^2y}{dx^2} \right]$ में अवकलज $\frac{d^2y}{dx^2}$ का एक पारलौकिक फलन (transcendental function) शामिल है।
चूंकि इस समीकरण को अवकल गुणांकों में बहुपद के रूप में व्यक्त नहीं किया जा सकता है,इसलिए इसकी घात परिभाषित नहीं है।
अतः,सही विकल्प $D$ है।
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एक गुब्बारे में $27^{\circ}C$ तापमान और $1 \ atm$ दाब पर $500 \ m^3$ हीलियम गैस भरी है। तो $3^{\circ}C$ तापमान और $0.5 \ atm$ दाब पर हीलियम का आयतन $m^3$ में कितना होगा?
A
$500$
B
$700$
C
$900$
D
$1000$

Solution

(C) आदर्श गैस समीकरण $\frac{P_1 V_1}{T_1} = \frac{P_2 V_2}{T_2}$ का उपयोग करने पर।
दिया गया है: $P_1 = 1 \ atm$,$V_1 = 500 \ m^3$,$T_1 = 27 + 273 = 300 \ K$.
$P_2 = 0.5 \ atm$,$T_2 = 3 + 273 = 276 \ K$.
मान रखने पर: $\frac{1 \times 500}{300} = \frac{0.5 \times V_2}{276}$.
$\frac{500}{300} = \frac{0.5 \times V_2}{276} \Rightarrow \frac{5}{3} = \frac{0.5 \times V_2}{276}$.
$V_2 = \frac{5 \times 276}{3 \times 0.5} = 920 \ m^3$.
(नोट: गणना के अनुसार उत्तर $920 \ m^3$ आता है,लेकिन दिए गए विकल्पों के अनुसार $900$ निकटतम मान है।)
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निम्नलिखित में से कौन सी रेडॉक्स अभिक्रिया है?
A
$NaCl + KNO_3 \to NaNO_3 + KCl$
B
$CaC_2O_4 + 2HCl \to CaCl_2 + H_2C_2O_4$
C
$Mg(OH)_2 + 2NH_4Cl \to MgCl_2 + 2NH_4OH$
D
$Zn + 2AgCN \to 2Ag + Zn(CN)_2$

Solution

(D) रेडॉक्स अभिक्रिया में तत्वों की ऑक्सीकरण अवस्था में परिवर्तन होता है।
अभिक्रिया $Zn + 2AgCN \to 2Ag + Zn(CN)_2$ में:
$Zn$ की ऑक्सीकरण अवस्था $0$ से बढ़कर $+2$ हो जाती है (ऑक्सीकरण)।
$Ag$ की ऑक्सीकरण अवस्था $+1$ से घटकर $0$ हो जाती है (अपचयन)।
चूंकि यहाँ ऑक्सीकरण और अपचयन दोनों हो रहे हैं,इसलिए यह एक रेडॉक्स अभिक्रिया है।
अन्य विकल्पों में ऑक्सीकरण अवस्था में कोई परिवर्तन नहीं होता है।
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निम्नलिखित में से कौन सी रेडॉक्स अभिक्रिया है?
A
$NaCl + KNO_3 \to NaNO_3 + KCl$
B
$CaCO_3 + 2HCl \to CaCl_2 + H_2O + CO_2$
C
$Mg(OH)_2 + 2NH_4Cl \to MgCl_2 + 2NH_4OH$
D
$Zn + 2AgCN \to 2Ag + Zn(CN)_2$

Solution

(D) रेडॉक्स अभिक्रिया में ऑक्सीकरण और अपचयन (रिडक्शन) दोनों प्रक्रियाएं शामिल होती हैं।
अभिक्रिया $Zn + 2AgCN \to 2Ag + Zn(CN)_2$ में:
$Zn$ का $0$ से $+2$ अवस्था में ऑक्सीकरण होता है: $Zn \to Zn^{2+} + 2e^-$.
$Ag^+$ का $+1$ से $0$ अवस्था में अपचयन होता है: $Ag^+ + e^- \to Ag$.
चूंकि यहाँ ऑक्सीकरण और अपचयन दोनों हो रहे हैं,इसलिए यह एक रेडॉक्स अभिक्रिया है।
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रेखा $y - x = 1$ और वक्र $x = y^2$ के बीच की न्यूनतम दूरी क्या है?
A
$\frac{3\sqrt{2}}{8}$
B
$\frac{2\sqrt{3}}{8}$
C
$\frac{3\sqrt{2}}{5}$
D
$\frac{\sqrt{3}}{4}$

Solution

(A) माना वक्र $x = y^2$ पर स्थित बिंदु $P(a^2, a)$ है।
रेखा का समीकरण $x - y + 1 = 0$ है।
बिंदु $P(a^2, a)$ से रेखा $x - y + 1 = 0$ की लंबवत दूरी $D = \frac{|Ax_0 + By_0 + C|}{\sqrt{A^2 + B^2}}$ सूत्र द्वारा दी जाती है।
मान रखने पर,$D = \frac{|a^2 - a + 1|}{\sqrt{1^2 + (-1)^2}} = \frac{a^2 - a + 1}{\sqrt{2}}$ (चूंकि सभी वास्तविक $a$ के लिए $a^2 - a + 1 > 0$ है)।
न्यूनतम दूरी ज्ञात करने के लिए,हम व्यंजक $f(a) = a^2 - a + 1$ को न्यूनतम करते हैं।
पूर्ण वर्ग बनाने पर,$f(a) = (a - \frac{1}{2})^2 + \frac{3}{4}$ प्राप्त होता है।
$f(a)$ का न्यूनतम मान $a = \frac{1}{2}$ पर प्राप्त होता है,जो $\frac{3}{4}$ है।
अतः,न्यूनतम दूरी $D_{\min} = \frac{3/4}{\sqrt{2}} = \frac{3}{4\sqrt{2}} = \frac{3\sqrt{2}}{8}$ है।
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$A$ प्लेट क्षेत्रफल और $d$ प्लेट पृथक्करण वाले एक समांतर प्लेट संधारित्र को एक स्थिर धारा $I$ द्वारा आवेशित किया जाता है। प्लेटों के बीच और प्लेटों के समांतर $A/2$ क्षेत्रफल वाली एक समतल सतह पर विचार करें। इस क्षेत्रफल से गुजरने वाली विस्थापन धारा है
A
$I$
B
$I/2$
C
$I/4$
D
$I/8$

Solution

(B) $t$ समय पर संधारित्र की प्लेटों पर आवेश $q = It$ है।
इस क्षण पर प्लेटों के बीच विद्युत क्षेत्र $E = \frac{q}{A \varepsilon_0} = \frac{It}{A \varepsilon_0}$ है।
दिए गए $A/2$ क्षेत्रफल से गुजरने वाला विद्युत फ्लक्स $\phi_E = E \cdot \left(\frac{A}{2}\right) = \left(\frac{It}{A \varepsilon_0}\right) \cdot \left(\frac{A}{2}\right) = \frac{It}{2 \varepsilon_0}$ है।
विस्थापन धारा $I_D$ को $I_D = \varepsilon_0 \frac{d\phi_E}{dt}$ के रूप में परिभाषित किया गया है।
$\phi_E$ का मान रखने पर,हमें प्राप्त होता है $I_D = \varepsilon_0 \frac{d}{dt} \left(\frac{It}{2 \varepsilon_0}\right) = \varepsilon_0 \cdot \frac{I}{2 \varepsilon_0} = \frac{I}{2}$।
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सोडियम और कॉपर का कार्य फलन (work function) क्रमशः $2.3 \ eV$ और $4.5 \ eV$ है। तो उनकी देहली तरंगदैर्ध्य (threshold wavelength) का अनुपात किसके निकट है?
A
$1:2$
B
$4:1$
C
$2:1$
D
$1:4$

Solution

(C) कार्य फलन $\phi$ और देहली तरंगदैर्ध्य $\lambda_0$ के बीच का संबंध $\phi = \frac{hc}{\lambda_0}$ है।
इससे यह स्पष्ट है कि $\phi \propto \frac{1}{\lambda_0}$,जिसका अर्थ है कि $\lambda_0 \propto \frac{1}{\phi}$।
सोडियम $(\phi_s = 2.3 \ eV)$ और कॉपर $(\phi_c = 4.5 \ eV)$ के लिए कार्य फलन दिए गए हैं,इसलिए उनकी देहली तरंगदैर्ध्य का अनुपात होगा:
$\frac{\lambda_s}{\lambda_c} = \frac{\phi_c}{\phi_s} = \frac{4.5 \ eV}{2.3 \ eV} \approx \frac{4.6}{2.3} = 2$।
अतः,अनुपात लगभग $2:1$ है।
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निम्नलिखित संरचनात्मक सूत्र द्वारा दर्शाए गए यौगिक का मोलर द्रव्यमान क्या है?
Question diagram
A
$36 \ g \ mol^{-1}$
B
$46 \ g \ mol^{-1}$
C
$22 \ g \ mol^{-1}$
D
$32 \ g \ mol^{-1}$

Solution

(B) दी गई संरचनात्मक सूत्र इथेनॉल $(CH_3CH_2OH)$ को दर्शाती है।
इथेनॉल का आणविक सूत्र $C_2H_6O$ है।
मोलर द्रव्यमान की गणना इस प्रकार है:
$M = (2 \times 12.01) + (6 \times 1.008) + (1 \times 16.00) \approx 24 + 6 + 16 = 46 \ g \ mol^{-1}$।
अतः,सही विकल्प $B$ है।
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$STP$ पर निम्नलिखित में से कौन सा यौगिक पानी में सबसे कम घुलनशील है?
A
$C_2H_5OH$
B
$CH_3OH$
C
$CH_3NH_2$
D
$CH_4$

Solution

(D) पानी में घुलनशीलता अणु की पानी के अणुओं के साथ हाइड्रोजन बंध बनाने की क्षमता पर निर्भर करती है।
$C_2H_5OH$,$CH_3OH$ और $CH_3NH_2$ ध्रुवीय अणु हैं जो पानी के साथ हाइड्रोजन बंध बना सकते हैं,जिससे वे घुलनशील हो जाते हैं।
$CH_4$ (मीथेन) एक अध्रुवीय हाइड्रोकार्बन है।
अध्रुवीय अणु पानी के साथ हाइड्रोजन बंध नहीं बनाते हैं और पानी में उनकी घुलनशीलता बहुत कम होती है।
इसलिए,दिए गए विकल्पों में से $CH_4$ सबसे कम घुलनशील यौगिक है।
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but$-1-$ene का हाइड्रोबोरेशन-ऑक्सीकरण क्या बनाता है?
A
ब्यूटेनैल
B
ब्यूटेनोन
C
ब्यूटेन$-1-$ऑल
D
ब्यूटेन$-2-$ऑल

Solution

(C) एल्कीन का हाइड्रोबोरेशन-ऑक्सीकरण द्वि-आबंध पर पानी $(H_2O)$ का एंटी-मार्कोवनिकोव योग है।
but$-1-$ene $(CH_3CH_2CH=CH_2)$ के लिए,अभिक्रिया इस प्रकार है:
$CH_3CH_2CH=CH_2 + (BH_3)_2 \rightarrow CH_3CH_2CH_2CH_2BH_2$
इसके बाद $H_2O_2/OH^-$ के साथ ऑक्सीकरण:
$CH_3CH_2CH_2CH_2BH_2 + 3H_2O_2 + OH^- \rightarrow CH_3CH_2CH_2CH_2OH + B(OH)_4^-$
अंतिम उत्पाद ब्यूटेन$-1-$ऑल है।
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निम्नलिखित में से कौन सा ग्लिसरॉल की बॉन्ड-लाइन संरचना है?
A
Option A
B
Option B
C
Option C
D
Option D

Solution

(D) ग्लिसरॉल,जिसे प्रोपेन-$1,2,3$-ट्रायोल के रूप में भी जाना जाता है,का रासायनिक सूत्र $CH_2(OH)-CH(OH)-CH_2(OH)$ है।
इसमें तीन कार्बन की श्रृंखला होती है जहाँ प्रत्येक कार्बन परमाणु एक हाइड्रॉक्सिल $(-OH)$ समूह से जुड़ा होता है।
विकल्पों को देखने पर:
विकल्प $A$ एक द्वि-आबंध और केवल दो हाइड्रॉक्सिल समूहों वाली संरचना दिखाता है।
विकल्प $B$ एक द्वि-आबंध और दो हाइड्रॉक्सिल समूहों वाली संरचना दिखाता है।
विकल्प $C$ दो हाइड्रॉक्सिल समूहों वाला ब्यूटेन का व्युत्पन्न दिखाता है।
विकल्प $D$ ग्लिसरॉल की सही संरचना को दर्शाता है,जिसमें तीन कार्बन की मुख्य श्रृंखला पर प्रत्येक कार्बन परमाणु के साथ एक $-OH$ समूह जुड़ा हुआ है।
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निम्नलिखित में से किसका क्वथनांक सबसे कम है?
A
$CH_3-O-CH_2-CH_3$
B
$CH_3-COOH$
C
$CH_3-CH_2-CH_2-CH_3$
D
$CH_3-CH_2-CH_2-OH$

Solution

(C) सबसे कम क्वथनांक निर्धारित करने के लिए,हम प्रत्येक अणु में मौजूद अंतर-आणविक बलों का विश्लेषण करते हैं:
$1$. $CH_3-COOH$ (एथेनोइक एसिड) मजबूत हाइड्रोजन बॉन्डिंग प्रदर्शित करता है और डाइमर बनाता है,जिससे इसका क्वथनांक बहुत अधिक होता है।
$2$. $CH_3-CH_2-CH_2-OH$ (प्रोपेन$-1-$ओल) हाइड्रोजन बॉन्डिंग प्रदर्शित करता है,जिसके परिणामस्वरूप इसका क्वथनांक अपेक्षाकृत अधिक होता है।
$3$. $CH_3-O-CH_2-CH_3$ (मेथॉक्सीएथेन) एक ईथर है,जो द्विध्रुव-द्विध्रुव आकर्षण प्रदर्शित करता है लेकिन इसमें हाइड्रोजन बॉन्डिंग नहीं होती है।
$4$. $CH_3-CH_2-CH_2-CH_3$ ($n$-ब्यूटेन) एक एल्केन है,जो केवल कमजोर लंदन फैलाव बल प्रदर्शित करता है।
इनकी तुलना करने पर,$n$-ब्यूटेन में सबसे कमजोर अंतर-आणविक बल होते हैं,इसलिए इसका क्वथनांक सबसे कम होता है।
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निम्नलिखित में से कौन सा कैटेकोल का सही $IUPAC$ नाम है?
A
बेंजीन-$1,2$-डायोल
B
बेंजीन-$1,3$-डायोल
C
बेंजीन-$1,4$-डायोल
D
बेंजीन-$1,3,5$-ट्रायोल

Solution

(A) कैटेकोल एक डाइहाइड्रॉक्सी बेंजीन व्युत्पन्न का सामान्य नाम है जिसमें दो हाइड्रॉक्सिल $(-OH)$ समूह बेंजीन वलय के आसन्न कार्बन परमाणुओं से जुड़े होते हैं।
$IUPAC$ नामकरण के अनुसार,जब बेंजीन वलय में $1$ और $2$ स्थिति पर दो $-OH$ समूह जुड़े होते हैं,तो उस यौगिक को बेंजीन-$1,2$-डायोल कहा जाता है।
अतः,सही विकल्प $A$ है।
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निम्नलिखित में से कौन सा यौगिक अंतराण्विक हाइड्रोजन बंधन नहीं बनाता है?
A
एथॉक्सी एथेन
B
ब्यूटेन
C
फिनोल
D
ब्यूटेन-$1$-$\text{ओल}$

Solution

(B) अंतराण्विक हाइड्रोजन बंधन उन यौगिकों में होता है जहाँ हाइड्रोजन $O$,$N$ या $F$ जैसे अत्यधिक विद्युत ऋणात्मक परमाणु से जुड़ा होता है।
$1$. $\text{फिनोल}$ $(C_6H_5OH)$ में $-OH$ समूह होता है,जो हाइड्रोजन बंधन बनाता है।
$2$. $\text{ब्यूटेन}-1-\text{ओल}$ $(CH_3CH_2CH_2CH_2OH)$ में भी $-OH$ समूह होता है।
$3$. $\text{एथॉक्सी}$ $\text{एथेन}$ $(CH_3CH_2OCH_2CH_3)$ एक ईथर है,जिसमें ऑक्सीजन से सीधे जुड़ा हाइड्रोजन नहीं होता है।
$4$. $\text{ब्यूटेन}$ $(C_4H_{10})$ एक हाइड्रोकार्बन है जिसमें केवल $C-C$ और $C-H$ बंधन होते हैं,इसलिए यह हाइड्रोजन बंधन नहीं बना सकता है।
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$2-$Methylhexan$-3-$ol को सांद्र सल्फ्यूरिक एसिड के साथ गर्म करने पर बनने वाले मुख्य उत्पाद की पहचान करें।
A
$2-$Methylhex$-2-$ene
B
$2-$Methylhex$-3-$ene
C
$3-$Methylhex$-2-$ene
D
$2-$Methylhex$-1-$ene

Solution

(A) $2-$Methylhexan$-3-$ol $(CH_3-CH(CH_3)-CH(OH)-CH_2-CH_2-CH_3)$ का सांद्र $H_2SO_4$ के साथ निर्जलीकरण $E1$ क्रियाविधि द्वारा होता है।
$1$. $-OH$ समूह के प्रोटोनेशन और उसके बाद पानी के अणु के निकलने से $C3$ स्थिति पर द्वितीयक कार्बोकेशन बनता है: $CH_3-CH(CH_3)-CH^+-CH_2-CH_2-CH_3$.
$2$. यह द्वितीयक कार्बोकेशन $1,2-$हाइड्राइड शिफ्ट के माध्यम से $C2$ स्थिति पर अधिक स्थिर तृतीयक कार्बोकेशन में बदल जाता है: $CH_3-C^+(CH_3)-CH_2-CH_2-CH_2-CH_3$.
$3$. सेटज़ेफ के नियम के अनुसार,सबसे अधिक प्रतिस्थापित एल्कीन मुख्य उत्पाद होता है।
$4$. तृतीयक कार्बोकेशन $C3$ से प्रोटॉन खोकर $2-$Methylhex$-2-$ene $(CH_3-C(CH_3)=CH-CH_2-CH_2-CH_3)$ बनाता है,जो सबसे स्थिर उत्पाद है।
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निम्नलिखित अभिक्रियाओं की श्रृंखला में उत्पाद $Z$ की पहचान करें: $CH_3CH_2OH$ $\xrightarrow{SOCl_2, \Delta} X$ $\xrightarrow{Mg, \text{Dry ether}} Y$ $\xrightarrow{NH_3} Z + Mg(Cl)(NH_2)$
A
एथिल क्लोराइड
B
एथिल मैग्नीशियम क्लोराइड
C
एथिल एमीन
D
एथेन

Solution

(D) चरण $1$: एथेनॉल की $SOCl_2$ (थायोनिल क्लोराइड) के साथ अभिक्रिया से एथिल क्लोराइड $(X)$ प्राप्त होता है।
$CH_3CH_2OH + SOCl_2 \rightarrow CH_3CH_2Cl + SO_2 + HCl$
अतः,$X = CH_3CH_2Cl$ (एथिल क्लोराइड)।
चरण $2$: एथिल क्लोराइड की शुष्क ईथर में $Mg$ के साथ अभिक्रिया से एथिल मैग्नीशियम क्लोराइड $(Y)$ प्राप्त होता है,जो एक ग्रिगनार्ड अभिकर्मक है।
$CH_3CH_2Cl + Mg \xrightarrow{\text{Dry ether}} CH_3CH_2MgCl$
अतः,$Y = CH_3CH_2MgCl$ (एथिल मैग्नीशियम क्लोराइड)।
चरण $3$: ग्रिगनार्ड अभिकर्मक $(Y)$ की अमोनिया $(NH_3)$ के साथ अभिक्रिया से एक एल्केन $(Z)$ और मैग्नीशियम लवण प्राप्त होता है।
$CH_3CH_2MgCl + NH_3 \rightarrow CH_3CH_3 + Mg(Cl)(NH_2)$
अतः,$Z = CH_3CH_3$ (एथेन)।
इसलिए,सही विकल्प $D$ है।
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निम्नलिखित अभिक्रियाओं की श्रृंखला में उत्पाद '$Z$' की पहचान करें।
$C_2H_5OH$ $\xrightarrow[\Delta]{SOCl_2} X$ $\xrightarrow[\text{Dry ether}]{Mg} Y$ $\xrightarrow{NH_3} Z$
A
एथिल क्लोराइड
B
एथिल मैग्नीशियम क्लोराइड
C
एथिल एमीन
D
एथेन

Solution

(D) अभिक्रिया श्रृंखला इस प्रकार है:
$1$. $C_2H_5OH + SOCl_2 \xrightarrow{\Delta} C_2H_5Cl (X) + SO_2 + HCl$
$2$. $C_2H_5Cl + Mg \xrightarrow{\text{Dry ether}} C_2H_5MgCl (Y)$ (ग्रिग्नार्ड अभिकर्मक)
$3$. $C_2H_5MgCl + NH_3 \rightarrow C_2H_6 (Z) + Mg(NH_2)Cl$
ग्रिग्नार्ड अभिकर्मक सक्रिय हाइड्रोजन परमाणुओं वाले यौगिकों (जैसे $NH_3$) के साथ अभिक्रिया करके संगत एल्केन बनाते हैं। अतः,उत्पाद $Z$ एथेन है।
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निम्नलिखित अभिक्रियाओं की श्रृंखला में उत्पाद '$B$' की पहचान करें।
क्लोरोबेंजीन $\xrightarrow[ii) \ H_3O^{+}]{i) \ NaOH, \ 623 \ K / 150 \ atm} A$ $\xrightarrow{Br_2 \ water} B$
A
फिनोल
B
$o-$ब्रोमोफिनोल
C
$p-$ब्रोमोफिनोल
D
$2,4,6-$ट्राइब्रोमोफिनोल

Solution

(D) चरण $1$: क्लोरोबेंजीन $623 \ K$ तापमान और $150 \ atm$ दाब पर $NaOH$ के साथ अभिक्रिया करता है और उसके बाद अम्लीकरण $(H_3O^+)$ द्वारा फिनोल $(A)$ बनाता है।
चरण $2$: फिनोल $(A)$ ब्रोमीन जल $(Br_2 \ water)$ के साथ अभिक्रिया करके इलेक्ट्रोफिलिक एरोमैटिक प्रतिस्थापन दर्शाता है।
चूंकि $-OH$ समूह अत्यधिक सक्रियकारी और ऑर्थो/पैरा-निर्देशी है,इसलिए यह अंतिम उत्पाद के रूप में $2,4,6-$ट्राइब्रोमोफिनोल $(B)$ बनाता है।
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निम्नलिखित अभिक्रिया में $A$ की पहचान कीजिए।
$A + \text{Acetic anhydride} \xrightarrow{H^{+}} \text{Aspirin} + \text{Acetic acid}$
A
एक्रिलिक एसिड
B
ऑक्सेलिक एसिड
C
सैलिसिलिक एसिड
D
थैलिक एसिड

Solution

(C) एस्पिरिन (एसिटाइलसैलिसिलिक एसिड) और एसिटिक एसिड बनाने के लिए एसिड उत्प्रेरक $(H^{+})$ की उपस्थिति में $A$ की एसिटिक एनहाइड्राइड के साथ अभिक्रिया एक एसिटिलेशन अभिक्रिया है।
विशेष रूप से,सैलिसिलिक एसिड $(C_7H_6O_3)$ एसिटिक एनहाइड्राइड $((CH_3CO)_2O)$ के साथ अभिक्रिया करके एस्पिरिन $(C_9H_8O_4)$ और एसिटिक एसिड $(CH_3COOH)$ बनाता है।
अतः,$A$ सैलिसिलिक एसिड है।
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पायरोगैलोल का सही $IUPAC$ नाम चुनिए।
A
बेंजीन-$1,3$-डायोल
B
बेंजीन-$1,4$-डायोल
C
बेंजीन-$1,3,5$-ट्रायोल
D
बेंजीन-$1,2,3$-ट्रायोल

Solution

(D) पायरोगैलोल $1,2,3$-ट्राइहाइड्रॉक्सीबेंजीन यौगिक का सामान्य नाम है।
$IUPAC$ नामकरण के अनुसार,जब बेंजीन वलय पर $1, 2$ और $3$ स्थितियों पर तीन हाइड्रॉक्सिल $(-OH)$ समूह जुड़े होते हैं,तो यौगिक को बेंजीन-$1,2,3$-ट्रायोल कहा जाता है।
अतः,सही विकल्प $D$ है।
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फ्लोरोग्लुसिनोल का संरचनात्मक सूत्र पहचानें।
A
$1,3,5$-ट्राइहाइड्रॉक्सीबेंजीन
B
$1,2,3$-ट्राइहाइड्रॉक्सीबेंजीन
C
$1,2,4$-ट्राइहाइड्रॉक्सीबेंजीन
D
$1,3$-डाईहाइड्रॉक्सीबेंजीन

Solution

(A) फ्लोरोग्लुसिनोल $1,3,5$-ट्राइहाइड्रॉक्सीबेंजीन का सामान्य नाम है।
इसमें एक बेंजीन रिंग होती है जिसमें $1, 3$ और $5$ स्थितियों पर तीन हाइड्रॉक्सिल $(-OH)$ समूह जुड़े होते हैं।
विकल्प $A$ $1,3,5$-ट्राइहाइड्रॉक्सीबेंजीन की संरचना को दर्शाता है।
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निम्नलिखित अभिक्रिया में प्रयुक्त अभिकर्मक '$R$' की पहचान कीजिए।
कीटोन $\xrightarrow{R}$ सेमीकार्बाज़ोन
A
$NH_2OH$
B
$NH_2NHCONH_2$
C
$NH_2NHC_6H_5$
D
$NH_2NH_2$

Solution

(B) कीटोन की सेमीकार्बाज़ाइड $(NH_2NHCONH_2)$ के साथ अभिक्रिया से सेमीकार्बाज़ोन का निर्माण होता है।
यह एक नाभिकरागी योग-विलोपन अभिक्रिया है।
अभिकर्मक '$R$' सेमीकार्बाज़ाइड है,जिसका सूत्र $NH_2NHCONH_2$ है।
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एसिटोनाइट्राइल के एक मोल के पूर्ण अपचयन (reduction) के लिए $H$ परमाणुओं के कितने मोल की आवश्यकता होती है?
A
$2$
B
$4$
C
$6$
D
$8$

Solution

(B) एसिटोनाइट्राइल का रासायनिक सूत्र $CH_3CN$ है।
एसिटोनाइट्राइल $(CH_3CN)$ का एथिलएमाइन $(CH_3CH_2NH_2)$ में पूर्ण अपचयन निम्नलिखित रासायनिक समीकरण द्वारा दर्शाया गया है:
$CH_3CN + 4[H] \rightarrow CH_3CH_2NH_2$.
अभिक्रिया के रससमीकरणमिति (stoichiometry) के अनुसार,$1 \ mole$ एसिटोनाइट्राइल को एथिलएमाइन में पूर्ण अपचयन के लिए $4 \ moles$ हाइड्रोजन परमाणुओं $(H)$ की आवश्यकता होती है।
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एलाइलएमाइन $(Allylamine)$ का $IUPAC$ नाम क्या है?
A
प्रोपेन-$1$-एमाइन
B
प्रोप-$2$-ईन-$1$-एमाइन
C
प्रोप-$1$-ईन-$2$-एमाइन
D
प्रोपेन-$2$-एमाइन

Solution

(B) एलाइलएमाइन की संरचना $CH_2=CH-CH_2-NH_2$ है।
$IUPAC$ नामकरण के अनुसार,मुख्य श्रृंखला में क्रियात्मक समूह $(-NH_2)$ और द्वि-आबंध दोनों शामिल होने चाहिए।
इस श्रृंखला में $3$ कार्बन परमाणु हैं,इसलिए मूल नाम $prop$ है।
द्वि-आबंध $2$ नंबर की स्थिति पर है और एमाइन समूह $1$ नंबर की स्थिति पर है।
अतः,$IUPAC$ नाम $Prop-2-en-1-amine$ है।
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$0.35 \ mol$ ग्लूकोज में उपस्थित कार्बन परमाणुओं की संख्या ज्ञात कीजिए।
A
$3.011 \times 10^{24}$
B
$6.022 \times 10^{24}$
C
$1.264 \times 10^{24}$
D
$2.044 \times 10^{24}$

Solution

(C) ग्लूकोज का रासायनिक सूत्र $C_6H_{12}O_6$ है।
एक मोल ग्लूकोज में $6 \ mol$ कार्बन परमाणु होते हैं।
इसलिए,$0.35 \ mol$ ग्लूकोज में $0.35 \times 6 = 2.1 \ mol$ कार्बन परमाणु होते हैं।
कार्बन परमाणुओं की संख्या की गणना $2.1 \times N_A$ के रूप में की जाती है,जहाँ $N_A = 6.022 \times 10^{23} \ mol^{-1}$ है।
कार्बन परमाणुओं की संख्या $= 2.1 \times 6.022 \times 10^{23} = 12.6462 \times 10^{23} = 1.26462 \times 10^{24}$ है।
अतः,सही विकल्प $C$ है।
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टैनिन (tannins) के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही नहीं है?
A
ये ताजे कटे हुए आलू को भूरा होने से बचाते हैं।
B
ये पॉलीफेनोल्स से बनते हैं।
C
ये क्विनोन के बहुलकीकरण (polymerisation) द्वारा प्राप्त होते हैं।
D
ये फलों या सब्जियों को काटने के बाद उत्पन्न होते हैं।

Solution

(A) टैनिन प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले पॉलीफेनोलिक यौगिक हैं जो कई पौधों में मिलते हैं।
जब फलों या सब्जियों को काटा जाता है,तो उनमें मौजूद फेनोलिक यौगिक ऑक्सीजन और पॉलीफेनोल ऑक्सीडेज एंजाइम के संपर्क में आते हैं।
इससे फेनोल का ऑक्सीकरण होकर क्विनोन बनते हैं,जो बाद में बहुलकीकरण (polymerisation) के माध्यम से टैनिन नामक भूरे रंग के वर्णक बनाते हैं।
इसलिए,टैनिन कटे हुए फलों और सब्जियों के भूरे होने (browning) के लिए जिम्मेदार होते हैं,न कि उसे रोकने के लिए।
अतः,यह कथन कि टैनिन भूरे होने से बचाते हैं,गलत है।
37
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निम्नलिखित में से कौन सा डाइकार्बोक्सिलिक एसिड नहीं है?
A
मैलोनिक एसिड
B
कैप्रोइक एसिड
C
ग्लूटेरिक एसिड
D
सक्सिनिक एसिड

Solution

(B) एक डाइकार्बोक्सिलिक एसिड में दो कार्बोक्सिल $(-COOH)$ समूह होते हैं।
$1$. मैलोनिक एसिड $HOOC-CH_2-COOH$ है (डाइकार्बोक्सिलिक)।
$2$. कैप्रोइक एसिड $CH_3-(CH_2)_4-COOH$ है (मोनोकार्बोक्सिलिक)।
$3$. ग्लूटेरिक एसिड $HOOC-(CH_2)_3-COOH$ है (डाइकार्बोक्सिलिक)।
$4$. सक्सिनिक एसिड $HOOC-(CH_2)_2-COOH$ है (डाइकार्बोक्सिलिक)।
अतः,कैप्रोइक एसिड एक डाइकार्बोक्सिलिक एसिड नहीं है।
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निम्नलिखित में से कौन सा डाइकार्बोक्सिलिक एसिड है?
A
वैलेरिक एसिड
B
कैप्रोइक एसिड
C
ग्लूटेरिक एसिड
D
ब्यूटिरिक एसिड

Solution

(C) डाइकार्बोक्सिलिक एसिड एक कार्बनिक यौगिक है जिसमें दो कार्बोक्सिल समूह $(-COOH)$ होते हैं।
वैलेरिक एसिड $(C_4H_9COOH)$,कैप्रोइक एसिड $(C_5H_{11}COOH)$,और ब्यूटिरिक एसिड $(C_3H_7COOH)$ मोनोकार्बोक्सिलिक एसिड हैं।
ग्लूटेरिक एसिड पेंटेनडायोइक एसिड है,जिसकी संरचना $HOOC-(CH_2)_3-COOH$ होती है।
इसमें दो कार्बोक्सिल समूह होते हैं,इसलिए यह एक डाइकार्बोक्सिलिक एसिड है।
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यदि सैलिसिलिक एसिड $(138 \text{ u})$ एसिटिक एनहाइड्राइड $(102 \text{ u})$ के साथ प्रतिक्रिया करके एस्पिरिन $(180 \text{ u})$ और एसिटिक एसिड $(60 \text{ u})$ बनाता है,तो प्रतिशत परमाणु अर्थव्यवस्था (atom economy) की गणना करें। ($\%$ में)
A
$25$
B
$50$
C
$65$
D
$75$

Solution

(D) अभिक्रिया है: $C_7H_6O_3 + C_4H_6O_3 \rightarrow C_9H_8O_4 + C_2H_4O_2$.
परमाणु अर्थव्यवस्था = $\frac{\text{वांछित उत्पाद का आणविक द्रव्यमान}}{\text{सभी अभिकारकों का कुल आणविक द्रव्यमान}} \times 100$.
वांछित उत्पाद एस्पिरिन $(180 \text{ u})$ है।
अभिकारकों का कुल द्रव्यमान = $138 \text{ u} + 102 \text{ u} = 240 \text{ u}$.
परमाणु अर्थव्यवस्था = $\frac{180}{240} \times 100 = 75 \%$.
40
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केंद्रीय परमाणु के संयोजी कोश में सबसे अधिक एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म (lone pair) वाला अणु पहचानें।
A
$NH_3$
B
$SF_4$
C
$ICl_3$
D
$PCl_3$

Solution

(C) केंद्रीय परमाणु पर एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्मों की संख्या निर्धारित करने के लिए,हम सूत्र का उपयोग करते हैं: $\text{Lone pairs} = \frac{1}{2} (V - N)$,जहाँ $V$ केंद्रीय परमाणु के संयोजी इलेक्ट्रॉन हैं और $N$ जुड़े हुए एकसंयोजक परमाणुओं की संख्या है।
$1$. $NH_3$ के लिए: $V = 5$,$N = 3$. $\text{Lone pairs} = \frac{1}{2} (5 - 3) = 1$.
$2$. $SF_4$ के लिए: $V = 6$,$N = 4$. $\text{Lone pairs} = \frac{1}{2} (6 - 4) = 1$.
$3$. $ICl_3$ के लिए: $V = 7$,$N = 3$. $\text{Lone pairs} = \frac{1}{2} (7 - 3) = 2$.
$4$. $PCl_3$ के लिए: $V = 5$,$N = 3$. $\text{Lone pairs} = \frac{1}{2} (5 - 3) = 1$.
अतः,$ICl_3$ में एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्मों की संख्या सबसे अधिक $(2)$ है।
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निम्नलिखित में से किस अणु में केंद्रीय परमाणु के संयोजी कोश में इलेक्ट्रॉनों के एकाकी युग्मों (lone pairs) की संख्या न्यूनतम होती है?
A
$SCl_2$
B
$PCl_3$
C
$ClF_3$
D
$XeF_4$

Solution

(B) केंद्रीय परमाणु पर एकाकी युग्मों की संख्या निर्धारित करने के लिए,हम सूत्र का उपयोग करते हैं: $\text{Lone pairs} = \frac{V - B}{2}$,जहाँ $V$ केंद्रीय परमाणु के संयोजी इलेक्ट्रॉनों की संख्या है और $B$ आसपास के परमाणुओं के साथ साझा किए गए बंधित इलेक्ट्रॉनों की संख्या है।
$A) SCl_2$: केंद्रीय परमाणु $S$ (समूह $16$) में $6$ संयोजी इलेक्ट्रॉन होते हैं। यह $2$ बंध बनाता है। एकाकी युग्म = $(6 - 2) / 2 = 2$.
$B) PCl_3$: केंद्रीय परमाणु $P$ (समूह $15$) में $5$ संयोजी इलेक्ट्रॉन होते हैं। यह $3$ बंध बनाता है। एकाकी युग्म = $(5 - 3) / 2 = 1$.
$C) ClF_3$: केंद्रीय परमाणु $Cl$ (समूह $17$) में $7$ संयोजी इलेक्ट्रॉन होते हैं। यह $3$ बंध बनाता है। एकाकी युग्म = $(7 - 3) / 2 = 2$.
$D) XeF_4$: केंद्रीय परमाणु $Xe$ (समूह $18$) में $8$ संयोजी इलेक्ट्रॉन होते हैं। यह $4$ बंध बनाता है। एकाकी युग्म = $(8 - 4) / 2 = 2$.
मानों की तुलना करने पर,$PCl_3$ में एकाकी युग्मों की संख्या न्यूनतम $(1)$ है।
42
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निम्नलिखित में से कौन सा लुईस क्षार (Lewis base) है?
A
$BF_3$
B
$Cu^{2+}$
C
$AlCl_3$
D
$NH_3$

Solution

(D) लुईस क्षार वह पदार्थ है जो उपसहसंयोजक बंध बनाने के लिए इलेक्ट्रॉनों के एक एकाकी युग्म (lone pair) का दान कर सकता है।
$NH_3$ (अमोनिया) में नाइट्रोजन परमाणु पर एक एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म होता है,जिसे वह दान कर सकता है।
$BF_3$,$Cu^{2+}$,और $AlCl_3$ सभी इलेक्ट्रॉन-न्यून प्रजातियां या धनायन हैं जो इलेक्ट्रॉन युग्म स्वीकार करके लुईस अम्ल के रूप में कार्य करते हैं।
43
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परक्लोरिक एसिड $(HClO_4)$ में क्लोरीन द्वारा ऑक्सीजन के साथ किस प्रकार के बंध बनते हैं?
A
$2$ एकल बंध और $2$ द्वि-बंध
B
$3$ एकल बंध और $1$ द्वि-बंध
C
$2$ एकल बंध और $3$ द्वि-बंध
D
$1$ एकल बंध और $3$ द्वि-बंध

Solution

(D) परक्लोरिक एसिड $(HClO_4)$ में,केंद्रीय क्लोरीन परमाणु चार ऑक्सीजन परमाणुओं से जुड़ा होता है।
एक ऑक्सीजन परमाणु हाइड्रोजन परमाणु से जुड़ा होता है ($O-H$ एकल बंध)।
क्लोरीन परमाणु इस ऑक्सीजन के साथ एक एकल बंध $(Cl-O-H)$ बनाता है।
शेष तीन ऑक्सीजन परमाणु क्लोरीन परमाणु के साथ द्वि-बंध $(Cl=O)$ द्वारा जुड़े होते हैं।
अतः,संरचना में क्लोरीन और ऑक्सीजन परमाणुओं के बीच $1$ एकल बंध $(Cl-O)$ और $3$ द्वि-बंध $(Cl=O)$ होते हैं।
44
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निम्नलिखित में से यौगिकों के किस जोड़े में केंद्रीय परमाणु के संयोजी कोश में एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्मों (lone pair) की संख्या समान है?
A
$BrF_5$ और $XeF_6$
B
$ICl$ और $H_2S$
C
$ClF_3$ और $XeF_2$
D
$IF_7$ और $XeF_4$

Solution

(A) केंद्रीय परमाणु पर एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्मों की संख्या निर्धारित करने के लिए,हम सूत्र का उपयोग करते हैं: $\text{Lone pairs} = \frac{1}{2} (V - N)$,जहाँ $V$ केंद्रीय परमाणु के संयोजी इलेक्ट्रॉनों की संख्या है और $N$ जुड़े हुए एकसंयोजी परमाणुओं की संख्या है।
$A$: $BrF_5$ ($Br$ के पास $7$ संयोजी $e^-$,$5$ जुड़े हुए $F$ परमाणु): $\text{Lone pairs} = \frac{1}{2} (7 - 5) = 1$. $XeF_6$ ($Xe$ के पास $8$ संयोजी $e^-$,$6$ जुड़े हुए $F$ परमाणु): $\text{Lone pairs} = \frac{1}{2} (8 - 6) = 1$.
$B$: $ICl$ ($I$ के पास $7$ संयोजी $e^-$,$1$ जुड़ा हुआ $Cl$ परमाणु): $\text{Lone pairs} = \frac{1}{2} (7 - 1) = 3$. $H_2S$ ($S$ के पास $6$ संयोजी $e^-$,$2$ जुड़े हुए $H$ परमाणु): $\text{Lone pairs} = \frac{1}{2} (6 - 2) = 2$.
$C$: $ClF_3$ ($Cl$ के पास $7$ संयोजी $e^-$,$3$ जुड़े हुए $F$ परमाणु): $\text{Lone pairs} = \frac{1}{2} (7 - 3) = 2$. $XeF_2$ ($Xe$ के पास $8$ संयोजी $e^-$,$2$ जुड़े हुए $F$ परमाणु): $\text{Lone pairs} = \frac{1}{2} (8 - 2) = 3$.
$D$: $IF_7$ ($I$ के पास $7$ संयोजी $e^-$,$7$ जुड़े हुए $F$ परमाणु): $\text{Lone pairs} = \frac{1}{2} (7 - 7) = 0$. $XeF_4$ ($Xe$ के पास $8$ संयोजी $e^-$,$4$ जुड़े हुए $F$ परमाणु): $\text{Lone pairs} = \frac{1}{2} (8 - 4) = 2$.
अतः,$BrF_5$ और $XeF_6$ दोनों के केंद्रीय परमाणु पर $1$ एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म है।
45
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निम्नलिखित में से कौन सा अणु अष्टक नियम का पालन नहीं करता है?
A
$CO_2$
B
$CHCl_3$
C
$ClF_3$
D
$NH_3$

Solution

(C) अष्टक नियम के अनुसार,परमाणु अपने संयोजी कोश में $8$ इलेक्ट्रॉन प्राप्त करने के लिए इलेक्ट्रॉनों का आदान-प्रदान या साझा करते हैं।
$CO_2$ में,$C$ के पास $8$ और $O$ के पास $8$ इलेक्ट्रॉन हैं।
$CHCl_3$ में,$C$ के पास $8$,$H$ के पास $2$ (द्विक नियम) और $Cl$ के पास $8$ इलेक्ट्रॉन हैं।
$NH_3$ में,$N$ के पास $8$ और $H$ के पास $2$ इलेक्ट्रॉन हैं।
$ClF_3$ में,केंद्रीय परमाणु $Cl$ के संयोजी कोश में $10$ इलेक्ट्रॉन हैं ($3$ आबंध युग्म और $2$ एकाकी युग्म),जो एक विस्तारित अष्टक है।
अतः,$ClF_3$ अष्टक नियम का पालन नहीं करता है।
46
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निम्नलिखित में से किस अणु की ज्यामिति अपेक्षित रूप से नियमित है?
A
$SiCl_4$
B
$SF_4$
C
$BrF_5$
D
$XeF_4$

Solution

(A) $1$. $SiCl_4$: केंद्रीय परमाणु $Si$ में $4$ संयोजी इलेक्ट्रॉन होते हैं और यह $Cl$ परमाणुओं के साथ $4$ बंध बनाता है। यह $sp^3$ संकरण से गुजरता है और इसमें $0$ एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म (lone pair) होते हैं,जिसके परिणामस्वरूप एक नियमित चतुष्फलकीय (tetrahedral) ज्यामिति प्राप्त होती है।
$2$. $SF_4$: केंद्रीय परमाणु $S$ में $6$ संयोजी इलेक्ट्रॉन होते हैं,$4$ बंध बनाता है और $1$ एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म होता है। यह $sp^3d$ संकरण से गुजरता है,जिसके परिणामस्वरूप सी-सॉ (see-saw) ज्यामिति प्राप्त होती है।
$3$. $BrF_5$: केंद्रीय परमाणु $Br$ में $7$ संयोजी इलेक्ट्रॉन होते हैं,$5$ बंध बनाता है और $1$ एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म होता है। यह $sp^3d^2$ संकरण से गुजरता है,जिसके परिणामस्वरूप वर्गाकार पिरामिडीय (square pyramidal) ज्यामिति प्राप्त होती है।
$4$. $XeF_4$: केंद्रीय परमाणु $Xe$ में $8$ संयोजी इलेक्ट्रॉन होते हैं,$4$ बंध बनाता है और $2$ एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म होते हैं। यह $sp^3d^2$ संकरण से गुजरता है,जिसके परिणामस्वरूप वर्गाकार समतलीय (square planar) ज्यामिति प्राप्त होती है।
$5$. अतः,केवल $SiCl_4$ की ज्यामिति नियमित है।
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निम्नलिखित में से $TeF_4$ अणु की ज्यामिति की पहचान करें।
A
रैखिक
B
चतुष्फलकीय
C
त्रिकोणीय द्विपिरामिडी
D
सी-सॉ (See-saw)

Solution

(D) $1$. केंद्रीय परमाणु $Te$ में $6$ संयोजी इलेक्ट्रॉन होते हैं।
$2$. यह $F$ परमाणुओं के साथ $4$ बंध बनाता है और इसमें $1$ एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म (lone pair) होता है।
$3$. इलेक्ट्रॉन युग्मों की कुल संख्या $4 + 1 = 5$ है,जो $sp^3d$ संकरण को दर्शाता है।
$4$. $VSEPR$ सिद्धांत के अनुसार,$5$ इलेक्ट्रॉन युग्म और $1$ एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म वाला अणु सी-सॉ (See-saw) ज्यामिति अपनाता है।
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$BrF_5$ अणु की आकृति क्या है?
A
त्रिकोणीय पिरामिडीय
B
वर्ग समतलीय
C
वर्ग पिरामिडीय
D
मुड़ा हुआ '$T$' आकार

Solution

(C) केंद्रीय परमाणु $Br$ में $7$ संयोजी इलेक्ट्रॉन होते हैं। $BrF_5$ में,यह $F$ परमाणुओं के साथ $5$ बंध बनाता है और इसमें $1$ एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म (lone pair) होता है।
कुल इलेक्ट्रॉन युग्म = $5$ (बंध युग्म) + $1$ (एकाकी युग्म) = $6$.
यह $sp^3d^2$ संकरण और अष्टफलकीय इलेक्ट्रॉन ज्यामिति के अनुरूप है।
एक एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म की उपस्थिति के कारण,$BrF_5$ अणु की आकृति वर्ग पिरामिडीय होती है।
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निम्नलिखित में से कौन सी स्पीशीज चतुष्फलकीय (tetrahedral) नहीं है?
A
$CH_4$
B
$SF_4$
C
$\stackrel{+}{N}H_4$
D
$SiCl_4$

Solution

(B) ज्यामिति निर्धारित करने के लिए,हम $H = \frac{1}{2}(V + M - C + A)$ सूत्र का उपयोग करके केंद्रीय परमाणु का संकरण (hybridization) निकालते हैं।
$1$. $CH_4$ के लिए: $H = \frac{1}{2}(4 + 4) = 4$ ($sp^3$ संकरण,चतुष्फलकीय)।
$2$. $SF_4$ के लिए: $H = \frac{1}{2}(6 + 4) = 5$ ($sp^3d$ संकरण,एक एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म के कारण सी-सॉ (see-saw) ज्यामिति)।
$3$. $\stackrel{+}{N}H_4$ के लिए: $H = \frac{1}{2}(5 + 4 - 1) = 4$ ($sp^3$ संकरण,चतुष्फलकीय)।
$4$. $SiCl_4$ के लिए: $H = \frac{1}{2}(4 + 4) = 4$ ($sp^3$ संकरण,चतुष्फलकीय)।
अतः,$SF_4$ एकमात्र ऐसी स्पीशीज है जो चतुष्फलकीय नहीं है।
50
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$CH_4$ और $SiCl_4$ में उपस्थित ज्यामिति और इलेक्ट्रॉनों के एकाकी युग्म (lone pair) के संबंध में सही कथन की पहचान करें।
A
दोनों की ज्यामिति समान है और प्रत्येक में दो एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म हैं।
B
दोनों की ज्यामिति अलग है और प्रत्येक में एक एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म है।
C
दोनों की ज्यामिति समान है और प्रत्येक में कोई एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म नहीं है।
D
दोनों की ज्यामिति अलग है और प्रत्येक में कोई एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म नहीं है।

Solution

(C) $CH_4$ में,केंद्रीय कार्बन परमाणु $sp^3$ संकरित है और हाइड्रोजन परमाणुओं के साथ $4$ सिग्मा बंध बनाता है। इसमें $0$ एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म हैं और इसकी ज्यामिति चतुष्फलकीय (tetrahedral) है।
$SiCl_4$ में,केंद्रीय सिलिकॉन परमाणु $sp^3$ संकरित है और क्लोरीन परमाणुओं के साथ $4$ सिग्मा बंध बनाता है। इसमें $0$ एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म हैं और इसकी ज्यामिति चतुष्फलकीय है।
अतः,दोनों अणुओं की ज्यामिति समान चतुष्फलकीय है और केंद्रीय परमाणु पर कोई एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म नहीं है।
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$C_5H_{12}O$ आण्विक सूत्र वाले अल्कोहल की संरचना निम्नलिखित में से कौन सी है?
A
साइक्लोपेंटेनॉल
B
पेंटेन$-1-$ऑल
C
पेंटेन$-3-$ऑल
D
साइक्लोपेंट$-2-$ईन$-1-$ऑल

Solution

(B) संतृप्त अचक्रीय अल्कोहल का सामान्य सूत्र $C_nH_{2n+2}O$ होता है।
$n = 5$ के लिए,सूत्र $C_5H_{12}O$ है।
विकल्प $A$ साइक्लोपेंटेनॉल है,जिसका सूत्र $C_5H_{10}O$ है।
विकल्प $B$ पेंटेन$-1-$ऑल है,जो एक सीधी श्रृंखला वाला संतृप्त अल्कोहल है और इसका सूत्र $C_5H_{12}O$ है।
विकल्प $C$ पेंटेन$-3-$ऑल है,जो भी एक संतृप्त अल्कोहल है और इसका सूत्र $C_5H_{12}O$ है।
विकल्प $D$ साइक्लोपेंट$-2-$ईन$-1-$ऑल है,जिसका सूत्र $C_5H_8O$ है।
$B$ और $C$ दोनों $C_5H_{12}O$ के लिए मान्य संरचनाएं हैं।
52
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निम्नलिखित में से कौन सा प्राथमिक एलाइलिक अल्कोहल है?
A
$H_2C=CH-CH(CH_3)-OH$
B
$H_2C=CH-CH_2-OH$
C
$H_2C=CH-C(CH_3)_2-OH$
D
$CH_3-CH=CH-CH(CH_3)-OH$

Solution

(B) एलाइलिक अल्कोहल वह है जिसमें $-OH$ समूह कार्बन-कार्बन द्वि-आबंध $(C=C)$ के बगल वाले कार्बन परमाणु से जुड़ा होता है।
$1$. प्राथमिक $(1^{\circ})$ अल्कोहल में $-OH$ समूह उस कार्बन परमाणु से जुड़ा होता है जो केवल एक अन्य कार्बन परमाणु से जुड़ा होता है।
$2$. विकल्पों का विश्लेषण करते हैं:
- $A$: $H_2C=CH-CH(CH_3)-OH$ एक द्वितीयक $(2^{\circ})$ एलाइलिक अल्कोहल है।
- $B$: $H_2C=CH-CH_2-OH$ एक प्राथमिक $(1^{\circ})$ एलाइलिक अल्कोहल है क्योंकि $-OH$ समूह $CH_2$ समूह से जुड़ा है।
- $C$: $H_2C=CH-C(CH_3)_2-OH$ एक तृतीयक $(3^{\circ})$ एलाइलिक अल्कोहल है।
- $D$: $CH_3-CH=CH-CH(CH_3)-OH$ एक द्वितीयक $(2^{\circ})$ एलाइलिक अल्कोहल है।
अतः,सही विकल्प $B$ है।
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निम्नलिखित में से किस यौगिक का क्वथनांक सबसे कम है?
A
$(C_2H_5)_2NH$
B
$C_2H_5N(CH_3)_2$
C
$n-C_4H_9OH$
D
$C_2H_5COOH$

Solution

(B) सबसे कम क्वथनांक निर्धारित करने के लिए,हम प्रत्येक यौगिक में मौजूद अंतर-आणविक बलों का विश्लेषण करते हैं:
$1$. $(C_2H_5)_2NH$ एक द्वितीयक एमीन है,जो अंतर-आणविक हाइड्रोजन बंध बना सकता है।
$2$. $C_2H_5N(CH_3)_2$ एक तृतीयक एमीन है। इसमें नाइट्रोजन परमाणु से जुड़ा कोई हाइड्रोजन परमाणु नहीं होता है,इसलिए यह अंतर-आणविक हाइड्रोजन बंध नहीं बना सकता है। यह केवल द्विध्रुव-द्विध्रुव आकर्षण और लंदन फैलाव बलों को प्रदर्शित करता है।
$3$. $n-C_4H_9OH$ एक प्राथमिक अल्कोहल है,जो मजबूत अंतर-आणविक हाइड्रोजन बंध बनाता है।
$4$. $C_2H_5COOH$ एक कार्बोक्सिलिक एसिड है,जो बहुत मजबूत अंतर-आणविक हाइड्रोजन बंध (डाइमर) बनाता है।
चूंकि तृतीयक एमीन में हाइड्रोजन बंध का अभाव होता है,इसलिए समान आणविक भार वाले अल्कोहल,कार्बोक्सिलिक एसिड और प्राथमिक/द्वितीयक एमीन की तुलना में इनका क्वथनांक काफी कम होता है। इसलिए,$C_2H_5N(CH_3)_2$ का क्वथनांक सबसे कम है।
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निम्नलिखित में से किस यौगिक का क्वथनांक सबसे कम है?
A
$n$-ब्यूटेनॉल
B
आइसोब्यूटेनॉल ($2$-मिथाइलप्रोपेन-$1$-ओल)
C
सेक-ब्यूटेनॉल (ब्यूटेन-$2$-ओल)
D
टर्ट-ब्यूटेनॉल ($2$-मिथाइलप्रोपेन-$2$-ओल)

Solution

(D) अल्कोहल का क्वथनांक अंतर-आणविक हाइड्रोजन बंधन और अणु के सतह क्षेत्र पर निर्भर करता है।
समावयवी अल्कोहल के लिए,जैसे-जैसे शाखाओं (branching) की संख्या बढ़ती है,क्वथनांक कम होता जाता है क्योंकि शाखाएं सतह क्षेत्र को कम कर देती हैं,जिससे वैन डेर वाल्स बल कमजोर हो जाते हैं।
दी गई संरचनाओं की तुलना करने पर:
$A$: $n$-ब्यूटेनॉल (प्राथमिक अल्कोहल,सीधी श्रृंखला)
$B$: आइसोब्यूटेनॉल (प्राथमिक अल्कोहल,शाखित)
$C$: सेक-ब्यूटेनॉल (द्वितीयक अल्कोहल,शाखित)
$D$: टर्ट-ब्यूटेनॉल (तृतीयक अल्कोहल,अत्यधिक शाखित)
इन समावयवियों में,टर्ट-ब्यूटेनॉल में सबसे अधिक शाखाएं होती हैं,जिसके परिणामस्वरूप सतह क्षेत्र सबसे कम होता है और वैन डेर वाल्स बल सबसे कमजोर होते हैं। इसलिए,इसका क्वथनांक सबसे कम है।
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निम्नलिखित कार्बनिक यौगिकों के लिए क्वथनांक का सही घटता क्रम पहचानें।
A
कार्बोक्सिलिक एसिड > एमाइन > अल्कोहल
B
कार्बोक्सिलिक एसिड > अल्कोहल > एमाइन
C
एमाइन > अल्कोहल > कार्बोक्सिलिक एसिड
D
अल्कोहल > एमाइन > कार्बोक्सिलिक एसिड

Solution

(B) कार्बनिक यौगिकों का क्वथनांक अंतःआणविक आकर्षण बलों की शक्ति पर निर्भर करता है।
$1$. कार्बोक्सिलिक एसिड का क्वथनांक सबसे अधिक होता है क्योंकि वे स्थिर अंतःआणविक हाइड्रोजन-बंधित डाइमर बनाते हैं।
$2$. समान आणविक द्रव्यमान वाले अल्कोहल का क्वथनांक एमाइन से अधिक होता है क्योंकि $O-H$ बंध $N-H$ बंध की तुलना में अधिक ध्रुवीय होता है,जिससे अल्कोहल में मजबूत हाइड्रोजन बॉन्डिंग होती है।
$3$. इन तीनों में एमाइन का क्वथनांक सबसे कम होता है क्योंकि इनमें हाइड्रोजन बॉन्डिंग कमजोर होती है।
अतः,सही घटता क्रम है: $Carboxylic acids > Alcohols > Amines$.
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निम्नलिखित में से किसका क्वथनांक सबसे अधिक है?
A
प्रोपेनोन
B
एथेनोइक अम्ल
C
प्रोपेन-$1$-ऑल
D
प्रोपेनल

Solution

(B) किसी यौगिक का क्वथनांक अंतर-आणविक बलों की शक्ति पर निर्भर करता है।
$1$. $CH_3COCH_3$ (प्रोपेनोन) और $CH_3CH_2CHO$ (प्रोपेनल) द्विध्रुव-द्विध्रुव आकर्षण प्रदर्शित करते हैं।
$2$. $CH_3CH_2CH_2OH$ (प्रोपेन-$1$-ऑल) हाइड्रोजन बंधन प्रदर्शित करता है।
$3$. $CH_3COOH$ (एथेनोइक अम्ल) मजबूत अंतर-आणविक हाइड्रोजन बंधन प्रदर्शित करता है,जो तरल अवस्था में स्थिर डाइमर बनाता है।
मजबूत हाइड्रोजन-बंधित डाइमर की उपस्थिति के कारण,$CH_3COOH$ का क्वथनांक $(118 \ ^\circ C)$ प्रोपेन-$1$-ऑल $(97 \ ^\circ C)$,प्रोपेनोन $(56 \ ^\circ C)$ और प्रोपेनल $(49 \ ^\circ C)$ की तुलना में सबसे अधिक है।
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निम्नलिखित में से किसकी जल में घुलनशीलता सबसे अधिक है?
A
फिनोल
B
$p$-क्रेसोल
C
$o$-नाइट्रोफिनोल
D
$p$-नाइट्रोफिनोल

Solution

(D) कार्बनिक यौगिकों की जल में घुलनशीलता जल के अणुओं के साथ हाइड्रोजन बंध बनाने की उनकी क्षमता पर निर्भर करती है।
$p$-नाइट्रोफिनोल में $-NO_2$ समूह होता है जो एक प्रबल इलेक्ट्रॉन-आकर्षक समूह है।
यह समूह फेनोलिक $-OH$ समूह की अम्लता को बढ़ाता है,जिससे यह जल के साथ मजबूत अंतर-आणविक हाइड्रोजन बंध बनाने में अधिक सक्षम हो जाता है।
इसके अतिरिक्त,$o$-नाइट्रोफिनोल में अंतः-आणविक हाइड्रोजन बंध होता है,जो जल के साथ हाइड्रोजन बंध बनाने की इसकी क्षमता को कम कर देता है,जिससे इसकी घुलनशीलता कम हो जाती है।
$p$-क्रेसोल में एक हाइड्रोफोबिक मिथाइल समूह होता है,जो फिनोल की तुलना में इसकी घुलनशीलता को कम करता है।
इसलिए,दिए गए विकल्पों में $p$-नाइट्रोफिनोल सबसे अधिक घुलनशील है।
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कार्बिनोल प्रणाली में,$sec$-ब्यूटाइल अल्कोहल को किस नाम से जाना जाता है?
A
एथिल मिथाइल कार्बिनोल
B
$sec$-ब्यूटाइलकार्बिनोल
C
आइसोप्रोपिल कार्बिनोल
D
डाइएथिलकार्बिनोल

Solution

(A) कार्बिनोल प्रणाली में,अल्कोहल का नामकरण मेथनॉल के व्युत्पन्न के रूप में किया जाता है,जिसे कार्बिनोल $(CH_3OH)$ कहा जाता है।
$sec$-ब्यूटाइल अल्कोहल की संरचना $CH_3-CH_2-CH(OH)-CH_3$ है।
इसे एक कार्बिनोल समूह $(CH_2OH)$ के रूप में देखा जा सकता है जहाँ दो हाइड्रोजन परमाणुओं को एक एथिल समूह $(-C_2H_5)$ और एक मिथाइल समूह $(-CH_3)$ द्वारा प्रतिस्थापित किया गया है।
इसलिए,इसका नाम एथिल मिथाइल कार्बिनोल है।
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निम्नलिखित अभिक्रिया में उत्पाद '$A$' की पहचान करें:
$C_6H_5OCH_3 \xrightarrow[398 \ K]{HI} A + CH_3I$
A
एनिलीन
B
आयोडोबेंजीन
C
फिनोल
D
बेंजीन

Solution

(C) एनिसोल $(C_6H_5OCH_3)$ की $398 \ K$ पर $HI$ के साथ अभिक्रिया ईथर का विदलन (cleavage) है।
चूंकि फेनिल समूह $(C_6H_5-)$ ऑक्सीजन परमाणु से जुड़ा होता है,इसलिए अनुनाद (resonance) के कारण फेनिल रिंग और ऑक्सीजन के बीच के $C-O$ बंध में आंशिक द्वि-बंध गुण होता है।
इसलिए,$HI$ $O-CH_3$ बंध पर आक्रमण करता है,जिसके परिणामस्वरूप फिनोल $(C_6H_5OH)$ और आयोडोमेथेन $(CH_3I)$ का निर्माण होता है।
अतः,उत्पाद '$A$' फिनोल $(C_6H_5OH)$ है,जिसे बेंजेनोल के रूप में भी जाना जाता है।
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निम्नलिखित में से किसका क्वथनांक (boiling point) सबसे अधिक है?
A
ब्यूटेन$-1-$ऑल
B
$2-$मिथाइलप्रोपेन$-1-$ऑल
C
ब्यूटेन$-2-$ऑल
D
$2-$मिथाइलप्रोपेन$-2-$ऑल

Solution

(A) आइसोमेरिक अल्कोहल का क्वथनांक शाखाओं (branching) की मात्रा पर निर्भर करता है।
जैसे-जैसे शाखाएं बढ़ती हैं,अणु का सतह क्षेत्र (surface area) कम हो जाता है,जिससे वैन डर वाल्स आकर्षण बलों का परिमाण कम हो जाता है।
परिणामस्वरूप,शाखाओं में वृद्धि के साथ क्वथनांक कम हो जाता है।
दिए गए यौगिक हैं:
$A$: ब्यूटेन$-1-$ऑल (प्राथमिक अल्कोहल,सीधी श्रृंखला)
$B$: $2-$मिथाइलप्रोपेन$-1-$ऑल (प्राथमिक अल्कोहल,शाखित)
$C$: ब्यूटेन$-2-$ऑल (द्वितीयक अल्कोहल,शाखित)
$D$: $2-$मिथाइलप्रोपेन$-2-$ऑल (तृतीयक अल्कोहल,अत्यधिक शाखित)
इनमें से,$A$ (ब्यूटेन$-1-$ऑल) सबसे बड़े सतह क्षेत्र वाला सीधी श्रृंखला वाला प्राथमिक अल्कोहल है,जिसके परिणामस्वरूप सबसे मजबूत अंतर-आणविक हाइड्रोजन बॉन्डिंग और वैन डर वाल्स बल होते हैं।
इसलिए,ब्यूटेन$-1-$ऑल का क्वथनांक सबसे अधिक है।
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निम्नलिखित में से किस यौगिक का क्वथनांक सबसे कम है?
A
एथेनॉल
B
प्रोपेनॉल
C
ब्यूटेनॉल
D
मेथेनॉल

Solution

(D) वान डर वाल्स आकर्षण बलों के परिमाण में वृद्धि के कारण आणविक द्रव्यमान बढ़ने के साथ अल्कोहल का क्वथनांक बढ़ता है।
दिए गए अल्कोहल में,$CH_3OH$ (मेथेनॉल) का आणविक द्रव्यमान सबसे कम है।
इसलिए,$CH_3OH$ का क्वथनांक सबसे कम है।
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जब $n$ मोल ट्राइग्लिसराइड का जल-अपघटन (hydrolysis) किया जाता है,तो प्रोपेन-$1,2,3$-ट्रायोल के कितने मोल बनते हैं?
A
$n$
B
$2n$
C
$3n$
D
$0.5n$

Solution

(A) ट्राइग्लिसराइड ग्लिसरॉल (प्रोपेन-$1,2,3$-ट्रायोल) और फैटी एसिड के ट्राइ-एस्टर होते हैं।
जब एक मोल ट्राइग्लिसराइड का जल-अपघटन होता है,तो यह तीन मोल पानी के साथ प्रतिक्रिया करके एक मोल ग्लिसरॉल और तीन मोल फैटी एसिड बनाता है।
रासायनिक अभिक्रिया इस प्रकार है: $\text{Triglyceride} + 3H_2O \rightarrow \text{Glycerol} + 3 \text{Fatty Acids}$.
अतः,यदि $n$ मोल ट्राइग्लिसराइड का जल-अपघटन किया जाता है,तो $n$ मोल प्रोपेन-$1,2,3$-ट्रायोल (ग्लिसरॉल) प्राप्त होगा।
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निम्नलिखित में से कौन सा ग्रिग्नार्ड अभिकर्मक के साथ अभिक्रिया और उसके बाद जल-अपघटन करने पर तृतीयक अल्कोहल बनाता है?
A
मेथेनल
B
एथेनल
C
प्रोपेनल
D
प्रोपेनोन

Solution

(D) ग्रिग्नार्ड अभिकर्मक $(R'MgX)$ की कार्बोनिल यौगिकों के साथ अभिक्रिया निम्नलिखित नियमों का पालन करती है:
$1$. मेथेनल $(HCHO)$ के साथ अभिक्रिया प्राथमिक अल्कोहल $(R'CH_2OH)$ देती है।
$2$. अन्य एल्डिहाइड $(RCHO)$ के साथ अभिक्रिया द्वितीयक अल्कोहल $(R'RCHOH)$ देती है।
$3$. कीटोन $(RR'CO)$ के साथ अभिक्रिया तृतीयक अल्कोहल $(RR'R''COH)$ देती है।
दिए गए विकल्पों में से,$A$,$B$,और $C$ एल्डिहाइड हैं,जबकि $D$ (प्रोपेनोन,$CH_3COCH_3$) एक कीटोन है।
अतः,प्रोपेनोन की ग्रिग्नार्ड अभिकर्मक के साथ अभिक्रिया और उसके बाद जल-अपघटन करने पर तृतीयक अल्कोहल प्राप्त होता है।
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क्रोटोनिल अल्कोहल किस प्रकार का अल्कोहल है?
A
एलाइलिक अल्कोहल
B
बेंजाइलिक अल्कोहल
C
विनाइलिक अल्कोहल
D
पॉलीहाइड्रिक अल्कोहल

Solution

(A) क्रोटोनिल अल्कोहल की संरचना $CH_3-CH=CH-CH_2OH$ है।
इस अणु में,$-OH$ समूह उस कार्बन परमाणु से जुड़ा है जो कार्बन-कार्बन द्वि-आबंध के बगल में है।
वह अल्कोहल जिसमें $-OH$ समूह $C=C$ द्वि-आबंध के बगल वाले $sp^3$ संकरित कार्बन परमाणु से जुड़ा होता है,उसे एलाइलिक अल्कोहल के रूप में वर्गीकृत किया जाता है।
इसलिए,क्रोटोनिल अल्कोहल एक एलाइलिक अल्कोहल है।
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$Methyl$ propanoate का तनु $NaOH$ के साथ जल-अपघटन करने पर एक लवण बनता है,जो सांद्र $HCl$ के साथ अम्लीकरण करने पर क्या बनाता है?
A
$CH_3COOH$
B
$HCOOC_2H_5$
C
$CH_3CH_2COOH$
D
$CH_3COOC_2H_5$

Solution

(C) $Methyl$ propanoate $CH_3CH_2COOCH_3$ होता है।
तनु $NaOH$ के साथ क्षारीय जल-अपघटन पर,यह साबुनीकरण के माध्यम से सोडियम प्रोपेनोएट और मेथनॉल बनाता है:
$CH_3CH_2COOCH_3 + NaOH \rightarrow CH_3CH_2COONa + CH_3OH$
सांद्र $HCl$ के साथ अम्लीकरण करने पर,कार्बोक्सिलिक अम्ल का सोडियम लवण (सोडियम प्रोपेनोएट) प्रोपेनोइक अम्ल में परिवर्तित हो जाता है:
$CH_3CH_2COONa + HCl \rightarrow CH_3CH_2COOH + NaCl$
अतः,अंतिम उत्पाद प्रोपेनोइक अम्ल है,जो विकल्प $C$ के अनुरूप है।
66
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निम्नलिखित अभिक्रिया में उत्पाद की पहचान करें: $Phenol \xrightarrow{CrO_3} \text{Product}$
A
$Benzene$
B
$Benzoic \ acid$
C
$Benzaldehyde$
D
$p-Benzoquinone$

Solution

(D) $Phenol$ की क्रोमिक अम्ल $(CrO_3)$ के साथ अभिक्रिया एक ऑक्सीकरण अभिक्रिया है।
$Phenol$ का $CrO_3$ की उपस्थिति में ऑक्सीकरण होकर मुख्य उत्पाद के रूप में $p-Benzoquinone$ प्राप्त होता है।
यह फिनोल की एक विशिष्ट अभिक्रिया है जिसमें एरोमैटिक वलय का ऑक्सीकरण होकर संयुग्मित डाइकीटोन बनता है।
67
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निम्नलिखित में से कौन सा सांद्र सल्फ्यूरिक एसिड के साथ गर्म करने पर $2-$मिथाइलब्यूट$-2-$ईन बनाता है?
A
ब्यूटेन$-2-$ऑल
B
$2-$मिथाइल$-2-$प्रोपेनॉल
C
$2-$मिथाइलब्यूटेन$-1-$ऑल
D
$2-$मिथाइलब्यूटेन$-2-$ऑल

Solution

(D) सांद्र $H_2SO_4$ के साथ अल्कोहल का निर्जलीकरण $E1$ क्रियाविधि का पालन करता है,जिसमें कार्बोकेशन मध्यवर्ती बनता है।
$2-$मिथाइलब्यूटेन$-2-$ऑल $(CH_3-CH_2-C(CH_3)(OH)-CH_3)$ के लिए,$-OH$ समूह के प्रोटोनेशन और उसके बाद पानी के अणु के निकलने से तृतीयक कार्बोकेशन बनता है: $CH_3-CH_2-C^+(CH_3)-CH_3$।
यह कार्बोकेशन एल्कीन बनाने के लिए पड़ोसी कार्बन परमाणुओं से एक प्रोटॉन खो सकता है।
$C-3$ स्थिति से प्रोटॉन के हटने से $2-$मिथाइलब्यूट$-2-$ईन $(CH_3-CH=C(CH_3)-CH_3)$ प्राप्त होता है,जो सेटज़ेफ के नियम के अनुसार सबसे स्थिर एल्कीन है।
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निम्नलिखित अभिक्रिया में सबस्ट्रेट $X$ की पहचान कीजिए। $X + O_2 \text{ (वायु)}$ $\xrightarrow[\text{ii) तनु } HCl, \Delta]{\text{i) Co-नेफ्थेनेट, } 423 \ K} \text{फिनोल} + \text{एसीटोन}$
A
क्लोरोबेंजीन
B
बेंजीन सल्फोनिक एसिड
C
बेंजेनामाइन
D
आइसोप्रोपिल बेंजीन

Solution

(D) दी गई अभिक्रिया क्यूमीन (आइसोप्रोपिल बेंजीन) से फिनोल बनाने की औद्योगिक विधि है।
$1.$ क्यूमीन (आइसोप्रोपिल बेंजीन) $423 \ K$ पर कोबाल्ट नेफ्थेनेट की उपस्थिति में $O_2$ (वायु) के साथ अभिक्रिया करके क्यूमीन हाइड्रोपरॉक्साइड बनाता है।
$2.$ इसके बाद क्यूमीन हाइड्रोपरॉक्साइड को तनु $HCl$ के साथ गर्म करने पर फिनोल और एसीटोन प्राप्त होते हैं।
अतः,सबस्ट्रेट $X$ आइसोप्रोपिल बेंजीन है।
69
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जब एनीसोल एसिटिक एसिड में ब्रोमीन के साथ प्रतिक्रिया करता है,तो प्राप्त मुख्य उत्पाद की पहचान करें।
A
$o-$ब्रोमोएनीसोल
B
$m-$ब्रोमोएनीसोल
C
$p-$ब्रोमोएनीसोल
D
$2, 4, 6-$ट्राइब्रोमोएनीसोल

Solution

(C) एनीसोल $(C_6H_5OCH_3)$ में एक मेथॉक्सी समूह $(-OCH_3)$ होता है,जो अनुनाद प्रभाव के कारण एक सक्रिय समूह और ऑर्थो/पैरा निर्देशक होता है।
जब एनीसोल एसिटिक एसिड $(CH_3COOH)$ में ब्रोमीन $(Br_2)$ के साथ प्रतिक्रिया करता है,तो यह एक इलेक्ट्रोफिलिक एरोमैटिक प्रतिस्थापन प्रतिक्रिया है।
मेथॉक्सी समूह की मजबूत सक्रिय प्रकृति के कारण,ऑर्थो स्थिति पर त्रिविम बाधा (steric hindrance) के कारण पैरा-आइसोमर मुख्य उत्पाद के रूप में बनता है।
इसलिए,मुख्य उत्पाद $p-$ब्रोमोएनीसोल है।
70
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निम्नलिखित अभिक्रिया में अभिकारक '$A$' की पहचान कीजिए।
$A + CO_2$ $\xrightarrow[6 \ atm]{398 \ K} \text{Sodium salicylate}$ $\xrightarrow{H_3O^{+}} \text{Salicylic acid}$
A
फिनोल
B
सोडियम फिनोक्साइड
C
सैलिसिलैल्डिहाइड
D
$o-$फिनोलसल्फोनिक अम्ल

Solution

(B) वर्णित अभिक्रिया $Kolbe-Schmitt$ अभिक्रिया है।
इस अभिक्रिया में,$Sodium \ phenoxide$,$398 \ K$ तापमान और $6 \ atm$ दाब पर $CO_2$ के साथ अभिक्रिया करके $Sodium \ salicylate$ बनाता है।
$H_3O^{+}$ के साथ अम्लीकरण करने पर,$Sodium \ salicylate$,$Salicylic \ acid$ में परिवर्तित हो जाता है।
अतः,अभिकारक '$A$' $Sodium \ phenoxide$ है।
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निम्नलिखित अभिक्रिया में '$Z$' की पहचान कीजिए।
$Ar-OH + Cl-C(=O)-R \xrightarrow{\text{Pyridine}} Z + HCl$
A
$Ar-O-C(=O)-R$
B
$Ar-C(=O)-OR$
C
$R-C(=O)-OAr$
D
$Ar-C(=O)-R$

Solution

(A) पिरिडीन जैसे क्षार की उपस्थिति में फिनोल $(Ar-OH)$ और एसिड क्लोराइड $(R-COCl)$ के बीच की अभिक्रिया एक एसाइलेशन अभिक्रिया है।
पिरिडीन अभिक्रिया के दौरान उत्पन्न $HCl$ को उदासीन करने के लिए एक क्षार के रूप में कार्य करता है,जो साम्यावस्था को उत्पाद की ओर स्थानांतरित करने में मदद करता है।
अभिक्रिया इस प्रकार है:
$Ar-OH + R-COCl \xrightarrow{\text{Pyridine}} Ar-O-CO-R + HCl$
यहाँ,फेनोलिक ऑक्सीजन एसिड क्लोराइड के कार्बोनिल कार्बन पर आक्रमण करता है,जिससे एस्टर $(Ar-O-CO-R)$ का निर्माण होता है।
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फिनोल की ब्रोमीन के जलीय विलयन के साथ अभिक्रिया करने पर प्राप्त होता है
A
$o-$ब्रोमोफिनोल
B
$m-$ब्रोमोफिनोल
C
$p-$ब्रोमोफिनोल
D
$2,4,6-$ट्राइब्रोमोफिनोल

Solution

(D) जब फिनोल ब्रोमीन जल (ब्रोमीन का जलीय विलयन) के साथ अभिक्रिया करता है,तो यह सभी उपलब्ध ऑर्थो और पैरा स्थितियों पर इलेक्ट्रॉनरागी प्रतिस्थापन अभिक्रिया करता है।
$-OH$ समूह के प्रबल सक्रियण प्रभाव के कारण,यह अभिक्रिया तेजी से होती है और सफेद अवक्षेप के रूप में $2,4,6-$ट्राइब्रोमोफिनोल प्राप्त होता है।
73
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जब फिनोल और हाइड्रोजन के वाष्प के मिश्रण को $433 \ K$ पर निकेल उत्प्रेरक के ऊपर से गुजारा जाता है,तो प्राप्त अंतिम उत्पाद की पहचान करें।
A
साइक्लोहेक्सानोल
B
साइक्लोहेक्स-$2$-ईन-$1$-ओल
C
साइक्लोहेक्सेन
D
बेंजीन

Solution

(A) जब फिनोल $(C_6H_5OH)$ को $433 \ K$ पर निकेल उत्प्रेरक की उपस्थिति में हाइड्रोजन गैस के साथ गर्म किया जाता है,तो बेंजीन वलय का उत्प्रेरकीय हाइड्रोजनीकरण होता है।
अभिक्रिया इस प्रकार है: $C_6H_5OH + 3H_2 \xrightarrow{Ni, 433 \ K} C_6H_{11}OH$.
प्राप्त उत्पाद साइक्लोहेक्सानोल है।
74
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निम्नलिखित अभिक्रिया में उत्पाद '$B$' की पहचान कीजिए।
$Sodium \ phenoxide$ $\xrightarrow[6 \ atm]{CO_2 ; \ 398 \ K} A$ $\xrightarrow{H_3O^{+}} B$
A
पिक्रिक एसिड
B
सल्फोनिक एसिड
C
सैलिसिलिक एसिड
D
सैलिसिलैल्डिहाइड

Solution

(C) दी गई अभिक्रिया $Kolbe-Schmitt$ अभिक्रिया है।
इस अभिक्रिया में,$Sodium \ phenoxide$,$398 \ K$ और $6 \ atm$ दाब पर $CO_2$ के साथ अभिक्रिया करके एक मध्यवर्ती $A$ बनाता है,जो $Sodium \ salicylate$ है।
$H_3O^{+}$ के साथ अम्लीकरण करने पर,$Sodium \ salicylate$,$Salicylic \ acid$ $(B)$ में परिवर्तित हो जाता है।
अभिक्रिया का क्रम:
$Sodium \ phenoxide + CO_2$ $\xrightarrow[6 \ atm]{398 \ K} Sodium \ salicylate (A)$ $\xrightarrow{H_3O^{+}} Salicylic \ acid (B)$.
75
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जब फिनोल की कम तापमान पर तनु नाइट्रिक एसिड के साथ अभिक्रिया कराई जाती है,तो निम्नलिखित में से कौन सा यौगिक प्राप्त होता है?
A
$o-$नाइट्रोफिनोल
B
$p-$नाइट्रोफिनोल
C
$2,4,6-$ट्राइनाइट्रोफिनोल
D
$o-$नाइट्रोफिनोल और $p-$नाइट्रोफिनोल का मिश्रण

Solution

(D) जब फिनोल कम तापमान $(298 \ K)$ पर तनु नाइट्रिक एसिड के साथ अभिक्रिया करता है,तो यह इलेक्ट्रोफिलिक एरोमैटिक प्रतिस्थापन के माध्यम से $o-$नाइट्रोफिनोल और $p-$नाइट्रोफिनोल का मिश्रण बनाता है।
ऑर्थो और पैरा आइसोमर्स को भाप आसवन (steam distillation) द्वारा अलग किया जा सकता है क्योंकि $o-$नाइट्रोफिनोल में अंतःआणविक हाइड्रोजन बॉन्डिंग के कारण यह भाप में वाष्पशील होता है,जबकि $p-$नाइट्रोफिनोल में अंतर-आणविक हाइड्रोजन बॉन्डिंग के कारण यह भाप में वाष्पशील नहीं होता है।
76
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सैलिसिलिक एसिड का प्राकृतिक स्रोत क्या है?
A
दालचीनी
B
विलो (Willow) का पौधा
C
हल्दी का पौधा
D
आंवला

Solution

(B) सैलिसिलिक एसिड एक फेनोलिक एसिड है जो प्राकृतिक रूप से $Willow$ (जीनस $Salix$) के पौधे की छाल में पाया जाता है। 'सैलिसिलिक' नाम लैटिन शब्द '$salix$' से लिया गया है,जिसका अर्थ विलो का पेड़ होता है। ऐतिहासिक रूप से,विलो की छाल के अर्क का उपयोग इसके औषधीय गुणों के लिए,विशेष रूप से दर्द निवारक और बुखार कम करने के लिए किया जाता रहा है।
77
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निम्नलिखित अभिक्रियाओं की श्रृंखला में उत्पाद '$B$' की पहचान करें।
$Chlorobenzene$ $\xrightarrow[ii) \ H_3O^{+}]{i) \ NaOH, 623 \ K / 150 \ atm} A$ $\xrightarrow{Br_2 \text{ water}} B$
A
फिनोल
B
$o-$ब्रोमोफिनोल
C
$p-$ब्रोमोफिनोल
D
$2,4,6-$ट्राइब्रोमोफिनोल

Solution

(D) $Chlorobenzene$ की $623 \ K$ और $150 \ atm$ पर $NaOH$ के साथ अभिक्रिया और उसके बाद अम्लीकरण $(H_3O^+)$ $Dow$ प्रक्रिया है,जो $Phenol$ $(A)$ देती है।
जब $Phenol$ की अभिक्रिया $Br_2$ जल के साथ होती है,तो $-OH$ समूह की उच्च सक्रियता के कारण यह इलेक्ट्रोफिलिक एरोमैटिक प्रतिस्थापन द्वारा अंतिम उत्पाद के रूप में $2,4,6-$ट्राइब्रोमोफिनोल $(B)$ बनाता है।
78
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जब ईथर को ठंडे सांद्र सल्फ्यूरिक एसिड में घोला जाता है,तो निम्नलिखित में से कौन सा यौगिक बनता है?
A
अल्केनॉल
B
अल्केनोइक एसिड
C
अल्काइल हाइड्रोजन सल्फेट
D
ऑक्सोनियम लवण

Solution

(D) ऑक्सीजन परमाणु पर इलेक्ट्रॉनों के एकाकी युग्म की उपस्थिति के कारण ईथर प्रकृति में क्षारीय होते हैं। $R-O-R + H_2SO_4 (\text{conc.}) \rightarrow [R-O^+(H)-R]HSO_4^-$. इस उत्पाद को ऑक्सोनियम लवण के रूप में जाना जाता है।
79
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निम्नलिखित में से कौन सा डाइहाइड्रिक अल्कोहल (या डाइहाइड्रिक फिनोल) नहीं है?
A
कैटेकोल
B
रिसोरसिनोल
C
फ्लोरोग्लुसिनोल
D
हाइड्रोक्विनोन

Solution

(C) एक डाइहाइड्रिक यौगिक में बेंजीन रिंग से जुड़े दो हाइड्रॉक्सिल $(-OH)$ समूह होते हैं।
$1$. कैटेकोल ($1,2$-डाइहाइड्रॉक्सीबेंजीन) एक डाइहाइड्रिक फिनोल है।
$2$. रिसोरसिनोल ($1,3$-डाइहाइड्रॉक्सीबेंजीन) एक डाइहाइड्रिक फिनोल है।
$3$. हाइड्रोक्विनोन ($1,4$-डाइहाइड्रॉक्सीबेंजीन) एक डाइहाइड्रिक फिनोल है।
$4$. फ्लोरोग्लुसिनोल ($1,3,5$-ट्राइहाइड्रॉक्सीबेंजीन) में तीन हाइड्रॉक्सिल समूह होते हैं,इसलिए यह एक ट्राइहाइड्रिक फिनोल है।
अतः,फ्लोरोग्लुसिनोल डाइहाइड्रिक यौगिक नहीं है।
80
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निम्नलिखित में से किस यौगिक में फेनोलिक $-OH$ समूह नहीं होता है?
A
करक्यूमिन
B
यूजेनॉल
C
गैलिक एसिड
D
एस्कॉर्बिक एसिड

Solution

(D) एक फेनोलिक $-OH$ समूह को एक सुगंधित बेंजीन वलय से सीधे जुड़े हाइड्रॉक्सिल समूह के रूप में परिभाषित किया गया है।
$1$. करक्यूमिन में फेनोलिक $-OH$ समूह होते हैं।
$2$. यूजेनॉल में एक फेनोलिक $-OH$ समूह होता है।
$3$. गैलिक एसिड ($3,4,5$-ट्राइहाइड्रॉक्सीबेंजोइक एसिड) में फेनोलिक $-OH$ समूह होते हैं।
$4$. एस्कॉर्बिक एसिड (विटामिन $C$) एनोलिक $-OH$ समूहों वाला एक लैक्टोन है,लेकिन इसमें बेंजीन वलय नहीं होता है,इसलिए इसमें फेनोलिक $-OH$ समूह नहीं होता है।
81
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हाइड्रोक्विनोन का $IUPAC$ नाम क्या है?
A
बेंजीन-$1,2$-डायोल
B
बेंजीन-$1,3$-डायोल
C
बेंजीन-$1,4$-डायोल
D
बेंजीन-$1,3,5$-ट्रायोल

Solution

(C) हाइड्रोक्विनोन एक डाइहाइड्रिक फिनोल है जिसमें दो हाइड्रॉक्सिल $(-OH)$ समूह बेंजीन रिंग से $1$ और $4$ स्थितियों पर जुड़े होते हैं।
$IUPAC$ नामकरण के अनुसार,मुख्य श्रृंखला बेंजीन है और हाइड्रॉक्सिल समूहों को $1$ और $4$ स्थितियों पर $-diol$ प्रत्यय द्वारा दर्शाया जाता है।
इसलिए,$IUPAC$ नाम बेंजीन-$1,4$-डायोल है।
82
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$Benzene-1,4-diol$ का सामान्य नाम क्या है?
A
कैटेकोल
B
रिसोरसिनोल
C
क्विनोल
D
पायरोगैलोल

Solution

(C) $Benzene-1,4-diol$ को $Hydroquinone$ या $Quinol$ के रूप में भी जाना जाता है।
$Catechol$ $Benzene-1,2-diol$ है।
$Resorcinol$ $Benzene-1,3-diol$ है।
$Pyrogallol$ $Benzene-1,2,3-triol$ है।
83
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यूजेनॉल (Eugenol) का औषधीय गुण क्या है?
A
एंटीसेप्टिक
B
एंटीऑक्सीडेंट
C
एनाल्जेसिक और एंटीमाइक्रोबियल
D
एंटीडायबिटिक

Solution

(C) यूजेनॉल एक फेनोलिक यौगिक है जो मुख्य रूप से लौंग के तेल में पाया जाता है।
यह अपने औषधीय गुणों के लिए जाना जाता है,विशेष रूप से यह एक एनाल्जेसिक (दर्द निवारक) और एंटीमाइक्रोबियल एजेंट के रूप में कार्य करता है।
इसका उपयोग आमतौर पर दंत चिकित्सा में दांत दर्द से राहत पाने के लिए किया जाता है।
84
ChemistryEasyMCQMHT CET · 2025
निम्नलिखित में से कौन सा फिनोल नहीं है?
A
o-नाइट्रोफिनोल
B
$2-$नैफ्थोल
C
p-ब्रोमोफिनोल
D
बेंजाइल अल्कोहल

Solution

(D) फिनोल वे कार्बनिक यौगिक हैं जिनमें $-OH$ समूह सीधे एरोमैटिक वलय के कार्बन परमाणु से जुड़ा होता है।
विकल्प $A$ में,$-OH$ समूह बेंजीन वलय से जुड़ा है (o-नाइट्रोफिनोल)।
विकल्प $B$ में,$-OH$ समूह नैफ्थलीन वलय से जुड़ा है ($2$-नैफ्थोल)।
विकल्प $C$ में,$-OH$ समूह बेंजीन वलय से जुड़ा है (p-ब्रोमोफिनोल)।
विकल्प $D$ में,$-OH$ समूह एक $CH_2$ समूह से जुड़ा है,जो फिर बेंजीन वलय से जुड़ा है। यह यौगिक बेंजाइल अल्कोहल है,जो एक एरोमैटिक अल्कोहल है,फिनोल नहीं है।
85
ChemistryMediumMCQMHT CET · 2025
निम्नलिखित में से किस यौगिक की जल में घुलनशीलता सबसे कम है?
A
फिनोल
B
$p$-क्रेसोल
C
$o$-नाइट्रोफिनोल
D
$p$-नाइट्रोफिनोल

Solution

(C) जल में घुलनशीलता यौगिक की जल के अणुओं के साथ हाइड्रोजन बंध बनाने की क्षमता पर निर्भर करती है।
$o$-नाइट्रोफिनोल में अंतःअणुक (intramolecular) हाइड्रोजन बंध होता है,जो इसे जल के अणुओं के साथ प्रभावी अंतर-अणुक (intermolecular) हाइड्रोजन बंध बनाने से रोकता है।
इसके विपरीत,$p$-नाइट्रोफिनोल,$p$-क्रेसोल और फिनोल जल के साथ अंतर-अणुक हाइड्रोजन बंध बना सकते हैं,जिससे वे अधिक घुलनशील हो जाते हैं।
अतः,$o$-नाइट्रोफिनोल की जल में घुलनशीलता सबसे कम है।
86
ChemistryMediumMCQMHT CET · 2025
फिनोल को पिक्रिक एसिड में बदलने के लिए निम्नलिखित में से किस अभिकर्मक का उपयोग किया जाता है?
A
तनु $HNO_3$
B
तनु $HNO_2$
C
सांद्र $HNO_3 +$ सांद्र $H_2SO_4$
D
सांद्र $H_2SO_4$

Solution

(C) फिनोल का पिक्रिक एसिड ($2,4,6$-ट्राइनाइट्रोफिनोल) में रूपांतरण एक इलेक्ट्रोफिलिक एरोमैटिक प्रतिस्थापन अभिक्रिया है जिसे नाइट्रीकरण कहा जाता है।
जब फिनोल को सांद्र सल्फ्यूरिक एसिड $(H_2SO_4)$ की उपस्थिति में सांद्र नाइट्रिक एसिड $(HNO_3)$ के साथ उपचारित किया जाता है,तो यह $2, 4,$ और $6$ स्थितियों पर नाइट्रीकरण के माध्यम से $2,4,6$-ट्राइनाइट्रोफिनोल बनाता है,जिसे सामान्यतः पिक्रिक एसिड कहा जाता है।
87
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निम्नलिखित में से कौन सा कथन फिनोल के लिए सत्य नहीं है?
A
फिनोल ध्रुवीय अणु होते हैं।
B
शुद्ध फिनोल गंधहीन,गैर-विषैला और उच्च गलनांक वाला ठोस होता है।
C
फिनोल का क्वथनांक आणविक द्रव्यमान में वृद्धि के साथ बढ़ता है।
D
फिनोल पानी में पर्याप्त घुलनशीलता दिखाते हैं।

Solution

(B) फिनोल $(C_6H_5OH)$ एक सफेद,क्रिस्टलीय,कम गलनांक वाला ठोस है $(m.p. = 41 \ ^\circ C)$।
इसमें एक विशिष्ट औषधीय गंध होती है और यह प्रकृति में विषैला होता है।
अतः,यह कथन कि शुद्ध फिनोल गंधहीन,गैर-विषैला और उच्च गलनांक वाला ठोस है,गलत है।
88
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बेंज़ोनाइट्राइल का हाइड्रोक्लोरिक एसिड $(HCl)$ की उपस्थिति में स्टेनस क्लोराइड $(SnCl_2)$ द्वारा अपचयन और उसके बाद अम्लीय जल-अपघटन करने पर क्या प्राप्त होता है?
A
बेंज़ल क्लोराइड
B
बेंज़ोयल क्लोराइड
C
बेंज़ोफेनोन
D
बेंज़ल्डिहाइड

Solution

(D) यह अभिक्रिया $Stephen$ अपचयन कहलाती है।
$1$. बेंज़ोनाइट्राइल $(C_6H_5CN)$ स्टेनस क्लोराइड $(SnCl_2)$ और हाइड्रोक्लोरिक एसिड $(HCl)$ के साथ अभिक्रिया करके इमाइन हाइड्रोक्लोराइड मध्यवर्ती $(C_6H_5CH=NH \cdot HCl)$ बनाता है।
$2$. इस मध्यवर्ती के अम्लीय जल-अपघटन से बेंज़ल्डिहाइड $(C_6H_5CHO)$ प्राप्त होता है।
$3$. पूर्ण अभिक्रिया: $C_6H_5CN + 2[H]$ $\xrightarrow{SnCl_2/HCl} C_6H_5CH=NH$ $\xrightarrow{H_3O^+} C_6H_5CHO$.
89
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रोसेनमुंड अपचयन (Rosenmund reduction) के लिए उपयोग किए जाने वाले अभिकर्मक की पहचान करें।
A
$H_2 / Ni$
B
$H_2 / Pd, BaSO_4$
C
$Na-Hg / H_2O$
D
$SnCl_2 / HCl$

Solution

(B) रोसेनमुंड अपचयन एक हाइड्रोजनीकरण प्रक्रिया है जिसका उपयोग एसिड क्लोराइड को एल्डिहाइड में बदलने के लिए किया जाता है।
इसमें उपयोग किया जाने वाला अभिकर्मक बेरियम सल्फेट $(BaSO_4)$ पर समर्थित पैलेडियम $(Pd)$ उत्प्रेरक की उपस्थिति में $H_2$ गैस है।
$BaSO_4$ एल्डिहाइड के प्राथमिक अल्कोहल में आगे अपचयन को रोकने के लिए उत्प्रेरक विष (poison) के रूप में कार्य करता है।
इसलिए,सही अभिकर्मक $H_2 / Pd, BaSO_4$ है।
90
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निम्नलिखित अभिक्रियाओं की श्रृंखला में उत्पाद '$B$' की पहचान करें।
$CH_3MgBr$ $\xrightarrow{CdCl_2} A$ $\xrightarrow{CH_3COCl} B$
A
डाइमिथाइल कैडमियम
B
प्रोपेनोन
C
ब्यूटेनोन
D
प्रोपेनल

Solution

(B) चरण $1$: मिथाइल मैग्नीशियम ब्रोमाइड की कैडमियम क्लोराइड के साथ अभिक्रिया से डाइमिथाइल कैडमियम $(A)$ प्राप्त होता है।
$2CH_3MgBr + CdCl_2 \rightarrow (CH_3)_2Cd + 2Mg(Br)Cl$
चरण $2$: डाइमिथाइल कैडमियम की एसिटाइल क्लोराइड $(CH_3COCl)$ के साथ अभिक्रिया से प्रोपेनोन $(B)$ प्राप्त होता है।
$(CH_3)_2Cd + 2CH_3COCl \rightarrow 2CH_3COCH_3 + CdCl_2$
अतः,उत्पाद '$B$' प्रोपेनोन है।
91
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निम्नलिखित अभिक्रिया में क्रियाकारक '$S$' की पहचान कीजिए।
$S \xrightarrow{\text{Dimethyl cadmium}} \text{Propanone} + \text{Cadmium chloride}$
A
एथिल क्लोराइड
B
एथिलीन डाइक्लोराइड
C
एथेनॉयल क्लोराइड
D
एथिलीडीन डाइक्लोराइड

Solution

(C) एसिड क्लोराइड की डाइऐल्किल कैडमियम के साथ अभिक्रिया कीटोन बनाने की एक मानक विधि है।
सामान्य अभिक्रिया है: $2RCOCl + R'_2Cd \rightarrow 2RCOR' + CdCl_2$।
यहाँ,उत्पाद प्रोपेनोन $(CH_3COCH_3)$ है और अभिकर्मक डाइमेथिल कैडमियम $((CH_3)_2Cd)$ है।
सामान्य अभिक्रिया से तुलना करने पर,$R'$ एक मेथिल समूह $(CH_3)$ है।
अतः,$2RCOCl + (CH_3)_2Cd \rightarrow 2CH_3COCH_3 + CdCl_2$।
उत्पाद के प्रोपेनोन होने के लिए,$R$ को एक मेथिल समूह $(CH_3)$ होना चाहिए।
इसलिए,क्रियाकारक $S$ एथेनॉयल क्लोराइड $(CH_3COCl)$ है।
92
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निम्नलिखित अभिक्रिया के उत्पाद की पहचान करें: $Formaldehyde + Benzaldehyde \xrightarrow[H_3O^{+}]{conc. NaOH} \text{product}$
A
फेनिल मेथेनॉल और मेथेनॉल
B
मेथेनॉल और बेंजोइक एसिड
C
मेथेनोइक एसिड और फेनिल मेथेनॉल
D
मेथेनोइक एसिड और बेंजोइक एसिड

Solution

(C) $Formaldehyde$ $(HCHO)$ और $Benzaldehyde$ $(C_6H_5CHO)$ के बीच की अभिक्रिया सांद्र $NaOH$ की उपस्थिति में $Cross-Cannizzaro$ अभिक्रिया है।
$Formaldehyde$ में कोई $\alpha$-हाइड्रोजन नहीं होता है,इसलिए यह $OH^-$ द्वारा न्यूक्लियोफिलिक हमले के प्रति अधिक संवेदनशील होता है।
$Formaldehyde$ का ऑक्सीकरण होकर $Methanoic$ $acid$ (क्षारीय माध्यम में $Sodium$ $formate$ के रूप में) बनता है और $Benzaldehyde$ का अपचयन होकर $Phenyl$ $methanol$ ($Benzyl$ $alcohol$) बनता है।
$H_3O^+$ के साथ अम्लीकरण करने पर,$Sodium$ $formate$ का रूपांतरण $Methanoic$ $acid$ $(HCOOH)$ में हो जाता है।
अतः,उत्पाद $Methanoic$ $acid$ और $Phenyl$ $methanol$ हैं।
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निम्नलिखित अभिक्रिया में प्रयुक्त अभिकर्मक $R$ की पहचान करें:
$\text{Ketone} \xrightarrow{R} \text{Semicarbazone}$
A
$NH_2OH$
B
$NH_2NHCONH_2$
C
$NH_2NHC_6H_5$
D
$NH_2-NH_2$

Solution

(B) एक कीटोन की दुर्बल अम्लीय माध्यम में सेमीकार्बेजाइड $(NH_2NHCONH_2)$ के साथ अभिक्रिया करने पर सेमीकार्बेजोन का निर्माण होता है।
सामान्य अभिक्रिया इस प्रकार है: $R_2C=O + NH_2NHCONH_2 \rightarrow R_2C=NNHCONH_2 + H_2O$.
अतः,अभिकर्मक $R$ सेमीकार्बेजाइड है,जो $NH_2NHCONH_2$ है।
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निम्नलिखित में से किस यौगिक का क्वथनांक (boiling point) सबसे अधिक है?
A
एसिटाल्डिहाइड
B
प्रोपियोनाल्डिहाइड
C
ब्यूटिराल्डिहाइड
D
वैलेराल्डिहाइड

Solution

(D) वान डेर वाल्स आकर्षण बलों के परिमाण में वृद्धि के कारण आणविक द्रव्यमान बढ़ने के साथ एल्डिहाइड का क्वथनांक बढ़ता है।
$Acetaldehyde$ $(CH_3CHO)$ में $2$ कार्बन,$Propionaldehyde$ $(CH_3CH_2CHO)$ में $3$ कार्बन,$Butyraldehyde$ $(CH_3CH_2CH_2CHO)$ में $4$ कार्बन और $Valeraldehyde$ $(CH_3CH_2CH_2CH_2CHO)$ में $5$ कार्बन होते हैं।
चूंकि दिए गए विकल्पों में $Valeraldehyde$ का आणविक द्रव्यमान सबसे अधिक है,इसलिए यह सबसे मजबूत वान डेर वाल्स बल प्रदर्शित करता है और इसका क्वथनांक सबसे अधिक होता है।
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निम्नलिखित अभिक्रिया में उत्पाद '$B$' की पहचान कीजिए:
एथेनल $\xrightarrow{\text{dil. } NaOH} A$ $\xrightarrow[-\text{H}_2\text{O}]{\Delta} B$
A
$3-$हाइड्रॉक्सीब्यूटेनल
B
$4-$हाइड्रॉक्सीब्यूटेनल
C
ब्यूट$-2-$ईनल
D
ब्यूट$-3-$ईनल

Solution

(C) दी गई अभिक्रिया एल्डोल संघनन और उसके बाद निर्जलीकरण है।
चरण $1$: एथेनल $(CH_3CHO)$ के दो अणु तनु $NaOH$ की उपस्थिति में अभिक्रिया करके $3-$हाइड्रॉक्सीब्यूटेनल $(A)$ बनाते हैं।
$2CH_3CHO \xrightarrow{\text{dil. } NaOH} CH_3CH(OH)CH_2CHO$ $(A)$.
चरण $2$: गर्म करने पर,$3-$हाइड्रॉक्सीब्यूटेनल निर्जलीकरण (जल के अणु का निकलना) के माध्यम से एक $\alpha, \beta-$असंतृप्त एल्डिहाइड बनाता है,जो ब्यूट$-2-$ईनल $(B)$ है।
$CH_3CH(OH)CH_2CHO \xrightarrow[-\text{H}_2\text{O}]{\Delta} CH_3CH=CHCHO$ $(B)$.
अतः,उत्पाद '$B$' ब्यूट$-2-$ईनल है।
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निम्नलिखित रूपांतरण में क्रियाकारक '$A$' की पहचान करें।
$A \xrightarrow[H_3O^{+}]{AlH(i-Bu)_2} \text{Pent-}3\text{-enal}$
A
पेंटेननाइट्राइल
B
पेंट-$3$-ईननाइट्राइल
C
पेंट-$3$-ईन-$1$-एमीन
D
पेंट-$3$-आइननाइट्राइल

Solution

(B) अभिकर्मक $AlH(i-Bu)_2$ डाईआइसोब्यूटिल एल्युमीनियम हाइड्राइड ($DIBAL$-$H$) है।
यह अम्लीय जल-अपघटन $(H_3O^+)$ के बाद नाइट्राइल $(-CN)$ को एल्डिहाइड $(-CHO)$ में अपचयित करने के लिए उपयोग किया जाने वाला एक चयनात्मक अपचायक है।
$\text{Pent-}3\text{-enal}$ $(CH_3-CH=CH-CH_2-CHO)$ प्राप्त करने के लिए,प्रारंभिक पदार्थ समान कार्बन कंकाल वाला नाइट्राइल होना चाहिए,जो कि $\text{Pent-}3\text{-enenitrile}$ $(CH_3-CH=CH-CH_2-CN)$ है।
अतः,क्रियाकारक '$A$' $\text{Pent-}3\text{-enenitrile}$ है।
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निम्नलिखित में से किस यौगिक का क्वथनांक (boiling point) सबसे अधिक है?
A
प्रोपेनल
B
एथेनल
C
पेंटेनल
D
हेक्सेनल

Solution

(D) एल्डिहाइड और कीटोन का क्वथनांक आणविक द्रव्यमान और अंतर-आणविक बलों की शक्ति पर निर्भर करता है।
जैसे-जैसे कार्बन श्रृंखला की लंबाई बढ़ती है,आणविक द्रव्यमान बढ़ता है,जिससे वैन डेर वाल्स आकर्षण बलों की तीव्रता में वृद्धि होती है।
दिए गए विकल्पों में,$Hexanal$ $(C_6H_{12}O)$ की कार्बन श्रृंखला सबसे लंबी है और इसका आणविक द्रव्यमान $Propanal$ $(C_3H_6O)$,$Ethanal$ $(C_2H_4O)$,और $Pentanal$ $(C_5H_{10}O)$ की तुलना में सबसे अधिक है।
इसलिए,$Hexanal$ का क्वथनांक सबसे अधिक है।
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निम्नलिखित में से किसका क्वथनांक सबसे कम है?
A
पेंटेनल
B
प्रोपेनल
C
मेथेनल
D
एथेनल

Solution

(C) एल्डिहाइड और कीटोन का क्वथनांक आणविक द्रव्यमान और अंतर-आणविक बलों की शक्ति पर निर्भर करता है।
जैसे-जैसे आणविक द्रव्यमान बढ़ता है,वैन डेर वाल्स बलों का परिमाण बढ़ता है,जिससे क्वथनांक उच्च हो जाता है।
दिए गए विकल्पों में,$Methanal$ $(HCHO)$ का आणविक द्रव्यमान सबसे कम $(30 \ g/mol)$ है।
इसलिए,$Methanal$ का क्वथनांक सबसे कम है।
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उस अभिक्रिया का नाम पहचानिए जिसमें एल्डिहाइड और कीटोन के कार्बोनिल समूह को हाइड्राज़ीन के साथ उपचारित करने के बाद एथिलीन ग्लाइकॉल में सोडियम हाइड्रॉक्साइड के साथ गर्म करने पर मेथिलीन समूह में अपचयित (reduce) किया जाता है।
A
वोल्फ-किशनर अपचयन
B
क्लेमेन्सन अपचयन
C
स्टीफन अभिक्रिया
D
एटार्ड अभिक्रिया

Solution

(A) वर्णित अभिक्रिया $Wolff-Kishner$ अपचयन है।
इस प्रक्रिया में,एल्डिहाइड या कीटोन को पहले हाइड्राज़ोन मध्यवर्ती बनाने के लिए हाइड्राज़ीन $(NH_2NH_2)$ के साथ उपचारित किया जाता है।
इसके बाद,इस हाइड्राज़ोन को एथिलीन ग्लाइकॉल जैसे उच्च क्वथनांक वाले विलायक में सोडियम हाइड्रॉक्साइड $(NaOH)$ जैसे प्रबल क्षार के साथ गर्म करने पर कार्बोनिल समूह $(>C=O)$ का मेथिलीन समूह $(>CH_2)$ में अपचयन हो जाता है और नाइट्रोजन गैस $(N_2)$ निकलती है।
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Etard अभिक्रिया में निम्नलिखित में से किस अभिकर्मक का उपयोग किया जाता है?
A
क्रोमियम क्लोराइड
B
क्रोमिल क्लोराइड
C
क्रोमियम ऑक्साइड
D
क्रोमिक एसिड

Solution

(B) Etard अभिक्रिया एक रासायनिक अभिक्रिया है जिसमें एक एरोमैटिक या हेट्रोसायक्लिक मिथाइल समूह को क्रोमिल क्लोराइड $(CrO_2Cl_2)$ का उपयोग करके सीधे एल्डिहाइड में ऑक्सीकृत किया जाता है।
अतः,Etard अभिक्रिया में प्रयुक्त सही अभिकर्मक क्रोमिल क्लोराइड है।

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