AP EAMCET 2025 Physics Question Paper with Answer and Solution in Hindi

399 QuestionsHindiWith Solutions

PhysicsQ51150 of 399 questions

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तीन सदिश,जिनमें से प्रत्येक का परिमाण $3 \sqrt{1.5}$ इकाई है,एक बिंदु पर कार्य कर रहे हैं। यदि किन्हीं दो सदिशों के बीच का कोण $\frac{\pi}{3}$ है,तो तीनों सदिशों के परिणामी सदिश का परिमाण क्या होगा?
A
$9 \sqrt{3}$ इकाई
B
$9$ इकाई
C
$\sqrt{6}$ इकाई
D
$3$ इकाई

Solution

(B) मान लीजिए कि तीन सदिश $\vec{A}$,$\vec{B}$,और $\vec{C}$ हैं। प्रत्येक सदिश का परिमाण $A = B = C = 3 \sqrt{1.5} = 3 \sqrt{\frac{3}{2}}$ है।
चूंकि किन्हीं दो सदिशों के बीच का कोण $\frac{\pi}{3}$ $(60^\circ)$ है,हम उन्हें $3D$ निर्देशांक प्रणाली में रख सकते हैं।
मान लीजिए $\vec{A} = A \hat{i}$.
$\vec{A}$ और $\vec{B}$ के बीच का कोण $60^\circ$ है,इसलिए $\vec{B} = A(\cos 60^\circ \hat{i} + \sin 60^\circ \hat{j}) = A(\frac{1}{2} \hat{i} + \frac{\sqrt{3}}{2} \hat{j})$.
तीसरे सदिश $\vec{C}$ के लिए,यह $\vec{A}$ और $\vec{B}$ दोनों के साथ $60^\circ$ का कोण बनाता है। परिणामी सदिश $\vec{R} = \vec{A} + \vec{B} + \vec{C}$ है।
परिमाण का वर्ग $R^2 = A^2 + B^2 + C^2 + 2(AB \cos 60^\circ + BC \cos 60^\circ + CA \cos 60^\circ)$ होगा।
$R^2 = 3A^2 + 2(3 \cdot A^2 \cdot \frac{1}{2}) = 3A^2 + 3A^2 = 6A^2$.
यहाँ $A = 3 \sqrt{1.5} = 3 \sqrt{\frac{3}{2}}$ है,इसलिए $A^2 = 9 \cdot \frac{3}{2} = 13.5$.
$R^2 = 6 \times 13.5 = 81$.
अतः,$R = \sqrt{81} = 9$ इकाई।
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यदि एक सदिश $\overrightarrow{p}$ का परिमाण $25 \text{ units}$ है और इसका $y$-घटक $7 \text{ units}$ है, तो इसका $x$-घटक क्या होगा ($\text{ units}$ में)?
A
$24$
B
$18$
C
$32$
D
$16$

Solution

(A) सदिश $\overrightarrow{p}$ का परिमाण सूत्र $|\overrightarrow{p}| = \sqrt{p_x^2 + p_y^2}$ द्वारा दिया जाता है।
दिया गया है, $|\overrightarrow{p}| = 25 \text{ units}$ और $p_y = 7 \text{ units}$।
सूत्र में मान रखने पर: $25 = \sqrt{p_x^2 + 7^2}$।
दोनों पक्षों का वर्ग करने पर: $25^2 = p_x^2 + 7^2$।
$625 = p_x^2 + 49$।
$p_x^2 = 625 - 49 = 576$।
वर्गमूल लेने पर: $p_x = \sqrt{576} = 24 \text{ units}$।
अतः, $x$-घटक $24 \text{ units}$ है।
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यदि $\alpha, \beta$ और $\gamma$ एक सदिश द्वारा क्रमशः $x, y$ और $z$ अक्षों के साथ बनाए गए कोण हैं,तो $\sin ^2 \alpha + \sin ^2 \beta =$
A
$\sin ^2 \gamma$
B
$1 + \cos ^2 \gamma$
C
$1 + \sin ^2 \gamma$
D
$2 + \sin ^2 \gamma$

Solution

(B) किसी भी सदिश के लिए,दिक्-कोज्या (direction cosines) $\cos \alpha, \cos \beta$ और $\cos \gamma$ के रूप में परिभाषित होते हैं।
हम जानते हैं कि दिक्-कोज्या के लिए मूल सर्वसमिका $\cos ^2 \alpha + \cos ^2 \beta + \cos ^2 \gamma = 1$ है।
त्रिकोणमितीय सर्वसमिका $\sin ^2 \theta = 1 - \cos ^2 \theta$ का उपयोग करते हुए,हम व्यंजक को इस प्रकार लिख सकते हैं:
$(1 - \sin ^2 \alpha) + (1 - \sin ^2 \beta) + (1 - \sin ^2 \gamma) = 1$.
$3 - (\sin ^2 \alpha + \sin ^2 \beta + \sin ^2 \gamma) = 1$.
$\sin ^2 \alpha + \sin ^2 \beta + \sin ^2 \gamma = 2$.
अतः,$\sin ^2 \alpha + \sin ^2 \beta = 2 - \sin ^2 \gamma$.
चूंकि $\sin ^2 \gamma = 1 - \cos ^2 \gamma$,हम इसे समीकरण में प्रतिस्थापित करते हैं:
$\sin ^2 \alpha + \sin ^2 \beta = 2 - (1 - \cos ^2 \gamma) = 1 + \cos ^2 \gamma$.
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सदिश $(4 \hat{i}-3 \hat{j})$ के लंबवत सदिश है
A
$4 \hat{i}+3 \hat{j}$
B
$6 \hat{i}$
C
$3 \hat{i}+4 \hat{j}$
D
$7 \hat{k}$

Solution

(C) दो सदिश लंबवत होते हैं यदि उनका अदिश गुणनफल (dot product) $0$ के बराबर हो।
माना दिया गया सदिश $\vec{A} = 4 \hat{i} - 3 \hat{j}$ है।
हम प्रत्येक विकल्प के साथ $\vec{A}$ का अदिश गुणनफल जाँचते हैं:
विकल्प $C$ के लिए: $\vec{B} = 3 \hat{i} + 4 \hat{j}$।
$\vec{A} \cdot \vec{B} = (4 \hat{i} - 3 \hat{j}) \cdot (3 \hat{i} + 4 \hat{j}) = (4 \times 3) + (-3 \times 4) = 12 - 12 = 0$।
चूंकि अदिश गुणनफल $0$ है,इसलिए सदिश $(3 \hat{i} + 4 \hat{j})$,$(4 \hat{i} - 3 \hat{j})$ के लंबवत है।
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एक हाइड्रोलिक लिफ्ट में,यदि छोटे पिस्टन की त्रिज्या $5 \ cm$ है और बड़े पिस्टन की त्रिज्या $50 \ cm$ है,तो जब छोटे पिस्टन पर $250 \ N$ का बल लगाया जाता है,तो बड़ा पिस्टन कितना भार उठा सकता है ($kN$ में)?
A
$50$
B
$100$
C
$40$
D
$25$

Solution

(D) पास्कल के नियम के अनुसार,किसी बंद तरल पर लगाया गया दबाव तरल के प्रत्येक भाग और पात्र की दीवारों पर समान रूप से संचारित होता है।
हाइड्रोलिक लिफ्ट के लिए,दोनों पिस्टन पर दबाव समान होता है: $P_1 = P_2$।
इसका अर्थ है $\frac{F_1}{A_1} = \frac{F_2}{A_2}$,जहाँ $F_1$ छोटे पिस्टन पर बल है,$A_1$ उसका क्षेत्रफल है,$F_2$ बड़े पिस्टन पर बल (भार) है और $A_2$ उसका क्षेत्रफल है।
वृत्ताकार पिस्टन का क्षेत्रफल $A = \pi r^2$ द्वारा दिया जाता है।
अतः,$\frac{F_1}{\pi r_1^2} = \frac{F_2}{\pi r_2^2}$,जो सरल होकर $F_2 = F_1 \times (\frac{r_2}{r_1})^2$ हो जाता है।
दिया गया है $F_1 = 250 \ N$,$r_1 = 5 \ cm$,और $r_2 = 50 \ cm$।
मान रखने पर: $F_2 = 250 \times (\frac{50}{5})^2 = 250 \times (10)^2 = 250 \times 100 = 25,000 \ N$।
किलोन्यूटन में बदलने पर: $F_2 = 25 \ kN$।
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$4.5 \times 10^4 \,kg$ द्रव्यमान और $600 \,m^2$ कुल पंख क्षेत्रफल वाला एक हवाई जहाज स्थिर ऊँचाई पर उड़ रहा है। इसके पंखों की ऊपरी और निचली सतहों के बीच का दाबांतर है (गुरुत्वीय त्वरण $= 10 \,m \,s^{-2}$)
A
$500 \,N \,m^{-2}$
B
$825 \,N \,m^{-2}$
C
$600 \,N \,m^{-2}$
D
$750 \,N \,m^{-2}$

Solution

(D) हवाई जहाज के स्थिर ऊँचाई पर उड़ने के लिए,ऊपर की ओर लगने वाला उत्थापन बल (lift force) हवाई जहाज के नीचे की ओर लगने वाले गुरुत्वाकर्षण बल (भार) को संतुलित करना चाहिए।
मान लीजिए $m$ हवाई जहाज का द्रव्यमान है,$A$ कुल पंख क्षेत्रफल है,$g$ गुरुत्वीय त्वरण है,और $\Delta P$ पंखों की निचली और ऊपरी सतहों के बीच का दाबांतर है।
उत्थापन बल $F_L$ को $F_L = \Delta P \times A$ द्वारा दिया जाता है।
हवाई जहाज का भार $W = m \times g$ है।
स्थिर ऊँचाई के लिए दोनों बलों को बराबर करने पर: $\Delta P \times A = m \times g$.
दिए गए मानों को रखने पर: $\Delta P \times 600 = (4.5 \times 10^4) \times 10$.
$\Delta P \times 600 = 4.5 \times 10^5$.
$\Delta P = \frac{4.5 \times 10^5}{600} = \frac{450000}{600} = 750 \,N \,m^{-2}$.
अतः,दाबांतर $750 \,N \,m^{-2}$ है।
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$2 \times 10^{-3} \,m^2$ के अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल वाले पाइप से बहता पानी $12 \,m \,s^{-1}$ के वेग से एक ऊर्ध्वाधर दीवार से क्षैतिज रूप से टकराता है। यदि पानी दीवार से टकराने के बाद वापस नहीं उछलता है, तो पानी के कारण दीवार पर लगने वाला बल क्या है ($\,N$ में)?
A
$24$
B
$144$
C
$288$
D
$72$

Solution

(C) पानी द्वारा दीवार पर लगाया गया बल पानी के संवेग परिवर्तन की दर के बराबर होता है।
दिया गया है:
अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल $A = 2 \times 10^{-3} \,m^2$
वेग $v = 12 \,m \,s^{-1}$
पानी का घनत्व $\rho = 1000 \,kg \,m^{-3}$
प्रति इकाई समय में दीवार से टकराने वाले पानी का द्रव्यमान $\frac{dm}{dt} = \rho A v$ द्वारा दिया जाता है।
मान रखने पर:
$\frac{dm}{dt} = 1000 \times (2 \times 10^{-3}) \times 12 = 24 \,kg \,s^{-1}$.
बल $F$ संवेग परिवर्तन की दर है: $F = \frac{dp}{dt} = \frac{dm}{dt} \times v$.
चूंकि पानी वापस नहीं उछलता है, इसलिए अंतिम वेग $0$ है।
$F = (24 \,kg \,s^{-1}) \times (12 \,m \,s^{-1}) = 288 \,N$.
अतः, दीवार पर लगने वाला बल $288 \,N$ है।
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एक पानी की टंकी में,हवा का एक बुलबुला तल से पानी की ऊपरी सतह तक ऊपर उठता है। यदि टंकी में पानी की गहराई $7.28 \ m$ है और वायुमंडलीय दबाव $10 \ m$ पानी के बराबर है,तो टंकी के तल पर और पानी की ऊपरी सतह पर बुलबुले की त्रिज्याओं का अनुपात क्या होगा? (टंकी में पानी का तापमान स्थिर है)।
A
$2: 3$
B
$5: 6$
C
$3: 4$
D
$4: 5$

Solution

(B) मान लीजिए $P_1$ और $V_1$ तल पर बुलबुले का दबाव और आयतन हैं,और $P_2$ और $V_2$ ऊपरी सतह पर दबाव और आयतन हैं।
चूंकि तापमान स्थिर है,हम बॉयल के नियम का उपयोग करते हैं: $P_1 V_1 = P_2 V_2$.
तल पर दबाव $P_1 = P_{atm} + h \rho g = 10 \ m + 7.28 \ m = 17.28 \ m$ पानी के बराबर है।
ऊपरी सतह पर दबाव $P_2 = P_{atm} = 10 \ m$ पानी के बराबर है।
गोलाकार बुलबुले का आयतन $V = \frac{4}{3} \pi r^3$ होता है,इसलिए $V \propto r^3$.
इसे बॉयल के नियम में रखने पर: $P_1 r_1^3 = P_2 r_2^3$.
अतः,$\frac{r_1^3}{r_2^3} = \frac{P_2}{P_1} = \frac{10}{17.28} = \frac{1000}{1728}$.
दोनों पक्षों का घनमूल लेने पर: $\frac{r_1}{r_2} = \sqrt[3]{\frac{1000}{1728}} = \frac{10}{12} = \frac{5}{6}$.
अतः,त्रिज्याओं का अनुपात $5: 6$ है।
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$D$ व्यास की एक द्रव की बूंद $3375$ छोटी समान बूंदों में विभाजित हो जाती है। यदि $S$ द्रव का पृष्ठ तनाव है,तो इस प्रक्रिया में पृष्ठ ऊर्जा में परिवर्तन क्या होगा?
A
$14 \pi D^2 S$
B
$44 \pi D^2 S$
C
$56 D^2 S$
D
$56 \pi D^2 S$

Solution

(A) माना बड़ी बूंद की त्रिज्या $R = D/2$ है। माना प्रत्येक छोटी बूंद की त्रिज्या $r$ है।
चूंकि आयतन स्थिर रहता है,बड़ी बूंद का आयतन $n = 3375$ छोटी बूंदों के आयतन के योग के बराबर होगा:
$\frac{4}{3} \pi R^3 = n \times \frac{4}{3} \pi r^3$
$R^3 = 3375 r^3$
दोनों पक्षों का घनमूल लेने पर: $R = 3375^{1/3} r = 15r$,इसलिए $r = R/15$.
प्रारंभिक पृष्ठीय क्षेत्रफल $A_i = 4 \pi R^2$ है।
अंतिम पृष्ठीय क्षेत्रफल $A_f = n \times 4 \pi r^2 = 3375 \times 4 \pi (R/15)^2 = 3375 \times 4 \pi (R^2 / 225) = 15 \times 4 \pi R^2 = 60 \pi R^2$ है।
पृष्ठीय क्षेत्रफल में परिवर्तन $\Delta A = A_f - A_i = 60 \pi R^2 - 4 \pi R^2 = 56 \pi R^2$ है।
पृष्ठ ऊर्जा में परिवर्तन $\Delta U = S \times \Delta A = S \times 56 \pi R^2$ है।
$R = D/2$ प्रतिस्थापित करने पर,हमें प्राप्त होता है $\Delta U = S \times 56 \pi (D/2)^2 = S \times 56 \pi (D^2 / 4) = 14 \pi D^2 S$।
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$1 \ cm$ त्रिज्या की पारे की एक बूंद को $10^6$ समान आकार की छोटी बूंदों में विभाजित किया जाता है। यदि पारे का पृष्ठ तनाव $35 \times 10^{-3} \ N/m$ है,तो इस प्रक्रिया में पृष्ठ ऊर्जा में परिवर्तन क्या होगा?
A
$4356 \times 10^{-3} \ J$
B
$4356 \times 10^{-6} \ J$
C
$4356 \times 10^{-5} \ J$
D
$4356 \times 10^{-4} \ J$

Solution

(B) माना बड़ी बूंद की त्रिज्या $R = 1 \ cm = 10^{-2} \ m$ है। छोटी बूंदों की संख्या $n = 10^6$ है। माना प्रत्येक छोटी बूंद की त्रिज्या $r$ है।
चूंकि आयतन स्थिर रहता है,$\frac{4}{3} \pi R^3 = n \times \frac{4}{3} \pi r^3$.
$r^3 = \frac{R^3}{n} = \frac{(10^{-2})^3}{10^6} = \frac{10^{-6}}{10^6} = 10^{-12} \ m^3$.
अतः,$r = 10^{-4} \ m$.
पृष्ठ ऊर्जा में परिवर्तन $\Delta U = T \times \Delta A$ द्वारा दिया जाता है,जहाँ $\Delta A$ पृष्ठ क्षेत्रफल में परिवर्तन है।
$\Delta A = n(4 \pi r^2) - 4 \pi R^2 = 4 \pi (n r^2 - R^2)$.
$\Delta A = 4 \pi (10^6 \times (10^{-4})^2 - (10^{-2})^2) = 4 \pi (10^6 \times 10^{-8} - 10^{-4}) = 4 \pi (10^{-2} - 10^{-4}) = 4 \pi (0.01 - 0.0001) = 4 \pi (0.0099) \ m^2$.
$\Delta U = 35 \times 10^{-3} \times 4 \times 3.1416 \times 0.0099 \approx 4356 \times 10^{-6} \ J$.
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यदि $r_1$ और $r_2$ त्रिज्या वाले दो साबुन के बुलबुले $A$ और $B$ को निर्वात में स्थिर तापमान पर रखा जाता है,तो बुलबुलों $A$ और $B$ के अंदर हवा के द्रव्यमान का अनुपात क्या होगा?
A
$r_2^3: r_1^3$
B
$r_1^3: r_2^3$
C
$r_1: r_2$
D
$r_2: r_1$

Solution

(B) साबुन के बुलबुले के लिए,अंदर का अतिरिक्त दबाव $P_{ex} = \frac{4T}{r}$ द्वारा दिया जाता है,जहाँ $T$ पृष्ठ तनाव है और $r$ त्रिज्या है।
बुलबुले के अंदर कुल दबाव $P = P_{atm} + P_{ex}$ है। चूंकि बुलबुले निर्वात में हैं,$P_{atm} = 0$ है।
अतः,$P = \frac{4T}{r}$।
आदर्श गैस समीकरण $PV = nRT$ का उपयोग करते हुए,जहाँ $n = \frac{m}{M}$ ($m$ हवा का द्रव्यमान है,$M$ हवा का मोलर द्रव्यमान है),हमें $P = \frac{mRT}{MV}$ प्राप्त होता है।
$P = \frac{4T}{r}$ और $V = \frac{4}{3}\pi r^3$ प्रतिस्थापित करने पर,हमें $\frac{4T}{r} = \frac{mRT}{M(\frac{4}{3}\pi r^3)}$ मिलता है।
द्रव्यमान $m$ के लिए व्यवस्थित करने पर,$m = \frac{4T}{r} \cdot \frac{M \cdot 4\pi r^3}{3RT} = \frac{16\pi TM}{3RT} \cdot r^2$ प्राप्त होता है।
चूंकि $T$,$M$,$R$ और तापमान स्थिर हैं,इसलिए $m \propto r^2$ है।
अतः,द्रव्यमान का अनुपात $\frac{m_1}{m_2} = \frac{r_1^2}{r_2^2}$ होगा।
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$20 \ cm$ लंबाई का एक तार पानी की सतह पर क्षैतिज रूप से रखा गया है और तार को संतुलन में रखने के लिए $1.456 \times 10^{-2} \ N$ के बल से धीरे से ऊपर खींचा जाता है। पानी का पृष्ठ तनाव क्या है ($N \ m^{-1}$ में)?
A
$0.00364$
B
$0.0364$
C
$0.00464$
D
$0.0864$

Solution

(B) तार पानी की सतह के संपर्क में दोनों तरफ से है। इसलिए,सतह के संपर्क में तार की कुल लंबाई $L_{total} = 2 \times L = 2 \times 20 \ cm = 40 \ cm = 0.4 \ m$ है।
जब तार को ऊपर खींचा जाता है,तो पृष्ठ तनाव के कारण बल नीचे की ओर कार्य करता है,जो खिंचाव का विरोध करता है। संतुलन के लिए,लगाया गया बल $F$ पृष्ठ तनाव बल $F_s$ को संतुलित करना चाहिए।
पृष्ठ तनाव के कारण बल $F_s = T \times L_{total}$ द्वारा दिया जाता है,जहाँ $T$ पृष्ठ तनाव है।
यहाँ $F = 1.456 \times 10^{-2} \ N$ और $L_{total} = 0.4 \ m$ दिया गया है।
बलों को बराबर करने पर: $1.456 \times 10^{-2} = T \times 0.4$.
$T$ के लिए हल करने पर: $T = \frac{1.456 \times 10^{-2}}{0.4} = 3.64 \times 10^{-2} \ N \ m^{-1} = 0.0364 \ N \ m^{-1}$.
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यदि $2 \ cm$ त्रिज्या के दो साबुन के बुलबुले निर्वात में समतापीय स्थितियों के तहत जुड़ते हैं,तो बनने वाले नए बुलबुले की त्रिज्या क्या होगी?
A
$2 \ cm$
B
$2\sqrt{2} \ cm$
C
$\sqrt{2} \ cm$
D
$4 \ cm$

Solution

(B) जब $r$ त्रिज्या के दो साबुन के बुलबुले निर्वात में मिलकर $R$ त्रिज्या का एक बुलबुला बनाते हैं,तो बुलबुलों के अंदर हवा के मोलों की कुल संख्या स्थिर रहती है। चूंकि प्रक्रिया समतापीय है,तापमान $T$ स्थिर है। $r$ त्रिज्या के साबुन के बुलबुले के अंदर का दबाव $P = P_0 + \frac{4S}{r}$ होता है,जहां $P_0$ बाहरी दबाव है (जो निर्वात में $0$ है) और $S$ पृष्ठ तनाव है। अतः,$P = \frac{4S}{r}$।
आदर्श गैस समीकरण $PV = nRT$ का उपयोग करते हुए,साबुन के बुलबुले के लिए,$n = \frac{PV}{RT} = \frac{(4S/r) \cdot (4/3 \pi r^3)}{RT} = \frac{16 \pi S r^2}{3RT}$।
चूंकि मोलों की कुल संख्या संरक्षित रहती है,$n_{total} = n_1 + n_2$। दिया गया है कि $r_1 = r_2 = r = 2 \ cm$,इसलिए $n_{total} = 2n = \frac{32 \pi S r^2}{3RT}$।
$R$ त्रिज्या के नए बुलबुले के लिए,$n_{total} = \frac{16 \pi S R^2}{3RT}$।
दोनों को बराबर करने पर,हमें $R^2 = 2r^2$ प्राप्त होता है,जिसका अर्थ है $R = r\sqrt{2}$।
$r = 2 \ cm$ रखने पर,हमें $R = 2\sqrt{2} \ cm$ प्राप्त होता है।
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यदि पानी $2 \,cm$ त्रिज्या वाले पाइप में $20 \,cm \,s^{-1}$ के वेग से बह रहा है, तो प्रवाह कैसा होगा? (पानी का श्यानता गुणांक $10^{-3} \,kg \,m^{-1} \,s^{-1}$ है और पानी का घनत्व $10^3 \,kg \,m^{-3}$ है)।
A
$\text{अशांत (turbulent)}$
B
$\text{स्थायी प्रवाह}$
C
$\text{श्यानता रहित}$
D
$\text{अस्थायी}$

Solution

(A) प्रवाह की प्रकृति निर्धारित करने के लिए, हम रेनॉल्ड्स संख्या $(R_e)$ की गणना करते हैं।
रेनॉल्ड्स संख्या का सूत्र $R_e = \frac{\rho v D}{\eta}$ है, जहाँ $\rho$ घनत्व है, $v$ वेग है, $D$ पाइप का व्यास है और $\eta$ श्यानता गुणांक है।
दिया गया है:
घनत्व $\rho = 10^3 \,kg \,m^{-3}$
वेग $v = 20 \,cm \,s^{-1} = 0.2 \,m \,s^{-1}$
त्रिज्या $r = 2 \,cm = 0.02 \,m$, इसलिए व्यास $D = 2r = 0.04 \,m$
श्यानता $\eta = 10^{-3} \,kg \,m^{-1} \,s^{-1}$
इन मानों को रखने पर:
$R_e = \frac{10^3 \times 0.2 \times 0.04}{10^{-3}}$
$R_e = \frac{10^3 \times 0.008}{10^{-3}} = 8 \times 10^3 = 8000$
चूंकि रेनॉल्ड्स संख्या $R_e > 2000$ है, इसलिए प्रवाह अशांत (turbulent) है।
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जब तापमान बढ़ता है,तो किसकी श्यानता (viscosity) में परिवर्तन होता है?
A
गैसों की घटती है लेकिन द्रवों की बढ़ती है
B
गैसों की बढ़ती है लेकिन द्रवों की घटती है
C
गैसों और द्रवों दोनों की बढ़ती है
D
गैसों और द्रवों दोनों की घटती है

Solution

(B) किसी तरल की श्यानता उसके प्रवाह के प्रतिरोध का माप है।
द्रवों के लिए,श्यानता मुख्य रूप से अणुओं के बीच के ससंजक बलों (cohesive forces) के कारण होती है। जैसे-जैसे तापमान बढ़ता है,अणुओं की गतिज ऊर्जा बढ़ती है,जो इन ससंजक बलों को कम कर देती है,जिससे द्रवों की श्यानता घट जाती है।
गैसों के लिए,श्यानता मुख्य रूप से यादृच्छिक तापीय गति के कारण गैस के अणुओं की परतों के बीच संवेग (momentum) के स्थानांतरण के कारण होती है। जैसे-जैसे तापमान बढ़ता है,गैस के अणुओं की यादृच्छिक गति बढ़ जाती है,जिससे टक्करें अधिक बार होती हैं और संवेग स्थानांतरण की दर बढ़ जाती है,जिसके कारण गैसों की श्यानता बढ़ जाती है।
अतः,जब तापमान बढ़ता है,तो गैसों की श्यानता बढ़ती है और द्रवों की श्यानता घटती है।
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जब एक गोले को $1 \ km$ गहरे समुद्र की तली में ले जाया जाता है,तो उसके आयतन में $0.01 \%$ का संकुचन होता है। गोले के पदार्थ का आयतन प्रत्यास्थता गुणांक (Bulk Modulus) क्या है? (गुरुत्वीय त्वरण $= 10 \ m \ s^{-2}$,समुद्री जल का घनत्व $= 10^3 \ kg \ m^{-3}$)
A
$10 \times 10^6 \ N \ m^{-2}$
B
$1.2 \times 10^{10} \ N \ m^{-2}$
C
$10 \times 10^{10} \ N \ m^{-2}$
D
$10 \times 10^{11} \ N \ m^{-2}$

Solution

(C) $h$ गहराई पर दबाव $P = \rho gh$ द्वारा दिया जाता है।
दिया गया है: $h = 1 \ km = 10^3 \ m$,$\rho = 10^3 \ kg \ m^{-3}$,$g = 10 \ m \ s^{-2}$.
$P = 10^3 \times 10 \times 10^3 = 10^7 \ N \ m^{-2}$.
आयतन में भिन्नात्मक परिवर्तन $\frac{\Delta V}{V} = 0.01 \% = \frac{0.01}{100} = 10^{-4}$.
आयतन प्रत्यास्थता गुणांक $B$ को $B = \frac{P}{\Delta V / V}$ के रूप में परिभाषित किया गया है।
$B = \frac{10^7}{10^{-4}} = 10^{11} \ N \ m^{-2}$.
अतः,$10^{11} \ N \ m^{-2}$ का मान $10 \times 10^{10} \ N \ m^{-2}$ के बराबर है,इसलिए विकल्प $C$ सही है।
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यदि किसी पिंड पर दबाव $200 \text{ kPa}$ से बढ़ाकर $250 \text{ kPa}$ कर दिया जाए,तो पिंड का आयतन $0.25 \%$ कम हो जाता है। पिंड के पदार्थ की संपीड्यता ($m^2 \text{ N}^{-1}$ में) क्या है?
A
$2 \times 10^{-8}$
B
$2 \times 10^{-7}$
C
$5 \times 10^{-8}$
D
$5 \times 10^{-7}$

Solution

(C) दबाव में परिवर्तन $\Delta P = 250 \text{ kPa} - 200 \text{ kPa} = 50 \text{ kPa} = 50 \times 10^3 \text{ Pa} = 5 \times 10^4 \text{ Pa}$ है।
आयतन में आंशिक परिवर्तन $\frac{\Delta V}{V} = 0.25 \% = \frac{0.25}{100} = 2.5 \times 10^{-3}$ है।
बल्क मापांक $B$ का सूत्र $B = -\frac{\Delta P}{\Delta V / V}$ है।
संपीड्यता $K$,बल्क मापांक का व्युत्क्रम है,$K = \frac{1}{B} = \frac{\Delta V / V}{\Delta P}$।
मान रखने पर: $K = \frac{2.5 \times 10^{-3}}{5 \times 10^4} = 0.5 \times 10^{-7} \text{ m}^2 \text{ N}^{-1} = 5 \times 10^{-8} \text{ m}^2 \text{ N}^{-1}$।
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यदि एक खींचे गए तार की अनुदैर्ध्य विकृति (longitudinal strain) $0.2 \%$ है और तार के पदार्थ का प्वासों अनुपात (Poisson's ratio) $0.3$ है,तो तार की आयतन विकृति (volume strain) क्या होगी ($\%$ में)?
A
$0.12$
B
$0.08$
C
$0.14$
D
$0.26$

Solution

(B) अनुदैर्ध्य विकृति $\epsilon_L = 0.2 \% = 0.002$ दी गई है।
प्वासों अनुपात $\sigma$ को पार्श्व विकृति (lateral strain) $\epsilon_d$ और अनुदैर्ध्य विकृति $\epsilon_L$ के अनुपात के रूप में परिभाषित किया जाता है,इसलिए $\epsilon_d = -\sigma \cdot \epsilon_L$।
यहाँ,$\sigma = 0.3$ है,इसलिए पार्श्व विकृति $\epsilon_d = -0.3 \times 0.002 = -0.0006$ है।
एक तार के लिए आयतन विकृति $\frac{\Delta V}{V}$ अनुदैर्ध्य विकृति और दो पार्श्व विकृतियों के योग के बराबर होती है: $\frac{\Delta V}{V} = \epsilon_L + 2\epsilon_d$।
मान रखने पर: $\frac{\Delta V}{V} = 0.002 + 2(-0.0006) = 0.002 - 0.0012 = 0.0008$।
प्रतिशत में बदलने पर: $0.0008 \times 100 \% = 0.08 \%$।
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जब $Y$ यंग मापांक (Young's modulus) वाले पदार्थ से बने एक तार पर $S$ प्रतिबल (stress) लगाया जाता है,तो तार में प्रति इकाई आयतन संचित प्रत्यास्थ स्थितिज ऊर्जा क्या होगी?
A
$\frac{Y S}{2}$
B
$\frac{S^2 Y}{2}$
C
$\frac{S^2}{2 Y}$
D
$\frac{S}{2 Y}$

Solution

(C) एक खींचे गए तार में प्रति इकाई आयतन संचित प्रत्यास्थ स्थितिज ऊर्जा $(u)$ प्रति इकाई आयतन किए गए कार्य द्वारा दी जाती है।
$u = \frac{1}{2} \times \text{प्रतिबल} \times \text{विकृति}$
हुक के नियम से,हम जानते हैं कि यंग मापांक $Y = \frac{\text{प्रतिबल}}{\text{विकृति}}$,जिसका अर्थ है कि $\text{विकृति} = \frac{\text{प्रतिबल}}{Y}$।
ऊर्जा घनत्व के सूत्र में विकृति का मान रखने पर:
$u = \frac{1}{2} \times S \times \left( \frac{S}{Y} \right)$
$u = \frac{S^2}{2 Y}$
अतः,सही विकल्प $C$ है।
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$1 \,m$ लंबाई और $1 \,mm^2$ अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल वाली तांबे की छड़ को $1 \,mm$ खींचने पर उसमें संचित प्रत्यास्थ स्थितिज ऊर्जा क्या होगी? (तांबे का यंग मापांक $= 1.2 \times 10^{11} \,N/m^2$)
A
$6 \times 10^{-2} \,J$
B
$3 \times 10^{-2} \,J$
C
$60 \,J$
D
$3 \,J$

Solution

(A) खींचे गए तार में संचित प्रत्यास्थ स्थितिज ऊर्जा $U$ का सूत्र है: $U = \frac{1}{2} \times \text{Stress} \times \text{Strain} \times \text{Volume}$.
वैकल्पिक रूप से,$U = \frac{1}{2} \times Y \times A \times \frac{(\Delta L)^2}{L}$,जहाँ $Y$ यंग मापांक है,$A$ अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल है,$\Delta L$ लंबाई में वृद्धि है,और $L$ मूल लंबाई है।
दिया गया है:
$Y = 1.2 \times 10^{11} \,N/m^2$
$A = 1 \,mm^2 = 1 \times 10^{-6} \,m^2$
$L = 1 \,m$
$\Delta L = 1 \,mm = 10^{-3} \,m$
मान रखने पर:
$U = \frac{1}{2} \times (1.2 \times 10^{11}) \times (10^{-6}) \times \frac{(10^{-3})^2}{1}$
$U = 0.6 \times 10^5 \times 10^{-6} \times 10^{-6} = 0.6 \times 10^{-1} = 0.06 \,J = 6 \times 10^{-2} \,J$.
अतः,सही विकल्प $A$ है।
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निम्नलिखित में से किस भौतिक राशि की विमाएँ यंग मापांक (Young's modulus) के समान हैं?
A
विकृति (strain)
B
गुरुत्वीय विभव (gravitational potential)
C
पृष्ठ ऊर्जा (surface energy)
D
ऊर्जा घनत्व (energy density)

Solution

(D) यंग मापांक $(Y)$ को अनुदैर्ध्य प्रतिबल और अनुदैर्ध्य विकृति के अनुपात के रूप में परिभाषित किया जाता है। चूंकि विकृति एक विमाहीन राशि है,इसलिए यंग मापांक की विमाएँ प्रतिबल की विमाओं के समान होती हैं।
प्रतिबल = $\frac{\text{बल}}{\text{क्षेत्रफल}} = \frac{[MLT^{-2}]}{[L^2]} = [ML^{-1}T^{-2}]$.
अब,ऊर्जा घनत्व की विमाओं की जाँच करते हैं:
ऊर्जा घनत्व = $\frac{\text{ऊर्जा}}{\text{आयतन}} = \frac{[ML^2T^{-2}]}{[L^3]} = [ML^{-1}T^{-2}]$.
चूंकि यंग मापांक और ऊर्जा घनत्व दोनों की विमाएँ $[ML^{-1}T^{-2}]$ हैं,इसलिए सही विकल्प $D$ है।
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चित्र में दिखाए अनुसार,$150 \ cm$ लंबाई की एक हल्की समान छड़ $PQ$ को छत से दो धातु के तारों $A$ और $B$ का उपयोग करके क्षैतिज रूप से लटकाया गया है,जो छड़ के सिरों से बंधे हैं। दो तारों $A$ और $B$ की त्रिज्याओं और पदार्थों के यंग मापांक का अनुपात क्रमशः $2:3$ और $3:2$ है। छड़ से वजन किस स्थान पर लटकाया जाना चाहिए ताकि दोनों तारों का विस्तार समान हो जाए?
Question diagram
A
$P$ से $90 \ cm$ की दूरी पर
B
$P$ से $100 \ cm$ की दूरी पर
C
$Q$ से $40 \ cm$ की दूरी पर
D
$Q$ से $45 \ cm$ की दूरी पर

Solution

(A) मान लीजिए $r_A, r_B$ तार $A$ और $B$ की त्रिज्याएँ हैं और $Y_A, Y_B$ उनके यंग मापांक हैं।
दिया गया है: $\frac{r_A}{r_B} = \frac{2}{3}$ और $\frac{Y_A}{Y_B} = \frac{3}{2}$.
मान लीजिए $L$ तारों की लंबाई है (समान मानी गई है) और $\Delta L$ दोनों तारों में समान विस्तार है।
विस्तार के सूत्र के अनुसार,$\Delta L = \frac{F L}{A Y}$,जहाँ $F$ तार में तनाव है और $A = \pi r^2$ अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल है।
चूंकि दोनों तारों के लिए $\Delta L$ समान है,इसलिए $\frac{F_A L}{\pi r_A^2 Y_A} = \frac{F_B L}{\pi r_B^2 Y_B}$.
अतः,$\frac{F_A}{F_B} = \frac{r_A^2 Y_A}{r_B^2 Y_B} = \left(\frac{r_A}{r_B}\right)^2 \left(\frac{Y_A}{Y_B}\right) = \left(\frac{2}{3}\right)^2 \times \left(\frac{3}{2}\right) = \frac{4}{9} \times \frac{3}{2} = \frac{2}{3}$.
मान लीजिए वजन $P$ से $x$ दूरी पर लटकाया गया है। निलंबन बिंदु के परितः आघूर्ण लेने पर,$F_A x = F_B (150 - x)$.
$\frac{F_A}{F_B} = \frac{150 - x}{x} = \frac{2}{3}$.
$3(150 - x) = 2x \implies 450 - 3x = 2x \implies 5x = 450 \implies x = 90 \ cm$ ($P$ से)।
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जब $L$ लंबाई के एक तार को एक सिरे से क्लैंप करके दूसरे सिरे से $F$ बल द्वारा खींचा जाता है,तो इसकी लंबाई में $l$ की वृद्धि होती है। यदि तार की त्रिज्या और आरोपित बल को आधा कर दिया जाए,तो इसकी लंबाई में वृद्धि होगी
A
$l$
B
$2l$
C
$0.5l$
D
$4l$

Solution

(B) यंग मापांक $Y$ का सूत्र $Y = \frac{F \cdot L}{A \cdot l}$ है,जहाँ $A$ तार का अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल है।
चूंकि $A = \pi r^2$,हम लिख सकते हैं $l = \frac{F \cdot L}{Y \cdot \pi r^2}$।
इसका अर्थ है $l \propto \frac{F}{r^2}$।
मान लीजिए प्रारंभिक लंबाई में वृद्धि $l_1 = k \cdot \frac{F}{r^2}$ है।
जब बल $F' = \frac{F}{2}$ और त्रिज्या $r' = \frac{r}{2}$ हो,तो लंबाई में नई वृद्धि $l_2$ होगी:
$l_2 = k \cdot \frac{F'}{(r')^2} = k \cdot \frac{F/2}{(r/2)^2} = k \cdot \frac{F/2}{r^2/4} = 2 \cdot k \cdot \frac{F}{r^2} = 2l_1$।
अतः,लंबाई में नई वृद्धि $2l$ होगी।
74
PhysicsMediumMCQAP EAMCET · 2025
$1 \,mm^2$ अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल वाले स्टील के तार को उसकी लंबाई से दोगुना करने के लिए आवश्यक बल क्या होगा? (स्टील का यंग मापांक $= 2 \times 10^{11} \,N \,m^{-2}$)
A
$2 \times 10^3 \,N$
B
$2 \times 10^5 \,N$
C
$2 \times 10^2 \,N$
D
$2 \times 10^4 \,N$

Solution

(B) यंग मापांक $(Y)$ को अनुदैर्ध्य प्रतिबल और अनुदैर्ध्य विकृति के अनुपात के रूप में परिभाषित किया गया है।
$Y = \frac{\text{Stress}}{\text{Strain}} = \frac{F/A}{\Delta L/L}$
दिया गया है:
क्षेत्रफल $A = 1 \,mm^2 = 1 \times 10^{-6} \,m^2$
यंग मापांक $Y = 2 \times 10^{11} \,N \,m^{-2}$
लंबाई को दोगुना करने के लिए,लंबाई में परिवर्तन $\Delta L$ मूल लंबाई $L$ के बराबर होना चाहिए,अर्थात $\Delta L = L$,जिसका अर्थ है कि $\frac{\Delta L}{L} = 1$।
इन मानों को सूत्र में रखने पर:
$2 \times 10^{11} = \frac{F / (1 \times 10^{-6})}{1}$
$F = 2 \times 10^{11} \times 10^{-6} \,N$
$F = 2 \times 10^5 \,N$
अतः,सही विकल्प $B$ है।
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PhysicsMediumMCQAP EAMCET · 2025
एक तार को $F$ बल द्वारा $1 \ mm$ खींचा जाता है। यदि समान पदार्थ,समान लंबाई और पहले तार के व्यास से $4$ गुना व्यास वाले दूसरे तार को समान बल $F$ द्वारा खींचा जाता है,तो दूसरे तार का विस्तार क्या होगा?
A
$\frac{1}{8} \ mm$
B
$8 \ mm$
C
$16 \ mm$
D
$\frac{1}{16} \ mm$

Solution

(D) यंग मापांक $Y$ का सूत्र $Y = \frac{F \cdot L}{A \cdot \Delta L}$ है,जहाँ $F$ बल है,$L$ लंबाई है,$A$ अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल है और $\Delta L$ विस्तार है।
चूंकि $A = \pi r^2 = \pi (d/2)^2 = \frac{\pi d^2}{4}$,हम लिख सकते हैं $\Delta L = \frac{F \cdot L}{Y \cdot A} = \frac{4 \cdot F \cdot L}{Y \cdot \pi d^2}$।
चूंकि $F$,$L$ और $Y$ दोनों तारों के लिए स्थिर हैं,इसलिए $\Delta L \propto \frac{1}{d^2}$ होगा।
मान लीजिए $\Delta L_1 = 1 \ mm$ और $d_1 = d$ है। दूसरे तार के लिए,$d_2 = 4d$ है।
इसलिए,$\frac{\Delta L_2}{\Delta L_1} = \left( \frac{d_1}{d_2} \right)^2 = \left( \frac{d}{4d} \right)^2 = \left( \frac{1}{4} \right)^2 = \frac{1}{16}$।
अतः,$\Delta L_2 = \frac{1}{16} \cdot \Delta L_1 = \frac{1}{16} \cdot 1 \ mm = \frac{1}{16} \ mm$।
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$100^{\circ} C$ तापमान पर $0.5 \ m$ लंबाई और $4 \times 10^{-6} \ m^2$ अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल वाले एक तार को उसके ऊपरी सिरे को छत से बांधकर ऊर्ध्वाधर लटकाया जाता है। तार को फिर $0^{\circ} C$ तक ठंडा किया जाता है,लेकिन निचले सिरे पर एक द्रव्यमान जोड़कर इसे सिकुड़ने से रोका जाता है। यदि तार का द्रव्यमान नगण्य है,तो तार से जुड़े द्रव्यमान का मान क्या है ($kg$ में)? (तार के पदार्थ का यंग मापांक $= 10^{11} \ N \ m^{-2}$; तार के पदार्थ का रैखिक प्रसार गुणांक $= 10^{-5} \ K^{-1}$ और गुरुत्वीय त्वरण $= 10 \ m \ s^{-2}$)
A
$10$
B
$20$
C
$30$
D
$40$

Solution

(D) यदि तार स्वतंत्र रूप से सिकुड़ सकता तो उत्पन्न तापीय विकृति $\Delta L / L = \alpha \Delta T$ द्वारा दी जाती है।
यहाँ,$\alpha = 10^{-5} \ K^{-1}$ और $\Delta T = 100^{\circ} C - 0^{\circ} C = 100 \ K$.
अतः,$\Delta L / L = 10^{-5} \times 100 = 10^{-3}$.
चूंकि तार को सिकुड़ने से रोका जाता है,इसलिए उत्पन्न प्रतिबल यंग मापांक और विकृति के गुणनफल के बराबर होता है: $\text{प्रतिबल} = Y \times (\Delta L / L)$.
$\text{प्रतिबल} = 10^{11} \times 10^{-3} = 10^8 \ N \ m^{-2}$.
प्रतिबल को प्रति इकाई क्षेत्रफल बल के रूप में भी परिभाषित किया जाता है,इसलिए $\text{प्रतिबल} = F / A = (mg) / A$.
प्रतिबल के लिए दोनों व्यंजकों की तुलना करने पर: $mg / A = 10^8$.
$m = (10^8 \times A) / g = (10^8 \times 4 \times 10^{-6}) / 10$.
$m = 400 / 10 = 40 \ kg$.
77
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यदि दिया गया ग्राफ $1 \,m$ लंबाई और $1 \,mm^2$ अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल वाले तार पर लटकाए गए भार $(W)$ और उसमें उत्पन्न विस्तार $(\Delta l)$ को दर्शाता है, तो तार के पदार्थ का यंग मापांक क्या है?
Question diagram
A
$20 \times 10^{10} \,N \,m^{-2}$
B
$2 \times 10^{10} \,N \,m^{-2}$
C
$10 \times 10^{10} \,N \,m^{-2}$
D
$4 \times 10^{10} \,N \,m^{-2}$

Solution

(B) यंग मापांक $(Y)$ का सूत्र इस प्रकार है: $Y = \frac{\text{Stress}}{\text{Strain}} = \frac{F/A}{\Delta l/L} = \frac{F \cdot L}{A \cdot \Delta l}$.
ग्राफ से, हम कोई भी बिंदु ले सकते हैं, उदाहरण के लिए, $W = 100 \,N$ और $\Delta l = 5 \,mm = 5 \times 10^{-3} \,m$.
दिया गया है: $L = 1 \,m$, $A = 1 \,mm^2 = 1 \times 10^{-6} \,m^2$.
मान रखने पर:
$Y = \frac{100 \,N \times 1 \,m}{1 \times 10^{-6} \,m^2 \times 5 \times 10^{-3} \,m} = \frac{100}{5 \times 10^{-9}} = 20 \times 10^9 \,N \,m^{-2} = 2 \times 10^{10} \,N \,m^{-2}$.
अतः, सही विकल्प $B$ है।
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दो तारों $A$ और $B$ का प्रतिबल-विकृति (stress-strain) ग्राफ चित्र में दिखाया गया है। यदि $Y_{A}$ और $Y_B$ क्रमशः तारों $A$ और $B$ के पदार्थों के यंग मापांक (Young's moduli) हैं, तो
Question diagram
A
$Y_{A}=3 Y_{B}$
B
$Y_A=Y_B$
C
$Y_{B}=3 Y_{A}$
D
$Y_B=2 Y_A$

Solution

(C) यंग मापांक $Y$ को प्रतिबल और विकृति के अनुपात के रूप में परिभाषित किया गया है, जो प्रतिबल-विकृति ग्राफ के ढलान (slope) के बराबर होता है।
$Y = \text{slope} = \tan(\theta)$, जहाँ $\theta$ वह कोण है जो रेखा विकृति अक्ष के साथ बनाती है।
तार $A$ के लिए, विकृति अक्ष के साथ कोण $\theta_A = 30^{\circ}$ है।
इसलिए, $Y_A = \tan(30^{\circ}) = \frac{1}{\sqrt{3}}$.
तार $B$ के लिए, विकृति अक्ष के साथ कोण $\theta_B = 30^{\circ} + 30^{\circ} = 60^{\circ}$ है।
इसलिए, $Y_B = \tan(60^{\circ}) = \sqrt{3}$.
अब, अनुपात $\frac{Y_B}{Y_A} = \frac{\sqrt{3}}{1/\sqrt{3}} = 3$ की गणना करने पर।
अतः, $Y_B = 3 Y_A$.
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यदि एक गेंद को जमीन से एक निश्चित प्रारंभिक वेग के साथ ऊर्ध्वाधर ऊपर की ओर फेंका जाता है और वह $4 \ s$ के समयांतराल में $25 \ m$ की ऊँचाई पर एक बिंदु को दो बार पार करती है,तो गेंद का प्रारंभिक वेग क्या है ($m \ s^{-1}$ में)? (गुरुत्वीय त्वरण $= 10 \ m \ s^{-2}$)
A
$20$
B
$30$
C
$40$
D
$25$

Solution

(B) माना प्रारंभिक वेग $u$ है। गति का समीकरण $h = ut - \frac{1}{2}gt^2$ है।
$h = 25 \ m$ और $g = 10 \ m \ s^{-2}$ रखने पर,हमें $25 = ut - 5t^2$ प्राप्त होता है,जिसे $5t^2 - ut + 25 = 0$ के रूप में लिखा जा सकता है।
माना $t_1$ और $t_2$ वे दो समय हैं जब गेंद $25 \ m$ की ऊँचाई पर होती है।
मूलों का योग $t_1 + t_2 = \frac{u}{5}$ और मूलों का गुणनफल $t_1 t_2 = \frac{25}{5} = 5$ है।
समयांतराल $|t_2 - t_1| = 4 \ s$ है।
सर्वसमिका $(t_2 - t_1)^2 = (t_1 + t_2)^2 - 4t_1 t_2$ का उपयोग करने पर,$4^2 = (\frac{u}{5})^2 - 4(5)$ प्राप्त होता है।
$16 = \frac{u^2}{25} - 20$,इसलिए $\frac{u^2}{25} = 36$।
$u^2 = 36 \times 25 = 900$,जिससे $u = 30 \ m \ s^{-1}$ प्राप्त होता है।
80
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एक मुक्त रूप से गिरती हुई वस्तु के अपनी गति के दूसरे और पांचवें सेकंड के दौरान विस्थापन का अनुपात क्या है?
A
$1: 1$
B
$2: 5$
C
$4: 25$
D
$1: 3$

Solution

(D) $n^{th}$ सेकंड में वस्तु का विस्थापन सूत्र द्वारा दिया जाता है: $S_n = u + \frac{a}{2}(2n - 1)$।
मुक्त रूप से गिरती हुई वस्तु के लिए,प्रारंभिक वेग $u = 0$ और त्वरण $a = g$ होता है।
अतः,$n^{th}$ सेकंड में विस्थापन $S_n = \frac{g}{2}(2n - 1)$ है।
दूसरे सेकंड के लिए $(n = 2)$: $S_2 = \frac{g}{2}(2(2) - 1) = \frac{g}{2}(3) = 1.5g$।
पांचवें सेकंड के लिए $(n = 5)$: $S_5 = \frac{g}{2}(2(5) - 1) = \frac{g}{2}(9) = 4.5g$।
विस्थापन का अनुपात $\frac{S_2}{S_5} = \frac{1.5g}{4.5g} = \frac{1.5}{4.5} = \frac{1}{3}$ है।
81
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यदि एक स्वतंत्र रूप से गिरती हुई वस्तु द्वारा अपनी गति के अंतिम सेकंड से एक सेकंड पहले तय की गई दूरी $5 \ m$ है,तो गति का कुल समय क्या है ($s$ में)? (गुरुत्वीय त्वरण $g = 10 \ m \ s^{-2}$)
A
$1$
B
$2$
C
$3$
D
$4$

Solution

(B) माना गति का कुल समय $n$ सेकंड है। $n^{th}$ सेकंड में तय की गई दूरी $S_n = u + \frac{a}{2}(2n - 1)$ द्वारा दी जाती है।
स्वतंत्र रूप से गिरती हुई वस्तु के लिए,प्रारंभिक वेग $u = 0$ और त्वरण $a = g = 10 \ m \ s^{-2}$ है।
अंतिम सेकंड ($n^{th}$ सेकंड) में तय की गई दूरी $S_n = 0 + \frac{10}{2}(2n - 1) = 5(2n - 1)$ है।
अंतिम सेकंड से एक सेकंड पहले ($(n-1)^{th}$ सेकंड) तय की गई दूरी $S_{n-1} = 0 + \frac{10}{2}(2(n-1) - 1) = 5(2n - 3)$ है।
दिया गया है कि अंतिम सेकंड से एक सेकंड पहले तय की गई दूरी $5 \ m$ है,इसलिए $5(2n - 3) = 5$ है।
$2n - 3 = 1 \implies 2n = 4 \implies n = 2 \ s$.
82
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$v$ वेग के साथ ऊर्ध्वाधर ऊपर की ओर फेंकी गई एक गेंद अपनी ऊपर की यात्रा में $x$ सेकंड के समय में बिंदु $P$ से गुजरती है। वहाँ से,वह समय जिसमें गेंद फिर से उसी बिंदु $P$ से गुजरती है,वह है
A
$\frac{v}{2g}$
B
$\frac{2v}{g}-x$
C
$\frac{v}{2g}-x$
D
$2(\frac{v}{g}-x)$

Solution

(D) मान लीजिए कि बिंदु $P$ जमीन से $h$ ऊंचाई पर है। गति का समीकरण $h = vt - \frac{1}{2}gt^2$ है।
इसे पुनर्व्यवस्थित करने पर,हमें $\frac{1}{2}gt^2 - vt + h = 0$ प्राप्त होता है।
यह $t$ में एक द्विघात समीकरण है,जिसके दो मूल $t_1$ और $t_2$ हैं,जो उस समय को दर्शाते हैं जब गेंद $h$ ऊंचाई पर होती है।
दिया गया है कि $t_1 = x$,मूलों का योग $t_1 + t_2 = \frac{-(-v)}{\frac{1}{2}g} = \frac{2v}{g}$ है।
इसलिए,$t_2 = \frac{2v}{g} - x$ है।
पहली बार $P$ से गुजरने के बाद फिर से बिंदु $P$ तक पहुँचने में लगा समय $t_2 - t_1 = (\frac{2v}{g} - x) - x = \frac{2v}{g} - 2x = 2(\frac{v}{g} - x)$ है।
83
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यदि एक गतिशील कण का विस्थापन ($s$ मीटर में) समय ($t$ सेकंड में) के पदों में $s = t^3 - 6t^2 + 18t + 9$ है,तो कण द्वारा प्राप्त न्यूनतम वेग है ($m \ s^{-1}$ में)
A
$29$
B
$5$
C
$6$
D
$12$

Solution

(C) कण का विस्थापन $s = t^3 - 6t^2 + 18t + 9$ द्वारा दिया गया है।
वेग $v$,समय के सापेक्ष विस्थापन का प्रथम अवकलज है: $v = \frac{ds}{dt} = 3t^2 - 12t + 18$.
न्यूनतम वेग ज्ञात करने के लिए,हम समय के सापेक्ष वेग का अवकलज निकालते हैं और उसे शून्य के बराबर रखते हैं: $\frac{dv}{dt} = 6t - 12$.
$\frac{dv}{dt} = 0$ रखने पर,हमें $6t - 12 = 0$ प्राप्त होता है,जिसका अर्थ है $t = 2 \ s$.
अब,न्यूनतम वेग ज्ञात करने के लिए $t = 2 \ s$ को वेग के समीकरण में प्रतिस्थापित करें:
$v_{min} = 3(2)^2 - 12(2) + 18 = 3(4) - 24 + 18 = 12 - 24 + 18 = 6 \ m \ s^{-1}$.
84
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यदि एक कार कुल दूरी का $40 \%$ भाग $v_1$ चाल से और शेष दूरी $v_2$ चाल से तय करती है,तो कार की औसत चाल क्या होगी?
A
$\frac{1}{2} \sqrt{v_1 v_2}$
B
$\frac{v_1+v_2}{2}$
C
$\frac{2 v_1 v_2}{v_1+v_2}$
D
$\frac{5 v_1 v_2}{3 v_1+2 v_2}$

Solution

(D) माना कुल दूरी $D$ है।
$v_1$ चाल से तय की गई दूरी $d_1 = 0.4D$ है।
$v_2$ चाल से तय की गई दूरी $d_2 = 0.6D$ है।
पहले भाग के लिए लिया गया समय $t_1 = \frac{d_1}{v_1} = \frac{0.4D}{v_1}$ है।
दूसरे भाग के लिए लिया गया समय $t_2 = \frac{d_2}{v_2} = \frac{0.6D}{v_2}$ है।
औसत चाल $v_{avg} = \frac{\text{कुल दूरी}}{\text{कुल समय}} = \frac{D}{t_1 + t_2}$ है।
$v_{avg} = \frac{D}{\frac{0.4D}{v_1} + \frac{0.6D}{v_2}} = \frac{1}{\frac{0.4}{v_1} + \frac{0.6}{v_2}}$।
$v_{avg} = \frac{1}{\frac{0.4v_2 + 0.6v_1}{v_1 v_2}} = \frac{v_1 v_2}{0.4v_2 + 0.6v_1}$।
अंश और हर को $5$ से गुणा करने पर: $v_{avg} = \frac{5 v_1 v_2}{2v_2 + 3v_1} = \frac{5 v_1 v_2}{3v_1 + 2v_2}$।
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एक कण एक सीधी रेखा में गति कर रहा है, जो दूरी का पहला आधा भाग $3 \, m \, s^{-1}$ की चाल से तय करता है। शेष आधी दूरी दो समान समयांतरालों में क्रमशः $4.5 \, m \, s^{-1}$ और $7.5 \, m \, s^{-1}$ की चाल से तय की जाती है, तो गति के दौरान कण की औसत चाल क्या होगी?
A
$4.0 \, m \, s^{-1}$
B
$5.0 \, m \, s^{-1}$
C
$5.5 \, m \, s^{-1}$
D
$4.8 \, m \, s^{-1}$

Solution

(A) माना कुल दूरी $2d$ है।
पहली आधी दूरी $d$ के लिए, चाल $v_1 = 3 \, m \, s^{-1}$ है। लिया गया समय $t_1 = d / v_1 = d / 3$ है।
दूसरी आधी दूरी $d$ के लिए, इसे दो समान समयांतरालों $t_2$ और $t_2$ (कुल समय $2t_2$) में $v_2 = 4.5 \, m \, s^{-1}$ और $v_3 = 7.5 \, m \, s^{-1}$ की चाल से तय किया जाता है।
इस आधे भाग में तय की गई दूरी $d = v_2 t_2 + v_3 t_2 = (4.5 + 7.5) t_2 = 12 t_2$ है।
अतः, $t_2 = d / 12$।
दूसरे आधे भाग के लिए लिया गया कुल समय $T_2 = 2 t_2 = 2(d / 12) = d / 6$ है।
पूरी यात्रा के लिए कुल समय $T = t_1 + T_2 = d / 3 + d / 6 = (2d + d) / 6 = 3d / 6 = d / 2$ है।
औसत चाल $v_{avg} = \text{कुल दूरी} / \text{कुल समय} = 2d / (d / 2) = 4 \, m \, s^{-1}$ है।
86
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एक सीधी रेखा में गति कर रहे कण का विस्थापन $(x)$ और समय $(t)$ ग्राफ चित्र में दिखाया गया है। $10 \ s$ के समय में कण का औसत वेग क्या है ($m \ s^{-1}$ में)?
Question diagram
A
$2$
B
$4$
C
$6$
D
$8$

Solution

(A) औसत वेग को कुल विस्थापन को कुल समय अंतराल से विभाजित करके परिभाषित किया जाता है।
ग्राफ से,$t = 0 \ s$ पर,प्रारंभिक स्थिति $x_i = 80 \ m$ है।
$t = 10 \ s$ पर,अंतिम स्थिति $x_f = 60 \ m$ है।
कुल विस्थापन $\Delta x = x_f - x_i = 60 \ m - 80 \ m = -20 \ m$ है।
कुल समय अंतराल $\Delta t = 10 \ s - 0 \ s = 10 \ s$ है।
औसत वेग $v_{avg} = \frac{\Delta x}{\Delta t} = \frac{-20 \ m}{10 \ s} = -2 \ m \ s^{-1}$ है।
औसत वेग का परिमाण $2 \ m \ s^{-1}$ है।
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यदि एक पत्थर को एक पुल से $5 \,m \,s^{-1}$ के प्रारंभिक वेग के साथ ऊर्ध्वाधर ऊपर की ओर फेंका जाता है और वह $3 \,s$ के समय में पुल के नीचे पानी से टकराता है, तो पानी की सतह से पुल की ऊँचाई क्या है ($\,m$ में)? (गुरुत्वीय त्वरण $= 10 \,m \,s^{-2}$)
A
$10$
B
$26$
C
$30$
D
$18$

Solution

(C) दिया गया है: प्रारंभिक वेग $u = 5 \,m \,s^{-1}$, समय $t = 3 \,s$, त्वरण $a = -g = -10 \,m \,s^{-2}$।
विस्थापन के लिए गति के समीकरण का उपयोग करते हुए: $s = ut + \frac{1}{2}at^2$।
यहाँ, $s$ प्रक्षेपण बिंदु से पानी की सतह तक के ऊर्ध्वाधर विस्थापन को दर्शाता है। चूँकि पत्थर पुल के नीचे पानी में गिरता है, इसलिए विस्थापन $-h$ होगा (जहाँ $h$ पुल की ऊँचाई है)।
मान रखने पर: $-h = (5)(3) + \frac{1}{2}(-10)(3)^2$।
$-h = 15 - 5(9)$।
$-h = 15 - 45$।
$-h = -30$।
$h = 30 \,m$।
अतः, पानी की सतह से पुल की ऊँचाई $30 \,m$ है।
88
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एक पिंड विरामावस्था से एकसमान त्वरण के साथ चलना शुरू करता है और $n$ सेकंड के समय पर उसका वेग $v$ है। उसकी गति के $n^{\text{वें}}$ और $(n-1)^{\text{वें}}$ सेकंड में पिंड का कुल विस्थापन क्या है?
A
$\frac{v(n+1)}{n}$
B
$\frac{2v(n+1)}{n}$
C
$\frac{2v(n-1)}{n}$
D
$\frac{v(n-1)}{n}$

Solution

(C) दिया गया है कि पिंड विरामावस्था से शुरू होता है,इसलिए प्रारंभिक वेग $u = 0$ है। मान लीजिए एकसमान त्वरण $a$ है।
समय $t = n$ पर,वेग $v = u + at = 0 + an$,इसलिए $a = \frac{v}{n}$ है।
$k^{\text{वें}}$ सेकंड में विस्थापन $S_k = u + \frac{a}{2}(2k - 1)$ द्वारा दिया जाता है।
चूंकि $u = 0$,इसलिए $S_k = \frac{a}{2}(2k - 1)$ है।
$n^{\text{वें}}$ सेकंड में विस्थापन $S_n = \frac{a}{2}(2n - 1)$ है।
$(n-1)^{\text{वें}}$ सेकंड में विस्थापन $S_{n-1} = \frac{a}{2}(2(n-1) - 1) = \frac{a}{2}(2n - 3)$ है।
इन दो सेकंड में कुल विस्थापन $S_{total} = S_n + S_{n-1} = \frac{a}{2}(2n - 1 + 2n - 3) = \frac{a}{2}(4n - 4) = 2a(n - 1)$ है।
$a = \frac{v}{n}$ प्रतिस्थापित करने पर,हमें $S_{total} = 2(\frac{v}{n})(n - 1) = \frac{2v(n - 1)}{n}$ प्राप्त होता है।
89
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यदि गोलियों को एक ही बिंदु से $10 \,m \,s^{-1}$ के समान वेग और $45^{\circ}$ के प्रक्षेपण कोण के साथ सभी संभव दिशाओं में दागा जाता है,तो जमीन पर गोलियों द्वारा घेरा गया क्षेत्रफल लगभग कितना होगा ($\,m^2$ में)? (गुरुत्वीय त्वरण $g = 10 \,m \,s^{-2}$)
A
$628$
B
$314$
C
$157$
D
$79$

Solution

(B) प्रक्षेप्य की क्षैतिज परास (Horizontal range) $R$ का सूत्र है: $R = \frac{u^2 \sin(2\theta)}{g}$।
दिया गया है: प्रारंभिक वेग $u = 10 \,m \,s^{-1}$,प्रक्षेपण कोण $\theta = 45^{\circ}$,और गुरुत्वीय त्वरण $g = 10 \,m \,s^{-2}$।
मान रखने पर: $R = \frac{10^2 \sin(2 \times 45^{\circ})}{10} = \frac{100 \times \sin(90^{\circ})}{10} = \frac{100 \times 1}{10} = 10 \,m$।
चूंकि गोलियां सभी दिशाओं में दागी जाती हैं,वे जमीन पर $R = 10 \,m$ त्रिज्या वाले एक वृत्त में गिरेंगी।
गोलियों द्वारा घेरा गया क्षेत्रफल $A$ इस वृत्त का क्षेत्रफल है: $A = \pi R^2$।
$A = \pi \times (10)^2 = 100\pi$।
$\pi \approx 3.14$ का उपयोग करने पर,$A = 100 \times 3.14 = 314 \,m^2$ प्राप्त होता है।
90
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एक कण $t=0$ समय पर मूल बिंदु से गुजरता है और $xy$-समतल में $y$-दिशा में एकसमान त्वरण $a$ के साथ गति करता है। यदि कण की गति का समीकरण $y = bx^2$ है (जहाँ $b$ एक स्थिरांक है),तो $x$-दिशा में इसका वेग घटक क्या होगा?
A
$\sqrt{\frac{2b}{a}}$
B
$\sqrt{\frac{a}{2b}}$
C
$\sqrt{\frac{a}{b}}$
D
$\sqrt{\frac{b}{a}}$

Solution

(B) दिया गया गति का समीकरण: $y = bx^2$ है।
समय $t$ के सापेक्ष अवकलन करने पर: $\frac{dy}{dt} = 2bx \frac{dx}{dt}$ प्राप्त होता है।
इसका अर्थ है $v_y = 2bx v_x$।
पुनः $t$ के सापेक्ष अवकलन करने पर: $\frac{dv_y}{dt} = 2b \left( \frac{dx}{dt} \cdot v_x + x \cdot \frac{dv_x}{dt} \right)$ प्राप्त होता है।
चूंकि $x$-दिशा में त्वरण शून्य है $(a_x = 0)$,इसलिए $\frac{dv_x}{dt} = 0$ है।
अतः,$a_y = 2b(v_x^2)$।
दिया गया है कि $a_y = a$,इसलिए $a = 2bv_x^2$ है।
$v_x$ के लिए हल करने पर: $v_x^2 = \frac{a}{2b}$,जिससे $v_x = \sqrt{\frac{a}{2b}}$ प्राप्त होता है।
91
PhysicsMediumMCQAP EAMCET · 2025
एक पिंड को क्षैतिज के साथ $60^{\circ}$ के कोण पर प्रक्षेपित किया जाता है। यदि पिंड की प्रारंभिक गतिज ऊर्जा $X$ है, तो उच्चतम बिंदु पर इसकी गतिज ऊर्जा क्या होगी?
A
$X$
B
$2X$
C
$\frac{X}{2}$
D
$\frac{X}{4}$

Solution

(D) मान लीजिए पिंड का प्रारंभिक वेग $u$ है और उसका द्रव्यमान $m$ है। प्रारंभिक गतिज ऊर्जा $X = \frac{1}{2}mu^2$ द्वारा दी जाती है।
प्रक्षेप्य गति के उच्चतम बिंदु पर, वेग का ऊर्ध्वाधर घटक शून्य हो जाता है और क्षैतिज घटक $u_x = u \cos \theta$ बना रहता है।
प्रक्षेपण कोण $\theta = 60^{\circ}$ दिया गया है, इसलिए उच्चतम बिंदु पर क्षैतिज वेग $u_x = u \cos 60^{\circ} = u \times \frac{1}{2} = \frac{u}{2}$ होगा।
उच्चतम बिंदु पर गतिज ऊर्जा $K_h = \frac{1}{2}m(u_x)^2$ द्वारा दी जाती है।
$u_x$ का मान रखने पर, $K_h = \frac{1}{2}m(\frac{u}{2})^2 = \frac{1}{2}m(\frac{u^2}{4}) = \frac{1}{4}(\frac{1}{2}mu^2)$ प्राप्त होता है।
चूंकि $X = \frac{1}{2}mu^2$, इसलिए $K_h = \frac{X}{4}$ होगा।
92
PhysicsMediumMCQAP EAMCET · 2025
एक सभागार (auditorium) में छत की ऊँचाई $30 \ m$ है। प्रवेश द्वार से $30 \ m \ s^{-1}$ की गति से एक गेंद को इस प्रकार फेंका जाता है कि वह छत को छुए बिना उसके बहुत करीब से गुजरती है और फिर सभागार के अंत में जमीन पर पहुँचती है। तो सभागार की लंबाई क्या है? (गुरुत्वीय त्वरण $= 10 \ m \ s^{-2}$)
A
$60 \sqrt{2} \ m$
B
$30 \sqrt{2} \ m$
C
$70 \sqrt{2} \ m$
D
$100 \sqrt{2} \ m$

Solution

(A) मान लीजिए प्रारंभिक वेग $u = 30 \ m \ s^{-1}$ है और प्रक्षेपण कोण $\theta$ है। प्रक्षेप्य द्वारा प्राप्त अधिकतम ऊँचाई $H = \frac{u^2 \sin^2 \theta}{2g} = 30 \ m$ है।
मान रखने पर: $\frac{(30)^2 \sin^2 \theta}{2 \times 10} = 30 \implies \frac{900 \sin^2 \theta}{20} = 30 \implies 45 \sin^2 \theta = 30 \implies \sin^2 \theta = \frac{30}{45} = \frac{2}{3}$.
अतः,$\sin \theta = \sqrt{\frac{2}{3}}$ और $\cos \theta = \sqrt{1 - \frac{2}{3}} = \frac{1}{\sqrt{3}}$.
प्रक्षेप्य की परास (Range) $R = \frac{u^2 \sin 2\theta}{g} = \frac{u^2 (2 \sin \theta \cos \theta)}{g}$ है।
$R = \frac{30^2 \times 2 \times \sqrt{\frac{2}{3}} \times \frac{1}{\sqrt{3}}}{10} = \frac{900 \times 2 \times \frac{\sqrt{2}}{3}}{10} = 90 \times 2 \times \frac{\sqrt{2}}{3} = 60 \sqrt{2} \ m$.
93
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चित्र में दर्शाए गए प्रक्षेप्य के पथ के लिए प्रक्षेपण कोण ज्ञात कीजिए।
Question diagram
A
$\tan ^{-1}(1)$
B
$\tan ^{-1}\left(\frac{8}{3}\right)$
C
$\tan ^{-1}\left(\frac{4}{3}\right)$
D
$\tan ^{-1}\left(\frac{5}{3}\right)$

Solution

(B) प्रक्षेप्य के पथ का समीकरण $y = x \tan \theta (1 - \frac{x}{R})$ होता है।
यहाँ प्रक्षेपण बिंदु $(0, 0)$ है। अधिकतम ऊँचाई $H = 20 \text{ m}$,$x = 30 \text{ m}$ की दूरी पर प्राप्त होती है।
कुल परास $R = 30 \text{ m} + 10 \text{ m} = 40 \text{ m}$ है।
समीकरण में मान रखने पर: $20 = 30 \tan \theta (1 - \frac{30}{40})$.
$20 = 30 \tan \theta (1 - 0.75) = 30 \tan \theta (0.25) = 7.5 \tan \theta$.
अतः,$\tan \theta = \frac{20}{7.5} = \frac{8}{3}$.
इसलिए,प्रक्षेपण कोण $\theta = \tan^{-1}(\frac{8}{3})$ है।
94
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यदि किसी प्रक्षेप्य की गति का समीकरण $y=Ax-Bx^2$ है,तो प्राप्त अधिकतम ऊँचाई और प्रक्षेप्य की परास (Range) का अनुपात क्या होगा?
A
$\frac{A}{4}$
B
$\frac{A}{B}$
C
$\frac{B}{4}$
D
$\frac{A^2}{B}$

Solution

(A) प्रक्षेप्य के पथ का समीकरण $y = x \tan \theta - \frac{gx^2}{2u^2 \cos^2 \theta}$ होता है।
दिए गए समीकरण $y = Ax - Bx^2$ के साथ तुलना करने पर,हमें प्राप्त होता है:
$A = \tan \theta$ और $B = \frac{g}{2u^2 \cos^2 \theta}$।
अधिकतम ऊँचाई $H = \frac{u^2 \sin^2 \theta}{2g}$ होती है।
परास $R = \frac{u^2 \sin 2\theta}{g} = \frac{2u^2 \sin \theta \cos \theta}{g}$ होती है।
$A = \tan \theta$ से,$\sin \theta = A \cos \theta$ प्राप्त होता है।
इस मान को $B = \frac{g}{2u^2 \cos^2 \theta}$ में रखने पर,$u^2 = \frac{g}{2B \cos^2 \theta}$ प्राप्त होता है।
अब,$H = \frac{(\frac{g}{2B \cos^2 \theta}) (A^2 \cos^2 \theta)}{2g} = \frac{A^2}{4B}$।
इसी प्रकार,$R = \frac{2 (\frac{g}{2B \cos^2 \theta}) (A \cos^2 \theta)}{g} = \frac{A}{B}$।
अधिकतम ऊँचाई और परास का अनुपात $\frac{H}{R} = \frac{A^2 / 4B}{A / B} = \frac{A}{4}$ होगा।
95
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$60 \,m \,s^{-1}$ के वेग से प्रक्षेपित एक पिंड की परास (range) $180 \sqrt{3} \,m$ है, तो पिंड का प्रक्षेपण कोण क्या होगा? (गुरुत्वीय त्वरण $= 10 \,m \,s^{-2}$)
A
$30^{\circ}$ या $60^{\circ}$
B
$37^{\circ}$ या $53^{\circ}$
C
$20^{\circ}$ या $70^{\circ}$
D
$15^{\circ}$ या $75^{\circ}$

Solution

(A) प्रक्षेप्य की क्षैतिज परास $R$ का सूत्र $R = \frac{u^2 \sin(2\theta)}{g}$ है।
दिया गया है: $u = 60 \,m \,s^{-1}$, $R = 180 \sqrt{3} \,m$, और $g = 10 \,m \,s^{-2}$।
इन मानों को सूत्र में रखने पर:
$180 \sqrt{3} = \frac{(60)^2 \sin(2\theta)}{10}$
$180 \sqrt{3} = \frac{3600 \sin(2\theta)}{10}$
$180 \sqrt{3} = 360 \sin(2\theta)$
$\sin(2\theta) = \frac{180 \sqrt{3}}{360} = \frac{\sqrt{3}}{2}$।
चूंकि $\sin(60^{\circ}) = \frac{\sqrt{3}}{2}$, इसलिए $2\theta = 60^{\circ}$ या $2\theta = 180^{\circ} - 60^{\circ} = 120^{\circ}$।
अतः, $\theta = 30^{\circ}$ या $\theta = 60^{\circ}$।
96
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यदि गति की शुरुआत से $2 \ s$ के समय पर एक प्रक्षेप्य की ऊँचाई $60 \ m$ है,तो प्रक्षेप्य का उड्डयन काल (time of flight) क्या है ($s$ में)? (गुरुत्वीय त्वरण $= 10 \ m \ s^{-2}$)
A
$12$
B
$4$
C
$6$
D
$8$

Solution

(D) माना प्रारंभिक ऊर्ध्वाधर वेग $u_y$ है और गुरुत्वीय त्वरण $g = 10 \ m \ s^{-2}$ है।
समय $t$ पर ऊँचाई $h$ गति के समीकरण द्वारा दी जाती है: $h = u_y t - \frac{1}{2} g t^2$.
$t = 2 \ s$ पर $h = 60 \ m$ दिया गया है,इसलिए: $60 = u_y(2) - \frac{1}{2}(10)(2)^2$.
$60 = 2u_y - 20 \implies 2u_y = 80 \implies u_y = 40 \ m \ s^{-1}$.
उड्डयन काल $T$ का सूत्र $T = \frac{2u_y}{g}$ है।
मान रखने पर: $T = \frac{2 \times 40}{10} = 8 \ s$.
97
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यदि '$u$' वेग से प्रक्षेपित एक पिंड की क्षैतिज परास (range) उसके द्वारा प्राप्त अधिकतम ऊँचाई की $3$ गुनी है,तो पिंड की परास क्या होगी? ($g$ - गुरुत्वीय त्वरण)
A
$\frac{2 u^2}{3 g}$
B
$\frac{4 u^2}{5 g}$
C
$\frac{12 u^2}{13 g}$
D
$\frac{24 u^2}{25 g}$

Solution

(D) प्रक्षेप्य की क्षैतिज परास $R$ का सूत्र $R = \frac{u^2 \sin(2\theta)}{g} = \frac{2 u^2 \sin\theta \cos\theta}{g}$ है।
अधिकतम ऊँचाई $H$ का सूत्र $H = \frac{u^2 \sin^2\theta}{2g}$ है।
प्रश्न के अनुसार,$R = 3H$.
सूत्रों को प्रतिस्थापित करने पर: $\frac{2 u^2 \sin\theta \cos\theta}{g} = 3 \left( \frac{u^2 \sin^2\theta}{2g} \right)$.
समीकरण को सरल करने पर: $2 \cos\theta = \frac{3}{2} \sin\theta$,जिससे $\tan\theta = \frac{4}{3}$ प्राप्त होता है।
$\tan\theta = \frac{4}{3}$ से,$\sin\theta = \frac{4}{5}$ और $\cos\theta = \frac{3}{5}$ प्राप्त होता है।
अब,इन मानों को परास के सूत्र में रखने पर: $R = \frac{2 u^2 (4/5)(3/5)}{g} = \frac{2 u^2 (12/25)}{g} = \frac{24 u^2}{25 g}$.
98
PhysicsMediumMCQAP EAMCET · 2025
$45^{\circ}$ के कोण पर प्रक्षेपित एक प्रक्षेप्य की अधिकतम ऊँचाई पर वेग $20 \,m \,s^{-1}$ है, तो प्रक्षेप्य द्वारा प्राप्त अधिकतम ऊँचाई ज्ञात कीजिए। (गुरुत्वीय त्वरण $=10 \,m \,s^{-2}$) ($\,m$ में)
A
$10$
B
$20$
C
$30$
D
$40$

Solution

(B) माना प्रक्षेप्य का प्रारंभिक वेग $u$ है और प्रक्षेपण कोण $\theta = 45^{\circ}$ है।
अधिकतम ऊँचाई पर, वेग का ऊर्ध्वाधर घटक $0$ होता है, इसलिए प्रक्षेप्य का वेग उसके क्षैतिज घटक के बराबर होता है: $v_{max} = u \cos \theta$.
दिया गया है $v_{max} = 20 \,m \,s^{-1}$ और $\theta = 45^{\circ}$, अतः $20 = u \cos 45^{\circ} = u / \sqrt{2}$.
इस प्रकार, $u = 20\sqrt{2} \,m \,s^{-1}$.
प्रक्षेप्य द्वारा प्राप्त अधिकतम ऊँचाई $H$ का सूत्र $H = \frac{u^2 \sin^2 \theta}{2g}$ है।
मान रखने पर: $H = \frac{(20\sqrt{2})^2 \sin^2 45^{\circ}}{2 \times 10}$.
$H = \frac{800 \times (1/\sqrt{2})^2}{20} = \frac{800 \times 0.5}{20} = \frac{400}{20} = 20 \,m$.
99
PhysicsMediumMCQAP EAMCET · 2025
यदि दो पिंडों $A$ और $B$ को समान वेग $u$ से लेकिन क्षैतिज के साथ क्रमशः अलग-अलग कोणों $\theta_1$ और $\theta_2$ पर प्रक्षेपित किया जाता है ताकि दोनों की परास (range) समान हो,तो पिंडों $A$ और $B$ के उड्डयन काल (time of flight) का अनुपात क्या होगा?
A
$\sin \theta_2 / \sin \theta_1$
B
$\sin \theta_1 / \sin \theta_2$
C
$\tan \theta_2 / \tan \theta_1$
D
$\tan \theta_1 / \tan \theta_2$

Solution

(D) प्रक्षेप्य की परास $R = \frac{u^2 \sin(2\theta)}{g}$ द्वारा दी जाती है।
चूंकि परास समान हैं,इसलिए $\sin(2\theta_1) = \sin(2\theta_2)$।
इसका अर्थ है $2\theta_1 = 180^\circ - 2\theta_2$,जो सरल होकर $\theta_1 + \theta_2 = 90^\circ$ या $\theta_2 = 90^\circ - \theta_1$ हो जाता है।
उड्डयन काल $T = \frac{2u \sin \theta}{g}$ द्वारा दिया जाता है।
उड्डयन काल का अनुपात $\frac{T_1}{T_2} = \frac{\frac{2u \sin \theta_1}{g}}{\frac{2u \sin \theta_2}{g}} = \frac{\sin \theta_1}{\sin \theta_2}$ है।
चूंकि $\theta_2 = 90^\circ - \theta_1$,इसलिए $\sin \theta_2 = \sin(90^\circ - \theta_1) = \cos \theta_1$।
अतः,$\frac{T_1}{T_2} = \frac{\sin \theta_1}{\cos \theta_1} = \tan \theta_1$।
100
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एक गेंद को एक बिंदु से $V_0$ की गति से क्षैतिज के साथ एक निश्चित कोण $\theta$ पर प्रक्षेपित किया जाता है। उसी बिंदु से और उसी क्षण,एक व्यक्ति गेंद को पकड़ने के लिए $0.5 V_0$ की निरंतर गति से दौड़ना शुरू करता है। यदि व्यक्ति कुछ समय बाद गेंद को पकड़ लेता है,तो गेंद का प्रक्षेपण कोण क्या है ($^{\circ}$ में)?
A
$60$
B
$30$
C
$45$
D
$53$

Solution

(A) मान लीजिए कि गेंद को $V_0$ गति से क्षैतिज के साथ $\theta$ कोण पर प्रक्षेपित किया गया है। गेंद के वेग का क्षैतिज घटक $V_x = V_0 \cos \theta$ है।
व्यक्ति गेंद को पकड़ने के लिए उसी क्षैतिज दिशा में $V_p = 0.5 V_0$ की निरंतर गति से दौड़ता है।
व्यक्ति द्वारा गेंद को पकड़ने के लिए,व्यक्ति द्वारा तय की गई क्षैतिज दूरी उड़ान के समय $T$ पर गेंद की क्षैतिज परास (Range) के बराबर होनी चाहिए।
गेंद की क्षैतिज परास $R = (V_0 \cos \theta) T$ है,जहाँ $T = \frac{2 V_0 \sin \theta}{g}$ है।
समय $T$ में व्यक्ति द्वारा तय की गई दूरी $d = V_p T = (0.5 V_0) T$ है।
व्यक्ति द्वारा तय की गई दूरी को गेंद की क्षैतिज परास के बराबर रखने पर: $0.5 V_0 T = V_0 \cos \theta T$।
दोनों पक्षों को $V_0 T$ से विभाजित करने पर (यह मानते हुए कि $T \neq 0$),हमें प्राप्त होता है: $0.5 = \cos \theta$।
अतः,$\theta = \cos^{-1}(0.5) = 60^{\circ}$।
101
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पोटेंशियोमीटर प्रयोग में,जब $E_1$ और $E_2$ $(E_2 > E_1)$ emf वाले दो सेल श्रेणीक्रम में जोड़े जाते हैं,तो संतुलन लंबाई $160 \ cm$ होती है। यदि एक सेल को उल्टा कर दिया जाए,तो संतुलन लंबाई $75 \%$ कम हो जाती है। यदि $E_1 = 1.2 \ V$ है,तो $E_2 =$ ($V$ में)
A
$2$
B
$2.4$
C
$1.8$
D
$1.5$

Solution

(A) पोटेंशियोमीटर में,संतुलन लंबाई $l$ सेल के emf $\varepsilon$ के सीधे आनुपातिक होती है,अर्थात $\varepsilon = kl$,जहाँ $k$ विभव प्रवणता है।
जब सेल श्रेणीक्रम में जुड़े होते हैं,तो कुल emf $E_1 + E_2$ होता है। अतः,$E_1 + E_2 = k(160)$।
जब एक सेल को उल्टा किया जाता है,तो कुल emf $E_2 - E_1$ हो जाता है (क्योंकि $E_2 > E_1$)।
नई संतुलन लंबाई $l'$ में $75 \%$ की कमी होती है,इसलिए $l' = 160 - (0.75 \times 160) = 160 - 120 = 40 \ cm$।
अतः,$E_2 - E_1 = k(40)$।
दोनों समीकरणों को विभाजित करने पर: $\frac{E_1 + E_2}{E_2 - E_1} = \frac{160}{40} = 4$।
$E_1 + E_2 = 4(E_2 - E_1) \implies E_1 + E_2 = 4E_2 - 4E_1$।
$5E_1 = 3E_2 \implies E_2 = \frac{5}{3}E_1$।
चूँकि $E_1 = 1.2 \ V$ दिया गया है,$E_2 = \frac{5}{3} \times 1.2 = 5 \times 0.4 = 2.0 \ V$।
102
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$15 \ \Omega$ प्रतिरोध वाले गैल्वेनोमीटर से $0.5 \ mA$ की अधिकतम धारा प्रवाहित हो सकती है। इसे $0-10 \ V$ की रेंज वाले वोल्टमीटर में बदलने के लिए श्रेणीक्रम में जोड़े जाने वाले प्रतिरोध का मान क्या होगा ($Omega$ में)?
A
$9985$
B
$20015$
C
$20000$
D
$19985$

Solution

(D) गैल्वेनोमीटर को वोल्टमीटर में बदलने के लिए,गैल्वेनोमीटर के साथ श्रेणीक्रम (series) में एक उच्च प्रतिरोध $R$ जोड़ा जाना चाहिए।
दिया गया है:
गैल्वेनोमीटर का प्रतिरोध,$G = 15 \ \Omega$
पूर्ण-स्केल विक्षेप धारा,$I_g = 0.5 \ mA = 0.5 \times 10^{-3} \ A = 5 \times 10^{-4} \ A$
वांछित वोल्टेज रेंज,$V = 10 \ V$
श्रेणी प्रतिरोध $R$ का सूत्र है:
$V = I_g(R + G)$
$R + G = \frac{V}{I_g}$
$R = \frac{V}{I_g} - G$
मान रखने पर:
$R = \frac{10}{5 \times 10^{-4}} - 15$
$R = 2 \times 10^4 - 15$
$R = 20000 - 15 = 19985 \ \Omega$
अतः,आवश्यक प्रतिरोध $19985 \ \Omega$ है।
103
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$30$ विभाजनों वाले एक गैल्वेनोमीटर की धारा सुग्राहिता $0.0625 \frac{\text{div}}{\mu A}$ है। यदि इसे अधिकतम $6 \text{ V}$ मापने वाले वोल्टमीटर में परिवर्तित किया जाता है,तो उस वोल्टमीटर का प्रतिरोध क्या होगा?
A
$7.5 \text{ k}\Omega$
B
$12.5 \text{ k}\Omega$
C
$6 \text{ k}\Omega$
D
$5 \text{ k}\Omega$

Solution

(B) $1$. सबसे पहले,गैल्वेनोमीटर की पूर्ण-स्केल विक्षेप धारा $(I_g)$ की गणना करें।
$I_g = \frac{\text{कुल विभाजन}}{\text{धारा सुग्राहिता}} = \frac{30 \text{ div}}{0.0625 \text{ div}/\mu A} = 480 \mu A = 480 \times 10^{-6} \text{ A} = 4.8 \times 10^{-4} \text{ A}$.
$2$. वोल्टमीटर बनाने के लिए गैल्वेनोमीटर के साथ श्रेणीक्रम में एक उच्च प्रतिरोध $(R)$ जोड़ा जाता है।
$3$. वोल्टमीटर का कुल प्रतिरोध $(R_v)$ सूत्र $V = I_g \times R_v$ द्वारा दिया जाता है,जहाँ $V$ अधिकतम मापा जाने वाला वोल्टेज है।
$4$. $R_v$ के लिए सूत्र को व्यवस्थित करने पर: $R_v = \frac{V}{I_g} = \frac{6 \text{ V}}{4.8 \times 10^{-4} \text{ A}}$.
$5$. $R_v = \frac{6}{4.8} \times 10^4 \Omega = 1.25 \times 10^4 \Omega = 12.5 \text{ k}\Omega$.
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एक इलेक्ट्रिक केतली $220 \ V$ पर $4 \ A$ की धारा लेती है। यदि पूरी विद्युत ऊर्जा ऊष्मा ऊर्जा में परिवर्तित हो जाती है, तो $1 \ kg$ पानी का तापमान $34^{\circ} C$ से $100^{\circ} C$ तक बढ़ाने में लगा समय (मिनटों में) है
A
$7.50$
B
$4.50$
C
$5.25$
D
$6.25$

Solution

(C) दिया गया है: धारा $I = 4 \ A$, वोल्टेज $V = 220 \ V$, पानी का द्रव्यमान $m = 1 \ kg$, प्रारंभिक तापमान $T_1 = 34^{\circ} C$, अंतिम तापमान $T_2 = 100^{\circ} C$.
पानी की विशिष्ट ऊष्मा धारिता $c = 4200 \ J/(kg \cdot ^{\circ} C)$.
विद्युत शक्ति $P = V \times I = 220 \times 4 = 880 \ W$.
आवश्यक ऊष्मा ऊर्जा $Q = mc\Delta T = 1 \times 4200 \times (100 - 34) = 4200 \times 66 = 277200 \ J$.
चूंकि विद्युत ऊर्जा ऊष्मा ऊर्जा में परिवर्तित होती है, इसलिए $P \times t = Q$.
$880 \times t = 277200$.
$t = 277200 / 880 = 315 \ \text{सेकंड}$.
समय को मिनटों में बदलने के लिए: $t = 315 / 60 = 5.25 \ \text{मिनट}$.
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$100 \Omega$ प्रतिरोध वाले एक समान तार के सिरों के बीच $120 \text{ V}$ का विभवांतर लगाने पर उसमें व्यय होने वाली शक्ति है ($W$ में)
A
$122$
B
$144$
C
$160$
D
$200$

Solution

(B) एक प्रतिरोधक में व्यय होने वाली शक्ति $P$ का सूत्र $P = \frac{V^2}{R}$ है,जहाँ $V$ विभवांतर है और $R$ प्रतिरोध है।
दिया गया है:
विभवांतर $V = 120 \text{ V}$
प्रतिरोध $R = 100 \Omega$
सूत्र में मान रखने पर:
$P = \frac{(120)^2}{100}$
$P = \frac{14400}{100}$
$P = 144 \text{ W}$
अतः,व्यय होने वाली शक्ति $144 \text{ W}$ है।
106
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$R$ प्रतिरोध वाले एक तार को एक वृत्ताकार लूप के रूप में मोड़ा जाता है। वृत्त पर दो बिंदु जो परिधि के एक चौथाई भाग से अलग हैं,उन्हें $E$ emf और नगण्य आंतरिक प्रतिरोध वाली बैटरी से जोड़ा जाता है। तार में प्रति सेकंड उत्पन्न ऊष्मा है
A
$\frac{E^2}{4 R}$
B
$\frac{16 E^2}{3 R}$
C
$\frac{E^2}{R}$
D
$\frac{2 E^2}{3 R}$

Solution

(B) तार का कुल प्रतिरोध $R$ है। जब तार को एक वृत्ताकार लूप में मोड़ा जाता है,तो प्रतिरोध परिधि पर समान रूप से वितरित हो जाता है।
परिधि के एक चौथाई भाग से अलग दो बिंदु लूप को दो चापों में विभाजित करते हैं: एक का प्रतिरोध $R_1 = \frac{1}{4}R$ है और दूसरे का प्रतिरोध $R_2 = \frac{3}{4}R$ है।
इन दो खंडों को $E$ emf वाली बैटरी के समानांतर जोड़ा जाता है।
समानांतर संयोजन का समतुल्य प्रतिरोध $R_{eq}$ इस प्रकार है: $\frac{1}{R_{eq}} = \frac{1}{R_1} + \frac{1}{R_2} = \frac{1}{R/4} + \frac{1}{3R/4} = \frac{4}{R} + \frac{4}{3R} = \frac{12+4}{3R} = \frac{16}{3R}$।
अतः,$R_{eq} = \frac{3R}{16}$।
प्रति सेकंड उत्पन्न ऊष्मा वह शक्ति है,जो $P = \frac{E^2}{R_{eq}}$ द्वारा दी जाती है।
$R_{eq}$ का मान रखने पर,हमें $P = \frac{E^2}{3R/16} = \frac{16 E^2}{3 R}$ प्राप्त होता है।
107
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दिए गए परिपथ में, स्थिर अवस्था में संधारित्र $C$ की प्लेटों के बीच विभवांतर कितना होगा ($V$ में)?
Question diagram
A
$6.5$
B
$6$
C
$9$
D
$7.5$

Solution

(B) स्थिर अवस्था में, संधारित्र $C$ एक ओपन सर्किट की तरह कार्य करता है, इसलिए संधारित्र वाली शाखा से कोई धारा प्रवाहित नहीं होती है।
मान लीजिए कि $9 \text{ V}$ की बैटरी के ऋणात्मक टर्मिनल पर विभव $0 \text{ V}$ है। तो धनात्मक टर्मिनल पर विभव $9 \text{ V}$ होगा।
परिपथ $6 \text{ }\Omega$ और $4 \text{ }\Omega$ के प्रतिरोधों के श्रेणी संयोजन के रूप में सरल हो जाता है, जिसमें $1 \text{ }\Omega$ का प्रतिरोध बैटरी के साथ श्रेणी में है।
परिपथ का कुल प्रतिरोध $R_{eq} = 6 \text{ }\Omega + 4 \text{ }\Omega + 1 \text{ }\Omega = 11 \text{ }\Omega$ है।
परिपथ में प्रवाहित धारा $I = \frac{V}{R_{eq}} = \frac{9 \text{ V}}{11 \text{ }\Omega} = \frac{9}{11} \text{ A}$ है।
$6 \text{ }\Omega$ और $4 \text{ }\Omega$ प्रतिरोधों के बीच के जंक्शन पर विभव $V_x = 9 \text{ V} - I \times 6 \text{ }\Omega = 9 - (\frac{9}{11} \times 6) = 9 - \frac{54}{11} = \frac{45}{11} \text{ V}$ है।
संधारित्र $6 \text{ }\Omega$ के प्रतिरोध के साथ समानांतर में जुड़ा हुआ है। इसलिए, संधारित्र की प्लेटों के बीच विभवांतर $6 \text{ V}$ है।
108
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आरेख में दिखाए गए परिपथ में वोल्टमीटर और एमीटर के पाठ्यांक क्रमशः क्या हैं?
Question diagram
A
$5 \, V, 3 \, A$
B
$7 \, V, 3 \, A$
C
$5 \, V, 1 \, A$
D
$7 \, V, 1 \, A$

Solution

(D) दिए गए परिपथ में, दो सेल श्रेणीक्रम में जुड़े हुए हैं। कुल विद्युत वाहक बल $(EMF)$ $E_{eq} = 12 \, V - 6 \, V = 6 \, V$ है (क्योंकि वे विपरीत दिशा में जुड़े हैं)।
परिपथ का कुल प्रतिरोध $R_{total} = 4 \, \Omega + 1 \, \Omega + 0.6 \, \Omega + 0.4 \, \Omega = 6 \, \Omega$ है।
परिपथ में प्रवाहित धारा $I = \frac{E_{eq}}{R_{total}} = \frac{6 \, V}{6 \, \Omega} = 1 \, A$ है।
अतः, एमीटर का पाठ्यांक $1 \, A$ है।
वोल्टमीटर $6 \, V$ वाले सेल के सिरों पर जुड़ा है। चूंकि धारा $6 \, V$ सेल के धनात्मक टर्मिनल में प्रवेश कर रही है, इसलिए सेल चार्ज हो रहा है।
$6 \, V$ सेल का टर्मिनल वोल्टेज $V = E + Ir = 6 \, V + (1 \, A)(1 \, \Omega) = 7 \, V$ है।
इसलिए, वोल्टमीटर का पाठ्यांक $7 \, V$ और एमीटर का पाठ्यांक $1 \, A$ है।
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एक तांबे के तार की लंबाई और अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल क्रमशः $30 \ m$ और $6 \times 10^{-7} \ m^2$ है। यदि तांबे की प्रतिरोधकता $1.7 \times 10^{-8} \ \Omega \ m$ है,तो तार का प्रतिरोध क्या होगा ($Omega$ में)?
A
$0.51$
B
$0.68$
C
$0.85$
D
$0.75$

Solution

(C) तार का प्रतिरोध $R$ सूत्र $R = \rho \frac{L}{A}$ द्वारा दिया जाता है,जहाँ $\rho$ प्रतिरोधकता है,$L$ लंबाई है और $A$ अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल है।
दिया गया है:
प्रतिरोधकता $\rho = 1.7 \times 10^{-8} \ \Omega \ m$
लंबाई $L = 30 \ m$
क्षेत्रफल $A = 6 \times 10^{-7} \ m^2$
इन मानों को सूत्र में रखने पर:
$R = (1.7 \times 10^{-8} \ \Omega \ m) \times \frac{30 \ m}{6 \times 10^{-7} \ m^2}$
$R = 1.7 \times 10^{-8} \times 5 \times 10^7 \ \Omega$
$R = 8.5 \times 10^{-1} \ \Omega$
$R = 0.85 \ \Omega$
अतः,सही विकल्प $C$ है।
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जब एक तार को मीटर ब्रिज के बाएं अंतराल (gap) में जोड़ा जाता है,तो संतुलन बिंदु बाएं सिरे से $40 \ cm$ की दूरी पर होता है। यदि बाएं अंतराल में लगे तार को खींचकर उसकी लंबाई दोगुनी कर दी जाए और फिर से उसी अंतराल में जोड़ा जाए,तो मीटर ब्रिज के बाएं सिरे से संतुलन बिंदु की दूरी क्या होगी?
A
$\frac{300}{11} \ cm$
B
$\frac{800}{11} \ cm$
C
$\frac{400}{11} \ cm$
D
$\frac{700}{11} \ cm$

Solution

(B) मान लीजिए तार का प्रतिरोध $R$ है। मीटर ब्रिज में संतुलन की स्थिति $\frac{R}{S} = \frac{l}{100-l}$ द्वारा दी जाती है,जहाँ $S$ दाएं अंतराल में प्रतिरोध है और $l$ बाएं सिरे से संतुलन लंबाई है।
प्रारंभ में,$l_1 = 40 \ cm$,इसलिए $\frac{R}{S} = \frac{40}{60} = \frac{2}{3}$,जिसका अर्थ है $S = 1.5R$।
जब तार को खींचकर उसकी लंबाई दोगुनी की जाती है,तो उसकी नई लंबाई $l' = 2l$ और नया अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल $A' = \frac{A}{2}$ हो जाता है (क्योंकि आयतन $V = Al$ स्थिर रहता है)।
नया प्रतिरोध $R' = \rho \frac{l'}{A'} = \rho \frac{2l}{A/2} = 4 \rho \frac{l}{A} = 4R$ होगा।
अब,मान लीजिए नई संतुलन लंबाई $l_2$ है। नई संतुलन स्थिति $\frac{R'}{S} = \frac{l_2}{100-l_2}$ है।
$R' = 4R$ और $S = 1.5R$ रखने पर,हमें $\frac{4R}{1.5R} = \frac{l_2}{100-l_2}$ प्राप्त होता है।
$\frac{4}{1.5} = \frac{8}{3} = \frac{l_2}{100-l_2}$।
$8(100 - l_2) = 3l_2 \implies 800 - 8l_2 = 3l_2 \implies 11l_2 = 800$।
$l_2 = \frac{800}{11} \ cm$।
111
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एक मीटर ब्रिज में,जब प्रतिरोध $R$ और $S$ को क्रमशः बाएं और दाएं अंतराल में जोड़ा जाता है,तो शून्य बिंदु तार के बाएं सिरे से $20 \ cm$ पर स्थित होता है। यदि प्रतिरोध $S$ को $60 \ \Omega$ के प्रतिरोध के साथ शंट किया जाता है,तो शून्य बिंदु $5 \ cm$ विस्थापित हो जाता है। $R$ और $S$ के मान क्रमशः क्या हैं?
A
$24 \ \Omega, 6 \ \Omega$
B
$6 \ \Omega, 24 \ \Omega$
C
$5 \ \Omega, 20 \ \Omega$
D
$20 \ \Omega, 5 \ \Omega$

Solution

(C) मीटर ब्रिज में,संतुलन की स्थिति $\frac{R}{S} = \frac{l}{100-l}$ द्वारा दी जाती है।
दिया गया है $l = 20 \ cm$,इसलिए $\frac{R}{S} = \frac{20}{80} = \frac{1}{4}$,जिसका अर्थ है $S = 4R$।
जब $S$ को $60 \ \Omega$ के साथ शंट किया जाता है,तो नया प्रतिरोध $S'$ का मान $\frac{S \times 60}{S + 60}$ होता है।
शून्य बिंदु $5 \ cm$ विस्थापित होता है। संतुलन की स्थिति $\frac{R}{S'} = \frac{25}{75} = \frac{1}{3}$ लेने पर,$3R = S' = \frac{60S}{S+60}$ प्राप्त होता है।
$S = 4R$ रखने पर: $3R = \frac{60(4R)}{4R+60} \Rightarrow 3 = \frac{240}{4R+60} \Rightarrow 12R + 180 = 240 \Rightarrow 12R = 60 \Rightarrow R = 5 \ \Omega$।
अतः $S = 4 \times 5 = 20 \ \Omega$।
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यदि एक प्रोटॉन का रैखिक संवेग $p_0$ से बदल जाता है,तो प्रोटॉन से जुड़ी डी-ब्रोग्ली तरंगदैर्ध्य $0.25 \%$ बदल जाती है। तो प्रोटॉन का प्रारंभिक रैखिक संवेग क्या है?
A
$100 p_0$
B
$\frac{p_0}{400}$
C
$400 p_0$
D
$\frac{p_0}{100}$

Solution

(C) डी-ब्रोग्ली तरंगदैर्ध्य $\lambda$ और रैखिक संवेग $p$ के बीच संबंध $\lambda = \frac{h}{p}$ है।
अवकलन करने पर,हमें $d\lambda = -\frac{h}{p^2} dp$ प्राप्त होता है।
दोनों समीकरणों को विभाजित करने पर,हमें भिन्नात्मक परिवर्तन मिलता है: $\frac{d\lambda}{\lambda} = -\frac{dp}{p}$.
यह दिया गया है कि तरंगदैर्ध्य में परिवर्तन का परिमाण $0.25 \%$ है,इसलिए $\left| \frac{d\lambda}{\lambda} \right| = \frac{0.25}{100} = \frac{1}{400}$.
चूंकि $\left| \frac{d\lambda}{\lambda} \right| = \frac{dp}{p}$,इसलिए $\frac{p_0}{p} = \frac{1}{400}$.
अतः,प्रारंभिक रैखिक संवेग $p = 400 p_0$ है।
113
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$8 \mu g$ द्रव्यमान का एक गतिशील कण $4 \mu g$ द्रव्यमान के एक स्थिर कण से टकराता है। यदि टक्कर पूर्णतः प्रत्यास्थ और एकविमीय है, तो टक्कर के बाद उनकी डी-ब्रोग्ली तरंगदैर्ध्य का अनुपात क्या होगा ($2 : 1$ में)?
A
$4$
B
$3$
C
$1$
D
$2$

Solution

(D) माना पहले कण का द्रव्यमान $m_1 = 8 \mu g$ और दूसरे कण का द्रव्यमान $m_2 = 4 \mu g$ है। माना $m_1$ का प्रारंभिक वेग $u_1$ है और $m_2$ का वेग $u_2 = 0$ है। पूर्णतः प्रत्यास्थ एकविमीय टक्कर के बाद, अंतिम वेग $v_1$ और $v_2$ इस प्रकार हैं:
$v_1 = \frac{m_1 - m_2}{m_1 + m_2} u_1 = \frac{8 - 4}{8 + 4} u_1 = \frac{4}{12} u_1 = \frac{1}{3} u_1$
$v_2 = \frac{2m_1}{m_1 + m_2} u_1 = \frac{2(8)}{8 + 4} u_1 = \frac{16}{12} u_1 = \frac{4}{3} u_1$
डी-ब्रोग्ली तरंगदैर्ध्य $\lambda = \frac{h}{p} = \frac{h}{mv}$ द्वारा दी जाती है।
तरंगदैर्ध्य का अनुपात $\frac{\lambda_1}{\lambda_2} = \frac{h/m_1v_1}{h/m_2v_2} = \frac{m_2v_2}{m_1v_1}$ है।
मान रखने पर: $\frac{\lambda_1}{\lambda_2} = \frac{4 \times (4/3)u_1}{8 \times (1/3)u_1} = \frac{16/3}{8/3} = \frac{16}{8} = 2 : 1$.
114
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यदि एक प्रोटॉन और एक अल्फा कण को समान विभवांतर द्वारा त्वरित किया जाता है, तो उनकी डी-ब्रोग्ली तरंगदैर्ध्य का अनुपात क्या होगा?
A
$1: 2$
B
$1: 4$
C
$2 \sqrt{2}: 1$
D
$1: 8$

Solution

(C) $q$ आवेश और $m$ द्रव्यमान वाले कण को $V$ विभवांतर से त्वरित करने पर डी-ब्रोग्ली तरंगदैर्ध्य $\lambda = \frac{h}{\sqrt{2mqV}}$ होती है।
चूंकि $h$ और $V$ दोनों कणों के लिए नियत हैं, इसलिए $\lambda \propto \frac{1}{\sqrt{mq}}$।
प्रोटॉन $(p)$ के लिए: द्रव्यमान $m_p = m$, आवेश $q_p = e$।
अल्फा कण $(\alpha)$ के लिए: द्रव्यमान $m_{\alpha} = 4m$, आवेश $q_{\alpha} = 2e$।
तरंगदैर्ध्य का अनुपात $\frac{\lambda_p}{\lambda_{\alpha}} = \sqrt{\frac{m_{\alpha} q_{\alpha}}{m_p q_p}} = \sqrt{\frac{4m \cdot 2e}{m \cdot e}} = \sqrt{8} = 2\sqrt{2}$ है।
अतः, अनुपात $\lambda_p : \lambda_{\alpha} = 2\sqrt{2} : 1$ है।
115
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यदि एक इलेक्ट्रॉन की डी-ब्रोग्ली तरंगदैर्ध्य $2 \ nm$ है,तो इसकी गतिज ऊर्जा लगभग कितनी होगी ($eV$ में)? (प्लांक नियतांक $= 6.6 \times 10^{-34} \ J \ s$ और इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान $= 9 \times 10^{-31} \ kg$)
A
$0.48$
B
$0.68$
C
$0.38$
D
$0.25$

Solution

(C) डी-ब्रोग्ली तरंगदैर्ध्य $\lambda$ का सूत्र $\lambda = \frac{h}{p}$ है,जहाँ $p$ इलेक्ट्रॉन का संवेग है।
हम जानते हैं कि गतिज ऊर्जा $K = \frac{p^2}{2m}$,इसलिए $p = \sqrt{2mK}$।
इस मान को तरंगदैर्ध्य के सूत्र में रखने पर: $\lambda = \frac{h}{\sqrt{2mK}}$।
$K$ के लिए पुनर्व्यवस्थित करने पर: $K = \frac{h^2}{2m\lambda^2}$।
दिए गए मान: $h = 6.6 \times 10^{-34} \ J \ s$,$m = 9 \times 10^{-31} \ kg$,और $\lambda = 2 \ nm = 2 \times 10^{-9} \ m$।
$K = \frac{(6.6 \times 10^{-34})^2}{2 \times (9 \times 10^{-31}) \times (2 \times 10^{-9})^2}$।
$K = \frac{43.56 \times 10^{-68}}{18 \times 10^{-31} \times 4 \times 10^{-18}} = \frac{43.56 \times 10^{-68}}{72 \times 10^{-49}} \approx 0.605 \times 10^{-19} \ J$।
जूल को इलेक्ट्रॉन-वोल्ट $(eV)$ में बदलने के लिए,$1.6 \times 10^{-19} \ J/eV$ से विभाजित करें:
$K = \frac{0.605 \times 10^{-19}}{1.6 \times 10^{-19}} \approx 0.378 \ eV$।
निकटतम विकल्प के अनुसार,उत्तर $0.38 \ eV$ प्राप्त होता है।
116
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$127^{\circ} C$ और $352^{\circ} C$ तापमान पर तापीय न्यूट्रॉन से जुड़ी डी-ब्रोग्ली तरंगदैर्ध्य का अनुपात क्या है?
A
$5: 3$
B
$3: 2$
C
$3: 4$
D
$5: 4$

Solution

(D) $T$ तापमान पर तापीय न्यूट्रॉन की डी-ब्रोग्ली तरंगदैर्ध्य $\lambda = \frac{h}{\sqrt{3mkT}}$ सूत्र द्वारा दी जाती है,जहाँ $h$ प्लांक नियतांक है,$m$ न्यूट्रॉन का द्रव्यमान है और $k$ बोल्ट्जमैन नियतांक है।
इस संबंध से,हम देख सकते हैं कि $\lambda \propto \frac{1}{\sqrt{T}}$.
दिए गए तापमान $T_1 = 127^{\circ} C = 127 + 273 = 400 \ K$ और $T_2 = 352^{\circ} C = 352 + 273 = 625 \ K$ हैं।
तरंगदैर्ध्य का अनुपात $\frac{\lambda_1}{\lambda_2} = \sqrt{\frac{T_2}{T_1}}$ है।
मान रखने पर,$\frac{\lambda_1}{\lambda_2} = \sqrt{\frac{625}{400}} = \sqrt{\frac{25}{16}} = \frac{5}{4}$.
अतः,अनुपात $5: 4$ है।
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$\frac{200}{3} \,V$ के विभवांतर द्वारा त्वरित इलेक्ट्रॉन से संबद्ध डी-ब्रोग्ली तरंगदैर्ध्य लगभग कितनी है ($Å$ में)?
A
$25$
B
$2.5$
C
$15$
D
$1.5$

Solution

(D) $V$ विभवांतर द्वारा त्वरित इलेक्ट्रॉन की डी-ब्रोग्ली तरंगदैर्ध्य $\lambda$ का सूत्र है: $\lambda = \frac{12.27}{\sqrt{V}} Å$।
यहाँ,$V = \frac{200}{3} \,V \approx 66.67 \,V$ दिया गया है।
सूत्र में $V$ का मान रखने पर:
$\lambda = \frac{12.27}{\sqrt{66.67}} Å$।
चूंकि $\sqrt{66.67} \approx 8.16$ होता है,इसलिए:
$\lambda \approx \frac{12.27}{8.16} Å \approx 1.503 Å$।
अतः,डी-ब्रोग्ली तरंगदैर्ध्य लगभग $1.5 Å$ है।
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यदि उत्तेजित अवस्था में एक इलेक्ट्रॉन ग्राउंड स्टेट में गिरता है और $5 \ eV$ ऊर्जा का एक फोटॉन उत्सर्जित होता है,तो फोटॉन की तरंग दैर्ध्य लगभग कितनी होगी ($nm$ में)?
A
$748$
B
$598$
C
$398$
D
$248$

Solution

(D) फोटॉन की ऊर्जा का सूत्र $E = \frac{hc}{\lambda}$ है।
यहाँ,$E = 5 \ eV$,$h = 6.626 \times 10^{-34} \ J \cdot s$,$c = 3 \times 10^8 \ m/s$,और $1 \ eV = 1.6 \times 10^{-19} \ J$ है।
वैकल्पिक रूप से,शॉर्टकट सूत्र $E \ (eV) = \frac{1240}{\lambda \ (nm)}$ का उपयोग करते हुए।
मान रखने पर: $5 = \frac{1240}{\lambda}$।
$\lambda$ के लिए हल करने पर: $\lambda = \frac{1240}{5} = 248 \ nm$।
अतः,उत्सर्जित फोटॉन की तरंग दैर्ध्य $248 \ nm$ है।
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यदि किसी धातु की सतह से प्रकाश-विद्युत उत्सर्जन के लिए प्रकाश की देहली तरंगदैर्ध्य (threshold wavelength) $6250 \ \text{Å}$ है, तो धातु का कार्य फलन (work function) क्या होगा ($\text{eV}$ में)? (प्लांक नियतांक $= 6.6 \times 10^{-34} \ \text{Js}$)
A
$3.98$
B
$1.98$
C
$2.98$
D
$4.98$

Solution

(B) कार्य फलन $\Phi$ का सूत्र $\Phi = \frac{hc}{\lambda_0}$ है, जहाँ $h$ प्लांक नियतांक है, $c$ प्रकाश की गति है और $\lambda_0$ देहली तरंगदैर्ध्य है।
दिया गया है: $h = 6.6 \times 10^{-34} \ \text{Js}$, $c = 3 \times 10^8 \ \text{m/s}$, और $\lambda_0 = 6250 \ \text{Å} = 6250 \times 10^{-10} \ \text{m}$.
मान रखने पर:
$\Phi = \frac{6.6 \times 10^{-34} \times 3 \times 10^8}{6250 \times 10^{-10}} \ \text{J}$.
$\Phi = \frac{19.8 \times 10^{-26}}{6250 \times 10^{-10}} = \frac{19.8}{6250} \times 10^{-16} \ \text{J} = 3.168 \times 10^{-20} \ \text{J}$.
इसे इलेक्ट्रॉन-वोल्ट (eV) में बदलने के लिए, इलेक्ट्रॉन के आवेश $e = 1.6 \times 10^{-19} \ \text{C}$ से विभाजित करने पर:
$\Phi = \frac{3.168 \times 10^{-20}}{1.6 \times 10^{-19}} \ \text{eV} = 1.98 \ \text{eV}$.
अतः, सही विकल्प $B$ है।
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एक लेजर $5 \times 10^{14} \,Hz$ आवृत्ति के प्रकाश पुंज का उत्पादन करती है जिसका आउटपुट पावर $33 \,mW$ है। लेजर द्वारा प्रति सेकंड उत्सर्जित फोटॉनों की औसत संख्या क्या है? (प्लांक नियतांक $h = 6.6 \times 10^{-34} \,J \,s$)
A
$40 \times 10^{16}$
B
$10 \times 10^{16}$
C
$30 \times 10^{16}$
D
$20 \times 10^{16}$

Solution

(B) लेजर की शक्ति $P = nE$ द्वारा दी जाती है,जहाँ $n$ प्रति सेकंड उत्सर्जित फोटॉनों की संख्या है और $E$ एक फोटॉन की ऊर्जा है।
एक फोटॉन की ऊर्जा $E = h\nu$ है,जहाँ $h = 6.6 \times 10^{-34} \,J \,s$ और $\nu = 5 \times 10^{14} \,Hz$ है।
$E = (6.6 \times 10^{-34}) \times (5 \times 10^{14}) = 33 \times 10^{-20} \,J$।
शक्ति $P = 33 \,mW = 33 \times 10^{-3} \,W$ है।
प्रति सेकंड फोटॉनों की संख्या $n = P / E$ है।
$n = (33 \times 10^{-3}) / (33 \times 10^{-20}) = 10^{17} = 10 \times 10^{16}$ फोटॉन प्रति सेकंड।
अतः,सही विकल्प $B$ है।
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जब $8 \times 10^{-19} \ J$ ऊर्जा के फोटॉन एक प्रकाश-संवेदी पदार्थ पर आपतित होते हैं,तो अधिकतम गतिज ऊर्जा के साथ उत्सर्जित फोटोइलेक्ट्रॉन की डी-ब्रोग्ली तरंगदैर्ध्य $10 \ Å$ है। प्रकाश-संवेदी पदार्थ का कार्य फलन लगभग है ($eV$ में)
A
$3.5$
B
$2.5$
C
$2.0$
D
$1.5$

Solution

(A) आपतित फोटॉन की ऊर्जा $E = 8 \times 10^{-19} \ J$ है।
इसे इलेक्ट्रॉन-वोल्ट में बदलने पर,$E = \frac{8 \times 10^{-19}}{1.6 \times 10^{-19}} \ eV = 5 \ eV$।
उत्सर्जित फोटोइलेक्ट्रॉन की डी-ब्रोग्ली तरंगदैर्ध्य $\lambda = 10 \ Å = 10^{-9} \ m$ है।
फोटोइलेक्ट्रॉन की गतिज ऊर्जा $K_{max} = \frac{h^2}{2m\lambda^2}$ द्वारा दी जाती है।
मान रखने पर: $K_{max} = \frac{(6.63 \times 10^{-34})^2}{2 \times 9.1 \times 10^{-31} \times (10^{-9})^2} \approx 2.41 \times 10^{-19} \ J$।
इसे $eV$ में बदलने पर: $K_{max} = \frac{2.41 \times 10^{-19}}{1.6 \times 10^{-19}} \ eV \approx 1.5 \ eV$।
आइंस्टीन के प्रकाश-विद्युत समीकरण का उपयोग करने पर: $E = \phi + K_{max}$,जहाँ $\phi$ कार्य फलन है।
$\phi = E - K_{max} = 5 \ eV - 1.5 \ eV = 3.5 \ eV$।
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जब $4 \ mA$ की धारा एक प्रेरक (inductor) से गुजरती है,यदि इससे जुड़ा फ्लक्स $32 \times 10^{-6} \ T \ m^2$ है,तो प्रेरक में संचित ऊर्जा है
A
$64 \times 10^{-9} \ J$
B
$32 \times 10^{-9} \ J$
C
$128 \times 10^{-9} \ J$
D
$96 \times 10^{-9} \ J$

Solution

(A) दिया गया है:
धारा $I = 4 \ mA = 4 \times 10^{-3} \ A$
चुंबकीय फ्लक्स $\phi = 32 \times 10^{-6} \ Wb$ (या $T \ m^2$)
सबसे पहले,$\phi = L \cdot I$ सूत्र का उपयोग करके स्व-प्रेरकत्व (self-inductance) $L$ की गणना करें:
$L = \frac{\phi}{I} = \frac{32 \times 10^{-6}}{4 \times 10^{-3}} = 8 \times 10^{-3} \ H$
प्रेरक में संचित ऊर्जा $U = \frac{1}{2} L I^2$ द्वारा दी जाती है:
$U = \frac{1}{2} \times (8 \times 10^{-3}) \times (4 \times 10^{-3})^2$
$U = 4 \times 10^{-3} \times 16 \times 10^{-6}$
$U = 64 \times 10^{-9} \ J$
अतः,सही विकल्प $A$ है।
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$30 \ m$ लंबाई का एक क्षैतिज टेलीग्राफ तार पूर्व से पश्चिम की ओर फैला हुआ है और $20 \ m$ की ऊंचाई से मुक्त रूप से गिरता है। यदि तार का प्रतिरोध $40 \ \Omega$ है और उस स्थान पर पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र का क्षैतिज घटक $2 \times 10^{-5} \ T$ है,तो जब तार जमीन पर पहुंचता है तो प्रेरित धारा ज्ञात कीजिए। (गुरुत्वीय त्वरण $= 10 \ m \ s^{-2}$)
A
$0.3 \ mA$
B
$3 \ mA$
C
$3 \ A$
D
$0.03 \ A$

Solution

(A) $1$. तार $h = 20 \ m$ की ऊंचाई से मुक्त रूप से गिरता है। जमीन पर पहुंचने से ठीक पहले तार का वेग $v = \sqrt{2gh} = \sqrt{2 \times 10 \times 20} = \sqrt{400} = 20 \ m \ s^{-1}$ होगा।
$2$. चुंबकीय क्षेत्र में गतिमान चालक में प्रेरित विद्युत वाहक बल $(EMF)$ $\epsilon = Bvl$ द्वारा दिया जाता है,जहाँ $B$ चुंबकीय क्षेत्र का घटक है,$v$ वेग है और $l$ तार की लंबाई है।
$3$. यहाँ,$B = 2 \times 10^{-5} \ T$,$v = 20 \ m \ s^{-1}$,और $l = 30 \ m$ है।
$4$. प्रेरित $EMF$ $\epsilon = (2 \times 10^{-5}) \times 20 \times 30 = 1200 \times 10^{-5} = 1.2 \times 10^{-2} \ V$ है।
$5$. प्रेरित धारा $I = \frac{\epsilon}{R}$ द्वारा दी जाती है,जहाँ $R = 40 \ \Omega$ है।
$6$. $I = \frac{1.2 \times 10^{-2}}{40} = 0.03 \times 10^{-2} \ A = 3 \times 10^{-4} \ A = 0.3 \ mA$।
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$45$ फेरों और $4 \ cm$ त्रिज्या वाली एक कुंडली को एक समान चुंबकीय क्षेत्र में इस प्रकार रखा गया है कि उसका तल क्षेत्र की दिशा के लंबवत है। यदि चुंबकीय क्षेत्र $220 \ s$ के समयांतराल में $0$ से $0.70 \ T$ तक एकसमान दर से बढ़ता है,तो कुंडली में प्रेरित emf क्या होगा ($mV$ में)?
A
$0.32$
B
$0.50$
C
$0.72$
D
$0.96$

Solution

(C) दिया गया है:
फेरों की संख्या $N = 45$
त्रिज्या $r = 4 \ cm = 0.04 \ m$
क्षेत्रफल $A = \pi r^2 = \pi \times (0.04)^2 = 16\pi \times 10^{-4} \ m^2$
प्रारंभिक चुंबकीय क्षेत्र $B_1 = 0 \ T$
अंतिम चुंबकीय क्षेत्र $B_2 = 0.70 \ T$
समयांतराल $\Delta t = 220 \ s$
चुंबकीय फ्लक्स $\phi = B \cdot A \cdot \cos(\theta)$ है। चूंकि कुंडली का तल क्षेत्र के लंबवत है,इसलिए कोण $\theta = 0^\circ$ होगा,अतः $\cos(0^\circ) = 1$।
फ्लक्स में परिवर्तन $\Delta \phi = A(B_2 - B_1) = 16\pi \times 10^{-4} \times (0.70 - 0) = 11.2\pi \times 10^{-4} \ Wb$।
फैराडे के नियम के अनुसार,प्रेरित emf $\varepsilon = -N \frac{\Delta \phi}{\Delta t}$ है।
emf का परिमाण $|\varepsilon| = \frac{45 \times 11.2\pi \times 10^{-4}}{220}$।
$|\varepsilon| = \frac{504\pi \times 10^{-4}}{220} \approx \frac{1583.36 \times 10^{-4}}{220} \approx 7.2 \times 10^{-4} \ V = 0.72 \ mV$।
125
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$200 \ \Omega$ प्रतिरोध वाली एक कुंडली को चुंबकीय क्षेत्र में रखा गया है। यदि कुंडली से जुड़ा चुंबकीय फ्लक्स $\phi$ (वेबर में) समय $t$ (सेकंड में) के साथ समीकरण $\phi = 50t^2 + 4$ के अनुसार बदलता है,तो $t = 2 \ s$ पर कुंडली में प्रेरित धारा क्या होगी ($A$ में)?
A
$2$
B
$1$
C
$0.5$
D
$0.1$

Solution

(B) फैराडे के विद्युत चुंबकीय प्रेरण के नियम के अनुसार,प्रेरित विद्युत वाहक बल $(EMF)$ $\varepsilon = -\frac{d\phi}{dt}$ द्वारा दिया जाता है।
यहाँ चुंबकीय फ्लक्स $\phi = 50t^2 + 4$ दिया गया है।
समय $t$ के सापेक्ष $\phi$ का अवकलन करने पर:
$\frac{d\phi}{dt} = \frac{d}{dt}(50t^2 + 4) = 100t$.
प्रेरित $EMF$ का परिमाण $|\varepsilon| = |-\frac{d\phi}{dt}| = 100t$ है।
समय $t = 2 \ s$ पर,प्रेरित $EMF$ $|\varepsilon| = 100(2) = 200 \ V$ होगा।
ओम के नियम के अनुसार प्रेरित धारा $I = \frac{|\varepsilon|}{R}$ है।
प्रतिरोध $R = 200 \ \Omega$ दिया गया है।
अतः,$I = \frac{200 \ V}{200 \ \Omega} = 1 \ A$.
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$10 \ cm$ भुजा वाले $100$ वर्गाकार लूप वाली एक कुंडली को इस प्रकार रखा गया है कि उसका तल चुंबकीय क्षेत्र के लंबवत है,जो $0.7 \ T \ s^{-1}$ की दर से बदल रहा है। कुंडली में प्रेरित emf क्या है ($V$ में)?
A
$0.2$
B
$0.4$
C
$0.7$
D
$1$

Solution

(C) एक लूप से गुजरने वाला चुंबकीय फ्लक्स $\phi = B \cdot A \cdot \cos(\theta)$ द्वारा दिया जाता है।
चूंकि कुंडली का तल चुंबकीय क्षेत्र के लंबवत है,इसलिए क्षेत्रफल सदिश और चुंबकीय क्षेत्र के बीच का कोण $\theta = 0^\circ$ है,अतः $\cos(0^\circ) = 1$ होगा।
इस प्रकार,$\phi = B \cdot A$.
$N$ फेरों वाली कुंडली में प्रेरित emf $\epsilon$ फैराडे के नियम द्वारा दिया जाता है: $\epsilon = -N \frac{d\phi}{dt}$.
यहाँ,$N = 100$,क्षेत्रफल $A = (10 \ cm)^2 = (0.1 \ m)^2 = 0.01 \ m^2$,और चुंबकीय क्षेत्र के परिवर्तन की दर $\frac{dB}{dt} = 0.7 \ T \ s^{-1}$ है।
इन मानों को रखने पर: $\epsilon = N \cdot A \cdot \frac{dB}{dt} = 100 \times 0.01 \times 0.7$.
$\epsilon = 1 \times 0.7 = 0.7 \ V$.
127
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$0.3 \ m$ त्रिज्या की एक धात्विक डिस्क $5 \times 10^{-2} \ T$ के एकसमान चुंबकीय क्षेत्र के लंबवत तल में $60 \ rad \ s^{-1}$ की स्थिर कोणीय गति से घूम रही है। डिस्क के रिम पर स्थित एक बिंदु और केंद्र के बीच प्रेरित emf क्या है ($V$ में)?
A
$0.06$
B
$0.612$
C
$1.35$
D
$0.135$

Solution

(D) घूमती हुई धात्विक डिस्क में प्रेरित emf $(e)$ का सूत्र है: $e = \frac{1}{2} B \omega r^2$।
दिया गया है:
चुंबकीय क्षेत्र $(B)$ = $5 \times 10^{-2} \ T$
कोणीय गति $(\omega)$ = $60 \ rad \ s^{-1}$
त्रिज्या $(r)$ = $0.3 \ m$
सूत्र में मान रखने पर:
$e = \frac{1}{2} \times (5 \times 10^{-2}) \times 60 \times (0.3)^2$
$e = \frac{1}{2} \times 0.05 \times 60 \times 0.09$
$e = 0.025 \times 60 \times 0.09$
$e = 1.5 \times 0.09$
$e = 0.135 \ V$।
अतः,सही विकल्प $D$ है।
128
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यदि $40 \ cm$ लंबे $24$ धात्विक स्पोक्स (spokes) वाले एक पहिये को पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र के क्षैतिज घटक के लंबवत तल में $180 \ rev/min$ की गति से घुमाया जाता है, तो पहिये की धुरी और रिम के बीच प्रेरित emf $E$ है। यदि स्पोक्स की संख्या $12$ कर दी जाए और पहिये को उसी क्षेत्र में $90 \ rev/min$ की गति से घुमाया जाए, तो प्रेरित emf क्या होगा?
A
$E$
B
$2E$
C
$4E$
D
$0.25 E$

Solution

(D) चुंबकीय क्षेत्र $(B)$ में कोणीय वेग $(\omega)$ के साथ घूमने वाले $l$ लंबाई के धात्विक स्पोक में प्रेरित emf $(e)$ का सूत्र है: $e = \frac{1}{2} B \omega l^2$.
यहाँ, emf स्पोक्स की संख्या पर निर्भर नहीं करता है, क्योंकि प्रत्येक स्पोक धुरी और रिम के बीच समानांतर में जुड़े emf के एक व्यक्तिगत स्रोत के रूप में कार्य करता है।
प्रारंभिक स्थिति: $\omega_1 = 180 \ rev/min$, $e_1 = E = \frac{1}{2} B \omega_1 l^2$.
अंतिम स्थिति: $\omega_2 = 90 \ rev/min$, $e_2 = \frac{1}{2} B \omega_2 l^2$.
अनुपात लेने पर: $\frac{e_2}{E} = \frac{\omega_2}{\omega_1} = \frac{90}{180} = \frac{1}{2}$.
अतः, $e_2 = 0.5 E$.
129
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$40 \ cm$ लंबाई और $7 \ cm$ व्यास वाले $200$ फेरों वाली वायु-क्रोडित (air-cored) परिनालिका का स्व-प्रेरकत्व लगभग कितना होगा ($\mu H$ में)?
A
$484$
B
$242$
C
$121$
D
$968$

Solution

(A) परिनालिका का स्व-प्रेरकत्व $L$ सूत्र $L = \frac{\mu_0 N^2 A}{l}$ द्वारा दिया जाता है,जहाँ $\mu_0 = 4\pi \times 10^{-7} \ T \cdot m/A$ निर्वात की पारगम्यता है,$N = 200$ फेरों की संख्या है,$l = 0.4 \ m$ लंबाई है,और $A = \pi r^2$ अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल है। व्यास $d = 7 \ cm = 0.07 \ m$ है,इसलिए त्रिज्या $r = 0.035 \ m$ होगी। अतः,$A = \pi (0.035)^2 \approx 3.848 \times 10^{-3} \ m^2$। इन मानों को सूत्र में रखने पर: $L = \frac{(4\pi \times 10^{-7}) \times (200)^2 \times (3.848 \times 10^{-3})}{0.4}$। गणना करने पर $L \approx 482.5 \ \mu H$ प्राप्त होता है,जो लगभग $484 \ \mu H$ के बराबर है।
130
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जब एक कुंडली में धारा $0.3 \ s$ के समय में $2 \ A$ से बदलकर $5 \ A$ हो जाती है,यदि कुंडली में प्रेरित emf $40 \ mV$ है,तो कुंडली का स्व-प्रेरकत्व (self inductance) क्या है?
A
$4 \ H$
B
$4 \ mH$
C
$40 \ mH$
D
$4 \ \mu H$

Solution

(B) स्व-प्रेरकत्व के कारण कुंडली में प्रेरित emf का सूत्र $\varepsilon = -L \frac{di}{dt}$ है।
परिमाण लेने पर,हमें प्राप्त होता है $|\varepsilon| = L \frac{|\Delta i|}{\Delta t}$.
दिया गया है:
प्रारंभिक धारा $i_1 = 2 \ A$
अंतिम धारा $i_2 = 5 \ A$
धारा में परिवर्तन $\Delta i = i_2 - i_1 = 5 \ A - 2 \ A = 3 \ A$.
समय अंतराल $\Delta t = 0.3 \ s$.
प्रेरित emf $\varepsilon = 40 \ mV = 40 \times 10^{-3} \ V$.
सूत्र में मान रखने पर:
$40 \times 10^{-3} = L \times \frac{3}{0.3}$.
$40 \times 10^{-3} = L \times 10$.
$L = \frac{40 \times 10^{-3}}{10} = 4 \times 10^{-3} \ H$.
$L = 4 \ mH$.
131
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निम्नलिखित विद्युतचुंबकीय तरंगों में से अधिकतम तरंगदैर्ध्य वाली तरंगें कौन सी हैं?
A
$X$-किरणें
B
रेडियो तरंगें
C
$UV$ तरंगें
D
दृश्य किरणें

Solution

(B) विद्युतचुंबकीय स्पेक्ट्रम को बढ़ती आवृत्ति और घटती तरंगदैर्ध्य के क्रम में व्यवस्थित किया जाता है।
सबसे लंबी तरंगदैर्ध्य से सबसे छोटी तरंगदैर्ध्य तक का क्रम इस प्रकार है:
$1$. रेडियो तरंगें
$2$. सूक्ष्म तरंगें (Microwaves)
$3$. अवरक्त किरणें (Infrared rays)
$4$. दृश्य प्रकाश
$5$. पराबैंगनी किरणें (Ultraviolet rays)
$6$. $X$-किरणें
$7$. गामा किरणें
चूंकि रेडियो तरंगें इस अनुक्रम की शुरुआत में आती हैं,इसलिए दिए गए विकल्पों में इनकी तरंगदैर्ध्य सबसे अधिक होती है।
132
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एक समतल विद्युतचुंबकीय तरंग में,चुंबकीय क्षेत्र $\vec{B} = 3 \times 10^{-7} \sin (100 \pi x + 10^{12} t) \ T$ द्वारा दिया गया है,तो तरंग की तरंगदैर्ध्य क्या है ($m$ में)? (जहाँ $x$ मीटर में और $t$ सेकंड में है)
A
$0.02$
B
$0.2$
C
$0.4$
D
$0.04$

Solution

(A) समतल विद्युतचुंबकीय तरंग का सामान्य समीकरण $\vec{B} = B_0 \sin (kx + \omega t)$ होता है।
दिए गए समीकरण $\vec{B} = 3 \times 10^{-7} \sin (100 \pi x + 10^{12} t)$ के साथ तुलना करने पर,हम तरंग संख्या $k = 100 \pi \ m^{-1}$ प्राप्त करते हैं।
तरंग संख्या $k$ और तरंगदैर्ध्य $\lambda$ के बीच का संबंध $k = \frac{2 \pi}{\lambda}$ है।
$k$ का मान रखने पर: $100 \pi = \frac{2 \pi}{\lambda}$।
$\lambda$ के लिए हल करने पर: $\lambda = \frac{2 \pi}{100 \pi} = \frac{2}{100} = 0.02 \ m$।
अतः,तरंग की तरंगदैर्ध्य $0.02 \ m$ है।
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$25 \text{ MHz}$ आवृत्ति वाली एक समतल विद्युतचुंबकीय तरंग निर्वात में धनात्मक $x$-दिशा में संचरित हो रही है। अंतरिक्ष और समय के एक विशेष बिंदु पर,यदि विद्युत क्षेत्र $6.3 \hat{j} \text{ Vm}^{-1}$ है,तो उसी समय इस बिंदु पर तरंग के चुंबकीय क्षेत्र का परिमाण क्या होगा?
A
$2.1 \times 10^{-8} \text{ T}$
B
$4.2 \times 10^{-8} \text{ T}$
C
$6.3 \times 10^{-8} \text{ T}$
D
$8.4 \times 10^{-8} \text{ T}$

Solution

(A) निर्वात में संचरित होने वाली विद्युतचुंबकीय तरंग के लिए,विद्युत क्षेत्र $(E)$ और चुंबकीय क्षेत्र $(B)$ के परिमाण के बीच का संबंध $E = cB$ द्वारा दिया जाता है,जहाँ $c$ निर्वात में प्रकाश की गति है $(c \approx 3 \times 10^8 \text{ ms}^{-1})$।
यहाँ विद्युत क्षेत्र का परिमाण $E = 6.3 \text{ Vm}^{-1}$ दिया गया है।
हमें चुंबकीय क्षेत्र $B$ का परिमाण ज्ञात करना है।
सूत्र $B = \frac{E}{c}$ का उपयोग करते हुए,मान रखने पर:
$B = \frac{6.3}{3 \times 10^8} \text{ T}$.
$B = 2.1 \times 10^{-8} \text{ T}$.
अतः,चुंबकीय क्षेत्र का परिमाण $2.1 \times 10^{-8} \text{ T}$ है।
134
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मुक्त आकाश में यात्रा कर रही एक समतल विद्युतचुंबकीय तरंग के विद्युत क्षेत्र का परिमाण $E$ है। यदि $\mu_0$ और $\varepsilon_0$ क्रमशः मुक्त आकाश की पारगम्यता (permeability) और विद्युतशीलता (permittivity) हैं,तो तरंग के चुंबकीय क्षेत्र का परिमाण क्या होगा?
A
$E \mu_0 \varepsilon_0$
B
$\frac{E}{\mu_0 \varepsilon_0}$
C
$E \sqrt{\mu_0 \varepsilon_0}$
D
$\frac{E}{\sqrt{\mu_0 \varepsilon_0}}$

Solution

(C) मुक्त आकाश में यात्रा कर रही एक समतल विद्युतचुंबकीय तरंग के लिए,विद्युत क्षेत्र $E$ और चुंबकीय क्षेत्र $B$ के परिमाण के बीच का संबंध $E = cB$ द्वारा दिया जाता है,जहाँ $c$ मुक्त आकाश में प्रकाश की गति है।
मुक्त आकाश में प्रकाश की गति $c$,पारगम्यता $\mu_0$ और विद्युतशीलता $\varepsilon_0$ से $c = \frac{1}{\sqrt{\mu_0 \varepsilon_0}}$ सूत्र द्वारा संबंधित है।
$c$ के इस व्यंजक को $E = cB$ संबंध में प्रतिस्थापित करने पर,हमें प्राप्त होता है:
$E = \left( \frac{1}{\sqrt{\mu_0 \varepsilon_0}} \right) B$
चुंबकीय क्षेत्र $B$ के परिमाण के लिए समीकरण को व्यवस्थित करने पर:
$B = E \sqrt{\mu_0 \varepsilon_0}$।
135
PhysicsMediumMCQAP EAMCET · 2025
यदि एक बिंदु स्रोत से $3 \ m$ की दूरी पर विद्युत चुम्बकीय तरंगों के विद्युत क्षेत्र का rms मान $3 \ N C^{-1}$ है,तो स्रोत की शक्ति क्या है ($W$ में)?
A
$10.8$
B
$8.1$
C
$5.4$
D
$2.7$

Solution

(D) एक बिंदु स्रोत से $r$ दूरी पर विद्युत चुम्बकीय तरंग की तीव्रता $I = \frac{P}{4 \pi r^2}$ द्वारा दी जाती है,जहाँ $P$ स्रोत की शक्ति है।
साथ ही,तीव्रता और rms विद्युत क्षेत्र $E_{rms}$ के बीच संबंध $I = \epsilon_0 c E_{rms}^2$ है।
दोनों समीकरणों की तुलना करने पर: $\frac{P}{4 \pi r^2} = \epsilon_0 c E_{rms}^2$.
$P$ के लिए सूत्र बनाने पर: $P = 4 \pi r^2 \epsilon_0 c E_{rms}^2$.
दिया गया है: $r = 3 \ m$,$E_{rms} = 3 \ N C^{-1}$,$\epsilon_0 = 8.854 \times 10^{-12} \ C^2 N^{-1} m^{-2}$,और $c = 3 \times 10^8 \ m s^{-1}$.
मान रखने पर: $P = 4 \times 3.14 \times (3)^2 \times (8.854 \times 10^{-12}) \times (3 \times 10^8) \times (3)^2$.
$P = 4 \times 3.14 \times 9 \times 8.854 \times 10^{-12} \times 3 \times 10^8 \times 9$.
$P \approx 113.04 \times 8.854 \times 10^{-4} \times 27 \approx 270.2 \times 10^{-2} \approx 2.7 \ W$.
अतः,स्रोत की शक्ति $2.7 \ W$ है।
136
PhysicsEasyMCQAP EAMCET · 2025
एक समतल विद्युतचुंबकीय तरंग के विद्युत क्षेत्र के परिमाण और चुंबकीय क्षेत्र के $10^8$ गुना परिमाण का अनुपात क्या है?
A
$1: 3$
B
$3: 1$
C
$1: 1$
D
$1: \sqrt{3}$

Solution

(B) निर्वात में यात्रा करने वाली एक समतल विद्युतचुंबकीय तरंग के लिए,विद्युत क्षेत्र $E$ और चुंबकीय क्षेत्र $B$ के परिमाण के बीच संबंध $E = cB$ है,जहाँ $c$ निर्वात में प्रकाश की गति है।
यहाँ $c = 3 \times 10^8 \ m/s$ है।
हमें विद्युत क्षेत्र $E$ और चुंबकीय क्षेत्र $B$ के $10^8$ गुना परिमाण का अनुपात ज्ञात करना है।
अनुपात $= E / (10^8 \times B) = (cB) / (10^8 \times B) = c / 10^8$.
$c = 3 \times 10^8 \ m/s$ का मान रखने पर:
अनुपात $= (3 \times 10^8) / 10^8 = 3$.
अतः,अनुपात $3: 1$ है।
137
PhysicsEasyMCQAP EAMCET · 2025
एक विद्युतचुंबकीय तरंग के दोलनशील विद्युत और चुंबकीय क्षेत्र सदिश किस दिशा में होते हैं?
A
समान दिशा में और समान कला में।
B
समान दिशा में लेकिन $90^{\circ}$ का कला अंतर रखते हैं।
C
परस्पर लंबवत दिशाओं में और समान कला में।
D
परस्पर लंबवत दिशाओं में लेकिन $90^{\circ}$ का कला अंतर रखते हैं।

Solution

(C) एक विद्युतचुंबकीय तरंग में,दोलनशील विद्युत क्षेत्र सदिश $\vec{E}$ और चुंबकीय क्षेत्र सदिश $\vec{B}$ हमेशा एक-दूसरे के लंबवत होते हैं।
इसके अलावा,ये दोनों सदिश तरंग के संचरण की दिशा के भी लंबवत होते हैं।
ये क्षेत्र समान कला में दोलन करते हैं,जिसका अर्थ है कि वे एक ही समय और एक ही स्थान पर अपने अधिकतम और न्यूनतम मान प्राप्त करते हैं।
इसलिए,सही कथन यह है कि वे परस्पर लंबवत दिशाओं में होते हैं और समान कला में होते हैं।
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यदि एक समतल प्रगामी तरंग में चुंबकीय क्षेत्र को समीकरण $B_{y} = 2 \times 10^{-7} \sin(0.5 \times 10^3 x + 1.5 \pi \times 10^{11} t) \ T$ द्वारा दर्शाया गया है,तो तरंग की आवृत्ति क्या है? (समीकरण में समय $t$ सेकंड में है)।
A
$75 \times 10^9 \ Hz$
B
$150 \times 10^9 \ Hz$
C
$75 \times 10^7 \ Hz$
D
$150 \times 10^7 \ Hz$

Solution

(A) समतल प्रगामी तरंग के लिए मानक समीकरण $B = B_0 \sin(kx + \omega t)$ है।
दिए गए समीकरण $B_y = 2 \times 10^{-7} \sin(0.5 \times 10^3 x + 1.5 \pi \times 10^{11} t)$ के साथ तुलना करने पर,हमें कोणीय आवृत्ति $\omega = 1.5 \pi \times 10^{11} \ rad/s$ प्राप्त होती है।
कोणीय आवृत्ति $\omega$ और आवृत्ति $f$ के बीच संबंध $\omega = 2 \pi f$ है।
$\omega$ का मान रखने पर,$1.5 \pi \times 10^{11} = 2 \pi f$ प्राप्त होता है।
$f$ के लिए हल करने पर,$f = \frac{1.5 \pi \times 10^{11}}{2 \pi} = 0.75 \times 10^{11} \ Hz$ प्राप्त होता है।
इसे $f = 75 \times 10^9 \ Hz$ के रूप में लिखा जा सकता है।
अतः,सही विकल्प $A$ है।
139
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यदि एक $10 \ W$ का बल्ब सभी दिशाओं में समान रूप से विद्युत चुम्बकीय तरंगों का उत्सर्जन करता है,तो स्रोत से $0.5 \ m$ की दूरी पर प्रकाश की तीव्रता लगभग कितनी होगी ($W \ m^{-2}$ में)?
A
$3.18$
B
$0.31$
C
$0.62$
D
$5$

Solution

(A) सभी दिशाओं में समान रूप से शक्ति $P$ उत्सर्जित करने वाले बिंदु स्रोत की $r$ दूरी पर तीव्रता $I$ को निम्नलिखित सूत्र द्वारा दिया जाता है:
$I = \frac{P}{4 \pi r^2}$
दिया गया है:
शक्ति $P = 10 \ W$
दूरी $r = 0.5 \ m$
मान रखने पर:
$I = \frac{10}{4 \times 3.14 \times (0.5)^2}$
$I = \frac{10}{4 \times 3.14 \times 0.25}$
$I = \frac{10}{3.14}$
$I \approx 3.18 \ W \ m^{-2}$
अतः,सही विकल्प $A$ है।
140
PhysicsMediumMCQAP EAMCET · 2025
$20 \ kV$ इलेक्ट्रॉनों द्वारा उत्पन्न $X$-किरणों की न्यूनतम तरंगदैर्ध्य लगभग कितनी है ($Å$ में)?
A
$0.62$
B
$1.8$
C
$3.2$
D
$6.5$

Solution

(A) $V$ विभवांतर द्वारा त्वरित इलेक्ट्रॉनों द्वारा उत्पन्न $X$-किरणों की न्यूनतम तरंगदैर्ध्य $(\lambda_{min})$ डुआन-हंट नियम द्वारा दी जाती है: $\lambda_{min} = \frac{hc}{eV}$.
मान रखने पर: $h = 6.63 \times 10^{-34} \ J \cdot s$,$c = 3 \times 10^8 \ m/s$,$e = 1.6 \times 10^{-19} \ C$,और $V = 20 \times 10^3 \ V$.
$\lambda_{min} = \frac{(6.63 \times 10^{-34}) \times (3 \times 10^8)}{(1.6 \times 10^{-19}) \times (20 \times 10^3)} \ m$.
$\lambda_{min} = \frac{19.89 \times 10^{-26}}{3.2 \times 10^{-15}} \ m = 6.215 \times 10^{-11} \ m$.
चूंकि $1 \ Å = 10^{-10} \ m$,इसलिए $\lambda_{min} = 0.6215 \times 10^{-10} \ m = 0.62 \ Å$ है।
141
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यदि $3$ परावैद्युतांक (dielectric constant) वाली एक परावैद्युत स्लैब को $1.5 \times 10^{-9} \pi \ N C^{-1}$ विद्युत क्षेत्र वाले संधारित्र की प्लेटों के बीच रखा जाता है,तो विद्युत विस्थापन (electric displacement) क्या होगा?
A
$125 \times 10^{-12} \ C m^{-2}$
B
$125 \times 10^{-9} \ C m^{-2}$
C
$250 \times 10^{-12} \ C m^{-2}$
D
$250 \times 10^{-9} \ C m^{-2}$

Solution

(A) विद्युत विस्थापन सदिश $D$ को $D = \epsilon E$ के रूप में परिभाषित किया जाता है,जहाँ $\epsilon$ माध्यम की विद्युतशीलता है और $E$ विद्युत क्षेत्र है।
दिया गया है कि परावैद्युतांक $K = 3$ है,इसलिए माध्यम की विद्युतशीलता $\epsilon = K \epsilon_0$ है,जहाँ $\epsilon_0 = 8.854 \times 10^{-12} \ F m^{-1}$ है।
विद्युत क्षेत्र $E = 1.5 \times 10^{-9} \pi \ N C^{-1}$ है।
सूत्र में इन मानों को रखने पर:
$D = K \epsilon_0 E$
$D = 3 \times (8.854 \times 10^{-12}) \times (1.5 \times 10^{-9} \pi)$
गणना की सुविधा के लिए $\epsilon_0 \approx \frac{1}{36\pi} \times 10^{-9} \ F m^{-1}$ का उपयोग करने पर:
$D = 3 \times (\frac{1}{36\pi} \times 10^{-9}) \times (1.5 \times 10^{-9} \pi)$
$D = 3 \times \frac{1}{36} \times 1.5 \times 10^{-18}$
$D = \frac{4.5}{36} \times 10^{-18} = 0.125 \times 10^{-18} \ C m^{-2} = 125 \times 10^{-21} \ C m^{-2}$.
142
PhysicsMediumMCQAP EAMCET · 2025
हवा में $9 \ cm$ की दूरी पर रखे गए दो बिंदु आवेशों के बीच का बल $98 \ N$ है। यदि दो आवेशों के बीच $4$ परावैद्युतांक और $6 \ cm$ मोटाई वाली एक परावैद्युत स्लैब और $9$ परावैद्युतांक और $3 \ cm$ मोटाई वाली दूसरी परावैद्युत स्लैब रखी जाती है,तो नया बल कितना होगा ($N$ में)?
A
$18$
B
$36$
C
$49$
D
$84$

Solution

(A) हवा में $r$ दूरी पर स्थित दो आवेशों $q_1$ और $q_2$ के बीच प्रारंभिक बल $F = \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \frac{q_1 q_2}{r^2} = 98 \ N$ है।
जब परावैद्युत स्लैब पेश की जाती हैं,तो आवेशों के बीच प्रभावी दूरी $r_{eff}$ बदल जाती है। प्रभावी दूरी $r_{eff} = (r - t_1 - t_2) + t_1\sqrt{K_1} + t_2\sqrt{K_2}$ द्वारा दी जाती है।
यहाँ,$r = 9 \ cm$,$t_1 = 6 \ cm$,$K_1 = 4$,$t_2 = 3 \ cm$,$K_2 = 9$ है।
$r_{eff} = (9 - 6 - 3) + 6\sqrt{4} + 3\sqrt{9} = 0 + 6(2) + 3(3) = 12 + 9 = 21 \ cm$ है।
नया बल $F'$ सूत्र $F' = F \left( \frac{r}{r_{eff}} \right)^2$ द्वारा प्राप्त होता है।
$F' = 98 \times \left( \frac{9}{21} \right)^2 = 98 \times \left( \frac{3}{7} \right)^2 = 98 \times \frac{9}{49} = 2 \times 9 = 18 \ N$ है।
143
PhysicsMediumMCQAP EAMCET · 2025
$1 \ kg$ द्रव्यमान वाले एक ठोस में $6 \times 10^{24}$ परमाणु हैं। यदि $0.005 \%$ परमाणुओं में से प्रत्येक परमाणु से एक इलेक्ट्रॉन हटा दिया जाए,तो ठोस द्वारा प्राप्त आवेश क्या होगा?
A
$+24 \ C$
B
$+48 \ C$
C
$+96 \ C$
D
$+60 \ C$

Solution

(B) परमाणुओं की कुल संख्या $N = 6 \times 10^{24}$ है।
जिन परमाणुओं से एक इलेक्ट्रॉन हटाया जाता है,उनकी संख्या $n = 0.005 \% \text{ of } N$ है।
$n = \frac{0.005}{100} \times 6 \times 10^{24} = 5 \times 10^{-5} \times 6 \times 10^{24} = 30 \times 10^{19} = 3 \times 10^{20}$ है।
चूंकि प्रत्येक परमाणु से एक इलेक्ट्रॉन हटाया जाता है,इसलिए हटाए गए इलेक्ट्रॉनों की कुल संख्या $3 \times 10^{20}$ है।
ठोस द्वारा प्राप्त आवेश $q = n \times e$ है,जहाँ $e = 1.6 \times 10^{-19} \ C$ है।
$q = (3 \times 10^{20}) \times (1.6 \times 10^{-19}) = 4.8 \times 10 = 48 \ C$ है।
चूंकि इलेक्ट्रॉन हटाए जाते हैं,इसलिए ठोस $+48 \ C$ का धनात्मक आवेश प्राप्त करता है।
144
PhysicsMediumMCQAP EAMCET · 2025
हवा में $1.5 \ m$ की दूरी पर स्थित दो बिंदु धनात्मक आवेशों का योग $25 \mu C$ है। यदि दोनों आवेशों के बीच स्थिर-वैद्युत बल $0.6 \ N$ है,तो दोनों आवेशों के बीच का अंतर क्या है ($\mu C$ में)?
A
$5$
B
$8$
C
$3$
D
$6$

Solution

(A) माना कि दो आवेश $q_1$ और $q_2$ हैं। दिया गया है कि $q_1 + q_2 = 25 \times 10^{-6} \ C$ और दूरी $r = 1.5 \ m$ है। स्थिर-वैद्युत बल का सूत्र $F = \frac{k q_1 q_2}{r^2}$ है,जहाँ $k = 9 \times 10^9 \ N \cdot m^2/C^2$ है। मान रखने पर: $0.6 = \frac{9 \times 10^9 \times q_1 q_2}{(1.5)^2}$। $q_1 q_2$ के लिए हल करने पर: $q_1 q_2 = \frac{0.6 \times 2.25}{9 \times 10^9} = 0.15 \times 10^{-9} = 150 \times 10^{-12} \ C^2$। हम जानते हैं कि $(q_1 - q_2)^2 = (q_1 + q_2)^2 - 4 q_1 q_2$। मान रखने पर: $(q_1 - q_2)^2 = (25 \times 10^{-6})^2 - 4(150 \times 10^{-12}) = 625 \times 10^{-12} - 600 \times 10^{-12} = 25 \times 10^{-12} \ C^2$। वर्गमूल लेने पर,$q_1 - q_2 = 5 \times 10^{-6} \ C = 5 \mu C$।
145
PhysicsMediumMCQAP EAMCET · 2025
$+8 \mu C$ और $-4 \mu C$ आवेश वाले समान त्रिज्या के दो चालक गोलों के बीच हवा में कुछ दूरी पर बल $F$ है। यदि गोलों को एक चालक तार से जोड़ा जाता है और कुछ समय बाद तार हटा दिया जाता है,तो दो चालक गोलों के बीच बल का परिमाण क्या होगा?
A
$F$
B
$F/2$
C
$F/8$
D
$F/4$

Solution

(C) प्रारंभ में,दो गोलों के बीच बल कूलम्ब के नियम द्वारा दिया जाता है: $F = k \frac{|q_1 q_2|}{r^2} = k \frac{|(+8 \mu C)(-4 \mu C)|}{r^2} = k \frac{32 \mu C^2}{r^2}$.
जब दो समान चालक गोलों को एक तार से जोड़ा जाता है,तो आवेश समान रूप से पुनर्वितरित हो जाते हैं क्योंकि उनकी त्रिज्या समान है।
प्रत्येक गोले पर नया आवेश $q' = \frac{q_1 + q_2}{2} = \frac{+8 \mu C - 4 \mu C}{2} = +2 \mu C$ होगा।
गोलों के बीच नया बल $F' = k \frac{|q' q'|}{r^2} = k \frac{|(+2 \mu C)(+2 \mu C)|}{r^2} = k \frac{4 \mu C^2}{r^2}$ है।
दोनों बलों की तुलना करने पर: $\frac{F'}{F} = \frac{4}{32} = \frac{1}{8}$.
अतः,$F' = \frac{F}{8}$.
146
PhysicsEasyMCQAP EAMCET · 2025
यदि $1.6 \times 10^{-19} \ C$ और $3.2 \times 10^{-19} \ C$ आवेश वाले दो कण $A$ और $B$ हवा में $3 \ cm$ की दूरी पर स्थित हैं,तो कण $B$ के कारण कण $A$ पर लगने वाले स्थिरवैद्युत बल का परिमाण क्या होगा?
A
$5.12 \times 10^{-22} \ N$
B
$5.12 \times 10^{-32} \ N$
C
$5.12 \times 10^{-25} \ N$
D
$5.12 \times 10^{-28} \ N$

Solution

(C) कूलम्ब के नियम के अनुसार,$r$ दूरी पर स्थित दो बिंदु आवेशों $q_1$ और $q_2$ के बीच स्थिरवैद्युत बल $F = k \frac{|q_1 q_2|}{r^2}$ होता है,जहाँ $k = 9 \times 10^9 \ N \cdot m^2/C^2$ है।
दिया गया है:
$q_1 = 1.6 \times 10^{-19} \ C$
$q_2 = 3.2 \times 10^{-19} \ C$
$r = 3 \ cm = 3 \times 10^{-2} \ m$
मान रखने पर:
$F = \frac{(9 \times 10^9) \times (1.6 \times 10^{-19}) \times (3.2 \times 10^{-19})}{(3 \times 10^{-2})^2}$
$F = \frac{9 \times 10^9 \times 5.12 \times 10^{-38}}{9 \times 10^{-4}}$
$F = 5.12 \times 10^{9-38+4} \ N$
$F = 5.12 \times 10^{-25} \ N$.
147
PhysicsEasyMCQAP EAMCET · 2025
$2 \times 10^{-10} \text{ C m}$ आघूर्ण (dipole moment) वाले एक विद्युत द्विध्रुव को $10^4 \text{ N C}^{-1}$ के एकसमान विद्युत क्षेत्र की दिशा के साथ $30^{\circ}$ के कोण पर रखा गया है। द्विध्रुव पर कार्य करने वाले बल आघूर्ण (torque) का परिमाण क्या है?
A
$10^{-6} \text{ N m}$
B
$10^{-5} \text{ N m}$
C
$10^{-4} \text{ N m}$
D
$10^{-3} \text{ N m}$

Solution

(A) एकसमान विद्युत क्षेत्र में रखे विद्युत द्विध्रुव पर कार्य करने वाले बल आघूर्ण $\tau$ का सूत्र है: $\tau = pE \sin \theta$।
दिया गया है:
द्विध्रुव आघूर्ण $p = 2 \times 10^{-10} \text{ C m}$।
विद्युत क्षेत्र $E = 10^4 \text{ N C}^{-1}$।
कोण $\theta = 30^{\circ}$।
सूत्र में मान रखने पर:
$\tau = (2 \times 10^{-10}) \times (10^4) \times \sin(30^{\circ})$।
चूंकि $\sin(30^{\circ}) = 0.5$ है:
$\tau = 2 \times 10^{-6} \times 0.5 = 1 \times 10^{-6} \text{ N m}$।
अतः,बल आघूर्ण का परिमाण $10^{-6} \text{ N m}$ है।
148
PhysicsEasyMCQAP EAMCET · 2025
$5 \ cm$ और $10 \ cm$ त्रिज्या वाले दो आवेशित चालक गोलों का पृष्ठीय आवेश घनत्व समान है। यदि छोटे गोले की सतह पर विद्युत क्षेत्र $E$ है,तो बड़े गोले की सतह पर विद्युत क्षेत्र क्या होगा?
A
$2 E$
B
$4 E$
C
$0.5 E$
D
$E$

Solution

(D) एक आवेशित चालक गोले की सतह पर विद्युत क्षेत्र $E = \frac{\sigma}{\epsilon_0}$ सूत्र द्वारा दिया जाता है,जहाँ $\sigma$ पृष्ठीय आवेश घनत्व है और $\epsilon_0$ मुक्त स्थान की विद्युतशीलता है।
चूँकि दोनों गोलों का पृष्ठीय आवेश घनत्व समान $(\sigma_1 = \sigma_2 = \sigma)$ है,इसलिए दोनों गोलों की सतह पर विद्युत क्षेत्र केवल पृष्ठीय आवेश घनत्व $\sigma$ और स्थिरांक $\epsilon_0$ पर निर्भर करता है।
अतः,बड़े गोले की सतह पर विद्युत क्षेत्र भी $E = \frac{\sigma}{\epsilon_0}$ होगा।
इस प्रकार,बड़े गोले की सतह पर विद्युत क्षेत्र छोटे गोले की सतह पर विद्युत क्षेत्र के बराबर,यानी $E$ होगा।
149
PhysicsMediumMCQAP EAMCET · 2025
$0.2 \ g$ द्रव्यमान और $2 \ C$ आवेश वाला एक कण $20 \ N \ C^{-1}$ के एकसमान विद्युत क्षेत्र में विरामावस्था से छोड़ा जाता है। $20 \ cm$ की दूरी तय करने के बाद कण की गतिज ऊर्जा क्या होगी ($J$ में)?
A
$10$
B
$8$
C
$18$
D
$12$

Solution

(B) दिया गया है: द्रव्यमान $m = 0.2 \ g = 0.2 \times 10^{-3} \ kg$,आवेश $q = 2 \ C$,विद्युत क्षेत्र $E = 20 \ N \ C^{-1}$,दूरी $d = 20 \ cm = 0.2 \ m$,प्रारंभिक वेग $u = 0$.
कण पर कार्य करने वाला बल $F = qE = 2 \times 20 = 40 \ N$ है।
कार्य-ऊर्जा प्रमेय के अनुसार,विद्युत बल द्वारा किया गया कार्य गतिज ऊर्जा में परिवर्तन के बराबर होता है।
किया गया कार्य $W = F \times d = 40 \ N \times 0.2 \ m = 8 \ J$.
चूंकि कण विरामावस्था से शुरू होता है,इसलिए प्रारंभिक गतिज ऊर्जा $0$ है।
अतः,अंतिम गतिज ऊर्जा $K.E. = W = 8 \ J$ होगी।
150
PhysicsEasyMCQAP EAMCET · 2025
एक क्षेत्र में,विद्युत क्षेत्र $\overrightarrow{E}=(3 \hat{i}+5 \hat{j}+7 \hat{k}) \text{ NC}^{-1}$ द्वारा दिया गया है। $yz$-तल में $3 \text{ m}^2$ क्षेत्रफल वाली सतह से गुजरने वाला विद्युत फ्लक्स ($SI$ इकाइयों में) क्या है?
A
$21$
B
$15$
C
$12$
D
$9$

Solution

(D) सतह से गुजरने वाला विद्युत फ्लक्स $\Phi$,विद्युत क्षेत्र सदिश $\overrightarrow{E}$ और क्षेत्रफल सदिश $\overrightarrow{A}$ के अदिश गुणनफल (dot product) द्वारा दिया जाता है।
$\Phi = \overrightarrow{E} \cdot \overrightarrow{A}$
दिया गया है,$\overrightarrow{E} = (3 \hat{i} + 5 \hat{j} + 7 \hat{k}) \text{ NC}^{-1}$.
सतह $yz$-तल में है,इसलिए इसका क्षेत्रफल सदिश $\overrightarrow{A}$,$x$-अक्ष की दिशा में होगा।
अतः,$\overrightarrow{A} = 3 \hat{i} \text{ m}^2$.
अब,अदिश गुणनफल की गणना करें:
$\Phi = (3 \hat{i} + 5 \hat{j} + 7 \hat{k}) \cdot (3 \hat{i})$
$\Phi = (3 \times 3) (\hat{i} \cdot \hat{i}) + (5 \times 0) + (7 \times 0)$
$\Phi = 9 \text{ Nm}^2\text{C}^{-1}$.
अतः,सही विकल्प $D$ है।

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