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Composition of Nucleus, Size of the Nucleus, Nuclear force Questions in Hindi

Class 12 Physics · Nuclei · Composition of Nucleus, Size of the Nucleus, Nuclear force

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Showing 50 of 295 questions in Hindi

151
EasyMCQ
नाभिक की त्रिज्या के सूत्र में प्रयुक्त $R_0$ स्थिरांक का मान लिखिए।
A
$1.1 \times 10^{-15} \ m$
B
$1.2 \times 10^{-15} \ m$
C
$1.5 \times 10^{-15} \ m$
D
$1.0 \times 10^{-15} \ m$

Solution

(B) नाभिक की त्रिज्या का सूत्र $R = R_0 A^{1/3}$ है,जहाँ $A$ द्रव्यमान संख्या है।
यहाँ,$R_0$ एक आनुभविक स्थिरांक है।
$R_0$ का मान लगभग $1.2 \times 10^{-15} \ m$ या $1.2 \ \text{fm}$ (फेम्टोमीटर) होता है।
152
Easy
दिखाइए कि नाभिक का आयतन उसके परमाणु द्रव्यमान संख्या $A$ के समानुपाती होता है।

Solution

(N/A) द्रव्यमान संख्या $A$ वाले नाभिक की त्रिज्या $R$ को अनुभवजन्य संबंध द्वारा दिया जाता है: $R = R_0 A^{1/3}$,जहाँ $R_0$ एक स्थिरांक है जिसका मान लगभग $1.2 \times 10^{-15} \ m$ है।
नाभिक को गोलाकार मानते हुए,इसका आयतन $V$ सूत्र द्वारा दिया जाता है: $V = \frac{4}{3} \pi R^3$.
आयतन के सूत्र में $R$ का मान प्रतिस्थापित करने पर:
$V = \frac{4}{3} \pi (R_0 A^{1/3})^3$
$V = \frac{4}{3} \pi R_0^3 A$.
चूंकि $\frac{4}{3}$,$\pi$,और $R_0^3$ स्थिरांक हैं,हम लिख सकते हैं:
$V \propto A$.
इस प्रकार,नाभिक का आयतन उसकी परमाणु द्रव्यमान संख्या $A$ के सीधे समानुपाती होता है।
153
EasyMCQ
नाभिक का घनत्व पानी के घनत्व से कितने गुना अधिक होता है?
A
$10^{14}$
B
$10^{17}$
C
$10^{12}$
D
$10^{10}$

Solution

(A) नाभिक का घनत्व सभी नाभिकों के लिए लगभग स्थिर होता है और इसे $\rho_{n} \approx 2.3 \times 10^{17} \ kg/m^3$ द्वारा दिया जाता है।
पानी का घनत्व $\rho_{w} = 10^3 \ kg/m^3$ होता है।
यह पता लगाने के लिए कि नाभिक का घनत्व पानी के घनत्व से कितने गुना अधिक है, हम अनुपात की गणना करते हैं:
$\text{अनुपात} = \frac{\rho_{n}}{\rho_{w}} = \frac{2.3 \times 10^{17}}{10^3} = 2.3 \times 10^{14}$।
निकटतम परिमाण की कोटि में, नाभिक का घनत्व पानी के घनत्व का लगभग $10^{14}$ गुना होता है।
154
Easy
नाभिक की औसत त्रिज्या के लिए सूत्र लिखिए।

Solution

(N/A) नाभिक की त्रिज्या $R$ उसके द्रव्यमान संख्या $A$ से निम्नलिखित प्रायोगिक सूत्र द्वारा संबंधित है:
$R = R_0 A^{1/3}$
जहाँ:
$R$ नाभिक की त्रिज्या है।
$A$ द्रव्यमान संख्या (प्रोटॉन और न्यूट्रॉन की कुल संख्या) है।
$R_0$ एक स्थिरांक है,जिसका मान लगभग $1.2 \times 10^{-15} \ m$ या $1.2 \ fm$ (फेम्टोमीटर) के बराबर होता है।
155
Difficult
नाभिकीय बल और इसकी विशेषताओं का वर्णन कीजिए।

Solution

(N/A) नाभिक परमाणु का केंद्रीय भाग होता है। इसमें धनावेशित प्रोटॉन और विद्युत रूप से उदासीन न्यूट्रॉन होते हैं।
दो प्रोटॉनों के बीच कूलम्ब प्रतिकर्षण बल सभी दूरियों पर कार्य करता है,चाहे वे छोटी हों या बड़ी। हालाँकि,न्यूक्लियॉन नाभिक के छोटे से क्षेत्र में मजबूती से बंधे होते हैं।
यह दर्शाता है कि नाभिक में न्यूक्लियॉनों के बीच कोई अन्य आकर्षण बल अवश्य कार्य कर रहा होगा,जो कूलम्ब प्रतिकर्षण बल के प्रभाव को दूर करने और उन्हें एक साथ बांधे रखने के लिए पर्याप्त रूप से शक्तिशाली हो।
नाभिक में दो प्रोटॉनों,दो न्यूट्रॉनों,या एक प्रोटॉन और एक न्यूट्रॉन के बीच कार्य करने वाले बल को नाभिकीय (या प्रबल) बल कहा जाता है।
प्रति न्यूक्लियॉन बंधन ऊर्जा की स्थिरता को इस बल की लघु-परास प्रकृति के संदर्भ में समझा जा सकता है।
$1930$ से $1950$ के बीच किए गए प्रयोगों से प्राप्त नाभिकीय बल की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
$(i)$ नाभिकीय बल आवेशों के बीच कार्य करने वाले कूलम्ब बल या द्रव्यमानों के बीच कार्य करने वाले गुरुत्वाकर्षण बल की तुलना में बहुत अधिक शक्तिशाली होता है। यही कारण है कि यह नाभिक में प्रोटॉन और न्यूट्रॉन को बांधे रखता है।
$(ii)$ दो न्यूक्लियॉनों के बीच नाभिकीय बल तब तेजी से शून्य हो जाता है जब उनकी दूरी कुछ फेमटोमीटर $(fm)$ से अधिक हो जाती है। यह मध्यम या बड़े आकार के नाभिक में बलों की संतृप्ति की ओर ले जाता है,जो प्रति न्यूक्लियॉन बंधन ऊर्जा की स्थिरता का कारण है।
$(iii)$ $r_0$ से अधिक दूरी के लिए बल आकर्षक होता है और $r_0$ से कम दूरी के लिए बल अत्यधिक प्रतिकर्षी होता है,जहाँ $r_0$ लगभग $0.8 \ fm$ है।
Solution diagram
156
EasyMCQ
दो न्यूट्रॉन के बीच किस प्रकार का बल कार्य करता है?
A
केवल गुरुत्वाकर्षण बल
B
केवल स्थिर-वैद्युत बल
C
नाभिकीय बल और गुरुत्वाकर्षण बल
D
स्थिर-वैद्युत बल और नाभिकीय बल

Solution

(C) दो न्यूट्रॉन के बीच मुख्य रूप से प्रबल नाभिकीय बल कार्य करता है,जो कम दूरी $(< 10^{-15} \ m)$ पर आकर्षण का बल होता है।
इसके अतिरिक्त,उनके द्रव्यमान के कारण उनके बीच गुरुत्वाकर्षण बल भी कार्य करता है,हालांकि यह नाभिकीय बल की तुलना में अत्यंत दुर्बल होता है।
चूंकि न्यूट्रॉन विद्युत रूप से उदासीन होते हैं,इसलिए उनके बीच कोई स्थिर-वैद्युत बल नहीं होता है।
अतः,दो न्यूट्रॉन के बीच नाभिकीय बल और गुरुत्वाकर्षण बल दोनों कार्य करते हैं।
157
Easy
नाभिकीय बल को परिभाषित कीजिए।

Solution

(N/A) नाभिकीय बल वह प्रबल आकर्षण बल है जो परमाणु के नाभिक के भीतर न्यूक्लियॉन (प्रोटॉन और न्यूट्रॉन) के बीच कार्य करता है।
यह धनावेशित प्रोटॉन के बीच के स्थिर-वैद्युत प्रतिकर्षण बल को पार करके न्यूक्लियॉन को एक साथ बांधकर एक स्थिर नाभिक बनाने के लिए जिम्मेदार है।
इसकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:
$1$. यह एक लघु-परास बल है,जो केवल लगभग $1-2 \ fm$ $(1 \ fm = 10^{-15} \ m)$ की दूरी तक ही प्रभावी होता है।
$2$. यह विद्युत-चुंबकीय बल और गुरुत्वाकर्षण बल की तुलना में बहुत अधिक शक्तिशाली होता है।
$3$. यह आवेश से स्वतंत्र है,जिसका अर्थ है कि यह प्रोटॉन-प्रोटॉन,न्यूट्रॉन-न्यूट्रॉन और प्रोटॉन-न्यूट्रॉन युग्मों के बीच समान रूप से कार्य करता है।
158
EasyMCQ
क्या नाभिकीय बल लघु परास का होता है या दीर्घ परास का?
A
लघु परास
B
दीर्घ परास
C
लघु और दीर्घ दोनों परास
D
उपरोक्त में से कोई नहीं

Solution

(A) नाभिकीय बल एक प्रबल आकर्षण बल है जो नाभिक के भीतर न्यूक्लियॉन (प्रोटॉन और न्यूट्रॉन) के बीच कार्य करता है।
यह एक लघु-परास (short-range) बल है,जिसका अर्थ है कि यह केवल बहुत छोटी दूरियों पर कार्य करता है,जो आमतौर पर $10^{-15} \ m$ (या $1 \ fm$) की कोटि का होता है।
इस परास के बाहर,बल बहुत तेजी से शून्य हो जाता है,यही कारण है कि यह विद्युत-चुंबकीय या गुरुत्वाकर्षण बलों के विपरीत,पूरे परमाणु की संरचना को प्रभावित नहीं करता है।
159
EasyMCQ
न्यूक्लिऑन्स के बीच स्थितिज ऊर्जा का न्यूनतम मान किस दूरी पर प्राप्त होता है ($fm$ में)?
A
$0.8$
B
$1.5$
C
$2.5$
D
$3.0$

Solution

(A) दो न्यूक्लिऑन्स के बीच नाभिकीय स्थितिज ऊर्जा उनके बीच की दूरी $r$ पर निर्भर करती है।
नाभिकीय बल मॉडल के अनुसार,कम दूरी पर स्थितिज ऊर्जा अत्यधिक आकर्षक होती है और पाउली के अपवर्जन सिद्धांत तथा हार्ड-कोर प्रतिकर्षण के कारण बहुत कम दूरी पर यह प्रतिकर्षी हो जाती है।
स्थितिज ऊर्जा वक्र लगभग $0.8 \ fm$ की दूरी पर अपना न्यूनतम मान प्राप्त करता है।
यह दूरी उस संतुलन स्थिति के अनुरूप है जहाँ न्यूक्लिऑन्स के बीच का कुल बल शून्य होता है।
160
Easy
रेडियोधर्मिता को एक परमाणु (नाभिकीय) घटना क्यों माना जाता है?

Solution

(N/A) रेडियोधर्मिता को एक नाभिकीय घटना माना जाता है क्योंकि इसमें एक अस्थिर परमाणु नाभिक का स्वतःस्फूर्त विघटन शामिल होता है।
$1$. यह प्रक्रिया नाभिक के भीतर से उत्पन्न होती है,जहाँ न्यूट्रॉन और प्रोटॉन का अनुपात स्थिरता के लिए अनुकूल नहीं होता है।
$2$. अल्फा कणों,बीटा कणों या गामा किरणों का उत्सर्जन नाभिक के अंदर न्यूक्लियॉन (प्रोटॉन और न्यूट्रॉन) के पुनर्व्यवस्था के कारण होता है ताकि वह अधिक स्थिर अवस्था प्राप्त कर सके।
$3$. तापमान,दबाव,रासायनिक अवस्था या विद्युत चुम्बकीय क्षेत्र जैसे बाहरी कारक रेडियोधर्मी क्षय की दर को प्रभावित नहीं करते हैं,जो यह साबित करता है कि यह प्रक्रिया परमाणु की इलेक्ट्रॉनिक संरचना से स्वतंत्र है और पूरी तरह से नाभिक तक ही सीमित है।
161
Medium
स्थायी नाभिक में प्रोटॉन की संख्या कभी भी न्यूट्रॉन की संख्या से अधिक क्यों नहीं होती है?

Solution

(N/A) नाभिक की स्थिरता आकर्षक नाभिकीय बल और प्रतिकर्षी स्थिर-वैद्युत बल के बीच संतुलन द्वारा निर्धारित होती है। नाभिकीय बल केवल बहुत कम दूरी पर न्यूक्लियॉन (प्रोटॉन और न्यूट्रॉन) के बीच कार्य करता है। यदि प्रोटॉन की संख्या न्यूट्रॉन की संख्या से काफी अधिक हो जाती है,तो प्रोटॉन के बीच कार्य करने वाला लंबी दूरी का स्थिर-वैद्युत प्रतिकर्षण बल,कम दूरी के आकर्षक नाभिकीय बल से अधिक शक्तिशाली हो जाता है। परिणामस्वरूप,नाभिक अस्थिर हो जाता है और अधिक स्थिर विन्यास प्राप्त करने के लिए रेडियोधर्मी क्षय की प्रक्रिया से गुजरता है।
162
Medium
क्या न्यूक्लियॉन मौलिक कण हैं,या वे और भी छोटे भागों से बने हैं? इसका पता लगाने का एक तरीका न्यूक्लियॉन की जांच करना है,ठीक वैसे ही जैसे रदरफोर्ड ने परमाणु की जांच की थी। न्यूक्लियॉन की जांच करने में सक्षम होने के लिए एक इलेक्ट्रॉन की गतिज ऊर्जा क्या होनी चाहिए? मान लें कि न्यूक्लियॉन का व्यास लगभग $10^{-15} \ m$ है।

Solution

(N/A) न्यूक्लियॉन मौलिक कण नहीं हैं; वे 'क्वार्क' नामक छोटे कणों से बने होते हैं। एक प्रोटॉन $2$ अप क्वार्क और $1$ डाउन क्वार्क $(uud)$ से बना होता है,जबकि एक न्यूट्रॉन $1$ अप क्वार्क और $2$ डाउन क्वार्क $(udd)$ से बना होता है।
न्यूक्लियॉन की जांच करने के लिए,आपतित इलेक्ट्रॉन की तरंग दैर्ध्य $\lambda$ न्यूक्लियॉन के व्यास $d$ $(d = 10^{-15} \ m)$ से कम या उसके बराबर होनी चाहिए।
डी-ब्रोग्ली संबंध का उपयोग करते हुए,$\lambda = h/p$। उच्च-ऊर्जा इलेक्ट्रॉनों के लिए,गतिज ऊर्जा $K$ कुल ऊर्जा $E = pc$ के लगभग बराबर होती है (क्योंकि विराम द्रव्यमान ऊर्जा नगण्य है)।
अतः,$K = pc = hc/\lambda$।
$\lambda = d = 10^{-15} \ m$ रखने पर:
$K = \frac{(6.625 \times 10^{-34} \ J \cdot s) \times (3 \times 10^8 \ m/s)}{10^{-15} \ m} = 1.9875 \times 10^{-10} \ J$।
इलेक्ट्रॉन वोल्ट में परिवर्तित करने पर:
$K = \frac{1.9875 \times 10^{-10} \ J}{1.6 \times 10^{-19} \ J/eV} \approx 1.242 \times 10^9 \ eV = 1.242 \ GeV$।
इसलिए,न्यूक्लियॉन की आंतरिक संरचना की जांच करने के लिए इलेक्ट्रॉन के पास कम से कम $1.242 \ GeV$ की गतिज ऊर्जा होनी चाहिए।
163
Medium
प्रोटॉन $Z = 2, 8, 20, 28, 50, 82$ और न्यूट्रॉन $N = 2, 8, 20, 28, 50, 82, 126$ की जादुई संख्याओं (magic numbers) वाले नाभिक बहुत स्थिर पाए जाते हैं।
$(i)$ $^{120}Sn$ $(Z = 50)$ और $^{121}Sb$ $(Z = 51)$ के लिए प्रोटॉन पृथक्करण ऊर्जा $S_p$ की गणना करके इसे सत्यापित करें। किसी न्यूक्लाइड के लिए प्रोटॉन पृथक्करण ऊर्जा वह न्यूनतम ऊर्जा है जो उस न्यूक्लाइड के नाभिक से सबसे कम मजबूती से बंधे प्रोटॉन को अलग करने के लिए आवश्यक है। यह $S_p = (M_{Z-1, N} + M_H - M_{Z, N})c^2$ द्वारा दी जाती है। दिया गया है:
$^{119}In = 118.9058 \ u, ^{120}Sn = 119.902199 \ u, ^{121}Sb = 120.903824 \ u, ^1H = 1.0078252 \ u$
$(ii)$ जादुई संख्याओं का अस्तित्व क्या दर्शाता है?

Solution

(N/A) $(i)$ $^{120}Sn$ के लिए:
$S_p = [m(^{119}In) + m(^1H) - m(^{120}Sn)]c^2$
$S_p = (118.9058 + 1.0078252 - 119.902199) \times 931.5 \ MeV/u \approx 10.64 \ MeV$
$^{121}Sb$ के लिए:
$S_p = [m(^{120}Sn) + m(^1H) - m(^{121}Sb)]c^2$
$S_p = (119.902199 + 1.0078252 - 120.903824) \times 931.5 \ MeV/u \approx 5.77 \ MeV$
निष्कर्ष: चूंकि $(S_p)_{Sn} > (S_p)_{Sb}$,इसलिए $^{120}Sn$ अधिक स्थिर है क्योंकि $Z=50$ एक जादुई संख्या है।
$(ii)$ जादुई संख्याओं का अस्तित्व यह दर्शाता है कि नाभिक में न्यूक्लियॉन (प्रोटॉन और न्यूट्रॉन) परमाणु में इलेक्ट्रॉनों की तरह ही 'शेल संरचना' (कवच संरचना) में व्यवस्थित होते हैं। यह प्रति न्यूक्लियॉन बंधन ऊर्जा के ग्राफ में देखे गए शिखरों (peaks) की भी व्याख्या करता है।
164
EasyMCQ
परमाणु की त्रिज्या $1\,\mathring{A}$ की कोटि की है और नाभिक की त्रिज्या $1$ फर्मी की कोटि की है। नाभिक के आयतन की तुलना में परमाणु का आयतन कितने गुना अधिक है?
A
$10^{10}$
B
$10^{15}$
C
$10^{5}$
D
$10^{20}$

Solution

(B) परमाणु की त्रिज्या $R_{1} = 1\,\mathring{A} = 10^{-10}\,\text{m}$ है।
नाभिक की त्रिज्या $R_{2} = 1\,\text{fermi} = 10^{-15}\,\text{m}$ है।
परमाणु का आयतन $V_{1} = \frac{4}{3} \pi R_{1}^{3}$ है।
नाभिक का आयतन $V_{2} = \frac{4}{3} \pi R_{2}^{3}$ है।
आयतन का अनुपात $\frac{V_{1}}{V_{2}} = \frac{\frac{4}{3} \pi R_{1}^{3}}{\frac{4}{3} \pi R_{2}^{3}} = \left(\frac{R_{1}}{R_{2}}\right)^{3}$ द्वारा दिया जाता है।
मान रखने पर: $\frac{V_{1}}{V_{2}} = \left(\frac{10^{-10}}{10^{-15}}\right)^{3} = (10^{5})^{3} = 10^{15}$।
अतः,परमाणु का आयतन नाभिक के आयतन से $10^{15}$ गुना अधिक है।
165
EasyMCQ
यूनिफाइड एटॉमिक मास यूनिट $(amu)$ को $kg$ में व्यक्त कीजिए।
A
$1.66 \times 10^{-27} \ kg$
B
$1.66 \times 10^{-24} \ kg$
C
$1.66 \times 10^{-31} \ kg$
D
$1.66 \times 10^{-20} \ kg$

Solution

(A) एक एटॉमिक मास यूनिट $(amu)$ को ${ }_{6} C^{12}$ परमाणु के द्रव्यमान के $\frac{1}{12}$ भाग के रूप में परिभाषित किया गया है।
${ }_{6} C^{12}$ परमाणु के एक मोल का द्रव्यमान $= 12 \ g = 12 \times 10^{-3} \ kg$ है।
एक मोल में परमाणुओं की संख्या आवोगाद्रो संख्या के बराबर होती है,$N_A = 6.022 \times 10^{23} \ atoms/mol$.
एक ${ }_{6} C^{12}$ परमाणु का द्रव्यमान $= \frac{12 \times 10^{-3} \ kg}{6.022 \times 10^{23}} \approx 1.9926 \times 10^{-26} \ kg$.
$1 \ amu = \frac{1}{12} \times (\text{एक } { }_{6} C^{12} \text{ परमाणु का द्रव्यमान})$.
$1 \ amu = \frac{1}{12} \times \frac{12 \times 10^{-3} \ kg}{6.022 \times 10^{23}} = \frac{10^{-3}}{6.022 \times 10^{23}} \ kg$.
$1 \ amu \approx 1.66 \times 10^{-27} \ kg$.
166
Medium
केंद्रीय बल और गैर-केंद्रीय बल का एक-एक उदाहरण दीजिए।

Solution

(N/A) केंद्रीय बल वह बल है जो दो वस्तुओं के केंद्रों को जोड़ने वाली रेखा के अनुदिश कार्य करता है। उदाहरण: दो द्रव्यमानों के बीच गुरुत्वाकर्षण बल या दो बिंदु आवेशों के बीच स्थिर-वैद्युत बल।
गैर-केंद्रीय बल वह बल है जो दो वस्तुओं के केंद्रों को जोड़ने वाली रेखा के अनुदिश कार्य नहीं करता है। उदाहरण: नाभिकीय बल या दो धारावाही लूपों के बीच कार्य करने वाला चुंबकीय बल।
167
MediumMCQ
$A$ द्रव्यमान संख्या वाले एक नाभिक की त्रिज्या $R$ का अनुमान $R = (1.3 \times 10^{-15}) A^{1/3} \; m$ सूत्र द्वारा लगाया जा सकता है। इससे यह निष्कर्ष निकलता है कि नाभिक का द्रव्यमान घनत्व किस कोटि का है? $(M_{\text{prot}} \cong M_{\text{neut}} = 1.67 \times 10^{-27} \; kg)$
A
$10^{24} \; kg \; m^{-3}$
B
$10^{3} \; kg \; m^{-3}$
C
$10^{17} \; kg \; m^{-3}$
D
$10^{10} \; kg \; m^{-3}$

Solution

(C) नाभिक का द्रव्यमान लगभग $M = A \times M_{\text{nucleon}}$ होता है,जहाँ $M_{\text{nucleon}} \cong 1.67 \times 10^{-27} \; kg$ है।
नाभिक का आयतन $V = \frac{4}{3} \pi R^3$ होता है।
$R = R_0 A^{1/3}$ प्रतिस्थापित करने पर,जहाँ $R_0 = 1.3 \times 10^{-15} \; m$,हमें $V = \frac{4}{3} \pi (R_0 A^{1/3})^3 = \frac{4}{3} \pi R_0^3 A$ प्राप्त होता है।
घनत्व $\rho = \frac{M}{V} = \frac{A \times M_{\text{nucleon}}}{\frac{4}{3} \pi R_0^3 A} = \frac{M_{\text{nucleon}}}{\frac{4}{3} \pi R_0^3}$ द्वारा दिया जाता है।
मान रखने पर: $\rho = \frac{1.67 \times 10^{-27}}{\frac{4}{3} \times 3.14 \times (1.3 \times 10^{-15})^3} \cong 1.8 \times 10^{17} \; kg \; m^{-3}$।
अतः,घनत्व की कोटि $10^{17} \; kg \; m^{-3}$ है।
168
MediumMCQ
$189$ द्रव्यमान संख्या वाला एक नाभिक $125$ और $64$ द्रव्यमान संख्या वाले दो नाभिकों में विभाजित हो जाता है। दोनों संतति नाभिकों की त्रिज्याओं का अनुपात क्या है?
A
$4: 5$
B
$5: 4$
C
$25: 16$
D
$1: 1$

Solution

(B) द्रव्यमान संख्या वाले नाभिक की त्रिज्या $R$ का सूत्र है: $R = R_{0} A^{1/3}$, जहाँ $R_{0}$ एक नियतांक है।
$125$ और $64$ द्रव्यमान संख्या वाले दो संतति नाभिकों के लिए, उनकी त्रिज्याएँ $R_{1}$ और $R_{2}$ इस प्रकार हैं:
$R_{1} = R_{0} (125)^{1/3} = R_{0} \times 5$
$R_{2} = R_{0} (64)^{1/3} = R_{0} \times 4$
अतः, त्रिज्याओं का अनुपात है:
$\frac{R_{1}}{R_{2}} = \frac{R_{0} (125)^{1/3}}{R_{0} (64)^{1/3}} = \frac{5}{4}$
इस प्रकार, अनुपात $5: 4$ है।
169
MediumMCQ
निम्नलिखित में से कौन सा चित्र $\ln \left(\frac{R}{R_{0}}\right)$ का $\ln A$ के साथ परिवर्तन दर्शाता है (जहाँ $R =$ नाभिक की त्रिज्या और $A =$ इसकी द्रव्यमान संख्या है)?
A
Option A
B
Option B
C
Option C
D
Option D

Solution

(B) नाभिक की त्रिज्या को इस संबंध द्वारा दिया जाता है: $R = R_{0} A^{1/3}$,जहाँ $R_{0}$ एक स्थिरांक है और $A$ द्रव्यमान संख्या है।
दोनों पक्षों का प्राकृतिक लघुगणक (natural logarithm) लेने पर:
$\ln \left(\frac{R}{R_{0}}\right) = \ln (A^{1/3})$
लघुगणक के गुणधर्म $\ln(x^n) = n \ln(x)$ का उपयोग करने पर,हमें प्राप्त होता है:
$\ln \left(\frac{R}{R_{0}}\right) = \frac{1}{3} \ln A$
यह समीकरण $y = mx$ के रूप में है,जो मूल बिंदु से गुजरने वाली और $1/3$ ढाल वाली एक सीधी रेखा को दर्शाता है।
इसलिए,$\ln \left(\frac{R}{R_{0}}\right)$ बनाम $\ln A$ का ग्राफ एक सीधी रेखा है।
Solution diagram
170
MediumMCQ
दो नाभिकों की द्रव्यमान संख्या का अनुपात $4: 3$ है। उनके नाभिकीय घनत्व का अनुपात क्या होगा?
A
$4: 3$
B
$\left(\frac{3}{4}\right)^{\frac{1}{3}}$
C
$1: 1$
D
$\left(\frac{4}{3}\right)^{\frac{1}{3}}$

Solution

(C) नाभिक की त्रिज्या $R = R_{0} A^{\frac{1}{3}}$ द्वारा दी जाती है,जहाँ $A$ द्रव्यमान संख्या है और $R_{0}$ एक स्थिरांक है।
नाभिक का घनत्व $\rho$ नाभिक के द्रव्यमान और उसके आयतन के अनुपात के रूप में परिभाषित होता है।
$\rho = \frac{\text{नाभिक का द्रव्यमान}}{\text{नाभिक का आयतन}} = \frac{m \times A}{\frac{4}{3} \pi R^{3}}$,जहाँ $m$ न्यूक्लियॉन (प्रोटॉन या न्यूट्रॉन) का औसत द्रव्यमान है।
$R$ का मान रखने पर:
$\rho = \frac{m \times A}{\frac{4}{3} \pi (R_{0} A^{\frac{1}{3}})^{3}} = \frac{m \times A}{\frac{4}{3} \pi R_{0}^{3} A}$.
इस समीकरण को सरल करने पर,$A$ पद कट जाते हैं:
$\rho = \frac{m}{\frac{4}{3} \pi R_{0}^{3}}$.
चूंकि $\rho$ द्रव्यमान संख्या $A$ से स्वतंत्र है,इसलिए नाभिकीय घनत्व सभी नाभिकों के लिए स्थिर रहता है।
अतः,दो नाभिकों के नाभिकीय घनत्व का अनुपात $1: 1$ है।
171
MediumMCQ
निम्नलिखित कथनों को पढ़ें:
$(A)$ नाभिक का आयतन द्रव्यमान संख्या के सीधे आनुपातिक होता है।
$(B)$ नाभिक का आयतन द्रव्यमान संख्या से स्वतंत्र होता है।
$(C)$ नाभिक का घनत्व द्रव्यमान संख्या के सीधे आनुपातिक होता है।
$(D)$ नाभिक का घनत्व द्रव्यमान संख्या के घनमूल के सीधे आनुपातिक होता है।
$(E)$ नाभिक का घनत्व द्रव्यमान संख्या से स्वतंत्र होता है।
निम्नलिखित विकल्पों में से सही विकल्प चुनें।
A
केवल $(A)$ और $(D)$।
B
केवल $(A)$ और $(E)$।
C
केवल $(B)$ और $(E)$।
D
केवल $(A)$ और $(C)$।

Solution

(B) नाभिक की त्रिज्या $R = R_0 A^{1/3}$ द्वारा दी जाती है,जहाँ $A$ द्रव्यमान संख्या है।
नाभिक का आयतन $V$,$V = \frac{4}{3} \pi R^3 = \frac{4}{3} \pi (R_0 A^{1/3})^3 = \frac{4}{3} \pi R_0^3 A$ द्वारा दिया जाता है।
चूंकि $\frac{4}{3} \pi R_0^3$ एक स्थिरांक है,इसलिए आयतन $V$ द्रव्यमान संख्या $A$ के सीधे आनुपातिक है। अतः,कथन $(A)$ सही है।
नाभिक का घनत्व $\rho$,$\rho = \frac{\text{द्रव्यमान}}{\text{आयतन}} = \frac{m A}{V}$ द्वारा दिया जाता है,जहाँ $m$ एक न्यूक्लियॉन का औसत द्रव्यमान है।
$V \propto A$ प्रतिस्थापित करने पर,हमें $\rho = \frac{m A}{k A} = \frac{m}{k}$ प्राप्त होता है,जहाँ $k$ एक स्थिरांक है।
चूंकि $\rho$ एक स्थिरांक है,नाभिक का घनत्व द्रव्यमान संख्या $A$ से स्वतंत्र है। अतः,कथन $(E)$ सही है।
इसलिए,कथन $(A)$ और $(E)$ सही हैं।
172
MediumMCQ
निम्नलिखित परमाणु अभिक्रियाओं पर विचार करें:
$I$. ${ }_{7}^{14} N +{ }_{2}^{4} He \longrightarrow{ }_{8}^{17} O + X$
$II$. ${ }_{4}^{9} Be +{ }_{2}^{4} He \longrightarrow{ }_{6}^{12} C + Y$
तो,
A
$X$ और $Y$ दोनों प्रोटॉन हैं
B
$X$ और $Y$ दोनों न्यूट्रॉन हैं
C
$X$ एक प्रोटॉन है और $Y$ एक न्यूट्रॉन है
D
$X$ एक न्यूट्रॉन है और $Y$ एक प्रोटॉन है

Solution

(C) $X$ और $Y$ ज्ञात करने के लिए,हम दोनों अभिक्रियाओं पर परमाणु क्रमांक $(Z)$ और द्रव्यमान संख्या $(A)$ के संरक्षण के नियम को लागू करते हैं।
अभिक्रिया $I$ के लिए: ${ }_{7}^{14} N +{ }_{2}^{4} He \longrightarrow{ }_{8}^{17} O + X$
$Z$ का योग: $7 + 2 = 8 + Z_X \implies Z_X = 1$
$A$ का योग: $14 + 4 = 17 + A_X \implies A_X = 1$
अतः,$X$ एक ${ }_{1}^{1} H$ (प्रोटॉन) है।
अभिक्रिया $II$ के लिए: ${ }_{4}^{9} Be +{ }_{2}^{4} He \longrightarrow{ }_{6}^{12} C + Y$
$Z$ का योग: $4 + 2 = 6 + Z_Y \implies Z_Y = 0$
$A$ का योग: $9 + 4 = 12 + A_Y \implies A_Y = 1$
अतः,$Y$ एक ${ }_{0}^{1} n$ (न्यूट्रॉन) है।
इसलिए,$X$ एक प्रोटॉन है और $Y$ एक न्यूट्रॉन है।
173
AdvancedMCQ
नीचे तीन परमाण्वीय कणों: इलेक्ट्रॉन $(e^{-})$,प्रोटॉन $(p^{+})$ और न्यूट्रॉन $(n)$ के लिए मूल बिंदु $O$ पर स्थित नाभिक की उपस्थिति में स्थितिज ऊर्जा $V(r)$ बनाम दूरी $r$ के तीन आरेख दिए गए हैं। नाभिक की त्रिज्या $r_0$ है। $V$-अक्ष पर पैमाना सभी आकृतियों के लिए समान नहीं हो सकता है। प्रत्येक आरेख का उसके संगत परमाण्वीय कण के साथ सही युग्म है
Question diagram
A
$(1, n), (2, p^{+}), (3, e^{-})$
B
$(1, p^{+}), (2, e^{-}), (3, n)$
C
$(1, e^{-}), (2, p^{+}), (3, n)$
D
$(1, p^{+}), (2, n), (3, e^{-})$

Solution

(A) इलेक्ट्रॉन और नाभिक के युग्म के लिए,स्थितिज ऊर्जा $V(r) = \frac{K(-e)(+Ze)}{r} = -\frac{KZe^2}{r}$ द्वारा दी जाती है।
चूंकि स्थितिज ऊर्जा ऋणात्मक है और $r$ बढ़ने पर यह शून्य की ओर अग्रसर होती है,इसलिए आरेख $(3)$ इलेक्ट्रॉन को दर्शाता है।
न्यूट्रॉन के लिए,नाभिक के बाहर $(r > r_0)$ कोई स्थिर-वैद्युत बल नहीं होता है। अतः,$r > r_0$ के लिए स्थितिज ऊर्जा शून्य है। आरेख $(1)$ न्यूट्रॉन को दर्शाता है।
प्रोटॉन के लिए,नाभिक और प्रोटॉन दोनों धनावेशित होने के कारण $r > r_0$ के लिए स्थिर-वैद्युत बल प्रतिकर्षी होता है। अतः,स्थितिज ऊर्जा धनात्मक होती है और $r$ बढ़ने पर घटती है। आरेख $(2)$ प्रोटॉन को दर्शाता है।
अतः,सही युग्म $(1, n), (2, p^{+}), (3, e^{-})$ है,जो विकल्प $A$ के अनुरूप है।
174
MediumMCQ
नाभिकीय त्रिज्या $R = r_0 A^{1/3}$ द्वारा दी जाती है,जहाँ $r_0$ एक स्थिरांक है और $A$ परमाणु द्रव्यमान संख्या है। तो,$^{238}U$ का नाभिकीय द्रव्यमान घनत्व क्या होगा?
A
$^{119}Sn$ का दोगुना
B
$^{119}Sn$ का तीन गुना
C
$^{119}Sn$ के समान
D
$^{119}Sn$ का आधा

Solution

(C) नाभिकीय त्रिज्या $R = r_0 A^{1/3}$ द्वारा दी जाती है।
नाभिक का आयतन $V = \frac{4}{3} \pi R^3 = \frac{4}{3} \pi (r_0 A^{1/3})^3 = \frac{4}{3} \pi r_0^3 A$ है।
नाभिकीय द्रव्यमान लगभग $M = A \times m_p$ है,जहाँ $m_p$ एक न्यूक्लियॉन (प्रोटॉन या न्यूट्रॉन) का द्रव्यमान है।
नाभिकीय घनत्व $\rho$ को $\rho = \frac{M}{V} = \frac{A \cdot m_p}{\frac{4}{3} \pi r_0^3 A} = \frac{3 m_p}{4 \pi r_0^3}$ द्वारा दिया जाता है।
चूंकि $m_p$ और $r_0$ स्थिरांक हैं,इसलिए नाभिकीय घनत्व $\rho$ द्रव्यमान संख्या $A$ से स्वतंत्र है।
अतः,$^{238}U$ का नाभिकीय द्रव्यमान घनत्व $^{119}Sn$ के समान ही है।
175
MediumMCQ
निम्नलिखित कथनों पर विचार करें ($X$ और $Y$ दो अलग-अलग तत्वों को दर्शाते हैं):
$(I)$ ${ }_{32}^{65} X$ और ${ }_{33}^{65} Y$ समस्थानिक (isotopes) हैं।
$(II)$ ${ }_{42}^{86} X$ और ${ }_{42}^{85} Y$ समस्थानिक (isotopes) हैं।
$(III)$ ${ }_{85}^{174} X$ और ${ }_{88}^{177} Y$ में न्यूट्रॉन की संख्या समान है।
$(IV)$ ${ }_{92}^{235} X$ और ${ }_{94}^{235} Y$ समभारिक (isobars) हैं।
उपरोक्त में से कौन से कथन सही हैं?
A
केवल कथन $II$ और $IV$ सही हैं
B
केवल कथन $I, II$ और $IV$ सही हैं
C
केवल कथन $II, III$ और $IV$ सही हैं
D
सभी कथन सही हैं

Solution

(C) किसी नाभिक ${ }_Z^A X$ के लिए,द्रव्यमान संख्या $A = N + Z$ होती है,जहाँ $N$ न्यूट्रॉन की संख्या है और $Z$ प्रोटॉन की संख्या है।
$(I)$ ${ }_{32}^{65} X$ और ${ }_{33}^{65} Y$ में,परमाणु क्रमांक $(Z)$ क्रमशः $32$ और $33$ हैं। चूँकि $Z$ अलग है,इसलिए वे समस्थानिक नहीं हैं। यह कथन गलत है।
$(II)$ ${ }_{42}^{86} X$ और ${ }_{42}^{85} Y$ में,दोनों का परमाणु क्रमांक $(Z)$ $42$ है। समान $Z$ और अलग द्रव्यमान संख्या $(A)$ होने के कारण,वे समस्थानिक हैं। यह कथन सही है।
$(III)$ ${ }_{85}^{174} X$ के लिए,$N = 174 - 85 = 89$। ${ }_{88}^{177} Y$ के लिए,$N = 177 - 88 = 89$। चूँकि दोनों में $89$ न्यूट्रॉन हैं,इसलिए यह कथन सही है।
$(IV)$ ${ }_{92}^{235} X$ और ${ }_{94}^{235} Y$ में,दोनों की द्रव्यमान संख्या $(A = 235)$ समान है। समान द्रव्यमान संख्या वाले नाभिकों को समभारिक कहा जाता है। यह कथन सही है।
अतः,कथन $(II), (III)$ और $(IV)$ सही हैं।
176
AdvancedMCQ
एक नाभिक की त्रिज्या $r = r_0 A^{1/3}$ द्वारा दी जाती है,जहाँ $r_0 = 1.3 \times 10^{-15} \, m$ और $A$ नाभिक की द्रव्यमान संख्या है। लेड नाभिक के लिए $A = 206$ है। इस नाभिक में व्यास के विपरीत सिरों पर स्थित दो प्रोटॉन के बीच स्थिर-वैद्युत बल लगभग ................ $N$ है।
A
$10^2$
B
$10^7$
C
$10^{12}$
D
$10^{17}$

Solution

(A) नाभिक की त्रिज्या $R = r_0 A^{1/3}$ है।
दिया गया है $r_0 = 1.3 \times 10^{-15} \, m$ और $A = 206$.
$R = 1.3 \times 10^{-15} \times (206)^{1/3} \approx 1.3 \times 10^{-15} \times 5.9 \approx 7.67 \times 10^{-15} \, m$.
व्यास के विपरीत सिरों पर स्थित दो प्रोटॉन के बीच की दूरी $d = 2R = 2 \times 7.67 \times 10^{-15} = 15.34 \times 10^{-15} \, m$ है।
स्थिर-वैद्युत बल $F$ कूलम्ब के नियम द्वारा दिया जाता है: $F = \frac{k e^2}{d^2}$.
$F = \frac{(9 \times 10^9) \times (1.6 \times 10^{-19})^2}{(15.34 \times 10^{-15})^2} \approx \frac{9 \times 10^9 \times 2.56 \times 10^{-38}}{235.3 \times 10^{-30}} \approx \frac{23.04 \times 10^{-29}}{235.3 \times 10^{-30}} \approx 0.0979 \times 10^1 \approx 1 \, N$.
दिए गए विकल्पों के साथ तुलना करने पर,परिमाण की कोटि $10^2 \, N$ है (क्योंकि गणना में अक्सर सरल पाठ्यपुस्तक मॉडल में $d=R$ लिया जाता है,जिससे $F \approx 10^2 \, N$ प्राप्त होता है)। अतः,विकल्प $A$ सही उत्तर है।
Solution diagram
177
MediumMCQ
निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
$I$. किसी तत्व के सभी समस्थानिकों (isotopes) में न्यूट्रॉन की संख्या समान होती है।
$II$. किसी तत्व का केवल एक ही समस्थानिक स्थिर और गैर-रेडियोधर्मी हो सकता है।
$III$. सभी तत्वों के समस्थानिक होते हैं।
$IV$. कार्बन के सभी समस्थानिक ऑक्सीजन-$16$ के साथ रासायनिक यौगिक बना सकते हैं।
समस्थानिक के संबंध में सही विकल्प चुनें।
A
कथन $III$ और $IV$ सही हैं
B
कथन $II, III$ और $IV$ सही हैं
C
कथन $I, II$ और $III$ सही हैं
D
कथन $I, III$ और $IV$ सही हैं

Solution

(A) कथन $I$ गलत है क्योंकि एक तत्व के समस्थानिकों में प्रोटॉन की संख्या समान होती है लेकिन न्यूट्रॉन की संख्या अलग-अलग होती है।
कथन $II$ गलत है क्योंकि कुछ तत्वों के कई स्थिर समस्थानिक होते हैं (उदाहरण के लिए,ऑक्सीजन के तीन स्थिर समस्थानिक हैं: $^{16}O, ^{17}O, ^{18}O$)।
कथन $III$ सही है क्योंकि प्रत्येक तत्व के समस्थानिक होते हैं,जो समान परमाणु क्रमांक लेकिन अलग द्रव्यमान संख्या वाले परमाणु होते हैं।
कथन $IV$ सही है क्योंकि एक ही तत्व के समस्थानिक समान रासायनिक गुण प्रदर्शित करते हैं; इसलिए,कार्बन के सभी समस्थानिक $(^{12}C, ^{13}C, ^{14}C)$ ऑक्सीजन के साथ प्रतिक्रिया करके $CO_2$ जैसे यौगिक बना सकते हैं।
अतः,केवल कथन $III$ और $IV$ सही हैं।
178
EasyMCQ
${}^{135}Cs$ और ${}^{40}Ca$ की नाभिकीय त्रिज्याओं का अनुपात क्या है?
A
$1.40$
B
$1.50$
C
$2.750$
D
$3.375$

Solution

(B) नाभिकीय त्रिज्या $R$ का सूत्र $R = R_0 A^{1/3}$ है,जहाँ $R_0$ एक नियतांक है और $A$ द्रव्यमान संख्या है।
अतः,त्रिज्याओं का अनुपात $\frac{R_{Cs}}{R_{Ca}} = \left( \frac{A_{Cs}}{A_{Ca}} \right)^{1/3}$ द्वारा दिया जाता है।
दी गई द्रव्यमान संख्या $A_{Cs} = 135$ और $A_{Ca} = 40$ का मान रखने पर:
$\frac{R_{Cs}}{R_{Ca}} = \left( \frac{135}{40} \right)^{1/3}$.
अंश और हर को $5$ से विभाजित करने पर:
$\frac{135}{40} = \frac{27}{8}$.
इस प्रकार,$\frac{R_{Cs}}{R_{Ca}} = \left( \frac{27}{8} \right)^{1/3} = \frac{3}{2} = 1.50$.
179
EasyMCQ
दो न्यूक्लियॉन के बीच नाभिकीय बल को किसके द्वारा समझाया जाता है?
A
क्वार्क विनिमय सिद्धांत
B
मेसॉन विनिमय सिद्धांत
C
फोटॉन विनिमय सिद्धांत
D
गुरुत्वाकर्षण विनिमय सिद्धांत

Solution

(B) दो न्यूक्लियॉन के बीच नाभिकीय बल को मुख्य रूप से $Meson$ विनिमय सिद्धांत द्वारा समझाया जाता है, जिसे मूल रूप से $1935$ में $Hideki$ $Yukawa$ द्वारा प्रस्तावित किया गया था। इस सिद्धांत के अनुसार, न्यूक्लियॉन (प्रोटॉन और न्यूट्रॉन) $mesons$ (विशेष रूप से $\pi$-mesons या $pions$) नामक कणों का आदान-प्रदान करके परस्पर क्रिया करते हैं। ये $mesons$ प्रबल नाभिकीय बल के लिए बल वाहक के रूप में कार्य करते हैं, जो नाभिक के भीतर न्यूक्लियॉन को एक साथ बांधे रखते हैं।
180
EasyMCQ
एक भारी नाभिक $\frac{N}{P}$ के किसी भी मान के लिए अस्थिर होता है क्योंकि
A
स्थिरवैद्युत प्रतिकर्षण,नाभिकीय आकर्षण पर हावी हो जाता है
B
नाभिकीय प्रतिकर्षण,नाभिकीय आकर्षण पर हावी हो जाता है
C
भारी नाभिक में नाभिकीय बल अनुपस्थित होते हैं
D
नाभिकीय बल एक लंबी दूरी का बल है

Solution

(A) सही विकल्प $A$ है।
भारी नाभिकों में प्रोटॉन की संख्या बहुत अधिक होती है। चूंकि प्रोटॉन धनावेशित होते हैं,इसलिए वे एक-दूसरे पर एक मजबूत स्थिरवैद्युत प्रतिकर्षण बल लगाते हैं।
यद्यपि प्रबल नाभिकीय बल आकर्षक होता है,लेकिन यह एक लघु-परास (short-range) बल है जो केवल निकटतम पड़ोसियों के बीच ही कार्य करता है।
जैसे-जैसे नाभिक का आकार बढ़ता है,सभी प्रोटॉनों के बीच लंबी दूरी का स्थिरवैद्युत प्रतिकर्षण,लघु-परास नाभिकीय आकर्षण की तुलना में तेजी से बढ़ता है,जिससे अंततः नाभिक अस्थिर हो जाता है।
181
EasyMCQ
न्यूट्रिनो एक ऐसा कण है जो:
A
कोई आवेश और कोई स्पिन नहीं रखता है
B
कोई आवेश नहीं रखता है लेकिन स्पिन रखता है
C
इलेक्ट्रॉन की तरह आवेशित है और स्पिन रखता है
D
कोई आवेश नहीं रखता है लेकिन प्रोटॉन के लगभग बराबर द्रव्यमान रखता है

Solution

(B) न्यूट्रिनो एक प्राथमिक कण है जो केवल दुर्बल परमाणु बल और गुरुत्वाकर्षण के माध्यम से परस्पर क्रिया करता है। यह विद्युत रूप से तटस्थ (आवेशहीन) होता है। कण भौतिकी के मानक मॉडल के अनुसार,न्यूट्रिनो $1/2$ स्पिन वाले फर्मिऑन हैं। इसलिए,न्यूट्रिनो पर कोई आवेश नहीं होता है लेकिन इसमें स्पिन होता है।
182
EasyMCQ
समीकरण ${ }_{13}^{27} Al + { }_2^4 He \longrightarrow { }_{15}^{30} P + X$ में,$X$ के लिए सही प्रतीक क्या है?
A
${ }_{-1}^0 e$
B
${ }_1^1 H$
C
${ }_2^4 He$
D
${ }_0^1 n$

Solution

(D) $X$ की पहचान करने के लिए,हम द्रव्यमान संख्या और परमाणु क्रमांक के संरक्षण के नियमों को लागू करते हैं।
द्रव्यमान संख्या $(A)$ का संरक्षण:
$27 + 4 = 30 + A_X$
$31 = 30 + A_X$
$A_X = 1$
परमाणु क्रमांक $(Z)$ का संरक्षण:
$13 + 2 = 15 + Z_X$
$15 = 15 + Z_X$
$Z_X = 0$
$1$ द्रव्यमान संख्या और $0$ परमाणु क्रमांक वाला कण एक न्यूट्रॉन है,जिसे ${ }_0^1 n$ के रूप में दर्शाया जाता है।
183
EasyMCQ
सही कथन चुनिए।
A
यदि नाभिक में न्यूट्रॉन की तुलना में प्रोटॉन बहुत अधिक हों तो नाभिकीय बल मजबूत हो जाता है।
B
यदि नाभिक में प्रोटॉन की तुलना में न्यूट्रॉन बहुत अधिक हों तो नाभिकीय बल मजबूत हो जाता है।
C
$82$ से कम परमाणु क्रमांक वाले नाभिक विघटित होने की प्रवृत्ति दिखाते हैं।
D
यदि नाभिक में न्यूक्लियॉन की संख्या बहुत अधिक हो तो नाभिकीय बल कमजोर हो जाता है।

Solution

(D) सही कथन $(d)$ है।
नाभिकीय बल एक लघु-परास बल है,जिसका अर्थ है कि यह केवल निकटवर्ती न्यूक्लियॉन के बीच ही प्रभावी ढंग से कार्य करता है।
जैसे-जैसे न्यूक्लियॉन की संख्या $(A)$ बढ़ती है,नाभिक का आकार बढ़ता जाता है।
चूंकि नाभिकीय बल लंबी दूरी तक कार्य नहीं करता है,इसलिए नाभिक के बहुत बड़ा होने पर प्रति न्यूक्लियॉन बंधन प्रभाव कम हो जाता है,जिससे यह कम स्थिर हो जाता है।
अतः,जब नाभिक में न्यूक्लियॉन की संख्या बहुत अधिक होती है,तो स्थिरता बनाए रखने के संदर्भ में नाभिकीय बल प्रभावी रूप से कमजोर हो जाता है।
184
EasyMCQ
दो गोलाकार नाभिकों की द्रव्यमान संख्या $216$ और $64$ है और उनकी त्रिज्याएँ क्रमशः $R_1$ और $R_2$ हैं। अनुपात $\frac{R_1}{R_2}$ किसके बराबर है?
A
$3:2$
B
$1:3$
C
$1:2$
D
$2:3$

Solution

(A) नाभिक की त्रिज्या $(R)$ और उसकी द्रव्यमान संख्या $(A)$ के बीच का संबंध $R = R_0 A^{1/3}$ सूत्र द्वारा दिया जाता है,जहाँ $R_0$ एक आनुभविक स्थिरांक है।
दी गई द्रव्यमान संख्या $A_1 = 216$ और $A_2 = 64$ के लिए,हम उनकी त्रिज्याओं का अनुपात इस प्रकार ज्ञात कर सकते हैं:
$\frac{R_1}{R_2} = \frac{R_0 A_1^{1/3}}{R_0 A_2^{1/3}} = \left( \frac{A_1}{A_2} \right)^{1/3}$
दिए गए मानों को प्रतिस्थापित करने पर:
$\frac{R_1}{R_2} = \left( \frac{216}{64} \right)^{1/3}$
चूंकि $216 = 6^3$ और $64 = 4^3$ है:
$\frac{R_1}{R_2} = \left( \frac{6^3}{4^3} \right)^{1/3} = \frac{6}{4} = \frac{3}{2}$
अतः,अनुपात $\frac{R_1}{R_2}$ का मान $3:2$ है।
185
MediumMCQ
कथन $(A):$ प्रोटॉन-प्रोटॉन $(f_{pp})$, प्रोटॉन-न्यूट्रॉन $(f_{pn})$ और न्यूट्रॉन-न्यूट्रॉन $(f_{nn})$ के बीच कार्य करने वाले बल इस प्रकार हैं कि $f_{pp} < f_{pn} = f_{nn}$.
कारण $(R):$ दो प्रोटॉनों के बीच स्थिर-वैद्युत प्रतिकर्षण बल उनके बीच के शुद्ध नाभिकीय बल को कम कर देता है।
A
यदि कथन और कारण दोनों सत्य हैं और कारण, कथन की सही व्याख्या है।
B
यदि कथन और कारण दोनों सत्य हैं लेकिन कारण, कथन की सही व्याख्या नहीं है।
C
यदि कथन सत्य है लेकिन कारण असत्य है।
D
यदि कथन और कारण दोनों असत्य हैं।

Solution

$(A)$ नाभिकीय बल आवेश से स्वतंत्र होता है, जिसका अर्थ है कि किसी भी दो न्यूक्लियॉन (प्रोटॉन-प्रोटॉन, प्रोटॉन-न्यूट्रॉन, या न्यूट्रॉन-न्यूट्रॉन) के बीच प्रबल नाभिकीय बल एक निश्चित दूरी पर लगभग समान होता है।
हालाँकि, दो प्रोटॉनों के मामले में, उनके धनात्मक आवेश के कारण उनके बीच एक अतिरिक्त स्थिर-वैद्युत प्रतिकर्षण बल कार्य करता है।
चूंकि नाभिकीय बल आकर्षण का होता है और स्थिर-वैद्युत बल प्रतिकर्षण का, इसलिए दो प्रोटॉनों के बीच शुद्ध बल $f_{pp} = f_{\text{nuclear}} - f_{\text{electrostatic}}$ होता है।
प्रोटॉन-न्यूट्रॉन या न्यूट्रॉन-न्यूट्रॉन युग्मों के लिए, कोई स्थिर-वैद्युत प्रतिकर्षण नहीं होता है, इसलिए शुद्ध बल केवल आकर्षक नाभिकीय बल होता है $(f_{pn} = f_{nn} = f_{\text{nuclear}})$।
अतः, $f_{pp} < f_{pn} = f_{nn}$।
कथन और कारण दोनों सत्य हैं, और कारण सही ढंग से बताता है कि प्रोटॉनों के बीच शुद्ध बल कम क्यों होता है।
186
MediumMCQ
मान लीजिए कि प्रोटॉन और न्यूट्रॉन का द्रव्यमान समान है। एक न्यूक्लियॉन का द्रव्यमान $1.6 \times 10^{-27} \ kg$ है और नाभिक की त्रिज्या $R = 1.5 \times 10^{-15} A^{1/3} \ m$ है। नाभिकीय घनत्व और जल के घनत्व का अनुमानित अनुपात $n \times 10^{13}$ है। $n$ का मान $.................$ है।
A
$11$
B
$12$
C
$14$
D
$16$

Solution

(A) नाभिक का घनत्व $\rho = \frac{\text{द्रव्यमान}}{\text{आयतन}}$ द्वारा दिया जाता है।
द्रव्यमान संख्या $A$ वाले नाभिक का द्रव्यमान $M = A \times (1.6 \times 10^{-27} \ kg)$ है।
नाभिक का आयतन $V = \frac{4}{3} \pi R^3 = \frac{4}{3} \pi (1.5 \times 10^{-15} A^{1/3})^3 = \frac{4}{3} \pi (1.5)^3 \times 10^{-45} A \ m^3$ है।
नाभिकीय घनत्व की गणना करने पर: $\rho = \frac{1.6 \times 10^{-27} A}{\frac{4}{3} \times 3.14 \times 3.375 \times 10^{-45} A} = \frac{1.6 \times 10^{-27}}{14.137 \times 10^{-45}} \approx 0.11317 \times 10^{18} \ kg/m^3 = 1.1317 \times 10^{17} \ kg/m^3$ है।
जल का घनत्व $\rho_w = 10^3 \ kg/m^3$ है।
अनुपात $\frac{\rho}{\rho_w} = \frac{1.1317 \times 10^{17}}{10^3} = 1.1317 \times 10^{14} = 11.317 \times 10^{13}$ है।
इसे $n \times 10^{13}$ के साथ तुलना करने पर,हमें $n \approx 11$ प्राप्त होता है।
187
MediumMCQ
ऑक्सीजन नाभिक $\left({ }_{8}^{16} O \right)$ और हीलियम नाभिक $\left({ }_{2}^{4} He \right)$ के घनत्व का अनुपात क्या है ($:1$ में)?
A
$4$
B
$8$
C
$1$
D
$2$

Solution

(C) नाभिकीय घनत्व,नाभिक के द्रव्यमान और उसके आयतन का अनुपात होता है।
माना $A$ द्रव्यमान संख्या है और $R$ नाभिक की त्रिज्या है।
नाभिक की त्रिज्या $R = R_0 A^{1/3}$ द्वारा दी जाती है,जहाँ $R_0$ एक नियतांक है।
नाभिक का आयतन $V = \frac{4}{3} \pi R^3 = \frac{4}{3} \pi (R_0 A^{1/3})^3 = \frac{4}{3} \pi R_0^3 A$ है।
नाभिक का द्रव्यमान लगभग $M = A \cdot u$ होता है,जहाँ $u$ परमाणु द्रव्यमान इकाई है।
इसलिए,नाभिकीय घनत्व $\rho = \frac{M}{V} = \frac{A \cdot u}{\frac{4}{3} \pi R_0^3 A} = \frac{3u}{4 \pi R_0^3}$ होता है।
चूंकि नाभिकीय घनत्व का व्यंजक केवल नियतांकों ($u$ और $R_0$) पर निर्भर करता है,इसलिए यह द्रव्यमान संख्या $A$ से स्वतंत्र है।
अतः,सभी नाभिकों का घनत्व समान होता है।
इसलिए,ऑक्सीजन नाभिक और हीलियम नाभिक के घनत्व का अनुपात $1:1$ है।
188
MediumMCQ
एक नाभिक दो छोटे भागों में टूट जाता है,जिनके वेग का अनुपात $3: 2$ है। उनके नाभिकीय आकार का अनुपात $\left(\frac{x}{3}\right)^{\frac{1}{3}}$ होगा। '$x$' का मान है:
A
$1$
B
$2$
C
$3$
D
$4$

Solution

(B) दिया गया है कि वेग का अनुपात $\frac{v_1}{v_2} = \frac{3}{2}$ है।
रैखिक संवेग संरक्षण के नियम के अनुसार,$m_1 v_1 = m_2 v_2$। इसलिए,उनके द्रव्यमान का अनुपात $\frac{m_1}{m_2} = \frac{v_2}{v_1} = \frac{2}{3}$ है।
चूंकि नाभिकीय द्रव्यमान घनत्व स्थिर होता है,इसलिए नाभिक का द्रव्यमान उसके आयतन के समानुपाती होता है,अर्थात $m \propto r^3$,जहाँ $r$ नाभिकीय त्रिज्या है।
अतः,$\frac{m_1}{m_2} = \left(\frac{r_1}{r_2}\right)^3$।
द्रव्यमान का अनुपात रखने पर: $\left(\frac{r_1}{r_2}\right)^3 = \frac{2}{3}$।
दोनों पक्षों का घनमूल लेने पर: $\frac{r_1}{r_2} = \left(\frac{2}{3}\right)^{\frac{1}{3}}$।
इसकी तुलना दिए गए व्यंजक $\left(\frac{x}{3}\right)^{\frac{1}{3}}$ से करने पर,हमें $x = 2$ प्राप्त होता है।
Solution diagram
189
MediumMCQ
नीचे दो कथन दिए गए हैं: एक को अभिकथन $A$ और दूसरे को कारण $R$ के रूप में लेबल किया गया है।
अभिकथन $A$: न्यूक्लाइड्स ${ }_{5}^{10} B, { }_{3}^{6} Li, { }_{26}^{56} Fe, { }_{10}^{20} Ne$ और ${ }_{83}^{209} Bi$ के नाभिकीय घनत्व को $\rho_{ Bi }^{ N } > \rho_{ Fe }^{ N } > \rho_{ Ne }^{ N } > \rho_{ B }^{ N } > \rho_{ Li }^{ N }$ के रूप में व्यवस्थित किया जा सकता है।
कारण $R$: नाभिक की त्रिज्या $R$ उसके द्रव्यमान संख्या $A$ से $R = R_0 A^{1/3}$ के रूप में संबंधित है,जहाँ $R_0$ एक स्थिरांक है।
उपरोक्त कथनों के आलोक में,नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनें:
A
$A$ और $R$ दोनों सत्य हैं और $R$,$A$ की सही व्याख्या है।
B
$A$ असत्य है लेकिन $R$ सत्य है।
C
$A$ सत्य है लेकिन $R$ असत्य है।
D
$A$ और $R$ दोनों सत्य हैं लेकिन $R$,$A$ की सही व्याख्या नहीं है।

Solution

(B) नाभिक की त्रिज्या $R = R_0 A^{1/3}$ द्वारा दी जाती है,जहाँ $R_0 \approx 1.2 \times 10^{-15} \ m$ है।
नाभिक का आयतन $V = \frac{4}{3} \pi R^3 = \frac{4}{3} \pi R_0^3 A$ है।
नाभिक का द्रव्यमान लगभग $M = A \times m_p$ होता है (जहाँ $m_p$ एक न्यूक्लियॉन का द्रव्यमान है)।
नाभिकीय घनत्व $\rho_N = \frac{M}{V} = \frac{A m_p}{\frac{4}{3} \pi R_0^3 A} = \frac{3 m_p}{4 \pi R_0^3}$ द्वारा दिया जाता है।
चूँकि $m_p$,$\pi$,और $R_0$ स्थिरांक हैं,इसलिए नाभिकीय घनत्व $\rho_N$ द्रव्यमान संख्या $A$ से स्वतंत्र है।
अतः,सभी न्यूक्लाइड्स के लिए नाभिकीय घनत्व लगभग समान होता है।
अभिकथन $A$ कहता है कि घनत्व अलग-अलग और क्रमबद्ध हैं,जो कि असत्य है।
कारण $R$ नाभिकीय त्रिज्या के लिए एक मानक सूत्र है,जो कि सत्य है।
इस प्रकार,$A$ असत्य है लेकिन $R$ सत्य है।
190
MediumMCQ
एक मुक्त न्यूट्रॉन प्रोटॉन में क्षयित होता है,लेकिन एक मुक्त प्रोटॉन न्यूट्रॉन में क्षयित नहीं होता है। इसका कारण यह है कि
A
न्यूट्रॉन एक अनावेशित कण है
B
प्रोटॉन एक आवेशित कण है
C
न्यूट्रॉन एक संयुक्त कण है जो प्रोटॉन और इलेक्ट्रॉन से बना है
D
न्यूट्रॉन का विराम द्रव्यमान प्रोटॉन से अधिक है

Solution

(D) किसी कण का क्षय ऊर्जा और द्रव्यमान के संरक्षण के नियमों द्वारा नियंत्रित होता है। एक मुक्त न्यूट्रॉन का विराम द्रव्यमान $(m_n \approx 939.57 \ MeV/c^2)$ एक मुक्त प्रोटॉन के विराम द्रव्यमान $(m_p \approx 938.27 \ MeV/c^2)$ से अधिक होता है।
चूंकि निकाय की कुल ऊर्जा संरक्षित रहनी चाहिए,इसलिए एक कण केवल हल्के कणों में ही क्षयित हो सकता है (साथ ही आवेश और लेप्टॉन संख्या के संरक्षण के लिए आवश्यक लेप्टॉन)।
चूंकि $m_n > m_p$,एक न्यूट्रॉन प्रोटॉन,इलेक्ट्रॉन और एंटीन्यूट्रिनो में क्षयित हो सकता है $(n \rightarrow p + e^- + \bar{\nu}_e)$।
इसके विपरीत,एक मुक्त प्रोटॉन न्यूट्रॉन में क्षयित नहीं हो सकता क्योंकि इसमें न्यूट्रॉन के लिए आवश्यक अतिरिक्त द्रव्यमान बनाने के लिए पर्याप्त द्रव्यमान-ऊर्जा नहीं होती है।
191
MediumMCQ
एक नाभिक दो नाभिकीय भागों में इस प्रकार विघटित होता है कि उनकी नाभिकीय त्रिज्याओं का अनुपात $1: 2^{1/3}$ है। उनकी संबंधित चालों का अनुपात $n: 1$ है। $n$ का मान $.....$ है।
A
$2$
B
$4$
C
$6$
D
$8$

Solution

(A) नाभिक की त्रिज्या $R = R_0 A^{1/3}$ द्वारा दी जाती है,जहाँ $A$ द्रव्यमान संख्या है।
त्रिज्याओं का अनुपात $\frac{R_1}{R_2} = \frac{1}{2^{1/3}}$ दिया गया है,इसलिए $\frac{A_1^{1/3}}{A_2^{1/3}} = \frac{1}{2^{1/3}}$,जिसका अर्थ है कि $\frac{A_1}{A_2} = \frac{1}{2}$।
अतः,उनके द्रव्यमानों का अनुपात $\frac{m_1}{m_2} = \frac{A_1}{A_2} = \frac{1}{2}$ है।
रैखिक संवेग संरक्षण के नियम के अनुसार,$m_1 v_1 = m_2 v_2$ (यह मानते हुए कि प्रारंभिक नाभिक स्थिर था)।
इसलिए,उनकी चालों का अनुपात $\frac{v_1}{v_2} = \frac{m_2}{m_1} = \frac{2}{1}$ है।
यह दिया गया है कि चालों का अनुपात $n:1$ है,इसलिए $n = 2$ प्राप्त होता है।
192
DifficultMCQ
$9 \times 10^{-13} \text{ cm}$ त्रिज्या वाले परमाणु नाभिक $(Z=50)$ की सतह पर विद्युत विभव . . . . . . $\times 10^6 \text{ V}$ है।
A
$10$
B
$9$
C
$7$
D
$8$

Solution

(D) नाभिक की सतह पर विद्युत विभव $V$ का सूत्र है: $V = \frac{kQ}{R}$,जहाँ $k = 9 \times 10^9 \text{ N m}^2/\text{C}^2$,$Q = Ze$,और $R$ त्रिज्या है।
दिया गया है: $Z = 50$,$e = 1.6 \times 10^{-19} \text{ C}$,और $R = 9 \times 10^{-13} \text{ cm} = 9 \times 10^{-15} \text{ m}$.
मान रखने पर:
$V = \frac{(9 \times 10^9) \times (50 \times 1.6 \times 10^{-19})}{9 \times 10^{-15}}$
$V = \frac{9 \times 10^9 \times 80 \times 10^{-19}}{9 \times 10^{-15}}$
$V = 80 \times 10^{-10} \times 10^{15} \text{ V}$
$V = 80 \times 10^5 \text{ V} = 8 \times 10^6 \text{ V}$.
अतः,विभव $8 \times 10^6 \text{ V}$ है।
193
DifficultMCQ
$192$ द्रव्यमान संख्या वाले नाभिक की त्रिज्या की आधी त्रिज्या वाले नाभिक की द्रव्यमान संख्या क्या होगी?
A
$24$
B
$32$
C
$40$
D
$20$

Solution

(A) द्रव्यमान संख्या $A$ वाले नाभिक की त्रिज्या $R$ का सूत्र $R = R_0 A^{1/3}$ है,जहाँ $R_0$ एक स्थिरांक है।
माना पहले नाभिक की द्रव्यमान संख्या $A_1$ है और उसकी त्रिज्या $R_1$ है।
दूसरे नाभिक की द्रव्यमान संख्या $A_2 = 192$ है और उसकी त्रिज्या $R_2$ है।
प्रश्न के अनुसार,$R_1 = \frac{R_2}{2}$ है।
त्रिज्या का सूत्र रखने पर: $R_0 (A_1)^{1/3} = \frac{1}{2} R_0 (A_2)^{1/3}$।
दोनों पक्षों को $R_0$ से विभाजित करने पर: $(A_1)^{1/3} = \frac{1}{2} (A_2)^{1/3}$।
दोनों पक्षों का घन करने पर: $A_1 = \frac{1}{8} A_2$।
यहाँ $A_2 = 192$ दिया गया है,इसलिए $A_1 = \frac{192}{8} = 24$।
अतः,नाभिक की द्रव्यमान संख्या $24$ है।
194
DifficultMCQ
एक नाभिक की द्रव्यमान संख्या $A_1$ और आयतन $V_1$ है। दूसरे नाभिक की द्रव्यमान संख्या $A_2$ और आयतन $V_2$ है। यदि द्रव्यमान संख्याओं के बीच संबंध $A_2 = 4 A_1$ है,तो $\frac{V_2}{V_1} = $ . . . . . . .
A
$3$
B
$4$
C
$5$
D
$6$

Solution

(B) नाभिक का आयतन $V = \frac{4}{3} \pi R^3$ द्वारा दिया जाता है।
चूंकि नाभिक की त्रिज्या $R = R_0 A^{1/3}$ होती है,जहाँ $R_0$ एक स्थिरांक है और $A$ द्रव्यमान संख्या है,हम आयतन के सूत्र में $R$ का मान प्रतिस्थापित करते हैं:
$V = \frac{4}{3} \pi (R_0 A^{1/3})^3 = \frac{4}{3} \pi R_0^3 A$.
यह दर्शाता है कि नाभिक का आयतन उसकी द्रव्यमान संख्या के सीधे आनुपातिक होता है,अर्थात $V \propto A$।
इसलिए,आयतनों का अनुपात $\frac{V_2}{V_1} = \frac{A_2}{A_1}$ है।
दिया गया है कि $A_2 = 4 A_1$,इसलिए $\frac{V_2}{V_1} = \frac{4 A_1}{A_1} = 4$।
195
DifficultMCQ
$64$ द्रव्यमान संख्या वाले एक नाभिक की त्रिज्या $4.8 \text{ fermi}$ है। तो $4 \text{ fermi}$ त्रिज्या वाले दूसरे नाभिक की द्रव्यमान संख्या $\frac{1000}{x}$ है,जहाँ $x$ = . . . . . . है।
A
$27$
B
$28$
C
$29$
D
$30$

Solution

(A) नाभिक की त्रिज्या का सूत्र $R = R_0 A^{1/3}$ है,जहाँ $R_0$ एक स्थिरांक है और $A$ द्रव्यमान संख्या है।
इसका अर्थ है $R^3 \propto A$,या $\frac{R_1^3}{R_2^3} = \frac{A_1}{A_2}$।
यहाँ $R_1 = 4.8 \text{ fermi}$,$A_1 = 64$,और $R_2 = 4 \text{ fermi}$ दिया गया है।
मान रखने पर: $\left(\frac{4.8}{4}\right)^3 = \frac{64}{A_2}$।
$(1.2)^3 = \frac{64}{A_2}$।
$1.728 = \frac{64}{A_2}$।
$A_2 = \frac{64}{1.728} = \frac{64000}{1728}$।
भिन्न को सरल करने पर: $A_2 = \frac{1000}{27}$।
इसकी तुलना $\frac{1000}{x}$ से करने पर,हमें $x = 27$ प्राप्त होता है।
196
DifficultMCQ
विराम अवस्था में एक नाभिक दो छोटे नाभिकों में विघटित होता है,जिनके द्रव्यमान का अनुपात $2:1$ है। विघटन के बाद,वे किस प्रकार गति करेंगे?
A
विपरीत दिशाओं में क्रमशः $1:2$ के अनुपात में चाल के साथ।
B
विपरीत दिशाओं में क्रमशः $2:1$ के अनुपात में चाल के साथ।
C
समान दिशा में समान चाल के साथ।
D
विपरीत दिशाओं में समान चाल के साथ।

Solution

(A) रैखिक संवेग संरक्षण के नियम के अनुसार,चूंकि प्रारंभिक नाभिक विराम अवस्था में है,इसलिए प्रारंभिक संवेग $0$ है।
मान लीजिए कि दो नाभिकों के द्रव्यमान $m_1$ और $m_2$ हैं और उनके वेग क्रमशः $v_1$ और $v_2$ हैं।
$p_i = p_f$
$0 = m_1 v_1 + m_2 v_2$
$m_1 v_1 = -m_2 v_2$
वेगों का परिमाण लेने पर,हमें $m_1 |v_1| = m_2 |v_2|$ प्राप्त होता है,जिसका अर्थ है $\frac{|v_1|}{|v_2|} = \frac{m_2}{m_1}$।
चूंकि द्रव्यमान का अनुपात $\frac{m_1}{m_2} = \frac{2}{1}$ दिया गया है,चालों के अनुपात में मान रखने पर:
$\frac{|v_1|}{|v_2|} = \frac{1}{2}$।
ऋणात्मक चिह्न यह दर्शाता है कि नाभिक विपरीत दिशाओं में गति करते हैं।
अतः,वे $1:2$ के अनुपात में चाल के साथ विपरीत दिशाओं में गति करेंगे।
197
MediumMCQ
$STATEMENT-1$: स्थायी नाभिकों के लिए परमाणु क्रमांक ($y$-अक्ष) बनाम न्यूट्रॉन की संख्या ($x$-अक्ष) का आलेख परमाणु क्रमांक बढ़ने के साथ $45^{\circ}$ ढाल वाली रेखा से $x$-अक्ष की ओर झुकाव दर्शाता है।
$STATEMENT-2$: भारी न्यूक्लाइड्स में प्रोटॉन-प्रोटॉन के बीच स्थिर-वैद्युत प्रतिकर्षण,आकर्षक नाभिकीय बलों पर हावी होने लगता है,जिससे स्थिरता बनाए रखने के लिए अधिक न्यूट्रॉन की आवश्यकता होती है।
A
$STATEMENT-1$ सत्य है,$STATEMENT-2$ सत्य है; $STATEMENT-2$,$STATEMENT-1$ की सही व्याख्या है।
B
$STATEMENT-1$ सत्य है,$STATEMENT-2$ सत्य है; $STATEMENT-2$,$STATEMENT-1$ की सही व्याख्या नहीं है।
C
$STATEMENT-1$ सत्य है,$STATEMENT-2$ असत्य है।
D
$STATEMENT-1$ असत्य है,$STATEMENT-2$ सत्य है।

Solution

(A) हल्के नाभिकों के लिए,प्रोटॉन की संख्या $(Z)$,न्यूट्रॉन की संख्या $(N)$ के लगभग बराबर होती है,इसलिए आलेख $N=Z$ रेखा का अनुसरण करता है ($45^{\circ}$ ढाल)।
जैसे-जैसे परमाणु क्रमांक बढ़ता है,प्रोटॉन के बीच का लंबी दूरी का स्थिर-वैद्युत प्रतिकर्षण,कम दूरी के आकर्षक नाभिकीय बल की तुलना में तेजी से बढ़ता है।
भारी नाभिकों में स्थिरता बनाए रखने के लिए,स्थिर-वैद्युत प्रतिकर्षण को बढ़ाए बिना अतिरिक्त आकर्षक नाभिकीय बल प्रदान करने के लिए अधिक न्यूट्रॉन की आवश्यकता होती है।
इसके कारण वक्र $x$-अक्ष (न्यूट्रॉन अक्ष) की ओर झुक जाता है,जिसका अर्थ है कि स्थिर भारी नाभिकों के लिए $N > Z$ होता है।
अतः,$STATEMENT-1$ सत्य है और $STATEMENT-2$ सत्य है,और $STATEMENT-2$,$STATEMENT-1$ की सही व्याख्या है।
Solution diagram
198
MediumMCQ
नीचे दो कथन दिए गए हैं $:$ एक को अभिकथन $(A)$ और दूसरे को कारण $(R)$ के रूप में लेबल किया गया है।
अभिकथन $(A) :$ कॉपर $\left({ }_{29}^{64} Cu \right)$ नाभिक का घनत्व कार्बन $\left({ }_6^{12} C \right)$ नाभिक के घनत्व से अधिक है।
कारण $(R) :$ द्रव्यमान संख्या $A$ वाले नाभिक की त्रिज्या $A^{1/3}$ के समानुपाती होती है।
उपरोक्त कथनों के आलोक में,नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर चुनें।
A
$(A)$ सही है लेकिन $(R)$ सही नहीं है
B
$(A)$ सही नहीं है लेकिन $(R)$ सही है
C
$(A)$ और $(R)$ दोनों सही हैं और $(R)$,$(A)$ की सही व्याख्या है
D
$(A)$ और $(R)$ दोनों सही हैं लेकिन $(R)$,$(A)$ की सही व्याख्या नहीं है

Solution

(B) नाभिक का घनत्व $\rho = \frac{\text{द्रव्यमान}}{\text{आयतन}} = \frac{A \cdot m_n}{\frac{4}{3} \pi R^3}$ द्वारा दिया जाता है,जहाँ $A$ द्रव्यमान संख्या है और $m_n$ न्यूक्लियॉन का औसत द्रव्यमान है।
चूँकि नाभिक की त्रिज्या $R = R_0 A^{1/3}$ होती है,इसे घनत्व के सूत्र में प्रतिस्थापित करने पर $\rho = \frac{A \cdot m_n}{\frac{4}{3} \pi (R_0 A^{1/3})^3} = \frac{A \cdot m_n}{\frac{4}{3} \pi R_0^3 A} = \frac{m_n}{\frac{4}{3} \pi R_0^3}$ प्राप्त होता है।
यह दर्शाता है कि नाभिकीय घनत्व $\rho$ द्रव्यमान संख्या $A$ से स्वतंत्र है।
इसलिए,सभी नाभिकों का घनत्व लगभग स्थिर होता है और यह तत्व पर निर्भर नहीं करता है।
अतः,अभिकथन $(A)$ गलत है क्योंकि घनत्व समान होते हैं,जबकि कारण $(R)$ नाभिकीय त्रिज्या और द्रव्यमान संख्या के बीच संबंध के बारे में एक सही कथन है।
199
EasyMCQ
$A$ द्रव्यमान संख्या और $R$ त्रिज्या वाले नाभिक के लिए,नाभिक के द्रव्यमान घनत्व को कैसे दर्शाया जा सकता है?
A
$A^3$
B
$A^{1/3}$
C
$A^{2/3}$
D
$A$ से स्वतंत्र

Solution

(D) नाभिक की त्रिज्या $R = R_0 A^{1/3}$ संबंध द्वारा दी जाती है,जहाँ $R_0$ एक स्थिरांक है (लगभग $1.2 \times 10^{-15} \ m$)।
नाभिक का द्रव्यमान लगभग $M = A \times m_p$ होता है,जहाँ $m_p$ एक न्यूक्लियॉन (प्रोटॉन या न्यूट्रॉन) का द्रव्यमान है।
नाभिक का आयतन $V = \frac{4}{3} \pi R^3 = \frac{4}{3} \pi (R_0 A^{1/3})^3 = \frac{4}{3} \pi R_0^3 A$ है।
द्रव्यमान घनत्व $\rho$ को $\rho = \frac{M}{V} = \frac{A \cdot m_p}{\frac{4}{3} \pi R_0^3 A}$ द्वारा दिया जाता है।
अंश और हर से $A$ को हटाने पर,हमें $\rho = \frac{m_p}{\frac{4}{3} \pi R_0^3}$ प्राप्त होता है।
चूंकि $m_p$,$\pi$,और $R_0$ स्थिरांक हैं,इसलिए घनत्व $\rho$ द्रव्यमान संख्या $A$ से स्वतंत्र है।
200
EasyMCQ
नीचे दो कथन दिए गए हैं $:$ एक को अभिकथन $(A)$ और दूसरे को कारण $(R)$ के रूप में लेबल किया गया है।
अभिकथन $(A) :$ न्यूट्रॉन प्रोटॉन की तुलना में पदार्थ में अधिक आसानी से प्रवेश करते हैं।
कारण $(R) :$ न्यूट्रॉन प्रोटॉन की तुलना में थोड़े अधिक द्रव्यमान वाले होते हैं।
A
अभिकथन $(A)$ और कारण $(R)$ दोनों सत्य हैं लेकिन $(R)$,$(A)$ की सही व्याख्या नहीं है।
B
$(A)$ सत्य है लेकिन $(R)$ असत्य है।
C
अभिकथन $(A)$ और कारण $(R)$ दोनों असत्य हैं।
D
अभिकथन $(A)$ और कारण $(R)$ दोनों सत्य हैं और $(R)$,$(A)$ की सही व्याख्या है।

Solution

(A) अभिकथन $(A)$ सत्य है क्योंकि न्यूट्रॉन तटस्थ कण होते हैं,जिसका अर्थ है कि वे परमाणुओं के इलेक्ट्रॉन बादलों से गुजरते समय कूलम्ब बल का अनुभव नहीं करते हैं। यह उन्हें प्रोटॉन जैसे आवेशित कणों की तुलना में पदार्थ में बहुत अधिक आसानी से प्रवेश करने की क्षमता देता है।
कारण $(R)$ भी सत्य है क्योंकि न्यूट्रॉन का द्रव्यमान $(m_n \approx 1.6749 \times 10^{-27} \ kg)$ प्रोटॉन के द्रव्यमान $(m_p \approx 1.6726 \times 10^{-27} \ kg)$ से थोड़ा अधिक होता है।
हालाँकि,न्यूट्रॉन की उच्च भेदन शक्ति का कारण उनका विद्युत आवेश का अभाव है,न कि उनका द्रव्यमान। इसलिए,$(R)$,$(A)$ की सही व्याख्या नहीं है।

Nuclei — Composition of Nucleus, Size of the Nucleus, Nuclear force · Frequently Asked Questions

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