JEE Main 2026 Chemistry Question Paper with Answer and Solution in Hindi

459 QuestionsHindiWith Solutions

ChemistryQ51150 of 459 questions

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फोटॉन $A$ की तरंगदैर्ध्य $400 \ nm$ है। फोटॉन $B$ की आवृत्ति $10^{16} \ s^{-1}$ है। फोटॉन $C$ की तरंग संख्या $10^{4} \ cm^{-1}$ है। इन फोटॉनों की ऊर्जा का सही क्रम क्या है?
A
$C > B > A$
B
$B > A > C$
C
$A > B > C$
D
$A > C > B$

Solution

(B) $(1)$. $A$ की तरंगदैर्ध्य $= 400 \ nm = 400 \times 10^{-9} \ m$.
$(2)$. $B$ की तरंगदैर्ध्य $(\lambda) = \frac{c}{\nu} = \frac{3 \times 10^{8} \ m/s}{10^{16} \ s^{-1}} = 3 \times 10^{-8} \ m = 30 \ nm$.
$(3)$. $C$ की तरंगदैर्ध्य $(\lambda) = \frac{1}{\bar{\nu}} = \frac{1}{10^{4} \ cm^{-1}} = 10^{-4} \ cm = 10^{-6} \ m = 1000 \ nm$.
तरंगदैर्ध्य की तुलना करने पर: $\lambda_{C} (1000 \ nm) > \lambda_{A} (400 \ nm) > \lambda_{B} (30 \ nm)$.
चूंकि ऊर्जा $(E) = \frac{hc}{\lambda}$,इसलिए $E \propto \frac{1}{\lambda}$.
अतः,ऊर्जा का क्रम $E_{B} > E_{A} > E_{C}$ है।
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मैंगनेट और परमैंगनेट आयनों के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें। सही कथनों की पहचान करें:
$(A)$ मैंगनेट और परमैंगनेट दोनों आयनों की ज्यामिति चतुष्फलकीय है।
$(B)$ मैंगनेट और परमैंगनेट में $Mn$ की ऑक्सीकरण अवस्थाएं क्रमशः $+7$ और $+6$ हैं।
$(C)$ पेरोक्सिडाइसल्फेट द्वारा $Mn(II)$ लवण का ऑक्सीकरण अंतिम उत्पाद के रूप में मैंगनेट आयन देता है।
$(D)$ मैंगनेट आयन अनुचुंबकीय है और परमैंगनेट आयन प्रतिचुंबकीय है।
$(E)$ अम्लीकृत परमैंगनेट आयन ऑक्सालेट,नाइट्राइट और आयोडाइड आयनों को अपचयित करता है।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनें:
A
केवल $(A), (C)$ और $(D)$
B
केवल $(A), (B)$ और $(C)$
C
केवल $(A), (D)$ और $(E)$
D
केवल $(A)$ और $(D)$

Solution

(D) मैंगनेट आयन: $MnO_4^{2-}$; परमैंगनेट आयन: $MnO_4^-$.
$(A)$ $Mn$ के $d^3s$ संकरण के कारण $MnO_4^{2-}$ और $MnO_4^-$ दोनों की ज्यामिति चतुष्फलकीय होती है। यह कथन सही है।
$(B)$ $MnO_4^{2-}$ में,$Mn$ $+6$ ऑक्सीकरण अवस्था में है। $MnO_4^-$ में,$Mn$ $+7$ ऑक्सीकरण अवस्था में है। कथन में क्रमशः $+7$ और $+6$ दिया गया है,जो गलत है।
$(C)$ पेरोक्सिडाइसल्फेट $(S_2O_8^{2-})$ द्वारा $Mn^{2+}$ का ऑक्सीकरण परमैंगनेट $(MnO_4^-)$ देता है,मैंगनेट नहीं। यह कथन गलत है।
$(D)$ $MnO_4^{2-}$ ($d^1$ विन्यास) अनुचुंबकीय है। $MnO_4^-$ ($d^0$ विन्यास) प्रतिचुंबकीय है। यह कथन सही है।
$(E)$ अम्लीकृत परमैंगनेट एक ऑक्सीकरण एजेंट के रूप में कार्य करता है,न कि अपचायक एजेंट के रूप में। यह ऑक्सालेट,नाइट्राइट और आयोडाइड आयनों का ऑक्सीकरण करता है। यह कथन गलत है।
अतः,केवल कथन $(A)$ और $(D)$ सही हैं।
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वे अभिक्रियाएँ जिनमें उत्पाद के रूप में अल्कोहल प्राप्त होता है,वे हैं:
$A$. $CH_{4} + O_{2} \xrightarrow{Mo_{2}O_{3}}$
$B$. $2CH_{3}CH_{3} + 3O_{2} \xrightarrow[\Delta]{(CH_{3}COO)_{2}Mn}$
$C$. $(CH_{3})_{3}CH \xrightarrow{KMnO_{4}}$
$D$. $2CH_{4} + O_{2} \xrightarrow{Cu/523 \ K/100 \ atm.}$
$E$. $CH_{3}CH=CHCH_{3} \xrightarrow{KMnO_{4}/H^{+}}$
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए:
A
केवल $A$ और $D$
B
केवल $A, C$ और $E$
C
केवल $C$ और $D$
D
केवल $B, D$ और $E$

Solution

(C) प्रत्येक अभिक्रिया का विश्लेषण करते हैं:
$(A)$ $CH_{4} + O_{2} \xrightarrow{Mo_{2}O_{3}} HCHO$ (फॉर्मेल्डिहाइड प्राप्त होता है,अल्कोहल नहीं)।
$(B)$ $2CH_{3}CH_{3} + 3O_{2} \xrightarrow[\Delta]{(CH_{3}COO)_{2}Mn} 2CH_{3}COOH$ (एथेनोइक अम्ल प्राप्त होता है)।
$(C)$ $(CH_{3})_{3}CH \xrightarrow{KMnO_{4}} (CH_{3})_{3}COH$ (टर्ट-ब्यूटाइल अल्कोहल प्राप्त होता है)।
$(D)$ $2CH_{4} + O_{2} \xrightarrow[523 \ K, 100 \ atm.]{Cu} 2CH_{3}OH$ (मेथेनॉल प्राप्त होता है)।
$(E)$ $CH_{3}CH=CHCH_{3} \xrightarrow{KMnO_{4}/H^{+}} 2CH_{3}COOH$ (एथेनोइक अम्ल प्राप्त होता है)।
अतः,अभिक्रिया $(C)$ और $(D)$ में उत्पाद के रूप में अल्कोहल प्राप्त होता है।
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$log_{10} K$ बनाम $\frac{1}{T}$ का आलेख एक सीधी रेखा देता है। अंतःखंड (intercept) और ढाल (slope) क्रमशः क्या हैं? (जहाँ $K$ साम्य स्थिरांक है)।
A
$\frac{2.303R}{\Delta H^{\circ}}, \frac{2.303R}{\Delta S^{\circ}}$
B
$\frac{\Delta S^{\circ}}{2.303R}, -\frac{\Delta H^{\circ}}{2.303R}$
C
$-\frac{\Delta S^{\circ}R}{2.303}, \frac{\Delta H^{\circ}R}{2.303}$
D
$-\frac{\Delta H^{\circ}}{2.303R}, \frac{\Delta S^{\circ}}{2.303R}$

Solution

(B) साम्य स्थिरांक $K$ और तापमान $T$ के बीच का संबंध वैनट हॉफ समीकरण द्वारा दिया जाता है: $\ln K = -\frac{\Delta H^{\circ}}{RT} + \frac{\Delta S^{\circ}}{R}$.
आधार $10$ के लघुगणक में बदलने पर: $log_{10} K = -\frac{\Delta H^{\circ}}{2.303RT} + \frac{\Delta S^{\circ}}{2.303R}$.
इसे रैखिक समीकरण $y = mx + c$ के साथ तुलना करने पर,जहाँ $y = log_{10} K$ और $x = \frac{1}{T}$:
ढाल $m = -\frac{\Delta H^{\circ}}{2.303R}$.
$y$-अंतःखंड $c = \frac{\Delta S^{\circ}}{2.303R}$.
अतः,अंतःखंड और ढाल क्रमशः $\frac{\Delta S^{\circ}}{2.303R}$ और $-\frac{\Delta H^{\circ}}{2.303R}$ हैं।
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$1 \text{ L}$ के फ्लास्क में निम्नलिखित साम्यावस्था का अवलोकन करें। $A_{(g)} \rightleftharpoons B_{(g)}$. $T \text{ K}$ पर,$A$ और $B$ की साम्यावस्था सांद्रता क्रमशः $0.5 \text{ M}$ और $0.375 \text{ M}$ है। फ्लास्क में $0.1 \text{ mol}$ $A$ मिलाया जाता है और साम्यावस्था को पुनः स्थापित करने के लिए $T \text{ K}$ तक गर्म किया जाता है। $A$ और $B$ की नई साम्यावस्था सांद्रता ($\text{M}$ में) क्रमशः क्या होगी?
A
$0.367, 0.275$
B
$0.53, 0.4$
C
$0.742, 0.557$
D
$0.557, 0.418$

Solution

(D) अभिक्रिया $A_{(g)} \rightleftharpoons B_{(g)}$ के लिए,साम्यावस्था स्थिरांक $K_c = \frac{[B]}{[A]} = \frac{0.375}{0.5} = 0.75$.
$1 \text{ L}$ फ्लास्क में $A$ के प्रारंभिक मोल $= 0.5 \text{ mol}$.
$1 \text{ L}$ फ्लास्क में $B$ के प्रारंभिक मोल $= 0.375 \text{ mol}$.
$0.1 \text{ mol}$ $A$ जोड़ने के बाद,$A$ के कुल मोल $= 0.5 + 0.1 = 0.6 \text{ mol}$.
माना कि नई साम्यावस्था तक पहुँचने के लिए $A$ की $x$ मात्रा अभिक्रिया करती है।
नई $[A] = 0.6 - x$ और नई $[B] = 0.375 + x$.
$K_c = \frac{0.375 + x}{0.6 - x} = 0.75$.
$0.375 + x = 0.45 - 0.75x$.
$1.75x = 0.075 \Rightarrow x = 0.0428$.
नई $[A] = 0.6 - 0.0428 = 0.557 \text{ M}$ और नई $[B] = 0.375 + 0.0428 = 0.418 \text{ M}$.
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$N$,$P$,$O$,$S$,$Cl$ और $F$ तत्वों पर विचार करें। उपरोक्त सूची में सबसे अधिक और सबसे कम धात्विक गुण वाले तत्वों में उपस्थित संयोजी इलेक्ट्रॉनों की संख्या क्रमशः क्या है?
A
$7$ और $5$
B
$5$ और $6$
C
$5$ और $7$
D
$6$ और $7$

Solution

(C) आवर्त सारणी में समूह में ऊपर से नीचे जाने पर धात्विक गुण बढ़ता है और आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर घटता है। दिए गए तत्वों ($N$,$P$,$O$,$S$,$Cl$,$F$) में से,$P$ (फास्फोरस) सबसे अधिक धात्विक है क्योंकि यह दूसरों की तुलना में आवर्त सारणी में बाईं ओर और नीचे स्थित है। इसका संयोजी कोश विन्यास $3s^2 3p^3$ है,इसलिए इसमें $5$ संयोजी इलेक्ट्रॉन हैं।
$F$ (फ्लोरीन) सूची में सबसे अधिक विद्युत ऋणात्मक और सबसे कम धात्विक तत्व है। इसका संयोजी कोश विन्यास $2s^2 2p^5$ है,इसलिए इसमें $7$ संयोजी इलेक्ट्रॉन हैं।
अतः,सबसे अधिक धात्विक $(P)$ और सबसे कम धात्विक $(F)$ तत्व के लिए संयोजी इलेक्ट्रॉनों की संख्या क्रमशः $5$ और $7$ है।
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सही कथनों की पहचान करें:
बेंजीन वलय में $-NO_{2}$ समूह की उपस्थिति:
A
केवल $B$ और $D$
B
केवल $C$ और $A$
C
केवल $A$ और $D$
D
केवल $B$ और $C$

Solution

(D) $-NO_{2}$ समूह अपने $-I$ और $-M$ प्रभावों के कारण एक प्रबल इलेक्ट्रॉन-आकर्षक समूह है।
$1$. यह बेंजीन वलय के इलेक्ट्रॉन घनत्व को कम करता है,जिससे यह इलेक्ट्रॉनरागी प्रतिस्थापन अभिक्रिया के प्रति निष्क्रिय हो जाता है (कथन $B$ सही है)।
$2$. यह $-M$ प्रभाव के माध्यम से मध्यवर्ती कार्बोनियन (मीसेनहाइमर कॉम्प्लेक्स) को स्थिर करके नाभिकरागी हमले के प्रति वलय की संवेदनशीलता को बढ़ाता है,जिससे यह नाभिकरागी प्रतिस्थापन के प्रति सक्रिय हो जाता है (कथन $C$ सही है)।
अतः,कथन $B$ और $C$ सही हैं।
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निम्नलिखित दुर्बल अम्ल $HA \rightleftharpoons H^{+}_{(aq)} + A^{-}_{(aq)}$ के वियोजन साम्य पर विचार करें। यदि अम्ल का $pK_{a} = 4$ है,तो $10 \ mM$ $HA$ विलयन की $pH$ . . . . . . है। (निकटतम पूर्णांक)
[दिया गया है: वियोजन की मात्रा को इकाई के सापेक्ष नगण्य माना जा सकता है]
A
$1$
B
$2$
C
$3$
D
$4$

Solution

(C) वियोजन साम्य $HA \rightleftharpoons H^{+} + A^{-}$ है।
दुर्बल अम्ल के लिए,$H^{+}$ की सांद्रता $[H^{+}] = \sqrt{K_{a} \times c}$ द्वारा दी जाती है।
दोनों पक्षों का ऋणात्मक लघुगणक लेने पर,$pH = \frac{1}{2} (pK_{a} - \log c)$ प्राप्त होता है।
दिया गया है $pK_{a} = 4$ और सांद्रता $c = 10 \ mM = 10 \times 10^{-3} \ M = 10^{-2} \ M$.
मान रखने पर: $pH = \frac{1}{2} [4 - \log(10^{-2})]$.
$pH = \frac{1}{2} [4 - (-2)] = \frac{1}{2} [6] = 3$.
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$0.53 \ g$ कार्बनिक यौगिक $(x)$ को जब सांद्र नाइट्रिक एसिड और फिर सिल्वर नाइट्रेट के साथ गर्म किया जाता है,तो $0.75 \ g$ सिल्वर ब्रोमाइड अवक्षेप प्राप्त होता है। $1.0 \ g$ $(x)$ के दहन से $1.32 \ g$ $CO_2$ गैस प्राप्त होती है। यौगिक $(x)$ में हाइड्रोजन का प्रतिशत . . . . . . $\%$ है। [निकटतम पूर्णांक]
[दिया गया है : मोलर द्रव्यमान $g \ mol^{-1}$ में $H : 1, C : 12, Br : 80, Ag : 108, O : 16$; यौगिक $(x) : C_xH_yBr_z$] ($\%$ में)
A
$2$
B
$6$
C
$1$
D
$4$

Solution

(D) $1$. $C$ का प्रतिशत ज्ञात करना:
$CO_2$ के मोल = $\frac{1.32 \ g}{44 \ g \ mol^{-1}} = 0.03 \ mol$.
$C$ का द्रव्यमान = $0.03 \ mol \times 12 \ g \ mol^{-1} = 0.36 \ g$.
$\% C = \frac{0.36 \ g}{1.0 \ g} \times 100 = 36\%$.
$2$. $Br$ का प्रतिशत ज्ञात करना:
$AgBr$ के मोल = $\frac{0.75 \ g}{188 \ g \ mol^{-1}} \approx 0.00399 \ mol$.
$Br$ का द्रव्यमान = $0.00399 \ mol \times 80 \ g \ mol^{-1} \approx 0.3192 \ g$.
$\% Br = \frac{0.3192 \ g}{0.53 \ g} \times 100 \approx 60.2\%$.
$3$. $H$ का प्रतिशत ज्ञात करना:
$\% H = 100 - (\% C + \% Br) = 100 - (36 + 60.2) = 3.8\%$.
निकटतम पूर्णांक में,हमें $4\%$ प्राप्त होता है।
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अम्लीय माध्यम में हो रही निम्नलिखित रेडॉक्स अभिक्रिया पर विचार करें: $BH_{4}^{-}(aq) + ClO_{3}^{-}(aq) \rightarrow H_{2}BO_{3}^{-}(aq) + Cl^{-}(aq)$. यदि उपरोक्त संतुलित अभिक्रिया के लिए नर्नस्ट समीकरण $E_{cell} = E_{cell}^{o} - \frac{RT}{nF} \ln Q$ है,तो $n$ का मान . . . . . . है। (निकटतम पूर्णांक)
A
$6$
B
$12$
C
$24$
D
$8$

Solution

(C) सबसे पहले,अम्लीय माध्यम में रेडॉक्स अभिक्रिया को संतुलित करें:
ऑक्सीकरण अर्ध-अभिक्रिया: $BH_{4}^{-} + 3H_{2}O \rightarrow H_{2}BO_{3}^{-} + 8H^{+} + 8e^{-}$
अपचयन अर्ध-अभिक्रिया: $ClO_{3}^{-} + 6H^{+} + 6e^{-} \rightarrow Cl^{-} + 3H_{2}O$
इलेक्ट्रॉनों को संतुलित करने के लिए,ऑक्सीकरण अर्ध-अभिक्रिया को $3$ से और अपचयन अर्ध-अभिक्रिया को $4$ से गुणा करें:
$3BH_{4}^{-} + 9H_{2}O \rightarrow 3H_{2}BO_{3}^{-} + 24H^{+} + 24e^{-}$
$4ClO_{3}^{-} + 24H^{+} + 24e^{-} \rightarrow 4Cl^{-} + 12H_{2}O$
इन्हें जोड़ने पर,संतुलित समीकरण प्राप्त होता है: $3BH_{4}^{-} + 4ClO_{3}^{-} \rightarrow 3H_{2}BO_{3}^{-} + 4Cl^{-} + 3H_{2}O$
नर्नस्ट समीकरण में,$n$ संतुलित रेडॉक्स अभिक्रिया में स्थानांतरित इलेक्ट्रॉनों के मोलों की संख्या को दर्शाता है।
संतुलित समीकरण से,$n = 24$.
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आवर्त सारणी के $4$थे आवर्त में,उच्चतम और न्यूनतम परमाणु त्रिज्या वाले तत्व क्रमशः कौन से हैं?
A
$Na$ और $Cl$
B
$K$ और $Se$
C
$K$ और $Br$
D
$Rb$ और $Br$

Solution

(C) एक आवर्त में,बाएं से दाएं जाने पर,प्रभावी नाभिकीय आवेश में वृद्धि के कारण परमाणु त्रिज्या घटती है।
$4$थे आवर्त में,तत्व $K$ (समूह $1$) से $Kr$ (समूह $18$) तक होते हैं।
उत्कृष्ट गैसों को छोड़कर (जिनकी वान डर वाल्स त्रिज्या बड़ी होती है),सबसे बड़ी परमाणु त्रिज्या वाला तत्व $K$ (पोटेशियम) है और सबसे छोटी परमाणु त्रिज्या वाला तत्व $Br$ (ब्रोमीन) है।
अतः,सही युग्म $K$ और $Br$ है।
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चित्र $1$ में $2s$ कक्षक के लिए इलेक्ट्रॉन घनत्व वितरण दर्शाया गया है। चित्र $2$ में $2s$ कक्षक के लिए त्रिज्यीय तरंग फलन (radial wave function) का आलेख दर्शाया गया है। चित्र $2$ में निम्नलिखित में से कौन सा बिंदु $(A, B, C, D)$ चित्र $1$ में दर्शाई गई गोलीय नोडल सतह का सबसे सटीक प्रतिनिधित्व करता है?
Question diagram
A
$B$
B
$D$
C
$C$
D
$A$

Solution

(C) नोड वह क्षेत्र है जहाँ इलेक्ट्रॉन के पाए जाने की प्रायिकता शून्य होती है। त्रिज्यीय तरंग फलन के लिए,यह उस बिंदु के अनुरूप है जहाँ तरंग फलन $\psi(r)$ x-अक्ष को काटता है,अर्थात $\psi(r) = 0$।
$2s$ कक्षक के लिए त्रिज्यीय तरंग फलन के आलेख में,वक्र नाभिक से एक निश्चित दूरी पर x-अक्ष को काटता है। इस आलेख के मानक निरूपण के आधार पर,बिंदु $C$ आमतौर पर उस प्रतिच्छेदन को चिह्नित करता है जहाँ $\psi(r) = 0$ होता है,जो गोलीय नोड का प्रतिनिधित्व करता है।
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$H$ परमाणु की तीन स्पेक्ट्रमी रेखाओं की तरंग संख्या पर विचार किया गया है। बामर श्रेणी से संबंधित स्पेक्ट्रमी रेखाओं के समूह की पहचान करें। ($R =$ रिडबर्ग स्थिरांक)
A
$ \frac{5R}{36}, \frac{3R}{16}, \frac{21R}{100} $
B
$ \frac{5R}{36}, \frac{8R}{9}, \frac{15R}{16} $
C
$ \frac{7R}{144}, \frac{3R}{16}, \frac{16R}{255} $
D
$ \frac{3R}{4}, \frac{3R}{16}, \frac{7R}{144} $

Solution

(A) बामर श्रेणी के लिए,तरंग संख्या $\bar{v}$ का सूत्र है: $\bar{v} = R \left[ \frac{1}{2^2} - \frac{1}{n^2} \right]$,जहाँ $n = 3, 4, 5, \dots$
$n = 3$ के लिए: $\bar{v} = R \left[ \frac{1}{4} - \frac{1}{9} \right] = \frac{5R}{36}$
$n = 4$ के लिए: $\bar{v} = R \left[ \frac{1}{4} - \frac{1}{16} \right] = \frac{3R}{16}$
$n = 5$ के लिए: $\bar{v} = R \left[ \frac{1}{4} - \frac{1}{25} \right] = \frac{21R}{100}$
अतः,स्पेक्ट्रमी रेखाओं का समूह $\frac{5R}{36}, \frac{3R}{16}, \frac{21R}{100}$ है।
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$Ph-CH=CH_2 \xrightarrow[HBr]{(PhCOO)_2} \text{Product}$
उपरोक्त अभिक्रिया पर विचार करें:
$A$. अभिक्रिया अधिक स्थिर रेडिकल मध्यवर्ती के माध्यम से आगे बढ़ती है।
$B$. पेरोक्साइड की भूमिका $\dot{H}$ (हाइड्रोजन रेडिकल) उत्पन्न करना है।
$C$. इस अभिक्रिया के दौरान,बेंजीन एक उप-उत्पाद के रूप में बनता है।
$D$. $1-\text{ब्रोमो}-2-\text{फेनिलइथेन}$ गौण उत्पाद के रूप में बनता है।
$E$. पेरोक्साइड की अनुपस्थिति में समान अभिक्रिया कार्बोकेशन मध्यवर्ती के माध्यम से आगे बढ़ती है।
सही कथनों की पहचान करें। नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनें:
A
केवल $A$ और $E$
B
केवल $A, B$ और $D$
C
केवल $C, D$ और $E$
D
केवल $A, C$ और $E$

Solution

(D) अभिक्रिया $Ph-CH=CH_2 + HBr \xrightarrow{(PhCOO)_2} Ph-CH_2-CH_2-Br$ एक एंटी-मार्कोवनिकोव योग अभिक्रिया है।
$A$. सही: अभिक्रिया मुक्त रेडिकल तंत्र के माध्यम से आगे बढ़ती है जहाँ अधिक स्थिर बेंजिलिक रेडिकल मध्यवर्ती बनता है।
$B$. गलत: पेरोक्साइड की भूमिका बेंज़ोइलोक्सी रेडिकल उत्पन्न करना है,जो फिर $HBr$ से $H$ को हटाकर ब्रोमीन रेडिकल $(\dot{Br})$ उत्पन्न करता है,न कि हाइड्रोजन रेडिकल $(\dot{H})$।
$C$. सही: तंत्र में दिखाए अनुसार,बेंज़ोइलोक्सी रेडिकल विघटित होकर $Ph\dot{}$ रेडिकल बनाता है,जो $HBr$ से $H$ लेकर उप-उत्पाद के रूप में बेंजीन $(Ph-H)$ बनाता है।
$D$. गलत: $1-\text{ब्रोमो}-2-\text{फेनिलइथेन}$ इस एंटी-मार्कोवनिकोव अभिक्रिया में मुख्य उत्पाद है।
$E$. सही: पेरोक्साइड की अनुपस्थिति में,अभिक्रिया इलेक्ट्रोफिलिक योग तंत्र का पालन करती है,जो कार्बोकेशन मध्यवर्ती (मार्कोवनिकोव योग) के माध्यम से आगे बढ़ती है।
अतः,कथन $A, C$ और $E$ सही हैं।
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नीचे $2$ कथन दिए गए हैं:
कथन $I$: $BF_4^-$,$SiF_4$,$XeF_4$ और $SF_4$ में से,जिन प्रजातियों में असमान $E-F$ बंध लंबाई होती है,उनकी संख्या $2$ है। यहाँ,$E$ केंद्रीय परमाणु है।
कथन $II$: $O_2^-$,$O_2^{2-}$,$F_2$ और $O_2^+$ में,$O_2^-$ का बंध क्रम सबसे अधिक है।
उपरोक्त कथनों के आलोक में,नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनें
A
कथन $I$ और कथन $II$ दोनों गलत हैं
B
कथन $I$ और कथन $II$ दोनों सही हैं
C
कथन $I$ सही है लेकिन कथन $II$ गलत है
D
कथन $I$ गलत है लेकिन कथन $II$ सही है

Solution

(A) कथन $I$: $BF_4^-$,$SiF_4$ और $XeF_4$ में सममिति के कारण सभी बंध लंबाई समान हैं। $SF_4$ में अक्षीय और निरक्षीय बंधों की लंबाई अलग-अलग होती है। अतः,केवल $1$ प्रजाति $(SF_4)$ में असमान बंध लंबाई है। कथन $I$ गलत है।
कथन $II$: बंध क्रम: $O_2^+$ $(2.5)$,$O_2^-$ $(1.5)$,$O_2^{2-}$ $(1.0)$,$F_2$ $(1.0)$। $O_2^+$ का बंध क्रम सबसे अधिक है,$O_2^-$ का नहीं। कथन $II$ गलत है।
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नीचे दी गई अभिक्रिया श्रृंखला के लिए दो कथन दिए गए हैं।
कथन $I$: यौगिक $'Z'$,$NaOI$ के साथ पीला अवक्षेप देगा।
कथन $II$: यौगिक $'Q'$ में दो अलग-अलग प्रकार के $'H'$ परमाणु (एरोमैटिक : एलिफैटिक) $1 : 3$ के अनुपात में हैं।
उपर्युक्त कथनों के आलोक में,नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनें:
Question diagram
A
कथन $I$ सत्य है लेकिन कथन $II$ असत्य है
B
कथन $I$ और कथन $II$ दोनों सत्य हैं
C
कथन $I$ असत्य है लेकिन कथन $II$ सत्य है
D
कथन $I$ और कथन $II$ दोनों असत्य हैं

Solution

(B) $1$. यौगिक $'X'$ $(C_3H_6Cl_2)$,$NaNH_2$ की अधिकता के साथ अभिक्रिया करके प्रोपाइन $(CH_3-C \equiv CH)$ बनाता है,जो यौगिक $'Y'$ है।
$2$. प्रोपाइन $(Y)$ का $dil. H_2SO_4/Hg^{2+}$ के साथ जलयोजन करने पर एसीटोन $(CH_3-CO-CH_3)$ प्राप्त होता है,जो यौगिक $'Z'$ है। एसीटोन में एक मिथाइल कीटोन समूह होता है और यह $NaOI$ के साथ आयोडोफॉर्म $(CHI_3)$ का पीला अवक्षेप देता है। अतः,कथन $I$ सत्य है।
$3$. प्रोपाइन $(Y)$ का लाल तप्त लोहे की नली में चक्रीय ट्राइमेराइजेशन करने पर $1,3,5$-ट्राइमिथाइलबेन्जीन (मेसिटिलीन) प्राप्त होता है,जो यौगिक $'Q'$ $(C_9H_{12})$ है।
$4$. $1,3,5$-ट्राइमिथाइलबेन्जीन में $3$ एरोमैटिक $H$ परमाणु (रिंग पर) और $9$ एलिफैटिक $H$ परमाणु (तीन मिथाइल समूहों में) होते हैं। एरोमैटिक और एलिफैटिक $H$ परमाणुओं का अनुपात $3:9 = 1:3$ है। अतः,कथन $II$ सत्य है।
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$pK_b = 5.699$ वाले एक दुर्बल क्षार '$B$' पर विचार करें। $25^{\circ}C$ पर $pH$ $9$ का $100 \ mL$ बफर बनाने के लिए '$x$' $mL$ $0.02 \ M$ $HCl$ और '$y$' $mL$ $0.02 \ M$ दुर्बल क्षार '$B$' को मिलाया जाता है। '$x$' और '$y$' के मान क्रमशः हैं: (दिया गया है: $\log 2=0.3010, \log 3=0.4771, \log 5=0.699$)
A
$x = 11.1, y = 88.9$
B
$x = 42.7, y = 57.3$
C
$x = 14.3, y = 85.7$
D
$x = 85.7, y = 14.3$

Solution

(C) दुर्बल क्षार और उसके लवण के बफर विलयन के लिए,हेंडरसन-हैसेलबैक समीकरण है: $pOH = pK_b + \log \frac{[Salt]}{[Base]}$.
दिया गया $pH = 9$,इसलिए $pOH = 14 - 9 = 5$.
दिया गया $pK_b = 5.699$,इसलिए $5 = 5.699 + \log \frac{[Salt]}{[Base]}$.
$\log \frac{[Salt]}{[Base]} = 5 - 5.699 = -0.699$.
चूंकि $\log 5 = 0.699$,इसलिए $\log \frac{[Salt]}{[Base]} = -\log 5 = \log \frac{1}{5}$.
अतः,$\frac{[Salt]}{[Base]} = \frac{1}{5}$.
अभिक्रिया: $B + HCl \rightarrow BH^+ + Cl^-$.
प्रारंभिक मोल: $n_B = 0.02y$,$n_{HCl} = 0.02x$.
अभिक्रिया के बाद: $n_{BH^+} = 0.02x$,$n_{B, remaining} = 0.02y - 0.02x$.
अनुपात: $\frac{0.02x}{0.02y - 0.02x} = \frac{1}{5}$ $\Rightarrow \frac{x}{y-x} = \frac{1}{5}$ $\Rightarrow 5x = y - x$ $\Rightarrow y = 6x$.
कुल आयतन: $x + y = 100 \ mL$.
$y$ का मान रखने पर: $x + 6x = 100$ $\Rightarrow 7x = 100$ $\Rightarrow x = 14.28 \approx 14.3 \ mL$.
$y = 100 - 14.3 = 85.7 \ mL$.
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निम्नलिखित अभिक्रिया में प्राप्त उत्पादों ($B$ और $C$) के मिश्रण को अलग करने के लिए किस विधि का उपयोग किया जाता है?
Question diagram
A
साधारण आसवन
B
ऊर्ध्वपातन
C
भाप आसवन
D
प्रभाजी आसवन

Solution

(D) $FeBr_3$ की उपस्थिति में बेंजीन की $Br_2$ के साथ अभिक्रिया से ब्रोमोबेंजीन $(A)$ प्राप्त होता है।
सांद्र $HNO_3$ और सांद्र $H_2SO_4$ के साथ ब्रोमोबेंजीन का नाइट्रीकरण करने पर ऑर्थो-ब्रोमोनाइट्रोबेंजीन $(B)$ और पैरा-ब्रोमोनाइट्रोबेंजीन $(C)$ का मिश्रण प्राप्त होता है।
चूंकि ऑर्थो- और पैरा-आइसोमर्स के क्वथनांक उनकी ध्रुवीयता और अंतर-आणविक बलों में अंतर के कारण भिन्न होते हैं,इसलिए उन्हें प्रभाजी आसवन (fractional distillation) द्वारा अलग किया जाता है।
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निम्नलिखित कार्बोनियन के लिए स्थिरता का सही क्रम क्या है?
$CH_2=CH^{-}, CH_3-CH_2^{-}, CH\equiv C^{-}$
A
$CH_3-CH_2^{-} > CH_2=CH^{-} > CH\equiv C^{-}$
B
$CH_2=CH^{-} > CH\equiv C^{-} > CH_3-CH_2^{-}$
C
$CH\equiv C^{-} > CH_2=CH^{-} > CH_3-CH_2^{-}$
D
$CH\equiv C^{-} > CH_3-CH_2^{-} > CH_2=CH^{-}$

Solution

(C) कार्बोनियन की स्थिरता,ऋण आवेश वाले कार्बन परमाणु के संकरण में $s$-लक्षण की प्रतिशत मात्रा के सीधे समानुपाती होती है।
$1$. $CH\equiv C^{-}$ में,कार्बन $sp$ संकरित है ($50\% \ s$-लक्षण)।
$2$. $CH_2=CH^{-}$ में,कार्बन $sp^2$ संकरित है ($33.3\% \ s$-लक्षण)।
$3$. $CH_3-CH_2^{-}$ में,कार्बन $sp^3$ संकरित है ($25\% \ s$-लक्षण)।
अधिक $s$-लक्षण का अर्थ है कि इलेक्ट्रॉन नाभिक के अधिक निकट हैं,जिससे स्थिरता बढ़ती है।
अतः,स्थिरता का सही क्रम है: $CH\equiv C^{-} > CH_2=CH^{-} > CH_3-CH_2^{-}$।
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$600 \ K$ और $0.5 \ MPa$ पर एक आदर्श गैस '$X$' के $20.0 \ dm^{3}$ का समतापीय उत्क्रमणीय प्रसार होता है जब तक कि गैस का दबाव $0.2 \ MPa$ न हो जाए। निम्नलिखित में से कौन सा विकल्प सही है? (दिया गया है: $\log\,2=0.3010$ और $\log\,5=0.6989$)
A
$w=-9.1 \ kJ, \Delta U=0, \Delta H=0, q=9.1 \ kJ$
B
$w=9.1 \ J, \Delta U=9.1 \ J, \Delta H=0; q=0$
C
$w=+4.1 \ kJ, \Delta U=0, \Delta H=0; q=-4.1 \ kJ$
D
$w=-3.9 \ kJ, \Delta U=0, \Delta H=0; q=3.9 \ kJ$

Solution

(A) आदर्श गैस के लिए समतापीय प्रक्रिया में $\Delta U=0$ और $\Delta H=0$ होता है।
समतापीय उत्क्रमणीय कार्य $w = -P_1V_1 \ln(P_1/P_2)$ द्वारा दिया जाता है।
$w = -(0.5 \times 10^6) \times (20.0 \times 10^{-3}) \times \ln(0.5/0.2) = -10000 \times 2.303 \times \log(2.5)$.
$\log(2.5) = 0.6989 - 0.3010 = 0.3979$.
$w = -10000 \times 2.303 \times 0.3979 \approx -9.1 \ kJ$.
चूंकि $\Delta U = q + w = 0$, इसलिए $q = -w = 9.1 \ kJ$.
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$X$ और $Y$ क्रमशः अम्लीकृत $K_{2}Cr_{2}O_{7}$ द्वारा $I^{-}$ का $I_{2}$ में और $S^{2-}$ का $S$ में ऑक्सीकरण के दौरान शामिल इलेक्ट्रॉनों की संख्या है। $X + Y$ का मान . . . . . . है।
A
$6$
B
$10$
C
$12$
D
$8$

Solution

(C) अम्लीकृत $K_{2}Cr_{2}O_{7}$ द्वारा $I^{-}$ का $I_{2}$ में ऑक्सीकरण के लिए संतुलित रासायनिक समीकरण है: $Cr_{2}O_{7}^{2-} + 14H^{+} + 6I^{-} \rightarrow 2Cr^{3+} + 3I_{2} + 7H_{2}O$। यहाँ,$6$ इलेक्ट्रॉन शामिल हैं,इसलिए $X = 6$।
अम्लीकृत $K_{2}Cr_{2}O_{7}$ द्वारा $S^{2-}$ का $S$ में ऑक्सीकरण के लिए संतुलित रासायनिक समीकरण है: $Cr_{2}O_{7}^{2-} + 3S^{2-} + 14H^{+} \rightarrow 3S + 2Cr^{3+} + 7H_{2}O$। यहाँ,$6$ इलेक्ट्रॉन शामिल हैं,इसलिए $Y = 6$।
अतः,$X + Y = 6 + 6 = 12$।
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नाइट्रोजन के आकलन की ड्यूमा विधि में,$0.50 \ g$ कार्बनिक यौगिक $300 \ K$ और $715 \ mm$ दाब पर $70 \ mL$ नाइट्रोजन देता है। कार्बनिक यौगिक में नाइट्रोजन का प्रतिशत . . . . . . $ \% $ है ($300 \ K$ पर जलीय तनाव $15 \ mm$ है)।
A
$10$
B
$15$
C
$20$
D
$25$

Solution

(B) चरण $1$: शुष्क $N_2$ गैस का दाब ज्ञात करें। $P_{N_2} = 715 - 15 = 700 \ mm = \frac{700}{760} \ atm$.
चरण $2$: $N_2$ के मोल ज्ञात करने के लिए आदर्श गैस समीकरण $PV = nRT$ का उपयोग करें। $n_{N_2} = \frac{(700/760) \times 0.070}{0.0821 \times 300} \approx 0.00263 \ mol$.
चरण $3$: $N_2$ का द्रव्यमान ज्ञात करें। $W_{N_2} = 0.00263 \times 28 \approx 0.07364 \ g$.
चरण $4$: नाइट्रोजन का प्रतिशत ज्ञात करें। $\% \ N = \frac{0.07364}{0.50} \times 100 \approx 14.73 \% \approx 15 \% $.
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हाइड्रोजन स्पेक्ट्रम में लाइमैन श्रेणी में कई स्पेक्ट्रल रेखाएं होती हैं ($L_1, L_2, L_3 \ldots$; $L_1$ लाइमैन श्रेणी में सबसे कम ऊर्जा वाली रेखा है)। इसी तरह,इसमें बामर श्रेणी में कई स्पेक्ट्रल रेखाएं होती हैं ($B_1, B_2, B_3 \ldots$; $B_1$ बामर रेखाओं में सबसे कम ऊर्जा वाली रेखा है)। $L_1$ की ऊर्जा $B_1$ की ऊर्जा का $x$ गुना है। $x$ का मान . . . . . . $\times 10^{-1}$ है (निकटतम पूर्णांक)।
A
$27$
B
$54$
C
$108$
D
$36$

Solution

(B) स्पेक्ट्रल रेखा की ऊर्जा $\Delta E = 13.6 \times Z^2 (\frac{1}{n_1^2} - \frac{1}{n_2^2}) \text{ eV}$ द्वारा दी जाती है।
लायमैन श्रेणी के लिए,सबसे कम ऊर्जा वाली रेखा $(L_1)$ $n_2 = 2$ से $n_1 = 1$ के संक्रमण के अनुरूप है: $\Delta E(L_1) = 13.6 \times 1^2 (\frac{1}{1^2} - \frac{1}{2^2}) = 13.6 \times \frac{3}{4} \text{ eV}$.
बामर श्रेणी के लिए,सबसे कम ऊर्जा वाली रेखा $(B_1)$ $n_2 = 3$ से $n_1 = 2$ के संक्रमण के अनुरूप है: $\Delta E(B_1) = 13.6 \times 1^2 (\frac{1}{2^2} - \frac{1}{3^2}) = 13.6 \times (\frac{1}{4} - \frac{1}{9}) = 13.6 \times \frac{5}{36} \text{ eV}$.
दिया गया है कि $\Delta E(L_1) = x \times \Delta E(B_1)$,इसलिए $x = \frac{\Delta E(L_1)}{\Delta E(B_1)} = \frac{3/4}{5/36} = \frac{3}{4} \times \frac{36}{5} = \frac{27}{5} = 5.4$.
$x$ को $x \times 10^{-1}$ के रूप में व्यक्त करने पर,$5.4 = 54 \times 10^{-1}$.
अतः,मान $54$ है।
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दो समूह $IV$ धातु आयनों $X^{2+}$ और $Y^{2+}$ पर विचार करें। $0.01 \ M$ $X^{2+}$ और $0.01 \ M$ $Y^{2+}$ युक्त एक विलयन को $H_2S$ के साथ संतृप्त किया जाता है। वह pH जिस पर धातु सल्फाइड $YS$ अवक्षेप के रूप में बनेगा,वह . . . . . . है (निकटतम पूर्णांक)। (दिया गया है: $K_{sp}(XS)=1 \times 10^{-22}$ $25^{\circ} C$ पर,$K_{sp}(YS)=4 \times 10^{-16}$ $25^{\circ} C$ पर,$[H_2S]=0.1 \ M$ विलयन में,$K_{a1} \times K_{a2}(H_2S)=1.0 \times 10^{-21}$,$\log 2=0.30, \log 3=0.48, \log 5=0.70$)
A
$2$
B
$3$
C
$6$
D
$4$

Solution

(D) $YS_{(s)}$ के अवक्षेपण के लिए,शर्त $[Y^{2+}][S^{2-}] \geq K_{sp}(YS)$ है।
दिया गया है $[Y^{2+}] = 0.01 \ M$ और $K_{sp}(YS) = 4 \times 10^{-16}$,इसलिए $[S^{2-}] \geq \frac{4 \times 10^{-16}}{0.01} = 4 \times 10^{-14} \ M$.
$H_2S$ के वियोजन के लिए,साम्य $H_2S_{(aq)} \rightleftharpoons 2H^{+}_{(aq)} + S^{2-}_{(aq)}$ है।
साम्य स्थिरांक का व्यंजक $\frac{[S^{2-}][H^{+}]^2}{[H_2S]} = K_{a1} \times K_{a2} = 1.0 \times 10^{-21}$ है।
मान रखने पर: $\frac{(4 \times 10^{-14})[H^{+}]^2}{0.1} = 1.0 \times 10^{-21}$.
$[H^{+}]^2 = \frac{1.0 \times 10^{-22}}{4 \times 10^{-14}} = 0.25 \times 10^{-8} = 25 \times 10^{-10}$.
$[H^{+}] = 5 \times 10^{-5} \ M$.
$pH = -\log[H^{+}] = -\log(5 \times 10^{-5}) = 5 - \log 5 = 5 - 0.70 = 4.3$.
pH के लिए निकटतम पूर्णांक $4$ है।
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नीचे दो कथन दिए गए हैं:
कथन $I$ : धात्विक गुण के संदर्भ में $K > Mg > Al > B$ सही क्रम है।
कथन $II$ : किसी भी तत्व के लिए परमाणु त्रिज्या हमेशा आयनिक त्रिज्या से बड़ी होती है।
उपरोक्त कथनों के प्रकाश में,नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनें
A
कथन $I$ और कथन $II$ दोनों सत्य हैं
B
कथन $I$ और कथन $II$ दोनों असत्य हैं
C
कथन $I$ असत्य है लेकिन कथन $II$ सत्य है
D
कथन $I$ सत्य है लेकिन कथन $II$ असत्य है

Solution

(D) कथन $I$ सत्य है: धात्विक गुण समूह में नीचे जाने पर बढ़ता है और आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर घटता है। $K$ ($Group$ $1$) सबसे अधिक धात्विक है,उसके बाद $Mg$ ($Group$ $2$),$Al$ ($Group$ $13$),और $B$ ($Group$ $13$,उपधातु) आते हैं। अतः,$K > Mg > Al > B$ सही है।
कथन $II$ असत्य है: हालांकि परमाणु त्रिज्या धनायनिक त्रिज्या से बड़ी होती है,लेकिन यह ऋणायनिक त्रिज्या से छोटी होती है। इसलिए,यह किसी भी तत्व के लिए हमेशा आयनिक त्रिज्या से बड़ी नहीं होती है।
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निम्नलिखित कार्बोनियन को उनकी स्थिरता के घटते क्रम में व्यवस्थित करें:
$I. \ p-Br-C_6H_4-CH_2^-$
$II. \ C_6H_5-CH_2^-$
$III. \ p-CH_3O-C_6H_4-CH_2^-$
$IV. \ p-CHO-C_6H_4-CH_2^-$
$V. \ p-CH_3-C_6H_4-CH_2^-$
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनें:
A
$I > II > IV > V > III$
B
$I > IV > II > V > III$
C
$IV > I > II > V > III$
D
$IV > II > I > III > V$

Solution

(C) कार्बोनियन की स्थिरता इलेक्ट्रॉन-आकर्षक समूहों $(EWG)$ द्वारा बढ़ती है और इलेक्ट्रॉन-दाता समूहों $(EDG)$ द्वारा घटती है।
$IV$ $(p-CHO)$: $-CHO$ एक प्रबल $EWG$ ($-M$ प्रभाव) है,जो अधिकतम स्थिरता प्रदान करता है।
$I$ $(p-Br)$: $-Br$ एक $EWG$ ($-I$ प्रभाव) है,जो स्थिरता प्रदान करता है।
$II$ $(C_6H_5-CH_2^-)$: संदर्भ संरचना।
$V$ $(p-CH_3)$: $-CH_3$ एक $EDG$ ($+I$ और हाइपरकंजुगेशन) है,जो स्थिरता को कम करता है।
$III$ $(p-CH_3O)$: $-OCH_3$ एक प्रबल $EDG$ ($+M$ प्रभाव) है,जो न्यूनतम स्थिरता प्रदान करता है।
अतः,स्थिरता का घटता क्रम $IV > I > II > V > III$ है।
77
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List-$I$ को List-$II$ के साथ सुमेलित कीजिए:
List-$I$ (आदर्श गैस निकाय के लिए समतापीय प्रक्रम) List-$II$ (किया गया कार्य)
$(A)$ उत्क्रमणीय प्रसार $(I)$ $w = 0$
$(B)$ मुक्त प्रसार $(II)$ $w = -nRT \ln \frac{V_f}{V_i}$
$(C)$ अनुत्क्रमणीय प्रसार $(III)$ $w = -p_{ex}(V_f - V_i)$
$(D)$ अनुत्क्रमणीय संपीड़न $(IV)$ $w = -p_{ex}(V_i - V_f)$

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए:
A
$(A)-(IV), (B)-(I), (C)-(III), (D)-(II)$
B
$(A)-(IV), (B)-(II), (C)-(III), (D)-(I)$
C
$(A)-(I), (B)-(III), (C)-(II), (D)-(IV)$
D
$(A)-(II), (B)-(I), (C)-(III), (D)-(IV)$

Solution

(D) उत्क्रमणीय समतापीय प्रसार के लिए,किया गया कार्य $w = -nRT \ln \frac{V_f}{V_i}$ है। अतः,$(A) \rightarrow (II)$.
$(B)$ मुक्त प्रसार के लिए,बाह्य दाब $p_{ex} = 0$ है,इसलिए $w = -p_{ex} \Delta V = 0$। अतः,$(B) \rightarrow (I)$.
$(C)$ अनुत्क्रमणीय प्रसार के लिए,किया गया कार्य $w = -p_{ex}(V_f - V_i)$ है। अतः,$(C) \rightarrow (III)$.
$(D)$ अनुत्क्रमणीय संपीड़न के लिए,किया गया कार्य $w = -p_{ex}(V_i - V_f)$ है। अतः,$(D) \rightarrow (IV)$.
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तीन धातु क्लोराइड $x$,$y$ और $z$ पर विचार करें,जहाँ $x$ कमरे के तापमान पर पानी में घुलनशील है,$y$ कमरे के तापमान पर पानी में अल्प घुलनशील है और $z$ गर्म पानी में घुलनशील है। $x$,$y$ और $z$ क्रमशः हैं:
A
$MgCl_{2}$,$AgCl$ और $AlCl_{3}$
B
$AgCl$,$Hg_{2}Cl_{2}$ और $PbCl_{2}$
C
$AlCl_{3}$,$PbCl_{2}$ और $BaCl_{2}$
D
$CuCl_{2}$,$AgCl$ और $PbCl_{2}$

Solution

(D) $CuCl_{2}$ एक धातु क्लोराइड है जो कमरे के तापमान पर पानी में घुलनशील है।
$AgCl$ कमरे के तापमान पर पानी में अल्प घुलनशील के रूप में जाना जाता है।
$PbCl_{2}$ एक धातु क्लोराइड है जो ठंडे पानी में अघुलनशील है लेकिन गर्म पानी में घुलनशील है।
अतः,सही क्रम $x = CuCl_{2}$,$y = AgCl$,और $z = PbCl_{2}$ है।
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निम्नलिखित में से कौन से संयोजन सही हैं :
$A.$ $IF_3$ $\rightarrow$ $T$-आकार $(sp^3d)$
$B.$ $IF_5$ $\rightarrow$ वर्गाकार पिरामिडी $(sp^3d^2)$
$C.$ $IF_7$ $\rightarrow$ पंचकोणीय द्विपिरामिडी $(sp^3d^3)$
$D.$ $ClO_4^-$ $\rightarrow$ वर्गाकार समतलीय $(sp^3d)$
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनें :
A
केवल $A$,$B$ और $C$
B
केवल $A$ और $B$
C
$A$,$B$,$C$ और $D$
D
केवल $B$,$C$ और $D$

Solution

(A) $1$. $IF_3$: आयोडीन के पास $7$ संयोजी इलेक्ट्रॉन होते हैं। यह $F$ परमाणुओं के साथ $3$ बंध बनाता है और इसमें $2$ एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म होते हैं। स्टेरिक संख्या = $3 + 2 = 5$ ($sp^3d$ संकरण)। $2$ एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्मों के कारण,यह $T$-आकार का होता है। (सही)
$2$. $IF_5$: आयोडीन के पास $7$ संयोजी इलेक्ट्रॉन होते हैं। यह $F$ परमाणुओं के साथ $5$ बंध बनाता है और इसमें $1$ एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म होता है। स्टेरिक संख्या = $5 + 1 = 6$ ($sp^3d^2$ संकरण)। $1$ एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म के कारण,यह वर्गाकार पिरामिडी होता है। (सही)
$3$. $IF_7$: आयोडीन के पास $7$ संयोजी इलेक्ट्रॉन होते हैं। यह $F$ परमाणुओं के साथ $7$ बंध बनाता है और इसमें $0$ एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म होते हैं। स्टेरिक संख्या = $7 + 0 = 7$ ($sp^3d^3$ संकरण)। यह पंचकोणीय द्विपिरामिडी होता है। (सही)
$4$. $ClO_4^-$: क्लोरीन के पास $7$ संयोजी इलेक्ट्रॉन होते हैं। यह $O$ परमाणुओं के साथ $4$ बंध बनाता है और इसमें $0$ एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म होते हैं। स्टेरिक संख्या = $4 + 0 = 4$ ($sp^3$ संकरण)। यह वर्गाकार समतलीय नहीं बल्कि चतुष्फलकीय होता है। (गलत)
अतः,$A$,$B$ और $C$ सही हैं।
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नीचे कुछ अणुओं/आयनों के बारे में कथन दिए गए हैं। सही कथनों की पहचान कीजिए।
$A$. $NF_3$ का द्विध्रुव आघूर्ण (dipole moment) $NH_3$ से अधिक है।
$B$. $BeH_2$ का द्विध्रुव आघूर्ण शून्य है।
$C$. $O_2^{2-}$ और $F_2$ का बंध क्रम (bond order) समान है।
$D$. ओजोन के केंद्रीय ऑक्सीजन परमाणु पर औपचारिक आवेश (formal charge) $-1$ है।
$E$. $NO_2$ में,तीनों परमाणु अष्टक नियम का पालन करते हैं,इसलिए यह बहुत स्थिर है।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए:
A
$A, B, C, D$ और $E$
B
केवल $B$ और $C$
C
केवल $B, C$ और $D$
D
केवल $A, C$ और $D$

Solution

(B) द्विध्रुव आघूर्ण: $NF_3 < NH_3$। कथन $A$ गलत है।
$(B)$ $BeH_2$ का संकरण $sp$ है और यह रेखीय है,इसलिए इसका द्विध्रुव आघूर्ण $0$ है। कथन $B$ सही है।
$(C)$ $O_2^{2-}$ का बंध क्रम $\frac{10-8}{2} = 1$ है। $F_2$ का बंध क्रम $\frac{8-6}{2} = 1$ है। कथन $C$ सही है।
$(D)$ $O_3$ में,केंद्रीय ऑक्सीजन परमाणु पर औपचारिक आवेश $+1$ होता है। कथन $D$ गलत है।
$(E)$ $NO_2$ में,नाइट्रोजन के पास विषम संख्या में इलेक्ट्रॉन होते हैं,इसलिए यह अष्टक नियम का पालन नहीं करता है। कथन $E$ गलत है।
अतः,केवल $B$ और $C$ सही हैं।
81
ChemistryDifficultMCQJEE Main · 2026
निम्नलिखित एल्कीनों को उनकी स्थिरता के घटते क्रम में व्यवस्थित कीजिए। नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए:
Question diagram
A
$I > III > II > IV$
B
$III > II > I > IV$
C
$I > III > IV > II$
D
$II > I > III > IV$

Solution

(A) एल्कीनों की स्थिरता अतिसंयुग्मन संरचनाओं (अल्फा-हाइड्रोजन) की संख्या और त्रिविम कारकों (steric factors) द्वारा निर्धारित की जाती है।
$I$: टेट्रा-प्रतिस्थापित एल्कीन,$12 \ \alpha-H$,सबसे अधिक स्थिर।
$III$: ट्राई-प्रतिस्थापित एल्कीन,$9 \ \alpha-H$।
$II$: डाई-प्रतिस्थापित ट्रांस-एल्कीन,$6 \ \alpha-H$,कम त्रिविम बाधा के कारण सिस से अधिक स्थिर।
$IV$: डाई-प्रतिस्थापित सिस-एल्कीन,$6 \ \alpha-H$,ट्रांस से कम स्थिर।
अतः,स्थिरता का घटता क्रम $I > III > II > IV$ है।
82
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$A \rightarrow D$ एक ऊष्माशोषी अभिक्रिया है जो $3$ चरणों (प्राथमिक) में होती है।
$(i)$ $A \rightarrow B$ $\Delta H_{i} = +ve$
$(ii)$ $B \rightarrow C$ $\Delta H_{ii} = -ve$
$(iii)$ $C \rightarrow D$ $\Delta H_{iii} = -ve$
स्थितिज ऊर्जा ($y$-अक्ष) बनाम अभिक्रिया निर्देशांक ($x$-अक्ष) के बीच निम्नलिखित में से कौन सा ग्राफ $A \rightarrow D$ की अभिक्रिया प्रोफाइल का सही प्रतिनिधित्व करता है?
A
Option A
B
Option B
C
Option C
D
Option D

Solution

(A) दिया गया है:
$A \rightarrow D$; $\Delta_{t} H = (+ve) = E_{D} - E_{A} \therefore E_{D} > E_{A}$.
क्रियाविधि:
$A \rightarrow B$; $\Delta_{r} H = (+ve) \Rightarrow E_{B} > E_{A}$
$B \rightarrow C$; $\Delta_{r} H = (-ve) \Rightarrow E_{C} < E_{B}$
$C \rightarrow D$; $\Delta_{r} H = (-ve) \Rightarrow E_{D} < E_{C}$

चूंकि समग्र अभिक्रिया ऊष्माशोषी है,इसलिए $D$ का अंतिम ऊर्जा स्तर $A$ के प्रारंभिक ऊर्जा स्तर से अधिक होना चाहिए। हालाँकि,मध्यवर्ती चरणों में ऊष्माक्षेपी प्रक्रियाएं शामिल हैं। ऊर्जा संबंधों $E_{B} > E_{A}$,$E_{C} < E_{B}$,और $E_{D} < E_{C}$ के आधार पर,स्थितिज ऊर्जा प्रोफाइल में $B$ को $A$ और $C$ के सापेक्ष स्थानीय अधिकतम होना चाहिए,और $C$ को $B$ और $D$ के सापेक्ष स्थानीय न्यूनतम होना चाहिए।
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$H_2X$ के प्रथम और द्वितीय आयनीकरण स्थिरांक क्रमशः $2.5 \times 10^{-8}$ और $1.0 \times 10^{-13}$ हैं। $0.1 \ M$ $H_2X$ विलयन में $X^{2-}$ की सांद्रता . . . . . . $\times 10^{-15} \ M$ है। $Y$ का मान क्या है?
A
$100$
B
$10$
C
$1$
D
$0.1$

Solution

(A) $H_2X$ जैसे द्वि-प्रोटोनिक अम्ल के लिए,आयनीकरण के चरण इस प्रकार हैं:
$H_2X \rightleftharpoons H^{+} + HX^{-}$,$K_{a1} = 2.5 \times 10^{-8}$
$HX^{-} \rightleftharpoons H^{+} + X^{2-}$,$K_{a2} = 1.0 \times 10^{-13}$
चूंकि $K_{a1} \gg K_{a2}$,$[H^{+}]$ मुख्य रूप से पहले वियोजन द्वारा निर्धारित होता है।
$0.1 \ M$ $H_2X$ के लिए: $[H^{+}] \approx \sqrt{K_{a1} \times C} = \sqrt{2.5 \times 10^{-8} \times 0.1} = 5 \times 10^{-5} \ M$.
दूसरा वियोजन स्थिरांक $K_{a2} = \frac{[H^{+}][X^{2-}]}{[HX^{-}]}$ है।
चूंकि $[H^{+}] \approx [HX^{-}]$,इसलिए $[X^{2-}] = K_{a2} = 1.0 \times 10^{-13} \ M$.
इसे $Y \times 10^{-15} \ M$ के रूप में व्यक्त करने पर:
$1.0 \times 10^{-13} = 100 \times 10^{-15} \ M$.
अतः,$Y = 100$.
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नीचे दो कथन दिए गए हैं:
कथन $I$: बंध वियोजन एन्थैल्पी के संदर्भ में सही क्रम $Cl_{2} > Br_{2} > F_{2} > I_{2}$ है।
कथन $II$: धातु हैलाइडों के सहसंयोजक गुण का सही क्रम $[SnCl_{4} > SnCl_{2}]$,$[PbCl_{4} > PbCl_{2}]$ और $[UF_{4} > UF_{6}]$ है।
उपरोक्त कथनों के प्रकाश में,नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनें:
A
कथन $I$ सत्य है लेकिन कथन $II$ असत्य है
B
कथन $I$ और कथन $II$ दोनों सत्य हैं
C
कथन $I$ असत्य है लेकिन कथन $II$ सत्य है
D
कथन $I$ और कथन $II$ दोनों असत्य हैं

Solution

(A) कथन $I$: छोटे $F$ परमाणुओं के एकाकी युग्मों के बीच उच्च अंतर-इलेक्ट्रॉनिक प्रतिकर्षण के कारण $F_{2}$ की बंध वियोजन एन्थैल्पी $Cl_{2}$ और $Br_{2}$ से कम होती है। अतः,सही क्रम $Cl_{2} > Br_{2} > F_{2} > I_{2}$ है। कथन $I$ सत्य है।
कथन $II$: फजान के नियम के अनुसार,धातु धनायन पर उच्च ऑक्सीकरण अवस्था अधिक सहसंयोजक गुण की ओर ले जाती है। इसलिए,$SnCl_{4} > SnCl_{2}$ और $PbCl_{4} > PbCl_{2}$ सही हैं। हालाँकि,यूरेनियम हैलाइडों के लिए,$UF_{6}$ की ऑक्सीकरण अवस्था $(+6)$ $UF_{4}$ $(+4)$ से अधिक है,इसलिए $UF_{6} > UF_{4}$ सही क्रम है। कथन में $UF_{4} > UF_{6}$ दिया गया है,जो गलत है। अतः,कथन $II$ असत्य है।
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नीचे दो कथन दिए गए हैं:
कथन-$I$ : नीचे दर्शाया गया यौगिक $(X)$,$NaHCO_3$ विलयन में घुल जाता है और इसमें दो कायरल कार्बन परमाणु हैं।
कथन-$II$ : नीचे दर्शाया गया यौगिक $(Y)$,में दो कार्बन $sp^3$ संकरण वाले,एक कार्बन $sp^2$ और एक कार्बन $sp$ संकरण वाला है।
उपरोक्त कथनों के आलोक में,नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनें:
Question diagram
A
कथन $I$ सत्य है लेकिन कथन $II$ असत्य है
B
कथन $I$ असत्य है लेकिन कथन $II$ सत्य है
C
कथन $I$ और कथन $II$ दोनों सत्य हैं
D
कथन $I$ और कथन $II$ दोनों असत्य हैं

Solution

(A) कथन-$I$: यौगिक $(X)$ में एक कार्बोक्सिलिक एसिड समूह $(-COOH)$ होता है,जो $NaHCO_3$ के साथ अभिक्रिया करके $CO_2$ गैस उत्पन्न करता है,इसलिए यह घुल जाता है। इसमें दो कायरल केंद्र भी हैं,इसलिए कथन-$I$ सत्य है।
कथन-$II$: यौगिक $(Y)$ है $CH_3-CH=C=O$। संरचना $CH_3-CH=C=O$ है। पहला कार्बन $(-CH_3)$ $sp^3$ है,दूसरा कार्बन $(-CH=)$ $sp^2$ है,तीसरा कार्बन $(=C=)$ $sp$ है। इस प्रकार,इसमें एक $sp^3$,एक $sp^2$ और एक $sp$ संकरित कार्बन है। अतः,कथन-$II$ असत्य है।
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सहसंयोजक बंध लंबाई के संदर्भ में $C-H(A)$, $C-O(B)$, $C=O(C)$ और $C\equiv N(D)$ बंधों का सही बढ़ता क्रम क्या है?
A
$A < D < C < B$
B
$A < C < D < B$
C
$D < C < B < A$
D
$D < C < A < B$

Solution

(A) दिए गए बंधों की बंध लंबाई लगभग इस प्रकार है:
$C-H(A) \approx 107 \ pm$
$C\equiv N(D) \approx 116 \ pm$
$C=O(C) \approx 121 \ pm$
$C-O(B) \approx 143 \ pm$
इन मानों की तुलना करने पर, बंध लंबाई का बढ़ता क्रम $A < D < C < B$ है.
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नीचे दो कथन दिए गए हैं:
कथन-$I$: परमाणु/आयनिक त्रिज्या के संदर्भ में सही क्रम $Al > Mg > Mg^{2+} > Al^{3+}$ है।
कथन-$II$: इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी के परिमाण के संदर्भ में सही क्रम $Cl > Br > S > O$ है।
उपर्युक्त कथनों के आलोक में, नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनें:
A
कथन-$I$ और कथन-$II$ दोनों गलत हैं
B
कथन-$I$ गलत है लेकिन कथन-$II$ सही है
C
कथन-$I$ सही है लेकिन कथन-$II$ गलत है
D
कथन-$I$ और कथन-$II$ दोनों सही हैं

Solution

(B) कथन-$I$: $Mg$ $(160 \ pm)$ की परमाणु त्रिज्या $Al$ $(143 \ pm)$ से अधिक है। $Mg^{2+}$ $(72 \ pm)$ की आयनिक त्रिज्या $Al^{3+}$ $(54 \ pm)$ से अधिक है। अतः, सही क्रम $Mg > Al > Mg^{2+} > Al^{3+}$ है। इसलिए, कथन-$I$ गलत है।
कथन-$II$: इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी का परिमाण सामान्यतः आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर बढ़ता है और समूह में ऊपर से नीचे जाने पर घटता है। छोटे आकार और अंतर-इलेक्ट्रॉनिक प्रतिकर्षण के कारण, $\text{ऑक्सीजन}$ $(O)$ की इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी $\text{सल्फर}$ $(S)$ से कम होती है। इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी के परिमाण का सही क्रम $Cl > Br > S > O$ है। इसलिए, कथन-$II$ सही है।
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निम्नलिखित डेटा पर विचार करें:
$\Delta_{f}H^{\Theta}(CH_{4}, g) = -X \ kJ \ mol^{-1}$
ग्रेफाइट की ऊर्ध्वपातन एन्थैल्पी = $Y \ kJ \ mol^{-1}$
$H_{2}$ की वियोजन एन्थैल्पी = $Z \ kJ \ mol^{-1}$
$C-H$ बंध की बंध एन्थैल्पी क्या होगी?
A
$\frac{X+Y+2Z}{4}$
B
$\frac{X+Y+4Z}{2}$
C
$X+Y+Z$
D
$\frac{-X+Y+Z}{4}$

Solution

(A) मीथेन के निर्माण के लिए थर्मोकेमिकल समीकरण: $C_{(s)} + 2H_{2(g)} \rightarrow CH_{4(g)}$
निर्माण एन्थैल्पी: $\Delta_{f}H^{\Theta} = \sum \text{अभिकारकों की बंध एन्थैल्पी} - \sum \text{उत्पादों की बंध एन्थैल्पी}$
$-X = [\Delta H_{sub}(C) + 2 \times B.E.(H-H)] - [4 \times B.E.(C-H)]$
दिए गए मान रखने पर: $-X = Y + 2Z - 4 \times B.E.(C-H)$
$B.E.(C-H)$ के लिए व्यवस्थित करने पर: $4 \times B.E.(C-H) = X + Y + 2Z$
$B.E.(C-H) = \frac{X+Y+2Z}{4}$
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सामान्य विश्लेषण द्वारा,$1.00 \ g$ यौगिक $(X)$ $1.79 \ g$ मैग्नीशियम पाइरोफॉस्फेट देता है। यौगिक $(X)$ में फास्फोरस का प्रतिशत है: (निकटतम पूर्णांक)
(दिया गया है,मोलर द्रव्यमान $g \ mol^{-1}$ में; $O=16, Mg=24, P=31$)
A
$50$
B
$30$
C
$20$
D
$40$

Solution

(A) मैग्नीशियम पाइरोफॉस्फेट $(Mg_2P_2O_7)$ का मोलर द्रव्यमान: $2 \times 24 + 2 \times 31 + 7 \times 16 = 222 \ g \ mol^{-1}$ है।
$Mg_2P_2O_7$ के मोल = $\frac{1.79}{222} \approx 0.008063 \ mol$ है।
चूंकि प्रत्येक $Mg_2P_2O_7$ अणु में $2$ फास्फोरस परमाणु होते हैं,इसलिए $P$ के मोल = $2 \times 0.008063 = 0.016126 \ mol$ है।
फास्फोरस का द्रव्यमान = $0.016126 \times 31 \approx 0.4999 \ g$ है।
फास्फोरस का प्रतिशत = $\frac{0.4999}{1.00} \times 100 = 49.99\% \approx 50\%$ है।
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जलीय $HCl$,$MnO_{2(s)}$ के साथ अभिक्रिया करके $MnCl_{2(aq)}$,$Cl_{2(g)}$ और $H_{2}O_{(l)}$ बनाता है। जब $8.7 \ g$ $MnO_{2(s)}$ की अभिक्रिया अतिरिक्त जलीय $HCl$ विलयन के साथ कराई जाती है,तो मुक्त $Cl_{2}$ का भार ($g$ में) क्या होगा? (दिया गया मोलर द्रव्यमान $g \ mol^{-1}$ में: $Mn=55$,$Cl=35.5$,$O=16$,$H=1$)
A
$7.1$
B
$71$
C
$21.3$
D
$14.2$

Solution

(A) अभिक्रिया के लिए संतुलित रासायनिक समीकरण: $MnO_{2(s)} + 4HCl_{(aq)} \rightarrow MnCl_{2(aq)} + Cl_{2(g)} + 2H_{2}O_{(l)}$
$MnO_{2}$ का मोलर द्रव्यमान: $55 + (2 \times 16) = 87 \ g \ mol^{-1}$.
$MnO_{2}$ के मोलों की संख्या: $n = \frac{8.7 \ g}{87 \ g \ mol^{-1}} = 0.1 \ mol$.
अभिक्रिया की रससमीकरणमिति के अनुसार,$1 \ mol$ $MnO_{2}$,$1 \ mol$ $Cl_{2}$ उत्पन्न करता है।
अतः,$0.1 \ mol$ $MnO_{2}$,$0.1 \ mol$ $Cl_{2}$ उत्पन्न करेगा।
$Cl_{2}$ का मोलर द्रव्यमान: $2 \times 35.5 = 71 \ g \ mol^{-1}$.
मुक्त $Cl_{2}$ का भार: $0.1 \ mol \times 71 \ g \ mol^{-1} = 7.1 \ g$.
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List-$I$ को List-$II$ के साथ सुमेलित कीजिए।
List-$I$ (यौगिकों का युग्म)List-$II$ (समावयवियों के प्रकार)
$A$. $2-$मेथिलप्रोपीन और ब्यूट$-1-$ईन$I$. त्रिविम समावयवी
$B$. $Cis-$ब्यूट$-2-$ईन और $trans-$ब्यूट$-2-$ईन$II$. स्थान समावयवी
$C$. $2-$ब्यूटेनॉल और डाईएथिल ईथर$III$. श्रृंखला समावयवी
$D$. ब्यूट$-1-$ईन और ब्यूट$-2-$ईन$IV$. क्रियात्मक समूह समावयवी

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए:
A
$A-III, B-I, C-IV, D-II$
B
$A-III, B-I, C-II, D-IV$
C
$A-I, B-IV, C-III, D-II$
D
$A-II, B-I, C-IV, D-III$

Solution

(A) . $2-$मेथिलप्रोपीन और ब्यूट$-1-$ईन कार्बन श्रृंखला में भिन्न हैं,इसलिए वे श्रृंखला समावयवी $(III)$ हैं।
$B$. $Cis-$ब्यूट$-2-$ईन और $trans-$ब्यूट$-2-$ईन ज्यामितीय समावयवी हैं,जो त्रिविम समावयवियों $(I)$ का एक प्रकार है।
$C$. $2-$ब्यूटेनॉल (अल्कोहल) और डाईएथिल ईथर (ईथर) में अलग-अलग क्रियात्मक समूह होते हैं,इसलिए वे क्रियात्मक समूह समावयवी $(IV)$ हैं।
$D$. ब्यूट$-1-$ईन और ब्यूट$-2-$ईन द्वि-आबंध की स्थिति में भिन्न हैं,इसलिए वे स्थान समावयवी $(II)$ हैं।
अतः,सही मिलान $A-III, B-I, C-IV, D-II$ है।
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परमाण्वीय हाइड्रोजन के लिए निम्नलिखित स्पेक्ट्रमी रेखाओं पर विचार करें:
$A$. पाश्चन श्रेणी की पहली रेखा
$B$. बामर श्रेणी की दूसरी रेखा
$C$. पाश्चन श्रेणी की तीसरी रेखा
$D$. ब्रैकेट श्रेणी की चौथी रेखा
ऊर्जा के बढ़ते क्रम में उपरोक्त रेखाओं का सही विन्यास है:
A
$D < C < A < B$
B
$A < B < C < D$
C
$C < D < B < A$
D
$D < A < C < B$

Solution

(D) स्पेक्ट्रमी रेखा की ऊर्जा $\Delta E = 13.6 \times Z^2 \times (\frac{1}{n_1^2} - \frac{1}{n_2^2}) \text{ eV}$ द्वारा दी जाती है। हाइड्रोजन $(Z=1)$ के लिए,$\Delta E \propto (\frac{1}{n_1^2} - \frac{1}{n_2^2})$.
$A$. पाश्चन ($1^{st}$ रेखा)$n_1=3, n_2=4 \rightarrow \Delta E \propto (\frac{1}{9} - \frac{1}{16}) = \frac{7}{144} \approx 0.0486$
$B$. बामर ($2^{nd}$ रेखा)$n_1=2, n_2=4 \rightarrow \Delta E \propto (\frac{1}{4} - \frac{1}{16}) = \frac{3}{16} = 0.1875$
$C$. पाश्चन ($3^{rd}$ रेखा)$n_1=3, n_2=6 \rightarrow \Delta E \propto (\frac{1}{9} - \frac{1}{36}) = \frac{3}{36} = 0.0833$
$D$. ब्रैकेट ($4^{th}$ रेखा)$n_1=4, n_2=8 \rightarrow \Delta E \propto (\frac{1}{16} - \frac{1}{64}) = \frac{3}{64} = 0.0468$

मानों की तुलना करने पर: $0.0468 (D) < 0.0486 (A) < 0.0833 (C) < 0.1875 (B)$.
अतः,सही बढ़ता क्रम $D < A < C < B$ है।
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यदि $Li$ की ऊर्ध्वपातन एन्थैल्पी $155 \ kJ \ mol^{-1}$ है,$F_2$ की वियोजन एन्थैल्पी $150 \ kJ \ mol^{-1}$ है,$Li$ की आयनन एन्थैल्पी $520 \ kJ \ mol^{-1}$ है,$F$ की इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी $-313 \ kJ \ mol^{-1}$ है और $LiF$ की मानक संभवन एन्थैल्पी $-594 \ kJ \ mol^{-1}$ है,तो $LiF$ की जालक एन्थैल्पी का परिमाण . . . . . . $kJ \ mol^{-1}$ (निकटतम पूर्णांक) है।
A
$1000$
B
$1031$
C
$1150$
D
$950$

Solution

(B) $LiF(s)$ के निर्माण के लिए बॉर्न-हेबर चक्र के अनुसार:
$\Delta H_f^{\circ} = \Delta H_{sub}(Li) + \frac{1}{2} \Delta H_{diss}(F_2) + IE(Li) + EGE(F) + U$
जहाँ $U$ जालक एन्थैल्पी है।
दिए गए मानों को प्रतिस्थापित करने पर:
$-594 = 155 + \frac{150}{2} + 520 + (-313) + U$
$-594 = 155 + 75 + 520 - 313 + U$
$-594 = 437 + U$
$U = -594 - 437 = -1031 \ kJ \ mol^{-1}$
जालक एन्थैल्पी का परिमाण $|-1031| = 1031 \ kJ \ mol^{-1}$ है।
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डाइब्रोमो यौगिक $[P]$ (आणविक सूत्र: $C_{9}H_{10}Br_{2}$) को जब अतिरिक्त सोडामाइड के साथ गर्म किया जाता है और उसके बाद तनु $HCl$ के साथ उपचारित किया जाता है,तो $[Q]$ प्राप्त होता है। $[Q]$ को मरक्यूरिक सल्फेट और तनु सल्फ्यूरिक एसिड के साथ गर्म करने पर $[R]$ प्राप्त होता है,जो धनात्मक आयोडोफॉर्म परीक्षण देता है लेकिन ऋणात्मक टॉलेन परीक्षण देता है। यौगिक $[P]$ है:
A
Option A
B
Option B
C
Option C
D
Option D

Solution

(C) अभिक्रिया क्रम इस प्रकार है:
$1$. यौगिक $[P]$ $1,1-dibromo-1-(4-methylphenyl)methane$ है।
$2$. $[P]$ की अतिरिक्त $NaNH_2$ और उसके बाद $HCl$ के साथ अभिक्रिया से विहाइड्रोहैलोजनीकरण होता है,जिससे टर्मिनल एल्काइन $[Q]$ बनता है,जो $1-ethynyl-4-methylbenzene$ है।
$3$. $HgSO_4$ और तनु $H_2SO_4$ के साथ एल्काइन $[Q]$ का जलयोजन (कुचेरोव अभिक्रिया) करने पर कीटोन $[R]$ प्राप्त होता है,जो $4-methylacetophenone$ है।
$4$. $4-methylacetophenone$ में $CH_3CO-$ समूह होता है,इसलिए यह धनात्मक आयोडोफॉर्म परीक्षण देता है। यह एक कीटोन है,इसलिए यह ऋणात्मक टॉलेन परीक्षण देता है।
$5$. अतः,$[P]$ $1,1-dibromoethyl-4-methylbenzene$ है (विकल्प $C$ द्वारा दर्शाया गया)।
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$H$ परमाणु की पहली (न्यूनतम) बामर रेखा की ऊर्जा $x \ J$ है। $H$ परमाणु की दूसरी बामर रेखा की ऊर्जा ($J$ में) क्या होगी?
A
$x^{2}$
B
$\frac{x}{1.35}$
C
$2x$
D
$1.35x$

Solution

(D) हाइड्रोजन जैसे परमाणु में संक्रमण की ऊर्जा $\Delta E = 13.6 \times Z^2 \left( \frac{1}{n_1^2} - \frac{1}{n_2^2} \right) \ eV$ द्वारा दी जाती है।
पहली बामर रेखा के लिए,संक्रमण $n_2 = 3$ से $n_1 = 2$ है:
$x = 13.6 \times (1)^2 \left( \frac{1}{2^2} - \frac{1}{3^2} \right) = 13.6 \left( \frac{5}{36} \right) \quad \dots(i)$
दूसरी बामर रेखा के लिए,संक्रमण $n_2 = 4$ से $n_1 = 2$ है:
$\Delta E = 13.6 \times (1)^2 \left( \frac{1}{2^2} - \frac{1}{4^2} \right) = 13.6 \left( \frac{3}{16} \right) \quad \dots(ii)$
समीकरण $(ii)$ को समीकरण $(i)$ से विभाजित करने पर:
$\frac{\Delta E}{x} = \frac{3/16}{5/36} = \frac{3}{16} \times \frac{36}{5} = 1.35$
अतः,$\Delta E = 1.35x$.
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निम्नलिखित में से कौन सा मिश्रण $pH = 9.25$ वाला बफर विलयन देता है?
दिया गया है: $pK_{b} (NH_{4}OH) = 4.75$
A
$0.2 \ M \ NH_{4}OH \ (0.4 \ L) + 0.1 \ M \ HCl \ (1 \ L)$
B
$0.2 \ M \ NH_{4}OH \ (0.5 \ L) + 0.1 \ M \ HCl \ (0.5 \ L)$
C
$0.5 \ M \ NH_{4}OH \ (0.2 \ L) + 0.2 \ M \ HCl \ (0.5 \ L)$
D
$0.4 \ M \ NH_{4}OH \ (1 \ L) + 0.1 \ M \ HCl \ (1 \ L)$

Solution

(B) क्षारीय बफर के लिए,$pOH = pK_{b} + \log \frac{[Salt]}{[Base]}$।
$pH = 9.25$ दिया गया है,इसलिए $pOH = 14 - 9.25 = 4.75$।
मान रखने पर: $4.75 = 4.75 + \log \frac{[Salt]}{[Base]}$,जिसका अर्थ है $\log \frac{[Salt]}{[Base]} = 0$,इसलिए $[Salt] = [Base]$।
इसका मतलब है कि बने हुए $NH_{4}Cl$ (लवण) के मिलीमोल शेष $NH_{4}OH$ (क्षार) के मिलीमोल के बराबर होने चाहिए।
विकल्प $(B)$ की जाँच करने पर:
$NH_{4}OH + HCl \rightarrow NH_{4}Cl + H_{2}O$
$NH_{4}OH$ के प्रारंभिक मिलीमोल = $0.2 \ M \times 500 \ mL = 100 \ mmol$।
$HCl$ के प्रारंभिक मिलीमोल = $0.1 \ M \times 500 \ mL = 50 \ mmol$।
अभिक्रिया के बाद,$50 \ mmol$ $NH_{4}Cl$ बनता है और $50 \ mmol$ $NH_{4}OH$ शेष रहता है।
चूँकि $[Salt] = [Base]$,इसलिए $pH = 9.25$ होगा।
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नीचे दो कथन दिए गए हैं:
कथन-$I$: प्रथम आयनन एन्थैल्पी के मानों के संदर्भ में $C < O < N < F$ सही क्रम है।
कथन-$II$: इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी के मानों के परिमाण के संदर्भ में $S > Se > Te > Po > O$ सही क्रम है।
उपर्युक्त कथनों के आलोक में,नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनें:
A
कथन-$I$ गलत है लेकिन कथन-$II$ सही है।
B
कथन-$I$ और कथन-$II$ दोनों सही हैं।
C
कथन-$I$ और कथन-$II$ दोनों गलत हैं।
D
कथन-$I$ सही है लेकिन कथन-$II$ गलत है।

Solution

(B) कथन-$I$: प्रथम आयनन एन्थैल्पी $(IE_1)$ सामान्यतः $Z_{eff}$ बढ़ने के कारण आवर्त में बढ़ती है। हालाँकि,$N$ $(2p^3)$ में स्थिर अर्ध-पूरित विन्यास होता है,जिससे इसकी $IE_1$,$O$ $(2p^4)$ से अधिक हो जाती है। सही क्रम $C < O < N < F$ है। अतः,कथन-$I$ सही है।
कथन-$II$: इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी का परिमाण $(|\Delta_{eg}H|)$ सामान्यतः समूह में नीचे जाने पर घटता है। हालाँकि,ऑक्सीजन $(O)$ का आकार बहुत छोटा होता है,जिससे इसमें अंतर-इलेक्ट्रॉनिक प्रतिकर्षण अधिक होता है,जो इसके इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी के मान को समूह के अन्य सदस्यों की तुलना में कम कर देता है। सही क्रम $S > Se > Te > Po > O$ है। अतः,कथन-$II$ सही है।
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$H_2S$,$H_2O$,$NF_3$,$NH_3$ और $CHCl_3$ में से,सबसे कम द्विध्रुव आघूर्ण (dipole moment) वाला अणु $(X)$ पहचानिए। अणु $(X)$ के केंद्रीय परमाणु पर उपस्थित एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्मों (lone pairs) की संख्या है:
A
$2$
B
$0$
C
$1$
D
$3$

Solution

(C) दिए गए अणुओं के द्विध्रुव आघूर्ण इस प्रकार हैं:
$H_2S = 0.95 \ D$
$H_2O = 1.85 \ D$
$NF_3 = 0.23 \ D$
$NH_3 = 1.47 \ D$
$CHCl_3 = 1.04 \ D$
इन मानों की तुलना करने पर,$NF_3$ का द्विध्रुव आघूर्ण सबसे कम है।
अतः,अणु $(X)$ $NF_3$ है।
$NF_3$ में,केंद्रीय परमाणु नाइट्रोजन $(N)$ है।
नाइट्रोजन के पास $5$ संयोजी इलेक्ट्रॉन होते हैं। यह $3$ फ्लोरीन परमाणुओं के साथ $3$ एकल बंध बनाता है,जिससे नाइट्रोजन परमाणु पर $1$ एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म शेष रहता है।
इस प्रकार,केंद्रीय परमाणु पर एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्मों की संख्या $1$ है।
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निम्नलिखित यौगिक का $IUPAC$ नाम क्या है?
Question diagram
A
$n$-propyl-$2$-bromo-$5$-methylheptanoate
B
$2$-bromo-$5$-methylhexylpropanoate
C
$2$-bromo-$5$-methylpropanoate
D
$n$-propyl-$1$-bromo-$4$-methylhexanoate

Solution

(A) $1$. क्रियात्मक समूह की पहचान करें: यह यौगिक एक एस्टर है,इसलिए प्रत्यय -oate होगा। ऑक्सीजन परमाणु से जुड़ा एल्काइल समूह प्रोपाइल है।
$2$. मुख्य श्रृंखला को क्रमांकित करें: एस्टर समूह का कार्बन $C-1$ है। एस्टर समूह वाली सबसे लंबी श्रृंखला में $7$ कार्बन हैं,इसलिए यह एक हेप्टानोएट व्युत्पन्न है।
$3$. प्रतिस्थापियों की पहचान करें: स्थिति $2$ पर एक ब्रोमो समूह और स्थिति $5$ पर एक मिथाइल समूह है।
$4$. नामकरण: सही नाम प्रोपाइल $2$-ब्रोमो-$5$-मिथाइलहेप्टानोएट है।
100
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जब $1 \ g$ यौगिक $(X)$ को नाइट्रोजन के आकलन के लिए जेल्डाल विधि में लिया जाता है,तो उत्पन्न अमोनिया द्वारा $15 \ mL$,$1 \ M$ $H_2SO_4$ उदासीन होता है। यौगिक $(X)$ में नाइट्रोजन का प्रतिशत है:
A
$21$
B
$0.42$
C
$42$
D
$0.21$

Solution

(C) $H_2SO_4$ के तुल्यांक = $1 \times 0.015 \times 2 = 0.03 \ eq$.
उत्पन्न $NH_3$ के मोल = $0.03 \ mol$.
नाइट्रोजन का द्रव्यमान = $0.03 \times 14 = 0.42 \ g$.
नाइट्रोजन का प्रतिशत = $\frac{0.42}{1} \times 100 = 42\%$.
101
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निम्नलिखित में से कौन सी अभिक्रिया सही ढंग से प्रदर्शित नहीं है?
A
$3$-मिथाइलसाइक्लोहेक्सिन + $Br_2, h\nu \rightarrow$ $3$-(ब्रोमोमिथाइल)साइक्लोहेक्सिन
B
बेंजीनडायज़ोनियम क्लोराइड + $Cu_2Br_2/HBr \rightarrow$ ब्रोमोबेंजीन
C
टोल्यूनि + $Br_2, h\nu \rightarrow$ बेंजाइल ब्रोमाइड
D
टोल्यूनि + $Br_2, Fe, \text{dark} \rightarrow$ ऑर्थो और पैरा ब्रोमोटोल्यूनि

Solution

(A) अभिक्रिया $(1)$ में,प्रारंभिक पदार्थ $3$-मिथाइलसाइक्लोहेक्सिन है। रेडिकल ब्रोमीनीकरण की स्थितियों $(Br_2, h\nu)$ के तहत,अभिक्रिया मुक्त रेडिकल के निर्माण के माध्यम से आगे बढ़ती है। सबसे स्थिर रेडिकल $C-3$ स्थिति पर बनने वाला तृतीयक $(3^\circ)$ रेडिकल है। इसलिए,मुख्य उत्पाद $3$-ब्रोमो-$3$-मिथाइलसाइक्लोहेक्सिन होना चाहिए,न कि $3$-(ब्रोमोमिथाइल)साइक्लोहेक्सिन। अतः,अभिक्रिया $(1)$ गलत तरीके से प्रदर्शित है।
102
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नीचे दो कथन दिए गए हैं:
कथन I: हाइड्रोजन हैलाइडों के क्वथनांक का बढ़ता क्रम \(HCl < HBr < HI < HF\) है
कथन II: हाइड्रोजन हैलाइडों के गलनांक का बढ़ता क्रम \(HCl < HBr < HF < HI\) है
उपरोक्त कथनों के आलोक में, नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनें
A
कथन I और कथन II दोनों सत्य हैं
B
कथन I सत्य है, किन्तु कथन II असत्य है
C
कथन I और कथन II दोनों असत्य हैं
D
कथन I असत्य है, किन्तु कथन II सत्य है

Solution

सही क्रम है :
(i) क्वथनांक: \(HF > HI > HBr > HCl\)
(ii) गलनांक: \(HI > HF > HBr > HCl\)
103
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$X$,$[Pt(NH_3)(H_2O)BrCl]$ द्वारा प्रदर्शित ज्यामितीय समावयवियों की संख्या है।
$Y$,$[CrCl_2(ox)_2]^{3-}$ द्वारा प्रदर्शित प्रकाशिक रूप से अक्रिय समावयवी (समावयवियों) की संख्या है।
$Z$,$[Co(NH_3)_3(NO_2)_3]$ द्वारा प्रदर्शित ज्यामितीय समावयवियों की संख्या है।
$X+Y+Z$ का मान . . . . . . है।
A
$4$
B
$5$
C
$6$
D
$7$

Solution

(C) $X$: $[M(abcd)]$ प्रकार के वर्ग समतलीय संकुल के लिए,ज्यामितीय समावयवियों की संख्या $3$ है।
$Y$: $[M(aa)_2b_2]$ प्रकार के अष्टफलकीय संकुल के लिए,$cis$-समावयवी प्रकाशिक रूप से सक्रिय होता है और $trans$-समावयवी प्रकाशिक रूप से अक्रिय होता है। अतः,$Y = 1$.
$Z$: $[Ma_3b_3]$ प्रकार के अष्टफलकीय संकुल के लिए,ज्यामितीय समावयवी $fac$ और $mer$ होते हैं। अतः,$Z = 2$.
$X+Y+Z = 3+1+2 = 6$.
104
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$500 \ mL$ $1.2 \ M$ $KI$ विलयन को क्षारीय माध्यम में $500 \ mL$ $0.2 \ M$ $KMnO_4$ विलयन के साथ मिलाया जाता है। मुक्त आयोडीन को स्टार्च सूचक की उपस्थिति में मानक $0.1 \ M$ $Na_2S_2O_3$ विलयन के साथ तब तक अनुमापित किया जाता है जब तक कि नीला रंग गायब न हो जाए। उपभोग किए गए $Na_2S_2O_3$ का आयतन ($L$ में) . . . . . . है। (निकटतम पूर्णांक)
A
$1$
B
$2$
C
$3$
D
$4$

Solution

(C) क्षारीय माध्यम में,$KMnO_4$ और $KI$ के बीच अभिक्रिया: $2MnO_4^{-} + I^{-} + H_2O \rightarrow 2MnO_2 + I_2 + 2OH^{-}$.
यहाँ,$KMnO_4$ के लिए $n$-कारक $3$ है ($Mn$ की ऑक्सीकरण अवस्था $+7$ से $+4$ में परिवर्तित होती है)।
$KMnO_4$ के तुल्यांक = $0.2 \times 0.5 \times 3 = 0.3 \ \text{eq}$.
अतः $I_2$ के तुल्यांक भी $0.3 \ \text{eq}$ होंगे।
अनुमापन अभिक्रिया: $I_2 + 2S_2O_3^{2-} \rightarrow 2I^{-} + S_4O_6^{2-}$.
$I_2$ के तुल्यांक = $Na_2S_2O_3$ के तुल्यांक.
$0.3 = 0.1 \times V \times 1$.
$V = 3 \ L$.
105
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निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?
A
$[Ni(CN)_4]^{2-}$ और $[NiCl_4]^{2-}$ प्रतिचुंबकीय हैं और $Ni(CO)_4$ अनुचुंबकीय है।
B
$Ni(CO)_4$ और $[NiCl_4]^{2-}$ प्रतिचुंबकीय हैं और $[Ni(CN)_4]^{2-}$ अनुचुंबकीय है।
C
$Ni(CO)_4$ और $[Ni(CN)_4]^{2-}$ प्रतिचुंबकीय हैं और $[NiCl_4]^{2-}$ अनुचुंबकीय है।
D
$Ni(CO)_4$ प्रतिचुंबकीय है और $[NiCl_4]^{2-}$ और $[Ni(CN)_4]^{2-}$ अनुचुंबकीय हैं।

Solution

(C) $1$. $[Ni(CN)_4]^{2-}$ के लिए: $Ni^{2+}$ का विन्यास $3d^8$ है। $CN^-$ एक प्रबल क्षेत्र लिगेंड है,जो इलेक्ट्रॉनों का युग्मन करता है। यह $dsp^2$ संकरण बनाता है,जिससे यह प्रतिचुंबकीय होता है।
$2$. $Ni(CO)_4$ के लिए: $Ni$ का विन्यास $3d^8 4s^2$ $(3d^{10})$ है। $CO$ एक प्रबल क्षेत्र लिगेंड है। यह $sp^3$ संकरण बनाता है,जिससे यह प्रतिचुंबकीय होता है।
$3$. $[NiCl_4]^{2-}$ के लिए: $Ni^{2+}$ का विन्यास $3d^8$ है। $Cl^-$ एक दुर्बल क्षेत्र लिगेंड है,इसलिए इलेक्ट्रॉनों का युग्मन नहीं होता है। यह दो अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों के साथ $sp^3$ संकरण बनाता है,जिससे यह अनुचुंबकीय होता है।
अतः,$Ni(CO)_4$ और $[Ni(CN)_4]^{2-}$ प्रतिचुंबकीय हैं,जबकि $[NiCl_4]^{2-}$ अनुचुंबकीय है।
106
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नीचे दो कथन दिए गए हैं:
कथन $I$: निम्नलिखित में से उन युग्मों की संख्या,जिनमें दोनों आयन जलीय विलयन में रंगीन हैं,$3$ है: $[Sc^{3+}, Ti^{3+}], [Mn^{2+}, Cr^{2+}], [Cu^{2+}, Zn^{2+}]$ और $[Ni^{2+}, Ti^{4+}]$.
कथन $II$: $Th^{4+}, Ce^{4+}, Gd^{3+}$ और $Eu^{2+}$ में $Th^{4+}$ सबसे प्रबल अपचायक (reducing agent) है.
उपरोक्त कथनों के आलोक में,नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए:
A
कथन $I$ सत्य है लेकिन कथन $II$ असत्य है
B
कथन $I$ असत्य है लेकिन कथन $II$ सत्य है
C
कथन $I$ और कथन $II$ दोनों असत्य हैं
D
कथन $I$ और कथन $II$ दोनों सत्य हैं

Solution

(C) कथन $I$: $d^0$ या $d^{10}$ विन्यास वाले आयन रंगहीन होते हैं। $Sc^{3+}$ $(d^0)$,$Ti^{4+}$ $(d^0)$,और $Zn^{2+}$ $(d^{10})$ रंगहीन हैं।
- $[Sc^{3+}, Ti^{3+}]$: $Sc^{3+}$ रंगहीन है,$Ti^{3+}$ रंगीन है।
- $[Mn^{2+}, Cr^{2+}]$: दोनों रंगीन हैं ($Mn^{2+}$ $d^5$ है,$Cr^{2+}$ $d^4$ है)।
- $[Cu^{2+}, Zn^{2+}]$: $Cu^{2+}$ रंगीन है $(d^9)$,$Zn^{2+}$ रंगहीन है।
- $[Ni^{2+}, Ti^{4+}]$: $Ni^{2+}$ रंगीन है $(d^8)$,$Ti^{4+}$ रंगहीन है।
केवल $1$ युग्म $([Mn^{2+}, Cr^{2+}])$ में दोनों आयन रंगीन हैं। अतः,कथन $I$ असत्य है।
कथन $II$: $Th^{4+}$ थोरियम की सबसे स्थिर ऑक्सीकरण अवस्था है और इसका आगे ऑक्सीकरण नहीं हो सकता,इसलिए यह अपचायक के रूप में कार्य नहीं कर सकता। $Eu^{2+}$ एक प्रबल अपचायक है क्योंकि यह $Eu^{3+}$ में परिवर्तित होने की प्रवृत्ति रखता है। अतः,कथन $II$ असत्य है।
107
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दिए गए पेंटापेप्टाइड में,एक आवश्यक अमीनो एसिड $(Y)$ और पेंटापेप्टाइड में मौजूद अनुक्रम ज्ञात कीजिए: नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनें:
Question diagram
A
$(Y) = \text{Threonine}, (\text{Sequence}) = \text{Ser} - \text{Thr} - \text{Asp} - \text{Gly} - \text{Ala}$
B
$(Y) = \text{Serine}, (\text{Sequence}) = \text{Thr} - \text{Ser} - \text{Asp} - \text{Ala} - \text{Gly}$
C
$(Y) = \text{Threonine}, (\text{Sequence}) = \text{Thr} - \text{Ser} - \text{Asp} - \text{Gly} - \text{Ala}$
D
$(Y) = \text{Serine}, (\text{Sequence}) = \text{Ser} - \text{Asp} - \text{Thr} - \text{Ala} - \text{Gly}$

Solution

(C) पेंटापेप्टाइड की संरचना का विश्लेषण करके,हम जल-अपघटन द्वारा पेप्टाइड बंधों को तोड़कर व्यक्तिगत अमीनो एसिड की पहचान कर सकते हैं। मौजूद अमीनो एसिड हैं:
$1$. $N$-टर्मिनल: $\text{Threonine} (\text{Thr})$
$2$. दूसरा: $\text{Serine} (\text{Ser})$
$3$. तीसरा: $\text{Aspartic acid} (\text{Asp})$
$4$. चौथा: $\text{Glycine} (\text{Gly})$
$5$. $C$-टर्मिनल: $\text{Alanine} (\text{Ala})$
अतः,अनुक्रम $\text{Thr} - \text{Ser} - \text{Asp} - \text{Gly} - \text{Ala}$ है।
इनमें से,$\text{Threonine}$ एक आवश्यक अमीनो एसिड है। इसलिए,$(Y) = \text{Threonine}$ और अनुक्रम $\text{Thr} - \text{Ser} - \text{Asp} - \text{Gly} - \text{Ala}$ है।
108
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निम्नलिखित अभिक्रियाओं पर विचार करें और सही अभिक्रिया की पहचान करें।
A
Option A
B
Option B
C
Option C
D
Option D

Solution

(D) $1$. अभिक्रिया $(A)$ में,बेंज़ेनिलाइड का नाइट्रीकरण मुख्य रूप से एनिलीन रिंग पर होता है। दिया गया उत्पाद गलत है।
$2$. अभिक्रिया $(B)$ में,एरील हैलाइड गैब्रियल थैलिमाइड संश्लेषण नहीं देते हैं।
$3$. अभिक्रिया $(C)$ में,कार्बिलएमाइन अभिक्रिया से प्राप्त आइसोसाइनाइड का अपचयन करने पर $N$-मिथाइलबेंज़िलएमाइन प्राप्त होता है,प्राथमिक एमाइन नहीं।
$4$. अभिक्रिया $(D)$ हॉफमैन ब्रोमामाइड निम्नीकरण है,जो प्रोपेनामाइड से एथिलएमाइन देता है,जो सही अभिक्रिया है।
109
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नीचे दो कथन दिए गए हैं:
कथन $I$: Griess-Ilosvay परीक्षण का उपयोग नाइट्राइट आयन $(NO_2^-)$ का पता लगाने के लिए किया जाता है,जिसमें सल्फानिलिक एसिड और $\alpha$-नेफ्थाइलमाइन अभिकर्मक का उपयोग शामिल है।
कथन $II$: उपरोक्त परीक्षण में,सल्फानिलिक एसिड का अम्लीकृत नाइट्राइट आयन द्वारा डायज़ोटाइजेशन किया जाता है,जो $\alpha$-नेफ्थाइलमाइन के साथ आगे युग्मन (coupling) करके एक एज़ो-डाई बनाता है।
उपरोक्त कथनों के प्रकाश में,नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनें।
A
कथन $I$ गलत है लेकिन कथन $II$ सही है
B
कथन $I$ और कथन $II$ दोनों सही हैं
C
कथन $I$ सही है लेकिन कथन $II$ गलत है
D
कथन $I$ और कथन $II$ दोनों गलत हैं

Solution

(B) Griess-Ilosvay परीक्षण नाइट्राइट आयनों $(NO_2^-)$ का पता लगाने के लिए उपयोग की जाने वाली एक मानक विश्लेषणात्मक विधि है।
इस परीक्षण में,सल्फानिलिक एसिड अम्लीय माध्यम में नाइट्राइट आयन से उत्पन्न नाइट्रस एसिड $(HNO_2)$ के साथ प्रतिक्रिया करके एक डायज़ोनियम लवण बनाता है।
यह डायज़ोनियम लवण फिर लाल रंग की एज़ो-डाई बनाने के लिए $\alpha$-नेफ्थाइलमाइन के साथ युग्मन प्रतिक्रिया करता है।
दोनों कथन इस परीक्षण के रासायनिक सिद्धांतों का सटीक वर्णन करते हैं।
इसलिए,कथन $I$ और कथन $II$ दोनों सही हैं।
110
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समूह $15$ के तत्वों के हाइड्राइड $EH_{3}$ $(E = N, P, As, Sb, Bi)$ के संबंध में,निम्नलिखित में से सही कथन का चयन करें:
$A$. हाइड्राइडों का स्थायित्व समूह में नीचे जाने पर घटता है।
$B$. हाइड्राइडों की क्षारीयता समूह में नीचे जाने पर घटती है।
$C$. अपचायक गुण समूह में नीचे जाने पर बढ़ता है।
$D$. क्वथनांक समूह में नीचे जाने पर बढ़ता है।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनें:
A
केवल $A, B$ और $C$
B
केवल $A$ और $D$
C
$A, B, C$ और $D$
D
केवल $B$ और $C$

Solution

(A) स्थायित्व: केंद्रीय परमाणु का आकार बढ़ने के साथ बंध वियोजन एन्थैल्पी घटती है,इसलिए स्थायित्व घटता है: $NH_{3} > PH_{3} > AsH_{3} > SbH_{3} > BiH_{3}$। अतः,कथन $A$ सही है।
क्षारीयता: आकार बढ़ने के साथ केंद्रीय परमाणु पर इलेक्ट्रॉन घनत्व घटता है,इसलिए क्षारीयता घटती है: $NH_{3} > PH_{3} > AsH_{3} > SbH_{3} > BiH_{3}$। अतः,कथन $B$ सही है।
अपचायक गुण: जैसे-जैसे स्थायित्व घटता है,$H_{2}$ मुक्त करने की प्रवृत्ति बढ़ती है,इसलिए अपचायक गुण बढ़ता है: $NH_{3} < PH_{3} < AsH_{3} < SbH_{3} < BiH_{3}$। अतः,कथन $C$ सही है।
क्वथनांक: हाइड्रोजन बंध के कारण $NH_{3}$ का क्वथनांक $PH_{3}$ से अधिक होता है। क्रम $PH_{3} < AsH_{3} < NH_{3} < SbH_{3} < BiH_{3}$ है। अतः,कथन $D$ गलत है।
111
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नीचे चार आइसोमेरिक यौगिक $(P, Q, R, S)$ दिए गए हैं। नीचे दिए गए सही कथनों की पहचान करें.
$A$. $Q, R$ और $S$,$2,4-DNP$ के साथ अवक्षेप देंगे.
$B$. $P$ और $Q$ सकारात्मक बेयर परीक्षण देंगे.
$C$. $Q$ और $R$ कालिख वाली ज्वाला देंगे.
$D$. $R$ और $S$,$I_2/NaOH$ के साथ पीला अवक्षेप देंगे.
$E$. केवल $Q$ टोलन अभिकर्मक के साथ सिल्वर जमा करेगा.
सही विकल्प चुनें.
Question diagram
A
केवल $A, C$ और $E$
B
केवल $A$ और $E$
C
केवल $C$ और $E$
D
केवल $A, B, D$ और $E$

Solution

(A) संरचनाएं हैं: $P$ ($1$-फेनिलप्रोप$-2-$एन$-1-$ओल),$Q$ ($3$-फेनिलप्रोपेनल),$R$ ($1$-फेनिलप्रोपेन$-2-$ओन),$S$ ($1$-फेनिलप्रोपेन$-1-$ओन).
$A$. $2,4-DNP$ एल्डिहाइड और कीटोन के साथ प्रतिक्रिया करता है. $Q$ (एल्डिहाइड),$R$ (कीटोन) और $S$ (कीटोन) परीक्षण देते हैं. कथन $A$ सही है.
$B$. बेयर परीक्षण असंतृप्ति के लिए है. केवल $P$ में द्वि-आबंध है. कथन $B$ गलत है.
$C$. एरोमैटिक यौगिक कालिख वाली ज्वाला देते हैं. चारों यौगिकों में फेनिल रिंग है,इसलिए सभी कालिख वाली ज्वाला देते हैं. कथन $C$ सही है.
$D$. आयोडोफॉर्म परीक्षण के लिए $CH_3CO-$ समूह आवश्यक है. $R$ में $CH_3CO-$ है और $S$ में नहीं है. कथन $D$ गलत है.
$E$. टोलन अभिकर्मक एल्डिहाइड के लिए है. केवल $Q$ एल्डिहाइड है. कथन $E$ सही है.
सही कथन $A, C, E$ हैं,इसलिए सही विकल्प $A$ है.
112
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एक कार्बनिक यौगिक प्रथम कोटि का अपघटन प्रदर्शित करता है। इसकी प्रारंभिक सांद्रता के $\left(\frac{1}{8}\right)^{\text{th}}$ और $\left(\frac{1}{10}\right)^{\text{th}}$ भाग तक अपघटन के लिए लिया गया समय क्रमशः $t_{1/8}$ और $t_{1/10}$ है। $\frac{t_{1/8}}{t_{1/10}} \times 10$ का मान क्या है? (दिया गया है: $\log 2 = 0.3$)
A
$9$
B
$0.9$
C
$3$
D
$30$

Solution

(A) प्रथम कोटि की अभिक्रिया के लिए,सांद्रता $A_0$ से $A_t$ तक पहुँचने में लगा समय $t = \frac{1}{k} \ln \frac{A_0}{A_t}$ द्वारा दिया जाता है।
$t_{1/8}$ के लिए,शेष सांद्रता $\frac{A_0}{8}$ है,इसलिए $t_{1/8} = \frac{1}{k} \ln \frac{A_0}{A_0/8} = \frac{1}{k} \ln 8$.
$t_{1/10}$ के लिए,शेष सांद्रता $\frac{A_0}{10}$ है,इसलिए $t_{1/10} = \frac{1}{k} \ln \frac{A_0}{A_0/10} = \frac{1}{k} \ln 10$.
अनुपात लेने पर: $\frac{t_{1/8}}{t_{1/10}} = \frac{\ln 8}{\ln 10} = \frac{\log 8}{\log 10} = \log 8$.
चूंकि $\log 8 = \log 2^3 = 3 \log 2 = 3 \times 0.3 = 0.9$.
अतः,$\frac{t_{1/8}}{t_{1/10}} \times 10 = 0.9 \times 10 = 9$.
113
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निम्नलिखित अभिक्रिया अनुक्रम पर विचार करें:
$\text{Compound } (x)$ $\xrightarrow[(ii) H_3O^{+}]{(i) CO_2, NaOH, 120^{\circ}C, \text{high pressure}} \text{Compound } (y) \text{ (Major Product)}$
$[76.6\% C, 6.38\% H, \text{vapour density } 47]$
यौगिक $(y)$ उदासीन $FeCl_3$ विलयन के साथ विशिष्ट रंग देता है।
उपरोक्त अनुक्रम के लिए निम्नलिखित में से गलत कथन की पहचान करें।
A
दोनों यौगिक $x$ और $y$ $NaOH$ में घुल जाएंगे।
B
यौगिक $y$ $NaHCO_3$ में घुल जाएगा और एक गैस उत्सर्जित करेगा।
C
यौगिक $x$,यौगिक $y$ से अधिक अम्लीय है।
D
दोनों यौगिक $x$ और $y$ कालिख वाली लौ के साथ जलेंगे।

Solution

(C) यह कोल्बे-श्मिट अभिक्रिया है। यौगिक $(y)$ का आणविक भार $2 \times \text{vapour density} = 2 \times 47 = 94$ है।
दी गई प्रतिशतता के अनुसार: $C = 76.6\%$,$H = 6.38\%$,$O = 17.02\%$.
मोल का अनुपात $C:H:O = 6:6:1$ है। अतः,यौगिक $(x)$ फिनोल है और यौगिक $(y)$ सैलिसिलिक एसिड है।
फिनोल $(x)$ अम्लीय है और $NaOH$ में घुल जाता है। सैलिसिलिक एसिड $(y)$ फिनोल से अधिक अम्लीय है,इसलिए यह भी $NaOH$ में घुल जाता है।
सैलिसिलिक एसिड $(y)$ $NaHCO_3$ के साथ अभिक्रिया करके $CO_2$ गैस उत्सर्जित करता है।
दोनों सुगंधित यौगिक हैं और कालिख वाली लौ के साथ जलते हैं।
कथन $(c)$ गलत है क्योंकि सैलिसिलिक एसिड $(y)$ फिनोल $(x)$ से अधिक अम्लीय है।
114
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$T(K)$ पर,$2$ मोल द्रव $A$ और $3$ मोल द्रव $B$ को मिश्रित किया जाता है। बने आदर्श विलयन का वाष्प दाब $320 \ mm \ Hg$ है। इस अवस्था पर,विलयन में एक मोल $A$ और एक मोल $B$ मिलाया जाता है। अब वाष्प दाब $328.6 \ mm \ Hg$ मापा जाता है। $A$ और $B$ के वाष्प दाब ($mm \ Hg$ में) क्रमशः हैं:
A
$300, 200$
B
$600, 400$
C
$400, 300$
D
$500, 200$

Solution

(D) आदर्श विलयन के लिए राउल्ट के नियम के अनुसार,$P_S = X_A P_A^{\circ} + X_B P_B^{\circ}$ है।
प्रथम मिश्रण के लिए: $X_A = 2/5$,$X_B = 3/5$,और $P_S = 320 \ mm \ Hg$ है।
$320 = P_A^{\circ} (2/5) + P_B^{\circ} (3/5) \implies 2 P_A^{\circ} + 3 P_B^{\circ} = 1600$ ...$(I)$
$1$ मोल $A$ और $1$ मोल $B$ मिलाने के बाद,नए मोल $3$ मोल $A$ और $4$ मोल $B$ हैं। कुल मोल = $7$ है।
$X_A' = 3/7$,$X_B' = 4/7$,और $P_S' = 328.6 \ mm \ Hg$ है।
$328.6 = P_A^{\circ} (3/7) + P_B^{\circ} (4/7) \implies 3 P_A^{\circ} + 4 P_B^{\circ} = 2300.2$ ...$(II)$
समीकरणों को हल करने पर:
$(I)$ को $3$ से गुणा करने पर: $6 P_A^{\circ} + 9 P_B^{\circ} = 4800$ ...$(III)$
$(II)$ को $2$ से गुणा करने पर: $6 P_A^{\circ} + 8 P_B^{\circ} = 4600.4$ ...$(IV)$
$(III)$ में से $(IV)$ घटाने पर: $P_B^{\circ} = 199.6 \ mm \ Hg \approx 200 \ mm \ Hg$ प्राप्त होता है।
$P_B^{\circ} = 200$ को $(I)$ में रखने पर: $2 P_A^{\circ} + 3(200) = 1600 \implies 2 P_A^{\circ} = 1000 \implies P_A^{\circ} = 500 \ mm \ Hg$ प्राप्त होता है।
अतः,वाष्प दाब $500 \ mm \ Hg$ और $200 \ mm \ Hg$ हैं।
115
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$Cu^{2+}$ के अम्लीय विलयन से तब तक विद्युत प्रवाहित की जाती है जब तक कि सारा $Cu^{2+}$ समाप्त न हो जाए,जिसके परिणामस्वरूप $300 \ mg$ $Cu$ धातु जमा होती है। इसके बाद,$600 \ mA$ की धारा को उसी विलयन से अगले $28 \ \text{मिनट}$ तक प्रवाहित किया जाता है,जबकि विलयन का कुल आयतन $200 \ mL$ पर स्थिर रखा जाता है। पूरी प्रक्रिया के दौरान $STP$ पर उत्सर्जित ऑक्सीजन का कुल आयतन . . . . . . $mL$ है। (निकटतम पूर्णांक)
A
$55$
B
$222$
C
$111$
D
$148$

Solution

(C) चरण $1$: $Cu$ जमा होने के दौरान उत्सर्जित $O_2$ की गणना।
$Cu$ के $Eq = O_2$ के $Eq$
$\frac{300 \times 10^{-3}}{63.54 / 2} = n_{O_2(1)} \times 4$
$n_{O_2(1)} = 2.36 \times 10^{-3} \ mol$.
चरण $2$: अगले $28 \ \text{मिनट}$ के दौरान उत्सर्जित $O_2$ की गणना।
$Q = I \times t = 0.6 \ A \times 1680 \ s = 1008 \ C$.
$n_{e^-} = \frac{1008}{96500} = 0.01044 \ mol$.
$n_{O_2(2)} = \frac{0.01044}{4} = 2.611 \times 10^{-3} \ mol$.
चरण $3$: $STP$ पर कुल $O_2$ का आयतन।
$n_{total} = 4.971 \times 10^{-3} \ mol$.
$V = 4.971 \times 10^{-3} \times 22400 \approx 111.35 \ mL$.
निकटतम पूर्णांक में,उत्तर $111 \ mL$ है।
116
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निम्नलिखित दो अभिक्रियाओं $A$ और $B$ पर विचार करें।
[$x$ का मोलर द्रव्यमान + $y$ का मोलर द्रव्यमान] का संख्यात्मक मान . . . . . . है।
Question diagram
A
$4$
B
$88$
C
$46$
D
$160$

Solution

(C) अभिक्रिया $A$ में,फिनोल सोडियम $(Na)$ के साथ अभिक्रिया करके हाइड्रोजन गैस $(x = H_2)$ मुक्त करता है।
$H_2$ का मोलर द्रव्यमान = $2 \ g/mol$ है।
अभिक्रिया $B$ में,बेंजोइक एसिड सोडियम बाइकार्बोनेट $(NaHCO_3)$ के साथ अभिक्रिया करके कार्बन डाइऑक्साइड गैस $(y = CO_2)$ मुक्त करता है।
$CO_2$ का मोलर द्रव्यमान = $44 \ g/mol$ है।
मोलर द्रव्यमान का योग = $2 + 44 = 46$ है।
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नीचे दो कथन दिए गए हैं:
कथन $I$: $CH_2=CH-Cl$ में $C-Cl$ बंध $CH_3-CH_2-Cl$ की तुलना में अधिक मजबूत होता है।
कथन $II$: दिया गया प्रकाशिक सक्रिय अणु जल-अपघटन पर एक ऐसा विलयन देता है जो समतल ध्रुवित प्रकाश को घुमा सकता है।
उपर्युक्त कथनों के आलोक में,नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए।
Question diagram
A
कथन $I$ गलत है लेकिन कथन $II$ सही है
B
कथन $I$ और कथन $II$ दोनों सही हैं
C
कथन $I$ और कथन $II$ दोनों गलत हैं
D
कथन $I$ सही है लेकिन कथन $II$ गलत है

Solution

(D) कथन $I$: $CH_2=CH-Cl$ (विनाइल क्लोराइड) में,क्लोरीन परमाणु पर मौजूद एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म द्वि-बंध के साथ अनुनाद में भाग लेता है,जिससे $C-Cl$ बंध को आंशिक द्वि-बंध गुण प्राप्त होता है। यह इसे $CH_3-CH_2-Cl$ (एथिल क्लोराइड) के $C-Cl$ बंध की तुलना में छोटा और मजबूत बनाता है,जिसमें केवल एकल बंध होता है। अतः,कथन $I$ सही है।
कथन $II$: दिया गया अणु एक कायरल एल्किल हैलाइड है। ऐसे अणु का जल-अपघटन आमतौर पर $S_N1$ क्रियाविधि द्वारा होता है,जिसमें एक समतलीय कार्बोनियम आयन मध्यवर्ती बनता है। इस कार्बोनियम आयन पर नाभिकरागी आक्रमण दोनों तरफ से समान संभावना के साथ होता है,जिससे रेसमिक मिश्रण का निर्माण होता है। रेसमिक मिश्रण प्रकाशिक रूप से निष्क्रिय होता है और यह समतल ध्रुवित प्रकाश $(PPL)$ को नहीं घुमा सकता है। अतः,कथन $II$ गलत है।
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$27^{\circ}C$ पर उत्प्रेरक की उपस्थिति में,एक अभिक्रिया की सक्रियण ऊर्जा $10 \ kJ \ mol^{-1}$ कम हो जाती है। $\frac{k(\text{catalysed})}{k(\text{uncatalysed})}$ का लघुगणक अनुपात क्या है? (मान लें कि दोनों अभिक्रियाओं के लिए आवृत्ति कारक समान है)
A
$17.41$
B
$1.741$
C
$3.482$
D
$0.1741$

Solution

(B) आरेनियस समीकरण के अनुसार,$k = A e^{-E_a / RT}$.
उत्प्रेरित अभिक्रिया के लिए,$k_c = A e^{-E_{ac} / RT}$ और बिना उत्प्रेरित अभिक्रिया के लिए,$k_u = A e^{-E_{au} / RT}$.
चूंकि आवृत्ति कारक $A$ समान है,अनुपात $\frac{k_c}{k_u} = e^{(E_{au} - E_{ac}) / RT} = e^{\Delta E_a / RT}$ होगा।
दोनों तरफ लघुगणक लेने पर: $\log_{10} \left( \frac{k_c}{k_u} \right) = \frac{\Delta E_a}{2.303 RT}$.
यहाँ $\Delta E_a = 10000 \ J \ mol^{-1}$,$R = 8.314 \ J \ K^{-1} \ mol^{-1}$,और $T = 300 \ K$ है।
$\log_{10} \left( \frac{k_c}{k_u} \right) = \frac{10000}{2.303 \times 8.314 \times 300} \approx 1.741$.
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$122 \ g \ mol^{-1}$ मोलर द्रव्यमान वाले एक हाइड्रॉक्सी यौगिक $(X)$ का एसिटिक एनहाइड्राइड के साथ एसिटिलीकरण किया जाता है,जिसमें अभिकर्मक की बड़ी अधिकता का उपयोग किया जाता है जो सभी हाइड्रॉक्सिल समूहों के पूर्ण एसिटिलीकरण को सुनिश्चित करता है। प्राप्त उत्पाद का मोलर द्रव्यमान $290 \ g \ mol^{-1}$ है। यौगिक $(X)$ में उपस्थित हाइड्रॉक्सिल समूहों की संख्या है:
A
$3$
B
$5$
C
$2$
D
$4$

Solution

(D) एसिटिलीकरण के दौरान,प्रत्येक $-OH$ समूह को $-OCOCH_3$ समूह द्वारा प्रतिस्थापित किया जाता है।
इसके परिणामस्वरूप एक हाइड्रोजन परमाणु (द्रव्यमान $1 \ u$) का एक एसिटिल समूह ($-COCH_3$,द्रव्यमान $43 \ u$) द्वारा प्रतिस्थापन होता है।
इसलिए,प्रत्येक $-OH$ समूह के लिए मोलर द्रव्यमान में शुद्ध वृद्धि $43 - 1 = 42 \ g \ mol^{-1}$ है।
मान लीजिए कि $n$ हाइड्रॉक्सिल समूहों की संख्या है।
मोलर द्रव्यमान में वृद्धि $290 - 122 = 168 \ g \ mol^{-1}$ है।
अतः,$n \times 42 = 168$.
$n = \frac{168}{42} = 4$.
इसलिए,यौगिक $(X)$ में $4$ हाइड्रॉक्सिल समूह उपस्थित हैं।
120
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एक छात्र को निम्नलिखित यौगिकों में से एक यौगिक दिया गया है जो टॉलेन अभिकर्मक के साथ धनात्मक परीक्षण देता है। वह यौगिक है:
Question diagram
A
$A$
B
$B$
C
$C$
D
$D$

Solution

(C) टॉलेन अभिकर्मक एक ऑक्सीकरण एजेंट है जो एल्डिहाइड के साथ प्रतिक्रिया करके सिल्वर मिरर बनाता है।
जो यौगिक खुली श्रृंखला वाले एल्डिहाइड रूप के साथ संतुलन में होते हैं,वे टॉलेन परीक्षण में धनात्मक परिणाम देते हैं।
हेमिएसिटल क्षार की उपस्थिति में (जो टॉलेन अभिकर्मक में मौजूद होता है) अपने खुले एल्डिहाइड रूप के साथ संतुलन में होते हैं।
यौगिक $C$ एक चक्रीय हेमिएसिटल है,जो खुलकर एल्डिहाइड बना सकता है,इसलिए यह टॉलेन परीक्षण में धनात्मक परिणाम देता है।
यौगिक $A$ और $B$ एसिटल (ईथर) हैं,जो इन परिस्थितियों में खुलकर एल्डिहाइड नहीं बनाते हैं।
यौगिक $D$ एक चक्रीय अल्कोहल है,जिसमें एल्डिहाइड बनाने के लिए आवश्यक हेमिएसिटल कार्यात्मक समूह नहीं होता है।
अतः,सही यौगिक $C$ है।
121
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$M \ g \ mol^{-1}$ मोलर द्रव्यमान वाले $W \ g$ अवाष्पशील विद्युत-अपघट्य ठोस विलेय को $100 \ mL$ जल में घोलने पर,जल का वाष्प दाब $640 \ mm \ Hg$ से घटकर $600 \ mm \ Hg$ हो जाता है। यदि विद्युत-अपघट्य का जलीय विलयन $375 \ K$ पर उबलता है और जल के लिए $K_b = 0.52 \ K \ kg \ mol^{-1}$ है,तो विलयन में विद्युत-अपघट्य विलेय का मोल अंश $(X_2)$ किस प्रकार व्यक्त किया जा सकता है? (दिया है: जल का घनत्व $= 1 \ g/mL$ और जल का क्वथनांक $= 373 \ K$):
A
$\frac{1.3}{8} \times \frac{W}{M}$
B
$\frac{16}{2.6} \times \frac{W}{M}$
C
$\frac{2.6}{16} \times \frac{M}{W}$
D
$\frac{1.3}{8} \times \frac{M}{W}$

Solution

(A) दिया है:
$P^0 = 640 \ mm \ Hg$,$P_s = 600 \ mm \ Hg$.
वाष्प दाब में सापेक्ष अवनमन: $\frac{P^0 - P_s}{P^0} = i \cdot X_2$.
$\frac{640 - 600}{640} = i \cdot X_2 \implies i \cdot X_2 = \frac{40}{640} = \frac{1}{16}$ ... $(i)$.
क्वथनांक में उन्नयन: $\Delta T_b = T_b - T_b^0 = 375 - 373 = 2 \ K$.
सूत्र: $\Delta T_b = i \cdot K_b \cdot m$.
$2 = i \cdot 0.52 \cdot \frac{W \times 1000}{M \times 100} \implies 2 = i \cdot 5.2 \cdot \frac{W}{M} \implies i = \frac{2 \cdot M}{5.2 \cdot W} = \frac{M}{2.6 \cdot W}$ ... $(ii)$.
$(ii)$ को $(i)$ में प्रतिस्थापित करने पर:
$\left(\frac{M}{2.6 \cdot W}\right) \cdot X_2 = \frac{1}{16}$.
$X_2 = \frac{2.6 \cdot W}{16 \cdot M} = \frac{1.3}{8} \cdot \frac{W}{M}$.
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List-$I$ को List-$II$ के साथ सुमेलित कीजिए
List-$I$ (क्लोरो व्युत्पन्न) List-$II$ (उदाहरण)
$A$. वाइनिल क्लोराइड $I$. $CH_2=CH-CH_2Cl$
$B$. बेंजिल क्लोराइड $II$. $CH_3-CH(Cl)CH_3$
$C$. एल्किल क्लोराइड $III$. $CH_2=CHCl$
$D$. एलिल क्लोराइड $IV$. $C_6H_5CH_2Cl$
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए:
A
$A-IV, B-I, C-III, D-II$
B
$A-III, B-IV, C-I, D-II$
C
$A-III, B-IV, C-II, D-I$
D
$A-I, B-II, C-IV, D-III$

Solution

(C) . वाइनिल क्लोराइड $CH_2=CHCl$ $(III)$ है।
$B$. बेंजिल क्लोराइड $C_6H_5CH_2Cl$ $(IV)$ है।
$C$. एल्किल क्लोराइड $CH_3-CH(Cl)CH_3$ $(II)$ है।
$D$. एलिल क्लोराइड $CH_2=CH-CH_2Cl$ $(I)$ है।
अतः,सही सुमेलन $A-III, B-IV, C-II, D-I$ है।
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नीचे दो कथन दिए गए हैं:
कथन-$I$: $[CoF_6]^{3-}$,$[TiF_6]^{3-}$,$V_2O_5$ और $[Fe(CN)_6]^{3-}$ में अनुचुंबकीय (paramagnetic) स्पीशीज की संख्या $3$ है।
कथन-$II$: $K_4[Fe(CN)_6] < K_3[Fe(CN)_6] < [Fe(H_2O)_6]SO_4 \cdot H_2O < [Fe(H_2O)_6]Cl_3$ संकुलों में अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की संख्या के संदर्भ में सही क्रम है।
उपरोक्त कथनों के आलोक में,नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनें।
A
कथन-$I$ और कथन-$II$ दोनों सत्य हैं
B
कथन-$I$ और कथन-$II$ दोनों असत्य हैं
C
कथन-$I$ सत्य है लेकिन कथन-$II$ असत्य है
D
कथन-$I$ असत्य है लेकिन कथन-$II$ सत्य है

Solution

(A) कथन-$I$:
$1$. $[CoF_6]^{3-}$: $Co^{3+}$ $(d^6)$,$F^-$ दुर्बल क्षेत्र लिगेंड है,$4$ अयुग्मित इलेक्ट्रॉन (अनुचुंबकीय).
$2$. $[TiF_6]^{3-}$: $Ti^{3+}$ $(d^1)$,$1$ अयुग्मित इलेक्ट्रॉन (अनुचुंबकीय).
$3$. $V_2O_5$: $V^{5+}$ $(d^0)$,$0$ अयुग्मित इलेक्ट्रॉन (प्रतिचुंबकीय).
$4$. $[Fe(CN)_6]^{3-}$: $Fe^{3+}$ $(d^5)$,$CN^-$ प्रबल क्षेत्र लिगेंड है,$1$ अयुग्मित इलेक्ट्रॉन (अनुचुंबकीय).
कुल अनुचुंबकीय स्पीशीज = $3$. कथन-$I$ सत्य है।
कथन-$II$:
$1$. $K_4[Fe(CN)_6]$: $Fe^{2+}$ $(d^6)$,$0$ अयुग्मित इलेक्ट्रॉन।
$2$. $K_3[Fe(CN)_6]$: $Fe^{3+}$ $(d^5)$,$1$ अयुग्मित इलेक्ट्रॉन।
$3$. $[Fe(H_2O)_6]SO_4 \cdot H_2O$: $Fe^{2+}$ $(d^6)$,$4$ अयुग्मित इलेक्ट्रॉन।
$4$. $[Fe(H_2O)_6]Cl_3$: $Fe^{3+}$ $(d^5)$,$5$ अयुग्मित इलेक्ट्रॉन।
क्रम: $0 < 1 < 4 < 5$. कथन-$II$ सत्य है।
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एक मिश्रण '$X$' पर विचार करें जिसे $0.4 \ mol$ $[Co(NH_{3})_{5}SO_{4}]Br$ और $0.4 \ mol$ $[Co(NH_{3})_{5}Br]SO_{4}$ को पानी में घोलकर $4 \ L$ विलयन बनाकर तैयार किया गया है। जब मिश्रण '$X$' के $2 \ L$ को अतिरिक्त $AgNO_{3}$ के साथ अभिक्रिया करने दिया जाता है,तो यह अवक्षेप '$Y$' बनाता है। शेष $2 \ L$ मिश्रण '$X$' अतिरिक्त $BaCl_{2}$ के साथ अभिक्रिया करके अवक्षेप '$Z$' बनाता है। निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?
A
$0.2 \ mol$ '$Z$' बनता है
B
'$Y$' $BaSO_{4}$ है और '$Z$' $AgBr$ है
C
$0.4 \ mol$ '$Z$' बनता है
D
$0.1 \ mol$ '$Y$' बनता है

Solution

(A) $4 \ L$ विलयन में $0.4 \ mol$ $[Co(NH_{3})_{5}SO_{4}]Br$ और $0.4 \ mol$ $[Co(NH_{3})_{5}Br]SO_{4}$ उपस्थित हैं।
मिश्रण के $2 \ L$ में प्रत्येक संकुल के $0.2 \ mol$ होंगे।
जब मिश्रण के $2 \ L$ अतिरिक्त $AgNO_{3}$ के साथ अभिक्रिया करते हैं,तो केवल $[Co(NH_{3})_{5}SO_{4}]Br$ अभिक्रिया करके $AgBr$ अवक्षेप $(Y)$ बनाता है। अतः,$0.2 \ mol$ $AgBr$ बनता है।
जब मिश्रण के $2 \ L$ अतिरिक्त $BaCl_{2}$ के साथ अभिक्रिया करते हैं,तो केवल $[Co(NH_{3})_{5}Br]SO_{4}$ अभिक्रिया करके $BaSO_{4}$ अवक्षेप $(Z)$ बनाता है। अतः,$0.2 \ mol$ $BaSO_{4}$ बनता है।
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निम्नलिखित डायज़ोनियम लवणों की स्थिरता का सही क्रम क्या है?
Question diagram
A
$A > C > D > B$
B
$C > D > B > A$
C
$A > B > C > D$
D
$C > A > D > B$

Solution

(A) बेंजीन डायज़ोनियम लवणों की स्थिरता बेंजीन वलय से जुड़े प्रतिस्थापी (substituent) की प्रकृति से प्रभावित होती है।
इलेक्ट्रॉन-दाता समूह $(EDG)$ धनावेश को फैलाकर डायज़ोनियम धनायन की स्थिरता को बढ़ाते हैं,जबकि इलेक्ट्रॉन-आकर्षक समूह $(EWG)$ धनावेश को तीव्र करके स्थिरता को कम करते हैं।
दिए गए यौगिकों में:
$A$: $-OCH_3$ एक प्रबल $EDG$ ($+M$ प्रभाव) है।
$C$: बेंजीन डायज़ोनियम क्लोराइड (कोई प्रतिस्थापी नहीं)।
$D$: $-CN$ एक $EWG$ ($-M$ प्रभाव) है।
$B$: $-NO_2$ एक बहुत प्रबल $EWG$ ($-M$ प्रभाव) है।
अतः,स्थिरता का क्रम $A > C > D > B$ है।
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$27^{\circ}C$ पर $100 \ mL$ $H_2O$ में $60 \ g \ mol^{-1}$ मोलर द्रव्यमान वाले $0.3 \ g$ अवाष्पशील अनपघट्य विलेय '$A$' और $180 \ g \ mol^{-1}$ मोलर द्रव्यमान वाले $0.9 \ g$ अवाष्पशील अनपघट्य विलेय '$B$' को घोलकर एक विलयन तैयार किया जाता है। विलयन का परासरण दाब होगा
[दिया गया है: $R=0.082 \ L \ atm \ K^{-1} \ mol^{-1}$] ($atm$ में)
A
$1.23$
B
$2.46$
C
$0.82$
D
$1.47$

Solution

(B) विलेय '$A$' के मोल = $\frac{0.3 \ g}{60 \ g \ mol^{-1}} = 0.005 \ mol$.
विलेय '$B$' के मोल = $\frac{0.9 \ g}{180 \ g \ mol^{-1}} = 0.005 \ mol$.
विलेय के कुल मोल = $0.005 + 0.005 = 0.01 \ mol$.
विलयन का आयतन = $100 \ mL = 0.1 \ L$.
मोलरता $(C)$ = $\frac{\text{कुल मोल}}{\text{आयतन } (L)} = \frac{0.01 \ mol}{0.1 \ L} = 0.1 \ M$.
तापमान $(T)$ = $27 + 273 = 300 \ K$.
परासरण दाब के सूत्र का उपयोग करने पर: $\pi = CRT$.
$\pi = 0.1 \ mol \ L^{-1} \times 0.082 \ L \ atm \ K^{-1} \ mol^{-1} \times 300 \ K$.
$\pi = 2.46 \ atm$.
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नीचे दो कथन दिए गए हैं:
कथन-$I$: $K_{3}[Co(CO_{3})_{3}]$ का संकरण,आकार और केवल स्पिन चुंबकीय आघूर्ण क्रमशः $sp^{3}d^{2}$,अष्टफलकीय और $4.9 \ BM$ है।
कथन-$II$: $[Ni(CN)_{4}]^{2-}$,$[MnBr_{4}]^{2-}$ और $[CoF_{6}]^{3-}$ आयनों की ज्यामिति,संकरण और केवल स्पिन चुंबकीय आघूर्ण के मान $(BM)$ क्रमशः वर्ग समतलीय,चतुष्फलकीय,अष्टफलकीय; $dsp^{2}$,$sp^{3}$,$sp^{3}d^{2}$ और $0, 5.9, 4.9$ हैं।
A
कथन-$I$ और कथन-$II$ दोनों गलत हैं
B
कथन-$I$ गलत है लेकिन कथन-$II$ सही है
C
कथन-$I$ और कथन-$II$ दोनों सही हैं
D
कथन-$I$ सही है लेकिन कथन-$II$ गलत है

Solution

(C) $K_{3}[Co(CO_{3})_{3}]$ में,$Co$ की ऑक्सीकरण अवस्था $+3$ ($d^{6}$ विन्यास) है। $CO_{3}^{2-}$ एक दुर्बल क्षेत्र लिगेंड है,इसलिए यह बाह्य कक्षक संकुल बनाता है: $sp^{3}d^{2}$ संकरण,अष्टफलकीय ज्यामिति और $4$ अयुग्मित इलेक्ट्रॉन। चुंबकीय आघूर्ण $\mu = \sqrt{4(6)} = 4.9 \ BM$ है। कथन-$I$ सही है।
$[Ni(CN)_{4}]^{2-}$ के लिए,$Ni^{2+}$ का विन्यास $d^{8}$ है। $CN^{-}$ एक प्रबल क्षेत्र लिगेंड है,इसलिए $dsp^{2}$ संकरण,वर्ग समतलीय,$0$ अयुग्मित इलेक्ट्रॉन,$\mu = 0 \ BM$ है।
$[MnBr_{4}]^{2-}$ के लिए,$Mn^{2+}$ का विन्यास $d^{5}$ है। $Br^{-}$ एक दुर्बल क्षेत्र लिगेंड है,इसलिए $sp^{3}$ संकरण,चतुष्फलकीय,$5$ अयुग्मित इलेक्ट्रॉन,$\mu = 5.9 \ BM$ है।
$[CoF_{6}]^{3-}$ के लिए,$Co^{3+}$ का विन्यास $d^{6}$ है। $F^{-}$ एक दुर्बल क्षेत्र लिगेंड है,इसलिए $sp^{3}d^{2}$ संकरण,अष्टफलकीय,$4$ अयुग्मित इलेक्ट्रॉन,$\mu = 4.9 \ BM$ है।
कथन-$II$ में सभी मान सही हैं। अतः,दोनों कथन सही हैं।
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$MX$ एक अल्प विलेय लवण है जो $298 \ K$ पर निम्नलिखित विलेयता साम्यावस्था का पालन करता है: $MX_{(s)} \rightleftharpoons M^{+}_{(aq)} + X^{-}_{(aq)}$; $K_{sp} = 10^{-10}$। यदि $M^{+}_{(aq)} + e^- \rightarrow M_{(s)}$ के लिए मानक अपचयन विभव $(E^{\ominus}_{M^{+}/M}) = 0.79 \ V$ है,तो धातु/अविलेय लवण इलेक्ट्रोड $E^{\ominus}_{X^{-}/MX_{(s)}/M}$ के लिए मानक अपचयन विभव का मान . . . . . . $mV$ है। (निकटतम पूर्णांक) [दिया गया है: $\frac{2.303 RT}{F} = 0.059 \ V$]
A
$200$
B
$790$
C
$590$
D
$1380$

Solution

(A) धातु/अविलेय लवण इलेक्ट्रोड के लिए इलेक्ट्रोड अभिक्रिया है: $MX_{(s)} + e^- \rightarrow M_{(s)} + X^-_{(aq)}$।
इसे दो अर्ध-अभिक्रियाओं के योग के रूप में व्यक्त किया जा सकता है:
$M^+_{(aq)} + e^- \rightarrow M_{(s)}$ $(E^{\circ} = 0.79 \ V)$
$MX_{(s)} \rightleftharpoons M^+_{(aq)} + X^-_{(aq)}$ $(K_{sp} = 10^{-10})$
संबंध $E^{\circ}_{cell} = E^{\circ}_{M^+/M} + \frac{0.059}{n} \log K_{sp}$ का उपयोग करते हुए:
$E^{\circ}_{X^-/MX_{(s)}/M} = 0.79 + 0.059 \log(10^{-10})$
$E^{\circ} = 0.79 + 0.059 \times (-10)$
$E^{\circ} = 0.79 - 0.59 = 0.20 \ V$
$mV$ में परिवर्तन: $0.20 \ V = 200 \ mV$।
129
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$Co^{2+}, Ni^{2+}, Fe^{2+}, V^{3+}$ और $Ti^{2+}$ में से उन धातु आयनों की पहचान करें जिनका स्पिन-ओनली चुंबकीय आघूर्ण मान $3.0 \ BM$ से अधिक है। उन धातु आयनों द्वारा निर्मित उच्च स्पिन अष्टफलकीय संकुलों में उपस्थित अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों का योग . . . . . . है।
A
$7$
B
$5$
C
$9$
D
$4$

Solution

(A) स्पिन-ओनली चुंबकीय आघूर्ण $\mu = \sqrt{n(n+2)} \ BM$ द्वारा दिया जाता है,जहाँ $n$ अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की संख्या है।
$\mu > 3.0 \ BM$ के लिए,हमें $\sqrt{n(n+2)} > 3.0$ चाहिए,जिसका अर्थ है $n(n+2) > 9$। यह $n \geq 3$ के लिए सत्य है।
इलेक्ट्रॉनिक विन्यास:
$V^{3+} (3d^2): n = 2, \mu = 2.83 \ BM$
$Ti^{2+} (3d^2): n = 2, \mu = 2.83 \ BM$
$Ni^{2+} (3d^8): n = 2, \mu = 2.83 \ BM$
$Fe^{2+} (3d^6): n = 4, \mu = 4.90 \ BM$
$Co^{2+} (3d^7): n = 3, \mu = 3.87 \ BM$
अतः,$Fe^{2+}$ और $Co^{2+}$ के लिए $\mu > 3.0 \ BM$ है।
उच्च स्पिन अष्टफलकीय संकुलों में:
$Fe^{2+} (3d^6)$ में $4$ अयुग्मित इलेक्ट्रॉन हैं।
$Co^{2+} (3d^7)$ में $3$ अयुग्मित इलेक्ट्रॉन हैं।
अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों का योग = $4 + 3 = 7$।
130
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एक पदार्थ '$X$' $(1.5 \ g)$ को $150 \ g$ विलायक '$Y$' (मोलर द्रव्यमान $= 300 \ g \ mol^{-1}$) में घोलने पर क्वथनांक में $0.5 \ K$ की वृद्धि होती है। विलायक '$Y$' के वाष्प दाब में सापेक्ष अवनमन . . . . . . $\times 10^{-2}$ है। (निकटतम पूर्णांक)
[दिया है : विलायक का $K_{b} = 5.0 \ K \ kg \ mol^{-1}$]
मान लीजिए कि विलयन तनु है और '$X$' का विलयन में कोई संयोजन या वियोजन नहीं होता है।
A
$3$
B
$1$
C
$5$
D
$2$

Solution

(A) क्वथनांक में उन्नयन $\Delta T_{b} = K_{b} \times m$ द्वारा दिया जाता है,जहाँ $m$ मोललता है।
$0.5 = 5.0 \times m \implies m = 0.1 \ mol \ kg^{-1}$.
मोललता $m = \frac{n_{X}}{W_{Y} (\text{kg में})} = \frac{n_{X}}{0.150 \ kg} = 0.1 \implies n_{X} = 0.015 \ mol$.
वाष्प दाब में सापेक्ष अवनमन $\frac{P^{o} - P_{s}}{P^{o}} = X_{X} = \frac{n_{X}}{n_{X} + n_{Y}}$ द्वारा दिया जाता है।
$n_{Y} = \frac{150 \ g}{300 \ g \ mol^{-1}} = 0.5 \ mol$.
चूँकि विलयन तनु है,$n_{X} + n_{Y} \approx n_{Y} = 0.5 \ mol$.
सापेक्ष अवनमन $= \frac{0.015}{0.5} = 0.03 = 3 \times 10^{-2}$.
अतः,मान $3$ है।
131
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$300 \ K$ पर एक जीवित कोशिका का परासरण दाब $12 \ atm$ है। इस तापमान पर जीवित कोशिका के साथ समपरासारी (isotonic) सोडियम क्लोराइड विलयन की सांद्रता $...... \ g \ L^{-1}$ है। (निकटतम पूर्णांक)
दिया गया है : $R = 0.08 \ L \ atm \ K^{-1} \ mol^{-1}$
मान लीजिए कि $NaCl$ का पूर्ण वियोजन होता है।
(दिया गया है : $Na$ और $Cl$ का मोलर द्रव्यमान क्रमशः $23$ और $35.5 \ g \ mol^{-1}$ है।)
A
$15$
B
$30$
C
$7.5$
D
$58.5$

Solution

(A) समपरासारी विलयन के लिए,$NaCl$ विलयन का परासरण दाब $(\pi)$ जीवित कोशिका के परासरण दाब के बराबर होना चाहिए।
$\pi = iCRT$
दिया गया है $\pi = 12 \ atm$,$T = 300 \ K$,$R = 0.08 \ L \ atm \ K^{-1} \ mol^{-1}$,और $i = 2$ ($NaCl \rightarrow Na^{+} + Cl^{-}$ के लिए)।
$12 = 2 \times C \times 0.08 \times 300$
$12 = 48 \times C$
$C = \frac{12}{48} = 0.25 \ mol \ L^{-1}$
$NaCl$ का मोलर द्रव्यमान = $23 + 35.5 = 58.5 \ g \ mol^{-1}$।
$NaCl$ विलयन की सांद्रता = $C \times \text{मोलर द्रव्यमान}$
$= 0.25 \times 58.5 = 14.625 \ g \ L^{-1}$।
निकटतम पूर्णांक में पूर्णांकित करने पर,हमें $15 \ g \ L^{-1}$ प्राप्त होता है।
132
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सामान्य नमक और $K_{2}Cr_{2}O_{7}$ के मिश्रण को सांद्र $H_{2}SO_{4}$ के साथ गर्म करने पर एक गैस निकलती है। उत्पन्न गैस का सूत्र और गैस में केंद्रीय धातु परमाणु की ऑक्सीकरण अवस्था क्रमशः क्या है?
A
$CrO_{2}Cl_{2}$ और $+5$
B
$CrO_{2}Cl_{2}$ और $+6$
C
$Cr_{2}O_{2}Cl_{2}$ और $+6$
D
$Cr_{2}O_{2}Cl_{2}$ और $+3$

Solution

(B) सामान्य नमक $(NaCl)$,पोटेशियम डाइक्रोमेट $(K_{2}Cr_{2}O_{7})$ और सांद्र सल्फ्यूरिक एसिड $(H_{2}SO_{4})$ के बीच की अभिक्रिया इस प्रकार है:
$4 \ NaCl + K_{2}Cr_{2}O_{7} + 6 \ H_{2}SO_{4}$ $\longrightarrow 2 \ KHSO_{4} + 2 \ CrO_{2}Cl_{2} + 4 \ NaHSO_{4} + 3 \ H_{2}O$
उत्पन्न गैस क्रोमिल क्लोराइड $(CrO_{2}Cl_{2})$ है।
$CrO_{2}Cl_{2}$ में,$Cr$ की ऑक्सीकरण अवस्था $x$ मानिए।
$x + 2(-2) + 2(-1) = 0$
$x - 4 - 2 = 0$
$x = +6$
अतः,सूत्र $CrO_{2}Cl_{2}$ है और ऑक्सीकरण अवस्था $+6$ है।
133
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एक बंद परिपथ डेनियल सेल के लिए,दिए गए तापमान पर निम्नलिखित में से कौन सा आलेख सटीक है?
A
Option A
B
Option B
C
Option C
D
Option D

Solution

(B) मानक सेल विभव,जिसे $E_{cell}^0$ के रूप में दर्शाया जाता है,एक विशिष्ट तापमान पर दिए गए विद्युत रासायनिक सेल के लिए एक स्थिर मान है। यह केवल शामिल अर्ध-सेलों के मानक अपचयन विभव पर निर्भर करता है और अभिकारकों की सांद्रता या सेल के कार्य करने के समय से स्वतंत्र होता है। इसलिए,$E_{cell}^0$ बनाम समय का आलेख एक क्षैतिज रेखा होगी,जो यह दर्शाती है कि मान समय के साथ स्थिर रहता है।
134
ChemistryDifficultMCQJEE Main · 2026
$Mn$ और $Mn_2O_7$ के बारे में नीचे कुछ कथन दिए गए हैं। सही कथनों की पहचान करें:
$A$. $Mn$ ऑक्साइड $Mn_2O_7$ बनाता है जिसमें $Mn$ अपनी उच्चतम ऑक्सीकरण अवस्था में है।
$B$. ऑक्सीजन $Mn$ के साथ बहु-आबंध बनाकर उसे उच्च ऑक्सीकरण अवस्थाओं में स्थिर करता है।
$C$. $Mn_2O_7$ एक आयनिक ऑक्साइड है।
$D$. $Mn_2O_7$ की संरचना में एक सेतुबंध ऑक्सीजन (bridged oxygen) होता है।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनें:
A
$A, B, C$ और $D$
B
केवल $A, B$ और $D$
C
केवल $A, C$ और $D$
D
केवल $A, B$ और $C$

Solution

(B) . $Mn_2O_7$ में $Mn$ की ऑक्सीकरण अवस्था $+7$ है,जो इसकी उच्चतम ऑक्सीकरण अवस्था है। यह कथन सही है।
$B$. ऑक्सीजन एक छोटा,अत्यधिक विद्युत-ऋणात्मक परमाणु है जो संक्रमण धातुओं के साथ बहु-आबंध ($p\pi-d\pi$ आबंधन) बना सकता है,जो उन्हें उच्च ऑक्सीकरण अवस्थाओं में स्थिर करता है। यह कथन सही है।
$C$. $Mn_2O_7$ एक सहसंयोजक ऑक्साइड है,न कि आयनिक। यह कथन गलत है।
$D$. $Mn_2O_7$ की संरचना में दो $MnO_3$ चतुष्फलक (tetrahedra) एक सामान्य ऑक्सीजन परमाणु (सेतुबंध ऑक्सीजन) साझा करते हैं। यह कथन सही है।
अतः,कथन $A, B$ और $D$ सही हैं।
135
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नीचे चार यौगिक दिए गए हैं:
$(a)$ $n$-प्रोपिल क्लोराइड,
$(b)$ $iso$-प्रोपिल क्लोराइड,
$(c)$ $sec$-ब्यूटिल क्लोराइड,
$(d)$ $neo$-पेंटिल क्लोराइड।
जो यौगिक प्रकाशिक समावयवता प्रदर्शित करता है,उसमें कार्बन का प्रतिशत है:
A
$52$
B
$56$
C
$46$
D
$40$

Solution

(A) $sec$-ब्यूटिल क्लोराइड ($2$-क्लोरोब्यूटेन) दिए गए विकल्पों में एकमात्र यौगिक है जिसमें एक कायरल कार्बन परमाणु होता है और इसलिए यह प्रकाशिक समावयवता प्रदर्शित करता है।
$sec$-ब्यूटिल क्लोराइड का आणविक सूत्र $C_4H_9Cl$ है।
$C_4H_9Cl$ का मोलर द्रव्यमान $= (4 \times 12) + (9 \times 1) + 35.5 = 48 + 9 + 35.5 = 92.5 \ g/mol$।
कार्बन का प्रतिशत $= \frac{\text{कार्बन का द्रव्यमान}}{\text{मोलर द्रव्यमान}} \times 100 = \frac{48}{92.5} \times 100 \approx 51.89 \%$।
निकटतम पूर्णांक में,हमें $52 \%$ प्राप्त होता है।
136
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नीचे दो कथन दिए गए हैं:
कथन $I$: $[Cr(H_2O)_6]^{2+}$ की क्रिस्टल फील्ड स्टेबिलाइज़ेशन एनर्जी $(CFSE)$,$[Mn(H_2O)_6]^{2+}$ से अधिक है।
कथन $II$: पोटेशियम फेरीसायनाइड का स्पिन-ओनली चुंबकीय आघूर्ण,सोडियम फेरोसायनाइड से अधिक है।
उपर्युक्त कथनों के आलोक में,नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनें:
A
कथन $I$ और कथन $II$ दोनों सही हैं
B
कथन $I$ और कथन $II$ दोनों गलत हैं
C
कथन $I$ सही है लेकिन कथन $II$ गलत है
D
कथन $I$ गलत है लेकिन कथन $II$ सही है

Solution

(A) $[Mn(H_2O)_6]^{2+}$ के लिए,विन्यास $d^5$ है और लिगेंड दुर्बल है,जिससे $CFSE$ $0 \Delta_o$ प्राप्त होती है।
$[Cr(H_2O)_6]^{2+}$ के लिए,विन्यास $d^4$ है और लिगेंड दुर्बल है,जिससे $CFSE$ $-0.6 \Delta_o$ प्राप्त होती है। अतः,कथन $I$ सही है।
$K_3[Fe(CN)_6]$ में $Fe^{3+}$ $(d^5)$ है,जिसमें $1$ अयुग्मित इलेक्ट्रॉन होता है,इसलिए $\mu = \sqrt{3} \ B.M.$
$Na_4[Fe(CN)_6]$ में $Fe^{2+}$ $(d^6)$ है,जिसमें $0$ अयुग्मित इलेक्ट्रॉन होता है,इसलिए $\mu = 0 \ B.M.$
अतः,कथन $II$ भी सही है।
137
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निम्नलिखित अभिक्रिया के लिए न्यूक्लियोफाइल के संबंध में अभिक्रिया की दर का सही क्रम क्या है: $CH_{3}Br + Nu^{\ominus} \longrightarrow CH_{3}Nu + Br^{\ominus}$
A
$PhO^{-} > {}^{-}OH > CH_{3}COO^{-} > ClO_{4}^{-}$
B
$ClO_{4}^{-} > CH_{3}COO^{-} > {}^{-}OH > PhO^{-}$
C
$CH_{3}COO^{-} > PhO^{-} > {}^{-}OH > ClO_{4}^{-}$
D
${}^{-}OH > PhO^{-} > CH_{3}COO^{-} > ClO_{4}^{-}$

Solution

(D) $S_{N}2$ अभिक्रिया की दर न्यूक्लियोफाइल की न्यूक्लियोफिलिसिटी पर निर्भर करती है। न्यूक्लियोफिलिसिटी आमतौर पर ऋणायन (संयुग्मी क्षार) की स्थिरता के व्युत्क्रमानुपाती होती है।
दिए गए ऋणायनों की स्थिरता का क्रम है: $ClO_{4}^{-} > CH_{3}COO^{-} > PhO^{-} > {}^{-}OH$।
चूंकि न्यूक्लियोफिलिसिटी ऋणायन की स्थिरता के विपरीत होती है,इसलिए न्यूक्लियोफिलिसिटी (और इस प्रकार अभिक्रिया की दर) का क्रम है: ${}^{-}OH > PhO^{-} > CH_{3}COO^{-} > ClO_{4}^{-}$।
138
ChemistryDifficultMCQJEE Main · 2026
सही कथन हैं:
$A$. सुक्रोज के एंजाइम-उत्प्रेरित जल-अपघटन के लिए सक्रियण ऊर्जा,अम्ल-उत्प्रेरित जल-अपघटन की तुलना में कम होती है।
$B$. विकृतीकरण (denaturation) के दौरान,प्रोटीन की द्वितीयक और तृतीयक संरचनाएं नष्ट हो जाती हैं लेकिन प्राथमिक संरचना बरकरार रहती है।
$C$. न्यूक्लियोटाइड पेंटोज शर्करा के $C_{1}$ और $C_{4}$ कार्बन के बीच ग्लाइकोसिडिक लिंकेज द्वारा जुड़े होते हैं।
$D$. प्रोटीन की चतुर्धातुक (quaternary) संरचना पॉलीपेप्टाइड श्रृंखला के समग्र वलन (folding) का प्रतिनिधित्व करती है।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनें:
A
केवल $A, C$ और $D$
B
केवल $A, B$ और $D$
C
केवल $A$ और $B$
D
केवल $B$ और $C$

Solution

(C) . एंजाइम अभिक्रिया की सक्रियण ऊर्जा को कम करते हैं,जिससे सुक्रोज का जल-अपघटन अम्ल-उत्प्रेरण की तुलना में तेज हो जाता है। यह कथन सही है।
$B$. विकृतीकरण प्रोटीन की द्वितीयक और तृतीयक संरचनाओं को बनाए रखने वाले हाइड्रोजन बंधों को तोड़ देता है,लेकिन प्राथमिक संरचना बरकरार रहती है। यह कथन सही है।
$C$. न्यूक्लियोटाइड पेंटोज शर्करा के $C_{3}$ और $C_{5}$ कार्बन के बीच फॉस्फोडिएस्टर लिंकेज द्वारा जुड़े होते हैं,न कि ग्लाइकोसिडिक लिंकेज द्वारा। यह कथन गलत है।
$D$. चतुर्धातुक संरचना एक प्रोटीन परिसर में कई पॉलीपेप्टाइड सबयूनिट्स की व्यवस्था को दर्शाती है। यह कथन गलत है।
अतः,केवल कथन $A$ और $B$ सही हैं।
139
ChemistryDifficultMCQJEE Main · 2026
$KCN$ के साथ निम्नलिखित बेंजाइल हैलाइड्स की अभिक्रियाशीलता का सही क्रम क्या है:
Question diagram
A
$a > b > c > d$
B
$b > a > d > c$
C
$b > a > c > d$
D
$a > b > d > c$

Solution

(B) बेंजाइल हैलाइड्स की $KCN$ के साथ अभिक्रिया $S_{N}1$ या $S_{N}2$ क्रियाविधि द्वारा होती है। इलेक्ट्रॉन-दाता समूह $(EDG)$ अभिक्रियाशीलता को बढ़ाते हैं,जबकि इलेक्ट्रॉन-आकर्षक समूह $(EWG)$ इसे कम करते हैं।
$a$ में $-OH$ है,$b$ में $-NH_2$ है,$c$ में $-NO_2$ (पैरा स्थिति) है,और $d$ में $-NO_2$ (मेटा स्थिति) है।
$-NH_2$,$-OH$ की तुलना में अधिक शक्तिशाली $EDG$ है,इसलिए $b > a$।
$-NO_2$ पैरा स्थिति $(c)$ पर मेटा स्थिति $(d)$ की तुलना में अधिक अस्थिरता पैदा करता है,इसलिए $d > c$।
अतः,सही क्रम $b > a > d > c$ है।
140
ChemistryDifficultMCQJEE Main · 2026
$A$ का अपघटन $T \ K$ पर एक प्रथम कोटि की अभिक्रिया है और इसे $A_{(g)} \rightarrow B_{(g)} + C_{(g)}$ द्वारा दर्शाया गया है। एक बंद $1 \ L$ पात्र में,$1 \ bar$ $A_{(g)}$ को $T \ K$ पर अपघटित होने दिया जाता है। $100 \ minutes$ के बाद,कुल दाब $1.5 \ bar$ था। अभिक्रिया का दर स्थिरांक ($min^{-1}$ में) क्या है? (दिया गया है: $\log 2 = 0.3$)
A
$6.9 \times 10^{-1}$
B
$6.9 \times 10^{-3}$
C
$6.9 \times 10^{-2}$
D
$6.9 \times 10^{-4}$

Solution

(B) अभिक्रिया $A_{(g)} \rightarrow B_{(g)} + C_{(g)}$ है।
प्रारंभ में $(t=0)$: $P_A = 1 \ bar$,$P_B = 0$,$P_C = 0$. कुल दाब $P_0 = 1 \ bar$.
$t = 100 \ min$ पर: $P_A = 1 - x$,$P_B = x$,$P_C = x$.
कुल दाब $P_t = (1 - x) + x + x = 1 + x$.
दिया गया है $P_t = 1.5 \ bar$,अतः $1 + x = 1.5 \implies x = 0.5 \ bar$.
$t = 100 \ min$ पर $A$ का आंशिक दाब $P_A = 1 - 0.5 = 0.5 \ bar$ है।
प्रथम कोटि की अभिक्रिया के लिए,$k = \frac{2.303}{t} \log \frac{P_0}{P_A}$.
$k = \frac{2.303}{100} \log \frac{1}{0.5} = \frac{2.303}{100} \log 2$.
$\log 2 = 0.3$ का उपयोग करने पर,$k = \frac{2.303 \times 0.3}{100} = \frac{0.6909}{100} \approx 6.9 \times 10^{-3} \ min^{-1}$.
141
ChemistryDifficultMCQJEE Main · 2026
List-$I$ को List-$II$ के साथ सुमेलित कीजिए।
List-$I$ (अभिकर्मक)List-$II$ (अभिक्रिया का नाम)
$A$. $H_2, Pd-BaSO_4$$I$. इटार्ड अभिक्रिया
$B$. $SnCl_2, HCl$$II$. रोजनमुंड अपचयन
$C$. $CrO_2Cl_2, CS_2$$III$. गाटरमान-कोच अभिक्रिया
$D$. $CO, HCl, \text{Anhyd. } AlCl_3$$IV$. स्टीफन अभिक्रिया

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए:
A
$A-II, B-III, C-IV, D-I$
B
$A-IV, B-III, C-I, D-II$
C
$A-IV, B-I, C-II, D-III$
D
$A-II, B-IV, C-I, D-III$

Solution

(D) सही मिलान इस प्रकार है:
$A$. $H_2, Pd-BaSO_4$ का उपयोग रोजनमुंड अपचयन में एसिड क्लोराइड को एल्डिहाइड में बदलने के लिए किया जाता है $(A-II)$.
$B$. $SnCl_2, HCl$ का उपयोग स्टीफन अभिक्रिया में नाइट्राइल को एल्डिहाइड में अपचयित करने के लिए किया जाता है $(B-IV)$.
$C$. $CrO_2Cl_2, CS_2$ का उपयोग इटार्ड अभिक्रिया में टोल्यूनि का बेंजल्डिहाइड में ऑक्सीकरण करने के लिए किया जाता है $(C-I)$.
$D$. $CO, HCl, \text{Anhyd. } AlCl_3$ का उपयोग गाटरमान-कोच अभिक्रिया में बेंजीन से बेंजल्डिहाइड बनाने के लिए किया जाता है $(D-III)$.
अतः,सही क्रम $A-II, B-IV, C-I, D-III$ है।
142
ChemistryDifficultMCQJEE Main · 2026
उपरोक्त अभिक्रियाओं की श्रृंखला पर विचार करें। अंतिम उत्पाद $(P)$ में ब्रोमीन परमाणु(ओं) की संख्या क्या होगी?
Question diagram
A
$1$
B
$6$
C
$5$
D
$3$

Solution

(C) चरण $1$: $Nitrobenzene$,$Br_2/FeBr_3$ के साथ अभिक्रिया करके $m-bromonitrobenzene$ देता है।
चरण $2$: $Sn/HCl$ के साथ अपचयन $-NO_2$ समूह को $-NH_2$ में बदल देता है,जिससे $m-bromoaniline$ प्राप्त होता है।
चरण $3$: $pH$ उदासीनीकरण किया जाता है।
चरण $4$: $m-bromoaniline$,$Br_2/H_2O$ के साथ अभिक्रिया करके $2,3,4,6-tetrabromoaniline$ देता है।
चरण $5$: $0-5^{\circ}C$ पर $NaNO_2/HBr$ के साथ डायज़ोटाइजेशन $-NH_2$ को $-N_2^+Br^-$ में बदल देता है।
चरण $6$: $CuBr/NaBr$ के साथ सैंडमेयर अभिक्रिया डायज़ोनियम समूह को $Br$ परमाणु द्वारा प्रतिस्थापित करती है।
अंतिम उत्पाद $pentabromobenzene$ है,जिसमें $5$ ब्रोमीन परमाणु होते हैं।
अतः,अंतिम उत्पाद $(P)$ में $Br$ परमाणुओं की संख्या $5$ है।
143
ChemistryDifficultMCQJEE Main · 2026
मान लीजिए $A \xrightarrow{k_1} B$ और $C \xrightarrow{k_2} D$ दो अभिक्रियाएँ हैं। यदि $A \rightarrow B$ अभिक्रिया का दर स्थिरांक $(k_1)$ निम्नलिखित समीकरण द्वारा व्यक्त किया जा सकता है $\log_{10} k = 14.34 - \frac{1.5 \times 10^4}{T/K}$ और $C \rightarrow D$ अभिक्रिया की सक्रियण ऊर्जा $(Ea_2)$,$A \rightarrow B$ अभिक्रिया $(Ea_1)$ का $\frac{1}{5}$ है,तो $(Ea_2)$ का मान . . . . . . $kJ \ mol^{-1}$ है। (निकटतम पूर्णांक)
A
$287$
B
$57$
C
$114$
D
$43$

Solution

(B) आरेनियस समीकरण $\log_{10} k = \log_{10} A - \frac{Ea_1}{2.303 RT}$ है।
दिए गए समीकरण $\log_{10} k = 14.34 - \frac{1.5 \times 10^4}{T}$ के साथ तुलना करने पर,$\frac{Ea_1}{2.303 R} = 1.5 \times 10^4$ प्राप्त होता है।
$Ea_1 = 1.5 \times 10^4 \times 2.303 \times 8.314 \ J \ mol^{-1} = 287207 \ J \ mol^{-1} = 287.207 \ kJ \ mol^{-1}$.
दिया गया है कि $Ea_2 = \frac{1}{5} Ea_1$,इसलिए $Ea_2 = \frac{287.207}{5} = 57.44 \ kJ \ mol^{-1}$.
निकटतम पूर्णांक $57$ है।
144
ChemistryDifficultMCQJEE Main · 2026
$5.8 \ g$ एनीलिन की बेंज़ोयलेशन अभिक्रिया से प्राप्त बेंज़ानिलाइड का द्रव्यमान,यदि उत्पाद की लब्धि $82\%$ है,तो . . . . . . $g$ (निकटतम पूर्णांक) है।
(दिया गया मोलर द्रव्यमान $g \ mol^{-1}$ में: $H: 1, C: 12, N: 14, O: 16$)
A
$8$
B
$10$
C
$12$
D
$15$

Solution

(B) अभिक्रिया: $C_6H_5NH_2 + C_6H_5COCl \rightarrow C_6H_5NHCOC_6H_5 + HCl$
एनीलिन $(C_6H_5NH_2)$ का मोलर द्रव्यमान = $6 \times 12 + 7 \times 1 + 14 = 93 \ g \ mol^{-1}$.
बेंज़ानिलाइड $(C_6H_5NHCOC_6H_5)$ का मोलर द्रव्यमान = $13 \times 12 + 11 \times 1 + 14 + 16 = 197 \ g \ mol^{-1}$.
एनीलिन के मोल = $\frac{5.8 \ g}{93 \ g \ mol^{-1}} \approx 0.06237 \ mol$.
बेंज़ानिलाइड के सैद्धांतिक मोल = $0.06237 \ mol$.
बेंज़ानिलाइड के वास्तविक मोल = $0.06237 \times 0.82 \approx 0.05114 \ mol$.
बेंज़ानिलाइड का द्रव्यमान = $0.05114 \ mol \times 197 \ g \ mol^{-1} \approx 10.07 \ g$.
निकटतम पूर्णांक में,द्रव्यमान $10 \ g$ है।
145
ChemistryDifficultMCQJEE Main · 2026
$3d$ तत्वों के निम्नलिखित ऑक्साइडों में से,मिश्रित ऑक्साइडों की संख्या . . . . . . है।
$Ti_{2}O_{3}, V_{2}O_{4}, Cr_{2}O_{3}, Mn_{3}O_{4}, Fe_{3}O_{4}, Fe_{2}O_{3}, Co_{3}O_{4}$
A
$1$
B
$2$
C
$3$
D
$4$

Solution

(C) मिश्रित ऑक्साइड वे होते हैं जो एक ही धातु के दो सरल ऑक्साइडों के अलग-अलग ऑक्सीकरण अवस्थाओं में संयोजन से बनते हैं।
दिए गए ऑक्साइडों का विश्लेषण करने पर:
$1. Mn_{3}O_{4} = MnO \cdot Mn_{2}O_{3}$ (मिश्रित ऑक्साइड)
$2. Fe_{3}O_{4} = FeO \cdot Fe_{2}O_{3}$ (मिश्रित ऑक्साइड)
$3. Co_{3}O_{4} = CoO \cdot Co_{2}O_{3}$ (मिश्रित ऑक्साइड)
अन्य ऑक्साइड जैसे $Ti_{2}O_{3}, V_{2}O_{4}, Cr_{2}O_{3},$ और $Fe_{2}O_{3}$ सरल ऑक्साइड हैं।
अतः,दी गई सूची में $3$ मिश्रित ऑक्साइड हैं।
146
ChemistryDifficultMCQJEE Main · 2026
इलेक्ट्रोकेमिकल सेल $Pt \ | \ O_{2(g)} \ (1 \ bar) \ | \ HCl \ (aq) \ || \ M^{2+} \ (aq, 1.0 \ M) \ | \ M_{(s)}$ पर विचार करें। वह pH जिसके ऊपर एनोड पर ऑक्सीजन गैस निकलना शुरू हो जाएगी,वह . . . . . . है (निकटतम पूर्णांक)। $\left[ \text{दिया है :} \ E^{\circ}_{M^{2+}/M} = 0.994 \ V, \ E^{\circ}_{O_{2}/H_{2}O} = 1.23 \ V, \ \frac{RT}{F}(2.303) = 0.059 \ V \ \text{दी गई स्थिति पर} \right]$
A
$2$
B
$4$
C
$6$
D
$8$

Solution

(B) सेल अभिक्रिया $M^{2+} + H_2O \rightarrow M + \frac{1}{2}O_2 + 2H^+$ है।
अभिक्रिया के स्वतःस्फूर्त होने के लिए,$E_{cell} > 0$ होना चाहिए।
सीमित स्थिति पर,$E_{cell} = 0$,इसलिए $E_{cathode} = E_{anode}$।
$E_{cathode} = E^{\circ}_{M^{2+}/M} - \frac{0.059}{2} \log \frac{1}{[M^{2+}]} = 0.994 - 0 = 0.994 \ V$।
$E_{anode} = E^{\circ}_{O_2/H_2O} - \frac{0.059}{4} \log \frac{1}{[H^+]^4 P_{O_2}^{1/2}} = 1.23 + \frac{0.059}{4} \log ([H^+]^4 \times 1) = 1.23 + 0.059 \log [H^+] = 1.23 - 0.059 \times pH$।
$E_{cathode} = E_{anode}$ को बराबर करने पर:
$0.994 = 1.23 - 0.059 \times pH$।
$0.059 \times pH = 1.23 - 0.994 = 0.236$।
$pH = \frac{0.236}{0.059} = 4$।
अतः,निकटतम पूर्णांक $4$ है।
147
ChemistryDifficultMCQJEE Main · 2026
$3, 3-$डाइमिथाइल$-2-$ब्यूटेनॉल को किसके द्वारा तैयार नहीं किया जा सकता है:
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनें:
Question diagram
A
केवल $B$
B
केवल $B$ और $E$
C
केवल $B$ और $C$
D
$B, C$ और $E$

Solution

(B) लक्षित अणु $3, 3-$डाइमिथाइल$-2-$ब्यूटेनॉल है,जिसकी संरचना $(CH_3)_3C-CH(OH)-CH_3$ है।
$A$. $3, 3-$डाइमिथाइलब्यूटेनैल की $MeMgBr$ के साथ अभिक्रिया और उसके बाद $H_3O^+$ से $3, 3-$डाइमिथाइल$-2-$ब्यूटेनॉल प्राप्त होता है। यह एक वैध तैयारी है।
$B$. $3, 3-$डाइमिथाइल$-1-$ब्यूटीन का अम्ल-उत्प्रेरित जलयोजन एक कार्बोनियम आयन पुनर्विन्यास (एथिल शिफ्ट) से गुजरता है,जिससे अधिक स्थिर कार्बोनियम आयन बनता है,जो $2, 3-$डाइमिथाइल$-2-$ब्यूटेनॉल की ओर ले जाता है,न कि लक्षित अल्कोहल की ओर। अतः,$B$ द्वारा इसे तैयार नहीं किया जा सकता है।
$C$. $2, 3, 4, 4-$टेट्रामिथाइल$-2-$पेंटीन का ओजोनोलिसिस और उसके बाद $NaBH_4$ के साथ अपचयन करने पर $3, 3-$डाइमिथाइल$-2-$ब्यूटेनॉल और एसीटोन प्राप्त होता है। यह एक वैध तैयारी है।
$D$. $3, 3-$डाइमिथाइल$-2-$ब्यूटेनोन का $LiAlH_4$ के साथ अपचयन करने पर $3, 3-$डाइमिथाइल$-2-$ब्यूटेनॉल प्राप्त होता है। यह एक वैध तैयारी है।
$E$. $3, 3-$डाइमिथाइल$-1-$ब्यूटाइन का $Hg^{2+}/H^+$ के साथ जलयोजन करने पर $3, 3-$डाइमिथाइल$-2-$ब्यूटेनोन प्राप्त होता है,न कि लक्षित अल्कोहल। अतः,$E$ द्वारा इसे तैयार नहीं किया जा सकता है।
इस प्रकार,$B$ और $E$ का उपयोग लक्षित अल्कोहल तैयार करने के लिए नहीं किया जा सकता है।
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ChemistryDifficultMCQJEE Main · 2026
यौगिक $A$,$C_{8}H_{8}O_{2}$,एसीटोफेनोन के साथ अभिक्रिया करके क्रॉस-एल्डोल संघनन के माध्यम से एक एकल उत्पाद बनाता है। यौगिक $A$ की सांद्र $NaOH$ के साथ अभिक्रिया से प्रतिस्थापित बेंजाइल अल्कोहल बनता है। यौगिक $A$ की पहचान करें।
A
$2-$हाइड्रॉक्सी एसीटोफेनोन
B
$4-$मेथॉक्सी बेंजालडिहाइड
C
$4-$हाइड्रॉक्सी बेंजालडिहाइड
D
$4-$मिथाइल बेंजोइक एसिड

Solution

(B) यौगिक $A$ $(C_{8}H_{8}O_{2})$ एसीटोफेनोन के साथ क्रॉस-एल्डोल संघनन करके एक एकल उत्पाद बनाता है। इसका अर्थ है कि $A$ एक ऐसा एल्डिहाइड है जिसमें $\alpha$-हाइड्रोजन नहीं होते हैं,जैसे कि $4-$मेथॉक्सीबेंजालडिहाइड $(p-CH_3OC_6H_4CHO)$।
जब $4-$मेथॉक्सीबेंजालडिहाइड सांद्र $NaOH$ के साथ अभिक्रिया करता है,तो यह कैनिज़ारो अभिक्रिया देता है क्योंकि इसमें $\alpha$-हाइड्रोजन का अभाव होता है।
यह अभिक्रिया $4-$मेथॉक्सीबेंजाइल अल्कोहल $(p-CH_3OC_6H_4CH_2OH)$ और $4-$मेथॉक्सीबेंजोएट आयन $(p-CH_3OC_6H_4COO^-)$ बनाती है।
अतः,यौगिक $A$ $4-$मेथॉक्सीबेंजालडिहाइड है।
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ChemistryDifficultMCQJEE Main · 2026
निम्नलिखित अपचयन (reduction) प्रक्रियाओं पर विचार करें:
$Al^{3+} + 3e^{-} \rightarrow Al_{(s)}, E^{\circ} = -1.66 \ V$
$Fe^{3+} + e^{-} \rightarrow Fe^{2+}, E^{\circ} = +0.77 \ V$
$Co^{3+} + e^{-} \rightarrow Co^{2+}, E^{\circ} = +1.81 \ V$
$Cr^{3+} + 3e^{-} \rightarrow Cr_{(s)}, E^{\circ} = -0.74 \ V$
अपचायक (reducing agent) के रूप में कार्य करने की प्रवृत्ति किस क्रम में घटती है?
A
$Al > Cr > Fe^{2+} > Co^{2+}$
B
$Al > Fe^{2+} > Cr > Co^{2+}$
C
$Al > Cr > Co^{2+} > Fe^{2+}$
D
$Cr > Fe^{2+} > Al > Co^{2+}$

Solution

(A) अपचायक क्षमता $\propto \frac{1}{\text{अपचयन विभव (Reduction potential)}}$
कम अपचयन विभव ऑक्सीकरण की उच्च प्रवृत्ति को दर्शाता है,इसलिए यह एक बेहतर अपचायक है।
अपचयन विभव का क्रम: $Al < Cr < Fe^{2+} < Co^{2+}$
अतः,अपचायक क्षमता का घटता हुआ क्रम है: $Al > Cr > Fe^{2+} > Co^{2+}$
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ChemistryDifficultMCQJEE Main · 2026
$[Ni(PPh_3)_2Cl_2]$ एक अनुचुंबकीय (paramagnetic) संकुल है। इस संकुल के बारे में गलत कथनों की पहचान कीजिए।
$A$. यह संकुल ज्यामितीय समावयवता (geometrical isomerism) प्रदर्शित करता है।
$B$. यह संकुल सफेद रंग का है।
$C$. इस संकुल का परिकलित स्पिन-ओनली चुंबकीय आघूर्ण $2.84 \ BM$ है।
$D$. इस संकुल में $Ni$ की परिकलित $CFSE$ (क्रिस्टल क्षेत्र स्थिरीकरण ऊर्जा) $-0.8 \Delta_0$ है।
$E$. इस संकुल में लिगेंड्स की ज्यामितीय व्यवस्था $Ni(CO)_4$ के समान है।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए:
A
केवल $A$ और $B$
B
केवल $A, B$ और $D$
C
केवल $C$ और $D$
D
केवल $C, D$ और $E$

Solution

(B) $[Ni(PPh_3)_2Cl_2]$ एक $d^8$ संकुल है। चूंकि यह अनुचुंबकीय है,इसलिए इसकी ज्यामिति चतुष्फलकीय (tetrahedral) होनी चाहिए।
$(A)$ $[MA_2B_2]$ प्रकार के चतुष्फलकीय संकुल ज्यामितीय समावयवता प्रदर्शित नहीं करते हैं। अतः,कथन $A$ गलत है।
$(B)$ यह संकुल नीले रंग का होता है,सफेद नहीं। अतः,कथन $B$ गलत है।
$(C)$ चतुष्फलकीय क्षेत्र में $Ni^{2+}$ $(d^8)$ के लिए,विन्यास $e^4 t_2^4$ है,जिसमें $2$ अयुग्मित इलेक्ट्रॉन होते हैं। स्पिन-ओनली चुंबकीय आघूर्ण $\mu = \sqrt{n(n+2)} = \sqrt{2(2+2)} = \sqrt{8} \approx 2.83 \ BM$ है। अतः,कथन $C$ सही है।
$(D)$ चतुष्फलकीय संकुल के लिए $CFSE$ की गणना $CFSE = (-0.6 \times n_e + 0.4 \times n_{t_2}) \Delta_t$ के रूप में की जाती है। $d^8$ के लिए,$CFSE = (-0.6 \times 4 + 0.4 \times 4) \Delta_t = -0.8 \Delta_t$। कथन में $-0.8 \Delta_0$ दिया गया है,जो गलत है।
$(E)$ $Ni(CO)_4$ चतुष्फलकीय है,और $[Ni(PPh_3)_2Cl_2]$ भी चतुष्फलकीय है। अतः,कथन $E$ सही है।
गलत कथन $A, B$ और $D$ हैं।

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