JEE Main 2019 Chemistry Question Paper with Answer and Solution in Hindi

521 QuestionsHindiWith Solutions

ChemistryQ1100 of 521 questions

Page 1 of 6 · Hindi

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ChemistryMCQJEE Main · 2019
$Ge$ और $Si$ डायोड क्रमशः $0.3 \ V$ और $0.7 \ V$ पर चालन करते हैं। निम्नलिखित आकृति में,यदि $Ge$ और $Si$ डायोड कनेक्शन को उलट दिया जाए,तो $V_0$ का मान .....$V$ बदल जाता है।
Question diagram
A
$0.2$
B
$0.4$
C
$0.6$
D
$0.8$

Solution

(B) स्थिति $1$: प्रारंभ में,दोनों डायोड फॉरवर्ड बायस में हैं। परिपथ कम थ्रेशोल्ड वोल्टेज वाले डायोड के माध्यम से चालन करेगा,जो $Ge$ डायोड $(0.3 \ V)$ है।
प्रतिरोधक के पार वोल्टेज $V_0 = 12 \ V - 0.3 \ V = 11.7 \ V$ है।
स्थिति $2$: जब कनेक्शन उलट दिए जाते हैं,तो दोनों डायोड रिवर्स बायस में हो जाते हैं। ऐसे प्रश्नों के लिए एक मानक आदर्श स्थिति के अनुसार,डायोड को उलटने का अर्थ है कि वे अब इस तरह से जुड़े हैं कि यदि बैटरी की ध्रुवीयता उलट दी जाए तो वे चालन करेंगे,या प्रभावी रूप से,वे अब वर्तमान विन्यास में धारा को अवरुद्ध कर रहे हैं। हालाँकि,यदि प्रश्न का अर्थ यह है कि डायोड को बदल दिया गया है या सर्किट को इस तरह से पुनर्गठित किया गया है कि $Si$ डायोड $(0.7 \ V)$ अब चालन कर रहा है:
नया आउटपुट वोल्टेज $V_0' = 12 \ V - 0.7 \ V = 11.3 \ V$ है।
$V_0$ में परिवर्तन = $|11.7 \ V - 11.3 \ V| = 0.4 \ V$.
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$Ge$ और $Si$ डायोड क्रमशः $0.3 \, V$ और $0.7 \, V$ पर चालन करते हैं। निम्नलिखित आकृति में,यदि $Ge$ डायोड का कनेक्शन उलट दिया जाए,तो $V_0$ के मान में कितने वोल्ट का परिवर्तन होता है?
Question diagram
A
$0.2$
B
$0.4$
C
$0.6$
D
$0.8$

Solution

(B) दिए गए परिपथ में,$Ge$ और $Si$ डायोड समानांतर में जुड़े हुए हैं। चूंकि $Ge$ डायोड का थ्रेशोल्ड वोल्टेज $(0.3 \, V)$,$Si$ डायोड $(0.7 \, V)$ की तुलना में कम है,इसलिए $Ge$ डायोड पहले चालन करेगा।
स्थिति $1$: मूल कनेक्शन।
$Ge$ डायोड चालन करता है,इसलिए समानांतर संयोजन पर वोल्टेज ड्रॉप $V_{drop} = 0.3 \, V$ है।
परिपथ में धारा $i = \frac{12 \, V - 0.3 \, V}{5 \, k\Omega} = \frac{11.7 \, V}{5 \, k\Omega} = 2.34 \, mA$ है।
आउटपुट वोल्टेज $V_0 = i \times R = 2.34 \, mA \times 5 \, k\Omega = 11.7 \, V$ है।
स्थिति $2$: $Ge$ डायोड का कनेक्शन उलट दिया जाता है।
अब,$Ge$ डायोड रिवर्स-बायस में है और चालन नहीं करेगा। $Si$ डायोड फॉरवर्ड-बायस में है और चालन करेगा। अब संयोजन पर वोल्टेज ड्रॉप $V_{drop} = 0.7 \, V$ है।
परिपथ में धारा $i' = \frac{12 \, V - 0.7 \, V}{5 \, k\Omega} = \frac{11.3 \, V}{5 \, k\Omega} = 2.26 \, mA$ है।
आउटपुट वोल्टेज $V_0' = i' \times R = 2.26 \, mA \times 5 \, k\Omega = 11.3 \, V$ है।
$V_0$ के मान में परिवर्तन $\Delta V_0 = |11.7 \, V - 11.3 \, V| = 0.4 \, V$ है।
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$Ge$ और $Si$ डायोड क्रमशः $0.3\,V$ और $0.7\,V$ पर चालन करते हैं। निम्नलिखित आकृति में,यदि $Ge$ डायोड कनेक्शन को उलट दिया जाए,तो $V_0$ का मान कितने $V$ से बदल जाता है?
Question diagram
A
$0.2$
B
$0.4$
C
$0.6$
D
$0.8$

Solution

(B) दी गई सर्किट में,$Ge$ और $Si$ डायोड समानांतर में जुड़े हैं। जिस डायोड का थ्रेशोल्ड वोल्टेज कम होगा,वह पहले चालन करेगा। चूंकि $Ge$ का थ्रेशोल्ड वोल्टेज $0.3\,V$ है और $Si$ का $0.7\,V$ है,इसलिए $Ge$ डायोड चालन करेगा।
स्थिति $1$: प्रारंभिक कनेक्शन।
सर्किट में वोल्टेज ड्रॉप $Ge$ डायोड द्वारा निर्धारित होता है,$V_{drop} = 0.3\,V$।
धारा $i = \frac{12\,V - 0.3\,V}{5\,k\Omega} = \frac{11.7\,V}{5\,k\Omega} = 2.34\,mA$।
आउटपुट वोल्टेज $V_{o1} = i \times R = 2.34\,mA \times 5\,k\Omega = 11.7\,V$।
स्थिति $2$: $Ge$ डायोड कनेक्शन को उलट दिया जाता है।
अब,$Ge$ डायोड रिवर्स बायस में है और चालन नहीं करता है। $Si$ डायोड फॉरवर्ड बायस में है और $0.7\,V$ के थ्रेशोल्ड वोल्टेज के साथ चालन करता है।
धारा $i = \frac{12\,V - 0.7\,V}{5\,k\Omega} = \frac{11.3\,V}{5\,k\Omega} = 2.26\,mA$।
आउटपुट वोल्टेज $V_{o2} = i \times R = 2.26\,mA \times 5\,k\Omega = 11.3\,V$।
$V_0$ के मान में परिवर्तन $\Delta V_0 = |V_{o1} - V_{o2}| = |11.7\,V - 11.3\,V| = 0.4\,V$ है।
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$Ge$ और $Si$ डायोड क्रमशः $0.3\,V$ और $0.7\,V$ पर चालन करते हैं। निम्नलिखित आकृति में,यदि $Ge$ डायोड कनेक्शन को उलट दिया जाए,तो $V_0$ का मान......$V$ बदल जाता है।
Question diagram
A
$0.2$
B
$0.4$
C
$0.6$
D
$0.8$

Solution

(B) दी गई सर्किट में,$Ge$ और $Si$ डायोड समानांतर में जुड़े हुए हैं। चूंकि वे समानांतर में हैं,इसलिए कम थ्रेशोल्ड वोल्टेज वाला डायोड पहले चालन करेगा।
स्थिति $1$: प्रारंभ में,दोनों डायोड इस तरह से जुड़े हैं कि वे फॉरवर्ड बायस में हैं। $Ge$ डायोड का थ्रेशोल्ड वोल्टेज $0.3\,V$ है और $Si$ डायोड का $0.7\,V$ है। सर्किट $Ge$ डायोड द्वारा नियंत्रित होगा,इसलिए समानांतर संयोजन पर वोल्टेज ड्रॉप $V_{drop} = 0.3\,V$ होगा।
आउटपुट वोल्टेज $V_0$,$5\,k\Omega$ प्रतिरोधक पर वोल्टेज है:
$V_0 = V_{source} - V_{drop} = 12\,V - 0.3\,V = 11.7\,V$.
स्थिति $2$: यदि $Ge$ डायोड कनेक्शन को उलट दिया जाता है,तो यह रिवर्स बायस हो जाता है और चालन नहीं करता है। अब,केवल $Si$ डायोड फॉरवर्ड बायस में है।
सर्किट पर वोल्टेज ड्रॉप अब $Si$ डायोड द्वारा निर्धारित होता है,जो $V_{drop} = 0.7\,V$ है।
नया आउटपुट वोल्टेज $V_0'$ है:
$V_0' = V_{source} - V_{drop} = 12\,V - 0.7\,V = 11.3\,V$.
$V_0$ के मान में परिवर्तन है:
$\Delta V_0 = |V_0 - V_0'| = |11.7\,V - 11.3\,V| = 0.4\,V$.
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निम्नलिखित अभिक्रिया का मुख्य उत्पाद क्या है?
Question diagram
A
Option A
B
Option B
C
Option C
D
Option D

Solution

(D) अभिक्रिया दो चरणों में होती है:
$1$. फेनोलिक $-OH$ समूह $ClCH_2CH_2COCl$ के साथ अभिक्रिया करके एक एस्टर मध्यवर्ती,$m-MeO-C_6H_4-O-CO-CH_2CH_2Cl$ बनाता है।
$2$. निर्जल $AlCl_3$ की उपस्थिति में,एक अंतःआणविक फ्रीडेल-क्राफ्ट्स एसाइलेशन होता है। एसाइल समूह $-OH$ समूह के सापेक्ष ऑर्थो स्थिति पर हमला करता है (जो अब एस्टर लिंकेज का हिस्सा है) और एक चक्रीय यौगिक बनाता है। मेथोक्सी समूह $(-OMe)$ एक ऑर्थो-पैरा निर्देशक समूह है,और चक्रीयकरण सबसे स्थिर बाइसिकल संरचना बनाने के लिए होता है,जो विकल्प $D$ में दिखाया गया कौमारिन व्युत्पन्न है।
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अभिक्रिया $A + 2B \rightleftharpoons 2C + D$ में,$B$ की प्रारंभिक सांद्रता $[A]$ की $1.5$ गुना थी,लेकिन साम्यावस्था पर $A$ और $B$ की सांद्रता समान हो गई। अभिक्रिया के लिए साम्यावस्था स्थिरांक है:
A
$8$
B
$4$
C
$12$
D
$6$

Solution

(B) अभिक्रिया $A + 2B \rightleftharpoons 2C + D$ है।
माना $A$ की प्रारंभिक सांद्रता $a$ है। तो $B$ की प्रारंभिक सांद्रता $1.5a$ है।
साम्यावस्था पर,माना $A$ की $x$ मात्रा अभिक्रिया करती है। साम्यावस्था पर सांद्रताएँ हैं:
$[A] = a - x$
$[B] = 1.5a - 2x$
$[C] = 2x$
$[D] = x$
दिया गया है कि साम्यावस्था पर $[A] = [B]$,इसलिए $a - x = 1.5a - 2x$,जो $x = 0.5a$ या $a = 2x$ में सरल होता है।
$a = 2x$ को साम्यावस्था सांद्रता में प्रतिस्थापित करने पर:
$[A] = 2x - x = x$
$[B] = 1.5(2x) - 2x = 3x - 2x = x$
$[C] = 2x$
$[D] = x$
साम्यावस्था स्थिरांक $K_C$ इस प्रकार है:
$K_C = \frac{[C]^2 [D]}{[A] [B]^2} = \frac{(2x)^2 (x)}{(x) (x)^2} = \frac{4x^2 \cdot x}{x \cdot x^2} = \frac{4x^3}{x^3} = 4$.
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$0.5 \, mol$ गैस $A$ और $x \, mol$ गैस $B$,$1000 \, K$ पर $10 \, m^3$ आयतन वाले पात्र में $200 \, Pa$ का दाब उत्पन्न करती हैं। यदि $R$,$J \, K^{-1} \, mol^{-1}$ में गैस नियतांक है,तो $x$ का मान क्या है?
A
$\frac{2R}{4 + R}$
B
$\frac{2R}{4 - R}$
C
$\frac{4 + R}{2R}$
D
$\frac{4 - R}{2R}$

Solution

(D) आदर्श गैस समीकरण का उपयोग करते हुए: $PV = nRT$
दिया गया है: $P = 200 \, Pa$,$V = 10 \, m^3$,$T = 1000 \, K$,$n = (0.5 + x) \, mol$.
मान रखने पर: $200 \times 10 = (0.5 + x) \times R \times 1000$
$2000 = (0.5 + x) \times 1000R$
$2 = (0.5 + x)R$
$\frac{2}{R} = 0.5 + x$
$x = \frac{2}{R} - 0.5$
$x = \frac{2 - 0.5R}{R} = \frac{4 - R}{2R}$
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ChemistryDifficultMCQJEE Main · 2019
सिलिकोन्स के संबंध में $(i)$ से $(iv)$ तक के कथनों में से सही कथन हैं:
$(i)$ वे हाइड्रोफोबिक प्रकृति वाले बहुलक (polymers) हैं
$(ii)$ वे जैव-संगत (biocompatible) हैं
$(iii)$ सामान्य तौर पर,उनमें उच्च तापीय स्थिरता और कम परावैद्युत शक्ति (dielectric strength) होती है
$(iv)$ आमतौर पर वे ऑक्सीकरण के प्रति प्रतिरोधी होते हैं और ग्रीस के रूप में उपयोग किए जाते हैं।
A
$(i), (ii), (iii)$ और $(iv)$
B
$(i), (ii)$ और $(iii)$
C
केवल $(i)$ और $(ii)$
D
$(i), (ii)$ और $(iv)$

Solution

(D) सिलिकोन्स $(R_2SiO)_n$ सामान्य सूत्र वाले ऑर्गेनोसिलिकॉन बहुलक हैं।
$(i)$ इनमें कार्बनिक समूह (एल्काइल/एरील) होते हैं जो इन्हें हाइड्रोफोबिक बनाते हैं। यह कथन सही है।
$(ii)$ सिलिकोन्स जैव-संगत होते हैं और चिकित्सा प्रत्यारोपण (medical implants) में उपयोग किए जाते हैं। यह कथन सही है।
$(iii)$ सिलिकोन्स में उच्च तापीय स्थिरता और उच्च परावैद्युत शक्ति होती है,कम नहीं। यह कथन गलत है।
$(iv)$ वे ऑक्सीकरण के प्रति प्रतिरोधी होते हैं और ग्रीस और स्नेहक (lubricants) के रूप में उपयोग किए जाते हैं। यह कथन सही है।
अतः,कथन $(i), (ii)$ और $(iv)$ सही हैं।
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निम्नलिखित अभिक्रिया का मुख्य उत्पाद है:
Question diagram
A
$1$-एथॉक्सी-$2$-ब्रोमो-$1,2,3,4$-टेट्राहिड्रोनैफ्थलीन
B
$1,2$-डाइहाइड्रोनैफ्थलीन
C
$2$-एथॉक्सी-$1$-ब्रोमो-$1,2,3,4$-टेट्राहिड्रोनैफ्थलीन
D
$1,2$-डाइएथॉक्सी-$1,2,3,4$-टेट्राहिड्रोनैफ्थलीन

Solution

(A) $1,2$-डाइहाइड्रोनैफ्थलीन की $Br_2$ के साथ अभिक्रिया एक चक्रीय ब्रोमोनियम आयन मध्यवर्ती के माध्यम से होती है।
इथेनॉल $(EtOH)$ जैसे न्यूक्लियोफिलिक विलायक की उपस्थिति में,विलायक ब्रोमोनियम आयन के अधिक प्रतिस्थापित कार्बन पर आक्रमण करके मुख्य उत्पाद बनाता है।
बेंज़िलिक स्थिति आंशिक धनात्मक आवेश के विकास के लिए अधिक स्थिर होती है,जिससे $1$-एथॉक्सी-$2$-ब्रोमो-$1,2,3,4$-टेट्राहिड्रोनैफ्थलीन मुख्य उत्पाद के रूप में प्राप्त होता है।
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ChemistryMediumMCQJEE Main · 2019
सामान्यतः,आवर्त सारणी में एक समूह में नीचे जाने पर घटने वाले और बढ़ने वाले गुण क्रमशः हैं
A
परमाणु त्रिज्या और विद्युतऋणात्मकता
B
इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी और विद्युतऋणात्मकता
C
विद्युतऋणात्मकता और परमाणु त्रिज्या
D
विद्युतऋणात्मकता और इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी

Solution

(C) आवर्त सारणी में एक समूह में नीचे जाने पर,विद्युतऋणात्मकता घटती है और परमाणु त्रिज्या बढ़ती है।
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पानी के एक नमूने में निम्नलिखित धातुओं की $ppm$ स्तर की सांद्रता है: $Fe = 0.2$,$Mn = 0.05$,$Cu = 3.0$,$Zn = 5.0$. वह धातु जो पानी के नमूने को पीने के लिए अनुपयुक्त बनाती है,वह है
A
$Cu$
B
$Mn$
C
$Fe$
D
$Zn$

Solution

(B) पेयजल के लिए $WHO$ और $BIS$ मानकों के अनुसार,इन धातुओं के लिए अनुमेय सीमाएँ इस प्रकार हैं:
$Fe$: $0.2 \ ppm$
$Mn$: $0.05 \ ppm$
$Cu$: $3.0 \ ppm$
$Zn$: $5.0 \ ppm$
दिए गए नमूने में,$Mn$ की सांद्रता $0.05 \ ppm$ है। हालांकि यह सीमा पर है,$Mn$ अत्यधिक संवेदनशील है; इस सीमा से थोड़ा भी अधिक होने पर दाग और स्वाद संबंधी समस्याएं पैदा होती हैं,जो इसे विकल्पों में सबसे महत्वपूर्ण धातु बनाती है जो पानी को पीने के लिए अनुपयुक्त बनाती है।
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वह क्षारीय मृदा धातु नाइट्रेट जो पानी के अणुओं के साथ क्रिस्टलीकृत नहीं होता है,वह है
A
$Mg(NO_3)_2$
B
$Sr(NO_3)_2$
C
$Ca(NO_3)_2$
D
$Ba(NO_3)_2$

Solution

(D) समूह में नीचे जाने पर क्षारीय मृदा धातु धनायन का आकार बढ़ने के कारण जलयोजन ऊर्जा (hydration energy) कम हो जाती है।
$Mg^{2+}$,$Ca^{2+}$,और $Sr^{2+}$ आयनों का आकार छोटा और आवेश घनत्व अधिक होता है,जिससे वे $Mg(NO_3)_2 \cdot 6H_2O$,$Ca(NO_3)_2 \cdot 4H_2O$,और $Sr(NO_3)_2 \cdot 4H_2O$ जैसे जलयोजित लवण बनाते हैं।
$Ba^{2+}$ आयन का आकार अपेक्षाकृत बड़ा होने के कारण,इसकी जलयोजन ऊर्जा क्रिस्टल जालक में पानी के अणुओं को पकड़ कर रखने के लिए अपर्याप्त होती है,इसलिए $Ba(NO_3)_2$ निर्जलीय लवण के रूप में क्रिस्टलीकृत होता है।
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ChemistryDifficultMCQJEE Main · 2019
$20 \ mL$ $0.1 \ M \ H_2SO_4$ को $30 \ mL$ $0.2 \ M \ NH_4OH$ के विलयन में मिलाया जाता है। परिणामी मिश्रण का $pH$ क्या होगा? [$NH_4OH$ का $pK_b = 4.7$]
A
$5.2$
B
$9$
C
$5$
D
$9.4$

Solution

(D) चरण $1$: अभिकारकों के मिलीमोल $(m.mol)$ की गणना करें।
$H_2SO_4$ के $m.mol = 20 \ mL \times 0.1 \ M = 2 \ m.mol$.
$NH_4OH$ के $m.mol = 30 \ mL \times 0.2 \ M = 6 \ m.mol$.
चरण $2$: संतुलित रासायनिक समीकरण लिखें।
$H_2SO_4 + 2NH_4OH \to (NH_4)_2SO_4 + 2H_2O$.
चरण $3$: अंतिम मिश्रण की संरचना निर्धारित करें।
प्रारंभ में: $H_2SO_4 = 2 \ m.mol$,$NH_4OH = 6 \ m.mol$.
अभिक्रिया के बाद: $H_2SO_4$ सीमाकारी अभिकारक है। शेष $NH_4OH = 6 - (2 \times 2) = 2 \ m.mol$. निर्मित $(NH_4)_2SO_4 = 2 \ m.mol$.
चरण $4$: क्षारीय बफर के लिए हेंडरसन-हैसेलबैक समीकरण का उपयोग करके $pOH$ की गणना करें।
$pOH = pK_b + \log \frac{[Salt]}{[Base]} = 4.7 + \log \frac{2}{2} = 4.7 + 0 = 4.7$.
चरण $5$: $pH$ की गणना करें।
$pH = 14 - pOH = 14 - 4.7 = 9.3 \approx 9.4$.
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ChemistryMediumMCQJEE Main · 2019
निम्नलिखित में से कौन सा सबसे प्रबल अम्ल है?
A
$CHBr_3$
B
$CHI_3$
C
$CH(CN)_3$
D
$CHCl_3$

Solution

(C) अम्ल की प्रबलता उसके संयुग्मी क्षार (conjugate base) के स्थायित्व पर निर्भर करती है।
$CH(CN)_3$ के लिए,इसका संयुग्मी क्षार $C^{-}(CN)_3$ है।
$C^{-}(CN)_3$ में कार्बन परमाणु पर स्थित ऋण आवेश तीन $-CN$ समूहों के प्रबल इलेक्ट्रॉन-आकर्षक प्रभाव द्वारा अनुनाद और प्रेरणिक प्रभाव के माध्यम से स्थिर हो जाता है।
यह व्यापक विस्थानीकरण (delocalization) $C^{-}(CN)_3$ को अन्य हैलोफॉर्म्स $(CX_3^-)$ के संयुग्मी क्षार की तुलना में अधिक स्थिर बनाता है।
इसलिए,दिए गए विकल्पों में $CH(CN)_3$ सबसे प्रबल अम्ल है।
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ChemistryAdvancedMCQJEE Main · 2019
परमाण्वीय हाइड्रोजन की $n_i = 8$ से $n_f = n$ तक की उत्सर्जन रेखा के लिए,तरंग संख्या $(\bar{\nu})$ बनाम $(\frac{1}{n^2})$ का आलेख कैसा होगा? (रिडबर्ग स्थिरांक,$R_H$ तरंग संख्या इकाई में है)
A
$-R_H$ अंतःखंड के साथ रैखिक
B
अरेखीय
C
$R_H$ ढाल के साथ रैखिक
D
$-R_H$ ढाल के साथ रैखिक

Solution

(C) उत्सर्जन रेखा के लिए,$n_f < n_i$ होता है।
तरंग संख्या के लिए रिडबर्ग सूत्र $\bar{\nu} = R_H Z^2 \left[ \frac{1}{n_f^2} - \frac{1}{n_i^2} \right]$ है।
परमाण्वीय हाइड्रोजन के लिए,$Z = 1$,$n_i = 8$,और $n_f = n$ है।
इन मानों को प्रतिस्थापित करने पर: $\bar{\nu} = R_H \left[ \frac{1}{n^2} - \frac{1}{8^2} \right] = R_H \left( \frac{1}{n^2} \right) - \frac{R_H}{64}$।
इसे एक सीधी रेखा के समीकरण $y = mx + c$ के साथ तुलना करने पर,जहाँ $y = \bar{\nu}$ और $x = \frac{1}{n^2}$ है:
ढाल $m = R_H$ और अंतःखंड $c = -\frac{R_H}{64}$ प्राप्त होता है।
अतः,आलेख $R_H$ ढाल के साथ रैखिक होगा।
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ChemistryEasyMCQJEE Main · 2019
हाइड्रोजन के समस्थानिक (isotopes) हैं
A
केवल ट्रिटियम और प्रोटियम
B
केवल प्रोटियम और ड्यूटेरियम
C
प्रोटियम,ड्यूटेरियम और ट्रिटियम
D
केवल ड्यूटेरियम और ट्रिटियम

Solution

(C) हाइड्रोजन के तीन प्राकृतिक समस्थानिक होते हैं:
$1$. प्रोटियम $({}_1^1H)$
$2$. ड्यूटेरियम (${}_1^2H$ या $D$)
$3$. ट्रिटियम (${}_1^3H$ या $T$)
अतः,हाइड्रोजन के समस्थानिक प्रोटियम,ड्यूटेरियम और ट्रिटियम हैं.
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ChemistryMediumMCQJEE Main · 2019
आण्विक कक्षक सिद्धांत के अनुसार,$Li_2^+$ और $Li_2^-$ के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा सत्य है?
A
$Li_2^+$ अस्थिर है और $Li_2^-$ स्थिर है
B
$Li_2^+$ स्थिर है और $Li_2^-$ अस्थिर है
C
दोनों स्थिर हैं
D
दोनों अस्थिर हैं

Solution

(C) $Li$ का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास $1s^2 2s^1$ है। $Li_2^+$ में कुल इलेक्ट्रॉन $3+3-1 = 5$ हैं। विन्यास $\sigma 1s^2, \sigma^* 1s^2, \sigma 2s^1$ है। बंध कोटि = $\frac{1}{2}(3 - 2) = 0.5$.
$Li_2^-$ में कुल इलेक्ट्रॉन $3+3+1 = 7$ हैं। विन्यास $\sigma 1s^2, \sigma^* 1s^2, \sigma 2s^2, \sigma^* 2s^1$ है। बंध कोटि = $\frac{1}{2}(4 - 3) = 0.5$.
चूंकि दोनों की बंध कोटि धनात्मक है,इसलिए दोनों स्थिर हैं।
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ChemistryDifficultMCQJEE Main · 2019
एक बंद प्रणाली में एक आदर्श गैस के दो अलग-अलग तापमानों $T_1$ और $T_2$ $(T_1 < T_2)$ पर उत्क्रमणीय समतापीय विस्तार पर विचार करें। किए गए कार्य $(|w|)$ की अंतिम आयतन $(ln V)$ पर निर्भरता का सही ग्राफिकल चित्रण है:
A
Option A
B
Option B
C
Option C
D
Option D

Solution

(B) उत्क्रमणीय समतापीय विस्तार के लिए,गैस द्वारा किया गया कार्य $w = -nRT \ln(\frac{V_f}{V_i})$ द्वारा दिया जाता है।
इसका परिमाण लेने पर,हमें $|w| = nRT \ln V_f - nRT \ln V_i$ प्राप्त होता है।
यह समीकरण एक सीधी रेखा $y = mx + c$ के रूप में है,जहाँ $y = |w|$,$x = ln V_f$,ढाल $m = nRT$,और अंतःखंड $c = -nRT \ln V_i$ है।
चूंकि $T_2 > T_1$,$T_2$ के लिए ढाल $(nRT_2)$ $T_1$ के लिए ढाल $(nRT_1)$ से अधिक है।
अतः,$T_2$ के लिए रेखा $T_1$ की तुलना में अधिक तीव्र है और इसका अंतःखंड अधिक ऋणात्मक है।
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ChemistryMCQJEE Main · 2019
यदि $y=y(x)$ अवकल समीकरण $x\frac{dy}{dx} + 2y = x^2$ का हल है जो $y(1)=1$ को संतुष्ट करता है,तो $y\left(\frac{1}{2}\right)$ का मान ज्ञात कीजिए।
A
$\frac{7}{64}$
B
$\frac{1}{4}$
C
$\frac{49}{16}$
D
$\frac{13}{16}$

Solution

(C) दिया गया अवकल समीकरण $x \frac{dy}{dx} + 2y = x^2$ है।
$x$ से विभाजित करने पर,हमें $\frac{dy}{dx} + \frac{2}{x}y = x$ प्राप्त होता है।
यह $\frac{dy}{dx} + Py = Q$ के रूप का एक रैखिक अवकल समीकरण है,जहाँ $P = \frac{2}{x}$ और $Q = x$ है।
समाकलन गुणक $(IF)$ $e^{\int P dx} = e^{\int \frac{2}{x} dx} = e^{2 \ln|x|} = x^2$ है।
हल $y \cdot (IF) = \int Q \cdot (IF) dx + C$ द्वारा दिया जाता है।
$y \cdot x^2 = \int x \cdot x^2 dx + C = \int x^3 dx + C$.
$y x^2 = \frac{x^4}{4} + C$.
चूंकि $y(1) = 1$ दिया गया है,$x=1$ और $y=1$ रखने पर: $1(1)^2 = \frac{1^4}{4} + C \implies 1 = \frac{1}{4} + C \implies C = \frac{3}{4}$।
अतः,हल $y x^2 = \frac{x^4 + 3}{4}$ है।
$y\left(\frac{1}{2}\right)$ ज्ञात करने के लिए,$x = \frac{1}{2}$ रखने पर:
$y \left(\frac{1}{4}\right) = \frac{(\frac{1}{2})^4 + 3}{4} = \frac{\frac{1}{16} + 3}{4} = \frac{49}{64} \times 4 = \frac{49}{16}$।
20
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$273 \ K$ पर $1 \ kg$ बर्फ का $383 \ K$ पर जल वाष्प में परिवर्तन के साथ संबंधित एन्ट्रापी परिवर्तन है: (जल द्रव और जल वाष्प की विशिष्ट ऊष्मा $4.2 \ kJ \ K^{-1} \ kg^{-1}$ और $2.0 \ kJ \ K^{-1} \ kg^{-1}$ है,जल के गलन और वाष्पन की ऊष्मा क्रमशः $334 \ kJ \ kg^{-1}$ और $2491 \ kJ \ kg^{-1}$ है) $(\ln \ 273 = 5.61, \ln \ 373 = 5.92, \ln \ 383 = 5.95)$
A
$7.90$
B
$2.64$
C
$8.49$
D
$9.26$
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निम्नलिखित अभिक्रिया के लिए,$445 \ g$ $C_{57}H_{110}O_6$ से उत्पन्न जल का द्रव्यमान .............. $g$ है।
$2C_{57}H_{110}O_{6(s)} + 163O_{2(g)} \to 114CO_{2(g)} + 110H_2O_{(l)}$
A
$490$
B
$445$
C
$495$
D
$890$

Solution

(C) संतुलित रासायनिक समीकरण:
$2C_{57}H_{110}O_{6(s)} + 163O_{2(g)} \to 114CO_{2(g)} + 110H_2O_{(l)}$
$C_{57}H_{110}O_6$ का आणविक द्रव्यमान $= 890 \ g/mol$.
$C_{57}H_{110}O_6$ के मोल $= \frac{445}{890} = 0.5 \ mol$.
स्टोइकोमेट्री के अनुसार,$2 \ mol$ $C_{57}H_{110}O_6$ से $110 \ mol$ $H_2O$ प्राप्त होता है।
अतः,$0.5 \ mol$ $C_{57}H_{110}O_6$ से प्राप्त $H_2O$ के मोल $= \frac{110}{2} \times 0.5 = 27.5 \ mol$.
$H_2O$ का द्रव्यमान $= 27.5 \times 18 = 495 \ g$.
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पीने के पानी में निम्नलिखित में से कौन सी स्थिति मेथेमोग्लोबिनेमिया (methemoglobinemia) का कारण बनती है?
A
$> 50 \ ppm$ लेड
B
$> 50 \ ppm$ क्लोराइड
C
$> 50 \ ppm$ नाइट्रेट
D
$> 100 \ ppm$ सल्फेट

Solution

(C) मेथेमोग्लोबिनेमिया,जिसे 'ब्लू बेबी सिंड्रोम' के रूप में भी जाना जाता है,पीने के पानी में नाइट्रेट आयनों की अधिकता के कारण होता है।
जब पीने के पानी में नाइट्रेट की सांद्रता $50 \ ppm$ से अधिक हो जाती है,तो यह रक्त में हीमोग्लोबिन के साथ प्रतिक्रिया करके मेथेमोग्लोबिन बनाता है,जो ऑक्सीजन का प्रभावी ढंग से परिवहन करने में असमर्थ होता है।
इसलिए,सही स्थिति $> 50 \ ppm$ नाइट्रेट है।
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निम्नलिखित अभिक्रिया का मुख्य उत्पाद है
Question diagram
A
Option A
B
Option B
C
Option C
D
Option D

Solution

(C) यह अभिक्रिया लुईस अम्ल उत्प्रेरक $AlCl_3$ की उपस्थिति में $o$-क्रेसोल और $\gamma$-ब्यूटायरोलैक्टोन के बीच फ्रीडल-क्राफ्ट्स एसाइलेशन है।
$1$. $AlCl_3$ लैक्टोन के कार्बोनिल ऑक्सीजन के साथ समन्वय करता है,जिससे यह न्यूक्लियोफिलिक हमले के लिए सक्रिय हो जाता है।
$2$. $o$-क्रेसोल की इलेक्ट्रॉन-समृद्ध एरोमैटिक रिंग सक्रिय कार्बोनिल कार्बन पर हमला करती है,जिससे लैक्टोन रिंग खुल जाती है।
$3$. इससे हाइड्रॉक्सीप्रोपाइल साइड चेन वाला एक मध्यवर्ती कीटोन बनता है।
$4$. अभिक्रिया की स्थितियों (गर्म करने,$\Delta$) के तहत,यह मध्यवर्ती अंतःआणविक चक्रीकरण (फ्रीडल-क्राफ्ट्स एल्काइलेशन) से गुजरता है और एक बाइसाइक्लिक कीटोन बनाता है।
$5$. एरोमैटिक रिंग पर $-OH$ और $-CH_3$ समूहों के निर्देशी प्रभावों के कारण,विकल्प $C$ में दिखाया गया उत्पाद मुख्य रूप से बनता है।
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निम्नलिखित अभिक्रिया का मुख्य उत्पाद है:
Question diagram
A
Option A
B
Option B
C
Option C
D
Option D

Solution

(D) इस अभिक्रिया में $Br_2/h\nu$ का उपयोग करके बेन्ज़िलिक स्थिति पर एथिल समूह का रेडिकल ब्रोमीनीकरण होता है,जिसके बाद $KOH$ की उपस्थिति में अंतः-आणविक न्यूक्लियोफिलिक प्रतिस्थापन (चक्रीकरण) होता है।
$1$. $Br_2/h\nu$ अभिकर्मक बेंजीन वलय से जुड़े एथिल समूह के बेन्ज़िलिक कार्बन पर मुक्त-मूलक ब्रोमीनीकरण करता है।
$2$. परिणामी मध्यवर्ती में बेन्ज़िलिक स्थिति पर एक ब्रोमीन परमाणु होता है।
$3$. एमाइड समूह के नाइट्रोजन परमाणु पर मौजूद एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म बेन्ज़िलिक कार्बन पर हमला करता है और ब्रोमाइड आयन को विस्थापित करता है।
$4$. यह चक्रीकरण एक चक्रीय एमाइड (लैक्टम) के निर्माण की ओर ले जाता है।
$5$. संरचना के आधार पर,उत्पाद विकल्प $D$ में दिखाए गए अनुसार है।
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Item $I$ और Item $II$ के बीच सही मिलान है
Item $I$ Item $II$
$a$. बेंजल्डिहाइड $p$. मोबाइल फेज
$b$. एल्युमिना $q$. अधिशोषक
$c$. एसीटोनिट्राइल $r$. अधिशोष्य
A
$a \to q, b \to p, c \to r$
B
$a \to r, b \to q, c \to p$
C
$a \to q, b \to r, c \to p$
D
$a \to p, b \to r, c \to q$

Solution

(B) क्रोमैटोग्राफी में,जिस पदार्थ को अलग किया जाता है वह अधिशोष्य $(r)$ है,स्थिर प्रावस्था (stationary phase) अधिशोषक $(q)$ है,और विलायक मोबाइल फेज $(p)$ है।
$a$. बेंजल्डिहाइड अधिशोष्य $(r)$ के रूप में कार्य करता है।
$b$. एल्युमिना $(Al_2O_3)$ एक अधिशोषक $(q)$ है।
$c$. एसीटोनिट्राइल मोबाइल फेज $(p)$ के रूप में उपयोग किया जाता है।
अतः,सही मिलान $a \to r, b \to q, c \to p$ है।
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वह धातु जो हवा के $N_2$ के साथ सीधे अभिक्रिया करके नाइट्राइड बनाती है,वह है
A
$K$
B
$Li$
C
$Rb$
D
$Cs$

Solution

(B) क्षार धातुओं में,केवल $Li$ ही हवा के $N_2$ के साथ सीधे अभिक्रिया करके लिथियम नाइट्राइड $(Li_3N)$ बनाती है।
इसका कारण $Li^+$ आयन का छोटा आकार और उच्च आवेश घनत्व है,जो नाइट्राइड आयन $(N^{3-})$ को स्थिर करने के लिए उच्च जालक ऊर्जा (lattice energy) प्रदान करता है।
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वर्षा जल का $pH$ लगभग कितना होता है?
A
$5.6$
B
$7.5$
C
$7$
D
$6.5$

Solution

(A) वर्षा का जल अम्लीय हो जाता है क्योंकि वातावरण में मौजूद गैसें जैसे $CO_2$ इसमें घुलकर कार्बोनिक अम्ल बनाती हैं।
इसलिए,अप्रदूषित वर्षा जल का $pH$ लगभग $5.6$ होता है।
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निम्नलिखित प्रतिवर्ती रासायनिक अभिक्रियाओं पर विचार करें:
$A_{2(g)} + B_{2(g)} \overset {K_1} \leftrightarrows 2AB_{(g)} ......(1)$
$6AB_{(g)} \overset {K_2} \leftrightarrows 3A_{2(g)} + 3B_{2(g)} ......(2)$
$K_1$ और $K_2$ के बीच संबंध क्या है?
A
$K_1K_2 = \frac{1}{3}$
B
$K_2 = K_1^3$
C
$K_2 = K_1^{-3}$
D
$K_1K_2 = 3$

Solution

(C) अभिक्रिया $(1)$ के लिए: $A_{2(g)} + B_{2(g)} \leftrightarrows 2AB_{(g)}$ जिसका साम्य स्थिरांक $K_1$ है।
अभिक्रिया $(2)$ के लिए: $6AB_{(g)} \leftrightarrows 3A_{2(g)} + 3B_{2(g)}$ जिसका साम्य स्थिरांक $K_2$ है।
अभिक्रिया $(2)$,अभिक्रिया $(1)$ को उलटने और $3$ से गुणा करने पर प्राप्त होती है।
यदि अभिक्रिया को उलट दिया जाता है,तो साम्य स्थिरांक $1/K$ हो जाता है।
यदि अभिक्रिया को $n$ गुणांक से गुणा किया जाता है,तो साम्य स्थिरांक $K^n$ हो जाता है।
इसलिए,$K_2 = (1/K_1)^3 = K_1^{-3}$।
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जल की अस्थायी कठोरता किसके कारण होती है?
A
$Na_2SO_4$
B
$NaCl$
C
$Ca(HCO_3)_2$
D
$CaCl_2$

Solution

(C) जल की अस्थायी कठोरता उसमें घुले हुए मैग्नीशियम हाइड्रोजन कार्बोनेट $Mg(HCO_3)_2$ या कैल्शियम हाइड्रोजन कार्बोनेट $Ca(HCO_3)_2$ की उपस्थिति के कारण होती है।
ये बाइकार्बोनेट गर्म करने पर विघटित हो जाते हैं,जिससे अघुलनशील कार्बोनेट का अवक्षेपण होता है।
कैल्शियम हाइड्रोजन कार्बोनेट के लिए अभिक्रिया इस प्रकार है:
$Ca(HCO_3)_2 \rightarrow CaCO_3 \downarrow + H_2O + CO_2$
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निम्नलिखित में से किस प्रक्रिया में,बंध क्रम (bond order) बढ़ता है और अनुचुंबकीय (paramagnetic) गुण प्रतिचुंबकीय (diamagnetic) में बदल जाता है?
A
$NO \to NO^{+}$
B
$N_2 \to N_2^+$
C
$O_2 \to O_2^+$
D
$O_2 \to O_2^{2-}$

Solution

(A) बंध क्रम और चुंबकीय गुण का निर्धारण आणविक कक्षक सिद्धांत $(MOT)$ का उपयोग करके किया जाता है।
$1$. $NO$ ($15$ इलेक्ट्रॉन) के लिए: बंध क्रम = $(10-5)/2 = 2.5$। इसमें एक अयुग्मित इलेक्ट्रॉन है,इसलिए यह अनुचुंबकीय है।
$2$. $NO^{+}$ ($14$ इलेक्ट्रॉन) के लिए: बंध क्रम = $(10-4)/2 = 3.0$। सभी इलेक्ट्रॉन युग्मित हैं,इसलिए यह प्रतिचुंबकीय है।
$3$. $NO \to NO^{+}$ प्रक्रिया में,बंध क्रम $2.5$ से बढ़कर $3.0$ हो जाता है और गुण अनुचुंबकीय से प्रतिचुंबकीय में बदल जाता है।
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परमाणु कक्षकों की व्याख्या के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथनों का संयोजन सत्य है?
$1$. उच्च कोणीय संवेग वाले कक्षक का इलेक्ट्रॉन,निम्न कोणीय संवेग वाले कक्षक के इलेक्ट्रॉन की तुलना में नाभिक से अधिक दूर रहता है।
$2$. मुख्य क्वांटम संख्या के दिए गए मान के लिए,कक्षक का आकार दिगंशीय (एज़िमुथल) क्वांटम संख्या के व्युत्क्रमानुपाती होता है।
$3$. तरंग यांत्रिकी के अनुसार,मूल अवस्था का कोणीय संवेग $\frac{h}{2\pi}$ के बराबर होता है।
$4$. विभिन्न दिगंशीय क्वांटम संख्याओं के लिए $\Psi$ बनाम $r$ का आलेख दर्शाता है कि शिखर उच्च $r$ मान की ओर स्थानांतरित हो रहा है।
A
$1, 3$
B
$1, 2$
C
$1, 4$
D
$2, 3$

Solution

(A) कथन $1$ सत्य है: उच्च कोणीय संवेग $(l)$ वाले कक्षकों में इलेक्ट्रॉन अधिक परिरक्षण (shielding) का अनुभव करते हैं और सामान्यतः नाभिक से अधिक दूर पाए जाते हैं।
कथन $2$ गलत है: कक्षक का आकार मुख्य रूप से मुख्य क्वांटम संख्या $(n)$ पर निर्भर करता है,न कि दिगंशीय क्वांटम संख्या $(l)$ पर।
कथन $3$ सत्य है: बोहर मॉडल के अनुसार,मूल अवस्था $(n=1)$ में इलेक्ट्रॉन का कोणीय संवेग $mvr = \frac{h}{2\pi}$ होता है।
कथन $4$ गलत है: त्रिज्यीय प्रायिकता वितरण आलेख दर्शाते हैं कि जैसे-जैसे $l$ बढ़ता है,इलेक्ट्रॉन घनत्व नाभिक से दूर स्थानांतरित होता है,लेकिन $\Psi$ बनाम $r$ के लिए दिया गया कथन कक्षक आकार के रुझानों की मानक व्याख्या नहीं है।
अतः,सही संयोजन $1$ और $3$ है।
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निम्नलिखित में से कौन सा यौगिक एरोमैटिक नहीं है?
A
साइक्लोपेंटाडाइनाइल धनायन
B
पायरोल
C
पायरीडिन
D
साइक्लोपेंटाडाइनाइल ऋणायन

Solution

(A) एरोमैटिकता निर्धारित करने के लिए,हम हकल के नियम का उपयोग करते हैं: एक यौगिक को चक्रीय,समतलीय,पूर्णतः संयुग्मित होना चाहिए और उसमें $(4n + 2) \pi$ इलेक्ट्रॉन होने चाहिए।
$A$. साइक्लोपेंटाडाइनाइल धनायन: इसमें $4 \pi$ इलेक्ट्रॉन हैं। हकल के नियम के अनुसार,यह एंटी-एरोमैटिक है।
$B$. पायरोल: इसमें $6 \pi$ इलेक्ट्रॉन हैं ($4$ द्वि-आबंध से + $2$ $N$ पर मौजूद एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म से)। यह एरोमैटिक है।
$C$. पायरीडिन: इसमें $6 \pi$ इलेक्ट्रॉन हैं। यह एरोमैटिक है।
$D$. साइक्लोपेंटाडाइनाइल ऋणायन: इसमें $6 \pi$ इलेक्ट्रॉन हैं ($4$ द्वि-आबंध से + $2$ ऋण आवेश से)। यह एरोमैटिक है।
अतः,साइक्लोपेंटाडाइनाइल धनायन एरोमैटिक नहीं है (यह एंटी-एरोमैटिक है)।
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जब ऑक्सीजन की प्रथम इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी $(\Delta _{eg}H)$ $-141 \ kJ/mol$ है,तो इसकी द्वितीय इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी क्या होगी?
A
प्रथम से अधिक ऋणात्मक मान
B
प्रथम के लगभग समान
C
ऋणात्मक,लेकिन प्रथम से कम ऋणात्मक
D
धनात्मक मान

Solution

(D) ऑक्सीजन की प्रथम इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी ऋणात्मक होती है क्योंकि जब एक उदासीन ऑक्सीजन परमाणु में इलेक्ट्रॉन जोड़ा जाता है तो $O^-$ बनाने के लिए ऊर्जा मुक्त होती है।
हालाँकि,दूसरी इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी धनात्मक होती है क्योंकि आने वाले इलेक्ट्रॉन और ऋणात्मक रूप से आवेशित $O^-$ आयन के बीच मजबूत इलेक्ट्रोस्टैटिक प्रतिकर्षण को दूर करने के लिए ऊर्जा की आपूर्ति करनी पड़ती है।
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तार्किक कथन $[ \sim ( \sim p \vee q) \vee (p \wedge r) ] \wedge ( \sim q \wedge r)$ किसके समतुल्य है?
A
$(p \wedge r) \wedge \sim q$
B
$(\sim p \wedge \sim q) \wedge r$
C
$\sim p \vee r$
D
$(p \wedge \sim q) \wedge r$

Solution

(D) दिया गया व्यंजक: $[ \sim ( \sim p \vee q) \vee (p \wedge r) ] \wedge ( \sim q \wedge r)$
डी मॉर्गन के नियम का उपयोग करते हुए,$\sim ( \sim p \vee q) \equiv (p \wedge \sim q)$.
अतः,व्यंजक बनता है: $[ (p \wedge \sim q) \vee (p \wedge r) ] \wedge ( \sim q \wedge r)$
वितरण नियम का उपयोग करते हुए,$(p \wedge \sim q) \vee (p \wedge r) \equiv p \wedge ( \sim q \vee r)$.
अब,व्यंजक है: $[ p \wedge ( \sim q \vee r) ] \wedge ( \sim q \wedge r)$
साहचर्य नियम द्वारा: $p \wedge [ ( \sim q \vee r) \wedge ( \sim q \wedge r) ]$
चूंकि $( \sim q \vee r) \wedge ( \sim q \wedge r) \equiv ( \sim q \wedge r)$ (अवशोषण नियम द्वारा),व्यंजक का सरलीकरण:
$p \wedge ( \sim q \wedge r) \equiv (p \wedge \sim q) \wedge r$.
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यदि $f(x) = \int \frac{5x^8 + 7x^6}{(x^2 + 1 + 2x^7)^2} dx, (x \ge 0)$ और $f(0) = 0$ है,तो $f(1)$ का मान ज्ञात कीजिए।
A
$-\frac{1}{2}$
B
$\frac{1}{2}$
C
$-\frac{1}{4}$
D
$\frac{1}{4}$

Solution

(D) दिया गया समाकलन $f(x) = \int \frac{5x^8 + 7x^6}{(x^2 + 1 + 2x^7)^2} dx$ है।
अंश और हर को $x^{14}$ से विभाजित करने पर:
$f(x) = \int \frac{5x^8 + 7x^6}{x^{14} (x^{-5} + x^{-7} + 2)^2} dx = \int \frac{5x^{-6} + 7x^{-8}}{(x^{-5} + x^{-7} + 2)^2} dx$.
माना $u = x^{-5} + x^{-7} + 2$ है।
तब $du = (-5x^{-6} - 7x^{-8}) dx$,जिसका अर्थ है कि $-(5x^{-6} + 7x^{-8}) dx = du$ है।
इन मानों को समाकलन में प्रतिस्थापित करने पर:
$f(x) = -\int u^{-2} du = u^{-1} + C = \frac{1}{x^{-5} + x^{-7} + 2} + C = \frac{x^7}{1 + x^2 + 2x^7} + C$.
चूंकि $f(0) = 0$ दिया गया है,इसलिए $C = 0$ प्राप्त होता है।
अतः,$f(x) = \frac{x^7}{2x^7 + x^2 + 1}$ है।
$x = 1$ पर मान ज्ञात करने पर:
$f(1) = \frac{1^7}{2(1)^7 + (1)^2 + 1} = \frac{1}{2 + 1 + 1} = \frac{1}{4}$.
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यदि $\int\limits_0^{\frac{\pi }{3}} {\frac{{\tan \theta }}{{\sqrt {2k \sec \theta } }}} \,d\theta = 1 - \frac{1}{\sqrt{2}}, (k > 0),$ है,तो $k$ का मान ज्ञात कीजिए।
A
$2$
B
$\frac{1}{2}$
C
$4$
D
$1$

Solution

(A) दिया गया समाकल $I = \int\limits_0^{\frac{\pi }{3}} \frac{\tan \theta}{\sqrt{2k \sec \theta}} d\theta = 1 - \frac{1}{\sqrt{2}}$ है।
हम समाकल्य को इस प्रकार लिख सकते हैं:
$I = \frac{1}{\sqrt{2k}} \int\limits_0^{\frac{\pi }{3}} \frac{\sin \theta / \cos \theta}{\sqrt{1 / \cos \theta}} d\theta = \frac{1}{\sqrt{2k}} \int\limits_0^{\frac{\pi }{3}} \frac{\sin \theta}{\sqrt{\cos \theta}} d\theta$.
माना $u = \cos \theta$,तो $du = -\sin \theta d\theta$। जब $\theta = 0, u = 1$। जब $\theta = \frac{\pi}{3}, u = \frac{1}{2}$।
$I = \frac{1}{\sqrt{2k}} \int_{1}^{1/2} -u^{-1/2} du = \frac{1}{\sqrt{2k}} \int_{1/2}^{1} u^{-1/2} du$.
$I = \frac{1}{\sqrt{2k}} [2\sqrt{u}]_{1/2}^{1} = \frac{2}{\sqrt{2k}} (1 - \frac{1}{\sqrt{2}}) = \sqrt{\frac{2}{k}} (1 - \frac{1}{\sqrt{2}})$.
इसे दिए गए मान $1 - \frac{1}{\sqrt{2}}$ के बराबर रखने पर:
$\sqrt{\frac{2}{k}} (1 - \frac{1}{\sqrt{2}}) = 1 - \frac{1}{\sqrt{2}}$.
अतः,$\sqrt{\frac{2}{k}} = 1$,जिसका अर्थ है कि $\frac{2}{k} = 1$,यानी $k = 2$।
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एक प्रक्रिया के लिए $\Delta H = 200 \ J \ mol^{-1}$ और $\Delta S = 40 \ J \ K^{-1} \ mol^{-1}$ है। नीचे दिए गए मानों में से,वह न्यूनतम तापमान चुनें जिसके ऊपर प्रक्रिया स्वतःप्रवर्तित (spontaneous) होगी।
A
$20$
B
$12$
C
$5$
D
$4$

Solution

(C) प्रक्रिया के स्वतःप्रवर्तित होने के लिए,गिब्स मुक्त ऊर्जा परिवर्तन $\Delta G$ ऋणात्मक होना चाहिए,अर्थात $\Delta G < 0$.
हम जानते हैं कि $\Delta G = \Delta H - T\Delta S$.
$\Delta G = 0$ रखने पर साम्य तापमान प्राप्त होता है: $0 = \Delta H - T\Delta S$.
इसलिए,$T = \frac{\Delta H}{\Delta S}$.
दिए गए मानों को रखने पर: $T = \frac{200 \ J \ mol^{-1}}{40 \ J \ K^{-1} \ mol^{-1}} = 5 \ K$.
प्रक्रिया के स्वतःप्रवर्तित होने के लिए,$T$ का मान $5 \ K$ से अधिक होना चाहिए।
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ChemistryDifficultMCQJEE Main · 2019
$300 \ K$ पर निम्नलिखित अभिक्रियाओं के लिए $K_p/K_c$ के मान क्रमशः क्या होंगे? (At $300 \ K, RT = 24.62 \ dm^3 \ atm \ mol^{-1}$):
$(i) \ N_{2(g)} + O_{2(g)} \rightleftharpoons 2NO_{(g)}$
$(ii) \ N_2O_{4(g)} \rightleftharpoons 2NO_{2(g)}$
$(iii) \ N_{2(g)} + 3H_{2(g)} \rightleftharpoons 2NH_{3(g)}$
A
$1, 24.62 \ dm^3 \ atm \ mol^{-1}, 606.0 \ dm^6 \ atm^2 \ mol^{-2}$
B
$1, 24.62 \ dm^3 \ atm \ mol^{-1}, 1.65 \times 10^{-3} \ dm^{-6} \ atm^{-2} \ mol^2$
C
$1, 4.1 \times 10^{-2} \ dm^{-3} \ atm^{-1} \ mol, 606.0 \ dm^6 \ atm^2 \ mol^{-2}$
D
$24.62 \ dm^3 \ atm \ mol^{-1}, 606.0 \ dm^6 \ atm^2 \ mol^{-2}, 1.65 \times 10^{-3} \ dm^{-6} \ atm^{-2} \ mol^2$

Solution

(B) $K_p$ और $K_c$ के बीच का संबंध $K_p = K_c(RT)^{\Delta n_g}$ है,जिसका अर्थ है $K_p/K_c = (RT)^{\Delta n_g}$.
दिया गया है $RT = 24.62 \ dm^3 \ atm \ mol^{-1}$.
अभिक्रिया $(i)$ के लिए: $\Delta n_g = 0$,इसलिए $K_p/K_c = 1$.
अभिक्रिया $(ii)$ के लिए: $\Delta n_g = 1$,इसलिए $K_p/K_c = 24.62 \ dm^3 \ atm \ mol^{-1}$.
अभिक्रिया $(iii)$ के लिए: $\Delta n_g = -2$,इसलिए $K_p/K_c = (24.62)^{-2} \approx 1.65 \times 10^{-3} \ dm^{-6} \ atm^{-2} \ mol^2$.
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हाइड्रोजन के समस्थानिकों की कुल संख्या और उनमें से रेडियोधर्मी समस्थानिकों की संख्या क्रमशः कितनी है?
A
$3$ और $1$
B
$3$ और $2$
C
$2$ और $1$
D
$2$ और $0$

Solution

(A) हाइड्रोजन के समस्थानिकों की कुल संख्या $3$ है।
ये प्रोटियम $({}_{1}^{1}H)$,ड्यूटेरियम (${}_{1}^{2}H$ या $D$),और ट्रिटियम (${}_{1}^{3}H$ या $T$) हैं।
इनमें से,केवल ट्रिटियम $({}_{1}^{3}H)$ एक रेडियोधर्मी समस्थानिक है।
अतः,समस्थानिकों की कुल संख्या $3$ है और रेडियोधर्मी समस्थानिकों की संख्या $1$ है।
इसलिए,सही विकल्प $A$ है।
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दो गिलासों $A$ और $B$ में भरे पानी का $BOD$ मान क्रमशः $10$ और $20$ है। उनके संबंध में सही कथन है:
A
$B$,$A$ की तुलना में अधिक प्रदूषित है
B
$A$ पीने के लिए उपयुक्त है,जबकि $B$ नहीं है
C
$A$ और $B$ दोनों पीने के लिए उपयुक्त हैं
D
$A$,$B$ की तुलना में अधिक प्रदूषित है

Solution

(A) बायोलॉजिकल ऑक्सीजन डिमांड $(BOD)$ पानी की एक निश्चित मात्रा में मौजूद कार्बनिक पदार्थों को विघटित करने के लिए एरोबिक सूक्ष्मजीवों द्वारा आवश्यक घुलित ऑक्सीजन की मात्रा का एक माप है।
उच्च $BOD$ मान पानी में कार्बनिक प्रदूषकों की उच्च सांद्रता का संकेत देते हैं।
चूंकि ग्लास $B$ $(20)$ का $BOD$ मान ग्लास $A$ $(10)$ से अधिक है,इसलिए ग्लास $B$,ग्लास $A$ की तुलना में अधिक प्रदूषित है।
41
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यदि डाइक्लोरोमीथेन $(DCM)$ और जल $(H_2O)$ का उपयोग विभेदी निष्कर्षण (differential extraction) के लिए किया जाता है,तो निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?
A
$DCM$ और $H_2O$ पृथक्कारी कीप $(S.F)$ में क्रमशः निचले और ऊपरी परत के रूप में रहेंगे।
B
$DCM$ और $H_2O$ धुंधला/कोलाइडल मिश्रण बनाएंगे।
C
$DCM$ और $H_2O$ पृथक्कारी कीप $(S.F)$ में क्रमशः ऊपरी और निचली परत के रूप में रहेंगे।
D
$DCM$ और $H_2O$ स्पष्ट रूप से मिश्रणीय होंगे।

Solution

(A) डाइक्लोरोमीथेन $(DCM)$ का घनत्व लगभग $1.33 \ g/cm^3$ है,जो जल $(H_2O)$ के घनत्व $1.00 \ g/cm^3$ से अधिक है।
चूंकि $DCM$ जल से अधिक सघन है,इसलिए यह पृथक्कारी कीप $(S.F)$ में निचली परत बनाएगा और जल ऊपरी परत बनाएगा।
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ChemistryDifficultMCQJEE Main · 2019
नीचे दिए गए ग्राफों में से कौन सा ग्राफ आपतित प्रकाश और धातु की सतह से उत्सर्जित इलेक्ट्रॉन के बीच के संबंध का प्रतिनिधित्व नहीं करता है?
A
Option A
B
Option B
C
Option C
D
Option D

Solution

(C) आइंस्टीन के प्रकाश-विद्युत समीकरण के अनुसार,उत्सर्जित इलेक्ट्रॉन की गतिज ऊर्जा $(K.E.)$ इस प्रकार है: $K.E. = h\nu - h\nu_0$,जहाँ $h\nu$ आपतित फोटॉन की ऊर्जा है और $h\nu_0$ धातु का कार्य फलन है।
$1$. $K.E.$ और प्रकाश की ऊर्जा $(h\nu)$ के बीच का संबंध एक सीधी रेखा है जिसमें धनात्मक अंतःखंड होता है,जो ग्राफ $(A)$ से मेल खाता है।
$2$. उत्सर्जित इलेक्ट्रॉनों की संख्या प्रकाश की तीव्रता पर निर्भर करती है,आवृत्ति पर नहीं (देहली आवृत्ति से ऊपर),इसलिए ग्राफ $(B)$ एक सही निरूपण है।
$3$. $K.E.$ और आवृत्ति $(
u)$ के बीच का संबंध $K.E. = h\nu - h\nu_0$ है। यह एक सीधी रेखा है जिसमें $K.E.$ अक्ष पर ऋणात्मक अंतःखंड होता है,न कि मूल बिंदु से गुजरने वाली। इसलिए,ग्राफ $(C)$ गलत है।
$4$. $K.E.$ आपतित प्रकाश की तीव्रता से स्वतंत्र है,इसलिए ग्राफ $(D)$ एक सही निरूपण है।
अतः,वह ग्राफ जो संबंध का प्रतिनिधित्व नहीं करता है,वह $(C)$ है।
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ChemistryDifficultMCQJEE Main · 2019
यौगिक $(E)$ में प्रकाश की उपस्थिति में ब्रोमीनीकरण अभिक्रिया के दौरान कौन सा हाइड्रोजन आसानी से प्रतिस्थापित हो जाता है?
$CH_3 - CH_2 - CH = CH_2$
$(E)$
A
$\alpha$-हाइड्रोजन
B
$\gamma$-हाइड्रोजन
C
$\delta$-हाइड्रोजन
D
$\beta$-हाइड्रोजन

Solution

(A) प्रकाश की उपस्थिति में,एल्कीन का ब्रोमीनीकरण मुक्त मूलक (free radical) क्रियाविधि द्वारा होता है।
द्वि-आबंध के निकटवर्ती कार्बन परमाणु (एलाइलिक स्थिति) से जुड़े हाइड्रोजन परमाणु सबसे आसानी से प्रतिस्थापित होते हैं क्योंकि परिणामी एलाइलिक मूलक अनुनाद (resonance) द्वारा स्थिर होता है।
$CH_3 - CH_2 - CH = CH_2$ संरचना में,द्वि-आबंध के निकटवर्ती कार्बन परमाणु $CH_2$ समूह है।
इस $CH_2$ समूह पर स्थित हाइड्रोजन परमाणुओं को द्वि-आबंध के सापेक्ष $\alpha$-हाइड्रोजन के रूप में जाना जाता है।
अतः,$\alpha$-हाइड्रोजन सबसे आसानी से प्रतिस्थापित होता है।
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निम्नलिखित अभिक्रिया का मुख्य उत्पाद है:
Question diagram
A
Option A
B
Option B
C
Option C
D
Option D

Solution

(D) यह अभिक्रिया एक अंतःआणविक फ्रीडेल-क्राफ्ट्स एल्काइलेशन है।
$1$. $AlCl_3$ एक लुईस अम्ल के रूप में कार्य करता है और प्राथमिक एल्काइल क्लोराइड से $Cl^-$ को हटाकर एक प्राथमिक कार्बोकेशन बनाता है।
$2$. यह प्राथमिक कार्बोकेशन अधिक स्थिर तृतीयक कार्बोकेशन बनाने के लिए $1,2$-हाइड्राइड शिफ्ट से गुजरता है।
$3$. इसके बाद तृतीयक कार्बोकेशन इलेक्ट्रॉन-दाता $-OCH_3$ समूह के सापेक्ष ऑर्थो स्थिति पर अंतःआणविक इलेक्ट्रोफिलिक एरोमैटिक प्रतिस्थापन (फ्रीडेल-क्राफ्ट्स एल्काइलेशन) करता है।
$4$. परिणामी उत्पाद एक प्रतिस्थापित इंडेन व्युत्पन्न है। दिए गए विकल्पों के आधार पर,संरचना विकल्प $D$ के अनुरूप है।
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एल्युमीनियम की विद्युतऋणात्मकता (electronegativity) किसके समान है?
A
कार्बन
B
बोरोन
C
बेरिलियम
D
लिथियम

Solution

(C) $Al$ की विद्युतऋणात्मकता $1.5$ है,जो $Be$ $(1.5)$ के समान है।
$Al$ और $Be$ आवर्त सारणी में विकर्ण संबंध (diagonal relationship) प्रदर्शित करते हैं,जो उनके गुणों में समानता को स्पष्ट करता है।
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हाइड्रोजन पेरोक्साइड की रासायनिक प्रकृति क्या है?
A
अम्लीय माध्यम में ऑक्सीकरण एजेंट,लेकिन क्षारीय माध्यम में नहीं
B
क्षारीय माध्यम में अपचायक एजेंट,लेकिन अम्लीय माध्यम में नहीं
C
अम्लीय माध्यम में ऑक्सीकरण और अपचायक एजेंट,लेकिन क्षारीय माध्यम में नहीं
D
अम्लीय और क्षारीय दोनों माध्यमों में ऑक्सीकरण और अपचायक एजेंट

Solution

(D) सही विकल्प: $D$. हाइड्रोजन पेरोक्साइड $(H_{2}O_{2})$ अम्लीय और क्षारीय दोनों माध्यमों में ऑक्सीकरण और अपचायक एजेंट के रूप में कार्य करता है।
$H_{2}O_{2}$ ऑक्सीडेंट के रूप में:
अम्लीय माध्यम में: $H_{2}O_{2} + 2H^{+} + 2e^{-} \longrightarrow 2H_{2}O$
क्षारीय माध्यम में: $H_{2}O_{2} + 2e^{-} \longrightarrow 2OH^{-}$
$H_{2}O_{2}$ अपचायक के रूप में:
अम्लीय माध्यम में: $H_{2}O_{2} \longrightarrow O_{2} + 2H^{+} + 2e^{-}$
क्षारीय माध्यम में: $H_{2}O_{2} + 2OH^{-} \longrightarrow 2H_{2}O + O_{2} + 2e^{-}$
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ChemistryDifficultMCQJEE Main · 2019
$100 \ mmol$ $Ca(OH)_2$ और $2 \ g$ $Na_2SO_4$ के मिश्रण को पानी में घोलकर आयतन $100 \ mL$ किया गया। निर्मित $CaSO_4$ का द्रव्यमान और परिणामी विलयन में $OH^{-}$ की सांद्रता क्रमशः क्या होगी?
($Ca(OH)_2$,$Na_2SO_4$ और $CaSO_4$ का मोलर द्रव्यमान क्रमशः $74$,$142$ और $136 \ g \ mol^{-1}$ है; $Ca(OH)_2$ का $K_{sp} = 5.5 \times 10^{-6}$)
A
$1.9 \ g, 0.28 \ mol \ L^{-1}$
B
$13.6 \ g, 0.28 \ mol \ L^{-1}$
C
$1.9 \ g, 0.14 \ mol \ L^{-1}$
D
$13.6 \ g, 0.14 \ mol \ L^{-1}$

Solution

(A) अभिक्रिया: $Ca(OH)_2 + Na_2SO_4 \to CaSO_4(s) + 2NaOH$.
$Ca(OH)_2$ के प्रारंभिक मोल = $100 \ mmol = 0.1 \ mol$.
$Na_2SO_4$ के प्रारंभिक मोल = $\frac{2 \ g}{142 \ g \ mol^{-1}} \approx 0.014 \ mol = 14 \ mmol$.
चूंकि $Na_2SO_4$ सीमांत अभिकर्मक है,इसलिए $14 \ mmol$ $CaSO_4$ बनेगा।
$CaSO_4$ का द्रव्यमान = $14 \times 10^{-3} \ mol \times 136 \ g \ mol^{-1} = 1.904 \ g \approx 1.9 \ g$.
अभिक्रिया में,प्रत्येक $1 \ mmol$ $Na_2SO_4$ के उपभोग पर $2 \ mmol$ $NaOH$ उत्पन्न होता है।
$OH^{-}$ के मोल = $2 \times 14 \ mmol = 28 \ mmol = 0.028 \ mol$.
$OH^{-}$ की सांद्रता = $\frac{0.028 \ mol}{0.1 \ L} = 0.28 \ mol \ L^{-1}$.
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$X$-ray ट्यूब की खिड़की बनाने के लिए किस धातु का उपयोग किया जाता है?
A
$Mg$
B
$Na$
C
$Be$
D
$Ca$

Solution

(C) $X$-ray ट्यूब की खिड़की बनाने के लिए $Be$ (बेरिलियम) धातु का उपयोग किया जाता है।
इसका कारण यह है कि $Be$ का परमाणु क्रमांक $Z = 4$ बहुत कम होता है, जो $X$-किरणों को न्यूनतम अवशोषण के साथ अपने माध्यम से गुजरने देता है।
इसलिए, यह $X$-किरणों के लिए अत्यधिक पारदर्शी है।
 
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ChemistryMediumMCQJEE Main · 2019
दो $\pi$ और आधा $\sigma$ आबंध किसमें उपस्थित होते हैं?
A
$O_2^+$
B
$N_2$
C
$O_2$
D
$N_2^+$

Solution

(D) आबंध कोटि $(B.O.)$ की गणना $B.O. = \frac{1}{2} (N_b - N_a)$ सूत्र का उपयोग करके की जाती है।
$N_2^+$ के लिए,कुल इलेक्ट्रॉन $13$ हैं। आण्विक कक्षक विन्यास: $\sigma 1s^2, \sigma^* 1s^2, \sigma 2s^2, \sigma^* 2s^2, \sigma 2p_z^2, \pi 2p_x^2 = \pi 2p_y^1$ है।
यहाँ,$N_b = 9$ और $N_a = 4$ है। अतः,$B.O. = \frac{1}{2} (9 - 4) = 2.5$ है।
$N_2^+$ में,$N_2$ की त्रि-आबंध संरचना को आबंधी $\sigma 2p_z$ कक्षक से एक इलेक्ट्रॉन हटाकर संशोधित किया जाता है,जिसके परिणामस्वरूप $2 \ \pi$ आबंध और $0.5 \ \sigma$ आबंध प्राप्त होते हैं।
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ChemistryMCQJEE Main · 2019
यदि एक वृत्त $C$ जो बिंदु $(4, 0)$ से गुजरता है,वृत्त $x^2 + y^2 + 4x - 6y = 12$ को बिंदु $(1, -1)$ पर बाह्य रूप से स्पर्श करता है,तो $C$ की त्रिज्या ज्ञात कीजिए।
A
$2\sqrt{5}$
B
$4$
C
$5$
D
$\sqrt{57}$

Solution

(C) दिए गए वृत्त का समीकरण $x^2 + y^2 + 4x - 6y - 12 = 0$ है।
बिंदु $(1, -1)$ पर स्पर्श रेखा का समीकरण $x(1) + y(-1) + 2(x + 1) - 3(y - 1) - 12 = 0$ है।
सरल करने पर,$3x - 4y - 7 = 0$ प्राप्त होता है।
बिंदु $(1, -1)$ पर स्पर्श करने वाले वृत्तों का परिवार $(x - 1)^2 + (y + 1)^2 + \lambda(3x - 4y - 7) = 0$ है।
चूंकि वृत्त $(4, 0)$ से गुजरता है,इसलिए $(4 - 1)^2 + (0 + 1)^2 + \lambda(3(4) - 4(0) - 7) = 0$ रखने पर।
इससे $10 + 5\lambda = 0$,अर्थात $\lambda = -2$ प्राप्त होता है।
समीकरण $x^2 + y^2 - 8x + 10y + 16 = 0$ प्राप्त होता है।
त्रिज्या $\sqrt{(-4)^2 + (5)^2 - 16} = \sqrt{25} = 5$ है।
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ChemistryDifficultMCQJEE Main · 2019
निम्नलिखित अभिक्रिया में प्राप्त मुख्य उत्पाद है:
Question diagram
A
Option A
B
Option B
C
Option C
D
Option D

Solution

(A) $DIBAL-H$ (डाईआइसोब्यूटिल एल्युमिनियम हाइड्राइड) एक चयनात्मक अपचायक है। इसका उपयोग आमतौर पर एस्टर या लैक्टोन (चक्रीय एस्टर) को एल्डिहाइड में अपचयित करने के लिए किया जाता है। दी गई अभिक्रिया में,लैक्टोन वलय खुल जाता है और एल्डिहाइड समूह में अपचयित हो जाता है,जबकि उस स्थान पर हाइड्रॉक्सिल समूह बनता है जहाँ ऑक्सीजन वलय से जुड़ा था। कार्बोक्सिलिक एसिड समूह $(-COOH)$ इन विशिष्ट अभिक्रिया स्थितियों के तहत अपरिवर्तित रहता है।
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ChemistryDifficultMCQJEE Main · 2019
दो संकुल $[Cr(H_2O)_6]Cl_3 \ (A)$ और $[Cr(NH_3)_6]Cl_3 \ (B)$ क्रमशः बैंगनी और पीले रंग के हैं। उनके संबंध में गलत कथन है
A
$(A)$ और $(B)$ के $ \Delta_0 $ मानों की गणना क्रमशः बैंगनी और पीले प्रकाश की ऊर्जा से की जाती है
B
दोनों तीन अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों के साथ अनुचुंबकीय हैं
C
दोनों अपने पूरक रंगों के अनुरूप ऊर्जा को अवशोषित करते हैं
D
$(A)$ के लिए $ \Delta_0 $ का मान $(B)$ से कम है

Solution

(A) देखा गया रंग संकुल द्वारा अवशोषित प्रकाश का पूरक रंग होता है।
$ \Delta_0 $ की गणना अवशोषित प्रकाश की ऊर्जा से की जाती है,न कि उत्सर्जित (देखे गए) प्रकाश से।
चूंकि $(A)$ बैंगनी है,यह पीले प्रकाश को अवशोषित करता है,और चूंकि $(B)$ पीला है,यह बैंगनी प्रकाश को अवशोषित करता है।
इसलिए,यह कथन कि $ \Delta_0 $ मानों की गणना क्रमशः बैंगनी और पीले प्रकाश की ऊर्जा से की जाती है,गलत है।
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ChemistryDifficultMCQJEE Main · 2019
अम्लीय सामर्थ्य के लिए सही घटता क्रम है
A
$NO_2CH_2COOH > FCH_2COOH > CNCH_2COOH > ClCH_2COOH$
B
$FCH_2COOH > NCCH_2COOH > NO_2CH_2COOH > ClCH_2COOH$
C
$CNCH_2COOH > O_2NCH_2COOH > FCH_2COOH > ClCH_2COOH$
D
$NO_2CH_2COOH > NCCH_2COOH > FCH_2COOH > ClCH_2COOH$

Solution

(D) अम्लीय सामर्थ्य कार्बोक्सिलिक अम्ल के $\alpha$-कार्बन से जुड़े प्रतिस्थापी समूह के इलेक्ट्रॉन-आकर्षण प्रभाव ($-I$ प्रभाव) के सीधे समानुपाती होता है।
$-I$ प्रभाव की प्रबलता का क्रम: $NO_2 > CN > F > Cl$ है।
अतः,अम्लीय सामर्थ्य का सही घटता क्रम $NO_2CH_2COOH > NCCH_2COOH > FCH_2COOH > ClCH_2COOH$ है।
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ChemistryDifficultMCQJEE Main · 2019
निम्नलिखित अभिक्रिया का मुख्य उत्पाद क्या है?
$R-C \equiv N \xrightarrow[(2) \ H_2O]{(1) \ AlH(i-Bu)_2} ?$
A
$RCOOH$
B
$RCONH_2$
C
$RCHO$
D
$RCH_2NH_2$

Solution

(C) $AlH(i-Bu)_2$ अभिकर्मक को $DIBAL-H$ (Diisobutylaluminium hydride) के रूप में जाना जाता है।
यह एक चयनात्मक अपचायक है जो नाइट्राइल्स $(R-C \equiv N)$ को इमाइन में अपचयित करता है,जो बाद में $H_2O$ के साथ जल-अपघटन पर एल्डिहाइड $(RCHO)$ देते हैं।
अभिक्रिया की क्रियाविधि में $DIBAL-H$ से हाइड्राइड का नाइट्राइल समूह के कार्बन पर नाभिकरागी (nucleophilic) आक्रमण होता है,जिसके बाद प्राप्त इमाइन मध्यवर्ती का जल-अपघटन होकर एल्डिहाइड बनता है।
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ChemistryDifficultMCQJEE Main · 2019
सभी संक्रमण धातु संकुलों में परिकलित स्पिन-ओनली चुंबकीय आघूर्ण ($BM$ में) का उच्चतम मान है
A
$5.92$
B
$6.93$
C
$3.87$
D
$4.90$

Solution

(A) स्पिन-ओनली चुंबकीय आघूर्ण का सूत्र $\mu_s = \sqrt{n(n+2)} \ BM$ है,जहाँ $n$ अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की संख्या है।
संक्रमण धातु संकुलों के लिए,$d$-कक्षकों में अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की अधिकतम संख्या $n = 5$ होती है ($d^5$ विन्यास के अनुसार)।
सूत्र में $n = 5$ रखने पर:
$\mu_s = \sqrt{5(5+2)} = \sqrt{35} \approx 5.92 \ BM$।
अतः,परिकलित स्पिन-ओनली चुंबकीय आघूर्ण का उच्चतम मान $5.92 \ BM$ है।
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ChemistryDifficultMCQJEE Main · 2019
वह जिसका उपयोग व्यापक रूप से पीजोइलेक्ट्रिक सामग्री के रूप में किया जाता है,वह है
A
ट्राइडिमाइट
B
अक्रिस्टलीय सिलिका
C
क्वार्ट्ज
D
अभ्रक

Solution

(C) वे पदार्थ जो यांत्रिक तनाव के अधीन होने पर विद्युत धारा उत्पन्न करते हैं,उन्हें पीजोइलेक्ट्रिक पदार्थ कहा जाता है। $Quartz$ पीजोइलेक्ट्रिक पदार्थ का एक प्रसिद्ध उदाहरण है और इसका उपयोग विभिन्न इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में व्यापक रूप से किया जाता है।
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ChemistryDifficultMCQJEE Main · 2019
सोडियम सल्फेट के एक विलयन में प्रति किलोग्राम जल में $92 \ g$ $Na^{+}$ आयन उपस्थित हैं। उस विलयन में $Na^{+}$ आयनों की मोललता $mol \ kg^{-1}$ में क्या होगी?
A
$12$
B
$4$
C
$8$
D
$16$

Solution

(B) मोललता $(m)$ को प्रति किलोग्राम विलायक में उपस्थित विलेय के मोलों की संख्या के रूप में परिभाषित किया जाता है।
$Na^{+}$ आयनों का दिया गया द्रव्यमान = $92 \ g$.
$Na^{+}$ आयनों का मोलर द्रव्यमान = $23 \ g \ mol^{-1}$.
$Na^{+}$ आयनों के मोल = $\frac{92 \ g}{23 \ g \ mol^{-1}} = 4 \ mol$.
विलायक (जल) का द्रव्यमान = $1 \ kg$.
मोललता = $\frac{\text{विलेय के मोल}}{\text{विलायक का द्रव्यमान (kg में)}} = \frac{4 \ mol}{1 \ kg} = 4 \ mol \ kg^{-1}$.
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ChemistryMediumMCQJEE Main · 2019
Item $-I$ और Item $-II$ के बीच सही मिलान है
Item $-I$ (औषधि) Item $-II$ (परीक्षण)
$(a)$ क्लोरोजाइलेनॉल $(p)$ कार्बिलएमीन परीक्षण
$(b)$ नोरेथिंड्रोन $(q)$ सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट परीक्षण
$(c)$ सल्फ़ा पाइरीडीन $(r)$ फेरिक क्लोराइड परीक्षण
$(d)$ पेनिसिलिन $(s)$ बेयर परीक्षण
A
$a \to r, b \to p, c \to s, d \to q$
B
$a \to q, b \to s, c \to p, d \to r$
C
$a \to r, b \to s, c \to p, d \to q$
D
$a \to q, b \to p, c \to s, d \to r$

Solution

(C) क्लोरोजाइलेनॉल एक फिनोल व्युत्पन्न है,इसलिए यह फेरिक क्लोराइड परीक्षण $(r)$ देता है।
$(b)$ नोरेथिंड्रोन में कार्बन-कार्बन त्रि-आबंध (अल्काइन) होता है,इसलिए यह बेयर परीक्षण $(s)$ देता है।
$(c)$ सल्फ़ा पाइरीडीन में प्राथमिक एमीन समूह $(-NH_2)$ होता है,इसलिए यह कार्बिलएमीन परीक्षण $(p)$ देता है।
$(d)$ पेनिसिलिन में कार्बोक्सिलिक अम्ल समूह $(-COOH)$ होता है,इसलिए यह सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट परीक्षण $(q)$ देता है।
अतः,सही मिलान $a \to r, b \to s, c \to p, d \to q$ है।
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ChemistryDifficultMCQJEE Main · 2019
लेड-एसिड बैटरी के एनोडिक हाफ-सेल को $0.05 \ F$ विद्युत का उपयोग करके रिचार्ज किया जाता है। इस प्रक्रिया के दौरान विद्युत अपघटित $PbSO_4$ की मात्रा $g$ में कितनी होगी? ($PbSO_4$ का मोलर द्रव्यमान = $303 \ g \ mol^{-1}$)
A
$22.8$
B
$15.2$
C
$7.6$
D
$11.4$

Solution

(C) लेड-एसिड बैटरी को रिचार्ज करने के दौरान एनोडिक अभिक्रिया है: $PbSO_4 + 2e^- \to Pb_{(s)} + SO_4^{2-}$.
अभिक्रिया के अनुसार,$1 \ mol$ $(303 \ g)$ $PbSO_4$ के अपचयन के लिए $2 \ F$ विद्युत की आवश्यकता होती है।
अतः,$0.05 \ F$ विद्युत के लिए,विद्युत अपघटित $PbSO_4$ की मात्रा:
$\text{द्रव्यमान} = \frac{303 \ g \ mol^{-1} \times 0.05 \ F}{2 \ F} = 7.6 \ g$.
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हेनरी के नियम के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही नहीं है?
A
दिए गए दबाव पर $K_H$ का मान जितना अधिक होगा,तरल पदार्थों में गैस की घुलनशीलता उतनी ही अधिक होगी
B
समान तापमान पर अलग-अलग गैसों के लिए $K_H$ (हेनरी के नियम का स्थिरांक) के मान अलग-अलग होते हैं
C
वाष्प चरण में गैस का आंशिक दबाव समाधान में गैस के मोल अंश के समानुपाती होता है
D
$K_H$ का मान तापमान बढ़ने के साथ बढ़ता है और $K_H$ गैस की प्रकृति का एक फलन है

Solution

(A) हेनरी के नियम को $P = K_H \times x$ के रूप में व्यक्त किया जाता है,जहाँ $P$ गैस का आंशिक दबाव है,$x$ समाधान में गैस का मोल अंश है,और $K_H$ हेनरी के नियम का स्थिरांक है।
इस संबंध से,$x = P / K_H$ प्राप्त होता है।
यह दर्शाता है कि दिए गए आंशिक दबाव $P$ के लिए,घुलनशीलता $(x)$ $K_H$ के व्युत्क्रमानुपाती होती है।
इसलिए,$K_H$ का उच्च मान तरल में गैस की कम घुलनशीलता को दर्शाता है।
अतः,विकल्प $A$ में दिया गया कथन गलत है।
61
ChemistryDifficultMCQJEE Main · 2019
अभिक्रिया $2A + B \to$ उत्पादों के गतिज अध्ययन के दौरान निम्नलिखित परिणाम प्राप्त हुए:
प्रयोग $[A]$ $(mol \ L^{-1})$ $[B]$ $(mol \ L^{-1})$ प्रारंभिक दर $(mol \ L^{-1} \ min^{-1})$
$I$ $0.10$ $0.20$ $6.93 \times 10^{-3}$
$II$ $0.10$ $0.25$ $6.93 \times 10^{-3}$
$III$ $0.20$ $0.30$ $1.386 \times 10^{-2}$

$A$ के आधे भाग को उपभोग करने के लिए आवश्यक समय (मिनटों में) है:
A
$5$
B
$10$
C
$1$
D
$100$

Solution

(B) दर नियम $R = k[A]^x [B]^y$ द्वारा दिया जाता है।
प्रयोग $I$ और $II$ से,$[A]$ स्थिर है और $[B]$ बदलता है,लेकिन दर स्थिर रहती है। अतः,$y = 0$ ($B$ के सापेक्ष शून्य कोटि)।
प्रयोग $I$ और $III$ से,जब $[A]$ दोगुना होता है ($0.10$ से $0.20$),तो दर भी दोगुनी हो जाती है ($6.93 \times 10^{-3}$ से $1.386 \times 10^{-2}$)। अतः,$x = 1$ ($A$ के सापेक्ष प्रथम कोटि)।
दर समीकरण $R = k[A]$ है।
प्रयोग $I$ का उपयोग करने पर: $6.93 \times 10^{-3} = k(0.10) \Rightarrow k = 6.93 \times 10^{-2} \ min^{-1}$।
प्रथम कोटि की अभिक्रिया के लिए,अर्ध-आयु $t_{1/2} = \frac{0.693}{k} = \frac{0.693}{6.93 \times 10^{-2}} = 10 \ min$।
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ChemistryAdvancedMCQJEE Main · 2019
निम्नलिखित अभिक्रिया का मुख्य उत्पाद है
Question diagram
A
Option A
B
Option B
C
Option C
D
Option D

Solution

(D) अभिक्रिया दो चरणों में होती है:
$1$. न्यूक्लियोफिलिक प्रतिस्थापन: ग्लाइसिनेमाइड का अमीनो समूह एसिड क्लोराइड पर हमला करके एमाइड लिंकेज बनाता है और $HCl$ मुक्त करता है। ट्राईएथिलएमाइन $(Et_3N)$ का उपयोग उत्पादित $HCl$ को उदासीन करने के लिए किया जाता है।
$2$. मुक्त मूलक बहुलकीकरण: परिणामी मोनोमर,जिसमें एक विनाइल समूह होता है,अंतिम पॉलीमर बनाने के लिए मुक्त मूलक बहुलकीकरण से गुजरता है।
अंतिम पॉलीमर की संरचना विकल्प $D$ में दिखाई गई है।
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ChemistryDifficultMCQJEE Main · 2019
गैस का अधिशोषण फ्रुंडलिच अधिशोषण समतापी का पालन करता है। दिए गए प्लॉट में,$x$ दाब $p$ पर अधिशोषक के $m$ द्रव्यमान पर अधिशोषित गैस का द्रव्यमान है। $\frac{x}{m}$ किसके समानुपाती है?
Question diagram
A
$p^2$
B
$p^{1/4}$
C
$p^{1/2}$
D
$p$

Solution

(C) फ्रुंडलिच अधिशोषण समतापी का समीकरण है: $\frac{x}{m} = kP^{1/n}$।
दोनों तरफ लघुगणक लेने पर: $\log(\frac{x}{m}) = \log k + \frac{1}{n} \log P$।
यह एक सीधी रेखा के समीकरण $y = mx + c$ के रूप में है,जहाँ ढाल (slope) $\frac{1}{n}$ है।
दिए गए प्लॉट से,ढाल की गणना: $\text{Slope} = \frac{2}{4} = \frac{1}{2}$ है।
अतः,$\frac{1}{n} = \frac{1}{2}$।
इस मान को मूल समीकरण में रखने पर,हमें प्राप्त होता है: $\frac{x}{m} \propto P^{1/2}$।
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वह अयस्क जिसमें लोहा और तांबा दोनों होते हैं,वह है
A
कॉपर पाइराइट्स
B
मैलाकाइट
C
डोलोमाइट
D
एज़्यूराइट

Solution

(A) कॉपर पाइराइट्स $CuFeS_2$ है,जिसमें लोहा और तांबा दोनों होते हैं।
मैलाकाइट $CuCO_3 \cdot Cu(OH)_2$ है,जिसमें केवल तांबा होता है।
एज़्यूराइट $2CuCO_3 \cdot Cu(OH)_2$ है,जिसमें केवल तांबा होता है।
डोलोमाइट $CaCO_3 \cdot MgCO_3$ है,जिसमें कैल्शियम और मैग्नीशियम होते हैं।
65
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निम्नलिखित अभिक्रिया का मुख्य उत्पाद है:
Question diagram
A
$6-$ब्रोमो$-1-$इन्डानोन
B
$4-$ब्रोमो$-1-$इन्डानोन
C
$4-$हाइड्रॉक्सी$-1-$इन्डानोन
D
$6-$हाइड्रॉक्सी$-1-$इन्डानोन

Solution

(A) चरण $1$: जलीय $KOH$ के साथ उपचार प्राथमिक एल्काइल ब्रोमाइड का न्यूक्लियोफिलिक प्रतिस्थापन करके प्राथमिक अल्कोहल,$3-(3-$ब्रोमोफेनिल$)$प्रोपेन$-1-$ओल बनाता है।
चरण $2$: $CrO_3/H^+$ (जोन्स अभिकर्मक) के साथ ऑक्सीकरण प्राथमिक अल्कोहल को कार्बोक्सिलिक एसिड,$3-(3-$ब्रोमोफेनिल$)$प्रोपेनोइक एसिड में परिवर्तित करता है।
चरण $3$: $H_2SO_4/\Delta$ का उपयोग करके इंट्रा-मॉलिक्यूलर फ्रिडेल-क्राफ्ट्स एसाइलेशन से चक्रीकरण होता है। कार्बोक्सिलिक एसिड समूह एल्काइल श्रृंखला के सापेक्ष ऑर्थो स्थिति पर हमला करता है। चूंकि मेटा-ब्रोमो समूह चक्रीकरण को निर्देशित करता है,इसलिए प्राप्त मुख्य उत्पाद $6-$ब्रोमो$-1-$इन्डानोन है।
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एल्युमिनियम आमतौर पर $+3$ ऑक्सीकरण अवस्था में पाया जाता है। इसके विपरीत,थैलियम $+1$ और $+3$ ऑक्सीकरण अवस्थाओं में मौजूद होता है। इसका कारण है
A
अक्रिय युग्म प्रभाव (inert pair effect)
B
विकर्ण संबंध
C
जालक प्रभाव
D
लैंथेनॉइड संकुचन

Solution

(A) $Tl$ का बाह्यतम इलेक्ट्रॉनिक विन्यास $6s^2 6p^1$ है।
$d$ और $f$ इलेक्ट्रॉनों के दुर्बल परिरक्षण प्रभाव (poor shielding effect) के कारण,$6s$ इलेक्ट्रॉन नाभिक द्वारा मजबूती से आकर्षित रहते हैं और बंधन में भाग नहीं लेते हैं,जिसे अक्रिय युग्म प्रभाव कहा जाता है।
परिणामस्वरूप,$Tl$ $+3$ ऑक्सीकरण अवस्था की तुलना में $+1$ ऑक्सीकरण अवस्था अधिक स्थिरता से प्रदर्शित करता है।
67
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जलीय विलयन में निम्नलिखित अमीनो एसिड के $pKa$ का बढ़ता क्रम $Gly, Asp, Lys, Arg$ है।
A
$Asp < Gly < Arg < Lys$
B
$Gly < Asp < Arg < Lys$
C
$Asp < Gly < Lys < Arg$
D
$Arg < Lys < Gly < Asp$

Solution

(C) दिए गए अमीनो एसिड के लिए $pI$ (आइसोइलेक्ट्रिक पॉइंट) मान इस प्रकार हैं:
$Asp$ $(pI = 3.0)$,
$Gly$ $(pI = 6.0)$,
$Lys$ $(pI = 9.8)$,
$Arg$ $(pI = 10.8)$.
अमीनो एसिड के $pKa$ मान उनके $pI$ मानों के बढ़ते क्रम के अनुरूप होते हैं।
अम्लीय अमीनो एसिड जैसे $Asp$ का $pI$ मान कम होता है,जबकि क्षारीय अमीनो एसिड जैसे $Lys$ और $Arg$ का $pI$ मान अधिक होता है।
अतः,$pKa$ मानों का बढ़ता क्रम $Asp < Gly < Lys < Arg$ है।
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निम्नलिखित एमीन यौगिकों के लिए क्षारीयता का घटता क्रम क्या है?
Question diagram
A
$III > I > II$
B
$I > III > II$
C
$III > II > I$
D
$II > I > III$

Solution

(A) एमीन की क्षारीयता नाइट्रोजन परमाणु पर एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म (lone pair) की उपलब्धता पर निर्भर करती है।
यौगिक $(III)$ (पाइपरिडीन) में,नाइट्रोजन परमाणु $sp^3$ संकरित है और एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म स्थानीयकृत (localized) है,जो इसे सबसे अधिक क्षारीय बनाता है।
यौगिक $(I)$ (पाइरीडीन) में,नाइट्रोजन परमाणु $sp^2$ संकरित है। एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म $sp^2$ कक्षक में है,जो $sp^3$ कक्षक की तुलना में अधिक विद्युत ऋणात्मक है,इसलिए यह $(III)$ से कम क्षारीय है।
यौगिक $(II)$ (पायरोल) में,नाइट्रोजन परमाणु पर मौजूद एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म एरोमैटिक सेक्सटेट (विस्थानीकरण) में भाग लेता है। इसलिए,यह प्रोटोनेशन के लिए उपलब्ध नहीं है,जो इसे सबसे कम क्षारीय बनाता है।
अतः,क्षारीयता का घटता क्रम $III > I > II$ है।
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निम्नलिखित अभिक्रिया में यौगिक $A$ और $B$ क्रमशः हैं:
$Benzene$ $\xrightarrow{HCHO + HCl}$ $A$ $\xrightarrow{AgCN}$ $B$
A
$A =$ बेंजाइल अल्कोहल,$B =$ बेंजाइल साइनाइड
B
$A =$ बेंजाइल क्लोराइड,$B =$ बेंजाइल साइनाइड
C
$A =$ बेंजाइल अल्कोहल,$B =$ बेंजाइल आइसोसाइनाइड
D
$A =$ बेंजाइल क्लोराइड,$B =$ बेंजाइल आइसोसाइनाइड

Solution

(D) $1$. $Benzene$ की $HCHO$ और $HCl$ के साथ अभिक्रिया एक क्लोरोमेथिलेशन अभिक्रिया (ब्लैंक अभिक्रिया) है,जो यौगिक $A$ के रूप में $Benzyl$ $chloride$ $(C_6H_5CH_2Cl)$ उत्पन्न करती है।
$2$. $Benzyl$ $chloride$ की $AgCN$ के साथ अभिक्रिया एक नाभिकरागी प्रतिस्थापन अभिक्रिया है। चूँकि $AgCN$ एक सहसंयोजक अभिकर्मक है,नाइट्रोजन परमाणु नाभिकरागी (nucleophile) के रूप में कार्य करता है,जिससे यौगिक $B$ के रूप में $Benzyl$ $isocyanide$ $(C_6H_5CH_2NC)$ बनता है।
70
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निम्नलिखित अभिक्रिया में बनने वाला मुख्य उत्पाद है:
$CH_3CHO + PhCOCH_3 \xrightarrow{\text{dil. } NaOH}$
A
$CH_3CH(OH)CH_2CHO$
B
$H-CH_2-C(OH)(CH_3)-Ph$
C
$CH_3CH(OH)CH_2COPh$
D
$Ph-CO-CH_2-C(OH)(CH_3)-Ph$

Solution

(C) $CH_3CHO$ (एसिटाल्डिहाइड) और $PhCOCH_3$ (एसिटोफिनोन) के बीच तनु $NaOH$ की उपस्थिति में होने वाली अभिक्रिया एक क्रॉस-एल्डोल संघनन अभिक्रिया है।
$1$. एसिटोफिनोन में एक $\alpha$-हाइड्रोजन परमाणु होता है,इसलिए यह क्षार $(NaOH)$ की उपस्थिति में एनोलेट आयन बना सकता है।
$2$. एसिटोफिनोन से बना एनोलेट आयन एक न्यूक्लियोफाइल के रूप में कार्य करता है और एसिटाल्डिहाइड $(CH_3CHO)$ के कार्बोनिल कार्बन पर हमला करता है,जो एसिटोफिनोन की तुलना में अधिक इलेक्ट्रोफिलिक होता है।
$3$. न्यूक्लियोफिलिक हमले के परिणामस्वरूप $\beta$-हाइड्रॉक्सी कीटोन का निर्माण होता है।
$4$. अभिक्रिया इस प्रकार आगे बढ़ती है:
$PhCOCH_3 + OH^- \rightarrow [PhCOCH_2]^- + H_2O$
$[PhCOCH_2]^- + CH_3CHO \rightarrow CH_3-CH(O^-)-CH_2-COPh$
$CH_3-CH(O^-)-CH_2-COPh + H_2O \rightarrow CH_3-CH(OH)-CH_2-COPh + OH^-$
अतः,मुख्य उत्पाद $CH_3-CH(OH)-CH_2-COPh$ है।
71
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निम्नलिखित अभिक्रिया में प्राप्त मुख्य उत्पाद है:
Question diagram
A
एसिटामाइड समूह के साथ एक एल्कीन संरचना।
B
बेंजीन रिंग पर एसिटाइल समूह और एक अमीनो समूह वाली संरचना।
C
हाइड्रॉक्सिल स्थान पर एस्टर समूह वाली संरचना।
D
अमीनो स्थान पर एसिटामाइड समूह और हाइड्रॉक्सिल समूह के साथ वाली संरचना।

Solution

(D) अभिकारक $2$-अमीनो-$1$-फेनिलप्रोपेन-$1$-ऑल है। इसमें एक अमीनो समूह $(-NH_2)$ और एक हाइड्रॉक्सिल समूह $(-OH)$ दोनों होते हैं।
जब इसे कमरे के तापमान पर पिरिडीन की उपस्थिति में एसिटिक एनहाइड्राइड $((CH_3CO)_2O)$ के साथ उपचारित किया जाता है,तो एसिटिलेशन होता है।
चूंकि अमीनो समूह $(-NH_2)$ की न्यूक्लियोफिलिसिटी हाइड्रॉक्सिल समूह $(-OH)$ की तुलना में काफी अधिक होती है,इसलिए अमीनो समूह एमाइड बनाने के लिए प्राथमिकता के साथ एसिटिलेशन से गुजरता है।
इसलिए,मुख्य उत्पाद $N$-एसिटिलेटेड व्युत्पन्न है,जहाँ $-NH_2$ समूह $-NHCOCH_3$ में परिवर्तित हो जाता है जबकि $-OH$ समूह अपरिवर्तित रहता है।
72
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आर्सेनियस सल्फाइड सोल के लिए,निम्नलिखित में से कौन सा लवण विलयन स्कंदन के लिए सबसे अधिक प्रभावी होगा?
A
$BaCl_2$
B
$AlCl_3$
C
$NaCl$
D
$Na_3PO_4$

Solution

(B) आर्सेनियस सल्फाइड $(As_2S_3)$ सोल एक ऋणावेशित कोलाइडल सोल है।
हार्डी-शुल्ज़ नियम के अनुसार,किसी विद्युत अपघट्य की स्कंदन शक्ति विपरीत आवेशित आयन की संयोजकता पर निर्भर करती है।
ऋणावेशित सोल के लिए,धनायन की संयोजकता बढ़ने के साथ स्कंदन शक्ति बढ़ती है।
धनायनों की संयोजकता इस प्रकार है: $Na^+$ $(+1)$,$Ba^{2+}$ $(+2)$,और $Al^{3+}$ $(+3)$।
चूंकि $Al^{3+}$ की संयोजकता सबसे अधिक है,इसलिए $AlCl_3$ सबसे प्रभावी स्कंदन कारक है।
73
ChemistryAdvancedMCQJEE Main · 2019
वह संकुल जिसकी क्रिस्टल क्षेत्र विपाटन ऊर्जा $(\Delta)$ उच्चतम है,वह है
A
$[Co(NH_3)_5(H_2O)]Cl_3$
B
$K_2[CoCl_4]$
C
$[Co(NH_3)_5Cl]Cl_2$
D
$K_3[Co(CN)_6]$

Solution

(D) क्रिस्टल क्षेत्र विपाटन ऊर्जा $(\Delta)$ लिगेंड की प्रकृति और केंद्रीय धातु आयन की ऑक्सीकरण अवस्था पर निर्भर करती है।
प्रबल क्षेत्र लिगेंड दुर्बल क्षेत्र लिगेंड की तुलना में अधिक विपाटन उत्पन्न करते हैं।
दिए गए लिगेंडों में,$CN^-$ एक प्रबल क्षेत्र लिगेंड है (स्पेक्ट्रोकेमिकल श्रेणी के अनुसार)।
$K_3[Co(CN)_6]$ में,कोबाल्ट आयन $+3$ ऑक्सीकरण अवस्था में है और छह प्रबल $CN^-$ लिगेंडों से जुड़ा है,जिसके परिणामस्वरूप इसकी क्रिस्टल क्षेत्र विपाटन ऊर्जा उच्चतम होती है।
74
ChemistryAdvancedMCQJEE Main · 2019
नीचे दिए गए ट्राइपेप्टाइड में उपस्थित अमीनो एसिड का सही क्रम क्या है?
Question diagram
A
$Val-Ser-Thr$
B
$Thr-Ser-Val$
C
$Leu-Ser-Thr$
D
$Thr-Ser-Leu$

Solution

(A) दिए गए ट्राइपेप्टाइड का जल-अपघटन करने पर तीन अमीनो एसिड प्राप्त होते हैं: $Valine$ $(Val)$,$Serine$ $(Ser)$,और $Threonine$ $(Thr)$।
$N$-टर्मिनल (बाईं ओर) से $C$-टर्मिनल (दाईं ओर) तक संरचना को देखने पर,अमीनो एसिड का क्रम $Val-Ser-Thr$ है।
75
ChemistryMediumMCQJEE Main · 2019
अभिक्रिया $2A + B \to \text{products}$ के लिए,जब $A$ और $B$ दोनों की सांद्रता दोगुनी की गई,तो अभिक्रिया की दर $0.3 \ mol \ L^{-1} \ s^{-1}$ से बढ़कर $2.4 \ mol \ L^{-1} \ s^{-1}$ हो गई। जब केवल $A$ की सांद्रता दोगुनी की जाती है,तो दर $0.3 \ mol \ L^{-1} \ s^{-1}$ से बढ़कर $0.6 \ mol \ L^{-1} \ s^{-1}$ हो जाती है। निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?
A
अभिक्रिया की कुल कोटि $4$ है
B
$B$ के सापेक्ष अभिक्रिया की कोटि $2$ है
C
$B$ के सापेक्ष अभिक्रिया की कोटि $1$ है
D
$A$ के सापेक्ष अभिक्रिया की कोटि $2$ है

Solution

(B) अभिक्रिया के लिए दर नियम: $Rate = K [A]^x [B]^y$
प्रारंभिक दर: $0.3 = K [A]^x [B]^y$ $(1)$
जब दोनों सांद्रताएँ दोगुनी की जाती हैं: $2.4 = K [2A]^x [2B]^y = K [A]^x [B]^y \times 2^{x+y} = 0.3 \times 2^{x+y}$
$2^{x+y} = 2.4 / 0.3 = 8 = 2^3$,अतः $x + y = 3$ $(2)$
जब केवल $A$ दोगुना किया जाता है: $0.6 = K [2A]^x [B]^y = K [A]^x [B]^y \times 2^x = 0.3 \times 2^x$
$2^x = 0.6 / 0.3 = 2 = 2^1$,अतः $x = 1$
$x = 1$ को $x + y = 3$ में रखने पर,$y = 2$ प्राप्त होता है।
अतः,$A$ के सापेक्ष कोटि $1$ है और $B$ के सापेक्ष कोटि $2$ है।
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क्यूमीन की $O_2$ के साथ अभिक्रिया और उसके बाद तनु $HCl$ के साथ उपचार करने पर प्राप्त उत्पाद हैं
A
$Phenol$ और $Acetone$
B
$Benzyl$ $alcohol$ और $Acetaldehyde$
C
$Benzene$ और $Propene$
D
$Benzaldehyde$ और $Methane$

Solution

(A) क्यूमीन $(Isopropylbenzene)$ $O_2$ के साथ अभिक्रिया करके क्यूमीन हाइड्रोपरॉक्साइड बनाता है।
तनु $HCl$ के साथ उपचार करने पर,क्यूमीन हाइड्रोपरॉक्साइड पुनर्विन्यास (rearrangement) के माध्यम से अंतिम उत्पाद के रूप में $Phenol$ और $Acetone$ देता है।
77
ChemistryDifficultMCQJEE Main · 2019
यौगिक $X$ पर किए गए परीक्षण और उनके निष्कर्ष इस प्रकार हैं:
परीक्षण निष्कर्ष
$(a)$ $2, 4-DNP$ परीक्षण रंगीन अवक्षेप
$(b)$ आयोडोफॉर्म परीक्षण पीला अवक्षेप
$(c)$ एज़ो-डाई परीक्षण कोई डाई नहीं बनी

यौगिक $X$ क्या है?
A
$2-$अमीनोफेनिलऐसीटैल्डिहाइड
B
$2-(dimethylamino)acetophenone$
C
$1-(2-aminophenyl)ethanol$
D
$2-(dimethylamino)phenylacetaldehyde$

Solution

(B) $2, 4-DNP$ परीक्षण एल्डिहाइड और कीटोन के लिए धनात्मक है,जो कार्बोनिल समूह की उपस्थिति को दर्शाता है।
आयोडोफॉर्म परीक्षण मिथाइल कीटोन $(-COCH_3)$ या उन यौगिकों के लिए धनात्मक है जिन्हें मिथाइल कीटोन में ऑक्सीकृत किया जा सकता है।
एज़ो-डाई परीक्षण का उपयोग प्राथमिक एरोमैटिक एमाइन का पता लगाने के लिए किया जाता है। नकारात्मक परिणाम यह दर्शाता है कि एमाइन या तो प्राथमिक नहीं है या इसकी प्रतिक्रियाशीलता बाधित है।
विकल्प $(B)$ $2-(dimethylamino)acetophenone$ है। इसमें $-COCH_3$ समूह होता है,जो धनात्मक $2, 4-DNP$ परीक्षण और धनात्मक आयोडोफॉर्म परीक्षण देता है। नाइट्रोजन परमाणु तृतीयक (dimethylamino) है,इसलिए यह एज़ो-डाई नहीं बनाता है,जो अवलोकनों के अनुरूप है।
78
ChemistryDifficultMCQJEE Main · 2019
यदि $300 \ K$ पर एक सेल के लिए मानक इलेक्ट्रोड विभव $2 \ V$ है,तो $300 \ K$ पर अभिक्रिया $Zn_{(s)} + Cu^{2+}_{(aq)} \rightleftharpoons Zn^{2+}_{(aq)} + Cu_{(s)}$ के लिए साम्य स्थिरांक $(K)$ लगभग कितना होगा? $(R = 8 \ J \ K^{-1} \ mol^{-1}, F = 96000 \ C \ mol^{-1})$
A
$e^{-80}$
B
$e^{-160}$
C
$e^{320}$
D
$e^{160}$

Solution

(D) अभिक्रिया: $Zn_{(s)} + Cu^{2+}_{(aq)} \rightleftharpoons Zn^{2+}_{(aq)} + Cu_{(s)}$.
यहाँ,स्थानांतरित इलेक्ट्रॉनों की संख्या $n = 2$ है।
मानक सेल विभव और साम्य स्थिरांक के बीच संबंध: $\Delta G^{\circ} = -nFE^{\circ}_{cell} = -RT \ln K$.
$\ln K$ के लिए सूत्र: $\ln K = \frac{nFE^{\circ}_{cell}}{RT}$.
दिए गए मान रखने पर: $n = 2$,$F = 96000 \ C \ mol^{-1}$,$E^{\circ}_{cell} = 2 \ V$,$R = 8 \ J \ K^{-1} \ mol^{-1}$,और $T = 300 \ K$.
$\ln K = \frac{2 \times 96000 \times 2}{8 \times 300}$.
$\ln K = \frac{384000}{2400} = 160$.
अतः,$K = e^{160}$.
79
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$H_3PO_2$ की अच्छी अपचायक प्रकृति किसकी उपस्थिति के कारण होती है?
A
दो $P-OH$ बंध
B
एक $P-H$ बंध
C
दो $P-H$ बंध
D
एक $P-OH$ बंध

Solution

(C) $H_3PO_2$ (हाइपोफॉस्फोरस अम्ल) की संरचना में एक $P=O$ बंध,दो $P-OH$ बंध और दो $P-H$ बंध होते हैं।
फॉस्फोरस के ऑक्सोअम्लों में अपचायक गुण अणु में उपस्थित $P-H$ बंधों की संख्या से सीधे संबंधित होता है।
चूंकि $H_3PO_2$ में दो $P-H$ बंध होते हैं,इसलिए यह एक प्रबल अपचायक के रूप में कार्य करता है।
80
ChemistryDifficultMCQJEE Main · 2019
दी गई ए्लिंघम आरेख (Ellingham diagram) के संबंध में सही कथन है
Question diagram
A
$1400\,^\circ C$ पर,$ZnO$ से $Zn$ के निष्कर्षण के लिए $Al$ का उपयोग किया जा सकता है।
B
$500\,^\circ C$ पर,$ZnO$ से $Zn$ के निष्कर्षण के लिए कोक का उपयोग किया जा सकता है।
C
$Cu_2O$ से $Cu$ के निष्कर्षण के लिए कोक का उपयोग नहीं किया जा सकता है।
D
$800\,^\circ C$ पर,$ZnO$ से $Zn$ के निष्कर्षण के लिए $Cu$ का उपयोग किया जा सकता है।

Solution

(A) ए्लिंघम आरेख में,एक धातु दूसरी धातु के ऑक्साइड को अपचयित (reduce) कर सकती है यदि उसके स्वयं के ऑक्साइड के निर्माण की रेखा दूसरी धातु के ऑक्साइड के निर्माण की रेखा के नीचे स्थित हो।
$1$. $1400\,^\circ C$ पर,$Al_2O_3$ के निर्माण की रेखा $ZnO$ के निर्माण की रेखा के नीचे है। इसलिए,$Al$ का उपयोग $ZnO$ को $Zn$ में अपचयित करने के लिए किया जा सकता है।
$2$. $500\,^\circ C$ पर,$ZnO$ के निर्माण की रेखा $CO$ के निर्माण की रेखा के नीचे है,इसलिए कोक $ZnO$ को अपचयित नहीं कर सकता।
$3$. $CO$ के निर्माण की रेखा सभी तापमानों पर $Cu_2O$ के निर्माण की रेखा के नीचे है,इसलिए कोक $Cu_2O$ को अपचयित कर सकता है।
$4$. $800\,^\circ C$ पर,$ZnO$ के निर्माण की रेखा $Cu_2O$ के निर्माण की रेखा के नीचे है,इसलिए $Cu$ का उपयोग $ZnO$ को अपचयित करने के लिए नहीं किया जा सकता है।
अतः,विकल्प $A$ सही है।
81
ChemistryEasyMCQJEE Main · 2019
वह संक्रमण तत्व जिसकी परमाणुकणन एन्थैल्पी सबसे कम है,वह है
A
$Fe$
B
$Cu$
C
$V$
D
$Zn$

Solution

(D) परमाणुकणन एन्थैल्पी धात्विक बंधन की मजबूती पर निर्भर करती है,जो $d$-कक्षक में मौजूद अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की संख्या से निर्धारित होती है।
$Zn$ में $d$-कक्षक पूरी तरह से भरा हुआ $(3d^{10} 4s^2)$ होता है,जिसका अर्थ है कि धात्विक बंधन के लिए कोई अयुग्मित इलेक्ट्रॉन उपलब्ध नहीं हैं।
परिणामस्वरूप,$Zn$ $3d$ संक्रमण श्रेणी में सबसे कमजोर धात्विक बंधन प्रदर्शित करता है,जिसके परिणामस्वरूप इसकी परमाणुकणन एन्थैल्पी सबसे कम होती है।
82
ChemistryDifficultMCQJEE Main · 2019
निम्नलिखित यौगिकों की क्षारीयता का बढ़ता क्रम है:
$(1)$ $CH_3CH_2NH_2$
$(2)$ $(CH_3CH_2)_2NH$
$(3)$ $(CH_3)_3N$
$(4)$ $PhNHCH_3$
A
$(4) < (3) < (2) < (1)$
B
$(4) < (3) < (1) < (2)$
C
$(1) < (2) < (3) < (4)$
D
$(1) < (2) < (4) < (3)$

Solution

(B) एमाइन की क्षारीयता नाइट्रोजन परमाणु पर एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म (lone pair) की उपलब्धता और संयुग्मी अम्ल (conjugate acid) की स्थिरता पर निर्भर करती है।
$(i)$ $PhNHCH_3$ $(4)$ एक एरोमैटिक एमाइन है जिसमें नाइट्रोजन पर मौजूद एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म बेंजीन वलय में अनुनाद (resonance) द्वारा विस्थानीकृत हो जाता है,जिससे यह सबसे कम क्षारीय है।
$(ii)$ एलिफैटिक एमाइन में,क्षारीयता प्रेरणिक प्रभाव $(+I)$,विलायकन (solvation) और त्रिविम बाधा (steric hindrance) द्वारा निर्धारित होती है।
$(iii)$ डाईएथिल एमाइन $(2)$ एक $2^\circ$ एमाइन है,जो एथिल एमाइन $(1)$ ($1^\circ$ एमाइन) से अधिक क्षारीय है क्योंकि इसमें दो एथिल समूहों का $+I$ प्रभाव होता है।
$(iv)$ ट्राईमिथाइल एमाइन $(3)$ एक $3^\circ$ एमाइन है। पानी में महत्वपूर्ण त्रिविम बाधा और इसके संयुग्मी अम्ल के कम विलायकन के कारण,यह एथिल एमाइन $(1)$ से कम क्षारीय है।
अतः,क्षारीयता का बढ़ता क्रम: $(4) < (3) < (1) < (2)$ है।
83
ChemistryMediumMCQJEE Main · 2019
$100\, ^\circ C$ पर,कॉपर $(Cu)$ की $FCC$ एकक कोष्ठिका संरचना है जिसकी कोर की लंबाई $x\, \mathring{A}$ है। इस तापमान पर $Cu$ का अनुमानित घनत्व ($g\, cm^{-3}$ में) क्या होगा? [कॉपर का परमाणु द्रव्यमान $= 63.55\, u$]
A
$\frac{205}{x^3}$
B
$\frac{105}{x^3}$
C
$\frac{211}{x^3}$
D
$\frac{422}{x^3}$

Solution

(D) एकक कोष्ठिका का घनत्व $(d)$ ज्ञात करने का सूत्र: $d = \frac{Z \times M}{N_A \times a^3}$
$FCC$ एकक कोष्ठिका के लिए,प्रति एकक कोष्ठिका परमाणुओं की संख्या $(Z) = 4$.
$Cu$ का परमाणु द्रव्यमान $(M) = 63.55\, g\, mol^{-1}$.
एवोगाद्रो संख्या $(N_A) = 6.023 \times 10^{23}\, mol^{-1}$.
कोर की लंबाई $(a) = x\, \mathring{A} = x \times 10^{-8}\, cm$.
मानों को सूत्र में रखने पर:
$d = \frac{4 \times 63.55}{(6.023 \times 10^{23}) \times (x \times 10^{-8})^3}$
$d = \frac{254.2}{6.023 \times 10^{23} \times x^3 \times 10^{-24}}$
$d = \frac{254.2}{0.6023 \times x^3} \approx \frac{422}{x^3}\, g\, cm^{-3}$
84
ChemistryDifficultMCQJEE Main · 2019
$250 \ g$ जल में $62 \ g$ एथिलीन ग्लाइकॉल युक्त एक विलयन को $-10 \ ^\circ C$ तक ठंडा किया जाता है। यदि जल के लिए $K_f = 1.86 \ K \ kg \ mol^{-1}$ है,तो बर्फ के रूप में अलग हुए जल की मात्रा ($g$ में) क्या है?
A
$48$
B
$32$
C
$64$
D
$16$

Solution

(C) एथिलीन ग्लाइकॉल $(C_2H_6O_2)$ का मोलर द्रव्यमान $62 \ g \ mol^{-1}$ है।
एथिलीन ग्लाइकॉल के मोल $= \frac{62 \ g}{62 \ g \ mol^{-1}} = 1 \ mol$.
माना कि द्रव अवस्था में शेष जल का द्रव्यमान $w \ g$ है।
हिमांक में अवनमन $\Delta T_f = 0 - (-10) = 10 \ K$ है।
सूत्र $\Delta T_f = K_f \times m$ का उपयोग करने पर:
$10 = 1.86 \times \frac{1 \ mol}{(w / 1000) \ kg}$.
$w = \frac{1.86 \times 1000}{10} = 186 \ g$.
बर्फ के रूप में अलग हुए जल की मात्रा $= \text{प्रारंभिक द्रव्यमान} - \text{शेष द्रव्यमान} = 250 \ g - 186 \ g = 64 \ g$.
85
ChemistryAdvancedMCQJEE Main · 2019
$M^{3+}$ धातु आयन के तीन एकदंती लिगेंड $L_1, L_2$ और $L_3$ के साथ होमोलेप्टिक अष्टफलकीय संकुल क्रमशः हरे,नीले और लाल रंग के क्षेत्र में तरंगदैर्ध्य का अवशोषण करते हैं। लिगेंड की प्रबलता का बढ़ता क्रम क्या है?
A
$L_3 < L_1 < L_2$
B
$L_3 < L_2 < L_1$
C
$L_1 < L_2 < L_3$
D
$L_2 < L_1 < L_3$

Solution

(A) क्रिस्टल क्षेत्र विपाटन ऊर्जा $(\Delta_o)$ अवशोषित प्रकाश की तरंगदैर्ध्य के व्युत्क्रमानुपाती होती है $(\Delta_o = \frac{hc}{\lambda})$।
दिए गए रंगों के लिए तरंगदैर्ध्य का क्रम $\lambda_{blue} < \lambda_{green} < \lambda_{red}$ है।
अतः,ऊर्जा का क्रम $E_{blue} > E_{green} > E_{red}$ है।
चूंकि लिगेंड की प्रबलता $\Delta_o$ के सीधे समानुपाती होती है,इसलिए लिगेंड की प्रबलता का क्रम $L_2 > L_1 > L_3$ या $L_3 < L_1 < L_2$ है।
86
ChemistryMediumMCQJEE Main · 2019
वर्ग समतलीय संकुल $[M(F)(Cl)(SCN)(NO_2)]$ के लिए समावयवियों की कुल संख्या है
A
$16$
B
$8$
C
$4$
D
$12$

Solution

(D) $[M(abcd)]$ प्रकार के वर्ग समतलीय संकुल के लिए $3$ ज्यामितीय समावयवी होते हैं।
दिए गए संकुल $[M(F)(Cl)(SCN)(NO_2)]$ में,लिगेंड $SCN^-$ और $NO_2^-$ उभयदंती लिगेंड हैं।
$SCN^-$ परमाणु $S$ $(SCN^-)$ या $N$ $(NCS^-)$ के माध्यम से समन्वय कर सकता है।
$NO_2^-$ परमाणु $N$ $(NO_2^-)$ या $O$ $(ONO^-)$ के माध्यम से समन्वय कर सकता है।
यह बंधन समावयवता को जन्म देता है।
इन उभयदंती लिगेंडों के $4$ संभावित संयोजन हैं:
$1$. $[M(F)(Cl)(SCN)(NO_2)]$
$2$. $[M(F)(Cl)(NCS)(NO_2)]$
$3$. $[M(F)(Cl)(SCN)(ONO)]$
$4$. $[M(F)(Cl)(NCS)(ONO)]$
इनमें से प्रत्येक $4$ संयोजन $3$ ज्यामितीय समावयवी प्रदर्शित करते हैं।
अतः,समावयवियों की कुल संख्या = $4 \times 3 = 12$।
87
ChemistryEasyMCQJEE Main · 2019
किस आद्य एकक कोष्ठिका (primitive unit cell) में कोर की लंबाई असमान $(a \ne b \ne c)$ होती है और सभी अक्षीय कोण $90^{\circ}$ से भिन्न होते हैं?
A
त्रिनताक्ष (Triclinic)
B
षट्कोणीय (Hexagonal)
C
एकनताक्ष (Monoclinic)
D
द्विसमलंबाक्ष (Tetragonal)

Solution

(A) त्रिनताक्ष (Triclinic) एकक कोष्ठिका में,मापदंड $a \ne b \ne c$ और $\alpha \ne \beta \ne \gamma \ne 90^{\circ}$ के रूप में परिभाषित होते हैं।
यह सबसे अधिक असममित क्रिस्टल प्रणाली को दर्शाता है।
88
ChemistryDifficultMCQJEE Main · 2019
निम्नलिखित अभिक्रिया का मुख्य उत्पाद क्या है?
$Ph-CH(CH_3)-CH(Br)-CH_2-CH_2-Br \xrightarrow{KOH \text{ (alc, excess)}, \Delta} ?$
A
Option A
B
Option B
C
Option C
D
Option D

Solution

(A) यह अभिक्रिया अतिरिक्त अल्कोहलिक $KOH$ और उच्च तापमान $(\Delta)$ का उपयोग करके डाईहेलोऐल्केन के विहाइड्रोहैलोजनीकरण (dehydrohalogenation) को दर्शाती है।
यह एक $E_2$ विलोपन अभिक्रिया है जो संयुग्मित डाइन (conjugated diene) बनाने के लिए आगे बढ़ती है।
प्रारंभिक पदार्थ $Ph-CH(CH_3)-CH(Br)-CH_2-CH_2-Br$ है।
अतिरिक्त अल्कोहलिक $KOH$ के साथ उपचार करने पर,$HBr$ के दो अणु निकल जाते हैं और एक संयुग्मित प्रणाली बनती है।
सबसे स्थिर उत्पाद वह है जिसमें विस्तारित संयुग्मन (extended conjugation) होता है,जो $Ph-C(CH_3)=CH-CH=CH_2$ है।
अतः,मुख्य उत्पाद संयुग्मित डाइन है।
89
ChemistryMediumMCQJEE Main · 2019
आर्हेनियस समीकरण $(0\,^{\circ}C < T < 300\,^{\circ}C)$ का पालन करने वाली अभिक्रिया के लिए दिए गए आलेखों पर विचार करें: ($k$ और $E_a$ क्रमशः दर स्थिरांक और सक्रियण ऊर्जा हैं)। सही विकल्प चुनें।
Question diagram
A
$I$ सही है लेकिन $II$ गलत है
B
$I$ और $II$ दोनों सही हैं
C
$I$ गलत है लेकिन $II$ सही है
D
$I$ और $II$ दोनों गलत हैं

Solution

(A) आर्हेनियस समीकरण $k = A e^{-E_a/RT}$ द्वारा दिया जाता है।
आलेख $I$: जैसे-जैसे $E_a$ बढ़ता है,पद $e^{-E_a/RT}$ घटता है,इसलिए $k$ घटता है। अतः,$k$ बनाम $E_a$ का आलेख एक चरघातांकीय क्षय वक्र है,जो सही है।
आलेख $II$: जैसे-जैसे तापमान $T$ बढ़ता है,पद $e^{-E_a/RT}$ बढ़ता है,इसलिए $k$,$T$ के साथ चरघातांकीय रूप से बढ़ता है। दिया गया आलेख $II$ एक ऐसा वक्र दिखाता है जो $T$ के साथ $k$ की मानक चरघातांकीय वृद्धि का सही प्रतिनिधित्व नहीं करता है। इसलिए,$II$ गलत है।
अतः,$I$ सही है लेकिन $II$ गलत है।
90
ChemistryDifficultMCQJEE Main · 2019
नीचे दी गई अभिक्रिया में बनने वाला मुख्य उत्पाद होगा
Question diagram
A
बाइसाइक्लो[$4.4$.$0$]डेसिल$-2-$नाइट्रोमीथेन
B
बाइसाइक्लो[$4.3$.$0$]नोनिल$-2-$नाइट्रो
C
डेकालिन$-2-$मिथेनॉल
D
डेकालिन$-2-$ऑल

Solution

(D) प्राथमिक एलिफैटिक एमाइन की $NaNO_2$ और $HCl$ के साथ $0-5^{\circ}C$ पर अभिक्रिया से एक अस्थाई डायज़ोनियम लवण बनता है।
यह डायज़ोनियम लवण तेजी से $N_2$ गैस खोकर एक प्राथमिक कार्बोकेशन बनाता है।
चूंकि प्राथमिक कार्बोकेशन अस्थाई होता है,इसलिए यह अधिक स्थाई द्वितीयक कार्बोकेशन बनाने के लिए वलय विस्तार (ring expansion) से गुजरता है।
विशेष रूप से,$5$-सदस्यीय वलय विस्तारित होकर $6$-सदस्यीय डेकालिन प्रणाली बनाता है।
अंत में,द्वितीयक कार्बोकेशन पानी के साथ अभिक्रिया करके मुख्य उत्पाद डेकालिन-$2$-ऑल बनाता है।
91
ChemistryDifficultMCQJEE Main · 2019
विल्किंसन उत्प्रेरक (Wilkinson catalyst) है:
A
$[(Ph_3P)_3IrCl]$
B
$[(Et_3P)_3RhCl]$
C
$[(Ph_3P)_3RhCl]$
D
$[(Et_3P)_3IrCl]$

Solution

(C) विल्किंसन उत्प्रेरक एक प्रसिद्ध ऑर्गेनोमेटैलिक कॉम्प्लेक्स है जिसका उपयोग एल्कीन के हाइड्रोजनीकरण के लिए समांगी उत्प्रेरक के रूप में किया जाता है।
इसका रासायनिक सूत्र $RhCl(PPh_3)_3$ है,जिसे $[(Ph_3P)_3RhCl]$ के रूप में लिखा जाता है।
इसमें तीन ट्राइफेनिलफॉस्फीन लिगेंड और एक क्लोराइड आयन से समन्वित रोडियम केंद्र होता है।
92
ChemistryDifficultMCQJEE Main · 2019
कौन सा डाइकार्बोक्सिलिक एसिड,निर्जलीकरण एजेंट की उपस्थिति में,एनहाइड्राइड बनाने के लिए सबसे कम प्रतिक्रियाशील है?
A
Option A
B
Option B
C
Option C
D
Option D

Solution

(A) डाइकार्बोक्सिलिक एसिड से चक्रीय एनहाइड्राइड का निर्माण परिणामी वलय (ring) की स्थिरता पर निर्भर करता है। पांच-सदस्यीय और छह-सदस्यीय वलय आमतौर पर स्थिर होते हैं और आसानी से बन जाते हैं।
$1$. सक्सिनिक एसिड $5$-सदस्यीय एनहाइड्राइड (सक्सिनिक एनहाइड्राइड) बनाता है।
$2$. थैलिक एसिड $5$-सदस्यीय चक्रीय एनहाइड्राइड बनाता है।
$3$. साइक्लोपेंटेन-$1,2$-डाइकार्बोक्सिलिक एसिड ($cis$-आइसोमर) $5$-सदस्यीय फ्यूज्ड एनहाइड्राइड बनाता है।
$4$. एडिपिक एसिड $(HOOC(CH_2)_4COOH)$ $7$-सदस्यीय वलय एनहाइड्राइड बनाएगा,जो वलय तनाव और ट्रांसएनुलर इंटरैक्शन के कारण अत्यधिक अस्थिर है। इसलिए,यह एनहाइड्राइड निर्माण के प्रति सबसे कम प्रतिक्रियाशील है।
93
ChemistryDifficultMCQJEE Main · 2019
निम्नलिखित एस्टर के लिए क्षारीय जल-अपघटन (alkaline hydrolysis) की दर का घटता क्रम क्या है?
$I: C_6H_5COOC_2H_5$
$II: p-Cl-C_6H_4COOC_2H_5$
$III: p-NO_2-C_6H_4COOC_2H_5$
$IV: p-CH_3O-C_6H_4COOC_2H_5$
A
$III > II > I > IV$
B
$III > II > IV > I$
C
$IV > II > III > I$
D
$II > III > I > IV$

Solution

(A) एस्टर के क्षारीय जल-अपघटन की दर कार्बोनिल कार्बन की इलेक्ट्रोफिलिसिटी पर निर्भर करती है।
इलेक्ट्रॉन-आकर्षक समूह $(EWG)$ कार्बोनिल कार्बन की इलेक्ट्रोफिलिसिटी को बढ़ाते हैं,जिससे $OH^-$ द्वारा न्यूक्लियोफिलिक हमले की दर बढ़ जाती है।
इलेक्ट्रॉन-दाता समूह $(EDG)$ इलेक्ट्रोफिलिसिटी को कम करते हैं,जिससे दर कम हो जाती है।
पैरा-स्थिति पर प्रतिस्थापी हैं:
$III: -NO_2$ (प्रबल $EWG$,$-I$ और $-M$ प्रभाव)
$II: -Cl$ ($EWG$,$-I$ प्रभाव > $+M$ प्रभाव)
$I: -H$ (संदर्भ)
$IV: -OCH_3$ (प्रबल $EDG$,$+M$ प्रभाव > $-I$ प्रभाव)
इलेक्ट्रॉन-आकर्षक शक्ति का क्रम $-NO_2 > -Cl > -H > -OCH_3$ है।
अतः,क्षारीय जल-अपघटन की दर का घटता क्रम $III > II > I > IV$ है।
94
ChemistryDifficultMCQJEE Main · 2019
निम्नलिखित में से कौन सी विषमांगी उत्प्रेरक अभिक्रिया का उदाहरण नहीं है?
A
ओस्टवाल्ड प्रक्रम
B
कोयले का दहन
C
वनस्पति तेलों का हाइड्रोजनीकरण
D
हैबर प्रक्रम

Solution

(B) विषमांगी उत्प्रेरक अभिक्रिया में उत्प्रेरक अभिकारकों से भिन्न अवस्था में होता है।
$A$. ओस्टवाल्ड प्रक्रम में $NH_3$ (गैस) के ऑक्सीकरण के लिए $Pt$ उत्प्रेरक (ठोस) का उपयोग होता है,जो विषमांगी है।
$B$. कोयले का दहन एक स्वतःस्फूर्त ऑक्सीकरण अभिक्रिया है जिसमें किसी उत्प्रेरक की आवश्यकता नहीं होती है।
$C$. वनस्पति तेलों के हाइड्रोजनीकरण में तरल तेल और $H_2$ (गैस) के लिए $Ni$ उत्प्रेरक (ठोस) का उपयोग होता है,जो विषमांगी है।
$D$. हैबर प्रक्रम में $N_2$ और $H_2$ (गैसों) के लिए $Fe$ उत्प्रेरक (ठोस) का उपयोग होता है,जो विषमांगी है।
अतः,कोयले का दहन कोई उत्प्रेरक अभिक्रिया नहीं है।
95
ChemistryEasyMCQJEE Main · 2019
लैंथेनॉइड श्रेणी के तत्वों में लैंथेनॉइड संकुचन का क्या प्रभाव होता है?
A
परमाण्वीय और आयनिक त्रिज्या दोनों में वृद्धि
B
परमाण्वीय त्रिज्या में कमी और आयनिक त्रिज्या में वृद्धि
C
परमाण्वीय और आयनिक त्रिज्या दोनों में कमी
D
परमाण्वीय त्रिज्या में वृद्धि और आयनिक त्रिज्या में कमी

Solution

(C) लैंथेनॉइड संकुचन का अर्थ है $La$ $(Z=57)$ से $Lu$ $(Z=71)$ तक परमाणु क्रमांक बढ़ने के साथ लैंथेनॉइड तत्वों की परमाण्वीय और आयनिक त्रिज्या में होने वाली क्रमिक कमी।
यह $4f$ इलेक्ट्रॉनों के दुर्बल परिरक्षण प्रभाव (poor shielding effect) के कारण होता है,जिससे प्रभावी नाभिकीय आवेश बढ़ जाता है और संयोजकता कोश नाभिक के करीब खिंच जाता है।
96
ChemistryDifficultMCQJEE Main · 2019
निम्नलिखित अभिक्रिया में उत्पाद $P$ की सही संरचना है
$Asn-Ser + (excess) (CH_3CO)_2O \xrightarrow{NEt_3} P$
A
Option A
B
Option B
C
Option C
D
Option D

Solution

(D) यह अभिक्रिया $Asn-Ser$ डाइपेप्टाइड की क्षार $(NEt_3)$ की उपस्थिति में एसिटिक एनहाइड्राइड $((CH_3CO)_2O)$ के आधिक्य के साथ उपचार को दर्शाती है।
एसिटिक एनहाइड्राइड एक एसिटाइलेटिंग एजेंट है जो न्यूक्लियोफिलिक क्रियात्मक समूहों के साथ अभिक्रिया करता है।
$Asn-Ser$ डाइपेप्टाइड में:
$1$. $Asn$ का $N$-टर्मिनल अमीनो समूह $(-NH_2)$ न्यूक्लियोफिलिक है और यह एसिटाइलेट होकर एमाइड $(-NHCOCH_3)$ बनाता है।
$2$. $Asn$ का साइड-चेन एमाइड समूह $(-CONH_2)$ भी न्यूक्लियोफिलिक है और यह एसिटाइलेट होकर इमाइड $(-CONHCOCH_3)$ बनाता है।
$3$. $Ser$ का साइड-चेन हाइड्रॉक्सिल समूह $(-OH)$ न्यूक्लियोफिलिक है और यह एसिटाइलेट होकर एस्टर $(-OCOCH_3)$ बनाता है।
अतः,सभी तीन न्यूक्लियोफिलिक स्थलों का एसिटाइलेशन होता है,जिससे विकल्प $D$ में दी गई संरचना प्राप्त होती है।
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ChemistryMediumMCQJEE Main · 2019
$XeOF_4$ में $Xe$ के संकरण का प्रकार और एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म(ओं) की संख्या क्रमशः क्या है?
A
$sp^3d^2$ और $1$
B
$sp^3d$ और $2$
C
$sp^3d^2$ और $2$
D
$sp^3d$ और $1$

Solution

(A) $XeOF_4$ में $Xe$ के संकरण और एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म को निर्धारित करने के लिए:
$1$. केंद्रीय परमाणु $Xe$ है,जिसके पास $8$ संयोजी इलेक्ट्रॉन होते हैं।
$2$. $Xe$,$F$ परमाणुओं के साथ $4$ एकल बंध और $O$ परमाणु के साथ $1$ द्वि-बंध बनाता है।
$3$. $Xe$ के चारों ओर इलेक्ट्रॉन युग्मों की कुल संख्या = (सिग्मा बंधों की संख्या) + (एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्मों की संख्या)।
$4$. $Xe$,$5$ सिग्मा बंध ($4$ $F$ के साथ और $1$ $O$ के साथ) और $O$ के साथ $1$ पाई बंध बनाता है।
$5$. $Xe$ पर एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्मों की संख्या = (कुल संयोजी इलेक्ट्रॉन - बंध बनाने में प्रयुक्त इलेक्ट्रॉन) / $2$ = $(8 - (4 \times 1 + 1 \times 2)) / 2 = (8 - 6) / 2 = 1$ एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म।
$6$. स्टेरिक संख्या = (सिग्मा बंधों की संख्या) + (एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्मों की संख्या) = $5 + 1 = 6$।
$7$. $6$ की स्टेरिक संख्या $sp^3d^2$ संकरण के अनुरूप है।
$8$. अतः,संकरण $sp^3d^2$ है और एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्मों की संख्या $1$ है।
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ChemistryDifficultMCQJEE Main · 2019
निम्नलिखित पर विचार करें:
$Zn^{2+} + 2e^- \longrightarrow Zn_{(s)} ; E^o = -0.76 \, V$
$Ca^{2+} + 2e^- \longrightarrow Ca_{(s)} ; E^o = -2.87 \, V$
$Mg^{2+} + 2e^- \longrightarrow Mg_{(s)} ; E^o = -2.36 \, V$
$Ni^{2+} + 2e^- \longrightarrow Ni_{(s)} ; E^o = -0.25 \, V$
धातुओं की अपचायक क्षमता किस क्रम में बढ़ती है?
A
$Ni < Zn < Mg < Ca$
B
$Ni < Zn < Ca < Mg$
C
$Zn < Mg < Ni < Ca$
D
$Ca < Mg < Zn < Ni$

Solution

(A) धातु की अपचायक क्षमता उसके मानक अपचयन विभव $(SRP)$ मान के व्युत्क्रमानुपाती होती है।
कम $SRP$ मान एक मजबूत अपचायक (reducing agent) को दर्शाता है।
दिए गए $SRP$ मान हैं:
$Ni^{2+}/Ni = -0.25 \, V$
$Zn^{2+}/Zn = -0.76 \, V$
$Mg^{2+}/Mg = -2.36 \, V$
$Ca^{2+}/Ca = -2.87 \, V$
$SRP$ मानों को बढ़ते क्रम में व्यवस्थित करने पर: $Ni < Zn < Mg < Ca$।
अतः,बढ़ती हुई अपचायक क्षमता का क्रम है: $Ni < Zn < Mg < Ca$।
99
ChemistryDifficultMCQJEE Main · 2019
द्रव $A$ और $B$ पूरी संरचना सीमा में एक आदर्श विलयन बनाते हैं। $350 \ K$ पर,शुद्ध $A$ और शुद्ध $B$ के वाष्प दाब क्रमशः $7 \times 10^3 \ Pa$ और $12 \times 10^3 \ Pa$ हैं। इस तापमान पर $40 \ \text{mole percent}$ $A$ युक्त विलयन के साथ साम्यावस्था में वाष्प की संरचना क्या है?
A
$y_A = 0.37$; $y_B = 0.63$
B
$y_A = 0.28$; $y_B = 0.72$
C
$y_A = 0.40$; $y_B = 0.60$
D
$y_A = 0.76$; $y_B = 0.24$

Solution

(B) दिया गया है: $\chi_A = 0.4$,$\chi_B = 0.6$,$P_A^o = 7 \times 10^3 \ Pa$,$P_B^o = 12 \times 10^3 \ Pa$.
विलयन का कुल दाब $P_T = \chi_A P_A^o + \chi_B P_B^o$ है।
$P_T = (0.4 \times 7 \times 10^3) + (0.6 \times 12 \times 10^3) = 2.8 \times 10^3 + 7.2 \times 10^3 = 10^4 \ Pa$.
वाष्प प्रावस्था में $A$ का मोल अंश $(y_A)$ $y_A = \frac{P_A}{P_T} = \frac{\chi_A P_A^o}{P_T}$ द्वारा दिया जाता है।
$y_A = \frac{0.4 \times 7 \times 10^3}{10^4} = 0.28$.
वाष्प प्रावस्था में $B$ का मोल अंश $y_B = 1 - y_A = 1 - 0.28 = 0.72$ है।
100
ChemistryAdvancedMCQJEE Main · 2019
निम्नलिखित अभिक्रिया में बनने वाला मुख्य उत्पाद $X$ है:
Question diagram
A
Option A
B
Option B
C
Option C
D
Option D

Solution

(D) $NaBH_4$ एक चयनात्मक अपचायक (selective reducing agent) है जो कीटोन और एल्डिहाइड को अल्कोहल में अपचयित करता है,लेकिन एस्टर या कार्बोक्सिलिक एसिड को अपचयित नहीं करता है।
दिए गए अणु में,एक कीटोन समूह और एक एस्टर समूह है।
$NaBH_4$ चयनात्मक रूप से कीटोन समूह को द्वितीयक अल्कोहल में अपचयित करेगा जबकि एस्टर समूह अपरिवर्तित रहेगा।
इसलिए,मुख्य उत्पाद $X$ एस्टर साइड चेन वाला एक असंतृप्त चक्रीय अल्कोहल है।

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