AIIMS 2005 Physics Question Paper with Answer and Solution in Hindi

52 QuestionsHindiWith Solutions

PhysicsQ152 of 52 questions

Page 1 of 1 · Hindi

1
PhysicsEasyMCQAIIMS · 2005
$Parsec$ किसका मात्रक है?
A
दूरी
B
वेग
C
समय
D
कोण

Solution

(A) $Parsec$ (पैरालैक्स सेकंड) दूरी की एक इकाई है जिसका उपयोग सौर मंडल के बाहर खगोलीय पिंडों की विशाल दूरी को मापने के लिए किया जाता है।
इसे उस दूरी के रूप में परिभाषित किया गया है जिस पर एक खगोलीय इकाई $(AU)$ एक आर्कसेकंड का कोण बनाती है।
$1 \ Parsec \approx 3.086 \times 10^{16} \ m$.
अतः,सही विकल्प $A$ है।
2
PhysicsMediumMCQAIIMS · 2005
$R$ (प्रतिरोध) की विमा क्या है?
A
$M L^2 T^{-1}$
B
$M L^2 T^{-3} A^{-2}$
C
$M L^{-1} T^{-2}$
D
इनमें से कोई नहीं

Solution

(B) ओम के नियम के अनुसार,$R = \frac{V}{I}$ होता है।
सबसे पहले,विभवांतर $(V)$ की विमा ज्ञात करें: $V = \frac{W}{q} = \frac{[M L^2 T^{-2}]}{[A T]} = [M L^2 T^{-3} A^{-1}]$।
अब,$V$ और $I$ की विमाओं को $R$ के सूत्र में रखें:
$R = \frac{[M L^2 T^{-3} A^{-1}]}{[A]} = [M L^2 T^{-3} A^{-2}]$।
अतः,सही विकल्प $B$ है।
3
PhysicsMediumMCQAIIMS · 2005
जब एक गेंद को $V_o$ वेग के साथ ऊर्ध्वाधर ऊपर फेंका जाता है,तो वह $h$ की अधिकतम ऊँचाई तक पहुँचती है। यदि कोई अधिकतम ऊँचाई को तीन गुना करना चाहता है,तो गेंद को किस वेग से फेंका जाना चाहिए?
A
$\sqrt{3} V_o$
B
$3 V_o$
C
$9 V_o$
D
$\frac{3}{2} V_o$

Solution

(A) प्रारंभिक वेग $u$ के साथ ऊर्ध्वाधर ऊपर फेंकी गई गेंद द्वारा प्राप्त अधिकतम ऊँचाई $h$ का सूत्र $h = \frac{u^2}{2g}$ है।
इस संबंध से,हम देख सकते हैं कि $h \propto u^2$,जिसका अर्थ है $u \propto \sqrt{h}$।
मान लीजिए कि $h$ ऊँचाई के लिए प्रारंभिक वेग $V_o$ है और $3h$ ऊँचाई के लिए नया वेग $V'$ है।
अतः,$\frac{V'}{V_o} = \sqrt{\frac{3h}{h}} = \sqrt{3}$।
इसलिए,$V' = \sqrt{3} V_o$।
4
PhysicsEasyMCQAIIMS · 2005
एक व्यक्ति लिफ्ट में खड़ा है। निम्नलिखित में से किस स्थिति में उसे अपना वजन अपने वास्तविक वजन से कम महसूस होता है?
A
लिफ्ट निरंतर त्वरण के साथ ऊपर की ओर बढ़ती है।
B
लिफ्ट निरंतर त्वरण के साथ नीचे की ओर बढ़ती है।
C
लिफ्ट एकसमान वेग के साथ ऊपर की ओर बढ़ती है।
D
लिफ्ट एकसमान वेग के साथ नीचे की ओर बढ़ती है।

Solution

(B) लिफ्ट में किसी व्यक्ति का आभासी भार $W'$ सूत्र $W' = m(g \pm a)$ द्वारा दिया जाता है,जहाँ $m$ व्यक्ति का द्रव्यमान है,$g$ गुरुत्वीय त्वरण है और $a$ लिफ्ट का त्वरण है।
जब लिफ्ट $a$ त्वरण के साथ नीचे की ओर बढ़ती है,तो आभासी भार $W' = m(g - a)$ होता है।
चूँकि $(g - a) < g$,इसलिए आभासी भार $W'$ वास्तविक भार $W = mg$ से कम होता है।
अतः,जब लिफ्ट निरंतर त्वरण के साथ नीचे की ओर बढ़ती है तो व्यक्ति को अपना वजन कम महसूस होता है।
5
PhysicsEasyMCQAIIMS · 2005
जब कोई पिंड स्थिर होता है,तो निम्नलिखित में से कौन सा कथन सत्य है?
A
उस पर कोई बल कार्य नहीं कर रहा है।
B
उस पर कार्य करने वाला बल उसके संपर्क में नहीं है।
C
उस पर कार्य करने वाले बलों का संयोजन एक-दूसरे को संतुलित करता है।
D
पिंड निर्वात में है।

Solution

(C) न्यूटन के गति के प्रथम नियम के अनुसार,कोई पिंड तब तक विरामावस्था या एकसमान गति की स्थिति में रहता है जब तक कि उस पर कोई बाहरी असंतुलित बल कार्य न करे।
यदि कोई पिंड स्थिर है,तो उसका त्वरण $0$ है।
न्यूटन के दूसरे नियम के अनुसार,$F_{net} = ma$ होता है।
चूंकि $a = 0$ है,इसलिए पिंड पर कार्य करने वाला कुल बल $F_{net} = 0$ होना चाहिए।
इसका अर्थ यह है कि पिंड पर कार्य करने वाले सभी व्यक्तिगत बलों का सदिश योग शून्य है,जिसका तात्पर्य है कि बल एक-दूसरे को संतुलित करते हैं।
अतः,विकल्प $C$ सही है।
6
PhysicsMediumMCQAIIMS · 2005
$r$ त्रिज्या वाले $m$ द्रव्यमान के एक समान गोलाकार पिंड के ब्लैक होल होने की शर्त क्या है? [$G=$ गुरुत्वाकर्षण नियतांक और $c=$ प्रकाश की गति]
A
$(2Gm/r)^{1/2} \le c$
B
$(2Gm/r)^{1/2} = c$
C
$(2Gm/r)^{1/2} \ge c$
D
$(Gm/r)^{1/2} \ge c$

Solution

(C) $r$ त्रिज्या और $m$ द्रव्यमान वाले गोलाकार पिंड की सतह से पलायन वेग $v_e$ का सूत्र है: $v_e = \sqrt{\frac{2Gm}{r}}$।
किसी पिंड के ब्लैक होल बनने के लिए,प्रकाश भी उसके गुरुत्वाकर्षण खिंचाव से बाहर नहीं निकल पाना चाहिए।
इसलिए,पलायन वेग प्रकाश की गति $c$ से अधिक या उसके बराबर होना चाहिए।
अतः,शर्त $\sqrt{\frac{2Gm}{r}} \ge c$ या $(2Gm/r)^{1/2} \ge c$ है।
7
PhysicsMediumMCQAIIMS · 2005
समान अनुप्रस्थ काट वाली एक कांच की नली पानी से भरी है और चित्र में दिखाए अनुसार एक घूमने वाली शाफ्ट पर लगी है। यदि नली को एक स्थिर कोणीय वेग $\omega$ से घुमाया जाता है,तो:
Question diagram
A
अनुभाग $A$ और $B$ दोनों में पानी का स्तर ऊपर उठता है।
B
अनुभाग $A$ में पानी का स्तर ऊपर उठता है और $B$ में नीचे आता है।
C
अनुभाग $A$ में पानी का स्तर नीचे आता है और $B$ में ऊपर उठता है।
D
दोनों अनुभागों में पानी का स्तर समान रहता है।

Solution

(A) जब नली कोणीय वेग $\omega$ के साथ घूमती है,तो क्षैतिज भुजाओं में पानी बाहर की ओर एक अभिकेंद्री बल का अनुभव करता है।
घूर्णन अक्ष से $r$ दूरी पर स्थित $dm$ द्रव्यमान के पानी के एक छोटे तत्व के लिए,आवश्यक अभिकेंद्री बल दबाव प्रवणता द्वारा प्रदान किया जाता है: $dP = \rho \omega^2 r dr$।
अक्ष $(r=0)$ से $r$ दूरी तक इसका समाकलन करने पर,हमें $r$ दूरी पर दबाव $P(r) = P_0 + \frac{1}{2} \rho \omega^2 r^2$ प्राप्त होता है,जहाँ $P_0$ अक्ष पर दबाव है।
चूंकि ऊर्ध्वाधर भुजाओं में पानी की सतह पर दबाव वायुमंडलीय दबाव के बराबर होना चाहिए,इसलिए अक्ष से $r$ दूरी पर स्थित भुजा में पानी के स्तंभ की ऊंचाई $h$,$\rho gh = P(r) - P_{atm}$ द्वारा दी जाती है।
जैसे-जैसे $r$ बढ़ता है,दबाव $P(r)$ बढ़ता है,जिसका अर्थ है कि इस दबाव को संतुलित करने के लिए पानी के स्तंभ की ऊंचाई $h$ बढ़नी चाहिए।
चूंकि भुजाएं $A$ और $B$ दोनों अक्ष से क्रमशः $L$ और $2L$ दूरी पर हैं,इसलिए पानी के द्रव्यमान के घूर्णन के लिए आवश्यक अभिकेंद्री बल प्रदान करने के लिए दोनों भुजाओं में पानी का स्तर केंद्रीय अक्ष के स्तर की तुलना में ऊपर उठ जाएगा।
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PhysicsMediumMCQAIIMS · 2005
$d$ व्यास वाली एक मोमबत्ती $D$ व्यास वाले बेलनाकार पात्र में एक तरल पर तैर रही है $(D >> d)$,जैसा कि चित्र में दिखाया गया है। यदि यह $2 \text{ cm/hour}$ की दर से जल रही है,तो मोमबत्ती का ऊपरी सिरा:
Question diagram
A
समान ऊँचाई पर रहेगा
B
$1 \text{ cm/hour}$ की दर से नीचे गिरेगा
C
$2 \text{ cm/hour}$ की दर से नीचे गिरेगा
D
$1 \text{ cm/hour}$ की दर से ऊपर जाएगा

Solution

(B) मान लीजिए मोमबत्ती का घनत्व $\rho_c$ है और तरल का घनत्व $\rho_l$ है। मान लीजिए मोमबत्ती की कुल लंबाई $L_0$ है और डूबी हुई लंबाई $L_s$ है। प्लवनशीलता के सिद्धांत के अनुसार,मोमबत्ती का भार विस्थापित तरल के भार के बराबर होता है:
$\rho_c \cdot A \cdot L_0 = \rho_l \cdot A \cdot L_s$
जहाँ $A$ मोमबत्ती का अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल है।
इसका अर्थ है $L_s = (\rho_c / \rho_l) L_0$। मान लीजिए $k = \rho_c / \rho_l$। तब $L_s = k L_0$।
तरल सतह के ऊपर मोमबत्ती के शीर्ष की ऊँचाई $h = L_0 - L_s = L_0(1 - k)$ है।
जैसे-जैसे मोमबत्ती जलती है,इसकी कुल लंबाई $L_0$ दर $v = dL_0/dt = 2 \text{ cm/hour}$ से घटती है।
मोमबत्ती के शीर्ष की ऊँचाई में परिवर्तन की दर $dh/dt = (dL_0/dt)(1 - k)$ है।
यह मानते हुए कि मोमबत्ती आधी डूबी हुई है (जैसा कि चित्र में दिखाया गया है),$k = 0.5$।
अतः,$dh/dt = 2 \text{ cm/hour} \times (1 - 0.5) = 1 \text{ cm/hour}$।
चूंकि $dh/dt$ धनात्मक है,मोमबत्ती का शीर्ष $1 \text{ cm/hour}$ की दर से नीचे गिरता है।
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PhysicsMediumMCQAIIMS · 2005
निम्नलिखित में से कौन सा फलन सरल आवर्त दोलन (Simple Harmonic Oscillation) को दर्शाता है?
A
$\sin \omega t - \cos \omega t$
B
$\sin^2 \omega t$
C
$\sin \omega t + \sin 2\omega t$
D
$\sin \omega t - \sin 2\omega t$

Solution

(A) एक फलन सरल आवर्त गति $(S.H.M.)$ को तब दर्शाता है यदि वह अवकल समीकरण $\frac{d^2x}{dt^2} + \omega^2 x = 0$ को संतुष्ट करता है।
विकल्प $A$: $x = \sin \omega t - \cos \omega t$. इसे $x = \sqrt{2} [\frac{1}{\sqrt{2}} \sin \omega t - \frac{1}{\sqrt{2}} \cos \omega t] = \sqrt{2} \sin(\omega t - \frac{\pi}{4})$ के रूप में लिखा जा सकता है। यह एक मानक $S.H.M.$ समीकरण है।
विकल्प $B$: $x = \sin^2 \omega t = \frac{1 - \cos 2\omega t}{2}$. यह एक स्थिर विस्थापन और $2\omega$ आवृत्ति वाली गति को दर्शाता है,जो सरल आवर्त गति नहीं है।
विकल्प $C$ और $D$: ये दो अलग-अलग आवृत्तियों ($\omega$ और $2\omega$) का अध्यारोपण हैं,जो आवर्ती गति तो देते हैं लेकिन सरल आवर्त गति नहीं हैं।
अतः,सही विकल्प $A$ है।
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PhysicsEasyMCQAIIMS · 2005
निम्नलिखित में से कौन सा एक अक्रिस्टलीय (amorphous) ठोस है?
A
कांच
B
हीरा
C
नमक
D
चीनी

Solution

(A) अक्रिस्टलीय ठोस वे ठोस होते हैं जिनमें घटक कण (परमाणु, अणु या आयन) लंबी दूरी तक पूरी तरह से अनियमित या यादृच्छिक तरीके से व्यवस्थित होते हैं।
दिए गए विकल्पों में से, $\text{कांच}$ अक्रिस्टलीय ठोस का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जिसे अक्सर अतिशीतित द्रव (supercooled liquid) भी कहा जाता है।
हीरा, नमक $(NaCl)$ और चीनी सभी क्रिस्टलीय ठोस के उदाहरण हैं, जिनमें एक लंबी दूरी की व्यवस्थित संरचना होती है।
अतः, सही विकल्प $A$ है।
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PhysicsEasyMCQAIIMS · 2005
$Assertion$ (कथन) : किसी तरल का विशिष्ट गुरुत्व (Specific gravity) एक विमाहीन राशि है।
$Reason$ (कारण) : यह तरल के घनत्व और $4^{\circ}C$ पर पानी के घनत्व का अनुपात है।
A
यदि $Assertion$ और $Reason$ दोनों सही हैं और $Reason$,$Assertion$ की सही व्याख्या है।
B
यदि $Assertion$ और $Reason$ दोनों सही हैं लेकिन $Reason$,$Assertion$ की सही व्याख्या नहीं है।
C
यदि $Assertion$ सही है लेकिन $Reason$ गलत है।
D
यदि $Assertion$ और $Reason$ दोनों गलत हैं।

Solution

(A) विशिष्ट गुरुत्व (जिसे सापेक्ष घनत्व भी कहा जाता है) को किसी पदार्थ के घनत्व और मानक तापमान (आमतौर पर $4^{\circ}C$) पर पानी के घनत्व के अनुपात के रूप में परिभाषित किया जाता है।
$\text{Specific Gravity} = \frac{\rho_{\text{fluid}}}{\rho_{\text{water}}}$
चूंकि यह दो समान भौतिक राशियों (घनत्व/घनत्व) का अनुपात है,इसलिए इकाइयां कट जाती हैं,जिससे यह एक विमाहीन राशि बन जाती है।
अतः,$Assertion$ और $Reason$ दोनों सही हैं,और $Reason$,$Assertion$ की सही व्याख्या है।
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PhysicsEasyMCQAIIMS · 2005
$Assertion$ (कथन) : घर्षण बल संरक्षी बल होते हैं।
$Reason$ (कारण) : स्थितिज ऊर्जा को घर्षण बलों के साथ जोड़ा जा सकता है।
A
यदि $Assertion$ और $Reason$ दोनों सही हैं और $Reason$,$Assertion$ की सही व्याख्या है।
B
यदि $Assertion$ और $Reason$ दोनों सही हैं लेकिन $Reason$,$Assertion$ की सही व्याख्या नहीं है।
C
यदि $Assertion$ सही है लेकिन $Reason$ गलत है।
D
यदि $Assertion$ और $Reason$ दोनों गलत हैं।

Solution

(D) किसी बल को संरक्षी तब कहा जाता है यदि दो बिंदुओं के बीच एक कण को ले जाने में उसके द्वारा या उसके विरुद्ध किया गया कार्य लिए गए पथ पर निर्भर नहीं करता है।
घर्षण बल एक असंरक्षी बल है क्योंकि घर्षण के विरुद्ध किया गया कार्य पथ की लंबाई पर निर्भर करता है।
इसके अलावा,घर्षण जैसे असंरक्षी बल के विरुद्ध किया गया कार्य ऊष्मा के रूप में नष्ट हो जाता है और इसे स्थितिज ऊर्जा के रूप में पुनः प्राप्त नहीं किया जा सकता है।
अतः,$Assertion$ और $Reason$ दोनों गलत हैं।
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PhysicsMediumMCQAIIMS · 2005
एक क्षैतिज प्लेटफॉर्म अपने केंद्र से गुजरने वाली ऊर्ध्वाधर अक्ष के चारों ओर एकसमान कोणीय वेग से घूम रहा है। किसी क्षण पर, $m$ द्रव्यमान का एक श्यान द्रव केंद्र पर गिराया जाता है और उसे फैलने दिया जाता है और अंततः वह नीचे गिर जाता है। इस अवधि के दौरान कोणीय वेग
A
लगातार घटता है
B
शुरुआत में घटता है और फिर बढ़ जाता है
C
अपरिवर्तित रहता है
D
लगातार बढ़ता है

Solution

(B) कोणीय संवेग संरक्षण के सिद्धांत के अनुसार, चूंकि निकाय पर कोई बाहरी टॉर्क कार्य नहीं करता है, इसलिए कोणीय संवेग $L = I\omega$ स्थिर रहता है।
जब श्यान द्रव को केंद्र पर गिराया जाता है और वह फैलता है, तो द्रव्यमान का वितरण घूर्णन अक्ष से दूर चला जाता है, जिससे निकाय का जड़त्व आघूर्ण $I$ बढ़ जाता है।
चूंकि $L = I\omega$ स्थिर है, इसलिए $I$ में वृद्धि के कारण कोणीय वेग $\omega$ में कमी आती है।
जैसे ही द्रव अंततः प्लेटफॉर्म से नीचे गिर जाता है, निकाय का द्रव्यमान कम हो जाता है, जिससे जड़त्व आघूर्ण $I$ वापस अपने मूल मान की ओर घट जाता है।
परिणामस्वरूप, जैसे ही द्रव प्लेटफॉर्म छोड़ता है, कोणीय वेग $\omega$ फिर से बढ़ जाता है।
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PhysicsMediumMCQAIIMS · 2005
एक ठोस गोला चित्र में दिखाए अनुसार घर्षण रहित सतह पर $v \, m/s$ के स्थानांतरण वेग के साथ लुढ़क रहा है। यदि इसे $h$ ऊँचाई तक नत समतल पर चढ़ना है,तो $v$ कितना होना चाहिए?
Question diagram
A
$v \ge \sqrt {\frac{10}{7}gh}$
B
$v \ge \sqrt {2gh}$
C
$v \ge 2gh$
D
$v \ge \frac{10}{7}gh$

Solution

(A) $h$ ऊँचाई तक नत समतल पर चढ़ने के लिए,लुढ़कते हुए गोले की कुल प्रारंभिक गतिज ऊर्जा $h$ ऊँचाई पर प्राप्त स्थितिज ऊर्जा के बराबर या उससे अधिक होनी चाहिए।
लुढ़कती हुई वस्तु की कुल गतिज ऊर्जा उसकी स्थानांतरण और घूर्णन गतिज ऊर्जा का योग होती है:
$K_{total} = K_{trans} + K_{rot} = \frac{1}{2}mv^2 + \frac{1}{2}I\omega^2$
एक ठोस गोले के लिए,जड़त्व आघूर्ण $I = \frac{2}{5}mr^2$ और शुद्ध लोटनिक गति के लिए,$\omega = \frac{v}{r}$ होता है।
इन मानों को प्रतिस्थापित करने पर:
$K_{total} = \frac{1}{2}mv^2 + \frac{1}{2}(\frac{2}{5}mr^2)(\frac{v}{r})^2$
$K_{total} = \frac{1}{2}mv^2 + \frac{1}{5}mv^2 = \frac{7}{10}mv^2$
ऊर्जा संरक्षण के नियम के अनुसार,कुल गतिज ऊर्जा शीर्ष पर स्थितिज ऊर्जा $mgh$ से अधिक या उसके बराबर होनी चाहिए:
$\frac{7}{10}mv^2 \ge mgh$
$v^2 \ge \frac{10}{7}gh$
$v \ge \sqrt{\frac{10}{7}gh}$
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PhysicsMediumMCQAIIMS · 2005
एक सीढ़ी को एक चिकनी दीवार के सहारे टिकाया गया है और इसे घर्षणहीन फर्श पर फिसलने दिया जाता है। कौन सा चित्र इसके द्रव्यमान केंद्र के पथ को दर्शाता है?
A
Option A
B
Option B
C
Option C
D
Option D

Solution

(B) मान लीजिए $\ell$ सीढ़ी की लंबाई है और $(x, y)$ इसके द्रव्यमान केंद्र के निर्देशांक हैं,जो सीढ़ी का मध्य बिंदु है।
दीवार के सहारे टिकी सीढ़ी की ज्यामिति से,इसके सिरों के निर्देशांक $(2x, 0)$ और $(0, 2y)$ हैं।
सीढ़ी की लंबाई $\ell$ के लिए पाइथागोरस प्रमेय का उपयोग करते हुए:
$(2x)^2 + (2y)^2 = \ell^2$
$4x^2 + 4y^2 = \ell^2$
$x^2 + y^2 = \left(\frac{\ell}{2}\right)^2$
यह मूल बिंदु $(0, 0)$ पर केंद्रित और $\frac{\ell}{2}$ त्रिज्या वाले एक वृत्त का समीकरण है।
जैसे-जैसे सीढ़ी फिसलती है,द्रव्यमान केंद्र एक वृत्ताकार चाप का अनुसरण करता है। इसलिए,सही निरूपण एक वृत्ताकार पथ है।
Solution diagram
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PhysicsEasyMCQAIIMS · 2005
$Assertion$ (कथन) : केंद्रीय बल क्षेत्र के अंतर्गत कणों के एक निकाय के लिए,कुल कोणीय संवेग संरक्षित रहता है।
$Reason$ (कारण) : ऐसे निकाय पर कार्य करने वाला बल-आघूर्ण (टॉर्क) शून्य होता है।
A
यदि $Assertion$ और $Reason$ दोनों सही हैं और $Reason$,$Assertion$ की सही व्याख्या है।
B
यदि $Assertion$ और $Reason$ दोनों सही हैं लेकिन $Reason$,$Assertion$ की सही व्याख्या नहीं है।
C
यदि $Assertion$ सही है लेकिन $Reason$ गलत है।
D
यदि $Assertion$ और $Reason$ दोनों गलत हैं।

Solution

(A) केंद्रीय बल क्षेत्र में,प्रत्येक कण पर कार्य करने वाला बल बल के केंद्र और कण को जोड़ने वाली रेखा की दिशा में होता है।
चूंकि बल त्रिज्यीय (radial) है,इसलिए स्थिति सदिश $\vec{r}$ और बल सदिश $\vec{F}$ संरेखीय होते हैं।
टॉर्क $\vec{\tau}$ को $\vec{\tau} = \vec{r} \times \vec{F}$ के रूप में परिभाषित किया जाता है।
चूंकि $\vec{r}$ और $\vec{F}$ समानांतर हैं,इसलिए उनका क्रॉस गुणनफल शून्य होता है,जिसका अर्थ है कि निकाय पर कार्य करने वाला कुल टॉर्क शून्य है।
कोणीय संवेग संरक्षण के सिद्धांत के अनुसार,यदि किसी निकाय पर कार्य करने वाला कुल बाह्य टॉर्क शून्य है,तो कुल कोणीय संवेग $\vec{L}$ स्थिर रहता है।
इसलिए,$Assertion$ और $Reason$ दोनों सही हैं,और $Reason$,$Assertion$ की सही व्याख्या है।
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PhysicsEasyMCQAIIMS · 2005
$Assertion :$ रेनॉल्ड्स संख्या $Re > 2000$ के लिए, द्रव का प्रवाह अशांत (turbulent) होता है।
$Reason :$ इतनी उच्च रेनॉल्ड्स संख्याओं पर श्यान बलों (viscous forces) की तुलना में जड़त्व बल (inertial forces) प्रभावी होते हैं।
A
यदि अभिकथन और कारण दोनों सही हैं और कारण अभिकथन की सही व्याख्या है।
B
यदि अभिकथन और कारण दोनों सही हैं लेकिन कारण अभिकथन की सही व्याख्या नहीं है।
C
यदि अभिकथन सही है लेकिन कारण गलत है।
D
यदि अभिकथन और कारण दोनों गलत हैं।

Solution

$(A)$ रेनॉल्ड्स संख्या $(Re)$ को द्रव प्रवाह में जड़त्व बलों और श्यान बलों के अनुपात के रूप में परिभाषित किया जाता है: $Re = \frac{\text{Inertial Force}}{\text{Viscous Force}}$.
$Re < 2000$ के लिए, प्रवाह आमतौर पर स्तरीय (laminar) होता है, जहाँ श्यान बल प्रभावी होते हैं।
$Re > 2000$ के लिए, प्रवाह अशांत (turbulent) हो जाता है, जिसका अर्थ है कि श्यान बलों की तुलना में जड़त्व बल प्रभावी होते हैं।
इसलिए, अभिकथन सही है, और कारण यह सही ढंग से बताता है कि उच्च रेनॉल्ड्स संख्या पर प्रवाह अशांत क्यों हो जाता है।
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PhysicsEasyMCQAIIMS · 2005
$Assertion :$ एक पिंड जो विकिरण का अच्छा उत्सर्जक है,वह किसी दी गई तरंगदैर्ध्य पर विकिरण का अच्छा अवशोषक भी होता है।
$Reason :$ किरचॉफ के नियम के अनुसार,किसी दी गई तरंगदैर्ध्य पर एक पिंड की अवशोषकता उसकी उत्सर्जकता के बराबर होती है।
A
यदि Assertion और Reason दोनों सही हैं और Reason,Assertion की सही व्याख्या है।
B
यदि Assertion और Reason दोनों सही हैं लेकिन Reason,Assertion की सही व्याख्या नहीं है।
C
यदि Assertion सही है लेकिन Reason गलत है।
D
यदि Assertion और Reason दोनों गलत हैं।

Solution

(A) किरचॉफ के विकिरण नियम के अनुसार,किसी भी पिंड के लिए,किसी दी गई तरंगदैर्ध्य और तापमान पर उसकी उत्सर्जन क्षमता $(e_{\lambda})$ और उसकी अवशोषकता $(a_{\lambda})$ का अनुपात उसी तरंगदैर्ध्य और तापमान पर एक आदर्श कृष्णिका (black body) की उत्सर्जन क्षमता $(E_{\lambda})$ के बराबर होता है।
गणितीय रूप से,$\frac{e_{\lambda}}{a_{\lambda}} = E_{\lambda}$.
चूंकि $E_{\lambda}$ दी गई तरंगदैर्ध्य और तापमान के लिए एक स्थिरांक है,इसलिए $e_{\lambda} \propto a_{\lambda}$ होता है।
इसका अर्थ है कि जिस पिंड की उत्सर्जकता अधिक होती है (अच्छा उत्सर्जक),उसकी अवशोषकता भी उस विशिष्ट तरंगदैर्ध्य पर अधिक होती है (अच्छा अवशोषक)। अतः,Assertion और Reason दोनों सही हैं और Reason,Assertion की सही व्याख्या है।
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PhysicsEasyMCQAIIMS · 2005
$Assertion :$ जल के दाब-ताप $(P-T)$ प्रावस्था आरेख में,गलन वक्र की ढाल ऋणात्मक पाई जाती है।
$Reason :$ बर्फ पिघलकर जल बनने पर संकुचित होती है।
A
यदि कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण,कथन की सही व्याख्या है।
B
यदि कथन और कारण दोनों सही हैं लेकिन कारण,कथन की सही व्याख्या नहीं है।
C
यदि कथन सही है लेकिन कारण गलत है।
D
यदि कथन और कारण दोनों गलत हैं।

Solution

(A) क्लॉसियस-क्लैपेरॉन समीकरण के अनुसार,गलन वक्र की ढाल $\frac{dP}{dT} = \frac{L}{T(V_2 - V_1)}$ द्वारा दी जाती है,जहाँ $L$ गलन की गुप्त ऊष्मा है,$T$ तापमान है,$V_2$ द्रव अवस्था का आयतन है और $V_1$ ठोस अवस्था का आयतन है।
जल के लिए,बर्फ पिघलने पर संकुचित होती है,जिसका अर्थ है कि जल का आयतन $(V_2)$ बर्फ के आयतन $(V_1)$ से कम होता है।
इसलिए,$(V_2 - V_1) < 0$ होता है,जो ढाल $\frac{dP}{dT}$ को ऋणात्मक बनाता है।
अतः,कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण,कथन की सही व्याख्या है।
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PhysicsEasyMCQAIIMS · 2005
$Assertion :$ उच्च तापमान के लिए, एक कृष्णिका (blackbody) की अधिकतम उत्सर्जन तरंगदैर्ध्य कम तरंगदैर्ध्य की ओर स्थानांतरित हो जाती है।
$Reason :$ कृष्णिका की अधिकतम उत्सर्जन तरंगदैर्ध्य तापमान की चौथी घात के समानुपाती होती है।
A
यदि कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण, कथन की सही व्याख्या है।
B
यदि कथन और कारण दोनों सही हैं लेकिन कारण, कथन की सही व्याख्या नहीं है।
C
यदि कथन सही है लेकिन कारण गलत है।
D
यदि कथन और कारण दोनों गलत हैं।

Solution

(C) वीन के विस्थापन नियम (Wien's displacement law) के अनुसार, $\lambda_m T = \text{नियतांक}$.
इसका अर्थ है कि $\lambda_m \propto 1/T$। इसलिए, जैसे-जैसे तापमान $T$ बढ़ता है, अधिकतम उत्सर्जन तरंगदैर्ध्य $\lambda_m$ घटती है। अतः, कथन सही है।
स्टीफन-बोल्ट्ज़मैन नियम के अनुसार, प्रति इकाई क्षेत्रफल और प्रति इकाई समय में उत्सर्जित कुल ऊर्जा $E = \sigma T^4$ होती है। यह नियम ऊर्जा और तापमान के बीच संबंध बताता है, न कि अधिकतम तरंगदैर्ध्य के साथ। अधिकतम तरंगदैर्ध्य वीन के विस्थापन नियम द्वारा निर्धारित होती है, न कि तापमान की चौथी घात द्वारा। अतः, कारण गलत है।
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PhysicsEasyMCQAIIMS · 2005
$Assertion :$ वास्तविक दुनिया में उत्क्रमणीय (reversible) प्रणालियों को खोजना कठिन है।
$Reason :$ अधिकांश प्रक्रियाएं प्रकृति में क्षयकारी (dissipative) होती हैं।
A
यदि $Assertion$ और $Reason$ दोनों सही हैं और $Reason$,$Assertion$ की सही व्याख्या है।
B
यदि $Assertion$ और $Reason$ दोनों सही हैं लेकिन $Reason$,$Assertion$ की सही व्याख्या नहीं है।
C
यदि $Assertion$ सही है लेकिन $Reason$ गलत है।
D
यदि $Assertion$ और $Reason$ दोनों गलत हैं।

Solution

(A) किसी भी वास्तविक प्रक्रिया में,घर्षण,श्यानता या अन्य प्रतिरोधी बलों के कारण कुछ ऊर्जा अनिवार्य रूप से ऊष्मा में परिवर्तित हो जाती है,जो प्रकृति में क्षयकारी (dissipative) होती है।
इस ऊर्जा हानि के कारण,परिवेश में कोई परिवर्तन किए बिना प्रणाली को उसकी मूल अवस्था में वापस नहीं लाया जा सकता है।
इसलिए,सभी प्राकृतिक प्रक्रियाएं अनुत्क्रमणीय (irreversible) होती हैं,जिससे वास्तविकता में पूर्णतः उत्क्रमणीय प्रणालियों को खोजना असंभव हो जाता है।
अतः,$Assertion$ सही है और $Reason$ इसकी सही व्याख्या है।
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$Assertion :$ गुब्बारे से तेजी से बाहर निकलती हवा ठंडी हो जाती है।
$Reason :$ बाहर निकलने वाली हवा रुद्धोष्म (adiabatic) प्रसार का अनुभव करती है।
A
यदि कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण कथन की सही व्याख्या है।
B
यदि कथन और कारण दोनों सही हैं लेकिन कारण कथन की सही व्याख्या नहीं है।
C
यदि कथन सही है लेकिन कारण गलत है।
D
यदि कथन और कारण दोनों गलत हैं।

Solution

(A) जब गुब्बारे से हवा तेजी से बाहर निकलती है,तो यह प्रक्रिया इतनी तेजी से होती है कि परिवेश के साथ ऊष्मा के आदान-प्रदान का समय नहीं मिलता,जिससे यह एक रुद्धोष्म (adiabatic) प्रक्रिया बन जाती है।
इस प्रक्रिया के दौरान,हवा बाहरी वायुमंडलीय दबाव के विरुद्ध फैलती है।
चूंकि हवा अपनी आंतरिक ऊर्जा की कीमत पर कार्य करती है,इसलिए इसका तापमान कम हो जाता है,जिससे हवा ठंडी हो जाती है।
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दो अनंत लंबाई की समानांतर चालक प्लेटें जिनकी पृष्ठीय आवेश घनत्व क्रमशः $+\sigma$ और $-\sigma$ है,एक छोटी दूरी पर स्थित हैं। प्लेटों के बीच का माध्यम निर्वात है। यदि $\varepsilon_0$ निर्वात की परावैद्युत विद्युतशीलता है,तो प्लेटों के बीच के क्षेत्र में विद्युत क्षेत्र क्या होगा?
A
$0 \text{ V/m}$
B
$\frac{\sigma}{2\varepsilon_0} \text{ V/m}$
C
$\frac{\sigma}{\varepsilon_0} \text{ V/m}$
D
$\frac{2\sigma}{\varepsilon_0} \text{ V/m}$

Solution

(C) पृष्ठीय आवेश घनत्व $\sigma$ वाली अनंत लंबाई की पतली शीट के कारण विद्युत क्षेत्र $E = \frac{\sigma}{2\varepsilon_0}$ द्वारा दिया जाता है।
$+\sigma$ और $-\sigma$ आवेश घनत्व वाली दो समानांतर प्लेटों के लिए,धनात्मक आवेशित प्लेट का विद्युत क्षेत्र उससे दूर की ओर इंगित करता है और ऋणात्मक आवेशित प्लेट का विद्युत क्षेत्र उसकी ओर इंगित करता है।
प्लेटों के बीच के क्षेत्र में,दोनों विद्युत क्षेत्र एक ही दिशा में (धनात्मक प्लेट से ऋणात्मक प्लेट की ओर) होते हैं।
इसलिए,कुल विद्युत क्षेत्र $E_{net}$ व्यक्तिगत क्षेत्रों के परिमाण का योग है:
$E_{net} = E_1 + E_2 = \frac{\sigma}{2\varepsilon_0} + \frac{|-\sigma|}{2\varepsilon_0} = \frac{\sigma}{2\varepsilon_0} + \frac{\sigma}{2\varepsilon_0} = \frac{\sigma}{\varepsilon_0} \text{ V/m}$.
Solution diagram
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आकृति में दिखाए अनुसार $L$ भुजा वाले एक कठोर वर्गाकार फ्रेम के चार कोनों पर समान परिमाण $(Q)$ के चार बिंदु धनात्मक आवेश रखे गए हैं। फ्रेम का तल $Z$-अक्ष के लंबवत है। यदि एक ऋणात्मक बिंदु आवेश $(-q)$ को फ्रेम के केंद्र से $Z$-अक्ष पर थोड़ी दूरी $z$ $(z < < L)$ पर रखा जाता है, तो:
Question diagram
A
ऋणात्मक आवेश $Z$-अक्ष के अनुदिश दोलन करता है।
B
यह फ्रेम से दूर चला जाता है।
C
यह धीरे-धीरे फ्रेम की ओर बढ़ता है और फ्रेम के तल में रुक जाता है।
D
यह फ्रेम से केवल एक बार गुजरता है।

Solution

(A) वर्ग के कोनों पर स्थित चार धनात्मक आवेश $(Q)$ $Z$-अक्ष पर केंद्र की ओर निर्देशित विद्युत क्षेत्र उत्पन्न करते हैं।
$Z$-अक्ष पर $z$ की अल्प दूरी पर रखे गए ऋणात्मक आवेश $(-q)$ पर लगने वाला परिणामी स्थिर-विद्युत बल वर्गाकार फ्रेम के केंद्र की ओर होता है।
छोटे $z$ के लिए इस बल का परिमाण विस्थापन $z$ के समानुपाती होता है (अर्थात $F \propto -z$)।
यह एक प्रत्यानयन बल के रूप में कार्य करता है। जैसे ही ऋणात्मक आवेश केंद्र की ओर आकर्षित होता है, वह त्वरित होता है। जब वह केंद्र (फ्रेम के तल) पर पहुँचता है, तो परिणामी बल शून्य होता है, लेकिन अपने प्राप्त वेग (जड़त्व) के कारण, वह केंद्र को पार कर दूसरी तरफ चला जाता है।
इसके बाद प्रत्यानयन बल विपरीत दिशा में कार्य करता है, जो उसे धीमा कर देता है जब तक कि वह रुक न जाए और वापस न खिंच जाए।
इस प्रकार, ऋणात्मक आवेश फ्रेम के केंद्र के परितः $Z$-अक्ष के अनुदिश सरल आवर्त गति (दोलन) करता है।
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दो संकेंद्रित चालक पतले गोलीय कोश $A$ और $B$ जिनकी त्रिज्याएँ $r_A$ और $r_B$ $(r_B > r_A)$ हैं,को $Q_A$ और $-Q_B$ $(|Q_B| > |Q_A|)$ आवेश दिया गया है। केंद्र से गुजरने वाली रेखा पर विद्युत क्षेत्र कैसा होगा?
A
Option A
B
Option B
C
Option C
D
Option D

Solution

(A) सामान्य केंद्र से $x$ दूरी पर विद्युत क्षेत्र $E$ गॉस के नियम का उपयोग करके निर्धारित किया जाता है:
$1$. $x < r_A$ के लिए: चालक कोश के अंदर विद्युत क्षेत्र शून्य होता है। अतः,$E = 0$.
$2$. $r_A < x < r_B$ के लिए: केवल कोश $A$ पर स्थित आवेश $Q_A$ क्षेत्र में योगदान देता है। अतः,$E = \frac{k Q_A}{x^2}$। यह एक धनात्मक मान है जो $x$ के बढ़ने पर घटता है।
$3$. $x > r_B$ के लिए: दोनों आवेश $Q_A$ और $-Q_B$ क्षेत्र में योगदान देते हैं। कुल आवेश $(Q_A - Q_B)$ है। चूँकि $|Q_B| > |Q_A|$,कुल आवेश ऋणात्मक है। अतः,$E = \frac{k(Q_A - Q_B)}{x^2}$। यह एक ऋणात्मक मान है जो $x \to \infty$ होने पर शून्य के करीब पहुँचता है।
इन विशेषताओं की तुलना दिए गए विकल्पों से करने पर,ग्राफ $x < r_A$ के लिए $E=0$,$r_A < x < r_B$ के लिए धनात्मक $1/x^2$ वक्र और $x > r_B$ के लिए ऋणात्मक $1/x^2$ वक्र दर्शाता है।
Solution diagram
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चित्र में दिखाए गए अनुसार जुड़े तीनों प्रतिरोधों $({R_1}, {R_2}, {R_3})$ में समान ऊर्जा का क्षय सुनिश्चित करने के लिए,उनके मानों के बीच क्या संबंध होना चाहिए?
Question diagram
A
${R_1} = {R_2} = {R_3}$
B
${R_2} = {R_3}$ और ${R_1} = 4{R_2}$
C
${R_2} = {R_3}$ और ${R_1} = \frac{1}{4}{R_2}$
D
${R_1} = {R_2} + {R_3}$

Solution

(C) मान लीजिए कि प्रत्येक प्रतिरोधक में क्षयित ऊर्जा $H$ है। चूंकि प्रतिरोधक ${R_2}$ और ${R_3}$ समानांतर में जुड़े हुए हैं,इसलिए उनके बीच विभवांतर समान है। अतः,उनमें क्षयित ऊर्जा $H = \frac{V^2}{R}t$ द्वारा दी जाती है। ऊर्जा समान रहने के लिए,${R_2} = {R_3}$ होना चाहिए।
मान लीजिए कि परिपथ से बहने वाली कुल धारा $i$ है। ${R_1}$ से बहने वाली धारा $i$ है। जंक्शन पर धारा ${i_1}$ और ${i_2}$ में विभाजित हो जाती है। चूंकि ${R_2} = {R_3}$ है,इसलिए धारा समान रूप से विभाजित होती है,अतः ${i_1} = {i_2} = \frac{i}{2}$।
${R_1}$ में क्षयित ऊर्जा $H = i^2 {R_1} t$ है।
${R_2}$ में क्षयित ऊर्जा $H = i_1^2 {R_2} t = (\frac{i}{2})^2 {R_2} t = \frac{i^2}{4} {R_2} t$ है।
चूंकि सभी प्रतिरोधकों में क्षयित ऊर्जा समान है,हम ${R_1}$ और ${R_2}$ में ऊर्जा की तुलना करते हैं:
$i^2 {R_1} t = \frac{i^2}{4} {R_2} t$
${R_1} = \frac{{R_2}}{4}$।
Solution diagram
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$1\,m$ त्रिज्या वाली एक चालक रिंग को $100\,Hz$ की आवृत्ति के साथ दोलन करने वाले $0.01\,T$ के एकसमान चुंबकीय क्षेत्र $B$ में रखा गया है,जिसका तल $B$ के लंबवत है। $V/m$ में प्रेरित विद्युत क्षेत्र क्या होगा?
A
$\pi$
B
$2$
C
$10$
D
$62$

Solution

(B) चुंबकीय क्षेत्र $B(t) = B_0 \sin(\omega t)$ द्वारा दिया जाता है,जहाँ $B_0 = 0.01\,T$ और $\omega = 2\pi f = 2\pi \times 100 = 200\pi\,rad/s$ है।
फैराडे के प्रेरण के नियम का उपयोग करते हुए,प्रेरित emf $\varepsilon = -\frac{d\phi}{dt} = -A \frac{dB}{dt}$ है।
चुंबकीय फ्लक्स $\phi = B \cdot A = B_0 \sin(\omega t) \cdot \pi r^2$ है।
अतः,$\varepsilon = -\pi r^2 \frac{d}{dt}(B_0 \sin(\omega t)) = -\pi r^2 B_0 \omega \cos(\omega t)$ प्राप्त होता है।
रिंग की परिधि पर प्रेरित विद्युत क्षेत्र $E$ को $\oint E \cdot dl = \varepsilon$ द्वारा ज्ञात किया जाता है।
$E(2\pi r) = \pi r^2 \frac{dB}{dt} \implies E = \frac{r}{2} \frac{dB}{dt}$ होता है।
चूँकि $\frac{dB}{dt} = B_0 \omega \cos(\omega t)$,अधिकतम प्रेरित विद्युत क्षेत्र $E_{max} = \frac{r}{2} B_0 \omega$ है।
मान रखने पर: $E_{max} = \frac{1}{2} \times 0.01 \times 200\pi = \pi \approx 3.14\,V/m$ प्राप्त होता है।
हालाँकि,प्रश्न के संदर्भ में औसत प्रेरित emf दृष्टिकोण का उपयोग करते हुए: $\varepsilon_{avg} = \frac{\Delta \phi}{\Delta t} = \frac{B_0 A}{T/4} = 4 B_0 A f = 4 \times 0.01 \times \pi(1)^2 \times 100 = 4\pi$ प्राप्त होता है।
अतः $E = \frac{\varepsilon}{2\pi r} = \frac{4\pi}{2\pi(1)} = 2\,V/m$ प्राप्त होता है।
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PhysicsMediumMCQAIIMS · 2005
एक चुंबक को एक निश्चित आवृत्ति के साथ दोलन कराया जाता है,जो चित्र में दिखाए अनुसार एक कुंडली से गुजरता है। एक चक्र के दौरान कुंडली में उत्पन्न $e.m.f.$ के परिमाण में समय के साथ परिवर्तन है
Question diagram
A
Option A
B
Option B
C
Option C
D
Option D

Solution

(A) फैराडे के विद्युत चुम्बकीय प्रेरण के नियम के अनुसार,प्रेरित $e.m.f.$ $\varepsilon = -\frac{d\phi}{dt}$ द्वारा दिया जाता है।
जब चुंबक का उत्तरी ध्रुव कुंडली के पास आता है,तो कुंडली से गुजरने वाला चुंबकीय फ्लक्स बढ़ता है,जिससे एक ध्रुवता (जैसे,धनात्मक) का $e.m.f.$ प्रेरित होता है और गति का विरोध करने के लिए धारा वामावर्त (anticlockwise) दिशा में बहती है।
जैसे ही चुंबक कुंडली के केंद्र से गुजरता है,फ्लक्स के परिवर्तन की दर क्षणिक रूप से शून्य हो जाती है,इसलिए प्रेरित $e.m.f.$ शून्य हो जाता है।
जैसे ही चुंबक दूर जाता है,फ्लक्स घटता है,जिससे विपरीत ध्रुवता (जैसे,ऋणात्मक) का $e.m.f.$ प्रेरित होता है और धारा दक्षिणावर्त (clockwise) दिशा में बहती है।
जब चुंबक अपने दोलन के अंतिम छोर पर पहुँचता है,तो वह क्षणिक रूप से स्थिर होता है,इसलिए $e.m.f.$ शून्य होता है।
जैसे ही यह वापस लौटता है,यह प्रक्रिया उल्टी दिशा में दोहराई जाती है,जिससे दोलन के एक पूर्ण चक्र के दौरान $e.m.f.$ में सममित परिवर्तन होता है। इसके परिणामस्वरूप एक तरंग रूप (waveform) प्राप्त होता है जो धनात्मक और ऋणात्मक दोनों शिखर दिखाता है,जैसा कि पहले विकल्प में दर्शाया गया है।
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PhysicsEasyMCQAIIMS · 2005
विभिन्न तत्वों के ठोस लक्ष्यों पर उच्च ऊर्जा वाले इलेक्ट्रॉन बीम की बमबारी की जाती है। विभिन्न लक्ष्यों से उत्सर्जित अभिलाक्षणिक $X-$किरणों की आवृत्ति $(f)$,परमाणु क्रमांक $Z$ के साथ किस प्रकार परिवर्तित होती है?
A
$f \propto \sqrt{Z}$
B
$f \propto Z^2$
C
$f \propto Z$
D
$f \propto Z^{3/2}$

Solution

(B) मोज़ले के नियम के अनुसार,किसी तत्व द्वारा उत्सर्जित अभिलाक्षणिक $X-$किरणों की आवृत्ति $(f)$ उसके परमाणु क्रमांक $(Z)$ से इस समीकरण द्वारा संबंधित होती है: $f = a(Z - b)^2$,जहाँ $a$ और $b$ स्थिरांक हैं।
उच्च परमाणु क्रमांक के लिए,$b$ नगण्य होता है,इसलिए $f \propto Z^2$ होता है।
अतः,अभिलाक्षणिक $X-$किरणों की आवृत्ति परमाणु क्रमांक के वर्ग के समानुपाती होती है।
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PhysicsEasyMCQAIIMS · 2005
हाइड्रोजन परमाणु की मूल अवस्था (ground state) ऊर्जा $-13.6 \, eV$ है। इस अवस्था में इलेक्ट्रॉन की स्थितिज ऊर्जा (potential energy) $eV$ में क्या है ($, eV$ में)?
A
$0$
B
$-27.2$
C
$13.6$
D
$27.2$

Solution

(B) हाइड्रोजन परमाणु के लिए,कुल ऊर्जा $(E)$,गतिज ऊर्जा $(K)$,और स्थितिज ऊर्जा $(U)$ के बीच संबंध इस प्रकार है:
$E = -K$
$U = 2E$
दिया गया है कि मूल अवस्था ऊर्जा $E = -13.6 \, eV$ है।
अतः,स्थितिज ऊर्जा $U = 2 \times (-13.6 \, eV) = -27.2 \, eV$ होगी।
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PhysicsMediumMCQAIIMS · 2005
नाभिक के चारों ओर घूमते हुए इलेक्ट्रॉन का चुंबकीय आघूर्ण $(\mu)$ मुख्य क्वांटम संख्या $n$ के साथ किस प्रकार बदलता है?
A
$\mu \propto n$
B
$\mu \propto 1/n$
C
$\mu \propto n^2$
D
$\mu \propto 1/n^2$

Solution

(A) घूमते हुए इलेक्ट्रॉन का चुंबकीय आघूर्ण $(\mu)$ संबंध $\mu = \frac{e}{2m} L$ द्वारा दिया जाता है,जहाँ $L$ कोणीय संवेग है।
बोर की क्वांटमीकरण शर्त के अनुसार,$n$-वीं कक्षा में इलेक्ट्रॉन का कोणीय संवेग $L = \frac{nh}{2\pi}$ होता है।
इस मान को चुंबकीय आघूर्ण के व्यंजक में प्रतिस्थापित करने पर,हमें प्राप्त होता है $\mu = \frac{e}{2m} \left( \frac{nh}{2\pi} \right)$।
पदों को व्यवस्थित करने पर,$\mu = n \left( \frac{eh}{4\pi m} \right)$।
चूंकि $e$,$h$,और $m$ स्थिरांक हैं,इसलिए $\frac{eh}{4\pi m}$ भी एक स्थिरांक है (जो बोर मैग्नेटॉन $\mu_B = \frac{eh}{4\pi m}$ से संबंधित है)।
अतः,$\mu \propto n$।
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PhysicsMediumMCQAIIMS · 2005
एक रेडियोधर्मी पदार्थ की अर्ध-आयु $10$ दिन है। $30$ दिनों के बाद पदार्थ का कितना अंश शेष रहेगा?
A
$0.5$
B
$0.25$
C
$0.125$
D
$0.33$

Solution

(C) समय $t$ के बाद शेष बचे रेडियोधर्मी नाभिकों की संख्या का सूत्र है: $N = N_0 \left( \frac{1}{2} \right)^{\frac{t}{T_{1/2}}}$।
यहाँ,प्रारंभिक मात्रा $N_0$ है,अर्ध-आयु $T_{1/2} = 10$ दिन है,और कुल समय $t = 30$ दिन है।
पदार्थ का शेष अंश $\frac{N}{N_0} = \left( \frac{1}{2} \right)^{\frac{30}{10}}$ है।
$\frac{N}{N_0} = \left( \frac{1}{2} \right)^3 = \frac{1}{8}$।
$\frac{N}{N_0} = 0.125$।
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PhysicsEasyMCQAIIMS · 2005
एक अर्धचालक पदार्थ में इलेक्ट्रॉनों और होल्स की गतिशीलता (mobilities) क्रमशः $\mu_e$ और $\mu_h$ है। निम्नलिखित में से कौन सा सत्य है?
A
$\mu_e > \mu_h$
B
$\mu_e < \mu_h$
C
$\mu_e = \mu_h$
D
$\mu_e < 0; \mu_h > 0$

Solution

(A) अर्धचालक में,आवेश वाहकों की गतिशीलता को प्रति इकाई विद्युत क्षेत्र में अपवाह वेग (drift velocity) के रूप में परिभाषित किया जाता है।
इलेक्ट्रॉन हल्के होते हैं और चालन बैंड (conduction band) में गति करते हैं,जबकि होल्स संयोजी बैंड (valence band) में रिक्तियां होती हैं जो क्रमिक इलेक्ट्रॉन जंप की प्रक्रिया के माध्यम से गति करती हैं।
अपने कम प्रभावी द्रव्यमान और चालन बैंड में गति की प्रकृति के कारण,इलेक्ट्रॉन होल्स की तुलना में कम प्रकीर्णन (scattering) का सामना करते हैं और उनकी गतिशीलता अधिक होती है।
इसलिए,इलेक्ट्रॉनों की गतिशीलता हमेशा होल्स की गतिशीलता से अधिक होती है,अर्थात $\mu_e > \mu_h$।
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PhysicsMediumMCQAIIMS · 2005
कॉमन-एमिटर कॉन्फ़िगरेशन में एक $NPN$ ट्रांजिस्टर एम्पलीफायर पर विचार करें। ट्रांजिस्टर का करंट गेन $100$ है। यदि कलेक्टर करंट में $1\, mA$ का परिवर्तन होता है,तो एमिटर करंट में कितना परिवर्तन ($mA$ में) होगा?
A
$1.1$
B
$1.01$
C
$0.01$
D
$10$

Solution

(B) दिया गया है: करंट गेन $\beta = 100$,कलेक्टर करंट में परिवर्तन $\Delta I_c = 1\, mA$ है।
हम जानते हैं कि कॉमन-एमिटर कॉन्फ़िगरेशन में करंट गेन $\beta = \frac{\Delta I_c}{\Delta I_b}$ के रूप में परिभाषित होता है।
इसलिए,बेस करंट में परिवर्तन $\Delta I_b = \frac{\Delta I_c}{\beta} = \frac{1\, mA}{100} = 0.01\, mA$ होगा।
एमिटर,कलेक्टर और बेस करंट के बीच संबंध $\Delta I_e = \Delta I_c + \Delta I_b$ है।
मान रखने पर,हमें $\Delta I_e = 1\, mA + 0.01\, mA = 1.01\, mA$ प्राप्त होता है।
अतः,एमिटर करंट में परिवर्तन $1.01\, mA$ है।
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PhysicsMediumMCQAIIMS · 2005
निम्नलिखित एम्पलीफायर का वोल्टेज गेन क्या है?
Question diagram
A
$10$
B
$100$
C
$1000$
D
$9.9$

Solution

(B) दिया गया परिपथ एक ऑपरेशनल एम्पलीफायर (op-amp) का उपयोग करके बनाया गया इनवर्टिंग एम्पलीफायर है।
इनवर्टिंग एम्पलीफायर के लिए,वोल्टेज गेन $A_v$ का सूत्र इस प्रकार है:
$A_v = -\frac{R_f}{R_i}$
जहाँ $R_f$ फीडबैक प्रतिरोध है और $R_i$ इनपुट प्रतिरोध है।
परिपथ आरेख से,हमारे पास है:
$R_f = 100 \, k\Omega$
$R_i = 1 \, k\Omega$
इन मानों को सूत्र में रखने पर,हमें प्राप्त होता है:
$A_v = -\frac{100 \, k\Omega}{1 \, k\Omega} = -100$
वोल्टेज गेन का परिमाण (magnitude) $|A_v| = 100$ है।
अतः,सही विकल्प $(b)$ है।
Solution diagram
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यदि $n_1$ और $n_2$ क्रमशः कोर और क्लैडिंग के अपवर्तनांक हैं,तो एक ऑप्टिकल फाइबर के एयर-कोर इंटरफेस पर अधिकतम स्वीकार्य कोण (acceptance angle) क्या होना चाहिए?
A
$\sin^{-1}(n_2/n_1)$
B
$\sin^{-1}\sqrt{n_1^2 - n_2^2}$
C
$\tan^{-1}(n_2/n_1)$
D
$\tan^{-1}(n_1/n_2)$

Solution

(B) स्वीकार्य कोण $\theta_a$ वह अधिकतम कोण है जो प्रकाश की किरण ऑप्टिकल फाइबर की धुरी के साथ बना सकती है और फिर भी पूर्ण आंतरिक परावर्तन द्वारा कोर के माध्यम से निर्देशित हो सकती है।
एयर-कोर इंटरफेस पर स्नेल के नियम को लागू करने पर: $1 \cdot \sin \theta_a = n_1 \cdot \sin \theta_r$,जहाँ $\theta_r$ अपवर्तन कोण है।
कोर-क्लैडिंग इंटरफेस पर,पूर्ण आंतरिक परावर्तन होने के लिए,आपतन कोण $\theta_i$ क्रांतिक कोण $\theta_c$ के बराबर या उससे अधिक होना चाहिए,जहाँ $\sin \theta_c = n_2/n_1$ है।
चूंकि $\theta_r + \theta_i = 90^\circ$,इसलिए $\sin \theta_r = \cos \theta_i = \sqrt{1 - \sin^2 \theta_i} = \sqrt{1 - (n_2/n_1)^2} = \frac{\sqrt{n_1^2 - n_2^2}}{n_1}$ है।
इस मान को पहले समीकरण में रखने पर: $\sin \theta_a = n_1 \cdot \frac{\sqrt{n_1^2 - n_2^2}}{n_1} = \sqrt{n_1^2 - n_2^2}$ प्राप्त होता है।
अतः,$\theta_a = \sin^{-1}\sqrt{n_1^2 - n_2^2}$।
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PhysicsMediumMCQAIIMS · 2005
एक टेलीस्कोप के अभिदृश्यक लेंस (objective lens) की फोकस दूरी $200 \, cm$ है और नेत्रिका (eyepiece) की फोकस दूरी $2 \, cm$ है। यदि इस टेलीस्कोप का उपयोग $2 \, km$ की दूरी पर स्थित $50 \, m$ ऊंची इमारत को देखने के लिए किया जाता है,तो अभिदृश्यक लेंस द्वारा निर्मित इमारत के प्रतिबिंब की ऊंचाई $cm$ में क्या होगी?
A
$5$
B
$10$
C
$1$
D
$2$

Solution

(A) टेलीस्कोप के अभिदृश्यक लेंस द्वारा उत्पन्न आवर्धन,प्रतिबिंब की ऊंचाई $(I)$ और वस्तु की ऊंचाई $(O)$ के अनुपात के बराबर होता है,जो अभिदृश्यक की फोकस दूरी $(f_0)$ और वस्तु की दूरी $(u_0)$ के अनुपात के भी बराबर होता है:
$m = \frac{I}{O} = \frac{f_0}{u_0}$
दिया गया है:
इमारत की ऊंचाई $(O)$ = $50 \, m = 5000 \, cm$
अभिदृश्यक की फोकस दूरी $(f_0)$ = $200 \, cm$
इमारत की दूरी $(u_0)$ = $2 \, km = 2000 \, m = 200,000 \, cm$
सूत्र में मान रखने पर:
$\frac{I}{5000} = \frac{200}{200000}$
$I = 5000 \times \frac{200}{200000}$
$I = 5000 \times \frac{1}{1000} = 5 \, cm$
अतः,अभिदृश्यक लेंस द्वारा निर्मित प्रतिबिंब की ऊंचाई $5 \, cm$ है।
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$2R \, cm$ व्यास वाली बेलनाकार पानी की टंकी में पानी की आभासी गहराई $x \, cm/minute$ की दर से कम हो रही है जब पानी को एक स्थिर दर पर बाहर निकाला जा रहा है। प्रति मिनट बाहर निकाले गए पानी की मात्रा ($c.c.$ में) क्या है? ($n_1 =$ हवा का अपवर्तनांक,$n_2 =$ पानी का अपवर्तनांक)
A
$x \pi R^2 n_1/n_2$
B
$x \pi R^2 n_2/n_1$
C
$2x \pi R n_1/n_2$
D
$\pi R^2 x$

Solution

(B) आभासी गहराई $h'$ और वास्तविक गहराई $h$ के बीच संबंध $h' = h / \mu$ है,जहाँ $\mu = n_2/n_1$ हवा के सापेक्ष पानी का अपवर्तनांक है।
दिया गया है कि आभासी गहराई $x \, cm/min$ की दर से कम हो रही है,इसलिए $\frac{dh'}{dt} = -x$ है।
चूंकि $h' = h \cdot (n_1/n_2)$ है,समय $t$ के सापेक्ष अवकलन करने पर $\frac{dh'}{dt} = \frac{n_1}{n_2} \frac{dh}{dt}$ प्राप्त होता है।
दी गई दर को प्रतिस्थापित करने पर: $-x = \frac{n_1}{n_2} \frac{dh}{dt}$,जिसका अर्थ है कि $\frac{dh}{dt} = -x \cdot (n_2/n_1)\text{।}$ इस प्रकार,वास्तविक गहराई $x \cdot (n_2/n_1) \, cm/min$ की दर से कम हो रही है।
बेलनाकार टंकी में पानी का आयतन $V = \pi R^2 h$ है।
आयतन में परिवर्तन की दर $\frac{dV}{dt} = \pi R^2 \frac{dh}{dt}$ है।
$\frac{dh}{dt}$ का मान रखने पर,प्रति मिनट बाहर निकाले गए पानी का आयतन $\frac{dV}{dt} = \pi R^2 \cdot x \cdot (n_2/n_1) = x \pi R^2 (n_2/n_1)$ होगा।
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PhysicsEasyMCQAIIMS · 2005
बरसात के दिन,पानी पर तेल की एक पतली परत चमकदार रंग दिखाती है। यह किसके कारण होता है?
A
प्रकाश का वर्ण-विक्षेपण (Dispersion)
B
प्रकाश का व्यतिकरण (Interference)
C
प्रकाश का अवशोषण (Absorption)
D
प्रकाश का प्रकीर्णन (Scattering)

Solution

(B) जब प्रकाश पानी पर तेल की एक पतली परत पर पड़ता है,तो यह तेल की परत की ऊपरी और निचली दोनों सतहों पर परावर्तन और अपवर्तन से गुजरता है।
पतली परत की ऊपरी और निचली सतहों से परावर्तित प्रकाश तरंगें एक-दूसरे के साथ व्यतिकरण (Interference) करती हैं।
परत की मोटाई और आपतन कोण के आधार पर,प्रकाश की कुछ तरंग दैर्ध्य संपोषी व्यतिकरण (Constructive Interference) का अनुभव करती हैं (जो चमकीली दिखाई देती हैं) जबकि अन्य विनाशी व्यतिकरण (Destructive Interference) का अनुभव करती हैं (जो अंधेरी दिखाई देती हैं)।
पतली परत की दो सतहों से परावर्तित प्रकाश तरंगों के अध्यारोपण की इस घटना को प्रकाश का व्यतिकरण कहा जाता है,जिसके परिणामस्वरूप चमकदार रंग दिखाई देते हैं।
40
PhysicsEasyMCQAIIMS · 2005
रैखिक रूप से ध्रुवीकृत प्रकाश के मामले में,विद्युत क्षेत्र सदिश का परिमाण:
A
समय के साथ नहीं बदलता है
B
समय के साथ आवर्ती रूप से बदलता है
C
समय के साथ रैखिक रूप से बढ़ता और घटता है
D
प्रसार की दिशा के समानांतर होता है

Solution

(B) एक विद्युत चुम्बकीय तरंग में,अंतरिक्ष में किसी भी बिंदु पर विद्युत क्षेत्र सदिश $\vec{E}$ को $\vec{E} = E_0 \sin(kx - \omega t) \hat{n}$ द्वारा दर्शाया जाता है।
यहाँ,$E_0$ आयाम है,$k$ तरंग संख्या है,$\omega$ कोणीय आवृत्ति है,और $t$ समय है।
विद्युत क्षेत्र सदिश का परिमाण $|\vec{E}| = |E_0 \sin(kx - \omega t)|$ है।
चूंकि साइन फलन $-1$ और $1$ के बीच दोलन करता है,इसलिए किसी भी निश्चित स्थान $x$ पर विद्युत क्षेत्र सदिश का परिमाण समय के साथ आवर्ती रूप से बदलता रहता है।
41
PhysicsMediumMCQAIIMS · 2005
हबल के नियम के अनुसार,दूर जा रही आकाशगंगा (galaxy) का रेडशिफ्ट $(Z)$ और पृथ्वी से उसकी दूरी $r$ किस प्रकार संबंधित हैं?
A
$Z \propto r$
B
$Z \propto 1/r$
C
$Z \propto 1/r^2$
D
$Z \propto r^{3/2}$

Solution

(A) हबल का नियम बताता है कि किसी आकाशगंगा का दूर जाने का वेग $(v)$,प्रेक्षक से उसकी दूरी $(r)$ के सीधे समानुपाती होता है।
गणितीय रूप से,इसे $v = H_0 r$ के रूप में व्यक्त किया जाता है,जहाँ $H_0$ हबल स्थिरांक है।
चूंकि गैर-सापेक्ष गति के लिए रेडशिफ्ट $(Z)$ दूर जाने के वेग $(v)$ के सीधे समानुपाती होता है,इसलिए $Z \propto v$ होता है।
इस संबंध को प्रतिस्थापित करने पर,हमें $Z \propto r$ प्राप्त होता है।
अतः,दूर जा रही आकाशगंगा का रेडशिफ्ट पृथ्वी से उसकी दूरी के सीधे समानुपाती होता है।
42
PhysicsEasyMCQAIIMS · 2005
कथन: एक डिस्क के आकार के चुंबक को तरल नाइट्रोजन द्वारा ठंडा किए गए अतिचालक (superconducting) पदार्थ के ऊपर हवा में लटकाया (levitated) जाता है।
कारण: अतिचालक चुंबक को प्रतिकर्षित करते हैं।
A
यदि कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण कथन की सही व्याख्या है।
B
यदि कथन और कारण दोनों सही हैं लेकिन कारण कथन की सही व्याख्या नहीं है।
C
यदि कथन सही है लेकिन कारण गलत है।
D
यदि कथन और कारण दोनों गलत हैं।

Solution

(A) अतिचालक (Superconductors) 'माइसनर प्रभाव' (Meissner effect) प्रदर्शित करते हैं,जिसका अर्थ है कि जब उन्हें उनके क्रांतिक तापमान $(T_c)$ से नीचे ठंडा किया जाता है,तो वे अपने आंतरिक भाग से चुंबकीय क्षेत्र को बाहर निकाल देते हैं।
इस कारण से,वे पूर्ण प्रतिचुंबकीय (diamagnetic) पदार्थों के रूप में कार्य करते हैं।
जब एक चुंबक को अतिचालक के पास रखा जाता है,तो अतिचालक सतह पर धाराएं उत्पन्न करता है जो चुंबक के क्षेत्र के विपरीत एक चुंबकीय क्षेत्र बनाती हैं।
इसके परिणामस्वरूप एक प्रतिकर्षण बल उत्पन्न होता है जो चुंबक को अतिचालक के ऊपर हवा में लटकाए रखता है।
अतः,कथन सही है क्योंकि चुंबक हवा में तैरता है,और कारण भी सही है क्योंकि अतिचालक माइसनर प्रभाव के कारण चुंबक के प्रति प्रतिकर्षण बल प्रदर्शित करते हैं।
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PhysicsEasyMCQAIIMS · 2005
कथन: कांच की शीट की सतह को खुरदरा बनाकर उसकी पारदर्शिता को कम किया जा सकता है।
कारण: खुरदरी सतह वाली कांच की शीट अधिक प्रकाश अवशोषित करती है।
A
यदि कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण कथन की सही व्याख्या है।
B
यदि कथन और कारण दोनों सही हैं लेकिन कारण कथन की सही व्याख्या नहीं है।
C
यदि कथन सही है लेकिन कारण गलत है।
D
यदि कथन और कारण दोनों गलत हैं।

Solution

(C) कथन सही है क्योंकि कांच की शीट की सतह को खुरदरा करने से प्रकाश का प्रकीर्णन (scattering) होता है,जो कांच से सीधे गुजरने वाले प्रकाश की मात्रा को कम कर देता है,जिससे उसकी पारदर्शिता कम हो जाती है।
कारण गलत है क्योंकि खुरदरी सतह का मतलब यह नहीं है कि वह अधिक प्रकाश अवशोषित करती है; बल्कि,यह आपतित प्रकाश को विभिन्न दिशाओं में बिखेर देती है। पारदर्शिता में कमी मुख्य रूप से प्रकीर्णन के कारण होती है,न कि अवशोषण में वृद्धि के कारण।
44
PhysicsEasyMCQAIIMS · 2005
कथन: हीरा बहुत चमकता है।
कारण: हीरा सूर्य के प्रकाश को अवशोषित नहीं करता है।
A
यदि कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण कथन की सही व्याख्या है।
B
यदि कथन और कारण दोनों सही हैं लेकिन कारण कथन की सही व्याख्या नहीं है।
C
यदि कथन सही है लेकिन कारण गलत है।
D
यदि कथन और कारण दोनों गलत हैं।

Solution

(C) कथन सही है क्योंकि हीरे का अपवर्तनांक $(n \approx 2.42)$ बहुत अधिक होता है,जिसके परिणामस्वरूप इसका क्रांतिक कोण $(C \approx 24.4^\circ)$ बहुत छोटा होता है।
जब प्रकाश हीरे में प्रवेश करता है,तो इस छोटे क्रांतिक कोण के कारण यह बार-बार आंतरिक परावर्तन से गुजरता है,जिससे यह बहुत चमकता है।
कारण गलत है क्योंकि हीरे का चमकना सूर्य के प्रकाश के अवशोषण से संबंधित नहीं है,बल्कि यह पूर्ण आंतरिक परावर्तन $(TIR)$ की घटना के कारण होता है।
45
PhysicsEasyMCQAIIMS · 2005
कथन: आकाश में बादल सामान्यतः सफेद दिखाई देते हैं।
कारण: बादलों के कारण विवर्तन (Diffraction) सभी तरंगदैर्ध्यों के लिए समान रूप से प्रभावी होता है।
A
यदि कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण कथन की सही व्याख्या है।
B
यदि कथन और कारण दोनों सही हैं लेकिन कारण कथन की सही व्याख्या नहीं है।
C
यदि कथन सही है लेकिन कारण गलत है।
D
यदि कथन और कारण दोनों गलत हैं।

Solution

(C) कथन सही है क्योंकि पानी की बूंदों द्वारा प्रकाश के प्रकीर्णन के कारण बादल सफेद दिखाई देते हैं।
बादलों में पानी की बूंदों का आकार दृश्य प्रकाश की तरंगदैर्ध्य से काफी बड़ा होता है।
प्रकीर्णन के सिद्धांत के अनुसार, जब प्रकीर्णन करने वाले कण का आकार $(a)$ प्रकाश की तरंगदैर्ध्य $(\lambda)$ से बहुत बड़ा होता है, अर्थात $a \gg \lambda$, तो प्रकीर्णन तरंगदैर्ध्य से स्वतंत्र होता है।
चूंकि दृश्य प्रकाश की सभी तरंगदैर्ध्य समान रूप से प्रकीर्णित होती हैं, इसलिए संयुक्त प्रभाव सफेद प्रकाश के रूप में अनुभव होता है।
विवर्तन एक ऐसी घटना है जो तब होती है जब प्रकाश अपनी तरंगदैर्ध्य के तुलनीय आकार के अवरोध या छिद्र का सामना करता है। चूंकि बादल के कण प्रकाश की तरंगदैर्ध्य से बहुत बड़े होते हैं, इसलिए वे दृश्य प्रकाश का महत्वपूर्ण विवर्तन नहीं करते हैं।
अतः, कारण गलत है।
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PhysicsEasyMCQAIIMS · 2005
कथन: यदि दूरबीन (telescope) के अभिदृश्यक लेंस (objective lens) का व्यास अधिक है,तो उसकी विभेदन क्षमता (resolving power) अधिक होती है।
कारण: बड़े व्यास वाला अभिदृश्यक लेंस अधिक प्रकाश एकत्र करता है।
A
यदि कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण,कथन की सही व्याख्या है।
B
यदि कथन और कारण दोनों सही हैं लेकिन कारण,कथन की सही व्याख्या नहीं है।
C
यदि कथन सही है लेकिन कारण गलत है।
D
यदि कथन और कारण दोनों गलत हैं।

Solution

(B) दूरबीन की विभेदन क्षमता को दो दूरस्थ वस्तुओं के बीच के उस न्यूनतम कोणीय पृथक्करण के व्युत्क्रम के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसे दूरबीन द्वारा अलग-अलग देखा जा सकता है।
दूरबीन की विभेदन क्षमता का सूत्र है: $\text{Resolving Power} = \frac{D}{1.22 \lambda}$,जहाँ $D$ अभिदृश्यक लेंस का व्यास है और $\lambda$ उपयोग किए गए प्रकाश की तरंग दैर्ध्य है।
इस सूत्र से स्पष्ट है कि विभेदन क्षमता अभिदृश्यक लेंस के व्यास $D$ के सीधे आनुपातिक है। अतः,कथन सही है।
कारण में कहा गया है कि बड़े व्यास वाला अभिदृश्यक लेंस अधिक प्रकाश एकत्र करता है। यह कथन भौतिक रूप से सत्य है,क्योंकि बड़ा द्वारक (aperture) दूरबीन में अधिक प्रकाश को प्रवेश करने देता है,जिससे उसकी प्रकाश एकत्र करने की क्षमता (छवि की चमक) बढ़ जाती है। हालाँकि,यह विभेदन क्षमता में वृद्धि का कारण नहीं है। विभेदन क्षमता विवर्तन सीमा (diffraction limit) पर निर्भर करती है,न कि प्रकाश एकत्र करने की क्षमता पर।
इसलिए,दोनों कथन सही हैं,लेकिन कारण,कथन की सही व्याख्या नहीं है।
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PhysicsEasyMCQAIIMS · 2005
कथन: एक फोटॉन की ऊर्जा $(E)$ और संवेग $(p)$ का संबंध $p = E/c$ द्वारा दिया जाता है।
कारण: फोटॉन एक कण की तरह व्यवहार करता है।
A
यदि कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण,कथन की सही व्याख्या है।
B
यदि कथन और कारण दोनों सही हैं लेकिन कारण,कथन की सही व्याख्या नहीं है।
C
यदि कथन सही है लेकिन कारण गलत है।
D
यदि कथन और कारण दोनों गलत हैं।

Solution

(A) सापेक्षता के सिद्धांत के अनुसार,एक कण की ऊर्जा $E^2 = (pc)^2 + (m_0c^2)^2$ द्वारा दी जाती है।
फोटॉन के लिए,विराम द्रव्यमान $m_0$ का मान $0$ होता है।
इसलिए,$E^2 = (pc)^2$,जो सरल होकर $E = pc$ या $p = E/c$ बन जाता है।
यह संबंध विशेष रूप से फोटॉन की कण प्रकृति से प्राप्त होता है,जो इसे विराम द्रव्यमान न होने के बावजूद संवेग रखने की अनुमति देता है।
अतः,कथन सही है और कारण,कथन की सही व्याख्या है।
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PhysicsEasyMCQAIIMS · 2005
कथन : ${}^{35}Cl$ का उपयोग संलयन ऊर्जा के लिए ईंधन के रूप में करना संभव नहीं है।
कारण : ${}^{35}Cl$ की बंधन ऊर्जा बहुत कम है।
A
यदि कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण,कथन की सही व्याख्या है।
B
यदि कथन और कारण दोनों सही हैं लेकिन कारण,कथन की सही व्याख्या नहीं है।
C
यदि कथन सही है लेकिन कारण गलत है।
D
यदि कथन और कारण दोनों गलत हैं।

Solution

(C) नाभिकीय संलयन में हल्के नाभिक मिलकर एक भारी और अधिक स्थिर नाभिक बनाते हैं,जिससे ऊर्जा मुक्त होती है।
${}^{35}Cl$ एक अपेक्षाकृत स्थिर,मध्यम द्रव्यमान वाला नाभिक है जिसकी प्रति न्यूक्लियॉन बंधन ऊर्जा अधिक होती है।
चूंकि यह पहले से ही स्थिर है,इसलिए यह ऊर्जा मुक्त करने के लिए संलयन प्रक्रिया से नहीं गुजरता है।
कथन सही है क्योंकि ${}^{35}Cl$ का उपयोग संलयन के लिए ईंधन के रूप में नहीं किया जा सकता है।
कारण गलत है क्योंकि ${}^{35}Cl$ की बंधन ऊर्जा वास्तव में बहुत अधिक है,कम नहीं,और यही कारण है कि यह स्थिर है और संलयन प्रक्रिया में भाग नहीं लेता है।
49
PhysicsEasyMCQAIIMS · 2005
कथन: $NOT$ लॉजिक गेट को डायोड का उपयोग करके बनाया जा सकता है।
कारण: डायोड के आउटपुट वोल्टेज और इनपुट वोल्टेज के बीच $180^o$ का कलांतर (phase difference) होता है।
A
यदि कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण,कथन की सही व्याख्या है।
B
यदि कथन और कारण दोनों सही हैं लेकिन कारण,कथन की सही व्याख्या नहीं है।
C
यदि कथन सही है लेकिन कारण गलत है।
D
यदि कथन और कारण दोनों गलत हैं।

Solution

(D) $NOT$ गेट एक इनवर्टर है जिसे इनवर्जन लॉजिक करने के लिए ट्रांजिस्टर जैसे सक्रिय घटक की आवश्यकता होती है। डायोड एक निष्क्रिय,एकदिशीय उपकरण है जो केवल एक दिशा में धारा प्रवाहित होने देता है और $NOT$ गेट के लिए आवश्यक लॉजिकल इनवर्जन नहीं कर सकता है।
इसके अलावा,डायोड इनपुट और आउटपुट वोल्टेज के बीच $180^o$ का फेज शिफ्ट उत्पन्न नहीं करता है। इसलिए,कथन और कारण दोनों गलत हैं।
50
PhysicsMediumMCQAIIMS · 2005
कथन: कमरे के तापमान पर $p-$प्रकार के सिलिकॉन अर्धचालक में इलेक्ट्रॉनों की संख्या शुद्ध सिलिकॉन अर्धचालक में इलेक्ट्रॉनों की संख्या से कम होती है।
कारण: यह द्रव्यमान क्रिया के नियम (law of mass action) के कारण है।
A
यदि कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण,कथन की सही व्याख्या है।
B
यदि कथन और कारण दोनों सही हैं लेकिन कारण,कथन की सही व्याख्या नहीं है।
C
यदि कथन सही है लेकिन कारण गलत है।
D
यदि कथन और कारण दोनों गलत हैं।

Solution

(A) द्रव्यमान क्रिया के नियम के अनुसार,एक अर्धचालक के लिए,दिए गए तापमान पर इलेक्ट्रॉनों $(n_e)$ और होल्स $(n_h)$ की संख्या घनत्व का गुणनफल स्थिर रहता है: $n_e n_h = n_i^2$,जहाँ $n_i$ आंतरिक वाहक सांद्रता है।
$p-$प्रकार के अर्धचालक में,त्रिसंयोजक अशुद्धि परमाणु मिलाए जाते हैं,जो होल्स की संख्या को काफी बढ़ा देते हैं $(n_h > n_i)$।
चूंकि गुणनफल $n_e n_h$ को $n_i^2$ के बराबर रहना चाहिए,इसलिए $n_h$ में वृद्धि के कारण इलेक्ट्रॉनों की संख्या $(n_e)$ में कमी आती है,जिससे $n_e = n_i^2 / n_h$ हो जाता है। चूंकि $n_h > n_i$,इसलिए यह निष्कर्ष निकलता है कि $n_e < n_i$।
अतः,$p-$प्रकार के अर्धचालक में इलेक्ट्रॉनों की संख्या समान तापमान पर आंतरिक (शुद्ध) अर्धचालक की तुलना में कम होती है।
कथन और कारण दोनों सही हैं,और कारण,कथन की सही व्याख्या है।
51
PhysicsEasyMCQAIIMS · 2005
कथन : एक कॉमन एमिटर ट्रांजिस्टर एम्पलीफायर में,इनपुट धारा आउटपुट धारा से बहुत कम होती है।
कारण : कॉमन एमिटर ट्रांजिस्टर एम्पलीफायर का इनपुट प्रतिबाधा (impedance) बहुत अधिक होता है।
A
यदि कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण कथन की सही व्याख्या है।
B
यदि कथन और कारण दोनों सही हैं लेकिन कारण कथन की सही व्याख्या नहीं है।
C
यदि कथन सही है लेकिन कारण गलत है।
D
यदि कथन और कारण दोनों गलत हैं।

Solution

(C) एक कॉमन एमिटर ट्रांजिस्टर एम्पलीफायर में,इनपुट धारा बेस धारा $(I_B)$ होती है और आउटपुट धारा कलेक्टर धारा $(I_C)$ होती है।
चूंकि धारा लाभ $\beta = I_C / I_B$ आमतौर पर $1$ से बहुत अधिक होता है,इसलिए $I_C \gg I_B$ होता है,जिसका अर्थ है कि इनपुट धारा आउटपुट धारा से बहुत कम है। अतः,कथन सही है।
हालाँकि,कॉमन एमिटर ट्रांजिस्टर एम्पलीफायर की इनपुट प्रतिबाधा कम होती है,न कि अधिक।
इसलिए,कारण गलत है।
52
PhysicsEasyMCQAIIMS · 2005
निम्नलिखित में से कौन सा लॉजिक गेट एक यूनिवर्सल गेट है?
A
$AND$
B
$OR$
C
$NOT$
D
$NAND$

Solution

(D) एक यूनिवर्सल गेट वह लॉजिक गेट है जिसका उपयोग किसी अन्य प्रकार के गेट की आवश्यकता के बिना किसी भी अन्य लॉजिक गेट या बूलियन फ़ंक्शन को लागू करने के लिए किया जा सकता है।
$NAND$ और $NOR$ गेट को यूनिवर्सल गेट के रूप में जाना जाता है।
दिए गए विकल्पों में,$NAND$ एक यूनिवर्सल गेट है।
इसलिए,सही विकल्प $D$ है।

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How many Physics questions are in AIIMS 2005?

There are 52 Physics questions from the AIIMS 2005 paper on Vedclass, each with a detailed step-by-step solution in Hindi.

Are AIIMS 2005 Physics solutions available in Hindi?

Yes. All solutions on this page are in Hindi. You can also switch to English or Hindi using the language buttons above the questions.

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