TS EAMCET 2014 Chemistry Question Paper with Answer and Solution in Hindi

196 QuestionsHindiWith Solutions

ChemistryQ176 of 196 questions

Page 1 of 4 · Hindi

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ChemistryMCQTS EAMCET · 2014
निम्नलिखित अभिक्रिया अनुक्रम में $Z$ क्या है?
$C_6H_5NH_2$ $\xrightarrow[(i) NaNO_2 + HCl / 273 \ K]{(ii) H_3PO_2 + H_2O}$ $\xrightarrow[(iii) CO, HCl, \text{anhydrous } AlCl_3/CuCl]{} Z$
A
$C_6H_5CO_2H$
B
$C_6H_5OH$
C
$C_6H_5CHO$
D
$C_6H_6$

Solution

(C) अभिक्रिया अनुक्रम इस प्रकार है:
$1$. एनिलीन $(C_6H_5NH_2)$,$273 \ K$ पर $NaNO_2 + HCl$ के साथ अभिक्रिया करके बेंजीन डायज़ोनियम क्लोराइड $(C_6H_5N_2^+Cl^-)$ बनाता है।
$2$. बेंजीन डायज़ोनियम क्लोराइड,$H_3PO_2 + H_2O$ के साथ अभिक्रिया करके अपचयन (reduction) द्वारा बेंजीन $(C_6H_6)$ देता है।
$3$. इसके बाद बेंजीन,निर्जल $AlCl_3/CuCl$ की उपस्थिति में $CO + HCl$ के साथ गटरमैन-कोच अभिक्रिया करके बेंज़ल्डिहाइड $(C_6H_5CHO)$ बनाता है।
अतः,$Z$ का मान $C_6H_5CHO$ है।
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हाइड्रोजन की पहली कक्षा की त्रिज्या $r_{H}$ है और ग्राउंड स्टेट में ऊर्जा $-13.6 \text{ eV}$ है। हाइड्रोजन परमाणु की तरह एक प्रोटॉन के चारों ओर घूमते हुए $207 m_e$ द्रव्यमान वाले $\mu^{-}$-कण पर विचार करते हुए,पहली कक्षा में प्रोटॉन और $\mu^{-}$-संयोजन की ऊर्जा और त्रिज्या क्रमशः क्या होगी? (मान लें कि नाभिक स्थिर है)
A
$-13.6 \times 207 \text{ eV}, \frac{r_{H}}{207}$
B
$-207 \times 13.6 \text{ eV}, 207 r_{H}$
C
$-\frac{13.6}{207} \text{ eV}, \frac{r_{H}}{207}$
D
$-\frac{13.6}{207} \text{ eV}, 207 r_{H}$

Solution

(A) $n$-वीं कक्षा की ऊर्जा $E_n = -\frac{m e^4}{8 \varepsilon_0^2 h^2 n^2}$ द्वारा दी जाती है। चूंकि $E_n \propto m$,इसलिए $\mu^{-}$-परमाणु की ऊर्जा $E_{\mu} = \frac{m_{\mu}}{m_e} \times E_e$ होगी। दिया गया है कि $m_{\mu} = 207 m_e$,इसलिए $E_{\mu} = 207 \times (-13.6 \text{ eV}) = -13.6 \times 207 \text{ eV}$ प्राप्त होता है।
$n$-वीं कक्षा की त्रिज्या $r_n = \frac{\varepsilon_0 h^2 n^2}{\pi m e^2}$ द्वारा दी जाती है। चूंकि $r_n \propto \frac{1}{m}$,इसलिए $\mu^{-}$-परमाणु की त्रिज्या $r_{\mu} = \frac{m_e}{m_{\mu}} \times r_{H} = \frac{m_e}{207 m_e} \times r_{H} = \frac{r_{H}}{207}$ प्राप्त होती है।
अतः,ऊर्जा $-13.6 \times 207 \text{ eV}$ और त्रिज्या $\frac{r_{H}}{207}$ है।
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जब चीनी को सांद्र $H_2SO_4$ के साथ उपचारित किया जाता है,तो उसका चारिंग (charring) हो जाता है। इसमें किस प्रकार की अभिक्रिया शामिल है?
A
$A.$ निर्जलीकरण (Dehydration) अभिक्रिया
B
$B.$ जल-अपघटन (Hydrolysis) अभिक्रिया
C
$C.$ योगात्मक (Addition) अभिक्रिया
D
$D.$ असमानुपातन (Disproportionation) अभिक्रिया

Solution

(A) सांद्र $H_2SO_4$ एक शक्तिशाली निर्जलीकरण कारक है।
यह चीनी $(C_{12}H_{22}O_{11})$ से पानी को हटा देता है,जिससे कार्बन का काला द्रव्यमान शेष रह जाता है।
इस प्रक्रिया को चारिंग कहा जाता है।
$C_{12}H_{22}O_{11} \xrightarrow{\text{conc. } H_2SO_4} 12C + 11H_2O$
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लैक्टोज किसका डाइसैकेराइड है?
A
$ \alpha-D $-ग्लूकोज और $ \alpha-D $-फ्रुक्टोज
B
$ \beta-D $-ग्लूकोज और $ \beta-D $-गैलेक्टोज
C
$ \alpha-D $-ग्लूकोज और $ \beta-D $-राइबोज
D
$ \alpha-D $-ग्लूकोज और $ \beta-D $-गैलेक्टोज

Solution

(B) लैक्टोज $ \beta-D(+) $-गैलेक्टोज और $ \beta-D(+) $-ग्लूकोज का एक डाइसैकेराइड है।
ये दो मोनोसैकेराइड $ \beta-1,4 $-ग्लाइकोसिडिक लिंकेज द्वारा एक साथ जुड़े होते हैं।
लैक्टोज एक अपचायी शर्करा (reducing sugar) है क्योंकि इसमें एक हेमीऐसिटल समूह होता है जो एल्डिहाइड समूह बनाने के लिए खुल सकता है।
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$CH_3MgBr + CO_2$ $\xrightarrow{\text{Dry ether}} Y$ $\xrightarrow{H_3O^{\oplus}} Z$. निम्नलिखित में से $Z$ की पहचान करें।
A
एथिल एसीटेट
B
एसीटिक अम्ल
C
प्रोपेनोइक अम्ल
D
मिथाइल एसीटेट

Solution

(B) शुष्क ईथर की उपस्थिति में ग्रिग्नार्ड अभिकर्मक $(CH_3MgBr)$ की कार्बन डाइऑक्साइड $(CO_2)$ के साथ अभिक्रिया से एक मध्यवर्ती मैग्नीशियम लवण,$CH_3COOMgBr$ $(Y)$ बनता है।
अम्लीय जल-अपघटन $(H_3O^{\oplus})$ पर,यह मध्यवर्ती अंतिम उत्पाद $(Z)$ के रूप में एसीटिक अम्ल $(CH_3COOH)$ देता है।
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निम्नलिखित अभिक्रिया में $Z$ क्या है? $CH_3-CH_2-CO_2^{\ominus} Na^{\oplus} \stackrel{NaOH / CaO}{\longrightarrow} Z$
A
प्रोपेन
B
$n$-ब्यूटेन
C
एथेन
D
एथाइन

Solution

(C) दी गई अभिक्रिया एक डीकार्बोक्सिलेशन अभिक्रिया है,जिसे सोडा-लाइम डीकार्बोक्सिलेशन के रूप में भी जाना जाता है।
जब सोडियम प्रोपेनोएट $(CH_3CH_2CO_2Na)$ को सोडा-लाइम $(NaOH + CaO)$ के साथ गर्म किया जाता है,तो यह डीकार्बोक्सिलेशन के माध्यम से मूल कार्बोक्सिलिक एसिड लवण की तुलना में एक कार्बन परमाणु कम वाला एल्केन बनाता है।
अभिक्रिया: $CH_3CH_2CO_2Na + NaOH \xrightarrow{CaO, \Delta} CH_3CH_3 + Na_2CO_3$.
अतः,$Z$ एथेन $(CH_3CH_3)$ है।
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निम्नलिखित में से किसकी सहसंयोजक बंध लंबाई सबसे अधिक है?
A
$C-C$
B
$C-H$
C
$C-N$
D
$C-O$

Solution

(A) बंध लंबाई को एक अणु में दो बंधित परमाणुओं के नाभिक के केंद्रों के बीच की औसत दूरी के रूप में परिभाषित किया जाता है। यह परमाणु के आकार,संकरण और विद्युत ऋणात्मकता के अंतर जैसे कारकों पर निर्भर करता है।
परमाणु त्रिज्या का क्रम: $C > N > O > H$ है।
चूंकि $C-C$ बंध में दिए गए जोड़ों में सबसे बड़ी परमाणु त्रिज्या वाले परमाणु शामिल हैं,इसलिए इसकी बंध लंबाई सबसे अधिक होती है।
अतः,सही विकल्प $A$ है।
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एथाइन और मीथेन की आकृतियाँ क्या हैं?
A
वर्ग समतलीय और रेखीय
B
चतुष्फलकीय और त्रिकोणीय समतलीय
C
रेखीय और चतुष्फलकीय
D
त्रिकोणीय समतलीय और रेखीय

Solution

(C) एथाइन $(C_2H_2)$: कार्बन परमाणु $sp$ संकरित है जिसमें $2$ $\sigma$-बंध और $0$ एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म होते हैं,जिसके परिणामस्वरूप रेखीय ज्यामिति प्राप्त होती है।
मीथेन $(CH_4)$: कार्बन परमाणु $sp^3$ संकरित है जिसमें $4$ $\sigma$-बंध और $0$ एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म होते हैं,जिसके परिणामस्वरूप चतुष्फलकीय ज्यामिति प्राप्त होती है।
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$XeOF_4$ की संरचना क्या है?
A
त्रिकोणीय द्विपिरामिडीय
B
वर्ग समतलीय
C
वर्ग पिरामिडीय
D
पिरामिडीय

Solution

(C) $XeOF_4$ में,केंद्रीय परमाणु $Xe$ के पास $8$ संयोजी इलेक्ट्रॉन होते हैं।
यह $F$ परमाणुओं के साथ $4$ एकल बंध और $O$ परमाणु के साथ $1$ द्वि-बंध बनाता है।
यह बंध बनाने में $6$ इलेक्ट्रॉनों का उपयोग करता है,जिससे $1$ एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म (lone pair) शेष बचता है।
कुल इलेक्ट्रॉन युग्म = $5$ आबंध युग्म + $1$ एकाकी युग्म = $6$ इलेक्ट्रॉन युग्म।
यह $sp^3d^2$ संकरण और अष्टफलकीय इलेक्ट्रॉन ज्यामिति को दर्शाता है।
$1$ एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म की उपस्थिति के कारण,आणविक ज्यामिति वर्ग पिरामिडीय होती है।
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$HF$ में हाइड्रोजन बंधन के लिए जिम्मेदार आणविक पारस्परिक क्रियाएँ हैं:
A
आयन-प्रेरित द्विध्रुव
B
द्विध्रुव-द्विध्रुव
C
द्विध्रुव-प्रेरित द्विध्रुव
D
आयन-द्विध्रुव

Solution

(B) हाइड्रोजन बंध एक उच्च विद्युत ऋणात्मक परमाणु से सहसंयोजक रूप से बंधे हाइड्रोजन परमाणु और इलेक्ट्रॉनों के एकाकी युग्म वाले दूसरे विद्युत ऋणात्मक परमाणु के बीच एक विशिष्ट प्रकार की द्विध्रुव-द्विध्रुव पारस्परिक क्रिया है।
$HF$ अणु में,$H$ और $F$ के बीच विद्युत ऋणात्मकता का अंतर महत्वपूर्ण है,जो एक स्थायी द्विध्रुव बनाता है।
इसलिए,$HF$ अणुओं के बीच की पारस्परिक क्रिया एक द्विध्रुव-द्विध्रुव पारस्परिक क्रिया है।
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एक अभिक्रिया $A + B \rightleftharpoons C + D$ में,जब $1 \ mole$ $A$ को $1 \ mole$ $B$ के साथ $10 \ L$ के बंद पात्र में गर्म किया जाता है,तो साम्यावस्था पर $B$ का $40 \%$ भाग अभिक्रिया कर लेता है। $K_C$ का मान ज्ञात कीजिए।
A
$0.44$
B
$0.18$
C
$0.22$
D
$0.36$

Solution

(A) अभिक्रिया $A + B \rightleftharpoons C + D$ है।
प्रारंभिक मोल: $A = 1, B = 1, C = 0, D = 0$.
साम्यावस्था पर,$B$ का $40 \%$ भाग अभिक्रिया कर लेता है,अतः अभिक्रिया करने वाली मात्रा $1 \times 0.4 = 0.4 \ mole$ है।
साम्यावस्था पर मोल: $A = (1 - 0.4) = 0.6, B = (1 - 0.4) = 0.6, C = 0.4, D = 0.4$.
चूंकि आयतन $10 \ L$ है,सांद्रता $[A] = 0.6/10, [B] = 0.6/10, [C] = 0.4/10, [D] = 0.4/10$ होगी।
$K_C = \frac{[C][D]}{[A][B]} = \frac{(0.4/10) \times (0.4/10)}{(0.6/10) \times (0.6/10)} = \frac{0.4 \times 0.4}{0.6 \times 0.6} = \frac{0.16}{0.36} = 0.44$.
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एक प्रथम कोटि की अभिक्रिया में,अभिकारक की सांद्रता $15 \ min$ में $0.6 \ M$ से घटकर $0.3 \ M$ हो जाती है। सांद्रता को $0.1 \ M$ से $0.025 \ M$ तक बदलने में लगा समय (मिनट में) है
A
$1.2$
B
$12$
C
$30$
D
$3$

Solution

(C) चूंकि अभिकारक की सांद्रता $15 \ min$ में $0.6 \ M$ से $0.3 \ M$ (अर्थात आधी) हो जाती है,इसलिए इस अभिक्रिया का अर्ध-आयु काल $(t_{1/2})$ $15 \ min$ है।
प्रथम कोटि की अभिक्रिया के लिए,सांद्रता को $[A]_0$ से $[A]$ तक बदलने में लगा समय $t = \frac{2.303}{k} \log \frac{[A]_0}{[A]}$ द्वारा दिया जाता है।
यहाँ $[A]_0 = 0.1 \ M$ और $[A] = 0.025 \ M$ दिया गया है,इसलिए अनुपात $\frac{[A]_0}{[A]} = \frac{0.1}{0.025} = 4 = 2^2$ है।
इसका अर्थ है कि सांद्रता अपने प्रारंभिक मान की $1/4$ हो जाती है,जो दो अर्ध-आयु काल $(2 \times t_{1/2})$ के बराबर है।
अतः,$t = 2 \times 15 \ min = 30 \ min$.
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निम्नलिखित में से कौन सा समूह $13$ के तत्वों की परमाणु संख्या $(Z)$ के साथ विद्युत ऋणात्मकता $(EN)$ के परिवर्तन को सही ढंग से दर्शाता है?
A
Option A
B
Option B
C
Option C
D
Option D

Solution

(D) समूह $13$ के तत्वों के लिए,पॉलिंग पैमाने पर विद्युत ऋणात्मकता $(EN)$ के मान इस प्रकार हैं:
$B: 2.0$
$Al: 1.5$
$Ga: 1.6$
$In: 1.7$
$Tl: 1.8$
जैसे-जैसे हम समूह में $B$ से $Al$ की ओर नीचे जाते हैं,परमाणु आकार में वृद्धि के कारण विद्युत ऋणात्मकता घटती है।
हालाँकि,$Al$ से $Tl$ तक,$d$ और $f$ कक्षकों के खराब परिरक्षण प्रभाव (shielding effect) के कारण विद्युत ऋणात्मकता में धीरे-धीरे वृद्धि होती है,जो प्रभावी परमाणु आवेश को बढ़ाती है।
इसलिए,सही परिवर्तन $B$ से $Al$ तक कमी,और उसके बाद $Al$ से $Tl$ तक वृद्धि है।
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एक अणु के केंद्रीय परमाणु के संयोजी कोश में इलेक्ट्रॉनों की संख्या $8$ है। वह अणु है
A
$BCl_3$
B
$BeH_2$
C
$SCl_2$
D
$SF_6$

Solution

(C) $SCl_2$ में,केंद्रीय परमाणु $S$ (सल्फर) है,जिसके पास $6$ संयोजी इलेक्ट्रॉन होते हैं।
यह $Cl$ परमाणुओं के साथ $2$ एकल बंध बनाता है,जिसमें $2$ इलेक्ट्रॉनों का उपयोग होता है।
शेष इलेक्ट्रॉन $= 6 - 2 = 4$ हैं,जो $2$ एकाकी युग्म (lone pairs) बनाते हैं।
$S$ के चारों ओर कुल संयोजी इलेक्ट्रॉन $= 2 \text{ (आबंध युग्म)} \times 2 + 2 \text{ (एकाकी युग्म)} \times 2 = 4 + 4 = 8$ इलेक्ट्रॉन हैं।
अतः,$SCl_2$ अष्टक नियम का पालन करता है।
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$Si, S, Na, Mg, Al$ की परमाणु त्रिज्या का बढ़ता क्रम क्या है?
A
$S < Si < Al < Mg < Na$
B
$Na < Al < Mg < S < Si$
C
$Na < Mg < Si < Al < S$
D
$Na < Mg < Al < Si < S$

Solution

(A) आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर,प्रभावी नाभिकीय आवेश बढ़ता है।
इसके कारण परमाणु त्रिज्या घटती है।
अतः,$3^{rd}$ आवर्त के तत्वों की परमाणु त्रिज्या का सही क्रम $Na > Mg > Al > Si > S$ है।
इसलिए,बढ़ता हुआ क्रम $S < Si < Al < Mg < Na$ है।
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एक टीवी ट्रांसमिटिंग एंटीना $128 \ m$ ऊँचा है। यदि रिसीविंग एंटीना जमीन के स्तर पर है,तो लाइन-ऑफ-साइट मोड में संतोषजनक संचार के लिए उनके बीच की अधिकतम दूरी क्या होगी? (पृथ्वी की त्रिज्या $R_e = 6.4 \times 10^6 \ m$)
A
$64 \times \sqrt{10} \ km$
B
$\frac{128}{\sqrt{10}} \ km$
C
$128 \times \sqrt{10} \ km$
D
$\frac{64}{\sqrt{10}} \ km$

Solution

(C) ट्रांसमिटिंग एंटीना की ऊँचाई $h_T$ और जमीन पर स्थित रिसीविंग एंटीना के बीच अधिकतम लाइन-ऑफ-साइट दूरी $d$ का सूत्र है: $d = \sqrt{2 R_e h_T}$।
दी गई मान:
$R_e = 6.4 \times 10^6 \ m$
$h_T = 128 \ m$
सूत्र में मान रखने पर:
$d = \sqrt{2 \times (6.4 \times 10^6) \times 128}$
$d = \sqrt{12.8 \times 10^6 \times 128}$
$d = \sqrt{128 \times 10^5 \times 128}$
$d = 128 \times \sqrt{10^5} \ m$
$d = 128 \times 100 \sqrt{10} \ m = 12800 \sqrt{10} \ m$
किलोमीटर में बदलने पर $(1 \ km = 1000 \ m)$:
$d = \frac{12800 \sqrt{10}}{1000} \ km = 12.8 \sqrt{10} \ km$।
गणना के अनुसार सही विकल्प $C$ है।
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$[AlCl(H_2O)_5]^{2+}$ में $Al$ की ऑक्सीकरण अवस्था और सहसंयोजकता क्रमशः क्या हैं?
A
$+6, 6$
B
$+3, 6$
C
$+2, 6$
D
$+3, 3$

Solution

(B) $[AlCl(H_2O)_5]^{2+}$ संकुल में,मान लीजिए $Al$ की ऑक्सीकरण अवस्था $x$ है।
$Cl^-$ की ऑक्सीकरण अवस्था $-1$ है और $H_2O$ एक उदासीन लिगेंड $(0)$ है।
$x + (-1) + 5(0) = +2$
$x - 1 = +2$
$x = +3$
अतः,$Al$ की ऑक्सीकरण अवस्था $+3$ है।
सहसंयोजकता (समन्वय संख्या) केंद्रीय धातु परमाणु द्वारा लिगेंड के साथ बनाए गए उपसहसंयोजक बंधों की कुल संख्या है।
यहाँ,$Cl$ $1$ बंध प्रदान करता है और $5$ $H_2O$ अणु $5$ बंध प्रदान करते हैं।
कुल सहसंयोजकता $= 1 + 5 = 6$.
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दिए गए परिपथ में,$5 \Omega$ के प्रतिरोध में $I_2$ धारा के कारण उत्पन्न ऊष्मा $50 \text{ J/s}$ है। तो,$2 \Omega$ के प्रतिरोध में प्रति सेकंड उत्पन्न ऊष्मा कितनी होगी ($text{ J/s}$ में)?
Question diagram
A
$5$
B
$4$
C
$9$
D
$10$

Solution

(A) $5 \Omega$ के प्रतिरोध में व्यय शक्ति $P_2 = I_2^2 R_2 = 50 \text{ J/s}$ द्वारा दी जाती है।
यहाँ $R_2 = 5 \Omega$ दिया गया है,इसलिए $I_2^2 \times 5 = 50$,जिसका अर्थ है $I_2^2 = 10 \text{ A}^2$,यानी $I_2 = \sqrt{10} \text{ A}$।
समांतर शाखाओं के बीच विभवांतर $V = I_2 \times R_2 = \sqrt{10} \times 5 = 5\sqrt{10} \text{ V}$ है।
ऊपरी शाखा में $2 \Omega$ और $8 \Omega$ के प्रतिरोध श्रेणीक्रम में जुड़े हैं,इसलिए ऊपरी शाखा का कुल प्रतिरोध $R_1 = 2 \Omega + 8 \Omega = 10 \Omega$ है।
ऊपरी शाखा में प्रवाहित धारा $I_1 = \frac{V}{R_1} = \frac{5\sqrt{10}}{10} = \frac{\sqrt{10}}{2} \text{ A}$ है।
$2 \Omega$ के प्रतिरोध में प्रति सेकंड उत्पन्न ऊष्मा $P_1 = I_1^2 \times R_{2\Omega} = \left(\frac{\sqrt{10}}{2}\right)^2 \times 2 = \frac{10}{4} \times 2 = \frac{20}{4} = 5 \text{ J/s}$ होगी।
Solution diagram
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तार $A$ और $B$ की प्रतिरोधकता $\rho_A$ और $\rho_B$ है,जहाँ $\rho_B = 2 \rho_A$,और उनकी लंबाई $l_A$ और $l_B$ है। यदि तार $B$ का व्यास $A$ से दोगुना है और दोनों तारों का प्रतिरोध समान है,तो अनुपात $\frac{l_B}{l_A}$ क्या है?
A
$2$
B
$1$
C
$\frac{1}{2}$
D
$\frac{1}{4}$

Solution

(A) दिया गया है: $\rho_B = 2 \rho_A$ और $R_A = R_B = R$.
मान लीजिए कि तार $A$ की त्रिज्या $r_A = r$ है।
चूंकि $B$ का व्यास $A$ से दोगुना है,इसलिए तार $B$ की त्रिज्या $r_B = 2r$ होगी।
तार का प्रतिरोध $R = \rho \frac{l}{A} = \rho \frac{l}{\pi r^2}$ सूत्र द्वारा दिया जाता है।
दोनों तारों के प्रतिरोधों की तुलना करने पर:
$\rho_A \frac{l_A}{\pi r_A^2} = \rho_B \frac{l_B}{\pi r_B^2}$
दिए गए मानों को रखने पर:
$\rho_A \frac{l_A}{\pi r^2} = (2 \rho_A) \frac{l_B}{\pi (2r)^2}$
$\rho_A \frac{l_A}{\pi r^2} = 2 \rho_A \frac{l_B}{4 \pi r^2}$
$\frac{l_A}{1} = \frac{2 l_B}{4}$
$\frac{l_A}{1} = \frac{l_B}{2}$
अतः,$\frac{l_B}{l_A} = 2$.
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निम्नलिखित में से किस आयन में अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की संख्या $V^{3+}$ आयन में उपस्थित इलेक्ट्रॉनों की संख्या के समान है?
A
$Fe^{3+}$
B
$Ni^{2+}$
C
$Mn^{2+}$
D
$Cr^{3+}$

Solution

(B) वैनेडियम $(Z=23)$ का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास $[Ar] 3d^3 4s^2$ है।
$V^{3+}$ के लिए,विन्यास $[Ar] 3d^2 4s^0$ है,जिसमें $2$ अयुग्मित इलेक्ट्रॉन हैं।
अब,विकल्पों की जाँच करते हैं:
$A) Fe^{3+} (Z=26): [Ar] 3d^5 4s^0 \Rightarrow 5$ अयुग्मित इलेक्ट्रॉन।
$B) Ni^{2+} (Z=28): [Ar] 3d^8 4s^0 \Rightarrow 2$ अयुग्मित इलेक्ट्रॉन।
$C) Mn^{2+} (Z=25): [Ar] 3d^5 4s^0 \Rightarrow 5$ अयुग्मित इलेक्ट्रॉन।
$D) Cr^{3+} (Z=24): [Ar] 3d^3 4s^0 \Rightarrow 3$ अयुग्मित इलेक्ट्रॉन।
अतः,$Ni^{2+}$ में $V^{3+}$ के समान ही अयुग्मित इलेक्ट्रॉन हैं।
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एक फोटॉन की ऊर्जा एक प्रोटॉन की गतिज ऊर्जा के बराबर है। यदि $\lambda_1$ प्रोटॉन की डी-ब्रोग्ली तरंगदैर्ध्य है,$\lambda_2$ फोटॉन से जुड़ी तरंगदैर्ध्य है और यदि फोटॉन की ऊर्जा $E$ है,तो $(\lambda_1 / \lambda_2)$ किसके समानुपाती है?
A
$E^4$
B
$E^{1/2}$
C
$E^2$
D
$E$

Solution

(B) फोटॉन की ऊर्जा $E = \frac{hc}{\lambda_2}$ द्वारा दी जाती है,इसलिए फोटॉन की तरंगदैर्ध्य $\lambda_2 = \frac{hc}{E}$ है।
प्रोटॉन के लिए,गतिज ऊर्जा $E = \frac{p^2}{2m}$ है,जिससे संवेग $p = \sqrt{2mE}$ प्राप्त होता है।
प्रोटॉन की डी-ब्रोग्ली तरंगदैर्ध्य $\lambda_1 = \frac{h}{p} = \frac{h}{\sqrt{2mE}}$ है।
अब,अनुपात $\frac{\lambda_1}{\lambda_2}$ की गणना करने पर:
$\frac{\lambda_1}{\lambda_2} = \frac{h / \sqrt{2mE}}{hc / E} = \frac{h}{\sqrt{2mE}} \cdot \frac{E}{hc} = \frac{E}{\sqrt{2mE} \cdot c} = \frac{\sqrt{E}}{\sqrt{2m} \cdot c}$.
चूंकि $m$ और $c$ स्थिरांक हैं,इसलिए $\frac{\lambda_1}{\lambda_2} \propto \sqrt{E}$ या $E^{1/2}$ प्राप्त होता है।
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$298 \ K$ पर $NH_4Cl$,$KOH$ और $KCl$ की अनंत तनुता पर मोलर चालकता $(\Lambda_m^{\circ})$ क्रमशः $152.8$,$272.6$ और $149.8 \ S \ cm^2 \ mol^{-1}$ है। समान तापमान पर $NH_4OH$ की $\Lambda_m^{\circ}$ ($S \ cm^2 \ mol^{-1}$ में) और $0.01 \ M \ NH_4OH$ (जिसकी $\Lambda_m = 25.1 \ S \ cm^2 \ mol^{-1}$ है) के लिए $\%$ वियोजन क्या होगा?
A
$275.6, 0.91$
B
$275.6, 9.1$
C
$266.6, 9.6$
D
$30, 84$

Solution

(B) कोहलराउश के स्वतंत्र आयनों के अभिगमन के नियम के अनुसार:
$\Lambda_m^{\circ}(NH_4OH) = \Lambda_m^{\circ}(NH_4Cl) + \Lambda_m^{\circ}(KOH) - \Lambda_m^{\circ}(KCl)$
$\Lambda_m^{\circ}(NH_4OH) = 152.8 + 272.6 - 149.8 = 275.6 \ S \ cm^2 \ mol^{-1}$
वियोजन की मात्रा $(\alpha)$ इस प्रकार है:
$\alpha = \frac{\Lambda_m}{\Lambda_m^{\circ}} = \frac{25.1}{275.6} \approx 0.091$
प्रतिशत वियोजन $= \alpha \times 100 = 0.091 \times 100 = 9.1 \%$
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$r$ त्रिज्या वाले तार की एक कुंडली में $600$ फेरे हैं और इसका स्व-प्रेरकत्व $108 \ mH$ है। समान त्रिज्या और $500$ फेरों वाली कुंडली का स्व-प्रेरकत्व क्या होगा ($mH$ में)?
A
$80$
B
$75$
C
$108$
D
$90$

Solution

(B) वृत्ताकार कुंडली का स्व-प्रेरकत्व $L$ सूत्र $L = \frac{\mu_0 \pi N^2 r}{2}$ द्वारा दिया जाता है,जहाँ $N$ फेरों की संख्या है और $r$ त्रिज्या है।
चूंकि दोनों कुंडलियों के लिए त्रिज्या $r$ समान है,इसलिए $L \propto N^2$ होगा।
अतः,स्व-प्रेरकत्व का अनुपात $\frac{L_1}{L_2} = \left(\frac{N_1}{N_2}\right)^2$ द्वारा प्राप्त होता है।
दी गई मान $L_1 = 108 \ mH$,$N_1 = 600$ और $N_2 = 500$ हैं।
इन मानों को अनुपात के सूत्र में रखने पर:
$\frac{108}{L_2} = \left(\frac{600}{500}\right)^2 = \left(\frac{6}{5}\right)^2 = \frac{36}{25}$.
$L_2$ के लिए हल करने पर:
$L_2 = 108 \times \frac{25}{36} = 3 \times 25 = 75 \ mH$.
इस प्रकार,दूसरी कुंडली का स्व-प्रेरकत्व $75 \ mH$ है।
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मुक्त आकाश में एक विद्युतचुंबकीय तरंग के लिए विद्युत क्षेत्र $E = \hat{i} 30 \cos (kz - 5 \times 10^8 t)$ है,जहाँ $E$ का परिमाण $V/m$ में है। तरंग सदिश $k$ का परिमाण ज्ञात कीजिए (मुक्त आकाश में $EM$ तरंग का वेग $= 3 \times 10^8 \ m/s$)।
A
$0.46 \ rad \ m^{-1}$
B
$3 \ rad \ m^{-1}$
C
$1.66 \ rad \ m^{-1}$
D
$0.83 \ rad \ m^{-1}$

Solution

(C) दिया गया विद्युत क्षेत्र समीकरण $E = \hat{i} 30 \cos (kz - 5 \times 10^8 t)$ है।
एक प्रगामी विद्युतचुंबकीय तरंग का मानक रूप $E = E_0 \cos (kz - \omega t)$ होता है।
दिए गए समीकरण की तुलना मानक रूप से करने पर,हमें कोणीय आवृत्ति $\omega = 5 \times 10^8 \ rad/s$ प्राप्त होती है।
प्रकाश की गति $c$,कोणीय आवृत्ति $\omega$ और तरंग सदिश $k$ के बीच संबंध $c = \frac{\omega}{k}$ है।
$k$ के लिए पुनर्व्यवस्थित करने पर,$k = \frac{\omega}{c}$ प्राप्त होता है।
दिए गए मानों को प्रतिस्थापित करने पर,$k = \frac{5 \times 10^8 \ rad/s}{3 \times 10^8 \ m/s} = \frac{5}{3} \ rad/m$।
अतः,$k \approx 1.66 \ rad/m$।
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एक आवेश $Q$ को दो आवेशों $q$ और $Q-q$ में विभाजित किया जाता है। $q$ का मान क्या होगा ताकि उनके बीच का बल अधिकतम हो?
A
$Q$
B
$\frac{3Q}{4}$
C
$\frac{Q}{2}$
D
$\frac{Q}{3}$

Solution

(C) कूलम्ब के नियम के अनुसार,$r$ दूरी पर स्थित दो आवेशों $q$ और $Q-q$ के बीच का स्थिर वैद्युत बल $F$ इस प्रकार है:
$F = \frac{1}{4 \pi \varepsilon_0} \cdot \frac{q(Q-q)}{r^2}$
बल को अधिकतम करने के लिए $q$ का मान ज्ञात करने हेतु,हम $F$ का $q$ के सापेक्ष अवकलन (differentiation) करते हैं और इसे शून्य के बराबर रखते हैं:
$\frac{dF}{dq} = \frac{1}{4 \pi \varepsilon_0 r^2} \cdot \frac{d}{dq}(Qq - q^2) = 0$
चूंकि $\frac{1}{4 \pi \varepsilon_0 r^2} \neq 0$,इसलिए:
$\frac{d}{dq}(Qq - q^2) = 0$
$Q - 2q = 0$
$2q = Q$
$q = \frac{Q}{2}$
अतः,बल तब अधिकतम होता है जब आवेश $Q$ को दो समान भागों में विभाजित किया जाता है,यानी $q = \frac{Q}{2}$।
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दो संकेंद्रित खोखले गोलीय कोशों की त्रिज्याएँ $r$ और $R$ $(R \gg r)$ हैं। उन पर $Q$ आवेश इस प्रकार वितरित है कि पृष्ठीय आवेश घनत्व समान हैं। केंद्र पर विद्युत विभव क्या होगा?
A
$\frac{Q(R+r)}{4 \pi \varepsilon_0(R^2+r^2)}$
B
$\frac{Q(R^2+r^2)}{4 \pi \varepsilon_0(R+r)}$
C
$\frac{Q}{4 \pi \varepsilon_0(R+r)}$
D
शून्य

Solution

(A) माना पृष्ठीय आवेश घनत्व $\sigma$ है। चूँकि दोनों कोशों के लिए पृष्ठीय आवेश घनत्व समान हैं,इसलिए $\sigma_1 = \sigma_2 = \sigma$ है।
कुल आवेश $Q$ दोनों कोशों पर आवेशों का योग है: $Q = q_1 + q_2$.
$Q = \sigma(4 \pi r^2) + \sigma(4 \pi R^2) = 4 \pi \sigma (r^2 + R^2)$.
अतः,$\sigma = \frac{Q}{4 \pi (r^2 + R^2)}$.
$q$ आवेश वाले $a$ त्रिज्या के गोलीय कोश के केंद्र पर विद्युत विभव $V = \frac{1}{4 \pi \varepsilon_0} \frac{q}{a}$ होता है।
दो संकेंद्रित कोशों के लिए,केंद्र पर कुल विभव प्रत्येक कोश के कारण विभव का योग है:
$V = V_r + V_R = \frac{1}{4 \pi \varepsilon_0} \left( \frac{q_1}{r} + \frac{q_2}{R} \right)$.
$q_1 = \sigma(4 \pi r^2)$ और $q_2 = \sigma(4 \pi R^2)$ रखने पर:
$V = \frac{1}{4 \pi \varepsilon_0} \left( \frac{\sigma 4 \pi r^2}{r} + \frac{\sigma 4 \pi R^2}{R} \right) = \frac{\sigma}{\varepsilon_0} (r + R)$.
$\sigma$ का मान रखने पर:
$V = \frac{Q}{4 \pi (r^2 + R^2) \varepsilon_0} (r + R) = \frac{Q(R + r)}{4 \pi \varepsilon_0 (R^2 + r^2)}$.
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निम्नलिखित अभिक्रिया में $X$ और $Y$ क्या हैं?
$CF_2Cl_2 \xrightarrow{UV} X + Y$
A
$\cdot CF_2Cl, \cdot Cl$
B
$^{-}C_2F_4, Cl_2$
C
$\cdot CFCl_2, \cdot F$
D
$CCl_2, F_2$

Solution

(A) क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFCs),जैसे $CF_2Cl_2$,क्षोभमंडल (troposphere) में स्थिर यौगिक होते हैं। हालाँकि,जब वे समताप मंडल (stratosphere) में पहुँचते हैं,तो वे पराबैंगनी $(UV)$ विकिरण को अवशोषित करते हैं।
यह उच्च-ऊर्जा विकिरण $C-Cl$ बंध के समांगी विखंडन (homolytic cleavage) का कारण बनता है,जिसके परिणामस्वरूप क्लोरीन मुक्त मूलक (free radical) बनते हैं।
अभिक्रिया इस प्रकार है:
$CF_2Cl_2 \xrightarrow{UV} \cdot CF_2Cl + \cdot Cl$
यहाँ,$X$ क्लोरोडाइफ्लोरोमिथाइल मूलक $(\cdot CF_2Cl)$ है और $Y$ क्लोरीन मुक्त मूलक $(\cdot Cl)$ है।
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निम्नलिखित में से कौन सा $S_{N}1$ क्रियाविधि द्वारा अधिक आसानी से जल-अपघटित होता है?
A
$(C_6H_5)_2C(CH_3)Br$
B
$C_6H_5CH_2Br$
C
$C_6H_5CH(CH_3)Br$
D
$(C_6H_5)_2CHBr$

Solution

(A) $S_{N}1$ अभिक्रिया की दर लीविंग ग्रुप के निकलने के बाद बनने वाले कार्बोनियम आयन (कार्बोकेशन) मध्यवर्ती के स्थायित्व पर निर्भर करती है।
कार्बोकेशन का अधिक स्थायित्व तीव्र अभिक्रिया की ओर ले जाता है।
दिए गए हैलाइडों से बनने वाले कार्बोकेशन इस प्रकार हैं:
$A$: $(C_6H_5)_2C^+(CH_3)$ (तृतीयक बेंजिलिक कार्बोकेशन,जो दो फेनिल रिंग और एक मिथाइल समूह द्वारा स्थिर होता है)
$B$: $C_6H_5CH_2^+$ (प्राथमिक बेंजिलिक कार्बोकेशन)
$C$: $C_6H_5CH^+(CH_3)$ (द्वितीयक बेंजिलिक कार्बोकेशन)
$D$: $(C_6H_5)_2CH^+$ (द्वितीयक बेंजिलिक कार्बोकेशन,लेकिन मिथाइल समूह की अनुपस्थिति के कारण $A$ से कम स्थिर है)
स्थायित्व की तुलना करने पर,तृतीयक बेंजिलिक कार्बोकेशन $(C_6H_5)_2C^+(CH_3)$ अनुनाद (resonance) और मिथाइल समूह के प्रेरणिक प्रभाव (inductive effect) के कारण सबसे अधिक स्थिर है।
अतः,$(C_6H_5)_2C(CH_3)Br$ का $S_{N}1$ क्रियाविधि द्वारा जल-अपघटन सबसे आसानी से होता है।
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हेमेटाइट अयस्क से लोहे के निष्कर्षण के दौरान चूना पत्थर (limestone) की भूमिका क्या है?
A
लीचिंग एजेंट
B
ऑक्सीडाइजिंग एजेंट
C
रिड्यूसिंग एजेंट
D
फ्लक्स (Flux)

Solution

(D) हेमेटाइट अयस्क से लोहे के निष्कर्षण के दौरान,भुने हुए अयस्क को कोक और चूना पत्थर के साथ ब्लास्ट फर्नेस में गर्म किया जाता है।
कोक एक रिड्यूसिंग एजेंट के रूप में कार्य करता है,जबकि चूना पत्थर फ्लक्स के रूप में कार्य करता है।
चूना पत्थर विघटित होकर $CaO$ बनाता है,जो सिलिका $(SiO_2)$ जैसी अम्लीय अशुद्धियों के साथ प्रतिक्रिया करके कैल्शियम सिलिकेट $(CaSiO_3)$ स्लैग बनाता है:
$CaCO_3 \rightarrow CaO + CO_2$
$CaO + SiO_2 \rightarrow CaSiO_3$ (स्लैग)
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एक उपग्रह $\rho$ घनत्व वाले ग्रह के बहुत करीब परिक्रमा कर रहा है। उपग्रह का परिक्रमण काल क्या है?
A
$\sqrt{\frac{3 \pi \rho}{G}}$
B
$\sqrt{\frac{3 \pi}{2 \rho G}}$
C
$\sqrt{\frac{3 \pi}{\rho G}}$
D
$\sqrt{\frac{3 \pi G}{\rho}}$

Solution

(C) ग्रह के केंद्र से $r = R_p + h$ दूरी पर परिक्रमा कर रहे उपग्रह का परिक्रमण काल $T = 2 \pi \sqrt{\frac{r^3}{GM_p}}$ द्वारा दिया जाता है।
जब उपग्रह सतह के बहुत करीब परिक्रमा कर रहा हो,तो $h \approx 0$,इसलिए $r = R_p$ होगा।
ग्रह के घनत्व $\rho$ और त्रिज्या $R_p$ के संदर्भ में ग्रह का द्रव्यमान $M_p = \frac{4}{3} \pi R_p^3 \rho$ है।
$M_p$ का मान परिक्रमण काल के सूत्र में रखने पर:
$T = 2 \pi \sqrt{\frac{R_p^3}{G (\frac{4}{3} \pi R_p^3 \rho)}}$.
इस व्यंजक को सरल करने पर:
$T = 2 \pi \sqrt{\frac{3}{4 \pi G \rho}} = \sqrt{\frac{4 \pi^2 \cdot 3}{4 \pi G \rho}} = \sqrt{\frac{3 \pi}{G \rho}}$.
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निम्नलिखित में से कौन दहन पर कालिख वाली ज्वाला देता है?
A
$C_2H_4$
B
$CH_4$
C
$C_2H_6$
D
$C_6H_6$

Solution

(D) एरोमैटिक यौगिक,जैसे $C_6H_6$ (बेंजीन),में कार्बन और हाइड्रोजन का अनुपात उच्च होता है।
अपूर्ण दहन के कारण,वे कालिख वाली (धुएँ वाली) ज्वाला उत्पन्न करते हैं।
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क्लार्क विधि द्वारा जल की अस्थायी कठोरता को क्या मिलाकर दूर किया जाता है?
A
कॉस्टिक सोडा
B
कैलगन
C
बोरेक्स
D
लाइम (चूना)

Solution

(D) क्लार्क विधि में,जल की अस्थायी कठोरता को एक निश्चित मात्रा में लाइम $(Ca(OH)_2)$ मिलाकर दूर किया जाता है। कैल्शियम और मैग्नीशियम के बाइकार्बोनेट अघुलनशील कार्बोनेट और हाइड्रॉक्साइड में परिवर्तित हो जाते हैं,जिन्हें छानकर अलग किया जा सकता है।
$Ca(HCO_3)_2 + Ca(OH)_2 \rightarrow 2CaCO_3 \downarrow + 2H_2O$
$Mg(HCO_3)_2 + 2Ca(OH)_2 \rightarrow 2CaCO_3 \downarrow + Mg(OH)_2 \downarrow + 2H_2O$
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यदि $Ni(OH)_2$ का विलेयता गुणनफल $(K_{sp})$ $1.9 \times 10^{-15}$ है,तो $1.0 \ M \ NaOH$ में $Ni(OH)_2$ की मोलर विलेयता क्या होगी?
A
$1.9 \times 10^{-18} \ M$
B
$1.9 \times 10^{-13} \ M$
C
$1.9 \times 10^{-15} \ M$
D
$1.9 \times 10^{-14} \ M$

Solution

(C) $NaOH$ एक प्रबल विद्युत अपघट्य है,इसलिए $[OH^-] = 1.0 \ M$।
मान लीजिए $Ni(OH)_2$ की विलेयता $s \ M$ है।
$Ni(OH)_2(s) \rightleftharpoons Ni^{2+}(aq) + 2OH^-(aq)$
$K_{sp} = [Ni^{2+}][OH^-]^2$
$1.9 \times 10^{-15} = (s)(1.0 + 2s)^2$
चूंकि $s$ बहुत छोटा है,हम $(1.0 + 2s) \approx 1.0$ मान सकते हैं।
$1.9 \times 10^{-15} = s \times (1.0)^2$
$s = 1.9 \times 10^{-15} \ M$।
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एक खुरदरे नत समतल (inclined plane) पर किसी वस्तु को ऊपर की ओर ले जाने के लिए आवश्यक बल,वस्तु को नीचे फिसलने से रोकने के लिए आवश्यक बल का दोगुना है। यदि समतल का झुकाव कोण $60^{\circ}$ है,तो घर्षण गुणांक क्या है?
A
$\frac{1}{3}$
B
$\frac{1}{\sqrt{2}}$
C
$\frac{1}{\sqrt{3}}$
D
$\frac{1}{2}$

Solution

(C) माना वस्तु का द्रव्यमान $m$,झुकाव कोण $\theta$ और घर्षण गुणांक $\mu$ है।
नत समतल पर वस्तु को ऊपर ले जाने के लिए आवश्यक बल $F_{up} = mg \sin \theta + \mu mg \cos \theta$ है।
वस्तु को नीचे फिसलने से रोकने के लिए आवश्यक बल $F_{down} = mg \sin \theta - \mu mg \cos \theta$ है।
प्रश्न के अनुसार,$F_{up} = 2 F_{down}$ है।
इन व्यंजकों को रखने पर:
$mg \sin \theta + \mu mg \cos \theta = 2(mg \sin \theta - \mu mg \cos \theta)$
दोनों पक्षों को $mg$ से विभाजित करने पर:
$\sin \theta + \mu \cos \theta = 2 \sin \theta - 2 \mu \cos \theta$
$\mu$ के लिए पदों को व्यवस्थित करने पर:
$3 \mu \cos \theta = \sin \theta$
$\mu = \frac{1}{3} \tan \theta$
चूंकि $\theta = 60^{\circ}$ दिया गया है,इसलिए:
$\mu = \frac{1}{3} \tan 60^{\circ} = \frac{1}{3} \times \sqrt{3} = \frac{1}{\sqrt{3}}$.
Solution diagram
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एक खुरदरे नत समतल (inclined plane) पर किसी वस्तु को ऊपर ले जाने के लिए आवश्यक बल,वस्तु को नीचे फिसलने से रोकने के लिए आवश्यक बल का दोगुना है। जब समतल का झुकाव कोण $60^{\circ}$ है,तो घर्षण गुणांक क्या होगा?
A
$\frac{1}{3}$
B
$\frac{1}{\sqrt{2}}$
C
$\frac{1}{\sqrt{3}}$
D
$\frac{1}{2}$

Solution

(C) ऊपर की गति के लिए,आवश्यक बल $F_{up} = mg(\sin \theta + \mu \cos \theta)$ है।
नीचे की गति के लिए,फिसलने से रोकने के लिए आवश्यक बल $F_{down} = mg(\sin \theta - \mu \cos \theta)$ है।
प्रश्न के अनुसार,$F_{up} = 2 F_{down}$ है।
व्यंजकों को प्रतिस्थापित करने पर,हमें प्राप्त होता है:
$mg(\sin \theta + \mu \cos \theta) = 2 mg(\sin \theta - \mu \cos \theta)$
$\sin \theta + \mu \cos \theta = 2 \sin \theta - 2 \mu \cos \theta$
$3 \mu \cos \theta = \sin \theta$
$\mu = \frac{1}{3} \tan \theta$
चूंकि $\theta = 60^{\circ}$ दिया गया है,इसलिए $\tan 60^{\circ} = \sqrt{3}$ है।
अतः,$\mu = \frac{1}{3} \times \sqrt{3} = \frac{1}{\sqrt{3}}$.
Solution diagram
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एक लंबे तार में स्थिर धारा प्रवाहित हो रही है। इसे एक फेरे वाले वृत्ताकार लूप में मोड़ा जाता है और कुंडली के केंद्र पर चुंबकीय क्षेत्र $B$ है। यदि उसी तार को $n$ फेरों वाले वृत्ताकार लूप में मोड़ा जाए,तो कुंडली के केंद्र पर चुंबकीय क्षेत्र होगा
A
$B/n$
B
$nB$
C
$nB^2$
D
$n^2B$

Solution

(D) $n$ फेरों वाली वृत्ताकार कुंडली के केंद्र पर चुंबकीय क्षेत्र $B = \frac{\mu_0 n i}{2r}$ द्वारा दिया जाता है,जहाँ $i$ धारा है और $r$ लूप की त्रिज्या है।
मान लीजिए तार की लंबाई $L$ है। एक फेरे के लिए $(n_1 = 1)$,परिधि $2\pi r_1 = L$ है,इसलिए $r_1 = L / (2\pi)$।
चुंबकीय क्षेत्र $B = \frac{\mu_0 (1) i}{2 r_1} = \frac{\mu_0 i}{2 (L / 2\pi)} = \frac{\mu_0 i \pi}{L}$ है।
जब उसी तार को $n$ फेरों में मोड़ा जाता है $(n_2 = n)$,तो नई परिधि $2\pi r_2 = L/n$ होती है,इसलिए $r_2 = L / (2\pi n)$।
नया चुंबकीय क्षेत्र $B'$ होगा $B' = \frac{\mu_0 n i}{2 r_2} = \frac{\mu_0 n i}{2 (L / 2\pi n)} = \frac{\mu_0 n^2 i \pi}{L}$।
दोनों की तुलना करने पर,$B' = n^2 \left( \frac{\mu_0 i \pi}{L} \right) = n^2 B$ प्राप्त होता है।
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एक विद्युत आवेशित कण एक समान चुंबकीय क्षेत्र में क्षेत्र के लंबवत दिशा में $v$ वेग के साथ प्रवेश करता है। तो,वह कैसे गति करेगा?
A
बिना त्वरण के एक सीधी रेखा में
B
क्षेत्र की दिशा में बल के साथ
C
$v^2$ के सीधे आनुपातिक त्रिज्या वाले एक वृत्तापीय पथ में
D
अपने वेग के सीधे आनुपातिक त्रिज्या वाले एक वृत्तापीय पथ में

Solution

(D) जब एक आवेशित कण एक समान चुंबकीय क्षेत्र में क्षेत्र रेखाओं के लंबवत प्रवेश करता है,तो चुंबकीय लॉरेंट्ज़ बल अभिकेंद्री बल के रूप में कार्य करता है।
$F = qvB = \frac{mv^2}{r}$
इससे,वृत्तापीय पथ की त्रिज्या $r$ इस प्रकार दी जाती है:
$r = \frac{mv}{qB}$
चूंकि $m$,$q$,और $B$ स्थिरांक हैं,इसलिए $r \propto v$ होता है।
अतः,कण अपने वेग के सीधे आनुपातिक त्रिज्या वाले एक वृत्तापीय पथ में यात्रा करता है।
Solution diagram
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एक निश्चित स्थान पर,नति कोण (angle of dip) $60^{\circ}$ है और पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र का क्षैतिज घटक $(B_H)$ $0.8 \times 10^{-4} ~T$ है। पृथ्वी का कुल चुंबकीय क्षेत्र है
A
$1.5 \times 10^{-4} ~T$
B
$1.6 \times 10^{-3} ~T$
C
$1.5 \times 10^{-3} ~T$
D
$1.6 \times 10^{-4} ~T$

Solution

(D) दिया गया है:
पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र का क्षैतिज घटक,$B_H = 0.8 \times 10^{-4} ~T$
नति कोण,$\theta = 60^{\circ}$
हमें पृथ्वी का कुल चुंबकीय क्षेत्र,$B_e$ ज्ञात करना है।
कुल चुंबकीय क्षेत्र,इसके क्षैतिज घटक और नति कोण के बीच संबंध इस प्रकार है:
$B_H = B_e \cos \theta$
दिए गए मानों को प्रतिस्थापित करने पर:
$0.8 \times 10^{-4} = B_e \cos 60^{\circ}$
चूंकि $\cos 60^{\circ} = 0.5$:
$0.8 \times 10^{-4} = B_e \times 0.5$
$B_e$ के लिए हल करने पर:
$B_e = \frac{0.8 \times 10^{-4}}{0.5}$
$B_e = 1.6 \times 10^{-4} ~T$
अतः,पृथ्वी का कुल चुंबकीय क्षेत्र $1.6 \times 10^{-4} ~T$ है।
Solution diagram
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यदि $\frac{2 x^3+x^2-5}{x^4-25}=\frac{A x+B}{x^2-5}+\frac{C x+1}{x^2+5}$ है,तो $(A, B, C)$ का मान ज्ञात कीजिए।
A
$(1, 1, 1)$
B
$(1, 1, 0)$
C
$(1, 0, 1)$
D
$(1, 2, 1)$

Solution

(C) दिया गया है,$\frac{2 x^3+x^2-5}{x^4-25}=\frac{A x+B}{x^2-5}+\frac{C x+1}{x^2+5}$
चूँकि $x^4-25 = (x^2-5)(x^2+5)$,हमारे पास है:
$2 x^3+x^2-5 = (A x+B)(x^2+5) + (C x+1)(x^2-5)$
$2 x^3+x^2-5 = A x^3 + 5Ax + Bx^2 + 5B + Cx^3 - 5Cx + x^2 - 5$
$2 x^3+x^2-5 = x^3(A+C) + x^2(B+1) + x(5A-5C) + (5B-5)$
$x^3, x^2, x$ और अचर पद के गुणांकों की तुलना करने पर:
$A+C = 2$
$B+1 = 1 \Rightarrow B = 0$
$5A-5C = 0 \Rightarrow A = C$
$5B-5 = -5 \Rightarrow 5(0)-5 = -5$ (जो संगत है)
$A=C$ को $A+C=2$ में रखने पर,$2C=2$ प्राप्त होता है,इसलिए $C=1$ और $A=1$ है।
अतः,$(A, B, C) = (1, 0, 1)$।
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यदि $x_1$ और $x_2$ समीकरण $x^2-kx+c=0$ के वास्तविक मूल हैं,तो बिंदुओं $A(x_1, 0)$ और $B(x_2, 0)$ के बीच की दूरी क्या है?
A
$\sqrt{k^2+4c}$
B
$\sqrt{k^2-c}$
C
$\sqrt{c-k^2}$
D
$\sqrt{k^2-4c}$

Solution

(D) दिया गया है कि $x_1$ और $x_2$ समीकरण $x^2-kx+c=0$ के मूल हैं।
मूलों और गुणांकों के बीच संबंध से:
$x_1+x_2 = k$
$x_1x_2 = c$
बिंदुओं $A(x_1, 0)$ और $B(x_2, 0)$ के बीच की दूरी का सूत्र है:
$AB = |x_2-x_1|$
हम जानते हैं कि $(x_2-x_1)^2 = (x_1+x_2)^2 - 4x_1x_2$ होता है।
मान रखने पर:
$|x_2-x_1| = \sqrt{(x_1+x_2)^2 - 4x_1x_2}$
$|x_2-x_1| = \sqrt{k^2 - 4c}$
अतः,दूरी $\sqrt{k^2-4c}$ है।
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यदि $p$ और $q$ भिन्न अभाज्य संख्याएँ हैं और यदि समीकरण $x^2 - px + q = 0$ के मूल धनात्मक पूर्णांक हैं,तो समीकरण के मूल हैं
A
$1, -1$
B
$2, 3$
C
$1, 2$
D
$3, 1$

Solution

(C) मान लीजिए कि द्विघात समीकरण $x^2 - px + q = 0$ के मूल $\alpha$ और $\beta$ हैं।
चूंकि मूल धनात्मक पूर्णांक हैं,हमारे पास $\alpha + \beta = p$ और $\alpha \beta = q$ है।
चूंकि $q$ एक अभाज्य संख्या है,इसके केवल गुणनखंड $1$ और $q$ हैं।
अतः,मूल $1$ और $q$ होने चाहिए।
मूलों के योग के समीकरण में मान रखने पर: $1 + q = p$।
चूंकि $p$ और $q$ दोनों अभाज्य संख्याएँ हैं,$p - q = 1$ को संतुष्ट करने वाली एकमात्र क्रमिक अभाज्य संख्याएँ $p = 3$ और $q = 2$ हैं।
$p = 3$ और $q = 2$ को मूल समीकरण में रखने पर: $x^2 - 3x + 2 = 0$।
समीकरण का गुणनखंड करने पर: $(x - 1)(x - 2) = 0$।
इसलिए,मूल $1$ और $2$ हैं।
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यदि $x$ वास्तविक है,तो $y = \frac{x^2-x+1}{x^2+x+1}$ का न्यूनतम मान क्या है?
A
$3$
B
$\frac{1}{3}$
C
$1$
D
$2$

Solution

(B) माना $y = \frac{x^2-x+1}{x^2+x+1}$.
वज्र-गुणन करने पर,$y(x^2+x+1) = x^2-x+1$ प्राप्त होता है।
$(y-1)x^2 + (y+1)x + (y-1) = 0$.
चूंकि $x$ वास्तविक है,इसलिए विविक्तकर $D \geq 0$ होगा।
$D = (y+1)^2 - 4(y-1)^2 \geq 0$.
$(y+1)^2 - [2(y-1)]^2 \geq 0$.
$a^2-b^2 = (a-b)(a+b)$ का उपयोग करने पर:
$((y+1) - (2y-2))((y+1) + (2y-2)) \geq 0$.
$(-y+3)(3y-1) \geq 0$.
$(y-3)(3y-1) \leq 0$.
अतः,$\frac{1}{3} \leq y \leq 3$.
इसलिए $y$ का न्यूनतम मान $\frac{1}{3}$ है।
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$z^3+\bar{z}=0$ के लिए हलों की संख्या क्या है?
A
$5$
B
$1$
C
$2$
D
$3$

Solution

(A) दिया गया है,$z^3+\bar{z}=0$. मान लीजिए $z=x+iy$.
समीकरण में $z$ का मान रखने पर: $(x+iy)^3 + (x-iy) = 0$.
घन का विस्तार करने पर: $(x^3 - 3xy^2 + x) + i(3x^2y - y^3 - y) = 0$.
वास्तविक और काल्पनिक भागों को शून्य के बराबर रखने पर:
$1) x(x^2 - 3y^2 + 1) = 0$
$2) y(3x^2 - y^2 - 1) = 0$.
स्थिति $1$: यदि $x=0$ है,तो $-y(y^2+1)=0 \Rightarrow y=0$. अतः,$(0,0)$ एक हल है।
स्थिति $2$: यदि $y=0$ है,तो $x(x^2+1)=0 \Rightarrow x=0$. (जो पहले ही मिल चुका है)।
स्थिति $3$: यदि $x \neq 0$ और $y \neq 0$ है,तो $x^2 - 3y^2 + 1 = 0$ और $3x^2 - y^2 - 1 = 0$.
दोनों समीकरणों को जोड़ने पर: $4x^2 - 4y^2 = 0 \Rightarrow x^2 = y^2$.
$y^2 = x^2$ को $x^2 - 3y^2 + 1 = 0$ में रखने पर: $x^2 - 3x^2 + 1 = 0$ $\Rightarrow 2x^2 = 1$ $\Rightarrow x = \pm \frac{1}{\sqrt{2}}$.
चूंकि $x^2 = y^2$,इसलिए $y = \pm \frac{1}{\sqrt{2}}$.
हल $(0,0)$,$(\frac{1}{\sqrt{2}}, \frac{1}{\sqrt{2}})$,$(\frac{1}{\sqrt{2}}, -\frac{1}{\sqrt{2}})$,$(-\frac{1}{\sqrt{2}}, \frac{1}{\sqrt{2}})$,और $(-\frac{1}{\sqrt{2}}, -\frac{1}{\sqrt{2}})$ हैं।
हलों की कुल संख्या $5$ है।
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वह न्यूनतम धनात्मक पूर्णांक $n$ जिसके लिए $(1+i)^n=(1-i)^n$ है,वह है
A
$8$
B
$2$
C
$4$
D
$6$

Solution

(C) दिया गया है,$(1+i)^n=(1-i)^n$
$\Rightarrow \frac{(1+i)^n}{(1-i)^n}=1$
$\Rightarrow \left[\frac{(1+i)(1+i)}{(1-i)(1+i)}\right]^n=1$
$\Rightarrow \left[\frac{1+i^2+2i}{1-i^2}\right]^n=1$
$\Rightarrow \left[\frac{1-1+2i}{1+1}\right]^n=1$
$\Rightarrow \left(\frac{2i}{2}\right)^n=1$
$\Rightarrow i^n=1$
चूँकि $i^n=1$ के लिए सबसे छोटा धनात्मक पूर्णांक $n$,$4$ है,इसलिए $n=4$।
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जब $n$ छोटी पानी की बूंदों से एक बड़ी बूंद बनती है,तो ऊर्जा की हानि $3E$ होती है,जहाँ $E$ बड़ी बूंद की ऊर्जा है। यदि $R$ बड़ी बूंद की त्रिज्या है और $r$ छोटी बूंद की त्रिज्या है,तो छोटी बूंदों की संख्या $(n)$ क्या है?
A
$\frac{4 R}{r^2}$
B
$\frac{4 R}{r}$
C
$\frac{2 R^2}{r}$
D
$\frac{4 R^2}{r^2}$

Solution

(D) माना $T$ पानी का पृष्ठ तनाव है।
एक छोटी बूंद की पृष्ठीय ऊर्जा $U_s = 4 \pi r^2 T$ है।
$n$ छोटी बूंदों की कुल पृष्ठीय ऊर्जा $n U_s = n(4 \pi r^2 T)$ है।
बड़ी बूंद की पृष्ठीय ऊर्जा $E = 4 \pi R^2 T$ है।
ऊर्जा की हानि प्रारंभिक पृष्ठीय ऊर्जा और अंतिम पृष्ठीय ऊर्जा के बीच का अंतर है:
$\text{ऊर्जा हानि} = n(4 \pi r^2 T) - 4 \pi R^2 T = 3E$.
चूंकि $E = 4 \pi R^2 T$,इसलिए:
$n(4 \pi r^2 T) - 4 \pi R^2 T = 3(4 \pi R^2 T)$.
$n(4 \pi r^2 T) = 4(4 \pi R^2 T)$.
$n r^2 = 4 R^2$.
$n = 4 \frac{R^2}{r^2}$.
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एक व्यक्ति अपने घर से $2.5 \ km$ दूर स्थित बाजार तक $5 \ km/h$ की चाल से सीधे रास्ते पर चलता है और तुरंत वापस मुड़कर $7.5 \ km/h$ की चाल से अपने घर पहुँचता है। $0$ से $50 \ min$ के समयांतराल के दौरान व्यक्ति की औसत चाल ($m/s$ में) क्या है?
A
$4 \frac{2}{3}$
B
$\frac{5}{3}$
C
$\frac{5}{6}$
D
$\frac{1}{3}$

Solution

(B) बाजार तक पहुँचने में लगा समय: $t_1 = \frac{\text{दूरी}}{\text{चाल}} = \frac{2.5 \ km}{5 \ km/h} = 0.5 \ h = 30 \ min$.
घर वापस लौटने में लगा समय: $t_2 = \frac{\text{दूरी}}{\text{चाल}} = \frac{2.5 \ km}{7.5 \ km/h} = \frac{1}{3} \ h = 20 \ min$.
पूरी यात्रा के लिए लगा कुल समय $30 \ min + 20 \ min = 50 \ min$ है।
चूंकि दिया गया कुल समयांतराल $50 \ min$ है,इसलिए व्यक्ति पूरी यात्रा पूरी करता है।
कुल तय की गई दूरी = $2.5 \ km + 2.5 \ km = 5 \ km = 5000 \ m$.
सेकंड में कुल समय = $50 \ min \times 60 \ s/min = 3000 \ s$.
औसत चाल = $\frac{\text{कुल दूरी}}{\text{कुल समय}} = \frac{5000 \ m}{3000 \ s} = \frac{5}{3} \ m/s$.
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एक बस $v$ वेग के साथ एक समतल सड़क पर चल रही है,जिसे $F$ मंदक बल लगाकर $x$ दूरी पर रोका जा सकता है। यात्रियों के चढ़ने से बस का भार $25 \%$ बढ़ जाता है। अब,यदि बस उसी गति से चल रही है और वही मंदक बल लगाया जाता है,तो बस के रुकने से पहले तय की गई दूरी क्या होगी?
A
$1.25 x$
B
$x$
C
$5 x$
D
$2.5 x$

Solution

(A) कार्य-ऊर्जा प्रमेय या गति के समीकरण $v^2 - u^2 = 2as$ का उपयोग करते हुए,जहाँ $v = 0$ (अंतिम वेग),$u = v$ (प्रारंभिक वेग),और $a = -F/m$ (मंदक त्वरण) है।
$0^2 - v^2 = 2(-F/m)x$
$v^2 = 2Fx/m$
$x = (mv^2) / (2F)$
चूंकि $v$ और $F$ स्थिर हैं,इसलिए रुकने की दूरी $x$ बस के द्रव्यमान $m$ के सीधे आनुपातिक है $(x \propto m)$।
मान लीजिए प्रारंभिक द्रव्यमान $m_1 = m$ और प्रारंभिक दूरी $x_1 = x$ है।
$25 \%$ की वृद्धि के बाद नया द्रव्यमान $m_2 = m + 0.25m = 1.25m$ है।
आनुपातिकता $x_2 / x_1 = m_2 / m_1$ का उपयोग करते हुए:
$x_2 / x = (1.25m) / m$
$x_2 = 1.25x$.
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प्रक्षेप्य का पथ समीकरण $y = ax - bx^2$ द्वारा दिया गया है,जहाँ $a$ और $b$ स्थिरांक हैं और $x$ तथा $y$ प्रक्षेप्य बिंदु से प्रक्षेप्य की क्रमशः क्षैतिज और ऊर्ध्वाधर दूरियाँ हैं। प्रक्षेप्य द्वारा प्राप्त अधिकतम ऊँचाई और प्रक्षेप्य कोण क्रमशः क्या हैं?
A
$\frac{2a^2}{b}, \tan^{-1}(a)$
B
$\frac{b^2}{2a}, \tan^{-1}(b)$
C
$\frac{a^2}{b}, \tan^{-1}(2b)$
D
$\frac{a^2}{4b}, \tan^{-1}(a)$

Solution

(D) प्रक्षेप्य पथ का समीकरण $y = ax - bx^2$ है।
इसे प्रक्षेप्य गति के मानक समीकरण $y = x \tan \theta - \frac{gx^2}{2u^2 \cos^2 \theta}$ के साथ तुलना करने पर,हमें प्राप्त होता है:
$a = \tan \theta$ और $b = \frac{g}{2u^2 \cos^2 \theta}$।
$a = \tan \theta$ से,प्रक्षेप्य कोण $\theta = \tan^{-1}(a)$ है।
अधिकतम ऊँचाई $H$ का सूत्र $H = \frac{u^2 \sin^2 \theta}{2g}$ है।
चूँकि $\tan \theta = a$,इसलिए $\sin \theta = \frac{a}{\sqrt{1+a^2}}$ और $\cos \theta = \frac{1}{\sqrt{1+a^2}}$ है।
साथ ही,$b = \frac{g}{2u^2 \cos^2 \theta} \implies u^2 = \frac{g}{2b \cos^2 \theta}$।
$u^2$ का मान $H$ के सूत्र में रखने पर:
$H = \frac{g}{2b \cos^2 \theta} \cdot \frac{\sin^2 \theta}{2g} = \frac{\tan^2 \theta}{4b} = \frac{a^2}{4b}$।
अतः,अधिकतम ऊँचाई $\frac{a^2}{4b}$ है और प्रक्षेप्य कोण $\tan^{-1}(a)$ है।
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एक पिंड को $\theta$ कोण पर प्रक्षेपित किया जाता है ताकि उसकी परास (range) अधिकतम हो। यदि $T$ उड़ान का समय (time of flight) है,तो अधिकतम परास का मान क्या होगा? (गुरुत्वीय त्वरण $= g$)
A
$\frac{g^2 T}{2}$
B
$\frac{g T}{2}$
C
$\frac{g T^2}{2}$
D
$\frac{g^2 T^2}{2}$

Solution

(C) प्रक्षेप्य की परास का सूत्र $R = \frac{u^2 \sin 2\theta}{g}$ है।
अधिकतम परास के लिए,प्रक्षेपण कोण $\theta = 45^{\circ}$ होना चाहिए।
अतः,$R_{\max} = \frac{u^2 \sin(2 \times 45^{\circ})}{g} = \frac{u^2}{g} \quad \dots(i)$.
उड़ान का समय $T$ का सूत्र $T = \frac{2u \sin \theta}{g}$ है।
$\theta = 45^{\circ}$ रखने पर,हमें प्राप्त होता है $T = \frac{2u \sin 45^{\circ}}{g} = \frac{2u}{g \sqrt{2}} = \frac{u \sqrt{2}}{g}$।
इससे,$u = \frac{Tg}{\sqrt{2}}$ प्राप्त होता है।
$u$ का यह मान समीकरण $(i)$ में रखने पर:
$R_{\max} = \frac{1}{g} \left( \frac{Tg}{\sqrt{2}} \right)^2 = \frac{1}{g} \left( \frac{T^2 g^2}{2} \right) = \frac{g T^2}{2}$।
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यदि $125$ द्रव्यमान संख्या वाले नाभिक की त्रिज्या $1.5 \text{ fermi}$ है,तो $64$ द्रव्यमान संख्या वाले नाभिक की त्रिज्या क्या होगी ($text{ fermi}$ में)?
A
$0.48$
B
$0.96$
C
$1.92$
D
$1.2$

Solution

(D) नाभिक की त्रिज्या का सूत्र $R = R_0 A^{1/3}$ होता है,जहाँ $R_0$ एक स्थिरांक है और $A$ द्रव्यमान संख्या है।
दिया गया है:
$R_1 = 1.5 \text{ fermi}$,$A_1 = 125$
$A_2 = 64$
हमें $R_2$ ज्ञात करना है।
त्रिज्याओं का अनुपात लेने पर:
$\frac{R_1}{R_2} = \left(\frac{A_1}{A_2}\right)^{1/3}$
मान रखने पर:
$\frac{1.5}{R_2} = \left(\frac{125}{64}\right)^{1/3}$
$\frac{1.5}{R_2} = \frac{5}{4}$
$R_2 = \frac{1.5 \times 4}{5} = 0.3 \times 4 = 1.2 \text{ fermi}$.
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निम्नलिखित अभिक्रियाओं में $X$ और $Y$ क्या हैं?
$CH_2O \xrightarrow[(ii) H_3O^+]{(i) X} CH_3(CH_2)_2CH_2OH$
$Y \xrightarrow[(ii) H_3O^+]{(i) C_2H_5MgBr} CH_3CH_2C(CH_3)_2OH$
A
$X = CH_3-CH(CH_3)-MgBr, Y = C_2H_5COCH_3$
B
$X = CH_3CH_2CH_2MgBr, Y = CH_3-CO-CH_3$
C
$X = CH_3-CH_2-MgBr, Y = CH_3CH_2CHO$
D
$X = (CH_3)_3CMgBr, Y = CH_3-CO-CH_3$

Solution

(B) पहली अभिक्रिया के लिए:
$CH_2O$ (फॉर्मेल्डिहाइड) एक ग्रिग्नार्ड अभिकर्मक $(RMgBr)$ के साथ अभिक्रिया करके और उसके बाद जल-अपघटन द्वारा प्राथमिक अल्कोहल बनाता है। उत्पाद $CH_3CH_2CH_2CH_2OH$ (ब्यूटेन$-1-$ऑल) है। ग्रिग्नार्ड अभिकर्मक $CH_3CH_2CH_2MgBr$ (प्रोपाइल मैग्नीशियम ब्रोमाइड) होना चाहिए।
दूसरी अभिक्रिया के लिए:
$Y$,$C_2H_5MgBr$ के साथ अभिक्रिया करके और उसके बाद जल-अपघटन द्वारा $CH_3CH_2C(CH_3)_2OH$ ($2$-मिथाइल ब्यूटेन$-2-$ऑल) बनाता है। यह एक तृतीयक अल्कोहल है। कीटोन की ग्रिग्नार्ड अभिकर्मक के साथ अभिक्रिया से तृतीयक अल्कोहल प्राप्त होता है। संरचना की तुलना करने पर,$Y$ को $CH_3COCH_3$ (एसीटोन या प्रोपेनोन) होना चाहिए।
अतः,$X = CH_3CH_2CH_2MgBr$ और $Y = CH_3COCH_3$।
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निम्नलिखित अभिक्रिया में $X$ और $Y$ की पहचान कीजिए:
$X \xrightarrow{Y} \text{Benzoquinone}$
A
$X = \text{Cyclohexanol}, Y = \text{Zn}$
B
$X = \text{Phenol}, Y = Na_2Cr_2O_7 / H_2SO_4$
C
$X = \text{Cyclohex-2-en-1-ol}, Y = Na_2Cr_2O_7 / H_2SO_4$
D
$X = \text{Phenol}, Y = \text{Zn}$

Solution

(B) क्रोमिक एसिड ($H_2SO_4$ की उपस्थिति में $Na_2Cr_2O_7$) के साथ फिनोल का ऑक्सीकरण $p$-बेंजोक्विनोन देता है।
अतः,$X$ फिनोल है और $Y$ $Na_2Cr_2O_7 / H_2SO_4$ है।
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Etard अभिक्रिया $(I)$ और Stephen अभिक्रिया $(II)$ में उपयोग किए जाने वाले अभिकर्मक हैं:
A
$PCC$ और $SnCl_2 / HCl$
B
$SnCl_2 / HCl$ और $CrO_2Cl_2$
C
$CrO_2Cl_2$ और $SnCl_2 / HCl$
D
$CrO_2Cl_2$ और $PCC$

Solution

(C) Etard अभिक्रिया $(I)$ में $CCl_4$ विलायक की उपस्थिति में क्रोमिल क्लोराइड $(CrO_2Cl_2)$ का उपयोग करके टोल्यूनि का बेंजाल्डिहाइड में ऑक्सीकरण किया जाता है। यह अभिक्रिया एक भूरे रंग के क्रोमियम संकुल के निर्माण के माध्यम से आगे बढ़ती है,जिसका बाद में जल-अपघटन करने पर बेंजाल्डिहाइड प्राप्त होता है।
Stephen अभिक्रिया $(II)$ में नाइट्राइल्स $(R-CN)$ का हाइड्रोक्लोरिक एसिड $(HCl)$ की उपस्थिति में स्टेनस क्लोराइड $(SnCl_2)$ द्वारा अपचयन किया जाता है,जिसके बाद जल-अपघटन करने पर संबंधित एल्डिहाइड $(R-CHO)$ प्राप्त होता है।
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निम्नलिखित अभिक्रिया अनुक्रम में उत्पादों $y$ और $x$ की पहचान करें:
$C_6H_5CONH_2 \xrightarrow{NaOBr} y$
$C_6H_5CONH_2 \xrightarrow[(ii) H_3O^+]{(i) C_6H_5SO_2Cl / py, \Delta} x$
A
y = $C_6H_5COOH$,x = $p-Br-C_6H_4NH_2$
B
y = $C_6H_5COOH$,x = $C_6H_5NH_2$
C
y = $C_6H_5NH_2$,x = $C_6H_5NH_2$
D
y = $C_6H_5NH_2$,x = $p-Br-C_6H_4NH_2$

Solution

(C) $1$. अभिक्रिया $C_6H_5CONH_2 \xrightarrow{NaOBr} y$ हॉफमैन ब्रोमामाइड निम्नीकरण अभिक्रिया है,जो एमाइड को एक कार्बन कम वाले प्राथमिक एमीन में परिवर्तित करती है। अतः,$y$ एनिलीन $(C_6H_5NH_2)$ है।
$2$. अभिक्रिया $C_6H_5CONH_2 \xrightarrow[(ii) H_3O^+]{(i) C_6H_5SO_2Cl / py, \Delta} x$ में पिरीडीन की उपस्थिति में बेंजामाइड की बेंजीन सल्फोनाइल क्लोराइड के साथ अभिक्रिया होती है,जिसके बाद गर्म किया जाता है और अम्लीय जल-अपघटन होता है। यह अनुक्रम एनिलीन $(C_6H_5NH_2)$ बनाता है।
$3$. इसलिए,$y$ और $x$ दोनों एनिलीन $(C_6H_5NH_2)$ हैं। सही विकल्प $(C)$ है।
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स्तंभ $I$ में दिए गए संकरण का स्तंभ $II$ में दिए गए संबंधित समन्वय परिसरों के साथ मिलान करें।
$A. sp^3$$(i). [Co(NH_3)_6]^{3+}$
$B. dsp^2$$(ii). [Ni(CO)_4]$
$C. sp^3d^2$$(iii). [Pt(NH_3)_2Cl_2]$
$D. d^2sp^3$$(iv). [CoF_6]^{3-}$
$(v). [Fe(CO)_5]$
A
$A-(ii), B-(iii), C-(iv), D-(i)$
B
$A-(ii), B-(iii), C-(v), D-(i)$
C
$A-(ii), B-(iii), C-(i), D-(iv)$
D
$A-(iii), B-(ii), C-(iv), D-(i)$

Solution

(A) दिए गए परिसरों का संकरण इस प्रकार निर्धारित किया जाता है:
$A. sp^3$: $[Ni(CO)_4]$ एक चतुष्फलकीय परिसर है जिसमें $sp^3$ संकरण होता है। अतः,$A-(ii)$.
$B. dsp^2$: $[Pt(NH_3)_2Cl_2]$ एक वर्ग समतलीय परिसर है जिसमें $dsp^2$ संकरण होता है। अतः,$B-(iii)$.
$C. sp^3d^2$: $[CoF_6]^{3-}$ एक बाह्य कक्षक अष्टफलकीय परिसर है जिसमें $sp^3d^2$ संकरण होता है। अतः,$C-(iv)$.
$D. d^2sp^3$: $[Co(NH_3)_6]^{3+}$ एक आंतरिक कक्षक अष्टफलकीय परिसर है जिसमें $d^2sp^3$ संकरण होता है। अतः,$D-(i)$.
इसलिए,सही मिलान $A-(ii), B-(iii), C-(iv), D-(i)$ है।
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निम्नलिखित में से को-पॉलिमर (सह-बहुलक) की पहचान कीजिए।
A
$[-CH_2-CH=CH-CH_2-CH(C_6H_5)-CH_2-]_n$
B
$[-CF_2-CF_2-]_n$
C
$[-CH_2-C(Cl)=CH-CH_2-]_n$
D
$[-CH_2-CH(Cl)-]_n$

Solution

(A) को-पॉलिमर वह बहुलक है जो दो या दो से अधिक विभिन्न प्रकार की मोनोमर इकाइयों से बनता है।
$1$. विकल्प $A$ ब्यूना-$S$ (स्टाइरीन-ब्यूटाडाइन रबर) को दर्शाता है,जो $1,3$-ब्यूटाडाइन और स्टाइरीन के को-पॉलिमराइजेशन द्वारा बनता है।
$2$. विकल्प $B$ पॉलीटेट्राफ्लुओरोएथिलीन (टेफ्लॉन) को दर्शाता है,जो टेट्राफ्लुओरोएथीन का होमोपॉलिमर है।
$3$. विकल्प $C$ पॉलीक्लोरोप्रीन (नियोप्रीन) को दर्शाता है,जो क्लोरोप्रीन का होमोपॉलिमर है।
$4$. विकल्प $D$ पॉलीविनाइल क्लोराइड $(PVC)$ को दर्शाता है,जो विनाइल क्लोराइड का होमोपॉलिमर है।
अतः,को-पॉलिमर विकल्प $A$ में दर्शाया गया है।
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अभिक्रिया इस प्रकार दी गई है: $X \xrightarrow{Y} \text{Benzoquinone}$. उपरोक्त अभिक्रिया में $X$ और $Y$ की पहचान कीजिए।
A
$X = \text{Cyclohexanol}, Y = \text{Zn}$
B
$X = \text{Phenol}, Y = Na_2Cr_2O_7 / H_2SO_4$
C
$X = \text{Cyclohex-2-en-1-ol}, Y = Na_2Cr_2O_7 / H_2SO_4$
D
$X = \text{Phenol}, Y = \text{Zn}$

Solution

(B) क्रोमिक अम्ल $(Na_2Cr_2O_7 / H_2SO_4)$ के साथ फिनोल का ऑक्सीकरण करने पर उत्पाद के रूप में $p$-बेंजोक्विनोन प्राप्त होता है।
अतः,$X$ फिनोल है और $Y$ $Na_2Cr_2O_7 / H_2SO_4$ है।
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निम्नलिखित अभिक्रिया में उत्पादों $Y$ और $Z$ की पहचान करें:
$C_6H_5-O-CH_2CH_3 \xrightarrow[\Delta]{HI} Y + Z$
A
$C_6H_5OH$ और $CH_3CH_3$
B
$C_2H_5I$ और $C_6H_5CHO$
C
$C_6H_5I$ और $CH_3CH_2OH$
D
$C_6H_5OH$ और $CH_3CH_2I$

Solution

(D) एल्किल एरील ईथर की $HI$ के साथ अभिक्रिया में $O-alkyl$ बंध का विदलन होता है।
ऐसा इसलिए होता है क्योंकि अनुनाद के कारण $O-aryl$ बंध में आंशिक द्वि-बंध गुण होता है,जो इसे मजबूत और तोड़ने में कठिन बनाता है।
इसलिए,ईथर $C_6H_5-O-CH_2CH_3$,$HI$ के साथ अभिक्रिया करके फिनोल $(C_6H_5OH)$ और एथिल आयोडाइड $(CH_3CH_2I)$ बनाता है।
अतः,सही विकल्प $D$ है।
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निम्नलिखित अभिक्रिया अनुक्रम में अंतिम उत्पाद $Z$ की पहचान करें:
A
$3$-नाइट्रोबेंजोइक एसिड
B
$3$-क्लोरोबेंजोइक एसिड
C
$3$-अमीनोबेंजोइक एसिड
D
$3$-क्लोरोबेंज़ोयल क्लोराइड

Solution

(B) $1$. बेंजोइक एसिड सांद्र $HNO_3$ और सांद्र $H_2SO_4$ के साथ अभिक्रिया (नाइट्रेशन) करके $m$-नाइट्रोबेंजोइक एसिड $(X)$ बनाता है।
$2$. $Sn/HCl$ के साथ $m$-नाइट्रोबेंजोइक एसिड $(X)$ का अपचयन $-NO_2$ समूह को $-NH_2$ समूह में परिवर्तित कर देता है,जिससे $m$-अमीनोबेंजोइक एसिड $(Y)$ बनता है।
$3$. $m$-अमीनोबेंजोइक एसिड $(Y)$,$0-5 \ ^\circ C$ पर $NaNO_2/HCl$ के साथ अभिक्रिया करके डायज़ोनियम लवण बनाता है,जो फिर $Cu_2Cl_2/HCl$ के साथ अभिक्रिया (सैंडमेयर अभिक्रिया) करके डायज़ोनियम समूह को क्लोरीन परमाणु द्वारा प्रतिस्थापित कर देता है,जिसके परिणामस्वरूप $m$-क्लोरोबेंजोइक एसिड $(Z)$ प्राप्त होता है।
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निम्नलिखित अभिक्रिया अनुक्रम में $Z$ क्या है?
$C_6H_5NH_2$ $\xrightarrow[(i) NaNO_2 + HCl / 273 \ K]{(ii) H_3PO_2 + H_2O}$ $\xrightarrow[(iii) CO, HCl, \text{anhydrous } AlCl_3/CuCl]{} Z$
A
$C_6H_5CO_2H$
B
$C_6H_5OH$
C
$C_6H_5CHO$
D
$C_6H_6$

Solution

(C) चरण $1$: एनीलिन $(C_6H_5NH_2)$ $273 \ K$ पर $NaNO_2 + HCl$ के साथ अभिक्रिया करके बेंजीन डायज़ोनियम क्लोराइड $(C_6H_5N_2^+Cl^-)$ बनाता है।
चरण $2$: बेंजीन डायज़ोनियम क्लोराइड $H_3PO_2 + H_2O$ के साथ अभिक्रिया करके बेंजीन $(C_6H_6)$ बनाता है।
चरण $3$: बेंजीन निर्जल $AlCl_3/CuCl$ की उपस्थिति में $CO + HCl$ के साथ अभिक्रिया करके (गाटरमैन-कोच अभिक्रिया) बेंज़ल्डिहाइड $(C_6H_5CHO)$ बनाता है।
अतः,$Z$ का मान $C_6H_5CHO$ है।
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लैक्टोज किसका डाइसैकेराइड है?
A
$\alpha-D$-ग्लूकोज और $\alpha-D$-फ्रुक्टोज
B
$\beta-D$-ग्लूकोज और $\beta-D$-गैलेक्टोज
C
$\alpha-D$-ग्लूकोज और $\beta-D$-राइबोज
D
$\alpha-D$-ग्लूकोज और $\beta-D$-गैलेक्टोज

Solution

(B) लैक्टोज $\beta-D(+)$-गैलेक्टोज और $\beta-D(+)$-ग्लूकोज इकाइयों से बना एक डाइसैकेराइड है।
ये दो मोनोसैकेराइड $\beta-1,4$-ग्लाइकोसिडिक लिंकेज द्वारा जुड़े होते हैं।
यह एक अपचायी (reducing) शर्करा है क्योंकि ग्लूकोज इकाई के $C-1$ पर हेमीऐसीटल समूह मुक्त होता है।
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$CH_3MgBr + CO_2$ $\xrightarrow{\text{Dry ether}} Y$ $\xrightarrow{H_3O^{\oplus}} Z$
निम्नलिखित में से $Z$ की पहचान कीजिए।
A
एथिल एसीटेट
B
एसीटिक अम्ल
C
प्रोपेनोइक अम्ल
D
मेथिल एसीटेट

Solution

(B) शुष्क ईथर की उपस्थिति में ग्रिग्नार्ड अभिकर्मक $(CH_3MgBr)$ की कार्बन डाइऑक्साइड $(CO_2)$ के साथ अभिक्रिया से एक मध्यवर्ती मैग्नीशियम कार्बोक्सिलेट संकुल $(Y = CH_3COOMgBr)$ बनता है।
इसके बाद अम्लीय जल-अपघटन $(H_3O^{\oplus})$ करने पर यह कार्बोक्सिलिक अम्ल प्रदान करता है।
चूंकि प्रयुक्त ग्रिग्नार्ड अभिकर्मक मेथिल मैग्नीशियम ब्रोमाइड $(CH_3MgBr)$ है,इसलिए प्राप्त कार्बोक्सिलिक अम्ल एसीटिक अम्ल $(CH_3COOH)$ है।
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$XeOF_4$ की संरचना है
A
त्रिकोणीय द्विपिरामिडीय
B
वर्ग समतलीय
C
वर्ग पिरामिडीय
D
पिरामिडीय

Solution

(C) $XeOF_4$ में,केंद्रीय परमाणु $Xe$ के पास $8$ संयोजी इलेक्ट्रॉन होते हैं।
यह $F$ परमाणुओं के साथ $4$ एकल बंध और $O$ परमाणु के साथ $1$ द्वि-बंध बनाता है।
यह $6$ इलेक्ट्रॉनों का उपयोग करता है,जिससे $2$ इलेक्ट्रॉन एक एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म (lone pair) के रूप में बच जाते हैं।
इलेक्ट्रॉन युग्मों की कुल संख्या $5 + 1 = 6$ है (जिसमें $5$ आबंधी युग्म और $1$ एकाकी युग्म है),जो $sp^3d^2$ संकरण को दर्शाता है।
एक एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म की उपस्थिति के कारण,इसकी ज्यामिति वर्ग पिरामिडीय होती है।
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एक प्रथम कोटि की अभिक्रिया में,अभिकारक की सांद्रता $15 \ min$ में $0.6 \ M$ से घटकर $0.3 \ M$ हो जाती है। सांद्रता को $0.1 \ M$ से $0.025 \ M$ तक बदलने में लगा समय (मिनट में) है
A
$1.2$
B
$12$
C
$30$
D
$3$

Solution

(C) चूंकि अभिकारक की सांद्रता $15 \ min$ में $0.6 \ M$ से $0.3 \ M$ (अर्थात आधी) हो जाती है,इसलिए इस अभिक्रिया के लिए अर्ध-आयु $(t_{1/2})$ $15 \ min$ है।
प्रथम कोटि की अभिक्रिया के लिए,सांद्रता प्रत्येक क्रमिक अर्ध-आयु अंतराल में आधी हो जाती है।
$0.1 \ M$ से शुरू करने पर:
$0.1 \ M$ $\xrightarrow{15 \ min} 0.05 \ M$ $\xrightarrow{15 \ min} 0.025 \ M$।
कुल समय $= 15 \ min + 15 \ min = 30 \ min$।
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$[AlCl(H_2O)_5]^{2+}$ में $Al$ की ऑक्सीकरण अवस्था और सहसंयोजकता क्रमशः क्या है?
A
$+6, 6$
B
$+3, 6$
C
$+2, 6$
D
$+3, 3$

Solution

(B) संकुल $[AlCl(H_2O)_5]^{2+}$ के लिए:
मान लीजिए $Al$ की ऑक्सीकरण अवस्था $x$ है।
$x + (-1) + 5(0) = +2$
$x = +3$
सहसंयोजकता (समन्वय संख्या) केंद्रीय धातु परमाणु से जुड़े लिगेंड्स की कुल संख्या होती है।
यहाँ,$1$ $Cl^-$ आयन और $5$ $H_2O$ अणु जुड़े हुए हैं।
कुल सहसंयोजकता $= 1 + 5 = 6$
अतः,ऑक्सीकरण अवस्था $+3$ है और सहसंयोजकता $6$ है।
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कॉलम $I$ में दिए गए संकरण को कॉलम $II$ में दिए गए संकुलों के साथ सुमेलित कीजिए। विकल्प क्रमशः $(A), (B), (C), (D)$ के लिए सही मिलान दर्शाते हैं।
कॉलम $I$कॉलम $II$
$(A)$ $sp^3$$(i)$ $[Co(NH_3)_6]^{3+}$
$(B)$ $dsp^2$$(ii)$ $[Ni(CO)_4]$
$(C)$ $sp^3d^2$$(iii)$ $[Pt(NH_3)_2Cl_2]$
$(D)$ $d^2sp^3$$(iv)$ $[CoF_6]^{3-}$
$(v)$ $[Fe(CO)_5]$
A
$(ii), (iii), (iv), (i)$
B
$(ii), (iii), (i), (iv)$
C
$(i), (ii), (iii), (iv)$
D
$(iv), (iii), (ii), (i)$

Solution

(A) सही मिलान इस प्रकार हैं:
$(A)$ $[Ni(CO)_4]$ में $sp^3$ संकरण होता है (चतुष्फलकीय ज्यामिति)।
$(B)$ $[Pt(NH_3)_2Cl_2]$ में $dsp^2$ संकरण होता है (वर्ग समतलीय ज्यामिति)।
$(C)$ $[CoF_6]^{3-}$ में $sp^3d^2$ संकरण होता है (बाह्य कक्षक संकुल)।
$(D)$ $[Co(NH_3)_6]^{3+}$ में $d^2sp^3$ संकरण होता है (आंतरिक कक्षक संकुल)।
अतः,सही क्रम $(ii), (iii), (iv), (i)$ है।
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निम्नलिखित में से किस आयन में अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की संख्या $V^{3+}$ आयन में उपस्थित इलेक्ट्रॉनों की संख्या के समान है?
A
$Fe^{3+}$
B
$Ni^{2+}$
C
$Mn^{2+}$
D
$Cr^{3+}$

Solution

(B) वैनेडियम ($V$,$Z=23$) का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास $[Ar] 3d^3 4s^2$ है।
$V^{3+}$ के लिए,विन्यास $[Ar] 3d^2 4s^0$ है,जिसमें $2$ अयुग्मित इलेक्ट्रॉन हैं।
अब,विकल्पों की जाँच करते हैं:
$Fe^{3+}$ $(Z=26)$: $[Ar] 3d^5$,जिसमें $5$ अयुग्मित इलेक्ट्रॉन हैं।
$Ni^{2+}$ $(Z=28)$: $[Ar] 3d^8$,जिसमें $2$ अयुग्मित इलेक्ट्रॉन हैं।
$Mn^{2+}$ $(Z=25)$: $[Ar] 3d^5$,जिसमें $5$ अयुग्मित इलेक्ट्रॉन हैं।
$Cr^{3+}$ $(Z=24)$: $[Ar] 3d^3$,जिसमें $3$ अयुग्मित इलेक्ट्रॉन हैं।
अतः,$Ni^{2+}$ में $V^{3+}$ के समान ही अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की संख्या है।
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$298 \ K$ पर $NH_4Cl, KOH$ और $KCl$ की अनंत तनुता पर मोलर चालकता $(\Lambda_m^{\circ})$ क्रमशः $152.8, 272.6$ और $149.8 \ S \ cm^2 \ mol^{-1}$ है। समान तापमान पर $NH_4OH$ की $\Lambda_m^{\circ}$ ($S \ cm^2 \ mol^{-1}$ में) और $0.01 \ M \ NH_4OH$ (जिसकी $\Lambda_m = 25.1 \ S \ cm^2 \ mol^{-1}$ है) के लिए $\%$ वियोजन क्या होगा?
A
$275.6, 0.91$
B
$275.6, 9.1$
C
$266.6, 9.6$
D
$30, 84$

Solution

(B) कोलरॉश के स्वतंत्र आयन अभिगमन के नियम के अनुसार:
$\Lambda_m^{\circ}(NH_4OH) = \Lambda_m^{\circ}(NH_4Cl) + \Lambda_m^{\circ}(KOH) - \Lambda_m^{\circ}(KCl)$
$= 152.8 + 272.6 - 149.8 = 275.6 \ S \ cm^2 \ mol^{-1}$
वियोजन की मात्रा $(\alpha)$ इस प्रकार है:
$\alpha = \frac{\Lambda_m}{\Lambda_m^{\circ}} = \frac{25.1}{275.6} \approx 0.091$
प्रतिशत वियोजन $= \alpha \times 100 = 0.091 \times 100 = 9.1 \%$
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निम्नलिखित में से कौन सा $S_{N}1$ तंत्र द्वारा अधिक आसानी से जल-अपघटित (hydrolysed) होता है?
A
$(C_6H_5)_2C(CH_3)Br$
B
$C_6H_5CH_2Br$
C
$C_6H_5CH(CH_3)Br$
D
$(C_6H_5)_2CHBr$

Solution

(A) $S_{N}1$ अभिक्रिया की दर लिविंग ग्रुप के निकलने के बाद बनने वाले कार्बोनियम आयन (carbocation) मध्यवर्ती के स्थायित्व पर निर्भर करती है।
कार्बोकेशन जितना अधिक स्थिर होगा,जल-अपघटन उतना ही तेज होगा।
दिए गए हैलाइड्स से बनने वाले कार्बोकेशन की तुलना:
$(a)$ $(C_6H_5)_2C^+(CH_3)$ एक तृतीयक बेंजिलिक कार्बोकेशन है जो दो फेनिल रिंग और एक मिथाइल समूह द्वारा स्थिर होता है।
$(b)$ $C_6H_5CH_2^+$ एक प्राथमिक बेंजिलिक कार्बोकेशन है।
$(c)$ $C_6H_5CH^+(CH_3)$ एक द्वितीयक बेंजिलिक कार्बोकेशन है।
$(d)$ $(C_6H_5)_2CH^+$ दो फेनिल रिंग द्वारा स्थिर द्वितीयक बेंजिलिक कार्बोकेशन है।
अधिकतम अनुनाद (resonance) स्थायित्व और प्रेरणिक प्रभाव (inductive effect) के कारण तृतीयक बेंजिलिक कार्बोकेशन $(C_6H_5)_2C^+(CH_3)$ दिए गए विकल्पों में सबसे अधिक स्थिर है।
इसलिए,$(C_6H_5)_2C(CH_3)Br$ का $S_{N}1$ तंत्र द्वारा जल-अपघटन सबसे आसानी से होता है।
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हेमेटाइट अयस्क से लोहे के निष्कर्षण के दौरान चूना पत्थर (limestone) की भूमिका क्या है?
A
लीचिंग एजेंट
B
ऑक्सीकरण एजेंट
C
अपचायक (Reducing agent)
D
फ्लक्स (Flux)

Solution

(D) हेमेटाइट अयस्क $(Fe_2O_3)$ से लोहे के निष्कर्षण के दौरान,भुने हुए अयस्क को कोक और चूना पत्थर के साथ मिलाकर ब्लास्ट फर्नेस में गर्म किया जाता है।
कोक लोहे के ऑक्साइड को धात्विक लोहे में अपचयित करने के लिए एक अपचायक के रूप में कार्य करता है।
चूना पत्थर $(CaCO_3)$ विघटित होकर कैल्शियम ऑक्साइड $(CaO)$ बनाता है,जो फ्लक्स के रूप में कार्य करता है।
यह फ्लक्स अयस्क में मौजूद सिलिका $(SiO_2)$ जैसी अम्लीय अशुद्धियों के साथ प्रतिक्रिया करके कैल्शियम सिलिकेट $(CaSiO_3)$ बनाता है,जिसे धातुमल (slag) कहा जाता है।
इसलिए,चूना पत्थर की भूमिका फ्लक्स के रूप में कार्य करना है।
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निम्नलिखित में से कौन सा तत्व जर्मेनियम के साथ डोपिंग करने पर इसे $p$-प्रकार का अर्धचालक (semiconductor) बनाता है?
A
$Bi$
B
$Sb$
C
$As$
D
$Ga$

Solution

(D) जर्मेनियम $(Ge)$ आवर्त सारणी के समूह $14$ का तत्व है।
$p$-प्रकार का अर्धचालक बनाने के लिए,हमें इसे समूह $13$ के तत्व के साथ डोप करना होगा,जिसमें $Ge$ की तुलना में एक संयोजी इलेक्ट्रॉन कम होता है।
यह एक इलेक्ट्रॉन-न्यून बंध या 'होल' बनाता है,जो धनात्मक आवेश वाहक के रूप में कार्य करता है।
दिए गए विकल्पों में से,$Bi$,$Sb$ और $As$ समूह $15$ के तत्व हैं (जो $n$-प्रकार का अर्धचालक बनाएंगे),जबकि $Ga$ समूह $13$ का तत्व है।
इसलिए,$Ge$ को $Ga$ के साथ डोप करने पर $p$-प्रकार का अर्धचालक प्राप्त होता है।
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निम्नलिखित में से को-पॉलिमर (सह-बहुलक) की पहचान कीजिए।
A
$[CH_2-CH=CH-CH_2-CH(C_6H_5)-CH_2]_n$
B
$[CF_2-CF_2]_n$
C
$[CH_2-C(Cl)=CH-CH_2]_n$
D
$[CH_2-CH(Cl)]_n$

Solution

(A) को-पॉलिमर वह बहुलक है जो दो या दो से अधिक विभिन्न प्रकार की मोनोमर इकाइयों से बनता है।
विकल्प $A$ ब्यूना-$S$ (स्टाइरीन-ब्यूटाडाईन रबर) को दर्शाता है,जो $1,3$-ब्यूटाडाईन $(CH_2=CH-CH=CH_2)$ और स्टाइरीन $(C_6H_5CH=CH_2)$ के को-पॉलिमराइजेशन द्वारा बनता है।
विकल्प $B$,$C$,और $D$ होमोपॉलिमर (समबहुलक) को दर्शाते हैं:
$B$ पॉलीटेट्राफ्लुओरोएथीन (टेफ्लॉन) है,
$C$ पॉलीक्लोरोप्रीन (नियोप्रीन) है,
$D$ पॉलीविनाइल क्लोराइड $(PVC)$ है।
अतः,सही उत्तर $A$ है।
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$25^{\circ} C$ पर $180 \ g$ जल में $0.1 \ mole$ यूरिया का वाष्प दाब ($mm \ Hg$ में) क्या होगा? ($25^{\circ} C$ पर जल का वाष्प दाब $24 \ mm \ Hg$ है।)
A
$2.376$
B
$20.76$
C
$23.76$
D
$24.76$

Solution

(C) अवाष्पशील विलेय युक्त विलयन के लिए राउल्ट के नियम के अनुसार:
$\frac{p^{\circ} - p_s}{p^{\circ}} = \frac{n_2}{n_1 + n_2} \approx \frac{n_2}{n_1}$
दिया गया है:
$n_2$ (यूरिया के मोल) $= 0.1 \ mol$
$W_1$ (जल का द्रव्यमान) $= 180 \ g$
$M_1$ (जल का मोलर द्रव्यमान) $= 18 \ g/mol$
$n_1$ (जल के मोल) $= \frac{180}{18} = 10 \ mol$
$p^{\circ}$ (शुद्ध जल का वाष्प दाब) $= 24 \ mm \ Hg$
मान रखने पर:
$\frac{24 - p_s}{24} = \frac{0.1}{10} = 0.01$
$24 - p_s = 24 \times 0.01 = 0.24$
$p_s = 24 - 0.24 = 23.76 \ mm \ Hg$
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विलेय $X$ का मोलर द्रव्यमान $g \ mol^{-1}$ में क्या होगा,यदि इसका $1 \%$ विलयन केन शुगर (मोलर द्रव्यमान $= 342 \ g \ mol^{-1}$) के $5 \%$ विलयन के साथ आइसोटोनिक है?
A
$68.4$
B
$34.2$
C
$136.2$
D
$171.2$

Solution

(A) आइसोटोनिक विलयनों के लिए,परासरण दाब समान होता है,इसलिए मोलर सांद्रता समान होती है: $\frac{W_1}{M_1 V_1} = \frac{W_2}{M_2 V_2}$.
दिया गया है कि विलयन $1 \%$ और $5 \%$ हैं,इसलिए हम $100 \ mL$ विलयन में $1 \ g$ विलेय $X$ और $100 \ mL$ विलयन में $5 \ g$ केन शुगर मान सकते हैं।
यहाँ,$W_1 = 1 \ g$,$W_2 = 5 \ g$,$M_2 = 342 \ g \ mol^{-1}$,और $V_1 = V_2 = 100 \ mL$.
मान रखने पर: $\frac{1}{M_1 \times 100} = \frac{5}{342 \times 100}$.
$M_1 = \frac{342}{5} = 68.4 \ g \ mol^{-1}$.
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कथन $(A)$: वान डर वाल्स बल केमिसॉर्प्शन (रासायनिक अधिशोषण) के लिए जिम्मेदार हैं।
कारण $(R)$: उच्च तापमान केमिसॉर्प्शन के लिए अनुकूल है।
सही उत्तर है
A
$(A)$ गलत है, लेकिन $(R)$ सही है
B
$(A)$ और $(R)$ दोनों सही हैं और $(R)$, $(A)$ की सही व्याख्या है
C
$(A)$ और $(R)$ दोनों सही हैं और $(R)$, $(A)$ की सही व्याख्या नहीं है
D
$(A)$ सही है, लेकिन $(R)$ गलत है

Solution

$(A)$ वान डर वाल्स बल भौतिक अधिशोषण (physisorption) के लिए जिम्मेदार होते हैं, न कि रासायनिक अधिशोषण (chemisorption) के लिए।
रासायनिक अधिशोषण में अधिशोष्य और अधिशोषक के बीच रासायनिक बंधों का निर्माण होता है।
इसलिए, कथन $(A)$ गलत है।
रासायनिक अधिशोषण एक सक्रिय प्रक्रिया है और इसके लिए सामान्यतः उच्च सक्रियण ऊर्जा की आवश्यकता होती है।
अतः, उच्च तापमान रासायनिक अधिशोषण के लिए अनुकूल होता है क्योंकि यह सक्रियण ऊर्जा अवरोध को पार करने में मदद करता है।
इसलिए, कारण $(R)$ सही है।
अतः, सही विकल्प $(A)$ गलत है, लेकिन $(R)$ सही है।
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वे पदार्थ कौन से हैं जो प्राकृतिक रासायनिक संदेशवाहकों की नकल करते हैं?
A
एंटीबायोटिक्स
B
एंटागोनिस्ट्स
C
एगोनिस्ट्स
D
रिसेप्टर्स

Solution

(C) एगोनिस्ट एक रासायनिक पदार्थ है जो रिसेप्टर से जुड़ता है और जैविक प्रतिक्रिया उत्पन्न करने के लिए इसे सक्रिय करता है। \\ यह समान रिसेप्टर साइटों से जुड़कर प्राकृतिक रासायनिक संदेशवाहकों की क्रिया की नकल करता है।

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