TS EAMCET 2020 Chemistry Question Paper with Answer and Solution in Hindi

358 QuestionsHindiWith Solutions

ChemistryQ1100 of 358 questions

Page 1 of 4 · Hindi

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ChemistryMCQTS EAMCET · 2020
एक व्यक्ति $30\, m$ उत्तर की ओर,फिर $20\, m$ पूर्व की ओर और अंत में $30\sqrt{2}\, m$ दक्षिण-पश्चिम दिशा में चलता है। मूल बिंदु से व्यक्ति का विस्थापन होगा
A
$10\, m$ उत्तर की ओर
B
$10\, m$ दक्षिण की ओर
C
$10\, m$ पश्चिम की ओर
D
$\text{शून्य}$

Solution

(C) मान लीजिए मूल बिंदु $O(0, 0)$ है।
$1$. व्यक्ति $30\, m$ उत्तर की ओर चलता है: $\vec{OA} = 30\hat{j}$.
$2$. फिर $20\, m$ पूर्व की ओर चलता है: $\vec{AB} = 20\hat{i}$.
$3$. अंत में $30\sqrt{2}\, m$ दक्षिण-पश्चिम दिशा में (दक्षिण और पश्चिम दोनों के साथ $45^\circ$ के कोण पर) चलता है: $\vec{BC} = 30\sqrt{2} \cdot (-\cos 45^\circ \hat{i} - \sin 45^\circ \hat{j}) = 30\sqrt{2} \cdot (-\frac{1}{\sqrt{2}} \hat{i} - \frac{1}{\sqrt{2}} \hat{j}) = -30\hat{i} - 30\hat{j}$.
कुल विस्थापन $\vec{OC} = \vec{OA} + \vec{AB} + \vec{BC} = (0\hat{i} + 30\hat{j}) + (20\hat{i} + 0\hat{j}) + (-30\hat{i} - 30\hat{j}) = -10\hat{i} + 0\hat{j}$.
इसका परिमाण $|\vec{OC}| = 10\, m$ है और दिशा ऋणात्मक x-अक्ष की ओर है,जो कि पश्चिम दिशा है।
Solution diagram
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न्यूटन का शीतलन नियम किसका एक विशेष मामला है?
A
स्टीफन का नियम
B
किरचॉफ का नियम
C
वीन का नियम
D
प्लांक का नियम

Solution

(A) स्टीफन के नियम के अनुसार,$T$ तापमान वाली वस्तु से $T_0$ तापमान वाले वातावरण में ऊष्मा हानि की दर $dQ/dt = e \sigma A (T^4 - T_0^4)$ द्वारा दी जाती है।
यदि तापमान का अंतर $\Delta T = T - T_0$ बहुत छोटा है,तो हम $T = T_0 + \Delta T$ लिख सकते हैं।
तब $T^4 = (T_0 + \Delta T)^4 = T_0^4 (1 + \Delta T/T_0)^4$ होगा।
द्विपद विस्तार का उपयोग करते हुए,$T^4 \approx T_0^4 (1 + 4 \Delta T/T_0) = T_0^4 + 4 T_0^3 \Delta T$ प्राप्त होता है।
इस मान को स्टीफन के नियम के समीकरण में रखने पर: $dQ/dt = e \sigma A (T_0^4 + 4 T_0^3 \Delta T - T_0^4) = 4 e \sigma A T_0^3 \Delta T$ प्राप्त होता है।
चूंकि $4 e \sigma A T_0^3$ एक स्थिरांक है,इसलिए हमें $dQ/dt \propto \Delta T$ प्राप्त होता है,जो न्यूटन का शीतलन नियम है।
अतः,न्यूटन का शीतलन नियम स्टीफन के नियम का एक विशेष मामला है।
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यदि $z - 2 - 3i$ का आयाम (amplitude) $\pi / 4$ है,तो $z = x + iy$ का बिंदुपथ क्या है?
A
$x + y - 1 = 0$
B
$x - y - 1 = 0$
C
$x + y + 1 = 0$
D
$x - y + 1 = 0$

Solution

(D) माना $z = x + iy$,तब $z - 2 - 3i = (x - 2) + i(y - 3)$.
चूंकि $z - 2 - 3i$ का आयाम $\pi / 4$ है,इसलिए $\tan^{-1}\left(\frac{y - 3}{x - 2}\right) = \frac{\pi}{4}$.
दोनों पक्षों का टेंजेंट लेने पर,$\frac{y - 3}{x - 2} = \tan\left(\frac{\pi}{4}\right) = 1$.
इसे सरल करने पर $y - 3 = x - 2$,जो $x - y + 1 = 0$ के रूप में प्राप्त होता है।
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यदि $\sqrt{x} + \frac{1}{\sqrt{x}} = 2\cos \theta$ है,तो ${x^6} + {x^{-6}} = $
A
$2\cos 6\theta$
B
$2\cos 12\theta$
C
$2\cos 3\theta$
D
$2\sin 3\theta$

Solution

(B) दिया है,$\sqrt{x} + \frac{1}{\sqrt{x}} = 2\cos \theta$ $(i)$
दोनों पक्षों का वर्ग करने पर,हमें प्राप्त होता है $x + \frac{1}{x} + 2 = 4\cos^2 \theta$
$x + \frac{1}{x} = 4\cos^2 \theta - 2 = 2(2\cos^2 \theta - 1) = 2\cos 2\theta$ $(ii)$
पुनः दोनों पक्षों का वर्ग करने पर,$x^2 + \frac{1}{x^2} + 2 = 4\cos^2 2\theta$
$x^2 + \frac{1}{x^2} = 4\cos^2 2\theta - 2 = 2(2\cos^2 2\theta - 1) = 2\cos 4\theta$ $(iii)$
अब,$(iii)$ के दोनों पक्षों का घन करने पर:
$(x^2 + \frac{1}{x^2})^3 = (2\cos 4\theta)^3$
$x^6 + \frac{1}{x^6} + 3(x^2 \cdot \frac{1}{x^2})(x^2 + \frac{1}{x^2}) = 8\cos^3 4\theta$
$x^6 + \frac{1}{x^6} + 3(2\cos 4\theta) = 8\cos^3 4\theta$
$x^6 + \frac{1}{x^6} = 8\cos^3 4\theta - 6\cos 4\theta = 2(4\cos^3 4\theta - 3\cos 4\theta)$
सर्वसमिका $\cos 3A = 4\cos^3 A - 3\cos A$ का उपयोग करने पर,हमें प्राप्त होता है:
$x^6 + \frac{1}{x^6} = 2\cos 3(4\theta) = 2\cos 12\theta$.
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समीकरण $(\sqrt{3} - 1)\sin \theta + (\sqrt{3} + 1)\cos \theta = 2$ का व्यापक हल है
A
$2n\pi \pm \frac{\pi}{4} + \frac{\pi}{12}$
B
$n\pi + (-1)^n\frac{\pi}{4} + \frac{\pi}{12}$
C
$2n\pi \pm \frac{\pi}{4} - \frac{\pi}{12}$
D
$n\pi + (-1)^n\frac{\pi}{4} - \frac{\pi}{12}$

Solution

(A) समीकरण को $r = \sqrt{(\sqrt{3}-1)^2 + (\sqrt{3}+1)^2} = 2\sqrt{2}$ से विभाजित करने पर।
समीकरण $\cos(\theta - \frac{\pi}{12}) = \cos(\frac{\pi}{4})$ के रूप में प्राप्त होता है।
अतः,$\theta - \frac{\pi}{12} = 2n\pi \pm \frac{\pi}{4}$.
$\theta = 2n\pi \pm \frac{\pi}{4} + \frac{\pi}{12}$.
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परवलयों $x^2 = 108y$ और $y^2 = 32x$ की उभयनिष्ठ स्पर्श रेखा का समीकरण है
A
$2x + 3y = 36$
B
$2x + 3y + 36 = 0$
C
$3x + 2y = 36$
D
$3x + 2y + 36 = 0$

Solution

(B) दिए गए परवलय $x^2 = 108y$ और $y^2 = 32x$ हैं।
परवलय $x^2 = 108y$ के लिए स्पर्श रेखा का समीकरण $y = mx - 27m^2$ है।
चूंकि यह रेखा $y^2 = 32x$ को भी स्पर्श करती है,इसलिए $D = 0$ रखने पर $m = -2/3$ प्राप्त होता है।
मान रखने पर,$y = (-2/3)x - 12$ प्राप्त होता है।
अतः,$2x + 3y + 36 = 0$ अभीष्ट समीकरण है।
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बोरेक्स का जलीय विलयन होता है
A
उदासीन
B
उभयधर्मी
C
क्षारीय
D
अम्लीय

Solution

(C) बोरेक्स $(Na_2B_4O_7 \cdot 10H_2O)$ एक प्रबल क्षार $(NaOH)$ और दुर्बल अम्ल $(H_3BO_3)$ का लवण है।
जल-अपघटन पर,यह $NaOH$ और $H_3BO_3$ उत्पन्न करता है।
चूंकि $NaOH$ एक प्रबल क्षार है और $H_3BO_3$ एक दुर्बल अम्ल है,इसलिए परिणामी जलीय विलयन की प्रकृति क्षारीय होती है।
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निम्नलिखित का मिलान करें:
List-$I$List-$II$
$(a)$ $SF_6$$(i)$ $sp^3d^2$
$(b)$ $PCl_5$(ii) $sp^3d$
$(c)$ $XeF_4$(iii) $sp^3d^3$
$(d)$ $IF_7$(iv) $sp^3d^2$

सही उत्तर है:
A
$a-ii, b-i, c-iii, d-iv$
B
$a-iii, b-iv, c-i, d-ii$
C
$a-iii, b-iv, c-ii, d-i$
D
$a-ii, b-i, c-iii, d-iv$

Solution

(C) प्रत्येक अणु में केंद्रीय परमाणु का संकरण $\text{Hybridization} = \frac{1}{2} (V + M - C + A)$ सूत्र द्वारा निर्धारित किया जाता है।
$(a)$ $SF_6$ के लिए: $V=6, M=6$. संकरण $= \frac{1}{2}(6+6) = 6$,जो $sp^3d^2$ के अनुरूप है।
$(b)$ $PCl_5$ के लिए: $V=5, M=5$. संकरण $= \frac{1}{2}(5+5) = 5$,जो $sp^3d$ के अनुरूप है।
$(c)$ $XeF_4$ के लिए: $V=8, M=4$. संकरण $= \frac{1}{2}(8+4) = 6$,जो $sp^3d^2$ के अनुरूप है।
$(d)$ $IF_7$ के लिए: $V=7, M=7$. संकरण $= \frac{1}{2}(7+7) = 7$,जो $sp^3d^3$ के अनुरूप है।
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यदि $z-2-3i$ का आयाम (amplitude) $\frac{\pi}{4}$ है,तो $z=x+iy$ का बिंदुपथ क्या है?
A
$x-y+1=0$
B
$x-y-1=0$
C
$x+y-1=0$
D
$x+y+1=0$

Solution

(A) दिया है $z = x + iy$,इसलिए $z - 2 - 3i = (x - 2) + i(y - 3)$.
चूंकि $z - 2 - 3i$ का आयाम $\frac{\pi}{4}$ है,इसलिए $\arg((x - 2) + i(y - 3)) = \frac{\pi}{4}$.
इसका अर्थ है $\tan^{-1}\left(\frac{y - 3}{x - 2}\right) = \frac{\pi}{4}$.
दोनों पक्षों का टेंजेंट लेने पर,$\frac{y - 3}{x - 2} = \tan\left(\frac{\pi}{4}\right) = 1$.
अतः,$y - 3 = x - 2$,जिसे सरल करने पर $x - y + 1 = 0$ प्राप्त होता है।
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$f(x)=\frac{x}{\sqrt{1+x^2}}$ द्वारा परिभाषित फलन $f: R \rightarrow R$ ........ है।
A
आच्छादक है लेकिन एकैकी नहीं
B
एकैकी और आच्छादक (बायजेक्टिव) है
C
एकैकी है लेकिन आच्छादक नहीं
D
न तो एकैकी है और न ही आच्छादक

Solution

(C) एकैकी (injective) होने की जाँच करने के लिए,मान लीजिए $f(x_1) = f(x_2)$ है।
$\frac{x_1}{\sqrt{1+x_1^2}} = \frac{x_2}{\sqrt{1+x_2^2}}$
दोनों पक्षों का वर्ग करने पर: $\frac{x_1^2}{1+x_1^2} = \frac{x_2^2}{1+x_2^2}$
$x_1^2(1+x_2^2) = x_2^2(1+x_1^2)$
$x_1^2 + x_1^2x_2^2 = x_2^2 + x_1^2x_2^2$
$x_1^2 = x_2^2 \Rightarrow x_1 = x_2$ (चूँकि फलन निरंतर वर्धमान है,इसलिए $x_1 = x_2$)।
अतः,$f$ एकैकी है।
आच्छादक (surjective) होने की जाँच करने के लिए,मान लीजिए $y = \frac{x}{\sqrt{1+x^2}}$ है।
$y^2 = \frac{x^2}{1+x^2} \Rightarrow y^2(1+x^2) = x^2 \Rightarrow y^2 = x^2(1-y^2) \Rightarrow x^2 = \frac{y^2}{1-y^2}$.
$x$ के वास्तविक होने के लिए,$1-y^2 > 0$ होना चाहिए,जिसका अर्थ है $y^2 < 1$,अर्थात $-1 < y < 1$ है।
फलन $f$ का परिसर $(-1, 1)$ है,जो सह-प्रांत $R$ के बराबर नहीं है।
इसलिए,$f$ आच्छादक नहीं है।
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उन रेखाओं के बीच का कोण ज्ञात कीजिए जिनके दिक्-कोसाइन समीकरण $l^2+m^2-n^2=0$ और $l+m+n=0$ द्वारा दिए गए हैं।
A
$\frac{\pi}{6}$
B
$\frac{\pi}{4}$
C
$\frac{\pi}{3}$
D
$\frac{\pi}{2}$

Solution

(C) दिया है,$l^2+m^2-n^2=0$ $(i)$ और $l+m+n=0$ $(ii)$.
समीकरण $(ii)$ से,$n=-(l+m)$. इसे $(i)$ में प्रतिस्थापित करने पर:
$l^2+m^2=(-(l+m))^2 = l^2+m^2+2lm$.
इसका अर्थ है $2lm=0$,अतः $l=0$ या $m=0$.
स्थिति $1$: यदि $l=0$,तो $n=-m$. चूँकि $l^2+m^2+n^2=1$,हमारे पास $0^2+m^2+(-m)^2=1 \Rightarrow 2m^2=1 \Rightarrow m=\pm\frac{1}{\sqrt{2}}$. अतः,दिक्-कोसाइन $(0, \frac{1}{\sqrt{2}}, -\frac{1}{\sqrt{2}})$ और $(0, -\frac{1}{\sqrt{2}}, \frac{1}{\sqrt{2}})$ हैं।
स्थिति $2$: यदि $m=0$,तो $n=-l$. चूँकि $l^2+m^2+n^2=1$,हमारे पास $l^2+0^2+(-l)^2=1 \Rightarrow 2l^2=1 \Rightarrow l=\pm\frac{1}{\sqrt{2}}$. अतः,दिक्-कोसाइन $(\frac{1}{\sqrt{2}}, 0, -\frac{1}{\sqrt{2}})$ और $(-\frac{1}{\sqrt{2}}, 0, \frac{1}{\sqrt{2}})$ हैं।
माना दोनों रेखाओं के दिक्-सदिश $\vec{a} = (0, \frac{1}{\sqrt{2}}, -\frac{1}{\sqrt{2}})$ और $\vec{b} = (\frac{1}{\sqrt{2}}, 0, -\frac{1}{\sqrt{2}})$ हैं।
रेखाओं के बीच का कोण $\theta$,$\cos \theta = |l_1l_2 + m_1m_2 + n_1n_2|$ द्वारा दिया जाता है।
$\cos \theta = |(0)(\frac{1}{\sqrt{2}}) + (\frac{1}{\sqrt{2}})(0) + (-\frac{1}{\sqrt{2}})(-\frac{1}{\sqrt{2}})| = |0 + 0 + \frac{1}{2}| = \frac{1}{2}$.
अतः,$\theta = \cos^{-1}(\frac{1}{2}) = \frac{\pi}{3}$.
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यदि दो रेखाओं की दिक्कोज्याएँ $l+m+n=0$ और $l^2-5m^2+n^2=0$ द्वारा दी गई हैं,तो उनके बीच का कोण क्या है?
A
$\frac{\pi}{2}$
B
$\frac{\pi}{6}$
C
$\frac{\pi}{4}$
D
$\frac{\pi}{3}$

Solution

(D) दो रेखाओं की दिक्कोज्याओं $(l, m, n)$ के लिए दिए गए समीकरण:
$l+m+n=0 \implies n = -(l+m)$
$n$ का मान दूसरे समीकरण $l^2-5m^2+n^2=0$ में रखने पर:
$l^2-5m^2+(-l-m)^2 = 0$
$l^2-5m^2+l^2+2lm+m^2 = 0$
$2l^2+2lm-4m^2 = 0$
$l^2+lm-2m^2 = 0$
$(l+2m)(l-m) = 0$
इससे दो स्थितियाँ प्राप्त होती हैं:
स्थिति $1$: $l=m$. तब $n = -(l+m) = -2l$. दिक् अनुपात $(l, l, -2l)$ प्राप्त होते हैं,जो सरल होकर $(1, 1, -2)$ हो जाते हैं। दिक्कोज्याएँ $(\frac{1}{\sqrt{6}}, \frac{1}{\sqrt{6}}, -\frac{2}{\sqrt{6}})$ हैं।
स्थिति $2$: $l=-2m$. तब $n = -(-2m+m) = m$. दिक् अनुपात $(-2m, m, m)$ प्राप्त होते हैं,जो सरल होकर $(-2, 1, 1)$ हो जाते हैं। दिक्कोज्याएँ $(-\frac{2}{\sqrt{6}}, \frac{1}{\sqrt{6}}, \frac{1}{\sqrt{6}})$ हैं।
माना दो रेखाओं की दिक्कोज्याएँ $(l_1, m_1, n_1) = (\frac{1}{\sqrt{6}}, \frac{1}{\sqrt{6}}, -\frac{2}{\sqrt{6}})$ और $(l_2, m_2, n_2) = (-\frac{2}{\sqrt{6}}, \frac{1}{\sqrt{6}}, \frac{1}{\sqrt{6}})$ हैं।
उनके बीच के कोण $\theta$ के लिए $\cos \theta$ इस प्रकार है:
$\cos \theta = |l_1 l_2 + m_1 m_2 + n_1 n_2|$
$\cos \theta = |(\frac{1}{\sqrt{6}})(-\frac{2}{\sqrt{6}}) + (\frac{1}{\sqrt{6}})(\frac{1}{\sqrt{6}}) + (-\frac{2}{\sqrt{6}})(\frac{1}{\sqrt{6}})|$
$\cos \theta = |-\frac{2}{6} + \frac{1}{6} - \frac{2}{6}| = |-\frac{3}{6}| = \frac{1}{2}$
अतः $\cos \theta = \frac{1}{2}$,जिसका अर्थ है $\theta = 60^{\circ} = \frac{\pi}{3}$।
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उन रेखाओं के बीच का कोण ज्ञात कीजिए जिनके दिक्कोसाइन समीकरण $l+m+n=0$ और $l^2+m^2-n^2=0$ को संतुष्ट करते हैं।
A
$\frac{\pi}{6}$
B
$\frac{\pi}{4}$
C
$\frac{\pi}{3}$
D
$\frac{\pi}{2}$

Solution

(C) दिया गया है,$l+m+n=0 \implies l = -m-n$ और $l^2+m^2-n^2=0$.
दूसरे समीकरण में $l = -m-n$ प्रतिस्थापित करने पर:
$(-m-n)^2 + m^2 - n^2 = 0$
$m^2 + 2mn + n^2 + m^2 - n^2 = 0$
$2m^2 + 2mn = 0$
$2m(m+n) = 0$.
इससे दो स्थितियाँ प्राप्त होती हैं:
स्थिति $1$: यदि $m=0$,तो $l = -n$. दिक् अनुपात $(-n, 0, n)$ हैं,जिसे $(-1, 0, 1)$ के रूप में सरल किया जा सकता है। मान लीजिए $\vec{v_1} = (-1, 0, 1)$.
स्थिति $2$: यदि $m+n=0$,तो $m = -n$. $l = -m-n$ में मान रखने पर,$l = -(-n)-n = 0$ प्राप्त होता है। दिक् अनुपात $(0, -n, n)$ हैं,जिसे $(0, -1, 1)$ के रूप में सरल किया जा सकता है। मान लीजिए $\vec{v_2} = (0, -1, 1)$.
रेखाओं के बीच का कोण $\theta$ सूत्र $\cos \theta = \frac{|\vec{v_1} \cdot \vec{v_2}|}{|\vec{v_1}| |\vec{v_2}|}$ द्वारा दिया जाता है।
$\vec{v_1} \cdot \vec{v_2} = (-1)(0) + (0)(-1) + (1)(1) = 1$.
$|\vec{v_1}| = \sqrt{(-1)^2 + 0^2 + 1^2} = \sqrt{2}$.
$|\vec{v_2}| = \sqrt{0^2 + (-1)^2 + 1^2} = \sqrt{2}$.
$\cos \theta = \frac{1}{\sqrt{2} \cdot \sqrt{2}} = \frac{1}{2}$.
अतः,$\theta = \frac{\pi}{3}$.
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निम्नलिखित अभिक्रिया का मुख्य उत्पाद क्या है?
Question diagram
A
Option A
B
Option B
C
Option C
D
Option D

Solution

(A) यह अभिक्रिया एक चक्रीय ईथर का $HI$ के साथ अम्लीय विदलन है। ईथर का ऑक्सीजन $H^+$ द्वारा प्रोटोनेटेड हो जाता है। विदलन उस बंध पर होता है जो अधिक स्थिर कार्बोनियम आयन (carbocation) के निर्माण की ओर ले जाता है। इस मामले में,ऑक्सीजन और तृतीयक कार्बन परमाणु के बीच का बंध टूटकर एक स्थिर बेंजिलिक-तृतीयक कार्बोनियम आयन बनाता है। इसके बाद आयोडाइड आयन $(I^-)$ इस कार्बोनियम आयन पर आक्रमण करके अंतिम उत्पाद बनाता है।
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ChemistryDifficultMCQTS EAMCET · 2020
उत्पाद $6-$ऑक्सोहेप्टेनल किसके रिडक्टिव ओजोनोलिसिस द्वारा बनता है?
A
$1-$मिथाइलसाइक्लोहेक्सिन
B
$3-$मिथाइलसाइक्लोहेक्सिन
C
$4-$मिथाइलसाइक्लोहेक्सिन
D
$1-$एथिलसाइक्लोहेक्सिन

Solution

(A) $6-$ऑक्सोहेप्टेनल $CH_3-C(=O)-CH_2-CH_2-CH_2-CH_2-CHO$ है।
चक्रीय एल्कीन का रिडक्टिव ओजोनोलिसिस द्वि-आबंध के विदलन द्वारा एक डाइकार्बोनिल यौगिक बनाता है।
$1-$मिथाइलसाइक्लोहेक्सिन के लिए,द्वि-आबंध $C_1$ और $C_2$ के बीच होता है। विदलन के परिणामस्वरूप $7-$कार्बन की श्रृंखला प्राप्त होती है जिसमें $C_2$ पर कीटोन और $C_7$ पर एल्डिहाइड होता है,जो $6-$ऑक्सोहेप्टेनल के अनुरूप है।
अतः,सही अभिकारक $1-$मिथाइलसाइक्लोहेक्सिन है।
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ChemistryMCQTS EAMCET · 2020
निम्नलिखित अभिक्रिया में मुख्य उत्पाद क्या है?
Question diagram
A
Option A
B
Option B
C
Option C
D
Option D

Solution

(D) यह अभिक्रिया सैलिसिलिक एसिड $(2-\text{हाइड्रॉक्सीबेंजोइक एसिड})$ और मेथनॉल $(MeOH)$ के बीच सांद्र एसिड उत्प्रेरक $(H_2SO_4)$ की उपस्थिति में होने वाली एस्टरीकरण अभिक्रिया है।
इस अभिक्रिया में,कार्बोक्सिलिक एसिड समूह $(-COOH)$ अल्कोहल $(-OH)$ के साथ अभिक्रिया करके एस्टर $(-COOCH_3)$ बनाता है।
इन परिस्थितियों में फेनोलिक $-OH$ समूह,कार्बोक्सिलिक एसिड समूह की तुलना में एस्टरीकरण के प्रति कम सक्रिय होता है।
इसलिए,मुख्य उत्पाद मिथाइल सैलिसिलेट है,जिसमें कार्बोक्सिलिक एसिड समूह मिथाइल एस्टर में परिवर्तित हो जाता है।
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ChemistryEasyMCQTS EAMCET · 2020
निम्नलिखित अणुओं में आयनिक गुण का सही क्रम ज्ञात कीजिए:
$(i)$ $O_2$
$(ii)$ $K_2O$
$(iii)$ $N_2$
$(iv)$ $LiF$
A
$iv > ii > i > iii$
B
$iv > ii > iii > i$
C
$ii > iv > i > iii$
D
$ii > iv > iii > i$

Solution

(A) बंध का आयनिक गुण बंधित परमाणुओं के बीच विद्युत ऋणात्मकता के अंतर के सीधे समानुपाती होता है।
$(i)$ $O_2$: विद्युत ऋणात्मकता का अंतर = $3.5 - 3.5 = 0$.
$(ii)$ $K_2O$: विद्युत ऋणात्मकता का अंतर = $3.5 - 0.8 = 2.7$.
$(iii)$ $N_2$: विद्युत ऋणात्मकता का अंतर = $3.0 - 3.0 = 0$.
$(iv)$ $LiF$: विद्युत ऋणात्मकता का अंतर = $4.0 - 1.0 = 3.0$.
मानों की तुलना करने पर: $LiF$ $(3.0)$ > $K_2O$ $(2.7)$ > $O_2$ $(0)$ = $N_2$ $(0)$.
अतः सही क्रम $iv > ii > i > iii$ है।
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ChemistryEasyMCQTS EAMCET · 2020
निम्नलिखित प्रणालियों में इलेक्ट्रॉन युग्मों के प्रतिकर्षण बल का सही क्रम ज्ञात कीजिए।
$(I)$ एकाकी युग्म - एकाकी युग्म
$(II)$ एकाकी युग्म - आबंध युग्म
$(III)$ आबंध युग्म - आबंध युग्म
A
$I > II > III$
B
$II > I > III$
C
$III > II > I$
D
$I > III > II$

Solution

(A) $VSEPR$ सिद्धांत के अनुसार,इलेक्ट्रॉन युग्म प्रतिकर्षण को कम करने के लिए खुद को एक-दूसरे से यथासंभव दूर व्यवस्थित करते हैं।
विभिन्न प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक प्रतिकर्षणों का परिमाण इस क्रम का पालन करता है:
$Lone pair - Lone pair > Lone pair - Bond pair > Bond pair - Bond pair$
अतः,सही क्रम $(I) > (II) > (III)$ है।
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ChemistryMediumMCQTS EAMCET · 2020
निम्नलिखित में से कौन सा सल्फर यौगिक अष्टक नियम का पालन करता है?
A
$H_2SO_4$
B
$SF_6$
C
$SCl_2$
D
$SF_4$

Solution

(C) यह निर्धारित करने के लिए कि कौन सा यौगिक अष्टक नियम का पालन करता है,हम प्रत्येक अणु में केंद्रीय सल्फर $(S)$ परमाणु के चारों ओर संयोजी इलेक्ट्रॉनों की संख्या की गणना करते हैं:
$1$. $H_2SO_4$ में,सल्फर परमाणु दो $OH$ समूहों और दो ऑक्सीजन परमाणुओं के साथ बंधा होता है,जिसके परिणामस्वरूप $S$ के चारों ओर $12$ इलेक्ट्रॉन होते हैं,जो एक विस्तारित अष्टक है।
$2$. $SF_6$ में,सल्फर परमाणु छह फ्लोरीन परमाणुओं के साथ बंधा होता है,जिसके परिणामस्वरूप $S$ के चारों ओर $12$ इलेक्ट्रॉन होते हैं,जो एक विस्तारित अष्टक है।
$3$. $SF_4$ में,सल्फर परमाणु चार फ्लोरीन परमाणुओं के साथ बंधा होता है और इसमें एक एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म होता है,जिसके परिणामस्वरूप $S$ के चारों ओर $10$ इलेक्ट्रॉन होते हैं,जो एक विस्तारित अष्टक है।
$4$. $SCl_2$ में,सल्फर परमाणु दो क्लोरीन परमाणुओं के साथ बंधा होता है और इसमें दो एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म होते हैं। $S$ के चारों ओर इलेक्ट्रॉनों की कुल संख्या $2 \times 2$ (आबंधी) $+ 2 \times 2$ (एकाकी युग्म) $= 8$ इलेक्ट्रॉन है। अतः,$SCl_2$ अष्टक नियम का पालन करता है।
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निम्नलिखित में से कौन सा यौगिक हाइपरवेलेंट (hypervalent) है?
A
$NO_3^-$
B
$BF_3$
C
$PCl_5$
D
$CH_4$

Solution

(C) हाइपरवेलेंट यौगिक वे होते हैं जिनमें केंद्रीय परमाणु के संयोजी कोश में $8$ से अधिक इलेक्ट्रॉन होते हैं (विस्तारित अष्टक)।
$PCl_5$ में,केंद्रीय फास्फोरस परमाणु $(P)$ $5$ क्लोरीन परमाणुओं से जुड़ा होता है,जिसके परिणामस्वरूप इसके संयोजी कोश में $5 \times 2 = 10$ इलेक्ट्रॉन होते हैं।
चूंकि $10 > 8$,इसलिए $PCl_5$ एक हाइपरवेलेंट यौगिक है।
इसके विपरीत,$NO_3^-$ अष्टक नियम का पालन करता है,$BF_3$ हाइपोवेलेंट है ($6$ इलेक्ट्रॉन),और $CH_4$ अष्टक नियम का पालन करता है ($8$ इलेक्ट्रॉन)।
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$CO_2$ अणु में,कार्बन और ऑक्सीजन परमाणुओं का संकरण क्रमशः क्या है?
A
कार्बन: $sp$,ऑक्सीजन: $sp^2$
B
कार्बन: $sp^2$,ऑक्सीजन: $sp^2$
C
कार्बन: $sp$,ऑक्सीजन: $sp$
D
कार्बन: $sp^2$,ऑक्सीजन: $sp^3$

Solution

(A) $CO_2$ अणु $(O=C=O)$ में,कार्बन परमाणु दो ऑक्सीजन परमाणुओं के साथ दो द्वि-आबंधों द्वारा जुड़ा होता है।
कार्बन के पास $2 \sigma$ आबंध और $2 \pi$ आबंध होते हैं,इसलिए इसकी स्टेरिक संख्या $2$ है,जो $sp$ संकरण को दर्शाता है।
प्रत्येक ऑक्सीजन परमाणु कार्बन के साथ एक द्वि-आबंध द्वारा जुड़ा होता है। $CO_2$ में एक ऑक्सीजन परमाणु के पास $1 \sigma$ आबंध,$1 \pi$ आबंध और $2$ एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म (lone pairs) होते हैं।
ऑक्सीजन के लिए स्टेरिक संख्या $1 (\sigma) + 2 (\text{lone pairs}) = 3$ है,जो $sp^2$ संकरण को दर्शाता है।
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दिए गए अणु में $C_1$,$C_2$ और $C_3$ लेबल वाले कार्बन परमाणुओं का संकरण ज्ञात कीजिए: $H-C \equiv C_1-C_2H-C_3H=CH_2$
A
$C_1$$sp$
$C_2$$sp^2$
$C_3$$sp^2$
B
$C_1$$sp$
$C_2$$sp^2$
$C_3$$sp^2$
C
$C_1$$sp^2$
$C_2$$sp$
$C_3$$sp$
D
$C_1$$sp^2$
$C_2$$sp^2$
$C_3$$sp^2$

Solution

(A) कार्बन परमाणुओं के संकरण को निर्धारित करने के लिए,हम कार्बन परमाणु से जुड़े सिग्मा $(\sigma)$ बंधों की संख्या गिनते हैं।
$1$. $C_1$ टर्मिनल कार्बन के साथ एक त्रि-बंध और $C_2$ के साथ एक एकल बंध द्वारा जुड़ा है। इसमें $2$ सिग्मा बंध और $2$ पाई बंध हैं। अतः,यह $sp$ संकरित है।
$2$. $C_2$,$C_1$,$H$ और $C_3$ से जुड़ा है। इसमें $3$ सिग्मा बंध और $1$ पाई बंध है। अतः,यह $sp^2$ संकरित है।
$3$. $C_3$,$C_2$,$H$ और $CH_2$ से जुड़ा है। इसमें $3$ सिग्मा बंध और $1$ पाई बंध है। अतः,यह $sp^2$ संकरित है।
इसलिए,संकरण $C_1: sp$,$C_2: sp^2$,$C_3: sp^2$ है।
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निम्नलिखित का मिलान करें:
List-$I$List-$II$
$A$. $BF_3$$II$. त्रिकोणीय समतलीय
$B$. $ClF_3$$III$. $T$-आकार
$C$. $NH_3$$IV$. त्रिकोणीय पिरामिडीय
$D$. $NH_4^+$$I$. चतुष्फलकीय

सही मिलान है:
A
$A-III, B-II, C-IV, D-I$
B
$A-III, B-II, C-I, D-IV$
C
$A-II, B-III, C-IV, D-I$
D
$A-II, B-III, C-I, D-IV$

Solution

(C) $BF_3$: केंद्रीय परमाणु $B$ में $3$ बंध युग्म और $0$ एकाकी युग्म होते हैं,जिससे त्रिकोणीय समतलीय ज्यामिति प्राप्त होती है $(A-II)$.
$ClF_3$: केंद्रीय परमाणु $Cl$ में $3$ बंध युग्म और $2$ एकाकी युग्म होते हैं,जिससे $T$-आकार की ज्यामिति प्राप्त होती है $(B-III)$.
$NH_3$: केंद्रीय परमाणु $N$ में $3$ बंध युग्म और $1$ एकाकी युग्म होते हैं,जिससे त्रिकोणीय पिरामिडीय ज्यामिति प्राप्त होती है $(C-IV)$.
$NH_4^+$: केंद्रीय परमाणु $N$ में $4$ बंध युग्म और $0$ एकाकी युग्म होते हैं,जिससे चतुष्फलकीय ज्यामिति प्राप्त होती है $(D-I)$.
अतः,सही मिलान $A-II, B-III, C-IV, D-I$ है।
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$P$ और $Q$ में कार्बन-$2$ का संकरण क्रमशः क्या है?
Question diagram
A
$sp^3, sp^2$
B
$sp^2, sp^2$
C
$sp^3, sp$
D
$sp^3, sp^3$

Solution

(A) दी गई अभिक्रिया में,प्रारंभिक पदार्थ एसीटोन $(CH_3COCH_3)$ है।
जब एसीटोन $HCN$ के साथ अभिक्रिया करता है,तो यह साइनोहाइड्रिन $(P)$ बनाता है,जो $2$-हाइड्रॉक्सी-$2$-मिथाइलप्रोपेनिट्राइल है। $(P)$ में केंद्रीय कार्बन (कार्बन-$2$) चार परमाणुओं $(-OH, -CN, -CH_3, -CH_3)$ से एकल बंध द्वारा जुड़ा होता है,इसलिए यह $sp^3$ संकरित है।
जब $(P)$ को गर्म करके $H_2SO_4$ और $H_2O$ के साथ उपचारित किया जाता है,तो यह निर्जलीकरण और जल-अपघटन के माध्यम से मिथाइल मेथाक्रिलेट $(Q)$ बनाता है,जो $CH_2=C(CH_3)COOCH_3$ है। $(Q)$ में कार्बन-$2$ एक द्वि-बंध $(C=C)$ का हिस्सा है,इसलिए यह $sp^2$ संकरित है।
अतः,संकरण क्रमशः $sp^3$ और $sp^2$ हैं।
Solution diagram
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$BCl_3$,$PCl_5$,$NH_3$ और $SF_6$ में केंद्रीय परमाणु का सही संकरण ज्ञात कीजिए।
A
$(BCl_3: sp^3); (PCl_5: sp^3d^2); (NH_3: sp^2)$ और $(SF_6: sp^3d)$
B
$(BCl_3: sp^2); (PCl_5: sp^3d); (NH_3: sp^3)$ और $(SF_6: sp^3d^2)$
C
$(BCl_3: sp^2); (PCl_5: sp^3d^2); (NH_3: sp^3)$ और $(SF_6: sp^3d)$
D
$(BCl_3: sp^3); (PCl_5: sp^3d); (NH_3: sp^2)$ और $(SF_6: sp^3d^2)$

Solution

(B) संकरण निर्धारित करने के लिए,हम सूत्र का उपयोग करते हैं: $H = \frac{1}{2} (V + M - C + A)$,जहाँ $V$ केंद्रीय परमाणु के संयोजी इलेक्ट्रॉनों की संख्या है,$M$ एकसंयोजक परमाणुओं की संख्या है,$C$ धनायन आवेश है और $A$ ऋणायन आवेश है।
$1$. $BCl_3$ के लिए: $V=3, M=3$. $H = \frac{1}{2}(3+3) = 3$,जो $sp^2$ संकरण को दर्शाता है।
$2$. $PCl_5$ के लिए: $V=5, M=5$. $H = \frac{1}{2}(5+5) = 5$,जो $sp^3d$ संकरण को दर्शाता है।
$3$. $NH_3$ के लिए: $V=5, M=3$. $H = \frac{1}{2}(5+3) = 4$,जो $sp^3$ संकरण को दर्शाता है।
$4$. $SF_6$ के लिए: $V=6, M=6$. $H = \frac{1}{2}(6+6) = 6$,जो $sp^3d^2$ संकरण को दर्शाता है।
अतः,सही संकरण $(BCl_3: sp^2); (PCl_5: sp^3d); (NH_3: sp^3)$ और $(SF_6: sp^3d^2)$ है।
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अमोनिया,अमोनियम आयन और एमाइड आयन के $H-N-H$ बंध कोणों का सही क्रम क्या है?
A
$NH_2^{-} > NH_3 > NH_4^{+}$
B
$NH_4^{+} > NH_3 > NH_2^{-}$
C
$NH_3 > NH_2^{-} > NH_4^{+}$
D
$NH_3 > NH_4^{+} > NH_2^{-}$

Solution

(B) $VSEPR$ सिद्धांत के अनुसार,बंध कोण केंद्रीय नाइट्रोजन परमाणु पर मौजूद एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्मों (lone pairs) की संख्या पर निर्भर करता है।
जैसे-जैसे एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्मों की संख्या बढ़ती है,एकाकी युग्म-बंध युग्म के बीच प्रतिकर्षण बढ़ता है,जिससे बंध कोण कम हो जाता है।
- $NH_4^{+}$: $0$ एकाकी युग्म,$4$ बंध युग्म,बंध कोण $\approx 109^{\circ} 28'$.
- $NH_3$: $1$ एकाकी युग्म,$3$ बंध युग्म,बंध कोण $\approx 107^{\circ}$.
- $NH_2^{-}$: $2$ एकाकी युग्म,$2$ बंध युग्म,बंध कोण $\approx 105^{\circ}$.
इसलिए,बंध कोणों का सही क्रम $NH_4^{+} > NH_3 > NH_2^{-}$ है।
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$He_2, He_2^{+}, O_2$ और $O_2^{+}$ में आबंध कोटि (bond order) ज्ञात कीजिए।
A
$0, 0.5, 2$ और $2.5$
B
$0.5, 0, 3$ और $2$
C
$0, 0.5, 2$ और $1$
D
$0, 0.5, 2.5$ और $2$

Solution

(A) आबंध कोटि की गणना इस सूत्र द्वारा की जाती है: $\text{Bond Order} = \frac{N_b - N_a}{2}$,जहाँ $N_b$ आबंधी इलेक्ट्रॉन हैं और $N_a$ प्रति-आबंधी इलेक्ट्रॉन हैं।
$1$. $He_2$ ($4$ इलेक्ट्रॉन) के लिए: विन्यास $\sigma 1s^2 \sigma^* 1s^2$ है। $BO = \frac{2-2}{2} = 0$.
$2$. $He_2^+$ ($3$ इलेक्ट्रॉन) के लिए: विन्यास $\sigma 1s^2 \sigma^* 1s^1$ है। $BO = \frac{2-1}{2} = 0.5$.
$3$. $O_2$ ($16$ इलेक्ट्रॉन) के लिए: विन्यास $KK \sigma 2s^2 \sigma^* 2s^2 \sigma 2p_z^2 \pi 2p_x^2 = \pi 2p_y^2 \pi^* 2p_x^1 = \pi^* 2p_y^1$ है। $BO = \frac{10-6}{2} = 2$.
$4$. $O_2^+$ ($15$ इलेक्ट्रॉन) के लिए: विन्यास $KK \sigma 2s^2 \sigma^* 2s^2 \sigma 2p_z^2 \pi 2p_x^2 = \pi 2p_y^2 \pi^* 2p_x^1$ है। $BO = \frac{10-5}{2} = 2.5$.
अतः,आबंध कोटि क्रमशः $0, 0.5, 2$ और $2.5$ है।
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आण्विक कक्षक सिद्धांत (Molecular Orbital Theory) के अनुसार निम्नलिखित में से कौन सा अणु अस्तित्व में नहीं है?
A
$Li_2$
B
$Be_2$
C
$B_2$
D
$C_2$

Solution

(B) आण्विक कक्षक सिद्धांत के अनुसार,अणु का बंध क्रम (Bond Order) इस प्रकार निकाला जाता है: $Bond \ Order = \frac{1}{2} (N_b - N_a)$,जहाँ $N_b$ आबंधी इलेक्ट्रॉनों की संख्या है और $N_a$ प्रति-आबंधी इलेक्ट्रॉनों की संख्या है।
$Be_2$ ($Z=4$,कुल $8$ इलेक्ट्रॉन) के लिए,इलेक्ट्रॉनिक विन्यास है: $\sigma 1s^2, \sigma^* 1s^2, \sigma 2s^2, \sigma^* 2s^2$।
यहाँ,$N_b = 4$ और $N_a = 4$ है।
$Bond \ Order = \frac{1}{2} (4 - 4) = 0$।
चूंकि बंध क्रम $0$ है,इसलिए $Be_2$ अणु अस्थिर है और अस्तित्व में नहीं है।
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निम्नलिखित में से कौन सा अणु प्रकृति में अनुचुंबकीय (paramagnetic) नहीं है?
A
$O_2$
B
$O_2^{+}$
C
$O_2^{-}$
D
$O_2^{2-}$

Solution

(D) यदि सभी इलेक्ट्रॉन युग्मित (paired) हैं,तो अणु प्रतिचुंबकीय (diamagnetic) होता है,जबकि यदि अणु में एक या अधिक इलेक्ट्रॉन अयुग्मित (unpaired) हैं,तो वह प्रजाति अनुचुंबकीय होती है।
$O_2^{2-}$ अनुचुंबकीय नहीं है क्योंकि $O_2^{2-}$ में सभी इलेक्ट्रॉन युग्मित हैं।
$O_2^{2-}$ का विन्यास (कुल इलेक्ट्रॉन $= 18$): $(\sigma 1s)^2, (\sigma^* 1s)^2, (\sigma 2s)^2, (\sigma^* 2s)^2, (\sigma 2p_z)^2, (\pi 2p_x)^2, (\pi 2p_y)^2, (\pi^* 2p_x)^2, (\pi^* 2p_y)^2$।
चूंकि सभी इलेक्ट्रॉन युग्मित हैं,इसलिए $O_2^{2-}$ प्रतिचुंबकीय है।
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नीचे दिए गए आणविक कक्षकों (molecular orbitals) के लिए प्रतीकों का सही सेट कौन सा है?
Question diagram
A
$I. = \sigma^*, II. = \sigma, III. = \pi^*, IV. = \pi$
B
$I. = \sigma^*, II. = \pi, III. = \pi^*, IV. = \sigma$
C
$I. = \pi^*, II. = \sigma, III. = \sigma^*, IV. = \pi$
D
$I. = \pi, II. = \sigma^*, III. = \sigma, IV. = \pi^*$

Solution

(C) आणविक कक्षक सिद्धांत के आरेखों के आधार पर:
$(i)$ एक एंटी-बॉन्डिंग पाई कक्षक को दर्शाता है,जिसे $\pi^*$ के रूप में लिखा जाता है।
(ii) एक बॉन्डिंग सिग्मा कक्षक को दर्शाता है,जिसे $\sigma$ के रूप में लिखा जाता है।
(iii) एक एंटी-बॉन्डिंग सिग्मा कक्षक को दर्शाता है,जिसे $\sigma^*$ के रूप में लिखा जाता है।
(iv) एक बॉन्डिंग पाई कक्षक को दर्शाता है,जिसे $\pi$ के रूप में लिखा जाता है।
अतः,सही सेट $I. = \pi^*, II. = \sigma, III. = \sigma^*, IV. = \pi$ है।
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निम्नलिखित अणुओं में बंध लंबाई का सही क्रम क्या है? $I. O_2, II. O_2^+, III. O_2^-, IV. O_2^{2-}$
A
$III > IV > II > I$
B
$III > IV > I > II$
C
$IV > III > II > I$
D
$IV > III > I > II$

Solution

(D) बंध लंबाई,बंध क्रम के व्युत्क्रमानुपाती होती है।
इन प्रजातियों के लिए बंध क्रम की गणना आणविक कक्षक सिद्धांत (Molecular Orbital Theory) का उपयोग करके की जाती है:
$O_2^+$ का बंध क्रम $= 2.5$
$O_2$ का बंध क्रम $= 2.0$
$O_2^-$ का बंध क्रम $= 1.5$
$O_2^{2-}$ का बंध क्रम $= 1.0$
चूंकि बंध लंबाई $\propto \frac{1}{\text{बंध क्रम}}$,इसलिए बंध लंबाई का क्रम $O_2^{2-} (IV) > O_2^- (III) > O_2 (I) > O_2^+ (II)$ है।
अतः,सही क्रम $IV > III > I > II$ है।
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निम्नलिखित यौगिकों को उनके द्विध्रुव आघूर्ण (dipole moment) के बढ़ते क्रम में व्यवस्थित कीजिए।
A
$iv < i < ii < iii$
B
$i < iv < iii < ii$
C
$iv < iii < ii < i$
D
$iii < iv < ii < i$

Solution

(A) यौगिक हैं:
$(i)$ टोल्यूनि $(C_6H_5CH_3)$
(ii) $m$-डाइक्लोरोबेंजीन
(iii) $o$-डाइक्लोरोबेंजीन
(iv) $p$-डाइक्लोरोबेंजीन
$1$. $p$-डाइक्लोरोबेंजीन (iv) के लिए,दो $C-Cl$ बंध द्विध्रुव समान और विपरीत होते हैं,इसलिए वे एक-दूसरे को निरस्त कर देते हैं,जिससे द्विध्रुव आघूर्ण $0$ हो जाता है।
$2$. टोल्यूनि $(i)$ के लिए,$-CH_3$ समूह के कमजोर इलेक्ट्रॉन-दाता प्रभाव के कारण द्विध्रुव आघूर्ण कम होता है।
$3$. $m$-डाइक्लोरोबेंजीन (ii) के लिए,दो $C-Cl$ बंधों के बीच का कोण $120^{\circ}$ है। परिणामी द्विध्रुव आघूर्ण $\sqrt{\mu^2 + \mu^2 + 2\mu^2 \cos(120^{\circ})} = \mu$ है।
$4$. $o$-डाइक्लोरोबेंजीन (iii) के लिए,दो $C-Cl$ बंधों के बीच का कोण $60^{\circ}$ है। परिणामी द्विध्रुव आघूर्ण $\sqrt{\mu^2 + \mu^2 + 2\mu^2 \cos(60^{\circ})} = \sqrt{3}\mu$ है।
अतः,सही क्रम $iv < i < ii < iii$ है।
इसलिए,विकल्प $A$ सही है।
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दी गई साम्य अभिक्रिया $2 A(g) \rightleftharpoons 2 B(g) + C(g)$ के लिए,$1000 \ K$ पर साम्य स्थिरांक $(K_c)$ $4 \times 10^{-4}$ है। $800 \ K$ तापमान पर अभिक्रिया के लिए $K_p$ की गणना कीजिए।
A
$0.044$
B
$0.026$
C
$0.33$
D
$1$

Solution

(B) $K_p$ और $K_c$ के बीच संबंध समीकरण $K_p = K_c(RT)^{\Delta n}$ द्वारा दिया जाता है।
यहाँ,$\Delta n = (2 + 1) - 2 = 1$.
दिया गया है $T = 800 \ K$ और $R = 0.082 \ L \ atm \ K^{-1} \ mol^{-1}$.
नोट: तापमान के साथ $K_c$ का मान बदलता है। हालाँकि,ऐसे पाठ्यपुस्तक प्रश्नों में $800 \ K$ के लिए $K_c = 4 \times 10^{-4}$ मानते हुए,
$K_p = (4 \times 10^{-4}) \times (0.082 \times 800)^1$.
$K_p = 0.0004 \times 65.6 = 0.02624 \approx 0.026$.
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यदि $500 \ K$ पर अभिक्रिया $2 SO_2 + O_2 \rightleftharpoons 2 SO_3$ के लिए साम्य स्थिरांक $64$ है,तो उसी तापमान पर अभिक्रिया $SO_3 \rightleftharpoons SO_2 + \frac{1}{2} O_2$ के लिए साम्य स्थिरांक क्या होगा?
A
$8$
B
$\frac{1}{8}$
C
$32$
D
$\frac{1}{64}$

Solution

(B) दी गई अभिक्रिया: $2 SO_2 + O_2 \rightleftharpoons 2 SO_3$,$K = 64$.
लक्ष्य अभिक्रिया: $SO_3 \rightleftharpoons SO_2 + \frac{1}{2} O_2$,$K' = ?$.
लक्ष्य अभिक्रिया प्राप्त करने के लिए,पहले दी गई अभिक्रिया को उल्टा करने पर: $2 SO_3 \rightleftharpoons 2 SO_2 + O_2$. इस उल्टी अभिक्रिया के लिए साम्य स्थिरांक $K_{rev} = \frac{1}{K} = \frac{1}{64}$ होगा।
इसके बाद,अभिक्रिया के गुणांकों को $\frac{1}{2}$ से गुणा करने पर: $SO_3 \rightleftharpoons SO_2 + \frac{1}{2} O_2$.
जब किसी अभिक्रिया को $n$ कारक से गुणा किया जाता है,तो नया साम्य स्थिरांक $(K_{original})^n$ हो जाता है। यहाँ,$n = \frac{1}{2}$ है।
अतः,$K' = (K_{rev})^{1/2} = (\frac{1}{64})^{1/2} = \frac{1}{8} = 0.125$.
इस प्रकार,विकल्प $(b)$ सही उत्तर है.
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दी गई अभिक्रिया के लिए साम्य स्थिरांक $(K_C)$ क्या है?
$N_2 + O_2 \rightleftharpoons 2 NO$
जहाँ $N_2$,$O_2$ और $NO$ की साम्य सांद्रता क्रमशः $4 \times 10^{-3} \ M$,$3 \times 10^{-3} \ M$ और $3 \times 10^{-3} \ M$ पाई जाती है।
A
$0.75$
B
$0.622$
C
$9 \times 10^{-3}$
D
$12.8 \times 10^{-6}$

Solution

(A) दी गई अभिक्रिया है: $N_2 + O_2 \rightleftharpoons 2 NO$
साम्य स्थिरांक का व्यंजक है:
$K_C = \frac{[NO]^2}{[N_2][O_2]}$
दी गई साम्य सांद्रता:
$[N_2] = 4 \times 10^{-3} \ M$
$[O_2] = 3 \times 10^{-3} \ M$
$[NO] = 3 \times 10^{-3} \ M$
व्यंजक में मान रखने पर:
$K_C = \frac{(3 \times 10^{-3})^2}{(4 \times 10^{-3})(3 \times 10^{-3})}$
$K_C = \frac{9 \times 10^{-6}}{12 \times 10^{-6}}$
$K_C = \frac{9}{12} = 0.75$
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$N_2O_4 \rightleftharpoons 2NO_2$ साम्यावस्था में $N_2O_4$ का वाष्प घनत्व $40$ है। वियोजन की मात्रा (degree of dissociation) है:
A
$1.25$
B
$2.5$
C
$1.5$
D
$0.15$

Solution

(D) अभिक्रिया $N_2O_4 \rightleftharpoons 2NO_2$ है।
$N_2O_4$ का मोलर द्रव्यमान $92 \ g/mol$ है।
सैद्धांतिक वाष्प घनत्व $D = \frac{\text{मोलर द्रव्यमान}}{2} = \frac{92}{2} = 46$ है।
प्रेक्षित वाष्प घनत्व $d = 40$ दिया गया है।
अभिकारक के $1 \ mole$ से बनने वाले उत्पाद के मोल $n = 2$ हैं।
वियोजन की मात्रा $\alpha$ का सूत्र $\alpha = \frac{D-d}{(n-1)d}$ है।
मान रखने पर: $\alpha = \frac{46-40}{(2-1) \times 40} = \frac{6}{40} = 0.15$।
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डाईएथिल एमाइन के $0.05 \ M$ जलीय विलयन का $pH$ $10$ है। साम्य स्थिरांक $(K_b)$ का मान ज्ञात कीजिए।
A
$4 \times 10^{-7}$
B
$2 \times 10^{-7}$
C
$2 \times 10^{-3}$
D
$4 \times 10^{-3}$

Solution

(B) दिया गया है,$pH = 10$.
हम जानते हैं कि $pH + pOH = 14$.
अतः,$pOH = 14 - 10 = 4$.
$[OH^{-}] = 10^{-pOH} = 10^{-4} \ M$.
सांद्रता $C = 0.05 \ M$.
दुर्बल क्षार के लिए,$K_b = \frac{[OH^{-}]^2}{C - [OH^{-}]}$.
चूंकि $[OH^{-}]$,$C$ की तुलना में बहुत छोटा है,$K_b \approx \frac{[OH^{-}]^2}{C}$.
$K_b = \frac{(10^{-4})^2}{0.05} = \frac{10^{-8}}{5 \times 10^{-2}} = 0.2 \times 10^{-6} = 2 \times 10^{-7}$.
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दी गई साम्य अभिक्रिया $H_{2(g)} + I_{2(g)} \rightleftharpoons 2 HI_{(g)}$ के लिए,$K_p$ की गणना करने हेतु सही समीकरण चुनें।
A
$K_p = K_C$
B
$K_p = K_C(RT)$
C
$K_p = K_C(RT)^{-1}$
D
$K_p = K_C(RT)^2$

Solution

(A) $K_p$ और $K_C$ के बीच का संबंध सूत्र $K_p = K_C(RT)^{\Delta n_g}$ द्वारा दिया जाता है।
अभिक्रिया $H_{2(g)} + I_{2(g)} \rightleftharpoons 2 HI_{(g)}$ के लिए,गैसीय प्रजातियों के मोलों की संख्या में परिवर्तन $\Delta n_g = n_p - n_r = 2 - (1 + 1) = 0$ है।
इसे सूत्र में प्रतिस्थापित करने पर,हमें $K_p = K_C(RT)^0$ प्राप्त होता है।
चूंकि किसी भी गैर-शून्य मान की घात $0$ होने पर उसका मान $1$ होता है,इसलिए $K_p = K_C \times 1 = K_C$ होगा।
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दी गई अभिक्रिया $2 A \rightleftharpoons B + C$ के लिए,साम्य स्थिरांक $2 \times 10^{-3}$ है। यदि किसी दिए गए समय पर अभिक्रिया मिश्रण का संघटन $[A]=[B]=[C]=6 \times 10^{-5} \ M$ है; तो अनुमान लगाइए कि अभिक्रिया किस दिशा में आगे बढ़ेगी और अभिक्रिया भागफल का सही मान क्या होगा।
A
अग्र दिशा और $1.0$
B
पश्च दिशा और $1.0$
C
अग्र दिशा और $3 \times 10^{-5}$
D
पश्च दिशा और $3 \times 10^{-5}$

Solution

(B) अभिक्रिया $2 A \rightleftharpoons B + C$ है।
अभिक्रिया भागफल $Q$ का व्यंजक: $Q = \frac{[B][C]}{[A]^2}$ है।
दी गई सांद्रता को प्रतिस्थापित करने पर: $Q = \frac{(6 \times 10^{-5}) \times (6 \times 10^{-5})}{(6 \times 10^{-5})^2} = 1$.
चूंकि $Q = 1$ और $K_{eq} = 2 \times 10^{-3}$,हम देखते हैं कि $Q > K_{eq}$ है।
जब $Q > K_{eq}$ होता है,तो अभिक्रिया साम्य प्राप्त करने के लिए पश्च दिशा में आगे बढ़ती है।
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फेरिक नाइट्रेट का जलीय विलयन जब पोटेशियम थायोसाइनेट के जलीय विलयन के साथ मिलाया जाता है,तो लाल रंग का विलयन प्राप्त होता है। साम्यावस्था प्राप्त होने पर लाल रंग की तीव्रता स्थिर हो जाती है। साम्यावस्था पर उपरोक्त विलयन में निम्नलिखित रसायनों को मिलाने पर सही कथन चुनिए:
$I$. ऑक्जेलिक अम्ल
$II$. मरक्यूरिक क्लोराइड
A
$(I)$ और $(II)$ दोनों लाल रंग की तीव्रता को कम करेंगे।
B
$(I)$ और $(II)$ दोनों लाल रंग की तीव्रता को बढ़ाएंगे।
C
$(I)$ बढ़ाएगा लेकिन $(II)$ लाल रंग की तीव्रता को कम करेगा।
D
$(I)$ कम करेगा लेकिन $(II)$ लाल रंग की तीव्रता को बढ़ाएगा।

Solution

(A) फेरिक आयनों और थायोसाइनेट आयनों के बीच की अभिक्रिया: $Fe^{3+} (aq) + SCN^- (aq) \rightleftharpoons [Fe(SCN)]^{2+} (aq)$ (लाल रंग)।
जब ऑक्जेलिक अम्ल $(C_2H_2O_4)$ मिलाया जाता है,तो यह $Fe^{3+}$ आयनों के साथ अभिक्रिया करके एक स्थिर संकुल $[Fe(C_2O_4)_3]^{3-}$ बनाता है,जो $Fe^{3+}$ की सांद्रता को कम करता है,साम्यावस्था को बाईं ओर स्थानांतरित करता है और लाल रंग की तीव्रता को कम करता है।
जब मरक्यूरिक क्लोराइड $(HgCl_2)$ मिलाया जाता है,तो यह $SCN^-$ आयनों के साथ अभिक्रिया करके एक स्थिर संकुल $[Hg(SCN)_4]^{2-}$ बनाता है,जो $SCN^-$ की सांद्रता को कम करता है,साम्यावस्था को बाईं ओर स्थानांतरित करता है और लाल रंग की तीव्रता को कम करता है।
अतः,$(I)$ और $(II)$ दोनों लाल रंग की तीव्रता को कम करेंगे।
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दी गई साम्यावस्था अभिक्रिया के लिए,स्थिर आयतन पर अक्रिय आर्गन गैस मिलाने से साम्यावस्था किस दिशा में स्थानांतरित हो सकती है? $N_{2(g)} + 3H_{2(g)} \rightleftharpoons 2NH_{3(g)}$
A
अग्र दिशा
B
पश्च दिशा
C
अप्रभावित रहेगी
D
प्रारंभ में अग्र और फिर पश्च दिशा

Solution

(C) रासायनिक साम्यावस्था के लिए,स्थिर आयतन पर अक्रिय गैस मिलाने से अभिक्रिया करने वाली प्रजातियों के आंशिक दबाव में कोई परिवर्तन नहीं होता है।
चूंकि पात्र का कुल आयतन स्थिर रहता है,इसलिए प्रत्येक अभिकारक और उत्पाद की सांद्रता अपरिवर्तित रहती है।
ला शातेलिए के सिद्धांत के अनुसार,यदि अभिक्रिया करने वाली प्रजातियों की सांद्रता नहीं बदलती है,तो साम्यावस्था की स्थिति अप्रभावित रहती है।
इसलिए,स्थिर आयतन पर अक्रिय $Ar$ गैस मिलाने से $N_{2(g)} + 3H_{2(g)} \rightleftharpoons 2NH_{3(g)}$ अभिक्रिया की साम्यावस्था पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
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एक उत्क्रमणीय अभिक्रिया $A \rightleftharpoons B$ के लिए,पूर्व-घातांकीय कारक (pre-exponential factor) अग्र और पश्च दोनों अभिक्रियाओं के लिए समान है और इसका मान $20 \ s^{-1}$ है। यदि अग्र अभिक्रिया के लिए एन्थैल्पी परिवर्तन $-41.5 \ kJ \ mol^{-1}$ है,तो $500 \ K$ पर साम्य स्थिरांक का मान क्या होगा?
A
$e^{10}$
B
$e^9$
C
$e^8$
D
$e^7$

Solution

(A) एक उत्क्रमणीय अभिक्रिया $A \rightleftharpoons B$ के लिए,साम्य स्थिरांक $K$ एन्थैल्पी परिवर्तन $\Delta H$ से वांट हॉफ समीकरण द्वारा संबंधित है: $\ln K = -\frac{\Delta H}{RT}$.
दिया गया है $\Delta H = -41.5 \ kJ \ mol^{-1}$,$R = 8.314 \times 10^{-3} \ kJ \ mol^{-1} \ K^{-1}$,और $T = 500 \ K$.
मान रखने पर: $\ln K = -\frac{-41.5}{8.314 \times 10^{-3} \times 500}$.
$\ln K = \frac{41.5}{4.157} \approx 9.983$.
अतः,$K = e^{9.983} \approx e^{10}$.
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$123$ परमाणु क्रमांक वाले तत्व के लिए $IUPAC$ प्रतीक और नाम क्या होगा?
A
Unt और Unniltrium
B
Ubq और Unbiquadium
C
Ubt और Unbitrium
D
Unb और Unnilbium

Solution

(C) $Z > 100$ परमाणु क्रमांक वाले तत्वों के लिए,$IUPAC$ नामकरण अंकों के लिए निम्नलिखित मूल का उपयोग करता है: $1 = un$,$2 = bi$,$3 = tri$।
$123$ परमाणु क्रमांक के लिए:
$1 = un$
$2 = bi$
$3 = tri$
नाम इन मूलों को जोड़कर और प्रत्यय $-ium$ जोड़कर बनाया जाता है: $un + bi + tri + ium = \text{Unbitrium}$।
प्रतीक मूल के पहले अक्षरों से लिया गया है: $U + b + t = Ubt$।
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मेंडेलीफ के आवर्त नियम और आधुनिक आवर्त नियम के बीच दृष्टिकोण में मूल अंतर तत्वों के वर्गीकरण के आधार में परिवर्तन है,जो
A
परमाणु क्रमांक से परमाणु भार
B
परमाणु भार से परमाणु क्रमांक
C
न्यूट्रॉन संख्या से परमाणु भार
D
इलेक्ट्रॉन संख्या से परमाणु क्रमांक

Solution

(B) मेंडेलीफ के आवर्त नियम और आधुनिक आवर्त नियम के बीच दृष्टिकोण में मूल अंतर इस प्रकार है:
$1$. मेंडेलीफ का आवर्त नियम $atomic \ weight$ (परमाणु भार) पर आधारित है।
$2$. आधुनिक आवर्त नियम $atomic \ number$ (परमाणु क्रमांक) पर आधारित है।
अतः,वर्गीकरण का आधार $atomic \ weight$ से बदलकर $atomic \ number$ हो गया है।
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निम्नलिखित में से कौन सा परमाणु सबसे अधिक विद्युत ऋणात्मक है?
A
$O$
B
$F$
C
$N$
D
$Cl$

Solution

(B) किसी परमाणु की साझा इलेक्ट्रॉन युग्म को अपनी ओर आकर्षित करने की क्षमता को विद्युत ऋणात्मकता कहा जाता है।
दी गई प्रजातियों में फ्लोरीन $(F)$ की विद्युत ऋणात्मकता सबसे अधिक है।
अपने छोटे आकार और बाहरी कोश में सात इलेक्ट्रॉनों के कारण,यह सबसे अधिक विद्युत ऋणात्मकता प्रदर्शित करता है।
पॉलिंग पैमाने पर,इसका मान $4.0$ माना जाता है।
अतः,विकल्प $(B)$ सही है।
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तत्व $X$ के लिए क्रमिक आयनन ऊर्जा के मान नीचे दिए गए हैं:
$(i)$ $1^{st}$ आयनन ऊर्जा $= 410 \ kJ \ mol^{-1}$
$(ii)$ $2^{nd}$ आयनन ऊर्जा $= 820 \ kJ \ mol^{-1}$
$(iii)$ $3^{rd}$ आयनन ऊर्जा $= 1100 \ kJ \ mol^{-1}$
$(iv)$ $4^{th}$ आयनन ऊर्जा $= 1500 \ kJ \ mol^{-1}$
$(v)$ $5^{th}$ आयनन ऊर्जा $= 3200 \ kJ \ mol^{-1}$
परमाणु $X$ में संयोजी इलेक्ट्रॉनों की संख्या ज्ञात कीजिए।
A
$5$
B
$4$
C
$2$
D
$3$

Solution

(B) संयोजी इलेक्ट्रॉनों की संख्या क्रमिक आयनन ऊर्जा में सबसे बड़े उछाल की पहचान करके निर्धारित की जाती है।
मानों की तुलना:
$1^{st} \to 2^{nd}$: $410 \ kJ \ mol^{-1}$
$2^{nd} \to 3^{rd}$: $280 \ kJ \ mol^{-1}$
$3^{rd} \to 4^{th}$: $400 \ kJ \ mol^{-1}$
$4^{th} \to 5^{th}$: $1700 \ kJ \ mol^{-1}$
सबसे बड़ा उछाल $4^{th}$ और $5^{th}$ आयनन ऊर्जा के बीच होता है।
यह इंगित करता है कि $5^{th}$ इलेक्ट्रॉन एक स्थिर आंतरिक कोश से निकाला जा रहा है।
इसलिए,परमाणु $X$ में $4$ संयोजी इलेक्ट्रॉन हैं।
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कथन $(A)$: $Mg^{2+}$ और $Al^{3+}$ आइसोइलेक्ट्रॉनिक हैं लेकिन $Al^{3+}$ की आयनिक त्रिज्या का मान $Mg^{2+}$ से कम है।
कारण $(R)$: $Al^{3+}$ में सबसे बाहरी इलेक्ट्रॉनों पर प्रभावी नाभिकीय आवेश $Mg^{2+}$ की तुलना में अधिक होता है।
निम्नलिखित में से सही विकल्प है:
A
$A$ सत्य है,$R$ सत्य है और $R$,$A$ की सही व्याख्या है।
B
$A$ सत्य है,$R$ सत्य है लेकिन $R$,$A$ की सही व्याख्या नहीं है।
C
$A$ सत्य है लेकिन $R$ असत्य है।
D
$A$ असत्य है लेकिन $R$ सत्य है।

Solution

(A) आइसोइलेक्ट्रॉनिक प्रजातियां वे आयन या परमाणु हैं जिनमें इलेक्ट्रॉनों की संख्या समान होती है। $Mg^{2+}$ और $Al^{3+}$ दोनों में $10$ इलेक्ट्रॉन $(1s^2 2s^2 2p^6)$ होते हैं।
आइसोइलेक्ट्रॉनिक प्रजातियों के लिए,जैसे-जैसे परमाणु क्रमांक $(Z)$ बढ़ता है,आयनिक त्रिज्या घटती जाती है क्योंकि प्रभावी नाभिकीय आवेश $(Z_{eff})$ बढ़ता है,जो इलेक्ट्रॉनों को नाभिक के करीब खींचता है।
$Z_{Mg} = 12$ और $Z_{Al} = 13$.
चूंकि $Z_{Al} > Z_{Mg}$,इसलिए $Al^{3+}$ में सबसे बाहरी इलेक्ट्रॉनों पर प्रभावी नाभिकीय आवेश $Mg^{2+}$ की तुलना में अधिक होता है।
यह उच्च $Z_{eff}$ $Al^{3+}$ की आयनिक त्रिज्या को $Mg^{2+}$ की तुलना में छोटा बना देता है।
अतः,$A$ और $R$ दोनों सत्य हैं और $R$,$A$ की सही व्याख्या है।
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निम्नलिखित में से किन तत्वों के युग्मों के विद्युतऋणात्मकता (electronegativity) मान लगभग समान हैं?
$I$. $H$ और $P$
$II$. $Be$ और $Al$
$III$. $N$ और $Cl$
$IV$. $C$ और $P$
A
$I, II$ और $III$
B
$II, III$ और $IV$
C
$I, III$ और $IV$
D
$I, II, III$ और $IV$

Solution

(A) विद्युतऋणात्मकता किसी परमाणु की साझा इलेक्ट्रॉन युग्म को आकर्षित करने की प्रवृत्ति है।
पॉलिंग स्केल के मानों के अनुसार:
$I$. $H (2.20)$ और $P (2.19)$ के मान समान हैं।
$II$. $Be (1.57)$ और $Al (1.61)$ के मान समान हैं।
$III$. $N (3.04)$ और $Cl (3.16)$ के मान समान हैं।
$IV$. $C (2.55)$ और $P (2.19)$ के मान अलग हैं।
अतः,$I, II$ और $III$ युग्मों के तत्वों की विद्युतऋणात्मकता लगभग समान है।
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$Al, Na, B$ और $Be$ की परमाणु त्रिज्या का सही क्रम क्या है?
A
$Be < Na < Al < B$
B
$B < Be < Al < Na$
C
$Al < Be < B < Na$
D
$Na < Al < B < Be$

Solution

(B) प्रभावी नाभिकीय आवेश में वृद्धि के कारण आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर परमाणु त्रिज्या घटती है।
$Period-2$ में,क्रम $B < Be$ है।
$Period-3$ में,क्रम $Al < Na$ है।
समूह में ऊपर से नीचे जाने पर एक नया कोश जुड़ने के कारण परमाणु त्रिज्या बढ़ती है।
तत्वों की तुलना करने पर: $B$ ($Period-2$,Group $13$) की त्रिज्या सबसे छोटी है। $Be$ ($Period-2$,Group $2$) $B$ से बड़ी है। $Al$ ($Period-3$,Group $13$) $B$ और $Be$ से बड़ी है। $Na$ ($Period-3$,Group $1$) इन सभी में सबसे बड़ी है।
अतः,परमाणु त्रिज्या का सही क्रम $B < Be < Al < Na$ है।
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निम्नलिखित आयनों को उनकी आयनिक त्रिज्या के संदर्भ में सही क्रम में व्यवस्थित करें।
A
$Br^{-} > Cl^{-} > Na^{+} > Be^{2+}$
B
$Be^{2+} > Na^{+} > Cl^{-} > Br^{-}$
C
$Cl^{-} > Br^{-} > Na^{+} > Be^{2+}$
D
$Na^{+} > Be^{2+} > Br^{-} > Cl^{-}$

Solution

(A) $Be^{2+}$ का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास $[He]$,$Na^{+}$ का $[Ne]$,$Cl^{-}$ का $[Ar]$ और $Br^{-}$ का $[Kr]$ है।
जैसे-जैसे हम समूह में नीचे जाते हैं,कोशों की संख्या बढ़ती है,जिससे आयनिक त्रिज्या में वृद्धि होती है।
चूंकि $Be^{2+}$ में $2$ कोश,$Na^{+}$ में $3$ कोश,$Cl^{-}$ में $4$ कोश और $Br^{-}$ में $5$ कोश होते हैं,इसलिए आयनिक त्रिज्या का क्रम $Br^{-} > Cl^{-} > Na^{+} > Be^{2+}$ होगा।
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निम्नलिखित अभिक्रिया का मुख्य उत्पाद क्या है?
Question diagram
A
साइक्लोहेक्सानोल जिसमें कार्बन से $D$ परमाणु और $-OH$ समूह जुड़ा है।
B
साइक्लोहेक्सानोल जिसमें कार्बन से $D$ परमाणु और $-OD$ समूह जुड़ा है।
C
साइक्लोहेक्सानोल जिसमें कार्बन से $D$ परमाणु और $H$ परमाणु जुड़ा है।
D
साइक्लोहेक्सानोल जिसमें कार्बन से $H$ परमाणु और $-OD$ समूह जुड़ा है।

Solution

(D) $LiAlH_4$ हाइड्राइड आयन $(H^-)$ के स्रोत के रूप में कार्य करता है,जो साइक्लोहेक्सानोन के इलेक्ट्रोफिलिक कार्बोनिल कार्बन पर हमला करके एक एल्कोक्साइड मध्यवर्ती बनाता है।
दूसरे चरण में,$D_2O$ ड्यूटेरियम $(D^+)$ के स्रोत के रूप में कार्य करता है,जो एल्कोक्साइड ऑक्सीजन का प्रोटोनेशन (ड्यूटेरेशन) करके अंतिम उत्पाद बनाता है,जो $-OD$ समूह और अल्फा कार्बन से जुड़े हाइड्रोजन परमाणु वाला साइक्लोहेक्सानोल का व्युत्पन्न है।
Solution diagram
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निम्नलिखित अभिक्रिया अनुक्रम का मुख्य उत्पाद है:
$C_6H_5OH \xrightarrow[(ii) NaOH, (iii) H^+]{(i) CHCl_3, NaOH(aq)} ?$
A
$2$-हाइड्रॉक्सीबेंज़ल्डिहाइड
B
$3$-हाइड्रॉक्सीबेंज़ल्डिहाइड
C
$4$-हाइड्रॉक्सीबेंज़ल्डिहाइड
D
बेंज़ल्डिहाइड

Solution

(A) दी गई अभिक्रिया राइमर-टीमैन अभिक्रिया है।
फिनोल जलीय सोडियम हाइड्रॉक्साइड $(NaOH)$ की उपस्थिति में क्लोरोफॉर्म $(CHCl_3)$ के साथ अभिक्रिया करके एक मध्यवर्ती बनाता है,जिसका अम्ल $(H^+)$ के साथ जल-अपघटन करने पर मुख्य उत्पाद के रूप में $2$-हाइड्रॉक्सीबेंज़ल्डिहाइड (सैलिसिलल्डिहाइड) प्राप्त होता है।
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निम्नलिखित अभिक्रिया में प्राप्त मुख्य उत्पाद है: $C_2H_5ONa + (CH_3)_3C-Cl \rightarrow$
A
$CH_3-C(CH_3)_2-O-C_2H_5$
B
$CH_2=C(CH_3)_2$
C
$CH_3-CH(CH_3)-O-C_2H_5$
D
$(CH_3)_3C-CH_2CHO$

Solution

(B) इस अभिक्रिया में एक तृतीयक एल्किल हैलाइड,$(CH_3)_3C-Cl$,और एक प्रबल क्षार,$C_2H_5ONa$ (सोडियम एथॉक्साइड) शामिल हैं।
चूंकि एल्किल हैलाइड त्रिविम रूप से बाधित (तृतीयक) है,इसलिए $S_N2$ मार्ग प्रतिकूल है।
इसके बजाय,क्षार एक प्रोटॉन स्वीकर्ता के रूप में कार्य करता है,जिससे $E2$ विलोपन अभिक्रिया होती है।
क्षार $\beta$-कार्बन परमाणु से एक प्रोटॉन को हटा देता है,जिसके परिणामस्वरूप एक एल्कीन का निर्माण होता है।
मुख्य उत्पाद $2$-मेथिलप्रोपीन है,जो $(CH_3)_2C=CH_2$ है।
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निम्नलिखित अभिक्रिया का मुख्य उत्पाद क्या है?
Question diagram
A
$1$-ब्रोमो-$1$-फेनिलएथेन
B
$2$-ब्रोमो-$1$-फेनिलएथेन
C
$p$-ब्रोमोएथिलबेंजीन
D
$o,p$-डाइब्रोमोएथिलबेंजीन

Solution

(A) $UV$ प्रकाश की उपस्थिति में एथिलबेंजीन की $Br_2$ के साथ अभिक्रिया एक मुक्त मूलक प्रतिस्थापन अभिक्रिया है। ब्रोमीन मूलक बेंजाइलिक कार्बन से हाइड्रोजन परमाणु को हटाता है क्योंकि परिणामी बेंजाइलिक मूलक फेनिल वलय द्वारा अनुनाद-स्थिर होता है। $\alpha$-कार्बन (बेंजाइलिक स्थिति) पर बना मूलक $\beta$-कार्बन पर बने मूलक की तुलना में अधिक स्थिर होता है। इसलिए,मुख्य उत्पाद $1$-ब्रोमो-$1$-फेनिलएथेन $(C_6H_5CH(Br)CH_3)$ है।
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निम्नलिखित अभिक्रिया अनुक्रम में $X$ और $Y$ क्या हैं?
Question diagram
A
Option A
B
Option B
C
Option C
D
Option D

Solution

(C) दी गई अभिक्रिया इस प्रकार आगे बढ़ती है:
$1$. प्रारंभिक पदार्थ एक कायरल $2^{\circ}$ हेलोऐल्केन है,विशेष रूप से $(S)-2-$ब्रोमोब्यूटेन।
$2$. $KCN$ के साथ अभिक्रिया $S_{N}2$ क्रियाविधि द्वारा होती है। न्यूक्लियोफाइल $CN^-$ लीविंग ग्रुप $(Br^-)$ के विपरीत दिशा से आक्रमण करता है,जिसके परिणामस्वरूप कायरल केंद्र पर वाल्डन प्रतिलोमन (विन्यास का उलटना) होता है।
$3$. इससे उत्पाद $X$ के रूप में $(R)-2-$मिथाइलब्यूटेन नाइट्राइल प्राप्त होता है।
$4$. इसके बाद नाइट्राइल समूह $(-CN)$ का अम्ल-उत्प्रेरित जल-अपघटन इसे कार्बोक्सिलिक अम्ल समूह $(-COOH)$ में परिवर्तित कर देता है,जो कायरल केंद्र को प्रभावित नहीं करता है। इस प्रकार,प्रारंभिक पदार्थ के सापेक्ष विन्यास उलटा रहता है,जिससे उत्पाद $Y$ के रूप में $(R)-2-$मिथाइलब्यूटेनोइक अम्ल प्राप्त होता है।
$5$. दिए गए विकल्पों के साथ तुलना करने पर,विकल्प $C$ सही ढंग से $X$ और $Y$ की संरचनाओं का प्रतिनिधित्व करता है।
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निम्नलिखित अभिक्रिया अनुक्रम का मुख्य उत्पाद है
Question diagram
A
$3$-ब्रोमोबेंजोइक एसिड
B
$2$-ब्रोमोबेंजोइक एसिड
C
$4$-ब्रोमोबेंजोइक एसिड
D
$3,5$-डाइब्रोमोबेंजोइक एसिड

Solution

(A) अभिक्रिया अनुक्रम इस प्रकार है:
$1$. आयोडोबेंजीन $Et_2O$ की उपस्थिति में $Mg$ के साथ अभिक्रिया करके फेनिलमैग्नीशियम आयोडाइड (ग्रिग्नार्ड अभिकर्मक) बनाता है।
$2$. फेनिलमैग्नीशियम आयोडाइड $CO_2$ के साथ अभिक्रिया करता है और उसके बाद अम्लीय जल-अपघटन $(H_3O^+)$ द्वारा बेंजोइक एसिड प्राप्त होता है।
$3$. बेंजोइक एसिड $Br_2/FeBr_3$ के साथ इलेक्ट्रोफिलिक एरोमैटिक प्रतिस्थापन अभिक्रिया करता है। चूँकि $-COOH$ समूह एक निष्क्रिय करने वाला और मेटा-निर्देशकारी समूह है,इसलिए ब्रोमीन परमाणु मेटा-स्थान पर प्रतिस्थापित होगा।
$4$. अंतिम उत्पाद $3$-ब्रोमोबेंजोइक एसिड है।
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निम्नलिखित में से कौन सी अभिक्रिया उत्पाद के रूप में अल्कोहल या फिनोल देती है?
$(i)$ $C_2H_5COOH \xrightarrow{LiAlH_4} C_2H_5CH_2OH$
$(ii)$ $C_2H_5Br$ $\xrightarrow[\text{then } H_2O]{\text{Mg, dry ether}} C_2H_5MgBr$ $\xrightarrow{H_2O} C_2H_6$
$(iii)$ $\text{बेंजीन डाइएजोनियम क्लोराइड} \xrightarrow{H_3PO_2, H_2O} \text{बेंजीन}$
$(iv)$ $4-\text{क्लोरोटोल्यूनि} \xrightarrow[300 \text{ atm}]{\text{NaOH, } 623 \text{ K}} 4-\text{मिथाइलफिनोल}$
A
$(i)$ और $(ii)$
B
$(ii)$ और $(iii)$
C
$(i)$ और $(iv)$
D
$(i)$ और $(iii)$

Solution

(C) आइए प्रत्येक अभिक्रिया का विश्लेषण करें:
$(i)$ $C_2H_5COOH \xrightarrow{LiAlH_4} C_2H_5CH_2OH$ (प्रोपेन$-1-$ऑल,एक अल्कोहल)।
$(ii)$ $C_2H_5Br$ $\xrightarrow{Mg, \text{dry ether}} C_2H_5MgBr$ $\xrightarrow{H_2O} C_2H_6$ (एथेन,एक एल्केन)।
$(iii)$ $\text{बेंजीन डाइएजोनियम क्लोराइड} \xrightarrow{H_3PO_2, H_2O} \text{बेंजीन}$ (एक एरोमैटिक हाइड्रोकार्बन)।
$(iv)$ $4-\text{क्लोरोटोल्यूनि} \xrightarrow[300 \text{ atm}]{\text{NaOH, } 623 \text{ K}} 4-\text{मिथाइलफिनोल}$ (एक फिनोल)।
अतः,अभिक्रियाएं $(i)$ और $(iv)$ क्रमशः अल्कोहल और फिनोल प्रदान करती हैं।
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List-$I$ में दी गई अभिक्रियाओं को List-$II$ में उनके उत्पादों के साथ सुमेलित कीजिए।
List-$I$ (अभिक्रिया)List-$II$ (उत्पाद)
$A$. $\text{Ketone} + NaBH_4$$I$. $1^\circ$-अल्कोहल
$B$. $\text{Ester} + LiAlH_4$$II$. $3^\circ$-अल्कोहल
$C$. $RMgX + \text{Ketone}$$III$. $2^\circ$-अल्कोहल
$IV$. $\text{एल्केन}$
A
$A-III, B-I, C-II$
B
$A-III, B-I, C-IV$
C
$A-I, B-IV, C-II$
D
$A-II, B-I, C-IV$

Solution

(A) सही मिलान इस प्रकार है:
$A$. $\text{Ketone} + NaBH_4 \rightarrow 2^\circ$-अल्कोहल $(III)$.
$B$. $\text{Ester} + LiAlH_4 \rightarrow 1^\circ$-अल्कोहल $(I)$.
$C$. $RMgX + \text{Ketone} \rightarrow 3^\circ$-अल्कोहल $(II)$.
अतः,सही क्रम $A-III, B-I, C-II$ है.
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निम्नलिखित में से कौन सा अभिक्रिया उत्पाद आयोडोफॉर्म परीक्षण देता है?
A
$CH_3CH_2CH_2CN \xrightarrow[\text{(ii) } H_3O^{+}]{\text{(i) } C_6H_5MgBr} CH_3CH_2CH_2COC_6H_5$
B
$(C_6H_5)_2Cd \xrightarrow{CH_3COCl} C_6H_5COCH_3$
C
$CH_2=CHCH_2CH(OH)C_6H_5 \xrightarrow{PCC} CH_2=CHCH_2COC_6H_5$
D
$C_6H_5CH_2CN \xrightarrow[\text{(ii) } H_3O^{+}]{\text{(i) } C_2H_5MgBr} C_6H_5CH_2COC_2H_5$

Solution

(B) आयोडोफॉर्म परीक्षण उन यौगिकों द्वारा दिया जाता है जिनमें $CH_3CO-$ समूह (मिथाइल कीटोन) होता है या जिन्हें ऐसे समूह में ऑक्सीकृत किया जा सकता है।
$(A)$ $CH_3CH_2CH_2COC_6H_5$ (ब्यूटिरोफिनोन): इसमें $CH_3CO-$ समूह नहीं है।
$(B)$ $C_6H_5COCH_3$ (एसिटोफिनोन): यह एक मिथाइल कीटोन $(CH_3CO-C_6H_5)$ है,इसलिए यह धनात्मक आयोडोफॉर्म परीक्षण देता है।
$(C)$ $CH_2=CHCH_2COC_6H_5$: इसमें $CH_3CO-$ समूह नहीं है।
$(D)$ $C_6H_5CH_2COC_2H_5$: इसमें $CH_3CO-$ समूह नहीं है।
अतः,विकल्प $B$ सही उत्तर है।
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निम्नलिखित में से कौन सा अल्कोहल कमरे के तापमान पर ल्यूकास अभिकर्मक के साथ लगभग तुरंत सफेद धुंधलापन (turbidity) देता है?
$(i)$ $n-$ब्यूटेनॉल
$(ii)$ $tert-$ब्यूटेनॉल
$(iii)$ बेंजाइल अल्कोहल
$(iv)$ एलील अल्कोहल
A
$(i)$,$(ii)$ और $(iii)$
B
$(i)$,$(iii)$ और $(iv)$
C
$(ii)$,$(iii)$ और $(iv)$
D
$(i)$,$(ii)$ और $(iv)$

Solution

(C) ल्यूकास अभिकर्मक सांद्र $HCl$ और निर्जल $ZnCl_2$ का मिश्रण है। इसका उपयोग प्राथमिक,द्वितीयक और तृतीयक अल्कोहल के बीच अंतर करने के लिए किया जाता है।
$1$. तृतीयक अल्कोहल $(3^\circ)$ तुरंत सफेद धुंधलापन देते हैं।
$2$. द्वितीयक अल्कोहल $(2^\circ)$ $5-10 \ min$ में सफेद धुंधलापन देते हैं।
$3$. प्राथमिक अल्कोहल $(1^\circ)$ कमरे के तापमान पर प्रतिक्रिया नहीं देते हैं।
दिए गए यौगिकों का विश्लेषण:
$(i)$ $n-$ब्यूटेनॉल एक प्राथमिक अल्कोहल है।
$(ii)$ $tert-$ब्यूटेनॉल एक तृतीयक अल्कोहल है।
$(iii)$ बेंजाइल अल्कोहल और $(iv)$ एलील अल्कोहल अपने कार्बोनियम आयन की स्थिरता के कारण तुरंत प्रतिक्रिया देते हैं।
अतः,$(ii)$,$(iii)$ और $(iv)$ सही उत्तर हैं।
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निम्नलिखित अभिक्रिया में मुख्य उत्पाद है:
Question diagram
A
$4$-एसिटॉक्सीबेन्ज़ोइक अम्ल
B
$2$-एसिटॉक्सीबेन्ज़ोइक अम्ल
C
$4$-हाइड्रॉक्सी-$3$-एसिटाइलबेन्ज़ोइक अम्ल
D
$2$-हाइड्रॉक्सीबेन्ज़ोइक अम्ल मिथाइल एस्टर

Solution

(B) अभिक्रिया का क्रम इस प्रकार है:
$1$. फिनोल $NaOH$ के साथ अभिक्रिया करके सोडियम फिनॉक्साइड बनाता है।
$2$. सोडियम फिनॉक्साइड $CO_2$ के साथ कोल्बे अभिक्रिया करता है और उसके बाद अम्लीकरण $(H_3O^+)$ द्वारा सैलिसिलिक अम्ल ($2$-हाइड्रॉक्सीबेन्ज़ोइक अम्ल) उत्पन्न करता है।
$3$. सैलिसिलिक अम्ल फिर अम्ल उत्प्रेरक $(H^+)$ की उपस्थिति में एसिटिक एनहाइड्राइड $((CH_3CO)_2O)$ के साथ अभिक्रिया करके फिनोलिक $-OH$ समूह का एसिटाइलेशन करता है।
$4$. अंतिम उत्पाद $2$-एसिटॉक्सीबेन्ज़ोइक अम्ल है,जिसे आमतौर पर एस्पिरिन के रूप में जाना जाता है।
62
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निम्नलिखित अभिक्रिया में बनने वाला मुख्य उत्पाद है:
Question diagram
A
एस्पिरिन (o-एसीटॉक्सीबेंजोइक एसिड)
B
मिथाइल सैलिसिलेट
C
p-एसीटॉक्सीबेंजोइक एसिड
D
मिथाइल p-हाइड्रॉक्सीबेंजोएट

Solution

(A) अभिक्रिया का क्रम इस प्रकार है:
$1$. फिनोल की $NaOH$ के साथ,उसके बाद $CO_2$ और फिर $H^+/H_2O$ के साथ अभिक्रिया कोल्बे-श्मिट अभिक्रिया है,जो सैलिसिलिक एसिड ($2$-हाइड्रॉक्सीबेंजोइक एसिड) देती है।
$2$. इसके बाद पिरिडीन की उपस्थिति में $CH_3COCl$ के साथ अभिक्रिया फिनोलिक $-OH$ समूह का एसीटिलीकरण है।
$3$. यह सैलिसिलिक एसिड के $-OH$ समूह को एसीटॉक्सी समूह $(-OCOCH_3)$ में परिवर्तित कर देता है,जिसके परिणामस्वरूप एस्पिरिन ($2$-एसीटॉक्सीबेंजोइक एसिड) का निर्माण होता है।
63
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निम्नलिखित अभिक्रिया में $X$ और $Y$ क्या हैं?
Question diagram
A
साइक्लोहेक्सिल आयोडाइड और फेनिल आयोडाइड
B
साइक्लोहेक्सिल आयोडाइड और फिनोल
C
साइक्लोहेक्सानोल और फेनिल आयोडाइड
D
साइक्लोहेक्सानोल और फिनोल

Solution

(B) एल्किल एरिल ईथर की $HI$ के साथ अभिक्रिया में ईथर के ऑक्सीजन परमाणु का प्रोटोनेशन होता है,जिसके बाद आयोडाइड आयन $(I^-)$ का कम बाधा वाले एल्किल समूह पर न्यूक्लियोफिलिक आक्रमण होता है। इस मामले में,साइक्लोहेक्सिल समूह एल्किल समूह है और फेनिल समूह एरिल समूह है। $I^-$ आयन साइक्लोहेक्सिल कार्बन पर आक्रमण करता है,जिससे साइक्लोहेक्सिल आयोडाइड $(X)$ और फिनोल $(Y)$ का निर्माण होता है।
64
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निम्नलिखित अभिक्रिया में बनने वाला मुख्य उत्पाद है:
Question diagram
A
$Ph-CH_2-CH_2-CH_2-CH_2-CH_2-NH_2$
B
$Ph-CH_2-CH_2-CH_2-CH_2-CH_2-OH$
C
$Ph-CH=CH-CH_2-CH_2-CH_2-NH_2$
D
$Ph-CH=CH-CH_2-CH_2-CHO$

Solution

(D) अभिकर्मक $DIBAL-H$ (डाईआइसोब्यूटाइल एल्युमीनियम हाइड्राइड,$AlH(i-Bu)_2$) एक चयनात्मक अपचायक है। यह जल-अपघटन के बाद नाइट्राइल $(-CN)$ को एल्डिहाइड $(-CHO)$ में अपचयित करता है,जबकि कार्बन-कार्बन द्वि-आबंध $(C=C)$ जैसे अन्य क्रियात्मक समूहों को प्रभावित नहीं करता है। इसलिए,$Ph-CH=CH-CH_2-CH_2-CN$ की $DIBAL-H$ और उसके बाद $H_2O$ के साथ अभिक्रिया से $Ph-CH=CH-CH_2-CH_2-CHO$ प्राप्त होता है।
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निम्नलिखित अभिकर्मकों में से कौन सा एस्टर को एल्डिहाइड में परिवर्तित कर सकता है?
A
$AlH(i-Bu)_2$
B
$Sn + HCl$
C
$H_2 / Pd, BaSO_4$
D
$DIBAL-H$

Solution

(D) $DIBAL-H$ का अर्थ है डाइआइसोब्यूटिल एल्युमिनियम हाइड्राइड,जिसका सूत्र $(i-Bu)_2AlH$ है।
यह एक चयनात्मक अपचायक है जो कम तापमान (आमतौर पर $-78 \ ^\circ C$) पर एस्टर को एल्डिहाइड में अपचयित करता है।
इसलिए,सही अभिकर्मक $DIBAL-H$ है।
अतः,सही विकल्प $(d)$ है।
66
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निम्नलिखित अभिक्रिया अनुक्रम में $X$ और $Y$ क्या हैं?
$Toluene$ $\xrightarrow{X} Benzaldehyde$ $\xrightarrow{HNO_3 + H_2SO_4, 273-283 \ K} Y$
A
$(i) \ CrO_2Cl_2/CS_2, (ii) \ H_3O^+$; $Y = m-nitrobenzaldehyde$
B
$CrO_3/H_2SO_4$; $Y = m-sulfobenzaldehyde$
C
$CrO_2Cl_2/H_3O^+$; $Y = benzoic \ acid$
D
$CrO_3/H_2SO_4$; $Y = m-nitrobenzoic \ acid$

Solution

(A) अभिक्रिया अनुक्रम इस प्रकार है:
$1$. $Toluene$ का $Benzaldehyde$ में परिवर्तन एक ऑक्सीकरण अभिक्रिया है जिसे $Etard$ अभिक्रिया कहा जाता है,जिसमें $CS_2$ में $CrO_2Cl_2$ और उसके बाद जल-अपघटन $(H_3O^+)$ का उपयोग किया जाता है। अतः,$X = (i) \ CrO_2Cl_2/CS_2, (ii) \ H_3O^+$.
$2$. $Benzaldehyde$ में $-CHO$ समूह होता है,जो इलेक्ट्रॉनरागी प्रतिस्थापन अभिक्रियाओं के लिए एक निष्क्रिय करने वाला और $meta$-निर्देशी समूह है।
$3$. $273-283 \ K$ पर नाइट्राइटिंग मिश्रण $(HNO_3 + H_2SO_4)$ का उपयोग करके $Benzaldehyde$ का नाइट्रीकरण करने पर मुख्य उत्पाद के रूप में $m-nitrobenzaldehyde$ प्राप्त होता है। अतः,$Y = m-nitrobenzaldehyde$.
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निम्नलिखित में से कौन सी अभिक्रियाएँ $n$-ब्यूटेनॉल उत्पन्न करती हैं?
Question diagram
A
$I, II$ और $III$
B
$II, III$ और $IV$
C
$I, II$ और $IV$
D
$I, III$ और $IV$

Solution

(D) आइए प्रत्येक अभिक्रिया का विश्लेषण करें:
$I$. $CH_3CH_2CH=CH_2 \xrightarrow[(ii) NaOH/H_2O_2]{(i) B_2H_6} CH_3CH_2CH_2CH_2OH$ ($n$-ब्यूटेनॉल)। यह हाइड्रोबोरेशन-ऑक्सीकरण है,जो पानी के एंटी-मार्कोवनिकोव योग का पालन करता है।
$II$. $CH_3CH_2CHO \xrightarrow[(ii) H_2O]{(i) CH_3MgI} CH_3CH_2CH(OH)CH_3$ (ब्यूटेन-$2$-ऑल)। यह एक ग्रिग्नार्ड अभिक्रिया है जो द्वितीयक अल्कोहल बनाती है।
$III$. $CH_3CH_2CH_2CN$ $\xrightarrow[(ii) H_3O^+]{(i) SnCl_2, HCl} CH_3CH_2CH_2CHO$ $\xrightarrow{NaBH_4} CH_3CH_2CH_2CH_2OH$ ($n$-ब्यूटेनॉल)। स्टीफन अपचयन नाइट्राइल को एल्डिहाइड में परिवर्तित करता है,जिसे बाद में प्राथमिक अल्कोहल में अपचयित किया जाता है।
$IV$. $CH_3CH_2CH_2CO_2H \xrightarrow{B_2H_6} CH_3CH_2CH_2CH_2OH$ ($n$-ब्यूटेनॉल)। डाइबोरेन विशेष रूप से कार्बोक्सिलिक एसिड को प्राथमिक अल्कोहल में अपचयित करता है।
अतः,अभिक्रियाएँ $I, III$ और $IV$ $n$-ब्यूटेनॉल उत्पन्न करती हैं।
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निम्नलिखित अभिक्रिया अनुक्रम में मुख्य उत्पाद $P$ और $Q$ हैं
Question diagram
A
$P$ = बेंजीन-$1,4$-डाइकार्बोक्सिलिक एसिड,$Q$ = बेंजीन-$1,4$-डाइमेथेनॉल
B
$P$ = $4$-मेथिलबेंजोइक एसिड,$Q$ = $4$-मेथिलबेंज़िल अल्कोहल
C
$P$ = बेंजीन-$1,4$-डाइकार्बोक्सिलिक एसिड,$Q$ = बेंजीन-$1,4$-डाइकार्बाल्डिहाइड
D
$P$ = बेंजीन-$1,4$-डाइकार्बोक्सिलिक एसिड,$Q$ = $p$-जाइलीन

Solution

(A) प्रारंभिक पदार्थ $4$-मेथिलएसीटोफिनोन है।
$(i)$ $KOH$ और गर्मी की उपस्थिति में अतिरिक्त $KMnO_4$ के साथ उपचार करने पर बेंजीन रिंग से जुड़े एल्काइल समूह $(-CH_3)$ और एसिटाइल समूह $(-COCH_3)$ दोनों का ऑक्सीकरण होकर कार्बोक्सिलेट समूह $(-COO^-)$ बन जाते हैं।
(ii) इसके बाद $dil. H_2SO_4$ के साथ अम्लीकरण करने पर कार्बोक्सिलेट समूह कार्बोक्सिलिक एसिड समूह $(-COOH)$ में परिवर्तित हो जाते हैं,जिससे उत्पाद $P$ के रूप में टेरेफ्थेलिक एसिड (बेंजीन-$1,4$-डाइकार्बोक्सिलिक एसिड) प्राप्त होता है।
(iii) $LiAlH_4$ एक शक्तिशाली अपचायक है जो दोनों कार्बोक्सिलिक एसिड समूहों को प्राथमिक अल्कोहल समूहों $(-CH_2OH)$ में अपचयित कर देता है।
(iv) अंत में $H_3O^+$ के साथ उपचार करने पर उत्पाद $Q$ के रूप में बेंजीन-$1,4$-डाइमेथेनॉल प्राप्त होता है।
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निम्नलिखित अभिक्रिया अनुक्रम में मुख्य उत्पाद है
Question diagram
A
$1$-ब्रोमो-$1$-एथिलसाइक्लोहेक्सेन
B
$1$-ब्रोमो-$2$-एथिलसाइक्लोहेक्सेन
C
$1$-ब्रोमो-$1$-एथिलसाइक्लोहेक्सेन (आइसोमर)
D
$3$-ब्रोमो-$1$-एथिलसाइक्लोहेक्सेन

Solution

(A) $Step \ 1$: साइक्लोहेक्सानोन $EtMgBr$ (ग्रिग्नार्ड अभिकर्मक) के साथ अभिक्रिया करता है और उसके बाद जल-अपघटन $(H_2O)$ द्वारा $1$-एथिलसाइक्लोहेक्सानोल बनाता है।
$Step \ 2$: $20\% \ H_3PO_4$ की उपस्थिति में $1$-एथिलसाइक्लोहेक्सानोल का निर्जलीकरण होने पर एथिलिडीनसाइक्लोहेक्सेन मुख्य एल्कीन उत्पाद के रूप में प्राप्त होता है।
$Step \ 3$: एथिलिडीनसाइक्लोहेक्सेन में $HBr$ का योग मार्कोवनिकोव के नियम का पालन करता है,जहाँ प्रोटॉन द्वि-आबंध के टर्मिनल कार्बन पर जुड़ता है और ब्रोमाइड आयन अधिक प्रतिस्थापित कार्बन पर जुड़ता है,जिसके परिणामस्वरूप अंतिम उत्पाद $(P)$ के रूप में $1$-ब्रोमो-$1$-एथिलसाइक्लोहेक्सेन प्राप्त होता है।
70
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निम्नलिखित अभिक्रिया अनुक्रम में उत्पाद $R$ क्या है?
Question diagram
A
$p$-जाइलीन
B
टोल्यूनि
C
$p$-क्रेसोल
D
$p$-मिथाइलबेन्जिल अल्कोहल

Solution

(B) दी गई अभिक्रिया $4$-मिथाइलबेन्जल्डिहाइड की सांद्र $NaOH$ के साथ कैनिज़ारो अभिक्रिया है।
$2 \ CH_3-C_6H_4-CHO + NaOH \xrightarrow{\Delta} CH_3-C_6H_4-CH_2OH (P) + CH_3-C_6H_4-COONa (Q)$.
यहाँ,$P$,$4$-मिथाइलबेन्जिल अल्कोहल है और $Q$,सोडियम $4$-मिथाइलबेन्जोएट है।
जब $Q$ को सोडालाइम $(NaOH + CaO)$ के साथ गर्म किया जाता है,तो यह विकार्बोक्सिलीकरण (decarboxylation) के माध्यम से टोल्यूनि $(R)$ बनाता है।
$CH_3-C_6H_4-COONa + NaOH \xrightarrow{CaO, \Delta} CH_3-C_6H_5 + Na_2CO_3$.
अतः,उत्पाद $R$ टोल्यूनि है।
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एक कार्बनिक यौगिक '$A$' जिसका आणविक सूत्र $C_8H_8O$ है,$I_2/KOH$ के साथ अभिक्रिया करके कार्बोक्सिलिक अम्ल का लवण '$B$' और एक हेलो-यौगिक '$C$' देता है। यौगिक '$C$' सिल्वर पाउडर के साथ अभिक्रिया करके '$D$' देता है। '$A$' और '$D$' की संरचनाएँ हैं
A
$A$: एसीटोफिनोन,$D$: $CH_3CHO$
B
$A$: एसीटोफिनोन,$D$: $HC\equiv CH$
C
$A$: फेनिल विनाइल ईथर,$D$: $H_2C=CH_2$
D
$A$: एसीटोफिनोन,$D$: $CH_4$

Solution

(B) $1$. यौगिक '$A$' का आणविक सूत्र $C_8H_8O$ है और यह $I_2/KOH$ (हेलोफॉर्म अभिक्रिया) के साथ अभिक्रिया करता है,जो मिथाइल कीटोन समूह $(-COCH_3)$ की उपस्थिति को दर्शाता है।
$2$. एसीटोफिनोन $(C_6H_5COCH_3)$ इस विवरण के अनुरूप है। यह $I_2/KOH$ के साथ अभिक्रिया करके पोटेशियम बेंजोएट ('$B$',$C_6H_5COOK$) और आयोडोफॉर्म ('$C$',$CHI_3$) बनाता है।
$3$. आयोडोफॉर्म $(CHI_3)$ को सिल्वर पाउडर $(Ag)$ के साथ गर्म करने पर विहैलोजनीकरण (dehalogenation) द्वारा एसिटिलीन ('$D$',$HC\equiv CH$) प्राप्त होता है।
$4$. अभिक्रिया इस प्रकार है: $2CHI_3 + 6Ag \rightarrow HC\equiv CH + 6AgI$.
$5$. अतः,'$A$' एसीटोफिनोन है और '$D$' एसिटिलीन $(HC\equiv CH)$ है।
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निम्नलिखित अभिक्रिया अनुक्रम का मुख्य उत्पाद है:
एनिलीन $\xrightarrow[(i) NaNO_2, HCl, 273-278K]{(ii) H_2O, warm} \text{उत्पाद}$ $\xrightarrow[(iv) NaOH]{(iii) Br_2, (excess)} \text{उत्पाद}$ $\xrightarrow{(v) CH_3I} \text{अंतिम उत्पाद}$
A
$2,4$-डाइब्रोमोऐनिसोल
B
$3,5$-डाइब्रोमोऐनिसोल
C
$2,4,6$-ट्राइब्रोमोऐनिसोल
D
$2,3,4$-ट्राइब्रोमोऐनिसोल

Solution

(C) अभिक्रिया अनुक्रम इस प्रकार है:
$1$. एनिलीन $273-278 \ K$ पर $NaNO_2/HCl$ के साथ अभिक्रिया करके बेंजीन डायज़ोनियम क्लोराइड बनाता है।
$2$. गर्म $H_2O$ के साथ जल-अपघटन करने पर डायज़ोनियम लवण फिनोल में परिवर्तित हो जाता है।
$3$. फिनोल अतिरिक्त $Br_2$ (ब्रोमीन जल) के साथ अभिक्रिया करके इलेक्ट्रोफिलिक एरोमैटिक प्रतिस्थापन द्वारा $2,4,6$-ट्राइब्रोमोफिनोल देता है।
$4$. $NaOH$ के साथ उपचार फिनोल को सोडियम फिनोक्साइड ($2,4,6$-ट्राइब्रोमोफिनोक्साइड) में बदल देता है।
$5$. अंत में,$CH_3I$ के साथ अभिक्रिया (विलियमसन ईथर संश्लेषण) अंतिम उत्पाद के रूप में $2,4,6$-ट्राइब्रोमोऐनिसोल प्रदान करती है।
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निम्नलिखित में से कौन सा यौगिक हॉफमैन निम्नीकरण (Hoffmann degradation) अभिक्रिया देता है?
A
$CH_3CN$
B
$CH_3CONHCH_3$
C
$CH_3CONH_2$
D
$CH_3NC$

Solution

(C) हॉफमैन ब्रोमामाइड निम्नीकरण अभिक्रिया एक ऐसी विधि है जिसका उपयोग प्राथमिक एमाइड को प्राथमिक एमाइन में बदलने के लिए किया जाता है,जिसमें शुरुआती एमाइड की तुलना में एक कार्बन परमाणु कम होता है।
सामान्य अभिक्रिया है: $R-CONH_2 + Br_2 + 4KOH \rightarrow R-NH_2 + K_2CO_3 + 2KBr + 2H_2O$.
दिए गए विकल्पों में से,$CH_3CONH_2$ (एसिटामाइड) एकमात्र प्राथमिक एमाइड है। अन्य यौगिक एक नाइट्राइल $(CH_3CN)$,एक द्वितीयक एमाइड $(CH_3CONHCH_3)$,और एक आइसोसाइनाइड $(CH_3NC)$ हैं।
इसलिए,$CH_3CONH_2$ हॉफमैन निम्नीकरण अभिक्रिया देता है।
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निम्नलिखित में से कौन सा कथन सत्य है?
A
एलिफैटिक डायज़ोनियम लवण स्थिर होते हैं।
B
एनिलीन को उसके डायज़ोनियम लवण के माध्यम से फिनोल में परिवर्तित नहीं किया जा सकता है।
C
एलिफैटिक डायज़ोनियम लवण मात्रात्मक रूप से नाइट्रोजन गैस मुक्त करते हैं।
D
एनिलीन को उसके डायज़ोनियम लवण के माध्यम से फ्लोरोबेंजीन में परिवर्तित नहीं किया जा सकता है।

Solution

(C) डायज़ोनियम लवण कार्बनिक यौगिकों का एक समूह है जिसमें सामान्य कार्यात्मक समूह $R-N_2^+ X^-$ होता है,जहाँ $R$ एक कार्बनिक समूह (एल्काइल या एराइल) है और $X$ एक अकार्बनिक आयन है।
$(a)$ एलिफैटिक डायज़ोनियम लवण अत्यधिक अस्थिर होते हैं और कम तापमान पर भी विघटित हो जाते हैं।
$(b)$ एनिलीन को उसके डायज़ोनियम लवण को पानी के साथ गर्म करके फिनोल में परिवर्तित किया जा सकता है।
$(c)$ एलिफैटिक डायज़ोनियम लवण विघटित होकर मात्रात्मक रूप से नाइट्रोजन गैस मुक्त करते हैं।
$(d)$ एनिलीन को बाल्ज़-शीमैन अभिक्रिया द्वारा उसके डायज़ोनियम लवण से फ्लोरोबेंजीन में परिवर्तित किया जा सकता है।
अतः,कथन $(c)$ सत्य है।
75
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निम्नलिखित रूपांतरण किसके द्वारा पूरा किया जा सकता है:
Question diagram
A
$LiAlH_4$,पिरिडिनियम डाइक्रोमेट
B
$Br_2 / 4 KOH$,$NaNO_2 / HCl$
C
$Br_2 / 3 KOH$,अल्कोहलिक $KMnO_4$
D
$NaNO_2 / HCl$,$LiAlH_4$

Solution

(B) चरण $(i)$: एमाइड ब्रोमीन और जलीय $KOH$ के साथ अभिक्रिया करके हॉफमैन ब्रोमामाइड निम्नीकरण द्वारा प्राथमिक एमीन बनाता है।
चरण $(ii)$: प्राथमिक एमीन कम तापमान पर $NaNO_2 / HCl$ (नाइट्रस अम्ल) के साथ अभिक्रिया करके डायज़ोनियम लवण बनाता है,जिसका जल-अपघटन करने पर अल्कोहल प्राप्त होता है।
76
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निम्नलिखित अभिक्रियाओं में,$P, Q$ और $R$ हैं
Question diagram
A
$P$: अमोनियम थैलेट,$Q$: थैलेमाइड,$R$: थैलिमाइड
B
$P$: अमोनियम थैलेट,$Q$: थैलिमाइड,$R$: थैलेमाइड
C
$P$: थैलेमाइड,$Q$: अमोनियम थैलेट,$R$: थैलिमाइड
D
$P$: थैलेमाइड,$Q$: थैलिमाइड,$R$: अमोनियम थैलेट

Solution

(A) थैलिक एसिड की $NH_3$ के साथ अभिक्रिया से अमोनियम थैलेट $(P)$ प्राप्त होता है।
अमोनियम थैलेट $(P)$ को गर्म करने पर पानी के दो अणु निकल जाते हैं और थैलेमाइड $(Q)$ बनता है।
थैलेमाइड $(Q)$ को और अधिक गर्म करने पर अमोनिया का एक अणु निकल जाता है और थैलिमाइड $(R)$ बनता है।
77
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निम्नलिखित अभिक्रिया अनुक्रम में $X$ की पहचान करें:
Question diagram
A
$p$-फ्लुओरोटोलुईन
B
$p$-क्रेसोल
C
$p$-टोलुईनडायज़ोनियम फ्लुओरोबोरेट
D
$p$-नाइट्रोटोलुईन

Solution

(D) अभिक्रिया अनुक्रम इस प्रकार है:
$1$. $p$-टोलुईडीन $NaNO_2$ और $HCl$ के साथ $273-278 \ K$ पर अभिक्रिया करके $p$-टोलुईनडायज़ोनियम क्लोराइड बनाता है (डायज़ोटीकरण)।
$2$. डायज़ोनियम लवण $HBF_4$ के साथ अभिक्रिया करके $p$-टोलुईनडायज़ोनियम फ्लुओरोबोरेट बनाता है,जो गर्म करने पर विघटित होकर $p$-फ्लुओरोटोलुईन देता है (बाल्ज़-शीमैन अभिक्रिया)।
$3$. $p$-फ्लुओरोटोलुईन $NaNO_2$ और $Cu$ के साथ गर्म करने पर फ्लुओरीन परमाणु को नाइट्रो समूह द्वारा प्रतिस्थापित कर देता है,जिससे $p$-नाइट्रोटोलुईन प्राप्त होता है।
अतः,अंतिम उत्पाद $X$ $p$-नाइट्रोटोलुईन है।
78
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निम्नलिखित अभिक्रिया में मुख्य उत्पाद है:
Question diagram
A
Option A
B
Option B
C
Option C
D
Option D

Solution

(D) दी गई अभिक्रिया में,$p$-टोल्यूडीन $273-278 \ K$ पर $NaNO_2$ और $HCl$ के साथ अभिक्रिया करके एक डायज़ोनियम लवण ($p$-मिथाइलबेन्ज़ीनडायज़ोनियम क्लोराइड) बनाता है।
यह डायज़ोनियम लवण फिर $H^+$ की उपस्थिति में $N$-फेनिलपायरोलिडिन के साथ इलेक्ट्रोफिलिक एरोमैटिक प्रतिस्थापन (युग्मन अभिक्रिया) से गुजरता है।
युग्मन अभिक्रिया $N$-फेनिलपायरोलिडिन वलय के पैरा-स्थान पर होती है क्योंकि पायरोलिडिनिल समूह एक प्रबल ऑर्थो/पैरा-निर्देशी समूह है और पैरा-स्थान त्रिविम रूप से कम बाधित होता है।
अतः,मुख्य उत्पाद विकल्प $D$ में दर्शाया गया पैरा-युग्मित एज़ो रंजक है।
79
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निम्नलिखित अभिक्रिया अनुक्रम में मुख्य उत्पाद है:
Question diagram
A
$4$-ब्रोमो-$2$-क्लोरोएनिलीन
B
$1$-ब्रोमो-$4$-क्लोरोबेंजीन
C
$3$-ब्रोमो-क्लोरोबेंजीन
D
$1$-ब्रोमो-$2$-क्लोरोबेंजीन

Solution

(B) अभिक्रिया अनुक्रम इस प्रकार है:
$1$. $(CH_3CO)_2O$ और पिरिडीन के साथ एनिलीन का एसिटिलेशन $-NH_2$ समूह की रक्षा करता है,जिससे एसिटानिलाइड बनता है।
$2$. $-NHCOCH_3$ समूह की त्रिविम बाधा (steric hindrance) के कारण $CH_3CO_2H$ में $Br_2$ के साथ इलेक्ट्रोफिलिक एरोमैटिक प्रतिस्थापन पैरा-स्थान पर होता है,जिससे $p$-ब्रोमोएसिटानिलाइड प्राप्त होता है।
$3$. $NaOH(aq)$ के साथ जल-अपघटन एसिटिल समूह को हटाकर $p$-ब्रोमोएनिलीन को पुनर्जीवित करता है।
$4$. $0-5 \ ^\circ C$ पर $HNO_2$ के साथ डायज़ोटाइजेशन $-NH_2$ समूह को डायज़ोनियम लवण,$-N_2^+Cl^-$ में परिवर्तित करता है।
$5$. $CuCl/HCl$ के साथ सैंडमेयर अभिक्रिया डायज़ोनियम समूह को क्लोरीन परमाणु द्वारा प्रतिस्थापित करती है,जिसके परिणामस्वरूप $1$-ब्रोमो-$4$-क्लोरोबेंजीन प्राप्त होता है।
Solution diagram
80
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बेंजाइलएमाइन की नाइट्रस एसिड के साथ अभिक्रिया से बनने वाला मुख्य उत्पाद है
A
फिनोल
B
बेंजाल्डिहाइड
C
क्लोरोबेंजीन
D
बेंजाइल अल्कोहल

Solution

(D) बेंजाइलएमाइन $(C_6H_5CH_2NH_2)$ एक प्राथमिक एलिफैटिक एमाइन है।
जब यह नाइट्रस एसिड $(HNO_2)$ के साथ अभिक्रिया करता है,जिसे कम तापमान $(273-278 \ K)$ पर $NaNO_2$ और $HCl$ की अभिक्रिया द्वारा इन-सिटू उत्पन्न किया जाता है,तो यह एक अस्थिर डायज़ोनियम लवण बनाता है।
यह डायज़ोनियम लवण तुरंत जल-अपघटन (hydrolysis) के माध्यम से बेंजाइल अल्कोहल $(C_6H_5CH_2OH)$ और नाइट्रोजन गैस $(N_2)$ में परिवर्तित हो जाता है।
अभिक्रिया इस प्रकार है: $C_6H_5CH_2NH_2 + HNO_2 \rightarrow C_6H_5CH_2OH + N_2 + H_2O$।
अतः,मुख्य उत्पाद बेंजाइल अल्कोहल है।
81
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निम्नलिखित अभिक्रिया का मुख्य उत्पाद क्या है?
Question diagram
A
सोडियम $2-$क्लोरोफेनोलेट
B
सोडियम $2-$कार्बोक्सीफेनोलेट
C
सोडियम $2-$फॉर्मिलफेनोलेट
D
सोडियम $2-$हाइड्रॉक्सीफेनोलेट

Solution

(C) जलीय $NaOH$ की उपस्थिति में फिनोल की $CHCl_3$ के साथ अभिक्रिया को $Reimer-Tiemann$ अभिक्रिया के रूप में जाना जाता है।
इस अभिक्रिया में,$CHCl_3$,$NaOH$ के साथ अभिक्रिया करके एक डाइक्लोरोकार्बीन मध्यवर्ती $(:CCl_2)$ उत्पन्न करता है।
यह इलेक्ट्रोफिलिक कार्बीन फेनॉक्साइड आयन पर ऑर्थो स्थिति पर आक्रमण करता है।
प्राप्त मध्यवर्ती का जल-अपघटन होने पर सैलिसिलल्डिहाइड ($2$-हाइड्रॉक्सीबेंजाल्डिहाइड) अपने लवण रूप में प्राप्त होता है,जो सोडियम $2-$फॉर्मिलफेनोलेट है।
82
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निम्नलिखित अभिक्रियाओं में मुख्य उत्पाद $P$ और $Q$ क्या हैं:
$C_6H_5-CH=NOH$ $\xrightarrow{(i) (CH_3CO)_2O} P$ $\xrightarrow{(i) CH_3MgI, (ii) H_3O^+} Q$
A
$P$ = $C_6H_5-CN$,$Q$ = $C_6H_5-CO-CH_3$
B
$P$ = $C_6H_5-CONH_2$,$Q$ = $C_6H_5-CO-CH_3$
C
$P$ = $C_6H_5-CHO$,$Q$ = $C_6H_5-CH(OH)-CH_3$
D
$P$ = $C_6H_5-CN$,$Q$ = $C_6H_5-CH(OH)-CH_3$

Solution

(A) चरण $1$: बेंजल्डिहाइड ऑक्साइम $(C_6H_5-CH=NOH)$ की एसिटिक एनहाइड्राइड $((CH_3CO)_2O)$ के साथ अभिक्रिया निर्जलीकरण द्वारा बेंजोनाइट्राइल $(P = C_6H_5-CN)$ बनाती है।
चरण $2$: बेंजोनाइट्राइल $(C_6H_5-CN)$ की मिथाइल मैग्नीशियम आयोडाइड $(CH_3MgI)$ के साथ अभिक्रिया और उसके बाद अम्लीय जल-अपघटन $(H_3O^+)$ कीटोन बनाने की एक मानक विधि है। ग्रिग्नार्ड अभिकर्मक नाइट्राइल कार्बन पर आक्रमण करके एक इमीन मध्यवर्ती बनाता है,जिसका जल-अपघटन एसिटोफेनोन $(Q = C_6H_5-CO-CH_3)$ देता है।
83
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जब एनिलिन को $KOH$ (अल्कोहलिक) की उपस्थिति में क्लोरोफॉर्म के साथ उपचारित किया जाता है,तो बनने वाला उत्पाद है
A
फिनोल
B
फेनिल आइसोथियोसाइनेट
C
फेनिल आइसोसाइनाइड
D
साइनोबेंजीन

Solution

(C) प्राथमिक एमाइन (एलिफैटिक और एरोमैटिक दोनों) की क्लोरोफॉर्म $(CHCl_3)$ और अल्कोहलिक पोटेशियम हाइड्रॉक्साइड $(KOH)$ के साथ अभिक्रिया को कार्बिलएमाइन अभिक्रिया के रूप में जाना जाता है।
इस अभिक्रिया में,एनिलिन $(C_6H_5NH_2)$ $CHCl_3$ और $KOH$ के साथ अभिक्रिया करके फेनिल आइसोसाइनाइड $(C_6H_5NC)$ बनाता है,जिसे फेनिल कार्बिलएमाइन भी कहा जाता है।
रासायनिक समीकरण है: $C_6H_5NH_2 + CHCl_3 + 3KOH (alc.) \rightarrow C_6H_5NC + 3KCl + 3H_2O$.
अतः,सही उत्पाद फेनिल आइसोसाइनाइड है।
84
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स्टार्च को जब उच्च दाब पर तनु सल्फ्यूरिक अम्ल के साथ उबाला जाता है,तो यौगिक $A$ प्राप्त होता है। हाइड्रोआयोडिक अम्ल के साथ लंबे समय तक गर्म करने पर,$A$ यौगिक $B$ देता है। यौगिक $B$ क्या है?
A
$CH_3-(CH_2)_4-CH_3$
B
$HO-CH_2-(CHOH)_4-CHO$
C
$HOOC-(CHOH)_4-COOH$
D
$HO-CH_2-(CHOH)_4-COOH$

Solution

(A) स्टार्च $(C_6H_{10}O_5)_n$ सूत्र वाला एक पॉलीसैकराइड है।
जब स्टार्च को उच्च दाब पर तनु $H_2SO_4$ के साथ उबाला जाता है,तो इसका जल-अपघटन होकर ग्लूकोज $(A)$ प्राप्त होता है।
अभिक्रिया: $(C_6H_{10}O_5)_n + nH_2O \xrightarrow{\text{dil. } H_2SO_4, \text{high pressure}} nC_6H_{12}O_6$.
ग्लूकोज $(C_6H_{12}O_6)$ को हाइड्रोआयोडिक अम्ल $(HI)$ के साथ लंबे समय तक गर्म करने पर इसका अपचयन होकर $n$-हेक्सेन $(B)$ प्राप्त होता है,जो $CH_3-(CH_2)_4-CH_3$ है।
अतः,सही विकल्प $A$ है।
85
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निम्नलिखित में से कौन सा कथन ग्लूकोज के चक्रीय रूप का समर्थन करता है?
$(i)$ यह शिफ परीक्षण नहीं देता है।
$(ii)$ यह दो अलग-अलग क्रिस्टलीय रूपों में पाया जाता है।
$(iii)$ यह नाइट्रिक एसिड के साथ ऑक्सीकृत होकर सैकेरिक एसिड देता है।
$(iv)$ ग्लूकोज का पेंटाएसीटेट हाइड्रॉक्सिलएमाइन के साथ प्रतिक्रिया नहीं करता है।
A
$(i)$,$(ii)$ और $(iv)$
B
$(i)$,$(iii)$ और $(iv)$
C
$(ii)$ और $(iii)$
D
$(i)$,$(ii)$ और $(iii)$

Solution

(A) ग्लूकोज की चक्रीय संरचना निम्नलिखित तथ्यों द्वारा समर्थित है:
$(i)$ ग्लूकोज शिफ परीक्षण नहीं देता है क्योंकि $-CHO$ समूह हेमीएसीटल संरचना में शामिल होता है और मुक्त नहीं होता है।
$(ii)$ एनोमेरिक कार्बन के निर्माण के कारण ग्लूकोज दो अलग-अलग क्रिस्टलीय रूपों ($\alpha$-$D$-ग्लूकोज और $\beta$-$D$-ग्लूकोज) में मौजूद होता है।
$(iv)$ ग्लूकोज का पेंटाएसीटेट हाइड्रॉक्सिलएमाइन के साथ प्रतिक्रिया नहीं करता है क्योंकि एल्डिहाइड समूह मुक्त नहीं होता है (यह चक्रीय हेमीएसीटल रूप में होता है)।
कथन $(iii)$ ग्लूकोज का सैकेरिक एसिड में ऑक्सीकरण का वर्णन करता है,जो खुली श्रृंखला वाली संरचना का गुण है,न कि चक्रीय संरचना का।
इसलिए,कथन $(i)$,$(ii)$ और $(iv)$ ग्लूकोज की चक्रीय संरचना का समर्थन करते हैं।
86
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निम्नलिखित में से कौन सी शर्करा अपचायी (reducing) शर्करा हैं?
$I$. सुक्रोज
$II$. राइबोज
$III$. लैक्टोज
$IV$. फ्रुक्टोज
A
$I$ और $II$
B
$II, III$ और $IV$
C
$II$ और $III$
D
$I, II$ और $IV$

Solution

(B) अपचायी शर्करा वह कार्बोहाइड्रेट है जो मुक्त एल्डिहाइड या कीटोन समूह की उपस्थिति के कारण अपचायक के रूप में कार्य कर सकता है।
सभी मोनोसेकेराइड,जैसे $Ribose$ और $Fructose$,अपचायी शर्करा हैं।
डाईसेकेराइड में,$Lactose$ एक अपचायी शर्करा है क्योंकि इसमें एक मुक्त हेमीएसीटल समूह होता है,जबकि $Sucrose$ एक अनपचायी (non-reducing) शर्करा है क्योंकि इसके ग्लाइकोसिडिक बंधन में ग्लूकोज और फ्रुक्टोज दोनों के एनोमेरिक कार्बन शामिल होते हैं।
इसलिए,$II$ (राइबोज),$III$ (लैक्टोज),और $IV$ (फ्रुक्टोज) अपचायी शर्करा हैं।
अतः,सही विकल्प $B$ है।
87
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इन तथ्यों पर विचार करते हुए कि
$I$. सुक्रोज,ग्लूकोज के $C_1$ और फ्रुक्टोज के $C_2$ के बीच ग्लाइकोसिडिक लिंकेज बनाता है,जबकि
$II$. लैक्टोज,गैलेक्टोज के $C_1$ और ग्लूकोज के $C_4$ के बीच ग्लाइकोसिडिक लिंकेज बनाता है।
सही कथन चुनें।
A
सुक्रोज और लैक्टोज दोनों रिड्यूसिंग शर्करा हैं।
B
सुक्रोज और लैक्टोज दोनों नॉन-रिड्यूसिंग शर्करा हैं।
C
लैक्टोज,गैलेक्टोज के $C_1$ और ग्लूकोज के $C_4$ के बीच ग्लाइकोसिडिक लिंकेज बनाता है।
D
लैक्टोज एक रिड्यूसिंग शर्करा है और सुक्रोज एक नॉन-रिड्यूसिंग शर्करा है।

Solution

(D) सुक्रोज और लैक्टोज दोनों डाइसैकेराइड हैं।
सुक्रोज में,$\alpha-D$-ग्लूकोज का एनोमेरिक $C_1$ और $\beta-D$-फ्रुक्टोज का $C_2$,$1,2$-ग्लाइकोसिडिक लिंकेज द्वारा जुड़े होते हैं,इसलिए यह एक नॉन-रिड्यूसिंग शर्करा है।
लैक्टोज में,$\beta-D$-गैलेक्टोज का एनोमेरिक $C_1$,$1,4$-ग्लाइकोसिडिक लिंकेज द्वारा जुड़ा होता है,लेकिन $\beta-D$-ग्लूकोज का एनोमेरिक $C_1$ मुक्त $-OH$ समूह के साथ रहता है,जो रिड्यूसिंग गुण प्रदर्शित करता है।
88
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विषमचक्रीय (heterocyclic) वलय युक्त अमीनो अम्ल हैं:
$(i)$ हिस्टिडाइन
$(ii)$ वैलीन
$(iii)$ आर्जिनिन
$(iv)$ प्रोलीन
A
$(i)$,$(iv)$
B
$(ii)$,$(iii)$
C
$(i)$,$(iii)$
D
$(ii)$,$(iv)$

Solution

(A) दिए गए अमीनो अम्लों की संरचनाएं इस प्रकार हैं:
$1$. हिस्टिडाइन में एक इमिडाज़ोल वलय होता है,जो एक विषमचक्रीय वलय है।
$2$. वैलीन एक एलिफैटिक अमीनो अम्ल है जिसमें आइसोप्रोपिल पार्श्व श्रृंखला होती है।
$3$. आर्जिनिन की पार्श्व श्रृंखला में एक गुआनिडिनो समूह होता है,जो विषमचक्रीय वलय नहीं है।
$4$. प्रोलीन में एक पाइरोलिडिन वलय होता है,जो एक विषमचक्रीय वलय है।
अतः,हिस्टिडाइन $(i)$ और प्रोलीन $(iv)$ दोनों में विषमचक्रीय वलय होते हैं।
89
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एस्पार्टिक एसिड के लिए सही ज़्विटर आयनिक रूप चुनें।
A
संरचना $H_3\stackrel{\oplus}{N}-CH(COOH)-COOH$ दिखाती है।
B
संरचना $H_3\stackrel{\oplus}{N}-CH(COOH)-COO^{\ominus}$ दिखाती है।
C
संरचना $H_3\stackrel{\oplus}{N}-CH(COO^{\ominus})-COO^{\ominus}$ दिखाती है।
D
संरचना $H_2N-CH(COO^{\ominus})-COO^{\ominus}$ दिखाती है।

Solution

(B) एस्पार्टिक एसिड एक अम्लीय अमीनो एसिड है जिसकी संरचना $HOOC-CH(NH_2)-CH_2-COOH$ है।
इसके ज़्विटर आयनिक रूप में,$\alpha$-कार्बोक्सिल समूह $(-COOH)$ से प्रोटॉन अमीनो समूह $(-NH_2)$ पर स्थानांतरित होकर $-NH_3^{\oplus}$ और $-COO^{\ominus}$ बनाता है।
चूंकि एस्पार्टिक एसिड की साइड चेन में एक अतिरिक्त कार्बोक्सिल समूह होता है,इसलिए $\alpha$-कार्बोक्सिल समूह सबसे अधिक अम्लीय होता है और शारीरिक pH पर सबसे पहले अपना प्रोटॉन खो देता है।
अतः,सही ज़्विटर आयनिक रूप $H_3\stackrel{\oplus}{N}-CH(COO^{\ominus})-CH_2-COOH$ है।
90
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इंसुलिन और ग्लूकागन,जो रक्त शर्करा के स्तर को बनाए रखने के लिए जिम्मेदार हैं,किसके अंतर्गत आते हैं?
A
एंटीबॉडीज
B
हार्मोन
C
एंजाइम
D
परिवहन एजेंट

Solution

(B) इंसुलिन और ग्लूकागन अग्न्याशय द्वारा स्रावित पेप्टाइड हार्मोन हैं जो रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करते हैं।
इंसुलिन कोशिकाओं में ग्लूकोज के अवशोषण को बढ़ावा देकर रक्त शर्करा के स्तर को कम करता है,जबकि ग्लूकागन यकृत में ग्लाइकोजन को ग्लूकोज में बदलकर रक्त शर्करा के स्तर को बढ़ाता है।
91
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जेरोफ्थैलमिया रोग किसकी कमी के कारण होता है?
A
विटामिन $K$
B
विटामिन $B_2$
C
विटामिन $B_6$
D
विटामिन $A$

Solution

(D) जेरोफ्थैलमिया एक चिकित्सीय स्थिति है जिसमें आंखें आंसू पैदा करने में विफल रहती हैं।
यह मुख्य रूप से विटामिन $A$ की कमी के कारण होता है.
92
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निम्नलिखित अभिक्रिया में बनने वाला मुख्य उत्पाद है
$C_6H_5CH=CH_2$ $\xrightarrow[(ii) H_3O^+]{(i) KMnO_4, KOH, \Delta}$ $\xrightarrow{(iii) Br_2/FeBr_3} \text{Product}$
A
$p$-ब्रोमोफेनिलएसेटिक अम्ल
B
$o$-ब्रोमोबेन्जोइक अम्ल
C
$m$-ब्रोमोएसीटोफिनोन
D
$m$-ब्रोमोबेन्जोइक अम्ल

Solution

(D) चरण $(i)$ और $(ii)$: क्षारीय $KMnO_4$ के साथ स्टाइरीन $(C_6H_5CH=CH_2)$ का ऑक्सीकरण और उसके बाद अम्लीय वर्कअप $(H_3O^+)$ करने पर बेन्जोइक अम्ल $(C_6H_5COOH)$ प्राप्त होता है।
चरण $(iii)$: बेन्जोइक अम्ल में $-COOH$ समूह होता है,जो एक निष्क्रिय करने वाला और मेटा-निर्देशी समूह है। इसलिए,$Br_2/FeBr_3$ के साथ इलेक्ट्रोफिलिक एरोमैटिक प्रतिस्थापन अभिक्रिया में ब्रोमीन परमाणु मेटा स्थिति पर जुड़ जाएगा।
अंतिम उत्पाद $m$-ब्रोमोबेन्जोइक अम्ल है।
93
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निम्नलिखित में से कौन सी अभिक्रिया अपने अभिक्रिया मिश्रण में कार्बोक्सिलेट आयन देती है?
Question diagram
A
$I$ और $II$
B
$II$ और $III$
C
$I$ और $III$
D
$III$ और $IV$

Solution

(B) अभिक्रिया $(I)$ में,बेंजीन निर्जलीय $AlCl_3/CuCl$ की उपस्थिति में $CO$ और $HCl$ के साथ अभिक्रिया करके बेंजल्डिहाइड बनाता है (गाटरमैन-कोच अभिक्रिया)। इसमें कोई कार्बोक्सिलेट आयन नहीं बनता है।
अभिक्रिया $(II)$ में,एसिटाल्डिहाइड $(CH_3CHO)$ क्षारीय माध्यम में टॉलेन अभिकर्मक $([Ag(NH_3)_2]^+)$ के साथ अभिक्रिया करके एसीटेट आयन $(CH_3COO^-)$ बनाता है,जो एक कार्बोक्सिलेट आयन है।
अभिक्रिया $(III)$ में,बेंजल्डिहाइड फेलिंग विलयन $(Cu^{2+}/OH^-)$ के साथ अभिक्रिया करके बेंजोएट आयन $(C_6H_5COO^-)$ बनाता है,जो एक कार्बोक्सिलेट आयन है।
अभिक्रिया $(IV)$ में,एनिलीन को $Cl_2/hv$ और उसके बाद $373 \ K$ पर $H_2O$ के साथ उपचारित किया जाता है,जिसमें कार्बोक्सिलेट आयन नहीं बनता है।
अतः,अभिक्रिया $(II)$ और $(III)$ अपने अभिक्रिया मिश्रण में कार्बोक्सिलेट आयन उत्पन्न करती हैं।
94
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निम्नलिखित अभिक्रिया अनुक्रम में $A$ और $B$ की भविष्यवाणी करें:
Question diagram
A
$A = CH_3-CH_2-CH_2-CH(Br)-COOH$,$B = CH_3-(CH_2)_2-CH(Br)-COO^-K^+$
B
$A = CH_3-CH_2-CH(Br)-CH_2-COOH$,$B = CH_3-CH_2-CH(Br)-CH=CH-COO^-K^+$
C
$A = CH_3-CH_2-CH_2-CH(Br)-COOH$,$B = CH_3-CH=CH-CH_2-COOH$
D
$A = CH_3-CH_2-CH_2-CH(Br)-COOH$,$B = CH_3-CH_2-CH=CH-COO^-K^+$

Solution

(D) अभिक्रिया अनुक्रम इस प्रकार है:
$1$. पहला चरण हेल-वोलहार्ड-ज़ेलिंस्की $(HVZ)$ अभिक्रिया है,जहाँ पेंटेनोइक एसिड $(CH_3-CH_2-CH_2-CH_2-COOH)$ लाल फास्फोरस की उपस्थिति में $Br_2$ के साथ अभिक्रिया करके $\alpha$-हैलोजनीकरण द्वारा $2$-ब्रोमोपेंटेनोइक एसिड $(A)$ बनाता है $(CH_3-CH_2-CH_2-CH(Br)-COOH)$.
$2$. दूसरे चरण में अल्कोहलिक $KOH$ के साथ उपचार शामिल है,जो एक मजबूत क्षार के रूप में कार्य करता है और $\alpha$-ब्रोमो एसिड से $HBr$ के $\beta$-विलोपन को बढ़ावा देता है। इसके परिणामस्वरूप $\alpha,\beta$-असंतृप्त कार्बोक्सिलेट लवण,पोटेशियम पेंट$-2-$एनोएट $(B)$ बनता है $(CH_3-CH_2-CH=CH-COO^-K^+)$.
95
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$XeO_3$ में $Xe$ का संकरण क्या है?
A
$s p^3$
B
$s p^3 d$
C
$s p^3 d^3$
D
$d s p^2$

Solution

(A) $XeO_3$ में केंद्रीय परमाणु $Xe$ के संकरण $(H)$ को निर्धारित करने के लिए,हम सूत्र का उपयोग करते हैं:
$H = \frac{1}{2}(V + M - C + A)$
जहाँ:
$V$ = केंद्रीय परमाणु $(Xe)$ के संयोजी इलेक्ट्रॉनों की संख्या = $8$
$M$ = जुड़े हुए एकसंयोजक परमाणुओं की संख्या = $0$ (ऑक्सीजन द्विसंयोजक है)
$C$ = धनायनित आवेश की संख्या = $0$
$A$ = ऋणायनित आवेश की संख्या = $0$
मान रखने पर:
$H = \frac{1}{2}(8 + 0 - 0 + 0) = 4$
$4$ का मान $s p^3$ संकरण को दर्शाता है।
96
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शून्य कोटि की अभिक्रिया के लिए वेग स्थिरांक की इकाई क्या है?
A
$mol \,L^{-1} \,s^{-1}$
B
$L \,mol^{-1} \,s^{-1}$
C
$s^{-1}$
D
$mol \,L \,s^{-1}$

Solution

$(A)$ अभिक्रिया के लिए वेग नियम इस प्रकार है: $r = k[conc.]^n$, जहाँ $n$ अभिक्रिया की कोटि है।
वेग स्थिरांक $k$ के लिए सूत्र: $k = \frac{r}{[conc.]^n} = \frac{mol \,L^{-1} \,s^{-1}}{(mol \,L^{-1})^n} = mol^{1-n} \,L^{n-1} \,s^{-1}$.
शून्य कोटि की अभिक्रिया के लिए, $n = 0$.
$n = 0$ का मान रखने पर: $k = mol^{1-0} \,L^{0-1} \,s^{-1} = mol \,L^{-1} \,s^{-1}$.
97
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शून्य कोटि की अभिक्रिया के लिए,अभिकारक की सांद्रता $vs$ समय का आलेख कैसा होता है? (संकेत: सांद्रता अक्ष पर अंतःखंड पर विचार करें)
A
धनात्मक ढाल और शून्येतर धनात्मक अंतःखंड के साथ रैखिक
B
ऋणात्मक ढाल और शून्येतर धनात्मक अंतःखंड के साथ रैखिक
C
ऋणात्मक ढाल और शून्य अंतःखंड के साथ रैखिक
D
धनात्मक ढाल और शून्य अंतःखंड के साथ रैखिक

Solution

(B) शून्य कोटि की अभिक्रिया के लिए,समाकलित वेग समीकरण: $[A] = -kt + [A]_0$ है।
यह समीकरण एक सीधी रेखा के समीकरण $y = mx + c$ के समान है,जहाँ $y = [A]$,$x = t$,$m = -k$ (ढाल) और $c = [A]_0$ (अंतःखंड) है।
अतः,सांद्रता $[A]$ बनाम समय $t$ का आलेख एक सीधी रेखा है जिसकी ढाल $-k$ (ऋणात्मक) है और सांद्रता अक्ष पर अंतःखंड $[A]_0$ (धनात्मक) है।
98
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प्रथम कोटि की अभिक्रिया का अर्ध-आयु काल तापमान के साथ किस प्रकार परिवर्तित होता है?
A
$\ln (t_{1/2}) \propto \frac{1}{T}$
B
$\ln (t_{1/2}) \propto T$
C
$(t_{1/2}) \propto \frac{1}{T^2}$
D
$(t_{1/2}) \propto T^2$

Solution

(A) प्रथम कोटि की अभिक्रिया के लिए,$t_{1/2} = \frac{0.693}{k}$ होता है।
दोनों पक्षों का प्राकृतिक लघुगणक लेने पर:
$\ln (t_{1/2}) = \ln(0.693) - \ln k$ $(i)$।
आर्हेनियस समीकरण के अनुसार,$k = A e^{-E_a/RT}$,इसलिए $\ln k = \ln A - \frac{E_a}{RT}$।
$\ln k$ का मान समीकरण $(i)$ में प्रतिस्थापित करने पर:
$\ln (t_{1/2}) = \ln(0.693) - (\ln A - \frac{E_a}{RT})$
$\ln (t_{1/2}) = \ln(\frac{0.693}{A}) + \frac{E_a}{RT}$
चूंकि $\ln(\frac{0.693}{A})$ और $\frac{E_a}{R}$ स्थिरांक हैं,इसलिए $\ln (t_{1/2}) \propto \frac{1}{T}$ प्राप्त होता है।
99
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तापमान में प्रत्येक $10^{\circ}C$ की वृद्धि के साथ रासायनिक अभिक्रिया की दर दोगुनी हो जाती है। यदि अभिक्रिया $22^{\circ}C$ के आसपास की जाती है,तो अभिक्रिया की सक्रियण ऊर्जा क्या होगी? (दिया गया है: $R = 8.3 \ J \ K^{-1} \ mol^{-1}$,$\ln 2 = 0.69$ और $\ln 3 = 1.1$)
A
$1.69 \ kJ \ mol^{-1}$
B
$0.169 \ kJ \ mol^{-1}$
C
$49.8 \ kJ \ mol^{-1}$
D
$498 \ J \ mol^{-1}$

Solution

(C) यह दिया गया है कि रासायनिक अभिक्रिया की दर तापमान में प्रत्येक $10^{\circ}C$ की वृद्धि के साथ दोगुनी हो जाती है,इसलिए $\frac{k_2}{k_1} = 2$.
प्रारंभिक तापमान $T_1 = 22 + 273 = 295 \ K$.
अंतिम तापमान $T_2 = 32 + 273 = 305 \ K$.
आरेनियस समीकरण का उपयोग करते हुए: $\ln \frac{k_2}{k_1} = \frac{E_a}{R} \left[ \frac{T_2 - T_1}{T_1 T_2} \right]$.
मान रखने पर: $0.69 = \frac{E_a}{8.3} \left[ \frac{305 - 295}{295 \times 305} \right]$.
$E_a = \frac{0.69 \times 8.3 \times 295 \times 305}{10} \approx 49800 \ J \ mol^{-1} = 49.8 \ kJ \ mol^{-1}$.
100
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एक अभिक्रिया $A \rightarrow B$ के लिए,$A$ और $B$ की औसत ऊर्जा क्रमशः $30 \ kcal/mol$ और $60 \ kcal/mol$ है। पश्च अभिक्रिया के लिए सक्रियण ऊर्जा $93 \ kcal/mol$ है। अग्र अभिक्रिया के लिए सक्रियण ऊर्जा क्या है?
A
$30 \ kcal/mol$
B
$123 \ kcal/mol$
C
$153 \ kcal/mol$
D
$90 \ kcal/mol$

Solution

(B) अभिक्रिया के लिए एन्थैल्पी परिवर्तन $\Delta H = E_B - E_A = 60 \ kcal/mol - 30 \ kcal/mol = 30 \ kcal/mol$ है।
किसी भी अभिक्रिया के लिए,एन्थैल्पी परिवर्तन,अग्र सक्रियण ऊर्जा $(E_a(f))$ और पश्च सक्रियण ऊर्जा $(E_a(b))$ के बीच संबंध $\Delta H = E_a(f) - E_a(b)$ होता है।
दिए गए मानों को रखने पर: $30 \ kcal/mol = E_a(f) - 93 \ kcal/mol$।
अतः,$E_a(f) = 30 + 93 = 123 \ kcal/mol$।
इसलिए,सही विकल्प $(B)$ है।

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How many Chemistry questions are in TS EAMCET 2020?

There are 358 Chemistry questions from the TS EAMCET 2020 paper on Vedclass, each with a detailed step-by-step solution in Hindi.

Are TS EAMCET 2020 Chemistry solutions available in Hindi?

Yes. All solutions on this page are in Hindi. You can also switch to English or Hindi using the language buttons above the questions.

Can I practice TS EAMCET 2020 Chemistry as a timed test?

Yes. Use the Vedclass Test Series to attempt a full TS EAMCET mock test covering Chemistry with time limits and instant score analysis.

Can teachers create Chemistry papers from TS EAMCET previous year questions?

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