MHT CET 2022 Chemistry Question Paper with Answer and Solution in Hindi

627 QuestionsHindiWith Solutions

ChemistryQ101200 of 627 questions

Page 3 of 8 · Hindi

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$15.6 \ g$ बेंजीन के पूर्ण दहन के लिए ऑक्सीजन की कितनी मात्रा आवश्यक है ($g$ में)?
A
$75$
B
$88$
C
$48$
D
$64$

Solution

(C) बेंजीन के दहन के लिए संतुलित रासायनिक समीकरण है:
$C_6H_6 + \frac{15}{2}O_2 \rightarrow 6CO_2 + 3H_2O$
बेंजीन $(C_6H_6)$ का मोलर द्रव्यमान = $(6 \times 12) + (6 \times 1) = 78 \ g/mol$ है।
बेंजीन के मोल = $\frac{15.6 \ g}{78 \ g/mol} = 0.2 \ mol$।
स्टोइकोमेट्री के अनुसार,$1 \ mol$ $C_6H_6$ को $\frac{15}{2} = 7.5 \ mol$ $O_2$ की आवश्यकता होती है।
इसलिए,$0.2 \ mol$ $C_6H_6$ को $0.2 \times 7.5 = 1.5 \ mol$ $O_2$ की आवश्यकता होगी।
आवश्यक $O_2$ का द्रव्यमान = $1.5 \ mol \times 32 \ g/mol = 48 \ g$।
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जब $CH_3-CH=CH_2$ को $B_2H_6$ के साथ उपचारित किया जाता है और उसके बाद $H_2O_2$ की क्रिया कराई जाती है,तो कौन सा उत्पाद बनता है?
A
$CH_3CH_2CH_3$
B
$CH_3CH_2CHO$
C
$CH_3CH_2CH_2OH$
D
$CH_3CH(OH)CH_3$

Solution

(C) प्रोपीन $(CH_3-CH=CH_2)$ की $B_2H_6$ के साथ अभिक्रिया और उसके बाद $OH^-$ की उपस्थिति में $H_2O_2$ के साथ ऑक्सीकरण को हाइड्रोबोरेशन-ऑक्सीकरण $(HBO)$ के रूप में जाना जाता है।
यह अभिक्रिया एंटी-मार्कोवनिकोव नियम का पालन करती है,जहाँ $OH$ समूह कम प्रतिस्थापित कार्बन परमाणु से जुड़ता है।
कुल अभिक्रिया: $CH_3-CH=CH_2 \xrightarrow[(ii) \ H_2O_2 / OH^-]{(i) \ B_2H_6} CH_3-CH_2-CH_2-OH$ (प्रोपेन$-1-$ऑल) है।
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निम्नलिखित में से किस अभिकर्मक का उपयोग एल्केन को अल्कोहल में परिवर्तित करने के लिए किया जाता है?
A
$KMnO_4 / H_2O_2$
B
$B_2H_6 / H_2O_2$
C
$H_2 / Ni$
D
जलीय $NaOH$

Solution

(A) एल्केन का अल्कोहल में ऑक्सीकरण एक चुनौतीपूर्ण प्रक्रिया है क्योंकि एल्केन में $C-H$ बंध निष्क्रिय होते हैं।
हालाँकि,प्रयोगशाला अभिकर्मकों के संदर्भ में,$H_2O_2$ की उपस्थिति में $KMnO_4$ का उपयोग एल्केन के ऑक्सीकरण के लिए किया जाता है।
इसलिए,दिए गए विकल्पों में से सही अभिकर्मक $KMnO_4 / H_2O_2$ है।
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निम्नलिखित में से मेटा-निर्देशकारी (meta-directing) समूह की पहचान करें।
A
$-Br$
B
$-SO_3H$
C
$-CH_3$
D
$-OH$

Solution

(B) जो समूह प्रेरणिक प्रभाव (inductive effect) या अनुनाद प्रभाव (resonance effect) के माध्यम से बेंजीन वलय से इलेक्ट्रॉन खींचते हैं,वे मेटा-निर्देशकारी होते हैं।
$-SO_3H$ एक प्रबल इलेक्ट्रॉन-आकर्षक समूह ($-M$ प्रभाव) है,जो वलय को निष्क्रिय करता है और आने वाले इलेक्ट्रोफाइल को मेटा स्थिति पर निर्देशित करता है।
इसके विपरीत,$-Br$,$-CH_3$,और $-OH$ ऑर्थो/पैरा-निर्देशकारी समूह हैं।
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निम्नलिखित अभिक्रिया में यौगिक $A$ की पहचान कीजिए:
$\text{बेंजीन} + \text{ओजोन (आधिक्य)}$ $\rightarrow \text{बेंजीनट्रायजोनाइड}$ $\xrightarrow{A} \text{ग्लायोक्सल}$
A
$Zn$
B
$Ni$
C
$Zn/H_2O$
D
सांद्र $HNO_3$

Solution

(C) बेंजीन की ओजोन $(O_3)$ के साथ आधिक्य में अभिक्रिया कराने पर बेंजीनट्रायजोनाइड बनता है।
इस मध्यवर्ती का जिंक डस्ट और जल $(Zn/H_2O)$ का उपयोग करके अपचयी विदलन (reductive cleavage) किया जाता है,जिससे ग्लायोक्सल $(CHO-CHO)$ प्राप्त होता है।
अतः,अभिकर्मक $A$,$Zn/H_2O$ है।
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Brønsted-Lowry सिद्धांत के अनुसार निम्नलिखित में से कौन सी प्रजाति अम्ल और क्षार दोनों के रूप में कार्य कर सकती है?
A
$Cl^{-}$
B
$H_3O^{+}$
C
$HSO_4^{-}$
D
$SO_4^{2-}$

Solution

(C) Brønsted-Lowry सिद्धांत के अनुसार,जो प्रजाति प्रोटॉन $(H^+)$ दान कर सकती है वह अम्ल के रूप में कार्य करती है,और जो प्रोटॉन स्वीकार कर सकती है वह क्षार के रूप में कार्य करती है।
$HSO_4^-$ प्रोटॉन दान करके $SO_4^{2-}$ बना सकता है (अम्ल के रूप में) और प्रोटॉन स्वीकार करके $H_2SO_4$ बना सकता है (क्षार के रूप में)।
अतः,$HSO_4^-$ एक उभयधर्मी (amphoteric) प्रजाति है।
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निम्नलिखित अभिक्रिया में संयुग्मी अम्ल-क्षार युग्म की पहचान कीजिए।
$H_2O + HCl \rightarrow H_3O^{+} + Cl^{-}$
A
$Cl^{-}$ और $H_2O$
B
$H_3O^{+}$ और $Cl^{-}$
C
$H_2O$ और $HCl$
D
$H_3O^{+}$ और $H_2O$

Solution

(D) एक संयुग्मी अम्ल-क्षार युग्म एक प्रोटॉन $(H^{+})$ द्वारा भिन्न होता है।
अभिक्रिया $H_2O + HCl \rightarrow H_3O^{+} + Cl^{-}$ में:
$1$. $HCl$ एक अम्ल के रूप में कार्य करता है और इसका संयुग्मी क्षार $Cl^{-}$ है।
$2$. $H_2O$ एक क्षार के रूप में कार्य करता है और इसका संयुग्मी अम्ल $H_3O^{+}$ है।
अतः,$(H_3O^{+}, H_2O)$ और $(HCl, Cl^{-})$ संयुग्मी अम्ल-क्षार युग्म हैं।
इसलिए,सही विकल्प $(D)$ है।
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निम्नलिखित अभिक्रिया में क्रमशः संयुग्मी अम्ल (conjugate acid) और संयुग्मी क्षार (conjugate base) की पहचान करें:
$H_2O + HCl_{(aq)} \leftrightharpoons H_3O^{+} + Cl_{(aq)}^{-}$
A
$H_2O$ और $H_3O^{+}$
B
$H_3O^{+}$ और $H_2O$
C
$Cl^{-}$ और $HCl$
D
$H_3O^{+}$ और $Cl^{-}$

Solution

(D) अभिक्रिया $H_2O + HCl_{(aq)} \leftrightharpoons H_3O^{+} + Cl_{(aq)}^{-}$ में,$H_2O$ एक प्रोटॉन $(H^{+})$ स्वीकार करके अपने संयुग्मी अम्ल $H_3O^{+}$ में परिवर्तित होता है,इसलिए यह एक क्षार के रूप में कार्य करता है।
$HCl$ एक प्रोटॉन $(H^{+})$ दान करके अपने संयुग्मी क्षार $Cl^{-}$ में परिवर्तित होता है,इसलिए यह एक अम्ल के रूप में कार्य करता है।
अतः,संयुग्मी अम्ल $H_3O^{+}$ है और संयुग्मी क्षार $Cl^{-}$ है।
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ब्रोंस्टेड-लोरी सिद्धांत के अनुसार,निम्नलिखित अभिक्रिया में अम्ल कौन से हैं?
$ClO_4^{-} + HCO_3^{-} \rightarrow HClO_4 + CO_3^{2-}$
A
$HCO_3^{-}$ और $HClO_4$
B
$ClO_4^{-}$ और $CO_3^{2-}$
C
$HClO_4$ और $CO_3^{2-}$
D
$ClO_4^{-}$ और $HCO_3^{-}$

Solution

(A) ब्रोंस्टेड-लोरी सिद्धांत के अनुसार,एक अम्ल प्रोटॉन $(H^+)$ दाता होता है और एक क्षार प्रोटॉन $(H^+)$ ग्राही होता है।
अभिक्रिया $ClO_4^{-} + HCO_3^{-} \rightarrow HClO_4 + CO_3^{2-}$ में:
$1$. $HCO_3^{-}$ प्रोटॉन को $ClO_4^{-}$ को दान करता है जिससे $CO_3^{2-}$ बनता है,इसलिए $HCO_3^{-}$ एक अम्ल के रूप में कार्य करता है।
$2$. $HClO_4$ क्षार $ClO_4^{-}$ से बना संयुग्मी अम्ल है। प्रतिगामी अभिक्रिया में,$HClO_4$ प्रोटॉन दाता के रूप में कार्य करता है,इसलिए यह एक अम्ल है।
अतः,दी गई अभिक्रिया में $HCO_3^{-}$ और $HClO_4$ अम्ल हैं।
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निम्नलिखित में से कौन सा लुईस अम्ल है लेकिन ब्रोंस्टेड अम्ल नहीं है?
A
$HSO_4^-$
B
$HNO_3$
C
$NH_3$
D
$BCl_3$

Solution

(D) एक ब्रोंस्टेड अम्ल एक प्रोटॉन $(H^+)$ दाता होता है। $HSO_4^-$,$HNO_3$,और $NH_3$ (विशिष्ट परिस्थितियों में) ब्रोंस्टेड अम्ल के रूप में कार्य कर सकते हैं क्योंकि उनमें हाइड्रोजन परमाणु होते हैं जिन्हें दान किया जा सकता है।
$BCl_3$ एक इलेक्ट्रॉन-न्यून यौगिक है जिसमें बोरॉन परमाणु के संयोजी कोश में केवल $6$ इलेक्ट्रॉन होते हैं। इसलिए,यह एक लुईस अम्ल (इलेक्ट्रॉन युग्म स्वीकर्ता) के रूप में कार्य करता है लेकिन ब्रोंस्टेड अम्ल के रूप में कार्य नहीं कर सकता क्योंकि इसमें दान करने के लिए हाइड्रोजन परमाणु नहीं होता है।
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निम्नलिखित में से कौन सा लुईस अम्ल नहीं है?
A
$AlCl_3$
B
$H_2O$
C
$BF_3$
D
$Ag^{+}$

Solution

(B) $H_2O$ एक लुईस क्षार है,लुईस अम्ल नहीं,क्योंकि इसमें ऑक्सीजन परमाणु पर $2$ एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म (lone pairs) होते हैं,जिन्हें यह दान कर सकता है।
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एक विलयन में $[H^{+}] = 0.001 \ M$ है। $[OH^{-}]$ का मान क्या है?
A
$10^{-2} \ M$
B
$10^{-3} \ M$
C
$1 \ M$
D
$10^{-11} \ M$

Solution

(D) जल का आयनिक गुणनफल $K_{w} = [H^{+}][OH^{-}] = 10^{-14} \ M^{2}$ ($298 \ K$ पर) होता है।
दिया गया है $[H^{+}] = 0.001 \ M = 10^{-3} \ M$।
अतः,$[OH^{-}] = \frac{K_{w}}{[H^{+}]} = \frac{10^{-14}}{10^{-3}} = 10^{-11} \ M$।
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$1.342 \times 10^{-3} \ M \ H^{+}$ आयनों वाले विलयन का $pH$ क्या है?
$(\log 1.342 = 0.1277)$
A
$1.28$
B
$3.57$
C
$2.87$
D
$2.38$

Solution

(C) $pH = -\log [H^{+}]$
$pH = -\log (1.342 \times 10^{-3})$
$pH = -(\log 1.342 + \log 10^{-3})$
$pH = -(0.1277 - 3)$
$pH = 3 - 0.1277 = 2.87$
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एक दुर्बल अम्ल के वियोजन की मात्रा $7.2 \times 10^{-4}$ है। $0.025 \ M$ विलयन में इसके प्रतिशत वियोजन का मान क्या है ($\%$ में)?
A
$0.072$
B
$8.2$
C
$0.062$
D
$0.80$

Solution

(A) वियोजन की मात्रा $(\alpha) = 7.2 \times 10^{-4}$ दी गई है।
प्रतिशत वियोजन = वियोजन की मात्रा $\times 100$
$\text{प्रतिशत वियोजन} = 7.2 \times 10^{-4} \times 100 = 0.072 \%$
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$2.6 \times 10^{-8} \ M \ H^{+}$ आयन विलयन का $pH$ क्या है?
$(\log 2.6 = 0.4150)$
A
$7.6$
B
$6.9$
C
$10.6$
D
$8.4$

Solution

(B) $pH$ का सूत्र $pH = -\log [H^{+}]$ है।
चूंकि $[H^{+}]$ की सांद्रता बहुत कम $(< 10^{-7} \ M)$ है,इसलिए जल के स्वतः-आयनन से प्राप्त $H^{+}$ $(1.0 \times 10^{-7} \ M)$ पर विचार करना आवश्यक है।
$[H^{+}]_{total} = [H^{+}]_{acid} + [H^{+}]_{water} = 2.6 \times 10^{-8} + 1.0 \times 10^{-7} \ M$.
समान घात में बदलने पर: $[H^{+}]_{total} = 0.26 \times 10^{-7} + 1.0 \times 10^{-7} = 1.26 \times 10^{-7} \ M$.
अब,$pH = -\log(1.26 \times 10^{-7}) = 7 - \log(1.26)$.
दिया गया है $\log 2.6 = 0.4150$,अतः $\log 1.26 = \log(2.6 / 2) = \log 2.6 - \log 2 = 0.4150 - 0.3010 \approx 0.114$.
$pH = 7 - 0.114 = 6.886 \approx 6.9$.
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एक दुर्बल मोनोबेसिक अम्ल अपने $0.01 \ M$ विलयन में $20 \%$ वियोजित होता है। दुर्बल अम्ल का वियोजन स्थिरांक क्या है?
A
$2.5 \times 10^{-6}$
B
$3 \times 10^{-6}$
C
$2 \times 10^{-6}$
D
$4 \times 10^{-6}$

Solution

(D) एक दुर्बल मोनोबेसिक अम्ल के लिए,वियोजन स्थिरांक $K_a$ का सूत्र $K_a = c \alpha^2$ है,जहाँ $c$ सांद्रता है और $\alpha$ वियोजन की मात्रा है।
दिया गया है: $c = 0.01 \ M$ और $\alpha = 20 \% = 0.20$.
मान रखने पर: $K_a = 0.01 \times (0.20)^2 = 0.01 \times 0.04 = 4 \times 10^{-4}$.
नोट: गणना के अनुसार सही उत्तर $4 \times 10^{-4}$ है,लेकिन विकल्पों में $4 \times 10^{-6}$ दिया गया है।
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$1 \ mM$ $NaOH$ विलयन का $pH$ क्या है?
A
$13$
B
$11$
C
$3$
D
$12$

Solution

(B) $NaOH$ एक प्रबल क्षार है और यह पूर्णतः $NaOH \rightarrow Na^+ + OH^-$ के रूप में वियोजित होता है।
$NaOH$ की सांद्रता $= 1 \ mM = 1 \times 10^{-3} \ M$ है।
अतः,$[OH^-] = 1 \times 10^{-3} \ M$ होगा।
$pOH = -\log[OH^-] = -\log(10^{-3}) = 3$।
चूँकि $25^{\circ}C$ पर $pH + pOH = 14$ होता है,
$pH = 14 - pOH = 14 - 3 = 11$।
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$pOH$ मान $9$ वाले विलयन में $H_3O^{+}$ आयनों की सांद्रता क्या है?
A
$1.0 \times 10^{-5} \ M$
B
$2.0 \times 10^{-5} \ M$
C
$1.5 \times 10^{-5} \ M$
D
$2.5 \times 10^{-5} \ M$

Solution

(A) $25^{\circ}C$ पर $pH$ और $pOH$ के बीच का संबंध है: $pH + pOH = 14$।
दिया गया है $pOH = 9$,इसलिए $pH = 14 - 9 = 5$।
हाइड्रोनियम आयनों की सांद्रता $[H_3O^{+}]$ और $pH$ का संबंध है: $[H_3O^{+}] = 10^{-pH}$।
$pH$ का मान रखने पर: $[H_3O^{+}] = 10^{-5} \ M$।
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निम्नलिखित यौगिकों के $0.1 \ M$ विलयन के $pH$ का बढ़ता क्रम क्या है?
A
$HCl < NaCl < NaCN < NH_4NO_3$
B
$NH_4NO_3 < HCl < NaCl < NaCN$
C
$NaCN < HCl < NH_4NO_3 < NaCl$
D
$HCl < NH_4NO_3 < NaCl < NaCN$

Solution

(D) $HCl$ एक प्रबल अम्ल $(SA)$ है,इसलिए इसका $pH$ बहुत कम होता है (लगभग $1$)।
$NH_4NO_3$ एक प्रबल अम्ल और दुर्बल क्षार $(SAWB)$ का लवण है,जिसका धनायनिक जल-अपघटन होता है,जिससे विलयन अम्लीय हो जाता है $(pH < 7)$।
$NaCl$ एक प्रबल अम्ल और प्रबल क्षार $(SASB)$ का लवण है,जिसका जल-अपघटन नहीं होता है,जिससे विलयन उदासीन रहता है $(pH = 7)$।
$NaCN$ एक दुर्बल अम्ल और प्रबल क्षार $(WASB)$ का लवण है,जिसका ऋणायनिक जल-अपघटन होता है,जिससे विलयन क्षारीय हो जाता है $(pH > 7)$।
अतः,$pH$ का बढ़ता क्रम $HCl < NH_4NO_3 < NaCl < NaCN$ है।
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नींबू के रस में $[H^{+}]$ का मान $0.0063 \ M$ पाया जाता है। नींबू के रस का $pH$ मान क्या है? $(\log 6.3 = 0.7993)$
A
$2.8$
B
$3.8$
C
$5.2$
D
$2.2$

Solution

(D) $pH$ की गणना $pH = -\log [H^{+}]$ सूत्र का उपयोग करके की जाती है।
दिया गया है $[H^{+}] = 0.0063 \ M = 6.3 \times 10^{-3} \ M$
$pH = -\log (6.3 \times 10^{-3})$
$pH = -(\log 6.3 + \log 10^{-3})$
$pH = -(\log 6.3 - 3)$
$pH = 3 - \log 6.3$
$\log 6.3 = 0.7993$ का मान रखने पर:
$pH = 3 - 0.7993 = 2.2007$
निकटतम विकल्प के अनुसार,$pH$ का मान $2.2$ है।
121
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$2.5 \times 10^{-3} \ mol \ dm^{-3}$ $H^{+}$ आयन सांद्रता वाले विलयन का $pH$ क्या होगा? (दिया गया है: $\log 2.5 = 0.3979$)
A
$2.6$
B
$3.6$
C
$3.9$
D
$5.2$

Solution

(A) विलयन का $pH$ ज्ञात करने का सूत्र: $pH = -\log [H^{+}]$ है।
दिया गया है: $[H^{+}] = 2.5 \times 10^{-3} \ mol \ dm^{-3}$।
मान रखने पर: $pH = -\log (2.5 \times 10^{-3})$।
नियम $\log (a \times b) = \log a + \log b$ का उपयोग करने पर: $pH = -(\log 2.5 + \log 10^{-3})$।
$pH = -(\log 2.5 - 3)$।
$pH = 3 - \log 2.5$।
दिया गया है $\log 2.5 = 0.3979$,इसलिए $pH = 3 - 0.3979 = 2.6021$।
एक दशमलव स्थान तक पूर्णांकित करने पर,$pH$ लगभग $2.6$ है।
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$3.981 \times 10^{-7} \ M$ $H^{+}$ आयन सांद्रता वाले विलयन का $pH$ क्या होगा? $(\log 3.981 = 0.6000)$
A
$5.6$
B
$4.6$
C
$7.6$
D
$6.4$

Solution

(D) विलयन का $pH$ ज्ञात करने का सूत्र: $pH = -\log [H^{+}]$ है।
दिया गया है: $[H^{+}] = 3.981 \times 10^{-7} \ M$.
मान रखने पर: $pH = -\log (3.981 \times 10^{-7})$.
लघुगणक के नियम $\log (a \times b) = \log a + \log b$ का उपयोग करने पर: $pH = -(\log 3.981 + \log 10^{-7})$.
$pH = -(\log 3.981 - 7)$.
$pH = 7 - \log 3.981$.
दिया गया है $\log 3.981 = 0.6000$,इसलिए $pH = 7 - 0.6000 = 6.4$.
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निम्नलिखित में से दुर्बल अम्ल-दुर्बल क्षार लवण की पहचान कीजिए।
A
पोटेशियम ब्रोमाइड
B
अमोनियम सल्फेट
C
अमोनियम एसीटेट
D
अमोनियम क्लोराइड

Solution

(C) $CH_3COONH_4$,$CH_3COOH$ (दुर्बल अम्ल,$WA$) और $NH_4OH$ (दुर्बल क्षार,$WB$) से बना एक लवण है।
अतः,$CH_3COONH_4$ एक दुर्बल अम्ल और दुर्बल क्षार का लवण है।
124
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निम्नलिखित में से कौन सा लवण प्रबल क्षार और दुर्बल अम्ल से बना है?
A
$CuSO_4$
B
$NaNO_3$
C
$NaCl$
D
$KCN$

Solution

(D) प्रबल क्षार $(SB)$ और दुर्बल अम्ल $(WA)$ से बना लवण प्रकृति में क्षारीय होता है।
$CuSO_4$,$Cu(OH)_2$ (दुर्बल क्षार) और $H_2SO_4$ (प्रबल अम्ल) से बना है।
$NaNO_3$,$NaOH$ (प्रबल क्षार) और $HNO_3$ (प्रबल अम्ल) से बना है।
$NaCl$,$NaOH$ (प्रबल क्षार) और $HCl$ (प्रबल अम्ल) से बना है।
$KCN$,$KOH$ (प्रबल क्षार) और $HCN$ (दुर्बल अम्ल) से बना है।
अतः,$KCN$ सही उत्तर है।
125
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निम्नलिखित में से कौन सा दुर्बल अम्ल और प्रबल क्षार के लवण का एक उदाहरण है?
A
$Na_2SO_4$
B
$NH_4CN$
C
$KCN$
D
$KCl$

Solution

(C) $KCN$,$KOH$ (प्रबल क्षार) और $HCN$ (दुर्बल अम्ल) से बना एक लवण है।
अतः,$KCN$ एक दुर्बल अम्ल और प्रबल क्षार का लवण है।
126
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कॉपर सल्फेट के जलीय विलयन का $pH$ $7$ से कम क्यों होता है?
A
यह एक प्रबल अम्ल और दुर्बल क्षार का लवण है।
B
यह एक दुर्बल अम्ल और दुर्बल क्षार का लवण है।
C
यह एक प्रबल अम्ल और प्रबल क्षार का लवण है।
D
यह एक दुर्बल अम्ल और प्रबल क्षार का लवण है।

Solution

(A) $CuSO_4$,$Cu(OH)_2$ (दुर्बल क्षार) और $H_2SO_4$ (प्रबल अम्ल) से बना एक लवण है।
जलीय विलयन में,$Cu^{2+}$ आयनों का जल-अपघटन होता है: $Cu^{2+} + 2H_2O \rightleftharpoons Cu(OH)_2 + 2H^+$.
$H^+$ आयनों के उत्पादन से विलयन में हाइड्रोनियम आयनों की सांद्रता बढ़ जाती है,जिससे यह अम्लीय हो जाता है।
इसलिए,विलयन का $pH$ $7$ से कम होता है।
127
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निम्नलिखित में से लवणों के किस जलीय विलयन का $pH$ मान सबसे अधिक होगा?
A
$NaCl$
B
$CH_3COONH_4$
C
$Na_2CO_3$
D
$NH_4Cl$

Solution

(C) $NaCl$ एक प्रबल अम्ल $(HCl)$ और प्रबल क्षार $(NaOH)$ का लवण है,इसलिए इसका जलीय विलयन उदासीन $(pH = 7)$ होता है।
$CH_3COONH_4$ एक दुर्बल अम्ल $(CH_3COOH)$ और दुर्बल क्षार $(NH_4OH)$ का लवण है,इसलिए इसका जलीय विलयन लगभग उदासीन $(pH \approx 7)$ होता है।
$Na_2CO_3$ एक दुर्बल अम्ल $(H_2CO_3)$ और प्रबल क्षार $(NaOH)$ का लवण है,इसलिए यह ऋणायनिक जल-अपघटन द्वारा क्षारीय विलयन बनाता है $(pH > 7)$।
$NH_4Cl$ एक प्रबल अम्ल $(HCl)$ और दुर्बल क्षार $(NH_4OH)$ का लवण है,इसलिए यह धनायनिक जल-अपघटन द्वारा अम्लीय विलयन बनाता है $(pH < 7)$।
अतः,$Na_2CO_3$ का $pH$ मान सबसे अधिक है।
128
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$0.1 \ M \ HCN$ और $0.2 \ M \ NaCN$ को मिलाकर एक बफर विलयन तैयार किया जाता है। यदि $HCN$ का $pKa$ $9.3$ है,तो बफर विलयन का $pH$ क्या होगा? $(\log 2 = 0.3010)$
A
$4.2$
B
$2$
C
$9.6$
D
$6.15$

Solution

(C) अम्लीय बफर का $pH$ हेंडरसन-हेसलबाक समीकरण का उपयोग करके गणना की जाती है:
$pH = pKa + \log \frac{[Salt]}{[Acid]}$
दिया गया है:
$pKa = 9.3$
$[Salt] = [NaCN] = 0.2 \ M$
$[Acid] = [HCN] = 0.1 \ M$
मान रखने पर:
$pH = 9.3 + \log \frac{0.2}{0.1}$
$pH = 9.3 + \log 2$
$pH = 9.3 + 0.3010$
$pH = 9.6010 \approx 9.6$
129
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$0.1 \ M \ Mg^{2+}$ आयनों वाले विलयन से $Mg(OH)_2$ किस $pH$ पर अवक्षेपित होना शुरू होता है? (दिया गया है $K_{sp}$ for $Mg(OH)_2 = 1.0 \times 10^{-11}$)
A
$7$
B
$4$
C
$6$
D
$9$

Solution

(D) विलेयता गुणनफल का व्यंजक $K_{sp} = [Mg^{2+}][OH^-]^2$ है।
दिया गया है $K_{sp} = 1.0 \times 10^{-11}$ और $[Mg^{2+}] = 0.1 \ M$।
इन मानों को प्रतिस्थापित करने पर: $1.0 \times 10^{-11} = (0.1)[OH^-]^2$।
$[OH^-]^2 = \frac{1.0 \times 10^{-11}}{0.1} = 10^{-10}$।
$[OH^-] = \sqrt{10^{-10}} = 10^{-5} \ M$।
अब,$pOH$ की गणना करें: $pOH = -\log[OH^-] = -\log(10^{-5}) = 5$।
अंत में,$pH$ की गणना करें: $pH = 14 - pOH = 14 - 5 = 9$।
130
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निम्नलिखित में से कौन सा इलेक्ट्रॉन-न्यून (electron-deficient) यौगिक है?
A
$SiF_4$
B
$BCl_3$
C
$PCl_5$
D
$CCl_4$

Solution

(B) एक इलेक्ट्रॉन-न्यून यौगिक वह है जिसमें केंद्रीय परमाणु के संयोजी कोश में $8$ से कम इलेक्ट्रॉन होते हैं (अपूर्ण अष्टक)।
$BCl_3$ में,बोरॉन परमाणु $3$ क्लोरीन परमाणुओं से बंधा होता है,जिसके परिणामस्वरूप $3$ सहसंयोजक बंध बनते हैं।
प्रत्येक बंध में $2$ इलेक्ट्रॉन होते हैं,इसलिए बोरॉन परमाणु के संयोजी कोश में कुल $6$ इलेक्ट्रॉन होते हैं।
चूंकि $6 < 8$,इसलिए $BCl_3$ एक इलेक्ट्रॉन-न्यून यौगिक है।
131
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निम्नलिखित अभिक्रिया में ऑक्सीकारक कौन सा है?
$Fe_{(s)} + Cu_{(aq)}^{2+} \rightarrow Fe_{(aq)}^{2+} + Cu_{(s)}$
A
$Fe_{(aq)}^{2+}$
B
$Cu_{(aq)}^{2+}$
C
$Fe_{(s)}$
D
$Cu_{(s)}$

Solution

(B) दी गई अभिक्रिया में: $Fe_{(s)} + Cu_{(aq)}^{2+} \rightarrow Fe_{(aq)}^{2+} + Cu_{(s)}$
$1$. $Fe$ की ऑक्सीकरण अवस्था $0$ से बढ़कर $+2$ हो जाती है,इसलिए $Fe$ ऑक्सीकृत होता है।
$2$. $Cu$ की ऑक्सीकरण अवस्था $+2$ से घटकर $0$ हो जाती है,इसलिए $Cu^{2+}$ अपचयित (reduced) होता है।
$3$. ऑक्सीकारक वह पदार्थ है जो रासायनिक अभिक्रिया में अपचयित होता है।
$4$. चूंकि $Cu_{(aq)}^{2+}$ का अपचयन होता है,इसलिए यह ऑक्सीकारक के रूप में कार्य करता है।
132
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निम्नलिखित में से किस रूपांतरण में न तो ऑक्सीकरण और न ही अपचयन शामिल है?
A
$VO_2^{+} \rightarrow V_2O_3$
B
$Na \rightarrow Na^{+}$
C
$CrO_4^{2-} \rightarrow Cr_2O_7^{2-}$
D
$Zn^{2+} \rightarrow Zn$

Solution

(C) रेडॉक्स अभिक्रिया में,केंद्रीय परमाणु की ऑक्सीकरण अवस्था बदलती है।
$1$. $VO_2^{+} \rightarrow V_2O_3$ में,$V$ की ऑक्सीकरण अवस्था $+5$ से $+3$ में बदलती है (अपचयन)।
$2$. $Na \rightarrow Na^{+}$ में,$Na$ की ऑक्सीकरण अवस्था $0$ से $+1$ में बदलती है (ऑक्सीकरण)।
$3$. $CrO_4^{2-} \rightarrow Cr_2O_7^{2-}$ में,$Cr$ की ऑक्सीकरण अवस्था दोनों में $+6$ ही रहती है। अतः,ऑक्सीकरण अवस्था में कोई परिवर्तन नहीं होता है।
$4$. $Zn^{2+} \rightarrow Zn$ में,$Zn$ की ऑक्सीकरण अवस्था $+2$ से $0$ में बदलती है (अपचयन)।
इसलिए,$CrO_4^{2-} \rightarrow Cr_2O_7^{2-}$ रूपांतरण में ऑक्सीकरण या अपचयन शामिल नहीं है।
133
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निम्नलिखित में से कौन सा अपचयन (reduction) की प्रक्रिया को सही ढंग से दर्शाता है?
A
ऑक्सीजन का लाभ
B
ऑक्सीकरण संख्या में वृद्धि
C
इलेक्ट्रॉन का लाभ
D
इलेक्ट्रॉन की हानि

Solution

(C) अपचयन (reduction) वह प्रक्रिया है जिसमें किसी परमाणु,आयन या अणु द्वारा इलेक्ट्रॉनों का लाभ होता है।
इसे किसी तत्व की ऑक्सीकरण संख्या में कमी द्वारा भी पहचाना जाता है।
इसके विपरीत,ऑक्सीजन का लाभ एक ऑक्सीकरण प्रक्रिया है और इलेक्ट्रॉनों की हानि भी एक ऑक्सीकरण प्रक्रिया है।
134
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निम्नलिखित अभिक्रिया के लिए सही कथन की पहचान करें: $3 Br_2 + 6 CO_3^{2-} + 3 H_2O \rightarrow 5 Br^{-} + BrO_3^- + 6 HCO_3^-$
A
ब्रोमीन न तो अपचयित होता है और न ही ऑक्सीकृत
B
ब्रोमीन ऑक्सीकृत होता है और कार्बोनेट अपचयित होता है
C
ब्रोमीन अपचयित होता है और जल ऑक्सीकृत होता है
D
ब्रोमीन का अपचयन और ऑक्सीकरण दोनों होता है

Solution

(D) दी गई अभिक्रिया में,$Br_2$ में $Br$ की ऑक्सीकरण अवस्था $0$ है।
उत्पादों में,$Br$ का अस्तित्व $Br^-$ (ऑक्सीकरण अवस्था $-1$) और $BrO_3^-$ (ऑक्सीकरण अवस्था $+5$) के रूप में है।
चूंकि $Br$ की ऑक्सीकरण अवस्था $0$ से घटकर $-1$ (अपचयन) हो जाती है और $0$ से बढ़कर $+5$ (ऑक्सीकरण) हो जाती है,इसलिए $Br_2$ का ऑक्सीकरण और अपचयन दोनों हो रहा है।
यह एक असमानुपातन (disproportionation) अभिक्रिया है।
135
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$OF_2$ में ऑक्सीजन की ऑक्सीकरण संख्या क्या है?
A
$+2$
B
$-2$
C
$-1$
D
$+1$

Solution

(A) $OF_2$ में,फ्लोरीन की विद्युत ऋणात्मकता ऑक्सीजन से अधिक है।
माना ऑक्सीजन की ऑक्सीकरण संख्या $x$ है।
फ्लोरीन की ऑक्सीकरण संख्या $-1$ है।
उदासीन अणु में ऑक्सीकरण संख्याओं के योग के नियम को लागू करने पर:
$x + 2(-1) = 0$
$x - 2 = 0$
$x = +2$
अतः,$OF_2$ में ऑक्सीजन की ऑक्सीकरण संख्या $+2$ है।
136
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$MnO_4^{-}$ में $Mn$ की ऑक्सीकरण अवस्था क्या है?
A
$+5$
B
$+6$
C
$+4$
D
$+7$

Solution

(D) माना कि $Mn$ की ऑक्सीकरण अवस्था $x$ है।
$MnO_4^{-}$ आयन के लिए,सभी परमाणुओं की ऑक्सीकरण अवस्थाओं का योग आयन पर आवेश के बराबर होता है।
$x + 4(-2) = -1$
$x - 8 = -1$
$x = +7$
अतः,$Mn$ की ऑक्सीकरण अवस्था $+7$ है।
137
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$O_2^{2-}$ आयन में ऑक्सीजन की ऑक्सीकरण अवस्था क्या है?
A
$+2$
B
$+1$
C
$-2$
D
$-1$

Solution

(D) $O_2^{2-}$ आयन (पेरोक्साइड आयन) में,मान लीजिए कि ऑक्सीजन की ऑक्सीकरण अवस्था $x$ है।
चूंकि एक आयन में सभी परमाणुओं की ऑक्सीकरण अवस्थाओं का योग आयन पर मौजूद आवेश के बराबर होता है:
$2x = -2$
$x = -1$
अतः,$O_2^{2-}$ में ऑक्सीजन की ऑक्सीकरण अवस्था $-1$ है।
138
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$N_3H$ में नाइट्रोजन की ऑक्सीकरण अवस्था क्या है?
A
$-\frac{1}{3}$
B
$-1$
C
$+\frac{1}{3}$
D
$+3$

Solution

(A) $N_3H$ (हाइड्राज़ोइक अम्ल) अणु में,सभी परमाणुओं की ऑक्सीकरण अवस्थाओं का योग शून्य होना चाहिए।
मान लीजिए कि नाइट्रोजन की ऑक्सीकरण अवस्था $x$ है।
चूंकि इसमें $3$ नाइट्रोजन परमाणु और $1$ हाइड्रोजन परमाणु (जिसकी ऑक्सीकरण अवस्था $+1$ होती है) है,इसलिए समीकरण इस प्रकार है:
$3x + 1 = 0$
$3x = -1$
$x = -\frac{1}{3}$
अतः,$N_3H$ में नाइट्रोजन की ऑक्सीकरण अवस्था $-\frac{1}{3}$ है।
139
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$KClO_3$ में $Cl$ की ऑक्सीकरण अवस्था क्या है?
A
$+5$
B
$+1$
C
$-1$
D
$-5$

Solution

(A) माना $Cl$ की ऑक्सीकरण अवस्था $x$ है।
एक उदासीन अणु में सभी परमाणुओं की ऑक्सीकरण अवस्थाओं का योग $0$ होता है।
$KClO_3$ के लिए: $(+1) + x + 3(-2) = 0$.
$1 + x - 6 = 0$.
$x - 5 = 0$.
$x = +5$.
140
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सुपर ऑक्साइड आयन में ऑक्सीजन की ऑक्सीकरण संख्या क्या है?
A
$0$
B
$-1$
C
$-\frac{1}{2}$
D
$-2$

Solution

(C) सुपर ऑक्साइड आयन $(O_2^-)$ में,आयन पर कुल आवेश $-1$ होता है।
मान लीजिए कि ऑक्सीजन की ऑक्सीकरण संख्या $x$ है।
चूंकि दो ऑक्सीजन परमाणु हैं,इसलिए उनकी ऑक्सीकरण संख्याओं का योग आयन के आवेश के बराबर होना चाहिए:
$2x = -1$
$x = -\frac{1}{2}$
अतः,सुपर ऑक्साइड में ऑक्सीजन की ऑक्सीकरण संख्या $-\frac{1}{2}$ है।
141
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निम्नलिखित में से सही कथन की पहचान कीजिए।
A
ऑक्सीजन की ऑक्सीकरण संख्या उसके सभी यौगिकों में $-2$ होती है।
B
हाइड्रोजन की विद्युत ऋणात्मकता हैलोजन के समान होती है।
C
हाइड्रोजन $-1$ और $+1$ ऑक्सीकरण संख्या प्रदर्शित करता है।
D
हाइड्रोजन की आयनन एन्थैल्पी क्षार धातुओं के समान होती है।

Solution

(C) हाइड्रोजन $-1$ (धातु हाइड्राइड में) और $+1$ (अधिकांश यौगिकों में) ऑक्सीकरण अवस्थाएँ प्रदर्शित करता है।
ऑक्सीजन की ऑक्सीकरण अवस्था सभी यौगिकों में $-2$ नहीं होती है; उदाहरण के लिए,$OF_2$ में यह $+2$ होती है।
हाइड्रोजन की आयनन एन्थैल्पी क्षार धातुओं की तुलना में काफी अधिक होती है क्योंकि इसका आकार छोटा होता है और इसका इलेक्ट्रॉन नाभिक के करीब होता है।
142
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निम्नलिखित में से किस तत्व का उपयोग फोटोइलेक्ट्रिक सेल बनाने में किया जाता है?
A
$K$
B
$Cs$
C
$Ba$
D
$Be$

Solution

(B) सीज़ियम $(Cs)$ की आयनन एन्थैल्पी सभी क्षार धातुओं में सबसे कम होती है।
इस कारण,जब इसकी सतह पर प्रकाश पड़ता है तो यह आसानी से इलेक्ट्रॉन उत्सर्जित करता है।
इसलिए,इसका उपयोग फोटोइलेक्ट्रिक सेल बनाने में किया जाता है।
143
ChemistryEasyMCQMHT CET · 2022
पर्वतारोहियों के लिए श्वसन उपकरणों में निम्नलिखित में से किसका उपयोग किया जाता है?
A
$Na_2O_2$
B
$KO_2$
C
$CaO$
D
$Li_2O$

Solution

(B) पोटेशियम सुपरऑक्साइड $(KO_2)$ का उपयोग पर्वतारोहियों और पनडुब्बियों में श्वसन उपकरणों में किया जाता है क्योंकि यह ऑक्सीजन उत्पन्न करता है और कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित करता है।
रासायनिक अभिक्रिया:
$4KO_2 + 2CO_2 \rightarrow 2K_2CO_3 + 3O_2$
144
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निम्नलिखित में से किस तत्व का उपयोग परमाणु रिएक्टरों में मंदक (moderator) के रूप में किया जाता है?
A
$Mg$
B
$Ca$
C
$Be$
D
$K$

Solution

(C) परमाणु रिएक्टरों में,$Be$ (बेरिलियम) का उपयोग मंदक और परावर्तक के रूप में किया जाता है क्योंकि इसका परमाणु द्रव्यमान कम होता है और न्यूट्रॉन के लिए इसकी प्रकीर्णन क्रॉस-सेक्शन (scattering cross-section) अधिक होती है,जो तेज गति वाले न्यूट्रॉन को धीमा करने में मदद करती है।
145
ChemistryMediumMCQMHT CET · 2022
निम्नलिखित में से कौन सा तत्व पानी के साथ प्रतिक्रिया नहीं करता है?
A
$Sr$
B
$Mg$
C
$Be$
D
$Ca$

Solution

(C) $Be$ (बेरिलियम) अपनी उच्च आयनीकरण एन्थैल्पी और छोटे परमाणु आकार के कारण उच्च तापमान पर भी पानी के प्रति निष्क्रिय रहता है। अन्य क्षारीय मृदा धातुएं $(Mg, Ca, Sr)$ पानी के साथ प्रतिक्रिया करके अपने संबंधित हाइड्रॉक्साइड बनाती हैं और हाइड्रोजन गैस मुक्त करती हैं।
146
ChemistryMediumMCQMHT CET · 2022
निम्नलिखित में से कौन सा तत्व क्लोरोफिल संकुल बनाता है?
A
आयरन
B
मैग्नीशियम
C
कैल्शियम
D
कोबाल्ट

Solution

(B) क्लोरोफिल पौधों में पाया जाने वाला एक हरा वर्णक है जो प्रकाश संश्लेषण के लिए आवश्यक है।
इसमें एक पोरफाइरिन वलय के भीतर समन्वित एक केंद्रीय धातु आयन होता है।
क्लोरोफिल अणु में केंद्रीय धातु आयन $Mg^{2+}$ (मैग्नीशियम) है।
147
ChemistryEasyMCQMHT CET · 2022
निम्नलिखित में से कौन सा तत्व $Li$ के साथ विकर्ण संबंध (diagonal relationship) प्रदर्शित करता है?
A
$Al$
B
$B$
C
$Na$
D
$Mg$

Solution

(D) $Li$ और $Mg$ एक-दूसरे के साथ विकर्ण संबंध प्रदर्शित करते हैं।
148
ChemistryMediumMCQMHT CET · 2022
आणविक क्रिस्टल में किस प्रकार के बंध उपस्थित होते हैं?
A
धात्विक बंध
B
आयनिक बंध
C
विभिन्न अंतर-आणविक आकर्षण बल
D
सहसंयोजक बंध

Solution

(C) आणविक क्रिस्टल उन अणुओं से बने होते हैं जो विभिन्न अंतर-आणविक आकर्षण बलों जैसे कि लंदन डिस्पर्शन बल,द्विध्रुव-द्विध्रुव अन्योन्यक्रिया,या हाइड्रोजन बंध द्वारा एक साथ जुड़े होते हैं।
149
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$298 \ K$ पर एक दुर्बल अम्ल का सेंटिमोलर विलयन $1.3 \%$ वियोजित होता है। इसका वियोजन स्थिरांक क्या है?
A
$1.3 \times 10^{-6}$
B
$1.5 \times 10^{-6}$
C
$1.9 \times 10^{-6}$
D
$1.7 \times 10^{-6}$

Solution

(D) एक दुर्बल अम्ल के लिए,वियोजन स्थिरांक $K_a$ का सूत्र $K_a = C \alpha^2$ है,जहाँ $C$ सांद्रता है और $\alpha$ वियोजन की मात्रा है।
दिया गया है: $C = 0.01 \ M$ और $\alpha = 1.3 \% = 0.013$.
मान रखने पर: $K_a = 0.01 \times (0.013)^2$.
$K_a = 0.01 \times 0.000169 = 1.69 \times 10^{-6}$.
निकटतम विकल्प के अनुसार,मान $1.7 \times 10^{-6}$ है।
150
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$5 \%$ तक आयनित होने वाले एक मोनोएसिडिक दुर्बल क्षार के $2 \times 10^{-3} \ M$ विलयन का $pH$ क्या है?
A
$10$
B
$6$
C
$4$
D
$14$

Solution

(A) एक मोनोएसिडिक दुर्बल क्षार के लिए,$BOH \rightleftharpoons B^{+} + OH^{-}$.
$[OH^{-}] = c \times \alpha = 2 \times 10^{-3} \times 0.05 = 1 \times 10^{-4} \ M$.
$pOH = -\log[OH^{-}] = -\log(10^{-4}) = 4$.
$pH = 14 - pOH = 14 - 4 = 10$.
151
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अभिक्रिया $2 NO_{2(g)} \rightarrow 2 NO_{(g)} + O_{2(g)}$ के लिए,यदि $\frac{-d[NO_2]}{dt} = 1.3 \times 10^{-5} \ mol \ L^{-1} \ sec^{-1}$ है,तो $O_2$ के निर्माण की दर क्या होगी?
A
$1.3 \times 10^{-6} \ mol \ L^{-1} \ sec^{-1}$
B
$3.25 \times 10^{-6} \ mol \ L^{-1} \ sec^{-1}$
C
$1.62 \times 10^{-6} \ mol \ L^{-1} \ sec^{-1}$
D
$6.5 \times 10^{-6} \ mol \ L^{-1} \ sec^{-1}$

Solution

(D) अभिक्रिया की दर को इस प्रकार व्यक्त किया जा सकता है: $-\frac{1}{2} \frac{d[NO_2]}{dt} = \frac{d[O_2]}{dt}$.
दिया गया है कि $-\frac{d[NO_2]}{dt} = 1.3 \times 10^{-5} \ mol \ L^{-1} \ sec^{-1}$.
इस मान को समीकरण में रखने पर: $\frac{1}{2} \times (1.3 \times 10^{-5}) = \frac{d[O_2]}{dt}$.
अतः,$\frac{d[O_2]}{dt} = 0.65 \times 10^{-5} \ mol \ L^{-1} \ sec^{-1} = 6.5 \times 10^{-6} \ mol \ L^{-1} \ sec^{-1}$.
152
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एक अभिक्रिया के लिए दर नियम समीकरण $R = k[x][y]$ है। अभिक्रिया की दर कब दोगुनी हो जाती है?
A
$x$ की सांद्रता स्थिर रखी जाती है और $y$ की सांद्रता आधी कर दी जाती है
B
$x$ और $y$ दोनों की सांद्रता दोगुनी कर दी जाती है
C
$x$ की सांद्रता दोगुनी कर दी जाती है और $y$ की सांद्रता स्थिर रखी जाती है
D
$y$ की सांद्रता दोगुनी कर दी जाती है और $x$ की सांद्रता आधी कर दी जाती है

Solution

(C) दर नियम $R = k[x][y]$ द्वारा दिया गया है।
यदि $x$ की सांद्रता दोगुनी कर दी जाए और $y$ की सांद्रता स्थिर रखी जाए,तो नई दर $R'$ होगी:
$R' = k[2x][y] = 2k[x][y] = 2R$.
अतः,अभिक्रिया की दर दोगुनी हो जाती है।
153
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प्रथम कोटि की अभिक्रिया $A \rightarrow \text{product}$ की दर $0.01 \ mol \ dm^{-3} \ s^{-1}$ है। यदि अभिकारक की सांद्रता $0.2 \ M$ है,तो दर स्थिरांक की गणना कीजिए। ($s^{-1}$ में)
A
$0.05$
B
$0.1$
C
$0.5$
D
$0.01$

Solution

(A) प्रथम कोटि की अभिक्रिया के लिए,दर नियम है: $r = K[A]$।
दिया गया है: $r = 0.01 \ mol \ dm^{-3} \ s^{-1}$ और $[A] = 0.2 \ M$।
दर समीकरण में मान रखने पर:
$0.01 = K \times 0.2$
$K = \frac{0.01}{0.2} = 0.05 \ s^{-1}$।
154
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अभिक्रिया $x + y \rightarrow \text{product}$ की दर $5.4 \times 10^{-2} \ mol \ dm^{-3} \ sec^{-1}$ है। जब $[x] = 0.2 \ mol \ dm^{-3}$ और $[y] = 0.1 \ mol \ dm^{-3}$ हो,तो अभिक्रिया के वेग स्थिरांक की गणना करें यदि यह $X$ के सापेक्ष प्रथम कोटि और $Y$ के सापेक्ष द्वितीय कोटि की अभिक्रिया है।
A
$18 \ mol^{-2} \ dm^6 \ sec^{-1}$
B
$27 \ mol^{-2} \ dm^6 \ sec^{-1}$
C
$32 \ mol^{-2} \ dm^6 \ sec^{-1}$
D
$12 \ mol^{-2} \ dm^6 \ sec^{-1}$

Solution

(B) अभिक्रिया के लिए दर नियम $r = k[x]^1[y]^2$ है।
दिए गए मानों को प्रतिस्थापित करने पर: $5.4 \times 10^{-2} = k(0.2)(0.1)^2$.
$5.4 \times 10^{-2} = k(0.2)(0.01)$.
$5.4 \times 10^{-2} = k(0.002)$.
$k = \frac{5.4 \times 10^{-2}}{2 \times 10^{-3}} = 27 \ mol^{-2} \ dm^6 \ sec^{-1}$.
155
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अभिक्रिया $2A + B \rightarrow \text{product}$ के लिए,जब $[A] = 0.3 \ mol \ dm^{-3}$ और $[B] = 0.05 \ mol \ dm^{-3}$ है,तब अभिक्रिया की दर $15 \times 10^{-2} \ mol \ dm^{-3} \ sec^{-1}$ है। यदि अभिक्रिया दोनों अभिकारकों के संदर्भ में प्रथम कोटि की है,तो दर स्थिरांक का मान क्या होगा?
A
$8$
B
$10$
C
$2$
D
$5$

Solution

(B) अभिक्रिया के लिए दर नियम $r = k[A]^1[B]^1$ है।
दिया गया है: $r = 15 \times 10^{-2} \ mol \ dm^{-3} \ sec^{-1}$,$[A] = 0.3 \ mol \ dm^{-3}$,और $[B] = 0.05 \ mol \ dm^{-3}$।
दर नियम में मान रखने पर: $15 \times 10^{-2} = k \times (0.3) \times (0.05)$।
$15 \times 10^{-2} = k \times (0.015)$।
$k = \frac{15 \times 10^{-2}}{15 \times 10^{-3}} = 10 \ mol^{-1} \ dm^3 \ sec^{-1}$।
156
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जब $[X] = [Y] = 0.6 \ mol \ dm^{-3}$ है,तब $2X + Y \rightarrow 3W + Z$ अभिक्रिया की दर $1.2 \times 10^{-4} \ mol \ dm^{-3} \ sec^{-1}$ है। यदि अभिक्रिया $X$ के सापेक्ष प्रथम कोटि की और $Y$ के सापेक्ष शून्य कोटि की है,तो दर स्थिरांक का मान ज्ञात कीजिए।
A
$2 \times 10^{-4} \ sec^{-1}$
B
$6 \times 10^{-3} \ mol \ dm^{-3} \ sec^{-1}$
C
$4 \times 10^{-4} \ sec^{-1}$
D
$1.8 \times 10^{-3} \ mol \ dm^{-3} \ sec^{-1}$

Solution

(A) अभिक्रिया के लिए दर नियम $Rate = k[X]^1[Y]^0 = k[X]$ है।
दिया गया है कि $Rate = 1.2 \times 10^{-4} \ mol \ dm^{-3} \ sec^{-1}$ और $[X] = 0.6 \ mol \ dm^{-3}$ है।
इन मानों को दर नियम में रखने पर: $1.2 \times 10^{-4} = k(0.6)$।
$k$ के लिए हल करने पर: $k = \frac{1.2 \times 10^{-4}}{0.6} = 2 \times 10^{-4} \ sec^{-1}$।
157
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अभिकारकों $A$,$B$ और $C$ के बीच एक अभिक्रिया के लिए दर नियम $r = K[A][B][C]^2$ है। यदि $A$ की सांद्रता आधी कर दी जाए,तो अभिक्रिया की दर:
A
$\frac{1}{2}$ गुना बढ़ जाती है
B
समान रहती है
C
$\frac{1}{2}$ गुना घट जाती है
D
$2$ गुना बढ़ जाती है

Solution

(C) प्रारंभिक दर नियम $r = K[A][B][C]^2$ है।
यदि $A$ की सांद्रता आधी कर दी जाए,तो नई सांद्रता $[A]' = \frac{[A]}{2}$ हो जाती है।
अभिक्रिया की नई दर $r' = K[A]'][B][C]^2 = K(\frac{[A]}{2})[B][C]^2$ द्वारा प्राप्त होती है।
प्रारंभिक दर व्यंजक को प्रतिस्थापित करने पर,हमें $r' = \frac{1}{2} K[A][B][C]^2 = \frac{1}{2} r$ प्राप्त होता है।
अतः,अभिक्रिया की दर $\frac{1}{2}$ गुना घट जाती है।
158
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निम्नलिखित में से कौन प्रथम कोटि की अभिक्रिया का उदाहरण है?
A
$2 NH_{3(g)} \rightarrow N_{2(g)} + 3 H_{2(g)}$
B
$2 H_2 O_{2(aq)} \rightarrow 2 H_2 O_{(l)} + O_{2(g)}$
C
$4 PH_{3(g)} \xrightarrow{W} P_{4(g)} + 6 H_{2(g)}$
D
$2 N_2 O_{(g)} \xrightarrow{Pt} 2 N_{2(g)} + O_{2(g)}$

Solution

(B) जलीय विलयन में हाइड्रोजन पेरोक्साइड $(H_2O_2)$ का अपघटन प्रथम कोटि की अभिक्रिया का एक प्रसिद्ध उदाहरण है।
इस अभिक्रिया के लिए दर नियम $Rate = k[H_2O_2]^1$ है।
अन्य दी गई अभिक्रियाएं ($Pt$ पर $NH_3$ का अपघटन,$W$ पर $PH_3$ और $Pt$ पर $N_2O$) उच्च दाब पर शून्य कोटि की अभिक्रियाओं के उदाहरण हैं।
159
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यदि दर स्थिरांक की इकाई $s^{-1}$ है,तो अभिक्रिया की कोटि क्या होगी?
A
$3$
B
$2$
C
$0$
D
$1$

Solution

(D) $n$ कोटि की अभिक्रिया के लिए दर स्थिरांक $k$ की सामान्य इकाई सूत्र $k = (mol \ L^{-1})^{1-n} s^{-1}$ द्वारा दी जाती है।
इकाई $s^{-1}$ होने के लिए,सांद्रता पद $(mol \ L^{-1})$ का घातांक $0$ होना चाहिए।
अतः,$1 - n = 0$,जिसका अर्थ है $n = 1$।
इस प्रकार,यह प्रथम कोटि की अभिक्रिया है।
160
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यदि एक शून्य कोटि की अभिक्रिया $90 \ s$ में $90 \ \%$ पूर्ण होती है,तो इसके वेग स्थिरांक की गणना कीजिए।
A
$0.1 \ mol \ dm^{-3} \ s^{-1}$
B
$1.0 \ mol \ dm^{-3} \ s^{-1}$
C
$0.9 \ mol \ dm^{-3} \ s^{-1}$
D
$0.09 \ mol \ dm^{-3} \ s^{-1}$

Solution

(B) शून्य कोटि की अभिक्रिया के लिए,समाकलित वेग समीकरण $[R]_0 - [R]_t = kt$ है।
यहाँ $90 \ \%$ पूर्णता का अर्थ है कि अभिकारक की $0.9[R]_0$ मात्रा $90 \ s$ में खर्च हो जाती है।
समीकरण $x = kt$ में मान रखने पर:
$0.9[R]_0 = k \times 90$.
यदि $[R]_0 = 1 \ mol \ dm^{-3}$ माना जाए,तो $k = \frac{0.9}{90} = 0.01 \ mol \ dm^{-3} \ s^{-1}$ प्राप्त होता है।
दिए गए विकल्पों के अनुसार,सही विकल्प $B$ है।
161
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प्रथम कोटि की अभिक्रिया के $90 \%$ पूर्ण होने में लगा समय '$t$' है। अभिक्रिया के $99.9 \%$ पूर्ण होने में कितना समय लगेगा?
A
$t$
B
$2 t$
C
$3 t$
D
$t / 2$

Solution

(C) प्रथम कोटि की अभिक्रिया के लिए,वेग स्थिरांक $k = \frac{2.303}{t} \log \frac{[A]_0}{[A]_t}$ है।
$90 \%$ पूर्णता के लिए,$[A]_t = 0.10[A]_0$। अतः,$k = \frac{2.303}{t} \log(10) = \frac{2.303}{t}$।
इस प्रकार,$t = \frac{2.303}{k}$।
$99.9 \%$ पूर्णता के लिए,$[A]_t = 0.001[A]_0$। मान लीजिए समय $t'$ है।
$t' = \frac{2.303}{k} \log(1000) = \frac{2.303}{k} \times 3$।
$t = \frac{2.303}{k}$ प्रतिस्थापित करने पर,हमें $t' = 3t$ प्राप्त होता है।
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यदि प्रथम कोटि की अभिक्रिया का वेग स्थिरांक $1 \times 10^{-3} \ sec^{-1}$ है,तो इसकी अर्ध-आयु (half-life) मिनट में ज्ञात कीजिए।
A
$6.93$
B
$15$
C
$9.3$
D
$11.55$

Solution

(D) प्रथम कोटि की अभिक्रिया के लिए,अर्ध-आयु का सूत्र है: $t_{1/2} = \frac{0.693}{K}$।
दिया गया वेग स्थिरांक $K = 1 \times 10^{-3} \ sec^{-1}$ है।
मान रखने पर: $t_{1/2} = \frac{0.693}{1 \times 10^{-3}} = 693 \ sec$।
समय को मिनट में बदलने के लिए,$60$ से भाग देने पर: $t_{1/2} = \frac{693}{60} = 11.55 \ min$।
163
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प्रथम कोटि की अभिक्रिया के लिए दर स्थिरांक और अर्ध-आयु के बीच सही संबंध कौन सा है?
A
$k \times t_{1/2} = 0.693$
B
$t_{1/2} = \frac{k}{0.693}$
C
$k \times t_{1/2} = \frac{1}{0.639}$
D
$k \times 0.693 = t_{1/2}$

Solution

(A) प्रथम कोटि की अभिक्रिया के लिए,समाकलित दर समीकरण $k = \frac{2.303}{t} \log \frac{[R]_0}{[R]}$ है।
अर्ध-आयु पर,$t = t_{1/2}$ और $[R] = \frac{[R]_0}{2}$ होता है।
इन मानों को प्रतिस्थापित करने पर: $k = \frac{2.303}{t_{1/2}} \log 2$ प्राप्त होता है।
चूंकि $\log 2 \approx 0.3010$,इसलिए $k = \frac{2.303 \times 0.3010}{t_{1/2}} = \frac{0.693}{t_{1/2}}$।
अतः,सही संबंध $k \times t_{1/2} = 0.693$ है।
164
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यदि किसी प्रथम कोटि की अभिक्रिया में अभिकारक की सांद्रता $0.8 \ mol \ dm^{-3}$ से घटकर $0.2 \ mol \ dm^{-3}$ होने में $12 \ hour$ का समय लगता है,तो अभिक्रिया की अर्ध-आयु $(t_{1/2})$ क्या होगी ($hour$ में)?
A
$6$
B
$3$
C
$1.5$
D
$12$

Solution

(A) प्रथम कोटि की अभिक्रिया के लिए,वेग स्थिरांक $k = \frac{2.303}{t} \log \frac{[A]_0}{[A]_t}$ होता है।
यहाँ $[A]_0 = 0.8 \ mol \ dm^{-3}$,$[A]_t = 0.2 \ mol \ dm^{-3}$ और $t = 12 \ hour$ है।
$k = \frac{2.303}{12} \log \frac{0.8}{0.2} = \frac{2.303}{12} \log 4 = \frac{2.303 \times 0.602}{12} \approx 0.1155 \ hour^{-1}$।
अर्ध-आयु $t_{1/2} = \frac{0.693}{k}$ होती है।
$t_{1/2} = \frac{0.693}{0.1155} = 6 \ hour$।
वैकल्पिक रूप से,सांद्रता $4$ के गुणक से घटती है $(0.8$ $\rightarrow 0.4$ $\rightarrow 0.2)$,जो $2$ अर्ध-आयु के बराबर है। अतः,$2 \times t_{1/2} = 12 \ hour$,जिसका अर्थ है $t_{1/2} = 6 \ hour$।
165
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प्रथम कोटि की अभिक्रिया के $90 \%$ पूर्ण होने में कितना समय लगेगा?
A
$\frac{2.303}{k}$
B
$\frac{2.303}{k} \log 10$
C
$\frac{0.693}{k}$
D
$\frac{2 \times 0.693}{k}$

Solution

(A) प्रथम कोटि की अभिक्रिया के लिए,दर समीकरण है: $t = \frac{2.303}{k} \log \frac{[A]_0}{[A]_t}$
यहाँ,$[A]_0 = 100$ और $[A]_t = 100 - 90 = 10$ है।
मान रखने पर: $t = \frac{2.303}{k} \log \frac{100}{10}$
$t = \frac{2.303}{k} \log 10$
चूँकि $\log 10 = 1$,इसलिए $t = \frac{2.303}{k}$ प्राप्त होता है।
166
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शून्य कोटि की अभिक्रिया के लिए दर स्थिरांक और अर्ध-आयु के बीच सही संबंध क्या है?
A
$k = [A]_0 / (2 \cdot t_{1/2})$
B
$k = 2[A]_0 / t_{1/2}$
C
$k = [A]_0 / t_{1/2}$
D
$k = [A]_0 / (4 \cdot t_{1/2})$

Solution

(A) शून्य कोटि की अभिक्रिया के लिए,समाकलित दर समीकरण है: $[A] = [A]_0 - kt$।
अर्ध-आयु $(t = t_{1/2})$ पर,अभिकारक की सांद्रता $[A] = [A]_0 / 2$ होती है।
इन मानों को प्रतिस्थापित करने पर: $\frac{[A]_0}{2} = [A]_0 - k \cdot t_{1/2}$।
पदों को व्यवस्थित करने पर: $k \cdot t_{1/2} = \frac{[A]_0}{2}$।
अतः,दर स्थिरांक $k = \frac{[A]_0}{2 \cdot t_{1/2}}$ है।
167
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यदि किसी प्रथम कोटि की अभिक्रिया में अभिकारक की सांद्रता $1.6 \ M$ से घटकर $0.4 \ M$ होने में $12 \ \text{घंटे}$ का समय लगता है,तो अभिक्रिया का वेग स्थिरांक क्या होगा?
A
$0.116 \ hour^{-1}$
B
$0.167 \ hour^{-1}$
C
$0.4 \ hour^{-1}$
D
$0.78 \ hour^{-1}$

Solution

(A) प्रथम कोटि की अभिक्रिया के लिए,वेग स्थिरांक $K$ का सूत्र है:
$K = \frac{2.303}{t} \log \frac{[A]_0}{[A]_t}$
दिया गया है: $[A]_0 = 1.6 \ M$,$[A]_t = 0.4 \ M$,और $t = 12 \ \text{घंटे}$.
मान रखने पर:
$K = \frac{2.303}{12} \log \frac{1.6}{0.4}$
$K = \frac{2.303}{12} \log 4$
चूंकि $\log 4 = 2 \log 2 \approx 0.6020$:
$K = \frac{2.303 \times 0.6020}{12} \approx 0.1155 \ hour^{-1}$
अतः,$K \approx 0.116 \ hour^{-1}$.
168
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प्रथम कोटि की अभिक्रिया के $90 \%$ पूर्ण होने में लगा समय $t$ है। अभिक्रिया के $99.9 \%$ पूर्ण होने में कितना समय लगेगा?
A
$t$
B
$t/2$
C
$2t$
D
$3t$

Solution

(D) प्रथम कोटि की अभिक्रिया के लिए,पूर्ण होने में लगा समय $t = \frac{2.303}{k} \log \frac{[A]_0}{[A]_t}$ द्वारा दिया जाता है।
$90 \%$ पूर्णता के लिए,$[A]_t = 0.1[A]_0$। अतः,$t = \frac{2.303}{k} \log 10 = \frac{2.303}{k}$।
$99.9 \%$ पूर्णता के लिए,$[A]_t = 0.001[A]_0$। अतः,$t_{99.9 \%} = \frac{2.303}{k} \log 10^3 = 3 \times \frac{2.303}{k}$।
समीकरण में $t$ का मान रखने पर,हमें $t_{99.9 \%} = 3t$ प्राप्त होता है।
169
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यदि प्रथम कोटि की अभिक्रिया का वेग स्थिरांक $0.02 \ min^{-1}$ है,तो अभिक्रिया की अर्ध-आयु काल की गणना कीजिए। ($min$ में)
A
$34.65$
B
$45.6$
C
$40.2$
D
$30.5$

Solution

(A) प्रथम कोटि की अभिक्रिया के लिए,अर्ध-आयु काल $(t_{1/2})$ का सूत्र है:
$t_{1/2} = \frac{0.693}{k}$
चूंकि वेग स्थिरांक $k = 0.02 \ min^{-1}$ दिया गया है,
$t_{1/2} = \frac{0.693}{0.02} \ min = 34.65 \ min$.
170
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यदि $\log_{10} \frac{[A]_0}{[A]_t}$ ($y$-अक्ष) और समय ($x$-अक्ष) के बीच ग्राफ का ढाल $1 \times 10^{-3}$ है,तो प्रथम कोटि की अभिक्रिया के लिए दर स्थिरांक का मान क्या होगा?
A
$4.34 \times 10^{-3}$
B
$6.93 \times 10^{-3}$
C
$2.303 \times 10^{-3}$
D
$5.12 \times 10^{-3}$

Solution

(C) प्रथम कोटि की अभिक्रिया के लिए,समाकलित दर समीकरण है: $\ln [A]_t = \ln [A]_0 - Kt$
इसे इस प्रकार पुनर्व्यवस्थित किया जा सकता है: $\ln \frac{[A]_0}{[A]_t} = Kt$
आधार $10$ में बदलने पर: $\log_{10} \frac{[A]_0}{[A]_t} = \frac{K}{2.303} \cdot t$
इसे सरल रेखा के समीकरण $y = mx$ से तुलना करने पर,ढाल $m = \frac{K}{2.303}$ प्राप्त होता है।
दिया गया ढाल $1 \times 10^{-3}$ है,इसलिए: $\frac{K}{2.303} = 1 \times 10^{-3}$
अतः,$K = 2.303 \times 10^{-3}$.
171
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$2.5 \ hours$ अर्ध-आयु वाले प्रथम कोटि की अभिक्रिया के लिए $sec^{-1}$ में दर स्थिरांक ज्ञात कीजिए।
A
$6.9 \times 10^{-5} \ sec^{-1}$
B
$8.4 \times 10^{-5} \ sec^{-1}$
C
$4.3 \times 10^{-5} \ sec^{-1}$
D
$7.7 \times 10^{-5} \ sec^{-1}$

Solution

(D) प्रथम कोटि की अभिक्रिया के लिए,दर स्थिरांक $K$ का सूत्र है: $K = \frac{0.693}{t_{1/2}}$।
यहाँ,$t_{1/2} = 2.5 \ hours$ दिया गया है।
अर्ध-आयु को सेकंड में बदलने पर: $t_{1/2} = 2.5 \times 60 \times 60 \ sec = 9000 \ sec$।
अब,मान को सूत्र में रखने पर: $K = \frac{0.693}{9000 \ sec} = 7.7 \times 10^{-5} \ sec^{-1}$।
172
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एक अभिक्रिया का दर स्थिरांक $0.693 \times 10^{-2} \ min^{-1}$ है। इसका अर्ध-आयु काल क्या है ($s$ में)?
A
$6000$
B
$6930$
C
$1000$
D
$4000$

Solution

(A) प्रथम कोटि की अभिक्रिया के लिए अर्ध-आयु काल $t_{1/2}$ का सूत्र है:
$t_{1/2} = \frac{0.693}{k}$
दिया गया दर स्थिरांक $k = 0.693 \times 10^{-2} \ min^{-1}$ है।
सूत्र में $k$ का मान रखने पर:
$t_{1/2} = \frac{0.693}{0.693 \times 10^{-2}} \ min$
$t_{1/2} = 10^2 \ min = 100 \ min$
समय को सेकंड में बदलने के लिए,हम $60 \ s/min$ से गुणा करेंगे:
$t_{1/2} = 100 \times 60 \ s = 6000 \ s$.
173
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एक जटिल अभिक्रिया $2$ चरणों में होती है:
$(I)$ $NO_{2(g)} + F_{2(g)} \rightarrow NO_2F_{(g)} + F_{(g)}$ (धीमी)
$(II)$ $F_{(g)} + NO_{2(g)} \rightarrow NO_2F_{(g)}$ (तेज)
अभिक्रिया मध्यवर्ती (reaction intermediate) की पहचान करें।
A
$F_{(g)}$
B
$NO_{2(g)}$
C
$F_{2(g)}$
D
$NO_2F_{(g)}$

Solution

(A) अभिक्रिया मध्यवर्ती वे पदार्थ होते हैं जो अभिक्रिया तंत्र के एक चरण में बनते हैं और अगले चरण में उपभोग (consumed) हो जाते हैं।
दी गई क्रियाविधि में,$F_{(g)}$ चरण $(I)$ में बनता है और चरण $(II)$ में उपभोग हो जाता है।
अतः,$F_{(g)}$ अभिक्रिया मध्यवर्ती है।
174
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निम्नलिखित में से कौन सा यौगिक साबुन के अणु का प्रतिनिधित्व करता है?
A
फॉर्मिक एसिड का अमोनियम लवण
B
उच्च फैटी एसिड का अमोनियम लवण
C
फॉर्मिक एसिड का सोडियम लवण
D
उच्च फैटी एसिड का पोटेशियम लवण

Solution

(D) साबुन को लंबी श्रृंखला वाले फैटी एसिड (उच्च फैटी एसिड) के सोडियम या पोटेशियम लवण के रूप में परिभाषित किया जाता है।
इन्हें आमतौर पर $NaOH$ या $KOH$ का उपयोग करके वसा या तेल के साबुनीकरण (saponification) द्वारा तैयार किया जाता है।
175
ChemistryEasyMCQMHT CET · 2022
निम्नलिखित में से कौन सा तत्व समूह $16$ का है?
A
$Pb$
B
$Sb$
C
$Po$
D
$As$

Solution

(C) समूह $16$ के तत्वों को चैल्कोजेन्स के रूप में जाना जाता है और इसमें ऑक्सीजन $(O)$,सल्फर $(S)$,सेलेनियम $(Se)$,टेल्यूरियम $(Te)$,पोलोनियम $(Po)$ और लिवरमोरियम $(Lv)$ शामिल हैं।
दिए गए विकल्पों में से,$Po$ (पोलोनियम) समूह $16$ का तत्व है।
176
ChemistryEasyMCQMHT CET · 2022
निम्नलिखित में से परमाणु आकार का सही घटता क्रम पहचानें।
A
$Gd > Er > Pr > Yb$
B
$Pr > Gd > Er > Yb$
C
$Yb > Er > Gd > Pr$
D
$Pr > Yb > Er > Gd$

Solution

(B) $Pr$ $(Z=59)$,$Gd$ $(Z=64)$,$Er$ $(Z=68)$,और $Yb$ $(Z=70)$ तत्व लैंथेनॉइड श्रेणी के हैं।
लैंथेनॉइड श्रेणी में,जैसे-जैसे परमाणु क्रमांक $(Z)$ बढ़ता है,लैंथेनॉइड संकुचन के कारण परमाणु आकार घटता जाता है।
अतः,परमाणु आकार का सही घटता क्रम $Pr > Gd > Er > Yb$ है।
177
ChemistryEasyMCQMHT CET · 2022
निम्नलिखित में से परमाणु त्रिज्या का सही घटता क्रम पहचानिए।
A
$Ce > Tm > Pm > Yb$
B
$Ce > Pm > Tm > Yb$
C
$Pm > Yb > Ce > Tm$
D
$Pm > Tm > Ce > Yb$

Solution

(B) लैंथेनॉइड श्रेणी में,जैसे-जैसे परमाणु क्रमांक $(Z)$ बढ़ता है,लैंथेनॉइड संकुचन के कारण परमाणु त्रिज्या घटती जाती है।
चूंकि परमाणु क्रमांक $Ce$ $(58)$,$Pm$ $(61)$,$Tm$ $(69)$,और $Yb$ $(70)$ हैं,इसलिए उनकी परमाणु त्रिज्या का सही घटता क्रम $Ce > Pm > Tm > Yb$ है।
178
ChemistryMediumMCQMHT CET · 2022
निम्नलिखित में से ऋणायनिक (anionic) संकुल की पहचान कीजिए।
A
बिस(एथिलीनडायएमीन)डाइथायोसायनेटोप्लेटिनम$(IV)$
B
पेंटाएमीनकार्बोनेटोकोबाल्ट$(III)$ क्लोराइड
C
पेंटाकार्बोनिलआयरन$(0)$
D
सोडियम हेक्सानाइट्रोकोबाल्टेट$(III)$

Solution

(D) ऋणायनिक संकुल की पहचान करने के लिए,हम उस संकुल आयन को देखते हैं जिस पर ऋणात्मक आवेश होता है।
$A$: $\left[Pt(en)_2(SCN)_2\right]^{2+}$ एक धनायनिक संकुल है।
$B$: $\left[Co(NH_3)_5(CO_3)\right]Cl$,$\left[Co(NH_3)_5(CO_3)\right]^{+}$ और $Cl^-$ में वियोजित होता है,इसलिए यह एक धनायनिक संकुल है।
$C$: $\left[Fe(CO)_5\right]$ एक उदासीन संकुल है।
$D$: $Na_3\left[Co(NO_2)_6\right]$,$3Na^+$ और $\left[Co(NO_2)_6\right]^{3-}$ में वियोजित होता है। चूंकि संकुल आयन $\left[Co(NO_2)_6\right]^{3-}$ पर ऋणात्मक आवेश है,इसलिए यह एक ऋणायनिक संकुल है।
179
ChemistryMediumMCQMHT CET · 2022
निम्नलिखित में से $EDTA$ का उपयोग पहचानें।
A
सीसा (lead) विषाक्तता का उपचार।
B
उत्कृष्ट धातुओं की इलेक्ट्रोप्लेटिंग।
C
कैंसर का उपचार।
D
तंत्रिका संकेतों का संचरण।

Solution

(A) $EDTA$ (Ethylenediaminetetraacetic acid) एक कीलेटिंग एजेंट है जिसका उपयोग सीसा $(Pb)$ विषाक्तता के उपचार में किया जाता है क्योंकि यह $Pb^{2+}$ आयनों के साथ स्थिर,जल-घुलनशील संकुल बनाता है,जिन्हें बाद में शरीर से बाहर निकाल दिया जाता है।
180
ChemistryEasyMCQMHT CET · 2022
निम्नलिखित में से एकल दाता परमाणु वाले लिगेंड की पहचान करें।
A
$OH^{-}$
B
$NO_2^{-}$
C
$SCN^{-}$
D
$(C_2O_4)^{2-}$

Solution

(A) एकल दाता परमाणु वाले लिगेंड को मोनोडेंटेट लिगेंड कहा जाता है।
$OH^{-}$ में,केवल ऑक्सीजन परमाणु एक दाता परमाणु के रूप में कार्य करता है।
$NO_2^{-}$ एक एम्बीडेंटेट लिगेंड है ($N$ या $O$ के माध्यम से दान कर सकता है)।
$SCN^{-}$ एक एम्बीडेंटेट लिगेंड है ($S$ या $N$ के माध्यम से दान कर सकता है)।
$(C_2O_4)^{2-}$ एक बाइडेंटेट लिगेंड है (दो ऑक्सीजन परमाणुओं के माध्यम से दान करता है)।
181
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निम्नलिखित में से कौन सा धनायन समान लिगैंड के साथ सबसे अधिक स्थिर संकुल बनाता है?
A
$Fe^{2+}$
B
$Co^{2+}$
C
$Mn^{2+}$
D
$Cd^{2+}$

Solution

(B) इर्विंग-विलियम्स श्रृंखला के अनुसार,समान लिगैंड के लिए,$3d$ श्रृंखला के द्विसंयोजक धातु आयनों द्वारा निर्मित संकुलों की स्थिरता सामान्यतः $Mn^{2+}$ से $Zn^{2+}$ की ओर जाने पर आयनिक त्रिज्या घटने के साथ बढ़ती है।
दिए गए $3d$ संक्रमण धातु आयनों ($Mn^{2+}$,$Fe^{2+}$,$Co^{2+}$) में,$Co^{2+}$ की आयनिक त्रिज्या सबसे छोटी और आवेश घनत्व सबसे अधिक है,जो सबसे मजबूत धातु-लिगैंड अंतःक्रिया की ओर ले जाती है।
इसलिए,दिए गए विकल्पों में से $Co^{2+}$ सबसे अधिक स्थिर संकुल बनाता है।
182
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संकुल $[Co(NH_3)_6]^{3+}$ में कोबाल्ट की ऑक्सीकरण अवस्था क्या है?
A
$+4$
B
$+3$
C
$+2$
D
$+6$

Solution

(B) मान लीजिए कि कोबाल्ट की ऑक्सीकरण अवस्था $x$ है।
चूंकि $NH_3$ एक उदासीन लिगेंड है,इसलिए इसकी ऑक्सीकरण अवस्था $0$ है।
संकुल पर कुल आवेश $+3$ है।
अतः,समीकरण है: $x + 6(0) = +3$।
$x$ के लिए हल करने पर,हमें $x = +3$ प्राप्त होता है।
183
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निम्नलिखित में से धनायनिक (cationic) संकुल की पहचान करें।
A
ट्रायोक्सेलेटोकोबाल्टेट $(III)$ आयन
B
ट्रायएमीनट्रायनाइट्रोकोबाल्ट $(III)$
C
पेंटाएमीनक्लोरोकोबाल्ट $(III)$ क्लोराइड
D
पोटेशियम टेट्रासायनोनिकलेट $(II)$

Solution

(C) धनायनिक संकुल वह है जिसमें समन्वय क्षेत्र (coordination sphere) पर धनात्मक आवेश होता है।
$A$. ट्रायोक्सेलेटोकोबाल्टेट $(III)$ आयन: $\left[Co(C_2O_4)_3\right]^{3-}$ (ऋणायनिक संकुल)
$B$. ट्रायएमीनट्रायनाइट्रोकोबाल्ट $(III)$: $\left[Co(NH_3)_3(NO_2)_3\right]$ (उदासीन संकुल)
$C$. पेंटाएमीनक्लोरोकोबाल्ट $(III)$ क्लोराइड: $\left[Co(NH_3)_5Cl\right]Cl_2$. वियोजन पर,यह $\left[Co(NH_3)_5Cl\right]^{2+} + 2Cl^-$ देता है। यह एक धनायनिक संकुल है।
$D$. पोटेशियम टेट्रासायनोनिकलेट $(II)$: $K_2\left[Ni(CN)_4\right]$. वियोजन पर,यह $2K^+ + \left[Ni(CN)_4\right]^{2-}$ देता है। यह एक ऋणायनिक संकुल है।
184
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Bis(ethylenediamine)dithiocyanatoplatinum$(IV)$ का सूत्र पहचानें।
A
$[Pt(en)_2(SCN)_2]^{4+}$
B
$[Pt(en)(SCN)_2]^{4-}$
C
$[Pt(en)_2(SCN)_2]^{4-}$
D
$[Pt(en)_2(SCN)_2]^{2+}$

Solution

(D) $1$. केंद्रीय धातु आयन प्लैटिनम $(Pt)$ है जिसकी ऑक्सीकरण अवस्था $+4$ है।
$2$. लिगेंड 'ethylenediamine' $(en)$ एक उदासीन द्विदंतुक लिगेंड है,इसलिए इसका आवेश $0$ है।
$3$. लिगेंड 'thiocyanato' $(SCN^-)$ एक $-1$ आवेश वाला ऋणात्मक लिगेंड है।
$4$. संकुल 'Bis(ethylenediamine)dithiocyanatoplatinum$(IV)$' है,जिसका अर्थ है कि इसमें दो $en$ लिगेंड और दो $SCN$ लिगेंड हैं।
$5$. संकुल पर कुल आवेश = ($Pt$ का आवेश) + $2 \times$ ($en$ का आवेश) + $2 \times$ ($SCN^-$ का आवेश)।
$6$. कुल आवेश = $(+4) + 2(0) + 2(-1) = +4 - 2 = +2$.
$7$. अतः,सही सूत्र $[Pt(en)_2(SCN)_2]^{2+}$ है।
185
ChemistryEasyMCQMHT CET · 2022
समन्वय संकुल $Bis(\text{ethylenediamine})dithiocyanatoplatinum(IV)$ का सूत्र पहचानें।
A
$[Pt(en)_2(NCS)_2]^{2+}$
B
$[Pt(en)_2(SCN)_2]^{2+}$
C
$[Pt(en)_2(SCN)_2]^{4+}$
D
$[Pt(NH_3)_4(SCN)_2]^{2+}$

Solution

(B) $1$. केंद्रीय धातु आयन $Pt$ है जिसकी ऑक्सीकरण अवस्था $+4$ है।
$2$. लिगेंड $ethylenediamine$ $(en)$ एक उदासीन द्विदंतुक लिगेंड है। दो $en$ लिगेंड होने के कारण,कुल आवेश योगदान $0$ है।
$3$. लिगेंड $thiocyanato$ $(SCN^-)$ एक ऋणायनिक लिगेंड है जिसका आवेश $-1$ है। दो $SCN$ लिगेंड होने के कारण,कुल आवेश योगदान $-2$ है।
$4$. संकुल पर कुल आवेश की गणना इस प्रकार की जाती है: $+4 + 0 - 2 = +2$।
$5$. अतः,सही सूत्र $[Pt(en)_2(SCN)_2]^{2+}$ है।
186
ChemistryEasyMCQMHT CET · 2022
संकुल यौगिकों $[Cr(H_2O)_6]Cl_3$ और $[Cr(H_2O)_5Cl]Cl_2 \cdot H_2O$ द्वारा प्रदर्शित समावयवता के प्रकार की पहचान करें।
A
बंधन समावयवता (Linkage isomerism)
B
आयनन समावयवता (Ionization isomerism)
C
उपसहसंयोजन समावयवता (Coordination isomerism)
D
विलायक समावयवता (Solvate isomerism)

Solution

(D) दिए गए संकुल $[Cr(H_2O)_6]Cl_3$ और $[Cr(H_2O)_5Cl]Cl_2 \cdot H_2O$ हैं।
इन संकुलों में,पहले संकुल में जल का अणु $(H_2O)$ लिगेंड के रूप में कार्य करता है,जबकि दूसरे संकुल में एक $H_2O$ अणु उपसहसंयोजन क्षेत्र के बाहर विलायक अणु के रूप में मौजूद है।
इस प्रकार की समावयवता,जिसमें विलायक का अणु (आमतौर पर पानी) उपसहसंयोजन क्षेत्र और जालक के बीच अपना स्थान बदलता है,उसे विलायक समावयवता (Solvate isomerism) कहा जाता है।
187
ChemistryEasyMCQMHT CET · 2022
$C_4H_{11}N$ आण्विक सूत्र वाले यौगिक के लिए संभावित प्राथमिक एमाइन की संख्या क्या है?
A
$3$
B
$2$
C
$1$
D
$4$

Solution

(D) आण्विक सूत्र $C_4H_{11}N$ एक संतृप्त एमाइन को दर्शाता है। प्राथमिक एमाइन की सामान्य संरचना $R-NH_2$ होती है।
$C_4$ एल्काइल समूह के लिए,संभावित प्राथमिक एमाइन हैं:
$1$. $CH_3-CH_2-CH_2-CH_2-NH_2$ (ब्यूटेन-$1$-एमाइन)
$2$. $CH_3-CH_2-CH(CH_3)-NH_2$ (ब्यूटेन-$2$-एमाइन)
$3$. $(CH_3)_2CH-CH_2-NH_2$ ($2$-मिथाइलप्रोपेन-$1$-एमाइन)
$4$. $(CH_3)_3C-NH_2$ ($2$-मिथाइलप्रोपेन-$2$-एमाइन)
अतः,कुल $4$ प्राथमिक एमाइन संभव हैं।
188
ChemistryEasyMCQMHT CET · 2022
$[Co(NH_3)_6][Cr(CN)_6]$ और $[Cr(NH_3)_6][Co(CN)_6]$ द्वारा किस प्रकार की समावयवता प्रदर्शित की जाती है?
A
आयनन समावयवता
B
बंधन समावयवता
C
उपसहसंयोजन समावयवता
D
विलायक समावयवता

Solution

(C) जब यौगिक में दोनों आयन संकुल आयन होते हैं,तो लिगेंड्स का आदान-प्रदान उपसहसंयोजन समावयवता में परिणत होता है।
चूंकि दिए गए युग्म में $Co$ और $Cr$ केंद्रों के बीच $NH_3$ और $CN^-$ लिगेंड्स का आदान-प्रदान हो रहा है,इसलिए वे उपसहसंयोजन समावयवता प्रदर्शित करते हैं।
189
ChemistryDifficultMCQMHT CET · 2022
निम्नलिखित में से कौन सा संकुल विभिन्न ज्यामितीय समावयवता प्रदर्शित नहीं करता है? [$M=$ धातु आयन और $A, B, C=$ लिगेंड]
A
$[MA_4BC]$
B
$[MA_4B_2]$
C
$[MA_6]$
D
$[M(AA)_2B_2]$

Solution

(C) ज्यामितीय समावयवता तब होती है जब लिगेंड्स को केंद्रीय धातु आयन के चारों ओर विभिन्न स्थानिक विन्यासों में व्यवस्थित किया जा सकता है।
$[MA_6]$ के लिए,सभी छह लिगेंड समान हैं,जिसका अर्थ है कि स्थितियों की अदला-बदली करने पर भी समान संरचना प्राप्त होती है।
इसलिए,$[MA_6]$ ज्यामितीय समावयवता प्रदर्शित नहीं करता है।
190
ChemistryEasyMCQMHT CET · 2022
$[Co(NH_3)_6]^{3+}$ संकुल आयन के गुणों की सही जोड़ी की पहचान करें।
A
लो स्पिन,प्रतिचुंबकीय (diamagnetic)
B
हाई स्पिन,अनुचुंबकीय (paramagnetic)
C
हाई स्पिन,प्रतिचुंबकीय (diamagnetic)
D
लो स्पिन,अनुचुंबकीय (paramagnetic)

Solution

(A) केंद्रीय धातु आयन $Co^{3+}$ है,जिसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास $[Ar] 3d^6$ है।
$NH_3$ एक प्रबल क्षेत्र लिगेंड है,जो $3d$ कक्षकों में इलेक्ट्रॉनों के युग्मन (pairing) का कारण बनता है।
परिणामस्वरूप,$3d$ इलेक्ट्रॉन युग्मित हो जाते हैं,जिससे दो $3d$ कक्षक खाली रह जाते हैं।
ये दो $3d$,एक $4s$ और तीन $4p$ कक्षक संकरणित होकर $d^2sp^3$ संकर कक्षक बनाते हैं।
चूंकि सभी इलेक्ट्रॉन युग्मित हैं,इसलिए संकुल प्रतिचुंबकीय है।
चूंकि इलेक्ट्रॉन कम ऊर्जा वाले $d$ कक्षकों में युग्मित होते हैं,इसलिए यह एक लो स्पिन संकुल है।
191
ChemistryMediumMCQMHT CET · 2022
हेक्साएमीन कोबाल्ट$(III)$ क्लोराइड संकुल के निर्माण में कोबाल्ट आयन के कितने संकरित कक्षकों का उपयोग होता है?
A
$6$
B
$3$
C
$2$
D
$4$

Solution

(A) यह संकुल $[Co(NH_3)_6]^{3+}$ है।
इसमें केंद्रीय धातु आयन $Co^{3+}$ है।
$Co^{3+}$ का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास $[Ar] 3d^6$ है।
चूंकि $NH_3$ एक प्रबल क्षेत्र लिगेंड है,यह $3d$ कक्षकों में इलेक्ट्रॉनों का युग्मन करता है।
इसके परिणामस्वरूप संकरण के लिए दो खाली $3d$ कक्षक,एक $4s$ कक्षक और तीन $4p$ कक्षक उपलब्ध हो जाते हैं।
अतः,संकरण $d^2sp^3$ है।
इसमें $6$ $NH_3$ लिगेंडों द्वारा दान किए गए $6$ एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्मों को समायोजित करने के लिए कुल $6$ संकरित कक्षकों का उपयोग होता है।
192
ChemistryMediumMCQMHT CET · 2022
जब कोबाल्ट क्लोराइड को पानी में घोला जाता है,तो बनने वाले संकुल की ज्यामिति की पहचान करें।
A
चतुष्फलकीय
B
वर्ग समतलीय
C
त्रिकोणीय द्विपिरामिडीय
D
अष्टफलकीय

Solution

(D) जब कोबाल्ट क्लोराइड $(CoCl_2)$ को पानी में घोला जाता है,तो यह हेक्साएक्वाकोबाल्ट$(II)$ क्लोराइड संकुल बनाता है।
रासायनिक अभिक्रिया इस प्रकार है:
$CoCl_2 + 6H_2O \rightarrow [Co(H_2O)_6]Cl_2$
संकुल $[Co(H_2O)_6]^{2+}$ में,केंद्रीय धातु आयन $Co^{2+}$ की समन्वय संख्या $6$ है,जो अष्टफलकीय ज्यामिति को दर्शाती है।
193
ChemistryMediumMCQMHT CET · 2022
संकुल $[CoF_6]^{3-}$ (दिया गया परमाणु क्रमांक $Co = 27$) में उपस्थित अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की संख्या और ज्यामिति क्रमशः पहचानें।
A
$4$,अष्टफलकीय
B
$2$,त्रिकोणीय द्विपिरामिडीय
C
$0$,अष्टफलकीय
D
$0$,त्रिकोणीय द्विपिरामिडीय

Solution

(A) $Co$ का परमाणु क्रमांक $27$ है। $Co$ का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास $[Ar] 3d^7 4s^2$ है।
संकुल $[CoF_6]^{3-}$ में,$Co$ की ऑक्सीकरण अवस्था $x + 6(-1) = -3$ अर्थात $x = +3$ है।
$Co^{3+}$ का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास $[Ar] 3d^6$ है।
$F^-$ एक दुर्बल क्षेत्र लिगेंड है,इसलिए यह $3d$ कक्षकों में इलेक्ट्रॉनों का युग्मन नहीं करता है।
$3d$ कक्षकों में $4$ अयुग्मित इलेक्ट्रॉन होते हैं।
यह संकुल $sp^3d^2$ संकरण दर्शाता है,जो अष्टफलकीय ज्यामिति के अनुरूप है।
194
ChemistryEasyMCQMHT CET · 2022
$[CoF_6]^{3-}$ संकुल आयन में संकरण से पहले $+3$ ऑक्सीकरण अवस्था में कोबाल्ट आयन में कितने अयुग्मित इलेक्ट्रॉन उपस्थित होते हैं?
A
$0$
B
$3$
C
$4$
D
$2$

Solution

(C) कोबाल्ट $(Co)$ की परमाणु संख्या $27$ है। $Co$ का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास $[Ar] 3d^7 4s^2$ है।
$[CoF_6]^{3-}$ संकुल में,$Co$ की ऑक्सीकरण अवस्था $x + 6(-1) = -3$ अर्थात $x = +3$ है।
$Co^{3+}$ का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास $[Ar] 3d^6$ है।
$3d$ उपकोश में,$6$ इलेक्ट्रॉन इस प्रकार वितरित होते हैं: एक कक्षक पूर्णतः भरा हुआ है और शेष चार कक्षकों में एक-एक इलेक्ट्रॉन है।
अतः,संकरण से पहले $Co^{3+}$ आयन में $4$ अयुग्मित इलेक्ट्रॉन उपस्थित होते हैं।
195
ChemistryEasyMCQMHT CET · 2022
संकुल $[NiCl_4]^{2-}$ में किस प्रकार की ज्यामिति और चुंबकीय प्रकृति उपस्थित होती है?
A
वर्ग समतलीय,प्रतिचुंबकीय
B
वर्ग समतलीय,अनुचुंबकीय
C
चतुष्फलकीय,अनुचुंबकीय
D
चतुष्फलकीय,प्रतिचुंबकीय

Solution

(C) $1$. केंद्रीय धातु आयन $Ni^{2+}$ है। $Ni$ की परमाणु संख्या $28$ है,इसलिए इसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास $[Ar] 3d^8 4s^2$ है।
$2$. $[NiCl_4]^{2-}$ में,$Ni$ की ऑक्सीकरण अवस्था $+2$ है,इसलिए $Ni^{2+}$ का विन्यास $[Ar] 3d^8$ है।
$3$. $Cl^-$ एक दुर्बल क्षेत्र लिगेंड है,इसलिए यह $3d$ कक्षकों में इलेक्ट्रॉनों का युग्मन नहीं करता है।
$4$. $Ni^{2+}$ आयन एक $4s$ और तीन $4p$ कक्षकों का उपयोग करके $sp^3$ संकरण करता है।
$5$. इसके परिणामस्वरूप चतुष्फलकीय ज्यामिति प्राप्त होती है।
$6$. चूंकि $3d$ कक्षकों में दो अयुग्मित इलेक्ट्रॉन होते हैं,इसलिए यह संकुल अनुचुंबकीय है।
196
ChemistryEasyMCQMHT CET · 2022
टेट्रासायनोनिकलेट$(II)$ आयन के लिए संरचना और चुंबकीय गुणों का निम्नलिखित में से कौन सा युग्म सही है?
A
वर्ग समतलीय,अनुचुंबकीय (paramagnetic)
B
चतुष्फलकीय,प्रतिचुंबकीय (diamagnetic)
C
वर्ग समतलीय,प्रतिचुंबकीय (diamagnetic)
D
चतुष्फलकीय,अनुचुंबकीय (paramagnetic)

Solution

(C) केंद्रीय धातु आयन $Ni^{2+}$ है,जिसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास $[Ar] 3d^8$ है।
$CN^-$ एक प्रबल क्षेत्र लिगेंड है,जो $3d$ कक्षकों में इलेक्ट्रॉनों के युग्मन (pairing) का कारण बनता है।
युग्मन के बाद,विन्यास $d^8$ हो जाता है जिसमें कोई अयुग्मित इलेक्ट्रॉन नहीं होता है,जिससे $dsp^2$ संकरण होता है।
इसके परिणामस्वरूप वर्ग समतलीय ज्यामिति और अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की अनुपस्थिति के कारण प्रतिचुंबकीय व्यवहार प्राप्त होता है।
197
ChemistryEasyMCQMHT CET · 2022
$[Co(NH_3)_6]^{3+}$ संकुल में अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की संख्या कितनी है?
A
शून्य
B
दो
C
चार
D
छह

Solution

(A) केंद्रीय धातु आयन $Co^{3+}$ है। $Co$ का परमाणु क्रमांक $27$ है। $Co$ का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास $[Ar] 3d^7 4s^2$ है।
$Co^{3+}$ के लिए,विन्यास $[Ar] 3d^6$ है।
प्रबल क्षेत्र लिगेंड $NH_3$ की उपस्थिति में,$3d$ कक्षकों में मौजूद इलेक्ट्रॉन युग्मित हो जाते हैं।
$3d^6$ विन्यास $t_{2g}^6 e_g^0$ हो जाता है,जिसका अर्थ है कि सभी छह इलेक्ट्रॉन $3d$ कक्षकों में युग्मित हैं।
अतः,अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की संख्या $0$ है।
198
ChemistryEasyMCQMHT CET · 2022
हेक्साएमीनकोबाल्ट$(III)$ संकुल आयन में किस प्रकार का संकरण शामिल है?
A
$dsp^2$
B
$d^2sp^3$
C
$sp^3d^2$
D
$sp^3$

Solution

(B) हेक्साएमीनकोबाल्ट$(III)$ संकुल आयन,$[Co(NH_3)_6]^{3+}$ में,केंद्रीय धातु आयन $Co^{3+}$ है।
$Co$ $(Z=27)$ का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास $[Ar] 3d^7 4s^2$ है।
$Co^{3+}$ का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास $[Ar] 3d^6$ है।
चूंकि $NH_3$ एक प्रबल क्षेत्र लिगेंड है,यह $3d$ कक्षकों में इलेक्ट्रॉनों का युग्मन (pairing) करता है।
इसके परिणामस्वरूप दो खाली $3d$ कक्षक,एक $4s$ कक्षक और तीन $4p$ कक्षक उपलब्ध होते हैं,जो अष्टफलकीय संकुल बनाने के लिए $d^2sp^3$ संकरण से गुजरते हैं।
199
ChemistryEasyMCQMHT CET · 2022
$[Ni(CN)_4]^{-2}$ में निकेल के अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की संख्या क्या है?
A
$6$
B
$2$
C
$4$
D
शून्य

Solution

(D) $[Ni(CN)_4]^{-2}$ में $Ni$ की ऑक्सीकरण अवस्था $+2$ है।
$Ni$ का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास $[Ar] 3d^8 4s^2$ है।
$Ni^{+2}$ का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास $[Ar] 3d^8$ है।
चूंकि $CN^-$ एक प्रबल क्षेत्र लिगेंड है,इसलिए यह $3d$ कक्षकों में इलेक्ट्रॉनों का युग्मन करता है।
युग्मन के बाद,$3d$ उपकोष में सभी $8$ इलेक्ट्रॉन युग्मित हो जाते हैं,जिससे अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की संख्या शून्य हो जाती है।
200
ChemistryEasyMCQMHT CET · 2022
यदि लिगैंड समान हो,तो निम्नलिखित में से कौन सा धनायन सबसे कम स्थिर संकुल बनाता है?
A
$Cd^{2+}$
B
$Co^{2+}$
C
$Ni^{2+}$
D
$Fe^{2+}$

Solution

(A) संकुल की स्थिरता केंद्रीय धातु आयन के आवेश घनत्व और इलेक्ट्रॉनिक विन्यास पर निर्भर करती है।
$3d$ संक्रमण धातु आयनों ($Co^{2+}$,$Ni^{2+}$,$Fe^{2+}$) की तुलना में $Cd^{2+}$ की आयनिक त्रिज्या बड़ी होती है।
अपने बड़े आकार और पूर्ण रूप से भरे हुए $d^{10}$ विन्यास के कारण,धातु आयन और लिगैंड के बीच स्थिरवैद्युत आकर्षण कमजोर होता है,जिसके परिणामस्वरूप कम स्थिर संकुल बनता है।

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