AIEEE 2006 Chemistry Question Paper with Answer and Solution in Hindi

90 QuestionsHindiWith Solutions

ChemistryQ181 of 90 questions

Page 1 of 2 · Hindi

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ChemistryMCQAIEEE · 2006
यदि ${x^p}{y^q} = {(x + y)^{p + q}},$ है,तो $\frac{dy}{dx} = $
A
$\frac{y}{x}$
B
$-\frac{y}{x}$
C
$\frac{x}{y}$
D
$-\frac{x}{y}$

Solution

(A) दिया गया समीकरण: ${x^p}{y^q} = {(x + y)^{p + q}}$
दोनों पक्षों का प्राकृतिक लघुगणक (log) लेने पर:
$\ln({x^p}{y^q}) = \ln({(x + y)^{p + q}})$
$p\ln x + q\ln y = (p + q)\ln(x + y)$
दोनों पक्षों का $x$ के सापेक्ष अवकलन करने पर:
$\frac{d}{dx}(p\ln x + q\ln y) = \frac{d}{dx}((p + q)\ln(x + y))$
$\frac{p}{x} + \frac{q}{y}\frac{dy}{dx} = \frac{p + q}{x + y}(1 + \frac{dy}{dx})$
हर को हटाने के लिए $xy(x + y)$ से गुणा करने पर:
$py(x + y) + qx(x + y)\frac{dy}{dx} = x(p + q)y + x(p + q)x\frac{dy}{dx}$
$pxy + py^2 + qx^2\frac{dy}{dx} + qxy\frac{dy}{dx} = pxy + qxy + (px^2 + qx^2)\frac{dy}{dx}$
$\frac{dy}{dx}$ को अलग करने के लिए पदों को व्यवस्थित करने पर:
$\frac{dy}{dx}(qx^2 + qxy - px^2 - qx^2) = pxy + qxy - pxy - py^2$
$\frac{dy}{dx}(qxy - px^2) = qxy - py^2$
$\frac{dy}{dx} = \frac{qxy - py^2}{qx^2 - pxy} = \frac{y(qx - py)}{x(qx - py)}$
$\frac{dy}{dx} = \frac{y}{x}$
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ChemistryMCQAIEEE · 2006
$100 \ ^oC$ तापमान पर बल्ब के फिलामेंट का प्रतिरोध $100 \ \Omega$ है। यदि इसका प्रतिरोध का ताप गुणांक $0.005 \ ^oC^{-1}$ है,तो किस तापमान $(^oC)$ पर इसका प्रतिरोध $200 \ \Omega$ हो जाएगा?
A
$300$
B
$400$
C
$500$
D
$200$

Solution

(B) तापमान $t$ पर प्रतिरोध का सूत्र $R_t = R_0(1 + \alpha \Delta T)$ है,जहाँ $R_0$ शून्य डिग्री सेल्सियस पर प्रतिरोध है।
दिया गया है: $t_1 = 100 \ ^oC$ पर $R_1 = 100 \ \Omega$,$t_2 = T$ पर $R_2 = 200 \ \Omega$ और $\alpha = 0.005 \ ^oC^{-1}$।
सूत्र $R_t = R_{ref}[1 + \alpha(t - t_{ref})]$ का उपयोग करते हुए:
$100 = R_0(1 + 0.005 \times 100) \implies 100 = R_0(1 + 0.5) \implies 100 = 1.5 R_0 \implies R_0 = \frac{100}{1.5} = \frac{200}{3} \ \Omega$.
अब,$T$ तापमान पर $R_2 = 200 \ \Omega$ के लिए:
$200 = R_0(1 + 0.005 \times T) = \frac{200}{3}(1 + 0.005T)$.
दोनों पक्षों को $200$ से विभाजित करने पर:
$1 = \frac{1}{3}(1 + 0.005T) \implies 3 = 1 + 0.005T \implies 2 = 0.005T$.
$T = \frac{2}{0.005} = \frac{2000}{5} = 400 \ ^oC$.
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ChemistryMCQAIEEE · 2006
एक बल्ब के फिलामेंट का $100\, ^oC$ तापमान पर प्रतिरोध $100\, \Omega$ है। यदि इसका प्रतिरोध का ताप गुणांक $0.005\, (^oC)^{-1}$ है,तो किस तापमान पर इसका प्रतिरोध $200\, \Omega$ हो जाएगा?
A
$500$
B
$200$
C
$300$
D
$400$

Solution

(C) दिया गया है: प्रारंभिक तापमान $\theta_1 = 100\, ^oC$,प्रारंभिक प्रतिरोध $R_{\theta_1} = 100\, \Omega$,अंतिम प्रतिरोध $R_{\theta_2} = 200\, \Omega$,ताप गुणांक $\alpha = 0.005\, (^oC)^{-1}$।
प्रतिरोध और तापमान के बीच संबंध का सूत्र $R_{\theta_2} = R_{\theta_1} [1 + \alpha (\theta_2 - \theta_1)]$ है।
$\theta_2$ के लिए सूत्र को व्यवस्थित करने पर:
$R_{\theta_2} - R_{\theta_1} = \alpha R_{\theta_1} (\theta_2 - \theta_1)$
$\frac{R_{\theta_2} - R_{\theta_1}}{\alpha R_{\theta_1}} = \theta_2 - \theta_1$
$\theta_2 = \frac{R_{\theta_2} - R_{\theta_1}}{\alpha R_{\theta_1}} + \theta_1$
मान रखने पर:
$\theta_2 = \frac{200 - 100}{0.005 \times 100} + 100$
$\theta_2 = \frac{100}{0.5} + 100$
$\theta_2 = 200 + 100 = 300\, ^oC$.
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ChemistryMCQAIEEE · 2006
यदि द्विघात समीकरण $x^2 + px + q = 0$ के मूल क्रमशः $\tan 30^\circ$ और $\tan 15^\circ$ हैं,तो $2 + q - p$ का मान क्या होगा?
A
$0$
B
$1$
C
$2$
D
$3$

Solution

(D) द्विघात समीकरण $x^2 + px + q = 0$ के मूल $\alpha = \tan 30^\circ$ और $\beta = \tan 15^\circ$ दिए गए हैं।
मूलों और गुणांकों के बीच संबंध से:
मूलों का योग: $\alpha + \beta = -p$
मूलों का गुणनफल: $\alpha \beta = q$
हम जानते हैं कि $\tan 30^\circ = \frac{1}{\sqrt{3}}$ और $\tan 15^\circ = 2 - \sqrt{3}$।
अतः,$p = -(\frac{1}{\sqrt{3}} + 2 - \sqrt{3}) = \frac{2 - 2\sqrt{3}}{\sqrt{3}}$
और $q = \frac{1}{\sqrt{3}}(2 - \sqrt{3}) = \frac{2}{\sqrt{3}} - 1$।
अब,$2 + q - p$ की गणना करने पर:
$2 + (\frac{2}{\sqrt{3}} - 1) - (\frac{2 - 2\sqrt{3}}{\sqrt{3}}) = 1 + \frac{2}{\sqrt{3}} - \frac{2}{\sqrt{3}} + 2 = 3$.
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ChemistryMCQAIEEE · 2006
यदि रेखाएँ $3x - 4y - 7 = 0$ और $2x - 3y - 5 = 0$ एक $49\pi$ वर्ग इकाई क्षेत्रफल वाले वृत्त के दो व्यास हैं,तो वृत्त का समीकरण ज्ञात कीजिए:
A
$x^2 + y^2 + 2x - 2y - 62 = 0$
B
$x^2 + y^2 - 2x + 2y - 62 = 0$
C
$x^2 + y^2 - 2x + 2y - 47 = 0$
D
$x^2 + y^2 + 2x - 2y - 47 = 0$

Solution

(C) वृत्त का केंद्र दोनों व्यासों का प्रतिच्छेदन बिंदु है।
$3x - 4y = 7$ और $2x - 3y = 5$ को हल करने पर:
पहले समीकरण को $2$ से और दूसरे को $3$ से गुणा करने पर: $6x - 8y = 14$ और $6x - 9y = 15$ प्राप्त होता है।
समीकरणों को घटाने पर: $(6x - 8y) - (6x - 9y) = 14 - 15 \implies y = -1$।
$y = -1$ को $3x - 4y = 7$ में रखने पर: $3x - 4(-1) = 7 \implies 3x + 4 = 7 \implies 3x = 3 \implies x = 1$।
अतः,केंद्र $(h, k) = (1, -1)$ है।
वृत्त का क्षेत्रफल $49\pi$ दिया गया है,इसलिए $\pi r^2 = 49\pi \implies r^2 = 49 \implies r = 7$।
वृत्त का समीकरण $(x - h)^2 + (y - k)^2 = r^2$ होता है।
$(x - 1)^2 + (y + 1)^2 = 7^2$।
$x^2 - 2x + 1 + y^2 + 2y + 1 = 49$।
$x^2 + y^2 - 2x + 2y + 2 = 49$।
$x^2 + y^2 - 2x + 2y - 47 = 0$।
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ChemistryMCQAIEEE · 2006
एक सरल रेखा बिंदु $A(3, 4)$ से होकर गुजरती है,इस प्रकार कि अक्षों के बीच का रेखाखंड बिंदु $A$ पर समद्विभाजित होता है। रेखा का समीकरण ज्ञात कीजिए।
A
$3x - 4y + 7 = 0$
B
$4x + 3y = 24$
C
$3x + 4y = 25$
D
$x + y = 7$

Solution

(B) माना कि रेखा के $x$-अक्ष और $y$-अक्ष पर अंतःखंड क्रमशः $a$ और $b$ हैं। रेखा का समीकरण $\frac{x}{a} + \frac{y}{b} = 1$ है।
चूंकि बिंदु $A(3, 4)$ अक्षों के बीच के रेखाखंड को समद्विभाजित करता है,इसलिए $A$ के निर्देशांक $(\frac{a}{2}, \frac{b}{2})$ हैं।
निर्देशांकों की तुलना करने पर,$\frac{a}{2} = 3 \Rightarrow a = 6$ और $\frac{b}{2} = 4 \Rightarrow b = 8$ प्राप्त होता है।
इन मानों को अंतःखंड रूप समीकरण में रखने पर: $\frac{x}{6} + \frac{y}{8} = 1$।
$24$ से गुणा करने पर,$4x + 3y = 24$ प्राप्त होता है।
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ChemistryMCQAIEEE · 2006
फलन $f(x) = \frac{x}{2} + \frac{2}{x}$ का $x = $ .......... पर स्थानीय निम्नतम मान है।
A
$-2$
B
$0$
C
$1$
D
$2$

Solution

(D) दिया गया फलन $f(x) = \frac{x}{2} + \frac{2}{x}$ है।
सबसे पहले,अवकलज $f'(x)$ ज्ञात करें:
$f'(x) = \frac{1}{2} - \frac{2}{x^2}$.
स्थानीय उच्चतम या निम्नतम के लिए,$f'(x) = 0$ रखें:
$\frac{1}{2} - \frac{2}{x^2} = 0 \implies \frac{1}{2} = \frac{2}{x^2} \implies x^2 = 4 \implies x = \pm 2$.
अब,द्वितीय अवकलज $f''(x)$ ज्ञात करें:
$f''(x) = \frac{d}{dx}(\frac{1}{2} - 2x^{-2}) = \frac{4}{x^3}$.
क्रांतिक बिंदुओं पर $f''(x)$ का चिह्न जाँचें:
$x = 2$ पर,$f''(2) = \frac{4}{2^3} = \frac{4}{8} = \frac{1}{2} > 0$.
चूँकि $f''(2) > 0$ है,इसलिए फलन का $x = 2$ पर स्थानीय निम्नतम मान है।
$x = -2$ पर,$f''(-2) = \frac{4}{(-2)^3} = \frac{4}{-8} = -\frac{1}{2} < 0$.
चूँकि $f''(-2) < 0$ है,इसलिए फलन का $x = -2$ पर स्थानीय उच्चतम मान है।
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मान लीजिए $C$ एक वृत्त है जिसका केंद्र $(0,0)$ और त्रिज्या $3$ इकाई है। वृत्त $C$ की उन जीवाओं के मध्य बिंदुओं का बिंदुपथ ज्ञात कीजिए जो केंद्र पर $\frac{2\pi}{3}$ का कोण बनाती हैं।
A
$x^2 + y^2 = \frac{3}{2}$
B
$x^2 + y^2 = 1$
C
$x^2 + y^2 = \frac{27}{4}$
D
$x^2 + y^2 = \frac{9}{4}$

Solution

(D) मान लीजिए $AB$ वृत्त $C$ की एक जीवा है और $M(h, k)$ जीवा $AB$ का मध्य बिंदु है।
चूँकि जीवा $AB$ केंद्र $O(0,0)$ पर $\frac{2\pi}{3}$ का कोण बनाती है,इसलिए $\triangle OAB$ एक समद्विबाहु त्रिभुज है जहाँ $OA = OB = 3$ है।
रेखाखंड $OM$ जीवा $AB$ का लंब समद्विभाजक है।
समकोण त्रिभुज $\triangle OAM$ में,कोण $\angle AOM = \frac{1}{2} \angle AOB = \frac{1}{2} \times \frac{2\pi}{3} = \frac{\pi}{3} = 60^{\circ}$ है।
$\triangle OAM$ में,$OM = OA \cos(60^{\circ})$ है।
चूँकि $M(h, k)$ मध्य बिंदु है,इसलिए दूरी $OM = \sqrt{h^2 + k^2}$ है।
अतः,$\sqrt{h^2 + k^2} = 3 \cos(60^{\circ}) = 3 \times \frac{1}{2} = \frac{3}{2}$ है।
दोनों पक्षों का वर्ग करने पर,$h^2 + k^2 = \frac{9}{4}$ प्राप्त होता है।
$(h, k)$ को $(x, y)$ से प्रतिस्थापित करने पर,अभीष्ट बिंदुपथ $x^2 + y^2 = \frac{9}{4}$ है।
Solution diagram
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ChemistryMCQAIEEE · 2006
$\int_{3}^{6} \frac{\sqrt{x}}{\sqrt{9-x} + \sqrt{x}} \, dx = $
A
$\frac{1}{2}$
B
$\frac{3}{2}$
C
$2$
D
$1$

Solution

(B) माना $I = \int_{3}^{6} \frac{\sqrt{x}}{\sqrt{9-x} + \sqrt{x}} \, dx \quad \dots(i)$
गुणधर्म $\int_{a}^{b} f(x) \, dx = \int_{a}^{b} f(a+b-x) \, dx$ का उपयोग करने पर:
$I = \int_{3}^{6} \frac{\sqrt{9-x}}{\sqrt{9-(9-x)} + \sqrt{9-x}} \, dx$
$I = \int_{3}^{6} \frac{\sqrt{9-x}}{\sqrt{x} + \sqrt{9-x}} \, dx \quad \dots(ii)$
समीकरण $(i)$ और $(ii)$ को जोड़ने पर:
$2I = \int_{3}^{6} \frac{\sqrt{x} + \sqrt{9-x}}{\sqrt{x} + \sqrt{9-x}} \, dx$
$2I = \int_{3}^{6} 1 \, dx$
$2I = [x]_{3}^{6} = 6 - 3 = 3$
$I = \frac{3}{2}$
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$l$ भुजा वाले एक वर्ग $ABCD$ के कोनों पर $m$ द्रव्यमान के चार बिंदु द्रव्यमान रखे गए हैं। $A$ से गुजरने वाली और $BD$ के समानांतर अक्ष के परितः इस निकाय का जड़त्व आघूर्ण क्या होगा?
A
$ml^2$
B
$2ml^2$
C
$\sqrt{3}ml^2$
D
$3ml^2$

Solution

(D) माना अक्ष $nn'$ है। यह अक्ष $A$ से गुजरती है और विकर्ण $BD$ के समानांतर है।
अक्ष से बिंदु $A$ की दूरी $0$ है। अतः,$A$ पर स्थित द्रव्यमान का जड़त्व आघूर्ण $0$ है।
अक्ष से बिंदु $B$ की दूरी $d_B = \frac{l}{\sqrt{2}}$ है।
अक्ष से बिंदु $D$ की दूरी $d_D = \frac{l}{\sqrt{2}}$ है।
अक्ष से बिंदु $C$ की दूरी $d_C = \sqrt{2}l$ है (क्योंकि $C$,$A$ से वर्ग के विपरीत कोने पर स्थित है)।
कुल जड़त्व आघूर्ण $I$ इस प्रकार है:
$I = m(d_A)^2 + m(d_B)^2 + m(d_D)^2 + m(d_C)^2$
$I = m(0)^2 + m\left(\frac{l}{\sqrt{2}}\right)^2 + m\left(\frac{l}{\sqrt{2}}\right)^2 + m(\sqrt{2}l)^2$
$I = 0 + m\left(\frac{l^2}{2}\right) + m\left(\frac{l^2}{2}\right) + 2ml^2$
$I = ml^2 + 2ml^2 = 3ml^2$
Solution diagram
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$75.0 \ cm$ की दूरी पर स्थित दो स्थिर बिंदुओं के बीच एक डोरी तनी हुई है। इसमें $420 \ Hz$ और $315 \ Hz$ की अनुनादी आवृत्तियाँ देखी जाती हैं। इन दोनों के बीच कोई अन्य अनुनादी आवृत्ति नहीं है। तो,इस डोरी के लिए सबसे कम अनुनादी आवृत्ति .... $Hz$ है।
A
$10.5$
B
$105$
C
$1.05$
D
$1050$

Solution

(B) दोनों सिरों पर बंधी हुई डोरी की अनुनादी आवृत्तियाँ $f_n = n \times f_1$ द्वारा दी जाती हैं,जहाँ $f_1 = \frac{v}{2L}$ मूल आवृत्ति है और $n$ एक पूर्णांक है $(n = 1, 2, 3, \dots)$।
दिया गया है कि दो क्रमिक अनुनादी आवृत्तियाँ $f_n = 315 \ Hz$ और $f_{n+1} = 420 \ Hz$ हैं।
हम जानते हैं कि $f_{n+1} - f_n = (n+1)f_1 - nf_1 = f_1$ होता है।
इसलिए,किन्हीं भी दो क्रमिक अनुनादी आवृत्तियों के बीच का अंतर मूल आवृत्ति $f_1$ के बराबर होता है।
$f_1 = 420 \ Hz - 315 \ Hz = 105 \ Hz$।
चूँकि $105 \ Hz$ मूल आवृत्ति है,इसलिए यह डोरी के लिए सबसे कम अनुनादी आवृत्ति है।
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मैग्नीशियम फॉस्फेट,$Mg_{3}(PO_{4})_{2}$ के कितने मोल में $0.25 \ mol$ ऑक्सीजन परमाणु होंगे?
A
$1.25 \times 10^{-2}$
B
$2.5 \times 10^{-2}$
C
$0.02$
D
$3.125 \times 10^{-2}$

Solution

(D) $1 \ mol$ $Mg_{3}(PO_{4})_{2}$ में $8 \ mol$ ऑक्सीजन परमाणु होते हैं।
मान लीजिए $Mg_{3}(PO_{4})_{2}$ के मोलों की संख्या $M$ है।
ऑक्सीजन परमाणुओं के मोलों की संख्या $M \times 8$ द्वारा दी जाती है।
प्रश्न के अनुसार,$M \times 8 = 0.25 \ mol$ है।
अतः,$M = \frac{0.25}{8} = 0.03125 \ mol$ है।
इसे $3.125 \times 10^{-2} \ mol$ के रूप में व्यक्त किया जा सकता है।
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बोर के सिद्धांत के अनुसार,$5^{th}$ कक्षा में एक इलेक्ट्रॉन का कोणीय संवेग क्या है ($, h/\pi$ में)?
A
$10$
B
$2.5$
C
$25$
D
$1.0$

Solution

(B) बोर के अभिधारणा के अनुसार,$n^{th}$ कक्षा में एक इलेक्ट्रॉन के कोणीय संवेग $(L)$ का सूत्र है:
$L = mvr = \frac{nh}{2\pi}$
यहाँ कक्षा संख्या $n = 5$ दी गई है,इसलिए सूत्र में मान रखने पर:
$L = \frac{5h}{2\pi}$
गणना करने पर:
$L = 2.5 \frac{h}{\pi}$
अतः,सही विकल्प $B$ है.
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$300 \ ms^{-1}$ के वेग से गति कर रहे एक इलेक्ट्रॉन (द्रव्यमान $= 9.1 \times 10^{-31} \ kg$) की स्थिति में अनिश्चितता,जो $0.001\%$ तक सटीक है,क्या होगी?
A
$1.92 \times 10^{-2} \ m$
B
$3.84 \times 10^{-2} \ m$
C
$19.2 \times 10^{-2} \ m$
D
$5.76 \times 10^{-2} \ m$

Solution

(A) वेग में प्रतिशत त्रुटि $0.001\%$ दी गई है।
$\frac{\Delta V}{V} \times 100 = 0.001$
$\Delta V = \frac{0.001 \times 300}{100} = 3 \times 10^{-3} \ ms^{-1}$
हाइजेनबर्ग के अनिश्चितता सिद्धांत के अनुसार:
$\Delta x \cdot m \Delta V \geq \frac{h}{4 \pi}$
$\Delta x = \frac{h}{4 \pi m \Delta V}$
मान रखने पर ($h = 6.63 \times 10^{-34} \ J \cdot s$,$m = 9.1 \times 10^{-31} \ kg$,$\Delta V = 3 \times 10^{-3} \ ms^{-1}$):
$\Delta x = \frac{6.63 \times 10^{-34}}{4 \times 3.14159 \times 9.1 \times 10^{-31} \times 3 \times 10^{-3}}$
$\Delta x \approx 1.92 \times 10^{-2} \ m$
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ChemistryMediumMCQAIEEE · 2006
निम्नलिखित में से आयनों का कौन सा समूह आइसोइलेक्ट्रॉनिक प्रजातियों का संग्रह दर्शाता है?
A
$N^{3-}, O^{2-}, P^{3-}, S^{2-}$
B
$Li^{+}, Na^{+}, Mg^{2+}, Ca^{2+}$
C
$K^{+}, Cl^{-}, Ca^{2+}, Sc^{3+}$
D
$Ba^{2+}, Sr^{2+}, K^{+}, Ca^{2+}$

Solution

(C) आइसोइलेक्ट्रॉनिक प्रजातियाँ वे होती हैं जिनमें इलेक्ट्रॉनों की संख्या समान होती है।
$K^{+}$ (परमाणु क्रमांक $19$) के लिए: इलेक्ट्रॉनों की संख्या $= 19 - 1 = 18$ है।
$Cl^{-}$ (परमाणु क्रमांक $17$) के लिए: इलेक्ट्रॉनों की संख्या $= 17 + 1 = 18$ है।
$Ca^{2+}$ (परमाणु क्रमांक $20$) के लिए: इलेक्ट्रॉनों की संख्या $= 20 - 2 = 18$ है।
$Sc^{3+}$ (परमाणु क्रमांक $21$) के लिए: इलेक्ट्रॉनों की संख्या $= 21 - 3 = 18$ है।
चूंकि इन सभी आयनों में $18$ इलेक्ट्रॉन हैं,इसलिए ये आइसोइलेक्ट्रॉनिक हैं।
16
ChemistryMediumMCQAIEEE · 2006
क्षार धातुओं और हैलोजन की रासायनिक अभिक्रियाशीलता के आवर्ती रुझानों के संबंध में निम्नलिखित कथन दिए गए हैं। इनमें से कौन सा कथन सही तस्वीर प्रस्तुत करता है?
A
क्षार धातुओं और हैलोजन दोनों में समूह में नीचे जाने पर परमाणु क्रमांक में वृद्धि के साथ रासायनिक अभिक्रियाशीलता बढ़ती है
B
क्षार धातुओं में अभिक्रियाशीलता बढ़ती है लेकिन हैलोजन में समूह में नीचे जाने पर परमाणु क्रमांक में वृद्धि के साथ यह घटती है
C
क्षार धातुओं में अभिक्रियाशीलता घटती है लेकिन हैलोजन में समूह में नीचे जाने पर परमाणु क्रमांक में वृद्धि के साथ यह बढ़ती है
D
क्षार धातुओं और हैलोजन दोनों में समूह में नीचे जाने पर परमाणु क्रमांक में वृद्धि के साथ रासायनिक अभिक्रियाशीलता घटती है

Solution

(B) क्षार धातुओं $(Group \ 1)$ के लिए,समूह में नीचे जाने पर अभिक्रियाशीलता बढ़ती है क्योंकि आयनन एन्थैल्पी कम हो जाती है,जिससे संयोजी इलेक्ट्रॉन को खोना आसान हो जाता है।
हैलोजन $(Group \ 17)$ के लिए,समूह में नीचे जाने पर अभिक्रियाशीलता घटती है क्योंकि इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी कम ऋणात्मक हो जाती है,जिससे इलेक्ट्रॉन प्राप्त करना कठिन हो जाता है।
इसलिए,क्षार धातुओं में अभिक्रियाशीलता बढ़ती है,और हैलोजन में समूह में नीचे जाने पर परमाणु क्रमांक में वृद्धि के साथ यह घटती है।
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ChemistryMediumMCQAIEEE · 2006
निम्नलिखित में से किस अणु/आयन में अयुग्मित इलेक्ट्रॉन नहीं होते हैं?
A
$N_2^+$
B
$O_2$
C
$O_2^{2-}$
D
$B_2$

Solution

(C) आणविक कक्षक सिद्धांत $(MOT)$ के अनुसार,हम आणविक कक्षकों को भरकर अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की उपस्थिति निर्धारित करते हैं:
$1$. $N_2^+$ ($13$ इलेक्ट्रॉन) के लिए: $\sigma_{1s}^2 \sigma_{1s}^{*2} \sigma_{2s}^2 \sigma_{2s}^{*2} \pi_{2p_x}^2 \pi_{2p_y}^2 \sigma_{2p_z}^1$. इसमें $1$ अयुग्मित इलेक्ट्रॉन है।
$2$. $O_2$ ($16$ इलेक्ट्रॉन) के लिए: $\sigma_{1s}^2 \sigma_{1s}^{*2} \sigma_{2s}^2 \sigma_{2s}^{*2} \sigma_{2p_z}^2 \pi_{2p_x}^2 \pi_{2p_y}^2 \pi_{2p_x}^{*1} \pi_{2p_y}^{*1}$. इसमें $2$ अयुग्मित इलेक्ट्रॉन हैं।
$3$. $O_2^{2-}$ ($18$ इलेक्ट्रॉन) के लिए: $\sigma_{1s}^2 \sigma_{1s}^{*2} \sigma_{2s}^2 \sigma_{2s}^{*2} \sigma_{2p_z}^2 \pi_{2p_x}^2 \pi_{2p_y}^2 \pi_{2p_x}^{*2} \pi_{2p_y}^{*2}$. सभी इलेक्ट्रॉन युग्मित हैं।
$4$. $B_2$ ($10$ इलेक्ट्रॉन) के लिए: $\sigma_{1s}^2 \sigma_{1s}^{*2} \sigma_{2s}^2 \sigma_{2s}^{*2} \pi_{2p_x}^1 \pi_{2p_y}^1$. इसमें $2$ अयुग्मित इलेक्ट्रॉन हैं।
अतः,$O_2^{2-}$ एकमात्र ऐसी स्पीशीज है जिसमें कोई अयुग्मित इलेक्ट्रॉन नहीं है।
18
ChemistryMediumMCQAIEEE · 2006
निम्नलिखित में से किस अणु/आयन में सभी बंध समान नहीं हैं?
A
$XeF_4$
B
$BF_4^-$
C
$SiF_4$
D
$SF_4$

Solution

(D) $XeF_4$ में,ज्यामिति वर्ग समतलीय है जहाँ सममिति के कारण सभी $Xe-F$ बंध समान हैं।
$BF_4^-$ और $SiF_4$ में,ज्यामिति चतुष्फलकीय है,जहाँ चारों बंध समान हैं।
$SF_4$ में,सल्फर परमाणु एक एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म (lone pair) के साथ $sp^3d$ संकरण करता है,जिसके परिणामस्वरूप 'सी-सॉ' (see-saw) ज्यामिति प्राप्त होती है।
एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म की उपस्थिति के कारण,अक्षीय और निरक्षीय $S-F$ बंधों की लंबाई और बंध कोण अलग-अलग होते हैं,जिससे वे असमान हो जाते हैं।
19
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एक आदर्श गैस को एक विलगित निकाय (isolated system) में उत्क्रमणीय (reversible) और अनुत्क्रमणीय (irreversible) दोनों रूप से प्रसारित होने दिया जाता है। यदि $T_i$ प्रारंभिक तापमान है और $T_f$ अंतिम तापमान है,तो निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?
A
$(T_f)_{rev} = (T_f)_{irrev}$
B
उत्क्रमणीय और अनुत्क्रमणीय दोनों प्रक्रियाओं के लिए $T_f = T_i$
C
$(T_f)_{irrev} > (T_f)_{rev}$
D
उत्क्रमणीय प्रक्रिया के लिए $T_f > T_i$ लेकिन अनुत्क्रमणीय प्रक्रिया के लिए $T_f = T_i$

Solution

(C) एक विलगित निकाय में प्रसारित होने वाली आदर्श गैस के लिए,आंतरिक ऊर्जा में परिवर्तन $\Delta U = q + w = 0$ होता है। चूंकि $q = 0$ (विलगित निकाय),इसलिए $w = 0$ होता है।
आदर्श गैस के लिए,$\Delta U = nC_v\Delta T = 0$,जिसका अर्थ है कि दोनों प्रक्रियाओं के लिए $\Delta T = 0$ या $T_f = T_i$ होता है।
हालाँकि,यदि प्रश्न बाहरी दबाव के विरुद्ध विस्तार का संकेत देता है जहाँ कार्य किया जाता है,तो एक विलगित निकाय $(q=0)$ में,$\Delta U = w$ होता है।
चूंकि $w_{rev} < w_{irrev}$ (उत्क्रमणीय विस्तार में अधिक कार्य किया जाता है),इसलिए तापमान में गिरावट उत्क्रमणीय प्रक्रिया में अधिक होती है।
अतः,$(T_f)_{rev} < (T_f)_{irrev}$।
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मिथेन,$CH_{4(g)}$ के लिए $298 \ K$ पर मानक संभवन एन्थैल्पी $(\Delta_fH^o)$ $-74.8 \ kJ \ mol^{-1}$ है। $C-H$ बंध निर्माण के लिए औसत ऊर्जा निर्धारित करने हेतु आवश्यक अतिरिक्त जानकारी क्या होगी?
A
कार्बन की प्रथम चार आयनन ऊर्जाएँ और हाइड्रोजन की इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी
B
हाइड्रोजन अणु,$H_2$ की वियोजन ऊर्जा
C
$H_2$ की वियोजन ऊर्जा और कार्बन की ऊर्ध्वपातन एन्थैल्पी
D
मिथेन के वाष्पीकरण की गुप्त ऊष्मा

Solution

(C) $CH_4$ की मानक संभवन एन्थैल्पी निम्नलिखित अभिक्रिया द्वारा दी जाती है:
$C_{(s)} + 2H_{2(g)} \rightarrow CH_{4(g)}$
औसत $C-H$ बंध ऊर्जा की गणना करने के लिए,हमें अभिकारकों के परमाण्वीकरण पर विचार करना होगा:
$1.$ कार्बन की ऊर्ध्वपातन एन्थैल्पी: $C_{(s)} \rightarrow C_{(g)}$
$2.$ हाइड्रोजन की वियोजन ऊर्जा: $2H_{2(g)} \rightarrow 4H_{(g)}$
हेस के नियम का उपयोग करके,हम इन्हें संभवन एन्थैल्पी के साथ जोड़कर $CH_4$ की कुल बंध वियोजन ऊर्जा ज्ञात करते हैं,जिसे औसत $C-H$ बंध ऊर्जा प्राप्त करने के लिए $4$ से विभाजित किया जाता है।
अतः,$H_2$ की वियोजन ऊर्जा और कार्बन की ऊर्ध्वपातन एन्थैल्पी आवश्यक है।
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निम्नलिखित प्रक्रियाओं के लिए एन्थैल्पी परिवर्तन नीचे दिए गए हैं:
$Cl_{2(g)} \rightarrow 2Cl_{(g)}$$242.3 \ kJ \ mol^{-1}$
$I_{2(g)} \rightarrow 2I_{(g)}$$151.0 \ kJ \ mol^{-1}$
$ICl_{(g)} \rightarrow I_{(g)} + Cl_{(g)}$$211.3 \ kJ \ mol^{-1}$
$I_{2(s)} \rightarrow I_{2(g)}$$62.76 \ kJ \ mol^{-1}$

यह देखते हुए कि आयोडीन और क्लोरीन की मानक अवस्थाएँ $I_{2(s)}$ और $Cl_{2(g)}$ हैं,$ICl_{(g)}$ के लिए मानक संभवन एन्थैल्पी है: ............... $kJ \ mol^{-1}$
A
$+16.8$
B
$+244.8$
C
$-14.6$
D
$-16.8$

Solution

(A) $ICl_{(g)}$ के लिए संभवन अभिक्रिया है: $\frac{1}{2} I_{2(s)} + \frac{1}{2} Cl_{2(g)} \rightarrow ICl_{(g)}$
संभवन एन्थैल्पी की गणना बंध वियोजन ऊर्जा और ऊर्ध्वपातन ऊर्जा का उपयोग करके की जाती है:
$\Delta H_f^o = [\frac{1}{2} \Delta H_{sub}(I_2) + \frac{1}{2} BE(I-I) + \frac{1}{2} BE(Cl-Cl)] - BE(I-Cl)$
दिए गए मानों को रखने पर:
$\Delta H_f^o = [\frac{1}{2}(62.76) + \frac{1}{2}(151.0) + \frac{1}{2}(242.3)] - 211.3$
$\Delta H_f^o = [31.38 + 75.5 + 121.15] - 211.3$
$\Delta H_f^o = 228.03 - 211.3 = 16.73 \ kJ \ mol^{-1}$
एक दशमलव स्थान तक पूर्णांकित करने पर,हमें $+16.8 \ kJ \ mol^{-1}$ प्राप्त होता है।
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$298 \ K$ पर अपने तत्वों से कार्बन मोनोऑक्साइड $(CO)$ के निर्माण के लिए $(\Delta H - \Delta U)$ का मान ............. $J \ mol^{-1}$ है। $(R = 8.314 \ J \ K^{-1} \ mol^{-1})$
A
$- 2477.57$
B
$2477.57$
C
$-1238.78$
D
$1238.78$

Solution

(D) $CO$ के निर्माण के लिए रासायनिक समीकरण है:
$C_{(s)} + \frac{1}{2} O_{2(g)} \rightarrow CO_{(g)}$
ऊष्मागतिकी के प्रथम नियम के अनुसार,$\Delta H = \Delta U + \Delta n_g RT$.
समीकरण को पुनर्व्यवस्थित करने पर,$\Delta H - \Delta U = \Delta n_g RT$.
यहाँ,$\Delta n_g$ गैसीय प्रजातियों के मोलों की संख्या में परिवर्तन है:
$\Delta n_g = n_{p(g)} - n_{r(g)} = 1 - \frac{1}{2} = \frac{1}{2}$.
मान रखने पर:
$\Delta H - \Delta U = \frac{1}{2} \times 8.314 \times 298 = 1238.78 \ J \ mol^{-1}$.
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फास्फोरस पेंटाक्लोराइड एक बंद अभिक्रिया पात्र में निम्नलिखित रूप से वियोजित होता है:
$PCl_{5(g)} \rightleftharpoons PCl_{3(g)} + Cl_{2(g)}$
यदि अभिक्रिया मिश्रण के साम्यावस्था पर कुल दाब $P$ है और $PCl_5$ की वियोजन की मात्रा $x$ है,तो $PCl_3$ का आंशिक दाब क्या होगा?
A
$\left( \frac{x}{x - 1} \right) P$
B
$\left( \frac{x}{1 - x} \right) P$
C
$\left( \frac{x}{1 + x} \right) P$
D
$\left( \frac{2x}{1 - x} \right) P$

Solution

(C) वियोजन अभिक्रिया है: $PCl_{5(g)} \rightleftharpoons PCl_{3(g)} + Cl_{2(g)}$
प्रारंभिक मोल: $1 \quad 0 \quad 0$
साम्यावस्था पर मोल: $(1 - x) \quad x \quad x$
साम्यावस्था पर कुल मोल = $(1 - x) + x + x = 1 + x$
गैस का आंशिक दाब = $\text{मोल अंश} \times \text{कुल दाब}$
$PCl_3$ का मोल अंश = $\frac{x}{1 + x}$
अतः,$P_{PCl_3} = \left( \frac{x}{1 + x} \right) P$
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अभिक्रिया $SO_{3(g)} \rightleftharpoons SO_{2(g)} + \frac{1}{2} O_{2(g)}$ के लिए साम्य स्थिरांक $K_c = 4.9 \times 10^{-2}$ है। अभिक्रिया $2SO_{2(g)} + O_{2(g)} \rightleftharpoons 2SO_{3(g)}$ के लिए $K_c$ का मान क्या होगा?
A
$9.8 \times 10^{-2}$
B
$4.9 \times 10^{-2}$
C
$416$
D
$2.40 \times 10^{-3}$

Solution

(C) अभिक्रिया $SO_{3(g)} \rightleftharpoons SO_{2(g)} + \frac{1}{2} O_{2(g)}$ के लिए,साम्य स्थिरांक $K_c = \frac{[SO_2][O_2]^{1/2}}{[SO_3]} = 4.9 \times 10^{-2}$ है।
अभिक्रिया $2SO_{2(g)} + O_{2(g)} \rightleftharpoons 2SO_{3(g)}$ प्राप्त करने के लिए,हम मूल अभिक्रिया को उल्टा करते हैं और इसे $2$ से गुणा करते हैं।
यदि अभिक्रिया को उल्टा किया जाता है,तो नया साम्य स्थिरांक $1/K_c$ हो जाता है। यदि इसे $n$ गुणांक से गुणा किया जाता है,तो नया साम्य स्थिरांक $(K_c)^n$ हो जाता है।
इसलिए,नई अभिक्रिया के लिए,$K_c' = \frac{1}{(K_c)^2} = \frac{1}{(4.9 \times 10^{-2})^2}$.
$K_c' = \frac{1}{24.01 \times 10^{-4}} = \frac{10^4}{24.01} \approx 416.5$.
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जलीय विलयन में क्षार धातु आयनों की आयनिक गतिशीलता किसके लिए अधिकतम है?
A
$Li^{+}$
B
$Na^{+}$
C
$K^{+}$
D
$Rb^{+}$

Solution

(D) जलीय विलयन में,क्षार धातु आयन जलयोजित (hydrated) हो जाते हैं। जलयोजन की मात्रा आयनिक आकार के व्युत्क्रमानुपाती होती है। छोटे आयनों का आवेश घनत्व अधिक होता है और वे अधिक जलयोजित हो जाते हैं,जिससे उनकी जलयोजित त्रिज्या बड़ी हो जाती है।
चूंकि आयनिक गतिशीलता जलयोजित आयन के आकार के व्युत्क्रमानुपाती होती है,इसलिए जलयोजित त्रिज्या का क्रम $Li^{+} > Na^{+} > K^{+} > Rb^{+}$ है।
अतः,आयनिक गतिशीलता का क्रम $Li^{+} < Na^{+} < K^{+} < Rb^{+}$ है।
इस प्रकार,$Rb^{+}$ के लिए आयनिक गतिशीलता अधिकतम है।
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ChemistryMediumMCQAIEEE · 2006
नीचे दिखाए गए यौगिक का $IUPAC$ नाम क्या है?
Question diagram
A
$3-$ब्रोमो$-1-$क्लोरोसाइक्लोहेक्सिन
B
$1-$ब्रोमो$-3-$क्लोरोसाइक्लोहेक्सिन
C
$2-$ब्रोमो$-6-$क्लोरोसाइक्लोहेक्स$-1-$ईन
D
$6-$ब्रोमो$-2-$क्लोरोसाइक्लोहेक्सिन

Solution

(A) $1$. द्वि-आबंध वाले चक्रीय यौगिकों में,अंकन के लिए द्वि-आबंध को प्राथमिकता दी जाती है।
$2$. द्वि-आबंध के कार्बन परमाणुओं को $1$ और $2$ स्थान दिया जाता है ताकि प्रतिस्थापियों को न्यूनतम संभव अंक मिले।
$3$. क्लोरीन परमाणु से जुड़े कार्बन से शुरू करते हुए,हम द्वि-आबंध के दूसरे कार्बन को $2$ स्थान देने के लिए द्वि-आबंध की ओर बढ़ते हैं।
$4$. इससे ब्रोमीन परमाणु $3$ नंबर के स्थान पर आता है।
$5$. अतः,सही नाम $3-$ब्रोमो$-1-$क्लोरोसाइक्लोहेक्सिन है।
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ChemistryMCQAIEEE · 2006
निम्नलिखित मुक्त मूलकों (free radicals) की स्थिरता का बढ़ता क्रम क्या है?
A
$(C_6H_5)_2 \dot{C}H < (C_6H_5)_3 \dot{C} < (CH_3)_3 \dot{C} < (CH_3)_2 \dot{C}H$
B
$(CH_3)_2 \dot{C}H < (CH_3)_3 \dot{C} < (C_6H_5)_2 \dot{C}H < (C_6H_5)_3 \dot{C}$
C
$(CH_3)_2 \dot{C}H < (CH_3)_3 \dot{C} < (C_6H_5)_3 \dot{C} < (C_6H_5)_2 \dot{C}H$
D
$(C_6H_5)_3 \dot{C} < (C_6H_5)_2 \dot{C}H < (CH_3)_3 \dot{C} < (CH_3)_2 \dot{C}H$

Solution

(B) मुक्त मूलकों की स्थिरता अनुनाद (resonance) और प्रेरणिक प्रभाव (inductive effect) द्वारा निर्धारित की जाती है।
अनुनाद,प्रेरणिक प्रभाव की तुलना में अधिक स्थिरीकरण प्रदान करता है।
$(C_6H_5)_3 \dot{C}$ तीन फेनिल रिंगों के साथ अनुनाद के कारण सबसे अधिक स्थिर है।
$(C_6H_5)_2 \dot{C}H$ दो फेनिल रिंगों के साथ अनुनाद के कारण इसके बाद आता है।
$(CH_3)_3 \dot{C}$ (तृतीयक एल्काइल मुक्त मूलक) अधिक प्रेरणिक प्रभाव और अतिसंयुग्मन (hyperconjugation) के कारण $(CH_3)_2 \dot{C}H$ (द्वितीयक एल्काइल मुक्त मूलक) से अधिक स्थिर है।
अतः,स्थिरता का बढ़ता क्रम: $(CH_3)_2 \dot{C}H < (CH_3)_3 \dot{C} < (C_6H_5)_2 \dot{C}H < (C_6H_5)_3 \dot{C}$ है।
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ChemistryMediumMCQAIEEE · 2006
नीचे दी गई विलोपन अभिक्रिया में मुख्य उत्पाद के रूप में बनने वाला एल्कीन है
Question diagram
A
$1-$मिथाइलसाइक्लोहेक्सीन
B
$3-$मिथाइलसाइक्लोहेक्सीन
C
$1-$ब्यूटीन
D
$CH_2=CH_2$

Solution

(D) दी गई अभिक्रिया हॉफमैन विलोपन (Hofmann elimination) है,जो तब होती है जब एक चतुष्क अमोनियम लवण को $OH^-$ जैसे क्षार के साथ गर्म किया जाता है।
हॉफमैन विलोपन में,क्षार उस $\beta$-कार्बन से प्रोटॉन को हटाता है जो सबसे कम त्रिविम बाधा (sterically hindered) वाला होता है,जिससे सबसे कम प्रतिस्थापित एल्कीन मुख्य उत्पाद के रूप में बनता है।
दिए गए सबस्ट्रेट में,चतुष्क नाइट्रोजन एक मिथाइल समूह,एक एथिल समूह,एक $n$-ब्यूटाइल समूह और एक साइक्लोहेक्सिनाइल रिंग से जुड़ा है।
उपलब्ध $\beta$-हाइड्रोजन की तुलना करने पर:
$1$. एथिल समूह पर $\beta_1$ हाइड्रोजन $CH_2=CH_2$ (एथीन) बनाता है।
$2$. $n$-ब्यूटाइल समूह पर $\beta_2$ हाइड्रोजन $CH_2=CHCH_2CH_3$ ($1$-ब्यूटीन) बनाता है।
$3$. रिंग पर $\beta_3$ और $\beta_4$ हाइड्रोजन चक्रीय एल्कीन बनाते हैं।
हॉफमैन नियम के अनुसार,सबसे कम प्रतिस्थापित एल्कीन,जो $CH_2=CH_2$ (एथीन) है,मुख्य उत्पाद के रूप में बनता है क्योंकि एथिल समूह नाइट्रोजन से जुड़ा सबसे कम त्रिविम बाधा वाला समूह है।
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$2-$फ्लोरोएथेनॉल के तीन मुख्य संरूपणों (अर्थात,ग्रसित (Eclipse),सांतर (Anti),और गौश (Gauche)) के बीच स्थिरता का बढ़ता क्रम क्या है?
A
ग्रसित,सांतर,गौश
B
सांतर,गौश,ग्रसित
C
ग्रसित,गौश,सांतर
D
गौश,ग्रसित,सांतर

Solution

(A) $2-$फ्लोरोएथेनॉल में,फ्लोरीन परमाणु $(F^{\delta -})$ और हाइड्रॉक्सिल हाइड्रोजन परमाणु $(H^{\delta +})$ के बीच अंतःआणविक हाइड्रोजन बंध बनने के कारण गौश (Gauche) संरूपण,सांतर (Anti) संरूपण की तुलना में अधिक स्थिर होता है।
ग्रसित (Eclipse) संरूपण उच्च मरोड़ तनाव (torsional strain) और त्रिविम प्रतिकर्षण (steric repulsion) के कारण सबसे कम स्थिर होता है।
अतः,स्थिरता का बढ़ता क्रम है: $Eclipse < Anti < Gauche$.
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ChemistryDifficultMCQAIEEE · 2006
निम्नलिखित मिश्रणों में से,किसमें मुख्य अन्योन्यक्रिया के रूप में द्विध्रुव-द्विध्रुव (dipole-dipole) अन्योन्यक्रिया उपस्थित है?
A
$KCl$ और जल
B
बेंजीन और कार्बन टेट्राक्लोराइड
C
बेंजीन और इथेनॉल
D
एसीटोनिट्राइल और एसीटोन

Solution

(D) द्विध्रुव-द्विध्रुव अन्योन्यक्रियाएं उन ध्रुवीय अणुओं के बीच होती हैं जिनमें स्थायी द्विध्रुव होते हैं।
इस अन्योन्यक्रिया में,एक ध्रुवीय अणु का धनात्मक सिरा दूसरे ध्रुवीय अणु के ऋणात्मक सिरे की ओर आकर्षित होता है।
$KCl$ और जल में आयन-द्विध्रुव अन्योन्यक्रियाएं होती हैं।
बेंजीन और कार्बन टेट्राक्लोराइड अध्रुवीय हैं,जिनमें लंदन परिक्षेपण बल होते हैं।
बेंजीन और इथेनॉल द्विध्रुव-प्रेरित द्विध्रुव अन्योन्यक्रियाएं प्रदर्शित करते हैं।
एसीटोनिट्राइल $(CH_{3}CN)$ और एसीटोन $(CH_{3})_{2}CO$ दोनों ध्रुवीय अणु हैं,इसलिए उनके बीच मुख्य अन्योन्यक्रिया द्विध्रुव-द्विध्रुव अन्योन्यक्रिया है।
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ChemistryDifficultMCQAIEEE · 2006
निम्नलिखित में से कौन सी रासायनिक अभिक्रिया $H_2SO_4$ के ऑक्सीकरण व्यवहार को दर्शाती है?
A
$NaCl + H_2SO_4 \rightarrow NaHSO_4 + HCl$
B
$2PCl_5 + H_2SO_4 \rightarrow 2POCl_3 + 2HCl + SO_2Cl_2$
C
$2HI + H_2SO_4 \rightarrow I_2 + SO_2 + 2H_2O$
D
$Ca(OH)_2 + H_2SO_4 \rightarrow CaSO_4 + 2H_2O$

Solution

(C) अभिक्रिया $2HI + H_2SO_4 \rightarrow I_2 + SO_2 + 2H_2O$ में,सल्फर $(S)$ की ऑक्सीकरण अवस्था $H_2SO_4$ में $+6$ से घटकर $SO_2$ में $+4$ हो जाती है,जो अपचयन (reduction) को दर्शाती है।
साथ ही,आयोडीन $(I)$ की ऑक्सीकरण अवस्था $HI$ में $-1$ से बढ़कर $I_2$ में $0$ हो जाती है,जो ऑक्सीकरण को दर्शाती है।
अतः $H_2SO_4$ एक ऑक्सीकारक (oxidizing agent) के रूप में कार्य करता है।
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ChemistryMediumMCQAIEEE · 2006
निम्नलिखित में से कौन सा कथन सत्य है?
A
$HClO_4$,$HClO_3$ की तुलना में एक दुर्बल अम्ल है
B
$HNO_3$,$HNO_2$ की तुलना में एक प्रबल अम्ल है
C
$H_3PO_3$,$H_2SO_3$ की तुलना में एक प्रबल अम्ल है
D
जलीय माध्यम में $HF$,$HCl$ की तुलना में एक प्रबल अम्ल है

Solution

(B) ऑक्सोअम्लों की अम्लता उनके संयुग्मी क्षार (conjugate base) के स्थायित्व पर निर्भर करती है।
$HNO_3$ (नाइट्रिक अम्ल) अपने संयुग्मी क्षार के रूप में नाइट्रेट आयन $(NO_3^-)$ बनाता है,जो अनुनाद (resonance) द्वारा स्थिर होता है।
$HNO_2$ (नाइट्रस अम्ल) अपने संयुग्मी क्षार के रूप में नाइट्राइट आयन $(NO_2^-)$ बनाता है।
चूंकि $HNO_3$ का संयुग्मी क्षार $HNO_2$ की तुलना में अधिक अनुनाद-स्थिर है,इसलिए $HNO_3$,$HNO_2$ की तुलना में एक प्रबल अम्ल है।
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ChemistryMediumMCQAIEEE · 2006
$B$,$P$,$S$ और $F$ तत्वों की प्रथम आयनन एन्थैल्पी का बढ़ता क्रम (सबसे कम पहले) क्या है?
A
$B < S < P < F$
B
$B < P < S < F$
C
$F < S < P < B$
D
$P < S < B < F$

Solution

(A) आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर प्रभावी नाभिकीय आवेश में वृद्धि के कारण प्रथम आयनन एन्थैल्पी सामान्यतः बढ़ती है।
दिए गए तत्वों में $B$ (बोरॉन,समूह $13$) की आयनन एन्थैल्पी सबसे कम है।
$P$ (फास्फोरस,समूह $15$) और $S$ (सल्फर,समूह $16$) की तुलना करने पर,$P$ की आयनन एन्थैल्पी $S$ से अधिक होती है क्योंकि $P$ में स्थिर अर्ध-पूर्ण $p$-कक्षक $(3s^2 3p^3)$ विन्यास होता है।
$F$ (फ्लोरीन,समूह $17$) का आकार छोटा और प्रभावी नाभिकीय आवेश अधिक होने के कारण इसकी आयनन एन्थैल्पी सबसे अधिक होती है।
अतः,सही क्रम $B < S < P < F$ है।
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ChemistryDifficultMCQAIEEE · 2006
हाइपोक्लोरस अम्ल की असमानुपातन (disproportionation) अभिक्रिया से कौन से उत्पाद अपेक्षित हैं?
A
$HCl$ और $Cl_2O$
B
$HCl$ और $HClO_3$
C
$HClO_3$ और $Cl_2O$
D
$HClO_2$ और $HClO_4$

Solution

(B) हाइपोक्लोरस अम्ल $(HOCl)$ गर्म करने पर या रखे रहने पर असमानुपातन अभिक्रिया प्रदर्शित करता है।
यह अभिक्रिया इस प्रकार है:
$3 HOCl \rightarrow 2 HCl + HClO_3$
इस अभिक्रिया में,$HOCl$ में क्लोरीन परमाणु (ऑक्सीकरण अवस्था $+1$) का एक साथ $HClO_3$ (ऑक्सीकरण अवस्था $+5$) में ऑक्सीकरण और $HCl$ (ऑक्सीकरण अवस्था $-1$) में अपचयन होता है।
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ChemistryMCQAIEEE · 2006
$[Co(NO_2)(NH_3)_5]Cl_2$ संकुल के लिए $IUPAC$ नाम क्या है?
A
पेंटाएमीन नाइट्रिटो-$N$-कोबाल्ट$(II)$ क्लोराइड
B
पेंटाएमीन नाइट्रिटो-$N$-कोबाल्ट$(III)$ क्लोराइड
C
नाइट्रिटो-$N$-पेंटाएमीन कोबाल्ट$(III)$ क्लोराइड
D
नाइट्रिटो-$N$-पेंटाएमीन कोबाल्ट$(II)$ क्लोराइड

Solution

(B) $1$. केंद्रीय धातु परमाणु $Co$ की ऑक्सीकरण अवस्था ज्ञात करें: मान लें कि ऑक्सीकरण अवस्था $x$ है। संकुल $[Co(NO_2)(NH_3)_5]Cl_2$ है। $NO_2^-$ का आवेश $-1$,$NH_3$ का $0$ और $Cl^-$ का $-1$ है। अतः,$x + (-1) + 5(0) + 2(-1) = 0$,जो $x - 3 = 0$ देता है,इसलिए $x = +3$ है।
$2$. लिगेंड के नाम: $5$ एमीन लिगेंड $(ammine)$ और $1$ नाइट्रो लिगेंड $(nitrito-N)$ हैं।
$3$. नाम व्यवस्थित करें: लिगेंड को वर्णानुक्रम में नामित किया जाता है: $ammine$,$nitrito-N$ से पहले आता है। इसलिए,यह पेंटाएमीन है।
$4$. संयोजन: नाम पेंटाएमीन नाइट्रिटो-$N$-कोबाल्ट$(III)$ क्लोराइड है।
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ChemistryMediumMCQAIEEE · 2006
एक धातु,$M$,अपनी $+2$ और $+4$ ऑक्सीकरण अवस्थाओं में क्लोराइड बनाती है। इन क्लोराइडों के बारे में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?
A
$MCl_2$,$MCl_4$ की तुलना में अधिक आयनिक है
B
$MCl_2$ का $MCl_4$ की तुलना में अधिक आसानी से जल-अपघटन होता है
C
$MCl_2$,$MCl_4$ की तुलना में अधिक वाष्पशील है
D
$MCl_2$,$MCl_4$ की तुलना में निर्जल इथेनॉल में अधिक घुलनशील है

Solution

(A) फजान के नियम के अनुसार,धातु धनायन की ऑक्सीकरण अवस्था में वृद्धि के साथ यौगिक का सहसंयोजक गुण बढ़ता है।
$+4$ ऑक्सीकरण अवस्था में,धातु आयन का आकार छोटा और आवेश घनत्व अधिक होता है,जिससे ध्रुवण क्षमता (polarizing power) अधिक हो जाती है।
परिणामस्वरूप,$MCl_4$ अधिक सहसंयोजक गुण प्रदर्शित करता है,जबकि $MCl_2$ अधिक आयनिक गुण प्रदर्शित करता है।
इसलिए,$MCl_2$,$MCl_4$ की तुलना में अधिक आयनिक है।
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ChemistryMCQAIEEE · 2006
$Fe(CO)_5$ में,$Fe-C$ आबंध में होता है
A
आयनिक गुण
B
केवल $\sigma$-गुण
C
$\pi$-गुण
D
$\sigma$ और $\pi$ दोनों गुण

Solution

(D) $Fe(CO)_5$ में,$Fe-C$ आबंध $CO$ लिगेंड के एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म के $Fe$ परमाणु के रिक्त $d$-कक्षकों में दान द्वारा बनता है,जो $\sigma$-आबंध बनाता है।
इसके अतिरिक्त,इसमें पश्च-आबंधन (back-bonding) होता है जहाँ $Fe$ परमाणु के भरे हुए $d$-कक्षकों से इलेक्ट्रॉन $CO$ लिगेंड के रिक्त प्रति-आबंधी $\pi^*$-कक्षकों में दान किए जाते हैं,जिससे $\pi$-आबंध बनता है।
अतः,$Fe-C$ आबंध में $\sigma$ और $\pi$ दोनों गुण होते हैं।
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ChemistryMCQAIEEE · 2006
फोटॉन के टकराने के बाद एक फोटोइलेक्ट्रॉन को बाहर आने में लगा समय लगभग कितना होता है?
A
$10^{-1} \ s$
B
$10^{-4} \ s$
C
$10^{-10} \ s$
D
$10^{-16} \ s$

Solution

(C) फोटोइलेक्ट्रिक प्रभाव एक तात्कालिक (instantaneous) घटना है। प्रायोगिक अवलोकन यह पुष्टि करते हैं कि फोटॉन के आपतित होने और फोटोइलेक्ट्रॉन के उत्सर्जन के बीच कोई मापने योग्य समय अंतराल नहीं होता है। इस प्रक्रिया में लगा समय लगभग $10^{-10} \ s$ की कोटि का होता है।
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ChemistryMCQAIEEE · 2006
किसी क्षण $t$ पर एक कुंडली से जुड़ा फ्लक्स $\phi = 10t^2 - 50t + 250$ द्वारा दिया गया है। $t = 3 \ s$ पर प्रेरित emf ....... $V$ है।
A
$10$
B
$190$
C
$-10$
D
$-190$

Solution

(C) कुंडली से जुड़ा चुंबकीय फ्लक्स $\phi = 10t^2 - 50t + 250$ है।
फैराडे के विद्युत चुंबकीय प्रेरण के नियम के अनुसार,प्रेरित emf $e$ का मान $e = -\frac{d\phi}{dt}$ होता है।
$t$ के सापेक्ष $\phi$ का अवकलन करने पर:
$\frac{d\phi}{dt} = \frac{d}{dt}(10t^2 - 50t + 250) = 20t - 50$.
अतः,$e = -(20t - 50) = 50 - 20t$.
$t = 3 \ s$ पर,प्रेरित emf का मान:
$e = 50 - 20(3) = 50 - 60 = -10 \ V$.
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ChemistryMCQAIEEE · 2006
दो अलग-अलग आदर्श गैसों वाले दो कठोर बक्से एक मेज पर रखे गए हैं। बॉक्स $A$ में $T_0$ तापमान पर एक मोल नाइट्रोजन है,जबकि बॉक्स $B$ में $(7/3) T_0$ तापमान पर एक मोल हीलियम है। फिर बक्सों को एक-दूसरे के तापीय संपर्क में लाया जाता है,और उनके बीच तब तक ऊष्मा का प्रवाह होता है जब तक कि गैसें एक सामान्य अंतिम तापमान तक नहीं पहुँच जातीं (बक्सों की ऊष्मा धारिता को अनदेखा करें)। तो,$T_0$ के पदों में गैसों का अंतिम तापमान $T_f$ क्या होगा?
A
$T_f = \frac{3}{7} T_0$
B
$T_f = \frac{7}{3} T_0$
C
$T_f = \frac{3}{2} T_0$
D
$T_f = \frac{5}{2} T_0$

Solution

(C) चूंकि बक्से कठोर हैं और परिवेश से तापीय रूप से अलग हैं,गर्म गैस (हीलियम) द्वारा खोई गई ऊष्मा,ठंडी गैस (नाइट्रोजन) द्वारा प्राप्त ऊष्मा के बराबर होती है।
हीलियम (एकपरमाणुक गैस) के लिए,स्थिर आयतन पर मोलर ऊष्मा धारिता $C_{V,He} = \frac{3R}{2}$ है।
नाइट्रोजन (द्विपरमाणुक गैस) के लिए,स्थिर आयतन पर मोलर ऊष्मा धारिता $C_{V,N_2} = \frac{5R}{2}$ है।
मान लीजिए $T_f$ अंतिम संतुलन तापमान है।
हीलियम द्वारा खोई गई ऊष्मा = नाइट्रोजन द्वारा प्राप्त ऊष्मा
$n_{He} C_{V,He} (T_{initial,He} - T_f) = n_{N_2} C_{V,N_2} (T_f - T_{initial,N_2})$
$1 \times \frac{3R}{2} \times (\frac{7}{3} T_0 - T_f) = 1 \times \frac{5R}{2} \times (T_f - T_0)$
दोनों तरफ से $\frac{R}{2}$ को हटाने पर:
$3(\frac{7}{3} T_0 - T_f) = 5(T_f - T_0)$
$7 T_0 - 3 T_f = 5 T_f - 5 T_0$
$12 T_0 = 8 T_f$
$T_f = \frac{12}{8} T_0 = \frac{3}{2} T_0$
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ChemistryMCQAIEEE · 2006
एक प्रेरक $(L = 100 \, mH)$,एक प्रतिरोधक $(R = 100 \, \Omega)$ और एक बैटरी $(E = 100 \, V)$ को शुरू में चित्र में दिखाए अनुसार श्रेणीक्रम में जोड़ा जाता है। लंबे समय के बाद,बिंदुओं $A$ और $B$ को शॉर्ट-सर्किट करके बैटरी को हटा दिया जाता है। शॉर्ट-सर्किट के $1 \, ms$ बाद परिपथ में धारा क्या होगी?
Question diagram
A
$\frac{1}{e} \, A$
B
$e \, A$
C
$0.1 \, A$
D
$1 \, A$

Solution

(A) जब परिपथ लंबे समय तक जुड़ा रहता है,तो प्रेरक एक शॉर्ट सर्किट के रूप में कार्य करता है। स्थिर धारा $I_0 = \frac{E}{R} = \frac{100 \, V}{100 \, \Omega} = 1 \, A$ होती है।
जब बैटरी को हटा दिया जाता है और बिंदुओं $A$ और $B$ को शॉर्ट-सर्किट किया जाता है,तो परिपथ एक $LR$ क्षय परिपथ (decay circuit) बन जाता है। समय $t$ पर धारा $I(t) = I_0 e^{-t/\tau}$ द्वारा दी जाती है,जहाँ $\tau$ समय नियतांक है।
समय नियतांक $\tau = \frac{L}{R} = \frac{100 \times 10^{-3} \, H}{100 \, \Omega} = 10^{-3} \, s = 1 \, ms$ है।
दिए गए $t = 1 \, ms = 10^{-3} \, s$ के लिए,धारा $I = 1 \times e^{-(10^{-3})/(10^{-3})} = 1 \times e^{-1} = \frac{1}{e} \, A$ होगी।
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ChemistryMCQAIEEE · 2006
मान लीजिए कि सूर्य $R$ त्रिज्या का एक गोलाकार पिंड है जिसका तापमान $T \ K$ है,तो सूर्य से $r$ दूरी पर पृथ्वी पर आपतित कुल विकिरण शक्ति का मूल्यांकन करें। (जहाँ $r_0$ पृथ्वी की त्रिज्या है और $\sigma$ स्टीफन का नियतांक है।)
A
$\frac{R^2 \sigma T^4}{r^2}$
B
$\frac{4 \pi r_0^2 R^2 \sigma T^4}{r^2}$
C
$\frac{\pi r_0^2 R^2 \sigma T^4}{r^2}$
D
$\frac{r_0^2 R^2 \sigma T^4}{4 \pi r^2}$

Solution

(C) सूर्य द्वारा विकिरित कुल शक्ति स्टीफन-बोल्ट्जमैन नियम द्वारा दी जाती है: $P = \sigma T^4 (4 \pi R^2)$.
यह ऊर्जा सूर्य से पृथ्वी तक यात्रा करते समय $r$ त्रिज्या की एक गोलाकार सतह पर फैल जाती है। सूर्य से $r$ दूरी पर तीव्रता $I$ (प्रति इकाई क्षेत्रफल शक्ति) इस प्रकार है: $I = \frac{P}{4 \pi r^2} = \frac{\sigma T^4 (4 \pi R^2)}{4 \pi r^2} = \frac{\sigma R^2 T^4}{r^2}$.
पृथ्वी $r_0$ त्रिज्या की एक डिस्क के रूप में कार्य करती है जो इस विकिरण को रोकती है। इस डिस्क का क्षेत्रफल $A = \pi r_0^2$ है।
इसलिए,पृथ्वी पर आपतित कुल विकिरण शक्ति $Q = I \times A = \left( \frac{\sigma R^2 T^4}{r^2} \right) \times (\pi r_0^2) = \frac{\pi r_0^2 R^2 \sigma T^4}{r^2}$ है।
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ChemistryMCQAIEEE · 2006
एक किलो मोल गैस को रुद्धोष्म (adiabatically) रूप से संपीड़ित करने के लिए $146 \, kJ$ कार्य किया जाता है और इस प्रक्रिया में गैस का तापमान $7 \, ^oC$ बढ़ जाता है। गैस है $(R = 8.3 \, J \, mol^{-1} \, K^{-1})$
A
द्विपरमाणुक (diatomic)
B
त्रिपरमाणुक (triatomic)
C
एकपरमाणुक और द्विपरमाणुक का मिश्रण
D
एकपरमाणुक (monoatomic)

Solution

(A) रुद्धोष्म प्रक्रिया के लिए,गैस पर किया गया कार्य $W = \frac{nR \Delta T}{\gamma - 1}$ द्वारा दिया जाता है।
दिया गया है: $W = 146 \, kJ = 146 \times 10^3 \, J$,$n = 1 \, kmol = 10^3 \, mol$,$\Delta T = 7 \, K$,और $R = 8.3 \, J \, mol^{-1} \, K^{-1}$.
मानों को सूत्र में रखने पर:
$146 \times 10^3 = \frac{10^3 \times 8.3 \times 7}{\gamma - 1}$
$146 = \frac{58.1}{\gamma - 1}$
$\gamma - 1 = \frac{58.1}{146} \approx 0.4$
$\gamma = 1 + 0.4 = 1.4$.
चूंकि द्विपरमाणुक गैस के लिए $\gamma = 1.4$ होता है,इसलिए गैस द्विपरमाणुक है।
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$1 \ mm$ और $2 \ mm$ त्रिज्या वाले दो गोलाकार चालकों $A$ और $B$ को $5 \ cm$ की दूरी पर रखा गया है और वे समान रूप से आवेशित हैं। यदि गोलों को एक चालक तार द्वारा जोड़ा जाता है,तो संतुलन की स्थिति में,गोलों $A$ और $B$ की सतहों पर विद्युत क्षेत्रों के परिमाण का अनुपात क्या होगा?
A
$4 : 1$
B
$1 : 2$
C
$2 : 1$
D
$1 : 4$

Solution

(C) जब दो चालकों को एक चालक तार द्वारा जोड़ा जाता है,तो आवेश तब तक प्रवाहित होता है जब तक कि उनके विभव समान न हो जाएं,अर्थात $V_1 = V_2$।
चूंकि गोलाकार चालक का विभव $V = K \frac{Q}{r}$ द्वारा दिया जाता है,इसलिए $K \frac{Q_1}{r_1} = K \frac{Q_2}{r_2}$,जिसका अर्थ है $\frac{Q_1}{r_1} = \frac{Q_2}{r_2}$ या $\frac{Q_1}{Q_2} = \frac{r_1}{r_2}$।
गोलाकार चालक की सतह पर विद्युत क्षेत्र $E = K \frac{Q}{r^2}$ होता है।
अतः,विद्युत क्षेत्रों का अनुपात $\frac{E_1}{E_2} = \frac{K Q_1 / r_1^2}{K Q_2 / r_2^2} = \frac{Q_1}{Q_2} \times \frac{r_2^2}{r_1^2}$ है।
$\frac{Q_1}{Q_2} = \frac{r_1}{r_2}$ प्रतिस्थापित करने पर,हमें $\frac{E_1}{E_2} = \frac{r_1}{r_2} \times \frac{r_2^2}{r_1^2} = \frac{r_2}{r_1}$ प्राप्त होता है।
चूंकि $r_1 = 1 \ mm$ और $r_2 = 2 \ mm$ दिया गया है,इसलिए अनुपात $\frac{E_1}{E_2} = \frac{2}{1} = 2 : 1$ होगा।
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सुइयां $N_1, N_2$ और $N_3$ क्रमशः एक फेरोमैग्नेटिक,एक पैरामैग्नेटिक और एक डायमैग्नेटिक पदार्थ से बनी हैं। जब एक चुंबक को उनके करीब लाया जाता है,तो वह
A
$N_1$ को मजबूती से आकर्षित करेगा,$N_2$ को कमजोर रूप से आकर्षित करेगा और $N_3$ को कमजोर रूप से प्रतिकर्षित करेगा।
B
$N_1$ को मजबूती से आकर्षित करेगा,लेकिन $N_2$ और $N_3$ को कमजोर रूप से प्रतिकर्षित करेगा।
C
तीनों को आकर्षित करेगा।
D
$N_1$ और $N_2$ को मजबूती से आकर्षित करेगा।

Solution

(A) फेरोमैग्नेटिक पदार्थ ($N_1$ जैसे) चुंबक द्वारा मजबूती से आकर्षित होते हैं।
पैरामैग्नेटिक पदार्थ ($N_2$ जैसे) चुंबक द्वारा कमजोर रूप से आकर्षित होते हैं।
डायमैग्नेटिक पदार्थ ($N_3$ जैसे) चुंबक द्वारा कमजोर रूप से प्रतिकर्षित होते हैं।
इसलिए,जब एक चुंबक को उनके करीब लाया जाता है,तो वह $N_1$ को मजबूती से आकर्षित करेगा,$N_2$ को कमजोर रूप से आकर्षित करेगा और $N_3$ को कमजोर रूप से प्रतिकर्षित करेगा।
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दो अलग-अलग आदर्श गैसों वाले दो कठोर बक्सों को एक मेज पर रखा गया है। बक्सा $A$ में $T_0$ तापमान पर एक मोल नाइट्रोजन है,जबकि बक्सा $B$ में $(7/3) T_0$ तापमान पर एक मोल हीलियम है। फिर बक्सों को एक-दूसरे के ऊष्मीय संपर्क में लाया जाता है,और उनके बीच तब तक ऊष्मा का प्रवाह होता है जब तक कि गैसें एक समान अंतिम तापमान तक नहीं पहुँच जातीं (बक्सों की ऊष्मा धारिता को अनदेखा करें)। $T_0$ के पदों में गैसों का अंतिम तापमान $T_f$ है:
A
$T_f = \frac{3}{7} T_0$
B
$T_f = \frac{7}{3} T_0$
C
$T_f = \frac{3}{2} T_0$
D
$T_f = \frac{5}{2} T_0$

Solution

(C) चूंकि बक्से ऊष्मीय संपर्क में हैं और परिवेश से अलग हैं,इसलिए एक गैस द्वारा खोई गई ऊष्मा दूसरी गैस द्वारा प्राप्त ऊष्मा के बराबर होती है।
$\Delta Q_A + \Delta Q_B = 0$
$\Delta U_A + \Delta U_B = 0$
$n_A C_{vA} (T_f - T_A) + n_B C_{vB} (T_f - T_B) = 0$
नाइट्रोजन (द्वि-परमाणुक) के लिए,$C_{vA} = \frac{5}{2} R$. हीलियम (एक-परमाणुक) के लिए,$C_{vB} = \frac{3}{2} R$.
दिया गया है $n_A = 1, n_B = 1, T_A = T_0, T_B = \frac{7}{3} T_0$.
$1 \times \frac{5}{2} R (T_f - T_0) + 1 \times \frac{3}{2} R (T_f - \frac{7}{3} T_0) = 0$
$\frac{1}{2} R$ से विभाजित करने पर:
$5(T_f - T_0) + 3(T_f - \frac{7}{3} T_0) = 0$
$5 T_f - 5 T_0 + 3 T_f - 7 T_0 = 0$
$8 T_f = 12 T_0$
$T_f = \frac{12}{8} T_0 = \frac{3}{2} T_0$
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एक श्रेणी अनुनादी $LCR$ परिपथ में,$R$ के सिरों पर वोल्टेज $100\,V$ है और $R = 1\,k\Omega$ तथा $C = 2\,\mu F$ है। अनुनादी आवृत्ति $\omega = 200\,rad/s$ है। अनुनाद पर,$L$ के सिरों पर वोल्टेज कितना होगा?
A
$40\,V$
B
$250\,V$
C
$4 \times 10^{-3}\,V$
D
$2.5 \times 10^{-2}\,V$

Solution

(B) श्रेणी $LCR$ परिपथ में अनुनाद की स्थिति में,प्रेरणिक प्रतिघात $X_L$ धारितीय प्रतिघात $X_C$ के बराबर होता है,अर्थात $X_L = X_C = \frac{1}{\omega C}$।
परिपथ में धारा $I = \frac{V_R}{R}$ द्वारा दी जाती है।
दिया गया है $V_R = 100\,V$ और $R = 1\,k\Omega = 1000\,\Omega$,इसलिए $I = \frac{100}{1000} = 0.1\,A$।
अनुनाद पर,प्रेरक के सिरों पर वोल्टेज $V_L = I \times X_L$ द्वारा प्राप्त होता है।
चूंकि $X_L = X_C = \frac{1}{\omega C}$,इसलिए $V_L = I \times \frac{1}{\omega C}$।
दिए गए मानों को प्रतिस्थापित करने पर: $V_L = 0.1 \times \frac{1}{200 \times 2 \times 10^{-6}}$।
$V_L = 0.1 \times \frac{1}{400 \times 10^{-6}} = 0.1 \times \frac{10^6}{400} = 0.1 \times 2500 = 250\,V$।
अतः,$L$ के सिरों पर वोल्टेज $250\,V$ है।
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ChemistryMCQAIEEE · 2006
सुइयां $N_1, N_2$ और $N_3$ क्रमशः एक फेरोमैग्नेटिक,एक पैरामैग्नेटिक और एक डायमैग्नेटिक पदार्थ से बनी हैं। जब एक चुंबक को उनके करीब लाया जाता है तो वह क्या करेगा?
A
$N_1$ को मजबूती से आकर्षित करेगा,$N_2$ को कमजोर रूप से आकर्षित करेगा और $N_3$ को कमजोर रूप से प्रतिकर्षित करेगा
B
$N_1$ को मजबूती से आकर्षित करेगा,लेकिन $N_2$ और $N_3$ को कमजोर रूप से प्रतिकर्षित करेगा
C
तीनों को आकर्षित करेगा
D
$N_1$ और $N_2$ को आकर्षित करेगा

Solution

(A) फेरोमैग्नेटिक पदार्थ बाहरी चुंबकीय क्षेत्र की दिशा में मजबूती से चुम्बकित हो जाते हैं,जिससे मजबूत आकर्षण होता है।
पैरामैग्नेटिक पदार्थ बाहरी चुंबकीय क्षेत्र की दिशा में कमजोर रूप से चुम्बकित होते हैं,जिससे कमजोर आकर्षण होता है।
डायमैग्नेटिक पदार्थ बाहरी चुंबकीय क्षेत्र की विपरीत दिशा में कमजोर रूप से चुम्बकित होते हैं,जिससे कमजोर प्रतिकर्षण होता है।
इसलिए,जब एक चुंबक को इन सुइयों के करीब लाया जाता है,तो यह $N_1$ को मजबूती से आकर्षित करेगा,$N_2$ को कमजोर रूप से आकर्षित करेगा और $N_3$ को कमजोर रूप से प्रतिकर्षित करेगा।
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यदि सोने के एक गोले (घनत्व $= 19.5 \times 10^3\, kg/m^3$) की टर्मिनल चाल एक श्यान द्रव (घनत्व $= 1.5 \times 10^3\, kg/m^3$) में $0.2\, m/s$ है,तो उसी द्रव में समान आकार के चांदी के गोले (घनत्व $= 10.5 \times 10^3\, kg/m^3$) की टर्मिनल चाल ज्ञात कीजिए।
A
$0.4$
B
$0.133$
C
$0.1$
D
$0.2$

Solution

(C) टर्मिनल वेग $v$ का सूत्र $v = \frac{2}{9 \eta} r^2 g (\rho - \sigma)$ है,जहाँ $r$ गोले की त्रिज्या है,$\rho$ गोले का घनत्व है,$\sigma$ द्रव का घनत्व है और $\eta$ श्यानता गुणांक है।
चूंकि समान द्रव में दोनों गोलों के लिए $r$,$g$ और $\eta$ स्थिर हैं,इसलिए $v \propto (\rho - \sigma)$ होगा।
सोने के गोले के लिए: $v_g = k (\rho_g - \sigma)$,जहाँ $k = \frac{2 r^2 g}{9 \eta}$ है।
$0.2 = k (19.5 \times 10^3 - 1.5 \times 10^3) = k (18 \times 10^3)$।
चांदी के गोले के लिए: $v_s = k (\rho_s - \sigma) = k (10.5 \times 10^3 - 1.5 \times 10^3) = k (9 \times 10^3)$।
अनुपात लेने पर: $\frac{v_s}{v_g} = \frac{9 \times 10^3}{18 \times 10^3} = \frac{1}{2}$।
अतः,$v_s = \frac{v_g}{2} = \frac{0.2}{2} = 0.1\, m/s$।
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ChemistryMCQAIEEE · 2006
यदि एक श्यान द्रव (घनत्व $= 1.5 \times 10^3 \, kg/m^3$) में सोने के गोले (घनत्व $= 19.5 \times 10^3 \, kg/m^3$) की सीमांत चाल $0.2 \, m/s$ है,तो उसी द्रव में समान आकार के चांदी के गोले (घनत्व $= 10.5 \times 10^3 \, kg/m^3$) की सीमांत चाल ज्ञात कीजिए।
A
$0.4$
B
$0.133$
C
$0.1$
D
$0.2$

Solution

(C) $r$ त्रिज्या और $\rho$ घनत्व वाले गोले का $\sigma$ घनत्व और $\eta$ श्यानता वाले द्रव में सीमांत वेग $V_T$ इस प्रकार है: $V_T = \frac{2r^2}{9\eta}(\rho - \sigma)g$
चूंकि $r$,$\eta$ और $\sigma$ दोनों गोलों के लिए समान हैं,इसलिए $V_T \propto (\rho - \sigma)$
माना $V_{Au}$ और $V_{Ag}$ क्रमशः सोने और चांदी के गोलों के सीमांत वेग हैं।
$\frac{V_{Ag}}{V_{Au}} = \frac{\rho_{Ag} - \sigma}{\rho_{Au} - \sigma}$
दिया गया है: $\rho_{Au} = 19.5 \times 10^3 \, kg/m^3$,$\rho_{Ag} = 10.5 \times 10^3 \, kg/m^3$,$\sigma = 1.5 \times 10^3 \, kg/m^3$ और $V_{Au} = 0.2 \, m/s$
$V_{Ag} = 0.2 \times \frac{10.5 - 1.5}{19.5 - 1.5} = 0.2 \times \frac{9}{18} = 0.2 \times 0.5 = 0.1 \, m/s$.
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पानी में एसिटिक एसिड के $2.05 \ M$ विलयन का घनत्व $1.02 \ g/mL$ है। विलयन की मोललता ............. $mol \ kg^{-1}$ है।
A
$2.28$
B
$0.44$
C
$1.14$
D
$3.28$

Solution

(A) दिया गया है: मोलरता $(M) = 2.05 \ M$,घनत्व $(d) = 1.02 \ g/mL$,एसिटिक एसिड $(CH_3COOH)$ का आणविक द्रव्यमान $= 60 \ g/mol$।
मोललता $(m)$ की गणना सूत्र का उपयोग करके की जाती है: $m = \frac{1000 \times M}{1000 \times d - M \times M_{solute}}$।
मान रखने पर: $m = \frac{1000 \times 2.05}{1000 \times 1.02 - 2.05 \times 60}$।
$m = \frac{2050}{1020 - 123} = \frac{2050}{897} \approx 2.28 \ mol \ kg^{-1}$।
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ChemistryMediumMCQAIEEE · 2006
आवर्त सारणी के समूह-$15$ में $NH_3$ $(106^o)$ से $SbH_3$ $(101^o)$ तक बंध कोण के मानों में कमी का कारण है
A
घटता $lp-bp$ प्रतिकर्षण
B
घटती विद्युत ऋणात्मकता
C
बढ़ता $bp-bp$ प्रतिकर्षण
D
$sp^3$ में बढ़ता $p-$कक्षक लक्षण

Solution

(B) जैसे-जैसे हम समूह-$15$ में नीचे जाते हैं,केंद्रीय परमाणु की विद्युत ऋणात्मकता कम होती जाती है।
विद्युत ऋणात्मकता में कमी के कारण,इलेक्ट्रॉन के बंध युग्म केंद्रीय परमाणु से दूर चले जाते हैं।
इसके परिणामस्वरूप $bp-bp$ (बंध युग्म-बंध युग्म) प्रतिकर्षण कम हो जाता है।
अतः,$NH_3$ से $SbH_3$ तक बंध कोण घटता जाता है।
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ChemistryDifficultMCQAIEEE · 2006
$25\, ^oC$ पर दिए गए डेटा के अनुसार:
$Ag + I^{-} \rightarrow AgI + e^-$,$E^o = 0.152\, V$
$Ag \rightarrow Ag^{+} + e^-$,$E^o = -0.800\, V$
$AgI$ के लिए $\log K_{sp}$ का मान क्या है? $(2.303\, RT/F = 0.059\, V)$
A
$-37.83$
B
$-16.13$
C
$-8.12$
D
$+8.612$

Solution

(B) सेल अभिक्रियाएँ इस प्रकार हैं:
$(I) \ Ag \rightarrow Ag^{+} + e^-$,$E^o = -0.800\, V$
$(II) \ Ag + I^{-} \rightarrow AgI + e^-$,$E^o = 0.152\, V$
अभिक्रिया $(II)$ से $(I)$ को घटाने पर विलेयता गुणनफल के लिए अभिक्रिया प्राप्त होती है:
$AgI \rightarrow Ag^{+} + I^{-}$
$E^o_{cell} = E^o_{(II)} - E^o_{(I)} = 0.152 - (-0.800) = -0.952\, V$
$25\, ^oC$ पर $E^o_{cell} = \frac{0.059}{n} \log K_{sp}$ संबंध का उपयोग करने पर:
$-0.952 = \frac{0.059}{1} \log K_{sp}$
$\log K_{sp} = -\frac{0.952}{0.059} = -16.135 \approx -16.13$
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ChemistryDifficultMCQAIEEE · 2006
$CH_3Br + Nu^{-} \rightarrow CH_3-Nu + Br^{-}$
न्युक्लियोफाइल्स $(Nu^{-})$ $A$ से $D$ के साथ उपरोक्त अभिक्रिया की दर का घटता क्रम क्या है?
$[Nu^{-} = (A) \, PhO^{-}, (B) \, AcO^{-}, (C) \, HO^{-}, (D) \, CH_3O^{-}]$
A
$A > B > C > D$
B
$B > D > C > A$
C
$D > C > A > B$
D
$D > C > B > A$

Solution

(C) $S_N2$ अभिक्रिया की दर आक्रमण करने वाले न्युक्लियोफाइल की न्युक्लियोफिलिसिटी के सीधे समानुपाती होती है।
न्युक्लियोफिलिसिटी का संबंधित संयुग्मी अम्ल की प्रबलता के साथ व्युत्क्रम संबंध होता है।
संयुग्मी अम्लों की अम्लीयता का क्रम: $CH_3COOH > C_6H_5OH > H_2O > CH_3OH$ है।
इसलिए,क्षारीयता (न्युक्लियोफिलिसिटी) का क्रम इसका उल्टा होगा: $CH_3COO^{-} < C_6H_5O^{-} < HO^{-} < CH_3O^{-}$।
अतः,अभिक्रिया की दर का घटता क्रम $D > C > A > B$ है।
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ChemistryMediumMCQAIEEE · 2006
धातु के फलक-केंद्रित घनीय $(FCC)$ एकक कोष्ठिका में उपस्थित परमाणुओं का कुल आयतन क्या है? ($r$ परमाणु त्रिज्या है)
A
$\frac{12}{3} \pi r^3$
B
$\frac{16}{3} \pi r^3$
C
$\frac{20}{3} \pi r^3$
D
$\frac{24}{3} \pi r^3$

Solution

(B) फलक-केंद्रित घनीय $(FCC)$ एकक कोष्ठिका में $4$ परमाणु होते हैं।
एक परमाणु का आयतन $V = \frac{4}{3} \pi r^3$ सूत्र द्वारा दिया जाता है।
अतः,एकक कोष्ठिका में परमाणुओं का कुल आयतन $4 \times \frac{4}{3} \pi r^3 = \frac{16}{3} \pi r^3$ है।
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ChemistryMediumMCQAIEEE · 2006
ठोस सतह पर गैस के अधिशोषण के लैंगम्यूर मॉडल में:
A
सतह के दिए गए क्षेत्रफल पर टकराने वाली गैस का द्रव्यमान गैस के दबाव के समानुपाती होता है
B
सतह के दिए गए क्षेत्रफल पर टकराने वाली गैस का द्रव्यमान गैस के दबाव से स्वतंत्र होता है
C
सतह से अधिशोषित अणुओं के वियोजन की दर सतह के आवरण पर निर्भर नहीं करती है
D
सतह पर एक ही स्थान पर अधिशोषण में एक ही समय में कई अणु शामिल हो सकते हैं

Solution

(A) लैंगम्यूर के अधिशोषण मॉडल के अनुसार,अधिशोषण की दर गैस के दबाव $(p)$ और सतह पर रिक्त स्थानों की संख्या के समानुपाती होती है।
सतह के दिए गए क्षेत्रफल पर टकराने वाली गैस का द्रव्यमान गैस के दबाव $(p)$ के सीधे समानुपाती होता है क्योंकि सतह के साथ अणुओं के टकराने की आवृत्ति दबाव के साथ रैखिक रूप से बढ़ती है।
इसलिए,सही कथन यह है कि सतह के दिए गए क्षेत्रफल पर टकराने वाली गैस का द्रव्यमान गैस के दबाव के समानुपाती होता है।
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ChemistryMediumMCQAIEEE · 2006
$18 \ g$ ग्लूकोज $(C_6H_{12}O_6)$ को $178.2 \ g$ जल में मिलाया जाता है। $100^\circ C$ पर इस जलीय विलयन के लिए जल का वाष्प दाब ........ $Torr$ है।
A
$76.00$
B
$752.40$
C
$759.00$
D
$7.60$

Solution

(B) ग्लूकोज के मोल $(n_{glucose}) = \frac{18 \ g}{180 \ g/mol} = 0.1 \ mol$.
जल के मोल $(n_{water}) = \frac{178.2 \ g}{18 \ g/mol} = 9.9 \ mol$.
जल का मोल अंश $(\chi_{water}) = \frac{n_{water}}{n_{water} + n_{glucose}} = \frac{9.9}{9.9 + 0.1} = \frac{9.9}{10} = 0.99$.
$100^\circ C$ पर शुद्ध जल का वाष्प दाब $760 \ Torr$ होता है।
राउल्ट के नियम के अनुसार,विलयन का वाष्प दाब $(P_{sol}) = \chi_{water} \times P^\circ_{water}$.
$P_{sol} = 0.99 \times 760 \ Torr = 752.4 \ Torr$.
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ChemistryDifficultMCQAIEEE · 2006
$25 ^\circ C$ पर जल में अनंत तनुता पर $\Lambda_{NaOH}^o$ और $\Lambda_{HCl}^o$ की मोलर चालकताएँ क्रमशः $91.0$ और $426.2 \ S \ cm^2/mol$ हैं। $\Lambda_{CH_3COOH}^o$ की गणना करने के लिए,आवश्यक अतिरिक्त मान क्या है?
A
$\Lambda_{NaOH}^o$
B
$\Lambda_{NaCl}^o$
C
$\Lambda_{H_2O}^o$
D
$\Lambda_{CH_3COONa}^o$

Solution

(B) कोलरॉश के आयनों के स्वतंत्र अभिगमन के नियम के अनुसार,अनंत तनुता पर एसिटिक एसिड $(CH_3COOH)$ जैसे दुर्बल विद्युत अपघट्य की मोलर चालकता की गणना प्रबल विद्युत अपघट्यों की मोलर चालकता का उपयोग करके की जा सकती है।
समीकरण इस प्रकार है:
$\Lambda_{CH_3COOH}^o = \Lambda_{CH_3COONa}^o + \Lambda_{HCl}^o - \Lambda_{NaCl}^o$
अतः,$\Lambda_{NaCl}^o$ का मान आवश्यक है।
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ChemistryMediumMCQAIEEE · 2006
$0.1 \, M$ सांद्रता वाले विद्युत अपघट्य के विलयन से भरे चालकता सेल का प्रतिरोध $100 \, \Omega$ है। इस विलयन की चालकता $1.29 \, S \, m^{-1}$ है। उसी सेल का प्रतिरोध जब उसी विलयन के $0.2 \, M$ सांद्रता वाले विलयन से भरा जाता है,तो $520 \, \Omega$ होता है। $0.2 \, M$ विद्युत अपघट्य विलयन की मोलर चालकता ..........$\times 10^{-4} \, S \, m^2 \, mol^{-1}$ होगी।
A
$1.24$
B
$12.4$
C
$124$
D
$1240$

Solution

(B) चरण $1$: सेल स्थिरांक $(G^* = l/a)$ की गणना करें।
$0.1 \, M$ विलयन के लिए दिया गया है: $R = 100 \, \Omega$ और $\kappa = 1.29 \, S \, m^{-1}$।
$G^* = \kappa \times R = 1.29 \, S \, m^{-1} \times 100 \, \Omega = 129 \, m^{-1}$।
चरण $2$: $0.2 \, M$ विलयन के लिए चालकता $(\kappa)$ की गणना करें।
$0.2 \, M$ विलयन के लिए $R = 520 \, \Omega$ दिया गया है।
$\kappa = \frac{G^*}{R} = \frac{129 \, m^{-1}}{520 \, \Omega} \approx 0.248 \, S \, m^{-1}$।
चरण $3$: मोलर चालकता $(\Lambda_m)$ की गणना करें।
$\Lambda_m = \frac{\kappa}{C} = \frac{0.248 \, S \, m^{-1}}{0.2 \, mol \, L^{-1}} = \frac{0.248 \, S \, m^{-1}}{0.2 \times 10^3 \, mol \, m^{-3}} = 1.24 \times 10^{-3} \, S \, m^2 \, mol^{-1}$।
आवश्यक इकाइयों में परिवर्तित करने पर $(\times 10^{-4} \, S \, m^2 \, mol^{-1})$:
$1.24 \times 10^{-3} = 12.4 \times 10^{-4} \, S \, m^2 \, mol^{-1}$।
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ChemistryMediumMCQAIEEE · 2006
एक अभिक्रिया कार्बन मोनोऑक्साइड की सांद्रता के संबंध में $2nd$ कोटि की पाई गई। यदि कार्बन मोनोऑक्साइड की सांद्रता को दोगुना कर दिया जाए,और बाकी सब कुछ समान रखा जाए,तो अभिक्रिया की दर
A
$4$ के गुणक से बढ़ जाएगी
B
दोगुनी हो जाएगी
C
अपरिवर्तित रहेगी
D
तीन गुनी हो जाएगी

Solution

(A) चूंकि अभिक्रिया $CO$ के संबंध में $2nd$ कोटि की है,इसलिए दर नियम इस प्रकार है:
$r = k[CO]^2$
मान लीजिए $CO$ की प्रारंभिक सांद्रता $a$ है,अर्थात $[CO] = a$.
$r_1 = k(a)^2 = ka^2$
जब सांद्रता दोगुनी हो जाती है,अर्थात $[CO] = 2a$.
इसलिए,$r_2 = k(2a)^2 = 4ka^2$.
अतः,$r_2 = 4r_1$.
इसलिए,अभिक्रिया की दर $4$ गुना बढ़ जाएगी।
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ChemistryEasyMCQAIEEE · 2006
अभिक्रिया की दर को आरेनियस समीकरण द्वारा इस प्रकार व्यक्त किया जा सकता है:
$k = A e^{-E_a / RT}$
इस समीकरण में,$E_a$ क्या दर्शाता है?
A
$T$ तापमान पर अभिक्रिया करने वाले अणुओं की कुल ऊर्जा
B
अभिक्रिया की सक्रियण ऊर्जा से अधिक ऊर्जा वाले अणुओं का अंश
C
वह ऊर्जा जिसके ऊपर सभी टकराने वाले अणु अभिक्रिया करेंगे
D
वह ऊर्जा जिसके नीचे सभी टकराने वाले अणु अभिक्रिया करेंगे

Solution

(C) आरेनियस समीकरण $k = A e^{-E_a / RT}$ में,$E_a$ सक्रियण ऊर्जा (activation energy) को दर्शाता है।
सक्रियण ऊर्जा वह न्यूनतम अतिरिक्त ऊर्जा है जो अभिकारक अणुओं द्वारा अवशोषित की जाती है ताकि उनकी ऊर्जा देहली ऊर्जा (threshold energy) के बराबर हो जाए,जिससे वे अभिक्रिया करके उत्पाद बना सकें।
अतः,यह वह ऊर्जा अवरोध है जिसे टकराने वाले अणुओं को अभिक्रिया करने के लिए पार करना होता है।
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ChemistryMediumMCQAIEEE · 2006
${}_{92}^{238}U$ के ${}_{92}^{234}U$ में रूपांतरण में,यदि एक उत्सर्जन $\alpha$-कण है,तो अन्य उत्सर्जन क्या होना चाहिए?
A
एक $\beta^-$ और एक $\gamma$
B
एक $\beta^+$ और एक $\beta^-$
C
दो $\beta^-$
D
दो $\beta^-$ और एक $\beta^+$

Solution

(C) नाभिकीय रूपांतरण ${}_{92}^{238}U \rightarrow {}_{92}^{234}U + \text{emissions}$ है।
सबसे पहले,एक $\alpha$-कण $({}_{2}^{4}He)$ के उत्सर्जन से: ${}_{92}^{238}U \rightarrow {}_{90}^{234}Th + {}_{2}^{4}He$ प्राप्त होता है।
अंतिम उत्पाद ${}_{92}^{234}U$ तक पहुँचने के लिए,${}_{90}^{234}Th$ को बीटा क्षय से गुजरना होगा: ${}_{90}^{234}Th \rightarrow {}_{91}^{234}Pa + {}_{-1}^{0}e$ और ${}_{91}^{234}Pa \rightarrow {}_{92}^{234}U + {}_{-1}^{0}e$।
अतः,कुल उत्सर्जन एक $\alpha$-कण और दो $\beta^-$-कण हैं।
63
ChemistryDifficultMCQAIEEE · 2006
$NO$ की $Br_2$ के साथ अभिक्रिया द्वारा $NOBr$ बनने के लिए निम्नलिखित क्रियाविधि प्रस्तावित की गई है:
$NO_{(g)} + Br_{2(g)} \rightleftharpoons NOBr_{2(g)}$
$NOBr_{2(g)} + NO_{(g)} \longrightarrow 2NOBr_{(g)}$
यदि दूसरा चरण दर-निर्धारक चरण है,तो $NO_{(g)}$ के सापेक्ष अभिक्रिया की कोटि क्या है?
A
$3$
B
$2$
C
$1$
D
$0$

Solution

(B) चरण $(i)$: $NO_{(g)} + Br_{2(g)} \rightleftharpoons NOBr_{2(g)}$ (तीव्र साम्यावस्था)
चरण $(ii)$: $NOBr_{2(g)} + NO_{(g)} \longrightarrow 2NOBr_{(g)}$ (धीमा,दर-निर्धारक चरण)
दर नियम धीमे चरण द्वारा निर्धारित किया जाता है: $\text{Rate} = k[NOBr_2][NO]$.
चूंकि $NOBr_2$ एक मध्यवर्ती है,हम इसकी सांद्रता को चरण $(i)$ के साम्य स्थिरांक $K_C$ का उपयोग करके व्यक्त करते हैं: $K_C = \frac{[NOBr_2]}{[NO][Br_2]}$.
अतः,$[NOBr_2] = K_C[NO][Br_2]$.
इसे दर नियम में प्रतिस्थापित करने पर: $\text{Rate} = k \cdot K_C[NO][Br_2][NO] = k'[NO]^2[Br_2]$.
अतः $NO_{(g)}$ के सापेक्ष अभिक्रिया की कोटि $2$ है.
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ChemistryDifficultMCQAIEEE · 2006
निकिल $(Z = 28)$ एक यूनीनेगेटिव मोनोडेंटेट लिगैंड $X^{-}$ के साथ मिलकर एक अनुचुंबकीय (paramagnetic) संकुल $[NiX_4]^{-2}$ बनाता है। इस संकुल आयन में निकिल के अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की संख्या और ज्यामिति क्रमशः क्या है $:$
A
$1$,वर्ग समतलीय
B
$2$,वर्ग समतलीय
C
$1$,चतुष्फलकीय
D
$2$,चतुष्फलकीय

Solution

(D) निकिल $(Ni)$ की परमाणु संख्या $28$ है। इसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास $[Ar] 3d^8 4s^2$ है।
संकुल $[NiX_4]^{-2}$ में,मान लीजिए $Ni$ की ऑक्सीकरण अवस्था $y$ है।
$y + 4(-1) = -2 \implies y = +2$.
अतः,$Ni^{+2}$ का विन्यास $[Ar] 3d^8$ है।
$3d$ कक्षक में $8$ इलेक्ट्रॉन होते हैं। हुंड के नियम के अनुसार,ये $3$ युग्मित और $2$ अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों के रूप में वितरित होते हैं।
चूंकि संकुल अनुचुंबकीय है और लिगैंड $X^-$ एक दुर्बल क्षेत्र लिगैंड है (क्योंकि यह चतुष्फलकीय संकुल बनाता है),इसलिए $3d$ कक्षकों में इलेक्ट्रॉनों का युग्मन नहीं होता है।
इस प्रकार,$2$ अयुग्मित इलेक्ट्रॉन मौजूद हैं।
इसमें $sp^3$ संकरण शामिल है,जो चतुष्फलकीय ज्यामिति को दर्शाता है।
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ChemistryMediumMCQAIEEE · 2006
लैंथेनॉइड संकुचन किसके कारण होता है?
A
$Ce$ से $Lu$ तक समान प्रभावी नाभिकीय आवेश
B
$4f$ इलेक्ट्रॉनों द्वारा नाभिकीय आवेश से बाहरी इलेक्ट्रॉनों का अपूर्ण परिरक्षण (shielding)
C
$4f$ इलेक्ट्रॉनों द्वारा नाभिकीय आवेश से बाहरी इलेक्ट्रॉनों का उल्लेखनीय परिरक्षण
D
$5d$ इलेक्ट्रॉनों द्वारा नाभिकीय आवेश से बाहरी इलेक्ट्रॉनों का उल्लेखनीय परिरक्षण

Solution

(B) लैंथेनॉइड संकुचन का मुख्य कारण $4f$ इलेक्ट्रॉनों द्वारा बाहरी कोश के इलेक्ट्रॉनों का दुर्बल परिरक्षण (poor shielding) है।
चूंकि $4f$ कक्षकों की आकृति विसरित (diffuse) होती है,इसलिए उनका परिरक्षण प्रभाव अपूर्ण होता है।
परिणामस्वरूप,बाहरी इलेक्ट्रॉनों द्वारा अनुभव किया जाने वाला प्रभावी नाभिकीय आवेश बढ़ जाता है,जिससे नाभिक बाहरी कोश के इलेक्ट्रॉनों को अधिक मजबूती से आकर्षित करता है,जिसके कारण लैंथेनॉइड श्रेणी में परमाणु और आयनिक त्रिज्याओं में कमी आती है।
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ChemistryMediumMCQAIEEE · 2006
$Ca^{2+}$ आयन के साथ अष्टफलकीय संकुल बनाने के लिए कितने $EDTA$ (एथिलीन डायमीन टेट्रा एसिटिक एसिड) अणुओं की आवश्यकता होती है?
A
$1$
B
$2$
C
$6$
D
$3$

Solution

(A) $EDTA$ एक हेक्साडेंटेट लिगैंड है,जिसका अर्थ है कि इसमें $6$ दाता परमाणु ($4$ ऑक्सीजन परमाणु और $2$ नाइट्रोजन परमाणु) होते हैं जो केंद्रीय धातु आयन के साथ समन्वय कर सकते हैं।
चूंकि एक अष्टफलकीय संकुल के लिए $6$ की समन्वय संख्या की आवश्यकता होती है,इसलिए $Ca^{2+}$ आयन की सभी $6$ समन्वय साइटों को संतुष्ट करने के लिए $EDTA$ का एक अणु पर्याप्त है।
इसलिए,$EDTA$ के $1$ अणु की आवश्यकता होती है।
67
ChemistryMediumMCQAIEEE · 2006
जलीय विलयन में $Ni^{2+}$ का "स्पिन-ओनली" चुंबकीय आघूर्ण [ बोर मैग्नेटोन,$(\mu_B)$ की इकाइयों में ] क्या होगा? (परमाणु क्रमांक $Ni = 28$)
A
$6$
B
$1.73$
C
$2.84$
D
$4.90$

Solution

(C) $Ni$ $(Z = 28)$ का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास $[Ar] 3d^8 4s^2$ है।
$Ni^{2+}$ के लिए,विन्यास $[Ar] 3d^8$ है।
$3d^8$ में,$2$ अयुग्मित इलेक्ट्रॉन होते हैं।
स्पिन-ओनली चुंबकीय आघूर्ण की गणना $\mu = \sqrt{n(n+2)} \ \mu_B$ सूत्र का उपयोग करके की जाती है,जहाँ $n$ अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की संख्या है।
$n = 2$ रखने पर: $\mu = \sqrt{2(2+2)} = \sqrt{8} \approx 2.83 \ \mu_B$।
अतः,निकटतम मान $2.84 \ \mu_B$ है।
68
ChemistryDifficultMCQAIEEE · 2006
फेनिल मैग्नीशियम ब्रोमाइड मेथनॉल के साथ अभिक्रिया करके क्या देता है?
A
टोल्यूनि और $Mg(OH)Br$ का मिश्रण
B
फिनोल और $Mg(Me)Br$ का मिश्रण
C
ऐनिसोल और $Mg(OH)Br$ का मिश्रण
D
बेंजीन और $Mg(OMe)Br$ का मिश्रण

Solution

(D) ग्रिग्नार्ड अभिकर्मक $(RMgX)$ प्रबल क्षार होते हैं और सक्रिय हाइड्रोजन परमाणु वाले यौगिकों (जैसे अल्कोहल) के साथ अभिक्रिया करके एल्केन बनाते हैं।
$C_{6}H_{5}MgBr + CH_{3}OH \longrightarrow C_{6}H_{6} + CH_{3}OMgBr$
यहाँ,फेनिल मैग्नीशियम ब्रोमाइड मेथनॉल के साथ अभिक्रिया करके बेंजीन और मेथॉक्सीमैग्नीशियम ब्रोमाइड $(Mg(OMe)Br)$ बनाता है।
69
ChemistryAdvancedMCQAIEEE · 2006
फ्लोरोबेंजीन $(C_6H_5F)$ को प्रयोगशाला में कैसे संश्लेषित किया जा सकता है?
A
$F_2$ गैस के साथ बेंजीन के सीधे फ्लोरीनीकरण द्वारा
B
ब्रोमोबेंजीन की $NaF$ विलयन के साथ अभिक्रिया द्वारा
C
फिनोल को $HF$ और $KF$ के साथ गर्म करके
D
एनिलीन के डायज़ोटाइज़ेशन द्वारा और उसके बाद डायज़ोनियम लवण को $HBF_4$ के साथ गर्म करके

Solution

(D) फ्लोरोबेंजीन को बाल्ज़-शीमैन (Balz-Schiemann) अभिक्रिया द्वारा तैयार किया जाता है।
इस प्रक्रिया में,सबसे पहले एनिलीन को $NaNO_2$ और $HCl$ का उपयोग करके $0-5^{\circ}C$ पर बेंजीन डायज़ोनियम क्लोराइड में परिवर्तित किया जाता है।
फिर,इसकी अभिक्रिया फ्लोरोबोरिक एसिड $(HBF_4)$ के साथ कराई जाती है जिससे बेंजीन डायज़ोनियम टेट्राफ्लोरोबोरेट $(C_6H_5N_2^+BF_4^-)$ बनता है।
अंत में,इस लवण को गर्म करने पर फ्लोरोबेंजीन,$BF_3$ और $N_2$ गैस प्राप्त होती है।
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ChemistryAdvancedMCQAIEEE · 2006
trans-$2-$phenyl$-1-$bromocyclopentane की अल्कोहलिक $KOH$ के साथ अभिक्रिया क्या उत्पाद देती है?
A
$1-$phenylcyclopentene
B
$3-$phenylcyclopentene
C
$4-$phenylcyclopentene
D
$2-$phenylcyclopentene

Solution

(B) यह अभिक्रिया $E2$ क्रियाविधि का पालन करती है। $E2$ विलोपन अभिक्रिया में,निकलने वाले समूह $(-Br)$ और $\beta$-हाइड्रोजन परमाणु को द्वि-आबंध के निर्माण के लिए एंटी-पेरिप्लेनर (trans) विन्यास में होना चाहिए। trans-$2-$phenyl$-1-$bromocyclopentane में,$C-3$ स्थिति पर स्थित $\beta$-हाइड्रोजन,$C-1$ स्थिति पर स्थित $-Br$ समूह के एंटी होता है। इसलिए,विलोपन $C-1$ और $C-3$ के बीच होता है,जिसके परिणामस्वरूप $3-$phenylcyclopentene का निर्माण होता है।
71
ChemistryDifficultMCQAIEEE · 2006
निम्नलिखित अभिक्रिया में बनने वाले मुख्य उत्पाद की संरचना क्या है?
Question diagram
A
$3$-आयोडोबेंज़िल क्लोराइड
B
$3$-आयोडोफेनिलएसीटोनिट्राइल
C
$3$-सायनोबेंज़िल क्लोराइड
D
$3$-सायनोफेनिलएसीटोनिट्राइल

Solution

(B) इस अभिक्रिया में ध्रुवीय एप्रोटिक विलायक $(DMF)$ में $NaCN$ से $CN^-$ न्यूक्लियोफाइल द्वारा $-CH_2Cl$ समूह का न्यूक्लियोफिलिक प्रतिस्थापन होता है।
यह अभिक्रिया $S_N2$ क्रियाविधि द्वारा होती है।
$-CH_2Cl$ समूह एक प्राथमिक एल्काइल हैलाइड है,जो $S_N2$ प्रतिस्थापन के प्रति अत्यधिक सक्रिय है।
बेंजीन रिंग से जुड़ा $-I$ समूह एक एराइल हैलाइड है,जो इन परिस्थितियों में न्यूक्लियोफिलिक प्रतिस्थापन के प्रति बहुत कम सक्रिय है।
इसलिए,$CN^-$ न्यूक्लियोफाइल चयनात्मक रूप से $-CH_2Cl$ समूह पर हमला करके $-CH_2CN$ समूह बनाता है,जबकि $-I$ समूह अप्रभावित रहता है।
मुख्य उत्पाद $3$-आयोडोफेनिलएसीटोनिट्राइल है।
72
ChemistryMediumMCQAIEEE · 2006
$HBr$,$CH_2=CH-OCH_3$ के साथ निर्जलीय परिस्थितियों में कमरे के तापमान पर अभिक्रिया करके क्या देता है?
A
$BrCH_2-CH_2-OCH_3$
B
$CH_3-CHBr-OCH_3$
C
$CH_3CHO$ और $CH_3Br$
D
$BrCH_2CHO$ और $CH_3OH$

Solution

(B) यह अभिक्रिया विनाइल ईथर पर $HBr$ के इलेक्ट्रॉनस्नेही योग (electrophilic addition) को दर्शाती है।
$HBr$ से $H^{+}$ टर्मिनल कार्बन $(CH_2)$ पर जुड़कर एक अनुनाद-स्थायित्व प्राप्त कार्बोकैटायन बनाता है:
$CH_2=CH-OCH_3 + H^{+} \rightarrow CH_3-C^{+}H-OCH_3 \leftrightarrow CH_3-CH=O^{+}-CH_3$
इसके बाद $Br^{-}$ आयन कार्बोकैटायन पर आक्रमण करके उत्पाद बनाता है:
$CH_3-C^{+}H-OCH_3 + Br^{-} \rightarrow CH_3-CHBr-OCH_3$
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ChemistryMediumMCQAIEEE · 2006
निम्नलिखित में से कौन सा $I_2$ और $NaOH$ के साथ अभिक्रिया करने पर धनात्मक आयोडोफॉर्म परीक्षण देता है?
A
$CH_3-CH(CH_3)-CH_2OH$
B
$C_6H_5-CH(OH)-CH_3$
C
$CH_3-CH_2-CH(OH)-CH_2-CH_3$
D
$C_6H_5-CH_2OH$

Solution

(B) आयोडोफॉर्म परीक्षण उन अल्कोहल द्वारा दिया जाता है जिनमें $CH_3-CH(OH)-$ समूह होता है या कार्बोनिल यौगिक जिनमें $CH_3-CO-$ समूह होता है।
$C_6H_5-CH(OH)-CH_3$ ($1$-फेनिलएथेनॉल) में $CH_3-CH(OH)-$ समूह होता है और इसलिए यह धनात्मक आयोडोफॉर्म परीक्षण देता है।
अभिक्रिया:
$C_6H_5-CH(OH)-CH_3 + 4I_2 + 6NaOH \rightarrow CHI_3 + C_6H_5-COONa + 5NaI + 5H_2O$
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ChemistryDifficultMCQAIEEE · 2006
ब्रोमीन जल के साथ उपचार करने पर ट्राइब्रोमो व्युत्पन्न देने वाले यौगिक की संरचना क्या है?
A
Option A
B
Option B
C
Option C
D
Option D

Solution

(C) जब फिनोल को ब्रोमीन जल के साथ उपचारित किया जाता है,तो $-OH$ समूह बेंजीन वलय को दृढ़ता से सक्रिय करता है,जिससे सभी उपलब्ध ऑर्थो और पैरा स्थितियों पर इलेक्ट्रोफिलिक प्रतिस्थापन होता है।
$m$-क्रेसोल ($3$-मिथाइलफिनोल) के लिए,$-OH$ समूह के सापेक्ष ऑर्थो और पैरा स्थितियां प्रतिस्थापन के लिए उपलब्ध हैं।
विशेष रूप से,$-OH$ समूह के ऑर्थो स्थितियां ($C2$ और $C6$ पर) और पैरा स्थिति ($C4$ पर) सभी सक्रिय हैं,जिससे $2,4,6-$ट्राइब्रोमो$-3-$मिथाइलफिनोल का निर्माण होता है।
इसलिए,$m$-क्रेसोल एक ट्राइब्रोमो व्युत्पन्न देता है।
75
ChemistryMediumMCQAIEEE · 2006
नीचे दी गई अभिक्रिया में शामिल इलेक्ट्रोफाइल है:
Question diagram
A
ट्राइक्लोरोमिथाइल एनायन $(:\,CCl_3^-)$
B
फॉर्मिल धनायन $(HCO^{+})$
C
डाइक्लोरोमिथाइल धनायन $(CHCl_2^+)$
D
डाइक्लोरोकार्बीन $(:\,CCl_2)$

Solution

(D) दी गई अभिक्रिया $Reimer-Tiemann$ अभिक्रिया है।
इस अभिक्रिया में,फिनोल जलीय सोडियम हाइड्रॉक्साइड $(NaOH)$ की उपस्थिति में क्लोरोफॉर्म $(CHCl_3)$ के साथ अभिक्रिया करके सैलिसिलैल्डिहाइड बनाता है।
इसकी क्रियाविधि में डाइक्लोरोकार्बीन $(:\,CCl_2)$ एक मध्यवर्ती के रूप में बनता है,जो इलेक्ट्रोफाइल के रूप में कार्य करता है।
अतः,सही विकल्प $D$ है।
76
ChemistryMediumMCQAIEEE · 2006
निम्नलिखित यौगिकों में $HCN$ के योग की दर का बढ़ता क्रम क्या है?
$(A)\ HCHO$
$(B)\ CH_3COCH_3$
$(C)\ PhCOCH_3$
$(D)\ PhCOPh$
A
$D < C < B < A$
B
$C < D < B < A$
C
$A < B < C < D$
D
$D < B < C < A$

Solution

(A) कार्बोनिल यौगिकों में $HCN$ के न्यूक्लियोफिलिक योग की दर दो कारकों पर निर्भर करती है:
$1$. त्रिविम बाधा (Steric hindrance): कार्बोनिल कार्बन से जुड़े समूहों का आकार बढ़ने पर न्यूक्लियोफिलिक हमले की दर कम हो जाती है।
$2$. इलेक्ट्रॉनिक प्रभाव: इलेक्ट्रॉन-दाता समूह (जैसे एल्काइल समूह) कार्बोनिल कार्बन की इलेक्ट्रोफिलिसिटी को कम करते हैं,जबकि इलेक्ट्रॉन-आकर्षक समूह (जैसे फेनिल रिंग) भी प्रतिक्रियाशीलता को कम करते हैं।
दिए गए यौगिकों की तुलना:
$(A)\ HCHO$ (फॉर्मेल्डिहाइड): कोई एल्काइल समूह नहीं,सबसे कम त्रिविम बाधा,सबसे अधिक प्रतिक्रियाशील।
$(B)\ CH_3COCH_3$ (एसीटोन): दो मिथाइल समूह,$HCHO$ की तुलना में अधिक त्रिविम बाधा।
$(C)\ PhCOCH_3$ (एसीटोफेनोन): एक फेनिल और एक मिथाइल समूह। फेनिल रिंग अनुनाद (resonance) के माध्यम से कार्बोनिल कार्बन की इलेक्ट्रोफिलिसिटी को कम करती है।
$(D)\ PhCOPh$ (बेंजोफेनोन): दो फेनिल समूह,सबसे अधिक त्रिविम बाधा और अनुनाद स्थिरता,इसलिए सबसे कम प्रतिक्रियाशील।
अतः,प्रतिक्रियाशीलता का क्रम $HCHO > CH_3COCH_3 > PhCOCH_3 > PhCOPh$ है।
बढ़ता हुआ क्रम $D < C < B < A$ है।
77
ChemistryMediumMCQAIEEE · 2006
यौगिकों की अम्लीय शक्ति के बढ़ने का सही क्रम है:
$(A) CH_3CO_2H$
$(B) MeOCH_2CO_2H$
$(C) CF_3CO_2H$
$(D) (CH_3)_2CHCO_2H$
A
$D < A < B < C$
B
$A < D < B < C$
C
$B < D < A < C$
D
$D < A < C < B$

Solution

(A) कार्बोक्सिलिक एसिड की अम्लीय शक्ति उसके संयुग्मी क्षार (कार्बोक्सिलेट आयन) की स्थिरता पर निर्भर करती है।
इलेक्ट्रॉन-आकर्षक समूह $(EWG)$ ऋण आवेश को स्थिर करके अम्लता बढ़ाते हैं,जबकि इलेक्ट्रॉन-दाता समूह $(EDG)$ उसे अस्थिर करके अम्लता कम करते हैं।
यौगिक इस प्रकार हैं:
$(A) CH_3CO_2H$ (एसिटिक एसिड)
$(B) MeOCH_2CO_2H$ (मेथॉक्सीएसिटिक एसिड,$-OCH_3$ एक $EWG$ है)
$(C) CF_3CO_2H$ (ट्राइफ्लोरोएसिटिक एसिड,$-CF_3$ एक बहुत मजबूत $EWG$ है)
$(D) (CH_3)_2CHCO_2H$ (आइसोब्यूटिरिक एसिड,आइसोप्रोपिल समूह एक $EDG$ है)
प्रभावों की तुलना करने पर:
$(D)$ में आइसोप्रोपिल समूह (सबसे मजबूत $EDG$) है,जो इसे सबसे कम अम्लीय बनाता है।
$(A)$ में मिथाइल समूह (कमजोर $EDG$) है।
$(B)$ में मेथॉक्सी समूह $(EWG)$ है।
$(C)$ में तीन फ्लोरीन परमाणु (सबसे मजबूत $EWG$) हैं।
अम्लीय शक्ति के बढ़ने का सही क्रम $D < A < B < C$ है.
78
ChemistryEasyMCQAIEEE · 2006
ग्लूकोज के एनोमर्स (anomers) शब्द का अर्थ क्या है?
A
ग्लूकोज के एनैन्शियोमर्स
B
ग्लूकोज के आइसोमर्स जो कार्बन एक $(C-1)$ पर विन्यास में भिन्न होते हैं
C
ग्लूकोज के आइसोमर्स जो कार्बन एक और चार $(C-1$ और $C-4)$ पर विन्यास में भिन्न होते हैं
D
$(D)-$ग्लूकोज और $(L)-$ग्लूकोज का मिश्रण

Solution

(B) ग्लूकोज के एनोमर्स चक्रीय डायस्टेरियोमर्स (एपिमर्स) होते हैं जो एनोमेरिक कार्बन,यानी $C-1$ पर विन्यास में भिन्न होते हैं।
ये दो रूपों में मौजूद होते हैं,$\alpha-$ और $\beta-$ रूप,जो $C-1$ पर हाइड्रॉक्सिल समूह के $CH_2OH$ समूह के सापेक्ष अभिविन्यास पर निर्भर करते हैं।
79
ChemistryEasyMCQAIEEE · 2006
$DNA$ में उपस्थित पिरिमिडिन क्षार हैं
A
साइटोसिन और थाइमिन
B
साइटोसिन और यूरेसिल
C
साइटोसिन और एडेनिन
D
साइटोसिन और ग्वानिन

Solution

(A) $DNA$ में दो प्रकार के नाइट्रोजनयुक्त क्षार होते हैं: प्यूरीन और पिरिमिडिन।
प्यूरीन एडेनिन $(A)$ और ग्वानिन $(G)$ हैं।
$DNA$ में उपस्थित पिरिमिडिन साइटोसिन $(C)$ और थाइमिन $(T)$ हैं।
$RNA$ में,थाइमिन के स्थान पर यूरेसिल $(U)$ होता है।
इसलिए,$DNA$ में पिरिमिडिन क्षार साइटोसिन और थाइमिन हैं।
80
ChemistryMediumMCQAIEEE · 2006
$Fe(CO)_5$ में,$Fe-C$ आबंध में होता है
A
आयनिक लक्षण
B
केवल $\sigma$-लक्षण
C
$\pi$-लक्षण
D
$\sigma$ और $\pi$ दोनों लक्षण

Solution

(D) $Fe(CO)_5$ में,$Fe-C$ आबंध $CO$ के $C$ परमाणु से $Fe$ के रिक्त $d$-कक्षक में इलेक्ट्रॉनों के एकाकी युग्म के दान से बनता है,जो $\sigma$-आबंध बनाता है।
इसके अतिरिक्त,$Fe$ के भरे हुए $d$-कक्षकों से $CO$ के रिक्त प्रति-आबंधी $\pi^*$-कक्षकों में इलेक्ट्रॉनों का पश्च-दान (back-donation) होता है,जो $\pi$-आबंध बनाता है।
अतः,$Fe-C$ आबंध में $\sigma$ और $\pi$ दोनों लक्षण होते हैं।
81
ChemistryMediumMCQAIEEE · 2006
संकुल $[Co(NO_2)(NH_3)_5]Cl_2$ का $IUPAC$ नाम क्या है?
A
पेंटाएमीन नाइट्रिटो$-N$-कोबाल्ट$(II)$ क्लोराइड
B
नाइट्रिटो$-N$-पेंटाएमीन कोबाल्ट$(II)$ क्लोराइड
C
नाइट्रिटो$-N$-पेंटाएमीन कोबाल्ट$(III)$ क्लोराइड
D
पेंटाएमीन नाइट्रिटो$-N$-कोबाल्ट$(III)$ क्लोराइड

Solution

(D) $1$. लिगेंड्स की पहचान करें: इसमें $5$ एमीन $(NH_3)$ लिगेंड और $1$ नाइट्रिटो$-N$ $(NO_2^-)$ लिगेंड हैं।
$2$. केंद्रीय धातु परमाणु $(Co)$ की ऑक्सीकरण अवस्था निर्धारित करें: मान लें कि ऑक्सीकरण अवस्था $x$ है। $NH_3$ पर आवेश $0$,$NO_2^-$ पर $-1$ और $Cl^-$ पर $-1$ है। संकुल का कुल आवेश $0$ है। अतः,$x + 5(0) + 1(-1) + 2(-1) = 0$,जिससे $x - 3 = 0$ प्राप्त होता है,इसलिए $x = +3$ है।
$3$. संकुल का नामकरण: लिगेंड्स को वर्णानुक्रम में नामित किया जाता है (नाइट्रिटो$-N$ से पहले एमीन)। धातु कोबाल्ट है जिसके बाद कोष्ठक में रोमन अंकों में ऑक्सीकरण अवस्था लिखी जाती है। प्रति-आयन क्लोराइड है।
$4$. सही नाम पेंटाएमीन नाइट्रिटो$-N$-कोबाल्ट$(III)$ क्लोराइड है।

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How many Chemistry questions are in AIEEE 2006?

There are 90 Chemistry questions from the AIEEE 2006 paper on Vedclass, each with a detailed step-by-step solution in Hindi.

Are AIEEE 2006 Chemistry solutions available in Hindi?

Yes. All solutions on this page are in Hindi. You can also switch to English or Hindi using the language buttons above the questions.

Can I practice AIEEE 2006 Chemistry as a timed test?

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