GUJCET 2023 Physics Question Paper with Answer and Solution in Hindi

28 QuestionsHindiWith Solutions

PhysicsQ128 of 28 questions

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जब एक $12 \ W$ के बल्ब को स्टेप-डाउन ट्रांसफार्मर से जोड़ा जाता है,तो उसका आउटपुट $24 \ V$ मापा जाता है। शिखर धारा (peak current) का मान $...... \ A$ है। ($A$ में)
A
$1.41$
B
$0.71$
C
$2$
D
$2.83$

Solution

(B) ट्रांसफार्मर की आउटपुट शक्ति $P_s = V_s I_s$ द्वारा दी जाती है,जहाँ $V_s$ $RMS$ वोल्टेज है और $I_s$ $RMS$ धारा है।
यहाँ $P_s = 12 \ W$ और $V_s = 24 \ V$ दिया गया है।
इसलिए,$RMS$ धारा $I_s = \frac{P_s}{V_s} = \frac{12}{24} = 0.5 \ A$.
शिखर धारा $I_m$ और $RMS$ धारा $I_s$ के बीच संबंध $I_m = \sqrt{2} I_s$ है।
$I_s$ का मान रखने पर,$I_m = \sqrt{2} \times 0.5 \approx 1.414 \times 0.5 = 0.707 \ A$.
दो दशमलव स्थानों तक पूर्णांकित करने पर,शिखर धारा $0.71 \ A$ प्राप्त होती है।
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$LC$ दोलनी परिपथ (oscillatory circuit) में संधारित्र (capacitor) का आवेश क्या होगा,जब प्रेरक (inductor) और संधारित्र से जुड़ी ऊर्जा समान हो? ($Q_{0}$ संधारित्र पर प्रारंभिक आवेश है।)
A
$\frac{Q_{0}}{2}$
B
$Q_{0}$
C
$\frac{Q_{0}}{\sqrt{3}}$
D
$\frac{Q_{0}}{\sqrt{2}}$

Solution

(D) $LC$ परिपथ में कुल ऊर्जा $U$ स्थिर रहती है और इसे $U = \frac{1}{2} \frac{Q_{0}^{2}}{C}$ द्वारा दर्शाया जाता है।
जब प्रेरक में संचित ऊर्जा $(U_L)$ और संधारित्र में संचित ऊर्जा $(U_C)$ बराबर होती है,तो प्रत्येक को कुल ऊर्जा का आधा होना चाहिए।
अतः,$U_C = \frac{U}{2}$.
ऊर्जा के व्यंजकों को प्रतिस्थापित करने पर: $\frac{1}{2} \frac{q^2}{C} = \frac{1}{2} \left( \frac{1}{2} \frac{Q_{0}^{2}}{C} \right)$.
समीकरण को सरल करने पर: $\frac{q^2}{C} = \frac{Q_{0}^{2}}{2C}$.
$q^2 = \frac{Q_{0}^{2}}{2}$.
दोनों पक्षों का वर्गमूल लेने पर,हमें $q = \frac{Q_{0}}{\sqrt{2}}$ प्राप्त होता है।
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$25.48 \ mH$ का एक शुद्ध प्रेरक और $8 \ \Omega$ का एक शुद्ध प्रतिरोधक $50 \ Hz$ आवृत्ति वाले $AC$ स्रोत के साथ श्रेणीक्रम में जुड़े हैं। इस परिपथ में धारा $(I)$ और वोल्टेज $(V)$ के बीच का कलान्तर . . . . . . है। ($^{\circ}$ में)
A
$45$
B
$30$
C
$60$
D
$90$

Solution

(A) दिया गया है: प्रेरकत्व $L = 25.48 \ mH = 25.48 \times 10^{-3} \ H$,प्रतिरोध $R = 8 \ \Omega$,आवृत्ति $\nu = 50 \ Hz$.
सबसे पहले,प्रेरणिक प्रतिघात $X_L$ की गणना करें:
$X_L = \omega L = 2 \pi \nu L$
$X_L = 2 \times 3.14 \times 50 \times 25.48 \times 10^{-3}$
$X_L = 314 \times 25.48 \times 10^{-3} \approx 8 \ \Omega$.
$LR$ श्रेणी परिपथ में कलान्तर $\phi$ इस प्रकार दिया जाता है:
$\tan \phi = \frac{X_L}{R}$
$\tan \phi = \frac{8}{8} = 1$
$\phi = \tan^{-1}(1) = 45^{\circ}$.
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वाटहीन (wattless) धारा प्राप्त करने के लिए ac आपूर्ति के साथ . . . . . . जोड़ा जाता है।
A
$R$-$C$ श्रेणी
B
$R$-$L$ श्रेणी
C
केवल $L$
D
केवल $R$

Solution

(C) वाटहीन धारा को $AC$ परिपथ में उस धारा के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके लिए औसत व्यय शक्ति शून्य होती है।
$AC$ परिपथ में शक्ति का सूत्र $P = V_{rms} I_{rms} \cos \phi$ है, जहाँ $\phi$ वोल्टेज और धारा के बीच का कला कोण है।
$P$ के शून्य होने के लिए, $\cos \phi$ का शून्य होना आवश्यक है, जिसका अर्थ है $\phi = 90^{\circ}$।
एक शुद्ध प्रेरक परिपथ (केवल $L$) या एक शुद्ध संधारित्र परिपथ (केवल $C$) में वोल्टेज और धारा के बीच का कलांतर $90^{\circ}$ होता है।
इसलिए, केवल एक आदर्श प्रेरक (केवल $L$) या केवल एक आदर्श संधारित्र वाले परिपथ में, शक्ति गुणांक $\cos 90^{\circ} = 0$ होता है, जिसके परिणामस्वरूप वाटहीन धारा प्राप्त होती है।
दिए गए विकल्पों में से, केवल $L$ सही विकल्प है।
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यदि एक ट्रांसफार्मर की प्राथमिक कुंडली में $100$ फेरे और द्वितीयक कुंडली में $200$ फेरे हैं,तो $220 \ V$ और $10 \ A$ के इनपुट के लिए,स्टेप-अप ट्रांसफार्मर में आउटपुट धारा . . . . . . होगी। ($A$ में)
A
$0.05$
B
$50.0$
C
$0.5$
D
$5.0$

Solution

(D) दिया गया है:
प्राथमिक फेरे $N_{1} = 100$
द्वितीयक फेरे $N_{2} = 200$
इनपुट धारा $I_{1} = 10 \ A$
इनपुट वोल्टेज $V_{1} = 220 \ V$
एक आदर्श ट्रांसफार्मर के लिए,पावर इनपुट = पावर आउटपुट: $V_{1}I_{1} = V_{2}I_{2}$।
साथ ही,ट्रांसफार्मर अनुपात $\frac{N_{2}}{N_{1}} = \frac{V_{2}}{V_{1}} = \frac{I_{1}}{I_{2}}$ द्वारा दिया जाता है।
धारा संबंध का उपयोग करते हुए: $\frac{N_{2}}{N_{1}} = \frac{I_{1}}{I_{2}}$।
मान रखने पर: $\frac{200}{100} = \frac{10}{I_{2}}$।
$2 = \frac{10}{I_{2}}$।
$I_{2} = \frac{10}{2} = 5.0 \ A$।
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$LCR$ श्रेणी $AC$ परिपथ में अनुनाद (resonance) पर,शक्ति गुणांक (power factor) का मान . . . . . . होगा।
A
$0$
B
$1$
C
$-1$
D
$\infty$

Solution

(B) $LCR$ श्रेणी परिपथ की प्रतिबाधा $Z$ का मान $Z = \sqrt{R^2 + (X_C - X_L)^2}$ द्वारा दिया जाता है।
अनुनाद पर,प्रेरणिक प्रतिघात $X_L$ धारितीय प्रतिघात $X_C$ के बराबर होता है,अर्थात $X_L = X_C$।
इस मान को प्रतिबाधा के सूत्र में रखने पर,हमें $Z = \sqrt{R^2 + 0} = R$ प्राप्त होता है।
शक्ति गुणांक को $\cos \phi = \frac{R}{Z}$ के रूप में परिभाषित किया जाता है।
$Z = R$ रखने पर,हमें $\cos \phi = \frac{R}{R} = 1$ प्राप्त होता है।
अतः,अनुनाद पर शक्ति गुणांक का मान $1$ होता है।
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हाइड्रोजन परमाणु में,एक इलेक्ट्रॉन $5^{\text{वीं}}$ कक्षा से $3^{\text{सरी}}$ कक्षा में संक्रमण करता है। इस इलेक्ट्रॉन के कोणीय संवेग में परिवर्तन . . . . . . है।
A
$\frac{5 h}{\pi}$
B
$\frac{h}{\pi}$
C
$\frac{3 h}{\pi}$
D
$\frac{h}{2 \pi}$

Solution

(B) बोर के अभिधारणा के अनुसार,$n^{\text{वीं}}$ कक्षा में इलेक्ट्रॉन का कोणीय संवेग $L = \frac{nh}{2\pi}$ द्वारा दिया जाता है।
$5^{\text{वीं}}$ कक्षा $(n_1 = 5)$ के लिए,कोणीय संवेग $L_5 = \frac{5h}{2\pi}$ है।
$3^{\text{सरी}}$ कक्षा $(n_2 = 3)$ के लिए,कोणीय संवेग $L_3 = \frac{3h}{2\pi}$ है।
कोणीय संवेग में परिवर्तन $\Delta L$ इस प्रकार है:
$\Delta L = L_5 - L_3$
$\Delta L = \frac{5h}{2\pi} - \frac{3h}{2\pi}$
$\Delta L = \frac{h}{2\pi} (5 - 3)$
$\Delta L = \frac{2h}{2\pi} = \frac{h}{\pi}$.
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$10 \ cm$ लंबाई और $1 \ cm \times 0.5 \ cm$ के आयताकार अनुप्रस्थ काट वाले एक धातु की छड़ को विपरीत फलकों पर बैटरी से जोड़ा जाता है। प्रतिरोध . . . . . . होगा।
A
$10 \ cm \times 1 \ cm$ फलकों पर बैटरी जोड़ने पर अधिकतम।
B
$1 \ cm \times 0.5 \ cm$ फलकों पर बैटरी जोड़ने पर अधिकतम।
C
$10 \ cm \times 0.5 \ cm$ फलकों पर बैटरी जोड़ने पर अधिकतम।
D
जुड़े हुए फलकों से स्वतंत्र समान।

Solution

(B) चालक का प्रतिरोध $R$ सूत्र $R = \rho \frac{l}{A}$ द्वारा दिया जाता है,जहाँ $\rho$ प्रतिरोधकता है,$l$ धारा के प्रवाह की दिशा में चालक की लंबाई है,और $A$ धारा के प्रवाह के लंबवत अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल है।
प्रतिरोध $R$ को अधिकतम करने के लिए,हमें अनुपात $\frac{l}{A}$ को अधिकतम करने की आवश्यकता है। इसका मतलब है कि हमें सबसे बड़ी लंबाई $l$ और सबसे छोटा अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल $A$ चाहिए।
छड़ के आयाम $10 \ cm$,$1 \ cm$ और $0.5 \ cm$ हैं।
यदि बैटरी को $1 \ cm \times 0.5 \ cm$ फलकों पर जोड़ा जाता है,तो धारा $l = 10 \ cm$ की लंबाई से होकर बहती है। अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल $A = 1 \ cm \times 0.5 \ cm = 0.5 \ cm^2$ है।
इस स्थिति में,अनुपात $\frac{l}{A} = \frac{10}{0.5} = 20 \ cm^{-1}$ है।
अन्य विन्यासों के साथ तुलना करने पर,यह विन्यास अनुपात $\frac{l}{A}$ के लिए अधिकतम मान देता है,इसलिए प्रतिरोध अधिकतम है।
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मूलभूत इकाइयों के संदर्भ में गतिशीलता (mobility) की इकाई . . . . . . है।
A
$kg^{-1} s^2 A$
B
$kg s^2 A$
C
$kg^{-1} s^2 A$
D
$kg^{-1} s^2 A^{-1}$

Solution

(C) गतिशीलता $\mu$ को अपवाह वेग (drift velocity) $v_d$ और विद्युत क्षेत्र $E$ के अनुपात के रूप में परिभाषित किया जाता है: $\mu = \frac{v_d}{E}$।
अपवाह वेग $v_d$ की इकाई $m/s$ है।
विद्युत क्षेत्र $E$ की इकाई $N/C$ (या $V/m$) है।
मूलभूत इकाइयों को प्रतिस्थापित करने पर:
$1 \ N = 1 \ kg \cdot m/s^2$
$1 \ C = 1 \ A \cdot s$
इसलिए,$E$ की इकाई $\frac{kg \cdot m/s^2}{A \cdot s} = \frac{kg \cdot m}{A \cdot s^3}$ है।
अब,$\mu$ की इकाई की गणना करने पर:
$\mu = \frac{m/s}{kg \cdot m / (A \cdot s^3)} = \frac{m}{s} \cdot \frac{A \cdot s^3}{kg \cdot m} = \frac{A \cdot s^2}{kg} = kg^{-1} s^2 A$।
अतः,सही विकल्प $C$ है।
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$66 \ W$ शक्ति का एक बल्ब $600 \ nm$ तरंगदैर्ध्य की तरंगें उत्सर्जित करता है,तो प्रति सेकंड उत्सर्जित फोटॉनों की संख्या . . . . . . है। $(h = 6.6 \times 10^{-34} \ J \cdot s)$
A
$2 \times 10^{22}$
B
$2 \times 10^{19}$
C
$2 \times 10^{21}$
D
$2 \times 10^{20}$

Solution

(D) बल्ब की शक्ति $P$ प्रति सेकंड उत्सर्जित कुल ऊर्जा है। एक फोटॉन की ऊर्जा $E = \frac{hc}{\lambda}$ द्वारा दी जाती है।
यदि $n$ प्रति सेकंड उत्सर्जित फोटॉनों की संख्या है,तो कुल शक्ति $P = n \times E = n \frac{hc}{\lambda}$ होगी।
$n$ के लिए पुनर्व्यवस्थित करने पर,हमें $n = \frac{P \lambda}{hc}$ प्राप्त होता है।
दिया गया है: $P = 66 \ W$,$\lambda = 600 \ nm = 600 \times 10^{-9} \ m$,$h = 6.6 \times 10^{-34} \ J \cdot s$,और $c = 3 \times 10^8 \ m/s$.
मान रखने पर:
$n = \frac{66 \times 600 \times 10^{-9}}{6.6 \times 10^{-34} \times 3 \times 10^8}$
$n = \frac{66 \times 600 \times 10^{-9}}{19.8 \times 10^{-26}}$
$n = \frac{39600 \times 10^{-9}}{19.8 \times 10^{-26}}$
$n = 2000 \times 10^{17} = 2 \times 10^{20}$.
अतः,प्रति सेकंड उत्सर्जित फोटॉनों की संख्या $2 \times 10^{20}$ है।
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ऊन से रगड़े गए पॉलीथीन के एक टुकड़े पर $3.52 \times 10^{-7} \text{ C}$ का ऋण आवेश पाया जाता है। स्थानांतरित इलेक्ट्रॉनों की संख्या क्या है?
A
$1.1 \times 10^{12}$
B
$2.2 \times 10^{12}$
C
$4.4 \times 10^{12}$
D
$5.5 \times 10^{12}$

Solution

(B) आवेश का क्वांटीकरण सूत्र $q = ne$ द्वारा दिया जाता है,जहाँ $q$ कुल आवेश है,$n$ इलेक्ट्रॉनों की संख्या है,और $e$ मूल आवेश $(e = 1.6 \times 10^{-19} \text{ C})$ है।
दिया गया है,$q = 3.52 \times 10^{-7} \text{ C}$.
स्थानांतरित इलेक्ट्रॉनों की संख्या $(n)$ ज्ञात करने के लिए,हम सूत्र को इस प्रकार व्यवस्थित करते हैं: $n = \frac{q}{e}$.
मान रखने पर: $n = \frac{3.52 \times 10^{-7}}{1.6 \times 10^{-19}}$.
$n = 2.2 \times 10^{12}$.
अतः,स्थानांतरित इलेक्ट्रॉनों की संख्या $2.2 \times 10^{12}$ है।
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चित्र चार बिंदु आवेशों $A$,$B$,$C$ और $D$ की विद्युत क्षेत्र रेखाओं को दर्शाता है। किस आवेश का परिमाण अधिकतम है?
Question diagram
A
$D$ आवेश
B
$C$ आवेश
C
$A$ आवेश
D
$B$ आवेश

Solution

(B) किसी बिंदु आवेश का परिमाण उससे निकलने वाली या उस पर समाप्त होने वाली विद्युत क्षेत्र रेखाओं की संख्या के सीधे समानुपाती होता है।
चित्र से,हम प्रत्येक आवेश से जुड़ी विद्युत क्षेत्र रेखाओं की संख्या गिन सकते हैं:
- आवेश $A$ में $6$ रेखाएं हैं।
- आवेश $B$ में $6$ रेखाएं हैं।
- आवेश $C$ में $12$ रेखाएं हैं।
- आवेश $D$ में $6$ रेखाएं हैं।
चूंकि आवेश $C$ अधिकतम संख्या में विद्युत क्षेत्र रेखाओं से जुड़ा है,इसलिए इसका परिमाण सबसे अधिक होना चाहिए।
अतः,सही विकल्प $B$ है।
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एक समान विद्युत क्षेत्र $\vec{E} = 3 \times 10^3 \hat{k} \text{ N C}^{-1}$ पर विचार करें। $20 \text{ cm}$ भुजा वाले एक वर्ग से गुजरने वाला इस क्षेत्र का विद्युत फ्लक्स ज्ञात कीजिए,जिसका तल $yz$-तल के समानांतर है। यह $....... \text{ N m}^2 \text{ C}^{-1}$ है।
A
शून्य
B
$90$
C
$60$
D
$120$

Solution

(A) विद्युत क्षेत्र $\vec{E} = 3 \times 10^3 \hat{k} \text{ N C}^{-1}$ द्वारा दिया गया है।
चूंकि वर्ग का तल $yz$-तल के समानांतर है,इसलिए इसका क्षेत्रफल सदिश $\vec{A}$,$yz$-तल के लंबवत होना चाहिए,जिसका अर्थ है कि यह $x$-अक्ष की दिशा में है।
अतः,क्षेत्रफल सदिश $\vec{A} = A \hat{i} = (0.2 \text{ m})^2 \hat{i} = 0.04 \hat{i} \text{ m}^2$ है।
विद्युत फ्लक्स $\phi$ को विद्युत क्षेत्र और क्षेत्रफल सदिश के अदिश गुणनफल के रूप में परिभाषित किया गया है: $\phi = \vec{E} \cdot \vec{A}$.
मान रखने पर: $\phi = (3 \times 10^3 \hat{k}) \cdot (0.04 \hat{i})$.
चूंकि लंबवत इकाई सदिशों का अदिश गुणनफल $\hat{k} \cdot \hat{i} = 0$ होता है,इसलिए फ्लक्स $\phi = 0 \text{ N m}^2 \text{ C}^{-1}$ प्राप्त होता है।
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$2 \text{ cm}^2$ क्षेत्रफल वाली एक वृत्ताकार कुंडली को $3 \text{ T}$ के चुंबकीय क्षेत्र में लंबवत रखा गया है। कुंडली में $10$ फेरे हैं और इसका प्रतिरोध $5 \text{ } \Omega$ है। अब,कुंडली को $0.2 \text{ s}$ में चुंबकीय क्षेत्र से बाहर निकाल लिया जाता है। कुंडली से प्रवाहित प्रेरित आवेश का मान . . . . . . है।
A
$1.1 \text{ mC}$
B
$1.9 \text{ mC}$
C
$1.2 \text{ mC}$
D
शून्य

Solution

(C) कुंडली से प्रवाहित प्रेरित आवेश $\Delta Q$ को इस सूत्र द्वारा दिया जाता है: $\Delta Q = \frac{\Delta \phi}{R}$.
यहाँ,$\Delta \phi$ चुंबकीय फ्लक्स में परिवर्तन है,$N$ फेरों की संख्या है,$A$ क्षेत्रफल है,$B$ चुंबकीय क्षेत्र है और $R$ प्रतिरोध है।
दिया गया है: $N = 10$,$A = 2 \text{ cm}^2 = 2 \times 10^{-4} \text{ m}^2$,$B = 3 \text{ T}$,$R = 5 \text{ } \Omega$.
फ्लक्स में परिवर्तन $\Delta \phi = N \cdot A \cdot B$ है।
मान रखने पर: $\Delta Q = \frac{N \cdot A \cdot B}{R} = \frac{10 \times 2 \times 10^{-4} \times 3}{5}$.
$\Delta Q = \frac{60 \times 10^{-4}}{5} = 12 \times 10^{-4} \text{ C}$.
$\Delta Q = 1.2 \times 10^{-3} \text{ C} = 1.2 \text{ mC}$.
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चित्र में दिखाए अनुसार,एक छड़ चुंबक एक स्थिर कुंडली की ओर $v$ की स्थिर गति से बढ़ रहा है। दाईं ओर ($R$.$H$.$S$.) स्थित प्रेक्षक द्वारा देखी गई कुंडली में प्रेरित धारा की दिशा . . . . . . है।
Question diagram
A
वामावर्त (Anticlockwise)
B
दक्षिणावर्त (Clockwise)
C
धारा अपनी दिशा यादृच्छिक रूप से बदलती है
D
प्रेरित धारा उत्पन्न नहीं होगी।

Solution

(B) लेंज़ के नियम के अनुसार,प्रेरित धारा की दिशा ऐसी होती है कि वह उस कारण का विरोध करती है जिससे वह उत्पन्न होती है।
जैसे ही छड़ चुंबक का उत्तरी ध्रुव $(N)$ कुंडली की ओर बढ़ता है,कुंडली से जुड़ा चुंबकीय फ्लक्स बढ़ जाता है।
चुंबकीय फ्लक्स में इस वृद्धि का विरोध करने के लिए,कुंडली चुंबक के सामने वाले हिस्से पर उत्तरी ध्रुव विकसित करेगी।
जब कुंडली में धारा उस तरफ से देखने पर वामावर्त दिशा में बहती है,तो वह सिरा उत्तरी ध्रुव के रूप में कार्य करता है।
प्रेक्षक दाईं ओर ($R$.$H$.$S$.) है,जो कुंडली के पीछे के हिस्से को देख रहा है।
चूंकि चुंबक की तरफ से (बाईं ओर) धारा वामावर्त दिखाई देती है,इसलिए दाईं ओर स्थित प्रेक्षक के लिए यह दक्षिणावर्त (Clockwise) दिखाई देगी।
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दृश्य प्रकाश की आवृत्ति का परास . . . . . . है।
A
$400 \text{ THz}$ से $700 \text{ THz}$
B
$400 \text{ GHz}$ से $700 \text{ GHz}$
C
$400 \text{ MHz}$ से $700 \text{ MHz}$
D
$400 \text{ kHz}$ से $700 \text{ kHz}$

Solution

(A) दृश्य स्पेक्ट्रम विद्युत चुम्बकीय स्पेक्ट्रम का वह भाग है जिसे मानव आँख देख सकती है।
दृश्य प्रकाश की तरंगदैर्ध्य का परास लगभग $400 \text{ nm}$ से $700 \text{ nm}$ होता है।
संबंध $c = f \lambda$ का उपयोग करते हुए,जहाँ $c = 3 \times 10^8 \text{ m/s}$ प्रकाश की गति है,हम आवृत्ति $f = c / \lambda$ की गणना कर सकते हैं।
$\lambda = 700 \text{ nm} = 700 \times 10^{-9} \text{ m}$ के लिए,$f = (3 \times 10^8) / (700 \times 10^{-9}) \approx 4.29 \times 10^{14} \text{ Hz} = 429 \text{ THz}$।
$\lambda = 400 \text{ nm} = 400 \times 10^{-9} \text{ m}$ के लिए,$f = (3 \times 10^8) / (400 \times 10^{-9}) = 7.5 \times 10^{14} \text{ Hz} = 750 \text{ THz}$।
अतः,आवृत्ति का परास लगभग $400 \text{ THz}$ से $750 \text{ THz}$ है,जो विकल्प $A$ के अनुरूप है।
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यदि $\overrightarrow{E}$ और $\overrightarrow{B}$ विद्युतचुंबकीय तरंग के विद्युत और चुंबकीय क्षेत्र सदिशों को दर्शाते हैं,तो विद्युतचुंबकीय तरंग के संचरण की दिशा . . . . . . के अनुदिश होती है।
A
$\vec{B}$
B
$\vec{E}$
C
$\vec{B} \times \vec{E}$
D
$\vec{E} \times \vec{B}$

Solution

(D) एक विद्युतचुंबकीय तरंग में,विद्युत क्षेत्र सदिश $\overrightarrow{E}$ और चुंबकीय क्षेत्र सदिश $\overrightarrow{B}$ समान कला में दोलन करते हैं और एक-दूसरे के लंबवत होते हैं।
मैक्सवेल के समीकरणों और विद्युतचुंबकीय तरंगों के गुणों के अनुसार,तरंग के संचरण की दिशा पॉइंटिंग सदिश $\overrightarrow{S}$ की दिशा द्वारा दी जाती है,जिसे $\overrightarrow{S} = \frac{1}{\mu_0} (\overrightarrow{E} \times \overrightarrow{B})$ के रूप में परिभाषित किया गया है।
इसलिए,विद्युतचुंबकीय तरंग के संचरण की दिशा $\overrightarrow{E} \times \overrightarrow{B}$ की दिशा में होती है।
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PhysicsEasyMCQGUJCET · 2023
वायु की परावैद्युत सामर्थ्य (dielectric strength) . . . . . . है।
A
$3 \times 10^9 \frac{V}{cm}$
B
$3 \times 10^6 \frac{V}{m}$
C
$3 \times 10^9 \frac{V}{\mu m}$
D
$3 \times 10^9 \frac{V}{m}$

Solution

(B) वायु की परावैद्युत सामर्थ्य वह अधिकतम विद्युत क्षेत्र है जिसे एक परावैद्युत माध्यम विद्युत भंजन (electrical breakdown) का अनुभव किए बिना सहन कर सकता है।
वायु के लिए,यह मान लगभग $3 \times 10^6 \frac{V}{m}$ या $3 \times 10^4 \frac{V}{cm}$ होता है।
दिए गए विकल्पों की तुलना करने पर,सही उत्तर $3 \times 10^6 \frac{V}{m}$ है।
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$10 \ cm$ त्रिज्या वाले एक वृत्त के केंद्र पर एक आवेश $Q$ रखा गया है। वृत्त के चाप पर स्थित किन्हीं दो बिंदुओं के बीच एक आवेश $q$ को ले जाने में किया गया कार्य ज्ञात कीजिए।
A
$kQq \ J$
B
$0.1 kQq \ J$
C
$0.5 kQq \ J$
D
$0 \ J$

Solution

(D) बिंदु आवेश $Q$ से $r$ दूरी पर स्थित किसी भी बिंदु पर विद्युत विभव $V$ का मान $V = \frac{kQ}{r}$ होता है।
चूंकि वृत्त की परिधि पर स्थित सभी बिंदु केंद्र से समान दूरी $(r = 10 \ cm)$ पर हैं,इसलिए वृत्त पर स्थित किसी भी बिंदु पर विद्युत विभव समान होता है।
मान लीजिए कि $A$ और $B$ वृत्त पर दो बिंदु हैं,तो उनका विभव $V_A = V_B = \frac{kQ}{10 \ cm}$ होगा।
आवेश $q$ को बिंदु $A$ से बिंदु $B$ तक ले जाने में किया गया कार्य $W = q(V_B - V_A)$ होता है।
चूंकि $V_A = V_B$ है,इसलिए विभवांतर $(V_B - V_A) = 0$ होगा।
अतः,$W = q(0) = 0 \ J$।
Solution diagram
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$q_m$ ध्रुव शक्ति और $m$ चुंबकीय आघूर्ण वाले एक छड़ चुंबक को उसकी लंबाई के अनुदिश दो बराबर भागों में विभाजित किया जाता है। नई ध्रुव शक्ति . . . . . . और चुंबकीय आघूर्ण . . . . . . है।
A
$q_m, \frac{m}{2}$
B
$\frac{q_m}{2}, m$
C
$\frac{q_m}{2}, \frac{m}{2}$
D
$q_m, m$

Solution

(A) जब एक छड़ चुंबक को उसकी लंबाई के अनुदिश दो बराबर भागों में काटा जाता है,तो अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल समान रहता है,इसलिए ध्रुव शक्ति $q_m$ अपरिवर्तित रहती है।
हालाँकि,प्रत्येक नए टुकड़े की लंबाई $l' = \frac{l}{2}$ हो जाती है।
चुंबकीय आघूर्ण को $m = q_m \times l$ के रूप में परिभाषित किया जाता है।
नए टुकड़ों के लिए,चुंबकीय आघूर्ण $m' = q_m \times \frac{l}{2} = \frac{m}{2}$ होता है।
अतः,नई ध्रुव शक्ति $q_m$ है और नया चुंबकीय आघूर्ण $\frac{m}{2}$ है।
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गैल्वेनोमीटर का प्रतिरोध $1.8 \Omega$ है। गैल्वेनोमीटर की रेंज को $10$ गुना बढ़ाने के लिए आवश्यक शंट का मान ज्ञात कीजिए। ($Omega$ में)
A
$4$
B
$1$
C
$3$
D
$2$

Solution

(D) दिया गया है: गैल्वेनोमीटर का प्रतिरोध,$R_G = 1.8 \Omega$।
रेंज को $n = 10$ गुना बढ़ाने के लिए,शंट प्रतिरोध $r_s$ का सूत्र है:
$r_s = \frac{R_G}{n - 1}$
मान रखने पर:
$r_s = \frac{1.8}{10 - 1}$
$r_s = \frac{1.8}{9}$
$r_s = 0.2 \Omega$।
नोट: यदि प्रश्न में $R_G = 18 \Omega$ होता,तो उत्तर $2 \Omega$ आता। दिए गए विकल्पों के आधार पर,$R_G = 18 \Omega$ मानकर सही विकल्प $D$ $(2 \Omega)$ है।
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PhysicsEasyMCQGUJCET · 2023
$0.5 \ m$ लंबाई वाले एक परिनालिका (solenoid) की त्रिज्या $1 \ cm$ है और इसमें $250$ फेरे हैं। इसमें $5 \ A$ की धारा प्रवाहित हो रही है। परिनालिका के भीतर चुंबकीय क्षेत्र का परिमाण क्या है?
A
$3.14 \times 10^{-3} \ T$
B
$6.28 \times 10^{-3} \ T$
C
$62.8 \times 10^{-3} \ T$
D
शून्य

Solution

(A) एक लंबी परिनालिका के भीतर चुंबकीय क्षेत्र $B$ का सूत्र है: $B = \mu_0 n I$, जहाँ $n = N/l$ प्रति इकाई लंबाई में फेरों की संख्या है।
दिया गया है:
लंबाई $l = 0.5 \ m$
फेरों की संख्या $N = 250$
धारा $I = 5 \ A$
निर्वात की पारगम्यता $\mu_0 = 4\pi \times 10^{-7} \ T \cdot m/A$
मान रखने पर:
$B = \frac{\mu_0 N I}{l}$
$B = \frac{4 \pi \times 10^{-7} \times 250 \times 5}{0.5}$
$B = \frac{4 \times 3.14159 \times 10^{-7} \times 1250}{0.5}$
$B = 8 \pi \times 10^{-7} \times 1250$
$B = 10000 \pi \times 10^{-7} \ T$
$B = \pi \times 10^{-3} \ T \approx 3.14 \times 10^{-3} \ T$.
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एक इलेक्ट्रॉन $3.2 \times 10^7 \ m/s$ की गति से $12 \times 10^{-4} \ T$ के चुंबकीय क्षेत्र में गति कर रहा है,जो इलेक्ट्रॉन की गति की दिशा के लंबवत है। इलेक्ट्रॉन के पथ की त्रिज्या . . . . . . $cm$ है। $(e = 1.6 \times 10^{-19} \ C$ और $m_e = 9 \times 10^{-31} \ kg)$
A
$30$
B
$13$
C
$15$
D
$26$

Solution

(C) चुंबकीय क्षेत्र के लंबवत गति करने वाले आवेशित कण के वृत्ताकार पथ की त्रिज्या $r$ का सूत्र है:
$r = \frac{m v}{q B}$
दिया गया है:
$m = 9 \times 10^{-31} \ kg$
$v = 3.2 \times 10^7 \ m/s$
$q = 1.6 \times 10^{-19} \ C$
$B = 12 \times 10^{-4} \ T$
मान रखने पर:
$r = \frac{9 \times 10^{-31} \times 3.2 \times 10^7}{1.6 \times 10^{-19} \times 12 \times 10^{-4}}$
$r = \frac{28.8 \times 10^{-24}}{19.2 \times 10^{-23}}$
$r = \frac{28.8}{192} \times 10^{-1} \ m$
$r = 0.15 \ m$
सेंटीमीटर में बदलने पर:
$r = 0.15 \times 100 \ cm = 15 \ cm$
अतः,सही विकल्प $C$ है।
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PhysicsEasyMCQGUJCET · 2023
एक इलेक्ट्रॉन को धारावाही लंबी परिनालिका (solenoid) की अक्ष के अनुदिश एकसमान वेग से प्रक्षेपित किया जाता है। निम्नलिखित में से कौन सा सत्य है?
A
इलेक्ट्रॉन का पथ अक्ष के परितः वृत्ताकार होगा।
B
इलेक्ट्रॉन अक्ष के अनुदिश त्वरित होगा।
C
इलेक्ट्रॉन अक्ष के साथ $45^{\circ}$ पर एक बल का अनुभव करेगा और इसलिए एक कुंडलित (helical) पथ पर चलेगा।
D
इलेक्ट्रॉन परिनालिका की अक्ष के अनुदिश एकसमान वेग से गति करना जारी रखेगा।

Solution

(D) सही विकल्प $D$ है।
एक लंबी धारावाही परिनालिका के भीतर चुंबकीय क्षेत्र एकसमान होता है और इसकी अक्ष के अनुदिश होता है।
जब एक इलेक्ट्रॉन को परिनालिका की अक्ष के अनुदिश प्रक्षेपित किया जाता है,तो उसका वेग सदिश $\vec{v}$,चुंबकीय क्षेत्र सदिश $\vec{B}$ के समानांतर होता है।
गतिमान आवेश पर चुंबकीय बल $\vec{F} = q(\vec{v} \times \vec{B})$ द्वारा दिया जाता है,जिसका परिमाण $F = qvB \sin \theta$ होता है,जहाँ $\theta$ वेग और चुंबकीय क्षेत्र के बीच का कोण है।
चूंकि इलेक्ट्रॉन अक्ष के अनुदिश गति करता है,इसलिए $\theta = 0^{\circ}$ है।
अतः,$F = evB \sin(0^{\circ}) = 0$।
चूंकि इलेक्ट्रॉन पर कार्य करने वाला कुल चुंबकीय बल $0$ है,न्यूटन के गति के प्रथम नियम के अनुसार,इलेक्ट्रॉन एकसमान वेग के साथ उसी दिशा में गति करना जारी रखेगा।
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सूर्य में प्रोटॉन-प्रोटॉन चक्र में,जब एक इलेक्ट्रॉन और उसका प्रतिकण (antiparticle) संयोजित होते हैं,तो मुक्त होने वाली ऊर्जा $\qquad$ है।
A
$1.632 \times 10^{-13} \ J$
B
$1.021 \times 10^{-13} \ J$
C
$1.126 \times 10^{-13} \ J$
D
$0.672 \times 10^{-13} \ J$

Solution

(A) जब एक इलेक्ट्रॉन $(e^-)$ और उसका प्रतिकण,पॉज़िट्रॉन $(e^+)$,संयोजित होते हैं (एनिहिलेशन),तो वे दो गामा-किरण फोटॉन उत्पन्न करते हैं।
इलेक्ट्रॉन की विराम द्रव्यमान ऊर्जा $0.511 \ MeV$ है,और पॉज़िट्रॉन के लिए भी यह $0.511 \ MeV$ है।
कुल मुक्त ऊर्जा $E = 0.511 \ MeV + 0.511 \ MeV = 1.022 \ MeV$ है।
इस ऊर्जा को जूल $(J)$ में बदलने के लिए,हम रूपांतरण कारक $1 \ eV = 1.6 \times 10^{-19} \ J$ का उपयोग करते हैं।
$E = 1.02 \times 10^6 \ eV \times 1.6 \times 10^{-19} \ J/eV = 1.632 \times 10^{-13} \ J$.
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एक लेंस की शक्ति $-4.0 \text{ डायोप्टर}$ है। इसका अर्थ . . . . . . है।
A
$-25.0 \text{ cm}$ फोकस दूरी वाला अवतल लेंस
B
$-0.25 \text{ cm}$ फोकस दूरी वाला अवतल लेंस
C
$+0.25 \text{ cm}$ फोकस दूरी वाला अवतल लेंस
D
$+25.0 \text{ cm}$ फोकस दूरी वाला अवतल लेंस

Solution

(A) लेंस की शक्ति का सूत्र $P = \frac{1}{f}$ है,जहाँ $f$ मीटर में फोकस दूरी है।
दी गई शक्ति $P = -4.0 \text{ D}$ है।
चूंकि शक्ति ऋणात्मक है,इसलिए यह एक अवतल लेंस है।
सूत्र $f = \frac{1}{P}$ का उपयोग करने पर:
$f = \frac{1}{-4.0} \text{ m} = -0.25 \text{ m}$।
मीटर को सेंटीमीटर में बदलने पर: $f = -0.25 \times 100 \text{ cm} = -25.0 \text{ cm}$।
अतः,यह $-25.0 \text{ cm}$ की फोकस दूरी वाला एक अवतल लेंस है।
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निर्वात के सापेक्ष वायु का अपवर्तनांक . . . . . . है।
A
$1.029$
B
$1.0029$
C
$1.00029$
D
$1$

Solution

(C) किसी माध्यम का अपवर्तनांक निर्वात में प्रकाश की गति $(c)$ और उस माध्यम में प्रकाश की गति $(v)$ के अनुपात के रूप में परिभाषित किया जाता है।
गणितीय रूप से,$n = c/v$।
वायु के लिए,प्रकाश की गति निर्वात में प्रकाश की गति से थोड़ी कम होती है।
वायु का अपवर्तनांक लगभग $1.00029$ होता है।
अतः,सही विकल्प $C$ है।
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दो स्लिट्स $10 \ mm$ की दूरी पर बनाई गई हैं और स्क्रीन $1.5 \ m$ की दूरी पर रखी गई है। जब $7000 \ \mathring{A}$ की तरंग दैर्ध्य का उपयोग किया जाता है,तो फ्रिंज पृथक्करण क्या है ($\mu m$ में)?
A
$105$
B
$1.05$
C
$10.5$
D
$0.105$

Solution

(A) फ्रिंज चौड़ाई (फ्रिंज पृथक्करण) $\beta$ का सूत्र है: $\beta = \frac{\lambda D}{d}$।
दिया गया है:
तरंग दैर्ध्य $\lambda = 7000 \ \mathring{A} = 7000 \times 10^{-10} \ m = 7 \times 10^{-7} \ m$.
स्लिट्स के बीच की दूरी $d = 10 \ mm = 10 \times 10^{-3} \ m = 10^{-2} \ m$.
स्क्रीन की दूरी $D = 1.5 \ m$.
इन मानों को सूत्र में रखने पर:
$\beta = \frac{7 \times 10^{-7} \times 1.5}{10^{-2}}$
$\beta = 7 \times 1.5 \times 10^{-5} \ m$
$\beta = 10.5 \times 10^{-5} \ m$
$\beta = 105 \times 10^{-6} \ m$
$\beta = 105 \ \mu m$.
अतः,सही विकल्प $A$ है।

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