GUJCET 2020 Physics Question Paper with Answer and Solution in Hindi

28 QuestionsHindiWith Solutions

PhysicsQ128 of 28 questions

Page 1 of 1 · Hindi

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PhysicsEasyMCQGUJCET · 2020
एक प्लैटिनम प्रतिरोध थर्मामीटर के प्लैटिनम तार का प्रतिरोध बर्फ बिंदु पर $5 \Omega$ और भाप बिंदु पर $5.23 \Omega$ है। जब थर्मामीटर को गर्म स्नान (hot bath) में डाला जाता है,तो प्लैटिनम तार का प्रतिरोध $5.795 \Omega$ हो जाता है। स्नान का तापमान ज्ञात कीजिए। ($^{\circ} C$ में)
A
$245.65$
B
$365.65$
C
$345.65$
D
$354.56$

Solution

(C) दिया गया है:
बर्फ बिंदु पर प्रतिरोध $(R_0)$ = $5 \Omega$,$\theta_0 = 0^{\circ} C$
भाप बिंदु पर प्रतिरोध $(R_{100})$ = $5.23 \Omega$,$\theta_{100} = 100^{\circ} C$
गर्म स्नान में प्रतिरोध $(R_{\theta})$ = $5.795 \Omega$
प्लैटिनम प्रतिरोध थर्मामीटर के लिए तापमान का सूत्र:
$\theta = \frac{R_{\theta} - R_0}{R_{100} - R_0} \times 100^{\circ} C$
मान रखने पर:
$\theta = \frac{5.795 - 5}{5.23 - 5} \times 100^{\circ} C$
$\theta = \frac{0.795}{0.23} \times 100^{\circ} C$
$\theta = 3.4565 \times 100^{\circ} C$
$\theta = 345.65^{\circ} C$
अतः,स्नान का तापमान $345.65^{\circ} C$ है।
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PhysicsEasyMCQGUJCET · 2020
ध्रुवण (polarization) $P$ का विमीय सूत्र . . . . . . है।
A
$L^{-2} A^1 T^1$
B
$M^1 L^{-2} T^1 A^1$
C
$L^2 A^{-1} T^{-1}$
D
$L^{-2} A^{-1} T^{-1}$

Solution

(A) ध्रुवण $P$ को प्रति इकाई आयतन द्विध्रुव आघूर्ण के रूप में परिभाषित किया जाता है।
$P = \frac{p}{V}$
चूंकि $p = q \times d$ (आवेश $\times$ दूरी) और $V = L^3$ (आयतन) है,
इसलिए,$P = \frac{q \times d}{L^3} = \frac{q}{L^2}$
आवेश $q$ का मात्रक $A \cdot T$ (एम्पियर-सेकंड) है और क्षेत्रफल $L^2$ का मात्रक $m^2$ है।
अतः,ध्रुवण का मात्रक $A \cdot T \cdot m^{-2}$ है।
इसका विमीय सूत्र $[A^1 T^1 L^{-2}]$ प्राप्त होता है।
इसलिए,सही विकल्प $A$ है।
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PhysicsEasyMCQGUJCET · 2020
एक वास्तविक ट्रांसफार्मर के लिए निम्नलिखित में से क्या सही है?
A
$P_{in} > P_{out}$
B
$P_{in} < P_{out}$
C
$P_{in} = P_{out}$
D
इनमें से कोई नहीं

Solution

(A) एक आदर्श ट्रांसफार्मर में, इनपुट पावर $(P_{in})$ आउटपुट पावर $(P_{out})$ के बराबर होती है, जिसका अर्थ है कि इसमें कोई ऊर्जा हानि नहीं होती है।
हालाँकि, एक वास्तविक ट्रांसफार्मर में कॉपर लॉस (वाइंडिंग का प्रतिरोध), आयरन लॉस (हिस्टैरिसीस और एड़ी धाराएं), और फ्लक्स लीकेज जैसे कारकों के कारण ऊर्जा की हानि होती है।
इन हानियों के कारण, आउटपुट पावर $(P_{out})$ हमेशा इनपुट पावर $(P_{in})$ से कम होती है।
इसलिए, सही संबंध $P_{in} > P_{out}$ है।
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PhysicsEasyMCQGUJCET · 2020
$283 \ V$ का अधिकतम मान और $50 \ Hz$ की आवृत्ति वाला एक ज्यावक्रीय (sinusoidal) वोल्टेज एक $LCR$ श्रेणी परिपथ में लगाया जाता है,जहाँ $R = 3 \ \Omega$,$L = 25.48 \ mH$ और $C = 796 \ \mu F$ है। अनुनाद (resonance) की स्थिति में प्रतिबाधा (impedance) क्या होगी ($Omega$ में)?
A
$4$
B
$5$
C
$3$
D
$15$

Solution

(C) अनुनाद की स्थिति में,प्रेरणिक प्रतिघात $(X_L)$ धारितीय प्रतिघात $(X_C)$ के बराबर होता है।
इसलिए,कुल प्रतिघात $X = X_L - X_C = 0$ होता है।
$LCR$ श्रेणी परिपथ की प्रतिबाधा $Z$ का सूत्र $Z = \sqrt{R^2 + (X_L - X_C)^2}$ है।
अनुनाद की स्थिति $X_L = X_C$ को प्रतिस्थापित करने पर,हमें $Z = \sqrt{R^2 + 0^2} = R$ प्राप्त होता है।
चूंकि $R = 3 \ \Omega$ दिया गया है,इसलिए अनुनाद पर प्रतिबाधा $Z = 3 \ \Omega$ होगी।
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PhysicsEasyMCQGUJCET · 2020
$100 \text{ W}$ रेटिंग वाला एक बल्ब $220 \text{ V}$ की आपूर्ति से जुड़ा है। बल्ब का प्रतिरोध . . . . . . है।
A
$2.2 \times 10^{-3} \Omega$
B
$484 \Omega \text{ m}^{-1}$
C
$2.2 \Omega$
D
$484 \Omega$

Solution

(D) किसी विद्युत उपकरण की शक्ति $P$ को सूत्र $P = \frac{V^2}{R}$ द्वारा दर्शाया जाता है,जहाँ $V$ वोल्टेज है और $R$ प्रतिरोध है।
प्रतिरोध के लिए सूत्र को पुनर्व्यवस्थित करने पर,हमें $R = \frac{V^2}{P}$ प्राप्त होता है।
यहाँ $V = 220 \text{ V}$ और $P = 100 \text{ W}$ दिया गया है।
मान रखने पर: $R = \frac{(220)^2}{100} = \frac{48400}{100} = 484 \Omega$.
अतः,बल्ब का प्रतिरोध $484 \Omega$ है।
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कार की बैटरी का emf $12 \ V$ है। यदि बैटरी का आंतरिक प्रतिरोध $0.4 \ \Omega$ है,तो बैटरी से ली गई अधिकतम शक्ति . . . . . . $W$ है।
A
शून्य
B
$360$
C
$4.8$
D
$30$

Solution

(B) बैटरी द्वारा बाहरी लोड को दी गई शक्ति $P = I^2 R$ द्वारा दी जाती है,जहाँ $I = \frac{\varepsilon}{R+r}$ है।
अधिकतम शक्ति स्थानांतरण के लिए,बाहरी प्रतिरोध $R$ बैटरी के आंतरिक प्रतिरोध $r$ के बराबर होना चाहिए $(R = r)$।
अधिकतम शक्ति का सूत्र $P_{max} = \frac{\varepsilon^2}{4r}$ है।
दिया गया है: $\varepsilon = 12 \ V$ और $r = 0.4 \ \Omega$।
मान रखने पर: $P_{max} = \frac{12^2}{4 \times 0.4} = \frac{144}{1.6} = 90 \ W$।
हालाँकि,दिए गए विकल्प $360 \ W$ का मान $P = \frac{\varepsilon^2}{r} = \frac{144}{0.4} = 360 \ W$ के आधार पर है,जो शॉर्ट सर्किट की स्थिति है। दिए गए विकल्पों के अनुसार,$360 \ W$ को सही उत्तर माना गया है।
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PhysicsEasyMCQGUJCET · 2020
एक विद्युत सेल ($2 \ V$ emf और $0.1 \ \Omega$ आंतरिक प्रतिरोध वाला) और दूसरा विद्युत सेल ($4 \ V$ emf और $0.2 \ \Omega$ आंतरिक प्रतिरोध वाला) एक-दूसरे के समांतर क्रम में जुड़े हैं। तो तुल्य emf . . . . . . $V$ होगा।
A
$0.38$
B
$2.57$
C
$1.33$
D
$2.67$

Solution

(D) जब $\varepsilon_1$ और $\varepsilon_2$ emf तथा $r_1$ और $r_2$ आंतरिक प्रतिरोध वाले दो सेल समांतर क्रम में जुड़े होते हैं,तो तुल्य emf $\varepsilon_{eq}$ का सूत्र इस प्रकार है:
$\varepsilon_{eq} = \frac{\varepsilon_1 r_2 + \varepsilon_2 r_1}{r_1 + r_2}$
दिए गए मान:
$\varepsilon_1 = 2 \ V, r_1 = 0.1 \ \Omega$
$\varepsilon_2 = 4 \ V, r_2 = 0.2 \ \Omega$
इन मानों को सूत्र में रखने पर:
$\varepsilon_{eq} = \frac{(2 \times 0.2) + (4 \times 0.1)}{0.1 + 0.2}$
$\varepsilon_{eq} = \frac{0.4 + 0.4}{0.3}$
$\varepsilon_{eq} = \frac{0.8}{0.3} \approx 2.67 \ V$
अतः,सही विकल्प $D$ है।
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PhysicsEasyMCQGUJCET · 2020
सीज़ियम की देहली आवृत्ति (threshold frequency) $5.16 \times 10^{14} \ Hz$ है। तो इसका कार्य फलन (work function) . . . . . . $eV$ है।
A
$4.12$
B
$2.14$
C
$1.12$
D
$1.14$

Solution

(B) कार्य फलन $\phi_{0}$ को सूत्र $\phi_{0} = h \nu_{0}$ द्वारा दिया जाता है,जहाँ $h$ प्लांक नियतांक $(6.626 \times 10^{-34} \ J \cdot s)$ है और $\nu_{0}$ देहली आवृत्ति है।
ऊर्जा को जूल से इलेक्ट्रॉन-वोल्ट $(eV)$ में बदलने के लिए,हम इसे इलेक्ट्रॉन के आवेश $(e = 1.6 \times 10^{-19} \ C)$ से विभाजित करते हैं।
$\phi_{0} = \frac{h \nu_{0}}{e} = \frac{6.626 \times 10^{-34} \times 5.16 \times 10^{14}}{1.6 \times 10^{-19}} \ eV$.
$\phi_{0} \approx \frac{34.19 \times 10^{-20}}{1.6 \times 10^{-19}} \ eV$.
$\phi_{0} \approx 2.137 \ eV$.
दो दशमलव स्थानों तक पूर्णांकित करने पर,हमें $\phi_{0} \approx 2.14 \ eV$ प्राप्त होता है।
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PhysicsEasyMCQGUJCET · 2020
एक समान रूप से आवेशित अनंत समतल का आवेश घनत्व $\sigma$ है। इसके पास एक सरल लोलक को ऊर्ध्वाधर नीचे की ओर लटकाया गया है। धात्विक बॉब पर $q_0$ आवेश रखा गया है। यदि धागे द्वारा ऊर्ध्वाधर दिशा के साथ बनाया गया कोण $\theta$ है,तो . . . . . . ।
A
$\sigma \propto \frac{q_0}{\tan \theta}$
B
$\sigma \propto \frac{\tan \theta}{q_0}$
C
$\sigma \propto \tan \theta$
D
$\sigma \propto \frac{\cot \theta}{q_0}$

Solution

(C) अनंत आवेशित समतल द्वारा उत्पन्न विद्युत क्षेत्र $E$ के प्रभाव में संतुलन में एक सरल लोलक के लिए,बॉब पर कार्य करने वाले बल तनाव $T$,गुरुत्वाकर्षण बल $mg$ और स्थिर विद्युत बल $F_e = q_0 E$ हैं।
बलों को क्षैतिज और ऊर्ध्वाधर घटकों में विभाजित करने पर:
$T \sin \theta = q_0 E$
$T \cos \theta = mg$
दोनों समीकरणों को विभाजित करने पर:
$\tan \theta = \frac{q_0 E}{mg}$
एक समान रूप से आवेशित अनंत समतल के कारण विद्युत क्षेत्र निम्न प्रकार है:
$E = \frac{\sigma}{2 \varepsilon_0}$
इसे $\tan \theta$ के व्यंजक में प्रतिस्थापित करने पर:
$\tan \theta = \frac{q_0}{mg} \left( \frac{\sigma}{2 \varepsilon_0} \right)$
चूंकि $q_0$,$m$,$g$ और $\varepsilon_0$ स्थिरांक हैं,इसलिए:
$\tan \theta \propto \sigma$
या,$\sigma \propto \tan \theta$।
Solution diagram
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दो बिंदु विद्युत आवेश $+10^{-8} \text{ C}$ और $-10^{-8} \text{ C}$ को $0.1 \text{ m}$ की दूरी पर रखा गया है। दोनों आवेशों को जोड़ने वाली रेखा के केंद्र पर कुल विद्युत क्षेत्र का परिमाण ज्ञात कीजिए।
A
$12.96 \times 10^4 \text{ NC}^{-1}$
B
$3.6 \times 10^4 \text{ NC}^{-1}$
C
शून्य
D
$7.2 \times 10^4 \text{ NC}^{-1}$

Solution

(D) मान लीजिए कि दो आवेश $q_1 = +10^{-8} \text{ C}$ और $q_2 = -10^{-8} \text{ C}$ हैं। उनके बीच की दूरी $d = 0.1 \text{ m}$ है।
आवेशों को जोड़ने वाली रेखा का केंद्र प्रत्येक आवेश से $r = d/2 = 0.05 \text{ m}$ की दूरी पर है।
बिंदु आवेश के कारण विद्युत क्षेत्र $E = \frac{kq}{r^2}$ द्वारा दिया जाता है,जहाँ $k = 9 \times 10^9 \text{ Nm}^2\text{C}^{-2}$ है।
केंद्र पर,धनात्मक आवेश $q_1$ के कारण विद्युत क्षेत्र उससे दूर (ऋणात्मक आवेश की ओर) इंगित करता है,और ऋणात्मक आवेश $q_2$ के कारण विद्युत क्षेत्र भी उसी की ओर इंगित करता है।
चूंकि दोनों क्षेत्र एक ही दिशा में हैं,इसलिए कुल विद्युत क्षेत्र $E_{total} = E_1 + E_2$ होगा।
$E_1 = \frac{k |q_1|}{r^2} = \frac{9 \times 10^9 \times 10^{-8}}{(0.05)^2} = \frac{90}{0.0025} = 3.6 \times 10^4 \text{ NC}^{-1}$.
$E_2 = \frac{k |q_2|}{r^2} = \frac{9 \times 10^9 \times 10^{-8}}{(0.05)^2} = 3.6 \times 10^4 \text{ NC}^{-1}$.
$E_{total} = 3.6 \times 10^4 + 3.6 \times 10^4 = 7.2 \times 10^4 \text{ NC}^{-1}$.
Solution diagram
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यदि एक आवेश $q$ को एक घन के किसी एक शीर्ष पर रखा जाता है,तो घन के किसी एक फलक से गुजरने वाला फ्लक्स . . . . . . है।
A
$\frac{q}{\varepsilon_0}$
B
$\frac{q}{6 \varepsilon_0}$
C
$\frac{q}{24 \varepsilon_0}$
D
$\frac{q}{8 \varepsilon_0}$

Solution

(C) गॉस के नियम के अनुसार,एक बंद सतह से गुजरने वाला कुल फ्लक्स $\frac{q}{\varepsilon_0}$ होता है।
घन के एक शीर्ष पर रखे आवेश $q$ को घेरने के लिए,हमें $8$ समान घनों की आवश्यकता होती है ताकि एक बड़ा सममित घन बन सके और आवेश $q$ उस बड़े घन के केंद्र में स्थित हो।
बड़े घन से गुजरने वाला कुल फ्लक्स $\frac{q}{\varepsilon_0}$ है।
चूंकि आवेश कोने पर है,इसलिए मूल घन से गुजरने वाला फ्लक्स कुल फ्लक्स का $\frac{1}{8}$ भाग होगा,जो $\frac{q}{8 \varepsilon_0}$ है।
मूल घन के $6$ फलकों में से,$3$ फलक उस शीर्ष पर मिलते हैं जहाँ आवेश रखा गया है। विद्युत क्षेत्र रेखाएं इन $3$ फलकों के समानांतर होती हैं,इसलिए इन $3$ फलकों से गुजरने वाला फ्लक्स $0$ होता है।
शेष $3$ फलक फ्लक्स को समान रूप से साझा करते हैं।
इसलिए,इन $3$ फलकों में से किसी एक से गुजरने वाला फ्लक्स $\frac{1}{3} \times \frac{q}{8 \varepsilon_0} = \frac{q}{24 \varepsilon_0}$ होगा।
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निम्नलिखित में से कौन सा प्रेरकत्व (inductance) का मात्रक नहीं है?
A
$Wb \cdot s \cdot A^{-1}$
B
$V \cdot s \cdot A^{-1}$
C
$H$
D
$Wb \cdot A^{-1}$

Solution

(A) प्रेरकत्व $L$ का सूत्र $\phi = L \cdot I$ द्वारा दिया जाता है,जहाँ $\phi$ चुंबकीय फ्लक्स है और $I$ धारा है।
अतः,$L = \frac{\phi}{I}$.
चुंबकीय फ्लक्स $\phi$ का मात्रक वेबर $(Wb)$ है और धारा $I$ का मात्रक एम्पीयर $(A)$ है।
इसलिए,प्रेरकत्व का $SI$ मात्रक $\frac{Wb}{A} = Wb \cdot A^{-1}$ है,जिसे हेनरी $(H)$ भी कहा जाता है।
चुंबकीय फ्लक्स का मात्रक $V \cdot s$ के रूप में भी व्यक्त किया जा सकता है,क्योंकि $V = \frac{d\phi}{dt}$।
यह मान रखने पर,$L = \frac{V \cdot s}{A} = V \cdot s \cdot A^{-1}$ प्राप्त होता है।
दिए गए विकल्पों की तुलना करने पर,$Wb \cdot A^{-1}$ $(D)$,$H$ $(C)$,और $V \cdot s \cdot A^{-1}$ $(B)$ प्रेरकत्व के मान्य मात्रक हैं।
विकल्प $A$ $(Wb \cdot s \cdot A^{-1})$ प्रेरकत्व का मान्य मात्रक नहीं है।
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नीचे दिए गए लूप्स में से किस लूप में प्रेरित धारा की दिशा $a \rightarrow c \rightarrow b$ है?
A
Option A
B
Option B
C
Option C
D
Option D

Solution

(A) प्रेरित धारा की दिशा ज्ञात करने के लिए, हम लेंज़ के नियम और गतिकीय $EMF$ की अवधारणा का उपयोग करते हैं।
$1$. प्रेरित धारा उस दिशा में बहती है जो चुंबकीय फ्लक्स में परिवर्तन का विरोध करती है।
$2$. एकसमान चुंबकीय क्षेत्र में गति करने वाले लूप के लिए, क्षेत्र के लंबवत गति करने वाली छड़ में गतिकीय $EMF$ प्रेरित होता है। आवेश वाहकों (इलेक्ट्रॉनों) पर लगने वाले बल की दिशा $\vec{F} = q(\vec{v} \times \vec{B})$ द्वारा दी जाती है।
$3$. विकल्प $A$ में, त्रिकोणीय लूप कागज के अंदर की ओर निर्देशित चुंबकीय क्षेत्र $(\otimes)$ में दाईं ओर गति कर रहा है। ऊर्ध्वाधर खंड $ab$ एक गतिमान छड़ के रूप में कार्य करता है। धनात्मक आवेशों पर बल के लिए दाहिने हाथ के नियम का उपयोग करते हुए, $\vec{v}$ दाईं ओर है और $\vec{B}$ अंदर की ओर है, इसलिए $\vec{v} \times \vec{B}$ ऊपर की ओर ($a$ की ओर) इंगित करता है। इस प्रकार, प्रेरित धारा $b \rightarrow a$ और फिर लूप के शेष भाग $a \rightarrow c \rightarrow b$ में बहती है।
$4$. इसलिए, प्रेरित धारा की दिशा $a \rightarrow c \rightarrow b$ है।
Solution diagram
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$1000$ फेरों और $0.10 \ m^2$ क्षेत्रफल वाली एक कुंडली आधे चक्कर प्रति सेकंड की गति से घूमती है और इसे कुंडली के घूर्णन अक्ष के लंबवत $0.01 \ T$ के एकसमान चुंबकीय क्षेत्र में रखा जाता है। कुंडली में उत्पन्न अधिकतम emf वोल्टेज . . . . . . $V$ है।
A
$0.314$
B
$5.0$
C
$3.14$
D
$0.5$

Solution

(C) दिया गया है: फेरों की संख्या $N = 1000$,क्षेत्रफल $A = 0.10 \ m^2$,आवृत्ति $\nu = 0.5 \ Hz$,चुंबकीय क्षेत्र $B = 0.01 \ T$ है।
कोणीय वेग $\omega = 2 \pi \nu$ द्वारा दिया जाता है।
$\omega = 2 \pi (0.5) = \pi \ rad/s$ है।
अधिकतम प्रेरित emf $\varepsilon_{\max}$ का सूत्र $\varepsilon_{\max} = N A B \omega$ है।
मान रखने पर: $\varepsilon_{\max} = 1000 \times 0.10 \times 0.01 \times \pi$ है।
$\varepsilon_{\max} = 1 \times \pi = 3.14 \ V$ है।
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पराबैंगनी (ultraviolet) किरणों के लिए तरंगदैर्ध्य की सीमा . . . . . . है।
A
$0.1 \ m$ से $1 \ mm$
B
$700 \ nm$ से $400 \ nm$
C
$1 \ mm$ से $700 \ nm$
D
$400 \ nm$ से $1.0 \ nm$

Solution

(D) विद्युतचुंबकीय स्पेक्ट्रम को तरंगदैर्ध्य और आवृत्ति के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है।
पराबैंगनी $(UV)$ विकिरण दृश्य प्रकाश स्पेक्ट्रम और एक्स-रे के बीच स्थित होता है।
पराबैंगनी विकिरण के लिए तरंगदैर्ध्य की सीमा लगभग $400 \ nm$ से $1.0 \ nm$ (या $10^{-7} \ m$ से $10^{-9} \ m$) होती है।
अतः,सही विकल्प $D$ है।
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PhysicsEasyMCQGUJCET · 2020
विस्थापन धारा (displacement current) का स्रोत . . . . . . है।
A
परिवर्ती विद्युत क्षेत्र
B
स्थिर विद्युत क्षेत्र
C
परिवर्ती चुंबकीय क्षेत्र
D
स्थिर चुंबकीय क्षेत्र

Solution

(A) सही उत्तर $A$ है।
विस्थापन धारा $(i_{d})$ वह धारा है जो समय के साथ बदलते विद्युत क्षेत्र के कारण उत्पन्न होती है।
विस्थापन धारा के लिए गणितीय व्यंजक इस प्रकार है:
$i_{d} = \varepsilon_{0} \frac{d}{dt}(\phi_{E})$
जहाँ $\phi_{E}$ विद्युत फ्लक्स है।
चूंकि $\phi_{E} = E \cdot A$,एक नियत क्षेत्रफल $A$ के लिए,व्यंजक इस प्रकार हो जाता है:
$i_{d} = \varepsilon_{0} A \frac{dE}{dt}$
अतः,एक परिवर्ती (बदलता हुआ) विद्युत क्षेत्र विस्थापन धारा का स्रोत है।
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PhysicsEasyMCQGUJCET · 2020
एक $2 \mu F$ संधारित्र को $50 \ V$ की आपूर्ति से और $3 \mu F$ संधारित्र को $100 \ V$ की आपूर्ति से जोड़ा जाता है। बैटरी हटाने के बाद,यदि समान प्रकार के आवेश वाली प्लेटों को एक-दूसरे से जोड़ा जाता है,तो नया विभवांतर . . . . . . $V$ होगा।
A
$75$
B
$333$
C
$200$
D
$80$

Solution

(D) समांतर क्रम में जुड़े दो संधारित्रों का उभयनिष्ठ विभव $V$ निम्नलिखित सूत्र द्वारा दिया जाता है:
$V = \frac{Q_1 + Q_2}{C_1 + C_2}$
चूंकि $Q = CV$,हमारे पास है:
$V = \frac{C_1 V_1 + C_2 V_2}{C_1 + C_2}$
दिया गया है:
$C_1 = 2 \mu F, V_1 = 50 \ V$
$C_2 = 3 \mu F, V_2 = 100 \ V$
मान रखने पर:
$V = \frac{(2 \times 10^{-6} \times 50) + (3 \times 10^{-6} \times 100)}{2 \times 10^{-6} + 3 \times 10^{-6}}$
$V = \frac{(100 + 300) \times 10^{-6}}{5 \times 10^{-6}}$
$V = \frac{400}{5} = 80 \ V$
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यदि किसी पदार्थ के लिए सापेक्ष विद्युतशीलता (relative permittivity) $80$ है,तो उसकी विद्युत प्रवृत्ति (electric susceptibility) . . . . . . है।
A
$81 \times 10^{-10}$
B
$7 \times 10^{-10}$
C
$79$
D
$7 \times 10^{-9}$

Solution

(C) सापेक्ष विद्युतशीलता ($K$ या $\epsilon_r$) और विद्युत प्रवृत्ति $(\chi_e)$ के बीच का संबंध इस सूत्र द्वारा दिया जाता है: $K = 1 + \chi_e$.
यहाँ दिया गया है कि सापेक्ष विद्युतशीलता $K = 80$ है।
सूत्र में मान रखने पर: $80 = 1 + \chi_e$.
इसलिए,$\chi_e = 80 - 1 = 79$.
अतः,विद्युत प्रवृत्ति $79$ है।
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PhysicsEasyMCQGUJCET · 2020
एक परिनालिका (solenoid) के क्रोड (core) की सापेक्ष पारगम्यता (relative permeability) $400$ है। परिनालिका की वाइंडिंग क्रोड से अछूता है और इसमें $2 \ A$ की धारा बह रही है। यदि प्रति मीटर फेरों की संख्या $1000$ है,तो परिनालिका के क्रोड के अंदर चुंबकीय तीव्रता . . . . . . $\frac{A}{m}$ है।
A
$2 \times 10^{-3}$
B
$2 \times 10^3$
C
$2.5 \times 10^3$
D
$2.5 \times 10^{-3}$

Solution

(B) परिनालिका के अंदर चुंबकीय तीव्रता $H$ का सूत्र $H = nI$ होता है,जहाँ $n$ प्रति इकाई लंबाई में फेरों की संख्या है और $I$ परिनालिका में बहने वाली धारा है।
दिया गया है:
प्रति मीटर फेरों की संख्या,$n = 1000 \ m^{-1}$.
धारा,$I = 2 \ A$.
इन मानों को सूत्र में रखने पर:
$H = 1000 \times 2 = 2000 \ \frac{A}{m}$.
इसे वैज्ञानिक संकेतन में $2 \times 10^3 \ \frac{A}{m}$ के रूप में लिखा जा सकता है।
अतः,सही विकल्प $B$ है।
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PhysicsEasyMCQGUJCET · 2020
भारत में,दिल्ली पर चुंबकीय दिक्पात (magnetic declination) . . . . . . है।
A
$0^{\circ} 58^{\prime} W$
B
$0^{\circ} 41^{\prime} W$
C
$0^{\circ} 58^{\prime} E$
D
$0^{\circ} 41^{\prime} E$

Solution

(D) किसी विशिष्ट स्थान पर चुंबकीय दिक्पात भौगोलिक याम्योत्तर (geographic meridian) और चुंबकीय याम्योत्तर (magnetic meridian) के बीच का कोण होता है। भारत के लिए मानक भौगोलिक और चुंबकीय डेटा के अनुसार,दिल्ली पर चुंबकीय दिक्पात लगभग $0^{\circ} 41^{\prime} E$ है।
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PhysicsMediumMCQGUJCET · 2020
$5 \ cm$ त्रिज्या वाले एक बहुत लंबे तार से $10 \ A$ की धारा प्रवाहित हो रही है। इसकी वक्र सतह से अंदर की ओर $2 \ cm$ की दूरी पर चुंबकीय क्षेत्र . . . . . . $\times 10^{-5} \ T$ है।
A
$2.4$
B
$6.7$
C
$4.4$
D
$3.4$

Solution

(A) दिया गया है:
तार की त्रिज्या,$R = 5 \ cm = 5 \times 10^{-2} \ m$
धारा,$I = 10 \ A$
वक्र सतह से दूरी = $2 \ cm$
इसलिए,तार की अक्ष से दूरी,$r = R - 2 \ cm = 5 \ cm - 2 \ cm = 3 \ cm = 3 \times 10^{-2} \ m$
एक लंबे बेलनाकार तार के अंदर अक्ष से $r$ दूरी पर चुंबकीय क्षेत्र का सूत्र:
$B = \frac{\mu_0 I r}{2 \pi R^2}$
मान रखने पर:
$B = \frac{(4 \pi \times 10^{-7}) \times 10 \times (3 \times 10^{-2})}{2 \pi \times (5 \times 10^{-2})^2}$
$B = \frac{2 \times 10^{-7} \times 10 \times 3 \times 10^{-2}}{25 \times 10^{-4}}$
$B = \frac{60 \times 10^{-9}}{25 \times 10^{-4}}$
$B = 2.4 \times 10^{-5} \ T$
अतः,चुंबकीय क्षेत्र $2.4 \times 10^{-5} \ T$ है।
Solution diagram
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$10 \text{ A m}^2$ चुंबकीय आघूर्ण वाली एक कुंडली को एक ऊर्ध्वाधर तल में रखा गया है और यह अपने क्षैतिज अक्ष के परितः घूमने के लिए स्वतंत्र है, जो इसके व्यास के साथ संपाती है। क्षैतिज दिशा में $2 \text{ T}$ का एक समान चुंबकीय क्षेत्र इस प्रकार मौजूद है कि प्रारंभ में कुंडली का अक्ष क्षेत्र की दिशा में है। चुंबकीय क्षेत्र के प्रभाव में कुंडली $90^{\circ}$ के कोण से घूमती है। कुंडली का जड़त्व आघूर्ण $0.1 \text{ kg m}^2$ है। इसकी कोणीय गति क्या होगी ($\text{ rad/s}$ में)?
A
$40$
B
$10$
C
$20$
D
$5$

Solution

(C) चुंबकीय क्षेत्र में चुंबकीय द्विध्रुव की स्थितिज ऊर्जा $U = -\vec{m} \cdot \vec{B} = -mB \cos \theta$ द्वारा दी जाती है।
प्रारंभ में, कुंडली का अक्ष क्षेत्र की दिशा में है, इसलिए $\theta_i = 0^{\circ}$।
$U_i = -mB \cos 0^{\circ} = -mB$।
$90^{\circ}$ के कोण से घूमने के बाद, अंतिम कोण $\theta_f = 90^{\circ}$ है।
$U_f = -mB \cos 90^{\circ} = 0$।
स्थितिज ऊर्जा में परिवर्तन $\Delta U = U_f - U_i = 0 - (-mB) = mB$ है।
स्थितिज ऊर्जा में यह परिवर्तन घूर्णी गतिज ऊर्जा में परिवर्तित हो जाता है: $\Delta U = K_f - K_i$।
चूंकि कुंडली स्थिर अवस्था से शुरू होती है, $K_i = 0$, इसलिए $mB = \frac{1}{2} I \omega^2$।
$\omega$ के लिए सूत्र: $\omega = \sqrt{\frac{2mB}{I}}$।
दिए गए मानों को रखने पर: $m = 10 \text{ A m}^2$, $B = 2 \text{ T}$, $I = 0.1 \text{ kg m}^2$।
$\omega = \sqrt{\frac{2 \times 10 \times 2}{0.1}} = \sqrt{\frac{40}{0.1}} = \sqrt{400} = 20 \text{ rad/s}$।
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चुंबकीय क्षेत्र का स्रोत . . . . . . है और विद्युत क्षेत्र का स्रोत . . . . . . है।
A
सदिश,अदिश
B
अदिश,अदिश
C
अदिश,सदिश
D
सदिश,सदिश

Solution

(A) सही उत्तर $A$ है।
चुंबकीय क्षेत्र का स्रोत धारा अवयव (current element) है,जो $I \vec{dl}$ के रूप में परिभाषित एक सदिश राशि है।
विद्युत क्षेत्र का स्रोत विद्युत आवेश है,जो एक अदिश राशि है।
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$1 \ g$ पदार्थ की ऊर्जा समतुल्यता की गणना करें।
A
$7 \times 10^{12} \ J$
B
$9 \times 10^{13} \ J$
C
$6 \times 10^{11} \ J$
D
$4 \times 10^{12} \ J$

Solution

(B) द्रव्यमान $m$ की ऊर्जा समतुल्यता आइंस्टीन के द्रव्यमान-ऊर्जा समतुल्यता संबंध द्वारा दी जाती है: $E = mc^2$।
दिया गया द्रव्यमान $m = 1 \ g = 10^{-3} \ kg$।
प्रकाश की गति $c = 3 \times 10^8 \ m/s$।
इन मानों को सूत्र में प्रतिस्थापित करने पर:
$E = 10^{-3} \ kg \times (3 \times 10^8 \ m/s)^2$।
$E = 10^{-3} \times 9 \times 10^{16} \ J$।
$E = 9 \times 10^{13} \ J$।
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अवतल दर्पण के ध्रुव और मुख्य फोकस के बीच रखे गए वस्तु के लिए बनने वाले प्रतिबिंब की प्रकृति क्या होती है?
A
वास्तविक,उल्टा और आवर्धित
B
आभासी,सीधा और छोटा
C
वास्तविक,उल्टा और छोटा
D
आभासी,सीधा और आवर्धित

Solution

(D) जब किसी वस्तु को अवतल दर्पण के ध्रुव $(P)$ और मुख्य फोकस $(F)$ के बीच रखा जाता है,तो परावर्तन के बाद प्रकाश की किरणें अपसरित होती हैं। इन किरणों को पीछे की ओर बढ़ाने पर,वे दर्पण के पीछे मिलती हुई प्रतीत होती हैं। अतः,बनने वाला प्रतिबिंब आभासी,सीधा और आवर्धित (बड़ा) होता है।
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यदि एक डायोड में अग्र वोल्टेज (forward voltage) को बढ़ाया जाता है,तो अवक्षय परत (depletion region) की चौड़ाई $\qquad$ .
A
उतार-चढ़ाव करती है
B
कोई परिवर्तन नहीं
C
घटती है
D
बढ़ती है

Solution

(C) जब एक डायोड को अग्र अभिनत (forward biased) किया जाता है,तो बैटरी का धनात्मक टर्मिनल $p$-प्रकार के क्षेत्र से और ऋणात्मक टर्मिनल $n$-प्रकार के क्षेत्र से जुड़ा होता है।
यह बाहरी विद्युत क्षेत्र अवक्षय परत के आंतरिक विद्युत क्षेत्र का विरोध करता है।
जैसे-जैसे अग्र वोल्टेज बढ़ता है,विभव प्राचीर (potential barrier) कम हो जाता है और बहुसंख्यक आवेश वाहक जंक्शन की ओर धकेले जाते हैं।
इसके परिणामस्वरूप अवक्षय परत की चौड़ाई कम हो जाती है।
अतः,सही विकल्प $C$ है।
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मान लीजिए कि एक शुद्ध $Si$ क्रिस्टल में $5 \times 10^{28}$ परमाणु $m^{-3}$ हैं। इसे $1$ ppm सांद्रता वाले पेंटावैलेंट $As$ द्वारा डोप किया जाता है। होल्स की संख्या की गणना करें। दिया गया है कि $n_i = 1.5 \times 10^{16} m^{-3}$।
A
$5.4 \times 10^{-9} m^{-3}$
B
$5.4 \times 10^{9} m^{-3}$
C
$4.5 \times 10^{-9} m^{-3}$
D
$4.5 \times 10^{9} m^{-3}$

Solution

(D) $m^3$ प्रति $As$ परमाणुओं की संख्या $1$ ppm (दस लाख में एक) की डोपिंग सांद्रता द्वारा दी जाती है।
$n_e \approx N_D = 1 \times 10^{-6} \times (5 \times 10^{28} m^{-3}) = 5 \times 10^{22} m^{-3}$।
मास एक्शन के नियम का उपयोग करते हुए,$n_e n_h = n_i^2$।
$n_h = \frac{n_i^2}{n_e} = \frac{(1.5 \times 10^{16})^2}{5 \times 10^{22}}$।
$n_h = \frac{2.25 \times 10^{32}}{5 \times 10^{22}} = 0.45 \times 10^{10} m^{-3} = 4.5 \times 10^9 m^{-3}$।
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दो स्लिटों के बीच की दूरी $3 \ mm$ है और पर्दा $2 \ m$ की दूरी पर रखा गया है। जब $500 \ nm$ तरंगदैर्ध्य वाले नीले-हरे प्रकाश का उपयोग किया जाता है, तो दो क्रमागत फ्रिंजों के बीच की दूरी क्या होगी ($mm$ में)?
A
$0.5$
B
$0.43$
C
$0.33$
D
$0.4$

Solution

(C) फ्रिंज चौड़ाई (दो क्रमागत फ्रिंजों के बीच की दूरी) का सूत्र है: $\beta = \frac{\lambda D}{d}$।
दिए गए मान हैं:
$\lambda = 500 \ nm = 500 \times 10^{-9} \ m = 5 \times 10^{-7} \ m$
$D = 2 \ m$
$d = 3 \ mm = 3 \times 10^{-3} \ m$
इन मानों को सूत्र में रखने पर:
$\beta = \frac{5 \times 10^{-7} \times 2}{3 \times 10^{-3}}$
$\beta = \frac{10 \times 10^{-7}}{3 \times 10^{-3}}$
$\beta = \frac{10}{3} \times 10^{-4} \ m$
$\beta = 3.33 \times 10^{-4} \ m$
$\beta = 0.333 \times 10^{-3} \ m = 0.33 \ mm$।
अतः, सही विकल्प $C$ है।

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