GUJCET 2025 Physics Question Paper with Answer and Solution in Hindi

40 QuestionsHindiWith Solutions

PhysicsQ140 of 40 questions

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1
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$LCR$ $AC$ परिपथ में अधिकतम वोल्टेज और इसके $rms$ वोल्टेज के अनुपात का अनुमानित प्रतिशत मान क्या है ($\%$ में)?
A
$22.8$
B
$70.7$
C
$50$
D
$141.4$

Solution

(D) साइनसोइडल $AC$ परिपथ के लिए अधिकतम (पीक) वोल्टेज $V_0$ और रूट मीन स्क्वायर $(rms)$ वोल्टेज $V_{rms}$ के बीच का संबंध $V_{rms} = \frac{V_0}{\sqrt{2}}$ है।
इस सूत्र को पुनर्व्यवस्थित करने पर,हमें अधिकतम वोल्टेज और $rms$ वोल्टेज का अनुपात $\frac{V_0}{V_{rms}} = \sqrt{2}$ प्राप्त होता है।
चूंकि $\sqrt{2} \approx 1.414$,इस अनुपात को प्रतिशत में बदलने के लिए $100\%$ से गुणा करने पर:
अतः,प्रतिशत मान $1.414 \times 100\% = 141.4\%$ है।
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निम्नलिखित में से किस $AC$ परिपथ में,अनुनाद की स्थिति में शक्ति गुणांक (power factor) का मान $1$ प्राप्त होता है?
A
$LCR$ श्रेणी परिपथ
B
$CR$ श्रेणी परिपथ
C
केवल प्रेरक $(L)$ परिपथ
D
$LR$ श्रेणी परिपथ

Solution

(A) $LCR$ श्रेणी परिपथ में,अनुनाद तब होता है जब प्रेरणिक प्रतिघात $X_L$ धारितीय प्रतिघात $X_C$ के बराबर होता है $(X_L = X_C)$।
इस स्थिति में,कुल प्रतिबाधा $Z$ प्रतिरोध $R$ के बराबर होती है,जिसका अर्थ है कि परिपथ शुद्ध रूप से प्रतिरोधी व्यवहार करता है।
शक्ति गुणांक $\cos \phi = \frac{R}{Z}$ द्वारा दिया जाता है।
अनुनाद पर,$Z = R$,इसलिए $\cos \phi = \frac{R}{R} = 1$ होता है।
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एक स्टेप-डाउन ट्रांसफार्मर का आउटपुट वोल्टेज $24 \text{ V}$ मापा जाता है,जब इसे $12 \text{ W}$ के लाइट बल्ब से जोड़ा जाता है। पीक करंट (शिखर धारा) का मान . . . . . . है।
A
$2\sqrt{2} \text{ A}$
B
$\sqrt{2} \text{ A}$
C
$2 \text{ A}$
D
$\frac{1}{\sqrt{2}} \text{ A}$

Solution

(D) शक्ति $P$ का सूत्र $P = V_{rms} \times I_{rms}$ होता है।
यहाँ $P = 12 \text{ W}$ और $V_{rms} = 24 \text{ V}$ दिया गया है,इसलिए हम $I_{rms}$ की गणना इस प्रकार कर सकते हैं:
$I_{rms} = \frac{P}{V_{rms}} = \frac{12}{24} = 0.5 \text{ A}$।
पीक करंट $I_0$ और $I_{rms}$ के बीच संबंध $I_0 = I_{rms} \times \sqrt{2}$ होता है।
$I_{rms}$ का मान रखने पर,हमें प्राप्त होता है:
$I_0 = 0.5 \times \sqrt{2} = \frac{1}{2} \times \sqrt{2} = \frac{1}{\sqrt{2}} \text{ A}$।
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. . . . . . का उपयोग चिकित्सा में कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने के लिए किया जाता है।
A
सूक्ष्म तरंगें (Microwaves)
B
गामा किरणें
C
पराबैंगनी किरणें
D
दृश्य किरणें

Solution

(B) गामा किरणों में उच्च ऊर्जा और उच्च भेदन क्षमता होती है। इनका उपयोग चिकित्सा उपचारों जैसे रेडियोथेरेपी में कैंसर कोशिकाओं के $DNA$ को नुकसान पहुँचाकर उनके विकास को रोकने या उन्हें नष्ट करने के लिए किया जाता है।
5
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एक माध्यम में प्रकाश की गति $200 \times 10^8 \text{ cm/s}$ है। माध्यम का अपवर्तनांक . . . . . . है $(c = 3 \times 10^8 \text{ m/s})$।
A
$2.42$
B
$1$
C
$1.5$
D
$1.33$

Solution

(C) निर्वात में प्रकाश की गति $c = 3 \times 10^8 \text{ m/s}$ है।
माध्यम में प्रकाश की गति $v = 200 \times 10^8 \text{ cm/s}$ है।
सबसे पहले,माध्यम में गति को $\text{m/s}$ में बदलें:
$v = 200 \times 10^8 \times 10^{-2} \text{ m/s} = 2 \times 10^8 \text{ m/s}$।
अपवर्तनांक $n$ का सूत्र $n = \frac{c}{v}$ है।
मान रखने पर: $n = \frac{3 \times 10^8 \text{ m/s}}{2 \times 10^8 \text{ m/s}} = 1.5$।
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$25 \text{ cm}$ की समान फोकस दूरी वाले उत्तल लेंस और अवतल लेंस के संयोजन की शक्ति क्या है?
A
शून्य
B
$25 \text{ D}$
C
अनंत
D
$8 \text{ D}$

Solution

(A) लेंस की शक्ति का सूत्र $P = \frac{1}{f(m)}$ है,जहाँ $f$ मीटर में फोकस दूरी है।
उत्तल लेंस के लिए,फोकस दूरी धनात्मक होती है,इसलिए $f_1 = +0.25 \text{ m}$। अतः,$P_1 = \frac{1}{0.25} = +4 \text{ D}$।
अवतल लेंस के लिए,फोकस दूरी ऋणात्मक होती है,इसलिए $f_2 = -0.25 \text{ m}$। अतः,$P_2 = \frac{1}{-0.25} = -4 \text{ D}$।
संपर्क में रखे लेंसों के संयोजन की शक्ति उनकी व्यक्तिगत शक्तियों का बीजगणितीय योग होती है: $P = P_1 + P_2$।
मान रखने पर,$P = 4 \text{ D} + (-4 \text{ D}) = 0 \text{ D}$।
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यदि न्यूनतम विचलन कोण $46^{\circ}$ है,तो एक समबाहु प्रिज्म के फलक पर प्रकाश की किरण को किस आपतन कोण पर आपतित होना चाहिए ($^{\circ}$ में)?
A
$35$
B
$38$
C
$40$
D
$53$

Solution

(D) एक समबाहु प्रिज्म में न्यूनतम विचलन की स्थिति के लिए,आपतन कोण $i$,निर्गत कोण $e$ के बराबर होता है।
संबंध इस प्रकार है: $i = e = \frac{A + \delta_m}{2}$।
समबाहु प्रिज्म के लिए,प्रिज्म का कोण $A = 60^{\circ}$ होता है।
दिया गया है कि न्यूनतम विचलन कोण $\delta_m = 46^{\circ}$ है।
इन मानों को सूत्र में प्रतिस्थापित करने पर:
$i = \frac{60^{\circ} + 46^{\circ}}{2} = \frac{106^{\circ}}{2} = 53^{\circ}$।
अतः,आपतन कोण $53^{\circ}$ है।
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यदि एक संयुक्त सूक्ष्मदर्शी (compound microscope) की नली की लंबाई $(L)$ बढ़ाई जाती है,तो उसकी आवर्धन क्षमता (magnification) . . . . . . ।
A
पहले बढ़ती है और फिर घटती है
B
बढ़ती है
C
स्थिर रहती है
D
घटती है

Solution

(B) संयुक्त सूक्ष्मदर्शी की आवर्धन क्षमता $(M)$ का सूत्र $M \approx \frac{L}{f_o} \times \frac{D}{f_e}$ है,जहाँ $L$ नली की लंबाई है,$f_o$ अभिदृश्यक लेंस (objective lens) की फोकस दूरी है,$f_e$ नेत्रिका (eyepiece) की फोकस दूरी है,और $D$ स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी है।
चूंकि $M$,नली की लंबाई $L$ के सीधे समानुपाती है $(M \propto L)$,इसलिए नली की लंबाई $L$ बढ़ाने पर संयुक्त सूक्ष्मदर्शी की आवर्धन क्षमता बढ़ जाती है।
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समान तीव्रता $I_0$ वाली दो तरंगें दो स्रोतों से समान कलांतर $(\phi)$ के साथ उत्सर्जित होती हैं। दो तरंगों के अध्यारोपण के कारण,परिणामी तरंग की तीव्रता . . . . . . के सीधे आनुपातिक होती है।
A
$\sin^2(\frac{\phi}{2})$
B
$\sin^2 \phi$
C
$\cos^2(\frac{\phi}{2})$
D
$\cos^2 \phi$

Solution

(C) समान तीव्रता $I_0$ और कलांतर $\phi$ वाली दो तरंगों के लिए परिणामी तीव्रता $I_R$ का सूत्र इस प्रकार है:
$I_R = I_1 + I_2 + 2\sqrt{I_1 I_2} \cos \phi$
चूंकि $I_1 = I_2 = I_0$,हम इन मानों को प्रतिस्थापित करते हैं:
$I_R = I_0 + I_0 + 2\sqrt{I_0 \cdot I_0} \cos \phi$
$I_R = 2I_0 + 2I_0 \cos \phi = 2I_0(1 + \cos \phi)$
त्रिकोणमितीय सर्वसमिका $1 + \cos \phi = 2 \cos^2(\frac{\phi}{2})$ का उपयोग करने पर:
$I_R = 2I_0 \cdot 2 \cos^2(\frac{\phi}{2}) = 4I_0 \cos^2(\frac{\phi}{2})$
अतः,परिणामी तीव्रता $I_R$,$\cos^2(\frac{\phi}{2})$ के सीधे आनुपातिक है।
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एक बिंदु स्रोत से अपसरित (diverging) होने वाले प्रकाश के लिए,
A
तरंगाग्र पर तीव्रता दूरी पर निर्भर नहीं करती है
B
तीव्रता दूरी के वर्ग के अनुपात में बढ़ती है
C
तरंगाग्र परवलयाकार होता है
D
तरंगाग्र गोलाकार होता है

Solution

(D) जब प्रकाश एक समांगी समदैशिक (homogeneous isotropic) माध्यम में एक बिंदु स्रोत से अपसरित होता है,तो ऊर्जा सभी दिशाओं में समान रूप से फैलती है। समान कला वाले बिंदुओं का बिंदुपथ स्रोत पर केंद्रित एक गोला बनाता है। अतः,तरंगाग्र गोलाकार होता है।
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यंग के द्वि-स्लिट प्रयोग में,स्लिट्स के बीच की दूरी $0.54$ mm है और स्क्रीन $1.8$ m की दूरी पर रखी गई है। केंद्रीय दीप्त फ्रिंज और छठी दीप्त फ्रिंज के बीच की दूरी $1.2$ cm मापी गई है। प्रयोग में उपयोग किए गए प्रकाश की तरंगदैर्घ्य ज्ञात कीजिए।
A
$5000$ $\mathring{A}$
B
$600$ nm
C
$8000$ nm
D
$800$ nm

Solution

(B) दिया गया है: स्लिट पृथक्करण $d = 0.54$ mm $= 0.54 \times 10^{-3}$ m.
स्क्रीन की दूरी $D = 1.8$ m.
केंद्रीय फ्रिंज से $n$ वें दीप्त फ्रिंज की दूरी $y_n = \frac{n\lambda D}{d}$ द्वारा दी जाती है।
$6$ वें दीप्त फ्रिंज के लिए,$n = 6$ और $y_6 = 1.2$ cm $= 1.2 \times 10^{-2}$ m.
तरंगदैर्घ्य $\lambda$ के लिए सूत्र को पुनर्व्यवस्थित करने पर: $\lambda = \frac{y_n d}{n D}$.
मान रखने पर: $\lambda = \frac{1.2 \times 10^{-2} \times 0.54 \times 10^{-3}}{6 \times 1.8}$.
$\lambda = \frac{0.648 \times 10^{-5}}{10.8} = 0.06 \times 10^{-5}$ m.
$\lambda = 600 \times 10^{-9}$ m $= 600$ nm.
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धातु से इलेक्ट्रॉनों को बाहर निकालने के लिए आवश्यक विद्युत क्षेत्र का न्यूनतम मान लगभग . . . . . . $V$/cm होता है।
A
$10^9$
B
$10^6$
C
$10^{10}$
D
$10^8$

Solution

(B) धातु की सतह से इलेक्ट्रॉन को बाहर निकालने के लिए (जिसे फील्ड उत्सर्जन कहा जाता है) आवश्यक विद्युत क्षेत्र आमतौर पर $10^6 \text{ V/cm}$ के क्रम का होता है।
यह मान धातु के कार्य फलन (work function) को दूर करने के लिए आवश्यक इलेक्ट्रोस्टैटिक बल से प्राप्त होता है,जो इलेक्ट्रॉनों को विभव अवरोध (potential barrier) के माध्यम से टनलिंग करने की अनुमति देता है।
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$6 \times 10^{14} \text{ Hz}$ आवृत्ति वाला एकवर्णी प्रकाश एक लेजर द्वारा उत्पन्न किया जाता है। उत्सर्जित शक्ति $4 \times 10^{-3} \text{ W}$ है। स्रोत द्वारा प्रति सेकंड औसतन कितने फोटॉन उत्सर्जित होते हैं? $[h = 6.63 \times 10^{-34} \text{ Js}]$
A
$1 \times 10^{16} \text{ फोटॉन प्रति सेकंड}$
B
$5 \times 10^{16} \text{ फोटॉन प्रति सेकंड}$
C
$3 \times 10^{15} \text{ फोटॉन प्रति सेकंड}$
D
$5 \times 10^{15} \text{ फोटॉन प्रति सेकंड}$

Solution

(A) स्रोत द्वारा उत्सर्जित शक्ति $P$,प्रति सेकंड उत्सर्जित फोटॉनों की संख्या $(n)$ और एक फोटॉन की ऊर्जा $(E = h\nu)$ के गुणनफल के बराबर होती है।
दिया गया है: शक्ति $P = 4 \times 10^{-3} \text{ W}$,आवृत्ति $\nu = 6 \times 10^{14} \text{ Hz}$,और प्लांक नियतांक $h = 6.63 \times 10^{-34} \text{ Js}$.
सूत्र: $P = n \cdot h\nu$.
$n$ के लिए सूत्र: $n = \frac{P}{h\nu}$.
मान रखने पर: $n = \frac{4 \times 10^{-3}}{6.63 \times 10^{-34} \times 6 \times 10^{14}}$.
$n = \frac{4 \times 10^{-3}}{39.78 \times 10^{-20}} = \frac{4}{39.78} \times 10^{17} \approx 0.10055 \times 10^{17} = 1.0055 \times 10^{16}$.
अतः,औसतन $n \approx 1 \times 10^{16} \text{ फोटॉन प्रति सेकंड}$ उत्सर्जित होते हैं।
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$0.033 \text{ kg}$ द्रव्यमान वाली और $1 \text{ km/s}$ की गति से चल रही एक गोली की डी-ब्रोग्ली तरंगदैर्ध्य क्या है? $(h = 6.6 \times 10^{-34} \text{ Js})$
A
$3 \times 10^{-25} \text{ m}$
B
$2 \times 10^{-35} \text{ m}$
C
$1.1 \times 10^{-32} \text{ m}$
D
$1.7 \times 10^{-35} \text{ m}$

Solution

(B) डी-ब्रोग्ली तरंगदैर्ध्य $\lambda$ का सूत्र $\lambda = \frac{h}{mv}$ है।
दिया गया है:
द्रव्यमान $m = 0.033 \text{ kg}$
वेग $v = 1 \text{ km/s} = 1000 \text{ m/s} = 10^3 \text{ m/s}$
प्लांक नियतांक $h = 6.6 \times 10^{-34} \text{ Js}$
सूत्र में मान रखने पर:
$\lambda = \frac{6.6 \times 10^{-34}}{0.033 \times 1000}$
$\lambda = \frac{6.6 \times 10^{-34}}{33}$
$\lambda = 0.2 \times 10^{-34} \text{ m}$
$\lambda = 2 \times 10^{-35} \text{ m}$.
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बोर के मॉडल के अनुसार,तीसरी उत्तेजित अवस्था में इलेक्ट्रॉन का कक्षीय कोणीय संवेग . . . . . . है $[h = 6.63 \times 10^{-34} \text{ Js}]$
A
$4.22 \times 10^{-34} \text{ kg m}^2\text{s}^{-1}$
B
$12.350 \times 10^{-34} \text{ kg m}^2\text{s}^{-1}$
C
$1.625 \times 10^{-26} \text{ erg-s}$
D
$6.63 \times 10^{-34} \text{ kg m}^2\text{s}^{-1}$

Solution

(A) बोर के मॉडल के अनुसार,कोणीय संवेग $L$ का सूत्र $L = n \frac{h}{2\pi}$ है।
मूल अवस्था (ground state) $n = 1$ के अनुरूप होती है।
प्रथम उत्तेजित अवस्था $n = 2$,दूसरी उत्तेजित अवस्था $n = 3$,और तीसरी उत्तेजित अवस्था $n = 4$ है।
सूत्र में $n = 4$ रखने पर:
$L = 4 \times \frac{h}{2\pi} = 2 \times \frac{h}{\pi}$।
दिया गया है $h = 6.63 \times 10^{-34} \text{ Js}$ और $\pi \approx 3.14$:
$L = 2 \times \frac{6.63 \times 10^{-34}}{3.14} \approx 2 \times 2.111 \times 10^{-34} = 4.222 \times 10^{-34} \text{ kg m}^2\text{s}^{-1}$।
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हाइड्रोजन परमाणु को प्रोटॉन और इलेक्ट्रॉन में अलग करने के लिए $13.6 \text{ eV}$ ऊर्जा की आवश्यकता होती है। यदि हाइड्रोजन परमाणु में इलेक्ट्रॉन की कक्षीय त्रिज्या $5.3 \times 10^{-11} \text{ m}$ है,तो इलेक्ट्रॉन का वेग . . . . . . है।
A
$6.25 \times 10^7 \text{ ms}^{-1}$
B
$1.36 \times 10^5 \text{ ms}^{-1}$
C
$2.4 \times 10^8 \text{ ms}^{-1}$
D
$2.2 \times 10^6 \text{ ms}^{-1}$

Solution

(D) ग्राउंड स्टेट $(n=1)$ में हाइड्रोजन परमाणु के लिए,कोणीय संवेग के लिए बोहर की क्वांटाइजेशन शर्त $mvr = \frac{nh}{2\pi}$ है।
यहाँ,$m$ इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान $(9.1 \times 10^{-31} \text{ kg})$,$v$ वेग,$r$ कक्षीय त्रिज्या $(5.3 \times 10^{-11} \text{ m})$,और $h$ प्लांक नियतांक $(6.63 \times 10^{-34} \text{ Js})$ है।
वेग $v$ के लिए सूत्र को पुनर्व्यवस्थित करने पर,हमें $v = \frac{h}{2\pi mr}$ प्राप्त होता है।
मान रखने पर: $v = \frac{6.63 \times 10^{-34}}{2 \times 3.14159 \times 9.1 \times 10^{-31} \times 5.3 \times 10^{-11}}$.
इसकी गणना करने पर,$v \approx 2.18 \times 10^6 \text{ ms}^{-1}$ प्राप्त होता है।
दो सार्थक अंकों तक राउंड ऑफ करने पर,हमें $v \approx 2.2 \times 10^6 \text{ ms}^{-1}$ प्राप्त होता है।
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हाइड्रोजन परमाणु की मूल अवस्था (ground state) की ऊर्जा $-13.6 \text{ eV}$ है। इस अवस्था में इलेक्ट्रॉन की स्थितिज ऊर्जा और गतिज ऊर्जा . . . . . . हैं।
A
$-13.6 \text{ eV}, -27.2 \text{ eV}$
B
$-27.2 \text{ eV}, -13.6 \text{ eV}$
C
$-27.2 \text{ eV}, +13.6 \text{ eV}$
D
$-13.6 \text{ eV}, +27.2 \text{ eV}$

Solution

(C) बोर मॉडल के अनुसार,मूल अवस्था में इलेक्ट्रॉन की कुल ऊर्जा $(TE)$ $-13.6 \text{ eV}$ है।
गतिज ऊर्जा $(KE)$ को $KE = -TE$ संबंध द्वारा दर्शाया जाता है। अतः,$KE = -(-13.6 \text{ eV}) = +13.6 \text{ eV}$।
स्थितिज ऊर्जा $(PE)$ को $PE = 2 \times TE$ संबंध द्वारा दर्शाया जाता है। अतः,$PE = 2 \times (-13.6 \text{ eV}) = -27.2 \text{ eV}$।
इस प्रकार,स्थितिज ऊर्जा $-27.2 \text{ eV}$ है और गतिज ऊर्जा $+13.6 \text{ eV}$ है।
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दो ड्यूटेरॉन (deuterons) की हेड-ऑन टक्कर के लिए विभव अवरोध (potential barrier) की ऊँचाई की गणना करें। (ड्यूटेरॉन की त्रिज्या $2$ fm है)।
A
$7.2 \times 10^{-19}$ $J$
B
$7.2 \times 10^{-14}$ $J$
C
$3.6 \times 10^{-19}$ $J$
D
$5.76 \times 10^{-14}$ $J$

Solution

(D) संपर्क बिंदु पर अवरोध की स्थितिज ऊर्जा (potential energy) $U = k \frac{q_1 q_2}{r}$ द्वारा दी जाती है।
यहाँ,प्रत्येक ड्यूटेरॉन का आवेश $q_1 = q_2 = e = 1.6 \times 10^{-19}$ $C$ है।
संपर्क बिंदु पर दो ड्यूटेरॉन के केंद्रों के बीच की दूरी $r = R_1 + R_2 = 2 \text{ fm} + 2 \text{ fm} = 4 \text{ fm} = 4 \times 10^{-15}$ m है।
सूत्र में मान रखने पर:
$U = \frac{(9 \times 10^9 \text{ N m}^2/\text{C}^2) \times (1.6 \times 10^{-19} \text{ C})^2}{4 \times 10^{-15} \text{ m}}$
$U = \frac{9 \times 10^9 \times 2.56 \times 10^{-38}}{4 \times 10^{-15}}$
$U = \frac{23.04 \times 10^{-29}}{4 \times 10^{-15}}$
$U = 5.76 \times 10^{-14}$ $J$.
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सूर्य में होने वाली संलयन अभिक्रिया के शुद्ध प्रभाव को पूरा करने के लिए सही विकल्प चुनें: $4_1^1H + 2e^- \rightarrow$ . . . . . . $+ 2\nu + 6\gamma +$ . . . . . .
A
$^3_2He, 5.49 \text{ MeV}$
B
$^4_2He, 26.7 \text{ MeV}$
C
$^4_2He, 22.86 \text{ MeV}$
D
$^3_2He, 0.42 \text{ MeV}$

Solution

(B) सूर्य में होने वाली प्रोटॉन-प्रोटॉन श्रृंखला अभिक्रिया,जो मुख्य संलयन प्रक्रिया है,को शुद्ध समीकरण द्वारा इस प्रकार दर्शाया जा सकता है:
$4_1^1H + 2e^- \rightarrow ^4_2He + 2\nu_e + 26.7 \text{ MeV}$.
इस प्रक्रिया में,चार हाइड्रोजन नाभिक (प्रोटॉन) मिलकर एक हीलियम नाभिक $(^4_2He)$ बनाते हैं,जिसमें दो न्यूट्रिनो $(
u_e)$ उत्सर्जित होते हैं और लगभग $26.7 \text{ MeV}$ की कुल ऊर्जा मुक्त होती है।
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निम्नलिखित में से किस युग्म को आइसोटोन (isotones) कहा जाता है?
A
$^{198}_{80}\text{Hg}, ^{197}_{79}\text{Au}$
B
$^3_1\text{H}, ^3_2\text{He}$
C
$^{214}_{82}\text{Pb}, ^{214}_{83}\text{Bi}$
D
$^{12}_6\text{C}, ^{14}_6\text{C}$

Solution

(A) आइसोटोन वे परमाणु होते हैं जिनमें न्यूट्रॉन की संख्या समान होती है।
न्यूट्रॉन की संख्या $(N)$ ज्ञात करने के लिए,हम सूत्र $N = A - Z$ का उपयोग करते हैं,जहाँ $A$ द्रव्यमान संख्या है और $Z$ परमाणु क्रमांक है।
$^{198}_{80}\text{Hg}$ के लिए: $N = 198 - 80 = 118$.
$^{197}_{79}\text{Au}$ के लिए: $N = 197 - 79 = 118$.
चूंकि दोनों परमाणुओं में न्यूट्रॉन की संख्या समान $(118)$ है,इसलिए वे आइसोटोन हैं।
अन्य विकल्पों के लिए:
- $^3_1\text{H}$ $(N=2)$ और $^3_2\text{He}$ $(N=1)$ आइसोटोन नहीं हैं।
- $^{214}_{82}\text{Pb}$ $(N=132)$ और $^{214}_{83}\text{Bi}$ $(N=131)$ आइसोटोन नहीं हैं।
- $^{12}_6\text{C}$ $(N=6)$ और $^{14}_6\text{C}$ $(N=8)$ समस्थानिक (isotopes) हैं,आइसोटोन नहीं।
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दिए गए परिपथ में प्रवाहित होने वाली धारा क्या है? दिया गया डायोड एक आदर्श डायोड है।
Question diagram
A
$0.1$ $A$
B
$100$ mA
C
$50$ mA
D
$10$ mA

Solution

(D) डायोड आदर्श है और अग्र-अभिनत (forward-biased) है क्योंकि एनोड पर विभव $(+6 \text{ V})$ कैथोड पर विभव $(+5 \text{ V})$ से अधिक है।
अग्र-अभिनति में,एक आदर्श डायोड शॉर्ट सर्किट (शून्य प्रतिरोध) के रूप में कार्य करता है।
अतः,परिपथ में प्रवाहित होने वाली धारा $I$ ओम के नियम द्वारा निर्धारित की जाती है:
$I = \frac{V_{\text{applied}}}{R} = \frac{6 \text{ V} - 5 \text{ V}}{100 \text{ } \Omega} = \frac{1 \text{ V}}{100 \text{ } \Omega} = 0.01 \text{ A} = 10 \text{ mA}$.
इसलिए,सही विकल्प $(D)$ है।
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जब एक $p-n$ जंक्शन पर रिवर्स बायस लगाया जाता है,तो यह . . . . . . .
A
बहुसंख्यक वाहक धारा को बढ़ाता है और विभव प्राचीर को कम करता है
B
बहुसंख्यक वाहक धारा को बढ़ाता है
C
विभव प्राचीर को कम करता है
D
विभव प्राचीर को बढ़ाता है

Solution

(D) जब एक $p-n$ जंक्शन पर रिवर्स बायस लगाया जाता है,तो बाहरी बैटरी का ऋणात्मक टर्मिनल $p$-क्षेत्र से और धनात्मक टर्मिनल $n$-क्षेत्र से जुड़ा होता है।
यह विन्यास अवक्षय परत (depletion layer) की चौड़ाई को बढ़ाता है।
जैसे-जैसे अवक्षय परत चौड़ी होती है,जंक्शन पर विभव प्राचीर (potential barrier) बढ़ जाता है,जिससे बहुसंख्यक आवेश वाहकों के लिए जंक्शन को पार करना अधिक कठिन हो जाता है।
अतः,सही विकल्प $D$ है।
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एक रेक्टिफायर में उपयोग किए जाने वाले फिल्टर सर्किट में लोड प्रतिरोध $200 \Omega$ और धारिता $15 \mu\text{F}$ है। समय नियतांक (time constant) का मान . . . . . . है।
A
$1.33 \text{ ms}$
B
$3 \text{ ms}$
C
$7.5 \text{ ms}$
D
$0.3 \mu\text{s}$

Solution

(B) $RC$ सर्किट के लिए समय नियतांक $\tau$ को प्रतिरोध $R$ और धारिता $C$ के गुणनफल के रूप में परिभाषित किया जाता है: $\tau = R \times C$.
दिए गए मान $R = 200 \Omega$ और $C = 15 \mu\text{F} = 15 \times 10^{-6} \text{ F}$ हैं।
इन मानों को सूत्र में रखने पर:
$\tau = 200 \Omega \times 15 \times 10^{-6} \text{ F}$
$\tau = 3000 \times 10^{-6} \text{ s}$
$\tau = 3 \times 10^{-3} \text{ s} = 3 \text{ ms}$.
अतः,सही विकल्प $(B)$ है।
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$r$ दूरी पर $2q$ बिंदु आवेश के कारण विद्युत क्षेत्र $E$ है। अब,यदि आवेश $q$ को $R$ त्रिज्या के एक पतले गोलीय कोश पर समान रूप से वितरित किया जाता है,तो पतले गोलीय कोश के केंद्र से $\frac{r}{2}$ $(r \gg R)$ दूरी पर विद्युत क्षेत्र $E'=$ . . . . . . होगा।
A
$4E$
B
$2E$
C
$E$
D
$\frac{E}{2}$

Solution

(B) $r$ दूरी पर स्थित $2q$ बिंदु आवेश के लिए,विद्युत क्षेत्र $E = k \frac{2q}{r^2}$ है।
$q$ आवेश और $R$ त्रिज्या वाले पतले गोलीय कोश के लिए,केंद्र से $r' = \frac{r}{2}$ दूरी पर विद्युत क्षेत्र ज्ञात करना है। यहाँ $r \gg R$ होने के कारण,$r' > R$ की स्थिति संतुष्ट होती है,जिसका अर्थ है कि कोश अपने केंद्र पर एक बिंदु आवेश की तरह व्यवहार करता है।
अतः,$E' = k \frac{q}{(r/2)^2} = k \frac{q}{r^2/4} = 4k \frac{q}{r^2}$ होगा।
प्रथम समीकरण से,$k \frac{q}{r^2} = \frac{E}{2}$ प्राप्त होता है।
इस मान को $E'$ के व्यंजक में रखने पर,$E' = 4 \times \frac{E}{2} = 2E$ प्राप्त होता है।
अतः,सही विकल्प $B$ है।
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$15$ आवेश,जिनमें प्रत्येक का मान $q$ है,$X$-अक्ष पर $0.5R$ की समान दूरी पर रखे गए हैं। $1.5R$ त्रिज्या वाले एक गोलीय बंद पृष्ठ,जिसके केंद्र में एक आवेश स्थित है,से संबद्ध विद्युत फ्लक्स क्या होगा?
A
$\frac{5q}{\epsilon_0}$
B
$\frac{7q}{\epsilon_0}$
C
शून्य
D
$\frac{15q}{\epsilon_0}$

Solution

(A) आवेश $X$-अक्ष पर $0.5R$ के अंतराल पर रखे गए हैं। चूँकि एक आवेश मूल बिंदु (गोले का केंद्र) पर स्थित है,इसलिए आवेशों की स्थितियाँ $x = 0, \pm 0.5R, \pm 1.0R, \pm 1.5R, \dots$ होंगी।
$1.5R$ त्रिज्या वाले गोलीय पृष्ठ के लिए,परिबद्ध आवेश वे हैं जो $x = 0, x = +0.5R, x = -0.5R, x = +1.0R$ और $x = -1.0R$ पर स्थित हैं।
कुल परिबद्ध आवेशों की संख्या $1 + 2 + 2 = 5$ है।
गॉस के नियम के अनुसार,विद्युत फ्लक्स $\phi = \frac{Q_{\text{enclosed}}}{\epsilon_0}$ होता है।
परिबद्ध आवेश का मान रखने पर,$\phi = \frac{5q}{\epsilon_0}$ प्राप्त होता है।
अतः,विकल्प $(A)$ सही है।
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गुरुत्वाकर्षण की अनुपस्थिति में,$q$ आवेश और $2m$ द्रव्यमान वाले एक कण को $E$ तीव्रता वाले एकसमान विद्युत क्षेत्र में स्थिर रखा गया है। जब आवेश को मुक्त किया जाता है,तो $n$ सेकंड के बाद इसकी गति . . . . . . होगी।
A
$2mqE$
B
$\frac{qEn}{m}$
C
$\frac{qEn}{2m}$
D
$\frac{2qEn}{m}$

Solution

(C) आवेश पर लगने वाला बल $F = qE$ है।
न्यूटन के गति के दूसरे नियम का उपयोग करते हुए,त्वरण $a = \frac{F}{M} = \frac{qE}{2m}$ प्राप्त होता है।
विराम अवस्था $(u = 0)$ से शुरू करते हुए,$n$ सेकंड के बाद गति $v$ को गति के समीकरण $v = u + at$ का उपयोग करके ज्ञात किया जा सकता है।
मान रखने पर,$v = 0 + (\frac{qE}{2m}) \times n = \frac{qEn}{2m}$ प्राप्त होता है।
अतः,सही विकल्प $C$ है।
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चित्र में दिखाए अनुसार,$+q, +q, -q$ और $-q$ आवेश एक वर्ग के शीर्षों पर रखे गए हैं,जिसकी प्रत्येक भुजा की लंबाई $2l$ है। $+q$ और $+q$ आवेशों के मध्य-बिंदु '$A$' पर विद्युत विभव . . . . . . है।
Question diagram
A
शून्य
B
$\frac{2kq}{l}[1+\frac{1}{\sqrt{5}}]$
C
$\frac{kq}{l}[1-\frac{1}{\sqrt{5}}]$
D
$\frac{2kq}{l}[1-\frac{1}{\sqrt{5}}]$

Solution

(D) बिंदु '$A$' ऊपर वाले $+q$ आवेश और नीचे वाले $+q$ आवेश से $l$ दूरी पर है।
बिंदु '$A$' से दोनों $-q$ आवेशों की दूरी $\sqrt{(2l)^2 + l^2} = \sqrt{4l^2 + l^2} = \sqrt{5l^2} = l\sqrt{5}$ है।
बिंदु '$A$' पर चारों आवेशों के कारण कुल विद्युत विभव $V$ प्रत्येक आवेश के विभव के योग के बराबर होता है:
$V_A = k(\frac{q}{l} + \frac{q}{l} - \frac{q}{l\sqrt{5}} - \frac{q}{l\sqrt{5}})$
$V_A = k(\frac{2q}{l} - \frac{2q}{l\sqrt{5}})$
$V_A = \frac{2kq}{l}(1 - \frac{1}{\sqrt{5}})$
अतः,विकल्प $(D)$ सही है।
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$1.6 \times 10^{-7} \text{ C}$ का आवेश $R$ त्रिज्या वाले एक गोलीय चालक की सतह पर समान रूप से वितरित है। गोलीय चालक के भीतर विद्युत विभव और सतह पर विद्युत क्षेत्र का अनुपात . . . . . . है।
A
$1.6 \times 10^{-7} R^2$
B
$R$
C
$1.6 \times 10^{-7} R$
D
$\frac{1}{R}$

Solution

(B) एक गोलीय चालक के भीतर विद्युत विभव $V$ स्थिर होता है और यह इसकी सतह पर विभव के बराबर होता है,जिसे $V = \frac{kq}{R}$ द्वारा दिया जाता है।
गोलीय चालक की सतह पर विद्युत क्षेत्र $E = \frac{kq}{R^2}$ द्वारा दिया जाता है।
भीतर के विद्युत विभव और सतह पर विद्युत क्षेत्र का अनुपात ज्ञात करने के लिए:
$\frac{V}{E} = \frac{kq/R}{kq/R^2} = \frac{kq}{R} \times \frac{R^2}{kq} = R$.
अतः,अनुपात $R$ है। विकल्प $(B)$ सही है।
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एक समांतर प्लेट संधारित्र की दो प्लेटों के बीच विभवांतर $2V$ है। चित्र में दिखाए अनुसार,इलेक्ट्रॉनों को बिंदु $P$ और $Q$ पर रखा गया है। तो,
Question diagram
A
दोनों इलेक्ट्रॉनों पर कार्य करने वाले विद्युत बल समान हैं।
B
बिंदु $P$ पर इलेक्ट्रॉन पर कार्य करने वाला विद्युत बल बिंदु $Q$ पर स्थित इलेक्ट्रॉन से अधिक है।
C
बिंदु $P$ पर इलेक्ट्रॉन पर कार्य करने वाला विद्युत बल बिंदु $Q$ पर स्थित इलेक्ट्रॉन से कम है।
D
दोनों इलेक्ट्रॉनों पर कार्य करने वाले विद्युत बल शून्य हैं।

Solution

(A) एक समांतर प्लेट संधारित्र में,प्लेटों के बीच विद्युत क्षेत्र एकसमान (uniform) होता है।
चूंकि बल का सूत्र $F = eE$ है,जहाँ $e$ इलेक्ट्रॉन का आवेश है और $E$ एकसमान विद्युत क्षेत्र है,इसलिए प्लेटों के बीच किसी भी बिंदु पर इलेक्ट्रॉन द्वारा अनुभव किया गया बल स्थिर रहता है।
अतः,बिंदु $P$ और $Q$ दोनों पर इलेक्ट्रॉनों पर कार्य करने वाले बल समान हैं।
इसलिए,विकल्प $(A)$ सही है।
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एक चालक जिसका अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल $A$ है और जिसमें $I$ धारा प्रवाहित हो रही है,उसमें इलेक्ट्रॉन का अपवाह वेग (drift velocity) $v_d$ है। अब,यदि चालक के अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल और प्रवाहित धारा दोनों को दोगुना कर दिया जाए,तो इलेक्ट्रॉन का नया अपवाह वेग . . . . . . होगा।
A
$\frac{v_d}{2}$
B
$\frac{v_d}{4}$
C
$4v_d$
D
$v_d$

Solution

(D) धारा $I$ और अपवाह वेग $v_d$ के बीच का संबंध $I = n e A v_d$ सूत्र द्वारा दिया जाता है,जहाँ $n$ इलेक्ट्रॉन घनत्व है और $e$ इलेक्ट्रॉन का आवेश है।
इससे,अपवाह वेग को $v_d = \frac{I}{neA}$ के रूप में व्यक्त किया जा सकता है।
दिया गया है कि नई धारा $I' = 2I$ और नया अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल $A' = 2A$ है,तो नया अपवाह वेग $v'_d$ इस प्रकार होगा:
$v'_d = \frac{I'}{neA'} = \frac{2I}{ne(2A)} = \frac{I}{neA} = v_d$.
अतः,अपवाह वेग अपरिवर्तित रहता है। विकल्प $(D)$ सही है।
31
PhysicsDifficultMCQGUJCET · 2025
चित्र में दिखाए अनुसार,व्हीटस्टोन ब्रिज की संतुलित स्थिति के लिए,$n$ का मान . . . . . . है।
Question diagram
A
$\frac{3}{2}$
B
$\frac{2}{5}$
C
$\frac{1}{2}$
D
$\frac{5}{2}$

Solution

(D) एक संतुलित व्हीटस्टोन ब्रिज में,विपरीत भुजाओं के प्रतिरोधों का अनुपात समान होता है।
चित्र से,ब्रिज की भुजाएँ $15 \Omega$,$10 \Omega$,$r \Omega$ और $r \Omega$ तथा $n \Omega$ का समानांतर संयोजन हैं।
मान लीजिए $R_1 = 15 \Omega$,$R_2 = 10 \Omega$,$R_3 = r \Omega$,और $R_4 = \frac{r \cdot n}{r + n} \Omega$ है।
व्हीटस्टोन ब्रिज के संतुलित होने की शर्त $\frac{R_1}{R_3} = \frac{R_2}{R_4}$ है।
मान रखने पर: $\frac{15}{r} = \frac{10}{\frac{rn}{r+n}}$.
इसे सरल करने पर: $\frac{15}{r} = \frac{10(r+n)}{rn}$.
दोनों तरफ से $r$ को हटाने पर: $15 = \frac{10(r+n)}{n}$.
$15n = 10r + 10n \implies 5n = 10r \implies n = 2r$.
यदि $r = 1.25 \Omega$ लिया जाए,तो $n = 2(1.25) = 2.5 = \frac{5}{2} \Omega$ प्राप्त होता है।
अतः,सही विकल्प $D$ है।
32
PhysicsDifficultMCQGUJCET · 2025
दिए गए परिपथ में,बिंदुओं $P$ और $Q$ के बीच विभवांतर . . . . . . है। ($\text{ V}$ में)
Question diagram
A
$128$
B
$20$
C
$96$
D
$60$

Solution

(B) यह परिपथ दो श्रेणीक्रम में जुड़े प्रतिरोधकों $R_1 = 64 \, \Omega$ और $R_2 = 32 \, \Omega$ वाला एक वोल्टेज विभाजक है,जो $60 \text{ V} - 0 \text{ V} = 60 \text{ V}$ के विभवांतर से जुड़ा है।
परिपथ का कुल प्रतिरोध $R_{eq} = R_1 + R_2 = 64 \, \Omega + 32 \, \Omega = 96 \, \Omega$ है।
परिपथ में प्रवाहित होने वाली धारा $I = \frac{V}{R_{eq}} = \frac{60 \text{ V}}{96 \, \Omega} = \frac{5}{8} \text{ A}$ है।
बिंदुओं $P$ और $Q$ के बीच विभवांतर $32 \, \Omega$ के प्रतिरोधक के सिरों पर वोल्टेज है।
$V_{PQ} = I \cdot R_2 = \left( \frac{5}{8} \text{ A} \right) \times 32 \, \Omega = 5 \times 4 = 20 \text{ V}$.
33
PhysicsDifficultMCQGUJCET · 2025
$R$ त्रिज्या वाली एक वृत्ताकार रिंग के केंद्र पर चुंबकीय क्षेत्र और उसके केंद्र से $2\sqrt{2}R$ की दूरी पर उसकी अक्ष पर स्थित बिंदु पर चुंबकीय क्षेत्र का अनुपात . . . . . . है।
A
$27:1$
B
$81:1$
C
$1:9$
D
$1:2\sqrt{2}$

Solution

(A) $I$ धारा वहन करने वाली वृत्ताकार रिंग के केंद्र पर चुंबकीय क्षेत्र $B_c = \frac{\mu_0 I}{2R}$ द्वारा दिया जाता है।
रिंग के केंद्र से $x$ दूरी पर उसकी अक्ष पर स्थित बिंदु पर चुंबकीय क्षेत्र $B_a = \frac{\mu_0 I R^2}{2(R^2+x^2)^{3/2}}$ द्वारा दिया जाता है।
यहाँ $x = 2\sqrt{2}R$ दिया गया है,इसलिए $(R^2+x^2)$ का मान:
$R^2 + x^2 = R^2 + (2\sqrt{2}R)^2 = R^2 + 8R^2 = 9R^2$.
इस मान को $B_a$ के सूत्र में रखने पर:
$B_a = \frac{\mu_0 I R^2}{2(9R^2)^{3/2}} = \frac{\mu_0 I R^2}{2(27R^3)} = \frac{\mu_0 I}{54R}$.
अब,$B_c/B_a$ का अनुपात:
$\frac{B_c}{B_a} = \frac{\mu_0 I}{2R} \div \frac{\mu_0 I}{54R} = \frac{54}{2} = 27$.
अतः,अभीष्ट अनुपात $27:1$ है।
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PhysicsMediumMCQGUJCET · 2025
मूविंग कॉइल गैल्वेनोमीटर की धारा सुग्राहिता (current sensitivity) का विमीय सूत्र क्या है?
A
$[L^2]$
B
$[M^1L^2T^{-2}A^{-1}]$
C
$[A^{-1}]$
D
$[M^1L^2T^{-2}]$

Solution

(C) धारा सुग्राहिता $I_s$ को प्रति इकाई धारा विक्षेप के रूप में परिभाषित किया जाता है,जो $I_s = \frac{\theta}{I} = \frac{NAB}{k}$ द्वारा दिया जाता है।
यहाँ,$N$ फेरों की संख्या है (विमाहीन),$A$ क्षेत्रफल $[L^2]$ है,$B$ चुंबकीय क्षेत्र है,और $k$ प्रति इकाई ऐंठन प्रत्यानयन बल आघूर्ण (restoring torque) है।
चुंबकीय क्षेत्र $B$ की विमाएँ $[MT^{-2}A^{-1}]$ हैं।
प्रत्यानयन बल आघूर्ण नियतांक $k$ की विमाएँ बल आघूर्ण के समान होती हैं,जो $[ML^2T^{-2}]$ है।
इन विमाओं को सूत्र में रखने पर: $[I_s] = \frac{[L^2] \cdot [MT^{-2}A^{-1}]}{[ML^2T^{-2}]}$।
व्यंजक को सरल करने पर: $[I_s] = \frac{L^2 MT^{-2}A^{-1}}{ML^2T^{-2}} = [A^{-1}]$।
अतः,धारा सुग्राहिता का विमीय सूत्र $[A^{-1}]$ है।
35
PhysicsMediumMCQGUJCET · 2025
एक निश्चित स्थान पर पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र का क्षैतिज घटक $3 \times 10^{-5} \text{T}$ है और क्षेत्र की दिशा भौगोलिक दक्षिण से भौगोलिक उत्तर की ओर है। एक बहुत लंबे सीधे चालक में $1 \text{A}$ की स्थिर धारा प्रवाहित हो रही है। जब इसे एक क्षैतिज मेज पर रखा जाता है और धारा की दिशा दक्षिण से उत्तर की ओर होती है,तो प्रति इकाई लंबाई पर लगने वाला बल क्या है?
A
शून्य
B
$1 \times 10^{-5} \text{Nm}^{-1}$
C
$6 \times 10^{-5} \text{Nm}^{-1}$
D
$9 \times 10^{-5} \text{Nm}^{-1}$

Solution

(A) चुंबकीय क्षेत्र $\vec{B}$ में धारा $I$ ले जाने वाले $L$ लंबाई के चालक पर बल $\vec{F} = I(\vec{L} \times \vec{B})$ द्वारा दिया जाता है।
प्रति इकाई लंबाई पर बल का परिमाण $f = I B \sin\theta$ है,जहाँ $\theta$ धारा की दिशा और चुंबकीय क्षेत्र के बीच का कोण है।
इस मामले में,चुंबकीय क्षेत्र $\vec{B}$ दक्षिण से उत्तर की ओर निर्देशित है,और धारा $I$ भी दक्षिण से उत्तर की ओर बह रही है।
इसलिए,धारा और चुंबकीय क्षेत्र के बीच का कोण $\theta = 0^\circ$ है।
चूंकि $\sin(0^\circ) = 0$,इसलिए प्रति इकाई लंबाई पर बल $f = I \times B \times \sin(0^\circ) = 0 \text{ N/m}$ होगा।
36
PhysicsMediumMCQGUJCET · 2025
'$a$' त्रिज्या वाले और '$I$' धारा ले जाने वाले एक बहुत लंबे सीधे चालक तार द्वारा उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र '$B$' है। तो,चुंबकीय क्षेत्र $(B)$ बनाम दूरी $(r)$ (तार की अक्ष के लंबवत) का ग्राफ . . . . . . है।
A
Option A
B
Option B
C
Option C
D
Option D

Solution

(B) '$a$' त्रिज्या वाले और '$I$' धारा ले जाने वाले एक लंबे बेलनाकार तार के लिए:
$1$. तार के अंदर $(r < a)$,चुंबकीय क्षेत्र $B = \frac{\mu_0 I r}{2\pi a^2}$ द्वारा दिया जाता है। यह दर्शाता है कि $B$,$r$ के सीधे आनुपातिक है $(B \propto r)$,जिसके परिणामस्वरूप केंद्र से सतह तक रैखिक वृद्धि होती है।
$2$. तार के बाहर $(r > a)$,चुंबकीय क्षेत्र $B = \frac{\mu_0 I}{2\pi r}$ द्वारा दिया जाता है। यह दर्शाता है कि $B$,$r$ के व्युत्क्रमानुपाती है $(B \propto 1/r)$,जिसके परिणामस्वरूप दूरी बढ़ने पर हाइपरबोलिक कमी होती है।
$3$. इन दोनों को मिलाने पर,ग्राफ $r = a$ तक रैखिक वृद्धि और $r > a$ के लिए हाइपरबोलिक कमी दिखाता है। यह ग्राफ $B$ के अनुरूप है।
37
PhysicsMediumMCQGUJCET · 2025
एक अनुचुंबकीय (paramagnetic) पदार्थ को एक असमान चुंबकीय क्षेत्र में रखा जाता है,तो
A
निरंतर घूर्णन करता है
B
कमजोर चुंबकीय क्षेत्र से मजबूत चुंबकीय क्षेत्र की ओर गति करता है
C
स्थिर रहता है
D
मजबूत चुंबकीय क्षेत्र से कमजोर चुंबकीय क्षेत्र की ओर गति करता है

Solution

(B) अनुचुंबकीय पदार्थों में छोटी धनात्मक चुंबकीय प्रवृत्ति (magnetic susceptibility) होती है। जब इन्हें एक असमान चुंबकीय क्षेत्र में रखा जाता है,तो ये उच्च चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता वाले क्षेत्र की ओर आकर्षित होते हैं। इसलिए,एक अनुचुंबकीय पदार्थ कमजोर चुंबकीय क्षेत्र वाले क्षेत्र से मजबूत चुंबकीय क्षेत्र वाले क्षेत्र की ओर गति करने की प्रवृत्ति रखता है।
38
PhysicsMediumMCQGUJCET · 2025
चित्र में दिखाए अनुसार,$r$ त्रिज्या वाले दो समान चालक छल्ले (rings) एक चुंबकीय क्षेत्र में रखे गए हैं। चित्र $(a)$ में चुंबकीय क्षेत्र $0.3 \text{ T/s}$ की दर से बढ़ रहा है और चित्र $(b)$ में चुंबकीय क्षेत्र $0.2 \text{ T/s}$ की दर से घट रहा है। ऊपर से देखने पर,छल्ले $(a)$ और छल्ले $(b)$ में धारा की दिशा . . . . . . है।
Question diagram
A
दक्षिणावर्त (Clockwise),वामावर्त (Anticlockwise)
B
वामावर्त,वामावर्त
C
दक्षिणावर्त,दक्षिणावर्त
D
वामावर्त,दक्षिणावर्त

Solution

(B) लेंज़ के नियम के अनुसार,प्रेरित धारा एक ऐसा चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करती है जो चुंबकीय फ्लक्स में होने वाले परिवर्तन का विरोध करता है।
चित्र $(a)$ में,चुंबकीय क्षेत्र पृष्ठ के अंदर की ओर $(\times)$ है और बढ़ रहा है। इस वृद्धि का विरोध करने के लिए,प्रेरित धारा को पृष्ठ के बाहर की ओर $(\bullet)$ चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करना होगा। दाहिने हाथ के नियम के अनुसार,बाहर की ओर चुंबकीय क्षेत्र वामावर्त (anticlockwise) धारा के अनुरूप होता है।
चित्र $(b)$ में,चुंबकीय क्षेत्र पृष्ठ के बाहर की ओर $(\bullet)$ है और घट रहा है। इस कमी का विरोध करने के लिए,प्रेरित धारा को उसी दिशा में (पृष्ठ के बाहर की ओर) चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करना होगा। यह भी वामावर्त (anticlockwise) धारा के अनुरूप है।
अतः,छल्ले $(a)$ और छल्ले $(b)$ दोनों में धारा की दिशा वामावर्त है।
39
PhysicsMediumMCQGUJCET · 2025
पास-पास स्थित कुंडलियों के एक युग्म का अन्योन्य प्रेरकत्व (mutual inductance) $2 \text{H}$ है। यदि एक कुंडली में धारा $0 \text{A}$ से बदलकर $0.15 \text{s}$ में $30 \text{A}$ हो जाती है,तो दूसरी कुंडली के साथ फ्लक्स लिंकेज में परिवर्तन क्या होगा ($\text{ Wb}$ में)?
A
$300$
B
$6$
C
$60$
D
$15$

Solution

(C) द्वितीयक कुंडली में चुंबकीय फ्लक्स लिंकेज $\phi$ और प्राथमिक कुंडली में प्रवाहित धारा $I$ के बीच संबंध $\phi = M I$ है,जहाँ $M$ अन्योन्य प्रेरकत्व है।
फ्लक्स लिंकेज में परिवर्तन $\Delta \phi$ ज्ञात करने के लिए,हम सूत्र $\Delta \phi = M \Delta I$ का उपयोग करते हैं।
दिया गया है:
अन्योन्य प्रेरकत्व $M = 2 \text{H}$.
धारा में परिवर्तन $\Delta I = I_f - I_i = 30 \text{A} - 0 \text{A} = 30 \text{A}$.
इन मानों को सूत्र में रखने पर:
$\Delta \phi = 2 \text{H} \times 30 \text{A} = 60 \text{ Wb}$.
अतः,दूसरी कुंडली के साथ फ्लक्स लिंकेज में परिवर्तन $60 \text{ Wb}$ है।
40
PhysicsMediumMCQGUJCET · 2025
एक $AC$ जनरेटर में,$t = 0$ पर प्रेरित emf $\varepsilon = 0$ है,तो इसका मान . . . . . .
A
समय $\frac{2\pi}{3\omega}$ पर न्यूनतम
B
समय $\frac{\pi}{2\omega}$ पर न्यूनतम
C
समय $\frac{2\pi}{\omega}$ पर अधिकतम
D
समय $\frac{\pi}{2\omega}$ पर अधिकतम

Solution

(D) एक $AC$ जनरेटर में प्रेरित emf समीकरण $\varepsilon = \varepsilon_0 \sin(\omega t)$ द्वारा दिया जाता है।
$t = 0$ पर,$\varepsilon = \varepsilon_0 \sin(0) = 0$ होता है।
emf अपना अधिकतम मान तब प्राप्त करता है जब $\sin(\omega t) = 1$ हो।
यह तब होता है जब $\omega t = \frac{\pi}{2}$ हो।
$t$ के लिए हल करने पर,हमें $t = \frac{\pi}{2\omega}$ प्राप्त होता है।
अतः,प्रेरित emf समय $t = \frac{\pi}{2\omega}$ पर अधिकतम होता है।

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