GUJCET 2019 Physics Question Paper with Answer and Solution in Hindi

29 QuestionsHindiWith Solutions

PhysicsQ129 of 29 questions

Page 1 of 1 · Hindi

1
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$\sqrt{\mu_{r} \varepsilon_{r}}$ का विमीय सूत्र . . . . . . है।
A
$M^{0} L^{-1} T^{1} A^{0}$
B
$M^{1} L^{-1} T^{1} A^{0}$
C
$M^{0} L^{1} T^{-1} A^{0}$
D
इनमें से कोई नहीं।

Solution

(D) किसी माध्यम का अपवर्तनांक $n$,निर्वात में प्रकाश की चाल $c$ और माध्यम में प्रकाश की चाल $v$ के अनुपात द्वारा दिया जाता है,अर्थात $n = \frac{c}{v}$।
हम जानते हैं कि $c = \frac{1}{\sqrt{\mu_{0} \varepsilon_{0}}}$ और $v = \frac{1}{\sqrt{\mu \varepsilon}} = \frac{1}{\sqrt{\mu_{0} \mu_{r} \varepsilon_{0} \varepsilon_{r}}}$ होता है।
इन मानों को प्रतिस्थापित करने पर,हमें $n = \frac{1/\sqrt{\mu_{0} \varepsilon_{0}}}{1/\sqrt{\mu_{0} \mu_{r} \varepsilon_{0} \varepsilon_{r}}} = \sqrt{\mu_{r} \varepsilon_{r}}$ प्राप्त होता है।
चूंकि अपवर्तनांक $n$ दो चालों का अनुपात है,इसलिए यह एक विमाहीन राशि है।
अतः,इसका विमीय सूत्र $M^{0} L^{0} T^{0} A^{0}$ है,जो विकल्पों में नहीं दिया गया है।
इस प्रकार,सही विकल्प $D$ है।
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स्प्रिंग के प्रभावी मरोड़ नियतांक (torsional constant) का विमीय सूत्र . . . . . . है।
A
$M^1 L^0 T^{-2}$
B
$M^1 L^2 T^{-2}$
C
$M^1 L^2 T^{-3}$
D
$M^0 L^0 T^0$

Solution

(B) स्प्रिंग या तार के लिए मरोड़ नियतांक $(k)$ को संबंध $\tau = k\theta$ द्वारा परिभाषित किया जाता है,जहाँ $\tau$ बलाघूर्ण (torque) है और $\theta$ रेडियन में कोणीय विस्थापन है।
चूंकि $\theta$ विमाहीन है,इसलिए मरोड़ नियतांक $(k)$ की विमाएँ बलाघूर्ण $(\tau)$ की विमाओं के समान होती हैं।
बलाघूर्ण को बल और लंबवत दूरी के गुणनफल के रूप में परिभाषित किया जाता है: $\tau = F \times d$।
बल $(F)$ का विमीय सूत्र $[M^1 L^1 T^{-2}]$ है।
दूरी $(d)$ का विमीय सूत्र $[L^1]$ है।
इसलिए,बलाघूर्ण $(\tau)$ का विमीय सूत्र $[M^1 L^1 T^{-2}] \times [L^1] = [M^1 L^2 T^{-2}]$ है।
अतः,प्रभावी मरोड़ नियतांक का विमीय सूत्र $[M^1 L^2 T^{-2}]$ है।
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$L-C-R$ श्रेणी $AC$ परिपथ में $L = 9 \ H$,$R = 10 \ \Omega$ और $C = 100 \ \mu F$ है। परिपथ का $Q$-फैक्टर . . . . . . है।
A
$35$
B
$25$
C
$45$
D
$30$

Solution

(D) $L-C-R$ श्रेणी परिपथ के लिए $Q$-फैक्टर (क्वालिटी फैक्टर) का सूत्र इस प्रकार है:
$Q = \frac{1}{R} \sqrt{\frac{L}{C}}$
दिए गए मान:
$L = 9 \ H$
$R = 10 \ \Omega$
$C = 100 \ \mu F = 100 \times 10^{-6} \ F = 10^{-4} \ F$
इन मानों को सूत्र में रखने पर:
$Q = \frac{1}{10} \sqrt{\frac{9}{10^{-4}}}$
$Q = \frac{1}{10} \times \frac{3}{10^{-2}}$
$Q = \frac{1}{10} \times 300$
$Q = 30$
अतः,सही विकल्प $D$ है।
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$j \omega L$ का विमीय सूत्र . . . . . . है। $Q$ को आवेश की विमा मानिए।
A
$M^{1} L^{2} T^{-1} Q^{-2}$
B
$M^{-1} L^{2} T^{-1} Q^{-2}$
C
$M^{1} L^{-2} T^{-1} Q^{-2}$
D
$M^{1} L^{2} T^{1} Q^{-2}$

Solution

(A) $j \omega L$ पद प्रेरणिक प्रतिघात $(X_L)$ को दर्शाता है,जिसकी विमा प्रतिरोध $(R)$ के समान होती है।
प्रतिरोध को $R = \frac{V}{I}$ के रूप में परिभाषित किया गया है।
चूंकि $V = \frac{W}{Q}$ (जहाँ $W$ कार्य/ऊर्जा है और $Q$ आवेश है) और $I = \frac{Q}{t}$ (जहाँ $t$ समय है),
$R = \frac{W/Q}{Q/t} = \frac{W \cdot t}{Q^2}$.
कार्य $(W)$ का विमीय सूत्र $[M^1 L^2 T^{-2}]$ है।
विमाओं को प्रतिस्थापित करने पर: $R = \frac{[M^1 L^2 T^{-2}] \cdot [T^1]}{[Q^2]} = [M^1 L^2 T^{-1} Q^{-2}]$.
अतः,सही विकल्प $A$ है।
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यदि एक $AC$,$LC$ श्रेणी परिपथ में $X_{C} > X_{L}$ है,तो विभव . . . . . . .
A
धारा से $\frac{\pi}{2}$ कला में आगे है।
B
धारा से $\frac{\pi}{2}$ कला में पीछे है।
C
धारा से $\pi$ कला में आगे है।
D
धारा से $\pi$ कला में पीछे है।

Solution

(B) $LC$ श्रेणी परिपथ में,कुल प्रतिघात (reactance) $X = X_{L} - X_{C}$ होता है।
दिया गया है कि $X_{C} > X_{L}$,इसलिए कुल प्रतिघात $X$ ऋणात्मक है,जिसका अर्थ है कि परिपथ की प्रकृति धारिता (capacitive) है।
एक शुद्ध धारिता परिपथ में,वोल्टेज धारा से $\frac{\pi}{2}$ के कला कोण से पीछे रहता है।
अतः,विभव धारा से $\frac{\pi}{2}$ कला में पीछे है।
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हाइड्रोजन परमाणु में इलेक्ट्रॉन की गतिज ऊर्जा $\frac{e^{2}}{8 \pi \varepsilon_{0} r}$ है। तो इसकी स्थितिज ऊर्जा . . . . . . है।
A
$\frac{e^{2}}{4 \pi \varepsilon_{0} r}$
B
$-\frac{e^{2}}{4 \pi \varepsilon_{0} r}$
C
$\frac{e^{2}}{8 \pi \varepsilon_{0} r}$
D
$-\frac{e^{2}}{8 \pi \varepsilon_{0} r}$

Solution

(B) हाइड्रोजन परमाणु में इलेक्ट्रॉन के लिए,स्थिर-वैद्युत स्थितिज ऊर्जा $U$ और गतिज ऊर्जा $K$ के बीच का संबंध विरियल प्रमेय द्वारा दिया जाता है।
$U = -2K$
दिया गया है कि गतिज ऊर्जा $K = \frac{e^{2}}{8 \pi \varepsilon_{0} r}$ है।
इस मान को संबंध में रखने पर:
$U = -2 \times \left( \frac{e^{2}}{8 \pi \varepsilon_{0} r} \right)$
$U = -\frac{e^{2}}{4 \pi \varepsilon_{0} r}$
अतः,स्थितिज ऊर्जा $-\frac{e^{2}}{4 \pi \varepsilon_{0} r}$ है।
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शंट तार . . . . . . होना चाहिए।
A
पतला और लंबा
B
मोटा और लंबा
C
मोटा और छोटा
D
पतला और छोटा

Solution

(C) गैल्वेनोमीटर की सुरक्षा के लिए शंट तार का प्रतिरोध बहुत कम होना चाहिए ताकि अधिकांश धारा उससे होकर गुजर सके।
प्रतिरोध के सूत्र $R = \frac{\rho l}{A}$ से,जहाँ $\rho$ प्रतिरोधकता है,$l$ लंबाई है,और $A$ अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल है।
$R$ को न्यूनतम करने के लिए,लंबाई $l$ कम होनी चाहिए और क्षेत्रफल $A$ अधिक (मोटा) होना चाहिए।
इसलिए,शंट तार मोटा और छोटा होना चाहिए।
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चित्र में दिखाए गए नेटवर्क में,बिंदुओं $X$ और $Y$ के बीच तुल्य प्रतिरोध . . . . . . $\Omega$ होगा। प्रत्येक प्रतिरोधक का मान $2 \Omega$ है।
Question diagram
A
$1$
B
$2$
C
$4$
D
$\frac{2}{3}$

Solution

(A) बिंदुओं $X$ और $Y$ के बीच तुल्य प्रतिरोध ज्ञात करने के लिए,हम समानांतर और श्रेणी संयोजनों की पहचान करके परिपथ को सरल बनाते हैं।
$1$. परिपथ को नोड्स की पहचान करके फिर से बनाया जा सकता है। मान लीजिए कि मध्य प्रतिरोधकों के बीच का नोड $Z$ है।
$2$. $X$ और $Z$ के बीच समानांतर में जुड़े प्रतिरोधकों का तुल्य प्रतिरोध $R_1 = \frac{2 \times 2}{2 + 2} = 1 \Omega$ है।
$3$. इसी प्रकार,$Z$ और $Y$ के बीच समानांतर में जुड़े प्रतिरोधकों का तुल्य प्रतिरोध $R_2 = \frac{2 \times 2}{2 + 2} = 1 \Omega$ है।
$4$. अब,$R_1$ और $R_2$ श्रेणी में हैं,इसलिए उनका तुल्य प्रतिरोध $R_3 = R_1 + R_2 = 1 + 1 = 2 \Omega$ है।
$5$. अंत में,यह $R_3$,$X$ और $Y$ के बीच सीधे जुड़े हुए शीर्ष $2 \Omega$ के प्रतिरोधक के साथ समानांतर में है। अतः,कुल तुल्य प्रतिरोध $R_{eq}$ है:
$R_{eq} = \frac{R_3 \times 2}{R_3 + 2} = \frac{2 \times 2}{2 + 2} = \frac{4}{4} = 1 \Omega$.
Solution diagram
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किसी दिए गए तापमान पर एक चालक से विद्युत धारा प्रवाहित करने पर प्रति इकाई समय में उत्पन्न ऊष्मा . . . . . . के सीधे आनुपातिक होती है।
A
विद्युत धारा का वर्ग
B
विद्युत धारा
C
विद्युत धारा का व्युत्क्रम
D
विद्युत धारा के वर्ग का व्युत्क्रम

Solution

(A) एक चालक में प्रति इकाई समय में उत्पन्न ऊष्मा को चालक में व्यय होने वाली विद्युत शक्ति $P$ के रूप में परिभाषित किया जाता है।
जूल के तापन नियम के अनुसार,व्यय होने वाली शक्ति का सूत्र है:
$P = I^2 R$
जहाँ $I$ विद्युत धारा है और $R$ चालक का प्रतिरोध है।
चूंकि तापमान स्थिर है,इसलिए प्रतिरोध $R$ स्थिर रहता है।
अतः,प्रति इकाई समय में उत्पन्न ऊष्मा विद्युत धारा के वर्ग के सीधे आनुपातिक होती है $(P \propto I^2)$।
इस प्रकार,सही विकल्प $A$ है।
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एक विद्युत द्विध्रुव (electric dipole) को एक असमान विद्युत क्षेत्र में रखा जाता है,तो . . . . . . ।
A
द्विध्रुव पर कार्य करने वाला परिणामी बल शून्य हो सकता है।
B
द्विध्रुव पर कार्य करने वाला परिणामी बल हमेशा शून्य होता है।
C
इस पर कार्य करने वाला बल आघूर्ण (torque) शून्य हो सकता है।
D
इस पर कार्य करने वाला बल आघूर्ण हमेशा शून्य होता है।

Solution

(C) एक असमान विद्युत क्षेत्र में,विद्युत क्षेत्र की तीव्रता अलग-अलग बिंदुओं पर भिन्न होती है।
एक विद्युत द्विध्रुव के लिए,धनात्मक आवेश $(+q)$ पर बल $F_+ = qE_+$ और ऋणात्मक आवेश $(-q)$ पर बल $F_- = -qE_-$ होता है।
परिणामी बल $F_{net} = q(E_+ - E_-)$ है। चूंकि क्षेत्र असमान है,$E_+ \neq E_-$,इसलिए परिणामी बल आमतौर पर शून्य नहीं होता है।
हालाँकि,यदि द्विध्रुव को इस प्रकार रखा जाए कि दोनों आवेशों पर क्षेत्र की तीव्रता समान हो (भले ही क्षेत्र अन्य स्थानों पर असमान हो),तो परिणामी बल शून्य हो सकता है।
बल आघूर्ण के संबंध में,$\tau = p \times E$। यदि द्विध्रुव आघूर्ण $p$,द्विध्रुव के स्थान पर विद्युत क्षेत्र $E$ के समानांतर या प्रति-समानांतर है,तो बल आघूर्ण $\tau = pE \sin(\theta)$ शून्य हो जाता है क्योंकि $\theta = 0^\circ$ या $180^\circ$ होता है।
अतः,द्विध्रुव पर कार्य करने वाला बल आघूर्ण शून्य हो सकता है।
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$1 \ m$ भुजा वाले एक नियमित षट्कोण के पाँच कोनों पर प्रत्येक $1 \mu C$ का आवेश रखा गया है। इसके केंद्र पर विद्युत क्षेत्र . . . . . . $N$/$C$ है।
A
$\frac{6}{5} \times 10^{-6} k$
B
$\frac{5}{6} \times 10^{-6} k$
C
$5 \times 10^{-6} k$
D
$10^{-6} k$

Solution

(D) एक नियमित षट्कोण में,प्रत्येक कोने से केंद्र तक की दूरी षट्कोण की भुजा की लंबाई के बराबर होती है,$r = 1 \ m$।
मान लीजिए कि कोने $A, B, C, D, E, F$ हैं और कोने $F$ पर आवेश अनुपस्थित है।
किसी कोने पर आवेश $q$ के कारण विद्युत क्षेत्र $E = \frac{kq}{r^2}$ होता है,जो आवेश से दूर की दिशा में होता है।
कोने $A$ पर आवेश $(E_A)$ और कोने $D$ पर आवेश $(E_D)$ के कारण विद्युत क्षेत्र परिमाण में समान और दिशा में विपरीत होते हैं,इसलिए वे एक-दूसरे को निरस्त कर देते हैं।
इसी प्रकार,कोने $B$ $(E_B)$ और कोने $E$ $(E_E)$ पर आवेश के कारण विद्युत क्षेत्र परिमाण में समान और दिशा में विपरीत होते हैं,इसलिए वे एक-दूसरे को निरस्त कर देते हैं।
केंद्र पर परिणामी विद्युत क्षेत्र केवल कोने $C$ पर स्थित आवेश के कारण होगा।
$E_{net} = E_C = \frac{kq}{r^2}$
यहाँ $q = 1 \mu C = 10^{-6} \ C$ और $r = 1 \ m$ दिया गया है:
$E_{net} = \frac{k \times 10^{-6}}{(1)^2} = 10^{-6} k \ N/C$।
Solution diagram
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$4 Q$ और $-2 Q$ आवेश वाले दो गोलों को एक निश्चित दूरी पर रखने पर उनके बीच लगने वाला बल $F$ है। अब उन्हें एक चालक तार से जोड़ा जाता है और फिर से अलग कर दिया जाता है। अब उन्हें पिछली दूरी की आधी दूरी पर रखा जाता है। उनके बीच लगने वाला बल . . . . . . है।
A
$\frac{F}{2}$
B
$F$
C
$\frac{F}{4}$
D
$\frac{F}{8}$

Solution

(A) कूलम्ब के नियम के अनुसार गोलों के बीच प्रारंभिक बल:
$F = \frac{k(4Q)(2Q)}{r^2} = \frac{8kQ^2}{r^2} \quad \dots(1)$
जब गोलों को एक चालक तार से जोड़ा जाता है,तो कुल आवेश उनके बीच समान रूप से पुनर्वितरित हो जाता है:
$Q_{new} = \frac{4Q + (-2Q)}{2} = \frac{2Q}{2} = Q$
अब,नई दूरी $r' = \frac{r}{2}$ है। नया बल $F'$ इस प्रकार है:
$F' = \frac{k(Q)(Q)}{(r/2)^2} = \frac{kQ^2}{r^2/4} = \frac{4kQ^2}{r^2}$
समीकरण $(1)$ से,हम जानते हैं कि $\frac{kQ^2}{r^2} = \frac{F}{8}$।
इस मान को $F'$ के व्यंजक में रखने पर:
$F' = 4 \times \left(\frac{F}{8}\right) = \frac{F}{2}$
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$200 \ cm^2$ क्षेत्रफल और $25$ फेरों वाली एक कुंडली को $0.02 \ Wb/m^2$ तीव्रता वाले चुंबकीय क्षेत्र के लंबवत रखा गया है। कुंडली का प्रतिरोध $1 \ \Omega$ है। यदि इसे $1 \ s$ में चुंबकीय क्षेत्र से हटा दिया जाता है,तो कुंडली में प्रेरित आवेश . . . . . . $C$ होगा।
A
$0.1$
B
$1.0$
C
$0.01$
D
$0.001$

Solution

(C) कुंडली में प्रेरित आवेश $Q$ का सूत्र $Q = \frac{\Delta \phi}{R}$ है,जहाँ $\Delta \phi$ चुंबकीय फ्लक्स में परिवर्तन है और $R$ कुंडली का प्रतिरोध है।
दिया गया है:
फेरों की संख्या $N = 25$
क्षेत्रफल $A = 200 \ cm^2 = 200 \times 10^{-4} \ m^2 = 0.02 \ m^2$
चुंबकीय क्षेत्र $B = 0.02 \ Wb/m^2$
प्रतिरोध $R = 1 \ \Omega$
समय $t = 1 \ s$
प्रारंभिक फ्लक्स $\phi_i = N B A \cos(0^\circ) = 25 \times 0.02 \times 0.02 = 0.01 \ Wb$
अंतिम फ्लक्स $\phi_f = 0 \ Wb$ (क्योंकि इसे क्षेत्र से हटा दिया जाता है)
फ्लक्स में परिवर्तन $\Delta \phi = |\phi_f - \phi_i| = 0.01 \ Wb$
प्रेरित आवेश $Q = \frac{\Delta \phi}{R} = \frac{0.01 \ Wb}{1 \ \Omega} = 0.01 \ C$.
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$2 \, m$ त्रिज्या वाला एक पहिया, जिसमें $8$ संकेंद्रित चालक स्पोक्स (spokes) हैं, अपने ज्यामितीय अक्ष के परितः $10 \, rad \, s^{-1}$ के कोणीय वेग से $0.2 \, T$ के एकसमान चुंबकीय क्षेत्र में अपने तल के लंबवत घूम रहा है। पहिये की रिम और केंद्र के बीच प्रेरित emf का मान . . . . . . $V$ है।
A
$4$
B
$2$
C
$6$
D
$8$

Solution

(A) चुंबकीय क्षेत्र में घूमते हुए चालक स्पोक में प्रेरित इलेक्ट्रोमोटिव फोर्स $(\varepsilon)$ का सूत्र है: $\varepsilon = \frac{1}{2} B \omega R^2$.
दिए गए मान हैं:
चुंबकीय क्षेत्र $(B)$ = $0.2 \, T$
कोणीय वेग $(\omega)$ = $10 \, rad \, s^{-1}$
त्रिज्या $(R)$ = $2 \, m$
इन मानों को सूत्र में रखने पर:
$\varepsilon = \frac{1}{2} \times 0.2 \times 10 \times (2)^2$
$\varepsilon = 0.1 \times 10 \times 4$
$\varepsilon = 4 \, V$
स्पोक्स की संख्या रिम और केंद्र के बीच विभवांतर को प्रभावित नहीं करती है, क्योंकि वे समानांतर क्रम में जुड़े होते हैं।
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$X$-किरणों के लिए तरंगदैर्ध्य की सीमा . . . . . . से है।
A
$1 \, mm$ से $700 \, nm$
B
$700 \, nm$ से $400 \, nm$
C
$400 \, nm$ से $1 \, nm$
D
$1 \, nm$ से $10^{-3} \, nm$

Solution

(D) विद्युतचुंबकीय स्पेक्ट्रम तरंगों को उनकी तरंगदैर्ध्य और आवृत्ति के आधार पर वर्गीकृत करता है। $X$-किरणें उच्च-ऊर्जा वाली विद्युतचुंबकीय तरंगें हैं जो पराबैंगनी किरणों और गामा किरणों के बीच के क्षेत्र में स्थित होती हैं। $X$-किरणों के लिए तरंगदैर्ध्य की विशिष्ट सीमा लगभग $1 \, nm$ से $10^{-3} \, nm$ ($0.1 \, \text{\AA}$ से $10 \, \text{\AA}$) होती है। अतः, विकल्प $D$ सही उत्तर है।
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एक गतिशील धनात्मक आवेश एक ऋणात्मक आवेश के करीब आता है। निकाय की स्थितिज ऊर्जा का क्या होगा?
A
बढ़ेगी
B
स्थिर रहेगी
C
घटेगी
D
बढ़ या घट सकती है

Solution

(C) $r$ दूरी पर स्थित दो बिंदु आवेशों $q_1$ और $q_2$ के निकाय की स्थिर-वैद्युत स्थितिज ऊर्जा $U$ का सूत्र $U = \frac{k q_1 q_2}{r}$ है।
यहाँ,आवेश $q_1 = +q$ और $q_2 = -q$ हैं। अतः,स्थितिज ऊर्जा $U = \frac{k(q)(-q)}{r} = -\frac{k q^2}{r}$ होगी।
जैसे-जैसे धनात्मक आवेश ऋणात्मक आवेश के करीब आता है,उनके बीच की दूरी $r$ कम होती जाती है।
चूंकि $r$ हर (denominator) में है और स्थितिज ऊर्जा ऋणात्मक है,इसलिए जैसे-जैसे $r$ घटता है,ऋणात्मक मान का परिमाण बढ़ता है,जिसका अर्थ है कि $U$ का मान और अधिक ऋणात्मक हो जाता है।
अतः,निकाय की स्थितिज ऊर्जा घट जाएगी।
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चित्र में,प्रत्येक प्लेट का क्षेत्रफल $A$ है और क्रमिक प्लेटों के बीच की दूरी चित्र में दर्शाई गई है। बिंदु $A$ और $B$ के बीच प्रभावी धारिता क्या है?
Question diagram
A
$\frac{2 A \varepsilon_0}{d}$
B
$\frac{A \varepsilon_0}{d}$
C
$\frac{3 A \varepsilon_0}{d}$
D
$\frac{4 A \varepsilon_0}{d}$

Solution

(A) दी गई प्रणाली चार प्लेटों से बनी है। मान लीजिए कि प्लेटों को ऊपर से नीचे $1, 2, 3, 4$ क्रमांकित किया गया है।
चित्र से,प्लेट $1$ और $3$ बिंदु $A$ से जुड़ी हैं,और प्लेट $2$ और $4$ बिंदु $B$ से जुड़ी हैं।
यह तीन समानांतर प्लेट संधारित्र बनाती है जो समानांतर क्रम में जुड़े हुए हैं:
$1$. प्लेट $1$ और $2$ द्वारा निर्मित संधारित्र,जिसका पृथक्करण $2d$ है: $C_1 = \frac{A \varepsilon_0}{2d}$
$2$. प्लेट $2$ और $3$ द्वारा निर्मित संधारित्र,जिसका पृथक्करण $d$ है: $C_2 = \frac{A \varepsilon_0}{d}$
$3$. प्लेट $3$ और $4$ द्वारा निर्मित संधारित्र,जिसका पृथक्करण $2d$ है: $C_3 = \frac{A \varepsilon_0}{2d}$
चूंकि ये संधारित्र समानांतर क्रम में जुड़े हैं,इसलिए समतुल्य धारिता $C_{AB}$ होगी:
$C_{AB} = C_1 + C_2 + C_3$
$C_{AB} = \frac{A \varepsilon_0}{2d} + \frac{A \varepsilon_0}{d} + \frac{A \varepsilon_0}{2d}$
$C_{AB} = \frac{A \varepsilon_0 + 2A \varepsilon_0 + A \varepsilon_0}{2d} = \frac{4A \varepsilon_0}{2d} = \frac{2A \varepsilon_0}{d}$
अतः,सही विकल्प $(A)$ है।
Solution diagram
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ध्रुवण की तीव्रता (Intensity of polarization) का मात्रक . . . . . . है।
A
$C^2/m$
B
$C/m^2$
C
$C^2/m^2$
D
$m^2/C$

Solution

(B) ध्रुवण की तीव्रता $P$ को प्रति इकाई आयतन द्विध्रुव आघूर्ण के रूप में परिभाषित किया गया है।
$P = \frac{p_{\text{total}}}{V} = \frac{q \cdot d}{A \cdot d} = \frac{q}{A}$
चूंकि आवेश $q$ का मात्रक कूलम्ब $(C)$ है और क्षेत्रफल $A$ का मात्रक वर्ग मीटर $(m^2)$ है,इसलिए ध्रुवण की तीव्रता का मात्रक $C/m^2$ होता है।
अतः,सही विकल्प $B$ है।
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Alnico . . . . . . की एक मिश्रधातु है।
A
Al,Ni,As,$P$
B
$Al, Ni, Cu, P$
C
$Al, Ni, Cu, Co$
D
$Al, As, P, Pt$

Solution

(C) सही विकल्प $C$ है।
Alnico लौह मिश्र धातुओं का एक परिवार है जो मुख्य रूप से एल्युमीनियम $(Al)$,निकल $(Ni)$,तांबा $(Cu)$,और कोबाल्ट $(Co)$ से बना होता है।
अपनी उच्च कोर्सिविटी और रिमेनेंस के कारण इसका उपयोग स्थायी चुंबक बनाने के लिए व्यापक रूप से किया जाता है।
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एक इलेक्ट्रॉन का जाइरोमैग्नेटिक अनुपात,इलेक्ट्रॉन के विशिष्ट आवेश का . . . . . . गुना होता है।
A
$1/2$
B
$1$
C
$2$
D
$4$

Solution

(A) जाइरोमैग्नेटिक अनुपात को एक इलेक्ट्रॉन के चुंबकीय द्विध्रुव आघूर्ण $\mu$ और कोणीय संवेग $L$ के अनुपात के रूप में परिभाषित किया जाता है।
नाभिक के चारों ओर परिक्रमा करने वाले इलेक्ट्रॉन के लिए,$\mu = \frac{e}{2m} L$ होता है।
इसलिए,जाइरोमैग्नेटिक अनुपात $\gamma = \frac{\mu}{L} = \frac{e}{2m}$ प्राप्त होता है।
इलेक्ट्रॉन का विशिष्ट आवेश $\frac{e}{m}$ के रूप में परिभाषित होता है।
इन दोनों व्यंजकों की तुलना करने पर,हमें $\gamma = \frac{1}{2} \times (\frac{e}{m})$ प्राप्त होता है।
अतः,जाइरोमैग्नेटिक अनुपात इलेक्ट्रॉन के विशिष्ट आवेश का $1/2$ गुना होता है।
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एक बहुत लंबी परिनालिका (solenoid) में प्रति $cm$ लंबाई में $50$ फेरे हैं। इसमें $2.5 \ A$ की धारा प्रवाहित हो रही है। इसकी अक्ष पर इसके केंद्र में चुंबकीय क्षेत्र . . . . . . $T$ है।
A
$2 \pi \times 10^{-3}$
B
$5 \pi \times 10^{-3}$
C
$6 \pi \times 10^{-3}$
D
$4 \pi \times 10^{-3}$

Solution

(B) एक लंबी परिनालिका के केंद्र में चुंबकीय क्षेत्र $B$ का सूत्र $B = \mu_0 n I$ है,जहाँ $n$ प्रति इकाई लंबाई में फेरों की संख्या है और $I$ विद्युत धारा है।
दिया गया है:
प्रति इकाई लंबाई में फेरों की संख्या $n = 50 \text{ फेरे/cm} = 50 \times 10^2 \text{ फेरे/m} = 5000 \text{ फेरे/m}$.
धारा $I = 2.5 \ A$.
निर्वात की पारगम्यता $\mu_0 = 4 \pi \times 10^{-7} \ T \cdot m/A$.
मान रखने पर:
$B = (4 \pi \times 10^{-7}) \times (5000) \times (2.5)$
$B = 4 \pi \times 10^{-7} \times 12500$
$B = 4 \pi \times 1.25 \times 10^{-3}$
$B = 5 \pi \times 10^{-3} \ T$.
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यदि ${}_{13}^{27}Al$ और ${}_{30}^{64}Zn$ नाभिकों की त्रिज्याएँ क्रमशः $R_{1}$ और $R_{2}$ हैं,तो $\frac{R_{1}}{R_{2}} = $
A
$\frac{64}{27}$
B
$\frac{3}{4}$
C
$\frac{27}{64}$
D
$\frac{4}{3}$

Solution

(B) नाभिक की त्रिज्या का सूत्र $R = R_{0} A^{1/3}$ है,जहाँ $A$ द्रव्यमान संख्या है और $R_{0}$ एक स्थिरांक है।
${}_{13}^{27}Al$ के लिए,द्रव्यमान संख्या $A_{1} = 27$ है।
${}_{30}^{64}Zn$ के लिए,द्रव्यमान संख्या $A_{2} = 64$ है।
त्रिज्याओं का अनुपात लेने पर:
$\frac{R_{1}}{R_{2}} = \frac{R_{0} A_{1}^{1/3}}{R_{0} A_{2}^{1/3}} = \left(\frac{A_{1}}{A_{2}}\right)^{1/3}$
मान रखने पर:
$\frac{R_{1}}{R_{2}} = \left(\frac{27}{64}\right)^{1/3}$
चूँकि $27 = 3^{3}$ और $64 = 4^{3}$,इसलिए:
$\frac{R_{1}}{R_{2}} = \left(\frac{3^{3}}{4^{3}}\right)^{1/3} = \frac{3}{4}$
अतः,सही विकल्प $B$ है।
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यदि एक खगोलीय दूरदर्शी की नली की लंबाई $96 \ cm$ है और सामान्य समायोजन के लिए आवर्धन क्षमता $15$ है,तो अभिदृश्यक (objective) की फोकस दूरी . . . . . . $cm$ है।
A
$92$
B
$105$
C
$90$
D
$100$

Solution

(C) सामान्य समायोजन में खगोलीय दूरदर्शी के लिए,नली की लंबाई $L = f_o + f_e = 96 \ cm$ होती है।
आवर्धन क्षमता $m = \frac{f_o}{f_e} = 15$ है।
दूसरे समीकरण से,$f_e = \frac{f_o}{15}$ प्राप्त होता है।
इस मान को पहले समीकरण में रखने पर: $f_o + \frac{f_o}{15} = 96$.
$\frac{16 f_o}{15} = 96$.
$f_o = \frac{96 \times 15}{16} = 6 \times 15 = 90 \ cm$.
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$4 \ cm$ मोटाई और $1.5$ अपवर्तनांक वाले स्लैब से सूर्य के प्रकाश को गुजरने में लगा समय . . . . . . $s$ है।
A
$2 \times 10^{-11}$
B
$2 \times 10^{-10}$
C
$2 \times 10^{-12}$
D
$2 \times 10^{-8}$

Solution

(B) अपवर्तनांक $n$ को निर्वात में प्रकाश की गति $c$ और माध्यम में प्रकाश की गति $v$ के अनुपात के रूप में परिभाषित किया गया है,जो $n = \frac{c}{v}$ है।
चूंकि गति $v$ प्रति इकाई समय $t$ में तय की गई दूरी $d$ है,इसलिए $v = \frac{d}{t}$ होता है।
इसे अपवर्तनांक के सूत्र में प्रतिस्थापित करने पर: $n = \frac{c}{d/t} = \frac{ct}{d}$.
समय $t$ के लिए सूत्र को व्यवस्थित करने पर: $t = \frac{nd}{c}$.
दिया गया है: $n = 1.5$,$d = 4 \ cm = 4 \times 10^{-2} \ m$,और $c = 3 \times 10^{8} \ m/s$.
मान रखने पर: $t = \frac{1.5 \times 4 \times 10^{-2}}{3 \times 10^{8}}$.
$t = \frac{6 \times 10^{-2}}{3 \times 10^{8}} = 2 \times 10^{-10} \ s$.
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$1.5$ अपवर्तनांक वाले पदार्थ से बने एक पतले लेंस की फोकस दूरी $15 \ cm$ है। जब इसे $\frac{4}{3}$ अपवर्तनांक वाले द्रव में रखा जाता है,तो इसकी फोकस दूरी $..........\ cm$ होगी।
A
$78.23$
B
$80.31$
C
$50$
D
$60$

Solution

(D) लेंस मेकर सूत्र $\frac{1}{f} = (n_{rel} - 1) \left( \frac{1}{R_1} - \frac{1}{R_2} \right)$ है,जहाँ $n_{rel} = \frac{n_{lens}}{n_{medium}}$ है।
वायु में $(n_a = 1)$: $\frac{1}{15} = (1.5 - 1) \left( \frac{1}{R_1} - \frac{1}{R_2} \right) = 0.5 \left( \frac{1}{R_1} - \frac{1}{R_2} \right)$.
अतः,$\left( \frac{1}{R_1} - \frac{1}{R_2} \right) = \frac{1}{15 \times 0.5} = \frac{1}{7.5} \ cm^{-1}$.
द्रव में $(n_w = \frac{4}{3})$: $\frac{1}{f_w} = \left( \frac{1.5}{4/3} - 1 \right) \left( \frac{1}{R_1} - \frac{1}{R_2} \right)$.
$\frac{1}{f_w} = \left( \frac{4.5}{4} - 1 \right) \left( \frac{1}{7.5} \right) = \left( \frac{0.5}{4} \right) \left( \frac{1}{7.5} \right) = \frac{1}{8} \times \frac{1}{7.5} = \frac{1}{60}$.
अतः,$f_w = 60 \ cm$.
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$pn$ जंक्शन के लिए,स्पेस चार्ज क्षेत्र (space charge region) की चौड़ाई लगभग $\qquad$ $\mu m$ होती है।
A
$0.5$
B
$6$
C
$5$
D
$0.05$

Solution

(A) स्पेस चार्ज क्षेत्र,जिसे अवक्षय परत (depletion layer) के रूप में भी जाना जाता है,$p$-प्रकार और $n$-प्रकार के अर्धचालकों के इंटरफ़ेस पर बनता है।
एक सामान्य $pn$ जंक्शन डायोड में,इस अवक्षय परत की चौड़ाई बहुत कम होती है।
यह आमतौर पर $10^{-6} \ m$ की कोटि का होता है,जो $1 \ \mu m$ के बराबर है।
विशेष रूप से,अवक्षय क्षेत्र की चौड़ाई आमतौर पर $0.1 \ \mu m$ से $1 \ \mu m$ की सीमा में होती है।
दिए गए विकल्पों में से,$0.5 \ \mu m$ स्पेस चार्ज क्षेत्र की विशिष्ट चौड़ाई का प्रतिनिधित्व करने वाला सबसे उपयुक्त मान है।
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$p-n$ जंक्शन के लिए,विद्युत क्षेत्र की तीव्रता $1 \times 10^{6} \text{ V/m}$ है और अवक्षय परत (depletion region) की चौड़ाई $5000 \text{ Å}$ है। विभव प्राचीर (potential barrier) का मान $\dots \text{ V}$ है।
A
$0.05$
B
$0.005$
C
$0.5$
D
$5$

Solution

(C) विभव प्राचीर $V$,विद्युत क्षेत्र $E$ और अवक्षय परत की चौड़ाई $d$ से सूत्र $V = E \cdot d$ द्वारा संबंधित है।
दिया गया है:
विद्युत क्षेत्र $E = 1 \times 10^{6} \text{ V/m}$
चौड़ाई $d = 5000 \text{ Å} = 5000 \times 10^{-10} \text{ m} = 5 \times 10^{-7} \text{ m}$
मान रखने पर:
$V = (1 \times 10^{6} \text{ V/m}) \times (5 \times 10^{-7} \text{ m})$
$V = 5 \times 10^{-1} \text{ V}$
$V = 0.5 \text{ V}$
अतः,सही विकल्प $C$ है।
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विवर्तन पैटर्न में केंद्रीय उच्चिष्ठ का कोणीय विस्तार . . . . . . पर निर्भर नहीं करता है।
A
प्रकाश की तरंगदैर्घ्य
B
स्लिट और स्रोत के बीच की दूरी
C
स्लिट की चौड़ाई
D
प्रकाश की आवृत्ति

Solution

(B) एक-स्लिट विवर्तन पैटर्न में केंद्रीय उच्चिष्ठ की कोणीय चौड़ाई का सूत्र $\theta = \frac{2\lambda}{a}$ है,जहाँ $\lambda$ प्रकाश की तरंगदैर्घ्य है और $a$ स्लिट की चौड़ाई है।
चूंकि आवृत्ति $f$,तरंगदैर्घ्य से $\lambda = \frac{c}{f}$ द्वारा संबंधित है,इसलिए कोणीय चौड़ाई आवृत्ति पर भी निर्भर करती है।
यह सूत्र दर्शाता है कि कोणीय विस्तार तरंगदैर्घ्य (और इस प्रकार आवृत्ति) और स्लिट की चौड़ाई पर निर्भर करता है।
यह स्लिट और स्रोत के बीच की दूरी या स्लिट और स्क्रीन के बीच की दूरी पर निर्भर नहीं करता है।
अतः,सही विकल्प $B$ है।
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यंग के प्रयोग में $5000 \ \mathring{A}$ तरंगदैर्ध्य के प्रकाश द्वारा उत्पन्न चौथी दीप्त फ्रिंज,एक अज्ञात तरंगदैर्ध्य की पांचवीं दीप्त फ्रिंज पर अध्यारोपित होती है। अज्ञात तरंगदैर्ध्य . . . . . . $\mathring{A}$ है।
A
$5000$
B
$4000$
C
$6000$
D
$8000$

Solution

(B) यंग के द्वि-स्लिट प्रयोग में $n$-वीं दीप्त फ्रिंज के लिए शर्त $y_n = \frac{n \lambda D}{d}$ द्वारा दी जाती है।
चूंकि फ्रिंज अध्यारोपित होती हैं,इसलिए उनकी स्थितियां समान होनी चाहिए: $y_4 = y_5$।
अतः,$n_1 \lambda_1 = n_2 \lambda_2$।
दिया गया है $n_1 = 4$,$\lambda_1 = 5000 \ \mathring{A}$,और $n_2 = 5$।
मान रखने पर: $4 \times 5000 = 5 \times \lambda_2$।
$\lambda_2 = \frac{4 \times 5000}{5} = 4000 \ \mathring{A}$।

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