TS EAMCET 2024 Chemistry Question Paper with Answer and Solution in Hindi

241 QuestionsHindiWith Solutions

ChemistryQ51150 of 241 questions

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वर्नियर कैलिपर्स द्वारा मापे गए एक खोखले बेलन के आंतरिक और बाह्य व्यास क्रमशः $(5.73 \pm 0.01) \text{ cm}$ और $(6.01 \pm 0.01) \text{ cm}$ हैं। तो बेलन की दीवार की मोटाई क्या होगी?
A
$(0.28 \pm 0.01) \text{ cm}$
B
$(0.28 \pm 0.02) \text{ cm}$
C
$(0.14 \pm 0.02) \text{ cm}$
D
$(0.14 \pm 0.01) \text{ cm}$

Solution

(D) दिया गया है:
आंतरिक व्यास $d = (5.73 \pm 0.01) \text{ cm}$
बाह्य व्यास $D = (6.01 \pm 0.01) \text{ cm}$
बेलन की दीवार की मोटाई $t$ का सूत्र:
$t = \frac{D - d}{2}$
सबसे पहले,माध्य मान की गणना करें:
$t_{\text{mean}} = \frac{6.01 - 5.73}{2} = \frac{0.28}{2} = 0.14 \text{ cm}$
अब,मोटाई में अनिश्चितता (त्रुटि) की गणना करें:
चूंकि मोटाई में घटाव शामिल है,इसलिए निरपेक्ष त्रुटियां जुड़ जाती हैं:
$\Delta t = \frac{\Delta D + \Delta d}{2} = \frac{0.01 + 0.01}{2} = \frac{0.02}{2} = 0.01 \text{ cm}$
अतः,मोटाई $(0.14 \pm 0.01) \text{ cm}$ होगी।
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निम्नलिखित यौगिक का $IUPAC$ नाम क्या है?
Question diagram
A
$6-$एथिल$-2-$मेथिलडेक$-4-$ईन$-7-$ओल
B
$2-$मेथिल$-6-$एथिलडेक$-4-$ईन$-7-$ओल
C
$5-$एथिल$-9-$मेथिलडेक$-6-$ईन$-4-$ओल
D
$9-$मेथिल$-5-$एथिलडेक$-6-$ईन$-4-$ओल

Solution

(B) $1$. मुख्य क्रियात्मक समूह $(-OH)$ और द्वि-आबंध युक्त सबसे लंबी कार्बन श्रृंखला की पहचान करें। श्रृंखला में $10$ कार्बन हैं,इसलिए जनक एल्केन डेकेन है।
$2$. श्रृंखला को इस प्रकार क्रमांकित करें कि क्रियात्मक समूह $(-OH)$ को सबसे कम अंक मिले।
$3$. दिए गए समाधान चित्र के अनुसार,$-OH$ समूह $C-7$ पर है,द्वि-आबंध $C-4$ पर है और मेथिल समूह $C-2$ पर है।
$4$. सही $IUPAC$ नाम $2-$मेथिल$-6-$एथिलडेक$-4-$ईन$-7-$ओल है।
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नीचे दी गई संरचना का सही $IUPAC$ नाम क्या है?
Question diagram
A
$5-$अमीनो$-1-$हाइड्रॉक्सी$-3-$मिथाइलहेक्स$-3-$एन$-2-$ओन
B
$4-$अमीनो$-2-$मिथाइलपेंटेनोइक एसिड
C
$5-$अमीनो$-3-$मिथाइल$-2-$ऑक्सोहेक्स$-3-$एन$-1-$ऑल
D
$2-$अमीनो$-6-$हाइड्रॉक्सी$-5-$कीटो$-4-$मिथाइल$-3-$हेक्सीन

Solution

(A) $1$. मुख्य क्रियात्मक समूह की पहचान करें: अणु में एक अमीनो समूह $(-NH_2)$,एक कीटोन समूह $(>C=O)$,और एक हाइड्रॉक्सिल समूह $(-OH)$ है। $IUPAC$ प्राथमिकता नियमों के अनुसार,कीटोन समूह की प्राथमिकता अल्कोहल और अमीन समूहों से अधिक होती है। इसलिए,प्रत्यय '-ओन' (one) होगा।
$2$. मुख्य क्रियात्मक समूह युक्त सबसे लंबी कार्बन श्रृंखला का चयन करें: कीटोन समूह युक्त सबसे लंबी श्रृंखला में $6$ कार्बन हैं।
$3$. श्रृंखला का अंकन करें: अंकन उस सिरे से शुरू होना चाहिए जो कीटोन समूह को सबसे कम संभव स्थान दे। दाएं से बाएं अंकन करने पर,कीटोन $2$ स्थिति पर है। श्रृंखला का अंकन इस प्रकार है: $C_1(H_2OH)-C_2(=O)-C_3(CH_3)=C_4(H)-C_5(H, NH_2)-C_6(H_3)$.
$4$. प्रतिस्थापियों और उनकी स्थितियों की पहचान करें: $5$ स्थिति पर एक अमीनो समूह,$3$ स्थिति पर एक मिथाइल समूह,और $1$ स्थिति पर एक हाइड्रॉक्सी समूह है।
$5$. नाम का संयोजन करें: इन्हें मिलाने पर,हमें $5-$अमीनो$-1-$हाइड्रॉक्सी$-3-$मिथाइलहेक्स$-3-$एन$-2-$ओन प्राप्त होता है।
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निम्नलिखित में से किस विकल्प में,$IUPAC$ नाम यौगिक की संरचना के साथ सही ढंग से मेल नहीं खाता है?
A
$3, 4-$डाइमिथाइलफिनोल
B
$4-$क्लोरो$-1, 3-$डाइनाइट्रोबेंजीन
C
$2-$क्लोरो$-1-$मिथाइल$-4-$नाइट्रोबेंजीन
D
$4-$एथिल$-2-$मिथाइलएनिलिन

Solution

(B) प्रत्येक विकल्प का विश्लेषण करते हैं:
$A$: संरचना $3$ और $4$ स्थान पर मिथाइल समूहों के साथ एक फिनोल वलय दिखाती है। यह $3, 4-$डाइमिथाइलफिनोल है। यह सही है।
$B$: संरचना $1$ स्थान पर क्लोरीन परमाणु और $2$ तथा $4$ स्थान पर नाइट्रो समूहों के साथ एक बेंजीन वलय दिखाती है। $IUPAC$ नाम $1-$क्लोरो$-2, 4-$डाइनाइट्रोबेंजीन होना चाहिए। दिया गया नाम $4-$क्लोरो$-1, 3-$डाइनाइट्रोबेंजीन गलत है।
$C$: संरचना $1$ स्थान पर मिथाइल समूह,$2$ स्थान पर क्लोरीन परमाणु और $4$ स्थान पर नाइट्रो समूह के साथ एक बेंजीन वलय दिखाती है। यह $2-$क्लोरो$-1-$मिथाइल$-4-$नाइट्रोबेंजीन है। यह सही है।
$D$: संरचना $2$ स्थान पर मिथाइल समूह और $4$ स्थान पर एथिल समूह के साथ एक एनिलिन वलय दिखाती है। यह $4-$एथिल$-2-$मिथाइलएनिलिन है। यह सही है।
अतः,वह विकल्प जो सही ढंग से मेल नहीं खाता है,वह $B$ है।
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निम्नलिखित कार्बोकेशन पर विचार करें:
$I. C_6H_5CH_2^+$
$II. CH_2=CH^+$
$III. CH_3-CH^+(CH_3)$
$IV. CH_3-CH_2^+$
$V. HC \equiv C^+$
उपरोक्त कार्बोकेशन को स्थिरता के घटते क्रम में व्यवस्थित करें।
A
$I > III > IV > II > V$
B
$V > II > IV > III > I$
C
$V > II > III > I > IV$
D
$II > III > IV > V > I$

Solution

(A) कार्बोकेशन की स्थिरता अनुनाद (resonance),अतिसंयुग्मन (hyperconjugation) और प्रेरणिक प्रभाव (inductive effect) द्वारा निर्धारित की जाती है।
$I$ $(C_6H_5CH_2^+)$ एक बेंजिलिक कार्बोकेशन है,जो फेनिल रिंग के साथ अनुनाद द्वारा अत्यधिक स्थिर होता है।
$III$ $(CH_3-CH^+(CH_3))$ एक द्वितीयक $(2^{\circ})$ कार्बोकेशन है,जो दो मिथाइल समूहों के अतिसंयुग्मन और प्रेरणिक प्रभाव द्वारा स्थिर होता है।
$IV$ $(CH_3-CH_2^+)$ एक प्राथमिक $(1^{\circ})$ कार्बोकेशन है,जो एक मिथाइल समूह के अतिसंयुग्मन और प्रेरणिक प्रभाव द्वारा स्थिर होता है।
$II$ $(CH_2=CH^+)$ एक विनाइलिक कार्बोकेशन है और $V$ $(HC \equiv C^+)$ एक एसिटिलीनिक कार्बोकेशन है। दोनों में धनात्मक आवेश क्रमशः $sp^2$ और $sp$ संकरित कार्बन पर होता है। उच्च $s$-लक्षण विद्युत ऋणात्मकता को बढ़ाता है,जिससे धनात्मक आवेश कम स्थिर हो जाता है।
चूंकि $sp$ संकरण ($50\% \ s$-लक्षण) $sp^2$ संकरण ($33.3\% \ s$-लक्षण) की तुलना में अधिक विद्युत ऋणात्मक है,इसलिए $V$,$II$ की तुलना में कम स्थिर है।
अतः,स्थिरता का घटता क्रम $I > III > IV > II > V$ है।
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दी गई संरचनाओं में देखी जाने वाली इलेक्ट्रॉन विस्थापन प्रभाव को क्या कहा जाता है?
Question diagram
A
$+R$ प्रभाव
B
$-R$ प्रभाव
C
इलेक्ट्रोमेरिक प्रभाव
D
$-I$ प्रभाव

Solution

(B) बेंजीन वलय से जुड़ा $CHO$ (एल्डिहाइड) समूह एक इलेक्ट्रॉन-आकर्षक समूह है।
दी गई संरचनाओं में,बेंजीन वलय के $\pi$-इलेक्ट्रॉन $CHO$ समूह के ऑक्सीजन परमाणु की ओर विस्थापित होते हैं।
इलेक्ट्रॉन विस्थापन का यह प्रकार,जिसमें प्रतिस्थापी अनुनाद के माध्यम से संयुग्मित प्रणाली से इलेक्ट्रॉन घनत्व को खींचता है,$-R$ प्रभाव (या $-M$ प्रभाव) के रूप में जाना जाता है।
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$C_4H_9Br$ आण्विक सूत्र वाले कार्बनिक यौगिक के लिए त्रिविम समावयवियों (stereoisomers) सहित संभावित समावयवियों की संख्या है
A
$3$
B
$4$
C
$5$
D
$8$

Solution

(C) $C_4H_9Br$ के लिए संरचनात्मक समावयवी निम्नलिखित हैं:
$1$. $CH_3CH_2CH_2CH_2Br$ ($1$-ब्रोमोब्यूटेन)
$2$. $CH_3CH_2CH(Br)CH_3$ ($2$-ब्रोमोब्यूटेन)
$3$. $(CH_3)_2CHCH_2Br$ ($1$-ब्रोमो-$2$-मिथाइलप्रोपेन)
$4$. $(CH_3)_3CBr$ ($2$-ब्रोमो-$2$-मिथाइलप्रोपेन)
इनमें से,$2$-ब्रोमोब्यूटेन $(CH_3CH_2CH(Br)CH_3)$ में $C_2$ स्थिति पर एक कायरल केंद्र होता है,जिसका अर्थ है कि यह प्रतिबिंब रूपों (enantiomers) की एक जोड़ी ($R$ और $S$ विन्यास) के रूप में मौजूद होता है।
अतः,त्रिविम समावयवियों सहित कुल समावयवियों की संख्या $4$ संरचनात्मक समावयवी + $1$ अतिरिक्त प्रतिबिंब रूप = $5$ समावयवी है।
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यदि $20 ~m$ की ऊँचाई से मुक्त रूप से गिराया गया एक पिंड $31.4 ~ms^{-1}$ के वेग के साथ एक ग्रह की सतह पर पहुँचता है,तो उस ग्रह पर सेकंड लोलक के रूप में कार्य करने वाले सरल लोलक की लंबाई क्या होगी ($~m$ में)?
A
$1$
B
$0.625$
C
$2.5$
D
$2$

Solution

(C) दिया गया है: ऊँचाई $h = 20 ~m$,अंतिम वेग $v = 31.4 ~ms^{-1}$।
गति के समीकरण $v^2 = u^2 + 2gh$ का उपयोग करते हुए,जहाँ प्रारंभिक वेग $u = 0$ है:
$v^2 = 2gh$
$g = \frac{v^2}{2h} = \frac{31.4 \times 31.4}{2 \times 20} = \frac{985.96}{40} \approx 24.65 ~ms^{-2}$।
ध्यान दें कि $31.4 \approx 10\pi$,इसलिए $g = \frac{(10\pi)^2}{40} = \frac{100\pi^2}{40} = 2.5\pi^2 ~ms^{-2}$।
सेकंड लोलक के लिए,आवर्तकाल $T = 2 ~s$ होता है।
सरल लोलक के आवर्तकाल का सूत्र $T = 2\pi \sqrt{\frac{l}{g}}$ है।
दोनों पक्षों का वर्ग करने पर: $T^2 = 4\pi^2 \frac{l}{g} \Rightarrow l = \frac{T^2 g}{4\pi^2}$।
$T = 2 ~s$ और $g = 2.5\pi^2 ~ms^{-2}$ का मान रखने पर:
$l = \frac{2^2 \times 2.5\pi^2}{4\pi^2} = \frac{4 \times 2.5\pi^2}{4\pi^2} = 2.5 ~m$।
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$M$ और $2M$ द्रव्यमान वाले दो तारे एक-दूसरे से $d$ दूरी पर हैं और अपने सामान्य द्रव्यमान केंद्र के चारों ओर घूम रहे हैं। दो तारों की प्रणाली का कोणीय वेग क्या है? ($G$ सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियतांक है):
A
$\sqrt{\frac{4GM}{d^3}}$
B
$\sqrt{\frac{2GM}{d^3}}$
C
$\sqrt{\frac{9GM}{d^3}}$
D
$\sqrt{\frac{3GM}{d^3}}$

Solution

(D) मान लीजिए कि $M$ और $2M$ द्रव्यमान वाले तारों की उनके द्रव्यमान केंद्र से दूरी क्रमशः $r_1$ और $r_2$ है।
द्रव्यमान केंद्र की परिभाषा के अनुसार,$M r_1 = (2M) r_2$ और $r_1 + r_2 = d$ है।
इन्हें हल करने पर,हमें $r_1 = \frac{2d}{3}$ और $r_2 = \frac{d}{3}$ प्राप्त होता है।
तारों के बीच का गुरुत्वाकर्षण बल उनकी वृत्तीय गति के लिए आवश्यक अभिकेंद्री बल प्रदान करता है।
$M$ द्रव्यमान वाले तारे के लिए: $F_g = M \omega^2 r_1$ है।
मान रखने पर: $\frac{G(M)(2M)}{d^2} = M \omega^2 \left(\frac{2d}{3}\right)$।
$\frac{2GM^2}{d^2} = M \omega^2 \left(\frac{2d}{3}\right)$।
$\omega^2 = \frac{3GM}{d^3}$।
अतः,$\omega = \sqrt{\frac{3GM}{d^3}}$।
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अभिक्रिया में बनने वाले उत्पाद '$Z$' में कार्बन का प्रतिशत क्या है?
Question diagram
A
$40$
B
$50$
C
$70$
D
$60$

Solution

(D) अभिक्रिया अनुक्रम कोल्बे-श्मिट अभिक्रिया है, जिसके बाद एस्पिरिन $(C_9H_8O_4)$ बनाने के लिए एसिटिलीकरण होता है।
$1$. फिनोल $NaOH$, $CO_2$ और $H^+$ के साथ अभिक्रिया करके सैलिसिलिक एसिड बनाता है।
$2$. सैलिसिलिक एसिड $H^+$ की उपस्थिति में एसिटिक एनहाइड्राइड $((CH_3CO)_2O)$ के साथ अभिक्रिया करके एस्पिरिन $(Z)$ और एसिटिक एसिड $(CH_3COOH)$ बनाता है।
$3$. एस्पिरिन $(Z)$ का आणविक सूत्र $C_9H_8O_4$ है।
$4$. $C_9H_8O_4$ का मोलर द्रव्यमान = $(9 \times 12) + (8 \times 1) + (4 \times 16) = 108 + 8 + 64 = 180 \ g/mol$.
$5$. $C_9H_8O_4$ के एक मोल में कार्बन का द्रव्यमान = $9 \times 12 = 108 \ g$.
$6$. कार्बन का प्रतिशत = $\frac{\text{कार्बन का द्रव्यमान}}{\text{Z का मोलर द्रव्यमान}} \times 100 = \frac{108}{180} \times 100 = 60 \%$.
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यौगिक '$A$' को सोडालाइम के साथ गर्म करने पर प्रोपेन प्राप्त होता है। यौगिक '$A$' की पहचान कीजिए।
A
$CH_3-CH_2-CH_2-OH$
B
$CH_3-CH_2-CO_2Na$
C
$CH_3-CH_2-CH_2-CO_2Na$
D
$CH_3-CO-CH_3$

Solution

(C) कार्बोक्सिलिक एसिड के सोडियम लवण का सोडालाइम $(NaOH + CaO)$ के साथ विकार्बोक्सिलीकरण एक कार्बन परमाणु को $Na_2CO_3$ के रूप में हटा देता है और एक कम कार्बन वाला एल्केन बनाता है।
प्रोपेन ($CH_3-CH_2-CH_3$,$3$ कार्बन) प्राप्त करने के लिए,प्रारंभिक पदार्थ ब्यूटानोइक एसिड का सोडियम लवण ($4$ कार्बन) होना चाहिए।
अभिक्रिया: $CH_3-CH_2-CH_2-COONa + NaOH \xrightarrow[\Delta]{CaO} CH_3-CH_2-CH_3 + Na_2CO_3$.
अतः,यौगिक '$A$' सोडियम ब्यूटानोएट $(CH_3-CH_2-CH_2-CO_2Na)$ है।
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समजातीय श्रेणी में मीथेन के बाद आने वाले एल्केन को निम्नलिखित में से किस अभिक्रिया द्वारा तैयार किया जा सकता है?
$I$. $2 CH_3 Br \xrightarrow[\text{dry ether}]{Na}$
$II$. $CH_3 COOH \xrightarrow[CaO, \Delta]{NaOH}$
$III$. $CH_3 CH=CH_2 \xrightarrow{H_2 / Pt}$
$IV$. $CH_3 CH_2 Br \xrightarrow[H^{+}]{Zn}$
सही उत्तर है
A
केवल $I, IV$
B
केवल $II, III$
C
केवल $I, III$
D
केवल $II, IV$

Solution

(A) एल्केन की समजातीय श्रेणी का सामान्य सूत्र $C_n H_{2n+2}$ है।
मीथेन $CH_4$ $(n=1)$ है।
समजातीय श्रेणी में इसके बाद का सदस्य इथेन,$C_2 H_6$ $(n=2)$ है।
$I$. वुर्ट्ज़ अभिक्रिया: $2 CH_3 Br \xrightarrow[\text{dry ether}]{Na} CH_3-CH_3 + 2 NaBr$। यह इथेन देता है।
$II$. डीकार्बोक्सिलेशन: $CH_3 COONa \xrightarrow[CaO, \Delta]{NaOH} CH_4 + Na_2 CO_3$। यह मीथेन देता है।
$III$. हाइड्रोजनीकरण: $CH_3-CH=CH_2 \xrightarrow{H_2 / Pt} CH_3-CH_2-CH_3$। यह प्रोपेन देता है।
$IV$. एल्काइल हैलाइड का अपचयन: $CH_3-CH_2 Br \xrightarrow[H^{+}]{Zn} CH_3-CH_3 + HBr$। यह इथेन देता है।
अतः,केवल $I$ और $IV$ इथेन देते हैं।
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एक एल्कीन $X$ $(C_4H_8)$ ज्यामितीय समावयवता प्रदर्शित करता है। $KMnO_4 | H^+$ के साथ $X$ का ऑक्सीकरण करने पर $Y$ प्राप्त होता है। $Y$ के सोडियम लवण को $NaOH$ और $CaO$ के मिश्रण के साथ गर्म करने पर $Z$ प्राप्त होता है। $Z$ क्या है?
A
$CH_3CH_3$
B
$CH_3CH_2CH_3$
C
$CH_3CH_2CH_2CH_3$
D
$CH_4$

Solution

(D) $1$. एल्कीन $X$,$\text{ब्यूट}-2-\text{ईन}$ $(CH_3CH=CHCH_3)$ है,जो ज्यामितीय समावयवता प्रदर्शित करता है।
$2$. अम्लीय $KMnO_4$ के साथ $\text{ब्यूट}-2-\text{ईन}$ का ऑक्सीकरण करने पर एसिटिक अम्ल $(CH_3COOH)$ $Y$ के रूप में प्राप्त होता है।
$3$. $Y$ का सोडियम लवण सोडियम एसीटेट $(CH_3COONa)$ है।
$4$. सोडियम एसीटेट को सोडा लाइम $(NaOH + CaO)$ के साथ गर्म करने पर इसका विकार्बोक्सिलीकरण (decarboxylation) होता है और मेथेन $(CH_4)$ $Z$ के रूप में प्राप्त होता है।
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एक्रोलीन $(X)$ उन रसायनों में से एक है जो प्रदूषित हवा में मौजूद बिना जले हाइड्रोकार्बन के साथ $O_3$ और $NO_2$ की प्रतिक्रिया से बनते हैं। '$X$' की संरचना है
A
$CH_3-CH=CH_2$
B
$CH_2=CH-CHO$
C
$CH_2=CH-CN$
D
$CH_3CO(OO)NO_2$

Solution

(B) एक्रोलीन एक असंतृप्त एल्डिहाइड है जिसका रासायनिक सूत्र $CH_2=CH-CHO$ है।
यह वायुमंडल में बिना जले हाइड्रोकार्बन,नाइट्रोजन ऑक्साइड $(NO_x)$ और ओजोन $(O_3)$ की फोटोकेमिकल स्मॉग प्रतिक्रियाओं के उप-उत्पाद के रूप में बनता है।
प्रतिक्रिया के उत्पादों में आमतौर पर फॉर्मेल्डिहाइड $(CH_2=O)$,एक्रोलीन $(CH_2=CH-CHO)$ और पेरोक्सीएसिटाइल नाइट्रेट $(CH_3CO(OO)NO_2)$ शामिल होते हैं।
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निम्नलिखित अभिक्रियाओं के समूह में '$Y$' क्या है?
Question diagram
A
$2-$ब्यूटीन
B
$2-$मिथाइल$-2-$ब्यूटीन
C
$1-$ब्यूटीन
D
$2-$ब्यूटीन

Solution

(B) $1$. $C_3H_4$ (प्रोपाइन) की $Hg^{2+}/H^+$ की उपस्थिति में $333 \ K$ पर $H_2O$ के साथ अभिक्रिया एक जलयोजन अभिक्रिया है जो मार्कोवनिकोव नियम का पालन करके एक इनोल मध्यवर्ती बनाती है,जो बाद में टॉटोमेरिज्म द्वारा $X$ (एसीटोन,$CH_3COCH_3$) में बदल जाता है।
$2$. अभिक्रिया का दूसरा भाग दर्शाता है कि $Y$ का ओजोनोलिसिस $((i) O_3, (ii) Zn/H_2O)$ होकर $X$ (एसीटोन) प्राप्त होता है।
$3$. एल्कीन $R_2C=CR_2$ का ओजोनोलिसिस दो कार्बोनिल यौगिक देता है। एसीटोन $(CH_3COCH_3)$ प्राप्त करने के लिए,एल्कीन $Y$ को $2,3-$डाइमिथाइल$-2-$ब्यूटीन $((CH_3)_2C=C(CH_3)_2)$ होना चाहिए।
$4$. दिए गए विकल्पों को देखने पर,विकल्प $B$ में दी गई संरचना $2,3-$डाइमिथाइल$-2-$ब्यूटीन को दर्शाती है।
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दी गई अभिक्रिया में बनने वाले उत्पाद '$X$' में कार्बन का प्रतिशत क्या है ($.6$ में)?
Question diagram
A
$85$
B
$80$
C
$90$
D
$70$

Solution

(C) दी गई अभिक्रिया निर्जल $AlCl_3$ की उपस्थिति में बेंजीन का एथिल क्लोराइड $(C_2H_5Cl)$ के साथ फ्रीडल-क्राफ्ट्स एल्काइलेशन है,जिससे एथिलबेंजीन $(X)$ बनता है।
एथिलबेंजीन $(X)$ का रासायनिक सूत्र $C_8H_{10}$ है।
कार्बन $(C)$ का परमाणु द्रव्यमान $= 12.01 \ g/mol$ है।
हाइड्रोजन $(H)$ का परमाणु द्रव्यमान $= 1.008 \ g/mol$ है।
$C_8H_{10}$ का मोलर द्रव्यमान $= (8 \times 12.01) + (10 \times 1.008) = 96.08 + 10.08 = 106.16 \ g/mol$ है।
$C_8H_{10}$ में कार्बन का प्रतिशत $= \frac{\text{कार्बन का द्रव्यमान}}{\text{कुल मोलर द्रव्यमान}} \times 100$ है।
कार्बन का प्रतिशत $= \frac{96.08}{106.16} \times 100 \approx 90.505 \% \approx 90.6 \%$ है।
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$C_3H_6$ $\xrightarrow{X} Y$ $\xrightarrow[C_6H_6]{AlCl_3} Z \text{ (मुख्य उत्पाद)}$
निम्नलिखित अभिक्रिया अनुक्रम में $X$ और $Z$ क्रमशः क्या हैं?
A
$HBr$,$n$-प्रोपिलबेंजीन
B
$HBr$,$p$-आइसोप्रोपिलबेंजीन
C
$HBr/ROOR$,आइसोप्रोपिलबेंजीन
D
$HBr/ROOR$,$n$-प्रोपिलबेंजीन

Solution

(C) $1$. अभिक्रिया प्रोपीन $(C_3H_6)$ से शुरू होती है।
$2$. अभिकर्मक $X$,$HBr/ROOR$ (पेरोक्साइड प्रभाव/एंटी-मार्कोवनिकोव योग) है,जो प्रोपीन को $1$-ब्रोमोप्रोपेन $(Y = CH_3CH_2CH_2Br)$ में परिवर्तित करता है।
$3$. $AlCl_3$ की उपस्थिति में,$1$-ब्रोमोप्रोपेन अधिक स्थिर आइसोप्रोपिल कार्बोनियम आयन $(CH_3CH^+CH_3)$ बनाने के लिए पुनर्विन्यासित होता है।
$4$. यह आइसोप्रोपिल कार्बोनियम आयन फिर बेंजीन $(C_6H_6)$ के साथ फ्रीडेल-क्राफ्ट्स एल्काइलेशन अभिक्रिया करके मुख्य उत्पाद के रूप में आइसोप्रोपिलबेंजीन (क्यूमीन) $(Z)$ बनाता है।
$5$. अतः,$X$,$HBr/ROOR$ है और $Z$,आइसोप्रोपिलबेंजीन है।
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निम्नलिखित में से सक्रियकारी (activating) और निष्क्रियकारी (deactivating) समूहों की संख्या क्रमशः कितनी है: $-OCH_2CH_3, -COCH_3, -NHCOCH_3, -COOCH_3, -SO_3H$
A
$2, 3$
B
$3, 2$
C
$1, 4$
D
$4, 1$

Solution

(A) सक्रियकारी समूह वे होते हैं जो बेंजीन वलय को इलेक्ट्रॉन घनत्व दान करते हैं,आमतौर पर अनुनाद (resonance) के माध्यम से। निष्क्रियकारी समूह वे होते हैं जो बेंजीन वलय से इलेक्ट्रॉन घनत्व खींचते हैं,आमतौर पर प्रेरणिक (inductive) या अनुनाद प्रभावों के माध्यम से।
$1$. $-OCH_2CH_3$: सक्रियकारी (ऑक्सीजन पर एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म के कारण)।
$2$. $-COCH_3$: निष्क्रियकारी (इलेक्ट्रॉन-आकर्षक कार्बोनिल समूह)।
$3$. $-NHCOCH_3$: सक्रियकारी (नाइट्रोजन पर एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म के कारण)।
$4$. $-COOCH_3$: निष्क्रियकारी (इलेक्ट्रॉन-आकर्षक एस्टर समूह)।
$5$. $-SO_3H$: निष्क्रियकारी (इलेक्ट्रॉन-आकर्षक सल्फोनिक एसिड समूह)।
इस प्रकार,$2$ सक्रियकारी समूह $(-OCH_2CH_3, -NHCOCH_3)$ और $3$ निष्क्रियकारी समूह $(-COCH_3, -COOCH_3, -SO_3H)$ हैं।
अतः,सही उत्तर $2, 3$ है।
69
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निम्नलिखित अभिक्रियाओं के अनुक्रम में अंतिम उत्पाद $(Z)$ की पहचान करें:
$C_2H_4Br_2$ $\xrightarrow[(ii) NaNH_2]{(i) Alc. KOH} X$ $\xrightarrow[873 \ K]{\text{Red hot Fe tube}} Y$ $\xrightarrow[\text{Anhy } AlCl_3, \Delta]{CH_3COCl} Z$
A
$C_6H_5COCl$
B
$C_6H_5COCH_3$
C
$C_6H_5CH_2CH_3$
D
$C_6H_5CONH_2$

Solution

(B) $1$. $C_2H_4Br_2$ ($1$,$2$-डाइब्रोमोइथेन) की $Alc. KOH$ और उसके बाद $NaNH_2$ के साथ अभिक्रिया से डिहाइड्रोहैलोजनीकरण द्वारा एथाइन $(X = HC \equiv CH)$ प्राप्त होता है।
$2$. एथाइन को $873 \ K$ पर लाल तप्त लोहे की नली से गुजारने पर चक्रीय बहुलकीकरण द्वारा बेंजीन $(Y = C_6H_6)$ बनता है।
$3$. बेंजीन निर्जलीय $AlCl_3$ की उपस्थिति में एसिटाइल क्लोराइड $(CH_3COCl)$ के साथ फ्रिडेल-क्राफ्ट्स एसिलेशन अभिक्रिया करके एसीटोफिनोन $(Z = C_6H_5COCH_3)$ बनाता है।
70
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पॉलिमेरिक संरचना वाले हाइड्राइड्स के युग्म की पहचान करें।
A
$LiH, NaH$
B
$BeH_2, MgH_2$
C
$NH_3, CH_4$
D
$B_2H_6, H_2O$

Solution

(B) क्षारीय मृदा धातुओं के हाइड्राइड्स,विशेष रूप से $BeH_2$ और $MgH_2$,इलेक्ट्रॉन-न्यून तीन-केंद्र दो-इलेक्ट्रॉन $(3c-2e)$ बंधों की उपस्थिति के कारण पॉलिमेरिक संरचना प्रदर्शित करते हैं।
ये संरचनाएं धातु परमाणुओं को ब्रिजिंग हाइड्रोजन परमाणुओं के माध्यम से एक स्थिर समन्वय वातावरण प्राप्त करने की अनुमति देती हैं।
71
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$H_2O_2$ अणु के गैसीय और ठोस चरणों में द्वितल कोण (dihedral angles) क्रमशः हैं
A
$90.2^{\circ}, 111.5^{\circ}$
B
$101.9^{\circ}, 94.8^{\circ}$
C
$111.5^{\circ}, 90.2^{\circ}$
D
$94.8^{\circ}, 101.9^{\circ}$

Solution

(C) $H_2O_2$ की संरचना असमतलीय (non-planar) होती है।
गैसीय अवस्था में,द्वितल कोण $111.5^{\circ}$ होता है।
ठोस अवस्था में,हाइड्रोजन बंधन के कारण,द्वितल कोण घटकर $90.2^{\circ}$ हो जाता है।
अतः,गैसीय और ठोस अवस्थाओं में द्वितल कोण क्रमशः $111.5^{\circ}$ और $90.2^{\circ}$ हैं।
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ChemistryMediumMCQTS EAMCET · 2024
$H_2O_2$ को संग्रहीत करने की उचित स्थितियाँ क्या हैं?
A
मोम की परत वाली प्लास्टिक की बोतल में और अंधेरे में रखना
B
मोम की परत वाली प्लास्टिक की बोतल में और प्रकाश में रखना
C
मोम की परत वाली प्लास्टिक की बोतल में जिसमें क्षार के अंश हों
D
धातु के बर्तन में और प्रकाश में रखना

Solution

(A) $H_2O_2$ अस्थिर होता है और प्रकाश या क्षार ऑक्साइड युक्त कांच की खुरदरी सतहों की उपस्थिति में यह $H_2O$ और $O_2$ में विघटित हो जाता है।
इसे रोकने के लिए,इसे मोम-लेपित कांच या प्लास्टिक की बोतलों में संग्रहीत किया जाता है ताकि सतह चिकनी और अक्रिय बनी रहे।
इसके अतिरिक्त,फोटोकैमिकल अपघटन से बचने के लिए इसे अंधेरे में रखा जाना चाहिए।
73
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निम्नलिखित अभिक्रियाओं का अवलोकन करें:
$I$. $2H_2O_{(l)} + 2Na_{(s)} \rightarrow 2NaOH_{(aq)} + H_{2(g)}$
$II$. $2H_2O_{(l)} + 2F_{2(g)} \rightarrow 4H^{+}_{(aq)} + 4F^{-}_{(aq)} + O_{2(g)}$
निम्नलिखित में से सही कथन की पहचान करें:
A
अभिक्रिया $I$ और अभिक्रिया $II$ दोनों में,जल का ऑक्सीकरण होता है।
B
अभिक्रिया $I$ और अभिक्रिया $II$ दोनों में,जल का अपचयन होता है।
C
अभिक्रिया $I$ में जल का अपचयन होता है और अभिक्रिया $II$ में जल का ऑक्सीकरण होता है।
D
अभिक्रिया $I$ में जल का ऑक्सीकरण होता है और अभिक्रिया $II$ में जल का अपचयन होता है।

Solution

(C) अभिक्रिया $I$ में,$H_2O$ में $H$ की ऑक्सीकरण अवस्था $+1$ से घटकर $0$ ($H_2$ में) हो जाती है,जो ऑक्सीकरण संख्या में कमी है,अतः जल का अपचयन होता है।
अभिक्रिया $II$ में,$H_2O$ में $O$ की ऑक्सीकरण अवस्था $-2$ से बढ़कर $0$ ($O_2$ में) हो जाती है,जो ऑक्सीकरण संख्या में वृद्धि है,अतः जल का ऑक्सीकरण होता है।
इसलिए,अभिक्रिया $I$ में जल का अपचयन होता है और अभिक्रिया $II$ में जल का ऑक्सीकरण होता है।
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हाइड्रोजन पेरोक्साइड के $20$ आयतन (volume) विलयन की नॉर्मलता क्या है ($N$ में)?
A
$0.892$
B
$1.785$
C
$2.678$
D
$3.570$

Solution

(D) $H_2O_2$ की आयतन शक्ति (volume strength) और नॉर्मलता के बीच संबंध इस प्रकार है: $\text{Volume strength} = 5.6 \times \text{Normality}$.
यहाँ,आयतन शक्ति = $20$ है।
अतः,$\text{Normality} = \frac{20}{5.6} \approx 3.571 \ N$.
इस प्रकार,सही विकल्प $D$ है।
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निम्नलिखित स्पीशीज का अवलोकन करें:
$(i)$ $NH_3$
$(ii)$ $AlCl_3$
$(iii)$ $SnCl_4$
$(iv)$ $CO_2$
$(v)$ $Ag^{+}$
$(vi)$ $HSO_4^{-}$
उपरोक्त में से कितनी स्पीशीज लुईस अम्ल के रूप में कार्य करती हैं?
A
$5$
B
$3$
C
$4$
D
$2$

Solution

(C) लुईस अम्ल एक इलेक्ट्रॉन-युग्म ग्राही होता है।
$(i)$ $NH_3$: $N$ पर एक एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म है,यह लुईस क्षार के रूप में कार्य करता है।
$(ii)$ $AlCl_3$: $Al$ का अष्टक अपूर्ण है ($6$ इलेक्ट्रॉन),यह लुईस अम्ल के रूप में कार्य करता है।
$(iii)$ $SnCl_4$: $Sn$ के पास रिक्त $d$-कक्षक हैं और यह अपना अष्टक विस्तारित कर सकता है,यह लुईस अम्ल के रूप में कार्य करता है।
$(iv)$ $CO_2$: ऑक्सीजन परमाणुओं की उच्च विद्युत ऋणात्मकता के कारण $C$ परमाणु इलेक्ट्रॉन-न्यून हो जाता है,यह लुईस अम्ल के रूप में कार्य करता है।
$(v)$ $Ag^{+}$: रिक्त कक्षकों वाला धातु धनायन,लुईस अम्ल के रूप में कार्य करता है।
$(vi)$ $HSO_4^{-}$: यह लुईस क्षार के रूप में कार्य कर सकता है,लेकिन सामान्यतः लुईस अम्ल के रूप में वर्गीकृत नहीं किया जाता है।
अतः,$AlCl_3$,$SnCl_4$,$CO_2$ और $Ag^{+}$ लुईस अम्ल के रूप में कार्य करते हैं।
कुल संख्या $4$ है।
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एक पात्र में हाइड्रोजन और नाइट्रोजन गैसें द्रव्यमान के $2:3$ अनुपात में हैं। यदि गैसों के मिश्रण का तापमान $30^{\circ} C$ है,तो हाइड्रोजन और नाइट्रोजन गैसों के प्रति अणु औसत गतिज ऊर्जा का अनुपात क्या होगा? $($हाइड्रोजन का आणविक द्रव्यमान $=2$ और नाइट्रोजन का आणविक द्रव्यमान $=28)$
A
$3:7$
B
$2:3$
C
$1:1$
D
$1:14$

Solution

(C) आदर्श गैस के प्रति अणु औसत गतिज ऊर्जा का सूत्र $\langle KE \rangle = \frac{f}{2} k_B T$ है,जहाँ $f$ स्वतंत्रता की कोटि (degrees of freedom) है,$k_B$ बोल्ट्जमैन नियतांक है और $T$ परम तापमान है।
$30^{\circ} C$ तापमान पर हाइड्रोजन और नाइट्रोजन दोनों द्वि-परमाणुक गैसें हैं,इसलिए उनकी स्वतंत्रता की कोटि समान $(f=5)$ है।
चूंकि गैसें एक ही पात्र में हैं,वे तापीय संतुलन में हैं,जिसका अर्थ है कि उनका तापमान समान $(T_{H_2} = T_{N_2} = T)$ है।
इसलिए,प्रति अणु औसत गतिज ऊर्जा का अनुपात $\frac{\langle KE \rangle_{H_2}}{\langle KE \rangle_{N_2}} = \frac{\frac{5}{2} k_B T}{\frac{5}{2} k_B T} = 1:1$ होगा।
द्रव्यमान का अनुपात यहाँ अप्रासंगिक है क्योंकि प्रति अणु औसत गतिज ऊर्जा केवल तापमान पर निर्भर करती है,न कि द्रव्यमान या अणुओं की संख्या पर।
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एक विमान $9 \ km$ त्रिज्या के क्षैतिज लूप में $540 \ km/h$ की स्थिर गति से उड़ रहा है। विमान के पंख किस कोण पर झुके (banked) हुए हैं? (गुरुत्वीय त्वरण $g = 10 \ m/s^2$)
A
$\operatorname{cosec}^{-1}(4)$
B
$\cot^{-1}(4)$
C
$\tan^{-1}(4)$
D
$\sec^{-1}(4)$

Solution

(B) दिया गया है: त्रिज्या $r = 9 \ km = 9000 \ m$. गति $v = 540 \ km/h = 540 \times \frac{5}{18} \ m/s = 150 \ m/s$. गुरुत्वीय त्वरण $g = 10 \ m/s^2$.
क्षैतिज लूप में उड़ने वाले विमान के लिए बैंकिंग कोण $\theta$ का सूत्र है: $\tan \theta = \frac{v^2}{rg}$.
मान रखने पर: $\tan \theta = \frac{150 \times 150}{9000 \times 10} = \frac{22500}{90000} = \frac{1}{4}$.
चूंकि $\tan \theta = \frac{1}{4}$ है,इसलिए $\cot \theta = 4$ होगा,जिसका अर्थ है $\theta = \cot^{-1}(4)$.
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$20 \ cm$ लंबाई का एक सीधा तार जिसमें $\frac{3}{\pi^2} \ A$ की धारा बह रही है,उसे एक वृत्त के रूप में मोड़ा जाता है। वृत्त के केंद्र पर चुंबकीय क्षेत्र क्या होगा?
A
$8 \times 10^{-6} \ T$
B
$3 \times 10^{-6} \ T$
C
$12 \times 10^{-6} \ T$
D
$6 \times 10^{-6} \ T$

Solution

(D) दिया गया है: तार की लंबाई $l = 20 \ cm = 0.2 \ m$,धारा $I = \frac{3}{\pi^2} \ A$.
जब तार को एक वृत्त में मोड़ा जाता है,तो उसकी लंबाई वृत्त की परिधि के बराबर हो जाती है: $l = 2 \pi R$.
अतः,$0.2 = 2 \pi R \Rightarrow R = \frac{0.1}{\pi} \ m = \frac{10^{-1}}{\pi} \ m$.
वृत्ताकार लूप के केंद्र पर चुंबकीय क्षेत्र $B$ का सूत्र $B = \frac{\mu_0 I}{2R}$ है।
मान रखने पर: $B = \frac{(4 \pi \times 10^{-7}) \times (\frac{3}{\pi^2})}{2 \times (\frac{10^{-1}}{\pi})}$.
सरल करने पर: $B = \frac{4 \pi \times 10^{-7} \times 3}{2 \times 10^{-1} \times \pi} = \frac{12 \pi \times 10^{-7}}{2 \pi \times 10^{-1}} = 6 \times 10^{-6} \ T$.
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$4 \ mm$ व्यास वाली एक लंबी सीधी छड़ में '$i$' धारा प्रवाहित हो रही है। धारा इसके अनुप्रस्थ काट पर समान रूप से वितरित है। छड़ की अक्ष से $1 \ mm$ और $4 \ mm$ की दूरी पर चुंबकीय क्षेत्रों का अनुपात क्या है?
A
$1:2$
B
$1:4$
C
$4:1$
D
$1:1$

Solution

(D) दिया गया है: व्यास $D = 4 \ mm$,इसलिए त्रिज्या $R = 2 \ mm$ है।
छड़ के अंदर के बिंदु $(r < R)$ के लिए,चुंबकीय क्षेत्र $B_{in} = \frac{\mu_0 i r}{2 \pi R^2}$ द्वारा दिया जाता है।
$r_1 = 1 \ mm$ पर,$B_1 = \frac{\mu_0 i (1)}{2 \pi (2)^2} = \frac{\mu_0 i}{8 \pi}$।
छड़ के बाहर के बिंदु $(r > R)$ के लिए,चुंबकीय क्षेत्र $B_{out} = \frac{\mu_0 i}{2 \pi r}$ द्वारा दिया जाता है।
$r_2 = 4 \ mm$ पर,$B_2 = \frac{\mu_0 i}{2 \pi (4)} = \frac{\mu_0 i}{8 \pi}$।
चुंबकीय क्षेत्रों का अनुपात $\frac{B_1}{B_2} = \frac{\mu_0 i / 8 \pi}{\mu_0 i / 8 \pi} = 1:1$ है।
Solution diagram
80
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भौतिक नियमों की प्रकृति के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही नहीं है?
A
सभी संरक्षित राशियाँ अनिवार्य रूप से अदिश होती हैं
B
प्रकृति के नियम समय के साथ नहीं बदलते हैं
C
ब्रह्मांड में हर जगह प्रकृति के नियम समान हैं
D
गुरुत्वाकर्षण का नियम चंद्रमा और पृथ्वी दोनों पर समान है

Solution

(A) भौतिक नियम संरक्षित राशियों पर आधारित होते हैं,जो अदिश (जैसे ऊर्जा) या सदिश (जैसे रैखिक संवेग और कोणीय संवेग) हो सकते हैं। इसलिए,यह कथन कि सभी संरक्षित राशियाँ अनिवार्य रूप से अदिश होती हैं,गलत है।
81
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$10 \ cm$ भुजा वाला एक लकड़ी का घन पानी और तेल के बीच की सतह पर तैर रहा है, जिसकी निचली सतह इंटरफेस से $3 \ cm$ नीचे है। यदि तेल का घनत्व $0.9 \ g \ cm^{-3}$ है, तो लकड़ी के घन का द्रव्यमान क्या है ($g$ में)?
A
$940$
B
$900$
C
$1000$
D
$930$

Solution

(D) दिया गया है: घन की भुजा $a = 10 \ cm$, पानी में गहराई $x = 3 \ cm$, तेल का घनत्व $\delta_1 = 0.9 \ g \ cm^{-3}$, पानी का घनत्व $\delta_2 = 1 \ g \ cm^{-3}$।
चूंकि घन तैर रहा है, घन का भार तेल और पानी द्वारा लगाए गए कुल उत्प्लावन बल के बराबर है।
घन का भार $W = mg$।
उत्प्लावन बल $F_B = (\text{तेल में आयतन} \times \delta_1 \times g) + (\text{पानी में आयतन} \times \delta_2 \times g)$।
घन का आयतन $V = a^3 = 10^3 = 1000 \ cm^3$।
पानी में आयतन $V_2 = a^2 \times x = 10^2 \times 3 = 300 \ cm^3$।
तेल में आयतन $V_1 = a^2 \times (a - x) = 10^2 \times (10 - 3) = 700 \ cm^3$।
तैरने के नियम के अनुसार, $mg = V_1 \delta_1 g + V_2 \delta_2 g$।
$m = V_1 \delta_1 + V_2 \delta_2$।
$m = (700 \times 0.9) + (300 \times 1)$।
$m = 630 + 300 = 930 \ g$।
Solution diagram
82
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एक बड़ी द्रव की बूंद समतापीय परिस्थितियों में '$n$' समान छोटी बूंदों में विभाजित हो जाती है। तब,इस प्रक्रिया में:
A
आयतन घटता है
B
कुल पृष्ठीय क्षेत्रफल घटता है
C
ऊर्जा अवशोषित होती है
D
ऊर्जा मुक्त होती है

Solution

(C) विभाजन की प्रक्रिया के दौरान द्रव का कुल आयतन स्थिर रहता है।
जब $R$ त्रिज्या की एक बड़ी बूंद $r$ त्रिज्या की $n$ छोटी बूंदों में विभाजित होती है,तो कुल आयतन संरक्षित रहता है: $\frac{4}{3} \pi R^3 = n \times \frac{4}{3} \pi r^3$,जिसका अर्थ है $R^3 = nr^3$ या $r = R / n^{1/3}$।
बड़ी बूंद का कुल पृष्ठीय क्षेत्रफल $A_1 = 4 \pi R^2$ है।
$n$ छोटी बूंदों का कुल पृष्ठीय क्षेत्रफल $A_2 = n \times 4 \pi r^2 = n \times 4 \pi (R / n^{1/3})^2 = n^{1/3} \times 4 \pi R^2$ है।
चूंकि $n > 1$,इसलिए $n^{1/3} > 1$,अतः $A_2 > A_1$। यानी पृष्ठीय क्षेत्रफल बढ़ता है।
पृष्ठीय ऊर्जा $U = T \times A$ द्वारा दी जाती है,जहाँ $T$ पृष्ठ तनाव है।
चूंकि पृष्ठीय क्षेत्रफल बढ़ता है,इसलिए निकाय की पृष्ठीय ऊर्जा बढ़ जाती है।
पृष्ठीय ऊर्जा को बढ़ाने के लिए निकाय पर कार्य करना पड़ता है,जिसका अर्थ है कि परिवेश से ऊर्जा अवशोषित होती है।
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$2 \ kg$ द्रव्यमान का एक ब्लॉक $1.0 \ mm^2$ अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल वाले $2 \ m$ लंबे धातु के तार के एक सिरे से बंधा है और इसे एक ऊर्ध्वाधर वृत्त में इस प्रकार घुमाया जाता है कि उच्चतम बिंदु पर तार में तनाव शून्य हो। यदि तार में अधिकतम विस्तार $2 \ mm$ है,तो धातु का यंग मापांक क्या है? (गुरुत्वीय त्वरण $= 10 \ ms^{-2}$)
A
$1.0 \times 10^{11} \ Nm^{-2}$
B
$1.2 \times 10^{11} \ Nm^{-2}$
C
$2.0 \times 10^{11} \ Nm^{-2}$
D
$0.2 \times 10^{11} \ Nm^{-2}$

Solution

(B) दिया गया है: द्रव्यमान $m = 2 \ kg$,लंबाई $l = 2 \ m$,क्षेत्रफल $A = 1 \ mm^2 = 1 \times 10^{-6} \ m^2$,अधिकतम विस्तार $\Delta l = 2 \ mm = 2 \times 10^{-3} \ m$,$g = 10 \ ms^{-2}$.
ऊर्ध्वाधर वृत्त में उच्चतम बिंदु पर तनाव शून्य होने के लिए,निचले बिंदु पर वेग $v = \sqrt{5gl}$ होना चाहिए।
$v = \sqrt{5 \times 10 \times 2} = \sqrt{100} = 10 \ ms^{-1}$.
अधिकतम तनाव $T_{\max}$ ऊर्ध्वाधर वृत्त के सबसे निचले बिंदु पर होता है।
$T_{\max} = mg + \frac{mv^2}{l} = 2 \times 10 + \frac{2 \times (10)^2}{2} = 20 + 100 = 120 \ N$.
यंग मापांक के सूत्र $Y = \frac{T_{\max} \cdot l}{A \cdot \Delta l}$ का उपयोग करने पर:
$Y = \frac{120 \times 2}{1 \times 10^{-6} \times 2 \times 10^{-3}} = \frac{240}{2 \times 10^{-9}} = 120 \times 10^9 = 1.2 \times 10^{11} \ Nm^{-2}$.
Solution diagram
84
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एक समान त्वरण से गतिमान एक पिंड चौथे सेकंड में $25 \ m$ और छठे सेकंड में $37 \ m$ की दूरी तय करता है। अगले दो सेकंड में पिंड द्वारा तय की गई दूरी क्या होगी ($m$ में)?
A
$63$
B
$84$
C
$49$
D
$92$

Solution

(D) समान त्वरित गति के लिए,$n^{th}$ सेकंड में तय की गई दूरी $S_n = u + \frac{a}{2}(2n - 1)$ द्वारा दी जाती है।
चौथे सेकंड के लिए $(n=4)$: $25 = u + \frac{a}{2}(2 \times 4 - 1) \implies 25 = u + 3.5a$ --- $(i)$
छठे सेकंड के लिए $(n=6)$: $37 = u + \frac{a}{2}(2 \times 6 - 1) \implies 37 = u + 5.5a$ --- (ii)
(ii) में से $(i)$ घटाने पर: $(37 - 25) = (5.5a - 3.5a) \implies 12 = 2a \implies a = 6 \ m/s^2$.
$(i)$ में $a=6$ रखने पर: $25 = u + 3.5(6) \implies 25 = u + 21 \implies u = 4 \ m/s$.
अगले दो सेकंड में ($t=6 \ s$ से $t=8 \ s$ तक) तय की गई दूरी की गणना $S = ut + \frac{1}{2}at^2$ का उपयोग करके की जाती है,जहाँ $u$,$t=6 \ s$ पर वेग है।
$t=6 \ s$ पर वेग: $v = u + at = 4 + (6 \times 6) = 40 \ m/s$.
$2 \ s$ में तय की गई दूरी: $S = (40 \times 2) + \frac{1}{2} \times 6 \times (2)^2 = 80 + 12 = 92 \ m$.
85
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एक पिंड को जमीन से क्षैतिज के साथ $\tan ^{-1}(\sqrt{7})$ के कोण पर प्रक्षेपित किया जाता है। अधिकतम ऊंचाई के आधे पर,पिंड की गति प्रक्षेपण की गति की '$n$' गुना है। '$n$' का मान है
A
$2$
B
$\frac{1}{3}$
C
$\frac{4}{3}$
D
$\frac{3}{4}$

Solution

(D) प्रक्षेप्य गति के लिए,प्रक्षेपण कोण $\theta = \tan^{-1}(\sqrt{7})$ है,इसलिए $\tan \theta = \sqrt{7}$।
किसी भी ऊंचाई $y$ पर,वेग का ऊर्ध्वाधर घटक $v_y^2 = u_y^2 - 2gy$ है।
$y = \frac{H}{2}$ पर,जहाँ $H = \frac{u^2 \sin^2 \theta}{2g}$ अधिकतम ऊंचाई है:
$v_y^2 = u^2 \sin^2 \theta - 2g \left( \frac{u^2 \sin^2 \theta}{4g} \right) = u^2 \sin^2 \theta - \frac{u^2 \sin^2 \theta}{2} = \frac{u^2 \sin^2 \theta}{2}$।
वेग का क्षैतिज घटक स्थिर रहता है: $v_x = u \cos \theta$।
$y = \frac{H}{2}$ पर गति $v = \sqrt{v_x^2 + v_y^2} = \sqrt{u^2 \cos^2 \theta + \frac{u^2 \sin^2 \theta}{2}}$ है।
दिया गया है $v = nu$,इसलिए $n^2 u^2 = u^2 \cos^2 \theta + \frac{u^2 \sin^2 \theta}{2}$।
$n^2 = \cos^2 \theta + \frac{\sin^2 \theta}{2} = \cos^2 \theta + \frac{1 - \cos^2 \theta}{2} = \frac{1 + \cos^2 \theta}{2}$।
चूंकि $\tan \theta = \sqrt{7}$,$\tan^2 \theta = 7$,इसलिए $\sec^2 \theta = 1 + 7 = 8$,जिसका अर्थ है $\cos^2 \theta = \frac{1}{8}$।
$n^2 = \frac{1 + 1/8}{2} = \frac{9/8}{2} = \frac{9}{16}$।
अतः,$n = \frac{3}{4}$।
86
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परमाणु रिएक्टर की कार्यप्रणाली को क्रिटिकल (critical) तब कहा जाता है जब न्यूट्रॉन गुणन कारक $K$ का मान होता है:
A
$K=0$
B
$K > 1$
C
$K=1$
D
$0 < K < 1$

Solution

(C) न्यूट्रॉन गुणन कारक $K$ (जिसे $k$ के रूप में भी दर्शाया जाता है) को एक पीढ़ी में उत्पन्न न्यूट्रॉन की संख्या और पिछली पीढ़ी में उत्पन्न न्यूट्रॉन की संख्या के अनुपात के रूप में परिभाषित किया जाता है।
जब $K = 1$ होता है,तो विखंडन की दर स्थिर रहती है और रिएक्टर को 'क्रिटिकल' अवस्था में कहा जाता है।
यदि $K > 1$ है,तो रिएक्टर 'सुपरक्रिटिकल' है (शक्ति बढ़ती है)।
यदि $K < 1$ है,तो रिएक्टर 'सबक्रिटिकल' है (शक्ति घटती है)।
इसलिए,एक क्रिटिकल रिएक्टर के लिए $K = 1$ होता है।
87
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$236$ द्रव्यमान संख्या वाले एक नाभिक के क्षय के दौरान $E$ ऊर्जा का एक $\alpha$-कण मुक्त होता है। इस प्रक्रिया में मुक्त कुल ऊर्जा है
A
$58 E$
B
$59 E$
C
$\frac{58 E}{59}$
D
$\frac{59 E}{58}$

Solution

(D) $236$ द्रव्यमान संख्या वाले नाभिक के क्षय में,जनक नाभिक एक $\alpha$-कण (द्रव्यमान संख्या $4$) और एक संतति नाभिक (द्रव्यमान संख्या $232$) में क्षयित होता है।
रैखिक संवेग संरक्षण के नियम के अनुसार,$\alpha$-कण का संवेग $(P_{\alpha})$ और संतति नाभिक का संवेग $(P_{d})$ परिमाण में समान होते हैं,अर्थात $P_{\alpha} = P_{d} = P$.
गतिज ऊर्जा $KE = \frac{P^2}{2m}$ सूत्र से,$KE \propto \frac{1}{m}$ प्राप्त होता है।
अतः,गतिज ऊर्जाओं का अनुपात $\frac{(KE)_{d}}{(KE)_{\alpha}} = \frac{m_{\alpha}}{m_{d}} = \frac{4}{232} = \frac{1}{58}$ होगा।
चूंकि $(KE)_{\alpha} = E$ दिया गया है,इसलिए $(KE)_{d} = \frac{E}{58}$ होगा।
इस प्रक्रिया में मुक्त कुल ऊर्जा $(Q)$ उत्पादों की गतिज ऊर्जाओं का योग है:
$Q = (KE)_{\alpha} + (KE)_{d} = E + \frac{E}{58} = \frac{59E}{58}$.
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निम्नलिखित अभिक्रियाओं पर विचार करें (संतुलित नहीं):
$BF_3 + NaH \xrightarrow{450 \ K} X + NaF$
$X + H_2O \longrightarrow Y + H_2 \uparrow$
$X$ और $Y$ के बारे में सही कथन हैं:
$I$. $X$ एक इलेक्ट्रॉन-न्यून अणु है
$II$. $X$ में $B-B$ बंध उपस्थित है
$III$. $Y$ एक दुर्बल ट्राइबैसिक अम्ल है
$IV$. $Y$ एक लुईस अम्ल के रूप में कार्य करता है
A
$I$ और $IV$
B
$II$ और $III$
C
$II$ और $IV$
D
$I$ और $III$

Solution

(A) समीकरण $(1)$ को संतुलित करने पर:
$2BF_3 + 6NaH \xrightarrow{450 \ K} B_2H_6 + 6NaF$
अतः,$X$ का मान $B_2H_6$ (डाइबोरेन) है।
समीकरण $(2)$ को संतुलित करने पर:
$B_2H_6 + 6H_2O \longrightarrow 2B(OH)_3 + 6H_2 \uparrow$
अतः,$Y$ का मान $B(OH)_3$ (बोरिक अम्ल) है।
$I$. $X$ $(B_2H_6)$ एक इलेक्ट्रॉन-न्यून अणु है ($3c-2e^-$ बंध युक्त)। यह सही है।
$II$. $X$ $(B_2H_6)$ में,कोई सीधा $B-B$ बंध नहीं होता है; इसमें दो सेतु हाइड्रोजन परमाणु $(B-H-B)$ होते हैं। यह गलत है।
$III$. $Y$ $(B(OH)_3)$ एक दुर्बल मोनोबैसिक लुईस अम्ल है,न कि ट्राइबैसिक अम्ल। यह गलत है।
$IV$. $Y$ $(B(OH)_3)$ लुईस अम्ल के रूप में कार्य करता है क्योंकि यह $OH^-$ आयनों से इलेक्ट्रॉन युग्म स्वीकार करता है। यह सही है।
अतः,कथन $I$ और $IV$ सही हैं।
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निम्नलिखित अभिक्रियाओं का अवलोकन करें (संतुलित नहीं):
$BF_3 + LiAlH_4 \xrightarrow{(C_2H_5)_2O} X + LiF + AlF_3$
$X + NaH \longrightarrow Y$
$Y$ के बारे में गलत कथन है:
A
यह एक अच्छा ऑक्सीकारक है
B
यह एक अच्छा अपचायक है
C
इसमें हाइड्रोजन की ऑक्सीकरण अवस्था $-1$ है
D
आयोडीन के साथ इसका ऑक्सीकरण करने पर डाइबोरेन प्राप्त होता है

Solution

(A) पहली अभिक्रिया है: $4BF_3 + 3LiAlH_4 \xrightarrow{(C_2H_5)_2O} 2B_2H_6 + 3LiF + 3AlF_3$. यहाँ,$X$ $B_2H_6$ (डाइबोरेन) है।
दूसरी अभिक्रिया है: $B_2H_6 + 2NaH \longrightarrow 2NaBH_4$. यहाँ,$Y$ $NaBH_4$ (सोडियम बोरोहाइड्राइड) है।
$NaBH_4$ में $BH_4^-$ आयन होता है,जिसमें हाइड्रोजन की ऑक्सीकरण अवस्था $-1$ होती है।
$NaBH_4$ एक प्रसिद्ध अपचायक है,ऑक्सीकारक नहीं।
इसलिए,'यह एक अच्छा ऑक्सीकारक है' कथन गलत है।
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निम्नलिखित अभिक्रियाओं में $X$ और $Y$ क्रमशः क्या हैं?
$X \xleftarrow{CO} B_2 H_6 \xrightarrow[(C_2 H_5)_2 O]{NaH} Y$
A
$BH_3 \cdot 2 CO ; NaBO_2$
B
$BH_3 \cdot CO ; NaBH_4$
C
$BH_3 \cdot CO ; NaBO_2$
D
$BH_3 \cdot CO ; Na_2 B_4 O_7$

Solution

(B) डाइबोरेन $(B_2 H_6)$ की कार्बन मोनोऑक्साइड $(CO)$ के साथ दबाव में अभिक्रिया करने पर बोरेन कार्बोनिल एडक्ट,$BH_3 \cdot CO$ $(X)$ प्राप्त होता है।
$B_2 H_6 + 2 CO \rightarrow 2 BH_3 \cdot CO$
डाइबोरेन $(B_2 H_6)$ की डाईएथिल ईथर $((C_2 H_5)_2 O)$ की उपस्थिति में सोडियम हाइड्राइड $(NaH)$ के साथ अभिक्रिया करने पर सोडियम बोरोहाइड्राइड,$NaBH_4$ $(Y)$ प्राप्त होता है।
$B_2 H_6 + 2 NaH \xrightarrow{(C_2 H_5)_2 O} 2 NaBH_4$
अतः,$X = BH_3 \cdot CO$ और $Y = NaBH_4$ है।
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बोरेक्स का सही सूत्र $Na_2[B_4O_5(OH)_4] \cdot 8H_2O$ है। यदि इस सूत्र को $Na_2[B_4O_5(OH)_x] \cdot yH_2O$ के रूप में दर्शाया जाए,तो $x$ और $y$ का योग क्या होगा?
A
$14$
B
$09$
C
$12$
D
$10$

Solution

(C) बोरेक्स का रासायनिक सूत्र $Na_2[B_4O_5(OH)_4] \cdot 8H_2O$ है।
इसे दिए गए व्यंजक $Na_2[B_4O_5(OH)_x] \cdot yH_2O$ के साथ तुलना करने पर:
$x = 4$
$y = 8$
अतः,$x + y = 4 + 8 = 12$ होगा।
92
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निम्नलिखित में से कौन से कथन सही हैं?
$(i)$ $CCl_4$ आसानी से जल-अपघटन (hydrolysis) करता है
$(ii)$ हीरे में दिशात्मक सहसंयोजक बंध होते हैं
$(iii)$ फुलरीन कार्बन का ऊष्मागतिक रूप से सबसे स्थिर अपररूप है
$(iv)$ कांच एक मानव निर्मित सिलिकेट है
सही उत्तर है
A
केवल $(i, iii)$
B
केवल $(ii, iv)$
C
केवल $(ii, iii, iv)$
D
केवल $(i, ii)$

Solution

(B) $(i)$ $CCl_4$ जल-अपघटन नहीं करता है क्योंकि इसमें पानी के अणुओं से एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म (lone pair) स्वीकार करने के लिए रिक्त $d$-कक्षक नहीं होते हैं।
$(ii)$ हीरे की संरचना कार्बन परमाणुओं के $3-D$ नेटवर्क से बनी होती है जिसमें पूरे जालक में दिशात्मक सहसंयोजक बंध होते हैं।
$(iii)$ कार्बन के अपररूपों की ऊष्मागतिक स्थिरता का क्रम $\text{Graphite} > \text{Diamond} > \text{Fullerene}$ है।
$(iv)$ कांच एक मानव निर्मित अक्रिस्टलीय सिलिकेट है।
अतः,कथन $(ii)$ और $(iv)$ सही हैं।
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कथन $(A)$: सिलिकोन का उपयोग कपड़ों को वाटरप्रूफ बनाने के लिए किया जाता है।
कारण $(R)$: सिलिकोन में पुनरावर्ती इकाई $R_2SiO$ है।
A
$(A)$ और $(R)$ सही हैं,लेकिन $(R)$,$(A)$ की सही व्याख्या नहीं है
B
$(A)$ और $(R)$ सही हैं,$(R)$,$(A)$ की सही व्याख्या है
C
$(A)$ गलत है लेकिन $(R)$ सही है
D
$(A)$ सही है लेकिन $(R)$ गलत है

Solution

(B) सिलिकोन ऑर्गेनोसिलिकॉन पॉलिमर हैं जिनका सामान्य अनुभवजन्य सूत्र $(R_2SiO)_n$ है।
सिलिकॉन परमाणुओं से जुड़े कार्बनिक समूहों $(R)$ की उपस्थिति के कारण ये प्रकृति में हाइड्रोफोबिक (जल-विकर्षक) होते हैं।
इस हाइड्रोफोबिक प्रकृति के कारण,इनका उपयोग कपड़ों को वाटरप्रूफ बनाने के लिए किया जाता है।
अतः,कथन $(A)$ और कारण $(R)$ दोनों सही हैं,और $(R)$,$(A)$ की सही व्याख्या है।
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निम्नलिखित अभिक्रियाओं (असंतुलित) का अवलोकन करें:
$P_2O_3 + H_2O \rightarrow X$
$P_4O_{10} + H_2O \rightarrow Y$
$X$ और $Y$ में उपस्थित $P=O$ बंधों की संख्या क्रमशः क्या है?
A
$1, 3$
B
$1, 2$
C
$2, 1$
D
$1, 1$

Solution

(D) संतुलित रासायनिक समीकरण इस प्रकार हैं:
$P_2O_3 + 3H_2O \rightarrow 2H_3PO_3$ $(X = H_3PO_3)$
$P_4O_{10} + 6H_2O \rightarrow 4H_3PO_4$ $(Y = H_3PO_4)$
$H_3PO_3$ (फास्फोरस अम्ल) में,संरचना में $1$ $P=O$ बंध,$2$ $P-OH$ बंध और $1$ $P-H$ बंध होता है।
$H_3PO_4$ (फास्फोरिक अम्ल) में,संरचना में $1$ $P=O$ बंध और $3$ $P-OH$ बंध होता है।
अतः,$X$ और $Y$ में $P=O$ बंधों की संख्या क्रमशः $1$ और $1$ है।
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कार्बन गर्म सांद्र $H_2SO_4$ के साथ अभिक्रिया करके $H_2O$ के साथ दो ऑक्साइड देता है। इन दो ऑक्साइड की प्रकृति क्या है?
A
दोनों अम्लीय हैं
B
दोनों क्षारीय हैं
C
दोनों उदासीन हैं
D
दोनों उभयधर्मी हैं

Solution

(A) रासायनिक अभिक्रिया इस प्रकार है: $C + 2H_2SO_4 \rightarrow CO_2 + 2SO_2 + 2H_2O$.
$CO_2$ और $SO_2$ दोनों अधात्विक ऑक्साइड हैं,जो प्रकृति में अम्लीय होते हैं।
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$C +$ सांद्र $H_2SO_4 \xrightarrow{\Delta} X + Y + H_2O$. उपरोक्त अभिक्रिया में $X$ और $Y$ हैं:
A
$CO, SO_3$
B
$CO_2, SO_2$
C
$CO, SO_2$
D
$C_3O_2, SO_2$

Solution

(B) कार्बन की सांद्र सल्फ्यूरिक अम्ल के साथ अभिक्रिया एक ऑक्सीकरण-अपचयन अभिक्रिया है।
कार्बन का कार्बन डाइऑक्साइड $(CO_2)$ में ऑक्सीकरण होता है और सल्फ्यूरिक अम्ल का सल्फर डाइऑक्साइड $(SO_2)$ में अपचयन होता है।
संतुलित रासायनिक समीकरण है:
$C + 2 H_2SO_4 \xrightarrow{\Delta} CO_2 + 2 SO_2 + 2 H_2O$
अतः,$X$ का मान $CO_2$ है और $Y$ का मान $SO_2$ है।
97
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हाइड्रोजन हैलाइड्स के क्वथनांक का सही क्रम है
A
$HF < HCl < HBr < HI$
B
$HI < HBr < HCl < HF$
C
$HCl < HBr < HI < HF$
D
$HBr < HCl < HI < HF$

Solution

(C) हाइड्रोजन हैलाइड्स के क्वथनांक का सही क्रम: $HCl < HBr < HI < HF$ है।
$HF$ में मजबूत अंतर-आणविक हाइड्रोजन बंधन होता है,जो अन्य हाइड्रोजन हैलाइड्स की तुलना में इसके क्वथनांक को काफी बढ़ा देता है।
शेष हाइड्रोजन हैलाइड्स $(HCl, HBr, HI)$ के लिए,आणविक द्रव्यमान बढ़ने के साथ वांडर वाल्स बल मजबूत होते हैं,जिससे क्वथनांक बढ़ता है।
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$73.5 \text{ cm}$ फोकस दूरी वाले एक पतले समतल-उत्तल लेंस का वृत्ताकार द्वारक $8.4 \text{ cm}$ व्यास का है। यदि लेंस के पदार्थ का अपवर्तनांक $\frac{5}{3}$ है,तो लेंस की मोटाई लगभग कितनी होगी?
A
$2.4 \text{ cm}$
B
$2.4 \text{ mm}$
C
$1.8 \text{ mm}$
D
$1.8 \text{ cm}$

Solution

(C) समतल-उत्तल लेंस के लिए,वक्रता त्रिज्या $R$,द्वारक की त्रिज्या $r$ और मोटाई $t$ के बीच ज्यामितीय संबंध है: $R^2 = (R-t)^2 + r^2$। चूँकि $t$ बहुत छोटा है,$R^2 \approx R^2 - 2Rt + t^2 + r^2$,जो सरल होकर $2Rt \approx r^2$ या $R = \frac{r^2}{2t}$ हो जाता है।
दिया गया व्यास $d = 8.4 \text{ cm}$ है,इसलिए त्रिज्या $r = \frac{d}{2} = 4.2 \text{ cm}$ है।
लेंस मेकर सूत्र का उपयोग करने पर: $\frac{1}{f} = (\mu - 1)(\frac{1}{R_1} - \frac{1}{R_2})$।
समतल-उत्तल लेंस के लिए,$R_1 = R$ और $R_2 = \infty$,इसलिए $\frac{1}{f} = (\mu - 1)(\frac{1}{R})$।
अतः,$R = f(\mu - 1)$।
$R = \frac{r^2}{2t}$ प्रतिस्थापित करने पर,हमें $\frac{r^2}{2t} = f(\mu - 1)$ प्राप्त होता है।
मोटाई $t$ के लिए सूत्र: $t = \frac{r^2}{2f(\mu - 1)}$।
मान रखने पर: $r = 4.2 \text{ cm}$,$f = 73.5 \text{ cm}$,$\mu = \frac{5}{3}$।
$t = \frac{(4.2)^2}{2 \times 73.5 \times (\frac{5}{3} - 1)} = \frac{17.64}{147 \times \frac{2}{3}} = \frac{17.64}{98} = 0.18 \text{ cm} = 1.8 \text{ mm}$।
Solution diagram
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जब $12 \ cm$ ऊँचाई की एक वस्तु को उत्तल लेंस से एक निश्चित दूरी पर रखा जाता है,तो पर्दे पर $18 \ cm$ ऊँचाई का एक प्रतिबिंब बनता है। वस्तु और पर्दे की स्थिति को बदले बिना,यदि लेंस को पर्दे की ओर खिसकाया जाता है,तो पर्दे पर एक और स्पष्ट प्रतिबिंब बनता है। इस प्रतिबिंब की ऊँचाई है ($cm$ में)
A
$4$
B
$6$
C
$8$
D
$10$

Solution

(C) माना वस्तु की ऊँचाई $h_0 = 12 \ cm$ है।
जब लेंस पहली स्थिति में होता है,तो प्रतिबिंब की ऊँचाई $h_1 = 18 \ cm$ होती है।
जब लेंस को दूसरी स्थिति में खिसकाया जाता है,तो प्रतिबिंब की ऊँचाई $h_2$ होती है।
उत्तल लेंस के लिए विस्थापन विधि (displacement method) के अनुसार,वस्तु की ऊँचाई और दो प्रतिबिंबों की ऊँचाई के बीच का संबंध इस प्रकार है:
$h_0 = \sqrt{h_1 \cdot h_2}$
दिए गए मानों को प्रतिस्थापित करने पर:
$12 = \sqrt{18 \cdot h_2}$
दोनों पक्षों का वर्ग करने पर:
$144 = 18 \cdot h_2$
$h_2 = \frac{144}{18} = 8 \ cm$।
अतः,दूसरे प्रतिबिंब की ऊँचाई $8 \ cm$ है।
100
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निम्नलिखित अभिक्रिया का अवलोकन करें:
$2 KClO_{3(s)} \xrightarrow{\Delta} 2 KCl_{(s)} + 3 O_{2(g)}$
इस अभिक्रिया में:
A
$Cl$ ऑक्सीकृत होता है और $O$ अपचयित होता है
B
$Cl$ अपचयित होता है और $O$ ऑक्सीकृत होता है
C
$K$ ऑक्सीकृत होता है और $O$ अपचयित होता है
D
$K$ अपचयित होता है और $Cl$ भी अपचयित होता है

Solution

(B) प्रत्येक तत्व के लिए ऑक्सीकरण अवस्था निर्धारित करें:
$KClO_3$ में,$K$ की ऑक्सीकरण अवस्था $+1$,$Cl$ की $+5$ और $O$ की $-2$ है।
$KCl$ में,$K$ की ऑक्सीकरण अवस्था $+1$ और $Cl$ की $-1$ है।
$O_2$ में,$O$ की ऑक्सीकरण अवस्था $0$ है।
ऑक्सीकरण अवस्थाओं की तुलना करने पर:
$Cl$ की ऑक्सीकरण अवस्था $+5$ से घटकर $-1$ हो जाती है (ऑक्सीकरण अवस्था में कमी,इसलिए $Cl$ अपचयित होता है)।
$O$ की ऑक्सीकरण अवस्था $-2$ से बढ़कर $0$ हो जाती है (ऑक्सीकरण अवस्था में वृद्धि,इसलिए $O$ ऑक्सीकृत होता है)।
अतः,$Cl$ अपचयित होता है और $O$ ऑक्सीकृत होता है।
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निम्नलिखित में से सही कथनों की पहचान कीजिए: $(i)$ $Ti(IV)$,$Ti(III)$ और $Ti(II)$ से अधिक स्थिर है $(ii)$ $3d-$श्रेणी के तत्वों ($Z=22$ से $29$) में केवल कॉपर का अपचयन विभव $(M^{2+} / M)$ धनात्मक होता है $(iii)$ $Sc$ और $Zn$ दोनों $+1$ ऑक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित करते हैं
A
केवल $i, ii$
B
केवल $i, iii$
C
केवल $ii, iii$
D
$i, ii, iii$

Solution

(A) $Ti = [Ar] 3d^2 4s^2$
$Ti^{3+} = [Ar] 3d^1 4s^0$
$Ti^{4+} = [Ar] 3d^0 4s^0$
चूंकि $Ti^{4+}$ में एक रिक्त $d$-कक्षक होता है और यह निकटतम उत्कृष्ट गैस विन्यास प्राप्त कर लेता है,इसलिए यह $Ti^{3+}$ और $Ti^{2+}$ की तुलना में अधिक स्थिर है।
$Cu^{2+} / Cu = +0.34 \ V$ का $3d$ श्रेणी के तत्वों में अपवादस्वरूप धनात्मक अपचयन विभव होता है।
$Sc$ $+3$ ऑक्सीकरण अवस्था और $Zn$ $+2$ ऑक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित करता है। वे $+1$ ऑक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित नहीं करते हैं।
अतः,केवल $(i)$ और $(ii)$ सही हैं।
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दिए गए गुणधर्म के लिए निम्नलिखित में से कौन सा क्रम सही है?
A
$Cr < Mn < Fe$ - $M^{3+} / M^{2+}$ का मानक इलेक्ट्रोड विभव मान
B
$Cr^{2+} < Mn^{2+} < Fe^{2+}$ - चुंबकीय आघूर्ण
C
$VO_2^{+} < Cr_2O_7^{2-} < MnO_4^{-}$ - ऑक्सीकरण क्षमता
D
$Ti < V < Cr$ - प्रथम आयनन एन्थैल्पी

Solution

(C) $M^{3+}/M^{2+}$ के लिए मानक इलेक्ट्रोड विभव $(E^{\circ})$ का क्रम $Mn^{3+}/Mn^{2+} > Fe^{3+}/Fe^{2+} > Cr^{3+}/Cr^{2+}$ है। अतः,विकल्प $A$ गलत है।
चुंबकीय आघूर्ण की गणना $\mu = \sqrt{n(n+2)}$ के रूप में की जाती है,जहाँ $n$ अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की संख्या है।
$Mn^{2+}$ $(3d^5)$ के लिए,$n=5$ है। $Cr^{2+}$ $(3d^4)$ के लिए,$n=4$ है। $Fe^{2+}$ $(3d^6)$ के लिए,$n=4$ है। सही क्रम $Mn^{2+} > Cr^{2+} \approx Fe^{2+}$ है। अतः,विकल्प $B$ गलत है।
ऑक्सीकरण क्षमता अपचयन विभव और निम्न ऑक्सीकरण अवस्था की स्थिरता पर निर्भर करती है। $MnO_4^-$ $(Mn^{+7})$ एक $Cr_2O_7^{2-}$ $(Cr^{+6})$ और $VO_2^+$ $(V^{+5})$ की तुलना में अधिक शक्तिशाली ऑक्सीकारक है। सही क्रम $VO_2^+ < Cr_2O_7^{2-} < MnO_4^-$ है। अतः,विकल्प $C$ सही है।
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निम्नलिखित $f$-ब्लॉक तत्वों का अवलोकन करें: $Eu (Z=63)$; $Pu (Z=94)$; $Cf (Z=98)$; $Sm (Z=62)$; $Gd (Z=64)$; $Cm (Z=96)$। उपरोक्त में से कितनों की मूल अवस्था में $f$-कक्षक अर्ध-पूर्ण (half-filled) हैं?
A
$3$
B
$4$
C
$2$
D
$5$

Solution

(A) इलेक्ट्रॉनिक विन्यास इस प्रकार हैं:
$Eu (Z=63): [Xe] 4f^7 6s^2$ (अर्ध-पूर्ण $f$-कक्षक)
$Pu (Z=94): [Rn] 5f^6 7s^2$
$Cf (Z=98): [Rn] 5f^{10} 7s^2$
$Sm (Z=62): [Xe] 4f^6 6s^2$
$Gd (Z=64): [Xe] 4f^7 5d^1 6s^2$ (अर्ध-पूर्ण $f$-कक्षक)
$Cm (Z=96): [Rn] 5f^7 6d^1 7s^2$ (अर्ध-पूर्ण $f$-कक्षक)
अर्ध-पूर्ण $f$-कक्षक वाले तत्व $Eu, Gd,$ और $Cm$ हैं।
कुल संख्या = $3$.
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निम्नलिखित में से सही कथनों की पहचान करें:
$(A)$ $298 \ K$ पर,$pH = 10$ वाले विलयन में रखे गए हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड का विभव $-0.59 \ V$ है।
$(B)$ $Ca^{2+}$ और $Cl^{-}$ की सीमांत मोलर चालकता क्रमशः $119$ और $76 \ S \ cm^2 \ mol^{-1}$ है। $CaCl_2$ की सीमांत मोलर चालकता $195 \ S \ cm^2 \ mol^{-1}$ है।
$(C)$ $K_{c}$ और $E_{cell}^{0}$ के बीच सही संबंध $E_{cell}^{0} = \frac{2.303 RT}{nF} \log K_{c}$ है।
A
$A, B, C$
B
केवल $A, B$
C
केवल $A, C$
D
केवल $B, C$

Solution

(C) हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड के लिए,$E = -0.0591 \times pH = -0.591 \ V$। अतः,कथन $(A)$ सही है।
$(B)$ $\Lambda^{\circ}_{m}(CaCl_2) = \Lambda^{\circ}_{m}(Ca^{2+}) + 2 \times \Lambda^{\circ}_{m}(Cl^{-}) = 119 + 2(76) = 271 \ S \ cm^2 \ mol^{-1}$। चूँकि $271 \neq 195$,इसलिए कथन $(B)$ गलत है।
$(C)$ साम्यावस्था पर नर्नस्ट समीकरण $E_{cell} = 0$ होता है,जिससे $E_{cell}^{0} = \frac{2.303 RT}{nF} \log K_{c}$ प्राप्त होता है। अतः,कथन $(C)$ सही है।
इसलिए,कथन $(A)$ और $(C)$ सही हैं।
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नीचे दो कथन दिए गए हैं।
कथन $I$ : पिघले हुए $NaCl$ का $Pt$ इलेक्ट्रोड का उपयोग करके विद्युत अपघटन किया जाता है। एनोड पर $Cl_2$ मुक्त होती है।
कथन $II$ : जलीय $CuSO_4$ का $Pt$ इलेक्ट्रोड का उपयोग करके विद्युत अपघटन किया जाता है। कैथोड पर $O_2$ मुक्त होती है।
सही उत्तर है
A
कथन $I$ और $II$ दोनों सही हैं
B
कथन $I$ और $II$ दोनों गलत हैं
C
कथन $I$ सही है लेकिन कथन $II$ गलत है
D
कथन $I$ गलत है लेकिन कथन $II$ सही है

Solution

(C) पिघले हुए $NaCl$ के विद्युत अपघटन के दौरान,कैथोड पर $Na$ धातु जमा होती है और एनोड पर $Cl_2$ गैस मुक्त होती है।
कैथोड पर: $Na^+ + e^- \rightarrow Na$
एनोड पर: $2Cl^- \rightarrow Cl_2 + 2e^-$
अतः,कथन $I$ सही है।
जब $Pt$ इलेक्ट्रोड का उपयोग करके जलीय $CuSO_4$ का विद्युत अपघटन किया जाता है,तो कैथोड पर $Cu$ जमा होता है और एनोड पर $O_2$ मुक्त होती है।
कैथोड पर: $Cu^{2+} + 2e^- \rightarrow Cu$
एनोड पर: $2H_2O \rightarrow O_2 + 4H^+ + 4e^-$
चूंकि $O_2$ कैथोड पर नहीं बल्कि एनोड पर मुक्त होती है,इसलिए कथन $II$ गलत है।
अतः,कथन $I$ सही है लेकिन कथन $II$ गलत है।
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$Li^{+} / Li$ और $Na^{+} / Na$ के लिए मानक इलेक्ट्रोड विभव $E^{\circ} (V)$ क्रमशः क्या हैं?
A
$-3.04, -2.714$
B
$-2.714, -3.04$
C
$-3.04, -3.04$
D
$-2.714, -2.714$

Solution

(A) मानक इलेक्ट्रोड विभव $(E^{\circ})$ इलेक्ट्रोड की अपचयन (reduction) होने की प्रवृत्ति को दर्शाता है।
$Li^{+} / Li$ के लिए,मानक इलेक्ट्रोड विभव $-3.04 \ V$ है।
$Na^{+} / Na$ के लिए,मानक इलेक्ट्रोड विभव $-2.714 \ V$ है।
अतः,मान क्रमशः $-3.04 \ V$ और $-2.714 \ V$ हैं।
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कॉपर$(II)$ सल्फेट के विलयन से $0.5 \ amperes$ विद्युत धारा $60 \ minutes$ तक प्रवाहित करने पर $0.592 \ g$ कॉपर जमा होता है। कॉपर$(II)$ का विद्युत-रासायनिक तुल्यांक ($g \ C^{-1}$ में) क्या है? $\left(F=96500 \ C \ mol^{-1}\right)$
A
$3.3 \times 10^{-3}$
B
$3.3 \times 10^{-4}$
C
$6.6 \times 10^{-3}$
D
$6.6 \times 10^{-4}$

Solution

(B) फैराडे के विद्युत अपघटन के नियम के अनुसार,$W = Z \times i \times t$,जहाँ $Z$ विद्युत-रासायनिक तुल्यांक है।
दिया गया है:
$W = 0.592 \ g$
$i = 0.5 \ A$
$t = 60 \ minutes = 60 \times 60 \ s = 3600 \ s$
सूत्र में मान रखने पर:
$0.592 = Z \times 0.5 \times 3600$
$0.592 = Z \times 1800$
$Z = \frac{0.592}{1800} \approx 3.288 \times 10^{-4} \ g \ C^{-1}$
दो सार्थक अंकों तक पूर्णांकित करने पर,$Z \approx 3.3 \times 10^{-4} \ g \ C^{-1}$.
108
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एक इलेक्ट्रोलाइट के $0.02 \ M$ विलयन की मोलर चालकता $124 \times 10^{-4} \ S \ m^2 \ mol^{-1}$ है। यदि इस विलयन को $129 \ m^{-1}$ सेल स्थिरांक वाले सेल में रखा जाए,तो इसका प्रतिरोध (ओह्म में) क्या होगा?
A
$390$
B
$130$
C
$260$
D
$520$

Solution

(D) दिया गया है: सांद्रता $C = 0.02 \ M = 20 \ mol \ m^{-3}$.
सेल स्थिरांक $G^* = 129 \ m^{-1}$.
मोलर चालकता $\Lambda_m = 124 \times 10^{-4} \ S \ m^2 \ mol^{-1}$.
सूत्र: $\Lambda_m = \frac{\kappa}{C}$,जहाँ $\kappa$ चालकता है।
$\kappa = \Lambda_m \times C = (124 \times 10^{-4}) \times 20 = 0.248 \ S \ m^{-1}$.
प्रतिरोध $R = \frac{G^*}{\kappa} = \frac{129}{0.248} \approx 520 \ \Omega$.
109
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निम्नलिखित में से कौन सा एलाइलिक हैलाइड का एक उदाहरण है?
A
Option A
B
Option B
C
Option C
D
Option D

Solution

(B) एलाइलिक हैलाइड वह यौगिक है जिसमें हैलोजन परमाणु $sp^3$ संकरित कार्बन परमाणु से जुड़ा होता है जो कार्बन-कार्बन द्वि-आबंध $(C=C)$ के बगल में होता है।
विकल्प $B$ में,क्लोरीन परमाणु उस कार्बन परमाणु से जुड़ा है जो सीधे $C=C$ द्वि-आबंध के बगल में है। यह कार्बन $sp^3$ संकरित है,इसलिए यह एक एलाइलिक हैलाइड है।
विकल्प $A$ में,क्लोरीन सीधे द्वि-आबंध वाले कार्बन से जुड़ा है,जो एक विनाइलिक हैलाइड है।
अतः,सही विकल्प $B$ है।
110
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निम्नलिखित यौगिक का $IUPAC$ नाम क्या है?
Question diagram
A
$2-$मिथाइलपेंटोक्सीबेन्जीन
B
$4-$मिथाइलपेंटोक्सीबेन्जीन
C
फेनॉक्सी$-4-$मिथाइलपेंटेन
D
फेनॉक्सी$-2-$मिथाइलपेंटेन

Solution

(B) $1$. ऑक्सीजन परमाणु से जुड़ी सबसे लंबी कार्बन श्रृंखला की पहचान करें। श्रृंखला में $5$ कार्बन परमाणु हैं,इसलिए मूल एल्केन पेंटेन है।
$2$. फेनॉक्सी समूह $(-OC_6H_5)$ पेंटेन श्रृंखला के पहले कार्बन से जुड़ा है।
$3$. प्रतिस्थापी को सबसे कम संख्या देने के लिए ऑक्सीजन से जुड़े कार्बन से अंकन शुरू करें।
$4$. मिथाइल समूह $4$थे स्थान पर है।
$5$. इस प्रकार,$IUPAC$ नाम $1-$फेनॉक्सी$-4-$मिथाइलपेंटेन है।
$6$. हालाँकि,दिए गए विकल्पों और संरचना के आधार पर,इस यौगिक को बेन्जीन का ईथर व्युत्पन्न माना जाता है जहाँ एल्कोक्सी समूह $4-$मिथाइलपेंटोक्सी है। इसलिए,सही नाम $4-$मिथाइलपेंटोक्सीबेन्जीन है।
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बिथियोनोल,टर्पिनियोल और क्लोरोज़ाइलेनोल की संरचनाओं में उपस्थित $-OH$ समूहों की संख्या क्रमशः कितनी है?
A
$2, 1, 1$
B
$1, 2, 1$
C
$1, 1, 2$
D
$2, 2, 1$

Solution

(A) $1$. बिथियोनोल: इसमें दो बेंजीन वलयों से जुड़े दो $-OH$ समूह होते हैं।
$2$. टर्पिनियोल: इसकी संरचना में एक $-OH$ समूह होता है।
$3$. क्लोरोज़ाइलेनोल: इसमें बेंजीन वलय से जुड़ा एक $-OH$ समूह होता है।
अतः,बिथियोनोल,टर्पिनियोल और क्लोरोज़ाइलेनोल में $-OH$ समूहों की संख्या क्रमशः $2, 1, 1$ है।
112
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केओलिनाइट धातु '$X$' का एक सिलिकेट खनिज है और कैलामाइन धातु '$Y$' का एक कार्बोनेट खनिज है। $X$ और $Y$ क्रमशः हैं
A
$Fe, Cu$
B
$Zn, Al$
C
$Al, Zn$
D
$Zn, Cu$

Solution

(C) केओलिनाइट $Al_2Si_2O_5(OH)_4$ रासायनिक सूत्र वाला एक क्ले खनिज है,जिसमें $Al$ (एल्युमीनियम) धातु होती है।
कैलामाइन $ZnCO_3$ रासायनिक सूत्र वाला एक जिंक अयस्क है,जिसमें $Zn$ (जिंक) धातु होती है।
अतः,$X$ का मान $Al$ है और $Y$ का मान $Zn$ है।
113
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कॉपर मैट किसका मिश्रण है?
A
$Cu$ और $Fe$ के ऑक्साइड
B
$Cu$ और $Fe$ के कार्बोनेट
C
$Cu$ और $Fe$ के सल्फाइड
D
$Cu$ और $Fe$ के सिलिकेट

Solution

(C) कॉपर मैट कॉपर पाइराइट्स से कॉपर के निष्कर्षण के दौरान प्राप्त होता है।
यह मुख्य रूप से कॉपर$(I)$ सल्फाइड $(Cu_2S)$ और आयरन$(II)$ सल्फाइड $(FeS)$ का मिश्रण है।
114
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कम क्वथनांक वाली धातु में अशुद्धि के रूप में उच्च क्वथनांक वाली धातु मौजूद है। शोधन की सही विधि है:
A
द्रवण (Liquation)
B
आसवन (Distillation)
C
पोलिंग (Poling)
D
वाष्प प्रावस्था शोधन (Vapour phase refining)

Solution

(B) आसवन (Distillation) उस प्रक्रिया का नाम है जिसका उपयोग $Zn$,$Cd$ और $Hg$ जैसी कम क्वथनांक वाली धातुओं को शुद्ध करने के लिए किया जाता है। इस विधि में,अशुद्ध धातु को गर्म करके शुद्ध धातु को वाष्पित किया जाता है,जिससे उच्च क्वथनांक वाली अशुद्धियाँ अवशेष के रूप में पीछे रह जाती हैं। इसके बाद शुद्ध धातु प्राप्त करने के लिए वाष्प को संघनित किया जाता है।
115
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निम्नलिखित में से कौन सी प्रक्रिया निस्तापन (calcination) है?
A
$2 Cu_2S + 3 O_2 \xrightarrow{\Delta} 2 Cu_2O + 2 SO_2 \uparrow$
B
$Al_2O_{3(s)} + 2 NaOH_{(aq)} + 3 H_2O_{(l)} \longrightarrow 2 Na[Al(OH)_4]_{(aq)}$
C
$2 CuFeS_2 + O_2 \longrightarrow Cu_2S + 2 FeS + SO_2 \uparrow$
D
$Fe_2O_3 \cdot x H_2O \xrightarrow{\Delta} Fe_2O_{3(s)} + x H_2O_{(g)}$

Solution

(D) निस्तापन (calcination) अयस्क को सीमित वायु में या वायु की अनुपस्थिति में गर्म करने की प्रक्रिया है ताकि वाष्पशील अशुद्धियों और नमी को हटाया जा सके।
यह आमतौर पर कार्बोनेट या जलयोजित ऑक्साइड अयस्कों के लिए उपयोग किया जाता है।
अभिक्रिया $Fe_2O_3 \cdot x H_2O \xrightarrow{\Delta} Fe_2O_{3(s)} + x H_2O_{(g)}$ लिमोनाइट से जलयोजन के जल को हटाने को दर्शाती है,जो एक विशिष्ट निस्तापन प्रक्रिया है।
116
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एक हैलोजन यौगिक $X$ $(C_4 H_9 Br)$ के जल-अपघटन से अल्कोहल $Y$ प्राप्त होता है। अल्कोहल $Y$,$358 \ K$ पर $20 \% H_3 PO_4$ के साथ निर्जलीकरण (dehydration) से गुजरता है। $X$ क्या है?
A
$(CH_3)_3 CBr$
B
$(CH_3)_2 CHCH_2 Br$
C
$CH_3 CH_2 CH_2 CH_2 Br$
D
$CH_3 CH(Br) CH_2 CH_3$

Solution

(A) अभिक्रिया का क्रम इस प्रकार है:
$1$. $C_4 H_9 Br$ $(X)$ का जल-अपघटन करने पर अल्कोहल $Y$ $(C_4 H_9 OH)$ प्राप्त होता है।
$2$. अल्कोहल $Y$,$358 \ K$ पर $20 \% H_3 PO_4$ के साथ निर्जलीकरण करके एल्कीन बनाता है।
$3$. टर्शियरी ब्यूटाइल ब्रोमाइड,$(CH_3)_3 CBr$,के जल-अपघटन से टर्शियरी ब्यूटाइल अल्कोहल,$(CH_3)_3 COH$ प्राप्त होता है।
$4$. टर्शियरी ब्यूटाइल अल्कोहल $358 \ K$ पर $20 \% H_3 PO_4$ के साथ आसानी से निर्जलीकरण करके आइसोब्यूटिलीन ($2$-मिथाइलप्रोपीन) बनाता है,जो दी गई अभिक्रिया की स्थितियों के अनुरूप है।
$5$. अतः,$X$,$(CH_3)_3 CBr$ है।
117
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निम्नलिखित अभिक्रिया अनुक्रम में मुख्य उत्पाद $(P)$ की पहचान करें।
$(CH_3)_3 CBr$ $\xrightarrow{\text{Alcoholic } KOH, \Delta}$ $\xrightarrow{HBr} P$
A
$(CH_3)_3 CBr$
B
$(CH_3)_2 CHCH_2 Br$
C
$CH_3-CH(Br)-CH_2-CH_3$
D
$CH_3-CH=CH-CH_3$

Solution

(A) चरण $1$: अल्कोहलिक $KOH$ के साथ टर्ट-ब्यूटाइल ब्रोमाइड का डिहाइड्रोहैलोजनीकरण आइसोब्यूटिलीन ($2$-मिथाइलप्रोपीन) देता है।
$(CH_3)_3 CBr \xrightarrow{\text{alc. } KOH, \Delta} (CH_3)_2 C=CH_2 + KBr + H_2O$
चरण $2$: आइसोब्यूटिलीन में $HBr$ का इलेक्ट्रोफिलिक योग मार्कोवनिकोव नियम का पालन करता है और मुख्य उत्पाद के रूप में टर्ट-ब्यूटाइल ब्रोमाइड बनाता है।
$(CH_3)_2 C=CH_2 + HBr \rightarrow (CH_3)_3 CBr$
118
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वह कार्बनिक हैलाइड,जो $S_{N}1$ क्रियाविधि द्वारा जल-अपघटन (hydrolysis) नहीं करता है,वह है
A
बेंजाइल क्लोराइड $(C_6H_5CH_2Cl)$
B
$CH_2=CH-CH_2Cl$
C
$(CH_3)_3C-Cl$
D
$CH_3-CH=CH-Cl$

Solution

(D) $S_{N}1$ क्रियाविधि कार्बोकेशन मध्यवर्ती के निर्माण के माध्यम से आगे बढ़ती है। कार्बोकेशन की स्थिरता $S_{N}1$ अभिक्रिया की सुगमता को निर्धारित करती है।
$(A)$ बेंजाइल क्लोराइड बेंजाइल कार्बोकेशन $(C_6H_5CH_2^+)$ बनाता है,जो बेंजीन वलय द्वारा अनुनाद (resonance) से स्थिर होता है।
$(B)$ $CH_2=CH-CH_2Cl$ एलिल कार्बोकेशन $(CH_2=CH-CH_2^+)$ बनाता है,जो अनुनाद द्वारा स्थिर होता है।
$(C)$ $(CH_3)_3C-Cl$ तृतीयक कार्बोकेशन $((CH_3)_3C^+)$ बनाता है,जो तीन मिथाइल समूहों के प्रेरणिक प्रभाव $(+I)$ द्वारा स्थिर होता है।
$(D)$ $CH_3-CH=CH-Cl$ विनाइलिक कार्बोकेशन $(CH_3-CH=CH^+)$ बनाएगा। द्वि-आबंध में शामिल कार्बन परमाणु पर धनात्मक आवेश $sp$-संकरित कार्बन की उच्च विद्युत ऋणात्मकता के कारण अत्यधिक अस्थिर होता है।
इसलिए,$CH_3-CH=CH-Cl$ का $S_{N}1$ क्रियाविधि द्वारा जल-अपघटन नहीं होता है।
119
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उपरोक्त अभिक्रिया में $X$ का $Y$ में रूपांतरण है
Question diagram
A
वुर्ट्ज़ अभिक्रिया
B
फिटिंग अभिक्रिया
C
वुर्ट्ज़-फिटिंग अभिक्रिया
D
सैंडमेयर अभिक्रिया

Solution

(C) अभिक्रिया का क्रम इस प्रकार है:
$1$. एनिलीन $0^{\circ}C$ पर $NaNO_2/HCl$ और उसके बाद $Cu_2Cl_2/HCl$ के साथ अभिक्रिया करके क्लोरोबेंजीन $(X)$ बनाता है। यह सैंडमेयर अभिक्रिया है।
$2$. क्लोरोबेंजीन $(X)$,$Na$ और शुष्क ईथर की उपस्थिति में मिथाइल क्लोराइड $(CH_3Cl)$ के साथ अभिक्रिया करके टोल्यूनि $(Y)$ बनाता है।
$3$. सोडियम और शुष्क ईथर की उपस्थिति में एरिल हैलाइड और एल्किल हैलाइड के बीच की अभिक्रिया को वुर्ट्ज़-फिटिंग अभिक्रिया के रूप में जाना जाता है।
Solution diagram
120
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दी गई अभिक्रिया श्रृंखला में $Y$ और $Z$ क्रमशः क्या हैं?
Question diagram
A
$CH_3COCH_3, CH_3CH=CHCHO$
B
$CH_3CH_2CHO, CH_3CH_2CH=C(CH_3)CHO$
C
$CH_3CH_2CHO, CH_3CH_2CH=C(CH_3)CHO$
D
$CH_3CH_2CH_2OH, CH_3CH_2COOH$

Solution

(B) $1$. प्रारंभिक पदार्थ प्रोपीन $(CH_3CH=CH_2)$ है।
$2$. $(i) B_2H_6$ और $(ii) H_2O_2/NaOH$ के साथ प्रोपीन का हाइड्रोबोरेशन-ऑक्सीकरण करने पर $X$ के रूप में प्रोपेन-$1$-ऑल $(CH_3CH_2CH_2OH)$ प्राप्त होता है।
$3$. $573 \ K$ पर $Cu$ का उपयोग करके प्रोपेन-$1$-ऑल $(X)$ का विहाइड्रोजनीकरण करने पर $Y$ के रूप में प्रोपेनल $(CH_3CH_2CHO)$ प्राप्त होता है।
$4$. प्रोपेनल $(Y)$ तनु $NaOH$ की उपस्थिति में एल्डोल संघनन अभिक्रिया करता है और उसके बाद गर्म $(\Delta)$ करने पर $Z$ के रूप में $\alpha,\beta$-असंतृप्त एल्डिहाइड,$2$-मिथाइलपेंट-$2$-इनल $(CH_3CH_2CH=C(CH_3)CHO)$ प्राप्त होता है।
121
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उस तत्व की पहचान करें जिसके लिए $+1$ ऑक्सीकरण अवस्था $+3$ ऑक्सीकरण अवस्था से अधिक स्थिर है।
A
$Ga$
B
$Sn$
C
$Tl$
D
$Ge$

Solution

(C) समूह $13$ के तत्वों में,अक्रिय युग्म प्रभाव (inert pair effect) के कारण समूह में नीचे जाने पर $+1$ ऑक्सीकरण अवस्था की स्थिरता बढ़ती है।
$Tl$ (थैलियम) के लिए,$+1$ ऑक्सीकरण अवस्था $+3$ ऑक्सीकरण अवस्था से अधिक स्थिर होती है क्योंकि $6s^2$ इलेक्ट्रॉन बंध बनाने में भाग लेने के प्रति अनिच्छुक होते हैं।
122
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निम्नलिखित में से किसका तापीय अपघटन करने पर डाइनाइट्रोजन मुक्त होती है?
$(i)$ सोडियम नाइट्रेट
$(ii)$ अमोनियम डाइक्रोमेट
$(iii)$ बेरियम एज़ाइड
A
केवल $i, ii$
B
केवल $ii, iii$
C
केवल $i, iii$
D
$i, ii, iii$

Solution

(B) तापीय अपघटन अभिक्रियाएँ इस प्रकार हैं:
$(NH_4)_2Cr_2O_7 \xrightarrow{\Delta} Cr_2O_3 + N_2 \uparrow + 4H_2O$
$Ba(N_3)_2 \xrightarrow{\Delta} Ba + 3N_2$
$2NaNO_3 \xrightarrow{\Delta} 2NaNO_2 + O_2$
उपरोक्त अभिक्रियाओं से यह स्पष्ट है कि अमोनियम डाइक्रोमेट $(ii)$ और बेरियम एज़ाइड $(iii)$ गर्म करने पर डाइनाइट्रोजन गैस मुक्त करते हैं,जबकि सोडियम नाइट्रेट $(i)$ डाइऑक्सीजन गैस मुक्त करता है।
अतः,सही विकल्प केवल $ii$ और $iii$ है।
123
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$NH_3, PH_3,$ और $BiH_3$ हाइड्राइड्स में,उच्चतम क्वथनांक वाला हाइड्राइड $X$ है और न्यूनतम क्वथनांक वाला हाइड्राइड $Y$ है। $X$ और $Y$ क्रमशः क्या हैं?
A
$PH_3, NH_3$
B
$NH_3, PH_3$
C
$BiH_3, PH_3$
D
$NH_3, BiH_3$

Solution

(C) नाइट्रोजन परिवार के हाइड्राइड्स के क्वथनांक का क्रम: $PH_3 < AsH_3 < NH_3 < SbH_3 < BiH_3$ है।
$NH_3$ में अंतर-आणविक हाइड्रोजन बंधन के कारण इसका क्वथनांक असामान्य रूप से उच्च होता है,लेकिन समूह में नीचे जाने पर आणविक द्रव्यमान और वैन डेर वाल्स बलों में वृद्धि के कारण क्वथनांक बढ़ता है।
दिए गए हाइड्राइड्स की तुलना करने पर: $PH_3$ का क्वथनांक सबसे कम है $(Y = PH_3)$।
$BiH_3$ का क्वथनांक सबसे अधिक है $(X = BiH_3)$।
अतः,$X = BiH_3$ और $Y = PH_3$ है।
124
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अमोनिया के निर्माण की हैबर प्रक्रिया में,'उत्प्रेरक','वर्धक' और 'उत्प्रेरक के लिए विष' क्रमशः क्या हैं?
A
$Fe, W, CO$
B
$Co, Mo, CO$
C
$Fe, Mo, CO_2$
D
$Fe, Mo, CO$

Solution

(D) अमोनिया के निर्माण की हैबर प्रक्रिया में,उत्प्रेरक $Fe$ है,वर्धक $Mo$ है और उत्प्रेरक के लिए विष $CO$ है।
125
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सूची-$I$ में दी गई औद्योगिक प्रक्रियाओं को सूची-$II$ में उपयोग किए गए उत्प्रेरकों के साथ सुमेलित करें:
सूची-$I$ (औद्योगिक प्रक्रिया)सूची-$II$ (उपयोग किया गया उत्प्रेरक)
$A$. ओस्टवाल्ड प्रक्रिया$I$. $CuCl_2$
$B$. हैबर प्रक्रिया$II$. जिओलाइट्स
$C$. डैकन प्रक्रिया$III$. $Pt$ गेज
$D$. हाइड्रोकार्बन का क्रैकिंग$IV$. $Fe$
A
$A-III, B-IV, C-I, D-II$
B
$A-IV, B-I, C-II, D-III$
C
$A-III, B-IV, C-II, D-I$
D
$A-II, B-I, C-IV, D-III$

Solution

(A) सही मिलान इस प्रकार है:
$A$. ओस्टवाल्ड प्रक्रिया में उत्प्रेरक के रूप में $Pt$ गेज का उपयोग किया जाता है $(A-III)$.
$B$. हैबर प्रक्रिया में उत्प्रेरक के रूप में $Fe$ का उपयोग किया जाता है $(B-IV)$.
$C$. डैकन प्रक्रिया में उत्प्रेरक के रूप में $CuCl_2$ का उपयोग किया जाता है $(C-I)$.
$D$. हाइड्रोकार्बन के क्रैकिंग के लिए जिओलाइट्स का उपयोग उत्प्रेरक के रूप में किया जाता है $(D-II)$.
अतः,सही क्रम $A-III, B-IV, C-I, D-II$ है।
126
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फास्फोरस के निम्नलिखित में से किस ऑक्सोएसिड में $P-O-P$ बंध होगा?
$I$. $H_4P_2O_5$
$II$. $H_4P_2O_6$
$III$. $H_4P_2O_7$
$IV$. $(HPO_3)_3$
A
$III$ और $IV$
B
$I$ और $II$
C
$I$ और $III$
D
$II$ और $IV$

Solution

(A) $P-O-P$ बंध वाले ऑक्सोएसिड निर्धारित करने के लिए,हम उनकी संरचनाओं की जांच करते हैं:
$I$. $H_4P_2O_5$ (पायरोफास्फोरस एसिड): इसमें $P-O-P$ लिंकेज होता है।
$II$. $H_4P_2O_6$ (हाइपोफास्फोरिक एसिड): इसमें $P-P$ बंध होता है,$P-O-P$ नहीं।
$III$. $H_4P_2O_7$ (पायरोफास्फोरिक एसिड): इसमें $P-O-P$ लिंकेज होता है।
$IV$. $(HPO_3)_3$ (साइक्लोट्राइमेटाफास्फोरिक एसिड): इसमें $P-O-P$ लिंकेज के साथ एक चक्रीय संरचना होती है।
अतः,$I$,$III$,और $IV$ सभी में $P-O-P$ बंध होते हैं।
127
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$H_2SO_4$ के निर्माण की संपर्क विधि (contact process) में,औद्योगिक संयंत्र में उपयोग किए जाने वाले आर्सेनिक प्यूरीफायर में क्या होता है?
A
$Al_2O_3 \cdot xH_2O$
B
$FeO \cdot xH_2O$
C
$Cr_2O_3 \cdot xH_2O$
D
$Fe_2O_3 \cdot xH_2O$

Solution

(D) सल्फ्यूरिक एसिड $(H_2SO_4)$ के निर्माण की संपर्क विधि में,सल्फर या सल्फाइड अयस्कों को जलाने से प्राप्त सल्फर डाइऑक्साइड $(SO_2)$ गैस में आर्सेनिक यौगिकों जैसी अशुद्धियाँ होती हैं।
ये अशुद्धियाँ कनवर्टर में उपयोग किए जाने वाले प्लैटिनम उत्प्रेरक के लिए उत्प्रेरक विष (catalytic poison) के रूप में कार्य करती हैं।
इन आर्सेनिक अशुद्धियों को दूर करने के लिए एक आर्सेनिक प्यूरीफायर का उपयोग किया जाता है।
आर्सेनिक प्यूरीफायर में फेरिक ऑक्साइड $(Fe_2O_3 \cdot xH_2O)$ होता है,जो गैस प्रवाह से आर्सेनिक अशुद्धियों को प्रभावी ढंग से अधिशोषित (adsorb) कर लेता है।
128
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निम्नलिखित अभिक्रिया का अवलोकन करें। यह अभिक्रिया क्या दर्शाती है?
$4 HCl + O_2 \xrightarrow[723 \ K]{CuCl_2} 2 Cl_2 + 2 H_2 O$
A
वैन आर्कल प्रक्रम
B
हॉल-हेरॉल्ट प्रक्रम
C
सर्पेक प्रक्रम
D
डीकन प्रक्रम

Solution

(D) दी गई अभिक्रिया क्लोरीन गैस के निर्माण की औद्योगिक विधि है,जिसे डीकन प्रक्रम के रूप में जाना जाता है।
इस प्रक्रिया में,$723 \ K$ पर $CuCl_2$ उत्प्रेरक की उपस्थिति में $HCl$ का वायुमंडलीय ऑक्सीजन द्वारा ऑक्सीकरण किया जाता है।
$4 HCl + O_2 \xrightarrow[723 \ K]{CuCl_2} 2 Cl_2 + 2 H_2 O$
129
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निम्नलिखित में से उस सेट की पहचान करें जो सही ढंग से मेल नहीं खाता है।
A
$PH_3$,रंगहीन गैस,सड़ी मछली जैसी गंध
B
$Cl_2$,हरे-पीले रंग की गैस,तीखी गंध
C
$Ne$,फ्लोरोसेंट हरी गैस,सड़े अंडे जैसी गंध
D
$SO_2$,रंगहीन गैस,तीखी गंध

Solution

(C) नियोन $(Ne)$ एक उत्कृष्ट गैस है,जो रंगहीन,गंधहीन और रासायनिक रूप से अक्रिय है।
विकल्प $C$ गलत है क्योंकि $Ne$ फ्लोरोसेंट हरी गैस नहीं है और इसमें सड़े अंडे जैसी गंध नहीं होती है।
$PH_3$ में सड़ी मछली जैसी गंध होती है,$Cl_2$ तीखी गंध वाली हरे-पीले रंग की गैस है,और $SO_2$ तीखी गंध वाली रंगहीन गैस है।
130
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वह मोनोमर जो बेकेलाइट और मेलामाइन दोनों पॉलिमर में उपस्थित होता है,वह है
A
मेथेनल
B
मेथेनॉल
C
फिनोल
D
एथेन-$1, 2$-डायोल

Solution

(A) बेकेलाइट,फिनोल और फॉर्मेल्डिहाइड (मेथेनल) के संघनन बहुलकीकरण द्वारा बनता है।
मेलामाइन,मेलामाइन और फॉर्मेल्डिहाइड (मेथेनल) के संघनन बहुलकीकरण द्वारा बनता है।
अतः,मेथेनल दोनों पॉलिमर में उपस्थित सामान्य मोनोमर है।
131
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निम्नलिखित में से कौन सा संघनन बहुलक (condensation polymer) का उदाहरण नहीं है?
A
टेरिलीन
B
नायलॉन $6,6$
C
बैकेलाइट
D
पॉलिस्टीरीन

Solution

(D) संघनन बहुलक दो अलग-अलग द्वि-कार्यात्मक मोनोमेरिक इकाइयों के बीच बार-बार होने वाली संघनन अभिक्रियाओं द्वारा बनते हैं,जिसमें पानी,अल्कोहल या हाइड्रोजन क्लोराइड जैसे छोटे अणुओं का निष्कासन होता है।
$A$,$B$,और $C$ (टेरिलीन,नायलॉन $6,6$,और बैकेलाइट) संघनन बहुलक के उदाहरण हैं।
पॉलिस्टीरीन एक योगात्मक बहुलक (addition polymer) है जो स्टाइरीन $(C_6H_5CH=CH_2)$ मोनोमर्स के बहुलकीकरण द्वारा बनता है,जिसमें किसी भी छोटे अणु का निष्कासन नहीं होता है।
132
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निम्नलिखित सूची-$I$ (मोनोमर) को सूची-$II$ (पॉलिमर का नाम) के साथ सुमेलित करें और सही उत्तर चुनें:
| सूची-$I$ (मोनोमर) | सूची-$II$ (पॉलिमर का नाम) |
| :--- | :--- |
| $A$. $CF_2=CF_2$ | $I$. नियोप्रीन |
| $B$. $NH_2(CH_2)_6NH_2, HO_2C(CH_2)_4CO_2H$ | $II$. बैकेलाइट |
| $C$. $C_6H_5OH, HCHO$ | $III$. टेफ्लॉन |
| $D$. $CH_2=CH(Cl)-CH=CH_2$ | $IV$. नायलॉन $6, 6$ |
A
$A-II; B-III; C-I; D-IV$
B
$A-III; B-IV; C-II; D-I$
C
$A-III; B-IV; C-I; D-II$
D
$A-III; B-I; C-IV; D-II$

Solution

(B) सही मिलान इस प्रकार हैं:
$A$. $CF_2=CF_2$ टेफ्लॉन $(III)$ के लिए मोनोमर है।
$B$. $NH_2(CH_2)_6NH_2$ (हेक्सामिथिलीन डायमाइन) और $HO_2C(CH_2)_4CO_2H$ (एडिपिक एसिड) नायलॉन $6, 6$ $(IV)$ के लिए मोनोमर हैं।
$C$. $C_6H_5OH$ (फिनोल) और $HCHO$ (फॉर्मेल्डिहाइड) बैकेलाइट $(II)$ के लिए मोनोमर हैं।
$D$. $CH_2=CH(Cl)-CH=CH_2$ (क्लोरोप्रीन) नियोप्रीन $(I)$ के लिए मोनोमर है।
अतः,सही मिलान $A-III, B-IV, C-II, D-I$ है।
133
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दी गई अभिक्रिया में बनने वाले बहुलक '$P$' की संरचना की पहचान कीजिए:
$Caprolactam \xrightarrow[H_2O]{533-543 \ K} P$
A
$[C(=O)-NH-(CH_2)_5-C]_n$
B
$[NH-(CH_2)_6-NH-CO-(CH_2)_4-C]_n$
C
$[C(=O)-(CH_2)_5-NH]_n$
D
$[C(=O)-(CH_2)_6-NH]_n$

Solution

(C) कैप्रोलैक्टम को $533-543 \ K$ पर जल के साथ गर्म करने पर यह वलय-खुलने (ring-opening) के बहुलकीकरण द्वारा नायलॉन-$6$ बनाता है।
अभिक्रिया इस प्रकार है:
$Caprolactam \xrightarrow[H_2O]{533-543 \ K} [CO-(CH_2)_5-NH]_n$
इस बहुलक को नायलॉन-$6$ के रूप में जाना जाता है। पुनरावर्ती इकाई की संरचना $[CO-(CH_2)_5-NH]_n$ है।
134
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निम्नलिखित अभिक्रियाओं में '$X$' और '$Y$' क्रमशः क्या हैं?
Question diagram
A
थैलिक एसिड,टेरेफ्थैलिक एसिड
B
टेरेफ्थैलिक एसिड,थैलिक एसिड
C
आइसोफ्थैलिक एसिड,टेरेफ्थैलिक एसिड
D
टेरेफ्थैलिक एसिड,आइसोफ्थैलिक एसिड

Solution

(A) एथिलीन ग्लाइकॉल $(HO-CH_2-CH_2-OH)$ की थैलिक एसिड के साथ अभिक्रिया से ग्लिप्टल बनता है,जिसका उपयोग पेंट के निर्माण में किया जाता है। अतः,$X$ थैलिक एसिड है।
एथिलीन ग्लाइकॉल की टेरेफ्थैलिक एसिड के साथ अभिक्रिया से टेरिलीन (या डेक्रॉन) बनता है,जिसका उपयोग सुरक्षा हेलमेट और सिंथेटिक फाइबर बनाने में किया जाता है। अतः,$Y$ टेरेफ्थैलिक एसिड है।
इसलिए,$X$ थैलिक एसिड है और $Y$ टेरेफ्थैलिक एसिड है।
135
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निम्नलिखित में से किसमें,आयनों को ऑक्सीकरण शक्ति के बढ़ते क्रम में सही ढंग से व्यवस्थित किया गया है?
A
$Cr_2O_7^{2-} < MnO_4^{-} < VO_2^{+}$
B
$VO_2^{+} < Cr_2O_7^{2-} < MnO_4^{-}$
C
$VO_2^{+} < MnO_4^{-} < Cr_2O_7^{2-}$
D
$MnO_4^{-} < Cr_2O_7^{2-} < VO_2^{+}$

Solution

(B) दिए गए आयनों में संक्रमण तत्वों की ऑक्सीकरण अवस्थाएँ $VO_2^{+}$ में $V = +5$,$Cr_2O_7^{2-}$ में $Cr = +6$ और $MnO_4^{-}$ में $Mn = +7$ हैं।
ऑक्सीकरण शक्ति अपचयन की सुगमता पर निर्भर करती है,जो प्राप्त अपचयित उत्पादों की स्थिरता पर निर्भर करती है।
इन संक्रमण धातुओं के लिए,अपचयित प्रजातियों की स्थिरता का क्रम $Mn^{2+} > Cr^{3+} > V^{3+}$ है।
अतः,ऑक्सीकरण शक्ति अपचयन विभव के साथ बढ़ती है,जिससे सही क्रम $VO_2^{+} < Cr_2O_7^{2-} < MnO_4^{-}$ प्राप्त होता है।
136
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$Pt + 3:1$ मिश्रण (सांद्र $HCl +$ सांद्र $HNO_3$) $\rightarrow [X]^{2-}$. $[X]^{2-}$ संकुल आयन में $Pt$ की ऑक्सीकरण अवस्था क्या है?
A
$2$
B
$3$
C
$4$
D
$6$

Solution

(C) जब $Pt$ सांद्र हाइड्रोक्लोरिक एसिड $(HCl)$ और सांद्र नाइट्रिक एसिड $(HNO_3)$ के $3:1$ मिश्रण के साथ प्रतिक्रिया करता है,तो यह एक्वा रेजिया नामक घोल बनाता है। एक्वा रेजिया क्लोरोसंकुल बनाकर प्लैटिनम को घोलने में सक्षम है। यह प्रतिक्रिया आमतौर पर $H_2[PtCl_6]$ बनाती है।
इस संकुल में,$Pt$ $+4$ ऑक्सीकरण अवस्था में है। प्रतिक्रिया के लिए संतुलित रासायनिक समीकरण है:
$Pt + 4HNO_3 + 6HCl \rightarrow H_2[PtCl_6] + 4NO_2 + 4H_2O$
अतः,$[PtCl_6]^{2-}$ में $Pt$ की ऑक्सीकरण अवस्था है:
$x + 6(-1) = -2$
$x - 6 = -2$
$x = +4$
137
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दी गई अभिक्रियाओं की श्रृंखला में $Y$ क्या है?
$P_4 + x NaOH + y H_2O \xrightarrow{CO_2} X + z NaH_2PO_2$
$X + CuSO_4 \rightarrow Y + H_2SO_4$
A
$Cu_3(PO_4)_2$
B
$Cu_3P_2$
C
$CuH_2PO_2$
D
$Cu_2(PO_3)_2$

Solution

(B) सफेद फास्फोरस की सोडियम हाइड्रोक्साइड के साथ अभिक्रिया एक असमानुपातन (disproportionation) अभिक्रिया है:
$P_4 + 3 NaOH + 3 H_2O \rightarrow PH_3 + 3 NaH_2PO_2$
यहाँ,$X$ फास्फीन $(PH_3)$ है।
इसके बाद,फास्फीन कॉपर$(II)$ सल्फेट के साथ अभिक्रिया करता है:
$2 PH_3 + 3 CuSO_4 \rightarrow Cu_3P_2 + 3 H_2SO_4$
अतः,$Y$ कॉपर फास्फाइड $(Cu_3P_2)$ है।
138
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सीमेंट के मुख्य घटक हैं
A
$SiO_2, Al_2O_3$
B
$Al_2O_3, Fe_2O_3$
C
$SiO_2, Fe_2O_3$
D
$SiO_2, CaO$

Solution

(D) सीमेंट मुख्य रूप से कैल्शियम ऑक्साइड $(CaO)$ और सिलिकॉन डाइऑक्साइड $(SiO_2)$ से बना होता है।
अन्य महत्वपूर्ण घटकों में एल्युमीनियम ऑक्साइड $(Al_2O_3)$,मैग्नीशियम ऑक्साइड $(MgO)$,आयरन ऑक्साइड $(Fe_2O_3)$ और सल्फर ट्राइऑक्साइड $(SO_3)$ शामिल हैं।
दिए गए विकल्पों में से,पोर्टलैंड सीमेंट में द्रव्यमान के आधार पर $SiO_2$ और $CaO$ सबसे अधिक मात्रा में होते हैं।
139
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एक यौगिक का आणविक सूत्र $AB_2O_4$ है। $O$ के परमाणु $ccp$ जालक बनाते हैं। $A$ (धनायन) के परमाणु चतुष्फलकीय रिक्तियों के $\frac{1}{8}$ भाग में स्थित हैं। $B$ (धनायन) के परमाणु अष्टफलकीय रिक्तियों के एक अंश में स्थित हैं। रिक्त अष्टफलकीय रिक्तियों का अंश क्या है?
A
$\frac{3}{4}$
B
$\frac{1}{4}$
C
$\frac{1}{3}$
D
$\frac{1}{2}$

Solution

(D) $ccp$ जालक में,यदि परमाणुओं की संख्या $N$ है,तो अष्टफलकीय रिक्तियों की संख्या $N$ और चतुष्फलकीय रिक्तियों की संख्या $2N$ होती है।
सूत्र $AB_2O_4$ के अनुसार,$O$ परमाणुओं की संख्या $4$ मानिए।
$O$,$ccp$ जालक बनाता है,इसलिए $N = 4$।
चतुष्फलकीय रिक्तियों की संख्या $= 2 \times 4 = 8$।
अष्टफलकीय रिक्तियों की संख्या $= 4$।
$A$ परमाणु चतुष्फलकीय रिक्तियों के $\frac{1}{8}$ भाग में हैं,इसलिए $A$ परमाणुओं की संख्या $= \frac{1}{8} \times 8 = 1$।
$B$ परमाणु अष्टफलकीय रिक्तियों में हैं। सूत्र $AB_2O_4$ के अनुसार,$B$ के $2$ परमाणु हैं।
भरी हुई अष्टफलकीय रिक्तियों का अंश $= \frac{2}{4} = \frac{1}{2}$।
रिक्त अष्टफलकीय रिक्तियों का अंश $= 1 - \frac{1}{2} = \frac{1}{2}$।
140
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$2.7 \times 10^{-2} \ kg \ mol^{-1}$ मोलर द्रव्यमान वाला एक तत्व $405 \ pm$ की किनारे की लंबाई के साथ एक घनीय इकाई सेल बनाता है। यदि इसका घनत्व $2.7 \times 10^3 \ kg \ m^{-3}$ है, तो इसकी एक इकाई सेल में उपस्थित परमाणुओं की संख्या क्या है? (दिया गया है: $N_{A}=6.023 \times 10^{23} \ mol^{-1}$)
A
$2$
B
$4$
C
$6$
D
$12$

Solution

(B) इकाई सेल के घनत्व का सूत्र: $\rho = \frac{Z \times M}{N_A \times a^3}$
जहाँ $Z$ प्रति इकाई सेल परमाणुओं की संख्या है, $M$ मोलर द्रव्यमान है, $N_A$ आवोगाद्रो संख्या है, और $a$ किनारे की लंबाई है।
$Z$ के लिए सूत्र: $Z = \frac{\rho \times N_A \times a^3}{M}$
दिया गया है:
$\rho = 2.7 \times 10^3 \ kg \ m^{-3}$
$M = 2.7 \times 10^{-2} \ kg \ mol^{-1}$
$a = 405 \ pm = 4.05 \times 10^{-10} \ m$
$N_A = 6.023 \times 10^{23} \ mol^{-1}$
मान रखने पर:
$Z = \frac{(2.7 \times 10^3) \times (6.023 \times 10^{23}) \times (4.05 \times 10^{-10})^3}{2.7 \times 10^{-2}}$
$Z \approx 4$
अतः, प्रति इकाई सेल परमाणुओं की संख्या $4$ है।
141
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एक क्रिस्टल का आणविक सूत्र $AB_2O_4$ है। ऑक्सीजन परमाणु $ccp$ जालक बनाते हैं। $A$ के परमाणु चतुष्फलकीय रिक्तियों का $x \%$ और $B$ के परमाणु अष्टफलकीय रिक्तियों का $y \%$ घेरते हैं। $x$ और $y$ क्रमशः हैं:
A
$12.5 \%, 50 \%$
B
$50 \%, 12.5 \%$
C
$33.3 \%, 66.6 \%$
D
$66.6 \%, 33.3 \%$

Solution

(A) $ccp$ जालक में,यदि ऑक्सीजन परमाणुओं की संख्या $4$ है,तो:
अष्टफलकीय रिक्तियों की संख्या $= 4$
चतुष्फलकीय रिक्तियों की संख्या $= 8$
आणविक सूत्र $AB_2O_4$ के अनुसार,$A$ परमाणु $1$,$B$ परमाणु $2$ और $O$ परमाणु $4$ हैं।
चतुष्फलकीय रिक्तियों में $A$ परमाणु के लिए: $x \% \text{ of } 8 = 1 \implies x = (1/8) \times 100 = 12.5 \%$.
अष्टफलकीय रिक्तियों में $B$ परमाणु के लिए: $y \% \text{ of } 4 = 2 \implies y = (2/4) \times 100 = 50 \%$.
अतः,$x = 12.5 \%$ और $y = 50 \%$ है।
142
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$X$ और $Y$ प्रकार के परमाणुओं वाले $BCC$ जालक में,$X$ प्रकार के परमाणु कोनों पर और $Y$ प्रकार के परमाणु काय-केंद्र (body center) पर उपस्थित हैं। इसकी इकाई कोशिका में,यदि कोनों से तीन परमाणु गायब हैं,तो यौगिक का सूत्र क्या होगा?
A
$X_5 Y_8$
B
$X_8 Y_5$
C
$X_3 Y_5$
D
$X_5 Y_3$

Solution

(A) $BCC$ इकाई कोशिका में $8$ कोने और $1$ काय-केंद्र होता है।
कोनों पर $X$ परमाणुओं की संख्या = $8 - 3 = 5$.
प्रत्येक कोने के परमाणु का योगदान = $1/8$.
कुल $X$ परमाणु = $5 \times (1/8) = 5/8$.
काय-केंद्र पर $Y$ परमाणुओं की संख्या = $1$.
काय-केंद्र के परमाणु का योगदान = $1$.
कुल $Y$ परमाणु = $1$.
अनुपात $X : Y = 5/8 : 1 = 5 : 8$.
अतः,यौगिक का सूत्र $X_5 Y_8$ है।
143
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ठोसों में क्रिस्टल दोषों के बारे में सही कथन की पहचान करें।
A
फ्रेंकेल दोष तब अनुकूल होता है जब धनायन और ऋणायन के आकार के बीच का अंतर बहुत छोटा होता है।
B
फ्रेंकेल दोष एक विस्थापन (dislocation) प्रभाव नहीं है।
C
शॉटकी दोषों का ठोसों के भौतिक गुणों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।
D
जालक (lattice) में इलेक्ट्रॉनों के फंसने से $F$-केंद्रों का निर्माण होता है।

Solution

(D) सही कथन यह है कि जालक में इलेक्ट्रॉनों के फंसने से $F$-केंद्रों का निर्माण होता है।
$1-$ फ्रेंकेल दोष तब अनुकूल होता है जब धनायन और ऋणायन के आकार के बीच का अंतर बड़ा होता है।
$2-$ फ्रेंकेल दोष को विस्थापन दोष भी कहा जाता है।
$3-$ शॉटकी दोष ठोसों के भौतिक गुणों को प्रभावित करता है,विशेष रूप से यह पदार्थ के घनत्व को कम करता है।
144
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शुष्क हवा में $79 \% \,N_2$ और $21 \% \,O_2$ होती है। $T \,K$ पर, यदि जल में $N_2$ और $O_2$ के लिए हेनरी के नियम के स्थिरांक क्रमशः $8.57 \times 10^4 \,atm$ और $4.56 \times 10^4 \,atm$ हैं, तो $1 \,atm$ पर जल में घुले $N_2$ और $O_2$ के मोल अंशों का अनुपात क्या है?
A
$4: 1$
B
$1: 4$
C
$2: 1$
D
$1: 2$

Solution

(C) जल के ऊपर हवा का कुल दाब $= 1 \,atm$ है।
$N_2$ और $O_2$ का आंशिक दाब:
$P_{N_2} = \frac{1 \times 79}{100} = 0.79 \,atm$
$P_{O_2} = \frac{1 \times 21}{100} = 0.21 \,atm$
हेनरी के नियम का उपयोग करने पर $(P = K_H \times X)$:
$X_{N_2} = \frac{P_{N_2}}{K_{H, N_2}} = \frac{0.79}{8.57 \times 10^4} \approx 9.22 \times 10^{-6}$
$X_{O_2} = \frac{P_{O_2}}{K_{H, O_2}} = \frac{0.21}{4.56 \times 10^4} \approx 4.60 \times 10^{-6}$
$N_2$ और $O_2$ के मोल अंशों का अनुपात:
$\frac{X_{N_2}}{X_{O_2}} = \frac{9.22 \times 10^{-6}}{4.60 \times 10^{-6}} \approx 2$
अतः, अनुपात $2: 1$ है।
145
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$300 \ K$ पर,$0.06 \ kg$ कार्बनिक विलेय को $1 \ kg$ जल में घोला जाता है। $300 \ K$ पर विलयन का वाष्प दाब $3.768 \ kPa$ है। यदि उस तापमान पर जल का वाष्प दाब $3.78 \ kPa$ है,तो कार्बनिक विलेय का मोलर द्रव्यमान ($g \ mol^{-1}$ में) क्या है? (मान लें कि विलयन तनु है)
A
$180$
B
$120$
C
$340$
D
$260$

Solution

(C) तनु विलयन के लिए,वाष्प दाब में सापेक्ष अवनमन का सूत्र: $\frac{P^0 - P_s}{P^0} = \frac{W_2 \times M_1}{M_2 \times W_1}$
दिया गया है: $W_2 = 60 \ g$,$W_1 = 1000 \ g$,$P^0 = 3.78 \ kPa$,$P_s = 3.768 \ kPa$,$M_1 = 18 \ g \ mol^{-1}$।
$\Delta P = 3.78 - 3.768 = 0.012 \ kPa$।
$M_2$ के लिए सूत्र: $M_2 = \frac{60 \times 18 \times 3.78}{0.012 \times 1000} = 340.2 \ g \ mol^{-1}$
निकटतम पूर्णांक मान $340 \ g \ mol^{-1}$ है।
146
ChemistryEasyMCQTS EAMCET · 2024
$300 \ K$ पर,टोल्यूनि और बेंजीन का वाष्प दाब क्रमशः $3.63 \ kPa$ और $9.7 \ kPa$ है। $0.4$ मोल अंश टोल्यूनि वाले विलयन के साथ साम्यावस्था में वाष्प का संघटन क्या होगा? (मान लीजिए कि विलयन आदर्श है)
A
$0.40$
B
$0.60$
C
$0.80$
D
$0.20$

Solution

(D) दिया गया है: $P_{T}^0 = 3.63 \ kPa$,$P_{B}^0 = 9.7 \ kPa$,$X_{T} = 0.4$.
चूंकि $X_{T} + X_{B} = 1$,बेंजीन का मोल अंश $X_{B} = 1 - 0.4 = 0.6$ है।
विलयन का कुल वाष्प दाब $P_{total} = P_{T}^0 X_{T} + P_{B}^0 X_{B}$ द्वारा दिया जाता है।
$P_{total} = (3.63 \times 0.4) + (9.7 \times 0.6) = 1.452 + 5.82 = 7.272 \ kPa$.
वाष्प प्रावस्था में टोल्यूनि का संघटन $(y_{T})$ डाल्टन के नियम का उपयोग करके: $y_{T} = \frac{P_{T}}{P_{total}} = \frac{P_{T}^0 X_{T}}{P_{total}}$.
$y_{T} = \frac{1.452}{7.272} \approx 0.1996 \approx 0.20$.
147
ChemistryEasyMCQTS EAMCET · 2024
आसुत जल $373.15 \ K$ पर उबलता है और $273.15 \ K$ पर जम जाता है। आसुत जल में ग्लूकोज का एक विलयन $373.202 \ K$ पर उबलता है। उसी विलयन का हिमांक ($K$ में) क्या है? (जल के लिए,$K_{b}=0.52 \ K \ kg \ mol^{-1}, \ K_{f}=1.86 \ K \ kg \ mol^{-1}$)
A
$273.15$
B
$273$
C
$272.964$
D
$273.336$

Solution

(C) दिया गया है: $T_{b}^{\circ} = 373.15 \ K$,$T_{b} = 373.202 \ K$,$K_{b} = 0.52 \ K \ kg \ mol^{-1}$,$K_{f} = 1.86 \ K \ kg \ mol^{-1}$,$T_{f}^{\circ} = 273.15 \ K$.
क्वथनांक में उन्नयन: $\Delta T_{b} = T_{b} - T_{b}^{\circ} = 373.202 - 373.15 = 0.052 \ K$.
चूंकि $\Delta T_{b} = m \times K_{b}$,इसलिए $0.052 = m \times 0.52$,जिससे मोललता $m = 0.1 \ mol \ kg^{-1}$ प्राप्त होती है।
हिमांक में अवनमन: $\Delta T_{f} = m \times K_{f} = 0.1 \times 1.86 = 0.186 \ K$.
विलयन का हिमांक: $T_{f} = T_{f}^{\circ} - \Delta T_{f} = 273.15 - 0.186 = 272.964 \ K$.
148
ChemistryEasyMCQTS EAMCET · 2024
$T \ K$ पर,$0.1 \ mol$ अवाष्पशील विलेय को $0.9 \ mol$ वाष्पशील विलायक में घोला गया। शुद्ध विलायक का वाष्प दाब $0.9 \ bar$ है। विलयन का वाष्प दाब ($bar$ में) क्या है?
A
$0.89$
B
$0.81$
C
$0.79$
D
$0.71$

Solution

(B) राउल्ट के नियम के अनुसार,अवाष्पशील विलेय युक्त विलयन का वाष्प दाब $P_s = P_1^0 \times X_1$ द्वारा दिया जाता है।
दिया गया है: $n_{\text{solute}} = 0.1 \ mol$,$n_{\text{solvent}} = 0.9 \ mol$,$P_1^0 = 0.9 \ bar$।
विलायक का मोल अंश $(X_1)$ = $\frac{n_{\text{solvent}}}{n_{\text{solvent}} + n_{\text{solute}}} = \frac{0.9}{0.9 + 0.1} = 0.9$।
$P_s = 0.9 \times 0.9 = 0.81 \ bar$।
149
ChemistryMediumMCQTS EAMCET · 2024
एक ठोस अधिशोषक पर गैस का अधिशोषण फ्रुंडलिच अधिशोषण समतापी का पालन करता है। यदि $x$ दाब $p$ पर '$m$' द्रव्यमान के अधिशोषक पर अधिशोषित गैस का द्रव्यमान है,तो दिए गए ग्राफ से,अधिशोषण की मात्रा किसके समानुपाती है?
Question diagram
A
$p^{1/2}$
B
$p^2$
C
$p$
D
$p^{1/4}$

Solution

(A) फ्रुंडलिच अधिशोषण समतापी के अनुसार:
$\frac{x}{m} = k \cdot p^{1/n}$
दोनों तरफ लघुगणक लेने पर:
$\log(\frac{x}{m}) = \log k + \frac{1}{n} \log p$
यह समीकरण $y = mx + c$ के रूप की एक सीधी रेखा को दर्शाता है,जहाँ ढाल (slope) $\frac{1}{n}$ है।
दिए गए ग्राफ से,ढाल की गणना इस प्रकार है:
$\text{Slope} = \frac{\text{change in } \log(\frac{x}{m})}{\text{change in } \log p} = \frac{3}{6} = \frac{1}{2}$
इसलिए,$\frac{1}{n} = \frac{1}{2}$।
इस मान को फ्रुंडलिच समीकरण में रखने पर:
$\frac{x}{m} = k \cdot p^{1/2}$
अतः,अधिशोषण की मात्रा $p^{1/2}$ के समानुपाती है।
150
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एक अधिशोषक पर गैस का अधिशोषण फ्रुंडलिच अधिशोषण समतापी का पालन करता है। समतापी का ढाल और अंतःखंड ($y$-अक्ष पर) क्रमशः $0.5$ और $1.0$ हैं। जब गैस का दाब $(p)$ $100 \ atm$ हो,तो $\frac{x}{m}$ का मान क्या होगा?
A
$10$
B
$1$
C
$100$
D
$1000$

Solution

(C) फ्रुंडलिच अधिशोषण समतापी का समीकरण है: $\log \frac{x}{m} = \log k + \frac{1}{n} \log p$।
इसे सरल रेखा के समीकरण $y = mx + c$ से तुलना करने पर,जहाँ $y = \log \frac{x}{m}$,$x = \log p$,ढाल $= \frac{1}{n}$,और अंतःखंड $= \log k$ है।
दिया गया है: ढाल $(\frac{1}{n}) = 0.5$ और अंतःखंड $(\log k) = 1.0$।
दाब $(p) = 100 \ atm$।
समीकरण में मान रखने पर: $\log \frac{x}{m} = 1.0 + 0.5 \times \log(100)$।
चूँकि $\log(100) = 2$,इसलिए: $\log \frac{x}{m} = 1.0 + 0.5 \times 2 = 1.0 + 1.0 = 2.0$।
अतः,$\frac{x}{m} = 10^2 = 100$।

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There are 241 Chemistry questions from the TS EAMCET 2024 paper on Vedclass, each with a detailed step-by-step solution in Hindi.

Are TS EAMCET 2024 Chemistry solutions available in Hindi?

Yes. All solutions on this page are in Hindi. You can also switch to English or Hindi using the language buttons above the questions.

Can I practice TS EAMCET 2024 Chemistry as a timed test?

Yes. Use the Vedclass Test Series to attempt a full TS EAMCET mock test covering Chemistry with time limits and instant score analysis.

Can teachers create Chemistry papers from TS EAMCET previous year questions?

Yes. The Vedclass Exam Paper Generator lets teachers mix TS EAMCET Chemistry questions and generate Set A/B/C/D papers in minutes.

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