NEET 2026 Physics Question Paper with Answer and Solution in Hindi

45 QuestionsHindiWith Solutions

PhysicsQ145 of 45 questions

Page 1 of 1 · Hindi

1
PhysicsMediumMCQNEET · 2026
एक सरल लोलक के लिए,जिसका आवर्तकाल $T$ है,गतिज ऊर्जा $(K.E)$ का समय $(t)$ के साथ परिवर्तन किसके द्वारा दर्शाया जाता है?
A
Option A
B
Option B
C
Option C
D
Option D

Solution

(D) एक सरल लोलक की गतिज ऊर्जा $(K.E)$ का सूत्र $K.E = \frac{1}{2} m v^2$ है।
सरल आवर्त गति $(SHM)$ कर रहे सरल लोलक का वेग $v = A\omega \cos(\omega t + \phi)$ होता है।
अतः,$K.E = \frac{1}{2} m A^2 \omega^2 \cos^2(\omega t + \phi)$।
चूंकि $K.E \propto \cos^2(\omega t)$,ग्राफ एक आवर्ती फलन है जिसकी आवृत्ति लोलक की गति की आवृत्ति से दोगुनी होती है,जिसका अर्थ है कि यह उस समय में दो चक्र पूरे करता है जितने समय में लोलक एक चक्र पूरा करता है $(T)$।
माध्य स्थिति $(t=0)$ पर,वेग अधिकतम होता है,इसलिए गतिज ऊर्जा भी अधिकतम होती है। वह ग्राफ जो $t=0$ पर अधिकतम गतिज ऊर्जा दर्शाता है और $T$ समय में दो चक्र पूरे करता है,वह ग्राफ $D$ है।
2
PhysicsDifficultMCQNEET · 2026
एक फ्लाईव्हील की कोणीय गति $10 \text{ s}$ में $600 \text{ rpm}$ से बढ़कर $1200 \text{ rpm}$ हो जाती है। इस समय के दौरान फ्लाईव्हील द्वारा पूरे किए गए चक्करों की संख्या है:
A
$600$
B
$300$
C
$900$
D
$150$

Solution

(D) प्रारंभिक कोणीय गति $\omega_i = 600 \text{ rpm} = \frac{600 \times 2\pi}{60} = 20\pi \text{ rad/s}$.
अंतिम कोणीय गति $\omega_f = 1200 \text{ rpm} = \frac{1200 \times 2\pi}{60} = 40\pi \text{ rad/s}$.
कोणीय त्वरण $\alpha = \frac{\omega_f - \omega_i}{t} = \frac{40\pi - 20\pi}{10} = 2\pi \text{ rad/s}^2$.
कुल कोणीय विस्थापन $\theta = \omega_i t + \frac{1}{2} \alpha t^2 = (20\pi)(10) + \frac{1}{2}(2\pi)(10^2) = 200\pi + 100\pi = 300\pi \text{ rad}$.
चक्करों की संख्या $n = \frac{\theta}{2\pi} = \frac{300\pi}{2\pi} = 150$.
3
PhysicsDifficultMCQNEET · 2026
एक सरल लोलक के गोलक की गतिज ऊर्जा और स्थितिज ऊर्जा का योग $0.02 \text{ J}$ है। साम्यावस्था (equilibrium position) पर सरल लोलक के गोलक की चाल लगभग कितनी होगी ($\text{ m/s}$ में)? (गोलक का द्रव्यमान = $20 \text{ g}$ लें)
A
$2.0$
B
$0.2$
C
$14.1$
D
$1.41$

Solution

(D) एक सरल लोलक की कुल यांत्रिक ऊर्जा $E$ उसकी गतिज ऊर्जा और स्थितिज ऊर्जा का योग होती है,जो गति के दौरान स्थिर रहती है।
दी गई कुल ऊर्जा $E = 0.02 \text{ J}$ है।
साम्यावस्था (माध्य स्थिति) पर,गोलक की स्थितिज ऊर्जा शून्य होती है,इसलिए कुल ऊर्जा पूरी तरह से गतिज ऊर्जा के रूप में होती है।
अतः,$E = K.E_{max} = \frac{1}{2} m v_{max}^2$.
दिया गया द्रव्यमान $m = 20 \text{ g} = 0.02 \text{ kg}$ है।
समीकरण में मान रखने पर:
$0.02 = \frac{1}{2} \times 0.02 \times v_{max}^2$
$1 = \frac{1}{2} v_{max}^2$
$v_{max}^2 = 2$
$v_{max} = \sqrt{2} \approx 1.414 \text{ m/s}$.
इस प्रकार,साम्यावस्था पर चाल लगभग $1.41 \text{ m/s}$ है।
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PhysicsDifficultMCQNEET · 2026
एक पनडुब्बी को $100 \text{ atm}$ के निरपेक्ष दबाव को सहन करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह पानी की सतह से कितनी गहराई तक जा सकती है ($\text{ m}$ में)? (पानी का घनत्व = $1000 \text{ kg/m}^3$, $1 \text{ atm} = 1 \times 10^5 \text{ Pa}$ और गुरुत्वीय त्वरण $g = 10 \text{ m/s}^2$ लें)
A
$9900$
B
$990$
C
$9000$
D
$99$

Solution

(B) निरपेक्ष दबाव का सूत्र $P = P_{atm} + \rho g h$ है।
यहाँ, $P = 100 \text{ atm} = 100 \times 10^5 \text{ Pa}$, $P_{atm} = 1 \text{ atm} = 1 \times 10^5 \text{ Pa}$, $\rho = 1000 \text{ kg/m}^3$, और $g = 10 \text{ m/s}^2$ है।
मान रखने पर: $100 \times 10^5 = 1 \times 10^5 + (1000)(10)h$.
$100 \times 10^5 - 1 \times 10^5 = 10^4 h$.
$99 \times 10^5 = 10^4 h$.
$h = \frac{99 \times 10^5}{10^4} = 99 \times 10 = 990 \text{ m}$.
अतः, पनडुब्बी $990 \text{ m}$ की गहराई तक जा सकती है।
5
PhysicsDifficultMCQNEET · 2026
सूची-$I$ को सूची-$II$ से सुमेलित कीजिए:
सूची-$I$ सूची-$II$
$A$. यंग मापांक $I$. $\frac{Ad}{\Delta L}$
$B$. संपीड्यता $II$. $\frac{FL}{A\Delta L}$
$C$. आयतन मापांक $III$. $-\frac{1}{\Delta P}(\frac{\Delta V}{V})$
$D$. प्वासों अनुपात $IV$. $-\frac{\Delta D/D}{\Delta L/L}$
A
$A-III, B-II, C-I, D-IV$
B
$A-II, B-III, C-IV, D-I$
C
$A-I, B-IV, C-III, D-II$
D
$A-IV, B-I, C-II, D-III$

Solution

(B) . यंग मापांक $(Y)$ अनुदैर्ध्य प्रतिबल और अनुदैर्ध्य विकृति का अनुपात है,जो $Y = \frac{FL}{A\Delta L}$ $(II)$ द्वारा दिया जाता है।
$B$. संपीड्यता $(K)$ आयतन मापांक का व्युत्क्रम है,जो $K = -\frac{1}{\Delta P}(\frac{\Delta V}{V})$ $(III)$ द्वारा दिया जाता है।
$C$. आयतन मापांक $(B)$ को $-\frac{\Delta P}{\Delta V/V}$ के रूप में परिभाषित किया गया है।
$D$. प्वासों अनुपात $(\sigma)$ पार्श्व विकृति और अनुदैर्ध्य विकृति का अनुपात है,जो $\sigma = -\frac{\Delta D/D}{\Delta L/L}$ $(IV)$ द्वारा दिया जाता है।
अतः,सही विकल्प $(2)$ है।
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PhysicsMediumMCQNEET · 2026
पृथ्वी की सतह से 'm' द्रव्यमान को पृथ्वी की त्रिज्या '$R$' के बराबर ऊँचाई तक ले जाने में किया गया कार्य कितना होगा?
A
$mg\frac{R}{2}$
B
$mgR$
C
$mg\frac{R}{4}$
D
$2mgR$

Solution

(A) पृथ्वी की सतह से $m$ द्रव्यमान को $h$ ऊँचाई तक ले जाने में किया गया कार्य $W$ गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा में परिवर्तन के बराबर होता है: $W = U_f - U_i$.
यहाँ,सतह पर प्रारंभिक स्थितिज ऊर्जा $U_i = -\frac{GMm}{R}$ है।
$h = R$ ऊँचाई पर अंतिम स्थितिज ऊर्जा $U_f = -\frac{GMm}{R+R} = -\frac{GMm}{2R}$ है।
अतः,$W = -\frac{GMm}{2R} - (-\frac{GMm}{R}) = \frac{GMm}{R} - \frac{GMm}{2R} = \frac{GMm}{2R}$।
चूँकि सतह पर गुरुत्वीय त्वरण $g = \frac{GM}{R^2}$ है,इसलिए हम $GM = gR^2$ लिख सकते हैं।
इस मान को कार्य के व्यंजक में प्रतिस्थापित करने पर: $W = \frac{(gR^2)m}{2R} = \frac{mgR}{2}$।
7
PhysicsMediumMCQNEET · 2026
जब एक स्केल ऊर्ध्वाधर रूप से गिरता है,तो $5$ अलग-अलग व्यक्ति इसे अलग-अलग प्रतिक्रिया समय के साथ पकड़ते हैं। $(g = 9.8 \text{ ms}^{-2})$
$A$. व्यक्ति $A$ का प्रतिक्रिया समय $0.20 \text{ s}$ है।
$B$. व्यक्ति $B$ का प्रतिक्रिया समय $0.22 \text{ s}$ है।
$C$. व्यक्ति $C$ का प्रतिक्रिया समय $0.18 \text{ s}$ है।
$D$. व्यक्ति $D$ का प्रतिक्रिया समय $0.19 \text{ s}$ है।
$E$. व्यक्ति $E$ का प्रतिक्रिया समय $0.21 \text{ s}$ है।
प्रत्येक व्यक्ति के लिए स्केल द्वारा तय की गई दूरी का सही क्रम क्या है?
A
$B > E > A > C > D$
B
$C > D > A > E > B$
C
$C > D > A > B > E$
D
$B > E > A > D > C$

Solution

(D) स्वतंत्र रूप से गिरती हुई वस्तु द्वारा तय की गई दूरी समीकरण $s = \frac{1}{2}gt^2$ द्वारा दी जाती है।
चूंकि $g$ स्थिर है,इसलिए दूरी $s$ प्रतिक्रिया समय $t$ के वर्ग के सीधे आनुपातिक है $(s \propto t^2)$।
प्रतिक्रिया समय की तुलना करने पर: $t_B (0.22 \text{ s}) > t_E (0.21 \text{ s}) > t_A (0.20 \text{ s}) > t_D (0.19 \text{ s}) > t_C (0.18 \text{ s})$।
चूंकि $s \propto t^2$,इसलिए दूरी का क्रम प्रतिक्रिया समय के वर्ग के क्रम के समान होगा।
अतः,तय की गई दूरी का क्रम होगा: $B > E > A > D > C$।
इस प्रकार,विकल्प $D$ सही है।
8
PhysicsDifficultMCQNEET · 2026
$1000 \text{ kg}$ द्रव्यमान को $10 \text{ s}$ में $20 \text{ m}$ की ऊँचाई तक उठाने वाली क्रेन की शक्ति क्या होगी? $(g = 9.8 \text{ ms}^{-2})$
A
$19.6 \text{ kW}$
B
$19.6 \text{ W}$
C
$39.2 \text{ kW}$
D
$39.2 \text{ W}$

Solution

(A) शक्ति $P$ को कार्य करने की दर के रूप में परिभाषित किया जाता है।
$P = \frac{W}{t} = \frac{mgh}{t}$.
दिए गए मान $m = 1000 \text{ kg}$,$h = 20 \text{ m}$,$t = 10 \text{ s}$,और $g = 9.8 \text{ ms}^{-2}$ हैं।
इन मानों को सूत्र में रखने पर:
$P = \frac{1000 \times 9.8 \times 20}{10}$
$P = 1000 \times 9.8 \times 2$
$P = 19600 \text{ W}$.
चूँकि $1 \text{ kW} = 1000 \text{ W}$,इसलिए $P = 19.6 \text{ kW}$ प्राप्त होता है।
अतः,विकल्प $A$ सही है.
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PhysicsMediumMCQNEET · 2026
एक इलेक्ट्रिक हीटर $100 \text{ W}$ की दर से एक सिस्टम को ऊष्मा प्रदान करता है। यदि सिस्टम $75 \text{ J/s}$ की दर से कार्य करता है,तो आंतरिक ऊर्जा के बढ़ने की दर क्या होगी ($\text{ W}$ में)?
A
$75$
B
$25$
C
$100$
D
$125$

Solution

(B) ऊष्मागतिकी के प्रथम नियम के अनुसार,ऊष्मा आपूर्ति की दर आंतरिक ऊर्जा में परिवर्तन की दर और सिस्टम द्वारा किए गए कार्य की दर के योग के बराबर होती है: $\frac{dQ}{dt} = \frac{dU}{dt} + \frac{dW}{dt}$.
दिया गया है कि ऊष्मा आपूर्ति की दर $\frac{dQ}{dt} = 100 \text{ W}$ और कार्य करने की दर $\frac{dW}{dt} = 75 \text{ J/s} = 75 \text{ W}$ है।
इन मानों को समीकरण में रखने पर: $100 \text{ W} = \frac{dU}{dt} + 75 \text{ W}$.
अतः,आंतरिक ऊर्जा के बढ़ने की दर $\frac{dU}{dt} = 100 - 75 = 25 \text{ W}$ होगी।
इस प्रकार,विकल्प $B$ सही है।
10
PhysicsDifficultMCQNEET · 2026
सविता, जो $XI$ कक्षा की छात्रा है, एक सरल लोलक की प्रभावी लंबाई $L$ निर्धारित करने के लिए प्रयोग करते समय, $30$ दोलनों को पूरा करने में लगने वाले समय को $60 \text{ s}$ नोट करती है और इस प्रकार सरल लोलक की लंबाई की गणना करती है: ($\pi^2 = 9.8$ और $g = 9.8 \text{ m/s}^2$ लें) ($\text{ m}$ में)
A
$0.75$
B
$1$
C
$1.5$
D
$2$

Solution

(B) एक सरल लोलक का आवर्तकाल $T$, सूत्र $T = 2\pi \sqrt{\frac{L}{g}}$ द्वारा दिया जाता है।
यह दिया गया है कि $30$ दोलनों के लिए लिया गया समय $60 \text{ s}$ है, इसलिए आवर्तकाल $T = \frac{60}{30} = 2 \text{ s}$ होगा।
सूत्र में मान रखने पर: $2 = 2\pi \sqrt{\frac{L}{9.8}}$।
समीकरण के दोनों पक्षों का वर्ग करने पर, हमें $4 = 4\pi^2 \frac{L}{9.8}$ प्राप्त होता है।
दिया गया है कि $\pi^2 = 9.8$, इसलिए समीकरण में मान प्रतिस्थापित करने पर: $4 = 4 \times 9.8 \times \frac{L}{9.8}$।
व्यंजक को सरल करने पर, हमें $4 = 4L$ प्राप्त होता है, जिसका अर्थ है $L = 1 \text{ m}$।
अतः, सही विकल्प $B$ है।
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$L$ लंबाई और $m$ रैखिक द्रव्यमान घनत्व वाले एक पतले तार को चित्र में दिखाए अनुसार $C$ केंद्र वाली एक वृत्ताकार रिंग ($x-y$ तल में) में मोड़ा गया है। $yy'$ अक्ष के परितः रिंग का जड़त्व आघूर्ण क्या होगा?
Question diagram
A
$\frac{3mL^3}{8\pi}$
B
$\frac{3mL^2}{8\pi^2}$
C
$\frac{3mL^3}{8\pi^2}$
D
$\frac{3mL^2}{8\pi}$

Solution

(C) कुल द्रव्यमान $M = m \times L$ है।
त्रिज्या $R$ का मान $L = 2\pi R$ से प्राप्त होता है,इसलिए $R = \frac{L}{2\pi}$।
एक रिंग का उसके व्यास के परितः जड़त्व आघूर्ण $I_{diam} = \frac{1}{2}MR^2$ होता है।
समांतर अक्ष प्रमेय का उपयोग करते हुए,स्पर्शरेखा $yy'$ के परितः जड़त्व आघूर्ण $I = I_{cm} + MR^2$ है,जहाँ $I_{cm} = I_{diam} = \frac{1}{2}MR^2$ है।
अतः,$I = \frac{1}{2}MR^2 + MR^2 = \frac{3}{2}MR^2$।
$M = mL$ और $R = \frac{L}{2\pi}$ प्रतिस्थापित करने पर:
$I = \frac{3}{2} (mL) \left(\frac{L}{2\pi}\right)^2 = \frac{3}{2} mL \left(\frac{L^2}{4\pi^2}\right) = \frac{3mL^3}{8\pi^2}$।
इसलिए,सही विकल्प $C$ है।
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एक प्रगामी हार्मोनिक तरंग $y(x, t) = 2.0 \cos 2\pi(10 t - 0.0080 x + 0.35)$ के लिए, जहाँ $x$ और $y$ $\text{cm}$ में हैं और $t$ $\text{s}$ में है। $0.5 \text{ m}$ की दूरी पर स्थित दो बिंदुओं की दोलनी गति के बीच का कलांतर क्या है ($\pi \text{ rad}$ में)?
A
$0.08$
B
$0.008$
C
$0.8$
D
$8$

Solution

(C) दी गई तरंग समीकरण $y(x, t) = 2.0 \cos(2\pi(10t - 0.0080x + 0.35))$ है।
इसे मानक तरंग समीकरण $y = A \cos(2\pi ft - kx + \phi)$ के साथ तुलना करने पर, हम तरंग संख्या $k$ प्राप्त करते हैं।
कोसाइन फलन के अंदर का पद $2\pi(10t - 0.0080x + 0.35) = 20\pi t - 0.016\pi x + 0.7\pi$ है।
अतः, तरंग संख्या $k = 0.016\pi \text{ cm}^{-1}$ है।
$\Delta x$ दूरी से अलग हुए दो बिंदुओं के बीच कलांतर $\Delta\phi = k \Delta x$ द्वारा दिया जाता है।
यहाँ $\Delta x = 0.5 \text{ m} = 50 \text{ cm}$ दिया गया है।
मान रखने पर, $\Delta\phi = (0.016\pi \text{ cm}^{-1}) \times 50 \text{ cm} = 0.8\pi \text{ rad}$ प्राप्त होता है।
अतः, सही विकल्प $C$ है।
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$15 \text{ kg}$ द्रव्यमान का एक बक्सा एक स्थिर ट्रॉली के फर्श पर रखा गया है। बक्से और ट्रॉली के बीच स्थैतिक घर्षण गुणांक $0.12$ है। बक्से को ट्रॉली पर स्थिर रखते हुए,वह अधिकतम त्वरण क्या है जिससे ट्रॉली को क्षैतिज रूप से गति कराई जा सकती है? $(g = 10 \text{m s}^{-2})$
A
$1.8$
B
$1.2$
C
$1.5$
D
$2.1$

Solution

(B) सीमांत घर्षण बल $f_s$ बक्से को ट्रॉली के साथ त्वरित करने के लिए आवश्यक बल प्रदान करता है।
बक्से को ट्रॉली के सापेक्ष स्थिर रहने के लिए,बक्से पर कार्य करने वाले छद्म बल (pseudo force) को स्थैतिक घर्षण बल द्वारा संतुलित होना चाहिए।
बक्से के ट्रॉली पर स्थिर रहने की शर्त है: $ma \le f_{s, \text{max}}$.
चूंकि $f_{s, \text{max}} = \mu N = \mu mg$,इसलिए $ma \le \mu mg$ प्राप्त होता है।
यह सरल होकर $a \le \mu g$ हो जाता है।
दिया गया है $\mu = 0.12$ और $g = 10 \text{m s}^{-2}$,इसलिए अधिकतम त्वरण $a_{\text{max}} = \mu g = 0.12 \times 10 = 1.2 \text{m s}^{-2}$ है।
अतः,वह अधिकतम त्वरण जिससे ट्रॉली को गति कराई जा सकती है,$1.2 \text{m s}^{-2}$ है।
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एक फ्लास्क में आर्गन और क्लोरीन द्रव्यमान के $2:1$ अनुपात में हैं। मिश्रण का तापमान $27^{\circ}\text{C}$ है। दोनों गैसों के अणुओं की रूट मीन स्क्वायर गति का अनुपात $\left(\frac{v_{\text{rms}}^{\text{Ar}}}{v_{\text{rms}}^{\text{Cl}}}\right)$ क्या होगा? (आर्गन का परमाणु द्रव्यमान $= 40.0 \text{u}$ और क्लोरीन का आणविक द्रव्यमान $= 70.0 \text{u}$)
A
$\frac{7}{4}$
B
$\frac{2}{\sqrt{7}}$
C
$\frac{\sqrt{7}}{2}$
D
$\frac{7}{2}$

Solution

(C) गैस के अणु की रूट मीन स्क्वायर गति का सूत्र $v_{\text{rms}} = \sqrt{\frac{3RT}{M}}$ है,जहाँ $R$ सार्वत्रिक गैस नियतांक है,$T$ निरपेक्ष तापमान है और $M$ गैस का मोलर द्रव्यमान है।
चूंकि मिश्रण में दोनों गैसों के लिए तापमान $T$ समान है,इसलिए उनकी रूट मीन स्क्वायर गति का अनुपात केवल उनके मोलर द्रव्यमान पर निर्भर करता है।
अनुपात $\frac{v_{\text{rms}}^{\text{Ar}}}{v_{\text{rms}}^{\text{Cl}}} = \frac{\sqrt{3RT/M_{\text{Ar}}}}{\sqrt{3RT/M_{\text{Cl}}}} = \sqrt{\frac{M_{\text{Cl}}}{M_{\text{Ar}}}}$ द्वारा दिया जाता है।
दिया गया है कि आर्गन का परमाणु द्रव्यमान $M_{\text{Ar}} = 40.0 \text{u}$ और क्लोरीन का आणविक द्रव्यमान $M_{\text{Cl}} = 70.0 \text{u}$ है।
इन मानों को प्रतिस्थापित करने पर,हमें $\frac{v_{\text{rms}}^{\text{Ar}}}{v_{\text{rms}}^{\text{Cl}}} = \sqrt{\frac{70}{40}} = \sqrt{\frac{7}{4}} = \frac{\sqrt{7}}{2}$ प्राप्त होता है।
अतः,सही विकल्प $C$ है।
15
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$5 \text{ kg}$ द्रव्यमान वाले एक पिंड पर जब दो परस्पर लंबवत बल $8 \text{ N}$ और $6 \text{ N}$ कार्य करते हैं,तो उत्पन्न त्वरण का परिमाण और दिशा क्रमशः क्या होगी?
A
$2 \text{ ms}^{-2}$; $\tan^{-1}(3/4, 8 \text{ N}$ बल के साथ$)$
B
$2 \text{ ms}^{-2}$; $\tan^{-1}(4/3, 8 \text{ N}$ बल के साथ$)$
C
$2 \text{ ms}^{-2}$; $\tan^{-1}(3/4, 6 \text{ N}$ बल के साथ$)$
D
$20 \text{ ms}^{-2}$; $\tan^{-1}(4/3, 8 \text{ N}$ बल के साथ$)$

Solution

(A) दिया गया द्रव्यमान $m = 5 \text{ kg}$ है।
दो बल $F_1 = 8 \text{ N}$ और $F_2 = 6 \text{ N}$ परस्पर लंबवत हैं।
परिणामी बल $F = \sqrt{F_1^2 + F_2^2} = \sqrt{8^2 + 6^2} = \sqrt{64 + 36} = \sqrt{100} = 10 \text{ N}$ है।
न्यूटन के गति के दूसरे नियम के अनुसार,त्वरण $a = F/m = 10 \text{ N} / 5 \text{ kg} = 2 \text{ ms}^{-2}$ है।
$8 \text{ N}$ बल के सापेक्ष परिणामी बल की दिशा $\theta$ के लिए,$\tan \theta = \frac{F_2}{F_1} = \frac{6}{8} = 3/4$ है।
अतः,$\theta = \tan^{-1}(3/4)$ जो $8 \text{ N}$ बल के साथ का कोण है।
इस प्रकार,सही विकल्प $A$ है।
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निर्वात में प्रकाश की गति को इकाई (unity) माना गया है। यदि प्रकाश को सूर्य से पृथ्वी तक पहुँचने में $6 \text{ min } 40 \text{ s}$ का समय लगता है,तो नई इकाई में सूर्य और पृथ्वी के बीच की दूरी क्या है?
A
$3 \times 10^8$
B
$500$
C
$3 \times 10^{10}$
D
$400$

Solution

(D) दिया गया है कि प्रकाश की गति $c = 1$ इकाई है।
लिया गया समय $t = 6 \text{ min } 40 \text{ s}$ है।
समय को सेकंड में बदलने पर: $t = (6 \times 60) \text{ s} + 40 \text{ s} = 360 \text{ s} + 40 \text{ s} = 400 \text{ s}$।
दूरी $d$ की गणना सूत्र $d = c \times t$ का उपयोग करके की जाती है।
मान रखने पर: $d = 1 \times 400 = 400$ इकाई।
अतः,सूर्य और पृथ्वी के बीच की दूरी $400$ इकाई है।
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निम्नलिखित आरेख ऊर्ध्वाधर ऊपर की ओर फेंकी गई और वापस नीचे गिरती हुई गेंद के लिए वेग $(v)$ और समय $(t)$ के बीच परिवर्तन को दर्शाते हैं। निम्नलिखित में से कौन सा आरेख सही है?
Question diagram
A
आरेख $(A)$
B
आरेख $(B)$
C
आरेख $(C)$
D
आरेख $(D)$

Solution

(C) जब किसी गेंद को प्रारंभिक वेग $u$ के साथ ऊर्ध्वाधर ऊपर की ओर फेंका जाता है,तो किसी भी समय $t$ पर उसका वेग गति के समीकरण द्वारा दिया जाता है: $v = u - gt$,जहाँ $g$ गुरुत्वीय त्वरण है।
$1$. प्रारंभ में,वेग धनात्मक $(v = u)$ होता है।
$2$. जैसे-जैसे गेंद ऊपर जाती है,गुरुत्वीय त्वरण $g$ के कारण वेग समय के साथ रैखिक रूप से घटता है।
$3$. अधिकतम ऊँचाई पर,वेग शून्य हो जाता है।
$4$. अधिकतम ऊँचाई तक पहुँचने के बाद,गेंद नीचे गिरना शुरू कर देती है। इस चरण के दौरान,वेग ऋणात्मक हो जाता है (क्योंकि यह प्रारंभिक ऊपर की दिशा के विपरीत होता है) और इसका परिमाण समय के साथ रैखिक रूप से बढ़ता है।
यह रैखिक संबंध $v = u - gt$ एक ऋणात्मक ढाल $(-g)$ वाली सीधी रेखा को दर्शाता है। आरेख $(C)$ इस परिवर्तन को सही ढंग से दर्शाता है,जो एक धनात्मक प्रारंभिक वेग से शुरू होता है,समय अक्ष को पार करता है (जहाँ $v = 0$ होता है),और ऋणात्मक वेग क्षेत्र में आगे बढ़ता है।
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एक वर्नियर कैलिपर्स में,$20$ $VSD$,$16$ $MSD$ के साथ संपाती (coincide) हैं (प्रत्येक भाग की लंबाई $1 \text{ mm}$ है)। वर्नियर कैलिपर्स का अल्पतमांक (least count) है: ($\text{ cm}$ में)
A
$0.2$
B
$0.1$
C
$0.02$
D
$0.01$

Solution

(C) वर्नियर कैलिपर्स का अल्पतमांक $(LC)$ सूत्र $LC = 1 \text{ MSD} - 1 \text{ VSD}$ द्वारा परिभाषित किया जाता है।
दिया गया है कि $20 \text{ VSD} = 16 \text{ MSD}$,इसलिए $1 \text{ VSD} = \frac{16}{20} \text{ MSD} = 0.8 \text{ MSD}$।
इसे सूत्र में प्रतिस्थापित करने पर,हमें $LC = 1 \text{ MSD} - 0.8 \text{ MSD} = 0.2 \text{ MSD}$ प्राप्त होता है।
चूंकि $1 \text{ MSD} = 1 \text{ mm} = 0.1 \text{ cm}$,इसलिए $LC = 0.2 \times 0.1 \text{ cm} = 0.02 \text{ cm}$ है।
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$5.580 \text{ kg}$ द्रव्यमान वाले एक धात्विक घन की प्रत्येक भुजा $9.0 \text{ cm}$ मापी गई है। सार्थक अंकों को ध्यान में रखते हुए,घन के पदार्थ के घनत्व को $X \times 10^3 \text{ kg m}^{-3}$ के रूप में सर्वोत्तम व्यक्त किया जा सकता है,जहाँ $X$ का मान है:
A
$7.654$
B
$7.7$
C
$7.65$
D
$7.6$

Solution

(B) घनत्व $\rho = \frac{\text{द्रव्यमान}}{\text{आयतन}}$.
द्रव्यमान $m = 5.580 \text{ kg}$.
भुजा की लंबाई $a = 9.0 \text{ cm} = 9.0 \times 10^{-2} \text{ m}$.
आयतन $V = a^3 = (9.0 \times 10^{-2} \text{ m})^3 = 729 \times 10^{-6} \text{ m}^3 = 7.29 \times 10^{-4} \text{ m}^3$.
घनत्व $\rho = \frac{5.580 \text{ kg}}{7.29 \times 10^{-4} \text{ m}^3} \approx 7654.32 \text{ kg m}^{-3} = 7.65432 \times 10^3 \text{ kg m}^{-3}$.
चूंकि भुजा की लंबाई $9.0 \text{ cm}$ में केवल दो सार्थक अंक हैं,इसलिए अंतिम परिणाम को दो सार्थक अंकों तक पूर्णांकित (round off) किया जाना चाहिए।
$7.65432$ को दो सार्थक अंकों तक पूर्णांकित करने पर $7.7$ प्राप्त होता है।
अतः,$X = 7.7$.
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एक रूम हीटर $400 \text{ W}$, $220 \text{ V}$ पर रेटेड है। यदि आपूर्ति वोल्टेज घटकर $200 \text{ V}$ हो जाता है, तो खपत की गई शक्ति (लगभग) क्या होगी ($\text{ W}$ में)?
A
$400$
B
$121$
C
$331$
D
$200$

Solution

(C) हीटर का प्रतिरोध $R$ स्थिर रहता है।
सूत्र $R = \frac{V^2}{P}$ का उपयोग करते हुए, हम $R = \frac{220^2}{400} \Omega$ की गणना करते हैं।
नए वोल्टेज $V' = 200 \text{ V}$ पर खपत की गई नई शक्ति $P' = \frac{(V')^2}{R}$ द्वारा दी जाती है।
$R$ का मान प्रतिस्थापित करने पर, हमें $P' = \frac{(V')^2 \cdot P}{V^2} = \frac{200^2 \times 400}{220^2}$ प्राप्त होता है।
$P' = \frac{40000 \times 400}{48400} = \frac{16000000}{48400} \approx 330.57 \text{ W}$।
निकटतम पूर्णांक में राउंड ऑफ करने पर, हमें $331 \text{ W}$ प्राप्त होता है।
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$5 \text{ cm}$ त्रिज्या वाली $100$ फेरों वाली एक वृत्ताकार कुंडली के केंद्र पर चुंबकीय क्षेत्र $3.14 \times 10^{-3} \text{ T}$ है। कुंडली से प्रवाहित धारा और इस कुंडली के चुंबकीय आघूर्ण का परिमाण क्रमशः क्या है? (लीजिए $\mu_0 = 4\pi \times 10^{-7} \text{ T m/A}$)
A
$2.5 \text{ A}, 20 \text{ A m}^2$
B
$2 \text{ A}, 4 \text{ A m}^2$
C
$2.5 \text{ A}, 2 \text{ A m}^2$
D
$2 \text{ A}, 10 \text{ A m}^2$

Solution

(C) वृत्ताकार कुंडली के केंद्र पर चुंबकीय क्षेत्र $B = \frac{\mu_0 N I}{2r}$ द्वारा दिया जाता है।
दिया गया है: $B = 3.14 \times 10^{-3} \text{ T}$,$N = 100$,$r = 5 \text{ cm} = 0.05 \text{ m}$,$\mu_0 = 4\pi \times 10^{-7} \text{ T m/A}$.
मान रखने पर: $3.14 \times 10^{-3} = \frac{4 \times 3.14 \times 10^{-7} \times 100 \times I}{2 \times 0.05}$.
$3.14 \times 10^{-3} = \frac{4 \times 3.14 \times 10^{-5} \times I}{0.1}$.
$10^{-3} = \frac{4 \times 10^{-5} \times I}{0.1} = 4 \times 10^{-4} \times I$.
$I = \frac{10^{-3}}{4 \times 10^{-4}} = \frac{10}{4} = 2.5 \text{ A}$.
चुंबकीय आघूर्ण $M = N I A = N I (\pi r^2)$ द्वारा दिया जाता है।
$M = 100 \times 2.5 \times 3.14 \times (0.05)^2$.
$M = 250 \times 3.14 \times 0.0025 = 1.9625 \approx 2 \text{ A m}^2$.
अतः,धारा $2.5 \text{ A}$ है और चुंबकीय आघूर्ण $2 \text{ A m}^2$ है।
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सूची-$I$ को सूची-$II$ से सुमेलित कीजिए:
सूची-$I$सूची-$II$
$A$. $E = hv$$I$. डी ब्रोग्ली तरंगदैर्ध्य
$B$. विवर्तन और व्यतिकरण$II$. प्रकाश की कण प्रकृति
$C$. $\lambda = h/p$$III$. प्रकाश की तरंग प्रकृति
$D$. कॉम्पटन प्रभाव$IV$. फोटॉन की ऊर्जा

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए:
A
$(1)$ $A-IV, B-III, C-II, D-I$
B
$(2)$ $A-IV, B-III, C-I, D-II$
C
$(3)$ $A-I, B-IV, C-III, D-II$
D
$(4)$ $A-IV, B-I, C-II, D-III$

Solution

(B) . $E = hv$ फोटॉन की ऊर्जा को दर्शाता है $(IV)$।
$B$. विवर्तन और व्यतिकरण वे घटनाएं हैं जो प्रकाश की तरंग प्रकृति को प्रदर्शित करती हैं $(III)$।
$C$. $\lambda = h/p$ डी ब्रोग्ली तरंगदैर्ध्य का समीकरण है $(I)$।
$D$. कॉम्पटन प्रभाव प्रकाश की कण प्रकृति को प्रदर्शित करता है $(II)$।
अतः,सही मिलान $A-IV, B-III, C-I, D-II$ है,जो विकल्प $(2)$ के अनुरूप है।
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$C_1 = C_2 = C_3 = C_4 = 10 \mu F$ और $C_5 = 2.5 \mu F$ धारिता वाले पाँच संधारित्रों को $50 \ V$ की बैटरी के साथ चित्रानुसार जोड़ा गया है। तुल्य धारिता और संधारित्रों पर आवेश ज्ञात कीजिए।
A
$4 \mu F$,$C_1$ से $C_4$ पर $250 \mu C$ और $C_5$ पर $125 \mu C$
B
$5 \mu F$,$C_4$ पर $250 \mu C$
C
$5 \mu F$,$C_1$ से $C_4$ पर $125 \mu C$ और $C_5$ पर $25 \mu C$
D
$5 \mu F$,$C_1, C_2, C_3, C_4$ पर $250 \mu C$ और $C_5$ पर $0 \mu C$

Solution

(D) यह परिपथ एक संतुलित व्हीटस्टोन सेतु है क्योंकि $\frac{C_1}{C_2} = \frac{C_4}{C_3} = \frac{10}{10} = 1$ है।
चूंकि सेतु संतुलित है,इसलिए केंद्रीय संधारित्र $C_5$ से कोई आवेश प्रवाहित नहीं होता है।
अतः,परिपथ दो समानांतर शाखाओं में सरल हो जाता है,जिनमें से प्रत्येक में दो संधारित्र श्रेणीक्रम में हैं।
बाईं शाखा में $C_1$ और $C_2$ श्रेणीक्रम में हैं,और दाईं शाखा में $C_4$ और $C_3$ श्रेणीक्रम में हैं।
प्रत्येक शाखा की तुल्य धारिता: $C_{\text{branch}} = \frac{10 \times 10}{10 + 10} = 5 \mu F$.
कुल तुल्य धारिता: $C_{\text{eq}} = 5 \mu F + 5 \mu F = 10 \mu F$.
बैटरी द्वारा आपूर्ति किया गया कुल आवेश: $Q = C_{\text{eq}}V = 10 \mu F \times 50 \ V = 500 \mu C$.
चूंकि शाखाएं समान हैं,इसलिए आवेश समान रूप से विभाजित होता है: प्रत्येक शाखा से $250 \mu C$ आवेश प्रवाहित होता है।
इस प्रकार,प्रत्येक संधारित्र $C_1, C_2, C_3, C_4$ पर $250 \mu C$ और $C_5$ पर $0 \mu C$ आवेश होता है।
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$200 \text{ pF}$ समान धारिता वाले दो अनावेशित संधारित्रों पर विचार करें। उनमें से एक को $100 \text{ V}$ की आपूर्ति द्वारा आवेशित किया जाता है और फिर डिस्कनेक्ट कर दिया जाता है। अब,इस संधारित्र को अनावेशित संधारित्र से जोड़ा जाता है। इस प्रक्रिया में नष्ट हुई स्थिर-विद्युत ऊर्जा कितनी है?
A
$0.5 \text{ J}$
B
$1.0 \times 10^{-6} \text{ J}$
C
$0.5 \times 10^{-6} \text{ J}$
D
$1.0 \text{ J}$

Solution

(C) प्रारंभिक ऊर्जा $U_i = \frac{1}{2} C V^2$.
यहाँ $C = 200 \text{ pF} = 200 \times 10^{-12} \text{ F}$ और $V = 100 \text{ V}$ दिया गया है।
$U_i = \frac{1}{2} \times 200 \times 10^{-12} \times (100)^2 = 100 \times 10^{-12} \times 10^4 = 10^{-6} \text{ J}$.
जब आवेशित संधारित्र को एक समान अनावेशित संधारित्र से जोड़ा जाता है,तो आवेश का पुनर्वितरण तब तक होता है जब तक विभव समान न हो जाए।
उभयनिष्ठ विभव $V' = \frac{CV + 0}{C+C} = \frac{V}{2} = \frac{100}{2} = 50 \text{ V}$.
अंतिम ऊर्जा $U_f = \frac{1}{2} (C+C) (V')^2 = C (\frac{V}{2})^2 = \frac{1}{4} CV^2 = \frac{U_i}{2}$.
$U_f = \frac{10^{-6}}{2} = 0.5 \times 10^{-6} \text{ J}$.
नष्ट हुई ऊर्जा $\Delta U = U_i - U_f = 10^{-6} - 0.5 \times 10^{-6} = 0.5 \times 10^{-6} \text{ J}$ है।
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एक $AC$ परिपथ में $1 \text{ k}Omega$ का प्रतिरोध,$0.1 \mu\text{F}$ का संधारित्र और $1 \text{ mH}$ का प्रेरक श्रेणीक्रम में जुड़े हैं। परिपथ की अनुनाद आवृत्ति लगभग कितनी है ($kHz$ में)?
A
$15.9$
B
$20.7$
C
$10.1$
D
$13.5$

Solution

(A) $LCR$ श्रेणी परिपथ की अनुनाद आवृत्ति $f_r$ का सूत्र है: $f_r = \frac{1}{2 \pi \sqrt{LC}}$.
दिए गए मान हैं: $L = 1 \text{ mH} = 10^{-3} \text{ H}$ और $C = 0.1 \mu\text{F} = 0.1 \times 10^{-6} \text{ F} = 10^{-7} \text{ F}$.
इन मानों को सूत्र में रखने पर:
$\sqrt{LC} = \sqrt{10^{-3} \times 10^{-7}} = \sqrt{10^{-10}} = 10^{-5}$.
अब,$f_r = \frac{1}{2 \pi \times 10^{-5}} = \frac{10^5}{2 \times 3.14159} \approx \frac{100000}{6.283} \approx 15915.5 \text{ Hz}$.
kHz में बदलने पर,$f_r \approx 15.9 \text{ kHz}$.
अतः,सही विकल्प $A$ है।
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नीचे दी गई आकृति 'a' त्रिज्या वाले वृत्ताकार अनुप्रस्थ काट के एक लंबे सीधे ठोस तार को दर्शाती है जिसमें स्थिर धारा $I$ प्रवाहित हो रही है। धारा $I$ इसके अनुप्रस्थ काट में समान रूप से वितरित है। वह ग्राफ जो चालक की अक्ष से दूरी $(r)$ के साथ चुंबकीय क्षेत्र $(B)$ के परिवर्तन को सही ढंग से दर्शाता है,वह है:
Question diagram
A
Option A
B
Option B
C
Option C
D
Option D

Solution

(A) चालक के अंदर $(r < a)$,चुंबकीय क्षेत्र $B = \frac{\mu_0 I r}{2 \pi a^2}$ द्वारा दिया जाता है,जो दर्शाता है कि $B \propto r$ है। यह चालक की अक्ष से सतह तक चुंबकीय क्षेत्र में एक रैखिक वृद्धि को दर्शाता है।
चालक के बाहर $(r > a)$,चुंबकीय क्षेत्र $B = \frac{\mu_0 I}{2 \pi r}$ द्वारा दिया जाता है,जो दर्शाता है कि $B \propto \frac{1}{r}$ है। यह चालक से दूरी बढ़ने के साथ चुंबकीय क्षेत्र में व्युत्क्रमानुपाती कमी को दर्शाता है।
ग्राफ $(A)$ सही ढंग से एक रैखिक वृद्धि और उसके बाद एक व्युत्क्रमानुपाती कमी को प्रदर्शित करता है। अतः,विकल्प $(A)$ सही है।
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PhysicsMediumMCQNEET · 2026
एक प्रत्यावर्ती धारा $(AC)$ का शिखर मान $5 \text{ A}$ है और आवृत्ति $60 \text{ Hz}$ है। शून्य से शुरू होकर,धारा को शिखर मान तक पहुँचने में कितना समय लगेगा?
A
$1$/$120$ s
B
$1$/$240$ s
C
$1$/$30$ s
D
$1$/$60$ s

Solution

(B) तात्क्षणिक धारा का समीकरण $I = I_0 \sin(\omega t)$ द्वारा दिया जाता है,जहाँ $I_0$ शिखर धारा है और $\omega$ कोणीय आवृत्ति है।
शिखर मान तक पहुँचने के लिए,ज्या (sine) फलन का मान $1$ होना चाहिए,जो तब होता है जब कला कोण $\omega t = \frac{\pi}{2}$ हो।
$\omega = 2 \pi f$ प्रतिस्थापित करने पर,हमें $2 \pi f t = \frac{\pi}{2}$ प्राप्त होता है।
समय $t$ के लिए हल करने पर,$t = \frac{1}{4f}$ प्राप्त होता है।
आवृत्ति $f = 60 \text{ Hz}$ दी गई है,इस मान को समीकरण में रखने पर:
$t = \frac{1}{4 \times 60} = \frac{1}{240} \text{ s}$.
अतः,धारा को शून्य से अपने शिखर मान तक पहुँचने में $1/240 \text{ s}$ का समय लगता है।
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PhysicsMediumMCQNEET · 2026
यंग के द्वि-झिरी प्रयोग में,$\lambda$ तरंगदैर्ध्य के एकवर्णी प्रकाश का उपयोग करते हुए,पर्दे पर उस बिंदु पर प्रकाश की तीव्रता $K$ इकाई है जहाँ पथ अंतर $\frac{\lambda}{3}$ है। उस बिंदु पर प्रकाश की तीव्रता क्या होगी जहाँ पथ अंतर $\lambda$ है?
A
$K$
B
$2K$
C
$4K$
D
$K/4$

Solution

(C) यंग के द्वि-झिरी प्रयोग में प्रकाश की तीव्रता $I = I_{max} \cos^2(\frac{\phi}{2})$ द्वारा दी जाती है,जहाँ $\phi$ कलांतर है।
कलांतर $\phi$ और पथ अंतर $\Delta x$ के बीच संबंध $\phi = \frac{2\pi}{\lambda} \Delta x$ है।
पथ अंतर $\Delta x = \frac{\lambda}{3}$ के लिए,कलांतर $\phi = \frac{2\pi}{\lambda} \times \frac{\lambda}{3} = \frac{2\pi}{3}$ होता है।
इस बिंदु पर तीव्रता $I_1 = I_{max} \cos^2(\frac{2\pi/3}{2}) = I_{max} \cos^2(\frac{\pi}{3}) = I_{max} (\frac{1}{2})^2 = \frac{I_{max}}{4}$ है।
दिया गया है कि $I_1 = K$,इसलिए $K = \frac{I_{max}}{4}$,जिसका अर्थ है $I_{max} = 4K$।
पथ अंतर $\Delta x = \lambda$ के लिए,कलांतर $\phi = \frac{2\pi}{\lambda} \times \lambda = 2\pi$ होता है।
इस बिंदु पर तीव्रता $I_2 = I_{max} \cos^2(\frac{2\pi}{2}) = I_{max} \cos^2(\pi) = I_{max} (-1)^2 = I_{max}$ है।
चूंकि $I_{max} = 4K$,इसलिए पथ अंतर $\lambda$ पर तीव्रता $4K$ होगी।
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PhysicsMediumMCQNEET · 2026
चार कथन दिए गए हैं ($A$ द्रव्यमान संख्या है) :
$A$. नाभिक का आयतन $A^{1/3}$ के समानुपाती होता है।
$B$. नाभिक का आयतन $A$ के समानुपाती होता है।
$C$. एक परमाणु और उसके नाभिक के द्रव्यमान के अंतर को द्रव्यमान क्षति कहा जाता है।
$D$. एक नाभिक और उसके घटकों के द्रव्यमान के अंतर को द्रव्यमान क्षति कहा जाता है।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए :
A
$A$ और $D$ सही हैं,लेकिन $B$ और $C$ गलत हैं
B
$B$ और $D$ सही हैं,लेकिन $A$ और $C$ गलत हैं
C
$B$ और $C$ सही हैं,लेकिन $A$ और $D$ गलत हैं
D
$A$ और $C$ सही हैं,लेकिन $B$ और $D$ गलत हैं

Solution

(B) नाभिक की त्रिज्या $R = R_0 A^{1/3}$ द्वारा दी जाती है,जहाँ $R_0$ एक स्थिरांक है और $A$ द्रव्यमान संख्या है।
नाभिक का आयतन $V = \frac{4}{3} \pi R^3 = \frac{4}{3} \pi (R_0 A^{1/3})^3 = \frac{4}{3} \pi R_0^3 A$ होता है।
चूंकि $\frac{4}{3} \pi R_0^3$ एक स्थिरांक है,इसलिए आयतन $V$ द्रव्यमान संख्या $A$ के सीधे समानुपाती है। अतः,कथन $A$ गलत है और कथन $B$ सही है।
द्रव्यमान क्षति को व्यक्तिगत न्यूक्लियॉन (प्रोटॉन और न्यूट्रॉन) के द्रव्यमान के योग और नाभिक के वास्तविक द्रव्यमान के बीच के अंतर के रूप में परिभाषित किया जाता है। अतः,कथन $C$ गलत है और कथन $D$ सही है।
इस प्रकार,कथन $B$ और $D$ सही हैं,जबकि $A$ और $C$ गलत हैं।
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PhysicsMediumMCQNEET · 2026
व्यतिकरण (interference) और विवर्तन (diffraction) में,प्रकाश ऊर्जा का पुनर्वितरण होता है। यदि यह एक क्षेत्र में कम हो जाती है,जिससे एक अदीप्त फ्रिंज (dark fringe) बनती है,तो यह दूसरे क्षेत्र में बढ़ जाती है,जिससे एक दीप्त फ्रिंज (bright fringe) बनती है। कथन $A$: चूंकि ऊर्जा का कोई लाभ या हानि नहीं होती है,इसलिए ये घटनाएं ऊर्जा संरक्षण के सिद्धांत के अनुरूप हैं। कथन $B$: विवर्तन और व्यतिकरण केवल प्रकाश तरंगों द्वारा प्रदर्शित विशेषताएं हैं। नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनें:
A
$A$ गलत है,लेकिन $B$ सही है
B
$A$ सही है,लेकिन $B$ गलत है
C
$A$ सही है और $B$ भी सही है
D
$A$ और $B$ दोनों गलत हैं

Solution

(B) कथन $A$ सही है क्योंकि व्यतिकरण और विवर्तन में ऊर्जा का अंतरिक्ष में पुनर्वितरण होता है,जिससे यह सुनिश्चित होता है कि कुल ऊर्जा स्थिर रहती है,जो ऊर्जा संरक्षण के नियम के अनुरूप है।
कथन $B$ गलत है क्योंकि व्यतिकरण और विवर्तन तरंग घटनाएं हैं जो केवल प्रकाश तक सीमित नहीं हैं; ये ध्वनि तरंगों,जल तरंगों और द्रव्य तरंगों सहित सभी प्रकार की तरंगों द्वारा प्रदर्शित की जाती हैं।
इसलिए,कथन $A$ सही है और कथन $B$ गलत है। सही विकल्प $B$ है।
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PhysicsMediumMCQNEET · 2026
एक प्रतिरोधक को $12 \text{ V}$ विद्युत वाहक बल (emf) और $2 \text{ }\Omega$ आंतरिक प्रतिरोध वाली बैटरी से जोड़ा गया है। यदि परिपथ में धारा $0.6 \text{ A}$ है,तो बैटरी का टर्मिनल वोल्टेज क्या होगा ($\text{ V}$ में)?
A
$12$
B
$1.2$
C
$10$
D
$10.8$

Solution

(D) बैटरी का टर्मिनल वोल्टेज $V$ ज्ञात करने का सूत्र है: $V = E - Ir$।
दिया गया है: emf $E = 12 \text{ V}$,आंतरिक प्रतिरोध $r = 2 \text{ }\Omega$,और धारा $I = 0.6 \text{ A}$।
इन मानों को सूत्र में रखने पर:
$V = 12 - (0.6 \times 2)$
$V = 12 - 1.2$
$V = 10.8 \text{ V}$।
अतः,बैटरी का टर्मिनल वोल्टेज $10.8 \text{ V}$ है।
इस प्रकार,सही विकल्प $D$ है।
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PhysicsMediumMCQNEET · 2026
मीटर ब्रिज प्रयोग में (चित्र देखें),सेल,$E$,और गैल्वेनोमीटर,$G$,के स्थानों को आपस में बदल दिया जाता है। हम गैल्वेनोमीटर में क्या देखेंगे?
Question diagram
A
केवल दाईं ओर का विक्षेप
B
केवल बाईं ओर का विक्षेप
C
जॉकी की स्थिति की परवाह किए बिना कोई विक्षेप नहीं होगा
D
दाईं और बाईं दोनों ओर का विक्षेप और संतुलन बिंदु पर,कोई विक्षेप नहीं

Solution

(D) व्हीटस्टोन ब्रिज में (जिसका मीटर ब्रिज एक रूप है),गैल्वेनोमीटर और सेल (बैटरी) संयुग्मी शाखाएं हैं।
पारस्परिकता प्रमेय (reciprocity theorem) के अनुसार,बैटरी और गैल्वेनोमीटर के स्थानों को आपस में बदलने से ब्रिज के संतुलन की स्थिति नहीं बदलती है।
यदि यह संतुलित था,तो यह संतुलित ही रहेगा; यदि यह असंतुलित था,तो विक्षेप का परिमाण या दिशा बदल सकती है,लेकिन यह अभी भी एक संतुलन बिंदु दिखाएगा।
इसलिए,जॉकी की स्थिति के आधार पर दोनों विक्षेप देखे जा सकते हैं,और संतुलन बिंदु पर शून्य विक्षेप अभी भी होगा।
अतः,विकल्प $D$ सही है।
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PhysicsMediumMCQNEET · 2026
निम्नलिखित में से कौन से कथन सही हैं?
$A$. चालक के भीतर,स्थिर वैद्युत क्षेत्र शून्य होता है।
$B$. आवेशित चालक की सतह पर विद्युत क्षेत्र उसके पृष्ठीय आवेश घनत्व पर निर्भर नहीं करता है।
$C$. स्थिर स्थिति में एक आवेशित चालक के आंतरिक भाग में कोई अतिरिक्त आवेश नहीं हो सकता है।
$D$. एक आवेशित चालक की सतह पर,स्थिर वैद्युत क्षेत्र प्रत्येक बिंदु पर सतह के लंबवत होना चाहिए।
$E$. एक आवेशित चालक के अंदर हर जगह स्थिर वैद्युत विभव शून्य होता है।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनें:
A
केवल $A, C$ और $D$
B
केवल $A, C$ और $E$
C
केवल $C, D$ और $E$
D
केवल $A, B$ और $D$

Solution

(A) सही है: स्थिर वैद्युत संतुलन में,चालक के अंदर $E = 0$ होता है।
$B$ गलत है: सतह पर $E = \frac{\sigma}{\epsilon_0}$ होता है,इसलिए यह $\sigma$ पर निर्भर करता है।
$C$ सही है: स्थिर स्थितियों में अतिरिक्त आवेश केवल चालक की सतह पर ही रहता है।
$D$ सही है: क्षेत्र रेखाएं चालक की सतह के लंबवत होनी चाहिए ताकि कोई स्पर्शरेखीय बल न लगे,जो अन्यथा धारा उत्पन्न करेगा।
$E$ गलत है: विभव अंदर स्थिर होता है,शून्य नहीं।
अतः,$A, C$ और $D$ सही हैं। विकल्प $A$ सही है।
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PhysicsMediumMCQNEET · 2026
नीचे दो कथन दिए गए हैं:
$A$. जब एक $p-n$ जंक्शन डायोड पर फॉरवर्ड बायस वोल्टेज एक निश्चित थ्रेशोल्ड वोल्टेज से ऊपर बढ़ता है,तो डायोड करंट काफी बढ़ जाता है।
$B$. इस करंट को रिवर्स सैचुरेशन करंट कहा जाता है।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनें:
A
कथन $A$ और $B$ दोनों सत्य हैं
B
कथन $A$ और $B$ दोनों असत्य हैं
C
कथन $A$ सत्य है,लेकिन कथन $B$ असत्य है
D
कथन $A$ असत्य है,लेकिन कथन $B$ सत्य है

Solution

(C) कथन $A$ सही है: एक $p-n$ जंक्शन में,फॉरवर्ड बायस पोटेंशियल बैरियर को कम करता है,जिससे थ्रेशोल्ड वोल्टेज के बाद करंट तेजी से बढ़ता है।
कथन $B$ गलत है: फॉरवर्ड बायस में प्रवाहित करंट को फॉरवर्ड करंट कहा जाता है। 'रिवर्स सैचुरेशन करंट' उस बहुत छोटे और लगभग स्थिर करंट को संदर्भित करता है जो $p-n$ जंक्शन डायोड के रिवर्स बायस में होने पर प्रवाहित होता है।
अतः,कथन $A$ सत्य है और कथन $B$ असत्य है।
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PhysicsEasyMCQNEET · 2026
एक अवतल लेंस में,वस्तु से आने वाली प्रकाश की किरण जो लेंस के मुख्य अक्ष के समानांतर है,अपवर्तन के बाद:
A
द्वितीय मुख्य फोकस से होकर गुजरती है।
B
प्रथम मुख्य फोकस से अपसरित होती हुई प्रतीत होती है।
C
$2F$ से होकर गुजरती है,जो लेंस की वक्रता त्रिज्या है।
D
मुख्य अक्ष के समानांतर निकलती है।

Solution

(B) अवतल लेंस के लिए,मुख्य अक्ष के समानांतर चलने वाली प्रकाश की किरण अपवर्तन के बाद अपसरित (diverge) हो जाती है।
जब इस अपसरित किरण को पीछे की ओर बढ़ाया जाता है,तो यह लेंस के प्रथम मुख्य फोकस से आती हुई प्रतीत होती है।
अतः,सही विकल्प $B$ है।
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PhysicsMediumMCQNEET · 2026
एक अज्ञात नाभिक का नाभिकीय घनत्व $2.29 \times 10^{17} \text{ kg/m}^3$ और द्रव्यमान $19.926 \times 10^{-27} \text{ kg}$ है। इसकी द्रव्यमान संख्या $A$ लगभग कितनी है? ($R_0 = 1.2 \times 10^{-15} \text{ m}$,$4\pi = 12.56$ लें)
A
$16$
B
$20$
C
$12$
D
$19$

Solution

(C) नाभिक का द्रव्यमान $M = A \times m_p$ द्वारा दिया जाता है,जहाँ $A$ द्रव्यमान संख्या है और $m_p$ एक न्यूक्लियॉन का औसत द्रव्यमान है (लगभग $1.67 \times 10^{-27} \text{ kg}$)।
नाभिक का कुल द्रव्यमान $M = 19.926 \times 10^{-27} \text{ kg}$ दिया गया है।
हम द्रव्यमान संख्या $A$ की गणना इस प्रकार कर सकते हैं:
$A = \frac{M}{m_p} = \frac{19.926 \times 10^{-27} \text{ kg}}{1.67 \times 10^{-27} \text{ kg}} \approx 11.93$।
इस मान को निकटतम पूर्णांक में बदलने पर,हमें $A \approx 12$ प्राप्त होता है।
अतः,नाभिक की द्रव्यमान संख्या $12$ है।
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$100 \Omega$ प्रतिरोध का एक गैल्वेनोमीटर $1 \text{ mA}$ की धारा के लिए पूर्ण स्केल विक्षेप देता है। इसे $0 - 10 \text{ A}$ की परास वाले एमीटर में परिवर्तित किया जाता है। आवश्यक शंट है: ($\text{ }\Omega$ में)
A
$0.001$
B
$0.10$
C
$1.0$
D
$0.01$

Solution

(D) गैल्वेनोमीटर को एमीटर में बदलने के लिए आवश्यक शंट प्रतिरोध $S$ का सूत्र $S = \frac{I_g G}{I - I_g}$ है。
यहाँ, $I_g$ पूर्ण स्केल विक्षेप के लिए धारा है, $G$ गैल्वेनोमीटर का प्रतिरोध है, और $I$ एमीटर द्वारा मापी जाने वाली अधिकतम धारा है。
दिए गए मान $I_g = 1 \text{ mA} = 10^{-3} \text{ A}$, $G = 100 \Omega$, और $I = 10 \text{ A}$ हैं。
इन मानों को सूत्र में रखने पर:
$S = \frac{10^{-3} \times 100}{10 - 10^{-3}}$
$S = \frac{0.1}{9.999}$
$S \approx \frac{0.1}{10} = 0.01 \Omega$.
अतः, आवश्यक शंट प्रतिरोध लगभग $0.01 \Omega$ है。
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नीचे दिखाए गए परिपथ में,डायोड $D$ के सिरों पर दिखाई देने वाला वोल्टेज किस रूप में होगा?
Question diagram
A
Option A
B
Option B
C
Option C
D
Option D

Solution

(D) डायोड $D$ एक हाफ-वेव रेक्टिफायर विन्यास में है।
इनपुट वोल्टेज $v_i$ के धनात्मक अर्ध-चक्र के दौरान,डायोड फॉरवर्ड बायस में होता है और एक शॉर्ट सर्किट के रूप में कार्य करता है (आदर्श डायोड मानते हुए),इसलिए इसके सिरों पर वोल्टेज ड्रॉप $v_D = 0$ होता है।
ऋणात्मक अर्ध-चक्र के दौरान,डायोड रिवर्स बायस में होता है और एक ओपन सर्किट के रूप में कार्य करता है,जिसका अर्थ है कि प्रतिरोधक $R$ से कोई धारा प्रवाहित नहीं होती है। परिणामस्वरूप,पूरा इनपुट वोल्टेज $v_i$ डायोड $D$ के सिरों पर दिखाई देता है,इसलिए $v_D = v_i$ होता है।
अतः,डायोड $D$ के सिरों पर वोल्टेज केवल ऋणात्मक अर्ध-चक्र के दौरान इनपुट तरंग का अनुसरण करता है,जो विकल्प $D$ में दिखाई गई तरंग के अनुरूप है।
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सूची-$I$ को सूची-$II$ से सुमेलित कीजिए:
सूची-$I$ (विद्युतचुंबकीय तरंग)सूची-$II$ (उत्पादन)
$A$. माइक्रोवेव$I$. जब इलेक्ट्रॉन उच्च ऊर्जा स्तर से निम्न ऊर्जा स्तर में जाते हैं तो परमाणु प्रकाश उत्सर्जित करते हैं
$B$. दृश्य प्रकाश$II$. नाभिक का रेडियोधर्मी क्षय
$C$. गामा किरणें$III$. परमाणुओं और अणुओं का कंपन
$D$. इन्फ्रारेड किरणें$IV$. क्लाइस्ट्रॉन वाल्व या मैग्नेट्रॉन वाल्व

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए:
A
$A-IV, B-III, C-II, D-I$
B
$A-III, B-IV, C-I, D-II$
C
$A-III, B-I, C-II, D-IV$
D
$A-IV, B-I, C-II, D-III$

Solution

(D) विद्युतचुंबकीय तरंगों के उत्पादन तंत्र इस प्रकार हैं:
$1$. माइक्रोवेव क्लाइस्ट्रॉन वाल्व या मैग्नेट्रॉन वाल्व जैसे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों द्वारा उत्पन्न होते हैं $(A-IV)$.
$2$. दृश्य प्रकाश परमाणुओं में इलेक्ट्रॉनों के उच्च ऊर्जा स्तर से निम्न ऊर्जा स्तर में संक्रमण द्वारा उत्पन्न होता है $(B-I)$.
$3$. गामा किरणें परमाणु नाभिक के रेडियोधर्मी क्षय के दौरान उत्पन्न होने वाली उच्च ऊर्जा वाली विद्युतचुंबकीय विकिरण हैं $(C-II)$.
$4$. इन्फ्रारेड किरणें परमाणुओं और अणुओं के कंपन द्वारा उत्पन्न होती हैं $(D-III)$.
अतः,सही मिलान $A-IV, B-I, C-II, D-III$ है।
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नीचे दिखाए गए परिपथ में धारा $I$ का मान क्या है? (सभी डायोड आदर्श और समान हैं)
Question diagram
A
$\frac{1}{3} \text{A}$
B
$\frac{15}{2} \text{A}$
C
$\frac{5}{3} \text{A}$
D
$\frac{5}{9} \text{A}$

Solution

(B) यह परिपथ $10 \text{V}$ की बैटरी से जुड़ी चार समानांतर शाखाओं से बना है।
प्रत्येक शाखा में एक प्रतिरोधक और एक डायोड है।
$10 \text{V}$ की बैटरी के सापेक्ष डायोड की ध्रुवता का विश्लेषण करने पर:
$1$. शीर्ष शाखा ($4 \Omega$ प्रतिरोधक) में डायोड फॉरवर्ड-बायस स्थिति में है।
$2$. दूसरी शाखा ($3 \Omega$ प्रतिरोधक) में डायोड रिवर्स-बायस स्थिति में है (यह एक खुले परिपथ की तरह कार्य करता है)।
$3$. तीसरी शाखा ($2 \Omega$ प्रतिरोधक) में डायोड फॉरवर्ड-बायस स्थिति में है।
$4$. निचली शाखा ($5 \Omega$ प्रतिरोधक) में डायोड रिवर्स-बायस स्थिति में है (यह एक खुले परिपथ की तरह कार्य करता है)।
केवल $4 \Omega$ और $2 \Omega$ प्रतिरोधक वाली शाखाएं ही सक्रिय हैं।
ये दो प्रतिरोधक समानांतर में हैं,इसलिए तुल्य प्रतिरोध $R_{\text{eq}}$ होगा:
$R_{\text{eq}} = \frac{4 \times 2}{4 + 2} = \frac{8}{6} = \frac{4}{3} \Omega$.
बैटरी से ली गई कुल धारा $I$ है:
$I = \frac{V}{R_{\text{eq}}} = \frac{10}{4/3} = \frac{30}{4} = 7.5 \text{A} = \frac{15}{2} \text{A}$.
अतः,सही विकल्प $B$ है।
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$6.6 \text{eV}$ कार्य फलन वाली धातु के लिए, आपतित विकिरण की निम्नलिखित में से कौन सी तरंगदैर्ध्य प्रकाश-विद्युत प्रभाव उत्पन्न नहीं करती है ($\text{nm}$ में)? (प्लांक नियतांक $h = 6.6 \times 10^{-34} \text{J s}$ और प्रकाश की गति $c = 3 \times 10^8 \text{m/s}$ लें)
A
$200$
B
$100$
C
$50$
D
$150$

Solution

(A) देहली तरंगदैर्ध्य $\lambda_0$ का सूत्र $\lambda_0 = \frac{hc}{\phi}$ है।
दिया गया कार्य फलन $\phi = 6.6 \text{eV} = 6.6 \times 1.6 \times 10^{-19} \text{J}$।
मान रखने पर: $\lambda_0 = \frac{6.6 \times 10^{-34} \times 3 \times 10^8}{6.6 \times 1.6 \times 10^{-19}} \text{m}$।
$\lambda_0 = \frac{3 \times 10^{-26}}{1.6 \times 10^{-19}} \text{m} = 1.875 \times 10^{-7} \text{m} = 187.5 \text{nm}$।
प्रकाश-विद्युत प्रभाव केवल तब होता है जब आपतित तरंगदैर्ध्य $\lambda \le \lambda_0$ हो।
यदि $\lambda > \lambda_0$ है, तो आपतित फोटॉन की ऊर्जा कार्य फलन से कम होती है, और कोई प्रकाश-विद्युत उत्सर्जन नहीं होता है।
विकल्पों की तुलना करने पर: $200 \text{nm} > 187.5 \text{nm}$, $100 \text{nm} < 187.5 \text{nm}$, $50 \text{nm} < 187.5 \text{nm}$, और $150 \text{nm} < 187.5 \text{nm}$।
अतः, $200 \text{nm}$ तरंगदैर्ध्य प्रकाश-विद्युत प्रभाव उत्पन्न नहीं करेगी।
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$8 \text{ cm}$ और $3 \text{ cm}$ भुजाओं वाला एक आयताकार तार का लूप,जिसमें एक छोटा सा कट है,$0.3 \text{ T}$ के एकसमान चुंबकीय क्षेत्र से बाहर निकल रहा है। चुंबकीय क्षेत्र लूप के तल के लंबवत है। यदि लूप का वेग $2 \text{ cm s}^{-1}$ है और यह लूप की छोटी भुजा के लंबवत दिशा में है,तो कट पर उत्पन्न emf कितना होगा?
A
$1.8 \times 10^{-4} \text{ V}$
B
$1.3 \times 10^{-4} \text{ V}$
C
$1.2 \times 10^{-4} \text{ V}$
D
$4.8 \times 10^{-4} \text{ V}$

Solution

(A) चुंबकीय क्षेत्र में गति करने वाले चालक में प्रेरित गतिकीय emf (electromotive force) का सूत्र $\varepsilon = B l v$ है,जहाँ $B$ चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता है,$l$ क्षेत्र के लंबवत गति करने वाले चालक की लंबाई है,और $v$ चालक का वेग है।
दिए गए मान हैं: $B = 0.3 \text{ T}$,$l = 3 \text{ cm} = 0.03 \text{ m}$ (चूंकि वेग छोटी भुजा के लंबवत है,इसलिए क्षेत्र रेखाओं को काटने वाली भुजा की लंबाई $3 \text{ cm}$ है),और $v = 2 \text{ cm s}^{-1} = 0.02 \text{ m s}^{-1}$।
इन मानों को सूत्र में रखने पर:
$\varepsilon = 0.3 \text{ T} \times 0.03 \text{ m} \times 0.02 \text{ m s}^{-1}$
$\varepsilon = 0.00018 \text{ V} = 1.8 \times 10^{-4} \text{ V}$।
अतः,सही विकल्प $A$ है।
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PhysicsMediumMCQNEET · 2026
एकवर्णी प्रकाश की एक किरण चित्र में दिखाए अनुसार एक समबाहु प्रिज्म $(ABC)$ से गुजर रही है। अपवर्तित किरण $(QR)$ इसके आधार $(BC)$ के समानांतर है और आपतन कोण $(i)$ $50^\circ$ है। तो विचलन कोण $(\delta)$ क्या है ($^\circ$ में)?
Question diagram
A
$45$
B
$55$
C
$35$
D
$40$

Solution

(D) एक समबाहु प्रिज्म में,प्रिज्म का कोण $A = 60^\circ$ होता है।
जब अपवर्तित किरण आधार के समानांतर होती है,तो प्रिज्म न्यूनतम विचलन की स्थिति में होता है।
इस स्थिति में,आपतन कोण $i$,निर्गत कोण $e$ के बराबर होता है।
दिया गया है,$i = 50^\circ$,इसलिए $e = 50^\circ$ होगा।
विचलन कोण $(\delta)$ का सूत्र: $\delta = i + e - A$ है।
मान रखने पर: $\delta = 50^\circ + 50^\circ - 60^\circ$.
$\delta = 100^\circ - 60^\circ = 40^\circ$.
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हाइड्रोजन परमाणु की प्रथम उत्तेजित अवस्था में,इसके इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा $-3.4 \text{ eV}$ है। इस स्थिति में इलेक्ट्रॉन की हाइड्रोजन नाभिक से त्रिज्यीय दूरी लगभग कितनी है? ($1 \text{ eV} = 1.6 \times 10^{-19} \text{ J}$,$e = 1.6 \times 10^{-19} \text{ C}$ और $\frac{1}{4\pi\epsilon_0} = 9 \times 10^9 \text{ N m}^2/\text{C}^2$ लें)
A
$2.1 \times 10^{-8} \text{ m}$
B
$2.1 \times 10^{-10} \text{ m}$
C
$2.1 \times 10^{-11} \text{ m}$
D
$2.1 \times 10^{-9} \text{ m}$

Solution

(B) हाइड्रोजन परमाणु के लिए,$n$ वीं कक्षा की त्रिज्या का सूत्र $r_n = a_0 \times n^2$ है,जहाँ $a_0 = 0.529 \text{ Å}$ बोहर त्रिज्या है।
प्रथम उत्तेजित अवस्था के लिए,मुख्य क्वांटम संख्या $n = 2$ है।
सूत्र में $n$ का मान रखने पर,हमें $r_2 = 0.529 \times (2)^2 \text{ Å}$ प्राप्त होता है।
$r_2 = 0.529 \times 4 \text{ Å} = 2.116 \text{ Å}$।
चूंकि $1 \text{ Å} = 10^{-10} \text{ m}$,इसलिए $r_2 = 2.116 \times 10^{-10} \text{ m}$ होगा।
दो सार्थक अंकों तक पूर्णांकित करने पर,त्रिज्यीय दूरी लगभग $2.1 \times 10^{-10} \text{ m}$ है।
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PhysicsMediumMCQNEET · 2026
$4 \ \Omega$ प्रतिरोध वाले एक समान धात्विक तार को मोड़कर एक वर्गाकार लूप $(ABCD)$ बनाया गया है (चित्र देखें)। बिंदुओं $B$ और $D$ के बीच $2 \ \Omega$ का प्रतिरोध जोड़ा गया है और बिंदुओं $A$ और $C$ के बीच $2 \ V$ की बैटरी जोड़ी गई है जैसा कि चित्र में दिखाया गया है। अब धारा $(I)$ का मान क्या है ($A$ में)?
Question diagram
A
$4$
B
$4.5$
C
$8$
D
$2$

Solution

(D) तार का कुल प्रतिरोध $4 \ \Omega$ है। इसे एक वर्ग में मोड़ने पर,प्रत्येक भुजा का प्रतिरोध $4 \ \Omega / 4 = 1 \ \Omega$ हो जाता है।
परिपथ में दो समानांतर शाखाएँ हैं: शाखा $ABC$ और शाखा $ADC$,जो बैटरी के टर्मिनलों $A$ और $C$ से जुड़ी हैं।
शाखा $ABC$ में श्रेणीक्रम में दो $1 \ \Omega$ के प्रतिरोधक हैं,इसलिए इसका कुल प्रतिरोध $1 \ \Omega + 1 \ \Omega = 2 \ \Omega$ है।
शाखा $ADC$ में भी श्रेणीक्रम में दो $1 \ \Omega$ के प्रतिरोधक हैं,इसलिए इसका कुल प्रतिरोध $1 \ \Omega + 1 \ \Omega = 2 \ \Omega$ है।
बिंदुओं $B$ और $D$ के बीच $2 \ \Omega$ का एक प्रतिरोधक जुड़ा है। हालाँकि,परिपथ की समरूपता के कारण,बिंदु $B$ पर विभव बिंदु $D$ पर विभव के बराबर है $(V_B = V_D)$।
चूँकि $2 \ \Omega$ के प्रतिरोधक पर कोई विभवांतर नहीं है,इसलिए इसमें से कोई धारा प्रवाहित नहीं होती है। अतः,तुल्य प्रतिरोध की गणना में इसे अनदेखा किया जा सकता है।
प्रत्येक $2 \ \Omega$ की दो समानांतर शाखाओं का तुल्य प्रतिरोध $R_{eq}$ इस प्रकार है:
$1/R_{eq} = 1/2 + 1/2 = 1 \ \Omega^{-1} \implies R_{eq} = 1 \ \Omega$.
$2 \ V$ की बैटरी से ली गई कुल धारा $I$ है:
$I = V / R_{eq} = 2 \ V / 1 \ \Omega = 2 \ A$.

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