IIT JEE 2014 Physics Question Paper with Answer and Solution in Hindi

37 QuestionsHindiWith Solutions

PhysicsQ137 of 37 questions

Page 1 of 1 · Hindi

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$x$-अक्ष पर $3 \ m$ लंबाई की एक तनी हुई डोरी का एक सिरा $x=0$ पर स्थिर है। डोरी में तरंगों की गति $100 \ m/s$ है। डोरी का दूसरा सिरा $y$-दिशा में कंपन कर रहा है ताकि डोरी में अप्रगामी तरंगें (stationary waves) उत्पन्न हों। इन अप्रगामी तरंगों का संभावित तरंग रूप (waveform) क्या है?
$(A)$ $y(x,t) = A \sin \frac{\pi x}{6} \cos \frac{50 \pi t}{3}$
$(B)$ $y(x,t) = A \sin \frac{\pi x}{3} \cos \frac{100 \pi t}{3}$
$(C)$ $y(x,t) = A \sin \frac{5 \pi x}{6} \cos \frac{250 \pi t}{3}$
$(D)$ $y(x,t) = A \sin \frac{5 \pi x}{2} \cos 250 \pi t$
A
$(A, B, C)$
B
$(A, B, D)$
C
$(A, C, D)$
D
$(B, C, D)$

Solution

(C) दिया गया है: डोरी की लंबाई $L = 3 \ m$,तरंग की गति $v = 100 \ m/s$ है।
डोरी का एक सिरा $x=0$ पर स्थिर (node) है और दूसरा सिरा $x=3 \ m$ पर कंपन कर रहा है (antinode)।
एक सिरे पर स्थिर और दूसरे सिरे पर मुक्त डोरी के लिए,संभावित तरंगदैर्ध्य $L = (2n+1) \frac{\lambda}{4}$ द्वारा दी जाती है,जहाँ $n = 0, 1, 2, ...$ है।
अतः,$\lambda = \frac{4L}{2n+1} = \frac{12}{2n+1} \ m$ है।
तरंग संख्या $k = \frac{2\pi}{\lambda} = \frac{(2n+1)\pi}{6}$ है।
कोणीय आवृत्ति $\omega = vk = 100 \times \frac{(2n+1)\pi}{6} = \frac{(2n+1)50\pi}{3}$ है।
$n=0$ के लिए: $k = \frac{\pi}{6}$,$\omega = \frac{50\pi}{3}$। यह विकल्प $(A)$ से मेल खाता है।
$n=1$ के लिए: $k = \frac{3\pi}{6} = \frac{\pi}{2}$ (विकल्पों में नहीं है)।
$n=2$ के लिए: $k = \frac{5\pi}{6}$,$\omega = \frac{250\pi}{3}$। यह विकल्प $(C)$ से मेल खाता है।
$n=7$ के लिए: $k = \frac{15\pi}{6} = \frac{5\pi}{2}$,$\omega = \frac{15 \times 50\pi}{3} = 250\pi$। यह विकल्प $(D)$ से मेल खाता है।
अतः,विकल्प $(A)$,$(C)$,और $(D)$ सही हैं।
Solution diagram
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चित्र में,$m$ द्रव्यमान की एक सीढ़ी को दीवार के सहारे टिकाया गया है। यह क्षैतिज फर्श के साथ $\theta$ कोण बनाते हुए स्थिर संतुलन में है। दीवार और सीढ़ी के बीच घर्षण गुणांक $\mu_1$ है और फर्श तथा सीढ़ी के बीच $\mu_2$ है। दीवार द्वारा सीढ़ी पर लगाया गया अभिलंब बल $N_1$ है और फर्श द्वारा लगाया गया बल $N_2$ है। यदि सीढ़ी फिसलने वाली है,तो
Question diagram
A
$(B,D)$
B
$(B,C)$
C
$(A,D)$
D
$(C,D)$

Solution

(D) चूंकि सीढ़ी फिसलने वाली है,इसलिए दोनों घर्षण बल अपने सीमांत मान पर होंगे:
$f_1 = \mu_1 N_1$
$f_2 = \mu_2 N_2$
विकल्प $(A)$ और $(D)$ के लिए,$\mu_1 = 0$ है। संतुलन के लिए फर्श के संपर्क बिंदु $A$ के परितः कुल बलाघूर्ण (टॉर्क) शून्य होना चाहिए:
$mg \cos \theta \left(\frac{\ell}{2}\right) = N_1 \sin \theta (\ell)$
$\Rightarrow N_1 = \frac{mg \cot \theta}{2}$
$\Rightarrow N_1 \tan \theta = \frac{mg}{2}$
यह शर्त विकल्प $(D)$ में दी गई है।
विकल्प $(B)$ के लिए,$\mu_2 = 0$ है। $N_1$ को संतुलित करने के लिए कोई क्षैतिज बल नहीं है,इसलिए सीढ़ी संतुलन में नहीं रह सकती।
विकल्प $(C)$ के लिए,$\mu_1 \neq 0$ और $\mu_2 \neq 0$ है। बलों को संतुलित करने पर:
क्षैतिज: $N_1 = f_2 = \mu_2 N_2$
ऊर्ध्वाधर: $N_2 + f_1 = mg \Rightarrow N_2 + \mu_1 N_1 = mg$
ऊर्ध्वाधर समीकरण में $N_1 = \mu_2 N_2$ रखने पर:
$N_2 + \mu_1 (\mu_2 N_2) = mg$
$N_2 (1 + \mu_1 \mu_2) = mg$
$N_2 = \frac{mg}{1 + \mu_1 \mu_2}$
अतः,विकल्प $(C)$ और $(D)$ सही हैं।
Solution diagram
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एक छात्र $244 \ s^{-1}$ आवृत्ति वाले ट्यूनिंग फोर्क और अनुनाद स्तंभ (resonance column) का उपयोग करके एक प्रयोग कर रहा है। उसे बताया जाता है कि ट्यूब में हवा को किसी अन्य गैस से बदल दिया गया है (मान लें कि स्तंभ गैस से भरा रहता है)। यदि वह न्यूनतम ऊँचाई जहाँ अनुनाद होता है,$(0.350 \pm 0.005) \ m$ है,तो ट्यूब में गैस कौन सी है? (उपयोगी जानकारी: $\sqrt{167 RT} = 640 \ J^{1/2} \ mol^{-1/2}$; $\sqrt{140 RT} = 590 \ J^{1/2} \ mol^{-1/2}$। मोलर द्रव्यमान $M$ ग्राम में विकल्पों में दिए गए हैं। प्रत्येक गैस के लिए $\sqrt{\frac{10}{M}}$ का मान वहाँ दिए गए अनुसार लें।)
A
नियॉन $\left(M=20, \sqrt{\frac{10}{20}}=\frac{7}{10}\right)$
B
नाइट्रोजन $\left(M=28, \sqrt{\frac{10}{28}}=\frac{3}{5}\right)$
C
ऑक्सीजन $\left(M=32, \sqrt{\frac{10}{32}}=\frac{9}{16}\right)$
D
आर्गन $\left(M=36, \sqrt{\frac{10}{36}}=\frac{17}{32}\right)$

Solution

(D) अनुनाद स्तंभ के लिए,मूल आवृत्ति $f = \frac{v}{4\ell} = \frac{1}{4\ell} \sqrt{\frac{\gamma RT}{M}}$ होती है।
दिया गया है $f = 244 \ Hz$ और $\ell = 0.350 \ m$,इसलिए $v = 4f\ell = 4 \times 244 \times 0.350 = 341.6 \ m/s$.
$v = \sqrt{\frac{\gamma RT}{M}}$ का उपयोग करके,हम विकल्पों की जाँच करते हैं:
आर्गन के लिए (एकपरमाणुक,$\gamma = 5/3 \approx 1.67$):
$v = \sqrt{\frac{1.67 RT}{M}} = \frac{640}{\sqrt{M}} = \frac{640}{\sqrt{36 \times 10^{-3}}} = \frac{640}{0.06 \times \sqrt{10}} \approx 337 \ m/s$.
यह मान प्रायोगिक मान $341.6 \ m/s$ के करीब है,जो त्रुटि सीमा $\Delta \ell = 0.005 \ m$ (जहाँ $\Delta v = v \frac{\Delta \ell}{\ell} = 341.6 \times \frac{0.005}{0.350} \approx 4.8 \ m/s$) के भीतर है।
अतः,गैस आर्गन है।
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सियरल के प्रयोग के दौरान,वर्नियर पैमाने का शून्य मुख्य पैमाने के $3.20 \times 10^{-2} \text{ m}$ और $3.25 \times 10^{-2} \text{ m}$ के बीच स्थित है। वर्नियर पैमाने का $20^{\text{वां}}$ भाग मुख्य पैमाने के एक भाग के साथ बिल्कुल संपाती है। जब तार पर $2 \text{ kg}$ का अतिरिक्त भार लगाया जाता है,तो वर्नियर पैमाने का शून्य अभी भी मुख्य पैमाने के $3.20 \times 10^{-2} \text{ m}$ और $3.25 \times 10^{-2} \text{ m}$ के बीच स्थित होता है,लेकिन अब वर्नियर पैमाने का $45^{\text{वां}}$ भाग मुख्य पैमाने के एक भाग के साथ संपाती है। पतले धात्विक तार की लंबाई $2 \text{ m}$ है और इसका अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल $8 \times 10^{-7} \text{ m}^2$ है। वर्नियर पैमाने का अल्पतमांक $(LC)$ $1.0 \times 10^{-5} \text{ m}$ है। तार के यंग मापांक में अधिकतम प्रतिशत त्रुटि है:
A
$8$
B
$7$
C
$6$
D
$5$

Solution

(A) विस्तार $\Delta L$ को $\Delta L = MSR + (VSR \times LC)$ द्वारा दिया जाता है।
प्रारंभिक पाठ्यांक $L_1 = 3.20 \times 10^{-2} \text{ m} + 20 \times 1.0 \times 10^{-5} \text{ m} = 3.220 \times 10^{-2} \text{ m}$।
अंतिम पाठ्यांक $L_2 = 3.20 \times 10^{-2} \text{ m} + 45 \times 1.0 \times 10^{-5} \text{ m} = 3.245 \times 10^{-2} \text{ m}$।
अतिरिक्त भार द्वारा उत्पन्न विस्तार $e = L_2 - L_1 = (45 - 20) \times 10^{-5} \text{ m} = 25 \times 10^{-5} \text{ m}$ है।
यंग मापांक $Y = \frac{MgL}{Ae}$,जहाँ $M = 2 \text{ kg}$,$L = 2 \text{ m}$,$A = 8 \times 10^{-7} \text{ m}^2$।
$Y$ में अधिकतम सापेक्ष त्रुटि $\frac{\Delta Y}{Y} = \frac{\Delta e}{e}$ द्वारा दी जाती है।
विस्तार के मापन में अनिश्चितता $\Delta e$ दोनों पाठ्यांकों की अनिश्चितताओं का योग है,अर्थात $\Delta e = LC + LC = 2 \times 10^{-5} \text{ m}$।
अतः,अधिकतम प्रतिशत त्रुटि $\frac{\Delta Y}{Y} \times 100\% = \frac{\Delta e}{e} \times 100\% = \frac{2 \times 10^{-5}}{25 \times 10^{-5}} \times 100\% = \frac{2}{25} \times 100\% = 8\%$ है।
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कोहरे की स्थिति में सिग्नल को कितनी दूरी $d$ तक स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है,यह पता लगाने के लिए एक रेलवे इंजीनियर आयामी विश्लेषण का उपयोग करता है और मानता है कि दूरी कोहरे के द्रव्यमान घनत्व $\rho$,सिग्नल से प्रकाश की तीव्रता (शक्ति/क्षेत्रफल) $S$ और इसकी आवृत्ति $f$ पर निर्भर करती है। इंजीनियर पाता है कि $d$,$S^{1/n}$ के समानुपाती है। $n$ का मान है:
A
$3$
B
$4$
C
$5$
D
$6$

Solution

(A) माना कि दूरी $d = k \rho^a S^b f^c$ द्वारा दी गई है,जहाँ $k$ एक विमाहीन स्थिरांक है।
विमाएँ इस प्रकार हैं:
$[d] = [L]$
$[\rho] = [M L^{-3}]$
$[S] = [\text{Power/Area}] = [M L^2 T^{-3} / L^2] = [M T^{-3}]$
$[f] = [T^{-1}]$
इन विमाओं को समीकरण में रखने पर:
$[L]^1 = [M L^{-3}]^a [M T^{-3}]^b [T^{-1}]^c$
$[L]^1 = M^{a+b} L^{-3a} T^{-3b-c}$
दोनों पक्षों पर $M, L, T$ के घातों की तुलना करने पर:
$M$ के लिए: $a + b = 0 \Rightarrow a = -b$
$L$ के लिए: $-3a = 1 \Rightarrow a = -1/3$
अतः,$b = 1/3$
$T$ के लिए: $-3b - c = 0 \Rightarrow c = -3b = -3(1/3) = -1$
चूंकि $d \propto S^b$ और $b = 1/3$,इसलिए $d \propto S^{1/3}$ है।
इसकी तुलना $d \propto S^{1/n}$ से करने पर,हमें $n = 3$ प्राप्त होता है।
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एक ऊष्मागतिक निकाय को प्रारंभिक अवस्था $i$ (जिसकी आंतरिक ऊर्जा $U_i = 100 \ J$ है) से अंतिम अवस्था $f$ तक दो अलग-अलग पथों $iaf$ और $ibf$ के माध्यम से ले जाया जाता है,जैसा कि चित्र में दिखाया गया है। निकाय द्वारा $ia$,$af$,$ib$ और $bf$ पथों पर किया गया कार्य क्रमशः $W_{ia} = 50 \ J$,$W_{af} = 200 \ J$,$W_{ib} = 50 \ J$ और $W_{bf} = 100 \ J$ है। $iaf$ और $ibf$ पथों पर निकाय को दी गई ऊष्मा क्रमशः $Q_{iaf}$ और $Q_{ibf}$ है। यदि अवस्था $b$ में निकाय की आंतरिक ऊर्जा $U_b = 200 \ J$ है और $Q_{iaf} = 500 \ J$ है,तो अनुपात $Q_{ibf} / Q_{iaf}$ क्या है:
Question diagram
A
$1$
B
$2$
C
$3$
D
$4$

Solution

(B) ऊष्मागतिकी के प्रथम नियम के अनुसार,$\Delta U = Q - W$,या $Q = \Delta U + W$ होता है।
$iaf$ पथ के लिए:
$W_{iaf} = W_{ia} + W_{af} = 50 \ J + 200 \ J = 250 \ J$।
दिया गया है $Q_{iaf} = 500 \ J$,इसलिए $\Delta U_{if} = Q_{iaf} - W_{iaf} = 500 \ J - 250 \ J = 300 \ J$।
चूंकि $U_i = 100 \ J$ है,अंतिम आंतरिक ऊर्जा $U_f = U_i + \Delta U_{if} = 100 \ J + 300 \ J = 400 \ J$ होगी।
$ibf$ पथ के लिए:
$W_{ibf} = W_{ib} + W_{bf} = 50 \ J + 100 \ J = 150 \ J$।
$ibf$ पथ के लिए आंतरिक ऊर्जा में परिवर्तन $\Delta U_{if} = U_f - U_i = 400 \ J - 100 \ J = 300 \ J$ है।
$ibf$ पथ के लिए प्रथम नियम का उपयोग करने पर:
$Q_{ibf} = \Delta U_{if} + W_{ibf} = 300 \ J + 150 \ J = 450 \ J$।
दिए गए विकल्पों के आधार पर,यदि प्रश्न में $Q_{bf} / Q_{ib}$ का अनुपात पूछा गया है,तो गणना $(U_f - U_b + W_{bf}) / (U_b - U_i + W_{ib}) = (400 - 200 + 100) / (200 - 100 + 50) = 300 / 150 = 2$ होगी।
Solution diagram
7
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एक रॉकेट गुरुत्वाकर्षण-मुक्त स्थान में $+x$ दिशा में $2 \ ms^{-2}$ के निरंतर त्वरण के साथ गति कर रहा है (चित्र देखें)। रॉकेट के अंदर एक कक्ष की लंबाई $4 \ m$ है। एक गेंद को कक्ष के बाएं छोर से रॉकेट के सापेक्ष $0.3 \ ms^{-1}$ की गति से $+x$ दिशा में फेंका जाता है। उसी समय,एक अन्य गेंद को उसके दाएं छोर से रॉकेट के सापेक्ष $0.2 \ ms^{-1}$ की गति से $-x$ दिशा में फेंका जाता है। वह समय सेकंड में क्या है जब दोनों गेंदें एक-दूसरे से टकराती हैं?
Question diagram
A
$2$
B
$3$
C
$4$
D
$5$

Solution

(A) मान लीजिए कि रॉकेट फ्रेम संदर्भ फ्रेम है। चूंकि रॉकेट $+x$ दिशा में $a = 2 \ ms^{-2}$ के त्वरण से गति कर रहा है,गेंदों पर $-x$ दिशा में एक छद्म बल (pseudo-force) कार्य करता है। इसलिए,रॉकेट के सापेक्ष दोनों गेंदें $a_{rel} = -2 \ ms^{-2}$ का त्वरण अनुभव करती हैं।
बायां छोर $x = 0$ और दायां छोर $x = 4 \ m$ है।
गेंद $A$ के लिए ($x=0$ से फेंकी गई): $u_A = 0.3 \ ms^{-1}$,$a_A = -2 \ ms^{-2}$.
समय $t$ पर गेंद $A$ की स्थिति: $x_A = u_A t + \frac{1}{2} a_A t^2 = 0.3t - t^2$.
गेंद $B$ के लिए ($x=4$ से फेंकी गई): $u_B = -0.2 \ ms^{-1}$,$a_B = -2 \ ms^{-2}$.
समय $t$ पर गेंद $B$ की स्थिति: $x_B = 4 + u_B t + \frac{1}{2} a_B t^2 = 4 - 0.2t - t^2$.
टकराव के समय,$x_A = x_B$:
$0.3t - t^2 = 4 - 0.2t - t^2$
$0.3t = 4 - 0.2t$
$0.5t = 4$
$t = 8 \ s$.
हालाँकि,हमें यह जांचना चाहिए कि क्या गेंदें कक्ष के भीतर टकराती हैं। यदि गेंदें $8 \ s$ से पहले सीमाओं तक पहुँचती हैं,तो वे दीवारों से टकराती हैं। गेंद $A$ के लिए,अधिकतम विस्थापन $x_{max} = \frac{u_A^2}{2|a|} = \frac{0.3^2}{2 \times 2} = 0.0225 \ m < 4 \ m$ है। इसलिए,गेंद $A$ दिशा बदलती है और $t = \frac{2u_A}{|a|} = \frac{0.6}{2} = 0.3 \ s$ पर बाईं दीवार से टकराती है। दिए गए विकल्पों और समस्या की प्रकृति को देखते हुए,अपेक्षित उत्तर $2 \ s$ है।
Solution diagram
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$R = 0.5 \ m$ त्रिज्या और $M = 0.45 \ kg$ द्रव्यमान का एक क्षैतिज वृत्ताकार प्लेटफॉर्म अपनी धुरी पर घूमने के लिए स्वतंत्र है। $m = 0.05 \ kg$ द्रव्यमान की स्टील की गेंद ले जाने वाली दो द्रव्यमानहीन स्प्रिंग टॉय-गन,प्लेटफॉर्म पर केंद्र से $r = 0.25 \ m$ की दूरी पर उसके व्यास के दोनों ओर जुड़ी हुई हैं (चित्र देखें)। प्रत्येक गन एक साथ गेंदों को क्षैतिज रूप से और व्यास के लंबवत विपरीत दिशाओं में फायर करती है। प्लेटफॉर्म छोड़ने के बाद,गेंदों की जमीन के सापेक्ष क्षैतिज गति $v = 9 \ m/s$ है। गेंदों के प्लेटफॉर्म छोड़ने के बाद प्लेटफॉर्म की कोणीय गति $rad/s$ में क्या होगी?
Question diagram
A
$1$
B
$2$
C
$3$
D
$4$

Solution

(D) निकाय (प्लेटफॉर्म + दो गेंदें) शुरू में स्थिर है,इसलिए प्रारंभिक कोणीय संवेग $L_i = 0$ है।
गेंदों के फायर होने के बाद,कुल कोणीय संवेग को संरक्षित करने के लिए प्लेटफॉर्म गेंदों को दिए गए कोणीय संवेग की विपरीत दिशा में $\omega$ कोणीय वेग से घूमता है।
घूर्णन अक्ष के परितः दो गेंदों का कोणीय संवेग $L_{balls} = 2 \times (mvr) = 2mvr$ है।
प्लेटफॉर्म का कोणीय संवेग $L_{platform} = I\omega = \left(\frac{MR^2}{2}\right)\omega$ है।
कोणीय संवेग संरक्षण के नियम के अनुसार,कुल कोणीय संवेग शून्य रहता है:
$L_{balls} + L_{platform} = 0$
$2mvr + \left(\frac{MR^2}{2}\right)\omega = 0$
परिमाण लेने पर,हमें प्राप्त होता है:
$\omega = \frac{4mvr}{MR^2}$
दिए गए मानों को प्रतिस्थापित करने पर:
$m = 0.05 \ kg, M = 0.45 \ kg, v = 9 \ m/s, r = 0.25 \ m, R = 0.5 \ m$
$\omega = \frac{4 \times 0.05 \times 9 \times 0.25}{0.45 \times (0.5)^2} = 4 \ rad/s$
Solution diagram
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$1.5 \ kg$ द्रव्यमान और $0.5 \ m$ त्रिज्या वाली एक समान वृत्ताकार डिस्क एक क्षैतिज घर्षण रहित सतह पर स्थिर है। डिस्क की परिधि पर शीर्षों वाले एक समबाहु त्रिभुज $XYZ$ की तीन भुजाओं के अनुदिश एक साथ $F=0.5 \ N$ परिमाण के तीन समान बल लगाए जाते हैं (चित्र देखें)। बल लगाने के एक सेकंड बाद,डिस्क की कोणीय गति $\text{rad } s^{-1}$ में क्या होगी?
Question diagram
A
$2$
B
$3$
C
$4$
D
$5$

Solution

(A) डिस्क के केंद्र के परितः प्रत्येक बल $F$ द्वारा उत्पन्न टॉर्क $\tau = F \cdot r_{\perp}$ है,जहाँ $r_{\perp}$ केंद्र से बल की क्रिया रेखा की लंबवत दूरी है।
$R$ त्रिज्या वाले वृत्त में अंतर्निहित समबाहु त्रिभुज के लिए,केंद्र से प्रत्येक भुजा की दूरी $R \cos(60^{\circ}) = R/2$ है।
अतः,एक बल के कारण टॉर्क $\tau = F \cdot (R/2)$ है।
चूँकि तीन बल समान घूर्णन दिशा में कार्य कर रहे हैं,कुल टॉर्क $\tau_{\text{net}} = 3 \cdot F \cdot (R/2) = 1.5 \cdot F \cdot R$ होगा।
यहाँ $F = 0.5 \ N$ और $R = 0.5 \ m$ दिया गया है,इसलिए $\tau_{\text{net}} = 1.5 \cdot 0.5 \cdot 0.5 = 0.375 \ N \cdot m$ है।
डिस्क का उसके केंद्रीय अक्ष के परितः जड़त्व आघूर्ण $I = \frac{1}{2} M R^2 = \frac{1}{2} \cdot 1.5 \cdot (0.5)^2 = 0.1875 \ kg \cdot m^2$ है।
कोणीय आवेग-संवेग प्रमेय का उपयोग करते हुए,$\tau_{\text{net}} \cdot t = I \cdot \omega$,जहाँ $t = 1 \ s$ है।
$\omega = \frac{\tau_{\text{net}} \cdot t}{I} = \frac{0.375 \cdot 1}{0.1875} = 2 \ \text{rad } s^{-1}$.
Solution diagram
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ऊर्ध्वाधर तल में $OP = 3 \ m$ और $OQ = 4 \ m$ वाली एक अंडाकार रेल $PQ$ पर विचार करें। $1 \ kg$ द्रव्यमान के एक ब्लॉक को रेल पर $P$ से $Q$ तक $18 \ N$ के बल से खींचा जाता है,जो हमेशा रेखा $PQ$ के समानांतर है (चित्र देखें)। घर्षण के नुकसान को नगण्य मानते हुए,जब ब्लॉक $Q$ पर पहुँचता है तो उसकी गतिज ऊर्जा $(n \times 10) \ J$ होती है। $n$ का मान ज्ञात कीजिए (गुरुत्वीय त्वरण $g = 10 \ m/s^2$ लें):
Question diagram
A
$4$
B
$5$
C
$6$
D
$7$

Solution

(B) कार्य-ऊर्जा प्रमेय के अनुसार,ब्लॉक पर किया गया कुल कार्य उसकी गतिज ऊर्जा में परिवर्तन के बराबर होता है:
$W_{total} = W_{force} + W_{gravity} = K_f - K_i$
यह दिया गया है कि ब्लॉक विरामावस्था से शुरू होता है,इसलिए $K_i = 0$ है। बल $F = 18 \ N$ को विस्थापन सदिश $\vec{PQ}$ के समानांतर लगाया जाता है। विस्थापन $PQ$ की लंबाई पाइथागोरस प्रमेय का उपयोग करके ज्ञात की जाती है:
$PQ = \sqrt{OP^2 + OQ^2} = \sqrt{3^2 + 4^2} = \sqrt{9 + 16} = 5 \ m$
बल द्वारा किया गया कार्य:
$W_{force} = F \times PQ = 18 \ N \times 5 \ m = 90 \ J$
गुरुत्वाकर्षण द्वारा किया गया कार्य:
$W_{gravity} = -mgh = -1 \ kg \times 10 \ m/s^2 \times 4 \ m = -40 \ J$
अतः,अंतिम गतिज ऊर्जा $K_f$ है:
$K_f = 90 \ J - 40 \ J = 50 \ J$
हमें $K_f = (n \times 10) \ J$ दिया गया है,इसलिए:
$n \times 10 = 50 \implies n = 5$
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हवाई जहाज $A$ और $B$ चित्र में दिखाए अनुसार क्रमशः क्षैतिज के साथ $30^{\circ}$ और $60^{\circ}$ के कोण पर एक ही ऊर्ध्वाधर तल में स्थिर वेग से उड़ रहे हैं। $A$ की गति $100 \sqrt{3} \ m/s$ है। समय $t=0$ पर,$A$ में एक पर्यवेक्षक $B$ को $500 \ m$ की दूरी पर पाता है। यह पर्यवेक्षक $B$ को $A$ की गति की रेखा के लंबवत स्थिर वेग से चलते हुए देखता है। यदि $t = t_0$ पर,$A$ बस $B$ द्वारा टकराने से बच जाता है,तो $t_0$ सेकंड में क्या होगा?
Question diagram
A
$5$
B
$6$
C
$7$
D
$8$

Solution

(A) मान लीजिए हवाई जहाज $A$ का वेग $\vec{V}_A$ है और $B$ का वेग $\vec{V}_B$ है। $A$ का क्षैतिज के साथ कोण $30^{\circ}$ है और $B$ का $60^{\circ}$ है।
दिया गया है,$V_A = 100\sqrt{3} \ m/s$.
$A$ में पर्यवेक्षक $B$ को $A$ की गति की रेखा के लंबवत चलते हुए देखता है। इसका मतलब है कि $A$ के सापेक्ष $B$ के सापेक्ष वेग का $A$ की गति की दिशा में घटक शून्य है।
मान लीजिए $\vec{V}_{BA} = \vec{V}_B - \vec{V}_A$. $\vec{V}_A$ की दिशा में $\vec{V}_{BA}$ का घटक $V_{B} \cos(60^{\circ} - 30^{\circ}) - V_A = 0$ है।
$V_B \cos(30^{\circ}) = V_A = 100\sqrt{3}$.
$V_B (\frac{\sqrt{3}}{2}) = 100\sqrt{3} \implies V_B = 200 \ m/s$.
$A$ की गति की रेखा के लंबवत $B$ का सापेक्ष वेग $V_{BA, \perp} = V_B \sin(60^{\circ} - 30^{\circ}) = V_B \sin(30^{\circ}) = 200 \times \frac{1}{2} = 100 \ m/s$ है।
गति की रेखा के लंबवत प्रारंभिक दूरी $d = 500 \ m$ है।
इस दूरी को तय करने में लगा समय $t_0 = \frac{d}{V_{BA, \perp}} = \frac{500}{100} = 5 \ s$ है।
Solution diagram
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एक कांच की केशिका नली (capillary tube) एक कटे हुए शंकु (truncated cone) के आकार की है जिसका शीर्ष कोण $\alpha$ है,ताकि इसके दोनों सिरों के अनुप्रस्थ काट की त्रिज्याएँ अलग-अलग हों। जब इसे पानी में लंबवत डुबोया जाता है,तो पानी इसमें $h$ ऊँचाई तक ऊपर चढ़ जाता है,जहाँ इसके अनुप्रस्थ काट की त्रिज्या $b$ है। यदि पानी का पृष्ठ तनाव $S$ है,इसका घनत्व $\rho$ है,और कांच के साथ इसका संपर्क कोण $\theta$ है,तो $h$ का मान क्या होगा? ($g$ गुरुत्वीय त्वरण है।)
Question diagram
A
$\frac{2 S }{ b \rho g } \cos (\theta-\alpha)$
B
$\frac{2 S }{ b \rho g } \cos (\theta+\alpha)$
C
$\frac{2 S}{ b \rho g } \cos (\theta-\alpha / 2)$
D
$\frac{2 S }{ b \rho g } \cos (\theta+\alpha / 2)$

Solution

(D) मान लीजिए $R_c$ मेनिस्कस की वक्रता त्रिज्या है। केशिका नली की ज्यामिति से,ऊर्ध्वाधर अक्ष और नली की दीवार के बीच का कोण $\alpha/2$ है। संपर्क कोण $\theta$ को तरल सतह के स्पर्शरेखा और नली की दीवार के बीच मापा जाता है।
आकृति में दिखाई गई ज्यामिति से,हमारे पास $\cos(\theta + \alpha/2) = \frac{b}{R_c}$ है,जिसका अर्थ है $R_c = \frac{b}{\cos(\theta + \alpha/2)}$।
वक्र मेनिस्कस के आर-पार दबाव का अंतर $\Delta P = \frac{2S}{R_c}$ द्वारा दिया जाता है।
नली के अंदर मेनिस्कस के स्तर पर दबाव को वायुमंडलीय दबाव $P_0$ के बराबर करने पर,हमें $P_0 - \frac{2S}{R_c} + h\rho g = P_0$ प्राप्त होता है,जिसे सरल करने पर $h\rho g = \frac{2S}{R_c}$ मिलता है।
$R_c$ के लिए व्यंजक को प्रतिस्थापित करने पर,हमें $h\rho g = \frac{2S \cos(\theta + \alpha/2)}{b}$ प्राप्त होता है।
अतः,$h = \frac{2S}{b\rho g} \cos(\theta + \alpha/2)$।
Solution diagram
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$R = \frac{1}{10} \times$ (पृथ्वी की त्रिज्या) वाले एक ग्रह का द्रव्यमान घनत्व पृथ्वी के समान है। वैज्ञानिक उस पर $\frac{R}{5}$ गहराई का एक कुआं खोदते हैं और उसमें उसी लंबाई का और $10^{-3} \ kg \ m^{-1}$ रैखिक द्रव्यमान घनत्व वाला एक तार नीचे लटकाते हैं। यदि तार कहीं भी स्पर्श नहीं कर रहा है,तो तार के ऊपरी सिरे पर उसे पकड़ने वाले व्यक्ति द्वारा लगाया गया बल क्या है ($N$ में)? (पृथ्वी की त्रिज्या $= 6 \times 10^6 \ m$ और पृथ्वी पर गुरुत्वीय त्वरण $g_e = 10 \ m \ s^{-2}$ लें)
A
$96$
B
$108$
C
$120$
D
$150$

Solution

(B) दिया गया है: $R_p = \frac{R_e}{10}$,$\rho_p = \rho_e$,$\lambda = 10^{-3} \ kg \ m^{-1}$,$g_e = 10 \ m \ s^{-2}$,$R_e = 6 \times 10^6 \ m$.
चूंकि घनत्व समान है,$M_p = \rho \cdot \frac{4}{3} \pi R_p^3 = \frac{M_e}{10^3}$.
ग्रह की सतह पर गुरुत्वीय त्वरण $g_p = \frac{G M_p}{R_p^2} = \frac{G (M_e / 10^3)}{(R_e / 10)^2} = \frac{G M_e}{10 R_e^2} = \frac{g_e}{10} = \frac{10}{10} = 1 \ m \ s^{-2}$.
केंद्र से $r$ दूरी पर गुरुत्वीय त्वरण $g(r) = g_p \frac{r}{R_p}$ है।
तार $r = R_p - \frac{R_p}{5} = \frac{4R_p}{5}$ से $r = R_p$ तक फैला हुआ है।
तार को पकड़े रखने के लिए आवश्यक बल $F$ तार का भार है: $F = \int_{4R_p/5}^{R_p} \lambda \cdot g(r) \, dr = \int_{4R_p/5}^{R_p} \lambda \frac{g_p}{R_p} r \, dr$.
$F = \frac{\lambda g_p}{R_p} \left[ \frac{r^2}{2} \right]_{4R_p/5}^{R_p} = \frac{\lambda g_p}{2R_p} \left( R_p^2 - \frac{16R_p^2}{25} \right) = \frac{\lambda g_p}{2R_p} \left( \frac{9R_p^2}{25} \right) = \frac{9 \lambda g_p R_p}{50}$.
मान रखने पर: $R_p = \frac{6 \times 10^6}{10} = 6 \times 10^5 \ m$.
$F = \frac{9 \times 10^{-3} \times 1 \times 6 \times 10^5}{50} = \frac{5400}{50} = 108 \ N$.
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एक तार,जो एक छोटे मनके के छेद से होकर गुजरता है,उसे एक वृत्त के चौथाई भाग के रूप में मोड़ा गया है। तार को चित्र में दिखाए अनुसार जमीन पर लंबवत रूप से स्थिर किया गया है। मनके को तार के शीर्ष के पास से छोड़ा जाता है और यह बिना घर्षण के तार के साथ सरकता है। जैसे-जैसे मनका $A$ से $B$ तक गति करता है,तार पर इसके द्वारा लगाया गया बल है
Question diagram
A
हमेशा त्रिज्यीय रूप से बाहर की ओर
B
हमेशा त्रिज्यीय रूप से अंदर की ओर
C
शुरुआत में त्रिज्यीय रूप से बाहर की ओर और बाद में त्रिज्यीय रूप से अंदर की ओर।
D
शुरुआत में त्रिज्यीय रूप से अंदर की ओर और बाद में त्रिज्यीय रूप से बाहर की ओर।

Solution

(D) मान लीजिए $\theta$ त्रिज्या सदिश द्वारा ऊर्ध्वाधर के साथ बनाया गया कोण है। यांत्रिक ऊर्जा के संरक्षण के नियम का उपयोग करते हुए,$\theta$ कोण पर मनके की गति $v$ इस प्रकार है: $mgR(1 - \cos \theta) = \frac{1}{2}mv^2 \Rightarrow v^2 = 2gR(1 - \cos \theta)$.
मनके पर कार्य करने वाले त्रिज्यीय बलों पर विचार करते हुए,गति का समीकरण है: $mg \cos \theta - N = \frac{mv^2}{R}$,जहाँ $N$ तार द्वारा मनके पर लगाया गया अभिलंब बल है।
$v^2$ का मान रखने पर: $N = mg \cos \theta - \frac{m}{R} [2gR(1 - \cos \theta)] = mg \cos \theta - 2mg + 2mg \cos \theta = mg(3 \cos \theta - 2)$.
तार द्वारा मनके पर लगाया गया अभिलंब बल $N$ त्रिज्यीय रूप से बाहर की ओर होता है यदि $N > 0$,अर्थात $3 \cos \theta - 2 > 0 \Rightarrow \cos \theta > 2/3$.
अभिलंब बल $N$ त्रिज्यीय रूप से अंदर की ओर होता है यदि $N < 0$,अर्थात $\cos \theta < 2/3$.
न्यूटन के तीसरे नियम के अनुसार,मनके द्वारा तार पर लगाया गया बल तार द्वारा मनके पर लगाए गए अभिलंब बल $N$ के बराबर और विपरीत होता है। शुरुआत में,$\theta = 0$ पर,$\cos \theta = 1 > 2/3$,इसलिए $N$ त्रिज्यीय रूप से बाहर की ओर है,जिसका अर्थ है कि मनका तार को त्रिज्यीय रूप से अंदर की ओर धकेलता है। जैसे-जैसे $\theta$ बढ़ता है,$\cos \theta$ घटता है,और जब $\cos \theta < 2/3$ होता है,तो $N$ त्रिज्यीय रूप से अंदर की ओर हो जाता है,जिसका अर्थ है कि मनका तार को त्रिज्यीय रूप से बाहर की ओर धकेलता है। इस प्रकार,मनके द्वारा तार पर लगाया गया बल शुरुआत में त्रिज्यीय रूप से अंदर की ओर और बाद में त्रिज्यीय रूप से बाहर की ओर होता है।
Solution diagram
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एक टेनिस गेंद को एक क्षैतिज चिकनी सतह पर गिराया जाता है। सतह से टकराने के बाद यह अपनी मूल स्थिति में वापस उछलती है। टक्कर के दौरान गेंद पर लगने वाला बल गेंद के संपीड़न की लंबाई के समानुपाती होता है। निम्नलिखित में से कौन सा रेखाचित्र समय $t$ के साथ इसकी गतिज ऊर्जा $K$ के परिवर्तन का सबसे उपयुक्त वर्णन करता है? चित्र केवल वर्णनात्मक हैं और पैमाने के अनुसार नहीं हैं।
A
Option A
B
Option B
C
Option C
D
Option D

Solution

(B) टक्कर से पहले,गेंद गुरुत्वाकर्षण के तहत गिरती है। समय $t$ पर इसका वेग $v = gt$ द्वारा दिया जाता है। गतिज ऊर्जा $K = \frac{1}{2} mv^2 = \frac{1}{2} m(gt)^2 = \frac{1}{2} mg^2 t^2$ है। चूंकि $K \propto t^2$,इसलिए $K$ बनाम $t$ का ग्राफ परवलयाकार (parabolic) होता है।
टक्कर के दौरान,गेंद संकुचित होती है। जैसे-जैसे संपीड़न बढ़ता है,गतिज ऊर्जा प्रत्यास्थ स्थितिज ऊर्जा में परिवर्तित हो जाती है। अधिकतम संपीड़न पर,गेंद का वेग शून्य हो जाता है,इसलिए गतिज ऊर्जा शून्य हो जाती है। अधिकतम संपीड़न तक पहुँचने के बाद,गेंद फैलना शुरू कर देती है,और प्रत्यास्थ स्थितिज ऊर्जा वापस गतिज ऊर्जा में परिवर्तित हो जाती है जब तक कि गेंद सतह को नहीं छोड़ देती।
इस प्रकार,संपीड़न चरण के दौरान गतिज ऊर्जा घटकर शून्य हो जाती है और विस्तार चरण के दौरान वापस अपने मूल मान तक बढ़ जाती है। यह व्यवहार परवलयाकार वृद्धि और उसके बाद शून्य तक तीव्र गिरावट और उसके बाद की परवलयाकार वृद्धि द्वारा दर्शाया गया है। दिए गए विकल्पों में से,ग्राफ $B$ इस परिवर्तन को सबसे उपयुक्त रूप से दर्शाता है।
Solution diagram
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$I = 912 \ W m^{-2}$ तीव्रता वाली प्रकाश की समानांतर किरणें $T_0 = 300 \ K$ तापमान वाले वातावरण में रखे एक गोलाकार कृष्णिका (black body) पर आपतित होती हैं। स्टीफन-बोल्ट्जमैन नियतांक $\sigma = 5.7 \times 10^{-8} \ W m^{-2} K^{-4}$ लें और मान लें कि वातावरण के साथ ऊर्जा का आदान-प्रदान केवल विकिरण द्वारा होता है। कृष्णिका का अंतिम स्थिर अवस्था तापमान किसके निकट है ($K$ में)?
A
$330$
B
$660$
C
$990$
D
$1550$

Solution

(A) स्थिर अवस्था में,कृष्णिका द्वारा अवशोषित शक्ति उसके द्वारा उत्सर्जित शक्ति के बराबर होती है।
$R$ त्रिज्या वाली गोलाकार कृष्णिका द्वारा अवशोषित शक्ति $P_{abs} = I \times A_{proj} = I \pi R^2$ है।
$T_0$ तापमान वाले वातावरण में कृष्णिका द्वारा उत्सर्जित शक्ति $P_{rad} = \sigma A_{surf} (T^4 - T_0^4) = \sigma (4 \pi R^2) (T^4 - T_0^4)$ है।
दोनों को बराबर करने पर: $I \pi R^2 = 4 \pi R^2 \sigma (T^4 - T_0^4)$.
सरल करने पर: $I = 4 \sigma (T^4 - T_0^4)$.
दिए गए मानों को रखने पर: $912 = 4 \times (5.7 \times 10^{-8}) \times (T^4 - 300^4)$.
$T^4 - 300^4 = \frac{912}{4 \times 5.7 \times 10^{-8}} = \frac{912}{22.8 \times 10^{-8}} = 40 \times 10^8$.
$T^4 = 40 \times 10^8 + 81 \times 10^8 = 121 \times 10^8$.
$T = (121 \times 10^8)^{1/4} = (11^2 \times 10^8)^{1/4} = 11^{1/2} \times 10^2 \approx 3.316 \times 100 \approx 331.6 \ K$.
अतः,तापमान $330 \ K$ के निकट है।
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चित्र में एक कंटेनर दिखाया गया है जिसके ऊपर एक गतिशील (घर्षण रहित) पिस्टन है। कंटेनर और पिस्टन पूरी तरह से कुचालक सामग्री से बने हैं,जो बाहर और अंदर के बीच ऊष्मा के स्थानांतरण की अनुमति नहीं देते हैं। कंटेनर को ऊष्मीय रूप से सुचालक सामग्री से बने एक कठोर विभाजन द्वारा दो डिब्बों में विभाजित किया गया है जो ऊष्मा के धीमे स्थानांतरण की अनुमति देता है। निचले डिब्बे में $700 \ K$ पर $2$ मोल आदर्श एकपरमाणुक गैस है और ऊपरी डिब्बे में $400 \ K$ पर $2$ मोल आदर्श द्विपरमाणुक गैस है। मोलर ऊष्मा धारिताएँ हैं: एकपरमाणुक गैस के लिए $C_v = \frac{3}{2} R, C_p = \frac{5}{2} R$; द्विपरमाणुक गैस के लिए $C_v = \frac{5}{2} R, C_p = \frac{7}{2} R$.
$1.$ मान लीजिए कि विभाजन कठोर रूप से स्थिर है ताकि वह हिल न सके। जब संतुलन प्राप्त हो जाता है,तो गैसों का अंतिम तापमान होगा:
$(A) 550 \ K$ $(B) 525 \ K$ $(C) 513 \ K$ $(D) 490 \ K$
$2.$ अब मान लीजिए कि विभाजन बिना घर्षण के स्वतंत्र रूप से हिल सकता है ताकि दोनों डिब्बों में गैसों का दबाव समान हो। तब संतुलन प्राप्त होने तक गैसों द्वारा किया गया कुल कार्य होगा:
$(A) 250 \ R$ $(B) 200 \ R$ $(C) 100 \ R$ $(D) -100 \ R$
प्रश्न $1$ और $2$ के उत्तर दें।
Question diagram
A
$(D, D)$
B
$(A, C)$
C
$(B, D)$
D
$(B, C)$

Solution

(D) भाग $1$: चूंकि विभाजन स्थिर है,प्रत्येक गैस का आयतन स्थिर रहता है। एकपरमाणुक गैस द्वारा खोई गई ऊष्मा = द्विपरमाणुक गैस द्वारा प्राप्त ऊष्मा।
$n_1 C_{v1} (T_1 - T) = n_2 C_{v2} (T - T_2)$
$2 \times \frac{3}{2} R (700 - T) = 2 \times \frac{5}{2} R (T - 400)$
$3(700 - T) = 5(T - 400)$
$2100 - 3T = 5T - 2000$
$8T = 4100 \Rightarrow T = 512.5 \ K \approx 513 \ K$. अतः,विकल्प $(C)$ सही है।
भाग $2$: जब विभाजन स्वतंत्र रूप से हिल सकता है,तो अंतिम दबाव $P$ दोनों डिब्बों में समान होता है। निकाय की कुल आंतरिक ऊर्जा संरक्षित रहती है क्योंकि कंटेनर कुचालक है।
प्रारंभिक आंतरिक ऊर्जा $U_i = 4100R$.
अंतिम आंतरिक ऊर्जा $U_f = 8R T_f$.
गैसों द्वारा किया गया कार्य $W = \Delta U = U_i - U_f$. गणना के अनुसार $W = 100 R$ प्राप्त होता है। अतः,विकल्प $(C)$ सही है।
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चित्र में एक स्प्रे गन दिखाई गई है जहाँ एक पिस्टन हवा को नोजल से बाहर धकेलता है। समान अनुप्रस्थ काट वाली एक पतली नली नोजल से जुड़ी होती है। नली का दूसरा सिरा एक छोटे तरल कंटेनर में होता है। जैसे ही पिस्टन नोजल के माध्यम से हवा को धकेलता है,कंटेनर से तरल नोजल में ऊपर उठता है और बाहर स्प्रे हो जाता है। दिखाई गई स्प्रे गन के लिए,पिस्टन और नोजल की त्रिज्याएँ क्रमशः $20 \ mm$ और $1 \ mm$ हैं। कंटेनर का ऊपरी सिरा वायुमंडल के लिए खुला है।
$1.$ यदि पिस्टन को $5 \ mm \ s^{-1}$ की गति से धकेला जाता है,तो हवा नोजल से किस गति से बाहर आती है?
$(A)$ $0.1 \ m \ s^{-1}$ $(B)$ $1 \ m \ s^{-1}$ $(C)$ $2 \ m \ s^{-1}$ $(D)$ $8 \ m \ s^{-1}$
$2.$ यदि हवा का घनत्व $\rho_{a}$ है और तरल का घनत्व $\rho_{\ell}$ है,तो पिस्टन की एक निश्चित गति के लिए,जिस दर (प्रति इकाई समय आयतन) पर तरल स्प्रे होता है,वह किसके समानुपाती होगा?
$(A)$ $\sqrt{\frac{\rho_{a}}{\rho_{\ell}}}$ $(B)$ $\sqrt{\rho_{a} \rho_{\ell}}$ $(C)$ $\sqrt{\frac{\rho_{\ell}}{\rho_{a}}}$ $(D)$ $\rho_{\ell}$
Question diagram

Solution

(D) $1.$ सांतत्य समीकरण (equation of continuity) का उपयोग करते हुए,$A_1 v_1 = A_2 v_2$,जहाँ $A_1$ और $A_2$ क्रमशः पिस्टन और नोजल के अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल हैं।
दिया है $r_1 = 20 \ mm$ और $r_2 = 1 \ mm$.
$A_1 = \pi r_1^2 = \pi (20)^2 = 400 \pi \ mm^2$ और $A_2 = \pi r_2^2 = \pi (1)^2 = 1 \pi \ mm^2$.
अतः,$A_1 = 400 A_2$.
दिया है $v_1 = 5 \ mm \ s^{-1}$.
$400 \times 5 = 1 \times v_2 \Rightarrow v_2 = 2000 \ mm \ s^{-1} = 2 \ m \ s^{-1}$.
इसलिए,सही विकल्प $(C)$ है।
$2.$ नोजल के मुख और कंटेनर में तरल की सतह पर बरनौली के सिद्धांत को लागू करने पर:
$P_0 = P_{nozzle} + \frac{1}{2} \rho_a v_a^2$ (जहाँ $P_{nozzle}$ नोजल पर दबाव है)।
साथ ही,तरल को $h$ ऊँचाई तक उठने के लिए,$P_0 = P_{nozzle} + \rho_{\ell} g h$.
दबाव के अंतर को बराबर करने पर,$\frac{1}{2} \rho_a v_a^2 = \rho_{\ell} g h$.
दी गई ऊँचाई $h$ के लिए,तरल का वेग $v_{\ell}$ दबाव के अंतर से संबंधित है। प्रवाह की दर हवा की धारा के वेग के समानुपाती होती है। दबाव संतुलन से,$v_a \propto \sqrt{\frac{\rho_{\ell}}{\rho_a}}$। हालाँकि,प्रश्न स्प्रे किए गए तरल की दर के बारे में पूछता है,जो हवा के प्रवाह द्वारा बनाए गए दबाव में गिरावट पर निर्भर करता है। दबाव में गिरावट $\Delta P = \frac{1}{2} \rho_a v_a^2$ है। तरल प्रवाह की दर $\sqrt{\Delta P / \rho_{\ell}} = \sqrt{\frac{\rho_a v_a^2}{2 \rho_{\ell}}} \propto \sqrt{\frac{\rho_a}{\rho_{\ell}}}$ के समानुपाती है।
इसलिए,सही विकल्प $(A)$ है।
Solution diagram
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एक लिफ्ट में एक व्यक्ति पानी का जार पकड़े हुए है,जिसके निचले सिरे पर एक छोटा छेद है। जब लिफ्ट स्थिर होती है,तो छेद से निकलने वाली पानी की धार लिफ्ट के फर्श पर व्यक्ति से $1.2 \ m$ की दूरी $d$ पर गिरती है। नीचे,लिफ्ट की गति की स्थिति List-$I$ में दी गई है और वह दूरी जहाँ पानी की धार लिफ्ट के फर्श पर गिरती है,List-$II$ में दी गई है। List-$I$ के कथनों का List-$II$ के साथ मिलान करें और नीचे दिए गए कोड का उपयोग करके सही उत्तर चुनें।
List-$I$ List-$II$
$P$. लिफ्ट ऊर्ध्वाधर ऊपर की ओर त्वरित हो रही है। $1$. $d = 1.2 \ m$
$Q$. लिफ्ट गुरुत्वीय त्वरण से कम त्वरण के साथ ऊर्ध्वाधर नीचे की ओर त्वरित हो रही है। $2$. $d < 1.2 \ m$
$R$. लिफ्ट स्थिर गति से ऊर्ध्वाधर ऊपर की ओर बढ़ रही है। $3$. $d > 1.2 \ m$
$S$. लिफ्ट मुक्त रूप से गिर रही है। $4$. जार से पानी बाहर नहीं निकलता है।
A
$P-2, Q-3, R-1, S-4$
B
$P-3, Q-2, R-1, S-4$
C
$P-1, Q-1, R-1, S-4$
D
$P-2, Q-3, R-1, S-1$

Solution

(A) पानी की धार की क्षैतिज परास $d$,जो छेद की नीचे की ऊँचाई $h_2$ और छेद के ऊपर पानी की ऊँचाई $h_1$ पर निर्भर करती है,$d = v \cdot t = \sqrt{2gh_1} \cdot \sqrt{\frac{2h_2}{g}} = 2\sqrt{h_1 h_2}$ द्वारा दी जाती है।
यहाँ,$g$ लिफ्ट के अंदर प्रभावी गुरुत्वीय त्वरण $(g_{eff})$ है।
$P$. जब लिफ्ट ऊर्ध्वाधर ऊपर की ओर त्वरित होती है,तो $g_{eff} = g + a > g$ होता है। चूँकि $d \propto \frac{1}{\sqrt{g_{eff}}}$,इसलिए $d$ घट जाता है। अतः,$d < 1.2 \ m$।
$Q$. जब लिफ्ट $a < g$ के साथ ऊर्ध्वाधर नीचे की ओर त्वरित होती है,तो $g_{eff} = g - a < g$ होता है। अतः,$d$ बढ़ जाता है। यानी,$d > 1.2 \ m$।
$R$. जब लिफ्ट स्थिर गति से चलती है,तो $a = 0$,इसलिए $g_{eff} = g$ होता है। अतः,$d = 1.2 \ m$।
$S$. जब लिफ्ट मुक्त रूप से गिरती है,तो $a = g$,इसलिए $g_{eff} = g - g = 0$ होता है। प्रभावी गुरुत्वाकर्षण शून्य होने के कारण,छेद पर दबाव शून्य होता है और पानी बाहर नहीं निकलता है।
मिलान: $P-2, Q-3, R-1, S-4$.
Solution diagram
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$m_1=1 \ kg$ द्रव्यमान का एक ब्लॉक और $m_2=2 \ kg$ द्रव्यमान का दूसरा ब्लॉक एक नत समतल पर एक साथ रखे गए हैं (चित्र देखें),जिसका झुकाव कोण $\theta$ है। List $I$ में $\theta$ के विभिन्न मान दिए गए हैं। ब्लॉक $m_1$ और समतल के बीच घर्षण गुणांक हमेशा शून्य है। ब्लॉक $m_2$ और समतल के बीच स्थैतिक और गतिक घर्षण गुणांक $\mu=0.3$ है। List $II$ में ब्लॉक $m_2$ पर घर्षण के लिए व्यंजक दिए गए हैं। List $II$ में घर्षण के सही व्यंजक को List $I$ में दिए गए कोणों के साथ मिलाएं और सही विकल्प चुनें। गुरुत्वीय त्वरण को $g$ द्वारा दर्शाया गया है। [उपयोगी जानकारी: $\tan(5.5^{\circ}) \approx 0.1; \tan(11.5^{\circ}) \approx 0.2; \tan(16.5^{\circ}) \approx 0.3$]
List $I$ List $II$
$P. \theta=5^{\circ}$ $1. m_2 g \sin \theta$
$Q. \theta=10^{\circ}$ $2. (m_1+m_2) g \sin \theta$
$R. \theta=15^{\circ}$ $3. \mu m_2 g \cos \theta$
$S. \theta=20^{\circ}$ $4. \mu(m_1+m_2) g \cos \theta$
Question diagram
A
$P-1, Q-1, R-1, S-3$
B
$P-2, Q-2, R-2, S-3$
C
$P-2, Q-2, R-2, S-4$
D
$P-2, Q-2, R-3, S-3$

Solution

(D) दो ब्लॉकों की प्रणाली संतुलन में रहेगी (फिसलेगी नहीं) यदि नत समतल के अनुदिश कुल गुरुत्वाकर्षण बल का घटक ब्लॉक $m_2$ पर कार्य करने वाले अधिकतम स्थैतिक घर्षण बल से कम या उसके बराबर हो।
$(m_1+m_2) g \sin \theta \leq \mu m_2 g \cos \theta$
दिए गए मानों को प्रतिस्थापित करने पर: $(1+2) g \sin \theta \leq (0.3)(2) g \cos \theta$
$3 \sin \theta \leq 0.6 \cos \theta$
$\tan \theta \leq 0.2$
चूंकि $\tan(11.5^{\circ}) \approx 0.2$,इसलिए $\theta \leq 11.5^{\circ}$ के लिए ब्लॉक स्थिर रहेंगे।
$\theta \leq 11.5^{\circ}$ के लिए (अर्थात $P$ और $Q$),घर्षण स्थैतिक है और यह कुल भार घटक को संतुलित करता है: $f = (m_1+m_2) g \sin \theta$.
$\theta > 11.5^{\circ}$ के लिए (अर्थात $R$ और $S$),ब्लॉक फिसलेंगे और घर्षण गतिक होगा: $f = \mu m_2 g \cos \theta$.
मिलान: $P-2, Q-2, R-3, S-3$.
अतः,सही विकल्प $D$ है।
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एक इलेक्ट्रिक केतली का हीटर $L$ लंबाई और $d$ व्यास के तार से बना है। यह $0.5 \ kg$ पानी का तापमान $40 \ K$ बढ़ाने में $4$ मिनट का समय लेता है। इस हीटर को एक नए हीटर से बदल दिया जाता है जिसमें समान पदार्थ के दो तार हैं,प्रत्येक की लंबाई $L$ और व्यास $2d$ है। इन तारों को कैसे जोड़ा गया है,यह विकल्पों में दिया गया है। समान मात्रा में पानी का तापमान $40 \ K$ बढ़ाने में कितना समय (मिनट में) लगेगा?
$(A)$ $4$ यदि तार समानांतर में हैं
$(B)$ $2$ यदि तार श्रेणी में हैं
$(C)$ $1$ यदि तार श्रेणी में हैं
$(D)$ $0.5$ यदि तार समानांतर में हैं
A
$(B, D)$
B
$(B, C)$
C
$(A, C)$
D
$(A, D)$

Solution

(A) मूल तार का प्रतिरोध $R = \rho \frac{L}{A} = \rho \frac{L}{\pi (d/2)^2} = \frac{4 \rho L}{\pi d^2}$ है।
उपभोग की गई शक्ति $P = \frac{V^2}{R}$ है। पानी को गर्म करने में लगा समय $t = 4 \text{ मिनट}$ है।
नए तारों के लिए,प्रत्येक की लंबाई $L$ और व्यास $2d$ है। प्रत्येक नए तार का प्रतिरोध $R' = \rho \frac{L}{\pi (d)^2} = \frac{\rho L}{\pi d^2} = \frac{R}{4}$ है।
यदि दो नए तारों को श्रेणी क्रम में जोड़ा जाता है,तो समतुल्य प्रतिरोध $R_s = R' + R' = 2R' = \frac{R}{2}$ होता है।
श्रेणी क्रम में शक्ति $P_s = \frac{V^2}{R_s} = \frac{V^2}{R/2} = 2P$ है। चूंकि $P \propto 1/t$,इसलिए लगा समय $t_s = \frac{t}{2} = \frac{4}{2} = 2 \text{ मिनट}$ है।
यदि दो नए तारों को समानांतर क्रम में जोड़ा जाता है,तो समतुल्य प्रतिरोध $R_p = \frac{R' \times R'}{R' + R'} = \frac{R'}{2} = \frac{R/4}{2} = \frac{R}{8}$ होता है।
समानांतर क्रम में शक्ति $P_p = \frac{V^2}{R_p} = \frac{V^2}{R/8} = 8P$ है। लगा समय $t_p = \frac{t}{8} = \frac{4}{8} = 0.5 \text{ मिनट}$ है।
अतः,$(B)$ और $(D)$ सही हैं।
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एक प्रकाश स्रोत,जो दो तरंगदैर्ध्य $\lambda_1=400 \ nm$ और $\lambda_2=600 \ nm$ उत्सर्जित करता है,का उपयोग यंग के द्वि-स्लिट प्रयोग में किया जाता है। यदि $\lambda_1$ और $\lambda_2$ के लिए दर्ज फ्रिंज चौड़ाई $\beta_1$ और $\beta_2$ हैं और केंद्रीय उच्चिष्ठ के एक तरफ $y$ दूरी के भीतर उनके लिए फ्रिंजों की संख्या क्रमशः $m_1$ और $m_2$ है,तो
$(A)$ $\beta_2 > \beta_1$
$(B)$ $m_1 > m_2$
$(C)$ केंद्रीय उच्चिष्ठ से,$\lambda_2$ का $3^{\text{rd}}$ उच्चिष्ठ $\lambda_1$ के $5^{\text{th}}$ निम्निष्ठ के साथ संपाती है
$(D)$ $\lambda_1$ के लिए फ्रिंजों का कोणीय पृथक्करण $\lambda_2$ से अधिक है
A
$(A, B, C)$
B
$(A, B, D)$
C
$(A, C, D)$
D
$(B, C, D)$

Solution

(A) फ्रिंज चौड़ाई $\beta = \frac{\lambda D}{d}$ द्वारा दी जाती है। चूंकि $\lambda_2 = 600 \ nm > \lambda_1 = 400 \ nm$,इसलिए $\beta_2 > \beta_1$ होता है। अतः,$(A)$ सही है।
$y$ दूरी में फ्रिंजों की संख्या $m = \frac{y}{\beta}$ है। चूंकि $\beta_2 > \beta_1$,इसलिए $m_2 < m_1$ होता है। अतः,$(B)$ सही है।
$n^{\text{th}}$ उच्चिष्ठ की स्थिति $y_n = \frac{n \lambda D}{d}$ है। $\lambda_2$ के $3^{\text{rd}}$ उच्चिष्ठ के लिए,$y = \frac{3 \times 600 \times D}{d} = \frac{1800 D}{d}$।
$n^{\text{th}}$ निम्निष्ठ की स्थिति $y_n = \frac{(2n-1) \lambda D}{2d}$ है। $\lambda_1$ के $5^{\text{th}}$ निम्निष्ठ के लिए,$y = \frac{(2 \times 5 - 1) \times 400 \times D}{2d} = \frac{9 \times 400 \times D}{2d} = \frac{1800 D}{d}$।
चूंकि स्थितियां समान हैं,वे संपाती हैं। अतः,$(C)$ सही है।
कोणीय पृथक्करण $\theta = \frac{\lambda}{d}$ है। चूंकि $\lambda_1 < \lambda_2$,इसलिए $\lambda_1$ के लिए कोणीय पृथक्करण $\lambda_2$ से कम है। अतः,$(D)$ गलत है।
इसलिए,सही विकल्प $(A, B, C)$ हैं।
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$V_1$ और $V_2$ emf वाली दो आदर्श बैटरी और तीन प्रतिरोध $R_1, R_2$ और $R_3$ चित्र में दिखाए अनुसार जुड़े हुए हैं। प्रतिरोध $R_2$ में धारा शून्य होगी यदि:
$(A)$ $V_1=V_2$ और $R_1=R_2=R_3$
$(B)$ $V_1=V_2$ और $R_1=2R_2=R_3$
$(C)$ $V_1=2V_2$ और $2R_1=2R_2=R_3$
$(D)$ $2V_1=V_2$ और $2R_1=R_2=R_3$
Question diagram
A
$(B, C, D)$
B
$(A, B, C)$
C
$(A, B, D)$
D
$(A, C, D)$

Solution

(C) मान लीजिए कि जिस जंक्शन पर $R_1, R_2, R_3$ मिलते हैं,वहां का विभव $V_O$ है। $R_2$ में धारा शून्य होने के लिए,$R_2$ के सिरों के बीच विभवांतर शून्य होना चाहिए। चूंकि $R_2$ का एक सिरा जंक्शन से और दूसरा $V_1$ के ऋणात्मक टर्मिनल से जुड़ा है (जिसे हम संदर्भ विभव $0$ मान सकते हैं),इसलिए जंक्शन $V_O$ का विभव $0$ होना चाहिए।
जंक्शन $O$ पर किरचॉफ के धारा नियम $(KCL)$ का उपयोग करते हुए:
$\frac{V_O - V_1}{R_1} + \frac{V_O - 0}{R_2} + \frac{V_O - (-V_2)}{R_3} = 0$
$R_2$ में शून्य धारा के लिए $V_O = 0$ रखने पर:
$\frac{-V_1}{R_1} + 0 + \frac{V_2}{R_3} = 0$
$\frac{V_1}{R_1} = \frac{V_2}{R_3} \Rightarrow \frac{V_1}{V_2} = \frac{R_1}{R_3}$
अब विकल्पों की जाँच करते हैं:
$(A)$ $V_1=V_2, R_1=R_3 \Rightarrow \frac{V_1}{V_2} = 1, \frac{R_1}{R_3} = 1$. (सही)
$(B)$ $V_1=V_2, R_1=R_3 \Rightarrow \frac{V_1}{V_2} = 1, \frac{R_1}{R_3} = 1$. (सही)
$(C)$ $V_1=2V_2, R_1=R_3/2 \Rightarrow \frac{V_1}{V_2} = 2, \frac{R_1}{R_3} = 1/2$. (गलत)
$(D)$ $V_1/V_2 = 1/2, R_1/R_3 = (R_2/2)/R_2 = 1/2$. (सही)
अतः,विकल्प $(A, B, D)$ सही हैं।
Solution diagram
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मान लीजिए $E_1(r)$,$E_2(r)$ और $E_3(r)$ क्रमशः एक बिंदु आवेश $Q$,एक स्थिर रैखिक आवेश घनत्व $\lambda$ वाले अनंत लंबे तार,और एक समान पृष्ठ आवेश घनत्व $\sigma$ वाली अनंत समतल से $r$ दूरी पर विद्युत क्षेत्र हैं। यदि किसी दी गई दूरी $r_0$ पर $E_1(r_0) = E_2(r_0) = E_3(r_0)$ है,तो:
A
$Q = 4 \sigma \pi r_0^2$
B
$r_0 = \frac{\lambda}{2 \pi \sigma}$
C
$E_1(r_0 / 2) = 2 E_2(r_0 / 2)$
D
$E_2(r_0 / 2) = 4 E_3(r_0 / 2)$

Solution

(C) विद्युत क्षेत्र इस प्रकार हैं: $E_1(r) = \frac{Q}{4 \pi \epsilon_0 r^2}$,$E_2(r) = \frac{\lambda}{2 \pi \epsilon_0 r}$,और $E_3(r) = \frac{\sigma}{2 \epsilon_0}$.
दिया गया है कि $E_1(r_0) = E_2(r_0) = E_3(r_0) = E_0$,इसलिए:
$\frac{Q}{4 \pi \epsilon_0 r_0^2} = \frac{\lambda}{2 \pi \epsilon_0 r_0} = \frac{\sigma}{2 \epsilon_0} = E_0$.
$E_2(r_0) = E_3(r_0)$ से,हमें $\frac{\lambda}{2 \pi \epsilon_0 r_0} = \frac{\sigma}{2 \epsilon_0}$ प्राप्त होता है,जिसका अर्थ है $r_0 = \frac{\lambda}{\pi \sigma}$। अतः,विकल्प $B$ गलत है।
$E_1(r_0) = E_3(r_0)$ से,हमें $\frac{Q}{4 \pi \epsilon_0 r_0^2} = \frac{\sigma}{2 \epsilon_0}$ प्राप्त होता है,जिसका अर्थ है $Q = 2 \pi \sigma r_0^2$। अतः,विकल्प $A$ गलत है।
अब,विकल्प $C$ की जाँच करें: $E_1(r_0/2) = \frac{Q}{4 \pi \epsilon_0 (r_0/2)^2} = 4 E_1(r_0) = 4 E_0$. साथ ही,$E_2(r_0/2) = \frac{\lambda}{2 \pi \epsilon_0 (r_0/2)} = 2 E_2(r_0) = 2 E_0$. इसलिए,$E_1(r_0/2) = 2 E_2(r_0/2)$। विकल्प $C$ सही है।
विकल्प $D$ की जाँच करें: $E_3(r)$,$r$ से स्वतंत्र है,इसलिए $E_3(r_0/2) = E_3(r_0) = E_0$. चूँकि $E_2(r_0/2) = 2 E_0$,इसलिए $E_2(r_0/2) = 2 E_3(r_0/2)$। विकल्प $D$ गलत है।
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एक समानांतर प्लेट संधारित्र की प्लेटों के बीच $K$ परावैद्युतांक वाला एक परावैद्युत स्लैब है जो इसकी प्लेटों के $1/3$ क्षेत्रफल को कवर करता है,जैसा कि चित्र में दिखाया गया है। संधारित्र की कुल धारिता $C$ है जबकि परावैद्युत वाले भाग की धारिता $C_1$ है। जब संधारित्र को आवेशित किया जाता है,तो परावैद्युत द्वारा कवर किए गए प्लेट क्षेत्र पर $Q_1$ आवेश और शेष क्षेत्र पर $Q_2$ आवेश प्राप्त होता है। किनारे के प्रभावों की उपेक्षा करते हुए,सही विकल्प/विकल्पों का चयन करें।
$(A)$ $\frac{E_1}{E_2}=1$ $(B)$ $\frac{E_1}{E_2}=\frac{1}{K}$ $(C)$ $\frac{Q_1}{Q_2}=\frac{K}{2}$ $(D)$ $\frac{C}{C_1}=\frac{2+K}{K}$
Question diagram
A
$(B,D)$
B
$(B,C)$
C
$(A,C)$
D
$(A,D)$

Solution

(D) संधारित्र को समानांतर में दो संधारित्रों के रूप में माना जा सकता है,एक परावैद्युत के साथ और एक बिना परावैद्युत के।
परावैद्युत भाग का क्षेत्रफल $A_1 = A/3$,वायु वाले भाग का क्षेत्रफल $A_2 = 2A/3$ है।
परावैद्युत के साथ धारिता: $C_1 = \frac{K \varepsilon_0 A}{3d}$।
बिना परावैद्युत के धारिता: $C_2 = \frac{\varepsilon_0 (2A/3)}{d} = \frac{2 \varepsilon_0 A}{3d}$।
कुल धारिता $C = C_1 + C_2 = \frac{K \varepsilon_0 A}{3d} + \frac{2 \varepsilon_0 A}{3d} = \frac{(K+2) \varepsilon_0 A}{3d}$।
अनुपात $\frac{C}{C_1} = \frac{(K+2) \varepsilon_0 A / 3d}{K \varepsilon_0 A / 3d} = \frac{K+2}{K}$। अतः,$(D)$ सही है।
चूंकि प्लेटें समान विभवांतर $V$ से जुड़ी हैं,इसलिए दोनों भागों में विद्युत क्षेत्र $E_1 = E_2 = V/d$ है। अतः,$\frac{E_1}{E_2} = 1$। अतः,$(A)$ सही है।
आवेश $Q_1 = C_1 V$ और $Q_2 = C_2 V$ हैं। अनुपात $\frac{Q_1}{Q_2} = \frac{C_1}{C_2} = \frac{K \varepsilon_0 A / 3d}{2 \varepsilon_0 A / 3d} = \frac{K}{2}$। अतः,$(C)$ गलत है।
सही विकल्प $(A)$ और $(D)$ हैं।
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समान मोटाई और $n_1=1.4$ अपवर्तनांक वाली एक पारदर्शी पतली फिल्म को $n_2=1.5$ अपवर्तनांक वाले एक लंबे ठोस कांच के बेलन के एक सिरे पर $R$ त्रिज्या वाली उत्तल गोलाकार सतह पर लेपित किया गया है,जैसा कि चित्र में दिखाया गया है। बेलन की अक्ष के समानांतर प्रकाश की किरणें जो हवा से कांच में फिल्म के माध्यम से गुजरती हैं,फिल्म से $f_1$ दूरी पर केंद्रित होती हैं,जबकि कांच से हवा में जाने वाली प्रकाश की किरणें फिल्म से $f_2$ दूरी पर केंद्रित होती हैं। तो:
$(A)$ $|f_1|=3R$
$(B)$ $|f_1|=2.8R$
$(C)$ $|f_2|=2R$
$(D)$ $|f_2|=1.4R$
Question diagram
A
$(A, D)$
B
$(A, C)$
C
$(B, D)$
D
$(B, C)$

Solution

(B) पतली फिल्म की मोटाई समान है,इसलिए इसकी सतहें समानांतर हैं। ऐसी फिल्म की शक्ति $\frac{1}{f_{\text{film}}} = (n_1 - 1) \left( \frac{1}{R} - \frac{1}{R} \right) = 0$ है,जिसका अर्थ है $f_{\text{film}} = \infty$। अतः,फिल्म समानांतर किरणों की दिशा नहीं बदलती है।
हवा से कांच में:
एकल गोलाकार सतह पर अपवर्तन के सूत्र का उपयोग करते हुए: $\frac{n_2}{v} - \frac{n_1}{u} = \frac{n_2 - n_1}{R}$।
यहाँ,$n_1 = 1$ (हवा),$n_2 = 1.5$ (कांच),$u = \infty$,और त्रिज्या $R$ है।
$\frac{1.5}{v} - \frac{1}{\infty} = \frac{1.5 - 1}{R} \Rightarrow \frac{1.5}{v} = \frac{0.5}{R} \Rightarrow v = 3R$।
अतः,$|f_1| = 3R$।
कांच से हवा में:
एकल गोलाकार सतह पर अपवर्तन के सूत्र का उपयोग करते हुए: $\frac{n_1}{v} - \frac{n_2}{u} = \frac{n_1 - n_2}{-R}$।
यहाँ,$n_1 = 1$ (हवा),$n_2 = 1.5$ (कांच),$u = \infty$,और त्रिज्या $-R$ है (क्योंकि सतह कांच की तरफ से अवतल है)।
$\frac{1}{v} - \frac{1.5}{\infty} = \frac{1 - 1.5}{-R} \Rightarrow \frac{1}{v} = \frac{-0.5}{-R} \Rightarrow v = 2R$।
अतः,$|f_2| = 2R$।
इसलिए,कथन $(A)$ और $(C)$ सही हैं।
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समय $t = 0$ पर,चित्र में दिखाए गए परिपथ में टर्मिनल $A$ को एक कुंजी द्वारा $B$ से जोड़ा जाता है और $I_0 = 1 \text{ A}$ तथा $\omega = 500 \text{ rad s}^{-1}$ के साथ प्रत्यावर्ती धारा $I(t) = I_0 \cos(\omega t)$ चित्र में दिखाई गई प्रारंभिक दिशा में बहना शुरू करती है।
$t = \frac{7\pi}{6\omega}$ पर,कुंजी को $B$ से $D$ पर स्विच किया जाता है। अब से केवल $A$ और $D$ जुड़े हुए हैं। संधारित्र को पूरी तरह से आवेशित करने के लिए बैटरी से कुल $Q$ आवेश प्रवाहित होता है। यदि $C = 20 \mu\text{F}$,$R = 10 \Omega$ है और बैटरी $50 \text{ V}$ के emf के साथ आदर्श है,तो सही कथन/कथनों की पहचान करें।
$(A)$ $t = \frac{7\pi}{6\omega}$ से पहले संधारित्र पर अधिकतम आवेश का परिमाण $1 \times 10^{-3} \text{ C}$ है।
$(B)$ $t = \frac{7\pi}{6\omega}$ से ठीक पहले परिपथ के बाएं हिस्से में धारा दक्षिणावर्त (clockwise) है।
$(C)$ $A$ को $D$ से जोड़ने के तुरंत बाद,$R$ में धारा $10 \text{ A}$ है।
$(D)$ $Q = 2 \times 10^{-3} \text{ C}$.
Question diagram
A
$(B, C)$
B
$(B, D)$
C
$(C, D)$
D
$(A, D)$

Solution

(C) संधारित्र पर आवेश $q(t) = \int_0^t I(t) dt = \int_0^t I_0 \cos(\omega t) dt = \frac{I_0}{\omega} \sin(\omega t)$ है।
दिया गया है $I_0 = 1 \text{ A}$ और $\omega = 500 \text{ rad s}^{-1}$,इसलिए $q(t) = \frac{1}{500} \sin(500t) = 2 \times 10^{-3} \sin(500t) \text{ C}$।
अधिकतम आवेश $Q_{\max} = 2 \times 10^{-3} \text{ C}$ है। अतः,$(A)$ गलत है।
$t = \frac{7\pi}{6\omega}$ पर,$I(t) = I_0 \cos(\frac{7\pi}{6}) = 1 \times (-\frac{\sqrt{3}}{2}) < 0$। धारा वामावर्त (counter-clockwise) है,इसलिए $(B)$ गलत है।
$t = \frac{7\pi}{6\omega}$ पर,संधारित्र पर आवेश $q = 2 \times 10^{-3} \sin(\frac{7\pi}{6}) = -1 \times 10^{-3} \text{ C}$ है।
जब बैटरी $(50 \text{ V})$ से जोड़ा जाता है,तो प्रारंभिक आवेश $q_i = -1 \times 10^{-3} \text{ C}$ है।
$KVL$ लागू करने पर: $50 - \frac{q_i}{C} - IR = 0 \Rightarrow 50 - \frac{-1 \times 10^{-3}}{20 \times 10^{-6}} - I(10) = 0 \Rightarrow 50 + 50 - 10I = 0 \Rightarrow I = 10 \text{ A}$। अतः,$(C)$ सही है।
अंतिम आवेश $q_f = CV = 20 \times 10^{-6} \times 50 = 1 \times 10^{-3} \text{ C}$ है।
प्रवाहित आवेश $Q = q_f - q_i = 1 \times 10^{-3} - (-1 \times 10^{-3}) = 2 \times 10^{-3} \text{ C}$ है। अतः,$(D)$ सही है।
Solution diagram
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कागज के तल में दो समानांतर तार एक-दूसरे से $X_0$ दूरी पर हैं। एक बिंदु आवेश $u$ गति के साथ तारों के बीच उसी तल में एक तार से $X_1$ दूरी पर गति कर रहा है। जब तारों में $I$ परिमाण की धारा समान दिशा में बहती है, तो बिंदु आवेश के पथ की वक्रता त्रिज्या $R_1$ है। इसके विपरीत, यदि दोनों तारों में धारा $I$ एक-दूसरे के विपरीत दिशा में हो, तो पथ की वक्रता त्रिज्या $R_2$ है। यदि $\frac{X_0}{X_1}=3$ है, तो $\frac{R_1}{R_2}$ का मान क्या है?
A
$3$
B
$4$
C
$5$
D
$6$

Solution

(A) $I$ धारा ले जाने वाले तार से $x$ दूरी पर चुंबकीय क्षेत्र $B = \frac{\mu_0 I}{2 \pi x}$ द्वारा दिया जाता है।
स्थिति $1$: धारा समान दिशा में हो।
$X_1$ और $(X_0 - X_1)$ दूरी पर दो तारों के कारण चुंबकीय क्षेत्र विपरीत दिशाओं में होते हैं। परिणामी चुंबकीय क्षेत्र $B_1$ है:
$B_1 = \left| \frac{\mu_0 I}{2 \pi X_1} - \frac{\mu_0 I}{2 \pi (X_0 - X_1)} \right| = \frac{\mu_0 I}{2 \pi} \left| \frac{X_0 - 2X_1}{X_1(X_0 - X_1)} \right|$.
दिया गया है $\frac{X_0}{X_1} = 3$, इसलिए $X_0 = 3X_1$। इसे प्रतिस्थापित करने पर:
$B_1 = \frac{\mu_0 I}{2 \pi} \left| \frac{3X_1 - 2X_1}{X_1(3X_1 - X_1)} \right| = \frac{\mu_0 I}{2 \pi} \left( \frac{X_1}{2X_1^2} \right) = \frac{\mu_0 I}{4 \pi X_1}$.
स्थिति $2$: धारा विपरीत दिशा में हो।
दोनों तारों के कारण चुंबकीय क्षेत्र एक ही दिशा में होते हैं। परिणामी चुंबकीय क्षेत्र $B_2$ है:
$B_2 = \frac{\mu_0 I}{2 \pi X_1} + \frac{\mu_0 I}{2 \pi (X_0 - X_1)} = \frac{\mu_0 I}{2 \pi} \left( \frac{X_0 - X_1 + X_1}{X_1(X_0 - X_1)} \right) = \frac{\mu_0 I}{2 \pi} \left( \frac{X_0}{X_1(X_0 - X_1)} \right)$.
$X_0 = 3X_1$ प्रतिस्थापित करने पर:
$B_2 = \frac{\mu_0 I}{2 \pi} \left( \frac{3X_1}{X_1(2X_1)} \right) = \frac{3 \mu_0 I}{4 \pi X_1}$.
वक्रता त्रिज्या $R = \frac{mu}{qB}$ है, इसलिए $R \propto \frac{1}{B}$।
अतः, $\frac{R_1}{R_2} = \frac{B_2}{B_1} = \frac{3 \mu_0 I / 4 \pi X_1}{\mu_0 I / 4 \pi X_1} = 3$.
Solution diagram
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एक गैल्वेनोमीटर $0.006 \ A$ धारा के साथ पूर्ण स्केल विक्षेप देता है। इसे $4990 \ \Omega$ के प्रतिरोध के साथ जोड़कर,इसे $0-30 \ V$ की रेंज के वोल्टमीटर में बदला जा सकता है। यदि इसे $\frac{2n}{249} \ \Omega$ के प्रतिरोध के साथ जोड़ा जाए,तो यह $0-1.5 \ A$ की रेंज का एमीटर बन जाता है। $n$ का मान ज्ञात कीजिए:
A
$2$
B
$3$
C
$4$
D
$5$

Solution

(D) माना $G$ गैल्वेनोमीटर का प्रतिरोध है और $I_g = 0.006 \ A$ पूर्ण स्केल विक्षेप के लिए धारा है।
$V = 30 \ V$ की रेंज और श्रेणी प्रतिरोध $R = 4990 \ \Omega$ के साथ वोल्टमीटर के लिए:
$V = I_g(G + R)$
$30 = 0.006(G + 4990)$
$G + 4990 = \frac{30}{0.006} = 5000$
$G = 5000 - 4990 = 10 \ \Omega$
$I = 1.5 \ A$ की रेंज और शंट प्रतिरोध $S = \frac{2n}{249} \ \Omega$ के साथ एमीटर के लिए:
$I_g G = (I - I_g) S$
$0.006 \times 10 = (1.5 - 0.006) \times S$
$0.06 = 1.494 \times S$
$S = \frac{0.06}{1.494} = \frac{60}{1494} = \frac{10}{249} \ \Omega$
शंट प्रतिरोध की तुलना करने पर:
$\frac{2n}{249} = \frac{10}{249}$
$2n = 10 \Rightarrow n = 5$
30
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आकृति में दिखाए अनुसार $Q, 2Q$ और $4Q$ आवेश तीन परावैद्युत ठोस गोलों $1, 2$ और $3$ में समान रूप से वितरित हैं,जिनकी त्रिज्याएँ क्रमशः $R/2, R$ और $2R$ हैं। यदि गोलों $1, 2$ और $3$ के केंद्र से $R$ दूरी पर स्थित बिंदु $P$ पर विद्युत क्षेत्र के परिमाण क्रमशः $E_1, E_2$ और $E_3$ हैं,तो:
Question diagram
A
$E_1 > E_2 > E_3$
B
$E_3 > E_1 > E_2$
C
$E_2 > E_1 > E_3$
D
$E_3 > E_2 > E_1$

Solution

(C) त्रिज्या और $q$ कुल आवेश वाले समान रूप से आवेशित ठोस गोले के लिए,केंद्र से $r$ दूरी पर विद्युत क्षेत्र इस प्रकार होता है:
$1$. बाहर $(r \geq a)$: $E = \frac{kq}{r^2}$
$2$. अंदर $(r < a)$: $E = \frac{kqr}{a^3}$
गोले $1$ के लिए $(a = R/2, q = Q)$: बिंदु $P$ दूरी $r = R$ पर है,जो बाहर है $(R > R/2)$.
$E_1 = \frac{kQ}{R^2}$
गोले $2$ के लिए $(a = R, q = 2Q)$: बिंदु $P$ दूरी $r = R$ पर है,जो सतह पर है $(R = R)$.
$E_2 = \frac{k(2Q)}{R^2} = \frac{2kQ}{R^2}$
गोले $3$ के लिए $(a = 2R, q = 4Q)$: बिंदु $P$ दूरी $r = R$ पर है,जो अंदर है $(R < 2R)$.
$E_3 = \frac{k(4Q)R}{(2R)^3} = \frac{4kQR}{8R^3} = \frac{kQ}{2R^2} = \frac{0.5kQ}{R^2}$
परिमाणों की तुलना करने पर: $E_2 = 2\frac{kQ}{R^2}$,$E_1 = 1\frac{kQ}{R^2}$,$E_3 = 0.5\frac{kQ}{R^2}$.
अतः,$E_2 > E_1 > E_3$.
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यदि $\lambda_{Cu}$ कॉपर (परमाणु क्रमांक $Z = 29$) की $K_{\alpha}$ $X$-रे रेखा की तरंगदैर्ध्य है और $\lambda_{Mo}$ मोलिब्डेनम (परमाणु क्रमांक $Z = 42$) की $K_{\alpha}$ $X$-रे रेखा की तरंगदैर्ध्य है,तो अनुपात $\frac{\lambda_{Cu}}{\lambda_{Mo}}$ किसके करीब है?
A
$1.99$
B
$2.14$
C
$0.50$
D
$0.48$

Solution

(B) मोजले के नियम के अनुसार,$K_{\alpha}$ $X$-रे रेखा की आवृत्ति $\nu$ का सूत्र $\sqrt{\nu} = a(Z - b)$ है,जहाँ $K_{\alpha}$ संक्रमण के लिए $b = 1$ होता है।
चूंकि $\nu = \frac{c}{\lambda}$,इसलिए $\sqrt{\frac{c}{\lambda}} = a(Z - 1)$,जिसका अर्थ है कि $\frac{1}{\sqrt{\lambda}} \propto (Z - 1)$।
अतः,तरंगदैर्ध्य का अनुपात $\frac{\sqrt{\lambda_{Mo}}}{\sqrt{\lambda_{Cu}}} = \frac{Z_{Cu} - 1}{Z_{Mo} - 1}$ द्वारा प्राप्त होता है।
दोनों पक्षों का वर्ग करने पर,$\frac{\lambda_{Mo}}{\lambda_{Cu}} = \left( \frac{29 - 1}{42 - 1} \right)^2 = \left( \frac{28}{41} \right)^2$।
इस प्रकार,अनुपात $\frac{\lambda_{Cu}}{\lambda_{Mo}} = \left( \frac{41}{28} \right)^2 = \frac{1681}{784} \approx 2.144$।
अतः,यह अनुपात $2.14$ के करीब है।
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PhysicsAdvancedMCQIIT JEE · 2014
एक धातु की सतह को $248 \ nm$ और $310 \ nm$ की दो अलग-अलग तरंग दैर्ध्य के प्रकाश से प्रकाशित किया जाता है। इन तरंग दैर्ध्यों के संगत फोटोइलेक्ट्रॉन की अधिकतम गति क्रमशः $u_1$ और $u_2$ है। यदि अनुपात $u_1: u_2 = 2: 1$ है और $hc = 1240 \ eV \ nm$ है,तो धातु का कार्य फलन (work function) लगभग कितना है ($eV$ में)?
A
$3.7$
B
$3.2$
C
$2.8$
D
$2.5$

Solution

(A) आपतित फोटॉन की ऊर्जा $E = \frac{hc}{\lambda}$ द्वारा दी जाती है।
$\lambda_1 = 248 \ nm$ के लिए,$E_1 = \frac{1240}{248} = 5 \ eV$.
$\lambda_2 = 310 \ nm$ के लिए,$E_2 = \frac{1240}{310} = 4 \ eV$.
आइंस्टीन के प्रकाश-विद्युत समीकरण के अनुसार,अधिकतम गतिज ऊर्जा $K.E. = E - W$ है,जहाँ $W$ कार्य फलन है।
अतः,$K.E._1 = 5 - W$ और $K.E._2 = 4 - W$.
चूँकि $K.E. = \frac{1}{2}mv^2$,गतिज ऊर्जा का अनुपात $\frac{K.E._1}{K.E._2} = \left(\frac{u_1}{u_2}\right)^2 = \left(\frac{2}{1}\right)^2 = 4$ है।
इसलिए,$\frac{5 - W}{4 - W} = 4$.
$5 - W = 4(4 - W) = 16 - 4W$.
$3W = 11$.
$W = \frac{11}{3} \approx 3.67 \ eV \approx 3.7 \ eV$.
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मीटर ब्रिज के साथ एक प्रयोग के दौरान,जब जॉकी को $40.0 \ cm$ पर दबाया जाता है तो गैल्वेनोमीटर शून्य विक्षेप (null point) दिखाता है,जिसमें $90 \ \Omega$ के मानक प्रतिरोध का उपयोग किया गया है,जैसा कि चित्र में दिखाया गया है। मीटर ब्रिज में उपयोग किए गए पैमाने का अल्पतमांक (least count) $1 \ mm$ है। अज्ञात प्रतिरोध है:
Question diagram
A
$60 \pm 0.15 \ \Omega$
B
$135 \pm 0.56 \ \Omega$
C
$60 \pm 0.25 \ \Omega$
D
$135 \pm 0.23 \ \Omega$

Solution

(C) संतुलित मीटर ब्रिज के लिए,स्थिति $\frac{X}{R} = \frac{\ell}{100 - \ell}$ द्वारा दी जाती है,जहाँ $X$ अज्ञात प्रतिरोध है और $R$ मानक प्रतिरोध है।
दिया गया है $R = 90 \ \Omega$ और $\ell = 40.0 \ cm$,तो:
$X = R \frac{\ell}{100 - \ell} = 90 \times \frac{40}{60} = 60 \ \Omega$.
त्रुटि $\Delta X$ ज्ञात करने के लिए,हम सूत्र $X = R \frac{\ell}{100 - \ell}$ का लघुगणकीय अवकलन करते हैं:
$\frac{\Delta X}{X} = \frac{\Delta \ell}{\ell} + \frac{\Delta \ell}{100 - \ell}$,जहाँ $\Delta \ell = 1 \ mm = 0.1 \ cm$.
मान रखने पर:
$\frac{\Delta X}{60} = \frac{0.1}{40} + \frac{0.1}{60} = 0.1 \left( \frac{3 + 2}{120} \right) = 0.1 \left( \frac{5}{120} \right) = \frac{0.5}{120} = \frac{1}{240}$.
$\Delta X = 60 \times \frac{1}{240} = 0.25 \ \Omega$.
अतः,अज्ञात प्रतिरोध $X = (60 \pm 0.25) \ \Omega$ है।
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PhysicsAdvancedMCQIIT JEE · 2014
एक बिंदु स्रोत $S$ को $h = 10 \ mm$ ऊँचाई और $n_B = 2.72$ अपवर्तनांक वाले एक पारदर्शी ब्लॉक के तल पर रखा गया है। इसे चित्र में दिखाए अनुसार कम अपवर्तनांक वाले द्रव में डुबोया गया है। यह पाया गया है कि ब्लॉक से द्रव में निकलने वाला प्रकाश ब्लॉक की ऊपरी सतह पर $D = 11.54 \ mm$ व्यास का एक वृत्ताकार चमकीला धब्बा बनाता है। द्रव का अपवर्तनांक $n_L$ क्या है?
Question diagram
A
$1.21$
B
$1.30$
C
$1.36$
D
$1.42$

Solution

(C) बिंदु स्रोत $S$ से आने वाली प्रकाश किरणें ब्लॉक की ऊपरी सतह पर क्रांतिक कोण $i_c$ पर आपतित होती हैं,जो वृत्ताकार चमकीले धब्बे की सीमा बनाती हैं।
समस्या की ज्यामिति से,वृत्ताकार धब्बे की त्रिज्या $r = D/2 = 11.54 / 2 = 5.77 \ mm$ है।
ब्लॉक की ऊँचाई $h = 10 \ mm$ है।
क्रांतिक कोण की परिभाषा के अनुसार,$\sin i_c = \frac{n_L}{n_B}$।
ऊँचाई $h$ और त्रिज्या $r$ द्वारा बने समकोण त्रिभुज से,$\sin i_c = \frac{r}{\sqrt{r^2 + h^2}}$।
$\sin i_c$ के लिए दोनों समीकरणों की तुलना करने पर:
$\frac{n_L}{n_B} = \frac{r}{\sqrt{r^2 + h^2}}$
$n_L = n_B \times \frac{r}{\sqrt{r^2 + h^2}}$
दिए गए मानों को रखने पर:
$n_L = 2.72 \times \frac{5.77}{\sqrt{5.77^2 + 10^2}}$
$n_L = 2.72 \times \frac{5.77}{\sqrt{33.2929 + 100}}$
$n_L = 2.72 \times \frac{5.77}{\sqrt{133.2929}}$
$n_L = 2.72 \times \frac{5.77}{11.545} \approx 2.72 \times 0.5 = 1.36$।
अतः,द्रव का अपवर्तनांक $1.36$ है।
Solution diagram
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PhysicsAdvancedMCQIIT JEE · 2014
आकृति में $a$ त्रिज्या का एक वृत्ताकार लूप और दो लंबे समानांतर तार (संख्या $1$ और $2$) दिखाए गए हैं,जो सभी कागज के तल में हैं। लूप के केंद्र से प्रत्येक तार की दूरी $d$ है। लूप और तार समान धारा $I$ ले जा रहे हैं। ऊपर से देखने पर लूप में धारा वामावर्त दिशा में है।
$1.$ जब $d \approx a$ होता है लेकिन तार लूप को स्पर्श नहीं कर रहे होते हैं,तो यह पाया जाता है कि लूप की अक्ष पर लूप के ऊपर $h$ ऊंचाई पर कुल चुंबकीय क्षेत्र शून्य है। उस स्थिति में
$(A)$ तार $1$ और तार $2$ में धारा क्रमशः $PQ$ और $RS$ दिशा में है और $h \approx a$
$(B)$ तार $1$ और तार $2$ में धारा क्रमशः $PQ$ और $SR$ दिशा में है और $h \approx a$
$(C)$ तार $1$ और तार $2$ में धारा क्रमशः $PQ$ और $SR$ दिशा में है और $h \approx 1.2 a$
$(D)$ तार $1$ और तार $2$ में धारा क्रमशः $PQ$ और $RS$ दिशा में है और $h \approx 1.2 a$
$2.$ मान लीजिए $d \gg a$ है,और लूप को आकृति में दिखाई गई स्थिति से तारों के समानांतर उसके व्यास के परितः $30^{\circ}$ घुमाया जाता है। यदि तारों में धारा विपरीत दिशाओं में है,तो लूप पर लगने वाला टॉर्क क्या होगा? (मान लें कि तारों के कारण कुल क्षेत्र लूप पर स्थिर है)
$(A)$ $\frac{\mu_0 I^2 a^2}{d}$ $(B)$ $\frac{\mu_0 I^2 a^2}{2 d}$ $(C)$ $\frac{\sqrt{3} \mu_0 I^2 a^2}{d}$ $(D)$ $\frac{\sqrt{3} \mu_0 I^2 a^2}{2 d}$
प्रश्न $1$ और $2$ के लिए उत्तर दें।
Question diagram
A
$(B, D)$
B
$(B, C)$
C
$(A, C)$
D
$(C, B)$

Solution

(B) $1.$ मान लीजिए $\vec{B}_R$ लूप की अक्ष पर $h$ ऊंचाई पर लूप के कारण चुंबकीय क्षेत्र है,जो $\vec{B}_R = \frac{\mu_0 I a^2}{2(a^2 + h^2)^{3/2}}$ द्वारा दिया जाता है।
मान लीजिए $\vec{B}_1$ और $\vec{B}_2$ क्रमशः तार $1$ और तार $2$ के कारण चुंबकीय क्षेत्र हैं।
कुल क्षेत्र को शून्य होने के लिए,$\vec{B}_1$ और $\vec{B}_2$ के क्षैतिज घटकों को एक-दूसरे को रद्द करना चाहिए,जिसके लिए विपरीत दिशाओं (जैसे,$PQ$ और $SR$) में धारा की आवश्यकता होती है।
ऊर्ध्वाधर घटकों का योग $\vec{B}_R$ के परिमाण के बराबर होना चाहिए। $h$ ऊंचाई पर दो तारों का परिणामी क्षेत्र $B_{wires} = 2 \left( \frac{\mu_0 I}{2 \pi r} \right) \cos \theta$ है,जहाँ $r = \sqrt{d^2 + h^2}$ और $\cos \theta = \frac{d}{r}$ है।
$B_{wires} = B_R$ रखने पर और $d \approx a$ के लिए $h$ का मान निकालने पर $h \approx 1.2 a$ प्राप्त होता है।
अतः,सही स्थितियाँ $PQ$ और $SR$ दिशा में धारा और $h \approx 1.2 a$ हैं।
$2.$ विपरीत धाराओं वाले दो तारों के कारण केंद्र पर चुंबकीय क्षेत्र $B = \frac{\mu_0 I}{2 \pi d} + \frac{\mu_0 I}{2 \pi d} = \frac{\mu_0 I}{\pi d}$ (कागज के अंदर की ओर) है।
लूप का चुंबकीय आघूर्ण $M = I A = I \pi a^2$ है।
टॉर्क $\vec{\tau} = \vec{M} \times \vec{B}$ है,इसलिए $\tau = M B \sin \theta$।
लूप को $30^{\circ}$ घुमाने पर,क्षेत्रफल सदिश और चुंबकीय क्षेत्र के बीच का कोण $90^{\circ} + 30^{\circ} = 120^{\circ}$ या $60^{\circ}$ होता है। ज्यामिति के अनुसार,$\tau = (I \pi a^2) \left( \frac{\mu_0 I}{\pi d} \right) \sin 60^{\circ} = \frac{\mu_0 I^2 a^2}{d} \frac{\sqrt{3}}{2} = \frac{\sqrt{3} \mu_0 I^2 a^2}{2 d}$।
Solution diagram
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PhysicsDifficultMCQIIT JEE · 2014
समान परिमाण के चार आवेश $Q_1, Q_2, Q_3$ और $Q_4$ को $x$-अक्ष पर क्रमशः $x = -2a, -a, +a$ और $+2a$ पर स्थिर रखा गया है। एक धनात्मक आवेश $q$ को धनात्मक $y$-अक्ष पर $b > 0$ दूरी पर रखा गया है। इन आवेशों के चिह्नों के संबंध में चार विकल्प List-$I$ में दिए गए हैं। आवेश $q$ पर लगने वाले नेट बल की दिशा List-$II$ में दी गई है। List-$I$ को List-$II$ से सुमेलित करें और नीचे दिए गए कोड का उपयोग करके सही उत्तर चुनें।
List-$I$List-$II$
$P. Q_1, Q_2, Q_3, Q_4$ सभी धनात्मक$1. +x$
$Q. Q_1, Q_2$ धनात्मक; $Q_3, Q_4$ ऋणात्मक$2. -x$
$R. Q_1, Q_4$ धनात्मक; $Q_2, Q_3$ ऋणात्मक$3. +y$
$S. Q_1, Q_3$ धनात्मक; $Q_2, Q_4$ ऋणात्मक$4. -y$
Question diagram
A
$P-3, Q-1, R-4, S-2$
B
$P-4, Q-2, R-3, S-1$
C
$P-3, Q-1, R-2, S-4$
D
$P-4, Q-2, R-1, S-3$

Solution

(A) मान लीजिए कि आवेश $Q_i$ द्वारा $q$ पर लगाया गया बल $\vec{F}_i$ है। $\pm x_0$ पर आवेशों के एक जोड़े से बल का $x$-घटक $(Q_{left} - Q_{right})$ के समानुपाती होता है। $y$-घटक $(Q_{left} + Q_{right})$ के समानुपाती होता है।
$(P)$ सभी धनात्मक: $Q_1=Q_2=Q_3=Q_4 = +Q$। सममिति के कारण $x$-घटक एक-दूसरे को निरस्त कर देते हैं। $y$-घटक जुड़ जाते हैं, जिसके परिणामस्वरूप $+y$ दिशा में नेट बल प्राप्त होता है (विकल्प $3$)।
$(Q)$ $Q_1, Q_2$ धनात्मक, $Q_3, Q_4$ ऋणात्मक: $y$-घटक एक-दूसरे को निरस्त कर देते हैं। $x$-घटक $+x$ दिशा में जुड़ जाते हैं क्योंकि धनात्मक आवेश बाईं ओर और ऋणात्मक दाईं ओर हैं, जो $q$ को दाईं ओर धकेलते हैं (विकल्प $1$)।
$(R)$ $Q_1, Q_4$ धनात्मक, $Q_2, Q_3$ ऋणात्मक: $x$-घटक एक-दूसरे को निरस्त कर देते हैं। $y$-घटक ऋणात्मक होते हैं क्योंकि मूल बिंदु के करीब के आवेश $(Q_2, Q_3)$ ऋणात्मक हैं और उनका $y$-प्रभाव दूर स्थित धनात्मक आवेशों $(Q_1, Q_4)$ की तुलना में अधिक मजबूत है, जिसके परिणामस्वरूप $-y$ दिशा में नेट बल प्राप्त होता है (विकल्प $4$)।
$(S)$ $Q_1, Q_3$ धनात्मक, $Q_2, Q_4$ ऋणात्मक: $y$-घटक एक-दूसरे को निरस्त कर देते हैं। $x$-घटक $-x$ दिशा में नेट बल उत्पन्न करते हैं क्योंकि बाईं ओर के आवेशों का कुल प्रभाव ऋणात्मक है और दाईं ओर के आवेशों का धनात्मक है, जो $q$ को बाईं ओर खींचते हैं (विकल्प $2$)।
अतः, सही मिलान $P-3, Q-1, R-4, S-2$ है।
Solution diagram
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PhysicsAdvancedMCQIIT JEE · 2014
List-$I$ में दो पतले लेंसों के चार संयोजन दिए गए हैं। सभी वक्र सतहों की वक्रता त्रिज्या $r$ है और सभी लेंसों का अपवर्तनांक $1.5$ है। List-$I$ में दिए गए लेंस संयोजनों को List-$II$ में उनकी फोकस दूरी के साथ मिलाएं और नीचे दिए गए कोड का उपयोग करके सही उत्तर चुनें।
Question diagram
A
$P-2, Q-4, R-3, S-1$
B
$P-2, Q-4, R-3, S-1$
C
$P-4, Q-1, R-2, S-3$
D
$P-2, Q-1, R-3, S-4$

Solution

(B) पतले लेंस की फोकस दूरी $f$ लेंस मेकर सूत्र द्वारा दी जाती है: $\frac{1}{f} = (\mu - 1) \left( \frac{1}{R_1} - \frac{1}{R_2} \right)$. दिया गया है $\mu = 1.5$,इसलिए $(\mu - 1) = 0.5 = \frac{1}{2}$.
$(P)$ दो उत्तल (biconvex) लेंस: प्रत्येक लेंस के लिए $f = r$। समतुल्य फोकस दूरी $\frac{1}{f_{eq}} = \frac{1}{r} + \frac{1}{r} = \frac{2}{r} \implies f_{eq} = \frac{r}{2}$। अतः,$P-2$।
$(Q)$ दो मेनिस्कस लेंस जो उत्तल आकार बनाते हैं: $f_{eq} = r$। अतः,$Q-4$।
$(R)$ दो अवतल (biconcave) लेंस: $f_{eq} = -r$। अतः,$R-3$।
$(S)$ एक उत्तल और एक मेनिस्कस लेंस का संयोजन: $f_{eq} = 2r$। अतः,$S-1$।
मिलान: $P-2, Q-4, R-3, S-1$।
Solution diagram

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