NEET 2021 Chemistry Question Paper with Answer and Solution in Hindi

53 QuestionsHindiWith Solutions

ChemistryQ153 of 53 questions

Page 1 of 1 · Hindi

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ChemistryMCQNEET · 2021
कॉफी का एक कप $90^{\circ} C$ से $80^{\circ} C$ तक $t$ मिनट में ठंडा होता है,जब कमरे का तापमान $20^{\circ} C$ है। उसी कमरे के तापमान $20^{\circ} C$ पर कॉफी के एक समान कप को $80^{\circ} C$ से $60^{\circ} C$ तक ठंडा होने में कितना समय लगेगा?
A
$\frac{13}{10} t$
B
$\frac{13}{5} t$
C
$\frac{10}{13} t$
D
$\frac{5}{13} t$

Solution

(B) न्यूटन के शीतलन नियम के अनुसार,ठंडा होने की दर $\frac{dT}{dt} = K(T_{avg} - T_0)$ द्वारा दी जाती है,जहाँ $T_{avg}$ वस्तु का औसत तापमान है और $T_0$ आसपास का तापमान है।
पहले मामले के लिए,$t$ समय में $90^{\circ} C$ से $80^{\circ} C$ तक ठंडा होने पर:
$\frac{90 - 80}{t} = K \left( \frac{90 + 80}{2} - 20 \right)$
$\frac{10}{t} = K(85 - 20) = 65K$ --- $(1)$
दूसरे मामले के लिए,$t'$ समय में $80^{\circ} C$ से $60^{\circ} C$ तक ठंडा होने पर:
$\frac{80 - 60}{t'} = K \left( \frac{80 + 60}{2} - 20 \right)$
$\frac{20}{t'} = K(70 - 20) = 50K$ --- $(2)$
समीकरण $(1)$ को $(2)$ से विभाजित करने पर:
$\frac{10/t}{20/t'} = \frac{65K}{50K}$
$\frac{10}{t} \times \frac{t'}{20} = \frac{13}{10}$
$\frac{t'}{2t} = \frac{13}{10}$
$t' = \frac{13}{5} t$
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ChemistryMCQNEET · 2021
एक कण को पृथ्वी की सतह से $S$ ऊँचाई से मुक्त किया जाता है। एक निश्चित ऊँचाई पर इसकी गतिज ऊर्जा इसकी स्थितिज ऊर्जा की तीन गुनी है। पृथ्वी की सतह से वह ऊँचाई और उस क्षण कण की चाल क्रमशः क्या है?
A
$\frac{S}{4}, \sqrt{\frac{3 gS}{2}}$
B
$\frac{S}{4}, \frac{\sqrt{3 gS}}{2}$
C
$\frac{S}{2}, \frac{\sqrt{3 gS}}{2}$
D
$\frac{S}{4}, \sqrt{\frac{3 gS}{2}}$

Solution

(A) मान लीजिए कि कण पृथ्वी की सतह से $h$ ऊँचाई पर है।
यांत्रिक ऊर्जा संरक्षण के नियम के अनुसार, $S$ ऊँचाई पर कुल ऊर्जा और $h$ ऊँचाई पर कुल ऊर्जा समान होती है।
कुल ऊर्जा $E = mgS$ है।
$h$ ऊँचाई पर, स्थितिज ऊर्जा $PE = mgh$ और गतिज ऊर्जा $KE = mg(S-h)$ है।
दिया गया है कि $KE = 3 PE$, इसलिए $mg(S-h) = 3 mgh$ है।
$mg$ से विभाजित करने पर, हमें $S-h = 3h$ प्राप्त होता है, जिसका अर्थ है $S = 4h$ या $h = S/4$ है।
अब, इस ऊँचाई पर चाल $V$ ज्ञात करने के लिए, हम $KE = \frac{1}{2} mV^2$ का उपयोग करते हैं।
चूँकि $KE = 3 PE = 3 mgh = 3 mg(S/4) = \frac{3 mgS}{4}$ है।
$KE$ के लिए दोनों समीकरणों की तुलना करने पर: $\frac{1}{2} mV^2 = \frac{3 mgS}{4}$ है।
$V$ के लिए हल करने पर, हमें $V^2 = \frac{3 gS}{2}$ प्राप्त होता है, इसलिए $V = \sqrt{\frac{3 gS}{2}}$ है।
अतः, ऊँचाई $S/4$ है और चाल $\sqrt{\frac{3 gS}{2}}$ है।
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ChemistryEasyMCQNEET · 2021
निम्नलिखित क्षारीय मृदा धातु हैलाइडों में से,कौन सा सहसंयोजक है और कार्बनिक विलायकों में घुलनशील है?
A
कैल्शियम क्लोराइड
B
स्ट्रोंटियम क्लोराइड
C
मैग्नीशियम क्लोराइड
D
बेरिलियम क्लोराइड

Solution

(D) फजान के नियम के अनुसार,सहसंयोजक गुण धनायन की ध्रुवण क्षमता (polarising power) के सीधे समानुपाती होता है।
ध्रुवण क्षमता धनायन के आकार के व्युत्क्रमानुपाती होती है $(Polarising \ power \propto \frac{1}{\text{size of cation}})$।
दिए गए क्षारीय मृदा धातु आयनों में,आकार का क्रम $Be^{2+} < Mg^{2+} < Ca^{2+} < Sr^{2+}$ है।
चूंकि $Be^{2+}$ का आकार सबसे छोटा है,इसलिए इसकी ध्रुवण क्षमता सबसे अधिक है,जो $BeCl_2$ को सबसे अधिक सहसंयोजक बनाती है।
अपने सहसंयोजक स्वभाव के कारण,$BeCl_2$ कार्बनिक विलायकों में घुलनशील है।
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ChemistryEasyMCQNEET · 2021
कथन $I :$ अम्लीय सामर्थ्य $HF < HCl < HBr < HI$ के क्रम में बढ़ता है।
कथन $II :$ जैसे-जैसे समूह में नीचे जाने पर $F, Cl, Br, I$ तत्वों का आकार बढ़ता है,$HF, HCl, HBr$ और $HI$ की बंध सामर्थ्य घटती है और इसलिए अम्लीय सामर्थ्य बढ़ता है।
उपरोक्त कथनों के प्रकाश में,नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए।
A
कथन $I$ और कथन $II$ दोनों सत्य हैं।
B
कथन $I$ और कथन $II$ दोनों असत्य हैं।
C
कथन $I$ सही है लेकिन कथन $II$ गलत है।
D
कथन $I$ गलत है लेकिन कथन $II$ सही है।

Solution

(A) हाइड्रोहेलिक अम्लों $(HX)$ की अम्लीय सामर्थ्य $H-X$ बंध की बंध वियोजन एन्थैल्पी पर निर्भर करती है।
जैसे-जैसे हम समूह में $F$ से $I$ की ओर नीचे जाते हैं,परमाणु का आकार बढ़ता है,जिससे बंध लंबाई बढ़ती है और बंध वियोजन एन्थैल्पी घटती है।
परिणामस्वरूप,$H-X$ बंध कमजोर हो जाता है,जिससे $H^+$ आयनों को मुक्त करना आसान हो जाता है।
इसलिए,अम्लीय सामर्थ्य $HF < HCl < HBr < HI$ के क्रम में बढ़ता है।
कथन $I$ और कथन $II$ दोनों सत्य हैं।
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ChemistryMediumMCQNEET · 2021
निम्नलिखित रासायनिक अभिक्रिया का मुख्य उत्पाद क्या है: $CH_3-CH(CH_3)-CH=CH_2 + HBr \xrightarrow{(C_6H_5CO)_2O_2} ?$
A
$CH_3-CH(CH_3)-CH_2-CH_2-Br$
B
$CH_3-CH(CH_3)-CH_2-CH_2-O-COC_6H_5$
C
$CH_3-CH(CH_3)-CH_2-CH(Br)_2$
D
$CH_3-CH(CH_3)-CH_2-CH(Br)-CH_3$

Solution

(A) बेंज़ोयल पेरोक्साइड $((C_6H_5CO)_2O_2)$ जैसे पेरोक्साइड की उपस्थिति में,असममित एल्कीन पर $HBr$ का योग एंटी-मार्कोवनिकोव नियम (जिसे पेरोक्साइड प्रभाव या खाराश प्रभाव भी कहा जाता है) का पालन करता है।
इस क्रियाविधि में,ब्रोमीन रेडिकल द्वि-आबंध के कम प्रतिस्थापित कार्बन परमाणु पर आक्रमण करता है ताकि अधिक स्थिर रेडिकल मध्यवर्ती बन सके।
अभिक्रिया: $CH_3-CH(CH_3)-CH=CH_2 + HBr \xrightarrow{\text{Peroxide}} CH_3-CH(CH_3)-CH_2-CH_2-Br$ ($1$-ब्रोमो$-3-$मिथाइल ब्यूटेन)।
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ChemistryEasyMCQNEET · 2021
ठोस अवस्था और वाष्प अवस्था में बेरिलियम क्लोराइड की संरचनाएँ हैं:
A
क्रमशः चेन और डाइमर
B
दोनों में रैखिक
C
क्रमशः डाइमर और रैखिक
D
दोनों में चेन

Solution

(A) ठोस अवस्था में,$BeCl_2$ एक बहुलक (polymeric) चेन संरचना के रूप में मौजूद होता है जहाँ प्रत्येक $Be$ परमाणु $sp^3$ संकरित होता है और चार $Cl$ परमाणुओं से बंधा होता है।
वाष्प अवस्था में,उच्च तापमान $(1200 \ K)$ पर,$BeCl_2$ एक मोनोमेरिक रैखिक अणु के रूप में मौजूद होता है,जबकि कम तापमान $(1000 \ K)$ पर,यह एक डाइमेरिक संरचना $(Be_2Cl_4)$ के रूप में मौजूद होता है।
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ChemistryMediumMCQNEET · 2021
एक कार्बनिक यौगिक में $78\%$ (भारानुसार) कार्बन और शेष प्रतिशत हाइड्रोजन है। इस यौगिक के मूलानुपाती सूत्र के लिए सही विकल्प है: [$C$ का परमाणु भार $12$,$H$ का $1$ है]
A
$CH$
B
$CH_{2}$
C
$CH_{3}$
D
$CH_{4}$

Solution

(C) $1$. हाइड्रोजन का प्रतिशत ज्ञात करें: $100\% - 78\% = 22\%$.
$2$. तत्वों का मोल अनुपात निर्धारित करें:
$C$ के लिए: $\frac{78}{12} = 6.5$.
$H$ के लिए: $\frac{22}{1} = 22$.
$3$. सबसे छोटे मान $(6.5)$ से विभाजित करें:
$C$ के लिए: $\frac{6.5}{6.5} = 1$.
$H$ के लिए: $\frac{22}{6.5} \approx 3.38 \approx 3$.
$4$. मूलानुपाती सूत्र $CH_{3}$ है।
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ChemistryMediumMCQNEET · 2021
$2,6-$Dimethyldec$-4-$ene की सही संरचना है:
A
Option A
B
Option B
C
Option C
D
Option D

Solution

(C) $2,6-$Dimethyldec$-4-$ene की संरचना निर्धारित करने के लिए निम्नलिखित चरणों का पालन करें:
$1$. मुख्य श्रृंखला $decene$ है,जिसमें $10$ कार्बन परमाणु हैं।
$2$. द्वि-आबंध $4^{th}$ स्थान पर स्थित है ($C4$ और $C5$ के बीच)।
$3$. $2^{nd}$ और $6^{th}$ स्थान पर मिथाइल समूह हैं।
$4$. विकल्पों का विश्लेषण करने पर,हम एक $10$ कार्बन वाली श्रृंखला देखते हैं जहाँ द्वि-आबंध $C4$ पर शुरू होता है और मिथाइल प्रतिस्थापी $C2$ और $C6$ पर स्थित हैं।
$5$. संरचना $C$ एक $10$ कार्बन वाली श्रृंखला को दर्शाती है जिसमें $4^{th}$ स्थान पर द्वि-आबंध है और $2^{nd}$ तथा $6^{th}$ स्थान पर मिथाइल समूह हैं,जो $2,6-$Dimethyldec$-4-$ene के $IUPAC$ नाम से मेल खाता है।
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ChemistryMediumMCQNEET · 2021
निम्नलिखित में से कौन सी अभिक्रिया धातु विस्थापन अभिक्रिया है? सही विकल्प चुनें।
A
$2 KClO_{3} \stackrel{\Delta}{\longrightarrow} 2 KCl + 3 O_{2}$
B
$Cr_{2}O_{3} + 2 Al \stackrel{\Delta}{\longrightarrow} Al_{2}O_{3} + 2 Cr$
C
$Fe + 2 HCl \rightarrow FeCl_{2} + H_{2} \uparrow$
D
$2 Pb(NO_{3})_{2} \rightarrow 2 PbO + 4 NO_{2} + O_{2} \uparrow$

Solution

(B) धातु विस्थापन अभिक्रिया में किसी यौगिक में मौजूद धातु को किसी अन्य मुक्त धातु द्वारा विस्थापित किया जाता है।
अभिक्रिया $Cr_{2}O_{3} + 2 Al \stackrel{\Delta}{\longrightarrow} Al_{2}O_{3} + 2 Cr$ में,धातु $Al$ अपने ऑक्साइड $Cr_{2}O_{3}$ से धातु $Cr$ को विस्थापित करती है।
अतः,यह एक धातु विस्थापन अभिक्रिया है।
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ChemistryMediumMCQNEET · 2021
वह यौगिक जो मेटामेरिज्म (metamerism) प्रदर्शित करता है,वह है:
A
$C_5H_{12}$
B
$C_3H_8O$
C
$C_3H_6O$
D
$C_4H_{10}O$

Solution

(D) मेटामेरिज्म उन यौगिकों द्वारा प्रदर्शित किया जाता है जिनमें एक पॉलीवैलेंट क्रियात्मक समूह (जैसे ईथर,थायोईथर या एमीन) होता है,जहाँ क्रियात्मक समूह से जुड़े एल्किल समूह भिन्न होते हैं।
$C_4H_{10}O$ डाईएथिल ईथर $(CH_3CH_2-O-CH_2CH_3)$ और मेथिल प्रोपिल ईथर $(CH_3-O-CH_2CH_2CH_3)$ को दर्शा सकता है।
चूंकि इन दो आइसोमर्स में ऑक्सीजन परमाणु से जुड़े एल्किल समूह अलग-अलग हैं,इसलिए वे मेटा मर्स हैं।
अतः,सही विकल्प $D$ है।
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ChemistryMediumMCQNEET · 2021
एथेन के सबसे कम स्थिर संरूपण (conformer) का द्वितल कोण (dihedral angle) $....\,^{\circ}$ है।
A
$0$
B
$180$
C
$60$
D
$120$

Solution

(A) एथेन का सबसे कम स्थिर संरूपण ग्रसित (eclipsed) रूप है।
ग्रसित संरूपण में,सामने वाले कार्बन पर स्थित हाइड्रोजन परमाणु पीछे वाले कार्बन पर स्थित हाइड्रोजन परमाणुओं के साथ सीधे संरेखित होते हैं,जिसके परिणामस्वरूप अधिकतम मरोड़ तनाव (torsional strain) उत्पन्न होता है।
यह $0^{\circ}$ के द्वितल कोण के अनुरूप है।
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ChemistryEasyMCQNEET · 2021
बॉयल के नियम के ग्राफिकल निरूपण के लिए सही विकल्प चुनें,जो विभिन्न तापमानों पर गैस के दबाव बनाम आयतन का ग्राफ दिखाता है:
A
Option A
B
Option B
C
Option C
D
Option D

Solution

(D) आदर्श गैस समीकरण के अनुसार,$PV = nRT$ है।
गैस की एक निश्चित मात्रा के लिए,$P = \frac{nRT}{V}$ होता है।
स्थिर आयतन $V$ पर,$P \propto T$ होता है।
इसका मतलब है कि दिए गए आयतन के लिए,उच्च तापमान पर दबाव अधिक होता है।
इसलिए,यदि $T_1 > T_2 > T_3$ है,तो स्थिर आयतन पर संबंधित दबाव $P_1 > P_2 > P_3$ होगा।
ग्राफ को देखने पर,उच्चतम तापमान $(600 \ K)$ के लिए वक्र सबसे ऊपर वाला वक्र होना चाहिए,उसके बाद $400 \ K$ और फिर सबसे नीचे $200 \ K$ होना चाहिए।
यह उस निरूपण से मेल खाता है जहाँ $600 \ K$ के लिए वक्र $400 \ K$ के वक्र के ऊपर है,जो $200 \ K$ के वक्र के ऊपर है।
Solution diagram
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ChemistryMediumMCQNEET · 2021
$T(K)$ तापमान पर डाइमिथाइलएमाइन का $pK_{b}$ और एसिटिक एसिड का $pK_{a}$ क्रमशः $3.27$ और $4.77$ है। डाइमिथाइलअमोनियम एसीटेट विलयन के $pH$ के लिए सही विकल्प है:
A
$8.50$
B
$5.50$
C
$7.75$
D
$6.25$

Solution

(C) डाइमिथाइलअमोनियम एसीटेट एक दुर्बल अम्ल (एसिटिक एसिड) और दुर्बल क्षार (डाइमिथाइलएमाइन) का लवण है।
दुर्बल अम्ल और दुर्बल क्षार के लवण के $pH$ का सूत्र है:
$pH = 7 + \frac{1}{2} pK_{a} - \frac{1}{2} pK_{b}$
दिया गया है:
$pK_{a} = 4.77$
$pK_{b} = 3.27$
सूत्र में मान रखने पर:
$pH = 7 + \frac{1}{2} (4.77) - \frac{1}{2} (3.27)$
$pH = 7 + \frac{1}{2} (4.77 - 3.27)$
$pH = 7 + \frac{1}{2} (1.50)$
$pH = 7 + 0.75$
$pH = 7.75$
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List-$I$ को List-$II$ के साथ सुमेलित कीजिए।
List-$I$ List-$II$
$(a)$ $PCl_{5}$ $(i)$ Square pyramidal
$(b)$ $SF_{6}$ $(ii)$ Trigonal planar
$(c)$ $BrF_{5}$ $(iii)$ Octahedral
$(d)$ $BF_{3}$ $(iv)$ Trigonal bipyramidal

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए।
A
$(a)-(iv), (b)-(iii), (c)-(i), (d)-(ii)$
B
$(a)-(ii), (b)-(iii), (c)-(iv), (d)-(i)$
C
$(a)-(iii), (b)-(i), (c)-(iv), (d)-(ii)$
D
$(a)-(iv), (b)-(iii), (c)-(ii), (d)-(i)$

Solution

(A) ज्यामिति निर्धारित करने के लिए,हम स्टेरिक नंबर $(SN)$ की गणना करते हैं: $SN = \sigma \text{ बंधों की संख्या} + \text{एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्मों की संख्या}$.
$1$. $PCl_{5}$: $SN = 5 + 0 = 5$. ज्यामिति: Trigonal bipyramidal $(iv)$.
$2$. $SF_{6}$: $SN = 6 + 0 = 6$. ज्यामिति: Octahedral $(iii)$.
$3$. $BrF_{5}$: $SN = 5 + 1 = 6$. ज्यामिति: Square pyramidal $(i)$.
$4$. $BF_{3}$: $SN = 3 + 0 = 3$. ज्यामिति: Trigonal planar $(ii)$.
अतः,सही मिलान $(a)-(iv), (b)-(iii), (c)-(i), (d)-(ii)$ है।
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ChemistryMediumMCQNEET · 2021
$BF_3$ एक समतलीय और इलेक्ट्रॉन-न्यून यौगिक है। केंद्रीय परमाणु के चारों ओर संकरण और इलेक्ट्रॉनों की संख्या क्रमशः है:
A
$sp^3$ और $4$
B
$sp^3$ और $6$
C
$sp^2$ और $6$
D
$sp^2$ और $8$

Solution

(C) $BF_3$ में,केंद्रीय परमाणु बोरॉन $(B)$ है।
बोरॉन के पास $3$ संयोजी इलेक्ट्रॉन होते हैं और यह $3$ फ्लोरीन परमाणुओं के साथ $3$ $\sigma$-बंध बनाता है।
केंद्रीय परमाणु पर एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म $(lp)$ की संख्या = $0$ है।
स्टेरिक संख्या = ($\sigma$-बंधों की संख्या) + (एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्मों की संख्या) = $3 + 0 = 3$ है।
$3$ की स्टेरिक संख्या $sp^2$ संकरण को दर्शाती है।
केंद्रीय बोरॉन परमाणु के चारों ओर इलेक्ट्रॉनों की कुल संख्या $3 \times 2 = 6$ इलेक्ट्रॉन है ($3$ सहसंयोजक बंधों के कारण)।
अतः,संकरण $sp^2$ है और इलेक्ट्रॉनों की संख्या $6$ है।
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ChemistryEasyMCQNEET · 2021
ऑल इंडिया रेडियो,नई दिल्ली का एक विशेष स्टेशन $1,368 \, kHz$ की आवृत्ति पर प्रसारण करता है। ट्रांसमीटर द्वारा उत्सर्जित विद्युत चुम्बकीय विकिरण की तरंगदैर्ध्य क्या है? [प्रकाश की गति $c = 3.0 \times 10^{8} \, m \, s^{-1}$]
A
$219.3 \, m$
B
$219.2 \, m$
C
$2192 \, m$
D
$21.92 \, cm$

Solution

(A) आवृत्ति $(\nu)$,तरंगदैर्ध्य $(\lambda)$ और प्रकाश की गति $(c)$ के बीच संबंध का सूत्र है: $\nu = \frac{c}{\lambda}$.
तरंगदैर्ध्य ज्ञात करने के लिए सूत्र: $\lambda = \frac{c}{\nu}$.
दिया गया है: $c = 3.0 \times 10^{8} \, m \, s^{-1}$ और $\nu = 1,368 \, kHz = 1,368 \times 10^{3} \, Hz$.
मान रखने पर: $\lambda = \frac{3.0 \times 10^{8} \, m \, s^{-1}}{1,368 \times 10^{3} \, s^{-1}}$.
$\lambda = \frac{300,000,000}{1,368,000} \, m \approx 219.29 \, m$.
एक दशमलव स्थान तक पूर्णांकित करने पर,$\lambda \approx 219.3 \, m$ प्राप्त होता है।
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ChemistryEasyMCQNEET · 2021
एक मोल आदर्श गैस के लिए $C_{P}$ और $C_{V}$ के बीच संबंध के लिए निम्नलिखित में से कौन सा विकल्प सही है?
A
$C_{P} + C_{V} = R$
B
$C_{P} - C_{V} = R$
C
$C_{P} = R C_{V}$
D
$C_{V} = R C_{P}$

Solution

(B) एक मोल आदर्श गैस के लिए,स्थिर दाब पर मोलर ऊष्मा धारिता $(C_{P})$ और स्थिर आयतन पर मोलर ऊष्मा धारिता $(C_{V})$ के बीच संबंध मेयर के संबंध द्वारा दिया जाता है:
$C_{P} - C_{V} = R$
जहाँ $R$ सार्वत्रिक गैस नियतांक है।
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ChemistryMediumMCQNEET · 2021
आदर्श गैस के समतापीय (isothermal) स्थिति में अनुत्क्रमणीय (irreversible) प्रसार के लिए,सही विकल्प है:
A
$ \Delta U = 0, \Delta S_{total} = 0 $
B
$ \Delta U \neq 0, \Delta S_{total} \neq 0 $
C
$ \Delta U = 0, \Delta S_{total} \neq 0 $
D
$ \Delta U \neq 0, \Delta S_{total} = 0 $

Solution

(C) आदर्श गैस के लिए,आंतरिक ऊर्जा $ \Delta U $ केवल तापमान पर निर्भर करती है। चूंकि प्रक्रिया समतापीय $( \Delta T = 0 )$ है,इसलिए $ \Delta U = 0 $ होता है।
किसी भी अनुत्क्रमणीय प्रक्रिया के लिए,ब्रह्मांड का कुल एन्ट्रापी परिवर्तन हमेशा धनात्मक होता है,अर्थात $ \Delta S_{total} > 0 $।
इसलिए,$ \Delta S_{total} \neq 0 $।
अतः,सही स्थिति $ \Delta U = 0 $ और $ \Delta S_{total} \neq 0 $ है।
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ChemistryMediumMCQNEET · 2021
$0^{\circ} C$ तापमान पर $1 \ L$ के कुल आयतन में रखे गए $4 \ g$ $O_2$ और $2 \ g$ $H_2$ के मिश्रण के लिए कुल दाब ($atm$ में) का सही विकल्प चुनें :
$\left[ \text{दिया गया है } R = 0.082 \ L \ atm \ mol^{-1} \ K^{-1}, T = 273 \ K \right]$
A
$2.518$
B
$2.602$
C
$25.18$
D
$26.02$

Solution

(C) कुल दाब की गणना आदर्श गैस समीकरण $PV = n_{total}RT$ का उपयोग करके की जाती है।
सबसे पहले,प्रत्येक गैस के मोलों की संख्या की गणना करें:
$n_{O_2} = \frac{4 \ g}{32 \ g/mol} = 0.125 \ mol$
$n_{H_2} = \frac{2 \ g}{2 \ g/mol} = 1.0 \ mol$
कुल मोल $n_{total} = 0.125 + 1.0 = 1.125 \ mol$.
$V = 1 \ L$,$R = 0.082 \ L \ atm \ mol^{-1} \ K^{-1}$,और $T = 273 \ K$ के साथ $PV = nRT$ का उपयोग करने पर:
$P \times 1 = 1.125 \times 0.082 \times 273$
$P = 25.18 \ atm$.
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ChemistryEasyMCQNEET · 2021
निम्नलिखित में से कौन सा अणु प्रकृति में अध्रुवीय (non-polar) है?
A
$POCl_3$
B
$CH_2O$
C
$SbCl_5$
D
$NO_2$

Solution

(C) एक अणु अध्रुवीय होता है यदि उसका कुल द्विध्रुव आघूर्ण (net dipole moment) शून्य हो।
$SbCl_5$ की ज्यामिति त्रिकोणीय द्विपिरामिडीय (trigonal bipyramidal) होती है,जिसमें तीन भूमध्यरेखीय (equatorial) $Sb-Cl$ बंध एक-दूसरे के प्रभाव को निरस्त कर देते हैं और दो अक्षीय (axial) $Sb-Cl$ बंध भी एक-दूसरे के प्रभाव को निरस्त कर देते हैं,जिसके परिणामस्वरूप कुल द्विध्रुव आघूर्ण शून्य हो जाता है।
$POCl_3$,$CH_2O$ और $NO_2$ ध्रुवीय अणु हैं क्योंकि उनकी असममित संरचना और अलग-अलग परमाणुओं या एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्मों की उपस्थिति के कारण उनका कुल द्विध्रुव आघूर्ण शून्य नहीं होता है।
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ChemistryEasyMCQNEET · 2021
निम्नलिखित आयनों के जोड़ों में से कौन सा एक आइसो-इलेक्ट्रॉनिक (iso-electronic) जोड़ा नहीं है?
A
$O^{2-}, F^{-}$
B
$Na^{+}, Mg^{2+}$
C
$Mn^{2+}, Fe^{3+}$
D
$Fe^{2+}, Mn^{2+}$

Solution

(D) आइसो-इलेक्ट्रॉनिक प्रजातियां वे होती हैं जिनमें इलेक्ट्रॉनों की संख्या समान होती है।
$O^{2-}$ में $8 + 2 = 10$ इलेक्ट्रॉन हैं; $F^{-}$ में $9 + 1 = 10$ इलेक्ट्रॉन हैं। (आइसो-इलेक्ट्रॉनिक)
$Na^{+}$ में $11 - 1 = 10$ इलेक्ट्रॉन हैं; $Mg^{2+}$ में $12 - 2 = 10$ इलेक्ट्रॉन हैं। (आइसो-इलेक्ट्रॉनिक)
$Mn^{2+}$ में $25 - 2 = 23$ इलेक्ट्रॉन हैं; $Fe^{3+}$ में $26 - 3 = 23$ इलेक्ट्रॉन हैं। (आइसो-इलेक्ट्रॉनिक)
$Fe^{2+}$ में $26 - 2 = 24$ इलेक्ट्रॉन हैं; $Mn^{2+}$ में $25 - 2 = 23$ इलेक्ट्रॉन हैं। (आइसो-इलेक्ट्रॉनिक नहीं है)
अतः,जोड़ा $Fe^{2+}, Mn^{2+}$ आइसो-इलेक्ट्रॉनिक नहीं है।
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ChemistryEasyMCQNEET · 2021
List-$I$ को List-$II$ के साथ सुमेलित कीजिए।
List-$I$ List-$II$
$(a)$ $2 SO_{2(g)} + O_{2(g)} \rightarrow 2 SO_{3(g)}$ $(i)$ अम्ल वर्षा
$(b)$ $HOCl_{(g)} \stackrel{h \nu}{\longrightarrow} \dot{O}H + \dot{Cl}$ $(ii)$ धूमकोहरा (Smog)
$(c)$ $CaCO_{3} + H_{2}SO_{4} \rightarrow CaSO_{4} + H_{2}O + CO_{2}$ $(iii)$ ओजोन क्षय
$(d)$ $NO_{2(g)} \stackrel{h \nu}{\longrightarrow} NO_{(g)} + O_{(g)}$ $(iv)$ क्षोभमंडलीय प्रदूषण

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए।
A
$(a)-(i), (b)-(ii), (c)-(iii), (d)-(iv)$
B
$(a)-(ii), (b)-(iii), (c)-(iv), (d)-(i)$
C
$(a)-(iv), (b)-(iii), (c)-(i), (d)-(ii)$
D
$(a)-(iii), (b)-(ii), (c)-(iv), (d)-(i)$

Solution

(C) सही मिलान इस प्रकार है:
$(a)$ $2 SO_{2(g)} + O_{2(g)} \rightarrow 2 SO_{3(g)}$ $SO_3$ के निर्माण को दर्शाता है जो अम्ल वर्षा का कारण बनता है,इसलिए $(a)-(iv)$ (क्योंकि यह क्षोभमंडलीय प्रदूषण का एक हिस्सा है)।
$(b)$ $HOCl_{(g)} \stackrel{h \nu}{\longrightarrow} \dot{O}H + \dot{Cl}$ ओजोन परत के क्षय में शामिल एक अभिक्रिया है,इसलिए $(b)-(iii)$।
$(c)$ $CaCO_{3} + H_{2}SO_{4} \rightarrow CaSO_{4} + H_{2}O + CO_{2}$ संगमरमर/चूना पत्थर के साथ अम्ल वर्षा की अभिक्रिया है,इसलिए $(c)-(i)$।
$(d)$ $NO_{2(g)} \stackrel{h \nu}{\longrightarrow} NO_{(g)} + O_{(g)}$ प्रकाश रासायनिक धूमकोहरे (photochemical smog) के निर्माण में एक प्रमुख चरण है,इसलिए $(d)-(ii)$।
अतः,सही क्रम $(a)-(iv), (b)-(iii), (c)-(i), (d)-(ii)$ है।
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$CH_3-CH_2-COO^{-} Na^{+} \xrightarrow[\Delta]{NaOH + ?} CH_3-CH_3 + Na_2CO_3$. उपरोक्त अभिक्रिया पर विचार करें और लुप्त अभिकर्मक/रसायन की पहचान करें।
A
$B_2H_6$
B
Red Phosphorus
C
$CaO$
D
$DIBAL-H$

Solution

(C) दी गई अभिक्रिया सोडियम प्रोपियोनेट का डीकार्बोक्सिलेशन है जिससे इथेन बनता है।
यह अभिक्रिया सोडालाइम की उपस्थिति में होती है,जो $NaOH$ और $CaO$ का मिश्रण है।
इसलिए,लुप्त अभिकर्मक $CaO$ है।
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निम्न में से किस व्यवस्था में,उनके सामने बताए गए गुणधर्म के अनुसार,उचित क्रम नहीं दिया गया है?
A
$HF < HCl < HBr < HI$ : अम्लीय सामर्थ्य के बढ़ते क्रम में
B
$H_{2}O < H_{2}S < H_{2}Se < H_{2}Te$ : $pK_{a}$ मानों के बढ़ते क्रम में
C
$NH_{3} < PH_{3} < AsH_{3} < SbH_{3}$ : अम्लीय लक्षण के बढ़ते क्रम में
D
$CO_{2} < SiO_{2} < SnO_{2} < PbO_{2}$ : ऑक्सीकरण क्षमता के बढ़ते क्रम में

Solution

(B) विकल्प $B$ में,समूह $16$ के हाइड्राइडों की अम्लीय सामर्थ्य समूह में नीचे जाने पर बढ़ती है $(H_{2}O < H_{2}S < H_{2}Se < H_{2}Te)$। चूँकि $pK_{a}$ मान अम्लीय सामर्थ्य के व्युत्क्रमानुपाती होता है,इसलिए सही क्रम $H_{2}O > H_{2}S > H_{2}Se > H_{2}Te$ होना चाहिए। अतः,दिया गया क्रम गलत है।
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$x$-दिशा में संचरित हो रही एक समतल विद्युतचुंबकीय तरंग के लिए,निम्नलिखित में से कौन सा संयोजन क्रमशः विद्युत क्षेत्र $(\vec{E})$ और चुंबकीय क्षेत्र $(\vec{B})$ के लिए सही संभावित दिशाएँ देता है?
A
$\hat{j} + \hat{k}, \hat{j} + \hat{k}$
B
$-\hat{j} + \hat{k}, -\hat{j} - \hat{k}$
C
$\hat{j} + \hat{k}, -\hat{j} - \hat{k}$
D
$-\hat{j} + \hat{k}, -\hat{j} + \hat{k}$

Solution

(B) विद्युतचुंबकीय तरंग के संचरण की दिशा पॉइंटिंग सदिश की दिशा द्वारा दी जाती है,जो $\vec{E} \times \vec{B}$ है।
यह दिया गया है कि तरंग $x$-दिशा में संचरित हो रही है,इसलिए हमारे पास $\vec{E} \times \vec{B} \parallel \hat{i}$ होना चाहिए।
विकल्प $B$ के लिए: $\vec{E} = -\hat{j} + \hat{k}$ और $\vec{B} = -\hat{j} - \hat{k}$।
क्रॉस प्रोडक्ट की गणना करने पर: $\vec{E} \times \vec{B} = (-\hat{j} + \hat{k}) \times (-\hat{j} - \hat{k}) = (-\hat{j} \times -\hat{j}) + (-\hat{j} \times -\hat{k}) + (\hat{k} \times -\hat{j}) + (\hat{k} \times -\hat{k}) = 0 + \hat{i} + \hat{i} + 0 = 2\hat{i}$।
चूंकि $2\hat{i}$,$x$-दिशा में है,इसलिए विकल्प $B$ सही है।
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$C-X$ बंध की बंध एन्थैल्पी का सही क्रम क्या है?
A
$CH_{3}-F < CH_{3}-Cl < CH_{3}-Br < CH_{3}-I$
B
$CH_{3}-F > CH_{3}-Cl > CH_{3}-Br > CH_{3}-I$
C
$CH_{3}-F < CH_{3}-Cl > CH_{3}-Br > CH_{3}-I$
D
$CH_{3}-Cl > CH_{3}-F > CH_{3}-Br > CH_{3}-I$

Solution

(B) $C-X$ बंध की बंध एन्थैल्पी बंध लंबाई पर निर्भर करती है।
आवर्त सारणी में समूह में नीचे जाने पर,हैलोजन $(X)$ का परमाणु आकार बढ़ता है।
इससे $C-X$ बंध की लंबाई बढ़ जाती है।
जैसे-जैसे बंध लंबाई बढ़ती है,बंध की मजबूती (और इसलिए बंध एन्थैल्पी) कम हो जाती है।
अतः,बंध एन्थैल्पी का सही क्रम $CH_{3}-F > CH_{3}-Cl > CH_{3}-Br > CH_{3}-I$ है।
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ChemistryEasyMCQNEET · 2021
निम्नलिखित में से किस विधि का उपयोग करके ऐसी अत्यधिक शुद्ध धातु प्राप्त की जा सकती है जो कमरे के तापमान पर तरल होती है?
A
विद्युत अपघटन (Electrolysis)
B
क्रोमैटोग्राफी
C
आसवन (Distillation)
D
जोन रिफाइनिंग

Solution

(C) कमरे के तापमान पर तरल रहने वाली धातुएं,जैसे कि $Hg$ (पारा),को आसवन (distillation) की प्रक्रिया द्वारा शुद्ध किया जाता है।
आसवन में,अशुद्ध धातु को उसके क्वथनांक तक गर्म किया जाता है,और शुद्ध धातु प्राप्त करने के लिए वाष्प को संघनित किया जाता है।
चूंकि धातु का क्वथनांक अशुद्धियों के क्वथनांक से काफी अलग होता है,इसलिए यह विधि वाष्पशील धातुओं के लिए अत्यधिक प्रभावी है।
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$14$ प्रकार के ब्रेवे जालक (Bravais lattice) एकक कोष्ठिकाओं में काय-केंद्रित (body-centred) एकक कोष्ठिकाओं की संख्या के लिए सही विकल्प है:
A
$7$
B
$5$
C
$2$
D
$3$

Solution

(D) $14$ ब्रेवे जालकों में,काय-केंद्रित $(BCC)$ एकक कोष्ठिकाएँ निम्नलिखित क्रिस्टल प्रणालियों में पाई जाती हैं:
$1$. घनीय (Cubic) प्रणाली: $1$ $(BCC)$
$2$. द्विसमलंबाक्ष (Tetragonal) प्रणाली: $1$ $(BCC)$
$3$. विषमलंबाक्ष (Orthorhombic) प्रणाली: $1$ $(BCC)$
अतः,काय-केंद्रित एकक कोष्ठिकाओं की कुल संख्या $1 + 1 + 1 = 3$ है।
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$Zr$ $(Z=40)$ और $Hf$ $(Z=72)$ की परमाणु और आयनिक त्रिज्या समान होती है,जिसका कारण है:
A
एक ही समूह से संबंधित होना
B
विकर्ण संबंध
C
लैंथेनॉइड संकुचन
D
समान रासायनिक गुण होना

Solution

(C) $Zr$ $(Z=40)$ और $Hf$ $(Z=72)$ की परमाणु और आयनिक त्रिज्या बहुत समान होती है।
इस घटना को लैंथेनॉइड संकुचन के रूप में जाना जाता है।
जैसे-जैसे हम एक ही समूह में $4d$ श्रेणी से $5d$ श्रेणी के तत्वों की ओर बढ़ते हैं,$4f$ कक्षकों का भराव होता है।
$4f$ इलेक्ट्रॉनों के खराब परिरक्षण प्रभाव (poor shielding effect) के कारण परमाणु आकार में कमी आती है,जो एक नई कक्षा के जुड़ने से होने वाली आकार की वृद्धि की लगभग पूरी तरह से भरपाई कर देती है।
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ChemistryMediumMCQNEET · 2021
ब्लास्ट फर्नेस (वात्या भट्टी) में प्राप्त किया जा सकने वाला अधिकतम तापमान है: ($K$ तक में)
A
$1200$
B
$2200$
C
$1900$
D
$5000$

Solution

(B) ब्लास्ट फर्नेस में,तापमान अलग-अलग क्षेत्रों में भिन्न होता है।
दहन क्षेत्र,जहाँ कोक गर्मी उत्पन्न करने के लिए जलता है,वहाँ अधिकतम तापमान लगभग $2200 \ K$ तक पहुँच जाता है।
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ChemistryMediumMCQNEET · 2021
निम्नलिखित रासायनिक अभिक्रिया में बनने वाले कार्बनिक यौगिक का $IUPAC$ नाम क्या है?
एसीटोन $\xrightarrow[(ii) H_2O, H^{+}]{(i) C_2H_5MgBr, \text{dry Ether}}$ उत्पाद
A
$2-$मेथिल प्रोपेन$-2-$ऑल
B
पेंटेन$-2-$ऑल
C
पेंटेन$-3-$ऑल
D
$2-$मेथिल ब्यूटेन$-2-$ऑल

Solution

(D) एसीटोन $(CH_3COCH_3)$ की अभिक्रिया शुष्क ईथर की उपस्थिति में एथिलमैग्नीशियम ब्रोमाइड $(C_2H_5MgBr)$ के साथ एक नाभिकरागी योगात्मक अभिक्रिया है।
नाभिकरागी एथिल समूह $(C_2H_5^-)$ एसीटोन के इलेक्ट्रोफिलिक कार्बोनिल कार्बन पर आक्रमण करके एक मध्यवर्ती मैग्नीशियम एल्कोक्साइड बनाता है।
इसके बाद $H_3O^+$ के साथ जल-अपघटन करने पर अंतिम अल्कोहल उत्पाद प्राप्त होता है।
अभिक्रिया अनुक्रम इस प्रकार है:
$CH_3COCH_3 + C_2H_5MgBr \rightarrow CH_3-C(OMgBr)(CH_3)-C_2H_5$
$CH_3-C(OMgBr)(CH_3)-C_2H_5 + H_2O/H^+ \rightarrow CH_3-C(OH)(CH_3)-CH_2CH_3 + Mg(OH)Br$
उत्पाद की संरचना $CH_3-C(OH)(CH_3)-CH_2-CH_3$ है।
$-OH$ समूह युक्त सबसे लंबी कार्बन श्रृंखला का चयन करने पर ब्यूटेन श्रृंखला प्राप्त होती है। $-OH$ समूह के निकटतम सिरे से अंकन करने पर,$-OH$ दूसरे स्थान पर है और एक मेथिल समूह भी दूसरे स्थान पर है।
अतः,$IUPAC$ नाम $2-$मेथिलब्यूटेन$-2-$ऑल है।
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ChemistryMediumMCQNEET · 2021
निम्नलिखित में से कौन सा बहुलक योगज बहुलकीकरण (addition polymerisation) द्वारा तैयार किया जाता है?
A
टेफ्लॉन
B
नायलॉन-$6,6$
C
नोवोलेक
D
डेक्रॉन

Solution

(A) टेफ्लॉन एक योगज बहुलक (addition polymer) है जो टेट्राफ्लुओरोएथीन $(CF_2=CF_2)$ के योगज बहुलकीकरण द्वारा बनता है।
अभिक्रिया इस प्रकार है:
$n \ CF_2=CF_2 \xrightarrow{\text{Polymerisation}} [-CF_2-CF_2-]_n$
नायलॉन-$6,6$,नोवोलेक और डेक्रॉन संघनन बहुलक (condensation polymers) हैं।
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ChemistryMediumMCQNEET · 2021
षट्कोणीय आद्य एकक कोष्ठिका में चतुष्फलकीय और अष्टफलकीय रिक्तियों की संख्या के लिए सही विकल्प है:
A
$8, 4$
B
$6, 12$
C
$2, 1$
D
$12, 6$

Solution

(D) षट्कोणीय निविड संकुलित $(HCP)$ एकक कोष्ठिका में,प्रति एकक कोष्ठिका परमाणुओं की संख्या $(Z)$ $6$ होती है।
अष्टफलकीय रिक्तियों की संख्या $(OHV)$ प्रति एकक कोष्ठिका परमाणुओं की संख्या के बराबर होती है,इसलिए $OHV = Z = 6$।
चतुष्फलकीय रिक्तियों की संख्या $(THV)$ प्रति एकक कोष्ठिका परमाणुओं की संख्या की दोगुनी होती है,इसलिए $THV = 2 \times Z = 2 \times 6 = 12$।
अतः,चतुष्फलकीय और अष्टफलकीय रिक्तियों की संख्या क्रमशः $12$ और $6$ है।
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ChemistryMediumMCQNEET · 2021
निम्नलिखित में से कौन सा कथन गलत है?
A
एक्टिनॉइड संकुचन,लैंथेनॉइड संकुचन की तुलना में तत्व-दर-तत्व अधिक होता है।
B
अधिकांश त्रिसंयोजक लैंथेनॉइड आयन ठोस अवस्था में रंगहीन होते हैं।
C
लैंथेनॉइड ऊष्मा और विद्युत के अच्छे सुचालक होते हैं।
D
एक्टिनॉइड अत्यधिक अभिक्रियाशील धातुएं हैं,विशेष रूप से जब वे बारीक चूर्ण के रूप में हों।

Solution

(B) सही उत्तर $B$ है।
अधिकांश त्रिसंयोजक लैंथेनॉइड आयन $(Ln^{3+})$ $f-f$ संक्रमण के कारण ठोस और जलीय दोनों अवस्थाओं में रंगीन होते हैं।
एक्टिनॉइड संकुचन वास्तव में लैंथेनॉइड संकुचन से अधिक होता है क्योंकि $5f$ इलेक्ट्रॉन,$4f$ इलेक्ट्रॉनों की तुलना में कम प्रभावी परिरक्षण (shielding) प्रदान करते हैं।
लैंथेनॉइड विशिष्ट धात्विक तत्व हैं और ऊष्मा और विद्युत के अच्छे सुचालक हैं।
एक्टिनॉइड अत्यधिक अभिक्रियाशील धातुएं हैं,विशेष रूप से जब वे बारीक चूर्ण के रूप में होते हैं,क्योंकि वे धीरे-धीरे एक सुरक्षात्मक ऑक्साइड परत बनाते हैं।
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ChemistryMediumMCQNEET · 2021
नीचे दो कथन दिए गए हैं:
कथन $I:$ एस्पिरिन और पैरासिटामोल मादक दर्दनाशक (narcotic analgesics) वर्ग के अंतर्गत आते हैं।
कथन $II:$ मॉर्फिन और हेरोइन गैर-मादक दर्दनाशक (non-narcotic analgesics) हैं।
उपरोक्त कथनों के आलोक में,नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए।
A
कथन $I$ और कथन $II$ दोनों सत्य हैं।
B
कथन $I$ और कथन $II$ दोनों असत्य हैं।
C
कथन $I$ सही है लेकिन कथन $II$ गलत है।
D
कथन $I$ गलत है लेकिन कथन $II$ सही है।

Solution

(B) कथन $I$ गलत है क्योंकि एस्पिरिन और पैरासिटामोल गैर-मादक दर्दनाशक हैं।
कथन $II$ गलत है क्योंकि मॉर्फिन और हेरोइन मादक दर्दनाशक हैं।
अतः,दोनों कथन असत्य हैं।
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ChemistryMediumMCQNEET · 2021
$2-Bromopentane$ की डीहाइड्रोहैलोजनीकरण अभिक्रिया में बनने वाला मुख्य उत्पाद $Pent-2-ene$ है। यह उत्पाद निर्माण किस पर आधारित है?
A
$Saytzeff's \ Rule$
B
$Hund's \ Rule$
C
$Hofmann \ Rule$
D
$Huckel's \ Rule$

Solution

(A) सही उत्तर $(A)$ है।
$Saytzeff's \ Rule$ के अनुसार,डीहाइड्रोहैलोजनीकरण अभिक्रियाओं में,मुख्य उत्पाद वह एल्कीन होता है जो अधिक प्रतिस्थापित होता है (अर्थात,जिसके द्वि-आबंध वाले कार्बन से अधिक एल्किल समूह जुड़े होते हैं)।
$2-Bromopentane$ के मामले में,$HBr$ के विलोपन से $Pent-1-ene$ या $Pent-2-ene$ प्राप्त हो सकता है।
$Pent-2-ene$ एक द्वि-प्रतिस्थापित एल्कीन है,जबकि $Pent-1-ene$ एक मोनो-प्रतिस्थापित एल्कीन है।
इसलिए,$Pent-2-ene$ अधिक स्थिर और मुख्य उत्पाद है।
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ChemistryMediumMCQNEET · 2021
अभिक्रिया $A \rightarrow B$ के लिए,अभिक्रिया की एन्थैल्पी $-4.2 \ kJ \ mol^{-1}$ है और सक्रियण की एन्थैल्पी $9.6 \ kJ \ mol^{-1}$ है। अभिक्रिया के लिए सही स्थितिज ऊर्जा (potential energy) प्रोफाइल किस विकल्प में दिखाया गया है?
A
Option A
B
Option B
C
Option C
D
Option D

Solution

(B) अभिक्रिया की एन्थैल्पी $\Delta H$,अग्र अभिक्रिया की सक्रियण ऊर्जा $(E_a)_f$ और पश्च अभिक्रिया की सक्रियण ऊर्जा $(E_a)_b$ के बीच के अंतर द्वारा दी जाती है:
$\Delta H = (E_a)_f - (E_a)_b$
दिया गया है $\Delta H = -4.2 \ kJ \ mol^{-1}$ और $(E_a)_f = 9.6 \ kJ \ mol^{-1}$:
$-4.2 = 9.6 - (E_a)_b$
$(E_a)_b = 9.6 + 4.2 = 13.8 \ kJ \ mol^{-1}$
चूंकि $\Delta H$ ऋणात्मक है,अभिक्रिया ऊष्माक्षेपी है,जिसका अर्थ है कि उत्पाद $B$ की स्थितिज ऊर्जा अभिकारक $A$ की स्थितिज ऊर्जा से कम होनी चाहिए। दिए गए विकल्पों में से,वह ग्राफ जिसमें उत्पाद $B$,अभिकारक $A$ से निचले ऊर्जा स्तर पर है,विकल्प $B$ द्वारा दर्शाया गया है।
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ChemistryEasyMCQNEET · 2021
एथिलीन डायमीनटेट्राएसीटेट $(EDTA^{4-})$ आयन है:
A
चार $O$ और दो $N$ दाता परमाणुओं वाला हेक्साडेंटेट लिगैंड
B
यूनिडेंटेट लिगैंड
C
दो $N$ दाता परमाणुओं वाला बाइडेंटेट लिगैंड
D
तीन $N$ दाता परमाणुओं वाला ट्राइडेंटेट लिगैंड

Solution

(A) एथिलीन डायमीनटेट्राएसीटेट $(EDTA^{4-})$ आयन की संरचना में दो नाइट्रोजन परमाणु और चार ऑक्सीजन परमाणु (चार कार्बोक्सिलेट समूहों से) होते हैं जो दाता साइटों के रूप में कार्य कर सकते हैं।
चूंकि इसमें छह दाता परमाणु होते हैं जो केंद्रीय धातु आयन से जुड़ सकते हैं,इसलिए इसे हेक्साडेंटेट लिगैंड के रूप में वर्गीकृत किया जाता है।
अतः,सही विकल्प $A$ है।
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ChemistryDifficultMCQNEET · 2021
उत्कृष्ट गैसों (Noble gases) का नाम उनकी अभिक्रियाशीलता के प्रति अक्रियता के कारण रखा गया है। उनके बारे में एक गलत कथन की पहचान करें।
A
उत्कृष्ट गैसें पानी में कम घुलनशील होती हैं।
B
उत्कृष्ट गैसों के गलनांक और क्वथनांक बहुत उच्च होते हैं।
C
उत्कृष्ट गैसों में कमजोर परिक्षेपण बल (dispersion forces) होते हैं।
D
उत्कृष्ट गैसों की इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी का मान बड़ा धनात्मक होता है।

Solution

(B) उत्कृष्ट गैसों का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास स्थिर ($ns^2 np^6$,$He$ को छोड़कर जो $1s^2$ है) होता है।
उनके स्थिर विन्यास के कारण,उनके परमाणुओं के बीच बहुत कमजोर परिक्षेपण बल होते हैं,जिसके परिणामस्वरूप उनके गलनांक और क्वथनांक बहुत कम होते हैं।
इसलिए,यह कथन कि उनके गलनांक और क्वथनांक बहुत उच्च होते हैं,गलत है।
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ChemistryEasyMCQNEET · 2021
$RBC$ की कमी किस विटामिन की कमी से होने वाला रोग है?
A
विटामिन $B_{12}$
B
विटामिन $B_{6}$
C
विटामिन $B_{1}$
D
विटामिन $B_{2}$

Solution

(A) विटामिन $B_{12}$ (साइनोकोबालामिन) की कमी से परनिशियस एनीमिया होता है,जो लाल रक्त कोशिकाओं ($RBC$s) की संख्या में कमी और असामान्य रूप से बड़ी,अपरिपक्व $RBC$s के उत्पादन द्वारा पहचाना जाता है।
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ChemistryEasyMCQNEET · 2021
ट्रिटियम,हाइड्रोजन का एक रेडियोधर्मी समस्थानिक,निम्नलिखित में से कौन से कण उत्सर्जित करता है?
A
$Beta (\beta^{-})$
B
$Alpha (\alpha)$
C
$Gamma (\gamma)$
D
$Neutron (n)$

Solution

(A) ट्रिटियम $(^{3}_{1}H)$ हाइड्रोजन का एक रेडियोधर्मी समस्थानिक है। यह हीलियम-$3$ $(^{3}_{2}He)$ बनाने के लिए बीटा कण $(\beta^{-})$ उत्सर्जित करके रेडियोधर्मी क्षय से गुजरता है। परमाणु अभिक्रिया इस प्रकार है: $^{3}_{1}H \rightarrow ^{3}_{2}He + ^{0}_{-1}e + \bar{\nu}_{e}$.
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ChemistryEasyMCQNEET · 2021
अनंत तनुता पर $NaCl$,$HCl$ और $CH_{3}COONa$ की मोलर चालकता क्रमशः $126.45$,$426.16$ और $91.0 \ S \ cm^{2} \ mol^{-1}$ है। अनंत तनुता पर $CH_{3}COOH$ की मोलर चालकता क्या होगी? अपने उत्तर के लिए सही विकल्प चुनें। ($S \ cm^{2} \ mol^{-1}$ में)
A
$201.28$
B
$390.71$
C
$698.28$
D
$540.28$

Solution

(B) कोह्लराश के स्वतंत्र आयनों के अभिगमन के नियम के अनुसार,$CH_{3}COOH$ के लिए अनंत तनुता पर मोलर चालकता इस प्रकार है:
$\Lambda^{\circ}_{m}(CH_{3}COOH) = \Lambda^{\circ}_{m}(CH_{3}COONa) + \Lambda^{\circ}_{m}(HCl) - \Lambda^{\circ}_{m}(NaCl)$
दिए गए मानों को रखने पर:
$\Lambda^{\circ}_{m}(CH_{3}COOH) = 91.0 + 426.16 - 126.45$
$\Lambda^{\circ}_{m}(CH_{3}COOH) = 517.16 - 126.45$
$\Lambda^{\circ}_{m}(CH_{3}COOH) = 390.71 \ S \ cm^{2} \ mol^{-1}$
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उस यौगिक की पहचान करें जो हिन्सबर्ग अभिकर्मक के साथ अभिक्रिया करके एक ठोस देता है जो क्षार में घुलनशील है।
A
Option A
B
Option B
C
Option C
D
Option D

Solution

(C) हिन्सबर्ग अभिकर्मक बेंजीनसल्फोनिल क्लोराइड $(C_6H_5SO_2Cl)$ है।
$1^{\circ}$ एमीन $(R-NH_2)$ हिन्सबर्ग अभिकर्मक के साथ अभिक्रिया करके $N$-एल्किलबेंजीनसल्फोनैमाइड बनाते हैं,जिसमें नाइट्रोजन से जुड़ा एक अम्लीय हाइड्रोजन परमाणु होता है। यह उत्पाद को क्षार (जैसे $KOH$ या $NaOH$) में घुलनशील बनाता है।
$2^{\circ}$ एमीन $N,N$-डाइएल्किलबेंजीनसल्फोनैमाइड बनाते हैं,जिनमें कोई अम्लीय हाइड्रोजन नहीं होता है और वे क्षार में अघुलनशील होते हैं।
$3^{\circ}$ एमीन हिन्सबर्ग अभिकर्मक के साथ अभिक्रिया नहीं करते हैं।
दिए गए विकल्पों में से,$CH_3-CH_2-NH_2$ एक $1^{\circ}$ एमीन है,इसलिए यह अभिक्रिया करके ऐसा उत्पाद देगा जो क्षार में घुलनशील है।
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ChemistryMediumMCQNEET · 2021
"टिंडल प्रभाव किसके द्वारा प्रदर्शित किया जाता है?" कथन के लिए सही विकल्प है:
A
$NaCl$ का विलयन
B
ग्लूकोज का विलयन
C
स्टार्च का विलयन
D
यूरिया का विलयन

Solution

(C) टिंडल प्रभाव कोलाइड या बहुत महीन निलंबन में कणों द्वारा प्रकाश के प्रकीर्णन के रूप में देखा जाता है।
दिए गए विकल्पों में से,$NaCl$,ग्लूकोज और यूरिया वास्तविक विलयन बनाते हैं,जो टिंडल प्रभाव प्रदर्शित नहीं करते हैं।
स्टार्च एक कोलाइडल विलयन बनाता है,जो प्रकाश को प्रकीर्णित करता है और इसलिए टिंडल प्रभाव प्रदर्शित करता है।
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$10 \ g$ ग्लूकोज $(C_{6}H_{12}O_{6})$ को $250 \ mL$ पानी में $(P_{1})$,$10 \ g$ यूरिया $(CH_{4}N_{2}O)$ को $250 \ mL$ पानी में $(P_{2})$ और $10 \ g$ सुक्रोज $(C_{12}H_{22}O_{11})$ को $250 \ mL$ पानी में $(P_{3})$ घोलकर निम्नलिखित विलयन तैयार किए गए। इन विलयनों के परासरण दाब के घटते क्रम के लिए सही विकल्प है:
A
$P_{2} > P_{1} > P_{3}$
B
$P_{1} > P_{2} > P_{3}$
C
$P_{2} > P_{3} > P_{1}$
D
$P_{3} > P_{1} > P_{2}$

Solution

(A) परासरण दाब $\Pi$ को सूत्र $\Pi = CRT$ द्वारा दर्शाया जाता है,जहाँ $C$ मोलर सांद्रता है।
चूंकि विलेय का द्रव्यमान $(10 \ g)$ और विलायक का आयतन $(250 \ mL)$ सभी विलयनों के लिए समान है,इसलिए मोलर सांद्रता $C = \frac{mass}{M_{w} \times V}$ विलेय के मोलर द्रव्यमान $(M_{w})$ के व्युत्क्रमानुपाती होती है।
अतः,$\Pi \propto \frac{1}{M_{w}}$.
मोलर द्रव्यमान की गणना:
ग्लूकोज $(C_{6}H_{12}O_{6})$: $M_{w1} = 180 \ g/mol$
यूरिया $(CH_{4}N_{2}O)$: $M_{w2} = 60 \ g/mol$
सुक्रोज $(C_{12}H_{22}O_{11})$: $M_{w3} = 342 \ g/mol$
चूंकि $M_{w2} < M_{w1} < M_{w3}$,इसलिए परासरण दाब का क्रम $P_{2} > P_{1} > P_{3}$ होगा।
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निम्नलिखित रासायनिक अभिक्रिया में मध्यवर्ती यौगिक $X$ क्या है?
Question diagram
A
$C_6H_5CH(OCrOHCl_2)_2$
B
$C_6H_5CH(OCOCH_3)_2$
C
$C_6H_5CHCl_2$
D
$C_6H_5CHCl$

Solution

(A) दी गई अभिक्रिया $Etard$ अभिक्रिया है,जिसका उपयोग कार्बन डाइसल्फाइड $(CS_2)$ जैसे अध्रुवीय विलायक की उपस्थिति में क्रोमिल क्लोराइड $(CrO_2Cl_2)$ का उपयोग करके टोल्यूनि का बेंजालडिहाइड में ऑक्सीकरण करने के लिए किया जाता है।
इस अभिक्रिया में,टोल्यूनि का मिथाइल समूह एक क्रोमियम संकुल मध्यवर्ती में ऑक्सीकृत हो जाता है,जो $C_6H_5CH(OCrOHCl_2)_2$ है।
इसके बाद इस मध्यवर्ती का जल $(H_3O^+)$ के साथ जल-अपघटन किया जाता है जिससे बेंजालडिहाइड प्राप्त होता है।
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ChemistryMediumMCQNEET · 2021
$45^{\circ} C$ पर बेंजीन और ऑक्टेन के $3 : 2$ मोलर अनुपात वाले विलयन के वाष्प दाब का सही मान ...... $mm \ Hg$ है। [$45^{\circ} C$ पर बेंजीन का वाष्प दाब $280 \ mm \ Hg$ और ऑक्टेन का वाष्प दाब $420 \ mm \ Hg$ है। आदर्श विलयन मानिए।]
A
$160$
B
$168$
C
$336$
D
$350$

Solution

(C) आदर्श विलयन के लिए राउल्ट के नियम के अनुसार,कुल वाष्प दाब $P_s$ इस प्रकार है:
$P_s = P_A^0 x_A + P_B^0 x_B$
दिया गया है:
$P_A^0$ (बेंजीन) $= 280 \ mm \ Hg$
$P_B^0$ (ऑक्टेन) $= 420 \ mm \ Hg$
मोलर अनुपात $= 3 : 2$,इसलिए मोल अंश हैं:
$x_A = \frac{3}{3+2} = \frac{3}{5} = 0.6$
$x_B = \frac{2}{3+2} = \frac{2}{5} = 0.4$
मान रखने पर:
$P_s = (280 \times 0.6) + (420 \times 0.4)$
$P_s = 168 + 168$
$P_s = 336 \ mm \ Hg$
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ChemistryMediumMCQNEET · 2021
निम्नलिखित रासायनिक अभिक्रिया में बनने वाला उत्पाद है:
Question diagram
A
Option A
B
Option B
C
Option C
D
Option D

Solution

(D) $NaBH_4$ (सोडियम बोरोहाइड्राइड) एक चयनात्मक अपचायक है जो एल्डिहाइड और कीटोन को उनके संबंधित अल्कोहल में अपचयित करता है,लेकिन सामान्य परिस्थितियों में एस्टर,कार्बोक्सिलिक एसिड या एमाइड को अपचयित नहीं करता है। दिए गए अभिकारक में एक कीटोन समूह और एक एस्टर समूह $(-COOCH_3)$ है। इसलिए,$NaBH_4$ चयनात्मक रूप से कीटोन समूह को द्वितीयक अल्कोहल $(-CHOH)$ में अपचयित करेगा जबकि एस्टर समूह अपरिवर्तित रहेगा। अंतिम उत्पाद $-OH$ समूह,$-CH_2-COOCH_3$ समूह और $-CH_3$ समूह वाली एक साइक्लोहेक्सेन रिंग है।
49
ChemistryMediumMCQNEET · 2021
$0.007 \ M$ एसिटिक अम्ल की मोलर चालकता $20 \ S \ cm^{2} \ mol^{-1}$ है। एसिटिक अम्ल का वियोजन स्थिरांक क्या है? ($\times 10^{-5} \ mol \ L^{-1}$ में)
$[\Lambda_{H^{+}}^{\circ}=350 \ S \ cm^{2} \ mol^{-1}, \Lambda_{CH_{3}COO^{-}}^{\circ}=50 \ S \ cm^{2} \ mol^{-1}]$
A
$175$
B
$2.50$
C
$1.75$
D
$250$

Solution

(C) सबसे पहले,एसिटिक अम्ल की सीमांत मोलर चालकता की गणना करें:
$\Lambda_{m}^{\circ}(CH_{3}COOH) = \Lambda_{H^{+}}^{\circ} + \Lambda_{CH_{3}COO^{-}}^{\circ} = 350 + 50 = 400 \ S \ cm^{2} \ mol^{-1}$
इसके बाद,वियोजन की मात्रा $(\alpha)$ की गणना करें:
$\alpha = \frac{\Lambda_{m}}{\Lambda_{m}^{\circ}} = \frac{20}{400} = 0.05$
अंत में,वियोजन स्थिरांक $(K_{a})$ की गणना $K_{a} = C \alpha^{2} / (1 - \alpha)$ सूत्र का उपयोग करके करें। चूंकि $\alpha$ बहुत छोटा है,हम $K_{a} \approx C \alpha^{2}$ का उपयोग करते हैं:
$K_{a} = 0.007 \times (0.05)^{2}$
$K_{a} = 7 \times 10^{-3} \times 25 \times 10^{-4}$
$K_{a} = 175 \times 10^{-7} = 1.75 \times 10^{-5} \ mol \ L^{-1}$
अतः,उत्तर $1.75$ है।
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ChemistryMediumMCQNEET · 2021
प्रथम कोटि की अभिक्रिया के लिए आरेनियस प्लॉट $(\ln k \, vs \, \frac{1}{T})$ का ढाल $-5 \times 10^{3} \, K$ है। अभिक्रिया के लिए $E_{a}$ का मान ज्ञात कीजिए। ($kJ \, mol^{-1}$ में)
$[\text{दिया गया है } R = 8.314 \, J \, K^{-1} \, mol^{-1}]$
A
$41.5$
B
$83.0$
C
$166$
D
$-83$

Solution

(A) आरेनियस समीकरण $\ln k = \ln A - \frac{E_{a}}{RT}$ है।
इसे सरल रेखा के समीकरण $y = mx + c$ से तुलना करने पर,जहाँ $y = \ln k$ और $x = \frac{1}{T}$,ढाल $m = -\frac{E_{a}}{R}$ प्राप्त होता है।
यहाँ ढाल $-5 \times 10^{3} \, K$ दिया गया है,इसलिए $-\frac{E_{a}}{R} = -5 \times 10^{3} \, K$.
अतः,$E_{a} = 5 \times 10^{3} \times 8.314 \, J \, mol^{-1} = 41570 \, J \, mol^{-1}$.
$kJ \, mol^{-1}$ में बदलने पर,$E_{a} = 41.57 \, kJ \, mol^{-1} \approx 41.5 \, kJ \, mol^{-1}$ प्राप्त होता है।
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ChemistryMediumMCQNEET · 2021
दी गई रासायनिक अभिक्रिया की श्रृंखला में अभिकर्मक '$R$' क्या है?
Question diagram
A
$H_{2}O$
B
$CH_{3}CH_{2}OH$
C
$HI$
D
$CuCN / KCN$

Solution

(B) दी गई अभिक्रिया श्रृंखला में $2,4,6$-ट्राइब्रोमोऐनिलीन का $0-5^{\circ}C$ पर $NaNO_{2} / HCl$ का उपयोग करके $2,4,6$-ट्राइब्रोमोबेंजीन डाइएजोनियम क्लोराइड में रूपांतरण शामिल है।
डाइएजोनियम समूह $(-N_{2}^{+}Cl^{-})$ को हाइड्रोजन परमाणु द्वारा प्रतिस्थापित करने के लिए एक अपचायक (reducing agent) की आवश्यकता होती है।
एथेनॉल $(CH_{3}CH_{2}OH)$ एक हल्के अपचायक के रूप में कार्य करता है जो डाइएजोनियम लवण को संबंधित एरोमैटिक हाइड्रोकार्बन (इस मामले में,$1,3,5$-ट्राइब्रोमोबेंजीन) में अपचयित कर देता है और स्वयं एसीटैल्डिहाइड में ऑक्सीकृत हो जाता है।
अतः,अभिकर्मक '$R$' $CH_{3}CH_{2}OH$ है।
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ChemistryEasyMCQNEET · 2021
सूची-$I$ का मिलान सूची-$II$ से करें।
सूची-$I$:
$(a)$ $\text{बेंजीन} \xrightarrow[\text{CuCl}]{\text{CO, HCl, Anhyd. AlCl}_3} \text{बेंजाल्डिहाइड}$
$(b)$ $R-CO-CH_3 + NaOX \rightarrow$
$(c)$ $R-CH_2-OH + R'COOH \xrightarrow{\text{Conc. H}_2\text{SO}_4}$
$(d)$ $R-CH_2COOH \xrightarrow[(ii) H_2O]{(i) X_2/\text{Red P}} R-CH(X)COOH$
सूची-$II$:
$(i)$ $\text{हेल-वोलहार्ड-जेलिंस्की अभिक्रिया}$
(ii) $\text{गाटरमैन-कोच अभिक्रिया}$
(iii) $\text{हेलोफॉर्म अभिक्रिया}$
(iv) $\text{एस्टरीकरण}$
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनें।
A
$(a)-(iv), (b)-(i), (c)-(ii), (d)-(iii)$
B
$(a)-(iii), (b)-(ii), (c)-(i), (d)-(iv)$
C
$(a)-(i), (b)-(iv), (c)-(iii), (d)-(ii)$
D
$(a)-(ii), (b)-(iii), (c)-(iv), (d)-(i)$

Solution

(D) सही मिलान इस प्रकार हैं:
$(a)$ निर्जल $AlCl_3/CuCl$ की उपस्थिति में बेंजीन की $CO$ और $HCl$ के साथ अभिक्रिया $\text{गाटरमैन-कोच अभिक्रिया}$ है। अतः,$(a)-(ii)$।
$(b)$ मिथाइल कीटोन की $NaOX$ $(X = Cl, Br, I)$ के साथ अभिक्रिया $\text{हेलोफॉर्म अभिक्रिया}$ है। अतः,$(b)-(iii)$।
$(c)$ सांद्र $H_2SO_4$ की उपस्थिति में अल्कोहल की कार्बोक्सिलिक एसिड के साथ अभिक्रिया $\text{एस्टरीकरण}$ है। अतः,$(c)-(iv)$।
$(d)$ $\alpha$-हाइड्रोजन युक्त कार्बोक्सिलिक एसिड की $X_2/\text{Red P}$ और उसके बाद पानी के साथ अभिक्रिया $\text{हेल-वोलहार्ड-जेलिंस्की (HVZ) अभिक्रिया}$ है। अतः,$(d)-(i)$।
अतः,सही क्रम $(a)-(ii), (b)-(iii), (c)-(iv), (d)-(i)$ है।
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ChemistryMediumMCQNEET · 2021
List-$I$ को List-$II$ के साथ सुमेलित कीजिए।
List-$I$ List-$II$
$a. [Fe(CN)_{6}]^{3-}$ $i. 5.92 \ BM$
$b. [Fe(H_{2}O)_{6}]^{3+}$ $ii. 0 \ BM$
$c. [Fe(CN)_{6}]^{4-}$ $iii. 4.90 \ BM$
$d. [Fe(H_{2}O)_{6}]^{2+}$ $iv. 1.73 \ BM$

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए।
A
$a-iv, b-ii, c-i, d-iii$
B
$a-ii, b-iv, c-iii, d-i$
C
$a-i, b-iii, c-iv, d-ii$
D
$a-iv, b-i, c-ii, d-iii$

Solution

(D) चुंबकीय आघूर्ण ज्ञात करने के लिए,हम प्रत्येक संकुल में अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की संख्या $(n)$ की गणना करते हैं:
$a. [Fe(CN)_{6}]^{3-}$: $Fe^{3+}$ का विन्यास $3d^{5}$ है। $CN^-$ एक प्रबल क्षेत्र लिगेंड है,जो युग्मन करता है। $n=1$,$\mu = 1.73 \ BM$.
$b. [Fe(H_{2}O)_{6}]^{3+}$: $Fe^{3+}$ का विन्यास $3d^{5}$ है। $H_2O$ एक दुर्बल क्षेत्र लिगेंड है,युग्मन नहीं होता है। $n=5$,$\mu = 5.92 \ BM$.
$c. [Fe(CN)_{6}]^{4-}$: $Fe^{2+}$ का विन्यास $3d^{6}$ है। $CN^-$ एक प्रबल क्षेत्र लिगेंड है,जो युग्मन करता है। $n=0$,$\mu = 0 \ BM$.
$d. [Fe(H_{2}O)_{6}]^{2+}$: $Fe^{2+}$ का विन्यास $3d^{6}$ है। $H_2O$ एक दुर्बल क्षेत्र लिगेंड है,युग्मन नहीं होता है। $n=4$,$\mu = 4.90 \ BM$.
इन मानों का मिलान करने पर: $a-iv, b-i, c-ii, d-iii$.

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