AP EAMCET 2025 Chemistry Question Paper with Answer and Solution in Hindi

452 QuestionsHindiWith Solutions

ChemistryQ51150 of 452 questions

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निम्नलिखित में से कौन सी गैस ग्लोबल वार्मिंग में मुख्य योगदानकर्ता है?
A
$CO$
B
$CO_2$
C
$CH_4$
D
$N_2O$

Solution

(B) ग्लोबल वार्मिंग मुख्य रूप से ग्रीनहाउस प्रभाव के कारण होती है,जिसमें कुछ गैसें पृथ्वी के वायुमंडल में गर्मी को रोक लेती हैं।
दिए गए विकल्पों में से,कार्बन डाइऑक्साइड $(CO_2)$ ग्लोबल वार्मिंग में सबसे बड़ा योगदानकर्ता है क्योंकि जीवाश्म ईंधन के जलने और वनों की कटाई जैसी मानवीय गतिविधियों के कारण इसकी सांद्रता अधिक है।
इसलिए,सही विकल्प $B$ है।
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निम्नलिखित में से गलत कथन है:
A
क्लासिकल स्मॉग को रिड्यूसिंग स्मॉग भी कहा जाता है।
B
क्लासिकल स्मॉग के सामान्य घटक $O_3, NO, HCHO$ हैं।
C
फोटोकेमिकल स्मॉग के कारण रबर में दरारें आती हैं और धातुओं का क्षरण होता है।
D
फोटोकेमिकल स्मॉग गर्म,शुष्क और धूप वाले जलवायु में होता है।

Solution

(B) क्लासिकल स्मॉग धुएं,कोहरे और सल्फर डाइऑक्साइड $(SO_2)$ का मिश्रण है,जो एक अपचायक (reducing agent) के रूप में कार्य करता है। इसलिए,इसे रिड्यूसिंग स्मॉग कहा जाता है।
फोटोकेमिकल स्मॉग नाइट्रोजन ऑक्साइड $(NO_x)$ और हाइड्रोकार्बन पर सूर्य के प्रकाश की क्रिया से बनता है। इसके सामान्य घटकों में ओजोन $(O_3)$,नाइट्रिक ऑक्साइड $(NO)$,एक्रोलिन,फॉर्मेल्डिहाइड $(HCHO)$,और पेरोक्सीएसिटाइल नाइट्रेट $(PAN)$ शामिल हैं।
क्लासिकल स्मॉग के घटक मुख्य रूप से $SO_2$ और कणिकीय पदार्थ (particulate matter) हैं,न कि $O_3, NO, HCHO$। अतः,विकल्प $B$ में दिया गया कथन गलत है।
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निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही नहीं है?
A
ऑटोमोबाइल में मौजूद उत्प्रेरक परिवर्तक (catalytic converters) वायुमंडल में नाइट्रोजन ऑक्साइड के उत्सर्जन को रोकते हैं।
B
प्रकाश रासायनिक धूम (photochemical smog) धुएं,कोहरे और $SO_2$ का मिश्रण है।
C
क्लोरोफ्लोरोकार्बन ओजोन परत को नुकसान पहुंचाते हैं।
D
अम्ल वर्षा पानी के पाइपों को संक्षारित करती है,जिसके परिणामस्वरूप पीने के पानी में भारी धातुएं मिल जाती हैं।

Solution

(B) सही उत्तर $B$ है।
प्रकाश रासायनिक धूम मुख्य रूप से नाइट्रोजन ऑक्साइड $(NO_x)$,वाष्पशील कार्बनिक यौगिकों $(VOCs)$ और ओजोन $(O_3)$ से बना होता है,जो सूर्य के प्रकाश की क्रिया से बनते हैं।
इसमें $SO_2$ प्राथमिक घटक के रूप में नहीं होता है; $SO_2$ शास्त्रीय धूम (क्लासिकल स्मॉग) से जुड़ा है।
विकल्प $A$ सही है क्योंकि उत्प्रेरक परिवर्तक $NO_x$ उत्सर्जन को कम करते हैं।
विकल्प $C$ सही है क्योंकि $CFCs$ ओजोन क्षरण के लिए जिम्मेदार हैं।
विकल्प $D$ सही है क्योंकि अम्ल वर्षा पानी के पाइपों में भारी धातुओं की घुलनशीलता को बढ़ाती है।
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पीने के पानी में निम्नलिखित धातुओं को उनकी अधिकतम निर्धारित सांद्रता ($ppm$ में) के साथ सुमेलित करें:
List-$I$ (धातु)List-$II$ (सांद्रता $ppm$ में)
$A$. $Mn$$I$. $0.05$
$B$. $Zn$$II$. $5.0$
$C$. $Cd$$III$. $0.005$
$D$. $Cu$$IV$. $3.0$
A
$A-I, B-II, C-III, D-IV$
B
$A-I, B-IV, C-III, D-II$
C
$A-III, B-II, C-IV, D-I$
D
$A-I, B-III, C-IV, D-II$

Solution

(A) पीने के पानी की गुणवत्ता के मानकों के अनुसार:
$1$. $Mn$ की अधिकतम निर्धारित सांद्रता $0.05 \ ppm$ है।
$2$. $Zn$ की अधिकतम निर्धारित सांद्रता $5.0 \ ppm$ है।
$3$. $Cd$ की अधिकतम निर्धारित सांद्रता $0.005 \ ppm$ है।
$4$. $Cu$ की अधिकतम निर्धारित सांद्रता $3.0 \ ppm$ है।
अतः,सही मिलान $A-I, B-II, C-III, D-IV$ है।
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निम्नलिखित का मिलान करें:
सूची-$I$ (जल में प्रदूषक सांद्रता सीमा) सूची-$II$ (प्रभाव)
$A. Pb > 50 \ ppb$ $I. \text{यकृत को नुकसान}$
$B. SO_4^{2-} > 500 \ ppm$ $II. \text{रेचक प्रभाव}$
$C. NO_3^{-} > 50 \ ppm$ $III. \text{ब्लू बेबी सिंड्रोम}$
$D. F^{-} > 2 \ ppm$ $IV. \text{दांतों का भूरा होना}$
सही उत्तर है
A
$A-I, B-II, C-III, D-IV$
B
$A-I, B-II, C-IV, D-III$
C
$A-II, B-I, C-III, D-IV$
D
$A-III, B-II, C-I, D-IV$

Solution

(A) सही मिलान इस प्रकार हैं:
$A. Pb > 50 \ ppb$ से $I. \text{यकृत को नुकसान}$ होता है।
$B. SO_4^{2-} > 500 \ ppm$ से $II. \text{रेचक प्रभाव}$ होता है।
$C. NO_3^{-} > 50 \ ppm$ से $III. \text{ब्लू बेबी सिंड्रोम}$ होता है।
$D. F^{-} > 2 \ ppm$ से $IV. \text{दांतों का भूरा होना}$ होता है।
अतः,सही क्रम $A-I, B-II, C-III, D-IV$ है।
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पीने के पानी में निम्नलिखित में से किसकी अधिकता से 'मेथेमोग्लोबिनेमिया' (methemoglobinemia) रोग होता है?
A
$SO_4^{2-}$
B
$NO_3^{-}$
C
$F^{-}$
D
$Pb$

Solution

(B) मेथेमोग्लोबिनेमिया रोग,जिसे 'ब्लू बेबी सिंड्रोम' के रूप में भी जाना जाता है,पीने के पानी में नाइट्रेट $(NO_3^{-})$ की अधिकता के कारण होता है।
शरीर में जाने पर,नाइट्रेट का अपचयन नाइट्राइट $(NO_2^{-})$ में हो जाता है,जो हीमोग्लोबिन के साथ प्रतिक्रिया करके मेथेमोग्लोबिन बनाता है।
मेथेमोग्लोबिन ऑक्सीजन का प्रभावी ढंग से परिवहन करने में असमर्थ होता है,जिससे रक्त में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है।
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निम्नलिखित यौगिक का $IUPAC$ नाम क्या है?
Question diagram
A
$6-$एथिल$-9-$मेथिल$-4-$ब्रोमोडेक$-5-$ईन$-7-$ऑल
B
$7-$ब्रोमो$-2-$मेथिल$-5-$एथिलडेक$-5-$ईन$-4-$ऑल
C
$7-$ब्रोमो$-5-$एथिल$-2-$मेथिलडेक$-5-$ईन$-4-$ऑल
D
$4-$ब्रोमो$-6-$एथिल$-9-$मेथिलडेक$-5-$ईन$-7-$ऑल

Solution

(C) $1$. मुख्य क्रियात्मक समूह $(-OH)$ और द्वि-आबंध युक्त सबसे लंबी कार्बन श्रृंखला की पहचान करें। श्रृंखला में $10$ कार्बन हैं,इसलिए जनक एल्केन डेकेन है।
$2$. श्रृंखला का अंकन उस सिरे से करें जो $-OH$ समूह को न्यूनतम संभव स्थान दे। दाईं से बाईं ओर अंकन करने पर $-OH$ समूह $4$थे स्थान पर आता है।
$3$. प्रतिस्थापी हैं: $7$ पर ब्रोमो,$5$ पर एथिल,और $2$ पर मेथिल।
$4$. प्रतिस्थापियों का वर्णानुक्रम: ब्रोमो,एथिल,मेथिल।
$5$. इन्हें संयोजित करने पर,$IUPAC$ नाम $7-$ब्रोमो$-5-$एथिल$-2-$मेथिलडेक$-5-$ईन$-4-$ऑल है।
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$IUPAC$ नामकरण पद्धति में कार्बनिक यौगिकों के कार्यात्मक समूहों के लिए प्राथमिकता का सही घटता क्रम क्या है?
A
$-COCl > -CONH_2 > -CHO > -OH$
B
$-CONH_2 > -CHO > -COCl > -OH$
C
$-COCl > -CHO > -CONH_2 > -OH$
D
$-CHO > -CONH_2 > -COCl > -OH$

Solution

(A) $IUPAC$ कार्यात्मक समूह प्राथमिकता नियमों के अनुसार,प्राथमिकता का क्रम इस प्रकार है:
$1$. एसिड हैलाइड $(-COCl)$
$2$. एमाइड $(-CONH_2)$
$3$. एल्डिहाइड $(-CHO)$
$4$. अल्कोहल $(-OH)$
अतः,सही घटता क्रम $-COCl > -CONH_2 > -CHO > -OH$ है।
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मेसिटिल ऑक्साइड और ऑक्सेलिक एसिड के $IUPAC$ नाम क्रमशः क्या हैं?
A
$4-$मिथाइलपेंट$-3-$ईन$-2-$ओन; इथेनडायोइक एसिड
B
$4-$मिथाइलपेंट$-3-$ईन$-2-$ओन; प्रोपेनडायोइक एसिड
C
$3-$मिथाइलपेंट$-3-$ईन$-2-$ओन; प्रोपेनडायोइक एसिड
D
$3-$मिथाइलपेंट$-3-$ईन$-2-$ओन; इथेनडायोइक एसिड

Solution

(A) मेसिटिल ऑक्साइड एक $\alpha,\beta-$असंतृप्त कीटोन है जिसकी संरचना $(CH_3)_2C=CHCOCH_3$ है। कीटोन समूह युक्त सबसे लंबी कार्बन श्रृंखला में $5$ कार्बन हैं। कीटोन समूह के निकटतम सिरे से अंकन करने पर इसका नाम $4-$मिथाइलपेंट$-3-$ईन$-2-$ओन होता है।
ऑक्सेलिक एसिड $(COOH)_2$ सूत्र वाला सबसे सरल डाइकार्बोक्सिलिक एसिड है। इसका $IUPAC$ नाम इथेनडायोइक एसिड है।
अतः,सही $IUPAC$ नाम $4-$मिथाइलपेंट$-3-$ईन$-2-$ओन और इथेनडायोइक एसिड हैं।
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निम्नलिखित यौगिक का $IUPAC$ नाम क्या है?
Question diagram
A
$3-$एथिल$-5-$मेथिलहेक्सेन
B
$4-$एथिल$-2-$मेथिलहेक्सेन
C
$2-$मेथिल$-4-$एथिलहेक्सेन
D
$5-$मेथिल$-3-$एथिलहेक्सेन

Solution

(B) $1$. सबसे लंबी कार्बन श्रृंखला की पहचान करें। सबसे लंबी श्रृंखला में $6$ कार्बन परमाणु हैं,इसलिए मुख्य एल्केन हेक्सेन है।
$2$. श्रृंखला को उस सिरे से क्रमांकित करें जो प्रतिस्थापियों को सबसे कम स्थान (locants) दे। बाएं से दाएं क्रमांकित करने पर प्रतिस्थापी $2$ और $4$ स्थान पर मिलते हैं। दाएं से बाएं क्रमांकित करने पर प्रतिस्थापी $3$ और $5$ स्थान पर मिलते हैं। अतः,सही क्रम बाएं से दाएं है।
$3$. प्रतिस्थापी $2$ स्थान पर मेथिल समूह और $4$ स्थान पर एथिल समूह हैं।
$4$. $IUPAC$ नियमों के अनुसार,प्रतिस्थापियों को वर्णानुक्रम (alphabetical order) में लिखा जाता है। इसलिए,एथिल,मेथिल से पहले आता है।
$5$. इस प्रकार,$IUPAC$ नाम $4-$एथिल$-2-$मेथिलहेक्सेन है।
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दिए गए यौगिकों $(I)$ और $(II)$ के $IUPAC$ नाम क्रमशः क्या हैं?
Question diagram
A
$5-$फेनिल$-3-$नाइट्रोब्यूटेन; $2-$एथिल$-2-$मेथिल$-1-$प्रोपिलसाइक्लोहेक्सेन
B
$2-$नाइट्रो$-1-$फेनिलब्यूटेन; $2-$एथिल$-2-$मेथिल$-1-$प्रोपिलसाइक्लोहेक्सेन
C
$2-$नाइट्रो$-1-$फेनिलब्यूटेन; $1-$एथिल$-1-$मेथिल$-2-$प्रोपिलसाइक्लोहेक्सेन
D
$3-$नाइट्रो$-5-$फेनिलब्यूटेन; $1-$एथिल$-1-$मेथिल$-2-$प्रोपिलसाइक्लोहेक्सेन

Solution

(C) यौगिक $(I)$ के लिए: नाइट्रो समूह युक्त सबसे लंबी कार्बन श्रृंखला में $4$ कार्बन हैं। अंकन नाइट्रो समूह के निकटतम सिरे से शुरू होता है। फेनिल समूह $1$ स्थान पर है। अतः,नाम $2-$नाइट्रो$-1-$फेनिलब्यूटेन है।
यौगिक $(II)$ के लिए: वलय साइक्लोहेक्सेन है। प्रतिस्थापी $1$ और $2$ स्थानों पर हैं। वर्णानुक्रम के अनुसार,एथिल,मेथिल और प्रोपिल से पहले आता है। अंकन प्रतिस्थापियों को सबसे कम स्थान देने के लिए किया जाता है। सही अंकन $1-$एथिल$-1-$मेथिल$-2-$प्रोपिलसाइक्लोहेक्सेन देता है।
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यौगिक $(X)$ में अतिसंयुग्मन (hyperconjugation) उपस्थित है और $(Y)$ में अनुनाद प्रभाव (resonance effect) उपस्थित है। क्रमशः $X$ और $Y$ क्या हैं?
A
टोल्यूनि,प्रोप$-2-$ईन$-1-$ऑल
B
एनिलिन,$2-$प्रोपेनल
C
टोल्यूनि,नाइट्रोबेंजीन
D
$1-$ब्रोमोप्रोपेन,फिनोल

Solution

(C) अतिसंयुग्मन के लिए $sp^2$ संकरित कार्बन परमाणु से जुड़े $\alpha-$हाइड्रोजन परमाणु की आवश्यकता होती है। टोल्यूनि $(C_6H_5CH_3)$ में,मिथाइल समूह में बेंजीन रिंग से जुड़े तीन $\alpha-$हाइड्रोजन होते हैं,जो अतिसंयुग्मन प्रदर्शित करते हैं।
अनुनाद प्रभाव में $\pi-$इलेक्ट्रॉनों या एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्मों का विस्थानीकरण शामिल होता है। नाइट्रोबेंजीन $(C_6H_5NO_2)$ में,नाइट्रो समूह बेंजीन रिंग के साथ संयुग्मन में होता है,जो एक मजबूत अनुनाद प्रभाव ($-M$ प्रभाव) प्रदर्शित करता है।
अतः,$X$ टोल्यूनि है और $Y$ नाइट्रोबेंजीन है।
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निम्नलिखित में से सबसे अधिक स्थिर कार्बोनियम आयन (carbocation) की पहचान करें:
A
साइक्लोहेक्सिल धनायन
B
साइक्लोहेक्स$-2-$ईन$-1-$इल धनायन
C
$1-$मिथाइल$-2-$फिनाइलसाइक्लोहेक्स$-2-$ईन$-1-$इल धनायन
D
($3$-फिनाइलसाइक्लोहेक्सिल)मिथाइल धनायन

Solution

(C) कार्बोकेशन की स्थिरता अनुनाद (resonance),अतिसंयुग्मन (hyperconjugation) और प्रेरणिक प्रभाव (inductive effects) जैसे कारकों द्वारा निर्धारित की जाती है।
$A$: साइक्लोहेक्सिल धनायन एक द्वितीयक कार्बोकेशन है जिसमें कोई अनुनाद स्थिरीकरण नहीं होता है।
$B$: साइक्लोहेक्स$-2-$ईन$-1-$इल धनायन एक एलिलिक कार्बोकेशन है,जो निकटवर्ती द्वि-आबंध के साथ अनुनाद द्वारा स्थिर होता है।
$C$: $1-$मिथाइल$-2-$फिनाइलसाइक्लोहेक्स$-2-$ईन$-1-$इल धनायन एक तृतीयक एलिलिक कार्बोकेशन है। यह निकटवर्ती द्वि-आबंध और फिनाइल समूह के साथ अनुनाद द्वारा,और साथ ही मिथाइल समूह के प्रेरणिक प्रभाव द्वारा स्थिर होता है। धनात्मक आवेश का यह व्यापक विस्थानीकरण इसे दिए गए विकल्पों में सबसे अधिक स्थिर बनाता है।
$D$: ($3$-फिनाइलसाइक्लोहेक्सिल)मिथाइल धनायन एक प्राथमिक कार्बोकेशन है,जो आमतौर पर सबसे कम स्थिर होता है।
इसलिए,सबसे अधिक स्थिर कार्बोकेशन विकल्प $C$ में है।
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सेट $I$,$II$,और $III$ पर विचार करें। पहचानें कि कौन सा/से सेट सही ढंग से मेल खाते हैं।
$I$. $\text{स्टैगर्ड इथेन} > \text{इक्लिप्स्ड इथेन} \dots \dots \dots \text{टॉरशनल स्ट्रेन}$.
$II$. $2, 2-\text{डाइमिथाइल ब्यूटेन} > 2-\text{मिथाइल पेंटेन} \dots \dots \dots \text{क्वथनांक}$.
$III$. $cis-\text{ब्यूट}-2-\text{ईन} > trans-\text{ब्यूट}-2-\text{ईन} \dots \dots \dots \text{द्विध्रुव आघूर्ण}$.
A
केवल $I, II$
B
केवल $II, III$
C
केवल $III$
D
$I, II, III$

Solution

(C) $I$. आसन्न कार्बन पर हाइड्रोजन परमाणुओं के बीच प्रतिकर्षण के कारण इक्लिप्स्ड इथेन में टॉरशनल स्ट्रेन अधिक होता है। अतः,$\text{स्टैगर्ड इथेन} < \text{इक्लिप्स्ड इथेन}$। यह कथन गलत है।
$II$. $2, 2-\text{डाइमिथाइल ब्यूटेन}$,$2-\text{मिथाइल पेंटेन}$ की तुलना में अधिक शाखित है। शाखाओं में वृद्धि से सतह का क्षेत्रफल कम हो जाता है,जिससे वैन डेर वाल्स बल कमजोर हो जाते हैं और क्वथनांक कम हो जाता है। अतः,$2, 2-\text{डाइमिथाइल ब्यूटेन} < 2-\text{मिथाइल पेंटेन}$। यह कथन गलत है।
$III$. $cis-\text{ब्यूट}-2-\text{ईन}$ में मिथाइल समूहों के एक ही तरफ अभिविन्यास के कारण नेट द्विध्रुव आघूर्ण होता है,जबकि $trans-\text{ब्यूट}-2-\text{ईन}$ में समरूपता के कारण नेट द्विध्रुव आघूर्ण शून्य होता है। अतः,$cis-\text{ब्यूट}-2-\text{ईन} > trans-\text{ब्यूट}-2-\text{ईन}$। यह कथन सही है।
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बहुत उच्च क्वथनांक वाले द्रवों और उन द्रवों को शुद्ध करने के लिए किस विधि का उपयोग किया जाता है जो अपने क्वथनांक पर या उससे नीचे विघटित हो जाते हैं?
A
आसवन
B
प्रभाजी आसवन
C
कम दबाव पर आसवन
D
भाप आसवन

Solution

(C) बहुत उच्च क्वथनांक वाले या अपने क्वथनांक पर या उससे नीचे विघटित होने वाले द्रवों को साधारण आसवन द्वारा शुद्ध नहीं किया जा सकता है क्योंकि वे वाष्पित होने से पहले ही विघटित हो जाएंगे।
इन मामलों में कम दबाव पर आसवन (जिसे वैक्यूम डिस्टिलेशन भी कहा जाता है) का उपयोग किया जाता है।
द्रव के ऊपर के दबाव को कम करके,द्रव का क्वथनांक कम हो जाता है,जिससे यह अपने विघटन बिंदु से नीचे के तापमान पर उबल और वाष्पित हो सकता है।
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वह तत्व जिसका प्रतिशत संघटन कार्बनिक यौगिक में कैरियस विधि द्वारा निर्धारित किया जा सकता है,वह है
A
नाइट्रोजन
B
सल्फर
C
कार्बन
D
ऑक्सीजन

Solution

(B) कैरियस विधि कार्बनिक यौगिकों में हैलोजन,सल्फर और फास्फोरस के मात्रात्मक आकलन के लिए उपयोग की जाने वाली एक मानक विश्लेषणात्मक तकनीक है।
इस विधि में,कार्बनिक यौगिक के एक ज्ञात द्रव्यमान को कैरियस ट्यूब नामक कठोर कांच की नली में धूम्रायमान नाइट्रिक एसिड के साथ गर्म किया जाता है।
सल्फर का ऑक्सीकरण सल्फ्यूरिक एसिड में हो जाता है,जिसे बाद में बेरियम क्लोराइड $(BaCl_2)$ मिलाकर बेरियम सल्फेट $(BaSO_4)$ के रूप में अवक्षेपित किया जाता है।
इसलिए,दिए गए विकल्पों में से,सल्फर वह तत्व है जिसे इस विधि द्वारा निर्धारित किया जाता है।
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जब एथिल ब्रोमाइड और $n$-प्रोपिल ब्रोमाइड को शुष्क ईथर में $Na$ धातु के साथ अभिक्रिया कराई जाती है,तो बनने वाले विभिन्न एल्केन की संख्या है
A
$1$
B
$2$
C
$3$
D
$4$

Solution

(C) दो अलग-अलग एल्किल हैलाइड के मिश्रण की शुष्क ईथर में $Na$ धातु के साथ अभिक्रिया को वुर्ट्ज़ अभिक्रिया कहा जाता है।
जब एथिल ब्रोमाइड $(C_2H_5Br)$ और $n$-प्रोपिल ब्रोमाइड $(C_3H_7Br)$ के मिश्रण की शुष्क ईथर में $Na$ के साथ अभिक्रिया होती है,तो एल्किल रेडिकल के जुड़ने के कारण तीन अलग-अलग एल्केन बनते हैं:
$1$. दो एथिल रेडिकल का जुड़ना: $C_2H_5-C_2H_5$ ($n$-ब्यूटेन)
$2$. दो $n$-प्रोपिल रेडिकल का जुड़ना: $C_3H_7-C_3H_7$ ($n$-हेक्सेन)
$3$. एक एथिल और एक $n$-प्रोपिल रेडिकल का क्रॉस-कपलिंग: $C_2H_5-C_3H_7$ ($n$-पेंटेन)
इस प्रकार,कुल $3$ अलग-अलग एल्केन बनते हैं।
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निम्नलिखित अभिक्रियाओं के सेट में $X$ और $Y$ क्रमशः क्या हैं?
$I. \ CH_3CH_2CH_2OH \xrightarrow{PBr_3} X$
$II. \ CH_3CH=CH_2 \xrightarrow{HBr, (C_6H_5COO)_2} Y \text{ (मुख्य)}$
A
$CH_3CH(Br)CH_3, \ CH_3CH_2CH_2Br$
B
$CH_3CH_2CH_2Br, \ CH_3CH_2CH_2Br$
C
$CH_3CH_2CH_2Br, \ CH_3CH(Br)CH_3$
D
$CH_3CH(Br)CH_3, \ CH_3CH(Br)CH_3$

Solution

(B) अभिक्रिया $I$ में,$n$-प्रोपेनॉल की $PBr_3$ के साथ अभिक्रिया एक न्यूक्लियोफिलिक प्रतिस्थापन अभिक्रिया ($S_N2$ क्रियाविधि) है जो अल्कोहल समूह को ब्रोमाइड में परिवर्तित करती है,जिससे $n$-प्रोपाइल ब्रोमाइड $(CH_3CH_2CH_2Br)$ प्राप्त होता है।
अभिक्रिया $II$ में,बेंज़ोयल पेरोक्साइड $((C_6H_5COO)_2)$ की उपस्थिति में प्रोपीन की $HBr$ के साथ अभिक्रिया एंटी-मार्कोवनिकोव योग क्रियाविधि (पेरोक्साइड प्रभाव या खराश प्रभाव) के माध्यम से होती है। इसके परिणामस्वरूप मुख्य उत्पाद के रूप में $n$-प्रोपाइल ब्रोमाइड $(CH_3CH_2CH_2Br)$ बनता है।
अतः,$X = CH_3CH_2CH_2Br$ और $Y = CH_3CH_2CH_2Br$.
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निम्नलिखित पर विचार करें:
कथन-$I$ : सोडियम प्रोपियोनेट के कोल्बे विद्युत-अपघटन से उत्पाद के रूप में $n$-हेक्सेन प्राप्त होता है।
कथन-$II$ : कोल्बे प्रक्रिया में एनोड पर $CO_2$ मुक्त होती है और कैथोड पर $H_2$ मुक्त होती है।
सही उत्तर है:
A
कथन-$I$ और कथन-$II$ दोनों सही हैं।
B
कथन-$I$ और कथन-$II$ दोनों गलत हैं।
C
कथन-$I$ सही है,लेकिन कथन-$II$ गलत है।
D
कथन-$I$ गलत है,लेकिन कथन-$II$ सही है।

Solution

(D) कोल्बे विद्युत-अपघटन में,अभिक्रिया $2CH_3CH_2COONa + 2H_2O \xrightarrow{\text{electrolysis}} CH_3CH_2CH_2CH_2CH_3 + 2CO_2 + H_2 + 2NaOH$ है।
कथन-$I$: सोडियम प्रोपियोनेट $(CH_3CH_2COONa)$ का विद्युत-अपघटन करने पर $n$-ब्यूटेन $(CH_3CH_2CH_2CH_3)$ प्राप्त होता है,न कि $n$-हेक्सेन। अतः,कथन-$I$ गलत है।
कथन-$II$: कार्बोक्सिलिक एसिड के सोडियम लवणों के विद्युत-अपघटन के दौरान,एनोड पर $CO_2$ और कैथोड पर $H_2$ मुक्त होती है। अतः,कथन-$II$ सही है।
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दी गई अभिक्रिया श्रृंखला में '$Z$' का मूलानुपाती सूत्र भार क्या है ($.5$ में)?
$n$-propyl bromide $\xrightarrow[\text{Dry ether}]{Na} X$ $\xrightarrow[\substack{773 \ K \\ 20 \ atm}]{V_2O_5} Y$ $\xrightarrow[\substack{UV \\ 500 \ K}]{Cl_2} Z$
A
$47$
B
$54$
C
$84$
D
$48$

Solution

(D) $1$. $n$-propyl bromide $(CH_3CH_2CH_2Br)$,$Na$ के साथ शुष्क ईथर में अभिक्रिया करके $n$-hexane $(X)$ बनाता है।
$2$. $n$-hexane $(X)$,$V_2O_5$ की उपस्थिति में $773 \ K$ और $20 \ atm$ पर बेंजीन $(Y)$ बनाता है।
$3$. बेंजीन $(Y)$,$UV$ प्रकाश में $Cl_2$ के साथ अभिक्रिया करके $C_6H_6Cl_6$ $(BHC)$ $(Z)$ बनाता है।
$4$. $C_6H_6Cl_6$ का मूलानुपाती सूत्र $CHCl$ है।
$5$. मूलानुपाती सूत्र भार = $12 + 1 + 35.5 = 48.5$.
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$n$-ऐल्केन का शाखित श्रृंखला वाले ऐल्केन में समावयवीकरण (isomerisation) के लिए उपयोग किया जाने वाला उत्प्रेरक है
A
निर्जल $AlCl_3 / HCl$
B
$Mo_2O_3$
C
$FeCl_3$
D
$TiCl_4 + R_3Al$

Solution

(A) $n$-ऐल्केन का शाखित श्रृंखला वाले ऐल्केन में समावयवीकरण ईंधन की ऑक्टेन रेटिंग को सुधारने के लिए उपयोग की जाने वाली एक प्रक्रिया है।
यह अभिक्रिया सामान्यतः निर्जल $AlCl_3$ और $HCl$ गैस जैसे लुईस अम्ल उत्प्रेरक की उपस्थिति में की जाती है।
अतः,सही उत्प्रेरक निर्जल $AlCl_3 / HCl$ है।
72
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निम्नलिखित अभिक्रिया अनुक्रम में $Z$ क्या है?
$C_3H_6$ $\xrightarrow[CCl_4]{Br_2} \underset{\text{(रंगहीन)}}{X}$ $\xrightarrow[\text{(ii) } NaNH_2, \Delta]{\text{(i) } KOH / \text{alcohol}} Y$ $\xrightarrow[\substack{Hg^{2+}, H^{+} \\ 333 \ K}]{H_2O} Z$
A
एसीटोन
B
प्रोपेनल
C
प्रोपेनॉल-$2$
D
मेथॉक्सी इथेन

Solution

(A) चरण $1$: $C_3H_6$ (प्रोपीन) $CCl_4$ में $Br_2$ के साथ अभिक्रिया करके $X$ बनाता है,जो $1,2$-डाइब्रोमोप्रोपेन $(CH_3-CHBr-CH_2Br)$ है।
चरण $2$: $1,2$-डाइब्रोमोप्रोपेन अल्कोहलिक $KOH$ और उसके बाद $NaNH_2$ व ऊष्मा के साथ अभिक्रिया करके $Y$ बनाता है,जो $CH_3-C \equiv CH$ (प्रोपाइन) है।
चरण $3$: प्रोपाइन $Hg^{2+}$ और $H^+$ की उपस्थिति में $333 \ K$ पर जलयोजन (कुचेरोव अभिक्रिया) द्वारा एक इनोल मध्यवर्ती बनाता है,जो चलावयवता (tautomerization) के माध्यम से $Z$ यानी $CH_3-CO-CH_3$ (एसीटोन) में परिवर्तित हो जाता है।
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निम्नलिखित अभिक्रियाओं के समूह में $B$ और $C$ क्रमशः क्या हैं?
$C \xleftarrow[\Delta]{Zn} 1,2-\text{डाइब्रोमोप्रोपेन}$ $\xrightarrow[\text {(ii) } NaNH_2]{\text {(i) alc. } KOH} A$ $\xrightarrow[\text { Catalyst }]{\text { Lindlar }} B$
A
प्रोपीन,प्रोपीन
B
प्रोपेन,प्रोपेन
C
प्रोपीन,प्रोपेन
D
प्रोपेन,प्रोपीन

Solution

(A) $1,2-\text{डाइब्रोमोप्रोपेन}$ की $Zn$ और $\Delta$ के साथ अभिक्रिया (डीहैलोजनीकरण) $C = \text{प्रोपीन}$ $(CH_3-CH=CH_2)$ देती है।
$1,2-\text{डाइब्रोमोप्रोपेन}$ की $(i)$ $\text{alc. } KOH$ और (ii) $NaNH_2$ के साथ अभिक्रिया (डीहाइड्रोहैलोजनीकरण) $A = \text{प्रोपाइन}$ $(CH_3-C \equiv CH)$ देती है।
$A$ $(\text{प्रोपाइन})$ का $\text{Lindlar catalyst}$ का उपयोग करके हाइड्रोजनीकरण करने पर $B = \text{प्रोपीन}$ $(CH_3-CH=CH_2)$ प्राप्त होता है।
अतः,$B$ $\text{प्रोपीन}$ है और $C$ $\text{प्रोपीन}$ है।
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बकमिन्स्टरफुलरीन $(C_{60})$ में,छह-सदस्यीय कार्बन वलयों की संख्या '$x$' है और पांच-सदस्यीय कार्बन वलयों की संख्या '$y$' है। $(x+y)$ का मान है
A
$30$
B
$31$
C
$32$
D
$33$

Solution

(C) बकमिन्स्टरफुलरीन $(C_{60})$ कार्बन का एक अपरूप है जिसमें $60$ कार्बन परमाणु एक फुटबॉल जैसी संरचना में व्यवस्थित होते हैं।
इसमें $20$ छह-सदस्यीय वलय $(x = 20)$ और $12$ पांच-सदस्यीय वलय $(y = 12)$ होते हैं।
अतः,$(x+y)$ का मान $20 + 12 = 32$ है।
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निम्नलिखित अभिक्रिया अनुक्रम पर विचार करें:
विनाइल बेंजीन $\xrightarrow[\Delta]{KMnO_4+KOH} X$ $\xrightarrow[\Delta]{NaOH+CaO} Y$
'$Y$' को निम्नलिखित में से किससे भी बनाया जा सकता है?
A
एथिलीन का बहुलकीकरण
B
प्रोपाइन का बहुलकीकरण
C
$n-$हेक्सेन का एरोमैटिकरण
D
$n-$हेप्टेन का एरोमैटिकरण

Solution

(C) $1$. विनाइल बेंजीन $(C_6H_5-CH=CH_2)$ का क्षारीय $KMnO_4$ के साथ ऑक्सीकरण और गर्म करने पर साइड चेन का ऑक्सीडेटिव विदलन होता है,जिससे पोटेशियम बेंजोएट $(C_6H_5COOK)$ प्राप्त होता है,जो अम्लीकरण के बाद बेंजोइक एसिड $(C_6H_5COOH)$ देता है। अतः,$X$ बेंजोइक एसिड है।
$2$. बेंजोइक एसिड $(C_6H_5COOH)$ को सोडालाइम $(NaOH+CaO)$ के साथ गर्म करने पर (डीकार्बोक्सिलेशन) बेंजीन $(C_6H_6)$ प्राप्त होता है। अतः,$Y$ बेंजीन है।
$3$. बेंजीन को $n-$हेक्सेन $(C_6H_{14})$ के एरोमैटिकरण (डीहाइड्रोसाइक्लाइजेशन) द्वारा $Cr_2O_3/Al_2O_3$ जैसे उत्प्रेरकों की उपस्थिति में उच्च तापमान और दबाव पर तैयार किया जा सकता है।
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निम्नलिखित अभिक्रियाओं के समूह में मुख्य उत्पाद $X$ और $Y$ क्रमशः क्या हैं?
Question diagram
A
$m$-ब्रोमोबेंजोइक एसिड,$p$-ब्रोमोटोल्यूइन
B
$p$-ब्रोमोबेंजोइक एसिड,$p$-ब्रोमोटोल्यूइन
C
$p$-ब्रोमोबेंजोइक एसिड,$m$-ब्रोमोटोल्यूइन
D
$m$-ब्रोमोबेंजोइक एसिड,$p$-ब्रोमोटोल्यूइन

Solution

(D) $Fe$ (अंधेरे में) की उपस्थिति में बेंजोइक एसिड $(C_6H_5COOH)$ की $Br_2$ के साथ अभिक्रिया एक इलेक्ट्रोफिलिक एरोमैटिक प्रतिस्थापन है। $-COOH$ समूह एक निष्क्रिय करने वाला और मेटा-निर्देशकारी समूह है,इसलिए मुख्य उत्पाद $X$ $m$-ब्रोमोबेंजोइक एसिड है।
$Fe$ (अंधेरे में) की उपस्थिति में टोल्यूइन $(C_6H_5CH_3)$ की $Br_2$ के साथ अभिक्रिया भी एक इलेक्ट्रोफिलिक एरोमैटिक प्रतिस्थापन है। $-CH_3$ समूह एक सक्रिय करने वाला और ऑर्थो/पैरा-निर्देशकारी समूह है। ऑर्थो स्थिति पर त्रिविम बाधा (steric hindrance) के कारण,मुख्य उत्पाद $Y$ $p$-ब्रोमोटोल्यूइन है।
अतः,मुख्य उत्पाद $m$-ब्रोमोबेंजोइक एसिड और $p$-ब्रोमोटोल्यूइन हैं।
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निम्नलिखित अभिक्रियाओं का अवलोकन करें:
$I$. $N_{2(g)} + 3H_{2(g)} \xrightarrow[773 \ K, \ 200 \ atm]{X} 2NH_{3(g)}$
$II$. $CO_{(g)} + H_{2}O_{(g)} \xrightarrow[673 \ K]{Y} CO_{2(g)} + H_{2(g)}$
$III$. $CH_{4(g)} + H_{2}O_{(g)} \xrightarrow[1270 \ K]{Z} CO_{(g)} + 3H_{2(g)}$
उत्प्रेरक $X$,$Y$ और $Z$ क्रमशः क्या हैं?
A
आयरन,सोडियम आर्सेनाइट,कोबाल्ट
B
आयरन,जिंक,कोबाल्ट
C
कोबाल्ट,जिंक,निकेल
D
आयरन,आयरन क्रोमेट,निकेल

Solution

(D) दी गई अभिक्रियाएं हाइड्रोजन और अमोनिया के उत्पादन के लिए औद्योगिक प्रक्रियाएं हैं:
$I$. यह अमोनिया के संश्लेषण के लिए हैबर प्रक्रिया है,जहाँ $X$ $Fe$ (आयरन) है।
$II$. यह वॉटर-गैस शिफ्ट अभिक्रिया है,जहाँ $Y$ $FeCrO_4$ (आयरन क्रोमेट) है।
$III$. यह मीथेन का स्टीम रिफॉर्मिंग है,जहाँ $Z$ $Ni$ (निकेल) है।
अतः,उत्प्रेरक $X$,$Y$ और $Z$ क्रमशः आयरन,आयरन क्रोमेट और निकेल हैं।
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निम्नलिखित में से कौन सा कथन गलत है?
A
आयनिक हाइड्राइड प्रकृति में क्रिस्टलीय होते हैं।
B
समूह $14$ के तत्व इलेक्ट्रॉन-सटीक (electron-precise) हाइड्राइड बनाते हैं।
C
सहसंयोजक हाइड्राइड अवाष्पशील यौगिक होते हैं।
D
सामान्यतः,लवणीय हाइड्राइड पानी के साथ हिंसक रूप से प्रतिक्रिया करते हैं।

Solution

(C) $1$. आयनिक (या लवणीय) हाइड्राइड $s$-ब्लॉक तत्वों द्वारा निर्मित स्टोइकोमेट्रिक यौगिक हैं। ये ठोस अवस्था में क्रिस्टलीय,अवाष्पशील और कुचालक होते हैं। ये पानी के साथ तीव्र प्रतिक्रिया करके $H_2$ गैस उत्पन्न करते हैं।
$2$. समूह $14$ के तत्व (जैसे $CH_4$,$SiH_4$) सामान्य सहसंयोजक बंध बनाने के लिए आवश्यक इलेक्ट्रॉन रखते हैं,इसलिए इन्हें इलेक्ट्रॉन-सटीक हाइड्राइड कहा जाता है।
$3$. सहसंयोजक (या आणविक) हाइड्राइड आमतौर पर कम क्वथनांक और गलनांक वाले वाष्पशील यौगिक होते हैं,क्योंकि ये कमजोर वैन डर वाल्स बलों द्वारा जुड़े होते हैं। अतः,यह कथन कि सहसंयोजक हाइड्राइड अवाष्पशील होते हैं,गलत है।
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तत्वों का कौन सा समूह इलेक्ट्रॉन प्रिसाइज़ (सटीक) हाइड्राइड बनाता है?
A
$B, Al, Ga$
B
$C, Si, Ge$
C
$N, P, As$
D
$B, C, N$

Solution

(B) इलेक्ट्रॉन प्रिसाइज़ हाइड्राइड आवर्त सारणी के समूह $14$ के तत्वों द्वारा बनाए जाते हैं।
इन तत्वों के पास आवश्यक सहसंयोजक बंध बनाने के लिए आवश्यक इलेक्ट्रॉनों की सटीक संख्या होती है (जैसे,$CH_4$,$SiH_4$,$GeH_4$)।
दिए गए विकल्पों में से,$C, Si, Ge$ समूह $14$ से संबंधित हैं और इसलिए ये इलेक्ट्रॉन प्रिसाइज़ हाइड्राइड बनाते हैं।
80
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उस हाइड्राइड की पहचान करें जो कोष्ठक में दिए गए उदाहरण के साथ सही ढंग से मेल नहीं खाता है?
A
सेलाइन हाइड्राइड - $(NaH)$
B
इलेक्ट्रॉन समृद्ध हाइड्राइड - $(H_2O)$
C
इलेक्ट्रॉन न्यून हाइड्राइड - $(B_2H_6)$
D
इलेक्ट्रॉन परिशुद्ध हाइड्राइड - $(HF)$

Solution

(D) हाइड्राइड का वर्गीकरण उनकी इलेक्ट्रॉनिक संरचना के आधार पर किया जाता है:
$1$. सेलाइन (आयनिक) हाइड्राइड: $s$-ब्लॉक तत्वों द्वारा निर्मित,उदा.,$(NaH)$।
$2$. इलेक्ट्रॉन न्यून हाइड्राइड: बंधन के लिए आवश्यक इलेक्ट्रॉनों से कम इलेक्ट्रॉन होते हैं,उदा.,$(B_2H_6)$।
$3$. इलेक्ट्रॉन परिशुद्ध हाइड्राइड: बंधन के लिए इलेक्ट्रॉनों की सटीक संख्या होती है,उदा.,$(CH_4)$।
$4$. इलेक्ट्रॉन समृद्ध हाइड्राइड: इलेक्ट्रॉनों के एकाकी युग्म (lone pairs) होते हैं,उदा.,$(H_2O, NH_3, HF)$।
विकल्प $(D)$ में,$(HF)$ एक इलेक्ट्रॉन समृद्ध हाइड्राइड है क्योंकि फ्लोरीन परमाणु पर एकाकी युग्म होते हैं,न कि इलेक्ट्रॉन परिशुद्ध हाइड्राइड। इसलिए,$(D)$ गलत तरीके से मेल खाता है।
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निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
कथन-$I$: $H_2O_2$ अम्लीय और क्षारीय दोनों माध्यमों में ऑक्सीकरण और अपचायक एजेंट के रूप में कार्य करता है।
कथन-$II$: $10 \ V \ H_2O_2$ नमूने का अर्थ है कि इसमें $3.03\% \ (w/v) \ H_2O_2$ होता है।
A
कथन-$I$ और कथन-$II$ दोनों सही हैं
B
कथन-$I$ सही है,लेकिन कथन-$II$ सही नहीं है
C
कथन-$I$ सही नहीं है,लेकिन कथन-$II$ सही है
D
कथन-$I$ और कथन-$II$ दोनों सही नहीं हैं।

Solution

(B) कथन-$I$ सही है: $H_2O_2$ में ऑक्सीजन की ऑक्सीकरण अवस्था $-1$ होती है। यह $H_2O$ (ऑक्सीकरण अवस्था $-2$) में अपचयित हो सकता है या $O_2$ (ऑक्सीकरण अवस्था $0$) में ऑक्सीकृत हो सकता है,जिससे यह अम्लीय और क्षारीय दोनों माध्यमों में ऑक्सीकरण और अपचायक एजेंट के रूप में कार्य कर सकता है।
कथन-$II$ गलत है: $10 \ V \ H_2O_2$ का अर्थ है कि $1 \ mL \ H_2O_2$ घोल $STP$ पर $10 \ mL \ O_2$ देता है।
अपघटन अभिक्रिया: $2H_2O_2 \rightarrow 2H_2O + O_2$.
$2 \times 34 \ g \ H_2O_2$,$STP$ पर $22400 \ mL \ O_2$ उत्पन्न करता है।
अतः,$22400 \ mL \ O_2$ का उत्पादन $68 \ g \ H_2O_2$ द्वारा होता है।
$10 \ mL \ O_2$ का उत्पादन $(68 \times 10) / 22400 \approx 0.03036 \ g \ H_2O_2$ द्वारा होता है।
चूंकि यह $1 \ mL$ घोल में है,सांद्रता $0.03036 \ g/mL$ है,जो $3.03\% \ (w/v)$ है। कथन में $6\%$ दिया गया है,जो गलत है।
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$D_2O$ के लिए निम्नलिखित में से कौन सा गुण $H_2O$ से कम है?
A
परावैद्युत स्थिरांक (Dielectric constant)
B
श्यानता (Viscosity)
C
घनत्व (Density)
D
गलनांक (Melting point)

Solution

(A) $D_2O$ (भारी जल) के भौतिक गुण सामान्यतः $H_2O$ से अधिक होते हैं,जिसका कारण मजबूत हाइड्रोजन बंधन और उच्च आणविक द्रव्यमान है।
विशेष रूप से,$298 \ K$ पर $D_2O$ का परावैद्युत स्थिरांक $78.06$ है,जबकि $298 \ K$ पर $H_2O$ के लिए यह $78.39$ है।
अतः,$D_2O$ का परावैद्युत स्थिरांक $H_2O$ से कम होता है।
83
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$25^{\circ} C$ पर,फॉर्मिक एसिड का $K_{a} = 1.8 \times 10^{-4}$ है। $HCOO^{-}$ का $K_{b}$ क्या होगा?
A
$1.8 \times 10^{-10}$
B
$5.55 \times 10^{-4}$
C
$5.55 \times 10^{-11}$
D
$5.55 \times 10^{-12}$

Solution

(C) एक दुर्बल अम्ल के वियोजन स्थिरांक $(K_{a})$ और उसके संयुग्मी क्षार के वियोजन स्थिरांक $(K_{b})$ के बीच का संबंध $K_{a} \times K_{b} = K_{w}$ समीकरण द्वारा दिया जाता है।
$25^{\circ} C$ पर,जल का आयनिक गुणनफल $K_{w} = 1.0 \times 10^{-14}$ होता है।
फॉर्मिक एसिड $(HCOOH)$ के लिए $K_{a} = 1.8 \times 10^{-4}$ दिया गया है।
अतः,$K_{b} = \frac{K_{w}}{K_{a}} = \frac{1.0 \times 10^{-14}}{1.8 \times 10^{-4}}$.
$K_{b} = 0.555 \times 10^{-10} = 5.55 \times 10^{-11}$.
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फास्फोरस अम्ल का संयुग्मी क्षार $x$ है। ओलियम का संयुग्मी क्षार $y$ है। क्रमशः $x$ और $y$ क्या हैं?
A
$H_2PO_4^{-}, H_2S_2O_7^{-}$
B
$H_2PO_4^{-}, HSO_5^{-}$
C
$H_2PO_3^{-}, HS_2O_7^{-}$
D
$H_2PO_3^{-}, HSO_4^{-}$

Solution

(C) संयुग्मी क्षार अम्ल से एक प्रोटॉन $(H^+)$ हटाकर बनता है।
फास्फोरस अम्ल $H_3PO_3$ है। एक $H^+$ हटाने पर $H_2PO_3^-$ प्राप्त होता है। अतः,$x = H_2PO_3^-$.
ओलियम $H_2S_2O_7$ है। एक $H^+$ हटाने पर $HS_2O_7^-$ प्राप्त होता है। अतः,$y = HS_2O_7^-$.
इसलिए,सही युग्म $(x, y) = (H_2PO_3^-, HS_2O_7^-)$ है।
85
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$25^{\circ} C$ पर,$x \ M$ एसिटिक अम्ल के आयनीकरण का प्रतिशत $4.242$ है। एसिटिक अम्ल के विलयन का $pH$ क्या है?
$(\log 4.242=0.6275) ;(\log 0.04242=-1.372) \quad (K_a=1.8 \times 10^{-5})$
A
$3.37$
B
$1.7$
C
$1.37$
D
$2.37$

Solution

(A) एक दुर्बल अम्ल के लिए,वियोजन स्थिरांक $K_a = C \alpha^2$ द्वारा दिया जाता है,जहाँ $C$ सांद्रता है और $\alpha$ आयनीकरण की मात्रा है।
दिया गया है $\alpha = 4.242 \% = 0.04242$ और $K_a = 1.8 \times 10^{-5}$।
$1.8 \times 10^{-5} = C \times (0.04242)^2$।
$C = \frac{1.8 \times 10^{-5}}{0.001799} \approx 0.01 \ M$।
$H^+$ आयनों की सांद्रता $[H^+] = C \alpha = 0.01 \times 0.04242 = 4.242 \times 10^{-4} \ M$ है।
$pH$ की गणना $pH = -\log[H^+] = -\log(4.242 \times 10^{-4})$ के रूप में की जाती है।
$pH = -(\log 4.242 + \log 10^{-4}) = -(0.6275 - 4) = 3.3725 \approx 3.37$।
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$1 \ L$ के $x \ M$ एसिटिक एसिड के आयनीकरण का प्रतिशत $4.242$ है और इसे विलयन "$A$" कहा जाता है। $1 \ L$ के $y \ M$ एसिटिक एसिड के आयनीकरण का प्रतिशत $3$ है और इसे विलयन "$B$" कहा जाता है। विलयन "$A$" को विलयन "$B$" के साथ मिलाया जाता है। परिणामी विलयन में एसिटिक एसिड की सांद्रता क्या है ($M$ में)? $\left(K_{a} \text{ of acetic acid } = 1.8 \times 10^{-5}\right)$
A
$0.05$
B
$0.015$
C
$0.02$
D
$0.15$

Solution

(B) एक दुर्बल अम्ल के लिए,आयनीकरण की मात्रा $\alpha = \sqrt{\frac{K_a}{C}}$ द्वारा दी जाती है,जहाँ $C$ मोलर सांद्रता है।
दिया गया है $K_a = 1.8 \times 10^{-5}$.
विलयन "$A$" के लिए: $\alpha_A = \frac{4.242}{100} = 0.04242$. अतः,$0.04242 = \sqrt{\frac{1.8 \times 10^{-5}}{x}}$. दोनों पक्षों का वर्ग करने पर: $0.0018 = \frac{1.8 \times 10^{-5}}{x}$,जिससे $x = 0.01 \ M$ प्राप्त होता है।
विलयन "$B$" के लिए: $\alpha_B = \frac{3}{100} = 0.03$. अतः,$0.03 = \sqrt{\frac{1.8 \times 10^{-5}}{y}}$. दोनों पक्षों का वर्ग करने पर: $0.0009 = \frac{1.8 \times 10^{-5}}{y}$,जिससे $y = 0.02 \ M$ प्राप्त होता है।
जब $1 \ L$ विलयन "$A$" $(0.01 \ M)$ को $1 \ L$ विलयन "$B$" $(0.02 \ M)$ के साथ मिलाया जाता है,तो कुल आयतन $2 \ L$ हो जाता है।
एसिटिक एसिड के कुल मोल = $(1 \ L \times 0.01 \ M) + (1 \ L \times 0.02 \ M) = 0.03 \ \text{moles}$.
परिणामी सांद्रता = $\frac{0.03 \ \text{moles}}{2 \ L} = 0.015 \ M$.
87
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$25^{\circ} C$ पर,'$x$' $M$ एसिटिक एसिड के आयनीकरण का प्रतिशत $4.242$ है। $x$ का मान क्या है? $(K_a = 1.8 \times 10^{-5})$
A
$0.05$
B
$0.04$
C
$0.02$
D
$0.01$

Solution

(D) एक दुर्बल अम्ल के लिए,आयनीकरण की मात्रा $\alpha$ को सूत्र $\alpha = \sqrt{\frac{K_a}{C}}$ द्वारा दिया जाता है,जहाँ $C$ मोलर सांद्रता '$x$' है।
दिया गया है,आयनीकरण का प्रतिशत $= 4.242\%$,इसलिए $\alpha = \frac{4.242}{100} = 0.04242$.
दिया गया है $K_a = 1.8 \times 10^{-5}$.
सूत्र $\alpha^2 = \frac{K_a}{C}$ का उपयोग करते हुए,हमें $C = \frac{K_a}{\alpha^2}$ प्राप्त होता है।
$C = \frac{1.8 \times 10^{-5}}{(0.04242)^2}$.
$(0.04242)^2 \approx 0.0018$.
$C = \frac{1.8 \times 10^{-5}}{1.8 \times 10^{-3}} = 10^{-2} = 0.01 \ M$.
अतः,$x$ का मान $0.01$ है।
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जब $30 \ mL$ $0.2 \ M$ $NH_4OH$ को $30 \ mL$ $2 \ M$ $NH_4Cl$ विलयन में मिलाया जाता है। यदि बने हुए बफर का $pH$ $8.2$ है,तो $NH_4OH$ का $pK_b$ क्या है?
A
$7.2$
B
$5.8$
C
$6.8$
D
$4.8$

Solution

(D) दिया गया विलयन एक क्षारीय बफर है जो एक दुर्बल क्षार $(NH_4OH)$ और एक प्रबल अम्ल के साथ इसके लवण $(NH_4Cl)$ से बना है।
क्षारीय बफर के लिए,$pOH$ की गणना हेंडरसन-हैसेलबैक समीकरण का उपयोग करके की जाती है: $pOH = pK_b + \log \frac{[Salt]}{[Base]}$.
सबसे पहले,दिए गए $pH$ से $pOH$ की गणना करें: $pOH = 14 - pH = 14 - 8.2 = 5.8$.
चूंकि दोनों विलयनों का आयतन समान $(30 \ mL)$ है,इसलिए सांद्रता का अनुपात $\frac{[Salt]}{[Base]}$ उनकी मोलरता के अनुपात के बराबर होगा: $\frac{[NH_4Cl]}{[NH_4OH]} = \frac{2 \ M}{0.2 \ M} = 10$.
इन मानों को हेंडरसन-हैसेलबैक समीकरण में रखने पर: $5.8 = pK_b + \log(10)$.
चूंकि $\log(10) = 1$,इसलिए $5.8 = pK_b + 1$.
अतः,$pK_b = 5.8 - 1 = 4.8$.
89
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$T(K)$ पर,$AgBr$ का विलेयता गुणनफल $4 \times 10^{-13}$ है। $0.1 \ M$ $KBr$ विलयन में इसकी विलेयता क्या है?
A
$2 \times 10^{-6} \ M$
B
$4 \times 10^{-10} \ M$
C
$4 \times 10^{-12} \ M$
D
$4 \times 10^{-14} \ M$

Solution

(C) $AgBr$ का वियोजन इस प्रकार है: $AgBr(s) \rightleftharpoons Ag^+(aq) + Br^-(aq)$.
माना $0.1 \ M$ $KBr$ में $AgBr$ की विलेयता $s$ है।
$0.1 \ M$ $KBr$ की उपस्थिति में,$Br^-$ आयनों की सांद्रता $[Br^-] = (s + 0.1) \approx 0.1 \ M$ है (चूंकि $s$ बहुत छोटा है)।
$Ag^+$ आयनों की सांद्रता $[Ag^+] = s$ है।
विलेयता गुणनफल का व्यंजक $K_{sp} = [Ag^+][Br^-]$ है।
मान रखने पर: $4 \times 10^{-13} = s \times 0.1$.
$s$ के लिए हल करने पर: $s = \frac{4 \times 10^{-13}}{0.1} = 4 \times 10^{-12} \ M$.
90
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$0.2 \ M \ Pb(NO_3)_2$ विलयन में $PbI_2$ की मोलर विलेयता $K_{sp}$ (विलेयता गुणनफल) के संदर्भ में क्या है?
A
$(\frac{K_{sp}}{0.2})^{1/2}$
B
$(\frac{K_{sp}}{0.4})^{1/4}$
C
$(\frac{K_{sp}}{0.8})^{1/2}$
D
$(\frac{K_{sp}}{0.8})^{1/3}$

Solution

(C) $PbI_2$ का वियोजन इस प्रकार है: $PbI_2(s) \rightleftharpoons Pb^{2+}(aq) + 2I^-(aq)$.
माना $PbI_2$ की मोलर विलेयता $S \ mol/L$ है।
$Pb(NO_3)_2$ से $Pb^{2+}$ आयनों की सांद्रता $0.2 \ M$ है।
$[Pb^{2+}]$ की कुल सांद्रता $= (0.2 + S) \approx 0.2 \ M$ (चूंकि $S$ बहुत छोटा है)।
$[I^-]$ की कुल सांद्रता $= 2S$ है।
विलेयता गुणनफल का व्यंजक $K_{sp} = [Pb^{2+}][I^-]^2$ है।
मान रखने पर: $K_{sp} = (0.2)(2S)^2$.
$K_{sp} = 0.2 \times 4S^2 = 0.8S^2$.
$S$ के लिए हल करने पर: $S^2 = \frac{K_{sp}}{0.8}$,अतः $S = (\frac{K_{sp}}{0.8})^{1/2}$।
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$T(K)$ पर,दो आयनिक लवणों $MX_2$ और $MX$ के $K_{sp}$ क्रमशः $5 \times 10^{-13}$ और $1.6 \times 10^{-11}$ हैं। $MX_2$ और $MX$ की मोलर विलेयता का अनुपात क्या है?
A
$12.5$
B
$1.25$
C
$6.25$
D
$7.50$

Solution

(A) लवण $MX_2$ के लिए: $MX_2 \rightleftharpoons M^{2+} + 2X^-$. मान लीजिए विलेयता $S_1$ है। अतः $K_{sp} = (S_1)(2S_1)^2 = 4S_1^3$. दिया गया है $4S_1^3 = 5 \times 10^{-13}$,इसलिए $S_1^3 = 1.25 \times 10^{-13} = 125 \times 10^{-15}$. अतः,$S_1 = 5 \times 10^{-5} \ M$.
लवण $MX$ के लिए: $MX \rightleftharpoons M^+ + X^-$. मान लीजिए विलेयता $S_2$ है। अतः $K_{sp} = S_2^2$. दिया गया है $S_2^2 = 1.6 \times 10^{-11} = 16 \times 10^{-12}$. अतः,$S_2 = 4 \times 10^{-6} \ M$.
मोलर विलेयता का अनुपात $\frac{S_1}{S_2} = \frac{5 \times 10^{-5}}{4 \times 10^{-6}} = \frac{50}{4} = 12.5$ है।
92
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यदि समीकरण $\sqrt{2}x^2 - bx + (8 - 2\sqrt{5}) = 0$ के मूलों का हरात्मक माध्य (harmonic mean) $4$ है,तो $b$ का मान ज्ञात कीजिए।
A
$2$
B
$3$
C
$4 - \sqrt{5}$
D
$4 + \sqrt{5}$

Solution

(C) दिया गया द्विघात समीकरण: $\sqrt{2}x^2 - bx + (8 - 2\sqrt{5}) = 0$.
माना समीकरण के मूल $\alpha$ और $\beta$ हैं।
द्विघात समीकरण के गुणों के अनुसार,मूलों का योग $\alpha + \beta = \frac{-(-b)}{\sqrt{2}} = \frac{b}{\sqrt{2}}$.
मूलों का गुणनफल $\alpha\beta = \frac{8 - 2\sqrt{5}}{\sqrt{2}}$.
दो मूलों का हरात्मक माध्य $(HM)$ $HM = \frac{2\alpha\beta}{\alpha + \beta}$ द्वारा दिया जाता है।
चूंकि $HM = 4$ दिया गया है:
$\frac{2\alpha\beta}{\alpha + \beta} = 4$
$\alpha + \beta$ और $\alpha\beta$ के मान रखने पर:
$\frac{2 \left( \frac{8 - 2\sqrt{5}}{\sqrt{2}} \right)}{\frac{b}{\sqrt{2}}} = 4$
$\frac{2(8 - 2\sqrt{5})}{b} = 4$
$2(8 - 2\sqrt{5}) = 4b$
$8 - 2\sqrt{5} = 2b$
$b = 4 - \sqrt{5}$.
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यदि एक नियमित बहुभुज के विकर्णों की संख्या $35$ है,तो बहुभुज की भुजाओं की संख्या क्या है?
A
$12$
B
$9$
C
$10$
D
$11$

Solution

(C) $n$ भुजाओं वाले बहुभुज में विकर्णों की संख्या का सूत्र $\frac{n(n-3)}{2}$ होता है।
दिया गया है कि विकर्णों की संख्या $35$ है,इसलिए:
$\frac{n(n-3)}{2} = 35$
$n(n-3) = 70$
$n^2 - 3n - 70 = 0$
$(n-10)(n+7) = 0$
चूंकि $n$ एक धनात्मक पूर्णांक होना चाहिए,इसलिए $n = 10$ लेते हैं।
अतः,बहुभुज की भुजाओं की संख्या $10$ है।
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निम्नलिखित पर विचार करें।
कथन-$I$ : $B, Al, In, Tl$ की विद्युतऋणात्मकता का क्रम $B > Tl > Al > In$ है।
कथन-$II$ : बोरिक अम्ल एक दुर्बल प्रोटोनिक अम्ल है।
सही उत्तर है
A
कथन-$I$ और कथन-$II$ दोनों सही हैं
B
कथन-$I$ और कथन-$II$ दोनों गलत हैं
C
कथन-$I$ सही है,लेकिन कथन-$II$ गलत है
D
कथन-$I$ गलत है,लेकिन कथन-$II$ सही है

Solution

(C) कथन-$I$ सही है। $Tl$ में $d$ और $f$ इलेक्ट्रॉनों के खराब परिरक्षण प्रभाव के कारण,प्रभावी नाभिकीय आवेश बढ़ जाता है,जिसके परिणामस्वरूप $Al$ और $In$ की तुलना में $Tl$ की विद्युतऋणात्मकता अधिक होती है। क्रम $B (2.04) > Tl (1.8) > Al (1.61) > In (1.5)$ है।
कथन-$II$ गलत है। बोरिक अम्ल ($H_3BO_3$ या $B(OH)_3$) एक प्रोटोनिक अम्ल नहीं है (यह $H^+$ आयन नहीं छोड़ता है)। इसके बजाय,यह पानी से $OH^-$ आयन को स्वीकार करके $[B(OH)_4]^-$ बनाता है और पानी के अणु से $H^+$ आयन मुक्त करता है,इसलिए यह एक लुईस अम्ल के रूप में कार्य करता है।
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डाइबोरेन $(B_2H_6)$ की संरचना में,$2$-केंद्र-$2$-इलेक्ट्रॉन $(2c-2e)$ बंधों की संख्या $X$ है और $3$-केंद्र-$2$-इलेक्ट्रॉन $(3c-2e)$ बंधों की संख्या $Y$ है। $(X+Y)$ का मान क्या है?
A
$5$
B
$6$
C
$4$
D
$8$

Solution

(B) डाइबोरेन $(B_2H_6)$ की संरचना में दो बोरॉन परमाणु और छह हाइड्रोजन परमाणु होते हैं।
इसमें $4$ टर्मिनल हाइड्रोजन परमाणु होते हैं,जो प्रत्येक बोरॉन परमाणु के साथ $2$-केंद्र-$2$-इलेक्ट्रॉन $(2c-2e)$ बंध द्वारा जुड़े होते हैं। अतः,$X = 4$ है।
इसमें $2$ ब्रिजिंग हाइड्रोजन परमाणु होते हैं,जो प्रत्येक दो बोरॉन परमाणुओं के साथ $3$-केंद्र-$2$-इलेक्ट्रॉन $(3c-2e)$ बंध में भाग लेते हैं। अतः,$Y = 2$ है।
$(X+Y)$ का मान $4 + 2 = 6$ है।
96
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निम्नलिखित में से गलत कथन है:
A
एल्युमिनियम सांद्र $HNO_3$ में घुल जाता है और $H_2$ गैस मुक्त करता है
B
बोराजोल में $12$ $\sigma$ और $3$ $\pi$ बंध होते हैं
C
गैलियम ऑक्साइड प्रकृति में उभयधर्मी है
D
$BF_3$ एक लुईस अम्ल है

Solution

(A) . एल्युमिनियम सांद्र $HNO_3$ में अपनी सतह पर एक सुरक्षात्मक ऑक्साइड परत बनने के कारण निष्क्रिय हो जाता है,इसलिए यह $H_2$ गैस मुक्त नहीं करता है। यह कथन गलत है।
$B$. बोराजोल $(B_3N_3H_6)$ की संरचना बेंजीन के समान होती है। इसमें $12$ $\sigma$ बंध और $3$ $\pi$ बंध होते हैं। यह कथन सही है।
$C$. गैलियम ऑक्साइड $(Ga_2O_3)$ प्रकृति में उभयधर्मी है क्योंकि यह अम्ल और क्षार दोनों के साथ प्रतिक्रिया करता है। यह कथन सही है।
$D$. $BF_3$ में बोरॉन परमाणु पर अष्टक अपूर्ण होता है,जो इसे इलेक्ट्रॉन-न्यून प्रजाति बनाता है और इसलिए यह एक लुईस अम्ल है। यह कथन सही है।
97
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उस अभिक्रिया की पहचान कीजिए जिसमें औद्योगिक स्तर पर डाइबोरेन का उत्पादन होता है।
A
डाइएथिल ईथर में $BF_3$ की $LiAlH_4$ के साथ अभिक्रिया
B
$NaBH_4$ का $I_2$ के साथ ऑक्सीकरण
C
$450 \ K$ पर $BF_3$ की $NaH$ के साथ अभिक्रिया
D
$H_3BO_3$ को $370 \ K$ से अधिक तापमान पर गर्म करके

Solution

(C) औद्योगिक स्तर पर,डाइबोरेन $(B_2H_6)$ का उत्पादन $450 \ K$ पर बोरॉन ट्राइफ्लोराइड $(BF_3)$ की सोडियम हाइड्राइड $(NaH)$ के साथ अभिक्रिया द्वारा किया जाता है।
इस अभिक्रिया का रासायनिक समीकरण है:
$2BF_3 + 6NaH \xrightarrow{450 \ K} B_2H_6 + 6NaF$
अतः,सही विकल्प $C$ है।
98
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समूह $13$ के तत्वों के बारे में गलत कथन की पहचान कीजिए।
A
बोरेक्स के जलीय विलयन की प्रकृति क्षारीय होती है।
B
ऑर्थोबोरिक अम्ल एक दुर्बल ट्राइबेसिक अम्ल है।
C
मेटाबोरिक अम्ल को गर्म करने पर एक अम्लीय ऑक्साइड प्राप्त होता है।
D
$LiBH_4$ एक अपचायक (reducing agent) के रूप में कार्य करता है।

Solution

(B) $1$. बोरेक्स $(Na_2B_4O_7 \cdot 10H_2O)$ जल में जल-अपघटित होकर $NaOH$ और $H_3BO_3$ देता है। $NaOH$ एक प्रबल क्षार है,इसलिए विलयन क्षारीय होता है। यह कथन सही है।
$2$. ऑर्थोबोरिक अम्ल $(H_3BO_3)$ एक दुर्बल मोनोबेसिक लुईस अम्ल है। यह प्रोटॉन दान करने के बजाय जल से हाइड्रॉक्सिल आयन $(OH^-)$ स्वीकार करके अम्ल की तरह कार्य करता है। अतः,इसे ट्राइबेसिक अम्ल कहना गलत है।
$3$. मेटाबोरिक अम्ल $(HBO_2)$ को गर्म करने पर बोरॉन ट्राइऑक्साइड $(B_2O_3)$ प्राप्त होता है,जो एक अम्लीय ऑक्साइड है। यह कथन सही है।
$4$. $LiBH_4$ एक प्रसिद्ध अपचायक है। यह कथन सही है।
अतः,गलत कथन $B$ है।
99
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निम्नलिखित में से किन अभिक्रियाओं में उत्पाद के रूप में $H_2$ प्राप्त होता है? (अभिक्रियाएं संतुलित नहीं हैं)
$I) NaBH_4 + I_2 \longrightarrow$
$II) B_2H_6 + N(CH_3)_3 \longrightarrow$
$III) Al + NaOH + H_2O \longrightarrow$
$IV) BF_3 + NaH \longrightarrow$
A
केवल $I, II$ और $III$
B
केवल $II$ और $IV$
C
केवल $I$ और $III$
D
केवल $II, III$ और $IV$

Solution

(C) आइए प्रत्येक अभिक्रिया का विश्लेषण करें:
$I) 2NaBH_4 + I_2 \longrightarrow 2NaI + B_2H_6 + H_2$. इस अभिक्रिया में $H_2$ उत्पन्न होता है।
$II) B_2H_6 + 2N(CH_3)_3 \longrightarrow 2BH_3 \cdot N(CH_3)_3$. यह एक एडक्ट (adduct) बनाने की अभिक्रिया है और इसमें $H_2$ उत्पन्न नहीं होता है।
$III) 2Al + 2NaOH + 6H_2O \longrightarrow 2Na[Al(OH)_4] + 3H_2$. इस अभिक्रिया में $H_2$ उत्पन्न होता है।
$IV) 2BF_3 + 6NaH \longrightarrow B_2H_6 + 6NaF$. इस अभिक्रिया में $H_2$ उत्पन्न नहीं होता है।
अतः,केवल अभिक्रिया $I$ और $III$ में उत्पाद के रूप में $H_2$ प्राप्त होता है।
100
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निम्नलिखित में से सही कथनों का चयन करें:
$A$) एल्युमीनियम तनु $HCl$ के साथ $H_2$ गैस मुक्त करता है लेकिन जलीय $NaOH$ के साथ नहीं।
$B$) सोडियम मेटाबोरेट का सूत्र $Na_3BO_3$ है।
$C$) बोरिक एसिड एक दुर्बल मोनोबेसिक एसिड है।
$D$) थैलियम के लिए,$+3$ अवस्था की तुलना में $+1$ अवस्था अधिक स्थिर है।
A
$A$ और $B$
B
$B$ और $C$
C
$C$ और $D$
D
$A$ और $D$

Solution

(C) ) गलत: एल्युमीनियम उभयधर्मी है और $H_2$ गैस मुक्त करने के लिए $HCl$ और $NaOH$ दोनों के साथ प्रतिक्रिया करता है।
$B$) गलत: सोडियम मेटाबोरेट का सूत्र $NaBO_2$ है। $Na_3BO_3$ सोडियम ऑर्थोबोरेट है।
$C$) सही: बोरिक एसिड $(H_3BO_3)$ पानी से $OH^-$ स्वीकार करके एक दुर्बल मोनोबेसिक लुईस एसिड के रूप में कार्य करता है: $B(OH)_3 + 2H_2O \rightarrow [B(OH)_4]^- + H_3O^+$.
$D$) सही: अक्रिय युग्म प्रभाव (inert pair effect) के कारण,समूह $13$ में नीचे जाने पर $+1$ ऑक्सीकरण अवस्था की स्थिरता बढ़ती है $(Al < Ga < In < Tl)$,जिससे $Tl^+$,$Tl^{3+}$ की तुलना में अधिक स्थिर हो जाता है।
101
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निम्नलिखित का मिलान करें:
सूची-$I$ (ग्लाइकोसिडिक लिंकेज)सूची-$II$ (पॉलीसेकेराइड)
$A$. $\alpha-1,4$$I$. एमाइलोज
$B$. $\beta-1,4$$II$. सेलुलोज
$C$. $\alpha-1,4, \alpha-1,6$$III$. एमाइलोपेक्टिन
A
$A-II, B-I, C-III$
B
$A-III, B-I, C-II$
C
$A-I, B-II, C-III$
D
$A-I, B-III, C-II$

Solution

(D) . एमाइलोज $\alpha-D-glucose$ इकाइयों का एक रैखिक बहुलक है जो $\alpha-1,4$-ग्लाइकोसिडिक बंधों द्वारा जुड़े होते हैं। अतः,$A-I$.
$B$. सेलुलोज $\beta-D-glucose$ इकाइयों का एक रैखिक बहुलक है जो $\beta-1,4$-ग्लाइकोसिडिक बंधों द्वारा जुड़े होते हैं। अतः,$B-III$.
$C$. एमाइलोपेक्टिन $\alpha-D-glucose$ इकाइयों का एक शाखित बहुलक है जिसमें श्रृंखला में $\alpha-1,4$-ग्लाइकोसिडिक बंध और शाखा बिंदुओं पर $\alpha-1,6$-ग्लाइकोसिडिक बंध होते हैं। अतः,$C-II$.
इसलिए,सही मिलान $A-I, B-III, C-II$ है।
102
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निम्नलिखित में से कौन सा टोलेंस अभिकर्मक को अपचयित नहीं करता है?
$a$) फ्रुक्टोज
$b$) सुक्रोज
$c$) लैक्टोज
$d$) सेलुलोज
A
$a, b$
B
$b, d$
C
$a, c$
D
$c, d$

Solution

(B) टोलेंस अभिकर्मक उन शर्कराओं द्वारा अपचयित होता है जिनमें मुक्त हेमीएसीटल या हेमीकीटल समूह होता है,जिन्हें अपचायी शर्करा कहा जाता है।
$a$) फ्रुक्टोज एक कीटोहेक्सोज है जो क्षार की उपस्थिति में ग्लूकोज और मैनोज में समावयवीकृत हो जाता है,इसलिए यह एक अपचायी शर्करा के रूप में कार्य करता है।
$b$) सुक्रोज एक अनपचायी शर्करा है क्योंकि ग्लाइकोसिडिक लिंकेज ग्लूकोज और फ्रुक्टोज के एनोमेरिक कार्बन के बीच होता है,जिससे कोई मुक्त हेमीएसीटल या हेमीकीटल समूह नहीं बचता है।
$c$) लैक्टोज एक अपचायी शर्करा है क्योंकि इसमें एक मुक्त हेमीएसीटल समूह होता है।
$d$) सेलुलोज एक पॉलीसेकेराइड है जिसमें $\beta(1 \to 4)$ ग्लाइकोसिडिक बंधों द्वारा जुड़े $D$-ग्लूकोज इकाइयां होती हैं; यह एक अनपचायी शर्करा है।
अतः,सुक्रोज और सेलुलोज टोलेंस अभिकर्मक को अपचयित नहीं करते हैं।
103
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नीचे दी गई सूची में आवश्यक अमीनो एसिड जो क्षारीय $(X)$ हैं और गैर-आवश्यक अमीनो एसिड जो उदासीन $(Y)$ हैं,शामिल हैं। निम्नलिखित सूची से $X$ और $Y$ की पहचान करें:
$a)$ Lysine
$b)$ Alanine
$c)$ Serine
$d)$ Arginine
$e)$ Tyrosine
A
$X = b, c, e; \quad Y = a, d$
B
$X = a, d; \quad Y = b, c, e$
C
$X = a, c; \quad Y = b, d, e$
D
$X = a, b, c; \quad Y = d, e$

Solution

(B) $1$. दिए गए अमीनो एसिड का विश्लेषण करें:
$a)$ Lysine: आवश्यक,क्षारीय
$b)$ Alanine: गैर-आवश्यक,उदासीन
$c)$ Serine: गैर-आवश्यक,उदासीन
$d)$ Arginine: आवश्यक,क्षारीय
$e)$ Tyrosine: गैर-आवश्यक,उदासीन
$2$. $X$ आवश्यक और क्षारीय अमीनो एसिड का प्रतिनिधित्व करता है: Lysine $(a)$ और Arginine $(d)$।
$3$. $Y$ गैर-आवश्यक और उदासीन अमीनो एसिड का प्रतिनिधित्व करता है: Alanine $(b)$,Serine $(c)$,और Tyrosine $(e)$।
$4$. इसलिए,$X = a, d$ और $Y = b, c, e$।
104
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निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
कथन-$I$: लाइसिन और आर्जिनिन आवश्यक और क्षारीय (basic) अमीनो एसिड हैं।
कथन-$II$: ल्यूसीन और फेनिलएलनिन गैर-आवश्यक और उदासीन (neutral) अमीनो एसिड हैं।
A
कथन-$I$ और कथन-$II$ दोनों सही हैं
B
कथन-$I$ और कथन-$II$ दोनों गलत हैं
C
कथन-$I$ सही है,लेकिन कथन-$II$ गलत है
D
कथन-$I$ गलत है,लेकिन कथन-$II$ सही है

Solution

(C) कथन-$I$ सही है: लाइसिन और आर्जिनिन वास्तव में क्षारीय अमीनो एसिड हैं (अतिरिक्त अमीनो समूहों की उपस्थिति के कारण) और वे आवश्यक अमीनो एसिड हैं (मानव शरीर द्वारा संश्लेषित नहीं किए जा सकते)।
कथन-$II$ गलत है: हालांकि ल्यूसीन और फेनिलएलनिन उदासीन अमीनो एसिड हैं,लेकिन वे दोनों आवश्यक अमीनो एसिड हैं,गैर-आवश्यक नहीं।
इसलिए,कथन-$I$ सही है,लेकिन कथन-$II$ गलत है।
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निम्नलिखित में से आवश्यक अमीनो एसिड की पहचान करें:
$A$) ल्यूसीन (Leucine)
$B$) टायरोसीन (Tyrosine)
$C$) सिस्टीन (Cysteine)
$D$) हिस्टिडीन (Histidine)
A
केवल $A$ और $B$
B
केवल $B$ और $C$
C
केवल $B$ और $D$
D
केवल $A$ और $D$

Solution

(D) आवश्यक अमीनो एसिड वे हैं जिन्हें मानव शरीर द्वारा संश्लेषित नहीं किया जा सकता है और इन्हें आहार के माध्यम से प्राप्त किया जाना चाहिए।
दिए गए विकल्पों में से:
$1$) ल्यूसीन एक आवश्यक अमीनो एसिड है।
$2$) हिस्टिडीन एक आवश्यक अमीनो एसिड है।
$3$) टायरोसीन और सिस्टीन गैर-आवश्यक अमीनो एसिड हैं क्योंकि इन्हें शरीर द्वारा बनाया जा सकता है।
इसलिए,$A$ (ल्यूसीन) और $D$ (हिस्टिडीन) आवश्यक अमीनो एसिड हैं।
सही विकल्प $D$ है।
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निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
कथन-$I$: प्रोटीन की प्राथमिक संरचना उसके अमीनो एसिड अनुक्रम को दर्शाती है।
कथन-$II$: प्रोटीन की $\alpha$-हेलिक्स और $\beta$-प्लीटेड शीट संरचना उसकी तृतीयक संरचना को दर्शाती है।
A
कथन-$I$ और कथन-$II$ दोनों सही हैं
B
कथन-$I$ और कथन-$II$ दोनों गलत हैं
C
कथन-$I$ सही है,लेकिन कथन-$II$ गलत है
D
कथन-$I$ गलत है,लेकिन कथन-$II$ सही है

Solution

(C) कथन-$I$ सही है क्योंकि प्रोटीन की प्राथमिक संरचना पेप्टाइड बॉन्ड द्वारा जुड़े अमीनो एसिड के विशिष्ट अनुक्रम को संदर्भित करती है।
कथन-$II$ गलत है क्योंकि $\alpha$-हेलिक्स और $\beta$-प्लीटेड शीट संरचनाएं प्रोटीन की द्वितीयक संरचना के उदाहरण हैं,न कि तृतीयक संरचना के। तृतीयक संरचना पॉलीपेप्टाइड श्रृंखला के समग्र त्रि-आयामी फोल्डिंग को संदर्भित करती है।
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नीचे दी गई नाइट्रोजन युक्त हेट्रोसायक्लिक बेस की संरचना क्या दर्शाती है?
Question diagram
A
एडेनिन
B
थाइमिन
C
यूरेसिल
D
साइटोसिन

Solution

(C) दी गई संरचना एक छह-सदस्यीय हेट्रोसायक्लिक रिंग है जिसमें $1$ और $3$ स्थान पर दो नाइट्रोजन परमाणु और $2$ और $4$ स्थान पर दो कार्बोनिल समूह होते हैं। यह संरचना $Uracil$ (यूरेसिल) की है।
$Adenine$ एक प्यूरीन बेस है।
$Thymine$ $5-methyluracil$ है।
$Cytosine$ में $4$थे स्थान पर एक अमीनो समूह और $2$रे स्थान पर एक कार्बोनिल समूह होता है।
108
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$DNA$ के प्यूरीन और पिरिमिडीन क्षार युक्त सेट को क्रमशः पहचानें।
A
एडेनिन,यूरेसिल
B
साइटोसिन,ग्वानिन
C
थाइमिन,यूरेसिल
D
एडेनिन,साइटोसिन

Solution

(D) $DNA$ में मौजूद नाइट्रोजनयुक्त क्षार को दो श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है: प्यूरीन और पिरिमिडीन।
प्यूरीन दोहरी वलय संरचनाएं हैं,जिनमें $Adenine$ $(A)$ और $Guanine$ $(G)$ शामिल हैं।
पिरिमिडीन एकल वलय संरचनाएं हैं,जिनमें $DNA$ में $Cytosine$ $(C)$ और $Thymine$ $(T)$ शामिल हैं।
इसलिए,$DNA$ के प्यूरीन और पिरिमिडीन क्षार युक्त सही सेट $Adenine$ और $Cytosine$ है।
109
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निम्नलिखित में से कौन सा $RNA$ के न्यूक्लियोसाइड का प्रतिनिधित्व करता है?
A
Option A
B
Option B
C
Option C
D
Option D

Solution

(D) एक न्यूक्लियोसाइड में एक नाइट्रोजनयुक्त क्षार और एक पेंटोज शर्करा होती है।
$RNA$ में,पेंटोज शर्करा राइबोज होती है,जिसमें $2'$ और $3'$ दोनों स्थितियों पर हाइड्रॉक्सिल $(-OH)$ समूह होता है।
$RNA$ में एडेनिन $(A)$,गुआनिन $(G)$,साइटोसिन $(C)$ और यूरेसिल $(U)$ नाइट्रोजनयुक्त क्षार होते हैं।
थाइमिन $(T)$ $DNA$ में पाया जाता है,$RNA$ में नहीं।
विकल्पों को देखने पर:
विकल्प $A$ में $T$ (थाइमिन) है,जो $DNA$ की विशेषता है।
विकल्प $B$ और $C$ डीऑक्सीराइबोज शर्करा दिखाते हैं ($2'$ स्थिति पर $-OH$ समूह की कमी),जो $DNA$ की विशेषता है।
विकल्प $D$ यूरेसिल $(U)$ से जुड़ी राइबोज शर्करा ($2'$ और $3'$ स्थितियों पर $-OH$ समूह के साथ) दिखाता है,जो $RNA$ (यूरिडिन) का एक विशिष्ट न्यूक्लियोसाइड है।
110
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निम्नलिखित में से कौन सा न्यूक्लियोसाइड को दर्शाता है?
A
Option A
B
Option B
C
Option C
D
Option D

Solution

(C) एक न्यूक्लियोसाइड एक पेंटोज़ शर्करा और एक नाइट्रोजनयुक्त क्षार से बना होता है।
एक न्यूक्लियोटाइड एक न्यूक्लियोसाइड और एक फॉस्फेट समूह से बना होता है।
विकल्प $A$ एक न्यूक्लियोटाइड (साइटिडिन मोनोफॉस्फेट) को दर्शाता है।
विकल्प $B$ एक शर्करा फॉस्फेट को दर्शाता है।
विकल्प $C$ एक न्यूक्लियोसाइड (यूरिडिन) को दर्शाता है,जिसमें एक पेंटोज़ शर्करा (राइबोज़) से जुड़ा एक नाइट्रोजनयुक्त क्षार (यूरेसिल) होता है।
विकल्प $D$ एक पेंटोज़ शर्करा (राइबोज़) को दर्शाता है।
111
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'$X$' के अनुचित कार्य के परिणामस्वरूप $Addison's$ रोग होता है। हार्मोन '$Y$' महिलाओं में द्वितीयक लैंगिक लक्षणों के विकास के लिए जिम्मेदार है। '$X$' और '$Y$' क्रमशः हैं
A
$Adrenal \text{ } Cortex$,एस्ट्राडियोल
B
$Adrenal \text{ } Cortex$,प्रोजेस्टेरोन
C
थायराइड,प्रोजेस्टेरोन
D
थायराइड,एस्ट्राडियोल

Solution

(A) $1$. $Addison's$ रोग $Adrenal \text{ } Cortex$ (अधिवृक्क वल्कुट) से हार्मोन के अल्पस्राव के कारण होता है।
$2$. एस्ट्राडियोल मुख्य एस्ट्रोजन हार्मोन है जो महिलाओं में द्वितीयक लैंगिक लक्षणों के विकास के लिए जिम्मेदार है।
$3$. इसलिए,'$X$' $Adrenal \text{ } Cortex$ है और '$Y$' एस्ट्राडियोल है।
$4$. सही विकल्प $A$ है।
112
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List-$I$ में दिए गए हार्मोन को List-$II$ में उनके कार्यों के साथ सुमेलित करें:
$A$. ग्लूकोकोर्टिकॉइड्स$I$. कार्बोहाइड्रेट चयापचय को नियंत्रित करना
$B$. मिनरलोकॉर्टिकॉइड्स$II$. गुर्दों द्वारा पानी और नमक के उत्सर्जन के स्तर को नियंत्रित करना
$C$. प्रोजेस्टेरोन$III$. निषेचित अंडे के आरोपण के लिए गर्भाशय को तैयार करना
$D$. एस्ट्राडियोल$IV$. मासिक धर्म चक्र के नियंत्रण में
A
$A-I, B-II, C-III, D-IV$
B
$A-IV, B-I, C-II, D-III$
C
$A-IV, B-III, C-II, D-I$
D
$A-I, B-II, C-IV, D-III$

Solution

(A) सही मिलान इस प्रकार है:
$A$. ग्लूकोकोर्टिकॉइड्स: $I$. कार्बोहाइड्रेट चयापचय को नियंत्रित करना।
$B$. मिनरलोकॉर्टिकॉइड्स: $II$. गुर्दों द्वारा पानी और नमक के उत्सर्जन के स्तर को नियंत्रित करना।
$C$. प्रोजेस्टेरोन: $III$. निषेचित अंडे के आरोपण के लिए गर्भाशय को तैयार करना।
$D$. एस्ट्राडियोल: $IV$. मासिक धर्म चक्र के नियंत्रण में।
अतः,सही क्रम $A-I, B-II, C-III, D-IV$ है।
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विटामिन $(X)$ की कमी से ऐंठन (convulsions) होती है। $X$ का स्रोत $Y$ है। $X$ और $Y$ क्या हैं?
A
राइबोफ्लेविन,दूध
B
राइबोफ्लेविन,मछली
C
पायरिडोक्सिन,दही
D
पायरिडोक्सिन,अनाज

Solution

(D) विटामिन $B_6$ (पायरिडोक्सिन) की कमी से मनुष्यों में ऐंठन (convulsions) होती है।
पायरिडोक्सिन $(X)$ के सामान्य आहार स्रोतों में यीस्ट,दूध,अंडे की जर्दी,अनाज और चना शामिल हैं।
दिए गए विकल्पों में से,पायरिडोक्सिन और अनाज $X$ और $Y$ के लिए सही युग्म हैं।
अतः,सही विकल्प $D$ है।
114
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निम्नलिखित में से कौन सी एंजाइमी अभिक्रिया कोष्ठक में दिखाए गए एंजाइम के साथ सही ढंग से मेल नहीं खाती है?
A
प्रोटीन $\longrightarrow$ पेप्टाइड्स (पेप्सिन)
B
स्टार्च $\longrightarrow$ माल्टोज़ (ज़ाइमेज़)
C
सुक्रोज़ $\longrightarrow$ ग्लूकोज़ और फ्रुक्टोज़ (इनवर्टेज़)
D
माल्टोज़ $\longrightarrow$ ग्लूकोज़ (माल्टेज़)

Solution

(B) अभिक्रिया $Starch \longrightarrow Maltose$ को $Diastase$ एंजाइम द्वारा उत्प्रेरित किया जाता है,न कि $Zymase$ द्वारा।
$Zymase$ एंजाइमों का एक समूह है जो शर्करा के इथेनॉल और कार्बन डाइऑक्साइड में किण्वन को उत्प्रेरित करता है।
अतः,विकल्प $B$ में दिया गया मिलान गलत है।
115
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निम्नलिखित अभिक्रियाओं से प्राप्त उत्पादों $I$,$II$,$III$ को उनकी अम्लीय शक्ति के घटते क्रम में व्यवस्थित करें।
$A) \text{Propylbenzene} \xrightarrow[\text{ (ii) } H_3O^{+}]{\text{ (i) } KMnO_4 / OH^{-}} I$
$B) CH_3COOH \xrightarrow[\text{ (ii) } H_2O]{\text{ (i) } Br_2 / \text{red } P} II$
$C) \text{Bromobenzene}$ $\xrightarrow[\substack{\text{ (ii) } CO_2 / \text{dry ether} \\ \text{ (iii) } H_3O^{+}}]{\text{ (i) } Mg / \text{dry ether}} III$
A
$III > II > I$
B
$III > I > II$
C
$II > I > III$
D
$I > II > III$

Solution

(C) चरण $1$: उत्पादों की पहचान करें।
अभिक्रिया $A$: प्रोपिलबेंजीन का $KMnO_4/OH^-$ के साथ ऑक्सीकरण और उसके बाद अम्लीय वर्कअप बेंजोइक एसिड देता है $(I = C_6H_5COOH)$।
अभिक्रिया $B$: एसिटिक एसिड की हेल-वोलहार्ड-जेलिंस्की अभिक्रिया ब्रोमोएसिटिक एसिड देती है $(II = BrCH_2COOH)$।
अभिक्रिया $C$: ब्रोमोबेंजीन से ग्रिग्नार्ड अभिकर्मक और उसके बाद $CO_2$ के साथ अभिक्रिया बेंजोइक एसिड देती है $(III = C_6H_5COOH)$।
नोट: $I$ और $III$ दोनों बेंजोइक एसिड हैं।
चरण $2$: अम्लीय शक्ति की तुलना करें।
$II$,$BrCH_2COOH$ है। इलेक्ट्रॉन-आकर्षक $-Br$ समूह बेंजोइक एसिड की तुलना में कार्बोक्सिलिक एसिड की अम्लता को बढ़ाता है।
इसलिए,अम्लीय शक्ति का क्रम $II > I = III$ है।
116
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सबसे अधिक अम्लीय कार्बोक्सिलिक अम्ल कौन सा है?
A
$C_6H_5COOH$
B
$C_6H_5CH_2COOH$
C
$HCOOH$
D
$CH_3COOH$

Solution

(C) कार्बोक्सिलिक अम्लों की अम्लता प्रोटॉन के नुकसान के बाद बनने वाले कार्बोक्सिलेट आयन की स्थिरता पर निर्भर करती है। इलेक्ट्रॉन-आकर्षित करने वाले समूह ऋणात्मक आवेश को स्थिर करके अम्लता बढ़ाते हैं,जबकि इलेक्ट्रॉन-दाता समूह अम्लता को कम करते हैं।
$1$. $HCOOH$ (फॉर्मिक अम्ल): $H$ परमाणु का कोई प्रेरणिक प्रभाव नहीं होता है।
$2$. $CH_3COOH$ (एसिटिक अम्ल): $CH_3$ समूह इलेक्ट्रॉन-दाता ($+I$ प्रभाव) है,जो कार्बोक्सिलेट आयन को अस्थिर बनाता है,जिससे यह फॉर्मिक अम्ल की तुलना में कम अम्लीय हो जाता है।
$3$. $C_6H_5COOH$ (बेंजोइक अम्ल): फेनिल समूह अपने $sp^2$ संकरित कार्बन परमाणु के कारण इलेक्ट्रॉन-आकर्षित करने वाला ($-I$ प्रभाव) होता है,जो इसे एसिटिक अम्ल से अधिक अम्लीय बनाता है।
$4$. $C_6H_5CH_2COOH$ (फेनिलएसिटिक अम्ल): $CH_2$ समूह फेनिल रिंग को कार्बोक्सिल समूह से अलग करता है,जिससे बेंजोइक अम्ल की तुलना में फेनिल रिंग का इलेक्ट्रॉन-आकर्षित करने वाला प्रभाव कम हो जाता है।
$pK_a$ मानों की तुलना करने पर: $HCOOH$ $(pK_a \approx 3.75)$ > $C_6H_5COOH$ $(pK_a \approx 4.20)$ > $C_6H_5CH_2COOH$ $(pK_a \approx 4.31)$ > $CH_3COOH$ $(pK_a \approx 4.76)$।
अतः,दिए गए विकल्पों में $HCOOH$ सबसे अधिक अम्लीय है।
117
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निम्नलिखित में से उच्चतम $pK_{a}$ और न्यूनतम $pK_{a}$ मान वाले कार्बोक्सिलिक अम्ल क्रमशः कौन से हैं?
Question diagram
A
$I, II$
B
$I, IV$
C
$III, II$
D
$III, IV$

Solution

(D) प्रतिस्थापित बेंजोइक एसिड की अम्लता प्रतिस्थापियों के इलेक्ट्रॉनिक प्रभावों पर निर्भर करती है। इलेक्ट्रॉन-आकर्षक समूह $(EWG)$ अम्लता को बढ़ाते हैं ($pK_{a}$ कम करते हैं),जबकि इलेक्ट्रॉन-दाता समूह $(EDG)$ अम्लता को कम करते हैं ($pK_{a}$ बढ़ाते हैं)।
$1$. $III$ ($p$-मिथाइलबेन्जोइक एसिड): $-CH_3$ एक $EDG$ है,जो अम्लता को कम करता है। अतः,इसका $pK_{a}$ उच्चतम है।
$2$. $I$ ($p$-आयोडोबेन्जोइक एसिड): $-I$ एक दुर्बल $EWG$ है।
$3$. $II$ ($p$-साइनोबेन्जोइक एसिड): $-CN$ एक प्रबल $EWG$ है।
$4$. $IV$ ($p$-नाइट्रोबेन्जोइक एसिड): $-NO_2$ एक बहुत प्रबल $EWG$ है,जो अम्लता को सबसे अधिक बढ़ाता है। अतः,इसका $pK_{a}$ न्यूनतम है।
अतः,उच्चतम $pK_{a}$ $III$ के लिए और न्यूनतम $pK_{a}$ $IV$ के लिए है। सही विकल्प $D$ है।
118
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निम्नलिखित अभिक्रिया अनुक्रम में $X$ और $Y$ क्रमशः क्या हैं?
स्टाइरीन $\xrightarrow[(ii) H_3O^+]{(i) KMnO_4 / KOH} X$ $\xrightarrow{Br_2 / FeBr_3} Y$
A
$X$ = फेनिलएसेटिक एसिड,$Y$ = फेनिलएसेटाइल ब्रोमाइड
B
$X$ = फेनिलएसेटिक एसिड,$Y$ = $p$-ब्रोमोफेनिलएसेटिक एसिड
C
$X$ = बेंजोइक एसिड,$Y$ = $m$-ब्रोमोबेंजोइक एसिड
D
$X$ = बेंजोइक एसिड,$Y$ = $o$-ब्रोमोबेंजोयल ब्रोमाइड

Solution

(C) $1$. स्टाइरीन $(C_6H_5-CH=CH_2)$ की क्षारीय $KMnO_4$ के साथ अभिक्रिया और उसके बाद अम्लीय वर्कअप $(H_3O^+)$ एक ऑक्सीडेटिव विदलन अभिक्रिया है जो विनाइल समूह को कार्बोक्सिलिक एसिड समूह में परिवर्तित करती है,जिससे उत्पाद $X$ के रूप में बेंजोइक एसिड $(C_6H_5COOH)$ प्राप्त होता है।
$2$. बेंजोइक एसिड में बेंजीन रिंग से जुड़ा $-COOH$ समूह होता है। $-COOH$ समूह एक प्रबल निष्क्रियकारी समूह है और यह इलेक्ट्रोफिलिक एरोमैटिक प्रतिस्थापन अभिक्रियाओं के लिए मेटा-निर्देशकारी होता है।
$3$. इसलिए,$Br_2 / FeBr_3$ का उपयोग करके बेंजोइक एसिड $(X)$ का ब्रोमीनीकरण करने पर ब्रोमीन परमाणु मेटा-स्थान पर इलेक्ट्रोफिलिक प्रतिस्थापन करेगा,जिससे उत्पाद $Y$ के रूप में $m$-ब्रोमोबेंजोइक एसिड प्राप्त होगा।
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निम्नलिखित अभिक्रियाओं के समूह में $X$ और $Y$ क्रमशः क्या हैं?
Question diagram
A
Option A
B
Option B
C
Option C
D
Option D

Solution

(C) प्रारंभिक पदार्थ $3$-ब्रोमोबेंजोइक एसिड है।
$1$. $X$ का निर्माण:
$B_2H_6$ और उसके बाद $H_3O^+$ के साथ अभिक्रिया,बेंजीन रिंग पर ब्रोमीन $(-Br)$ प्रतिस्थापी को प्रभावित किए बिना कार्बोक्सिलिक एसिड समूह $(-COOH)$ का प्राथमिक अल्कोहल $(-CH_2OH)$ में चयनात्मक अपचयन है। अतः,$X$,$3$-ब्रोमोबेंजिल अल्कोहल है।
$2$. $Y$ का निर्माण:
$(i)$ एस्टरीकरण: $3$-ब्रोमोबेंजोइक एसिड,$C_2H_5OH/H^+$ के साथ अभिक्रिया करके एथिल $3$-ब्रोमोबेंजोएट बनाता है।
(ii) अपचयन: $DIBAL-H$ एक चयनात्मक अपचायक है जो एस्टर $(-COOC_2H_5)$ को एल्डिहाइड $(-CHO)$ में अपचयित करता है।
(iii) जल-अपघटन: अंतिम चरण $Y$ के रूप में $3$-ब्रोमोबेंजाल्डिहाइड देता है।
इसलिए,$X$,$3$-ब्रोमोबेंजिल अल्कोहल है और $Y$,$3$-ब्रोमोबेंजाल्डिहाइड है। सही विकल्प $C$ है।
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दी गई अभिक्रिया अनुक्रम में अंतिम उत्पाद $(C)$ है
$C_6H_5COOH$ $\xrightarrow{SOCl_2} (A)$ $\xrightarrow[\text{anhy. } AlCl_3]{C_6H_6} (B)$ $\xrightarrow[\text{(ii) } KOH / (CH_2OH)_2]{\text{(i) } NH_2-NH_2} (C)$
A
बेंजोफेनोन
B
डाइफेनिल मेथेन
C
डाइफेनिलमेथेनॉल
D
बेंजोइक एसिड

Solution

(B) चरण $1$: $C_6H_5COOH + SOCl_2 \rightarrow C_6H_5COCl (A) + SO_2 + HCl$. यह बेंजोइक एसिड का बेंज़ोयल क्लोराइड में रूपांतरण है।
चरण $2$: $C_6H_5COCl + C_6H_6 \xrightarrow{\text{anhy. } AlCl_3} C_6H_5COC_6H_5 (B) + HCl$. यह फ्रिडेल-क्राफ्ट्स एसाइलेशन अभिक्रिया है जो बेंजोफेनोन बनाती है।
चरण $3$: $C_6H_5COC_6H_5 \xrightarrow[\text{(ii) } KOH / (CH_2OH)_2]{\text{(i) } NH_2-NH_2} C_6H_5CH_2C_6H_5 (C)$. यह बेंजोफेनोन का डाइफेनिलमेथेन में वोल्फ-किशनर अपचयन है।
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नीचे दी गई अभिक्रिया पर विचार करें:
$A + 2 B \longrightarrow 3 C + 2 D$.
यदि $B$ के लुप्त होने की दर $x \times 10^{-2} \ mol \ L^{-1} \ s^{-1}$ है,तो अभिक्रिया की दर और $C$ के प्रकट होने की दर का अनुपात क्या है?
A
$1:3$
B
$3:1$
C
$1:2$
D
$2:1$

Solution

(A) अभिक्रिया $A + 2 B \longrightarrow 3 C + 2 D$ के लिए,अभिक्रिया की दर $(r)$ इस प्रकार है:
$r = -\frac{d[A]}{dt} = -\frac{1}{2} \frac{d[B]}{dt} = \frac{1}{3} \frac{d[C]}{dt} = \frac{1}{2} \frac{d[D]}{dt}$
दिया गया है कि $B$ के लुप्त होने की दर $-\frac{d[B]}{dt} = x \times 10^{-2} \ mol \ L^{-1} \ s^{-1}$ है।
दर व्यंजक में मान रखने पर:
$r = -\frac{1}{2} \frac{d[B]}{dt} = \frac{1}{2} (x \times 10^{-2}) = 0.5x \times 10^{-2} \ mol \ L^{-1} \ s^{-1}$।
$C$ के प्रकट होने की दर $\frac{d[C]}{dt}$ है।
दर व्यंजक से,$r = \frac{1}{3} \frac{d[C]}{dt}$,इसलिए $\frac{d[C]}{dt} = 3r$।
अभिक्रिया की दर $(r)$ और $C$ के प्रकट होने की दर $(\frac{d[C]}{dt})$ का अनुपात है:
$\frac{r}{\frac{d[C]}{dt}} = \frac{r}{3r} = \frac{1}{3}$।
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$A \rightarrow B$ एक प्रथम कोटि की अभिक्रिया है। $A$ की सांद्रता $100 \ \min$ में $x \ mol \ L^{-1}$ से घटकर $y \ mol \ L^{-1}$ हो जाती है। अभिक्रिया का औसत वेग $mol \ L^{-1} \ \min^{-1}$ में क्या है?
A
$\frac{|x-y|}{100}$
B
$\frac{|y-x|^2}{100}$
C
$\frac{100}{|x-y|}$
D
$\frac{100}{|x+y|}$

Solution

(A) अभिक्रिया का औसत वेग अभिकारक या उत्पाद की सांद्रता में परिवर्तन को उस परिवर्तन के लिए लिए गए समय अंतराल से विभाजित करने पर प्राप्त होता है।
$A \rightarrow B$ अभिक्रिया के लिए,औसत वेग है:
$\text{औसत वेग} = -\frac{\Delta[A]}{\Delta t}$
यहाँ,$A$ की सांद्रता में परिवर्तन $\Delta[A] = [A]_{final} - [A]_{initial} = y - x$ है।
समय अंतराल $\Delta t = 100 \ \min$ है।
अतः,औसत वेग $-\frac{y - x}{100} = \frac{x - y}{100}$ है।
चूंकि वेग हमेशा धनात्मक होता है,हम इसका परिमाण लेते हैं: $\frac{|x - y|}{100} \ mol \ L^{-1} \ \min^{-1}$।
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$R \longrightarrow P$ एक प्रथम कोटि की अभिक्रिया है। $R$ की सांद्रता $40 \ min$ में $0.04$ से बदलकर $0.03 \ mol \ L^{-1}$ हो जाती है। अभिक्रिया का औसत वेग $mol \ L^{-1} \ s^{-1}$ में क्या है?
A
$2.5 \times 10^{-4}$
B
$4.167 \times 10^{-6}$
C
$4.167 \times 10^{6}$
D
$2.5 \times 10^{-5}$

Solution

(B) अभिक्रिया की औसत दर का सूत्र है: $\text{Average Rate} = -\frac{\Delta[R]}{\Delta t}$.
दिया गया है,$\Delta[R] = [R]_2 - [R]_1 = 0.03 - 0.04 = -0.01 \ mol \ L^{-1}$.
दिया गया है,$\Delta t = 40 \ min = 40 \times 60 \ s = 2400 \ s$.
मान रखने पर: $\text{Average Rate} = -\frac{-0.01}{2400} = \frac{0.01}{2400} \ mol \ L^{-1} \ s^{-1}$.
$\text{Average Rate} = \frac{1 \times 10^{-2}}{24 \times 10^2} = \frac{1}{24} \times 10^{-4} \approx 0.04167 \times 10^{-4} = 4.167 \times 10^{-6} \ mol \ L^{-1} \ s^{-1}$.
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$A \rightarrow$ उत्पाद एक प्रथम कोटि की अभिक्रिया है। $T \ K$ पर इस अभिक्रिया के लिए निम्नलिखित डेटा प्राप्त होता है। $x : y$ का मान है:
दर $(\text{mol } L^{-1} \ \text{min}^{-1})$$[A]$
$0.2$$0.02 \ M$
$0.4$$x \ M$
$1.0$$y \ M$
A
$1 : 5$
B
$2 : 3$
C
$5 : 2$
D
$2 : 5$

Solution

(D) प्रथम कोटि की अभिक्रिया के लिए,दर नियम है: $\text{Rate} = k[A]$.
दिए गए डेटा से,हम दर स्थिरांक $k$ ज्ञात कर सकते हैं:
$0.2 = k \times 0.02 \implies k = \frac{0.2}{0.02} = 10 \ \text{min}^{-1}$.
अब,$0.4$ दर का उपयोग करके $x$ ज्ञात करते हैं:
$0.4 = 10 \times x \implies x = 0.04 \ M$.
इसके बाद,$1.0$ दर का उपयोग करके $y$ ज्ञात करते हैं:
$1.0 = 10 \times y \implies y = 0.10 \ M$.
$x : y$ का अनुपात $0.04 : 0.10 = 4 : 10 = 2 : 5$ है।
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प्रथम कोटि की अभिक्रिया में,अभिकारक की सांद्रता $75 \ minutes$ में प्रारंभिक सांद्रता की $1/8$ रह जाती है। अभिक्रिया का $t_{1/2}$ (मिनटों में) है $(\log 2 = 0.30, \log 3 = 0.47, \log 4 = 0.60)$
A
$60.2$
B
$50.2$
C
$25.1$
D
$75.1$

Solution

(C) प्रथम कोटि की अभिक्रिया के लिए,$t$ समय के बाद सांद्रता $[A]_t = [A]_0 \times (1/2)^n$ द्वारा दी जाती है,जहाँ $n$ अर्ध-आयु की संख्या है।
यह दिया गया है कि सांद्रता प्रारंभिक सांद्रता की $1/8$ रह जाती है,इसलिए $(1/2)^n = 1/8$ है।
चूंकि $1/8 = (1/2)^3$,इसलिए $n = 3$ प्राप्त होता है।
इसका अर्थ है कि $75 \ minutes$ में $3$ अर्ध-आयु बीत चुकी हैं।
अतः,$3 \times t_{1/2} = 75 \ minutes$ है।
$t_{1/2} = 75 / 3 = 25 \ minutes$ है।
सबसे निकटतम विकल्प $25.1 \ minutes$ है।
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प्रथम कोटि की अभिक्रिया के लिए,अभिक्रिया के $\frac{3}{4}$ भाग को पूर्ण करने में लगा समय और अभिक्रिया के आधे भाग को पूर्ण करने में लगे समय का अनुपात है
A
$2$
B
$3$
C
$1.5$
D
$2.5$

Solution

(A) प्रथम कोटि की अभिक्रिया के लिए,$f$ भाग पूर्ण करने में लगा समय $t = \frac{2.303}{k} \log(\frac{1}{1-f})$ द्वारा दिया जाता है।
अर्ध-आयु $(t_{1/2})$ के लिए,$f = 0.5$,अतः $t_{1/2} = \frac{2.303}{k} \log(2)$।
$\frac{3}{4}$ भाग पूर्ण करने के लिए,$f = 0.75$,अतः $t_{3/4} = \frac{2.303}{k} \log(\frac{1}{1-0.75}) = \frac{2.303}{k} \log(4) = \frac{2.303}{k} \log(2^2) = 2 \times \frac{2.303}{k} \log(2)$।
अतः,अनुपात $\frac{t_{3/4}}{t_{1/2}} = \frac{2 \times \frac{2.303}{k} \log(2)}{\frac{2.303}{k} \log(2)} = 2$।
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अम्ल द्वारा सुक्रोज के जल-अपघटन के लिए सक्रियण ऊर्जा $X \ kJ \ mol^{-1}$ है जबकि सुक्रेज द्वारा सुक्रोज के जल-अपघटन के लिए सक्रियण ऊर्जा $Y \ kJ \ mol^{-1}$ है। $X$ और $Y$ क्रमशः हैं
A
$6.22, 2.15$
B
$2.15, 6.22$
C
$6.22, 6.22$
D
$2.15, 2.15$

Solution

(A) सुक्रोज का जल-अपघटन एक ऐसी अभिक्रिया है जिसे अम्ल या एंजाइम (सुक्रेज) द्वारा उत्प्रेरित किया जा सकता है।
एंजाइम जैविक उत्प्रेरक होते हैं जो अकार्बनिक उत्प्रेरकों या अम्ल-उत्प्रेरित अभिक्रियाओं की तुलना में अभिक्रिया की सक्रियण ऊर्जा को काफी कम कर देते हैं।
सुक्रोज के जल-अपघटन के लिए,अम्ल उत्प्रेरण के साथ सक्रियण ऊर्जा लगभग $6.22 \ kJ \ mol^{-1}$ है,जबकि एंजाइम सुक्रेज के साथ सक्रियण ऊर्जा काफी कम,लगभग $2.15 \ kJ \ mol^{-1}$ है।
अतः,$X = 6.22$ और $Y = 2.15$।
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$T \ K$ पर,एक प्रथम कोटि की अभिक्रिया के लिए निम्नलिखित समीकरण प्राप्त होता है: $\log \frac{k}{A} = -\frac{x}{T}$. इस अभिक्रिया के लिए सक्रियण ऊर्जा का मान क्या होगा? $(R = \text{गैस नियतांक})$
A
$2.303 x R$
B
$\frac{2.303 R}{x}$
C
$\frac{x}{2.303 R}$
D
$\frac{1}{2.303 x R}$

Solution

(A) आरेनियस समीकरण के अनुसार: $k = A e^{-E_a / RT}$.
दोनों पक्षों का प्राकृतिक लघुगणक लेने पर: $\ln k = \ln A - \frac{E_a}{RT}$.
पदों को व्यवस्थित करने पर: $\ln \left(\frac{k}{A}\right) = -\frac{E_a}{RT}$.
प्राकृतिक लघुगणक को $10$ के आधार में बदलने पर: $2.303 \log \left(\frac{k}{A}\right) = -\frac{E_a}{RT}$.
$2.303$ से भाग देने पर: $\log \left(\frac{k}{A}\right) = -\frac{E_a}{2.303 RT}$.
दिया गया समीकरण: $\log \left(\frac{k}{A}\right) = -\frac{x}{T}$.
दोनों समीकरणों की तुलना करने पर: $\frac{E_a}{2.303 R} = x$.
अतः,सक्रियण ऊर्जा है: $E_a = 2.303 x R$.
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$300 \ K$ पर प्रथम कोटि की अभिक्रिया के लिए निम्नलिखित समीकरण प्राप्त होता है।
$\log_{10} \frac{k}{A} = 0.00174$
अभिक्रिया की सक्रियण ऊर्जा ($J \ mol^{-1}$ में) क्या है?
$(R = 8.314 \ J \ mol^{-1} \ K^{-1})$
A
$10.0$
B
$100.0$
C
$0.1$
D
$1.0$

Solution

(A) आर्हेनियस समीकरण $k = A e^{-E_a / RT}$ है।
दोनों तरफ लघुगणक लेने पर: $\ln k = \ln A - \frac{E_a}{RT}$।
पुनर्व्यवस्थित करने पर $\ln \frac{k}{A} = -\frac{E_a}{RT}$ प्राप्त होता है।
आधार $10$ में बदलने पर: $\log_{10} \frac{k}{A} = -\frac{E_a}{2.303 RT}$।
दिया गया है $\log_{10} \frac{k}{A} = 0.00174$,$T = 300 \ K$,और $R = 8.314 \ J \ mol^{-1} \ K^{-1}$।
मान रखने पर: $0.00174 = -\frac{E_a}{2.303 \times 8.314 \times 300}$।
नोट: दिया गया समीकरण $\log_{10} \frac{k}{A} = 0.00174$ धनात्मक मान दर्शाता है,जो सक्रियण ऊर्जा $E_a > 0$ के लिए आर्हेनियस समीकरण के साथ भौतिक रूप से असंगत है। परिमाण को ध्यान में रखते हुए: $E_a = |0.00174 \times 2.303 \times 8.314 \times 300| \approx 10 \ J \ mol^{-1}$।
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दी गई अभिक्रिया $(A \rightarrow P)$ के लिए निम्नलिखित ग्राफ प्राप्त होता है। इस अभिक्रिया के लिए सक्रियण ऊर्जा ($E_{a}$,$kJ \ mol^{-1}$ में) और अभिक्रिया की ऊष्मा ($|\Delta H|$,$kJ \ mol^{-1}$ में) क्रमशः हैं ($x=$ अभिक्रिया निर्देशांक; $y=E$,$kJ \ mol^{-1}$ में)
Question diagram
A
$5, 15$
B
$15, 5$
C
$25, 5$
D
$10, 25$

Solution

(B) दिए गए स्थितिज ऊर्जा आरेख से:
$1$. अभिकारक $(A)$ की ऊर्जा $E_{A} = 10 \ kJ \ mol^{-1}$ है।
$2$. उत्पाद $(P)$ की ऊर्जा $E_{P} = 5 \ kJ \ mol^{-1}$ है।
$3$. देहली ऊर्जा (वक्र का शिखर) $E_{threshold} = 25 \ kJ \ mol^{-1}$ है।
$4$. सक्रियण ऊर्जा $(E_{a})$ की गणना $E_{threshold} - E_{A} = 25 - 10 = 15 \ kJ \ mol^{-1}$ के रूप में की जाती है।
$5$. अभिक्रिया की ऊष्मा $(\Delta H)$ की गणना $E_{P} - E_{A} = 5 - 10 = -5 \ kJ \ mol^{-1}$ के रूप में की जाती है।
$6$. अभिक्रिया की ऊष्मा का परिमाण $|\Delta H| = |-5| = 5 \ kJ \ mol^{-1}$ है।
अतः,सक्रियण ऊर्जा $15 \ kJ \ mol^{-1}$ और अभिक्रिया की ऊष्मा $5 \ kJ \ mol^{-1}$ है।
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एक अभिक्रिया के लिए,$\ln k$ (y-अक्ष पर) और $1 / T$ (x-अक्ष पर) का ग्राफ $-2 \times 10^4 \ K$ के ढाल (slope) वाली एक सीधी रेखा है। अभिक्रिया की सक्रियण ऊर्जा ($kJ \ mol^{-1}$ में) है $(R = 8.3 \ J \ K^{-1} \ mol^{-1})$
A
$332$
B
$432$
C
$166$
D
$216$

Solution

(C) आरेनियस समीकरण के अनुसार,$\ln k = \ln A - \frac{E_a}{RT}$ होता है।
इसे एक सीधी रेखा के समीकरण $y = mx + c$ के साथ तुलना करने पर,जहाँ $y = \ln k$ और $x = 1 / T$,ढाल $m = -\frac{E_a}{R}$ प्राप्त होता है।
दिया गया है,ढाल $= -2 \times 10^4 \ K$ और $R = 8.3 \ J \ K^{-1} \ mol^{-1}$।
अतः,$-\frac{E_a}{R} = -2 \times 10^4 \ K$।
$E_a = 2 \times 10^4 \ K \times 8.3 \ J \ K^{-1} \ mol^{-1} = 166000 \ J \ mol^{-1}$।
$kJ \ mol^{-1}$ में बदलने पर,$E_a = \frac{166000}{1000} = 166 \ kJ \ mol^{-1}$।
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निम्नलिखित में से कौन सा एंटासिड का उदाहरण नहीं है?
A
सिमेटिडाइन
B
रैनिटिडाइन
C
सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट
D
फेनेल्ज़िन

Solution

(D) एंटासिड वे पदार्थ हैं जो पेट के अतिरिक्त एसिड को बेअसर करते हैं। $Cimetidine$ और $Ranitidine$ हिस्टामाइन रिसेप्टर ब्लॉकर्स हैं जिनका उपयोग एंटासिड के रूप में किया जाता है। $Sodium \text{ } hydrogen \text{ } carbonate$ $(NaHCO_3)$ एक सामान्य हल्का एंटासिड है। $Phenelzine$ एक एंटीडिप्रेसेंट है,एंटासिड नहीं। इसलिए,सही उत्तर $D$ है।
133
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अवसाद (depression) और उच्च रक्तचाप (hypertension) को नियंत्रित करने के लिए किस दवा का उपयोग किया जाता है?
A
Bithionol
B
Equanil
C
Dimetapp
D
Prontosil

Solution

(B) Equanil एक ट्रैंक्विलाइज़र (प्रशांतक) है जिसका उपयोग अवसाद और उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है।
यह एक हल्का ट्रैंक्विलाइज़र है जो तनाव और चिंता को दूर करने में मदद करता है।
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एंटीसेप्टिक गुण प्रदान करने के लिए साबुन में बिथियोनोल मिलाया जाता है। इसकी संरचना में $-OH$ और $-Cl$ समूहों की संख्या क्रमशः कितनी है?
A
$2, 3$
B
$3, 2$
C
$4, 2$
D
$2, 4$

Solution

(D) बिथियोनोल की रासायनिक संरचना $2,2'$-थायोबिस($4,6$-डाइक्लोरोफेनोल) है।
इसमें सल्फर परमाणु द्वारा जुड़ी हुई दो फेनोल रिंग होती हैं।
प्रत्येक फेनोल रिंग में एक $-OH$ समूह और दो $-Cl$ समूह होते हैं।
अतः,$-OH$ समूहों की कुल संख्या $2$ है और $-Cl$ समूहों की कुल संख्या $4$ है।
सही विकल्प $D$ है।
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निम्नलिखित का मिलान करें।
सूची-$I$ (औषधियाँ)सूची-$II$ (प्रभाव)
$A$. Equanil$I$. सम्मोहक (Hypnotic)
$B$. Furacine$II$. प्रतिअम्ल (Antacid)
$C$. Tegamet$III$. पूतिरोधी (Antiseptic)
$D$. Veronal$IV$. उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करने के लिए
सही उत्तर है
A
$A-III, B-I, C-II, D-IV$
B
$A-II, B-IV, C-III, D-I$
C
$A-IV, B-III, C-II, D-I$
D
$A-IV, B-III, C-I, D-II$

Solution

(D) . Equanil का उपयोग उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है (प्रशांतक)। अतः,$A-IV$.
$B$. Furacine एक पूतिरोधी (antiseptic) है। अतः,$B-III$.
$C$. Tegamet एक प्रतिअम्ल (antacid) है। अतः,$C-II$.
$D$. Veronal एक सम्मोहक (hypnotic) है। अतः,$D-I$.
इसलिए,सही मिलान $A-IV, B-III, C-II, D-I$ है।
136
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निम्नलिखित में से कौन सा एक एंटीबायोटिक नहीं है?
A
क्लोरामफेनिकोल
B
ओफ्लोक्सासिन
C
पेनिसिलिन
D
नोवेस्ट्रोल

Solution

(D) $Chloramphenicol$,$Ofloxacin$,और $Penicillin$ जीवाणु संक्रमण के इलाज के लिए उपयोग की जाने वाली प्रसिद्ध एंटीबायोटिक्स हैं।
$Novestrol$ एक सिंथेटिक एस्ट्रोजन है,जो गर्भनिरोधक गोलियों में उपयोग किया जाने वाला एक हार्मोन है,यह एंटीबायोटिक नहीं है।
137
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निम्नलिखित में से कौन से सिंथेटिक डिटर्जेंट हैं?
$A$) $CH_3(CH_2)_{10}CH_2OH$
$B$) $CH_3(CH_2)_{10}CH_2OSO_3Na$
$C$) $CH_3(CH_2)_{15}N(CH_3)_3Br$
$D$) $(C_{15}H_{31}COO)_3C_3H_5$
A
केवल $A, B, C$
B
केवल $B, C, D$
C
केवल $A, D$
D
केवल $B, C$

Solution

(D) सिंथेटिक डिटर्जेंट ऐसे सफाई एजेंट हैं जिनमें साबुन के सभी गुण होते हैं लेकिन उनमें कोई वास्तविक साबुन नहीं होता है। इन्हें तीन श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है: एनायोनिक,कैटायोनिक और नॉन-आयनिक डिटर्जेंट।
$1$. $CH_3(CH_2)_{10}CH_2OH$ एक लंबी श्रृंखला वाला अल्कोहल है,डिटर्जेंट नहीं।
$2$. $CH_3(CH_2)_{10}CH_2OSO_3Na$ सोडियम लॉरिल सल्फेट है,जो एक एनायोनिक सिंथेटिक डिटर्जेंट है।
$3$. $CH_3(CH_2)_{15}N(CH_3)_3Br$ सेटिलट्राइमिथाइल अमोनियम ब्रोमाइड है,जो एक कैटायोनिक सिंथेटिक डिटर्जेंट है।
$4$. $(C_{15}H_{31}COO)_3C_3H_5$ ग्लिसरील ट्राइपामिटेट है,जो एक प्राकृतिक वसा (ट्राइग्लिसराइड) है,सिंथेटिक डिटर्जेंट नहीं।
इसलिए,$B$ और $C$ सिंथेटिक डिटर्जेंट हैं।
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निम्नलिखित में से कौन सा सिंथेटिक डिटर्जेंट का उदाहरण नहीं है?
A
Cetyltrimethylammonium bromide
B
Sodium stearate
C
Sodium laurylsulphate
D
Sodium dodecylbenzenesulfonate

Solution

(B) सिंथेटिक डिटर्जेंट ऐसे सफाई एजेंट हैं जिनमें साबुन नहीं होता है। ये आमतौर पर लंबी श्रृंखला वाले अल्काइल हाइड्रोजन सल्फेट या अल्काइल बेंजीन सल्फोनिक एसिड के लवण होते हैं।
$A$. $Cetyltrimethylammonium \text{ } bromide$ एक धनायनित (cationic) डिटर्जेंट है।
$B$. $Sodium \text{ } stearate$ $(C_{17}H_{35}COONa)$ एक साबुन है,सिंथेटिक डिटर्जेंट नहीं।
$C$. $Sodium \text{ } laurylsulphate$ एक ऋणायनित (anionic) डिटर्जेंट है।
$D$. $Sodium \text{ } dodecylbenzenesulfonate$ एक ऋणायनित (anionic) डिटर्जेंट है।
अतः,$Sodium \text{ } stearate$ सही उत्तर है।
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निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
कथन-$I$: शेविंग साबुन में तेजी से सूखने से रोकने के लिए ग्लिसरॉल होता है।
कथन-$II$: लॉन्ड्री साबुन में फिलर के रूप में सोडियम कार्बोनेट होता है।
सही उत्तर है:
A
कथन-$I$ और कथन-$II$ दोनों सही हैं
B
कथन-$I$ और कथन-$II$ दोनों गलत हैं
C
कथन-$I$ सही है,लेकिन कथन-$II$ गलत है
D
कथन-$I$ गलत है,लेकिन कथन-$II$ सही है

Solution

(C) कथन-$I$ सही है। शेविंग साबुन में ग्लिसरॉल होता है जो नमी बनाए रखकर इसे तेजी से सूखने से रोकता है।
कथन-$II$ गलत है। लॉन्ड्री साबुन में फिलर के रूप में सोडियम रोजिनेट या सोडियम सिलिकेट का उपयोग किया जाता है,न कि सोडियम कार्बोनेट का।
अतः,कथन-$I$ सही है,लेकिन कथन-$II$ गलत है।
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टूथपेस्ट में उपयोग किया जाने वाला सिंथेटिक डिटर्जेंट $X$ प्रकार का है। जंतु स्टार्च $Y$ है। $X$ और $Y$ क्रमशः क्या हैं?
A
एनायोनिक,एमाइलोज़
B
नॉन-आयनिक,सेलुलोज़
C
एनायोनिक,ग्लाइकोजन
D
कैटायोनिक,एमाइलोपेक्टिन

Solution

(C) टूथपेस्ट में उपयोग किया जाने वाला सिंथेटिक डिटर्जेंट आमतौर पर एक एनायोनिक डिटर्जेंट होता है,जैसे कि सोडियम लॉरिल सल्फेट।
जंतु स्टार्च को ग्लाइकोजन के रूप में जाना जाता है,जो एक पॉलीसेकेराइड है और जंतुओं में ऊर्जा भंडारण के रूप में कार्य करता है।
इसलिए,$X$ एनायोनिक है और $Y$ ग्लाइकोजन है।
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कृत्रिम मधुरक $X$ में ग्लाइकोसिडिक लिंकेज है और $Y$ में एमाइड और एस्टर लिंकेज हैं। $X$ और $Y$ क्रमशः क्या हैं?
A
सुक्रालोज़,एलिटेम
B
सुक्रालोज़,एस्पार्टेम
C
सैकरिन,एलिटेम
D
सैकरिन,एस्पार्टेम

Solution

(B) $X$ सुक्रालोज़ है,जो सुक्रोज़ का ट्राइक्लोरो व्युत्पन्न है। इसमें ग्लूकोज और फ्रुक्टोज़ इकाइयों के बीच एक ग्लाइकोसिडिक लिंकेज होता है।
$Y$ एस्पार्टेम है,जो एस्पार्टिक एसिड और फेनिलएलनिन का डाइपेप्टाइड मिथाइल एस्टर है। इसमें एमाइड (पेप्टाइड) और एस्टर दोनों लिंकेज होते हैं।
अतः,सही युग्म सुक्रालोज़ और एस्पार्टेम है।
142
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$Fe_{x}[Fe_{y}(CN)_6]_3$ में,$x$ और $y$ क्रमशः क्या हैं?
A
$3, 2$
B
$4, 1$
C
$2, 3$
D
$1, 4$

Solution

(B) दिया गया यौगिक प्रशियन ब्लू है,जो $Fe_4[Fe(CN)_6]_3$ है।
इसकी तुलना सामान्य सूत्र $Fe_x[Fe_y(CN)_6]_3$ से करने पर,हम $x$ और $y$ के मानों की पहचान कर सकते हैं।
यहाँ,$x = 4$ और $y = 1$ है।
अतः,$x$ और $y$ के मान क्रमशः $4$ और $1$ हैं।
143
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$K[Cr(H_2O)_2(C_2O_4)_2]$ में क्रोमियम की समन्वय संख्या (coordination number) क्या है?
A
$5$
B
$4$
C
$6$
D
$3$

Solution

(C) समन्वय संख्या को उन लिगेंड दाता परमाणुओं की संख्या के रूप में परिभाषित किया जाता है जिनसे धातु सीधे जुड़ी होती है।
संकुल $[Cr(H_2O)_2(C_2O_4)_2]^-$ में,लिगेंड इस प्रकार हैं:
$1$. दो $H_2O$ अणु,जो एकदंती (monodentate) लिगेंड हैं (प्रत्येक $1$ इलेक्ट्रॉन युग्म दान करता है)।
$2$. दो $C_2O_4^{2-}$ (ऑक्सालेट) आयन,जो द्विदंती (bidentate) लिगेंड हैं (प्रत्येक $2$ इलेक्ट्रॉन युग्म दान करता है)।
गणना: $(2 \times 1) + (2 \times 2) = 2 + 4 = 6$.
अतः,$Cr$ की समन्वय संख्या $6$ है।
144
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उस समूह की पहचान करें जिसमें एम्बीडेंटेट लिगेंड नहीं है।
A
$NO_2^{-}, CN^{-}, C_2O_4^{2-}$
B
$C_2O_4^{2-}, H_2O, SO_4^{2-}$
C
$SCN^{-}, NH_3, CH_3COO^{-}$
D
$CN^{-}, SCN^{-}, CH_3NH_2$

Solution

(B) एम्बीडेंटेट लिगेंड वह लिगेंड है जो दो अलग-अलग दाता परमाणुओं के माध्यम से केंद्रीय धातु परमाणु से जुड़ सकता है। उदाहरणों में $NO_2^{-}$,$CN^{-}$,और $SCN^{-}$ शामिल हैं।
विकल्प $A$ में,$NO_2^{-}$ और $CN^{-}$ एम्बीडेंटेट हैं।
विकल्प $B$ में,$C_2O_4^{2-}$ (ऑक्सालेट) एक बाईडेंटेट लिगेंड है,$H_2O$ एक मोनोडेंटेट लिगेंड है,और $SO_4^{2-}$ एक बाईडेंटेट लिगेंड है। इनमें से कोई भी एम्बीडेंटेट नहीं है।
विकल्प $C$ में,$SCN^{-}$ एम्बीडेंटेट है।
विकल्प $D$ में,$CN^{-}$ और $SCN^{-}$ एम्बीडेंटेट हैं।
अतः,वह समूह जिसमें कोई एम्बीडेंटेट लिगेंड नहीं है,वह $C_2O_4^{2-}, H_2O, SO_4^{2-}$ है।
145
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नीचे दिए गए संकुल का $IUPAC$ नाम क्या है? $K_3[Co(ox)_3]$
A
ट्राइपोटेशियम ट्राइऑक्सेलेटोकोबाल्टेट $(III)$
B
पोटेशियम ट्राइऑक्सेलेटकोबाल्टेट $(III)$
C
पोटेशियम ट्राइऑक्सेलेटकोबाल्ट $(III)$
D
पोटेशियम ट्राइऑक्सेलेटोकोबाल्टेट $(III)$

Solution

(D) $1$. धनायन की पहचान करें: धनायन $K^+$ है,जिसे पोटेशियम कहा जाता है। $IUPAC$ नाम में पोटेशियम आयनों की संख्या का उल्लेख नहीं किया जाता है।
$2$. लिगेंड की पहचान करें: लिगेंड $ox^{2-}$ (ऑक्सेलेट आयन) है। चूंकि $3$ ऑक्सेलेट लिगेंड हैं,इसलिए उपसर्ग 'ट्राइ' का उपयोग किया जाता है। लिगेंड का नाम 'ट्राइऑक्सेलेटो' हो जाता है।
$3$. केंद्रीय धातु परमाणु की पहचान करें: संकुल आयन $[Co(ox)_3]^{3-}$ है। चूंकि संकुल आयन ऋणात्मक है,इसलिए $Co$ को 'कोबाल्टेट' कहा जाता है।
$4$. ऑक्सीकरण अवस्था निर्धारित करें: मान लें कि $Co$ की ऑक्सीकरण अवस्था $x$ है। ऑक्सेलेट पर आवेश $-2$ है। इसलिए,$x + 3(-2) = -3$,जिससे $x - 6 = -3$ प्राप्त होता है,अर्थात $x = +3$। ऑक्सीकरण अवस्था को कोष्ठक में रोमन अंकों में लिखा जाता है: $(III)$।
$5$. भागों को जोड़ें: नाम पोटेशियम ट्राइऑक्सेलेटोकोबाल्टेट $(III)$ है।
146
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निम्नलिखित में से कौन सा संकुल ज्यामितीय समावयवता प्रदर्शित करता है?
$I$) $[Co(en)(NH_3)_2 Cl_2] Cl$
$II$) $[Co(NH_3)_4 Cl_2] Cl$
$III$) $[Co(en)_3] Cl_3$
$IV$) $[Co(en)_2 Cl_2] Br$
A
केवल $I, II \& III$
B
केवल $II, III \& IV$
C
केवल $I, II \& IV$
D
केवल $II \& III$

Solution

(C) अष्टफलकीय संकुलों में ज्यामितीय समावयवता तब होती है जब लिगेंड विभिन्न स्थानिक विन्यासों (cis और trans रूप) में व्यवस्थित होते हैं।
$I$) $[Co(en)(NH_3)_2 Cl_2] Cl$: यह संकुल $[M(AA)(a)_2(b)_2]$ रूप का है,जो ज्यामितीय समावयवता प्रदर्शित करता है।
$II$) $[Co(NH_3)_4 Cl_2] Cl$: यह संकुल $[M(a)_4(b)_2]$ रूप का है,जो cis और trans ज्यामितीय समावयव प्रदर्शित करता है।
$III$) $[Co(en)_3] Cl_3$: यह संकुल $[M(AA)_3]$ रूप का है। यह ज्यामितीय समावयवता नहीं दिखाता है क्योंकि द्विदंतुक लिगेंडों की सममिति के कारण सभी स्थितियाँ समान होती हैं।
$IV$) $[Co(en)_2 Cl_2] Br$: यह संकुल $[M(AA)_2(b)_2]$ रूप का है,जो cis और trans ज्यामितीय समावयव प्रदर्शित करता है।
अतः,संकुल $I, II,$ और $IV$ ज्यामितीय समावयवता प्रदर्शित करते हैं।
147
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निम्नलिखित में से कौन सा आयनीकरण समावयवता (ionization isomerism) प्रदर्शित करता है?
$I) [Cr(NH_3)_4Cl_2]Cl$
$II) [Ti(H_2O)_5Cl](NO_3)_2$
$III) [Pt(en)(NH_3)Cl]NO_3$
$IV) [Co(NH_3)_4(NO_3)_2]NO_3$
A
केवल $II$ और $III$
B
केवल $I$ और $II$
C
केवल $II$ और $IV$
D
केवल $III$ और $IV$

Solution

(A) आयनीकरण समावयवता तब होती है जब समन्वय परिसर में प्रति-आयन (counter ion) एक संभावित लिगेंड होता है और समन्वय क्षेत्र से लिगेंड को विस्थापित कर सकता है।
$II$ और $III$ दोनों में प्रति-आयन लिगेंड के रूप में प्रतिस्थापित हो सकते हैं,इसलिए वे आयनीकरण समावयवता प्रदर्शित करते हैं।
148
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$4.90 \ BM$ के स्पिन-ओनली चुंबकीय आघूर्ण वाले संकुल आयन की पहचान करें।
A
$[Co(NH_3)_6]^{3+}$
B
$[Cr(NH_3)_6]^{3+}$
C
$[Mn(CN)_6]^{3-}$
D
$[MnCl_6]^{3-}$

Solution

(D) स्पिन-ओनली चुंबकीय आघूर्ण $(\mu_{eff})$ को सूत्र $\mu = \sqrt{n(n+2)} \ BM$ द्वारा दिया जाता है,जहाँ $n$ अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की संख्या है।
$\mu = 4.90 \ BM$ के लिए,$n = 4$ होना चाहिए (क्योंकि $\sqrt{4(4+2)} = \sqrt{24} \approx 4.90$)।
$A$: $[Co(NH_3)_6]^{3+}$: $Co^{3+}$ का विन्यास $d^6$ है। $NH_3$ एक प्रबल क्षेत्र लिगैंड है,जो युग्मन (pairing) कराता है। $n = 0$ है।
$B$: $[Cr(NH_3)_6]^{3+}$: $Cr^{3+}$ का विन्यास $d^3$ है। $n = 3$ है।
$C$: $[Mn(CN)_6]^{3-}$: $Mn^{3+}$ का विन्यास $d^4$ है। $CN^{-}$ एक प्रबल क्षेत्र लिगैंड है,जो युग्मन कराता है। $n = 2$ है।
$D$: $[MnCl_6]^{3-}$: $Mn^{3+}$ का विन्यास $d^4$ है। $Cl^{-}$ एक दुर्बल क्षेत्र लिगैंड है,कोई युग्मन नहीं होता है। विन्यास $t_{2g}^3 e_g^1$ है,जिसके परिणामस्वरूप $n = 4$ अयुग्मित इलेक्ट्रॉन होते हैं।
अतः,$[MnCl_6]^{3-}$ का चुंबकीय आघूर्ण $4.90 \ BM$ है।
149
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निम्नलिखित का मिलान करें:
List-$I$ (\text{Aquated Ion}) List-$II$ (\text{Colour})
$A. Ni^{2+}$ $I. \text{Violet}$
$B. Fe^{3+}$ $II. \text{Blue}$
$C. Mn^{3+}$ $III. \text{Yellow}$
$D. V^{4+}$ $IV. \text{Red}$
$V. \text{Green}$
A
$A-V, B-III, C-IV, D-II$
B
$A-IV, B-V, C-I, D-III$
C
$A-I, B-III, C-IV, D-V$
D
$A-V, B-III, C-I, D-II$

Solution

(D) जलीय आयनों के रंग इस प्रकार हैं:
$1$. $[Ni(H_2O)_6]^{2+}$ हरा है।
$2$. $[Fe(H_2O)_6]^{3+}$ पीला है।
$3$. $[Mn(H_2O)_6]^{3+}$ बैंगनी है।
$4$. $[V(H_2O)_6]^{4+}$ नीला है।
अतः,सही मिलान $A-V, B-III, C-I, D-II$ है।
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निम्नलिखित में से किसमें,संकुल आयन अपने क्रिस्टल क्षेत्र विपाटन की मात्रा के संबंध में सही क्रम में नहीं हैं?
A
$[Fe(H_2O)_6]^{3+} > [FeF_6]^{3-}$
B
$[Fe(en)_3]^{3+} > [Fe(NCS)_6]^{3-}$
C
$[Fe(CN)_6]^{4-} > [Fe(H_2O)_6]^{2+}$
D
$[Fe(H_2O)_6]^{2+} > [Fe(NH_3)_6]^{2+}$

Solution

(D) क्रिस्टल क्षेत्र विपाटन $(\Delta_o)$ की मात्रा लिगेंड की प्रकृति (स्पेक्ट्रोकेमिकल श्रेणी) और धातु आयन की ऑक्सीकरण अवस्था पर निर्भर करती है।
$1$. विकल्प $A$ में,$H_2O$,$F^-$ की तुलना में एक प्रबल लिगेंड है,इसलिए $[Fe(H_2O)_6]^{3+} > [FeF_6]^{3-}$ सही है।
$2$. विकल्प $B$ में,$en$,$NCS^-$ की तुलना में एक प्रबल लिगेंड है,इसलिए $[Fe(en)_3]^{3+} > [Fe(NCS)_6]^{3-}$ सही है।
$3$. विकल्प $C$ में,$CN^-$,$H_2O$ की तुलना में एक प्रबल लिगेंड है,इसलिए $[Fe(CN)_6]^{4-} > [Fe(H_2O)_6]^{2+}$ सही है।
$4$. विकल्प $D$ में,$NH_3$,$H_2O$ की तुलना में एक प्रबल लिगेंड है। इसलिए,सही क्रम $[Fe(NH_3)_6]^{2+} > [Fe(H_2O)_6]^{2+}$ होना चाहिए। दिया गया क्रम $[Fe(H_2O)_6]^{2+} > [Fe(NH_3)_6]^{2+}$ गलत है।

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