JEE Main 2021 Chemistry Question Paper with Answer and Solution in Hindi

798 QuestionsHindiWith Solutions

ChemistryQ151250 of 798 questions

Page 4 of 9 · Hindi

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$1.86 \ g$ एनिलीन पूर्ण रूप से अभिक्रिया करके एसीटेनिलाइड बनाता है। शुद्धिकरण के दौरान $10 \ \%$ उत्पाद नष्ट हो जाता है। शुद्धिकरण के बाद प्राप्त एसीटेनिलाइड की मात्रा ($g$ में) ...... $\times 10^{-2}$ है।
A
$221$
B
$243$
C
$222$
D
$313$

Solution

(B) एनिलीन $(C_6H_5NH_2)$ का मोलर द्रव्यमान $93 \ g/mol$ है और एसीटेनिलाइड $(C_6H_5NHCOCH_3)$ का मोलर द्रव्यमान $135 \ g/mol$ है।
अभिक्रिया: $C_6H_5NH_2 + CH_3COCl \rightarrow C_6H_5NHCOCH_3 + HCl$.
$1 \ mol$ एनिलीन $1 \ mol$ एसीटेनिलाइड उत्पन्न करता है।
उपयोग किए गए एनिलीन के मोल $= \frac{1.86 \ g}{93 \ g/mol} = 0.02 \ mol$.
एसीटेनिलाइड की सैद्धांतिक उपज $= 0.02 \ mol \times 135 \ g/mol = 2.70 \ g$.
चूंकि शुद्धिकरण के दौरान $10 \ \%$ उत्पाद नष्ट हो जाता है,इसलिए उपज सैद्धांतिक उपज का $90 \ \%$ है।
वास्तविक उपज $= 2.70 \ g \times 0.90 = 2.43 \ g$.
$2.43 \ g = 243 \times 10^{-2} \ g$.
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ChemistryDifficultMCQJEE Main · 2021
आदर्श व्यवहार मानते हुए,$25^{\circ} C$ पर निम्नलिखित अभिक्रिया के लिए $\log \, K$ का परिमाण $x \times 10^{-1}$ है। $x$ का मान $......$ है। (पूर्णांक उत्तर)
$3 HC \equiv CH_{(g)} \rightleftharpoons C_6H_{6(\ell)}$
[दिया गया है: $\Delta_f G^{\circ}(HC \equiv CH) = -2.04 \times 10^5 \, J \, mol^{-1}$
$\Delta_f G^{\circ}(C_6H_6) = -1.24 \times 10^5 \, J \, mol^{-1}; R = 8.314 \, J \, K^{-1} \, mol^{-1}$]
A
$855$
B
$952$
C
$412$
D
$1054$

Solution

(A) अभिक्रिया के लिए: $3 HC \equiv CH_{(g)} \rightleftharpoons C_6H_{6(\ell)}$
$\Delta G^{\circ} = \sum \Delta_f G^{\circ}(\text{products}) - \sum \Delta_f G^{\circ}(\text{reactants})$
$\Delta G^{\circ} = [1 \times (-1.24 \times 10^5)] - [3 \times (-2.04 \times 10^5)]$
$\Delta G^{\circ} = -1.24 \times 10^5 + 6.12 \times 10^5 = 4.88 \times 10^5 \, J \, mol^{-1}$
हम जानते हैं कि $\Delta G^{\circ} = -RT \ln K = -2.303 RT \log K$
$4.88 \times 10^5 = -2.303 \times 8.314 \times 298 \times \log K$
$\log K = -\frac{4.88 \times 10^5}{2.303 \times 8.314 \times 298} \approx -85.52$
$\log K$ का परिमाण $85.52$ है।
दिया गया है कि $\log K = x \times 10^{-1}$,इसलिए $85.52 = x \times 10^{-1} \Rightarrow x = 855.2 \approx 855$.
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निम्नलिखित में से किस प्रजाति में बंध लंबाई असमान होती है?
A
$BF_{4}^{-}$
B
$XeF_{4}$
C
$SF_{4}$
D
$SiF_{4}$

Solution

(C) . $SF_{4}$ में,केंद्रीय परमाणु $S$ का $sp^{3}d$ संकरण होता है,जिसके परिणामस्वरूप सी-सॉ (see-saw) ज्यामिति प्राप्त होती है। भूमध्यरेखीय स्थिति में एक एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म (lone pair) की उपस्थिति के कारण,अक्षीय $S-F$ बंध,भूमध्यरेखीय $S-F$ बंधों की तुलना में लंबे होते हैं। इसके विपरीत,$BF_{4}^{-}$,$XeF_{4}$,और $SiF_{4}$ सममित ज्यामिति रखते हैं जहाँ सभी बंध लंबाई समान होती है।
प्रजातिसंकरण और बंध लंबाई की विशेषताएं
$BF_{4}^{-}$$sp^{3}$ (चतुष्फलकीय); सभी बंध लंबाई समान हैं
$XeF_{4}$$sp^{3}d^{2}$ (वर्ग समतलीय); सभी बंध लंबाई समान हैं
$SF_{4}$$sp^{3}d$ (सी-सॉ); अक्षीय बंध लंबाई > भूमध्यरेखीय बंध लंबाई
$SiF_{4}$$sp^{3}$ (चतुष्फलकीय); सभी बंध लंबाई समान हैं
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निम्नलिखित अभिक्रिया का मुख्य उत्पाद क्या है?
Question diagram
A
$3-nitro-2-phenylbutane$
B
$2-nitro-3-phenylbutane$
C
$1-nitro-3-phenylbutane$
D
$2-methyl-2-nitro-1-phenylbutane$

Solution

(B) यह अभिक्रिया अम्ल उत्प्रेरक $(H_2SO_4)$ की उपस्थिति में बेंजीन का एल्कीन $CH_3-CH(NO_2)-CH=CH_2$ के साथ इलेक्ट्रोफिलिक योगात्मक अभिक्रिया है।
$1$. अम्ल एल्कीन को प्रोटोनेट करके एक कार्बोनियम आयन मध्यवर्ती बनाता है।
$2$. सबसे स्थिर कार्बोनियम आयन बनता है,जो $NO_2$ समूह के निकटवर्ती कार्बन पर द्वितीयक कार्बोनियम आयन होता है।
$3$. बेंजीन एक न्यूक्लियोफाइल के रूप में कार्य करता है और कार्बोनियम आयन पर आक्रमण करके अंतिम उत्पाद $2-nitro-3-phenylbutane$ बनाता है।
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ChemistryMediumMCQJEE Main · 2021
जल किसके साथ अभिक्रिया करने पर $CO$ उत्पन्न नहीं करता है:
A
$CO_2$
B
$C$
C
$CH_4$
D
$C_3H_8$

Solution

(A) सही उत्तर $(A)$ है।
जल उच्च तापमान पर कार्बन और हाइड्रोकार्बन के साथ अभिक्रिया करके सिनगैस $(CO + H_2)$ उत्पन्न करता है।
$C + H_2O \xrightarrow{1270 \ K} CO + H_2$
$CH_4 + H_2O \xrightarrow{1270 \ K, \ Ni} CO + 3H_2$
$C_3H_8 + 3H_2O \xrightarrow{\Delta, \ Ni} 3CO + 7H_2$
$CO_2$ के साथ अभिक्रिया:
$CO_2 + H_2O \rightleftharpoons H_2CO_3$ (कार्बोनिक अम्ल)।
इस अभिक्रिया में $CO$ नहीं बनता है।
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नीचे दो कथन दिए गए हैं:
कथन $I :$ वर्षा के जल का $pH$ सामान्यतः $\sim 5.6$ होता है।
कथन $II :$ यदि वर्षा के जल का $pH$ $5.6$ से नीचे गिर जाता है,तो इसे अम्ल वर्षा (acid rain) कहा जाता है।
उपर्युक्त कथनों के आलोक में,नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनें:
A
कथन $I$ सत्य है लेकिन कथन $II$ असत्य है।
B
कथन $I$ और कथन $II$ दोनों असत्य हैं।
C
कथन $I$ असत्य है लेकिन कथन $II$ सत्य है।
D
कथन $I$ और कथन $II$ दोनों सत्य हैं।

Solution

(D) कथन $I$ सत्य है क्योंकि वायुमंडलीय $CO_2$ के घुलने से बनने वाले दुर्बल कार्बोनिक अम्ल $(H_2CO_3)$ के कारण सामान्य वर्षा के जल का $pH$ लगभग $5.6$ होता है।
कथन $II$ सत्य है क्योंकि जब सल्फर $(SO_x)$ और नाइट्रोजन $(NO_x)$ के ऑक्साइड जैसे प्रदूषकों की उपस्थिति के कारण वर्षा के जल का $pH$ $5.6$ से नीचे गिर जाता है,तो इसे अम्ल वर्षा कहा जाता है।
अतः,दोनों कथन सही हैं।
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हैलोजन के परीक्षण के लिए सिल्वर नाइट्रेट मिलाने से पहले सोडियम निष्कर्ष में निम्नलिखित में से कौन सा यौगिक मिलाया जाता है?
A
नाइट्रिक एसिड
B
अमोनिया
C
हाइड्रोक्लोरिक एसिड
D
सोडियम हाइड्रोक्साइड

Solution

(A) हैलोजन के परीक्षण के लिए,सोडियम निष्कर्ष में $HNO_3$ (नाइट्रिक एसिड) मिलाया जाता है।
यह इसलिए किया जाता है क्योंकि यदि निष्कर्ष में $CN^-$ या $S^{2-}$ आयन मौजूद हैं,तो वे $AgCN$ या $Ag_2S$ के अवक्षेप बनाकर परीक्षण में बाधा डालेंगे।
$HNO_3$ इन आयनों को क्रमशः $HCN$ और $H_2S$ गैसों में विघटित कर देता है,जिन्हें उबालकर हटा दिया जाता है,जिससे यह सुनिश्चित होता है कि केवल हैलाइड ही $AgNO_3$ के साथ प्रतिक्रिया करें।
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जल में $Ca(OH)_2$ की विलेयता ....... है।
[दिया है : जल में $Ca(OH)_2$ का विलेयता गुणनफल $= 5.5 \times 10^{-6}$]
A
$1.77 \times 10^{-6}$
B
$1.11 \times 10^{-6}$
C
$1.11 \times 10^{-2}$
D
$1.77 \times 10^{-2}$

Solution

(C) $Ca(OH)_2$ का वियोजन इस प्रकार होता है:
$Ca(OH)_2(s) \rightleftharpoons Ca^{2+}(aq) + 2OH^-(aq)$
यदि $s$ विलेयता है,तो $[Ca^{2+}] = s$ और $[OH^-] = 2s$ होगा।
विलेयता गुणनफल का व्यंजक:
$K_{sp} = [Ca^{2+}][OH^-]^2 = (s)(2s)^2 = 4s^3$
दिया गया $K_{sp} = 5.5 \times 10^{-6}$ के लिए:
$4s^3 = 5.5 \times 10^{-6}$
$s^3 = \frac{5.5}{4} \times 10^{-6} = 1.375 \times 10^{-6}$
$s = (1.375 \times 10^{-6})^{1/3} \approx 1.11 \times 10^{-2} \text{ M}$
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दी गई अभिक्रिया में $X$ क्या है?
$HOCH_2-CH_2OH + (COOH)_2 \xrightarrow{210^{\circ}C} X$
(मुख्य उत्पाद)
A
$CH_2=CH_2$
B
$CH(OH)=CH_2$
C
$CHO-CHO$
D
$CH_2OH-CHO$

Solution

(A) एथिलीन ग्लाइकॉल $(HOCH_2-CH_2OH)$ की ऑक्सेलिक एसिड $((COOH)_2)$ के साथ $110^{\circ}C$ पर अभिक्रिया करने से एक चक्रीय एस्टर (एथिलीन ऑक्सेलेट) बनता है।
$210^{\circ}C$ तक और गर्म करने पर,यह चक्रीय एस्टर विकार्बोक्सिलीकरण (decarboxylation) से गुजरता है और एथीन $(CH_2=CH_2)$ तथा कार्बन डाइऑक्साइड $(CO_2)$ उत्पन्न करता है।
अतः,$210^{\circ}C$ पर बनने वाला मुख्य उत्पाद $X$ एथीन $(CH_2=CH_2)$ है।
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निम्नलिखित में से,उन धातुओं की संख्या जो फोटोइलेक्ट्रिक सेल में इलेक्ट्रोड के रूप में उपयोग की जा सकती हैं,$.......$ है। (पूर्णांक उत्तर)
$A. Li$
$B. Na$
$C. Rb$
$D. Cs$
A
$0$
B
$1$
C
$3$
D
$4$

Solution

(B) फोटोइलेक्ट्रिक प्रभाव धातु के कार्य फलन (work function) पर निर्भर करता है।
$Cs$ (सीज़ियम) की आयनन ऊर्जा सभी क्षार धातुओं में सबसे कम होती है,जो इसे फोटोइलेक्ट्रिक सेल में उपयोग के लिए सबसे उपयुक्त बनाती है।
हालांकि $Na$ और $Rb$ जैसी अन्य क्षार धातुएं भी फोटोइलेक्ट्रिक प्रभाव प्रदर्शित कर सकती हैं,लेकिन अपने कम कार्य फलन के कारण $Cs$ इस तरह के अनुप्रयोगों के लिए मानक विकल्प है।
इसलिए,इस प्रश्न के संदर्भ में इस विशिष्ट अनुप्रयोग के लिए आमतौर पर केवल $1$ धातु $(Cs)$ का उल्लेख किया जाता है।
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$663 \ nm$ तरंगदैर्ध्य वाला विद्युत चुम्बकीय विकिरण धातु $A$ के परमाणु को आयनित करने के लिए पर्याप्त है। धातु $A$ की आयनन ऊर्जा $kJ \ mol^{-1}$ में कितनी होगी?
(निकटतम पूर्णांक में पूर्णांकित) $\left[ h = 6.63 \times 10^{-34} \ Js, c = 3.00 \times 10^{8} \ ms^{-1}, N_{A} = 6.02 \times 10^{23} \ mol^{-1} \right]$
A
$145$
B
$90$
C
$40$
D
$181$

Solution

(D) एक मोल परमाणुओं को आयनित करने के लिए आवश्यक ऊर्जा $E$ निम्नलिखित सूत्र द्वारा दी जाती है:
$E = \frac{hcN_{A}}{\lambda \times 1000} \text{ (in } kJ \ mol^{-1} \text{)}$
दिया गया है:
$h = 6.63 \times 10^{-34} \ J \cdot s$
$c = 3.00 \times 10^{8} \ m \cdot s^{-1}$
$N_{A} = 6.02 \times 10^{23} \ mol^{-1}$
$\lambda = 663 \ nm = 663 \times 10^{-9} \ m$
मान रखने पर:
$E = \frac{6.63 \times 10^{-34} \times 3.00 \times 10^{8} \times 6.02 \times 10^{23}}{663 \times 10^{-9} \times 1000}$
$E = \frac{6.63 \times 3.00 \times 6.02 \times 10^{-3}}{663 \times 10^{-6}}$
$E = \frac{119.799 \times 10^{-3}}{663 \times 10^{-6}} = \frac{119.799}{0.663} \approx 180.69 \ kJ \ mol^{-1}$
निकटतम पूर्णांक में पूर्णांकित करने पर,हमें $181 \ kJ \ mol^{-1}$ प्राप्त होता है।
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$293 \, K$ पर $5 \, mol$ आदर्श गैस का $2.1 \, MPa$ के प्रारंभिक दाब से $1.3 \, MPa$ तक $4.3 \, MPa$ के स्थिर बाह्य दाब के विरुद्ध समतापीय प्रसार किया जाता है। इस प्रक्रिया में स्थानांतरित ऊष्मा $...... \, kJ \, mol^{-1}$ है। (निकटतम पूर्णांक में पूर्णांकित करें) $\left[\right.$ $R = 8.314 \, J \, mol^{-1} \, K^{-1}$ का उपयोग करें $\left.\right]$
A
$35$
B
$15$
C
$4$
D
$5$

Solution

(C) समतापीय प्रक्रिया के लिए $\Delta U = 0$ होता है,इसलिए $q = -W$ है।
$W = -P_{ext} \Delta V = -nRT P_{ext} (\frac{1}{P_2} - \frac{1}{P_1})$
मान रखने पर: $W = -5 \times 8.314 \times 293 \times 4.3 \times (\frac{1}{1.3} - \frac{1}{2.1}) \approx -15.38 \, kJ$.
$5 \, mol$ के लिए $q = 15.38 \, kJ$ है।
$1 \, mol$ के लिए $q = \frac{15.38}{5} = 3.076 \, kJ \, mol^{-1}$ है।
निकटतम पूर्णांक $4 \, kJ \, mol^{-1}$ है।
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हाइड्रोजन का निम्नलिखित में से कौन सा रूप कम ऊर्जा वाले $\beta^{-}$ कणों का उत्सर्जन करता है?
A
ड्यूटेरियम ${ }_{1}^{2} H$
B
ट्रिटियम ${ }_{1}^{3} H$
C
प्रोटियम ${ }_{1}^{1} H$
D
प्रोटॉन $H^{+}$

Solution

(B) ट्रिटियम $\left({ }_{1}^{3} H \right)$ हाइड्रोजन का एक रेडियोधर्मी समस्थानिक है।
यह अभिक्रिया ${ }_{1}^{3} H \rightarrow { }_{2}^{3} He + { }_{-1}^{0} e + \bar{\nu}$ के अनुसार हीलियम-$3$ बनाने के लिए $\beta^{-}$ क्षय से गुजरता है।
इस प्रक्रिया में एक न्यूट्रॉन का प्रोटॉन में रूपांतरण शामिल है,जिससे कम ऊर्जा वाला $\beta^{-}$ कण उत्सर्जित होता है।
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इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी का सही क्रम है
A
$S > Se > Te > O$
B
$Te > Se > S > O$
C
$O > S > Se > Te$
D
$S > O > Se > Te$

Solution

(A) समूह में $S$ से $Te$ की ओर नीचे जाने पर परमाणु आकार में वृद्धि के कारण इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी कम ऋणात्मक हो जाती है।
हालाँकि,$O$ का आकार बहुत छोटा होता है,जिसके कारण इलेक्ट्रॉन जोड़ने पर मजबूत अंतर-इलेक्ट्रॉनिक प्रतिकर्षण होता है,इसलिए इसकी इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी सबसे कम होती है।
अतः,सही क्रम $S > Se > Te > O$ है।
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ChemistryMediumMCQJEE Main · 2021
अणु $CH_2=C=CH-CH_3$ में (जहाँ परमाणुओं को क्रमशः $1, 2, 3,$ और $4$ क्रमांकित किया गया है),कार्बन $1, 2, 3,$ और $4$ का संकरण क्या है?
A
$sp^2, sp, sp^2, sp^3$
B
$sp^2, sp^2, sp^2, sp^3$
C
$sp^2, sp^2, sp, sp^3$
D
$sp^2, sp^3, sp^2, sp^3$

Solution

(A) $CH_2=C=CH-CH_3$ अणु में:
कार्बन-$1$ $(CH_2=)$: यह दो $H$ परमाणुओं और एक $C$ परमाणु के साथ द्वि-आबंध द्वारा जुड़ा है। इसमें $3$ सिग्मा आबंध और $0$ एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म हैं,इसलिए यह $sp^2$ संकरित है।
कार्बन-$2$ $(=C=)$: यह दो $C$ परमाणुओं के साथ द्वि-आबंध द्वारा जुड़ा है। इसमें $2$ सिग्मा आबंध और $0$ एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म हैं,इसलिए यह $sp$ संकरित है।
कार्बन-$3$ $(=CH-)$: यह एक $C$ परमाणु के साथ द्वि-आबंध,एक $C$ परमाणु के साथ एकल आबंध और एक $H$ परमाणु के साथ जुड़ा है। इसमें $3$ सिग्मा आबंध और $0$ एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म हैं,इसलिए यह $sp^2$ संकरित है।
कार्बन-$4$ $(-CH_3)$: यह एक $C$ परमाणु और तीन $H$ परमाणुओं के साथ एकल आबंध द्वारा जुड़ा है। इसमें $4$ सिग्मा आबंध और $0$ एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म हैं,इसलिए यह $sp^3$ संकरित है।
अतः,कार्बन $1, 2, 3,$ और $4$ का संकरण $sp^2, sp, sp^2, sp^3$ है।
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ChemistryMediumMCQJEE Main · 2021
ऑक्साइडों का कौन सा युग्म प्रकृति में अम्लीय है?
A
$B_2O_3, CaO$
B
$B_2O_3, SiO_2$
C
$N_2O, BaO$
D
$CaO, SiO_2$

Solution

(B) $B_2O_3$ और $SiO_2$ अम्लीय ऑक्साइड हैं।
सामान्यतः,अधातुओं के ऑक्साइड प्रकृति में अम्लीय होते हैं।
$CaO$ और $BaO$ क्षारीय ऑक्साइड (धातु ऑक्साइड) हैं,और $N_2O$ एक उदासीन ऑक्साइड है।
167
ChemistryEasyMCQJEE Main · 2021
कैल्गॉन का उपयोग जल उपचार के लिए किया जाता है। कैल्गॉन के बारे में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सत्य $\text{नहीं}$ है?
A
कैल्गॉन में पृथ्वी की पपड़ी में वजन के अनुसार $2^{nd}$ सबसे प्रचुर तत्व होता है।
B
यह एक बहुलक (polymeric) यौगिक है और जल में घुलनशील है।
C
इसे ग्राहम के लवण (Graham's salt) के रूप में भी जाना जाता है।
D
यह अवक्षेपण (precipitation) द्वारा $Ca^{2+}$ आयन को नहीं हटाता है।

Solution

(A) कैल्गॉन सोडियम हेक्सामेटाफॉस्फेट है,जिसका सूत्र $(NaPO_{3})_{6}$ या $Na_{6}P_{6}O_{18}$ है।
$1$. पृथ्वी की पपड़ी में वजन के अनुसार $2^{nd}$ सबसे प्रचुर तत्व सिलिकॉन $(Si)$ है,जो कैल्गॉन में मौजूद नहीं है। अतः,कथन $A$ असत्य है।
$2$. कैल्गॉन एक बहुलक यौगिक है और जल में घुलनशील है। कथन $B$ सत्य है।
$3$. इसे आमतौर पर ग्राहम के लवण के रूप में जाना जाता है। कथन $C$ सत्य है।
$4$. यह $Ca^{2+}$ और $Mg^{2+}$ आयनों को घुलनशील संकुल आयन बनाकर हटाता है,न कि अवक्षेपण द्वारा। कथन $D$ सत्य है।
इसलिए,जो कथन सत्य $\text{नहीं}$ है वह $A$ है।
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ChemistryMediumMCQJEE Main · 2021
नीचे दी गई अभिक्रिया पर विचार करते हुए,मुख्य उत्पाद की पहचान करें:
Question diagram
A
एथिलबेंजीन
B
प्रोपिलबेंजीन
C
o-जाइलीन
D
प्रोपियोफिनोन

Solution

(A) दी गई अभिक्रिया दो चरणों में होती है:
$1$. क्लीमेंसन अपचयन: $Zn-Hg/HCl$ का उपयोग करके कीटोन समूह $(C=O)$ को मेथिलीन समूह $(-CH_2-)$ में अपचयित किया जाता है।
$2$. डिहाइड्रोसाइक्लाइजेशन (एरोमैटाइजेशन): एल्केन को $773 \ K$ तापमान और $10-20 \ atm$ दबाव पर $Cr_2O_3$ के साथ उपचारित करने पर यह एरोमैटिक हाइड्रोकार्बन बनाता है।
इस अभिक्रिया के परिणामस्वरूप मुख्य उत्पाद के रूप में एथिलबेंजीन प्राप्त होता है।
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ChemistryEasyMCQJEE Main · 2021
अणुओं के बंध क्रम (bond order) के आधार पर सूची-$I$ का मिलान सूची-$II$ से कीजिए।
सूची-$I$ सूची-$II$
$(a)$ $Ne_2$ $(i)$ $1$
$(b)$ $N_2$ $(ii)$ $2$
$(c)$ $F_2$ $(iii)$ $0$
$(d)$ $O_2$ $(iv)$ $3$

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनें:
A
$(a)$ $\rightarrow (iii), (b)$ $\rightarrow (iv), (c)$ $\rightarrow (i), (d)$ $\rightarrow (ii)$
B
$(a)$ $\rightarrow (i), (b)$ $\rightarrow (ii), (c)$ $\rightarrow (iii), (d)$ $\rightarrow (iv)$
C
$(a)$ $\rightarrow (ii), (b)$ $\rightarrow (i), (c)$ $\rightarrow (iv), (d)$ $\rightarrow (iii)$
D
$(a)$ $\rightarrow (iv), (b)$ $\rightarrow (iii), (c)$ $\rightarrow (ii), (d)$ $\rightarrow (i)$

Solution

(A) बंध क्रम $(B.O.)$ की गणना सूत्र $B.O. = \frac{1}{2} (N_b - N_a)$ द्वारा की जाती है,जहाँ $N_b$ आबंधी इलेक्ट्रॉनों की संख्या है और $N_a$ प्रति-आबंधी इलेक्ट्रॉनों की संख्या है।
$(a) \ Ne_2$ $(20 \ e^-)$: $B.O. = \frac{10-10}{2} = 0$.
$(b) \ N_2$ $(14 \ e^-)$: $B.O. = \frac{10-4}{2} = 3$.
$(c) \ F_2$ $(18 \ e^-)$: $B.O. = \frac{10-8}{2} = 1$.
$(d) \ O_2$ $(16 \ e^-)$: $B.O. = \frac{10-6}{2} = 2$.
अतः,सही मिलान है: $(a)$ $\rightarrow (iii), (b)$ $\rightarrow (iv), (c)$ $\rightarrow (i), (d)$ $\rightarrow (ii)$.
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$50 \ mL$ जलीय विलयन बनाने के लिए आवश्यक $NaNO_3$ का द्रव्यमान ज्ञात कीजिए,जिसमें प्रति $mL$ $70.0 \ mg$ $Na^{+}$ हो। (निकटतम पूर्णांक में पूर्णांकित करें) [दिया गया है: परमाणु भार $g \ mol^{-1}$ में - $Na : 23$; $N : 14$; $O : 16$]
A
$19$
B
$13$
C
$17$
D
$10$

Solution

(B) $Na^{+}$ का कुल द्रव्यमान $= 70.0 \ mg/mL \times 50 \ mL = 3500 \ mg = 3.5 \ g$.
$NaNO_3$ का आणविक द्रव्यमान $= 23 + 14 + (3 \times 16) = 85 \ g \ mol^{-1}$.
$Na^{+}$ के मोल $= \frac{3.5 \ g}{23 \ g \ mol^{-1}} \approx 0.15217 \ mol$.
चूंकि $1 \ mol$ $NaNO_3$ में $1 \ mol$ $Na^{+}$ होता है,इसलिए $NaNO_3$ के मोल $= 0.15217 \ mol$.
$NaNO_3$ का द्रव्यमान $= 0.15217 \ mol \times 85 \ g \ mol^{-1} = 12.93445 \ g$.
निकटतम पूर्णांक में पूर्णांकित करने पर,हमें $13 \ g$ प्राप्त होता है।
171
ChemistryMediumMCQJEE Main · 2021
$SF_{6}$ की औसत $S-F$ बंध ऊर्जा $kJ \ mol^{-1}$ में $......$ है। (निकटतम पूर्णांक में पूर्णांकित करें) [दिया गया है: $SF_{6(g)}$,$S_{(g)}$ और $F_{(g)}$ की मानक संभवन एन्थैल्पी के मान क्रमशः $-1100$,$275$ और $80 \ kJ \ mol^{-1}$ हैं।]
A
$309$
B
$459$
C
$193$
D
$123$

Solution

(A) $SF_{6(g)}$ के परमाण्वीकरण के लिए अभिक्रिया: $SF_{6(g)} \rightarrow S_{(g)} + 6F_{(g)}$
अभिक्रिया की एन्थैल्पी $(\Delta_{r}H)$: $\Delta_{r}H = \Delta_{f}H(S, g) + 6 \times \Delta_{f}H(F, g) - \Delta_{f}H(SF_{6}, g)$
दिए गए मान रखने पर: $\Delta_{r}H = 275 + 6 \times 80 - (-1100)$
$\Delta_{r}H = 275 + 480 + 1100 = 1855 \ kJ \ mol^{-1}$
चूंकि $SF_{6}$ में $6$ $S-F$ बंध होते हैं,इसलिए औसत बंध ऊर्जा $(\epsilon_{S-F})$: $\epsilon_{S-F} = \frac{1855}{6} \approx 309.16 \ kJ \ mol^{-1}$
निकटतम पूर्णांक में पूर्णांकित करने पर,हमें $309 \ kJ \ mol^{-1}$ प्राप्त होता है।
172
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हल्के क्षारीय माध्यम में,थायोसल्फेट आयन $MnO_4^-$ द्वारा $A$ में ऑक्सीकृत हो जाता है। $A$ में सल्फर की ऑक्सीकरण अवस्था ..... है।
A
$4$
B
$5$
C
$6$
D
$12$

Solution

(C) हल्के क्षारीय माध्यम में,थायोसल्फेट आयन $(S_2O_3^{2-})$ और परमैंगनेट आयन $(MnO_4^-)$ के बीच अभिक्रिया इस प्रकार है:
$8MnO_4^- + 3S_2O_3^{2-} + H_2O \rightarrow 8MnO_2 + 6SO_4^{2-} + 2OH^-$
यहाँ,उत्पाद $A$ सल्फेट आयन $(SO_4^{2-})$ है।
$SO_4^{2-}$ में सल्फर $(S)$ की ऑक्सीकरण अवस्था ज्ञात करने के लिए:
माना $S$ की ऑक्सीकरण अवस्था $x$ है।
$x + 4(-2) = -2$
$x - 8 = -2$
$x = +6$
अतः,$A$ में सल्फर की ऑक्सीकरण अवस्था $6$ है।
173
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अमोनियम फॉस्फेट विलयन का $pH$ क्या होगा,यदि फॉस्फोरिक एसिड का $pK_a$ और अमोनियम हाइड्रॉक्साइड का $pK_b$ क्रमशः $5.23$ और $4.75$ है?
A
$11$
B
$9$
C
$7$
D
$8$

Solution

(C) अमोनियम फॉस्फेट $(NH_4)_3PO_4$ एक दुर्बल अम्ल $(H_3PO_4)$ और दुर्बल क्षार $(NH_4OH)$ का लवण है।
दुर्बल अम्ल और दुर्बल क्षार के लवण के $pH$ का सूत्र है:
$pH = 7 + \frac{1}{2}(pK_a - pK_b)$
दिया गया है:
$pK_a = 5.23$
$pK_b = 4.75$
मान रखने पर:
$pH = 7 + \frac{1}{2}(5.23 - 4.75)$
$pH = 7 + \frac{1}{2}(0.48)$
$pH = 7 + 0.24$
$pH = 7.24$
निकटतम पूर्णांक में,$pH$ लगभग $7$ है।
174
ChemistryDifficultMCQJEE Main · 2021
निम्नलिखित अभिक्रिया में बनने वाला मुख्य उत्पाद है:
Question diagram
A
$1$-ब्रोमो-$3$-मिथाइलब्यूट-$2$-ईन की संरचना।
B
$2,3$-डाइब्रोमो-$2$-मिथाइल ब्यूटेन की संरचना।
C
$2$-ब्रोमो-$2$-मिथाइलब्यूट-$3$-ईन की संरचना।
D
$1,4$-डाइब्रोमो-$2$-मिथाइल ब्यूटेन की संरचना।

Solution

(A) यह अभिक्रिया एक संयुग्मित डाइन,$2$-मिथाइलब्यूटा-$1,3$-डाइन (आइसोप्रीन) में $HBr$ के इलेक्ट्रॉनस्नेही योग को दर्शाती है।
जब संयुग्मित डाइन में $HBr$ जोड़ा जाता है,तो $1,2$-योग और $1,4$-योग दोनों उत्पाद बन सकते हैं।
अधिक प्रतिस्थापित एल्कीन बनने के कारण $1,4$-योग उत्पाद आमतौर पर अधिक स्थिर होता है।
$2$-मिथाइलब्यूटा-$1,3$-डाइन की $HBr$ के साथ अभिक्रिया से $1$-ब्रोमो-$3$-मिथाइलब्यूट-$2$-ईन मुख्य $1,4$-योग उत्पाद के रूप में प्राप्त होता है।
175
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जल में $F^{-}$ आयनों की उपस्थिति के कारण हाइड्रॉक्सीपैटाइट का रूपांतरण होता है। हाइड्रॉक्सीपैटाइट का सही सूत्र क्या है?
A
$[3 Ca_{3}(PO_{4})_{2} \cdot Ca(OH)_{2}]$
B
$[3 Ca(OH)_{2} \cdot CaF_{2}]$
C
$[Ca_{3}(PO_{4})_{2} \cdot CaF_{2}]$
D
$[3 Ca_{3}(PO_{4})_{2} \cdot CaF_{2}]$

Solution

(A) $F^{-}$ आयन हाइड्रॉक्सीपैटाइट,$[3 Ca_{3}(PO_{4})_{2} \cdot Ca(OH)_{2}]$,जो दांतों की सतह पर इनेमल होता है,को अधिक कठोर फ्लोरोएपेटाइट,$[3 Ca_{3}(PO_{4})_{2} \cdot CaF_{2}]$ में परिवर्तित करके दांतों के इनेमल को बहुत कठोर बना देते हैं।
अतः,हाइड्रॉक्सीपैटाइट का सही सूत्र $[3 Ca_{3}(PO_{4})_{2} \cdot Ca(OH)_{2}]$ है।
176
ChemistryDifficultMCQJEE Main · 2021
नीचे दो कथन दिए गए हैं।
कथन $I:$ एक प्रबल अम्ल और दुर्बल क्षार के बीच अनुमापन (titration) में मिथाइल ऑरेंज एक उपयुक्त सूचक है।
कथन $II:$ एसिटिक अम्ल के $NaOH$ के साथ अनुमापन के लिए फिनोलफथलीन एक उपयुक्त सूचक नहीं है।
उपरोक्त कथनों के आलोक में,नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर चुनें:
A
कथन $I$ गलत है लेकिन कथन $II$ सही है
B
कथन $I$ सही है लेकिन कथन $II$ गलत है
C
कथन $I$ और कथन $II$ दोनों सही हैं
D
कथन $I$ और कथन $II$ दोनों गलत हैं

Solution

(B) कथन $I$: एक प्रबल अम्ल और दुर्बल क्षार के अनुमापन में,तुल्यांक बिंदु पर $pH$ अम्लीय सीमा $(pH < 7)$ में होता है। मिथाइल ऑरेंज की $pH$ संक्रमण सीमा $3.2$ से $4.4$ है,जो अनुमापन वक्र के तीव्र भाग के भीतर आती है। अतः,यह एक उपयुक्त सूचक है। कथन $I$ सही है।
कथन $II$: एक दुर्बल अम्ल (एसिटिक अम्ल) और प्रबल क्षार $(NaOH)$ के अनुमापन में,तुल्यांक बिंदु पर $pH$ क्षारीय सीमा $(pH > 7)$ में होता है। फिनोलफथलीन की $pH$ संक्रमण सीमा $8.2$ से $10.0$ है,जो इस अनुमापन वक्र के तीव्र भाग को कवर करती है। अतः,यह एक उपयुक्त सूचक है। कथन $II$ गलत है।
177
ChemistryMediumMCQJEE Main · 2021
डी-आयोनाइज्ड जल तैयार करने के लिए निम्नलिखित में से कौन सी विधि सबसे उपयुक्त है?
A
सिंथेटिक रेजिन विधि
B
क्लार्क की विधि
C
कैलगन विधि
D
परम्यूटिट विधि

Solution

(A) सभी घुलनशील खनिज लवणों से मुक्त शुद्ध विखनिजीकृत (डी-आयोनाइज्ड) जल,जल को क्रमिक रूप से एक धनायन विनिमय रेजिन ($H^{+}$ रूप में) और एक ऋणायन विनिमय रेजिन ($OH^{-}$ रूप में) से गुजार कर प्राप्त किया जाता है।
178
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जब बुझे हुए चूने (slaked lime) में $CO_{2}$ की अधिकता प्रवाहित की जाती है,तो क्रम में कौन से उत्पाद बनते हैं?
A
$Ca(HCO_{3})_{2}, CaCO_{3}$
B
$CaCO_{3}, Ca(HCO_{3})_{2}$
C
$CaO, Ca(HCO_{3})_{2}$
D
$CaO, CaCO_{3}$

Solution

(B) जब $CO_{2}$ को बुझे हुए चूने $(Ca(OH)_{2})$ में प्रवाहित किया जाता है,तो यह पहले कैल्शियम कार्बोनेट $(CaCO_{3})$ का सफेद अवक्षेप बनाता है:
$Ca(OH)_{2} + CO_{2} \longrightarrow CaCO_{3} \downarrow + H_{2}O$
जब अतिरिक्त $CO_{2}$ प्रवाहित की जाती है,तो कैल्शियम कार्बोनेट आगे अभिक्रिया करके घुलनशील कैल्शियम बाइकार्बोनेट $(Ca(HCO_{3})_{2})$ बनाता है:
$CaCO_{3} + CO_{2} + H_{2}O \longrightarrow Ca(HCO_{3})_{2}$
179
ChemistryMediumMCQJEE Main · 2021
नीचे दो कथन दिए गए हैं।
कथन $I:$ बोर के परमाणु मॉडल के अनुसार,गुणात्मक रूप से इलेक्ट्रॉन के वेग का परिमाण नाभिक पर धनात्मक आवेश में कमी के साथ बढ़ता है क्योंकि नाभिक द्वारा इलेक्ट्रॉन पर कोई मजबूत पकड़ नहीं होती है।
कथन $II:$ बोर के परमाणु मॉडल के अनुसार,गुणात्मक रूप से इलेक्ट्रॉन के वेग का परिमाण मुख्य क्वांटम संख्या में कमी के साथ बढ़ता है।
उपरोक्त कथनों के आलोक में,नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर चुनें:
A
कथन $I$ और कथन $II$ दोनों गलत हैं
B
कथन $I$ और कथन $II$ दोनों सही हैं
C
कथन $I$ गलत है लेकिन कथन $II$ सही है
D
कथन $I$ सही है लेकिन कथन $II$ गलत है

Solution

(C) बोर के परमाणु मॉडल में इलेक्ट्रॉन का वेग $V \propto \frac{Z}{n}$ संबंध द्वारा दिया जाता है।
यहाँ,$Z$ परमाणु क्रमांक है (नाभिक पर धनात्मक आवेश का परिमाण दर्शाता है) और $n$ मुख्य क्वांटम संख्या है।
कथन $I$ का दावा है कि धनात्मक आवेश $(Z)$ में कमी के साथ वेग बढ़ता है। चूँकि $V \propto Z$,इसलिए नाभिक पर धनात्मक आवेश कम होने पर वेग घटता है। अतः,कथन $I$ गलत है।
कथन $II$ का दावा है कि मुख्य क्वांटम संख्या $(n)$ में कमी के साथ वेग बढ़ता है। चूँकि $V \propto \frac{1}{n}$,इसलिए $n$ घटने पर वेग बढ़ता है। अतः,कथन $II$ सही है।
180
ChemistryEasyMCQJEE Main · 2021
$125^{\circ} C$ पर प्रकाश की उपस्थिति में $Br_{2}$ के साथ आइसोब्यूटेन की अभिक्रिया में निम्नलिखित में से कौन सा मुख्य उत्पाद के रूप में प्राप्त होता है?
A
$1-$ब्रोमो$-2-$मिथाइलप्रोपेन
Option A
B
$2-$ब्रोमो$-2-$मिथाइलप्रोपेन
C
$1,3-$डिब्रोमो$-2-$मिथाइलप्रोपेन
D
$2-$ब्रोमो$-2-$मिथाइलप्रोपेन मुख्य उत्पाद है

Solution

(B) एल्केन का ब्रोमीनीकरण अत्यधिक चयनात्मक होता है।
अभिक्रिया के दौरान बनने वाले मुक्त मूलक मध्यवर्ती की स्थिरता मुख्य उत्पाद को निर्धारित करती है।
आइसोब्यूटेन में,तृतीयक मूलक $((CH_{3})_{3}C^{\bullet})$ प्राथमिक मूलक $((CH_{3})_{2}CH-CH_{2}^{\bullet})$ की तुलना में अधिक स्थिर होता है।
अतः,$2-$ब्रोमो$-2-$मिथाइलप्रोपेन मुख्य उत्पाद के रूप में बनता है।
181
ChemistryEasyMCQJEE Main · 2021
$AB_{3}$ एक अंतर-हैलोजन $T$-आकार का अणु है। $A$ पर इलेक्ट्रॉनों के एकाकी युग्मों (lone pairs) की संख्या $......$ है।
A
$2$
B
$3$
C
$4$
D
$1$

Solution

(A) $VSEPR$ सिद्धांत के अनुसार,$AB_{3}$ अणु के लिए $T$-आकार की ज्यामिति होने के लिए,केंद्रीय परमाणु $A$ में $3$ आबंध युग्म और $2$ एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म होने चाहिए।
यह $5$ की स्टेरिक संख्या के अनुरूप है,जो $sp^{3}d$ संकरण को दर्शाता है।
संरचना में दिखाए अनुसार,केंद्रीय परमाणु $A$ पर $2$ एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म मौजूद हैं।
182
ChemistryMediumMCQJEE Main · 2021
$5.0 \ mL$ $0.0504 \ M \ NH_{4}Cl$ और $2 \ mL$ $0.0210 \ M \ NH_{3}$ के मिश्रण में $OH^{-}$ की सांद्रता $x \times 10^{-6} \ M$ है। $x$ का मान ..... है।
(निकटतम पूर्णांक)
$[ \text{दिया गया है } K_{w}=1 \times 10^{-14} \text{ और } K_{b}=1.8 \times 10^{-5} ]$
A
$3$
B
$4$
C
$5$
D
$6$

Solution

(A) मिश्रण एक दुर्बल क्षार $(NH_{3})$ और उसके लवण $(NH_{4}Cl)$ से बना है,जो एक क्षारीय बफर बनाता है।
सबसे पहले,प्रत्येक घटक के मोल की गणना करें:
$n(NH_{4}Cl) = 0.0504 \ M \times 5.0 \ mL = 0.252 \ mmol$
$n(NH_{3}) = 0.0210 \ M \times 2.0 \ mL = 0.042 \ mmol$
क्षारीय बफर के लिए हेंडरसन-हेसलबाक समीकरण का उपयोग करते हुए:
$[OH^{-}] = K_{b} \times \frac{[Base]}{[Salt]} = K_{b} \times \frac{n(NH_{3})}{n(NH_{4}Cl)}$
$[OH^{-}] = 1.8 \times 10^{-5} \times \frac{0.042}{0.252}$
$[OH^{-}] = 1.8 \times 10^{-5} \times \frac{1}{6} = 0.3 \times 10^{-5} = 3 \times 10^{-6} \ M$
इसे $x \times 10^{-6} \ M$ के साथ तुलना करने पर,हमें $x = 3$ प्राप्त होता है।
183
ChemistryDifficultMCQJEE Main · 2021
मोहर लवण (Mohr's salt) और पोटाश फिटकरी (potash alum) में जल के अणुओं की संख्या का अनुपात $.... \times 10^{-1}$ है।
A
$5$
B
$3$
C
$4$
D
$1$

Solution

(A) मोहर लवण का सूत्र $(NH_4)_2Fe(SO_4)_2 \cdot 6H_2O$ है। इसमें जल के अणुओं की संख्या $6$ है।
पोटाश फिटकरी का सूत्र $KAl(SO_4)_2 \cdot 12H_2O$ है। इसमें जल के अणुओं की संख्या $12$ है।
मोहर लवण और पोटाश फिटकरी में जल के अणुओं की संख्या का अनुपात $\frac{6}{12} = \frac{1}{2} = 0.5$ है।
$0.5$ को $.... \times 10^{-1}$ के रूप में व्यक्त करने पर,यह $5 \times 10^{-1}$ प्राप्त होता है।
184
ChemistryMediumMCQJEE Main · 2021
$KCl$ के लिए बॉर्न-हेबर चक्र का मूल्यांकन निम्नलिखित डेटा के साथ किया जाता है:
$KCl$ के लिए $\Delta_{f} H^{\ominus} = -436.7 \ kJ \ mol^{-1}$
$K$ के लिए $\Delta_{sub} H^{\ominus} = 89.2 \ kJ \ mol^{-1}$
$K$ के लिए $\Delta_{ionization} H^{\ominus} = 419.0 \ kJ \ mol^{-1}$
$Cl_{(g)}$ के लिए $\Delta_{electron \ gain} H^{\ominus} = -348.6 \ kJ \ mol^{-1}$
$Cl_2$ के लिए $\Delta_{bond} H^{\ominus} = 243.0 \ kJ \ mol^{-1}$
$kJ \ mol^{-1}$ में $KCl$ की जालक एन्थैल्पी (lattice enthalpy) का परिमाण क्या है? (निकटतम पूर्णांक)
A
$718$
B
$951$
C
$632$
D
$521$

Solution

(A) बॉर्न-हेबर चक्र का समीकरण है:
$\Delta_{f} H^{\ominus}_{KCl} = \Delta_{sub} H^{\ominus}_{(K)} + \Delta_{ionization} H^{\ominus}_{(K)} + \frac{1}{2} \Delta_{bond} H^{\ominus}_{(Cl_2)} + \Delta_{electron \ gain} H^{\ominus}_{(Cl)} + \Delta_{lattice} H^{\ominus}_{(KCl)}$
दिए गए मानों को प्रतिस्थापित करने पर:
$-436.7 = 89.2 + 419.0 + \frac{1}{2}(243.0) + (-348.6) + \Delta_{lattice} H^{\ominus}_{(KCl)}$
$-436.7 = 281.1 + \Delta_{lattice} H^{\ominus}_{(KCl)}$
$\Delta_{lattice} H^{\ominus}_{(KCl)} = -717.8 \ kJ \ mol^{-1}$
जालक एन्थैल्पी का परिमाण $717.8 \ kJ \ mol^{-1}$ है,जिसका निकटतम पूर्णांक $718 \ kJ \ mol^{-1}$ है।
185
ChemistryMediumMCQJEE Main · 2021
नीचे दो कथन दिए गए हैं: एक को अभिकथन $(A)$ और दूसरे को कारण $(R)$ के रूप में लेबल किया गया है।
अभिकथन $(A):$ प्रकाश-रासायनिक धूमकोहरा (Photochemical smog) रबर में दरारें पैदा करता है।
कारण $(R):$ प्रकाश-रासायनिक धूमकोहरे में ओजोन,नाइट्रिक ऑक्साइड,एक्रोलिन,फॉर्मेल्डिहाइड और पेरोक्सीएसिटाइल नाइट्रेट की उपस्थिति इसे ऑक्सीकरणकारी बनाती है।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर चुनें:
A
दोनों $(A)$ और $(R)$ सत्य हैं लेकिन $(R)$,$(A)$ की सही व्याख्या नहीं है
B
$(A)$ असत्य है लेकिन $(R)$ सत्य है।
C
$(A)$ सत्य है लेकिन $(R)$ असत्य है
D
दोनों $(A)$ और $(R)$ सत्य हैं और $(R)$,$(A)$ की सही व्याख्या है

Solution

(D) प्रकाश-रासायनिक धूमकोहरा ओजोन $(O_3)$,नाइट्रिक ऑक्साइड $(NO)$,एक्रोलिन,फॉर्मेल्डिहाइड और पेरोक्सीएसिटाइल नाइट्रेट $(PAN)$ जैसे प्रदूषकों का एक ऑक्सीकरणकारी मिश्रण है।
ये ऑक्सीकरणकारी एजेंट रबर में मौजूद द्वि-आबंधों के साथ प्रतिक्रिया करते हैं,जिससे रबर का क्षरण होता है और उसमें दरारें पड़ जाती हैं।
इसलिए,अभिकथन $(A)$ और कारण $(R)$ दोनों सत्य हैं,और $(R)$,$(A)$ की सही व्याख्या है।
186
ChemistryMediumMCQJEE Main · 2021
दो कणों के बीच $London$ बलों की अन्योन्यक्रिया ऊर्जा $r^{x}$ के समानुपाती होती है,जहाँ $r$ कणों के बीच की दूरी है। $x$ का मान क्या है?
A
$3$
B
$-3$
C
$-6$
D
$6$

Solution

(C) $London$ परिक्षेपण बलों के लिए,अन्योन्यक्रिया ऊर्जा $E$ कणों के बीच की दूरी $r$ की छठी घात के व्युत्क्रमानुपाती होती है।
गणितीय रूप से,$E \propto \frac{1}{r^{6}}$,जिसे $E \propto r^{-6}$ के रूप में लिखा जा सकता है।
इसलिए,इसकी तुलना $E \propto r^{x}$ से करने पर,हमें $x = -6$ प्राप्त होता है।
187
ChemistryMediumMCQJEE Main · 2021
$O_{2}^{-}$ आयन की आबंध कोटि (bond order) और चुंबकीय व्यवहार क्रमशः हैं:
A
$1.5$ और अनुचुंबकीय
B
$1.5$ और प्रतिचुंबकीय
C
$2$ और प्रतिचुंबकीय
D
$1$ और अनुचुंबकीय

Solution

(A) $O_{2}^{-}$ ($17$ इलेक्ट्रॉन) का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास है: $(\sigma_{1s})^{2}(\sigma_{1s}^{*})^{2}(\sigma_{2s})^{2}(\sigma_{2s}^{*})^{2}(\sigma_{2p_{z}})^{2}(\pi_{2p_{x}}^{2} = \pi_{2p_{y}}^{2})(\pi_{2p_{x}}^{*2} = \pi_{2p_{y}}^{*1})$.
$\text{आबंध कोटि} = \frac{N_b - N_a}{2} = \frac{10 - 7}{2} = 1.5$.
चूंकि $\pi^{*}$ कक्षक में एक अयुग्मित इलेक्ट्रॉन है,इसलिए यह आयन अनुचुंबकीय है।
188
ChemistryEasyMCQJEE Main · 2021
नीचे दो कथन दिए गए हैं: एक को अभिकथन $A$ और दूसरे को कारण $R$ के रूप में लेबल किया गया है।
अभिकथन $A$: बेरियम कार्बोनेट पानी में अघुलनशील है और अत्यधिक स्थिर है।
कारण $R$: धनायन का आकार बढ़ने के साथ कार्बोनेट की तापीय स्थिरता बढ़ती है।
$A$ और $R$ के लिए नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर चुनें।
A
$A$ और $R$ दोनों सत्य हैं लेकिन $R$,$A$ की सही व्याख्या है।
B
$A$ सत्य है लेकिन $R$ असत्य है।
C
$A$ और $R$ दोनों सत्य हैं और $R$,$A$ की सही व्याख्या नहीं है।
D
$A$ असत्य है लेकिन $R$ सत्य है।

Solution

(A) अभिकथन $A$ सत्य है: $BaCO_3$ अपनी उच्च जालक ऊर्जा के कारण पानी में अघुलनशील है और तापीय रूप से स्थिर है।
कारण $R$ सत्य है: जैसे-जैसे समूह में नीचे जाने पर क्षारीय मृदा धातु धनायन का आकार बढ़ता है $(Be^{2+} < Mg^{2+} < Ca^{2+} < Sr^{2+} < Ba^{2+})$,धनायन की ध्रुवीकरण शक्ति कम हो जाती है,जिससे संबंधित कार्बोनेट की तापीय स्थिरता बढ़ जाती है।
चूंकि $Ba^{2+}$ समूह में सबसे बड़ा धनायन है,इसलिए $BaCO_3$ उनमें सबसे अधिक तापीय रूप से स्थिर कार्बोनेट है।
अतः,$R$,$A$ की सही व्याख्या है।
189
ChemistryMediumMCQJEE Main · 2021
नीचे दो कथन दिए गए हैं: एक को अभिकथन $(A)$ और दूसरे को कारण $(R)$ के रूप में लेबल किया गया है।
अभिकथन $(A):$ भारी जल का उपयोग अभिक्रिया क्रियाविधि के अध्ययन के लिए किया जाता है।
कारण $(R):$ $O-H$ बंध के विदलन के लिए अभिक्रिया की दर $O-D$ बंध की तुलना में धीमी होती है।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर चुनें:
A
दोनों $(A)$ और $(R)$ सत्य हैं लेकिन $(R)$,$(A)$ की सही व्याख्या नहीं है।
B
दोनों $(A)$ और $(R)$ सत्य हैं और $(R)$,$(A)$ की सही व्याख्या है।
C
$(A)$ असत्य है लेकिन $(R)$ सत्य है।
D
$(A)$ सत्य है लेकिन $(R)$ असत्य है।

Solution

(D) अभिकथन $(A)$ सत्य है क्योंकि भारी जल $(D_2O)$ का उपयोग अभिक्रिया क्रियाविधि के अध्ययन में ट्रेसर के रूप में किया जाता है।
कारण $(R)$ असत्य है क्योंकि काइनेटिक आइसोटोप प्रभाव के कारण $O-H$ बंध $O-D$ बंध की तुलना में कमजोर होता है। परिणामस्वरूप,$O-H$ बंध के विदलन की दर $O-D$ बंध की तुलना में तेज होती है,धीमी नहीं।
अतः,$(A)$ सत्य है लेकिन $(R)$ असत्य है।
190
ChemistryEasyMCQJEE Main · 2021
निम्नलिखित में से कौन सा यौगिक एरोमैटिक नहीं है?
A
साइक्लोहेप्टाट्रायनाइल एनायन
B
साइक्लोपेंटाडाइनाइल एनायन
C
साइक्लोऑक्टाटेट्राईन
D
फिनोल

Solution

(C) यह निर्धारित करने के लिए कि कोई यौगिक एरोमैटिक है या नहीं,उसे हकल के नियम का पालन करना चाहिए: यह चक्रीय,समतलीय,पूर्णतः संयुग्मित होना चाहिए और इसमें $(4n + 2) \pi$ इलेक्ट्रॉन होने चाहिए।
$A$. साइक्लोहेप्टाट्रायनाइल एनायन: इसमें $8 \pi$ इलेक्ट्रॉन हैं (एंटी-एरोमैटिक) या यह असमतलीय है।
$B$. साइक्लोपेंटाडाइनाइल एनायन: इसमें $6 \pi$ इलेक्ट्रॉन $(n=1)$ हैं,यह चक्रीय,समतलीय और पूर्णतः संयुग्मित है। यह एरोमैटिक है।
$C$. साइक्लोऑक्टाटेट्राईन: इसमें $8 \pi$ इलेक्ट्रॉन ($4n$ सिस्टम) हैं। यह एंटी-एरोमैटिक होने से बचने के लिए असमतलीय (टब के आकार का) हो जाता है,जो इसे नॉन-एरोमैटिक बनाता है।
$D$. फिनोल: यह बेंजीन का व्युत्पन्न है,जो एरोमैटिक है।
अतः,साइक्लोऑक्टाटेट्राईन एक नॉन-एरोमैटिक यौगिक है।
191
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$1,2-$डाइमिथाइलसाइक्लोप्रोपेन के लिए संभावित स्टीरियोआइसोमर्स की संख्या क्या है?
A
$\text{एक}$
B
$\text{चार}$
C
$\text{दो}$
D
$\text{तीन}$

Solution

(D) $1,2-$डाइमिथाइलसाइक्लोप्रोपेन के लिए $C1$ और $C2$ पर दो कायरल केंद्र होते हैं।
$1,2-$डाइमिथाइलसाइक्लोप्रोपेन तीन स्टीरियोआइसोमेरिक रूपों में मौजूद होता है:
$1$. $cis-1,2-$डाइमिथाइलसाइक्लोप्रोपेन: इस अणु में समरूपता का तल होता है और यह अकायरल (मेसो यौगिक) होता है।
$2$. $trans-1,2-$डाइमिथाइलसाइक्लोप्रोपेन: यह इनैन्टीओमर्स की एक जोड़ी के रूप में मौजूद होता है (डेक्सट्रोरोटेटरी और लेवोरोटेटरी रूप)।
इस प्रकार,कुल $3$ स्टीरियोआइसोमर्स ($1$ मेसो रूप + $2$ इनैन्टीओमर्स) होते हैं।
192
ChemistryMediumMCQJEE Main · 2021
सल्फर के आकलन में,$0.471 \, g$ कार्बनिक यौगिक से $1.44 \, g$ बेरियम सल्फेट प्राप्त होता है। यौगिक में सल्फर का प्रतिशत $...... \%$ है। (निकटतम पूर्णांक)
($Ba$ का परमाणु द्रव्यमान $= 137 \, u$)
A
$142$
B
$42$
C
$471$
D
$233$

Solution

(B) $BaSO_4$ का आणविक द्रव्यमान $= 137 + 32 + (4 \times 16) = 233 \, g/mol$ है।
चूंकि $233 \, g$ $BaSO_4$ में $32 \, g$ सल्फर होता है,
इसलिए $1.44 \, g$ $BaSO_4$ में $\frac{32}{233} \times 1.44 \, g$ सल्फर होगा।
सल्फर का प्रतिशत = $\frac{\text{सल्फर का द्रव्यमान}}{\text{कार्बनिक यौगिक का द्रव्यमान}} \times 100$
सल्फर का प्रतिशत = $\frac{32 \times 1.44}{233 \times 0.471} \times 100 = 41.98 \, \%$ है।
निकटतम पूर्णांक में,यह $42 \, \%$ होगा।
193
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अभिक्रिया $A + B \rightleftharpoons C + D$ के लिए $298 \ K$ पर साम्य स्थिरांक $K_{c} = 100$ है। यदि $A, B, C$ और $D$ की सांद्रता $1 \ M$ वाले सममोलर विलयन से शुरुआत की जाए,तो $D$ की साम्य सांद्रता $....... \times 10^{-2} \ M$ होगी। (निकटतम पूर्णांक)
A
$18$
B
$182$
C
$45$
D
$18200$

Solution

(B) अभिक्रिया $A + B \rightleftharpoons C + D$ है,जहाँ $K_{eq} = 100$ है।
प्रारंभिक सांद्रता $[A] = 1 \ M, [B] = 1 \ M, [C] = 1 \ M, [D] = 1 \ M$ है।
अभिक्रिया भागफल $Q_{c} = \frac{[C][D]}{[A][B]} = \frac{1 \times 1}{1 \times 1} = 1$ है।
चूंकि $Q_{c} < K_{eq}$,अभिक्रिया अग्र दिशा में आगे बढ़ेगी।
माना साम्य पर सांद्रता में परिवर्तन $x$ है:
$[A] = 1-x, [B] = 1-x, [C] = 1+x, [D] = 1+x$।
$K_{eq} = \frac{(1+x)(1+x)}{(1-x)(1-x)} = 100$।
वर्गमूल लेने पर: $\frac{1+x}{1-x} = 10$।
$1+x = 10 - 10x$ $\Rightarrow 11x = 9$ $\Rightarrow x = \frac{9}{11} \approx 0.818$।
$D$ की साम्य सांद्रता $= 1 + x = 1 + \frac{9}{11} = \frac{20}{11} \approx 1.8181 \ M$।
$10^{-2} \ M$ के रूप में व्यक्त करने पर: $1.8181 \times 10^{0} = 181.81 \times 10^{-2} \ M$।
निकटतम पूर्णांक में बदलने पर,हमें $182 \times 10^{-2} \ M$ प्राप्त होता है।
194
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जल के लिए $373 \ K$ और $1 \ bar$ दाब पर $\Delta_{vap} H = 41 \ kJ \ mol^{-1}$ है। यह मानते हुए कि जल वाष्प एक आदर्श गैस है जो द्रव जल की तुलना में बहुत अधिक आयतन घेरती है,जल के वाष्पीकरण के दौरान आंतरिक ऊर्जा में परिवर्तन $...... \ kJ \ mol^{-1}$ है।
[उपयोग करें: $R = 8.3 \ J \ mol^{-1} \ K^{-1}$]
A
$3.8$
B
$38$
C
$380$
D
$410$

Solution

(B) वाष्पीकरण की अभिक्रिया है: $H_2O(\ell) \longrightarrow H_2O(g)$.
दिया गया है $\Delta H = 41 \ kJ \ mol^{-1}$,$T = 373 \ K$,और $R = 8.3 \times 10^{-3} \ kJ \ mol^{-1} \ K^{-1}$.
गैस के मोलों की संख्या में परिवर्तन $\Delta n_g = 1 - 0 = 1$ है।
संबंध $\Delta H = \Delta U + \Delta n_g RT$ का उपयोग करने पर:
$\Delta U = \Delta H - \Delta n_g RT$
$\Delta U = 41 \ kJ \ mol^{-1} - (1) \times (8.3 \times 10^{-3}) \times (373)$
$\Delta U = 41 - 3.0959 = 37.9041 \ kJ \ mol^{-1} \approx 38 \ kJ \ mol^{-1}$.
195
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एक धातु की सतह को $500 \ nm$ विकिरण के संपर्क में लाया जाता है। फोटोइलेक्ट्रिक धारा के लिए धातु की देहली आवृत्ति (threshold frequency) $4.3 \times 10^{14} \ Hz$ है। उत्सर्जित इलेक्ट्रॉन का वेग $....... \times 10^{5} \ ms^{-1}$ है (निकटतम पूर्णांक)।
[उपयोग करें : $h=6.63 \times 10^{-34} \ Js, m_{e}=9.0 \times 10^{-31} \ kg$]
A
$7$
B
$5$
C
$1$
D
$500$

Solution

(B) $v$: अधिकतम गतिज ऊर्जा वाले इलेक्ट्रॉन की गति।
आइंस्टीन के फोटोइलेक्ट्रिक समीकरण के अनुसार:
$E = \phi + K.E._{\max}$
$\frac{hc}{\lambda} = h \nu_{0} + \frac{1}{2} m_{e} v^{2}$
$\frac{6.63 \times 10^{-34} \times 3 \times 10^{8}}{500 \times 10^{-9}} = 6.63 \times 10^{-34} \times 4.3 \times 10^{14} + \frac{1}{2} \times 9.0 \times 10^{-31} \times v^{2}$
$3.978 \times 10^{-19} = 2.8509 \times 10^{-19} + 4.5 \times 10^{-31} \times v^{2}$
$1.1271 \times 10^{-19} = 4.5 \times 10^{-31} \times v^{2}$
$v^{2} = \frac{1.1271 \times 10^{-19}}{4.5 \times 10^{-31}} \approx 0.2504 \times 10^{12} = 25.04 \times 10^{10}$
$v \approx 5.004 \times 10^{5} \ ms^{-1}$
निकटतम पूर्णांक में लेने पर,मान $5$ प्राप्त होता है।
196
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$100 \, mL$ $Na_{3}PO_{4}$ विलयन में $3.45 \, g$ सोडियम उपस्थित है। विलयन की मोलरता $..... \times 10^{-2} \, mol \, L^{-1}$ है $(\text{निकटतम }\, \text{पूर्णांक})$.
[$\text{परमाणु }\, \text{द्रव्यमान }- Na: 23.0 \, u, O: 16.0 \, u, P: 31.0 \, u$]
A
$500$
B
$50$
C
$5$
D
$0.50$

Solution

(B) $Na_{3}PO_{4}$ का वियोजन: $Na_{3}PO_{4} \rightarrow 3Na^{+} + PO_{4}^{3-}$.
$Na$ परमाणुओं के मोल की संख्या = $\frac{3.45 \, g}{23.0 \, g \, mol^{-1}} = 0.15 \, mol$.
चूंकि $1 \, mol$ $Na_{3}PO_{4}$ में $3 \, mol$ $Na$ होते हैं,इसलिए $Na_{3}PO_{4}$ के मोल = $\frac{1}{3} \times 0.15 \, mol = 0.05 \, mol$.
विलयन का आयतन = $100 \, mL = 0.1 \, L$.
मोलरता $(M)$ = $\frac{\text{विलेय के मोल}}{\text{विलयन का आयतन } (L)} = \frac{0.05 \, mol}{0.1 \, L} = 0.5 \, mol \, L^{-1}$.
$10^{-2}$ के रूप में: $0.5 = 50 \times 10^{-2} \, mol \, L^{-1}$.
अतः,निकटतम पूर्णांक $50$ है।
197
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अभिक्रिया $[PtCl_4]^{2-} + H_2O \rightleftharpoons [Pt(H_2O)Cl_3]^- + Cl^-$ के लिए अभिक्रिया दर को विभिन्न प्रजातियों की सांद्रता के फलन के रूप में मापा गया था। यह देखा गया कि $\frac{-d[[PtCl_4]^{2-}]}{dt} = 4.8 \times 10^{-5} [[PtCl_4]^{2-}] - 2.4 \times 10^{-3} [[Pt(H_2O)Cl_3]^-] [Cl^-]$,जहाँ वर्गाकार कोष्ठक का उपयोग मोलर सांद्रता को दर्शाने के लिए किया जाता है। साम्य स्थिरांक $K_c = ...$ है। (निकटतम पूर्णांक)
A
$0$
B
$1$
C
$2$
D
$5$

Solution

(A) अभिक्रिया $[PtCl_4]^{2-} + H_2O \rightleftharpoons [Pt(H_2O)Cl_3]^- + Cl^-$ के लिए,अग्र अभिक्रिया की दर $r_f = k_f [[PtCl_4]^{2-}]$ है और पश्च अभिक्रिया की दर $r_b = k_b [[Pt(H_2O)Cl_3]^-] [Cl^-]$ है।
साम्यावस्था पर,अग्र अभिक्रिया की दर पश्च अभिक्रिया की दर के बराबर होती है $(r_f = r_b)$।
अतः,$k_f [[PtCl_4]^{2-}] = k_b [[Pt(H_2O)Cl_3]^-] [Cl^-]$।
साम्य स्थिरांक $K_c = \frac{k_f}{k_b} = \frac{[[Pt(H_2O)Cl_3]^-] [Cl^-]}{[[PtCl_4]^{2-}]}$ द्वारा दिया जाता है।
दिए गए दर व्यंजक से,$k_f = 4.8 \times 10^{-5} \ s^{-1}$ और $k_b = 2.4 \times 10^{-3} \ M^{-1} s^{-1}$ है।
$K_c = \frac{4.8 \times 10^{-5}}{2.4 \times 10^{-3}} = 0.02$।
$0.02$ का निकटतम पूर्णांक $0$ है।
198
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सूची-$I$ का मिलान सूची-$II$ से करें:
सूची-$I$ (प्रजातियाँ) सूची-$II$ (केंद्रीय परमाणु पर एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्मों की संख्या)
$(a)$ $XeF_{2}$ $(i)$ $0$
$(b)$ $XeO_{2}F_{2}$ $(ii)$ $1$
$(c)$ $XeO_{3}F_{2}$ $(iii)$ $2$
$(d)$ $XeF_{4}$ $(iv)$ $3$

नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर चुनें:
A
$a-iv, b-ii, c-i, d-iii$
B
$a-iii, b-iv, c-ii, d-i$
C
$a-iii, b-ii, c-iv, d-i$
D
$a-iv, b-i, c-ii, d-iii$

Solution

(A) प्रत्येक प्रजाति में केंद्रीय परमाणु $(Xe)$ पर एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्मों की संख्या निर्धारित करने के लिए:
$1$. $XeF_{2}$: $Xe$ के पास $8$ संयोजी इलेक्ट्रॉन होते हैं। $2$ इलेक्ट्रॉन $F$ परमाणुओं के साथ बंध बनाने में उपयोग होते हैं। शेष इलेक्ट्रॉन = $8-2 = 6$,जो $3$ एकाकी युग्म बनाते हैं। अतः,$(a) - (iv)$.
$2$. $XeO_{2}F_{2}$: $Xe$ के पास $8$ संयोजी इलेक्ट्रॉन होते हैं। $2$ इलेक्ट्रॉन $F$ के लिए और $4$ इलेक्ट्रॉन $2$ द्वि-बंधित $O$ परमाणुओं के लिए उपयोग होते हैं। शेष इलेक्ट्रॉन = $8-2-4 = 2$,जो $1$ एकाकी युग्म बनाते हैं। अतः,$(b) - (ii)$.
$3$. $XeO_{3}F_{2}$: $Xe$ के पास $8$ संयोजी इलेक्ट्रॉन होते हैं। $2$ इलेक्ट्रॉन $F$ के लिए और $6$ इलेक्ट्रॉन $3$ द्वि-बंधित $O$ परमाणुओं के लिए उपयोग होते हैं। शेष इलेक्ट्रॉन = $8-2-6 = 0$। अतः,$(c) - (i)$.
$4$. $XeF_{4}$: $Xe$ के पास $8$ संयोजी इलेक्ट्रॉन होते हैं। $4$ इलेक्ट्रॉन $F$ परमाणुओं के साथ बंध बनाने में उपयोग होते हैं। शेष इलेक्ट्रॉन = $8-4 = 4$,जो $2$ एकाकी युग्म बनाते हैं। अतः,$(d) - (iii)$.
अतः,सही मिलान $a-iv, b-ii, c-i, d-iii$ है।
199
ChemistryMediumMCQJEE Main · 2021
निम्नलिखित में से किस अणु में हैलाइड से बोरॉन की ओर इलेक्ट्रॉन युग्म का सबसे मजबूत बैक डोनेशन अपेक्षित है?
A
$BCl_{3}$
B
$BF_{3}$
C
$BBr_{3}$
D
$BI_{3}$

Solution

(B) बोरॉन ट्राईहैलाइड्स में बैक बॉन्डिंग में हैलाइड के $p$-ऑर्बिटल से बोरॉन के खाली $2p$-ऑर्बिटल में लोन पेयर का दान शामिल है।
यह एक $(p\pi-p\pi)$ बैक बॉन्डिंग है।
बैक बॉन्डिंग की मजबूती ऑर्बिटल्स के बीच प्रभावी ओवरलैप पर निर्भर करती है।
$BF_{3}$ के लिए,ओवरलैप $(2p\pi-2p\pi)$ है,जो समान आकार के कारण सबसे अधिक प्रभावी है।
$BCl_{3}$ के लिए यह $(2p\pi-3p\pi)$,$BBr_{3}$ के लिए यह $(2p\pi-4p\pi)$ और $BI_{3}$ के लिए यह $(2p\pi-5p\pi)$ है।
जैसे-जैसे हैलाइड का आकार बढ़ता है,ऊर्जा का अंतर बढ़ता है और ओवरलैप की दक्षता कम हो जाती है।
इसलिए,बैक बॉन्डिंग की मजबूती का क्रम $BF_{3} > BCl_{3} > BBr_{3} > BI_{3}$ है।
200
ChemistryMediumMCQJEE Main · 2021
ड्यूटेरियम गुणों में हाइड्रोजन के समान है लेकिन:
A
हाइड्रोजन की तुलना में धीमी गति से प्रतिक्रिया करता है
B
हाइड्रोजन की तुलना में अधिक तेजी से प्रतिक्रिया करता है
C
हाइड्रोजन की तरह ही प्रतिक्रिया करता है
D
$\beta^{+}$ कणों का उत्सर्जन करता है

Solution

(A) $D_2$ की बंध वियोजन ऊर्जा $H_2$ से अधिक होती है क्योंकि $H-H$ बंध की तुलना में $D-D$ बंध अधिक मजबूत होता है।
परिणामस्वरूप,रासायनिक अभिक्रियाओं में $D_2$,$H_2$ की तुलना में धीमी गति से अभिक्रिया करता है।
201
ChemistryEasyMCQJEE Main · 2021
रक्त के प्रभावी थक्के (clotting) के लिए सबसे उपयुक्त लवण कौन सा होगा :-
A
$NaHCO_3$
B
$FeSO_4$
C
$Mg(HCO_3)_2$
D
$FeCl_3$

Solution

(D) रक्त एक ऋणात्मक आवेशित कोलाइडल सोल है।
हार्डी-शुल्ज़ नियम के अनुसार,किसी इलेक्ट्रोलाइट की स्कंदन शक्ति सक्रिय आयन (सोल के विपरीत आवेश वाला आयन) की संयोजकता पर निर्भर करती है।
ऋणात्मक आवेशित सोल के लिए,स्कंदन हेतु धनात्मक आवेशित आयन की आवश्यकता होती है।
धनायन पर आवेश का परिमाण बढ़ने के साथ स्कंदन शक्ति बढ़ती है।
धनायनों की तुलना करने पर: $Na^+$,$Fe^{2+}$,$Mg^{2+}$,और $Fe^{3+}$.
$Fe^{3+}$ आयन पर सबसे अधिक आवेश $(+3)$ है,इसलिए ऋणात्मक आवेशित रक्त सोल के लिए इसकी स्कंदन शक्ति अधिकतम है।
अतः,$FeCl_3$ रक्त के थक्के जमने के लिए सबसे उपयुक्त लवण है।
202
ChemistryEasyMCQJEE Main · 2021
निम्नलिखित यौगिकों के लिए नाभिकरागी प्रतिस्थापन (nucleophilic substitution) अभिक्रिया के प्रति बढ़ती प्रवृत्ति का सही क्रम क्या है :-
$(i)$ क्लोरोबेंजीन
(ii) $p$-नाइट्रोक्लोरोबेंजीन
(iii) $2,4$-डाइनाइट्रोक्लोरोबेंजीन
(iv) $2,4,6$-ट्राइनाइट्रोक्लोरोबेंजीन
A
$ ( i ) < ( ii ) < ( iii ) < ( iv ) $
B
$ ( iv ) < ( i ) < ( ii ) < ( iii ) $
C
$ ( iv ) < ( i ) < ( iii ) < ( ii ) $
D
$ ( i ) < ( ii ) < ( iii ) < ( iv ) $

Solution

(A) नाभिकरागी एरोमैटिक प्रतिस्थापन अभिक्रियाएं बेंजीन रिंग पर इलेक्ट्रॉन-आकर्षक समूहों (जैसे $-NO_2$) की उपस्थिति से सुगम हो जाती हैं।
ये समूह $-I$ और $-M$ प्रभावों के माध्यम से मध्यवर्ती कार्बोनियन को स्थिर करते हैं।
जैसे-जैसे $-NO_2$ समूहों की संख्या बढ़ती है,रिंग पर इलेक्ट्रॉन घनत्व कम हो जाता है,जिससे यह नाभिकरागी हमले के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाता है।
अभिक्रियाशीलता का क्रम इस प्रकार है:
$(i)$ क्लोरोबेंजीन (कोई $-NO_2$ समूह नहीं)
(ii) $p$-नाइट्रोक्लोरोबेंजीन (एक $-NO_2$ समूह)
(iii) $2,4$-डाइनाइट्रोक्लोरोबेंजीन (दो $-NO_2$ समूह)
(iv) $2,4,6$-ट्राइनाइट्रोक्लोरोबेंजीन (तीन $-NO_2$ समूह)
अतः,नाभिकरागी प्रतिस्थापन के प्रति बढ़ती प्रवृत्ति का सही क्रम $(i) < (ii) < (iii) < (iv)$ है।
203
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सूची-$I$ और सूची-$II$ का मिलान करें।
सूची-$I$सूची-$II$
$(a)$ $R-COCl \to R-CHO$$(i)$ $Br_2 / NaOH$
$(b)$ $R-CH_2-COOH \to R-CH(Cl)-COOH$$(ii)$ $H_2 / Pd-BaSO_4$
$(c)$ $R-CONH_2 \to R-NH_2$$(iii)$ $Zn(Hg) / \text{Conc. } HCl$
$(d)$ $R-CO-CH_3 \to R-CH_2-CH_3$$(iv)$ $Cl_2 / \text{Red } P, H_2O$

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनें:
A
$(a)-(ii), (b)-(i), (c)-(iv), (d)-(iii)$
B
$(a)-(iii), (b)-(iv), (c)-(i), (d)-(ii)$
C
$(a)-(ii), (b)-(iv), (c)-(i), (d)-(iii)$
D
$(a)-(iii), (b)-(i), (c)-(iv), (d)-(ii)$

Solution

(C) $R-COCl \to R-CHO$ रोसेनमुंड अपचयन है,जो अभिकर्मक के रूप में $H_2 / Pd-BaSO_4$ का उपयोग करता है। अतः,$(a)-(ii)$।
$(b)$ $R-CH_2-COOH \to R-CH(Cl)-COOH$ हेल-वोलहार्ड-जेलिंस्की $(HVZ)$ अभिक्रिया है,जो अभिकर्मक के रूप में $Cl_2 / \text{Red } P, H_2O$ का उपयोग करती है। अतः,$(b)-(iv)$।
$(c)$ $R-CONH_2 \to R-NH_2$ हॉफमैन ब्रोमामाइड निम्नीकरण है,जो अभिकर्मक के रूप में $Br_2 / NaOH$ का उपयोग करता है। अतः,$(c)-(i)$।
$(d)$ $R-CO-CH_3 \to R-CH_2-CH_3$ क्लीमेन्सन अपचयन है,जो अभिकर्मक के रूप में $Zn(Hg) / \text{Conc. } HCl$ का उपयोग करता है। अतः,$(d)-(iii)$।
इसलिए,सही मिलान $(a)-(ii), (b)-(iv), (c)-(i), (d)-(iii)$ है।
204
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प्रजातियों $[FeCl_{4}]^{2-}$,$[Co(C_{2}O_{4})_{3}]^{3-}$ और $MnO_{4}^{2-}$ के लिए परिकलित चुंबकीय आघूर्ण (केवल चक्रण मान) क्रमशः ..... हैं।
A
$5.82$,$0$ और $0 \ BM$
B
$4.90$,$0$ और $1.73 \ BM$
C
$5.92$,$4.90$ और $0 \ BM$
D
$4.90$,$0$ और $2.83 \ BM$

Solution

(B) $(i)$ $[FeCl_{4}]^{2-}$: $Fe^{2+}$ चतुष्फलकीय क्षेत्र में $d^{6}$ है। विन्यास $e^{3} t_{2}^{3}$ है,अतः $n = 4$ अयुग्मित इलेक्ट्रॉन हैं। $\mu = \sqrt{4(4+2)} = \sqrt{24} \approx 4.90 \ BM$.
$(ii)$ $[Co(C_{2}O_{4})_{3}]^{3-}$: $Co^{3+}$ अष्टफलकीय क्षेत्र में $d^{6}$ है,जिसमें प्रबल लिगेंड है। विन्यास $t_{2g}^{6} e_{g}^{0}$ है,अतः $n = 0$ अयुग्मित इलेक्ट्रॉन हैं। $\mu = 0 \ BM$.
$(iii)$ $MnO_{4}^{2-}$: $Mn$ $+6$ ऑक्सीकरण अवस्था में है। $Mn^{6+}$ $3d^{1}$ है। $n = 1$ अयुग्मित इलेक्ट्रॉन है। $\mu = \sqrt{1(1+2)} = \sqrt{3} \approx 1.73 \ BM$.
205
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पॉलिमर Buna-$S$ में,'$S$' का अर्थ क्या है :-
A
सल्फोनेशन
B
स्ट्रेंथ
C
सल्फर
D
स्टाइरीन

Solution

(D) Buna-$S$ एक को-पॉलिमर है जो $1,3$-ब्यूटाडाइन और स्टाइरीन के पॉलिमराइजेशन से बनता है।
Buna-$S$ नाम में,'Bu' का अर्थ $1,3$-ब्यूटाडाइन है,'na' का अर्थ सोडियम (उत्प्रेरक) है,और '$S$' का अर्थ स्टाइरीन है।
206
ChemistryEasyMCQJEE Main · 2021
उपरोक्त अभिक्रिया में उत्पाद के निर्माण के लिए निम्नलिखित में से कौन सा अभिकर्मक उपयुक्त है?
Question diagram
A
$NaBH_{4}$
B
$NH_{2}NH_{2} / C_{2}H_{5}O^{-}Na^{+}$
C
$Ni / H_{2}$
D
$Red \ P + Cl_{2}$

Solution

(B) इस अभिक्रिया में कार्बन-कार्बन द्वि-आबंध $(C=C)$ की उपस्थिति में कार्बोनिल समूह $(C=O)$ का मेथिलीन समूह $(-CH_{2}-)$ में अपचयन शामिल है।
वोल्फ-किश्नर अपचयन,जिसमें हाइड्राज़ीन $(NH_{2}NH_{2})$ और उसके बाद सोडियम एथॉक्साइड $(C_{2}H_{5}O^{-}Na^{+})$ जैसे प्रबल क्षार और ऊष्मा का उपयोग किया जाता है,का उपयोग विशेष रूप से $C=C$ द्वि-आबंध को प्रभावित किए बिना कार्बोनिल समूहों को एल्केन में अपचयित करने के लिए किया जाता है।
$NaBH_{4}$ कार्बोनिल का अपचयन करता है लेकिन आमतौर पर अल्कोहल के लिए उपयोग किया जाता है,और $Ni/H_{2}$ कार्बोनिल और $C=C$ द्वि-आबंध दोनों का अपचयन कर देगा।
Solution diagram
207
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List-$I$ और List-$II$ का मिलान करें।
List-$I$ List-$II$
$(a).$ Valium $(i).$ Antifertility drug
$(b).$ Morphine $(ii).$ Pernicious anaemia
$(c).$ Norethindrone $(iii).$ Analgesic
$(d).$ Vitamin $B_{12}$ $(iv).$ Tranquilizer
A
$a-iv, b-iii, c-ii, d-i$
B
$a-iv, b-iii, c-i, d-ii$
C
$a-ii, b-iv, c-iii, d-i$
D
$a-i, b-iii, c-iv, d-ii$

Solution

(B) Valium $-$ Tranquilizer: $(a-iv)$
$(b)$ Morphine $-$ Analgesic: $(b-iii)$
$(c)$ Norethindrone $-$ Antifertility drug: $(c-i)$
$(d)$ Vitamin $B_{12}$ $-$ Pernicious anaemia: $(d-ii)$
अतः,सही मिलान $a-iv, b-iii, c-i, d-ii$ है।
208
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List-$I$ और List-$II$ का मिलान कीजिए।
List-$I$ (धातु) List-$II$ (अयस्क)
$a$. एल्युमीनियम $i$. सिडेराइट
$b$. कॉपर $ii$. कैलेमाइन
$c$. आयरन $iii$. केओलिनाइट
$d$. जिंक $iv$. मैलाकाइट

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए:
A
$a-iv, b-iii, c-ii, d-i$
B
$a-ii, b-iv, c-i, d-iii$
C
$a-i, b-ii, c-iii, d-iv$
D
$a-iii, b-iv, c-i, d-ii$

Solution

(D) अयस्कों की पहचान इस प्रकार है:
$a$. एल्युमीनियम: केओलिनाइट $(Al_{2}(OH)_{4} \cdot Si_{2}O_{5})$
$b$. कॉपर: मैलाकाइट $(Cu(OH)_{2} \cdot CuCO_{3})$
$c$. आयरन: सिडेराइट $(FeCO_{3})$
$d$. जिंक: कैलेमाइन $(ZnCO_{3})$
अतः,सही मिलान $a-iii, b-iv, c-i, d-ii$ है।
209
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निम्नलिखित तत्वों का उनकी घनत्व के संदर्भ में सही क्रम क्या है?
A
$Cr < Zn < Co < Cu < Fe$
B
$Zn < Cu < Co < Fe < Cr$
C
$Zn < Cr < Fe < Co < Cu$
D
$Cr < Fe < Co < Cu < Zn$

Solution

(C) $3d$ संक्रमण श्रेणी में,सामान्यतः घनत्व बाएं से दाएं बढ़ने पर बढ़ता है क्योंकि परमाणु द्रव्यमान बढ़ता है और परमाणु आयतन घटता है।
हालाँकि,$Zn$ का घनत्व $Cr$ से कम होता है क्योंकि पूर्ण भरे हुए $d$-कक्षकों के कारण इसका परमाणु आकार बड़ा होता है।
घनत्व के मान ($g/cm^3$ में) इस प्रकार हैं: $Zn (7.13) < Cr (7.19) < Fe (7.87) < Co (8.90) < Cu (8.96)$।
अतः,सही क्रम $Zn < Cr < Fe < Co < Cu$ है।
210
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निम्नलिखित में से कौन सा कथन गलत है :-
A
$VOSO_4$ एक अपचायक (reducing agent) है
B
$Cr_2O_3$ एक उभयधर्मी (amphoteric) ऑक्साइड है
C
$RuO_4$ एक ऑक्सीकारक (oxidizing agent) है
D
माणिक (ruby) का लाल रंग $Co^{3+}$ की उपस्थिति के कारण होता है

Solution

(A, D) $(I)$ $VOSO_4$ में,$V$ $+4$ ऑक्सीकरण अवस्था में है। यह एक ऑक्सीकारक के रूप में कार्य करता है,न कि अपचायक के रूप में।
$(II)$ $Cr_2O_3$ एक उभयधर्मी ऑक्साइड है।
$(III)$ $RuO_4$ में,$Ru$ $+8$ ऑक्सीकरण अवस्था में है। यह एक ऑक्सीकारक के रूप में कार्य करता है।
$(IV)$ माणिक का लाल रंग $Al_2O_3$ जालक में $Cr^{3+}$ आयनों की उपस्थिति के कारण होता है,न कि $Co^{3+}$ के कारण।
अतः,$(A)$ और $(D)$ दोनों कथन गलत हैं।
211
ChemistryMediumMCQJEE Main · 2021
निम्नलिखित में से किस यौगिक का डायज़ोनियम लवण $NaOH$ में $\beta$-नैफ्थोल के साथ अभिक्रिया करके रंगीन रंजक (dye) बनाएगा?
A
बेंज़िलएमीन $(C_6H_5CH_2NH_2)$
B
$N,N$-डाइमेथिलएनिलीन $(C_6H_5N(CH_3)_2)$
C
एनिलीन $(C_6H_5NH_2)$
D
$N$-मेथिलएनिलीन $(C_6H_5NHCH_3)$

Solution

(C) रंगीन रंजक (एज़ो रंजक) का निर्माण डायज़ोनियम लवण की क्षारीय माध्यम $(NaOH)$ में $\beta$-नैफ्थोल जैसे एरोमैटिक यौगिक के साथ युग्मन (coupling) अभिक्रिया द्वारा होता है।
प्राथमिक एरोमैटिक एमीन,जैसे एनिलीन $(C_6H_5NH_2)$,$0-5 \ ^\circ C$ पर $NaNO_2$ और $HCl$ के साथ अभिक्रिया करके स्थिर बेंज़ीनडायज़ोनियम क्लोराइड बनाते हैं।
यह डायज़ोनियम लवण फिर $\beta$-नैफ्थोल के साथ इलेक्ट्रॉनरागी प्रतिस्थापन (युग्मन) अभिक्रिया करके नारंगी-लाल एज़ो रंजक उत्पन्न करता है।
बेंज़िलएमीन एक एलिफैटिक एमीन है और इन परिस्थितियों में स्थिर डायज़ोनियम लवण नहीं बनाता है।
$N,N$-डाइमेथिलएनिलीन और $N$-मेथिलएनिलीन क्रमशः द्वितीयक और तृतीयक एमीन हैं,और वे इस विशिष्ट युग्मन अभिक्रिया के लिए आवश्यक समान प्रकार का स्थिर डायज़ोनियम लवण नहीं बनाते हैं।
212
ChemistryMediumJEE Main · 2021
निम्नलिखित में से कुल कितने एमाइन गैब्रियल थैलिमाइड संश्लेषण द्वारा बनाए जा सकते हैं:
$(A)$ $(CH_3)_2CH-CH_2-NH_2$
$(B)$ $CH_3CH_2NH_2$
$(C)$ $C_6H_5-CH_2-NH_2$
$(D)$ $C_6H_5-NH_2$

Solution

(A) गैब्रियल थैलिमाइड संश्लेषण का उपयोग प्राथमिक $(1^{\circ})$ एलिफैटिक एमाइन तैयार करने के लिए किया जाता है।
$1$. $(CH_3)_2CH-CH_2-NH_2$ एक प्राथमिक एलिफैटिक एमाइन है। इसे इस विधि द्वारा संश्लेषित किया जा सकता है।
$2$. $CH_3CH_2NH_2$ एक प्राथमिक एलिफैटिक एमाइन है। इसे इस विधि द्वारा संश्लेषित किया जा सकता है।
$3$. $C_6H_5-CH_2-NH_2$ (बेंजाइल एमाइन) एक प्राथमिक एमाइन है जहाँ $-NH_2$ समूह एक एलिफैटिक कार्बन से जुड़ा है। इसे इस विधि द्वारा संश्लेषित किया जा सकता है।
$4$. $C_6H_5-NH_2$ (एनिलिन) एक एरोमैटिक एमाइन है। एरोमैटिक प्राथमिक एमाइन को गैब्रियल थैलिमाइड संश्लेषण द्वारा तैयार नहीं किया जा सकता है क्योंकि एराइल हैलाइड थैलिमाइड के ऋणायन के साथ न्यूक्लियोफिलिक प्रतिस्थापन अभिक्रिया नहीं देते हैं।
अतः,कुल $3$ एमाइन इस विधि द्वारा संश्लेषित किए जा सकते हैं।
213
ChemistryEasyMCQJEE Main · 2021
सल्फर के निम्नलिखित अपररूपों में से,अपररूपों की वह संख्या,जो अनुचुंबकत्व (paramagnetism) प्रदर्शित करेगी,वह है ..... .
$(A)$ $\alpha$-सल्फर
$(B)$ $\beta$-सल्फर
$(C)$ $S_2$-रूप
A
$0$
B
$1$
C
$2$
D
$3$

Solution

(B) सल्फर $\alpha$-सल्फर (रोम्बिक) और $\beta$-सल्फर (मोनोक्लिनिक) जैसे विभिन्न अपररूपों में मौजूद होता है,जिनमें $S_8$ वलय संरचना होती है। ये रूप प्रतिचुंबकीय (diamagnetic) होते हैं क्योंकि $S_8$ अणुओं में सभी इलेक्ट्रॉन युग्मित होते हैं।
सल्फर का $S_2$ रूप $O_2$ के समान है और उच्च तापमान पर वाष्प अवस्था में अनुचुंबकीय (paramagnetic) होता है,क्योंकि इसके एंटीबॉन्डिंग $\pi^*$ आणविक कक्षकों में दो अयुग्मित इलेक्ट्रॉन होते हैं।
इसलिए,केवल $S_2$ रूप ही अनुचुंबकत्व प्रदर्शित करता है।
ऐसे अपररूपों की संख्या $1$ है।
214
ChemistryMediumMCQJEE Main · 2021
$C_{6}H_{6}$ का हिमांक $5.5^{\circ} C$ है। वह तापमान जिस पर $200 \ g$ $C_{6}H_{6}$ में $10 \ g$ $C_{4}H_{10}$ का विलयन जम जाता है,$...... \ ^{\circ} C$ है। ($C_{6}H_{6}$ का मोलल हिमांक अवनमन स्थिरांक $5.12 \ ^{\circ} C/m$ है।)
A
$3$
B
$1$
C
$5$
D
$9$

Solution

(B) दिया गया है:
विलेय का द्रव्यमान $(C_{4}H_{10})$ = $10 \ g$
$C_{4}H_{10}$ का मोलर द्रव्यमान = $(4 \times 12) + (10 \times 1) = 58 \ g/mol$
विलेय के मोल = $\frac{10}{58} \ mol$
विलायक का द्रव्यमान $(C_{6}H_{6})$ = $200 \ g = 0.2 \ kg$
मोललता $(m)$ = $\frac{\text{विलेय के मोल}}{\text{विलायक का द्रव्यमान kg में}} = \frac{10/58}{0.2} = \frac{10}{11.6} \approx 0.862 \ m$
हिमांक अवनमन स्थिरांक $(K_{f})$ = $5.12 \ ^{\circ} C/m$
हिमांक में अवनमन $(\Delta T_{f})$ = $K_{f} \times m = 5.12 \times 0.862 \approx 4.41 \ ^{\circ} C$
विलयन का हिमांक $(T_{f})$ = $T_{f}^{\circ} - \Delta T_{f} = 5.5 - 4.41 = 1.09 \ ^{\circ} C$
निकटतम पूर्णांक में,तापमान $1 \ ^{\circ} C$ है।
215
ChemistryMediumMCQJEE Main · 2021
यदि $25^{\circ} C$ पर $H^{+}$ सांद्रता को $1 \, M$ से घटाकर $10^{-4} \, M$ कर दिया जाए,तो $MnO_4^- / Mn^{2+}$ युग्म की ऑक्सीकरण क्षमता में परिवर्तन का परिमाण $x \times 10^{-4} \, V$ है। ($H^{+}$ सांद्रता में परिवर्तन पर $MnO_4^-$ और $Mn^{2+}$ की सांद्रता को समान मानें)। $x$ का मान ....... है।
(निकटतम पूर्णांक में पूर्णांकित)
$[\text{दिया है} : \frac{2.303 RT}{F} = 0.059]$
A
$3776$
B
$3800$
C
$4276$
D
$1552$

Solution

(A) अपचयन अर्ध-अभिक्रिया है:
$MnO_4^- + 8H^{+} + 5e^- \rightarrow Mn^{2+} + 4H_2O$
इलेक्ट्रोड विभव के लिए नर्नस्ट समीकरण का उपयोग करते हुए:
$E = E^0 - \frac{0.059}{5} \log \frac{[Mn^{2+}]}{[MnO_4^-][H^{+}]^8}$
स्थिति $I$: जब $[H^{+}] = 1 \, M$
$E_1 = E^0 - \frac{0.059}{5} \log \frac{[Mn^{2+}]}{[MnO_4^-]}$
स्थिति $II$: जब $[H^{+}] = 10^{-4} \, M$
$E_2 = E^0 - \frac{0.059}{5} \log \frac{[Mn^{2+}]}{[MnO_4^-] \times (10^{-4})^8}$
$E_2 = E^0 - \frac{0.059}{5} \log \frac{[Mn^{2+}]}{[MnO_4^-]} + \frac{0.059}{5} \log (10^{-4})^8$
$E_2 = E^0 - \frac{0.059}{5} \log \frac{[Mn^{2+}]}{[MnO_4^-]} + \frac{0.059}{5} \times (-32)$
परिवर्तन का परिमाण $|E_1 - E_2|$ की गणना:
$|E_1 - E_2| = \frac{0.059}{5} \times 32$
$|E_1 - E_2| = 0.0118 \times 32 = 0.3776 \, V$
दिया गया परिवर्तन $x \times 10^{-4} \, V$ है:
$0.3776 \, V = 3776 \times 10^{-4} \, V$
अतः,$x = 3776$.
216
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सुक्रोज अम्लीय विलयन में प्रथम कोटि की अभिक्रिया के दर नियम का पालन करते हुए $25^{\circ} C$ पर $3.33 \ h$ की अर्ध-आयु के साथ ग्लूकोज और फ्रुक्टोज में जल-अपघटित होता है। $9 \ h$ के बाद,शेष सुक्रोज का अंश $f$ है। $\log _{10} (\frac{1}{f})$ का मान ..... $\times 10^{-2}$ है। (निकटतम पूर्णांक में पूर्णांकित करें) [मान लीजिए : $\ln 10 = 2.303, \ln 2 = 0.693$ ]
A
$475$
B
$525$
C
$125$
D
$81$

Solution

(D) प्रथम कोटि की अभिक्रिया के लिए,दर स्थिरांक $k = \frac{\ln 2}{t_{1/2}} = \frac{0.693}{3.33 \ h} = \frac{0.693}{10/3 \ h} = 0.2079 \ h^{-1}$ है।
प्रथम कोटि की अभिक्रिया के लिए समाकलित दर समीकरण $\log_{10} \frac{[A]_0}{[A]_t} = \frac{kt}{2.303}$ है।
चूंकि शेष सुक्रोज का अंश $f = \frac{[A]_t}{[A]_0}$ है,इसलिए $\frac{1}{f} = \frac{[A]_0}{[A]_t}$ होगा।
मान रखने पर: $\log_{10} (\frac{1}{f}) = \frac{0.2079 \times 9}{2.303} = \frac{0.693 \times 3 \times 9}{10 \times 2.303} = 0.81243$ प्राप्त होता है।
अतः,$\log_{10} (\frac{1}{f}) = 81.24 \times 10^{-2}$ है।
निकटतम पूर्णांक में,उत्तर $81$ है।
217
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कार्बिलएमीन परीक्षण का उपयोग कार्बनिक यौगिक में प्राथमिक एमीनो समूह की उपस्थिति का पता लगाने के लिए किया जाता है। जब यह परीक्षण एनीलिन के साथ किया जाता है तो निम्नलिखित में से कौन सा यौगिक बनता है?
A
$C_6H_5NHCH_3$
B
$C_6H_5CONH_2$
C
$C_6H_5CN$
D
$C_6H_5NC$

Solution

(D) कार्बिलएमीन परीक्षण $1^{\circ}$ एमीन द्वारा दिया जाता है। जब एनीलिन $(C_6H_5NH_2)$ को क्लोरोफॉर्म $(CHCl_3)$ और अल्कोहलिक पोटेशियम हाइड्रॉक्साइड $(KOH)$ के साथ उपचारित किया जाता है,तो यह फेनिल आइसोसाइनाइड $(C_6H_5NC)$ बनाने के लिए अभिक्रिया करता है,जो अपनी अत्यधिक अप्रिय गंध के लिए जाना जाता है।
रासायनिक समीकरण इस प्रकार है:
$C_6H_5NH_2 + CHCl_3 + 3KOH \rightarrow C_6H_5NC + 3KCl + 3H_2O$
218
ChemistryEasyMCQJEE Main · 2021
माल्टोज़ के $\alpha-$एनोमर की सही संरचना निम्नलिखित में से कौन सी है?
A
Option A
B
Option B
C
Option C
D
Option D

Solution

(A) माल्टोज़ एक डाइसैकेराइड है जो $\alpha(1 \rightarrow 4)$ ग्लाइकोसिडिक लिंकेज द्वारा जुड़े $\alpha-D-$ग्लूकोपाइरानोज़ की दो इकाइयों से बनता है। माल्टोज़ के $\alpha-$एनोमर में,दूसरी ग्लूकोज़ इकाई के $C-1$ स्थान पर हाइड्रॉक्सिल समूह नीचे की ओर (अक्षीय स्थिति) होता है। चित्र $983-$s843 माल्टोज़ के सही $\alpha-$एनोमर को दर्शाता है,जिसमें $C-1$ हाइड्रॉक्सिल समूह $\alpha$ विन्यास में है।
219
ChemistryMediumMCQJEE Main · 2021
बेंजीन से $4-$ब्रोमो$-2-$नाइट्रोएथिलबेंजीन के निर्माण में प्रयुक्त अभिकर्मकों का सही क्रम क्या है?
A
$HNO_3 / H_2SO_4, Br_2 / AlCl_3, CH_3COCl / AlCl_3, Zn-Hg / HCl$
B
$Br_2 / AlBr_3, CH_3COCl / AlCl_3, HNO_3 / H_2SO_4, Zn / HCl$
C
$CH_3COCl / AlCl_3, Br_2 / AlBr_3, HNO_3 / H_2SO_4, Zn / HCl$
D
$CH_3COCl / AlCl_3, Zn-Hg / HCl, Br_2 / AlBr_3, HNO_3 / H_2SO_4$

Solution

(D) बेंजीन से $4-$ब्रोमो$-2-$नाइट्रोएथिलबेंजीन का संश्लेषण निम्नलिखित चरणों में होता है:
$1$. एसीटोफिनोन बनाने के लिए $CH_3COCl / AlCl_3$ के साथ बेंजीन का फ्रीडल-क्राफ्ट्स एसाइलेशन।
$2$. एथिलबेंजीन बनाने के लिए $Zn-Hg / HCl$ का उपयोग करके एसीटोफिनोन का क्लीमेन्सन अपचयन।
$3$. $4-$ब्रोमोएथिलबेंजीन बनाने के लिए $Br_2 / AlBr_3$ का उपयोग करके एथिलबेंजीन का इलेक्ट्रोफिलिक एरोमैटिक ब्रोमीनीकरण (ऑर्थो स्थिति पर त्रिविम बाधा के कारण पैरा-उत्पाद मुख्य होता है)।
$4$. $4-$ब्रोमो$-2-$नाइट्रोएथिलबेंजीन बनाने के लिए $HNO_3 / H_2SO_4$ का उपयोग करके $4-$ब्रोमोएथिलबेंजीन का नाइट्रीकरण।
220
ChemistryEasyMCQJEE Main · 2021
निम्नलिखित यौगिकों के अम्लीय गुण का सही क्रम क्या है?
Question diagram
A
$III > II > I > IV$
B
$IV > III > II > I$
C
$I > II > III > IV$
D
$II > III > IV > I$

Solution

(D) अम्लीय सामर्थ्य प्रोटॉन $(H^+)$ के नुकसान के बाद बनने वाले संयुग्मी क्षार (conjugate base) की स्थिरता पर निर्भर करता है।
$1.$ फिनोल $(I)$,कार्बोक्सिलिक एसिड $(II, III, IV)$ की तुलना में बहुत कम अम्लीय है।
$2.$ कार्बोक्सिलिक एसिड में,इलेक्ट्रॉन खींचने वाले समूह $(-NO_2)$ अम्लता को बढ़ाते हैं,जबकि इलेक्ट्रॉन देने वाले समूह $(-CH_3)$ इसे कम करते हैं।
$3.$ यौगिक $II$ ($p$-नाइट्रोबेंजोइक एसिड) में मजबूत $-I$ और $-M$ प्रभाव होता है,जो इसे सबसे अधिक अम्लीय बनाता है।
$4.$ यौगिक $III$ (बेंजोइक एसिड) संदर्भ है।
$5.$ यौगिक $IV$ ($p$-टोलुइक एसिड) में $+I$ और $+H$ प्रभाव होता है,जो इसे कार्बोक्सिलिक एसिड में सबसे कम अम्लीय बनाता है।
$6.$ इसलिए,सही क्रम $II > III > IV > I$ है।
221
ChemistryMediumMCQJEE Main · 2021
दी गई रासायनिक अभिक्रिया के बारे में सही कथन है:
Question diagram
A
$-\ddot{N}H_2$ समूह ऑर्थो और पैरा निर्देशक है,इसलिए उत्पाद $(B)$ संभव नहीं है।
B
अभिक्रिया संभव है और यौगिक $(B)$ मुख्य उत्पाद होगा।
C
अभिक्रिया नाइट्रीकरण के बजाय सल्फोनेटेड उत्पाद बनाएगी।
D
अभिक्रिया संभव है और यौगिक $(A)$ मुख्य उत्पाद होगा।

Solution

(D) प्रबल अम्ल $(H_2SO_4)$ की उपस्थिति में,एनिलीन प्रोटोनेट होकर एनिलीनियम आयन $(C_6H_5NH_3^+)$ बनाता है।
$-NH_3^+$ समूह अपनी प्रबल इलेक्ट्रॉन-आकर्षक प्रकृति के कारण मेटा-निर्देशक होता है।
परिणामस्वरूप,$p$-नाइट्रोएनिलीन (यौगिक $(A)$) के साथ-साथ काफी मात्रा में $m$-नाइट्रोएनिलीन (यौगिक $(B)$) का निर्माण होता है।
प्रायोगिक आंकड़े दर्शाते हैं कि $p$-नाइट्रोएनिलीन $(51\%)$ मुख्य उत्पाद है,जिसके बाद $m$-नाइट्रोएनिलीन $(47\%)$ और $o$-नाइट्रोएनिलीन $(2\%)$ प्राप्त होते हैं।
222
ChemistryEasyMCQJEE Main · 2021
हैलोजन की बंध वियोजन एन्थैल्पी का सही क्रम है:
A
$Cl_2 > F_2 > Br_2 > I_2$
B
$I_2 > Br_2 > Cl_2 > F_2$
C
$Cl_2 > Br_2 > F_2 > I_2$
D
$F_2 > Cl_2 > Br_2 > I_2$

Solution

(C) हैलोजन की बंध वियोजन एन्थैल्पी का सही क्रम $Cl_2 > Br_2 > F_2 > I_2$ है।
फ्लोरीन परमाणु के छोटे आकार के कारण,$F_2$ में दो फ्लोरीन परमाणुओं पर मौजूद एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्मों के बीच महत्वपूर्ण अंतर-इलेक्ट्रॉनिक प्रतिकर्षण होता है।
यह $F-F$ बंध को $Cl-Cl$ और $Br-Br$ बंधों की तुलना में कमजोर बना देता है,जिसके परिणामस्वरूप $F_2$ की बंध वियोजन एन्थैल्पी $Cl_2$ और $Br_2$ की तुलना में कम हो जाती है।
223
ChemistryEasyMCQJEE Main · 2021
जर्मन सिल्वर के मुख्य घटक हैं:
A
$Ge, Cu$ और $Ag$
B
$Zn, Ni$ और $Ag$
C
$Cu, Zn$ और $Ni$
D
$Cu, Zn$ और $Ag$

Solution

(C) जर्मन सिल्वर एक मिश्र धातु है जिसमें चांदी $(Ag)$ नहीं होती है।
यह तांबा $(Cu)$,जस्ता $(Zn)$ और निकल $(Ni)$ से बनी होती है।
इसका सामान्य संगठन लगभग $50\% \ Cu$,$30\% \ Zn$ और $20\% \ Ni$ होता है।
224
ChemistryDifficultMCQJEE Main · 2021
निम्नलिखित में से किस क्रम में दिए गए संकुल आयनों को उनके घटते हुए स्पिन-ओनली चुंबकीय आघूर्ण के संदर्भ में सही ढंग से व्यवस्थित किया गया है?
$(i)$ $[FeF_{6}]^{3-}$
$(ii)$ $[Co(NH_{3})_{6}]^{3+}$
$(iii)$ $[NiCl_{4}]^{2-}$
$(iv)$ $[Cu(NH_{3})_{4}]^{2+}$
A
$i > iii > iv > ii$
B
$ii > iii > i > iv$
C
$iii > iv > ii > i$
D
$ii > i > iii > iv$

Solution

(A) स्पिन-ओनली चुंबकीय आघूर्ण $(\mu = \sqrt{n(n+2)} \ B.M.)$ निर्धारित करने के लिए,हम प्रत्येक संकुल के लिए अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की संख्या $(n)$ ज्ञात करते हैं:
$(i)$ $[FeF_{6}]^{3-}$: $Fe^{3+}$ विन्यास $3d^{5}$ है। $F^{-}$ एक दुर्बल क्षेत्र लिगेंड $(WFL)$ है,इसलिए इलेक्ट्रॉन अयुग्मित रहते हैं। $n = 5$,$\mu = \sqrt{35} \ B.M.$
$(ii)$ $[Co(NH_{3})_{6}]^{3+}$: $Co^{3+}$ विन्यास $3d^{6}$ है। $NH_{3}$ एक प्रबल क्षेत्र लिगेंड $(SFL)$ है,जो युग्मन का कारण बनता है। $n = 0$,$\mu = 0 \ B.M.$
$(iii)$ $[NiCl_{4}]^{2-}$: $Ni^{2+}$ विन्यास $3d^{8}$ है। $Cl^{-}$ एक $WFL$ है। चतुष्फलकीय ज्यामिति में,$n = 2$,$\mu = \sqrt{8} \ B.M.$
$(iv)$ $[Cu(NH_{3})_{4}]^{2+}$: $Cu^{2+}$ विन्यास $3d^{9}$ है। $n = 1$,$\mu = \sqrt{3} \ B.M.$
मानों की तुलना करने पर: $\sqrt{35} > \sqrt{8} > \sqrt{3} > 0$,जो $i > iii > iv > ii$ क्रम को दर्शाता है।
225
ChemistryEasyMCQJEE Main · 2021
हाइड्रोफिलिक सॉल के लिए निम्नलिखित में से कौन सा कथन गलत है?
A
उनकी श्यानता (viscosity) $H_2O$ के क्रम की होती है।
B
इन सॉल का आसानी से स्कंदन (coagulation) नहीं किया जा सकता है।
C
उन्हें स्थिरता के लिए इलेक्ट्रोलाइट्स की आवश्यकता नहीं होती है।
D
ये सॉल प्रकृति में उत्क्रमणीय (reversible) होते हैं।

Solution

(A) हाइड्रोफिलिक सॉल की श्यानता आमतौर पर परिक्षेपण माध्यम $(H_2O)$ की तुलना में अधिक होती है।
हाइड्रोफिलिक सॉल अधिक स्थिर होते हैं क्योंकि परिक्षिप्त प्रावस्था और परिक्षेपण माध्यम के बीच मजबूत आकर्षण होता है,जिससे उनका स्कंदन करना कठिन होता है।
हाइड्रोफिलिक सॉल प्रकृति में उत्क्रमणीय होते हैं,जिसका अर्थ है कि स्कंदन के बाद उन्हें केवल परिक्षेपण माध्यम के साथ मिलाकर फिर से प्राप्त किया जा सकता है।
उन्हें स्थिरता के लिए इलेक्ट्रोलाइट्स की आवश्यकता नहीं होती है; वास्तव में,इलेक्ट्रोलाइट्स मिलाने से स्कंदन हो सकता है।
इसलिए,यह कथन कि उनकी श्यानता $H_2O$ के क्रम की होती है,गलत है।
226
ChemistryEasyMCQJEE Main · 2021
नीचे दो कथन दिए गए हैं:
कथन $I :$ $Ni^{2+}$ की पहचान $NH_{4}OH$ की उपस्थिति में डाइमिथाइल ग्लाइऑक्सिम द्वारा की जाती है।
कथन $II :$ डाइमिथाइल ग्लाइऑक्सिम एक द्विदंतुक (bidentate) उदासीन लिगेंड है।
उपर्युक्त कथनों के आलोक में,नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए:
A
कथन $I$ गलत है लेकिन कथन $II$ सही है।
B
कथन $I$ और कथन $II$ दोनों गलत हैं।
C
कथन $I$ सही है लेकिन कथन $II$ गलत है।
D
कथन $I$ और कथन $II$ दोनों सही हैं।

Solution

(C) कथन $I$ सही है क्योंकि डाइमिथाइल ग्लाइऑक्सिम $(DMG)$ का उपयोग अमोनियामय माध्यम $(NH_{4}OH)$ में $Ni^{2+}$ आयनों की पहचान के लिए एक विशिष्ट अभिकर्मक के रूप में किया जाता है।
कथन $II$ गलत है क्योंकि डाइमिथाइल ग्लाइऑक्सिम $(C_{4}H_{8}N_{2}O_{2})$ एक प्रोटॉन खोने के बाद द्विदंतुक मोनोएनायोनिक लिगेंड $(dmg^{-})$ के रूप में कार्य करता है,न कि उदासीन लिगेंड के रूप में।
अभिक्रिया है: $Ni^{2+}_{(aq)} + 2dmg^{-} \rightarrow [Ni(dmg)_{2}] \text{ (गुलाबी लाल अवक्षेप)}$.
227
ChemistryMediumMCQJEE Main · 2021
निम्नलिखित अभिक्रिया का मुख्य उत्पाद है:
$CH_3CH_2CH=CH_2$ $\xrightarrow[Rh \ \text{catalyst}]{H_2/CO}$
A
$CH_3CH_2CH_2CH_2CHO$
B
$CH_3CH_2CH(CHO)CH_3$
C
$CH_3CH_2CH_2CH_2CHO$ (रैखिक उत्पाद) और $CH_3CH_2CH(CH_3)CHO$ (शाखित उत्पाद)
D
$CH_3CH_2CH_2CHO$

Solution

(A) यह अभिक्रिया एल्कीन का ऑक्सो प्रक्रम या हाइड्रोफॉर्मिलीकरण है।
इस अभिक्रिया में,एक एल्कीन रोडियम $(Rh)$ या कोबाल्ट उत्प्रेरक की उपस्थिति में $CO$ और $H_2$ के साथ अभिक्रिया करके एल्डिहाइड बनाता है।
$CH_3CH_2CH=CH_2$ (ब्यूट$-1-$ईन) के लिए,हाइड्रोफॉर्मिलीकरण दो समावयवी एल्डिहाइड देता है:
$1$. $CH_3CH_2CH_2CH_2CHO$ (पेंटेनल,रैखिक उत्पाद)
$2$. $CH_3CH_2CH(CH_3)CHO$ ($2$-मिथाइल ब्यूटेनल,शाखित उत्पाद)
रोडियम उत्प्रेरक का उपयोग करने पर,संक्रमण अवस्था के दौरान कम त्रिविम बाधा के कारण रैखिक एल्डिहाइड मुख्य उत्पाद के रूप में प्राप्त होता है।
अतः,मुख्य उत्पाद $CH_3CH_2CH_2CH_2CHO$ है।
228
ChemistryEasyMCQJEE Main · 2021
$Indium$ के शोधन के लिए प्रयुक्त विधि ..... है।
A
वैन आर्केल विधि
B
द्रवण (liquation)
C
जोन रिफाइनिंग
D
वाष्प प्रावस्था शोधन

Solution

(C) $Indium$ $(In)$ के शोधन के लिए $Zone$ रिफाइनिंग का उपयोग किया जाता है।
यह विधि इस सिद्धांत पर आधारित है कि अशुद्धियाँ धातु की ठोस अवस्था की तुलना में गलित अवस्था में अधिक घुलनशील होती हैं।
229
ChemistryEasyMCQJEE Main · 2021
नीचे दो कथन दिए गए हैं:
कथन-$I$: सल्फर के $\alpha$ और $\beta$ रूप धीरे-धीरे गर्म करने या धीरे-धीरे ठंडा करने पर आपस में उत्क्रमणीय रूप से बदल सकते हैं।
कथन-$II$: कमरे के तापमान पर सल्फर का स्थिर क्रिस्टलीय रूप मोनोक्लिनिक सल्फर है।
उपर्युक्त कथनों के आलोक में,नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनें:
A
कथन $I$ गलत है लेकिन कथन $II$ सही है।
B
कथन $I$ और कथन $II$ दोनों सही हैं।
C
कथन $I$ सही है लेकिन कथन $II$ गलत है।
D
कथन $I$ और कथन $II$ दोनों गलत हैं।

Solution

(C) सल्फर के लिए संक्रमण तापमान $369 \ K$ है। $369 \ K$ से नीचे $\alpha-$सल्फर (रोम्बिक) स्थिर होता है,और $369 \ K$ से ऊपर $\beta-$सल्फर (मोनोक्लिनिक) स्थिर होता है।
ये दोनों रूप धीरे-धीरे गर्म करने या धीरे-धीरे ठंडा करने पर आपस में उत्क्रमणीय रूप से बदल सकते हैं,इसलिए कथन-$I$ सही है।
कमरे के तापमान पर,$\alpha-$सल्फर (रोम्बिक) सबसे स्थिर रूप है,न कि मोनोक्लिनिक सल्फर। इसलिए,कथन-$II$ गलत है।
230
ChemistryMediumMCQJEE Main · 2021
यदि एक यौगिक $AB$ जलीय विलयन में $75\,\%$ तक वियोजित होता है,तो उस विलयन की मोललता क्या होगी जो क्वथनांक में $2.5\, K$ की वृद्धि दर्शाता है? $......$ मोलल।
(निकटतम पूर्णांक में पूर्णांकित) $[K_{b} = 0.52\, K\, kg\, mol^{-1}]$
A
$4$
B
$3$
C
$6$
D
$5$

Solution

(B) वियोजन की मात्रा $\alpha = 0.75$ है और $AB$ के लिए,आयनों की संख्या $n = 2$ है।
वांट हॉफ कारक $i = 1 - \alpha + n\alpha = 1 - 0.75 + 2 \times 0.75 = 1.75$ है।
क्वथनांक में उन्नयन $\Delta T_{b} = i \times K_{b} \times m$ द्वारा दिया जाता है।
मान रखने पर: $2.5 = 1.75 \times 0.52 \times m$।
मोललता $m = \frac{2.5}{1.75 \times 0.52} = \frac{2.5}{0.91} \approx 2.747$ है।
निकटतम पूर्णांक में पूर्णांकित करने पर,हमें $3$ प्राप्त होता है।
231
ChemistryMediumMCQJEE Main · 2021
नीचे दिए गए यौगिकों में से कितने यौगिक $-COOH$ समूह रखते हैं .... .
$A$. सल्फानिलिक एसिड
$B$. पिकरिक एसिड
$C$. एस्पिरिन
$D$. एस्कॉर्बिक एसिड
A
$1$
B
$0$
C
$2$
D
$4$

Solution

(A) आइए दिए गए यौगिकों की संरचनाओं का विश्लेषण करें:
$1$. सल्फानिलिक एसिड $(p-NH_2C_6H_4SO_3H)$: इसमें सल्फोनिक एसिड समूह $(-SO_3H)$ होता है,न कि कार्बोक्सिलिक एसिड समूह $(-COOH)$।
$2$. पिकरिक एसिड ($2,4,6-$ट्राइनाइट्रोफेनोल): इसमें फेनोलिक हाइड्रॉक्सिल समूह $(-OH)$ और नाइट्रो समूह $(-NO_2)$ होते हैं,न कि कार्बोक्सिलिक एसिड समूह $(-COOH)$।
$3$. एस्पिरिन (एसिटाइलसैलिसिलिक एसिड): इसमें एक कार्बोक्सिलिक एसिड समूह $(-COOH)$ और एक एस्टर समूह होता है।
$4$. एस्कॉर्बिक एसिड (विटामिन $C$): इसमें हाइड्रॉक्सिल समूह और एक चक्रीय एस्टर (लैक्टोन) होता है,न कि कार्बोक्सिलिक एसिड समूह $(-COOH)$।
अतः,केवल एस्पिरिन में $-COOH$ समूह होता है।
ऐसे यौगिकों की कुल संख्या $1$ है।
232
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तापमान $27^{\circ} C$ से $52^{\circ} C$ तक बढ़ाने पर एक अभिक्रिया का दर स्थिरांक पांच गुना बढ़ जाता है। सक्रियण ऊर्जा का मान $kJ \, mol^{-1}$ में $....$ है। (निकटतम पूर्णांक में पूर्णांकित) $[R = 8.314 \, J \, K^{-1} \, mol^{-1}]$
A
$26$
B
$10$
C
$52$
D
$48$

Solution

(C) दिया गया है: $T_1 = 300 \, K$,$T_2 = 325 \, K$,$K_2 = 5K_1$,$R = 8.314 \, J \, K^{-1} \, mol^{-1}$.
आरेनियस समीकरण का उपयोग करते हुए: $\ln \frac{K_2}{K_1} = \frac{E_a}{R} \left[ \frac{T_2 - T_1}{T_1 T_2} \right]$.
$\ln(5) = \frac{E_a}{8.314} \left[ \frac{25}{97500} \right]$.
$1.6094 = \frac{E_a}{8.314} \times 0.0002564$.
$E_a = \frac{1.6094 \times 8.314}{0.0002564} \approx 52194 \, J \, mol^{-1} = 52.194 \, kJ \, mol^{-1}$.
निकटतम पूर्णांक में उत्तर $52 \, kJ \, mol^{-1}$ है।
233
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जलीय विलयन में एक द्विसंयोजक आयन (परमाणु क्रमांक $29$) का स्पिन-ओनली चुंबकीय आघूर्ण ...... $BM$ है।
A
$2$
B
$8$
C
$6$
D
$4$

Solution

(A) तत्व का परमाणु क्रमांक $Z = 29$ है,जो कॉपर $(Cu)$ है।
$Cu$ का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास $[Ar] 3d^{10} 4s^1$ है।
द्विसंयोजक आयन $Cu^{2+}$ के लिए,इलेक्ट्रॉनिक विन्यास $[Ar] 3d^9$ है।
$3d$ कक्षक में $9$ इलेक्ट्रॉन हैं,जिसका अर्थ है कि इसमें $1$ अयुग्मित इलेक्ट्रॉन है।
स्पिन-ओनली चुंबकीय आघूर्ण का सूत्र $\mu = \sqrt{n(n+2)} \ BM$ है,जहाँ $n$ अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की संख्या है।
$n = 1$ रखने पर: $\mu = \sqrt{1(1+2)} = \sqrt{3} \approx 1.73 \ BM$।
$1.73$ को निकटतम पूर्णांक में बदलने पर उत्तर $2 \ BM$ प्राप्त होता है।
234
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$NaOH$ विलयन और $1.25\, M$ ऑक्सेलिक एसिड विलयन के अनुमापन (titration) पर विचार करें। अंतिम बिंदु पर निम्नलिखित ब्यूरेट रीडिंग प्राप्त हुईं:
$(i)$ $4.5\, mL$ $\quad (ii)$ $4.5\, mL$ $\quad (iii)$ $4.4\, mL$
$(iv)$ $4.4\, mL$ $\quad (v)$ $4.4\, mL$
यदि ऑक्सेलिक एसिड का आयतन $10.0\, mL$ लिया गया था,तो $NaOH$ विलयन की मोलरता .... $M$ है (निकटतम पूर्णांक में पूर्णांकित)।
A
$6$
B
$16$
C
$32$
D
$1$

Solution

(A) $NaOH$ का सुसंगत आयतन $(iii, iv, v)$ रीडिंग का औसत है,जो $4.4\, mL$ है।
तुल्यता के सिद्धांत का उपयोग करते हुए: $NaOH$ के तुल्यांक = $H_2C_2O_4$ के तुल्यांक।
$M_{NaOH} \times V_{NaOH} \times n_{factor} = M_{acid} \times V_{acid} \times n_{factor}$.
$NaOH$ के लिए,$n_{factor} = 1$ और ऑक्सेलिक एसिड के लिए,$n_{factor} = 2$ है।
$M \times 4.4 \times 1 = 1.25 \times 10.0 \times 2$.
$M = \frac{25}{4.4} \approx 5.68\, M$.
निकटतम पूर्णांक में पूर्णांकित करने पर,उत्तर $6\, M$ प्राप्त होता है।
235
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कॉपर $HNO_{3}$ की सांद्रता के आधार पर $NO_{3}^{-}$ को $NO$ और $NO_{2}$ में अपचयित (reduce) करता है। मान लीजिए $[Cu^{2+}]$ स्थिर है और $P_{NO} = P_{NO_{2}} = 1 \ bar$ है,तो $HNO_{3}$ की वह सांद्रता जिस पर कॉपर द्वारा $NO_{3}^{-}$ के $NO$ और $NO_{2}$ में अपचयन की ऊष्मागतिक प्रवृत्ति समान है,$10^{x} \ M$ है। $2x$ का मान ...... है।
$[Given: E_{Cu^{2+} / Cu}^{\circ} = 0.34 \ V, E_{NO_{3}^{-} / NO}^{\circ} = 0.96 \ V, E_{NO_{3}^{-} / NO_{2}}^{\circ} = 0.79 \ V$ और $298 \ K$ पर,$\frac{RT}{F}(2.303) = 0.059]$
A
$2$
B
$4$
C
$6$
D
$8$

Solution

(B) $NO_{3}^{-}$ के $NO$ में अपचयन के लिए:
$NO_{3}^{-} + 4H^{+} + 3e^{-} \longrightarrow NO + 2H_{2}O$
$E_{1} = E_{NO_{3}^{-} / NO}^{\circ} - \frac{0.059}{3} \log \frac{P_{NO}}{[NO_{3}^{-}][H^{+}]^{4}}$
$NO_{3}^{-}$ के $NO_{2}$ में अपचयन के लिए:
$NO_{3}^{-} + 2H^{+} + e^{-} \longrightarrow NO_{2} + H_{2}O$
$E_{2} = E_{NO_{3}^{-} / NO_{2}}^{\circ} - \frac{0.059}{1} \log \frac{P_{NO_{2}}}{[NO_{3}^{-}][H^{+}]^{2}}$
दिया गया है $[HNO_{3}] = y$,इसलिए $[H^{+}] = y$ और $[NO_{3}^{-}] = y$. साथ ही $P_{NO} = P_{NO_{2}} = 1 \ bar$.
$E_{1} = E_{2}$ को बराबर करने पर:
$0.96 - \frac{0.059}{3} \log \frac{1}{y \cdot y^{4}} = 0.79 - 0.059 \log \frac{1}{y \cdot y^{2}}$
$0.17 = \frac{0.059}{3} \log (y^{-5}) - 0.059 \log (y^{-3})$
$0.17 = -\frac{0.059}{3} \cdot 5 \log y + 0.059 \cdot 3 \log y$
$0.17 = 0.059 \log y (3 - \frac{5}{3}) = 0.059 \log y (\frac{4}{3})$
$\log y = \frac{0.17 \times 3}{0.059 \times 4} = \frac{0.51}{0.236} \approx 2.16$
$y = 10^{2.16}$,इसलिए $x = 2.16$.
$2x = 4.32$.
236
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कॉपर का इकाई सेल $3.596 \, \mathring{A}$ की कोर लंबाई वाले फलक-केंद्रित घनीय $(FCC)$ जालक के अनुरूप है। $kg / m^{3}$ में कॉपर का परिकलित घनत्व ....... है।
[कॉपर का मोलर द्रव्यमान $= 63.54 \, g/mol$; आवोगाद्रो संख्या $= 6.022 \times 10^{23} \, mol^{-1}$]
A
$3596$
B
$1047$
C
$9077$
D
$4577$

Solution

(C) $FCC$ इकाई सेल के लिए,प्रति इकाई सेल परमाणुओं की संख्या $(Z)$ $4$ है।
घनत्व $(d)$ का सूत्र $d = \frac{Z \times M}{N_{A} \times a^{3}}$ है।
दिया गया है: $Z = 4$,$M = 63.54 \, g/mol = 0.06354 \, kg/mol$,$N_{A} = 6.022 \times 10^{23} \, mol^{-1}$,और $a = 3.596 \, \mathring{A} = 3.596 \times 10^{-10} \, m$.
मान रखने पर: $d = \frac{4 \times 0.06354}{6.022 \times 10^{23} \times (3.596 \times 10^{-10})^{3}} \approx 9076.6 \, kg/m^{3}$.
अतः,घनत्व लगभग $9077 \, kg/m^{3}$ है।
237
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नीचे दो कथन दिए गए हैं: एक को अभिकथन $A$ और दूसरे को कारण $R$ के रूप में लेबल किया गया है।
अभिकथन $A$: $T \ell I_{3}$ में,जो $CsI_{3}$ के समरूपी (isomorphous) है,धातु $+1$ ऑक्सीकरण अवस्था में उपस्थित है।
कारण $R$: $T \ell$ धातु के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास में चौदह $f$ इलेक्ट्रॉन होते हैं।
उपरोक्त कथनों के आलोक में,नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर चुनें:
A
$A$ सही है लेकिन $R$ सही नहीं है।
B
$A$ और $R$ दोनों सही हैं और $R$,$A$ की सही व्याख्या है।
C
$A$ सही नहीं है लेकिन $R$ सही है।
D
$A$ और $R$ दोनों सही हैं लेकिन $R$,$A$ की सही व्याख्या नहीं है।

Solution

(D) $T \ell I_{3}$,$CsI_{3}$ के समरूपी है,जिसका अर्थ है कि इसमें ट्राईआयोडाइड आयन $I_{3}^{\ominus}$ होता है।
अतः,$T \ell I_{3}$ को $T \ell^{\oplus} I_{3}^{\ominus}$ के रूप में लिखा जाता है,जहाँ $T \ell$ $+1$ ऑक्सीकरण अवस्था में है। इसलिए,अभिकथन $A$ सही है।
$T \ell$ $(Z=81)$ का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास $[Xe] 4f^{14} 5d^{10} 6s^{2} 6p^{1}$ है।
इसमें चौदह $4f$ इलेक्ट्रॉन होते हैं। इसलिए,कारण $R$ सही है।
हालाँकि,$14f$ इलेक्ट्रॉनों की उपस्थिति $T \ell$ परमाणु की एक सामान्य विशेषता है और यह $T \ell I_{3}$ के $T \ell^{\oplus} I_{3}^{\ominus}$ के रूप में अस्तित्व का सीधा कारण नहीं है (जो अक्रिय युग्म प्रभाव और $T \ell^{\oplus}$ आयन की स्थिरता के कारण है)। इसलिए,$R$,$A$ की सही व्याख्या नहीं है।
238
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List-$I$ को List-$II$ के साथ सुमेलित कीजिए:
List-$I$ List-$II$
$(a)$. सुक्रोज $(i)$. $\beta-D$-गैलेक्टोज और $\beta-D$-ग्लूकोज
$(b)$. लैक्टोज $(ii)$. $\alpha-D$-ग्लूकोज और $\beta-D$-फ्रुक्टोज
$(c)$. माल्टोज $(iii)$. $\alpha-D$-ग्लूकोज और $\alpha-D$-ग्लूकोज

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए:
A
$(a)$ $\rightarrow (i), (b)$ $\rightarrow (iii), (c)$ $\rightarrow (ii)$
B
$(a)$ $\rightarrow (iii), (b)$ $\rightarrow (i), (c)$ $\rightarrow (iii)$
C
$(a)$ $\rightarrow (ii), (b)$ $\rightarrow (i), (c)$ $\rightarrow (iii)$
D
$(a)$ $\rightarrow (iii), (b)$ $\rightarrow (ii), (c)$ $\rightarrow (i)$

Solution

(C) डाईसैकेराइड्स के जल-अपघटन उत्पाद इस प्रकार हैं:
$1$. सुक्रोज के जल-अपघटन से $\alpha-D$-ग्लूकोज और $\beta-D$-फ्रुक्टोज प्राप्त होते हैं। अतः,$(a) \rightarrow (ii)$.
$2$. लैक्टोज के जल-अपघटन से $\beta-D$-गैलेक्टोज और $\beta-D$-ग्लूकोज प्राप्त होते हैं। अतः,$(b) \rightarrow (i)$.
$3$. माल्टोज के जल-अपघटन से $\alpha-D$-ग्लूकोज और $\alpha-D$-ग्लूकोज प्राप्त होते हैं। अतः,$(c) \rightarrow (iii)$.
इसलिए,सही मिलान $(a)$ $\rightarrow (ii), (b)$ $\rightarrow (i), (c)$ $\rightarrow (iii)$ है।
239
ChemistryEasyMCQJEE Main · 2021
$A$. फेनिल मेथेनेमाइन
$B$. $N,N$-डाइमेथिलऐनिलीन
$C$. $N$-मेथिलऐनिलीन
$D$. बेंजेनेमाइन
उपरोक्त एमाइन की क्षारीय प्रकृति का सही क्रम चुनिए।
A
$A > C > B > D$
B
$D > C > B > A$
C
$D > B > C > A$
D
$A > B > C > D$

Solution

(D) एमाइन की क्षारीय शक्ति नाइट्रोजन परमाणु पर एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म (lone pair) की उपलब्धता पर निर्भर करती है।
$A$ (फेनिल मेथेनेमाइन,$C_6H_5CH_2NH_2$): एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म बेंजीन वलय के साथ संयुग्मन (conjugation) में नहीं है,जिससे यह सबसे अधिक क्षारीय है।
$B$ ($N,N$-डाइमेथिलऐनिलीन,$C_6H_5N(CH_3)_2$): एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म बेंजीन वलय के साथ संयुग्मन में है,लेकिन दो मेथिल समूह प्रेरणिक प्रभाव $(+I)$ प्रदान करते हैं,जो $C$ और $D$ की तुलना में क्षारीयता को बढ़ाते हैं।
$C$ ($N$-मेथिलऐनिलीन,$C_6H_5NHCH_3$): एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म बेंजीन वलय के साथ संयुग्मन में है और एक मेथिल समूह प्रेरणिक प्रभाव $(+I)$ प्रदान करता है।
$D$ (बेंजेनेमाइन,$C_6H_5NH_2$): एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म बेंजीन वलय के साथ संयुग्मन में है और एल्काइल समूहों से कोई प्रेरणिक प्रभाव नहीं मिलता है।
अतः,क्षारीय शक्ति का क्रम $A > B > C > D$ है।
240
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Seliwanoff परीक्षण और Xanthoproteic परीक्षण का उपयोग क्रमशः $....$ और $....$ की पहचान के लिए किया जाता है।
A
Aldoses,ketoses
B
Proteins,ketoses
C
Ketoses,proteins
D
Ketoses,aldoses

Solution

(C) Seliwanoff परीक्षण एक रासायनिक परीक्षण है जो एल्डोज और कीटोज शर्करा के बीच अंतर करता है। यह विशेष रूप से कीटोज की पहचान लाल रंग उत्पन्न करके करता है।
Xanthoproteic परीक्षण का उपयोग प्रोटीन की उपस्थिति का पता लगाने के लिए किया जाता है,विशेष रूप से उन प्रोटीनों में जिनमें एरोमैटिक रिंग वाले अमीनो एसिड (जैसे टायरोसिन,ट्रिप्टोफैन और फेनिलएलनिन) होते हैं,जो सांद्र नाइट्रिक एसिड के साथ उपचार करने पर पीला रंग देते हैं।
241
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$2,4-DNP$ परीक्षण का उपयोग किसे पहचानने के लिए किया जा सकता है?
A
एमीन
B
एल्डिहाइड
C
ईथर
D
हैलोजन

Solution

(B) $2,4-DNP$ का अर्थ $2,4-dinitrophenylhydrazine$ है।
इस अभिकर्मक का उपयोग कार्बोनिल यौगिकों की पहचान करने के लिए किया जाता है,जिसमें एल्डिहाइड और कीटोन दोनों शामिल हैं।
दिए गए विकल्पों में से,एल्डिहाइड एक कार्बोनिल यौगिक है।
242
ChemistryEasyMCQJEE Main · 2021
Ceric ammonium nitrate और $CHCl_3 / \text{alc. } KOH$ का उपयोग क्रमशः ...... और ........ में उपस्थित कार्यात्मक समूहों की पहचान के लिए किया जाता है।
A
अल्कोहल,फिनोल
B
एमीन,अल्कोहल
C
अल्कोहल,एमीन
D
एमीन,फिनोल

Solution

(C) Ceric ammonium nitrate का उपयोग अल्कोहल की पहचान के लिए एक परीक्षण के रूप में किया जाता है,जो एक विशिष्ट लाल या पीला रंग देता है।
$CHCl_3 / \text{alc. } KOH$ का उपयोग कार्बिलएमीन परीक्षण में किया जाता है,जो प्राथमिक एमीन $(R-NH_2)$ की पहचान के लिए विशिष्ट है।
243
ChemistryDifficultMCQJEE Main · 2021
दी गई रासायनिक अभिक्रिया में $A$ को पहचानें:
Question diagram
A
Option A
B
Option B
C
Option C
D
Option D

Solution

(A) दी गई अभिक्रिया $o$-फेनिलीनडाईएसीटैल्डिहाइड का अंतःआणविक एल्डोल संघनन है।
$1$. क्षार $(OH^-)$ एनोलेट आयन बनाने के लिए एल्डिहाइड समूह में से एक $\alpha$-हाइड्रोजन को हटाता है।
$2$. यह एनोलेट आयन दूसरे एल्डिहाइड समूह के कार्बोनिल कार्बन पर न्यूक्लियोफिलिक हमला करता है,जिससे चक्रीय $\beta$-हाइड्रॉक्सी एल्डिहाइड बनता है।
$3$. अम्ल या क्षार की उपस्थिति में गर्म करने पर (निर्जलीकरण),$\beta$-हाइड्रॉक्सी एल्डिहाइड पानी के एक अणु को हटाकर $\alpha,\beta$-असंतृप्त एल्डिहाइड बनाता है।
$4$. अंतिम उत्पाद $2$-फॉर्मिल-$1,2,3,4$-टेट्राहाइड्रोनैफ़थलीन है।
244
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निम्नलिखित रासायनिक अभिक्रिया में $A$ की पहचान करें:
Question diagram
A
$4$-हाइड्रॉक्सीबेन्जिल एथिल ईथर
B
$4$-हाइड्रॉक्सीबेन्जिल आयोडाइड
C
$4$-मेथॉक्सीबेन्जिल अल्कोहल
D
$4$-हाइड्रॉक्सीबेन्जिल अल्कोहल

Solution

(B) अभिक्रिया तीन चरणों में पूरी होती है:
$1$. क्रॉस-कैनिज़ारो अभिक्रिया: $p$-मेथॉक्सीबेन्जल्डिहाइड $NaOH$ की उपस्थिति में $HCHO$ के साथ अभिक्रिया करके $p$-मेथॉक्सीबेन्जिल अल्कोहल $(CH_3O-C_6H_4-CH_2OH)$ और सोडियम फॉर्मेट बनाता है।
$2$. विलियमसन ईथर संश्लेषण: $p$-मेथॉक्सीबेन्जिल अल्कोहल $NaH$ की उपस्थिति में $CH_3CH_2Br$ के साथ अभिक्रिया करके $p$-मेथॉक्सीबेन्जिल एथिल ईथर $(CH_3O-C_6H_4-CH_2-O-CH_2CH_3)$ बनाता है।
$3$. $HI$ और $\Delta$ के साथ विदलन: गर्म करने पर $HI$ द्वारा ईथर लिंकेज और मेथॉक्सी समूह का विदलन होता है। मेथॉक्सी समूह $(CH_3O-)$ $OH$ और $CH_3I$ में परिवर्तित हो जाता है,और बेन्जिल ईथर $(R-CH_2-O-CH_2CH_3)$ का विदलन होकर $4$-हाइड्रॉक्सीबेन्जिल आयोडाइड $(HO-C_6H_4-CH_2I)$ और एथेनॉल बनता है।
अतः,अंतिम उत्पाद $A$ $4$-हाइड्रॉक्सीबेन्जिल आयोडाइड है।
245
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सूची-$I$ का सूची-$II$ से मिलान करें:
सूची-$I$ सूची-$II$
$a$. बेंजीनडायज़ोनियम क्लोराइड $\xrightarrow{Cu_2Cl_2/HCl}$ क्लोरोबेंजीन $+ N_2$ $i$. वुर्ट्ज़ अभिक्रिया
$b$. बेंजीनडायज़ोनियम क्लोराइड $\xrightarrow{Cu/HCl}$ क्लोरोबेंजीन $+ N_2$ $ii$. सैंडमेयर अभिक्रिया
$c$. $2 CH_3CH_2Cl + 2 Na \xrightarrow{Ether} C_2H_5-C_2H_5 + 2 NaCl$ $iii$. फिटिग अभिक्रिया
$d$. $2 C_6H_5Cl + 2 Na \xrightarrow{Ether} C_6H_5-C_6H_5 + 2 NaCl$ $iv$. गाटरमैन अभिक्रिया

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनें:
A
$a$ $\rightarrow iii, b$ $\rightarrow i, c$ $\rightarrow iv, d$ $\rightarrow ii$
B
$a$ $\rightarrow ii, b$ $\rightarrow i, c$ $\rightarrow iv, d$ $\rightarrow iii$
C
$a$ $\rightarrow ii, b$ $\rightarrow iv, c$ $\rightarrow i, d$ $\rightarrow iii$
D
$a$ $\rightarrow iii, b$ $\rightarrow iv, c$ $\rightarrow i, d$ $\rightarrow ii$

Solution

(C) . बेंजीनडायज़ोनियम क्लोराइड की $Cu_2Cl_2/HCl$ के साथ अभिक्रिया सैंडमेयर अभिक्रिया है $(a \rightarrow ii)$.
$b$. बेंजीनडायज़ोनियम क्लोराइड की $Cu/HCl$ के साथ अभिक्रिया गाटरमैन अभिक्रिया है $(b \rightarrow iv)$.
$c$. ईथर में $Na$ के साथ एल्किल हैलाइड की अभिक्रिया जो एल्केन बनाती है,वुर्ट्ज़ अभिक्रिया है $(c \rightarrow i)$.
$d$. ईथर में $Na$ के साथ एरिल हैलाइड की अभिक्रिया जो डायरिल बनाती है,फिटिग अभिक्रिया है $(d \rightarrow iii)$.
अतः,सही मिलान $a$ $\rightarrow ii, b$ $\rightarrow iv, c$ $\rightarrow i, d$ $\rightarrow iii$ है।
246
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दी गई अभिक्रिया में $A$ को पहचानें।
Question diagram
A
Option A
B
Option B
C
Option C
D
Option D

Solution

(B) इस अभिक्रिया में $SOCl_2$ के साथ बहु-क्रियात्मक समूह वाले यौगिक की अभिक्रिया शामिल है।
$SOCl_2$ (थायोनाइल क्लोराइड) एक अभिकर्मक है जिसका उपयोग आमतौर पर अल्कोहल को अल्काइल क्लोराइड में बदलने के लिए किया जाता है।
दिए गए सबस्ट्रेट में तीन हाइड्रॉक्सिल समूह हैं:
$1$. एक फेनोलिक $-OH$ समूह।
$2$. संतृप्त वलय पर एक द्वितीयक एलिफैटिक $-OH$ समूह।
$3$. एक प्राथमिक बेंजिलिक $-CH_2OH$ समूह।
$SOCl_2$ एलिफैटिक अल्कोहल (प्राथमिक और द्वितीयक दोनों) के साथ आसानी से अभिक्रिया करके अल्काइल क्लोराइड बनाता है।
हालाँकि,यह सामान्य परिस्थितियों में फेनोलिक $-OH$ समूह को एराइल क्लोराइड में परिवर्तित नहीं करता है।
इसलिए,द्वितीयक $-OH$ और प्राथमिक बेंजिलिक $-CH_2OH$ दोनों समूह क्रमशः $-Cl$ और $-CH_2Cl$ में परिवर्तित हो जाएंगे।
परिणामी मुख्य उत्पाद $A$ में फेनोलिक $-OH$ समूह बरकरार रहेगा,एक द्वितीयक $-Cl$ समूह होगा,और एक $-CH_2Cl$ समूह होगा।
यह संरचना विकल्प $B$ में दिखाई गई है।
247
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List-$I$ को List-$II$ के साथ सुमेलित कीजिए।
List-$I$ List-$II$
$(a)$ साइडराइट $(i)$ $Cu$
$(b)$ कैलेमाइन $(ii)$ $Ca$
$(c)$ मैलाकाइट $(iii)$ $Fe$
$(d)$ क्रायोलाइट $(iv)$ $Al$
$(v)$ $Zn$

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए:
A
$(a)$ $\rightarrow (iii), (b)$ $\rightarrow (i), (c)$ $\rightarrow (v), (d)$ $\rightarrow (ii)$
B
$(a)$ $\rightarrow (i), (b)$ $\rightarrow (ii), (c)$ $\rightarrow (v), (d)$ $\rightarrow (iii)$
C
$(a)$ $\rightarrow (iii), (b)$ $\rightarrow (v), (c)$ $\rightarrow (i), (d)$ $\rightarrow (iv)$
D
$(a)$ $\rightarrow (i), (b)$ $\rightarrow (ii), (c)$ $\rightarrow (iii), (d)$ $\rightarrow (iv)$

Solution

(C) साइडराइट $FeCO_{3}$ है,जो $Fe$ का अयस्क है।
$(b)$ कैलेमाइन $ZnCO_{3}$ है,जो $Zn$ का अयस्क है।
$(c)$ मैलाकाइट $Cu(OH)_{2} \cdot CuCO_{3}$ है,जो $Cu$ का अयस्क है।
$(d)$ क्रायोलाइट $Na_{3}AlF_{6}$ है,जो $Al$ का अयस्क है।
अतः,सही मिलान है: $(a)$ $\rightarrow (iii), (b)$ $\rightarrow (v), (c)$ $\rightarrow (i), (d)$ $\rightarrow (iv)$.
248
ChemistryEasyMCQJEE Main · 2021
जब $FeCl_3$ को गर्म पानी की अधिकता में मिलाया जाता है,तो परिणामी कोलाइडल कणों पर आवेश की प्रकृति क्या होती है?
A
धनात्मक
B
कभी धनात्मक और कभी ऋणात्मक
C
उदासीन
D
ऋणात्मक

Solution

(A) जब $FeCl_3$ को गर्म पानी में मिलाया जाता है,तो यह जल-अपघटन (hydrolysis) द्वारा हाइड्रेटेड फेरिक ऑक्साइड,$Fe_2O_3 \cdot xH_2O$ बनाता है।
इस प्रक्रिया के दौरान,कोलाइडल कण विलयन से $Fe^{3+}$ आयनों का अधिशोषण (adsorption) करते हैं,जिससे एक धनात्मक आवेशित सोल बनता है।
इसका निरूपण $Fe_2O_3 \cdot xH_2O / Fe^{3+}$ है।
अतः,आवेश की प्रकृति धनात्मक होती है।
249
ChemistryEasyMCQJEE Main · 2021
List-$I$ को List-$II$ के साथ सुमेलित कीजिए:
List-$I$ List-$II$
$(a)$ सोडियम कार्बोनेट $(i)$ डीकन
$(b)$ टाइटेनियम $(ii)$ कास्टनर-केलनर
$(c)$ क्लोरीन $(iii)$ वैन-आर्केल
$(d)$ सोडियम हाइड्रॉक्साइड $(iv)$ सॉल्वे

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए:
A
$(a)$ $\rightarrow (iv), (b)$ $\rightarrow (iii), (c)$ $\rightarrow (i), (d)$ $\rightarrow (ii)$
B
$(a)$ $\rightarrow (i), (b)$ $\rightarrow (iii), (c)$ $\rightarrow (iv), (d)$ $\rightarrow (ii)$
C
$(a)$ $\rightarrow (iv), (b)$ $\rightarrow (i), (c)$ $\rightarrow (ii), (d)$ $\rightarrow (iii)$
D
$(a)$ $\rightarrow (iii), (b)$ $\rightarrow (ii), (c)$ $\rightarrow (i), (d)$ $\rightarrow (iv)$

Solution

(A) सोडियम कार्बोनेट $(Na_2CO_3)$ सॉल्वे प्रक्रम द्वारा तैयार किया जाता है।
$(b)$ टाइटेनियम $(Ti)$ वैन-आर्केल प्रक्रम द्वारा परिष्कृत किया जाता है।
$(c)$ क्लोरीन $(Cl_2)$ डीकन प्रक्रम द्वारा तैयार किया जाता है।
$(d)$ सोडियम हाइड्रॉक्साइड $(NaOH)$ कास्टनर-केलनर प्रक्रम द्वारा तैयार किया जाता है।
अतः,सही मिलान $(a)$ $\rightarrow (iv), (b)$ $\rightarrow (iii), (c)$ $\rightarrow (i), (d)$ $\rightarrow (ii)$ है।
250
ChemistryMediumMCQJEE Main · 2021
$298 \,K$ पर निम्नलिखित सेल का $Emf$ $V$ में $x \times 10^{-2}$ है। $Zn | Zn^{2+}(0.1 \,M) || Ag^{+}(0.01 \,M) | Ag$. $x$ का मान .... है। (निकटतम पूर्णांक में पूर्णांकित) [दिया गया है: $E^{0}_{Zn^{2+}/Zn} = -0.76 \,V$; $E^{0}_{Ag^{+}/Ag} = +0.80 \,V$; $\frac{2.303 RT}{F} = 0.059$]
A
$147$
B
$157$
C
$188$
D
$288$

Solution

(A) सेल अभिक्रिया है: $Zn_{(s)} + 2Ag^{+}_{(aq)} \rightarrow Zn^{2+}_{(aq)} + 2Ag_{(s)}$
$E^{0}_{cell} = E^{0}_{cathode} - E^{0}_{anode} = 0.80 - (-0.76) = 1.56 \,V$
नेर्न्स्ट समीकरण का उपयोग करते हुए: $E_{cell} = E^{0}_{cell} - \frac{0.059}{n} \log \frac{[Zn^{2+}]}{[Ag^{+}]^{2}}$
यहाँ,$n = 2$,$[Zn^{2+}] = 0.1$,और $[Ag^{+}] = 0.01$
$E_{cell} = 1.56 - \frac{0.059}{2} \log \frac{0.1}{(0.01)^{2}}$
$E_{cell} = 1.56 - 0.0295 \times \log(1000)$
$E_{cell} = 1.56 - 0.0295 \times 3 = 1.56 - 0.0885 = 1.4715 \,V$
$E_{cell} = 147.15 \times 10^{-2} \,V$
निकटतम पूर्णांक में पूर्णांकित करने पर,$x = 147$.

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