JEE Main 2020 Chemistry Question Paper with Answer and Solution in Hindi

422 QuestionsHindiWith Solutions

ChemistryQ201222 of 422 questions

Page 5 of 5 · Hindi

201
ChemistryMediumMCQJEE Main · 2020
एक क्रिस्टल धातु आयनों $M_1$ और $M_2$ तथा ऑक्साइड आयनों से बना है। ऑक्साइड आयन $ccp$ जालक संरचना बनाते हैं। धनायन $M_1$ अष्टफलकीय रिक्तियों का $50 \%$ घेरता है और धनायन $M_2$ ऑक्साइड जालक की चतुष्फलकीय रिक्तियों का $12.5 \%$ घेरता है। $M_1$ और $M_2$ की ऑक्सीकरण संख्याएँ क्रमशः क्या हैं?
A
$+2, +4$
B
$+3, +1$
C
$+1, +3$
D
$+4, +2$

Solution

(A) माना कि $ccp$ जालक में ऑक्साइड आयनों $(O^{2-})$ की संख्या $4$ है।
अष्टफलकीय रिक्तियों $(O.V.)$ की संख्या = $4$.
चतुष्फलकीय रिक्तियों $(T.V.)$ की संख्या = $2 \times 4 = 8$.
$M_1$,$O.V.$ का $50 \%$ घेरता है = $0.50 \times 4 = 2$.
$M_2$,$T.V.$ का $12.5 \%$ घेरता है = $0.125 \times 8 = 1$.
क्रिस्टल का सूत्र $(M_1)_2(M_2)_1O_4$ है।
क्रिस्टल को विद्युत रूप से उदासीन होने के लिए,ऑक्सीकरण अवस्थाओं का योग शून्य होना चाहिए:
$2 \times (\text{O.N. of } M_1) + 1 \times (\text{O.N. of } M_2) + 4 \times (-2) = 0$
$2 \times (\text{O.N. of } M_1) + (\text{O.N. of } M_2) = 8$.
विकल्प $A$ की जाँच करने पर: $2(+2) + (+4) = 4 + 4 = 8$. यह शर्त को पूरा करता है।
202
ChemistryMediumMCQJEE Main · 2020
अष्टफलकीय क्षेत्र में $d^{4}$ धातु आयन के लिए,सही इलेक्ट्रॉनिक विन्यास क्या है?
A
$t_{2g}^{4} e_{g}^{0}$ जब $\Delta_{o} < P$
B
$e_{g}^{2} t_{2g}^{2}$ जब $\Delta_{o} < P$
C
$t_{2g}^{3} e_{g}^{1}$ जब $\Delta_{o} < P$
D
$t_{2g}^{3} e_{g}^{1}$ जब $\Delta_{o} > P$

Solution

(C) अष्टफलकीय क्षेत्र में,$d$-कक्षक $t_{2g}$ और $e_{g}$ सेट में विभाजित हो जाते हैं।
$d^{4}$ आयन के लिए,यदि क्रिस्टल क्षेत्र विपाटन ऊर्जा $\Delta_{o}$,युग्मन ऊर्जा $P$ से कम है (दुर्बल क्षेत्र लिगैंड),तो इलेक्ट्रॉन युग्मित होने से पहले एकल भरे जाएंगे।
अतः,विन्यास $t_{2g}^{3} e_{g}^{1}$ है।
यदि $\Delta_{o} > P$ है (प्रबल क्षेत्र लिगैंड),तो चौथा इलेक्ट्रॉन $t_{2g}$ कक्षक में युग्मित होगा,जिसके परिणामस्वरूप $t_{2g}^{4} e_{g}^{0}$ प्राप्त होता है।
203
ChemistryDifficultMCQJEE Main · 2020
निम्नलिखित में से कौन सा यौगिक गेब्रियल थैलिमाइड संश्लेषण द्वारा अच्छी उपज में तैयार किया जा सकता है?
A
बेंज़िलएमीन
B
एनिलीन
C
$2-$फेनिलएथेनामाइड
D
$N$-मिथाइल-एथेनामाइन

Solution

(A) गेब्रियल थैलिमाइड संश्लेषण का उपयोग प्राथमिक $(1^{\circ})$ एलिफैटिक एमीन तैयार करने के लिए किया जाता है।
इस अभिक्रिया में,पोटेशियम थैलिमाइड एक अल्काइल हैलाइड के साथ अभिक्रिया करके $N$-अल्काइलथैलिमाइड बनाता है,जिसका जल-अपघटन करने पर प्राथमिक एलिफैटिक एमीन प्राप्त होता है।
एरोमैटिक एमीन (जैसे एनिलीन) को इस विधि द्वारा तैयार नहीं किया जा सकता है क्योंकि एराइल हैलाइड इन परिस्थितियों में थैलिमाइड आयन के साथ न्यूक्लियोफिलिक प्रतिस्थापन अभिक्रिया नहीं देते हैं।
दिए गए विकल्पों में से,बेंज़िलएमीन $(C_6H_5CH_2NH_2)$ एक प्राथमिक एलिफैटिक एमीन है और इसे बेंज़िल क्लोराइड का उपयोग करके इस विधि द्वारा तैयार किया जा सकता है।
204
ChemistryDifficultMCQJEE Main · 2020
बेंजाल्डिहाइड के निर्माण के लिए आइटम-$I$ (प्रारंभिक पदार्थ) और आइटम-$II$ (अभिकर्मक) के बीच सही मिलान है :
आइटम-$I$आइटम-$II$
$I$. बेंजीन$P$. $HCl$ और $SnCl_2, H_3O^{+}$
$II$. बेंजोनाइट्राइल$Q$. $H_2, Pd-BaSO_4, S$ और क्विनोलिन
$III$. बेंज़ोयल क्लोराइड$R$. $CO, HCl$ और $AlCl_3$
A
$I-Q, II-R$ और $III-P$
B
$I-R, II-Q$ और $III-P$
C
$I-R, II-P$ और $III-Q$
D
$I-P, II-Q$ और $III-R$

Solution

(C) सही मिलान इस प्रकार हैं:
$1$. बेंजीन $(I)$,$CO, HCl$ और $AlCl_3$ (गाटरमैन-कोच अभिक्रिया) के साथ अभिक्रिया करके बेंजाल्डिहाइड बनाता है। अतः,$I-R$ है।
$2$. बेंजोनाइट्राइल $(II)$,$SnCl_2, HCl$ और उसके बाद $H_3O^{+}$ (स्टीफन अपचयन) के साथ अभिक्रिया करके बेंजाल्डिहाइड बनाता है। अतः,$II-P$ है।
$3$. बेंज़ोयल क्लोराइड $(III)$,$H_2, Pd-BaSO_4, S$ और क्विनोलिन (रोज़नमुंड अपचयन) के साथ अभिक्रिया करके बेंजाल्डिहाइड बनाता है। अतः,$III-Q$ है।
अतः,सही मिलान $I-R, II-P$ और $III-Q$ है।
205
ChemistryDifficultMCQJEE Main · 2020
निम्नलिखित में से कौन सा कथन सत्य नहीं है?
A
लैक्टोज में गैलेक्टोज के $C_{1}$ और ग्लूकोज के $C_{4}$ के बीच $\beta-$ग्लाइकोसिडिक लिंकेज होता है।
B
लैक्टोज $(C_{12}H_{22}O_{11})$ एक डाइसैकेराइड है और इसमें $8$ हाइड्रॉक्सिल समूह होते हैं।
C
अम्ल जलअपघटन पर,लैक्टोज $D(+)-$ग्लूकोज का एक अणु और $D(+)-$गैलेक्टोज का एक अणु देता है।
D
लैक्टोज एक अपचायक शर्करा (reducing sugar) है और यह फेहलिंग परीक्षण देता है।

Solution

(B) लैक्टोज $D(+)-$गैलेक्टोज और $D(+)-$ग्लूकोज इकाइयों से बना एक डाइसैकेराइड है जो $\beta-1,4-$ग्लाइकोसिडिक बंध द्वारा जुड़े होते हैं।
यह एक अपचायक शर्करा है क्योंकि इसमें ग्लूकोज इकाई के $C_{1}$ स्थान पर एक मुक्त हेमीऐसिटल समूह होता है,जो इसे म्यूटारोटेशन करने और फेहलिंग परीक्षण देने में सक्षम बनाता है।
हाइड्रॉक्सिल समूहों की संख्या के संदर्भ में: लैक्टोज की संरचना में $8$ हाइड्रॉक्सिल समूह होते हैं।
206
ChemistryMediumMCQJEE Main · 2020
विलायक के रूप में $180 \ g$ पानी और $10 \ g$ अलग-अलग अवाष्पशील विलेय $A, B$ और $C$ का उपयोग करके विलयनों का एक सेट तैयार किया जाता है। इन विलेयों की उपस्थिति में वाष्प दाब में सापेक्ष अवनमन किस क्रम में है?
[दिया गया है,$A$ का मोलर द्रव्यमान = $100 \ g \ mol^{-1}; B = 200 \ g \ mol^{-1}; C = 10,000 \ g \ mol^{-1}]$
A
$A > B > C$
B
$A > C > B$
C
$C > B > A$
D
$B > C > A$

Solution

(A) राउल्ट के नियम के अनुसार,वाष्प दाब में सापेक्ष अवनमन विलेय के मोल अंश के बराबर होता है: $\frac{\Delta P}{P^0} = x_{\text{solute}} = \frac{n_{\text{solute}}}{n_{\text{solute}} + n_{\text{solvent}}}$.
चूंकि विलायक का द्रव्यमान ($180 \ g$ पानी) और विलेय का द्रव्यमान $(10 \ g)$ स्थिर है,विलेय का मोल अंश विलेय के मोलों की संख्या पर निर्भर करता है $(n = \frac{\text{द्रव्यमान}}{\text{मोलर द्रव्यमान}})$।
जैसे-जैसे विलेय का मोलर द्रव्यमान बढ़ता है,विलेय के मोलों की संख्या कम हो जाती है,जिससे विलेय का मोल अंश कम हो जाता है।
दिए गए मोलर द्रव्यमान: $M_A = 100 \ g \ mol^{-1}$,$M_B = 200 \ g \ mol^{-1}$,$M_C = 10,000 \ g \ mol^{-1}$।
चूंकि $M_A < M_B < M_C$,मोलों की संख्या का क्रम $n_A > n_B > n_C$ होगा।
इसलिए,वाष्प दाब में सापेक्ष अवनमन का क्रम $A > B > C$ होगा।
207
ChemistryMediumMCQJEE Main · 2020
निम्नलिखित अभिक्रियाओं के मुख्य उत्पादों $A$,$B$ और $C$ के क्वथनांकों का बढ़ता क्रम क्या होगा?
Question diagram
A
$C < A < B$
B
$B < C < A$
C
$A < B < C$
D
$A < C < B$

Solution

(B) अभिक्रियाएं इस प्रकार हैं:
$(a)$ $CH_2=CH-CH_2-CH_3 + HBr \xrightarrow{Peroxide} CH_2Br-CH_2-CH_2-CH_3$ (उत्पाद $A$,$1$-ब्रोमोब्यूटेन,क्वथनांक $\approx 102 \ ^\circ C$)
$(b)$ $CH_2=C(CH_3)_2 + HBr \rightarrow CH_3-C(Br)(CH_3)_2$ (उत्पाद $B$,$2$-ब्रोमो-$2$-मिथाइलप्रोपेन,क्वथनांक $\approx 73.3 \ ^\circ C$)
$(c)$ $CH_2=CH-CH_2-CH_3 + HBr \rightarrow CH_3-CH(Br)-CH_2-CH_3$ (उत्पाद $C$,$2$-ब्रोमोब्यूटेन,क्वथनांक $\approx 91 \ ^\circ C$)
क्वथनांक कार्बन श्रृंखला में शाखाओं (branching) के व्युत्क्रमानुपाती होता है।
संरचनाओं की तुलना करने पर: $A$ एक सीधी श्रृंखला वाला प्राथमिक एल्काइल हैलाइड है,$C$ एक द्वितीयक एल्काइल हैलाइड है जिसमें $B$ की तुलना में कम शाखाएं हैं,और $B$ एक तृतीयक एल्काइल हैलाइड है जिसमें सबसे अधिक शाखाएं हैं।
अतः,क्वथनांकों का क्रम $B < C < A$ है।
208
ChemistryMediumMCQJEE Main · 2020
फ्रुंडलिच अधिशोषण समताप (Freundlich adsorption isotherm) के लिए,$\log (x / m)$ ($y$-अक्ष) और $\log p$ ($x$-अक्ष) का आलेख एक सीधी रेखा देता है। रेखा के लिए अंतःखंड (intercept) और ढाल (slope) क्रमशः $0.4771$ और $2$ हैं। यदि प्रारंभिक दाब $0.04 \ atm$ है,तो प्रति ग्राम अधिशोषक (adsorbent) पर अधिशोषित गैस का द्रव्यमान $........\times 10^{-4} \ g$ है।
$(\log 3 = 0.4771)$
A
$48$
B
$52$
C
$40$
D
$58$

Solution

(A) फ्रुंडलिच अधिशोषण समताप का समीकरण $\frac{x}{m} = K P^{1/n}$ है।
दोनों तरफ लॉग लेने पर,$\log \left( \frac{x}{m} \right) = \frac{1}{n} \log P + \log K$ प्राप्त होता है।
इसे सीधी रेखा के समीकरण $y = mx + c$ से तुलना करने पर,ढाल $\frac{1}{n} = 2$ और अंतःखंड $\log K = 0.4771$ है।
चूंकि $\log 3 = 0.4771$,इसलिए $K = 3$ है।
अब,$K = 3$,$P = 0.04 \ atm$,और $n = 0.5$ (क्योंकि $\frac{1}{n} = 2$) के मानों को समीकरण $\frac{x}{m} = K P^{1/n}$ में रखने पर:
$\frac{x}{m} = 3 \times (0.04)^{2} = 3 \times 0.0016 = 0.0048 \ g$.
इसे आवश्यक प्रारूप में बदलने पर: $0.0048 \ g = 48 \times 10^{-4} \ g$।
209
ChemistryMediumMCQJEE Main · 2020
जब क्लोरोफॉर्म में फिनोल के घोल को जलीय $NaOH$ के साथ उपचारित किया जाता है,तो मुख्य उत्पाद के रूप में यौगिक $P$ प्राप्त होता है। $P$ में कार्बन का द्रव्यमान प्रतिशत $..............$ है (निकटतम पूर्णांक तक)
(परमाणु द्रव्यमान : $C = 12$; $H = 1$; $O = 16$)
A
$70.56$
B
$68.85$
C
$65.52$
D
$60.75$

Solution

(B) जलीय $NaOH$ की उपस्थिति में क्लोरोफॉर्म $(CHCl_3)$ के साथ फिनोल की अभिक्रिया राइमर-टीमैन अभिक्रिया है,जो मुख्य उत्पाद $P$ के रूप में सैलिसिलैल्डिहाइड ($o$-हाइड्रॉक्सीबेंजाल्डिहाइड) देती है।
सैलिसिलैल्डिहाइड $(P)$ का आणविक सूत्र $C_7H_6O_2$ है।
$C_7H_6O_2$ का आणविक द्रव्यमान = $(7 \times 12) + (6 \times 1) + (2 \times 16) = 84 + 6 + 32 = 122 \ g/mol$.
$P$ में कार्बन का द्रव्यमान प्रतिशत इस प्रकार है:
$\text{द्रव्यमान } \% C = \frac{\text{कार्बन का कुल द्रव्यमान}}{\text{P का आणविक द्रव्यमान}} \times 100$
$\text{द्रव्यमान } \% C = \frac{7 \times 12}{122} \times 100 = \frac{84}{122} \times 100 \approx 68.85\%$.
निकटतम पूर्णांक में,हमें $69\%$ प्राप्त होता है।
210
ChemistryMediumMCQJEE Main · 2020
जब तापमान $40^{\circ} C$ से बदलकर $30^{\circ} C$ किया गया,तो अभिक्रिया की दर $3.555$ गुना कम हो गई। अभिक्रिया की सक्रियण ऊर्जा (activation energy) ......... $kJ \, mol^{-1}$ है।
[लीजिए; $R = 8.314 \, J \, mol^{-1} \, K^{-1}$,$\ln(3.555) = 1.268$]
A
$85$
B
$94$
C
$110$
D
$100$

Solution

(D) आरेनियस समीकरण का उपयोग करते हुए: $\ln \left(\frac{k_2}{k_1}\right) = \frac{E_a}{R} \left[\frac{1}{T_1} - \frac{1}{T_2}\right]$
दिया गया है: $T_1 = 313 \, K$ $(40^{\circ} C)$,$T_2 = 303 \, K$ $(30^{\circ} C)$.
अभिक्रिया की दर $3.555$ गुना कम हो जाती है,इसलिए $\frac{k_1}{k_2} = 3.555$,जिसका अर्थ है $\frac{k_2}{k_1} = \frac{1}{3.555}$.
$\ln \left(\frac{1}{3.555}\right) = \frac{E_a}{8.314} \left[\frac{1}{313} - \frac{1}{303}\right]$
$-1.268 = \frac{E_a}{8.314} \left[\frac{303 - 313}{313 \times 303}\right]$
$-1.268 = \frac{E_a}{8.314} \left[\frac{-10}{94839}\right]$
$E_a = \frac{1.268 \times 8.314 \times 94839}{10} \approx 99980 \, J \, mol^{-1} = 99.98 \, kJ \, mol^{-1} \approx 100 \, kJ \, mol^{-1}$.
211
ChemistryMediumMCQJEE Main · 2020
वह समूह जिसमें केवल संक्रमण तत्वों के परमाणु क्रमांक हैं -
A
$21, 32, 53, 64$
B
$21, 25, 42, 72$
C
$9, 17, 34, 38$
D
$37, 42, 50, 64$

Solution

(B) संक्रमण तत्व वे तत्व हैं जिनमें उनकी मूल अवस्था या उनकी किसी भी ऑक्सीकरण अवस्था में $d$-कक्षक अपूर्ण रूप से भरे होते हैं।
इनमें निम्नलिखित परमाणु क्रमांक वाले तत्व शामिल हैं:
$21-30$ (प्रथम संक्रमण श्रेणी),
$39-48$ (द्वितीय संक्रमण श्रेणी),
$57$ और $72-80$ (तृतीय संक्रमण श्रेणी),
$89$ और $104-112$ (चतुर्थ संक्रमण श्रेणी)।
दिए गए समूह $21, 25, 42, 72$ में:
$21$ $(Sc)$,$25$ $(Mn)$,$42$ $(Mo)$,और $72$ $(Hf)$ सभी संक्रमण तत्व हैं।
अतः,सही समूह $21, 25, 42, 72$ है।
212
ChemistryMediumMCQJEE Main · 2020
वह लैंथेनॉइड जो $+4$ ऑक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित नहीं करता है,वह है
A
$Dy$
B
$Eu$
C
$Ce$
D
$Tb$

Solution

(B) लैंथेनॉइड सामान्यतः $+3$ ऑक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित करते हैं। हालाँकि,स्थिर इलेक्ट्रॉनिक विन्यास ($f^0$,$f^7$,या $f^{14}$) के कारण कुछ तत्व $+2$ या $+4$ ऑक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित करते हैं।
$Ce$ $(Z=58)$ स्थिर $f^0$ विन्यास प्राप्त करने के लिए $+4$ प्रदर्शित करता है।
$Tb$ $(Z=65)$ स्थिर $f^7$ विन्यास प्राप्त करने के लिए $+4$ प्रदर्शित करता है।
$Dy$ $(Z=66)$ कुछ यौगिकों में $+4$ प्रदर्शित कर सकता है।
$Eu$ $(Z=63)$ स्थिर $f^7$ विन्यास प्राप्त करने के लिए $+2$ ऑक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित करता है,लेकिन यह $+4$ ऑक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित नहीं करता है।
213
ChemistryMediumMCQJEE Main · 2020
गलत कथन है:
A
कांसा (Bronze) तांबे और टिन की मिश्र धातु है।
B
पीतल (Brass) तांबे और निकल की मिश्र धातु है।
C
ढलवां लोहा (Cast iron) का उपयोग पिटवां लोहा (Wrought iron) बनाने के लिए किया जाता है।
D
जर्मन सिल्वर जस्ता,तांबा और निकल की मिश्र धातु है।

Solution

(B) मिश्र धातुओं का संगठन इस प्रकार है:
$1$. पीतल तांबे और जस्ते की मिश्र धातु है।
$2$. कांसा तांबे और टिन की मिश्र धातु है।
$3$. जर्मन सिल्वर तांबे,जस्ते और निकल की मिश्र धातु है।
$4$. ढलवां लोहे का उपयोग पिटवां लोहा बनाने के लिए कच्चे माल के रूप में किया जाता है।
अतः,यह कथन कि पीतल तांबे और निकल की मिश्र धातु है,गलत है,क्योंकि पीतल में तांबा और जस्ता होता है।
214
ChemistryMediumMCQJEE Main · 2020
डाइनाइट्रोजन $(N_2)$ के संबंध में सही कथन है:
A
द्रव डाइनाइट्रोजन का उपयोग क्रायोसर्जरी में नहीं किया जाता है।
B
इसका उपयोग अभिक्रियाशील रसायनों के लिए एक अक्रिय मंदक (inert diluent) के रूप में किया जा सकता है।
C
यह $25^{\circ} C$ पर डाइऑक्सीजन के साथ संयोग कर सकता है।
D
$N_2$ प्रकृति में अनुचुंबकीय (paramagnetic) है।

Solution

(B) $1$. द्रव नाइट्रोजन का उपयोग जैविक सामग्री,खाद्य पदार्थों को संरक्षित करने और क्रायोसर्जरी में रेफ्रिजरेंट के रूप में किया जाता है।
$2$. लोहा और रासायनिक उद्योग में,इसका उपयोग अभिक्रियाशील रसायनों के लिए एक अक्रिय मंदक के रूप में किया जाता है।
$3$. $N_2$ कमरे के तापमान $(25^{\circ} C)$ पर डाइऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया नहीं करता है; नाइट्रिक ऑक्साइड $(NO)$ बनाने के लिए बहुत उच्च तापमान $(\,2000 \ K)$ की आवश्यकता होती है।
$4$. $N_2$ प्रकृति में प्रतिचुंबकीय (diamagnetic) है क्योंकि सभी इलेक्ट्रॉन युग्मित होते हैं।
215
ChemistryMediumMCQJEE Main · 2020
$n_{1}$ मोल $1^{st}$ घटक और $n_{2}$ मोल $2^{nd}$ घटक युक्त दो घटकों का एक विलयन तैयार किया जाता है। $M_{1}$ और $M_{2}$ क्रमशः घटक $1$ और $2$ के आणविक भार हैं। यदि $d$ विलयन का घनत्व $g \ mL^{-1}$ में है, $C_{2}$ मोलरता है और $x_{2}$ $2^{nd}$ घटक का मोल अंश है, तो $C_{2}$ को कैसे व्यक्त किया जा सकता है?
A
$C_{2} = \frac{1000 x_{2}}{M_{1} + x_{2}(M_{2} - M_{1})}$
B
$C_{2} = \frac{d x_{2}}{M_{2} + x_{2}(M_{2} - M_{1})}$
C
$C_{2} = \frac{d x_{1}}{M_{2} + x_{2}(M_{2} - M_{1})}$
D
$C_{2} = \frac{1000 d x_{2}}{M_{1} + x_{2}(M_{2} - M_{1})}$

Solution

(D) मोलरता $(C_{2})$ को विलयन के प्रति लीटर में विलेय के मोलों की संख्या के रूप में परिभाषित किया जाता है।
$C_{2} = \frac{n_{2}}{V_{sol} (L \text{ में})} = \frac{n_{2} \times 1000}{V_{sol} (mL \text{ में})}$
चूँकि $V_{sol} = \frac{\text{कुल द्रव्यमान}}{d} = \frac{n_{1}M_{1} + n_{2}M_{2}}{d}$, हमारे पास है:
$C_{2} = \frac{n_{2} \times 1000 \times d}{n_{1}M_{1} + n_{2}M_{2}}$
अंश और हर को $(n_{1} + n_{2})$ से विभाजित करने पर:
$C_{2} = \frac{1000 d (n_{2} / (n_{1} + n_{2}))}{(n_{1}M_{1} + n_{2}M_{2}) / (n_{1} + n_{2})}$
मोल अंश $x_{2} = \frac{n_{2}}{n_{1} + n_{2}}$ और $x_{1} = \frac{n_{1}}{n_{1} + n_{2}} = 1 - x_{2}$ का उपयोग करने पर:
$C_{2} = \frac{1000 d x_{2}}{x_{1}M_{1} + x_{2}M_{2}} = \frac{1000 d x_{2}}{(1 - x_{2})M_{1} + x_{2}M_{2}}$
$C_{2} = \frac{1000 d x_{2}}{M_{1} - x_{2}M_{1} + x_{2}M_{2}} = \frac{1000 d x_{2}}{M_{1} + x_{2}(M_{2} - M_{1})}$
216
ChemistryMediumMCQJEE Main · 2020
क्राफ्ट तापमान वह तापमान है
A
जिसके नीचे मिसेल्स का निर्माण होता है।
B
जिसके नीचे डिटर्जेंट का जलीय घोल जमना शुरू हो जाता है।
C
जिसके ऊपर मिसेल्स का निर्माण होता है।
D
जिसके ऊपर डिटर्जेंट का जलीय घोल उबलना शुरू हो जाता है।

Solution

(C) क्राफ्ट तापमान $(T_{k})$ वह न्यूनतम तापमान है जिसके ऊपर डिटर्जेंट के जलीय घोल में मिसेल्स का निर्माण होता है।
217
ChemistryMediumMCQJEE Main · 2020
नीचे दिए गए अभिकथन $(A)$ और कारण $(R)$ पर विचार करें।
अभिकथन $(A):$ जिगलर-नाटा उत्प्रेरक की उपस्थिति में उच्च तापमान और दबाव पर बहुलकीकृत एथीन का उपयोग बाल्टी और डस्टबिन बनाने के लिए किया जाता है।
कारण $(R):$ उच्च घनत्व वाले बहुलक निकटता से संकुलित (closely packed) होते हैं और रासायनिक रूप से निष्क्रिय होते हैं।
निम्नलिखित में से सही उत्तर चुनें:
A
$(A)$ सही है लेकिन $(R)$ गलत है।
B
$(A)$ और $(R)$ दोनों गलत हैं।
C
$(A)$ और $(R)$ दोनों सही हैं और $(R)$,$(A)$ की सही व्याख्या है।
D
$(A)$ और $(R)$ दोनों सही हैं लेकिन $(R)$,$(A)$ की सही व्याख्या नहीं है।

Solution

(C) जिगलर-नाटा उत्प्रेरक (ट्राइएथिलएल्युमिनियम और टाइटेनियम टेट्राक्लोराइड) की उपस्थिति में कम दबाव और तापमान पर एथीन का बहुलकीकरण करने से उच्च घनत्व पॉलीथीन $(HDPE)$ प्राप्त होता है।
$HDPE$ में रैखिक श्रृंखलाएं होती हैं जो निकटता से संकुलित होती हैं,जिसके परिणामस्वरूप उच्च घनत्व और रासायनिक निष्क्रियता होती है।
इन गुणों के कारण,$HDPE$ का उपयोग बाल्टी,डस्टबिन,बोतल और पाइप बनाने में किया जाता है।
अतः,अभिकथन $(A)$ और कारण $(R)$ दोनों सही हैं,और $(R)$,$(A)$ की सही व्याख्या है।
218
ChemistryDifficultMCQJEE Main · 2020
वह स्पीशीज जिसका (स्पिन ओनली) चुंबकीय आघूर्ण $5.9 \, BM$ है,वह है:
A
$Ni(CO)_4$ $(T_d)$
B
$[MnBr_4]^{2-}$ $(T_d)$
C
$[NiCl_4]^{2-}$ $(T_d)$
D
$[Ni(CN)_4]^{2-}$ (वर्ग समतलीय)

Solution

(B) स्पिन-ओनली चुंबकीय आघूर्ण $\mu$ को सूत्र $\mu = \sqrt{n(n+2)} \, BM$ द्वारा दिया जाता है,जहाँ $n$ अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की संख्या है।
$\mu = 5.9 \, BM$ के लिए,$\sqrt{n(n+2)} \approx 5.9$ है,जिसका अर्थ है $n = 5$।
$[MnBr_4]^{2-}$ में,$Mn$ की ऑक्सीकरण अवस्था $+2$ है। $Mn^{2+}$ का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास $[Ar] 3d^5$ है।
चूँकि $Br^-$ एक दुर्बल क्षेत्र लिगेंड है,यह $3d$ कक्षकों में इलेक्ट्रॉनों का युग्मन नहीं करता है।
अतः,$Mn^{2+}$ में $5$ अयुग्मित इलेक्ट्रॉन हैं $(n=5)$।
इसलिए,$\mu = \sqrt{5(5+2)} = \sqrt{35} \approx 5.9 \, BM$।
219
ChemistryMediumMCQJEE Main · 2020
निम्नलिखित यौगिकों के $pK_b$ मानों का बढ़ता क्रम है
Question diagram
A
$I < II < IV < III$
B
$II < IV < III < I$
C
$II < I < III < IV$
D
$I < II < III < IV$

Solution

(A) एमाइन की क्षारीयता उनके $pK_b$ मानों के व्युत्क्रमानुपाती होती है। प्रबल क्षार का $pK_b$ मान कम होता है।
$I$: $p$-मेथॉक्सी-$N,N$-डाइमिथाइलएनिलीन। $-OCH_3$ समूह इलेक्ट्रॉन-दाता ($+M$ प्रभाव) है,जो नाइट्रोजन परमाणु पर इलेक्ट्रॉन घनत्व को बढ़ाता है,जिससे यह सबसे प्रबल क्षार बन जाता है।
$II$: $N,N$-डाइमिथाइलएनिलीन। दो मिथाइल समूहों के $+I$ प्रभाव के कारण यह एनिलीन से अधिक क्षारीय है।
$IV$: $m$-हाइड्रॉक्सी-$N$-मिथाइलएनिलीन। $-OH$ समूह मेटा स्थिति पर $-I$ प्रभाव (इलेक्ट्रॉन-आकर्षक) डालता है,जो $II$ की तुलना में क्षारीयता को कम करता है।
$III$: $m$-साइनो-$N$-मिथाइलएनिलीन। $-CN$ समूह एक प्रबल इलेक्ट्रॉन-आकर्षक समूह ($-I$ और $-M$ प्रभाव) है,जो क्षारीयता को काफी कम कर देता है,जिससे यह सबसे दुर्बल क्षार बन जाता है।
अतः,क्षारीयता का क्रम $I > II > IV > III$ है।
चूंकि $pK_b$ क्षारीयता के व्युत्क्रमानुपाती होता है,इसलिए $pK_b$ मानों का बढ़ता क्रम $I < II < IV < III$ है।
220
ChemistryMediumMCQJEE Main · 2020
निम्नलिखित अभिक्रियाओं पर विचार करें:
$A$ $\rightarrow P_1; B$ $\rightarrow P_2; C$ $\rightarrow P_3; D$ $\rightarrow P_4$
उपरोक्त अभिक्रियाओं की कोटि क्रमशः $a, b, c,$ और $d$ है। जब $\log[\text{rate}]$ बनाम $\log[\text{conc.}]$ आलेखित किया जाता है,तो निम्नलिखित ग्राफ प्राप्त होता है:
निम्नलिखित में से,अभिक्रियाओं की कोटि के लिए सही क्रम क्या है?
Question diagram
A
$a > b > c > d$
B
$c > a > b > d$
C
$d > b > a > c$
D
$d > a > b > c$

Solution

(C) अभिक्रिया के लिए,वेग नियम इस प्रकार है: $\text{Rate} = k[\text{conc.}]^n$,जहाँ $n$ अभिक्रिया की कोटि है।
दोनों पक्षों का लघुगणक लेने पर:
$\log(\text{rate}) = \log(k) + n \log[\text{conc.}]$
यह समीकरण $y = mx + c$ के रूप में है,जहाँ ढाल $m$ अभिक्रिया की कोटि $n$ के बराबर है।
ग्राफ में रेखाओं की ढाल की तुलना करने पर:
रेखा $D$ की ढाल सबसे अधिक है,उसके बाद $B$,फिर $A$,और अंत में $C$ की ढाल सबसे कम है।
अतः,अभिक्रियाओं की कोटि का सही क्रम है: $d > b > a > c$.
221
ChemistryMediumMCQJEE Main · 2020
$0.10 \ m$ जलीय $CrCl_{3} \cdot xNH_{3}$ विलयन के क्वथनांक में उन्नयन,$0.05 \ m$ जलीय $CaCl_{2}$ विलयन के क्वथनांक में उन्नयन का दोगुना है। $x$ का मान क्या है?.........
[मान लीजिए कि संकुल और $CaCl_{2}$ का $100 \%$ आयनीकरण होता है,$Cr$ की समन्वय संख्या $6$ है,और सभी $NH_{3}$ अणु समन्वय क्षेत्र के भीतर मौजूद हैं $]$
A
$10$
B
$5$
C
$12$
D
$15$

Solution

(B) क्वथनांक में उन्नयन $\Delta T_{b} = i \times K_{b} \times m$ द्वारा दिया जाता है।
$0.05 \ m$ $CaCl_{2}$ विलयन के लिए,$i = 3$ (क्योंकि $CaCl_{2} \rightarrow Ca^{2+} + 2Cl^{-}$)। अतः,$\Delta T_{b(CaCl_{2})} = 3 \times 0.05 \times K_{b} = 0.15 \times K_{b}$।
$0.10 \ m$ $CrCl_{3} \cdot xNH_{3}$ विलयन के लिए,$\Delta T_{b(complex)} = i \times 0.10 \times K_{b}$।
दिया गया है कि $\Delta T_{b(complex)} = 2 \times \Delta T_{b(CaCl_{2})}$,इसलिए $i \times 0.10 \times K_{b} = 2 \times (0.15 \times K_{b}) = 0.30 \times K_{b}$।
अतः,$i = 3$।
चूंकि संकुल $[Cr(NH_{3})_{x}Cl_{3}]$ आयनित होकर $i = 3$ आयन देता है,यह $[Cr(NH_{3})_{x}Cl_{3-y}]^{y+} + yCl^{-}$ के रूप में वियोजित होगा,जहाँ $1 + y = 3$,यानी $y = 2$।
इसका अर्थ है कि संकुल $[Cr(NH_{3})_{x}Cl]Cl_{2}$ है।
$Cr$ की समन्वय संख्या $6$ है,इसलिए लिगेंड की संख्या $x + 1 = 6$ होगी,जिससे $x = 5$ प्राप्त होता है।
222
ChemistryMediumMCQJEE Main · 2020
पोटेशियम क्लोरेट को बेसिक घोल में $KCl$ के इलेक्ट्रोलिसिस द्वारा तैयार किया जाता है:
$6 OH^{-} + Cl^{-} \rightarrow ClO_{3}^{-} + 3 H_{2}O + 6 e^{-}$
यदि प्रतिक्रिया में केवल $60\%$ करंट का उपयोग किया जाता है,तो $2 \ A$ के करंट का उपयोग करके $10 \ g$ $KClO_{3}$ का उत्पादन करने के लिए आवश्यक समय (निकटतम घंटे में) क्या होगा?
(दिया गया है: $F = 96,500 \ C \ mol^{-1}$,$KClO_{3}$ का मोलर द्रव्यमान = $122 \ g \ mol^{-1}$)
A
$11$
B
$8$
C
$18$
D
$22$

Solution

(A) संतुलित अर्ध-प्रतिक्रिया: $6 OH^{-} + Cl^{-} \rightarrow ClO_{3}^{-} + 3 H_{2}O + 6 e^{-}$.
उत्पन्न $KClO_{3}$ के मोल = $\frac{10 \ g}{122 \ g \ mol^{-1}} = 0.08197 \ mol$.
प्रतिक्रिया के अनुसार,$1 \ mol$ $KClO_{3}$ के लिए $6 \ mol$ इलेक्ट्रॉनों की आवश्यकता होती है। इसलिए,आवश्यक कुल आवेश $Q = n \times z \times F = 0.08197 \times 6 \times 96500 \ C = 47462.3 \ C$.
यह दिया गया है कि केवल $60\%$ करंट का उपयोग किया जाता है,इसलिए प्रभावी करंट $I_{eff} = 2 \ A \times 0.60 = 1.2 \ A$.
सूत्र $Q = I_{eff} \times t$ का उपयोग करते हुए,$t = \frac{Q}{I_{eff}} = \frac{47462.3 \ C}{1.2 \ A} = 39551.9 \ s$.
घंटों में बदलने पर: $t = \frac{39551.9}{3600} \approx 10.98 \ hr$.
निकटतम घंटे में पूर्णांकित करने पर,हमें $11 \ hr$ प्राप्त होता है।

Vedclass Products

For Students

Vedclass Test Series

Mock tests in real JEE Main style covering Chemistry with performance analysis. 5-day free trial.

Start Free Trial
For Teachers

Exam Paper Generator

Generate Set A/B/C/D Chemistry papers from 7.5L+ questions in 2 minutes. 3 chapters free.

Try Free
For Institutes

Online Exam Module

Run live JEE Main mock exams with unlimited students, 360° analytics & white-label branding.

See Demo

Frequently Asked Questions

How many Chemistry questions are in JEE Main 2020?

There are 422 Chemistry questions from the JEE Main 2020 paper on Vedclass, each with a detailed step-by-step solution in Hindi.

Are JEE Main 2020 Chemistry solutions available in Hindi?

Yes. All solutions on this page are in Hindi. You can also switch to English or Hindi using the language buttons above the questions.

Can I practice JEE Main 2020 Chemistry as a timed test?

Yes. Use the Vedclass Test Series to attempt a full JEE Main mock test covering Chemistry with time limits and instant score analysis.

Can teachers create Chemistry papers from JEE Main previous year questions?

Yes. The Vedclass Exam Paper Generator lets teachers mix JEE Main Chemistry questions and generate Set A/B/C/D papers in minutes.

For Teachers & Institutes

Build a Custom Chemistry Paper

Pick JEE Main 2020 Chemistry questions, set difficulty, and generate Set A/B/C/D in 2 minutes.