GUJCET 2017 Physics Question Paper with Answer and Solution in Hindi

24 QuestionsHindiWith Solutions

PhysicsQ124 of 24 questions

Page 1 of 1 · Hindi

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धारिता का विमीय सूत्र . . . . . . है। $Q$ को आवेश का विमीय सूत्र मानिए।
A
$M^1 L^{-2} T^{-2} Q^{-2}$
B
$M^1 L^2 T^{-2} Q^{-2}$
C
$M^1 L^{-2} T^2 Q^2$
D
$M^{-1} L^{-2} T^2 Q^2$

Solution

(D) धारिता का सूत्र $C = \frac{Q}{V}$ है।
चूँकि विभव $V = \frac{W}{Q}$ होता है,जहाँ $W$ कार्य है और $Q$ आवेश है,हम इसे धारिता के सूत्र में प्रतिस्थापित करते हैं:
$C = \frac{Q^2}{W}$.
कार्य $W$ का विमीय सूत्र $[M^1 L^2 T^{-2}]$ है।
विमाओं को प्रतिस्थापित करने पर:
$C = \frac{Q^2}{[M^1 L^2 T^{-2}]}$.
$C = M^{-1} L^{-2} T^2 Q^2$.
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एक $AC$ वोल्टेज $V = 5 \cos(1000t) \text{ V}$ को $3 \text{ mH}$ प्रेरकत्व और $4 \text{ } \Omega$ प्रतिरोध वाले $L-R$ परिपथ में लगाया जाता है। परिपथ में अधिकतम धारा का मान . . . . . . $A$ है।
A
$0.8$
B
$1$
C
$\frac{5}{7}$
D
$\frac{5}{\sqrt{7}}$

Solution

(B) दिया गया $AC$ वोल्टेज $V = V_m \cos(\omega t)$ है, जहाँ $V_m = 5 \text{ V}$ और $\omega = 1000 \text{ rad/s}$ है。
$L-R$ परिपथ के लिए, प्रतिबाधा $Z = \sqrt{R^2 + X_L^2}$ द्वारा दी जाती है, जहाँ $X_L = \omega L$ है。
यहाँ $L = 3 \text{ mH} = 3 \times 10^{-3} \text{ H}$ और $R = 4 \text{ } \Omega$ दिया गया है。
प्रेरकीय प्रतिघात की गणना: $X_L = 1000 \times 3 \times 10^{-3} = 3 \text{ } \Omega$ है。
प्रतिबाधा की गणना: $Z = \sqrt{4^2 + 3^2} = \sqrt{16 + 9} = \sqrt{25} = 5 \text{ } \Omega$ है。
अधिकतम धारा $I_m = \frac{V_m}{Z}$ द्वारा दी जाती है。
मान रखने पर: $I_m = \frac{5}{5} = 1 \text{ A}$ प्राप्त होता है।
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$AC$ धारा $I = 50 \cos(100t + 45^{\circ}) \ A$ के लिए,$I_{rms}$ का मान . . . . . . $A$ है।
A
शून्य
B
$50 \sqrt{2}$
C
$25$
D
$25 \sqrt{2}$

Solution

(D) प्रत्यावर्ती धारा $(AC)$ का दिया गया समीकरण $I = I_m \cos(\omega t + \phi)$ है,जहाँ $I_m$ शिखर धारा (peak current) है।
दिए गए समीकरण $I = 50 \cos(100t + 45^{\circ}) \ A$ के साथ तुलना करने पर,हमें शिखर धारा $I_m = 50 \ A$ प्राप्त होती है।
रूट मीन स्क्वायर धारा $I_{rms}$ और शिखर धारा $I_m$ के बीच का संबंध $I_{rms} = \frac{I_m}{\sqrt{2}}$ है।
$I_m$ का मान रखने पर,$I_{rms} = \frac{50}{\sqrt{2}}$ प्राप्त होता है।
सरल बनाने के लिए,अंश और हर को $\sqrt{2}$ से गुणा करने पर: $I_{rms} = \frac{50 \sqrt{2}}{2} = 25 \sqrt{2} \ A$.
अतः,सही विकल्प $D$ है।
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एक $AC$ परिपथ में,धारा $3 \ A$ है,वोल्टेज $210 \ V$ है और शक्ति $63 \ W$ है। शक्ति गुणांक (power factor) . . . . . . है।
A
$0.11$
B
$0.09$
C
$0.08$
D
$0.1$

Solution

(D) $AC$ परिपथ में शक्ति का सूत्र इस प्रकार है: $P = VI \cos \phi$,जहाँ $\cos \phi$ शक्ति गुणांक है।
दी गई मान हैं: $P = 63 \ W$,$V = 210 \ V$,और $I = 3 \ A$.
शक्ति गुणांक ज्ञात करने के लिए सूत्र को व्यवस्थित करने पर: $\cos \phi = \frac{P}{VI}$.
मान रखने पर: $\cos \phi = \frac{63}{3 \times 210}$.
$\cos \phi = \frac{63}{630} = 0.1$.
अतः,शक्ति गुणांक $0.1$ है।
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हाइड्रोजन परमाणु की प्रथम उत्तेजित अवस्था में एक इलेक्ट्रॉन की कुल ऊर्जा $-3.4 \ eV$ है। इस अवस्था में इसकी स्थितिज ऊर्जा ज्ञात कीजिए।
A
-$6.8$
B
$3.4$
C
-$3.4$
D
$6.8$

Solution

(A) हाइड्रोजन परमाणु में एक इलेक्ट्रॉन के लिए,कुल ऊर्जा $(E)$,गतिज ऊर्जा $(K)$ और स्थितिज ऊर्जा $(U)$ के बीच संबंध इस प्रकार है:
$E = -K = \frac{U}{2}$
अतः,स्थितिज ऊर्जा $U = 2 \times E$ होती है।
दिया गया है कि कुल ऊर्जा $E = -3.4 \ eV$ है,इसलिए:
$U = 2 \times (-3.4 \ eV) = -6.8 \ eV$.
इस प्रकार,प्रथम उत्तेजित अवस्था में इलेक्ट्रॉन की स्थितिज ऊर्जा $-6.8 \ eV$ है।
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दिए गए परिपथ में,यदि $10 \Omega$ के प्रतिरोधक से प्रवाहित धारा $2.5 \text{ A}$ है,तो $R$ का मान . . . . . . है। ($Omega$ में)
Question diagram
A
$50$
B
$40$
C
$8$
D
$10$

Solution

(C) $10 \Omega$ और $40 \Omega$ के प्रतिरोधक समांतर क्रम में जुड़े हुए हैं। मान लीजिए $10 \Omega$ प्रतिरोधक से प्रवाहित धारा $i_1$ है और $40 \Omega$ प्रतिरोधक से प्रवाहित धारा $i_2$ है।
चूंकि वे समांतर क्रम में हैं,उनके सिरों पर विभवांतर समान होगा:
$i_1 \times 10 = i_2 \times 40$
दिया गया है $i_1 = 2.5 \text{ A}$,इसलिए:
$2.5 \times 10 = i_2 \times 40$
$i_2 = \frac{25}{40} = 0.625 \text{ A}$
जंक्शन बिंदु पर,परिपथ से प्रवाहित कुल धारा $i$ है:
$i = i_1 + i_2 = 2.5 + 0.625 = 3.125 \text{ A}$
$10 \Omega$ और $40 \Omega$ के समांतर संयोजन का तुल्य प्रतिरोध $R'$ है:
$R' = \frac{10 \times 40}{10 + 40} = \frac{400}{50} = 8 \Omega$
परिपथ का कुल प्रतिरोध $R'' = (R + 8) \Omega$ है।
ओम के नियम का उपयोग करते हुए,$V = i \times R''$:
$50 = 3.125 \times (R + 8)$
$R + 8 = \frac{50}{3.125} = 16$
$R = 16 - 8 = 8 \Omega$
अतः,$R$ का मान $8 \Omega$ है।
Solution diagram
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एक कार्बन प्रतिरोधक पर भूरे (Brown),लाल (Red) और नारंगी (Orange) रंग की पट्टियों के बाद एक चांदी (Silver) रंग की पट्टी है। प्रतिरोधक का मान . . . . . . है।
A
$320 \Omega \pm 5 \%$
B
$12 \ k\Omega \pm 5 \%$
C
$320 \Omega \pm 10 \%$
D
$12 \ k\Omega \pm 10 \%$

Solution

(D) कार्बन प्रतिरोधक कलर कोड के अनुसार:
$1$. पहली पट्टी भूरी (Brown) है,जो अंक $1$ को दर्शाती है।
$2$. दूसरी पट्टी लाल (Red) है,जो अंक $2$ को दर्शाती है।
$3$. तीसरी पट्टी नारंगी (Orange) है,जो गुणक $10^3$ को दर्शाती है।
$4$. चौथी पट्टी चांदी (Silver) की है,जो $\pm 10 \%$ की टॉलरेंस (सहनशीलता) को दर्शाती है।
अतः,प्रतिरोध $R$ का मान:
$R = (12 \times 10^3 \pm 10 \%) \ \Omega$
$R = (12 \ k\Omega \pm 10 \%)$
इसलिए,सही विकल्प $(D)$ है।
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आकृति में आवेशों की व्यवस्था दिखाई गई है। बंद सतह $P$ और $Q$ से जुड़े फ्लक्स क्रमशः . . . . . . और . . . . . . हैं।
Question diagram
A
शून्य,शून्य
B
$\frac{q}{\varepsilon_0}, \frac{-q}{\varepsilon_0}$
C
$\frac{-q}{\varepsilon_0}, \frac{q}{\varepsilon_0}$
D
$\frac{q}{\varepsilon_0}$,शून्य

Solution

(C) गॉस के नियम के अनुसार,एक बंद सतह से जुड़ा विद्युत फ्लक्स $\phi = \frac{q_{enclosed}}{\varepsilon_0}$ द्वारा दिया जाता है,जहाँ $q_{enclosed}$ सतह द्वारा घिरा हुआ कुल आवेश है।
सतह $P$ के लिए:
घिरे हुए आवेश $+q, -q, -q$ हैं।
कुल आवेश $q_{P} = (+q) + (-q) + (-q) = -q$ है।
इसलिए,फ्लक्स $\phi_{P} = \frac{-q}{\varepsilon_0}$ है।
सतह $Q$ के लिए:
घिरे हुए आवेश $+q, -q, +q$ हैं।
कुल आवेश $q_{Q} = (+q) + (-q) + (+q) = +q$ है।
इसलिए,फ्लक्स $\phi_{Q} = \frac{q}{\varepsilon_0}$ है।
अतः,$P$ और $Q$ से जुड़े फ्लक्स क्रमशः $\frac{-q}{\varepsilon_0}$ और $\frac{q}{\varepsilon_0}$ हैं।
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समान पृष्ठीय आवेश घनत्व $(\sigma)$ वाले अनंत आयाम की दो पतली समानांतर शीटों के बीच और बाहर के बिंदुओं पर विद्युत क्षेत्र की तीव्रता क्रमशः . . . . . . और . . . . . . है।
A
$\frac{\sigma}{\varepsilon_0}, \frac{\sigma}{\varepsilon_0}$
B
$0, \frac{\sigma}{\varepsilon_0}$
C
$0, 0$
D
$\frac{\sigma}{\varepsilon_0}, 0$

Solution

(B) पृष्ठीय आवेश घनत्व $\sigma$ वाली एक पतली अनंत शीट के कारण विद्युत क्षेत्र की तीव्रता $E = \frac{\sigma}{2\varepsilon_0}$ होती है।
समान पृष्ठीय आवेश घनत्व $\sigma$ वाली दो समानांतर शीटों के लिए:
$1$. शीटों के बीच: दोनों शीटों के कारण विद्युत क्षेत्र परिमाण में समान लेकिन दिशा में विपरीत होते हैं। अतः,कुल विद्युत क्षेत्र $E_{net} = E_1 - E_2 = \frac{\sigma}{2\varepsilon_0} - \frac{\sigma}{2\varepsilon_0} = 0$ होता है।
$2$. शीटों के बाहर: दोनों शीटों के कारण विद्युत क्षेत्र एक ही दिशा में होते हैं। अतः,कुल विद्युत क्षेत्र $E_{net} = E_1 + E_2 = \frac{\sigma}{2\varepsilon_0} + \frac{\sigma}{2\varepsilon_0} = \frac{\sigma}{\varepsilon_0}$ होता है।
अतः,शीटों के बीच विद्युत क्षेत्र की तीव्रता $0$ है और शीटों के बाहर $\frac{\sigma}{\varepsilon_0}$ है।
सही विकल्प $B$ है।
Solution diagram
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यदि $R$ और $L$ क्रमशः प्रतिरोध और प्रेरकत्व को दर्शाते हैं,तो निम्नलिखित में से किसका विमीय सूत्र समय के समान है?
A
$\sqrt{\frac{L}{R}}$
B
$\frac{L}{R}$
C
$\sqrt{\frac{R}{L}}$
D
$\frac{R}{L}$

Solution

(B) प्रेरकत्व $L$ की विमा $V = L \frac{di}{dt}$ द्वारा दी जाती है,इसलिए $[L] = [V][T][I]^{-1}$ है।
प्रतिरोध $R$ की विमा $V = IR$ द्वारा दी जाती है,इसलिए $[R] = [V][I]^{-1}$ है।
अतः,अनुपात $\frac{L}{R}$ की विमा होगी:
$\left[ \frac{L}{R} \right] = \frac{[V][T][I]^{-1}}{[V][I]^{-1}} = [T]$.
इस प्रकार,$\frac{L}{R}$ की विमा समय के समान है।
सही विकल्प $B$ है।
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एक $AC$ जनरेटर की कुंडली में फेरों की संख्या $100$ है और इसका अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल $2.5 \ m^2$ है। कुंडली $0.3 \ T$ की तीव्रता वाले एकसमान चुंबकीय क्षेत्र में $60 \ rad \ s^{-1}$ के एकसमान कोणीय वेग से घूम रही है। अधिकतम प्रेरित emf का मान . . . . . . $kV$ है।
A
$1.25$
B
$4.5$
C
$6.75$
D
$2.25$

Solution

(B) घूर्णन करती कुंडली में प्रेरित विद्युत वाहक बल $(\varepsilon)$ का सूत्र: $\varepsilon = N B A \omega \sin(\omega t)$ है।
अधिकतम प्रेरित emf $(\varepsilon_{\max})$ के लिए, हम $\sin(\omega t) = 1$ लेते हैं।
अतः, सूत्र इस प्रकार है: $\varepsilon_{\max} = N B A \omega$.
दिए गए मान:
फेरों की संख्या $(N)$ = $100$
चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता $(B)$ = $0.3 \ T$
क्षेत्रफल $(A)$ = $2.5 \ m^2$
कोणीय वेग $(\omega)$ = $60 \ rad \ s^{-1}$
इन मानों को सूत्र में रखने पर:
$\varepsilon_{\max} = 100 \times 0.3 \times 2.5 \times 60$
$\varepsilon_{\max} = 30 \times 2.5 \times 60$
$\varepsilon_{\max} = 75 \times 60 = 4500 \ V$.
$kV$ में परिवर्तित करने पर:
$\varepsilon_{\max} = 4.5 \ kV$.
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हवा से गुजरने वाले $9 \text{ GHz}$ के विकिरण के लिए,$1 \text{ m}$ लंबाई से गुजरने वाली तरंगों की संख्या . . . . . . है।
A
$30$
B
$5$
C
$20$
D
$3$

Solution

(A) दी गई लंबाई $L$ में तरंगों की संख्या ज्ञात करने का सूत्र है: $\text{तरंगों की संख्या} = \frac{L}{\lambda}$.
चूंकि विकिरण हवा से गुजर रहा है,इसका वेग $v$ प्रकाश की गति $c = 3 \times 10^8 \text{ m/s}$ के बराबर माना जाता है।
दी गई आवृत्ति $\nu = 9 \text{ GHz} = 9 \times 10^9 \text{ Hz}$ और लंबाई $L = 1 \text{ m}$ है।
संबंध $\lambda = \frac{c}{\nu}$ का उपयोग करते हुए,सूत्र इस प्रकार होगा:
$\text{तरंगों की संख्या} = \frac{L \times \nu}{c}$.
मान रखने पर:
$\text{तरंगों की संख्या} = \frac{1 \times 9 \times 10^9}{3 \times 10^8} = 3 \times 10^1 = 30$.
अतः,तरंगों की संख्या $30$ है।
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चिकित्सा में,कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने के लिए . . . . . . किरणों का उपयोग किया जाता है।
A
गामा
B
दृश्य
C
पराबैंगनी
D
अवरक्त

Solution

(A) सही उत्तर $A$ है। गामा किरणों में बहुत उच्च ऊर्जा और उच्च भेदन क्षमता होती है। इस गुण के कारण,इनका उपयोग चिकित्सा उपचारों में,विशेष रूप से रेडियोथेरेपी में,कैंसर कोशिकाओं के $DNA$ को नुकसान पहुँचाकर उन्हें मारने या नष्ट करने के लिए किया जाता है।
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$\vec{P}$ द्विध्रुव आघूर्ण वाला एक विद्युत द्विध्रुव,$\vec{E}$ तीव्रता वाले एकसमान विद्युत क्षेत्र के समानांतर रखा गया है। इसे $180^{\circ}$ घुमाने पर किया गया कार्य . . . . . . है।
A
$2 p E$
B
शून्य
C
$p E$
D
$-2 p E$

Solution

(A) एकसमान विद्युत क्षेत्र में एक विद्युत द्विध्रुव को प्रारंभिक कोण $\theta_1$ से अंतिम कोण $\theta_2$ तक घुमाने में किया गया कार्य $W$ निम्नलिखित सूत्र द्वारा दिया जाता है:
$W = p E (\cos \theta_1 - \cos \theta_2)$
यह दिया गया है कि द्विध्रुव शुरू में विद्युत क्षेत्र के समानांतर है,इसलिए प्रारंभिक कोण $\theta_1 = 0^{\circ}$ है।
द्विध्रुव को $180^{\circ}$ घुमाया जाता है,इसलिए अंतिम कोण $\theta_2 = 180^{\circ}$ है।
इन मानों को सूत्र में रखने पर:
$W = p E (\cos 0^{\circ} - \cos 180^{\circ})$
चूंकि $\cos 0^{\circ} = 1$ और $\cos 180^{\circ} = -1$ है:
$W = p E (1 - (-1))$
$W = p E (1 + 1)$
$W = 2 p E$
अतः,किया गया कार्य $2 p E$ है।
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एक निश्चित क्षेत्र में $X$-दिशा में एकसमान विद्युत क्षेत्र विद्यमान है। बिंदुओं $P$,$Q$ और $R$ के निर्देशांक क्रमशः $(0,0)$,$(2,0)$ और $(0,2)$ हैं। इन बिंदुओं पर विभव के लिए निम्नलिखित में से कौन सा विकल्प सही है?
Question diagram
A
$V_P = V_Q, V_Q > V_R$
B
$V_P = V_R, V_P > V_Q$
C
$V_P = V_R, V_Q > V_R$
D
$V_P = V_Q, V_P > V_R$

Solution

(B) विद्युत क्षेत्र $\vec{E}$ एकसमान है और $+X$-दिशा में है।
बिंदु $P(0,0)$ और $R(0,2)$ विद्युत क्षेत्र रेखाओं के लंबवत एक ही तल ($YZ$-तल) पर स्थित हैं। इसलिए,$P$ और $R$ एक ही समविभव पृष्ठ पर स्थित हैं,जिसका अर्थ है कि $V_P = V_R$ है।
विद्युत क्षेत्र की दिशा में विद्युत विभव घटता है। चूंकि बिंदु $Q(2,0)$,बिंदु $P(0,0)$ की तुलना में $+X$-दिशा में आगे है,इसलिए $P$ पर विभव $Q$ पर विभव से अधिक होना चाहिए,अर्थात $V_P > V_Q$ है।
अतः,$V_P = V_R$ और $V_P > V_Q$ सही है।
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यदि $\mu_0$ निर्वात की पारगम्यता (permeability) है और $\chi_m$ चुंबकीय प्रवृत्ति (magnetic susceptibility) है,तो पदार्थ की पारगम्यता $\mu$ . . . . . . है।
A
$\mu=\mu_0(1+\chi_m)$
B
$\mu=\mu_0(\chi_m-1)$
C
$\mu=\mu_0(1-\chi_m)$
D
$\mu=\mu_0(1+\chi_m)$

Solution

(D) किसी चुंबकीय पदार्थ की सापेक्ष पारगम्यता $\mu_r$ को पदार्थ की पारगम्यता $\mu$ और निर्वात की पारगम्यता $\mu_0$ के अनुपात के रूप में परिभाषित किया जाता है,जो $\mu_r = \frac{\mu}{\mu_0}$ है।
साथ ही,सापेक्ष पारगम्यता और चुंबकीय प्रवृत्ति $\chi_m$ के बीच का संबंध $\mu_r = 1 + \chi_m$ है।
इन दोनों समीकरणों की तुलना करने पर,हमें $\frac{\mu}{\mu_0} = 1 + \chi_m$ प्राप्त होता है।
अतः,पदार्थ की पारगम्यता $\mu = \mu_0(1 + \chi_m)$ होती है।
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$\frac{B^2}{2\mu_0}$ का विमीय सूत्र चुनिए।
A
$M^1 L^1 T^{-2}$
B
$M^{-1} L^1 T^2$
C
$M^{-1} L^{-1} T^{-2}$
D
$M^1 L^{-1} T^{-2}$

Solution

(D) व्यंजक $\frac{B^2}{2\mu_0}$ चुंबकीय क्षेत्र में संचित चुंबकीय ऊर्जा घनत्व $(u_B)$ को दर्शाता है।
ऊर्जा घनत्व को प्रति इकाई आयतन ऊर्जा के रूप में परिभाषित किया जाता है।
$u_B = \frac{B^2}{2\mu_0} = \frac{\text{ऊर्जा}}{\text{आयतन}}$
ऊर्जा का विमीय सूत्र $[M^1 L^2 T^{-2}]$ है और आयतन का विमीय सूत्र $[L^3]$ है।
अतः,चुंबकीय ऊर्जा घनत्व का विमीय सूत्र है:
$\frac{[M^1 L^2 T^{-2}]}{[L^3]} = [M^1 L^{-1} T^{-2}]$
इस प्रकार,सही विकल्प $D$ है।
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$m$ द्रव्यमान और $q$ आवेश वाला एक कण $XZ$ तल पर $v$ वेग के साथ आपतित होता है,जो $X$-अक्ष के अनुदिश लगाए गए एकसमान चुंबकीय क्षेत्र के साथ $\theta$ कोण बनाता है। कण द्वारा की जाने वाली गति की प्रकृति . . . . . . है।
A
वृत्ताकार
B
हेलिकल (कुंडलिनी)
C
परवलयाकार
D
सरल रेखा

Solution

(B) कण के वेग $v$ को दो घटकों में विभाजित किया जा सकता है: एक चुंबकीय क्षेत्र के समानांतर $(v_{\parallel} = v \cos \theta)$ और एक चुंबकीय क्षेत्र के लंबवत $(v_{\perp} = v \sin \theta)$।
समानांतर घटक $v_{\parallel}$ के कारण,कण चुंबकीय क्षेत्र की दिशा में रैखिक गति करता है।
लंबवत घटक $v_{\perp}$ के कारण,चुंबकीय बल $F = q(v \times B)$ अभिकेंद्र बल के रूप में कार्य करता है,जिससे कण क्षेत्र के लंबवत तल में वृत्ताकार पथ पर गति करता है।
क्षेत्र के अनुदिश रैखिक गति और क्षेत्र के लंबवत वृत्ताकार गति के संयोजन के परिणामस्वरूप कण का पथ हेलिकल (कुंडलिनी) होता है।
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एक प्रोटॉन $2.5 \ T$ के एकसमान चुंबकीय क्षेत्र के लंबवत $2 \ MeV$ गतिज ऊर्जा के साथ गति कर रहा है। प्रोटॉन पर लगने वाला बल . . . . . . $N$ है। (प्रोटॉन का द्रव्यमान $= 1.6 \times 10^{-27} \ kg$,प्रोटॉन का आवेश $= 1.6 \times 10^{-19} \ C$)
A
$8 \times 10^{-12}$
B
$8 \times 10^{-11}$
C
$3 \times 10^{-11}$
D
$3 \times 10^{-10}$

Solution

(A) चुंबकीय क्षेत्र $B$ में $v$ वेग से गतिमान आवेश $q$ पर लगने वाला बल $F = qvB \sin \theta$ द्वारा दिया जाता है। चूंकि प्रोटॉन क्षेत्र के लंबवत गति कर रहा है,$\theta = 90^{\circ}$,इसलिए $F = qvB$ होगा।
दी गई गतिज ऊर्जा $K = 2 \ MeV = 2 \times 10^6 \times 1.6 \times 10^{-19} \ J = 3.2 \times 10^{-13} \ J$ है।
$K = \frac{1}{2}mv^2$ का उपयोग करते हुए,वेग $v = \sqrt{\frac{2K}{m}} = \sqrt{\frac{2 \times 3.2 \times 10^{-13}}{1.6 \times 10^{-27}}} = \sqrt{4 \times 10^{14}} = 2 \times 10^7 \ m/s$ है।
अब,$F = (1.6 \times 10^{-19} \ C) \times (2 \times 10^7 \ m/s) \times (2.5 \ T)$।
$F = 1.6 \times 10^{-19} \times 5 \times 10^7 = 8 \times 10^{-12} \ N$।
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दो बहुत लंबे सीधे तार एक-दूसरे के समानांतर रखे गए हैं। प्रत्येक में समान दिशा में $I$ धारा बह रही है और उनके बीच की दूरी $2r$ है। चित्र में दिखाए गए बिंदु $P$ पर चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता . . . . . . है।
Question diagram
A
$\frac{3}{8} \frac{\mu_0 I}{\pi r}$
B
$\frac{2 \mu_0 I}{\pi r}$
C
$\frac{2}{3} \frac{\mu_0 I}{\pi r}$
D
$\frac{2}{3} \frac{\mu_0 I}{2 \pi r} = \frac{\mu_0 I}{3 \pi r}$

Solution

(C) $I$ धारा ले जाने वाले एक लंबे सीधे तार के कारण $d$ दूरी पर चुंबकीय क्षेत्र $B = \frac{\mu_0 I}{2 \pi d}$ द्वारा दिया जाता है।
बिंदु $P$ के लिए,तार $1$ से दूरी $r$ है। अतः,तार $1$ के कारण चुंबकीय क्षेत्र $B_1 = \frac{\mu_0 I}{2 \pi r}$ (कागज के तल के अंदर की ओर) है।
तार $2$ से दूरी $2r + r = 3r$ है। अतः,तार $2$ के कारण चुंबकीय क्षेत्र $B_2 = \frac{\mu_0 I}{2 \pi (3r)} = \frac{\mu_0 I}{6 \pi r}$ (कागज के तल के अंदर की ओर) है।
चूंकि दोनों क्षेत्र एक ही दिशा में हैं,इसलिए कुल चुंबकीय क्षेत्र $B_{net}$ होगा:
$B_{net} = B_1 + B_2$
$B_{net} = \frac{\mu_0 I}{2 \pi r} + \frac{\mu_0 I}{6 \pi r}$
$B_{net} = \frac{\mu_0 I}{2 \pi r} (1 + \frac{1}{3}) = \frac{\mu_0 I}{2 \pi r} (\frac{4}{3}) = \frac{2 \mu_0 I}{3 \pi r}$.
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$12.5 \ cm$ फोकस दूरी वाले एक उत्तल लेंस का उपयोग सरल सूक्ष्मदर्शी के रूप में किया जाता है। जब प्रतिबिंब अनंत पर बनता है,तो आवर्धन . . . . . . है। (सामान्य दृष्टि के लिए निकट बिंदु $25 \ cm$ है)
A
$25$
B
$2.5$
C
$2$
D
$1$

Solution

(C) जब प्रतिबिंब अनंत पर बनता है (सामान्य समायोजन),तो सरल सूक्ष्मदर्शी की आवर्धन क्षमता $m$ को सूत्र $m = \frac{D}{f}$ द्वारा दिया जाता है।
यहाँ,$D$ सामान्य आँख के लिए निकट बिंदु की दूरी है,जो $25 \ cm$ है।
उत्तल लेंस की फोकस दूरी $f = 12.5 \ cm$ है।
इन मानों को सूत्र में रखने पर:
$m = \frac{25}{12.5} = 2$.
अतः,आवर्धन $2$ है।
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PhysicsEasyMCQGUJCET · 2017
एक खगोलीय दूरदर्शी (astronomical telescope) के लिए,अभिदृश्यक लेंस (objective lens) की फोकस दूरी $f_{0}$ है और नेत्रिका लेंस (eyepiece lens) की फोकस दूरी $f_{e}$ है। तब दूरदर्शी की नली की लंबाई . . . . . . है।
A
$L \geq f_{0}-f_{e}$
B
$L \geq f_{0}+f_{e}$
C
$L \leq f_{0}+f_{e}$
D
$L \leq f_{0}-f_{e}$

Solution

(B) एक खगोलीय दूरदर्शी में,अभिदृश्यक लेंस दूर की वस्तु का प्रतिबिंब अपने फोकस तल पर बनाता है।
सामान्य समायोजन के लिए,अंतिम प्रतिबिंब अनंत पर बनता है,और अभिदृश्यक लेंस और नेत्रिका के बीच की दूरी $L = f_{0} + f_{e}$ होती है।
जब अंतिम प्रतिबिंब निकट बिंदु (स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी) पर बनता है,तो नेत्रिका को अभिदृश्यक लेंस के करीब ले जाया जाता है,लेकिन ऑप्टिकल पथ में दोनों लेंसों की फोकस दूरी को समायोजित करने के लिए कुल लंबाई $L$ कम से कम $f_{0} + f_{e}$ होनी चाहिए।
इसलिए,नली की लंबाई $L$ सामान्यतः $L \geq f_{0} + f_{e}$ द्वारा दी जाती है।
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चित्र में दिखाए गए परिपथ के लिए,दो स्थितियों $(i)$ $V_A > V_B$ और (ii) $V_B > V_A$ के लिए बिंदुओं $A$ और $B$ के बीच तुल्य प्रतिरोध क्रमशः $\qquad \Omega$ और $\qquad \Omega$ है। ($D_1$ और $D_2$ आदर्श डायोड हैं)
Question diagram
A
$25, \infty$
B
$50, \infty$
C
$\infty, 25$
D
$25, 25$

Solution

(A) एक आदर्श डायोड के लिए,फॉरवर्ड बायस प्रतिरोध $0 \ \Omega$ और रिवर्स बायस प्रतिरोध $\infty \ \Omega$ होता है।
$(i)$ स्थिति $V_A > V_B$:
इस स्थिति में,दोनों डायोड $D_1$ और $D_2$ फॉरवर्ड बायस में हैं।
इसलिए,प्रत्येक शाखा का प्रतिरोध $50 \ \Omega + 0 \ \Omega = 50 \ \Omega$ है।
चूंकि दोनों शाखाएं समानांतर में हैं,इसलिए तुल्य प्रतिरोध $R_{AB}$ इस प्रकार होगा:
$\frac{1}{R_{AB}} = \frac{1}{50} + \frac{1}{50} = \frac{2}{50} = \frac{1}{25}$
$R_{AB} = 25 \ \Omega$.
(ii) स्थिति $V_B > V_A$:
इस स्थिति में,दोनों डायोड $D_1$ और $D_2$ रिवर्स बायस में हैं।
इसलिए,प्रत्येक शाखा का प्रतिरोध $50 \ \Omega + \infty \ \Omega = \infty \ \Omega$ है।
चूंकि दोनों शाखाएं समानांतर में हैं,इसलिए तुल्य प्रतिरोध $R_{AB}$ इस प्रकार होगा:
$\frac{1}{R_{AB}} = \frac{1}{\infty} + \frac{1}{\infty} = 0 + 0 = 0$
$R_{AB} = \infty \ \Omega$.
अतः,तुल्य प्रतिरोध क्रमशः $25 \ \Omega$ और $\infty \ \Omega$ हैं।
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PhysicsEasyMCQGUJCET · 2017
यंग के द्वि-स्लिट प्रयोग में,यदि दो स्लिटों के बीच की दूरी उपयोग किए गए प्रकाश की तरंगदैर्ध्य के बराबर है,तो पर्दे पर प्राप्त होने वाली दीप्त फ्रिंजों की अधिकतम संख्या . . . . . . होगी।
A
अनंत
B
$3$
C
$7$
D
$5$

Solution

(B) यंग के द्वि-स्लिट प्रयोग में दीप्त फ्रिंजों के लिए शर्त $d \sin \theta = n \lambda$ है,जहाँ $d$ स्लिटों के बीच की दूरी है,$\theta$ कोण है,$n$ फ्रिंज का क्रम है और $\lambda$ तरंगदैर्ध्य है।
दिया गया है कि $d = \lambda$,इसलिए समीकरण $\lambda \sin \theta = n \lambda$ हो जाता है,जो सरल होकर $\sin \theta = n$ बन जाता है।
चूंकि $\sin \theta$ का अधिकतम मान $1$ है,इसलिए $n \leq 1$ प्राप्त होता है।
$n$ के लिए संभावित पूर्णांक मान $-1, 0, 1$ हैं।
अतः,कुल $3$ दीप्त फ्रिंज प्राप्त होती हैं।

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How many Physics questions are in GUJCET 2017?

There are 24 Physics questions from the GUJCET 2017 paper on Vedclass, each with a detailed step-by-step solution in Hindi.

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Can I practice GUJCET 2017 Physics as a timed test?

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