GUJCET 2021 Chemistry Question Paper with Answer and Solution in Hindi

18 QuestionsHindiWith Solutions

ChemistryQ118 of 18 questions

Page 1 of 1 · Hindi

1
ChemistryEasyMCQGUJCET · 2021
निम्नलिखित अभिक्रिया में $A$ क्या है?
$C_6H_5-CH_2-CH=CH_2 + HCl \rightarrow A$
A
Option A
B
Option B
C
Option C
D
Option D

Solution

(D) यह अभिक्रिया allylbenzene $(C_6H_5-CH_2-CH=CH_2)$ में $HCl$ का इलेक्ट्रोफिलिक योग है।
मार्कोवनिकोव के नियम के अनुसार,इलेक्ट्रोफाइल $(H^+)$ द्वि-आबंध के उस कार्बन परमाणु से जुड़ता है जिसके पास अधिक हाइड्रोजन परमाणु होते हैं।
Allylbenzene में,द्वि-आबंध $C_2$ और $C_3$ के बीच है।
$H^+$ टर्मिनल $CH_2$ समूह से जुड़ता है,जिससे एक स्थिर बेंजिलिक कार्बोनियम आयन मध्यवर्ती $(C_6H_5-CH_2-CH^+-CH_3)$ बनता है।
इसके बाद,न्यूक्लियोफाइल $(Cl^-)$ इस कार्बोनियम आयन पर हमला करता है और अंतिम उत्पाद $C_6H_5-CH_2-CHCl-CH_3$ ($1$-phenyl$-2-$chloropropane) बनाता है।
अतः,सही विकल्प $D$ है।
2
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निम्नलिखित में से किस यौगिक का $pK_a$ मान अधिकतम है?
A
$p-O_2N-C_6H_4-OH$
B
$m-O_2N-C_6H_4-OH$
C
$o-O_2N-C_6H_4-OH$
D
$C_6H_5OH$

Solution

(D) $pK_a$ मान यौगिक की अम्लता के व्युत्क्रमानुपाती होता है। उच्च अम्लता का अर्थ है कम $pK_a$ मान।
नाइट्रो समूह $(-NO_2)$ मजबूत इलेक्ट्रॉन-आकर्षक समूह $(EWG)$ हैं जो $-I$ और $-M$ प्रभाव के माध्यम से फेनॉक्साइड आयन को स्थिर करके फिनोल की अम्लता को बढ़ाते हैं।
$p-O_2N-C_6H_4-OH$,$m-O_2N-C_6H_4-OH$ और $o-O_2N-C_6H_4-OH$ में,$-NO_2$ समूह फिनोल $(C_6H_5OH)$ की तुलना में अम्लता को बढ़ाते हैं।
चूंकि $C_6H_5OH$ में कोई इलेक्ट्रॉन-आकर्षक प्रतिस्थापी नहीं है,इसलिए यह दिए गए यौगिकों में सबसे कम अम्लीय है।
अतः,$C_6H_5OH$ का $pK_a$ मान अधिकतम है।
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कौन सा ग्रिग्नार्ड अभिकर्मक मेथेनल के साथ अभिक्रिया करके $2-$मेथिलप्रोपेन$-1-$ऑल देता है?
A
$CH_3-CH(CH_3)-MgX$
B
$CH_3-CH=CH-MgX$
C
$CH_3-CH_2-CH_2-MgX$
D
$CH_3-CH(CH_3)-CH_2-MgX$

Solution

(A) ग्रिग्नार्ड अभिकर्मक $(R-MgX)$ की मेथेनल $(HCHO)$ के साथ अभिक्रिया और उसके बाद जल-अपघटन करने पर प्राथमिक अल्कोहल प्राप्त होता है जिसमें ग्रिग्नार्ड अभिकर्मक की तुलना में एक कार्बन परमाणु अधिक होता है।
$2-$मेथिलप्रोपेन$-1-$ऑल $(CH_3-CH(CH_3)-CH_2-OH)$ प्राप्त करने के लिए,ग्रिग्नार्ड अभिकर्मक आइसोप्रोपिल मैग्नीशियम हैलाइड $(CH_3-CH(CH_3)-MgX)$ होना चाहिए।
अभिक्रिया:
$CH_3-CH(CH_3)-MgX + HCHO \rightarrow CH_3-CH(CH_3)-CH_2-OMgX$
$CH_3-CH(CH_3)-CH_2-OMgX + H_2O \rightarrow CH_3-CH(CH_3)-CH_2-OH + Mg(OH)X$
अतः,सही विकल्प $A$ है।
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निम्नलिखित में से किस यौगिक की अम्लीय शक्ति अधिकतम है?
A
$2-$मेथॉक्सीबेन्जोइक एसिड
B
बेन्जोइक एसिड
C
$4-$मेथॉक्सीबेन्जोइक एसिड
D
$4-$नाइट्रोबेन्जोइक एसिड

Solution

(D) सही उत्तर है।
बेन्जोइक एसिड के व्युत्पन्नों की अम्लीय शक्ति इलेक्ट्रॉन-आकर्षक समूह $(EWG)$ द्वारा बढ़ती है और इलेक्ट्रॉन-दाता समूह $(EDG)$ द्वारा घटती है।
$4-$नाइट्रोबेन्जोइक एसिड में $-NO_2$ समूह होता है,जो एक मजबूत इलेक्ट्रॉन-आकर्षक समूह ($-I$ और $-M$ प्रभाव) है,जिससे कार्बोक्सिलेट आयन स्थिर हो जाता है और अम्लता बढ़ जाती है।
$2-$मेथॉक्सीबेन्जोइक एसिड और $4-$मेथॉक्सीबेन्जोइक एसिड में $-OCH_3$ समूह होता है,जो इलेक्ट्रॉन-दाता समूह ($+M$ प्रभाव) के रूप में कार्य करता है,जो बेन्जोइक एसिड की तुलना में अम्लीय शक्ति को कम करता है।
इसलिए,दिए गए विकल्पों में $4-$नाइट्रोबेन्जोइक एसिड की अम्लीय शक्ति अधिकतम है।
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कौन सी अभिक्रिया यह सिद्ध करती है कि ग्लूकोज में सभी छह कार्बन परमाणु एक सीधी श्रृंखला में जुड़े हुए हैं?
A
$Br_2$ के साथ अभिक्रिया
B
$NH_2OH$ के साथ अभिक्रिया
C
$HI$ के साथ गर्म करना
D
$HCN$ के साथ अभिक्रिया

Solution

(C) जब ग्लूकोज को $HI$ के साथ लंबे समय तक गर्म किया जाता है,तो यह $n$-हेक्सेन $(CH_3-(CH_2)_4-CH_3)$ बनाता है।
यह अभिक्रिया पुष्टि करती है कि ग्लूकोज में सभी छह कार्बन परमाणु एक सीधी श्रृंखला में जुड़े हुए हैं।
6
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प्रथम कोटि की अभिक्रिया के लिए दर स्थिरांक $60 \text{ s}^{-1}$ है। अभिकारक की प्रारंभिक सांद्रता को उसके $1/16$ वें मान तक कम करने में कितना समय (सेकंड में) लगेगा?
A
$2.3 \times 10^{-2} \text{ s}$
B
$9.5 \times 10^{-2} \text{ s}$
C
$4.6 \times 10^{-2} \text{ s}$
D
$6.9 \times 10^{-2} \text{ s}$

Solution

(C) प्रथम कोटि की अभिक्रिया के लिए,दर समीकरण $k = \frac{2.303}{t} \log \frac{[R]_0}{[R]}$ है।
यहाँ सांद्रता प्रारंभिक मान के $1/16$ वें भाग तक कम हो जाती है,इसलिए $\frac{[R]_0}{[R]} = 16$.
मान रखने पर: $t = \frac{2.303}{k} \log(16)$.
$t = \frac{2.303}{60} \log(2^4) = \frac{2.303 \times 4 \times 0.3010}{60}$.
$t = \frac{2.303 \times 1.204}{60} \approx 0.0462 \text{ s}$.
अतः,$t = 4.6 \times 10^{-2} \text{ s}$.
7
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एक अभिक्रिया के लिए,$K = 4.5 \times 10^{-4} \ L \ mol^{-1} \ s^{-1}$ है। अभिक्रिया की कोटि क्या है?
A
शून्य
B
द्वितीय
C
प्रथम
D
तृतीय

Solution

(B) $n$ कोटि की अभिक्रिया के लिए दर स्थिरांक $K$ की इकाई $(mol \ L^{-1})^{1-n} \ s^{-1}$ द्वारा दी जाती है।
द्वितीय कोटि की अभिक्रिया $(n = 2)$ के लिए,इकाई $(mol \ L^{-1})^{1-2} \ s^{-1} = (mol \ L^{-1})^{-1} \ s^{-1} = L \ mol^{-1} \ s^{-1}$ होती है।
चूंकि दी गई इकाई $L \ mol^{-1} \ s^{-1}$ है,इसलिए अभिक्रिया द्वितीय कोटि की है।
8
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$[Co(NH_3)_5(SO_4)]Br$ और $[Co(NH_3)_5Br]SO_4$ समावयवी किस प्रकार की समावयवता प्रदर्शित करते हैं?
A
बंधन (Linkage)
B
आयनन (Ionisation)
C
समन्वय (Coordination)
D
विलायक (Solvate)

Solution

(B) दिए गए समावयवी $[Co(NH_3)_5(SO_4)]Br$ और $[Co(NH_3)_5Br]SO_4$ हैं।
ये यौगिक जलीय विलयन में अलग-अलग आयन देते हैं।
$[Co(NH_3)_5(SO_4)]Br$ से $Br^-$ आयन प्राप्त होते हैं,जबकि $[Co(NH_3)_5Br]SO_4$ से $SO_4^{2-}$ आयन प्राप्त होते हैं।
इस प्रकार की समावयवता,जिसमें समन्वय क्षेत्र के आयन का लिगेंड के साथ आदान-प्रदान होता है,उसे $Ionisation$ (आयनन) समावयवता कहा जाता है।
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पेंटाएमीनकार्बोनेटोकोबाल्ट$(III)$ क्लोराइड समन्वय यौगिक के लिए सही सूत्र कौन सा है?
A
$[Co(NH_3)_5(CO_3)]Cl$
B
$[Co(NH_3)_5(CO_2)]Cl$
C
$[Co(NH_3)_5(CO_3)]Cl_2$
D
$[Co(NH_2)_5(CO_3)]Cl$

Solution

(A) $1$. केंद्रीय धातु आयन कोबाल्ट $+3$ ऑक्सीकरण अवस्था में है,जिसे $Co(III)$ के रूप में दर्शाया गया है।
$2$. 'पेंटाएमीन' लिगेंड $5$ अमोनिया अणुओं,$(NH_3)_5$ को दर्शाता है।
$3$. 'कार्बोनेटो' लिगेंड कार्बोनेट आयन,$CO_3^{2-}$ को दर्शाता है।
$4$. समन्वय क्षेत्र $[Co(NH_3)_5(CO_3)]$ है।
$5$. आवेश को संतुलित करने के लिए: $Co$ $+3$ है,$CO_3$ $-2$ है,और $NH_3$ $0$ है। समन्वय क्षेत्र पर कुल आवेश $(+3) + (-2) = +1$ है।
$6$. संकुल के $+1$ आवेश को उदासीन करने के लिए,समन्वय क्षेत्र के बाहर एक क्लोराइड आयन $(Cl^-)$ की आवश्यकता होती है।
$7$. इसलिए,सही सूत्र $[Co(NH_3)_5(CO_3)]Cl$ है।
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यदि किसी तत्व की परमाणु संख्या $26$ है, तो इसके द्विसंयोजक जलीय आयन का चुंबकीय आघूर्ण . . . . . . $BM$ है।
A
$1.73$
B
$3.87$
C
$2.83$
D
$4.90$

Solution

(D) $26$ परमाणु संख्या वाला तत्व आयरन $(Fe)$ है।
इसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास $[Ar] 3d^6 4s^2$ है।
द्विसंयोजक आयन $Fe^{2+}$ का विन्यास $[Ar] 3d^6$ है।
$3d$ उपकोश में $4$ अयुग्मित इलेक्ट्रॉन होते हैं।
चुंबकीय आघूर्ण $(\mu)$ की गणना $\mu = \sqrt{n(n+2)} \ BM$ सूत्र द्वारा की जाती है, जहाँ $n$ अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की संख्या है।
$n = 4$ रखने पर, $\mu = \sqrt{4(4+2)} = \sqrt{24} \approx 4.90 \ BM$ प्राप्त होता है।
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निम्नलिखित सेल अभिक्रिया के लिए सही प्रतीकात्मक निरूपण कौन सा है?
$Mg_{(s)} + Cl_{2(g)} \rightarrow Mg^{2+}_{(aq)} + 2Cl^{-}_{(aq)}$
A
$Mg_{(s)} \mid Mg^{2+}_{(aq)} \parallel Cl_{2(g)} \mid Cl^{-}_{(aq)} \mid Pt_{(s)}$
B
$Pt_{(s)} \mid Cl^{-}_{(aq)} \mid Cl_{2(g)} \parallel Mg^{2+}_{(aq)} \mid Mg_{(s)}$
C
$Mg_{(s)} \mid Mg^{2+}_{(aq)} \parallel Cl_{2(g)} \mid Cl^{-}_{(aq)} \mid Pt_{(s)}$
D
$Pt_{(s)} \mid Cl_{2(g)} \mid Cl^{-}_{(aq)} \parallel Mg^{2+}_{(aq)} \mid Mg_{(s)}$

Solution

(A) $\text{सेल निरूपण में, एनोड (ऑक्सीकरण) को बाईं ओर और कैथोड (अपचयन) को दाईं ओर लिखा जाता है।}$
$1$. $\text{ऑक्सीकरण अर्ध-अभिक्रिया: } Mg_{(s)} \rightarrow Mg^{2+}_{(aq)} + 2e^-$. $\text{यह एनोड पर होता है: } Mg_{(s)} \mid Mg^{2+}_{(aq)}$.
$2$. $\text{अपचयन अर्ध-अभिक्रिया: } Cl_{2(g)} + 2e^- \rightarrow 2Cl^-_{(aq)}$. $\text{यह कैथोड पर होता है। चूंकि } Cl_2 \text{ एक गैस है, इसलिए } Pt \text{ जैसे अक्रिय इलेक्ट्रोड का उपयोग किया जाता है: } Cl_{2(g)} \mid Cl^-_{(aq)} \mid Pt_{(s)}$.
$3$. $\text{लवण सेतु } (\parallel) \text{ के साथ जोड़ने पर, सही निरूपण } Mg_{(s)} \mid Mg^{2+}_{(aq)} \parallel Cl_{2(g)} \mid Cl^-_{(aq)} \mid Pt_{(s)} \text{ है।}$
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नीचे दिए गए डेटा का उपयोग करके,सबसे प्रबल अपचायक (reducing agent) ज्ञात कीजिए:
$E^0_{Cr_2O_7^{2-}/Cr^{3+}} = 1.33 \text{ V}$,$E^0_{Cl_2/Cl^{-}} = 1.36 \text{ V}$,$E^0_{MnO_4^-/Mn^{2+}} = 1.51 \text{ V}$,$E^0_{Cr^{3+}/Cr} = -0.74 \text{ V}$
A
$Cl^{-}$
B
$Cr^{3+}$
C
$Cr$
D
$Mn^{2+}$

Solution

(C) अपचायक की प्रबलता उसके मानक अपचयन विभव $(E^0_{red})$ के मान के व्युत्क्रमानुपाती होती है। कम (अधिक ऋणात्मक) $E^0_{red}$ मान वाला पदार्थ अधिक प्रबल अपचायक होता है।
दिए गए मानों की तुलना करने पर:
$E^0_{MnO_4^-/Mn^{2+}} = 1.51 \text{ V}$
$E^0_{Cl_2/Cl^{-}} = 1.36 \text{ V}$
$E^0_{Cr_2O_7^{2-}/Cr^{3+}} = 1.33 \text{ V}$
$E^0_{Cr^{3+}/Cr} = -0.74 \text{ V}$
चूँकि $E^0_{Cr^{3+}/Cr}$ का मान सबसे कम (अधिक ऋणात्मक) $-0.74 \text{ V}$ है,इसलिए $Cr$ सबसे प्रबल अपचायक है।
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सोडियम क्लोराइड के जलीय विलयन के विद्युत अपघटन के दौरान कौन से उत्पाद प्राप्त होते हैं?
A
$NaOH, O_2$ और $H_2$
B
$NaOH, Na$ और $H_2$
C
$NaOH, Cl_2$ और $H_2$
D
$Na, Cl_2$ और $H_2$

Solution

(C) सोडियम क्लोराइड ($NaCl$ (aq)) के जलीय विलयन के विद्युत अपघटन के दौरान,निम्नलिखित अभिक्रियाएँ होती हैं:
कैथोड पर: $2H_2O(l) + 2e^- \rightarrow H_2(g) + 2OH^-(aq)$.
एनोड पर: $2Cl^-(aq) \rightarrow Cl_2(g) + 2e^-$.
विलयन में शेष आयन $Na^+$ और $OH^-$ हैं,जो मिलकर $NaOH(aq)$ बनाते हैं।
अतः,प्राप्त उत्पाद $NaOH, Cl_2$ और $H_2$ हैं।
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निम्नलिखित में से कौन सा हैलाइड $S_N 1$ अभिक्रिया सबसे तेजी से देगा?
A
$2-$ब्रोमो-$3-$मिथाइल ब्यूटेन
B
$2-$क्लोरो-$3-$मिथाइल ब्यूटेन
C
क्लोरोमेथेन
D
$2-$ब्रोमो-$2-$मिथाइल प्रोपेन

Solution

(D) $S_N 1$ अभिक्रिया की दर दर-निर्धारक चरण के दौरान बनने वाले कार्बोकेशन मध्यवर्ती की स्थिरता पर निर्भर करती है।
$S_N 1$ अभिक्रियाशीलता का क्रम: $3^{\circ} > 2^{\circ} > 1^{\circ} > CH_3-X$ है।
$A$: $2-$ब्रोमो-$3-$मिथाइल ब्यूटेन एक $2^{\circ}$ हैलाइड है।
$B$: $2-$क्लोरो-$3-$मिथाइल ब्यूटेन एक $2^{\circ}$ हैलाइड है।
$C$: क्लोरोमेथेन एक $1^{\circ}$ हैलाइड है।
$D$: $2-$ब्रोमो-$2-$मिथाइल प्रोपेन एक $3^{\circ}$ हैलाइड है।
चूंकि $3^{\circ}$ कार्बोकेशन सबसे अधिक स्थिर होते हैं,इसलिए $2-$ब्रोमो-$2-$मिथाइल प्रोपेन सबसे तेजी से $S_N 1$ अभिक्रिया देगा।
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$CH_3-CH=CH-C(Cl)(CH_3)_2$ में $-Cl$ परमाणु की स्थिति के आधार पर,यह किस प्रकार का हैलाइड है?
A
द्वितीयक (Secondary)
B
विनाइलिक (Vinylic)
C
एलाइलिक (Allylic)
D
एराइल (Aryl)

Solution

(C) दिया गया यौगिक $CH_3-CH=CH-C(Cl)(CH_3)_2$ है।
इस संरचना में,$-Cl$ परमाणु उस कार्बन परमाणु से जुड़ा है जो सीधे कार्बन-कार्बन द्वि-आबंध $(C=C)$ से जुड़ा है।
विशेष रूप से,$-Cl$ युक्त कार्बन परमाणु द्वि-आबंध के $sp^2$ संकरित कार्बन के बगल में स्थित है।
ऐसा हैलाइड,जिसमें हैलोजन द्वि-आबंध के बगल वाले $sp^3$ संकरित कार्बन परमाणु से जुड़ा होता है,उसे एलाइलिक हैलाइड के रूप में वर्गीकृत किया जाता है।
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समुद्र के पानी से नमक हटाने के लिए किस विधि का उपयोग किया जाता है?
A
हाइड्रोलिक वाशिंग
B
लीचिंग
C
रिवर्स ऑस्मोसिस
D
फ्रॉथ फ्लोटेशन

Solution

(C) समुद्र के पानी से नमक हटाकर उसे पीने योग्य बनाने की प्रक्रिया को डिसेलिनेशन कहा जाता है।
इस उद्देश्य के लिए रिवर्स ऑस्मोसिस सबसे सामान्य विधि है।
इस प्रक्रिया में,ऑस्मोटिक दबाव से अधिक दबाव डालकर पानी से नमक को अलग करने के लिए अर्ध-पारगम्य झिल्ली (semi-permeable membrane) का उपयोग किया जाता है।
इसलिए,सही विकल्प $C$ है।
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$50 \ g$ बेंजीन में $3.0 \ g$ एथेनोइक एसिड की मोललता . . . . . . है। (परमाणु भार: $H=1, C=12, O=16$).
A
$0.1$
B
$1.0$
C
$0.6$
D
$0.06$

Solution

(B) एथेनोइक एसिड $(CH_3COOH)$ का मोलर द्रव्यमान $(2 \times 12) + (4 \times 1) + (2 \times 16) = 60 \ g/mol$ है।
एथेनोइक एसिड के मोल = $\frac{\text{द्रव्यमान}}{\text{मोलर द्रव्यमान}} = \frac{3.0 \ g}{60 \ g/mol} = 0.05 \ mol$.
विलायक (बेंजीन) का द्रव्यमान = $50 \ g = 0.05 \ kg$.
मोललता $(m)$ = $\frac{\text{विलेय के मोल}}{\text{विलायक का द्रव्यमान (kg में)}} = \frac{0.05 \ mol}{0.05 \ kg} = 1.0 \ mol/kg$.
अतः,सही विकल्प $B$ है।
18
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निम्नलिखित में से किस जलीय विलयन का क्वथनांक न्यूनतम होना चाहिए?
A
$0.1 \ M$ यूरिया
B
$0.1 \ M \ K_2SO_4$
C
$0.1 \ M \ NaCl$
D
$0.1 \ M \ FeCl_3$

Solution

(A) क्वथनांक में उन्नयन एक अणुसंख्यक गुणधर्म है,जो वांट हॉफ गुणांक $(i)$ और विलेय कणों की सांद्रता पर निर्भर करता है। सूत्र $\Delta T_b = i \times K_b \times m$ है।
चूंकि सभी विलयनों के लिए मोललता $(m)$ समान $(0.1 \ M)$ है,इसलिए जिस विलयन के लिए वांट हॉफ गुणांक $(i)$ न्यूनतम होगा,उसका क्वथनांक भी न्यूनतम होगा।
यूरिया (अनपघट्य) के लिए,$i = 1$ है।
$K_2SO_4$ $(2K^+ + SO_4^{2-})$ के लिए,$i = 3$ है।
$NaCl$ $(Na^+ + Cl^-)$ के लिए,$i = 2$ है।
$FeCl_3$ $(Fe^{3+} + 3Cl^-)$ के लिए,$i = 4$ है।
मानों की तुलना करने पर,यूरिया का $i$ मान सबसे कम $(1)$ है,इसलिए $0.1 \ M$ यूरिया का क्वथनांक न्यूनतम है।

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