GSEB 2024 Chemistry Question Paper with Answer and Solution in Hindi

93 QuestionsHindiWith Solutions

ChemistryQ5178 of 93 questions

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यदि परमाणु क्रमांक $28$ है, तो जलीय विलयन में द्विसंयोजक आयन का चुंबकीय आघूर्ण (magnetic moment) क्या होगा ($BM$ में)?
A
$3.87$
B
$2.84$
C
$1.73$
D
$4.90$

Solution

(B) तत्व का परमाणु क्रमांक $28$ है, जो निकेल $(Ni)$ है।
$Ni$ $(Z=28)$ का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास $[Ar] 3d^8 4s^2$ है।
द्विसंयोजक आयन $(Ni^{2+})$ $4s$ कक्षक से दो इलेक्ट्रॉनों के हटने से बनता है, जिससे विन्यास $[Ar] 3d^8$ प्राप्त होता है।
$3d^8$ विन्यास में $2$ अयुग्मित इलेक्ट्रॉन $(n=2)$ होते हैं।
चुंबकीय आघूर्ण $(\mu)$ की गणना स्पिन-ओनली सूत्र द्वारा की जाती है: $\mu = \sqrt{n(n+2)} \ BM$।
$n=2$ रखने पर: $\mu = \sqrt{2(2+2)} = \sqrt{8} \approx 2.84 \ BM$।
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पिघले हुए $Al_2O_3$ से $2.7 \ g$ $Al$ उत्पन्न करने के लिए फैराडे के संदर्भ में कितनी विद्युत की आवश्यकता होती है? ($Al$ का परमाणु द्रव्यमान $= 27 \ u$)
A
$0.6$
B
$0.1$
C
$0.2$
D
$0.3$

Solution

(D) पिघले हुए $Al_2O_3$ से $Al$ के उत्पादन के लिए अपचयन अभिक्रिया इस प्रकार है:
$Al^{3+} + 3e^- \rightarrow Al$
अभिक्रिया के रससमीकरणमिति (stoichiometry) के अनुसार,$1 \ mol$ $Al$ $(27 \ g)$ के लिए $3 \ F$ विद्युत की आवश्यकता होती है।
$Al$ का दिया गया द्रव्यमान $= 2.7 \ g$ है।
$Al$ के मोलों की संख्या $= \frac{2.7 \ g}{27 \ g/mol} = 0.1 \ mol$ है।
चूंकि $1 \ mol$ $Al$ के लिए $3 \ F$ की आवश्यकता होती है,इसलिए $0.1 \ mol$ $Al$ के लिए $0.1 \times 3 = 0.3 \ F$ की आवश्यकता होगी।
अतः,आवश्यक विद्युत $0.3 \ F$ है।
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इलेक्ट्रॉनिक चालकता . . . . . . पर निर्भर नहीं करती है।
A
विद्युत अपघट्य की सांद्रता
B
प्रति परमाणु संयोजी इलेक्ट्रॉनों की संख्या
C
तापमान
D
धातु की प्रकृति और संरचना

Solution

(A) इलेक्ट्रॉनिक चालकता (धात्विक चालकता) धातु की प्रकृति और संरचना,प्रति परमाणु संयोजी इलेक्ट्रॉनों की संख्या और तापमान पर निर्भर करती है।
यह विद्युत अपघट्य की सांद्रता पर निर्भर नहीं करती है,क्योंकि इलेक्ट्रॉनिक चालकता धातुओं का गुण है,न कि विद्युत अपघट्य विलयनों का।
इसलिए,सही विकल्प $A$ है।
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जब शुष्क सेल (dry cell) कार्य कर रहा होता है,तो अपचायक (reducing agent) के रूप में क्या कार्य करता है?
A
ग्रेफाइट
B
$MnO_2$
C
$NH_4Cl$
D
$Zn$

Solution

(D) शुष्क सेल (लेक्लांचे सेल) में,एनोड जिंक $(Zn)$ का बना होता है और कैथोड मैंगनीज डाइऑक्साइड $(MnO_2)$ से घिरा हुआ कार्बन की छड़ होती है।
एनोड पर,जिंक का ऑक्सीकरण होता है: $Zn(s) \rightarrow Zn^{2+}(aq) + 2e^-$.
चूंकि जिंक इलेक्ट्रॉन खोता है,इसलिए यह अपचायक के रूप में कार्य करता है।
अतः,सही विकल्प $D$ है।
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$0.177 \ V$ ऑक्सीकरण विभव वाले हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड के संपर्क में आने वाले विलयन का $pH$ क्या होगा?
A
$3$
B
$5$
C
$10$
D
$2$

Solution

(A) हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड के लिए ऑक्सीकरण अभिक्रिया: $H_2(g) \rightarrow 2H^+(aq) + 2e^-$.
ऑक्सीकरण विभव के लिए नर्नस्ट समीकरण का उपयोग करने पर: $E_{ox} = E^0_{ox} - \frac{0.0591}{n} \log [H^+]^2$.
हाइड्रोजन के लिए $E^0_{ox} = 0 \ V$ और $n = 2$ है,इसलिए: $0.177 = 0 - \frac{0.0591}{2} \times 2 \log [H^+]$.
$0.177 = -0.0591 \times \log [H^+]$.
चूंकि $pH = -\log [H^+]$,इसलिए: $0.177 = 0.0591 \times pH$.
$pH = \frac{0.177}{0.0591} = 3$.
अतः,सही विकल्प $A$ है।
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कौन सी धातु $HCl$ विलयन के साथ अभिक्रिया करके $H_2$ गैस उत्पन्न नहीं कर सकती है?
$E^0_{Fe^{2+}/Fe} = -0.44 \ V$
$E^0_{Cu^{2+}/Cu} = +0.34 \ V$
$E^0_{Ni^{2+}/Ni} = -0.25 \ V$
$E^0_{Zn^{2+}/Zn} = -0.76 \ V$
A
$Zn$
B
$Ni$
C
$Cu$
D
$Fe$

Solution

(C) यदि किसी धातु का मानक अपचयन विभव $(E^0_{M^{n+}/M})$ हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड के $0.00 \ V$ से कम है,तो वह $HCl$ से $H_2$ गैस विस्थापित कर सकती है।
ऋणात्मक अपचयन विभव वाली धातुएं अपचायक के रूप में कार्य करती हैं।
दिए गए मानों की तुलना करने पर:
$E^0_{Zn^{2+}/Zn} = -0.76 \ V$ (ऋणात्मक,$H_2$ उत्पन्न कर सकती है)
$E^0_{Fe^{2+}/Fe} = -0.44 \ V$ (ऋणात्मक,$H_2$ उत्पन्न कर सकती है)
$E^0_{Ni^{2+}/Ni} = -0.25 \ V$ (ऋणात्मक,$H_2$ उत्पन्न कर सकती है)
$E^0_{Cu^{2+}/Cu} = +0.34 \ V$ (धनात्मक,$H_2$ उत्पन्न नहीं कर सकती है)
अतः,$Cu$ गैस उत्पन्न नहीं कर सकती है।
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निम्नलिखित सेल के लिए कौन सा नर्नस्ट समीकरण सही है? $Al_{(s)}|Al_{(aq)}^{3+} || Zn_{(aq)}^{2+}| Zn_{(s)}$
A
$E_{cell} = E_{cell}^0 - \frac{0.059}{6} \log \frac{[Al^{3+}]^2}{[Zn^{2+}]^3}$
B
$E_{cell} = E_{cell}^0 - \frac{0.059}{6} \log \frac{[Zn^{2+}]^3}{[Al^{3+}]^2}$
C
$E_{cell} = E_{cell}^0 - \frac{0.059}{3} \log \frac{[Al^{3+}]^2}{[Zn^{2+}]^3}$
D
$E_{cell} = E_{cell}^0 - \frac{0.059}{2} \log \frac{[Al^{3+}]^2}{[Zn^{2+}]^3}$

Solution

(A) सेल अभिक्रिया है: $2Al_{(s)} + 3Zn_{(aq)}^{2+} \rightarrow 2Al_{(aq)}^{3+} + 3Zn_{(s)}$.
यहाँ,अभिक्रिया में शामिल इलेक्ट्रॉनों की संख्या $n = 6$ है।
नर्नस्ट समीकरण इस प्रकार है: $E_{cell} = E_{cell}^0 - \frac{0.059}{n} \log \frac{[Product]}{[Reactant]}$.
मान रखने पर: $E_{cell} = E_{cell}^0 - \frac{0.059}{6} \log \frac{[Al^{3+}]^2}{[Zn^{2+}]^3}$.
अतः,विकल्प $A$ सही है।
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$NaCl$,$HCl$ और $NaAc$ के लिए $\Lambda_{m}^0$ का मान क्रमशः $126.4 \ S \ cm^2 \ mol^{-1}$,$425.9 \ S \ cm^2 \ mol^{-1}$ और $91.0 \ S \ cm^2 \ mol^{-1}$ है। $HAc$ के लिए $\Lambda^0$ की गणना कीजिए।
A
$461.3 \ S \ cm^2 \ mol^{-1}$
B
$208.5 \ S \ cm^2 \ mol^{-1}$
C
$643.3 \ S \ cm^2 \ mol^{-1}$
D
$390.5 \ S \ cm^2 \ mol^{-1}$

Solution

(D) कोहलराउस के आयनों के स्वतंत्र अभिगमन के नियम के अनुसार,अनंत तनुता पर किसी विद्युत अपघट्य की मोलर चालकता उसके घटक आयनों की मोलर चालकताओं के योग के बराबर होती है।
हमें दिया गया है:
$\Lambda_{m}^0(NaCl) = 126.4 \ S \ cm^2 \ mol^{-1}$
$\Lambda_{m}^0(HCl) = 425.9 \ S \ cm^2 \ mol^{-1}$
$\Lambda_{m}^0(NaAc) = 91.0 \ S \ cm^2 \ mol^{-1}$
हमें $\Lambda_{m}^0(HAc)$ ज्ञात करना है:
$\Lambda_{m}^0(HAc) = \Lambda_{m}^0(H^+) + \Lambda_{m}^0(Ac^-)$
दिए गए मानों का उपयोग करने पर:
$\Lambda_{m}^0(HAc) = \Lambda_{m}^0(HCl) + \Lambda_{m}^0(NaAc) - \Lambda_{m}^0(NaCl)$
$\Lambda_{m}^0(HAc) = 425.9 + 91.0 - 126.4$
$\Lambda_{m}^0(HAc) = 516.9 - 126.4 = 390.5 \ S \ cm^2 \ mol^{-1}$
अतः,सही विकल्प $D$ है।
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मर्करी सेल में,निम्नलिखित में से कौन सा कैथोड के रूप में कार्य करता है?
A
$ZnO$ और कार्बन का पेस्ट
B
जिंक और मर्करी अमलगम
C
$HgO$ और कार्बन का पेस्ट
D
$NH_4Cl$ और $ZnCl_2$ का पेस्ट

Solution

(C) मर्करी सेल में,एनोड जिंक-मर्करी अमलगम $(Zn(Hg))$ होता है और कैथोड मर्क्यूरिक ऑक्साइड $(HgO)$ और कार्बन का पेस्ट होता है।
इलेक्ट्रोलाइट के रूप में पोटेशियम हाइड्रोक्साइड $(KOH)$ और जिंक ऑक्साइड $(ZnO)$ का नम पेस्ट उपयोग किया जाता है।
अतः,सही विकल्प $C$ है।
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$Al_2O_3$ से $2$ मोल एल्युमीनियम प्राप्त करने के लिए आवश्यक आवेश की मात्रा क्या है ($F$ में)?
A
$3$
B
$6$
C
$1$
D
$2$

Solution

(B) $Al_2O_3$ से एल्युमीनियम प्राप्त करने के लिए अपचयन अभिक्रिया इस प्रकार है:
$Al^{3+} + 3e^- \rightarrow Al$
$1$ मोल $Al$ प्राप्त करने के लिए $3$ मोल इलेक्ट्रॉनों की आवश्यकता होती है,जो $3 \ F$ आवेश के बराबर है।
अतः,$2$ मोल $Al$ प्राप्त करने के लिए आवश्यक आवेश है:
$2 \times 3 \ F = 6 \ F$.
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डेनियल सेल के लिए मानक इलेक्ट्रोड विभव $1.1 \ V$ है। अभिक्रिया के लिए मानक गिब्स ऊर्जा का मान क्या होगा?
$Zn_{(s)} + Cu_{(aq)}^{2+} \rightarrow Zn_{(aq)}^{2+} + Cu_{(s)}$
$(1 \ F = 96487 \ C \ mol^{-1})$
A
$-106.14 \ kJ \ mol^{-1}$
B
$212.27 \ kJ \ mol^{-1}$
C
$-212.27 \ kJ \ mol^{-1}$
D
$106.14 \ kJ \ mol^{-1}$

Solution

(C) मानक गिब्स ऊर्जा परिवर्तन $\Delta G^{\circ}$ का सूत्र: $\Delta G^{\circ} = -nFE^{\circ}_{cell}$ है।
यहाँ,अभिक्रिया में स्थानांतरित इलेक्ट्रॉनों की संख्या $n = 2$ है।
मानक इलेक्ट्रोड विभव $E^{\circ}_{cell} = 1.1 \ V$ है।
फैराडे नियतांक $F = 96487 \ C \ mol^{-1}$ है।
इन मानों को रखने पर: $\Delta G^{\circ} = -(2) \times (96487 \ C \ mol^{-1}) \times (1.1 \ V)$।
$\Delta G^{\circ} = -212271.4 \ J \ mol^{-1}$।
$kJ \ mol^{-1}$ में बदलने पर: $\Delta G^{\circ} = -212.27 \ kJ \ mol^{-1}$।
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एक इलेक्ट्रोकेमिकल सेल कब एक इलेक्ट्रोलाइटिक सेल के रूप में व्यवहार करता है?
A
$E_{ext} > E_{cell}$
B
$E_{cell} > E_{ext}$
C
$E_{cell} = 0$
D
$E_{cell} = E_{ext}$

Solution

(A) जब बाहरी विभव $(E_{ext})$ सेल विभव $(E_{cell})$ से कम होता है,तो एक इलेक्ट्रोकेमिकल सेल गैल्वेनिक सेल के रूप में कार्य करता है।
हालाँकि,जब सेल विभव $(E_{cell})$ से अधिक बाहरी विभव $(E_{ext})$ लगाया जाता है,तो धारा की दिशा उलट जाती है और सेल एक इलेक्ट्रोलाइटिक सेल के रूप में व्यवहार करता है,जहाँ बाहरी शक्ति स्रोत द्वारा गैर-स्वतःस्फूर्त अभिक्रियाएं संचालित होती हैं।
इसलिए,सही स्थिति $E_{ext} > E_{cell}$ है।
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निम्नलिखित में से कौन सा यौगिक आंखों के सीधे संपर्क में आने पर कॉर्निया को जला सकता है?
A
$CH_3Cl$
B
$CCl_4$
C
$CH_2Cl_2$
D
$CHCl_3$

Solution

(C) डाइक्लोरोमीथेन $(CH_2Cl_2)$ एक वाष्पशील तरल है जिसका उपयोग विलायक और पेंट रिमूवर के रूप में किया जाता है। जब यह आंखों के सीधे संपर्क में आता है,तो यह हल्की से मध्यम जलन पैदा कर सकता है और कॉर्निया को जला सकता है। इसलिए,सही यौगिक $CH_2Cl_2$ है।
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$S_{N}1$ अभिक्रिया के प्रति किस यौगिक की अभिक्रियाशीलता सबसे अधिक है?
A
$C_{6}H_{5}CH_{2}Br$
B
$C_{6}H_{5}CH(CH_{3})Br$
C
$C_{6}H_{5}CH(C_{6}H_{5})Br$
D
$C_{6}H_{5}C(CH_{3})(C_{6}H_{5})Br$

Solution

(D) $S_{N}1$ अभिक्रिया के प्रति एल्किल हैलाइड की अभिक्रियाशीलता लिविंग ग्रुप $(Br^-)$ के हटने के बाद बनने वाले कार्बोकेशन मध्यवर्ती की स्थिरता पर निर्भर करती है।
$1$. $C_{6}H_{5}CH_{2}^+$ (प्राथमिक बेंजिलिक कार्बोकेशन)
$2$. $C_{6}H_{5}CH^+(CH_{3})$ (द्वितीयक बेंजिलिक कार्बोकेशन)
$3$. $C_{6}H_{5}CH^+(C_{6}H_{5})$ (दो फेनिल रिंग वाला द्वितीयक बेंजिलिक कार्बोकेशन)
$4$. $C_{6}H_{5}C^+(CH_{3})(C_{6}H_{5})$ (दो फेनिल रिंग वाला तृतीयक बेंजिलिक कार्बोकेशन)
कार्बोकेशन की स्थिरता का क्रम $3^\circ > 2^\circ > 1^\circ$ होता है। इसके अलावा,दो फेनिल समूहों की उपस्थिति कार्बोकेशन को व्यापक अनुनाद (resonance) स्थिरता प्रदान करती है।
यौगिक $D$ दो फेनिल रिंग द्वारा स्थिर एक तृतीयक बेंजिलिक कार्बोकेशन बनाता है,जो इसे सबसे अधिक स्थिर बनाता है और इसलिए यह $S_{N}1$ के प्रति सबसे अधिक अभिक्रियाशील है।
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$ . . . . . . $ एलाइलिक हैलाइड नहीं है।
A
$2-$ब्रोमोसाइक्लोहेक्सिन
B
$3-$क्लोरोप्रोप$-1-$ईन
C
$3-$क्लोरोसाइक्लोहेक्सिन
D
$1-$क्लोरोब्यूट$-2-$ईन

Solution

(A) एलाइलिक हैलाइड वह यौगिक है जिसमें हैलोजन परमाणु द्वि-आबंध $(C=C)$ वाले कार्बन परमाणु के बगल वाले $sp^3$ संकरित कार्बन परमाणु से जुड़ा होता है।
$2-$ब्रोमोसाइक्लोहेक्सिन में,ब्रोमीन परमाणु सीधे द्वि-आबंध के कार्बन से जुड़ा है,जो $sp^2$ संकरित है। इसलिए यह एक विनाइलिक हैलाइड है,एलाइलिक हैलाइड नहीं।
$3-$क्लोरोप्रोप$-1-$ईन,$3-$क्लोरोसाइक्लोहेक्सिन और $1-$क्लोरोब्यूट$-2-$ईन में,हैलोजन द्वि-आबंध के बगल वाले $sp^3$ कार्बन से जुड़ा है,जो एलाइलिक हैलाइड की परिभाषा को पूरा करता है।
अतः,सही उत्तर $A$ है।
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स्वाट्र्स अभिक्रिया में किस अभिकर्मक का उपयोग नहीं किया जाता है?
A
$HF$
B
$SbF_3$
C
$AgF$
D
$CoF_2$

Solution

(A) स्वाट्र्स अभिक्रिया आल्काइल क्लोराइड या आल्काइल ब्रोमाइड को धात्विक फ्लोराइड की उपस्थिति में गर्म करके आल्काइल फ्लोराइड तैयार करने की एक विधि है।
सामान्य रूप से उपयोग किए जाने वाले धात्विक फ्लोराइड में $AgF$,$Hg_2F_2$,$CoF_2$ और $SbF_3$ शामिल हैं।
$HF$ (हाइड्रोजन फ्लोराइड) एक धात्विक फ्लोराइड नहीं है और इसका उपयोग स्वाट्र्स अभिक्रिया में अभिकर्मक के रूप में नहीं किया जाता है।
अतः,सही विकल्प $A$ है।
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$S_N1$ अभिक्रिया में निम्नलिखित यौगिकों की अभिक्रियाशीलता का क्रम ज्ञात कीजिए :
$(I)$ $CH_3-CH_2-CH(Br)-CH_3$
$(II)$ $(CH_3)_2CH-CH_2-Br$
$(III)$ $(CH_3)_3CBr$
A
$(III) < (II) < (I)$
B
$(II) < (I) < (III)$
C
$(I) < (II) < (III)$
D
$(III) < (I) < (II)$

Solution

(B) $S_N1$ अभिक्रिया में एल्किल हैलाइड की अभिक्रियाशीलता दर-निर्धारक चरण के दौरान बनने वाले कार्बधनायन मध्यवर्ती के स्थायित्व पर निर्भर करती है।
कार्बधनायन के स्थायित्व का क्रम: $3^{\circ} > 2^{\circ} > 1^{\circ}$ है।
दिए गए यौगिकों से बनने वाले कार्बधनायनों का विश्लेषण करते हैं:
$(I)$ $CH_3-CH_2-CH^+(CH_3)$ एक $2^{\circ}$ कार्बधनायन है।
$(II)$ $(CH_3)_2CH-CH_2^+$ एक $1^{\circ}$ कार्बधनायन है।
$(III)$ $(CH_3)_3C^+$ एक $3^{\circ}$ कार्बधनायन है।
चूंकि स्थायित्व का क्रम $(II) < (I) < (III)$ है,इसलिए $S_N1$ अभिक्रिया में अभिक्रियाशीलता का क्रम $(II) < (I) < (III)$ होगा।
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दिए गए विलयनों में से समान परिस्थितियों में किसका क्वथनांक सबसे अधिक है?
A
$1 \ m \ FeCl_3$
B
$1 \ m \ NaCl$
C
$1 \ m \ BaCl_2$
D
$1 \ m \ \text{urea}$

Solution

(A) क्वथनांक में उन्नयन एक अणुसंख्यक गुणधर्म है,जो वांट हॉफ गुणांक $(i)$ पर निर्भर करता है।
$\Delta T_b = i \times K_b \times m$.
दी गई मोललता $(m)$ और विलायक के लिए,$\Delta T_b$,$i$ के सीधे समानुपाती होता है।
- $1 \ m \ FeCl_3$ के लिए,$i = 4$ $(Fe^{3+} + 3Cl^-)$।
- $1 \ m \ NaCl$ के लिए,$i = 2$ $(Na^+ + Cl^-)$।
- $1 \ m \ BaCl_2$ के लिए,$i = 3$ $(Ba^{2+} + 2Cl^-)$।
- $1 \ m \ \text{urea}$ के लिए,$i = 1$ (अनपघट्य)।
चूंकि $FeCl_3$ का वांट हॉफ गुणांक $(i = 4)$ सबसे अधिक है,इसलिए इसका क्वथनांक सबसे अधिक होगा। सही विकल्प $A$ है।
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किस विलयन में तापमान बढ़ने पर विलेय की विलेयता घट जाती है?
A
जल में घुला हुआ इथेनॉल
B
जल में घुला हुआ ग्लूकोज
C
$Na-Hg$ अमलगम
D
जल में घुला हुआ क्लोरीन

Solution

(D) द्रवों में गैसों की विलेयता आमतौर पर तापमान बढ़ने के साथ घटती है क्योंकि द्रव में गैस का घुलना एक ऊष्माक्षेपी प्रक्रिया है। ला-शातेलिए के सिद्धांत के अनुसार,तापमान में वृद्धि साम्यावस्था को पीछे की दिशा में स्थानांतरित कर देती है,जिससे विलेयता कम हो जाती है। दिए गए विकल्पों में,$Chlorine$ एक गैस है,इसलिए तापमान बढ़ने पर जल में इसकी विलेयता घट जाती है।
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निम्नलिखित में से कौन सा मिश्रण एक आदर्श विलयन है?
A
$Acetone + Chloroform$
B
$Acetone + Ethanol$
C
$n-hexane + n-heptane$
D
$Phenol + Aniline$

Solution

(C) एक आदर्श विलयन वह है जो सांद्रता की पूरी सीमा पर राउल्ट के नियम का पालन करता है और मिश्रण पर आयतन या एन्थैल्पी में कोई परिवर्तन नहीं दिखाता है ($\Delta V_{mix} = 0$ और $\Delta H_{mix} = 0$)।
$n-hexane$ और $n-heptane$ संरचनात्मक रूप से समान हैं और समान अंतर-आणविक बल रखते हैं,जो एक आदर्श विलयन बनाते हैं।
$Acetone + Chloroform$ हाइड्रोजन बॉन्डिंग के कारण ऋणात्मक विचलन दिखाता है।
$Acetone + Ethanol$ और $Phenol + Aniline$ अंतर-आणविक अंतःक्रियाओं में परिवर्तन के कारण क्रमशः धनात्मक और ऋणात्मक विचलन दिखाते हैं।
अतः,सही विकल्प $C$ है।
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समान परिस्थितियों में,किन जलीय विलयनों का हिमांक समान होता है? (यूरिया का आणविक द्रव्यमान $= 60 \ u$ और ग्लूकोज $= 180 \ u$)
A
$100 \ g \ H_2O$ में $10 \ g$ यूरिया और $100 \ g \ H_2O$ में $5 \ g$ ग्लूकोज
B
$100 \ g \ H_2O$ में $6 \ g$ यूरिया और $100 \ g \ H_2O$ में $18 \ g$ ग्लूकोज
C
$100 \ g \ H_2O$ में $5 \ g$ यूरिया और $100 \ g \ H_2O$ में $10 \ g$ ग्लूकोज
D
$100 \ g \ H_2O$ में $10 \ g$ यूरिया और $100 \ g \ H_2O$ में $10 \ g$ ग्लूकोज

Solution

(B) हिमांक में अवनमन $\Delta T_f$ एक अणुसंख्यक गुणधर्म है,जो विलयन की मोललता $(m)$ पर निर्भर करता है। $\Delta T_f = K_f \times m$। हिमांक समान होने के लिए,दोनों विलयनों की मोललता समान होनी चाहिए।
मोललता $m = \frac{\text{विलेय के मोल}}{\text{विलायक का द्रव्यमान (kg में)}}$।
विकल्प $B$ के लिए:
यूरिया के मोल $= \frac{6 \ g}{60 \ g/mol} = 0.1 \ mol$।
ग्लूकोज के मोल $= \frac{18 \ g}{180 \ g/mol} = 0.1 \ mol$।
चूंकि विलायक का द्रव्यमान $(100 \ g \ H_2O)$ दोनों के लिए समान है और विलेय के मोलों की संख्या भी समान $(0.1 \ mol)$ है,इसलिए दोनों विलयनों की मोललता समान है।
अतः,उनका हिमांक समान होगा।
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$7.14 \times 10^{-3} \ g$ इथेन युक्त विलयन पर इथेन का आंशिक दाब $1 \ bar$ है। यदि विलयन में $5 \times 10^{-2} \ g$ इथेन है,तो गैस का आंशिक दाब क्या होगा ($bar$ में)? (समान तापमान पर)
A
$1$
B
$3$
C
$7$
D
$4$

Solution

(C) हेनरी के नियम के अनुसार,स्थिर तापमान पर विलायक के एक निश्चित आयतन में घुली हुई गैस का आंशिक दाब $(p)$ उसके द्रव्यमान $(m)$ के सीधे समानुपाती होता है: $p \propto m$ या $p = k \times m$।
दिया गया है: $p_1 = 1 \ bar$,$m_1 = 7.14 \times 10^{-3} \ g$।
हमें $p_2$ ज्ञात करना है जब $m_2 = 5 \times 10^{-2} \ g$ हो।
अनुपात का उपयोग करने पर: $\frac{p_2}{p_1} = \frac{m_2}{m_1}$।
$\frac{p_2}{1} = \frac{5 \times 10^{-2}}{7.14 \times 10^{-3}} = \frac{50 \times 10^{-3}}{7.14 \times 10^{-3}} \approx 7 \ bar$।
अतः,आंशिक दाब $7 \ bar$ होगा।
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$400 \ g$ के $25 \%$ विलयन और $600 \ g$ के $40 \%$ विलयन को मिलाकर एक विलयन प्राप्त किया जाता है। परिणामी विलयन की द्रव्यमान प्रतिशतता क्या है ($\%$ में)?
A
$55$
B
$50$
C
$34$
D
$35$

Solution

(C) प्रथम विलयन में विलेय का द्रव्यमान $= 400 \ g \times 0.25 = 100 \ g$.
द्वितीय विलयन में विलेय का द्रव्यमान $= 600 \ g \times 0.40 = 240 \ g$.
विलेय का कुल द्रव्यमान $= 100 \ g + 240 \ g = 340 \ g$.
परिणामी विलयन का कुल द्रव्यमान $= 400 \ g + 600 \ g = 1000 \ g$.
परिणामी विलयन की द्रव्यमान प्रतिशतता $= (\text{विलेय का कुल द्रव्यमान} / \text{विलयन का कुल द्रव्यमान}) \times 100 = (340 \ g / 1000 \ g) \times 100 = 34 \%$.
अतः,सही विकल्प $C$ है.
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अचार बनाने के लिए सांद्र नमक के घोल में रखी गई कच्ची आम सिकुड़ जाती है क्योंकि . . . . . . .
A
यह रिवर्स ऑस्मोसिस के कारण पानी प्राप्त करती है
B
यह रिवर्स ऑस्मोसिस के कारण पानी खो देती है
C
यह ऑस्मोसिस के कारण पानी प्राप्त करती है
D
यह ऑस्मोसिस के कारण पानी खो देती है

Solution

(D) जब कच्चे आम को सांद्र नमक के घोल में रखा जाता है,तो आम के बाहर नमक की सांद्रता आम की कोशिकाओं के अंदर मौजूद विलेय की सांद्रता से बहुत अधिक होती है।
यह एक सांद्रता प्रवणता बनाता है जहाँ पानी आम की अर्ध-पारगम्य कोशिका झिल्ली के माध्यम से कम विलेय सांद्रता (आम के अंदर) से उच्च विलेय सांद्रता (नमक का घोल) की ओर जाता है।
इस प्रक्रिया को ऑस्मोसिस (परासरण) कहा जाता है।
परिणामस्वरूप,आम पानी खो देता है और सिकुड़ जाता है।
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ChemistryEasyMCQGSEB · 2024
निम्नलिखित में से कौन सा एक आदर्श विलयन का उदाहरण है?
A
क्लोरोफॉर्म और एसीटोन
B
बेंजीन और टोल्यूनि
C
एथेनॉल और एसीटोन
D
जल और एथेनॉल

Solution

(B) एक आदर्श विलयन वह है जो सांद्रता की पूरी सीमा पर राउल्ट के नियम का पालन करता है और मिश्रण पर एन्थैल्पी $(\Delta H_{mix} = 0)$ या आयतन $(\Delta V_{mix} = 0)$ में कोई परिवर्तन नहीं दर्शाता है।
बेंजीन और टोल्यूनि एक आदर्श विलयन बनाते हैं क्योंकि बेंजीन-बेंजीन,टोल्यूनि-टोल्यूनि और बेंजीन-टोल्यूनि के बीच के अंतर-आणविक बल लगभग समान होते हैं।
क्लोरोफॉर्म और एसीटोन ऋणात्मक विचलन दिखाते हैं,जबकि एथेनॉल और एसीटोन,तथा जल और एथेनॉल राउल्ट के नियम से धनात्मक विचलन दिखाते हैं।
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ChemistryEasyMCQGSEB · 2024
ग्लूकोज के $1 \ m$ (मोलल) जलीय विलयन के लिए निम्नलिखित में से कौन सा सही है?
A
$\Delta T_{b} \neq K_{b}$
B
$\Delta T_{b} < K_{b}$
C
$\Delta T_{b} > K_{b}$
D
$\Delta T_{b} = K_{b}$

Solution

(D) क्वथनांक में उन्नयन का सूत्र है: $\Delta T_{b} = i \times K_{b} \times m$।
ग्लूकोज के लिए,जो एक अन-अपघट्य (non-electrolyte) है,वांट हॉफ कारक $(i)$ $1$ होता है।
मोललता $(m)$ $1 \ m$ दी गई है,इसलिए समीकरण में मान रखने पर:
$\Delta T_{b} = 1 \times K_{b} \times 1 = K_{b}$।
अतः,$\Delta T_{b} = K_{b}$।
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ChemistryEasyMCQGSEB · 2024
यदि $22 \ g$ बेंजीन $(C_6H_6)$ को $122 \ g$ कार्बन टेट्राक्लोराइड $(CCl_4)$ में घोला जाता है,तो बेंजीन की द्रव्यमान प्रतिशतता की गणना कीजिए। ($\%$ में)
A
$84.72$
B
$18.03$
C
$15.28$
D
$28.20$

Solution

(C) विलेय की द्रव्यमान प्रतिशतता की गणना इस सूत्र का उपयोग करके की जाती है: $\text{द्रव्यमान प्रतिशत} = \frac{\text{विलेय का द्रव्यमान}}{\text{विलेय का द्रव्यमान} + \text{विलायक का द्रव्यमान}} \times 100$.
दिया गया है: $\text{बेंजीन (विलेय) का द्रव्यमान} = 22 \ g$.
$\text{कार्बन टेट्राक्लोराइड (विलायक) का द्रव्यमान} = 122 \ g$.
$\text{विलयन का कुल द्रव्यमान} = 22 \ g + 122 \ g = 144 \ g$.
$\text{बेंजीन की द्रव्यमान प्रतिशतता} = \frac{22}{144} \times 100 = 15.277 \% \approx 15.28 \%$.
अतः,सही विकल्प $C$ है।
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ChemistryEasyMCQGSEB · 2024
इनमें से कौन सा ठोस विलयन का एक उदाहरण है?
A
सोने में घुला हुआ तांबा
B
पानी में घुला हुआ ग्लूकोज
C
नाइट्रोजन गैस में कपूर
D
पानी में घुला हुआ इथेनॉल

Solution

(A) ठोस विलयन वह विलयन है जिसमें विलेय और विलायक दोनों ठोस अवस्था में होते हैं।
$A$ सोने में घुला हुआ तांबा ठोस विलयन (मिश्र धातु) का एक उदाहरण है,जहाँ दोनों घटक ठोस हैं।
$B$ पानी में घुला हुआ ग्लूकोज ठोस-द्रव विलयन है।
$C$ नाइट्रोजन गैस में कपूर ठोस-गैस विलयन है।
$D$ पानी में घुला हुआ इथेनॉल द्रव-द्रव विलयन है।
अतः,सही उत्तर $A$ है।

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