AIIMS 2002 Chemistry Question Paper with Answer and Solution in Hindi

62 QuestionsHindiWith Solutions

ChemistryQ162 of 62 questions

Page 1 of 1 · Hindi

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ChemistryMCQAIIMS · 2002
यदि $250 \ N$ भार वाली एक सीढ़ी को एक चिकनी ऊर्ध्वाधर दीवार के सहारे रखा गया है और सीढ़ी तथा फर्श के बीच घर्षण गुणांक $0.3$ है,तो सीढ़ी और फर्श के बीच संपर्क बिंदु पर उपलब्ध अधिकतम घर्षण बल कितना होगा?
A
$75$
B
$50$
C
$35$
D
$25$

Solution

(A) सीढ़ी को एक चिकनी ऊर्ध्वाधर दीवार के सहारे रखा गया है,जिसका अर्थ है कि दीवार के संपर्क बिंदु पर कोई घर्षण नहीं है।
सीढ़ी का भार ऊर्ध्वाधर नीचे की ओर कार्य करता है,$W = 250 \ N$।
फर्श द्वारा सीढ़ी पर लगाया गया अभिलंब प्रतिक्रिया बल $R$ ऊर्ध्वाधर दिशा में सीढ़ी के भार को संतुलित करता है।
इसलिए,$R = W = 250 \ N$।
सीढ़ी और फर्श के बीच संपर्क बिंदु पर उपलब्ध अधिकतम स्थैतिक घर्षण बल $f_{max}$ सूत्र $f_{max} = \mu R$ द्वारा दिया जाता है,जहाँ $\mu$ घर्षण गुणांक है।
दिया गया है कि $\mu = 0.3$ और $R = 250 \ N$,इसलिए:
$f_{max} = 0.3 \times 250 \ N = 75 \ N$।
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ChemistryMCQAIIMS · 2002
$10^{-10} \ m$ की तरंगदैर्ध्य वाले एक इलेक्ट्रॉन की गति ........... $\times 10^6 \ m/s$ है।
A
$7.25$
B
$6.26$
C
$5.25$
D
$4.24$

Solution

(A) डी ब्रोग्ली तरंगदैर्ध्य $\lambda$ का सूत्र $\lambda = \frac{h}{p} = \frac{h}{mv}$ है।
वेग $v$ के लिए पुनर्व्यवस्थित करने पर,$v = \frac{h}{m\lambda}$ प्राप्त होता है।
मान रखने पर: $h = 6.63 \times 10^{-34} \ J \cdot s$,$m = 9.11 \times 10^{-31} \ kg$,और $\lambda = 10^{-10} \ m$.
$v = \frac{6.63 \times 10^{-34}}{(9.11 \times 10^{-31}) \times (10^{-10})} = \frac{6.63}{9.11} \times 10^{7} \ m/s \approx 0.727 \times 10^{7} \ m/s = 7.27 \times 10^6 \ m/s$.
दिए गए विकल्पों के अनुसार निकटतम मान $7.25 \times 10^6 \ m/s$ है।
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ChemistryMediumMCQAIIMS · 2002
एक यौगिक में द्रव्यमान के अनुसार $8\%$ सल्फर है। इसका न्यूनतम आणविक द्रव्यमान है
A
$200$
B
$400$
C
$155$
D
$355$

Solution

(B) सल्फर का परमाणु द्रव्यमान $32 \ g/mol$ है।
यह दिया गया है कि यौगिक में द्रव्यमान के अनुसार $8\%$ सल्फर है,जिसका अर्थ है कि $100 \ g$ यौगिक में $8 \ g$ सल्फर मौजूद है।
न्यूनतम आणविक द्रव्यमान ज्ञात करने के लिए,हम मानते हैं कि अणु में कम से कम एक सल्फर परमाणु है।
इसलिए,$1 \ g$ सल्फर $\frac{100}{8} \ g$ यौगिक में मौजूद होगा।
$32 \ g$ सल्फर (एक मोल परमाणु) के लिए,यौगिक का द्रव्यमान $\frac{100}{8} \times 32 = 400 \ g/mol$ होगा।
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ChemistryEasyMCQAIIMS · 2002
दिगंशीय (Azimuthal) क्वांटम संख्या क्या परिभाषित करती है?
A
इलेक्ट्रॉन का $e/m$ अनुपात
B
इलेक्ट्रॉन का चक्रण (Spin)
C
इलेक्ट्रॉन का कोणीय संवेग (Angular momentum)
D
इलेक्ट्रॉन का चुंबकीय आघूर्ण

Solution

(C) दिगंशीय क्वांटम संख्या $(l)$ कक्षक की आकृति और किसी दिए गए कक्षक में इलेक्ट्रॉन के कोणीय संवेग को निर्धारित करती है। कोणीय संवेग का परिमाण $\sqrt{l(l+1)} \frac{h}{2\pi}$ सूत्र द्वारा दिया जाता है।
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ChemistryEasyMCQAIIMS · 2002
एक परमाणु की क्वांटम संख्याओं को किसके आधार पर परिभाषित किया जा सकता है?
A
हुंड का नियम
B
आउफबाऊ का सिद्धांत
C
पाउली का अपवर्जन सिद्धांत
D
हाइजेनबर्ग का अनिश्चितता सिद्धांत

Solution

(C) क्वांटम संख्याएँ हाइड्रोजन परमाणु के लिए $Schr\ddot{o}dinger$ तरंग समीकरण के समाधान से प्राप्त की जाती हैं। ये संख्याएँ कक्षकों के आकार,आकृति और अभिविन्यास के साथ-साथ इलेक्ट्रॉनों के चक्रण (spin) का वर्णन करती हैं। यद्यपि विकल्पों में सूचीबद्ध सिद्धांत (हुंड का नियम,आउफबाऊ का सिद्धांत,पाउली का अपवर्जन सिद्धांत) कक्षकों में इलेक्ट्रॉनों के भरने को नियंत्रित करते हैं,लेकिन क्वांटम संख्याएँ स्वयं तरंग समीकरण के मौलिक गणितीय समाधान हैं,जो परमाणु के क्वांटम यांत्रिक मॉडल के अनुरूप हैं।
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ChemistryMediumMCQAIIMS · 2002
निम्नलिखित में से किस इलेक्ट्रॉनिक विन्यास की ऊर्जा अधिकतम है?
A
Option A
B
Option B
C
Option C
D
Option D

Solution

(B) इलेक्ट्रॉनिक विन्यास की ऊर्जा कक्षकों में मौजूद सभी इलेक्ट्रॉनों की ऊर्जा के योग द्वारा निर्धारित की जाती है।
दिए गए मुख्य क्वांटम संख्या $n=3$ के लिए,कक्षकों की ऊर्जा का क्रम $3s < 3p < 3d$ होता है।
अधिकतम ऊर्जा वाले विन्यास को खोजने के लिए,हम उच्च ऊर्जा वाले कक्षकों ($3p$ और $3d$) में इलेक्ट्रॉनों की कुल संख्या की तुलना करते हैं।
विकल्प $A$: $3s$ में $2$ इलेक्ट्रॉन,$3p$ में $2$,$3d$ में $0$। $3p+3d$ में कुल इलेक्ट्रॉन = $2$।
विकल्प $B$: $3s$ में $2$ इलेक्ट्रॉन,$3p$ में $3$,$3d$ में $2$। $3p+3d$ में कुल इलेक्ट्रॉन = $5$।
विकल्प $C$: $3s$ में $2$ इलेक्ट्रॉन,$3p$ में $3$,$3d$ में $1$। $3p+3d$ में कुल इलेक्ट्रॉन = $4$।
विकल्प $D$: $3s$ में $2$ इलेक्ट्रॉन,$3p$ में $3$,$3d$ में $1$। $3p+3d$ में कुल इलेक्ट्रॉन = $4$।
उच्च ऊर्जा वाले कक्षकों में इलेक्ट्रॉनों की कुल संख्या की तुलना करने पर,विकल्प $B$ में $3p$ और $3d$ कक्षकों में सबसे अधिक इलेक्ट्रॉन हैं,इसलिए यह अधिकतम ऊर्जा वाली स्थिति को दर्शाता है।
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ChemistryEasyMCQAIIMS · 2002
निम्नलिखित में से किस अणु की बंध ऊर्जा सबसे अधिक है?
A
$F_2$
B
$C_2$
C
$N_2$
D
$O_2$

Solution

(C) बंध ऊर्जा बंध कोटि (bond order) पर निर्भर करती है।
$N_2$ में त्रि-बंध $(N \equiv N)$ होता है जिसकी बंध कोटि $3$ है।
$O_2$ में द्वि-बंध $(O=O)$ होता है जिसकी बंध कोटि $2$ है।
$F_2$ में एकल बंध $(F-F)$ होता है जिसकी बंध कोटि $1$ है।
$C_2$ की बंध कोटि $2$ है।
चूंकि बंध ऊर्जा बंध कोटि के सीधे समानुपाती होती है,इसलिए $N_2$ की बंध ऊर्जा सबसे अधिक है।
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ChemistryMediumMCQAIIMS · 2002
निम्नलिखित में से किसका द्विध्रुव आघूर्ण (dipole moment) सबसे अधिक है?
A
$H_2C=O$
B
$CH_3-CH=CH-CH_3$ (trans)
C
$(CH_3)_2C=CH_2$
D
$CH_3-C(Cl)=C(Cl)-CH_3$ (trans)

Solution

(A) $H_2C=O$ (फॉर्मेल्डिहाइड) में अत्यधिक ध्रुवीय $C=O$ बंध की उपस्थिति के कारण इसका द्विध्रुव आघूर्ण सबसे अधिक होता है।
ऑक्सीजन कार्बन की तुलना में काफी अधिक विद्युत ऋणात्मक है,जिससे एक बड़ा बंध द्विध्रुव बनता है।
ट्रांस-आइसोमर्स जैसे ट्रांस-ब्यूट$-2-$ईन और ट्रांस$-2,3-$डाइक्लोरो$-2-$ब्यूटीन में,आणविक समरूपता के कारण बंध द्विध्रुव एक-दूसरे को रद्द कर देते हैं,जिसके परिणामस्वरूप शुद्ध द्विध्रुव आघूर्ण शून्य हो जाता है।
$2$-मिथाइलप्रोपीन का द्विध्रुव आघूर्ण कम होता है,लेकिन यह फॉर्मेल्डिहाइड की तुलना में बहुत कम है।
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ChemistryMediumMCQAIIMS · 2002
निम्नलिखित में से कौन सी अणुओं की व्यवस्था उनके द्विध्रुव आघूर्ण (dipole moments) के आधार पर सही है?
A
$BF_3 < NF_3 < NH_3$
B
$BF_3 < NH_3 < NF_3$
C
$NF_3 < BF_3 < NH_3$
D
$NH_3 < NF_3 < BF_3$

Solution

(A) $BF_3$ की संरचना त्रिकोणीय समतलीय होती है,जिससे यह $0 \ D$ के द्विध्रुव आघूर्ण के साथ अध्रुवीय होता है।
$NH_3$ में,एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म (lone pair) का कक्षीय द्विध्रुव और $N-H$ बंधों के द्विध्रुव एक ही दिशा में होते हैं,जिसके परिणामस्वरूप $1.47 \ D$ का बड़ा द्विध्रुव आघूर्ण प्राप्त होता है।
$NF_3$ में,एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म का कक्षीय द्विध्रुव और $N-F$ बंधों के द्विध्रुव विपरीत दिशाओं में होते हैं,जिससे $0.24 \ D$ का छोटा द्विध्रुव आघूर्ण प्राप्त होता है।
अतः,द्विध्रुव आघूर्ण का सही बढ़ता क्रम $BF_3 < NF_3 < NH_3$ है।
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ChemistryMediumMCQAIIMS · 2002
$80\,^{\circ}C$ पर,आसुत जल में $[H_3O^{+}]$ सांद्रता $1 \times 10^{-6} \, mol/L$ है। इस तापमान पर $K_w$ का मान क्या होगा?
A
$1 \times 10^{-6}$
B
$1 \times 10^{-9}$
C
$1 \times 10^{-12}$
D
$1 \times 10^{-15}$

Solution

(C) आसुत जल में,स्वतः-आयनीकरण अभिक्रिया $2H_2O(l) \rightleftharpoons H_3O^{+}(aq) + OH^{-}(aq)$ होती है।
चूंकि जल उदासीन है,इसलिए हाइड्रोनियम आयनों की सांद्रता हाइड्रॉक्साइड आयनों की सांद्रता के बराबर होती है: $[H_3O^{+}] = [OH^{-}] = 1 \times 10^{-6} \, mol/L.$
जल का आयनिक गुणनफल,$K_w,$ इस प्रकार परिभाषित है: $K_w = [H_3O^{+}][OH^{-}].$
दिए गए मानों को रखने पर: $K_w = (1 \times 10^{-6}) \times (1 \times 10^{-6}) = 1 \times 10^{-12}.$
अतः,सही विकल्प $C$ है।
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ChemistryMediumMCQAIIMS · 2002
$25 \ ^\circ C$ पर $CuBr$ की विलेयता $2 \times 10^{-4} \ mol/L$ है। $CuBr$ के लिए $K_{sp}$ का मान क्या होगा?
A
$4 \times 10^{-8} \ mol^2 \ L^{-2}$
B
$4 \times 10^{-11} \ mol^2 \ L^{-2}$
C
$4 \times 10^{-4} \ mol^2 \ L^{-2}$
D
$4 \times 10^{-15} \ mol^2 \ L^{-2}$

Solution

(A) $CuBr$ का वियोजन इस प्रकार है: $CuBr(s) \rightleftharpoons Cu^{+}(aq) + Br^{-}(aq)$
माना $CuBr$ की विलेयता $S \ mol/L$ है।
अतः,$[Cu^{+}] = S$ और $[Br^{-}] = S$ होगा।
विलेयता गुणनफल स्थिरांक $K_{sp}$ का सूत्र: $K_{sp} = [Cu^{+}][Br^{-}] = S \times S = S^2$.
यहाँ $S = 2 \times 10^{-4} \ mol/L$ दिया गया है,इसलिए:
$K_{sp} = (2 \times 10^{-4})^2 = 4 \times 10^{-8} \ mol^2 \ L^{-2}$.
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ChemistryMediumMCQAIIMS · 2002
$25\,^oC$ पर $0.10\,M$ सोडियम एसीटेट और $0.03\,M$ एसिटिक एसिड युक्त विलयन का $pH$ क्या होगा? ($CH_3COOH$ के लिए $pK_a = 4.57$)
A
$4.09$
B
$5.09$
C
$6.10$
D
$7.09$

Solution

(B) यह विलयन एक बफर विलयन है जिसमें एक दुर्बल अम्ल $(CH_3COOH)$ और प्रबल क्षार के साथ उसका लवण $(CH_3COONa)$ उपस्थित है।
हम हेंडरसन-हैसेलबैक समीकरण का उपयोग करते हैं: $pH = pK_a + \log \frac{[salt]}{[acid]}$.
दिया गया है: $pK_a = 4.57$,$[salt] = 0.10\,M$,$[acid] = 0.03\,M$.
मान रखने पर: $pH = 4.57 + \log \frac{0.10}{0.03} = 4.57 + \log(3.33)$.
चूंकि $\log(3.33) \approx 0.52$,इसलिए $pH = 4.57 + 0.52 = 5.09$ प्राप्त होता है।
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ChemistryMediumMCQAIIMS · 2002
एक प्रबल अम्ल और एक प्रबल क्षार की उदासीनीकरण ऊष्मा $57.0 \, kJ \, mol^{-1}$ है। जब $0.5 \, mole$ $HNO_3$ के विलयन को $0.2 \, mole$ $KOH$ के साथ मिलाया जाता है,तो मुक्त हुई ऊष्मा $...... \, kJ$ है।
A
$57$
B
$11.4$
C
$28.5$
D
$34.9$

Solution

(B) प्रबल अम्ल $(HNO_3)$ और प्रबल क्षार $(KOH)$ के बीच की अभिक्रिया इस प्रकार है: $H^+ + OH^- \rightarrow H_2O$,$\Delta H = -57.0 \, kJ \, mol^{-1}$.
चूंकि $0.2 \, mole$ $KOH$ सीमाकारी अभिकर्मक है,यह $0.2 \, mole$ $HNO_3$ के साथ अभिक्रिया करके $0.2 \, mole$ $H_2O$ बनाएगा।
मुक्त हुई ऊष्मा की गणना: $\text{Heat} = \Delta H \times \text{moles of water formed} = 57.0 \, kJ \, mol^{-1} \times 0.2 \, mol = 11.4 \, kJ$.
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ChemistryEasyMCQAIIMS · 2002
$Fe_3O_4$ में $Fe$ की ऑक्सीकरण अवस्था क्या है?
A
$\frac{3}{2}$
B
$\frac{4}{5}$
C
$\frac{5}{4}$
D
$\frac{8}{3}$

Solution

(D) माना $Fe$ की औसत ऑक्सीकरण अवस्था $x$ है।
$Fe_3O_4$ में,ऑक्सीजन की ऑक्सीकरण अवस्था $-2$ है।
एक उदासीन अणु में सभी परमाणुओं की ऑक्सीकरण अवस्थाओं का योग $0$ होता है।
$3x + 4(-2) = 0$
$3x - 8 = 0$
$3x = 8$
$x = \frac{8}{3}$
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ChemistryMediumMCQAIIMS · 2002
$Li^{2+}$ का स्पेक्ट्रम किसके समान है?
A
$H$
B
$He$
C
$Be$
D
$Ne$

Solution

(A) $Li$ का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास $1s^2 \, 2s^1$ है,इसलिए $Li^{2+}$ का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास $1s^1$ होता है।
बोर का मॉडल और परिणामी स्पेक्ट्रम हाइड्रोजन-समान प्रजातियों पर लागू होते हैं,जिनमें केवल एक इलेक्ट्रॉन होता है।
चूंकि $Li^{2+}$ में केवल एक इलेक्ट्रॉन है,इसलिए इसका स्पेक्ट्रम हाइड्रोजन परमाणु $(H)$ के समान है,जिसका विन्यास भी $1s^1$ है।
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ChemistryEasyMCQAIIMS · 2002
निम्नलिखित में से कौन सी अभिक्रिया हाइड्रोजन उत्पन्न करती है?
A
$Mg + 2H_2O \to Mg(OH)_2 + H_2$
B
$BaO_2 + 2HCl \to BaCl_2 + H_2O_2$
C
$H_2S_2O_8 + 2H_2O \to 2H_2SO_4 + H_2O_2$
D
$Na_2O_2 + 2HCl \to 2NaCl + H_2O_2$

Solution

(A) मैग्नीशियम $(Mg)$ की जल $(H_2O)$ के साथ अभिक्रिया से मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड $(Mg(OH)_2)$ और हाइड्रोजन गैस $(H_2)$ उत्पन्न होती है:
$Mg + 2H_2O \to Mg(OH)_2 + H_2 \uparrow$
अन्य दी गई अभिक्रियाओं में हाइड्रोजन गैस के स्थान पर हाइड्रोजन पेरोक्साइड $(H_2O_2)$ उत्पन्न होता है।
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ChemistryMediumMCQAIIMS · 2002
$CH_3-CH(CH_3)-CH_2-CH(CN)-CH_3$ का $IUPAC$ नाम क्या है?
A
$2-$साइनो$-4-$मिथाइलपेंटेन
B
$4-$मिथाइल$-2-$हेक्सेननाइट्राइल
C
$2-$साइनो$-4-$मिथाइलहेक्सेन
D
$3-$मिथाइल$-5-$हेक्सेननाइट्राइल

Solution

(B) $1$. क्रियात्मक समूह (नाइट्राइल समूह) युक्त सबसे लंबी कार्बन श्रृंखला की पहचान करें। श्रृंखला में $6$ कार्बन हैं,इसलिए मूल एल्केन हेक्सेन है।
$2$. नाइट्राइल कार्बन से $C-1$ के रूप में अंकन शुरू करें।
$3$. नाइट्राइल समूह $C-1$ पर है,इसलिए प्रत्यय $nitrile$ होगा।
$4$. $4$थे कार्बन पर एक मिथाइल समूह है।
$5$. सही $IUPAC$ नाम $4-$मिथाइलहेक्सेननाइट्राइल है।
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ChemistryMediumMCQAIIMS · 2002
$pent-4-en-1-yne$ में उपस्थित $\sigma$ और $\pi$ आबंधों की संख्या है
A
$10, 3$
B
$3, 10$
C
$4, 9$
D
$9, 4$

Solution

(A) $pent-4-en-1-yne$ की संरचना $HC \equiv C-CH_2-CH=CH_2$ है।
$\sigma$ आबंधों की संख्या = $4$ ($C-C$ आबंध) + $6$ ($C-H$ आबंध) = $10$.
$\pi$ आबंधों की संख्या = $2$ ($C \equiv C$ से) + $1$ ($C=C$ से) = $3$.
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ChemistryDifficultMCQAIIMS · 2002
निम्नलिखित में से कौन सा एक कायरल (chiral) यौगिक है?
A
हेक्सेन
B
मीथेन
C
$n-$ब्यूटेन
D
$2,3,4-$ट्राइमिथाइल हेक्सेन

Solution

(D) एक कायरल यौगिक वह है जिसमें कम से कम एक कायरल कार्बन परमाणु (चार अलग-अलग समूहों से जुड़ा कार्बन परमाणु) होता है।
$2,3,4-$ट्राइमिथाइल हेक्सेन में,$3$ नंबर के स्थान पर स्थित कार्बन परमाणु एक हाइड्रोजन परमाणु,एक मिथाइल समूह,एक एथिल समूह और एक $sec-$ब्यूटाइल समूह से जुड़ा होता है।
चूंकि $C-3$ परमाणु से जुड़े चारों समूह अलग-अलग हैं,इसलिए यह एक कायरल केंद्र है।
अतः,$2,3,4-$ट्राइमिथाइल हेक्सेन एक कायरल यौगिक है।
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ChemistryDifficultMCQAIIMS · 2002
जब एसिटिलीन को $Hg^{2+}$ आयनों वाले तनु सल्फ्यूरिक एसिड में प्रवाहित किया जाता है,तो प्राप्त उत्पाद है
A
एसीटोन
B
एसिटिक एसिड
C
एसिटाल्डिहाइड
D
फॉर्मल्डिहाइड

Solution

(C) तनु $H_2SO_4$ और $Hg^{2+}$ आयनों की उपस्थिति में एसिटिलीन का जलयोजन इस प्रकार होता है:
$CH \equiv CH + H_2O \xrightarrow{H_2SO_4, Hg^{2+}} [CH_2 = CH - OH]$
यह मध्यवर्ती,विनाइल अल्कोहल,अस्थिर है और अधिक स्थिर कार्बोनिल यौगिक बनाने के लिए टॉटोमेरिज़ेशन (पुनर्विन्यास) से गुजरता है:
$[CH_2 = CH - OH] \rightarrow CH_3 - CHO$ (एसिटाल्डिहाइड)।
21
ChemistryMediumMCQAIIMS · 2002
निम्नलिखित में से किसमें $3d-$उपकोश में संयोजी इलेक्ट्रॉन नहीं होते हैं?
A
$Fe(III)$
B
$Mn(II)$
C
$Cr(I)$
D
$P(0)$

Solution

(D) $P(0)$: फास्फोरस एक $p-$ब्लॉक तत्व है (समूह $15$)। इसका संयोजी कोश $3$रा कोश $(3s^2 3p^3)$ है,और इसमें $3d-$उपकोश में कोई इलेक्ट्रॉन नहीं होता है।
$Fe(III)$: इसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास $[Ar] 3d^5$ है। इसमें $3d-$उपकोश में संयोजी इलेक्ट्रॉन होते हैं।
$Mn(II)$: इसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास $[Ar] 3d^5$ है। इसमें $3d-$उपकोश में संयोजी इलेक्ट्रॉन होते हैं।
$Cr(I)$: इसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास $[Ar] 3d^5$ है। इसमें $3d-$उपकोश में संयोजी इलेक्ट्रॉन होते हैं।
अतः,$P(0)$ सही उत्तर है।
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ChemistryMCQAIIMS · 2002
अपने आवास के भीतर एक प्रजाति की जनसंख्या की प्रचुरता को क्या कहा जाता है?
A
निक घनत्व
B
क्षेत्रीय घनत्व
C
सापेक्ष घनत्व
D
निरपेक्ष घनत्व

Solution

(D) किसी दिए गए आवास में प्रति इकाई क्षेत्र या आयतन में एक प्रजाति के व्यक्तियों की कुल संख्या को निरपेक्ष घनत्व (Absolute density) कहा जाता है। यह एक विशिष्ट क्षेत्र के भीतर जनसंख्या के आकार की वास्तविक गणना को दर्शाता है।
23
ChemistryMCQAIIMS · 2002
विनाशी व्यतिकरण के लिए पथ अंतर क्या है?
A
$n\lambda$
B
$n(\lambda + 1)$
C
$\frac{(n+1)\lambda}{2}$
D
$\frac{(2n+1)\lambda}{2}$

Solution

(D) विनाशी व्यतिकरण होने के लिए,दो तरंगों को एक बिंदु पर विपरीत कला में पहुँचना चाहिए।
यह तब होता है जब दो तरंगों के बीच का पथ अंतर तरंगदैर्ध्य के आधे का विषम गुणज होता है।
विनाशी व्यतिकरण के लिए शर्त पथ अंतर $\Delta x = (2n + 1) \frac{\lambda}{2}$ द्वारा दी जाती है,जहाँ $n = 0, 1, 2, 3, \dots$ है।
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ChemistryMCQAIIMS · 2002
चित्र में दिखाए अनुसार,एक समद्विबाहु त्रिभुज के शीर्षों $B$ और $C$ पर $+q$ और $-q$ आवेश रखे गए हैं। शीर्ष $A$ पर विभव क्या होगा?
Question diagram
A
$\frac{1}{4\pi \epsilon_0} \cdot \frac{2q}{\sqrt{a^2 + b^2}}$
B
शून्य
C
$\frac{1}{4\pi \epsilon_0} \cdot \frac{q}{\sqrt{a^2 + b^2}}$
D
$\frac{1}{4\pi \epsilon_0} \cdot \frac{-q}{\sqrt{a^2 + b^2}}$

Solution

(B) बिंदु आवेश $Q$ से $r$ दूरी पर स्थित किसी बिंदु पर विद्युत विभव $V = \frac{1}{4\pi \epsilon_0} \cdot \frac{Q}{r}$ सूत्र द्वारा दिया जाता है।
दिए गए समद्विबाहु त्रिभुज में,शीर्ष $A$ से शीर्ष $B$ की दूरी $a$ है और शीर्ष $A$ से शीर्ष $C$ की दूरी भी $a$ है (क्योंकि यह एक समद्विबाहु त्रिभुज है जिसमें $AB = AC = a$ है)।
$B$ पर स्थित $+q$ आवेश के कारण शीर्ष $A$ पर विभव $V_B = \frac{1}{4\pi \epsilon_0} \cdot \frac{+q}{a}$ है।
$C$ पर स्थित $-q$ आवेश के कारण शीर्ष $A$ पर विभव $V_C = \frac{1}{4\pi \epsilon_0} \cdot \frac{-q}{a}$ है।
शीर्ष $A$ पर कुल विभव व्यक्तिगत विभवों का बीजगणितीय योग है: $V_A = V_B + V_C = \frac{1}{4\pi \epsilon_0} \cdot \frac{q}{a} + \frac{1}{4\pi \epsilon_0} \cdot \frac{-q}{a} = 0$।
Solution diagram
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ChemistryMCQAIIMS · 2002
जब चुंबकीय फ्लक्स में $2 \times 10^{-2} \, Wb$ का परिवर्तन होता है और धारा में $0.01 \, A$ का परिवर्तन होता है,तो अन्योन्य प्रेरण गुणांक (coefficient of mutual inductance) क्या होगा?
A
$2$
B
$3$
C
$0.5$
D
$0$

Solution

(A) अन्योन्य प्रेरण में चुंबकीय फ्लक्स लिंकेज का सूत्र $\Delta \phi = M \Delta I$ द्वारा दिया जाता है,जहाँ $\Delta \phi$ चुंबकीय फ्लक्स में परिवर्तन है,$M$ अन्योन्य प्रेरण गुणांक है,और $\Delta I$ धारा में परिवर्तन है।
दिया गया है:
$\Delta \phi = 2 \times 10^{-2} \, Wb$
$\Delta I = 0.01 \, A = 10^{-2} \, A$
सूत्र में मान रखने पर:
$2 \times 10^{-2} = M \times 10^{-2}$
$M = \frac{2 \times 10^{-2}}{10^{-2}}$
$M = 2 \, H$
अतः,अन्योन्य प्रेरण गुणांक $2 \, H$ है।
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ChemistryMCQAIIMS · 2002
यदि $250\,N$ वजन वाली एक सीढ़ी को एक चिकनी ऊर्ध्वाधर दीवार के सहारे रखा जाता है और सीढ़ी तथा फर्श के बीच घर्षण गुणांक $0.3$ है,तो सीढ़ी और फर्श के बीच संपर्क बिंदु पर उपलब्ध अधिकतम घर्षण बल क्या है?
A
$75$
B
$50$
C
$35$
D
$25$

Solution

(A) अधिकतम घर्षण बल $(f_{max})$ का सूत्र $f_{max} = \mu N$ है,जहाँ $\mu$ घर्षण गुणांक है और $N$ अभिलंब प्रतिक्रिया बल (normal reaction force) है।
चूंकि सीढ़ी एक क्षैतिज फर्श पर है,इसलिए फर्श द्वारा सीढ़ी पर लगाया गया अभिलंब बल $N$,सीढ़ी के वजन $(W = 250\,N)$ के बराबर होता है।
यहाँ $\mu = 0.3$ और $N = 250\,N$ दिया गया है।
अतः,$f_{max} = 0.3 \times 250 = 75\,N$.
27
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कथन : परमाणुओं को न तो बनाया जा सकता है और न ही नष्ट किया जा सकता है।
कारण : तापमान और दबाव की समान परिस्थितियों में,गैसों के समान आयतन में परमाणुओं की संख्या समान नहीं होती है।
A
यदि कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण कथन की सही व्याख्या है।
B
यदि कथन और कारण दोनों सही हैं लेकिन कारण कथन की सही व्याख्या नहीं है।
C
यदि कथन सही है लेकिन कारण गलत है।
D
यदि कथन और कारण दोनों गलत हैं।

Solution

(D) कथन गलत है क्योंकि,नाभिकीय अभिक्रियाओं के अनुसार,परमाणुओं को बनाया या नष्ट किया जा सकता है (जैसे,नाभिकीय विखंडन या संलयन में)।
कारण भी गलत है क्योंकि,एवोगैड्रो के नियम के अनुसार,तापमान और दबाव की समान परिस्थितियों में सभी गैसों के समान आयतन में अणुओं की संख्या समान होती है,और परिणामस्वरूप,यदि गैसें एकपरमाणुक हैं तो परमाणुओं की संख्या भी समान होती है।
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कथन : हाइड्रोजन स्पेक्ट्रम की बामर श्रेणी के लिए,$n_1 = 2$ और $n_2 = 3, 4, 5...$ मान होता है।
कारण : हाइड्रोजन स्पेक्ट्रम की बामर श्रेणी में उच्चतम तरंगदैर्ध्य वाली रेखा के लिए $n$ का मान $4$ और $6$ होता है।
A
यदि कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण कथन की सही व्याख्या है।
B
यदि कथन और कारण दोनों सही हैं लेकिन कारण कथन की सही व्याख्या नहीं है।
C
यदि कथन सही है लेकिन कारण गलत है।
D
यदि कथन और कारण दोनों गलत हैं।

Solution

(C) बामर श्रेणी उन संक्रमणों के अनुरूप है जहाँ $n_1 = 2$ और $n_2 = 3, 4, 5, ...$ होता है। अतः,कथन सही है।
उच्चतम तरंगदैर्ध्य के लिए,स्तरों के बीच ऊर्जा का अंतर न्यूनतम होना चाहिए।
चूँकि $\Delta E = 13.6 \times Z^2 \times (\frac{1}{n_1^2} - \frac{1}{n_2^2}) \text{ eV}$ और $\lambda = \frac{hc}{\Delta E}$ है,बामर श्रेणी के लिए न्यूनतम ऊर्जा संक्रमण $n_2 = 3$ से $n_1 = 2$ है।
इसलिए,कारण गलत है क्योंकि उच्चतम तरंगदैर्ध्य $n_2 = 3$ से $n_1 = 2$ के संक्रमण के अनुरूप है,न कि $n = 4$ और $6$ के।
29
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कथन : अवशोषण स्पेक्ट्रम में गहरे स्थानों द्वारा अलग की गई कुछ चमकीली रेखाएँ होती हैं।
कारण : उत्सर्जन स्पेक्ट्रम में गहरी रेखाएँ होती हैं।
A
यदि कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण कथन की सही व्याख्या है।
B
यदि कथन और कारण दोनों सही हैं लेकिन कारण कथन की सही व्याख्या नहीं है।
C
यदि कथन सही है लेकिन कारण गलत है।
D
यदि कथन और कारण दोनों गलत हैं।

Solution

(D) कथन गलत है क्योंकि अवशोषण स्पेक्ट्रम में चमकीले स्थानों द्वारा अलग की गई गहरी रेखाएँ होती हैं,जो तब बनती हैं जब किसी पदार्थ द्वारा विशिष्ट तरंगदैर्घ्य का अवशोषण होता है।
कारण भी गलत है क्योंकि उत्सर्जन स्पेक्ट्रम में गहरे बैकग्राउंड पर चमकीली रेखाएँ होती हैं,जो उत्तेजित परमाणुओं या अणुओं द्वारा उत्सर्जित प्रकाश को दर्शाती हैं।
इसलिए,कथन और कारण दोनों गलत हैं।
30
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कथन : सिग्मा $(\sigma)$ एक मजबूत बंध है,जबकि पाई $(\pi)$ एक कमजोर बंध है।
कारण : परमाणु पाई $(\pi)$ बंध के चारों ओर स्वतंत्र रूप से घूम सकते हैं।
A
यदि कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण कथन की सही व्याख्या है।
B
यदि कथन और कारण दोनों सही हैं लेकिन कारण कथन की सही व्याख्या नहीं है।
C
यदि कथन सही है लेकिन कारण गलत है।
D
यदि कथन और कारण दोनों गलत हैं।

Solution

(C) कथन सही है क्योंकि सिग्मा $(\sigma)$ बंध परमाणु कक्षकों के अक्षीय अतिव्यापन द्वारा बनता है,जो पाई $(\pi)$ बंध बनाने वाले पार्श्व अतिव्यापन की तुलना में अधिक प्रभावी होता है। इसलिए,सिग्मा $(\sigma)$ बंध पाई $(\pi)$ बंध से अधिक मजबूत होता है।
कारण गलत है क्योंकि परमाणु पाई $(\pi)$ बंध के चारों ओर स्वतंत्र रूप से नहीं घूम सकते हैं। पाई $(\pi)$ बंध की उपस्थिति घूर्णन को प्रतिबंधित करती है,क्योंकि घूर्णन के लिए $p$-कक्षकों के पार्श्व अतिव्यापन को तोड़ना आवश्यक होगा।
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यदि $P$ दाब है और $\rho$ गैस का घनत्व है,तो $P$ और $\rho$ किस प्रकार संबंधित हैं?
A
$P \propto \rho$
B
$P \propto 1/\rho$
C
$P \propto \rho^2$
D
$P \propto 1/\rho^2$

Solution

(A) आदर्श गैस समीकरण के अनुसार,$PV = nRT = (m/M)RT$,जहाँ $m$ द्रव्यमान है और $M$ गैस का मोलर द्रव्यमान है।
समीकरण को पुनर्व्यवस्थित करने पर,हमें $P = (m/V) \times (RT/M)$ प्राप्त होता है।
चूंकि घनत्व $\rho = m/V$ है,हम इसे समीकरण में प्रतिस्थापित कर सकते हैं: $P = \rho \times (RT/M)$।
स्थिर तापमान $T$ पर,$R$ और $M$ स्थिरांक हैं,इसलिए $P \propto \rho$।
32
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अभिकथन : रुद्धोष्म (adiabatic) प्रक्रिया के दौरान,निकाय और उसके परिवेश के बीच ऊष्मा ऊर्जा का आदान-प्रदान नहीं होता है।
कारण : जब किसी गैस का रुद्धोष्म प्रसार होता है तो उसका तापमान बढ़ जाता है।
A
यदि अभिकथन और कारण दोनों सही हैं और कारण,अभिकथन की सही व्याख्या है।
B
यदि अभिकथन और कारण दोनों सही हैं लेकिन कारण,अभिकथन की सही व्याख्या नहीं है।
C
यदि अभिकथन सही है लेकिन कारण गलत है।
D
यदि अभिकथन और कारण दोनों गलत हैं।

Solution

(C) रुद्धोष्म प्रक्रिया को एक ऐसी प्रक्रिया के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसमें निकाय और परिवेश के बीच ऊष्मा का कोई आदान-प्रदान नहीं होता है,अर्थात $q = 0$। अतः,अभिकथन सही है।
रुद्धोष्म प्रसार के दौरान,निकाय अपनी आंतरिक ऊर्जा की कीमत पर परिवेश पर कार्य करता है। चूंकि $dU = dq + dw$ और $dq = 0$,इसलिए $dU = dw$ होता है। प्रसार के लिए,$dw < 0$,इसलिए $dU < 0$ होता है। आदर्श गैस के लिए आंतरिक ऊर्जा तापमान का फलन होती है,इसलिए आंतरिक ऊर्जा में कमी से तापमान में कमी आती है। अतः,कारण गलत है।
33
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कथन : द्रव्यमान और आयतन विस्तीर्ण (extensive) गुणधर्म हैं।
कारण : द्रव्यमान / आयतन भी एक विस्तीर्ण प्राचल है।
A
यदि कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण,कथन की सही व्याख्या है।
B
यदि कथन और कारण दोनों सही हैं लेकिन कारण,कथन की सही व्याख्या नहीं है।
C
यदि कथन सही है लेकिन कारण गलत है।
D
यदि कथन और कारण दोनों गलत हैं।

Solution

(C) निकाय के वे गुणधर्म जो उसमें निहित पदार्थ की मात्रा पर निर्भर करते हैं,विस्तीर्ण (extensive) गुणधर्म कहलाते हैं,जैसे द्रव्यमान,आयतन,ऊष्मा धारिता आदि।
हालाँकि,$\text{घनत्व} = \frac{\text{द्रव्यमान}}{\text{आयतन}}$।
घनत्व एक गहन (intensive) गुणधर्म है क्योंकि यह निकाय में पदार्थ की मात्रा पर निर्भर नहीं करता है।
अतः,कथन सही है,लेकिन कारण गलत है।
34
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कथन : पदार्थों की आंतरिक ऊर्जा के निरपेक्ष मान निर्धारित नहीं किए जा सकते हैं।
कारण : पदार्थों की घटक ऊर्जाओं के सटीक मान निर्धारित करना असंभव है।
A
यदि कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण,कथन की सही व्याख्या है।
B
यदि कथन और कारण दोनों सही हैं लेकिन कारण,कथन की सही व्याख्या नहीं है।
C
यदि कथन सही है लेकिन कारण गलत है।
D
यदि कथन और कारण दोनों गलत हैं।

Solution

(A) किसी पदार्थ की आंतरिक ऊर्जा प्रणाली में मौजूद सभी प्रकार की ऊर्जाओं का योग होती है,जैसे कि इलेक्ट्रॉनिक,परमाणु,कंपन और घूर्णन ऊर्जा।
चूंकि इन घटक ऊर्जाओं के सटीक मान निर्धारित करना असंभव है,इसलिए किसी पदार्थ की कुल आंतरिक ऊर्जा का निरपेक्ष मान निर्धारित नहीं किया जा सकता है।
अतः,कथन सही है और कारण इसकी सही व्याख्या प्रदान करता है।
35
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कथन : पोटेशियम और सीज़ियम का उपयोग फोटोइलेक्ट्रिक सेल में किया जाता है।
कारण : पोटेशियम और सीज़ियम प्रकाश के संपर्क में आने पर इलेक्ट्रॉनों का उत्सर्जन करते हैं।
A
यदि कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण कथन की सही व्याख्या है।
B
यदि कथन और कारण दोनों सही हैं लेकिन कारण कथन की सही व्याख्या नहीं है।
C
यदि कथन सही है लेकिन कारण गलत है।
D
यदि कथन और कारण दोनों गलत हैं।

Solution

(A) पोटेशियम $(K)$ और सीज़ियम $(Cs)$ बहुत कम आयनन एन्थैल्पी वाली क्षार धातुएं हैं।
इस कम आयनन एन्थैल्पी के कारण,वे प्रकाश के संपर्क में आने पर आसानी से इलेक्ट्रॉनों का उत्सर्जन कर सकते हैं (फोटोइलेक्ट्रिक प्रभाव)।
इस गुण के कारण,उनका उपयोग फोटोइलेक्ट्रिक सेल में व्यापक रूप से किया जाता है।
अतः,कारण कथन की सही व्याख्या है।
36
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कथन : स्टेनस क्लोराइड,मरक्यूरिक क्लोराइड के साथ धूसर (grey) अवक्षेप देता है,लेकिन स्टेनिक क्लोराइड ऐसा नहीं करता है।
कारण : स्टेनस क्लोराइड एक शक्तिशाली ऑक्सीकारक है जो मरक्यूरिक क्लोराइड को धात्विक मरकरी में ऑक्सीकृत कर देता है।
A
यदि कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण,कथन की सही व्याख्या है।
B
यदि कथन और कारण दोनों सही हैं लेकिन कारण,कथन की सही व्याख्या नहीं है।
C
यदि कथन सही है लेकिन कारण गलत है।
D
यदि कथन और कारण दोनों गलत हैं।

Solution

(C) $Sn^{2+}$ एक प्रबल अपचायक (reducing agent) है और यह $Sn^{4+}$ में ऑक्सीकृत हो जाता है।
मरक्यूरिक क्लोराइड $(HgCl_2)$ के साथ अभिक्रिया इस प्रकार होती है:
$2HgCl_2 + SnCl_2 \to Hg_2Cl_2 + SnCl_4$ (सफेद अवक्षेप)
$Hg_2Cl_2 + SnCl_2 \to 2Hg + SnCl_4$ (धात्विक मरकरी का धूसर अवक्षेप)
अतः,कथन सही है क्योंकि $SnCl_2$ एक अपचायक के रूप में कार्य करता है,न कि ऑक्सीकारक के रूप में। इसलिए,कारण गलत है।
37
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कथन: हीरा एक कुचालक है।
कारण: ग्रेफाइट एक सुचालक है।
A
यदि कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण,कथन की सही व्याख्या है।
B
यदि कथन और कारण दोनों सही हैं लेकिन कारण,कथन की सही व्याख्या नहीं है।
C
यदि कथन सही है लेकिन कारण गलत है।
D
यदि कथन और कारण दोनों गलत हैं।

Solution

(B) हीरा एक कुचालक है क्योंकि कार्बन के सभी $4$ संयोजी इलेक्ट्रॉन $sp^3$ सहसंयोजक बंध में शामिल होते हैं,जिससे कोई मुक्त इलेक्ट्रॉन नहीं बचता है।
ग्रेफाइट विद्युत का सुचालक है क्योंकि प्रत्येक कार्बन परमाणु $sp^2$ संकरित होता है,जिससे इसके जालक में प्रति कार्बन परमाणु एक मुक्त इलेक्ट्रॉन उपलब्ध रहता है।
कथन और कारण दोनों सही हैं,लेकिन यह तथ्य कि ग्रेफाइट एक सुचालक है,यह स्पष्ट नहीं करता कि हीरा कुचालक क्यों है। इसलिए,कारण,कथन की सही व्याख्या नहीं है।
38
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शुद्ध वंशक्रम (Pure line breed) का तात्पर्य है
A
केवल विषमयुग्मजता (Heterozygosity)
B
विषमयुग्मजता और सहलग्नता (Linkage)
C
केवल समयुग्मजता (Homozygosity)
D
समयुग्मजता और स्वतंत्र अपव्यूहन (Self assortment)

Solution

(C) शुद्ध वंशक्रम (Pure line) उन जीवों की आबादी को संदर्भित करता है जो आनुवंशिक रूप से समान होते हैं और वांछित लक्षणों के लिए समयुग्मजी (Homozygous) होते हैं।
जब निकट संबंधी जीवों का एक ही नस्ल के भीतर $4-6$ पीढ़ियों तक प्रजनन कराया जाता है,तो प्राप्त संतति में समयुग्मजता बढ़ जाती है।
यह प्रक्रिया,जिसे अंतःप्रजनन (Inbreeding) कहा जाता है,हानिकारक अप्रभावी एलील्स को समाप्त करके और वांछित लक्षणों को स्थिर करके एक शुद्ध वंशक्रम के विकास की ओर ले जाती है।
39
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लेड शॉट्स (lead shots) के निर्माण में किस गुण का उपयोग किया जाता है?
A
द्रव लेड का विशिष्ट गुरुत्व (Specific gravity)
B
द्रव लेड का विशिष्ट भार (Specific weight)
C
द्रव लेड की संपीड्यता (Compressibility)
D
द्रव लेड का पृष्ठ तनाव (Surface tension)

Solution

(D) सही उत्तर $(d)$ है।
लेड शॉट्स बनाने की प्रक्रिया में,पिघले हुए लेड को एक छलनी के माध्यम से ऊंचाई से गिराया जाता है। जैसे ही द्रव लेड नीचे गिरता है,यह बूंदों का रूप ले लेता है। पृष्ठ तनाव के गुण के कारण,द्रव की बूंद की मुक्त सतह हमेशा एक निश्चित आयतन के लिए अपने पृष्ठीय क्षेत्रफल को न्यूनतम करने का प्रयास करती है। चूंकि एक गोले का पृष्ठीय क्षेत्रफल एक निश्चित आयतन के लिए न्यूनतम होता है,इसलिए गिरती हुई बूंदें जमने से पहले स्वाभाविक रूप से गोलाकार आकार ले लेती हैं,जिसके परिणामस्वरूप गोलाकार लेड शॉट्स प्राप्त होते हैं।
40
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निम्नलिखित में से कौन सा यौगिक एक ट्राइबैसिक (क्षारकीय) अम्ल है?
A
$H_3PO_2$
B
$H_3PO_3$
C
$H_3PO_4$
D
$H_4P_2O_7$

Solution

(C) $H_3PO_4$ (ऑर्थोफॉस्फोरिक अम्ल) एक ट्राइबैसिक अम्ल है क्योंकि इसमें $P-OH$ समूहों के रूप में ऑक्सीजन परमाणुओं से जुड़े तीन प्रतिस्थापनीय हाइड्रोजन परमाणु होते हैं।
इसकी संरचना $O=P(OH)_3$ है।
41
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$He, Ne, Ar, Kr, Xe$ के लिए जल में घुलनशीलता का सही क्रम क्या है?
A
$He > Ne > Ar > Kr > Xe$
B
$Ne > Ar > Kr > He > Xe$
C
$Xe > Kr > Ar > Ne > He$
D
$Ar > Ne > He > Kr > Xe$

Solution

(C) जल में उत्कृष्ट गैसों की घुलनशीलता परमाणु आकार और ध्रुवीयता में वृद्धि के साथ बढ़ती है।
जैसे-जैसे हम समूह में $He$ से $Xe$ की ओर नीचे जाते हैं,परमाणु आकार बढ़ता है,जिससे गैस के अणुओं और जल के अणुओं के बीच वांडर वाल्स आकर्षण बल मजबूत हो जाता है।
इसलिए,घुलनशीलता का सही क्रम $Xe > Kr > Ar > Ne > He$ है।
42
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$AB_2$ प्रकार की संरचना किसमें पाई जाती है?
A
$NaCl$
B
$Al_2O_3$
C
$CaF_2$
D
$N_2O$

Solution

(C) $AB_2$ प्रकार की संरचना फ्लोराइट संरचना होती है,जो $CaF_2$ में पाई जाती है।
इस संरचना में,$Ca^{2+}$ धनायन फलक-केंद्रित घनीय $(FCC)$ जालक स्थलों पर स्थित होते हैं,जबकि $F^-$ ऋणायन सभी चतुष्फलकीय रिक्तियों में स्थित होते हैं।
इसका वियोजन इस प्रकार है: $CaF_2 \rightleftharpoons Ca^{2+} + 2F^-$.
43
ChemistryMediumMCQAIIMS · 2002
Schottky defect किसकी जालक संरचना में अपूर्णता को परिभाषित करता है?
A
ठोस
B
द्रव
C
गैस
D
प्लाज्मा

Solution

(A) $Schottky$ दोष एक प्रकार का बिंदु दोष है जो $solid$ (ठोस) क्रिस्टल जालक में होता है। यह तब उत्पन्न होता है जब विपरीत आवेशित आयन अपने जालक स्थलों को छोड़ देते हैं,जिससे विद्युत तटस्थता बनाए रखने के लिए रिक्तियां (vacancies) बन जाती हैं।
44
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$bcc$ संरचना वाले एक तत्व (परमाणु द्रव्यमान $100 \ g/mol$) के इकाई सेल की कोर $400 \ pm$ है। तो तत्व का घनत्व है ($g/cm^3$ में)
A
$10.376$
B
$5.188$
C
$7.289$
D
$2.144$

Solution

(B) $bcc$ संरचना के लिए, प्रति इकाई सेल परमाणुओं की संख्या $(n)$ = $2$ है。
दिया गया है: परमाणु द्रव्यमान $(M)$ = $100 \ g/mol$, कोर की लंबाई $(a)$ = $400 \ pm = 400 \times 10^{-10} \ cm$, आवोगाद्रो संख्या $(N_A)$ = $6.022 \times 10^{23} \ mol^{-1}$.
घनत्व $(\rho)$ का सूत्र: $\rho = \frac{n \times M}{a^3 \times N_A}$.
मान रखने पर: $\rho = \frac{2 \times 100}{(400 \times 10^{-10})^3 \times 6.022 \times 10^{23}}$.
$\rho = \frac{200}{64 \times 10^{-24} \times 6.022 \times 10^{23}} = \frac{200}{38.54} \approx 5.189 \ g/cm^3$.
अतः, सही विकल्प $(B)$ है।
45
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सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में होने वाली अभिक्रिया के लिए,अभिक्रिया की कोटि क्या है?
$H_2 + Cl_2 \xrightarrow{\text{Sunlight}} 2HCl$
A
$1$
B
$2$
C
$3$
D
$0$

Solution

(D) . इस प्रकाश-रासायनिक (photochemical) अभिक्रिया की दर अभिकारकों की सांद्रता पर निर्भर नहीं करती है।
अतः,यह शून्य कोटि की अभिक्रिया है।
46
ChemistryMediumMCQAIIMS · 2002
दो साइटों वाले एंजाइमों को क्या कहा जाता है?
A
एपोएंजाइम
B
होलोएंजाइम
C
एलोस्टेरिक एंजाइम
D
संयुग्मी एंजाइम

Solution

(C) दो अलग-अलग साइटों वाले एंजाइमों को $allosteric \ enzymes$ कहा जाता है।
ये दो साइटें $active \ site$ और $allosteric \ site$ होती हैं।
$active \ site$ वह स्थान है जहाँ सबस्ट्रेट जुड़कर उत्प्रेरक अभिक्रिया करता है।
$allosteric \ site$ एंजाइम का एक विशिष्ट भाग है जहाँ एक इफ़ेक्टर या मॉड्यूलेटर अणु जुड़ सकता है।
यह बंधन प्रतिवर्ती होता है और एंजाइम की गतिविधि को नियंत्रित करता है।
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ChemistryDifficultMCQAIIMS · 2002
कोलाइडल कणों का आकार कितना होता है?
A
$10^{-9} \ m$ से $10^{-7} \ m$
B
$10^{-9} \ m$ से $10^{-17} \ m$
C
$10^{-5} \ m$ से $10^{-7} \ m$
D
$10^{-4} \ m$ से $10^{-10} \ m$

Solution

(A) कोलाइडल कणों का आकार वास्तविक विलयन और निलंबन के बीच का होता है।
कोलाइड्स के लिए कणों के आकार की सीमा आमतौर पर $1 \ nm$ से $1000 \ nm$ होती है।
मीटर में बदलने पर: $1 \ nm = 10^{-9} \ m$ और $1000 \ nm = 10^{-6} \ m$।
दिए गए विकल्पों में से,$10^{-9} \ m$ से $10^{-7} \ m$ की सीमा कोलाइडल सीमा को दर्शाती है।
अतः,सही विकल्प $A$ है।
48
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निम्नलिखित में से कौन सा अयस्क लोहे का अयस्क नहीं है?
A
हेमेटाइट
B
मैग्नेटाइट
C
कैसिटेराइट
D
लिमोनाइट

Solution

(C) दिए गए अयस्कों के रासायनिक सूत्र इस प्रकार हैं:
$1$. हेमेटाइट: $Fe_2O_3$ (लोहे का अयस्क)
$2$. मैग्नेटाइट: $Fe_3O_4$ (लोहे का अयस्क)
$3$. कैसिटेराइट: $SnO_2$ (टिन का अयस्क)
$4$. लिमोनाइट: $Fe_2O_3 \cdot 3H_2O$ (लोहे का अयस्क)
अतः,कैसिटेराइट वह अयस्क है जो लोहे का अयस्क नहीं है।
49
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निम्नलिखित अभिक्रिया को क्या कहा जाता है?
$C_2H_5OH + SOCl_2 \xrightarrow{\text{Pyridine}} C_2H_5Cl + SO_2 + HCl$
A
खराश प्रभाव
B
डार्ज़न्स प्रक्रिया
C
विलियमसन संश्लेषण
D
हंसडीकर संश्लेषण अभिक्रिया

Solution

(B) पिरिडीन की उपस्थिति में अल्कोहल की थायोनिल क्लोराइड $(SOCl_2)$ के साथ अभिक्रिया एल्काइल क्लोराइड तैयार करने की एक मानक विधि है।
इस विशिष्ट अभिक्रिया को डार्ज़न्स प्रक्रिया के रूप में जाना जाता है।
इसे प्राथमिकता दी जाती है क्योंकि उप-उत्पाद ($SO_2$ और $HCl$) गैसीय अवस्था में होते हैं,जो बाहर निकल जाते हैं,जिससे शुद्ध एल्काइल क्लोराइड प्राप्त होता है।
50
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ल्यूकास परीक्षण का उपयोग किसके लिए किया जाता है?
A
अल्कोहल
B
एमीन
C
डाईएथिल ईथर
D
ग्लेशियल एसिटिक एसिड

Solution

(A) ल्यूकास परीक्षण का उपयोग प्राथमिक,द्वितीयक और तृतीयक अल्कोहल के बीच अंतर करने के लिए किया जाता है।
51
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अभिक्रिया $C_6H_5CHO + C_6H_5NH_2 \to C_6H_5N=CHC_6H_5 + H_2O$ में,यौगिक $C_6H_5N=CHC_6H_5$ को किस रूप में जाना जाता है?
A
एल्डोल
B
शिफ अभिकर्मक
C
शिफ बेस
D
बेनेडिक्ट अभिकर्मक

Solution

(C) एक एल्डिहाइड $(C_6H_5CHO)$ और एक प्राथमिक अमीन $(C_6H_5NH_2)$ के बीच की अभिक्रिया के परिणामस्वरूप एक इमाइन का निर्माण होता है,जिसे आमतौर पर शिफ बेस के रूप में जाना जाता है।
इस विशिष्ट अभिक्रिया में,बेंजल्डिहाइड एनिलीन के साथ अभिक्रिया करके $N$-बेंजिलिडीनएनिलीन बनाता है,जो एक शिफ बेस है।
52
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टेफ्लॉन किस मोनोमर का बहुलक है,या टेफ्लॉन किस यौगिक के बहुलकीकरण द्वारा प्राप्त किया जाता है?
A
मोनोफ्लोरोएथीन
B
डाइफ्लोरोएथीन
C
ट्राइफ्लोरोएथीन
D
टेट्राफ्लोरोएथीन

Solution

(D) टेफ्लॉन $Tetrafluoroethene$ का एक बहुलक है।
यह $Tetrafluoroethene$ $(CF_2 = CF_2)$ के पेरोक्साइड या पर्सल्फेट उत्प्रेरक की उपस्थिति में उच्च दबाव पर बहुलकीकरण द्वारा प्राप्त किया जाता है।
अतः,सही विकल्प $(D)$ है।
53
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कथन : एमाइड्स के क्वथनांक और गलनांक उनके संगत अम्लों से अधिक होते हैं।
कारण : यह उनके अणुओं में मजबूत अंतर-आणविक हाइड्रोजन बंधन के कारण होता है।
A
यदि कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण कथन की सही व्याख्या है।
B
यदि कथन और कारण दोनों सही हैं लेकिन कारण कथन की सही व्याख्या नहीं है।
C
यदि कथन सही है लेकिन कारण गलत है।
D
यदि कथन और कारण दोनों गलत हैं।

Solution

(D) एमाइड्स सामान्यतः समान आणविक द्रव्यमान वाले अन्य यौगिकों की तुलना में उच्च क्वथनांक और गलनांक प्रदर्शित करते हैं,लेकिन जब उनकी तुलना उनके संगत कार्बोक्सिलिक अम्लों से की जाती है,तो वे सामान्यतः कम या समान होते हैं।
हालाँकि,यह कथन कि एमाइड्स के क्वथनांक और गलनांक संगत अम्लों से अधिक होते हैं,वैज्ञानिक रूप से गलत है,क्योंकि कार्बोक्सिलिक अम्ल एमाइड्स की तुलना में अधिक मजबूत अंतर-आणविक हाइड्रोजन बंधन (डाइमर) बनाते हैं।
इसलिए,कथन गलत है और कारण एमाइड्स में अंतर-आणविक हाइड्रोजन बंधन की उपस्थिति के संबंध में सही है।
54
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कथन : आकाश नीला दिखाई देता है।
कारण : धूल के कोलाइडल कण नीले प्रकाश का प्रकीर्णन करते हैं।
A
यदि कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण,कथन की सही व्याख्या है।
B
यदि कथन और कारण दोनों सही हैं लेकिन कारण,कथन की सही व्याख्या नहीं है।
C
यदि कथन सही है लेकिन कारण गलत है।
D
यदि कथन और कारण दोनों गलत हैं।

Solution

(A) वायुमंडल में मौजूद कोलाइडल कणों (धूल और हवा के अणु) द्वारा सूर्य के प्रकाश के प्रकीर्णन के कारण आकाश नीला दिखाई देता है।
रेले प्रकीर्णन के अनुसार,प्रकीर्णित प्रकाश की तीव्रता तरंगदैर्ध्य की चौथी घात के व्युत्क्रमानुपाती होती है $(I \propto 1/\lambda^4)$।
चूंकि नीले प्रकाश की तरंगदैर्ध्य लाल प्रकाश की तुलना में कम होती है,इसलिए इन कणों द्वारा इसका प्रकीर्णन अधिक प्रभावी ढंग से होता है,जिससे आकाश नीला दिखाई देता है।
55
ChemistryMediumMCQAIIMS · 2002
कथन : अणुओं का भौतिक अधिशोषण केवल सतह पर होता है।
कारण : इस प्रक्रिया में,अधिशोषित अणुओं के बंध टूट जाते हैं।
A
यदि कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण कथन की सही व्याख्या है।
B
यदि कथन और कारण दोनों सही हैं लेकिन कारण कथन की सही व्याख्या नहीं है।
C
यदि कथन सही है लेकिन कारण गलत है।
D
यदि कथन और कारण दोनों गलत हैं।

Solution

(D) कथन गलत है क्योंकि भौतिक अधिशोषण एक पृष्ठीय घटना है,लेकिन कथन में 'अवशोषण' (absorption) शब्द का प्रयोग किया गया है,जो एक स्थूल (bulk) घटना है।
इसके अतिरिक्त,कारण गलत है क्योंकि भौतिक अधिशोषण में दुर्बल वाण्डर वाल्स बल कार्य करते हैं और इसमें रासायनिक बंध नहीं टूटते हैं।
अतः,कथन और कारण दोनों गलत हैं।
56
ChemistryDifficultMCQAIIMS · 2002
कथन : फ्लोरीन की अभिक्रियाशीलता कम होती है।
कारण : $F-F$ बंध की बंध वियोजन ऊर्जा कम होती है।
A
यदि कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण,कथन की सही व्याख्या है।
B
यदि कथन और कारण दोनों सही हैं लेकिन कारण,कथन की सही व्याख्या नहीं है।
C
यदि कथन सही है लेकिन कारण गलत है।
D
यदि कथन गलत है लेकिन कारण सही है।

Solution

(D) फ्लोरीन $(F_2)$ अपनी अत्यंत कम बंध वियोजन ऊर्जा के कारण सबसे अधिक अभिक्रियाशील हैलोजन है,जो $F-F$ बंध को तोड़ना बहुत आसान बनाता है।
अतः,यह कथन कि फ्लोरीन की अभिक्रियाशीलता कम होती है,गलत है,जबकि यह कारण कि $F-F$ बंध की बंध वियोजन ऊर्जा कम होती है,सही है।
57
ChemistryDifficultMCQAIIMS · 2002
कथन : ऑक्सीजन का द्वि-ऋणात्मक आयन $(O^{2-})$ काफी सामान्य है लेकिन सल्फर का द्वि-ऋणात्मक आयन $(S^{2-})$ कम सामान्य है।
कारण : ऑक्सीजन की सहसंयोजकता दो है।
A
यदि कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण,कथन की सही व्याख्या है।
B
यदि कथन और कारण दोनों सही हैं लेकिन कारण,कथन की सही व्याख्या नहीं है।
C
यदि कथन सही है लेकिन कारण गलत है।
D
यदि कथन और कारण दोनों गलत हैं।

Solution

(D) कथन गलत है क्योंकि सल्फर का द्वि-ऋणात्मक आयन $(S^{2-})$ वास्तव में बहुत सामान्य है (उदाहरण के लिए,$ZnS$,$FeS$ जैसे धातु सल्फाइड में),जबकि छोटे ऑक्सीजन परमाणु में उच्च इलेक्ट्रॉन-इलेक्ट्रॉन प्रतिकर्षण के कारण $O^{2-}$ का निर्माण ऊर्जा की दृष्टि से कठिन है।
कारण भी गलत है क्योंकि ऑक्सीजन की सहसंयोजकता सामान्यतः दो होती है,लेकिन यह उसके आयनों की स्थिरता या सामान्यता का कारण नहीं है।
अतः,कथन और कारण दोनों गलत हैं।
58
ChemistryDifficultMCQAIIMS · 2002
कथन : हैलोजन दृश्य प्रकाश को अवशोषित करते हैं।
कारण : सभी हैलोजन रंगीन होते हैं।
A
यदि कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण कथन की सही व्याख्या है।
B
यदि कथन और कारण दोनों सही हैं लेकिन कारण कथन की सही व्याख्या नहीं है।
C
यदि कथन सही है लेकिन कारण गलत है।
D
यदि कथन और कारण दोनों गलत हैं।

Solution

(A) सभी हैलोजन रंगीन होते हैं क्योंकि वे दृश्य क्षेत्र में प्रकाश को अवशोषित करते हैं।
दृश्य प्रकाश का यह अवशोषण इलेक्ट्रॉनों को उच्च ऊर्जा स्तरों में उत्तेजित करता है,जिसके परिणामस्वरूप हैलोजन के विशिष्ट रंग दिखाई देते हैं।
अतः,कथन सही है और कारण कथन की सही व्याख्या है।
59
ChemistryEasyMCQAIIMS · 2002
कथन: क्यूप्रस आयन $(Cu^{+})$ में अयुग्मित इलेक्ट्रॉन होते हैं जबकि क्यूप्रिक आयन $(Cu^{2+})$ में नहीं होते हैं।
कारण: क्यूप्रस आयन $(Cu^{+})$ रंगहीन होता है जबकि क्यूप्रिक आयन $(Cu^{2+})$ जलीय घोल में नीला होता है।
A
यदि कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण कथन की सही व्याख्या है।
B
यदि कथन और कारण दोनों सही हैं लेकिन कारण कथन की सही व्याख्या नहीं है।
C
यदि कथन सही है लेकिन कारण गलत है।
D
यदि कथन गलत है लेकिन कारण सही है।

Solution

(D) $Cu$ का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास $[Ar] 3d^{10} 4s^1$ है।
$Cu^{+}$ (क्यूप्रस आयन) के लिए,विन्यास $[Ar] 3d^{10}$ है,जिसमें कोई अयुग्मित इलेक्ट्रॉन नहीं है।
$Cu^{2+}$ (क्यूप्रिक आयन) के लिए,विन्यास $[Ar] 3d^9$ है,जिसमें एक अयुग्मित इलेक्ट्रॉन है।
अतः,कथन गलत है क्योंकि यह विपरीत जानकारी देता है।
$Cu^{+}$ अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की अनुपस्थिति के कारण रंगहीन होता है,जबकि $Cu^{2+}$ जलीय घोल में पानी के लिगेंड की उपस्थिति में $d-d$ संक्रमण के कारण नीला होता है। इस प्रकार,कारण सही है।
सही विकल्प $D$ है।
60
ChemistryMediumMCQAIIMS · 2002
कथन : फिनोल,इथेनॉल की तुलना में एक प्रबल अम्ल है।
कारण : $+M$ प्रभाव वाले समूह $p-$स्थिति पर अम्लता को कम करते हैं।
A
यदि कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण,कथन की सही व्याख्या है।
B
यदि कथन और कारण दोनों सही हैं लेकिन कारण,कथन की सही व्याख्या नहीं है।
C
यदि कथन सही है लेकिन कारण गलत है।
D
यदि कथन और कारण दोनों गलत हैं।

Solution

(B) फिनोल $(C_6H_5OH)$ इथेनॉल $(C_2H_5OH)$ की तुलना में एक प्रबल अम्ल है क्योंकि प्रोटॉन के नुकसान के बाद बनने वाला फिनोक्साइड आयन $(C_6H_5O^-)$ अनुनाद द्वारा स्थिर होता है,जबकि एथॉक्साइड आयन $(C_2H_5O^-)$ नहीं होता है।
$+M$ प्रभाव वाले समूह (जैसे $-OH$,$-OR$,$-NH_2$) वलय में इलेक्ट्रॉन घनत्व बढ़ाते हैं,जो फिनोक्साइड आयन को अस्थिर करते हैं और $p-$स्थिति पर मौजूद होने पर फिनोल की अम्लता को कम करते हैं।
कथन और कारण दोनों वैज्ञानिक रूप से सही हैं,लेकिन कारण यह नहीं बताता कि फिनोल इथेनॉल से अधिक प्रबल अम्ल क्यों है।
इसलिए,सही विकल्प $(b)$ है।
61
ChemistryEasyMCQAIIMS · 2002
कथन : सुक्रोज म्यूटारोटेशन (mutarotation) प्रदर्शित करता है।
कारण : सुक्रोज एक डाइसैकेराइड है।
A
यदि कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण,कथन की सही व्याख्या है।
B
यदि कथन और कारण दोनों सही हैं लेकिन कारण,कथन की सही व्याख्या नहीं है।
C
यदि कथन सही है लेकिन कारण गलत है।
D
यदि कथन और कारण दोनों गलत हैं।

Solution

(D) सुक्रोज एक अनपचायी (non-reducing) शर्करा है क्योंकि इसमें कोई मुक्त हेमीऐसिटल या हेमीकीटल समूह नहीं होता है।
म्यूटारोटेशन उन अपचायी शर्कराओं का गुण है जिनमें मुक्त हेमीऐसिटल या हेमीकीटल समूह होता है,जो उन्हें उनके $\alpha$ और $\beta$ एनोमेरिक रूपों के बीच संतुलन में रहने की अनुमति देता है।
चूंकि सुक्रोज में इस मुक्त समूह का अभाव होता है,इसलिए यह म्यूटारोटेशन प्रदर्शित नहीं करता है।
अतः,कथन गलत है,जबकि कारण सही है।
62
ChemistryMediumMCQAIIMS · 2002
कथन : $DNA$ और $RNA$ दोनों अणु कोशिका के केंद्रक में पाए जाते हैं।
कारण : गर्म करने पर,एंजाइम अपनी विशिष्ट सक्रियता नहीं खोते हैं।
A
यदि कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण,कथन की सही व्याख्या है।
B
यदि कथन और कारण दोनों सही हैं लेकिन कारण,कथन की सही व्याख्या नहीं है।
C
यदि कथन सही है लेकिन कारण गलत है।
D
यदि कथन और कारण दोनों गलत हैं।

Solution

(D) $DNA$ मुख्य रूप से कोशिका के केंद्रक में पाया जाता है,जबकि $RNA$ मुख्य रूप से कोशिका के कोशिका द्रव्य में पाया जाता है। अतः,कथन गलत है।
एंजाइम जैविक उत्प्रेरक होते हैं जो एक विशिष्ट तापमान सीमा के भीतर कार्य करते हैं। गर्म करने पर,वे विकृत (denaturation) हो जाते हैं,जिससे वे अपनी विशिष्ट जैविक सक्रियता खो देते हैं। अतः,कारण भी गलत है।

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How many Chemistry questions are in AIIMS 2002?

There are 62 Chemistry questions from the AIIMS 2002 paper on Vedclass, each with a detailed step-by-step solution in Hindi.

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