TS EAMCET 2025 Chemistry Question Paper with Answer and Solution in Hindi

244 QuestionsHindiWith Solutions

ChemistryQ51150 of 244 questions

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निम्नलिखित को उनके क्वथनांक के घटते क्रम में व्यवस्थित करें:
$(A)$ $2-$मेथिलब्यूटेन
$(B)$ $2,2-$डाइमेथिलप्रोपेन
$(C)$ पेंटेन
$(D)$ हेक्सेन
A
$D > C > A > B$
B
$B > A > C > D$
C
$D > A > C > B$
D
$B > C > A > D$

Solution

(A) एल्केन का क्वथनांक अणु के पृष्ठीय क्षेत्रफल पर निर्भर करता है।
कार्बन परमाणुओं की संख्या बढ़ने पर क्वथनांक बढ़ता है।
समावयवियों (isomers) के लिए,शाखाओं (branching) में वृद्धि के साथ क्वथनांक कम हो जाता है क्योंकि शाखाएं पृष्ठीय क्षेत्रफल को कम करती हैं,जिससे वैन डेर वाल्स बल कमजोर हो जाते हैं।
दिए गए यौगिक हैं:
$(A)$ $2-$मेथिलब्यूटेन ($C_5H_{12}$,शाखित)
$(B)$ $2,2-$डाइमेथिलप्रोपेन ($C_5H_{12}$,अधिक शाखित)
$(C)$ पेंटेन ($C_5H_{12}$,सीधी श्रृंखला)
$(D)$ हेक्सेन ($C_6H_{14}$,सीधी श्रृंखला)
$C_5$ समावयवियों $(A, B, C)$ की तुलना करने पर: क्वथनांक का क्रम $C > A > B$ है।
हेक्सेन $(D)$ में कार्बन परमाणुओं की संख्या सबसे अधिक है,इसलिए इसका क्वथनांक सबसे अधिक है।
अतः,घटता हुआ क्रम $D > C > A > B$ है।
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$X$,$C_6H_{14}$ का एक समावयवी (isomer) है। इसमें चार प्राथमिक कार्बन और दो तृतीयक कार्बन हैं। '$X$' को निम्नलिखित में से किस अभिक्रिया द्वारा तैयार किया जा सकता है?
A
$2$-मिथाइलपेंट-$2$-ईन का हाइड्रोजनीकरण
B
$1$-ब्रोमोप्रोपेन की वुर्ट्ज़ अभिक्रिया
C
$2$-क्लोरो-$3$-मिथाइलपेंटेन का अपचयन
D
$2$-ब्रोमोप्रोपेन की वुर्ट्ज़ अभिक्रिया

Solution

(D) चार प्राथमिक कार्बन और दो तृतीयक कार्बन वाला $C_6H_{14}$ का समावयवी $2,3$-डाइमिथाइलब्यूटेन $(CH_3-CH(CH_3)-CH(CH_3)-CH_3)$ है।
विकल्पों का विश्लेषण करते हैं:
$A$: $2$-मिथाइलपेंट-$2$-ईन का हाइड्रोजनीकरण $2$-मिथाइलपेंटेन देता है,जिसमें पांच प्राथमिक कार्बन और एक तृतीयक कार्बन होता है।
$B$: $1$-ब्रोमोप्रोपेन $(CH_3CH_2CH_2Br)$ की वुर्ट्ज़ अभिक्रिया $n$-हेक्सेन $(CH_3CH_2CH_2CH_2CH_2CH_3)$ देती है।
$C$: $2$-क्लोरो-$3$-मिथाइलपेंटेन का अपचयन $3$-मिथाइलपेंटेन देता है,जिसमें तीन प्राथमिक कार्बन और एक तृतीयक कार्बन होता है।
$D$: $2$-ब्रोमोप्रोपेन $(CH_3CH(Br)CH_3)$ की शुष्क ईथर में $Na$ के साथ वुर्ट्ज़ अभिक्रिया दो आइसोप्रोपिल समूहों के संयोजन से $2,3$-डाइमिथाइलब्यूटेन $(CH_3-CH(CH_3)-CH(CH_3)-CH_3)$ बनाती है।
अतः,सही अभिक्रिया $D$ है।
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एक एल्कीन $X$ का ओजोनोलिसिस करने पर सबसे सरल कीटोन $(Y)$ और $3-$पेंटेनोन का मिश्रण प्राप्त होता है। एल्कीन $X$ का $IUPAC$ नाम क्या है?
A
$2,3-$डाइमिथाइलब्यूट$-2-$ईन
B
$3-$इथाइल$-4-$मिथाइलपेंट$-3-$ईन
C
$3-$इथाइल$-2-$मिथाइलपेंट$-2-$ईन
D
$2-$मिथाइल$-3-$इथाइलपेंट$-2-$ईन

Solution

(C) सबसे सरल कीटोन एसीटोन है,जो $CH_3COCH_3$ (प्रोपेन$-2-$ओन) है।
$3-$पेंटेनोन $CH_3CH_2COCH_2CH_3$ है।
एल्कीन $X$ प्राप्त करने के लिए,हम दोनों कीटोन से ऑक्सीजन परमाणुओं को हटाकर कार्बोनिल कार्बनों के बीच एक द्वि-आबंध बनाते हैं:
$CH_3-C(CH_3)=C(CH_2CH_3)-CH_2CH_3$.
इस संरचना का $IUPAC$ नाम $3-$इथाइल$-2-$मिथाइलहेक्स$-2-$ईन है। दिए गए विकल्पों में $C$ सबसे निकटतम विकल्प है।
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एक एल्काइन का आणविक सूत्र $C_6H_{10}$ है। इसके लिए संभव $1$-एल्काइन आइसोमर्स (स्टीरियोआइसोमर्स को छोड़कर) की संख्या है
A
$2$
B
$5$
C
$3$
D
$4$

Solution

(D) एल्काइन का सामान्य सूत्र $C_nH_{2n-2}$ है। $C_6H_{10}$ के लिए,$n=6$ है।
$1$-एल्काइन में ट्रिपल बॉन्ड टर्मिनल स्थिति पर होता है,जिसे $R-C \equiv CH$ के रूप में दर्शाया जाता है।
$6$-कार्बन श्रृंखला के लिए,$1$-एल्काइन की संभावित संरचनाएं हैं:
$1$. $CH_3-CH_2-CH_2-CH_2-C \equiv CH$ $(hex-1-yne)$
$2$. $CH_3-CH_2-CH(CH_3)-C \equiv CH$ $(3-methylpent-1-yne)$
$3$. $CH_3-CH(CH_3)-CH_2-C \equiv CH$ $(4-methylpent-1-yne)$
$4$. $(CH_3)_3C-C \equiv CH$ $(3,3-dimethylbut-1-yne)$
अतः,$1$-एल्काइन के लिए $4$ संभावित आइसोमर्स हैं।
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$C_6H_{10}$ सूत्र वाले एल्काइन के लिए,अम्लीय हाइड्रोजन वाले एल्काइन की संख्या $x$ है और बिना अम्लीय हाइड्रोजन वाले एल्काइन की संख्या $y$ है। $x$ और $y$ क्रमशः हैं:
A
$2, 5$
B
$3, 4$
C
$4, 3$
D
$5, 2$

Solution

(C) यदि एल्काइन टर्मिनल एल्काइन $(R-C \equiv CH)$ है,तो उसमें अम्लीय हाइड्रोजन होता है।
$C_6H_{10}$ सूत्र के लिए संभावित आइसोमर्स हैं:
$1$. $Hex-1-yne$ - टर्मिनल (अम्लीय)
$2$. $3-Methylpent-1-yne$ - टर्मिनल (अम्लीय)
$3$. $4-Methylpent-1-yne$ - टर्मिनल (अम्लीय)
$4$. $3,3-Dimethylbut-1-yne$ - टर्मिनल (अम्लीय)
ये $4$ आइसोमर्स टर्मिनल एल्काइन हैं,इसलिए $x = 4$ है।
गैर-टर्मिनल (आंतरिक) एल्काइन में कोई अम्लीय हाइड्रोजन नहीं होता है:
$1$. $Hex-2-yne$
$2$. $Hex-3-yne$
$3$. $4-Methylpent-2-yne$
ये $3$ आइसोमर्स आंतरिक एल्काइन हैं,इसलिए $y = 3$ है।
अतः,$x = 4$ और $y = 3$ है।
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निम्नलिखित अभिक्रिया अनुक्रम में यौगिक $(Z)$ की पहचान करें: $CH_3-CH(Br)-CH_2Br$ $\xrightarrow{alc. KOH, \Delta}$ $\xrightarrow{NaNH_2}$ $\xrightarrow{H_2O, Hg^{2+}, H^+} (Z)$
A
प्रोपेनल
B
प्रोपेनोन
C
प्रोपेनोइक अम्ल
D
प्रोपेनामाइड

Solution

(B) प्रारंभिक पदार्थ $1,2-\text{डाइब्रोमोप्रोपेन}$ $(CH_3-CH(Br)-CH_2Br)$ है।
चरण $1$: $alc. KOH$ और उसके बाद $NaNH_2$ के साथ उपचार करने पर डीहाइड्रोहैलोजनीकरण द्वारा प्रोपाइन $(CH_3-C \equiv CH)$ बनता है।
चरण $2$: $Hg^{2+}$ और $H^+$ की उपस्थिति में प्रोपाइन का जलयोजन (कुचेरोव अभिक्रिया) मार्कोवनिकोव नियम का पालन करता है।
चरण $3$: ट्रिपल बॉन्ड में पानी के जुड़ने से एक इनोल मध्यवर्ती $(CH_3-C(OH)=CH_2)$ बनता है,जो टॉटोमेरिज़ेशन के माध्यम से प्रोपेनोन $(CH_3-CO-CH_3)$ में परिवर्तित हो जाता है।
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List-$I$ में दी गई अभिक्रियाओं को List-$II$ में उनके मुख्य उत्पादों के साथ सुमेलित कीजिए:
List-$I$ (अभिक्रिया)List-$II$ (मुख्य उत्पाद)
$A. CH_3-C \equiv CH \xrightarrow{H_2O, Hg^{2+}/H^+, 333K}$$I. CH_3-CH(OH)-CH_3$
$B. CH_3COONa \xrightarrow{H_2O, Pt, \text{electrolysis}}$$II. CH_3-CO-CH_3$
$C. CH_3-CH=CH_2 \xrightarrow{H_2O/H^+}$$III. CH_3-CH(OH)-CH_2OH$
$D. CH_3-CH=CH_2 \xrightarrow{H_2O, \text{dil. } KMnO_4, 273K}$$IV. CH_3-CH_3$
$V. CH_4$
A
$A-II, B-IV, C-I, D-III$
B
$A-II, B-V, C-I, D-III$
C
$A-III, B-IV, C-II, D-I$
D
$A-II, B-III, C-IV, D-I$

Solution

(A) . $Hg^{2+}/H^+$ की उपस्थिति में प्रोपाइन $(CH_3-C \equiv CH)$ का जलयोजन मार्कोवनिकोव नियम का पालन करता है और एसीटोन $(CH_3-CO-CH_3)$ बनाता है,जो $II$ है।
$B$. सोडियम एसीटेट $(CH_3COONa)$ का कोल्बे विद्युत-अपघटन इथेन $(CH_3-CH_3)$ देता है,जो $IV$ है।
$C$. प्रोपीन $(CH_3-CH=CH_2)$ का अम्ल-उत्प्रेरित जलयोजन प्रोपेन$-2-$ऑल $(CH_3-CH(OH)-CH_3)$ देता है,जो $I$ है।
$D$. ठंडे तनु क्षारीय $KMnO_4$ (बेयर अभिकर्मक) का उपयोग करके प्रोपीन का हाइड्रॉक्सिलेशन प्रोपेन$-1,2-$डायोल $(CH_3-CH(OH)-CH_2OH)$ देता है,जो $III$ है।
अतः,सही मिलान $A-II, B-IV, C-I, D-III$ है।
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निम्नलिखित अभिक्रियाओं की श्रृंखला पर विचार करें। $Z$ में,$sp^3$ कार्बन की संख्या $a$ है और $sp^2$ कार्बन की संख्या $b$ है। $(a+b)$ का मान है:
$CH_3CH_2CH_2CH_2Br$ $\xrightarrow[\text{dry ether}]{Na} X$ $\xrightarrow[\text{10-20 atm}]{\text{Cr}_2\text{O}_3 / 773 \text{ K}} Y$ $\xrightarrow[\text{anhy. AlCl}_3]{\text{CH}_3\text{COCl}} Z$
A
$8$
B
$7$
C
$6$
D
$9$

Solution

(D) $1$. प्रारंभिक पदार्थ $n$-ब्यूटाइल ब्रोमाइड $(CH_3CH_2CH_2CH_2Br)$ है।
$2$. शुष्क ईथर में $Na$ के साथ अभिक्रिया वुर्ट्ज़ अभिक्रिया है,जो अल्काइल समूह को जोड़कर $n$-ऑक्टेन $(CH_3(CH_2)_6CH_3)$ बनाती है,इसलिए $X$,$n$-ऑक्टेन है।
$3$. $773 \text{ K}$ और $10-20 \text{ atm}$ पर $\text{Cr}_2\text{O}_3$ का उपयोग करके $n$-ऑक्टेन का एरोमैटाइजेशन करने पर एथिलबेंजीन $(Y)$ प्राप्त होता है।
$4$. निर्जलीय $\text{AlCl}_3$ की उपस्थिति में एथिलबेंजीन का $\text{CH}_3\text{COCl}$ के साथ फ्रिडेल-क्राफ्ट्स एसाइलेशन करने पर $Z$ के रूप में $p$-मिथाइलएसीटोफेनोन प्राप्त होता है। $p$-मिथाइलएसीटोफेनोन की संरचना $CH_3-C_6H_4-COCH_3$ है।
$5$. $p$-मिथाइलएसीटोफेनोन $(CH_3-C_6H_4-COCH_3)$ में:
- $sp^3$ कार्बन: रिंग पर मिथाइल समूह $(1)$,कार्बोनिल पर मिथाइल समूह $(1)$। कुल $a = 2$ है।
- $sp^2$ कार्बन: बेंजीन रिंग के $6$ कार्बन $(6)$ और कार्बोनिल कार्बन $(1)$। कुल $b = 7$ है।
$6$. $(a+b) = 2 + 7 = 9$ का मान है।
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दी गई अभिक्रिया श्रृंखला में बनने वाले यौगिक '$D$' का मूलानुपाती सूत्र (empirical formula) क्या है?
$C_2H_4$ $\xrightarrow{Br_2/CCl_4} A$ $\xrightarrow[(ii) NaNH_2]{(i) alc. KOH} B$ $\xrightarrow{\text{cyclic polymerization}} C$ $\xrightarrow[\text{dry } AlCl_3, \text{dark, cold}]{Cl_2 \text{ (excess)}} D$
A
$CHCl$
B
$CCl$
C
$CH_2Cl$
D
$CHCl_2$

Solution

(A) $1$. $C_2H_4 + Br_2/CCl_4 \rightarrow BrCH_2-CH_2Br$ ($A$ $1,2$-डाइब्रोमोएथेन है)।
$2$. $BrCH_2-CH_2Br \xrightarrow[(ii) NaNH_2]{(i) alc. KOH} HC \equiv CH$ ($B$ एथाइन है)।
$3$. $3HC \equiv CH \xrightarrow{\text{cyclic polymerization}} C_6H_6$ ($C$ बेंजीन है)।
$4$. $C_6H_6 + 3Cl_2 \xrightarrow{\text{dry } AlCl_3, \text{dark, cold}} C_6H_6Cl_6$ ($D$ बेंजीन हेक्साक्लोराइड है,जिसे गैमेक्सेन या लिंडेन के रूप में भी जाना जाता है)।
$5$. $D$ का आणविक सूत्र $C_6H_6Cl_6$ है। इसका मूलानुपाती सूत्र परमाणुओं का सबसे सरल अनुपात है,जो $CH Cl$ है।
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निम्नलिखित में से कौन सी अभिक्रिया इलेक्ट्रोफिलिक प्रतिस्थापन अभिक्रिया का उदाहरण है?
A
$CH_3CHO + HCN \rightarrow CH_3CH(OH)CN$
B
$(CH_3)_3CX + H_2O \rightarrow (CH_3)_3COH + HX$
C
$C_6H_6 + CH_3COCl \xrightarrow{AlCl_3} C_6H_5(COCH_3) + HCl$
D
$BrCH_2CH_2Br + Zn \xrightarrow[\Delta]{\text{alcohol}} CH_2=CH_2 + ZnBr_2$

Solution

(C) इलेक्ट्रोफिलिक प्रतिस्थापन अभिक्रिया में एक अणु पर किसी परमाणु या समूह का इलेक्ट्रोफाइल द्वारा प्रतिस्थापन होता है।
विकल्प $A$ एक न्यूक्लियोफिलिक योगात्मक अभिक्रिया है।
विकल्प $B$ एक न्यूक्लियोफिलिक प्रतिस्थापन अभिक्रिया $(S_N1)$ है।
विकल्प $C$ फ्रीडल-क्राफ्ट्स एसाइलेशन अभिक्रिया है,जो इलेक्ट्रोफिलिक एरोमैटिक प्रतिस्थापन का एक उत्कृष्ट उदाहरण है जहाँ इलेक्ट्रोफाइल एसाइलियम आयन $(CH_3CO^+)$ होता है।
विकल्प $D$ एक विलोपन अभिक्रिया (डीहैलोजिनेशन) है।
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निम्नलिखित अभिक्रियाओं में $X$ और $Y$ क्रमशः क्या हैं?
Question diagram
A
$CH_3Cl, CH_3COCl$
B
$C_2H_5Cl, CH_3COCl$
C
$CH_3COCl, CH_3Cl$
D
$C_2H_5COCl, CH_3Cl$

Solution

(A) निर्जल $AlCl_3$ की उपस्थिति में बेंजीन की $CH_3Cl$ के साथ अभिक्रिया एक फ्रीडल-क्राफ्ट्स एल्काइलेशन अभिक्रिया है,जो टोल्यूनि बनाती है। अतः,$X = CH_3Cl$ है।
निर्जल $AlCl_3$ की उपस्थिति में बेंजीन की $CH_3COCl$ (एसिटाइल क्लोराइड) के साथ अभिक्रिया एक फ्रीडल-क्राफ्ट्स एसाइलेशन अभिक्रिया है,जो एसीटोफेनोन बनाती है। अतः,$Y = CH_3COCl$ है।
इसलिए,$X$ और $Y$ क्रमशः $CH_3Cl$ और $CH_3COCl$ हैं।
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निम्नलिखित में से इलेक्ट्रॉन-समृद्ध हाइड्राइड की पहचान करें।
A
$B_2H_6, AlH_3$
B
$NaH, MgH_2$
C
$NH_3, H_2O$
D
$CH_4, SiH_4$

Solution

(C) इलेक्ट्रॉन-समृद्ध हाइड्राइड वे होते हैं जिनके केंद्रीय परमाणु पर एक या अधिक एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म (lone pairs) होते हैं।
ये आमतौर पर समूह $15, 16,$ और $17$ के तत्वों द्वारा बनाए जाते हैं।
उदाहरणों में $NH_3$ (एक एकाकी युग्म),$H_2O$ (दो एकाकी युग्म),और $HF$ (तीन एकाकी युग्म) शामिल हैं।
दिए गए विकल्पों में,$NH_3$ और $H_2O$ इलेक्ट्रॉन-समृद्ध हाइड्राइड हैं।
$B_2H_6$ और $AlH_3$ इलेक्ट्रॉन-न्यून हाइड्राइड हैं।
$NaH$ और $MgH_2$ लवणीय या आयनिक हाइड्राइड हैं।
$CH_4$ और $SiH_4$ इलेक्ट्रॉन-सटीक हाइड्राइड हैं।
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$1 \ mL$ "$x$ volume" $H_2O_2$ विलयन को गर्म करने पर $STP$ पर $20 \ mL$ ऑक्सीजन गैस प्राप्त होती है। "$x$ volume" $H_2O_2$ के संगत $(w/v) \%$ क्या है?
A
$3.03$
B
$6.06$
C
$9.09$
D
$30.3$

Solution

(B) $H_2O_2$ का अपघटन अभिक्रिया: $2H_2O_2(aq) \rightarrow 2H_2O(l) + O_2(g)$ द्वारा होता है।
"$x$ volume" $H_2O_2$ की परिभाषा के अनुसार,$1 \ mL$ $H_2O_2$ विलयन $STP$ पर $x \ mL$ $O_2$ गैस उत्पन्न करता है।
यहाँ $1 \ mL$ $H_2O_2$,$20 \ mL$ $O_2$ देता है,इसलिए $x = 20$.
वॉल्यूम स्ट्रेंथ और $(w/v) \%$ के बीच संबंध: $\text{Volume strength} = 5.6 \times \text{Molarity}$ और $\text{Molarity} = \frac{(w/v) \% \times 10}{34}$.
अतः,$20 = 5.6 \times \frac{(w/v) \% \times 10}{34}$.
गणना करने पर,$(w/v) \% = \frac{20 \times 34}{56} \approx 12.14 \%$. हालाँकि,मानक कारक $1 \text{ volume} = 0.303 \% (w/v)$ का उपयोग करने पर,$20 \times 0.303 = 6.06 \% (w/v)$ प्राप्त होता है।
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निम्नलिखित का मिलान करें:
सूची-$I$ (अभिक्रियाएं)सूची-$II$ (विधियां)
$A$. $Mg(HCO_3)_2 \rightarrow Mg(OH)_2 \downarrow + 2 CO_2 \uparrow$$I$. क्लार्क विधि
$B$. $M^{2+} + Na_4P_6O_{18}^{2-} \rightarrow [Na_2MP_6O_{18}]^{2-} + 2 Na^{+}$$II$. आयन विनिमय विधि
$C$. $Ca(HCO_3)_2 + Ca(OH)_2 \rightarrow 2 CaCO_3 + 2 H_2O$$III$. उबालना
$D$. $2 NaZ + Ca^{2+}_{(aq)} \rightarrow 2 Na^{+} + CaZ_2$ ($Z$ = जिओलाइट)$IV$. कैलगन विधि
A
$A-III, B-IV, C-I, D-II$
B
$A-III, B-IV, C-II, D-I$
C
$A-IV, B-II, C-I, D-III$
D
$A-II, B-IV, C-I, D-III$

Solution

(A) सही मिलान इस प्रकार है:
$A$. $Mg(HCO_3)_2 \rightarrow Mg(OH)_2 \downarrow + 2 CO_2 \uparrow$ अस्थायी कठोरता को दूर करने के लिए $III$. उबालने की प्रक्रिया के दौरान होने वाली अभिक्रिया है।
$B$. $M^{2+} + Na_4P_6O_{18}^{2-} \rightarrow [Na_2MP_6O_{18}]^{2-} + 2 Na^{+}$ अभिक्रिया $IV$. कैलगन विधि में शामिल है।
$C$. $Ca(HCO_3)_2 + Ca(OH)_2 \rightarrow 2 CaCO_3 + 2 H_2O$ अभिक्रिया $I$. क्लार्क विधि में होती है।
$D$. $2 NaZ + Ca^{2+}_{(aq)} \rightarrow 2 Na^{+} + CaZ_2$ अभिक्रिया $II$. आयन विनिमय विधि में होती है।
अतः,सही क्रम $A-III, B-IV, C-I, D-II$ है।
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$H_2O$ के अधिकतम घनत्व का तापमान $y \ K$ है और $D_2O$ का $x \ K$ है। $(x-y)$ ($K$ में) लगभग कितना है?
A
$7$
B
$3.5$
C
$4$
D
$8.5$

Solution

(A) $H_2O$ के लिए अधिकतम घनत्व का तापमान लगभग $277 \ K$ $(4 \ ^\circ C)$ होता है।
$D_2O$ के लिए अधिकतम घनत्व का तापमान लगभग $284 \ K$ $(11 \ ^\circ C)$ होता है।
अतः,$x = 284 \ K$ और $y = 277 \ K$ है।
$(x-y) = 284 - 277 = 7 \ K$ होगा।
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$T(K)$ पर $MgCO_3$ और $Ag_2CO_3$ के संतृप्त विलयन में,यदि $Mg^{2+}$ आयन की सांद्रता $3.2 \times 10^{-5} \ M$ है,तो विलयन में $Ag^{+}$ आयन की सांद्रता क्या होगी? [दिया है: $K_{sp}(MgCO_3) = 1.6 \times 10^{-6}$ और $K_{sp}(Ag_2CO_3) = 8.0 \times 10^{-12}$ at $T(K)$]
A
$\sqrt{1.3} \times 10^{-7} \ M$
B
$\sqrt{1.5} \times 10^{-6} \ M$
C
$\sqrt{1.6} \times 10^{-6} \ M$
D
$\sqrt{1.6} \times 10^{-5} \ M$

Solution

(D) $MgCO_3$ के संतृप्त विलयन के लिए,विलेयता गुणनफल का व्यंजक $K_{sp}(MgCO_3) = [Mg^{2+}][CO_3^{2-}]$ है।
दिया है $[Mg^{2+}] = 3.2 \times 10^{-5} \ M$ और $K_{sp}(MgCO_3) = 1.6 \times 10^{-6}$.
इन मानों को रखने पर: $1.6 \times 10^{-6} = (3.2 \times 10^{-5}) \times [CO_3^{2-}]$.
अतः,$[CO_3^{2-}] = \frac{1.6 \times 10^{-6}}{3.2 \times 10^{-5}} = 0.05 \ M$.
अब,$Ag_2CO_3$ के संतृप्त विलयन के लिए,विलेयता गुणनफल का व्यंजक $K_{sp}(Ag_2CO_3) = [Ag^{+}]^2[CO_3^{2-}]$ है।
दिया है $K_{sp}(Ag_2CO_3) = 8.0 \times 10^{-12}$ और $[CO_3^{2-}] = 0.05 \ M$.
इन मानों को रखने पर: $8.0 \times 10^{-12} = [Ag^{+}]^2 \times (0.05)$.
$[Ag^{+}]^2 = \frac{8.0 \times 10^{-12}}{0.05} = 1.6 \times 10^{-10}$.
$[Ag^{+}] = \sqrt{1.6} \times 10^{-5} \ M$.
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संतृप्त विलयन प्राप्त करने के लिए $0.1 \ g$ $PbCl_2$ को घोलने के लिए आवश्यक पानी का आयतन ($mL$ में) है (दिया गया है: $K_{sp}(PbCl_2) = 3.2 \times 10^{-8}$; $Pb$ का परमाणु द्रव्यमान $= 207 \ u$,$Cl = 35.5 \ u$)
A
$150$
B
$100$
C
$120$
D
$180$

Solution

(D) $PbCl_2$ के लिए विलेयता साम्य: $PbCl_2(s) \rightleftharpoons Pb^{2+}(aq) + 2Cl^-(aq)$.
माना विलेयता $s \ mol/L$ है। तब $K_{sp} = [Pb^{2+}][Cl^-]^2 = (s)(2s)^2 = 4s^3$.
दिया है $K_{sp} = 3.2 \times 10^{-8}$,अतः $4s^3 = 3.2 \times 10^{-8} \implies s^3 = 8 \times 10^{-9}$.
अतः,$s = 2 \times 10^{-3} \ mol/L$.
$PbCl_2$ का मोलर द्रव्यमान $= 207 + 2 \times 35.5 = 278 \ g/mol$.
$1 \ L$ विलयन में $PbCl_2$ का द्रव्यमान $= s \times \text{मोलर द्रव्यमान} = 2 \times 10^{-3} \times 278 = 0.556 \ g/L$.
$0.1 \ g$ $PbCl_2$ को घोलने के लिए आवश्यक आयतन $V = \frac{0.1}{0.556} \approx 0.1798 \ L$.
$mL$ में बदलने पर,$V \approx 180 \ mL$.
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$HCl$ $(pH=2)$ के $200 \ mL$ जलीय विलयन को $NaOH$ $(pH=12)$ के $300 \ mL$ जलीय विलयन के साथ मिलाया जाता है और इसे $1.0 \ L$ तक तनु किया जाता है। परिणामी विलयन का $pH$ है
A
$10.3$
B
$11$
C
$11.3$
D
$11.7$

Solution

(B) $HCl$ विलयन के लिए: $pH = 2$,अतः $[H^+] = 10^{-2} \ M$। $H^+$ के मोल = $10^{-2} \ mol/L \times 0.2 \ L = 2 \times 10^{-3} \ mol$।
$NaOH$ विलयन के लिए: $pH = 12$,अतः $pOH = 14 - 12 = 2$। $[OH^-] = 10^{-2} \ M$। $OH^-$ के मोल = $10^{-2} \ mol/L \times 0.3 \ L = 3 \times 10^{-3} \ mol$।
चूंकि $n(OH^-) > n(H^+)$,अभिक्रिया $H^+ + OH^- \rightarrow H_2O$ होती है।
$OH^-$ के शेष मोल = $3 \times 10^{-3} - 2 \times 10^{-3} = 1 \times 10^{-3} \ mol$।
परिणामी विलयन का कुल आयतन $1.0 \ L$ है।
$OH^-$ की सांद्रता = $\frac{1 \times 10^{-3} \ mol}{1.0 \ L} = 10^{-3} \ M$।
$pOH = -\log(10^{-3}) = 3$।
$pH = 14 - pOH = 14 - 3 = 11$।
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बोरोन के यौगिकों के बारे में सही कथन हैं:
$I$. बोरेक्स बीड परीक्षण में,कोबाल्ट मेटाबोरेट का रंग नीला होता है।
$II$. डाइबोरेन को सोडियम बोरोहाइड्राइड के आयोडीन के साथ ऑक्सीकरण द्वारा तैयार किया जाता है।
$III$. डाइबोरेन में हाइड्रोजन की ऑक्सीकरण अवस्था $+1$ है।
$IV$. बोरिक एसिड एक ट्राइबेसिक एसिड है।
A
$I$ और $II$
B
$III$ और $IV$
C
$I$ और $III$
D
$II$ और $IV$

Solution

(A) $I$. बोरेक्स बीड परीक्षण में,कोबाल्ट ऑक्साइड $B_2O_3$ के साथ प्रतिक्रिया करके कोबाल्ट मेटाबोरेट,$Co(BO_2)_2$ बनाता है,जो नीले रंग का होता है। यह कथन सही है।
$II$. डाइबोरेन $(B_2H_6)$ को सोडियम बोरोहाइड्राइड $(NaBH_4)$ की आयोडीन $(I_2)$ के साथ प्रतिक्रिया द्वारा तैयार किया जाता है: $2NaBH_4 + I_2 \rightarrow B_2H_6 + 2NaI + H_2$। यह कथन सही है।
$III$. डाइबोरेन $(B_2H_6)$ में,बोरोन हाइड्रोजन की तुलना में अधिक इलेक्ट्रोपॉजिटिव है,इसलिए हाइड्रोजन की ऑक्सीकरण अवस्था $-1$ है। यह कथन गलत है।
$IV$. बोरिक एसिड $(H_3BO_3)$ एक दुर्बल मोनोबेसिक लुईस एसिड है,न कि ट्राइबेसिक एसिड,क्योंकि यह पानी से $OH^-$ आयनों को स्वीकार करता है। यह कथन गलत है।
अतः,कथन $I$ और $II$ सही हैं।
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समूह $13$ के तत्वों के यौगिकों के बारे में निम्नलिखित में से कौन सा कथन गलत है?
A
$TlI_3$ को छोड़कर सभी ट्राइहेलाइड मौजूद हैं
B
ट्राइहेलाइड जल-अपघटन पर चतुष्फलकीय (tetrahedral) प्रजातियां बनाते हैं
C
डाइबोरेन इलेक्ट्रॉन-सटीक (electron precise) हाइड्राइड का एक उदाहरण है
D
डाइबोरेन का जल-अपघटन बोरिक एसिड देता है

Solution

(C) सही उत्तर $C$ है।
$A$: $TlI_3$ मौजूद नहीं है क्योंकि $Tl^{3+}$ एक मजबूत ऑक्सीकरण एजेंट है और $I^-$ एक मजबूत कम करने वाला एजेंट है,जिससे $TlI$ और $I_2$ का निर्माण होता है।
$B$: $BCl_3$ जैसे ट्राइहेलाइड जल-अपघटन पर $[B(OH)_4]^-$ बनाते हैं,जो एक चतुष्फलकीय प्रजाति है।
$C$: डाइबोरेन $(B_2H_6)$ एक इलेक्ट्रॉन-न्यून (electron-deficient) हाइड्राइड है,न कि इलेक्ट्रॉन-सटीक हाइड्राइड।
$D$: डाइबोरेन का जल-अपघटन $(B_2H_6 + 6H_2O \rightarrow 2H_3BO_3 + 6H_2)$ बोरिक एसिड $(H_3BO_3)$ देता है।
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डाइबोरेन के जल-अपघटन से यौगिक $X$ प्राप्त होता है। $X$ के बारे में सही कथन हैं
$I$. यह एक ट्राइबेसिक अम्ल है
$II$. यह एक दुर्बल मोनोबेसिक अम्ल है
$III$. इसकी परतदार संरचना होती है
$IV$. यह जल में अत्यधिक घुलनशील है
A
$I$ और $III$
B
$II$ और $III$
C
$II$ और $IV$
D
$I$ और $IV$

Solution

(B) डाइबोरेन $(B_2H_6)$ का जल-अपघटन अभिक्रिया द्वारा होता है: $B_2H_6 + 6H_2O \rightarrow 2H_3BO_3 + 6H_2$।
अतः,यौगिक $X$ ऑर्थोबोरिक अम्ल $(H_3BO_3)$ है।
$H_3BO_3$ के गुणों के बारे में:
$I$. यह ट्राइबेसिक अम्ल नहीं है,बल्कि यह एक दुर्बल मोनोबेसिक लुईस अम्ल है।
$II$. यह कथन सही है।
$III$. ठोस अवस्था में इसकी परतदार संरचना होती है जहाँ $BO_3$ इकाइयाँ हाइड्रोजन बंध द्वारा जुड़ी होती हैं। यह कथन सही है।
$IV$. यह ठंडे पानी में कम घुलनशील है।
इसलिए,सही कथन $II$ और $III$ हैं।
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ईथर में बोरोन ट्राइफ्लोराइड की लिथियम एल्युमिनियम हाइड्राइड के साथ अभिक्रिया से $LiF$,$AlF_3$ और $X$ प्राप्त होते हैं। $X$ की $NH_3$ के साथ अभिक्रिया से $Y$ प्राप्त होता है। $Y$ को और गर्म करने पर एक यौगिक $Z$ प्राप्त होता है। $Z$ में $\sigma$-बंधों और $\pi$-बंधों की संख्या क्रमशः $x$ और $y$ है। $(x+y)$ का मान क्या है?
A
$15$
B
$12$
C
$14$
D
$18$

Solution

(A) $BF_3$ की ईथर में $LiAlH_4$ के साथ अभिक्रिया से डाइबोरेन $(B_2H_6)$ $X$ के रूप में प्राप्त होता है:
$4BF_3 + 3LiAlH_4 \rightarrow 2B_2H_6 + 3LiF + 3AlF_3$.
$X$ $(B_2H_6)$ $NH_3$ के साथ अभिक्रिया करके एक एडक्ट बनाता है,जिसे गर्म करने पर अकार्बनिक बेंजीन (बोराज़ीन,$B_3N_3H_6$) $Z$ के रूप में प्राप्त होता है:
$3B_2H_6 + 6NH_3$ $\rightarrow 3[BH_2(NH_3)_2]^+[BH_4]^-$ $\xrightarrow{\Delta} 2B_3N_3H_6 + 12H_2$.
बोराज़ीन $(B_3N_3H_6)$ की संरचना बेंजीन के समान चक्रीय होती है।
इसमें $12$ $\sigma$-बंध ($6$ $B-N$ और $6$ $B-H/N-H$ बंध) और $3$ $\pi$-बंध होते हैं।
अतः,$x = 12$ और $y = 3$.
$(x + y) = 12 + 3 = 15$.
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निम्नलिखित में से किस अभिक्रिया में हाइड्रोजन मुक्त होता है?
$I$. सोडियम बोरोहाइड्राइड की आयोडीन के साथ अभिक्रिया
$II$. डाइबोरेन का ऑक्सीकरण
$III$. बोरॉन ट्राइफ्लोराइड की सोडियम हाइड्राइड के साथ अभिक्रिया
$IV$. डाइबोरेन का जल-अपघटन
A
केवल $I, IV$
B
केवल $I, II$
C
केवल $III, IV$
D
केवल $I, II, IV$

Solution

(A) $I$. $2NaBH_4 + I_2 \rightarrow B_2H_6 + 2NaI + H_2 \uparrow$ (हाइड्रोजन मुक्त होता है)
$II$. $B_2H_6 + 3O_2 \rightarrow B_2O_3 + 3H_2O$ (हाइड्रोजन मुक्त नहीं होता है)
$III$. $8BF_3 + 6NaH \rightarrow B_2H_6 + 6NaBF_4$ (हाइड्रोजन मुक्त नहीं होता है)
$IV$. $B_2H_6 + 6H_2O \rightarrow 2H_3BO_3 + 6H_2 \uparrow$ (हाइड्रोजन मुक्त होता है)
अतः,अभिक्रिया $I$ और $IV$ में हाइड्रोजन गैस मुक्त होती है।
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निम्नलिखित ऑक्साइडों का अवलोकन करें। दी गई सूची में से उभयधर्मी (amphoteric) ऑक्साइडों की संख्या है
$CO, B_2O_3, SnO_2, PbO_2, Ga_2O_3, SnO, PbO, CO_2$
A
$3$
B
$4$
C
$5$
D
$6$

Solution

(C) उभयधर्मी ऑक्साइडों की पहचान करने के लिए,हम सूची में प्रत्येक ऑक्साइड का विश्लेषण करते हैं:
$1$. $CO$: उदासीन ऑक्साइड।
$2$. $B_2O_3$: दुर्बल अम्लीय ऑक्साइड।
$3$. $SnO_2$: उभयधर्मी ऑक्साइड।
$4$. $PbO_2$: उभयधर्मी ऑक्साइड।
$5$. $Ga_2O_3$: उभयधर्मी ऑक्साइड।
$6$. $SnO$: उभयधर्मी ऑक्साइड।
$7$. $PbO$: उभयधर्मी ऑक्साइड।
$8$. $CO_2$: अम्लीय ऑक्साइड।
उभयधर्मी ऑक्साइड $SnO_2, PbO_2, Ga_2O_3, SnO,$ और $PbO$ हैं।
अतः,उभयधर्मी ऑक्साइडों की कुल संख्या $5$ है।
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कार्बन के अपररूपों के बारे में सही कथन चुनिए:
$I$. ग्रेफाइट की संरचना परतदार होती है।
$II$. बकमिन्स्टरफुलरीन प्रकृति में एरोमैटिक नहीं है।
$III$. ग्रेफाइट में दो निकटवर्ती परतों के बीच की दूरी $340 \ pm$ है।
$IV$. ग्रेफाइट और बकमिन्स्टरफुलरीन में कार्बन का संकरण समान है।
A
$I$ और $IV$
B
$I$ और $II$
C
$II$ और $III$
D
$III$ और $IV$

Solution

(A) $I$. ग्रेफाइट में षट्कोणीय वलयों में व्यवस्थित कार्बन परमाणुओं की परतें होती हैं,जो सही है।
$II$. बकमिन्स्टरफुलरीन $(C_{60})$ गोलाकार पिंजरे में $\pi$-इलेक्ट्रॉनों के विस्थानीकरण के कारण प्रकृति में एरोमैटिक है,इसलिए यह कथन गलत है।
$III$. ग्रेफाइट में दो निकटवर्ती परतों के बीच की दूरी $340 \ pm$ है,न कि $141.5 \ pm$। परत के भीतर $C-C$ बंध लंबाई $141.5 \ pm$ है। अतः,यह कथन गलत है।
$IV$. ग्रेफाइट और बकमिन्स्टरफुलरीन दोनों में,प्रत्येक कार्बन परमाणु $sp^2$ संकरित होता है। अतः,यह कथन सही है।
इसलिए,कथन $I$ और $IV$ सही हैं।
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समूह $14$ के तत्वों की ऑक्सीकरण अवस्थाओं के बारे में गलत कथन है
A
$+4$ और $+2$ के अलावा,कार्बन ऋणात्मक ऑक्सीकरण अवस्थाएँ भी दर्शाता है
B
$+2$ अवस्था में टिन एक अपचायक (reducing agent) के रूप में कार्य करता है
C
$+2$ अवस्था में लेड एक अच्छे अपचायक के रूप में कार्य करता है
D
$+4$ अवस्था में लेड एक अच्छे ऑक्सीकारक (oxidising agent) के रूप में कार्य करता है

Solution

(C) समूह $14$ के तत्वों का संयोजी कोश इलेक्ट्रॉनिक विन्यास $ns^2 np^2$ होता है।
वे सामान्यतः $+4$ और $+2$ ऑक्सीकरण अवस्थाएँ प्रदर्शित करते हैं।
अक्रिय युग्म प्रभाव (inert pair effect) के कारण,समूह में नीचे जाने पर $+2$ ऑक्सीकरण अवस्था की स्थिरता बढ़ती है $(C < Si < Ge < Sn < Pb)$।
इसलिए,$Pb^{2+}$ लेड के लिए सबसे स्थिर अवस्था है,और $Pb^{4+}$ एक प्रबल ऑक्सीकारक है क्योंकि यह $Pb^{2+}$ में अपचयित होने की प्रवृत्ति रखता है।
इसके विपरीत,$Sn^{2+}$ एक अपचायक है क्योंकि यह $Sn^{4+}$ में ऑक्सीकृत होने की प्रवृत्ति रखता है।
चूँकि $Pb^{2+}$ लेड के लिए सबसे स्थिर अवस्था है,इसलिए यह अपचायक के रूप में कार्य नहीं करता है।
अतः,यह कथन कि $+2$ अवस्था में लेड एक अच्छा अपचायक है,गलत है।
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समूह $13$ के तत्वों की परमाणु त्रिज्या का सही क्रम है
A
$Al > Tl > Ga > In$
B
$Al > Ga > In > Tl$
C
$Tl > In > Ga > Al$
D
$Tl > In > Al > Ga$

Solution

(C) समूह $13$ के तत्वों की परमाणु त्रिज्या सामान्यतः समूह में नीचे जाने पर बढ़ती है।
हालाँकि, $d$ और $f$ कक्षकों के दुर्बल परिरक्षण प्रभाव (लैंथेनॉइड संकुचन) के कारण, $Tl$ की परमाणु त्रिज्या $In$ से थोड़ी अधिक होती है।
वास्तविक क्रम $Al < Ga < In < Tl$ है, जिसका अर्थ है $Tl > In > Ga > Al$।
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फास्फोरस का द्विभास्मिक (dibasic) ऑक्सोअम्ल असमानुपातन (disproportionation) पर दो उत्पाद $A$ और $B$ देता है। $A$ और $B$ क्रमशः हैं
A
$HPO_3, PH_3$
B
$H_3PO_2, H_2O$
C
$H_3PO_4, PH_3$
D
$H_4P_2O_6, H_3PO_2$

Solution

(C) फास्फोरस का द्विभास्मिक ऑक्सोअम्ल फास्फोरस अम्ल $(H_3PO_3)$ है।
गर्म करने पर,$H_3PO_3$ निम्नलिखित असमानुपातन अभिक्रिया दर्शाता है:
$4H_3PO_3 \rightarrow 3H_3PO_4 + PH_3$
यहाँ,$H_3PO_3$ में $P$ की ऑक्सीकरण अवस्था $+3$ है।
$H_3PO_4$ में,$P$ की ऑक्सीकरण अवस्था $+5$ है (ऑक्सीकरण)।
$PH_3$ में,$P$ की ऑक्सीकरण अवस्था $-3$ है (अपचयन)।
अतः,उत्पाद $A$ और $B$ क्रमशः $H_3PO_4$ और $PH_3$ हैं।
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$XeO_3$,$XeOF_4$ और $XeF_6$ के केंद्रीय परमाणु पर एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्मों (lone pairs) की संख्या क्रमशः कितनी है?
A
$1, 1, 1$
B
$3, 2, 1$
C
$2, 1, 0$
D
$1, 2, 1$

Solution

(A) इन सभी यौगिकों में केंद्रीय परमाणु ज़ेनॉन $(Xe)$ है,जिसके संयोजी कोश में $8$ इलेक्ट्रॉन होते हैं।
$1$. $XeO_3$ में: $Xe$,$3$ ऑक्सीजन परमाणुओं के साथ $3$ द्वि-आबंध बनाता है। यह आबंधन के लिए $6$ इलेक्ट्रॉनों का उपयोग करता है। शेष इलेक्ट्रॉन = $8 - 6 = 2$। अतः,$1$ एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म।
$2$. $XeOF_4$ में: $Xe$,$4$ फ्लोरीन परमाणुओं के साथ $4$ एकल आबंध और $1$ ऑक्सीजन परमाणु के साथ $1$ द्वि-आबंध बनाता है। यह आबंधन के लिए $4 + 2 = 6$ इलेक्ट्रॉनों का उपयोग करता है। शेष इलेक्ट्रॉन = $8 - 6 = 2$। अतः,$1$ एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म।
$3$. $XeF_6$ में: $Xe$,$6$ फ्लोरीन परमाणुओं के साथ $6$ एकल आबंध बनाता है। यह आबंधन के लिए $6$ इलेक्ट्रॉनों का उपयोग करता है। शेष इलेक्ट्रॉन = $8 - 6 = 2$। अतः,$1$ एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म।
अतः,एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्मों की संख्या $1, 1, 1$ है।
80
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यौगिक $X$ में हाइड्रोजन की ऑक्सीकरण अवस्था $-1$ है और यौगिक $Y$ में $+1$ है। $X$ और $Y$ क्रमशः हैं
A
$LiAlH_4, H_2O$
B
$NH_3, NaH$
C
$CH_4, H_2O$
D
$H_2S, NaBH_4$

Solution

(A) धातु हाइड्राइड में हाइड्रोजन की ऑक्सीकरण अवस्था $-1$ होती है (जहाँ हाइड्रोजन कम विद्युत ऋणात्मक तत्व से जुड़ा होता है) और उन यौगिकों में $+1$ होती है जहाँ हाइड्रोजन अधिक विद्युत ऋणात्मक अधातु से जुड़ा होता है।
$LiAlH_4$ में,हाइड्रोजन हाइड्राइड आयन $(H^-)$ के रूप में मौजूद है,इसलिए इसकी ऑक्सीकरण अवस्था $-1$ है।
$H_2O$ में,हाइड्रोजन ऑक्सीजन से जुड़ा है (जो अधिक विद्युत ऋणात्मक है),इसलिए इसकी ऑक्सीकरण अवस्था $+1$ है।
अतः,$X = LiAlH_4$ और $Y = H_2O$ है।
81
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अम्लीय माध्यम में,$MnO_4^-$ और $Cr_2O_7^{2-}$ के एक-एक मोल का क्रमशः $x$ और $y$ मोल फेरस आयनों $(Fe^{2+})$ द्वारा अपचयन (reduction) होता है। $x$ और $y$ का योग है:
A
$14$
B
$12$
C
$10$
D
$11$

Solution

(D) अम्लीय माध्यम में,अपचयन अर्ध-अभिक्रियाएँ इस प्रकार हैं:
$1$. $MnO_4^-$ के लिए: $MnO_4^- + 8H^+ + 5e^- \rightarrow Mn^{2+} + 4H_2O$. यहाँ,$1 \text{ मोल } MnO_4^- \text{ को } 5 \text{ मोल } e^- \text{ की आवश्यकता होती है}$.
$2$. $Cr_2O_7^{2-}$ के लिए: $Cr_2O_7^{2-} + 14H^+ + 6e^- \rightarrow 2Cr^{3+} + 7H_2O$. यहाँ,$1 \text{ मोल } Cr_2O_7^{2-} \text{ को } 6 \text{ मोल } e^- \text{ की आवश्यकता होती है}$.
फेरस आयनों $(Fe^{2+})$ का फेरिक आयनों $(Fe^{3+})$ में ऑक्सीकरण होता है: $Fe^{2+} \rightarrow Fe^{3+} + e^-$.
अतः,$1 \text{ मोल } Fe^{2+} \text{ एक } 1 \text{ मोल } e^- \text{ प्रदान करता है}$.
इसलिए,$x = 5 \text{ मोल}$ और $y = 6 \text{ मोल}$.
योग $x + y = 5 + 6 = 11$.
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यदि एक मोल अम्लीय $MnO_4^{-}$ द्वारा ऑक्सीकृत $Fe^{2+}$ आयनों के मोलों की संख्या $x$ है,तो एक मोल अम्लीय $Cr_2O_7^{2-}$ द्वारा ऑक्सीकृत $Fe^{2+}$ आयनों के मोलों की संख्या क्या होगी?
A
$\frac{5x}{8}$
B
$\frac{6x}{5}$
C
$\frac{8x}{5}$
D
$\frac{5x}{6}$

Solution

(B) $Fe^{2+}$ का $Fe^{3+}$ में ऑक्सीकरण $1$ इलेक्ट्रॉन के त्याग से होता है: $Fe^{2+} \rightarrow Fe^{3+} + e^-$.
अम्लीय माध्यम में $MnO_4^-$ के लिए: $MnO_4^- + 8H^+ + 5e^- \rightarrow Mn^{2+} + 4H_2O$. अतः,$1$ मोल $MnO_4^-$ द्वारा $5$ मोल $Fe^{2+}$ ऑक्सीकृत होते हैं। इसलिए $x = 5$.
अम्लीय माध्यम में $Cr_2O_7^{2-}$ के लिए: $Cr_2O_7^{2-} + 14H^+ + 6e^- \rightarrow 2Cr^{3+} + 7H_2O$. अतः,$1$ मोल $Cr_2O_7^{2-}$ द्वारा $6$ मोल $Fe^{2+}$ ऑक्सीकृत होते हैं।
चूंकि $x = 5$ है,$Cr_2O_7^{2-}$ द्वारा ऑक्सीकृत $Fe^{2+}$ के मोल $6$ हैं। $x$ के पदों में $6 = \frac{6x}{5}$ होगा।
83
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निम्नलिखित में से किसमें नाइट्रोजन की ऑक्सीकरण अवस्था सबसे कम है?
A
$NH_2OH$
B
$NH_4Cl$
C
$N_2H_4$
D
$HNO_2$

Solution

(B) प्रत्येक यौगिक में नाइट्रोजन $(N)$ की ऑक्सीकरण अवस्था ज्ञात करने के लिए,हम अन्य तत्वों की ऑक्सीकरण अवस्थाओं का उपयोग करते हैं (हाइड्रोजन = $+1$,ऑक्सीजन = $-2$,क्लोरीन = $-1$):
$1$. $NH_2OH$ में: $x + 2(+1) + (-2) + (+1) = 0 \implies x = -1$.
$2$. $NH_4Cl$ में: $x + 4(+1) + (-1) = 0 \implies x = -3$.
$3$. $N_2H_4$ में: $2x + 4(+1) = 0 \implies x = -2$.
$4$. $HNO_2$ में: $(+1) + x + 2(-2) = 0 \implies x = +3$.
मानों की तुलना करने पर: $-1, -3, -2, +3$. सबसे कम ऑक्सीकरण अवस्था $-3$ है जो $NH_4Cl$ में है।
84
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अम्लीय माध्यम में एक मोल परमैंगनेट आयनों $(MnO_4^-)$ द्वारा ऑक्सीकृत होने वाले ऑक्सालेट आयनों $(C_2O_4^{2-})$ के मोलों की संख्या है
A
$2.5$
B
$5$
C
$1.5$
D
$2$

Solution

(A) अम्लीय माध्यम में,परमैंगनेट आयनों और ऑक्सालेट आयनों के बीच रेडॉक्स अभिक्रिया का संतुलित समीकरण इस प्रकार है:
$2MnO_4^- + 5C_2O_4^{2-} + 16H^+ \rightarrow 2Mn^{2+} + 10CO_2 + 8H_2O$
संतुलित समीकरण के स्टोइकोमेट्री के अनुसार,$2$ मोल $MnO_4^-$,$5$ मोल $C_2O_4^{2-}$ के साथ अभिक्रिया करते हैं।
इसलिए,$1$ मोल $MnO_4^-$,$\frac{5}{2} = 2.5$ मोल $C_2O_4^{2-}$ के साथ अभिक्रिया करेगा।
अतः,सही उत्तर $2.5$ है।
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$100 \ mL$ $0.05 \ M$ $Cu^{2+}$ जलीय विलयन को $1 \ L$ $0.1 \ M$ $KI$ विलयन में मिलाया जाता है। निर्मित $I_2$ और $Cu_2I_2$ के मोलों की संख्या क्रमशः क्या है?
A
$2.5 \times 10^{-3}, 5 \times 10^{-3}$
B
$5 \times 10^{-3}, 5 \times 10^{-3}$
C
$5 \times 10^{-3}, 2.5 \times 10^{-3}$
D
$2.5 \times 10^{-3}, 2.5 \times 10^{-3}$

Solution

(D) अभिक्रिया के लिए संतुलित रासायनिक समीकरण है: $2Cu^{2+} + 4I^- \rightarrow Cu_2I_2 + I_2$.
$Cu^{2+}$ के मोल = $M \times V(L) = 0.05 \times 0.1 = 5 \times 10^{-3} \ mol$.
$I^-$ के मोल = $M \times V(L) = 0.1 \times 1 = 0.1 \ mol$.
चूंकि $I^-$ अधिक मात्रा में है,अभिक्रिया $Cu^{2+}$ द्वारा सीमित है।
स्टोइकोमेट्री के अनुसार,$2 \ mol$ $Cu^{2+}$ से $1 \ mol$ $I_2$ और $1 \ mol$ $Cu_2I_2$ बनता है।
अतः,$5 \times 10^{-3} \ mol$ $Cu^{2+}$ से निर्मित मोल:
$I_2$ के मोल = $\frac{5 \times 10^{-3}}{2} = 2.5 \times 10^{-3} \ mol$.
$Cu_2I_2$ के मोल = $\frac{5 \times 10^{-3}}{2} = 2.5 \times 10^{-3} \ mol$.
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क्षारीय माध्यम में निम्नलिखित रेडॉक्स अभिक्रिया पर विचार करें।
$x \ Cr(OH)_3 + y(IO_3)^{-} + z(OH)^{-} \rightarrow a(CrO_4)^{2-} + b(I)^{-} + c(H_2O)$
इसके बारे में गलत विकल्प है
A
$x + y = 3$
B
$a + b = 7$
C
$z = 4$
D
$b = 1$

Solution

(B) संतुलित रासायनिक समीकरण को अभिक्रिया को दो अर्ध-अभिक्रियाओं में विभाजित करके प्राप्त किया जाता है:
ऑक्सीकरण अर्ध-अभिक्रिया: $Cr(OH)_3 + 5(OH)^{-} \rightarrow (CrO_4)^{2-} + 4(H_2O) + 3e^{-}$
अपचयन अर्ध-अभिक्रिया: $(IO_3)^{-} + 3(H_2O) + 6e^{-} \rightarrow (I)^{-} + 6(OH)^{-}$
इलेक्ट्रॉनों को संतुलित करने के लिए,ऑक्सीकरण अर्ध-अभिक्रिया को $2$ से गुणा करें और इसे अपचयन अर्ध-अभिक्रिया में जोड़ें:
$2Cr(OH)_3 + 10(OH)^{-} + (IO_3)^{-} + 3(H_2O) \rightarrow 2(CrO_4)^{2-} + 8(H_2O) + (I)^{-} + 6(OH)^{-}$
समीकरण को सरल बनाने पर,हमें प्राप्त होता है:
$2Cr(OH)_3 + (IO_3)^{-} + 4(OH)^{-} \rightarrow 2(CrO_4)^{2-} + (I)^{-} + 5(H_2O)$
दिए गए समीकरण के साथ तुलना करने पर,$x=2, y=1, z=4, a=2, b=1, c=5$ है।
विकल्पों की जाँच करने पर:
$A: x + y = 2 + 1 = 3$ (सही)
$B: a + b = 2 + 1 = 3$ (गलत,क्योंकि $3 \neq 7$)
$C: z = 4$ (सही)
$D: b = 1$ (सही)
अतः,गलत विकल्प $B$ है।
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जब सोडियम को ऑक्सीजन की अधिकता में जलाया जाता है,तो यह यौगिक $X$ बनाता है और पोटेशियम यौगिक $Y$ बनाता है। $X$ और $Y$ की चुंबकीय प्रकृति क्रमशः क्या है?
A
$X$ और $Y$ दोनों अनुचुंबकीय (paramagnetic) प्रकृति के हैं
B
$X$ प्रतिचुंबकीय (diamagnetic) है और $Y$ अनुचुंबकीय (paramagnetic) प्रकृति का है
C
$X$ अनुचुंबकीय (paramagnetic) है और $Y$ प्रतिचुंबकीय (diamagnetic) प्रकृति का है
D
$X$ और $Y$ दोनों प्रतिचुंबकीय (diamagnetic) प्रकृति के हैं

Solution

(B) जब सोडियम को ऑक्सीजन की अधिकता में जलाया जाता है,तो यह सोडियम पेरोक्साइड $(Na_2O_2)$ बनाता है,इसलिए $X = Na_2O_2$ है।
$Na_2O_2$ में,पेरोक्साइड आयन $O_2^{2-}$ होता है,जिसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास $\sigma 1s^2, \sigma^* 1s^2, \sigma 2s^2, \sigma^* 2s^2, \sigma 2p_z^2, \pi 2p_x^2 = \pi 2p_y^2, \pi^* 2p_x^2 = \pi^* 2p_y^2$ है। चूंकि सभी इलेक्ट्रॉन युग्मित हैं,इसलिए $Na_2O_2$ प्रतिचुंबकीय है।
जब पोटेशियम को ऑक्सीजन की अधिकता में जलाया जाता है,तो यह पोटेशियम सुपरऑक्साइड $(KO_2)$ बनाता है,इसलिए $Y = KO_2$ है।
$KO_2$ में,सुपरऑक्साइड आयन $O_2^-$ होता है,जिसमें $\pi^* 2p$ कक्षकों में एक अयुग्मित इलेक्ट्रॉन होता है। इसलिए,$KO_2$ अनुचुंबकीय है।
अतः,$X$ प्रतिचुंबकीय है और $Y$ अनुचुंबकीय है।
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निम्नलिखित कथनों का अवलोकन करें:
कथन-$I$: $LiF$ और $CsI$ दोनों की जल में विलेयता कम होती है।
कथन-$II$: $LiF$ की जल में कम विलेयता उसकी उच्च जालक एन्थैल्पी (lattice enthalpy) के कारण है और $CsI$ की कम विलेयता उसके आयनों की कम जलयोजन एन्थैल्पी (hydration enthalpy) के कारण है।
A
कथन $I$ और $II$ दोनों सही हैं
B
कथन $I$ सही है,लेकिन कथन $II$ सही नहीं है
C
कथन $I$ सही नहीं है,लेकिन कथन $II$ सही है
D
कथन $I$ और $II$ दोनों सही नहीं हैं

Solution

(B) कथन-$I$ सही है क्योंकि अन्य क्षार धातु हैलाइडों की तुलना में $LiF$ और $CsI$ दोनों जल में कम विलेयता प्रदर्शित करते हैं।
कथन-$II$ गलत है क्योंकि दिए गए कारणों को आपस में बदल दिया गया है। $LiF$ की कम विलेयता मुख्य रूप से इसकी बहुत उच्च जालक एन्थैल्पी के कारण है (क्योंकि $Li^+$ और $F^-$ दोनों बहुत छोटे हैं),जबकि $CsI$ की कम विलेयता इसकी कम जलयोजन एन्थैल्पी के कारण है (क्योंकि $Cs^+$ और $I^-$ दोनों बहुत बड़े हैं,जिससे जल के साथ कमजोर आयन-द्विध्रुव आकर्षण होता है)।
अतः,कथन-$I$ सही है,लेकिन कथन-$II$ सही नहीं है।
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निम्नलिखित में से कितनी धातुएं हवा में जलने पर ऑक्साइड और नाइट्राइड देती हैं?
$Be, Na, Mg, Ba, Sr, Li, K$
A
$2$
B
$3$
C
$4$
D
$5$

Solution

(B) जब धातुओं को हवा में जलाया जाता है,तो वे ऑक्साइड बनाने के लिए $O_2$ के साथ और नाइट्राइड बनाने के लिए $N_2$ के साथ प्रतिक्रिया करती हैं।
$1$. $Li$,$O_2$ और $N_2$ दोनों के साथ प्रतिक्रिया करके $Li_2O$ और $Li_3N$ बनाता है।
$2$. $Mg$,$O_2$ और $N_2$ दोनों के साथ प्रतिक्रिया करके $MgO$ और $Mg_3N_2$ बनाता है।
$3$. $Be$,$O_2$ और $N_2$ दोनों के साथ प्रतिक्रिया करके $BeO$ और $Be_3N_2$ बनाता है।
$Na, K, Ba,$ और $Sr$ मुख्य रूप से ऑक्साइड या पेरोक्साइड/सुपरऑक्साइड बनाते हैं लेकिन इन स्थितियों में स्थिर नाइट्राइड नहीं बनाते हैं।
अतः,जो धातुएं दोनों बनाती हैं वे $Li, Mg,$ और $Be$ हैं।
कुल संख्या $3$ है।
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निम्नलिखित का मिलान करें:
List-$I$ (रासायनिक) List-$II$ (उपयोग)
$A$. $KOH$ $I$. शीतलक (Coolant)
$B$. $Na_{(l)}$ $II$. एंटासिड
$C$. $Li$ $III$. इलेक्ट्रोकेमिकल सेल
$D$. $Mg(OH)_2$ $IV$. $CO_2$ के लिए अवशोषक

सही उत्तर है:
A
$A-II, B-III, C-IV, D-I$
B
$A-IV, B-I, C-III, D-II$
C
$A-IV, B-III, C-II, D-I$
D
$A-III, B-IV, C-I, D-II$

Solution

(B) . $KOH$ का उपयोग $CO_2$ के अवशोषक के रूप में किया जाता है $(A-IV)$.
$B$. तरल सोडियम $(Na_{(l)})$ का उपयोग फास्ट ब्रीडर परमाणु रिएक्टरों में शीतलक के रूप में किया जाता है $(B-I)$.
$C$. $Li$ का उपयोग इलेक्ट्रोकेमिकल सेल में किया जाता है $(C-III)$.
$D$. $Mg(OH)_2$ का उपयोग एंटासिड के रूप में किया जाता है $(D-II)$.
अतः,सही मिलान $A-IV, B-I, C-III, D-II$ है.
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किस प्रक्रिया का उपयोग करके सोडियम कार्बोनेट सामान्यतः तैयार किया जाता है?
A
डीकन प्रक्रिया
B
कास्टनर-केलनर प्रक्रिया
C
नेल्सन सेल प्रक्रिया
D
सॉल्वे प्रक्रिया

Solution

(D) सोडियम कार्बोनेट $(Na_2CO_3)$ औद्योगिक रूप से $Solvay$ प्रक्रिया द्वारा तैयार किया जाता है।
इस प्रक्रिया में,$CO_2$ और $NH_3$ को सोडियम क्लोराइड (ब्राइन) के सांद्र विलयन से गुजारा जाता है।
इस अभिक्रिया में सोडियम बाइकार्बोनेट $(NaHCO_3)$ का निर्माण होता है,जिसे बाद में गर्म करके सोडियम कार्बोनेट प्राप्त किया जाता है।
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$HCl$ के साथ अभिक्रिया करने पर निम्नलिखित में से कौन सा अधिक संख्या में ऑक्साइड देता है?
A
$Na_2CO_3$
B
$NaNO_2$
C
$Na_2SO_3$
D
$NaHCO_3$

Solution

(B) प्रत्येक यौगिक की $HCl$ के साथ अभिक्रिया का विश्लेषण करते हैं:
$1$. $Na_2CO_3 + 2HCl \rightarrow 2NaCl + H_2O + CO_2$ ($1$ ऑक्साइड देता है: $CO_2$)
$2$. $NaNO_2 + HCl \rightarrow NaCl + HNO_2$ (जो आगे $H_2O + NO + NO_2$ में विघटित हो जाता है। $2$ ऑक्साइड देता है: $NO$ और $NO_2$)
$3$. $Na_2SO_3 + 2HCl \rightarrow 2NaCl + H_2O + SO_2$ ($1$ ऑक्साइड देता है: $SO_2$)
$4$. $NaHCO_3 + HCl \rightarrow NaCl + H_2O + CO_2$ ($1$ ऑक्साइड देता है: $CO_2$)
उत्पादों की तुलना करने पर,$NaNO_2$ $2$ ऑक्साइड ($NO$ और $NO_2$) देता है,जो दूसरों की तुलना में अधिक है।
93
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निम्नलिखित में से किसमें $s$-ब्लॉक तत्वों को उनके गलनांक के सही क्रम में व्यवस्थित किया गया है?
A
$Mg > Be > Na > Li$
B
$Li > Be > Mg > Na$
C
$Be > Mg > Li > Na$
D
$Li > Mg > Na > Be$

Solution

(C) $s$-ब्लॉक तत्वों के गलनांक धात्विक बंधन की मजबूती और क्रिस्टल संरचना पर निर्भर करते हैं।
$Be$ (बेरिलियम) अपने छोटे आकार और मजबूत धात्विक बंधन के कारण उच्च गलनांक $(1560 \ K)$ रखता है।
$Mg$ (मैग्नीशियम) का गलनांक $923 \ K$ है।
$Li$ (लिथियम) का गलनांक $453 \ K$ है।
$Na$ (सोडियम) का गलनांक $371 \ K$ है।
इन मानों की तुलना करने पर: $1560 \ K (Be) > 923 \ K (Mg) > 453 \ K (Li) > 371 \ K (Na)$।
अतः,सही क्रम $Be > Mg > Li > Na$ है।
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कोष्ठक में दिए गए गुणों के विरुद्ध गलत क्रम की पहचान करें।
A
$BeCO_3 < MgCO_3 < CaCO_3 < SrCO_3$ (ऊष्मीय स्थिरता)
B
$BeSO_4 > MgSO_4 > CaSO_4 > SrSO_4$ (जल में घुलनशीलता)
C
$Li_2CO_3 < Na_2CO_3 < K_2CO_3 < Rb_2CO_3$ (ऊष्मीय स्थिरता)
D
$BeCO_3 > MgCO_3 > CaCO_3 > SrCO_3$ (जल में घुलनशीलता)

Solution

(C) $1$. क्षारीय मृदा धातुओं के कार्बोनेट की ऊष्मीय स्थिरता समूह में नीचे जाने पर बढ़ती है: $BeCO_3 < MgCO_3 < CaCO_3 < SrCO_3$। अतः,विकल्प $A$ सही है।
$2$. जलयोजन ऊर्जा में कमी के कारण क्षारीय मृदा धातुओं के सल्फेट की घुलनशीलता समूह में नीचे जाने पर घटती है: $BeSO_4 > MgSO_4 > CaSO_4 > SrSO_4$। अतः,विकल्प $B$ सही है।
$3$. क्षारीय धातुओं के कार्बोनेट की ऊष्मीय स्थिरता समूह में नीचे जाने पर बढ़ती है: $Li_2CO_3 < Na_2CO_3 < K_2CO_3 < Rb_2CO_3$। विकल्प $C$ में दिया गया क्रम $(Li_2CO_3 > Na_2CO_3 > K_2CO_3 > Rb_2CO_3)$ गलत है।
$4$. क्षारीय मृदा धातुओं के कार्बोनेट की घुलनशीलता समूह में नीचे जाने पर घटती है: $BeCO_3 > MgCO_3 > CaCO_3 > SrCO_3$। अतः,विकल्प $D$ सही है।
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पानी के एक नमूने में $Mg(HCO_3)_2$ और $Ca(HCO_3)_2$ मौजूद हैं। इस पानी को उबालने पर,ये हाइड्रोजन कार्बोनेट अवक्षेप के रूप में निकल जाते हैं। अवक्षेप हैं
A
$MgCO_3, CaCO_3$
B
$Mg(OH)_2, Ca(OH)_2$
C
$Mg(OH)_2, CaCO_3$
D
$MgCO_3, Ca(OH)_2$

Solution

(C) पानी में अस्थायी कठोरता मैग्नीशियम और कैल्शियम हाइड्रोजन कार्बोनेट की उपस्थिति के कारण होती है।
जब $Mg(HCO_3)_2$ और $Ca(HCO_3)_2$ युक्त पानी को उबाला जाता है,तो ये यौगिक विघटित हो जाते हैं।
$Ca(HCO_3)_2$ विघटित होकर कैल्शियम कार्बोनेट $(CaCO_3)$ बनाता है,जो एक अवक्षेप है: $Ca(HCO_3)_2 \xrightarrow{\Delta} CaCO_3 \downarrow + H_2O + CO_2 \uparrow$।
$Mg(HCO_3)_2$ विघटित होकर मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड $(Mg(OH)_2)$ बनाता है क्योंकि $Mg(OH)_2$,$MgCO_3$ की तुलना में कम घुलनशील होता है: $Mg(HCO_3)_2 \xrightarrow{\Delta} Mg(OH)_2 \downarrow + 2CO_2 \uparrow$।
96
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निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही नहीं है?
A
क्षारीय मृदा धातुओं के कार्बोनेट पानी में अघुलनशील होते हैं।
B
$Beryllium$ हैलाइड्स प्रकृति में सहसंयोजक होते हैं।
C
क्षार धातुओं के सुपरऑक्साइड रंगहीन होते हैं।
D
क्षार धातु हैलाइड्स की निर्माण एन्थैल्पी अत्यधिक ऋणात्मक होती है।

Solution

(C) $1$. क्षारीय मृदा धातुओं के कार्बोनेट $(MgCO_3, CaCO_3, SrCO_3, BaCO_3)$ सामान्यतः पानी में अघुलनशील होते हैं।
$2$. $Beryllium$ हैलाइड्स (जैसे $BeCl_2$) अपने छोटे आकार और $Be^{2+}$ आयन की उच्च ध्रुवीकरण शक्ति के कारण सहसंयोजक होते हैं।
$3$. क्षार धातुओं के सुपरऑक्साइड (जैसे $KO_2, RbO_2, CsO_2$) अनुचुंबकीय (paramagnetic) और रंगीन (आमतौर पर पीले या नारंगी) होते हैं,जो $\pi^* 2p$ आणविक कक्षक में अयुग्मित इलेक्ट्रॉन की उपस्थिति के कारण होता है।
$4$. क्षार धातु हैलाइड्स की जालक ऊर्जा (lattice energy) उच्च होने के कारण उनकी निर्माण एन्थैल्पी अत्यधिक ऋणात्मक होती है।
अतः,यह कथन कि क्षार धातुओं के सुपरऑक्साइड रंगहीन होते हैं,गलत है।
97
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निम्नलिखित में से सही कथनों की पहचान करें:
$I$. $LiF$,$NaF$ की तुलना में पानी में कम घुलनशील है
$II$. $LiCl$ और $MgCl_2$ दोनों इथेनॉल में अघुलनशील हैं
$III$. $Li$ और $Mg$ दोनों नाइट्राइड बनाते हैं
$IV$. $Na_2CO_3$ गर्म करने पर $CO_2$ देता है
A
$I$ और $IV$
B
$I$ और $III$
C
$I$ और $II$
D
$II$ और $III$

Solution

(B) $I$. अपनी बहुत अधिक जालक ऊर्जा (lattice energy) के कारण $LiF$,$NaF$ की तुलना में पानी में कम घुलनशील है। यह कथन सही है।
$II$. $LiCl$ और $MgCl_2$ प्रकृति में सहसंयोजक हैं और इथेनॉल में घुलनशील हैं,अघुलनशील नहीं। यह कथन गलत है।
$III$. $Li$ और $Mg$ दोनों विकर्ण संबंध (diagonal relationship) प्रदर्शित करते हैं और दोनों $N_2$ के साथ अभिक्रिया करके नाइट्राइड ($Li_3N$ और $Mg_3N_2$) बनाते हैं। यह कथन सही है।
$IV$. $Na_2CO_3$ तापीय रूप से स्थिर है और गर्म करने पर $CO_2$ नहीं देता है। यह कथन गलत है।
अतः,कथन $I$ और $III$ सही हैं।
98
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$CaCO_3$ पर तनु $HCl$ की अभिक्रिया से उत्पन्न गैस के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही नहीं है?
A
यह रंगहीन,गंधहीन गैस है
B
इसकी पानी में घुलनशीलता सबसे कम है
C
यह प्रकृति में अम्लीय है
D
यह जहरीली गैस है

Solution

(D) तनु $HCl$ और $CaCO_3$ के बीच की अभिक्रिया है: $CaCO_3(s) + 2HCl(aq) \rightarrow CaCl_2(aq) + H_2O(l) + CO_2(g)$।
उत्पन्न गैस कार्बन डाइऑक्साइड $(CO_2)$ है।
$CO_2$ एक रंगहीन और गंधहीन गैस है।
$CO_2$ प्रकृति में अम्लीय है क्योंकि यह पानी में घुलने पर कार्बोनिक एसिड $(H_2CO_3)$ बनाती है।
$CO_2$ को जहरीली गैस नहीं माना जाता है।
$CO_2$ पानी में मध्यम रूप से घुलनशील है,इसकी घुलनशीलता सबसे कम नहीं है।
99
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$Na_2CO_3$ और $NaHCO_3$ युक्त $4.0 \ g$ मिश्रण को $673 \ K$ तक गर्म किया जाता है। मिश्रण के द्रव्यमान में $0.62 \ g$ की कमी पाई जाती है। मिश्रण में सोडियम कार्बोनेट का प्रतिशत है:
A
$42$
B
$58$
C
$48$
D
$52$

Solution

(B) $NaHCO_3$ को गर्म करने की रासायनिक अभिक्रिया: $2NaHCO_3 \rightarrow Na_2CO_3 + H_2O + CO_2$ है।
$Na_2CO_3$ का $673 \ K$ पर अपघटन नहीं होता है।
द्रव्यमान में कमी $H_2O$ और $CO_2$ के निकलने के कारण होती है।
$2NaHCO_3$ का मोलर द्रव्यमान $2 \times 84 = 168 \ g/mol$ है।
निकलने वाले $H_2O + CO_2$ का द्रव्यमान $18 + 44 = 62 \ g$ है।
माना $NaHCO_3$ का द्रव्यमान $x \ g$ है।
द्रव्यमान में कमी = $(62/168) \times x = 0.62 \ g$ है।
$x = (0.62 \times 168) / 62 = 1.68 \ g$ है।
$Na_2CO_3$ का द्रव्यमान = $4.0 - 1.68 = 2.32 \ g$ है।
$Na_2CO_3$ का प्रतिशत = $(2.32 / 4.0) \times 100 = 58 \%$ है।
100
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$5 \ g$ वजन वाले एक ठोस मिश्रण में $Na_2CO_3$ और $NaHCO_3$ के समान मोल हैं। इस ठोस मिश्रण को $1 \ L$ पानी में घोला गया। इस $1 \ L$ मिश्रण विलयन के साथ पूरी तरह से प्रतिक्रिया करने के लिए आवश्यक $0.1 \ M \ HCl$ का आयतन ($mL$ में) क्या है?
A
$157.8$
B
$789.0$
C
$1578.0$
D
$946.8$

Solution

(B) मान लीजिए $Na_2CO_3$ के मोल $x$ हैं और $NaHCO_3$ के मोल भी $x$ हैं।
$Na_2CO_3$ का मोलर द्रव्यमान $= 106 \ g/mol$.
$NaHCO_3$ का मोलर द्रव्यमान $= 84 \ g/mol$.
मिश्रण का कुल द्रव्यमान: $106x + 84x = 5 \ g$.
$190x = 5 \implies x = 0.026316 \ mol$.
$HCl$ के साथ अभिक्रियाएं:
$Na_2CO_3 + 2HCl \rightarrow 2NaCl + H_2O + CO_2$ ($2x$ मोल $HCl$ की आवश्यकता है)
$NaHCO_3 + HCl \rightarrow NaCl + H_2O + CO_2$ ($x$ मोल $HCl$ की आवश्यकता है)
$HCl$ के कुल आवश्यक मोल $= 3x = 3 \times 0.026316 = 0.078948 \ mol$.
$0.1 \ M \ HCl$ का आवश्यक आयतन $= \frac{0.078948}{0.1} = 0.78948 \ L$.
$mL$ में बदलने पर: $0.78948 \times 1000 = 789.48 \ mL \approx 789.0 \ mL$.
101
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निम्नलिखित संकुल आयनों का अवलोकन करें:
संकुल आयनलेबल
$[Mn(CN)_6]^{3-}$$A$
$[Fe(CN)_6]^{3-}$$B$
$[CoF_6]^{3-}$$C$
$[Co(C_2O_4)_3]^{3-}$$D$

वह विकल्प पहचानें जिसमें संकुल आयनों में अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों का बढ़ता हुआ क्रम सही है।
A
$C < A < B < D$
B
$B < A < C < D$
C
$D < A < B < C$
D
$D < B < A < C$

Solution

(D) अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की संख्या निर्धारित करने के लिए,हम प्रत्येक संकुल में केंद्रीय धातु आयन के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास का विश्लेषण करते हैं:
$1$. $[Mn(CN)_6]^{3-}$ $(A)$: $Mn^{3+}$ का विन्यास $3d^4$ है। $CN^-$ एक प्रबल क्षेत्र लिगेंड है,जो युग्मन का कारण बनता है। विन्यास: $t_{2g}^4 e_g^0$। अयुग्मित इलेक्ट्रॉन = $2$।
$2$. $[Fe(CN)_6]^{3-}$ $(B)$: $Fe^{3+}$ का विन्यास $3d^5$ है। $CN^-$ एक प्रबल क्षेत्र लिगेंड है। विन्यास: $t_{2g}^5 e_g^0$। अयुग्मित इलेक्ट्रॉन = $1$।
$3$. $[CoF_6]^{3-}$ $(C)$: $Co^{3+}$ का विन्यास $3d^6$ है। $F^-$ एक दुर्बल क्षेत्र लिगेंड है। विन्यास: $t_{2g}^4 e_g^2$। अयुग्मित इलेक्ट्रॉन = $4$।
$4$. $[Co(C_2O_4)_3]^{3-}$ $(D)$: $Co^{3+}$ का विन्यास $3d^6$ है। $C_2O_4^{2-}$ एक प्रबल क्षेत्र लिगेंड है। विन्यास: $t_{2g}^6 e_g^0$। अयुग्मित इलेक्ट्रॉन = $0$।
अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की संख्या की तुलना करने पर: $D (0) < B (1) < A (2) < C (4)$।
सही बढ़ता हुआ क्रम $D < B < A < C$ है।
102
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$E^{\circ}_{M^{3+} \mid M^{2+}} \text{ (} V \text{ में) किसके लिए उच्चतम है?}$
A
$Fe$
B
$Mn$
C
$Cr$
D
$V$

Solution

(B) मानक इलेक्ट्रोड विभव $E^{\circ}_{M^{3+} \mid M^{2+}}$ $+3$ ऑक्सीकरण अवस्था से $+2$ ऑक्सीकरण अवस्था में अपचयन की सुगमता को दर्शाता है।
$3d$ श्रेणी के तत्वों के लिए मान इस प्रकार हैं:
$V^{3+} \mid V^{2+} = -0.26 \ V$
$Cr^{3+} \mid Cr^{2+} = -0.41 \ V$
$Mn^{3+} \mid Mn^{2+} = +1.57 \ V$
$Fe^{3+} \mid Fe^{2+} = +0.77 \ V$
इन मानों की तुलना करने पर,$Mn^{3+} \mid Mn^{2+}$ का मान सबसे अधिक धनात्मक है क्योंकि $Mn^{2+}$ $(3d^5)$ एक स्थिर अर्ध-पूरित विन्यास है,जो $Mn^{3+}$ का $Mn^{2+}$ में अपचयन को अत्यधिक अनुकूल बनाता है।
अतः,सही विकल्प $B$ है।
103
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निम्नलिखित में से किस संक्रमण धातु आयन (जलीय) का रंग सही ढंग से सुमेलित नहीं है?
A
$Fe^{2 } - \text{हरा}$
B
$Cu^{2 } - \text{नीला}$
C
$Fe^{3 } - \text{गुलाबी}$
D
$V^{3 } - \text{हरा}$

Solution

(C) जलीय विलयन में संक्रमण धातु आयनों का रंग $d-d$ संक्रमण के कारण होता है।
$Fe^{2 }$ (जलीय) हल्के हरे रंग का होता है।
$Cu^{2 }$ (जलीय) नीले रंग का होता है।
$V^{3 }$ (जलीय) हरे रंग का होता है।
$Fe^{3 }$ (जलीय) पीले या हल्के बैंगनी रंग का होता है,गुलाबी नहीं।
अतः,गलत सुमेल $Fe^{3 } - \text{गुलाबी}$ है।
104
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List-$I$ में दिए गए तत्वों को List-$II$ में उनके संबंधित समूहों के साथ सुमेलित कीजिए।
List-$I$ (तत्व)List-$II$ (समूह)
$A$. $Mn, Tc, Re$$IV$. $7$
$B$. $Zn, Cd, Hg$$I$. $12$
$C$. $Ti, Zr, Hf$$II$. $4$
$D$. $Ga, In, Tl$$V$. $13$

सही उत्तर है:
A
$A-IV, B-I, C-II, D-V$
B
$A-IV, B-II, C-I, D-V$
C
$A-III, B-I, C-II, D-V$
D
$A-III, B-V, C-I, D-IV$

Solution

$ (A) $ दिए गए तत्वों के लिए समूह आवंटन इस प्रकार हैं:
$A$. $Mn, Tc, Re$ समूह $7$ से संबंधित हैं।
$B$. $Zn, Cd, Hg$ समूह $12$ से संबंधित हैं।
$C$. $Ti, Zr, Hf$ समूह $4$ से संबंधित हैं।
$D$. $Ga, In, Tl$ समूह $13$ से संबंधित हैं।
अतः, सही मिलान $A-IV, B-I, C-II, D-V$ है।
105
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लैंथेनॉइड्स के बारे में सही कथनों की पहचान करें:
$I$. $Ce^{4+}$ और $Tb^{4+}$ ऑक्सीकरण एजेंट के रूप में कार्य करते हैं।
$II$. $Eu^{2+}$ और $Yb^{2+}$ अपचायक एजेंट के रूप में कार्य करते हैं।
$III$. मिशमेटल $95 \%$ लैंथेनॉइड धातु और $5 \%$ आयरन की एक मिश्र धातु है।
$IV$. $La^{3+}$ और $Ce^{4+}$ प्रतिचुंबकीय प्रकृति के होते हैं।
A
केवल $I$ और $II$
B
केवल $I$ और $IV$
C
केवल $II, III$ और $IV$
D
केवल $I, II$ और $IV$

Solution

(B) $I$. $Ce^{4+}$ $(4f^0)$ और $Tb^{4+}$ $(4f^7)$ स्थिर विन्यास प्राप्त करने के लिए इलेक्ट्रॉन प्राप्त करने की प्रबल प्रवृत्ति रखते हैं,इसलिए वे प्रबल ऑक्सीकरण एजेंट के रूप में कार्य करते हैं। यह कथन सही है।
$II$. $Eu^{2+}$ $(4f^7)$ और $Yb^{2+}$ $(4f^{14})$ क्रमशः अर्ध-पूर्ण और पूर्ण रूप से भरे हुए $f$-कक्षकों के कारण स्थिर हैं। वे $+3$ अवस्था प्राप्त करने के लिए इलेक्ट्रॉन खोने की प्रवृत्ति रखते हैं,इसलिए वे अपचायक एजेंट के रूप में कार्य करते हैं। प्रश्न में दिया गया कथन कि वे ऑक्सीकरण एजेंट के रूप में कार्य करते हैं,गलत है।
$III$. मिशमेटल में लगभग $95 \%$ लैंथेनॉइड धातु और $5 \%$ आयरन होता है,साथ ही $S, C, Ca,$ और $Al$ के अंश होते हैं। प्रश्न में दिया गया कथन प्रतिशत को गलत तरीके से दर्शाता है। यह कथन गलत है।
$IV$. $La^{3+}$ $([Xe] 4f^0)$ और $Ce^{4+}$ $([Xe] 4f^0)$ में कोई अयुग्मित इलेक्ट्रॉन नहीं होता है,जो उन्हें प्रतिचुंबकीय बनाता है। यह कथन सही है।
अतः,कथन $I$ और $IV$ सही हैं।
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निम्नलिखित तत्वों के युग्मों पर विचार करें और उन युग्मों की पहचान करें जिनकी परमाणु त्रिज्या लगभग समान है।
$I$. $Y, La$
$II$. $Zr, Hf$
$III$. $Mo, W$
$IV$. $Cr, Mo$
A
$I$ & $II$
B
$II$ & $III$
C
$III$ & $IV$
D
$I$ & $III$

Solution

(B) एक ही समूह में नीचे जाने पर नई कोशों के जुड़ने के कारण परमाणु त्रिज्या सामान्यतः बढ़ती है। हालाँकि, $4d$ और $5d$ श्रेणी के तत्वों के लिए, लैंथेनॉइड संकुचन के कारण परमाणु त्रिज्या अक्सर बहुत समान होती है।
$1$. $Zr$ ($4d$ श्रेणी) और $Hf$ ($5d$ श्रेणी) की परमाणु त्रिज्या लैंथेनॉइड संकुचन के कारण लगभग समान ($160 \text{ pm}$ और $159 \text{ pm}$) होती है।
$2$. $Mo$ ($4d$ श्रेणी) और $W$ ($5d$ श्रेणी) भी इसी घटना के कारण लगभग समान परमाणु त्रिज्या ($140 \text{ pm}$ और $141 \text{ pm}$) प्रदर्शित करते हैं।
अतः, युग्म $II$ और $III$ की परमाणु त्रिज्या लगभग समान है।
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पैरामैग्नेटिक प्रकृति और समान संख्या में इलेक्ट्रॉनों वाले आयनों का युग्म है
A
$Lu^{3+}, Yb^{2+}$
B
$Eu^{3+}, Pm^{2+}$
C
$Eu^{2+}, Gd^{3+}$
D
$La^{3+}, Ce^{4+}$

Solution

(C) सही युग्म निर्धारित करने के लिए,हम प्रत्येक आयन के लिए इलेक्ट्रॉनिक विन्यास और इलेक्ट्रॉनों की संख्या का विश्लेषण करते हैं:
$1$. $Lu^{3+}$ $(Z=71)$: $[Xe] 4f^{14}$,इलेक्ट्रॉन = $68$,डायमैग्नेटिक।
$2$. $Yb^{2+}$ $(Z=70)$: $[Xe] 4f^{14}$,इलेक्ट्रॉन = $68$,डायमैग्नेटिक।
$3$. $Eu^{3+}$ $(Z=63)$: $[Xe] 4f^{6}$,इलेक्ट्रॉन = $60$,पैरामैग्नेटिक।
$4$. $Pm^{2+}$ $(Z=61)$: $[Xe] 4f^{5}$,इलेक्ट्रॉन = $59$,पैरामैग्नेटिक।
$5$. $Eu^{2+}$ $(Z=63)$: $[Xe] 4f^{7}$,इलेक्ट्रॉन = $61$,पैरामैग्नेटिक।
$6$. $Gd^{3+}$ $(Z=64)$: $[Xe] 4f^{7}$,इलेक्ट्रॉन = $61$,पैरामैग्नेटिक।
$7$. $La^{3+}$ $(Z=57)$: $[Xe]$,इलेक्ट्रॉन = $54$,डायमैग्नेटिक।
$8$. $Ce^{4+}$ $(Z=58)$: $[Xe]$,इलेक्ट्रॉन = $54$,डायमैग्नेटिक।
विकल्पों की तुलना करने पर,$Eu^{2+}$ और $Gd^{3+}$ दोनों में $61$ इलेक्ट्रॉन हैं और दोनों में $4f$ ऑर्बिटल में $7$ अयुग्मित इलेक्ट्रॉन हैं,जो उन्हें पैरामैग्नेटिक बनाते हैं।
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$298 \ K$ पर,यदि अभिक्रिया $Zn_{(s)} + 2H^+_{(aq)} \rightarrow Zn^{2+}(0.01 \ M) + H_{2(g)}(1 \ atm)$ के लिए सेल का $emf$ $0.28 \ V$ है,तो हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड पर विलयन का $pH$ क्या होगा? (दिया गया है: $\frac{2.303 \ RT}{F} = 0.06 \ V$,$E^o_{Zn^{2+}|Zn} = -0.76 \ V$)
A
$7$
B
$8$
C
$9$
D
$10$

Solution

(C) सेल अभिक्रिया: $Zn_{(s)} + 2H^+_{(aq)} \rightarrow Zn^{2+}(0.01 \ M) + H_{2(g)}(1 \ atm)$.
$E^o_{cell} = E^o_{cathode} - E^o_{anode} = 0 - (-0.76) = 0.76 \ V$.
नेर्न्स्ट समीकरण का उपयोग करने पर: $E_{cell} = E^o_{cell} - \frac{0.06}{n} \log \frac{[Zn^{2+}] \cdot P_{H_2}}{[H^+]^2}$.
यहाँ $n = 2$,$E_{cell} = 0.28 \ V$,$[Zn^{2+}] = 0.01 \ M$,$P_{H_2} = 1 \ atm$.
$0.28 = 0.76 - \frac{0.06}{2} \log \frac{0.01}{[H^+]^2}$.
$-0.48 = -0.03 \log \frac{0.01}{[H^+]^2}$.
$16 = \log \frac{0.01}{[H^+]^2} = -2 - 2 \log [H^+]$.
चूँकि $pH = -\log [H^+]$,इसलिए $16 = -2 + 2(pH)$.
$18 = 2(pH) \implies pH = 9$.
109
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$Pt$ इलेक्ट्रोड के बीच जलीय कॉपर $(II)$ सल्फेट का विद्युत अपघटन करने पर एनोड पर '$X$' और कैथोड पर '$Y$' प्राप्त होता है। $X$ और $Y$ क्रमशः क्या हैं?
A
$Cu, O_2$
B
$O_2, Cu$
C
$SO_2, H_2$
D
$O_2, Cu$

Solution

(B) अक्रिय $Pt$ इलेक्ट्रोड का उपयोग करके जलीय $CuSO_4$ के विद्युत अपघटन के दौरान,विलयन में $Cu^{2+}$,$SO_4^{2-}$,$H^+$ और $OH^-$ आयन उपस्थित होते हैं।
कैथोड पर,$Cu^{2+}$ आयनों का अपचयन विभव $H^+$ आयनों की तुलना में अधिक होता है,इसलिए $Cu^{2+}$ आयनों का $Cu$ धातु में अपचयन हो जाता है: $Cu^{2+}(aq) + 2e^- \rightarrow Cu(s)$।
एनोड पर,$SO_4^{2-}$ आयनों की तुलना में $OH^-$ आयनों का ऑक्सीकरण होता है,जिससे ऑक्सीजन गैस निकलती है: $4OH^-(aq) \rightarrow O_2(g) + 2H_2O(l) + 4e^-$।
अतः,'$X$' (एनोड उत्पाद) $O_2$ है और '$Y$' (कैथोड उत्पाद) $Cu$ है।
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निम्नलिखित सेल $Cr | Cr^{3+} (0.1 \ M) || Fe^{2+} (0.01 \ M) | Fe$ के लिए अभिक्रिया का गिब्स ऊर्जा परिवर्तन ($kJ \ mol^{-1}$ में) क्या होगा? (दिया है: $E^{\circ}_{Cr^{3+}/Cr} = -0.74 \ V$,$E^{\circ}_{Fe^{2+}/Fe} = -0.44 \ V$)
A
$-150.9$
B
$+150.9$
C
$-173.7$
D
$+173.7$

Solution

(A) सेल अभिक्रिया: $2Cr(s) + 3Fe^{2+}(aq) \rightarrow 2Cr^{3+}(aq) + 3Fe(s)$.
स्थानांतरित इलेक्ट्रॉनों की संख्या,$n = 6$.
मानक सेल विभव: $E^{\circ}_{cell} = E^{\circ}_{cathode} - E^{\circ}_{anode} = -0.44 - (-0.74) = +0.30 \ V$.
नर्न्स्ट समीकरण का उपयोग करते हुए: $E_{cell} = E^{\circ}_{cell} - \frac{0.0591}{n} \log \frac{[Cr^{3+}]^2}{[Fe^{2+}]^3}$.
$E_{cell} = 0.30 - \frac{0.0591}{6} \log \frac{(0.1)^2}{(0.01)^3} = 0.30 - 0.0394 = 0.2606 \ V$.
गिब्स ऊर्जा परिवर्तन: $\Delta G = -nFE_{cell} = -6 \times 96500 \times 0.2606 \ J \ mol^{-1} = -150.9 \ kJ \ mol^{-1}$.
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अनंत तनुता पर एसिटिक एसिड विलयन की मोलर चालकता $390 \ S \ cm^2 \ mol^{-1}$ है। $0.01 \ M$ एसिटिक एसिड विलयन की मोलर चालकता ($S \ cm^2 \ mol^{-1}$ में) क्या होगी? (दिया है: $K_{a}(CH_3COOH) = 1.8 \times 10^{-5}$,$1-\alpha \approx 1$ मानिए)
A
$10.64$
B
$16.54$
C
$51.64$
D
$15.64$

Solution

(B) वियोजन की मात्रा $\alpha$ सूत्र $\alpha = \sqrt{\frac{K_a}{C}}$ द्वारा दी जाती है।
दिया है $K_a = 1.8 \times 10^{-5}$ और $C = 0.01 \ M = 10^{-2} \ M$.
$\alpha = \sqrt{\frac{1.8 \times 10^{-5}}{10^{-2}}} = \sqrt{1.8 \times 10^{-3}} = \sqrt{18 \times 10^{-4}} = 4.24 \times 10^{-2} = 0.0424$.
मोलर चालकता $\Lambda_m$ और अनंत तनुता पर मोलर चालकता $\Lambda_m^\circ$ के बीच संबंध $\Lambda_m = \alpha \times \Lambda_m^\circ$ है।
$\Lambda_m = 0.0424 \times 390 \ S \ cm^2 \ mol^{-1} = 16.536 \ S \ cm^2 \ mol^{-1} \approx 16.54 \ S \ cm^2 \ mol^{-1}$.
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$0.5 \ A$ की विद्युत धारा को पिघले हुए $AlCl_3$ से $96.5 \ s$ के लिए गुजारा जाता है। कैथोड पर जमा हुए एल्युमीनियम का द्रव्यमान $x \ mg$ है और एनोड पर मुक्त क्लोरीन का आयतन ($STP$ पर) $y \ mL$ है। $x$ और $y$ क्रमशः हैं
A
$18.0, 22.4$
B
$13.5, 16.8$
C
$9.0, 11.2$
D
$4.5, 5.6$

Solution

(D) प्रवाहित कुल आवेश $Q = I \times t = 0.5 \ A \times 96.5 \ s = 48.25 \ C$ है।
कैथोड पर अभिक्रिया के लिए: $Al^{3+} + 3e^- \rightarrow Al(s)$।
इलेक्ट्रॉनों के मोल = $\frac{48.25}{96500} = 5 \times 10^{-4} \ mol$।
जमा हुए $Al$ के मोल = $\frac{5 \times 10^{-4}}{3} \ mol$।
$Al$ का द्रव्यमान $(x)$ = $\frac{5 \times 10^{-4}}{3} \times 27 \ g = 4.5 \times 10^{-3} \ g = 4.5 \ mg$।
एनोड पर अभिक्रिया के लिए: $2Cl^- \rightarrow Cl_2(g) + 2e^-$।
मुक्त $Cl_2$ के मोल = $\frac{5 \times 10^{-4}}{2} = 2.5 \times 10^{-4} \ mol$।
$Cl_2$ का आयतन $(y)$ = $2.5 \times 10^{-4} \ mol \times 22400 \ mL/mol = 5.6 \ mL$।
अतः,$x = 4.5$ और $y = 5.6$।
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$298 \ K$ पर अभिक्रिया $M_{(s)} + 2 Ag^{+}_{(aq)} \rightarrow M^{2+}_{(aq)} + 2 Ag_{(s)}$ के लिए साम्य स्थिरांक $10^{15}$ है। इस अभिक्रिया के लिए $E_{cell}^{\ominus}$ ($V$ में) क्या होगा? $\left(\frac{2.303 RT}{F}\right) = 0.06 \ V$
A
$0.45$
B
$0.90$
C
$0.225$
D
$1.10$

Solution

(A) मानक सेल विभव $E_{cell}^{\ominus}$ और साम्य स्थिरांक $K_c$ के बीच संबंध नर्नस्ट समीकरण द्वारा दिया जाता है:
$E_{cell}^{\ominus} = \frac{2.303 RT}{nF} \log K_c$
यहाँ,$n = 2$ (संतुलित अभिक्रिया में स्थानांतरित इलेक्ट्रॉनों की संख्या)।
दिया गया है: $\frac{2.303 RT}{F} = 0.06 \ V$,$K_c = 10^{15}$,और $n = 2$।
मान रखने पर:
$E_{cell}^{\ominus} = \frac{0.06}{2} \log(10^{15})$
$E_{cell}^{\ominus} = 0.03 \times 15$
$E_{cell}^{\ominus} = 0.45 \ V$
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सिडेराइट अयस्क का संगठन क्या है?
A
$FeCO_3$
B
$ZnCO_3$
C
$CuCO_3 \cdot Cu(OH)_2$
D
$CuFeS_2$

Solution

(A) सिडेराइट लोहे का एक महत्वपूर्ण अयस्क है।
इसका रासायनिक संगठन $FeCO_3$ (आयरन$(II)$ कार्बोनेट) है।
अतः,सही विकल्प $A$ है।
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किस धातु के अयस्क का सांद्रण लीचिंग (leaching) द्वारा किया जाता है?
A
$Zn$
B
$Cu$
C
$Al$
D
$Fe$

Solution

(C) लीचिंग अयस्क के सांद्रण की एक प्रक्रिया है जिसमें अयस्क को एक उपयुक्त विलायक में घोला जाता है जिसमें अयस्क घुलनशील होता है लेकिन अशुद्धियाँ नहीं होती हैं।
$Al$ (एल्युमीनियम) मुख्य रूप से इसके अयस्क बॉक्साइट $(Al_2O_3 \cdot 2H_2O)$ से निकाला जाता है,जिसे बेयर प्रक्रिया द्वारा सांद्रित किया जाता है,जो $NaOH$ के सांद्र घोल का उपयोग करके लीचिंग की एक प्रसिद्ध विधि है।
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निम्नलिखित कथनों का अवलोकन करें:
कथन-$I$: ऑक्साइड अयस्क के अपचयन के लिए अपचायक का चयन एलिंगम आरेख (Ellingham diagram),जो $\Delta G^{\ominus}$ बनाम $T$ का एक आलेख है,का उपयोग करके किया जा सकता है।
कथन-$II$: एलिंगम आरेख के अनुसार,उच्च $\Delta G^{\ominus}$ वाला धातु ऑक्साइड,निम्न $\Delta G^{\ominus}$ वाले ऑक्साइड की तुलना में अधिक स्थिर होता है।
A
दोनों कथन $I$ और $II$ सही हैं
B
कथन $I$ सही है,लेकिन कथन $II$ सही नहीं है
C
कथन $I$ सही नहीं है,लेकिन कथन $II$ सही है
D
दोनों कथन $I$ और $II$ सही नहीं हैं

Solution

(B) कथन-$I$ सही है: एलिंगम आरेख ऑक्साइड के निर्माण के लिए $\Delta G^{\ominus}$ बनाम $T$ का एक आलेख है। यह एक उपयुक्त अपचायक चुनने में मदद करता है क्योंकि यदि अपचयन अभिक्रिया के लिए $\Delta G^{\ominus}$ ऋणात्मक है,तो एक धातु दूसरी धातु के ऑक्साइड का अपचयन कर सकती है। यह तब होता है जब एलिंगम आरेख में अपचायक के लिए रेखा धातु ऑक्साइड की रेखा के नीचे स्थित होती है।
कथन-$II$ गलत है: एलिंगम आरेख में,$\Delta G^{\ominus}$ का अधिक ऋणात्मक मान धातु ऑक्साइड की अधिक स्थिरता को दर्शाता है। इसलिए,निम्न (अधिक ऋणात्मक) $\Delta G^{\ominus}$ वाला धातु ऑक्साइड,उच्च (कम ऋणात्मक) $\Delta G^{\ominus}$ वाले ऑक्साइड की तुलना में अधिक स्थिर होता है।
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स्फेलेराइट अयस्क से प्राप्त धातु $X$ को निम्नलिखित में से किस विधि द्वारा शुद्ध किया जा सकता है?
A
आसवन
B
पोलिंग
C
जोन रिफाइनिंग
D
वाष्प प्रावस्था शोधन

Solution

(A) स्फेलेराइट अयस्क $ZnS$ (जिंक ब्लेंड) है।
निष्कर्षण के बाद,प्राप्त धातु जिंक $(Zn)$ है।
जिंक का क्वथनांक कम $(1180 \ K)$ होता है और यह वाष्पशील है।
इसलिए,इसे आसवन (distillation) की प्रक्रिया द्वारा शुद्ध किया जाता है।
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उस अभिक्रिया की पहचान करें,जो कॉपर के निष्कर्षण से संबंधित नहीं है।
A
$2 Cu_2S + 3 O_2 \rightarrow 2 Cu_2O + 2 SO_2$
B
$2 FeS + 3 O_2 \rightarrow 2 FeO + 2 SO_2$
C
$FeO + SiO_2 \rightarrow FeSiO_3$
D
$SiO_2 + CaO \rightarrow CaSiO_3$

Solution

(D) कॉपर पाइराइट्स $(CuFeS_2)$ से कॉपर के निष्कर्षण में,सल्फर को $SO_2$ के रूप में हटाने के लिए अयस्क का भर्जन किया जाता है।
$1$. $2 CuFeS_2 + O_2 \rightarrow Cu_2S + 2 FeS + SO_2$
$2$. $2 FeS + 3 O_2 \rightarrow 2 FeO + 2 SO_2$ (विकल्प $B$ आयरन की अशुद्धि को हटाने से संबंधित है)।
$3$. $FeO + SiO_2 \rightarrow FeSiO_3$ (विकल्प $C$ आयरन को हटाने के लिए धातुमल (slag) बनाने का चरण है)।
$4$. $2 Cu_2S + 3 O_2 \rightarrow 2 Cu_2O + 2 SO_2$ (विकल्प $A$ कॉपर मैट का आंशिक ऑक्सीकरण है)।
विकल्प $D$ $(SiO_2 + CaO \rightarrow CaSiO_3)$ आयरन के निष्कर्षण (वात्या भट्टी) में उपयोग की जाने वाली अभिक्रिया है,जिसमें $CaO$ फ्लक्स का उपयोग करके $SiO_2$ जैसी अम्लीय अशुद्धियों को हटाया जाता है। यह कॉपर के निष्कर्षण से संबंधित नहीं है।
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ब्लास्ट फर्नेस का उपयोग करके लोहे के निष्कर्षण में,अशुद्धि $(X)$ को हटाने के लिए,अयस्क में रसायन $(Y)$ मिलाया जाता है। $X$ और $Y$ क्रमशः हैं
A
$SiO_2, MgCO_3$
B
$FeO, SiO_2$
C
$SiO_2, CaCO_3$
D
$SiO_2, FeCO_3$

Solution

(C) लोहे के निष्कर्षण में,मुख्य अशुद्धि सिलिका $(SiO_2)$ होती है,जो प्रकृति में अम्लीय होती है।
इस अम्लीय अशुद्धि को हटाने के लिए,क्षारीय फ्लक्स के रूप में कैल्शियम कार्बोनेट $(CaCO_3)$ मिलाया जाता है।
ब्लास्ट फर्नेस के अंदर,$CaCO_3$ विघटित होकर कैल्शियम ऑक्साइड $(CaO)$ बनाता है,जो $SiO_2$ के साथ प्रतिक्रिया करके कैल्शियम सिलिकेट $(CaSiO_3)$ नामक धातुमल (slag) बनाता है।
अतः,$X = SiO_2$ और $Y = CaCO_3$ है।
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निम्नलिखित में से कौन $S_{N}1$ क्रियाविधि के प्रति सबसे अधिक अभिक्रियाशील है?
A
$C_{6}H_{5}CH_{2}Br$
B
$C_{6}H_{5}CH(Br)CH_{3}$
C
$C_{6}H_{5}CH(Br)C_{6}H_{5}$
D
$C_{6}H_{5}C(Br)(CH_{3})C_{6}H_{5}$

Solution

(D) $S_{N}1$ क्रियाविधि के प्रति एल्किल हैलाइड की अभिक्रियाशीलता लिविंग ग्रुप $(Br^-)$ के निकलने के बाद बनने वाले कार्बोनियम आयन (कार्बोकेशन) मध्यवर्ती के स्थायित्व पर निर्भर करती है।
$1$. $C_{6}H_{5}CH_{2}^+$ (बेंजाइल कार्बोकेशन): एक फेनिल रिंग के साथ अनुनाद द्वारा स्थिर होता है।
$2$. $C_{6}H_{5}CH^+CH_{3}$ ($1$-फेनिलएथिल कार्बोकेशन): एक फेनिल रिंग के साथ अनुनाद और मिथाइल समूह के प्रेरणिक प्रभाव द्वारा स्थिर होता है।
$3$. $C_{6}H_{5}CH^+C_{6}H_{5}$ (डाइफेनिलमिथाइल कार्बोकेशन): दो फेनिल रिंग के साथ अनुनाद द्वारा अत्यधिक स्थिर होता है।
$4$. $C_{6}H_{5}C^+(CH_{3})C_{6}H_{5}$ ($1$,$1$-डाइफेनिल$-1-$एथिल कार्बोकेशन): दो फेनिल रिंग के साथ अनुनाद और मिथाइल समूह के प्रेरणिक प्रभाव के कारण सबसे अधिक स्थिर है।
चूंकि कार्बोकेशन के स्थायित्व का क्रम $C_{6}H_{5}C^+(CH_{3})C_{6}H_{5} > C_{6}H_{5}CH^+C_{6}H_{5} > C_{6}H_{5}CH^+CH_{3} > C_{6}H_{5}CH_{2}^+$ है,इसलिए $C_{6}H_{5}C(Br)(CH_{3})C_{6}H_{5}$ यौगिक $S_{N}1$ क्रियाविधि के प्रति सबसे अधिक अभिक्रियाशील है।
121
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दी गई अभिक्रियाओं में उत्पादों $B$ और $C$ के बारे में सही कथन हैं:
$CH_3CH_2OH$ $\xrightarrow[\text{Anhy } ZnCl_2]{HCl} A$ $\xrightarrow[\text{AgCN}]{\text{ethanolic}} \underset{\text{Minor}}{B} + \underset{\text{Major}}{C}$
$I$. $B$ और $C$ क्रियात्मक समावयवी हैं
$II$. $H_2 / \text{Catalyst}$ के साथ,$B$,$1^{\circ}$ एमीन देता है और $C$,$2^{\circ}$ एमीन देता है
$III$. $B$ का अम्लीय जल-अपघटन फार्मिक अम्ल देता है और $C$,$C_3H_6O_2$ देता है
$IV$. $C$,$HgO$ के साथ आइसोसाइनेट बनाता है
A
$I$ और $III$
B
$II$ और $III$
C
$I, II$ और $IV$
D
$II, III$ और $IV$

Solution

(A) $1$. $CH_3CH_2OH + HCl \xrightarrow{ZnCl_2} CH_3CH_2Cl (A) + H_2O$.
$2$. $CH_3CH_2Cl + AgCN \rightarrow CH_3CH_2NC (B, \text{minor}) + CH_3CH_2CN (C, \text{major})$.
$3$. $B$ एथिल आइसोसाइनाइड है और $C$ एथिल साइनाइड है। वे क्रियात्मक समावयवी हैं ($I$ सही है)।
$4$. अपचयन: $CH_3CH_2NC + 4[H] \rightarrow CH_3CH_2NHCH_3$ ($2^{\circ}$ एमीन) और $CH_3CH_2CN + 4[H] \rightarrow CH_3CH_2CH_2NH_2$ ($1^{\circ}$ एमीन)। अतः,$II$ गलत है।
$5$. जल-अपघटन: $CH_3CH_2NC + 2H_2O \rightarrow CH_3CH_2NH_2 + HCOOH$ (फार्मिक अम्ल)। $CH_3CH_2CN + 2H_2O \rightarrow CH_3CH_2COOH + NH_3$. $CH_3CH_2COOH$ का सूत्र $C_3H_6O_2$ है। अतः,$III$ सही है।
$6$. $C$ (नाइट्राइल) $HgO$ के साथ आइसोसाइनेट नहीं बनाता है; $B$ (आइसोसाइनाइड) का ऑक्सीकरण आइसोसाइनेट में हो सकता है। अतः,$IV$ गलत है।
इसलिए,कथन $I$ और $III$ सही हैं।
122
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निम्नलिखित अभिक्रियाओं का अवलोकन करें:
$1$. $C_6H_5-CH=CH_2 + HBr \rightarrow X$
$2$. $C_6H_5-C(CH_3)=CH_2 + HBr \rightarrow Y$
$3$. $C_6H_5-CH=CH_2 + HBr \xrightarrow{(C_6H_5COO)_2} Z$
$S_N1$ अभिक्रिया के प्रति $X, Y, Z$ की अभिक्रियाशीलता का सही क्रम क्या है?
A
$X > Y > Z$
B
$X > Z > Y$
C
$Y > X > Z$
D
$Y > Z > X$

Solution

(C) प्राप्त उत्पाद हैं:
$X$: $C_6H_5-CH(Br)-CH_3$ (द्वितीयक बेंजाइलिक हैलाइड)
$Y$: $C_6H_5-C(Br)(CH_3)_2$ (तृतीयक बेंजाइलिक हैलाइड)
$Z$: $C_6H_5-CH_2-CH_2-Br$ (प्राथमिक एल्काइल हैलाइड)
$S_N1$ अभिक्रियाशीलता मध्यवर्ती कार्बोकेशन के स्थायित्व पर निर्भर करती है।
$Y$ के लिए कार्बोकेशन $C_6H_5-C^+(CH_3)_2$ है,जो तृतीयक और बेंजाइलिक है (सर्वाधिक स्थिर)।
$X$ के लिए कार्बोकेशन $C_6H_5-CH^+-CH_3$ है,जो द्वितीयक और बेंजाइलिक है।
$Z$ के लिए कार्बोकेशन $C_6H_5-CH_2-CH_2^+$ है,जो प्राथमिक है (सबसे कम स्थिर)।
अतः,अभिक्रियाशीलता का क्रम $Y > X > Z$ है।
123
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$DDT$ अणु की संरचना में क्लोरीन $(Cl)$ परमाणुओं की संख्या है
A
$4$
B
$3$
C
$2$
D
$5$

Solution

(D) $DDT$ का अर्थ $p,p'$-डाइक्लोरोडाइफेनिलट्राइक्लोरोइथेन है।
$DDT$ का रासायनिक सूत्र $(ClC_6H_4)_2CHCCl_3$ है।
इस संरचना में,दो क्लोरोबेंजीन वलय हैं,जिनमें से प्रत्येक पैरा स्थिति पर एक क्लोरीन परमाणु रखता है,और केंद्रीय कार्बन परमाणु से जुड़ा एक ट्राइक्लोरोमिथाइल समूह है।
क्लोरीन परमाणुओं की कुल संख्या = $2$ (बेंजीन वलयों से) + $3$ (ट्राइक्लोरोमिथाइल समूह से) = $5$।
124
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निम्नलिखित अभिक्रिया अनुक्रम में उत्पाद $Z$ क्या है?
$C_6H_5N_2Cl$ $\xrightarrow{Cu_2Cl_2/HCl} X$ $\xrightarrow{CH_3Cl/Na, \text{dry ether}} Y$ $\xrightarrow{Cl_2/Fe, \text{dark}} Z$
A
बेंज़िल क्लोराइड
B
$p$-क्लोरोटोलुइन
C
$p$-क्लोरोबेंज़िल क्लोराइड
D
बेंज़ल क्लोराइड

Solution

(B) $1$. पहला चरण सैंडमेयर अभिक्रिया है जहाँ बेंजीन डायज़ोनियम क्लोराइड $(C_6H_5N_2Cl)$,$Cu_2Cl_2/HCl$ के साथ अभिक्रिया करके क्लोरोबेंजीन $(X = C_6H_5Cl)$ बनाता है।
$2$. दूसरा चरण वुर्ट्ज़-फिटिंग अभिक्रिया है जहाँ क्लोरोबेंजीन,मिथाइल क्लोराइड $(CH_3Cl)$ और सोडियम $(Na)$ के साथ शुष्क ईथर में अभिक्रिया करके टोलुइन $(Y = C_6H_5CH_3)$ बनाता है।
$3$. तीसरा चरण अंधेरे में $Fe$ (लुईस एसिड उत्प्रेरक) की उपस्थिति में $Cl_2$ का उपयोग करके टोलुइन का इलेक्ट्रोफिलिक एरोमैटिक प्रतिस्थापन (क्लोरीनीकरण) है। चूँकि मिथाइल समूह $(-CH_3)$ ऑर्थो/पैरा निर्देशक है,इसलिए मुख्य उत्पाद $p$-क्लोरोटोलुइन $(Z = p-Cl-C_6H_4-CH_3)$ बनता है।
125
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दी गई अभिक्रियाओं की श्रृंखला में उत्पाद '$Y$' की पहचान करें।
Question diagram
A
$2-$नाइट्रोफिनोल
B
$4-$नाइट्रोफिनोल
C
$2,4-$डाइनाइट्रोफिनोल
D
$4-$हाइड्रॉक्सीबेंजीनसल्फोनिक एसिड

Solution

(B) अभिक्रिया की श्रृंखला इस प्रकार है:
$1$. क्लोरोबेंजीन $HNO_3$ और $Conc. H_2SO_4$ (नाइट्रेशन) के साथ अभिक्रिया करके $o$-नाइट्रोक्लोरोबेंजीन और $p$-नाइट्रोक्लोरोबेंजीन का मिश्रण बनाता है। मुख्य उत्पाद '$X$' $p$-नाइट्रोक्लोरोबेंजीन है।
$2$. इसके बाद $p$-नाइट्रोक्लोरोबेंजीन $443 \ K$ पर $NaOH$ के साथ न्यूक्लियोफिलिक एरोमैटिक प्रतिस्थापन अभिक्रिया करता है,जिसके बाद $H^+$ के साथ अम्लीकरण किया जाता है,जिससे $-Cl$ समूह $-OH$ समूह द्वारा प्रतिस्थापित हो जाता है और अंतिम उत्पाद '$Y$' के रूप में $p$-नाइट्रोफिनोल ($4$-नाइट्रोफिनोल) प्राप्त होता है।
अतः,सही विकल्प $B$ है।
126
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क्लोरोबेंजीन जब फिटिग अभिक्रिया से गुजरता है तो एक यौगिक '$X$' देता है। $X$ में $\sigma$ और $\pi$-आबंधों का योग है
A
$30$
B
$28$
C
$18$
D
$29$

Solution

(B) फिटिग अभिक्रिया में सोडियम धातु और शुष्क ईथर की उपस्थिति में दो एराइल हैलाइड्स का संयोजन होकर एक डायराइल यौगिक बनता है।
क्लोरोबेंजीन $(C_6H_5Cl)$ सोडियम के साथ अभिक्रिया करके बाइफिनाइल $(C_6H_5-C_6H_5)$ बनाता है,जो '$X$' है।
बाइफिनाइल में $12$ कार्बन और $10$ हाइड्रोजन होते हैं।
कुल $\sigma$-आबंध = $21$ और $\pi$-आबंध = $6$ हैं।
योग = $21 + 6 = 27$।
127
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दी गई अभिक्रिया श्रृंखला में उत्पाद '$C$' है
Question diagram
A
नाइट्रोबेंजीन
B
ब्रोमोबेंजीन
C
$3$-ब्रोमोबेंजोइक एसिड
D
सोडियम $3$-ब्रोमोबेंजोएट

Solution

(A) चरण $1$: ग्रिग्नार्ड अभिकर्मक '$A$' का निर्माण।
$m$-ब्रोमोनाइट्रोबेंजीन शुष्क ईथर की उपस्थिति में $Mg$ के साथ अभिक्रिया करके ग्रिग्नार्ड अभिकर्मक,$m$-नाइट्रोफेनिल मैग्नीशियम ब्रोमाइड $(A)$ बनाता है।
चरण $2$: '$B$' का निर्माण।
ग्रिग्नार्ड अभिकर्मक $(A)$ की $CO_2$ के साथ अभिक्रिया और उसके बाद अम्लीय जल-अपघटन $(H_3O^+)$ द्वारा $m$-नाइट्रोबेंजोइक एसिड $(B)$ प्राप्त होता है।
चरण $3$: '$C$' का निर्माण।
$m$-नाइट्रोबेंजोइक एसिड $(B)$ $Na$ के साथ अभिक्रिया करके सोडियम $m$-नाइट्रोबेंजोएट बनाता है,जिसे सोडा लाइम $(NaOH + CaO)$ के साथ गर्म करने पर विकार्बोक्सिलीकरण (decarboxylation) द्वारा नाइट्रोबेंजीन $(C)$ प्राप्त होता है।
128
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निम्नलिखित में से कौन सी अभिक्रिया क्लीमेन्सन अपचयन (Clemmensen reduction) का उदाहरण है?
A
$R-COCl + H_2 \xrightarrow{Pd/BaSO_4} R-CHO + HCl$
B
$R-CHO \xrightarrow[(ii) KOH/HOCH_2CH_2OH]{(i) NH_2-NH_2} R-CH_3$
C
$R-COOC_2H_5 \xrightarrow[2. H_2O]{1. DIBAL-H} R-CHO + C_2H_5OH$
D
$R-COCH_3 \xrightarrow{Zn-Hg/HCl} R-CH_2-CH_3$

Solution

(D) क्लीमेन्सन अपचयन एक रासायनिक अभिक्रिया है जो जिंक अमलगम $(Zn-Hg)$ और सांद्र हाइड्रोक्लोरिक अम्ल $(HCl)$ का उपयोग करके कार्बोनिल समूहों (एल्डिहाइड और कीटोन) को मेथिलीन समूहों $(-CH_2-)$ में अपचयित करती है।
विकल्प $A$ रोजनमुंड अपचयन को दर्शाता है।
विकल्प $B$ वोल्फ-किशनर अपचयन को दर्शाता है।
विकल्प $C$ $DIBAL-H$ का उपयोग करके एस्टर के एल्डिहाइड में अपचयन को दर्शाता है।
विकल्प $D$ क्लीमेन्सन अपचयन को दर्शाता है,जहाँ कीटोन $R-COCH_3$ का एल्केन $R-CH_2-CH_3$ में अपचयन होता है।
129
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दी गई अभिक्रिया श्रृंखला में उत्पाद ' $P$ ' की पहचान करें।
Question diagram
A
$4$-हाइड्रॉक्सी-$4$-मेथिलपेंटेन-$2$-ओन
B
$3$-हाइड्रॉक्सी-$2$-मेथिलपेंटेन-$2$-ओन
C
$4$-मेथिलपेंट-$3$-ईन-$2$-ओन
D
$3$-हाइड्रॉक्सी-$3$-मेथिलब्यूटेनैल

Solution

(A) प्रारंभिक पदार्थ $2,3$-डाइमेथिलब्यूट-$2$-ईन है।
चरण $1$: $(1) \ O_3$ और $(2) \ Zn/H_2O$ के साथ $2,3$-डाइमेथिलब्यूट-$2$-ईन का ओजोनोलिसिस द्वि-आबंध को तोड़ता है,जिससे एसीटोन $(CH_3COCH_3)$ के दो अणु प्राप्त होते हैं।
चरण $2$: उत्पाद ' $A$ ' एसीटोन है। जब एसीटोन को $Ba(OH)_2$ (एक क्षार) के साथ उपचारित किया जाता है,तो यह एल्डोल संघनन अभिक्रिया से गुजरता है।
एसीटोन के दो अणु अभिक्रिया करके $4$-हाइड्रॉक्सी-$4$-मेथिलपेंटेन-$2$-ओन (डायएसीटोन अल्कोहल) बनाते हैं।
अतः,उत्पाद ' $P$ ' $4$-हाइड्रॉक्सी-$4$-मेथिलपेंटेन-$2$-ओन है।
130
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निम्नलिखित अभिक्रिया अनुक्रम द्वारा उत्पाद $C$ और $D$ क्या हैं?
$CH_3CH_2COCH_3$ $\xrightarrow[(ii) H_3O^+]{(i) CH_3MgBr} A$ $\xrightarrow[358 \ K]{20\% H_3PO_4} B \text{ (Major)}$ $\xrightarrow[(ii) Zn/H_2O]{(i) O_3} C + D$
A
एथेनोइक अम्ल,एथेनल
B
एथेनॉल,प्रोपेनोन
C
एथेनल,प्रोपेनोन
D
प्रोपेनल,प्रोपेनोन

Solution

(C) $1$. $CH_3CH_2COCH_3$ (ब्यूटेन$-2-$ओन) की $CH_3MgBr$ के साथ अभिक्रिया और उसके बाद जल-अपघटन से $A$ प्राप्त होता है,जो $CH_3CH_2C(OH)(CH_3)_2$ ($2$-मिथाइलब्यूटेन$-2-$ऑल) है।
$2$. $358 \ K$ पर $20\% H_3PO_4$ के साथ $A$ का निर्जलीकरण सेटज़ेफ नियम का पालन करते हुए मुख्य उत्पाद $B$ देता है,जो $CH_3CH=C(CH_3)_2$ ($2$-मिथाइलब्यूट$-2-$ईन) है।
$3$. $B$ $(CH_3CH=C(CH_3)_2)$ का ओजोनोलिसिस $CH_3CHO$ (एथेनल) और $(CH_3)_2CO$ (प्रोपेनोन) को उत्पाद $C$ और $D$ के रूप में देता है।
131
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निर्जल $AlCl_3$ की उपस्थिति में बेंजीन की $CO$ और $HCl$ के साथ अभिक्रिया से यौगिक $X$ प्राप्त होता है। $X$ को निम्नलिखित में से किस अभिक्रिया द्वारा भी प्राप्त किया जा सकता है?
A
बेंज़ोनाइट्राइल की $(i) \ LiAlH_4$ $(ii) \ H_3O^+$ के साथ अभिक्रिया
B
टोल्यूनि की $KMnO_4 | OH^-$ और गर्मी के साथ अभिक्रिया
C
बेंज़ोयल क्लोराइड की $H_2-Pd$ और $BaSO_4$ के साथ अभिक्रिया
D
बेंज़िल अल्कोहल की $CrO_3-H_2SO_4$ के साथ अभिक्रिया

Solution

(C) निर्जल $AlCl_3$ की उपस्थिति में बेंजीन की $CO$ और $HCl$ के साथ अभिक्रिया गैटरमैन-कोच अभिक्रिया है,जो बेंज़ल्डिहाइड $(C_6H_5CHO)$ देती है। अतः,$X$ बेंज़ल्डिहाइड है।
दिए गए विकल्पों का विश्लेषण करते हैं:
$A$: बेंज़ोनाइट्राइल $(C_6H_5CN)$ का $LiAlH_4$ के साथ अपचयन करने पर बेंज़िलएमाइन $(C_6H_5CH_2NH_2)$ प्राप्त होता है।
$B$: टोल्यूनि $(C_6H_5CH_3)$ का $KMnO_4 | OH^-$ के साथ ऑक्सीकरण करने पर बेंज़ोइक एसिड $(C_6H_5COOH)$ प्राप्त होता है।
$C$: बेंज़ोयल क्लोराइड $(C_6H_5COCl)$ का $H_2-Pd$ और $BaSO_4$ (रोसेनमुंड अपचयन) के साथ अपचयन करने पर बेंज़ल्डिहाइड $(C_6H_5CHO)$ प्राप्त होता है।
$D$: बेंज़िल अल्कोहल $(C_6H_5CH_2OH)$ का $CrO_3-H_2SO_4$ के साथ ऑक्सीकरण करने पर बेंज़ोइक एसिड $(C_6H_5COOH)$ प्राप्त होता है।
इसलिए,अभिक्रिया $C$ में बेंज़ल्डिहाइड प्राप्त होता है।
132
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टोल्यूनि अभिकर्मक $A$ के साथ अभिक्रिया करके $X$ देता है। यह $(X)$,$2,4-$डाइनिट्रोफेनिलहाइड्राजोन बनाता है और अमोनिकल सिल्वर नाइट्रेट विलयन का अपचयन करता है। टोल्यूनि की दूसरे अभिकर्मक $B$ के साथ अभिक्रिया से $Y$ बनता है,जो $CO_2$ के उत्सर्जन के साथ $NaHCO_3$ में घुल जाता है। $A$ और $B$ क्रमशः क्या हैं?
A
$CrO_2Cl_2 | CS_2, H_3O^+ ; KMnO_4 | OH^-, \Delta, H_3O^+$
B
$CrO_3+(CH_3CO)_2O, H_3O^+ ; CrO_2Cl_2 | CS_2, H_3O^+$
C
$KMnO_4 | OH^-, \Delta ; CrO_3-H_2SO_4$
D
$CrO_3+(CH_3CO)_2O, H_3O^+ ; KMnO_4-KOH / \Delta, H_3O^+$

Solution

(A) $1$. टोल्यूनि $CS_2$ में $CrO_2Cl_2$ के साथ अभिक्रिया करके और उसके बाद जल-अपघटन ($Etard$ अभिक्रिया) द्वारा बेंजल्डिहाइड $(X)$ बनाता है।
$2$. बेंजल्डिहाइड $(X)$ में कार्बोनिल समूह होता है,इसलिए यह $2,4-$डाइनिट्रोफेनिलहाइड्राजोन बनाता है और टॉलेन अभिकर्मक (अमोनिकल सिल्वर नाइट्रेट) के प्रति अपचायक के रूप में कार्य करता है।
$3$. टोल्यूनि $KMnO_4 | OH^-, \Delta$ के साथ अभिक्रिया करके और उसके बाद अम्लीय वर्कअप द्वारा बेंजोइक एसिड $(Y)$ बनाता है।
$4$. बेंजोइक एसिड $(Y)$ इतना अम्लीय होता है कि यह $NaHCO_3$ के साथ अभिक्रिया करके $CO_2$ गैस मुक्त करता है।
$5$. इसलिए,$A$ का मान $CrO_2Cl_2 | CS_2, H_3O^+$ है और $B$ का मान $KMnO_4 | OH^-, \Delta, H_3O^+$ है।
133
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निम्नलिखित अभिक्रियाओं के अनुक्रम पर विचार करें।
$2 CH_3Cl + Si$ $\xrightarrow[573 \ K]{Cu} X$ $\xrightarrow{H_2O} Y$ $\xrightarrow{\text{Polymerization}} Z$
$Z$ में पुनरावर्ती संरचनात्मक इकाई क्या है?
A
Option A
B
Option B
C
Option C
D
Option D

Solution

(C) अभिक्रिया अनुक्रम इस प्रकार है:
$1$. $2 CH_3Cl + Si \xrightarrow[573 \ K]{Cu} (CH_3)_2SiCl_2$ $(X)$
$2$. $(CH_3)_2SiCl_2 + 2 H_2O \rightarrow (CH_3)_2Si(OH)_2 + 2 HCl$ $(Y)$
$3$. जल-अपघटन उत्पाद $(CH_3)_2Si(OH)_2$ सिलिकॉन (पॉलीडाइमिथाइलसिलोक्सेन) बनाने के लिए बहुलकीकरण (polymerization) से गुजरता है।
$4$. परिणामी बहुलक $Z$ में पुनरावर्ती संरचनात्मक इकाई $[-(CH_3)_2Si-O-]_n$ है।
यह विकल्प $C$ में दिखाई गई संरचना के अनुरूप है।
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जिंक की सांद्र नाइट्रिक अम्ल के साथ अभिक्रिया से नाइट्रोजन का एक ऑक्साइड $(A)$ प्राप्त होता है। जिंक की तनु नाइट्रिक अम्ल के साथ अभिक्रिया से नाइट्रोजन का दूसरा ऑक्साइड $(B)$ प्राप्त होता है। $(A)$ और $(B)$ में नाइट्रोजन की ऑक्सीकरण संख्याएँ क्रमशः क्या हैं?
A
$+4, +1$
B
$+4, +2$
C
$+2, +4$
D
$+1, +4$

Solution

(A) जिंक की सांद्र नाइट्रिक अम्ल के साथ अभिक्रिया: $Zn + 4HNO_3 (\text{conc.}) \rightarrow Zn(NO_3)_2 + 2NO_2 + 2H_2O$ है। यहाँ,नाइट्रोजन का ऑक्साइड $(A)$ $NO_2$ है। $NO_2$ में $N$ की ऑक्सीकरण संख्या $x + 2(-2) = 0$,अतः $x = +4$ है।
जिंक की तनु नाइट्रिक अम्ल के साथ अभिक्रिया: $4Zn + 10HNO_3 (\text{dil.}) \rightarrow 4Zn(NO_3)_2 + N_2O + 5H_2O$ है। यहाँ,नाइट्रोजन का ऑक्साइड $(B)$ $N_2O$ है। $N_2O$ में $N$ की ऑक्सीकरण संख्या $2x + (-2) = 0$,अतः $2x = +2$,$x = +1$ है।
अतः,$(A)$ और $(B)$ में नाइट्रोजन की ऑक्सीकरण संख्याएँ क्रमशः $+4$ और $+1$ हैं।
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निम्नलिखित अभिकथन $(A)$ और कारण $(R)$ पर विचार करें: अभिकथन $(A)$: फास्फोरस फास्फोरस$(III)$ और फास्फोरस$(V)$ क्लोराइड दोनों बना सकता है,लेकिन नाइट्रोजन नाइट्रोजन$(V)$ क्लोराइड नहीं बना सकता है। कारण $(R)$: नाइट्रोजन की विद्युत ऋणात्मकता फास्फोरस से अधिक है। सही उत्तर है
A
$(A)$ और $(R)$ दोनों सही हैं,$(R)$,$(A)$ की सही व्याख्या है
B
$(A)$ सही है,लेकिन $(R)$ सही नहीं है
C
$(A)$ और $(R)$ दोनों सही हैं,$(R)$,$(A)$ की सही व्याख्या नहीं है
D
$(A)$ सही नहीं है,लेकिन $(R)$ सही है

Solution

(C) फास्फोरस के संयोजी कोश में रिक्त $d$-कक्षक होते हैं,जो इसे अपने अष्टक का विस्तार करने और $PCl_3$ (फास्फोरस$(III)$ क्लोराइड) के अलावा $PCl_5$ (फास्फोरस$(V)$ क्लोराइड) बनाने की अनुमति देते हैं।
नाइट्रोजन,दूसरे आवर्त का तत्व होने के कारण,इसमें रिक्त $d$-कक्षक नहीं होते हैं और यह $4$ की संयोजकता से अधिक अपने अष्टक का विस्तार नहीं कर सकता है। इसलिए,यह $NCl_5$ नहीं बना सकता है।
अभिकथन $(A)$ सही है।
कारण $(R)$ बताता है कि नाइट्रोजन की विद्युत ऋणात्मकता फास्फोरस से अधिक है,जो एक सत्य कथन है।
हालाँकि,नाइट्रोजन की $NCl_5$ न बना पाने की अक्षमता रिक्त $d$-कक्षकों की अनुपस्थिति के कारण है,न कि इसकी विद्युत ऋणात्मकता के कारण।
अतः,$(R)$ एक सत्य कथन है लेकिन $(A)$ की सही व्याख्या नहीं है।
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जब अमोनियम डाइक्रोमेट का तापीय अपघटन किया जाता है,तो कौन से उत्पाद बनते हैं?
A
$N_2O, Cr_2O_3, H_2$
B
$N_2O, Cr_2O_3, H_2O$
C
$N_2, CrO_3, H_2O$
D
$N_2, Cr_2O_3, H_2O$

Solution

(D) अमोनियम डाइक्रोमेट $(NH_4)_2Cr_2O_7$ का तापीय अपघटन एक प्रसिद्ध प्रयोगशाला अभिक्रिया है।
इस अभिक्रिया के लिए संतुलित रासायनिक समीकरण है:
$(NH_4)_2Cr_2O_7(s) \xrightarrow{\Delta} N_2(g) + Cr_2O_3(s) + 4H_2O(g)$
अतः,बनने वाले उत्पाद नाइट्रोजन गैस $(N_2)$,क्रोमियम$(III)$ ऑक्साइड $(Cr_2O_3)$ और जल वाष्प $(H_2O)$ हैं।
137
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फास्फोरस सल्फ्यूराइल क्लोराइड के साथ अभिक्रिया करके एक यौगिक $X$ देता है,जिसका पूर्ण जल-अपघटन करने पर $Y$ प्राप्त होता है। $X$ और $Y$ क्रमशः हैं
A
$PCl_3, H_3PO_3$
B
$PCl_5, POCl_3$
C
$PCl_5, H_3PO_4$
D
$PCl_3, H_3PO_2$

Solution

(C) सफेद फास्फोरस $(P_4)$ की सल्फ्यूराइल क्लोराइड $(SO_2Cl_2)$ के साथ अभिक्रिया से फास्फोरस पेंटाक्लोराइड $(PCl_5)$ यौगिक $X$ के रूप में प्राप्त होता है।
$P_4 + 10SO_2Cl_2 \rightarrow 4PCl_5 + 10SO_2$
जब $PCl_5$ का पूर्ण जल-अपघटन होता है,तो यह जल के साथ अभिक्रिया करके फास्फोरिक अम्ल $(H_3PO_4)$ यौगिक $Y$ के रूप में देता है।
$PCl_5 + 4H_2O \rightarrow H_3PO_4 + 5HCl$
अतः,$X$ का मान $PCl_5$ है और $Y$ का मान $H_3PO_4$ है।
138
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फास्फोरस का एक ऑक्सोएसिड '$X$' सिल्वर नाइट्रेट के घोल को धात्विक सिल्वर में अपचयित (reduce) करता है और दूसरे यौगिक $Y$ में ऑक्सीकृत हो जाता है। $X$ और $Y$ क्रमशः हैं।
A
$HPO_3, H_3PO_4$
B
$H_3PO_2, H_3PO_4$
C
$H_3PO_3, H_3PO_2$
D
$H_3PO_2, HNO_3$

Solution

(B) हाइपोफास्फोरस एसिड $(H_3PO_2)$ एक शक्तिशाली अपचायक (reducing agent) के रूप में कार्य करता है।
यह सिल्वर नाइट्रेट $(AgNO_3)$ को धात्विक सिल्वर $(Ag)$ में अपचयित करता है।
अभिक्रिया है: $H_3PO_2 + 4AgNO_3 + 2H_2O \rightarrow 4Ag + 4HNO_3 + H_3PO_4$.
यहाँ,$X$ का मान $H_3PO_2$ है और यह ऑक्सीकृत होकर $Y$ बनाता है,जो फास्फोरिक एसिड $(H_3PO_4)$ है।
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थायोनिल क्लोराइड सफेद फास्फोरस के साथ अभिक्रिया करके फास्फोरस का एक यौगिक '$C$' देता है,जिसका जल-अपघटन करने पर एक ऑक्सो अम्ल '$O$' प्राप्त होता है। '$C$' और '$O$' के बारे में सही कथन हैं:
$I$. '$C$' की आकृति पिरामिडीय है
$II$. '$O$' एक द्विभास्मिक (dibasic) अम्ल है
$III$. '$O$' एक एकभास्मिक (monobasic) अम्ल है
$IV$. '$C$',एसिटिक अम्ल के साथ अभिक्रिया करके '$O$' देता है
A
केवल $I$ और $II$
B
केवल $II$ और $IV$
C
केवल $I$,$III$ और $IV$
D
केवल $I$,$II$ और $IV$

Solution

(D) सफेद फास्फोरस $(P_4)$ की थायोनिल क्लोराइड $(SOCl_2)$ के साथ अभिक्रिया: $P_4 + 8SOCl_2 \rightarrow 4PCl_3 + 4SO_2 + 2S_2Cl_2$ है। अतः,'$C$' $PCl_3$ है।
$PCl_3$ का जल-अपघटन फास्फोरस अम्ल $(H_3PO_3)$ देता है: $PCl_3 + 3H_2O \rightarrow H_3PO_3 + 3HCl$। अतः,'$O$' $H_3PO_3$ है।
कथन $I$: $PCl_3$ की आकृति पिरामिडीय होती है क्योंकि इसमें $sp^3$ संकरण और एक एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म होता है। (सही)
कथन $II$: $H_3PO_3$ एक द्विभास्मिक अम्ल है क्योंकि इसमें दो $P-OH$ बंध होते हैं। (सही)
कथन $III$: $H_3PO_3$ एक एकभास्मिक अम्ल है। (गलत)
कथन $IV$: $PCl_3$,एसिटिक अम्ल $(CH_3COOH)$ के साथ अभिक्रिया करके एसिटाइल क्लोराइड और फास्फोरस अम्ल $(H_3PO_3)$ देता है: $3CH_3COOH + PCl_3 \rightarrow 3CH_3COCl + H_3PO_3$। (सही)
अतः,कथन $I$,$II$ और $IV$ सही हैं।
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सल्फर डाइऑक्साइड की चारकोल की उपस्थिति में क्लोरीन के साथ अभिक्रिया कराने पर यौगिक $(A)$ प्राप्त होता है। इसकी सफेद फास्फोरस के साथ अभिक्रिया कराने पर $SO_2$ और यौगिक $(B)$ प्राप्त होता है। '$B$' के बारे में सही कथन है
A
'$B$' की आकृति पिरामिडीय है
B
'$B$' का जल-अपघटन करने पर फास्फोरस अम्ल प्राप्त होता है
C
'$B$' ठोस अवस्था में एक आयनिक ठोस के रूप में मौजूद होता है
D
'$B$' में सभी बंध समान हैं

Solution

(C) चारकोल (उत्प्रेरक) की उपस्थिति में $SO_2$ की $Cl_2$ के साथ अभिक्रिया से सल्फ्यूराइल क्लोराइड $(A)$ प्राप्त होता है: $SO_2 + Cl_2 \xrightarrow{\text{charcoal}} SO_2Cl_2$ $(A)$.
सल्फ्यूराइल क्लोराइड $(A)$ सफेद फास्फोरस $(P_4)$ के साथ अभिक्रिया करके $SO_2$ और फास्फोरस पेंटाक्लोराइड $(B)$ देता है: $10SO_2Cl_2 + P_4 \rightarrow 4PCl_5$ $(B)$ $+ 10SO_2$.
यौगिक $(B)$ $PCl_5$ है।
ठोस अवस्था में,$PCl_5$ एक आयनिक ठोस $[PCl_4]^+[PCl_6]^-$ के रूप में मौजूद होता है।
अतः,सही कथन यह है कि '$B$' ठोस अवस्था में एक आयनिक ठोस के रूप में मौजूद होता है।
141
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निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही नहीं है?
A
$TeO_2$ एक ऑक्सीकरण एजेंट है
B
$SeO_3$ प्रकृति में अम्लीय है
C
$SeO_2$ एक गैस है
D
$SO_2$ एक अपचायक है

Solution

(C) $1$. $TeO_2$ एक ऑक्सीकरण एजेंट के रूप में कार्य करता है क्योंकि अक्रिय युग्म प्रभाव के कारण $+4$ ऑक्सीकरण अवस्था में $Te$,$+2$ ऑक्सीकरण अवस्था की तुलना में कम स्थिर होता है।
$2$. $SeO_3$ एक अम्लीय ऑक्साइड है क्योंकि यह पानी के साथ प्रतिक्रिया करके सेलेनिक एसिड $(H_2SeO_4)$ बनाता है।
$3$. $SeO_2$ कमरे के तापमान पर एक सफेद क्रिस्टलीय ठोस है,गैस नहीं।
$4$. $SO_2$ एक अपचायक के रूप में कार्य करता है क्योंकि सल्फर को $+4$ से $+6$ ऑक्सीकरण अवस्था में ऑक्सीकृत किया जा सकता है।
अतः,कथन "$SeO_2$ एक गैस है" गलत है।
142
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निम्नलिखित में से ऑक्सोएसिड के किस जोड़े की क्षारकता (basicity) $2$ है?
A
$H_3PO_3, H_2SO_4$
B
$H_3PO_2, H_2SO_3$
C
$H_3PO_4, H_3PO_2$
D
$H_2S_2O_8, H_3PO_2$

Solution

(A) ऑक्सोएसिड की क्षारकता केंद्रीय परमाणु से सीधे जुड़े $OH$ समूहों की संख्या द्वारा निर्धारित की जाती है।
$H_3PO_3$ (फास्फोरस एसिड) में दो $OH$ समूह और एक $P-H$ बंध होता है,इसलिए इसकी क्षारकता $2$ है।
$H_2SO_4$ (सल्फ्यूरिक एसिड) में सल्फर परमाणु से दो $OH$ समूह जुड़े होते हैं,इसलिए इसकी क्षारकता $2$ है।
$H_3PO_2$ (हाइपोफास्फोरस एसिड) में एक $OH$ समूह और दो $P-H$ बंध होते हैं,इसलिए इसकी क्षारकता $1$ है।
$H_2SO_3$ (सल्फ्यूरस एसिड) में दो $OH$ समूह होते हैं,इसलिए इसकी क्षारकता $2$ है।
$H_3PO_4$ (फास्फोरिक एसिड) में तीन $OH$ समूह होते हैं,इसलिए इसकी क्षारकता $3$ है।
$H_2S_2O_8$ (पेरोक्सोडिसल्फ्यूरिक एसिड) में दो $OH$ समूह होते हैं,इसलिए इसकी क्षारकता $2$ है।
अतः,$H_3PO_3$ और $H_2SO_4$ दोनों की क्षारकता $2$ है।
143
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डीकन प्रक्रिया से संबंधित अभिक्रिया की पहचान करें।
A
$2 H_2 O + 2 Cl_2 \xrightarrow{\text{sunlight}} 4 HCl + O_2$
B
$4 HCl + O_2 \xrightarrow[723 \ K]{CuCl_2} 2 Cl_2 + 2 H_2 O$
C
$2 NaCl + H_2 SO_4 \xrightarrow{823 \ K} Na_2 SO_4 + 2 HCl$
D
$Na_2 S_2 O_3 + Cl_2 + H_2 O \longrightarrow Na_2 SO_4 + 2 HCl + S$

Solution

(B) डीकन प्रक्रिया क्लोरीन गैस $(Cl_2)$ के उत्पादन की एक औद्योगिक विधि है।
इस प्रक्रिया में,हाइड्रोजन क्लोराइड $(HCl)$ का वायुमंडलीय ऑक्सीजन $(O_2)$ द्वारा कॉपर$(II)$ क्लोराइड $(CuCl_2)$ उत्प्रेरक की उपस्थिति में लगभग $723 \ K$ तापमान पर ऑक्सीकरण किया जाता है।
इस अभिक्रिया का रासायनिक समीकरण है: $4 HCl + O_2 \xrightarrow[723 \ K]{CuCl_2} 2 Cl_2 + 2 H_2 O$।
144
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निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही नहीं है?
A
क्लोरीन अम्लीय माध्यम में फेरस लवणों को फेरिक लवणों में ऑक्सीकृत करता है
B
क्लोरीन पानी में आयोडीन को पीरियोडिक एसिड में ऑक्सीकृत करता है
C
क्लोरीन ऑक्सीकरण के कारण विरंजन एजेंट (bleaching agent) के रूप में कार्य करता है
D
क्लोरीन का निर्माण डेकोन प्रक्रिया द्वारा किया जाता है

Solution

(B) सही उत्तर $B$ है।
$1$. क्लोरीन $(Cl_2)$ अम्लीय माध्यम में फेरस लवणों $(Fe^{2+})$ को फेरिक लवणों $(Fe^{3+})$ में ऑक्सीकृत करता है: $2Fe^{2+} + Cl_2 \rightarrow 2Fe^{3+} + 2Cl^-$. यह कथन सही है।
$2$. क्लोरीन पानी की उपस्थिति में आयोडीन $(I_2)$ को आयोडिक एसिड $(HIO_3)$ में ऑक्सीकृत करता है,न कि पीरियोडिक एसिड $(HIO_4)$ में: $I_2 + 5Cl_2 + 6H_2O \rightarrow 2HIO_3 + 10HCl$. अतः,कथन $B$ गलत है।
$3$. क्लोरीन नवजात ऑक्सीजन द्वारा रंगीन पदार्थों के ऑक्सीकरण के कारण विरंजन एजेंट के रूप में कार्य करता है: $Cl_2 + H_2O \rightarrow 2HCl + [O]$. यह कथन सही है।
$4$. क्लोरीन का निर्माण डेकोन प्रक्रिया द्वारा किया जाता है,जिसमें $CuCl_2$ उत्प्रेरक की उपस्थिति में वायुमंडलीय ऑक्सीजन द्वारा हाइड्रोजन क्लोराइड गैस का ऑक्सीकरण होता है: $4HCl + O_2 \xrightarrow{CuCl_2} 2Cl_2 + 2H_2O$. यह कथन सही है।
145
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इनमें से कौन सा क्रम उसके सामने उल्लिखित गुण के साथ सही ढंग से मेल खाता है?
A
$H_2S < H_2O < H_2Se < H_2Te$ (क्वथनांक)
B
$N_2O < NO < N_2O_3 < N_2O_4 < N_2O_5$ (अम्लीय प्रकृति)
C
$HI < HCl < HBr < HF$ (अम्लीय प्रकृति)
D
$H_2O < H_2S < H_2Se < H_2Te$ (बंध कोण)

Solution

(B) $1$. विकल्प $A$ के लिए: समूह $16$ के हाइड्राइड्स का क्वथनांक क्रम $H_2S < H_2Se < H_2Te < H_2O$ है। हाइड्रोजन बॉन्डिंग के कारण $H_2O$ का क्वथनांक सबसे अधिक होता है। अतः,$A$ गलत है।
$2$. विकल्प $B$ के लिए: नाइट्रोजन के ऑक्साइड की अम्लीय प्रकृति नाइट्रोजन की ऑक्सीकरण अवस्था के साथ बढ़ती है। ऑक्सीकरण अवस्थाएँ हैं: $N_2O (+1), NO (+2), N_2O_3 (+3), N_2O_4 (+4), N_2O_5 (+5)$। अतः,$N_2O < NO < N_2O_3 < N_2O_4 < N_2O_5$ का क्रम सही है।
$3$. विकल्प $C$ के लिए: हाइड्रोहेलिक एसिड की अम्लीय शक्ति समूह में नीचे जाने पर बढ़ती है क्योंकि बंध वियोजन ऊर्जा घटती है: $HF < HCl < HBr < HI$। अतः,$C$ गलत है।
$4$. विकल्प $D$ के लिए: केंद्रीय परमाणु की विद्युत ऋणात्मकता घटने के कारण समूह में नीचे जाने पर बंध कोण घटता है: $H_2O (104.5^{\circ}) > H_2S (92^{\circ}) > H_2Se (91^{\circ}) > H_2Te (90^{\circ})$। अतः,$D$ गलत है।
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$XeF_6$ का आंशिक जल-अपघटन '$X$' और $HF$ देता है। '$X$' की आकृति क्या है?
A
पिरामिडीय
B
चतुष्फलकीय
C
वर्ग पिरामिडीय
D
रैखिक

Solution

(C) $XeF_6$ का आंशिक जल-अपघटन निम्नलिखित रासायनिक समीकरण द्वारा दर्शाया गया है:
$XeF_6 + H_2O \rightarrow XeOF_4 + 2HF$
यहाँ,'$X$' $XeOF_4$ है।
$XeOF_4$ में केंद्रीय परमाणु $Xe$ के पास $8$ संयोजी इलेक्ट्रॉन होते हैं। यह $F$ परमाणुओं के साथ $4$ एकल बंध और $O$ परमाणु के साथ $1$ द्वि-बंध बनाता है।
$Xe$ के चारों ओर कुल इलेक्ट्रॉन युग्म = $5$ (आबंधी) + $1$ (अकेला युग्म) = $6$ इलेक्ट्रॉन युग्म।
यह $sp^3d^2$ संकरण और अष्टफलकीय इलेक्ट्रॉन ज्यामिति को दर्शाता है।
एक अकेले इलेक्ट्रॉन युग्म की उपस्थिति के कारण,$XeOF_4$ की आकृति वर्ग पिरामिडीय होती है।
147
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उत्कृष्ट गैस '$X$' का उपयोग आधुनिक डाइविंग उपकरणों में ऑक्सीजन के लिए तनुकारी (diluent) के रूप में किया जाता है और उत्कृष्ट गैस '$Y$' का उपयोग मुख्य रूप से उच्च तापमान वाली धातुकर्म प्रक्रियाओं में अक्रिय वातावरण प्रदान करने के लिए किया जाता है। '$Y$' और '$X$' क्रमशः क्या हैं?
A
$He, Ar$
B
$Ar, He$
C
$He, Kr$
D
$Ar, Kr$

Solution

(B) $1$. हीलियम $(He)$ का उपयोग आधुनिक डाइविंग उपकरणों में ऑक्सीजन के लिए तनुकारी के रूप में किया जाता है क्योंकि रक्त में इसकी घुलनशीलता कम होती है।
$2$. आर्गन $(Ar)$ का उपयोग उच्च तापमान वाली धातुकर्म प्रक्रियाओं में अक्रिय वातावरण प्रदान करने के लिए किया जाता है।
$3$. प्रश्न में '$Y$' और '$X$' क्रमशः पूछे गए हैं।
$4$. अतः,'$Y$' $Ar$ है और '$X$' $He$ है,इसलिए सही युग्म $(Ar, He)$ है।
148
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पॉलिमर $X$ में पॉलिमर श्रृंखलाएं हाइड्रोजन बॉन्डिंग द्वारा एक साथ जुड़ी होती हैं। पॉलिमर $X$ मोनोमर्स $Y$ और $Z$ से बनता है। $Y$ और $Z$ क्या हैं?
$CH_2=CH-C_6H_5$$H_2N(CH_2)_6NH_2$$CH_2=CH-CH=CH_2$$CH_2=CH-CN$$HO_2C(CH_2)_4CO_2H$
$A$$B$$C$$D$$E$
A
$A, C$
B
$B, E$
C
$C, D$
D
$A, A$

Solution

(B) हाइड्रोजन बॉन्डिंग जैसे मजबूत अंतर-आणविक बलों द्वारा एक साथ जुड़े पॉलिमर को फाइबर (fibres) के रूप में जाना जाता है।
नायलॉन-$6,6$ फाइबर का एक सामान्य उदाहरण है,जो एक पॉलियामाइड है।
यह हेक्सामेथिलीनडायमाइन ($H_2N(CH_2)_6NH_2$,जिसे $B$ के रूप में लेबल किया गया है) और एडिपिक एसिड ($HO_2C(CH_2)_4CO_2H$,जिसे $E$ के रूप में लेबल किया गया है) के संघनन बहुलकीकरण (condensation polymerization) द्वारा बनता है।
इसलिए,मोनोमर्स $Y$ और $Z$ $B$ और $E$ हैं।
149
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$X$ एक बहुलक (polymer) है,जिसका उपयोग मुख्य रूप से अटूट कप और लैमिनेटेड शीट बनाने के लिए किया जाता है। $X$ के एकलक (monomers) हैं
A
यूरिया और फॉर्मेल्डिहाइड
B
एथिलीन ग्लाइकॉल और थैलिक एसिड
C
फिनोल और फॉर्मेल्डिहाइड
D
$1,3-$ब्यूटाडाइन और स्टाइरीन

Solution

(A) $X$ बहुलक जिसका उपयोग अटूट कप और लैमिनेटेड शीट बनाने के लिए किया जाता है,वह यूरिया-फॉर्मेल्डिहाइड रेजिन है।
यूरिया-फॉर्मेल्डिहाइड रेजिन यूरिया और फॉर्मेल्डिहाइड के संघनन बहुलकीकरण (condensation polymerization) द्वारा बनता है।
150
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एथिलीन की $273 \ K$ पर ठंडे,तनु क्षारीय $KMnO_4$ के साथ अभिक्रिया से एक यौगिक '$P$' प्राप्त होता है। यह निम्नलिखित में से किसके साथ बहुलकीकरण (polymerisation) करके डेक्रॉन देता है?
A
बेंजोइक अम्ल
B
टेरेफ्थैलिक अम्ल
C
फ्थैलिक अम्ल
D
p-हाइड्रॉक्सीबेंजोइक अम्ल

Solution

(B) एथिलीन $(CH_2=CH_2)$ $273 \ K$ पर ठंडे,तनु क्षारीय $KMnO_4$ (बेयर अभिकर्मक) के साथ अभिक्रिया करके एथिलीन ग्लाइकॉल $(HO-CH_2-CH_2-OH)$ बनाता है,जो यौगिक '$P$' है।
डेक्रॉन (जिसे टेरिलीन भी कहा जाता है) एथिलीन ग्लाइकॉल और टेरेफ्थैलिक अम्ल $(HOOC-C_6H_4-COOH)$ के संघनन बहुलकीकरण द्वारा बनने वाला एक पॉलिएस्टर है।
अतः,सही अभिकारक टेरेफ्थैलिक अम्ल है।

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