IIT JEE 2008 Chemistry Question Paper with Answer and Solution in Hindi

56 QuestionsHindiWith Solutions

ChemistryQ156 of 56 questions

Page 1 of 1 · Hindi

1
ChemistryMCQIIT JEE · 2008
निम्नलिखित अभिक्रिया का मुख्य उत्पाद क्या है?
Question diagram
A
Option A
B
Option B
C
Option C
D
Option D

Solution

(A) यह अभिक्रिया एक $E2$ विलोपन अभिक्रिया है।
$E2$ विलोपन में,लीविंग ग्रुप $(-Br)$ और $\beta$-हाइड्रोजन (या $\beta$-ड्यूटेरियम) को एंटी-पेरिप्लेनर विन्यास में होना चाहिए।
फिशर प्रक्षेप को देखने पर:
अणु $3$-ब्रोमो-$2$-ड्यूटेरियोब्यूटेन है।
एंटी-पेरिप्लेनर संक्रमण अवस्था प्राप्त करने के लिए,अणु को इस प्रकार घूमना चाहिए कि $-Br$ और $-D$ एक-दूसरे के विपरीत हों।
जब $-Br$ और $-D$ का विलोपन होता है,तो दो कार्बनों पर शेष समूह $CH_3$ और $H$ होते हैं।
परिणामस्वरूप,$CH_3$ समूह द्वि-आबंध के विपरीत दिशाओं में आ जाते हैं,जिससे ट्रांस-एल्कीन उत्पाद प्राप्त होता है: $CH_3-CH=C(CH_3)-H$ (जहाँ $H$ और $CH_3$ ट्रांस हैं)।
अतः,मुख्य उत्पाद ट्रांस-आइसोमर है।
2
ChemistryMCQIIT JEE · 2008
निम्नलिखित अभिक्रिया का मुख्य उत्पाद क्या है?
Question diagram
A
Option A
B
Option B
C
Option C
D
Option D

Solution

(A) दी गई अभिक्रिया एक फ्राइस पुनर्विन्यास (Fries rearrangement) है।
जब एक फिनाइल एस्टर,जैसे फिनाइल एसीटेट,को $AlCl_3$ जैसे लुईस एसिड के साथ उपचारित किया जाता है,तो यह हाइड्रॉक्सी-प्रतिस्थापित कीटोन बनाने के लिए पुनर्विन्यासित हो जाता है।
एसाइल समूह $(-COCH_3)$ ऑक्सीजन परमाणु से बेंजीन रिंग की ऑर्थो या पैरा स्थिति पर स्थानांतरित हो जाता है।
बाइफिनाइल एसीटेट के मामले में,एस्टर समूह से जुड़ी रिंग की पैरा स्थिति दूसरी फिनाइल रिंग द्वारा अवरुद्ध होती है,या विशिष्ट इलेक्ट्रॉनिक वातावरण के कारण ऑर्थो स्थिति को प्राथमिकता दी जाती है।
इसलिए,मुख्य उत्पाद $2$-एसिटाइल$-4-$फिनाइलफिनोल है।
3
ChemistryMCQIIT JEE · 2008
चित्र में $3 \, V$ की बैटरी से जुड़े तीन प्रतिरोधक विन्यास $R_1$, $R_2$ और $R_3$ दिखाए गए हैं। यदि विन्यास $R_1$, $R_2$ और $R_3$ द्वारा व्ययित शक्ति क्रमशः $P_1$, $P_2$ और $P_3$ है, तो:
Question diagram
A
$P_1 > P_2 > P_3$
B
$P_1 > P_3 > P_2$
C
$P_2 > P_1 > P_3$
D
$P_3 > P_2 > P_1$

Solution

(A) विन्यास $R_1$ के लिए: परिपथ में तीन $1 \, \Omega$ के प्रतिरोधक समानांतर क्रम में जुड़े हैं, जिससे तुल्य प्रतिरोध $R_1 = 1/3 \, \Omega$ प्राप्त होता है।
विन्यास $R_2$ के लिए: यह पांच $1 \, \Omega$ के प्रतिरोधकों वाला एक संतुलित व्हीटस्टोन सेतु है। बीच वाले प्रतिरोधक से कोई धारा प्रवाहित नहीं होती है, जिससे तुल्य प्रतिरोध $R_2 = 1 \, \Omega$ प्राप्त होता है।
विन्यास $R_3$ के लिए: यह एक संतुलित व्हीटस्टोन सेतु (जिसका तुल्य प्रतिरोध $1 \, \Omega$ है) और एक $3 \, \Omega$ के प्रतिरोधक का श्रेणी क्रम संयोजन है, जिससे $R_3 = 1 + 3 = 4 \, \Omega$ प्राप्त होता है।
प्रतिरोधों की तुलना करने पर: $R_3 > R_2 > R_1$।
चूंकि व्ययित शक्ति $P = V^2 / R$ होती है, स्थिर वोल्टेज $V$ के लिए, $P$, $R$ के व्युत्क्रमानुपाती होता है।
अतः, $P_1 > P_2 > P_3$।
4
ChemistryMCQIIT JEE · 2008
एक रेडियोधर्मी नमूना $S_1$ जिसकी सक्रियता $5\,\mu Ci$ है,में दूसरे नमूने $S_2$ (जिसकी सक्रियता $10\,\mu Ci$ है) की तुलना में दोगुने नाभिक हैं। $S_1$ और $S_2$ की अर्ध-आयु क्या हो सकती है?
A
क्रमशः $20\, years$ और $5\, years$
B
क्रमशः $20\, years$ और $10\, years$
C
प्रत्येक $10\, years$
D
प्रत्येक $5\, years$

Solution

(B) एक रेडियोधर्मी नमूने की सक्रियता $A = \lambda N$ द्वारा दी जाती है,जहाँ $\lambda$ क्षय स्थिरांक है और $N$ नाभिकों की संख्या है।
दिया गया है: $A_1 = 5\,\mu Ci$ और $A_2 = 10\,\mu Ci$.
साथ ही,$N_1 = 2N_2$.
सक्रियता सूत्र का उपयोग करते हुए: $A_1 = \lambda_1 N_1$ और $A_2 = \lambda_2 N_2$.
मान रखने पर: $5 = \lambda_1 N_1$ और $10 = \lambda_2 N_2$.
चूंकि $N_1 = 2N_2$,इसलिए $5 = \lambda_1 (2N_2) \Rightarrow 10 = 2\lambda_1 N_2$.
$A_2 = 10 = \lambda_2 N_2$ के साथ तुलना करने पर,हमें $\lambda_2 N_2 = 2\lambda_1 N_2$ प्राप्त होता है,जिसका अर्थ है $\lambda_2 = 2\lambda_1$.
अर्ध-आयु $T_{1/2}$ क्षय स्थिरांक $\lambda$ के व्युत्क्रमानुपाती होती है $(T_{1/2} = \ln(2) / \lambda)$.
इसलिए,$T_2 = T_1 / 2$,या $T_1 = 2T_2$.
विकल्पों की जाँच करने पर,यदि $T_2 = 10\, years$ है,तो $T_1 = 20\, years$ होगा। अतः,विकल्प $B$ सही है।
5
ChemistryMCQIIT JEE · 2008
चित्र में $3 \, V$ की बैटरी से जुड़े तीन प्रतिरोधक विन्यास $R_1, R_2$ और $R_3$ दिखाए गए हैं। यदि विन्यास $R_1, R_2$ और $R_3$ द्वारा व्ययित शक्ति क्रमशः $P_1, P_2$ और $P_3$ है,तो:
Question diagram
A
$P_1 > P_2 > P_3$
B
$P_1 > P_3 > P_2$
C
$P_2 > P_1 > P_3$
D
$P_3 > P_2 > P_1$

Solution

(C) स्थिर वोल्टेज $V$ के लिए,व्ययित शक्ति $P = \frac{V^2}{R}$ द्वारा दी जाती है। अतः,$P \propto \frac{1}{R}$ है।
$1$. $R_1$ के लिए: परिपथ में तीन $1 \, \Omega$ के प्रतिरोधक समानांतर में हैं,जो एक अन्य $1 \, \Omega$ के प्रतिरोधक के साथ श्रेणीक्रम में हैं। तुल्य प्रतिरोध $R_1 = (1 \, \Omega \parallel 1 \, \Omega \parallel 1 \, \Omega) + 1 \, \Omega = \frac{1}{3} \, \Omega + 1 \, \Omega = \frac{4}{3} \, \Omega \approx 1.33 \, \Omega$ है।
$2$. $R_2$ के लिए: यह पाँच $1 \, \Omega$ प्रतिरोधकों वाला एक संतुलित व्हीटस्टोन सेतु है। बीच वाले प्रतिरोधक में कोई धारा प्रवाहित नहीं होती है। तुल्य प्रतिरोध $R_2 = (1 \, \Omega + 1 \, \Omega) \parallel (1 \, \Omega + 1 \, \Omega) = 2 \, \Omega \parallel 2 \, \Omega = 1 \, \Omega$ है।
$3$. $R_3$ के लिए: यह चार $1 \, \Omega$ प्रतिरोधकों वाला एक व्हीटस्टोन सेतु है जो $3 \, \Omega$ के प्रतिरोधक के साथ श्रेणीक्रम में है। सेतु भाग का तुल्य प्रतिरोध $1 \, \Omega$ है। अतः,$R_3 = 1 \, \Omega + 3 \, \Omega = 4 \, \Omega$ है।
प्रतिरोधों की तुलना करने पर: $R_3 > R_1 > R_2$ है।
चूँकि $P \propto \frac{1}{R}$,इसलिए $P_2 > P_1 > P_3$ प्राप्त होता है।
6
ChemistryMCQIIT JEE · 2008
निम्नलिखित अभिक्रिया का मुख्य उत्पाद क्या है?
Question diagram
A
Option A
B
Option B
C
Option C
D
Option D

Solution

(A) अभिक्रिया दो चरणों में होती है:
$1$. एल्कीन पर $HCl$ का मार्कोवनिकोव योग: $H^+$ द्वि-आबंध के अंतिम कार्बन पर जुड़कर बेंजीन वलय से सटे कार्बन पर एक अधिक स्थिर द्वितीयक कार्बोकैटायन बनाता है।
$2$. अंतःआणविक फ्रीडल-क्राफ्ट्स एल्काइलेशन: बना हुआ द्वितीयक कार्बोकैटायन एक इलेक्ट्रोफाइल के रूप में कार्य करता है और फिनोल वलय की ऑर्थो स्थिति पर आक्रमण करता है ($-OH$ समूह की सक्रियता के कारण),जिससे बेंजीन वलय के साथ जुड़ी हुई पांच-सदस्यीय वलय बनती है।
7
ChemistryMCQIIT JEE · 2008
चित्र में दिखाए अनुसार $A, B$ और $C$ बिंदुओं पर रखे गए $\frac{q}{3}, \frac{q}{3}$ और $-\frac{2q}{3}$ आवेशों की एक प्रणाली पर विचार करें। $O$ को $R$ त्रिज्या वाले वृत्त का केंद्र मानें और $\angle CAB = 60^\circ$ है।
Question diagram
A
$O$ बिंदु पर विद्युत क्षेत्र $\frac{q}{8\pi \epsilon_0 R^2}$ है जो ऋणात्मक $x$-अक्ष की दिशा में है।
B
प्रणाली की स्थितिज ऊर्जा शून्य है।
C
$C$ और $B$ पर स्थित आवेशों के बीच बल का परिमाण $\frac{q^2}{54\pi \epsilon_0 R^2}$ है।
D
$O$ बिंदु पर विभव $\frac{q}{12\pi \epsilon_0 R}$ है।

Solution

(C) दिए गए आवेश: $q_A = q/3, q_B = q/3, q_C = -2q/3$। चूँकि $\angle CAB = 60^\circ$ और $OA=OB=OC=R$,$\triangle OAC$ और $\triangle OAB$ समबाहु त्रिभुज हैं। अतः,$A, B, C$ वृत्त पर स्थित हैं।
$O$ पर विद्युत क्षेत्र: $\vec{E}_A = \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \frac{q/3}{R^2}$ ($A$ से दूर),$\vec{E}_B = \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \frac{q/3}{R^2}$ ($B$ से दूर),$\vec{E}_C = \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \frac{2q/3}{R^2}$ ($C$ की ओर)।
परिणामी क्षेत्र $\vec{E}_O = \vec{E}_A + \vec{E}_B + \vec{E}_C$। घटकों को हल करने पर,शुद्ध क्षेत्र ऋणात्मक $x$-अक्ष की दिशा में $\frac{q}{6\pi\epsilon_0 R^2}$ प्राप्त होता है।
$O$ पर विभव: $V_O = \frac{1}{4\pi\epsilon_0 R} (q/3 + q/3 - 2q/3) = 0$।
$C$ और $B$ के बीच बल: दूरी $CB = \sqrt{R^2 + R^2 - 2R^2 \cos(120^\circ)} = \sqrt{3}R$। बल $F = \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \frac{|q_C q_B|}{(CB)^2} = \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \frac{(2q/3)(q/3)}{3R^2} = \frac{2q^2}{108\pi\epsilon_0 R^2} = \frac{q^2}{54\pi\epsilon_0 R^2}$।
अतः,विकल्प $C$ सही है।
8
ChemistryMCQIIT JEE · 2008
निम्नलिखित अभिक्रिया का मुख्य उत्पाद है:
Question diagram
A
Option A
B
Option B
C
Option C
D
Option D

Solution

(A) इस अभिक्रिया में एक ऐसा सबस्ट्रेट है जिसमें दो संभावित इलेक्ट्रोफिलिक साइट्स हैं: एक ब्रोमीन परमाणु से जुड़ा बेंजिलिक कार्बन और एक फ्लोरीन परमाणु से जुड़ा एरोमैटिक कार्बन।
अभिकर्मक $PhS^-Na^+$ एक प्रबल न्यूक्लियोफाइल है।
बेंजिलिक स्थिति $S_N2$ प्रतिस्थापन के लिए संवेदनशील है। $PhS^-$ न्यूक्लियोफाइल बेंजिलिक कार्बन पर हमला करता है और $Br^-$ आयन को विस्थापित करता है। यह अभिक्रिया कायरल केंद्र पर विन्यास के प्रतिलोमन (inversion) के साथ आगे बढ़ती है।
यद्यपि एरोमैटिक रिंग में पैरा स्थिति पर एक प्रबल इलेक्ट्रॉन-आकर्षक $-NO_2$ समूह है,जो ऑर्थो-फ्लोरीन को न्यूक्लियोफिलिक एरोमैटिक प्रतिस्थापन $(S_NAr)$ के लिए सक्रिय करता है,लेकिन इन परिस्थितियों में बेंजिलिक स्थिति पर $S_N2$ अभिक्रिया सामान्यतः तेज होती है।
अतः,मुख्य उत्पाद $Br$ परमाणु के $PhS$ समूह द्वारा प्रतिस्थापन से बनता है,जिसमें विन्यास का प्रतिलोमन होता है।
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ChemistryMCQIIT JEE · 2008
चित्र में $3\,V$ की बैटरी से जुड़े तीन प्रतिरोधक विन्यास $R_1, R_2$ और $R_3$ दिखाए गए हैं। यदि विन्यास $R_1, R_2$ और $R_3$ द्वारा व्ययित शक्ति क्रमशः $P_1, P_2$ और $P_3$ है,तो:
Question diagram
A
$P_1 > P_2 > P_3$
B
$P_1 > P_3 > P_2$
C
$P_2 > P_1 > P_3$
D
$P_3 > P_2 > P_1$

Solution

(C) स्थिर वोल्टेज $V$ वाले परिपथ में व्ययित शक्ति $P = \frac{V^2}{R}$ द्वारा दी जाती है। चूंकि तीनों परिपथों के लिए $V = 3\,V$ स्थिर है,इसलिए $P \propto \frac{1}{R}$ होगा। अतः,जिस परिपथ का तुल्य प्रतिरोध सबसे कम होगा,उसमें सबसे अधिक शक्ति व्यय होगी।
$1$. $R_1$ के लिए: परिपथ में कई $1\,\Omega$ के प्रतिरोधक हैं। समरूपता और श्रेणी-समांतर संयोजन का विश्लेषण करने पर,तुल्य प्रतिरोध $R_1 = 1\,\Omega$ प्राप्त होता है।
$2$. $R_2$ के लिए: यह एक संतुलित व्हीटस्टोन ब्रिज है जिसमें बीच में एक प्रतिरोधक है। समरूपता के कारण,मध्य प्रतिरोधक के सिरों पर विभव समान है,इसलिए इसमें से कोई धारा प्रवाहित नहीं होती है। तुल्य प्रतिरोध $R_2 = 0.5\,\Omega$ प्राप्त होता है।
$3$. $R_3$ के लिए: यह एक ब्रिज परिपथ है जो एक अन्य प्रतिरोधक के साथ श्रेणीक्रम में है। तुल्य प्रतिरोध $R_3 = 2\,\Omega$ प्राप्त होता है।
प्रतिरोधों की तुलना करने पर: $R_2 (0.5\,\Omega) < R_1 (1\,\Omega) < R_3 (2\,\Omega)$।
चूंकि $P \propto \frac{1}{R}$ है,इसलिए शक्ति व्यय का क्रम उल्टा होगा: $P_2 > P_1 > P_3$।
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ChemistryMCQIIT JEE · 2008
चित्र में दिखाए अनुसार $A, B$ और $C$ बिंदुओं पर क्रमशः $\frac{q}{3}, \frac{q}{3}$ और $\frac{-2q}{3}$ आवेशों की एक प्रणाली पर विचार करें। $R$ त्रिज्या वाले वृत्त का केंद्र $O$ है और कोण $\angle CAB = 60^{\circ}$ है।
Question diagram
A
बिंदु $O$ पर विद्युत क्षेत्र $\frac{q}{8\pi \varepsilon_0 R^2}$ है जो ऋणात्मक $x$-अक्ष की दिशा में है।
B
प्रणाली की स्थितिज ऊर्जा शून्य है।
C
$C$ और $B$ पर स्थित आवेशों के बीच बल का परिमाण $\frac{q^2}{54\pi \varepsilon_0 R^2}$ है।
D
बिंदु $O$ पर विभव $\frac{q}{12\pi \varepsilon_0 R}$ है।

Solution

(C) दिए गए आवेश $q_A = \frac{q}{3}$,$q_B = \frac{q}{3}$,और $q_C = \frac{-2q}{3}$ हैं।
$\triangle ABC$ में,चूंकि $A, B, C$ त्रिज्या $R$ के वृत्त पर स्थित हैं और $\angle CAB = 60^{\circ}$ है,जीवा $BC$ परिधि पर कोण बनाती है। $O$ केंद्र है,इसलिए $\angle COB = 2 \angle CAB = 120^{\circ}$ होगा।
दूरी $BC = 2R \sin(60^{\circ}) = 2R \frac{\sqrt{3}}{2} = R\sqrt{3}$ प्राप्त होती है।
कूलम्ब के नियम के अनुसार $C$ और $B$ पर स्थित आवेशों के बीच स्थिर-विद्युत बल का परिमाण:
$F = \frac{1}{4\pi \varepsilon_0} \frac{|q_C \cdot q_B|}{(BC)^2} = \frac{1}{4\pi \varepsilon_0} \frac{|(\frac{-2q}{3}) \cdot (\frac{q}{3})|}{(R\sqrt{3})^2}$
$F = \frac{1}{4\pi \varepsilon_0} \frac{2q^2/9}{3R^2} = \frac{2q^2}{108\pi \varepsilon_0 R^2} = \frac{q^2}{54\pi \varepsilon_0 R^2}$.
अतः,विकल्प $C$ सही है।
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$X-$रे ट्यूब से उत्पन्न $X-$किरणों के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन सा कथन $\text{गलत}$ है?
A
जब लक्ष्य (target) की परमाणु संख्या बढ़ती है तो अभिलक्षणिक $X-$किरणों की तरंगदैर्ध्य कम हो जाती है।
B
सतत $X-$किरणों की कट-ऑफ तरंगदैर्ध्य लक्ष्य की परमाणु संख्या पर निर्भर करती है।
C
$X-$किरणों की तीव्रता $X-$रे ट्यूब को दी गई विद्युत शक्ति पर निर्भर करती है।
D
सतत $X-$किरणों की कट-ऑफ तरंगदैर्ध्य $X-$रे ट्यूब में इलेक्ट्रॉनों की ऊर्जा पर निर्भर करती है।

Solution

(B) सतत $X-$किरणों की कट-ऑफ तरंगदैर्ध्य $(\lambda_{min})$ सूत्र $\lambda_{min} = \frac{hc}{eV}$ द्वारा दी जाती है, जहाँ $h$ प्लांक नियतांक है, $c$ प्रकाश की गति है, $e$ इलेक्ट्रॉन का आवेश है और $V$ त्वरक विभवांतर है।
यह सूत्र दर्शाता है कि $\lambda_{min}$ केवल त्वरक वोल्टेज $V$ (जो इलेक्ट्रॉनों की ऊर्जा निर्धारित करता है) और मूलभूत नियतांकों पर निर्भर करता है।
यह लक्ष्य सामग्री की परमाणु संख्या $(Z)$ पर निर्भर नहीं करता है।
इसलिए, यह कथन कि कट-ऑफ तरंगदैर्ध्य लक्ष्य की परमाणु संख्या पर निर्भर करती है, $\text{गलत}$ है।
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ChemistryMCQIIT JEE · 2008
एक अनुप्रस्थ ज्यावक्रीय (sinusoidal) तरंग $10\, cm/s$ की गति से धनात्मक $x-$ दिशा में एक डोरी पर चलती है। तरंग की तरंगदैर्ध्य $0.5\, m$ है और इसका आयाम $10\, cm$ है। किसी विशेष समय $t$ पर,तरंग का स्नैप-शॉट चित्र में दिखाया गया है। बिंदु $P$ का वेग क्या होगा जब इसका विस्थापन $5\, cm$ है?
Question diagram
A
$\frac{\sqrt{3} \pi}{50} \hat{j} \, m/s$
B
$-\frac{\sqrt{3} \pi}{50} \hat{j} \, m/s$
C
$\frac{\sqrt{3} \pi}{50} \hat{i} \, m/s$
D
$-\frac{\sqrt{3} \pi}{50} \hat{i} \, m/s$

Solution

(A) अनुप्रस्थ तरंग में एक कण का वेग $v_p = \omega \sqrt{A^2 - y^2}$ द्वारा दिया जाता है,जहाँ $A$ आयाम है और $y$ विस्थापन है।
दिया गया है: तरंग की गति $v = 10 \, cm/s = 0.1 \, m/s$,तरंगदैर्ध्य $\lambda = 0.5 \, m$,आयाम $A = 10 \, cm = 0.1 \, m$,और विस्थापन $y = 5 \, cm = 0.05 \, m$.
कोणीय आवृत्ति $\omega = \frac{2\pi v}{\lambda} = \frac{2\pi \times 0.1}{0.5} = 0.4\pi \, rad/s$.
वेग के सूत्र में मान रखने पर:
$v_p = 0.4\pi \sqrt{(0.1)^2 - (0.05)^2} = 0.4\pi \sqrt{0.01 - 0.0025} = 0.4\pi \sqrt{0.0075} = 0.4\pi \times 0.05\sqrt{3} = 0.02\sqrt{3}\pi \, m/s$.
$0.02\sqrt{3}\pi$ को भिन्न रूप में बदलने पर: $\frac{2\sqrt{3}\pi}{100} = \frac{\sqrt{3}\pi}{50} \, m/s$.
चित्र से,जैसे ही तरंग धनात्मक $x-$ दिशा में यात्रा करती है,बिंदु $P$ शृंग (crest) के नीचे की ढलान पर है,जिसका अर्थ है कि यह धनात्मक $y-$ दिशा में ऊपर की ओर बढ़ रहा है। अतः,वेग $\frac{\sqrt{3}\pi}{50} \hat{j} \, m/s$ है।
Solution diagram
13
ChemistryMCQIIT JEE · 2008
$[Ni(CO)_4]$ और $[Ni(CN)_4]^{2-}$ दोनों प्रतिचुंबकीय (diamagnetic) हैं। इन संकुलों में निकैल का संकरण क्रमशः क्या है?
A
$sp^3, sp^3$
B
$sp^3, dsp^2$
C
$dsp^2, sp^3$
D
$dsp^2, dsp^2$

Solution

(B) $[Ni(CO)_4]$ में,$Ni$ की ऑक्सीकरण अवस्था $0$ है,इसलिए इलेक्ट्रॉनिक विन्यास $[Ar] 3d^8 4s^2$ है। चूँकि $CO$ एक प्रबल लिगेंड है,यह $4s$ के इलेक्ट्रॉनों को $3d$ उपकोश में युग्मित कर देता है,जिससे $3d^{10}$ विन्यास प्राप्त होता है। इससे एक $4s$ और तीन $4p$ कक्षक रिक्त हो जाते हैं,जिसके परिणामस्वरूप $sp^3$ संकरण होता है।
$[Ni(CN)_4]^{2-}$ में,$Ni$ की ऑक्सीकरण अवस्था $+2$ है,इसलिए इलेक्ट्रॉनिक विन्यास $[Ar] 3d^8$ है। $CN^-$ एक प्रबल लिगेंड है जो $3d$ उपकोश में इलेक्ट्रॉनों को युग्मित करता है,जिससे एक $3d$ कक्षक रिक्त हो जाता है। यह रिक्त $3d$ कक्षक,एक $4s$ और दो $4p$ कक्षकों के साथ मिलकर $dsp^2$ संकरण बनाता है।
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ChemistryMCQIIT JEE · 2008
एक प्रकाश किरण क्षेत्र $I$ से क्षेत्र $IV$ की ओर यात्रा कर रही है (आकृति देखें)। क्षेत्र $I, II, III$ और $IV$ के अपवर्तनांक क्रमशः $n_0, \frac{n_0}{2}, \frac{n_0}{6}$ और $\frac{n_0}{8}$ हैं। आपतन कोण $\theta$ ज्ञात कीजिए जिसके लिए किरण क्षेत्र $IV$ में प्रवेश करने से ठीक चूक जाती है।
Question diagram
A
$\sin^{-1}\left(\frac{3}{4}\right)$
B
$\sin^{-1}\left(\frac{1}{8}\right)$
C
$\sin^{-1}\left(\frac{1}{4}\right)$
D
$\sin^{-1}\left(\frac{1}{3}\right)$

Solution

(B) स्नेल के नियम के अनुसार,जब प्रकाश की किरण कई समानांतर सतहों से होकर गुजरती है,तो अपवर्तनांक और कोण के ज्या (sine) का गुणनफल प्रत्येक सतह पर स्थिर रहता है।
मान लीजिए $n_1, n_2, n_3, n_4$ अपवर्तनांक हैं और $\theta, \theta_1, \theta_2, \theta_3$ क्रमशः क्षेत्र $I, II, III, IV$ में अपवर्तन के कोण हैं।
स्नेल का नियम लागू करने पर:
$n_0 \sin \theta = n_1 \sin \theta_1 = n_2 \sin \theta_2 = n_3 \sin \theta_3$
दिया गया है:
$n_1 = n_0, n_2 = \frac{n_0}{2}, n_3 = \frac{n_0}{6}, n_4 = \frac{n_0}{8}$
इसलिए:
$n_0 \sin \theta = \frac{n_0}{8} \sin \theta_3$
किरण के क्षेत्र $IV$ में प्रवेश करने से ठीक चूकने के लिए,क्षेत्र $IV$ में अपवर्तन का कोण $\theta_3 = 90^\circ$ (या $\frac{\pi}{2}$ रेडियन) होना चाहिए।
$\theta_3 = 90^\circ$ प्रतिस्थापित करने पर:
$n_0 \sin \theta = \frac{n_0}{8} \sin(90^\circ)$
$n_0 \sin \theta = \frac{n_0}{8} (1)$
$\sin \theta = \frac{1}{8}$
$\theta = \sin^{-1}\left(\frac{1}{8}\right)$
Solution diagram
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ChemistryMCQIIT JEE · 2008
एक आदर्श गैस इस प्रकार प्रसारित हो रही है कि $PT^2 =$ नियतांक है। गैस का आयतन प्रसार गुणांक है
A
$\frac{1}{T}$
B
$\frac{2}{T}$
C
$\frac{3}{T}$
D
$\frac{4}{T}$

Solution

(C) दी गई प्रक्रिया का समीकरण $PT^2 = \text{नियतांक}$ है।
आदर्श गैस नियम $PV = nRT$ का उपयोग करते हुए, हम दाब को $P = \frac{nRT}{V}$ के रूप में लिख सकते हैं।
इसे प्रक्रिया समीकरण में प्रतिस्थापित करने पर: $\left(\frac{nRT}{V}\right)T^2 = \text{नियतांक}$।
यह सरल होकर $\frac{T^3}{V} = \text{नियतांक}$, या $V \propto T^3$ हो जाता है।
दोनों पक्षों का $T$ के सापेक्ष अवकलन करने पर: $dV = 3k T^2 dT$, जहाँ $k$ एक नियतांक है।
चूँकि $V = k T^3$, इसलिए $\frac{dV}{dT} = 3k T^2 = \frac{3V}{T}$ प्राप्त होता है।
आयतन प्रसार गुणांक $\gamma$ को $\gamma = \frac{1}{V} \frac{dV}{dT}$ के रूप में परिभाषित किया जाता है।
$\frac{dV}{dT}$ का मान रखने पर: $\gamma = \frac{1}{V} \left(\frac{3V}{T}\right) = \frac{3}{T}$।
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ChemistryMCQIIT JEE · 2008
निम्नलिखित अभिक्रिया का मुख्य उत्पाद है
Question diagram
A
Option A
B
Option B
C
Option C
D
Option D

Solution

(A) यह अभिक्रिया बेन्ज़िलिक कार्बन पर द्वि-आण्विक नाभिकरागी प्रतिस्थापन $(SN^{2})$ है। नाभिकरागी $PhS^-$ बेन्ज़िलिक कार्बन पर लीविंग ग्रुप $(I^-)$ के विपरीत दिशा से आक्रमण करता है,जिसके परिणामस्वरूप विन्यास में प्रतिलोमन (inversion) होता है। बेन्ज़ीन वलय पर स्थित फ्लोरीन परमाणु प्रतिस्थापित नहीं होता है क्योंकि अभिक्रिया की स्थितियाँ वलय पर नाभिकरागी एरोमैटिक प्रतिस्थापन $(S_NAr)$ की तुलना में एलिफैटिक बेन्ज़िलिक स्थिति पर $SN^{2}$ को अधिक प्राथमिकता देती हैं।
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ChemistryMCQIIT JEE · 2008
निम्नलिखित अभिक्रिया का मुख्य उत्पाद क्या है?
Question diagram
A
Option A
B
Option B
C
Option C
D
Option D

Solution

(A) दी गई अभिक्रिया बर्च अपचयन (Birch reduction) का एक उदाहरण है,जिसमें अल्कोहल $(CH_3CH_2OH)$ की उपस्थिति में द्रव अमोनिया $(NH_3)$ में क्षार धातु ($Na$ या $Li$) का उपयोग करके एक एरोमैटिक वलय का गैर-संयुग्मित $1,4$-साइक्लोहेक्साडाइन में अपचयन किया जाता है।
इलेक्ट्रॉन-दाता समूह (जैसे $-OCH_3$) के साथ प्रतिस्थापित एरोमैटिक वलय के लिए,प्रतिस्थापी परिणामी $1,4$-साइक्लोहेक्साडाइन के द्वि-आबंध पर रहता है।
इलेक्ट्रॉन-आकर्षक समूह (जैसे $-NO_2$) के साथ प्रतिस्थापित एरोमैटिक वलय के लिए,प्रतिस्थापी परिणामी $1,4$-साइक्लोहेक्साडाइन के संतृप्त कार्बन ($sp^3$ संकरित कार्बन) पर स्थित होता है।
दिए गए अभिकारक,$o$-नाइट्रोऐनिसोल में,$-NO_2$ समूह एक प्रबल इलेक्ट्रॉन-आकर्षक समूह है,जबकि $-OCH_3$ समूह एक इलेक्ट्रॉन-दाता समूह है। अपचयन इस प्रकार होता है कि $-NO_2$ समूह $1,4$-साइक्लोहेक्साडाइन वलय के संतृप्त कार्बन परमाणु पर आ जाता है। अतः,सही उत्पाद वह है जिसमें $-NO_2$ समूह $sp^3$ कार्बन पर है और $-OCH_3$ समूह द्वि-आबंध पर है।
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ChemistryMCQIIT JEE · 2008
कणों की एक गोलीय सममित गुरुत्वाकर्षण प्रणाली का द्रव्यमान घनत्व $\rho = \begin{cases} \rho_0 & \text{for } r \leq R \\ 0 & \text{for } r > R \end{cases}$ है,जहाँ $\rho_0$ एक स्थिरांक है। एक परीक्षण द्रव्यमान कणों के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र के प्रभाव में वृत्ताकार गति कर सकता है। प्रणाली के केंद्र से दूरी $r$ $(0 < r < \infty)$ के फलन के रूप में इसकी चाल $V$ को किसके द्वारा दर्शाया गया है?
A
Option A
B
Option B
C
Option C
D
Option D

Solution

(C) गोलीय सममित प्रणाली के लिए,$r$ त्रिज्या के गोले के भीतर निहित द्रव्यमान $M(r)$ द्वारा $r$ दूरी पर स्थित परीक्षण द्रव्यमान $m$ पर गुरुत्वाकर्षण बल प्रदान किया जाता है।
स्थिति $1$: $r \leq R$ के लिए,द्रव्यमान $M(r) = \rho_0 \cdot \frac{4}{3} \pi r^3$ है।
गुरुत्वाकर्षण बल $F = \frac{G M(r) m}{r^2} = \frac{G m}{r^2} \cdot \rho_0 \cdot \frac{4}{3} \pi r^3 = \frac{4}{3} \pi G \rho_0 m r$ है।
वृत्ताकार गति के लिए,अभिकेंद्र बल $\frac{m V^2}{r} = F = \frac{4}{3} \pi G \rho_0 m r$ है।
अतः,$V^2 = \frac{4}{3} \pi G \rho_0 r^2$,जिसका अर्थ है $V \propto r$।
स्थिति $2$: $r > R$ के लिए,कुल द्रव्यमान $M = \rho_0 \cdot \frac{4}{3} \pi R^3$ केंद्र पर एक बिंदु द्रव्यमान के रूप में कार्य करता है।
गुरुत्वाकर्षण बल $F = \frac{G M m}{r^2}$ है।
वृत्ताकार गति के लिए,$\frac{m V^2}{r} = \frac{G M m}{r^2}$,जो $V^2 = \frac{G M}{r}$ देता है।
अतः,$V \propto \frac{1}{\sqrt{r}}$।
इसलिए,चाल $V$ का मान $r \leq R$ के लिए $r$ के साथ रैखिक रूप से बढ़ता है और $r > R$ के लिए $1/\sqrt{r}$ के अनुसार घटता है। यह विकल्प $C$ में दिए गए ग्राफ के अनुरूप है।
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ChemistryMCQIIT JEE · 2008
यदि $0 < x < 1$ है,तो $\sqrt{1+x^2}\left[\left\{x \cos \left(\cot ^{-1} x\right)+\sin \left(\cot ^{-1} x\right)\right\}^2-1\right]^{1 / 2}$ का मान ज्ञात कीजिए।
A
$\frac{x}{\sqrt{1+x^2}}$
B
$x$
C
$x \sqrt{1+x^2}$
D
$\sqrt{1+x^2}$

Solution

(C) माना $\theta = \cot^{-1} x$,तो $\cot \theta = x$ है।
चूंकि $0 < x < 1$,$\theta$ प्रथम चतुर्थांश में है।
त्रिभुज के आधार पर,$\cos \theta = \frac{x}{\sqrt{1+x^2}}$ और $\sin \theta = \frac{1}{\sqrt{1+x^2}}$ है।
इन मानों को व्यंजक में प्रतिस्थापित करने पर:
$\sqrt{1+x^2} \left[ \left( x \cdot \frac{x}{\sqrt{1+x^2}} + \frac{1}{\sqrt{1+x^2}} \right)^2 - 1 \right]^{1/2}$
$= \sqrt{1+x^2} \left[ \left( \frac{x^2+1}{\sqrt{1+x^2}} \right)^2 - 1 \right]^{1/2}$
$= \sqrt{1+x^2} \left[ \left( \sqrt{1+x^2} \right)^2 - 1 \right]^{1/2}$
$= \sqrt{1+x^2} \left[ 1+x^2 - 1 \right]^{1/2}$
$= \sqrt{1+x^2} \cdot \sqrt{x^2} = x \sqrt{1+x^2}$.
20
ChemistryAdvancedMCQIIT JEE · 2008
$25^{\circ} C$ पर $\frac{2}{5} \ M$ दुर्बल मोनोएसिडिक बेस $(K_{b} = 1 \times 10^{-12})$ के $2.5 \ mL$ को $25^{\circ} C$ पर $\frac{2}{15} \ M \ HCl$ के साथ अनुमापित किया जाता है। तुल्यता बिंदु पर $H^{+}$ की सांद्रता ज्ञात कीजिए ($K_W = 1 \times 10^{-14}$ at $25^{\circ} C$).
A
$3.7 \times 10^{-13} \ M$
B
$3.2 \times 10^{-7} \ M$
C
$3.2 \times 10^{-2} \ M$
D
$2.7 \times 10^{-2} \ M$

Solution

(C) अभिक्रिया $BOH + HCl \longrightarrow BCl + H_2O$ है।
तुल्यता बिंदु पर,लवण $BCl$ बनता है।
$BOH$ के मोल $= 2.5 \ mL \times 0.4 \ M = 1.0 \ mmol$.
आवश्यक $HCl$ का आयतन $= \frac{1.0 \ mmol}{2/15 \ M} = 7.5 \ mL$.
तुल्यता बिंदु पर कुल आयतन $= 2.5 \ mL + 7.5 \ mL = 10 \ mL$.
लवण की सांद्रता $C = \frac{1.0 \ mmol}{10 \ mL} = 0.1 \ M$.
दुर्बल बेस और प्रबल अम्ल के लवण के लिए,$[H^{+}] = \sqrt{\frac{K_W \times C}{K_b}}$.
$[H^{+}] = \sqrt{\frac{10^{-14} \times 0.1}{10^{-12}}} = \sqrt{10^{-3}} = \sqrt{10 \times 10^{-4}} \approx 3.16 \times 10^{-2} \ M$.
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ChemistryMCQIIT JEE · 2008
निम्नलिखित अभिक्रिया का मुख्य उत्पाद है
Question diagram
A
Option A
B
Option B
C
Option C
D
Option D

Solution

(A) यह अभिक्रिया एक न्यूक्लियोफाइल $(PhS^-)$ और एक ध्रुवीय एप्रोटिक विलायक (डाइमिथाइलफॉर्मामाइड) की उपस्थिति में एक कायरल अल्काइल हैलाइड केंद्र पर न्यूक्लियोफिलिक प्रतिस्थापन को दर्शाती है।
यह अभिक्रिया $S_N2$ क्रियाविधि द्वारा होती है।
$S_N2$ अभिक्रिया में,न्यूक्लियोफाइल लिविंग ग्रुप के विपरीत दिशा से आक्रमण करता है,जिसके परिणामस्वरूप विन्यास का प्रतिपन्न (Walden inversion) होता है।
चूंकि शुरुआती सामग्री में $Br$ परमाणु वेज्ड विन्यास में है,इसलिए उत्पाद में $SPh$ समूह डैशड विन्यास में होगा।
अतः,सही उत्पाद वह है जिसमें $SPh$ समूह डैशड बॉन्ड विन्यास में है।
22
ChemistryDifficultMCQIIT JEE · 2008
अतिसंयुग्मन (Hyperconjugation) में निम्नलिखित में से किन कक्षकों का अतिव्यापन (overlap) होता है?
A
$\sigma-\sigma$
B
$\sigma-p$
C
$p-p$
D
$\pi-\pi$

Solution

(B) अतिसंयुग्मन एक $\sigma$-बंध (आमतौर पर $C-H$ या $C-C$) के इलेक्ट्रॉनों और एक निकटवर्ती खाली या आंशिक रूप से भरे हुए $p$-कक्षक या $\pi$-कक्षक के बीच की परस्पर क्रिया है। अतः,इसमें $\sigma-p$ कक्षकों का अतिव्यापन होता है।
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ChemistryMediumMCQIIT JEE · 2008
$Na_2S_2O_3$ के जलीय विलयन की $Cl_2$ के साथ अभिक्रिया करने पर क्या प्राप्त होता है?
A
$Na_2S_4O_6$
B
$NaHSO_4$
C
$NaCl$
D
$NaOH$

Solution

(B) सोडियम थायोसल्फेट $(Na_2S_2O_3)$ के जलीय विलयन की क्लोरीन $(Cl_2)$ के साथ अभिक्रिया एक ऑक्सीकरण अभिक्रिया है।
$Na_2S_2O_3 + 4Cl_2 + 5H_2O \longrightarrow 2NaHSO_4 + 8HCl$
इस अभिक्रिया में,थायोसल्फेट में सल्फर का ऑक्सीकरण सल्फेट $(HSO_4^-)$ में हो जाता है और क्लोरीन का अपचयन क्लोराइड $(HCl)$ में हो जाता है।
24
ChemistryAdvancedMCQIIT JEE · 2008
वान डर वाल्स समीकरण द्वारा वर्णित एक गैस:
A
$A, C, D$
B
$D, C, B$
C
$A, D, B$
D
$B, C, D$

Solution

(A) वान डर वाल्स समीकरण $\left(P + \frac{n^2 a}{V^2}\right)(V - nb) = nRT$ है।
$A$. बड़े मोलर आयतन $(V \to \infty)$ पर,$\frac{n^2 a}{V^2}$ और $nb$ पद नगण्य हो जाते हैं,इसलिए यह आदर्श गैस की तरह व्यवहार करती है। यह सही है।
$B$. उच्च दबाव पर,आयतन $V$ छोटा होता है और सुधार पद महत्वपूर्ण हो जाते हैं,इसलिए यह आदर्श व्यवहार से विचलित हो जाती है। यह गलत है।
$C$. स्थिरांक $a$ (अंतर-आणविक बल) और $b$ (वर्जित आयतन) गैस की प्रकृति पर निर्भर करते हैं और तापमान से स्वतंत्र होते हैं। यह सही है।
$D$. चूँकि $P = \frac{nRT}{V-nb} - \frac{n^2 a}{V^2}$,आकर्षण बल पद $\frac{n^2 a}{V^2}$ के कारण वास्तविक गैस का दबाव $P$,आदर्श दबाव $P_{ideal} = \frac{nRT}{V}$ से कम होता है। यह सही है।
25
ChemistryAdvancedMCQIIT JEE · 2008
नीचे दिए गए यौगिक के बारे में सही कथन है(हैं):
$A$. यौगिक प्रकाशिक रूप से सक्रिय है
$B$. यौगिक में सममिति का केंद्र है
$C$. यौगिक में सममिति का तल है
$D$. यौगिक में सममिति की अक्ष है
Question diagram
A
$B, C$
B
$A, C$
C
$A, B$
D
$A, D$

Solution

(D) दिया गया यौगिक $2,3$-डाइक्लोरोब्यूटेन है।
एक कार्बन परमाणु को $180^{\circ}$ घुमाकर,हम सममिति के तत्वों का अवलोकन कर सकते हैं।
इस संरूपण में अणु में सममिति का तल या सममिति का केंद्र नहीं होता है,जिससे यह प्रकाशिक रूप से सक्रिय हो जाता है।
हालाँकि,इसमें $C-C$ बंध के लंबवत सममिति की अक्ष $(C_2)$ होती है।
अतः,यौगिक प्रकाशिक रूप से सक्रिय है और इसमें सममिति की अक्ष है।
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ChemistryAdvancedIIT JEE · 2008
संरचनाओं $E, F$ और $G$ के संबंध में सही कथन है (हैं):
$E$: $CH_3CH_2CH(CH_3)COCH_3$
$F$: $CH_3CH_2C(OH)=C(CH_3)_2$ (इनोल रूप)
$G$: $CH_3CH_2C(CH_3)=C(OH)CH_3$ (इनोल रूप)
$(A)$ $E, F$ और $G$ अनुनादी संरचनाएं हैं
$(B)$ $E, F$ और $E, G$ चलावयवी (tautomers) हैं
$(C)$ $F$ और $G$ ज्यामितीय समावयवी हैं
$(D)$ $F$ और $G$ विवृमर (diastereomers) हैं

Solution

(C) $E$,$3$-मिथाइलपेंटेन-$2$-ओन है।
$F$ और $G$,$E$ के इनोल रूप हैं।
$E$ और $F$ चलावयवी हैं,और $E$ और $G$ भी चलावयवी हैं। अतः,कथन $(B)$ सही है।
$F$ और $G$ एक ही कीटोन के इनोल समावयवी हैं। $F$ में,$-OH$ समूह और $-CH_3$ समूह द्वि-आबंध के एक ही तरफ हैं,जबकि $G$ में,वे विपरीत दिशाओं में हैं। अतः,$F$ और $G$ ज्यामितीय समावयवी हैं। चूंकि सभी ज्यामितीय समावयवी विवृमर होते हैं,इसलिए कथन $(C)$ और $(D)$ भी सही हैं।
अतः,सही कथन $(B), (C)$ और $(D)$ हैं।
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ChemistryAdvancedMCQIIT JEE · 2008
रंगहीन लवण $H$ के विलयन को अतिरिक्त $NaOH$ के साथ उबालने पर एक अज्वलनशील गैस उत्पन्न होती है। कुछ समय बाद गैस का निकलना बंद हो जाता है। उसी विलयन में $Zn$ चूर्ण मिलाने पर,गैस का निकलना फिर से शुरू हो जाता है। रंगहीन लवण $H$ है (हैं):
A
$A, C$
B
$A, B$
C
$C, B$
D
$C, A$

Solution

(B) उत्पन्न होने वाली गैस $NH_3$ (अमोनिया) है,जो अज्वलनशील है।
$NH_4^+$ लवण $NaOH$ के साथ अभिक्रिया करके $NH_3$ गैस मुक्त करते हैं: $NH_4^+ + OH^- \longrightarrow NH_3 + H_2O$।
जब $NH_4^+$ आयन समाप्त हो जाते हैं,तो $NH_3$ का निकलना बंद हो जाता है।
यदि लवण में $NO_3^-$ या $NO_2^-$ जैसे ऑक्सीकरण करने वाले ऋणायन होते हैं,तो क्षारीय माध्यम में $Zn$ चूर्ण मिलाने पर इन ऋणायनों का अपचयन होकर $NH_3$ गैस उत्पन्न होती है,जिससे गैस का निकलना फिर से शुरू हो जाता है।
$NH_4NO_3 + 4Zn + 7NaOH \longrightarrow 4Na_2ZnO_2 + 2NH_3 + 2H_2O$।
$NH_4NO_2 + 3Zn + 5NaOH \longrightarrow 3Na_2ZnO_2 + 2NH_3 + H_2O$।
$NH_4Cl$ और $(NH_4)_2SO_4$ में ऑक्सीकरण करने वाले ऋणायन नहीं होते हैं,इसलिए $Zn$ चूर्ण मिलाने पर और $NH_3$ उत्पन्न नहीं होगी।
अतः,$H$ का मान $NH_4NO_3$ या $NH_4NO_2$ हो सकता है।
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ChemistryEasyMCQIIT JEE · 2008
$STATEMENT-1$: साम्यावस्था पर प्रत्येक रासायनिक अभिक्रिया के लिए,अभिक्रिया की मानक गिब्स ऊर्जा शून्य होती है। $STATEMENT-2$: स्थिर तापमान और दबाव पर,रासायनिक अभिक्रियाएं गिब्स ऊर्जा के घटने की दिशा में स्वतःप्रवर्तित होती हैं।
A
$STATEMENT-1$ सत्य है,$STATEMENT-2$ सत्य है; $STATEMENT-2$,$STATEMENT-1$ की सही व्याख्या है
B
$STATEMENT-1$ सत्य है,$STATEMENT-2$ सत्य है; $STATEMENT-2$,$STATEMENT-1$ की सही व्याख्या नहीं है
C
$STATEMENT-1$ सत्य है,$STATEMENT-2$ असत्य है
D
$STATEMENT-1$ असत्य है,$STATEMENT-2$ सत्य है

Solution

(D) साम्यावस्था पर,गिब्स ऊर्जा में परिवर्तन $\Delta G = 0$ होता है,लेकिन अभिक्रिया की मानक गिब्स ऊर्जा $\Delta G^{\circ}$ साम्यावस्था स्थिरांक $K$ से $\Delta G^{\circ} = -RT \ln K$ समीकरण द्वारा संबंधित होती है। अतः,$\Delta G^{\circ}$ केवल तभी शून्य होती है यदि $K = 1$ हो। इसलिए,$STATEMENT-1$ असत्य है।
स्थिर तापमान और दबाव पर,एक रासायनिक अभिक्रिया स्वतःप्रवर्तित होती है यदि निकाय की गिब्स ऊर्जा घटती है,अर्थात $\Delta G < 0$। इसलिए,$STATEMENT-2$ सत्य है।
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ChemistryAdvancedMCQIIT JEE · 2008
$STATEMENT-1$: $Pb^{4+}$ यौगिक $Sn^{4+}$ यौगिकों की तुलना में अधिक प्रबल ऑक्सीकारक हैं।
$STATEMENT-2$: 'अक्रिय युग्म प्रभाव' (inert pair effect) के कारण समूह $14$ के तत्वों के भारी सदस्यों के लिए उच्च ऑक्सीकरण अवस्थाएं अधिक स्थिर होती हैं।
A
$STATEMENT-1$ सत्य है,$STATEMENT-2$ सत्य है; $STATEMENT-2$,$STATEMENT-1$ की सही व्याख्या है
B
$STATEMENT-1$ सत्य है,$STATEMENT-2$ सत्य है; $STATEMENT-2$,$STATEMENT-1$ की सही व्याख्या नहीं है
C
$STATEMENT-1$ सत्य है,$STATEMENT-2$ असत्य है
D
$STATEMENT-1$ असत्य है,$STATEMENT-2$ सत्य है

Solution

(C) $STATEMENT-1$ सत्य है: अक्रिय युग्म प्रभाव के कारण,समूह $14$ में नीचे जाने पर $+4$ ऑक्सीकरण अवस्था की स्थिरता घटती है $(C > Si > Ge > Sn > Pb)$। अतः,$Pb^{4+}$ अत्यधिक अस्थिर है और अधिक स्थिर $+2$ अवस्था प्राप्त करने के लिए एक प्रबल ऑक्सीकारक के रूप में कार्य करता है।
$STATEMENT-2$ असत्य है: अक्रिय युग्म प्रभाव यह बताता है कि समूह $14$ के भारी सदस्यों (जैसे $Pb$) के लिए उच्च ऑक्सीकरण अवस्था $(+4)$ की तुलना में निम्न ऑक्सीकरण अवस्था $(+2)$ अधिक स्थिर होती है।
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ChemistryDifficultMCQIIT JEE · 2008
$T$ तापमान पर $MX$,$MX_2$ और $M_3X$ प्रकार के लवणों के विलेयता गुणनफल स्थिरांक $(K_{sp})$ क्रमशः $4.0 \times 10^{-8}$,$3.2 \times 10^{-14}$ और $2.7 \times 10^{-15}$ हैं। $T$ तापमान पर लवणों की विलेयता $(\text{mol } dm^{-3})$ का क्रम क्या है?
A
$MX > MX_2 > M_3X$
B
$M_3X > MX_2 > MX$
C
$MX_2 > M_3X > MX$
D
$MX > M_3X > MX_2$

Solution

(D) $MX$ के लिए: $K_{sp} = s^2 \implies s = \sqrt{4.0 \times 10^{-8}} = 2.0 \times 10^{-4} \text{ mol } dm^{-3}$.
$MX_2$ के लिए: $K_{sp} = 4s^3 \implies s = \sqrt[3]{(3.2 \times 10^{-14}) / 4} = \sqrt[3]{8.0 \times 10^{-15}} = 2.0 \times 10^{-5} \text{ mol } dm^{-3}$.
$M_3X$ के लिए: $K_{sp} = 27s^4 \implies s = \sqrt[4]{(2.7 \times 10^{-15}) / 27} = \sqrt[4]{1.0 \times 10^{-16}} = 1.0 \times 10^{-4} \text{ mol } dm^{-3}$.
मानों की तुलना करने पर: $2.0 \times 10^{-4} > 1.0 \times 10^{-4} > 2.0 \times 10^{-5}$.
अतः,विलेयता का क्रम $MX > M_3X > MX_2$ है.
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ChemistryAdvancedMCQIIT JEE · 2008
निम्नलिखित प्रजातियों के लिए स्थिरता का सही क्रम क्या है?
Question diagram
A
$(II) > (IV) > (I) > (III)$
B
$(I) > (II) > (III) > (IV)$
C
$(II) > (I) > (IV) > (III)$
D
$(I) > (III) > (II) > (IV)$

Solution

(D) कार्बोकेशन की स्थिरता अनुनाद (resonance),अतिसंयुग्मन (hyperconjugation) और प्रेरणिक प्रभाव (inductive effect) द्वारा निर्धारित की जाती है।
$(I)$ एक ऑक्सीजन परमाणु के बगल में स्थित तृतीयक कार्बोकेशन है। यह अनुनाद द्वारा स्थिर होता है और इसमें अतिसंयुग्मन के लिए $6$ $\alpha$-हाइड्रोजन परमाणु होते हैं।
$(III)$ एक ऑक्सीजन परमाणु के बगल में स्थित द्वितीयक कार्बोकेशन है। यह अनुनाद द्वारा स्थिर होता है,लेकिन इसमें केवल $3$ $\alpha$-हाइड्रोजन परमाणु होते हैं।
$(II)$ एक द्वितीयक एल्काइल कार्बोकेशन है जिसमें $5$ $\alpha$-हाइड्रोजन परमाणु होते हैं।
$(IV)$ एक प्राथमिक एल्काइल कार्बोकेशन है जिसमें $2$ $\alpha$-हाइड्रोजन परमाणु होते हैं।
ऑक्सीजन परमाणु द्वारा अनुनाद स्थिरीकरण सबसे महत्वपूर्ण कारक है,जो $(I)$ और $(III)$ को $(II)$ और $(IV)$ से अधिक स्थिर बनाता है। $(I)$ और $(III)$ के बीच,अधिक अतिसंयुग्मन के कारण $(I)$ अधिक स्थिर है। $(II)$ और $(IV)$ के बीच,अधिक अतिसंयुग्मन के कारण $(II)$ अधिक स्थिर है।
अतः,स्थिरता का सही क्रम $(I) > (III) > (II) > (IV)$ है।
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ChemistryMediumMCQIIT JEE · 2008
$STATEMENT-1:$ कार्य को ऊष्मा में बदलने और ऊष्मा को कार्य में बदलने के बीच एक प्राकृतिक विषमता है।
$STATEMENT-2:$ ऐसी कोई प्रक्रिया संभव नहीं है जिसका एकमात्र परिणाम किसी जलाशय (reservoir) से ऊष्मा का अवशोषण और उसका पूर्णतः कार्य में रूपांतरण हो।
A
$STATEMENT-1$ सत्य है,$STATEMENT-2$ सत्य है; $STATEMENT-2$,$STATEMENT-1$ की सही व्याख्या है
B
$STATEMENT-1$ सत्य है,$STATEMENT-2$ सत्य है; $STATEMENT-2$,$STATEMENT-1$ की सही व्याख्या नहीं है
C
$STATEMENT-1$ सत्य है,$STATEMENT-2$ असत्य है
D
$STATEMENT-1$ असत्य है,$STATEMENT-2$ सत्य है

Solution

(A) $STATEMENT-1$ सत्य है क्योंकि कार्य को पूरी तरह से ऊष्मा में बदला जा सकता है (जैसे घर्षण के माध्यम से),लेकिन ऊष्मा को बिना किसी अन्य प्रभाव के पूरी तरह से कार्य में नहीं बदला जा सकता है।
$STATEMENT-2$ ऊष्मागतिकी के दूसरे नियम का केल्विन-प्लांक कथन है,जो इस अंतर्निहित विषमता की व्याख्या करता है।
अतः,$STATEMENT-2$,$STATEMENT-1$ की सही व्याख्या है।
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ChemistryAdvancedMCQIIT JEE · 2008
स्तंभ $I$ में दिए गए यौगिकों का स्तंभ $II$ में दी गई उनकी विशिष्ट परीक्षण अभिक्रियाओं के साथ मिलान कीजिए।
स्तंभ $I$ स्तंभ $II$
$A. H_2N-NH_3^+Cl^-$ $p. \text{\text{यौगिक का सोडियम संलयन निष्कर्ष }} FeSO_4 \text{ \text{के साथ प्रशियन नीला रंग देता है}}$
$B. HO-C_6H_4-CH(NH_3^+)COOH \text{ (} I^- \text{ \text{आयन के साथ})}$ $q. \text{\text{धनात्मक }} FeCl_3 \text{ \text{परीक्षण देता है}}$
$C. HO-C_6H_4-NH_3^+Cl^-$ $r. AgNO_3 \text{ \text{के साथ सफेद अवक्षेप देता है}}$
$D. (NO_2)_2C_6H_3-NH-NH_3^+Br^-$ $s. \text{\text{हाइड्रेज़ोन व्युत्पन्न बनाने के लिए एल्डिहाइड के साथ अभिक्रिया करता है}}$
A
$A-r, s; B-p, q; C-p, q, r; D-p, s$
B
$A-r, q; B-p, s; C-p, q, s; D-p, r$
C
$A-q, s; B-r, q; C-s, p, r; D-q, s$
D
$A-r, q; B-r, s; C-q, r, p; D-p, q$

Solution

(A) $A. H_2N-NH_3^+Cl^-$ में $Cl^-$ होता है (जो $AgNO_3$ के साथ सफेद अवक्षेप देता है,$r$) और इसमें $N$ होता है (जो $Na$ संलयन के साथ प्रशियन नीला रंग देता है,$p$)। यह एल्डिहाइड के साथ अभिक्रिया करके हाइड्रेज़ोन भी बनाता है $(s)$।
$B. HO-C_6H_4-CH(NH_3^+)COOH$ ($I^-$ के साथ) में $I^-$ होता है (जो $AgNO_3$ के साथ पीला अवक्षेप देता है,सफेद नहीं,इसलिए $r$ बाहर है)। इसमें फिनोल समूह है (जो $FeCl_3$ परीक्षण देता है,$q$) और $N$ है (जो $p$ देता है)।
$C. HO-C_6H_4-NH_3^+Cl^-$ में $Cl^-$ है (जो $r$ देता है),फिनोल समूह है (जो $q$ देता है),और $N$ है (जो $p$ देता है)।
$D. (NO_2)_2C_6H_3-NH-NH_3^+Br^-$ में $Br^-$ है (जो $AgNO_3$ के साथ क्रीम/सफेद अवक्षेप देता है,$r$),$N$ है (जो $p$ देता है),और यह एक हाइड्रेज़िन व्युत्पन्न है (एल्डिहाइड के साथ अभिक्रिया करता है,$s$)।
विकल्पों का मिलान करने पर: $A-r, s; B-p, q; C-p, q, r; D-p, s$ सही विकल्प $A$ है।
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ChemistryAdvancedMCQIIT JEE · 2008
कॉलम $I$ की प्रविष्टियों को कॉलम $II$ में सही संबंधित क्वांटम संख्या(ओं) के साथ मिलाएं।
कॉलम $I$ कॉलम $II$
$A$. हाइड्रोजन-समान परमाणु कक्षक में इलेक्ट्रॉन का कोणीय संवेग $p$. मुख्य क्वांटम संख्या
$B$. पाउली सिद्धांत का पालन करने वाला हाइड्रोजन-समान एक-इलेक्ट्रॉन तरंग फलन $q$. दिगंशीय क्वांटम संख्या
$C$. हाइड्रोजन-समान परमाणु कक्षकों का आकार,माप और अभिविन्यास $r$. चुंबकीय क्वांटम संख्या
$D$. हाइड्रोजन-समान परमाणु में नाभिक पर इलेक्ट्रॉन का प्रायिकता घनत्व $s$. इलेक्ट्रॉन चक्रण क्वांटम संख्या
A
$A-q, B-s, C-p, q, r, D-p, q, r$
B
$A-q, B-s, C-p, q, r, D-p, q, r$
C
$A-p, B-p, C-q, s, r, D-r, p, r$
D
$A-s, B-q, C-r, s, p, D-s, p, r$

Solution

(B) . कक्षीय कोणीय संवेग दिगंशीय क्वांटम संख्या $(l)$ द्वारा निर्धारित होता है। अतः,$A-q$.
$B$. पाउली का अपवर्जन सिद्धांत इलेक्ट्रॉनों के लिए है,जिसमें चक्रण क्वांटम संख्या $(s)$ शामिल है। अतः,$B-s$.
$C$. कक्षकों का आकार,माप और अभिविन्यास मुख्य $(n)$,दिगंशीय $(l)$ और चुंबकीय $(m_l)$ क्वांटम संख्याओं द्वारा निर्धारित होते हैं। अतः,$C-p, q, r$.
$D$. नाभिक पर प्रायिकता घनत्व मुख्य $(n)$ और दिगंशीय $(l)$ क्वांटम संख्याओं पर निर्भर करता है। अतः,$D-p, q$.
35
ChemistryMCQIIT JEE · 2008
निम्नलिखित अभिक्रिया का मुख्य उत्पाद है
Question diagram
A
Option A
B
Option B
C
Option C
D
Option D

Solution

(A) यह अभिक्रिया एक अंतःआणविक एल्डोल संघनन (intramolecular aldol condensation) है।
$1$. क्षार $(OH^-)$ कीटोन समूह से $\alpha$-हाइड्रोजन को हटाकर एक एनोलेट आयन बनाता है।
$2$. एनोलेट आयन दूसरे कीटोन समूह के कार्बोनिल कार्बन पर आक्रमण करके एक चक्रीय $\beta$-हाइड्रॉक्सी कीटोन बनाता है।
$3$. अम्ल $(H^+)$ और ऊष्मा के उपचार पर,$\beta$-हाइड्रॉक्सी कीटोन निर्जलीकरण (पानी का निष्कासन) के माध्यम से मुख्य उत्पाद के रूप में एक $\alpha,\beta$-असंतृप्त कीटोन बनाता है।
36
ChemistryMCQIIT JEE · 2008
निम्नलिखित अभिक्रिया का मुख्य उत्पाद क्या है?
Question diagram
A
Option A
B
Option B
C
Option C
D
Option D

Solution

(A) यह अभिक्रिया एक चक्रीय ईथर का $HI$ के साथ अम्लीय विदलन है। ईथर का ऑक्सीजन $H^+$ द्वारा प्रोटोनेटेड हो जाता है। विदलन उस बंध पर होता है जो अधिक स्थिर कार्बोनियम आयन (carbocation) के निर्माण की ओर ले जाता है। इस मामले में,ऑक्सीजन और तृतीयक कार्बन परमाणु के बीच का बंध टूटकर एक स्थिर बेंजिलिक-तृतीयक कार्बोनियम आयन बनाता है। इसके बाद आयोडाइड आयन $(I^-)$ इस कार्बोनियम आयन पर आक्रमण करके अंतिम उत्पाद बनाता है।
37
ChemistryDifficultMCQIIT JEE · 2008
निम्नलिखित अभिक्रिया का मुख्य उत्पाद क्या है?
Question diagram
A
Option A
B
Option B
C
Option C
D
Option D

Solution

(A) चरण $1$: प्रारंभिक पदार्थ का जल-अपघटन। प्रारंभिक पदार्थ $4$-मेथॉक्सीफेनिल एसीटेट है। $dil. \ HCl$ और ऊष्मा के साथ उपचार करने पर एस्टर समूह का जल-अपघटन होता है,जिससे $4$-मेथॉक्सीफेनोल प्राप्त होता है।
चरण $2$: बहुलकीकरण। इसके बाद $4$-मेथॉक्सीफेनोल की अभिक्रिया ऑक्सेलिक एसिड $(COOH)_2$ के साथ कराई जाती है। यह एक संघनन बहुलकीकरण अभिक्रिया है जहाँ फेनोलिक $-OH$ समूह ऑक्सेलिक एसिड के कार्बोक्सिलिक एसिड समूहों के साथ अभिक्रिया करके एस्टर लिंकेज बनाते हैं। परिणामी बहुलक में एस्टर बंधों के माध्यम से जुड़ी $4$-मेथॉक्सीफेनिल इकाई होती है।
38
ChemistryAdvancedMCQIIT JEE · 2008
प्राकृतिक सिल्वर धातु $NaCN$ के तनु जलीय विलयन के साथ किसकी उपस्थिति में जल में घुलनशील संकुल बनाती है?
A
नाइट्रोजन
B
ऑक्सीजन
C
कार्बन डाइऑक्साइड
D
आर्गन

Solution

(B) प्राकृतिक सिल्वर धातु $(Ag)$ वायुमंडलीय ऑक्सीजन $(O_2)$ की उपस्थिति में $NaCN$ के तनु जलीय विलयन के साथ अभिक्रिया करके जल में घुलनशील संकुल,सोडियम डाइसायनोआर्जेनटेट$(I)$ बनाती है।
इस प्रक्रिया के लिए रासायनिक समीकरण है:
$4 Ag + 8 NaCN + 2 H_2O + O_2 \longrightarrow 4 Na[Ag(CN)_2] + 4 NaOH$
39
ChemistryDifficultMCQIIT JEE · 2008
समान अभिक्रिया परिस्थितियों के तहत,एक पदार्थ की $1.386 \ mol \ dm^{-3}$ प्रारंभिक सांद्रता प्रथम कोटि और शून्य कोटि गतिकी द्वारा क्रमशः $40 \ s$ और $20 \ s$ में आधी हो जाती है। प्रथम कोटि $\left(k_1\right)$ और शून्य कोटि $\left(k_0\right)$ अभिक्रियाओं के वेग स्थिरांकों का अनुपात $\left(\frac{k_1}{k_0}\right)$ क्या है?
A
$0.5 \ mol^{-1} \ dm^3$
B
$1.0 \ mol \ dm^{-3}$
C
$1.5 \ mol \ dm^{-3}$
D
$2.0 \ mol^{-1} \ dm^3$

Solution

(A) प्रथम कोटि अभिक्रिया के लिए,वेग स्थिरांक $k_1 = \frac{0.693}{t_{1/2}} = \frac{0.693}{40} \ s^{-1}$ है।
शून्य कोटि अभिक्रिया के लिए,वेग स्थिरांक $k_0 = \frac{[A]_0}{2 t_{1/2}} = \frac{1.386}{2 \times 20} = \frac{1.386}{40} \ mol \ dm^{-3} \ s^{-1}$ है।
अनुपात $\frac{k_1}{k_0}$ की गणना इस प्रकार है:
$\frac{k_1}{k_0} = \frac{0.693 / 40}{1.386 / 40} = \frac{0.693}{1.386} = 0.5 \ mol^{-1} \ dm^3$.
40
ChemistryAdvancedMCQIIT JEE · 2008
$STATEMENT-1$: ब्रोमोबेंजीन $Br_2 / Fe$ के साथ अभिक्रिया करके मुख्य उत्पाद के रूप में $1,4$-डाइब्रोमोबेंजीन देता है।
$STATEMENT-2$: ब्रोमोबेंजीन में,आने वाले इलेक्ट्रोफाइल को निर्देशित करने में ब्रोमो समूह का प्रेरणिक प्रभाव (inductive effect),मेसोमेरिक प्रभाव से अधिक प्रभावी होता है।
A
$STATEMENT-1$ सत्य है,$STATEMENT-2$ सत्य है; $STATEMENT-2$,$STATEMENT-1$ की सही व्याख्या है
B
$STATEMENT-1$ सत्य है,$STATEMENT-2$ सत्य है; $STATEMENT-2$,$STATEMENT-1$ की सही व्याख्या नहीं है
C
$STATEMENT-1$ सत्य है,$STATEMENT-2$ असत्य है
D
$STATEMENT-1$ असत्य है,$STATEMENT-2$ सत्य है

Solution

(C) $STATEMENT-1$ सत्य है: ब्रोमोबेंजीन इलेक्ट्रोफिलिक एरोमैटिक प्रतिस्थापन अभिक्रिया देता है। $-Br$ समूह अपने $+M$ (मेसोमेरिक) प्रभाव के कारण ऑर्थो/पैरा-निर्देशी है,और ऑर्थो स्थिति पर त्रिविम बाधा (steric hindrance) के कारण $1,4$-डाइब्रोमोबेंजीन (पैरा-आइसोमर) मुख्य उत्पाद के रूप में प्राप्त होता है।
$STATEMENT-2$ असत्य है: हैलोजन में,आने वाले इलेक्ट्रोफाइल को ऑर्थो और पैरा स्थिति पर निर्देशित करने के लिए प्रेरणिक प्रभाव $(-I)$ की तुलना में मेसोमेरिक प्रभाव $(+M)$ अधिक प्रभावी होता है।
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ChemistryAdvancedMCQIIT JEE · 2008
पृथ्वी की पपड़ी में नाइट्रेट्स और फॉस्फेट्स के कुछ जमाव हैं। नाइट्रेट्स पानी में अधिक घुलनशील होते हैं। प्रयोगशाला की स्थितियों में नाइट्रेट्स का अपचयन करना कठिन है लेकिन सूक्ष्मजीव इसे आसानी से कर लेते हैं। अमोनिया संक्रमण धातु आयनों के साथ बड़ी संख्या में संकुल बनाता है। संकरण $NH_3$ और $PH_3$ की सिग्मा दान क्षमता को आसानी से समझाता है। फॉस्फीन एक ज्वलनशील गैस है और इसे सफेद फास्फोरस से तैयार किया जाता है।
$1.$ निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है:
$(A)$ मनुष्यों में फॉस्फेट्स का कोई जैविक महत्व नहीं है
$(B)$ नाइट्रेट्स और फॉस्फेट्स के बीच,पृथ्वी की पपड़ी में फॉस्फेट्स कम मात्रा में पाए जाते हैं
$(C)$ नाइट्रेट्स और फॉस्फेट्स के बीच,पृथ्वी की पपड़ी में नाइट्रेट्स कम मात्रा में पाए जाते हैं
$(D)$ मिट्टी में नाइट्रेट्स का ऑक्सीकरण संभव है
$2.$ निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है:
$(A)$ $NH_3$ और $PH_3$ के बीच,$NH_3$ बेहतर इलेक्ट्रॉन दाता है क्योंकि इलेक्ट्रॉनों की एकाकी जोड़ी गोलाकार '$s$' कक्षक में होती है और कम दिशात्मक होती है
$(B)$ $NH_3$ और $PH_3$ के बीच,$PH_3$ बेहतर इलेक्ट्रॉन दाता है क्योंकि इलेक्ट्रॉनों की एकाकी जोड़ी $sp^3$ कक्षक में होती है और अधिक दिशात्मक होती है
$(C)$ $NH_3$ और $PH_3$ के बीच,$NH_3$ बेहतर इलेक्ट्रॉन दाता है क्योंकि इलेक्ट्रॉनों की एकाकी जोड़ी $sp^3$ कक्षक में होती है और अधिक दिशात्मक होती है
$(D)$ $NH_3$ और $PH_3$ के बीच,$PH_3$ बेहतर इलेक्ट्रॉन दाता है क्योंकि इलेक्ट्रॉनों की एकाकी जोड़ी गोलाकार '$s$' कक्षक में होती है और कम दिशात्मक होती है
$3.$ सफेद फास्फोरस की $NaOH$ के साथ अभिक्रिया से उत्पाद के रूप में $PH_3$ प्राप्त होता है। यह एक:
$(A)$ डाइमराइजेशन अभिक्रिया है
$(B)$ असमानुपातन (disproportionation) अभिक्रिया है
$(C)$ संघनन अभिक्रिया है
$(D)$ अवक्षेपण अभिक्रिया है
प्रश्न $1, 2$ और $3$ के उत्तर दें।
A
$(B, C, A)$
B
$(C, C, B)$
C
$(C, D, A)$
D
$(B, A, C)$
42
ChemistryAdvancedIIT JEE · 2008
निम्नलिखित अनुक्रम में,उत्पाद $I$,$J$ और $L$ बनते हैं। $K$ एक अभिकर्मक का प्रतिनिधित्व करता है।
$1.$ उत्पाद $I$ की संरचना क्या है?
$2.$ यौगिकों $J$ और $K$ की संरचनाएं क्रमशः क्या हैं?
$3.$ उत्पाद $L$ की संरचना क्या है?
प्रश्न $1, 2$ और $3$ के उत्तर दें।
Question diagram

Solution

(A) $1.$ $\text{Hex-3-ynal}$ $(CH_3-CH_2-C \equiv C-CH_2-CHO)$ की अभिक्रिया $NaBH_4$ के साथ होने पर एल्डिहाइड का प्राथमिक अल्कोहल $(CH_3-CH_2-C \equiv C-CH_2-CH_2OH)$ में अपचयन होता है,जिसके बाद $PBr_3$ द्वारा अल्कोहल का ब्रोमाइड में रूपांतरण होता है। अतः,$I$ का मान $CH_3-CH_2-C \equiv C-CH_2-CH_2Br$ है,जो संरचना $(D)$ के अनुरूप है।
$2.$ $I$ से ग्रिग्नार्ड अभिकर्मक बनाकर फिर $CO_2$ और अम्लीय वर्कअप के साथ अभिक्रिया करने पर कार्बोक्सिलिक एसिड $J$ $(CH_3-CH_2-C \equiv C-CH_2-CH_2-COOH)$ प्राप्त होता है। $J$ को एसिड क्लोराइड में बदलने के लिए $SOCl_2$ $(K)$ की आवश्यकता होती है। अतः,$J$ संरचना $(B)$ है और $K$ का मान $SOCl_2$ है। $(J, K)$ का युग्म $(B, SOCl_2)$ है,जो विकल्प $(C)$ से मेल खाता है।
$3.$ अंतिम चरण लिंडलर उत्प्रेरक $(H_2, Pd/BaSO_4, \text{quinoline})$ का उपयोग करके एल्काइन का सिस-एल्कीन में आंशिक हाइड्रोजनीकरण है। उत्पाद $L$ एक एल्डिहाइड समूह वाला सिस-एल्कीन है,जो संरचना $(C)$ के अनुरूप है।
अतः,$(1, 2, 3)$ के लिए सही क्रम $(D, C, C)$ है।
43
ChemistryAdvancedMCQIIT JEE · 2008
जब एक समांगी विलयन प्राप्त करने के लिए विलेय के अणु मिलाए जाते हैं,तो शुद्ध विलायक के क्वथनांक,हिमांक और वाष्प दाब जैसे गुण बदल जाते हैं। इन्हें अणुसंख्यक गुणधर्म कहा जाता है। अणुसंख्यक गुणधर्मों के अनुप्रयोग दैनिक जीवन में बहुत उपयोगी हैं। इसका एक उदाहरण ऑटोमोबाइल के रेडिएटर में एंटी-फ्रीजिंग तरल के रूप में एथिलीन ग्लाइकॉल और पानी के मिश्रण का उपयोग है।
इथेनॉल और पानी को मिलाकर एक विलयन $M$ तैयार किया जाता है। मिश्रण में इथेनॉल का मोल अंश $0.9$ है।
दिया गया है: पानी का हिमांक अवनमन स्थिरांक $(K_{f}^{\text{water}}) = 1.86 \ K \ kg \ mol^{-1}$
इथेनॉल का हिमांक अवनमन स्थिरांक $(K_{f}^{\text{ethanol}}) = 2.0 \ K \ kg \ mol^{-1}$
पानी का क्वथनांक उन्नयन स्थिरांक $(K_{b}^{\text{water}}) = 0.52 \ K \ kg \ mol^{-1}$
इथेनॉल का क्वथनांक उन्नयन स्थिरांक $(K_{b}^{\text{ethanol}}) = 1.2 \ K \ kg \ mol^{-1}$
पानी का मानक हिमांक $= 273 \ K$
इथेनॉल का मानक हिमांक $= 155.7 \ K$
पानी का मानक क्वथनांक $= 373 \ K$
इथेनॉल का मानक क्वथनांक $= 351.5 \ K$
शुद्ध पानी का वाष्प दाब $= 32.8 \ mm \ Hg$
शुद्ध इथेनॉल का वाष्प दाब $= 40 \ mm \ Hg$
पानी का आणविक द्रव्यमान $= 18 \ g \ mol^{-1}$
इथेनॉल का आणविक द्रव्यमान $= 46 \ g \ mol^{-1}$
निम्नलिखित प्रश्नों का उत्तर देते समय,विलयनों को आदर्श तनु विलयन और विलेय को अवाष्पशील और अविघटनीय मानें।
$1.$ विलयन $M$ का हिमांक है
$(A) \ 268.7 \ K \ (B) \ 268.5 \ K$
$(C) \ 234.2 \ K \ (D) \ 150.9 \ K$
$2.$ विलयन $M$ का वाष्प दाब है
$(A) \ 39.3 \ mm \ Hg \ (B) \ 36.0 \ mm \ Hg$
$(C) \ 29.5 \ mm \ Hg \ (D) \ 28.8 \ mm \ Hg$
$3.$ विलयन $M$ में पानी इस प्रकार मिलाया जाता है कि विलयन में पानी का मोल अंश $0.9$ हो जाता है। इस विलयन का क्वथनांक है
$(A) \ 380.4 \ K \ (B) \ 376.2 \ K$
$(C) \ 375.5 \ K \ (D) \ 354.7 \ K$
प्रश्न $1, 2$ और $3$ के उत्तर दें।
A
$(D, B, B)$
B
$(D, B, C)$
C
$(A, B, C)$
D
$(D, C, C)$
44
ChemistryEasyMCQIIT JEE · 2008
$[Ni(NH_3)_4][NiCl_4]$ का $IUPAC$ नाम क्या है?
A
टेट्राक्लोरोनिकल $(II)$ - टेट्राएमीननिकल $(II)$
B
टेट्राएमीननिकल $(II)$ - टेट्राक्लोरोनिकल $(II)$
C
टेट्राएमीननिकल $(II)$ - टेट्राक्लोरोनिक्लेट $(II)$
D
टेट्राक्लोरोनिकल $(II)$ - टेट्राएमीननिक्लेट $(0)$

Solution

(C) $[Ni(NH_3)_4][NiCl_4]$ एक आयनिक समन्वय यौगिक है जिसमें धनायन $[Ni(NH_3)_4]^{2+}$ और ऋणायन $[NiCl_4]^{2-}$ होते हैं।
धनायन भाग में $Ni$ की ऑक्सीकरण अवस्था $x + 4(0) = +2$ है,इसलिए $x = +2$ है।
ऋणायन भाग में $Ni$ की ऑक्सीकरण अवस्था $x + 4(-1) = -2$ है,इसलिए $x = +2$ है।
धनायन भाग का नाम टेट्राएमीननिकल $(II)$ है।
ऋणायन भाग का नाम टेट्राक्लोरोनिक्लेट $(II)$ है क्योंकि धातु एक ऋणायनिक संकुल में है।
अतः,सही $IUPAC$ नाम टेट्राएमीननिकल $(II)$ टेट्राक्लोरोनिक्लेट $(II)$ है।
45
ChemistryDifficultMCQIIT JEE · 2008
निम्नलिखित में से रंगीन यौगिक है:
A
$CuCl$
B
$K_3[Cu(CN)_4]$
C
$CuF_2$
D
$[Cu(CH_3CN)_4]BF_4$

Solution

(C) $CuCl$ में,$Cu$ $+1$ ऑक्सीकरण अवस्था ($d^{10}$ विन्यास) में है,जो रंगहीन है।
$K_3[Cu(CN)_4]$ में,$Cu$ $+1$ ऑक्सीकरण अवस्था ($d^{10}$ विन्यास) में है,जो रंगहीन है।
$[Cu(CH_3CN)_4]BF_4$ में,$Cu$ $+1$ ऑक्सीकरण अवस्था ($d^{10}$ विन्यास) में है,जो रंगहीन है।
$CuF_2$ में,$Cu$ $+2$ ऑक्सीकरण अवस्था ($d^9$ विन्यास) में है। अयुग्मित इलेक्ट्रॉन की उपस्थिति के कारण,$d-d$ संक्रमण होता है,जिससे यह नीले रंग का होता है।
46
ChemistryEasyMCQIIT JEE · 2008
$[Ni(CO)_4]$ और $[Ni(CN)_4]^{2-}$ दोनों प्रतिचुंबकीय हैं। इन संकुलों में निकेल का संकरण क्रमशः क्या है?
A
$sp^3, sp^3$
B
$dsp^2, sp^3$
C
$sp^3, dsp^2$
D
$dsp^2, dsp^2$

Solution

(C) $[Ni(CO)_4]$ में,$Ni$ की ऑक्सीकरण अवस्था $0$ है। इसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास $[Ar] 3d^8 4s^2$ है। चूंकि $CO$ एक प्रबल क्षेत्र लिगेंड है,यह इलेक्ट्रॉनों का युग्मन करता है,जिससे $sp^3$ संकरण और चतुष्फलकीय ज्यामिति प्राप्त होती है।
$[Ni(CN)_4]^{2-}$ में,$Ni$ की ऑक्सीकरण अवस्था $+2$ है। इसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास $[Ar] 3d^8$ है। $CN^-$ एक प्रबल क्षेत्र लिगेंड है,जो $3d$ इलेक्ट्रॉनों को युग्मित होने के लिए मजबूर करता है,जिसके परिणामस्वरूप $dsp^2$ संकरण और वर्ग समतलीय ज्यामिति प्राप्त होती है।
47
ChemistryMediumMCQIIT JEE · 2008
निम्नलिखित में से कौन सा सर्फेक्टेंट परिवेश की स्थितियों में सबसे कम मोलर सांद्रता पर जलीय घोल में मिसेल बनाएगा?
A
$CH_3(CH_2)_{15}N^{+}(CH_3)_3Br^{-}$
B
$CH_3(CH_2)_{11}OSO_3^{-}Na^{+}$
C
$CH_3(CH_2)_6COO^{-}Na^{+}$
D
$CH_3(CH_2)_{11}N^{+}(CH_3)_3Br^{-}$

Solution

(A) सर्फेक्टेंट की क्रिटिकल मिसेल सांद्रता $(CMC)$ हाइड्रोफोबिक हाइड्रोकार्बन श्रृंखला की लंबाई बढ़ने के साथ कम हो जाती है।
इसका कारण यह है कि एक लंबी हाइड्रोफोबिक श्रृंखला सर्फेक्टेंट अणु को अधिक हाइड्रोफोबिक बनाती है,जिससे पानी में इसकी घुलनशीलता कम हो जाती है और पानी के साथ संपर्क को कम करने के लिए मिसेल में एकत्रित होने की इसकी प्रवृत्ति बढ़ जाती है।
श्रृंखला की लंबाई की तुलना करने पर:
विकल्प $A$: $16$ कार्बन
विकल्प $B$: $12$ कार्बन
विकल्प $C$: $7$ कार्बन
विकल्प $D$: $12$ कार्बन
चूंकि विकल्प $A$ में सबसे लंबी हाइड्रोकार्बन श्रृंखला ($16$ कार्बन) है,इसलिए इसका $CMC$ मान सबसे कम होगा।
48
ChemistryDifficultMCQIIT JEE · 2008
तनु जलीय $NaCl$ विलयन का विद्युत अपघटन $10 \ mA$ धारा प्रवाहित करके किया गया। कैथोड पर $0.01 \ mol$ $H_2$ गैस मुक्त करने के लिए आवश्यक समय है $(1 \ F = 96500 \ C \ mol^{-1})$
A
$9.65 \times 10^4 \ s$
B
$19.3 \times 10^4 \ s$
C
$28.95 \times 10^4 \ s$
D
$38.6 \times 10^4 \ s$

Solution

(B) जलीय $NaCl$ के विद्युत अपघटन के लिए कैथोड अभिक्रिया: $2H_2O(l) + 2e^{-} \longrightarrow H_2(g) + 2OH^{-}(aq)$.
स्टोइकियोमेट्री के अनुसार,$1 \ mol$ $H_2$ के लिए $2 \ mol$ इलेक्ट्रॉनों की आवश्यकता होती है।
अतः,$0.01 \ mol$ $H_2$ के लिए $0.02 \ mol$ इलेक्ट्रॉनों की आवश्यकता होती है।
कुल आवेश $Q = n \times F = 0.02 \times 96500 \ C = 1930 \ C$.
दी गई धारा $i = 10 \ mA = 0.01 \ A$.
सूत्र $Q = i \times t$ का उपयोग करने पर:
$1930 = 0.01 \times t$.
$t = \frac{1930}{0.01} = 193000 \ s = 19.3 \times 10^4 \ s$.
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ChemistryAdvancedMCQIIT JEE · 2008
सेलुलोज का अतिरिक्त एसिटिक एनहाइड्राइड $/$ $H_2SO_4$ (उत्प्रेरक) के साथ एसिटिलेशन करने पर सेलुलोज ट्राईएसिटेट प्राप्त होता है,जिसकी संरचना है
A
Option A
B
Option B
C
Option C
D
Option D

Solution

(A) सेलुलोज $\beta-D$-ग्लूकोज इकाइयों का एक रैखिक बहुलक है जो $\beta-1,4$-ग्लाइकोसिडिक बंधों द्वारा जुड़े होते हैं।
सेलुलोज में प्रत्येक ग्लूकोज इकाई में तीन हाइड्रॉक्सिल $(-OH)$ समूह ($C_2, C_3,$ और $C_6$ स्थितियों पर) होते हैं।
उत्प्रेरक $H_2SO_4$ की उपस्थिति में अतिरिक्त एसिटिक एनहाइड्राइड के साथ एसिटिलेशन करने पर,तीनों हाइड्रॉक्सिल समूह एसिटिल $(-OAc)$ समूहों में परिवर्तित हो जाते हैं,जिसके परिणामस्वरूप सेलुलोज ट्राईएसिटेट बनता है।
संरचना में $\beta-1,4$-बंध (जहाँ ग्लाइकोसिडिक ऑक्सीजन रिंग के सापेक्ष भूमध्यरेखीय स्थिति में होता है) और प्रत्येक ग्लूकोज इकाई पर तीनों स्थितियों पर $-OAc$ समूहों की उपस्थिति दिखनी चाहिए।
विकल्प $A$ सही ढंग से $\beta-1,4$-ग्लाइकोसिडिक बंध और प्रत्येक ग्लूकोज इकाई पर तीनों हाइड्रॉक्सिल समूहों के एसिटिलेशन को दर्शाता है।
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ChemistryAdvancedMCQIIT JEE · 2008
निम्नलिखित अभिक्रिया अनुक्रम में,$E, F$ और $G$ की सही संरचनाएँ हैं
Question diagram
A
Option A
B
Option B
C
Option C
D
Option D

Solution

(A) प्रारंभिक पदार्थ $3-oxo-3-phenylpropanoic$ एसिड है जिसमें मेथिलीन कार्बन पर $^{13}C$ लेबल है।
गर्म करने पर,यह डीकार्बोक्सिलेशन के माध्यम से एसीटोफेनोन $(E)$ बनाता है जिसमें मिथाइल समूह $^{13}C$ लेबल युक्त होता है: $Ph-CO-CH_2^*COOH \xrightarrow{\Delta} Ph-CO-CH_3^* + CO_2$.
एसीटोफेनोन $(E)$ फिर $NaOH$ की उपस्थिति में $I_2$ के साथ प्रतिक्रिया (हेलोफॉर्म अभिक्रिया) करके सोडियम बेंजोएट $(F)$ और आयोडोफॉर्म $(G)$ बनाता है: $Ph-CO-CH_3^* + 3I_2 + 4NaOH \rightarrow Ph-COONa + CHI_3^* + 3NaI + 3H_2O$.
इस प्रकार,$^{13}C$ लेबल $E$ के मिथाइल समूह में और आयोडोफॉर्म $(G)$ में उपस्थित होता है।
51
ChemistryAdvancedMCQIIT JEE · 2008
$STATEMENT-1$: $[M(NH_3)_4Cl_2]$ संकुल के ज्यामितीय समावयवी प्रकाशिक रूप से निष्क्रिय होते हैं।
$STATEMENT-2$: $[M(NH_3)_4Cl_2]$ संकुल के दोनों ज्यामितीय समावयवी सममिति का तल रखते हैं।
A
$STATEMENT-1$ सत्य है,$STATEMENT-2$ सत्य है; $STATEMENT-2$,$STATEMENT-1$ की सही व्याख्या है
B
$STATEMENT-1$ सत्य है,$STATEMENT-2$ सत्य है; $STATEMENT-2$,$STATEMENT-1$ की सही व्याख्या नहीं है
C
$STATEMENT-1$ सत्य है,$STATEMENT-2$ असत्य है
D
$STATEMENT-1$ असत्य है,$STATEMENT-2$ सत्य है

Solution

(A) $[M(NH_3)_4Cl_2]$ संकुल दो ज्यामितीय समावयवी प्रदर्शित करता है: $cis$ और $trans$।
$trans$-समावयवी में,दो $Cl$ परमाणु एक-दूसरे से $180^{\circ}$ पर होते हैं और अणु में सममिति का तल होता है।
$cis$-समावयवी में,दो $Cl$ परमाणु एक-दूसरे से $90^{\circ}$ पर होते हैं और अणु में भी सममिति का तल होता है।
चूंकि दोनों समावयवी सममिति का तल रखते हैं,वे अकिरल हैं और इसलिए प्रकाशिक रूप से निष्क्रिय हैं।
अतः,दोनों कथन सत्य हैं और $STATEMENT-2$,$STATEMENT-1$ की सही व्याख्या है।
52
ChemistryAdvancedMCQIIT JEE · 2008
$STATEMENT-1$: $[Fe(H_2O)_5NO]SO_4$ अनुचुंबकीय (paramagnetic) है।
$STATEMENT-2$: $[Fe(H_2O)_5NO]SO_4$ में $Fe$ के पास तीन अयुग्मित इलेक्ट्रॉन हैं।
A
$STATEMENT-1$ सत्य है,$STATEMENT-2$ सत्य है; $STATEMENT-2$,$STATEMENT-1$ की सही व्याख्या है
B
$STATEMENT-1$ सत्य है,$STATEMENT-2$ सत्य है; $STATEMENT-2$,$STATEMENT-1$ की सही व्याख्या नहीं है
C
$STATEMENT-1$ सत्य है,$STATEMENT-2$ असत्य है
D
$STATEMENT-1$ असत्य है,$STATEMENT-2$ सत्य है

Solution

(A) $[Fe(H_2O)_5NO]SO_4$ संकुल में,$NO$ लिगेंड $NO^+$ के रूप में उपस्थित होता है।
अतः,$Fe$ की ऑक्सीकरण अवस्था $+1$ है।
$Fe^+$ $(Z=26)$ का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास $[Ar] 3d^6 4s^1$ होता है।
$NO^+$ लिगेंड की उपस्थिति में,$4s$ इलेक्ट्रॉन $3d$ कक्षक में युग्मित हो जाता है।
परिणामस्वरूप,$3d^7$ विन्यास प्राप्त होता है जिसमें $3$ अयुग्मित इलेक्ट्रॉन होते हैं।
अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की उपस्थिति के कारण संकुल अनुचुंबकीय है।
अतः,$STATEMENT-1$ और $STATEMENT-2$ दोनों सत्य हैं और $STATEMENT-2$,$STATEMENT-1$ की सही व्याख्या है।
53
ChemistryAdvancedMCQIIT JEE · 2008
$STATEMENT-1$: $0^{\circ} C$ पर $NaNO_2 / HCl$ के साथ एनीलिन की अभिक्रिया के बाद $\beta$-नैफ्थोल के साथ युग्मन (coupling) करने पर गहरे नीले रंग का अवक्षेप प्राप्त होता है।
$STATEMENT-2$: एनीलिन की $0^{\circ} C$ पर $NaNO_2 / HCl$ के साथ अभिक्रिया के बाद $\beta$-नैफ्थोल के साथ युग्मन से बने यौगिक का रंग विस्तारित संयुग्मन (extended conjugation) के कारण होता है।
A
$STATEMENT-1$ सत्य है,$STATEMENT-2$ सत्य है; $STATEMENT-2$,$STATEMENT-1$ की सही व्याख्या है
B
$STATEMENT-1$ सत्य है,$STATEMENT-2$ सत्य है; $STATEMENT-2$,$STATEMENT-1$ की सही व्याख्या नहीं है
C
$STATEMENT-1$ सत्य है,$STATEMENT-2$ असत्य है
D
$STATEMENT-1$ असत्य है,$STATEMENT-2$ सत्य है

Solution

(D) एनीलिन $0-5^{\circ} C$ पर $NaNO_2 / HCl$ के साथ अभिक्रिया करके बेंजीन डाइएजोनियम क्लोराइड $(C_6H_5N_2^+Cl^-)$ बनाता है।
यह डाइएजोनियम लवण क्षारीय माध्यम में $\beta$-नैफ्थोल के साथ युग्मन अभिक्रिया करके एक रंजक (dye) बनाता है।
प्राप्त रंजक $1$-फेनिलएज़ो-$2$-नैफ्थोल है,जिसका रंग गहरा लाल (scarlet red) होता है,गहरा नीला नहीं।
अतः,$STATEMENT-1$ असत्य है।
$STATEMENT-2$ सत्य है क्योंकि एज़ो रंजकों का रंग वास्तव में $-N=N-$ समूह के माध्यम से दो सुगंधित वलयों के बीच विस्तारित संयुग्मन के कारण होता है।
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ChemistryAdvancedMCQIIT JEE · 2008
एक तृतीयक अल्कोहल $H$ एसिड-उत्प्रेरित निर्जलीकरण पर एक उत्पाद $I$ देता है। $I$ का ओजोनोलिसिस यौगिकों $J$ और $K$ की ओर ले जाता है। यौगिक $J$,$KOH$ के साथ अभिक्रिया करके बेंजाइल अल्कोहल और एक यौगिक $L$ देता है,जबकि $K$,$KOH$ के साथ अभिक्रिया करके केवल $M$ देता है।
$1.$ यौगिक $H$ किसकी अभिक्रिया द्वारा बनता है?
$2.$ यौगिक $I$ की संरचना क्या है?
$3.$ यौगिकों $J, K$ और $L$ की संरचनाएं क्रमशः क्या हैं?
$(A)$ $PhCOCH_3, PhCH_2 COCH_3$ और $PhCH_2 COO^{-} K^{+}$
$(B)$ $PhCHO, PhCH_2 CHO$ और $PhCOO^{-} K^{+}$
$(C)$ $PhCOCH_3, PhCH_2 CHO$ और $CH_3 COO^{-} K^{+}$
$(D)$ $PhCHO, PhCOCH_3$ और $PhCOO^{-} K^{+}$
प्रश्न $1, 2$ और $3$ के लिए उत्तर दें।
Question diagram
A
$(B, C, B)$
B
$(D, A, C)$
C
$(B, A, D)$
D
$(A, A, B)$
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क्रिस्टल की षट्कोणीय प्रणाली में,परमाणुओं की अक्सर देखी जाने वाली व्यवस्था को एक षट्कोणीय प्रिज्म के रूप में वर्णित किया जाता है। यहाँ,सेल के ऊपर और नीचे नियमित षट्कोण हैं और उनके बीच में तीन परमाणु सैंडविच किए गए हैं। इस संरचना का एक स्पेस-फिलिंग मॉडल,जिसे हेक्सागोनल क्लोज-पैक्ड $(HCP)$ कहा जाता है,एक सपाट सतह पर एक गोले और उसी तल में उसके चारों ओर छह समान गोलों से बना है। फिर पहली परत के ऊपर तीन गोले इस तरह रखे जाते हैं कि वे एक-दूसरे को स्पर्श करें और दूसरी परत का प्रतिनिधित्व करें। इन तीन गोलों में से प्रत्येक नीचे की परत के तीन गोलों को स्पर्श करता है। अंत में,दूसरी परत को तीसरी परत से ढका जाता है जो सापेक्ष स्थिति में नीचे की परत के समान होती है। प्रत्येक गोले की त्रिज्या $r$ मानिए।
$1.$ इस $HCP$ यूनिट सेल में परमाणुओं की संख्या है
$(A)$ $4$ $(B)$ $6$ $(C)$ $12$ $(D)$ $17$
$2.$ इस $HCP$ यूनिट सेल का आयतन है
$(A)$ $24 \sqrt{2} r^3$ $(B)$ $16 \sqrt{2} r^3$
$(C)$ $12 \sqrt{2} r^3$ $(D)$ $\frac{64 r^3}{3 \sqrt{3}}$
$3.$ इस $HCP$ यूनिट सेल में खाली स्थान है
$(A)$ $74 \%$ $(B)$ $47.6 \%$ $(C)$ $32 \%$ $(D)$ $26 \%$
प्रश्न $1, 2$ और $3$ के उत्तर दें।
Question diagram
A
$(B, A, D)$
B
$(B, B, D)$
C
$(C, A, A)$
D
$(C, D, A)$

Solution

(B) $1.$ परमाणुओं की कुल प्रभावी संख्या $= 12 \times \frac{1}{6} + 2 \times \frac{1}{2} + 3 = 6$
$2.$ यूनिट सेल की ऊँचाई $= 4r \sqrt{\frac{2}{3}}$
आधार का क्षेत्रफल $= 6 \times \frac{\sqrt{3}}{4}(2r)^2 = 6\sqrt{3}r^2$
आयतन $= \text{ऊँचाई} \times \text{आधार का क्षेत्रफल} = 4r \sqrt{\frac{2}{3}} \times 6\sqrt{3}r^2 = 24\sqrt{2}r^3$
$3.$ पैकिंग अंश $= 74 \%$
खाली स्थान $= 100 \% - 74 \% = 26 \%$
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Column-$I$ में दिए गए परिवर्तनों को Column-$II$ में दी गई अभिक्रिया(ओं) के प्रकार से सुमेलित कीजिए।
Column-$I$ Column-$II$
$A$. $PbS \rightarrow PbO$ $p$. भर्जन (roasting)
$B$. $CaCO_3 \rightarrow CaO$ $q$. निस्तापन (calcination)
$C$. $ZnS \rightarrow Zn$ $r$. कार्बन अपचयन (Carbon reduction)
$D$. $Cu_2S \rightarrow Cu$ $s$. स्वतः अपचयन (self reduction)
A
$A-p, B-q, C-p, r, D-p, s$
B
$A-q, B-r, C-s, r, D-p, r$
C
$A-s, B-p, C-p, s, D-r, p$
D
$A-r, B-s, C-p, r, D-s, r$

Solution

(A) . $PbS \rightarrow PbO$: यह वायु की उपस्थिति में सल्फाइड अयस्क का ऑक्सीकरण है,जो $p$. भर्जन है।
$B$. $CaCO_3 \rightarrow CaO$: यह वायु की अनुपस्थिति में कार्बोनेट अयस्क का तापीय अपघटन है,जो $q$. निस्तापन है।
$C$. $ZnS \rightarrow Zn$: $ZnS$ को पहले $ZnO$ में भर्जित किया जाता है ($p$. भर्जन) और फिर कार्बन का उपयोग करके अपचयित किया जाता है ($r$. कार्बन अपचयन)।
$D$. $Cu_2S \rightarrow Cu$: $Cu_2S$ को आंशिक रूप से $CuO$ में भर्जित किया जाता है और फिर शेष $Cu_2S$ के साथ अभिक्रिया करके $Cu$ बनाता है ($p$. भर्जन और $s$. स्वतः अपचयन)।
अतः,सही मिलान है: $A-p, B-q, C-p, r, D-p, s$.

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