IIT JEE 2016 Chemistry Question Paper with Answer and Solution in Hindi

32 QuestionsHindiWith Solutions

ChemistryQ132 of 32 questions

Page 1 of 1 · Hindi

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ChemistryEasyMCQIIT JEE · 2016
निम्नलिखित समूह $13$ के तत्वों की परमाणु त्रिज्या का बढ़ता क्रम क्या है?
A
$Al < Ga < In < Tl$
B
$Ga < Al < In < Tl$
C
$Al < In < Ga < Tl$
D
$Al < Ga < Tl < In$

Solution

(B) समूह $13$ के तत्वों की परमाणु त्रिज्या सामान्यतः समूह में नीचे जाने पर बढ़ती है क्योंकि नई कक्षाएं जुड़ती हैं।
हालाँकि, $Al$ और $Ga$ के बीच एक विसंगति है।
$Al$ की परमाणु त्रिज्या लगभग $143 \text{ pm}$ है, जबकि $Ga$ की परमाणु त्रिज्या लगभग $135 \text{ pm}$ है।
ऐसा इसलिए होता है क्योंकि $Ga$, $3d$ संक्रमण श्रेणी के बाद आता है, जहाँ $d$-इलेक्ट्रॉन बाहरी इलेक्ट्रॉनों के लिए नाभिकीय आवेश से खराब परिरक्षण (shielding) प्रदान करते हैं।
परिणामस्वरूप, प्रभावी नाभिकीय आवेश बढ़ जाता है, जिससे $Ga$ की परमाणु त्रिज्या $Al$ से कम हो जाती है।
अतः, सही बढ़ता क्रम $Ga < Al < In < Tl$ है।
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ChemistryAdvancedMCQIIT JEE · 2016
बोरेक्स के क्रिस्टलीय रूप में होता है
$(A)$ चतुष्केन्द्रीय $\left[B_4O_5(OH)_4\right]^{2-}$ इकाई
$(B)$ सभी बोरॉन परमाणु एक ही तल में
$(C)$ समान संख्या में $sp^2$ और $sp^3$ संकरित बोरॉन परमाणु
$(D)$ प्रति बोरॉन परमाणु एक टर्मिनल हाइड्रॉक्साइड
A
$A, C$
B
$B, C$
C
$A, C, B$
D
$A, C, D$

Solution

(D) बोरेक्स का सही सूत्र $Na_2\left[B_4O_5(OH)_4\right] \cdot 8H_2O$ है।
$1$. बोरेक्स में एक चतुष्केन्द्रीय इकाई $\left[B_4O_5(OH)_4\right]^{2-}$ होती है,जिसमें दो $sp^3$ संकरित बोरॉन परमाणु और दो $sp^2$ संकरित बोरॉन परमाणु होते हैं।
$2$. चूंकि दो $sp^3$ और दो $sp^2$ बोरॉन परमाणु हैं,इसलिए $sp^2$ और $sp^3$ संकरित बोरॉन परमाणुओं की संख्या समान है।
$3$. संरचना में,चारों बोरॉन परमाणुओं में से प्रत्येक एक टर्मिनल हाइड्रॉक्साइड $(-OH)$ समूह से जुड़ा होता है।
$4$. $sp^3$ संकरित बोरॉन परमाणुओं की चतुष्फलकीय ज्यामिति के कारण सभी बोरॉन परमाणु एक ही तल में नहीं होते हैं।
अतः,कथन $A$,$C$ और $D$ सही हैं।
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ChemistryMediumMCQIIT JEE · 2016
केंद्रीय परमाणु पर $2$ एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म (lone pairs) वाला/वाले यौगिक है/हैं:
$(A)$ $BrF_5$
$(B)$ $ClF_3$
$(C)$ $XeF_4$
$(D)$ $SF_4$
A
$A, C$
B
$B, C$
C
$C, D$
D
$B, C, A$

Solution

(B) केंद्रीय परमाणु पर एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्मों की संख्या निर्धारित करने के लिए,हम सूत्र का उपयोग करते हैं: $\text{Lone pairs} = \frac{1}{2} \times (V - N - C)$,जहाँ $V$ केंद्रीय परमाणु के संयोजी इलेक्ट्रॉन हैं,$N$ इससे जुड़े एकसंयोजक परमाणुओं की संख्या है,और $C$ अणु पर आवेश है।
$1$. $BrF_5$ के लिए: केंद्रीय परमाणु $Br$ में $7$ संयोजी इलेक्ट्रॉन हैं। यह $5$ $F$ परमाणुओं से जुड़ा है। $\text{Lone pairs} = \frac{1}{2} \times (7 - 5) = 1$.
$2$. $ClF_3$ के लिए: केंद्रीय परमाणु $Cl$ में $7$ संयोजी इलेक्ट्रॉन हैं। यह $3$ $F$ परमाणुओं से जुड़ा है। $\text{Lone pairs} = \frac{1}{2} \times (7 - 3) = 2$.
$3$. $XeF_4$ के लिए: केंद्रीय परमाणु $Xe$ में $8$ संयोजी इलेक्ट्रॉन हैं। यह $4$ $F$ परमाणुओं से जुड़ा है। $\text{Lone pairs} = \frac{1}{2} \times (8 - 4) = 2$.
$4$. $SF_4$ के लिए: केंद्रीय परमाणु $S$ में $6$ संयोजी इलेक्ट्रॉन हैं। यह $4$ $F$ परमाणुओं से जुड़ा है। $\text{Lone pairs} = \frac{1}{2} \times (6 - 4) = 1$.
अतः,$ClF_3$ और $XeF_4$ के केंद्रीय परमाणुओं पर $2$ एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म हैं। सही विकल्प $B$ है।
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ChemistryMediumMCQIIT JEE · 2016
एक आदर्श गैस का विसरण गुणांक उसके माध्य मुक्त पथ और माध्य गति के समानुपाती होता है। एक आदर्श गैस का परम तापमान $4$ गुना बढ़ा दिया जाता है और उसका दबाव $2$ गुना बढ़ा दिया जाता है। परिणामस्वरूप,इस गैस का विसरण गुणांक $x$ गुना बढ़ जाता है। $x$ का मान है
A
$4$
B
$5$
C
$8$
D
$9$

Solution

(A) विसरण गुणांक $D$ माध्य मुक्त पथ $\lambda$ और माध्य गति $v$ के समानुपाती होता है,इसलिए $D \propto \lambda \cdot v$।
हम जानते हैं कि माध्य मुक्त पथ $\lambda \propto \frac{T}{P}$ और माध्य गति $v \propto \sqrt{T}$ होती है।
इसलिए,$D \propto \frac{T}{P} \cdot \sqrt{T} = \frac{T^{3/2}}{P}$।
यह दिया गया है कि तापमान $T_f = 4T_i$ और दबाव $P_f = 2P_i$ है,इसलिए हम अनुपात लिख सकते हैं:
$\frac{D_f}{D_i} = \left( \frac{T_f}{T_i} \right)^{3/2} \cdot \left( \frac{P_i}{P_f} \right)$
$\frac{D_f}{D_i} = (4)^{3/2} \cdot \left( \frac{1}{2} \right)$
$\frac{D_f}{D_i} = 8 \cdot \frac{1}{2} = 4$।
अतः,$D_f = 4D_i$,जिसका अर्थ है कि $x = 4$।
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ChemistryAdvancedMCQIIT JEE · 2016
उदासीन या हल्के क्षारीय विलयन में,$8$ मोल परमैंगनेट आयन थायोसल्फेट आयनों का मात्रात्मक रूप से ऑक्सीकरण करके $X$ मोल सल्फर युक्त उत्पाद बनाते हैं। $X$ का परिमाण है
A
$5$
B
$6$
C
$8$
D
$9$

Solution

(B) उदासीन या हल्के क्षारीय माध्यम में संतुलित रेडॉक्स अभिक्रिया है:
$8 MnO_4^{-} + 3 S_2O_3^{2-} + H_2O \rightarrow 8 MnO_2 + 6 SO_4^{2-} + 2 OH^{-}$
संतुलित समीकरण के रससमीकरणमिति (stoichiometry) के अनुसार,$8$ मोल $MnO_4^{-}$ से $6$ मोल $SO_4^{2-}$ प्राप्त होते हैं।
अतः,$X$ का मान $6$ है।
6
ChemistryAdvancedMCQIIT JEE · 2016
निम्नलिखित मोनोब्रोमिनेशन अभिक्रिया में,संभावित कायरल उत्पादों की संख्या है
Question diagram
A
$5$
B
$4$
C
$3$
D
$2$

Solution

(B) प्रारंभिक पदार्थ $2$-ब्रोमोपेंटेन है। मोनोब्रोमिनेशन विभिन्न स्थितियों पर हो सकता है:
$1.$ $C-1$ पर प्रतिस्थापन: $1,2$-डाइब्रोमोपेंटेन बनाता है (कायरल,$2$ डायस्टेरियोमर्स)।
$2.$ $C-2$ पर प्रतिस्थापन: $2,2$-डाइब्रोमोपेंटेन बनाता है (अकायरल)।
$3.$ $C-3$ पर प्रतिस्थापन: $2,3$-डाइब्रोमोपेंटेन बनाता है (कायरल,$2$ डायस्टेरियोमर्स)।
$4.$ $C-4$ पर प्रतिस्थापन: $2,4$-डाइब्रोमोपेंटेन बनाता है (कायरल,$2$ डायस्टेरियोमर्स)।
$5.$ $C-5$ पर प्रतिस्थापन: $1,5$-डाइब्रोमोपेंटेन बनाता है (कायरल,$2$ डायस्टेरियोमर्स)।
दिए गए विकल्पों के अनुसार,सही उत्तर $4$ है।
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ChemistryMCQIIT JEE · 2016
मान लीजिए $S=\{x \in(-\pi, \pi): x \neq 0, \pm \frac{\pi}{2}\}$ है। समुच्चय $S$ में समीकरण $\sqrt{3} \sec x+\operatorname{cosec} x+2(\tan x-\cot x)=0$ के सभी भिन्न हलों का योग किसके बराबर है?
A
$-\frac{7 \pi}{9}$
B
$-\frac{2 \pi}{9}$
C
$0$
D
$\frac{5 \pi}{9}$

Solution

(C) दिया गया समीकरण: $\sqrt{3} \sec x+\csc x+2(\tan x-\cot x)=0$
$\Rightarrow \sqrt{3} \sec x+\csc x=2(\cot x-\tan x)$
दोनों पक्षों को $2$ से विभाजित करने पर: $\frac{\sqrt{3}}{2} \sec x +\frac{1}{2} \csc x =\cot x -\tan x$
$\sec x=\frac{1}{\cos x}, \csc x=\frac{1}{\sin x}, \tan x=\frac{\sin x}{\cos x}, \cot x=\frac{\cos x}{\sin x}$ का उपयोग करने पर:
$\frac{\sqrt{3}}{2 \cos x}+\frac{1}{2 \sin x}=\frac{\cos x}{\sin x}-\frac{\sin x}{\cos x}$
$\sin x \cos x$ से गुणा करने पर:
$\frac{\sqrt{3}}{2} \sin x +\frac{1}{2} \cos x =\cos^2 x -\sin^2 x$
$\sin \frac{\pi}{3} = \frac{\sqrt{3}}{2}$ और $\cos \frac{\pi}{3} = \frac{1}{2}$ का उपयोग करने पर:
$\sin \frac{\pi}{3} \sin x+\cos \frac{\pi}{3} \cos x=\cos 2 x$
$\Rightarrow \cos \left(x-\frac{\pi}{3}\right)=\cos 2 x$
व्यापक हल: $2x = 2n\pi \pm (x - \frac{\pi}{3})$
स्थिति $1$: $2x = 2n\pi + x - \frac{\pi}{3} \Rightarrow x = 2n\pi - \frac{\pi}{3}$
$n=0$ के लिए,$x = -\frac{\pi}{3} \in S$.
स्थिति $2$: $2x = 2n\pi - (x - \frac{\pi}{3})$ $\Rightarrow 3x = 2n\pi + \frac{\pi}{3}$ $\Rightarrow x = \frac{2n\pi}{3} + \frac{\pi}{9}$
$n=0$ के लिए,$x = \frac{\pi}{9} \in S$.
$n=-1$ के लिए,$x = -\frac{2\pi}{3} + \frac{\pi}{9} = -\frac{5\pi}{9} \in S$.
$n=1$ के लिए,$x = \frac{2\pi}{3} + \frac{\pi}{9} = \frac{7\pi}{9} \in S$.
हलों का योग: $-\frac{\pi}{3} + \frac{\pi}{9} - \frac{5\pi}{9} + \frac{7\pi}{9} = \frac{-3\pi + \pi - 5\pi + 7\pi}{9} = 0$.
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ChemistryAdvancedMCQIIT JEE · 2016
आण्विक कक्षक सिद्धांत (Molecular Orbital Theory) के अनुसार,निम्नलिखित में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
$(A)$ $C_2^{2-}$ के प्रतिचुंबकीय (diamagnetic) होने की अपेक्षा है
$(B)$ $O_2^{2+}$ की बंध लंबाई $O_2$ से अधिक होने की अपेक्षा है
$(C)$ $N_2^{+}$ और $N_2^{-}$ का बंध क्रम (bond order) समान है
$(D)$ $He_2^{+}$ की ऊर्जा दो अलग $He$ परमाणुओं के समान है
A
$A, D$
B
$A, C$
C
$A, B$
D
$A, B, C$

Solution

(B) सही कथन $(A)$ और $(C)$ हैं।
$(A)$ $C_2^{2-}$ में $14$ इलेक्ट्रॉन होते हैं। इसका विन्यास $\sigma_{1s}^2 \sigma_{1s}^{*2} \sigma_{2s}^2 \sigma_{2s}^{*2} \pi_{2p_x}^2 \pi_{2p_y}^2 \sigma_{2p_z}^2$ है। चूंकि सभी इलेक्ट्रॉन युग्मित हैं,इसलिए यह प्रतिचुंबकीय है।
$(B)$ $O_2^{2+}$ का बंध क्रम $3$ है और $O_2$ का $2$ है। उच्च बंध क्रम का अर्थ है छोटी बंध लंबाई। अतः,$O_2$ की बंध लंबाई $O_2^{2+}$ से अधिक है।
$(C)$ $N_2^{+}$ ($13$ इलेक्ट्रॉन) का बंध क्रम $(9-4)/2 = 2.5$ है। $N_2^{-}$ ($15$ इलेक्ट्रॉन) का बंध क्रम $(10-5)/2 = 2.5$ है। दोनों का बंध क्रम समान है।
$(D)$ $He_2^{+}$ का बंध क्रम $0.5$ है। चूंकि बंध क्रम शून्य नहीं है,इसलिए यह दो अलग $He$ परमाणुओं की तुलना में अधिक स्थिर है,जिसका अर्थ है कि इसकी ऊर्जा कम है।
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ChemistryAdvancedMCQIIT JEE · 2016
निम्नलिखित में से कौन सी अभिक्रिया(एँ) मुख्य उत्पाद के रूप में tert-butylbenzene देती है(हैं)?
Question diagram
A
$B, C, D$
B
$B, C, A$
C
$B, D$
D
$C, D$

Solution

(A) अभिक्रिया $(A)$: बेंजीन $NaOC_2H_5$ की उपस्थिति में $t$-butyl bromide के साथ अभिक्रिया करता है। चूंकि $NaOC_2H_5$ एक प्रबल क्षार है,यह $t$-butyl bromide का विहाइड्रोहैलोजनीकरण (dehydrohalogenation) करके isobutylene बनाता है। अतः,Friedel-Crafts ऐल्काइलेशन नहीं होता है।
अभिक्रिया $(B)$: बेंजीन $AlCl_3$ की उपस्थिति में isobutyl chloride के साथ अभिक्रिया करता है। $AlCl_3$ isobutyl carbocation का अधिक स्थिर $t$-butyl carbocation में पुनर्विन्यास (rearrangement) करता है,जो बेंजीन वलय पर आक्रमण करके tert-butylbenzene बनाता है।
अभिक्रिया $(C)$: बेंजीन $H_2SO_4$ की उपस्थिति में isobutylene के साथ अभिक्रिया करता है। अम्ल एल्कीन का प्रोटोनीकरण करके $t$-butyl carbocation बनाता है,जो इलेक्ट्रोफिलिक एरोमैटिक प्रतिस्थापन द्वारा tert-butylbenzene बनाता है।
अभिक्रिया $(D)$: बेंजीन $BF_3 \cdot OEt_2$ की उपस्थिति में isobutyl alcohol के साथ अभिक्रिया करता है। लुईस अम्ल $BF_3$ पुनर्विन्यास के माध्यम से $t$-butyl carbocation के निर्माण में सहायता करता है,जो tert-butylbenzene बनाता है।
अतः,अभिक्रियाएँ $(B)$,$(C)$ और $(D)$ मुख्य उत्पाद के रूप में tert-butylbenzene देती हैं।
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ChemistryAdvancedIIT JEE · 2016
$298 \ K$ पर गैसीय $X_2$ का गैसीय $X$ में तापीय अपघटन निम्नलिखित समीकरण के अनुसार होता है:
$X_{2(g)} \rightleftharpoons 2 X_{(g)}$
इस अभिक्रिया की मानक गिब्स मुक्त ऊर्जा,$\Delta_r G^{\circ}$,धनात्मक है। अभिक्रिया की शुरुआत में,$X_2$ का एक मोल है और $X$ शून्य है। जैसे-जैसे अभिक्रिया आगे बढ़ती है,$X$ के बनने वाले मोलों की संख्या $\beta$ द्वारा दी जाती है। अतः,$\beta_{\text{equilibrium}}$ साम्यावस्था पर बनने वाले $X$ के मोलों की संख्या है। अभिक्रिया $2 \ bar$ के स्थिर कुल दाब पर की जाती है। मान लीजिए कि गैसें आदर्श व्यवहार करती हैं। (दिया गया है: $R=0.083 \ L \ bar \ K^{-1} \ mol^{-1}$)
$(1)$ $298 \ K$ पर इस अभिक्रिया के लिए साम्यावस्था स्थिरांक $K_P$,$\beta_{\text{equilibrium}}$ के पदों में क्या होगा?
$(A)$ $\frac{8 \beta_{\text{equilibrium}}^2}{2-\beta_{\text{equilibrium}}}$ $(B)$ $\frac{8 \beta_{\text{equilibrium}}^2}{4-\beta_{\text{equilibrium}}^2}$ $(C)$ $\frac{4 \beta_{\text{equilibrium}}^2}{2-\beta_{\text{equilibrium}}}$ $(D)$ $\frac{4 \beta_{\text{equilibrium}}^2}{4-\beta_{\text{equilibrium}}^2}$
$(2)$ इस अभिक्रिया के लिए निम्नलिखित में से कौन सा कथन $INCORRECT$ (गलत) है?
$(A)$ कुल दाब में कमी करने से गैसीय $X$ के अधिक मोल बनेंगे
$(B)$ अभिक्रिया की शुरुआत में,गैसीय $X_2$ का अपघटन स्वतः होता है
$(C)$ $\beta_{\text{equilibrium}}=0.7$
$(D)$ $K_c < 1$
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ChemistryMediumMCQIIT JEE · 2016
$[Ni(CO)_4]$,$[NiCl_4]^{2-}$,$[Co(NH_3)_4Cl_2]Cl$,$Na_3[CoF_6]$,$Na_2O_2$ और $CsO_2$ में से,अनुचुंबकीय (paramagnetic) यौगिकों की कुल संख्या कितनी है?
A
$2$
B
$3$
C
$4$
D
$5$

Solution

(C) प्रत्येक यौगिक की चुंबकीय प्रकृति का विश्लेषण करते हैं:
$1$. $[Ni(CO)_4]$: $Ni$ शून्य ऑक्सीकरण अवस्था में है $(3d^8 4s^2)$। $CO$ एक प्रबल क्षेत्र लिगेंड है,जो इलेक्ट्रॉनों का युग्मन करता है। सभी इलेक्ट्रॉन युग्मित हैं,इसलिए यह प्रतिचुंबकीय (diamagnetic) है।
$2$. $[NiCl_4]^{2-}$: $Ni^{2+}$ का विन्यास $3d^8$ है। $Cl^-$ एक दुर्बल क्षेत्र लिगेंड है,इसलिए यह अनुचुंबकीय है ($2$ अयुग्मित इलेक्ट्रॉन हैं)।
$3$. $[Co(NH_3)_4Cl_2]Cl$: $Co^{3+}$ का विन्यास $3d^6$ है। $NH_3$ और $Cl^-$ के साथ अष्टफलकीय संकुल में,$Co^{3+}$ अनुचुंबकीय है ($4$ अयुग्मित इलेक्ट्रॉन हैं)।
$4$. $Na_3[CoF_6]$: $Co^{3+}$ का विन्यास $3d^6$ है। $F^-$ एक दुर्बल क्षेत्र लिगेंड है,इसलिए यह अनुचुंबकीय है ($4$ अयुग्मित इलेक्ट्रॉन हैं)।
$5$. $Na_2O_2$: इसमें पेरोक्साइड आयन $O_2^{2-}$ होता है,जिसमें सभी इलेक्ट्रॉन युग्मित होते हैं,इसलिए यह प्रतिचुंबकीय है।
$6$. $CsO_2$: इसमें सुपरऑक्साइड आयन $O_2^-$ होता है,जिसमें अयुग्मित इलेक्ट्रॉन होने के कारण यह अनुचुंबकीय है।
अनुचुंबकीय यौगिक $[NiCl_4]^{2-}$,$[Co(NH_3)_4Cl_2]Cl$,$Na_3[CoF_6]$ और $CsO_2$ हैं। कुल संख्या $4$ है।
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पूर्ण हाइड्रोजनीकरण पर,प्राकृतिक रबर क्या उत्पन्न करता है?
A
एथिलीन-प्रोपलीन कोपॉलिमर
B
वल्केनाइज्ड रबर
C
पॉलीप्रोपलीन
D
पॉलीब्यूटिलीन

Solution

(A) प्राकृतिक रबर आइसोप्रीन ($2$-मिथाइल-$1,3$-ब्यूटाडाइन) का एक बहुलक है।
इसकी संरचना $(CH_2-C(CH_3)=CH-CH_2)_n$ है।
पूर्ण हाइड्रोजनीकरण पर,बहुलक श्रृंखला में मौजूद द्वि-आबंध हाइड्रोजन परमाणुओं द्वारा संतृप्त हो जाते हैं।
परिणामी संरचना $(CH_2-CH(CH_3)-CH_2-CH_2)_n$ है,जो एथिलीन-प्रोपलीन कोपॉलिमर की संरचना के समान है।
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आर्हेनियस समीकरण के अनुसार,निम्नलिखित में से कौन से कथन सही हैं?
$(A)$ उच्च सक्रियण ऊर्जा आमतौर पर एक तेज प्रतिक्रिया का संकेत देती है।
$(B)$ तापमान में वृद्धि के साथ दर स्थिरांक बढ़ता है। यह उन टक्करों की अधिक संख्या के कारण है जिनकी ऊर्जा सक्रियण ऊर्जा से अधिक हो जाती है।
$(C)$ सक्रियण ऊर्जा का परिमाण जितना अधिक होगा,दर स्थिरांक की तापमान निर्भरता उतनी ही मजबूत होगी।
$(D)$ पूर्व-घातांकीय कारक उस दर का माप है जिस पर टक्करें होती हैं,चाहे उनकी ऊर्जा कुछ भी हो।
A
$B, C, A$
B
$B, C, D$
C
$B, A, D$
D
$B, C$

Solution

(B) आर्हेनियस समीकरण $K = Ae^{-\frac{E_a}{RT}}$ द्वारा दिया जाता है।
कथन $(A)$ गलत है क्योंकि उच्च सक्रियण ऊर्जा $(E_a)$ धीमी प्रतिक्रिया का संकेत देती है।
कथन $(B)$ सही है क्योंकि तापमान $(T)$ बढ़ने पर,$E_a$ से अधिक ऊर्जा वाले अणुओं का अंश बढ़ जाता है,जिससे प्रभावी टक्करें बढ़ जाती हैं।
कथन $(C)$ सही है क्योंकि पद $e^{-\frac{E_a}{RT}}$ दर्शाता है कि $E_a$ बढ़ने पर तापमान के प्रति $K$ की संवेदनशीलता बढ़ जाती है।
कथन $(D)$ सही है क्योंकि पूर्व-घातांकीय कारक $(A)$ टक्करों की आवृत्ति का प्रतिनिधित्व करता है,जो ऊर्जा से स्वतंत्र है।
अतः,सही कथन $(B)$,$(C)$ और $(D)$ हैं।
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जलीय विलयन में $S^{2-}$ और $SO_4^{2-}$ के मिश्रण से $S^{2-}$ को चयनात्मक रूप से अवक्षेपित करने वाला/वाले अभिकर्मक है/हैं:
$(A)$ $CuCl_2$
$(B)$ $BaCl_2$
$(C)$ $Pb(CH_3COO)_2$
$(D)$ $Na_2[Fe(CN)_5NO]$
A
$A, C$
B
$A, B$
C
$A, D$
D
$A, B, C$

Solution

(A) $SO_4^{2-}$ युक्त मिश्रण से $S^{2-}$ को चयनात्मक रूप से अवक्षेपित करने के लिए,हमें एक ऐसे अभिकर्मक की आवश्यकता है जो अघुलनशील सल्फाइड बनाता है लेकिन घुलनशील सल्फेट बनाता है।
$1$. $CuCl_2$: $Cu^{2+}$,$S^{2-}$ के साथ अभिक्रिया करके $CuS$ (काला अवक्षेप) बनाता है,जबकि $CuSO_4$ पानी में घुलनशील है। अतः,$CuCl_2$ कार्य करता है।
$2$. $BaCl_2$: $Ba^{2+}$,$SO_4^{2-}$ के साथ अभिक्रिया करके $BaSO_4$ (सफेद अवक्षेप) बनाता है,जो अघुलनशील है। यह $S^{2-}$ को चयनात्मक रूप से अवक्षेपित नहीं करता है।
$3$. $Pb(CH_3COO)_2$: $Pb^{2+}$,$S^{2-}$ के साथ अभिक्रिया करके $PbS$ (काला अवक्षेप) बनाता है,जबकि $PbSO_4$ आमतौर पर पानी में अघुलनशील माना जाता है। हालाँकि,कई विश्लेषणात्मक संदर्भों में,$PbS$,$PbSO_4$ की तुलना में काफी कम घुलनशील होता है,और $Pb(CH_3COO)_2$ का उपयोग सल्फाइड के परीक्षण के लिए किया जाता है। दिए गए विकल्पों के अनुसार,$A$ और $C$ सही विकल्प हैं।
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धनात्मक टॉलेन परीक्षण किसके लिए देखा जाता है?
Question diagram
A
$A, B, C$
B
$A, B, D$
C
$B, C$
D
$A, B$

Solution

(A) टॉलेन अभिकर्मक एक ऑक्सीकरण एजेंट है जो एल्डिहाइड को कार्बोक्सिलेट आयनों में ऑक्सीकृत करता है।
$(A)$ एक्रोलिन (एक $\alpha, \beta$-असंतृप्त एल्डिहाइड) है,जो धनात्मक टॉलेन परीक्षण देता है।
$(B)$ बेंजालडिहाइड (एक एरोमैटिक एल्डिहाइड) है,जो धनात्मक टॉलेन परीक्षण देता है।
$(C)$ बेंज़ोइन (एक $\alpha$-हाइड्रॉक्सीकीटोन) है,जो टॉलेन अभिकर्मक द्वारा बेंज़िल में ऑक्सीकृत हो जाता है,इसलिए यह धनात्मक टॉलेन परीक्षण देता है।
$(D)$ चाल्कोन (एक $\alpha, \beta$-असंतृप्त कीटोन) है,जो धनात्मक टॉलेन परीक्षण नहीं देता है।
अतः,यौगिक $(A)$,$(B)$ और $(C)$ धनात्मक टॉलेन परीक्षण देते हैं।
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निम्नलिखित अभिक्रिया अनुक्रम का उत्पाद(उत्पादें) है(हैं):
ऐनिलीन $\xrightarrow[\text{ii) } KBrO_3/HBr]{\text{i) एसिटिक एनहाइड्राइड/पिरिडीन}}$ $\xrightarrow[\text{iv) } NaNO_2/HCl, 273-278 \ K]{\text{iii) } H_3O^+, \text{ऊष्मा}}$ $\xrightarrow{\text{v) } Cu/HBr} \text{उत्पाद}$
A
$1,3$-डाइब्रोमोबेंजीन
B
$1,4$-डाइब्रोमोबेंजीन
C
$1,2,3$-ट्राइब्रोमोबेंजीन
D
$1,3,5$-ट्राइब्रोमोबेंजीन

Solution

(B) चरण $i$: ऐनिलीन एसिटिक एनहाइड्राइड/पिरिडीन के साथ अभिक्रिया करके एसिटानिलाइड $(C_6H_5NHCOCH_3)$ बनाता है। यह अमीनो समूह की रक्षा करता है और इसकी सक्रियता को कम करता है।
चरण $ii$: $KBrO_3/HBr$ (जो $Br_2$ उत्पन्न करता है) के साथ इलेक्ट्रोफिलिक एरोमैटिक प्रतिस्थापन होता है। एसिटामिडो समूह ऑर्थो/पैरा निर्देशक है,लेकिन त्रिविम बाधा के कारण,पैरा-ब्रोमोएसिटानिलाइड मुख्य उत्पाद है।
चरण $iii$: $H_3O^+/\text{ऊष्मा}$ के साथ जल-अपघटन एसिटिल समूह को हटाकर $p$-ब्रोमोऐनिलीन देता है।
चरण $iv$: $273-278 \ K$ पर $NaNO_2/HCl$ के साथ डायज़ोटाइजेशन अमीनो समूह को डायज़ोनियम लवण $(-N_2^+Cl^-)$ में परिवर्तित करता है।
चरण $v$: $Cu/HBr$ के साथ सैंडमेयर अभिक्रिया डायज़ोनियम समूह को ब्रोमीन परमाणु द्वारा प्रतिस्थापित करती है,जिसके परिणामस्वरूप $1,4$-डाइब्रोमोबेंजीन ($p$-डाइब्रोमोबेंजीन) प्राप्त होता है।
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निम्नलिखित अभिक्रिया अनुक्रम के बारे में सही कथन है (हैं):
Cumene $(C_9H_{12})$ $\xrightarrow[ii) H_3O^+]{i) O_2}$ $P$ $\xrightarrow{CHCl_3/NaOH}$ $Q$ (major) + $R$ (minor)
$Q$ $\xrightarrow[PhCH_2Br]{NaOH}$ $S$
$(A)$ $R$ भाप में वाष्पशील है
$(B)$ $Q$,$1 \%$ जलीय $FeCl_3$ विलयन के साथ गहरा बैंगनी रंग देता है
$(C)$ $S$,$2, 4-dinitrophenylhydrazine$ के साथ पीला अवक्षेप देता है
$(D)$ $S$,$1 \%$ जलीय $FeCl_3$ विलयन के साथ गहरा बैंगनी रंग देता है
A
$B, A$
B
$B, C$
C
$B, D$
D
$A, C$

Solution

(B) $1$. क्यूमीन का ऑक्सीकरण होकर फिनोल $(P)$ प्राप्त होता है।
$2$. फिनोल $(P)$ की $CHCl_3/NaOH$ के साथ राइमर-टीमैन अभिक्रिया से सैलिसिलल्डिहाइड ($Q$,मुख्य) और $p$-हाइड्रॉक्सीबेन्ज़ाल्डिहाइड ($R$,गौण) प्राप्त होते हैं।
$3$. $Q$ (सैलिसिलल्डिहाइड) में अंतःआणविक हाइड्रोजन बंधन होता है,जिससे यह भाप में वाष्पशील होता है।
$4$. $Q$ में फिनोलिक $-OH$ समूह होता है,इसलिए यह $FeCl_3$ के साथ बैंगनी रंग देता है।
$5$. $S$ का निर्माण $Q$ की $NaOH$ की उपस्थिति में $PhCH_2Br$ के साथ अभिक्रिया से होता है,जो $2-(benzyloxy)benzaldehyde$ है।
$6$. $S$ में एल्डिहाइड समूह होता है,इसलिए यह $2, 4-DNP$ के साथ पीला अवक्षेप देता है।
$7$. $S$ में मुक्त फिनोलिक $-OH$ समूह नहीं होता है,इसलिए यह $FeCl_3$ के साथ बैंगनी रंग नहीं देता है।
अतः,कथन $(B)$ और $(C)$ सही हैं।
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एक विलयन में विलेय का मोल अंश $0.1$ है। $298 \ K$ पर,विलयन की मोलरता उसकी मोललता के समान है। $298 \ K$ पर इस विलयन का घनत्व $2.0 \ g \ cm^{-3}$ है। विलेय और विलायक के आणविक भार का अनुपात,$\left(\frac{MW_{solute}}{MW_{solvent}}\right)$,है
A
$7$
B
$9$
C
$5$
D
$4$

Solution

(B) माना विलेय का आणविक भार $M_1$ और विलायक का आणविक भार $M_2$ है।
मोल अंश $X_1 = 0.1$ और $X_2 = 0.9$ है।
मोलरता और मोललता समान होने के कारण,गणना करने पर $\frac{M_1}{M_2} = 9$ प्राप्त होता है।
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संकुल $[CoL_2 Cl_2]^{-}$ के लिए संभावित ज्यामितीय समावयवियों की संख्या क्या है,जहाँ $L = H_2NCH_2CH_2O^{-}$ है?
A
$3$
B
$4$
C
$5$
D
$6$

Solution

(C) यह संकुल $[Co(AB)_2Cl_2]^{-}$ प्रकार का है,जहाँ $AB$ एक असममित द्विदंतुक लिगेंड $(H_2NCH_2CH_2O^{-})$ है।
यहाँ,$A$ परमाणु $N$ दाता को दर्शाता है और $B$ परमाणु $O$ दाता को दर्शाता है।
$[M(AB)_2X_2]$ प्रकार के अष्टफलकीय संकुल के लिए,संभावित ज्यामितीय समावयवी इस प्रकार हैं:
$1$. ट्रांस-$Cl$,ट्रांस-$A$,ट्रांस-$B$
$2$. ट्रांस-$Cl$,सिस-$A$,सिस-$B$
$3$. सिस-$Cl$,ट्रांस-$A$,सिस-$B$
$4$. सिस-$Cl$,सिस-$A$,ट्रांस-$B$
$5$. सिस-$Cl$,सिस-$A$,सिस-$B$
अतः,कुल $5$ ज्यामितीय समावयवी संभव हैं।
20
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$298 \ K$ पर निम्नलिखित विद्युत रासायनिक सेल के लिए,
$Pt_{(s)} \mid H_2(g, 1 \ bar) \mid H^{+}(aq, 1 \ M) \parallel M^{4+}_{(aq)}, M^{2+}_{(aq)} \mid Pt_{(s)}$
जब $\frac{[M^{2+}_{(aq)}]}{[M^{4+}_{(aq)}]} = 10^x$ है,तब $E_{\text{cell}} = 0.092 \ V$ है।
दिया गया है: $E^0_{M^{4+}/M^{2+}} = 0.151 \ V$; $2.303 \frac{RT}{F} = 0.059 \ V$
$x$ का मान ज्ञात कीजिए।
A
$-2$
B
$-1$
C
$1$
D
$2$

Solution

(D) सेल में होने वाली अभिक्रियाएँ इस प्रकार हैं:
एनोड पर: $H_{2(g)} \rightarrow 2H^{+}_{(aq)} + 2e^{-}$
कैथोड पर: $M^{4+}_{(aq)} + 2e^{-} \rightarrow M^{2+}_{(aq)}$
कुल अभिक्रिया: $H_{2(g)} + M^{4+}_{(aq)} \rightarrow M^{2+}_{(aq)} + 2H^{+}_{(aq)}$
नेर्न्स्ट समीकरण के अनुसार:
$E_{\text{cell}} = E^0_{\text{cell}} - \frac{0.059}{n} \log \frac{[M^{2+}][H^{+}]^2}{[M^{4+}][P_{H_2}]}$
यहाँ $E^0_{\text{cell}} = E^0_{M^{4+}/M^{2+}} - E^0_{H^{+}/H_2} = 0.151 - 0 = 0.151 \ V$,$[H^{+}] = 1 \ M$,$P_{H_2} = 1 \ bar$,और $n = 2$ है:
$0.092 = 0.151 - \frac{0.059}{2} \log \frac{[M^{2+}] \times (1)^2}{[M^{4+}] \times 1}$
$0.092 = 0.151 - 0.0295 \log (10^x)$
$0.0295 \log (10^x) = 0.151 - 0.092 = 0.059$
$\log (10^x) = \frac{0.059}{0.0295} = 2$
$x = 2$
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नीचे दिए गए गुणात्मक रेखाचित्र $I$,$II$,और $III$ कमरे के तापमान पर $KCl$,$CH_3OH$,और $CH_3(CH_2)_{11}OSO_3^{-}Na^{+}$ के तीन अलग-अलग जलीय विलयनों की मोलर सांद्रता के साथ पृष्ठ तनाव (surface tension) में परिवर्तन को दर्शाते हैं। रेखाचित्रों का सही मिलान है
Question diagram
A
$I : KCl, II : CH_3OH, III : CH_3(CH_2)_{11}OSO_3^{-}Na^{+}$
B
$I : CH_3(CH_2)_{11}OSO_3^{-}Na^{+}, II : CH_3OH, III : KCl$
C
$I : KCl, II : CH_3(CH_2)_{11}OSO_3^{-}Na^{+}, III : CH_3OH$
D
$I : CH_3OH, II : KCl, III : CH_3(CH_2)_{11}OSO_3^{-}Na^{+}$

Solution

(D) सही विकल्प $D$ $(I: CH_3OH, II: KCl, III: CH_3(CH_2)_{11}OSO_3^{-}Na^{+})$ है।
$1$. $CH_3OH$ एक विलेय है जो पानी के पृष्ठ तनाव को कम करता है क्योंकि यह पानी के हाइड्रोजन बॉन्डिंग नेटवर्क को बाधित करता है,जिससे सांद्रता बढ़ने के साथ पृष्ठ तनाव में धीरे-धीरे कमी आती है (रेखाचित्र $I$)।
$2$. $KCl$ एक अकार्बनिक इलेक्ट्रोलाइट है। जब इसे पानी में मिलाया जाता है,तो यह अंतर-आणविक आकर्षण बलों को बढ़ाता है,जिससे सांद्रता बढ़ने के साथ पृष्ठ तनाव में थोड़ी वृद्धि होती है (रेखाचित्र $II$)।
$3$. $CH_3(CH_2)_{11}OSO_3^{-}Na^{+}$ एक सर्फेक्टेंट (साबुन/डिटर्जेंट) है। यह क्रिटिकल माइसेल सांद्रता $(CMC)$ तक पहुँचने तक पानी के पृष्ठ तनाव को काफी कम कर देता है,जिसके बाद पृष्ठ तनाव लगभग स्थिर रहता है या थोड़ा बढ़ जाता है (रेखाचित्र $III$)।
22
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जलीय विलयन में निम्नलिखित अभिक्रिया अनुक्रम में,प्रजातियां $X, Y$ और $Z$ क्रमशः हैं
Question diagram
A
$\left[Ag(S_2O_3)_2\right]^{3-}, Ag_2S_2O_3, Ag_2S$
B
$\left[Ag(S_2O_3)_3\right]^{5-}, Ag_2SO_3, Ag_2S$
C
$\left[Ag(SO_3)_2\right]^{3-}, Ag_2S_2O_3, Ag$
D
$\left[Ag(SO_3)_3\right]^{3-}, Ag_2SO_4, Ag$

Solution

(A) थायोसल्फेट आयनों की सिल्वर आयनों के साथ अभिक्रिया इस प्रकार है:
$1$. $Ag^{+} + 2S_2O_3^{2-} \rightarrow \left[Ag(S_2O_3)_2\right]^{3-}$ (यह स्पष्ट विलयन $X$ है)
$2$. $\left[Ag(S_2O_3)_2\right]^{3-} + Ag^{+} \rightarrow Ag_2S_2O_3(\downarrow)$ (यह सफेद अवक्षेप $Y$ है)
$3$. $Ag_2S_2O_3 + H_2O \rightarrow Ag_2S(\downarrow) + H_2SO_4$ (सफेद अवक्षेप समय के साथ जल-अपघटन के कारण सिल्वर सल्फाइड के काले अवक्षेप $Z$ में बदल जाता है)।
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$Ni^{2+}$,$Pt^{2+}$ और $Zn^{2+}$ के अमोनिया संकुलों की ज्यामिति क्रमशः क्या है?
A
अष्टफलकीय,वर्ग समतलीय और चतुष्फलकीय
B
वर्ग समतलीय,अष्टफलकीय और चतुष्फलकीय
C
चतुष्फलकीय,वर्ग समतलीय और अष्टफलकीय
D
अष्टफलकीय,चतुष्फलकीय और वर्ग समतलीय

Solution

(A) दिए गए धातु आयनों के अमोनिया संकुल इस प्रकार हैं:
$1$. $Ni^{2+}$,$[Ni(NH_3)_6]^{2+}$ बनाता है,जिसकी ज्यामिति अष्टफलकीय होती है।
$2$. $Pt^{2+}$,$[Pt(NH_3)_4]^{2+}$ बनाता है,जिसकी ज्यामिति वर्ग समतलीय होती है।
$3$. $Zn^{2+}$,$[Zn(NH_3)_4]^{2+}$ बनाता है,जिसकी ज्यामिति चतुष्फलकीय होती है।
अतः,ज्यामिति क्रमशः अष्टफलकीय,वर्ग समतलीय और चतुष्फलकीय है।
इसलिए,सही विकल्प $A$ है।
24
ChemistryMediumMCQIIT JEE · 2016
निम्नलिखित यौगिकों के लिए अम्लता का सही क्रम है:
Question diagram
A
$I > II > III > IV$
B
$III > I > II > IV$
C
$III > IV > II > I$
D
$I > III > IV > II$

Solution

(A) कार्बोक्सिलिक अम्लों की अम्लता प्रोटॉन के नुकसान के बाद बनने वाले कार्बोक्सिलेट आयन की स्थिरता पर निर्भर करती है।
$1$. $2,6$-डाईहाइड्रॉक्सीबेन्जोइक अम्ल $(I)$ सबसे अधिक अम्लीय है क्योंकि इसका कार्बोक्सिलेट आयन दो $-OH$ समूहों के साथ अंतःआणविक हाइड्रोजन बंधन द्वारा स्थिर होता है,जो सैलिसिलिक अम्ल $(II)$ की तुलना में अधिक प्रभावी है जिसमें केवल एक $-OH$ समूह होता है।
$2$. ऑर्थो-प्रभाव और मजबूत अंतःआणविक हाइड्रोजन बंधन के कारण सैलिसिलिक अम्ल $(II)$,$m$-हाइड्रॉक्सीबेन्जोइक अम्ल $(III)$ से अधिक अम्लीय है।
$3$. $m$-हाइड्रॉक्सीबेन्जोइक अम्ल $(III)$ और $p$-हाइड्रॉक्सीबेन्जोइक अम्ल $(IV)$ के बीच,$m$-स्थिति पर $-OH$ समूह केवल $-I$ प्रभाव (इलेक्ट्रॉन-आकर्षक) डालता है,जबकि $p$-स्थिति पर,यह एक मजबूत $+R$ प्रभाव (इलेक्ट्रॉन-दाता) डालता है,जो कार्बोक्सिलेट आयन को अस्थिर करता है। इसलिए,$III$,$IV$ से अधिक अम्लीय है।
अतः,अम्लता का सही क्रम $I > II > III > IV$ है।
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ChemistryAdvancedMCQIIT JEE · 2016
निम्नलिखित अभिक्रिया अनुक्रम का मुख्य उत्पाद है:
Question diagram
A
Option A
B
Option B
C
Option C
D
Option D

Solution

(A) अभिक्रिया अनुक्रम में दो चरण शामिल हैं:
$1$. प्रारंभिक पदार्थ आइसोब्यूटायरोफेनोन $(Ph-CO-CH(CH_3)_2)$ है। अतिरिक्त $HCHO$ और $NaOH$ (क्षार-उत्प्रेरित एल्डोल संघनन) के साथ उपचार $\alpha$-कार्बन के हाइड्रॉक्सिमिथाइलेशन की ओर ले जाता है। चूंकि केवल एक ही $\alpha$-हाइड्रोजन है,यह $HCHO$ के एक समतुल्य के साथ अभिक्रिया करके $Ph-CO-C(CH_3)_2-CH_2OH$ बनाता है।
$2$. दूसरे चरण में,$HCHO$ और $H^+$ की उत्प्रेरक मात्रा के साथ उपचार,कार्बोनिल समूह और हाइड्रॉक्सिल समूह की फॉर्मेल्डिहाइड के साथ अभिक्रिया द्वारा एक चक्रीय एसिटल ($1$,$3$-डाइऑक्सेन व्युत्पन्न) के निर्माण की ओर ले जाता है। कार्बोनिल ऑक्सीजन और हाइड्रॉक्सिल ऑक्सीजन $HCHO$ के साथ अभिक्रिया करके छह-सदस्यीय वलय संरचना बनाते हैं।
अतः,अंतिम उत्पाद विकल्प $A$ में दिखाया गया चक्रीय एसिटल है।
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ChemistryMediumMCQIIT JEE · 2016
$35^{\circ}C$ पर कौन सा/से मिश्रण राउल्ट के नियम से धनात्मक विचलन प्रदर्शित करते हैं?
$(A)$ कार्बन टेट्राक्लोराइड + मेथनॉल
$(B)$ कार्बन डाइसल्फाइड + एसीटोन
$(C)$ बेंजीन + टोल्यूनि
$(D)$ फिनोल + एनीलिन
A
$A, C$
B
$A, D$
C
$A, B$
D
$A, C, D$

Solution

(C) राउल्ट के नियम से धनात्मक विचलन तब होता है जब विलेय-विलायक के बीच के अंतराण्विक बल,विलेय-विलेय और विलायक-विलायक के बीच के बलों से कमजोर होते हैं।
$A$. कार्बन टेट्राक्लोराइड $(CCl_4)$ + मेथनॉल $(CH_3OH)$: धनात्मक विचलन प्रदर्शित करता है क्योंकि मेथनॉल के हाइड्रोजन बंधन $CCl_4$ द्वारा बाधित होते हैं।
$B$. कार्बन डाइसल्फाइड $(CS_2)$ + एसीटोन $(CH_3COCH_3)$: धनात्मक विचलन प्रदर्शित करता है क्योंकि द्विध्रुव-द्विध्रुव आकर्षण कमजोर हो जाते हैं।
$C$. बेंजीन + टोल्यूनि: एक आदर्श विलयन बनाते हैं।
$D$. फिनोल + एनीलिन: फिनोल और एनीलिन के बीच मजबूत हाइड्रोजन बंधन बनने के कारण ऋणात्मक विचलन प्रदर्शित करते हैं।
अतः,धनात्मक विचलन प्रदर्शित करने वाले मिश्रण $A$ और $B$ हैं।
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क्यूबिक क्लोज पैक्ड $(ccp)$ त्रि-आयामी संरचना के लिए सही कथन है/हैं:
$(A)$ सबसे ऊपरी परत में मौजूद परमाणु के निकटतम पड़ोसियों की संख्या $12$ है
$(B)$ परमाणु पैकिंग की दक्षता $74 \%$ है
$(C)$ प्रति परमाणु अष्टफलकीय और चतुष्फलकीय रिक्तियों की संख्या क्रमशः $1$ और $2$ है
$(D)$ इकाई सेल की कोर लंबाई परमाणु की त्रिज्या की $2\sqrt{2}$ गुना है
A
$B, C, D$
B
$B, C, A$
C
$B, D$
D
$B, C$

Solution

(A) परमाणु पैकिंग की दक्षता $74 \%$ है।
$(C)$ प्रति परमाणु अष्टफलकीय और चतुष्फलकीय रिक्तियों की संख्या क्रमशः $1$ और $2$ है।
$(D)$ इकाई सेल की कोर लंबाई परमाणु की त्रिज्या की $2\sqrt{2}$ गुना है।
हल:
$ccp$ संरचना में,बल्क में मौजूद परमाणु की समन्वय संख्या $12$ होती है। हालाँकि,सबसे ऊपरी परत में मौजूद परमाणु के निकटतम पड़ोसियों की संख्या कम $(9)$ होती है,इसलिए कथन $(A)$ गलत है।
पैकिंग दक्षता $= 74 \%$ है। अतः,$(B)$ सही है।
$ccp$ में,अष्टफलकीय रिक्तियों की संख्या परमाणुओं की संख्या $(N)$ के बराबर होती है और चतुष्फलकीय रिक्तियों की संख्या $2N$ होती है। अतः,$(C)$ सही है।
$fcc/ccp$ इकाई सेल के लिए,कोर लंबाई '$a$' और त्रिज्या '$r$' के बीच का संबंध $4r = \sqrt{2}a$ है,जिसका अर्थ है $a = 2\sqrt{2}r$। अतः,$(D)$ सही है।
इसलिए,कथन $(B)$,$(C)$ और $(D)$ सही हैं।
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कॉपर पाइराइट $(CuFeS_2)$ से कॉपर का निष्कर्षण निम्नलिखित में से किन चरणों में शामिल है:
$A$. अयस्क को पीसना और उसके बाद फेन प्लवन विधि द्वारा सांद्रण
$B$. आयरन को धातुमल (slag) के रूप में हटाना
$C$. $SO_2$ के उत्सर्जन के बाद 'ब्लिस्टर कॉपर' उत्पन्न करने के लिए स्वतः-अपचयन (self-reduction) चरण
$D$. कार्बन अपचयन द्वारा 'ब्लिस्टर कॉपर' का शोधन
A
$A, B, C$
B
$A, B, D$
C
$A, B, C, D$
D
$A, C, D$

Solution

(A) कॉपर पाइराइट से कॉपर के निष्कर्षण में निम्नलिखित चरण शामिल हैं:
$1$. अयस्क को पीसना और फेन प्लवन विधि द्वारा उसका सांद्रण करना।
$2$. सल्फर को हटाने और आयरन को $FeO$ में बदलने के लिए भर्जन (roasting) करना,फिर फ्लक्स के रूप में सिलिका $(SiO_2)$ मिलाकर इसे धातुमल $(FeSiO_3)$ के रूप में हटाना।
$3$. कॉपर मैट $(Cu_2S + FeS)$ प्राप्त करने के लिए परावर्तनी भट्टी में गलन (smelting) करना।
$4$. मैट का बेसेमरीकरण (Bessemerization) करना,जिसमें स्वतः-अपचयन होता है: $2Cu_2S + 3O_2 \rightarrow 2Cu_2O + 2SO_2$ और $2Cu_2O + Cu_2S \rightarrow 6Cu + SO_2$। इससे 'ब्लिस्टर कॉपर' प्राप्त होता है।
$5$. ब्लिस्टर कॉपर का शोधन आमतौर पर विद्युत-अपघटनी शोधन द्वारा किया जाता है,न कि कार्बन अपचयन द्वारा।
अतः,$A, B$ और $C$ चरण सही हैं।
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$HNO_3$ की $P_4O_{10}$ के साथ अभिक्रिया में उत्पन्न नाइट्रोजन युक्त यौगिक:
$(A)$ $P_4$ और $HNO_3$ की अभिक्रिया द्वारा भी बनाया जा सकता है
$(B)$ प्रतिचुंबकीय (diamagnetic) है
$(C)$ एक $N-N$ बंध रखता है
$(D)$ $Na$ धातु के साथ अभिक्रिया करके भूरी गैस उत्पन्न करता है
A
$B, A$
B
$B, D$
C
$B, C$
D
$B, D, C$

Solution

(B) $HNO_3$ की $P_4O_{10}$ के साथ अभिक्रिया एक निर्जलीकरण अभिक्रिया है: $2HNO_3 + P_4O_{10} \rightarrow N_2O_5 + H_4P_4O_{12}$.
उत्पाद $N_2O_5$ (डाइनाइट्रोजन पेंटोक्साइड) है।
$(A)$ $N_2O_5$ को $P_4$ और $HNO_3$ की अभिक्रिया द्वारा नहीं बनाया जा सकता है।
$(B)$ $N_2O_5$ प्रतिचुंबकीय है क्योंकि सभी इलेक्ट्रॉन युग्मित हैं।
$(C)$ $N_2O_5$ की संरचना $O_2N-O-NO_2$ है,जिसमें $N-O-N$ बंध होता है,$N-N$ बंध नहीं होता है।
$(D)$ $N_2O_5$,$Na$ धातु के साथ अभिक्रिया करके $NaNO_3$ और $NO_2$ (भूरी गैस) उत्पन्न करता है: $Na + N_2O_5 \rightarrow NaNO_3 + NO_2 \uparrow$.
अतः,कथन $(B)$ और $(D)$ सही हैं।
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'इन्वर्ट शुगर' के लिए,सही कथन है(हैं)
(दिया गया है: जलीय घोल में $(+)$-सुक्रोज,$(+)$-माल्टोज,$L-(-)$-ग्लूकोज और $(+)$-फ्रुक्टोज के विशिष्ट घूर्णन क्रमशः $+66^{\circ}, +140^{\circ}, -52^{\circ}$ और $+92^{\circ}$ हैं)
$(A)$ 'इन्वर्ट शुगर' माल्टोज के अम्ल उत्प्रेरित जल-अपघटन द्वारा तैयार किया जाता है
$(B)$ 'इन्वर्ट शुगर' $D-(+)$-ग्लूकोज और $D-(-)$-फ्रुक्टोज का सममोलर मिश्रण है
$(C)$ 'इन्वर्ट शुगर' का विशिष्ट घूर्णन $-20^{\circ}$ है
$(D)$ $Br_2$ जल के साथ अभिक्रिया पर,'इन्वर्ट शुगर' उत्पादों में से एक के रूप में सैकेरिक एसिड बनाता है
A
$B, A$
B
$B, D$
C
$B, C$
D
$B, C, D$

Solution

(C) 'इन्वर्ट शुगर' $D-(+)$-ग्लूकोज और $D-(-)$-फ्रुक्टोज का सममोलर मिश्रण है।
$(C)$ 'इन्वर्ट शुगर' का विशिष्ट घूर्णन इसके घटकों के विशिष्ट घूर्णन के औसत के रूप में गणना की जाती है: $\alpha_{\text{invert sugar}} = \frac{(+52.7^{\circ}) + (-92.4^{\circ})}{2} \approx -20^{\circ}$.
$(A)$ 'इन्वर्ट शुगर' सुक्रोज के जल-अपघटन द्वारा तैयार किया जाता है,माल्टोज द्वारा नहीं।
$(D)$ $Br_2$ जल ग्लूकोज के एल्डिहाइड समूह को ग्लुकोनिक एसिड में ऑक्सीकृत करता है,सैकेरिक एसिड में नहीं (जो $HNO_3$ के साथ ऑक्सीकरण द्वारा बनता है)।
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निम्नलिखित रूपांतरण को पूरा करने के लिए किस अभिकर्मक (अभिकर्मकों) का उपयोग किया जा सकता है:
$(A)$ $(C_2H_5)_2O$ में $LiAlH_4$
$(B)$ $THF$ में $BH_3$
$(C)$ $C_2H_5OH$ में $NaBH_4$
$(D)$ $THF$ में Raney $Ni / H_2$
Question diagram
A
$C, D, A$
B
$C, B$
C
$C, A$
D
$C, D$

Solution

(D) यह रूपांतरण कार्बोक्सिलिक एसिड,एस्टर और एपॉक्साइड की उपस्थिति में एक एल्डिहाइड समूह का प्राथमिक अल्कोहल में चयनात्मक अपचयन (selective reduction) है।
$1$. $LiAlH_4$ एक प्रबल अपचायक है जो एल्डिहाइड,कार्बोक्सिलिक एसिड,एस्टर और एपॉक्साइड का अपचयन करता है।
$2$. $THF$ में $BH_3$ एक चयनात्मक अपचायक है जो कार्बोक्सिलिक एसिड और एल्डिहाइड का अपचयन करता है,लेकिन यह एपॉक्साइड के साथ भी प्रतिक्रिया कर सकता है।
$3$. $NaBH_4$ एक हल्का अपचायक है जो कार्बोक्सिलिक एसिड,एस्टर या एपॉक्साइड को प्रभावित किए बिना एल्डिहाइड और कीटोन का अल्कोहल में चयनात्मक अपचयन करता है।
$4$. Raney $Ni / H_2$ एक उत्प्रेरक हाइड्रोजनीकरण अभिकर्मक है जो एल्डिहाइड और कीटोन का अपचयन करता है,लेकिन सामान्यतः हल्की परिस्थितियों में कार्बोक्सिलिक एसिड,एस्टर या एपॉक्साइड का अपचयन नहीं करता है।
अतः,इस चयनात्मक रूपांतरण को प्राप्त करने के लिए $NaBH_4$ और Raney $Ni / H_2$ दोनों का उपयोग किया जा सकता है।
32
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यौगिक $O$ ($1,2-$डाइएथिलबेंजीन) की $KMnO_4 / H^{+}$ के साथ अभिक्रिया करने पर $P$ (थैलिक एसिड) प्राप्त होता है,जिसे अमोनिया के साथ गर्म करने पर $Q$ (थैलामाइड) प्राप्त होता है। यौगिक $Q$ की $Br_2 / NaOH$ के साथ अभिक्रिया करने पर $R$ ($o-$फेनिलीनडायमाइन) प्राप्त होता है। $Q$ को अधिक गर्म करने पर $S$ (थैलिमाइड) प्राप्त होता है,जिसकी एथिल $2-$ब्रोमोप्रोपेनोएट के साथ $KOH$ की उपस्थिति में अभिक्रिया और अम्लीय जलअपघटन करने पर यौगिक $T$ प्राप्त होता है।
$(1)$ यौगिक $R$ क्या है?
$(2)$ यौगिक $T$ क्या है?
$(A)$ ग्लाइसिन
$(B)$ एलेनिन
$(C)$ वैलिन
$(D)$ सेरीन
$(1)$ और $(2)$ के लिए सही विकल्प पहचानें।
Question diagram
A
$A, C$
B
$A, B$
C
$A, D$
D
$A, B, D$

Solution

(B) चरण $1$: $1,2-$डाइएथिलबेंजीन $(O)$ का $KMnO_4 / H^+$ के साथ ऑक्सीकरण करने पर थैलिक एसिड $(P)$ प्राप्त होता है।
चरण $2$: थैलिक एसिड $(P)$ की अमोनिया के साथ अभिक्रिया और गर्म करने पर थैलामाइड $(Q)$ प्राप्त होता है।
चरण $3$: थैलामाइड $(Q)$ का $Br_2 / NaOH$ के साथ हॉफमैन ब्रोमामाइड निम्नीकरण करने पर $o-$फेनिलीनडायमाइन $(R)$ प्राप्त होता है।
चरण $4$: थैलामाइड $(Q)$ को गर्म करने पर थैलिमाइड $(S)$ प्राप्त होता है।
चरण $5$: थैलिमाइड $(S)$ और एथिल $2-$ब्रोमोप्रोपेनोएट का उपयोग करके गैब्रियल थैलिमाइड संश्लेषण और उसके बाद जलअपघटन करने पर एलेनिन $(T)$ प्राप्त होता है।
अतः,$T$ एलेनिन $(B)$ है।

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Can I practice IIT JEE 2016 Chemistry as a timed test?

Yes. Use the Vedclass Test Series to attempt a full IIT JEE mock test covering Chemistry with time limits and instant score analysis.

Can teachers create Chemistry papers from IIT JEE previous year questions?

Yes. The Vedclass Exam Paper Generator lets teachers mix IIT JEE Chemistry questions and generate Set A/B/C/D papers in minutes.

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