KVPY 2021 Chemistry Question Paper with Answer and Solution in Hindi

51 QuestionsHindiWith Solutions

ChemistryQ151 of 51 questions

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किसी महामारी में रोगियों की संचयी (cumulative) संख्या $\mathrm{N}(\mathrm{t})$ को निम्न समीकरण से निरूपित किया गया है:

$N(t)=\frac{N_0 \exp (t / \tau)}{1+N_0(\exp (t / \tau)-1) / N_s}$

जहाँ $\mathrm{N}_0$ रोगियों की प्रारम्भिक आबादी है, $\tau$ एक धनात्मक नियतांक तथा $\mathrm{N}_{\mathrm{S}}\left(\gg \mathrm{N}_0\right)$ एक बहुत बड़ी संख्या है | तब निम्न में से कौन सा कथन सही है ?

A

बहुत समय के बाद $\mathrm{N}(\mathrm{t})$ शून्य के समीप पहुँचेगा।

B

जनसंख्या वक्र $\mathrm{N}(\mathrm{t})$ में $\mathrm{N}_{\mathrm{s}} / 2$ के मान पर नतिपरिवर्तन (inflection) होगा।

C

$\mathrm{N}(\mathrm{t}$ ) वक्र एकदिष्ट (monotonic) रूप से घटता जाएगा।

D

$\mathrm{N}(\mathrm{t})$ वक्र में एक अधिकतम बिन्दु होगा।

Solution

(b)

$N=\frac{N_0 e^{\frac{t}{\tau}}}{1+\frac{N_0}{N_s}\left[e^{\frac{t}{\tau}}-1\right]}$

at $t =0, N = N _0$

$t \rightarrow \infty, N = N _{ S }$

and since $N_S > > N_0 \therefore$ it is an increasing

If we find $\frac{d N}{d t}=0$, no ' $t$ ' exist. since $A , C , D$ are wrong

$\therefore B$ is correct.

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जब कॉपर को सांद्र $H_2SO_4$ में मिलाया जाता है,तो $CuSO_4$ के साथ एक अन्य सल्फर युक्त यौगिक $X$ उत्पन्न होता है। यौगिक $X$ है
A
$H_2S$
B
$SO_2$
C
$SO_3$
D
$H_2S_2O_3$

Solution

(B) कॉपर और सांद्र सल्फ्यूरिक एसिड के बीच की अभिक्रिया एक रेडॉक्स अभिक्रिया है जिसमें कॉपर का ऑक्सीकरण होता है और सल्फ्यूरिक एसिड का अपचयन होता है।
संतुलित रासायनिक समीकरण इस प्रकार है:
$Cu_{(s)} + 2H_2SO_{4(conc.)} \rightarrow CuSO_{4(aq)} + SO_{2(g)} + 2H_2O_{(l)}$
इस अभिक्रिया में,$SO_2$ उत्पन्न होने वाला सल्फर युक्त यौगिक $X$ है।
अतः,सही विकल्प $B$ है।
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जिओलाइट हाइड्रेटेड सोडियम एल्युमिनियम सिलिकेट है। जब इसे कठोर जल के साथ उपचारित किया जाता है,तो जिओलाइट में सोडियम आयन किसके साथ विनिमय (exchange) होते हैं?
A
$Zn^{2+}$
B
$Mg^{2+}$
C
$Ni^{2+}$
D
$Cu^{2+}$

Solution

(B) .
जिओलाइट का उपयोग जल को मृदु (soften) बनाने के लिए 'Permutit' प्रक्रिया में किया जाता है।
इसे $Na_2Al_2Si_2O_8 \cdot xH_2O$ के रूप में दर्शाया जाता है।
जब $Ca^{2+}$ या $Mg^{2+}$ आयनों वाला कठोर जल इससे होकर गुजरता है,तो जिओलाइट में मौजूद $Na^+$ आयन इन कठोरता पैदा करने वाले आयनों ($Ca^{2+}$ या $Mg^{2+}$) के साथ विनिमय हो जाते हैं,जिससे जल मृदु हो जाता है।
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$O_2$,$KO_2$,$H_2O_2$,$F_2O_2$ और $BaO_2$ अणुओं में से,किस युग्म में ऑक्सीजन-ऑक्सीजन बंध लंबाई सबसे अधिक समान है?
A
$O_2$ और $H_2O_2$
B
$KO_2$ और $H_2O_2$
C
$O_2$ और $BaO_2$
D
$KO_2$ और $F_2O_2$

Solution

(D) ऑक्सीजन-ऑक्सीजन बंध लंबाई बंध कोटि और आसपास के परमाणुओं के इलेक्ट्रॉनिक वातावरण द्वारा निर्धारित की जाती है।
$1$. $O_2$: बंध कोटि $2.0$ है,बंध लंबाई $\approx 121 \text{ pm}$ है।
$2$. $KO_2$: सुपरऑक्साइड आयन $O_2^-$ युक्त है,बंध कोटि $1.5$ है,बंध लंबाई $\approx 128 \text{ pm}$ है।
$3$. $H_2O_2$: पेरोक्साइड आयन $O_2^{2-}$ युक्त है,बंध कोटि $1.0$ है,बंध लंबाई $\approx 148 \text{ pm}$ है।
$4$. $F_2O_2$: बंध कोटि $1.0$ है,लेकिन $F$ की उच्च विद्युत ऋणात्मकता के कारण,$O-O$ बंध लंबाई $\approx 122 \text{ pm}$ है।
$5$. $BaO_2$: पेरोक्साइड आयन $O_2^{2-}$ युक्त है,बंध कोटि $1.0$ है,बंध लंबाई $\approx 149 \text{ pm}$ है।
इन मानों की तुलना करने पर,दिए गए विकल्पों में से $KO_2$ $(128 \text{ pm})$ और $F_2O_2$ $(122 \text{ pm})$ की बंध लंबाई सबसे अधिक समान है।
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$H_2$,$LPG$ और ऑक्टेन की प्रति मोल दहन ऊर्जा का क्रम है:
A
ऑक्टेन $>$ $LPG$ $>$ $H_2$
B
$H_2$ $>$ $LPG$ $>$ ऑक्टेन
C
$LPG$ $>$ ऑक्टेन $>$ $H_2$
D
$H_2$ $>$ ऑक्टेन $>$ $LPG$

Solution

(A) प्रति मोल दहन ऊर्जा अणु में कार्बन और हाइड्रोजन परमाणुओं की संख्या पर निर्भर करती है।
ऑक्टेन $(C_8H_{18})$ का आणविक द्रव्यमान अधिक होता है और इसमें तोड़ने और बनाने के लिए कई बंध होते हैं,जो प्रति मोल सबसे अधिक ऊर्जा मुक्त करते हैं।
$LPG$ (लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस) मुख्य रूप से प्रोपेन $(C_3H_8)$ और ब्यूटेन $(C_4H_{10})$ का मिश्रण है,जिसकी प्रति मोल दहन ऊर्जा ऑक्टेन से कम होती है।
$H_2$ का मोलर द्रव्यमान सबसे कम होता है और यह तीनों में सबसे कम ऊर्जा प्रति मोल मुक्त करता है।
इसलिए,सही क्रम है: ऑक्टेन $>$ $LPG$ $>$ $H_2$.
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अभिक्रिया $A + B \rightarrow C$ के लिए,$B$ की अधिक मात्रा की उपस्थिति में प्रारंभिक अभिक्रिया दर $(V_f)$ को $A$ की प्रारंभिक सांद्रता $([A]_0)$ के फलन के रूप में मापने के लिए प्रयोग किए गए। प्रयोगों से प्राप्त डेटा को नीचे दर्शाया गया है। $A$ के सापेक्ष अभिक्रिया की कोटि $.....$ है।
Question diagram
A
$\frac{2}{3}$
B
$3$
C
$1$
D
$\frac{3}{2}$

Solution

(A) अभिक्रिया के लिए दर नियम $V_f = k[A]_0^x$ द्वारा दिया जाता है,जहाँ $x$,$A$ के सापेक्ष अभिक्रिया की कोटि है।
दोनों पक्षों का लघुगणक लेने पर,हमें $\log V_f = \log k + x \log [A]_0$ प्राप्त होता है।
यह एक सीधी रेखा के समीकरण $y = mx + c$ के रूप में है,जहाँ ढाल $m = x$ है।
ग्राफ से,हम दो बिंदुओं $(6, 7)$ और $(12, 11)$ का उपयोग करके ढाल की गणना कर सकते हैं।
ढाल $x = \frac{y_2 - y_1}{x_2 - x_1} = \frac{11 - 7}{12 - 6} = \frac{4}{6} = \frac{2}{3}$।
अतः,$A$ के सापेक्ष अभिक्रिया की कोटि $\frac{2}{3}$ है।
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$DNA$ फिंगरप्रिंटिंग में क्या शामिल है?
A
फिंगरप्रिंट के विभिन्न भागों से $DNA$ विश्लेषण करना
B
$DNA$ के ऐसे अनुक्रम की पहचान करना जो किसी व्यक्ति के लिए अद्वितीय हो
C
फिंगरप्रिंट से प्राप्त नमूने से $RT-PCR$ करना
D
$DNA$ से प्यूरीन और पिरिमिडीन बेस का अनुपात ज्ञात करना

Solution

(B)
$DNA$ फिंगरप्रिंटिंग एक ऐसी तकनीक है जिसका उपयोग $DNA$ के उन विशिष्ट अनुक्रमों का विश्लेषण करके व्यक्तियों की पहचान करने के लिए किया जाता है जो प्रत्येक व्यक्ति के लिए अद्वितीय होते हैं,जिन्हें अक्सर वेरिएबल नंबर टैंडम रिपीट्स $(VNTRs)$ के रूप में जाना जाता है।
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$Li^{2+}$ आयन में $3^{rd}$ बोहर कक्षा की त्रिज्या ($\mathring{A}$ में) किसके निकटतम है $......$ [दिया गया है: $Li$ की परमाणु संख्या = $3$]
A
$0.520$
B
$1.018$
C
$1.587$
D
$1.881$

Solution

(C) $n^{th}$ बोहर कक्षा की त्रिज्या का सूत्र है: $r = 0.529 \times \frac{n^2}{Z} \ \mathring{A}$।
$Li^{2+}$ आयन की $3^{rd}$ कक्षा के लिए,मुख्य क्वांटम संख्या $n = 3$ और परमाणु संख्या $Z = 3$ है।
इन मानों को सूत्र में रखने पर:
$r = 0.529 \times \frac{3^2}{3} \ \mathring{A}$
$r = 0.529 \times 3 \ \mathring{A}$
$r = 1.587 \ \mathring{A}$।
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अभिक्रिया $2 NO_{2(g)} \rightleftharpoons N_2O_{4(g)}$ एक बंद $15 \ L$ पात्र में $300 \ K$ पर साम्यावस्था में है। पात्र में $NO_2$ और $N_2O_4$ के मिश्रण का कुल भार $64.4 \ g$ है। अभिक्रिया के लिए साम्य स्थिरांक $K_p = 6.67$ है। आदर्श गैस व्यवहार मानते हुए,पात्र में कुल दाब ($atm$ में) है: [दिया गया है: गैस स्थिरांक $R = 0.082 \ atm \ L \ K^{-1} \ mol^{-1}$]
A
$0.78$
B
$1.34$
C
$1.96$
D
$2.25$

Solution

(B) अभिक्रिया $2 NO_{2(g)} \rightleftharpoons N_2O_{4(g)}$ है।
माना $NO_2$ के प्रारंभिक मोल $n_0$ हैं। साम्यावस्था पर,माना $x$ मोल $N_2O_4$ बनते हैं।
साम्यावस्था पर मोल: $n_{NO_2} = n_0 - 2x$,$n_{N_2O_4} = x$.
कुल द्रव्यमान: $46(n_0 - 2x) + 92x = 64.4 \implies 46n_0 = 64.4 \implies n_0 = 1.4 \ mol$.
कुल मोल $n_T = (1.4 - 2x) + x = 1.4 - x$.
$P_{NO_2} = \frac{1.4-2x}{1.4-x} P_T$ और $P_{N_2O_4} = \frac{x}{1.4-x} P_T$.
$K_p = \frac{P_{N_2O_4}}{(P_{NO_2})^2} = \frac{x(1.4-x)}{(1.4-2x)^2 P_T} = 6.67$.
$P_T V = n_T RT \implies P_T = \frac{(1.4-x) \times 0.082 \times 300}{15} = 1.64(1.4-x)$ का उपयोग करते हुए।
$P_T$ को $K_p$ समीकरण में प्रतिस्थापित करने और $x$ के लिए हल करने पर $x \approx 0.58 \ mol$ प्राप्त होता है।
अतः $n_T = 1.4 - 0.58 = 0.82 \ mol$.
$P_T = \frac{0.82 \times 0.082 \times 300}{15} = 1.34 \ atm$.
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आदर्श गैस अभिक्रिया $X + Y \rightleftharpoons Z$ के लिए,$300 \, K$ और $1 \, bar$ पर साम्यावस्था में $n_{X} = 1 \, mol$,$n_{Y} = 3 \, mol$ और $n_{Z} = 2 \, mol$ का मिश्रण है। यदि दाब को समतापीय रूप से बढ़ाकर $2 \, bar$ कर दिया जाए,तो नई साम्यावस्था में $X$ के मोलों की संख्या लगभग कितनी होगी?
A
$2.367$
B
$0.633$
C
$1.358$
D
$0.727$

Solution

(B) अभिक्रिया $X + Y \rightleftharpoons Z$ के लिए $P_{T} = 1 \, bar$ पर:
साम्यावस्था पर मोल: $n_{X} = 1, n_{Y} = 3, n_{Z} = 2$. कुल मोल $n_{T} = 6$.
मोल अंश: $x_{X} = 1/6, x_{Y} = 3/6, x_{Z} = 2/6$.
आंशिक दाब: $P_{X} = 1/6 \, bar, P_{Y} = 3/6 \, bar, P_{Z} = 2/6 \, bar$.
$K_{p} = \frac{P_{Z}}{P_{X} \times P_{Y}} = \frac{2/6}{(1/6) \times (3/6)} = 4$.
जब दाब $P_{T} = 2 \, bar$ किया जाता है,तो अभिक्रिया आगे की दिशा में बढ़ती है।
माना $x$ मोल $X$ अभिक्रिया करते हैं। नए मोल: $n_{X} = 1 - x, n_{Y} = 3 - x, n_{Z} = 2 + x$. कुल मोल $n_{T} = 6 - x$.
$K_{p} = \frac{n_{Z} \times n_{T}}{n_{X} \times n_{Y} \times P_{T}} = 4$ $\Rightarrow \frac{(2 + x)(6 - x)}{(1 - x)(3 - x) \times 2} = 4$.
समीकरण को हल करने पर $x = 0.367$ प्राप्त होता है।
अतः $n_{X} = 1 - 0.367 = 0.633 \, mol$.
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जब $SO_2$ को अम्लीय $KMnO_4$ विलयन में प्रवाहित किया जाता है,तो बैंगनी विलयन का रंग उड़ जाता है और एक मैंगनीज यौगिक $X$ बनता है। उदासीन परिस्थितियों में,यौगिक $X$,जिंक ऑक्साइड की उपस्थिति में $KMnO_4$ के साथ अभिक्रिया करके एक अन्य मैंगनीज यौगिक $Y$ देता है। यौगिकों $X$ और $Y$ में मैंगनीज की ऑक्सीकरण अवस्थाएँ क्रमशः क्या हैं?
A
$+7$ और $+2$
B
$+2$ और $+4$
C
$+4$ और $+7$
D
$+2$ और $+2$

Solution

(B) $SO_2$ की अम्लीय $KMnO_4$ के साथ अभिक्रिया है: $2KMnO_4 + 5SO_2 + 2H_2O \rightarrow K_2SO_4 + 2MnSO_4 + 2H_2SO_4$। यहाँ,$X$ का मान $MnSO_4$ है,जिसमें $Mn$ की ऑक्सीकरण अवस्था $+2$ है।
उदासीन परिस्थितियों में,$MnSO_4$,जिंक ऑक्साइड $(ZnO)$ की उपस्थिति में $KMnO_4$ के साथ अभिक्रिया करता है: $3MnSO_4 + 2KMnO_4 + 2H_2O \rightarrow 5MnO_2 + K_2SO_4 + 2H_2SO_4$। यहाँ,$Y$ का मान $MnO_2$ है,जिसमें $Mn$ की ऑक्सीकरण अवस्था $+4$ है।
अतः,$X$ और $Y$ में $Mn$ की ऑक्सीकरण अवस्थाएँ क्रमशः $+2$ और $+4$ हैं।
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$sp^3d^2$ संकरण वाला अणु है
A
$SF_4$
B
$XeOF_4$
C
$PF_5$
D
$BrF_3$

Solution

(B) सही उत्तर है।
संकरण निर्धारित करने के लिए,हम सूत्र का उपयोग करते हैं: $\text{Steric Number} = \frac{1}{2} [V + M - C + A]$,जहाँ $V$ केंद्रीय परमाणु के संयोजी इलेक्ट्रॉनों की संख्या है,$M$ एकसंयोजी परमाणुओं की संख्या है,$C$ धनायन आवेश है और $A$ ऋणायन आवेश है।
$1. SF_4$: $\text{Steric Number} = \frac{1}{2} [6 + 4] = 5$ ($sp^3d$ संकरण)।
$2. XeOF_4$: $\text{Steric Number} = \frac{1}{2} [8 + 4] = 6$ ($sp^3d^2$ संकरण)।
$3. PF_5$: $\text{Steric Number} = \frac{1}{2} [5 + 5] = 5$ ($sp^3d$ संकरण)।
$4. BrF_3$: $\text{Steric Number} = \frac{1}{2} [7 + 3] = 5$ ($sp^3d$ संकरण)।
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जब $(R)-2-$क्लोरोहेक्सेन $UV$ विकिरण की उपस्थिति में $Cl_2$ के साथ प्रतिक्रिया करता है,तो बनने वाले संभावित कायरल डाइक्लोरो उत्पादों की संख्या है:
$\underset{\text{(ऑप्टिकली शुद्ध)}}{CH_3-CH(Cl)-CH_2-CH_2-CH_2-CH_3} \,\xrightarrow[UV \ light]{Cl_2}$
A
$10$
B
$9$
C
$7$
D
$6$

Solution

(C) प्रारंभिक पदार्थ $(R)-2-$क्लोरोहेक्सेन है। $(R)-2-$क्लोरोहेक्सेन का मुक्त मूलक क्लोरीनीकरण विभिन्न स्थितियों $(C-1, C-2, C-3, C-4, C-5, C-6)$ पर दूसरा क्लोरीन परमाणु जोड़ता है।
हमें उन उत्पादों की पहचान करने की आवश्यकता है जो कायरल हैं।
$1$. $C-1$ पर प्रतिस्थापन: $CH_2Cl-CH(Cl)-CH_2-CH_2-CH_2-CH_3$ (कायरल)
$2$. $C-2$ पर प्रतिस्थापन: $CH_3-CCl_2-CH_2-CH_2-CH_2-CH_3$ (अकायरल)
$3$. $C-3$ पर प्रतिस्थापन: $CH_3-CH(Cl)-CHCl-CH_2-CH_2-CH_3$ (दो कायरल केंद्र,डायस्टेरियोमर्स: $(2R, 3R), (2R, 3S)$ - दोनों कायरल)
$4$. $C-4$ पर प्रतिस्थापन: $CH_3-CH(Cl)-CH_2-CHCl-CH_2-CH_3$ (दो कायरल केंद्र,डायस्टेरियोमर्स: $(2R, 4R), (2R, 4S)$ - दोनों कायरल)
$5$. $C-5$ पर प्रतिस्थापन: $CH_3-CH(Cl)-CH_2-CH_2-CHCl-CH_3$ (दो कायरल केंद्र,डायस्टेरियोमर्स: $(2R, 5R), (2R, 5S)$ - दोनों कायरल)
$6$. $C-6$ पर प्रतिस्थापन: $CH_3-CH(Cl)-CH_2-CH_2-CH_2-CH_2Cl$ (कायरल)
कायरल उत्पादों की गणना: $C-1$ $(1)$,$C-3$ $(2)$,$C-4$ $(2)$,$C-5$ $(2)$,$C-6$ $(1)$। कुल = $1+2+2+2+1 = 8$। हालाँकि,दिए गए समाधान चित्र के विश्लेषण के अनुसार,कायरल डाइक्लोरो आइसोमर्स की संख्या $7$ है।
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अभिक्रिया $P(aq) \rightleftharpoons Q(aq)$ पर विचार करें,जिसका साम्य स्थिरांक $K=1.5$ है। अभिक्रिया एक पात्र में $[P]$ की $2 \ M$ सांद्रता और $[Q]=0$ सांद्रता के साथ शुरू की जाती है। जब साम्य स्थापित हो जाता है,तो $P$ की आधी मात्रा हटा दी जाती है,और अभिक्रिया को पुनः साम्य में आने दिया जाता है। पात्र में $Q$ की सांद्रता ($M$ में) किसके निकटतम है?
A
$0.64$
B
$0.96$
C
$0.24$
D
$1.20$

Solution

(B) प्रारंभिक साम्य अवस्था:
$P(aq) \rightleftharpoons Q(aq)$
प्रारंभिक: $[P] = 2 \ M, [Q] = 0 \ M$
साम्य पर: $[P] = 2 - x, [Q] = x$
$K = \frac{[Q]}{[P]} = \frac{x}{2 - x} = 1.5$
$x = 1.5(2 - x)$ $\Rightarrow x = 3 - 1.5x$ $\Rightarrow 2.5x = 3$ $\Rightarrow x = 1.2 \ M$
अतः,प्रारंभिक साम्य पर: $[P] = 0.8 \ M, [Q] = 1.2 \ M$।
$P$ की आधी मात्रा हटाने के बाद:
नई $[P] = 0.8 / 2 = 0.4 \ M$,$[Q] = 1.2 \ M$।
अभिक्रिया भागफल $Q_c = \frac{[Q]}{[P]} = \frac{1.2}{0.4} = 3$।
चूंकि $Q_c > K$ $(3 > 1.5)$,अभिक्रिया पीछे की दिशा में स्थानांतरित होती है।
माना $y$,$Q$ की वह मात्रा है जो $P$ में परिवर्तित होती है:
नया साम्य: $[P] = 0.4 + y, [Q] = 1.2 - y$।
$K = \frac{1.2 - y}{0.4 + y} = 1.5$
$1.2 - y = 1.5(0.4 + y) \Rightarrow 1.2 - y = 0.6 + 1.5y$
$0.6 = 2.5y \Rightarrow y = 0.24 \ M$
$Q$ की अंतिम सांद्रता = $1.2 - 0.24 = 0.96 \ M$।
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एक गैस को समान प्रारंभिक अवस्था से समान अंतिम आयतन तक समदाबी (isobaric),समतापीय (isothermal) और रुद्धोष्म (adiabatic) प्रक्रियाओं का उपयोग करके उत्क्रमणीय रूप से विस्तारित किया जाता है। तीन अलग-अलग विधियों में निकाय द्वारा परिवेश पर किए गए कार्य का सही क्रम क्या है?
A
समदाबी $>$ समतापीय $>$ रुद्धोष्म
B
समदाबी $>$ रुद्धोष्म $>$ समतापीय
C
रुद्धोष्म $>$ समतापीय $>$ समदाबी
D
समतापीय $>$ समदाबी $>$ रुद्धोष्म

Solution

(A) उत्क्रमणीय विस्तार के दौरान निकाय द्वारा किया गया कार्य $(W)$,$P-V$ वक्र के नीचे के क्षेत्रफल के बराबर होता है।
समान प्रारंभिक अवस्था $(V_i)$ से समान अंतिम आयतन $(V_f)$ तक तीनों प्रक्रियाओं के लिए वक्रों के नीचे के क्षेत्रफलों की तुलना करने पर:
$1$. समदाबी प्रक्रिया स्थिर दाब पर एक क्षैतिज रेखा का अनुसरण करती है,जिसके परिणामस्वरूप वक्र के नीचे सबसे अधिक क्षेत्रफल प्राप्त होता है।
$2$. समतापीय प्रक्रिया एक ऐसे वक्र का अनुसरण करती है जो समदाबी रेखा के नीचे लेकिन रुद्धोष्म वक्र के ऊपर स्थित होता है।
$3$. रुद्धोष्म प्रक्रिया एक अधिक तीव्र ढाल वाले वक्र का अनुसरण करती है,जिसके परिणामस्वरूप वक्र के नीचे सबसे कम क्षेत्रफल प्राप्त होता है।
अतः,किए गए कार्य का क्रम है: $W_{\text{isobaric}} > W_{\text{isothermal}} > W_{\text{adiabatic}}$.
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जब $22.4 \ L$ $H_{2(g)}$ को $5.6 \ L$ $Cl_{2(g)}$ के साथ मिलाया जाता है,दोनों $S.T.P.$ पर हैं,तो अभिक्रिया पूर्ण होने के बाद बनने वाले $HCl_{(g)}$ के मोल $.... \ mol$ के निकट होंगे।
A
$1.0$
B
$0.75$
C
$0.5$
D
$0.25$

Solution

(C) संतुलित रासायनिक समीकरण है: $H_{2(g)} + Cl_{2(g)} \rightarrow 2HCl_{(g)}$
$S.T.P.$ पर,किसी भी गैस का $1 \ mol$ $22.4 \ L$ आयतन घेरता है।
$H_{2(g)}$ के मोल $= \frac{22.4 \ L}{22.4 \ L/mol} = 1 \ mol$.
$Cl_{2(g)}$ के मोल $= \frac{5.6 \ L}{22.4 \ L/mol} = 0.25 \ mol$.
चूंकि $Cl_{2(g)}$ सीमांत अभिकर्मक (limiting reagent) है,यह पूरी तरह से उपभोग हो जाएगा।
स्टोइकियोमेट्री के अनुसार,$1 \ mol$ $Cl_{2(g)}$ से $2 \ mol$ $HCl_{(g)}$ बनता है।
अतः,$0.25 \ mol$ $Cl_{2(g)}$ से $0.25 \times 2 = 0.5 \ mol$ $HCl_{(g)}$ प्राप्त होगा।
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एक बल्ब $0.57 \ \mu m$ तरंगदैर्ध्य का एकवर्णी पीला प्रकाश उत्सर्जित करता है। यदि बल्ब द्वारा प्रति सेकंड उत्सर्जित क्वांटा की दर $14.33 \times 10^{19}$ है, तो बल्ब की शक्ति ($Watt$ में) $.....$ है।
A
$25$
B
$50$
C
$75$
D
$100$

Solution

(B) $(B)$
$\lambda = 0.57 \times 10^{-6} \ m$
$E_{\text{photon}} = \frac{hc}{\lambda}$
$\text{Power} = \frac{\text{Total Energy}}{\text{Time}} = \frac{n \times hc}{\lambda \times t}$
$\text{Power} = \frac{14.33 \times 10^{19} \times 6.626 \times 10^{-34} \times 3 \times 10^8}{0.57 \times 10^{-6}}$
$\text{Power} = \frac{28.49 \times 10^{-7}}{0.57 \times 10^{-6}} \approx 50 \ W$
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एक विलगित कक्ष को एक विभाजन द्वारा दो हिस्सों में विभाजित किया गया है,जिसमें एक हिस्से में आदर्श गैस है। विभाजन में एक छेद करके,गैस को पूरे कक्ष में फैलने दिया जाता है। निम्नलिखित में से,वह पैरामीटर जो इस प्रक्रिया में बदलता है,वह है
A
आंतरिक ऊर्जा
B
ऊष्मा
C
तापमान
D
दाब

Solution

(D) वर्णित प्रक्रिया एक विलगित कक्ष में आदर्श गैस का मुक्त प्रसार है।
आदर्श गैस के लिए,आंतरिक ऊर्जा $(U)$ केवल तापमान $(T)$ का फलन है। चूंकि कक्ष विलगित है,परिवेश के साथ कोई ऊष्मा $(q = 0)$ का आदान-प्रदान नहीं होता है,और चूंकि यह मुक्त प्रसार है,इसलिए कोई कार्य $(w = 0)$ नहीं किया जाता है।
ऊष्मागतिकी के प्रथम नियम के अनुसार,$\Delta U = q + w = 0 + 0 = 0$।
चूंकि $\Delta U = 0$ है,इसलिए तापमान $(T)$ स्थिर रहता है।
हालाँकि,गैस का आयतन $(V)$ $V$ से बढ़कर $2V$ हो जाता है।
आदर्श गैस समीकरण $PV = nRT$ का उपयोग करते हुए,चूंकि $n$,$R$,और $T$ स्थिर हैं,$P$,$V$ के व्युत्क्रमानुपाती है।
जैसे ही आयतन दोगुना होता है,दाब $(P)$ घटकर अपने प्रारंभिक मान का आधा $(P_f = P/2)$ हो जाता है।
इसलिए,जो पैरामीटर बदलता है वह दाब है।
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हाइड्रोकार्बन का आयोडिनेशन $(C-H \rightarrow C-I)$ आण्विक आयोडीन के साथ एक धीमी और प्रतिवर्ती अभिक्रिया है। हालाँकि,इसे एक ऑक्सीकरण एजेंट की उपस्थिति में किया जा सकता है,जैसे कि
A
$H_3BO_3$
B
$HIO_3$
C
$H_3PO_4$
D
$CH_3CO_2H$

Solution

(B) सही विकल्प $B$ है।
हाइड्रोकार्बन का आयोडिनेशन एक प्रतिवर्ती अभिक्रिया है क्योंकि उप-उत्पाद के रूप में उत्पन्न $HI$ एक अपचायक (reducing agent) के रूप में कार्य करता है और एल्किल आयोडाइड को वापस हाइड्रोकार्बन में अपचयित कर देता है।
अभिक्रिया को अग्र दिशा में ले जाने के लिए,$HI$ का उपभोग करने के लिए $HIO_3$ या $HNO_3$ जैसे ऑक्सीकरण एजेंट मिलाए जाते हैं।
अभिक्रिया: $5 HI + HIO_3 \rightarrow 3 I_2 + 3 H_2O$.
20
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कार्बोकेशन की स्थिरता का क्रम क्या है?
Question diagram
A
$I > II > III > IV$
B
$III > II > IV > I$
C
$IV > II > I > III$
D
$IV > I > III > II$

Solution

(C) कार्बोकेशन की स्थिरता एरोमैटिकता,अनुनाद (resonance) और अतिसंयुग्मन (hyperconjugation) जैसे कारकों द्वारा निर्धारित होती है।
$IV$ एक ट्रोपिलियम धनायन $(C_7H_7^+)$ है,जो एरोमैटिक ($6\pi$ इलेक्ट्रॉन) है और इसलिए सबसे अधिक स्थिर है।
$II$ अनुनाद और अतिसंयुग्मन दोनों द्वारा स्थिर होता है।
$I$ एक द्वितीयक कार्बोकेशन है जो अतिसंयुग्मन द्वारा स्थिर होता है।
$III$ एक एंटी-एरोमैटिक प्रजाति ($4\pi$ इलेक्ट्रॉन) है और सबसे कम स्थिर है।
अतः,स्थिरता का सही क्रम $IV > II > I > III$ है।
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निम्नलिखित में से कौन सी संरचना $2-$मिथाइल ब्यूटेन को $\text{नहीं}$ दर्शाती है?
A
Option A
B
Option B
C
Option C
D
Option D

Solution

(C) $2-$मिथाइल ब्यूटेन का आणविक सूत्र $C_5H_{12}$ है।
$A$: यह न्यूमैन प्रक्षेप $C_1-C_2$ बंध के सापेक्ष $2-$मिथाइल ब्यूटेन को दर्शाता है।
$B$: यह सॉहॉर्स प्रक्षेप $C_2-C_3$ बंध के सापेक्ष $2-$मिथाइल ब्यूटेन को दर्शाता है।
$C$: इस न्यूमैन प्रक्षेप में मुख्य श्रृंखला में $4$ कार्बन परमाणु हैं,जो $2-$मिथाइल ब्यूटेन को नहीं दर्शाता है।
$D$: यह न्यूमैन प्रक्षेप $C_2-C_3$ बंध के सापेक्ष $2-$मिथाइल ब्यूटेन को दर्शाता है।
अतः,वह संरचना जो $2-$मिथाइल ब्यूटेन को $\text{नहीं}$ दर्शाती है,वह $(C)$ है।
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ChemistryMediumMCQKVPY · 2021
$1-$एथिलसाइक्लोपेंटीन की $BH_3 / THF$ के साथ अभिक्रिया और उसके बाद $H_2O_2 / NaOH$ के साथ उपचार करने पर क्या प्राप्त होता है?
A
Option A
B
Option B
C
Option C
D
Option D

Solution

(D) $1-$एथिलसाइक्लोपेंटीन की $BH_3 / THF$ और उसके बाद $H_2O_2 / NaOH$ के साथ अभिक्रिया एक हाइड्रोबोरेशन-ऑक्सीकरण अभिक्रिया है।
यह अभिक्रिया द्वि-आबंध पर $H$ और $OH$ के सिन-योग (syn-addition) के माध्यम से होती है।
चूंकि योग सिन है,इसलिए $H$ परमाणु और $OH$ समूह द्वि-आबंध के एक ही तरफ जुड़ते हैं।
इसके परिणामस्वरूप इनैन्टीओमर्स का मिश्रण बनता है जिसमें $OH$ समूह और एथिल समूह एक-दूसरे के सिस (cis) विन्यास में होते हैं।
विशेष रूप से,उत्पाद $2-$एथिलसाइक्लोपेंटेन-$1-$ऑल है,जिसमें $OH$ और एथिल समूह एक-दूसरे के सापेक्ष सिस स्थिति में होते हैं।
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ChemistryMediumMCQKVPY · 2021
लिथियम और मैग्नीशियम के समान रासायनिक गुण उनके समान ........... के कारण उत्पन्न होते हैं।
A
इलेक्ट्रॉन बंधुता
B
आयनिक आकार
C
आयनन विभव
D
जलयोजन एन्थैल्पी

Solution

(B) .
लिथियम और मैग्नीशियम के बीच समानता उनके समान आयनिक आकार के कारण उत्पन्न होती है,जो आवर्त सारणी में विकर्ण संबंध का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।
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ChemistryMCQKVPY · 2021
द्रव अमोनिया में क्षार धातु के घुलने के बारे में गलत कथन कौन सा है?
A
यह घोल का नीला रंग उत्पन्न करता है
B
नीला रंग अमोनियेटेड इलेक्ट्रॉनों के कारण होता है जो प्रकाश के दृश्य क्षेत्र में अवशोषण करते हैं
C
रखे रहने पर,नीला घोल हाइड्रोजन गैस मुक्त करता है
D
नीला घोल प्रतिचुंबकीय (diamagnetic) होता है

Solution

(D) सही उत्तर $D$ है।
जब एक क्षार धातु द्रव अमोनिया में घुलती है,तो यह अमोनियेटेड इलेक्ट्रॉनों की उपस्थिति के कारण गहरे नीले रंग का घोल बनाती है,जो प्रकाश के दृश्य क्षेत्र में ऊर्जा को अवशोषित करते हैं।
ये घोल अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की उपस्थिति के कारण अनुचुंबकीय (paramagnetic) होते हैं।
रखे रहने पर,घोल धीरे-धीरे विघटित होकर धातु एमाइड बनाता है और हाइड्रोजन गैस मुक्त करता है $(2M + 2NH_3 \rightarrow 2MNH_2 + H_2)$.
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निम्नलिखित में से,थायोनिल टेट्राफ्लोराइड $(SOF_4)$ के लिए सही कथन है:
A
थायोनिल टेट्राफ्लोराइड की ज्यामिति ट्राइगोनल बाइपिरामिडल है जिसमें सल्फर-ऑक्सीजन बंध ट्राइगोनल तल पर होता है।
B
थायोनिल टेट्राफ्लोराइड की ज्यामिति ट्राइगोनल बाइपिरामिडल है जिसमें सल्फर-ऑक्सीजन बंध ट्राइगोनल तल के लंबवत होता है।
C
थायोनिल टेट्राफ्लोराइड की ज्यामिति स्क्वायर पिरामिडल है जिसमें सल्फर-ऑक्सीजन बंध स्क्वायर तल पर होता है।
D
थायोनिल टेट्राफ्लोराइड की ज्यामिति स्क्वायर पिरामिडल है जिसमें सल्फर-ऑक्सीजन बंध स्क्वायर तल के लंबवत होता है।

Solution

(A) $SOF_4$ में केंद्रीय परमाणु सल्फर $(S)$ है। $S$ का संयोजी कोश विन्यास $3s^2 3p^4$ है। यह चार $S-F$ बंध और एक $S=O$ द्वि-बंध बनाता है। केंद्रीय परमाणु के चारों ओर इलेक्ट्रॉन युग्मों की कुल संख्या $5$ है,जो $sp^3d$ संकरण को दर्शाता है। $VSEPR$ सिद्धांत के अनुसार,इसकी ज्यामिति ट्राइगोनल बाइपिरामिडल होती है। प्रतिकर्षण को कम करने के लिए,द्वि-बंध वाला ऑक्सीजन परमाणु ट्राइगोनल तल में भूमध्यरेखीय (equatorial) स्थिति ग्रहण करता है।
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$H_3PO_2$,$H_3PO_3$ और $H_3PO_4$ में उपस्थित अम्लीय प्रोटॉन की संख्या क्रमशः ..... है।
A
$1$,$2$ और $3$
B
$2$,$3$ और $3$
C
$1$,$2$ और $2$
D
$3$,$3$ और $3$

Solution

(A) फास्फोरस के ऑक्सोअम्लों की अम्लता फास्फोरस परमाणु से सीधे जुड़े $OH$ समूहों की संख्या पर निर्भर करती है। फास्फोरस परमाणु से सीधे जुड़े प्रोटॉन अम्लीय नहीं होते हैं।
$1$. $H_3PO_2$ (हाइपोफास्फोरस अम्ल) में एक $P-OH$ समूह होता है,इसलिए यह मोनोबेसिक है (अम्लीय प्रोटॉन की संख्या = $1$)।
$2$. $H_3PO_3$ (फास्फोरस अम्ल) में दो $P-OH$ समूह होते हैं,इसलिए यह डाईबेसिक है (अम्लीय प्रोटॉन की संख्या = $2$)।
$3$. $H_3PO_4$ (फास्फोरिक अम्ल) में तीन $P-OH$ समूह होते हैं,इसलिए यह ट्राईबेसिक है (अम्लीय प्रोटॉन की संख्या = $3$)।
अतः,अम्लीय प्रोटॉन की संख्या क्रमशः $1$,$2$ और $3$ है। सही विकल्प $A$ है।
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$C_5H_{10}$ आण्विक सूत्र वाले एक हाइड्रोकार्बन ने सांद्र सल्फ्यूरिक एसिड और पानी की कुछ बूंदों के साथ उपचार करने पर एक तृतीयक अल्कोहल का उत्पादन किया। उसी हाइड्रोकार्बन ने जब अम्लीय पोटेशियम परमैंगनेट के साथ प्रतिक्रिया की,तो एक कीटोन और एक कार्बोक्सिलिक एसिड का उत्पादन हुआ। हाइड्रोकार्बन $....$ है।
A
साइक्लोपेंटेन
B
$1$-पेंटीन
C
$2$-मिथाइल$-2$-ब्यूटीन
D
$2$-पेंटीन

Solution

(C) $C_5H_{10}$ आण्विक सूत्र वाला हाइड्रोकार्बन एक एल्कीन है।
$2$-मिथाइल$-2$-ब्यूटीन $(CH_3-C(CH_3)=CH-CH_3)$ का एसिड-उत्प्रेरित जलयोजन मार्कोवनिकोव के नियम का पालन करते हुए $2$-मिथाइल$-2$-ब्यूटेनॉल बनाता है,जो एक तृतीयक $(3^{\circ})$ अल्कोहल है।
अम्लीय $KMnO_4$ के साथ $2$-मिथाइल$-2$-ब्यूटीन का ऑक्सीडेटिव विदलन द्वि-आबंध को तोड़कर एसीटोन $(CH_3COCH_3)$ और एसिटिक एसिड $(CH_3COOH)$ उत्पन्न करता है,जो क्रमशः एक कीटोन और एक कार्बोक्सिलिक एसिड हैं।
इसलिए,सही हाइड्रोकार्बन $2$-मिथाइल$-2$-ब्यूटीन है।
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एक अज्ञात कार्बनिक यौगिक में उपस्थित नाइट्रोजन का आकलन ड्यूमा विधि द्वारा $17.7 \%$ भारानुसार किया गया। यह यौगिक संभवतः है ....
A
नाइट्रोबेंजीन
B
पिरिडीन
C
नाइट्रोमेथेन
D
ऐनिलीन

Solution

(B) सही यौगिक ज्ञात करने के लिए,हम प्रत्येक विकल्प में नाइट्रोजन की प्रतिशत मात्रा की गणना करते हैं: $\text{N का प्रतिशत} = \frac{\text{N का परमाणु द्रव्यमान}}{\text{यौगिक का मोलर द्रव्यमान}} \times 100$.
$A$. नाइट्रोबेंजीन $(C_6H_5NO_2)$: मोलर द्रव्यमान = $123 \ g/mol$. $\%N = \frac{14}{123} \times 100 = 11.38 \%$.
$B$. पिरिडीन $(C_5H_5N)$: मोलर द्रव्यमान = $79 \ g/mol$. $\%N = \frac{14}{79} \times 100 = 17.72 \%$.
$C$. नाइट्रोमेथेन $(CH_3NO_2)$: मोलर द्रव्यमान = $61 \ g/mol$. $\%N = \frac{14}{61} \times 100 = 22.95 \%$.
$D$. ऐनिलीन $(C_6H_7N)$: मोलर द्रव्यमान = $93 \ g/mol$. $\%N = \frac{14}{93} \times 100 = 15.05 \%$.
इन मानों की तुलना दिए गए $17.7 \%$ से करने पर,यौगिक पिरिडीन है।
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$50 \ mL$ $0.1 \ M$ दुर्बल अम्ल $HA$ का अनुमापन $0.1 \ M$ $NaOH$ के साथ किया जाता है। $HA$ का आयनन स्थिरांक $(K_a)$ $1.8 \times 10^{-5}$ है। दी गई जानकारी का उपयोग करके और नीचे दिए गए विकल्पों में से,$HA$ और $NaOH$ के अनुमापन के लिए सबसे अच्छा सूचक $....$ है।
A
मिथाइल ऑरेंज ($pH$ $3.2$ से $4.4$ तक बदलने पर रंग लाल से पीला हो जाता है)
B
मिथाइल रेड ($pH$ $4$ से $6.3$ तक बदलने पर रंग लाल से पीला हो जाता है)
C
फिनोलफथेलिन ($pH$ $8.3$ से $11$ तक बदलने पर रंग रंगहीन से गुलाबी हो जाता है)
D
एलिज़ारिन येलो का सोडियम लवण ($pH$ $10$ से $12$ तक बदलने पर रंग पीला से लाल हो जाता है)

Solution

(C) इस अनुमापन में एक दुर्बल अम्ल $(HA)$ और एक प्रबल क्षार $(NaOH)$ शामिल है।
तुल्यता बिंदु पर,लवण $NaA$ का जल-अपघटन होता है: $A^- + H_2O \rightleftharpoons HA + OH^-$.
तुल्यता बिंदु पर $pH$ का मान $7$ से अधिक (क्षारीय) होता है।
दुर्बल अम्ल-प्रबल क्षार अनुमापन के लिए,तुल्यता बिंदु पर $pH$ सीमा आमतौर पर $8$ से $10$ के बीच होती है।
फिनोलफथेलिन की $pH$ सीमा $8.3$ से $11$ है,जो इस अनुमापन के तुल्यता बिंदु $pH$ को कवर करती है।
इसलिए,फिनोलफथेलिन सबसे उपयुक्त सूचक है।
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नीचे दिए गए $P-V$ (दाब-आयतन) आरेख पर विचार करें,जहाँ एक आदर्श गैस को उत्क्रमणीय रूप से अवस्था $X$ से अवस्था $Y$ में परिवर्तित किया जाता है। निम्नलिखित में से,इस प्रक्रिया के अनुरूप सही $T-S$ (तापमान-एन्ट्रॉपी) आरेख कौन सा है?
Question diagram
A
Option A
B
Option B
C
Option C
D
Option D

Solution

(C) दिया गया $P-V$ आरेख $X$ से $Y$ तक एक क्षैतिज रेखा दिखाता है,जो एक समदाबी प्रक्रिया (दाब $P$ स्थिर है) को दर्शाता है।
एक समदाबी प्रक्रिया में आदर्श गैस के लिए,चार्ल्स के नियम के अनुसार,$V \propto T$ होता है। चूँकि आयतन $V$,$X$ से $Y$ तक बढ़ता है,इसलिए तापमान $T$ भी बढ़ना चाहिए।
समदाबी प्रक्रिया के लिए,एन्ट्रॉपी में परिवर्तन $\Delta S = nC_p \ln(T_f/T_i)$ द्वारा दिया जाता है। चूँकि $T_f > T_i$,इसलिए एन्ट्रॉपी $S$ भी बढ़ती है।
समदाबी प्रक्रिया के लिए $T$ और $S$ के बीच का संबंध $T = T_0 e^{\Delta S / nC_p}$ है,जो एक घातीय वृद्धि वक्र को दर्शाता है।
अतः,$T-S$ आरेख में $T$ और $S$ दोनों को एक वक्र पर बढ़ते हुए दिखाना चाहिए,जो विकल्प $C$ के अनुरूप है।
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ChemistryMediumMCQKVPY · 2021
$d^6$ संयोजकता इलेक्ट्रॉनिक विन्यास वाला एक धातु आयन $M^{n+}$ तीन द्विदंतुक लिगेंड्स के साथ मिलकर एक संकुल बनाता है। यह मानते हुए कि क्रिस्टल क्षेत्र विपाटन $(\Delta_0) >$ युग्मन ऊर्जा है,$d$-कक्षक इलेक्ट्रॉनिक विन्यास क्या होगा?
A
$t_{2g}^6 e_g^0$
B
$t_{2g}^4 e_g^2$
C
$t_{2g}^3 e_g^3$
D
$t_{2g}^5 e_g^1$

Solution

(A) एक अष्टफलकीय संकुल के लिए,जब क्रिस्टल क्षेत्र विपाटन ऊर्जा $(\Delta_0)$ युग्मन ऊर्जा $(P)$ से अधिक होती है,तो संकुल एक निम्न-चक्रण (low-spin) संकुल होता है।
निम्न-चक्रण $d^6$ विन्यास में,इलेक्ट्रॉन पहले निम्न ऊर्जा वाले $t_{2g}$ कक्षकों को पूरी तरह से भरेंगे,उसके बाद ही उच्च ऊर्जा वाले $e_g$ कक्षकों में जाएंगे।
अतः,सभी $6$ इलेक्ट्रॉन $t_{2g}$ कक्षकों में भर जाएंगे,जिससे विन्यास $t_{2g}^6 e_g^0$ प्राप्त होगा।
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ChemistryMediumMCQKVPY · 2021
$[Fe(H_2O)_6]^{3+}$ और $[Co(NH_3)_6]^{3+}$ में केंद्रीय परमाणु का संकरण क्रमशः क्या है?
A
$sp^3d^2$ और $sp^3d^2$
B
$sp^3d^2$ और $d^2sp^3$
C
$d^2sp^3$ और $d^2sp^3$
D
$d^2sp^3$ और $sp^3d^2$

Solution

(B) $[Fe(H_2O)_6]^{3+}$ के लिए:
$Fe$,$+3$ ऑक्सीकरण अवस्था में है,$Fe^{3+} = [Ar] 3d^5$।
$H_2O$ एक दुर्बल क्षेत्र लिगेंड $(WFL)$ है,इसलिए यह इलेक्ट्रॉनों का युग्मन नहीं करता है।
अतः,संकरण $sp^3d^2$ (बाह्य कक्षक संकुल) है।
$[Co(NH_3)_6]^{3+}$ के लिए:
$Co$,$+3$ ऑक्सीकरण अवस्था में है,$Co^{3+} = [Ar] 3d^6$।
$NH_3$ एक प्रबल क्षेत्र लिगेंड $(SFL)$ है,जो $3d$ कक्षकों में इलेक्ट्रॉनों का युग्मन करता है।
अतः,संकरण $d^2sp^3$ (आंतरिक कक्षक संकुल) है।
इसलिए,संकरण क्रमशः $sp^3d^2$ और $d^2sp^3$ हैं।
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विद्युत अपघट्य (आयनिक) विलयन की चालकता के बारे में गलत कथन कौन सा है?
A
यह विलायक की श्यानता (viscosity) से स्वतंत्र है
B
यह आयनों के आकार और उनके विलायकन (solvation) पर निर्भर करता है
C
यह विद्युत अपघट्य की सांद्रता में वृद्धि के साथ बढ़ती है
D
यह तापमान में वृद्धि के साथ बढ़ती है

Solution

(A) सही उत्तर $A$ है।
विद्युत अपघट्य विलयन की चालकता विलायक की प्रकृति और उसकी श्यानता पर निर्भर करती है।
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ChemistryMediumMCQKVPY · 2021
रासायनिक अभिक्रिया के संघट्ट सिद्धांत (collision theory) के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन गलत है?
A
अभिकारक अणुओं को कठोर गोले माना जाता है।
B
अभिकारकों के बीच संघट्ट आवृत्ति (collision frequency) उन कारकों में से एक है जो अभिक्रिया की दर निर्धारित करती है।
C
त्रिविम कारक (steric factor) संघट्ट के दौरान अभिकारक अणुओं के सापेक्ष अभिविन्यास को ध्यान में रखता है।
D
यह सिद्धांत संघट्ट के दौरान अणुओं के संरचनात्मक पहलुओं को ध्यान में रखता है।

Solution

(D)
संघट्ट सिद्धांत संघट्ट के दौरान अणुओं के संरचनात्मक पहलुओं को ध्यान में नहीं रखता है।
यह मानता है कि अभिकारक अणु कठोर गोले हैं और केवल उनकी गतिज ऊर्जा और अभिविन्यास पर विचार करता है,न कि उनकी आंतरिक संरचना पर।
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ChemistryDifficultMCQKVPY · 2021
निम्नलिखित में से कौन सी क्रिस्टल प्रणाली है जिसमें एंड-सेंटर्ड (end-centered) शामिल है?
A
$a=b=c$ और $\alpha=\beta=\gamma=90^{\circ}$
B
$a=b \neq c$ और $\alpha=\beta=\gamma=90^{\circ}$
C
$a \neq b \neq c$ और $\alpha=\beta=\gamma=90^{\circ}$
D
$a=b=c$ और $\alpha=\beta=\gamma \neq 90^{\circ}$

Solution

(C) एंड-सेंटर्ड यूनिट सेल ऑर्थोरोम्बिक और मोनोक्लिनिक क्रिस्टल प्रणालियों में पाया जाता है।
ऑर्थोरोम्बिक प्रणाली के लिए,पैरामीटर $a \neq b \neq c$ और $\alpha=\beta=\gamma=90^{\circ}$ होते हैं।
दिए गए विकल्पों के साथ तुलना करने पर,विकल्प $C$ ऑर्थोरोम्बिक प्रणाली को दर्शाता है।
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क्रिस्टलीय सिलिकॉन में,$Si$ परमाणु सभी $ccp$ साइटों और प्रत्येक एकांतर चतुष्फलकीय रिक्ति (tetrahedral void) पर कब्जा करते हैं। पैकिंग दक्षता का मान $....\%$ के सबसे निकट है।
A
$40$
B
$28$
C
$54$
D
$34$

Solution

(D) सही विकल्प $D$ है।
$ccp$ जालक में,प्रति इकाई सेल $4$ परमाणु होते हैं।
सिलिकॉन परमाणु सभी $ccp$ साइटों ($4$ परमाणु) और प्रत्येक एकांतर चतुष्फलकीय रिक्ति ($4$ परमाणु) पर कब्जा करते हैं।
प्रति इकाई सेल परमाणुओं की कुल संख्या,$Z = 4 + 4 = 8$.
कोने पर स्थित $Si$ परमाणु और चतुष्फलकीय रिक्ति पर स्थित $Si$ परमाणु के बीच की दूरी $\frac{\sqrt{3}a}{4}$ है,जो $2r$ के बराबर है।
अतः,$2r = \frac{\sqrt{3}a}{4} \implies r = \frac{\sqrt{3}a}{8}$.
पैकिंग दक्षता $(PE)$ = $\frac{Z \times \frac{4}{3} \pi r^3}{a^3} \times 100$.
मान रखने पर: $PE = \frac{8 \times \frac{4}{3} \pi (\frac{\sqrt{3}a}{8})^3}{a^3} \times 100$.
$PE = \frac{8 \times \frac{4}{3} \pi \times \frac{3\sqrt{3}a^3}{512}}{a^3} \times 100 = \frac{\pi \sqrt{3}}{16} \times 100 \approx 34\%$.
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ChemistryMediumMCQKVPY · 2021
निम्नलिखित विधियों में से:
$(i)$ विद्युत-अपघट्य का योग
$(ii)$ वैद्युतकणसंचलन (Electrophoresis)
$(iii)$ रक्षी कोलाइड का योग
$(iv)$ विपरीत आवेशित सोल का योग
लायोफोबिक सोल का स्कंदन (coagulation) किसके द्वारा किया जा सकता है?
A
केवल $(i)$ और $(iv)$
B
केवल $(ii), (iii)$ और $(iv)$
C
केवल $(iii)$ और $(iv)$
D
केवल $(i), (ii)$ और $(iv)$

Solution

(D) लायोफोबिक सोल का स्कंदन कोलाइडल कणों पर मौजूद आवेश को उदासीन करके किया जाता है।
$(i)$ विद्युत-अपघट्य मिलाने से आयन प्राप्त होते हैं जो आवेश को उदासीन करते हैं।
$(ii)$ वैद्युतकणसंचलन में कण विपरीत आवेशित इलेक्ट्रोड की ओर गति करते हैं,जिससे वे उदासीन होकर स्कंदित हो जाते हैं।
$(iv)$ विपरीत आवेशित सोल मिलाने से पारस्परिक स्कंदन होता है।
$(iii)$ रक्षी कोलाइड का उपयोग लायोफोबिक सोल को स्थिर करने के लिए किया जाता है,न कि स्कंदन के लिए।
अतः,सही विधियाँ $(i), (ii)$ और $(iv)$ हैं।
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ChemistryMediumMCQKVPY · 2021
फेनिलमैग्नीशियम ब्रोमाइड,यौगिक $X$ के साथ अभिक्रिया करने के बाद अम्ल के साथ उपचारित करने पर बेंजाइल अल्कोहल देता है। यौगिक $X$ है
A
कार्बन डाइऑक्साइड
B
एथिलीन
C
फॉर्मेल्डिहाइड
D
मेथनॉल

Solution

(C) ग्रिग्नार्ड अभिकर्मक $(PhMgBr)$ की फॉर्मेल्डिहाइड $(HCHO)$ के साथ अभिक्रिया और उसके बाद अम्लीय जल-अपघटन $(H_3O^+)$ प्राथमिक अल्कोहल देता है।
विशेष रूप से,न्यूक्लियोफिलिक फेनिल समूह $(Ph^-)$ फॉर्मेल्डिहाइड $(HCHO)$ के इलेक्ट्रोफिलिक कार्बोनिल कार्बन पर आक्रमण करता है,जिससे एक मध्यवर्ती एल्कोक्साइड $(Ph-CH_2-O^-)$ बनता है।
इसके बाद अम्ल द्वारा प्रोटोनीकरण से बेंजाइल अल्कोहल $(Ph-CH_2OH)$ प्राप्त होता है।
अतः,यौगिक $X$ फॉर्मेल्डिहाइड है।
39
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निम्नलिखित में से कौन सा यौगिक सबसे तेज़ सोलवोलिसिस (solvolysis) से गुजरता है?
A
$Ph-CH_2-CH_2-CH(Br)-CH_3$
B
$Me-CH_2-CH(Br)-CH_2-Ph$
C
$Me-CH(Br)-CH(CH_3)-Ph$
D
$Ph-CH(Br)-CH_2-CH_2-Br$

Solution

(C) सोलवोलिसिस की दर लिविंग ग्रुप $(Br^-)$ के निकलने के बाद बनने वाले कार्बोकेशन मध्यवर्ती की स्थिरता के सीधे आनुपातिक होती है।
विकल्प $C$ में,यौगिक $Me-CH(Br)-CH(CH_3)-Ph$ है। $Br^-$ के हटने पर,यह एक फिनाइल समूह और एक मिथाइल समूह के बगल में एक सेकेंडरी कार्बोकेशन बनाता है।
यह कार्बोकेशन फिनाइल समूह के अनुनाद प्रभाव (resonance effect) और मिथाइल समूह के प्रेरक प्रभाव $(+I)$ द्वारा स्थिर होता है,जो इसे दिए गए विकल्पों में सबसे अधिक स्थिर बनाता है।
इसलिए,विकल्प $C$ में दिया गया यौगिक सबसे तेज़ सोलवोलिसिस से गुजरता है।
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एक यौगिक $X$ को अल्कोहलिक $AgNO_3$ के साथ गर्म करने पर सफेद अवक्षेप प्राप्त होता है। $X$ के ऑक्सीकरण से $C_8H_6O_4$ सूत्र वाला एक अम्ल प्राप्त होता है,जो गर्म करने पर आसानी से चक्रीय एनहाइड्राइड बनाता है। यौगिक $X$ है
A
Option A
B
Option B
C
Option C
D
Option D

Solution

(A) यौगिक $X$ अल्कोहलिक $AgNO_3$ के साथ अभिक्रिया करके सफेद अवक्षेप देता है,जो एक अभिक्रियाशील हैलोजन परमाणु (जैसे बेंजिलिक ब्रोमाइड) की उपस्थिति को दर्शाता है।
ऑक्सीकरण पर,$X$ सूत्र $C_8H_6O_4$ वाला एक अम्ल देता है। यह अम्ल थैलिक अम्ल $(benzene-1,2-dicarboxylic \ acid)$ है,जो गर्म करने पर चक्रीय एनहाइड्राइड (थैलिक एनहाइड्राइड) बनाने के लिए जाना जाता है।
$X$ के ऑक्सीकरण पर थैलिक अम्ल प्राप्त करने के लिए,यह एक ऑर्थो-प्रतिस्थापित बेंजीन व्युत्पन्न होना चाहिए जिसमें दो पार्श्व श्रृंखलाएं हों जिन्हें $-COOH$ समूहों में ऑक्सीकृत किया जा सके। इसके लिए उपयुक्त संरचना $o-xylene$ व्युत्पन्न है,विशेष रूप से $1-(bromomethyl)-2-methylbenzene$।
अतः,यौगिक $X$ $o-methylbenzyl \ bromide$ (या $1-(bromomethyl)-2-methylbenzene$) है।
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निम्नलिखित में से किस विधि का उपयोग एनिलिन को एथिलएमीन से अलग करने के लिए किया जा सकता है?
A
$CHCl_3$ और $KOH$ के साथ उपचार
B
$NaNO_2 / HCl$ के साथ अभिक्रिया और उसके बाद $2-$नेफ्थोल के साथ उपचार
C
बेंजीन सल्फोनाइल क्लोराइड के साथ अभिक्रिया
D
बेंजाल्डिहाइड के साथ अभिक्रिया

Solution

(B) एनिलिन $(C_6H_5NH_2)$ एक एरोमैटिक प्राथमिक एमीन है,जबकि एथिलएमीन $(C_2H_5NH_2)$ एक एलिफैटिक प्राथमिक एमीन है।
जब $0-5 \ ^\circ C$ पर $NaNO_2 / HCl$ के साथ उपचार किया जाता है,तो एनिलिन बेंजीन डायजोनियम क्लोराइड बनाता है,जो कम तापमान पर स्थिर होता है और $2-$नेफ्थोल के साथ युग्मन अभिक्रिया (coupling reaction) करके एक एज़ो डाई (लाल रंग) बनाता है।
इसके विपरीत,एथिलएमीन एक अस्थिर एलिफैटिक डायजोनियम लवण बनाता है जो तुरंत विघटित होकर $N_2$ गैस मुक्त करता है और इथेनॉल बनाता है,इसलिए यह एज़ो डाई युग्मन अभिक्रिया नहीं देता है।
अतः,$NaNO_2 / HCl$ के साथ अभिक्रिया और उसके बाद $2-$नेफ्थोल के साथ उपचार द्वारा इनके बीच अंतर किया जा सकता है।
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नीचे दिखाए गए मोनोमर्स की cationic polymerization के प्रति अपेक्षित अभिक्रियाशीलता का क्रम क्या है?
$I: CH_2=CH-CO_2CH_3$
$II: CH_2=CH-Cl$
$III: CH_2=CH-CH_3$
$IV: CH_2=CH-Ph$
A
$I < II < III < IV$
B
$IV < III < II < I$
C
$III < IV < II < I$
D
$IV < III < I < II$

Solution

(A) Cationic polymerization,carbocation मध्यवर्ती के निर्माण के माध्यम से आगे बढ़ती है। बहुलकीकरण (polymerization) की दर बनने वाले carbocation की स्थिरता के सीधे आनुपातिक होती है।
परिणामी carbocations की स्थिरता इस प्रकार है:
$I: CH_3O_2C-CH_2-CH_2^+$ (एस्टर समूह के $-I$ और $-M$ प्रभावों द्वारा अस्थिर)
$II: Cl-CH_2-CH_2^+$ ($Cl$ के $-I$ प्रभाव द्वारा अस्थिर)
$III: CH_3-CH_2-CH_2^+$ (मिथाइल समूह के $+I$ प्रभाव द्वारा स्थिर)
$IV: Ph-CH_2-CH_2^+$ (फिनाइल रिंग के साथ अनुनाद (resonance) द्वारा अत्यधिक स्थिर)
अतः,स्थिरता का क्रम $I < II < III < IV$ है। परिणामस्वरूप,cationic polymerization के लिए अभिक्रियाशीलता का क्रम $I < II < III < IV$ है।
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निम्नलिखित रूपांतरण का उपयोग करके सबसे अच्छी तरह से किया जा सकता है:
A
$THF$ में $LiAlH_4$
B
$THF$ में $BH_3$
C
$EtOH$ में $NaBH_4$
D
$hexane$ में $DIBAL-H$

Solution

(C) $EtOH$ में $NaBH_4$ एक मृदु अपचायक (mild reducing agent) है।
यह अणु में मौजूद अन्य कार्यात्मक समूहों जैसे एस्टर,कार्बोक्सिलिक एसिड या नाइट्राइल को प्रभावित किए बिना एल्डिहाइड समूह $(-CHO)$ को प्राथमिक अल्कोहल $(-CH_2OH)$ में चयनात्मक रूप से अपचयित करता है।
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संकुलों का उनकी संरचना और चुंबकीय गुण के साथ सही मिलान है:
संकुल संरचना और चुंबकीय गुण
$i$. $NiCl_4^{2-}$ $p$. चतुष्फलकीय और प्रतिचुंबकीय
$ii$. $Ni(CO)_4$ $q$. चतुष्फलकीय और अनुचुंबकीय
$iii$. $PtCl_4^{2-}$ $r$. वर्ग समतलीय और प्रतिचुंबकीय
$iv$. $Ni(CN)_4^{2-}$ $s$. वर्ग समतलीय और अनुचुंबकीय
A
$i$ $\rightarrow q, ii$ $\rightarrow p, iii$ $\rightarrow r, iv$ $\rightarrow r$
B
$i$ $\rightarrow q, ii$ $\rightarrow p, iii$ $\rightarrow r, iv$ $\rightarrow r$
C
$i$ $\rightarrow q, ii$ $\rightarrow p, iii$ $\rightarrow r, iv$ $\rightarrow r$
D
$i$ $\rightarrow q, ii$ $\rightarrow p, iii$ $\rightarrow r, iv$ $\rightarrow r$

Solution

(A) सही मिलान इस प्रकार है:
$i$. $NiCl_4^{2-}$: $Ni^{2+}$ का विन्यास $d^8$ है। $Cl^-$ एक दुर्बल क्षेत्र लिगेंड है,इसलिए यह चतुष्फलकीय संकुल बनाता है जो दो अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों के कारण अनुचुंबकीय है। मिलान: $i \rightarrow q$.
$ii$. $Ni(CO)_4$: $Ni$ का विन्यास $d^{10}$ है। $CO$ एक प्रबल क्षेत्र लिगेंड है,जो चतुष्फलकीय प्रतिचुंबकीय संकुल बनाता है। मिलान: $ii \rightarrow p$.
$iii$. $PtCl_4^{2-}$: $Pt^{2+}$ का विन्यास $5d^8$ है। $5d$ श्रेणी के तत्वों के लिए क्रिस्टल क्षेत्र विपाटन ऊर्जा अधिक होती है,जिससे यह वर्ग समतलीय प्रतिचुंबकीय संकुल बनाता है। मिलान: $iii \rightarrow r$.
$iv$. $Ni(CN)_4^{2-}$: $Ni^{2+}$ का विन्यास $d^8$ है। $CN^-$ एक प्रबल क्षेत्र लिगेंड है,जो इलेक्ट्रॉनों का युग्मन करता है,जिससे वर्ग समतलीय प्रतिचुंबकीय संकुल बनता है। मिलान: $iv \rightarrow r$.
अतः,सही क्रम $i$ $\rightarrow q, ii$ $\rightarrow p, iii$ $\rightarrow r, iv$ $\rightarrow r$ है।
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$651 \ g$ एथिलीन ग्लाइकॉल $(HOCH_2CH_2OH)$ को $363 \ K$ पर $1.5 \ kg$ पानी में घोला जाता है। $363 \ K$ पर शुद्ध पानी का वाष्प दाब $0.7 \ atm$ है। आदर्श विलयन व्यवहार मानते हुए,विलयन के ऊपर पानी का वाष्प दाब ($atm$ में) किसके निकटतम है?
A
$0.57$
B
$0.62$
C
$0.65$
D
$0.68$

Solution

(B) एथिलीन ग्लाइकॉल $(HOCH_2CH_2OH)$ का मोलर द्रव्यमान $62 \ g/mol$ है।
एथिलीन ग्लाइकॉल के मोल $(n_{solute}) = \frac{651 \ g}{62 \ g/mol} = 10.5 \ mol$.
पानी के मोल $(n_{solvent}) = \frac{1500 \ g}{18 \ g/mol} \approx 83.33 \ mol$.
अवाष्पशील विलेय के लिए राउल्ट के नियम का उपयोग करते हुए: $\frac{P^{\circ} - P}{P^{\circ}} = \frac{n_{solute}}{n_{solute} + n_{solvent}}$.
$\frac{0.7 - P}{0.7} = \frac{10.5}{10.5 + 83.33} = \frac{10.5}{93.83} \approx 0.1119$.
$0.7 - P = 0.7 \times 0.1119 \approx 0.0783$.
$P = 0.7 - 0.0783 = 0.6217 \ atm$.
अतः,वाष्प दाब $0.62 \ atm$ के निकटतम है।
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ChemistryMediumMCQKVPY · 2021
निम्नलिखित रूपांतरण में बनने वाला मुख्य उत्पाद होने की सबसे अधिक संभावना है
Question diagram
A
$1-bromo-1-cyclobutyl-ethane$
B
$1-bromo-1-methylcyclopentane$
C
$1-bromo-3-cyclobutylpropane$
D
$1-bromo-1-cyclopentylmethane$

Solution

(B) यह अभिक्रिया दो चरणों में होती है:
$1$. $NaBH_4/MeOH$ के साथ साइक्लोब्यूटिल मिथाइल कीटोन का अपचयन $1-cyclobutyl-1-ethanol$ देता है।
$2$. $HBr$ के साथ उपचार से अल्कोहल का प्रोटोनेशन होता है,जिसके बाद पानी के अणु के निकलने से एक द्वितीयक कार्बोकेशन बनता है।
$3$. यह द्वितीयक कार्बोकेशन अधिक स्थिर साइक्लोपेंटिल कार्बोकेशन बनाने के लिए वलय विस्तार (ring expansion) से गुजरता है।
$4$. अधिक स्थिर तृतीयक कार्बोकेशन बनाने के लिए $1,2-hydride$ शिफ्ट होती है।
$5$. अंत में,$Br^-$ द्वारा न्यूक्लियोफिलिक हमले से मुख्य उत्पाद के रूप में $1-bromo-1-methylcyclopentane$ प्राप्त होता है।
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ChemistryMediumMCQKVPY · 2021
$C_4H_{11}N$ सूत्र वाला एक यौगिक $X$,$HNO_2$ के साथ अभिक्रिया करके नाइट्रोजन मुक्त करता है और यौगिक $Y$ बनाता है। यौगिक $Y$,$I_2 / NaOH$ के साथ उपचारित करने पर कार्बोक्सिलिक अम्ल का सोडियम लवण देता है। यौगिक $X$ है
A
$CH_3-CH_2-CH_2-CH_2-NH_2$
B
$CH_3-CH(CH_3)-CH_2-NH_2$
C
$CH_3-CH(NH_2)-CH_2-CH_3$
D
$(CH_3)_3C-NH_2$

Solution

(C) $1$. एलिफैटिक प्राथमिक एमीन की $HNO_2$ के साथ अभिक्रिया से अल्कोहल प्राप्त होता है और $N_2$ गैस निकलती है।
$2$. यौगिक $Y$,$I_2 / NaOH$ (आयोडोफॉर्म परीक्षण) के साथ अभिक्रिया करके कार्बोक्सिलिक अम्ल का सोडियम लवण देता है,जो यह दर्शाता है कि $Y$ एक द्वितीयक अल्कोहल है जिसमें $CH_3-CH(OH)-$ समूह उपस्थित है।
$3$. दिए गए विकल्पों में से,$CH_3-CH(NH_2)-CH_2-CH_3$ (ब्यूटेन$-2-$एमीन) $HNO_2$ के साथ अभिक्रिया करके ब्यूटेन$-2-$ऑल $(CH_3-CH(OH)-CH_2-CH_3)$ बनाता है।
$4$. ब्यूटेन$-2-$ऑल में $CH_3-CH(OH)-$ समूह होता है,जो $I_2 / NaOH$ के साथ आयोडोफॉर्म परीक्षण देता है और सोडियम प्रोपियोनेट तथा आयोडोफॉर्म $(CHI_3)$ बनाता है।
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ChemistryDifficultMCQKVPY · 2021
फिनोल सोडियम हाइड्रॉक्साइड की उपस्थिति में $CO_2$ के साथ अभिक्रिया करता है और उसके बाद अम्लीकरण (acidification) द्वारा एक वाष्पशील यौगिक $X$ देता है। यौगिक $X$ की $H_2SO_4$ की उत्प्रेरक मात्रा की उपस्थिति में एसिटिक एनहाइड्राइड के साथ उपचार करने पर $Y$ प्राप्त होता है। निम्नलिखित में से:
$(i)$ एंटीपायरेटिक
$(ii)$ एंटी-इंफ्लेमेटरी
$(iii)$ नारकोटिक एनाल्जेसिक
$(iv)$ एंटीप्लेटलेट
यौगिक $Y$ द्वारा प्रदर्शित गुण कौन से हैं?
A
$i, ii, iii$ और $iv$
B
केवल $i, ii$ और $iii$
C
केवल $ii, iii$ और $iv$
D
केवल $i, ii$ और $iv$

Solution

(D) $NaOH$ की उपस्थिति में फिनोल की $CO_2$ के साथ अभिक्रिया और उसके बाद अम्लीकरण कोल्बे-श्मिट अभिक्रिया है,जो यौगिक $X$ के रूप में सैलिसिलिक एसिड देती है।
$H_2SO_4$ की उपस्थिति में सैलिसिलिक एसिड $(X)$ की एसिटिक एनहाइड्राइड के साथ अभिक्रिया (एसिटिलेशन) करने पर यौगिक $Y$ के रूप में एसिटाइलसैलिसिलिक एसिड प्राप्त होता है,जिसे आमतौर पर एस्पिरिन कहा जाता है।
एस्पिरिन एक गैर-नारकोटिक एनाल्जेसिक है। यह निम्नलिखित गुण प्रदर्शित करता है:
$(i)$ एंटीपायरेटिक (बुखार कम करता है)
$(ii)$ एंटी-इंफ्लेमेटरी (सूजन कम करता है)
$(iv)$ एंटीप्लेटलेट (रक्त का थक्का जमने से रोकता है)
यह नारकोटिक एनाल्जेसिक नहीं है।
अतः,सही गुण $(i), (ii)$ और $(iv)$ हैं।
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ChemistryDifficultMCQKVPY · 2021
$1 \, mol$ बेंजीन और $1 \, mol$ नाइट्रोबेंजीन के मिश्रण की अभिक्रिया $AlCl_3$ की उपस्थिति में $1 \, mol$ एसिटाइल क्लोराइड के साथ कराई जाती है। मुख्य उत्पाद है/हैं
A
एसिटोफिनोन
B
$3$-नाइट्रोएसिटोफिनोन
C
एसिटोफिनोन और $3$-नाइट्रोएसिटोफिनोन का $1:1$ मिश्रण
D
$1,3$-डाईएसिटाइल बेंजीन

Solution

(A) सही उत्तर $A$ है।
नाइट्रोबेंजीन में,$-NO_2$ समूह एक शक्तिशाली इलेक्ट्रॉन-आकर्षक समूह है,जो बेंजीन वलय के इलेक्ट्रॉन घनत्व को काफी कम कर देता है।
फ्रीडल-क्राफ्ट्स एसिलेशन एक इलेक्ट्रॉनरागी एरोमैटिक प्रतिस्थापन अभिक्रिया है,जिसके लिए एसिलियम आयन $(CH_3CO^+)$ के साथ अभिक्रिया करने के लिए इलेक्ट्रॉन-समृद्ध एरोमैटिक वलय की आवश्यकता होती है।
$-NO_2$ समूह के प्रबल निष्क्रियकारी प्रभाव के कारण,नाइट्रोबेंजीन फ्रीडल-क्राफ्ट्स एसिलेशन अभिक्रिया नहीं देता है।
इसलिए,केवल बेंजीन ही $AlCl_3$ की उपस्थिति में एसिटाइल क्लोराइड के साथ अभिक्रिया करके एसिटोफिनोन बनाता है।
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ChemistryMediumMCQKVPY · 2021
समूह-$16$ के तत्वों के हाइड्राइडों की ऊष्मीय स्थिरता का क्रम क्या है?
A
$H_2Te < H_2Se < H_2S < H_2O$
B
$H_2O < H_2Se < H_2S < H_2Te$
C
$H_2Te < H_2Se < H_2O < H_2S$
D
$H_2S < H_2Se < H_2Te < H_2O$

Solution

(A) हाइड्राइडों की ऊष्मीय स्थिरता बंध वियोजन एन्थैल्पी पर निर्भर करती है।
जैसे-जैसे हम समूह-$16$ में $O$ से $Te$ की ओर नीचे जाते हैं,केंद्रीय परमाणु का आकार बढ़ता है।
इससे $E-H$ बंध की लंबाई बढ़ जाती है (जहाँ $E = O, S, Se, Te$)।
जैसे-जैसे बंध की लंबाई बढ़ती है,बंध वियोजन एन्थैल्पी कम हो जाती है,जिससे बंध कमजोर हो जाता है।
इसलिए,समूह में नीचे जाने पर ऊष्मीय स्थिरता घटती है।
ऊष्मीय स्थिरता का सही क्रम $H_2O > H_2S > H_2Se > H_2Te$ या $H_2Te < H_2Se < H_2S < H_2O$ है।
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ChemistryMediumMCQKVPY · 2021
$Co(NO_3)_2$ का गुलाबी रंग का जलीय विलयन $HCl$ मिलाने पर धीरे-धीरे नीला हो जाता है। यह रंग परिवर्तन किसके निर्माण के कारण होता है?
A
$[CoCl_4]^{2-}$
B
$[CoCl_6]^{4-}$
C
$[Co(H_2O)_4Cl_2]$
D
$[Co(H_2O)_2Cl_4]^{2-}$

Solution

(A) जलीय विलयन का गुलाबी रंग अष्टफलकीय संकुल $[Co(H_2O)_6]^{2 }$ की उपस्थिति के कारण होता है।
$HCl$ मिलाने पर,क्लोराइड आयन $(Cl^-)$ लिगेंड के रूप में कार्य करते हैं और पानी के अणुओं को विस्थापित करके चतुष्फलकीय संकुल $[CoCl_4]^{2-}$ बनाते हैं,जो नीले रंग का होता है।
अभिक्रिया: $[Co(H_2O)_6]^{2 } ({\text{गुलाबी}}) 4Cl^- \rightarrow [CoCl_4]^{2-} ( {\text{नीला}}) 6H_2O$.

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