AIPMT 2004 Biology Question Paper with Answer and Solution in Hindi

166 QuestionsHindiWith Solutions

BiologyQ51116 of 166 questions

Page 2 of 2 · Hindi

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BiologyMediumMCQAIPMT · 2004
हरितलवक (chloroplast) में क्लोरोफिल कहाँ उपस्थित होता है?
A
बाह्य झिल्ली
B
आंतरिक झिल्ली
C
थाइलाकोइड्स
D
स्ट्रोमा

Solution

(C) हरितलवक पादप कोशिकाओं में पाई जाने वाली दोहरी झिल्ली से घिरी हुई कोशिकांग है।
हरितलवक के अंदर चपटी,थैलीनुमा संरचनाओं का एक तंत्र होता है जिसे थाइलाकोइड्स कहा जाता है।
क्लोरोफिल सहित वर्णक थाइलाकोइड झिल्लियों में स्थित होते हैं।
ये वर्णक प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया के दौरान प्रकाश ऊर्जा को पकड़ने के लिए आवश्यक होते हैं।
इसलिए,क्लोरोफिल का सही स्थान थाइलाकोइड्स है।
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BiologyMediumMCQAIPMT · 2004
तंत्रिका झिल्ली की विश्राम अवस्था के दौरान,यदि सांद्रता प्रवणता के कारण विसरण की अनुमति दी जाती है,तो किस आयन को कोशिका में प्रवेश करने दिया जाता है?
A
$K^+$ कोशिका में
B
$K^+$ और $Na^+$ कोशिका के बाहर
C
$Na^+$ कोशिका में
D
$Na^+$ कोशिका के बाहर

Solution

(C) तंत्रिका झिल्ली की विश्राम अवस्था में,एक्सोनल झिल्ली पोटेशियम आयनों $(K^+)$ के लिए काफी अधिक पारगम्य होती है और सोडियम आयनों $(Na^+)$ के लिए लगभग अपारगम्य होती है।
सांद्रता प्रवणता के कारण,$K^+$ आयन कोशिका से बाहर विसरित होने की प्रवृत्ति रखते हैं,जबकि $Na^+$ आयनों को प्रवेश करने से रोका जाता है।
हालाँकि,यदि हम झिल्ली की पारगम्यता और विद्युत-रासायनिक प्रवणता पर विचार करें,तो विश्राम झिल्ली विभव मुख्य रूप से $K^+$ के कोशिका से बाहर रिसाव द्वारा बनाए रखा जाता है।
यदि प्रश्न यह पूछता है कि किस आयन को कोशिका में प्रवेश करने दिया जाता है,तो यह $Na^+$ है जो कोशिका में प्रवेश करता है जब झिल्ली की पारगम्यता बदलती है (जैसे कि क्रिया विभव के दौरान)।
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BiologyMediumMCQAIPMT · 2004
मनुष्यों में $Vagus$ तंत्रिका को चोट लगने से निम्नलिखित में से किसे प्रभावित होने की संभावना नहीं है?
A
जीभ की गति
B
जठरांत्र संबंधी गति
C
अग्नाशयी स्राव
D
हृदय गति

Solution

(A) $Vagus$ तंत्रिका (कपाल तंत्रिका $X$) पैरासिम्पेथेटिक तंत्रिका तंत्र का एक प्रमुख घटक है।
यह हृदय,फेफड़ों और पाचन तंत्र (पेट और आंतों सहित) को नियंत्रित करती है और हृदय गति,जठरांत्र संबंधी गतिशीलता और ग्रंथियों के स्राव (जैसे अग्नाशयी स्राव) जैसे कार्यों को विनियमित करती है।
जीभ की गति मुख्य रूप से $Hypoglossal$ तंत्रिका (कपाल तंत्रिका $XII$) द्वारा नियंत्रित होती है।
इसलिए,$Vagus$ तंत्रिका में चोट लगने से जीभ की गति प्रभावित नहीं होगी।
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निम्नलिखित में से कौन सा हार्मोन एक अमीनो एसिड से व्युत्पन्न (derived) है?
A
एपिनेफ्रिन
B
प्रोजेस्टेरोन
C
प्रोस्टाग्लैंडिन
D
एस्ट्रोजन

Solution

(A) हार्मोन को उनकी रासायनिक प्रकृति के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है।
$1$. एपिनेफ्रिन (जिसे एड्रेनालाईन के रूप में भी जाना जाता है) टायरोसिन नामक अमीनो एसिड से व्युत्पन्न होता है।
$2$. प्रोजेस्टेरोन और एस्ट्रोजन स्टेरॉयड हार्मोन हैं जो कोलेस्ट्रॉल से बनते हैं।
$3$. प्रोस्टाग्लैंडिन लिपिड के व्युत्पन्न (फैटी एसिड) होते हैं।
अतः,एपिनेफ्रिन सही उत्तर है।
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निम्नलिखित में से कौन सा युग्म हार्मोन और उसकी कमी से होने वाले रोग के साथ सही ढंग से सुमेलित है?
A
ल्यूटिनाइजिंग हार्मोन - अंडोत्सर्ग (ovulation) में विफलता
B
इंसुलिन - डायबिटीज इन्सिपिडस
C
थायरोक्सिन - टेटनी
D
पैराथायराइड हार्मोन - डायबिटीज मेलिटस

Solution

(A) $1$. $Luteinizing$ $hormone$ $(LH)$ महिलाओं में अंडोत्सर्ग (ovulation) के लिए आवश्यक है। इसकी कमी से अंडोत्सर्ग में विफलता होती है।
$2$. $Diabetes$ $insipidus$ $Vasopressin$ $(ADH)$ की कमी के कारण होता है,न कि $Insulin$ की कमी से।
$3$. $Tetany$ $Parathyroid$ $hormone$ $(PTH)$ की कमी के कारण होता है,न कि $Thyroxine$ की कमी से।
$4$. $Diabetes$ $mellitus$ $Insulin$ की कमी के कारण होता है,न कि $Parathyroid$ $hormone$ की कमी से।
अतः,सही सुमेलित युग्म $Luteinizing$ $hormone$ और अंडोत्सर्ग में विफलता है।
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तेल के स्थिरांक (constant) के लिए कौन सा फैटी एसिड जिम्मेदार है?
A
ओलिक एसिड
B
लिनोलेनिक एसिड
C
लिनोलेइक एसिड
D
एरुसिक एसिड

Solution

(D) तेल के स्थिरांक (constant) शब्द तेल के विशिष्ट भौतिक और रासायनिक गुणों को संदर्भित करता है,जैसे कि आयोडीन मान,जो असंतृप्ति की डिग्री को मापता है। एरुसिक एसिड $(C_{22}H_{42}O_2)$ एक मोनोअनसैचुरेटेड ओमेगा-$9$ फैटी एसिड है जो रेपसीड और सरसों के तेल में उच्च सांद्रता में पाया जाता है। इन विशिष्ट तेलों की शुद्धता और संरचना निर्धारित करने के लिए विश्लेषण में इसे अक्सर एक मार्कर या स्थिरांक के रूप में उपयोग किया जाता है।
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पादपों में कौन सा तत्व सबसे अधिक मात्रा में उपस्थित होता है?
A
कार्बन
B
नाइट्रोजन
C
मैंगनीज
D
आयरन

Solution

(A) पादप ऊतकों के तात्विक विश्लेषण से पता चलता है कि कार्बन $(C)$,हाइड्रोजन $(H)$ और ऑक्सीजन $(O)$ पादपों में पाए जाने वाले सबसे प्रचुर तत्व हैं। इनमें से,कार्बन सभी कार्बनिक अणुओं का प्राथमिक संरचनात्मक घटक है,जिसमें कार्बोहाइड्रेट,प्रोटीन,लिपिड और न्यूक्लिक एसिड शामिल हैं,जो पादप के शुष्क भार का अधिकांश हिस्सा बनाते हैं। इसलिए,नाइट्रोजन,मैंगनीज या आयरन जैसे अन्य तत्वों की तुलना में कार्बन सबसे अधिक मात्रा में उपस्थित होता है।
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BiologyMediumMCQAIPMT · 2004
उच्च जीवों में आनुवंशिक पुनर्संयोजन (genetic recombination) के परिणामस्वरूप होने वाला क्रॉसिंग ओवर ....... के बीच होता है।
A
द्विसूत्री (bivalent) की सिस्टर क्रोमैटिड्स
B
द्विसूत्री (bivalent) की नॉन-सिस्टर क्रोमैटिड्स
C
दो संतति केंद्रक
D
दो अलग द्विसूत्री

Solution

(B) क्रॉसिंग ओवर एक जैविक प्रक्रिया है जो अर्धसूत्रीविभाजन-$I$ $(meiosis-I)$ की प्रोफेज-$I$ की $pachytene$ अवस्था के दौरान होती है।
इसमें समजात गुणसूत्रों की नॉन-सिस्टर क्रोमैटिड्स के बीच आनुवंशिक सामग्री का आदान-प्रदान होता है।
यह प्रक्रिया आनुवंशिक पुनर्संयोजन की ओर ले जाती है,जो संतानों में आनुवंशिक विविधता पैदा करने के लिए आवश्यक है।
इसलिए,सही उत्तर द्विसूत्री की नॉन-सिस्टर क्रोमैटिड्स है।
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दैहिक कोशिका चक्र में:
A
$G_1$ चरण में $DNA$ की मात्रा मूल कोशिका में मौजूद $DNA$ से दोगुनी होती है।
B
$DNA$ का प्रतिकृतियन $S$ चरण में होता है।
C
लंबे समसूत्री विभाजन चरण के कारण छोटी अंतरावस्था होती है।
D
$G_2$ चरण समसूत्री विभाजन चरण का अनुसरण करता है।

Solution

(B) कोशिका चक्र दो मुख्य चरणों से बना है: अंतरावस्था (Interphase) और $M$-चरण (समसूत्री विभाजन)।
अंतरावस्था को $G_1$,$S$ और $G_2$ चरणों में विभाजित किया गया है।
$1$. $G_1$ चरण (Gap $1$): कोशिका वृद्धि करती है और $DNA$ प्रतिकृतियन के लिए तैयारी करती है।
$2$. $S$ चरण (Synthesis): $DNA$ का प्रतिकृतियन होता है,जिससे प्रति कोशिका $DNA$ की मात्रा दोगुनी हो जाती है।
$3$. $G_2$ चरण (Gap $2$): कोशिका प्रोटीन और अंगों का संश्लेषण करके समसूत्री विभाजन के लिए तैयारी करती है।
$4$. $M$-चरण: केंद्रक और कोशिका द्रव्य का वास्तविक विभाजन होता है।
इसलिए,यह कथन कि $DNA$ का प्रतिकृतियन $S$ चरण में होता है,सही है।
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BiologyMediumMCQAIPMT · 2004
कोशिका चक्र के $M$ चरण के दौरान निम्नलिखित में से कौन सी घटना केंद्रक आवरण के निर्माण से जुड़ी है?
A
गुणसूत्रों के विसघनित (decondense) होने पर केंद्रक आवरण का निर्माण होता है।
B
गुणसूत्रों से प्रतिलेखन (transcription) होता है और केंद्रक आवरण का निर्माण होता है।
C
एक संकुचनशील वलय (contractile ring) बनता है और फ्रेग्मोप्लास्ट का निर्माण होता है।
D
एक संकुचनशील वलय बनता है और गुणसूत्रों से प्रतिलेखन होता है।

Solution

(A) कोशिका चक्र के $M$ चरण के दौरान,विशेष रूप से अंत्यावस्था $(Telophase)$ के अंत में,संतति गुणसूत्रों के चारों ओर केंद्रक आवरण का पुनर्गठन होता है। यह प्रक्रिया तब शुरू होती है जब गुणसूत्र विसघनित (decondense) होने लगते हैं (अपनी सघन अवस्था खो देते हैं) और वापस क्रोमैटिन में बदल जाते हैं। केंद्रक लैमिना और केंद्रक छिद्र कॉम्प्लेक्स आनुवंशिक सामग्री को घेरने के लिए एकत्रित होते हैं,जिससे केंद्रक आवरण का प्रभावी ढंग से पुनर्गठन होता है।
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यदि आपको प्याज के मूलग्र (root tips) दिए जाएं और आपसे गुणसूत्रों की गणना करने के लिए कहा जाए,तो आप समसूत्री विभाजन (mitosis) की किस अवस्था को चुनेंगे?
A
मध्यावस्था (Metaphase)
B
अन्त्यावस्था (Telophase)
C
पश्चावस्था (Anaphase)
D
पूर्वावस्था (Prophase)

Solution

(A) कोशिका में गुणसूत्रों की संख्या गिनने के लिए $Metaphase$ (मध्यावस्था) सबसे उपयुक्त अवस्था है।
$Metaphase$ के दौरान,गुणसूत्र कोशिका की मध्यवर्ती प्लेट (metaphase plate) पर संरेखित हो जाते हैं।
इस अवस्था में,गुणसूत्र सबसे अधिक संघनित,स्पष्ट रूप से दिखाई देने वाले और अलग-अलग होते हैं,जो इसे गुणसूत्रों के अध्ययन और गणना के लिए आदर्श बनाते हैं।
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BiologyEasyMCQAIPMT · 2004
हरितलवक (क्लोरोप्लास्ट) में क्लोरोफिल कहाँ पाया जाता है?
A
ग्रेना
B
पायरेनॉइड
C
स्ट्रोमा
D
ग्रेना और स्ट्रोमा दोनों में

Solution

(A) क्लोरोफिल प्रकाश ऊर्जा को ग्रहण करने के लिए जिम्मेदार प्राथमिक प्रकाश संश्लेषी वर्णक है।
हरितलवक में,क्लोरोफिल के अणु थायलाकोइड झिल्ली के भीतर स्थित होते हैं।
ये थायलाकोइड झिल्ली एक के ऊपर एक व्यवस्थित होकर $Grana$ (ग्रेना) नामक संरचनाएं बनाती हैं।
इसलिए,क्लोरोफिल विशेष रूप से हरितलवक के $Grana$ में पाया जाता है,जहाँ प्रकाश संश्लेषण की प्रकाश-निर्भर अभिक्रियाएं होती हैं।
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BiologyMediumMCQAIPMT · 2004
यदि कोई पौधा कम तीव्रता वाला प्रकाश प्राप्त करता है,तो:
A
पौधा सूर्य के प्रकाश को पकड़ने के लिए व्यापक प्रकाश संश्लेषक इकाइयां विकसित करता है।
B
पौधा सूर्य के प्रकाश में अधिक मात्रा में $CO_2$ का स्थिरीकरण करता है।
C
जड़ तंत्र का विस्तार अधिक होता है।
D
पत्तियां पर्णकंटकों (leaf spines) में परिवर्तित हो जाती हैं।

Solution

(A) जब पौधे कम तीव्रता वाले प्रकाश (छायादार स्थितियों) में उगते हैं,तो वे प्रकाश के अवशोषण को अधिकतम करने के लिए रूपात्मक और शारीरिक अनुकूलन प्रदर्शित करते हैं। ऐसा ही एक अनुकूलन यह है कि पौधा प्रकाश अवशोषण के लिए सतह क्षेत्र को बढ़ाने हेतु चौड़ी पत्तियां या बड़ी प्रकाश संश्लेषक इकाइयां विकसित करता है। यह पौधे को सीमित प्रकाश उपलब्धता के बावजूद प्रकाश संश्लेषण की कुशल दर बनाए रखने में मदद करता है।
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BiologyMediumMCQAIPMT · 2004
$C_3$ पौधों में प्रकाश संश्लेषण की अप्रकाशीय अभिक्रिया (dark reaction) के दौरान बनने वाला पहला स्थिर उत्पाद कौन सा है?
A
मैलिक एसिड
B
ऑक्सेलिक एसिड
C
$3$-फॉस्फोग्लिसरिक एसिड ($3$-$PGA$)
D
फॉस्फोग्लिसराल्डिहाइड

Solution

(C) $C_3$ पौधों में,प्राथमिक कार्बन स्थिरीकरण का चरण केल्विन चक्र के दौरान होता है।
इस प्रक्रिया के दौरान,$RuBisCO$ एंजाइम $CO_2$ के साथ $RuBP$ $(Ribulose-1,5-bisphosphate)$ के कार्बोक्सिलेशन को उत्प्रेरित करता है।
यह अभिक्रिया $3$-फॉस्फोग्लिसरिक एसिड ($3$-$PGA$) के दो अणुओं के निर्माण का परिणाम देती है,जो एक $3$-कार्बन यौगिक है।
$3$-$PGA$,$C_3$ पौधों में केल्विन चक्र का पहला स्थिर उत्पाद है।
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BiologyMediumMCQAIPMT · 2004
ग्रहणी (duodenum) द्वारा सामान्यतः कौन से दो हार्मोन स्रावित होते हैं जो ब्रूनर की ग्रंथियों के स्राव को उत्तेजित करते हैं?
A
काइनेज,एस्ट्रोजन
B
सिक्रेटिन,कोलेसिस्टोकाइनिन
C
प्रोलैक्टिन,पैराथॉर्मोन
D
एस्ट्रैडियोल,प्रोजेस्टेरोन

Solution

(B) ग्रहणी (duodenum) दो मुख्य हार्मोन,$Secretin$ (सिक्रेटिन) और $Cholecystokinin$ ($CCK$ - कोलेसिस्टोकाइनिन) का स्राव करती है,जो पाचन प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
$Secretin$ अग्न्याशय को बाइकार्बोनेट युक्त अग्न्याशयी रस छोड़ने के लिए उत्तेजित करता है और यह ब्रूनर की ग्रंथियों (जो ग्रहणी के सबम्यूकोसा में स्थित होती हैं) को श्लेष्म और एंजाइम स्रावित करने के लिए भी उत्तेजित करता है।
$Cholecystokinin$ $(CCK)$ पित्ताशय को पित्त छोड़ने के लिए और अग्न्याशय को पाचक एंजाइम छोड़ने के लिए उत्तेजित करता है।
अतः,सही विकल्प $B$ है।
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जब रक्त में $CO_2$ की सांद्रता बढ़ती है,तो श्वसन:
A
उथला और धीमा हो जाता है
B
श्वसन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता
C
धीमा और गहरा हो जाता है
D
तेज और गहरा हो जाता है

Solution

(D) मस्तिष्क के मेडुला क्षेत्र में स्थित श्वसन लयबद्धता केंद्र श्वसन के नियमन के लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार है। यह केंद्र $CO_2$ और हाइड्रोजन आयनों के प्रति अत्यधिक संवेदनशील होता है। रक्त में $CO_2$ की सांद्रता में वृद्धि होने पर यह रसायन-संवेदी क्षेत्र को उत्तेजित करता है,जो बदले में श्वसन लयबद्धता केंद्र को आवश्यक समायोजन करने का संकेत देता है। इसके परिणामस्वरूप शरीर से अतिरिक्त $CO_2$ को बाहर निकालने के लिए श्वसन की दर और गहराई बढ़ जाती है। इसलिए,श्वसन तेज और गहरा हो जाता है।
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जब किसी रोगी के रक्त विश्लेषण में कार्बोक्सी हीमोग्लोबिन का स्तर उच्च पाया जाता है,तो निम्नलिखित में से कौन सा निष्कर्ष सबसे अधिक सही हो सकता है? रोगी ने .......... की असामान्य रूप से उच्च सांद्रता वाली प्रदूषित हवा में सांस ली होगी।
A
कार्बन डाइसल्फ़ाइड
B
क्लोरोफॉर्म
C
कार्बन डाइऑक्साइड
D
कार्बन मोनोऑक्साइड

Solution

(D) कार्बोक्सी हीमोग्लोबिन तब बनता है जब कार्बन मोनोऑक्साइड $(CO)$ रक्त में हीमोग्लोबिन के साथ जुड़ जाता है।
कार्बन मोनोऑक्साइड की हीमोग्लोबिन के साथ जुड़ने की क्षमता ऑक्सीजन $(O_2)$ की तुलना में लगभग $200-250$ गुना अधिक होती है।
जब $CO$ को सांस के माध्यम से लिया जाता है,तो यह हीमोग्लोबिन के साथ जुड़कर कार्बोक्सी हीमोग्लोबिन नामक एक स्थिर यौगिक बनाता है,जो रक्त को शरीर के ऊतकों तक प्रभावी ढंग से ऑक्सीजन ले जाने से रोकता है।
इसलिए,रक्त में कार्बोक्सी हीमोग्लोबिन का उच्च स्तर कार्बन मोनोऑक्साइड के उच्च संपर्क का संकेत देता है।
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हृदय के पेसमेकर को ........ के रूप में जाना जाता है।
A
$AV$ नोड
B
बंडल ऑफ हिज़
C
$SA$ नोड
D
पुरकिंजे तंतु

Solution

(C) हृदय का लयबद्ध संकुचन हृदय की मांसपेशियों के तंतुओं के एक विशेष समूह द्वारा शुरू होता है जिसे $SA$ नोड (साइनो-एट्रियल नोड) कहा जाता है।
यह दाएं अलिंद के ऊपरी दाएं कोने में स्थित होता है।
चूंकि यह क्रियात्मक विभव (action potential) उत्पन्न करता है जो हृदय के संकुचन की गति निर्धारित करता है,इसलिए इसे हृदय का प्राकृतिक पेसमेकर कहा जाता है।
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BiologyMediumMCQAIPMT · 2004
यदि आपको किसी रोगी से रक्त एकत्र करना है और रक्त कोशिकाओं और प्लाज्मा के पृथक्करण के लिए इसे एक टेस्ट ट्यूब में रखना है,तो आप निम्नलिखित में से किस टेस्ट ट्यूब का उपयोग नहीं करेंगे?
A
कैल्शियम कार्बोनेट युक्त टेस्ट ट्यूब
B
स्टेराइल (जंतु रहित) टेस्ट ट्यूब
C
हेपरिन युक्त टेस्ट ट्यूब
D
सोडियम ऑक्सालेट युक्त टेस्ट ट्यूब

Solution

(A) रक्त को प्लाज्मा और रक्त कोशिकाओं में अलग करने के लिए,रक्त को तरल अवस्था में रखना आवश्यक है (थक्का जमने से रोकना)।
$1$. हेपरिन और सोडियम ऑक्सालेट एंटीकोआगुलंट्स हैं जो कैल्शियम आयनों को हटाकर या चेलेट करके रक्त का थक्का जमने से रोकते हैं,जो जमावट प्रक्रिया के लिए आवश्यक हैं।
$2$. एक स्टेराइल टेस्ट ट्यूब संग्रह के लिए मानक है।
$3$. कैल्शियम कार्बोनेट कैल्शियम आयनों का एक स्रोत है। रक्त में कैल्शियम मिलाने से जमावट की प्रक्रिया को बढ़ावा मिलता है,जिससे रक्त का थक्का जम जाएगा,जिससे प्लाज्मा और कोशिकाओं को प्रभावी ढंग से अलग करना असंभव हो जाएगा। इसलिए,कैल्शियम कार्बोनेट युक्त टेस्ट ट्यूब का उपयोग नहीं किया जाना चाहिए।
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$ABO$ रक्त समूह प्रणाली में,यदि दोनों एंटीजन मौजूद हैं लेकिन कोई एंटीबॉडी मौजूद नहीं है,तो व्यक्ति का रक्त समूह ................... होगा।
A
$B$
B
$O$
C
$AB$
D
$A$

Solution

(C) $ABO$ रक्त समूह प्रणाली में,लाल रक्त कोशिकाओं की सतह पर मौजूद एंटीजन रक्त समूह का निर्धारण करते हैं।
$1$. रक्त समूह $A$ वाले व्यक्तियों में एंटीजन $A$ और प्लाज्मा में एंटीबॉडी $b$ होता है।
$2$. रक्त समूह $B$ वाले व्यक्तियों में एंटीजन $B$ और प्लाज्मा में एंटीबॉडी $a$ होता है।
$3$. रक्त समूह $AB$ वाले व्यक्तियों में लाल रक्त कोशिकाओं पर दोनों एंटीजन $A$ और $B$ मौजूद होते हैं,लेकिन प्लाज्मा में कोई एंटीबॉडी ($a$ या $b$) नहीं होती है।
$4$. रक्त समूह $O$ वाले व्यक्तियों में लाल रक्त कोशिकाओं पर कोई एंटीजन नहीं होता है,लेकिन प्लाज्मा में दोनों एंटीबॉडी $a$ और $b$ मौजूद होते हैं।
अतः,वह रक्त समूह जिसमें दोनों एंटीजन मौजूद हों और कोई एंटीबॉडी न हो,वह $AB$ है।
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मुक्तजीवी नाइट्रोजन स्थिरीकरण करने वाला साइनोबैक्टीरियम जो जलीय फर्न अज़ोला के साथ सहजीवी संबंध बनाता है,वह ............. है।
A
टोलीपोथ्रिक्स
B
क्लोरेला
C
नोस्टॉक
D
एनाबीना

Solution

(D) जलीय फर्न $Azolla$ (अज़ोला) साइनोबैक्टीरियम $Anabaena$ $azollae$ (एनाबीना अज़ोली) के साथ सहजीवी संबंध बनाए रखता है।
यह साइनोबैक्टीरियम फर्न की पत्तियों के गुहिकाओं (cavities) में रहता है।
यह वायुमंडलीय नाइट्रोजन का स्थिरीकरण करता है,जिसका उपयोग फर्न अपनी वृद्धि के लिए करता है।
अतः,$Anabaena$ (एनाबीना) सही उत्तर है।
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निम्नलिखित में से मिट्टी के प्रकार और उनकी विशेषताओं का कौन सा युग्म सही ढंग से सुमेलित नहीं है?
A
लैटेराइट - एल्युमीनियम के यौगिकों से युक्त।
B
टेरा रोसा - गुलाब के लिए अत्यधिक उपयुक्त।
C
चेर्नोज़ेम्स - दुनिया की सबसे उपजाऊ मिट्टी।
D
काली मिट्टी - कैल्शियम कार्बोनेट से भरपूर।

Solution

(B) सही उत्तर $B$ है।
$1$. लैटेराइट मिट्टी आयरन और एल्युमीनियम ऑक्साइड से समृद्ध होती है,इसलिए $A$ में दिया गया कथन सही है।
$2$. टेरा रोसा चूना पत्थर के अपक्षय से बनने वाली लाल रंग की मिट्टी है; यह विशेष रूप से गुलाब के लिए उपयुक्त नहीं है,इसलिए $B$ में दिया गया कथन गलत है।
$3$. चेर्नोज़ेम्स काले रंग की मिट्टी है जिसमें ह्यूमस की मात्रा अधिक होती है और इसे दुनिया की सबसे उपजाऊ मिट्टी माना जाता है,इसलिए $C$ में दिया गया कथन सही है।
$4$. काली मिट्टी (रेगुर मिट्टी) आमतौर पर कैल्शियम कार्बोनेट,मैग्नीशियम,पोटाश और चूने से भरपूर होती है,इसलिए $D$ में दिया गया कथन सही है।
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यदि विकिरण द्वारा सभी $Nitrogenase$ एंजाइम नष्ट हो जाएं,तो क्या नहीं होगा?
A
लेग्युमिनस (फलीदार) पौधों द्वारा नाइट्रोजन का स्थिरीकरण नहीं होगा।
B
वायुमंडल में नाइट्रोजन का स्थिरीकरण नहीं होगा।
C
लेग्युमिनस पौधों में नाइट्रेट का नाइट्राइट में रूपांतरण नहीं होगा।
D
मिट्टी में अमोनियम का नाइट्रेट में रूपांतरण नहीं होगा।

Solution

(A) $Nitrogenase$ एक महत्वपूर्ण एंजाइम कॉम्प्लेक्स है जो जैविक नाइट्रोजन स्थिरीकरण प्रक्रिया के लिए जिम्मेदार है,जिसमें वायुमंडलीय $N_2$ को अमोनिया $(NH_3)$ में परिवर्तित किया जाता है।
यह प्रक्रिया मुख्य रूप से डायज़ोट्रोफिक बैक्टीरिया द्वारा की जाती है,जैसे कि $Rhizobium$,जो लेग्युमिनस पौधों की जड़ ग्रंथियों में सहजीवी संबंध में रहते हैं।
यदि $Nitrogenase$ एंजाइम नष्ट हो जाते हैं,तो वायुमंडलीय नाइट्रोजन का जैविक अपचयन (reduction) नहीं हो पाएगा।
इसलिए,लेग्युमिनस पौधे वायुमंडलीय नाइट्रोजन को उपयोगी रूप में स्थिर करने में असमर्थ होंगे।
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यदि सभी $Nitrogenase$ एंजाइमों को विकिरण द्वारा निष्क्रिय कर दिया जाए,तो निम्नलिखित में से क्या नहीं होगा?
A
फलीदार पौधों में नाइट्रोजन स्थिरीकरण
B
वायुमंडल में नाइट्रोजन स्थिरीकरण
C
फलीदार पौधों में नाइट्रेट का नाइट्राइट में रूपांतरण
D
मिट्टी में अमोनियम का नाइट्रेट में रूपांतरण

Solution

(A) $Nitrogenase$ एंजाइम जैविक नाइट्रोजन स्थिरीकरण की प्रक्रिया के लिए आवश्यक है,जिसमें वायुमंडलीय $N_2$ को $NH_3$ (अमोनिया) में परिवर्तित किया जाता है।
फलीदार पौधे $Rhizobium$ बैक्टीरिया के साथ सहजीवी संबंध बनाते हैं,जिनमें वायुमंडलीय नाइट्रोजन को स्थिर करने के लिए $Nitrogenase$ एंजाइम होता है।
यदि $Nitrogenase$ निष्क्रिय हो जाता है,तो पौधा जैविक नाइट्रोजन स्थिरीकरण करने में असमर्थ होगा।
इसलिए,फलीदार पौधों में नाइट्रोजन स्थिरीकरण नहीं होगा।
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कथन: पेरिस्टोम कैप्सूल के मुख पर पाए जाने वाले दांत जैसे प्रवर्धों की एक झालर है।
कारण: यह दो प्रकार के हो सकते हैं: नेमेटोडोंटस और ऑर्थोडोंटस।
A
यदि कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण,कथन की सही व्याख्या है।
B
यदि कथन और कारण दोनों सही हैं लेकिन कारण,कथन की सही व्याख्या नहीं है।
C
यदि कथन सही है लेकिन कारण गलत है।
D
यदि कथन और कारण दोनों गलत हैं।

Solution

(B) पेरिस्टोम एक विशिष्ट संरचना है जो मॉस में कैप्सूल के मुख पर पाए जाने वाले दांत जैसे प्रवर्धों से बनी होती है।
ये दांत बीजाणुओं के क्रमिक प्रसार में मदद करते हैं।
पेरिस्टोम दांतों को उनकी संरचना के आधार पर दो मुख्य प्रकारों में वर्गीकृत किया गया है:
$1$. नेमेटोडोंटस: ये मृत कोशिकाओं के बंडलों से बनी ठोस संरचनाएं हैं। उदाहरण के लिए $Polytrichum$,$Pogonatum$ और $Tetraphis$।
$2$. ऑर्थोडोंटस: ये पतले,झिल्लीदार,अनुप्रस्थ रूप से धारीदार दांतों से बने होते हैं,जो आसन्न कोशिकाओं की कोशिका भित्ति के मोटे हिस्सों द्वारा बनते हैं।
चूंकि पेरिस्टोम की परिभाषा और उसका वर्गीकरण दोनों सही हैं,इसलिए कथन और कारण दोनों सत्य हैं,लेकिन कारण यह स्पष्ट नहीं करता है कि पेरिस्टोम दांत जैसे प्रवर्धों की झालर क्यों है।
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BiologyEasyMCQAIPMT · 2004
कोशिका चक्र के $M-$चरण के दौरान निम्नलिखित में से कौन सी घटना केंद्रक आवरण के पुनर्गठन से पहले होती है?
A
गुणसूत्रों का विसंघनन (Decondensation) और केंद्रकीय लैमिना का पुनर्संयोजन
B
गुणसूत्रों से अनुलेखन (Transcription) और केंद्रकीय लैमिना का पुनर्संयोजन
C
संकुचनशील वलय (Contractile ring) का निर्माण और फ्रेग्मोप्लास्ट का निर्माण
D
संकुचनशील वलय का निर्माण और गुणसूत्रों से अनुलेखन

Solution

(A) कोशिका चक्र के $M-$चरण के दौरान,विशेष रूप से अंत्यावस्था (Telophase) में,संतति गुणसूत्रों के चारों ओर केंद्रक आवरण का पुनर्गठन शुरू होता है।
इस पुनर्गठन से पहले,जो गुणसूत्र मध्यावस्था और पश्चावस्था के दौरान अत्यधिक संघनित (condensed) थे,उनका विसंघनन (decondensation) होना आवश्यक है ताकि वे वापस क्रोमैटिन अवस्था में आ सकें।
साथ ही,केंद्रकीय लैमिना,जो केंद्रक के अंदर एक सघन तंतुमय जाल है,का पुनर्संयोजन होना चाहिए ताकि नए बन रहे केंद्रक आवरण को संरचनात्मक आधार मिल सके।
अतः,गुणसूत्रों का विसंघनन और केंद्रकीय लैमिना का पुनर्संयोजन वे महत्वपूर्ण घटनाएं हैं जो केंद्रक आवरण के पुनर्गठन से पहले होती हैं।
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BiologyMediumMCQAIPMT · 2004
उस बीजांड को क्या कहते हैं जो इस प्रकार मुड़ा होता है कि बीजांडकाय और भ्रूणपोष बीजांडवृंत के समकोण पर स्थित होते हैं?
A
हेमीट्रोपस (अनुप्रस्थमुखी)
B
कैम्पायलोट्रोपस (वक्रमुखी)
C
एनाट्रोपस (अधोमुखी)
D
ऑर्थोट्रोपस (ऊर्ध्वमुखी)

Solution

(A) हेमीट्रोपस $(Hemitropous)$ बीजांड में,बीजांड का मुख्य भाग बीजांडवृंत के समकोण $(90^{\circ})$ पर स्थित होता है।
इस प्रकार में,बीजांडकाय और भ्रूणपोष बीजांडवृंत के साथ समकोण पर होते हैं।
ऑर्थोट्रोपस $(Orthotropous)$ बीजांड सीधे होते हैं,एनाट्रोपस $(Anatropous)$ बीजांड उल्टे $(180^{\circ})$ होते हैं,और कैम्पायलोट्रोपस $(Campylotropous)$ बीजांड में बीजांड का शरीर मुड़ा हुआ होता है।
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BiologyEasyMCQAIPMT · 2004
मानव मादा में,अंडोत्सर्ग (ovulation) सामान्यतः मासिक चक्र के दौरान कब होता है?
A
स्रावी प्रावस्था के मध्य में
B
स्रावी प्रावस्था समाप्त होने से पहले
C
प्रोलिफेरेटिव प्रावस्था की शुरुआत में
D
प्रोलिफेरेटिव प्रावस्था के अंत में

Solution

(D) एक सामान्य $28$ दिवसीय मासिक चक्र में,चक्र को विभिन्न प्रावस्थाओं में विभाजित किया जाता है।
$1$. आर्तव (menstrual) प्रावस्था $1$ से $5$ दिन तक होती है।
$2$. पुटकीय (प्रोलिफेरेटिव) प्रावस्था $6$ से $13$ दिन तक होती है।
$3$. अंडोत्सर्ग लगभग $14$वें दिन होता है,जो प्रोलिफेरेटिव प्रावस्था का अंत दर्शाता है।
$4$. ल्यूटियल (स्रावी) प्रावस्था $15$ से $28$ दिन तक होती है।
अतः,अंडोत्सर्ग प्रोलिफेरेटिव प्रावस्था के अंत में होता है।
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BiologyMediumMCQAIPMT · 2004
एक संकरण में,एक जनक के माइटोकॉन्ड्रिया में उत्परिवर्तन है। इस मामले में,इस जनक को नर के रूप में लिया जाता है। विश्लेषण के दौरान,$F_2$ पीढ़ी में यह उत्परिवर्तन किस संतति में देखा जाता है?
A
$\frac{1}{3}$ संतति में
B
किसी भी संतति में नहीं देखा जाएगा
C
सभी संतति में
D
$50\%$ संतति में

Solution

(B) माइटोकॉन्ड्रियल $DNA$ विशेष रूप से अंड कोशिका के कोशिका द्रव्य के माध्यम से वंशागत होता है (मातृ वंशागति)।
चूंकि माइटोकॉन्ड्रियल उत्परिवर्तन वाले जनक को नर के रूप में उपयोग किया जाता है,शुक्राणु केवल केंद्रकीय $DNA$ का योगदान देता है और युग्मनज में लगभग कोई कोशिका द्रव्य नहीं जोड़ता है।
इसलिए,माइटोकॉन्ड्रियल उत्परिवर्तन $F_1$ पीढ़ी में स्थानांतरित नहीं होता है,और परिणामस्वरूप,यह $F_2$ पीढ़ी में भी मौजूद नहीं होगा।
अतः,यह उत्परिवर्तन किसी भी संतति में नहीं देखा जाता है।
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BiologyMediumMCQAIPMT · 2004
उत्परिवर्तन (mutation) के मामले में,जब एडेनिन के स्थान पर गुआनिन आ जाता है,तो इसे क्या कहा जाता है?
A
फ्रेमशिफ्ट उत्परिवर्तन
B
अनुलेखन (Transcription)
C
बिंदु उत्परिवर्तन (Point mutation)
D
ट्रांसवर्जन

Solution

(C) बिंदु उत्परिवर्तन (Point mutation) $DNA$ के एक ही बेस पेयर (base pair) में होने वाला परिवर्तन है।
जब एक प्यूरीन दूसरे प्यूरीन द्वारा (जैसे,एडेनिन का गुआनिन द्वारा) या एक पिरिमिडीन दूसरे पिरिमिडीन द्वारा प्रतिस्थापित होता है,तो इसे ट्रांजिशन कहा जाता है।
जब एक प्यूरीन पिरिमिडीन द्वारा प्रतिस्थापित होता है या इसके विपरीत,तो इसे ट्रांसवर्जन कहा जाता है।
हालाँकि,चूंकि प्रश्न एक ही बेस के परिवर्तन से जुड़े उत्परिवर्तन की सामान्य श्रेणी के बारे में पूछता है,इसलिए 'बिंदु उत्परिवर्तन' इस प्रकार के प्रतिस्थापन उत्परिवर्तन के लिए सबसे उपयुक्त वर्गीकरण है।
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BiologyMediumMCQAIPMT · 2004
फलमक्खी $Drosophila$ में दो जीनों $A$ और $B$ के स्वतंत्र अपव्यूहन (independent assortment) का अभाव किसके कारण होता है?
A
पृथक्करण
B
पुनर्संयोजन
C
सहलग्नता
D
विनिमय

Solution

(C) स्वतंत्र अपव्यूहन मेंडल द्वारा वर्णित एक सिद्धांत है,जो बताता है कि विभिन्न लक्षणों के लिए जीन युग्मक निर्माण के दौरान स्वतंत्र रूप से अलग होते हैं।
हालाँकि,जब दो जीन एक ही गुणसूत्र पर एक-दूसरे के करीब स्थित होते हैं,तो वे एक साथ वंशागत होने की प्रवृत्ति रखते हैं,इस घटना को सहलग्नता (Linkage) कहा जाता है।
$Drosophila$ में,$T.H. Morgan$ ने देखा कि जीन $A$ और $B$ स्वतंत्र अपव्यूहन नहीं दिखाते थे क्योंकि वे एक ही गुणसूत्र पर भौतिक रूप से जुड़े हुए थे।
इसलिए,स्वतंत्र अपव्यूहन का अभाव सहलग्नता के कारण होता है।
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BiologyMediumMCQAIPMT · 2004
मनुष्यों में,$X$-गुणसूत्र पर स्थित अप्रभावी जीन हमेशा:
A
घातक (Lethal)
B
उप-घातक (Sub-lethal)
C
नर में अभिव्यक्त होते हैं
D
मादा में अभिव्यक्त होते हैं

Solution

(C) मनुष्यों में,नर के पास केवल एक ही $X$-गुणसूत्र ($XY$ जीनोटाइप) होता है। इसलिए,$X$-गुणसूत्र पर स्थित कोई भी अप्रभावी जीन नर में हमेशा अभिव्यक्त होता है क्योंकि उसके सामने कोई प्रभावी जीन नहीं होता है। इस स्थिति को 'हेमीज़ायगस' (Hemizygous) कहा जाता है। मादा में दो $X$-गुणसूत्र होने के कारण,अप्रभावी जीन केवल तभी अभिव्यक्त होता है जब वह दोनों $X$-गुणसूत्रों पर मौजूद हो।
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BiologyDifficultMCQAIPMT · 2004
एक मानव नर अलिंगसूत्री (autosomal) जीनों $A$ और $B$ के लिए विषमयुग्मजी (heterozygous) है और हीमोफीलिया जीन के लिए अर्धयुग्मजी (hemizygous) है। उसके शुक्राणुओं में $abh$ का अनुपात क्या होगा?
A
$1/8$
B
$1/32$
C
$1/16$
D
$1/4$

Solution

(A) नर का जीनोटाइप $AaBbX^hY$ है।
चूंकि जीन $A$ और $B$ अलिंगसूत्री और विषमयुग्मजी हैं,इसलिए इन एलील्स के लिए संभावित युग्मक $AB, Ab, aB, ab$ हैं,जिनमें से प्रत्येक की संभावना $1/4$ है।
नर हीमोफीलिया जीन के लिए अर्धयुग्मजी $(X^hY)$ है,जिसका अर्थ है कि वह $X^h$ गुणसूत्र और $Y$ गुणसूत्र वहन करता है।
शुक्राणु द्वारा $X^h$ गुणसूत्र प्राप्त करने की संभावना $1/2$ है और $Y$ गुणसूत्र प्राप्त करने की संभावना $1/2$ है।
$abh$ शुक्राणु होने के लिए,इसमें $a$ एलील,$b$ एलील और $h$ एलील ($X^h$ गुणसूत्र पर स्थित) होना आवश्यक है।
अलिंगसूत्री जीनों से $ab$ प्राप्त करने की संभावना $1/4$ है।
$X^h$ गुणसूत्र प्राप्त करने की संभावना $1/2$ है।
अतः,कुल संभावना $1/4 \times 1/2 = 1/8$ है।
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BiologyDifficultMCQAIPMT · 2004
पादपों में,लाल फल $(R)$ पीले फल $(r)$ पर प्रभावी है और लंबा कद $(T)$ बौने कद $(t)$ पर प्रभावी है। यदि $RRTt$ जीनप्रारूप वाले पादप का संकरण $RRTt$ जीनप्रारूप वाले पादप के साथ कराया जाए,तो संतति का लक्षणप्रारूप क्या होगा?
A
$75\%$ लंबे और लाल फल वाले होंगे।
B
$50\%$ लंबे और लाल फल वाले होंगे।
C
$25\%$ लंबे और लाल फल वाले होंगे।
D
सभी संतति लंबी और लाल फल वाली होगी।

Solution

(A) यह संकरण $RRTt \times RRTt$ के बीच है।
$1$. फल के रंग के जीन के लिए $(RR \times RR)$,सभी संतति $RR$ (लाल फल वाली) होगी।
$2$. लंबाई के जीन के लिए $(Tt \times Tt)$,संतति के जीनप्रारूप $1 TT : 2 Tt : 1 tt$ प्राप्त होंगे।
$3$. लक्षणप्रारूप के आधार पर,$3/4$ $(75\%)$ लंबे ($TT$ और $Tt$) और $1/4$ $(25\%)$ बौने $(tt)$ होंगे।
$4$. इन दोनों को मिलाने पर,सभी संतति लाल फल वाली होगी और $75\%$ लंबी होगी।
अतः,$75\%$ संतति लंबी और लाल फल वाली होगी।
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BiologyMediumMCQAIPMT · 2004
एक सामान्य महिला,जिसके पिता वर्णांध (colorblind) थे,एक सामान्य पुरुष से विवाह करती है। उनके पुत्रों की स्थिति क्या होगी?
A
$75\%$ वर्णांध
B
$50\%$ वर्णांध
C
सभी सामान्य
D
सभी वर्णांध

Solution

(B) वर्णांधता एक $X$-सहलग्न अप्रभावी विकार है।
मान लीजिए $X^C$ सामान्य दृष्टि के लिए एलील है और $X^c$ वर्णांधता के लिए एलील है।
महिला के पिता वर्णांध $(X^cY)$ थे,इसलिए वह महिला वाहक $(X^CX^c)$ होगी।
पुरुष सामान्य $(X^CY)$ है।
संकरण इस प्रकार है: $X^CX^c \times X^CY$।
संभावित संतति हैं: $X^CX^C$ (सामान्य पुत्री),$X^CY$ (सामान्य पुत्र),$X^CX^c$ (वाहक पुत्री),और $X^cY$ (वर्णांध पुत्र)।
पुत्रों में,$50\%$ सामान्य $(X^CY)$ और $50\%$ वर्णांध $(X^cY)$ होंगे।
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BiologyMediumMCQAIPMT · 2004
$DNA$ फिंगर प्रिंटिंग क्या है?
A
$DNA$ नमूनों का आणविक विश्लेषण या प्रोफाइलिंग।
B
इप्रिंटिंग टूल का उपयोग करके $DNA$ नमूनों का विश्लेषण।
C
एक विशिष्ट तकनीक का उपयोग करके विभिन्न $DNA$ नमूनों का आणविक विश्लेषण।
D
किसी व्यक्ति की फिंगर प्रिंट (तकनीक का उपयोग करके)।

Solution

(C) $DNA$ फिंगर प्रिंटिंग एक ऐसी तकनीक है जिसका उपयोग व्यक्तियों को उनके संबंधित $DNA$ प्रोफाइल द्वारा पहचानने के लिए किया जाता है।
इसमें न्यूक्लियोटाइड अनुक्रमों में भिन्नता का पता लगाने के लिए $DNA$ नमूनों का आणविक विश्लेषण शामिल है।
ये भिन्नताएं,जिन्हें बहुरूपता (polymorphism) के रूप में जाना जाता है,प्रत्येक व्यक्ति के लिए अद्वितीय होती हैं (समान जुड़वां बच्चों को छोड़कर)।
इसलिए,इसे $VNTR$ विश्लेषण जैसी विशिष्ट तकनीकों का उपयोग करके विभिन्न $DNA$ नमूनों के आणविक विश्लेषण के रूप में परिभाषित किया गया है।
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BiologyMediumMCQAIPMT · 2004
अनुलेखन (Transcription) के दौरान,$DNA$ रज्जुक का न्यूक्लियोटाइड अनुक्रम $ATACG$ है। तो $m-RNA$ का न्यूक्लियोटाइड अनुक्रम क्या होगा?
A
$TATGC$
B
$TCTGG$
C
$UAUGC$
D
$UATGG$

Solution

(C) अनुलेखन की प्रक्रिया के दौरान,$DNA$ एक टेम्पलेट के रूप में कार्य करता है जिससे $m-RNA$ का संश्लेषण होता है।
क्षार-युग्मन (Base-pairing) के नियमों के अनुसार,$RNA$ में $Adenine$ $(A)$,$Uracil$ $(U)$ के साथ जुड़ता है और $Thymine$ $(T)$,$Adenine$ $(A)$ के साथ जुड़ता है।
दिया गया $DNA$ अनुक्रम: $ATACG$.
- $A$ का युग्म $U$ के साथ बनता है।
- $T$ का युग्म $A$ के साथ बनता है।
- $A$ का युग्म $U$ के साथ बनता है।
- $C$ का युग्म $G$ के साथ बनता है।
- $G$ का युग्म $C$ के साथ बनता है।
अतः,परिणामी $m-RNA$ अनुक्रम $UAUGC$ होगा।
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BiologyMediumMCQAIPMT · 2004
किसी दी गई प्रजाति में,निम्नलिखित में से कौन सा अनुपात स्थिर होता है?
A
$\frac{A+G}{C+T}$
B
$\frac{T+C}{G+A}$
C
$\frac{G+C}{A+T}$
D
$\frac{A+C}{T+G}$

Solution

(A) द्विरज्जुक (double-stranded) $DNA$ के लिए चारगाफ के नियमों के अनुसार,एडेनिन $(A)$ की मात्रा थाइमिन $(T)$ की मात्रा के बराबर होती है और ग्वानिन $(G)$ की मात्रा साइटोसिन $(C)$ की मात्रा के बराबर होती है।
इसलिए,$A = T$ और $G = C$ होता है।
इसका अर्थ है कि $A + G = T + C$ होता है।
जब हम प्यूरीन $(A+G)$ और पिरिमिडीन $(C+T)$ का अनुपात लेते हैं,तो हमें $\frac{A+G}{C+T} = 1$ प्राप्त होता है।
चूंकि $A+G$ हमेशा $C+T$ के बराबर होता है,इसलिए यह अनुपात किसी दी गई प्रजाति के लिए स्थिर रहता है।
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BiologyEasyMCQAIPMT · 2004
यूकेरियोटिक गुणसूत्रों के टेलोमीयर ............ से समृद्ध छोटे अनुक्रमों से बने होते हैं।
A
थायमीन-समृद्ध पुनरावृत्ति
B
साइटोसिन-समृद्ध पुनरावृत्ति
C
एडेनिन-समृद्ध पुनरावृत्ति
D
ग्वानिन-समृद्ध पुनरावृत्ति

Solution

(D) टेलोमीयर यूकेरियोटिक गुणसूत्रों के अंतिम क्षेत्र होते हैं जो सिरों को क्षरण और संलयन से बचाते हैं।
ये क्षेत्र अत्यधिक संरक्षित,दोहराव वाले $DNA$ अनुक्रमों से बने होते हैं।
मनुष्यों सहित अधिकांश यूकेरियोट्स में,ये टेलोमेरिक अनुक्रम $G$ (ग्वानिन) न्यूक्लियोटाइड की उच्च मात्रा द्वारा पहचाने जाते हैं।
उदाहरण के लिए,मानव टेलोमेरिक पुनरावृत्ति अनुक्रम $5'-TTAGGG-3'$ है,जो ग्वानिन से समृद्ध है।
इसलिए,टेलोमीयर ग्वानिन-समृद्ध होते हैं।
90
BiologyMediumMCQAIPMT · 2004
जीन स्तर पर उत्परिवर्तन (mutation) के बाद,जीव के लक्षणों में परिवर्तन निम्नलिखित में से किसमें बदलाव के कारण होता है?
A
प्रोटीन संरचना
B
$DNA$ प्रतिकृति
C
प्रोटीन संश्लेषण की प्रक्रिया
D
$RNA$ अनुलेखन प्रक्रिया

Solution

(A) जीन $DNA$ का एक खंड है जो एक विशिष्ट पॉलीपेप्टाइड या प्रोटीन के लिए कोड करता है।
जब जीन स्तर पर उत्परिवर्तन होता है,तो $DNA$ में न्यूक्लियोटाइड का क्रम बदल जाता है।
यह परिवर्तित $DNA$ अनुक्रम एक परिवर्तित $mRNA$ अनुक्रम के अनुलेखन (transcription) की ओर ले जाता है।
परिणामस्वरूप,अनुवाद (translation) प्रक्रिया के कारण एक अलग अमीनो एसिड अनुक्रम वाले प्रोटीन का संश्लेषण होता है,जो प्रोटीन की संरचना और कार्य को बदल देता है।
चूंकि प्रोटीन लक्षणों (फेनोटाइप) को व्यक्त करने के लिए जिम्मेदार होते हैं,इसलिए प्रोटीन संरचना में बदलाव जीव के लक्षणों में परिवर्तन का कारण बनता है।
91
BiologyMediumMCQAIPMT · 2004
बैक्टीरियल गुणसूत्र के प्रतिकृतियन (replication) के दौरान,$DNA$ संश्लेषण प्रतिकृतियन के उद्भव स्थान (origin of replication) से शुरू होता है और किस दिशा में आगे बढ़ता है?
A
$RNA$ प्राइमर शामिल है।
B
टेलोमेरेज़ मदद करता है।
C
स्थल से एक दिशा में।
D
स्थल से दोनों दिशाओं में।

Solution

(D) बैक्टीरिया में $DNA$ प्रतिकृतियन आमतौर पर द्वि-दिशीय (bidirectional) होता है। प्रतिकृतियन के उद्भव स्थान $(ori)$ से शुरू होकर,$DNA$ पॉलीमरेज़ एंजाइम दोनों दिशाओं में प्रतिकृतियन कांटे (replication forks) बनाता है,जिसके परिणामस्वरूप $DNA$ का संश्लेषण उद्भव स्थान से दोनों दिशाओं में होता है।
92
BiologyEasyMCQAIPMT · 2004
कौन सा $RNA$ क्लोवर-लीफ (तिपतिया घास) संरचना के साथ जुड़ा हुआ है?
A
$r-RNA$
B
$hnRNA$
C
$m-RNA$
D
$t-RNA$

Solution

(D) $t-RNA$ (ट्रांसफर $RNA$) अणु क्लोवर-लीफ (तिपतिया घास) जैसी द्वितीयक संरचना के लिए जाना जाता है।
इस संरचना में, अणु विभिन्न लूपों में मुड़ा होता है, जिसमें एंटीकोडोन लूप, $D$-लूप और $T\psi C$-लूप शामिल हैं।
यह संरचना प्रोटीन संश्लेषण में इसके कार्य के लिए आवश्यक है, जहाँ यह $m-RNA$ के कोडोन अनुक्रम के आधार पर विशिष्ट अमीनो एसिड को राइबोसोम तक ले जाता है।
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BiologyEasyMCQAIPMT · 2004
कौन सा मुक्त-जीवी नाइट्रोजन-स्थिरीकरण करने वाला सायनोबैक्टीरियम जल फर्न अजोला के साथ सहजीवी संबंध दर्शाता है?
A
टोलीपोथ्रिक्स
B
क्लोरेला
C
नोस्टॉक
D
एनाबीना

Solution

(D) सायनोबैक्टीरियम $Anabaena$ $azollae$ एक नाइट्रोजन-स्थिरीकरण करने वाला जीव है जो जल फर्न $Azolla$ के साथ सहजीवी संबंध में रहता है।
यह $Azolla$ की पत्तियों के गुहिकाओं (cavities) में रहता है,जहाँ यह पौधे को नाइट्रोजन प्रदान करता है और बदले में पौधे से कार्बोहाइड्रेट और एक सुरक्षित वातावरण प्राप्त करता है।
इस संबंध का उपयोग धान की खेती में जैव-उर्वरक के रूप में व्यापक रूप से किया जाता है।
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BiologyEasyMCQAIPMT · 2004
$Anthesis$ (एन्थेसिस) की घटना निम्नलिखित में से किसके लिए जानी जाती है?
A
वर्तिकाग्र द्वारा पराग कणों को ग्रहण करने की घटना
B
पराग कणों के निर्माण की घटना
C
परागकोष का विकास
D
पुष्प कलिका का खिलना

Solution

(D) $Anthesis$ (एन्थेसिस) उस अवधि को परिभाषित करता है जिसके दौरान एक फूल पूरी तरह से खुला और कार्यात्मक होता है। यह एक पुष्प कलिका के परिपक्व फूल में खिलने की प्रक्रिया को संदर्भित करता है,जिससे परागण की क्रिया संभव हो पाती है। अतः,सही विकल्प $D$ है।
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BiologyMediumMCQAIPMT · 2004
जीवाश्मों की आयु अतीत में पारंपरिक रूप से रेडियो-कार्बन डेटिंग और चट्टानों में पाए जाने वाले रेडियो-सक्रिय तत्वों से जुड़ी अन्य विधियों द्वारा निर्धारित की जाती थी। जीवों के विभिन्न समूहों के विकासवादी समय को निर्धारित करने के लिए वर्तमान में उपयोग की जाने वाली अधिक सटीक विधियों में शामिल हैं:
A
जीवाश्मों में कार्बोहाइड्रेट/प्रोटीन का अध्ययन
B
जीवाश्मों के निर्माण की परिस्थितियों का अध्ययन
C
इलेक्ट्रॉन स्पिन रेजोनेंस $(ESR)$ और जीवाश्मों का $DNA$ विश्लेषण
D
चट्टानों में कार्बोहाइड्रेट/प्रोटीन का अध्ययन

Solution

(C) जीवाश्मों की आयु निर्धारित करने और विकासवादी समयरेखा को समझने के लिए आधुनिक विधियाँ सामान्य रेडियो-कार्बन डेटिंग से कहीं आगे निकल गई हैं। इलेक्ट्रॉन स्पिन रेजोनेंस $(ESR)$ एक शक्तिशाली तकनीक है जिसका उपयोग भूवैज्ञानिक और पुरातात्विक सामग्रियों में फंसे इलेक्ट्रॉनों के संचय को मापकर उनकी आयु निर्धारित करने के लिए किया जाता है। इसके अतिरिक्त,जीवाश्मों से निकाले गए प्राचीन $DNA$ $(aDNA)$ का विश्लेषण विभिन्न जीवों के बीच विकासवादी संबंधों और उनके अलग होने के समय के बारे में सटीक जानकारी प्रदान करता है। इसलिए,$ESR$ और $DNA$ विश्लेषण विकासवादी जीव विज्ञान में उपयोग की जाने वाली सबसे सटीक आधुनिक विधियाँ हैं।
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BiologyMediumMCQAIPMT · 2004
किस प्रकार के प्रमाण यह बताते हैं कि मनुष्य किसी भी अन्य होमिनिड वानर की तुलना में चिम्पांजी से अधिक निकटता से संबंधित थे?
A
केवल लिंग गुणसूत्रों के $DNA$ के प्रमाण।
B
आकारिकी रूप से गुणसूत्रों की तुलना द्वारा।
C
केवल जीवाश्म माइटोकॉन्ड्रियल $DNA$ और अमीनो एसिड के प्रमाण द्वारा।
D
लिंग गुणसूत्रों,अलिंगसूत्रों (ऑटोसोम) और माइटोकॉन्ड्रिया से निकाले गए $DNA$ के प्रमाण द्वारा।

Solution

(D) आणविक प्रमाण,विशेष रूप से $DNA$ अनुक्रमों की तुलना,सबसे सटीक जातिवृत्तीय संबंध प्रदान करते हैं। लिंग गुणसूत्रों,अलिंगसूत्रों और माइटोकॉन्ड्रिया से निकाले गए $DNA$ से जुड़े अध्ययनों ने दिखाया है कि मनुष्यों और चिम्पांजी के बीच आनुवंशिक समानता लगभग $98-99\%$ है। यह व्यापक जीनोमिक विश्लेषण पुष्टि करता है कि मनुष्य किसी भी अन्य होमिनिड वानर की तुलना में चिम्पांजी से अधिक निकटता से संबंधित हैं।
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BiologyMediumMCQAIPMT · 2004
मेंढक के टैडपोल में गलफड़ों (gills) की उपस्थिति यह दर्शाती है कि . . . . . . .
A
मछलियां अतीत में उभयचर थीं।
B
मछलियां मेंढक जैसे पूर्वजों से विकसित हुई हैं।
C
मेंढकों में भविष्य में गलफड़े होंगे।
D
मेंढक गलफड़े वाले पूर्वजों से विकसित हुए हैं।

Solution

(D) मेंढक की टैडपोल अवस्था में गलफड़ों की उपस्थिति विकासवादी साक्ष्य का एक उदाहरण है। विकासवाद के सिद्धांत के अनुसार,जीव अक्सर अपने भ्रूण या लार्वा विकास के दौरान अपने पूर्वजों के लक्षण प्रदर्शित करते हैं। चूंकि मेंढक ऐसे उभयचर हैं जो मछली जैसे पूर्वजों से विकसित हुए हैं जिनमें श्वसन के लिए गलफड़े होते थे,इसलिए टैडपोल इस पैतृक विशेषता को बनाए रखता है। यह दर्शाता है कि मेंढक गलफड़े वाले पूर्वजों से विकसित हुए हैं।
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BiologyMediumMCQAIPMT · 2004
ओपेरिन के अनुसार,पृथ्वी के आदि वातावरण में निम्नलिखित में से किसकी अनुपस्थिति थी?
A
मीथेन
B
ऑक्सीजन
C
हाइड्रोजन
D
जल वाष्प

Solution

(B) ओपेरिन-हेल्डेन परिकल्पना के अनुसार,पृथ्वी का आदि वातावरण एक अपचायक (reducing) वातावरण था।
इसमें मीथेन $(CH_4)$,अमोनिया $(NH_3)$,हाइड्रोजन $(H_2)$ और जल वाष्प $(H_2O)$ जैसी गैसें मौजूद थीं।
प्रारंभिक वातावरण में मुक्त ऑक्सीजन $(O_2)$ अनुपस्थित थी क्योंकि यह अत्यधिक प्रतिक्रियाशील थी और अन्य तत्वों के साथ मिलकर ऑक्साइड बना लेती थी।
अतः,सही विकल्प $B$ है।
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BiologyMediumMCQAIPMT · 2004
स्तनधारियों में $T$-लिम्फोसाइट्स के संबंध में निम्नलिखित में से क्या सत्य है?
A
वे क्षतिग्रस्त कोशिकाओं और कोशिकीय मलबे को साफ करते हैं।
B
वे थायरॉयड में उत्पन्न होते हैं।
C
इनके तीन मुख्य प्रकार हैं: साइटोटॉक्सिक $T$-कोशिकाएं,हेल्पर $T$-कोशिकाएं और सप्रेसर $T$-कोशिकाएं।
D
वे लिम्फोइड ऊतकों से उत्पन्न होते हैं।

Solution

(C) $T$-लिम्फोसाइट्स श्वेत रक्त कोशिकाओं का एक प्रकार है जो कोशिका-मध्यस्थ प्रतिरक्षा (cell-mediated immunity) में केंद्रीय भूमिका निभाते हैं।
ये अस्थि मज्जा (bone marrow) में उत्पन्न होते हैं और थाइमस ग्रंथि में परिपक्व होते हैं।
$T$-लिम्फोसाइट्स के तीन मुख्य कार्यात्मक प्रकार हैं:
$1$. हेल्पर $T$-कोशिकाएं $(T_h)$: ये अन्य प्रतिरक्षा कोशिकाओं को सक्रिय करती हैं।
$2$. साइटोटॉक्सिक $T$-कोशिकाएं $(T_c)$: ये सीधे संक्रमित या कैंसरग्रस्त कोशिकाओं को मारती हैं।
$3$. सप्रेसर $T$-कोशिकाएं $(T_s)$: ये प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को नियंत्रित करती हैं और अन्य प्रतिरक्षा कोशिकाओं की गतिविधि को दबाकर ऑटोइम्यूनिटी को रोकती हैं।
अतः,विकल्प $C$ सही कथन है।
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BiologyEasyMCQAIPMT · 2004
निम्नलिखित में से कौन सा युग्म सही ढंग से सुमेलित नहीं है?
A
स्ट्रेप्टोमाइसेस - एंटीबायोटिक
B
सेराटिया - ड्रग एडिक्ट (नशा करने वाला)
C
स्पिरुलिना - एकल कोशिका प्रोटीन
D
राइजोबियम - जैव उर्वरक

Solution

(B) $1$. $Streptomyces$ बैक्टीरिया का एक वंश है जो विभिन्न एंटीबायोटिक दवाओं के उत्पादन के लिए जाना जाता है।
$2$. $Spirulina$ एक साइनोबैक्टीरिया है जिसका उपयोग एकल कोशिका प्रोटीन $(SCP)$ के स्रोत के रूप में किया जाता है।
$3$. $Rhizobium$ एक सहजीवी बैक्टीरिया है जो वायुमंडलीय नाइट्रोजन को स्थिर करता है और जैव उर्वरक के रूप में कार्य करता है।
$4$. $Serratia$ ग्राम-नेगेटिव बैक्टीरिया का एक वंश है; इसका 'नशा करने वाले' (drug addict) से कोई संबंध नहीं है। अतः, $Serratia - \text{Drug addict}$ का युग्म गलत तरीके से सुमेलित है।
101
BiologyMediumMCQAIPMT · 2004
निम्नलिखित में से कौन सा युग्म गलत सुमेलित है?
A
$Glossina \text{ } palpalis$ - स्लीपिंग सिकनेस
B
$Culex \text{ } pipiens$ - फाइलेरियासिस
C
$Aedes \text{ } aegypti$ - येलो फीवर
D
$Anopheles \text{ } stephensi$ - लीशमैनियासिस

Solution

(D) सही उत्तर $D$ है।
$Glossina \text{ } palpalis$ (त्से-त्से मक्खी) अफ्रीकी स्लीपिंग सिकनेस (ट्राइपेनोसोमियासिस) का वाहक है।
$Culex \text{ } pipiens$ $Wuchereria \text{ } bancrofti$ का एक सामान्य वाहक है, जो फाइलेरियासिस का कारण बनता है।
$Aedes \text{ } aegypti$ येलो फीवर और डेंगू का प्राथमिक वाहक है।
$Anopheles \text{ } stephensi$ मलेरिया का वाहक है, लीशमैनियासिस का नहीं। लीशमैनियासिस (काला-जार) सैंडफ्लाई (रेत मक्खी), $Phlebotomus$ द्वारा फैलता है।
102
BiologyMediumMCQAIPMT · 2004
$1960$ में भारत में गेहूं उत्पादन क्रांति निम्नलिखित में से किसके कारण संभव हुई थी?
A
संकर बीज
B
क्लोरोफिल की अधिक मात्रा
C
पादप की ऊंचाई में कमी लाने वाली उत्परिवर्तन
D
बहुगुणी किस्मों में उत्परिवर्तन

Solution

(C) $1960$ के दशक में भारत में गेहूं उत्पादन क्रांति मुख्य रूप से अर्ध-बौनी (semi-dwarf) गेहूं की किस्मों के परिचय के कारण संभव हुई थी। ये किस्में डॉ. नॉर्मन ई. बोरलॉग द्वारा विकसित की गई थीं और डॉ. एम. एस. स्वामीनाथन द्वारा भारत लाई गई थीं। इन किस्मों की मुख्य विशेषता एक उत्परिवर्तन (mutation) थी जिसके परिणामस्वरूप पौधे की ऊंचाई में महत्वपूर्ण कमी आई (अर्ध-बौना लक्षण)। इसने पौधों को गिरने (lodging) से रोका और पौधों को भारी,अनाज से भरी बालियों को सहारा देने में सक्षम बनाया,जिससे उत्पादन में भारी वृद्धि हुई।
103
BiologyMediumMCQAIPMT · 2004
फसल को नष्ट करने वाले कीटों में कीटनाशकों के प्रति प्रतिरोध विकसित होने का संभावित कारण क्या है?
A
यादृच्छिक उत्परिवर्तन (Random mutation)
B
आनुवंशिक पुनर्संयोजन
C
निर्देशित उत्परिवर्तन (Directed mutation)
D
अर्जित आनुवंशिक परिवर्तन

Solution

(A) कीटों में रासायनिक कीटनाशकों या जैविक नियंत्रण कारकों के प्रति प्रतिरोध विकसित होने का मुख्य कारण $Random \text{ } mutation$ (यादृच्छिक उत्परिवर्तन) है।
जब कीटों की एक बड़ी आबादी को नियंत्रण कारक के संपर्क में लाया जाता है, तो अधिकांश कीट मर जाते हैं।
हालाँकि, आबादी में होने वाले यादृच्छिक उत्परिवर्तन के कारण, कुछ कीटों में आनुवंशिक विविधता हो सकती है जो उन्हें प्रतिरोध प्रदान करती है।
ये प्रतिरोधी कीट जीवित रहते हैं और प्रजनन करते हैं, जिससे प्रतिरोध के जीन उनकी संतानों में चले जाते हैं, जिसके परिणामस्वरूप पूरी आबादी उस कारक के प्रति प्रतिरोधी बन जाती है।
104
BiologyMediumMCQAIPMT · 2004
$ELISA$ का उपयोग वायरस की पहचान के लिए किया जाता है। इसमें प्रयुक्त मुख्य अभिकर्मक ...... है।
A
अल्कलाइन फॉस्फेटेज
B
कैटलेज
C
$DNA$ प्रोब
D
$RNase$

Solution

(A) $ELISA$ (एंजाइम-लिंक्ड इम्यूनोसॉर्बेंट एसे) एक नैदानिक तकनीक है जो एंटीजन-एंटीबॉडी परस्पर क्रिया के सिद्धांत पर आधारित है।
इस तकनीक में,किसी विशिष्ट रोगजनक (जैसे वायरस) की उपस्थिति का पता लगाने के लिए एक एंजाइम को एंटीबॉडी या एंटीजन से जोड़ा जाता है।
$ELISA$ में मुख्य अभिकर्मक के रूप में सबसे अधिक उपयोग किया जाने वाला एंजाइम अल्कलाइन फॉस्फेटेज या हॉर्सरेडिश पेरोक्सीडेज है,जो अपने सबस्ट्रेट के साथ प्रतिक्रिया करने पर रंग परिवर्तन उत्पन्न करता है,जो वायरस की उपस्थिति को दर्शाता है।
105
BiologyMediumMCQAIPMT · 2004
रिस्ट्रिक्शन एंडोन्यूक्लिएज का कार्य क्या है?
A
वे स्तनधारी कोशिकाओं में कोशिका की मृत्यु होने पर $DNA$ को विघटित करने के लिए होते हैं।
B
वे आनुवंशिक इंजीनियरिंग में $DNA$ के दो अणुओं को जोड़ने के लिए उपयोग किए जाते हैं।
C
वे प्रयोगशाला में $DNA$ के संश्लेषण के लिए उपयोग किए जाते हैं।
D
वे बैक्टीरिया द्वारा उनकी रक्षात्मक क्रियाविधि के हिस्से के रूप में संश्लेषित किए जाते हैं।

Solution

(D) रिस्ट्रिक्शन एंडोन्यूक्लिएज वे एंजाइम हैं जो $DNA$ को विशिष्ट पहचान अनुक्रमों (recognition sequences) पर काटते हैं।
ये एंजाइम प्राकृतिक रूप से बैक्टीरिया द्वारा उनकी रक्षात्मक क्रियाविधि के रूप में उत्पन्न किए जाते हैं,जो विदेशी वायरल $DNA$ को काटकर उन्हें बैक्टीरियोफेज (bacteriophage) के संक्रमण से बचाते हैं।
जैव प्रौद्योगिकी में,वे पुनर्संयोजक (recombinant) $DNA$ अणु बनाने के लिए आवश्यक उपकरण हैं।
106
BiologyMediumMCQAIPMT · 2004
निम्नलिखित में से किस आवास में मृदा के तापमान में सबसे अधिक भिन्नता पाई जाती है?
A
आर्द्रभूमि (वेटलैंड)
B
वन
C
मरुस्थल
D
घास के मैदान

Solution

(C) मरुस्थलीय आवासों में मृदा के तापमान में सबसे अधिक भिन्नता पाई जाती है।
$1$. मरुस्थल अत्यधिक परिस्थितियों के लिए जाने जाते हैं,जिसमें उच्च सौर विकिरण और मिट्टी में नमी की बहुत कम मात्रा होती है।
$2$. वनस्पति आवरण की कमी और कम जल सामग्री के कारण,मरुस्थल की मिट्टी दिन के दौरान तेजी से गर्म हो जाती है और रात में जल्दी ठंडी हो जाती है,जिससे तापमान में उच्च दैनिक अंतर होता है।
$3$. इसके विपरीत,वनों,आर्द्रभूमि और घास के मैदानों में वनस्पति आवरण और नमी अधिक होती है,जो थर्मल बफर के रूप में कार्य करते हैं और मृदा के तापमान को स्थिर रखते हैं।
107
BiologyMediumMCQAIPMT · 2004
आधारभूत प्रजाति (Foundation species) क्या है?
A
एक ऐसी प्रजाति जो समुदाय के कुल जैवभार का बहुत छोटा हिस्सा बनाती है,लेकिन समुदाय की संरचना और जैव विविधता पर बड़ा प्रभाव डालती है।
B
एक सामान्य प्रजाति जिसका जैवभार बहुत अधिक होता है,लेकिन समुदाय की संरचना पर उसका प्रभाव बहुत कम होता है।
C
एक दुर्लभ प्रजाति जिसका जैवभार और समुदाय की अन्य प्रजातियों पर बहुत कम प्रभाव पड़ता है।
D
एक प्रभावी प्रजाति जो जैवभार का एक बड़ा हिस्सा बनाती है और कई अन्य प्रजातियों को प्रभावित करती है।

Solution

(D) आधारभूत प्रजाति (Foundation species) वह प्रजाति है जो अन्य प्रजातियों का समर्थन करने वाले आवास के निर्माण या रखरखाव में मुख्य भूमिका निभाती है। इन प्रजातियों का जैवभार अक्सर अधिक होता है और ये भौतिक आवास या संसाधन प्रदान करके समुदाय की संरचना को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित करती हैं। अतः,विकल्प $D$ आधारभूत प्रजाति का सही वर्णन है।
108
BiologyMediumMCQAIPMT · 2004
किसी तेजी से नष्ट हुए पारिस्थितिकी तंत्र के कुछ समय बाद पुनर्स्थापन के लिए किन गतिविधियों या प्रभावों को रोका जाना चाहिए?
A
कम स्थिरता और उच्च लचीलापन
B
उच्च स्थिरता और कम लचीलापन
C
कम स्थिरता और कम लचीलापन
D
उच्च स्थिरता और उच्च लचीलापन

Solution

(D) एक नष्ट हुए पारिस्थितिकी तंत्र के पुनर्स्थापन को सुनिश्चित करने के लिए, उन कारकों को कम करना आवश्यक है जो अस्थिरता पैदा करते हैं और लचीलेपन को बढ़ावा देते हैं।
एक पारिस्थितिकी तंत्र जो अत्यधिक स्थिर और अत्यधिक लचीला होता है, वह गड़बड़ी के बाद उबरने के लिए बेहतर ढंग से सुसज्जित होता है।
स्थिरता का तात्पर्य किसी पारिस्थितिकी तंत्र की गड़बड़ी के बावजूद अपरिवर्तित रहने की क्षमता से है, जबकि लचीलापन का तात्पर्य गड़बड़ी के बाद पारिस्थितिकी तंत्र की उबरने की क्षमता से है।
इसलिए, पारिस्थितिकी तंत्र को बहाल करने के लिए, हमें उन गतिविधियों को रोककर $\text{उच्च स्थिरता}$ और $\text{उच्च लचीलापन}$ का लक्ष्य रखना चाहिए जो इन गुणों को कम करती हैं।
109
BiologyMediumMCQAIPMT · 2004
घास के पारिस्थितिकी तंत्र में कौन सी उत्पादकता $(g/m^2/yr)$ सबसे अधिक होती है?
A
द्वितीयक उत्पादकता
B
शुद्ध प्राथमिक उत्पादकता
C
शुद्ध सामुदायिक उत्पादकता
D
सकल प्राथमिक उत्पादकता

Solution

(D) किसी भी पारिस्थितिकी तंत्र में,प्रकाश संश्लेषण के माध्यम से उत्पादकों द्वारा उत्पादित कार्बनिक पदार्थ की कुल मात्रा को सकल प्राथमिक उत्पादकता $(GPP)$ के रूप में जाना जाता है।
शुद्ध प्राथमिक उत्पादकता $(NPP)$ वह बायोमास की मात्रा है जो उत्पादकों द्वारा श्वसन $(R)$ के दौरान खोई गई ऊर्जा को घटाने के बाद उपभोक्ताओं के लिए उपलब्ध होती है।
इसका संबंध इस प्रकार है: $NPP = GPP - R$।
चूंकि $GPP$ किसी भी नुकसान से पहले कैप्चर की गई कुल ऊर्जा का प्रतिनिधित्व करता है,इसलिए यह पारिस्थितिकी तंत्र में $NPP$ या किसी अन्य प्रकार की उत्पादकता से हमेशा अधिक होता है।
110
BiologyMediumMCQAIPMT · 2004
आपके विचार में, किसी विशिष्ट क्षेत्र में पादप विविधता के संरक्षण के लिए सबसे प्रभावी उपाय कौन सा है?
A
ऊतक संवर्धन
B
जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र की स्थापना
C
वनस्पति उद्यान की स्थापना
D
बीज बैंक का विकास

Solution

(B) पादप विविधता सहित जैव विविधता के संरक्षण के लिए सबसे प्रभावी विधि $in-situ$ (स्व-स्थाने) संरक्षण है।
$In-situ$ संरक्षण में उस पूरे पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा की जाती है जहाँ प्रजातियाँ प्राकृतिक रूप से पाई जाती हैं।
जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र (Biosphere reserves) बड़े संरक्षित क्षेत्र होते हैं जिन्हें पारिस्थितिकी तंत्र, प्रजातियों और आनुवंशिक विविधता को उनके प्राकृतिक आवास में संरक्षित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
इसके विपरीत, ऊतक संवर्धन, वनस्पति उद्यान और बीज बैंक $ex-situ$ (बाह्य-स्थाने) संरक्षण के उदाहरण हैं, जिनका उपयोग तब किया जाता है जब प्राकृतिक आवास खतरे में हों या नष्ट हो गए हों।
इसलिए, जैवमंडल आरक्षित क्षेत्रों की स्थापना दीर्घकालिक संरक्षण के लिए सबसे प्रभावी दृष्टिकोण है।
111
BiologyEasyMCQAIPMT · 2004
$IUCN$ रेड लिस्ट के अनुसार,रेड पांडा $(Ailurus fulgens)$ को किस श्रेणी में वर्गीकृत किया गया है?
A
गंभीर रूप से संकटग्रस्त (Critically Endangered)
B
अतिसंवेदनशील (Vulnerable)
C
विलुप्त (Extinct)
D
संकटग्रस्त (Endangered)

Solution

(D) $IUCN$ की संकटग्रस्त प्रजातियों की रेड लिस्ट के अनुसार रेड पांडा $(Ailurus fulgens)$ को $Endangered$ (संकटग्रस्त) श्रेणी में वर्गीकृत किया गया है।
यह वर्गीकरण उनके आवास के नुकसान,विखंडन और अवैध शिकार के कारण उनकी आबादी में आई भारी गिरावट के कारण किया गया है।
112
BiologyEasyMCQAIPMT · 2004
फ्लोराइड प्रदूषण मुख्य रूप से निम्नलिखित में से किसे प्रभावित करता है?
A
वृक्क (गुर्दे)
B
मस्तिष्क
C
हृदय
D
दांत

Solution

(D) जब पीने के पानी में फ्लोराइड की सांद्रता $1.5 \ ppm$ से अधिक होती है,तो यह मुख्य रूप से कंकाल तंत्र और दांतों को प्रभावित करता है। इस स्थिति को फ्लोरोसिस के रूप में जाना जाता है। दांतों में,यह डेंटल फ्लोरोसिस का कारण बनता है,जिससे इनेमल पर धब्बे पड़ जाते हैं या उसका रंग खराब हो जाता है। अतः,सही विकल्प $D$ है।
113
BiologyEasyMCQAIPMT · 2004
$1984$ में भोपाल गैस त्रासदी हुई थी क्योंकि मिथाइल आइसोसाइनेट की अभिक्रिया किसके साथ हुई थी?
A
$DDT$
B
अमोनिया
C
$CO_2$
D
पानी

Solution

(D) भोपाल गैस त्रासदी,जो $2-3$ दिसंबर $1984$ की रात को हुई थी,यूनियन कार्बाइड कीटनाशक संयंत्र से मिथाइल आइसोसाइनेट $(MIC)$ गैस के आकस्मिक रिसाव के कारण हुई थी।
$MIC$ पानी के साथ अत्यधिक अभिक्रियाशील है। जब पानी भंडारण टैंक में प्रवेश कर गया,तो इसने एक ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया को जन्म दिया जिससे भारी मात्रा में गर्मी और दबाव उत्पन्न हुआ,जिसके कारण टैंक फट गया और जहरीली गैस वातावरण में फैल गई।
114
BiologyMediumMCQAIPMT · 2004
सही युग्म की पहचान करें।
A
बेसल कन्वेंशन - जैव विविधता का संरक्षण
B
क्योटो प्रोटोकॉल - जलवायु परिवर्तन
C
मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल - ग्लोबल वार्मिंग
D
रामसर कन्वेंशन - भूजल प्रदूषण

Solution

(B) सही युग्म $B$ (क्योटो प्रोटोकॉल - जलवायु परिवर्तन) है।
$1$. बेसल कन्वेंशन खतरनाक कचरे के सीमा-पार आवाजाही और उनके निपटान के नियंत्रण से संबंधित है।
$2$. क्योटो प्रोटोकॉल $1992$ के संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन फ्रेमवर्क कन्वेंशन $(UNFCCC)$ का एक अंतरराष्ट्रीय समझौता है,जो देशों को ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करने के लिए प्रतिबद्ध करता है। यह इस वैज्ञानिक सहमति पर आधारित है कि ग्लोबल वार्मिंग हो रही है और मानव निर्मित $CO_2$ उत्सर्जन इसे बढ़ावा दे रहा है।
$3$. मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल ओजोन परत की रक्षा के लिए बनाया गया एक अंतरराष्ट्रीय समझौता है,जिसका उद्देश्य ओजोन रिक्तीकरण के लिए जिम्मेदार पदार्थों के उत्पादन को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करना है।
$4$. रामसर कन्वेंशन आर्द्रभूमि (wetlands) के संरक्षण और उनके सतत उपयोग के लिए एक अंतरराष्ट्रीय संधि है।
115
BiologyEasyMCQAIPMT · 2004
रक्त में सीसे $(Pb)$ की चेतावनी स्वरूप सांद्रता कितनी है?
A
$20 \mu g / 100 \ ml$
B
$30 \mu g / 100 \ ml$
C
$4 - 6 \mu g / 100 \ ml$
D
$10 \mu g / 100 \ ml$

Solution

(B) सीसा $(Pb)$ एक विषाक्त भारी धातु है जो मानव शरीर में जमा हो सकती है।
चिकित्सा और पर्यावरणीय स्वास्थ्य मानकों के अनुसार,रक्त में सीसे का $30 \mu g / 100 \ ml$ का स्तर चेतावनी सांद्रता माना जाता है।
इस स्तर से ऊपर का सांद्रण तंत्रिका तंत्र को नुकसान,एनीमिया और विकासात्मक देरी जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर सकता है।
अतः,सही विकल्प $B$ है।
116
BiologyEasyMCQAIPMT · 2004
हाल ही में,भारत सरकार ने पेट्रोल में अल्कोहल (इथेनॉल) मिलाने की अनुमति दी है। पेट्रोल में कितने प्रतिशत अल्कोहल मिलाया जा सकता है?
A
$2.5\%$
B
$10-15\%$
C
$10\%$
D
$5\%$

Solution

(D) भारत सरकार ने आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम करने और कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लिए इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल $(EBP)$ कार्यक्रम लागू किया है।
शुरुआत में,सरकार ने पेट्रोल में $5\%$ इथेनॉल (अल्कोहल) मिलाने की अनुमति दी थी।
समय के साथ,इस लक्ष्य को बढ़ाकर $10\%$ और फिर $20\%$ (E20) कर दिया गया है ताकि टिकाऊ ईंधन के उपयोग को बढ़ावा दिया जा सके।
दिए गए विकल्पों के अनुसार,$5\%$ मिश्रण के लिए स्वीकृत प्रारंभिक मानक प्रतिशत था।

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