(N/A) नहीं, बल्ब समान चमक के साथ नहीं जलेंगे।
$1$. श्रेणीक्रम परिपथ में, कुल प्रतिरोध $R_{series} = R + R + R = 3R$ होता है। चूंकि वोल्टेज $V$ स्थिर है, इसलिए प्रत्येक बल्ब में धारा $I_{series} = V / (3R) = (1/3) \times (V/R)$ होती है।
$2$. समानांतर क्रम परिपथ में, प्रत्येक बल्ब सीधे स्रोत वोल्टेज $V$ से जुड़ा होता है। इसलिए, प्रत्येक बल्ब में धारा $I_{parallel} = V/R$ होती है।
$3$. चूंकि बल्ब द्वारा व्यय की गई शक्ति $P = I^2R$ होती है, इसलिए श्रेणीक्रम परिपथ में शक्ति $P_{series} = (V/3R)^2 \times R = V^2 / (9R)$ है, जबकि समानांतर परिपथ में यह $P_{parallel} = (V/R)^2 \times R = V^2 / R$ है।
$4$. चूंकि $P_{parallel} > P_{series}$ है, इसलिए समानांतर परिपथ वाले बल्ब श्रेणीक्रम परिपथ वाले बल्बों की तुलना में अधिक चमक के साथ जलेंगे।