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Acids and Bases Questions in Hindi

Class 11 Chemistry · 6-2.Equilibrium-II (Ionic Equilibrium) · Acids and Bases

477+

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Showing 50 of 477 questions in Hindi

151
EasyMCQ
$NH_3$ गैस पानी में घुल कर $NH_4OH$ देती है। इस अभिक्रिया में,जल ...... के रूप में कार्य करता है।
A
अम्ल
B
क्षार
C
लवण
D
संयुग्मी क्षार

Solution

(A) अभिक्रिया इस प्रकार है: $NH_3 + H_2O \rightleftharpoons NH_4^+ + OH^-$.
इस अभिक्रिया में,$NH_3$ एक ब्रोंस्टेड-लोरी क्षार के रूप में कार्य करता है क्योंकि यह प्रोटॉन $(H^+)$ स्वीकार करता है।
जल $(H_2O)$ एक ब्रोंस्टेड-लोरी अम्ल के रूप में कार्य करता है क्योंकि यह $NH_3$ को प्रोटॉन $(H^+)$ दान करता है और $OH^-$ बनाता है।
अतः,जल एक अम्ल के रूप में कार्य करता है।
152
EasyMCQ
निम्नलिखित में से कौन सा $Br\text{ø}nsted-Lowry$ अम्ल है?
A
$SO_4^{2-}$
B
$H_3O^+$
C
$OH^-$
D
$Cl^-$

Solution

(B) $Br\text{ø}nsted-Lowry$ सिद्धांत के अनुसार,अम्ल वह पदार्थ है जो प्रोटॉन ($H^+$ आयन) दान कर सकता है।
$H_3O^+$ प्रोटॉन दान करके $H_2O$ बना सकता है,इसलिए यह $Br\text{ø}nsted-Lowry$ अम्ल के रूप में कार्य करता है।
$SO_4^{2-}$,$OH^-$,और $Cl^-$ संयुग्मी क्षार हैं जो प्रोटॉन स्वीकार कर सकते हैं,इसलिए वे $Br\text{ø}nsted-Lowry$ क्षार हैं।
153
EasyMCQ
$CH_3COO^-$ आयन एक....... है।
A
दुर्बल संयुग्मी क्षार
B
प्रबल संयुग्मी क्षार
C
दुर्बल संयुग्मी अम्ल
D
प्रबल संयुग्मी अम्ल

Solution

(B) $CH_3COOH$ एक दुर्बल अम्ल है। ब्रोंस्टेड-लॉरी सिद्धांत के अनुसार,एक दुर्बल अम्ल का संयुग्मी क्षार अपेक्षाकृत प्रबल होता है। चूँकि $CH_3COOH$ एक दुर्बल अम्ल है,इसलिए इसका संयुग्मी क्षार $CH_3COO^-$ एक प्रबल संयुग्मी क्षार है।
154
EasyMCQ
निम्नलिखित में से कौन सा यौगिक $Br\o nsted$ अम्ल और $Br\o nsted$ क्षार दोनों के रूप में कार्य नहीं कर सकता है?
A
$HSO_4^-$
B
$Na_2CO_3$
C
$NH_3$
D
$HCO_3^-$

Solution

(B) $Br\o nsted$ अम्ल एक प्रोटॉन $(H^+)$ दाता होता है,और $Br\o nsted$ क्षार एक प्रोटॉन $(H^+)$ स्वीकर्ता होता है।
जो यौगिक दोनों के रूप में कार्य कर सकते हैं उन्हें उभयधर्मी (amphoteric) कहा जाता है।
$HSO_4^-$ प्रोटॉन दान करके $SO_4^{2-}$ बना सकता है और प्रोटॉन स्वीकार करके $H_2SO_4$ बना सकता है।
$NH_3$ प्रोटॉन दान करके $NH_2^-$ बना सकता है और प्रोटॉन स्वीकार करके $NH_4^+$ बना सकता है।
$HCO_3^-$ प्रोटॉन दान करके $CO_3^{2-}$ बना सकता है और प्रोटॉन स्वीकार करके $H_2CO_3$ बना सकता है।
$Na_2CO_3$ का वियोजन $2Na^+$ और $CO_3^{2-}$ में होता है। $CO_3^{2-}$ आयन केवल प्रोटॉन स्वीकार करके $HCO_3^-$ या $H_2CO_3$ बना सकता है; यह प्रोटॉन दान नहीं कर सकता क्योंकि इसमें कोई हाइड्रोजन परमाणु नहीं है।
इसलिए,$Na_2CO_3$ $Br\o nsted$ अम्ल के रूप में कार्य नहीं कर सकता है।
155
EasyMCQ
निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही नहीं है?
A
आर्हेनियस अम्ल-क्षार सिद्धांत पानी या अन्य विलायकों में पदार्थों के अम्लीय या क्षारीय गुणों को समझाने के लिए उपयुक्त है।
B
आर्हेनियस सिद्धांत $AlCl_3$ के अम्लीय गुण को नहीं समझाता है।
C
$Na_2CO_3$ का जलीय विलयन क्षारीय है,फिर भी इसमें $OH^-$ आयन नहीं होते हैं।
D
$CO_2$ का जलीय विलयन अम्लीय है,फिर भी इसमें $H^+$ आयन नहीं होते हैं।

Solution

(A) आर्हेनियस सिद्धांत अम्लों को उन पदार्थों के रूप में परिभाषित करता है जो पानी में $H^+$ आयनों की सांद्रता बढ़ाते हैं और क्षारों को उन पदार्थों के रूप में जो पानी में $OH^-$ आयनों की सांद्रता बढ़ाते हैं।
कथन $A$ गलत है क्योंकि आर्हेनियस सिद्धांत केवल जलीय विलयनों तक सीमित है और यह गैर-जलीय विलायकों में अम्लीय या क्षारीय गुणों को नहीं समझा सकता है।
कथन $B$ सही है क्योंकि $AlCl_3$ एक लुईस अम्ल है,आर्हेनियस अम्ल नहीं।
कथन $C$ सही है क्योंकि $Na_2CO_3$ एक प्रबल क्षार $(NaOH)$ और दुर्बल अम्ल $(H_2CO_3)$ का लवण है,जो जल-अपघटन के कारण अपने विलयन को क्षारीय बनाता है,भले ही ठोस अवस्था में इसमें $OH^-$ आयन न हों।
कथन $D$ सही है क्योंकि $CO_2$ पानी के साथ प्रतिक्रिया करके $H_2CO_3$ बनाता है,जो वियोजित होकर $H^+$ आयन प्रदान करता है,लेकिन $CO_2$ में स्वयं $H^+$ आयन नहीं होते हैं।
156
EasyMCQ
निम्नलिखित में से कौन सा एक लुईस अम्ल है?
A
$NH_4Cl$
B
$MgCl_2$
C
$CO_2$
D
$H_2O$

Solution

(C) लुईस अम्ल वह पदार्थ है जो इलेक्ट्रॉन के एक एकाकी युग्म (lone pair) को स्वीकार कर सकता है।
$CO_2$ एक लुईस अम्ल के रूप में कार्य करता है क्योंकि कार्बन परमाणु इलेक्ट्रॉन-न्यून होता है और न्यूक्लियोफाइल से इलेक्ट्रॉन युग्म स्वीकार कर सकता है।
$NH_4Cl$ एक लवण है,$MgCl_2$ एक आयनिक यौगिक है,और $H_2O$ आमतौर पर ऑक्सीजन परमाणु पर मौजूद एकाकी युग्मों के कारण लुईस क्षार के रूप में कार्य करता है।
157
EasyMCQ
उदासीनीकरण अभिक्रिया के परिणामस्वरूप....... उत्पाद प्राप्त होता है।
A
$H^{+}$ आयन
B
$OH^{-}$ आयन
C
$H^{+}$ और $OH^{-}$ दोनों आयन
D
जल के अणु

Solution

(D) उदासीनीकरण अभिक्रिया एक अम्ल और एक क्षार के बीच होती है जिससे लवण और जल प्राप्त होता है। एक प्रबल अम्ल और एक प्रबल क्षार के उदासीनीकरण के लिए शुद्ध आयनिक समीकरण है: $H^{+}(aq) + OH^{-}(aq) \rightarrow H_2O(l)$। अतः,उदासीनीकरण प्रक्रिया का मुख्य उत्पाद जल के अणु हैं।
158
EasyMCQ
निम्नलिखित में से कौन सा सबसे प्रबल संयुग्मी क्षार (conjugate base) है?
A
$ClO_4^-$
B
$HCO_3^-$
C
$F^-$
D
$HSO_4^-$

Solution

(B) संयुग्मी क्षार की प्रबलता उसके संबंधित अम्ल की प्रबलता के व्युत्क्रमानुपाती होती है।
प्रबल अम्ल के संयुग्मी क्षार दुर्बल होते हैं और दुर्बल अम्ल के संयुग्मी क्षार प्रबल होते हैं।
दिए गए संयुग्मी क्षारों के लिए संबंधित अम्ल हैं:
$ClO_4^-$ आता है $HClO_4$ से (एक बहुत प्रबल अम्ल)।
$HCO_3^-$ आता है $H_2CO_3$ से (एक दुर्बल अम्ल)।
$F^-$ आता है $HF$ से (एक दुर्बल अम्ल)।
$HSO_4^-$ आता है $H_2SO_4$ से (एक प्रबल अम्ल)।
अम्ल की प्रबलता की तुलना करने पर: $HClO_4 > H_2SO_4 > HF > H_2CO_3$।
इसलिए,संयुग्मी क्षार की प्रबलता का क्रम $HCO_3^- > F^- > HSO_4^- > ClO_4^-$ है।
अतः,दिए गए विकल्पों में $HCO_3^-$ सबसे प्रबल संयुग्मी क्षार है।
159
EasyMCQ
निम्नलिखित में से कौन सा $Br\o nsted$ अम्ल नहीं है?
A
$CH_3NH_3^+$
B
$CH_3COO^-$
C
$H_2O$
D
$HSO_4^-$

Solution

(B) $Br\o nsted$ अम्ल वह पदार्थ है जो प्रोटॉन $(H^+)$ दान कर सकता है।
$CH_3NH_3^+$ प्रोटॉन दान करके $CH_3NH_2$ बना सकता है।
$H_2O$ प्रोटॉन दान करके $OH^-$ बना सकता है।
$HSO_4^-$ प्रोटॉन दान करके $SO_4^{2-}$ बना सकता है।
$CH_3COO^-$ एसिटिक अम्ल $(CH_3COOH)$ का संयुग्मी क्षार है और यह प्रोटॉन दान नहीं कर सकता; यह प्रोटॉन स्वीकार करके $Br\o nsted$ क्षार के रूप में कार्य करता है।
160
EasyMCQ
निम्नलिखित में से किसमें $HCl$ अम्ल के रूप में कार्य नहीं करता है?
A
$NH_3$
B
$C_2H_5OH$
C
$H_2O$
D
$C_6H_6$

Solution

(D) अम्ल वह पदार्थ है जो प्रोटॉन $(H^+)$ दान करता है।
$HCl$ एक अम्ल के रूप में तब कार्य करता है जब वह किसी ऐसे क्षार के साथ प्रतिक्रिया करता है जो प्रोटॉन स्वीकार कर सके।
$1$. $HCl + NH_3 \rightarrow NH_4^+ + Cl^-$ (यहाँ $NH_3$ एक क्षार है,$HCl$ अम्ल के रूप में कार्य करता है)।
$2$. $HCl + C_2H_5OH \rightarrow C_2H_5OH_2^+ + Cl^-$ (यहाँ $C_2H_5OH$ क्षार के रूप में कार्य करता है,$HCl$ अम्ल के रूप में कार्य करता है)।
$3$. $HCl + H_2O \rightarrow H_3O^+ + Cl^-$ (यहाँ $H_2O$ एक क्षार है,$HCl$ अम्ल के रूप में कार्य करता है)।
$4$. $C_6H_6$ (बेंजीन) एक अध्रुवीय विलायक है और इसके पास $HCl$ से प्रोटॉन स्वीकार करने के लिए कोई एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म नहीं है। इसलिए,$C_6H_6$ में $HCl$ अम्ल के रूप में कार्य नहीं करता है।
161
EasyMCQ
निम्नलिखित में से कौन सा एक लुईस क्षार नहीं है?
A
$CH_4$
B
$C_2H_5OH$
C
एसीटोन
D
द्वितीयक एमीन

Solution

(A) एक लुईस क्षार वह पदार्थ है जो इलेक्ट्रॉनों के एक एकाकी युग्म (lone pair) को दान कर सकता है।
$CH_4$ (मीथेन) में केंद्रीय कार्बन परमाणु पर कोई एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म नहीं होता है,क्योंकि इसके सभी संयोजी इलेक्ट्रॉन सहसंयोजक बंधन में शामिल होते हैं।
इसलिए,$CH_4$ लुईस क्षार के रूप में कार्य नहीं कर सकता है।
$C_2H_5OH$ (एथेनॉल) में ऑक्सीजन पर,एसीटोन में ऑक्सीजन पर और द्वितीयक एमीन में नाइट्रोजन पर एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म होते हैं,जिससे वे सभी लुईस क्षार के रूप में कार्य कर सकते हैं।
162
EasyMCQ
$HPO_4^{2-}$ का संयुग्मी क्षार ..... है।
A
$PO_4^{3-}$
B
$H_2PO_4^{-}$
C
$H_3PO_4$
D
$H_4PO_4^{+}$

Solution

(A) संयुग्मी क्षार दिए गए अम्ल से एक प्रोटॉन $(H^{+})$ को हटाने से बनता है।
$HPO_4^{2-}$ स्पीशीज के लिए,एक $H^{+}$ आयन हटाने पर $PO_4^{3-}$ प्राप्त होता है।
अभिक्रिया: $HPO_4^{2-} \rightarrow H^{+} + PO_4^{3-}$.
अतः,$HPO_4^{2-}$ का संयुग्मी क्षार $PO_4^{3-}$ है।
163
EasyMCQ
निम्नलिखित में से कौन सा सबसे दुर्बल ब्रोंस्टेड-लोरी क्षार है?
A
$H^{-}$
B
$OH^{-}$
C
$Cl^{-}$
D
$HCO_3^{-}$

Solution

(C) ब्रोंस्टेड-लोरी क्षार की प्रबलता उसके संयुग्मी अम्ल की प्रबलता के व्युत्क्रमानुपाती होती है।
$1$. दिए गए क्षारों के संयुग्मी अम्ल हैं: $H_2$ ($H^{-}$ के लिए),$H_2O$ ($OH^{-}$ के लिए),$HCl$ ($Cl^{-}$ के लिए),और $H_2CO_3$ ($HCO_3^{-}$ के लिए)।
$2$. इन अम्लों में,$HCl$ सबसे प्रबल अम्ल है।
$3$. चूंकि $HCl$ सबसे प्रबल अम्ल है,इसलिए इसका संयुग्मी क्षार $Cl^{-}$ सबसे दुर्बल क्षार होगा।
164
EasyMCQ
$NH_3 + H_2O \rightleftharpoons NH_4^+ + OH^-$ अभिक्रिया में जल ....... के रूप में कार्य करता है।
A
अम्ल
B
क्षार
C
उदासीन
D
अम्ल और क्षार दोनों

Solution

(A) $NH_3 + H_2O \rightleftharpoons NH_4^+ + OH^-$ अभिक्रिया में,$NH_3$ जल से एक प्रोटॉन $(H^+)$ ग्रहण करके $NH_4^+$ बनाता है।
चूंकि $H_2O$ यहाँ $NH_3$ को प्रोटॉन $(H^+)$ दान करता है,इसलिए यह ब्रोंस्टेड-लौरी अम्ल के रूप में कार्य करता है।
165
EasyMCQ
$HC_2O_4^{-} + PO_4^{3-} \rightarrow HPO_4^{2-} + C_2O_4^{2-}$ अभिक्रिया में दो ब्रोंस्टेड क्षार (Brønsted bases) कौन से हैं?
A
$HC_2O_4^{-}$ और $PO_4^{3-}$
B
$HPO_4^{2-}$ और $C_2O_4^{2-}$
C
$PO_4^{3-}$ और $C_2O_4^{2-}$
D
$HC_2O_4^{-}$ और $HPO_4^{2-}$

Solution

(C) ब्रोंस्टेड-लॉरी सिद्धांत के अनुसार,एक क्षार वह है जो प्रोटॉन $(H^+)$ स्वीकार करता है।
दी गई अभिक्रिया में: $HC_2O_4^{-} + PO_4^{3-} \rightarrow HPO_4^{2-} + C_2O_4^{2-}$
$1$. $HC_2O_4^{-}$ एक अम्ल के रूप में कार्य करता है क्योंकि यह प्रोटॉन दान करके $C_2O_4^{2-}$ बनाता है।
$2$. $PO_4^{3-}$ एक क्षार के रूप में कार्य करता है क्योंकि यह प्रोटॉन स्वीकार करके $HPO_4^{2-}$ बनाता है।
$3$. विपरीत अभिक्रिया में,$HPO_4^{2-}$ एक अम्ल है और $C_2O_4^{2-}$ एक क्षार है।
अतः,दो ब्रोंस्टेड क्षार $PO_4^{3-}$ और $C_2O_4^{2-}$ हैं।
166
MediumMCQ
निम्नलिखित में से कौन सा यौगिक $Lewis$ क्षार के रूप में कार्य करता है?
A
$Cu^{2+}$
B
$AlCl_3$
C
$NH_3$
D
$BF_3$

Solution

(C) $Lewis$ क्षार वह पदार्थ है जो इलेक्ट्रॉनों के एक एकाकी युग्म (lone pair) को दान कर सकता है।
$NH_3$ में नाइट्रोजन परमाणु पर एक एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म होता है,जिसे वह इलेक्ट्रॉन-न्यून प्रजाति को दान कर सकता है।
$Cu^{2+}$,$AlCl_3$ और $BF_3$ सभी इलेक्ट्रॉन-न्यून प्रजातियां हैं और $Lewis$ अम्ल के रूप में कार्य करती हैं क्योंकि वे इलेक्ट्रॉन युग्म स्वीकार कर सकती हैं।
167
EasyMCQ
निम्नलिखित में से कौन सा लुईस अम्ल का उदाहरण है?
A
$CaO$
B
$CH_3NH_2$
C
$SO_3$
D
इनमें से कोई नहीं

Solution

(C) लुईस अम्ल को इलेक्ट्रॉन युग्म स्वीकार करने वाले के रूप में परिभाषित किया जाता है।
$SO_3$ (सल्फर ट्राइऑक्साइड) में सल्फर परमाणु इलेक्ट्रॉन-न्यून होता है जो एक क्षार से इलेक्ट्रॉन युग्म स्वीकार कर सकता है।
$CaO$ एक क्षारीय ऑक्साइड है।
$CH_3NH_2$ (मिथाइल एमाइन) एक लुईस क्षार के रूप में कार्य करता है क्योंकि नाइट्रोजन परमाणु पर एक एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म (lone pair) मौजूद होता है।
168
EasyMCQ
$Cl^-$ ..... का संयुग्मी क्षार (conjugate base) है।
A
$HClO_4$
B
$HCl$
C
$HOCl$
D
$HOCl_3$

Solution

(B) ब्रोंस्टेड-लोरी सिद्धांत के अनुसार,जब कोई अम्ल एक प्रोटॉन $(H^+)$ त्यागता है,तो संयुग्मी क्षार बनता है।
यह संबंध इस प्रकार है: $\text{Acid} \rightleftharpoons \text{Conjugate Base} + H^+$.
क्लोराइड आयन $(Cl^-)$ के लिए,संबंधित अम्ल इसमें एक प्रोटॉन $(H^+)$ जोड़कर प्राप्त किया जाता है:
$Cl^- + H^+ \rightarrow HCl$.
अतः,$Cl^-$ अम्ल $HCl$ का संयुग्मी क्षार है।
169
EasyMCQ
$NH_3$ का स्व-आयनीकरण स्थिरांक $........... $ है।
A
$[NH_4]^+[NH_2]^-$
B
$[NH_4]^+[NH]^{2-}$
C
$[NH_4]^+[NH_3]^-$
D
$[NH_4]^+ / [NH_2]^-$

Solution

(A) द्रव अमोनिया का स्व-आयनीकरण (ऑटो-प्रोटोलेसिस) संतुलन अभिक्रिया द्वारा दर्शाया जाता है:
$2NH_3(l) \rightleftharpoons NH_4^+(am) + NH_2^-(am)$
स्व-आयनीकरण स्थिरांक $(K_{am})$ को बनने वाले आयनों की सांद्रता के गुणनफल के रूप में परिभाषित किया जाता है:
$K_{am} = [NH_4^+][NH_2^-]$
170
EasyMCQ
निम्नलिखित में से कौन सा यौगिक $Br\o nsted$ अम्ल और $Br\o nsted$ क्षार दोनों के रूप में कार्य कर सकता है?
A
$NH_3$
B
$CN^-$
C
$HSO_4^-$
D
$NH_3$ और $HSO_4^-$

Solution

(C) $Br\o nsted$ अम्ल एक प्रोटॉन $(H^+)$ दाता है,और $Br\o nsted$ क्षार एक प्रोटॉन $(H^+)$ स्वीकर्ता है।
जो पदार्थ प्रोटॉन का दान और स्वीकार दोनों कर सकते हैं,उन्हें उभयधर्मी (amphoteric) कहा जाता है।
$NH_3$ प्रोटॉन स्वीकार करके $NH_4^+$ बनाता है (क्षार के रूप में),लेकिन सामान्य परिस्थितियों में प्रोटॉन का दान नहीं कर सकता है।
$CN^-$ प्रोटॉन स्वीकार करके $HCN$ बनाता है (क्षार के रूप में),लेकिन प्रोटॉन का दान नहीं कर सकता है।
$HSO_4^-$ प्रोटॉन का दान करके $SO_4^{2-}$ बनाता है (अम्ल के रूप में) और प्रोटॉन स्वीकार करके $H_2SO_4$ बनाता है (क्षार के रूप में)।
इसलिए,$HSO_4^-$ $Br\o nsted$ अम्ल और $Br\o nsted$ क्षार दोनों के रूप में कार्य करता है।
171
EasyMCQ
$HBr + H_2O \rightleftharpoons H_3O^{+} + Br^{-}$ अभिक्रिया में दुर्बल अम्ल का संयुग्मी क्षार ....... है।
A
$HBr$
B
$H_2O$
C
$Br^{-}$
D
$H_3O^{+}$

Solution

(C) दी गई अभिक्रिया में: $HBr + H_2O \rightleftharpoons H_3O^{+} + Br^{-}$.
$HBr$ एक अम्ल के रूप में कार्य करता है क्योंकि यह $H_2O$ को प्रोटॉन $(H^{+})$ दान करता है।
$H_2O$ एक क्षार के रूप में कार्य करता है क्योंकि यह प्रोटॉन स्वीकार करता है।
जब एक अम्ल $(HBr)$ एक प्रोटॉन खो देता है,तो यह अपना संयुग्मी क्षार $(Br^{-})$ बनाता है।
चूंकि $HBr$ एक प्रबल अम्ल है,इसलिए इसका संयुग्मी क्षार $Br^{-}$ एक दुर्बल क्षार है।
172
MediumMCQ
निम्नलिखित में से कौन सा आयन एक अम्ल और एक क्षार दोनों के रूप में कार्य कर सकता है?
A
$HSO_4^-$
B
$SO_4^{2-}$
C
$H_3O^+$
D
$Cl^-$

Solution

(A) एक उभयधर्मी (amphoteric) प्रजाति वह है जो प्रोटॉन $(H^+)$ दान भी कर सकती है और स्वीकार भी कर सकती है।
$1$. क्षार के रूप में: $HSO_4^- + H^+ \rightleftharpoons H_2SO_4$
$2$. अम्ल के रूप में: $HSO_4^- \rightleftharpoons SO_4^{2-} + H^+$
अतः,$HSO_4^-$ अम्ल और क्षार दोनों के रूप में कार्य करता है।
173
EasyMCQ
निम्नलिखित आयनों को उनकी अम्लता के सही क्रम में व्यवस्थित करें: $(i) \, HCO_3^-, (ii) \, H_3O^+, (iii) \, HSO_4^-, (iv) \, HSO_3F$.
A
$ii < iii < i < iv$
B
$i < iii < ii < iv$
C
$iii < i < iv < ii$
D
$iv < ii < iii < i$

Solution

(B) अम्लता निर्धारित करने के लिए,हम संयुग्मी क्षार (conjugate base) की स्थिरता या अम्लीय प्रोटॉन से जुड़े इलेक्ट्रॉन-आकर्षक समूहों की प्रकृति को देखते हैं।
$1$. $HSO_3F$ (फ्लोरोसल्फोनिक एसिड) एक सुपर एसिड है,जो इसे दिए गए विकल्पों में सबसे मजबूत एसिड बनाता है।
$2$. $H_3O^+$ (हाइड्रोनियम आयन) एक मजबूत एसिड है जिसका $pK_a$ लगभग $-1.7$ होता है।
$3$. $HSO_4^-$ (बाइसल्फेट आयन) का $pK_a$ लगभग $1.99$ होता है।
$4$. $HCO_3^-$ (बाइकार्बोनेट आयन) एक कमजोर एसिड है जिसका $pK_a$ लगभग $10.3$ होता है।
इन मानों की तुलना करने पर,अम्लता का क्रम: $HCO_3^- < HSO_4^- < H_3O^+ < HSO_3F$ प्राप्त होता है,जो $(i) < (iii) < (ii) < (iv)$ के अनुरूप है।
174
MediumMCQ
$NH_4^+$,$H_2O$,$H_3O^+$,$HF$ और $OH^-$ को उनकी अम्लीय शक्ति के बढ़ते क्रम में व्यवस्थित करें।
A
$OH^- < H_2O < NH_4^+ < HF < H_3O^+$
B
$H_3O^+ < HF < H_2O < NH_4^+ < OH^-$
C
$NH_4^+ < HF < H_3O^+$
D
$H_3O^+ < NH_4^+ < HF < OH^- < H_2O$

Solution

(A) अम्लीय शक्ति प्रोटॉन $(H^+)$ दान करने की क्षमता पर निर्भर करती है।
प्रबल अम्लों के संयुग्मी क्षार दुर्बल होते हैं।
उनके संयुग्मी क्षारों की तुलना करने पर:
$NH_3$ ($NH_4^+$ से),$OH^-$ ($H_2O$ से),$H_2O$ ($H_3O^+$ से),$F^-$ ($HF$ से) और $O^{2-}$ ($OH^-$ से)।
इन संयुग्मी क्षारों की क्षारीय शक्ति का क्रम $O^{2-} > NH_3 > OH^- > F^- > H_2O$ है।
अतः,अम्लीय शक्ति का क्रम इसका उल्टा होगा: $OH^- < H_2O < NH_4^+ < HF < H_3O^+$.
175
EasyMCQ
निम्नलिखित में से कौन सा आयन अम्लीय गुण प्रदर्शित नहीं करता है?
A
$[Al(H_2O)_6]^{+3}$
B
$[Fe(H_2O)_6]^{+3}$
C
$HPO_4^{-2}$
D
$ClO_4^-$

Solution

(D) एक अम्लीय प्रजाति को प्रोटॉन $(H^+)$ दान करने में सक्षम होना चाहिए।
$1$. $[Al(H_2O)_6]^{+3}$ एक लुईस अम्ल के रूप में कार्य करता है और समन्वित जल के अणुओं से $H^+$ मुक्त कर सकता है।
$2$. $[Fe(H_2O)_6]^{+3}$ भी लुईस अम्ल के रूप में कार्य करता है और $H^+$ मुक्त कर सकता है।
$3$. $HPO_4^{-2}$ उभयधर्मी है और $PO_4^{-3}$ बनाने के लिए प्रोटॉन दान कर सकता है।
$4$. $ClO_4^-$ एक प्रबल अम्ल $(HClO_4)$ का संयुग्मी क्षार है। चूँकि $HClO_4$ एक बहुत प्रबल अम्ल है,इसका संयुग्मी क्षार $ClO_4^-$ नगण्य क्षारीयता रखता है और इसमें कोई अम्लीय गुण नहीं होता है क्योंकि यह प्रोटॉन दान नहीं कर सकता है।
176
EasyMCQ
$HBr$ का संयुग्मी क्षार (conjugate base) ...... है।
A
$H_2Br^{+}$
B
$H^{+}$
C
$Br^{-}$
D
$Br^{+}$

Solution

(C) ब्रोंस्टेड-लॉरी सिद्धांत के अनुसार,जब कोई अम्ल एक प्रोटॉन $(H^{+})$ दान करता है,तो संयुग्मी क्षार बनता है।
$HBr$ अम्ल के लिए,अभिक्रिया इस प्रकार है:
$HBr \rightarrow H^{+} + Br^{-}$
अतः,$HBr$ का संयुग्मी क्षार $Br^{-}$ है।
177
MediumMCQ
निम्नलिखित में से कौन सा संयुग्मी अम्ल-क्षार युग्म है?
A
$HCl, NaOH$
B
$NH_4Cl, NH_4OH$
C
$H_2SO_4, HSO_4^-$
D
$KCN, HCN$

Solution

(C) एक संयुग्मी अम्ल-क्षार युग्म केवल एक प्रोटॉन $(H^+)$ से भिन्न होता है।
$H_2SO_4$ और $HSO_4^-$ युग्म के लिए,संबंध इस प्रकार है:
$H_2SO_4 \rightleftharpoons H^+ + HSO_4^-$
यहाँ,$H_2SO_4$ अम्ल के रूप में कार्य करता है और $HSO_4^-$ इसका संयुग्मी क्षार है।
इसलिए,$H_2SO_4, HSO_4^-$ एक संयुग्मी अम्ल-क्षार युग्म है।
178
EasyMCQ
$Brønsted-Lowry$ सिद्धांत के अनुसार निम्नलिखित में से कौन सा एक क्षार (base) के रूप में कार्य करता है?
A
$I^{-}$
B
$H_3O^{+}$
C
$HCl$
D
$NH_4^{+}$

Solution

(A) $Brønsted-Lowry$ सिद्धांत के अनुसार,क्षार वह पदार्थ है जो प्रोटॉन $(H^{+})$ स्वीकार कर सकता है।
$I^{-}$ प्रबल अम्ल $HI$ का संयुग्मी क्षार है,जिसका अर्थ है कि इसके पास इलेक्ट्रॉनों का एक एकाकी युग्म है और यह प्रोटॉन स्वीकार करके $HI$ बना सकता है।
$H_3O^{+}$,$HCl$ और $NH_4^{+}$ सभी $Brønsted$ अम्ल हैं क्योंकि वे प्रोटॉन दान कर सकते हैं।
अतः,$I^{-}$ एक क्षार के रूप में कार्य करता है।
179
EasyMCQ
जब शुद्ध जल को वायुमंडलीय $CO_2$ के संपर्क में रखा जाता है,तो यह गैस को अवशोषित कर लेता है। इसका $pH$ क्या होगा?
A
$7$ से अधिक
B
$7$ से कम
C
$7$
D
जल के आयनिक गुणनफल पर निर्भर करता है

Solution

(B) $CO_2$ एक अम्लीय ऑक्साइड है। जब यह जल में घुलता है,तो यह कार्बोनिक अम्ल $(H_2CO_3)$ बनाता है:
$CO_2(g) + H_2O(l) \rightleftharpoons H_2CO_3(aq)$.
कार्बोनिक अम्ल के निर्माण से विलयन में $H^+$ आयनों की सांद्रता बढ़ जाती है।
इसलिए,परिणामी विलयन का $pH$ $7$ से कम हो जाता है।
180
EasyMCQ
निम्नलिखित स्पीशीज को उनकी क्षारीय सामर्थ्य के घटते क्रम में व्यवस्थित कीजिए: $(a) OH^{-}, (b) NH_2^{-}, (c) F^{-}$.
A
$OH^{-} > NH_2^{-} > F^{-}$
B
$NH_2^{-} > OH^{-} > F^{-}$
C
$F^{-} > NH_2^{-} > OH^{-}$
D
$F^{-} > OH^{-} > NH_2^{-}$

Solution

(B) संयुग्मी क्षारों की क्षारीय सामर्थ्य उनके संबंधित संयुग्मी अम्लों की अम्लीय सामर्थ्य के व्युत्क्रमानुपाती होती है।
संयुग्मी अम्ल हैं: $(a) H_2O, (b) NH_3, (c) HF$.
इन अम्लों की अम्लीय सामर्थ्य का क्रम है: $HF > H_2O > NH_3$.
चूंकि अम्लीय सामर्थ्य $HF > H_2O > NH_3$ है,इसलिए उनके संयुग्मी क्षारों की क्षारीय सामर्थ्य का क्रम उल्टा होगा: $NH_2^{-} > OH^{-} > F^{-}$.
अतः,सही क्रम $NH_2^{-} > OH^{-} > F^{-}$ है।
181
EasyMCQ
निम्नलिखित में से अम्लीयता का सही क्रम कौन सा है?
A
$HCN > OH^- > ClCH_2COOH > HCOOH > CH_3COOH$
B
$HCN > HCOOH > ClCH_2COOH > CH_3COOH$
C
$ClCH_2COOH > HCOOH > CH_3COOH > HCN$
D
$ClCH_2COOH > HCN > HCOOH > CH_3COOH$

Solution

(C) इन यौगिकों की अम्लीयता उनके संयुग्मी क्षार (conjugate base) के स्थायित्व और प्रतिस्थापियों के प्रेरणिक प्रभाव (inductive effect) पर निर्भर करती है।
$1$. $Cl$ परमाणु के प्रबल इलेक्ट्रॉन-आकर्षक प्रभाव के कारण $ClCH_2COOH$ सबसे प्रबल अम्ल है।
$2$. $HCOOH$,$CH_3COOH$ से अधिक अम्लीय है क्योंकि $CH_3COOH$ में मिथाइल समूह इलेक्ट्रॉन-दाता होता है,जो कार्बोक्सिलेट आयन को अस्थिर करता है।
$3$. कार्बोक्सिलिक अम्लों की तुलना में $HCN$ एक बहुत ही दुर्बल अम्ल है।
अतः,अम्लीयता का सही क्रम: $ClCH_2COOH > HCOOH > CH_3COOH > HCN$ है।
182
EasyMCQ
$HSO_3^-$ का संयुग्मी क्षार (conjugate base) ...... है।
A
$H_2SO_3$
B
$SO_2$
C
$SO_3^{2-}$
D
$H_2S$

Solution

(C) किसी अम्ल का संयुग्मी क्षार उस अम्ल से एक प्रोटॉन $(H^+)$ निकालने पर प्राप्त होता है।
$HSO_3^-$ अम्ल के लिए,एक $H^+$ आयन को हटाने पर सल्फाइट आयन,$SO_3^{2-}$ प्राप्त होता है।
अभिक्रिया: $HSO_3^- \rightarrow H^+ + SO_3^{2-}$।
183
EasyMCQ
लुईस सिद्धांत के अनुसार,निम्नलिखित में से कौन सा एक क्षार (base) नहीं है?
A
$OH^{-}$
B
$H_2O$
C
$Ag^{+}$
D
$NH_3$

Solution

(C) लुईस सिद्धांत के अनुसार,एक क्षार वह स्पीशीज है जो इलेक्ट्रॉनों के एक एकाकी युग्म (lone pair) का दान कर सकती है।
$OH^{-}$,$H_2O$ और $NH_3$ सभी के पास इलेक्ट्रॉनों के एकाकी युग्म होते हैं जिन्हें वे दान कर सकते हैं।
$Ag^{+}$ एक धातु धनायन है जो इलेक्ट्रॉन युग्म ग्राही के रूप में कार्य करता है,इसलिए यह एक लुईस अम्ल है,न कि लुईस क्षार।
184
MediumMCQ
$AOH$ और $BOH$ क्षारों के आयनन स्थिरांक क्रमशः $K_{b1}$ और $K_{b2}$ हैं। उनका संबंध $pK_{b1} < pK_{b2}$ है। तो निम्नलिखित में से कौन सा क्षार सबसे अधिक $pH$ का प्रतिनिधित्व नहीं करता है?
A
$AOH$
B
$BOH$
C
दोनों
D
इनमें से कोई नहीं

Solution

(B) दिया गया संबंध $pK_{b1} < pK_{b2}$ है।
चूंकि $pK_b = -\log(K_b)$,कम $pK_b$ मान उच्च $K_b$ मान को दर्शाता है।
इसलिए,$K_{b1} > K_{b2}$।
उच्च $K_b$ मान का अर्थ है कि क्षार अधिक प्रबल है।
$AOH$,$BOH$ की तुलना में अधिक प्रबल क्षार है।
प्रबल क्षार अधिक $OH^-$ आयन उत्पन्न करते हैं,जिससे $pH$ मान अधिक होता है।
अतः,$AOH$ का $pH$,$BOH$ से अधिक है।
प्रश्न पूछता है कि कौन सा क्षार सबसे अधिक $pH$ का प्रतिनिधित्व नहीं करता है,जो कि $BOH$ है।
185
EasyMCQ
निम्नलिखित में से कौन सा ब्रोंस्टेड क्षार के रूप में कार्य करता है?
A
$NO_3^-$
B
$H_3O^+$
C
$NH_4^+$
D
$CH_3COOH$

Solution

(A) ब्रोंस्टेड क्षार वह पदार्थ है जो प्रोटॉन $(H^+)$ स्वीकार कर सकता है।
$NO_3^-$ प्रबल अम्ल $HNO_3$ का संयुग्मी क्षार है और यह प्रोटॉन स्वीकार करके $HNO_3$ बना सकता है।
$H_3O^+$,$NH_4^+$,और $CH_3COOH$ ब्रोंस्टेड अम्ल हैं क्योंकि वे प्रोटॉन दान कर सकते हैं।
186
EasyMCQ
$NH_4^+ + S^{2-} \rightarrow NH_3 + HS^-$ अभिक्रिया में,$NH_4^+$ और $S^{2-}$ के सापेक्ष $NH_3$ और $HS^-$ क्या हैं?
A
अम्ल
B
क्षार
C
संयुग्मी अम्ल-क्षार युग्म
D
इनमें से कोई नहीं

Solution

(C) $Br\o nsted-Lowry$ सिद्धांत के अनुसार,एक अम्ल-क्षार युग्म एक प्रोटॉन $(H^+)$ से भिन्न होता है।
दी गई अभिक्रिया में:
$NH_4^+$ (अम्ल) एक प्रोटॉन खोकर $NH_3$ (संयुग्मी क्षार) बनाता है।
$S^{2-}$ (क्षार) एक प्रोटॉन ग्रहण करके $HS^-$ (संयुग्मी अम्ल) बनाता है।
अतः,$NH_4^+/NH_3$ और $S^{2-}/HS^-$ संयुग्मी अम्ल-क्षार युग्म हैं।
187
EasyMCQ
निम्नलिखित में से कौन $Br\ddot{o}nsted$ अम्ल और $Br\ddot{o}nsted$ क्षार दोनों के रूप में कार्य करता है?
A
$Na_2CO_3$
B
$CN^-$
C
$CO_3^{2-}$
D
$HCO_3^-$

Solution

(D) $Br\ddot{o}nsted$ अम्ल एक प्रोटॉन $(H^+)$ दाता होता है,और $Br\ddot{o}nsted$ क्षार एक प्रोटॉन $(H^+)$ स्वीकर्ता होता है।
जो प्रजातियां प्रोटॉन दान और ग्रहण दोनों कर सकती हैं,उन्हें उभयधर्मी (amphoteric) कहा जाता है।
दिए गए विकल्पों में,$HCO_3^-$ अम्ल के रूप में कार्य कर सकता है: $HCO_3^- \rightarrow H^+ + CO_3^{2-}$.
यह क्षार के रूप में भी कार्य कर सकता है: $HCO_3^- + H^+ \rightarrow H_2CO_3$.
इसलिए,$HCO_3^-$ $Br\ddot{o}nsted$ अम्ल और $Br\ddot{o}nsted$ क्षार दोनों के रूप में कार्य करता है।
188
EasyMCQ
निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?
A
जलीय माध्यम में $HF$,$HCl$ की तुलना में एक प्रबल अम्ल है।
B
$HClO_4$,$HClO_3$ की तुलना में एक दुर्बल अम्ल है।
C
$HNO_3$,$HNO_2$ की तुलना में एक प्रबल अम्ल है।
D
$H_3PO_3$,$H_2SO_3$ की तुलना में एक प्रबल अम्ल है।

Solution

(C) $1$. जलीय माध्यम में,$H-F$ बंध की उच्च बंध वियोजन ऊर्जा के कारण $HCl$,$HF$ की तुलना में एक प्रबल अम्ल है। अतः,विकल्प $A$ गलत है।
$2$. ऑक्सोअम्लों की अम्लता केंद्रीय परमाणु की ऑक्सीकरण अवस्था के साथ बढ़ती है। $HClO_4$ में $Cl$ की ऑक्सीकरण अवस्था $+7$ है,जबकि $HClO_3$ में यह $+5$ है। इसलिए,$HClO_4$,$HClO_3$ की तुलना में एक प्रबल अम्ल है। अतः,विकल्प $B$ गलत है।
$3$. $HNO_3$ में $N$ की ऑक्सीकरण अवस्था $+5$ है और $HNO_2$ में यह $+3$ है। उच्च ऑक्सीकरण अवस्था और अधिक अनुनाद-स्थिर संयुग्मी क्षार के कारण $HNO_3$,$HNO_2$ की तुलना में एक प्रबल अम्ल है। अतः,विकल्प $C$ सही है।
$4$. $H_2SO_3$,$H_3PO_3$ की तुलना में एक प्रबल अम्ल है क्योंकि $S$,$P$ की तुलना में अधिक विद्युत ऋणात्मक है,जिससे $O-H$ बंध का अधिक ध्रुवीकरण होता है। अतः,विकल्प $D$ गलत है।
189
EasyMCQ
$Br\text{\o}nsted$ सिद्धांत के अनुसार,निम्नलिखित अभिक्रिया में कौन से अम्ल हैं?
$NH_3 + H_2O \rightleftharpoons NH_4^+ + OH^-$
A
$H_2O$ और $NH_4^+$
B
$NH_3$ और $OH^-$
C
$NH_3$ और $H_2O$
D
$NH_4^+$ और $OH^-$

Solution

(A) $Br\text{\o}nsted-Lowry$ सिद्धांत के अनुसार,अम्ल एक प्रोटॉन $(H^+)$ दाता होता है।
अभिक्रिया $NH_3 + H_2O \rightleftharpoons NH_4^+ + OH^-$ में:
$1$. $H_2O$,$NH_3$ को एक प्रोटॉन दान करता है और $OH^-$ बनाता है,इसलिए $H_2O$ एक अम्ल के रूप में कार्य करता है।
$2$. विपरीत अभिक्रिया में,$NH_4^+$,$OH^-$ को एक प्रोटॉन दान करता है और $NH_3$ तथा $H_2O$ बनाता है,इसलिए $NH_4^+$ एक अम्ल के रूप में कार्य करता है।
अतः,$H_2O$ और $NH_4^+$ अम्ल हैं।
190
EasyMCQ
निम्नलिखित में से कौन सा एक प्रबल लुईस क्षार के साथ-साथ ब्रोंस्टेड अम्ल और ब्रोंस्टेड क्षार भी है?
A
$NH_3$
B
$PH_3$
C
$CH_4$
D
$BH_3$

Solution

(A) $1$. $Lewis$ क्षार वह पदार्थ है जो इलेक्ट्रॉनों के एक एकाकी युग्म (lone pair) का दान कर सकता है। $NH_3$ में नाइट्रोजन परमाणु पर एक एकाकी युग्म होता है,जो इसे एक प्रबल $Lewis$ क्षार बनाता है।
$2$. $Bronsted$ अम्ल एक प्रोटॉन $(H^+)$ दाता है। $NH_3$ एक प्रोटॉन खोकर $NH_2^-$ बना सकता है,इस प्रकार यह $Bronsted$ अम्ल के रूप में कार्य करता है।
$3$. $Bronsted$ क्षार एक प्रोटॉन $(H^+)$ स्वीकर्ता है। $NH_3$ एक प्रोटॉन स्वीकार करके $NH_4^+$ बना सकता है,इस प्रकार यह $Bronsted$ क्षार के रूप में कार्य करता है।
$4$. इसलिए,$NH_3$ तीनों मानदंडों को पूरा करता है।
191
EasyMCQ
अमोनियम हाइड्रॉक्साइड $(NH_4OH)$ एक ...... है।
A
प्रबल विद्युत अपघट्य
B
दुर्बल विद्युत अपघट्य
C
विभिन्न परिस्थितियों में प्रबल और दुर्बल दोनों विद्युत अपघट्य
D
कम घनत्व वाला पदार्थ

Solution

(B) अमोनियम हाइड्रॉक्साइड $(NH_4OH)$ एक दुर्बल क्षार है।
जलीय विलयन में,यह $NH_4^+$ और $OH^-$ आयनों में आंशिक रूप से वियोजित होता है।
चूंकि यह पानी में पूरी तरह से वियोजित नहीं होता है,इसलिए इसे दुर्बल विद्युत अपघट्य के रूप में वर्गीकृत किया जाता है।
192
EasyMCQ
निम्नलिखित में से कौन सा सबसे दुर्बल क्षार है?
A
$CH_3COO^-$
B
$CH_3^-$
C
$CH_3O^-$
D
$Cl^-$

Solution

(D) क्षार की प्रबलता उसके संयुग्मी अम्ल की प्रबलता के व्युत्क्रमानुपाती होती है।
$1$. दिए गए क्षारों के संयुग्मी अम्ल हैं: $CH_3COOH$ ($CH_3COO^-$ के लिए),$CH_4$ ($CH_3^-$ के लिए),$CH_3OH$ ($CH_3O^-$ के लिए),और $HCl$ ($Cl^-$ के लिए)।
$2$. अम्लीय प्रबलता का क्रम है: $HCl > CH_3COOH > CH_3OH > CH_4$।
$3$. चूँकि $HCl$ सबसे प्रबल अम्ल है,इसलिए इसका संयुग्मी क्षार $Cl^-$ सबसे दुर्बल क्षार है।
193
EasyMCQ
$BF_3$ ....... अवधारणा के अनुसार एक अम्ल है।
A
लुईस
B
आर्हेनियस
C
ब्रोंस्टेड और लॉरी
D
मैडम क्यूरी

Solution

(A) $BF_3$ (बोरॉन ट्राइफ्लोराइड) में केंद्रीय बोरॉन परमाणु के चारों ओर अष्टक अधूरा होता है।
यह अपना अष्टक पूरा करने के लिए इलेक्ट्रॉन युग्म स्वीकार कर सकता है।
लुईस अवधारणा के अनुसार,अम्ल एक इलेक्ट्रॉन-युग्म स्वीकर्ता है।
इसलिए,$BF_3$ एक लुईस अम्ल है।
194
EasyMCQ
$H^{+}$ आयन एक ...... है।
A
लुईस अम्ल
B
लुईस क्षार
C
लॉरी-ब्रोंस्टेड क्षार
D
इनमें से कोई नहीं

Solution

(A) लुईस अम्ल-क्षार सिद्धांत के अनुसार,अम्ल वह पदार्थ है जो इलेक्ट्रॉनों के एक एकाकी युग्म (lone pair) को स्वीकार कर सकता है।
चूंकि $H^{+}$ आयन में एक रिक्त $1s$ कक्षक होता है,इसलिए यह उपसहसंयोजक बंध बनाने के लिए इलेक्ट्रॉनों के एक युग्म को स्वीकार कर सकता है।
अतः,$H^{+}$ आयन एक लुईस अम्ल के रूप में कार्य करता है।
195
EasyMCQ
निम्नलिखित अभिक्रियाओं पर विचार करते हुए,अभिक्रियाओं का कौन सा युग्म यह दर्शाता है कि जल में क्षारीय गुण होते हैं?
$(i) \ CO_2 + H_2O \rightleftharpoons H_2CO_3$
$(ii) \ NH_3 + H_2O \rightleftharpoons NH_4^+ + OH^-$
$(iii) \ HCl + H_2O \rightleftharpoons Cl^- + H_3O^+$
A
$(i)$ और $(ii)$
B
केवल $(ii)$
C
केवल $(iii)$
D
$(i), (ii)$ और $(iii)$

Solution

(C) जल एक क्षार के रूप में कार्य करता है जब वह किसी अन्य पदार्थ से प्रोटॉन $(H^+)$ स्वीकार करता है।
अभिक्रिया $(i)$ में,$H_2O$ एक अभिकारक के रूप में $H_2CO_3$ बनाता है,लेकिन यह ब्रोंस्टेड-लॉरी क्षार के रूप में कार्य नहीं कर रहा है।
अभिक्रिया $(ii)$ में,$NH_3 + H_2O \rightleftharpoons NH_4^+ + OH^-$,जल $NH_3$ को एक प्रोटॉन दान करता है और अम्ल के रूप में कार्य करता है।
अभिक्रिया $(iii)$ में,$HCl + H_2O \rightleftharpoons Cl^- + H_3O^+$,जल $HCl$ से एक प्रोटॉन स्वीकार करके $H_3O^+$ बनाता है,इस प्रकार यह एक क्षार के रूप में कार्य करता है।
अतः,केवल अभिक्रिया $(iii)$ जल के क्षारीय गुण को प्रदर्शित करती है।
196
EasyMCQ
जलीय विलयन में निम्नलिखित में से कौन सा अम्ल के रूप में कार्य करता है?
A
$HOCl$
B
$B(OH)_3$
C
$HOCl$ और $B(OH)_3$
D
इनमें से कोई नहीं

Solution

(C) $1$. $HOCl$ (हाइपोक्लोरस अम्ल) जलीय विलयन में जल को प्रोटॉन $(H^+)$ दान करके ब्रोंस्टेड-लोरी अम्ल के रूप में कार्य करता है: $HOCl + H_2O \rightleftharpoons H_3O^+ + OCl^-$.
$2$. $B(OH)_3$ (बोरिक अम्ल) जलीय विलयन में जल से इलेक्ट्रॉन युग्म स्वीकार करके लुईस अम्ल के रूप में कार्य करता है: $B(OH)_3 + 2H_2O \rightleftharpoons [B(OH)_4]^- + H_3O^+$.
$3$. चूंकि दोनों यौगिक जलीय विलयन में अम्लीय व्यवहार प्रदर्शित करते हैं,इसलिए सही विकल्प $C$ है।
197
EasyMCQ
$NH_3$ का संयुग्मी अम्ल (conjugate acid) लिखिए।
A
$NH_2^-$
B
$NH_4^+$
C
$NH_3$
D
$NH_2$

Solution

(B) किसी क्षार का संयुग्मी अम्ल उसमें एक प्रोटॉन $(H^+)$ जोड़ने से प्राप्त होता है।
$NH_3$ क्षार के लिए,संयुग्मी अम्ल इस अभिक्रिया द्वारा बनता है: $NH_3 + H^+ \rightarrow NH_4^+$.
अतः,$NH_3$ का संयुग्मी अम्ल $NH_4^+$ है।
198
EasyMCQ
जब अमोनिया को पानी में मिलाया जाता है,तो इसकी क्षारीयता में वृद्धि (या $H_3O^+$ की सांद्रता में कमी) के लिए निम्नलिखित में से कौन सा आयन जिम्मेदार है?
A
$OH^-$
B
$H_3O^+$
C
$NH_4^+$
D
इनमें से कोई नहीं

Solution

(A) अमोनिया $(NH_3)$ एक दुर्बल क्षार है जो पानी के साथ इस प्रकार अभिक्रिया करता है:
$NH_3(aq) + H_2O(l) \rightleftharpoons NH_4^+(aq) + OH^-(aq)$
इस अभिक्रिया में,$NH_3$ पानी से एक प्रोटॉन स्वीकार करके अमोनियम आयन $(NH_4^+)$ बनाता है और हाइड्रॉक्साइड आयन $(OH^-)$ मुक्त करता है।
$OH^-$ आयनों की सांद्रता में वृद्धि विलयन को क्षारीय बनाती है,जिससे पानी के आयनिक गुणनफल $(K_w = [H_3O^+][OH^-])$ के कारण $H_3O^+$ आयनों की सांद्रता में कमी आती है।
अतः,$OH^-$ आयन इस परिवर्तन के लिए जिम्मेदार है।
199
EasyMCQ
बाइकार्बोनेट आयन $(HCO_3^-)$ का संयुग्मी क्षार (conjugate base) क्या है?
A
$CO_3^{2-}$
B
$HCO_3^-$
C
$CO_2$
D
$H_2CO_3$

Solution

(A) किसी अम्ल का संयुग्मी क्षार,उस अम्ल से एक प्रोटॉन $(H^+)$ निकालने पर प्राप्त होता है।
बाइकार्बोनेट आयन $(HCO_3^-)$ से एक $H^+$ आयन हटाने पर कार्बोनेट आयन $(CO_3^{2-})$ प्राप्त होता है।
अभिक्रिया: $HCO_3^- \rightarrow H^+ + CO_3^{2-}$.
अतः,$HCO_3^-$ का संयुग्मी क्षार $CO_3^{2-}$ है।
200
EasyMCQ
$Zn(OH)_2$ का संयुग्मी अम्ल है:
A
$Zn(OH)^+$
B
$Zn(OH_3)^-$
C
$Zn^{2+}$
D
इनमें से कोई नहीं

Solution

(D) संयुग्मी अम्ल दिए गए क्षार में एक प्रोटॉन $(H^+)$ जोड़ने से बनता है।
$Zn(OH)_2$ स्पीशीज के लिए,एक प्रोटॉन $(H^+)$ जोड़ने पर $[Zn(OH)_2H]^+$ प्राप्त होता है,जिसे $[Zn(OH)(H_2O)]^+$ के रूप में लिखा जा सकता है।
दिए गए विकल्पों को देखने पर,कोई भी विकल्प $Zn(OH)_2$ का सही संयुग्मी अम्ल नहीं है।

6-2.Equilibrium-II (Ionic Equilibrium) — Acids and Bases · Frequently Asked Questions

1Are these 6-2.Equilibrium-II (Ionic Equilibrium) questions useful for JEE and NEET?

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