(N/A) मान लीजिए कि एक पत्थर को धागे से बांधकर एक क्षैतिज वृत्ताकार पथ पर स्थिर गति से घुमाया जा रहा है।
$1$. पत्थर का संवेग $\vec{p} = m\vec{v}$ द्वारा दिया जाता है। चूंकि गति स्थिर है, संवेग का परिमाण स्थिर रहता है, लेकिन इसकी दिशा हमेशा वृत्ताकार पथ के स्पर्शरेखा (tangential) होती है और लगातार बदलती रहती है।
$2$. छोटे समय अंतराल $\Delta t$ में संवेग में परिवर्तन $\Delta \vec{p} = \vec{p}_{final} - \vec{p}_{initial}$ द्वारा दिया जाता है। वृत्तीय गति के लिए, संवेग में परिवर्तन का यह सदिश वृत्त के केंद्र की ओर इंगित करता है।
$3$. न्यूटन के गति के दूसरे नियम के अनुसार, $\vec{F} = \frac{d\vec{p}}{dt}$। धागे में तनाव बल केंद्र की ओर कार्य करता है, जो संवेग में परिवर्तन की दिशा के समान है।
$4$. चूंकि संवेग सदिश स्पर्शरेखीय है और संवेग में परिवर्तन का सदिश त्रिज्यीय (केंद्र की ओर) है, इसलिए यह स्पष्ट है कि वे एक ही दिशा में नहीं हैं।