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Out breeding Devices Questions in Hindi

Class 12 Biology · Sexual Reproduction in Flowering Plants · Out breeding Devices

82+

Questions

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100%

With Solutions

Showing 50 of 82 questions in Hindi

1
EasyMCQ
एक पुष्प में नर और मादा जनन अंगों का अलग-अलग समय पर परिपक्व होना क्या कहलाता है?
A
एपोगैमी (Apogamy)
B
पॉलीगैमी (Polygamy)
C
डाइकोगैमी (Dichogamy)
D
हर्कोगेमी (Herkogamy)

Solution

(C) उभयलिंगी पुष्पों में,जब नर और मादा जनन अंग अलग-अलग समय पर परिपक्व होते हैं,तो यह स्व-परागण को रोकता है। इस घटना को $Dichogamy$ (भिन्नकालपक्वता) कहा जाता है।
$Apogamy$ का अर्थ निषेचन के बिना भ्रूण का विकास है।
$Polygamy$ का अर्थ एक ही पौधे पर एकलिंगी और उभयलिंगी दोनों प्रकार के पुष्पों की उपस्थिति है।
$Herkogamy$ एक यांत्रिक बाधा है जो स्व-परागण को रोकती है।
2
MediumMCQ
निम्नलिखित में से कौन से पुष्पों में विषमवर्तिकाग्रता (heterostyly) दिखाई देती है?
A
मिराबिलिस (Mirabilis)
B
गुड़हल (Hibiscus)
C
प्रिमरोज़ (Primrose)
D
मटर (Pisum)

Solution

(C) सही उत्तर है।
विषमवर्तिकाग्रता (heterostyly) एक ऐसी स्थिति है जिसमें एक ही प्रजाति के फूलों में वर्तिका (style) और पुंकेसर (stamens) की लंबाई अलग-अलग होती है।
यह तंत्र स्व-परागण को रोककर पर-परागण को बढ़ावा देता है।
$Primula$ (प्रिमरोज़) में दो प्रकार के फूल होते हैं:
$1$. पिन-आइड (Pin-eyed): लंबी वर्तिका और छोटे पुंकेसर वाले फूल।
$2$. थ्रम-आइड (Thrum-eyed): छोटी वर्तिका और लंबे पुंकेसर वाले फूल।
यह द्विरूपता सुनिश्चित करती है कि एक प्रकार के फूल से परागकण प्रभावी रूप से दूसरे प्रकार के फूल के वर्तिकाग्र (stigma) पर स्थानांतरित हो जाएं।
3
MediumMCQ
कुछ पौधों में वर्तिका (style) छोटी होती है,जबकि कुछ अन्य में यह पुंकेसर (stamens) से लंबी होती है। इस स्थिति को क्या कहा जाता है?
A
समकालपक्वता (Homogamy)
B
समवर्तिका (Homostyly)
C
विषमवर्तिका (Heterostyly)
D
इनमें से कोई नहीं

Solution

(C) विषमवर्तिका (Heterostyly) कुछ पुष्पी पौधों में पाई जाने वाली एक क्रियाविधि है जिसमें फूलों में वर्तिका और पुंकेसर की लंबाई अलग-अलग होती है।
यह अनुकूलन पर-परागण को बढ़ावा देता है क्योंकि यह सुनिश्चित करता है कि एक प्रकार के फूल के परागकण दूसरे प्रकार के फूल के वर्तिकाग्र पर स्थानांतरित हों,जिसकी वर्तिका की लंबाई उसके अनुरूप हो।
इसलिए,वह स्थिति जिसमें वर्तिका की लंबाई पुंकेसर के सापेक्ष भिन्न होती है,उसे विषमवर्तिका (Heterostyly) कहा जाता है।
4
EasyMCQ
जब परागकोष अपने ही पुष्प के वर्तिकाग्र से पहले परिपक्व हो जाते हैं,तो इस स्थिति को क्या कहा जाता है?
A
हर्कोगेमी (Herkogamy)
B
प्रोटेंड्री (Protandry)
C
हेटरोस्टाइली (Heterostyly)
D
हेटरोगामी (Heterogamy)

Solution

(B) जब पुंकेसर (परागकोष) उसी पुष्प के वर्तिकाग्र से पहले परिपक्व हो जाते हैं,तो इस स्थिति को $Protandry$ (पुंपक्वता) कहा जाता है।
इस स्थिति को प्रदर्शित करने वाले पुष्पों को प्रोटेंड्रस कहा जाता है।
यह प्रक्रिया स्व-परागण को रोककर पर-परागण को बढ़ावा देती है।
उदाहरण के लिए: धनिया,चमेली और सूरजमुखी।
5
MediumMCQ
निम्नलिखित में से कौन सा लक्षण पर-परागण (cross-pollination) को बढ़ावा देता है?
A
अनुन्मील्य परागणी (Cleistogamy)
B
भिन्नकालपक्वता (Dichogamy)
C
समकालपक्वता (Homogamy)
D
उपरोक्त सभी

Solution

(B) . $Dichogamy$ (भिन्नकालपक्वता) में,नर और मादा प्रजनन अंगों (परागकोष और वर्तिकाग्र) के परिपक्व होने का समय अलग-अलग होता है। यह समय का अंतर स्व-परागण को रोकता है और पर-परागण को अनिवार्य बनाता है। $Cleistogamy$ (अनुन्मील्य परागणी) और $Homogamy$ (समकालपक्वता) आमतौर पर स्व-परागण को बढ़ावा देते हैं।
6
MediumMCQ
किसी प्रजाति में निरंतर स्व-परागण से क्या विकसित होता है?
A
मजबूत संतान
B
कमजोर संतान
C
नई किस्में
D
बीज रहित फल

Solution

(B) निरंतर स्व-परागण से अंतःप्रजनन अवसाद (inbreeding depression) उत्पन्न होता है।
अंतःप्रजनन अवसाद का अर्थ है संबंधित व्यक्तियों के बीच प्रजनन के परिणामस्वरूप किसी दी गई आबादी में जैविक फिटनेस में कमी आना।
यह प्रक्रिया समयुग्मजता (homozygosity) को बढ़ाती है,जो अक्सर हानिकारक अप्रभावी एलील की अभिव्यक्ति की ओर ले जाती है,जिसके परिणामस्वरूप संतान कमजोर हो जाती है।
7
EasyMCQ
डाइकोगैमी (Dichogamy),जो पर-परागण में सहायता करती है,एक ऐसी पुष्पीय प्रक्रिया है जिसमें:
A
परागकोष और वर्तिकाग्र अलग-अलग ऊंचाइयों पर होते हैं
B
परागकोष और वर्तिकाग्र अलग-अलग समय पर परिपक्व होते हैं
C
परागकोष और वर्तिकाग्र की संरचना बाधा के रूप में कार्य करती है
D
परागकण उसी फूल के वर्तिकाग्र पर अंकुरित होने में असमर्थ होते हैं

Solution

(B) डाइकोगैमी (Dichogamy) एक ऐसी प्रक्रिया है जो पर-परागण को बढ़ावा देती है,जिसमें एक ही फूल के परागकोष और वर्तिकाग्र अलग-अलग समय पर परिपक्व होते हैं। यह स्व-परागण को रोकता है। इसके दो प्रकार हैं: $Protandry$ (नर जननांग पहले परिपक्व होते हैं) और $Protogyny$ (वर्तिकाग्र पहले परिपक्व होता है)। सूरजमुखी इसका एक उदाहरण है।
8
MediumMCQ
निम्नलिखित में से क्या स्व-परागण को रोकता है?
A
स्व-बंध्यता (Self-sterility)
B
हरकोगेमी (Herkogamy)
C
डाइकोगेमी (Dichogamy)
D
उपरोक्त सभी

Solution

(D) पादपों में स्व-परागण को रोकने और पर-परागण को बढ़ावा देने के लिए कई अनुकूलन पाए जाते हैं:
$1$. $\text{स्व-बंध्यता}$ (Self-sterility): यह एक आनुवंशिक तंत्र है जिसमें परागकण उसी पुष्प के वर्तिकाग्र पर अंकुरित नहीं हो पाते हैं।
$2$. $\text{हरकोगेमी}$ (Herkogamy): इसमें एक ही पुष्प के परागकोष और वर्तिकाग्र के बीच भौतिक या यांत्रिक बाधा होती है, जो स्व-परागण को रोकती है।
$3$. $\text{डाइकोगेमी}$ (Dichogamy): यह वह स्थिति है जिसमें एक ही पुष्प के परागकोष और वर्तिकाग्र अलग-अलग समय पर परिपक्व होते हैं (पुंपक्वता या स्त्रीपूर्वता)।
अतः, ये सभी तंत्र स्व-परागण को रोकते हैं।
9
MediumMCQ
पादपों में,प्रकृति में,स्व-युग्मन (autogamy) से बचा जाता है क्योंकि उत्पन्न होने वाले बीज:
A
संख्या में कम होते हैं
B
सफलतापूर्वक अंकुरित नहीं होते हैं
C
स्वस्थ पौधे उत्पन्न नहीं करते हैं
D
उपरोक्त सभी

Solution

(D) स्व-युग्मन (autogamy) लगातार पीढ़ियों तक होने से अंतःप्रजनन अवसाद (inbreeding depression) उत्पन्न होता है।
अंतःप्रजनन अवसाद का अर्थ है अंतःप्रजनन के परिणामस्वरूप किसी दी गई आबादी में जैविक फिटनेस का कम होना।
इसके परिणामस्वरूप ऐसे बीज उत्पन्न होते हैं जो संख्या में कम होते हैं,जिनकी अंकुरण दर कम होती है,और जो पर-परागण (allogamy) द्वारा उत्पन्न बीजों की तुलना में कम स्वस्थ या कम ओजस्वी पौधे उत्पन्न करते हैं।
10
MediumMCQ
द्विलिंगी पुष्पों में,जब जायांग (gynoecium) पुमंग (androecium) से पहले परिपक्व होता है,तो इसे क्या कहा जाता है?
A
पुंपक्वता (Protandry)
B
स्त्रीपूर्वता (Protogyny)
C
विषमयुग्मकी (Heterogamy)
D
स्वयुग्मन (Autogamy)

Solution

(B) द्विलिंगी पुष्पों में,स्व-परागण को रोकने और पर-परागण को बढ़ावा देने के लिए,पौधों में विभिन्न बहिःप्रजनन युक्तियाँ (outbreeding devices) विकसित हुई हैं।
ऐसी ही एक प्रक्रिया डाइकोगैमी (dichogamy) है,जिसमें पुंकेसर और स्त्रीकेसर अलग-अलग समय पर परिपक्व होते हैं।
जब जायांग (मादा प्रजनन अंग) पुमंग (नर प्रजनन अंग) से पहले परिपक्व होता है,तो इस स्थिति को स्त्रीपूर्वता (Protogyny) कहा जाता है।
इसके विपरीत,जब पुमंग जायांग से पहले परिपक्व होता है,तो इसे पुंपक्वता (Protandry) कहा जाता है।
11
MediumMCQ
एलोगैमी (पर-परागण) किसके द्वारा सबसे अच्छी तरह से समर्थित है?
A
समकालपक्वता (Homogamy)
B
अनुन्मील्य परागण (Cleistogamy)
C
एकलिंगता (Dicliny)
D
उपरोक्त सभी

Solution

(C) एलोगैमी या पर-परागण एक फूल के परागकोष से दूसरे फूल के वर्तिकाग्र तक पराग कणों का स्थानांतरण है।
$1$. समकालपक्वता (Homogamy) का अर्थ है परागकोष और वर्तिकाग्र का एक ही समय पर परिपक्व होना,जो स्व-परागण को बढ़ावा देता है।
$2$. अनुन्मील्य परागण (Cleistogamy) उन फूलों को संदर्भित करता है जो कभी नहीं खुलते हैं,जिससे स्व-परागण सुनिश्चित होता है।
$3$. एकलिंगता (Dicliny) का अर्थ है एक फूल में केवल एक प्रकार के प्रजनन अंग (पुंकेसर या स्त्रीकेसर) की उपस्थिति। यह स्थिति स्व-परागण को असंभव बनाती है,जिससे यह एलोगैमी का समर्थन करती है।
अतः,सही विकल्प $C$ है।
12
MediumMCQ
एक ही पुष्प में नर (परागकोष) और मादा (वर्तिकाग्र) जनन अंगों का अलग-अलग समय पर परिपक्व होना (स्व-परागण की संभावना को कम करने के लिए) क्या कहलाता है?
A
डाइकोगेमी (Dichogamy)
B
डाइकोटॉमी (Dichotomy)
C
डाइक्लाइनी (Dicliny)
D
डाइओसी (Dioecy)

Solution

(A) डाइकोगेमी पौधों द्वारा स्व-परागण को रोकने और पर-परागण को बढ़ावा देने के लिए उपयोग की जाने वाली एक युक्ति है।
इस प्रक्रिया में,एक ही पुष्प के नर जनन अंग (परागकोष) और मादा जनन अंग (वर्तिकाग्र) अलग-अलग समय पर परिपक्व होते हैं।
यह दो प्रकार से हो सकता है:
$1$. पुंपूर्वता (Protandry): परागकोष वर्तिकाग्र से पहले परिपक्व होते हैं।
$2$. स्त्रीपूर्वता (Protogyny): वर्तिकाग्र परागकोष से पहले परिपक्व होते हैं।
अतः,सही विकल्प $A$ है।
13
MediumMCQ
स्व-परागण को रोकने वाले पुष्पों को क्या कहा जाता है?
A
डाइकोगेमी (Dichogamy)
B
प्रोटेंड्री (Protandry)
C
हर्कोगेमी (Herkogamy)
D
प्रोटोगिनी (Protogyny)

Solution

(C) हर्कोगेमी (Herkogamy) एक यांत्रिक युक्ति है जो स्व-परागण को रोकती है और पर-परागण को बढ़ावा देती है,यहाँ तक कि उन पुष्पों में भी जहाँ परागकोष और वर्तिकाग्र एक ही समय पर परिपक्व होते हैं। इसमें परागकोष और वर्तिकाग्र के बीच भौतिक बाधाएँ होती हैं।
14
MediumMCQ
जब किसी पुष्प में भौतिक अवरोध या बाड़ के कारण परागकण परागकोश से वर्तिकाग्र तक स्थानांतरित नहीं हो पाते हैं,या जब स्व-परागण को रोकने के लिए पुमंग और जायांग के बीच कोई प्राकृतिक अवरोध मौजूद होता है,तो इसे क्या कहा जाता है?
A
विषमवर्तिकात्व (Heterostyly)
B
हरकोगेमी (Herkogamy)
C
भिन्नकालपक्वता (Dichogamy)
D
अनुन्मील्यपरागता (Cleistogamy)

Solution

(B) हरकोगेमी एक यांत्रिक या भौतिक अवरोध है जो उभयलिंगी पुष्पों में स्व-परागण को रोकता है।
इस तंत्र में,परागकोश और वर्तिकाग्र की स्थानिक व्यवस्था ऐसी होती है कि परागकोश से परागकण आसानी से उसी पुष्प के वर्तिकाग्र तक नहीं पहुँच पाते हैं।
यह भौतिक पृथक्करण या अवरोध स्व-परागण को रोककर पर-परागण सुनिश्चित करता है।
अतः,सही विकल्प $B$ है।
15
EasyMCQ
पुंपूर्वता (Protandry) वह अवस्था है,जिसमें......
A
परागकोष वर्तिकाग्र के बाद परिपक्व होते हैं।
B
परागकोष वर्तिकाग्र से पहले परिपक्व होते हैं।
C
परागकोष और वर्तिकाग्र दोनों एक ही समय पर परिपक्व होते हैं।
D
उपर्युक्त सभी।

Solution

(B) पुंपूर्वता (Protandry) भिन्नकालपक्वता (dichogamy) का एक प्रकार है,जिसमें एक पुष्प के परागकोष (नर जनन अंग) उसी पुष्प के वर्तिकाग्र (मादा जनन अंग) से पहले परिपक्व हो जाते हैं। यह तंत्र स्व-परागण को रोकता है और पर-परागण को बढ़ावा देता है। अतः,सही विकल्प $B$ है।
16
MediumMCQ
...... स्वयुग्मन (Autogamy) और सजातपुष्पी परागण (Geitonogamy) दोनों को रोकता है।
A
सजातपुष्पी परागण,लेकिन पर-परागण नहीं
B
स्वयुग्मन और सजातपुष्पी परागण
C
स्वयुग्मन लेकिन सजातपुष्पी परागण नहीं
D
पर-परागण और सजातपुष्पी परागण दोनों

Solution

(B) पुष्पी पादपों में,$Autogamy$ (स्वयुग्मन) का अर्थ है परागकणों का उसी पुष्प के वर्तिकाग्र पर स्थानांतरण।
$Geitonogamy$ (सजातपुष्पी परागण) का अर्थ है परागकणों का उसी पादप के दूसरे पुष्प के वर्तिकाग्र पर स्थानांतरण।
$Dioecy$ (एकलिंगाश्रयी) एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें नर और मादा पुष्प अलग-अलग पादपों पर उत्पन्न होते हैं।
चूंकि नर और मादा पुष्प अलग-अलग पादपों पर होते हैं,इसलिए पादप न तो $Autogamy$ (क्योंकि इसके लिए एक ही पुष्प की आवश्यकता होती है) और न ही $Geitonogamy$ (क्योंकि इसके लिए एक ही पादप की आवश्यकता होती है) कर सकता है।
अतः,$Dioecy$ स्वयुग्मन और सजातपुष्पी परागण दोनों को रोकता है।
17
MediumMCQ
आकृति में दर्शाया गया परागण के लिए अनुकूलन ..... प्रकार का है।
A
हरकोगेमी (Herkogamy)
B
क्लिस्टोगेमी (Cleistogamy)
C
हेटरोस्टाइल (Heterostyly)
D
डाइकोगेमी (Dichogamy)

Solution

(A) $Herkogamy$ (हरकोगेमी) उभयलिंगी फूलों में स्व-परागण को रोकने के लिए एक यांत्रिक बाधा को संदर्भित करता है। यह पौधों में पर-परागण को बढ़ावा देने के लिए एक सामान्य अनुकूलन है। $Cleistogamy$ (क्लिस्टोगेमी) उन फूलों को संदर्भित करता है जो कभी नहीं खुलते हैं,$Heterostyly$ (हेटरोस्टाइल) वर्तिका और पुंकेसर की अलग-अलग लंबाई को संदर्भित करता है,और $Dichogamy$ (डाइकोगेमी) नर और मादा प्रजनन अंगों के अलग-अलग समय पर परिपक्व होने को संदर्भित करता है। इस प्रश्न से जुड़े मानक वनस्पति आरेखों के आधार पर,परागकोष और वर्तिकाग्र का यांत्रिक पृथक्करण $Herkogamy$ के रूप में पहचाना जाता है।
18
MediumMCQ
एक एकलिंगाश्रयी (dioecious) पुष्पी पादप किसे रोकता है?
A
स्वयुग्मन (autogamy) और सजातपुष्पी परागण (geitonogamy)
B
सजातपुष्पी परागण (geitonogamy) और पर-परागण (xenogamy)
C
अनुन्मील्य परागणी (cleistogamy) और पर-परागण (xenogamy)
D
स्वयुग्मन (autogamy) और पर-परागण (xenogamy)

Solution

(A) एकलिंगाश्रयी (dioecious) पादपों में नर और मादा पुष्प अलग-अलग पादपों पर स्थित होते हैं।
चूंकि नर और मादा प्रजनन संरचनाएं अलग-अलग पादपों पर शारीरिक रूप से पृथक होती हैं,इसलिए स्व-परागण नहीं हो सकता है।
स्वयुग्मन (autogamy) (एक ही पुष्प के परागकोष से परागकणों का उसी पुष्प के वर्तिकाग्र पर स्थानांतरण) रुक जाता है क्योंकि पादप एकलिंगी होता है।
सजातपुष्पी परागण (geitonogamy) (एक ही पादप के एक पुष्प के परागकणों का उसी पादप के दूसरे पुष्प के वर्तिकाग्र पर स्थानांतरण) भी रुक जाता है क्योंकि एक पादप पर केवल एक ही लिंग के पुष्प होते हैं।
अतः,एकलिंगाश्रयी पादप स्वयुग्मन और सजातपुष्पी परागण दोनों को रोकते हैं।
19
MediumMCQ
निम्नलिखित में से किसमें स्वयुग्मन (autogamy) और सजातपुष्पी परागण (geitonogamy) दोनों को रोका जाता है?
A
पपीता
B
खीरा
C
अरंडी
D
मक्का

Solution

(A) : स्वयुग्मन (autogamy) और सजातपुष्पी परागण (geitonogamy) स्व-परागण के दो रूप हैं।
स्वयुग्मन में,परागकण उसी पुष्प के वर्तिकाग्र पर गिरते हैं।
सजातपुष्पी परागण में,एक पुष्प के परागकण उसी पौधे के दूसरे पुष्प के वर्तिकाग्र पर गिरते हैं।
पपीता एक एकलिंगाश्रयी (dioecious) पौधा है,जिसका अर्थ है कि नर और मादा पुष्प अलग-अलग पौधों पर होते हैं।
चूंकि नर और मादा प्रजनन संरचनाएं अलग-अलग पौधों पर स्थित होती हैं,इसलिए इसमें स्वयुग्मन और सजातपुष्पी परागण दोनों ही रुक जाते हैं।
20
MediumMCQ
पुष्पों की एकलिंगता क्या रोकती है?
A
गेिटोनोगेमी,लेकिन ज़ेनोगेमी नहीं
B
स्वयुग्मन (ऑटोगैमी) और गेिटोनोगेमी
C
स्वयुग्मन (ऑटोगैमी),लेकिन गेिटोनोगेमी नहीं
D
गेिटोनोगेमी और ज़ेनोगेमी दोनों

Solution

(C) : एकलिंगता वह स्थिति है जिसमें दो प्रकार के एकलिंगी पुष्प मौजूद होते हैं,अर्थात्,पुंकेसरी (नर पुष्प) और स्त्रीकेसरी (मादा पुष्प)।
एकलिंगाश्रयी (monoecious) पादप में,एकलिंगी पुष्प स्वयुग्मन (ऑटोगैमी) को रोकते हैं क्योंकि नर और मादा प्रजनन अंग अलग-अलग पुष्पों में होते हैं।
हालाँकि,गेिटोनोगेमी (एक पुष्प के परागकोष से परागकणों का उसी पादप के दूसरे पुष्प के वर्तिकाग्र पर स्थानांतरण) अभी भी एकलिंगाश्रयी पादपों में हो सकती है।
इसलिए,एकलिंगता स्वयुग्मन को रोकती है लेकिन गेिटोनोगेमी को नहीं रोकती है।
21
MediumMCQ
निरंतर स्व-परागण का परिणाम होता है....
A
आउटब्रीडिंग डिप्रेशन
B
इनब्रीडिंग डिप्रेशन
C
बहुभ्रूणता (Polyembryony)
D
असंगतजनन (Apomixis)

Solution

(B) पौधों में निरंतर स्व-परागण के परिणामस्वरूप समयुग्मजी अवस्था में अप्रभावी हानिकारक एलील जमा हो जाते हैं।
यह प्रक्रिया एक आबादी के भीतर आनुवंशिक विविधता को कम करती है।
इस बढ़ती हुई समयुग्मजता के कारण फिटनेस, जीवन शक्ति और प्रजनन क्षमता में जो कमी आती है, उसे $Inbreeding \text{ } depression$ (अंतःप्रजनन अवसाद) कहा जाता है।
अतः, सही विकल्प $B$ है।
22
MediumMCQ
निम्नलिखित में से किसमें स्वयुग्मन (autogamy) और सजातपुष्पी परागण (geitonogamy) दोनों को रोका जा सकता है?
A
पपीता
B
खीरा
C
मक्का
D
अरंडी

Solution

(A) स्वयुग्मन (autogamy) परागकणों का एक ही पुष्प के परागकोष से उसी पुष्प के वर्तिकाग्र तक स्थानांतरण है। सजातपुष्पी परागण (geitonogamy) परागकणों का एक पुष्प के परागकोष से उसी पौधे के दूसरे पुष्प के वर्तिकाग्र तक स्थानांतरण है। इन दोनों प्रक्रियाओं को एकलिंगाश्रयी (dioecious) पौधों में रोका जा सकता है। एकलिंगाश्रयी पौधों में नर और मादा पुष्प अलग-अलग पौधों पर होते हैं। इसलिए,न तो स्व-परागण (स्वयुग्मन) और न ही एक ही पौधे के पुष्पों के बीच परागण (सजातपुष्पी परागण) हो सकता है। दिए गए विकल्पों में से,$Papaya$ (पपीता) एक एकलिंगाश्रयी पौधा है,जबकि $Cucumber$ (खीरा),$Maize$ (मक्का) और $Castor$ (अरंडी) उभयलिंगाश्रयी (monoecious) पौधे हैं।
23
MediumMCQ
क्लिस्टोगैमी (Cleistogamy) किस पौधे में होती है?
A
कोमेलिना (Commelina)
B
युक्का (Yucca)
C
मालवा (Malva)
D
हाइड्रालिया (Hydrallia)

Solution

(A) क्लिस्टोगैमी एक ऐसी घटना है जिसमें फूल कभी नहीं खिलते (खुलते नहीं हैं)। ऐसे फूलों में परागकोष और वर्तिकाग्र एक-दूसरे के बहुत करीब होते हैं। जब पुष्प कलिका में परागकोष का स्फुटन होता है,तो परागकण वर्तिकाग्र के संपर्क में आते हैं और परागण की प्रक्रिया पूरी होती है। इस प्रकार,क्लिस्टोगैमिस फूल हमेशा स्व-परागित होते हैं क्योंकि इसमें पर-परागण की कोई संभावना नहीं होती है। $Commelina$ एक ऐसा पौधा है जो चैज्मोगैमिस (खुले) और क्लिस्टोगैमिस (बंद) दोनों प्रकार के फूल उत्पन्न करता है।
24
MediumMCQ
किन पौधों में आउटब्रीडिंग युक्तियाँ ऑटोगैमी (स्व-युग्मन) को रोकती हैं लेकिन गिटोनोगैमी (सजातपुष्पी परागण) को नहीं?
A
अरंडी और पपीता
B
पपीता और मक्का
C
अरंडी और मक्का
D
उपरोक्त सभी

Solution

(C) आउटब्रीडिंग युक्तियाँ वे तंत्र हैं जो पर-परागण को बढ़ावा देते हैं।
एकलिंगाश्रयी (monoecious) पौधे,जैसे $Castor$ (अरंडी) और $Maize$ (मक्का),एक ही पौधे पर नर और मादा दोनों प्रकार के फूल रखते हैं।
इन पौधों में,एकलिंगी फूलों की उपस्थिति ऑटोगैमी (एक ही फूल के परागकणों का उसी फूल के वर्तिकाग्र पर स्थानांतरण) को रोकती है क्योंकि फूल या तो नर होता है या मादा।
हालाँकि,गिटोनोगैमी (एक ही पौधे के एक फूल के परागकणों का उसी पौधे के दूसरे फूल के वर्तिकाग्र पर स्थानांतरण) अभी भी हो सकती है क्योंकि दोनों प्रकार के फूल एक ही पौधे पर मौजूद होते हैं।
इसलिए,$Castor$ और $Maize$ सही उदाहरण हैं।
25
MediumMCQ
पुष्पों की एकलिंगता (Unisexuality) किसे रोकती है?
A
स्वयुग्मन (Autogamy) लेकिन सजातपुष्पी परागण (Geitonogamy) नहीं
B
सजातपुष्पी परागण (Geitonogamy) और पर-परागण (Xenogamy)
C
स्वयुग्मन (Autogamy) और सजातपुष्पी परागण (Geitonogamy)
D
$A$ और $C$

Solution

(D) एकलिंगता पुष्पी पादपों में बहिःप्रजनन (outbreeding) की एक युक्ति है।
यदि कोई पादप एकलिंगाश्रयी (dioecious) है (उदाहरण के लिए,पपीता),तो यह स्वयुग्मन (एक ही पुष्प के भीतर परागण) और सजातपुष्पी परागण (एक ही पादप के दो पुष्पों के बीच परागण) दोनों को रोकता है।
चूंकि पुष्प एकलिंगी होते हैं और अलग-अलग पादपों पर स्थित होते हैं,इसलिए परागकण उसी पुष्प या उसी पादप के किसी अन्य पुष्प के वर्तिकाग्र तक नहीं पहुँच सकते हैं।
अतः,यह स्वयुग्मन और सजातपुष्पी परागण दोनों को रोकता है।
26
MediumMCQ
निम्नलिखित में से किसमें स्वयुग्मन (Autogamy) और सजातपुष्पी परागण (Geitonogamy) दोनों को रोका जा सकता है?
A
पपीता
B
खीरा
C
अरंडी
D
मक्का

Solution

(A) स्वयुग्मन (Autogamy) परागकणों का एक ही पुष्प के परागकोष से उसी पुष्प के वर्तिकाग्र तक स्थानांतरण है।
सजातपुष्पी परागण (Geitonogamy) परागकणों का एक ही पौधे के एक पुष्प के परागकोष से दूसरे पुष्प के वर्तिकाग्र तक स्थानांतरण है।
एकलिंगाश्रयी (Dioecious) पौधे,जैसे पपीता,नर और मादा पुष्पों को अलग-अलग पौधों पर धारण करते हैं।
चूंकि नर और मादा पुष्प अलग-अलग पौधों पर होते हैं,इसलिए न तो स्वयुग्मन (एक ही पुष्प) और न ही सजातपुष्पी परागण (एक ही पौधा) हो सकता है।
इसके विपरीत,उभयलिंगाश्रयी (Monoecious) पौधे जैसे खीरा,अरंडी और मक्का में नर और मादा पुष्प एक ही पौधे पर होते हैं,जो सजातपुष्पी परागण को संभव बनाते हैं।
27
EasyMCQ
एक द्विलिंगाश्रयी (dioecious) पुष्पी पादप किसे रोकता है?
A
स्वयुग्मन (Autogamy) और पर-परागण (Xenogamy)
B
स्वयुग्मन (Autogamy) और सजातपुष्पी परागण (Geitonogamy)
C
सजातपुष्पी परागण (Geitonogamy) और पर-परागण (Xenogamy)
D
अनुन्मील्य परागण (Cleistogamy) और पर-परागण (Xenogamy)

Solution

(B) एक द्विलिंगाश्रयी पादप में नर और मादा पुष्प अलग-अलग पौधों पर मौजूद होते हैं।
$1$. स्वयुग्मन (Autogamy) एक ही पुष्प के परागकणों का उसी पुष्प के वर्तिकाग्र पर स्थानांतरण है। चूंकि पादप द्विलिंगाश्रयी है,इसलिए यह संभव नहीं है।
$2$. सजातपुष्पी परागण (Geitonogamy) एक ही पौधे के एक पुष्प के परागकणों का दूसरे पुष्प के वर्तिकाग्र पर स्थानांतरण है। चूंकि पादप द्विलिंगाश्रयी है,नर और मादा पुष्प अलग-अलग पौधों पर होते हैं,इसलिए यह भी संभव नहीं है।
अतः,द्विलिंगाश्रयी अवस्था स्वयुग्मन और सजातपुष्पी परागण दोनों को रोकती है।
28
EasyMCQ
एक उभयलिंगी पुष्प में,यदि पुमंग और जायांग अलग-अलग समय पर परिपक्व होते हैं,तो इस घटना को क्या कहा जाता है?
A
डाइकोगेमी (भिन्नकालपक्वता)
B
हर्कोगेमी
C
हेटरोगेमी
D
मोनोगेमी

Solution

(A) एक उभयलिंगी पुष्प में,यदि पुमंग (नर प्रजनन अंग) और जायांग (मादा प्रजनन अंग) अलग-अलग समय पर परिपक्व होते हैं,तो इस स्थिति को डाइकोगेमी (भिन्नकालपक्वता) कहा जाता है। यह तंत्र स्व-परागण को रोकता है और पर-परागण को बढ़ावा देता है। डाइकोगेमी को आगे प्रोटेंड्री (परागकोष पहले परिपक्व होते हैं) और प्रोटोगिनी (वर्तिकाग्र पहले परिपक्व होता है) में वर्गीकृत किया जा सकता है।
29
MediumMCQ
निम्नलिखित में से किसमें स्वयुग्मन (Autogamy) और सजातपुष्पी परागण (Geitonogamy) दोनों को रोका जाता है?
A
गेहूं
B
पपीता
C
मक्का
D
अरंडी

Solution

(B) स्वयुग्मन (Autogamy) परागकणों का एक ही फूल के परागकोष से उसी फूल के वर्तिकाग्र तक स्थानांतरण है। सजातपुष्पी परागण (Geitonogamy) परागकणों का एक ही पौधे के एक फूल के परागकोष से दूसरे फूल के वर्तिकाग्र तक स्थानांतरण है।
एकलिंगाश्रयी (Dioecious) पौधे, जैसे $\text{पपीता}$, वे पौधे हैं जिनमें नर और मादा फूल अलग-अलग पौधों पर होते हैं।
चूंकि नर और मादा फूल अलग-अलग पौधों पर होते हैं, इसलिए स्वयुग्मन (एक ही फूल के भीतर परागण) और सजातपुष्पी परागण (एक ही पौधे के फूलों के बीच परागण) दोनों ही रुक जाते हैं।
इसके विपरीत, $\text{गेहूं}$, $\text{मक्का}$ और $\text{अरंडी}$ उभयलिंगी या एकसदन (Monoecious) पौधे हैं जिनमें स्वयुग्मन या सजातपुष्पी परागण हो सकता है।
30
Easy
पुष्पों में स्व-परागण को रोकने के लिए विकसित दो रणनीतियों का उल्लेख कीजिए।

Solution

(N/A) स्व-परागण में परागकणों का स्थानांतरण एक ही पुष्प के पुंकेसर से उसी पुष्प के स्त्रीकेसर तक होता है। पुष्पों में स्व-परागण को रोकने के लिए विकसित दो रणनीतियाँ निम्नलिखित हैं:
$1$. स्व-असंगतता (Self-incompatibility): कुछ पौधों में,वर्तिकाग्र में उसी पुष्प या उसी पौधे के अन्य पुष्पों के परागकणों के अंकुरण को रोकने की क्षमता होती है,जिससे पराग नलिका की वृद्धि रुक जाती है। यह स्व-परागण को रोकने के लिए एक आनुवंशिक तंत्र है।
$2$. भिन्नकालपक्वता (Dichogamy): कुछ पौधों में,स्त्रीकेसर और पुंकेसर अलग-अलग समय पर परिपक्व होते हैं। यदि स्त्रीकेसर पुंकेसर से पहले परिपक्व होता है,तो इसे स्त्रीपूर्वता (Protogyny) कहा जाता है। यदि पुंकेसर स्त्रीकेसर से पहले परिपक्व होता है,तो इसे पुंपूर्वता (Protandry) कहा जाता है। यह समय का अंतर परागकणों को उसी पुष्प के ग्रहणशील वर्तिकाग्र के संपर्क में आने से रोकता है।
31
Easy
स्व-असंगतता (self-incompatibility) क्या है? स्व-असंगत प्रजातियों में स्व-परागण बीज निर्माण की ओर क्यों नहीं ले जाता है?

Solution

(N/A) स्व-असंगतता आवृतबीजी पौधों में एक आनुवंशिक तंत्र है जो स्व-परागण को रोकता है।
यह एक ही प्रजाति के व्यक्तियों के बीच या विभिन्न प्रजातियों के व्यक्तियों के बीच आनुवंशिक असंगति विकसित करता है।
जो पौधे इस घटना को प्रदर्शित करते हैं,उनमें पराग कणों के अंकुरण को रोकने की क्षमता होती है और इस प्रकार,वे फूल के वर्तिकाग्र पर पराग नलिका की वृद्धि को रोक देते हैं।
यह युग्मकों के संलयन और भ्रूण के विकास को रोकता है।
परिणामस्वरूप,बीज का निर्माण नहीं होता है।
32
Medium
आउटब्रीडिंग डिवाइसेस (बहिःप्रजनन युक्तियाँ) क्या हैं? इसका महत्व बताइए।

Solution

(N/A) आउटब्रीडिंग डिवाइसेस वे तंत्र हैं जिन्हें पुष्पी पादपों ने स्व-परागण को हतोत्साहित करने और पर-परागण को प्रोत्साहित करने के लिए विकसित किया है।
महत्व: निरंतर स्व-परागण से अंतःप्रजनन अवसाद (inbreeding depression) उत्पन्न होता है,जो पादप आबादी की आनुवंशिक विविधता और फिटनेस को कम करता है। आउटब्रीडिंग डिवाइसेस पर-परागण को बढ़ावा देकर इसे रोकते हैं,जिससे आनुवंशिक विविधता में वृद्धि होती है।
प्रमुख युक्तियाँ निम्नलिखित हैं:
$(i)$ भिन्नकालपक्वता (Dichogamy): कुछ प्रजातियों में पराग मुक्ति और वर्तिकाग्र की ग्राह्यता समकालिक नहीं होती है। या तो पराग वर्तिकाग्र के ग्राह्य होने से पहले मुक्त हो जाते हैं,या वर्तिकाग्र पराग के मुक्त होने से पहले ही ग्राह्य हो जाता है (उदाहरण: $Palms$)।
$(ii)$ हर्कोगेमी (Herkogamy): परागकोष और वर्तिकाग्र की ऐसी व्यवस्था जिसमें वे अलग-अलग स्थितियों में होते हैं ताकि पराग उसी फूल के वर्तिकाग्र के संपर्क में न आ सके (उदाहरण: $Primula$)।
$(iii)$ स्व-असंगतता (Self-incompatibility): यह एक आनुवंशिक तंत्र है जो स्व-पराग को वर्तिकाग्र पर अंकुरित होने या पराग नलिका की वृद्धि को रोककर निषेचन से रोकता है।
33
Medium
वैज्ञानिक कारण दीजिए: आउटब्रीडिंग युक्तियाँ (Outbreeding devices) उर्वरता बढ़ाती हैं।

Solution

(N/A) आउटब्रीडिंग युक्तियाँ वे तंत्र हैं जिन्हें पुष्पी पादपों द्वारा स्व-परागण को हतोत्साहित करने और पर-परागण को प्रोत्साहित करने के लिए विकसित किया गया है।
$1$. अंतःप्रजनन अवसाद (Inbreeding depression) की रोकथाम: निरंतर स्व-परागण से अंतःप्रजनन अवसाद होता है,जो पीढ़ियों तक संतानों की आनुवंशिक विविधता और ओज (vigor) को कम करता है।
$2$. आनुवंशिक विविधता: पर-परागण जीनों के नए संयोजन पेश करता है,जिससे आनुवंशिक विविधता में वृद्धि होती है,जो बदलते वातावरण में प्रजाति की अनुकूलन क्षमता और अस्तित्व को बढ़ाती है।
$3$. बढ़ा हुआ ओज: पर-परागण के माध्यम से उत्पन्न संतानों में अक्सर 'हाइब्रिड विगर' (Hybrid vigor) या विषमयुग्मजता दिखाई देती है,जिसके परिणामस्वरूप स्व-परागण द्वारा उत्पन्न पौधों की तुलना में अधिक स्वस्थ,मजबूत और अधिक उर्वर पौधे प्राप्त होते हैं।
$4$. विकासवादी लाभ: पर-परागण को बढ़ावा देकर,आउटब्रीडिंग युक्तियाँ यह सुनिश्चित करती हैं कि जनसंख्या आनुवंशिक रूप से स्वस्थ रहे और विकास करने में सक्षम हो,जिससे प्रजाति के भीतर उच्च उर्वरता बनी रहती है।
34
Medium
निम्नलिखित शब्दों को परिभाषित कीजिए:
$1.$ उन्मीलपरागी (Chasmogamous)
$2.$ अनुन्मीलपरागी (Cleistogamous)

Solution

(N/A) $1.$ उन्मीलपरागी (Chasmogamous) पुष्प वे पुष्प होते हैं जो खिलते हैं और अपने परागकोशों और वर्तिकाग्र को वातावरण के लिए खोल देते हैं,जिससे पर-परागण संभव होता है। उदाहरण के लिए $Viola$,$Oxalis$ और $Commelina$।
$2.$ अनुन्मीलपरागी (Cleistogamous) पुष्प वे पुष्प होते हैं जो कभी नहीं खिलते हैं। इन पुष्पों में परागकोश और वर्तिकाग्र एक-दूसरे के बहुत करीब स्थित होते हैं,जिससे परागणकों की अनुपस्थिति में भी स्व-परागण (स्वयुग्मन) सुनिश्चित होता है। उदाहरण के लिए $Viola$,$Oxalis$ और $Commelina$।
35
Medium
स्व-असंगतता (Self-incompatibility) क्या है?

Solution

(N/A) स्व-असंगतता पुष्पी पादपों में पाई जाने वाली एक आनुवंशिक क्रियाविधि है जो स्व-परागण को रोकती है। यह स्त्रीकेसर के भीतर परागकणों के अंकुरण या पराग नलिका की वृद्धि को बाधित करके कार्य करती है,जिससे उसी पुष्प या उसी पादप के किसी अन्य पुष्प के परागकणों द्वारा बीजांडों का निषेचन नहीं हो पाता है।
36
MediumMCQ
स्व-असंगत (self-incompatible) पौधों में होने वाले परागण के प्रकार का नाम बताइए।
A
स्व-परागण
B
पर-परागण
C
अनुन्मील्य परागण (Cleistogamy)
D
सजातपुष्पी परागण (Geitonogamy)

Solution

(B) स्व-असंगतता एक आनुवंशिक तंत्र है जो स्व-परागकणों (उसी फूल या उसी पौधे के अन्य फूलों से) को बीजांडों को निषेचित करने से रोकता है,क्योंकि यह पराग के अंकुरण या स्त्रीकेसर में पराग नलिका की वृद्धि को बाधित करता है।
चूंकि इस तंत्र द्वारा स्व-परागण बाधित होता है,इसलिए इन पौधों को निषेचन प्राप्त करने के लिए पर-परागण पर निर्भर रहना पड़ता है।
अतः,स्व-असंगत पौधों में होने वाले परागण का प्रकार पर-परागण है।
37
Medium
एक द्विलिंगी उन्मीलपरागी (chasmogamous) पुष्प में स्व-परागण (autogamy) को रोकने के लिए विकसित होने वाली तीन रणनीतियों की सूची बनाइए।

Solution

(N/A) द्विलिंगी उन्मीलपरागी पुष्पों में स्व-परागण (autogamy) को रोकने के लिए पौधों में निम्नलिखित तीन मुख्य विधियाँ विकसित हुई हैं:
$(A)$ भिन्नकालपक्वता (Dichogamy): इस प्रक्रिया में परागकोष और वर्तिकाग्र अलग-अलग समय पर परिपक्व होते हैं। इसमें पूर्वपुंपक्वता (परागकोष पहले परिपक्व होते हैं) या पूर्वस्त्रीपूर्वता (वर्तिकाग्र पहले परिपक्व होता है) हो सकती है,जो परागकणों को उसी पुष्प के ग्रहणशील वर्तिकाग्र तक पहुँचने से रोकती है।
$(B)$ हर्कोगेमी (Herkogamy): यह एक यांत्रिक या स्थानिक व्यवस्था है जिसमें नर और मादा प्रजनन अंग इस प्रकार स्थित होते हैं कि उसी पुष्प के परागकण वर्तिकाग्र के संपर्क में नहीं आ सकते। यह भौतिक बाधा पर-परागण सुनिश्चित करती है,जैसा कि $Hibiscus$ और $Gloriosa$ में देखा जाता है।
$(C)$ स्व-असंगतता (Self-incompatibility): यह एक आनुवंशिक तंत्र है जिसमें एक पुष्प के परागकण उसी पुष्प के वर्तिकाग्र पर अंकुरित होने में असमर्थ होते हैं या वर्तिका में पराग नलिका का विकास नहीं हो पाता है,जिससे निषेचन रुक जाता है,जैसा कि $Abutilon$ में देखा जाता है।
38
Medium
क्या स्व-असंगतता (self-incompatibility) स्व-युग्मन (autogamy) पर कोई प्रतिबंध लगाती है? कारण बताइए और ऐसे पौधों में परागण की विधि सुझाइए।

Solution

(N/A) हाँ,स्व-असंगतता स्व-युग्मन पर एक महत्वपूर्ण प्रतिबंध लगाती है।
कारण: स्व-असंगतता एक आनुवंशिक तंत्र है जो स्व-पराग (एक ही फूल या उसी पौधे के अन्य फूलों से) को वर्तिकाग्र पर अंकुरित होने से रोककर या पराग नलिका की वृद्धि को बाधित करके बीजांड को निषेचित होने से रोकता है।
परागण की विधि: ऐसे पौधों में परागण पर-परागण (cross-pollination) के माध्यम से होना चाहिए। चूंकि स्व-परागण आनुवंशिक रूप से अवरुद्ध है,इसलिए पौधा एक फूल के परागकोष से दूसरे फूल के वर्तिकाग्र तक परागकणों को स्थानांतरित करने के लिए हवा,पानी या जैविक कारकों (कीटों,पक्षियों,आदि) जैसे बाहरी एजेंटों पर निर्भर करता है।
39
MediumMCQ
सपुष्पी पादप किसे रोकने के लिए कई युक्तियाँ विकसित करते हैं?
A
बीज निर्माण
B
फल निर्माण
C
पर-परागण
D
स्व-परागण

Solution

(D) सपुष्पी पादपों ने स्व-परागण को रोकने और पर-परागण को प्रोत्साहित करने के लिए कई 'बहिःप्रजनन युक्तियाँ' (outbreeding devices) विकसित की हैं।
स्व-परागण के कारण लगातार पीढ़ियों में अंतःप्रजनन अवसाद (inbreeding depression) उत्पन्न होता है,जो पादप समष्टि की आनुवंशिक विविधता और फिटनेस को कम करता है।
सामान्य बहिःप्रजनन युक्तियों में शामिल हैं:
$1$. भिन्नकालपक्वता (Dichogamy): परागकणों के मुक्त होने और वर्तिकाग्र के ग्रहणशील होने का समय अलग-अलग होता है।
$2$. हरकोगैमी (Herkogamy): परागकोष और वर्तिकाग्र ऐसी स्थिति में होते हैं कि परागकण उसी पुष्प के वर्तिकाग्र के संपर्क में नहीं आ पाते।
$3$. स्व-असंगतता (Self-incompatibility): यह एक आनुवंशिक तंत्र है जो स्व-परागकणों को बीजांड को निषेचित करने से रोकता है।
$4$. एकलिंगी पुष्पों का उत्पादन।
अतः,सही उत्तर $D$ है।
40
MediumMCQ
निरंतर स्व-परागण का परिणाम क्या होता है?
A
बहिःप्रजनन
B
अंतःप्रजनन अवसाद
C
बहिःप्रजनन अवसाद
D
जाति विविधता

Solution

(B) निरंतर स्व-परागण के कारण अप्रभावी एलील (recessive alleles) जमा हो जाते हैं और जनसंख्या में आनुवंशिक विविधता कम हो जाती है। यह प्रक्रिया समयुग्मजता (homozygosity) को बढ़ाती है, जिसके परिणामस्वरूप अक्सर हानिकारक अप्रभावी लक्षण प्रकट होते हैं। इस घटना को $Inbreeding \text{ } depression$ (अंतःप्रजनन अवसाद) के रूप में जाना जाता है।
41
MediumMCQ
निम्नलिखित में से किसके द्वारा अंतःप्रजनन (inbreeding) रुकता है?
A
द्विलिंगी पुष्प
B
स्व-परागण
C
एक ही पौधे पर नर और मादा पुष्पों का विकास
D
स्व-असंगतता

Solution

(D) अंतःप्रजनन का तात्पर्य एक ही पौधे या एक ही पुष्प के परागकणों द्वारा निषेचन से है। पर-परागण को बढ़ावा देने और आनुवंशिक विविधता बढ़ाने के लिए,पौधों में विभिन्न 'बहिःप्रजनन युक्तियाँ' (outbreeding devices) विकसित हुई हैं।
$1$. स्व-असंगतता (Self-incompatibility) एक आनुवंशिक तंत्र है जो परागकण के अंकुरण या स्त्रीकेसर में पराग नलिका की वृद्धि को रोककर स्व-परागकणों को निषेचन करने से रोकता है।
$2$. द्विलिंगी पुष्प और स्व-परागण वास्तव में अंतःप्रजनन को बढ़ावा देते हैं।
$3$. एक ही पौधे पर नर और मादा पुष्पों का विकास (एकलिंगाश्रयी) स्व-युग्मन (autogamy) को रोकता है लेकिन सजातपुष्पी परागण (geitonogamy) को नहीं।
अतः,अंतःप्रजनन को रोकने के लिए स्व-असंगतता सबसे प्रभावी आनुवंशिक तंत्र है।
42
MediumMCQ
पादप किसे बढ़ावा देने के लिए विभिन्न युक्तियाँ विकसित करते हैं?
A
स्व-परागण
B
अंतःप्रजनन
C
पर-परागण
D
गेइटोनोगैमी

Solution

(C) पादप स्व-परागण को हतोत्साहित करने और पर-परागण को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न बहिःप्रजनन युक्तियाँ (outbreeding devices) विकसित करते हैं।
स्व-परागण के कारण लगातार पीढ़ियों तक अंतःप्रजनन अवसाद (inbreeding depression) उत्पन्न होता है,जो पादप आबादी की आनुवंशिक विविधता और फिटनेस को कम करता है।
पर-परागण को बढ़ावा देकर,पादप आनुवंशिक विविधता सुनिश्चित करते हैं,जो अनुकूलन और विकास के लिए आवश्यक है।
43
MediumMCQ
निम्नलिखित में से कौन सी युक्ति स्व-परागण को रोकती है?
A
स्व-असंगतता
B
परागकोश और वर्तिकाग्र का एक-दूसरे के निकट होना
C
द्विलिंगी पुष्पों का निर्माण
D
स्व-संगतता

Solution

(A) स्व-परागण का अर्थ है परागकणों का परागकोश से उसी पुष्प के वर्तिकाग्र तक स्थानांतरण। पर-परागण को बढ़ावा देने के लिए,पौधों में कई 'बहिःप्रजनन युक्तियाँ' (outbreeding devices) विकसित हुई हैं।
$1$. स्व-असंगतता (Self-incompatibility) एक आनुवंशिक तंत्र है जो स्व-पराग (उसी पौधे या पुष्प से) को बीजांड को निषेचित करने से रोकता है,क्योंकि यह स्त्रीकेसर में पराग अंकुरण या पराग नलिका की वृद्धि को बाधित करता है।
$2$. परागकोश और वर्तिकाग्र का एक-दूसरे के निकट होना,द्विलिंगी पुष्पों का निर्माण और स्व-संगतता वास्तव में स्व-परागण को बढ़ावा देते हैं,न कि उसे रोकते हैं।
अतः,सही विकल्प $A$ है।
44
MediumMCQ
निम्नलिखित में से कौन सी युक्तियाँ पर-परागण को बढ़ावा देती हैं?
$(i)$ पराग मुक्ति और वर्तिकाग्र की ग्राह्यता का समकालिक न होना
$(ii)$ परागकोष और वर्तिकाग्र का अलग-अलग स्थानों पर स्थित होना
$(iii)$ उभयलिंगाश्रयी (Monoecious) पौधे
$(iv)$ एकलिंगाश्रयी (Dioecious) पौधों का उत्पादन
$(v)$ स्व-असंगतता (Self-incompatibility)
$(vi)$ परागकोष और वर्तिकाग्र का एक-दूसरे के करीब स्थित होना
$(vii)$ स्व-संगतता
A
$(i), (iii), (v), (vi)$
B
$(i), (ii), (iv), (v)$
C
$(ii), (iv), (vii)$
D
$(i), (ii), (iv), (vi), (vii)$

Solution

(B) पुष्पी पादपों में स्व-परागण से बचने और आनुवंशिक विविधता को बढ़ावा देने के लिए पर-परागण को प्रोत्साहित करने वाली कई युक्तियाँ (outbreeding devices) होती हैं:
$(i)$ पराग मुक्ति और वर्तिकाग्र की ग्राह्यता का समकालिक न होना: परागकणों के मुक्त होने से पहले या बाद में वर्तिकाग्र का ग्राह्य होना।
$(ii)$ परागकोष और वर्तिकाग्र का अलग-अलग स्थानों पर स्थित होना (हरकोगेमी): यह परागकणों को उसी पुष्प के वर्तिकाग्र के संपर्क में आने से रोकता है।
$(iv)$ एकलिंगाश्रयी (Dioecious) पौधों का उत्पादन: पपीता जैसे पौधों में नर और मादा पुष्प अलग-अलग पौधों पर होते हैं,जिससे स्व-परागण असंभव हो जाता है।
$(v)$ स्व-असंगतता: यह एक आनुवंशिक तंत्र है जो स्व-परागकणों को बीजांड को निषेचित करने से रोकता है,क्योंकि यह परागकणों के अंकुरण या पराग नलिका की वृद्धि को स्त्रीकेसर में रोक देता है।
अतः,सही युक्तियाँ $(i), (ii), (iv)$ और $(v)$ हैं।
45
MediumMCQ
निम्नलिखित में से क्या परागकणों के अंकुरण या पराग नलिका की वृद्धि को रोकता है?
A
स्व-परागण
B
पर-परागण
C
स्व-अनिषेच्यता (स्व-असंगतता)
D
स्व-संगतता

Solution

(C) स्व-अनिषेच्यता (Self-incompatibility) पुष्पी पादपों में पाई जाने वाली एक आनुवंशिक क्रियाविधि है जो स्व-निषेचन को रोकती है।
यह एक बहिःप्रजनन युक्ति (outbreeding device) के रूप में कार्य करती है,जो उसी पुष्प या उसी पादप के अन्य पुष्पों के परागकणों को वर्तिकाग्र पर अंकुरित होने या पराग नलिका को वर्तिका में वृद्धि करने से रोकती है।
यह पर-परागण को सुनिश्चित करती है और आनुवंशिक विविधता को बढ़ावा देती है।
46
MediumMCQ
मक्का में कौन सी प्रक्रिया बाधित नहीं होती है?
A
स्वयुग्मन (Autogamy)
B
पर-परागण (Allogamy)
C
सजातपुष्पी परागण (Geitonogamy)
D
$B$ और $C$ दोनों

Solution

(C) मक्का एक उभयलिंगाश्रयी (monoecious) पौधा है,जिसका अर्थ है कि इसमें एक ही पौधे पर नर (पुंकेसरी) और मादा (स्त्रीकेसरी) दोनों प्रकार के फूल होते हैं।
चूंकि दोनों प्रकार के फूल एक ही पौधे पर मौजूद होते हैं,इसलिए पौधा सजातपुष्पी परागण (Geitonogamy - एक ही पौधे के दो फूलों के बीच परागण) को नहीं रोक सकता है।
हालाँकि,मक्का में पर-परागण (Allogamy) को बढ़ावा देने और स्वयुग्मन (Autogamy) को कम करने के लिए तंत्र होते हैं।
इसलिए,मक्का में सजातपुष्पी परागण (Geitonogamy) बाधित नहीं होता है।
47
MediumMCQ
निम्नलिखित में से किस प्रकार के पौधों में स्वयुग्मन (Autogamy) और सजातपुष्पी परागण (Geitonogamy) नहीं हो सकते हैं?
A
एकलिंगाश्रयी (Dioecious)
B
द्विलिंगी (Bisexual)
C
उभयलिंगाश्रयी (Monoecious)
D
$A$ और $B$ दोनों

Solution

(A) एकलिंगाश्रयी (Dioecious) पौधों में नर और मादा पुष्प अलग-अलग पौधों पर मौजूद होते हैं।
चूंकि नर और मादा प्रजनन अंग अलग-अलग पौधों पर होते हैं,इसलिए परागकण उसी पौधे के वर्तिकाग्र तक नहीं पहुँच सकते हैं।
इसलिए,स्वयुग्मन (एक ही पुष्प के परागकोष से उसी पुष्प के वर्तिकाग्र तक परागकणों का स्थानांतरण) और सजातपुष्पी परागण (एक ही पौधे के दूसरे पुष्प के वर्तिकाग्र तक परागकणों का स्थानांतरण) दोनों ही रुक जाते हैं।
उदाहरण के लिए पपीता और खजूर।
48
MediumMCQ
जब पौधों में नर और मादा पुष्प अलग-अलग पौधों पर उत्पन्न होते हैं,तो इस स्थिति को क्या कहा जाता है?
A
एकलिंगाश्रयी (Monoecious)
B
द्विलिंगी (Bisexual)
C
द्विलिंगाश्रयी (Dioecious)
D
बहुलिंगी (Polygamous)

Solution

(C) पौधों में,जब नर और मादा पुष्प एक ही पौधे पर उपस्थित होते हैं,तो इसे एकलिंगाश्रयी (Monoecious) कहा जाता है (उदाहरण: मक्का,अरंडी)।
जब नर और मादा पुष्प अलग-अलग पौधों पर उत्पन्न होते हैं,तो इस स्थिति को द्विलिंगाश्रयी (Dioecious) कहा जाता है (उदाहरण: पपीता,खजूर)।
यह प्रक्रिया स्व-परागण को रोकने और पर-परागण को बढ़ावा देने के लिए एक बहिःप्रजनन युक्ति (outbreeding device) के रूप में कार्य करती है।
49
MediumMCQ
निम्नलिखित में से किस पौधे में गेइटोनोगेमी (geitonogamy) और ऑटोगैमी (autogamy) दोनों रुक जाते हैं?
A
गुड़हल
B
पपीता
C
अरंडी
D
मक्का

Solution

(B) स्वयुग्मन (autogamy) परागकणों का उसी फूल के वर्तिकाग्र पर स्थानांतरण है।
गेइटोनोगेमी (geitonogamy) परागकणों का उसी पौधे के दूसरे फूल के वर्तिकाग्र पर स्थानांतरण है।
एकलिंगाश्रयी (dioecious) पौधों में स्वयुग्मन और गेइटोनोगेमी दोनों रुक जाते हैं, क्योंकि इनमें नर और मादा फूल अलग-अलग पौधों पर मौजूद होते हैं।
पपीता $(Carica \, papaya)$ एक एकलिंगाश्रयी पौधा है, जिसका अर्थ है कि इसमें नर और मादा पौधे अलग-अलग होते हैं।
इसलिए, यह स्वयुग्मन और गेइटोनोगेमी दोनों को रोकता है।
गुड़हल उभयलिंगी है, जबकि अरंडी और मक्का उभयलिंगाश्रयी (monoecious) हैं (एक ही पौधे पर नर और मादा फूल होते हैं), जो गेइटोनोगेमी को संभव बनाते हैं।
50
MediumMCQ
निम्नलिखित में से किस पौधे में स्वयुग्मन (Autogamy) नहीं होता है?
A
पपीता
B
अरंडी
C
मक्का
D
उपरोक्त सभी

Solution

(D) स्वयुग्मन स्व-परागण का एक प्रकार है जिसमें परागकण एक ही पुष्प के परागकोश से वर्तिकाग्र तक स्थानांतरित होते हैं।
पपीता $(Carica papaya)$ में पौधा एकलिंगाश्रयी (dioecious) होता है, जिसका अर्थ है कि नर और मादा पुष्प अलग-अलग पौधों पर होते हैं, जिससे स्वयुग्मन असंभव हो जाता है।
अरंडी $(Ricinus communis)$ और मक्का $(Zea mays)$ में पौधे उभयलिंगाश्रयी (monoecious) होते हैं, जिसका अर्थ है कि नर और मादा पुष्प एक ही पौधे पर मौजूद होते हैं। हालांकि वे सजातपुष्पी परागण (geitonogamy) कर सकते हैं, लेकिन उन्होंने स्वयुग्मन को रोकने के लिए विभिन्न तंत्र विकसित किए हैं।
अतः, दिए गए सभी उदाहरणों में विभिन्न प्रजनन रणनीतियों द्वारा स्वयुग्मन को रोका जाता है।

Sexual Reproduction in Flowering Plants — Out breeding Devices · Frequently Asked Questions

1Are these Sexual Reproduction in Flowering Plants questions useful for JEE and NEET?

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2Can I switch to Hindi or Gujarati for these questions?

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