(N/A) स्व-परागण में परागकणों का स्थानांतरण एक ही पुष्प के पुंकेसर से उसी पुष्प के स्त्रीकेसर तक होता है। पुष्पों में स्व-परागण को रोकने के लिए विकसित दो रणनीतियाँ निम्नलिखित हैं:
$1$. स्व-असंगतता (Self-incompatibility): कुछ पौधों में,वर्तिकाग्र में उसी पुष्प या उसी पौधे के अन्य पुष्पों के परागकणों के अंकुरण को रोकने की क्षमता होती है,जिससे पराग नलिका की वृद्धि रुक जाती है। यह स्व-परागण को रोकने के लिए एक आनुवंशिक तंत्र है।
$2$. भिन्नकालपक्वता (Dichogamy): कुछ पौधों में,स्त्रीकेसर और पुंकेसर अलग-अलग समय पर परिपक्व होते हैं। यदि स्त्रीकेसर पुंकेसर से पहले परिपक्व होता है,तो इसे स्त्रीपूर्वता (Protogyny) कहा जाता है। यदि पुंकेसर स्त्रीकेसर से पहले परिपक्व होता है,तो इसे पुंपूर्वता (Protandry) कहा जाता है। यह समय का अंतर परागकणों को उसी पुष्प के ग्रहणशील वर्तिकाग्र के संपर्क में आने से रोकता है।