(N/A) विद्युत क्षेत्र का आयाम,$E_{0} = 120 \; N/C$.
स्रोत की आवृत्ति,$\nu = 50.0 \; MHz = 50 \times 10^{6} \; Hz$.
प्रकाश की गति,$c = 3 \times 10^{8} \; m/s$.
$(a)$ चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता का परिमाण इस प्रकार है:
$B_{0} = \frac{E_{0}}{c} = \frac{120}{3 \times 10^{8}} = 4 \times 10^{-7} \; T = 400 \; nT$.
कोणीय आवृत्ति इस प्रकार है:
$\omega = 2 \pi \nu = 2 \pi \times 50 \times 10^{6} = 3.14 \times 10^{8} \; rad/s$.
प्रसार नियतांक इस प्रकार है:
$k = \frac{\omega}{c} = \frac{3.14 \times 10^{8}}{3 \times 10^{8}} = 1.05 \; rad/m$.
तरंगदैर्ध्य इस प्रकार है:
$\lambda = \frac{c}{\nu} = \frac{3 \times 10^{8}}{50 \times 10^{6}} = 6.0 \; m$.
$(b)$ मान लीजिए कि तरंग धनात्मक $x$-दिशा में संचरित हो रही है। तब,विद्युत क्षेत्र सदिश धनात्मक $y$-दिशा में होगा और चुंबकीय क्षेत्र सदिश धनात्मक $z$-दिशा में होगा। ऐसा इसलिए है क्योंकि तीनों सदिश परस्पर लंबवत होते हैं। विद्युत क्षेत्र सदिश का समीकरण:
$\vec{E} = 120 \sin(1.05x - 3.14 \times 10^{8}t) \hat{j} \; V/m$.
और,चुंबकीय क्षेत्र सदिश का समीकरण:
$\vec{B} = (4 \times 10^{-7}) \sin(1.05x - 3.14 \times 10^{8}t) \hat{k} \; T$.