(N/A) $+x$-दिशा में गति करती हुई एक तरंग पल्स जब किसी दृढ़ (स्थिर) आधार से टकराती है,तो वह $-x$-दिशा में परावर्तित हो जाती है।
यदि हम यह मान लें कि सीमा पर ऊर्जा का कोई अवशोषण नहीं होता है,तो परावर्तित पल्स का आकार आपतित पल्स के समान ही रहता है,लेकिन इसकी कला (phase) $180^{\circ}$ या $\pi$ रेडियन से बदल जाती है।
इसका कारण यह है कि आधार स्थिर है,इसलिए उस बिंदु पर विस्थापन हमेशा शून्य होना चाहिए।
मान लीजिए कि $t$ समय पर आपतित प्रगामी तरंग का विस्थापन $y_{i}(x, t) = a \sin(kx - \omega t)$ है।
मान लीजिए कि परावर्तित तरंग का विस्थापन $y_{r}(x, t)$ है।
अध्यारोपण के सिद्धांत (superposition principle) के अनुसार,परिणामी विस्थापन $y(x, t)$ इस प्रकार है:
$y(x, t) = y_{i}(x, t) + y_{r}(x, t)$
चूंकि आधार दृढ़ है,स्थिर सिरे पर विस्थापन हमेशा शून्य होता है,इसलिए $y(x, t) = 0$।
अतः,$0 = y_{i}(x, t) + y_{r}(x, t)$
इसका अर्थ है कि $y_{r}(x, t) = -y_{i}(x, t)$
आपतित तरंग का समीकरण रखने पर,हमें प्राप्त होता है:
$y_{r}(x, t) = -a \sin(kx - \omega t) = a \sin(kx - \omega t + \pi)$