(A) गतिज ऊर्जा
$(b)$ कम
व्याख्या:
$(a)$ उपग्रह की कुल यांत्रिक ऊर्जा $E$,उसकी गतिज ऊर्जा $K$ और स्थितिज ऊर्जा $U$ का योग है। वृत्ताकार कक्षा में उपग्रह के लिए,$E = -K = U/2$ होता है। चूंकि $K$ हमेशा धनात्मक होता है,इसलिए कुल ऊर्जा ऋणात्मक होती है,जो उसकी गतिज ऊर्जा के ऋणात्मक मान के बराबर होती है।
$(b)$ परिक्रमा करते उपग्रह के पास अपने कक्षीय वेग के कारण पहले से ही गतिज ऊर्जा होती है। पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र से बाहर निकलने के लिए,उसे कुल ऊर्जा को शून्य तक पहुँचाना होता है। चूंकि उसके पास पहले से ही कुछ ऊर्जा है,इसलिए शून्य तक पहुँचने के लिए आवश्यक अतिरिक्त ऊर्जा,उसी ऊंचाई पर स्थित एक स्थिर वस्तु के लिए आवश्यक ऊर्जा से कम होती है,क्योंकि स्थिर वस्तु के पास शुरुआत में कोई गतिज ऊर्जा नहीं होती है।