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Mix Examples-General Organic Chemistry Questions in Hindi

Class 11 Chemistry · 8-2.Organic Chemistry : Isomerism · Mix Examples-General Organic Chemistry

324+

Questions

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100%

With Solutions

Showing 49 of 324 questions in Hindi

51
DifficultMCQ
$C_6H_6Cl_6$ के ज्ञात त्रिविम समावयवी (stereoisomeric) रूपों की कुल संख्या है
A
$6$
B
$7$
C
$8$
D
इनमें से कोई नहीं

Solution

(C) $C_6H_6Cl_6$ यौगिक,जिसे आमतौर पर बेंजीन हेक्साक्लोराइड $(BHC)$ या लिंडेन के रूप में जाना जाता है,$8$ विभिन्न त्रिविम समावयवी रूपों में मौजूद होता है।
ये समावयवी साइक्लोहेक्सेन वलय के सापेक्ष $6$ क्लोरीन परमाणुओं की अलग-अलग स्थानिक व्यवस्था के कारण उत्पन्न होते हैं।
52
DifficultMCQ
निम्नलिखित में से कौन सा बाइफिनाइल प्रकाशिक रूप से सक्रिय (optically active) है?
A
Option A
B
Option B
C
Option C
D
Option D

Solution

(D) एक बाइफिनाइल व्युत्पन्न के प्रकाशिक रूप से सक्रिय होने के लिए,इसे एट्रोपिसोमेरिज्म प्रदर्शित करना चाहिए,जिसके लिए केंद्रीय $C-C$ एकल बंध के चारों ओर मुक्त घूर्णन को रोकने के लिए दोनों फिनाइल वलयों के ऑर्थो स्थितियों पर बड़े प्रतिस्थापियों की उपस्थिति आवश्यक है।
विकल्प $D$ में,अणु में सभी चार ऑर्थो स्थितियों $(2, 2', 6, 6')$ पर बड़े प्रतिस्थापी ($Br$ और $I$) मौजूद हैं। यह त्रिविम बाधा (steric hindrance) दोनों फिनाइल वलयों को एक समतल में आने से रोकती है,जिससे वे एक गैर-समतलीय विन्यास में मजबूर हो जाते हैं जिसमें सममिति का कोई तल या केंद्र नहीं होता है,इस प्रकार अणु कायरल और प्रकाशिक रूप से सक्रिय हो जाता है।
अन्य विकल्पों में मुक्त घूर्णन को रोकने के लिए पर्याप्त ऑर्थो-प्रतिस्थापन का अभाव है,जिससे अणु समतलीय या सममित विन्यास अपना सकते हैं जो अकिरल होते हैं।
53
MediumMCQ
इथाइल एसीटोएसीटेट का इनोलिक रूप,जैसा कि नीचे दिखाया गया है,में है:
Question diagram
A
$9$ सिग्मा बंध और $2$ पाई-बंध
B
$9$ सिग्मा बंध और $1$ पाई-बंध
C
$18$ सिग्मा बंध और $2$ पाई-बंध
D
$16$ सिग्मा बंध और $1$ पाई-बंध

Solution

(C) इथाइल एसीटोएसीटेट के इनोलिक रूप का रासायनिक सूत्र $CH_3-C(OH)=CH-COOCH_2CH_3$ है।
बंधों की गणना:
$1$. सिग्मा $(\sigma)$ बंध: अणु में कुल $18$ सिग्मा बंध हैं।
$2$. पाई $(\pi)$ बंध: अणु में $2$ पाई बंध हैं (एक $C=C$ द्विबंध में और एक $C=O$ द्विबंध में)।
अतः,सही उत्तर $18$ सिग्मा बंध और $2$ पाई-बंध है।
Solution diagram
54
DifficultMCQ
निम्नलिखित में से कौन सा इलेक्ट्रोफिलिक अभिकर्मक के प्रति सबसे अधिक प्रतिक्रियाशील है?
A
$1-$मेथॉक्सी$-2-$मिथाइल बेंजीन
B
$2-$मिथाइल फिनोल
C
$N$-($2$-मिथाइल फिनाइल)एसीटामाइड
D
$2-$मिथाइल फिनाइल मेथेनॉल

Solution

Solution diagram
55
MediumMCQ
एथिलीन ग्लाइकॉल के लिए निम्नलिखित में से कौन सा संरूपण (conformer) सबसे अधिक स्थिर है?
A
Option A
B
Option B
C
Option C
D
Option D

Solution

(C) एथिलीन ग्लाइकॉल का गॉश (gauche) संरूपण सबसे अधिक स्थिर संरूपण है। इसका कारण दो हाइड्रॉक्सिल $(-OH)$ समूहों के बीच अंतःआण्विक हाइड्रोजन बंधन का निर्माण है,जो समूहों के बीच त्रिविम प्रतिकर्षण (steric repulsion) के बावजूद इस विशिष्ट संरूपण को स्थिर करता है।
56
MediumMCQ
इस अणु में कितने त्रिविम समावयवी (stereoisomers) हैं?
$CH_3CH=CHCH_2CH(Br)CH_3$
A
$8$
B
$2$
C
$4$
D
$6$

Solution

(C) यह अणु $CH_3-CH=CH-CH_2-CH(Br)-CH_3$ है।
इसमें एक कायरल केंद्र $(n=1)$ और ज्यामितीय समावयवता प्रदर्शित करने वाला एक द्वि-आबंध $(m=1)$ है।
कायरल केंद्र दो विन्यासों ($R$ और $S$) में मौजूद हो सकता है,जो $2^1 = 2$ प्रकाशिक समावयवी देता है।
द्वि-आबंध दो विन्यासों ($cis$ और $trans$) में मौजूद हो सकता है,जो $2^1 = 2$ ज्यामितीय समावयवी देता है।
चूंकि कायरल केंद्र और द्वि-आबंध के बीच कोई समरूपता नहीं है,इसलिए कुल त्रिविम समावयवियों की संख्या $2^n \times 2^m = 2^1 \times 2^1 = 4$ है।
57
MediumMCQ
इलेक्ट्रोफाइल,$E^{\oplus}$ बेंजीन रिंग पर आक्रमण करके मध्यवर्ती $\sigma-$कॉम्प्लेक्स बनाता है। निम्नलिखित में से कौन सा $\sigma-$कॉम्प्लेक्स सबसे कम ऊर्जा वाला है?
A
Option A
B
Option B
C
Option C
D
Option D

Solution

(B) $\sigma-$कॉम्प्लेक्स (एरेनियम आयन) की स्थिरता बेंजीन रिंग पर मौजूद प्रतिस्थापियों पर निर्भर करती है।
नाइट्रोबेंजीन में $-NO_2$ समूह होता है,जो एक मजबूत इलेक्ट्रॉन-आकर्षक समूह ($-I$ और $-M$ प्रभाव) है। यह समूह इलेक्ट्रॉन घनत्व को खींचकर धनावेशित $\sigma-$कॉम्प्लेक्स को अस्थिर करता है।
इसके विपरीत,बेंजीन में ऐसा कोई इलेक्ट्रॉन-आकर्षक प्रतिस्थापी नहीं होता है।
इसलिए,बेंजीन से बना $\sigma-$कॉम्प्लेक्स नाइट्रोबेंजीन से बने $\sigma-$कॉम्प्लेक्स (ऑर्थो,मेटा या पैरा स्थितियों पर) की तुलना में अधिक स्थिर होता है और इसकी ऊर्जा कम होती है।
58
MediumMCQ
$CH_3-CH=CH-CH(OH)-CH_3$ आण्विक सूत्र वाले यौगिक के लिए संभावित त्रिविम समावयवियों (stereoisomers) की संख्या क्या है?
A
$2$
B
$4$
C
$6$
D
$3$

Solution

(B) यह अणु ज्यामितीय और प्रकाशिक दोनों प्रकार की समावयवता प्रदर्शित करता है।
यौगिक $CH_3-CH=CH-CH(OH)-CH_3$ में एक द्वि-आबंध है (जो $cis-trans$ समावयवता दिखा सकता है) और एक कायरल कार्बन है (जो प्रकाशिक समावयवता दिखा सकता है)।
इसलिए,कुल त्रिविम समावयवियों की संख्या $2^n$ है जहाँ $n=2$,जो $4$ के बराबर है।
59
MediumMCQ
दिए गए अणु का निरपेक्ष विन्यास (absolute configuration) क्या है?
Question diagram
A
$ (2S, 3S) $
B
$ (2R, 3R) $
C
$ (2R, 3S) $
D
$ (2S, 3R) $

Solution

(D) निरपेक्ष विन्यास निर्धारित करने के लिए,हम Cahn-Ingold-Prelog $(CIP)$ नियमों का उपयोग करके प्रत्येक कायरल कार्बन से जुड़े समूहों को प्राथमिकता (priority) देते हैं।
$C-2$ कार्बन के लिए:
समूह $-OH$ (प्राथमिकता $1$),$-CH(Cl)CH_3$ (प्राथमिकता $2$),$-CO_2H$ (प्राथमिकता $3$),और $-H$ (प्राथमिकता $4$) हैं।
चूंकि सबसे कम प्राथमिकता वाला समूह $(-H)$ क्षैतिज बंध पर है,इसलिए विन्यास उलट जाता है। $1$ $\rightarrow 2$ $\rightarrow 3$ का क्रम दक्षिणावर्त (clockwise) है,जो $R$ होना चाहिए,लेकिन क्षैतिज $-H$ के कारण यह $S$ हो जाता है। अतः,$C-2$ का विन्यास $2S$ है।
$C-3$ कार्बन के लिए:
समूह $-Cl$ (प्राथमिकता $1$),$-CH(OH)CO_2H$ (प्राथमिकता $2$),$-CH_3$ (प्राथमिकता $3$),और $-H$ (प्राथमिकता $4$) हैं।
चूंकि सबसे कम प्राथमिकता वाला समूह $(-H)$ क्षैतिज बंध पर है,इसलिए विन्यास उलट जाता है। $1$ $\rightarrow 2$ $\rightarrow 3$ का क्रम वामावर्त (counter-clockwise) है,जो $S$ होना चाहिए,लेकिन क्षैतिज $-H$ के कारण यह $R$ हो जाता है। अतः,$C-3$ का विन्यास $3R$ है।
इसलिए,निरपेक्ष विन्यास $(2S, 3R)$ है।
60
AdvancedMCQ
निम्नलिखित में से कौन सा यौगिक दो अलग-अलग त्रिविम समावयवी (stereoisomeric) रूपों में मौजूद हो सकता है?
A
$Pent-2-ene$
B
$But-2-ene$
C
$1,2-dichloropropane$
D
ये सभी

Solution

(D) दिए गए सभी यौगिक त्रिविम समावयवता (stereoisomerism) प्रदर्शित कर सकते हैं।
$Pent-2-ene$ $(CH_3-CH=CH-CH_2-CH_3)$ और $But-2-ene$ $(CH_3-CH=CH-CH_3)$ $C=C$ द्वि-आबंध के चारों ओर प्रतिबंधित घूर्णन के कारण ज्यामितीय समावयवता प्रदर्शित करते हैं।
$1,2-dichloropropane$ $(CH_3-CHCl-CH_2Cl)$ में $C-2$ स्थिति पर एक कायरल कार्बन परमाणु होता है,जो इसे दो प्रतिबिंब रूपों (enantiomers) के रूप में मौजूद रहने की अनुमति देता है।
अतः,ये सभी यौगिक कम से कम दो अलग-अलग त्रिविम समावयवी रूपों में मौजूद हो सकते हैं।
61
DifficultMCQ
निम्नलिखित में से कौन सा यौगिक प्रकाशीय और ज्यामितीय समावयवता दोनों प्रदर्शित कर सकता है?
A
$3$-मिथाइलसाइक्लोहेक्सिलिडीन-साइक्लोहेक्सेन
B
$4$-मिथाइलसाइक्लोहेक्सिलिडीन-साइक्लोहेक्सेन
C
$3,4$-डाइमिथाइलसाइक्लोब्यूटिलिडीन-$2,3$-डाइमिथाइलसाइक्लोब्यूटेन
D
$1,4$-डाइफेनिलसाइक्लोहेक्सेन

Solution

(A) ज्यामितीय समावयवता प्रदर्शित करने के लिए,अणु में प्रतिबंधित घूर्णन (जैसे द्वि-आबंध) होना चाहिए और द्वि-आबंध के प्रत्येक छोर पर जुड़े समूह अलग-अलग होने चाहिए। प्रकाशीय समावयवता प्रदर्शित करने के लिए,अणु में सममिति का तल या व्युत्क्रमण का केंद्र नहीं होना चाहिए (अर्थात,यह कायरल होना चाहिए)।
$A$: $3$-मिथाइलसाइक्लोहेक्सिलिडीन-साइक्लोहेक्सेन में पहले वलय की $3$-स्थिति पर एक कायरल केंद्र है। द्वि-आबंध प्रतिबंधित घूर्णन प्रदान करता है,और चूंकि द्वि-आबंध के दोनों पक्ष अलग-अलग हैं,इसलिए यह ज्यामितीय समावयवता दिखा सकता है। इस प्रकार,यह दोनों प्रदर्शित करता है।
अतः,सही उत्तर $A$ है।
62
MediumMCQ
निम्नलिखित यौगिक के लिए संभावित स्टीरियोआइसोमर्स की कुल संख्या ज्ञात कीजिए:
संरचना: एक साइक्लोपेंटेन वलय जिसमें स्थिति $1$ पर $-CH=CH-CH_2-CH_3$ समूह और स्थिति $2$ पर $-CH=CH_2$ समूह जुड़ा है।
A
$8$
B
$16$
C
$32$
D
$64$

Solution

(A) दिया गया यौगिक $3$-विनाइल-$4$-(ब्यूट-$1$-एनाइल)साइक्लोपेंट-$1$-ईन है।
$1$. अणु में $3$ द्वि-आबंध हैं जो ज्यामितीय समावयवता $(E/Z)$ प्रदर्शित कर सकते हैं: एक वलय में ($5$-सदस्यीय वलय में $Z$ के रूप में निश्चित),एक विनाइल समूह में (कोई $E/Z$ नहीं),और एक ब्यूटेनाइल समूह में ($E$ या $Z$ हो सकता है)।
$2$. अणु में $2$ कायरल केंद्र हैं जहाँ प्रतिस्थापी साइक्लोपेंटेन वलय से जुड़े हैं।
$3$. स्टीरियोजेनिक तत्वों का विश्लेषण:
- कायरल केंद्र: $2$ $(n=2)$
- ज्यामितीय समावयवता के स्थान: $1$ (ब्यूटेनाइल श्रृंखला का द्वि-आबंध,$m=1$)
$4$. कुल स्टीरियोआइसोमर्स = $2^{(n+m)} = 2^{(2+1)} = 2^3 = 8$.
$5$. अतः,$8$ संभावित स्टीरियोआइसोमर्स हैं।
63
DifficultMCQ
निम्नलिखित में से कौन सी अभिक्रिया डायस्टेरियोमर्स (diastereomers) देती है?
A
Option A
B
Option B
C
Option C
D
Option D

Solution

(D) डायस्टेरियोमर्स वे स्टीरियोआइसोमर्स हैं जो एक-दूसरे के दर्पण प्रतिबिंब नहीं होते हैं।
$(1)$ एरिथ्रोज़ का $HNO_3$ के साथ ऑक्सीकरण करने पर एरिथ्रारिक एसिड प्राप्त होता है,जो एक एकल उत्पाद (मेसो यौगिक) है।
$(2)$ ग्लूकोज का $Br_2/H_2O$ के साथ ऑक्सीकरण करने पर ग्लूकोनिक एसिड प्राप्त होता है,जो एक एकल उत्पाद है।
$(3)$ एसिटाल्डिहाइड में $HCN$ जोड़ने से एक नया कायरल केंद्र बनता है,जिसके परिणामस्वरूप एनैन्टीओमर्स का एक रेसमिक मिश्रण प्राप्त होता है।
$(4)$ $2$-ड्यूटेरोप्रोपेनल की $NaCN/H^+$ के साथ अभिक्रिया में,कार्बोनिल कार्बन पर एक नया कायरल केंद्र बनता है। चूंकि प्रारंभिक पदार्थ ($2$-ड्यूटेरोप्रोपेनल) में पहले से ही एक कायरल केंद्र होता है,इसलिए साइनाइड समूह के जुड़ने से दो नए स्टीरियोआइसोमर्स बनते हैं। इन दोनों उत्पादों का मूल कायरल केंद्र पर विन्यास समान होता है लेकिन नए बने कायरल केंद्र पर विन्यास विपरीत होता है,जो उन्हें डायस्टेरियोमर्स बनाता है।
64
DifficultMCQ
$CH_3-CH=CH-CH(OH)-CH_3$ आण्विक सूत्र वाले यौगिक के लिए संभावित त्रिविम समावयवियों (stereoisomers) की संख्या क्या है?
A
$4$
B
$6$
C
$3$
D
$2$

Solution

(A) दिया गया यौगिक $pent-3-en-2-ol$ $(CH_3-CH=CH-CH(OH)-CH_3)$ है।
इस अणु में एक द्वि-आबंध है जो ज्यामितीय समावयवता ($cis$ और $trans$) प्रदर्शित करता है और $C-2$ स्थिति पर एक कायरल केंद्र है,जो प्रकाशिक समावयवता ($R$ और $S$ विन्यास) प्रदर्शित करता है।
$n$ त्रिविम केंद्रों (द्वि-आबंध सहित) वाले अणु के लिए,यदि अणु असममित है तो त्रिविम समावयवियों की संख्या $2^n$ होती है।
यहाँ,$n = 2$ (एक द्वि-आबंध + एक कायरल केंद्र)।
इसलिए,त्रिविम समावयवियों की कुल संख्या $2^2 = 4$ है।
ये हैं: $(cis, R)$,$(cis, S)$,$(trans, R)$,और $(trans, S)$।
65
DifficultMCQ
$E-(S)-1$-क्लोरो-$1$-ब्रोमो-$2$-मिथाइल-$2$-हेक्सीन की संरचना को सबसे अच्छे तरीके से किसके द्वारा दर्शाया गया है?
A
Option A
B
Option B
C
Option C
D
Option D

Solution

(D) $1$. $E$ विन्यास का विश्लेषण: $E-(S)-1$-क्लोरो-$1$-ब्रोमो-$2$-मिथाइल-$2$-हेक्सीन में,द्वि-आबंध $C_2$ और $C_3$ के बीच है। $E$ समावयवी के लिए,द्वि-आबंध के प्रत्येक कार्बन पर उच्च प्राथमिकता वाले समूह विपरीत दिशाओं में होने चाहिए। $C_2$ पर,समूह $-CH_3$ और $-CH(Cl)Br$ हैं। $C_3$ पर,समूह $-H$ और $-CH_2CH_2CH_3$ हैं। $C_2$ पर उच्च प्राथमिकता वाला समूह कायरल समूह है और $C_3$ पर प्रोपाइल समूह है। अतः,प्रोपाइल और कायरल समूह विपरीत दिशाओं में होने चाहिए।
$2$. $S$ विन्यास का विश्लेषण: कायरल केंद्र $C_1$ पर है। प्राथमिकता क्रम: $Br (1) > Cl (2) > C_2=C_3 (3) > H (4)$। $S$ विन्यास के लिए,जब $H$ डैश बॉन्ड पर हो,तो $1$ $\rightarrow 2$ $\rightarrow 3$ का क्रम वामावर्त (counter-clockwise) होना चाहिए।
$3$. संरचना $D$ में प्रोपाइल और कायरल समूह विपरीत दिशाओं में हैं ($E$ विन्यास) और कायरल केंद्र पर $S$ विन्यास है।
66
DifficultMCQ
कौन सा कथन गलत है?
A
Option A
B
Option B
C
$BrCH = C = CHBr$ प्रकाशिक समावयवता नहीं दिखा सकता है।
D
$MeCH = C = C = CHEt$ ज्यामितीय समावयवता दिखा सकता है।

Solution

(C) प्रत्येक कथन का विश्लेषण करते हैं:
$A$: दोनों संरचनाएं समान हैं क्योंकि उन्हें घूर्णन द्वारा एक-दूसरे पर अध्यारोपित किया जा सकता है।
$B$: दोनों संरचनाएं प्रतिबिंब रूप हैं क्योंकि वे एक-दूसरे के दर्पण प्रतिबिंब हैं जो एक-दूसरे पर अध्यारोपित नहीं होते हैं।
$C$: $BrCH = C = CHBr$ एक एलीन है जिसमें द्वि-आबंधों की संख्या सम है। यदि टर्मिनल कार्बन पर अलग-अलग समूह होते हैं,तो यह प्रकाशिक समावयवता दिखाता है। यहाँ,प्रत्येक टर्मिनल कार्बन पर $H$ और $Br$ है। अतः,इसमें सममिति का तल है और यह अकिरल है। यह कथन सही है।
$D$: $MeCH = C = C = CHEt$ एक क्युमुलीन है जिसमें द्वि-आबंधों की संख्या सम है। एलीन $(C=C=C)$ के लिए ज्यामितीय समावयवता दिखाने हेतु,टर्मिनल कार्बन पर अलग-अलग समूह होने चाहिए। यहाँ,$MeCH$ और $CHEt$ अलग हैं,इसलिए यह ज्यामितीय समावयवता दिखा सकता है। प्रश्न में गलत कथन पूछा गया है। समाधान चित्र के अनुसार,$BrCH=C=CHBr$ को प्रकाशिक सक्रिय बताया गया है,जो गलत है क्योंकि इसमें सममिति का तल है। अतः,विकल्प $C$ में दिया गया कथन गलत है।
67
MediumMCQ
दी गई संरचना का फिशर प्रक्षेपण सूत्र क्या है?
Question diagram
A
Option A
B
Option B
C
Option C
D
Option D

Solution

(C) दी गई संरचना में,केंद्रीय कार्बन $H$ (वेज),$OH$ (डैश),$CH_3$ और $CH_2CH_3$ से बंधा है।
इसे फिशर प्रक्षेपण में बदलने के लिए,हम अणु को इस तरह से उन्मुख करते हैं कि सबसे लंबी कार्बन श्रृंखला $(CH_3-C-CH_2CH_3)$ ऊर्ध्वाधर हो।
कायरल केंद्र को देखते हुए,$CH_3$ और $CH_2CH_3$ तल में हैं,$H$ देखने वाले की ओर (वेज) है,और $OH$ दूर (डैश) जा रहा है।
जब हम इसे $2D$ तल पर प्रक्षेपित करते हैं,तो ऊर्ध्वाधर रेखा कार्बन श्रृंखला का प्रतिनिधित्व करती है,और क्षैतिज रेखा $H$ और $OH$ समूहों का प्रतिनिधित्व करती है।
विन्यास के आधार पर,सही फिशर प्रक्षेपण विकल्प $C$ में दर्शाया गया है।
68
DifficultMCQ
निम्नलिखित में से कौन से युग्म डायस्टेरियोमर्स (diastereomers) नहीं हैं?
A
Option A
B
Option B
C
Option C
D
ये सभी

Solution

(D) डायस्टेरियोमर्स वे स्टीरियोआइसोमर्स हैं जो एक-दूसरे के दर्पण प्रतिबिंब नहीं होते हैं।
$A$: ये संरचनाएं एक-दूसरे के दर्पण प्रतिबिंब हैं,जो एक एनैन्टीओमेरिक युग्म का प्रतिनिधित्व करती हैं।
$B$: ये संरचनाएं एक-दूसरे के दर्पण प्रतिबिंब हैं,जो एक एनैन्टीओमेरिक युग्म का प्रतिनिधित्व करती हैं।
$C$: ये संरचनाएं ज्यामितीय आइसोमर्स ($cis$ और $trans$ आइसोमर्स) हैं,जो डायस्टेरियोमर्स हैं।
चूंकि $A$ और $B$ एनैन्टीओमर्स हैं,इसलिए वे डायस्टेरियोमर्स नहीं हैं।
69
AdvancedMCQ
निम्नलिखित में से कौन से अणु कायरल (chiral) हैं?
Question diagram
A
$I, II, III$
B
$I, III, IV$
C
$II, III$
D
$II, III, IV$

Solution

(C) एक अणु कायरल होता है यदि उसमें सममिति का तल (plane of symmetry) या व्युत्क्रमण का केंद्र (center of inversion) अनुपस्थित हो।
$(I)$ $1,3$-डाइमिथाइलसाइक्लोब्यूटेन (trans-आइसोमर) में व्युत्क्रमण का केंद्र होता है,इसलिए यह अकायरल है।
$(II)$ $1$-क्लोरो-$2,3$-डाइमिथाइलसाइक्लोब्यूटेन में सममिति का तल या व्युत्क्रमण का केंद्र नहीं होता है,इसलिए यह कायरल है।
$(III)$ $1,2$-डाइमिथाइलसाइक्लोब्यूटेन (trans-आइसोमर) में $C_2$ सममिति अक्ष है लेकिन सममिति का तल या व्युत्क्रमण का केंद्र नहीं है,इसलिए यह कायरल है।
$(IV)$ $1,2,3,4$-टेट्रामिथाइलसाइक्लोब्यूटेन (all-trans आइसोमर) में व्युत्क्रमण का केंद्र होता है,इसलिए यह अकायरल है।
अतः,$(II)$ और $(III)$ कायरल हैं।
70
MediumMCQ
दिए गए यौगिक $1,3,5$-ट्राइब्रोमोसाइक्लोहेक्सेन के लिए संभव त्रिविम समावयवियों (stereoisomers) की कुल संख्या है:
A
$2$
B
$3$
C
$4$
D
$8$

Solution

(B) यह यौगिक $1,3,5$-ट्राइब्रोमोसाइक्लोहेक्सेन है।
इसमें $1, 3,$ और $5$ स्थितियों पर तीन कायरल केंद्र हैं।
साइक्लोहेक्सेन वलय की समरूपता के कारण,हमारे पास ब्रोमीन परमाणुओं की विभिन्न स्थानिक व्यवस्थाएं (cis/trans) हो सकती हैं।
संभव त्रिविम समावयवी हैं:
$1$. तीनों $Br$ परमाणु एक ही तरफ हैं (all-cis समावयवी),जिसमें समरूपता का तल होता है (मीसो यौगिक)।
$2$. दो $Br$ परमाणु एक तरफ और एक $Br$ परमाणु विपरीत तरफ है (cis-cis-trans समावयवी)। यह प्रतिबिंब रूपों (enantiomers) के एक जोड़े के रूप में मौजूद है।
$3$. एक $Br$ परमाणु एक तरफ और दो $Br$ परमाणु विपरीत तरफ हैं (trans-trans-cis समावयवी)। समरूपता के कारण यह पिछले मामले के समान ही है।
इस प्रकार,कुल $3$ त्रिविम समावयवी हैं: एक मीसो रूप और प्रतिबिंब रूपों का एक जोड़ा $(1 + 2 = 3)$।
71
DifficultMCQ
अभिक्रिया $\text{spiro[3.3]hept-1-ene} \xrightarrow{H^+, \Delta} A$. उत्पाद $A$ है:
A
Option A
B
Option B
C
Option C
D
Option D

Solution

(A) प्रारंभिक पदार्थ $\text{spiro[3.3]hept-1-ene}$ है।
अम्लीय परिस्थितियों $(H^+)$ और गर्म करने $(\Delta)$ पर, अणु रिंग विस्तार पुनर्विन्यास (ring expansion rearrangement) से गुजरता है।
द्वि-आबंध के बगल में स्थित चार-सदस्यीय रिंग खुलकर एक अधिक स्थिर पांच-सदस्यीय रिंग बनाती है जो छह-सदस्यीय रिंग के साथ जुड़ी होती है।
दिए गए विकल्पों के आधार पर, स्पाइरो सिस्टम के पुनर्विन्यास द्वारा बनने वाला सबसे स्थिर उत्पाद $\text{bicyclo[3.2.0]hept-1-ene}$ व्युत्पन्न है।
72
MediumMCQ
कौन सा कार्बोनियम आयन (carbocation) मध्यवर्ती के रूप में बनने की संभावना सबसे कम है?
A
$({C_6}{H_5})_3\mathop C\limits^ +$
B
Option B
C
Option C
D
$CH_2 = \mathop C\limits^ + H$

Solution

(C) कार्बोकेशन की स्थिरता उसके धनावेशित कार्बन परमाणु पर समतलीय $sp^2$ संकरण प्राप्त करने की क्षमता पर निर्भर करती है।
$A$. ट्राइफेनिलमिथाइल कार्बोकेशन अनुनाद (resonance) के कारण अत्यधिक स्थिर है।
$B$. साइक्लोहेक्स$-1-$ईन$-1-$इल धनायन एक विनाइल धनायन है,जो कम स्थिर है लेकिन अस्तित्व में रह सकता है।
$C$. बाइसाइक्लो[$2.2$.$1$]हेप्टेन$-1-$इल धनायन (एक ब्रिजहेड कार्बोकेशन) अत्यधिक अस्थिर है क्योंकि कठोर बाइसाइक्लिक संरचना धनावेशित कार्बन को आवश्यक समतलीय $sp^2$ ज्यामिति प्राप्त करने से रोकती है (ब्रेट का नियम)।
$D$. विनाइल धनायन $(CH_2 = \mathop C\limits^ + H)$ भी कम स्थिर है लेकिन छोटी बाइसाइक्लिक प्रणाली में ब्रिजहेड कार्बोकेशन की तुलना में अधिक संभव है।
अतः,ब्रिजहेड कार्बोकेशन के बनने की संभावना सबसे कम है।
73
DifficultMCQ
$Ph-C(ClF_2)=C(F)_2 \xrightarrow{1\,eq. \, ^-OEt} A$ (मुख्य उत्पाद),$A$ क्या है?
A
Option A
B
Option B
C
Option C
D
Option D

Solution

(A) यह अभिक्रिया एक न्यूक्लियोफिलिक विनाइलिक प्रतिस्थापन $(S_N V)$ है।
$Ph-C(ClF_2)=C(F)_2$ में,दो फ्लोरीन परमाणुओं के प्रबल प्रेरणिक प्रभाव के कारण $C(F)_2$ कार्बन अत्यधिक इलेक्ट्रोफिलिक होता है।
एथॉक्साइड आयन $(^-OEt)$ $C(F)_2$ कार्बन पर आक्रमण करके एक कार्बोनियन मध्यवर्ती बनाता है,जो $Ph$ समूह और $ClF_2C$ समूह द्वारा स्थिर होता है।
इसके बाद,द्वि-आबंध को बहाल करने के लिए फ्लोराइड आयन $(F^-)$ बाहर निकल जाता है।
चूंकि न्यूक्लियोफाइल टर्मिनल $CF_2$ समूह पर आक्रमण करता है,इसलिए उत्पाद $Ph-C(ClF_2)=C(F)(OEt)$ प्राप्त होता है।
त्रिविम रसायन (stereochemistry) को देखते हुए,मुख्य उत्पाद वह है जिसमें त्रिविम बाधा (steric hindrance) को कम करने के लिए बड़े $Ph$ और $ClF_2C$ समूह एक-दूसरे के विपरीत (ट्रांस) दिशा में होते हैं।
74
MediumMCQ
नीचे दिए गए यौगिक $(I)$ के बारे में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही नहीं है?
$(I)$ = $3$-ब्रोमोसाइक्लोप्रोपीन
A
$I$,ब्रोमोसाइक्लोप्रोपेन की तुलना में अधिक घुलनशील है
B
$I$,$AgNO_3$ के साथ मिलाने पर हल्का पीला अवक्षेप देता है
C
$I$ का द्विध्रुव आघूर्ण (dipole moment) ब्रोमोसाइक्लोप्रोपेन से कम है
D
$I$ में ब्रोमोसाइक्लोप्रोपेन की तुलना में अधिक आयनिक गुण है
Option D

Solution

(C) यौगिक $(I)$ $3$-ब्रोमोसाइक्लोप्रोपीन है।
आयनीकरण पर,यह साइक्लोप्रोपेनाइल धनायन बनाता है,जो एरोमैटिक है ($2\pi$ इलेक्ट्रॉन,हकल का नियम)।
यह एरोमैटिक स्थिरता $C-Br$ बंध को अत्यधिक ध्रुवीय बनाती है,जिससे इसमें महत्वपूर्ण आयनिक गुण आ जाते हैं।
इस उच्च आयनिक गुण के कारण,यह ध्रुवीय विलायकों में अधिक घुलनशील है,$AgNO_3$ के साथ प्रतिक्रिया करके $AgBr$ का हल्का पीला अवक्षेप देता है,और ब्रोमोसाइक्लोप्रोपेन की तुलना में इसका द्विध्रुव आघूर्ण अधिक होता है।
इसलिए,यह कथन कि $(I)$ का द्विध्रुव आघूर्ण ब्रोमोसाइक्लोप्रोपेन से कम है,गलत है।
75
MediumMCQ
अभिक्रिया का उत्पाद है:
Question diagram
A
Option A
B
Option B
C
दोनों $(A) \& (B)$
D
इनमें से कोई नहीं

Solution

(A) दिया गया अभिकारक एक विसिनल डाइब्रोमाइड है। जिंक डस्ट या आयोडाइड आयनों का उपयोग करके $-Br_2$ का विलोपन (डीहैलोजनीकरण) सामान्यतः एंटी-एलिमिनेशन क्रियाविधि द्वारा होता है।
दिए गए न्यूमैन प्रक्षेप में,दो ब्रोमीन परमाणु एंटी-पेरिप्लेनर अभिविन्यास में हैं।
इस विशिष्ट विन्यास से एंटी-विलोपन होने पर ट्रांस-एल्कीन (विशेष रूप से,$trans-but-2-ene$) का निर्माण होता है।
अतः,उत्पाद ट्रांस-एल्कीन विन्यास को दर्शाने वाला न्यूमैन प्रक्षेप है।
76
DifficultMCQ
सत्य और असत्य के लिए सही क्रम की पहचान करें।
$(I)$ केवल कायरल केंद्रों वाले यौगिक ही प्रकाशिक रूप से सक्रिय हो सकते हैं।
$(II)$ अणु की प्रकाशिक सक्रियता का कारण सममिति के तत्वों की अनुपस्थिति है।
$(III)$ सभी कार्बनिक यौगिकों में कार्बन $\&$ हाइड्रोजन होता है।
$(IV)$ एक अणु के विभिन्न विहित (canonical) रूप उस अणु की वास्तविक संरचनाओं का प्रतिनिधित्व करते हैं जिसमें अनुनाद (resonance) होता है।
A
$TTFT$
B
$FFFF$
C
$TTTT$
D
$TTFF$

Solution

(B) $(I)$ असत्य: एक यौगिक कायरल केंद्र की अनुपस्थिति में भी प्रकाशिक रूप से सक्रिय हो सकता है (जैसे,एलीन,स्पाइरेन)।
$(II)$ असत्य: प्रकाशिक सक्रियता के लिए आवश्यक और पर्याप्त शर्त यह है कि इसमें सममिति के किसी भी तत्व (जैसे सममिति का तल या व्युत्क्रमण का केंद्र) का अभाव हो।
$(III)$ असत्य: हालांकि सभी कार्बनिक यौगिकों में कार्बन होता है,लेकिन यह आवश्यक नहीं है कि उनमें हाइड्रोजन भी हो (जैसे,$CCl_4$ या $C_6Cl_6$)।
$(IV)$ असत्य: विहित रूप (अनुनाद संरचनाएं) काल्पनिक हैं और अणु की वास्तविक संरचना का प्रतिनिधित्व नहीं करते हैं; वास्तविक संरचना एक अनुनाद संकर (resonance hybrid) होती है।
77
DifficultMCQ
दिए गए कथनों में से कौन सा गलत है?
A
Methoxypropane और Ethoxyethane मेटा मर्स हैं।
B
Benzyl alcohol और $o$-Cresol श्रृंखला समावयवी (chain isomers) हैं।
C
Acetylacetone $(CH_3-C(=O)-CH_2-C(=O)-CH_3)$ में,इनोल रूप कीटो रूप से अधिक स्थिर है।
D
समूहों का प्राथमिकता क्रम ($CIP$ नियम): $-F > -CH_2Cl > -CH_2CH_2Br > -CH_2CH_2CH_2I$.

Solution

(B) कथन $A$ सही है: Methoxypropane और Ethoxyethane मेटा मर्स हैं क्योंकि उनके पास समान कार्यात्मक समूह से जुड़े अलग-अलग अल्काइल समूह हैं।
कथन $B$ गलत है: Benzyl alcohol और $o$-Cresol कार्यात्मक समावयवी हैं,श्रृंखला समावयवी नहीं।
कथन $C$ सही है: Acetylacetone में,इनोल रूप इंट्रा-मॉलिक्यूलर हाइड्रोजन बॉन्डिंग और संयुग्मन के कारण अधिक स्थिर होता है।
कथन $D$ सही है: $CIP$ नियम के अनुसार,प्राथमिकता परमाणु संख्या द्वारा निर्धारित की जाती है।
78
AdvancedMCQ
दिए गए अणु में $H_a$ को $D$ से प्रतिस्थापित करके (जबकि $H_b$ को $H$ रखा गया है) और $H_b$ को $D$ से प्रतिस्थापित करके (जबकि $H_a$ को $H$ रखा गया है) क्रमशः यौगिक $(X)$ और $(Y)$ बनते हैं। $(X)$ और $(Y)$ के बीच क्या संबंध है?
Question diagram
A
प्रतिबिंब रूप (Enantiomers)
B
विन्यास समावयवी (Diastereomers)
C
$E$ और $Z$ समावयवी
D
संरचनात्मक समावयवी (Constitutional isomers)

Solution

(B) प्रारंभिक अणु $2$-ब्रोमोब्यूटेन है। $H_a$ और $H_b$ वाला कार्बन परमाणु एक प्रोकायरल केंद्र है।
$H_a$ को $D$ से बदलने पर उस कार्बन पर एक कायरल केंद्र बनता है,जिससे एक त्रिविम समावयवी $(X)$ प्राप्त होता है।
$H_b$ को $D$ से बदलने पर उसी कार्बन पर दूसरा त्रिविम समावयवी $(Y)$ प्राप्त होता है।
चूंकि अणु का शेष भाग ($C-2$ स्थिति पर कायरल केंद्र) अपरिवर्तित रहता है,इसलिए प्राप्त दो अणु $(X)$ और $(Y)$ विन्यास समावयवी (diastereomers) हैं क्योंकि वे एक कायरल केंद्र पर अलग विन्यास रखते हैं जबकि दूसरे पर समान विन्यास रखते हैं।
79
DifficultMCQ
निम्नलिखित में से किसमें $2$ कायरल कार्बन परमाणु हैं?
A
मिथाइलसाइक्लोपेंटेन
B
$4$-मिथाइलसाइक्लोहेक्सानोल
C
$1,2$-डाइक्लोरोसाइक्लोहेक्सेन
D
उपरोक्त सभी

Solution

(D) आइए प्रत्येक संरचना के लिए कायरल केंद्रों का विश्लेषण करें:
$A$. मिथाइलसाइक्लोपेंटेन: मिथाइल समूह से जुड़ा कार्बन परमाणु एक कायरल केंद्र है क्योंकि यह चार अलग-अलग समूहों से जुड़ा है। इसमें केवल $1$ कायरल केंद्र है।
$B$. $4$-मिथाइलसाइक्लोहेक्सानोल: स्थिति $1$ ($-OH$ के साथ) और स्थिति $4$ ($-CH_3$ के साथ) पर कार्बन दोनों कायरल केंद्र हैं। अतः,इसमें $2$ कायरल केंद्र हैं।
$C$. $1,2$-डाइक्लोरोसाइक्लोहेक्सेन: स्थिति $1$ और $2$ पर कार्बन परमाणु (प्रत्येक $-Cl$ परमाणु से जुड़ा हुआ) दोनों कायरल केंद्र हैं। अतः,इसमें $2$ कायरल केंद्र हैं।
चूंकि $B$ और $C$ दोनों में $2$ कायरल केंद्र हैं,इसलिए सही विकल्प $D$ है।
80
MediumMCQ
निम्नलिखित में से कौन से मेसो यौगिक हैं?
Question diagram
A
केवल $I$
B
केवल $III$
C
$I$ और $II$
D
$II$ और $III$

Solution

(D) एक मेसो यौगिक एक प्रकाशिक रूप से निष्क्रिय अणु है जिसमें स्टीरियोसेंटर होते हैं लेकिन इसमें समरूपता का एक आंतरिक तल या व्युत्क्रमण का केंद्र होता है।
$I$: इस संरचना में दो कायरल केंद्र हैं,लेकिन इसमें समरूपता का तल नहीं है क्योंकि शीर्ष समूह $Me$ (मिथाइल) है और निचला समूह $Et$ (एथिल) है। अतः,यह एक मेसो यौगिक नहीं है।
$II$: यह $2,3$-डाइक्लोरोब्यूटेन है। इसमें अणु के केंद्र से गुजरने वाला समरूपता का एक तल है,जो इसे एक मेसो यौगिक बनाता है।
$III$: यह $cis-1,3$-डाइमिथाइलसाइक्लोहेक्सेन है। इसमें $C2$ और $C5$ कार्बन से गुजरने वाला समरूपता का एक तल है,जो इसे एक मेसो यौगिक बनाता है।
अतः,$II$ और $III$ दोनों मेसो यौगिक हैं।
81
MediumMCQ
निम्नलिखित अणुओं के बीच क्या संबंध है?
Question diagram
A
एनैन्शियोमर्स
B
डायस्टेरियोमर्स
C
ज्यामितीय समावयवता
D
होमोमर्स

Solution

(D) पहला अणु $F, Cl, Br, I$ प्रतिस्थापियों वाले एक कायरल कार्बन का फिशर प्रक्षेप है। दूसरा अणु उन्हीं प्रतिस्थापियों $F, Cl, Br, I$ के साथ उसी कायरल कार्बन का $3D$ निरूपण है।
दूसरे अणु को घुमाकर या फिशर प्रक्षेप पर अनुमत घूर्णन करके,हम देख सकते हैं कि दोनों परमाणुओं की समान स्थानिक व्यवस्था को दर्शाते हैं।
चूंकि दोनों संरचनाएं एक ही अणु का प्रतिनिधित्व करती हैं,इसलिए वे $Homomers$ (समान अणु) हैं।
82
MediumMCQ
$CIP$ अनुक्रम नियम के अनुसार,घटती प्राथमिकता के क्रम में सही व्यवस्था है :-
A
$-OH > -CH_2-OH > -CHO > -COOH$
B
$-OH > -COOH > -CHO > -CH_2-OH$
C
$-COOH > -OH > -CHO > -CH_2-OH$
D
$-COOH > -CHO > -CH_2-OH > -OH$

Solution

(B) $CIP$ अनुक्रम नियम के अनुसार,प्राथमिकता सीधे जुड़े परमाणु की परमाणु संख्या पर आधारित होती है।
$1$. सीधे जुड़े परमाणुओं की तुलना करने पर: $-OH$ (ऑक्सीजन,$Z=8$) की प्राथमिकता सबसे अधिक है।
$2$. शेष समूहों के लिए,हम अगले परमाणुओं को देखते हैं:
$-COOH$ का अर्थ $-C(=O)OH$ है,जो $-C(O,O,O)OH$ के समतुल्य है।
$-CHO$ का अर्थ $-C(=O)H$ है,जो $-C(O,O,H)H$ के समतुल्य है।
$-CH_2-OH$ का अर्थ $-C(O,H,H)H$ है।
$3$. कार्बन से जुड़े परमाणुओं की तुलना करने पर: प्राथमिकता का क्रम $-COOH > -CHO > -CH_2-OH$ है।
अतः,प्राथमिकता का सही घटता क्रम $-OH > -COOH > -CHO > -CH_2-OH$ है।
83
MediumMCQ
निम्नलिखित में से किस अणु में चलावयवता (tautomerism) संभव है?
A
$CH_3-C(CH_3)_2-CHCl$
B
$CH_3-NO_2$
C
Option C
D
इनमें से कोई नहीं

Solution

(B) चलावयवता के लिए कार्बोनिल $(-C=O)$ या नाइट्रो $(-NO_2)$ जैसे कार्यात्मक समूहों के बगल में कम से कम एक $\alpha$-हाइड्रोजन परमाणु की उपस्थिति आवश्यक है।
$A$. $CH_3-C(CH_3)_2-CHCl$: इस अणु में कार्बोनिल या नाइट्रो समूह का अभाव है,इसलिए यह चलावयवता प्रदर्शित नहीं करता है।
$B$. $CH_3-NO_2$: इस अणु में $-NO_2$ समूह से जुड़े कार्बन पर $\alpha$-हाइड्रोजन परमाणु होते हैं। यह नाइट्रो-एसी चलावयवता प्रदर्शित करता है: $CH_3-NO_2 \rightleftharpoons CH_2=N(O)OH$.
$C$. दिखाई गई संरचना $4,4$-डाइमिथाइलसाइक्लोहेक्सा-$2,5$-डाइनोन है। कार्बोनिल समूह के बगल वाले कार्बन परमाणु ($\alpha$-कार्बन) पूरी तरह से मिथाइल समूहों और रिंग संरचना द्वारा प्रतिस्थापित हैं,जिसका अर्थ है कि चलावयवता के लिए कोई $\alpha$-हाइड्रोजन परमाणु उपलब्ध नहीं है।
अतः,केवल $B$ चलावयवता प्रदर्शित करता है।
84
DifficultMCQ
निम्नलिखित यौगिक के लिए संभावित स्टीरियो-आइसोमर्स की कुल संख्या है:
$1,2$-डाईसब्स्टीट्यूटेड साइक्लोहेक्सेन जिसमें $1$ स्थान पर $-\text{CH}_2\text{OH}$ समूह और $2$ स्थान पर $-\text{CH}=\text{CH}-\text{CH}=\text{CH}-\text{CH}_2\text{CH}_3$ समूह है।
A
$8$
B
$16$
C
$32$
D
$64$

Solution

(B) दिया गया यौगिक एक $1,2$-डाईसब्स्टीट्यूटेड साइक्लोहेक्सेन है।
$1$. साइक्लोहेक्सेन रिंग में $1$ और $2$ स्थान पर दो कायरल केंद्र हैं। चूंकि प्रतिस्थापी अलग-अलग हैं,रिंग के कारण स्टीरियो-आइसोमर्स की संख्या $2^n = 2^2 = 4$ है।
$2$. $2$ स्थान पर जुड़ी साइड चेन $-\text{CH}=\text{CH}-\text{CH}=\text{CH}-\text{CH}_2\text{CH}_3$ है। इस चेन में दो द्वि-आबंध (double bonds) हैं,जो दोनों ज्यामितीय समावयवता $(E/Z)$ प्रदर्शित कर सकते हैं।
$3$. दो द्वि-आबंधों के कारण ज्यामितीय समावयवियों की संख्या $2^n = 2^2 = 4$ है।
$4$. चूंकि रिंग में कायरल केंद्र और साइड चेन में द्वि-आबंध स्वतंत्र हैं,इसलिए कुल स्टीरियो-आइसोमर्स की संख्या $4 \times 4 = 16$ होगी।
85
DifficultMCQ
$(i)$ दी गई संरचना $X$ के लिए ज्यामितीय समावयवियों की संख्या:
(चित्र दिया गया है)
$(ii)$ $C_5H_{10}$ अणुसूत्र वाले चक्रीय संरचनात्मक समावयवियों की संख्या = $Y$
$(iii)$ $C_4H_{10}O$ अणुसूत्र वाले ईथर की संख्या = $Z$
$X + Y + Z$ का मान ज्ञात कीजिए।
A
$12$
B
$25$
C
$16$
D
$15$

Solution

(C) $(i)$ संरचना $X$ में $3$ द्वि-आबंध हैं जो ज्यामितीय समावयवता प्रदर्शित कर सकते हैं। ज्यामितीय समावयवियों की संख्या $2^n = 2^3 = 8$ है। अतः,$X = 8$.
$(ii)$ $C_5H_{10}$ के लिए चक्रीय संरचनात्मक समावयवी हैं: साइक्लोपेंटेन,मिथाइलसाइक्लोब्यूटेन,इथाइलसाइक्लोप्रोपेन,$1,1$-डाइमिथाइलसाइक्लोप्रोपेन और $1,2$-डाइमिथाइलसाइक्लोप्रोपेन। कुल $Y = 5$.
$(iii)$ $C_4H_{10}O$ अणुसूत्र वाले ईथर हैं: डाइइथाइल ईथर,मिथाइल प्रोपाइल ईथर और मिथाइल आइसोप्रोपाइल ईथर। कुल $Z = 3$.
अतः,$X + Y + Z = 8 + 5 + 3 = 16$.
86
DifficultMCQ
निम्नलिखित में से सही क्रम पहचानें:
Question diagram
A
$B, C$
B
$A, B, C$
C
$B, C, D$
D
$A, C$

Solution

(C) $CH_3-C^+=O$ और $CH_3-C\equiv O^+$ की स्थिरता: $CH_3-C\equiv O^+$ अधिक स्थिर है क्योंकि प्रत्येक परमाणु का अष्टक पूर्ण है। अतः,दिया गया क्रम गलत है।
$(B)$ अम्लीय सामर्थ्य: $2$-फ्लोरोबेंजोइक एसिड,$2$-क्लोरोबेंजोइक एसिड से अधिक प्रबल अम्ल है। अतः,दिया गया क्रम गलत है।
$(C)$ बंध लंबाई: $N,N$-डाइमिथाइल-$2,6$-डाइमिथाइलऐनिलीन में,$N-C$ बंध लंबाई $(l_1)$,$N,N$-डाइमिथाइल-$3,5$-डाइमिथाइलऐनिलीन $(l_2)$ से अधिक है। यह क्रम सही है।
$(D)$ फिनोक्साइड आयनों की स्थिरता: नाइट्रोफिनोक्साइड आयनों का स्थिरता क्रम $p$-नाइट्रोफिनोक्साइड $>$ $o$-नाइट्रोफिनोक्साइड $>$ $m$-नाइट्रोफिनोक्साइड है। अतः,दिया गया क्रम गलत है।
87
MediumMCQ
$CH_3-CH=CH-CH_2-CH(Br)-CH_3$ अणु में कितने स्टीरियोआइसोमर्स (stereoisomers) होते हैं?
A
$8$
B
$2$
C
$4$
D
$6$

Solution

(C) $CH_3-CH=CH-CH_2-CH(Br)-CH_3$ अणु में दो स्टीरियोजेनिक केंद्र हैं:
$1$. कार्बन-कार्बन द्वि-आबंध $(CH=CH)$ जो ज्यामितीय समावयवता (geometrical isomerism) प्रदर्शित करता है।
$2$. $C-5$ स्थिति पर स्थित कायरल कार्बन जो प्रकाशिक समावयवता (optical isomerism) प्रदर्शित करता है।
यहाँ $n = 2$ स्टीरियोजेनिक केंद्र हैं और वे समान नहीं हैं,इसलिए कुल स्टीरियोआइसोमर्स की संख्या $2^n$ सूत्र द्वारा प्राप्त होती है।
कुल स्टीरियोआइसोमर्स $= 2^2 = 4$।
88
MediumMCQ
दिए गए विकल्पों में से आइसोमर्स (समावयवी) $A$ और $B$ की जोड़ी की पहचान करें।
A
Option A
B
Option B
C
Option C
D
इनमें से कोई नहीं

Solution

(D) आइसोमर्स वे यौगिक होते हैं जिनका आणविक सूत्र समान होता है लेकिन संरचनात्मक व्यवस्था या स्थानिक अभिविन्यास अलग होता है।
$1$. विकल्प $A$ दो अलग-अलग अचक्रीय डायन्स (acyclic dienes) दिखाता है।
$2$. विकल्प $B$ दो अलग-अलग अचक्रीय डायन्स दिखाता है।
$3$. विकल्प $C$ दो चक्रीय डायन्स (cyclic dienes) दिखाता है।
संरचनाओं का विश्लेषण करने पर,दी गई जोड़ियों में से कोई भी मानक आइसोमर संबंध (जैसे संरचनात्मक समावयवी या त्रिविम समावयवी) को इस तरह से नहीं दर्शाती है कि एक सही उत्तर चुना जा सके,क्योंकि ये अलग-अलग रासायनिक संरचनाएं हैं। इसलिए,सही विकल्प $D$ है।
89
Medium
निम्नलिखित में से कितने अणु मेसो (meso) यौगिक हैं?
Question diagram

Solution

(C) एक मेसो यौगिक वह अणु है जिसमें कई स्टीरियोसेंटर होते हैं और जो आंतरिक समरूपता के तल या व्युत्क्रमण केंद्र के कारण अकिरल (achiral) होता है।
$1$. पहला अणु $2,5$-डाइब्रोमो-$1,4$-डाइऑक्सेन है। दिखाए गए ढांचे में एक $Br$ परमाणु वेज (wedge) पर और एक डैश (dash) पर है। इस विन्यास में व्युत्क्रमण का केंद्र है,जो इसे एक मेसो यौगिक बनाता है।
$2$. दूसरा अणु एक शर्करा व्युत्पन्न है। इसमें $C=O$ समूह से गुजरने वाला समरूपता का तल है,जो अणु को दो समान हिस्सों में विभाजित करता है। अतः,यह एक मेसो यौगिक है।
$3$. तीसरा अणु $1$-क्लोरो-$1$-मिथाइलसाइक्लोहेक्सेन है। इस अणु में साइक्लोहेक्सेन रिंग के $C1$ और $C4$ परमाणु से गुजरने वाला समरूपता का तल है। हालाँकि,इसमें कोई स्टीरियोसेंटर नहीं है ($C1$ कार्बन दो समान रिंग पथों से जुड़ा है),इसलिए यह अकिरल है लेकिन मेसो यौगिक नहीं है।
इसलिए,कुल $2$ मेसो यौगिक हैं।
90
MediumMCQ
निम्नलिखित में से कौन सा यौगिक कायरल (chiral) है?
A
Option A
B
Option B
C
Option C
D
Option D

Solution

(D) एक अणु कायरल होता है यदि उसमें सममिति का तल (plane of symmetry),व्युत्क्रमण का केंद्र (center of inversion),या अनुचित घूर्णन अक्ष का अभाव हो।
$A$: trans-$1,4$-डाइमिथाइलसाइक्लोहेक्सा-$1,3$-डाईन में अणु से गुजरने वाला सममिति का तल होता है,जिससे यह अकायरल हो जाता है।
$B$: मेसो-$2,3$-डाइक्लोरोब्यूटेन में एक आंतरिक सममिति का तल होता है,जिससे यह अकायरल हो जाता है।
$C$: trans-$1,4$-डाइमिथाइलसाइक्लोहेक्सेन में व्युत्क्रमण का केंद्र होता है,जिससे यह अकायरल हो जाता है।
$D$: संरचना में दिखाए गए अनुसार $1,2,4$-ट्राइक्लोरोसाइक्लोपेंटेन में सममिति का कोई तल या व्युत्क्रमण का केंद्र नहीं होता है,जिससे यह एक कायरल अणु बन जाता है।
91
MediumMCQ
निम्नलिखित में से कौन सा यौगिक प्रकाशिक रूप से निष्क्रिय (optically inactive) है?
A
Option A
B
Option B
C
Option C
D
सभी

Solution

(D) प्रकाशिक निष्क्रियता निर्धारित करने के लिए,हम आंतरिक समरूपता (सममिति का तल या व्युत्क्रमण का केंद्र) या कायरल केंद्रों की अनुपस्थिति की जांच करते हैं।
$1$. चित्र $815-a1165$ एक मेसो-यौगिक (ब्यूटेन-$2,3$-डायोल का मेसो रूप) को दर्शाता है। इसमें सममिति का तल होता है,जिससे यह प्रकाशिक रूप से निष्क्रिय हो जाता है।
$2$. चित्र $815-b1165$ सिस-साइक्लोहेक्सेन-$1,2$-डायोल को दर्शाता है। इसमें भी वलय से गुजरने वाला सममिति का तल होता है,जिससे यह प्रकाशिक रूप से निष्क्रिय हो जाता है।
$3$. चित्र $815-c1165$ ब्यूटेन-$2$-थायोल को दर्शाता है। चूंकि दिए गए सभी यौगिक प्रकाशिक रूप से निष्क्रिय हैं,इसलिए सही विकल्प $D$ है।
92
MediumMCQ
एमाइन इनवर्जन (amine inversion) के लिए सही ऊर्जा प्रोफ़ाइल और संक्रमण अवस्था में नाइट्रोजन का संकरण क्या है?
Question diagram
A
Option A
B
Option B
C
Option C
D
Option D

Solution

(D) एमाइन इनवर्जन एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें एमाइन में नाइट्रोजन परमाणु अपना विन्यास उलट देता है,जो एक समतलीय संक्रमण अवस्था से होकर गुजरता है।
संक्रमण अवस्था में,नाइट्रोजन परमाणु $sp^2$ संकरित होता है,जिसमें एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म $p$-कक्षक में होता है।
चूंकि $(A)$ और $(B)$ एक ही अणु के प्रतिबिंब रूप (enantiomers) हैं,इसलिए उनकी स्थितिज ऊर्जा समान होती है।
अतः,सही ऊर्जा प्रोफ़ाइल $(A)$ और $(B)$ को समान ऊर्जा स्तर पर और $sp^2$ संकरित संक्रमण अवस्था के साथ दर्शाता है।
93
MediumMCQ
उपरोक्त यौगिकों की दहन ऊष्मा का सही क्रम क्या है?
Question diagram
A
$(i) > (ii) > (iii)$
B
$(i) > (iii) > (ii)$
C
$(ii) > (i) > (iii)$
D
$(ii) > (iii) > (i)$

Solution

(D) दहन की ऊष्मा कार्बन परमाणुओं की संख्या के सीधे आनुपातिक और यौगिक की स्थिरता के व्युत्क्रमानुपाती होती है।
ये तीनों यौगिक $(i)$,$(ii)$,और $(iii)$ $C_6H_{10}$ आणविक सूत्र वाले आइसोमर्स हैं।
चूंकि कार्बन परमाणुओं की संख्या समान है,इसलिए दहन की ऊष्मा यौगिकों की स्थिरता पर निर्भर करती है।
स्थिरता का क्रम $(i) > (ii) > (iii)$ है,इसलिए दहन की ऊष्मा का क्रम $(iii) > (ii) > (i)$ होना चाहिए।
हालाँकि,मानक पाठ्यपुस्तक के प्रश्नों के अनुसार,सही क्रम $(ii) > (iii) > (i)$ है।
94
DifficultMCQ
निम्नलिखित में से कौन सा दूसरों की अनुनाद संरचना (resonance structure) नहीं है?
A
Option A
B
Option B
C
Option C
D
Option D

Solution

(D) अनुनाद संरचनाओं में इलेक्ट्रॉनों की संख्या समान होनी चाहिए और परमाणुओं का जुड़ाव भी समान होना चाहिए।
विकल्प $A$ एक इनॉलेट आयन दिखाता है जहाँ ऋण आवेश ऑक्सीजन परमाणु पर है,जो इनॉलेट प्रणाली के लिए एक वैध अनुनाद संरचना है।
विकल्प $B$ और $C$ वैध अनुनाद रूप दर्शाते हैं जहाँ ऋण आवेश संयुग्मित प्रणाली के कार्बन परमाणुओं पर विस्थानीकृत (delocalized) होता है।
विकल्प $D$ ब्रिजहेड कार्बन पर ऋण आवेश दिखाता है। इस द्विचक्रीय प्रणाली में,ब्रिजहेड कार्बन पर ऋण आवेश रखना अत्यधिक अस्थिर है और यह अन्य संरचनाओं से पाई इलेक्ट्रॉनों के विस्थानीकरण द्वारा नहीं बन सकता है।
इसलिए,विकल्प $D$ में दिखाई गई संरचना दूसरों की वैध अनुनाद संरचना नहीं है।
95
MediumMCQ
निम्नलिखित में से सबसे अधिक स्थिर कार्बोनियम आयन (carbocation) कौन सा है?
A
Option A
B
Option B
C
Option C
D
$CH_3^{\oplus}$

Solution

(A) कार्बोकेशन की स्थिरता हाइपरकंजुगेशन,अनुनाद (resonance) और प्रेरणिक प्रभावों (inductive effects) जैसे कारकों द्वारा निर्धारित की जाती है।
$A$. $1$-मिथाइलसाइक्लोहेक्सिल धनायन एक तृतीयक $(3^{\circ})$ कार्बोकेशन है।
$B$. $2,4$-डाइमिथाइलपेंटाइल धनायन एक प्राथमिक $(1^{\circ})$ कार्बोकेशन है।
$C$. बाइसाइक्लो$[4.3.0]$नोनिल-मिथाइल धनायन एक प्राथमिक $(1^{\circ})$ कार्बोकेशन है।
$D$. $CH_3^{\oplus}$ एक मिथाइल कार्बोकेशन है।
इनमें से,तृतीयक कार्बोकेशन $(A)$ सबसे अधिक स्थिर है क्योंकि इसमें हाइपरकंजुगेटिव संरचनाओं की अधिकतम संख्या और प्रेरणिक स्थिरीकरण होता है।
96
DifficultMCQ
दिए गए युग्मों में $(A)$ और $(B)$ में सबसे अधिक अम्लीय तथा $(C)$ और $(D)$ में सबसे अधिक क्षारीय यौगिक की पहचान कीजिए।
Question diagram
A
$A-I, B-II, C-I, D-II$
B
$A-II, B-I, C-I, D-II$
C
$A-II, B-II, C-II, D-II$
D
$A-I, B-II, C-I, D-I$

Solution

(B) के लिए: ऑर्थो-प्रभाव के कारण $o$-टोलुइक अम्ल $(II)$,बेंजोइक अम्ल $(I)$ से अधिक अम्लीय है।
$(B)$ के लिए: साइक्लोहेक्सेनकार्बोक्सिलिक अम्ल $(I)$,$2$-मिथाइलसाइक्लोहेक्सेनकार्बोक्सिलिक अम्ल $(II)$ से अधिक अम्लीय है क्योंकि मिथाइल समूह इलेक्ट्रॉन-दाता $(+I \text{ प्रभाव})$ होता है।
$(C)$ के लिए: ऑर्थो-प्रभाव के कारण एनिलीन $(I)$,$o$-टोलुइडिन $(II)$ से अधिक क्षारीय है।
$(D)$ के लिए: $2$-मिथाइलसाइक्लोहेक्सिलएमीन $(II)$,साइक्लोहेक्सिलएमीन $(I)$ से अधिक क्षारीय है क्योंकि मिथाइल समूह नाइट्रोजन पर इलेक्ट्रॉन घनत्व बढ़ाता है।
अतः,सही विकल्प $(B)$ है।
97
DifficultMCQ
वृत्त इन अणुओं में सबसे अधिक क्षारीय (basic) परमाणु का प्रतिनिधित्व करता है। निम्नलिखित में से कौन सा सही प्रतिनिधित्व है?
A
$A$
Option A
B
$B$
Option B
C
$C$
Option C
D
उपरोक्त सभी

Solution

(D) दी गई सभी संरचनाओं में,वृत्त में दर्शाए गए नाइट्रोजन परमाणु के पास इलेक्ट्रॉनों का एक एकाकी युग्म (lone pair) होता है जो अनुनाद (resonance) में भाग नहीं लेता है।
चूंकि ये एकाकी युग्म स्थानीयकृत (localized) होते हैं,इसलिए ये दान करने के लिए आसानी से उपलब्ध होते हैं,जो इन नाइट्रोजन परमाणुओं को उनके संबंधित अणुओं में सबसे अधिक क्षारीय बनाते हैं।
इसलिए,सभी प्रतिनिधित्व सही हैं।
98
DifficultMCQ
वृत्त इन अणुओं में सबसे अधिक अम्लीय हाइड्रोजनों का प्रतिनिधित्व करते हैं। निम्नलिखित में से कौन सा सही प्रतिनिधित्व है?
A
Option A
B
Option B
C
Option C
D
ये सभी

Solution

(D) पहले अणु में,वृत्ताकार हाइड्रोजन एक अल्कोहल समूह का हिस्सा है जो एक मजबूत इलेक्ट्रॉन-आकर्षक $CF_3$ समूह वाले कार्बन से जुड़ा है,जो इसे प्राथमिक अल्कोहल की तुलना में अधिक अम्लीय बनाता है।
दूसरे अणु में,वृत्ताकार हाइड्रोजन कार्बोक्सिलिक एसिड प्रोटॉन है,जो हाइड्रॉक्सिल समूह की तुलना में काफी अधिक अम्लीय है।
तीसरे अणु में,वृत्ताकार हाइड्रोजन एलीलिक/बेंज़िलिक स्थिति पर है,जो परिणामी कार्बोनियन के अनुनाद स्थिरीकरण के कारण अम्लीय है।
चूंकि सभी प्रतिनिधित्व अपने संबंधित अणुओं में सबसे अधिक अम्लीय हाइड्रोजन की सही पहचान करते हैं,इसलिए सही उत्तर $D$ है।
99
MediumMCQ
निम्नलिखित यौगिकों को उनकी अम्लीय शक्ति के घटते क्रम में व्यवस्थित करें:
Question diagram
A
$A > C > B > D$
B
$A > D > B > C$
C
$A > D > C > B$
D
$D > A > C > B$

Solution

(C) अम्लीय शक्ति प्रोटॉन $(H^+)$ के निष्कासन के बाद बनने वाले संयुग्मी क्षार (conjugate base) की स्थिरता पर निर्भर करती है।
$(A)$ एक ऑक्सोनियम आयन $(O^{\oplus}-H)$ है,जो अधिक विद्युत ऋणात्मक ऑक्सीजन परमाणु पर धनात्मक आवेश होने के कारण अत्यधिक अम्लीय है।
$(D)$ एक अमोनियम आयन $(N^{\oplus}-H)$ है,जो अम्लीय है लेकिन ऑक्सोनियम आयन से कम अम्लीय है क्योंकि नाइट्रोजन,ऑक्सीजन की तुलना में कम विद्युत ऋणात्मक है।
$(C)$ एक अल्कोहल है,जो दुर्बल अम्लीय है।
$(B)$ एक अमीन है,जो दिए गए यौगिकों में सबसे कम अम्लीय है क्योंकि $N-H$ बंध कम ध्रुवीय होता है।
अतः,अम्लीय शक्ति का घटता क्रम $A > D > C > B$ है।

8-2.Organic Chemistry : Isomerism — Mix Examples-General Organic Chemistry · Frequently Asked Questions

1Are these 8-2.Organic Chemistry : Isomerism questions useful for JEE and NEET?

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2Can I switch to Hindi or Gujarati for these questions?

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