(N/A) $(i)$ बर्नौली का प्रमेय ऊर्जा संरक्षण के सिद्धांत पर आधारित है,जिसमें यह माना जाता है कि घर्षण के कारण कोई ऊर्जा नष्ट नहीं होती है। लेकिन वास्तव में,जब तरल पदार्थ बहते हैं,तो आंतरिक घर्षण (श्यानता) के कारण ऊर्जा का ह्रास होता है। तरल की विभिन्न परतों के बीच कार्य करने वाले श्यान बल ऊर्जा की हानि का कारण बनते हैं।
$(ii)$ यह प्रमेय मानता है कि तरल असंपीड्य (incompressible) है। व्यवहार में,तरल की प्रत्यास्थ ऊर्जा को ध्यान में नहीं रखा जाता है,जो संपीड्य तरल पदार्थों के लिए प्रमेय की प्रयोज्यता को सीमित करता है।
$(iii)$ यह प्रमेय स्थिर और धारा रेखीय प्रवाह की धारणा पर आधारित है। यह अशांत (turbulent) प्रवाह को ध्यान में नहीं रखता है,जहाँ किसी बिंदु पर वेग और दबाव समय के साथ बेतरतीब ढंग से बदलते रहते हैं।