| श्रेणीक्रम संयोजन | समांतर क्रम संयोजन |
| $(1)$ प्रतिरोधकों को एक-दूसरे के सिरे से इस प्रकार जोड़ा जाता है कि प्रत्येक प्रतिरोधक से समान विद्युत धारा प्रवाहित होती है। | $(1)$ प्रतिरोधकों को दो समान बिंदुओं के बीच इस प्रकार जोड़ा जाता है कि प्रत्येक प्रतिरोधक के सिरों के बीच विभवांतर समान रहता है। |
| $(2)$ प्रत्येक प्रतिरोधक के सिरों के बीच विभवांतर अलग-अलग होता है। | $(2)$ प्रत्येक प्रतिरोधक से प्रवाहित होने वाली विद्युत धारा अलग-अलग होती है। |
| $(3)$ तुल्य प्रतिरोध का सूत्र $R_{eq} = R_{1} + R_{2} + \dots + R_{n}$ है। | $(3)$ तुल्य प्रतिरोध का सूत्र $\frac{1}{R_{eq}} = \frac{1}{R_{1}} + \frac{1}{R_{2}} + \dots + \frac{1}{R_{n}}$ है। |
| $(4)$ तुल्य प्रतिरोध का मान परिपथ के सबसे बड़े प्रतिरोध से भी अधिक होता है। | $(4)$ तुल्य प्रतिरोध का मान परिपथ के सबसे छोटे प्रतिरोध से भी कम होता है। |
| $(5)$ यदि एक प्रतिरोधक खराब हो जाता है, तो पूरा परिपथ टूट जाता है। | $(5)$ यदि एक प्रतिरोधक खराब हो जाता है, तो अन्य शाखाएं कार्य करना जारी रखती हैं। |
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