(N/A) कूलम्ब का नियम बताता है कि दो स्थिर बिंदु आवेशों के बीच लगने वाला स्थिर वैद्युत बल आवेशों के परिमाणों के गुणनफल के सीधे आनुपातिक और उनके बीच की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है। यह बल दोनों आवेशों को जोड़ने वाली रेखा के अनुदिश कार्य करता है।
यदि दो बिंदु आवेश $q_{1}$ और $q_{2}$ निर्वात में $r$ दूरी पर स्थित हैं,तो स्थिर वैद्युत बल $F$ का परिमाण इस प्रकार है:
$F \propto \frac{|q_{1} q_{2}|}{r^{2}}$
$F = k \frac{|q_{1} q_{2}|}{r^{2}}$
जहाँ $k$ कूलम्ब नियतांक है,$k = \frac{1}{4 \pi \epsilon_{0}} \approx 8.9875 \times 10^{9} \text{ N m}^{2} \text{ C}^{-2}$.
यहाँ,$\epsilon_{0}$ निर्वात की विद्युतशीलता (permittivity) है,$\epsilon_{0} \approx 8.854 \times 10^{-12} \text{ C}^{2} \text{ N}^{-1} \text{ m}^{-2}$.
यदि आवेशों को $\epsilon$ विद्युतशीलता वाले माध्यम में रखा जाता है,तो बल $F_{m}$ होगा:
$F_{m} = \frac{1}{4 \pi \epsilon} \frac{|q_{1} q_{2}|}{r^{2}}$
सापेक्ष विद्युतशीलता (या परावैद्युतांक) को $K = \epsilon_{r} = \frac{\epsilon}{\epsilon_{0}}$ के रूप में परिभाषित किया जाता है।
अतः,$\epsilon = K \epsilon_{0}$.
इसे $F_{m}$ के समीकरण में प्रतिस्थापित करने पर:
$F_{m} = \frac{1}{4 \pi K \epsilon_{0}} \frac{|q_{1} q_{2}|}{r^{2}} = \frac{F}{K}$
इस प्रकार,माध्यम में बल निर्वात में लगने वाले बल का $1/K$ गुना होता है।