पूर्णतः शुद्ध सरल आवर्त गति संभव क्यों नहीं है?

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(N/A) वास्तविकता में पूर्णतः शुद्ध सरल आवर्त गति $(SHM)$ संभव नहीं है क्योंकि इसके लिए घर्षण,वायु प्रतिरोध और श्यानता जैसे सभी क्षयकारी बलों की अनुपस्थिति आवश्यक है।
किसी भी भौतिक निकाय में,ये क्षयकारी बल हमेशा मौजूद होते हैं,जो समय के साथ दोलन करने वाले निकाय की ऊर्जा का ह्रास करते हैं।
इसके परिणामस्वरूप अवमंदन (damping) होता है,जहाँ दोलन का आयाम धीरे-धीरे कम हो जाता है और अंततः निकाय स्थिर हो जाता है।
इसलिए,$SHM$ एक आदर्श स्थिति है,जबकि वास्तविक दुनिया के निकाय अवमंदित आवर्त गति प्रदर्शित करते हैं।

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एक कण जिस पर विस्थापन के समानुपाती प्रत्यानयन बल और वेग के समानुपाती प्रतिरोधक बल कार्य करता है,उस पर $F \sin \omega t$ का बाह्य बल लगाया जाता है। यदि कण का आयाम $\omega = \omega_1$ के लिए अधिकतम है और कण की ऊर्जा $\omega = \omega_2$ के लिए अधिकतम है,तो (जहाँ $\omega_0$ कण की प्राकृतिक आवृत्ति है):

अनुनाद (Resonance) क्या है? इसका उदाहरण दीजिए।

अवमंदित दोलन (Damped oscillations) क्या हैं? स्प्रिंग के उदाहरण द्वारा इसकी चर्चा कीजिए।

Difficult
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यदि एक अवमंदित आवर्ती दोलक (damped harmonic oscillator) का आयाम $10 \ s$ के समय में अपने प्रारंभिक आयाम का आधा हो जाता है,तो दोलक की यांत्रिक ऊर्जा को उसकी प्रारंभिक यांत्रिक ऊर्जा का आधा होने में कितना समय लगेगा ($s$ में)?

अवमंदित दोलनों के लिए अवकल समीकरण व्युत्पन्न कीजिए और इसका हल लिखिए।

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