(N/A) द्वि-परिसंचरण एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके दौरान रक्त एक पूर्ण चक्र के दौरान हृदय से दो बार गुजरता है। इस प्रकार का परिसंचरण उभयचरों,सरीसृपों,पक्षियों और स्तनधारियों में पाया जाता है। पक्षियों और स्तनधारियों में हृदय पूरी तरह से चार कक्षों में विभाजित होता है: दायां अलिंद,दायां निलय,बायां अलिंद और बायां निलय।
रक्त का संचलन दो भागों में विभाजित है:
$1$. दैहिक परिसंचरण (Systemic circulation): इसमें ऑक्सीजनयुक्त रक्त बाएं निलय से महाधमनी में जाता है,जो इसे ऊतकों तक वितरित करती है। ऊतकों से ऑक्सीजन रहित रक्त शिराओं द्वारा एकत्र होकर दाएं अलिंद में वापस आता है।
$2$. फुफ्फुसीय परिसंचरण (Pulmonary circulation): इसमें ऑक्सीजन रहित रक्त दाएं निलय से फुफ्फुसीय धमनी के माध्यम से फेफड़ों में ऑक्सीजनीकरण के लिए जाता है। इसके बाद ऑक्सीजनयुक्त रक्त फुफ्फुसीय शिराओं के माध्यम से बाएं अलिंद में वापस आता है।
द्वि-परिसंचरण का महत्व:
ऑक्सीजनयुक्त और ऑक्सीजन रहित रक्त का पृथक्करण शरीर की कोशिकाओं को ऑक्सीजन की अधिक कुशल आपूर्ति की अनुमति देता है। यह सुनिश्चित करता है कि ऊतकों को उच्च ऑक्सीजनयुक्त रक्त प्राप्त हो,जो पक्षियों और स्तनधारियों में उच्च चयापचय दर बनाए रखने के लिए आवश्यक है।