परिसंचरण तंत्र में यकृत निवाहिका तंत्र (hepatic portal system) का क्या महत्व है?

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(N/A) यकृत निवाहिका तंत्र एक विशेष संवहनी संबंध है जो पाचन तंत्र और यकृत के बीच पाया जाता है।
इसका मुख्य महत्व निम्नलिखित है:
$1$. पोषक तत्वों का प्रबंधन: पाचन तंत्र से अवशोषित अतिरिक्त पोषक तत्व,जैसे कि ग्लूकोज और अमीनो एसिड,सीधे यकृत में भेजे जाते हैं,जहाँ उन्हें संग्रहीत किया जाता है और आवश्यकता पड़ने पर शरीर द्वारा उपयोग किया जा सकता है।
$2$. विषहरण (Detoxification): यकृत पाचन तंत्र से अवशोषित पदार्थों को संसाधित करता है,जिसमें विषाक्त अमोनिया का यूरिया में रूपांतरण शामिल है,जिसे बाद में उत्सर्जन के लिए वृक्क (किडनी) में भेजा जाता है।
$3$. चयापचय का नियमन: यह सुनिश्चित करता है कि रक्त के दैहिक परिसंचरण में प्रवेश करने से पहले यकृत एक चयापचय फिल्टर के रूप में कार्य करे।

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निम्नलिखित कॉलम का मिलान करें:
कॉलम-$I$कॉलम-$II$
$P$. एकल परिसंचरण$I$. मछलियाँ
$Q$. अपूर्ण दोहरा परिसंचरण$II$. उभयचर और सरीसृप
$R$. पूर्ण दोहरा परिसंचरण$III$. मगरमच्छ,पक्षी और स्तनधारी

मनुष्यों में पोर्टल प्रणाली (portal system) को इस प्रकार परिभाषित किया जाता है:

उस तंत्र को क्या कहा जाता है जहाँ रक्त वाहिकाएँ केशिकाओं में उत्पन्न होती हैं और केशिकाओं में ही समाप्त होती हैं?

दैहिक परिसंचरण (Systemic circulation) के लिए निम्नलिखित में से कौन सा मार्ग सही है?

स्तनधारियों में "दोहरा परिसंचरण तंत्र" (double circulatory system) होता है। इसका क्या अर्थ है?

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