सोडियम पर प्रकाश-विद्युत प्रभाव के लिए देहली तरंगदैर्ध्य $5000\;\mathring{A}$ है। इसका कार्य फलन (work function) है:

  • A
    $1\;J$
  • B
    $3 \times 10^{-19}\;J$
  • C
    $4 \times 10^{-19}\;J$
  • D
    $2 \times 10^{-19}\;J$

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$1 \ cm$ त्रिज्या और $4.7 \ eV$ कार्य फलन वाला एक चांदी का गोला मुक्त स्थान में एक कुचालक धागे से लटका हुआ है। यह $200 \ nm$ तरंग दैर्ध्य के प्रकाश से निरंतर प्रकाशित हो रहा है। जैसे-जैसे फोटोइलेक्ट्रॉन उत्सर्जित होते हैं,गोला आवेशित हो जाता है और एक विभव प्राप्त कर लेता है। गोले से उत्सर्जित फोटोइलेक्ट्रॉनों की अधिकतम संख्या $A \times 10^Z$ है (जहाँ $1 < A < 10$)। $Z$ का मान ज्ञात कीजिए:

तीन धातुओं $A, B$ और $C$ के कार्य फलन (work functions) क्रमशः $W_A, W_B$ और $W_C$ हैं। वे घटते क्रम में हैं $(W_A > W_B > W_C)$। उत्सर्जित इलेक्ट्रॉन की अधिकतम गतिज ऊर्जा $E_k$ और आपतित विकिरण की आवृत्ति $v$ के बीच सही ग्राफ कौन सा है?

एक पदार्थ का कार्य फलन (work function) $4.0 \,eV$ है। प्रकाश की वह अधिकतम तरंगदैर्ध्य जो इस पदार्थ से प्रकाशिक इलेक्ट्रॉन उत्सर्जन उत्पन्न कर सकती है,लगभग ......... $nm$ है।

फोटोइलेक्ट्रॉन की अधिकतम गतिज ऊर्जा कैसे बदलती है?

प्रकाश-विद्युत प्रभाव के संदर्भ में निरोधी विभव (stopping potential) आपतित विद्युत-चुंबकीय विकिरण के निम्नलिखित गुण पर निर्भर करता है:

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