जब एक प्रेरक (inductor) में धारा $60\, mA$ होती है,तो उसमें संचित चुंबकीय स्थितिज ऊर्जा $25\, mJ$ होती है। इस प्रेरक का प्रेरकत्व (inductance) ......$H$ है।

  • A
    $0.138$
  • B
    $138.88$
  • C
    $13.89$
  • D
    $1.389$

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$L = 100 \, mH$ प्रेरकत्व वाले एक प्रेरक में $I = 10 \, A$ की धारा प्रवाहित हो रही है। प्रेरक में संचित ऊर्जा ....... $J$ है।

$2\,H$ प्रेरकत्व (inductance) वाली एक कुंडली से $2\,A$ की धारा $4\,A/s$ की दर से बढ़ रही है। प्रेरक में प्रति इकाई समय में संचित ऊर्जा ... $J/s$ है।

कथन : यदि किसी परिनालिका (solenoid) में धारा की दिशा को परिमाण समान रखते हुए उलट दिया जाए,तो परिनालिका में संचित चुंबकीय क्षेत्र ऊर्जा अपरिवर्तित रहती है।
कारण : चुंबकीय क्षेत्र ऊर्जा घनत्व चुंबकीय क्षेत्र के समानुपाती होता है।

$3 \ mH$ के स्व-प्रेरकत्व वाले सोलेनोइड से $2 \ A$ की धारा प्रवाहित होती है। सोलेनोइड के भीतर संचित ऊर्जा $.... \ mJ$ है।

$20\, \Omega$ प्रतिरोध और $5\, H$ प्रेरकत्व वाली एक कुंडली को $100\, V$ की बैटरी से जोड़ा गया है। कुंडली में संचित ऊर्जा .... $J$ होगी।

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